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यूएस के सैन्य विस्फोटक निर्माण संयंत्र में धमाका, कई लोगों की मौत और लापता होने की आशंका
11 Oct, 2025 09:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिका के टेनेसी राज्य में स्थित सैन्य विस्फोटक निर्माण संयंत्र में जोरदार धमाका हुआ। ग्रामीण क्षेत्र में लगे इस संयंत्र में हुए धमाके में कई लोगों के मरने और लापता होने की आशंका है। फिलहाल मामले की जांच चल रही है। स्थानीय अधिकारियों और निवासियों ने बताया कि धमाका इतना शक्तिशाली था कि कई मील दूर तक घर हिल गए और आपातकालीन प्रतिक्रिया दल को घटनास्थल पर बुलाना पड़ा। हिकमैन काउंटी के एडवांस्ड ईएमटी डेविड स्टीवर्ट ने बताया कि रेस्क्यू टीम अभी तक अंदर नहीं जा सकी, क्योंकि विस्फोट जारी हैं। शुरुआती रिपोर्टों में कहा गया कि कई लोग मारे गए और कई लापता हैं, जबकि कंपनी ने इस घटना पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की।
हिकमैन काउंटी शेरिफ कार्यालय के अनुसार, यह विस्फोट नैशविले से लगभग 97 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में, बक्सनॉर्ट शहर के पास एक्यूरेट एनर्जेटिक सिस्टम्स में हुआ। अधिकारियों ने लोगों से क्षेत्र से दूर रहने का अनुरोध किया ताकि राहत और बचाव कार्य सुचारू रूप से किए जा सकें।
घटना के वीडियो सामने आए हैं, जिनमें जलता हुआ मलबा और धुआं उठता दिखाई दे रहा है। नैशविले के स्थानीय टीवी चैनल ने बताया कि विस्फोट के कारण पार्किंग में वाहन क्षतिग्रस्त हो गए और स्थानीय निवासियों ने अपने घरों को हिलते हुए महसूस किया। कुछ लोगों ने अपने कैमरों में विस्फोट की तेज आवाज कैद की। टेनेसी के कांग्रेसमैन स्कॉट डेसजार्लिस ने सोशल मीडिया पर कहा, कृपया मेरे और एमी के साथ मिलकर एक्यूरेट एनर्जेटिक सिस्टम्स के कर्मचारियों, उनके परिवारों और दोस्तों के लिए प्रार्थना करें। साथ ही घटनास्थल पर मौजूद सभी प्रथम प्रतिक्रियाकर्ताओं के लिए भी प्रार्थना करें।
गाजा में लौटने लगी शांति: पीछे हट रही इजरायली सेना, लोगों की हो रही घर वापसी
11 Oct, 2025 07:38 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गाजा। गाजा ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए राहत भरी खबर है। अब गाजा में शांति लौटने लगी है। यहां लंबे समय से डटी इजरायली सेना पीछे हट रही तो लोग वापस अपने घर आने लगे हैं। शुक्रवार दोपहर से इजरायल और हमास के बीच युद्धविराम लागू हो गया है। इसके बाद हजारों फिलिस्तीनी अपने घरों की ओर लौटने लगे हैं। इजरायली सेना ने कहा है कि उसके सैनिक तय की गई सीमाओं तक पीछे हट गए हैं। हालांकि शुक्रवार सुबह तक उत्तरी गाजा में भारी गोलाबारी की रिपोर्टें भी आईं।
प्रधानमंत्री बेन्जामिन नेतन्याहू के दफ्तर ने बताया कि उनके कैबिनेट ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता से बनी सीजफायर योजना को मंजूरी दी है। इसके तहत सभी बचे हुए बंधकों और कई फ़िलिस्तीनी कैदियों की रिहाई रविवार या सोमवार से शुरू होगी। वहीं वाडी गाजा इलाके में हजारों लोग शुक्रवार दोपहर पैदल अपने घरों की ओर निकल पड़े। कई लोग केवल यह देखने लौटे हैं कि उनका घर अब भी खड़ा है या नहीं। इजरायली सेना के प्रवक्ता ने कहा कि उत्तरी गाजा की दो सड़कों पर वापसी की अनुमति दी गई है, लेकिन कुछ इलाकों में अब भी सेना मौजूद है, इसलिए वहां न जाने की चेतावनी दी गई है।यह युद्धविराम पिछले दो साल से चल रहे विनाशकारी युद्ध को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे गाजा में खाने-पीने की चीजो, दवाओं और अन्य राहत सामग्री की आपूर्ति भी बढ़ेगी। हालांकि अब भी कई सवाल बाकी हैं- जैसे कि क्या हमास का निशस्त्रीकरण कैसे होगा और गाजा का शासन कौन संभालेगा। हमास के वरिष्ठ नेता मूसा अबू मरजूक ने कहा कि संगठन अब भी मध्यस्थों से संपर्क में है और वह कुछ प्रमुख फिलिस्तीनी नेताओं जैसे मरवान बरघूती और अहमद सादात की रिहाई पर जोर दे रहा है। उन्होंने बताया कि इजरायल ने कई नामों को मंजूर करने से इनकार किया है। मरवान बरघूती 66 साल के हैं और फ़िलिस्तीन में लोकप्रिय नेता माने जाते हैं। वे इजरायल में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र ने इजराइल से गाजा में और ज्यादा बॉर्डर क्रॉसिंग खोलने की अपील की है ताकि जरूरतमंदों तक राहत सामग्री पहुंचाई जा सके। यूएन प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि ‘सीजफायर ने उम्मीद जगाई है।’ यूएन ने बताया कि रविवार से 1,70,000 मीट्रिक टन राहत सामग्री गाजा में भेजने की तैयारी है, जो जॉर्डन और मिस्र में पहले से रखी गई थी। अब इज़राइल ने राहत एजेंसियों को ग्रीन सिग्नल दे दिया है। इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने एक्स पर लिखा- नोबेल कमेटी शांति की बात करती है, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप उसे साकार करते हैं। वे नोबेल शांति पुरस्कार के हकदार हैं। समझौते के तहत 48 बंधकों की रिहाई होगी, जिनमें से लगभग 20 के जीवित होने की उम्मीद है। इसके बदले करीब 2,000 फ़िलिस्तीनी कैदी छोड़े जाएंगे। हालांकि, इस सूची में मरवान बरघूती का नाम नहीं है। अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस ने कहा कि यह अब तक की सबसे बड़ी और जटिल कैदी-बंदी अदला-बदली होगी।
