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अमेरिकी एच-1बी विवाद के बीच चीन ने किया के-वीजा लॉन्च,1 अक्टूबर से लागू होगा
23 Sep, 2025 11:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दुनियाभर के टैलेंटेड युवाओं के लिए खुला चीनी दरवाजा
बीजिंग। चीन ने दुनियाभर के टैलेंट को आकर्षित करने के लिए के-वीजा शुरू करने का ऐलान किया है। इसे अमेरिका के एच-1बी वीजा का विकल्प बताया जा रहा है। नया वीजा 1 अक्टूबर 2025 से लागू होगा। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक के-वीजा उन युवा और कुशल पेशेवरों के लिए है, जो साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, मैथ के क्षेत्र से जुड़े हैं और जिन्होंने किसी चर्चित यूनिवर्सिटी या रिसर्च इंस्टीट्यूट से पढ़ाई पूरी की है या वहां अभी पढ़ाई या रिसर्च कर रहे हैं। आवेदन करने वालों को जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे। इससे जुड़ी अधिक जानकारी चीनी दूतावास और वाणिज्य दूतावास जारी करेंगे। चीन सरकार ने अगस्त में इस फैसले को मंजूरी दी थी।
चीन अभी 12 तरह के वीजा जारी करता है। अभी चीन में काम करने के लिए जेड-वीजा का इस्तेमाल किया जाता है। इसकी वैधता 1 साल की है। लेकिन के वीजा में विदेशियों को ज्यादा समय तक चीन में रहने की सुविधा मिलेगी। हालांकि यह कितने समय के लिए होगी अभी इसकी जानकारी नहीं आई है। नया के-वीजा पुराने वीजा नियमों से अलग इसलिए है क्योंकि इसमें कुछ बड़ी सुविधाएं दी गई हैं, जो अभी चल रहे जेड वीजा में नहीं है। जेडवीजा वाला विदेशी व्यक्ति अगर चीन में काम करना चाहता है, तो उसे पहले किसी चीनी कंपनी या संस्था से नौकरी का प्रस्ताव या स्पॉन्सरशिप लेना पड़ेगा। लेकिन के-वीजा में यह नियम नहीं है। इसमें आवेदक को किसी स्थानीय कंपनी की जरूरत नहीं है। बस उसकी योग्यता, जैसे आयु, शिक्षा और काम का अनुभव, देखी जाएगी। इससे विदेशी पेशेवरों के लिए आवेदन करना आसान हो जाएगा।
चीनी कंपनी में नौकरी के बिना आवेदन कर पाएंगे
जेड-वीजा में किसी चीनी कंपनी की नौकरी मिलनी जरूरी थी और वीजा सिर्फ उसी कंपनी के लिए वैध था। नौकरी बदलने पर नया वीजा लेना पड़ता है। लेकिन अब के-वीजा के साथ ऐसा कोई नियम नहीं होगा। शिक्षा और अनुभव के आधार पर सीधे आवेदन किया जा सकता है। के-वीजा फीस के बारे में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। वहीं, जेडवीजा की फीस हर देश के नागरिकों के लिए अलग-अलग होती है। भारतीय नागरिकों के लिए यह 2.9 हजार रुपए, अमेरिकी नागरिकों के लिए 2.3 हजार रुपए, कनाडाई नागरिकों के लिए 8.5 हजार रुपए और ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों के लिए 5.5 हजार है। इसके अलावा वीजा आवेदन प्रक्रिया में सर्विस चार्ज भी जोड़ा जाता है जिसकी कीमत भारतीयों के लिए 2 से 3 हजार के बीच होती है।
चीन ने विदेशी टेलेंट के लिए 2 प्रोग्राम लॉन्च किए
रिपोट्र्स के मुताबिक चीन 2035 तक दुनिया की एक तकनीकी ताकत बनाना चाहता है। इसके लिए उसे विदेशी विशेषज्ञों और कुशल लोगों की जरूरत है। इस मकसद को पूरा करने के लिए चीन ने दो प्रोग्राम लॉन्च किए हैं। टैलेंटेड यंग साइंटिस्ट प्रोग्राम- यह एशिया और अफ्रीका के 45 साल तक के शोधकर्ताओं को चीन में काम करने और रिसर्च करने के लिए है। आउटस्टैंडिंग यंग साइंटिस्ट फंड प्रोजेक्ट- यह 40 साल तक के टॉप क्लास वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को चीन आने और वहां काम करने के लिए है। इसके अलावा, चीन के मुख्य विश्वविद्यालय और शोध संस्थान बेहतरीन स्टूडेंट्स और रिसर्चर्स को लाने के लिए उन्हें अच्छी सैलरी और बोनस भी दे रहे हैं।
अमेरिका ने एच-1बी वीजा का फीस बढ़ाई
अमेरिका ने नए एच-1बी वीजा के आवेदन के लिए फीस बढ़ाकर 1 लाख डॉलर यानी करीब 88 लाख रुपए कर दी है। 3 साल के वीजा के लिए यह फीस वन टाइम यानी एक बार ही लगेगी। दोबारा रिन्यू कराने पर फीस लगेगी या नहीं फिलहाल यह साफ नहीं है। इससे पहले एच-1बी वीजा के लिए 5.5 से 6.7 लाख रुपए लगते थे। यह 3 साल के लिए मान्य होता था। इसे दोबारा फीस देकर अगले 3 साल के लिए रिन्यू किया जा सकता था दुनियाभर से लोग काम करने के लिए इस वीजा पर अमेरिका जाते हैं।
