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बांग्लादेश: ढाका की गारमेंट फैक्ट्री और केमिकल वेयरहाउस में लगी भीषण आग, जिंदा जले 16 मजदूर
15 Oct, 2025 08:59 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली. बांग्लादेश (Bangladesh) की राजधानी ढाका (Dhaka) में मंगलवार को बड़ा हादसा हो गया. यहां की एक चार मंजिला गारमेंट फैक्ट्री (garment factory) और उसके पास स्थित केमिकल वेयरहाउस (chemical warehouse) में आग लगने से कम से कम 16 मजदूरों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हुए.
फायर सर्विस और सिविल डिफेंस के अधिकारी तल्हा बिन जसीम के अनुसार, आग केमिकल वेयरहाउस में लगी और फैक्ट्री तक फैल गई. आग सबसे पहले शाह आलम केमिकल वेयरहाउस में लगी और उसके बाद एनार फैशन गारमेंट्स फैक्ट्री तक पहुंची.
फायर सर्विस के प्रवक्ता अनवरुल इस्लाम ने बताया, “खोज अभियान के दौरान केवल गारमेंट फैक्ट्री से ही 16 शव बरामद हुए हैं. आग को फैक्ट्री से बुझा दिया गया है, लेकिन केमिकल वेयरहाउस में आग अभी भी जारी है.”
फायर सर्विस और सिविल डिफेंस के निदेशक लेफ्टिनेंट कर्नल मोहम्मद ताजुल इस्लाम चौधरी ने कहा कि शवों की स्थिति इतनी भयावह है कि उनकी पहचान फिलहाल DNA टेस्ट के माध्यम से ही संभव होगी. मृतकों के शव ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजे गए हैं.
उन्होंने यह भी कहा कि संभवतः सभी मृतक जहरीली गैस सांस में लेने के कारण मारे गए. चौधरी ने बताया, “हमारा अनुमान है कि आग की शुरुआत केमिकल विस्फोट से हुई, जिससे जहरीली गैस फैल गई और कई लोग तुरंत मारे गए.”
दूसरी और तीसरी मंजिल पर फंसे थे लोग
मृतक दूसरी और तीसरी मंजिल के बीच फंसे हुए थे. बिल्डिंग की छत टिन और खपरैल की बनी थी और छत का निकास दो ताले से बंद था. जहरीली गैस और अचानक लगी आग (flashover) के कारण लोग बेहोश होकर तुरंत मर गए. चौधरी ने बताया कि केमिकल वेयरहाउस में 6 से 7 प्रकार के रसायन संग्रहीत थे, और वहां अभी भी प्रवेश करना बहुत खतरनाक है. रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए ड्रोन और लूप मॉनिटर जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है.
यूनुस ने अधिकारियों को दिए निर्देश
मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया और घायल लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की. उन्होंने अधिकारियों से जांच कर प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता देने का निर्देश दिया. फायर सर्विस ने बताया कि आग की सूचना सुबह 11:40 बजे मिली और टीम 11:56 बजे मौके पर पहुंची. आग पर 12 फायर फाइटिंग यूनिट्स ने काबू पाने का प्रयास किया.
पाकिस्तान की वजह से दुर्लभ खनिजों के निर्यात पर लगाए प्रतिबंध? चीन ने दी सफाई
15 Oct, 2025 08:38 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
डेस्क। चीन (China) ने दुर्लभ खनिजों (Rare Minerals) इससे जुड़ी प्रौद्योगिकियों (Technologies) के निर्यात पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। चीन ने अब इन प्रतिबंधों को लेकर सफाई भी दी है। चीन की ओर से कहा गया है कि दुर्लभ खनिजों और उनसे जुड़ी प्रौद्योगिकियों के निर्यात पर कड़े प्रतिबंध लगाने का उसका कदम पाकिस्तान (Pakistan) से किसी भी तरह से जुड़ा नहीं है। चीन ने यह भी कहा है कि पाकिस्तान के नेताओं ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को कीमती खनिज भेंट किए हैं, इससे भी इसका कोई संबंध नहीं है।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि पाकिस्तान के अमेरिका के साथ घनिष्ठ संबंध विकसित होने के बावजूद पाकिस्तान के साथ चीन की अटूट दोस्ती बरकरार है। लिन ने सरकारी अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ के संवाददाता की ओर से पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए कहा, “दुर्लभ खनिजों और संबंधित वस्तुओं के संबंध में निर्यात नियंत्रण उपायों पर चीन की हालिया घोषणा का पाकिस्तान से कोई लेनादेना नहीं है।” उन्होंने कहा, “आपने जिन खबरों का जिक्र किया है, वो या तो तथ्यों से अनजान हैं या अटकलों पर आधारित हैं या फिर मतभेद पैदा करने के इरादे से गढ़ी गई हैं। ये खबरें पूरी तरह से बेबुनियाद हैं।”
दुर्लभ खनिजों के खनन पर एक तरह से एकाधिकार रखने वाले चीन ने पिछले हफ्ते इन खनिजों के खनन एवं प्रसंस्करण पर नए निर्यात प्रतिबंधों की घोषणा की था। चीन ने इस दौरान अज्ञात विदेशी कंपनियों पर सैन्य उद्देश्यों के लिए उसके खनिजों का इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया था। ट्रंप ने बीजिंग के इस कदम पर कड़ी आपत्ति जताते हुए चीनी वस्तुओं के आयात पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी है।
खुद को हिंदू नहीं कहें, अल्पसंख्यकों से बांग्लादेश के अंतरिम प्रमुख यूनुस ने कहा
14 Oct, 2025 11:50 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
डेस्क: बांग्लादेश (Bangladesh) में शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद मोहम्मद यूनुस (Mohammad Yunus) के नेतृत्व में अंतरिम सरकार (Interim Government) का गठन किया गया है, लेकिन सरकार के गठन के बाद से ही बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों हिंदुओं (Minority Hindus) पर लगातार अत्याचार (Atrocities) बढ़ रहे हैं. हालांकि मोहम्मद यूनुस इसे स्वीकार कभी स्वीकार नहीं किया है. इसके बजाय, उन्होंने भारत को दोषी ठहराया. उन्होंने हिंदुओं पर अत्याचार को खारिज करते हुए इसे पूरी तरह से फर्जी करार दिया है. वहीं, यूनुस ने बांग्लादेश के हिंदू समुदाय को एक खास संदेश भी दिया. उन्होंने उनसे कहा कि वे खुद को हिंदू न कहें.
