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शहबाज ने सिंधु संधि उल्लंघन पर दिया चेतावनी भरा बयान
27 Sep, 2025 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
संयुक्त राष्ट्र के 80 वें सत्र की आम बहस में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को भी बोलने का मौका मिला. जिसमें उन्होंने भारत के खिलाफ फिर से जहर उगलने का एक और मौका जाने नहीं दिया और सिंधु जल संधि को स्थगित करने का रोना रोने लगे. शहबाज शरीफ ने शुक्रवार को अपने संबोधन में सिंधु जल संधि को स्थगित करने का मुद्दा उठाया और भारत पर संधि के प्रावधानों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है.
शरीफ ने कहा, “सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का भारत का एकतरफा और गैरकानूनी प्रयास न सिर्फ संधि के प्रावधानों का उल्लंघन है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून के मानदंडों का भी उल्लंघन करता है. पाकिस्तान ने यह साफ कर दिया है कि हम इन जल क्षेत्रों पर अपने लोगों के अधिकारों की रक्षा करेंगे. हमारे लिए, संधि का कोई भी उल्लंघन युद्ध की कार्रवाई (Act of war) के समान है.”
क्यों सिंधु संधि का राग अलाप रहे शहबाज
22 अप्रैल को पहलगाम आतंकवादी हमले में 26 लोगों के मारे जाने के बाद भारत ने पाकिस्तान के सीमा पार आतंकवाद के जवाब में सिंधु संधि को स्थगित कर दिया था. साथ ही भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर लांच करते हुए पाकिस्तान के हमलों का भी मुंह तोड़ जवाब दिया था. जिसके बाद पाकिस्तान की किरकिरी हो रही है और अब उन्होंने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच से भारत को बदनाम करने की कोशिश की है.
क्या सिंधु जल संधि?
सिंधु जल संधि विश्व बैंक की ओर मध्यस्थता की गई एक संधि है, जिसके तहत भारत और पाकिस्तान के पानी का बंटवारा हुआ है. इसे सितम्बर 1960 में साइन किया गया था. इसके अंतर्गत भारत को पूर्वी नदियां रावी, व्यास और सतलुज और पाकिस्तान को पश्चिमी नदियां सिंधु, झेलम और चिनाब का पानी दिया गया है.
संयुक्त राष्ट्र में बोलते हुए लड़खड़ाए पाक मंत्री
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में हुई एक अहम बैठक के दौरान पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ चर्चा का केंद्र बन गए हैं. ये बैठक की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर और इस उनके दिया गया भाषण वायरल हो गया, जिसमें वह बोलते हुए लड़खड़ा रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक AI की चुनौतियों और खतरों पर बोलते हुए आसिफ ने सात बार शब्दों के उच्चारण में गड़बड़ी की.
नेतन्याहू की UN स्पीच में डिजिटल संदेश, जनता तक सीधे पहुंचाने की कोशिश
27 Sep, 2025 12:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को संबोधित करते हुए इजराइल के प्रधानमंत्री अपने सूट पर एक QR लगाए हुए दिखाई दिए. उनके सूट पर लगा ये QR कोड सोशल मीडिया से लेकर न्यूज हेडलाइन्स में बना हुआ है. जिसके मतलब और मकसद जानने के लिए सभी लोग उत्सुक हैं.
इजराइली प्रधानमंत्री ने कहा कि इस कोड में 7 अक्टूबर के अत्याचारों का डॉक्यूमेंटेशन करने वाली एक वेबसाइट का लिंक था. प्रधानमंत्री के साथ सभा में मौजूद अन्य इजराइली सदस्यों ने भी यही कोड बैच पहना था.
QR कोड न्यूयॉर्क में इजराइली जन-कूटनीति की एक खास कोशिश का हिस्सा था. संयुक्त राष्ट्र हेडक्वार्टर और टाइम्स स्क्वायर के पास दर्जनों बिलबोर्ड ट्रक और डिजिटल स्क्रीन पर ‘7 अक्टूबर को याद रखें’ संदेश के साथ यह QR कोड भी प्रदर्शित किया गया है. बता दें अमेरिका में इजराइल के गाजा पर हमलों के खिलाफ लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं. ऐसे में इजराइल का ये प्रयास अमेरिकी लोगों में उसकी कार्रवाई के प्रति नजरिए को बदल सकता है.
संयुक्त राष्ट्र में क्या बोले नेतन्याहू?
इजराइली प्रधानमंत्री ने ने संयुक्त राष्ट्र में बोलते हुए गाजा में बंधक बनाए गए इजराइली लोगों को लाउडस्पीकर के जरिए अलग से संबोधित किया. पहले उन्होंने हिब्रू में अपनी स्पीच दी, फिर वह अंग्रेज़ी में बोलने लगे और कहा, “हमारे वीर नायकों (बंधकों), मैं प्रधानमंत्री नेतन्याहू हूं, संयुक्त राष्ट्र से आपसे सीधा संवाद कर रहा हूं. हम आपको एक पल के लिए भी नहीं भूले हैं. इजराइल के लोग आपके साथ हैं.”
नेतन्याहू ने जोर दिया कि वह तब तक नहीं रुकेंगे, जब तक वह सभी बंधकों वापस नहीं लाएंगे. इजराइली प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि उनके भाषण का गाना वासियों के मोबाइल फोन पर लाइव टेलीकास्ट किया जा रहा है. उन्होंने इसके लिए अपनी खुफिया एजेंसी का आभार जताया.
नेतन्याहू के मंच पर आते ही हॉल से बाहर गए कई देश
नेतन्याहू ने जब संयुक्त राष्ट्र में मंच संभाला तो लगभग पूरा हॉल खाली हो गया है. इजराइल की गाजा पर अमानवीय कार्रवाई के विरोध में कई विश्व नेताओं नेतन्याहू के मंच पर आते ही हॉल छोड़कर चला गया, लेकिन इजराइली डेलीगेशन उनके भाषण पर जोर जोर तालियां बजाता रहा.