58 साल बाद यूएन महासभा में सीरिया की वापसी.....अमेरिका पहुंचे अहमद अल-शरा
23 Sep, 2025 10:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
न्यूयॉर्क । सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा 58 साल के बाद पहली बार संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 80वें सत्र में हिस्सा लेने के लिए न्यूयॉर्क पहुंचे हैं। इससे पहले 1967 में तत्कालीन राष्ट्रपति नूर अल-दीन अल-अतासी ने यूएनजीए में भाग लिया था। यह बैठक 23 से 29 सितंबर, 2025 तक चलेगी। अल-शरा पिछले साल दिसंबर में तख्तापलट के बाद अंतरिम राष्ट्रपति बने थे। उनके आने के बाद से सीरिया सरकार अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के साथ अपने रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रही है।
बात दे कि मई 2025 में सऊदी अरब में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और राष्ट्रपति अल-शरा के बीच मुलाकात हुई थी। यह 25 साल में पहली बार था जब किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने सीरियाई राष्ट्रपति से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद ट्रम्प ने सीरिया पर लगे कई प्रतिबंधों को हटाने का आदेश दिया। ये प्रतिबंध पहले असद सरकार को कमजोर करने के लिए लगाए गए थे, जिसमें तेल, गैस, बैंकिंग और सैन्य सामान के लेनदेन पर रोक शामिल थी।
सीरिया और इज़राइल के बीच लंबे समय से तनावपूर्ण रिश्ते रहे हैं। असद के शासन के पतन के बाद इज़राइल ने सीरिया पर हवाई हमले बढ़ा दिए थे। इज़राइल ने यूएन शांति सैनिकों की निगरानी वाले गोलन हाइट्स बफर जोन पर भी कब्ज़ा कर लिया है।
अल-शरा इस बैठक में इज़राइल के साथ अपने रिश्तों को सुधारने पर ज़ोर दे सकते हैं। उन्होंने 1974 के डिसएंगेजमेंट समझौते को फिर से शुरू करने की इच्छा जाहिर की है, हालांकि इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने उनके प्रस्ताव को भविष्य की बात कहकर टाल दिया है।
डिसएंगेजमेंट समझौता (1974):
यह समझौता 31 मई, 1974 को इज़राइल और सीरिया के बीच हुआ था। इसके तहत संयुक्त राष्ट्र शांति सेना (यूएनडीएफओ) की स्थापना की गई और दोनों देशों के बीच सैन्य गतिविधियों को रोकने के लिए एक बफर जोन बनाया गया था।
सात समंदर पार से राजनाथ सिंह ने भरी हुंकार, कहा...
23 Sep, 2025 09:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रबात। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मोरक्को के रबात में भारतीय समुदाय से मिले। उन्होंने पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) पर मजबूत बात कही। उन्होंने कहा कि पीओके खुद भारत का हिस्सा बनेगा। वहां के लोग नारे लगाने लगे हैं - मैं भी भारत हूं। ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना की कार्रवाई की सराहना की। उन्होंने भारत की प्रगति और भारतीय समुदाय की मेहनत की भी तारीफ की।
भारतीय समुदाय से बातचीत में राजनाथ सिंह ने कहा कि पीओके हमारा होगा, बिना हमला किए। पीओके के लोग खुद मांग करने लगे हैं। आपने नारे सुने होंगे। 5 साल पहले कश्मीर घाटी में भारतीय सेना को संबोधित करते हुए मैंने कहा था कि पीओके पर हमला करने की जरूरत नहीं। वो तो हमारा ही है। पीओके खुद कहेगा - मैं भी भारत हूं। वह दिन जरूर आएगा। राजनाथ सिंह ने पीओके में हो रहे बदलाव का जिक्र किया। वहां के लोग भारत से जुडऩे की बात करने लगे हैं। यह भारत की मजबूत नीति का नतीजा है।
ऑपरेशन सिंदूर संयमित लेकिन सख्त जवाब
भारतीय समुदाय ने ऑपरेशन सिंदूर में सेना की तेज कार्रवाई की तारीफ की। यह ऑपरेशन पहलगाम में निर्दोष भारतीयों पर कायराना हमले के बाद किया गया। राजनाथ सिंह ने कहा कि सेना पूरी तरह तैयार थी। सरकार ने सेना को पूरी आजादी दी थी। लेकिन भारत ने संयम बरता। कार्रवाई बढ़ाने वाली नहीं थी। उन्होंने रामचरितमानस से उद्धरण दिया कि हमने धर्म देखकर नहीं, कर्म देखकर मारा है। मतलब, हमने गलत काम करने वालों को सजा दी, लेकिन जरूरत से ज्यादा नहीं। यह भारत की मजबूत लेकिन शांतिपूर्ण नीति दिखाता है। समुदाय ने सेना की बहादुरी पर तालियां बजाईं।
पाकिस्तान ने अपने ही लोगों पर बरसाए बम!