मेहदी हसन को दिया गया मोहम्मद यूनुस का एक इंटरव्यू वायरल हो गया है. इस इंटरव्यू में, होस्ट ने मोहम्मद यूनुस से पूछा कि हिंदुओं पर हमलों के विरोध में हुए विरोध प्रदर्शनों और प्रदर्शनों से उन्होंने कैसे निपटा? जवाब में, यूनुस ने कहा, “ये फर्जी खबरें हैं. आप फर्जी खबरों से प्रभावित नहीं हो सकते. भारत की खासियत फर्जी खबरें हैं.”
रिपोर्ट के अनुसार, अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमलों और उनकी सुरक्षा के बारे में बात करते हुए, मोहम्मद यूनुस ने कहा कि उन्हें हिंदू समुदाय के रूप में देखने से पहले, खुद को बांग्लादेश के नागरिक के रूप में देखें. यह दृष्टिकोण समावेशिता और एकता को उजागर करेगा. यूनुस ने कहा, “जब मैं समुदाय के नेताओं से मिलूंगा, तो मेरा संदेश यही होगा कि यह मत कहो कि मैं हिंदू हूं, इसलिए मेरी रक्षा करो. हमेशा कहो, मैं इस देश का नागरिक हूं, इसलिए मेरे अधिकारों की रक्षा करो. इससे तुम्हें ज्यादा सुरक्षा मिलेगी.”
उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं को कभी अकेलापन महसूस नहीं करना चाहिए. यूनुस ने उन्हें नागरिक के रूप में अपने अधिकारों की मांग करने की सलाह दी. हिंदुओं पर हमलों और अत्याचारों की घटनाओं के बारे में बोलते हुए, नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री ने कहा कि ज्यादातर घटनाएं जमीन को लेकर स्थानीय विवाद या पड़ोसियों के बीच की समस्याओं के कारण होती हैं, जिन्हें सांप्रदायिक समस्या के रूप में पेश किया जाता है.
पुतिन की सीक्रेट लाइफ पर नई किताब, दावा- कैलेंडर गर्ल और ओलंपिक जिमनास्ट से अफेयर
14 Oct, 2025 10:49 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Russian President Vladimir Putin) की निजी जिंदगी से जुड़े कई राज एक नई किताब में सामने आए हैं. किताब का नाम है द जार हिमसेल्फ: हाउ व्लादिमीर पुतिन डिसीव्ड अस ऑल. इसे दो रूसी पत्रकारों रोमन बादानिन और मिखाइल रुबिन ने लिखा है. किताब में बताया गया है कि पुतिन का जीवन कई झूठ और रहस्यों से भरा है.
पुतिन ने अपनी पहली पत्नी ल्यूडमिला से शादी की थी और उनके दो बच्चे हैं. लेकिन 2014 में दोनों का तलाक हो गया. माना जाता है कि पुतिन की कई अफेयर्स की वजह से तलाक हुआ. किताब में कहा गया है कि पुतिन राष्ट्रपति बनने से पहले 20 साल की स्वेतलाना क्रिवोनोगिख से मिलने लगे. स्वेतलाना एक दुकान में सफाईकर्मी थीं.
2003 में स्वेतलाना ने पुतिन की तीसरी बेटी एलिजावेता को जन्म दिया, लेकिन पुतिन ने इस बेटी को कभी स्वीकार नहीं किया. अफवाह है कि स्वेतलाना अब बहुत अमीर है. उसने सेंट पीटर्सबर्ग के पास एक महंगा स्की रिसॉर्ट खरीदा और एक बैंक में हिस्सेदारी भी ली. किताब में 17 साल की लड़की एलिसा खरचेवा का भी जिक्र है. वह पुतिन के सम्मान में एक कैलेंडर में नजर आई थी. कहा जाता है कि वह भी पुतिन से जुड़ी हुई थी. उसे मॉस्को में एक अच्छा घर और एक प्रसिद्ध कॉलेज में दाखिला मिला.
पुतिन के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने ओलंपिक जिम्नास्ट अलीना काबायेवा से भी रिश्ता बनाया था, जब वे अभी भी अपनी पहली पत्नी से शादीशुदा थे. हालांकि पुतिन ने इसे कभी स्वीकार नहीं किया. लेकिन फ्रांसीसी पत्रकार सेलिन नोनी ने बताया कि यह रिश्ता 2006 से शुरू हुआ था. पुतिन और अलीना के दो बेटे हैं, जिनके असली नाम छुपा दिए गए हैं. उनके बच्चों को ‘स्पिरिडोनोव’ नाम दिया गया है, जो पुतिन के दादा का नाम था.
पुतिन के दादा स्पिरिडोन पुतिन सोवियत नेता लेनिन और स्टालिन के लिए शेफ थे. किताब के लेखक रोमन बादानिन कहते हैं कि पुतिन की जिंदगी में दिखावा बहुत है. वे कहते हैं कि पुतिन के पारंपरिक परिवार के विचार बदलते रहते हैं और केवल अपने राजनीतिक फायदे के लिए काम करते हैं.
