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हलफनामे में बड़ा दावा, चचेरे भाई पर संपत्ति हड़पने का आरोप
14 Apr, 2026 11:04 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिसार। पूर्व विधायक रेलुराम पूनिया हत्याकांड में उम्रकैद से दंडित और अभी जमानत पर जेल से बाहर सोनिया ने सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में खुद को पीड़ित बताया है। उसने दावा किया कि पैतृक संपत्ति कब्जाने के लिए उसे जानबूझकर इस केस में फंसाया गया। उसके शरीर में वही जहर मिला जिससे अन्य लोगों की मौत हुई थी। सोनिया और उसके पति संजीव को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 9 दिसंबर 2025 को जमानत पर रिहा किया था। इस फैसले के खिलाफ सोनिया के चचेरे भाई जितेंद्र पूनिया ने जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। इस पर 7 अप्रैल को सुनवाई के दौरान अदालत ने सोनिया और संजीव को हलफनामा पेश करने के आदेश दिए थे। जितेंद्र के अधिवक्ता लाल बहादुर खोवाल ने बताया कि अदालत के जरिए शपथ पत्र मिला है। इसमें सोनिया ने खुद को पीड़ित बताया है। सोनिया ने दावा किया कि वह अपने माता-पिता के परिवार की एकमात्र जीवित सदस्य है। सोनिया ने आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता (जितेंद्र) उसे आखिरी सांस तक जेल में रखना चाहता है ताकि वे उसके पिता की करोड़ों की संपत्ति पर कब्जा कर सके। उसने दावा किया कि याचिकाकर्ता असली पीड़ित नहीं है।
जेल में मिला अवॉर्ड
सोनिया ने बताया कि जेल में उसने ब्यूटी पार्लर और सिलाई-कढ़ाई जैसे कोर्स किए हैं। वह रेडियो जॉकी भी बन चुकी हैं और 2021 में तिनका-तिनका बंदिनी अवॉर्ड से सम्मानित की गईं।
क्या था मामला?
वर्ष 2001 में बरवाला के पूर्व विधायक रेलुराम पूनिया (50), उनकी पत्नी कृष्णा देवी (41), बच्चे प्रियंका (14), सुनील (23), बहू शकुंतला (20), पोता लोकेश (4) और दो पोतियां शिवानी (2) व 45 दिन की प्रीति की लितानी गांव के फार्म हाउस में हत्या कर दी गई थी। इस मामले में रेलुराम की छोटी बेटी सोनिया और उसके पति संजीव को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई जिसे 6 अगस्त 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद में बदल दिया था।
कब-कब क्या हुआ?
वर्ष 2004 में हिसार जिला अदालत ने सोनिया और संजीव को फांसी की सजा सुनाई। वर्ष 2007 में सुप्रीम कोर्ट ने इस सजा को बरकरार रखा। 6 अगस्त 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने दोनों की दया याचिका पर फैसला सुनाते हुए फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील करते हुए पूरी जिंदगी जेल में बिताने के आदेश दिए। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 11 दिसंबर 2025 को दोनों को अंतरिम जमानत दी और 16 दिसंबर 2025 को करनाल जेल से रिहा कर दिया।
क्यूबा के राष्ट्रपति Miguel Díaz-Canel बोले — सैन्य दखल या सत्ता परिवर्तन की कोशिश पर देंगे जवाब, ट्रंप को सीधा संदेश
14 Apr, 2026 10:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हवाना। कैरेबियन देश क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनेल ने हाल ही में अमेरिका को कड़ी चेतावनी देकर स्पष्ट कहा कि यदि उनके देश पर किसी भी प्रकार का सैन्य हमला या सत्ता परिवर्तन की कोशिश हुई, तब क्यूबा उसका मजबूती से जवाब देगा। यह बयान उन्होंने अमेरिकी मीडिया चैनल को दिए साक्षात्कार के दौरान दिया।
राष्ट्रपति ने कहा कि क्यूबा पर किसी भी तरह के आक्रमण, “सर्जिकल ऑपरेशन” या नेतृत्व को हटाने के प्रयास का कोई वैध आधार नहीं है। उन्होंने दो टूक कहा कि यदि ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है, तब क्यूबा पीछे नहीं हटेगा और अपने देश की रक्षा पूरी ताकत से करेगा।
डियाज़-कैनेल ने अमेरिका पर “शत्रुतापूर्ण नीति” अपनाने का आरोप लगाकर कहा कि अमेरिका को क्यूबा के राजनीतिक ढांचे में बदलाव की मांग करने का नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि क्यूबा और अमेरिका के बीच बातचीत की संभावना बनी हुई है, लेकिन यह बिना किसी शर्त के और समानता के आधार पर होनी चाहिए। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि क्यूबा किसी भी बाहरी दबाव में अपने राजनीतिक सिस्टम में बदलाव स्वीकार नहीं करेगा।
यह बयान तब आया है जब दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है, हालांकि कुछ स्तर पर संवाद की प्रक्रिया भी चल रही है। क्यूबा सरकार लंबे समय से अपनी आर्थिक समस्याओं के लिए अमेरिकी प्रतिबंधों और ऊर्जा नाकेबंदी को जिम्मेदार ठहराती रही है। राष्ट्रपति के अनुसार, इन प्रतिबंधों के कारण देश की स्वास्थ्य सेवाओं, सार्वजनिक परिवहन और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ा है।
देश की ऊर्जा स्थिति भी बेहद चुनौतीपूर्ण बताई गई है। क्यूबा अपनी जरूरत का केवल लगभग 40 प्रतिशत ईंधन ही खुद उत्पादन कर पाता है। हाल ही में वेनेजुएला से तेल आपूर्ति रुकने के बाद संकट और बढ़ गया। इसके बाद रूस से एक टैंकर तेल पहुंचा, जिससे कुछ राहत मिली, और आगे और आपूर्ति की उम्मीद जताई गई है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा नेतृत्व की आलोचना कर भ्रष्ट बताया और कहा कि बाहरी तेल आपूर्ति से स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। इस पर क्यूबा के राष्ट्रपति ने गंभीर चेतावनी के रूप में लिया और देश की सुरक्षा, संप्रभुता और राजनीतिक व्यवस्था की रक्षा के लिए तैयार रहने की बात दोहराई।
