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रक्षा क्षेत्र को मजबूती, शिपयार्ड पुनर्जीवन और उत्पादन वृद्धि पर सरकार का जोर
16 Jul, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने देश के नौसेना निर्माण उद्योग में नई जान फूंकने के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी और बड़े विज़न की घोषणा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार घरेलू स्तर पर जहाजों के उत्पादन को तेज करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए वैश्विक साझेदारों के साथ मिलकर काम किया जाएगा, ताकि पिछले कई दशकों से अमेरिकी नौसैनिक औद्योगिक आधार में आई भारी गिरावट को पूरी तरह से रोका जा सके। राष्ट्रपति ट्रम्प ने जोर देकर कहा कि ठप पड़े शिपयार्डों को फिर से चालू करना और नौसेना के लिए रिकॉर्ड उत्पादन करना अब देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता बन चुका है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी नौसैनिक बेड़े का आधुनिकीकरण करना और सेना की युद्धक तैयारियों को शीर्ष स्तर पर ले जाना है।
ऐतिहासिक फिलाडेल्फिया शिपयार्ड से होगी नए युग की शुरुआत
राष्ट्रपति ट्रम्प ने अमेरिकी नौसेना की वर्तमान स्थिति को रेखांकित करते हुए कहा कि हालांकि अमेरिका के पास दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना है, लेकिन उसके युद्धपोत अब पुराने हो रहे हैं और देश जहाज निर्माण की रेस में पिछड़ गया है। इस स्थिति को बदलने के लिए उन्होंने ऐलान किया कि प्रशासन ऐतिहासिक फिलाडेल्फिया शिपयार्ड में दो नए 'मल्टी-मिशन राष्ट्रीय सुरक्षा जहाजों' का निर्माण शुरू करने जा रहा है। उन्होंने यह रणनीतिक संकेत भी दिया कि जब तक अमेरिका अपनी घरेलू औद्योगिक क्षमता को पूरी तरह से विकसित नहीं कर लेता, तब तक वह अपनी तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिए विदेशी मित्र देशों से भी जहाज खरीदने के लिए तैयार है। ट्रम्प ने अफसोस जताते हुए कहा कि अतीत में अमेरिका रोजाना एक जहाज तैयार करता था, लेकिन बाद में बहुत सारे शिपयार्डों को बंद करके वहां पानी के किनारे रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स बना दिए गए।
दक्षिण कोरियाई तकनीक से अमेरिका में बनेगी मिसाल, शिपयार्ड जीतेंगे जंग
इस महाअभियान में वैश्विक सहयोग की मिसाल पेश करते हुए 'हनवा डिफेंस यूएसए' के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने बताया कि दक्षिण कोरिया में स्थित उनका शिपयार्ड हर हफ्ते लगभग एक अत्याधुनिक जहाज बनाने की क्षमता रखता है और अब उनकी योजना इसी बेजोड़ कार्यक्षमता व तकनीक को फिलाडेल्फिया शिपयार्ड में उतारने की है। उन्होंने एक बेहद प्रभावशाली बात कहते हुए कहा कि जहाज भले ही व्यक्तिगत लड़ाइयां जीतते हों, लेकिन मजबूत शिपयार्ड पूरे युद्ध को जिताने का दम रखते हैं। यह फिलाडेल्फिया शिपयार्ड आने वाले समय में अमेरिकी जहाज निर्माण उद्योग को 'फिर से महान' बनाने का मुख्य केंद्र साबित होगा।
पनडुब्बी कार्यक्रमों के लिए 2.5 अरब डॉलर का भारी-भरकम निवेश
नौसैनिक बेड़े को अत्यधिक आधुनिक बनाने की इस कड़ी में 'जनरल डायनेमिक्स' ने भी अमेरिकी नौसेना के पनडुब्बी कार्यक्रमों को पंख लगाने के लिए रोड्स इंडस्ट्रीज में 2.5 अरब डॉलर के विशाल निवेश का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। इस भारी-भरकम निवेश परियोजना से अकेले पेंसिल्वेनिया राज्य में लगभग 1,500 नए रोजगार के अवसरों का सृजन होने की उम्मीद है। कंपनी के अध्यक्ष ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि यह कदम राज्य की रक्षा आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) को अभूतपूर्व मजबूती देगा। इससे नौसेना की बेहद महत्वपूर्ण 'वर्जीनिया-क्लास' और 'कोलंबिया-क्लास' पनडुब्बियों के उत्पादन की रफ्तार कई गुना बढ़ जाएगी।
गुणवत्ता के साथ रफ्तार बढ़ाने पर जोर, बदलेगा रक्षा परिदृश्य
राष्ट्रपति ट्रम्प ने रक्षा तैयारियों की समीक्षा करते हुए केवल जहाजों पर ही नहीं, बल्कि अत्याधुनिक पनडुब्बियों, मिसाइलों और अन्य घातक सैन्य प्रणालियों के उत्पादन में भी तेजी लाने पर विशेष बल दिया है। जनरल डायनेमिक्स के अध्यक्ष ने भी राष्ट्रपति के सुर में सुर मिलाते हुए माना कि अमेरिकी रक्षा उत्पादों की गुणवत्ता दुनिया में सबसे बेहतरीन है, लेकिन वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए उत्पादन की गति को और बढ़ाना समय की मांग है। जहाज निर्माण की यह नई और व्यापक पहल, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी), बड़े पैमाने पर विनिर्माण और सहयोगी रक्षा कंपनियों के साथ गहरे तालमेल के माध्यम से अमेरिकी रक्षा औद्योगिक आधार को पुनर्जीवित करने के सरकार के बड़े राष्ट्रीय संकल्प का हिस्सा है।
ऑटोमैटिक डेड मैन्स स्विच पर अमेरिका की सीमाएं उजागर
16 Jul, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन / तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच गहराता भू-राजनीतिक टकराव अब एक बेहद संवेदनशील और खतरनाक दौर में पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बात की ओर इशारा किया है कि उन्होंने रक्षा बलों को एक अपरिवर्तनीय और सख्त हिदायत दे रखी है कि यदि तेहरान प्रशासन उनकी हत्या करने की अपनी पुरानी धमकियों को हकीकत में बदलने की कोशिश करता है, तो ईरान को ऐसे भीषण विनाश का सामना करना पड़ेगा जिसकी कल्पना उसने कभी नहीं की होगी। हालांकि, रणनीतिक और तकनीकी तौर पर अमेरिकी प्रशासन के पास ऐसा कोई मैकेनिज्म नहीं है जिससे एक स्वचालित और पूर्व-स्वीकृत ‘डेड मैन्स स्विच’ एक्टिव किया जा सके, जो राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में खुद-ब-खुद जवाबी सैन्य कार्रवाई को अंजाम दे दे।
व्हाइट हाउस की ओर से फिलहाल इस बात का कोई त्वरित स्पष्टीकरण नहीं आया है कि यदि ट्रंप के साथ कोई अनहोनी होती है, तो उनके द्वारा पूर्व में दिए गए इन सैन्य निर्देशों की कानूनी और व्यावहारिक स्थिति क्या होगी। वास्तविक नियमों के अनुसार, यदि राष्ट्रपति की हत्या जैसी अत्यंत विषम परिस्थिति पैदा होती है, तो अमेरिकी संविधान के 25वें संशोधन और वर्ष 1947 के राष्ट्रपति उत्तराधिकार अधिनियम के प्रावधानों के तहत बेहद व्यवस्थित ढंग से सत्ता का हस्तांतरण किया जाएगा। इसके अंतर्गत उपराष्ट्रपति जेडी वेंस तत्काल प्रभाव से देश के नए सर्वोच्च कमांडर (कमांडर-इन-चीफ) की जिम्मेदारी संभालेंगे और किसी भी प्रकार की सैन्य जवाबी कार्रवाई का अंतिम और पूर्ण अधिकार उनके हाथों में सुरक्षित हो जाएगा।
उत्तराधिकारी के विवेक पर निर्भर करेगी सैन्य कार्रवाई
ऐसी अभूतपूर्व स्थिति उत्पन्न होने पर यह पूरी तरह नवनियुक्त राष्ट्रपति जेडी वेंस के विवेक पर निर्भर करेगा कि वह डोनाल्ड ट्रंप द्वारा तय किए गए आक्रामक रास्ते पर आगे बढ़ते हैं या फिर अपने पूर्ववर्ती के कठोर आदेशों को दरकिनार कर एक बिल्कुल भिन्न और कूटनीतिक नीति अपनाने का फैसला करते हैं। अमेरिकी मामलों के विश्लेषकों और लेखकों का मानना है कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने कई तकनीकी, नैतिक और रणनीतिक वजहों से कभी भी किसी मैकेनिकल या डिजिटल 'डेड मैन्स स्विच' व्यवस्था को स्वीकार नहीं किया है। अमेरिका के पास परमाणु युद्ध या किसी बड़े राष्ट्रीय संकट के समय सरकार के संचालन को निर्बाध रूप से जारी रखने के लिए पहले से ही बेहद मजबूत और गोपनीय आकस्मिक योजनाएं (कंटीन्यूटी ऑफ गवर्नमेंट) हमेशा बैकअप में तैयार रहती हैं।