दक्षिण अफ्रीका के पहाड़ी क्षेत्र में नियंत्रण खोकर खाई में गिर गई बस, 42 लोगों की मौत
14 Oct, 2025 09:48 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
केपटाउन। दक्षिण अफ्रीका (South Africa) के उत्तर में स्थित पहाड़ी क्षेत्र में सोमवार को एक भीषण बस हादसे (Horrific Bus Accident) में कम से कम 42 लोगों की मौत हो गई। यह दुर्घटना रविवार को एन-1 राजमार्ग पर लुईस ट्रिचार्ड्ट कस्बे (Louis Trichardt Towns) के पास हुई, जो कि प्रिटोरिया से लगभग 400 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। सड़क परिवहन प्रबंधन निगम के प्रवक्ता साइमन ज्वाने ने बताया कि अब तक 42 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, हालांकि मृतकों और घायलों की सटीक संख्या की जांच अभी जारी है।
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, बस पहाड़ी रास्ते पर नियंत्रण खो बैठी और सड़क से नीचे गहरी खाई में जा गिरी। सरकारी विभाग की ओर से जारी तस्वीरों में नीले रंग की बस उलटी पड़ी दिखाई दे रही है। सरकारी बयान में बताया गया कि यह बस दक्षिण अफ्रीका के पूर्वी केप प्रांत से उत्तर की ओर जा रही थी और इसमें सवार यात्री ज्यादातर जिम्बाब्वे और मलावी के नागरिक थे, जो अपने घर लौट रहे थे। घटना के बाद राहतकर्मी मौके पर पहुंचे और कई घायलों को आसपास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
नया रिवाज: शादी टूटी तो लड़की ने मंगेतर से मांगी गले लगाने की राशि
14 Oct, 2025 08:46 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हेनान। जब दो लोगों की तयशुदा शादी कैंसिल (scheduled wedding cancelled) होती है, तो दोनों को ही बुरा लगता है। लेकिन चीन से एक अजीबोगरीब मामला (strange case) सामने आया है। यह मामला शादी टूटने की वजह से अजीब नहीं है, बल्कि लड़की द्वारा शादी कैंसिल होने के पहले मंगेतर को गले लगाने के पैसे मांगने की वजह से है। लड़की का कहना है कि अब ,जबकि शादी कैंसिल हो गई है, तो उसने लड़के को जो गले लगाया था उसका पैसा मिलना चाहिए। लड़की ने इसके लिए करीब 4200 डॉलर की मांग की है।
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक सगाई के दौरान महिला को करीब 28,000 अमेरिकी डॉलर के गिफ्ट मिले थे, जब सगाई के टूटने की नौबत आ गई तो वह उन्हें वापस करने के लिए तैयार हो गई। लेकिन उसने गले लगाने के लिए मिले करीब 4200 डॉलर वापस करने से इनकार कर दिया।
रिपोर्ट के मुताबिक हेनान प्रांत के पिंगडिंगशान का रहने वाला यह जोड़ा पिछले साल एक मैचमेकर के माध्यम से मिला था। दोनों ने एक दूसरे को पसंद किया फिर उसके बाद जनवरी में उन्होंने सगाई कर ली। कुछ दिन बात करने के बाद इन्होंने नवंबर में शादी करने की योजना बनाई थी। इसके लिए उन्होंने होटल भी बुक कर लिया था।
कुछ दिनों की बातचीत के बाद लड़की ने यह कहते हुए शादी तोड़ दी की लड़का बहुत ही ज्यादा ईमानदार है और उसकी आमदनी भी काफी कम है। स्थानीय मीडिया से बात करते हुए, वान उपनाम वाले मैचमेकर ने कहा, “महिला को लगता था कि वह आदमी बहुत ईमानदार है और उसकी आमदनी बहुत कम है।
वान ने आगे कहा, “सगाई के उपहार के बारे में, उसने कहा कि वह उसे वापस करने को तैयार है, लेकिन 30,000 युआन (4200 डॉलर) ‘गिंग फीस (गले लगाने का शुल्क) के तौर पर रखेगी। मैंने पिछले दस सालों में हजार से ज्यादा जोड़ों की मुलाकात करवाई है। इसमें से इसका परिवार सबसे ज्यादा नखरेबाज है।
आठ महीनों में आठ संघर्ष खत्म करने का दावा, ट्रंप बोले — “हम जीतना जानते हैं”
13 Oct, 2025 08:01 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को इस्राइली संसद (नेसेट) को संबोधित किया। उन्होंने इस बात को दोहराया कि उन्होंने आठ महीने में आठ संघर्षों को खत्म करवाया। ट्रंप ने यह भी कहा कि गाजा शांति समझौता पश्चिम एशिया के लिए एक नई सुबह है। इस बीच, संसद में एक सदस्य के हंगामे के कारण कुछ समय के लिए व्यवधान भी आया।
इस्राइल और गाजा के बीच शांति समझौता करने के लिए इस्राइल ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इस्राइली सर्वोच्च नागरिक सम्मान देने का एलान किया है। ट्रंप यह सम्मान पाने वाले पहले गैर इस्राइली नागरिक हैं। इसके साथ ही पीएम नेतन्याहू ने डोनाल्ड ट्रंप के शांति प्रयासों की सरहाना की है। इसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस्राइली नेसेट को संबोधित किया। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अंधेरे और कैद में खौफनाक दो साल बिताने के बाद 20 बहादुर बंधक अब अपने परिवारों के पास वापस लौट रहे हैं। ट्रंप ने दोहराया, हमने आठ महीनों में आठ युद्ध निपटाए हैं, जिनमें यह भी शामिल है। ट्रंप ने कहा, अगर हम जंग में उतरते हैं, तो हम इसे ऐसे जीतते हैं, जैसा पहले कभी किसी ने नहीं जीता।
अमेरिकी राष्ट्रपति अरब और इस्लामी देशों की तारीफ की
अमेरिकी राष्ट्रपति ने गाजा में शांति योजना के लिए अरब और इस्लामी देशों की तारीफ की और कहा कि उन्होंने एकजुट होकर हमास पर दबाव डाला और बंधकों को रिहा करने में मदद की। उन्होंने कहा, हमें बहुत मदद मिली। ऐसे कई लोग हैं, जिनके बारे में आपने सोचा भी नहीं होगा और मैं उनका आभार व्यक्त करता हूं।