23 Sep, 2025 08:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान की वायुसेना पर अपने ही लोगों पर बमबारी के आरोप लगे हैं। सोमवार को कुछ रिपोट्र्स में दावा किया गया है कि पाकिस्तानी वायुसेना ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के वजीरिस्तान स्थित तिराह घाटी में बिना कोई चेतावनी जारी किए ही बम गिरा दिए। इस हमले की चपेट में आकर 30 लोगों की जान चली गई।
बताया गया है कि यह बमबारी पाकिस्तानी वायुसेना के जेएफ-17 विमान के जरिए की गई। जो बम बरसाए गए, वह घातक किस्म के एलएस-6 बम थे। यह घटना रविवार देर रात करीब दो बजे की है। धमाके इतने तेज थे कि गांव के गांव तबाह हो गए। हमले में कई लोग घायल भी हुए हैं। स्थानीय मीडिया रिपोट्र्स की मानें तो पाकिस्तान की वायुसेना इन हमलों के जरिए आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) को निशाना बनाने की कोशिश कर रही थी। हालांकि, आतंकियों के बजाय हमले में अधिकतर नागरिकों की मौत हुई।
यात्री ने बोर्डिंग पास स्कैन कराया और हो गया गायब, क्रू मेंबर हुए परेशान
22 Sep, 2025 07:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन। लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पर एयर इंडिया की फ्लाइट में उस समय खलबली मच गई, जब बोर्डिंग पास लेने के बाद भी एक यात्री विमान में सवार नहीं हुआ। जानकारी के मुताबिक संबंधित यात्री ने बोर्डिंग पास स्कैन कराने के बाद भी विमान में चढ़ने के बजाय अराइवल एरिया में प्रवेश कर लिया। जब तक यह बात सामने आई, तब तक विमान टैक्सी करने लगा था। सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत एयर इंडिया क्रू ने तुरंत फैसला लिया और विमान को गेट पर वापस लाया गया और उस यात्री का सामान उतारा गया। इसके बाद ही विमान ने दिल्ली के लिए उड़ान भरी।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एयर इंडिया के प्रवक्ता ने कहा कि एआई162 फ्लाइट को गेट पर वापस लाने का फैसला पूरी तरह सुरक्षा मानकों के पालन के तहत किया गया। हमारे क्रू ने सभी जरूरी प्रक्रिया का पालन किया। हम इस घटना से हुई देरी के लिए खेद व्यक्त करते हैं। इस बीच लंदन एयरपोर्ट पुलिस ने उस यात्री को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। सुरक्षा एजेंसियां उसकी सभी डिटेल्स खंगाल रही हैं और उसके सामान की गहन जांच की जा रही है। एयर इंडिया ने कहा है कि सुरक्षा प्रोटोकॉल के मुताबिक विमान को रनवे से टैक्सिंग-बे यानी कि गेट के पास लाया गया। यात्री का सामान को फ्लाइट से उतारने के बाद थोड़ी देरी से नई दिल्ली के लिए रवाना हुई।
नेपाल के बाद अब पेरु में सरकार के खिलाफ जेन-ज़ी का जोरदार प्रदर्शन
22 Sep, 2025 06:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लीम। नेपाल के बाद अब पेरू का जेन-ज़ी युवा सड़क पर उतर आया है और सरकार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर रहा है। जेन-ज़ी का बैनर, सोशल मीडिया पोस्ट्स, मीम्स और एक साथ जुट कर विरोध का तरीका बहुत कुछ एक जैसा है! नेपाल में सोशल मीडिया पर बैन से विरोध प्रदर्शन हुए थे, तो पेरू पिछले कुछ दिनों से सरकारी फरमान से अंदर ही अंदर सुलग रहा था। पेरु के राष्ट्रपति डिना बोलुआर्टे के खिलाफ माहौल बन गया, ठीक वैसा ही जैसा नेपाल में पीएम ओली के खिलाफ बना।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पेरू की राजधानी लीमा में सैकड़ों युवा सड़कों पर उतरे आए। यह प्रदर्शन मुख्य रूप से जेन-ज़ी यानी नई पीढ़ी के युवाओं द्वारा किया गया। युवाओं का मुख्य उद्देश्य था भ्रष्टाचार, आर्थिक असुरक्षा और पेंशन सुधार कानून के खिलाफ आवाज उठाना है। जेनरेशन जेड नामक एक युवा समूह की ओर से आयोजित यह विरोध-प्रदर्शन, संगठित अपराध, सरकारी पदों पर भ्रष्टाचार और हाल ही में हुए पेंशन सुधार के खिलाफ पेरू में बढ़ते सामाजिक असंतोष का हिस्सा है।
बता दें हाल ही में पेरू की कांग्रेस ने निजी पेंशन फंड में बदलाव किया है, जिससे युवाओं को डर है कि उनकी भविष्य की बचत असुरक्षित हो जाएगी। साथ ही बढ़ते अपराध और भ्रष्टाचार ने युवाओं में बेचैनी पैदा कर दी है। प्रदर्शनकारियों ने सोशल मीडिया के सहारे अपना दर्द और गुस्सा निकाला और एक जगह जमा हो गए। असंतोष बढ़ता देख पुलिस ने मोर्चा संभाला। भीड़ को तितर बितर करने आंसू गैस छोड़ी और इस हिंसक झड़प में करीब तीन पुलिसकर्मी घायल हुए।
बता दें नेपाल में भी इस महीने जेन-ज़ी के युवा कुछ ऐसे ही सक्रिय हुए, सरकार और संसद के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया गया। नेपाल में युवा नेतृत्व वाले इन प्रदर्शनों ने पीएम ओली के इस्तीफे और अंतरिम पीएम की नियुक्ति तक को प्रभावित किया। नेपाल में भी युवा डिजिटल सक्रियता के जरिए सरकार विरोधी नारे फैलाते रहे। जेन-ज़ी राजनीति में सिर्फ वोटर नहीं, बल्कि सक्रिय भागीदार चाहते हैं। वैश्विक स्तर पर भी यह प्रवृत्ति देखी जा रही है। बांग्लादेश में ऐसा ही दिखा, तो इंडोनेशिया और केन्या में युवा इसी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर विरोध कर रहे हैं।
