ख़बर
हरियाणा में बदलेगा मौसम का मिजाज, 20 जुलाई से बारिश के नए दौर की संभावना
14 Jul, 2026 08:06 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिसार। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में एक बार फिर मौसम का मिजाज बदल गया है। सक्रिय हुए नए पश्चिमी विक्षोभ के असर से सोमवार दोपहर बाद हिसार, सिरसा और फतेहाबाद समेत आसपास के तमाम इलाकों में धूल भरी आंधी के साथ हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश दर्ज की गई। इस अचानक हुए बदलाव से झुलसाने वाली गर्मी से जूझ रहे लोगों को काफी हद तक राहत मिली है। हालांकि मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में उमस एक बार फिर लोगों का इम्तिहान ले सकती है।
पश्चिमी विक्षोभ ने दिलाई तपती गर्मी से बड़ी राहत
मौसम विज्ञानियों के अनुसार प्रदेश के कई हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से सूरज के तीखे तेवरों और भारी उमस ने जनजीवन बेहाल कर रखा था। सोमवार सुबह से ही आसमान में बादलों की आवाजाही का सिलसिला शुरू हो गया था, लेकिन दोपहर होते-होते हवा का रुख बदला और धूल भरी आंधी चलने लगी। इसके तुरंत बाद कई इलाकों में गरज-चमक के साथ फुहारें पड़ीं, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई और मौसम काफी खुशनुमा हो गया।
मानसूनी हवाओं की सुस्ती और विक्षोभ का सहारा
विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई महीने की शुरुआत में तो मानसून ने हरियाणा के भीतर धमाकेदार एंट्री की थी, लेकिन कुछ समय बाद ही पश्चिमी जिलों में इसकी रफ्तार बेहद धीमी पड़ गई। प्रदेश के उत्तरी और पूर्वी हिस्सों में तो बारिश का दौर रुक-रुक कर चलता रहा, मगर पश्चिमी इलाके सूखे रह गए। ऐसे में अब पश्चिमी विक्षोभ ही इन सूखे इलाकों के लिए वरदान साबित हो रहे हैं और इसी प्रणाली के चलते समय-समय पर धूल भरी आंधी व बारिश की गतिविधियां दर्ज की जा रही हैं।
अगले कुछ दिनों तक उमस के साथ आंधी का अलर्ट
मौसम विभाग के अनुसार मौजूदा मौसमी परिस्थितियों का प्रभाव अगले दो दिनों तक हरियाणा, दिल्ली और पूरे एनसीआर क्षेत्र में बना रहेगा। इस दौरान तेज रफ्तार हवाएं चलने, आंधी आने और कुछ स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी होने की पूरी संभावना है। हालांकि, इस आंधी-बारिश के बीच धूप निकलने के कारण दिन और रात के तापमान में आंशिक बढ़ोतरी भी दर्ज की जा सकती है, जिससे उमस वाली चिपचिपी गर्मी लोगों को थोड़ा परेशान कर सकती है।
मानसून ब्रेक के बाद फिर शुरू होगा झमाझम बारिश का दौर
मौसम पूर्वानुमान के मुताबिक आने वाले दिनों में मानसून की मुख्य रेखा यानी मानसून ट्रफ तराई वाले पहाड़ी क्षेत्रों की तरफ खिसक जाएगी, जिसके कारण 15 से 19 जुलाई के बीच मैदानी इलाकों में मानसून ब्रेक की स्थिति बनी रहेगी। इस दौरान केवल छिटपुट बूंदाबांदी ही देखने को मिलेगी। राहत की बात यह है कि 20 से 23 जुलाई के बीच मानसूनी हवाएं एक बार फिर सक्रिय होंगी, जिससे पूरे हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर में मध्यम से भारी बारिश का
जयशंकर ने दुनिया के सामने रखा AI का विजन
14 Jul, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में वर्ष 2028-29 के कार्यकाल के लिए भारत ने अपनी अस्थायी सदस्यता की मजबूत दावेदारी पेश कर दी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में भारत के आधिकारिक अभियान का शंखनाद करते हुए दुनिया के सामने देश का स्पष्ट विजन रखा। उन्होंने रेखांकित किया कि सुरक्षा परिषद में चुने जाने पर भारत आतंकवाद के खात्मे, सुरक्षित समुद्री व्यापार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के नैतिक उपयोग को वैश्विक पटल पर मुख्य एजेंडा बनाएगा।
आतंकवाद की वित्तीय कमर तोड़ने पर विशेष जोर
विदेश मंत्री ने वैश्विक मंच से आह्वान किया कि दुनिया को अब आतंकवाद के केवल लक्षणों से लड़ने के बजाय उसकी मूल जड़ पर प्रहार करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद का परमानेंट इलाज तभी मुमकिन है जब आतंकी संगठनों को मिलने वाली आर्थिक और वित्तीय मदद को पूरी तरह ठप कर दिया जाए। भारत का लक्ष्य आतंकवाद के वित्तपोषण पर सख्त वैश्विक लगाम लगाना है। इसके साथ ही, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकियों को प्रतिबंधित सूची में शामिल करने के लिए ठोस और साक्ष्य-आधारित प्रस्तावों को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे कोई भी देश इसका राजनीतिकरण न कर सके।
वैश्विक समुद्री व्यापार की सुरक्षा के लिए साझा प्रयास
सप्लाई चेन और वैश्विक अर्थव्यवस्था की परस्पर निर्भरता का हवाला देते हुए जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों को सुरक्षित और निर्बाध रखने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हालिया वैश्विक घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि समुद्री सुरक्षा में थोड़ी भी चूक पूरी दुनिया के व्यापार को ठप कर सकती है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सख्ती से पालन होना बेहद जरूरी है। भारत समुद्री डकैती (पाइरेसी) जैसी बड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए सक्षम राष्ट्रों के साथ मिलकर काम करने का पक्षधर है।
हिंद महासागर में भारत की अग्रणी भूमिका
समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में भारत के अब तक के योगदान को साझा करते हुए विदेश मंत्री ने बताया कि देश लंबे समय से खोज एवं बचाव अभियानों, आपदा राहत और मानवीय सहायता में अग्रिम पंक्ति में रहा है। भारत का 'इंटरनेशनल फ्यूजन सेंटर' वर्तमान में पूरे हिंद महासागर क्षेत्र में एक बेहतरीन सहयोगी नेटवर्क चला रहा है। भारत यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि सुरक्षा परिषद के भीतर समुद्री सुरक्षा के इन संवेदनशील मुद्दों को प्राथमिकता के साथ उठाया जाए।
जिम्मेदार शासन के लिए भारत का 'MANAV' फ्रेमवर्क
उभरती हुई तकनीकों पर भारत का दृष्टिकोण रखते हुए जयशंकर ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जहां विकास के नए द्वार खोल रही है, वहीं इसके अपने खतरे भी हैं। इसलिए तकनीकी विकास मानव-केंद्रित और जवाबदेह होना चाहिए। इस दिशा में भारत ने दुनिया के सामने MANAV फ्रेमवर्क का प्रस्ताव रखा है। इस विशेष रणनीति के तहत नैतिक व्यवस्था (Moral and Ethical), जवाबदेह शासन (Accountable Governance), राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान (National Sovereignty), सभी के लिए समावेशी पहुंच (Accessible and Inclusive) और एक वैध व विश्वसनीय प्रणाली (Valid and Legitimate) सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाएगा।
पेरिस में जेलेंस्की की अहम बैठकें, रूस पर दबाव बढ़ाने की रणनीति पर होगी चर्चा
