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अमेरिका में फिर हुई ताबड़तोड़ फायरिंग, 12 गंभीर घायलों में बच्चे भी शामिल
1 Dec, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कैलिफोर्निया। कैलिफोर्निया प्रांत के स्टॉकटन इलाके में ओपन फायरिंग की घटना सामने आई है। मास शूटिंग की इस घटना में बताया जा रहा है कि 12 से ज्यादा लोग इस घटना में बुरी तरह से जख्मी हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक सैन जाओक्विन काउंटी शेरिफ ऑफिस ने ये जानकारी दी जख्मी हुए लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना की जांच की जा रही है कि आखिर इसके पीछे वजह क्या रही। एक चश्मदीद ने बताया कि जब वे स्टॉकटन में गैस भरवाने रुके, तो वहां 11 पुलिस कारें और 5 एम्बुलेंस दिखीं। बताया गया कि 9 साल, 12 साल के बच्चों और कई अन्य लोगों को गोली लगी है। फिलहाल कुल 12 पीड़ित हैं। बता दें कि सिर्फ साल 2025 में ही अमेरिका में 300 से ज्यादा मास शूटिंग की घटनाएं दर्ज हो चुकी हैं। लगभग हफ्ते, यहां किसी न किसी राज्य में फायरिंग की घटना सामने आ जाती है।
कैलिफोर्निया के स्टॉकटन शहर में ये भयानक घटना लूसिल एवेन्यू के 1900 ब्लॉक, थॉर्नटन रोड के पास 29 नवंबर को हुई। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अस्पताल में भर्ती हुए लोगों में से कई की हालत गंभीर है। कुछ रिपोर्ट्स में ये संख्या 12 तो कुछ में 14 बताई जा रही है। घाटल होने वाले लोगों में बच्चे भी शामिल हैं। घटना के बाद सोशल मीडिया पर इसके कुछ वीडियो शेयर किए गए हैं, जिसमें इलाके में भारी पुलिस बल, कई एम्बुलेंस, और हर तरफ फ्लैशिंग लाइट्स दिखीं। इससे पता चल रहा है कि मामला कितना ज्यादा गंभीर है।
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि पुलिस ने घटना के बाद इलाके में हाई-स्पीड चेज भी शुरू कर दी है। हालांकि फिलहाल हमलावर के बारे में किसी भी तरह की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है कि वो कहां से आया और उसके ऐसा क्यों किया। सोशल मीडिया पर वहां से गुजरने वाले लोगों ने हालात के बारे में जानकारी दी है। ज्यादातर लोगों का कहना है कि आधिकारिक तौर पर अभी कुछ नहीं कहा गया है लेकिन स्थिति गंभीर है। अमेरिका में सिर्फ नवंबर के ही महीने में फायरिंग और मास शूटिंग की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इसमें सबसे चर्चित 26 नवंबर 2025 में व्हाइट हाउस के सामने हुई फायरिंग रही, जिसमें दो नेशनल गार्ड्स को निशाना बनाया गया था। बाद में संदिग्ध को हिरासत में लिया गया।16 नवंबर 2025 को फ्लोरिडा के जैक्सनविले में एक पार्टी के दौरान हुई गोलीबारी में कम से कम 4 लोग जख्मी हो गए। 17 नवंबर 2025 को न्यू मेक्सिको के लास क्रूसेस में एक हाउस पार्टी के दौरान गोलीबारी हुई, इस घटना में 1 व्यक्ति की मौत हो गई और 3 लोग जख्मी हो गए। 9 नवंबर 2025 को कैलिफोर्निया के ही सैन फ्रांसिस्को में बीच के पास हुई लड़ाई के बाद गोलीबारी हुई, जिसमें 5 लोग जख्मी हो गए। 7 नवंबर 2025 को डेलावेयर के विलिमिंग्टन में भी फायरिंग की घठना सामने आई, जिसमें 5 लोग जख्मी हो गए।
वेनेजुएला की विपक्षी नेता मचाडो नोबेल पुरस्कार लेने गई तो होंगी भगोड़ा घोषित
30 Nov, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वेनेजुएला । नोबेल पुरस्कार विजेता और वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो अगर शांति पुरस्कार लेने नॉर्वे जाती हैं तो उन्हें ‘भगोड़ा’ करार दिए जाने का खतरा है। कोरिना मचाडो को लोकतांत्रिक अधिकारों को बढ़ावा देने के लिए पिछले महीने नोबेल शांति पुरस्कार देने की घोषणा की गई थी। वेनेजुएला में मचाडो के खिलाफ आतंकवाद से जुड़े आरोपों समेत कई आपराधिक मामले दर्ज होने से उन्हें व्यक्तिगत रूप से पुरस्कार लेने जाने से मना करना पड़ सकता है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 58 साल की कोरिना मचाडो कथित तौर पर देश में छिपी हैं। वेनेजुएला की इस राजनीतिज्ञ ने पिछले सप्ताह 10 दिसंबर के समारोह के लिए नॉर्वे के शहर ओस्लो की यात्रा करने की इच्छा जताई थी। हालांकि एक रिपोर्ट के मुताबिक वेनेजुएला के अटॉर्नी जनरल तारेक विलियम साब ने चेतावनी दी है कि वह कई आपराधिक मामलों का सामना कर रही हैं और यदि वह शांति पुरस्कार लेने विदेश जाती हैं तो उन्हें ‘भगोड़ा’ घोषित किया जाएगा।
विलियम साब ने बताया कि वेनेजुएला से बाहर रहने और कई आपराधिक जांचों के कारण उन्हें भगोड़ा माना जाता है। कोरिना मचाडो पर षड्यंत्र, घृणा भड़काने और आतंकवाद के कृत्यों का आरोप है। रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त 2024 से मचाडो छिपी हुई हैं। उस समय मादुरो ने खुद को तीसरे कार्यकाल के लिए फिर से निर्वाचित घोषित करने के बाद विरोधियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी। रिपोर्ट के मुताबिक मचाडो ने पिछले महीने एक साक्षात्कार में कहा था कि निकोलस मादुरो ने मुझ पर आतंकवाद का आरोप लगाया था और उन्हें छिपना पड़ा था। उन्होंने कहा कि उनके ज्यादातर सहयोगियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। बचे हुए छिप गए या निर्वासन में चले गए हैं।
उन्होंने कहा कि करीब 15 महीने से वह एकांतवास में हैं और उन्हें इस बात का अहसास है कि अगर वे उन्हें ढूंढ भी लेंगे तो उन्हें गायब कर ही देंगे। विश्लेषकों का मानना है कि अपनी जान और आज़ादी को जोखिम में डाले बिना, मचाडो शायद देश के अंदर रहकर ही नोबेल पुरस्कार स्वीकार करेंगी। यह सवाल इस समय वेनेजुएला की राजनीति और अंतररष्ट्रीय मानवाधिकार आंदोलनों के केंद्र में है। कोरिना मचाडो का नॉर्वे जाने का फैसला उनके राजनीतिक करियर और वेनेजुएला में लोकतंत्र की लड़ाई के लिए अत्यंत जोखिम भरा और अहम कदम होगा।