नोबेल नहीं मिला… दूसरी तरफ मिसाइल दिखाकर ट्रंप को चिढ़ा रहा उत्तर कोरिया का तानाशाह
11 Oct, 2025 05:37 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मांगने के बाद भी शांति का नोबेल पुरस्कार नहीं मिला। इस दर्द से तड़प रहे ट्रंप को कुछ राहत मिलती इससे पहले उत्तर कोरिया ने उनके जख्म पर नमक छिड़कना शुरु कर दिया है। दरअसल, उत्तर कोरिया ने राजधानी प्योंगयांग में एक भव्य सैन्य परेड निकालकर दुनिया को अपनी ताकत दिखाई और खास बात यह रही कि इस परेड में उसने अपनी अब तक की सबसे खतरनाक लॉन्ग रेंज मिसाइल ‘ह्वासोंग-20’ भी दिखाई। कहा जा रहा है कि यह मिसाइल अमेरिका के मुख्य भूभाग तक हमला करने की क्षमता रखती है।
उत्तर कोरिया ने एक भव्य सैन्य परेड में अपने सबसे खतरनाक और ताकतवर हथियारों की झलक दिखाई है। इस परेड की खास बात यह रही कि इसमें उत्तर कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग उन ने अपनी सेना का नया लॉन्ग-रेंज इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल– ‘ह्वासोंग-20’ पेश किया। माना जा रहा है कि यह मिसाइल आने वाले हफ्तों में टेस्ट भी की जा सकती है। इस परेड से यह साफ है कि किम जोंग उन न केवल अपनी सैन्य शक्ति, बल्कि अपनी डिप्लोमेटिक स्थिति को भी मजबूत कर रहे हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर ‘ह्वासोंग-20’ का परीक्षण किया गया, तो यह अमेरिका और एशियाई देशों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन सकता है।
यह परेड शुक्रवार रात शुरू हुई और इसका आयोजन रूलिंग वर्कर्स पार्टी की 80वीं वर्षगांठ के मौके पर किया गया। इस मौके पर विदेशी नेता भी मौजूद थे, जिससे यह साफ झलक रहा था कि किम जोंग उन अब अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। परेड में दिखाई गई मिसाइलों में सबसे खास थी ह्वासोंग-20, जिसे उत्तर कोरिया ने अब तक का सबसे ‘पावरफुल न्यूक्लियर स्ट्रैटेजिक वेपन सिस्टम’ बताया है। उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया के मुताबिक, यह मिसाइल अभी तक टेस्ट नहीं की गई है, लेकिन इसे सबसे शक्तिशाली न्यूक्लियर स्ट्रैटेजिक वेपन कहा जा रहा है। यह मिसाइल इतनी लंबी दूरी तक जा सकती है कि इससे अमेरिका के महाद्वीपीय हिस्से तक हमला किया जा सकता है। इसके अलावा, परेड में शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज़ मिसाइल और सुपरसोनिक मिसाइलें भी दिखाई गईं, जिनके बारे में उत्तर कोरिया पहले ही दावा कर चुका है कि वे दक्षिण कोरिया के लक्ष्य पर परमाणु हमले करने में सक्षम हैं। परेड में भाषण देते हुए किम जोंग उन ने कहा, “हमारी सेना को लगातार विकसित होना चाहिए ताकि वह एक अजेय शक्ति बन सके और हर खतरे को खत्म कर सके।” हालांकि उन्होंने अपने भाषण में अमेरिका या दक्षिण कोरिया का सीधा नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा साफ तौर पर अपने विरोधियों की ओर था।
ट्रंप का दावा कहा- मारिया ने मेरे सम्मान में ग्रहण किया है शांति का नोबेल पुरस्कार
11 Oct, 2025 03:36 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को शांति का नोबेल पुरस्कार नहीं मिलने का भारी गम है। पर क्या करें मांगने के बाद भी नहीं मिला। अब खुद बहलाने वाली बातें करते नजर आ रहे हैं। यहां उन्होंने कहा कि उन्हें यह सम्मान नहीं मिला, लेकिन वेनज़ुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो, जिन्हें यह पुरस्कार दिया गया है, ने खुद उन्हें फोन कर बताया कि वह यह पुरस्कार वह ‘मेरे सम्मान में’ स्वीकार कर रही हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप ने वॉशिंगटन में पत्रकारों से कहा, ‘नोबेल पुरस्कार पाने वाली ने आज मुझे फोन किया और कहा ‘मैं यह पुरस्कार आपके सम्मान में स्वीकार कर रही हूं, क्योंकि आप इसके असली हकदार हैं।’ मैंने कहा, ‘नहीं, मुझे मत दो। लेकिन मैंने उसकी बहुत मदद की थी। वेनेज़ुएला में उस समय हालात बहुत खराब थे, और मैं खुश हूं कि मैंने लाखों लोगों की जान बचाई। बता दें कि वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो को 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया है। उन्हें यह सम्मान अपने देश में लोकतंत्र और आजादी के लिए लंबे समय से चल रही लड़ाई के लिए मिला है। मचाडो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि यह पुरस्कार ‘सभी वेनेज़ुएलावासियों के संघर्ष की पहचान है। उन्होंने लिखा, ‘मैं यह पुरस्कार अपने देश के पीड़ित लोगों और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उनके निर्णायक समर्थन के लिए समर्पित करती हूं।’ हालांकि अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस साल नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलने पर प्रतिक्रिया दी है।
