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दुबई में धमाके के बाद आसमान में धुआं, सुरक्षा एजेंसियों ने हमला विफल किया
13 Mar, 2026 12:38 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दुबई। दुबई में शुक्रवार को फिर से धमाके हुए और आसमान में धुएं का गुबार देखा गया। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा बलों ने एक हमले को नाकाम किया है। इसका मलबा एक इमारत पर गिरने से उसे नुकसान पहुंचा है। हालांकि, इस घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है। पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव के बीच दुबई में लगातार दूसरे दिन जोरदार धमाकों की आवाज सुनी गई। शुक्रवार को तेज धमाकों की आवाज से शहर की कई इमारतें हिल गईं। इस दौरान मध्य दुबई के एक हिस्से में आसमान में काले धुएं का घना गुबार देखा गया। चश्मदीदों के अनुसार, दो बड़े धमाके हुए जिससे पूरा इलाका दहल गया।
क्या बोला प्रशासन?
दुबई मीडिया ऑफिस ने सोशल मीडिया पर इस घटना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सुरक्षा बलों ने एक हमले को सफलतापूर्वक बीच में ही रोक दिया। इस कार्रवाई के दौरान हमले का मलबा एक इमारत के बाहरी हिस्से पर गिरा। अधिकारियों ने इसे एक मामूली घटना करार दिया है। अच्छी बात यह है कि इस हादसे में किसी की जान नहीं गई और कोई घायल भी नहीं हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, धमाकों के तुरंत बाद दुबई की मुख्य सड़क शेख जायद रोड पर सायरन की आवाजें गूंजने लगीं। पुलिस ने सुरक्षा के लिहाज से पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी है। यह घटना दुबई इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटर (DIFC) के पास हुई। धमाके और मलबे की वजह से इमारत को काफी नुकसान पहुंचा है।
लगातार दूसरे दिन हुआ हमला
दुबई में लगातार दूसरे दिन ऐसी घटना हुई है। इससे पहले गुरुवार को भी अल बदा इलाके में ड्रोन से जुड़ी एक घटना सामने आई थी। तब भी शहर के बीचों-बीच धमाकों की आवाज सुनी गई थी। 28 फरवरी को पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से खाड़ी क्षेत्र में तनाव बहुत बढ़ गया है। ईरान के हमलों की वजह से इस इलाके में अब तक 11 आम नागरिकों की मौत हो चुकी है। फिलहाल दुबई प्रशासन स्थिति पर नजर रखे हुए है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
प्राचीन एलर्स पेड़ के आसपास की मिट्टी में पाई जाती है सैकड़ों फंगस प्रजातियां
13 Mar, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेलबर्न। चिली के टेम्परेट रेनफॉरेस्ट में खड़े विशाल एलर्स पेड़ों का महत्व केवल उनके ऊपर दिखाई देने वाले हिस्सों तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीन के नीचे एक विशाल जैविक नेटवर्क को सहारा देते हैं। सैकडों साल पुराने एलर्स के ये पेड़ हजारों सालों से तूफान, आग और बदलते मौसम का सामना करते आए हैं। हाल ही में वैज्ञानिकों ने पाया है कि इनके आसपास की मिट्टी में सैकड़ों फंगस प्रजातियां पाई जाती हैं, जो जंगल के लिए बेहद जरूरी काम करती हैं। ये फंगस पौधों तक पानी और पोषक तत्व पहुंचाने, मिट्टी में कार्बन स्टोर करने और पूरे जंगल को पर्यावरणीय तनाव से बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
रिसर्च के अनुसार अगर एक हजार साल पुराने पेड़ को काट दिया जाए, तो केवल एक पेड़ नहीं खोता, बल्कि हजारों साल में विकसित हुआ पूरा अंडरग्राउंड इकोसिस्टम भी नष्ट हो जाता है। मेलबर्न यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता केमिली ट्रुओंग बताती हैं कि हर पेड़ समान नहीं होता। बड़े और प्राचीन पेड़ की मिट्टी में छोटी पौधों की तुलना में दोगुनी फंगल विविधता पाई जाती है। जब एक विशाल पेड़ गायब होता है, तो उसके साथ सदियों पुराना वह नेटवर्क भी समाप्त हो जाता है, जो मिट्टी की उपजाऊ शक्ति और जंगल की मजबूती बनाए रखता है। एसपीयूएन की एड्रियाना कोरालेस के अनुसार यह विविधता जंगल की ‘रेजिलिएंस’ या मजबूती को दर्शाती है, जो प्राकृतिक आपदाओं से उबरने में मदद करती है। यह खोज 2022 में चिली के एलर्स कोस्टेरो नेशनल पार्क में शुरू हुई।
शोधकर्ताओं ने 31 अलग-अलग एलर्स पेड़ों के नीचे मिट्टी के सैंपल लिए, जिनमें छोटे पेड़ और ‘एलर्स अबुएलो’ नामक विशाल पेड़ शामिल थे। इस पेड़ का तना 14.8 फीट से अधिक चौड़ा है। वैज्ञानिकों ने डीएनए तकनीक का इस्तेमाल करके मिट्टी में छिपी फंगल प्रजातियों की पहचान की। विश्लेषण में पता चला कि सबसे बड़े पेड़ के पास 300 से अधिक ऐसी फंगल प्रजातियां थीं, जो किसी और पेड़ के पास नहीं मिलीं। इससे यह स्पष्ट होता है कि पुराने पेड़ मिट्टी की जैव विविधता के लिए छाता की तरह काम करते हैं। एलर्स प्रजाति दुनिया की दूसरी सबसे लंबी उम्र वाली पेड़ों में से एक है। सदियों से इनका शिकार मजबूत लकड़ी के लिए किया जाता रहा है। खेती के लिए जंगलों को साफ करना और सड़क निर्माण जैसी गतिविधियां इन पर लगातार दबाव डाल रही हैं। प्रस्तावित सड़कों और बाहरी प्रजातियों के खतरे से जंगल और इसके भूमिगत नेटवर्क को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। नई रिसर्च चेतावनी देती है कि खतरा सिर्फ पेड़ों के नुकसान का नहीं है, बल्कि उस छिपे हुए जैविक खजाने को खोने का भी है, जो जंगल को दोबारा खड़ा करने की ताकत रखता है।