विश्व समुदाय में चिंता, महायुद्ध की आशंका से तनाव का माहौल
27 Sep, 2025 12:32 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रूस-यूक्रेन की जंग में NATO और यूरोप की बढ़ रही दिलचस्पी ने दुनिया के सामने एक ऐसे युद्ध का संकट खड़ा कर दिया है, जिससे कोई भी अछूता नहीं रहेगा, लेकिन क्या महायुद्ध वाकई होने वाला है? सवाल अब तक की स्थिति में ज्यादा गंभीर नहीं लग रहा था, लेकिन अमेरिका में होने वाली एक खुफिया बैठक ने इस सवाल को बेहद गंभीर बना दिया है. ये बैठक है अमेरिकी सैन्य अधिकारियों की, जो बैठक में शामिल होने के लिए दुनियाभर से जुटेंगे.
दुनिया में जंग के कई मोर्चे खुले हैं और इन सभी मोर्चों पर अमेरिका कहीं प्रत्यक्ष रूप से शामिल है, तो कहीं परोक्ष रूप से. यही वजह है कि अमेरिका को लेकर एक संदेह की स्थिति पूरी दुनिया में बनी हुई है और अब ये संदेह एक आदेश से बहुत ज्यादा गहरा गया है. ट्रंप को सत्ता में आए 9 महीने से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन जिस दावे के साथ वो सत्ता पर काबिज़ हुए वो दावा हवाई साबित हो गया. शांति स्थापना की जगह जंग के कई और प्रत्यक्ष मोर्चे खुल गए.
जंग के जो हालात सिर्फ यूक्रेन तक सीमित थे, उनको ट्रंप की नीतियों से विस्तार मिला, लेकिन इसी रण विस्तार के हालात में अमेरिका के रक्षा मंत्री ने दुनिया में फैले अपने सैन्य अधिकारियों को एक अहम आदेश जारी किया है. इस आदेश के तहत अगले हफ्ते वर्जीनिया में सभी सैन्य अधिकारियों को जुटना होगा और इस बैठक का कारण असामान्य हालात बताया गया है. इसी आदेश के कारण ही संदेह जन्म लेता है कि जब फ्लैग या जनरल अफसरों की बैठक अमेरिका जब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए लेता है, तो दुनिया भर से उन्हें चर्चा के लिए वर्जीनिया क्यों बुलाया गया है?
ट्रंप युद्धविराम की कोशिश में नाकाम हो गए
क्या अमेरिका सीधे रूस के खिलाफ जंग में उतरने जा रहा है? ये संभावना हालांकि बहुत कम है क्योंकि अमेरिका साफ कर चुका है कि वो रूस के खिलाफ यूक्रेन की जमीनी लड़ाई में अपने सैनिकों की तैनाती नहीं करेगा, लेकिन ये घोषित नीति है, ट्रंप की योजना नहीं. इसलिए ट्रंप के प्लान पर कई सवाल खड़े होते हैं. क्या यूक्रेन को NATO की सदस्यता देने की तैयारी हो गई है, क्या जंग में NATO सेना को उतारने की तैयारी हो गई है, क्या आर्टिकल-5 के तहत अमेरिका ने जंग की तैयारी शुरू कर दी है और क्या अमेरिका ने यूरोप और NATO को जंग का फेस बनाने की तैयारी कर ली है?
अमेरिका NATO के बैनर तले रूस के खिलाफ जंग छेड़ सकता है, लेकिन ऐसा क्यों? कारण क्या हैं? कारण बहुत सीधे हैं कि ट्रंप युद्धविराम की कोशिश में नाकाम हो गए हैं. अपने खिलाफ में बन रहे माहौल से आजिज आ गए हैं. रूस के खिलाफ उठाए गए कदमों के बेअसर होने से निराश हो गए हैं और ट्रंप अमेरिका में भी अपनी विश्वसनीयता खो चुके हैं इसलिए, दुनिया में बनने वाले युद्ध के हालात में अमेरिका की स्थिति क्या होगी? इसका आकलन करने के लिए उन्होंने अपनी सभी कमांड के जनरल और एडमिरल्स समेत बड़े अधिकारियों को वर्जीनिया में जुटने के आदेश दिए हैं.
तख्तापलट करवाने की भी योजना?
हालांकि, ये अनुमान है इसका एक और पक्ष है खुफिया युद्ध, जिसमें विरोधी देशों के अंदर बगावत भड़काई जा सकती है. विरोधी देशों में सत्ता परिवर्तन के लिए प्रयोजित आंदोलन करवाए जा सकते हैं. इसके अलावा खुफिया हमले भी करवाए जा सकते हैं. मुमकिन है कि रूस के खिलाफ अगर ट्रंप एक्शन लेते हैं, तो तख्तापलट करवाने की भी योजना हो सकती है. इसकी आशंका कम है. इसकी अपेक्षा NATO और यूरोप को आगे करके युद्ध की आशंका ज्यादा है, जिसका प्रमाण है कि पोलैंड ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी कर दी है.
इस एडवाइजरी के तहत बेलारूस छोड़ने के लिए कहा गया है. इसके अलावा बेलारूस और रूस से संबंधित देशों की यात्रा करने से बचने के लिए कहा गया है, जिसका सीधा मतलब है कि तैयारी सिर्फ हमले से बचाव की नहीं है, बल्कि युद्ध की है और इसी तैयारी वाले माहौल में ट्रंप ने अचानक सैन्य अधिकारियों की सीक्रेट बैठक बुलाई है, जिसके मायने बहुत गहरे हैं.
