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ड्यूटी के दौरान लापरवाही भारी पड़ी, दो होमगार्ड जवानों की नौकरी गई
16 Mar, 2026 03:46 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
फतेहाबाद। शहर के गुरुनानकपुरा मोहल्ले में रविवार रात को एक युवक की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। हमलावरों ने होमगार्ड जवानों के सामने वारदात को अंजाम दिया। वीडियो सामने आने के बाद एसपी ने होमगार्ड मुकेश और होशियार को बर्खास्त कर दिया है। दोनों जवान घटना के वक्त मूकदर्शक बने रहे और उन्होंने युवक को बचाने का प्रयास नहीं किया। ऐसे में एसपी ने दोनों होमगार्ड जवानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। बता दें कि रविवार रात को गुरुनानकपुरा निवासी संदीप उर्फ दीपा पर कुछ युवकों ने अचानक हमला कर दिया। हमलावरों ने उस पर कई बार चाकू से वार किए और मौके से फरार हो गए थे। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए नागरिक अस्पताल भिजवा दिया।प्रारंभिक जांच में हत्या का कारण आपसी रंजिश माना जा रहा है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है और हमलावरों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।
खंडहर में मिला युवक का शव, हत्या की वारदात से हड़कंप
16 Mar, 2026 03:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पानीपत। में एक युवक की हत्या का मामला सामने आया है। आरोपियों ने युवक को पहले घर से बुलाया और फिर बर्फ तोड़ने वाले सुए से उस पर हमला कर दिया। इस हमले में युवक की हत्या हो गई। मृतक की पहचान विशाल उम्र 21 साल के तौर पर हुई है। युवक का शव सोमवार को 13-17 थाना क्षेत्र में जीटी रोड पर एक खंडहर में मिला। विजय नगर कॉलोनी के रामबीर ने बताया कि उनका भतीजा विशाल मजदूरी करता था। रविवार सुबह 8 बजे वह घर से निकला था। शाम को एक युवक ने घर आकर बताया कि विशाल की हत्या कर दी गई है। जिसके बाद परिजनों ने तुरंत प्रभाव से इसकी सूचना पुलिस को दी। रात भर पुलिस विशाल की तलाश करती रही। सोमवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे एक खंडहर में विशाल का शव मिला। परिजनों ने बताया कि बर्फ तोड़ने वाले सुए से हमला कर विशाल की हत्या की गई है। युवक की गर्दन, छाती और पांव में 10 से 12 वार किए गए हैं। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।
हरियाणा राज्यसभा चुनाव में इनेलो का बड़ा फैसला, मतदान से दूरी
16 Mar, 2026 03:35 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। हरियाणा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए सुबह नौ बजे से मतदान शुरू हो गया है। सीएम नायब सिंह सैनी ने अपना वोट डाल दिया है। 11:20 बजे तक राज्यसभा चुनाव के लिए 25 वोट डाले गए हैं।मंत्री अनिल विज पैरों में फ्रेक्चर के कारण व्हीलचेयर पर वोट डालने पहुंचे। कांग्रेस विधायक विनेश फोगाट सांसद दीपेन्द्र सिंह हुड्डा और सतपाल ब्रह्मचारी के साथ विधानसभा पहुंची हैं। कांग्रेस के चार सांसद लगातार विधानसभा परिसर के बाहर डटे हुए हैं। विधायकों को साथ लेकर वोट डलवा रहे हैं।
इनेलो विधायक नहीं करेंगे मतदान
वहीं इनेलो ने राज्यसभा चुनाव में वोट न करने का निर्णय लिया है। अभय चौटाला ने बताया कि उनके दोनों विधायक वोट नहीं करेंगे।कुल तीन उम्मीदवार भाजपा से संजय भाटिया, कांग्रेस से कर्मवीर बौद्ध और भाजपा समर्थित निर्दलीय सतीश नांदल मैदान में हैं। भाटिया की जीत तय मानी जा रही है। मुख्य मुकाबला बौद्ध और नांदल में है। कांग्रेस के एकमुश्त 37 वोट बौद्ध को मिले तो उनका जीतना भी पक्का है। हालांकि क्रॉस वोटिंग होने पर उनकी राह मुश्किल हो सकती है।
कांग्रेस विधायक कसाैली से रवाना
हरियाणा कांग्रेस के 31 विधायक कसाैली से चंडीगढ़ के लिए निकल गए हैं। साथ में प्रभारी बीके हरिप्रसाद, प्रदेशाध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह, सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा भी हैं। सबसे पहले सभी विधायक नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सेक्टर 7 स्थित कोठी पर पहुंचेंगे। वहां ब्रेकफास्ट करने के बाद सभी विधायक राज्यसभा चुनाव में मतदान करने जाएंगे। मतदान केंद्र पर एआईसीसी की तरफ से नियुक्त पर्यवेक्षक भूपेंद्र सिंह हुड्डा और प्रभारी बीके हरिप्रसाद सभी विधायकों के मत पत्र की जांच करेंगे। कांग्रेस के 37 विधायक हैं, इनमें छह विधायक अपने निजी कारणों से हिमाचल नहीं गए थे।
पक्ष-विपक्ष के लिए प्रतिष्ठा का सवाल
राज्यसभा चुनाव सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए यह प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। भाजपा के सामने चुनाव में इतिहास दोहराने का अवसर है। पार्टी पहले भी दोनों सीटों पर कब्जा बनाए हुए थी और इस बार भी राजनीतिक रणनीति के दम पर जीतने की तैयारी कर रही है। भाजपा का लक्ष्य केवल जीत हासिल करना ही नहीं है बल्कि यह दिखाना भी है कि विधानसभा चुनाव के बाद भी उसकी रणनीति न सिर्फ मजबूत बनी हुई है बल्कि विपक्ष के विधायकों पर भी उसकी पकड़ मजबूत है।दूसरी ओर कांग्रेस ने क्रॉस वोटिंग की आशंका को देखते हुए अपने विधायकों को हिमाचल प्रदेश में रखा हुआ था ताकि वे एक साथ मतदान के लिए पहुंचे। कांग्रेस ने ऐसी किलेबंदी तैयार की है कि कोई भी विधायक सत्ता पक्ष के संपर्क में ना आ सके। कांग्रेस हाईकमान भी चुनाव के लिए पूरी तरह से सतर्क है और नजर बनाए हुए है।