अध्ययन यह बताता है कि हजारों साल पुराने जंगल कभी भी नए लगाए गए पेड़ों से पूरी तरह रिप्लेस नहीं किए जा सकते। हर बड़ा और प्राचीन पेड़ सैकड़ों अनोखी फंगल प्रजातियों का आश्रय है, और इसे बचाना पूरे भूमिगत इकोसिस्टम को संरक्षित करने के बराबर है। इस खोज ने साबित कर दिया है कि पुराने पेड़ केवल वनस्पति नहीं बल्कि पूरे जंगल की नींव हैं। उनका संरक्षण न केवल पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी है, बल्कि प्राकृतिक आपदाओं से बचाने और जंगल की मजबूती बनाए रखने के लिए भी अनिवार्य है।
यूएनएससी का बड़ा कदम: ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा, प्रस्ताव पारित
13 Mar, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जेनेवा। मिडिल ईस्ट में जारी भीषण संघर्ष और अस्थिरता के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया है। बहरीन की अगुवाई में लाए गए इस प्रस्ताव में खाड़ी देशों पर ईरान द्वारा किए गए हालिया मिसाइल और ड्रोन हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की गई है। गौरतलब है कि खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी संपत्ति और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए ये हमले, ईरान पर 28 फरवरी को शुरू हुए उन हमलों के जवाब में थे, जिनमें कथित तौर पर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की मृत्यु हो गई थी।
सुरक्षा परिषद में इस प्रस्ताव के पक्ष में कुल 13 मत पड़े, जबकि दो सदस्य देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। विशेष बात यह रही कि किसी भी सदस्य देश ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट नहीं किया। भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि वह खुद भी इन हमलों के खतरों से अछूता नहीं है। वहीं, रूस और चीन इस मतदान प्रक्रिया से अनुपस्थित रहे।
पारित किए गए प्रस्ताव में ईरान द्वारा बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन के विरुद्ध की गई सैन्य कार्रवाइयों को अंतरराष्ट्रीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन बताया गया है। सुरक्षा परिषद ने जोर देकर कहा कि ये हमले वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा हैं। प्रस्ताव में मांग की गई है कि ईरान इन देशों के खिलाफ अपनी सभी शत्रुतापूर्ण गतिविधियों को तुरंत रोके। साथ ही, संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत देशों को प्राप्त सामूहिक आत्मरक्षा के अधिकार की पुष्टि की गई है। परिषद ने होर्मुज जलडमरूमध्य और उसके आसपास के क्षेत्रों में नागरिक बुनियादी ढांचे, वाणिज्यिक जहाजों और आम लोगों को जानबूझकर निशाना बनाने की तीखी आलोचना की है। प्रस्ताव में चेतावनी दी गई है कि इस तरह के हमलों का वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर विनाशकारी प्रभाव पड़ रहा है। इसके अलावा, सुरक्षा परिषद ने जीसीसी देशों और अन्य क्षेत्रीय मध्यस्थों के उन प्रयासों की सराहना की, जिनका उद्देश्य बातचीत के जरिए विवादों का शांतिपूर्ण समाधान निकालना है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, जो दुनिया में शांति बनाए रखने वाली सबसे शक्तिशाली संस्था है, ने इस कदम के माध्यम से मिडिल ईस्ट में स्थिरता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। 15 सदस्यीय इस परिषद में अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे स्थायी सदस्यों के साथ-साथ पाकिस्तान, दक्षिण कोरिया और अन्य अस्थायी सदस्य शामिल हैं। इस प्रस्ताव का पारित होना ईरान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कूटनीतिक कदम माना जा रहा है।
ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों में रूस के ‘फिंगरप्रिंट’, जांच में मिले संकेत
13 Mar, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच पता चला है कि ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों के निर्माण में रूस की तकनीकी मदद शामिल हो सकती है। वहीं दूसरी ओर युद्ध को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने फिर दावा किया है। भारत ने भी अपने तेल आयात के स्रोतों में बदलाव किया है और रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी है। ईरान की तरफ से दागी गई मिसाइलों के मलबे की जांच में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक परीक्षण से पता चला है कि इन मिसाइलों के निर्माण में रूसी विशेषज्ञों की मदद की आशंका जताई जा रही है। जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि इन मिसाइलों की तकनीक और निर्माण प्रक्रिया में रूस और सोवियत दौर के विशेषज्ञों का योगदान रहा है। इसका मतलब है कि ईरान ने इन मिसाइलों को पूरी तरह अपने दम पर तैयार नहीं किया है। अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद रूस खुलकर ईरान के समर्थन में खड़ा नजर आ रहा है।