नाटो चीफ का बड़ा दावा – ट्रंप टैरिफ के बाद मोदी ने पुतिन से पूछा यूक्रेन प्लान
26 Sep, 2025 11:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। नाटो महासचिव मार्क रुटे ने सनसनीखेज दावा किया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की ओर से भारत पर रूसी तेल खरीदने के लिए लगाए गए टैरिफ का मॉस्को पर बड़ा असर पड़ रहा है।
रुटे का कहना है कि इन टैरिफ्स के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से फोन पर उनकी यूक्रेन रणनीति को समझाने की मांग कर रहे हैं।
बातचीत में रुटे ने कहा कि भारत पर 50% टैरिफ का दबाव रूस को सीधे प्रभावित कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, टैरिफ के बाद दिल्ली अब मॉस्को से जवाब मांग रही है।
रुटे ने कहा, "ये टैरिफ रूस को तुरंत प्रभावित करते हैं, क्योंकि अब दिल्ली पुतिन से फोन पर पूछ रही है, 'मैं आपका समर्थन करता हूं, लेकिन आप अपनी रणनीति समझाएं, क्योंकि मुझे अमेरिका के 50% टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है',"
ट्रंप का टैरिफ का असर रूस तक?
पिछले महीने ट्रंप ने भारत पर 25% पारस्परिक टैरिफ और रूसी तेल खरीदने की सजा के रूप में अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाया था। जनवरी में सत्ता में वापसी के बाद से ट्रंप कई देशों पर पारस्परिक टैरिफ लगा चुके हैं।
उन्होंने भारत पर आरोप लगाया कि रूसी तेल खरीदकर नई दिल्ली मॉस्को के यूक्रेन पर हमलों को बढ़ावा दे रही है। ट्रंप ने 13 सितंबर को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा कि जब तक सभी नाटो देश रूसी तेल खरीदना बंद नहीं करते, वह रूस पर "बड़े प्रतिबंध" लगाने को तैयार हैं।
रुटे ने ट्रंप के इस रुख का समर्थन किया और कहा कि नाटो देशों को रूसी तेल खरीदना बंद करना चाहिए। ट्रंप ने यह भी कहा कि नाटो की प्रतिबद्धता यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए 100% से काफी कम है और रूसी तेल की खरीद हैरान करने वाली है।
चंद्रमा पर जंग की परत, सौर हवाओं और धरती का कनेक्शन हुआ उजागर
26 Sep, 2025 10:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कुछ प्राकृतिक घटनाएं ऐसी होती हैं, जिन्हें देखने के बाद वैज्ञानिक भी हैरान हो जाते हैं। ऐसी ही एक रिपोर्ट ने वैज्ञानिकों को परेशान किया है।
दरअसल, सामने आई एक रिपोर्ट में पता चला है कि चांद के ध्रुवीय इलाकों में हीनेटाइट नाम का एक खनिज पाया गया है। इसके सामान्य भाषा में आयरन ऑक्साइड या जंग के नाम से जाना जाता है। इस बीच सभी के मन में सवाल है कि चांद पर ना तो पर्याप्त मात्रा में पानी है और ना ही वहां पर ऑक्सीजन है, ऐसे में वहां जंग कैसे लग सकती है।
जंग के इस रहस्य ने वैज्ञानिकों को किया हैरान
एक रिपोर्ट के अनुसार, लोगों को हैरान किया है। हालांकि, सामने आई इस जानकारी ने चांद और धरती के रिश्ते को नए नजरिए से देखने का भी अवसर दिया है। रिपोर्ट के बाद कुछ वैज्ञानिकों ने दावा किया कि धरती के कारण ही चांद पर जंग लगी हैं।
वैज्ञानिक मान रहे हैं कि चांद पर हीमेटाइट बनने की प्रक्रिया की मुख्य वजह धरती की भूमिका हो सकती है। आम तौर पर जंग के लिए ऑक्सीजन और पानी दोनों की आवश्यकता होती है, लेकिन चांद इन संसाधनों की कमी है।
शोध में पाया गया है कि जब चांद अपनी प्ररिक्रमा करते हुए धरती की चुंबकीय पूंछ से होकर गुजरता है को पांच दिनों तक सूरज की हवाओं में वह कहीं छिप जाता है। ठीक इसी समय चांद पर सीधा असर डालने वाले कल पृथ्वी से निकलने वाली ऑक्सीजन होती है। इसके वैज्ञानिक भाषा में अर्थ विंड भी कहा जाता है।
वैज्ञानिकों ने लैब में किया ये प्रयोग
जैसे ही ये रिपोर्ट सामने आई, वैज्ञानिकों के मन में कई सवाल खड़े हुए। वैज्ञानिकों ने इस विचार की जांच के लिए लैब में एक अनोखा प्रयोग किया। लैब में वैज्ञानिकों ने ऑक्सीजन और हाइड्रोजन आयनों को तेज गति से लौह-युक्त खनिजों पर डाला। ये खनिज ठीक वैसे ही थे, जो आम तौर पर चांद की सतह पर मिलते हैं। इस दौरान वैज्ञानिकों ने चौंकाने वाला परिणाम पाया।
इस प्रयोग के दौरान जब उच्च एनर्जी वाले ऑक्सीजन कण इन खनिजों से टकराए, तो उनमें हीमेटाइट बनने की प्रक्रिया देखने को मिली। वहीं, इस दौरान हाइड्रोजन के टकराने से यह प्रक्रिया आंशिक रूप से उलटी हो सकती है। इसका मतलब है कि जहां पर ऑक्सीजन जांच पर जंग बनाने में मदद कर रही है, वहीं हाइड्रोजन उसको धीमा करने की क्षमता रख रहा है।
भारत का दबाव काम आया, अमेरिका ने कहा – कश्मीर मसला भारत-पाकिस्तान का आंतरिक मामला
26 Sep, 2025 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान को एक बार फिर झटका लगा है. अमेरिकी विदेश विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि कश्मीर भारत और पाकिस्तान के बीच एक सीधा मुद्दा है और अमेरिका को इस मामले में दोनों देशों के बीच दबाव डालने में कोई दिलचस्पी नहीं है. ट्रंप प्रशासन के इस रुख से पाकिस्तान को झटका लग सकता है, क्योंकि पाकिस्तान लंबे समय से कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाता रहा है.