इलाज का इंतजार घटेगा, PGI में डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने का फैसला
14 Apr, 2026 09:52 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। पीजीआई में सुपर-स्पेशियलिटी कोर्सेज की सीटें बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। इस फैसले के तहत कुल 68 सीटों में इजाफा किया जाएगा जिससे मरीजों को बेहतर और समय पर इलाज मिल सकेगा। आजकल हृदय, मस्तिष्क, लीवर और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। इन जटिल बीमारियों के इलाज के लिए उच्च प्रशिक्षित सुपर-स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की भारी जरूरत है।
पीजीआई प्रशासन के अनुसार स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी से स्वीकृति मिलने के बाद अब आगे की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। सीटें बढ़ने से न केवल विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ेगी बल्कि ओपीडी, जांच और सर्जरी के लिए लंबा इंतजार भी कम होगा। प्रस्ताव के तहत न्यूरोसर्जरी में 6, कार्डियोलॉजी में 12, न्यूरोलॉजी में 14, हेपेटोलॉजी में 7 और क्लिनिकल हेमेटोलॉजी में 6 सीटें बढ़ाई जाएंगी। इसके अलावा पीडियाट्रिक क्रिटिकल केयर में 9, प्लास्टिक सर्जरी में 4 और कार्डियक एनेस्थीसिया व इंटेंसिव केयर में 10 सीटों का इजाफा किया जाएगा। पीजीआई में रोजाना 10 से 12 हजार मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण लंबी कतारें और सर्जरी के लिए महीनों की वेटिंग आम है। ऐसे में सीटों में यह बढ़ोतरी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
सुपर-स्पेशलिस्ट की बढ़ती जरूरत
विशेषज्ञों के अनुसार हृदय, मस्तिष्क, लीवर और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इन बीमारियों के इलाज के लिए उच्च प्रशिक्षित सुपर-स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की आवश्यकता होती है। सीटें बढ़ने से आने वाले वर्षों में अधिक विशेषज्ञ तैयार होंगे जिससे इलाज की गुणवत्ता और पहुंच दोनों बेहतर होंगी।
मरीजों को होगा सीधा फायदा
इस फैसले से ओपीडी में भीड़ कम होगी और मरीजों को जांच व सर्जरी की तारीख जल्दी मिल सकेगी। गंभीर मरीजों को समय पर विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध होगा, जिससे उनकी स्वास्थ्य स्थिति में सुधार की संभावनाएं बढ़ेंगी। पीजीआई का यह कदम ट्राइसिटी ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर भारत के मरीजों के लिए राहत भरा साबित होगा और स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती देगा।
बातचीत बेनतीजा, Middle East बना फिर से जंग का मैदान
14 Apr, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ईरान संग खुलकर आया चीन, ट्रंप को दी वॉर्निंग-हमारे मामले में दखल न दें..
होर्मुज के चक्रव्यूह में अमेरिका के सामने चीन
अमेरिका को ईरानी पोर्ट पर हमला न करने की चेतावनी, ईरान बोला- हमारे पोर्ट को निशाना बनाया तो इलाके का कोई बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेगा
तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर से बढ़ गया है। पाकिस्तान में हुई शांति वार्ता फेल होने के बाद दोनों ही एक-दूसरे पर निशाना साधते नजर आ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जहां होर्मुज पर नाकाबंदी का ऐलान किया है, तो वहीं ईरान ने पलटवार करते हुए तेल को लेकर वार्निंग दे डाली है। ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि अगर उसके बंदरगाहों को निशाना बनाया गया, तो फारस की खाड़ी और ओमान सागर में कोई भी पोर्ट सुरक्षित नहीं रहेगा। ईरान की सेना और रिवोल्यूशनरी गाड्र्स ने कहा कि क्षेत्र की समुद्री सुरक्षा सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है। अगर सुरक्षा सबके लिए नहीं होगी, तो किसी के लिए भी नहीं होगी। इस बीच ट्रंप की ओर से चीन को दी गई टैरिफ धमकी पर अब ड्रैगन ने भी अटैक किया है और ईरान के साथ खुलकर खड़ा हो गया है। चीन ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा है कि, हमारे मामले में दखल न दें। यानी अब होर्मुज के चक्रव्यूह में अमेरिका के सामने चीन खड़ा हो गया है।
डोनाल्ड ट्रंप ईरान को लेकर धड़ाधड़ एक्शन लेते नजर आ रहे हैं और उनके ज्यादातर फैसलों से न सिर्फ ईरान, बल्कि चीन भी प्रभावित हो रहा है। चीन द्वारा ईरान को सैन्य हथियारों की मदद करने से जुड़े इंटेल के बाद बीते दिनों डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया था और कहा था कि चीन द्वारा ईरान की सैन्य मदद करने से जुड़े सवाल पर ट्रंप ने कहा था कि, इसके परिणाम गंभीर होंगे। मुझे शक है कि वे ऐसा करेंगे, अगर हमने उन्हें ऐसा करते हुए पकड़ लिया, तो उन पर 50 प्रतिशत का टैरिफ लगेगा, जो कि सचमुच एक बहुत बड़ी रकम है।
हमारे जहाज रोका तो होंगे गंभीर परिणाम
अब चीन ट्रंप की धमकियों के बीच खुलकर ईरान के साथ खड़ा नजर आ रहा है। ट्रंप की होर्मुज पर नाकाबंदी की घोषणा के बाद ड्रैगन ने ईरान का समर्थन किया है और अमेरिका को बड़ी चेतावनी भी दी है। ट्रंप के कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए चीनी रक्षा मंत्री डोंग जून ने कहा कि, बीजिंग दुनिया में शांति और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है और मध्य पूर्व की स्थिति पर नजर रख रहा है। उन्होंने आगे सख्त लहजे में कहा कि, हमारे जहाज होर्मुज स्ट्रेट में लगातार आ-जा रहे हैं। ईरान के साथ हमारे व्यापारिक और ऊर्जा समझौते हैं। हम उनका सम्मान करेंगे और उम्मीद करते हैं कि कोई और हमारे मामलों में दखल न दे। होर्मुज पर ईरान का कंट्रोल है और यह हमारे लिए खुला है।