ट्रंप का 'लॉक एंड लोड' मिसाइलों का खुला एलान
इस बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने एक के बाद एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सीधे तेहरान को ललकारा है। उन्होंने दावा किया कि ईरान वैश्विक स्तर पर उनकी हत्या करने या उसके लिए साजिश रचने की लगातार साजिशें रच रहा है। ट्रंप ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अमेरिका की 1,000 मिसाइलें इस वक्त पूरी तरह 'लॉक एंड लोड' मोड में सीधे ईरान की दिशा में तान दी गई हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि ईरान सरकार ने अपने नापाक इरादों को जमीन पर उतारने का जरा सा भी प्रयास किया, तो इन 1,000 मिसाइलों के तुरंत दागने के बाद, बिना किसी देरी के हजारों अन्य मिसाइलें भी ईरान के मुख्य ठिकानों को मटियामेट करने के लिए छोड़ दी जाएंगी।
मोजतबा खामेनेई का प्रतिशोध जारी रखने का संकल्प
अमेरिकी राष्ट्रपति की इस खुली और बेहद आक्रामक धमकी के चंद घंटों के भीतर ही ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने नेशनल टेलीविजन पर आकर सीधे वाशिंगटन को चुनौती दी। मोजतबा खामेनेई ने अपने दिवंगत पिता अयातुल्ला अली खामेनेई की पूर्व में हुई हत्या का स्पष्ट संदर्भ देते हुए संकल्प लिया कि ईरानी आवाम अपने सर्वोच्च नेता की शहादत का प्रतिशोध लेना कभी बंद नहीं करेगी। उन्होंने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि वे देश के लिए शहीद हुए सभी बहादुरों और अपने नेता के पवित्र खून की एक-एक बूंद का बदला उन निंदनीय और पापी हत्यारों से हर कीमत पर लेकर रहेंगे। गौरतलब है कि हाल ही में संपन्न हुए खामेनेई के अंतिम संस्कार कार्यक्रमों के दौरान भी शोक संतप्त जनसैलाब के हाथों में बड़े पैमाने पर ऐसे बैनर और पोस्टर देखे गए थे, जिनमें सीधे तौर पर ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को जान से मारने की धमकियां लिखी हुई थीं।
मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव, ईरान के रहस्यमयी हथियार से अमेरिका सतर्क
16 Jul, 2026 10:39 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन / तेहरान: पारंपरिक युद्ध के मैदान में मिसाइल, ड्रोन और लेजर हथियारों की तबाही तो दुनिया ने कई बार देखी है, लेकिन इन दिनों अंतरराष्ट्रीय सैन्य गलियारों में एक बेहद अजीबोगरीब और हैरान करने वाले हथियार की चर्चा तेज हो गई है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी भीषण तनाव के बीच अचानक ‘कामीकाजे डॉल्फिन’ (आत्मघाती डॉल्फिन) का जिन्न एक बार फिर बाहर आ गया है। अमेरिकी रक्षा विभागों और मीडिया में इस बात को लेकर एक नया खौफ देखा जा रहा है कि ईरान समंदर में अमेरिकी नौसेना को निशाना बनाने के लिए इन प्रशिक्षित डॉल्फिनों का इस्तेमाल कर रहा है। हालांकि, ईरान के इस कथित रहस्यमयी हथियार को कभी किसी ने साक्षात देखा नहीं है, लेकिन इसका डर इस कदर फैल चुका है कि खुद अमेरिकी रक्षा मुख्यालय 'पेंटागन' को इस विषय पर आधिकारिक स्पष्टीकरण देने के लिए सामने आना पड़ा।
जहाजों को उड़ाने वाले 'मरीन सुसाइड बॉम्बर्स' का खौफ
अंतरराष्ट्रीय डिफेंस एक्सपर्ट्स और खुफिया रिपोर्टों के हवाले से यह सनसनीखेज दावा किया जा रहा है कि ईरान समंदर में अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों और कमर्शियल तेल टैंकरों को तबाह करने के लिए इंसानी सुसाइड बॉम्बर्स की तर्ज पर इन डॉल्फिन मछलियों को तैयार कर रहा है। इन दावों के अनुसार, इस गुप्त मिलिट्री प्रोग्राम के तहत डॉल्फिनों के शरीर पर भारी-भरकम बारूद, आधुनिक विस्फोटक और घातक समुद्री माइंस (Naval Mines) बांध दी जाती हैं। इसके बाद इन्हें चुपचाप अमेरिकी जहाजों की तरफ छोड़ दिया जाता है। शांत स्वभाव की दिखने वाली ये डॉल्फिन जैसे ही जहाजों के निचले हिस्से (Hull) से टकराती हैं, वैसे ही एक जोरदार धमाका होता है और पल भर में पूरा जहाज समंदर में समा जाता है। इस डरावनी थ्योरी ने खाड़ी क्षेत्र में सक्रिय वैश्विक शिपिंग कंपनियों के बीच भारी खलबली पैदा कर दी है।
पेंटागन की ब्रीफिंग में रक्षा मंत्री का बड़ा बयान
यह 'सुसाइडर डॉल्फिन' थ्योरी हाल ही में मई महीने में उस समय चरम पर पहुंच गई, जब वाशिंगटन में आयोजित एक हाई-प्रोफाइल पेंटागन प्रेस ब्रीफिंग के दौरान पत्रकारों ने अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से इस विषय पर सीधा सवाल दाग दिया। रक्षा मंत्री का जवाब बेहद कूटनीतिक और चौंकाने वाला था। उन्होंने ईरान के पास ऐसा कोई हथियार होने की बात को तो सिरे से खारिज कर दिया, लेकिन चालाकी से अमेरिका के अपने खुद के डॉल्फिन प्रोग्राम पर सस्पेंस कायम रखा। हेगसेथ ने मुस्कुराते हुए मीडिया से कहा:
"मैं इस बात की पुष्टि या इनकार नहीं कर सकता कि हमारे (अमेरिका) पास कामीकाजे डॉल्फिन हैं या नहीं, लेकिन मैं इस बात की पूरी गारंटी दे सकता हूं कि ईरान के पास ऐसा कोई खतरनाक जीव या ऐसा कोई सक्रिय मिलिट्री प्रोग्राम बिल्कुल नहीं है।"
शीत युद्ध (Cold War) के इतिहास से जुड़े हैं इसके तार
इस बयान के बाद अब वैश्विक रक्षा गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इंसानों की सबसे अच्छी दोस्त समझी जाने वाली बेहद शांत जीव डॉल्फिन अचानक एक खतरनाक 'सुसाइड बॉम्बर' के रूप में कैसे प्रोजेक्ट की जाने लगी? रक्षा इतिहासकारों के मुताबिक, इस पूरी थ्योरी के तार इतिहास के पन्नों और पुराने सोवियत संघ (USSR) के दौर से जुड़े हुए हैं। कोल्ड वॉर के जमाने में सोवियत नौसेना ने सचमुच समुद्री डॉल्फिन, व्हेल्स और सी-लायंस जैसे जीवों को दुश्मन के गोताखोरों का पता लगाने, समुद्री माइंस को खोजने और खुफिया जासूसी करने के लिए बकायदा मिलिट्री ट्रेनिंग दी थी। सोवियत संघ के विघटन के बाद यह तकनीक और कुछ जीव कथित तौर पर अन्य देशों के हाथों में चले गए, जिसके चलते आज आधुनिक युद्ध के बीच यह खौफनाक अफवाह दोबारा सच बनकर दुनिया को डरा रही है।
ईरान के भूमिगत परमाणु ठिकाने पर संकट, बंकर-बस्टर बम भी नहीं कर पाए असर
16 Jul, 2026 10:32 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन / तेहरान: ईरान के साथ बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रडार पर अब एक नया और बेहद गोपनीय ठिकाना आ गया है, जिसे सैन्य गलियारों में ‘पिकैक्स माउंटेन’ कहा जा रहा है। ईरान के इस बेहद सुरक्षित अंडरग्राउंड ठिकाने को ध्वस्त करने के लिए अमेरिकी प्रशासन पूरी ताकत लगाने की तैयारी में है। हालांकि, सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इस विशेष लोकेशन पर अमेरिका के सबसे आधुनिक और घातक बंकर-बस्टर बम भी बेअसर साबित हो रहे हैं। ट्रंप की इस आक्रामक रणनीति के पीछे वाशिंगटन का दशकों पुराना वह वॉर एजेंडा है, जिसके तहत अमेरिका हर कीमत पर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को हमेशा के लिए नेस्तनाबूत करना चाहता है।
हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के इस अगले बड़े टारगेट का खुलकर एलान किया। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अमेरिका बहुत जल्द पिकैक्स माउंटेन पर एक बड़ा शॉट लगाने जा रहा है और उन्होंने ईरानियों को इसके लिए तैयार रहने को कहा है। ट्रंप ने दावा किया कि वाशिंगटन इस न्यूक्लियर ठिकाने पर बहुत पैनी नजर रखे हुए है और जैसे ही किसी परमाणु गतिविधि की भनक लगती है, उसे निशाना बनाया जाता है। यही वजह है कि अब ईरान इस विषय पर बात करने से भी कतरा रहा है।
