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इजरायल ने फिर दिखाई सख्ती, सेना ने गाजा के लिए मानवीय सहायता ले जा रहे जहाजों के बेड़े को रोका
3 Oct, 2025 09:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यरुशलम। गाजा (Gaza) की ओर जा रहे राहत जहाजों (Ships) के काफिले में सवार कार्यकर्ताओं ने बुधवार देर रात कहा कि इजराइली नौसेना (Israeli Navy) ने उनकी 13 नौकाओं को रोक दिया है। इजरायली अधिकारियों ने बताया कि काफिले में सवार कार्यकर्ताओं में ग्रेटा थनबर्ग (Greta Thunberg) भी शामिल हैं। ये कार्यकर्ता सुरक्षित हैं और इन्हें इजरायल ले जाया जा रहा है। ‘द ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला’ नाम के इस काफिले में लगभग 50 छोटे जहाज शामिल हैं, जिन पर करीब 500 लोग सवार हैं। यह काफिला गाजा के घेराबंदी वाले क्षेत्र में फंसे फिलिस्तीनियों के लिए मानवीय सहायता ले जा रहा है, जिसमें मुख्य रूप से खाद्य सामग्री और दवाइयां शामिल हैं।
कार्यकर्ताओं ने बताया कि फ्लोटिला के 13 जहाजों को गाजा तट से लगभग 80 मील दूर रोका गया। इस बेड़े में पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग, नेल्सन मंडेला के पोते मंडला मंडेला, बार्सिलोना की पूर्व मेयर आदा कोलाउ और कई यूरोपीय सांसद शामिल हैं। समूह का कहना है कि उनका उद्देश्य इजरायल की नाकाबंदी तोड़ना और गाजा को प्रतीकात्मक मानवीय सहायता पहुंचाना है। आयोजकों ने अपने आधिकारिक टेलीग्राम चैनल पर कहा कि 43 में से 13 नौकाओं को रोक लिया गया है, शेष नौकाएं गाजा की ओर बढ़ती रहेंगी।
इजरायली विदेश मंत्रालय ने कहा कि सभी कार्यकर्ता सुरक्षित हैं और उन्हें अशदोद बंदरगाह ले जाया जा रहा है, जहां से उन्हें आगे निष्कासित किया जाएगा। इटली ने भी पुष्टि की कि अभियान शांतिपूर्ण रहेगा और बल प्रयोग नहीं होगा। वहीं, तुर्किये ने इस कार्रवाई को “आतंकवादी कृत्य” और अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताया। कार्यकर्ताओं ने ‘फिलिस्तीन को मुक्त करो’ के नारे लगाए और बताया कि इजरायली नौसैनिक जहाजों ने उनके इंजनों को बंद करने की चेतावनी दी। कुछ नौकाओं पर पानी की बौछार भी की गई।
जहाजों का यह काफिला स्पेन के बार्सिलोना से एक महीने पहले रवाना हुआ था और बृहस्पतिवार सुबह गाजा पहुंचने का लक्ष्य था। आयोजकों को पहले से अंदेशा था कि इजरायल उन्हें रोकेगा। फिलहाल, यह इजरायल की 18 वर्षों से समुद्री नाकाबंदी तोड़ने का अब तक का सबसे बड़ा प्रयास है।
किम जोंग उन का महिलाओं के लिए नया फरमान, ब्रेस्ट इम्प्लांट अब माना जाएगा अपराध
3 Oct, 2025 08:13 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
डेस्क: नॉर्थ कोरिया (North Korean) के तानाशाह किम जोंग उन (Kim Jong Un) ने महिलाओं (Womens) के लिए फरमान जारी कर दिया है. दरअसल नॉर्थ कोरिया में महिलाओं के स्तन वृद्धि सर्जरी (Breast Augmentation Surgery) को असामाजिकवादी और पूंजीवादी करार देते हुए इस पर कड़ा प्रतिबंध लगा दिया है.
सरकार ने ऐसे मामलों में शामिल महिलाओं और डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है, जिसमें श्रमिक शिविरों में भेजने तक की सजा शामिल है. रिपोर्ट के अनुसार, जिन महिलाओं पर सर्जरी कराने का शक है, उन्हें किम जोंग उन की सार्वजनिक स्वास्थ्य टीम की ओर से शारीरिक जांच का सामना करना पड़ सकता है.