हुड्डा की प्रतिष्ठा
कर्मवीर जीतते हैं तो संदेश जाएगा कि कांग्रेस विधायकों पर हुड्डा की पकड़ मजबूत है। वे अपने नेतृत्व और संगठनात्मक प्रभाव को साबित कर सकेंगे।चुनाव हारते हैं तो विपक्ष और पार्टी के अंदर चर्चा तेज हो सकती है कि विधायकों पर हुड्डा का नियंत्रण कमजोर हुआ है।रोहतक को हुड्डा का राजनीतिक गढ़ माना जाता है। नांदल भी रोहतक से हैं और जाट बिरादरी से हैं। नांदल के चुनाव जीतने पर इसे हुड्डा के गढ़ में भाजपा की सेंध के रूप में देखा जाएगा।
सैनी की भी परीक्षा
मुख्यमंत्री बनने के बाद नायब सिंह सैनी की यह पहली बड़ी राजनीतिक परीक्षा है। दोनों सीटों जीतने पर राजनीतिक पकड़ और रणनीतिक क्षमता मजबूत मानी जाएगी।जीत मिलने पर पार्टी हाईकमान के सामने उनका कद और प्रभाव बढ़ सकता है।
विधानसभा में वोटों का गणित
कुल विधायक : 90
भाजपा : 48 विधायक
कांग्रेस : 37 विधायक
इनेलो : 2 विधायक
निर्दलीय विधायक : 3
जीत का गणित
एक उम्मीदवार को जीतने के लिए 31 वोट चाहिए। भाजपा अपने 48 वोट के दम पर एक सीट आसानी से जीत सकती है। कांग्रेस के पास 37 वोट हैं इसलिए वह भी एक सीट जीतने की स्थिति में है। भाजपा के बचे 17 विधायक और तीन निर्दलीय वोट भी नांदल को वोट देंगे। यदि इनेलो के दो वोट भी नांदल को जाते हैं तो उन्हें 9 वोट और चाहिए होंगे। इन नौ वोटों को लेकर पूरा चुनाव दिलचस्प बना हुआ है।
क्या अंतरिक्ष में गर्भधारण और बच्चे का जन्म सुरक्षित है?...........क्या कहता हैं विज्ञान
16 Mar, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन । जैसे-जैसे इंसान मंगल और चंद्रमा पर बस्तियां बसाने की योजना तैयार कर रहा है, एक बड़ा सवाल वैज्ञानिकों के सामने खड़ा है कि क्या अंतरिक्ष में गर्भधारण और बच्चे का जन्म सुरक्षित है? अब तक की रिसर्च में सामने आया हैं कि ये तकनीकी रूप से यह संभव है, लेकिन बिना पृथ्वी के सुरक्षा कवच (गुरुत्वाकर्षण और वायुमंडल) के, एक नए जीवन का विकास किसी बड़े खतरे से कम नहीं होगा।
पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण हमारे शरीर की हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूती देने में प्राथमिक भूमिका निभाता है। अंतरिक्ष की माइक्रोग्रैविटी में भ्रूण के विकास के दौरान उसकी हड्डियों के घनत्व में भारी कमी आ सकती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि जीरो ग्रेविटी के कारण बच्चे का ऊपरी शरीर विकसित हो सकता है, लेकिन निचले हिस्से और पैरों की मांसपेशियां बेहद कमजोर हो सकती हैं।
अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण की कमी के कारण शरीर के तरल पदार्थ सिर की ओर शिफ्ट हो सकते हैं। इससे गर्भ में पल रहे शिशु की खोपड़ी के अंदर दबाव बढ़ सकता है। यह असामान्य दबाव बच्चे के मस्तिष्क विकास और आंखों की रोशनी को प्रभावित कर सकता है, जिससे भविष्य में न्यूरोलॉजिकल समस्याएं पैदा होने का खतरा रहता है।
इतना ही नहीं अंतरिक्ष खतरनाक कॉस्मिक रेडिएशन से भरा है, जिससे पृथ्वी का वायुमंडल हमें बचाता है। भ्रूण के सेल्स बहुत तेजी से विभाजित होते हैं, जिससे वे रेडिएशन के प्रति अत्यंत संवेदनशील होते हैं। रेडिएशन डीएनए को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके चलते जन्म दोष, मिसकैरेज या समय से पहले जन्म जैसी स्थितियां बन सकती हैं।
इतना ही नहीं स्पेस में बच्चे को जन्म देना किसी मेडिकल चुनौती से कम नहीं होगा। बिना गुरुत्वाकर्षण के लेबर पेन के दौरान पुश करना और शरीर के फ्लूइड्स को नियंत्रित करना मां और डॉक्टरों के लिए करीब असंभव होगा। इसके अलावा, जो बच्चा अंतरिक्ष में बड़ा होगा, उसके लिए बाद में पृथ्वी के भारी गुरुत्वाकर्षण में खुद को ढालना एक बड़ी शारीरिक चुनौती होगी।
किम जोंग ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया को चेताते हुए किया मल्टी-रॉकेट टेस्ट का निरीक्षण
16 Mar, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्योंगयांग। उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन ने एक बार फिर अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन करते हुए अपनी बेटी के साथ एक शक्तिशाली मल्टी-रॉकेट लॉन्चर परीक्षण का निरीक्षण किया है। सरकारी मीडिया द्वारा रविवार को दी गई जानकारी के अनुसार, किम जोंग उन ने शनिवार को देश के पूर्वी तट पर 12 अति-सटीक 600 मिमी कैलिबर के रॉकेट प्रक्षेपकों के परीक्षण की निगरानी की। इस कदम को अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच चल रहे वार्षिक फ्रीडम शील्ड सैन्य अभ्यास के कड़े जवाब के रूप में देखा जा रहा है।
उत्तर कोरिया ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि वह इन संयुक्त सैन्य अभ्यासों का मुंहतोड़ जवाब देगा, जिन्हें वह अपने ऊपर आक्रमण की तैयारी और उकसावे के रूप में देखता है। परीक्षण के दौरान किम जोंग उन ने स्पष्ट किया कि यह अभ्यास उनके दुश्मनों को बेचैन करने के लिए पर्याप्त है। उन्होंने कहा कि इन हथियारों की मारक क्षमता के दायरे में आने वाला प्रतिद्वंद्वी का कोई भी सैन्य बुनियादी ढांचा बच नहीं पाएगा। किम ने यह भी रेखांकित किया कि इस परीक्षण के माध्यम से दुनिया उनके सामरिक परमाणु हथियार की विनाशकारी शक्ति को बेहतर ढंग से समझ सकेगी।