महीनों बाद साथ दिखे ट्रम्प और मस्क, हाथ मिला की बातचीत......सुलह की अटकलें हुईं तेज
22 Sep, 2025 05:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और अरबपति इलॉन मस्क महीनों के विवाद के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से एक साथ नजर आए। यह मुलाकात एरिजोना के ग्लेनडेल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हुई, जहां हजारों लोग दक्षिणपंथी एक्टिविस्ट चार्ली कर्क को श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे। इस मौके पर ट्रम्प और मस्क ने एक-दूसरे से हाथ मिलाया और बातचीत की, जिससे दोनों के बीच सुलह की अटकलें तेज हो गई हैं।
मस्क ने ट्रम्प के राष्ट्रपति चुनाव में 270 मिलियन डॉलर से अधिक का चंदा दिया था और इसके बाद वे उनके सलाहकार भी बने। ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में मस्क ने डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी (डीओजीई) का नेतृत्व किया, जिसके तहत बड़ी संख्या में सरकारी नौकरियां खत्म की गई थीं। हालांकि, समय के साथ दोनों के रिश्ते तनावपूर्ण भी हो गए। मई में मस्क ने ट्रम्प के टैक्स और खर्च बिल को “पागलपन और विनाशकारी” बताया। इसके बाद सोशल मीडिया पर दोनों के बीच जमकर विवाद हुआ।
मस्क ने ट्रम्प पर एप्स्टीन फाइल्स में नाम आने का भी आरोप लगाया था। वहीं, जुलाई में ट्रम्प ने कहा था कि वे मस्क को देश से बाहर भेजने पर विचार कर सकते हैं। इस बढ़ते तनाव के बीच मस्क ने अपनी अलग अमेरिका फर्स्ट पार्टी बनाने का ऐलान भी किया था। बहरहाल महीनों की दूरियों और विवादों के बाद यह मुलाकात दोनों नेताओं के बीच रिश्तों में संभावित सुधार का संकेत मानी जा रही है।
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वाह में सेना की एयर स्ट्राइक में 30 से अधिक मौतें
22 Sep, 2025 04:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लाहौर। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वाह प्रांत के मात्रे दारा गांव में बीती रात पाकिस्तान की सेना ने एयर स्ट्राइक की, जिसमें अब तक 30 से अधिक लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में कई बच्चे और महिलाएं शामिल हैं। यह हमला तिराह घाटी में अफगानिस्तान बॉर्डर के पास स्थित इस गांव पर सुबह 2 बजे किया गया। इस हमले को लेकर आरोप लग रहे हैं कि आतंकियों के नाम पर निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, सेना ने जेएफ-17 थंडर फाइटर जेट से कम से कम 8 एलएस-6 बम बरसाए। यह कार्रवाई उस ऑपरेशन का हिस्सा बताई जा रही है, जिसके तहत पाकिस्तानी सेना पिछले तीन हफ्तों से तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के ठिकानों पर कार्रवाई कर रही थी। लेकिन वास्तविकता यह है कि आतंकियों के बजाय लगातार निर्दोष नागरिक मारे जा रहे हैं। स्थानीय विधायक इकबाल अफरीदी ने इस हमले की निंदा करते हुए कहा कि वादी तिराह के अकाखेल इलाके में मासूम बच्चों और महिलाओं की मौत दिल दहला देने वाली है। उन्होंने फेसबुक पोस्ट में लिखा, यह अत्याचार इंसानियत के खिलाफ सबसे बड़ा जुर्म है, जिसकी जितनी निंदा की जाए उतनी कम है।
विशेषज्ञों और मानवाधिकार समूहों का कहना है कि पाकिस्तानी सेना की यह कार्रवाई दोहरी नीति को उजागर करती है। एक ओर सरकार और सेना जैश-ए-मोहम्मद जैसे वैश्विक आतंकी संगठनों को पुलिस सुरक्षा में भर्ती अभियान चलाने देती है, वहीं दूसरी ओर अपने ही नागरिकों पर बम बरसाती है। वहीं स्थानीय लोगों का आरोप है कि पाकिस्तानी सेना आतंकवादियों के नाम पर निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाकर अपने दावों को छिपाने की कोशिश कर रही है। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समुदाय में भी चिंता बढ़ा दी है और पाकिस्तान की सुरक्षा नीति पर सवाल खड़े किए हैं।
5 साल की बच्ची की हत्या के सनसनीखेज मामले में रेवाड़ी में प्रेमी और महिला लिव-इन पार्टनर बनकर फंसे
22 Sep, 2025 01:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रेवाड़ी : हरियाणा के रेवाड़ी से एक हिला देने वाली खबर सामने आई है। यहां बावल रोड पर चांदपुर की ढाणी में एक बच्ची की हत्या कर दी गई। पांच साल की मासूम के हत्याकांड का खुलासा हुआ तो सब हैरान हो गए। बच्ची को उसकी मां के लिव-इन पार्टनर ने ही मार डाला था। वे चांदपुर की ढाणी में किराए के कमरे में रहते थे। पुलिस ने बताया कि आरोपी मूलता बिहार का रहने वाला है। उसने बच्ची को जमीन पर पटक-पटकर मार डाला। पुलिस अधिकारी के अनुसार रोशन बिहार के मोतीहारी में रघुनाथपुरा गांव का रहने वाला है। उसका अफेयर पड़ोस के गांव दिलावलपुर की रहने वाली महिला से हो गया था। महिला शादीशुदा थी और उसकी एक पांच साल की बेटी थी। दोनों एक दिन भागकर हरियाणा आ गए।