सितंबर 2025 में सरीवोन शहर में एक सार्वजनिक मुकदमे के दौरान एक निजी डॉक्टर और दो महिलाओं को अवैध स्तन वृद्धि सर्जरी करने और करवाने के आरोप में पेश किया गया. इन महिलाओं की उम्र 20 के आसपास थी और वे अपनी शारीरिक बनावट को बेहतर बनाना चाहती थीं. मुकदमे में सिलिकॉन, चिकित्सा उपकरण और नकद राशि जैसे अवैध सामानों को सबूत के रूप में पेश किया गया.
किम जोंग उन की सरकार ने जुलाई से सितंबर 2025 तक एक आपातकालीन अभियान चलाया, जिसमें गुप्त जांच और निगरानी के जरिए इस तरह की सर्जरी करने वालों और करवाने वालों की पहचान की गई. सीक्रेट एजेंटों और पड़ोस निगरानी दलों ने महिलाओं की पहचान की और उन्हें शारीरिक जांच के लिए अस्पताल भेजा. सरकार ने चेतावनी दी है कि ऐसे मामलों में शामिल महिलाओं और डॉक्टरों को श्रमिक शिविरों में भेजा जा सकता है.
नॉर्थ कोरियाई सरकार का कहना है कि 20 और 30 की उम्र की महिलाओं में ब्रेस्ट, आईलिड सर्जरी और भौंहों की टैटू जैसी चीजों की बढ़ती मांग का कारण यह है कि वे पूंजीवादी विचारधारा में रंगी हुई हैं. इस कार्रवाई के बारे में स्थानीय लोगों की मिली जुली प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं. कुछ लोगों ने डॉक्टरों की आर्थिक मजबूरी को समझते हुए सहानुभूति जताई, जबकि अन्य ने इसे असामाजिकवादी कृत्य मानते हुए आलोचना की. नॉर्थ कोरियाई सरकार ने अपने देश में इस बढ़ते ट्रेंड को समाप्त करने की ठानी है.
रुसी ड्रोन से डरे यूरोपियन देश..................ड्रोन वॉल तैयार करने की तैयारी में, बुलाई अहम बैठक
2 Oct, 2025 11:58 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोपेनहेगन। दुनिया में युद्ध के तरीके अब बदल रहे हैं। कभी तोप, बंदूक और टैंकों से जो जंग हुआ करती थी, उस जंग में अब ड्रोन वारफेयर ने जगह ले ली है। ईरान, रूस और तुर्की जैसे देशों ने ड्रोन के मामले में बढ़त हासिल की है। अहम बात है कि ड्रोन वारफेयर में लागत कम है और टारगेट पर सीधा हमला करके सफलता मिलने के चांस अधिक हैं। लेकिन अब ड्रोन वारफेयर से होने वाले नुकसान को लेकर चिंता बढ़ गई है। यूरोप में ड्रोन को लेकर खौफ का आलम है।
दरअसल यूरोपियन यूनियन की चिंता की बात यह है कि कुछ दिनों पहले ही रूसी ड्रोन पोलैंड के आसमान में दिखाई दिए थे। पोलैंड नाटो देश है, फिर भी उसके यहां इस तरह रूसी ड्रोन दिखाने से हलचल मच गई थी। इसके अलावा एस्टोनिया और रोमानिया ने भी शिकायत की है कि उनके आसमान में रूसी ड्रोन दिखाई दिए है। इसके बाद रूस की सीमा से लगते बुल्गारिया, एस्टोनिया, हंगरी,लातविया, लिथुआनिया, रोमानिया, पोलैंड, स्लोवाकिया, डेनमार्क और फिनलैंड जैसे देशों ने वार्ता की। इस मीटिंग में तय हुआ कि हमें ड्रोन वॉल तैयार करनी होगी। अब सवाल है कि यह ड्रोन वॉल क्या होगी और कैसी होगी।
जिस ड्रोन वॉल की बात की जा रही है, वह ऐंटी ड्रोन तकनीकों का तैनात होना है। ऐसी तकनीक से ड्रोन के प्रवेश पर सिस्टम तुरंत अलर्ट होगा और उन्हें माकूल जवाब मिलेगा। इसके अलावा यूरोपियन यूनियन के सभी सदस्य देशों के बीच डेटा शेयरिंग को लेकर सहमति होगी। इसके तहत सभी देश एक-दूसरे को बताएंगे कि ड्रोन एंट्री कर रहा है या फिर उसकी स्थिति क्या है।
नाटो के महासचिव मार्क रुट का कहना है कि हमें अपने आसमान को सुरक्षित रखना होगा। इसके लिए ड्रोन वॉल हमारी जरूरत है। उन्होंने कहा कि हम अरबों डॉलर की रकम मिसाइलों की खरीद पर नहीं लगा सकते। ड्रोन का जवाब मिसाइल से नहीं दिया जा सकता। इसलिए हम ड्रोन वॉल के प्रस्ताव पर बात कर रहे हैं। इसके लिए रकम भी कम खर्च होगी।