दक्षिण कोरियाई सेना के अनुसार, शनिवार को उत्तर कोरिया की ओर से पूर्वी सागर में लगभग 10 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। दक्षिण कोरिया की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने इस कृत्य की कड़ी निंदा की है। परिषद ने इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के उन प्रस्तावों का सीधा उल्लंघन बताया है जो उत्तर कोरिया की किसी भी प्रकार की बैलिस्टिक गतिविधियों पर रोक लगाते हैं। जानकारों का मानना है कि 420 किलोमीटर की मारक क्षमता वाले इन रॉकेट्स का मुख्य निशाना दक्षिण कोरिया और वहां तैनात अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं।
इस सैन्य निरीक्षण के दौरान किम जोंग उन की बेटी, किम जू ऐ भी उनके साथ नजर आईं। तस्वीरों में पिता-पुत्री विशाल जैतूनी-हरे रंग के लॉन्चिंग ट्रकों के पास चलते हुए और हथियारों के प्रक्षेपण का अवलोकन करते हुए दिखाई दे रहे हैं। लगभग 13 वर्षीय किम जू ऐ 2022 के अंत से ही प्रमुख सैन्य परेडों और हथियार परीक्षणों में अपने पिता के साथ सक्रिय रूप से दिखाई दे रही हैं। दक्षिण कोरियाई खुफिया एजेंसियों का अनुमान है कि किम जोंग उन अपनी बेटी को अपने उत्तराधिकारी के रूप में तैयार कर रहे हैं। गौरतलब है कि किम जोंग उन ने हाल ही में अमेरिका को सीधी धमकी देते हुए कहा था कि यदि दक्षिण कोरिया के साथ मिलकर कोई भी सैन्य कार्रवाई की गई, तो उसका परिणाम बेहद विनाशकारी होगा।
तालिबान के सुप्रीम लीडर अखुंदजादा को निशाना बनाकर पाकिस्तान ने की घातक एयरस्ट्राइक
16 Mar, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काबुल। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच जारी सीमा विवाद अब एक खतरनाक और निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। हालिया सुरक्षा रिपोर्टों और सूत्रों के हवाले से एक चौंकाने वाला दावा सामने आया है कि पाकिस्तान वायुसेना ने कंधार के कैंप गेको में एक बेहद सटीक और बड़ा हवाई हमला किया है। इस हमले का मुख्य उद्देश्य अफगान तालिबान के सर्वोच्च नेता हैबतुल्लाह अखुंदजादा को निशाना बनाना था। यदि यह दावा पूरी तरह पुष्ट होता है, तो इसे केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की भू-राजनीति को हिला देने वाली घटना माना जाएगा।
यह भीषण हमला शुक्रवार तड़के उस समय किया गया, जब खुफिया सूचनाओं के आधार पर यह संकेत मिले थे कि हैबतुल्लाह अखुंदजादा पिछले कुछ हफ्तों से कैंप गेको के एक अत्यंत सुरक्षित परिसर में ठहरे हुए हैं। जमीनी स्तर से आ रही शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, इस एयरस्ट्राइक में कम से कम 22 लोगों के मारे जाने और 50 से अधिक के घायल होने की सूचना है। कंधार, जिसे तालिबान नेतृत्व का आध्यात्मिक और संचालन केंद्र माना जाता है, पिछले 48 घंटों से भारी तनाव और सुरक्षा घेरे में है। इस हमले की तुलना उन चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय अभियानों से की जा रही है, जिनमें किसी देश ने सीधे तौर पर दूसरे देश के शीर्ष नेतृत्व को खत्म करने की कोशिश की हो।
हालांकि, सबसे बड़ा सवाल अभी भी अखुंदजादा की स्थिति को लेकर बना हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, हवाई हमले ने कैंप गेको की बाहरी सुरक्षा परतों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है, लेकिन तालिबान के सुप्रीम लीडर की वर्तमान स्थिति अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि हैबतुल्लाह अखुंदजादा एक अत्यंत गुप्त और बहुस्तरीय सुरक्षा घेरे में रहते हैं। रिपोर्टों में यह भी उल्लेख है कि उनके लिए विशेष रूप से जमीन के नीचे ऐसे बंकरों का निर्माण किया गया है, जो भारी हवाई हमलों को सहने में सक्षम हैं। यही कारण है कि ऊपरी इमारतों के तबाह होने के बावजूद उनके बचने की संभावना बनी हुई है। मारे गए 22 लोगों के बारे में माना जा रहा है कि वे तालिबान के उस विशिष्ट आंतरिक सुरक्षा दस्ते का हिस्सा थे, जो सुप्रीम लीडर के सबसे करीबी रक्षा कवच के रूप में तैनात रहते हैं। यह तथ्य इस बात की पुष्टि करता है कि पाकिस्तान की यह कार्रवाई केवल एक संदेश देने के लिए नहीं, बल्कि सीधे तौर पर नेतृत्व को खत्म करने के लिए की गई थी। इस स्ट्राइक को हाल के वर्षों में पाकिस्तान की ओर से की गई अब तक की सबसे घातक और सीधी सैन्य कार्रवाई बताया जा रहा है। आने वाले दिनों में इस घटना के प्रतिशोध में तालिबान की प्रतिक्रिया पूरे क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति तय करेगी।
मनकामना मंदिर से लौट रहे भारतीय श्रद्धालुओं की बस गहरी खाई में गिरी, 7 की मौत
16 Mar, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काठमांडू,। नेपाल के पहाड़ी रास्तों पर एक बार फिर रफ्तार का कहर देखने को मिला है। शनिवार शाम गोरखा जिले में हुए एक भीषण सड़क हादसे में कम से कम सात भारतीय श्रद्धालुओं की मौत हो गई। यह दुखद घटना उस समय हुई जब श्रद्धालु प्रसिद्ध मनकामना मंदिर में दर्शन कर वापस लौट रहे थे। स्थानीय पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, श्रद्धालुओं को ले जा रही एक इलेक्ट्रिक माइक्रोबस साहिद लखन ग्रामीण नगरपालिका के कंतार क्षेत्र में अनियंत्रित होकर सड़क से फिसल गई और गहरी खाई में जा गिरी।