रिपोर्ट के मुताबिक मचाडो वेनेजुएला से ही वर्चुअली या वीडियो संदेश के जरिए पुरस्कार स्वीकार कर सकती हैं। इससे वह अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा तय कर पाएंगी और देश के अंदर रहकर विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व जारी रख सकेंगी। वह अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों का सामना वेनेजुएला की कोर्ट में कर सकती हैं। सरकार उन पर कानूनी दबाव बनाए रखेगी, लेकिन देश के अंदर उनकी उपस्थिति विरोधियों को जुटाए रखने में मदद करेगी। हालांकि उनके ना जाने के फैसले से नोबेल समिति या समर्थकों को निराशा हो सकती है।
एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कैरिबियन सागर और उसके आसपास के क्षेत्रों में अमेरिकी सैन्य बलों की तैनाती का समर्थन करने के लिए भी कोरिना मचाडो की जांच चल रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया के सबसे बड़े विमानवाहक पोत, युद्धपोतों और लड़ाकू विमानों को तैनात किया है, जिसे वाशिंगटन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के वेनेजुएला शासन के खिलाफ एक मादक पदार्थ-विरोधी अभियान बता रहा है हालांकि, मादुरो का दावा है कि ट्रंप का कदम वामपंथी सरकार को गिराने के लिए है।
बता दें वेनेजुएला 2015 से ही अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। इससे पहले ट्रंप ने अगस्त 2017 में अपने पहले राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान सार्वजनिक रूप से वेनेजुएला पर सैन्य आक्रमण का संकेत दिया था। उनके दूसरे कार्यकाल में कूटनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है, जिससे फिर सैन्य कार्रवाई के संकेत मिलते हैं। वेनेजुएला की विपक्षी नेता और नोबेल पुरस्कार विजेता मचाडो ने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति का स्वागत किया है।
नेशनल गार्ड पर हमले के बाद अमेरिका ने अफगानियों के प्रवेश पर लगाई रोक
30 Nov, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी विदेश विभाग ने अचानक ऐलान किया कि अफगान पासपोर्ट धारकों को सभी तरह के वीजा जारी करना तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है। नए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर खुद इसकी पुष्टि की और लिखा, हमारे देश और हमारे लोगों की सुरक्षा से बड़ी कोई प्राथमिकता नहीं है।
यह कड़ा कदम बुधवार को वॉशिंगटन डीसी में हुए जानलेवा हमले के फौरन बाद लिया गया, जिसमें एक नेशनल गार्ड सैनिक की मौत हो गई और दूसरा गंभीर रूप से घायल है। हमलावर की पहचान 31 वर्षीय अफगान नागरिक रहमानुल्लाह लाकनवाल के रूप में हुई है। लाकनवाल 2021 में बाइडन प्रशासन के ‘ऑपरेशन अलाइज वेलकम’के तहत अमेरिका लाया गया था। सीआईए ने पुष्टि की है कि उसने अफगानिस्तान में अमेरिकी खुफिया एजेंसी के लिए काम किया था। हमले के बाद लाकनवाल पर फर्स्ट डिग्री मर्डर के साथ-साथ हथियारबंद हमले के दो अन्य गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
अलग से अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआईए) के निदेशक जोसेफ एडलो ने घोषणा की कि अब हर शरण आवेदन पर फैसला तब तक रोका जाएगा, जब तक अधिकतम स्तर की जांच और स्क्रीनिंग पूरी नहीं हो जाती। इसका मतलब है कि फिलहाल कोई भी नया शरणार्थी अमेरिका में कानूनी दर्जा नहीं पा सकेगा। ट्रंप प्रशासन के आने के मात्र दस दिन के अंदर यह इमिग्रेशन नीति पर सबसे सख्त कार्रवाई मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि 2021 में आए करीब 76,000 अफगान शरणार्थियों की दोबारा जांच का रास्ता भी इससे खुल गया है। अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अफगान पासपोर्ट पर यह प्रतिबंध तब तक जारी रहेगा, जब तक नई वीजा स्क्रीनिंग प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती। फिलहाल अफगान नागरिकों के लिए अमेरिका आने का एकमात्र रास्ता लगभग बंद हो चुका है।
बहन अलीमा बोलीं – वे मारेंगे नहीं, जनता उन्हें जिंदा नहीं छोड़ेगी
30 Nov, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान की अडियाला जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की जान को लेकर अब खुलेआम दहशत फैल रही है। पीटीआई के अंदरूनी सूत्रों ने बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं कि 4 नवंबर के बाद से किसी को भी इमरान से मिलने नहीं दिया जा रहा और जेल के अंदर उनके साथ “बर्बर मारपीट” की जा रही है। उन्हें पूरी तरह सॉलिटरी कन्फाइनमेंट (एकांत कारावास) में डाल दिया गया है, जहां न परिवार, न वकील और न ही पार्टी नेता पहुंच पा रहे हैं।
सूत्रों ने दावा किया है कि इमरान खान की सेहत तेजी से बिगड़ रही है। लगातार शारीरिक-मानसिक टॉर्चर, खराब खाना, अंधेरे सेल और संवाद पर पूरी पाबंदी के कारण उनकी हालत चिंताजनक हो चुकी है। कुछ दिन पहले जेल में उनके साथ “शारीरिक शोषण” तक की अफवाहें भी उड़ी थीं, जिन्हें न तो साबित किया जा सका, न खारिज। अब पीटीआई के करीबी रहे जुल्फी बुखारी ने स्थानीय मीडिया को बताया, 4 नवंबर के बाद से इमरान खान को किसी ने नहीं देखा। मुलाकात से बार-बार इनकार किया जा रहा है, बिना कोई वजह बताए।
इमरान की बहन अलीमा खानम ने कहा, “कुछ न कुछ बहुत गलत हो रहा है। लेकिन वे इमरान को मारेंगे नहीं, क्योंकि अगर ऐसा किया तो पूरा पाकिस्तान सड़कों पर उतर आएगा। जनता उन्हें जिंदा नहीं छोड़ेगी। न उन्हें देश में रहने देंगे, न भागने का आसमान का रास्ता मिलेगा। अलीमा ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, लोग अब चुप नहीं रहेंगे। बस वक्त का इंतजार है। परिवार और पार्टी अब सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं ताकि इमरान को फौरन अदालत में पेश किया जाए और उनकी असल हालत सामने आए। पाकिस्तान की सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक एक ही सवाल गूंज रहा है इमरान खान जिंदा हैं या नहीं?