डोनाल्ड ट्रंप दावा करते रहे हैं कि उन्होंने सात युद्ध खत्म कराए हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि इस बार उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिलेगा, क्योंकि उनके मुताबिक उन्होंने अपने कार्यकाल में ‘सात युद्ध खत्म’ कराए थे। उन्होंने कहा- ‘मैंने पूछा, ‘बाकी सात का क्या? मुझे हर एक के लिए नोबेल मिलना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि अगर आप रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध रोक देते हैं, तो आपको नोबेल मिलेगा। लेकिन मैंने सात युद्ध रोके यह एक बड़ी बात है। मैं खुश हूं कि लाखों जिंदगियां बचाई।’ वहीं नॉर्वे की नोबेल कमेटी ने मारिया मचाडो को ‘शांति की बहादुर और प्रतिबद्ध समर्थक’ बताया। कमेटी ने कहा कि उन्होंने वेनेज़ुएला में लोकतंत्र और आजादी के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया और तानाशाही शासन के खिलाफ शांतिपूर्ण रास्ते से लड़ाई लड़ी। कमेटी ने कहा, ‘लोकतंत्र स्थायी शांति की शर्त है। लेकिन आज दुनिया में लोकतंत्र पर दबाव बढ़ रहा है। मीडिया पर रोक, आलोचकों की गिरफ्तारी और कानून का दुरुपयोग बढ़ता जा रहा है।
79 साल में भी ट्रंप का शरीर और दिल यंग, व्हाइट हाउस के डॉक्टर ने किया खुलासा
11 Oct, 2025 01:35 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मेडिकल जांच रिपोर्ट में उन्हें एक्सेप्शनल हेल्थ में बताया गया है। व्हाइट हाउस द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया कि ट्रंप की कार्डियक एज उनकी वास्तविक उम्र से 14 साल कम है। यह मूल्यांकन व्हाइट हाउस के डॉक्टर शॉन बारबाबेला ने किया और प्रेस सचिव कैरोलाइन लेविट ने इस बारे में जानकारी दी।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप इस समय 79 साल के हैं और जनवरी में जब उन्होंने दोबारा व्हाइट हाउस की कमान संभाली तब वे अमेरिकी इतिहास में पद संभालने वाले सबसे उम्रदराज़ राष्ट्रपति बने गए थे। हालांकि, उनकी फिटनेस रिपोर्ट बताती है कि उनका शरीर और हृदय उनकी उम्र की तुलना में कहीं ज्यादा यंग एज में है। डॉक्टर बारबाबेला ने रिपोर्ट में लिखा- ट्रंप की कार्डियोवैस्कुलर, पल्मोनरी, न्यूरोलॉजिकल और फिजिकल परफॉर्मेंस सभी बेहतरीन स्थिति में हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ने अपनी आगामी अंतरराष्ट्रीय यात्रा से पहले जरुरी स्वास्थ्य परीक्षण, वार्षिक फ्लू वैक्सीन और अपडेटेड कोविड-19 बूस्टर टीकाकरण भी करवाया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ईसीजी के जरिए की गई जांच में ट्रंप की कार्डियक एज करीब 14 साल कम पाई गई। डॉक्टरों के मुताबिक यह हृदय की कार्यक्षमता और समग्र स्वास्थ्य का संकेतक है। ट्रंप की यह मेडिकल जांच वॉल्टर रीड नेशनल मिलिट्री मेडिकल सेंटर में हुई, जो परंपरागत रूप से अमेरिकी राष्ट्रपतियों का प्रमुख मेडिकल सेंटर रहा है। यह विजिट उनके पिछले अप्रैल के विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण के छह महीने बाद की गई थी।
अप्रैल की रिपोर्ट में बताया गया था कि ट्रंप की लंबाई 6 फुट 3 इंच और वजन 224 पाउंड यानी करीब 102 किलो है, साथ ही उनका कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण में है। उस समय भी डॉक्टरों ने उनकी फिटनेस और नियमित गोल्फ खेलने की आदत की तारीफ की थी।
रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब जो बाइडेन ने अपनी फिटनेस को लेकर उठे सवालों के बीच 2024 के चुनावी दौड़ से खुद को अलग कर लिया था। ट्रंप ने बीते चुनाव अभियान में खुद को बाइडेन से ज्यादा फिट और ऊर्जावान बताकर अपनी स्वास्थ्य स्थिति को एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया था।
पाकिस्तान में अल्पसंख्यक अहमदिया समुदाय के पूजा स्थल के बाहर फायरिंग
11 Oct, 2025 12:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लाहौर। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के चेनाब नगर (रब्वाह) में अल्पसंख्यक अहमदिया समुदाय के पूजा स्थल बैत-उल-महदी पर एक संदिग्ध व्यक्ति ने फायरिंग किया। यह घटना नमाज के दौरान हुई। पुलिस ने पुष्टि की कि इस हमले में अहमदिया समुदाय के 6 लोग घायल हुए हैं।
घटना का वीडियो फुटेज वायरल हो रहा है। इसमें दिख रहा है कि हमलावर पिस्तौल लेकर मस्जिद के गेट की ओर बढ़ता है और वहां खड़े लोगों पर कई राउंड फायरिंग करता है।
कुछ ही देर बाद, एक गार्ड जवाबी कार्रवाई करता है (वीडियो क्लिप में दिखाई नहीं दे रहा) और हमलावर पर गोली चला देता है। हमलावर अपनी बंदूकें गिरा देता है, उन्हें उठाने की कोशिश करता है, लेकिन नाकाम होकर जमीन पर गिर जाता है।
पुलिस ने इलाके को घेरकर जांच शुरू कर दी है। अभी यह पता नहीं चल सका कि हमलावर का किसी चरमपंथी संगठन से संबंध था या नहीं। किसी भी संगठन ने अभी तक हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन पहले भी तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) जैसे समूह अहमदिया समुदाय के पूजा स्थलों को निशाना बना चुके हैं।
पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय खुद को मुसलमान मानते हैं, इन्हें 1974 में गैर-मुस्लिम घोषित किया गया था। बाद में बने कानूनों ने उन्हें मुस्लिम के रूप में पूजा करने या अपनी पहचान बताने पर रोक लगा दी। उनके मस्जिदों में मीनारें बनाने या कुरान की आयतें प्रदर्शित करने पर भी पाबंदी है।
‘भारत करीबी दोस्त, इसके खिलाफ अपनी जमीन का इस्तेमाल नहीं होने देंगे’, अफगान विदेश मंत्री का बयान
10 Oct, 2025 05:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत दौरे (India Tour) पर आए अफगानिस्तान (Afghanistan) के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी (Amir Khan Muttaqi) ने शुक्रवार को नई दिल्ली में भारतीय समकक्ष डॉ. जयशंकर (Dr. Jaishankar) से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान अफगानिस्तान के विदेश मंत्री ने भारत को अफगानिस्तान का करीबी दोस्त देश बताया और दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने की मांग की।
मुत्तकी ने कहा कि ‘दिल्ली आकर अच्छा लग रहा है और यह दौरा दोनों देशों के बीच संबंधों को और बेहतर करेगा। भारत और अफगानिस्तान को संपर्क बढ़ाना चाहिए।’ मुत्तकी ने कहा कि ‘अफगानिस्तान अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी अन्य देश के खिलाफ नहीं होने देगा।’ अफगानी विदेश मंत्री ने कहा कि ‘जब अफगानिस्तान में हाल ही में भूकंप आया तो सबसे पहले मदद भेजने वाला देश भारत ही था। अफगानिस्तान भारत को एक करीबी मित्र राष्ट्र के तौर पर देखता है। अफगानिस्तान भारत के साथ आपसी सम्मान पर आधारित रिश्तें चाहता है, जिसमें व्यापारिक और लोगों के लोगों से संबंध रहें। हम एक ऐसी व्यवस्था बनाने के लिए तैयार हैं, जिससे दोनों देशों के रिश्तें मजबूत हो सकें।’
बैठक के दौरान भारतीय विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ने कहा कि ‘अफगानिस्तान सरकार द्वारा भारतीय कंपनियों को अफगानिस्तान में खनन के लिए आमंत्रित करने का हम स्वागत करते हैं। इस बार आगे चर्चा की जाएगी। व्यापार और वाणिज्य को बढ़ावा देने के हमारे साझे हित हैं। काबुल और नई दिल्ली के बीच उड़ान सेवाएं बढ़ाने का एलान करते हुए हमें खुशी हो रही है।’
भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि ‘विकास और समृद्धि के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता है। हालांकि, दोनों देशों द्वारा सीमापार आतंकवाद के साझा खतरों का सामना किया जा रहा है। हमें आतंकवाद से निपटने के लिए समन्वित प्रयास करने होंगे। भारत की सुरक्षा चिंताओं के प्रति आपकी संवेदनशीलता की हम सराहना करते हैं। पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद हमारे साथ आपकी एकजुटता उल्लेखनीय थी।’
रूस ने कीव पर किया हमला, एनर्जी साइट को बनाया निशाना; 9 लोग घायल
10 Oct, 2025 05:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
डेस्क: रूस (Russia) और यूक्रेन (Ukraine) के बीच लंबे समय से संघर्ष चल रहा है. इस बीच शुक्रवार की सुबह, रूस के एक बड़े हमले (Attack) ने यूक्रेन की राजधानी कीव (Kyiv) में हड़कंप मचा दिया. इस हमले के दौरान एक इमारत में आग लग गई और कई एनर्जी साइट्स (Energy Sites) को भी निशाना बनाया गया. जिससे राजधानी के कुछ हिस्सों में बिजली गुल हो गई. कीव के मेयर विताली क्लिचको ने बताया कि इस हमले में 9 लोग घायल हुए, जिनमें से 5 को तुरंत अस्पताल ले जाया गया. उन्होंने कहा कि डनिप्रो नदी के पूर्वी किनारे के कुछ जिलों में बिजली कट गई.
इस अटैक के बाद तबाही की तस्वीरें भी सामने आई. ऑनलाइन शेयर की गई तस्वीरों में देखा गया कि अपार्टमेंट्स में आग लगी हुई थी और दमकल कर्मी आग बुझाने के लिए मौके पर पहुंच चुके थे. इसके अलावा, मार गिराए गए ड्रोन के टुकड़े शहर के कई हिस्सों में गिरे. ऊर्जा मंत्री स्वितलाना ग्रिंचुक ने बताया कि रूस ने कीव के एनर्जी साइट्स पर हमला किया. उन्होंने फेसबुक पर लिखा कि ऊर्जा विशेषज्ञ सभी जरूरी कदम उठा रहे हैं ताकि नेगिटिव प्रभाव को कम किया जा सके.
पिछले कुछ हफ्तों में, रूस ने खासकर यूक्रेन की ऊर्जा संरचना को निशाना बनाना शुरू कर दिया है, क्योंकि सर्दियों का मौसम नजदीक है और रूस-यूक्रेन के बीच का युद्ध साढ़े तीन साल से ज्यादा समय से चल रहा है. पिछले हफ्ते हुए एक बड़े मिसाइल और ड्रोन हमले में यूक्रेन की कई मुख्य गैस उत्पादन सुविधाओं को भारी नुकसान हुआ है.
कीव की सैन्य प्रशासन के प्रमुख तिमुर त्काचेन्को ने बताया कि राजधानी पर देर रात हुए हमले में ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया. उन्होंने कहा कि ड्रोन की वजह से आग लगी. आग ने शहर के पेचेरस्की जिले में एक उच्च-आवासीय ब्लॉक के 6वीं और 7वीं मंजिल के अपार्टमेंट्स को प्रभावित किया. साउथईस्ट में स्थित जापोरिज्जिया शहर में भी रूस के ड्रोन ने कई लक्ष्यों को मारा. स्थानीय गवर्नर के अनुसार, तीन लोग घायल हुए और कम से कम एक आवासीय भवन में आग लगी.