अधिकारी ने आगे कहा कि हम इसे भारत और पाकिस्तान पर छोड़ रहे हैं. साथ ही इस बात पर जोर दिया कि भारत और पाकिस्तान के मसलों पर अमेरिका ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का ध्यान रखता है. भारत पहले से ही इस मसले को द्विपक्षीय ही रहने की वकालत करता आया है, माना जा रहा है कि ये बयान भारत के दबाव का असर है.
अधिकारी ने बताया कि अमेरिका भारत और पाकिस्तान को दो अलग-अलग नजरियों से देखता है. फिर अमेरिका फर्स्ट नीति के मुताबिक जो हमारे हितों के लिए बेहतर होता है, उसपर काम करते हैं.
ट्रंप के पास पहले से काफी मसले
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अधिकारी ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने पहले काफी मुद्दें हैं, जो उन्होंने सुलझाने हैं. लेकिन अगर उनसे मदद मांगी जाए तो वे मदद के लिए तैयार हैं.
हालांकि, संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष रोकने के दावे को फिर दोहराया था. इसपर विदेश विभाग के अधिकारी ने कहा, “यह सच है कि अमेरिका उस संकट में शामिल था और उसने युद्धविराम कराने में पूरी तरह से मदद की थी.”
भारत नहीं चाहता किसी तीसरे का कश्मीर मुद्दे में दखल
भारत लंबे समय से आतंकवाद और कश्मीर जैसे मुद्दों पर पाकिस्तान के साथ अपनी बातचीत में किसी तीसरे पक्ष को शामिल नहीं करना चाहता, क्योंकि नई दिल्ली का मानना है कि ये द्विपक्षीय ही रहने चाहिए. जबकि अमेरिका OIC से लेकर UN तक कश्मीर का राग अलापता रहा है. अमेरिका का ये बयान काफी हद तक भारत के विचार के पक्ष में है.
भारत-पाकिस्तान संघर्ष और ट्रंप के दावे
भारत ने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था. जिसके बाद पाकिस्तान की तरफ से भी भारत पर हमले किए गए थे, जिनका जवाब भी भारतीय सशस्त्र बलों ने बहादुरी से दिया था. 3 दिन चले इस संघर्ष में 10 मई को सीजफायर हुआ, जिसके सबसे पहले घोषणा ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया से की थी.
10 मई से, ट्रंप बार-बार दावा कर रहे हैं कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को कम करने में मदद की है. भारत ने इन दावों का खंडन किया है.
टिकटॉक का संचालन अब अमेरिकी निवेशकों के हाथ, ट्रंप ने युवाओं के हित में किया निर्णय
26 Sep, 2025 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। लंबे समय से टिकटॉक को लेकर चीन और अमेरिका के बीच होने वाली डील पर सभी की नजर थी। अब सभी प्रकार के संशय के पर्दा उठ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने गुरुवार को अमेरिका में चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टिकटॉक के भविष्य को पक्का कर दिया।
अमेरिका और चीन के बीच इस प्लेटफॉर्म को लेकर डील हो गई। ट्रंप के हस्ताक्षर के बाद चीन के इस सोशल मीडिया एप पर अमेरिका में इसे चलाने की जिम्मेदारी अमेरिकी निवेशकों की होगी। वहीं, इसके अमेरिकी वर्जन पर भी पूरा अधिकार अमेरिका का ही होगा।
ट्रंप ने किए ऐतिहासिक डील पर हस्ताक्षर
गुरुवार को डोनल्ड ट्रंप ने इस ऐतिहासिक डील पर साइन करने के बाद कहा कि हमारे देश के युवा यही चाहते थे और यह हमारे युवाओं के लिए काफी अच्छा है।
गुरुवार को व्हाइट हाउस में 14 मिलियन की इस खरीद के आदेश पर हस्ताक्षर करते हुए डोनल्ड ट्रंप ने कहा कि यह काफी दिलचस्प है कि मैंने राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ इस मु्द्दे पर काफी अच्छे से बात की। मेरे मन में शी चिनफिंग को लेकर काफी सम्मान है। इसी के साथ उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि चिनफिंग भी मेरा सम्मान करते हैं।
ट्रंप ने बताया कि शी चिनंफिंग से उन्होंने टिकटॉक के विषय पर बात की और उन्होंने इसपर सहमति दे दी। यह अमेरिकी निवेशकों द्वारा चलाया जाएगा। साथ ही हमारे देश के युवा भी यही चाहते थे। यह डील उनके लिए ही है। हमारे पास अमेरिकी निवेशक हैं, जो इसे संभाल रहे हैं।
अमेरिका में कई साल से जारी रहा है टिकटॉक का विवाद
जानकारी दें कि अमेरिका और चीन के बीच टिकटॉक को लेकर काफी पहले से विवाद रहा है। ये विवाद पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल के समय से ही है। पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन ने टिकटॉक का मालिकान हक रखने वाली कंपनी बाइटडांस को आदेश जारी किया था। इस आदेश में कहा गया कि बाइटडांस टिकटॉक का मालिकाना हक किसी अमेरिकी कंपनी को बेच दें, वरना बैन के लिए तैयार रहें।
चीन और अमेरिका में टिकटॉक पर क्या हुई डील?