13 Jul, 2026 06:22 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पेरिस: रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा विनाशकारी सैन्य संघर्ष अब अपने पांचवें साल में प्रवेश कर चुका है। इस बेहद नाजुक मोड़ पर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की सोमवार को फ्रांस की राजधानी पेरिस पहुंचे। यहाँ वे रूस के आक्रामक हमलों के खिलाफ यूक्रेन को सैन्य और आर्थिक मदद दे रहे करीब दो दर्जन से अधिक यूरोपीय देशों के शीर्ष नेताओं के साथ एक आपातकालीन और रणनीतिक बैठक करेंगे।
इसी वैश्विक हलचल के बीच, यूरोपीय देशों के विदेश मंत्रियों की भी बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में एक अलग से बेहद महत्वपूर्ण बैठक चल रही है। इस बंद कमरे की बैठक में यूक्रेन की तात्कालिक सैन्य आवश्यकताओं, गोला-बारूद की आपूर्ति और रूसी आक्रामकता के कारण पूरे यूरोप महाद्वीप पर मंडरा रहे सुरक्षा खतरों पर गहन मंथन होने की उम्मीद है।
ड्रोन तकनीक में यूक्रेन की लंबी छलांग; पुतिन पर बातचीत के लिए दबाव बनाने की रणनीति
यूक्रेन और उसके सहयोगी यूरोपीय देश इस समय रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर कूटनीतिक और सैन्य दबाव बनाना चाहते हैं ताकि मॉस्को को शांति समझौते की मेज पर लाया जा सके। हालांकि, वाशिंगटन में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के सालभर के तमाम शांति प्रयासों और मध्यस्थता की कोशिशों के बावजूद, क्रेमलिन (रूस) ने युद्ध रोकने या किसी भी तरह के समझौते में अब तक कोई रुचि नहीं दिखाई है:
यूक्रेन को मिली बढ़त: अंतरराष्ट्रीय रक्षा विश्लेषकों और पश्चिमी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, हाल के महीनों में यूक्रेन ने स्वदेशी ड्रोन तकनीक में अभूतपूर्व प्रगति की है, जिसने उसे युद्ध के मैदान में एक नई बढ़त (अपर हैंड) दिलाई है।
सप्लाई चेन पर चोट: यूक्रेन के इन आत्मघाती ड्रोन हमलों ने मोर्चे के पीछे स्थित रूस के मुख्य रसद, हथियार डिपो और आपूर्ति व्यवस्था (सप्लाई चेन) को भारी नुकसान पहुंचाया है। इसके परिणामस्वरूप, रूसी सेना की आगे बढ़ने की रफ्तार काफी धीमी हो गई है और उसे हर इंच जमीन के लिए भारी कीमत चुकानी पड़ रही है।
क्रीमिया में सबसे बड़ा ईंधन संकट; क्रेमलिन के अजेय होने के दावे को लगा बड़ा झटका
यूक्रेनी सेना ने अपनी रणनीति बदलते हुए विशेष रूप से उन क्षेत्रों को निशाना बनाया है जो रूस के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हैं। यूक्रेनी मिसाइल और ड्रोन हमलों का मुख्य फोकस क्रीमिया प्रायद्वीप को मिलने वाली सैन्य और रसद आपूर्ति लाइनों पर रहा है।
इन सटीक हमलों के कारण काला सागर (ब्लैक सी) स्थित इस पूरे क्षेत्र में रूस के कब्जे के बाद से अब तक का सबसे बड़ा ईंधन और ऊर्जा संकट पैदा हो गया है। गौरतलब है कि साल 2014 में रूस ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करते हुए क्रीमिया पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया था। यूक्रेन के इन दुस्साहसिक हमलों ने दुनिया के सामने क्रेमलिन के उस प्रोपेगैंडा और दावे को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है कि रूस इस जंग को आसानी से जीत रहा है।
रूसी मिसाइलों के खिलाफ एयर डिफेंस सिस्टम की दरकार; ट्रंप के फैसले से कीव को बड़ी उम्मीद
पेरिस दौरे के दौरान राष्ट्रपति जेलेंस्की की मुख्य प्राथमिकता यूरोपीय देशों के साथ मिलकर एक ऐसी मजबूत हवाई सुरक्षा प्रणाली (एयर डिफेंस ग्रिड) विकसित करने की है, जो रूस की खतरनाक बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर सके। यह प्रणाली यूक्रेन के बिजली ग्रिडों, थर्मल पावर प्लांटों और नागरिक बुनियादी ढांचों पर रूस के विनाशकारी हवाई हमलों को रोकने के लिए बेहद जरूरी है।
हाल ही में यूक्रेन के विभिन्न शहरों पर रातभर हुए भीषण मिसाइल हमलों के बाद, सोमवार को जेलेंस्की ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भावुक अपील करते हुए लिखा:
"आज दुनिया का हर नागरिक और देश साफ देख रहा है कि यूक्रेन को अपने मासूम लोगों की जिंदगी बचाने के लिए और अधिक आधुनिक हवाई सुरक्षा प्रणालियों (एयर डिफेंस सिस्टम) की कितनी सख्त जरूरत है।"
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पिछले सप्ताह यूक्रेन को आधुनिक 'पैट्रियट हवाई सुरक्षा प्रणाली' बनाने का लाइसेंस देने की घोषणा को कीव के लिए एक बहुत बड़ी कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों और यूक्रेनी अधिकारियों ने आगाह किया है कि इस कागजी योजना को वास्तविक हथियारों और मिसाइलों में तब्दील होकर मोर्चे पर तैनात होने में अभी कई साल का लंबा वक्त लग सकता है।
रूस को कड़ा संदेश: 30 देशों का महामंच; फ्रांस रोकेगा रूसी हैकर्स की घुसपैठ
पेरिस में हो रही इस 'इच्छुक देशों के गठबंधन' (कोअलिशन ऑफ द विलींग) की महाबैठक में यूक्रेन का खुलकर समर्थन करने वाले 30 से अधिक लोकतांत्रिक देश शामिल हो रहे हैं, जिसमें से करीब 25 देशों के राष्ट्राध्यक्ष और सरकार के प्रमुख स्वयं टेबल पर मौजूद हैं। इतनी बड़ी संख्या में वैश्विक नेताओं की भौतिक मौजूदगी को रूस के लिए एक सीधी और कड़ी चेतावनी माना जा रहा है कि पश्चिमी देश यूक्रेन के पीछे चट्टान की तरह खड़े हैं।
इस बीच, फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरट ने सोमवार को एक बड़ा कड़ा रुख अपनाते हुए घोषणा की कि वे फ्रांस में तैनात रूस के राजदूत को तलब (समन) कर कड़ा विरोध दर्ज कराएंगे। फ्रांस सरकार रूसी हैकर्स और साइबर अपराधियों पर सख्त आर्थिक प्रतिबंध लगाने जा रही है। विदेश मंत्री ने खुलासा किया कि यह कार्रवाई रूस की ओर से फ्रांस सहित करीब 10 यूरोपीय देशों में चलाई जा रही जासूसी की एक बहुत बड़ी और खतरनाक साइबर मुहिम (साइबर जासूसी) के पकड़े जाने के बाद की जा रही है।
पड़ोसी देश मोल्दोवा तक पहुंची युद्ध की चिंगारी; यूक्रेन सरकार में बड़ा राजनीतिक फेरबदल
इस महायुद्ध की विनाशकारी चिंगारी अब यूक्रेन की सीमाओं को लांघकर उसके पड़ोसी देशों को भी अपनी चपेट में लेने लगी है। ताजा घटनाक्रम में, यूक्रेन के ओडेसा क्षेत्र पर रूस द्वारा रातभर किए गए भीषण हमलों के दौरान एक आत्मघाती ड्रोन भटककर पड़ोसी देश मोल्दोवा की अंतरराष्ट्रीय सीमा के भीतर जा गिरा और वहां एक बड़ा विस्फोट हुआ।
मोल्दोवा के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को इस घटना की पुष्टि करते हुए इसे अपने संप्रभुता पर 'बेहद गंभीर, खतरनाक और अस्वीकार्य' हमला करार दिया है।