जाग्रोस पहाड़ियों में छिपा 'कुह-ए कोलंग गज़ ला'
ईरानी भाषा में इस रहस्यमयी जगह को ‘कुह-ए कोलंग गज़ ला’ कहा जाता है, लेकिन अमेरिकी सेना ने अपनी रणनीतिक सहूलियत के लिए इसे ‘पिकैक्स माउंटेन’ नाम दिया है। यह गुप्त ठिकाना ईरान की विशाल और दुर्गम जाग्रोस पर्वत श्रृंखला के बीच बेहद चतुराई से छिपाया गया है। रणनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह नया अंडरग्राउंड कॉम्प्लेक्स ईरान के मुख्य नतांज न्यूक्लियर प्लांट से महज दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
तबाही के मलबे से निकला नया परमाणु किला
विगत समय में अमेरिकी वायुसेना ने अपने शक्तिशाली ‘बंकर-बस्टर’ बमों से नतांज प्लांट को भारी नुकसान पहुंचाया था। नतांज के आंशिक रूप से प्रभावित होने के बावजूद, उसके ठीक बगल में मौजूद इस पिकैक्स माउंटेन के भीतर ईरान का परमाणु प्रोजेक्ट बिना रुके लगातार चलता रहा। साल 2020 से ही ईरान इस पहाड़ के नीचे बड़ी-बड़ी सुरंगों और गुप्त कमरों की खुदाई में जुटा है। शुरुआत में ईरान ने दावा किया था कि वह यहां सिर्फ एक नया सेंट्रीफ्यूज असेंबली प्लांट बना रहा है, क्योंकि उसका पुराना प्लांट नष्ट हो चुका था। लेकिन अब इस सुरंग के विशाल आकार और क्षमता को देखकर रक्षा विशेषज्ञ भी हैरान हैं।
अमेरिकी महाबमों की पहुंच से दूर महासुरंग
रक्षा खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, पिकैक्स माउंटेन के नीचे बना यह सुरंगों का जाल इतना गहरा और कंक्रीट से मजबूत किया गया है कि इस पर अमेरिका के सबसे आधुनिक पारंपरिक विनाशकारी बमों का भी कोई असर नहीं होगा। यही अमेरिकी सेना की सबसे बड़ी चिंता है। इस ठिकाने के अंडरग्राउंड चैंबर्स जमीन से करीब 260 से 330 फीट की गहराई पर बनाए गए हैं। यह गहराई ईरान के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले ‘फोर्डो’ न्यूक्लियर प्लांट से भी कहीं ज्यादा है, जो इसे मौजूदा अमेरिकी मिसाइलों की मारक क्षमता से पूरी तरह सुरक्षित रखती है।
सैटेलाइट तस्वीरों ने खोला सुरक्षा का घेरा
हालिया सैटेलाइट तस्वीरों से साफ हुआ है कि ईरान ने इस पूरे पहाड़ी इलाके के चारों तरफ भारी सुरक्षा दीवारें खड़ी कर दी हैं। इसके साथ ही सुरंग के प्रवेश द्वारों को कंक्रीट से अभेद्य बनाया जा रहा है, पहाड़ काटकर निकाली गई ताजा मिट्टी के ढेर और भारी कंस्ट्रक्शन मशीनें दिन-रात वहां काम करती दिख रही हैं। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इन तस्वीरों से यह पूरी तरह साबित होता है कि ईरान किसी भी संभावित हवाई या मिसाइल हमले से अपनी संवेदनशील परमाणु मशीनों और रिएक्टर पार्ट्स को बचाने के लिए उन्हें जमीन के काफी नीचे शिफ्ट कर चुका है।
एक साल पहले शुरू किया था प्लांट, आग ने किया बर्बाद; मालिक बोले- 40 लाख का नुकसान
16 Jul, 2026 09:49 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिसार:हरियाणा के हिसार रोड स्थित बहुअकबरपुर गांव में संचालित एक पुराली प्रोसेसिंग प्लांट (पावर वेंचर) में बुधवार देर रात उस समय बड़ा हादसा हो गया, जब वहाँ अचानक भीषण आग लग गई। रात के करीब दो बजे जब पूरा इलाका गहरी नींद में सोया हुआ था, तभी प्लांट के मुख्य हिस्से से आग की गगनचुंबी लपटें उठने लगीं। उस वक्त प्लांट परिसर के भीतर कई श्रमिक सो रहे थे, जिन्हें धुआं और गर्मी महसूस होने पर आंखें खुलीं। स्थिति को भांपते हुए सभी मजदूरों ने मुस्तैदी दिखाई और तुरंत वहां से भागकर अपनी जान बचाई, जिससे एक बहुत बड़ा जानी नुकसान होने से टल गया।
केमिकल और पुराली के कारण तेजी से फैली लपटें, दमकल की गाड़ियां घंटों जूझती रहीं
हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सूचना मिलने के तुरंत बाद दमकल विभाग (फायर ब्रिगेड) की तीन बड़ी गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं। प्लांट में भारी मात्रा में सूखी पुराली और तैयार गिट्टी (पैलेट्स) का स्टॉक मौजूद होने के कारण आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। वीरवार सुबह नौ बजे तक भी दमकल कर्मी आग पर पूरी तरह काबू पाने के लिए लगातार संघर्ष करते रहे। प्रारंभिक जांच और चश्मदीदों के अनुसार, इस भयंकर अग्निकांड की मुख्य वजह प्लांट के मुख्य विद्युत पैनल में हुआ अचानक शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है।
एक एकड़ में फैला था थर्मल पावर प्लांट को ईंधन सप्लाई करने वाला यह उद्योग
पीड़ित प्लांट मालिक आशीष, जो कि बहुअकबरपुर के ही निवासी हैं, ने बताया कि उन्होंने करीब एक साल पहले गांव की एक एकड़ भूमि में इस पुराली से गिट्टी बनाने वाले आधुनिक प्लांट की स्थापना की थी। इस प्लांट का मुख्य कार्य खेतों से निकलने वाली पुराली को प्रोसेस करके ईंधन योग्य गिट्टी में तब्दील करना था, जिसकी सप्लाई आगे झाड़ली स्थित बड़े पावर प्लांट में की जाती थी। इस तैयार गिट्टी का उपयोग पावर प्लांटों में बिजली उत्पादन के लिए कोयले के साथ मिलाकर एक वैकल्पिक और पर्यावरण अनुकूल ईंधन के रूप में किया जाता था।
लाखों रुपये का तैयार माल और मशीनरी जलकर राख, पीड़ित ने की मुआवजे की मांग
इस दर्दनाक हादसे में प्लांट मालिक को बेहद भारी वित्तीय चोट पहुंची है। देर रात लगी इस आग की वजह से प्लांट के भीतर रखा टन के हिसाब से तैयार माल, कच्ची पुराली और वहां लगी कीमती मशीनें तथा विद्युत पैनल पूरी तरह जलकर खाक हो गए हैं। प्लांट संचालक के शुरुआती आकलन और दावे के मुताबिक, इस अग्निकांड के कारण उन्हें लगभग 40 लाख रुपये से अधिक का सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। पीड़ित व्यवसायी ने प्रशासन और संबंधित विभाग से नुकसान का उचित जायजा लेकर जल्द से जल्द आर्थिक मुआवजा देने की गुहार लगाई है।
ईरान की तेल आपूर्ति पर संकट, अमेरिका ने खाड़ी में बढ़ाई सैन्य मौजूदगी
16 Jul, 2026 09:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन / तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच खाड़ी क्षेत्र में जारी सैन्य गतिरोध अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। अमेरिकी सेना ने एक बार फिर ईरान के रणनीतिक बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों की सख्त समुद्री नाकेबंदी लागू कर दी है, जिसे इससे पहले अप्रैल से जून के बीच भी प्रभावी किया गया था। इस चौतरफा घेराबंदी का मुख्य उद्देश्य तेहरान पर अधिकतम दबाव बनाना है। इसके साथ ही, अमेरिकी वायुसेना ने लगातार चौथे दिन ईरान के कई प्रमुख सैन्य ठिकानों पर भारी हवाई हमले किए हैं, जिसके बाद क्षेत्र में कुछ समय पहले लागू हुआ सीजफायर पूरी तरह टूटता नजर आ रहा है। इन हमलों के जवाब में खाड़ी के कई हिस्सों से धमाकों और जवाबी कार्रवाइयों की खबरें आ रही हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अमेरिका के सहयोगी देशों—कुवैत और बहरीन—ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी कर सतर्क रहने को कहा है। दूसरी ओर, ईरान के सरकारी मीडिया ने दावा किया है कि उनके बलों ने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है, हालांकि इस दावे की अब तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