फिलीपींस में 7.6 तीव्रता का भूकंप, भारी तबाही की आशंका; सुनामी की चेतावनी जारी
10 Oct, 2025 11:17 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली. फिलीपींस (Philippines) के मिंडानाओ इलाके में ज़ोरदार भूकंप (earthquake) आया है. इसकी तीव्रता 7.6 (7.6 magnitude) मापी गई, जो कि बहुत शक्तिशाली है. भूकंप का केंद्र करीब 10 किलोमीटर गहराई में था. इस भूकंप के बाद स्थानीय भूकंप विज्ञान एजेंसी फिवोल्क्स ने सुनामी (tsunami) का अलर्ट जारी किया है. समुद्र किनार रहने वाले लोगों को तुरंत ऊंची जगहों पर जाने को कहा गया है.
शुरुआती रिपोर्ट्स में किसी बड़े नुक़सान या तबाही की ख़बर नहीं आई है, लेकिन इतने शक्तिशाली भूकंप की वजह से लोग घबरा कर अपने घरों से बाहर निकल आए. मृतकों या घायलों की संख्या की पुष्टि नहीं हुई है. यह भूकंप मिंडानाओ और आस-पास के क्षेत्रों के लिए गंभीर चेतावनी है, क्योंकि यह इलाके भूकंप आने वाले सक्रिय क्षेत्रों में आते हैं.
स्थानीय प्रशासन ने क्षतिग्रस्त इलाकों में राहत-बचाव कार्य शुरू कर दिया है. पहले अस्पताल, सड़कों और गंभीर रूप से प्रभावित इमारतों को प्राथमिकता दी जा रही है.
शक्तिशाली भूकंप फिलीपींस के लिए ख़तरनाक
फिलीपींस भूकंपीय रूप से बहुत ज्यादा एक्टिव एरिया है, जहां कई टेक्टोनिक प्लेटें, जैसे फिलीपींस सी प्लेट और यूरेशियन प्लेट, एक-दूसरे के संपर्क में आती हैं और आपस में टकराती हैं. इन टकरावों की वजह से जमीन के अंदर बहुत तेज तनाव उत्पन्न होता है, जो अचानक मुक्त होने पर भूकंप का रूप ले लेता है.
7.6 तीव्रता का भूकंप अत्यंत शक्तिशाली होता है, जिससे न केवल इमारतें ढह सकती हैं, बल्कि सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो जाती हैं और लोगों को गंभीर चोटें या जान का नुकसान हो सकता है.
चूंकि इस क्षेत्र का भूकंप केंद्र अक्सर समुद्र के नीचे होता है, इसलिए इसका एक बड़ा खतरा सुनामी का भी होता है. भूकंप के कारण समुद्र तल में हलचल से बहुत बड़ी लहरें पैदा हो सकती हैं, जो तटीय इलाकों पर भारी तबाही मचा सकती हैं. तटीय क्षेत्रों में बसे कई बड़े शहर और गांव इन लहरों की चपेट में आ सकते हैं, जिससे मानवीय और आर्थिक नुकसान और भी बढ़ जाता है.
फिलीपींस की घनी आबादी, कमजोर निर्माण सामग्री से बनी इमारतें, और प्रमुख शहरों का तटीय इलाकों में स्थित होना इस भूकंपीय खतरे को और भी गंभीर बना देता है. ऐसे भूकंप में न सिर्फ जनहानि होती है, बल्कि भारी आर्थिक नुकसान और पुनर्निर्माण की लंबी प्रक्रिया भी शुरू हो जाती है.
अफगानिस्तान : काबुल में धमाके, सोशल मीडिया हैंडल्स पर किया हवाई हमलों का दावा, तालिबान बोला सब सामान्य
10 Oct, 2025 10:12 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काबुल. अफगानिस्तान (Afghanistan) की राजधानी काबुल (Kabul) में गुरुवार देर रात कई धमाकों (Blasts) की आवाजें सुनाई दी। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स (media reports) के अनुसार यह विस्फोट अब्दुल हक स्क्वायर के पास हुआ, जहां एक लैंड क्रूजर वाहन को निशाना बनाया गया। स्थानीय निवासियों ने बताया कि इस घटना के बाद अब्दुल हक चौराहा बंद कर दिया गया, जिससे इलाके में भारी ट्रैफिक जाम लग गया।
तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर कहा कि काबुल शहर में विस्फोट की आवाज आई, लेकिन किसी को चिंता करने की जरूरत नहीं है। जांच जारी है और अभी तक किसी नुकसान की सूचना नहीं मिली है।
अफगान विदेश मंत्री भारत दौरे पर
यह घटना उसी समय हुई जब अफगान विदेश मंत्री आमिर खां मुत्ताकी भारत दौरे पर नई दिल्ली पहुंचे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जैस्वाल ने एक्स पर लिखा कि भारत और अफगानिस्तान के बीच द्विपक्षीय संबंध और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा करने की उम्मीद है। मुत्ताकी का 9 से 16 अक्तूबर तक का दौरा तालिबान के नियंत्रण के बाद काबुल से नई दिल्ली की पहली उच्च स्तरीय यात्रा है। इस दौरान वह अपने भारतीय समकक्ष और वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे और दोनों देशों के बीच संबंधों को बढ़ाने और क्षेत्रीय सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर बातचीत करेंगे।
हालांकि भारत तालिबान को औपचारिक रूप से मान्यता नहीं देता, लेकिन कूटनीतिक और मानवीय सहयोग जारी है, जिसमें हाल ही में आए भूकंप के बाद सहायता शामिल है। मुत्ताकी ने मॉकासा फॉर्मेट के सातवें सम्मेलन में भाग लेने के बाद भारत की यात्रा की।
यह दौरा अफगानिस्तान की अंतर्राष्ट्रीय यात्रा प्रतिबंधों में अस्थायी छूट के तहत संभव हुआ, जिसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अनुमोदित किया है। मुत्ताकी की भारत यात्रा क्षेत्रीय कूटनीति और अफगानिस्तान की वैश्विक संबंधों में भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
भारत के साथ आर्कटिक क्षेत्र में एक ऐतिहासिक समझौता करेंगे पुतिन, चीन पर लगाम लगाने की तैयारी
9 Oct, 2025 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मॉस्को । वैश्विक भू-राजनीति के बदलते परिदृश्य में, रूस और भारत (Russia and India) के बीच सदियों पुरानी दोस्ती एक बार फिर नई ऊंचाइयों को छूने वाली है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) की दिसंबर में प्रस्तावित भारत यात्रा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि आर्कटिक क्षेत्र में एक ऐतिहासिक समझौते की नींव भी रखेगी। यह समझौता नॉर्दर्न सी रूट (NSR) और संसाधन विकास पर केंद्रित होगा जो भारत को आर्कटिक परिषद में बड़ी भूमिका दिलाने का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। यह कदम न केवल आर्थिक अवसरों के द्वार खोलेगा, बल्कि चीन की बढ़ती आर्कटिक महत्वाकांक्षाओं के बीच रूस के लिए एक रणनीतिक संतुलन भी साबित होगा।