उन्होंने कहा, यह इस्राइल और पूरी दुनिया के लिए एक अद्भुत कामयाबी है कि इन देशों ने शांति के साझेदार के रूप में मिलकर काम किया। उन्होंने आगे कहा, अब आने वाली पीढ़ियां इस क्षण को ऐसे याद रखेंगी, जब सब कुछ बदलना शुरू हो गया और बहुत ज्यादा बदलाव बेहतरी के लिए हुआ। यह केवल एक जंग का अंत नहीं है। यह इस्राइल और उसके सभी देशों के लिए महान सद्भाव और स्थायी सद्भाव की शुरुआत है।
ट्रंप के भाषण के दौरान एक सदस्य ने किया हंगामा
ट्रंप के भाषण के दौरान नेसेट के एक सदस्य अयमैन ओदेह ने बाधा डाली और फलस्तीन को मान्यता देने की मांग की। ओदेह ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा, संसद में दिखावा असहनीय है। एक समूह ने नेतन्याहू का महिमामंडन किया गया, जो पहले कभी नहीं देखा गया था। इससे नेतन्याहू और उनकी सरकार गाजा में हुए मानवता के खिलाफ अपराधों और सैकड़ों हजारों फलस्तीनियों और हजारों इस्राइली लोगों की जान का जिम्मेदार होने से बच नहीं सकते।
डरते नहीं हैं, मुंहतोड़ जवाब देंगे…ट्रंप के 100% टैरिफ पर चीन का करारा पलटवार
13 Oct, 2025 10:56 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: चीन के 100 प्रतिशत टैरिफ (China’s 100 percent tariffs) लगाने पर अमेरिका (America) को दोटूक और करारा जवाब दिया है. चीन के वाणिज्य मंत्रालय की ओर से सख्त लहजे में बयान जारी किया गया है कि अमेरिका की ट्रंप सरकार चीन के खिलाफ जिस तरह के कदम उठा रही है, उससे नुकसान चीन के साथ उनका भी होगा. द्विपक्षीय आर्थिक और व्यापार संबंध खराब होंगे, तनाव बढ़ेगा और दरार गहरी हो जाएगी. चीन बस लड़ना नहीं चाहता, लेकिन चीन लड़ने से डरता नहीं है और अगर जरूरत महसूस हुई तो अमेरिका को मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा.
बता दें कि चीन ने रेयर अर्थ एलिमेंट्स पर अपना कंट्रोल बढ़ाते हुए विदेश निवेश और इसकी सप्लाई पर लोग रोक लगा दी है. चीन के आदेशानुसार, 17 रेयर अर्थ एलिमेंट्स में से होल्मियम, एर्बियम आदि 5 एलिमेंट्स अब सैन्य उपयोग के लिए सप्लाई नहीं किए जाएंगे. इस आदेश से अमेरिका नाराज हुआ और चीन के सामान पर 100% अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया, जो एक नवंबर 2025 से लागू होगा. साथ ही चीन से AI चिप्स और सॉफ्टवेयर्स के निर्यात पर भी रोक लगा दी. इस वर्किंग ने चीन और अमेरिका के बीच ट्रेड वार को बढ़ा दिया है.
रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REE) टेक्नोलॉजी, रक्षा उपकरण, इलेक्ट्रिक वाहन, स्मार्टफोन और अन्य गैजेट बनाने में इस्तेमाल रहते हैं. रेयर अर्थ एलिमेंट्स में गैलियम, जर्मेनियम, एंटीमोनी स्कैंडियम, यट्रियम और लैंथेनाइड्स आदि शामिल हैं. इन ऐलिमेंट्स का खनन और प्रोसेसिंग महंगा और पर्यावरणीय रूप से हानिकारक है, लेकिन इन एलिमेंट्स पर चीन का 90% से ज्यादा कंट्रोल है और अमेरिका इन एलिमेंट्स पर काफी निर्भर करता है, लेकिन चीन 1990 से इन एलिमेंट्स पर अपना कंट्रोल बढ़ाता आ रहा है. अमेरिका, यूरोपीय संघ और जापान ने साल 2012 में चीन की शिकायत WTO से की है.
मारिया कोरिना मचाडो को मिले नोबेल शांति पुरस्कार का मुस्लिम संगठन कर रहे विरोध
13 Oct, 2025 09:55 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
न्यूयार्क। नोबेल पीस प्राइज 2025 (Nobel Peace Prize 2025) के लिए जब वेनेजुएला की विपक्षी नेता (Venezuelan opposition leader) मारिया कोरिना मचाडो (Maria Corina Machado) के नाम का ऐलान किया गया तो एक तरफ उन्हें बधाई देने वालों का तांता लग गया तो वहीं कई संगठन मांग कर रहे हैं कि उनसे यह पुरस्कार वापस ले लिया जाए। आखिर ऐसा क्यों है? यहां तक कि वेनेजुएला में भी उनको शांति पुरस्कार दिए जाने की आलोचना हो रही है। देश में लोकतंत्र बहाल करवाने के लिए उनके अहिंसक तरीके से किए गए संघर्ष के लिए ही उन्हें इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए चुना गया है। वहीं वामपंथी विचारक और राजनीतिक विरोधी इसके खिलाफ नजर आ रहे हैं।
विरोधियों का कहना है कि मचाडो की करीबी अमेरिकी दक्षिणपंथियों से रही है। अब गौर करने वाली बात है कि व्हाइट हाउस ने भी उनको नोबेल दिए जाने की आलोचना कर दी और कहा कि पुरस्कार देने में समिति ने राजनीति को शांति से ऊपर रखा है। वेनेजुएला के लोग उनको नोबेल मिलने से इसलिए खुश हैं कि उन्हें लगता है कि अमेरिका में उनके डिपोर्टेशन का रिस्क कम हो जाएगा। कई लोगों का कहना है कि मचाडो वेनेजुएला की सरकार पर विदेशी प्रतिबंधों का समर्थन करती हैं, ऐसे में उन्हें नोबेल नहीं मिलना चाहिए था।
अमेरिका में मुस्लिम सिविल राइट ग्रुप काउंसिल ऑन अमेरिकन इस्लामिक रिलेशन (CAIR) ने भी इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि नोबेल कमेटी को यह पुरस्कार वापस ले लेना चाहिए। वेनेजुएला की सत्ताधारी पार्टी के सासंद ने कहा कि मचाडो को नोबेल दिया जाना शर्मनाक है। उन्होंने विदेशी शक्तियों की मदद से देश में अस्थिरता का माहौल पैदा कर दिया।
CAIR ने कहा, मचाडो इजरायल के मुस्लिम विरोधी अजेंडे का समर्थन करती हैं। वह मुस्लिमों पर होने वाले अत्याचार का खुलकर समर्थन करती हैं। वेनेजुएला में सरकार के पूर्व वाइस प्रेसिडेंट पाबले इगलेसियास ने कहा कि मचाडो देश में तख्तापलट की कोशिश कर रही थीं। वह अडोल्फ हिटलर की विचारधारा का समर्थन करती हैं। कहीं ऐसा ना हो कि अगले साल पुतिन और जेलेंस्की को शांति को नोबेल पुरस्कार मिल जाए।