साइक्लोन दित्वा ने श्रीलंका में मचाई तबाही, बाढ़-लैंडस्लाइड से 123 से ज्यादा मौतें
30 Nov, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलंबो। श्रीलंका इस समय एक बड़े मानवीय संकट से गुजर रहा है। साइक्लोन दित्वा ने देश में ऐसी तबाही मचाई जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। बारिश से निचले इलाके डूब गए और जगह-जगह लैंडस्लाइड शुरू हो गए। सबसे दुखद बात यह है कि 123 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 130 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। करीब 3.7 लाख लोग प्रभावित हैं और 195 राहत शिविरों में 14,000 लोग रह रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मातले में तो सिर्फ 24 घंटों में 540 मिमी बारिश हुई। यह बारिश सामान्य सीमा से कई गुना ज्यादा है। पिछले 10 दिनों में करीब 1000 मिमी बारिश ने पूरे इलाकों को तबाह कर दिया। वैज्ञानिकों का कहना है कि 150 मिमी बारिश भी लैंडस्लाइड करा सकती है, और यहां तो 500 मिमी से ज्यादा पानी बरस चुका है। सबसे ज्यादा चिंता कोलंबो और गंपाहा की है, जहां केलानी और अट्टानगालु नदियां खतरे के निशान से ऊपर पहुंच चुकी हैं। लोगों को सुरक्षित जगह जाने और जरूरी कागजात संभालकर रखने को कहा है। तूफान ने श्रीलंका के बुनियादी ढांचे को भी बुरी तरह नुकसान पहुंचाया है। तीन बड़े पुल- मोरगहकंडा मेन ब्रिज, एलाहेरा ब्रिज और कुमारा एला ब्रिज पूरी तरह बह गए। बिजली की लाइनें टूटने से देश के 25–30 फीसदी हिस्से में बिजली की आपूर्ति नहीं की जा रही है। ट्रेनें रद्द हैं और कई परीक्षाएं टाल दी गई हैं।
श्रीलंका राष्ट्रपति ने आपातकालीन कानून लागू किया और बिजली, फ्यूल, अस्पताल और पानी को “जरूरी सेवाएं” घोषित किया है। कोलंबो के आर प्रेमदासा स्टेडियम को राहत केंद्र बनाया गया है, जहां 3,000 लोगों को ठहराया जा सकता है।
भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ
भारत ने तुरंत मदद का हाथ बढ़ाया और ऑपरेशन सागर बंधु शुरू किया। भारतीय नौसेना के विक्रांत और उदयगिरि जहाज राहत सामग्री लेकर श्रीलंका पहुंचे। इनमें 4.5 टन सूखा राशन, 2 टन ताजा खाने का सामान और अन्य जरूरी सामग्री शामिल है। विशेषज्ञों ने इसे अभूतपूर्व स्थिति बताया है और कहा है कि आने वाले दो दिन और मुश्किल भरे हो सकते हैं। तूफान अभी भी त्रिंकोमाली के पास है और भारी बारिश का दौर जारी है।
ऑस्ट्रेलियाई पीएम अल्बनीज ने की शादी, बनाया अनोखा रिकॉर्ड!
30 Nov, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कैनबरा। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने जोडी हेडन से शादी की। इसकी तस्दीक उन्होंने खुद सोशल मीडिया पोस्ट के द्वारा कर दी। दोनों कई साल से संबंध में थे। इस घोषणा ने एक और ऐतिहासिक पहलू पर भी मुहर लगा दी, यह पहली बार है जब किसी मौजूदा ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने अपने कार्यकाल के दौरान विवाह किया है। कपल पहली बार पांच साल पहले मेलबर्न में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मिला था। अल्बनीज ने एक्स पर अंगूठी वाली इमोजी के साथ लिखा, मैरिड!
रिपोर्ट्स के अनुसार, विवाह में केवल परिवार और कुछ करीबी मित्र शामिल थे, जिसमें अल्बनीज का बेटा नाथन और हेडन के माता-पिता बिल और पॉलीन थे। शादी के बाद दोनों ने साझा बयान जारी किया। कहा, “हम अपने परिवार और करीबी दोस्तों के बीच, अपनी आने वाली जिंदगी साथ बिताने का संकल्प ले काफी प्रसन्न हैं।”
इस जोड़े की शादी एनएसडब्ल्यू सेंट्रल कोस्ट के एक सेलिब्रेंट ने करवाई और उन्होंने अपनी कसमें खुद लिखीं। हेडन को उनके माता-पिता ने बेन फोल्ड्स के गाने “द लकिएस्ट” पर शादी की लाइन में ले जाया।
एबीसी.नेट.एयू ने बताया कि परंपरानुसार हेडन की पांच साल की भतीजी एला फूल लेकर पहुंची जबकि प्रधानमंत्री का पेट टोटो अंगूठी लेकर विवाह स्थल तक पहुंचा। कैनबरा के एक नामी रेस्त्रां में डिनर के बाद अल्बनीज ने फरवरी 2024 में वैलेंटाइन डे पर लॉज की बालकनी में हेडन को प्रपोज किया था। उन्होंने इस मौके के लिए एक खास अंगूठी डिजाइन कराई थी।
ऑस्ट्रेलिया के PM की शादी सुर्खियों में, चर्चा की क्या है असली वजह?