एक महीने पहले बिहार से आए थे रेवाड़ी
वे करीब एक महीने पहले रेवाड़ी आए और यहां चांदपुर की ढाणी में किराए का कमरा लेकर रहने लगे थे। पुलिस ने बताया कि 13 सितंबर को महिला ने रोशन से सोने का हार दिलाने की जिद की। दोनों का इस बात को लेकर झगड़ा हो गया। उसके बाद दोनों बाजार गए। यहां हार को लेकर फिर दोनों के बीच झगड़ा हो गया। गुस्से में महिला बाजार से ही नाराज होकर रेलवे स्टेशन की ओर चली गई। रोशन उसके पीछे गया और उसे मनाने की कोशिश की लेकिन वह नहीं मानी। उसके बाद गुस्से में रोशन भी घर वापस आ गया।
मां के पास जाने की जिद कर रही थी बेटी
रोशन घर आया तो बच्ची ने मां के बारे में पूछा। रोशन ने बहाना बना दिया। जब देर तक मां नहीं आई तो बच्ची ने रोना शुरू कर दिया। वह रोशन से उसे उसकी मां के पास ले जाने के लिए कह रही थी। जब रोशन ने ध्यान नहीं दिया, तो बच्ची रोती रही। रोशन ने बच्ची को कई बार डांटा तो वह और जोर से रोने लगी। जिसके बाद उसने गुस्से में आकर बच्ची को जमीन पर पटक दिया। उसने बच्ची को डंडे से भी पीटा। उसका जी नहीं भरा और उसने कई बार बच्ची को उठाकर जमीन पर पटका। जिसके बाद बच्ची ने मौके पर दम तोड़ दिया।
पड़ोसियों ने पुलिस को बुलाया
बच्ची की हत्या के बाद वह तुरंत वहां से फरार हो गया। इधर पड़ोसियों ने घटना की सूचना पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस ने बच्ची का शव बरामद किया। मौके से खून से सना डंडा भी बरामद किया। पुलिस ने टीमें बनाकर आरोपी की तलाश शुरू की और उसे गिरफ्तार कर लिया।
H-1B वीजा पुराने धारकों को तुरंत US लौटने की जरूरत नहीं, 1 लाख डॉलर फीस सिर्फ नए आवेदकों के लिए : अमेरिकी अधिकारी
21 Sep, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा H-1B वीजा की सालाना फीस 1 लाख डॉलर किए जाने की घोषणा के बाद भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और कंपनियों में अफरातफरी मच गई थी. फलस्वरूप कई बड़ी टेक कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को तुरंत वापस अमेरिका लौटने तक के लिए कह दिया था. लेकिन इसी बीच अब एक अमेरिकी अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि भारतीयों को घबराने की जरूरत नहीं है.
अमेरिकी अधिकारी ने शनिवार को साफ करते हुए कहा, 'H-1B वीजा पर रह रहे भारतीयों को रविवार तक अमेरिका लौटने की कोई आवश्यकता नहीं है और न ही उन्हें दोबारा आने के लिए एक लाख डॉलर चुकाने होंगे.'
अधिकारी ने स्पष्ट किया कि ट्रंप सरकार का यह नया नियम सिर्फ नए वीजा आवेदन पर लागू होगा. जिन लोगों के पास पहले से H-1B वीजा है या जो लोग अपने वीजा का रिन्यूवल करवा रहे हैं, उन पर यह नई फीस लागू नहीं होगी.
सबसे अधिक असर भारतीयों पर
अमेरिका के इस निर्णय से सबसे अधिक प्रभाव भारतीय पेशेवरों पर पड़ सकता था, क्योंकि H-1B वीजा धारकों में 71-72% भारतीय हैं. यही वजह थी कि टेक कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को तुरंत अलर्ट कर दिया था.
वहीं केंद्र सरकार ने अपने सभी मिशनों/केंद्रों को सलाह दी है कि वे अगले 24 घंटों में अमेरिका वापस जाने वाले भारतीय नागरिकों को हर संभव सहायता प्रदान करें. सरकार ने शनिवार को कहा कि एच-1बी वीज़ा आवेदनों पर 100,000 अमेरिकी डॉलर का वार्षिक शुल्क लगाने के अमेरिकी फैसले के पूरे प्रभावों का भारतीय उद्योग सहित सभी संबंधित पक्षों द्वारा अध्ययन किया जा रहा है, और इस कदम से परिवारों के लिए उत्पन्न व्यवधान के रूप में मानवीय परिणाम होने की संभावना है.
अमेरिकी H-1B वीज़ा कार्यक्रम पर प्रतिबंधों के संबंध में एक बयान में, विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा कि भारत और अमेरिका दोनों में उद्योग जगत की नवाचार और रचनात्मकता में रुचि है और उनसे आगे के सर्वोत्तम मार्ग पर परामर्श की उम्मीद की जा सकती है.
सरकार ने अमेरिकी H-1B वीज़ा कार्यक्रम पर प्रस्तावित प्रतिबंधों से संबंधित रिपोर्टें देखी हैं. बयान में कहा गया है, "इस उपाय के पूर्ण निहितार्थों का अध्ययन सभी संबंधित पक्षों द्वारा किया जा रहा है, जिसमें भारतीय उद्योग भी शामिल है, जिसने पहले ही H-1B कार्यक्रम से संबंधित कुछ धारणाओं को स्पष्ट करते हुए एक प्रारंभिक विश्लेषण प्रस्तुत किया है."
नया नियम कब से लागू होगा?
व्हाइट हाउस की वेबसाइट पर जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, H-1B वीजा पर नया नियम 21 सितंबर से लागू होगा, H-1B वीजा अमेरिकी कंपनियों को विदेशी पेशेवरों (जैसे वैज्ञानिक, इंजीनियर, कंप्यूटर प्रोग्रामर) को काम पर रखने की अनुमति देता है. इसकी अवधि 3 साल की होती है, जिसे 6 साल तक बढ़ाया जा सकता है.