पारंपरिक दक्षिणी समुद्री मार्गों की तुलना में छोटा यह मार्ग
ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, नई दिल्ली की नॉर्दर्न सी रूट के विकास में संभावित भागीदारी को लेकर बातचीत चल रही है और संभावना है कि इस साल होने वाले वार्षिक शिखर सम्मेलन में इस दिशा में ठोस परिणाम सामने आ सकते हैं। नॉर्दर्न सी रूट रूस के उत्तरी तट के साथ आर्कटिक महासागर से होकर गुजरता है और पारंपरिक दक्षिणी समुद्री मार्गों की तुलना में करीब 40% छोटा है। इस मार्ग से यूरोप और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के बीच तेज, सुरक्षित और किफायती कार्गो परिवहन संभव हो सकेगा।
जुलाई 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मॉस्को यात्रा के दौरान दोनों देशों ने आर्कटिक शिपिंग में सहयोग की संभावनाओं को लेकर एक संयुक्त कार्य समूह बनाने पर सहमति जताई थी। यह समूह रूस के विशेष आर्कटिक विकास प्रतिनिधि व्लादिमीर पानोव (Rosatom) और भारत के नौवहन मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा की संयुक्त अध्यक्षता में काम कर रहा है।
इस कार्य समूह की पहली बैठक अक्टूबर 2024 में नई दिल्ली में हुई, जिसमें आर्कटिक जहाज निर्माण परियोजनाओं में साझेदारी, भारतीय नाविकों को ध्रुवीय नौवहन प्रशिक्षण देने, और एनएसआर पर कार्गो शिपिंग सहयोग के लिए एक एमओयू तैयार करने पर चर्चा हुई।
भारत को आर्कटिक काउंसिल में बड़ी भूमिका देना चाहता है रूस
सूत्रों के अनुसार, रूस चाहता है कि भारत को आर्कटिक काउंसिल में अधिक प्रभावशाली भूमिका दी जाए। इसका एक प्रमुख कारण यह है कि मॉस्को क्षेत्र में चीन के बढ़ते दखल को संतुलित करना चाहता है। आर्कटिक इलाका जीवाश्म ईंधन और महत्वपूर्ण खनिजों से समृद्ध है, जिससे रूस और भारत दोनों के लिए यह रणनीतिक रूप से अहम बनता है।
इसके साथ ही रूस इस बात पर भी जोर दे रहा है कि नॉर्दर्न सी रूट को ईरान के चाबहार बंदरगाह से जोड़ा जाए। भारत ने इस बंदरगाह के संचालन की जिम्मेदारी अगले दस वर्षों के लिए हासिल की है। रूस इस बंदरगाह का इस्तेमाल भारतीय महासागर क्षेत्र तक पहुंच के लिए करना चाहता है।
पुतिन के आगामी भारत दौरे से उम्मीद की जा रही है कि भारत-रूस आर्कटिक सहयोग में एक नया अध्याय शुरू होगा, जो न केवल आर्थिक दृष्टि से बल्कि सामरिक दृष्टिकोण से भी दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
आर्कटिक: वैश्विक व्यापार का नया गेटवे
आर्कटिक क्षेत्र पृथ्वी के सबसे ठंडे और संसाधन-समृद्ध इलाकों में से एक है। यह आज जलवायु परिवर्तन के कारण तेजी से पिघल रहा है। इससे न केवल नए शिपिंग मार्ग खुल रहे हैं, बल्कि तेल, गैस, दुर्लभ खनिजों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों तक पहुंच भी आसान हो रही है। रूस आर्कटिक महासागर के 53 प्रतिशत तट को नियंत्रित करता है। वह इस क्षेत्र में अपनी प्रभुता कायम रखने के लिए सक्रिय है। 2024 में NSR से 37 मिलियन टन से अधिक माल ढोया गया, जो 2025 में और बढ़ने की उम्मीद है।
भारत के लिए यह अवसर सुनहरा है। स्वेज कनाल या पनामा चैनल जैसे पारंपरिक मार्गों की तुलना में NSR एशिया और यूरोप के बीच यात्रा को 40 प्रतिशत छोटा कर देता है। इससे न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि व्यापारिक लागत भी घटेगी। रूसी स्रोतों के अनुसार, पुतिन की यात्रा के दौरान NSR के उपयोग पर ठोस कार्रवाई की योजना बनेगी। इसमें भारत को रूसी आइसब्रेकर बेड़े (जिसमें 40 आइसब्रेकर और 8 न्यूक्लियर-संचालित जहाज शामिल हैं) का सहयोग मिलेगा। यह कदम चीन की ‘पोलर सिल्क रोड’ महत्वाकांक्षाओं का मुकाबला करने के लिए रूस की रणनीति का हिस्सा है। आर्कटिक में चीन की बढ़ती उपस्थिति रूस के लिए चुनौती बनी हुई है, और भारत का प्रवेश एक संतुलनकारी शक्ति के रूप में काम करेगा।
भारत-रूस संबंध: इतिहास से वर्तमान तक
भारत और रूस के बीच संबंध सोवियत काल से ही विशेष रहे हैं। 1971 के भारत-पाक युद्ध में सोवियत संघ का समर्थन हो या आज रूस का S-400 मिसाइल सिस्टम, दोनों देशों की साझेदारी रक्षा, ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में अटूट रही है। 2024 में द्विपक्षीय व्यापार 63 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें रूसी तेल भारत का सबसे बड़ा आयात स्रोत बना। यूक्रेन संघर्ष के बावजूद, भारत ने रूसी ऊर्जा पर निर्भरता बनाए रखी, जिसकी आलोचना अमेरिका ने की। लेकिन राष्ट्रपति पुतिन ने हाल ही में वलदाई चर्चा क्लब में कहा, “भारत हमारे ऊर्जा वाहकों को अस्वीकार करे तो उसे 9-10 अरब डॉलर का नुकसान होगा। हमारी साझेदारी मजबूत है।” पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “प्रिय मित्र” और “बुद्धिमान नेता” कहा, जो देश की भलाई के बारे में सोचते हैं।
हमास को मना लो…अल्टीमेटम खत्म होने के बाद तुर्की के पास पहुंचे डोनाल्ड ट्रंप
9 Oct, 2025 11:23 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) ने इजराइल और हमास (Israel and Hamas) के बीच चल रहे युद्ध को रोकने के लिए दोनों को शांति समझौते के लिए राजी करने की कोशिश की. इजराइल ने हामी तो भरी तो लेकिन हमास को बार-बार अल्टिमेटम दिए जाने के बाद भी कोई जवाब नहीं मिला. ट्रंप ने यह भी कह दिया था कि अगर हमास शांति समझौते के लिए तैयार नहीं हुआ तो अंजाम बुरा होगा. अब जब हमास ने कोई जवाब नहीं दिया तो ट्रंप ने तुर्की से मदद मांगी है.