गोरखा जिला पुलिस कार्यालय के उप पुलिस अधीक्षक राज कुमार श्रेष्ठ ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि इस हादसे में सात अन्य श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल हुए हैं। बचाव दल ने स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को खाई से बाहर निकाला, जिन्हें तत्काल उपचार के लिए चितवन जिले के भरतपुर स्थित चितवन मेडिकल कॉलेज भेजा गया है। अधिकारियों के मुताबिक, माइक्रोबस में एक दर्जन से अधिक यात्री सवार थे, जिसके चलते हताहतों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई थी। गोरखा के मुख्य जिला अधिकारी तुलसी बहादुर श्रेष्ठ ने बताया कि वाहन मनकामना मंदिर से पश्चिम की ओर तनहूं जिले के अनबुखैरेनी क्षेत्र की ओर जा रहा था। हालांकि, यात्रियों के गंतव्य को लेकर अभी पूरी जानकारी स्पष्ट नहीं हो पाई है।पुलिस अभी हादसे के सटीक कारणों की जांच कर रही है, लेकिन प्राथमिक दृष्टि में पहाड़ी सड़क के तीखे मोड़ पर चालक का नियंत्रण खोना दुर्घटना की वजह माना जा रहा है। गौरतलब है कि नेपाल के इस क्षेत्र में भारतीय तीर्थयात्रियों के साथ होने वाला यह पहला बड़ा हादसा नहीं है। इससे पहले अगस्त 2024 में भी अनबुखैरेनी के पास एक बस दुर्घटना में 27 भारतीय श्रद्धालुओं ने अपनी जान गंवाई थी।
हाल के वर्षों में नेपाल में सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों में चिंताजनक वृद्धि देखी गई है। नेपाल ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में हादसों की संख्या 4,999 से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 7,669 तक पहुंच गई है। विश्व बैंक की एक रिपोर्ट बताती है कि इन दुर्घटनाओं से होने वाला आर्थिक नुकसान नेपाल के कुल सकल राष्ट्रीय उत्पाद (जीएनपी) का लगभग 1.5 प्रतिशत तक पहुंच गया है। उबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्ते, वाहनों की खराब स्थिति और सुरक्षा मानकों की कमी नेपाल में संवेदनशील सड़क उपयोगकर्ताओं और विदेशी पर्यटकों के लिए बड़ा खतरा बनी हुई है।
अमेरिकी सेना ने खर्ग द्वीप को मिट्टी में मिला दिया, अब मजे के लिए करेंगे हमले: ट्रंप
16 Mar, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। मध्य पूर्व में जारी भारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सबसे अहम तेल हब, खर्ग द्वीप पर बड़े हमलों की पुष्टि की है। शनिवार को दिए एक इंटरव्यू और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने द्वीप पर मौजूद ईरान के 100फीसदी सैन्य ठिकानों को मिट्टी में मिला दिया है। ट्रंप ने कहा कि हालांकि ईरान अब संघर्ष को खत्म करने के लिए समझौते की मेज पर आता दिख रहा है, लेकिन अभी शर्तें अमेरिका के पक्ष में पर्याप्त नहीं हैं। ट्रंप ने बेबाक अंदाज में कहा कि हमने खर्ग द्वीप का ज्यादातर हिस्सा तबाह कर दिया है और हम मजे के लिए इस पर कई बार हमला कर सकते हैं।
मडिया रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने अपने ट्रूथ सोशल पर जानकारी दी कि ईरान की सैन्य क्षमता अब लगभग खत्म हो चुकी है, लेकिन वह अभी भी समुद्री जलमार्ग में खदानों या छोटे ड्रोनों के जरिए बाधा डाल सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और अन्य मित्र देश होर्मुज में युद्धपोत तैनात करेंगे। ब्रिटेन, फ्रांस, जापान भी इस मार्ग को सुरक्षित रखने के लिए अमेरिका का साथ देंगे। लक्ष्य यह है कि वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री परिवहन बिना किसी डर के जारी रह सके।
ईरान ने अमेरिका-इजराइल हमलों का बदला लेने की कसम खाई है। इसी कड़ी में ईरानी सरकारी मीडिया ने संयुक्त अरब अमीरात के तीन बड़े बंदरगाहों को खाली करने का अल्टीमेटम दिया है जिसमें जेबेल अली बंदरगाह, खलीफा बंदरगाह, फुजैरा बंदरगाह शामिल हैं। ईरान का आरोप है कि अमेरिका इन बंदरगाहों का इस्तेमाल उस पर हमले करने के लिए कर रहा है। निवासियों और कामगारों को तुरंत इलाका छोड़ने को कहा है, जिससे क्षेत्र में युद्ध के और फैलने की आशंका है।
युद्ध की विभीषिका अब मानवीय आंकड़ों में सामने आ रही है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने सनसनीखेज दावा किया है कि अमेरिका और इजराइल के हमलों में अब तक 1300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई उच्चाधिकारी भी मारे गए हैं। राजदूत ने आरोप लगाया कि जानबूझकर रिहायशी इलाकों और स्कूलों को निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि, मानवाधिकार संस्था का अनुमान है कि मरने वालों की संख्या 1858 से ज्यादा हो सकती है, जिसमें नागरिक और सैनिक दोनों शामिल हैं।
तेल, गैस के बाद अब भारत की इंटरनेट व्यवस्था को चोट पहुंच सकता हैं मिडिल ईस्ट में जारी तनाव
15 Mar, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ते तनाव के बीच में एक नया खतरा सामने दिख रहा है, जिसका बहुत बड़ा असर भारत पर पड़ सकता है। दरअसल, तनाव का असर दुनिया की इंटरनेट व्यवस्था को भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ इलाके में संघर्ष बढ़ता है, तब उस इलाके के समुद्र के नीचे बिछी फाइबर-ऑप्टिक्स केबल्स को नुकसान पहुंच सकता है। ये वहीं केबल्स हैं, जिससे दुनिया का ज्यादातर इंटरनेट डेटा गुजरता है।
बात दें कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है। इस रास्ते से बड़ी मात्रा में तेल गुजरता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि समुद्र की सतह के नीचे यहां से कई महत्वपूर्ण इंटरनेट केबल्स भी गुजरती हैं। ये केबल्स एशिया, पश्चिम एशिया और यूरोप को डिजिटल रूप से जोड़ती हैं। एक के अनुसार भारत से यूरोप को जोड़ने वाली कई बड़ी केबल्स इसी क्षेत्र से होकर गुजरती हैं। इसलिए यह इलाका भारत के लिए भी डिजिटल कनेक्टिविटी का बेहद अहम कॉरिडोर माना जाता है।