बता दें कि टिकटॉक पर मालिकाना हक वर्तमान में केवल बाइटडांस का ही है। हालांकि, इस डील के बाद अमेरिका में इस प्लेटफॉर्म का एक बड़ा शेयर अमेरिका की कंपनी को चला जाएगा। केवल 20 प्रतिशत ही शेयर मूल कंपनी के पास रह जाएगा। नई डील के बाद अब अमेरिका में इस प्लेटफॉर्म पर क्या देखा जाएगा, यह अमेरिका ही तय करेगा।
इस डील पर क्या बोले जेडी वेंस?
वहीं, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने जोर देते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच हुई यह डील सुनिश्चित करेगी कि अमेरिकी निवेशक उस एल्गोरिदम को नियंत्रित करें, जो यूजर्स को दिखता है। उन्होंने कहा कि हम नहीं चाहते हैं कि इसका उपयोग किसी भी विदेशी सरकार द्वारा प्रचार उपकरण के रूप किया जाए।
पाक पीएम शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर से मुलाकात, व्हाइट हाउस ने नहीं दी कोई आधिकारिक तस्वीर
26 Sep, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने वाशिंगटन स्थित ओवल ऑफिस में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख (सीओएएस) असीम मुनीर के साथ मुलाकात की।
हालांकि, व्हाइट हाउस की ओर से बैठक की कोई आधिकारिक तस्वीर या वीडियो जारी न किए जाने के कारण इस बैठक पर संशय के बादल मंडरा रहे हैं।
व्हाइट हाउस आमतौर पर राष्ट्रपति की विदेशी समकक्षों के साथ बैठक की तस्वीरें या लाइव वीडियो जारी करके प्रोटोकॉल का पालन करता है।
इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति ने तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप एर्दोगन की मेज़बानी की थी और उस बैठक के बाद एक लाइव संयुक्त ब्रीफिंग हुई थी। हालाँकि, शरीफ, मुनीर और ट्रंप की बैठक की जानकारी केवल पाकिस्तान के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स पर ही पोस्ट की गई थी।
पाकिस्तान क्या कह रहा है?
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो भी मौजूद थे। उन्होंने आगे कहा कि बैठक एक खुशनुमा माहौल में हुई। पाक पीएमओ ने दावा किया कि बैठक प्रेस के लिए बंद थी और अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर करने के दौरान लगभग 30 मिनट की देरी हुई।
हालांकि, व्हाइट हाउस की प्रेस पूल तस्वीरों में मुनीर और शरीफ व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यक्रम पूरे होने तक इंतजार करते हुए दिखाई दे रहे थे।
जेम्स कोमी की बेटी मॉरीन कोमी को भी नौकरी से निकाले जाने का खुलासा, कोई कारण नहीं बताया गया
26 Sep, 2025 10:40 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पूर्व FBI निदेशक जेम्स कोमी के खिलाफ अभियोग दर्ज होने के कुछ ही मिनटों बाद उनके दामाद ट्रॉय एडवर्ड्स ने संघीय अभियोजक के पद से इस्तीफा दे दिया।
एडवर्ड्स ने अपने एक लाइन के इस्तीफे में कहा, "मैंने संविधान और देश के प्रति अपनी शपथ को कायम रखने के लिए यह कदम उठाया है।"
यह नाटकीय घटनाक्रम वर्जीनिया के पूर्वी जिले में हुआ, जहां कोमी पर कांग्रेस से झूठ बोलने का आरोप लगा है। एडवर्ड्स राष्ट्रीय सुरक्षा अनुभाग के उप प्रमुख थे। ये पेंटागन और CIA मुख्यालय को कवर करने वाला एक प्रतिष्ठित पद है।
उन्होंने 6 जनवरी, 2021 को कैपिटल हिल पर हमले की साजिश रचने वाले ओथ कीपर्स के संस्थापक स्टीवर्ट रोड्स को दोषी ठहराने वाली अभियोजन टीम में अहम भूमिका निभाई थी।
ट्रंप ने दिया था कार्रवाई का संकेत
केवल कुछ दिन पहले, राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अपने अटॉर्नी जनरल को कोमी और अन्य कथित राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ कार्रवाई करने का संकेत दिया था। वर्जीनिया के पूर्वी जिले की नई कार्यवाहक यूएस अटॉर्नी लिंडसे हॉलिगन ने पांच साल की सीमा अवधि समाप्त होने से पहले जल्दबाजी में मामले को ग्रैंड जूरी के सामने पेश किया।
हॉलिगन की नियुक्ति उनके पूर्ववर्ती के इस्तीफे के बाद हुई, जिन्होंने कोमी पर आरोप नहीं लगाए थे और ट्रम्प के एक अन्य टारगेट न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स के खिलाफ जांच में दबाव का सामना किया था।
बेटी को बिना कारण बताए नौकरी से निकाल दिया था
कोमी ने गुरुवार को कहा कि वह निर्दोष हैं और मुकदमे का स्वागत करते हैं। उन्होंने संघीय न्यायिक व्यवस्था में अपने "पूर्ण विश्वास" की बात दोहराई। इस बीच, एडवर्ड्स अपने ससुर के अभियोग के दौरान कोर्टरूम में पहली पंक्ति में मौजूद थे।
एडवर्ड्स का इस्तीफा कोमी परिवार पर आए संकट की एक और कड़ी है। दो महीने पहले, जुलाई में, जेम्स कोमी की बेटी मॉरीन कोमी को न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले से बिना किसी स्पष्टीकरण के नौकरी से निकाल दिया गया था।