तुर्की के राष्ट्रपति तैय्यप एर्दोगन ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अनुरोध किया है कि हम गाजा युद्ध को समाप्त करने की उनकी योजना का समर्थन करने के लिए हमास को राजी करने में मदद करें. एर्दोगन ने कहा कि तुर्की के अधिकारी बुधवार को मिस्र के शर्म अल शेख में वार्ता में शामिल थे और ट्रम्प ने तुर्की से हमास को प्रस्ताव स्वीकार करने के लिए मनाने को कहा था.
राष्ट्रपति ऑफिस की तरफ से जारी बयान के अनुसार उन्होंने कहा कि हम इस पूरी प्रक्रिया के दौरान हमास के संपर्क में रहे हैं. हम अब भी उनके संपर्क में हैं. हम उन्हें समझा रहे हैं कि सबसे उपयुक्त तरीका क्या है, फिलिस्तीन को भविष्य में प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ाने के लिए क्या करने की जरूरत है. उन्होंने पिछले महीने व्हाइट हाउस की अपनी यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि हमने डोनाल्ड ट्रंप को समझाने की कोशिश की है कि फिलिस्तीन का समाधान कैसे निकाला जा सकता है.
पाकिस्तान सेना पर बॉर्डर के पास हुआ बड़ा अटैक, कर्नल-मेजर समेत 11 जवानों की मौत
9 Oct, 2025 10:42 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
डेस्क: पाकिस्तानी सेना (Pakistani Army) पर मंगलवार और बुधवार की रात बड़ा हमला (Major Attack) हो गया. तहरीक-ए-तालिबान (Tehreek-e-Taliban) पाकिस्तान के इस अटैक में पाकिस्तान के 11 सैनिक (Soldier) मारे गए. वहीं कई गंभीर रूप से घायल हुए हैं. मारे गए सैनिकों में 2 अधिकारी भी शामिल हैं. सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान सेना TTP के खिलाफ अफगानिस्तान बॉर्डर पर ऑपरेशन चला रही थी. इस दौरान मुठभेड़ हो गई. पाकिस्तानी सेना के साथ हुई मुठभेड़ में TTP के 19 लड़ाके भी मारे गए हैं.
दरअसल TTP के लड़ाकों ने घात लगाकर हमला किया. उत्तर-पश्चिमी कुर्रम जिले में पहले सड़क किनारे बम धमाके किए गए, इसके बाद गोलीबारी शुरू कर दी गई. पाकिस्तानी सेना ने एक बयान में कहा कि इस अभियान के दौरान आतंकियों को भी मार गिराया गया. पाकिस्तानी तालिबान के हमले में लेफ्टिनेंट कर्नल और मेजर रैंक के दो अधिकारियों भी मारे गए. लेफ्टिनेंट कर्नल जुनैद आरिफ ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहे थे, उनके साथ मेजर तय्यब रहत भी ऑपरेशन का हिस्सा थे.
पाकिस्तानी नेता बिलाल अफरीदी ने मारे गए पाकिस्तानी सैनिकों के लिए एक्स पर पोस्ट भी शेयर की है. उन्होंने लिखा, ”लेफ्टिनेंट कर्नल जुनैद आरिफ (39) और मेजर तैयब रहत (33) ने नौ बहादुर सैनिकों के साथ शहादत हासिल की.”
इस हमले की जिम्मेदारी तहरीक-ए-तालिबान-पाकिस्तान (TTP) ने ली है. संगठन ने दावा किया कि उसके लड़ाकों ने काफिले पर हमला किया था. यह संगठन पाकिस्तान सरकार को गिराकर अपने सख्त इस्लामी शासन की स्थापना करना चाहता है. वहीं, पाकिस्तान का कहना है कि ये आतंकी अफगानिस्तान में प्रशिक्षण लेकर पाकिस्तान पर हमले करते हैं, हालांकि काबुल इस बात से बार-बार इनकार करता है.