इंटरनेट कनेक्टिविटी को मजबूत बनाने के लिए दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां और टेलीकॉम ऑपरेटर लगातार नए अंडरसी केबल नेटवर्क में निवेश कर रहे हैं। हाल ही में गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने नई दिल्ली की यात्रा के दौरान इंडिया-अमेरिका कनेक्ट प्रोजेक्ट की घोषणा की। इसका मकसद भारत को वैश्विक डिजिटल नेटवर्क से और मजबूत तरीके से जोड़ना है।
रिपोर्ट के मुताबिक भारत का लगभग एक-तिहाई पश्चिम दिशा की इंटरनेट ट्रैफिक इन्हीं केबल्स के जरिए गुजरती है। इसका मतलब अगर इस क्षेत्र में कोई बड़ी रुकावट आती है, तब भारत और यूरोप के बीच डेटा ट्रांसमिशन प्रभावित हो सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क में बैकअप सिस्टम भी मौजूद हैं।
इस पूरे मामले से जुड़े एक जानकार ने कहा, समुद्री केबल्स में रेडंडेंसी होती है। अगर एक केबल कट भी जाए, तब डेटा दूसरे रास्तों से भेजा जा सकता है, लेकिन अगर कई केबल्स एक साथ प्रभावित हो जाएं, तब बाकी रूट्स पर ज्यादा लोड पड़ जाएगा। इसके बाद इंटरनेट की स्पीड स्लो हो सकती है और सर्विस में दिक्कतें आ सकती हैं।
उन्होंने कहा कि इसका असर तुरंत दिखाई नहीं देगा। दुनिया भर में इंटरनेट सर्वर रिजर्व में रखे जाते हैं। भारत के पास भी इसतरह के सिस्टम हैं। इस कारण कम से कम एक हफ्ते तक बड़ा असर देखने को नहीं मिलेगा। इसके अलावा अटलांटिक महासागर से आने वाले केबल्स भी विकल्प के रूप में मौजूद हैं।
एक अन्य जानकार ने कहा कि, अभी तक इंटरनेट कनेक्टिविटी पर कोई असर नहीं पड़ा है, लेकिन अगर केबल्स काट दी गईं या टेलीकॉम और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला हुआ, तब स्थिति गंभीर हो सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक भारत का अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट ट्रैफिक मुख्य रूप से दो बड़े गेटवे से बाहर जाता है। एक मुंबई में और दूसरा चेन्नई में। मुंबई के रास्ते जाने वाला डेटा अरब सागर और खाड़ी क्षेत्र से होकर यूरोप तक पहुंचता है, इसलिए इस इलाके में किसी भी तरह की गड़बड़ी भारत के डिजिटल नेटवर्क को प्रभावित कर सकती है।
साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञ ने बताया कि दुनिया का इंटरनेट सैटेलाइट्स से नहीं बल्कि समुद्र के नीचे बिछी केबल्स से चलता है। उन्होंने कहा, दुनिया के 99 प्रतिशत से ज्यादा डेटा अंडरसी फाइबर-ऑप्टिक केबल्स से गुजरता है। यही डिजिटल अर्थव्यवस्था की असली रीढ़ हैं। साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञ के मुताबिक रेड सी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के आसपास का इलाका आज दुनिया का अहम डिजिटल हाईवे बन चुका है। अगर यहां कोई रुकावट आती है, तब इंटरनेट सर्विसेज़ स्लो हो सकती हैं और ग्लोबल कनेक्टिविटी प्रभावित हो सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि युद्ध की स्थिति में ये केबल्स बेहद असुरक्षित हो जाती हैं। उनके मुताबिक, अब दुनिया एक नए सीबेड इंफ्रास्ट्रक्चर वॉर की तरफ बढ़ रही है। जैसे तेल पाइपलाइन और समुद्री रास्ते रणनीतिक संपत्ति माने जाते हैं, वैसे ही अब इंटरनेट केबल्स भी वैश्विक शक्ति संतुलन का अहम हिस्सा बन गए हैं।
ईरान-अमेरिका युद्ध: 15वें दिन खार्ग द्वीप पर भीषण हमला, ईरान की आर्थिक लाइफलाइन पर संकट
15 Mar, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के 15वें दिन संघर्ष एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुँच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उनके आदेश पर अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण खार्ग आइलैंड पर अब तक की सबसे शक्तिशाली बमबारी की है। यह हमला न केवल सैन्य दृष्टिकोण से, बल्कि ईरान की अर्थव्यवस्था को चोट पहुँचाने के इरादे से किया गया है।खार्ग द्वीप फारस की खाड़ी में स्थित एक छोटा कोरल द्वीप है, जिसे ईरान के तेल निर्यात का नर्व सिस्टम माना जाता है। ईरान के कुल कच्चे तेल के निर्यात का लगभग 80 से 90 प्रतिशत हिस्सा इसी द्वीप के टर्मिनलों से होकर दुनिया भर में जाता है। यही कारण है कि इस द्वीप को तबाह करने का मतलब ईरान की आर्थिक रीढ़ को तोड़ना है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी वायुसेना ने द्वीप पर मौजूद सभी सैन्य ठिकानों को पूरी तरह नष्ट कर दिया है, जिससे तेहरान को भारी रणनीतिक नुकसान हुआ है।
हैरानी की बात यह है कि इस भीषण हमले में फिलहाल तेल के बुनियादी ढांचे को जानबूझकर निशाना नहीं बनाया गया है। राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार, अमेरिका ने संयम दिखाते हुए तेल टर्मिनलों को सुरक्षित रखा है, ताकि वैश्विक तेल बाजार में अचानक हाहाकार न मचे। हालांकि, उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि यदि ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों का रास्ता रोकने की कोशिश जारी रखी, तो यह शालीनता तुरंत खत्म कर दी जाएगी और तेल ठिकानों को भी उड़ा दिया जाएगा।