इसी बीच डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया है कि ईरान के साथ चल रहा युद्ध जल्द खत्म हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह युद्ध तब खत्म हो जाएगा जब वह चाहेंगे। उनके मुताबिक अब ईरान में निशाना बनाने के लिए करीब कुछ भी बाकी नहीं बचा है। हालांकि ट्रंप के इस बयान के बावजूद क्षेत्र में हमले और जवाबी कार्रवाई अभी भी जारी है। इस बीच इजराइल ने कहा है कि अमेरिका के साथ मिलकर चलाया जा रहा सैन्य अभियान जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई तब तक चलेगी जब तक सभी लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते। उनके मुताबिक इस अभियान की कोई समय सीमा तय नहीं है और जरूरत पड़ने पर इसे लंबे समय तक जारी रखा जाएगा।
पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य संघर्ष का असर ऊर्जा बाजार पर भी दिख रहा है। भारत ने मार्च महीने में रूस से कच्चे तेल की खरीद में करीब 50 फीसदी की बढ़ोतरी की है। जहाज निगरानी से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक इस महीने भारत ने करीब पंद्रह लाख बैरल रूसी तेल खरीदा है। फरवरी में यह मात्रा करीब दस लाख चालीस हजार बैरल प्रतिदिन थी। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयात करने वाला देश है और अपनी कुल तेल जरूरत का करीब 88 फीसदी विदेशों से खरीदता है।
हमने कुछ ही घंटों में ईरान से युद्ध जीत लिया, काम पूरा करके ही पीछे हटेंगे
13 Mar, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका ने ईरान के साथ युद्ध प्रभावी तरीके से जीत लिया है। उन्होंने कहा कि शुरुआती हमलों के कुछ ही घंटों के अंदर नतीजा तय हो गया था, हालांकि मिशन पूरा करने के लिए अमेरिकी सेना इस ऑपरेशन को जारी रखेगी। ट्रंप ने एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि अमेरिकी सेना ने पहले ही जीत हासिल कर ली है लेकिन वॉशिंगटन समय से पहले पीछे नहीं हटेगा।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने समर्थकों से कहा कि आप जल्दी यह कहना पसंद नहीं करते कि आप जीत गए, लेकिन हम जीत गए। पहले ही घंटे में सब खत्म हो गया था। इस दौरान ट्रंप ने स्टेज पर डांस भी किया। ट्रंप ने अभियान के दौरान ईरान की नौसैनिक ताकत को भारी नुकसान पहुंचाने का श्रेय अमेरिकी सेना को देते हुए कहा कि हमने ईरान के 58 नौसैनिक जहाजों को नष्ट कर दिया है।
बता दें ट्रंप ने इस सैन्य अभियान ऑपरेशन फ्यूरी का भी जिक्र करते हुए मजाकिया अंदाज में भीड़ से पूछा कि क्या यह शानदार नाम है? यह तभी अच्छा लगता है जब आप जीतते हैं और हम जीत चुके हैं। उन्होंने बताया कि शुरुआत में ऑपरेशन के लिए कई नाम सुझाए गए थे, लेकिन उन्हें कोई पसंद नहीं आया। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने मुझे करीब 20 नाम दिए, मैं तो ऊंघने लगा था। मुझे कोई पसंद नहीं आया फिर मैंने इपिक फ्यूरी देखा और कहा कि मुझे यह नाम पसंद है।
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष पूरे पश्चिम एशिया में चर्चा का विषय बना हुआ है। करीब दो हफ्ते पहले शुरू हुए इस युद्ध में ईरान के सैन्य ढांचे और परमाणु कार्यक्रम को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर हमले किए गए थे।
ट्रंप ने कहा कि हम जल्दी नहीं जाना चाहते। हमें काम पूरा करना होगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि अभियान से ईरान की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है और एक समय ऐसा भी आया जब निशाना बनाने के लिए लगभग कुछ भी बाकी नहीं बचा था। वहीं, ट्रंप ने कहा कि युद्ध के कारण ऊर्जा कीमतों पर पड़े दबाव को कम करने के लिए सरकार स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व का इस्तेमाल कर सकती है। उन्होंने कहा कि हम इसे थोड़ा कम करेंगे, इससे कीमतें नीचे आएंगी। मैंने इसे पहले भी भरवाया था और फिर भरवा दूंगा। ट्रंप ने माना कि युद्ध के कारण वैश्विक बाजारों में अस्थिरता आई है, लेकिन उनका मानना है कि जल्द ही हालात स्थिर हो जाएंगे।
हमारा शिया-सुन्नी जैसा कोई मजहब नहीं, हमारा सिर्फ एक ही मजहब है इस्लाम