29 Nov, 2025 07:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ऑस्ट्रेलिया | ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने शनिवार को अपनी लंबे समय से साथी जोडी हैडन से शादी रचाई. यह ऐतिहासिक शादी उनके सरकारी निवास The Lodge, कैनबरा के गार्डन में आयोजित एक निजी समारोह में हुई |62 वर्षीय प्रधानमंत्री ने 46 वर्षीय वित्तीय सेवाओं की कर्मचारी से विवाह किया. यह पहली बार है जब ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री अपने कार्यकाल में शादी कर रहे हैं. इसलिए ऑस्ट्रेलिया की ये शादी चर्चा का विषय बनी हुई है |
समारोह की झलकियों पर एक नजर
शादी का समारोह बेहद निजी और शानदार था. अल्बनीज ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए एक शब्द में लिखा- Married. वीडियो में उन्होंने बाउ-टाई पहना हुआ था और उनकी दुल्हन, जोडि़ हैडन, लंबी सफेद पोशाक में मुस्कुराती हुई दिखाई दीं, और उनके चारों ओर कंफेट्टी गिर रहा था. इस अवसर पर दंपति ने अपने खुद के वचन लिखे और समारोह को एक सेलिब्रेंट ने संपन्न किया. शादी के दौरान परिवार और करीबी दोस्तों ने उन्हें घेर रखा था |
कौन है पीएम की पत्नी जोडि हैडन?
अल्बनीज ने 14 फरवरी 2024 को वैलेंटाइन डे पर जोडि़ हैडन को प्रपोज किया था. उस समय उन्होंने कहा था कि उन्होंने एक साथी पाया है, जिसके साथ मैं अपनी बाकी जिंदगी बिताना चाहता हूँ. जोडि़ हैडन लंबे समय से अल्बनेज़े के साथ रही हैं। उन्होंने 2022 के चुनाव अभियान में प्रधानमंत्री के साथ कदम से कदम मिलाकर काम किया और इस साल मई में उनके लेबर पार्टी की जीत के समय भी उनके साथ थीं. उनकी जोड़ी को राजनीतिक और निजी दोनों ही मोर्चों पर जनता ने खूब सराहा |
हनीमून और भविष्य की योजनाएँ
शादी के बाद दंपति सोमवार से शुक्रवार तक ऑस्ट्रेलिया में हनीमून मनाएंगे. उनके कार्यालय ने बताया कि हनीमून का खर्च पूरी तरह निजी तौर पर अल्बनीज और हैडन ने वहन किया है. शादी के मौके पर प्रधानमंत्री ने बयान दिया कि हम अपने प्यार और जीवनभर साथ बिताने के संकल्प को परिवार और सबसे करीबी दोस्तों के सामने साझा करके बेहद खुश हैं |
पुतिन के दौरे से पहले भारत–रूस के रिश्तों में मजबूती, बड़े सैन्य समझौते की तैयारी
29 Nov, 2025 03:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन की नई दिल्ली यात्रा से पहले भारत और रूस दोस्ती की नई इबारत लिखने जा रहे हैं। भारत और रूस के बीच अब तक का सबसे बड़ा सैन्य समझौता हो सकता है। भारत और रूस के बीच यह संभावित सैन्य समझौता पाकिस्तान से लेकर चीन तक के लिए और अमेरिका के लिए भी चिंता का सबब बन सकता है।
रूसी संसद के निचले सदन ‘स्टेट डूमा’ ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की चार-पांच दिसंबर को होने वाली भारत यात्रा से ठीक पहले भारत के साथ एक महत्वपूर्ण सैन्य समझौते को मंजूरी देने की अंतिम तैयारी कर ली है। यह समझौता दोनों देशों के बीच लंबे समय से लंबित ‘रेसीप्रोकल एक्सचेंज ऑफ लॉजिस्टिक्स एग्रीमेंट’ (RELOS) है। इस साल 18 फरवरी को मॉस्को में भारत के राजदूत विनय कुमार और रूस के तत्कालीन उप रक्षा मंत्री कर्नल जनरल अलेक्जेंडर फोमिन ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। स्टेट डूमा ने रेलोस दस्तावेज को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर संसदीय पुष्टि के लिए अपलोड कर दिया है।
भारत और रूस की सैन्य साझेदारी होगी मजबूत
सरकार की ओर से दिए गए नोट में कहा गया है कि यह समझौता रूस-भारत सैन्य सहयोग को और मजबूत करेगा तथा दोनों देशों की सेनाओं के बीच परस्पर लॉजिस्टिक सहायता को सरल बनाएगा। रेलोस समझौते से संयुक्त सैन्य अभ्यास, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) अभियानों, पोतों की मरम्मत, ईंधन भराई तथा चिकित्सा सहायता के लिए एक-दूसरे के सैन्य अड्डों का उपयोग आसान हो जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, इस समझौते से सबसे बड़ा रणनीतिक लाभ आर्कटिक और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में होगा। रूसी दैनिक इज्वेस्तिया के मुताबिक, समझौते के प्रावधान आर्कटिक क्षेत्र में संयुक्त नौसैनिक अभ्यासों पर भी लागू होंगे।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ेगा भारत का दबदबा