ट्रंप के निशाने पर है चीन
अमेरिका की ईरान से जंग हो या फिर वेनेजुएला में स्ट्राइक, कहीं न कही निशाने पर चीन रहा है। यही वजह है कि चीन अब खुलकर ईरान के समर्थन में खड़ा हो गया है और ऐसा हो भी क्यों न आखिर उसकी एनर्जी सुरक्षा जो खतरे में है। पहले वेनेजुएला के तेल पर कंट्रोल करके ट्रंप ने चीन पर चोट की थी, क्योंकि वहां के तेल का चीन प्रमुख खरीदार था। तो वहीं ईरानी तेल का भी सबसे बड़ा ग्राहक चीन ही है, तो ट्रंप ने ईरान पर अटैक कर एक तीर से दो निशाने साधे हैं।
दक्षिण लेबनान में इजराइली सेना का ग्राउंड ऑपरेशन शुरू
इजराइल की सेना ने सोमवार को कहा कि उसने दक्षिण लेबनान के बिन्त जबील इलाके में ग्राउंड ऑपरेशन शुरू कर दिया है। सेना के मुताबिक, यह खास टारगेट्स को निशाना बनाकर हमला किया जा रहा है। वहीं, ईरान और पाकिस्तान का कहना है कि पिछले हफ्ते जो अस्थायी सीजफायर हुआ था, उसमें लेबनान भी शामिल है। लेकिन इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने इस दावे को खारिज कर दिया है। उन्होंने साफ कहा कि लेबनान में कोई सीजफायर नहीं है और इजराइल हिजबुल्लाह पर पूरी ताकत से हमला जारी रखेगा।
ईरान के प्रमुख बंदरगाह अमेरिकी नाकेबंदी की जद में
अमेरिका की नाकेबंदी के तहत ईरान के सभी प्रमुख बंदरगाह निशाने पर होंगे। इसमें फारस की खाड़ी के साथ ओमान सागर में स्थित बंदरगाह भी शामिल हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, नाकेबंदी ईरान के बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों से आने-जाने वाले सभी देशों के जहाजों पर लागू होगी। ईरान का सबसे बड़ा बंदरगाह बंदर अब्बास है, जो खाड़ी के मुहाने पर स्थित है और हर साल करीब 3.7 करोड़ टन माल व लगभग 10 लाख कंटेनर हैंडल करता है। इस बंदरगाह से पेट्रोलियम उत्पाद, स्टील, क्रोम, खाद, अनाज और निर्माण उपकरण का बड़ा व्यापार होता है। इसके अलावा बंदर इमाम खुमैनी ईरान का आधुनिक बंदरगाह है, जो हर साल 1.6 करोड़ टन से ज्यादा कार्गो संभालता है और पेट्रोकेमिकल निर्यात का प्रमुख केंद्र है।
जापान ने होर्मुज में माइंसवीपर भेजने पर फैसला टाला
जापान ने होर्मुज स्ट्रेट में माइंसवीपर भेजने के फैसले को फिलहाल टाल दिया है। सरकार ने कहा है कि सेल्फ-डिफेंस फोर्स की तैनाती पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। हालात पर नजर बनाए हुए है और आगे का फैसला स्थिति के अनुसार लिया जाएगा। जापान का कहना है कि फिलहाल सबसे जरूरी है क्षेत्र में तनाव कम करना और समुद्री रास्तों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना। साथ ही, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने और व्यापक समझौते की दिशा में प्रगति पर भी जोर दिया गया है। माइंसवीपर ऐसे खास नौसैनिक जहाज होते हैं, जो समुद्र में बिछी बारूदी सुरंगों को हटाकर जहाजों के लिए रास्ता सुरक्षित बनाते हैं। ये जहाज तकनीक की मदद से पानी के अंदर छिपी माइंस का पता लगाते हैं और उन्हें निष्क्रिय या नष्ट कर देते हैं।
14 प्लॉट आवंटन में गड़बड़ी, हुड्डा के खिलाफ केस की मंजूरी
14 Apr, 2026 08:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने पंचकूला के इंडस्ट्रियल एरिया में 14 औद्योगिक प्लॉटों के आवंटन से जुड़े सीबीआई मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी है। ये आवंटन वर्ष 2013 में किए गए थे, जब भूपेंद्र हुड्डा मुख्यमंत्री थे। सीबीआई ने फरवरी में हरियाणा सरकार से कानूनी कार्रवाई की मंजूरी मांगी थी। हुड्डा के साथ-साथ राज्य सरकार ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के पूर्व अधिकारियों—पूर्व मुख्य प्रशासक डीपीएस नागल, पूर्व मुख्य वित्त नियंत्रक एससी कंसल और पूर्व डिप्टी सुपरिंटेंडेंट बीबी तनेजा के खिलाफ भी अभियोजन की मंजूरी दी है। अभियोजन की अनुमति मिलने के बाद सीबीआई अब हुड्डा, पूर्व सरकारी अधिकारियों और प्लॉट आवंटियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करेगी। इससे पहले इसी केस में ईडी ने 2021 में ही हुड्डा और प्लॉट आवंटियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। ईडी ने सीबीआई की एफआईआर के आधार पर मामला दर्ज किया था। ईडी ने हुड्डा को मुख्य साजिशकर्ता बताया है। ईडी ने पंचकूला इंडस्ट्रियल प्लॉट आवंटन मामले में अपनी शिकायत में हुड्डा को मुख्य साजिशकर्ता बताया है।
ईडी के अनुसार, हुड्डा ने अवैध आवंटन की योजना बनाई और चयनित आवंटियों को लाभ पहुंचाने के लिए पात्रता मानदंड में बदलाव किया। जांच एजेंसी ने यह भी दावा किया कि कई आवंटी हुड्डा के परिचित या उनके करीबी लोगों से जुड़े थे। रेनू हुड्डा और नंदिता हुड्डा उनके पैतृक गांव सांघी से थीं। कंवर प्रीत सिंह संधू उनके स्कूल मित्र के बेटे थे। मोना बेरी उनके ओएसडी की बहू थीं। डॉ. गणेश दत्त रतन उनके साथ टेनिस खेलते थे। प्रदीप कुमार उनके निजी सचिव के बेटे थे। इसके अलावा, अन्य आवंटियों के भी हुड्डा से प्रत्यक्ष या परोक्ष संबंध बताए गए हैं।
आवंटन में गड़बड़ी और नुकसान
ईडी के मुताबिक 14 प्लॉटों के लिए कुल 582 आवेदन आए थे। कई चयनित आवंटी आर्थिक रूप से कमजोर और अनुभवहीन थे। प्लॉट 6,400 प्रति वर्ग मीटर की दर से दिए गए, जबकि बाजार दर इससे कई गुना अधिक थी। जांच में सामने आया कि लगभग 30.34 करोड़ मूल्य के प्लॉट सिर्फ 7.85 करोड़ में बेच दिए गए, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।
तेल की लाइफलाइन Strait of Hormuz पर ट्रंप की रणनीति — कितना कामयाब होगा यह दांव?