ट्रंप की बुनियादी ढांचे को उड़ाने की चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक होलिया इंटरव्यू में ईरान को सीधे शब्दों में बेहद कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने साफ किया कि यदि तेहरान जल्द ही बातचीत की मेज पर वापस नहीं लौटता, तो अगले सप्ताह अमेरिकी सेना ईरान के पुलों, बांधों और बिजली संयंत्रों (पावर ग्रिड) जैसे बेहद महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना शुरू कर देगी। व्हाइट हाउस में मीडिया से मुखातिब होते हुए ट्रंप ने कड़े लहजे में कहा कि ईरान सिर्फ ताकत की भाषा समझता है। उन्होंने आरोप लगाया कि दो दिन पहले दोनों देशों के बीच एक सहमति बन रही थी, लेकिन ईरान ने ऐन वक्त पर उस समझौते को तोड़ दिया। ट्रंप ने दोहराया कि ईरान पर अमेरिकी हमले तब तक थमेंगे नहीं, जब तक कि तेहरान खुद घुटनों पर आकर यह न कह दे कि अब बहुत हुआ।
खार्ग द्वीप पर अमेरिकी 'सर्जिकल' स्ट्राइक
राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि अमेरिकी सेना ईरान के सबसे महत्वपूर्ण तेल निर्यात केंद्र 'खार्ग द्वीप' पर पहले ही दो से तीन बार हमला कर चुकी है। उन्होंने रणनीतिक विवरण साझा करते हुए कहा, "जैसा कि आप जानते हैं, हमने खार्ग द्वीप पर पहले ही दो-तीन बार हमला किया है। मैंने सेना को निर्देश दिया था कि वहां सब कुछ निशाना बनाओ, लेकिन एक छोटे से हिस्से को करीब 25 गज की दूरी तक छोड़ दो। मैं नहीं चाहता कि इस कार्रवाई से वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल आपूर्ति पर कोई अचानक और गंभीर संकट खड़ा हो।"
सुरक्षा शुल्क पर ट्रंप का यू-टर्न
अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कूटनीतिक दबाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने एक बड़े आर्थिक फैसले से पैर पीछे खींच लिए हैं। ट्रंप ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले सभी वैश्विक मालवाहक जहाजों पर 20 प्रतिशत सुरक्षा शुल्क (Security Fee) लगाने के अपने पिछले विवादास्पद ऐलान पर पूरी तरह यू-टर्न ले लिया है। विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक व्यापारिक संगठनों और सहयोगियों के दबाव के चलते वाशिंगटन को यह कदम पीछे खींचना पड़ा है।
आईआरजीसी की वैश्विक ऊर्जा संकट की धमकी
अमेरिका के इन भीषण हवाई हमलों के जवाब में ईरान की शक्तिशाली सेना 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) ने बेहद आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। आईआरजीसी ने अमेरिका और उसके सहयोगियों को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि जब तक ईरान की धरती पर अमेरिकी बमबारी जारी रहेगी, तब तक इस पूरे क्षेत्र से तेल और गैस का निर्यात सामान्य नहीं रहने दिया जाएगा। ईरानी सैन्य कमांड ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि अमेरिका ने अपनी सैन्य आक्रामकता तुरंत नहीं रोकी, तो वे पूरे खाड़ी क्षेत्र की ऊर्जा आपूर्ति को ठप कर देंगे, जिससे पूरी दुनिया में हाहाकार मच सकता है। समुद्री नाकेबंदी और तेल रिफाइनरियों पर मंडराते इस खतरे से अब वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर काले बादल मँडराने लगे हैं।
इराक से अमेरिकी सेना की विदाई, जानिए क्यों शुरू हुआ था यह 23 साल लंबा सैन्य अभियान
15 Jul, 2026 05:49 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन: खाड़ी क्षेत्र (मिडिल ईस्ट) की भू-राजनीति में एक युगांतरकारी और बेहद बड़ा बदलाव होने जा रहा है। संयुक्त राज्य अमेरिका ने आधिकारिक रूप से घोषणा की है कि वह चालू वर्ष के अंत तक यानी 30 सितंबर 2026 तक इराक से अपनी सेना को पूरी तरह वापस बुला लेगा।
गौरतलब है कि आज से ठीक 23 साल पहले, यानी साल 2003 में तत्कालीन इराकी तानाशाह सद्दाम हुसैन के खिलाफ शुरू की गई आक्रामक सैन्य कार्रवाई के समय से ही अमेरिकी सैनिक वहां डटे हुए थे। इस ऐतिहासिक फैसले की पुष्टि खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में आयोजित एक द्विपक्षीय बैठक के दौरान की है, जिसके बाद खाड़ी देशों सहित पूरी दुनिया के सुरक्षा विश्लेषक इस कदम के दूरगामी परिणामों का आकलन करने में जुट गए हैं।
व्हाइट हाउस: राष्ट्रपति ट्रंप और इराकी पीएम अली अल-ज़ैदी के बीच शिखर वार्ता, राष्ट्रपति बोले- 'अब वहां अमेरिकी सैनिकों की जरूरत नहीं'
इस ऐतिहासिक सैन्य वापसी का खाका व्हाइट हाउस में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान खींचा गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इराक के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री अली अल-ज़ैदी के साथ एक संयुक्त प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा, "हमने जमीनी हालातों का बहुत बारीकी से अध्ययन किया है और हमारा मानना है कि अब इराक की धरती पर अमेरिकी सेना की मौजूदगी की कोई आवश्यकता नहीं रह गई है।"
राष्ट्रपति ट्रंप ने भरोसा जताया कि इराकी सुरक्षा बल अब अपने देश की आंतरिक और बाहरी संप्रभुता की रक्षा करने में पूरी तरह से सक्षम और आत्मनिर्भर हो चुके हैं, जिसके कारण इस सैन्य मिशन को समाप्त करने का यह बिल्कुल सही समय है।
बगदाद: आइसिस के खिलाफ खत्म होगा अंतरराष्ट्रीय अभियान, पेंटागन ने की 2024 के द्विपक्षीय सुरक्षा समझौते की पुष्टि
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने भी इस संबंध में एक विस्तृत सैन्य रिपोर्ट और आधिकारिक बयान जारी किया है। पेंटागन के अनुसार, वे आतंकी संगठन आइसिस (ISIS) के खिलाफ चलाए जा रहे अपने अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभियान को पूरी तरह समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसके लिए वे साल 2024 में हुए द्विपक्षीय समझौते की शर्तों की पुष्टि कर रहे हैं।
विदित हो कि जो बाइडन के राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान हुए इस सुरक्षा समझौते के बाद से ही सैन्य वापसी की प्रक्रिया धीरे-धीरे शुरू हो गई थी और बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिक पहले ही अपने देश वापस लौट चुके हैं। अब अमेरिका और उसके गठबंधन सहयोगियों की सेनाएं सुरक्षा और रक्षा की पूरी कमान उन इराकी सैनिकों के हाथों में सौंप रही हैं, जिन्हें पिछले कई वर्षों से खुद अमेरिकी सैन्य प्रशिक्षकों (ट्रेनर्स) द्वारा अत्याधुनिक ट्रेनिंग और युद्ध कौशल सिखाया गया है।
इतिहास का पन्ना: जब मार्च 2003 में 'विनाशकारी हथियारों' के दावों पर अमेरिका ने इराक पर किया था हमला
इस सैन्य वापसी के साथ ही इतिहास का एक बेहद लंबा और विवादित अध्याय भी बंद होने जा रहा है। अमेरिका ने मार्च 2003 में तात्कालिक राष्ट्रपति जॉर्ज डब्लू बुश के कार्यकाल के दौरान इराक पर एकतरफा हमला किया था। उस समय दुनिया के सामने यह दावा किया गया था कि सद्दाम हुसैन के पास बड़े पैमाने पर तबाही मचाने वाले गुप्त रासायनिक और जैविक हथियार (Weapons of Mass Destruction) मौजूद हैं, जिससे पूरी दुनिया को खतरा है।
हालांकि, बाद के वर्षों में हुई अंतरराष्ट्रीय जांचों और तफ्तीशों में यह दावा पूरी तरह से गलत और निराधार साबित हुआ था। इस युद्ध में लाखों इराकी नागरिकों और हजारों अमेरिकी सैनिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। अब, 23 साल बाद, अमेरिका इस देश से अपनी सैन्य उपस्थिति को पूरी तरह समेटने जा रहा है।
दिन के समय US की एयरस्ट्राइक, क्या नए मोड़ पर पहुंच गया पश्चिम एशिया संकट?