हीथ्रो, बर्लिन, ब्रुसेल्स एयरपोर्ट पर बड़ा साइबर हमला, दर्जनों उड़ानें रद्द
20 Sep, 2025 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन: यूरोप के कई बड़े हवाई अड्डों पर शनिवार को साइबर हमले की वजह से अफरातफरी मच गई है। रिपोर्ट के मुताबिक साइबर हमला करते हुए कई एयरपोर्ट पर चेक-इन और बोर्डिंग सिस्टम को ठप कर दिया गया है। जिससे दर्जनों हवाई अड्डों पर यातायात ठप हो गई है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एक तृतीय-पक्ष सेवा प्रदाता को निशाना बनाकर किए गए साइबर हमले ने लंदन के हीथ्रो, ब्रुसेल्स और बर्लिन सहित कई प्रमुख यूरोपीय हवाई अड्डों पर चेक-इन और बोर्डिंग सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया है। इससे दर्जनों फ्लाइट को कैंसिल कर दिया गया है।
रिपोर्ट के मुकाबिक लंदन के हीथ्रो, ब्रुसेल्स और बर्लिन एयरपोर्ट सहित कई स्थानों पर यह दिक्कत देखने को मिली है। एयरपोर्ट अधिकारियों ने पुष्टि की कि हमले ने एक थर्ड-पार्टी सर्विस प्रोवाइडर के सिस्टम को निशाना बनाया गया है, जिससे एयरलाइंस को मैनुअल प्रोसेसिंग पर निर्भर होना पड़ा। इस साइबर हमले की वजह से एयरपोर्ट पर ऑपरेशन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है और यात्रियों को घंटों तक लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ा। ब्रुसेल्स एयरपोर्ट ने अपनी वेबसाइट पर बताया है कि इस हमले ने ऑटोमेटिक चेक-इन और बोर्डिंग सिस्टम को ठप कर दिया है, जिसके चलते बड़ी संख्या में उड़ानों में देरी हुई है और फ्लाइट कैंसिल करना पड़ा है।
यूरोप के कई एयरपोर्ट पर साइबर हमला
पोलिटिको की रिपोर्ट के मुताबिक हवाई अड्डे के प्रवक्ता एरियन गूसेंस ने कहा कि शनिवार सुबह 10:30 बजे तक, ब्रुसेल्स हवाई अड्डे से प्रस्थान करने वाली 10 उड़ानें रद्द कर दी गईं और 17 अन्य उड़ानें एक घंटे से ज्यादा देरी से चल रही थीं। लंदन के हीथ्रो हवाई अड्डे ने भी एक बयान जारी कर इस समस्या को एक तृतीय-पक्ष आपूर्तिकर्ता, कॉलिन्स एयरोस्पेस, में एक "तकनीकी समस्या" को वजह बताया है। दुनिया भर में कई एयरलाइनों के लिए चेक-इन और बोर्डिंग सिस्टम प्रदान करने वाली इस कंपनी को एक तकनीकी समस्या का सामना करना पड़ रहा है, जिससे प्रस्थान करने वाले यात्रियों को देरी हो सकती है।
वहीं, कॉलिन्स एयरोस्पेस के एक प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी को कुछ हवाई अड्डों पर उनके MUSE सॉफ्टवेयर को प्रभावित करने वाली "साइबर-संबंधी गड़बड़ी" के बारे में पता चला है। उन्होंने आगे कहा कि वे "इस समस्या को हल करने और अपने ग्राहकों के लिए जल्द से जल्द पूरी कार्यक्षमता बहाल करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।" उन्होंने आगे कहा, "यह प्रभाव इलेक्ट्रॉनिक ग्राहक चेक-इन और बैगेज ड्रॉप तक सीमित है और इसे मैन्युअल चेक-इन संचालन से कम किया जा सकता है।"
बर्लिन एयरपोर्ट ने भी अपने आधिकारिक पोर्टल पर यात्रियों को चेतावनी दी कि चेक-इन के दौरान उन्हें लंबे इंतजार का सामना करना पड़ सकता है। एयरपोर्ट ने यह भी बताया कि तकनीकी गड़बड़ी पूरे यूरोप में ऑपरेट करने वाले एक सर्विस प्रोवाइडर से जुड़ी है, और इसको जल्द दूर करने की कोशिश की जा रही है। वहीं, फ्रैंकफर्ट एयरपोर्ट ने राहत की खबर दी कि उसकी सेवाएं इस हमले से प्रभावित नहीं हुई हैं। ज्यूरिख एयरपोर्ट ने भी पुष्टि की कि उसका संचालन सामान्य रूप से चल रहा है और किसी साइबर अटैक का असर वहां नहीं देखा गया।
फिलिस्तीन को मान्यता देने वालों की फेहरिस्त में पुर्तगाल भी शामिल, नेतन्याहू की कूटनीति को झटका
20 Sep, 2025 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष के बीच 22 सितंबर को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की एक अहम बैठक होने जा रही है. इस बैठक में चर्चा पूरी तरह दो-राष्ट्र समाधान पर केंद्रित रहेगी. उससे ठीक एक दिन पहले यूरोपीय देश पुर्तगाल ने इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को बड़ा झटका देते हुए घोषणा की है कि वो आधिकारिक तौर पर फिलिस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देगा.
बैठक में कई पश्चिमी और यूरोपीय देशों के भी फिलिस्तीन को मान्यता देने की उम्मीद है. इजराइल ने इन मान्यताओं का सख्त विरोध किया है. तेल अवीव का कहना है कि यह कदम हमास को इनाम देने जैसा है, जिसने 7 अक्टूबर 2023 को हमला कर गाज़ा युद्ध की शुरुआत की थी. इजराइल सरकार का तर्क है कि फिलिस्तीन को मान्यता देने से आतंकवाद को बढ़ावा मिलेगा और शांति प्रक्रिया कमजोर होगी.