14 Apr, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत टूटने और होर्मुज की घेराबंदी की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी के बाद मिडिल ईस्ट का टेंशन फिर होर्मुज की खाड़ी पर केंद्रीत हो गया है। ईरान ने यहां बारूद बिछाया हुआ है, यहां से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलने की बात कर रहा है। ईरान के इस चक्रव्यू को तोड़ने के लिए अमेरिका नई घेराबंदी करने की तैयारी में है। इन स्थितियों ने वैश्विक ऊर्जा, सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी बजा दी है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण चेंकपॉइंट है। दुनिया के कुल पेट्रोलियम उपभोग का लगभग 20 प्रतिशत इस संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। ईरान की भौगोलिक स्थिति इस मार्ग पर प्राकृतिक बढ़त देती है। सालों से ईरान ने यहां अपनी सैन्य क्षमता को एसिमेट्रिक वॉरफेयर (असमान युद्ध) के लिए तैयार किया है। ईरान के पास अभी हज़ारों की संख्या में फास्ट अटैक क्राफ्ट्स, आधुनिक समुद्री सुरंगें और तट पर तैनात लंबी दूरी की मिसाइलें हैं। ये हथियार किसी भी बड़े नौसैनिक जहाज या तेल टैंकर को निशाना बनाने की ताकत रखते हैं। जानकारों का मानना है कि ईरान पूरे जलमार्ग को भौतिक रूप से बंद करने के बजाय, यातायात में व्यवधान पैदा कर तेल की कीमतों में भारी उछाल लाने की रणनीति अपना सकता है। ईरान का साफ कहना है व्यपारिक जहाज के गुजरने पर कोई रोक नहीं है। बस इस रास्ते से कोई भी युद्धपोत हालात समान्य होने के बाद ही गुजर सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका अब ईरान की आक्रामकता को रोकने के लिए एक जोखिम भरी नई रणनीति पर काम कर रहा है। अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यदि ईरान ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग को बाधित करना जारी रखा,तब अमेरिका होर्मुज की नाकाबंदी करेगा। हालांकि, यह कदम बेहद संवेदनशील है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत किसी देश की समुद्री नाकाबंदी करना युद्ध की घोषणा के बराबर होता है। अभी यह भी साफ नही है कि अमेरिका क्या उन विदेशी जहाजों के ख़िलाफ बल प्रयोग करेगा जो अमेरिकी ब्लॉकेड को नजरअंदाज करेंगे? अगर चीन जैसे देशों के जहाज आए, तब क्या अमेरिका उनके खिलाफ भी बलप्रयोग करेगा? इन सवालों के जवाब साफ नहीं हैं। इस नाकेबंदी में नाटो देशों ने शामिल होने से इंकार किया है। वैसे अमेरिकी नौसेना के 5वें बेड़े को हाई अलर्ट पर रखा गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि बातचीत की नाकामी के बाद फिर से सीधे टकराव से पश्चिम एशिया में एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की शुरुआत हो सकती है, जिससे बचना अब तक दोनों देशों की प्राथमिकता रही है।
एक रिपोर्ट में कहा गया हैं कि यदि होर्मुज में तनाव के कारण तेल आपूर्ति बाधित होती है, तब कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं। इसका सीधा असर भारत और चीन जैसे देशों पर पड़ेगा, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस मार्ग पर बहुत अधिक निर्भर हैं। इसके अलावा, बीमा कंपनियों ने इस क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों के लिए वॉर रिस्क प्रीमियम बढ़ा दिया है, जिससे वैश्विक रसद की लागत बढ़ गई है। ब्रिटेन और अन्य पश्चिमी देश इस क्षेत्र में फ्रीडम ऑफ नेविगेशन बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
अमेरिका को क्यूबा की खुली धमकी, राष्ट्रपति बोले— ‘हमले का जवाब सख्ती से देंगे’
13 Apr, 2026 04:19 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनेल ने अमेरिका को साफ चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास क्यूबा पर सैन्य हमला करने या उनकी सरकार को सत्ता से हटाने का कोई सही कारण नहीं है। एनबीसी न्यूज के फेसम कार्यक्रम ‘मीट द प्रेस’ में दिए गए इंटरव्यू में डियाज-कैनेल ने यह बात कही है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ने क्यूबा पर हमला किया तो यह बहुत महंगा पड़ेगा। इससे पूरे इलाके की सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाएगी।
राष्ट्रपति ने कहा कि अगर अमेरिका हमला करता है तो क्यूबा के लोग अपने देश की रक्षा जरूर करेंगे। उन्होंने कहा, “अगर ऐसा समय आया तो मुझे नहीं लगता कि अमेरिका के पास क्यूबा पर सैन्य हमला करने, सर्जिकल ऑपरेशन करने या राष्ट्रपति को अगवा करने का कोई औचित्य होगा।” उन्होंने कहा, “अगर हमला हुआ तो लड़ाई होगी, संघर्ष होगा। हम अपना बचाव करेंगे। जरूरत पड़ी तो हम अपनी जान भी दे देंगे। क्योंकि हमारे राष्ट्रगान में लिखा है कि वतन के लिए मरना ही जीना है।”
राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनेल का यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्यूबा और अमेरिका के बीच बातचीत हो रही है। दोनों देशों ने बातचीत की पुष्टि की है, लेकिन बातचीत के बारे में कोई डिटेल अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। फिर भी दोनों देशों के बीच तनाव अभी भी बना हुआ है। डियाज-कैनेल ने अमेरिका पर क्यूबा के खिलाफ शत्रुतापूर्ण नीति अपनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को क्यूबा से कोई मांग करने का नैतिक अधिकार नहीं है, फिर भी क्यूबा बिना किसी शर्त के बातचीत के लिए तैयार है। किसी भी मुद्दे पर चर्चा की जा सकती है। उन्होंने साफ कहा कि क्यूबा अपने राजनीतिक सिस्टम में कोई बदलाव नहीं करेगा। उन्होंने कहा, “हम अमेरिका से अपने सिस्टम में बदलाव की मांग नहीं करते तो अमेरिका भी हमें ऐसा करने को नहीं कह सकता।”
क्यूबा इस समय गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। राष्ट्रपति डियाज-कैनेल ने इसके लिए अमेरिका की लगाई गई ऊर्जा नाकेबंदी को जिम्मेदार ठहराया। इस नाकेबंदी की वजह से स्वास्थ्य सेवाएं, सार्वजनिक परिवहन और रोजमर्रा की चीजों का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। क्यूबा अपनी जरूरत का सिर्फ 40 प्रतिशत ईंधन ही खुद पैदा कर पाता है। जनवरी में वेनेजुएला से तेल की आपूर्ति बंद हो जाने के बाद स्थिति और खराब हो गई है। मार्च महीने में रूस से एक टैंकर कच्चा तेल लेकर क्यूबा पहुंचा। यह तीन महीनों में पहली आपूर्ति थी। रूस ने एक और टैंकर भेजने का वादा भी किया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा की सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। डियाज-कैनेल ने ट्रंप के इन बयानों को चेतावनी के तौर पर लिया। उन्होंने कहा कि क्यूबा को अपने लोगों और अपने देश की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार रहना होगा। कुल मिलाकर, क्यूबा साफ संदेश दे रहा है कि वह अमेरिकी दबाव के सामने नहीं झुकेगा। चाहे आर्थिक मुश्किलें कितनी भी हों, देश अपनी स्वतंत्रता और राजनीतिक व्यवस्था की रक्षा के लिए लड़ने को तैयार है।
ट्रंप बनाम पोप: ईरान परमाणु विवाद पर बयानबाजी तेज, राष्ट्रपति का तीखा जवाब
13 Apr, 2026 04:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पोप लियो ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की ईरान युद्ध नीति को लेकर कड़ी आलोचना की. उन्होंने इस युद्ध को अन्यायपूर्ण बताया. पोप के बयान के बाद ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट शेयर किया है. ट्रंप ने कहा कि पोप लियो अपराध के मामले में कमजोर हैं और विदेश नीति के लिए बहुत बुरे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ने जवाब देते हुए कहा कि वो ट्रंप प्रशासन के ‘डर’ की बात करते हैं, लेकिन उस डर का जिक्र नहीं करते जो कैथोलिक चर्च और बाकी सभी ईसाई संगठनों को COVID के दौरान था. उस समय जब पादरियों, मंत्रियों और बाकी सभी को चर्च की प्रार्थनाएं करने के लिए गिरफ्तार किया जा रहा था, तब भी जब वे बाहर निकल रहे थे और एक-दूसरे से दस या बीस फुट की दूरी पर थे.
ट्रंप ने कहा कि मुझे उनके भाई लुइस, उनसे कहीं ज्यादा पसंद हैं, क्योंकि लुइस पूरी तरह से MAGA समर्थक हैं. वह बात समझते हैं, लेकिन लियो नहीं. ट्रंप ने कहा कि मुझे ऐसा पोप नहीं चाहिए जो यह सोचे कि ईरान के पास परमाणु हथियार होना ठीक है. मुझे ऐसा पोप नहीं चाहिए जो यह सोचे कि अमेरिका का वेनेज़ुएला पर हमला करना गलत था. एक ऐसा देश जो अमेरिका में भारी मात्रा में नशीले पदार्थ भेज रहा था और इससे भी बुरा, अपनी जेलों को खाली करके हत्यारों, नशीले पदार्थों के तस्करों और अपराधियों को हमारे देश में भेज रहा था.
ट्रंप ने कहा कि मुझे ऐसा पोप नहीं चाहिए जो अमेरिका के राष्ट्रपति की आलोचना करे, क्योंकि मैं ठीक वही कर रहा हूं जिसके लिए मुझे भारी बहुमत से चुना गया था. उन्होंने कहा कि अपराध के मामलों को रिकॉर्ड स्तर तक कम करना और इतिहास का सबसे बेहतरीन शेयर बाजार बनाना. लियो को शुक्रगुजार होना चाहिए, क्योंकि जैसा कि सब जानते हैं, उनका पोप बनना एक चौंकाने वाला सरप्राइज था. पोप बनने की किसी भी लिस्ट में उनका नाम नहीं था और चर्च ने उन्हें सिर्फ इसलिए चुना क्योंकि वह एक अमेरिकी थे. उन्हें लगता है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से निपटने का यही सबसे अच्छा तरीका होगा. अगर मैं व्हाइट हाउस में न होता, तो लियो वेटिकन में न होते.