अमेरिका में शटडाउन...सरकारी कामकाज ठप,ट्रम्प फंडिंग बिल पास नहीं करा पाए, 60 वोटों की जरूरत थी, 55 ही मिले
2 Oct, 2025 10:56 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
9 लाख सरकारी कर्मचारियों की सैलरी पर संकट
वॉशिंगटन। अमेरिका में बुधवार से शटडाउन लागू हो गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प सीनेट से फंडिंग बिल को पास नहीं करा पाए। इससे कई गैरजरूरी सरकारी कामकाज ठप हो गए हैं, जिससे करीब 9 लाख सरकारी कर्मचारियों को बिना सैलरी छुट्टी पर भेजने की नौबत आ गई है। दरअसल, मंगलवार देर रात बिल पर वोटिंग हुई। बिल के समर्थन में 55 और विरोध में 45 वोट पड़े। इसे पास कराने के लिए 60 वोटों की जरूरत थी। ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी को विपक्षी डेमोक्रेट्स सांसदों का समर्थन जरूरी था। लेकिन डेमोक्रेट्स ने बिल के खिलाफ वोट किया। 100 सदस्यों वाली सीनेट में 53 रिपब्लिकन, 47 डेमोक्रेट और 2 निर्दलीय सांसद हैं। दोनों निर्दलियों ने बिल के समर्थन में वोटिंग की।
यह 2019 के बाद पहला सरकारी शटडाउन है। अब शटडाउन शुरू होने के बाद सरकार की परेशानी बढ़ गई है। अमेरिका में सरकार को हर साल अपना बजट पास करना पड़ता है। अगर संसद बजट पर सहमत नहीं होती, तो फंडिंग बिल पास नहीं होता और सरकार को मिलने वाला पैसा रुक जाता है। इस वजह से कुछ सरकारी विभागों और सेवाओं को पैसे नहीं मिलते। गैर-जरूरी सेवाओं को बंद कर दिया जाता है। इसे ही सरकारी शटडाउन कहा जाता है। रिपब्लिकन पार्टी सीनेट में एक बार फिर से फंडिंग बिल पर वोट कराने की तैयारी में है। रिपब्लिकन नेताओं ने कहा है कि जब तक डेमोक्रेट्स बिल को समर्थन नहीं देंगे, तब तक इस बिल को रोजाना पेश किया जाएगा। ट्रम्प ने इस शटडाउन के लिए डेमोक्रेट्स को जिम्मेदार ठहराया है। वे पहले ही सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से निकालने की धमकी दे चुके है। 9 लाख कर्मचारियों को जबरन छुट्टी पर भेजने का खतरा बढ़ गया है।
हेल्थ केयर प्रोग्राम को लेकर सहमति नहीं बन पाई
अमेरिका के दोनों प्रमुख दल डेमोक्रेट और रिपब्लिकन में ओबामा हेल्थ केयर सब्सिडी प्रोग्राम को लेकर ठन गई थी। डेमोक्रेट्स चाहते थे कि हेल्थ केयर (स्वास्थ्य बीमा) की सब्सिडी बढ़ाई जाए। रिपब्लिकन को डर था कि अगर सब्सिडी बढ़ाई गई तो सरकार को खर्च करने के लिए और पैसे की जरूरत पड़ेगी, जिससे बाकी सरकारी काम प्रभावित होंगे। शटडाउन रोकने के लिए राष्ट्रपति ट्रम्प और डेमोक्रेटिक नेताओं ने सोमवार को व्हाइट हाउस में बैठक की थी, लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला।
ट्रम्प को शटडाउन लगने से फायदा या नुकसान
शटडाउन के दौरान, ट्रम्प प्रशासन ऑफिस ऑफ मैनेजमेंट एंड बजट के जरिए से जरूरी और गैर-जरूरी सेवाओं का फैसला कर सकता है। इससे वे डेमोक्रेट-समर्थित प्रोग्राम्स जैसे शिक्षा, पर्यावरण, स्वास्थ्य सब्सिडी को गैर-जरूरी कर सकते हैं, जबकि डिफेंस और इमिग्रेशन को जरूरी का दर्जा दे सकते हैं। ट्रम्प ने खुद कहा है शटडाउन से कई अच्छी चीजें होंगी। शटडाउन के चलते बड़ी संख्या में लोगों को नौकरी से निकाला जा सकता है। 2025 में पहले ही संघीय नौकरियों में 3 लाख की कटौती का जा चुकी है। यह ट्रम्प की नीति का हिस्सा है। ट्रम्प इसे डेमोक्रेट्स पर दोष डालने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। व्हाइट हाउस ने फेडरल एजेंसियों को निर्देश दिया कि वे डेमोक्रेट्स को जिम्मेदार ठहराएं, जो नैतिकता कानूनों का उल्लंघन हो सकता है। छोटे शटडाउन से ट्रम्प को ज्यादा फायदा होगा, क्योंकि वे अपनी एजेंडा को आगे बढ़ा सकते हैं, लेकिन लंबा खिंचने पर आर्थिक नुकसान से उनकी छवि खराब हो सकती है।