अमेरिका की यह चाल केवल ईरान ही नहीं, बल्कि चीन की भी बेचैनी बढ़ाने वाली है। चीन, ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है और उसकी ऊर्जा सुरक्षा काफी हद तक खार्ग द्वीप से होने वाली सप्लाई पर निर्भर है। इस द्वीप पर अमेरिकी दबाव का सीधा मतलब है कि बीजिंग की तेल आपूर्ति अब वाशिंगटन की इच्छा पर निर्भर हो सकती है। ट्रंप ने इस संबंध में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी चर्चा की है, जिससे साफ है कि यह युद्ध अब केवल दो देशों के बीच नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति का केंद्र बन चुका है। दूसरी ओर, ईरान ने इस हमले के बाद तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी मीडिया के अनुसार, तेहरान ने धमकी दी है कि यदि उसके ऊर्जा ठिकानों पर हमला जारी रहा, तो वह उन सभी अंतरराष्ट्रीय तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाएगा जिनमें अमेरिकी हिस्सेदारी है। इस बीच, ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में संकेत दिया है कि हॉर्मुज की खाड़ी से गुजरने वाले तेल टैंकरों को बहुत जल्द अमेरिकी नौसेना की सुरक्षा प्रदान की जाएगी। फिलहाल, खार्ग द्वीप पर हुआ यह हमला इस युद्ध के भविष्य की दिशा तय करेगा। यदि तनाव कम नहीं हुआ, तो दुनिया को एक बड़े ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है।
अमेरिका में यू-वीजा हासिल करने 11 भारतीयों ने रची डकैती की साजिश, पकड़ाए
15 Mar, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बोस्टन। अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे 11 भारतीय नागरिकों पर वीजा धोखाधड़ी की साजिश रचने का आरोप है। अमेरिकी सरकारी वकीलों के मुताबिक इन लोगों ने ग्रीन कार्ड हासिल करने के शॉर्टकट के तौर पर सुविधा दुकानों में हथियारों के बल पर डकैती का नाटक रचा था। अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों ने जानबूझकर दुकानों में फर्जी डकैती की योजना बनाई थी। इसका मुख्य उद्देश्य यह था कि स्टोर में काम करने वाले क्लर्क आव्रजन आवेदनों में खुद को अपराध का शिकार बता सकें।
बता दें यह पूरी साजिश यू-वीजा हासिल करने के लिए रची गई थी। यू-वीजा उन प्रवासियों को दिया जाता है जो किसी अपराध के शिकार हुए हों, जिन्होंने मानसिक या शारीरिक शोषण झेला हो और जो पुलिस की जांच में मददगार साबित हुए हों। यह वीजा प्रवासियों को काम करने की अनुमति देता है और 5 से 10 साल के अंदर ग्रीन कार्ड प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त करता है। इस मामले में जिन 11 लोगों पर वीजा धोखाधड़ी की साजिश का आरोप लगा है, उनके नाम हैं-
जितेंद्र कुमार पटेल (39), महेश कुमार पटेल (36), संजय कुमार पटेल (45), दीपिका बेन पटेल (40), रमेशभाई पटेल (52), अमिता बेन पटेल (43), रौनक कुमार पटेल (28), संगीताबेन पटेल (36), मिंकेश पटेल (42), सोनल पटेल (42) और मितुल पटेल (40)। ये सभी मैसाचुसेट्स, केंटकी और ओहियो जैसे अमेरिकी राज्यों में अवैध रूप से रह रहे थे। दीपिकाबेन पटेल को मैसाचुसेट्स के वेमाउथ में अवैध रूप से रहने के कारण वापस भारत डिपोर्ट (निर्वासित) कर दिया गया है।
आरोप पत्र के मुताबिक मार्च 2023 में रामभाई नामक मुख्य साजिशकर्ता और उसके साथियों ने मैसाचुसेट्स और अन्य स्थानों पर कम से कम छह सुविधा/शराब की दुकानों और फास्ट फूड रेस्तरां में फर्जी डकैतियों को अंजाम दिया। इस नाटक में लुटेरा सीसीटीवी कैमरे के सामने बंदूक दिखाकर कैशियर या मालिक को धमकाता था और गल्ले से पैसे लेकर भाग जाता था। लुटेरे के भागने के पांच मिनट या उससे ज्यादा समय बाद, पीड़ित क्लर्क या मालिक जानबूझकर पुलिस को फोन करके अपराध की रिपोर्ट दर्ज कराते थे ताकि मामला असली लगे।
जांच में सामने आया है कि इन पीड़ितों ने इस पूरी योजना में शामिल होने के लिए आयोजक रामभाई को पैसे दिए थे। इसके बदले में, रामभाई ने इस फर्जी डकैती के लिए अपनी दुकानों का इस्तेमाल करने देने के लिए स्टोर मालिकों को पैसे चुकाए थे। रामभाई, डकैती का नाटक करने वाले लुटेरे और उन्हें भगाने वाले ड्राइवर को पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है। वीजा धोखाधड़ी की साजिश के इस आरोप में अधिकतम 5 साल जेल, 3 साल की निगरानी और 2,50,000 अमेरिकी डॉलर के जुर्माने का प्रावधान है।
ट्रंप बोले- होर्मुज पर निर्भर देशों को अमेरिकी मदद से इस मार्ग को खुला रखने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए
15 Mar, 2026 10:18 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान: ईरान ने शनिवार को लोगों से आग्रह किया कि वे मिडिल ईस्ट के सबसे व्यस्त बंदरगाह और संयुक्त अरब अमीरात के दो अन्य बंदरगाहों को खाली कर दें. यह पहली बार था जब उसने खुले तौर पर किसी पड़ोसी देश की गैर-अमेरिकी संपत्तियों को धमकी दी, जबकि अमेरिका और इजराइल के साथ उसका युद्ध तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है. तेहरान ने कहा कि अमेरिका ने बिना कोई सबूत दिए यूएई में मौजूद बंदरगाहों और ठिकानों का इस्तेमाल करके खार्ग द्वीप पर हमले किए. खार्ग द्वीप पर ही ईरान के तेल निर्यात को संभालने वाला मुख्य टर्मिनल स्थित है. उसने लोगों से उन इलाकों को छोड़ने का आग्रह किया, जहाँ उसके अनुसार अमेरिकी सेनाएँ पनाह लिए हुए है. इस युद्ध के दौरान ईरान ने अरब खाड़ी क्षेत्र के अपने पड़ोसी देशों पर सैकड़ों मिसाइलें और ड्रोन दागे. हालांकि, उसका कहना है कि वह केवल