मॉरीन ने इस महीने सरकार के खिलाफ मुकदमा दायर किया। यह दावा करते हुए कि उनकी बर्खास्तगी राजनीतिक कारणों से थी और असंवैधानिक थी।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पद छोड़ने को तैयार जेलेंस्की
25 Sep, 2025 10:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। रूस और यूक्रेन के बीच तीन साल से अधिक समय से युद्ध जारी है। इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वह रूस के साथ युद्ध समाप्त होने के बाद राष्ट्रपति पद छोड़ने को तैयार हैं।
दरअसल,यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने बात करते हुए बताया कि रूस के साथ युद्ध समाप्त होने के बाद वह पद छोड़ने के लिए तैयार होंगे। इस बातचीत के दौरान जेलेंस्की ने कहा कि मेरा लक्ष्य युद्ध समाप्त करना है, न कि पद के लिए दौड़ना है।
रूस के खिलाफ सख्त कदम उठाने की तैयारी: जेलेंस्की
यूक्रेन के राष्ट्रपति ने इससे पहले संयुक्त राष्ट्र में कहा कि रूस को रोका जाना चाहिए। उन्होंने इस दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति ने पूरी दुनिया से रूस के खिलाफ सख्त कदम उठाने की अपील की है।
उन्होंने आरोप लगाया कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूरोप में जंग का विस्तार करना चाहते हैं। जेलेंस्की का कहना है कि हथियारों की विनाशकारी दौड़ में काफी आगे हैं और इसको नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
चुनाव आयोग ने आवामी लीग का रजिस्ट्रेशन निलंबित किया
25 Sep, 2025 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बांग्लादेश में शेख हसीना के तख्तापलट के बाद फरवरी 2026 में आम चुनाव प्रस्तावित हैं. इन चुनाव को लेकर चुनावी हलचल तेज है. वहीं, चुनाव आयोग ने कई चुनाव चिन्ह की एक लिस्ट जारी की है. इस लिस्ट में 115 चुनाव चिन्ह रिजर्व किए गए हैं. साथ ही वॉटर लिली (कमल) और शेख हसीना की पार्टी का चुनाव चिन्ह नौका (बोट) को अपनी सूची से हटा दिया है.
इसी चुनाव के बाद अब बांग्लादेश में नई सरकार का गठन होगा. इससे पहले बांग्लादेश में आखिरी बार साल 2021 में आम चुनाव कराए गए थे, जिसमें शेख हसीना की पार्टी को एकतरफा जीत मिली थी. अब शेख हसीना के तख्तापलट होने के बाद देश में चुनाव होने वाले हैं.
115 चुनाव चिन्ह किए गए तय
निर्वाचन आयोग (EC) ने आगामी 13वें राष्ट्रीय संसदीय चुनाव के लिए कुल 115 चुनावी चिन्ह पार्टियों और निर्दलीय उम्मीदवारों के लिए सुरक्षित रखे हैं. इस सूची में पारंपरिक नौका और शापला/जल कुमुदिनी (Water Lily) प्रतीक शामिल नहीं हैं.
देश के पहले संसदीय चुनावों में कुल 69 चुनावी प्रतीक उपलब्ध थे. फिलहाल, चुनाव आयोग के साथ 50 दल रजिस्टर हैं, जबकि पांच दलों का पंजीकरण रद्द या निलंबित किया जा चुका है.
शापला (कमल) के चिन्ह को लेकर बवाल
नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) लगातार शापला प्रतीक की मांग कर रही थी, लेकिन आयोग ने इसे लिस्ट में शामिल नहीं किया. आयोग ने साफ किया कि शापला (कमल) आधिकारिक सूची का हिस्सा नहीं है और पार्टी को वैकल्पिक प्रतीक चुनने का निर्देश दिया.
नौका को क्यों किया बाहर
शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग का चुनाव चिन्ह परंपरागत रूप से नौका रहा है. इसी के चलते आवामी लीग की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगने और रजिस्ट्रेशन निलंबित होने की वजह से नौका प्रतीक को सूची से हटा दिया गया है.
बुधवार को जारी अधिसूचना में कहा गया कि यह कदम जनप्रतिनिधित्व आदेश, 1972 (Representation of the People Order, 1972) की धारा 94 के तहत, निर्वाचन आचार नियमावली, 2008 में संशोधन करते हुए उठाया गया है. नई सूची में दरीपल्ला (तराजू), जो पहले जमात-ए-इस्लामी का चुनाव चिह्न था उसको बहाल किया गया है. निर्वाचन आयोग ने पहले सूची में 46 नए प्रतीक जोड़कर कुल संख्या 115 तक बढ़ा दी थी.
कई लोग कर रहे विरोध
चुनाव चिन्ह को लेकर देश में विरोध भी दिखाई दे रहा है. नेशनल सिटीजन पार्टी (एनसीपी) के मुख्य आयोजक (उत्तरी क्षेत्र) सरजिस आलम ने चुनाव आयोग के पार्टी को “शापला” (कमल) चुनाव चिन्ह आवंटित न करने के फैसले का विरोध किया है.
सरजिस ने तर्क दिया कि जिस दिन एनसीपी ने पंजीकरण के लिए आवेदन किया था, उसी दिन पार्टी ने स्पष्ट रूप से “शापला” चिन्ह के लिए अनुरोध किया था. उन्होंने लिखा, “शापला को सूची में शामिल करने की ज़िम्मेदारी किसकी थी? क्या वे इतने समय से चुनाव आयोग में बैठकर तमाशा देख रहे थे? या वो एक स्वतंत्र संस्था के रूप में काम करने के बजाय किसी अन्य संस्था, पार्टी या एजेंसी के निर्देशों पर काम कर रहे थे?”
उन्होंने कहा, “चूंकि कोई कानूनी बाधा नहीं है, इसलिए एनसीपी का चिन्ह शापला ही होना चाहिए. इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है. उन्होंने आगे कहा, वरना, हम भी देखेंगे कि चुनाव कैसे होते हैं और कौन सत्ता में आने का सपना देखता है.