राष्ट्रपति जेलेंस्की एक ऐसे समय में फ्रांस पहुंचे हैं, जब अमेरिकी सीनेट में यूक्रेन के सबसे मुखर और मजबूत पैरोकार रहे सीनेटर लिंडसे ग्राहम का निधन हो चुका है, जिससे वाशिंगटन में यूक्रेन ने अपना एक बड़ा रणनीतिक मित्र खो दिया है। इसके साथ ही, यह पूरी यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब खुद यूक्रेन की आंतरिक सरकार के भीतर एक बहुत बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक फेरबदल चल रहा है। इसी उथल-पुथल के बीच, यूक्रेनी प्रधानमंत्री यूलिया स्विरिडेंको ने रविवार को अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिससे कीव की आंतरिक राजनीति में भी सरगर्मियां बढ़ गई हैं।
मॉस्को दहल उठा: यूक्रेन ने दागे 350 से अधिक ड्रोन; रूसी राजधानी के पास मचे भारी तबाही
यूक्रेन अब सिर्फ अपनी रक्षा नहीं कर रहा, बल्कि उसने रूस के भीतर काफी गहराई में स्थित सैन्य ठिकानों पर अपने स्वनिर्मित लंबी दूरी के ड्रोनों और क्रूज मिसाइलों से विनाशकारी पलटवार करना शुरू कर दिया है। कई मोर्चों पर यूक्रेन के ड्रोनों की संख्या रूस के हमलों के बराबर या उससे भी अधिक देखी गई है:
मॉस्को के मेयर का दावा: रूस की राजधानी मॉस्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया कि रूस की वायु रक्षा प्रणाली ने मॉस्को की ओर बढ़ रहे यूक्रेन के एक विशालकाय ड्रोन बेड़े (लगभग 350 से अधिक ड्रोनों) को हवा में ही इंटरसेप्ट किया है। इनमें से 50 से अधिक खतरनाक ड्रोन राजधानी के मुख्य रिहायशी इलाकों के ठीक ऊपर मार गिराए गए।
रूस में नागरिक हताहत: मॉस्को क्षेत्र के गवर्नर आंद्रेई वोरोब्योव ने बताया कि केवल रातभर के भीतर ही उनके क्षेत्र में 81 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए गए। हालांकि, इस हमले का एक दुखद पहलू यह रहा कि मॉस्को क्षेत्र के पश्चिमी हिस्से में स्थित इस्त्रा के पास पियोनेर्स्की नामक बस्ती में एक यूक्रेनी ड्रोन का मलबा गिरने से भीषण आग लग गई, जिसकी चपेट में आने से तीन आम रूसी नागरिकों की मौत हो गई और तीन अन्य गंभीर रूप से झुलस गए। इस हमले में पांच आलीशान निजी मकान पूरी तरह जलकर राख हो गए, जिससे अब रूस के आम नागरिकों के भीतर भी इस युद्ध को लेकर खौफ बढ़ता जा रहा है।
नेपाल में Gen-Z का बड़ा प्रदर्शन, शाह के फैसले के विरोध में नारेबाजी
13 Jul, 2026 04:22 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काठमांडू। नेपाल में सोशल मीडिया पाबंदियों और भ्रष्टाचार के खिलाफ चले ऐतिहासिक 'जेन-जी आंदोलन' की लहर पर सवार होकर सत्ता के शिखर तक पहुंचे प्रधानमंत्री बालेन शाह अब खुद उसी युवा शक्ति के निशाने पर आ गए हैं। भूमिहीन झुग्गीवासियों को बिना किसी वैकल्पिक पुनर्वास के बेघर करने के सरकारी फैसले के खिलाफ रविवार को राजधानी काठमांडू के मैतीघर मंडला में सैकड़ों लोगों ने जोरदार प्रदर्शन किया। सिंहदरबार सचिवालय के ठीक सामने 'संयुक्त राष्ट्रीय भूमिहीन मोर्चा' के बैनर तले जुटे प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर गरीबों पर अत्याचार बंद करने, मानवाधिकारों की रक्षा और अवैध गिरफ्तारियों पर रोक लगाने की मांग की। यह घटनाक्रम देश में एक बड़ा राजनीतिक विरोधाभास खड़ा करता है, क्योंकि बालेन शाह को युवाओं ने व्यवस्था परिवर्तन के लिए चुना था।
बाढ़ पीड़ितों से मिलने पहुंचे कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज और गिरफ्तारियां
इस विवाद की तात्कालिक वजह काठमांडू के कीर्तिपुर में स्थित एक अस्थायी आवास केंद्र में शुक्रवार रात आई बाढ़ बनी। जलभराव के बाद सुरक्षाबलों ने करीब 150 भूमिहीन झुग्गीवासियों को वहां से सुरक्षित निकाला था। शनिवार को जब 'जेन-जी' से जुड़े युवा सामाजिक कार्यकर्ता इस आपदा की जमीनी हकीकत जानने केंद्र पर पहुंचे, तो पुलिस ने उन पर बेरहमी से लाठीचार्ज कर दिया और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। इस पुलिसिया कार्रवाई में एक युवा कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष गगन कुमार थापा ने पुलिस की इस बर्बरता की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए गिरफ्तार कार्यकर्ताओं को तुरंत रिहा करने की मांग की है। इसी तरह का एक और मामला मोरांग जिले में सामने आया, जहां कार्यकर्ताओं से बदसलूकी के खिलाफ धरना दे रहे 26 अन्य लोगों को भी पुलिस ने जेल भेज दिया।
हजारों परिवारों के बेघर होने से गहराया मानवीय संकट
नेपाल में भूमिहीन संकट इस साल अप्रैल में तब और गहरा गया जब सरकार ने काठमांडू घाटी सहित देश के कई इलाकों में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया। इस कार्रवाई की जद में आने से 2,600 से अधिक परिवारों के लगभग 15,000 लोग रातों-रात बेघर हो गए। इनमें से 325 परिवारों को जैसे-तैसे अस्थायी शिविरों में शरण दी गई थी, लेकिन सरकार ने 2 जुलाई को एक नया फरमान जारी कर उन्हें 6 जुलाई तक इन केंद्रों को भी खाली करने का अल्टीमेटम दे दिया। बिना किसी ठोस पुनर्वास नीति के उठाए गए इस कदम ने हजारों गरीब नागरिकों को अधर में लटका दिया है, जिससे जनता का गुस्सा सरकार के खिलाफ भड़क उठा है।
युवा क्रांति से उदय और तीन महीने में ही मोहभंग
प्रधानमंत्री बालेन शाह का राजनीतिक सफर साल 2025 में देश में भड़के 'जेन-जी' युवा आंदोलन की देन है, जो बढ़ती बेरोजगारी, भाई-भतीजावाद और तानाशाही नीतियों के खिलाफ सोशल मीडिया पर शुरू होकर सड़कों तक फैला था। इस अभूतपूर्व छात्र और युवा विद्रोह ने तत्कालीन प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली को पद छोड़ने पर मजबूर कर दिया था। इसके बाद मार्च 2026 में हुए आम चुनावों में बालेन शाह की पार्टी ने ऐतिहासिक बहुमत हासिल किया और उन्होंने 27 मार्च 2026 को देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। लेकिन सत्ता संभालने के महज साढ़े तीन महीनों के भीतर ही, अपने वादों से पलटने के आरोपों के चलते उन्हें अपनों के ही तीखे विद्रोह का सामना करना पड़ रहा है, जिसने नेपाल को एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता के मुहाने पर ला खड़ा किया है।
SYL मुद्दे पर दुष्यंत चौटाला का CM नायब सैनी से बड़ा आग्रह
13 Jul, 2026 04:18 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रोहतक। हरियाणा के रोहतक स्थित जननायक जनता पार्टी (जजपा) के प्रदेश कार्यालय में संत कबीर दास जयंती समारोह का गरिमामय आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम में पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत कर कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाया। उन्होंने महान संत और समाज सुधारक कबीर दास जी के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए वर्तमान समाज में सामाजिक समरसता, एकता और भाईचारे की भावना को मजबूत करने पर बल दिया।
जहां देवालय वहां पुस्तकालय अभियान को निरंतर आगे बढ़ाने का आह्वान