पीओके में पाकिस्तानी सेना की प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी
2 Oct, 2025 08:53 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
10 की मौत, 100 घायल; तीसरे दिन भी हिंसक प्रदर्शन जारी, सरकार से 38 मांगे
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ तीसरे दिन भी हिंसक प्रदर्शन जारी हैं। बुधवार को सिक्योरिटी फोर्सेज की गोलीबारी में 8 लोगों की मौत हो गई, जबकि 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बाघ जिले के धीरकोट में 4 लोग मारे गए, मुजफ्फराबाद में 2 और मीरपुर में 2 मौतें हुईं। प्रदर्शन के दौरान अब तक कुल 10 नागरिक मारे जा चुके हैं। ये प्रदर्शन जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी की अपील पर हो रहे हैं। प्रदर्शनकारी सरकार पर मौलिक अधिकारों की अनदेखी और महंगाई कंट्रोल न कर पाने का आरोप लगा रहे हैं।
लोगों का हुजूम मुजफ्फराबाद की तरफ मार्च कर रहा है। इन्होंने सरकार के सामने 38 मांगें रखी हैं, जिनमें पीओके विधानसभा की 12 रिजर्व सीटें खत्म करने की मांग शामिल है। नेता शौकत नवाज मीर ने कहा कि हमारी मुहिम 70 साल से इनकार किए गए मौलिक अधिकारों के लिए है... या तो हक दो, वरना लोगों का गुस्सा झेलो। उन्होंने मारे गए लोगों के परिवारों के लिए मुआवजा और सरकारी नौकरी भी मांगी रखी है। मीर ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा- यह हड़ताल प्लान ए है। लोगों का सब्र टूट चुका है। हमारे पास बैकअप प्लान हैं और प्लान डी बहुत खतरनाक होगा।
पीओके में पत्रकारों की एंट्री बैन
पाकिस्तान सरकार ने पीओके में पत्रकारों और टूरिस्ट की एंट्री बैन कर दी है। लोकल रिपोर्टर्स भी आरोप लगा रहे हैं कि उन्हें न्यूट्रल कवरेज करने से रोका जा रहा है। इसके अलावा कई मानवाधिकार संगठन भी इस मुद्दे पर आवाज उठा रहे हैं। पीओके में आधी रात से इंटरनेट बंद कर दिया गया है। सरकार को डर है कि ये प्रदर्शन आजादी की मांग में बदल सकते हैं।
‘चीन में धर्मों को समाजवादी समाज के और अधिक अनुरूप होना चाहिए’, जिनपिंग ने कही ये बात
1 Oct, 2025 01:27 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
डेस्क: चीन (China) के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) ने सोमवार (29 सितंबर, 2025) को कहा कि इस कम्युनिस्ट देश में धर्मों (Religions) को समाजवादी समाज के और अधिक अनुरूप होना चाहिए. सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि चीन में धर्म चीनी परिप्रेक्ष्य के और अधिक अनुरूप होने चाहिए.
शी ने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक समूह अध्ययन सत्र की अध्यक्षता करते हुए धर्मों को सक्रिय मार्गदर्शन प्रदान करने का भी आह्वान किया ताकि वे समाजवादी समाज के अनुरूप बन सकें. साल 2012 में सत्ता में आने के बाद से, शी (72) सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी की धर्म संबंधी नीतियों को मार्क्सवादी विचारधारा के साथ जोड़कर उन्हें नया रूप दे रहे हैं.
इस साल जुलाई में, चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने एक सवाल का जवाब देते हुए, शी द्वारा जारी दिशानिर्देशों के तहत तिब्बती बौद्ध धर्म और अन्य धर्मों के चीनीकरण का बचाव किया था. माओ ने कहा, ‘मेरा मानना है कि धर्म का चीनीकरण धार्मिक आचरण पर प्रतिबंध लगाने के बारे में नहीं है, बल्कि सभी धर्मों को देश के सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य के अनुरूप होना चाहिए.’