नॉर्वे की नोबेल कमेटी का कहना है कि वेनेजुएला में शांतिपूर्ण तरीके से तनाशाही सरकार से लोकतंत्र में तब्दली करने के लिए अथक परिश्रम और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए मचाडो को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। वहीं मचाडो ने कहा कि वह इस जीत को डोनाल्ड ट्रंप को समर्पित कर रही हैं।
गाजा में शांति की ओर आगे बढ़ रहे इजरायल ने अब लेबनान पर की बमबारी..
13 Oct, 2025 08:53 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। हमास और इजरायल (Hamas and Israel) के बीच पिछले दो सालों से गाजा (Gaza) में अब शांति की ओर आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। इजरायली सेना (Israeli Army) भी पीछे की तरफ जाने लगी है। लेकिन इसी बीच नेतन्याहू (Netanyahu) के देश ने अपने एक और पड़ोसी लेबनान पर बमबारी कर दी है। आईडीएफ ने शुक्रवार को दावा किया कि उसने दक्षिणी लेबनान के आयता अश-शब हिज्बुल्लाह के एक हथियार अड्डे को ध्वस्त कर दिया है
इजरायली समाचार एजेंसी जेएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक इजरायली सेना ने खुफिया जानकारी मिली थी कि हिज्बुल्लाह यहां पर हथियारों का जखीरा तैयार कर रहा है। इसके आधार पर इजरायली सैनिकों ने घटनास्थल की तलाशी ली और ढांचे को ध्वस्त कर दिया, वहां मिले हथियारों को भी जब्त कर लिया।
इस हमले को सही साबित करते हुए इजरायली सेना ने लेबनान के ऊपर 27 सिंतबर 2024 को युद्धविराम समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया। आईडीएफ के मुताबिक इस इमारत के भीतर हिज्बुल्लाह जिस तरीके से हथियारों का इकट्ठा करके और अन्य गतिविधियां कर रहा था यह साफ तौर पर समझौते का उल्लंघन है। गौरतलब है कि 18 फरवरी को युद्धविराम की समय सीमा समाप्त होने के बाद से ही लेबनान और इजरायल के बीच में तनाव बना हुआ है। मंगलवार को भी आईडीएफ ने दक्षिणी लेबनान के टायर जिले में हमला बोल दिया था। इसमें हिज्बुल्लाह का बड़ा नेता महमूद अली इस्सा मारा गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस्सा स्थानीय निवासियों के साथ मिलकर हिज्बुल्लाह के वित्तीय और सैन्य प्रबंधन की देख-रेख करता था।
पाकिस्तान: पुलिस ट्रेनिंग सेंटर पर बड़ा हमला, 6 आतंकवादी और 7 पुलिसकर्मी समेत 13 की मौत
12 Oct, 2025 11:02 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पेशावर। उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान (Pakistan) के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत (Khyber Pakhtunkhwa Province) में एक पुलिस प्रशिक्षण केंद्र (Police Training Center) पर बड़ा आत्मघाती हमला हुआ है। पाकिस्तान के अनुसार यह एक आतंकवादी हमला (Terrorist Attack) था। हमले के बाद पांच घंटे जारी रही मुठभेड़ में 6 आतंकवादियों को मार गिराने के दावा किया गया है। इस दौरान 7 पुलिसकर्मियों की भी मौत हो गई है। पाकिस्तान पुलिस ने यह जानकारी दी है।
यह हमला डेरा इस्माइल खान जिले में रत्ता कुलाची पुलिस प्रशिक्षण स्कूल पर हुआ। हमले के बाद पुलिस कर्मियों द्वारा की गई जवाबी गोलीबारी में पहले तीन आतंकवादी मारे गए और कुछ अन्य आतंकवादी परिसर के अंदर छिप गए। आतंकवादियों का सफाया करने के लिए शुक्रवार देर रात शुरू किए गए एक अभियान के दौरान तीन और आतंकवादी मारे गए। जबकि छह पुलिसकर्मियों की मौत हो गई। इससे पहले, एक पुलिसकर्मी के मारे जाने की खबर मिली थी। इसी के साथ इस हमले में मारे गए सुरक्षाकर्मियों की संख्या सात हो गई, जबकि 13 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।
पाकिस्तानी अधिकारियों ने बताया कि हमले के बाद सभी प्रशिक्षु रंगरूटों और कर्मचारियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया है। इसके बाद आतंकियों के खिलाफ सफाया अभियान शुरू किया गया। इसमें एसएसजी कमांडो, अल-बुर्क फोर्स, एलीट फोर्स और पुलिसकर्मी शामिल थे। यह घटना शुक्रवार देर रात हुई जब आतंकवादियों ने विस्फोटकों से लदे ट्रक से पुलिस प्रशिक्षण स्कूल के मुख्य द्वार को टक्कर मार दी जिससे एक जोरदार विस्फोट हुआ। विस्फोट के तुरंत बाद विभिन्न वर्दी पहने आतंकवादी परिसर में घुस आए और उन्होंने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके बाद पुलिसकर्मियों ने जवाबी कार्रवाई की और हमलावरों को घेर लिया। गोलीबारी के दौरान आतंकवादी हथगोले फेंकते रहे।
तालिबानी लड़ाकों ने ढहाया कहर, PAK आर्मी के 12 जवान मारे, टैंक-चौकियों पर कब्जा, 5 ने हथियार डाले
12 Oct, 2025 10:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली. पाकिस्तान (Pakistan) और अफगानिस्तान (Afghanistan) की सीमावर्ती इलाकों में हाल के हवाई हमलों (air strikes) और मुठभेड़ों के बाद तनाव चरम पर पहुंच गया है. सुरक्षा सूत्रों और स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, डुरंड लाइन (Durand Line) पर कुर्रम जिले के गावी क्षेत्र में पाकिस्तान और अफगान बलों के बीच देर रात भारी झड़पें हुईं. शुरुआती आधे घंटे में छोटी बंदूकों से फायरिंग शुरू हुई, लेकिन यह जल्द ही तोपखाने और गोलाबारी तक बढ़ गई.