समारोह के दौरान पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कबीर दास जी की अमूल्य शिक्षाओं को याद करते हुए युवाओं के बौद्धिक विकास पर विशेष ध्यान दिया। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और समाज के प्रबुद्ध नागरिकों से अपील की कि वे समाज में शिक्षा के उजियारे को फैलाने के लिए पूर्व में शुरू किए गए 'जहां देवालय, वहां पुस्तकालय' अभियान को पूरी शिद्दत के साथ निरंतर आगे बढ़ाएं। उनका मानना है कि धार्मिक स्थलों पर पुस्तकालयों के निर्माण से युवा पीढ़ी न केवल अपने संस्कारों से जुड़ी रहेगी बल्कि ज्ञानवान भी बनेगी।
प्रधानमंत्री के दौरे पर दुष्यंत चौटाला ने एसवाईएल नहर का मुद्दा उठाने की मांग की
आगामी समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हरियाणा के प्रस्तावित दौरे को लेकर जजपा नेता ने सूबे की राजनीति में नया दांव खेला है। उन्होंने वर्तमान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से पुरजोर मांग की कि वे प्रधानमंत्री के इस आगमन का लाभ उठाएं और हरियाणा की जीवनरेखा माने जाने वाले सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर के विवादित मुद्दे को उनके समक्ष प्रमुखता से रखें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को बिना किसी संकोच के प्रधानमंत्री से मिलकर इस गंभीर मसले पर हरियाणा के किसानों का वाजिब हक सुनिश्चित कराना चाहिए।
यमुना जल बंटवारे की अधूरी जानकारी और बांध परियोजनाओं के लिए विशेष बजट की वकालत
सरकार की नीतियों को कटघरे में खड़ा करते हुए पूर्व उपमुख्यमंत्री ने भाजपा सरकार पर यमुना जल बंटवारे को लेकर प्रदेश की जनता और विपक्ष को अंधेरे में रखने तथा पूरी जानकारी साझा न करने का सीधा आरोप लगाया। इसके साथ ही उन्होंने हरियाणा के जल संकट को दूर करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाने वाली किशाऊ, लखवार और रेणुकाजी बांध परियोजनाओं की धीमी गति पर चिंता व्यक्त की। दुष्यंत चौटाला ने इन तीनों बड़ी बांध परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार से विशेष वित्तीय बजट आवंटित करने की मांग की।
पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण से इंजनों को होने वाले नुकसान पर जताई गहरी चिंता
समारोह के अंतिम सत्र में उन्होंने देश में बढ़ते ईंधन के दामों और पर्यावरण के नाम पर पेट्रोल में की जा रही एथेनॉल की मिलावट के तकनीकी पहलुओं पर भी खुलकर बात की। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि पेट्रोल में एथेनॉल की अत्यधिक मात्रा मिलने के कारण वाहनों के इंजनों को भारी तकनीकी नुकसान पहुंच रहा है, जिससे आम वाहन स्वामियों की जेब पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। कार्यक्रम में मौजूद पार्टी के राष्ट्रीय संगठन सचिव राजेंद्र लतानी, जिलाध्यक्ष डॉ. संदीप हुड्डा और एससी प्रकोष्ठ प्रभारी रमेश खटक सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने भी कबीर दास के विचारों को सामाजिक समानता की असली आधारशिला बताया।
महंगाई की नई मार, पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल फिर हुआ महंगा
13 Jul, 2026 04:14 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कराची। आर्थिक बदहाली और महंगाई से त्रस्त पाकिस्तान की जनता को सरकार ने एक और करारा झटका दिया है। देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर भारी इजाफा कर दिया गया है, जिसने आम नागरिकों की जेब पर बोझ और बढ़ा दिया है। इस मूल्य वृद्धि के पीछे वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के दामों में आई तेजी को मुख्य वजह बताया जा रहा है।
परिवहन लागत में उछाल और बढ़ा किराया
ईंधन के दाम आसमान छूने का सीधा और तात्कालिक असर देश की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और माल ढुलाई सेवाओं पर देखने को मिल रहा है। ट्रांसपोर्ट कंपनियों और ऑपरेटरों ने तेल की बढ़ी हुई कीमतों का ठीकरा जनता के सिर फोड़ते हुए बसों और अन्य कमर्शियल वाहनों के किराए में तत्काल प्रभाव से बढ़ोतरी कर दी है। हालात यह हैं कि कई प्रमुख शहरों में अब सफर करने के लिए न्यूनतम किराया ही 50 पाकिस्तानी रुपये तय कर दिया गया है।
महंगाई का नया चक्र और भविष्य की चिंता
सफर महंगा होने के साथ ही अब आने वाले दिनों में रोजमर्रा की जरूरी चीजों और खाद्य पदार्थों की कीमतों में भी भारी उछाल आने की आशंका पैदा हो गई है। पहले से ही गंभीर आर्थिक संकट और बेलगाम महंगाई से जूझ रहे पाकिस्तानी आवाम के लिए ईंधन का यह नया झटका 'कोढ़ में खाज' जैसा साबित हो रहा है। आर्थिक विश्लेषकों का अनुमान है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं, तो आने वाले समय में देश में महंगाई का दबाव और ज्यादा बढ़ सकता है, जिससे निपटना सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी।
ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन की बड़ी परियोजना, भूकंपीय क्षेत्र में निर्माण से नया विवाद
13 Jul, 2026 04:01 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। हिमालय की संवेदनशील वादियों में चीन द्वारा ब्रह्मपुत्र नदी पर बनाई जा रही महात्वाकांक्षी जलविद्युत परियोजना एक नए वैज्ञानिक खुलासे के बाद विवादों के घेरे में आ गई है। इस बार चिंता की वजह इसका विशालकाय आकार नहीं, बल्कि इसके ठीक नीचे छिपे भूगर्भीय खतरे हैं। हाल ही में सामने आए एक वैज्ञानिक अध्ययन ने इस बात का सनसनीखेज दावा किया है कि इस प्रस्तावित बांध के नीचे एक बेहद सक्रिय फॉल्ट लाइन गुजर रही है। भूवैज्ञानिकों का स्पष्ट कहना है कि इस सक्रिय रेखा की वजह से भविष्य में यहां विनाशकारी भूकंप और भीषण भूस्खलन का खतरा मंडरा रहा है, जो इतने बड़े निर्माण की बुनियाद को हिला सकता है।
भारत की सीमा पर संकट और पुराना विवाद
यह पूरी परियोजना भारतीय राज्य अरुणाचल प्रदेश की सीमा के अत्यंत समीप आकार ले रही है, जिसके कारण भारत की सुरक्षात्मक और पर्यावरणीय चिंताएं एक बार फिर वैश्विक पटल पर आ गई हैं। चीन अब तक अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यही दलील देता आया है कि उसने अत्याधुनिक तकनीक और गहन भूवैज्ञानिक जांच के बाद ही इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी दी है, इसलिए निचले बहाव वाले देशों को इससे कोई खतरा नहीं है। लेकिन इस नए शोध ने बीजिंग के इन दावों की हवा निकाल दी है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि परियोजना क्षेत्र के पास मौजूद 'पाइझेन फॉल्ट' वास्तव में हिमालयी क्षेत्र की एक ऐसी सोई हुई कड़ी है जो कभी भी जाग सकती है। सदियों से हो रही भूगर्भीय हलचलों के कारण यहाँ के पहाड़ और चट्टानें भीतर से काफी खोखली और कमजोर हो चुकी हैं, जिससे बांध, सुरंगों और विशाल जलाशयों का टिक पाना बेहद मुश्किल नजर आ रहा है।
तबाही का अंदेशा और सुरक्षा पर सवाल