पुर्तगाल का बड़ा फैसला
पुर्तगाल ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि वह 21 सितंबर, रविवार को फिलिस्तीन को स्वतंत्र राज्य के रूप में मान्यता देगा. पुर्तगाल के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को बयान जारी कर इसकी जानकारी दी. लिस्बन ने जुलाई में ही साफ कर दिया था कि लगातार बिगड़ते हालात, मानवीय संकट और इजरायल की बार-बार की गई धमकियों के बाद यह कदम अब जरूरी हो गया है.
कौन-कौन देश देने वाले हैं समर्थन?
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के सलाहकार के मुताबिक, एंडोरा, ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, लक्समबर्ग, माल्टा और सैन मरीनो जैसे देश भी फिलिस्तीन को मान्यता देने की तैयारी में हैं. इसके अलावा ब्रिटेन, कनाडा और फ्रांस जैसे बड़े पश्चिमी देश भी इस बार महासभा में फिलिस्तीन को मान्यता देने का ऐलान कर सकते हैं. फिलहाल, संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों में से करीब तीन-चौथाई फिलिस्तीन को पहले ही मान्यता दे चुके हैं.
संयुक्त राष्ट्र महासभा में होगा अहम एजेंडा
22 सितंबर से न्यूयॉर्क में शुरू होने वाली महासभा में “दो-राष्ट्र समाधान” पर व्यापक चर्चा होगी. इसी दौरान फ्रांस और सऊदी अरब मिलकर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भी करेंगे, जिसमें नॉर्वे और स्पेन की भी भागीदारी रहेगी. इस कॉन्फ्रेंस का मुख्य उद्देश्य फिलिस्तीनी अथॉरिटी (PA) को आर्थिक संकट से बचाना है. इजराइल ने चार महीने से पीए के लिए वसूले गए करोड़ों डॉलर की राशि रोक रखी है, जिससे उसकी वित्तीय स्थिति चरमरा गई है.
मोरक्को में बनेगी भारत की पहली डिफेंस प्रोडक्शन यूनिट, राजनाथ सिंह करेंगे उद्घाटन
20 Sep, 2025 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 22 और 23 सितंबर को मोरक्को की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे. यह पहली बार होगा जब कोई भारतीय रक्षा मंत्री इस अफ्रीकी देश का दौरा करेगा. इस यात्रा से दोनों देशों के बीच रक्षा और औद्योगिक सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है. दौरे का सबसे बड़ा आकर्षण बेररेशिद शहर में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स मोरक्को की नई फैक्ट्री का उद्घाटन होगा, यहां भारत का विकसित किया गया व्हील्ड आर्मर्ड प्लेटफॉर्म (Wheeled Armored Platform (WhAP)) 8×8 बनाया जाएगा. 22 सितंबर को मोरक्को के कैसाब्लांका शहर में नई डिफेंस फैक्ट्री का उद्घाटन किया जाएगा.
खास बात यह है कि यह फैक्ट्री अफ्रीका में भारत की पहली डिफेंस प्रोडक्शन यूनिट होगी. इससे न केवल भारत की तकनीक को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि अफ्रीकी महाद्वीप में भारत की औद्योगिक उपस्थिति भी मजबूत होगी. यह भारत की पहली विदेशी रक्षा फैक्ट्री होगी. किसी भारतीय कंपनी द्वारा विदेश में स्थापित किया जाने वाला यह पहला ग्रीनफील्ड डिफेंस यूनिट है.
हाई लेवल बैठकें और सहयोग पर चर्चा
इस यात्रा के दौरान राजनाथ सिंह मोरक्को के रक्षा मंत्री प्रतिनिधि अब्देलतिफ लौदियी से मुलाकात करेंगे. दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और संयुक्त परियोजनाओं (जॉइंट प्रोजेक्टस) पर चर्चा की जाएगी. इसके अलावा वो उद्योग मंत्री रियाद मेज्जौर से भी मिलेंगे. राजधानी रबात में भारतीय समुदाय को संबोधित करना भी उनके कार्यक्रम का हिस्सा है.
समझौते और रिश्तों को नई मजबूती
भारत और मोरक्को इस दौरे में रक्षा सहयोग समझौता (MoU) पर साइन कर सकते हैं. इस समझौते से ट्रेनिंग, रक्षा उद्योग और आपसी सहयोग को नई ऊर्जा मिलेगी. पिछले कुछ सालों में भारतीय नौसेना के जहाज मोरक्को के कासाब्लांका बंदरगाह पर लगातार जाते रहे हैं. अब यह दौरा दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम साबित होगा. 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मोरक्को के सम्राट मोहम्मद षष्ठम की भारत में मुलाकात हुई थी.
फंडिंग के लिए आतंकी संगठन की नई चाल, जैश-ए-मोहम्मद बना ‘इस्लाम का रक्षक’ अल-मुराबितुन
20 Sep, 2025 04:23 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद अब अपना नाम बदलने की फिराक में है। इस आतंकी संगठन को पाकिस्तान में अब अल-मुराबितुन के नाम से जाना जाएगा।
दरअसल, अल-मुराबितुन का अरबी में अर्थ होता है कि 'इस्लाम के रक्षक'। बताया जाता है कि अगले हफ्ते संस्थापक मसूद अजहर के भाई यूसुफ अजहर के लिए बनने वाले स्मारक में इस नए नाम का इस्तेमाल करने की संभावना है।
आर्थित तंगी से जूझ रहा ये आतंकी संगठन
भारतीय संसद पर हमले, 26/11 के मुंबई हमलों तथा जम्मू-कश्मीर के उरी और पुलवामा में सेना पर हमले के लिए जैश-ए-मोहम्मद ही जिम्मेदार है। इस आतंकी संगठन की अब कमर टूट चुकी है। एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि 'जैश-ए-मोहम्मद' पर प्रतिबंध के बाद यह अपना नाम इसलिए बदलना चाहता है कि क्योंकि प्रतिबंधों के कारण इसके लिए धन जुटाना मुश्किल हो गया है।
वहीं, वैश्विक आतंकवाद-रोधी फंडिंग निगरानी संस्था, फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की जुलाई में आई एक रिपोर्ट में बताया गया है कि यह फंड इस समय फंडिंग की चुनौती से जूझ रहा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस आतंकी संगठन को आर्थिक चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
रिपोर्ट में बताया कि जैश अब अपने पुनर्निर्माण के लिए धन जुटाने के लिए डिजिटल भुगतान यानी ई-वॉलेट और यूपीआई ट्रांसफर का सहारा ले रहा है। माना जा रहा है कि ई-वॉलेट के इस्तेमाल से यह पता नहीं चल सकेगा कि किस बैंक खाते से इस आतंकी संगठन को कितना भुगतान किया गया?