यह हिंसक झड़प तब शुरू हुई जब तालिबान बलों ने कथित तौर पर शनिवार देर रात कई पाकिस्तानी सीमा चौकियों पर गोलीबारी की. स्थानीय मीडिया ने इसका वीडियो भी जारी किया है, जिसमें दोनों तरफ से ताबड़तोड़ फायरिंग और गोलाबारी देखी जा सकती है.
दरअसल, अफगान तालिबान ने 11 अक्टूबर की देर रात को नंगरहर और कुनार प्रांतों में डुरंड लाइन के पास पाकिस्तानी सैन्य चौकियों पर बड़े पैमाने पर हमले शुरू किए. अफगानिस्तान की 201 खालिद बिन वलीद आर्मी कोर ने नंगरहर और कुनार प्रांतों में पाकिस्तानी सैन्य चौकियों पर हमला बोल दिया.
12 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए
तालिबान सरकार के रक्षा मंत्रालय ने टोलो न्यूज (TOLOnews) को बताया कि इस्लामिक एमिरेट्स ऑफ अफगानिस्तान की सेनाओं ने कई पाकिस्तानी चौकियों पर कब्जा कर लिया है. कुनार और हेलमंद प्रांतों में एक-एक पाकिस्तानी चौकी को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया.
सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, हेलमंद के बहरम चाह जिले में हुई झड़पों में 12 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और एक मिल देहशिका टैंक अफगान बलों के कब्जे में आ गया. इसके अलावा, कंधार के मायवंद जिले में पांच पाकिस्तानी सैनिकों ने तालिबान के सामने आत्मसमर्पण कर दिया.
उधर, पाकिस्तानी मीडिया में दावा किया गया है कि पाकिस्तानी बलों ने कार्रवाई करते हुए कई अफगान सीमा चौकियों को प्रभावी ढंग से निशाना बनाया. इसमें कई अफगान चौकियों और आतंकवादी ठिकानों को काफी नुकसान पहुंचा है. साथ हीकई अफगान सैनिक और लड़ाके मारे गए हैं.
कतर ने जताई चिंता, संवाद की अपील
सीमा पर बढ़ते संघर्ष के बीच कतर ने आधिकारिक रूप से बयान जारी कर स्थिति पर चिंता व्यक्त की है. कतर के विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते तनाव और हिंसा से क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है. कतर ने दोनों देशों से संवाद, कूटनीति और संयम अपनाने की अपील की.
मंत्रालय ने कहा, “कतर इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर बढ़ते तनाव और उसके संभावित परिणामों को लेकर चिंतित है. हम दोनों पक्षों से आग्रह करते हैं कि वे तनाव कम करने के लिए बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता दें और स्थिति को और न बढ़ाएं.”
कतर ने यह भी कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय शांति और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करने के सभी प्रयासों का समर्थन करता है. बयान में कहा गया, “कतर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रयासों के साथ खड़ा है जो अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए किए जा रहे हैं. यह पाकिस्तान और अफगानिस्तान दोनों के लोगों की भलाई और समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध है.”
तनाव की जड़: पाकिस्तानी हवाई हमले
बता दें कि 9 अक्टूबर की रात, जब अफगानिस्तान की राजधानी काबुल और अन्य शहरों में सन्नाटा पसरा था, पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने अचानक आसमान को चीरते हुए हवाई हमले शुरू किए. काबुल, खोस्त, जलालाबाद और पक्तिका में टीटीपी के कथित ठिकानों को निशाना बनाया गया.
दावा है कि इन हमलों का मकसद टीटीपी चीफ नूर वली मेहसूद को खत्म करना था, जिसे वह अपनी धरती पर आतंकवादी गतिविधियों का जिम्मेदार मानता है. तालिबान के रक्षा मंत्रालय ने इन हमलों की निंदा करते हुए इसे युद्ध की शुरुआत बताया, जिसने दोनों देशों के बीच पहले से ही तनावपूर्ण रिश्तों को और गहरा कर दिया. वहीं पाकिस्तान ने इन हमलों की सीधे तौर पर जिम्मेदारी नहीं ली है.
तालिबान ने जारी की चेतावनी
अफगान तालिबान ने इन हमलों के बाद सख्त चेतावनी जारी की है. तालिबान सरकार ने एक बयान में कहा, “शहर में हमारी कार्रवाई रात 12 बजे समाप्त हो गई थी, लेकिन अगर विरोधी पक्ष ने फिर से अफगानिस्तान की क्षेत्रीय सीमा का उल्लंघन किया, तो हमारी सशस्त्र सेनाएं अपने हवाई क्षेत्र की रक्षा के लिए तैयार हैं और इसका कड़ा जवाब देंगी.”