अमेरिकी संपत्तियों को निशाना बना रहा है, जबकि हवाई अड्डों और तेल क्षेत्रों जैसी नागरिक संपत्तियों पर भी हमले होने या हमले के प्रयास किए जाने की खबरें सामने आई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि देश ने खार्ग द्वीप पर सैन्य ठिकानों को पूरी तरह तबाह कर दिया है और अगर तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों के गुजरने में दखल देना जारी रखता है, तो तेल का बुनियादी ढांचा अगला निशाना हो सकता है. तेल की कीमतों और आपूर्ति को लेकर दुनिया भर में बढ़ती चिंता के बीच ट्रंप ने शनिवार को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अन्य देश होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला और सुरक्षित रखने के लिए युद्धपोत भेजेंगे. जवाब में ब्रिटेन ने कहा कि वह जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सहयोगियों के साथ कई विकल्पों पर चर्चा कर रहा है. इजराइल ने कहा कि उसकी वायु सेना ने पिछले 24 घंटों में 200 से अधिक लक्ष्यों पर हमले किए जिनमें मिसाइल लॉन्चर, रक्षा प्रणालियां और हथियार बनाने वाले ठिकाने शामिल हैं. इस बीच, लेबनान में मानवीय संकट और गहरा गया. इजराइल द्वारा ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह लड़ाकों के खिलाफ लगातार हमले किए जाने से 800 से ज़्यादा लोग मारे गए और 850,000 लोग बेघर हो गए. एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि अमेरिका 31वीं मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट के 2500 और मरीन तथा एम्फीबियस असॉल्ट शिप यूएसएस ट्रिपोली को मिडिल ईस्ट भेजा जा रहा है. यह इस क्षेत्र में दशकों में युद्धपोतों और विमानों की सेना की सबसे बड़ी तैनाती है.
कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला: एविएशन अथॉरिटी
देश की सिविल एविएशन अथॉरिटी ने बताया कि शनिवार को कई ड्रोन्स ने कुवैत के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हमला किया और उसके रडार सिस्टम को निशाना बनाया, लेकिन इस घटना में किसी को कोई चोट नहीं आई. अथॉरिटी ने कहा, 'कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट को कई ड्रोन्स द्वारा निशाना बनाया गया, जिन्होंने उसके रडार सिस्टम पर हमला किया.' उन्होंने आगे कहा, 'गनीमत रही कि इस घटना में किसी के घायल होने की कोई खबर नहीं है.'
यह युद्ध इस्लाम और मुस्लिमों के खिलाफ है, हम किसी भी घटनाक्रम के लिए तैयार
15 Mar, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रियाद। ईरान और अमेरिका में युद्ध के बीच यमन के हूतियों ने बड़ा ऐलान किया है। यमन के हूती नेता अब्दुल मलिक अल हूती ने इस जंग को इस्लाम और मुस्लिमों के खिलाफ युद्ध बताया है। अब्दुल मलिक ने ऐलान किया कि उनका संगठन ईरान के साथ खड़ा है। उसने कहा कि हम इस इलाके में लड़ाई के किसी भी घटनाक्रम के लिए तैयार हैं। अपने भाषण में मलिक ने चेतावनी दी कि इस लड़ाई के निशाने पर पूरा इलाका है। अब तक हूती विद्रोही इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई से दूर थे लेकिन अब वे तेहरान के साथ आते दिख रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक हूतियों के इस ऐलान से सऊदी की धड़कन तेज हो गई है जो लाल सागर से तेल के निर्यात के लिए तैयारी कर चुका है। अमेरिका के इस हमले में अब तक 1300 से ज्यादा लोग मारे गए हैं और 10 हजार लोग घायल हुए हैं। ईरान लगातार सऊदी अरब से लेकर यूएई तक में लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है। यही नहीं ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया है। इससे सऊदी अरब, कतर, यूएई, ओमान, कुवैत, बहरीन का तेल निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
सऊदी अरब ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के बाद लाल सागर के रास्ते तेल सप्लाई की योजना पर काम तेज कर दिया है लेकिन अब हूतियों के ऐलान से बड़ा खतरा पैदा हो गया है। हूतियों का एक हमला दुनियाभर में तेल की कीमतों में आग लगा सकता है। सऊदी अरब को बहुत पहले ही इस बात का डर था कि ईरान कभी भी होर्मुज से तेल की सप्लाई को रोक सकता है। इसी वजह से उसने 1980 के दशक में अपने रेगिस्तानी इलाके से एक तेल पाइपलाइन को लाल सागर तक बनाया था।
सऊदी कंपनी आरामको के चीफ ने कहा था कि वे अब ईस्ट वेस्ट पाइपलाइन के जरिए तेल की आपूर्ति को तेज करने जा रहे हैं। ईरान के होर्मुज को बंद कर देने की वजह से दुनिया में तेल की सप्लाई में भारी कमी आई है। अगर यह पाइपलाइन पूरी तरह से शुरू हो जाती है तो इससे हर दिन 70 लाख बैरल तेल भेजा जा सकेगा। यह पाइपलाइन सऊदी अरब के अबकैब तेल इलाके से लाल सागर के यान्बू पोर्ट तक जाती है।
मिडिल ईस्ट मामलों के एक्सपर्ट का कहना है कि यही वजह है कि हूती अहम हैं। उन्होंने कहा कि सऊदी के यांबू पोर्ट से एशिया को तेल भेजने के लिए उसे बाब अल मंदेब से गुजरना होगा। यह हूतियों का गढ़ है। यही नहीं इस पूरे में इलाके में हूती कहीं भी ड्रोन हमला करने की ताकत रखते हैं। हूतियों के पास पहले से ही बड़ी मात्रा में ईरानी आत्मघाती ड्रोन हैं। ये ईरानी ड्रोन अभी पूरे मिडिल ईस्ट में तबाही मचाए हुए हैं। लाल सागर में पिछले कुछ महीनों में हूती कई बार इजराइल और अमेरिका के तेल टैंकरों को निशाना बना चुके हैं।
समझौता कर फंसा पाकिस्तान, ईरान के खिलाफ जंग में देगा सऊदी अरब का साथ!