शोधकर्ताओं ने अपनी रिपोर्ट में साफ तौर पर आगाह किया है कि यदि इस इलाके में तीव्र गति का भूकंप आता है, तो पहाड़ों के दरकने की घटनाएं तेजी से बढ़ेंगी। इससे न केवल अरबों डॉलर की यह संरचना मलबे में तब्दील हो सकती है, बल्कि वहां काम कर रहे हजारों कर्मियों की जान भी जोखिम में पड़ जाएगी। वैज्ञानिकों ने इस आसन्न संकट से बचने के लिए चीन को कमजोर पहाड़ियों को अतिरिक्त मजबूती देने और सुरक्षा मानकों को नए सिरे से तय करने की सलाह दी है। चीन में यारलुंग त्सांगपो के नाम से बहने वाली इस नदी पर बन रहे इस प्रोजेक्ट का बजट करीब 167.8 अरब डॉलर आंका गया है, जिसका काम पिछले साल ही शुरू हुआ था। चीन का इरादा इससे सालाना 300 अरब किलोवॉट घंटे से ज्यादा बिजली पैदा कर अपने 30 करोड़ नागरिकों को रोशन करने का है।
पुरानी घटनाओं से सबक और भविष्य की चुनौती
इस अध्ययन में साल 2017 में तिब्बत के मिलिन इलाके में आए 6.9 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप का विशेष रूप से हवाला दिया गया है, जो इस बात का जीवंत प्रमाण है कि पाइझेन फॉल्ट के भीतर आज भी भारी उथल-पुथल चल रही है। इसके अलावा प्राचीन झीलों की तलछटों की जांच भी इसी ओर इशारा करती है कि यह खतरा नया नहीं बल्कि हजारों साल पुराना है। हालांकि, चीनी प्रशासन अभी भी अपने इस स्टैंड पर कायम है कि वह निर्माण के दौरान पर्यावरण और तकनीक के उच्चतम पैमानों का पालन कर रहा है। दूसरी ओर, भारत इस निर्माण को लेकर शुरू से ही अपनी आपत्ति दर्ज कराता रहा है। इस ताजा रिपोर्ट के आने के बाद अब यह बहस बेहद गंभीर हो गई है कि प्रकृति से खिलवाड़ कर दुनिया की सबसे अशांत भूकंपीय पट्टी में इतना बड़ा बांध बनाना कितना तार्किक और सुरक्षित है।
बैंकॉक के नाइट क्लबों में सुरक्षा मानकों पर फिर उठे गंभीर सवाल
13 Jul, 2026 03:01 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बैंकॉक। थाईलैंड की राजधानी में सोमवार के तड़के एक पब के भीतर भयंकर आग लगने से 27 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 63 अन्य लोग झुलसकर अस्पताल पहुंच गए। इस भीषण अग्निकांड के बाद सबसे दिल दहला देने वाला नजारा पब के पिछले हिस्से में स्थित वॉशरूम के पास देखने को मिला, जहां सबसे ज्यादा शव बरामद हुए। आशंका है कि दम घोंटू धुएं से बचने के लिए लोग इस उम्मीद में उस तरफ भागे कि वहां से कोई रास्ता होगा, लेकिन सुरक्षित निकास न मिलने के कारण वे वहीं फंस गए। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद अब पब के इमरजेंसी एग्जिट (आपातकालीन द्वार), फायर अलार्म और अन्य सुरक्षा उपायों की पोल खुलती नजर आ रही है, जिनकी जांच शुरू कर दी गई है।
मनोरंजन स्थलों की सुरक्षा और पुराने जख्म
थाईलैंड के नाइट क्लबों में आग लगने की यह कोई पहली भयावह घटना नहीं है। इससे पहले साल 2009 में एक नाइट क्लब अग्निकांड में 66 लोगों की जान चली गई थी, वहीं 2022 में भी एक म्यूजिक पब में लगी आग ने 14 जिंदगियां लील ली थीं। अब साल 2026 में हुए इस ताजा हादसे ने प्रशासन को फिर से कटघरे में खड़ा कर दिया है कि आखिर बार-बार होने वाली इन त्रासदियों के बाद भी सुरक्षा नियमों को कड़ाई से लागू क्यों नहीं किया गया। दुनिया भर में अपनी नाइटलाइफ और बेहतरीन पर्यटन के लिए मशहूर थाईलैंड में हर साल लाखों विदेशी सैलानी आते हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का साफ कहना है कि सार्वजनिक मनोरंजन स्थलों पर फायर सेफ्टी मानकों का सख्ती से पालन और उनका नियमित निरीक्षण ही भविष्य में ऐसे हादसों को रोक सकता है।
मंच से उठी चिंगारी और हॉल में मची भगदड़
जिस समय यह हादसा हुआ, पब के अंदर लाइव म्यूजिक प्रोग्राम चल रहा था और भारी तादाद में लोग मौजूद थे। शुरुआती जांच में सामने आया है कि मंच पर प्रस्तुति दे रहे एक संगीतकार ने सबसे पहले पास के सर्किट ब्रेकर से धुआं निकलते देखा था। इसके कुछ ही सेकंड बाद पब की बत्ती गुल हो गई और एक जोरदार धमाका हुआ, जिसने पूरे हॉल को पल भर में घने और जहरीले काले धुएं के गुबार से भर दिया। अचानक हुए इस अंधेरे और धुएं के कारण किसी को बाहर निकलने का रास्ता नहीं सूझा और पब के भीतर चीख-पुकार के साथ भीषण भगदड़ मच गई।
राहत कार्य और अपनों की तलाश में भटकते परिजन
सूचना मिलते ही दमकल विभाग की गाड़ियों ने मोर्चा संभाला और करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया, लेकिन तब तक यह पब श्मशान में तब्दील हो चुका था। अस्पताल में भर्ती घायलों में से 22 लोगों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती यह भी आ रही है कि कई पीड़ितों के पास उनकी पहचान से जुड़ा कोई दस्तावेज नहीं मिला है, जिससे शवों की शिनाख्त मुश्किल हो गई है। अपनों को खोने वाले और लापता लोगों के परिजनों की मदद के लिए प्रशासन ने घटनास्थल के ठीक बाहर एक विशेष सहायता केंद्र स्थापित किया है, जहां रोते-बिलखते लोग अपने रिश्तेदारों के बारे में जानकारियां जुटा रहे हैं।
रेलवे को नई रफ्तार: PM मोदी करेंगे एलिवेटेड ट्रैक और स्टेशन का उद्घाटन
13 Jul, 2026 01:28 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जींद। हरियाणा के विकास और तकनीकी इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। आगामी 17 जुलाई को प्रदेश की धरा पर देश की पहली अत्याधुनिक हाइड्रोजन ट्रेन का विधिवत परिचालन शुरू होने जा रहा है, जिसका शुभारंभ स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरी झंडी दिखाकर करेंगे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस ऐतिहासिक पल को पूरे राज्य के लिए एक गौरवशाली और अद्वितीय अवसर करार दिया है, जिससे न केवल परिवहन व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव आएगा बल्कि धार्मिक पर्यटन को भी नए पंख लगेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे देश की पहली पर्यावरण अनुकूल हाइड्रोजन ट्रेन का शुभारंभ
इस विशेष परियोजना के तहत जींद से सोनीपत के बीच देश की पहली हाइड्रोजन संचालित रेलगाड़ी पटरियों पर दौड़ती नजर आएगी। मुख्यमंत्री ने रविवार देर रात अपने आवास कार्यालय पर पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ एक महत्वपूर्ण सांगठनिक बैठक की, जिसमें प्रधानमंत्री के इस ऐतिहासिक दौरे को सफल बनाने के लिए जिम्मेदारियां सौंपी गईं। यह अनोखी ट्रेन बिना किसी पारंपरिक ईंधन या बिजली के केवल हाइड्रोजन ऊर्जा से संचालित होगी, जिससे धुएं के स्थान पर सिर्फ भाप उत्सर्जित होगी और यह पूरी तरह से शून्य प्रदूषण के सिद्धांत पर काम करेगी।
कुरुक्षेत्र को मिलेगी एलिवेटिड रेलवे ट्रैक की सौगात और पांच फाटकों से मुक्ति
प्रधानमंत्री के इस दौरे के दौरान कुरुक्षेत्र वासियों को वर्षों पुरानी जाम की समस्या से बड़ी राहत मिलने जा रही है। शहर में बनकर पूरी तरह तैयार हो चुके नए एलिवेटिड रेलवे ट्रैक और स्टेशन पर रेलगाड़ियों की आवाजाही शुरू कर दी जाएगी। इस बेहद महत्वाकांक्षी परियोजना के धरातल पर उतरने से कुरुक्षेत्र के नागरिकों को शहर के बीचों-बीच आने वाले पांच व्यस्त रेलवे फाटकों के जाम से हमेशा के लिए परमानेंट मुक्ति मिल जाएगी, जिससे स्थानीय यातायात बेहद सुगम और तीव्र हो जाएगा।