सीमा पर तनाव का असर स्थानीय आबादी पर भी पड़ रहा है. कुर्रम, बाजौर और नॉर्थ वजीरिस्तान के गांवों में लोग रातों की नींद खो चुके हैं. गोलियों और गोले की आवाजें बच्चों और बुजुर्गों के मन में खौफ पैदा कर रही हैं. कई परिवारों ने अपने घरों को छोड़ दिया है.
लोग पलायन करने को मजबूर
पाकिस्तान के कुर्रम जिले के गावी क्षेत्र में दोनों देशों की सेनाओं के बीच भारी गोलीबारी की खबरें सामने आईं. स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह झड़प छोटे हथियारों से शुरू हुई, लेकिन जल्द ही तोपखाने और भारी हथियारों तक पहुंच गई. बाजौर (146 विंग), कुर्रम (155 विंग), 41 हॉर्स रेजिमेंट, 148 एडी नॉर्थ वजीरिस्तान और लोअर कुर्रम के शहीदन दांड क्षेत्र में भी गोलीबारी की खबरें हैं.
दोनों पक्षों की सैन्य चौकियां हाई अलर्ट पर हैं और सीमावर्ती क्षेत्रों में रुक-रुक कर गोले दागे गए. पक्तिया प्रांत के आरयूब जाजी जिले में सुबह से ही अफगान सीमा बलों और पाकिस्तानी सैनिकों के बीच झड़पें जारी थीं. स्थानीय लोगों ने बताया कि सीमावर्ती गांवों में डर और अशांति का माहौल है. कई परिवार अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं.
भारत दौरे पर हैं तालिबानी विदेश मंत्री
पाकिस्तान ने अफगानी क्षेत्रों में ये हवाई हमले ऐसे समय में किए, जब तालिबान शासन के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी 8 दिवसीय भारत यात्रा पर आए हैं. पत्रकारों द्वारा पाकिस्तान के इस हवाई हमले के बारे में पूछे जानें पर तालिबान शासन के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी ने कहा, ‘अफगानों के साहस की परीक्षा नहीं ली जानी चाहिए. हम भारत और पाकिस्तान दोनों के साथ बेहतर संबंध चाहते हैं, लेकिन यह एकतरफा नहीं हो सकता. अगर कोई अफगानों के साहस की परीक्षा लेना चाहता है, तो उसे सोवियत संघ, अमेरिका और नाटो से पूछना चाहिए, ताकि वे समझा सकें कि अफगानिस्तान के साथ ये खेल खेलना ठीक नहीं है.’
हमास ने डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्तावों को बताया बेतुका
12 Oct, 2025 09:02 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इज़रायल. फ़िलिस्तीनी संगठन हमास (Hamas) मिस्र में प्रस्तावित गाजा शांति समझौते (Gaza peace deal) के आधिकारिक हस्ताक्षर (signing ) कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लेगा. संगठन ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की योजना के कुछ हिस्सों पर उनके मतभेद हैं, जिससे लंबे समय से प्रतीक्षित समझौते का भविष्य अधर में लटक गया है. समाचार एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, हमास नेताओं ने ट्रंप के उस सुझाव को बेतुका बताया, जिसमें कहा गया था कि शांति योजना के तहत हमास के सदस्य गाज़ा पट्टी छोड़ दें.
राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य होसम बदरान ने संवाददाताओं से कहा कि फ़िलिस्तीनियों को, चाहे वे हमास के सदस्य हों या न हों, उनकी ज़मीन से निकालने की बात पूरी तरह बेतुकी और बकवास है. उन्होंने यह भी कहा कि योजना के दूसरे चरण पर बातचीत मुश्किल होगी, क्योंकि इसमें कई जटिलताएं और कठिनाइयां हैं.
ये टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अगले दो दिनों में होने वाली मिडिल ईस्ट यात्रा से पहले आई है. लेकिन हमास के एक वरिष्ठ अधिकारी ने संकेत दिया कि अभी भी कई राजनीतिक बाधाएं हैं, उन्होंने कहा कि हमास का हथियार डालना योजना की एक प्रमुख शर्त है, जो कि संभव नहीं है, भले ही हमास गाजा की सरकार से अलग हो जाए.
वहीं, टाइम्स ऑफ़ इज़रायल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि हमास नेताओं ने इस योजना के तहत अपने सदस्यों के गाज़ा पट्टी छोड़ने की बात को बेतुका बताते हुए खारिज कर दिया है.
बता दें कि ट्रंप के प्रस्तावित समझौते का एक हिस्सा शुक्रवार को लागू हुआ था, जब इज़रायल ने युद्धविराम पर सहमति जताई और गाजा के कुछ हिस्सों से अपनी सेना वापस बुला ली. इससे विस्थापित परिवार, जिनके घर इज़रायली बमबारी से तबाह हुए थे, वो वापस लौटने लगे. युद्धविराम लागू होते ही शनिवार को हज़ारों फ़िलिस्तीनी पैदल, कार और अन्य वाहनों से गाजा के तट के साथ उत्तर की ओर बढ़े. बता दें कि इजरायल और हमास जंग में हज़ारों लोग मारे गए और क्षेत्र का अधिकांश हिस्सा बर्बाद हो गया.