13 Mar, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अंकारा। अमेरिका-इजराइल और ईरान में युद्ध के चलते मिडिल ईस्ट में फैले तनाव के बीच तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन अपने इस्लामी एजेंडा को आगे बढ़ाने में जुट गए हैं। मध्य पूर्व में जंग की आंच के बीच एर्दोगन ने दुनिया के मुसलमानों से एकजुट होने की अपील की है। एर्दोगन ने अपनी एके पार्टी की एक बैठक में युद्ध रोकने की अपील की और कहा कि हम हथियारों को शांत करने की कोशिश जारी रखे हुए हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक तुर्की के राष्ट्रगान की 105वीं वर्षगांठ के मौके पर एर्दोगन ने ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों को याद किया और इसे बड़ी तबाही बताया। तुर्की के राष्ट्रपति की टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर हमले जारी रखे हुए हैं। इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई समेत कई शीर्ष रैंकिंग ईरानी अधिकारियों की हत्या कर दी गई है। ईरान के इंफ्रास्ट्रक्चर को बहुत नुकसान हुआ है। ईरानी लोग हर दिन जिंदा रहने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक एर्दोगन ने इस्लामिक एकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हमने अपने क्षेत्र के लोगों जिसमें ईरानी भाई भी शामिल हैं, शिया, सुन्नी, तुर्क और कुर्द के तौर पर नहीं देखा और हम कभी देखेंगे भी नहीं। एर्दोगन ने कहा कि हम हर उस व्यक्ति के साथ खड़े हैं, जिसके साथ गलत हुआ है या जो पीड़ित है। हम नस्ल, संप्रदाय, धर्म, भाषा या मूल के आधार पर भेदभाव को नकारते हैं। एर्दोगन ने सभी मुसलमानों से एक होने की अपील की और कहा कि हमारा सुन्नीवाद या शियावाद जैसा कोई मजहब नहीं है। हमारा सिर्फ एक ही मजहब है, और वह है इस्लाम। हजरत अली और हजरत उमर हमारे हैं। हमारी मां हजरत आयशा और मां हजरत जैनब भी हमारी हैं। एर्दोगन ने ईरान पर हमले के वैश्विक असर के बारे में चेतावनी दी। तेल की बढ़ती कीमतों पर उन्होंने कहा कि सिर्फ लड़ाई में शामिल देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया इसकी कीमत चुकाने की तैयारी कर रही है।
IDFC फर्स्ट बैंक केस में जांच तेज, कई खातों के जरिए ट्रांसफर हुई रकम
12 Mar, 2026 05:53 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़ | हरियाणा में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े बड़े घोटाले की जांच तेजी से चल रही है। गुरुवार को एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की डीजीपी चारू बाली और एसपी गंगाराम पुनिया ने प्रेस वार्ता में महत्वपूर्ण अपडेट दिए। जांच में पता चला है कि फर्जी कंपनियां बनाकर सरकारी विभागों के खातों से पैसों का हेरफेर किया गया था।
12 बैंक खातों से ट्रांसफर हुए थे पैसे
कुल 12 ऐसे बैंक अकाउंट्स का खुलासा हुआ है, जिनमें पैसे ट्रांसफर किए गए थे और इनसे जुड़े लोगों की भी पहचान हो चुकी है। अब तक 11 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं, जिनमें से 10 ज्यूडिशियल कस्टडी में हैं। इनमें 6 बैंक कर्मचारी, 4 प्राइवेट व्यक्ति और एक पब्लिक सर्वेंट शामिल हैं।
100 बैंक खातों को फ्रीज करने की मांग
एसीबी ने आगे की जांच के लिए 100 बैंक अकाउंट्स को फ्रीज करने की मांग की है। सभी संबंधित विभागों से रिकॉर्ड खोले जा चुके हैं और बैंक की टीम तथा विभागीय अधिकारी लगातार सहयोग कर रहे हैं। एसीबी हर अनाधिकृत ट्रांजेक्शन को ट्रेस कर रही है और यह जांच कर रही है कि घोटाले में किस-किस स्तर तक इन्वॉल्वमेंट है। जिन सरकारी पैसों की प्राप्ति पहले नहीं हो रही थी, वे अब मिल चुके हैं। एकाउंटिंग और बैंकिंग विशेषज्ञों की मदद से सभी अनाधिकृत लेन-देन की विस्तृत डिटेल्स निकाली जा रही हैं। यह घोटाला मुख्य रूप से हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों के फंड्स से जुड़ा है और जांच आगे बढ़ने पर और खुलासे होने की संभावना है।
क्रिकेट में फिर फिक्सिंग का साया, ICC ने दो और लोगों पर कसा शिकंजा
12 Mar, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने भ्रष्टाचार विरोधी नियमों के उल्लंघन के मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए वेस्टइंडीज के फास्ट बॉलिंग ऑलराउंडर जेवोन सियरल्स को अस्थायी रूप से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है। ICC के मुताबिक सर्ल्स पर एंटी-करप्शन कोड का उल्लंघन करने के आरोप हैं। यह मामला 2023-24 में बारबाडोस में खेले गए Bim10 लीग से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि इस टूर्नामेंट के दौरान मैच के नतीजे और खेल की स्थिति को प्रभावित करने की साजिश रची गई थी। इस मामले में सिर्फ सर्ल्स ही नहीं, बल्कि टाइटन्स टीम के मालिक चितरंजन राठौड़ और टीम अधिकारी ट्रेवॉन ग्रिफिथ भी जांच के दायरे में आए हैं। ICC औरक्रिकेट वेस्टइंडीज (CWI) ने तीनों के खिलाफ एंटी-करप्शन कोड के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें अस्थायी रूप से सस्पेंड कर दिया है।
IPL में खेल चुके हैं सर्ल्स
जेवोन सर्ल्स ने इंडियन प्रीमियर लीग में कोलकाता नाइट राइडर्स की ओर से खेला था। IPL 2018 में उन्होंने कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए 4 मैच खेले और 2 विकेट लिए। सर्ल्स वेस्टइंडीज की अंडर-19 टीम के लिए भी खेल चुके हैं, लेकिन उन्हें सीनियर इंटरनेशनल टीम के लिए खेलने का मौका नहीं मिला।