रूस के साथ यह महत्वपूर्ण सैन्य समझौता होने से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत का दबदबा बढ़ेगा। भारतीय नौसेना के तलवार-श्रेणी फ्रिगेट और विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य कठिन आर्कटिक परिस्थितियों में भी संचालन करने में सक्षम हैं। अब ये पोत रूसी उत्तरी बेड़े के बंदरगाहों में लॉजिस्टिक सहायता प्राप्त कर सकेंगे। दूसरी ओर, रूसी नौसेना भारतीय नौसैनिक अड्डों का उपयोग कर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ा सकेगी, जिसे विशेषज्ञ चीन के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ संतुलन के रूप में देख रहे हैं। रूस ने अमेरिका, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर और वियतनाम जैसे देशों के साथ इसी तरह के लॉजिस्टिक समझौते पहले ही कर रखे हैं।
भारत को मिलेगा और अधिक एस-400
ऑपरेशन सिंदूर में कमाल दिखाने वाले रूस के एयर डिफेंस सिस्टम एस-400 की भारत को और अधिक जरूरत है। पुतिन की भारत यात्रा के बाद और अधिक एस-400 मिलने की उम्मीद की जा रही है। भारत के साथ यह समझौता दोनों देशों के बीच 2003 से चले आ रहे अंतर-सरकारी आयोग (IRIGC-MTC) के तहत सैन्य-तकनीकी सहयोग को नया आयाम देगा। पुतिन की 23वीं भारत-रूस वार्षिक शिखर वार्ता के दौरान इस समझौते की औपचारिक पुष्टि होने की पूरी संभावना है। इससे पहले दोनों देश एस-400 वायु रक्षा प्रणाली, ब्रह्मोस मिसाइल, एके-203 राइफल संयुक्त उत्पादन जैसे बड़े रक्षा सौदों को सफलतापूर्वक लागू कर चुके हैं।
G20 से गायब ट्रंप बोले—2026 में साउथ अफ्रीका नहीं बनेगा मेज़बान! माहौल गर्म
29 Nov, 2025 12:49 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को सफाई देते हुए बताया है कि आखिर अमेरिका ने हाल ही में साउथ अफ्रीका में हुई G20 समिट में हिस्सा क्यों नहीं लिया. साथ ही उन्होंने यह भी घोषणा की कि अगले साल जब अमेरिका G20 की अध्यक्षता करेगा, तब साउथ अफ्रीका को आमंत्रण ही नहीं भेजा जाएगा. इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है. एक लंबी पोस्ट में ट्रंप ने साउथ अफ्रीका की सरकार पर गंभीर आरोप लगाए |
उन्होंने लिखा कि अफ्रीकानर्स और डच, फ्रेंच, जर्मन मूल के बसने वालों पर मानवाधिकार उल्लंघन हो रहे हैं. ट्रंप ने दावा किया, ‘साफ शब्दों में कहूं तो वे श्वेत लोगों को मार रहे हैं और उनकी जमीन छीनने रहे हैं.’ यह वही पुराना आरोप है जिसे ट्रंप पहले भी कई बार दोहरा चुके हैं, हालांकि साउथ अफ्रीकी सरकार और व्हाइट समुदाय के कई नेताओं ने इसे पहले भी खारिज किया है |
G20 समिट में अमेरिका क्यों नहीं गया?
G20 समिट पिछले हफ्ते जोहान्सबर्ग में हुई थी, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई वैश्विक नेता मौजूद थे. अमेरिका ने पहले ही संकेत दे दिया था कि वह इस बार समिट में हिस्सा नहीं लेगा. अब ट्रंप ने कहा कि साउथ अफ्रीका जमीन पर हो रहे अत्याचारों पर चुप है, इसलिए अमेरिका ने दूरी बनाई |
दक्षिण अफ्रीका को G20 में क्यों नहीं बुलाएंगे ट्रंप?
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पोस्ट में यह भी कहा है कि वह अमेरिका में होने वाले G20 में साउथ अफ्रीका को नहीं बुलाने वाले हैं. इसका उन्होंने कारण बताते हुए कहा कि दक्षिण अफ्रीका ने औपचारिक रूप से अध्यक्षता नहीं सौंपी थी. उन्होंने पोस्ट में लिखा,’जी-20 के समापन पर, दक्षिण अफ्रीका ने हमारे अमेरिकी दूतावास के एक वरिष्ठ प्रतिनिधि को जी-20 की अध्यक्षता सौंपने से इनकार कर दिया, जो समापन समारोह में उपस्थित थे. इसलिए, मेरे निर्देश पर, दक्षिण अफ्रीका को 2026 के जी-20 का निमंत्रण नहीं मिलेगा, जिसका आयोजन अगले वर्ष फ्लोरिडा के मियामी शहर में होगा |
साउथ अफ्रीका ने क्यों नहीं सौंपी G20 की अध्यक्षता?
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति ने अमेरिका को अध्यक्षता नहीं सौंपी थी. इसका कारण भी दक्षिण अफ्रीका ने बताया था. दक्षिण अफ्रीका ने कहा था कि राष्ट्रपति किसी को भी अध्यक्षता नहीं दे सकते. ऐसा नहीं हो सकता कि अमेरिका किसी भी अधिकारी को भेजे और राष्ट्रपति उसे अध्यक्षता देंगे. अमेरिका को उनके ही लेवल का नेता भेजना चाहिए था न कि दूतावास का कोई अधिकारी. दक्षिण अफ्रीका ने कहा था कि उनके विदेश मंत्रालय का कोई अधिकारी जल्द ही दूतावास में जाकर अध्यक्षता दे देगा |
ट्रंप के फैसले पर क्या बोला दक्षिण अफ्रीका?
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने कहा कि यह फैसला निराशाजनक है. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार हमेशा अमेरिका के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश करती रही है. साउथ अफ्रीका की विदेश मंत्रालय ने भी ट्रंप के दावे को गलत बताते हुए कहा कि चूंकि अमेरिका का कोई प्रतिनिधि समिट में मौजूद नहीं था, इसलिए G20 की अध्यक्षता का प्रतीक चिह्न (गैवल) अमेरिकी दूतावास के प्रतिनिधि को बाद में उनके मंत्रालय के मुख्यालय में सौंप दिया गया था |
क्या दक्षिण अफ्रीका में श्वेत किसानों पर हमले हो रहे हैं?