खिजर शेख की कंपनी ब्लैकलिस्ट, व्यापार पर रोक
25 Sep, 2025 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका में नकली दवाओं की सप्लाई को लेकर दो भारतीय व्यापारियों पर कार्रवाई की गई है. अमेरिकी ट्रेज़री विभाग ने दो भारतीय व्यापारियों और एक ऑनलाइन फ़ार्मेसी पर प्रतिबंध लगाया है. दोनों पर आरोप है कि उन्होंने इंटरनेट के ज़रिए अमेरिका में नकली दवाओं और खतरनाक नशीले पदार्थों की सप्लाई की.
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, भारतीय व्यापारी सादीक अब्बास हबीब सय्यद और खिज़र मोहम्मद इकबाल शेख लंबे समय से ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप के ज़रिए नकली प्रेसक्रिप्शन पिल्स बेच रहे थे. इन गोलीयों में फेंटेनायल जैसे जानलेवा रसायन पाए गए, जिन्हें उपभोक्ता वैध दवाइयों के नाम पर खरीद रहे थे.
खिज़र शेख द्वारा संचालित KS International Traders नामक ऑनलाइन फ़ार्मेसी को भी ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है.
अमेरिका ने क्यों की ये कार्रवाई?
दोनों भारतीय व्यापारियों पर एक्शन के बाद अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि इनसे जुड़े सभी वित्तीय लेनदेन और संपत्तियां ब्लॉक कर दी गई हैं और किसी भी अमेरिकी नागरिक या संस्था को इनके साथ कारोबार करने की अनुमति नहीं होगी.
फेंटेनायल की वजह से अमेरिका में ओवरडोज मौतों की संख्या लगातार बढ़ रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि नकली दवाओं का यह नेटवर्क युवा पीढ़ी के लिए गंभीर खतरा है. अमेरिकी एजेंसियों ने साफ किया है कि ऐसी गतिविधियों में शामिल किसी भी व्यक्ति या संस्था को बख्शा नहीं जाएगा.
कौन है शेख और सय्यद?
खिजर शेख का जन्म 1991 में मुंबई में हुआ था. वहीं सादिक सय्यद का जन्म 1985 में हुआ था. शेख और सय्यद पर 2024 में भी ड्र्ग्स को लेकर गंभीर आरोप लग चुके हैं. उस वक्त संघीय ग्रैंड जूरी ने सिर्फ दोनों को दोषी ठहराया था.
डोनाल्ड ट्रंप के आने के बाद ड्र्ग्स को लेकर सख्त एक्शन लिया जा रहा है. अमेरिकी टीम ने हाल ही में वेनेजुएला से आ रही कम से कम 3 जहाज को मार गिराया है. ट्रंप प्रशासन का कहना है कि वेनेजुएला के जरिए ही अमेरिका में ड्रग्स भेजे जा रहे हैं.
रिक्टर स्केल पर 6.2 मापी गई तीव्रता, दहशत का माहौल
25 Sep, 2025 05:14 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वेनेजुएला में आज सुबह धरती अचानक कांप उठी जब यहां 6.2 तीव्रता का भूकंप के झटके महसूस किए गए. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के मुताबिक, यह झटका स्थानीय समय के अनुसार सुबह 03:51 बजे महसूस किया गया हैं. भूकंप का केंद्र वेनेजुएला के उत्तरी हिस्से में दर्ज किया गया है, जहां से आसपास के इलाकों में भी कंपन महसूस हुए हैं.
6.2 तीव्रता और 7.8 किलोमीटर तक गहराई
रिपोर्ट्स के मुताबिक, भूकंप का केंद्र मेने ग्रांडो से करीब 24 किलोमीटर दूर पूर्वी-उत्तर में दर्ज किया गया था. बता दे कि भूकंप के झटके वेनेजुएला के साथ पड़ोसी देश कोलंबिया में भी महसूस किए गए हैं, जिससे लोग घरों से बाहर निकल आए और पूरे इलाके में डर का माहौल बन गया है. हालांकि अभी तक किसी तरह के बड़े नुकसान या जनहानि की सूचना नहीं मिली है.
मेने ग्रांडे महत्वपूर्ण इलाका
भूकंप आने के बाद वेनेजुएला सरकार ने तुरंत कोई जानकारी साझा नहीं की थी. मगर अमेरिकी एजेंसियों के अनुसार भूकंप के झटके काफी खतरनाक थे. मगर इससे सुनामी आने का कोई खतरा नहीं बना और न ही समुद्र की लहरों में कोई बदलाव दिखा. मेने ग्रांडे इस इलाके का सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है क्योंकि यह दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित तेल भंडार है.
क्रिस राइट का बयान: भारत दुनिया से तेल खरीद सकता है, बस रूस से नहीं
25 Sep, 2025 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका ने भारत पर हाल ही में 50 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ लगाया. यह टैरिफ रूस से तेल खरीदने के चलते लगाया गया. इसी के बाद अब अमेरिका के मंत्री का एक ऐसा बयान सामने है जिसमें उन्होंने भारत को अमेरिका का शानदार सहयोगी कहा. साथ ही उन्होंने कहा कि हम भारत को सजा नहीं देना चाहते. अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने बुधवार को कहा कि उनका देश अपने शानदार सहयोगी भारत के साथ ऊर्जा सहयोग का विस्तार करना चाहता है, जिसमें प्राकृतिक गैस, कोयला, परमाणु ऊर्जा और खाना पकाने के स्वच्छ ईंधन शामिल हैं.
राइट ने भारत की तारीफ करते हुए कहा, जब मैं इस पद पर आया, तब से मेरा ज्यादातर समय भारत के साथ काम करने में बीता है, जो दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र, अमेरिका का एक शानदार सहयोगी, एक तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है. अमेरिकी मंत्री ने कहा, मैं भारत का बहुत बड़ा प्रशंसक हूं. हम भारत से प्यार करते हैं. हम भारत के साथ और ज्यादा ऊर्जा व्यापार और ज्यादा बातचीत की उम्मीद करते हैं.