तीनों पर लगे कई गंभीर आरोप
ICC के बयान के अनुसार तीनों पर एंटी-करप्शन कोड की कई धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। चितरंजन राठौड़ पर क्रिकेट वेस्टइंडीज के एंटी-करप्शन कोड के तहत तीन आरोप लगाए गए हैं। जेवोन सर्ल्स पर चार आरोप दर्ज किए गए हैं। ट्रेवोन ग्रिफिथ पर चार आरोप CWI के कोड और एक आरोप ICC एंटी-करप्शन कोड के तहत लगाया गया है। इन आरोपों में मैच फिक्सिंग की साजिश रचना, खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ को भ्रष्ट गतिविधियों में शामिल करने के लिए उकसाना और जांच में सहयोग न करना शामिल है। ICC के अनुसार तीनों ने Bim10 लीग 2023-24 के मैचों के नतीजों या खेल के अन्य पहलुओं को गलत तरीके से प्रभावित करने की कोशिश की। इसके अलावा कुछ संदिग्ध प्रस्तावों या संपर्कों की जानकारी अधिकारियों को नहीं देना भी एंटी-करप्शन नियमों का उल्लंघन माना गया है।
14 दिन में देना होगा जवाब
ICC ने तीनों आरोपियों को 14 दिनों के भीतर जवाब देने का मौका दिया है। इस दौरान एंटी-करप्शन यूनिट मामले की जांच जारी रखेगी। यह मामला पहले से चल रही एक बड़ी जांच का हिस्सा बताया जा रहा है। इससे पहले अमेरिका के खिलाड़ी आरोन जोन्स पर भी क्रिकेट वेस्टइंडीज और ICC के एंटी-करप्शन नियमों के उल्लंघन के पांच मामलों में आरोप लगाए जा चुके हैं।
टैरिफ टकराव से दुनिया के दो बड़े बाजारों का व्यापार कम
12 Mar, 2026 02:18 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिका और चीन का द्विपक्षीय व्यापार कम होकर ग्लोबल ट्रेड का केवल दो प्रतिशत रह गया है, जो कि 2024 में 2.7 प्रतिशत था। यह जानकारी गुरुवार को जारी हुई एक रिपोर्ट में दी गई। लेटेस्ट डीएचएल ग्लोबल कनेक्टेडनेस रिपोर्ट 2026 में कहा गया कि समग्र वैश्वीकरण के मजबूत बने रहने के बावजूद दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच अलगाव जारी है। डीएचएल द्वारा न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के स्टर्न स्कूल ऑफ बिजनेस के साथ साझेदारी में जारी किए गए अध्ययन से पता चला है कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, टैरिफ और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीतियों में अनिश्चितता के बावजूद वैश्विक आर्थिक संबंध मजबूत बने हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और चीन के बीच व्यापार 2015 में ग्लोबल ट्रेड का 3.6 प्रतिशत के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि, हाल के वर्षों में यह हिस्सा लगातार घटता रहा है, जो 2024 में गिरकर 2.7 प्रतिशत और 2025 की पहली तीन तिमाहियों में लगभग 2 प्रतिशत तक पहुंच गया। दोनों देशों के बीच क्रॉस-बॉर्डर बिजनेस इन्वेस्टमेंट तो और भी कम है, जो वैश्विक निवेश प्रवाह के 1 प्रतिशत से भी कम है। वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच संबंधों में आई कमजोरी के बावजूद, रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्वीकरण कुल मिलाकर स्थिर बना हुआ है। वैश्विक स्तर पर कनेक्टेडनेस 2025 में लगभग 25 प्रतिशत रही, जो 2022 में देखे गए रिकॉर्ड स्तर के बराबर है। यह सूचकांक 0 से 100 के पैमाने पर व्यापार, पूंजी, सूचना और लोगों के अंतरराष्ट्रीय प्रवाह को मापता है।
डीएचएल एक्सप्रेस के सीईओ जॉन पियर्सन ने कहा कि ये निष्कर्ष दर्शाते हैं कि देश और कंपनियां अनिश्चित समय में भी अंतरराष्ट्रीय संबंध बनाए रखने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि गरीबी और जलवायु परिवर्तन जैसी प्रमुख वैश्विक चुनौतियों के लिए सहयोग और वैश्विक सोच की आवश्यकता है। रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि कोविड-19 महामारी के दौरान हुए असामान्य उतार-चढ़ाव को छोड़कर, 2025 में वैश्विक व्यापार में वृद्धि 2017 के बाद से किसी भी वर्ष की तुलना में अधिक तीव्र रही। इस वृद्धि का अधिकांश हिस्सा अमेरिका में टैरिफ वृद्धि से पहले बढ़ी हुई शिपमेंट और एआई से संबंधित उत्पादों की बढ़ती मांग के कारण हुआ। विश्व व्यापार संगठन के अनुसार, 2025 की पहली तीन तिमाहियों के दौरान वैश्विक वस्तु व्यापार वृद्धि में एआई से संबंधित वस्तुओं का योगदान लगभग 42 प्रतिशत था। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वैश्विक व्यापार में विस्तार जारी रहेगा, हालांकि गति मध्यम रहेगी। वस्तु व्यापार में 2029 तक औसतन 2.6 प्रतिशत की वार्षिक दर से वृद्धि होने का अनुमान है, जो पिछले दशक की वृद्धि के लगभग अनुरूप है।
क्रॉस वोटिंग की आशंका से कांग्रेस में बढ़ी चिंता, विधायकों को सुरक्षित स्थान पर भेजने की योजना