उन्होंने कहा, ‘चीन में तिब्बती बौद्ध धर्म एक ऐसे धर्म का प्रमुख उदाहरण है जिसने चीनी विशेषताओं को समाहित किया है और जो चीनीकरण की प्रक्रिया का उदाहरण है.’ चीन का कहना है कि उसके पास धार्मिक स्वतंत्रता है, लेकिन उसे पार्टी द्वारा निर्धारित मानदंडों के भीतर काम करना चाहिए.
यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि धर्मों को चीनी परिस्थितियों के अनुरूप होने के लिए क्या करना चाहिए. धर्म पर शी की टिप्पणी तिब्बत और शिनजियांग की उनकी हालिया यात्रा की पृष्ठभूमि में आई है. ये ऐसे दो विशाल प्रांत हैं जो सात दशकों से अधिक समय तक सीपीसी शासन और दमन के बावजूद भी अपनी धार्मिक पहचान बरकरार रखे हुए हैं.
पाकिस्तान के क्वेटा में जबरदस्त धमाका, छह की मौत और 15 से ज्यादा घायल
1 Oct, 2025 12:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
क्वेटा। पाकिस्तान (Pakistan) के क्वेटा शहर (Quetta City) में जबरदस्त विस्फोट (Explosion) हुआ है, जिसमें छह लोगों की मौत हुई है। धमाके में कई लोग घायल भी हुए हैं। क्वेटा पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की राजधानी है। बलूचिस्तान के स्वास्थ्य विभाग के सचिव ने बताया कि बम विस्फोट के चलते क्वेटा के अस्पतालों में आपातकाल लागू कर दिया गया है। सभी डॉक्टर्स, पैरामेडिकल स्टाफ, नर्सों आदि को ड्यूटी पर मौजूद रहने का निर्देश दिया गया है।
इमरान खान पर एकदम से पलटी मार गई बिलावल भुट्टो की पार्टी
1 Oct, 2025 11:24 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
डेस्क: पाकिस्तान (Pakistan) जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) की रिहाई का मामला तुल पकड़ लिया है. पेशावर में पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ की रैली के बाद अब बिलावल भुट्टो (Bilawal Bhutto) की पार्टी के नेता भी इमरान की पैरवी में जुट गए हैं. बिलावल पार्टी के कद्दावर नेता चौधरी ऐतजाज अहसान (Chaudhary Aitzaz Ahsan) का कहना है कि इमरान पर सारे आरोप झूठे हैं. उन्हें तुरंत रिहा किया जाना चाहिए.
ऐतजाज पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील होने के साथ-साथ बार एसोसिएशन के प्रमुख हैं. बिलावल पार्टी के सदस्य हैं और जरदारी परिवार से उनके पुराने ताल्लुकात हैं. ऐतजाज पार्टी के सर्वोच्च इकाई के सदस्य भी हैं और कानूनी मामलों में पार्टी का पक्ष रखते हैं. ऐसे में जिस तरीके से इमरान को लेकर ऐतजाज ने बयान दिया है, वो काफी चौंकाने वाला है. अब तक बिलावल की पार्टी इमरान को लेकर कुछ भी बोलने से परहेज करती रही है.
ऐतजाज अहसान का यह बयान ऐसे वक्त में आया है, जब पाकिस्तान में 2 सियासी चर्चा है. पहली चर्चा आसिफ अली जरदारी को हटाकर आसिम मुनीर को राष्ट्रपति बनाने की है. सेना ने अब तक इसे खंडन किया है, लेकिन हाल के दिनों में जिस तरीके से शहबाज और मुनीर की जोड़ी सुर्खियां बटोर रही है, उससे जरदारी अलग-थलग पड़ गए हैं. दूसरी चर्चा पंजाब और सिंध इलाके में दो पार्टियों के बीच गठबंधन को लेकर है. कहा जा रहा है कि पीपीपी इन दो प्रांतों में एक पार्टी के साथ गठबंधन पर विचार कर रही है. यह पार्टी कौन है, इसको लेकर खुलासा नहीं हुआ है.