चीन में लगा दुनिया का सबसे बड़ा ट्रैफिक जाम, 36 लेन वाले टोल स्टेशन पर 1.2 लाख वाहन फंसे
12 Oct, 2025 08:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
डेस्क: चीन (China) में दुनिया का सबसे बड़ा ट्रैफिक जाम (Traffic Jam) देखने को मिला है. यह महाजाम अनहुई प्रांत के वुझुआंग टोल स्टेशन (Wuzhuang Toll Station) पर तब लगा, जब लाखों लोग नेशनल डे (National Day) और मध्य-शरद उत्सव (Mid-Autumn Festival) की आठ दिनों की छुट्टियों (Holidays) के बाद अपने घरों की ओर लौट रहे थे. सोमवार (6 अक्टूबर 2025) को हुए इस जाम में हजारों गाड़ियां घंटों तक फंसी रहीं. ड्रोन से लिए गए फुटेज में 36 लेन वाले विशाल वुझुआंग टोल स्टेशन पर लाल टेल लाइट्स की लंबी कतारें एक अद्भुत लेकिन परेशान करने वाला नजारा पेश कर रही थीं.
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में वुझुआंग टोल स्टेशन पूरी तरह लाल रोशनी से चमकता दिखा, जहां हजारों गाड़ियां अपनी बारी का इंतजार करती नजर आईं. रिपोर्ट्स के अनुसार, इस टोल स्टेशन से उस दिन लगभग 1,20,000 वाहनों का आवागमन हुआ. हालांकि टोल प्लाजा में 36 लेन हैं, लेकिन इतने बड़े यातायात के कारण सैकड़ों वाहन कई किलोमीटर लंबी लाइन में फंस गए. ड्रोन फुटेज में दिखा कि किस तरह कई गाड़ियां अलग-अलग लेन से आकर चार मुख्य लेन में सिमटते हुए आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे. इस नजारें को रेड सी ऑफ लाइट्स (लाल रोशनी का समुद्र) नाम दे दिया गया.
मध्य-शरद उत्सव चीन का एक पारिवारिक त्योहार है, जिसे लोग अपने परिजनों के साथ मनाने के लिए घर लौटते हैं. इस वर्ष यह त्योहार राष्ट्रीय दिवस की छुट्टियों के साथ पड़ गया, जिससे देशभर में आठ दिन का लंबा अवकाश (1 से 8 अक्टूबर) मिल गया. चीन के संस्कृति और पर्यटन मंत्रालय के मुताबिक, इस अवधि में 88.8 करोड़ लोगों ने सफर किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 16% अधिक थीं. 2024 में समान अवधि के दौरान 76.5 करोड़ लोग घूमने निकले थे. इतनी बड़ी संख्या में लोग एक साथ सड़कों पर निकल पड़े, जिससे हाईवे और टोल स्टेशन पर भयानक जाम लग गया.
मुत्ताकी की यात्रा से बौखलाया पाकिस्तान बोला- तालिबान को भुगतना पड़ेगा अंजाम
11 Oct, 2025 11:41 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी की भारत यात्रा से पाकिस्तान बौखला गया है। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अफगानिस्तान को धमकी देते हुए कहा कि अंजाम भुगताने के लिए तैयार रहना चाहिए, जहां तक भारत का सवाल है तो भारत अफगानिस्तान के रास्ते बदला लेना चाहता है। आसिफ ने जो बयान दिया उससे साफ है कि पाकिस्तान अफगान तालिबान के विदेश मंत्री की भारत यात्रा से परेशान हो गया है। ख्वाजा आसिफ ने कहा कि भारत अब शायद अफगानिस्तान के रास्ते बदला लेने की कोशिश कर रहा है।
उन्होंने बिना सबूत के आरोप लगाते हुए कहा कि, अफगान मिट्टी से पाकिस्तान पर हो रहे हमले भारत के इशारे पर हो रहे हैं, और इनके मददगार भी भारतीय हैं। उन्होंने धमकी भरे लहजे में कहा कि अगर भारत पाकिस्तान से बदला काबुल के जरिए लेने की कोशिश करेगा, तो न सिर्फ भारत बल्कि अफगानिस्तान को भी इसके नतीजे भुगतने पड़ेंगे। ख्वाजा आसिफ ने बताया कि उन्होंने अफगान सरकार को समझाने की कोशिश की कि वह आतंकवादियों के पनाहगाह न बनने दे। उन्होंने आगे दावा किया, अफगान सरकार ने कहा कि अगर पाकिस्तान उन्हें पर्याप्त पैसा दे, तो वे उन्हें कहीं और बसा देंगे, लेकिन हमें डर था कि वे पैसा ले लेंगे और आतंकवादी वापस लौट आएंगे।
रक्षा मंत्री आसिफ ने यह भी कहा कि प्रतिबंधित आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के साथ हिसाब चुकता होगा। सबसे बड़ा खुलासा उन्होंने पूर्व नेताओं पर किया। आसिफ ने इमरान खान और पूर्व आईएसआई चीफ जनरल फैज हमीद पर सारा दोष मढ़ दिया। उनके मुताबिक, खान और फैज ने खैबर पख्तूनख्वा में 4,000-5,000 टीटीपी लड़ाकों को बसाया, जिससे पाकिस्तान में आतंकवाद फिर से जिंदा हो गया। आसिफ ने बताया कि जनरल फैज ने तालिबान को बुलेटप्रूफ वाहन गिफ्ट किया था। उनके बयान दिखाते हैं कि पाकिस्तान के अंदर भी विवाद है।
आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन अफगानिस्तान गारंटी नहीं दे रहा। वहां प्रतिबंधित तालिबान लीडर को बुलेटप्रूफ गाड़ी दी जा रही है, आतंकियों को नई जगहें बसाने में मदद हो रही है। उन्होंने कहा कि अफगान सरकार आतंकियों पर कार्रवाई न करने के लिए मजबूर नहीं है। वहीं उन्हें यह भी बुरा लगा कि अफगान विदेश मंत्री भारत में बैठकर पाकिस्तान को चेतावनी दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि अफगान विदेश मंत्री दिल्ली में बैठकर बयान दे रहें है। क्या अब हमारी मीटिंग भारत की इजाजत से होगी? दरअसल गुरुवार-शुक्रवार की रात पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में एयर स्ट्राइक की थी। इसके बाद शुक्रवार को भारत की धरती से तालिबानी मंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा था कि पाकिस्तान ‘खेल खेलना बंद करे।’
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