सिख गुरुओं के गौरवमयी इतिहास को समेटे भव्य सिख संग्रहालय का शिलान्यास
धार्मिक नगरी कुरुक्षेत्र को एक और बड़ी सौगात देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पहली पातशाही गुरु नानक देव जी से लेकर दशमी पातशाही गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज तक के पावन इतिहास को संजोने वाले एक भव्य सिख म्यूजियम का शिलान्यास किया जाएगा। इस शानदार और आधुनिक संग्रहालय का मुख्य उद्देश्य सिख गुरुओं द्वारा समाज व राष्ट्र की रक्षा के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदानों, उनकी पवित्र वाणी और शिक्षाओं का वैश्विक स्तर पर प्रचार-प्रसार करना है, ताकि आने वाली पीढ़ियां इस महान विरासत से प्रेरणा ले सकें।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में स्थानीय स्तर पर जश्न और पर्यावरण अनुकूल वाहनों से पहुंचने की अपील
इस ऐतिहासिक दिन को यादगार बनाने के लिए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में एक विशाल स्थानीय समारोह का आयोजन किया जाएगा, जिसमें प्रदेश के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। इस बड़े उत्सव को लेकर पूर्व राज्यमंत्री सुभाष सुधा सहित अन्य जनप्रतिक्षियों ने बताया कि पूरे शहर को दीपावली की तरह भव्य रूप से सजाया जाएगा और आतिशबाजी के साथ जश्न मनाया जाएगा। इसी बीच मुख्यमंत्री ने जनता से विशेष अपील की है कि जींद के मुख्य कार्यक्रम में शामिल होने के लिए लोग अधिक से अधिक सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों का ही उपयोग करें ताकि ईंधन की बचत के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जा सके।
हीटवेव का प्रकोप, ब्रिटेन में 2,700 लोगों की मौत का दावा
13 Jul, 2026 01:14 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन। कभी अपनी सर्द और सुहावनी जलवायु के लिए विख्यात ब्रिटेन सहित उत्तरी यूरोप के देश इन दिनों भीषण और जानलेवा गर्मी की नई मार झेल रहे हैं। जिन यूरोपीय देशों में कभी एयर कंडीशनर (एसी) को एक फिजूलखर्ची या अनावश्यक वस्तु समझा जाता था, आज वही एसी लोगों की जान बचाने के लिए एक अनिवार्य जरूरत बन चुका है। पारे में लगातार हो रहे इस रिकॉर्ड तोड़ इजाफे ने जहां बाजार में कूलिंग सिस्टम की मांग को आसमान पर पहुंचा दिया है, वहीं गर्मी के कारण जान गंवाने वाले लोगों के आंकड़ों ने भी सरकारों को चिंता में डाल दिया है। एक ताजा वैज्ञानिक रिपोर्ट के मुताबिक, केवल मई और जून 2026 के महीनों में आई दो भीषण हीटवेव (लू) की चपेट में आने से इंग्लैंड और वेल्स में लगभग 2,700 लोगों की असमय मौत होने की आशंका जताई गई है। पर्यावरण वैज्ञानिकों ने आगाह किया है कि ग्लोबल वार्मिंग के चलते आने वाले समय में यह संकट और अधिक भयानक रूप अख्तियार कर सकता है।
भीषण हीटवेव के आंकड़े और झुलसते घर
इस नए शोध के विवरण के अनुसार, 21 से 29 मई के बीच आए ग्रीष्म लहर के पहले दौर ने करीब 550 लोगों को मौत की नींद सुला दिया, जबकि 18 से 28 जून के बीच आए दूसरे और अधिक आक्रामक दौर ने तकरीबन 2,200 जिंदगियां लील लीं। इस अवधि में इंग्लैंड का पारा अप्रत्याशित रूप से मई में 35.1 डिग्री और जून में 37.7 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा, जिसने सामान्य जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह मौसमी बदलाव इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भविष्य का उत्तरी यूरोप आज के मुकाबले कहीं अधिक गर्म और शुष्क होने जा रहा है। दूसरी तरफ, जलवायु परिवर्तन पर नजर रखने वाली एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति ने एक भयावह चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यदि बुनियादी ढांचे में तुरंत सुधार नहीं किए गए, तो वर्ष 2050 तक ब्रिटेन के लगभग 92 फीसदी घर रहने लायक नहीं बचेंगे और अत्यधिक गर्म हो जाएंगे। समिति ने प्रशासन से अस्पतालों, विद्यालयों और सरकारी भवनों में कूलिंग अरेंजमेंट को आधुनिक बनाने तथा दफ्तरों के लिए काम करने की एक अधिकतम तापमान सीमा निर्धारित करने का आग्रह किया है।
खाड़ी देशों जैसी तपिश और बदलता इंफ्रास्ट्रक्चर
इस साल पड़ी अभूतपूर्व गर्मी ने यूरोप के कई विकसित देशों को यह अहसास करा दिया है कि उनका वर्तमान बुनियादी ढांचा इस स्तर की तपिश का सामना करने में पूरी तरह अक्षम है। यही कारण है कि अब भविष्य के खतरों को भांपते हुए ट्रांसपोर्टेशन और पब्लिक यूटिलिटीज में बुनियादी बदलावों की रूपरेखा तैयार की जा रही है। इसी कड़ी में लंदन, ब्रसेल्स और पेरिस जैसे महानगरों को आपस में जोड़ने वाली हाई-स्पीड अंतरराष्ट्रीय रेल सेवा ने अपनी आगामी ट्रेनों की रूपरेखा को पूरी तरह बदलने का निर्णय लिया है। पूर्व में इन अत्याधुनिक ट्रेनों को अधिकतम 45 डिग्री सेल्सियस तापमान सहन करने की क्षमता के साथ डिजाइन किया जा रहा था, परंतु अब इन्हें खाड़ी देशों (जैसे सऊदी अरब) की तर्ज पर 55 डिग्री सेल्सियस की झुलसाने वाली गर्मी में भी सरपट दौड़ने के लिए अपग्रेड किया जाएगा। इन नई ट्रेनों में ऐसे पावरफुल और आधुनिक एयर कंडीशनिंग सिस्टम फिट किए जाएंगे, जो बाहर की भयंकर गर्मी में भी फेल न हों। यह नई रेल सेवा साल 2031 से पटरियों पर उतरेगी और आने वाले कई दशकों तक यूरोप की लाइफलाइन बनी रहेगी।
नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, भारी मात्रा में डोडा पोस्त बरामद; 6 तस्कर गिरफ्तार
13 Jul, 2026 12:58 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कैथल। हरियाणा में नशा तस्करों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत जिला पुलिस को एक बहुत बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। स्पेशल डिटेक्टिव यूनिट (एसडीयू) की टीम ने एक गुप्त सूचना के आधार पर मुस्तैदी दिखाते हुए बड़ी मात्रा में नशीला पदार्थ बरामद किया है। इस बड़ी रिकवरी के बाद से नशा तस्करों के पूरे सिंडिकेट में हड़कंप मच गया है और पुलिस इसे इस साल की सबसे बड़ी और प्रभावी कार्रवाइयों में से एक मान रही है।
तीन करोड़ रुपये मूल्य का साढ़े उन्नीस क्विंटल डोडा पोस्त बरामद
एसडीयू की टीम द्वारा की गई इस छापामार कार्रवाई के दौरान करीब 19.5 क्विंटल डोडा पोस्त की एक विशाल खेप को जब्त किया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार बरामद किए गए इस मादक पदार्थ की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब 3 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। तस्कर इस भारी खेप को स्थानीय स्तर पर खपाने की तैयारी में थे, लेकिन पुलिस की सतर्कता के कारण उनके मंसूबों पर पूरी तरह से पानी फिर गया।
कलायत क्षेत्र में चली रेड और छह संदिग्ध आरोपी हिरासत में लिए गए