डोनाल्ड ट्रंप ने की पाक पीएम शरीफ, आसिम मुनीर की जमकर तारीफ
1 Oct, 2025 10:23 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald trump) ने सोमवार को वाइट हाउस में अपने एक बयान के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Shahbaz Sharif) और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर (Marshal Asim Munir) की तारीफ की है। दरअसल, इजरायली पीएम के साथ जारी किए गए गाजा पीस प्लान पर पाकिस्तान की तरफ से समर्थन मिलने पर ट्रंप ने यह बयान दिया। उन्होंने कहा कि वह (शहबाज शरीफ और मुनीर) शुरुआत से ही हमारे साथ थे।
वाइट हाउस में जारी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप ने 20 सूत्रीय गाजा शांति समझौते को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि इससे इजरायल और हमास के बीच में जारी युद्ध खत्म हो जाएगा। इसी ब्रीफिंग के दौरान ट्रंप ने सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात सहित तमाम अरब देशों के नेताओं द्वारा इस शांति प्रस्ताव पर सहमति जताने, नए सुझाव देने और सहयोग के लिए तारीफ की। ट्रंप ने अपनी इस योजना को नए गाजा के विकास के लिए बेहद जरूरी बताया।
ट्रंप ने कहा, “मैं इस प्रस्ताव को बनाने के लिए इन देशों के जबरदस्त समर्थन के लिए उन नेताओं का धन्यवाद देना चाहता हूं। इसमें सऊदी अरब, कतर के अमीर, संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन के राजा… तुर्किए के राष्ट्रपति एर्दोगन, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति शामिल हैं। इन सभी के साथ मेरी बैठकों और बातचीत में हम सब इस मुद्दे पर एक साथ थे।”
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री और सैन्य प्रमुख के बारे में बात करते हुए ट्रंप ने कहा, “प्रधानमंत्री और पाकिस्तान के फील्ड मार्शल… वे शुरुआत से ही हमारे साथ थे। उन्होंने बस एक बयान जारी किया और कहा कि उन्हें इस समझौते पर पूरा विश्वास है।”
ब्रीफिंग के दौरान ही ट्रंप ने कहा कि जब वह घूम रहे थे, तभी अधिकारियों ने उनसे आकर कहा, “सर, आपके लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और फील्ड मार्शल की ओर से एक बड़ा नोटिस है, वह इसका (गाजा पीस प्लान का) 100 प्रतिशत समर्थन करते हैं।”
अफगानिस्तान का खत्म हुआ दुनिया से संपर्क! तालिबान ने पूरे देश में इंटरनेट किया बंद
1 Oct, 2025 09:22 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
डेस्क। अफगानिस्तान (Afghanistan) में इंटरनेट सेवाएं (Internet Services) बंद (Shut Down) कर दी गई हैं। स्थानीय मीडिया के अनुसार, अनैतिकता पर तालिबान (Taliban) की कार्रवाई के मद्देनजर इंटरनेट सेवाओं को संभावित रूप से देशव्यापी स्तर पर बंद कर दिया गया है। तालिबान के अगस्त 2021 में सत्ता पर काबिज होने के बाद यह पहली बार है जब अफगानिस्तान में इस तरह की बंद की कोई कार्रवाई हुई है।
सितंबर महीने की शुरुआत में तालिबान नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा द्वारा अनैतिकता को रोकने के लिए इंटरनेट सेवा पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी करने के बाद कई प्रांतों के ‘फाइबर-ऑप्टिक कनेक्शन’ बंद हो गए थे। इंटरनेट के इस्तेमाल, उस तक पहुंच का समर्थन करने वाले संगठन ‘नेटब्लॉक्स’ ने बताया कि इंटरनेट के इस्तेमाल के संबंध में मौजूदा वास्तविक जानकारी के अनुसार अफगानिस्तान में ‘कनेक्टिविटी’ सामान्य स्तर के 14 प्रतिशत तक गिर गई है और देशभर में टेलीकॉम सेवाओं में लगभग पूर्ण व्यवधान देखा जा रहा है।
उद्यमी सोफिया चौधरी का खुलासा, लंदन की ट्रेन में बच्चों के साथ हुआ नस्लीय दुर्व्यवहार
1 Oct, 2025 08:21 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन । उद्यमी सोफिया चौधरी (Sophia Choudhary) ने दावा किया है कि लंदन की एक ट्रेन में कुछ बच्चों ने उनके साथ नस्लीय अपमान (Racial abuse) किया। यह घटना इस महीने की शुरुआत में घटी। 47 वर्षीय सोफिया ने अपनी पीड़ा लिंक्डइन पर एक भावुक पोस्ट और वीडियो के जरिए साझा की, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे उन्हे नस्लवादी गालियां दी गईं। सोफिया ने अपनी पोस्ट में विस्तार से घटना का जिक्र किया है।