15 Jul, 2026 05:20 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन: मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच एक बड़ी और सनसनीखेज ख़बर सामने आ रही है। संयुक्त राज्य अमेरिका के रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि उसकी वायुसेना ने ईरान को निशाना बनाते हुए हवाई हमलों (एयर स्ट्राइक्स) का एक बिल्कुल नया और आक्रामक चरण शुरू कर दिया है।
इस सैन्य कार्रवाई से जुड़ा सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने बुधवार को दिन के उजाले में इन बमबारियों की शुरुआत की है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह अचानक बदला गया समय दोनों देशों के बीच चल रहे युद्ध के बढ़ते स्तर और पेंटागन की नई आक्रामक रणनीति का एक स्पष्ट हिस्सा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य: व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए उठाया कदम, मध्य कमान (सेंटकॉम) ने जारी किया आधिकारिक बयान
अमेरिकी सेना की मध्य कमान (CENTCOM) ने अपने आधिकारिक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एक बयान जारी कर इस सैन्य ऑपरेशन की पुष्टि की है। गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से जारी संघर्ष में अमेरिका अब तक केवल रात के अंधेरे का फायदा उठाकर ईरानी ठिकानों को निशाना बना रहा था, लेकिन अब रणनीति बदल दी गई है।
सेंटकॉम के प्रवक्ताओं ने इन हमलों के सैन्य उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुए कहा है कि इस नए हवाई हमले का मुख्य लक्ष्य ईरानी सेना की उन सामरिक और सैन्य क्षमताओं को पूरी तरह से ध्वस्त या कमजोर करना है, जिनका उपयोग वे अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले कमर्शियल (वाणिज्यिक) जहाजों और तेल टैंकरों पर हमला करने के लिए कर रहे हैं।
तेहरान: ईरान-अमेरिका अंतरिम समझौता पूरी तरह से ध्वस्त, खाड़ी देशों में मंडराया बड़े युद्ध का खतरा
ईरान के सैन्य ठिकानों पर दिन के समय हुए ये भीषण हमले ऐसे बेहद नाजुक मोड़ पर किए गए हैं, जब ईरान और अमेरिका के राजनयिकों के बीच लंबे समय से चल रहा अंतरिम सुरक्षा समझौता (पीस एग्रीमेंट) पूरी तरह से टूटकर बिखर चुका है।
इस समझौते के विफल होने के बाद से ही दोनों देशों के बीच अविश्वास की खाई और गहरी हो गई थी। वाशिंगटन और तेहरान के बीच उपजे इस ताजा सैन्य टकराव ने पूरे खाड़ी क्षेत्र (गल्फ कंट्रीज) की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है, जिससे वैश्विक बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक लॉजिस्टिक्स में हड़कंप मच गया है।
नंदिनी के निधन पर छलके आंसू, मालिक ने किया बेटी जैसा अंतिम संस्कार
15 Jul, 2026 04:32 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सोनीपत। हरियाणा के सोनीपत जिले के हसनयारपुर तिहाड़ा कलां गाँव में जीव प्रेम और सनातन परंपरा की एक बेहद अनूठी और भावुक मिसाल देखने को मिली है। यहाँ के एक स्थानीय परिवार ने अपनी पालतू गाय 'नंदिनी' के देहावसान के बाद उसकी आत्मा की शांति के लिए पूरे विधि-विधान के साथ तेरहवीं संस्कार का आयोजन किया। लगभग 18 वर्षों तक परिवार के एक अभिन्न सदस्य की तरह रही इस गाय की विदाई को यादगार बनाने के लिए आस-पास के 11 गांवों के लोगों को आमंत्रित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने पहुंचकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
बेटी की तरह हुआ नंदिनी का लालन-पालन
परिवार के सदस्य मनजीत तिहाड़ा ने भावुक होते हुए बताया कि नंदिनी जब महज तीन महीने की बछड़ी थी, तब उसे घर लाया गया था। परिवार में बेटी की कमी को नंदिनी ने हमेशा के लिए दूर कर दिया था। करीब 16 वर्ष पूर्व जब मनजीत की माता जी का निधन हुआ, तब पूरे परिवार ने इस बेजुबान को अपनी सगी बेटी की तरह लाड़-प्यार से पाला। नंदिनी ने भी परिवार को कभी मायूस नहीं किया और अपने जीवनकाल में 12 स्वस्थ संतानों को जन्म देकर घर में गौवंश को समृद्ध किया।
लंबी बीमारी के बाद थमीं जीवन की सांसें
नंदिनी पिछले करीब तीन महीनों से गंभीर रूप से बीमार चल रही थी, जिसके बाद बीती सात जुलाई को उसने अंतिम सांस ली। परिजनों का अनुमान है कि चरने के दौरान या अनजाने में उसने चारे के साथ कोई नुकीली लोहे की वस्तु निगल ली थी, जो उसके पेट में जाकर फंस गई। इसी वजह से उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई और पशु चिकित्सकों के अथक प्रयासों के बाद भी उसे बचाया नहीं जा सका, जिससे पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
गौ सेवा और श्रद्धा की अनोखी मिसाल
पशु को केवल दूध का जरिया न मानकर उसे परिवार का हिस्सा मानने वाले इस परिवार ने समाज के सामने एक बड़ा संदेश पेश किया है। आमतौर पर इंसानों के निधन पर निभाई जाने वाली तेरहवीं की रस्म को एक गाय के लिए आयोजित कर परिवार ने यह साबित कर दिया कि बेजुबानों के प्रति सच्ची संवेदना क्या होती है। इस भोज में शामिल हुए 11 गांवों के मौजिज लोगों ने परिवार के इस सेवा भाव और गौ प्रेम की मुक्त कंठ से सराहना की।
सनातन परंपरा के अनुसार अंतिम विदाई
हिंदू धर्मग्रंथों में गाय को माता का दर्जा दिया गया है और इसी आस्था को निभाते हुए तिहाड़ा परिवार ने नंदिनी के अंतिम संस्कार से लेकर उसकी तेरहवीं तक के सभी कर्मकांड पूरे धार्मिक नियमों के साथ संपन्न किए। पंडितों द्वारा मंत्रोच्चारण के बीच शांति पाठ कराया गया और ब्रह्मभोज के साथ-साथ उपस्थित जनसमुदाय को भोजन कराया गया। इस अनोखे आयोजन की चर्चा अब पूरे सोनीपत जिले में हो रही है, जो इंसानों और पशुओं के बीच के अटूट रिश्ते को बयां करती है।
लंदन मर्डर केस में बड़ा खुलासा, सिख युवती के कातिल तक ऐसे पहुंची पुलिस
15 Jul, 2026 03:56 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन: पश्चिमी लंदन के हेज क्षेत्र से एक बेहद दिल दहला देने वाली और दुखद घटना सामने आई है। यहाँ एक घर के भीतर हुए धारदार हथियार से हमले में 24 वर्षीय ब्रिटिश सिख महिला किरनदीप कौर की मौत हो गई है। इस हिंसक वारदात में 20 वर्ष का एक अन्य युवक भी गंभीर रूप से जख्मी हुआ है। स्थानीय मेट्रोपॉलिटन पुलिस द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, घटना की सूचना मिलते ही पुलिस बल लंदन एंबुलेंस सेवा की आपातकालीन टीम के साथ मौके पर पहुँचा था। हालांकि, किरनदीप के शरीर पर चाकू के इतने गहरे और गंभीर घाव थे कि तमाम चिकित्सीय प्रयासों के बावजूद उन्हें घटनास्थल पर ही मृत घोषित करना पड़ा।
लंदन: 44 वर्षीय संदिग्ध गिरफ्तार, मजिस्ट्रेट अदालत में संगीन धाराओं के तहत आरोप तय