डीएसपी रोहताश ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि उन्हें कलायत क्षेत्र में नशे की एक बड़ी खेप के पहुंचने की सटीक खुफिया जानकारी मिली थी। सूचना की तस्दीक होते ही एसडीयू की टीम ने बिना वक्त गंवाए चिन्हित ठिकाने पर पूरी घेराबंदी के साथ रेड की। मौके से भारी मात्रा में डोडा पोस्त बरामद करने के साथ ही पुलिस ने इस अवैध कारोबार में लिप्त छह आरोपियों को भी घेराबंदी करके हिरासत में ले लिया है।
तस्करी के बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज खंगालने में जुटी पुलिस
पकड़े गए सभी छह आरोपियों को थाने लाकर पुलिस की विशेष टीम द्वारा बेहद गहनता से पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक पूछताछ के जरिए अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि नशे की यह इतनी बड़ी खेप मूल रूप से किस राज्य या जिले से तस्करी कर यहां लाई गई थी और स्थानीय स्तर पर इसके मुख्य खरीदार कौन-कौन थे। पुलिस इस नेटवर्क के पीछे छिपे मुख्य सरगनाओं की पहचान करने में जुटी है।
पूरे गिरोह के पर्दाफाश के लिए आरोपियों को रिमांड पर लेगी कोर्ट
इस संवेदनशील मामले को लेकर पुलिस का कहना है कि जांच का दायरा काफी बड़ा है और जल्द ही कई अन्य चौंकाने वाले खुलासे होने की उम्मीद है। पुलिस हिरासत में लिए गए सभी आरोपियों को जल्द ही स्थानीय अदालत में पेश करेगी, जहां से उनकी पुलिस रिमांड मांगी जाएगी। रिमांड के दौरान आरोपियों से आमने-सामने बिठाकर पूछताछ की जाएगी ताकि इस पूरे अंतरराज्यीय ड्रग नेटवर्क को पूरी तरह से नेस्तनाबूद किया जा सके।
खुशियों से भरी यात्रा बनी अंतिम सफर, सड़क हादसे में 13 लोगों की मौत
13 Jul, 2026 10:39 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जावा (इंडोनेशिया): इंडोनेशिया के मुख्य द्वीप जावा पर एक भीषण सड़क हादसे में शादी समारोह से लौट रहे 13 मेहमानों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 5 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हादसा उस वक्त हुआ जब सवारियों से भरी एक पिकअप गाड़ी हाईवे पर दो भारी भरकम ट्रकों के बीच सैंडविच बन गई। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंचे। फिलहाल, पुलिस प्रशासन इस पूरे दर्दनाक वाकये की गहनता से तफ्तीश कर रहा है।
यू-टर्न लेते समय हुआ दर्दनाक हादसा
स्थानीय यातायात पुलिस प्रमुख उंदांग स्यारिफ हिदायत ने दुर्घटना की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यह वीभत्स वाकया रविवार दोपहर को इंद्रामायु रीजेंसी के कियाजारन कुलोन गांव के पास उत्तरी तटीय हाईवे पर पेश आया। गाड़ी में सवार सभी लोग पड़ोसी परेआन गांव में आयोजित एक शादी समारोह में शिरकत करने के बाद खुशी-खुशी अपने घरों को वापस लौट रहे थे, लेकिन रास्ते में ही मौत ने उन्हें घेर लिया।
दो ट्रकों के बीच ऐसे फंसी यात्रियों से भरी पिकअप
पुलिस द्वारा दी गई शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, सभी मेहमान एक खुली पिकअप गाड़ी में सवार होकर सफर कर रहे थे। हाईवे पर सफर के दौरान जब चालक ने एक यू-टर्न लेने के लिए डिवाइडर के कट के पास वाहन की रफ्तार को धीमा किया और गाड़ी रोकी, तभी पीछे से काल बनकर आ रहे एक तेज रफ्तार विंग बॉक्स ट्रक ने पिकअप को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी।
टक्कर के बाद मची चीख-पुकार और बिखरी लाशें
पुलिस प्रमुख हिदायत ने आगे बताया कि पीछे से लगे इस भीषण झटके के कारण पिकअप अनियंत्रित होकर डिवाइडर लांघते हुए सीधे सामने वाली दूसरी लेन में जा पहुंची। इसी दौरान विपरीत दिशा से आ रहे एक अन्य तेज रफ्तार ट्रक ने पिकअप को सामने से भी जोरदार टक्कर मार दी। दोनों ट्रकों के बीच हुई इस जबर्दस्त भिड़ंत के कारण पिकअप के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार एक दर्जन से अधिक लोग हवा में उछलकर हाईवे पर जा गिरे। हादसे में घायल पांच लोगों को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार घायलों में से कुछ की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।
ईरान पर अमेरिकी एयरस्ट्राइक, जवाबी कार्रवाई को लेकर तेहरान का बड़ा बयान
13 Jul, 2026 10:33 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन/तेहरान: अमेरिका ने रविवार (स्थानीय समय) को ईरान के खिलाफ एक और बड़ा सैन्य ऑपरेशन शुरू करते हुए भीषण हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने आधिकारिक तौर पर बयान जारी कर स्पष्ट किया कि इन हमलों का मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाजों और आम नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा उन पर हमला करने की ईरान की ताकत को ध्वस्त करना है। सेंटकॉम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि यह आक्रामक कार्रवाई सीधे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर अमल में लाई गई है ताकि ईरानी सेना की हरकतों का करारा जवाब दिया जा सके। अमेरिकी कार्रवाई के बाद खाड़ी क्षेत्र में युद्ध के बादल और गहरे हो गए हैं। ईरानी मीडिया के मुताबिक, हमलों के फौरन बाद दक्षिणी ईरान के जास्क, बंदर अब्बास और सीरिक शहरों में भीषण धमाकों की आवाजें सुनी गईं।
ईरान ने दी जवाबी कार्रवाई की सख्त चेतावनी
अमेरिकी सैन्य कार्रवाई पर ईरान के विदेश मंत्रालय ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। ईरान ने पिछले 24 घंटों में हुए इन हमलों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर का खुला उल्लंघन बताते हुए इसकी पुरजोर निंदा की है। मंत्रालय ने आरोप लगाया कि अमेरिका के इस कदम ने पश्चिम एशिया में शांति बहाली के हालिया प्रयासों पर पानी फेर दिया है। ईरान ने दोटूक चेतावनी दी है कि यदि किसी भी पड़ोसी देश ने अपनी जमीन या सैन्य हवाई अड्डों का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ अमेरिकी हमलों के लिए करने दिया, तो ईरानी सशस्त्र बल आत्मरक्षा के तहत उस देश के ठिकानों को भी अपना "वैध सैन्य निशाना" मानकर पलटवार करेंगे। इसके साथ ही, ईरान ने मस्कट वार्ता को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति के दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे "पूरी तरह झूठ" करार दिया और कहा कि वार्ता का एजेंडा केवल समुद्री आवाजाही के प्रबंधन तक सीमित था।
यूएन प्रमुख ने दी विनाशकारी परिणामों की चेतावनी