ट्रंप ने कहा कि बदकिस्मती से अपराध और परमाणु हथियारों के मामले में लियो की कमजोरी मुझे बिल्कुल भी रास नहीं आती और न ही यह बात कि वह डेविड एक्सलरोड जैसे ओबामा-समर्थकों से मिलते हैं. ये वामपंथी विचारधारा के एक ‘लूजर’ (नाकाम व्यक्ति) हैं और उन लोगों में से एक हैं जो चाहते थे कि चर्च जाने वालों और पादरियों को गिरफ्तार किया जाए. ट्रंप ने कहा कि लियो को एक पोप के तौर पर अपना रवैया सुधारना चाहिए, अपनी समझ का इस्तेमाल करना चाहिए, कट्टरपंथी वामपंथियों को खुश करना बंद करना चाहिए और एक महान पोप बनने पर ध्यान देना चाहिए. न कि एक राजनेता बनने पर. ट्रंप ने कहा कि इससे उन्हें बहुत ज्यादा नुकसान हो रहा है और, इससे भी ज्यादा जरूरी बात, इससे कैथोलिक चर्च को नुकसान पहुंच रहा है.
होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ी तनातनी, ईरान के तेवर के बाद अमेरिकी युद्धपोत ने बदला रुख
13 Apr, 2026 04:07 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। ईरान और अमेरिका (Iran and America) के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। इस्लामाबाद में हुई वार्ता (talks in islamabad) बेनतीजा रहने के बाद हालात और बिगड़ गए हैं। इसी बीच ईरान ने दावा किया है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य में एक अमेरिकी जंगी जहाज को चेतावनी देकर पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।
‘आखिरी चेतावनी’ के बाद पीछे हटा जहाज
ईरानी मीडिया के मुताबिक, उसकी सेना ने अमेरिकी युद्धपोत को स्पष्ट चेतावनी दी कि अगर वह आगे बढ़ा तो हमला किया जाएगा। दावा है कि इसके बाद अमेरिकी नौसेना का जहाज क्षेत्र छोड़कर पीछे हट गया।
बारूदी सुरंग हटाने पहुंचे थे अमेरिकी जहाज
बताया जा रहा है कि अमेरिकी नौसेना होर्मुज जलडमरूमध्य में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाने के लिए वहां पहुंची थी। इस पर ईरान ने कड़ा ऐतराज जताते हुए जहाजों को दूर रहने की चेतावनी दी थी।
ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार, उसकी क्रूज मिसाइलें अमेरिकी विध्वंसक जहाजों को निशाना बनाने की स्थिति में थीं और हमलावर ड्रोन भी तैनात कर दिए गए थे। बताया गया कि अमेरिकी जहाजों को 30 मिनट के भीतर क्षेत्र खाली करने का अल्टीमेटम दिया गया।
वार्ता विफल, युद्धविराम पर संकट
इस्लामाबाद में हुई लंबी वार्ता के बावजूद कोई समझौता नहीं हो सका। फिलहाल लागू दो हफ्तों का युद्धविराम अनिश्चितता में है और दोनों देश एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं।
ट्रंप का सख्त रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य में सख्त कदम उठा सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी नौसेना को निर्देश दिए गए हैं कि वह समुद्री मार्गों की निगरानी बढ़ाए और संदिग्ध गतिविधियों पर कार्रवाई करे।
परमाणु मुद्दा बना सबसे बड़ी अड़चन
वार्ता में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे जेडी वेंस ने कहा कि समझौता न होने की बड़ी वजह ईरान का अपने परमाणु कार्यक्रम पर अडिग रहना है। अमेरिका चाहता है कि ईरान इसे पूरी तरह खत्म करे, जबकि तेहरान इस पर सहमत नहीं हुआ।
बढ़ सकता है वैश्विक असर
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में हालात और गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है।
ट्रंप की चेतावनियों पर ईरान का पलटवार, संसद अध्यक्ष ने कहा— दबाव में नहीं झुकेंगे
13 Apr, 2026 03:59 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। ईरान (Iran) के संसद अध्यक्ष (Parliament Speaker) मोहम्मद बाकेर गालिबाफ (Mohammad Baqer Ghalibaf) ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) की हाल की धमकियों का ईरानी जनता पर कोई असर नहीं पड़ता। उन्होंने कहा, ये धमकियां बेअसर हैं और ईरान अपने रुख पर मजबूत रहेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत में कुछ प्रगति हो रही है।
ईरानी सरकारी मीडिया और अल-जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, गालिबाफ ने कहा कि तेहरान ने बातचीत के दौरान ‘बहुत अच्छे प्रस्ताव’ दिए हैं, जिससे बातचीत आगे बढ़ी है। उन्होंने कहा, ट्रंप की हाल की धमकियों का ईरानी जनता पर कोई असर नहीं है।
हम किसी भी धमकी के आगे नहीं झुकेंगे: गालिबाफ
उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति को चेतावनी देते हुए कहा, अगर आप लड़ेंगे तो हम भी लड़ेंगे और अगर आप समझदारी से आएंगे तो हम भी समझदारी से बात करेंगे। उन्होंने आगे कहा, हम किसी भी धमकी के आगे नहीं झुकेंगे। उन्हें हमारी इच्छाशक्ति को फिर से परखने दीजिए, ताकि हम उन्हें बड़ा सबक सिखा सकें।
बातचीत की मैच पर वापस आएगा ईरान: ट्रंप
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि उन्हें भरोसा है कि ईरान आखिरकार अमेरिका की शर्तें मान लेगा। ट्रंप ने कहा कि ईरान वापस बातचीत की मेज पर आएगा। उन्होंने कहा, मैं चाहता हूं कि वे हमें सब कुछ दें। ईरान के पास कोई ताकत नहीं बची है। उनके पास कोई बढ़त नहीं हैं।
उन्होंने अपनी हालिया सख्त बयानबाजी का बचाव भी किया और कहा कि यही बातचीत शुरू होने की वजह बनी। ट्रंप ने कहा कि ईरान के ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ जैसे नारे भी लगते हैं, इसलिए कड़ा जवाब जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी एक टिप्पणी ने ही ईरान को बातचीत की मेज पर ला दिया और वह अभी भी वहीं मौजूद हैं।
पुलिस कार्रवाई में दो अपराधी घायल, मुठभेड़ में बढ़ा तनाव
13 Apr, 2026 03:16 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