ट्रंप का यह दावा नया नहीं है. वह कई बार कह चुके हैं कि साउथ अफ्रीका में व्हाइट अल्पसंख्यक ‘उत्पीड़न और हमलों’ का शिकार हैं. लेकिन इन दावों को साउथ अफ्रीकी सरकार, स्वतंत्र संस्थाओं और व्हाइट किसानों के कई प्रतिनिधियों ने भी तथ्यहीन बताया है. स्थानीय अध्ययनों में पाया गया है कि हिंसा का पैटर्न व्यापक है और यह पूरी आबादी को प्रभावित करता है, न कि किसी एक समूह को लक्ष्य बनाकर |
भारत का ‘ऑपरेशन दोस्त’ सक्रिय: IAF का विमान 12 टन राहत सामग्री के साथ कोलंबो पहुंचा
29 Nov, 2025 11:48 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत का पड़ोसी देश श्रीलंका प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहा है. यहां बारिश और बाढ़ की वजह से लोगों को काफी मुश्किलें उठानी पड़ रही हैं. पड़ोसी देश की इस मुश्किल घड़ी में मदद के लिए भारतीय वायुसेना का C-130J विमान लगभग 12 टन राहत सामग्री लेकर आज श्रीलंका के कोलंबो में उतरा. यह सामान ऑपरेशन सागर बंधु के तहत भेजा गया है. विमान में खाने-पीने का सामान, दवाइयां और जरूरी राहत सामग्री शामिल है. कोलंबो एयरपोर्ट पर भारतीय टीम ने यह मदद श्रीलंकाई अधिकारियों को सौंप दी |
अधिकारियों के मुताबिक यहां पर खराब मौसम की वजह से 12,313 परिवारों के 43,991 लोग प्रभावित हुए हैं. खराब मौसम और भूस्खलन की वजह से यहां पर 56 लोगों की मौत हो चुकी है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि ऑपरेशन सागर बंधु शुरू हो गया है. INS विक्रांत और INS उदयगिरी ने कोलंबो में राहत सामग्री सौंपी. आगे की कार्रवाई चल रही है | विदेश मंत्री ने कहा कि इंडियन एयर फ़ोर्स का C-130 J प्लेन लगभग 12 टन मानवीय मदद लेकर कोलंबो पहुंचा. इसमें टेंट, तिरपाल, कंबल, हाइजीन किट और खाने के लिए तैयार खाने की चीज़ें शामिल हैं |
क्या है ऑपरेशन सागर बंधु?
ऑपरेशन सागर बंधु इंडियन नेवी का एक मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) मिशन है. इसे प्राकृतिक आपदाओं या इमरजेंसी के दौरान पड़ोसी देशों की मदद के लिए शुरू किया गया है. सागर शब्द भारत के समुद्री विज़न सिक्योरिटी एंड ग्रोथ फॉर ऑल इन द रीजन से मेल खाता है, और वहीं बंधु का मतलब दोस्त है, जो हिंद महासागर क्षेत्र में एक सपोर्टिव पार्टनर के तौर पर भारत की भूमिका को दिखाता है |इस ऑपरेशन के तहत, भारत साइक्लोन, बाढ़ या दूसरे संकटों से प्रभावित देशों में नेवी के जहाज, एयरक्राफ्ट, मेडिकल टीम और राहत सप्लाई भेजता है, जिसमें खाना, दवाइयां, बचाव में मदद और लॉजिस्टिक्स जैसी तुरंत मदद देता है |
भड़के राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा 2026 के जी20 सम्मेलन में दक्षिण अफ्रीका को शामिल नहीं होने देंगे
28 Nov, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दक्षिण अफ्रीका पर तीखा प्रहार करते हुए 2026 के जी20 शिखर सम्मेलन से उसे बहिष्कृत करने का ऐलान किया है। ट्रुथ सोशल पर पोस्ट के जरिए उन्होंने कहा कि फ्लोरिडा के मियामी में आयोजित होने वाले इस सम्मेलन में दक्षिण अफ्रीका को निमंत्रण नहीं भेजा जाएगा। ट्रंप का गुस्सा दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा पर केंद्रित है, जिन्हें उन्होंने श्वेत समुदाय के अधिकारों की रक्षा में नाकाम बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि दक्षिण अफ्रीका में श्वेत किसानों पर खुले आम अत्याचार हो रहे हैं, उनकी हत्याएं की जा रही हैं और जमीनें जबरन हड़पी जा रही हैं। ट्रंप ने इसे श्वेत नरसंहार करार दिया, जो अफ्रीका में डच, फ्रेंच और जर्मन सेटलर्स के वंशजों के खिलाफ मानवाधिकार हनन का उदाहरण है।
इससे पहले, दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में नवंबर 2025 में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन में अमेरिका ने बहिष्कार किया था। सम्मेलन के घोषणापत्र पर अमेरिका ने हस्ताक्षर नहीं किए और कोई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद नहीं था। परंपरा के अनुसार, अध्यक्षता सौंपने के लिए प्रतीकात्मक लकड़ी का हथौड़ा सौंपा जाता है, लेकिन दक्षिण अफ्रीका ने अमेरिकी दूतावास के कनिष्ठ अधिकारी को यह सम्मान देने से इनकार कर दिया, जिसे ट्रंप ने अपमान माना। सोमवार को अमेरिका को जी20 की अध्यक्षता मिली, लेकिन खाली कुर्सी को ही यह जिम्मेदारी सौंपी गई। ट्रंप ने इसे दक्षिण अफ्रीका की अनुचित हरकतों का सबूत बताते हुए सभी अमेरिकी भुगतान और सब्सिडी तत्काल रोकने का आदेश दिया। फरवरी से ही अमेरिका ने दक्षिण अफ्रीका को सहायता रोक दी थी, जिसमें एचआईवी कार्यक्रमों के लिए 500 मिलियन डॉलर से अधिक शामिल हैं।