सोफिया ने अपनी पोस्ट में लिखा कि मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि ये शब्द दोबारा मेरे कानों में गूंजेंगे। उन्होंने आगे लिखा कि वह अकेली थीं, हेडफोन्स लगाए फोन पर स्क्रॉल कर रही थीं। उनके सामने चार बच्चे बैठे थे। अचानक चीखने-चिल्लाने की आवाज आई। वे बार-बार अपमानजनक शब्द दोहरा रहे थे। हंसी-ठहाके के बीच उनकी बेशर्मी देखकर मैं स्तब्ध रह गई। मैंने आसपास देखा कि कोई और भी तो परेशान है, लेकिन किसी ने कुछ न कहा। मुझे एहसास हो गया कि मैं इस लड़ाई में अकेली हूं।
सोफिया ने तुरंत सबूत जुटाने के लिए वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू कर दी। जब उन्होंने बच्चों को चेतावनी दी कि वह पुलिस में शिकायत करेंगी, तो वे अगले स्टेशन पर उतरकर भाग निकले। सबसे ज्यादा उन्हें सहयात्रियों की उदासीनता पर आश्चर्य हुआ। एक यात्री ने पूछा कि पुलिस क्यों बुला रही हो? जब सोफिया ने कहा कि वे नस्लवादी थे, तो उसने बेपरवाही से कहा- तो क्या? वहीं, एक अन्य यात्री ने टिप्पणी की कि वे तो सिर्फ बच्चे हैं, और वीडियो बनाने पर उन्हें ‘बाल शोषक’ तक कह डाला।
सोफिया ने बताया कि पिछले 25 वर्षों में उन्हें कभी ऐसा अपमान नहीं झेलना पड़ा, जो उन्हें सुंदरलैंड में गुजारे बचपन की याद दिला गया, जहां उन्होंने वर्षों तक नस्लवाद का दंश सहा। उन्होंने लिखा कि ये केवल शब्द नहीं हैं। इनमें दर्द, इतिहास और गहरे आघात समाए हैं। जब हम इन्हें अनदेखा करते हैं, तो हम इन्हें सामान्य बना देते हैं।
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, सोफिया ने हेज एंड हर्लिंगटन स्टेशन पर युवकों के उतरने से ठीक पहले पुलिस को कॉल किया था। ब्रिटिश ट्रांसपोर्ट पुलिस (बीटीपी) ने कहा कि जांच जारी है। बीटीपी के एक अधिकारी ने बताया कि वे हम इस तरह के अपराधों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हैं। ट्रांसपोर्ट फॉर लंदन (टीएफएल) ने भी खेद जताते हुए कहा कि उन्हें गहरा दुख है और वे यह जांच कर रहे हैं कि सोफिया को समय पर मदद क्यों नहीं मिली।
यूएस में भारत के ‘टेररिस्तान’ कहने पर भडक़ा पाकिस्तान, कहा, हमारा नाम बिगाड़ रहे, यह देश का अपमान
30 Sep, 2025 01:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों के बीच एक बार फिर तीखी जुबानी जंग देखने को मिली। इस बार विवाद की वजह बना भारतीय राजनयिक द्वारा पाकिस्तान के लिए इस्तेमाल किया गया शब्द ‘टेररिस्तान’, जिसे लेकर पाकिस्तान ने सख्त आपत्ति जताई और इसे देश का अपमान करार दिया। यह विवाद तब शुरू हुआ, जब भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने 27 सितंबर को दिए गए भाषण में आतंकवाद पर खुलकर बात करते हुए, पड़ोसी देश का नाम लिए बिना उस पर आतंक का केंद्र होने के गंभीर आरोप लगाए।
संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तानी प्रतिनिधि मोहम्मद राशिद ने भारत के बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि भारत अब इस हद तक गिर गया है कि वह हमारे देश के नाम को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहा है। टेररिस्तान कहना न सिर्फ अस्वीकार्य है, बल्कि यह पूरे राष्ट्र का अपमान है। पाकिस्तानी राजनयिक ने भारत पर आरोप लगाते हुए कहा कि भारत खुद आतंकवाद को बढ़ावा देता है और उसकी खुफिया एजेंसियां अन्य देशों में अस्थिरता फैलाने के काम में लगी हुई हैं। उन्होंने दावा किया कि भारत की गतिविधियां क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा बन चुकी हैं।
भारत बोला, पाकिस्तान की पहचान उसके कर्मों से
पाकिस्तान के आरोपों का जवाब देते हुए भारतीय प्रतिनिधि रेन्ताला श्रीनिवास ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिए बिना दो टूक कहा कि पाकिस्तान की पहचान उसके कार्यों से ही होती है। कोई भी देश, चाहे जितना भी झूठ बोले, वह ‘टेररिस्तान’ के अपराधों को छुपा नहीं सकता। श्रीनिवास ने कहा कि भारत का पड़ोसी देश न सिर्फ अपने आसपास के इलाकों के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए खतरा बन चुका है। उन्होंने दोहराया कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोपरि मानता है और आतंकवाद के खिलाफ पूरी ताकत से कार्रवाई करता रहेगा।