12 Mar, 2026 01:50 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। हरियाणा राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस भले ही एकजुटता का दावा कर रही हो लेकिन पार्टी के भीतर क्रॉस वोटिंग की आशंका को लेकर बेचैनी बढ़ गई है। ऐसे हालात में कांग्रेस अपने विधायकों को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें दूसरे प्रदेश में शिफ्ट करने की तैयारी कर रही है।राजनीतिक जानकारों के अनुसार राज्यसभा चुनाव कई बार ऐसे मोड़ ले लेते हैं जहां संख्या का गणित अचानक राजनीतिक मनोविज्ञान में बदल जाता है। इसी कारण कांग्रेस नेतृत्व को अपने विधायकों की निष्ठा को लेकर चिंता सता रही है। कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती सत्ता और विपक्ष के बीच का व्यावहारिक समीकरण भी है।प्रदेश में कांग्रेस विधायक विपक्ष में रहते हुए अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं को हल कराने के लिए प्रशासन और सरकार के साथ तालमेल बनाए रखते हैं। ऐसे में पार्टी को आशंका है कि कहीं भाजपा इस स्थिति का राजनीतिक लाभ न उठा ले। इसके अलावा वर्ष 2029 से पहले प्रस्तावित परिसीमन भी विधायकों की राजनीतिक रणनीति को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में हर विधायक अपने भविष्य को ध्यान में रखकर निर्णय लेने की स्थिति में रहता है।कांग्रेस की चिंता का एक कारण राज्यसभा उम्मीदवार कर्मवीर सिंह बौद्ध को लेकर पार्टी के भीतर बनी असहजता भी है। कई विधायकों के लिए यह नाम नया बताया जा रहा है। पार्टी के भीतर यह सवाल भी उठ रहा है कि जिस व्यक्ति को अधिकतर नेता ठीक से नहीं जानते, उसे अचानक राज्यसभा उम्मीदवार क्यों बनाया गया। हालांकि पार्टी नेतृत्व का कहना है कि सभी विधायक कर्मवीर सिंह बौद्ध को जिताने के लिए एकजुट हैं लेकिन कांग्रेस को 2016 और 2022 के राज्यसभा चुनावों का अनुभव भी याद है। उन दोनों चुनावों में पर्याप्त संख्या होने के बावजूद कांग्रेस के समीकरण बिगड़ गए थे और भाजपा ने हारी हुई बाजी अपने पक्ष में कर ली थी।
बयानबाजी के बाद कांग्रेस में कार्रवाई, सुचित्रा देवी को पार्टी से निकाला
12 Mar, 2026 01:33 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़ । हरियाणा प्रदेश महिला कांग्रेस की महासचिव सुचित्रा देवी को प्रदेश अध्यक्ष पर्ल चौधरी ने पार्टी से निकाल दिया है। सुचित्रा देवी ने कांग्रेस हाईकमान व गांधी परिवार पर बावल विधानसभा क्षेत्र की टिकट के नाम पर 7 करोड़ रुपये ऐंठने का आरोप लगाया था।हरियाणा महिला कांग्रेस की महासचिव सुचित्रा देवी के पति गौरव कुमार ने आरोप लगाया था कि उनकी पत्नी को विधानसभा चुनाव का टिकट दिलाने के नाम पर कांग्रेस के कुछ नेताओं ने उनसे पैसे लिए थे। गौरव कुमार का दावा था कि इस मामले से जुड़े चैट उनके पास मौजूद हैं। उनका कहना है कि उन चैट में संबंधित नेताओं ने खुद पैसे लेने की बात स्वीकार की है। हालांकि कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। गौरव कुमार ने कहा कि वह राहुल गांधी को यह दिखाना चाहते हैं कि पार्टी के भीतर कुछ वरिष्ठ नेता क्या कर रहे हैं? या तो उनके साथ गलत हो रहा है या फिर यह सब शीर्ष नेतृत्व की जानकारी में हो रहा है।सुचित्रा देवी ने बताया कि उन्होंने करीब 12 दिन पहले ही पार्टी से अपना इस्तीफा दे दिया था लेकिन अभी तक उसे स्वीकार नहीं किया गया है। वह दलित समुदाय से आती हैं और एक शहीद की बेटी हैं। उनके परिवार का कांग्रेस पार्टी से करीब 56 साल पुराना जुड़ाव रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके परिवार ने पार्टी के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए लेकिन बदले में केवल झूठे वादे ही मिले। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से इस मामले की कोई जानकारी नहीं है। यदि संबंधित महिला कांग्रेस से जुड़ी रही होंगी तो संभव है कि उन्होंने अपना इस्तीफा महिला कांग्रेस अध्यक्ष को भेजा होगा। राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि कांग्रेस में टिकट के बदले पैसे लेने जैसी कोई परंपरा या संस्कृति कभी नहीं रही है। उनके अनुसार संभव है कि किसी अन्य कारण से निराश होकर इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हों। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अब तक उनके पास इस मामले में कोई आधिकारिक शिकायत नहीं आई है।
कई अहम विषयों पर चर्चा, सीएम ने सरसंघचालक से की मुलाकात
12 Mar, 2026 01:23 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पानीपत। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक से एक दिन पहले सीएम नायब सिंह सैनी वीरवार को पट्टीकल्याणा स्थित माधव सृष्टि पहुंचे। उन्होंने सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत से भेंट। उन्होंने प्रदेश में राजनीति व सामाजिक विषयों पर चर्चा की। उनकी सरसंघचालक के साथ दो बजे तक बैठक चलेंगी।सीएम नायब सिंह सैनी वीरवार को हेलीकॉप्टर से पाइट कॉलेज पहुंचे। भाजपा जिलाध्यक्ष दुष्यंत भट्ट और प्रशासनिक अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। वे यहां से सीधे माधव सृष्टि केंद्र पहुंचे। यहां संघ की 13 से 15 मार्च को अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक होगी। इसकी तैयारियों काे पूरा कर लिया गया है। सीएम नायब सिंह सैनी ने सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत से भेंट की।माधव सृष्टि में तीन दिवसीय वार्षिक बैठक 1487 प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसमें संघ के शताब्दी वर्ष (2025) के कार्यों की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद आगामी वर्ष की योजना बनाने के साथ नए प्रस्ताव लाए जाएंगे।