ई-वॉलेट से की जा रही प्रतिबंधित आतंकी संगठन को फंडिंग
रिपोर्ट में बताया कि अब तक इस प्रकार के पांच वॉलेट का पता लगाया जा चुका है। इसमें करीब सभी का आतंकवादी समूह और उसके संस्थापक मसूद अजहर के परिवार के किसी ना किसी सदस्य से सीधा संबंध है। बताया जा रहा है कि इस आतंकी संगठन का मुख्य उद्देश्य लगभग चार अरब पाकिस्तानी रुपये जुटाकर 300 से अधिक प्रशिक्षण केंद्र खोलना है।
बता दें कि डिजिटल वॉलेट से पैसे ट्रांसफर करने का मुख्य अर्थ है कि पाकिस्तान यह कह सकता है कि सने बैंक हस्तांतरण जैसे औपचारिक माध्यमों से धन देना बंद कर दिया है। साथ ही पाकिस्तान दावा कर सकता है कि वह एफएटीएफ के नियमों का पालन करता है। हालांकि, सामने आई रिपोर्ट बताती है कि जैश को अभी भी फंडिंग की जा रही है।
जिनपिंग ने मानी बात, ट्रंप ने कहा- टिकटॉक पर अब अमेरिकी निवेशक का नियंत्रण होगा
20 Sep, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार (स्थानीय समय) को घोषणा की कि चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग ने वीडियो-शेयरिंग प्लेटफॉर्म के अमेरिका में संचालन जारी रखने के लिए टिकटॉक सौदे को मंजूरी दे दी है. ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि राष्ट्रपति जिनपिंग के साथ मेरी अच्छी बातचीत हुई और उन्होंने टिकटॉक सौदे को मंजूरी दे दी है.
दरअसल राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग ने टिकटॉक सौदे को मंजूरी दे दी है, जिससे यह प्लेटफॉर्म अमेरिका में काम करना जारी रख सकेगा.
टिकटॉक डील को मिली मंजूरी
डोनाल्ड ट्रंप ने ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि राष्ट्रपति जिनपिंग के साथ अच्छी बातचीत हुई है. उन्होंने टिकटॉक डील को मंजूरी भी दे दी है. हम इस सौदे के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं. अब इस पर सिर्फ एक औपचारिक हस्ताक्षर होना बाकी रह गया है. उन्होंने कहा कि टिकटॉक सौदा जल्द ही होने वाला है और निवेशक तैयारी कर रहे हैं.
TikTok पर अमेरिका का नियंत्रण
चीन के साथ TikTok सौदे पर ट्रंप ने कहा कि हम इस पर बहुत कड़ा नियंत्रण रखेंगे. यह एक अद्भुत चीज है जो बनाई गई है. मैं थोड़ा पूर्वाग्रही हूं क्योंकि सच कहूं तो मैंने इसमें बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है. इसने मुझे ऐसे आंकड़े दिए जो पहले कभी किसी ने सुने भी नहीं थे.
ट्रंप ने कहा कि हमारे देश के युवा इसे चाहते हैं. युवाओं के माता-पिता भी इसे पसंद करते हैं. इसलिए हम चीन के साथ एक समझौता करने को तैयार थे. यह हमारे लिए बहुत अच्छी डील है. मुझे उम्मीद है कि यह उनके लिए भी अच्छा सौदा होगा. उन्होंने कहा कि इस ऐप पर अमेरिकी निवेशक का नियंत्रण होगा. इसके लिए मैं राष्ट्रपति जिनपिंग को धन्यवाद देना चाहता हूं.
ट्रंप और जिनपिंग ने फोन पर की बातचीत
बता दें कि ट्रंप और जिनपिंग ने टेलीफोन पर बातचीत की, जिस दौरान उन्होंने चीनी ऐप टिकटॉक सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की. जिनपिंग के साथ ट्रंप की बातचीत के तुरंत बाद, बाइटडांस ने एक बयान जारी किया कि हम राष्ट्रपति जिनपिंग और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को टिकटॉक पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद देते हैं.
जनवरी से टिकटॉक पर प्रतिबंध
बाइटडांस ने कहा कि चीनी कानून के अनुसार हम टिकटॉक के काम को आगे बढ़ाएंगे. ताकि टिकटॉक यूएस अमेरिकी यूजर्स को अच्छी तरह से सेवा देना जारी रख सकेगा. अप्रैल 2024 में पारित कानून का मकसद 19 जनवरी, 2025 से ऐप पर प्रतिबंध लगाना था, लेकिन ट्रंप सरकार ने अभी तक इसे लागू नहीं किया है. अमेरिका चीन के साथ एक समझौता करने के लिए उत्सुक है जो अमेरिकी निवेशकों को टिकटॉक पर अधिक नियंत्रण रखने की अनुमति देता है.
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