करनाल। मुनक रोड पर बजीदा जाटान लिंक रोड पर रविवार देर रात पुलिस और दो बदमाशों के बीच मुठभेड़ हो गई। पुलिस की सीआईए- टू की टीम को देखते ही बदमाशों ने फायरिंग शुरू कर दी थी। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में दोनों बदमाशों की टांग में गोली लगी। वहीं, बदमाशों की ओर से चलाई गोली सहायक निरीक्षक मनोज की छाती में लगी। लेकिन बुलेटप्रूफ जैकेट पहने होने के कारण जान बच गई। दोनों बदमाशों को घायल अवस्था में काबू कर अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। पुलिस ने दोनों के पास से दो अवैध पिस्टल और 100 से ज्यादा गोलियां और एक बाइक बरामद की है। आरोपियों की पहचान सोनीपत जिला के गांव जाजल निवासी रौनक पुत्र सूरज और गांव गढ़ मलिकपुर निवासी इमरान पुत्र अली हसन के रूप में हुई है। रौनक की बाईं टांग और इमरान की दाईं टांग में गोली लगी है। दोनों को तुरंत करनाल के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती करवाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। पुलिस ने मधुबन थाने में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब दोनों को कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया जाएगा। दोनों ही आरोपी किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए पहुंचे थे।
गेट पास और बायोमेट्रिक सिस्टम ठप, मंडियों में कामकाज बाधित
13 Apr, 2026 01:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यमुनानगर। जगाधरी अनाज मंडी में गेहूं लेकर पहुंचे किसानों को उस समय भारी परेशानी का सामना करना पड़ा जब सरकारी पोर्टल बार-बार ठप हो गया। बायोमेट्रिक प्रक्रिया बाधित होने से मंडियों में गेट पास नहीं कट पाए। देखते ही देखते मंडियों के बाहर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लंबी लाइनें लगने लगी। गेट पास कटने में समय लगने से नाराज किसानों ने मंडी गेट पर विरोध जताया। ऐसे में मौके पर पुलिस भी बुलानी पड़ी। किसानों का आरोप है कि सरकार द्वारा शुरू किया गया ऑनलाइन पोर्टल बार-बार बंद हो रहा है, जिससे गेट पास जारी करने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। किसान सुल्तान हरनौली, सोहिल हरनौल, विकास, यशपाल, कर्मबीर ने बताया कि साइट हर थोड़ी देर में क्रैश हो जाती है, जिसके चलते बायोमेट्रिक सत्यापन भी नहीं हो पा रहा। कई किसानों ने कहा कि उन्हें दो-दो घंटे तक लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है, जिससे समय और श्रम दोनों की बर्बादी हो रही है।
मंडी में बढ़ती भीड़ और तकनीकी खामियों के चलते हालात तनावपूर्ण हो गए। नाराज किसानों ने प्रशासन और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए नए नियमों पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि बिना पर्याप्त व्यवस्था के लागू की गई यह नई प्रणाली किसानों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। किसानों ने मांग की है कि पोर्टल की खामियों को जल्द दूर किया जाए और गेट पास व बायोमेट्रिक प्रक्रिया को सरल बनाया जाए, ताकि उन्हें अनावश्यक परेशानियों से राहत मिल सके। प्रशासन की ओर से फिलहाल स्थिति को संभालने के प्रयास किए जा रहे हैं।
दो दिन से दिक्कत आ रही है: विशाल गर्ग
मार्केट कमेटी सचिव विशाल गर्ग ने बताया कि पिछले दो दिनों से साइट में दिक्कत आ रही है। रविवार को भी दिक्कत आई। इस समस्या के बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत करवा दिया है। जल्द ही समाधान करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
10 मई को हरियाणा के तीन नगर निगमों में होगा मतदान
13 Apr, 2026 01:09 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। हरियाणा में निकाय चुनाव का बिगुल बज गया है। पंचकूला, अंबाला और सोनीपत नगर निगम के चुनाव 10 मई को होंगे। हरियाणा राज्य निर्वाचन आयोग ने इसका एलान किया। निगम मेयर के लिए 30 लाख खर्च सीमा तय की गई है। सदस्य के लिए यह 7.50 लाख रुपये है। नामांकन 21 अप्रैल से 25 अप्रैल तक होंगे। स्क्रूटनी 27 अप्रैल को होगी। नामांकन वापिस की अंतिम तिथि 28 अप्रैल होगी। इसी दिन चुनाव चिन्ह बांटे जाएंगे। चुनाव 10 मई को होंगे। पुनः मतदान की जरूरत पड़ी तो वह 12 मई को होंगे। 13 मई को नतीजे आएंगे। चुनाव आयुक्त देवेंद्र कल्याण ने कहा कि नगर निगम चुनाव ईवीएम से ही होंगे। वीवीपैट का इस्तेमाल नहीं होगा।
कांग्रेस ने स्थानीय निकाय चुनाव के लिए घोषणा पत्र समिति बनाई
हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने राज्य में होने वाले आगामी स्थानीय निकाय चुनावों के लिए एक घोषणा पत्र समिति का गठन किया है। इस समिति की चेयरपर्सन विधायक गीता भुक्कल होंगी। समिति में चौ. आफताब अहमद, विधायक बीबी बतरा, विधायक जितेंद्र कुमार भारद्वाज, सदस्य एआईसीसी, जसबीर मल्लौर, पूर्व विधायक, संजीव भारद्वाज, मीडिया एवं कार्यालय प्रभारी, पीसीसी, तरुण चुघ, सतीश तेजली, जयवीर अंतिल शामिल हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने बताया कि इस समिति को स्थानीय निकाय चुनावों से संबंधित प्रमुख मुद्दों को ध्यान में रखते हुए शीघ्र ही चुनाव घोषणा पत्र तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही समिति को स्थानीय निवासियों से सक्रिय रूप से सुझाव और विचार प्राप्त करने के लिए भी कहा गया है, ताकि घोषणा पत्र जनता की समस्याओं और आकांक्षाओं को सही रूप में प्रतिबिंबित कर सके।
पर्यावरण संकट का दावा: न्यूक्लियर प्लांट से हडसन नदी में रेडियोधर्मी रिसाव, करोड़ों मछलियों की मौत का आरोप