ट्रंप ने जोर देकर कहा कि दक्षिण अफ्रीका ने अपनी कारगुजारियों से साबित कर दिया है कि वह जी20 सदस्यता के लायक नहीं। मई में ओवल ऑफिस में रामाफोसा से मुलाकात के दौरान ट्रंप ने वीडियो दिखाकर श्वेत किसानों पर अत्याचार के दावे पेश किए थे, लेकिन रामाफोसा ने इन्हें खारिज कर दिया। दक्षिण अफ्रीकी अपराध आंकड़ों के अनुसार, श्वेत किसानों की हत्याएं कुल 27,000 वार्षिक हत्याओं का मात्र 1 प्रतिशत हैं, और ये दावे व्यापक रूप से खारिज हो चुके हैं।
रामाफोसा ने ट्रंप के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण और गलत सूचनाओं पर आधारित बताया। उन्होंने कहा कि जोहान्सबर्ग सम्मेलन बहुपक्षीयता का प्रतीक था और दक्षिण अफ्रीका सहयोग की भावना से जी20 में भाग लेना चाहता है। रामाफोसा के कार्यालय ने इसे दंडात्मक कदम करार दिया, जो अमेरिका-दक्षिण अफ्रीका संबंधों को और खराब कर सकता है। ट्रंप प्रशासन पोलैंड को 2026 सम्मेलन में ऊंचा दर्जा देने की योजना बना रहा है। यह विवाद अमेरिकी विदेश नीति में नस्लीय मुद्दों को उभार रहा है, जबकि दक्षिण अफ्रीका उपनिवेशवाद के प्रभावों से निपटने पर जोर दे रहा है।
ढाका की कोरेल झुग्गी-बस्ती में भीषण आग, 1,500 झोपड़ियाँ स्वाहा, हजारों लोग बेघर
28 Nov, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। बांग्लादेश की राजधानी ढाका के भीड़भाड़ वाले कोरेल स्लम में लगी भीषण आग ने करीब 1,500 झोपड़ियों को पूरी तरह या आंशिक रूप से नष्ट कर दिया। इस हादसे से हजारों निवासी बेघर हो गए, हालांकि राहत की बात यह है कि अभी तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
अग्निशमन अधिकारियों के अनुसार आग पर काबू पाने में पूरे 16 घंटे लग गए। फायर सर्विस के ड्यूटी अधिकारी राशिद बिन खालिद ने बताया कि आग बहुत तेजी से फैली और इसे पूरी तरह बुझाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। दमकल सेवा के निदेशक लेफ्टिनेंट कर्नल मोहम्मद ताजुल इस्लाम चौधरी ने कहा कि लगभग 1,500 झोपड़ियाँ या तो जलकर राख हो गईं या बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं, जिससे बड़ी संख्या में लोग सड़क पर आ गए।
160 एकड़ में फैली कोरेल बस्ती ढाका के हाई-प्रोफाइल गुलशन और बनानी इलाकों के ठीक बीच बसी है और इसके चारों तरफ ऊँची-ऊँची इमारतें हैं। यहाँ लगभग 60,000 परिवार रहते हैं, जिनमें जलवायु परिवर्तन की मार झेलकर आए कई शरणार्थी भी शामिल हैं। आग लगते ही इलाके में घना धुआँ फैल गया और रात भर लोग अपनी झोपड़ियाँ जलते देखते रहे। सुबह होते-होते कई लोग मलबे से अपना बचा-खुचा सामान निकालते नजर आए। दमकलकर्मियों का कहना है कि बस्ती की बेहद संकरी गलियाँ आग बुझाने में सबसे बड़ी रुकावट बनीं, जिससे गाड़ियाँ और उपकरण अंदर तक पहुँचने में देरी हुई। ढाका, जिसकी आबादी 2024 तक करीब 1.02 करोड़ हो चुकी है, में सैकड़ों ऐसी झुग्गी-बस्तियाँ हैं। गाँवों से गरीबी, बेरोजगारी और जलवायु परिवर्तन की वजह से आए लोग यहीं बसते हैं और रिक्शा चलाना, घरेलू काम या सफाई जैसे दिहाड़ी मजदूरी से जीवन चलाते हैं। कोरेल जैसी बस्तियाँ इनके लिए आखिरी सहारा होती हैं, लेकिन बार-बार लगने वाली आग उन्हें फिर से खाली हाथ छोड़ देती है।
ट्रम्प प्रशासन ने नर्सिंग को ‘प्रोफेशनल डिग्री’ सूची से बाहर रखा, छात्र ऋण पर बड़ा असर संभव
28 Nov, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन ने फेडरल स्टूडेंट लोन सिस्टम में बड़े बदलाव किए हैं, जिसके बाद नर्सिंग शिक्षा से जुड़े लाखों छात्रों के लिए चिंता बढ़ गई है। सरकार ने जिन डिग्रियों को “प्रोफेशनल” श्रेणी में रखा है, उनमें लॉ, मेडिसिन और डेंटिस्ट्री शामिल हैं। लेकिन नर्सिंग को इस सूची से बाहर कर दिया गया है।
नई व्यवस्था के तहत, प्रोफेशनल डिग्री करने वाले छात्रों को सालाना 50 हजार डॉलर और कुल 2 लाख़ डॉलर तक का फेडरल लोन मिल सकेगा।जबकि गैर-प्रोफेशनल कार्यक्रमों में यह सीमा काफी कम सालाना 20,500 डॉलर और कुल 1 लाख़ डॉलर निर्धारित की गई है। चूंकि नर्सिंग को प्रोफेशनल डिग्री नहीं माना गया है, इसलिए नर्सिंग ग्रेजुएट छात्रों को कम राशि का ऋण ही मिलेगा। अमेरिकन नर्सेस एसोसिएशन ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। संगठन का कहना है कि नर्सिंग को प्रोफेशनल सूची से बाहर रखने से न केवल छात्रों की पहुंच उच्च शिक्षा तक सीमित होगी, बल्कि स्वास्थ्य क्षेत्र में बढ़ती नर्सों की मांग को भी गंभीर नुकसान पहुँचेगा। एसोसिएशन ने सरकार से अविलंब शब्दावली संशोधित करने की अपील की है ताकि नर्सिंग छात्रों को पहले की तरह अधिक ऋण उपलब्ध रहे। यह बदलाव 1 जुलाई 2026 से लागू होगा। मौजूदा छात्र अपनी पढ़ाई पूरी होने तक पुराने नियमों के तहत ही लोन प्राप्त कर सकेंगे। सरकार का दावा है कि यह कदम शिक्षा लागत को नियंत्रित करने और छात्रों को अत्यधिक कर्ज से बचाने के लिए उठाया गया है।
इमरान खान जेल में ही हैं और पूरी तरह सलामत हैं – अदियाला जेल प्रशासन