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते इस भीषण सैन्य टकराव पर संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने गहरी चिंता जताई है। उन्होंने वैश्विक समुदाय को आगाह किया कि खाड़ी क्षेत्र में होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी यह रस्साकशी दुनिया के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। गुटेरेस ने सोशल मीडिया पर लिखा कि होर्मुज में ईरान द्वारा जहाजों पर किए जा रहे हमले और जवाब में अमेरिका द्वारा ईरान पर की जा रही बमबारी तुरंत बंद होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह तनाव एक पूर्ण युद्ध में तब्दील हो गया, तो इसके वैश्विक अर्थव्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और मध्य-पूर्व के आम लोगों पर बेहद "विनाशकारी परिणाम" होंगे। यूएन प्रमुख ने दोनों देशों से संयम बरतते हुए तत्काल कूटनीतिक बातचीत की मेज पर लौटने की अपील की है।
140 सैन्य ठिकानों पर बमबारी और ट्रंप का दावा
इससे पहले शनिवार को भी अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के खिलाफ तीसरे दौर की व्यापक सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया था। सेंटकॉम के अनुसार, अमेरिकी सेना ने जमीन और समुद्र (नौसैनिक जहाजों) से उड़ान भरने वाले लड़ाकू विमानों व ड्रोनों की मदद से ईरान के लगभग 140 सैन्य ठिकानों पर सटीक और भीषण हमले किए हैं। इस कार्रवाई में ईरान के मिसाइल और ड्रोन लॉन्चिंग पैड, नौसैनिक अड्डे, हथियार डिपो, संचार नेटवर्क और तटीय निगरानी केंद्रों को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। इस महायुद्ध जैसी स्थिति के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि तमाम तनाव और सैन्य अभियानों के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों के लिए पूरी तरह खुला हुआ है और इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर ईरान के नियंत्रण के दावों में कोई दम नहीं है।
थाईलैंड में आग का तांडव, बैंकॉक पब हादसे में 27 लोगों की मौत
13 Jul, 2026 07:03 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बैंकॉक: थाईलैंड की राजधानी में सोमवार तड़के एक पब में भीषण आग लगने से कम से कम 27 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे के बाद पूरे इलाके में कोहराम मच गया। अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, सूचना मिलते ही दमकल विभाग की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और फायर फाइटर्स ने करीब आधे घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद लपटों पर काबू पाया।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ खौफनाक मंजर
राहत और बचाव कार्य में जुटे कर्मियों ने बताया कि इस वीभत्स अग्निकांड की खबर देर रात को मिली थी। घटना के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो भी सामने आए, जिनमें उत्तरी बैंकॉक में स्थित इस पब के मुख्य दरवाजे से आग की गगनचुंबी लपटें उठती हुई दिखाई दे रही हैं। पब के भीतर मौजूद लोग अपनी जान बचाने के लिए बदहवास होकर बाहर की तरफ भागते नजर आए। वहीं, आसमान में दूर-दूर तक काले धुएं का एक घना गुबार छा गया, जिससे चारों तरफ चीख-पुकार मच गई।
प्रधानमंत्री ने जताया दुख, दिए जांच के आदेश
इस दिल दहला देने वाले हादसे के बाद थाईलैंड के प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नवीरकुल ने खुद जमीनी हालात का जायजा लिया। घटनास्थल का दौरा करने के बाद उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में पुष्टि की कि इस भीषण आग की चपेट में आने से 27 लोगों ने अपनी जान गंवा दी है। इसके अलावा, झुलसे हुए कई अन्य पीड़ितों को तुरंत इलाज के लिए नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। प्रधानमंत्री ने इस दुर्घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि आग लगने की मुख्य वजहों का पता लगाने के लिए उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी गई है।
एक पल में बिछड़ गए साथी, खाना खाने निकले थे और हो गया दर्दनाक हादसा
12 Jul, 2026 02:37 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
फु क्वोक (वियतनाम)। वियतनाम का प्रसिद्ध और खूबसूरत पर्यटन स्थल फु क्वोक द्वीप एक भीषण हादसे का गवाह बना, जहां भारतीय सैलानियों से भरी एक तेज रफ्तार स्पीडबोट समंदर की लहरों की चपेट में आकर पलट गई। इस दर्दनाक हादसे में 15 भारतीय पर्यटकों की असमय मौत हो गई, जिनमें 13 पुरुष और 2 महिलाएं शामिल थीं। ये सभी मृतक दक्षिण भारत के मोबाइल डिस्ट्रीब्यूटर्स थे, जो मोबाइल निर्माता कंपनी 'लावा इंटरनेशनल' की ओर से आयोजित एक इंसेंटिव ट्रिप पर वियतनाम के दौरे पर आए थे। खुशियों और मनोरंजन का यह सफर पल भर में एक बड़ी त्रासदी में बदल गया।
चश्मदीद की जुबानी, खौफनाक मंजर
इस भयावह हादसे में बाल-बाल बचे तमिलनाडु के पलानी निवासी निर्मल कुमार ने घटना के उन खौफनाक पलों को साझा किया। उन्होंने बताया कि लगभग 39 लोग दोपहर के भोजन के लिए इस पूरी तरह से कवर्ड (बंद) बोट पर सवार हुए थे। बोट अभी तट से आधा किलोमीटर की दूरी भी तय नहीं कर पाई थी कि समंदर में अचानक उठी एक बेहद ऊंची और शक्तिशाली लहर उससे टकरा गई। बोट पर क्षमता से अधिक वजन होने की भी आशंका थी, जिसके कारण कुछ ही सेकेंडों में नाव पूरी तरह पलट गई। निर्मल कुमार और उनके मित्र बोट के अगले हिस्से में बैठे होने के कारण पानी में कूदकर बाहर निकलने में सफल रहे, लेकिन पिछले हिस्से में बैठे लोग बोट के बंद ढांचे के कारण भीतर ही कैद होकर रह गए।
रेस्क्यू ऑपरेशन में आईं बड़ी चुनौतियां
हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और वियतनाम कोस्ट गार्ड ने 2 हाई-स्पीड रेस्क्यू बोट और 40 से अधिक अधिकारियों के साथ तुरंत मोर्चा संभाला। बचाव कार्य में शामिल एक स्थानीय बोट ऑपरेटर ने बताया कि वे महज 5 मिनट में घटना स्थल पर पहुंच गए थे, लेकिन स्पीडबोट के चारों तरफ से बंद होने के कारण भीतर फंसे लोगों को बाहर निकालना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। दम घुटने के कारण कई लोग अंदर ही अचेत हो चुके थे। कड़ी मशक्कत के बाद कुल 36 लोगों में से 21 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जिनमें 17 यात्री और 4 क्रू मेंबर्स शामिल हैं। बचाए गए लोगों में से 2 की हालत अभी भी अत्यंत नाजुक बनी हुई है।
मृतकों की पहचान और परिवारों में कोहराम
वियतनाम स्थित भारतीय दूतावास ने इस हादसे में जान गंवाने वाले सभी 15 पर्यटकों की आधिकारिक सूची जारी कर दी है। मृतकों में तमिलनाडु के 10 सैलानी, आंध्र प्रदेश के 3 निवासी (रवि तेजा, मुदियम श्रीधर और गेल्ली जया लक्ष्मी) तथा केरल के कोट्टाराकारा के प्रसिद्ध व्यवसायी ए.सी. थॉमस और उनकी पत्नी लोवेनी थॉमस शामिल हैं। इस भीषण त्रासदी की खबर जैसे ही भारत में पीड़ितों के घरों तक पहुंची, वहां चीख-पुकार मच गई। मृतक रवि तेजा के भाई ने बताया कि वे 8 जुलाई को ही इस ट्रिप पर गए थे और परिवार अब भी इस दुखद सच को स्वीकार नहीं कर पा रहा है। वहीं, मुदियम श्रीधर का परिवार जो दो दिनों में उनकी घर वापसी की उम्मीद लगाए बैठा था, वह इस खबर के बाद पूरी तरह टूट चुका है।
हादसे के बाद प्रशासन सख्त, सुपरवाइजर पर गिरी गाज और कंपनी हुई ब्लैकलिस्ट