13 Apr, 2026 12:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। परमाणु ऊर्जा संयंत्र आधुनिक (Nuclear Power Plants) समय में ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने का महत्वपूर्ण स्रोत माने जाते हैं, लेकिन अमेरिका (America) के न्यूयॉर्क स्थित इंडियन पॉइंट न्यूक्लियर पावर प्लांट (Indian Point Nuclear Power Plant) को लेकर एक गंभीर रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस संयंत्र ने करीब 60 वर्षों तक हडसन नदी में लाखों गैलन रेडियोधर्मी अपशिष्ट जल छोड़ा, जिससे पर्यावरण और जलीय जीवन पर गंभीर असर पड़ा।
संयंत्र की शुरुआत 16 सितंबर 1962 में हुई थी और 2021 में इसे पूरी तरह बंद कर दिया गया। 1970 के दशक की एक रिपोर्ट में यह भी उल्लेख मिलता है कि यह संयंत्र हर साल 2 से 3 मिलियन गैलन तक उपचारित अपशिष्ट जल नदी में छोड़ता था। हालांकि, प्रबंधन का कहना था कि यह पानी उपचार प्रक्रिया से गुजरकर ही छोड़ा जाता था।
मछलियों की बड़े पैमाने पर मौत का दावा
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि संयंत्र की शीतलन प्रणाली के कारण बड़ी संख्या में मछलियों की मौत हुई। नदी से पानी खींचने के लिए लगाए गए इनटेक सिस्टम में मछलियाँ फंस जाती थीं, जिससे भारी नुकसान हुआ। अनुमानों के अनुसार, 1962 से 1970 के बीच लगभग 15 लाख से 50 लाख मछलियों की मौत हुई। समय के साथ यह समस्या और गंभीर होती गई, क्योंकि मछलियाँ संयंत्र के आसपास के हिस्सों में इकट्ठा होने लगी थीं, जिससे उनका जोखिम और बढ़ गया।
स्वामित्व और प्रबंधन पर उठे सवाल
संयंत्र के वर्तमान मालिक होल्टेक इंटरनेशनल ने स्वीकार किया है कि वर्षों तक अपशिष्ट जल का उत्सर्जन होता रहा, हालांकि कंपनी का कहना है कि उनके नियंत्रण में आने के बाद सभी गतिविधियां निर्धारित सुरक्षा मानकों के भीतर की गई हैं। होल्टेक ने यह भी स्पष्ट किया कि अब उसका मुख्य काम संयंत्र के डीकमीशनिंग (बंद करने की प्रक्रिया) और पुराने रेडियोधर्मी कचरे के सुरक्षित प्रबंधन का है, जिसमें प्रयुक्त ईंधन का निपटान भी शामिल है।
पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर चिंता बढ़ी
रिपोर्ट में यह संकेत दिया गया है कि दशकों तक चले इस उत्सर्जन का असर हडसन नदी के पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ा है। जलीय जीवन प्रभावित हुआ है और स्थानीय पर्यावरण पर भी दीर्घकालिक प्रभाव की आशंका जताई गई है।
चीन का बड़ा कदम: PoK के पास नई प्रशासनिक इकाई, भारत ने जताई आपत्ति
13 Apr, 2026 11:20 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। एक ओर दुनिया ईरान और अमेरिका (Iran and America) के बीच बढ़ते तनाव पर नजरें टिकाए हुए है, वहीं दूसरी ओर चीन ने सीमावर्ती क्षेत्र में बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। चीन ने पाकिस्तान (China and Pakistan) अधिकृत कश्मीर (PoK) और अफगानिस्तान की सीमा से सटे अपने शिनजियांग क्षेत्र में एक नई प्रशासनिक इकाई (काउंटी) स्थापित कर दी है, जिससे क्षेत्रीय समीकरण फिर गरमा गए हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, “सेनलिंग” नाम की यह नई काउंटी काराकोरम पर्वतमाला के पास स्थित है और PoK के बेहद करीब मानी जा रही है। इस कदम को चीन की सुरक्षा रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है, खासकर वाखान कॉरिडोर की निगरानी और उइगर गतिविधियों पर नियंत्रण के संदर्भ में।
एक साल में तीसरी नई इकाई
चीन इससे पहले भी शिनजियांग में “हेआन” और “हेकांग” नाम की दो नई काउंटियों का गठन कर चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि सीमावर्ती इलाकों में लगातार प्रशासनिक ढांचा मजबूत करना चीन की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है।
भारत ने जताया कड़ा ऐतराज
भारत पहले ही इन कदमों का विरोध कर चुका है। भारत का साफ कहना है कि इन नई काउंटियों के कुछ हिस्से केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के अंतर्गत आते हैं। खास तौर पर अक्साई चिन को लेकर भारत ने अपनी संप्रभुता दोहराई है और ऐसे किसी भी बदलाव को अस्वीकार्य बताया है।
काशगर के अधीन रहेगा नया जिला
जानकारी के अनुसार, सेनलिंग काउंटी को काशगर प्रशासन के तहत रखा जाएगा। काशगर ऐतिहासिक रूप से पुराने सिल्क रूट का अहम केंद्र रहा है और यही क्षेत्र चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) की शुरुआत का भी प्रमुख बिंदु है, जो PoK से होकर गुजरता है।
क्या है चीन की रणनीति?
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कदम केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि सीमा क्षेत्रों पर पकड़ मजबूत करने की रणनीति है। वाखान कॉरिडोर-करीब 74 किमी लंबी यह संकरी पट्टी—चीन के लिए बेहद संवेदनशील मानी जाती है, क्योंकि यह ताजिकिस्तान और PoK के बीच स्थित है।
चीन को लंबे समय से आशंका रही है कि ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट से जुड़े उइगर लड़ाके इस रास्ते का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे में नई काउंटी बनाकर चीन स्थानीय प्रशासन, सुरक्षा और निगरानी तंत्र को और मजबूत करना चाहता है।
बढ़ेगा क्षेत्रीय तनाव?
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत की चेतावनी के बावजूद उठाया गया यह कदम आने वाले समय में सीमा विवाद को और जटिल बना सकता है। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम पर भारत की नजर बनी हुई है और कूटनीतिक स्तर पर भी प्रतिक्रिया जारी है।
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