28 Nov, 2025 09:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रावलपिंडी/दुबई । अदियाला जेल प्रशासन (Adiala Jail Administration) ने कहा कि इमरान खान जेल में ही हैं और पूरी तरह सलामत हैं (Imran Khan is in Jail and is completely Safe) । अदियाला जेल प्रशासन ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के संस्थापक इमरान खान के कथित ‘ट्रांसफर’ को लेकर फैल रही अफवाहों पर विराम लगा दिया है।
जेल अधिकारियों ने साफ किया है कि इमरान खान जेल के अंदर ही मौजूद हैं और उनकी सेहत पूरी तरह सामान्य है। जेल प्रशासन ने कहा—“अदियाला जेल से उनके ट्रांसफर की खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। वह पूरी तरह स्वस्थ हैं और उन्हें पूरा चिकित्सकीय उपचार मिल रहा है।” अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सेहत को लेकर लगाए जा रहे कयास “बेबुनियाद” हैं और खान की मेडिकल जरूरतों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है।
उधर, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक बयान में कहा कि पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के संस्थापक को जेल में ऐसी सुविधाएं दी जा रही हैं जो किसी आम कैदी को प्राप्त नहीं होतीं।आसिफ के अनुसार, “अदियाला जेल में इमरान खान को फाइव-स्टार गुणवत्ता का भोजन और कई विशेष सुविधाएं दी जा रही हैं। सलाखों के पीछे उन्हें जितनी कठिनाई पहले उठानी पड़ती थी, उसकी तुलना में अब वह काफ़ी आराम में हैं।”
इमरान खान अगस्त 2023 से अदियाला जेल में बंद हैं। अप्रैल 2022 में अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से सत्ता से बेदखल किए जाने के बाद से उन पर भ्रष्टाचार से लेकर आतंकवाद तक कई मामलों में मुकदमे दर्ज हैं। जेल प्रशासन और सरकार, दोनों के दावों का लब्बोलुआब यही है—इमरान खान जेल में सुरक्षित हैं, उनकी सेहत ठीक है और ट्रांसफर की खबरें सिर्फ अफवाहें हैं।
इमरान हत्या की अफवाहों पर बोली सरकार: फाइव स्टार से बेहतर मिल रहीं सुविधाएं
28 Nov, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पीटीआई संस्थापक इमरान खान की जेल में कथित हत्या की अफवाहों ने पूरे देश में हड़कंप मचा दिया था। सोशल मीडिया पर तेजी से फैली इन अटकलों को देखते हुए अदियाला जेल प्रशासन को बुधवार देर रात आधिकारिक बयान जारी करना पड़ा। प्रशासन ने साफ कहा कि इमरान खान को जेल से कहीं बाहर नहीं ले जाया गया है, वे पूरी तरह स्वस्थ हैं और उनकी सेहत पर चल रही सारी बातें “बुनियादी रूप से गलत” हैं। उन्हें हर तरह की चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई जा रही है।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने तो तंज कसते हुए दावा किया कि इमरान खान को जेल में “फाइव स्टार होटल से भी बेहतर” सुविधाएँ मिल रही हैं। उनके मुताबिक, इमरान के पास डबल बेड, मखमली गद्दा, एक्सरसाइज मशीनें, टीवी और पसंदीदा चैनल देखने की पूरी छूट है। ख्वाजा आसिफ ने अपने पुराने जेल अनुभव का जिक्र करते हुए कहा, मैंने तो सर्दियों में ठंडी फर्श पर सिर्फ दो कंबलों के साथ रातें काटी थीं, गर्म पानी तक नहीं मिलता था। इमरान को चाहिए कि जेल के लाउडस्पीकर पर अपना वॉशिंगटन एरीना वाला भाषण सुन लें।
इसी बीच, अदियाला जेल के बाहर इमरान की बहन अलीमा खान के नेतृत्व में कई घंटों से चल रहा धरना बुधवार शाम शांतिपूर्वक खत्म हो गया। अलीमा ने आरोप लगाया था कि उनके भाई को “एकांतवास” में रखा जा रहा है, जो गैरकानूनी और अन्यायपूर्ण है। उन्होंने कहा था, जब तक मुझे इमरान से मिलने की इजाजत नहीं मिलेगी, मैं यहां से नहीं हटूंगी। धरने में बड़ी संख्या में पीटीआई कार्यकर्ता भी शामिल हुए थे। पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से लंबी बातचीत के बाद मामला सुलझ गया। अधिकारियों ने लिखित आश्वासन दिया कि अलीमा खान और परिवार को आज (गुरुवार) और फिर अगले मंगलवार को इमरान खान से मुलाकात कराई जाएगी। इसके बाद अलीमा ने धरना खत्म करने का ऐलान किया। जाते-जाते उन्होंने उन लोगों पर भी निशाना साधा जो उनके प्रदर्शन को “ड्रामा” बता रहे थे। उनका सवाल था, अगर यह ड्रामा है तो इतनी भारी पुलिस तैनाती क्यों की गई? मुझे गिरफ्तार करना चाहते हैं तो कर लें, मैं डरने वाली नहीं हूं। इमरान खान अगस्त 2023 से अदियाला जेल में बंद हैं और उन पर भ्रष्टाचार, राजद्रोह से लेकर आतंकवाद तक के दर्जनों मामले चल रहे हैं। उनकी सेहत और सुरक्षा को लेकर बार-बार उठने वाले सवालों ने शहबाज शरीफ सरकार को हर बार सफाई देने पर मजबूर कर दिया है। इस बार अफवाहों ने इतना जोर पकड़ा कि जेल प्रशासन को आधी रात को बयान जारी करना पड़ा।
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