अमरीका दोगुना करेगा मिसाइल प्रोडक्शन, चीन से संभावित संघर्ष की आशंका में उत्पादन बढ़ाने के निर्देश
30 Sep, 2025 12:32 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीते दिनों अमरीका के पास हथियारों की कमी की खबर सामने आने के बाद अब एक रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि अमरीका इसे लेकर बेहद अलर्ट मोड में है। रिपोर्ट के अनुसार पेंटागन ने कुछ अहम मिसाइलों के प्रोडक्शन को दोगुना, चौगुना करने के आदेश दे दिए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमरीका चीन के साथ संभावित जंग को देखते हुए यह कदम उठा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन के साथ संभावित भावी संघर्ष को देखते हुए पेंटागन अपने मिसाइल सप्लायर्स से उत्पादन दर को दोगुना, चौगुना करने की बातचीत कर रहा है। मामले से परिचित लोगों का हवाला देते हुए बताया गया है कि सबसे ज्यादा मांग वाले महत्त्वपूर्ण हथियारों के उत्पादन में तेजी लाने के लिए पेंटागन के अधिकारियों ने कई उच्च स्तरीय बैठकें की हैं।
सूत्रों ने यह भी बताया कि इस मिशन की देखरेख अमरीका के उप रक्षा सचिव स्टीव फीनबर्ग खुद कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुआबिक स्टीव फीनबर्ग इस पर चर्चा करने के लिए हर हफ्ते कुछ कंपनी के अधिकारियों को बुलाते हैं। हालांकि रिपोर्ट सामने आने के बाद पेंटागन या अमरीकी अधिकारियों की तरफ से कोई टिप्पणी नहीं की गई है।
हथियारों की कमी पर जता चुके हैं चिंता
बीते जुलाई महीने में अमरीका ने अपने हथियारों के भंडार में कमी को लेकर चिंता जताते हुए यूके्रन को कुछ हथियारों की आपूर्ति रोक दी थी। वाइट हाउस की प्रवक्ता एना केली ने एक बयान में कहा था, कि हमारे देश के सैन्य सहयोग और दुनिया भर के अन्य देशों को दी जाने वाली सहायता की समीक्षा के बाद अमरीका के हितों को सर्वोपरि रखने के लिए यह निर्णय लिया गया है। रिपोट्र्स में यह बात सामने आई थी कि अमेरिका के भंडार में कई जरूरी हथियारों का स्टॉक कम हो गया है।
नेपाल की नई प्रधानमंत्री सुशीला कार्की बोलीें, तय समय पर ही होंगे आम चुनाव
30 Sep, 2025 11:25 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नेपाल की नई प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने सोमवार को कहा कि उनकी अंतरिम सरकार देश में आम चुनाव तय समय पर कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने जनता से शांति बनाए रखने और सरकार का सहयोग करने की अपील की। बता दें कि सुशीला कार्की ने 12 सितंबर को प्रधानमंत्री पद संभाला था। इससे पहले देश में कई दिनों तक राजनीतिक अस्थिरता बनी रही थी। पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को पद से हटाया गया था, क्योंकि उनकी सरकार के खिलाफ युवा वर्ग, खासकर ‘जेन-जी’ समूह ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए थे।
इन प्रदर्शनों में भ्रष्टाचारऔर सोशल मीडिया पर प्रतिबंध को लेकर गुस्सा देखा गया था। नेपाल के सबसे बड़े और प्रमुख हिंदू त्योहार बड़ा दशैं (विजयादशमी) के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए प्रधानमंत्री कार्की ने कहा कि उनकी सरकार समय पर चुनाव कराने के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रही है।
पीओके में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन, सेना की गोलीबारी के बाद बेकाबू हुई भीड़, हजारों लोग सडक़ों पर उतरे
30 Sep, 2025 10:22 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर, यानी पीओके में लोगों का प्रदर्शन हिंसा में बदल गया है। सेना की गोलीबारी के बाद आम लोगों ने हिंसक प्रदर्शन शुरू कर दिया है। हजारों नागरिक सडक़ों पर उतरकर पाकिस्तान सरकार और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। पीओके से आ रही रिपोट्र्स के मुताबिक, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने निहत्थे नागरिकों पर गोलीबारी भी की है, जिससे माहौल काफी बिगड़ गया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें दशकों से राजनीतिक उपेक्षा, मानवाधिकार उल्लंघन और ‘दूसरे दर्जे के नागरिक’ जैसा व्यवहार झेलना पड़ रहा है।
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