इस वीभत्स हत्याकांड के तुरंत बाद मुस्तैद हुई पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 44 साल के एक व्यक्ति को हिरासत में लिया है, जिसकी पहचान डेनियल सीन जेम्स के रूप में हुई है। आरोपी डेनियल को विल्सडन मजिस्ट्रेट अदालत के समक्ष पेश किया गया। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी पर हत्या, हत्या के प्रयास और सार्वजनिक स्थान पर प्रतिबंधित धारदार हथियार रखने के संगीन आरोप तय कर दिए हैं।
अधिकारियों का बयान: स्थानीय समुदाय की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात
मामले की जांच का नेतृत्व कर रहे डिटेक्टिव चीफ इंस्पेक्टर अल्लम भंगू ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह एक अत्यंत पीड़ादायक और स्तब्ध करने वाली घटना है, जिसने एक हंसती-खेलती युवा महिला की जान ले ली और एक अन्य युवक को अस्पताल पहुंचा दिया। पुलिस प्रशासन की पूरी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं और उन्हें हर संभव कानूनी व मानसिक सहायता दी जा रही है।
अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि शुरुआती तफ्तीश के आधार पर आम जनता के लिए किसी बड़े या व्यापक सुरक्षा खतरे के इनपुट नहीं मिले हैं। इसके बावजूद, स्थानीय नागरिकों और समुदाय में फैले डर व चिंता के माहौल को देखते हुए आने वाले दिनों में प्रभावित इलाकों में अतिरिक्त पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है। उन्होंने चश्मदीदों से पुलिस की मदद करने की भी अपील की है।
पीड़ितों की स्थिति: घायल युवक खतरे से बाहर, पीड़ित परिवार को दी जा रही है विशेषज्ञ सहायता
पुलिस प्रशासन ने बताया कि मृतका किरनदीप कौर के परिजनों को इस भयानक त्रासदी की आधिकारिक सूचना दे दी गई है और उनके सहयोग के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित अधिकारियों को नियुक्त किया गया है। दूसरी तरफ, वारदात वाले घर के ठीक बाहर लहूलुहान हालत में मिले 20 वर्षीय घायल युवक का नजदीकी अस्पताल में इलाज चल रहा है। चिकित्सा अधिकारियों के अनुसार, राहत की बात यह है कि उसकी चोटें गंभीर होने के बावजूद फिलहाल जानलेवा (खतरे से बाहर) नहीं मानी जा रही हैं।
सिख संगठनों की चिंता: क्या यह 'एंटी-सिख हेट क्राइम' का मामला है?
इस घटना के सामने आने के बाद ब्रिटेन में रह रहे सिख संगठनों और प्रवासियों के बीच भारी आक्रोश और चिंता देखी जा रही है। कुछ प्रमुख सिख नेटवर्क्स ने आशंका व्यक्त की है कि यह हमला सिख समुदाय के प्रति बढ़ती नफरत (एंटी-सिख हेट क्राइम) से प्रेरित हो सकता है। यह मामला ऐसे संवेदनशील समय पर सामने आया है जब कुछ ही हफ्ते पहले दक्षिण-पूर्व इंग्लैंड में एक किशोर की हत्या के बहुचर्चित मामले में एक ब्रिटिश सिख युवक को दोषी करार दिया गया था।
विवादित पुराना मामला: विक्रम डिगवा केस और धार्मिक तर्कों से उपजी बहस
इस मामले को हाल ही में हुए एक अन्य चर्चित अदालती फैसले से भी जोड़कर देखा जा रहा है। दरअसल, कुछ समय पहले 23 वर्षीय विक्रम डिगवा को 18 साल के हेनरी नोवाक की चाकू मारकर हत्या करने के जुर्म में अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। उस मुकदमे की सुनवाई के दौरान डिगवा ने अपराध में इस्तेमाल किए गए हथियार को अपने धार्मिक आधार पर जायज ठहराने की कोशिश की थी, जिसके बाद पूरे ब्रिटेन के सामाजिक और राजनीतिक हलकों में एक बड़ी बहस छिड़ गई थी।
संसद में पेश होगा सर्वे: 40 प्रतिशत सिखों ने हाल के दिनों में झेला है नस्लीय भेदभाव
ब्रिटेन में सिखों के खिलाफ बढ़ते कथित अपराधों के बीच, सिख नेटवर्क नामक संस्था ब्रिटिश संसद में एक 'स्पॉट सर्वे' के चौंकाने वाले आंकड़े प्रस्तुत करने जा रही है। इस सर्वे की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि साक्षात्कार में शामिल हुए लगभग 40 प्रतिशत प्रतिभागियों ने इस बात को स्वीकार किया है कि उन्होंने हाल के महीनों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से एंटी-सिख नफरत, नस्लीय टिप्पणियों या हेट क्राइम का सामना किया है।
केले के पत्तों में पैकिंग, थाईलैंड की अनोखी पहल ने जीता लोगों का दिल
15 Jul, 2026 03:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बैंकॉक। दुनिया भर में गंभीर रूप से बढ़ रहे प्लास्टिक कचरे के संकट के बीच थाईलैंड के बाजारों से पर्यावरण संरक्षण की एक बेहद उम्मीद जगाने वाली तस्वीर सामने आई है। यहाँ के बड़े सुपरमार्केट्स ने फल, सब्जियों और अन्य खाद्य सामग्रियों की पैकेजिंग के लिए उपयोग होने वाली प्लास्टिक थैलियों और रैपर पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। इसके स्थान पर अब पारंपरिक और प्राकृतिक विकल्प के रूप में केले के पत्तों का इस्तेमाल धड़ल्ले से किया जा रहा है। हरित पर्यावरण की दिशा में उठाए गए इस क्रांतिकारी कदम की वैश्विक स्तर पर काफी चर्चा हो रही है और इसे अन्य विकासशील देशों के लिए एक बेहतरीन नजीर माना जा रहा है।
कुदरती गुणों से भरपूर और पूरी तरह बायोडिग्रेडेबल विकल्प
सुपरमार्केट संचालकों ने केले के पत्तों को इसके बड़े आकार, मजबूती और आसानी से साफ होने की क्षमता के कारण चुना है। यह प्राकृतिक आवरण न केवल मजबूत पैकेजिंग प्रदान करता है, बल्कि पूरी तरह से सड़नशील (बायोडिग्रेडेबल) भी है। उपयोग के बाद इन्हें बेहद आसानी से जैविक खाद में बदला जा सकता है, जिससे यह कुछ ही हफ्तों में बिना किसी रासायनिक अवशेष के मिट्टी का हिस्सा बन जाते हैं। थाईलैंड जैसे देश में, जहाँ की अर्थव्यवस्था काफी हद तक पर्यटन और कृषि पर निर्भर है, वहाँ यह प्रयोग समुद्रों और जंगलों में फैलते प्लास्टिक के जानलेवा जाल को काटने में वरदान साबित हो रहा है।
कृषि अपशिष्ट का सही प्रबंधन और किसानों की बढ़ी आमदनी
थाईलैंड में केले की बड़े पैमाने पर खेती की जाती है, जिसके कारण यह पत्ते वहाँ प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। अमूमन फसल की कटाई के बाद पौधों के तने और पत्तियां खेतों में ही सड़ने के लिए छोड़ दिए जाते थे, जिन्हें कृषि अपशिष्ट (कचरा) माना जाता था। अब इस बेकार समझे जाने वाले हिस्से को व्यावसायिक पैकेजिंग में शामिल कर कचरे का अनूठा प्रबंधन किया गया है। इस व्यवस्था से न केवल पर्यावरण को होने वाला नुकसान कम हुआ है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों को इन पत्तों को बेचकर अतिरिक्त कमाई का एक नया जरिया भी मिल गया है।
ग्राहकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया और ताजगी का अनोखा संगम