15 Mar, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रियाद। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के बीच सऊदी अरब और पाकिस्तान में तनाव बढ़ गया है। रिपोर्टों से पता चलता है कि सऊदी अरब पाकिस्तान से नाराज है और उसके बुलावे पर पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ जेद्दा पहुंचे। गुरुवार को शहबाज ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से मुलाकात की थी। इसके पहले पिछले सप्ताह पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर भी सऊदी गए थे।
बताया जा रहा है कि इन मुलाकातों से पाकिस्तान और ईरान के रिश्तों के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती हैं, क्योंकि ईरानी हमलों को रोकने के लिए रियाद ने इस्लामाबाद से सक्रिय समर्थन की मांग की है। सऊदी अरब और पाकिस्तान ने पिछले साल एक ऐतिहासिक समझौता किया था, जिसके मुताबिक किसी एक देश पर हमला दूसरे पर हमला माना जाएगा। अमेरिका-इजराइल के हमले के जवाब में ईरान ने सऊदी अरब समेत खाड़ी देशों में लगातार मिसाइल और ड्रोन दाग रहा है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक रियाद का कहना है कि अब यही समय है जब पाकिस्तान को समझौते के तहत ईरानी हमलों को रोकने के लिए सऊदी के साथ देना चाहिए। क्राउन प्रिंस से मुलाकात के बाद पीएम शहबाज के प्रवक्ता मुशर्रफ जैदी ने कहा कि पीएम शहबाजा ने इन मुश्किल समय में सऊदी अरब के प्रति पाकिस्तान की एकजुटता और समर्थन किया। शरीफ ने मुलाकात के दौरान एमबीएस को भरोसा दिलाया कि पाकिस्तान हमेशा सऊदी अरब के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा।
पिछले सप्ताह ही सऊदी रक्षा मंत्री ने पाकिस्तानी फील्ड मार्शल असीम मुनीर से मुलाकात की थी। इस मुलाकात में दोनों पक्षों ने ईरान के हालिया हमलों और अपने संयुक्त रणनीतिक रक्षा समझौते के तहत उनका जवाब देने के तरीकों पर बात की।
अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ बड़ा हमला बोला था, जिसके बाद क्षेत्र में बड़े पैमाने पर युद्ध भड़क गया। शुक्रवार को अमेरिका ने ईरान की आर्थिक रीढ़ कहे जाने वाले खर्ग द्वीप पर हमला किया। ट्रंप ने इस हमले की जानकारी दी। इस बीच अमेरिका ने अतिरिक्त मरीन सैनिकों और युद्धपोतों को तैनात करने का फैसला किया है। अमेरिका पोत यूएसएस त्रिपोली के साथ एक मरीन एम्फीबियस रेडी ग्रुप और 31वीं मरीन अभियान इकाई को क्षेत्र में भेज रहा है। एक अमेरिकी रक्षा अधिकारी के हवाले से बताया कि इस तैनाती में करीब 2,500 मरीन और 2,500 नाविक शामिल होंगे।
मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच उत्तर कोरिया ने किया बैलिस्टिक प्रोजेक्टाइल का परीक्षण
15 Mar, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्योंगयांग। उत्तर कोरिया ने शनिवार को एक संदिग्ध बैलिस्टिक प्रोजेक्टाइल दागकर एक बार फिर क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। यह प्रक्षेपण ऐसे समय हुआ है जब कुछ दिन पहले ही किम जोंग उन ने अपने नए युद्धपोत से क्रूज प्रोजेक्टाइल परीक्षण की निगरानी की थी। इस कदम को एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच एक अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। जापान के कोस्ट गार्ड के मुताबिक दागा गया संदिग्ध बैलिस्टिक प्रोजेक्टाइल समुद्र में गिर गया। जापान के सार्वजनिक प्रसारक ने रक्षा मंत्रालय के एक अज्ञात अधिकारी के हवाले से बताया कि प्रोजेक्टाइल देश के विशेष आर्थिक क्षेत्र के बाहर समुद्री क्षेत्र में गिरी।
यह प्रोजेक्टाइल परीक्षण ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच 9 मार्च से 19 मार्च तक वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यास चल रहा है। उत्तर कोरिया लंबे समय से इन अभ्यासों का विरोध करता रहा है और इन्हें अपने खिलाफ युद्ध की तैयारी बताता है। हाल ही में प्योंगयांग ने अमेरिका से उसे परमाणु शक्ति संपन्न देश के रूप में मान्यता देने की मांग की थी। यह मांग पांच साल में पहली बार आयोजित सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी की कांग्रेस के दौरान उठाई गई थी, जिसमें देश की सुरक्षा और परमाणु नीति पर भी चर्चा हुई थी।
उत्तर कोरिया ने हाल ही में ईरान पर अमेरिका हमले की भी कड़ी आलोचना की है। प्योंगयांग ने इस कार्रवाई को अमेरिका का बेशर्म कदम बताते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी निंदा की।
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