दो बजे तक चलेगी बैठक
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के साथ भेंट करने के उपरांत दिल्ली के लिए रवाना होंगे। वे 11 बजे माधव सृष्टि केंद्र पहुंचे हैं। उनके दो बजे वापस जाने का कार्यक्रम है। इस दौरान सीएम और सरसंघचालक के साथ बैठक चल रही हैं। सीएम ने इससे पहले प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों से बैठक के दौरान व्यवस्थाओं पर बारीकी से चर्चा की। इस मौके पर मेयर कोमल सैनी, सांसद प्रतिनिधि गजेंद्र सलूजा, जिलाध्यक्ष दुष्यंत भट्ट मौजूद रहे।
तीसरे विश्व युद्ध में हो सकता है 12 हजार न्यूक्लियर मिसाइलों का उपयोग
12 Mar, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन । तीसरे विश्व युद्ध के दौरान यदि दुनिया भर की करीब 12,000 न्यूक्लियर मिसाइलों का उपयोग होता है, तो अनुमानित 5 अरब लोग मारे जाएंगे और पूरी पृथ्वी ‘न्यूक्लियर विंटर’ यानी परमाणु शीत की चपेट में आ जाएगी। इस स्थिति में दस साल तक दुनिया के बड़े हिस्सों में बर्फबारी और अत्यधिक ठंड बनी रहेगी।
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की दहलीज पर खड़ा कर दिया है। विशेषज्ञों और हालिया वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, इस भीषण परिदृश्य में केवल दो देश – ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड – ही जीवित रहने में सक्षम हो सकते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि इन देशों की भौगोलिक स्थिति उन्हें परमाणु शीत की मार के बावजूद कृषि और जीवन बनाए रखने में मदद करेगी।
एनी जैकबसन, जो ‘न्यूक्लियर वॉर: ए सिनेरियो’ की लेखिका और आर्मगेडन विशेषज्ञ हैं, ने चेतावनी दी कि परमाणु विस्फोटों से निकलने वाली आग 100 मिलियन डिग्री सेल्सियस तक गर्म हो सकती है। उन्होंने कहा कि शुरुआती धमाकों में करोड़ों लोग मारे जाएंगे, लेकिन असली तबाही उसके बाद शुरू होगी। कृषि प्रधान क्षेत्रों जैसे आयोवा और यूक्रेन में दस साल तक बर्फ और ठंड की वजह से खेती पूरी तरह विफल हो जाएगी, जिससे लोग भूख और हालात की मार से मरेंगे। जैकबसन ने कहा कि ओजोन परत को नुकसान और रेडिएशन की मौजूदगी स्थिति को और भयावह बना देगी।
ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में लोग जीवित तो रहेंगे, लेकिन उन्हें अंधेरे में रहना होगा, भोजन के लिए संघर्ष करना होगा और रेडिएशन से बचने के लिए भूमिगत आश्रय लेना होगा। हालांकि इन देशों की समुद्र से दूरी और भौगोलिक स्थिति उन्हें तापमान में कटौती और कुछ हद तक सुरक्षित रहने में मदद करेगी। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष लगातार बढ़ रहा है। इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है, और दोनों पक्षों से हमले और पलटवार हो रहे हैं। रूस और यूक्रेन के बीच पिछले चार साल से युद्ध जारी है, जबकि अफगानिस्तान में तालिबान ने परमाणु संपन्न पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध की धमकी दी है। इसके अलावा चीन और ताइवान के बीच भी तनाव बढ़ा हुआ है।
जंग का अखाड़ा, होर्मुज मार्ग में बारुद बिछा रहे ईरान की 16 जहाजों को अमेरिका ने कर दिया तबाह
12 Mar, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को युद्ध के मैदान में तब्दील कर दिया है। बुधवार को अमेरिकी सेना की ओर से जारी एक बड़े बयान में दावा किया गया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरानी नौसेना के 16 जहाजों को नष्ट कर दिया गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, ये जहाज व्यापारिक मार्ग में बारूदी सुरंगे (माइन्स) बिछाने की गतिविधियों में लिप्त थे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सैन्य कार्रवाई की पुष्टि करते हुए चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने समुद्री रास्ते में बाधाएं उत्पन्न करना बंद नहीं किया, तो उसे और भी गंभीर नतीजे भुगतने होंगे। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि अमेरिका अपनी उसी तकनीक का उपयोग कर रहा है, जिससे मादक पदार्थों के तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है।