इस नए बदलाव को लेकर उपभोक्ताओं का रुझान भी बहुत उत्साहजनक देखा जा रहा है। खरीददारों का कहना है कि केले के पत्तों में लिपटी सब्जियां और फल लंबे समय तक फ्रेश रहते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, केले के पत्तों में प्राकृतिक रूप से नमी को नियंत्रित करने के साथ-साथ एंटी-बैक्टीरियल (जीवाणुरोधी) तत्व पाए जाते हैं, जो भोजन को जल्दी सड़ने या खराब होने से बचाते हैं। भारत जैसे सांस्कृतिक रूप से समृद्ध देशों के लिए भी यह एक बड़ा संदेश है, जहाँ प्राचीन काल से ही केले के पत्तों पर भोजन करने की समृद्ध परंपरा रही है। यदि भारत के सुपरमार्केट और स्थानीय किराना व्यापारी भी इस पारंपरिक तरीके को अपनाएं, तो हर साल हजारों टन प्लास्टिक के निर्माण और उसके हानिकारक कचरे से धरती को बचाया जा सकता है।
सीमित टिकाऊपन और डिलीवरी के मोर्चे पर बड़ी चुनौतियां
इस बेहतरीन पहल की सराहना के बीच पर्यावरण विशेषज्ञों ने इसके व्यावहारिक पहलुओं और चुनौतियों की तरफ भी ध्यान आकर्षित किया है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि प्राकृतिक पत्ते प्लास्टिक जितने लचीले और लंबे समय तक चलने वाले नहीं होते हैं। इसके कारण बहुत भारी सामान को पैक करने या फिर ई-कॉमर्स डिलीवरी के दौरान लंबी दूरी तक माल भेजने में इनके फटने का डर बना रहता है। इन कमियों को दूर करने के लिए अब पैकेजिंग तकनीकों में कुछ और सुधार करने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि इस शत-प्रतिशत प्राकृतिक विकल्प को वैश्विक स्तर पर मुख्यधारा का हिस्सा बनाया जा सके।
खरखौदा हादसा: दो ट्राले टकराए, आग की लपटों में घिरा चालक नहीं बच सका
15 Jul, 2026 02:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
खरखौदा। हरियाणा के रोहणा गांव के पास नेशनल हाईवे-334बी (NH-334B) पर बुधवार दोपहर एक बेहद दर्दनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाला सड़क हादसा सामने आया है। हाईवे पर जा रहे दो तेज रफ्तार ट्रालों के बीच भीषण भिड़ंत हो गई, जिसके तुरंत बाद पीछे वाले ट्राले में अचानक भयानक आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि चालक को वाहन से बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला और वह केबिन के भीतर ही जिंदा जल गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
हादसे के बाद हाईवे पर मची अफरा-तफरी और रेस्क्यू ऑपरेशन
दो भारी वाहनों के बीच हुई इस भीषण टक्कर और उसके बाद लगी आग की गगनचुंबी लपटों को देखकर हाईवे पर गुजर रहे अन्य वाहन चालकों और स्थानीय राहगीरों में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और दमकल विभाग की गाड़ियां तुरंत घटनास्थल पर पहुंचीं। दमकलकर्मियों ने बेहद मुस्तैदी दिखाते हुए भारी मशक्कत के बाद ट्राले में धधक रही आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक वाहन पूरी तरह जलकर मलबे में तब्दील हो चुका था।
मृतक चालक की शिनाख्त के प्रयास में जुटी पुलिस
इस दर्दनाक हादसे में अपनी जान गंवाने वाले बदनसीब चालक की शिनाख्त अभी तक नहीं हो पाई है, क्योंकि आग इतनी विकराल थी कि केबिन के भीतर सब कुछ जलकर राख हो गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दुर्घटनाग्रस्त वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर और चेसिस नंबर के जरिए मालिक का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि मृतक की पहचान सुनिश्चित की जा सके और उसके परिजनों को इस दुखद घटना की सूचना दी जा सके।
हादसे के कारणों की जांच और यातायात सुचारू करने की कोशिश
घटना के बाद नेशनल हाईवे पर कुछ समय के लिए वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। पुलिस ने क्रेन की मदद से दुर्घटनाग्रस्त ट्रालों को सड़क के किनारे करवाकर बंद पड़े हाईवे को दोबारा सुचारू रूप से चालू करवाया। प्रारंभिक तौर पर हादसे की वजह तेज रफ्तार या अचानक ब्रेक लगाना माना जा रहा है, और पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है।
खाड़ी में व्यापारिक दौड़ तेज, यूएई के नए पोर्ट पर दुनिया की नजर
15 Jul, 2026 02:01 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दुबई। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को एक खतरनाक युद्ध क्षेत्र में बदल दिया है। ईरान द्वारा इस संकरे समुद्री रास्ते को ब्लॉक करने की लगातार मिल रही धमकियों और बढ़ते हमलों के बीच, भारत के करीबी सहयोगी संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने एक बेहद महत्वाकांक्षी रणनीतिक योजना तैयार की है। यूएई ने अगले 18 महीनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी निर्भरता को पूरी तरह समाप्त कर तेल और माल ढुलाई के लिए एक नया, सुरक्षित मार्ग स्थापित करने का लक्ष्य रखा है।
दुबई की आर्थिक रीढ़ 'जेबेल अली पोर्ट' पर व्यापार 95% तक ठप
इस संकट का सबसे बड़ा झटका दुबई की आर्थिक शक्ति माने जाने वाले मध्य पूर्व के सबसे बड़े बंदरगाह 'जेबेल अली पोर्ट' को लगा है। होर्मुज स्ट्रेट में जारी नाकेबंदी के कारण जेबेल अली पोर्ट पर होने वाली व्यापारिक गतिविधियों में 90 से 95 प्रतिशत की ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। इस विशाल बंदरगाह पर बड़े मालवाहक जहाजों (कार्गो शिप्स) का आवागमन लगभग पूरी तरह ठप हो चुका है। चूंकि जेबेल अली बंदरगाह पूरे यूएई की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, इसलिए इस अभूतपूर्व संकट से निपटने के लिए दुबई की दिग्गज लॉजिस्टिक्स कंपनी 'डीपी वर्ल्ड' (DP World) ने एक बड़े मास्टरप्लान पर काम शुरू किया है।
ओमान की खाड़ी से लगते फुजैरा में बनेगा नया हाईटेक टर्मिनल
होर्मुज के खतरे को हमेशा के लिए टालने के लिए यूएई अब अपने पूर्वी तट पर, जो सीधे ओमान की खाड़ी से लगता है, एक बिल्कुल नया, आधुनिक और हाईटेक बंदरगाह तथा विशाल कंटेनर टर्मिनल बनाने जा रहे है।
नया केंद्र: यह नया मल्टीपर्पज पोर्ट फुजैरा में स्थापित किया जाएगा।
अस्थायी व्यवस्था: वर्तमान में डीपी वर्ल्ड ने जेबेल अली से हटाकर अपने ज्यादातर जहाजों को पूर्वी तट पर स्थित फुजैरा और 'खोर फक्कन' बंदरगाहों की तरफ मोड़ा है, जिसके कारण वहां समुद्र में जहाजों का भारी जाम (कंजेशन) लग गया है।
समय सीमा: बुनियादी ढांचा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि फंडिंग और वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल रहीं, तो यह नया पोर्ट मात्र 18 महीने के रिकॉर्ड समय में बनकर तैयार हो सकता है। हालांकि, इसके अंतिम डिजाइन और वित्तीय आवंटन पर अभी अंतिम दौर की चर्चा जारी है। यूएई प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस नए पोर्ट के आने के बाद भी जेबेल अली का वैश्विक महत्व कम नहीं होगा।
व्यापारिक सुरक्षा के साथ-साथ 3,000 मिसाइल और ड्रोन हमलों का खतरा