ऊर्जा सहयोग को लेकर क्या कहा?
राइट ने न्यूयॉर्क में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया. अमेरिकी मंत्री वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की इस टिप्पणी पर जवाब दे रहे थे कि भारत आने वाले सालों में वाशिंगटन के साथ ऊर्जा प्रोडक्शन पर अपने व्यापार को बढ़ाने की उम्मीद करता है और भारत के ऊर्जा सुरक्षा लक्ष्यों में अमेरिका की हिस्सेदारी अहम है.
अमेरिका ने भारत पर रूस से तेल खरीदने के चलते 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया है. राइट से इसको लेकर भी सवाल किया गया. उनसे पूछा गया कि ऊर्जा के क्षेत्र में भारत और अमेरिका के बीच सहयोग को किस तरह देखते हैं. उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का सबसे बड़ा जुनून विश्व शांति है.
भारत के रूस से तेल खरीदने पर क्या बोले
राइट ने कहा कि हम भारत को सजा नहीं देना चाहते. आप दुनिया के हर देश से तेल खरीद सकते हैं, बस रूस से तेल नहीं खरीद सकते. यह हमारा रुख है. अमेरिका के पास बेचने के लिए तेल है और बाकी सभी के पास भी है. उन्होंने आगे कहा, दुनिया में बहुत सारे तेल निर्यातक हैं. भारत को रूस से तेल खरीदने की जरूरत नहीं है. भारत रूस से तेल इसलिए खरीदता है क्योंकि यह सस्ता है. कोई भी रूस से तेल नहीं खरीदना चाहता. उन्हें इसे छूट पर बेचना पड़ता है.
सुरक्षा और राजनीति में सहयोग: ईरान ने पाक-सऊदी समझौते को अहम बताया
25 Sep, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हाल ही में एक रक्षा समझौता हुआ है. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अब बुधवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए ऐतिहासिक रक्षा समझौते का स्वागत किया. उन्होंने इसे सम्पूर्ण क्षेत्रीय सुरक्षा सिस्टम की शुरुआत बताया.
पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए इस रक्षा समझौते के तहत अब अगर पाकिस्तान या सऊदी अरब पर कहीं से भी हमला होता है, तो इसे दोनों देशों पर हमला माना जाएगा और दोनों देश मिलकर इसका जवाब देंगे. यह समझौता पिछले हफ्ते रियाद के अल-यमामा पैलेस में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने साइन किया.
मुस्लिम देशों के लिए क्यों है अहम?
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में बोलते हुए ईरानी राष्ट्रपति ने कहा, ईरान, सऊदी और पाकिस्तान के इस रक्षा समझौते का स्वागत करता है. यह पश्चिम एशिया के मुस्लिम देशों के बीच राजनीति, सुरक्षा और रक्षा के क्षेत्र में सहयोग से एक व्यापक सुरक्षा सिस्टम की शुरुआत है.
ईरान और सऊदी के रिश्ते
ईरान और सऊदी अरब पहले कई क्षेत्रीय संघर्षों (जैसे सीरिया और यमन) में आमने-सामने रहे हैं. दोनों ने 2016 में राजनयिक रिश्ते तोड़ दिए थे, लेकिन 2023 में चीन की मध्यस्थता से रिश्ते दोबारा शुरू किए. इसके बाद से दोनों देशों के रिश्ते सुधर रहे हैं और उच्च-स्तरीय मुलाकातें हो रही हैं. सऊदी अरब ने मई में ईरान पर इजराइली हमलों की निंदा की थी.
परमाणु हथियार को लेकर क्या बोले?
इस बीच परमाणु निर्माण को लेकर राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने अहम बात की. उन्होंने कहा, ईरान का परमाणु हथियार बनाने का कोई इरादा नहीं है. पेजेश्कियन ने कहा, मैं इस सभा के सामने एक बार फिर ऐलान करता हूं कि ईरान ने कभी परमाणु बम बनाने की कोशिश नहीं की है और न ही कभी करेगा. हम परमाणु हथियार नहीं चाहते.
राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को उस समय संबोधित किया जब कुछ ही महीने पहले इजराइल और अमेरिका ने ईरान पर सैन्य हमले किए थे और यूरोपीय देशों ने तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर नए प्रतिबंध लगा दिए थे. इन हालातों के बावजूद पेजेशकियन ने अपने भाषण में साफ-साफ दोहराया कि ईरान का मकसद कभी परमाणु हथियार बनाना नहीं रहा और न ही आगे ऐसा करने का इरादा है.
उन्होंने कहा कि यूरोपीय देशों का रवैया ईरान के प्रति दुर्भावनापूर्ण है और वो जानबूझकर ईरान को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं. राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि ईरान का सहयोग कम होना किसी “गुप्त हथियार योजना” की वजह से नहीं, बल्कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के 2015 के परमाणु समझौते से अचानक पीछे हटने के कारण है. इस समझौते को औपचारिक रूप से संयुक्त व्यापक कार्य योजना (JCPOA) कहा जाता है, जिसके तहत ईरान को प्रतिबंधों से राहत मिलने वाली थी, बदले में वह परमाणु हथियारों से दूरी बनाए रखेगा.
पेजेशकियन ने यह तर्क दिया कि जब ट्रंप प्रशासन ने समझौते को तोड़ दिया और ईरान पर दोबारा कड़े प्रतिबंध लगाए, तब ईरान के पास भी अपनी रक्षा और परमाणु कार्यक्रम को लेकर कुछ कदम उठाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अगर असल में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय निष्पक्षता और ईमानदारी से काम करे, तो ईरान सहयोग के लिए हमेशा तैयार है, लेकिन एकतरफा दबाव और अनुचित आरोप स्वीकार्य नहीं होंगे.
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