इस सैन्य टकराव का सबसे विनाशकारी प्रभाव वैश्विक व्यापार पर पड़ा है। 10 मार्च तक होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग से वाणिज्यिक यातायात लगभग पूरी तरह ठप हो गया है। हालांकि आधिकारिक तौर पर इस मार्ग को बंद करने की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन युद्ध के अत्यधिक जोखिम को देखते हुए बीमा कंपनियों ने जहाजों का बीमा करने से मना कर दिया है। इसके परिणामस्वरूप, मार्सक और हैपग-लॉयड जैसी दुनिया की दिग्गज शिपिंग कंपनियों ने अपने जहाजों का मार्ग बदल दिया है। अब व्यापारिक जहाजों को केप ऑफ गुड होप के लंबे रास्ते से भेजा जा रहा है, जिससे माल ढुलाई का समय और लागत दोनों बढ़ गए हैं। संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक आठ नाविकों की जान जा चुकी है और कई तेल टैंकर क्षतिग्रस्त हुए हैं।
तेल की आपूर्ति बाधित होने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त अस्थिरता देखी जा रही है। 9 मार्च को कच्चे तेल की कीमत उछलकर 120 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, जो वर्तमान में 88-90 डॉलर के आसपास बनी हुई है। ज्ञात हो कि दुनिया के कुल तेल उपभोग का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे मार्ग से होकर गुजरता है। एशिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं, विशेष रूप से भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया की ऊर्जा सुरक्षा पूरी तरह इस मार्ग पर टिकी है। अमेरिकी ऊर्जा प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, यहां से गुजरने वाले कच्चे तेल का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा एशियाई देशों को ही जाता है।
इस संकटपूर्ण स्थिति को देखते हुए भारत ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अपने ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अराघची से टेलीफोन पर वार्ता कर भारत की गहरी चिंताओं से अवगत कराया। अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद दोनों नेताओं के बीच यह तीसरी महत्वपूर्ण बातचीत है। भारत का मुख्य सरोकार ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता और क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना है, क्योंकि इस मार्ग के बंद होने का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था और ईंधन की कीमतों पर पड़ेगा।
भारतीय सहयोग को मजबूत करने के लिए ढाका ने बढ़ाया हाथ कहा- हम रिश्ते सुधारना चाहते हैं
12 Mar, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। बांग्लादेश में राजनीतिक परिवर्तन और तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत के साथ द्विपक्षीय कूटनीतिक और सुरक्षा संबंधों को पटरी पर लाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत मार्च की शुरुआत में बांग्लादेश की शीर्ष रक्षा खुफिया एजेंसी, डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फोर्सेज इंटेलिजेंस (डीजीएफआई) के प्रमुख ने भारत का एक उच्च-स्तरीय दौरा किया। तारिक रहमान सरकार के सत्ता संभालने के बाद किसी भी शीर्ष सैन्य या खुफिया अधिकारी की यह पहली आधिकारिक भारत यात्रा है, जिसे दोनों देशों के बीच भविष्य के सुरक्षा ढांचे के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, बांग्लादेश के नवनियुक्त डीजीएफआई महानिदेशक मेजर-जनरल कैसर राशिद चौधरी ने 1 से 3 मार्च के बीच दिल्ली का दौरा किया। अपनी इस संक्षिप्त लेकिन प्रभावी यात्रा के दौरान उन्होंने भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के प्रमुख पराग जैन और सैन्य खुफिया महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल आर. एस. रमन के साथ गहन चर्चा की। 2 मार्च को आयोजित एक विशेष बैठक के दौरान दोनों देशों के खुफिया प्रमुखों ने सीमा पार से होने वाली संदिग्ध गतिविधियों, खुफिया जानकारी साझा करने और सुरक्षा साझेदारी को और अधिक गहरा करने की रणनीतियों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। भारत लंबे समय से बांग्लादेश की धरती का इस्तेमाल कर होने वाली भारत विरोधी गतिविधियों को लेकर चिंतित रहा है, और अब प्राथमिकता इन चुनौतियों का मिलकर समाधान करना है। बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शामा ओबैद इस्लाम ने इस मामले पर स्पष्ट किया है कि सरकार हादी हत्याकांड में न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि चूंकि भारत और बांग्लादेश के बीच बंदियों के हस्तांतरण की संधि मौजूद है, इसलिए आरोपियों को वापस लाने के लिए सभी कूटनीतिक प्रयास किए जाएंगे। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मेजर-जनरल कैसर राशिद का दिल्ली दौरा और उसके तुरंत बाद वांछित अपराधियों की भारत में गिरफ्तारी यह स्पष्ट संकेत देती है कि नई सरकार भारत के साथ सुरक्षा संबंधों को एक नई और सकारात्मक दिशा देने के लिए तैयार है। आने वाले समय में सीमा सुरक्षा और आतंकवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों पर यह आपसी समन्वय और अधिक प्रभावी साबित हो सकता है।
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