यूएई द्वारा इस वैकल्पिक मार्ग को तैयार करने की जल्दबाजी के पीछे सिर्फ आर्थिक नुकसान ही नहीं, बल्कि देश की संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़ा एक बेहद गंभीर कारण भी है। ईरान-अमेरिका संघर्ष के भड़कने के बाद से ईरान ने सीधे यूएई को निशाना बनाते हुए लगभग 3,000 घातक ड्रोन और विनाशकारी मिसाइलें दागी हैं। पूरे पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में अकेले यूएई ने इस युद्ध के दौरान सबसे अधिक हवाई हमलों का सामना किया है, जिसके चलते अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक व्यापार को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए यूएई को होर्मुज के दायरे से बाहर निकलना अनिवार्य हो गया है।
बस हादसे से मचा हड़कंप, पूर्व सैनिक ने गंवाई जान; घायलों का इलाज जारी
15 Jul, 2026 01:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रेवाड़ी। हरियाणा के कोसली-टूमना मार्ग पर एक भीषण सड़क हादसा सामने आया है, जहां यात्रियों से भरी एक निजी बस अचानक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे एक मजबूत पेड़ से जा टकराई। रेवाड़ी से कोसली की तरफ जा रही इस बस की टक्कर इतनी जोरदार थी कि इस दुर्घटना में एक बुजुर्ग पूर्व सैनिक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 11 अन्य यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के वक्त बस में करीब 30 यात्री सवार थे, जिनमें टक्कर के बाद चीख-पुकार मच गई।
हादसे के बाद राहत कार्य और घायलों को अस्पताल पहुंचाना
टक्कर की आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण और राहगीर तुरंत मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचित करते हुए राहत कार्य शुरू किया। सूचना मिलते ही पुलिस की एक टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से सभी घायल यात्रियों को बस से बाहर निकाला। सभी 11 घायलों को तुरंत एम्बुलेंस के जरिए कोसली के सरकारी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों की देखरेख में उनका इलाज जारी है।
पूर्व सैनिक की मौत और घायलों की पहचान
इस दुखद हादसे में जान गंवाने वाले बुजुर्ग की पहचान बालधन गांव के निवासी 87 वर्षीय दीपचंद के रूप में हुई है, जो देश सेवा से सेवानिवृत्त एक पूर्व सैनिक थे। वहीं, घायल होने वाले यात्रियों में रेवाड़ी के शिवम, रामपुरी के प्रहलाद, बालधन खुर्द के दीपक, राजस्थान की अनुष्का, सुरहेली के बस्तीराम, बेरली खुर्द के अधिवक्ता सावंत, नयागांव के धर्मपाल व बीरमती शामिल हैं। इनके अलावा टूमना निवासी कोमल, मनीषा और राजाराम का भी अस्पताल में उपचार चल रहा है।
पुलिस द्वारा शव का पंचनामा और दुर्घटना की जांच
हादसे की सूचना के बाद पुलिस ने मृतक पूर्व सैनिक दीपचंद के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, बस की रफ्तार अधिक होने के कारण चालक अचानक वाहन पर से अपना नियंत्रण खो बैठा, जिससे बस सीधे पेड़ में जा घुसी। पुलिस प्रशासन ने आश्वस्त किया है कि दुर्घटना के सही कारणों की गहनता से जांच की जा रही है और जांच पूरी होने के बाद आरोपी चालक के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
भारतीय पर्यटकों के लिए राहत, थाईलैंड का वीजा-फ्री प्रवेश बरकरार
15 Jul, 2026 12:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बैंकॉक। थाईलैंड सरकार ने भारतीय पासपोर्ट धारकों को बड़ी राहत देते हुए देश में बिना वीज़ा (वीज़ा-फ्री) प्रवेश की सुविधा को जारी रखने का एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। हालांकि, इस नीति में एक बड़ा और रणनीतिक बदलाव किया गया है। अब भारतीय नागरिक बिना वीज़ा के थाईलैंड में अधिकतम 30 दिनों तक ही रुक सकेंगे, जबकि इससे पहले यह सीमा 60 दिनों की हुआ करती थी। थाईलैंड कैबिनेट ने मंगलवार को अपनी साप्ताहिक बैठक में इस नए प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
पर्यटन को बढ़ावा देने और सुरक्षा चिंताओं को संतुलित करने का प्रयास
थाईलैंड के पर्यटन मंत्री सुरसक पंचरोएनवोराकुल ने इस फैसले को स्पष्ट करते हुए कहा कि भारत थाईलैंड के पर्यटन उद्योग के लिए बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा बाजार है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य भारतीय सैलानियों के लिए यात्रा को सुगम बनाना और देश की पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को गति देना है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि भविष्य में इस नीति के कारण कोई सुरक्षात्मक या अन्य समस्या उत्पन्न होती है, तो सरकार इस छूट की समीक्षा कर सकती है।
यह नीतिगत बदलाव ऐसे समय में आया है जब प्रधानमंत्री अनुतिन चर्णविराकुल की सरकार उन विदेशी नागरिकों और देशों पर कड़ी नजर रख रही है, जो वीज़ा-फ्री सुविधा का दुरुपयोग कर अवैध गतिविधियों या स्थानीय व्यापारिक हितों को नुकसान पहुँचाने में संलिप्त पाए गए हैं।
वीज़ा-फ्री सूची में बदलाव और वैश्विक समीकरण
थाईलैंड ने इस साल मई में वीज़ा-मुक्त देशों की सूची को 93 से घटाकर 54 करने और प्रवास अवधि को 30 दिन तक सीमित करने का प्रस्ताव रखा था। नए संशोधनों के बाद, भारत के अलावा क्रोएशिया, बुल्गारिया, साइप्रस, माल्टा और मालदीव जैसे देशों के नागरिकों को भी 30 दिन की वीज़ा-मुक्त एंट्री की अनुमति दी गई है।
नया आंकड़ा: उप-सरकारी प्रवक्ता प्लॉयटाले लक्समीसांगचन के अनुसार, इस नए निर्णय के बाद अब 30 दिनों की वीज़ा-फ्री एंट्री की पात्रता रखने वाले देशों की कुल संख्या बढ़कर 60 हो गई है (जिसमें यूरोपीय संघ के सभी 27 देश शामिल हैं)।
शेंगेन वीज़ा की कोशिश: थाईलैंड को उम्मीद है कि इस उदार वीज़ा नीति के जरिए वह अपने नागरिकों के लिए यूरोपीय 'शेंगेन वीज़ा' में छूट हासिल करने के प्रयासों को वैश्विक स्तर पर मजबूती दे सकेगा।
थाईलैंड की अर्थव्यवस्था के लिए संजीवनी है पर्यटन
पर्यटन उद्योग थाईलैंड की जीडीपी (GDP) का मुख्य स्तंभ माना जाता है:
वर्ष 2025 का प्रदर्शन: पिछले साल थाईलैंड ने लगभग 3.3 करोड़ (33 मिलियन) विदेशी पर्यटकों की मेजबानी की, जिससे देश को तकरीबन 50 बिलियन डॉलर की भारी-भरकम कमाई हुई थी।
वर्ष 2026 की वर्तमान स्थिति: इस साल भी 4 जुलाई 2026 तक 1.6 करोड़ (16 मिलियन) से अधिक अंतर्राष्ट्रीय पर्यटक थाईलैंड पहुँच चुके हैं।
इस प्रकार, वीज़ा नियमों में किया गया यह नया बदलाव थाईलैंड की राष्ट्रीय सुरक्षा, स्थानीय व्यवसायों के हितों की रक्षा और आर्थिक समृद्धि के बीच एक रणनीतिक संतुलन बनाने का प्रयास है।
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