रूसी तेल खरीद पर हम भारत को निर्देश नहीं दे सकते, वो अपने फैसले खुद लेता है, बोले-ट्रंप के व्यापार सलाहकार
9 Oct, 2025 09:40 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन. अमेरिकी (American) व्यापार प्रतिनिधि और राष्ट्रपति ट्रंप के व्यापार सलाहकार (trade advisor) जैमीसन ग्रीर (Jamieson Greer) ने कहा कि भारत (India) अपने फैसले खुद लेता और अमेरिका दूसरे देशों को यह निर्देश नहीं दे रहा है कि वे किसके साथ संबंध रखें। न्यूयॉर्क के इकोनॉमिक क्लब द्वारा आयोजित एक बातचीत के दौरान ग्रीर ने कहा, ‘भारत ने हमेशा इतना रूसी तेल नहीं खरीदा है। रूस के साथ उनके हमेशा मजबूत संबंध रहे हैं, लेकिन पिछले दो या तीन वर्षों में उन्होंने न केवल उपभोग के लिए, बल्कि रिफाइनिंग और बेचने के लिए भी रूस से कम कीमत पर तेल खरीदना शुरू किया है।’ उन्होंने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा खरीद में विविधता लाने लगा है।
‘भारत ने तेल खरीद में विविधता लानी शुरू कर दी है’
जैमीसन ग्रीर ने कहा, ‘ऐसा नहीं है कि रूसी तेल भारतीय अर्थव्यवस्था का कोई आधार है। हमारा मानना है कि वे अपनी तेल खरीद में विविधता ला सकते हैं और उन्हें ऐसा करना चाहिए। सच कहूं तो, मैं पहले से ही देख सकता हूं कि उन्होंने अपनी तेल खरीद में विविधता लानी शुरू कर दी है। मुझे लगता है कि वे इसे समझते हैं।’ ग्रीर ने आगे कहा कि ‘जाहिर है कि वे (भारत) एक संप्रभु देश हैं। वे अपने फैसलों को नियंत्रित करेंगे।’
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया है, जिसमें भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद पर लगाया गया 25 प्रतिशत टैरिफ भी शामिल है। ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि रूसी तेल खरीदकर चीन और भारत यूक्रेन युद्ध को फंड किया जा रहा है। भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ के असर के बारे में पूछे जाने पर ग्रीर ने कहा कि भारत पर ये शुल्क कुछ हफ्तों से लागू हैं।
‘भारत को हम जितना बेचते हैं, उससे ज्यादा खरीदते हैं’
जैमीसन ग्रीर ने कहा, ‘भारत एक ऐसा देश है, जिससे हम 40 अरब अमेरिकी डॉलर का सामान ज्यादा खरीदते हैं। इसलिए उनका अमेरिका के साथ पहले से ही एक बेहतरीन समझौता है। जितना हम उन्हें बेचते हैं, वे उससे कहीं ज्यादा बेचते हैं। ऐसे में भारत व्यवहारिक रुख अपना रहा है।’ ग्रीर ने जोर देकर कहा कि ट्रंप रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ‘हम कोशिश कर रहे हैं कि व्लादिमीर पुतिन पर जितना हो सके उतना दबाव पड़े। हमने अपने यूरोपीय सहयोगियों से भी बात की है, जिनमें से कुछ आज भी रूसी तेल खरीद रहे हैं, जो कि एक अजीब बात है। इसलिए हम इस बारे में सिर्फ भारतीयों से ही बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि हमने चीनियों से भी बात की है। हमें बस इस युद्ध को समाप्त करने की कोशिश कर रहे हैं, और अगर युद्ध समाप्त हो जाता है, तो स्थिरता आएगी, तो आप रूसी तेल के बारे में फिर से बातचीत कर सकते हैं।’
निर्वासित तिब्बती EC ने की आम चुनाव की घोषणा, दो चरणों में होंगे चुनाव
9 Oct, 2025 08:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। तिब्बत चुनाव आयोग (Tibet Election Commission) ने मंगलवार को निर्वासित तिब्बत सरकार (tibet government) और निर्वासित तिब्बत संसद के चुनावों के कार्यक्रम की घोषणा की। अधिकारियों ने 18वें चुनाव को निष्पक्ष ढंग से संपन्न कराने की अपनी प्रतिबद्धता की घोषणा की। उन्होंने बताया कि चुनाव हर पांच साल में एक बार होते हैं। सिक्योंग (राजनीतिक नेता) और निर्वासित तिब्बती संसद के चुनाव दो चरणों में होंगे। पहला चरण 1 फरवरी, 2026 को और दूसरा चरण 26 अप्रैल, 2026 को होगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, यह बताया गया कि दुनिया भर में निर्वासित तिब्बती लोग चुनाव के पहले चरण में अपने पसंदीदा उम्मीदवारों को नामित करेंगे और अंतिम चुनाव के लिए शॉर्टलिस्ट का निर्धारण करेंगे। चुनाव आयोग ने शुक्रवार को नैतिक आचार संहिता की भी घोषणा की।
बता दें कि 17वीं निर्वासित तिब्बत संसद का दसवां सत्र 18 सितंबर को उत्तर भारतीय पहाड़ी शहर धर्मशाला में संपन्न हुआ। डोल्मा त्सेरिंग ने पहले कहा था कि सितंबर में चले सत्र के दौरान तिब्बत एकजुटता प्रस्ताव पारित किया गया था, जिसमें तिब्बत के अंदर गंभीर स्थिति पर चर्चा की गई थी। इस दौरान उन्होंने कहा था कि तिब्बत और तिब्बत के अंदर के लोग अधिनायकवादी शासन के तहत किस तरह से पीड़ित हैं और साथ ही हमने दलाई लामा के लिए भी कृतज्ञता का संकल्प लिया, क्योंकि हम उनके 90वें जन्मदिन को करुणा वर्ष के रूप में मना रहे हैं।
डोल्मा त्सेरिंग ने आगे कहा कि यह हमारा कर्तव्य है कि हम संपन्न तिब्बती समुदाय के लिए उनके योगदान को स्वीकार करें, जो हमारे पास है, जहां हमने वास्तव में शून्य से शुरुआत की थी, और हमने निर्वासन में यहां सब कुछ बनाया, जिसे तिब्बत में नष्ट किया जा रहा है। यह हमारे सबसे महत्वपूर्ण प्रस्तावों में से एक है। विभिन्न विभागों के कामकाज, सांसदों, पुरुष और महिला की परवाह किए बिना, सभी ने बहुत सक्रिय भागीदारी की।
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