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ब्रिटेन की अदालत ने नीरव मोदी की याचिका खारिज की, बैंक ऑफ इंडिया का मुकदमा तय समय पर चलेगा
8 Feb, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन। लंदन हाईकोर्ट ने हीरा कारोबारी नीरव मोदी को बड़ा झटका देते हुए बैंक ऑफ इंडिया (बीओआई) के बकाया ऋण से जुड़े मुकदमें को स्थगित करने की उसकी याचिका खारिज कर दी है। भगोड़े नीरव मोदी ने दृष्टिहीनता, अवसाद और जेल की परिस्थितियों का हवाला देते हुए सुनवाई टालने की मांग की थी, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया।
यहां बताते चलें कि 54 वर्षीय नीरव मोदी पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) से जुड़े करीब दो अरब अमेरिकी डॉलर के धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भारत प्रत्यर्पण का सामना कर रहा है। वह उत्तरी लंदन की एचएमपी पेंटनविले जेल में बंद है और बैंक ऑफ इंडिया के लगभग 80 करोड़ अमेरिकी डॉलर के अलग मामले में वीडियो लिंक के जरिए मुकदमा-पूर्व समीक्षा के लिए पेश हुआ। मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस साइमन टिंकलर ने कहा कि नीरव मोदी को मुकदमे में किसी तरह की “महत्वपूर्ण क्षति” नहीं होगी और 23 मार्च से शुरू होने वाले आठ दिवसीय ट्रायल में उसे समान अवसर मिलेंगे। अदालत ने टिप्पणी की कि यह याचिका देरी की रणनीति का हिस्सा प्रतीत होती है।
नीरव मोदी की ओर से बैरिस्टर जेम्स किनमैन ने दलील दी कि दक्षिण लंदन की एचएमपी थेम्साइड जेल से स्थानांतरण के बाद उसे कानूनी दस्तावेजों तक पर्याप्त पहुंच नहीं मिल पाई। उन्होंने बताया कि मोदी अपनी आंखों की 60 प्रतिशत रोशनी खो चुका है और नैदानिक अवसाद से पीड़ित है। हालांकि बैंक ऑफ इंडिया के बैरिस्टर टॉम बेस्ली ने अंतिम समय में दायर याचिका का विरोध किया।
नीरव 2019 से हैं ब्रिटेन की जेल में बंद
नीरव मोदी मार्च 2019 से ब्रिटेन की जेल में बंद है। भारत में उसके खिलाफ सीबीआई और ईडी की ओर से धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और साक्ष्य से छेड़छाड़ के तीन मामले चल रहे हैं। अप्रैल 2021 में ब्रिटेन की तत्कालीन गृह मंत्री प्रीति पटेल ने उसके प्रत्यर्पण का आदेश दिया था, जिसके खिलाफ उसकी कई अपीलें अब तक खारिज हो चुकी हैं।
शेख हसीना के करीबी नेता सेन की हिरासत में मौत, कस्टोडियल डेथ पर उठे सवाल
8 Feb, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर उबाल आ गया है। अवामी लीग के वरिष्ठ नेता, हिंदू समुदाय के प्रमुख चेहरे और पूर्व जल संसाधन मंत्री रमेश चंद्र सेन की शनिवार को हिरासत में मौत हो गई। 85 वर्षीय सेन लंबे समय से बीमार चल रहे थे और दीनाजपुर जिला जेल में बंद थे। शनिवार सुबह उन्हें जेल से दीनाजपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल के इमरजेंसी विभाग लाया गया, जहां कुछ ही मिनटों बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
जेल प्रशासन के अनुसार, रमेश चंद्र सेन को सुबह करीब 9:10 बजे अस्पताल लाया गया था और 9:29 बजे डॉक्टरों ने उनकी मृत्यु की पुष्टि की। हालांकि, उनकी मौत के बाद कस्टोडियल डेथ को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विपक्षी दलों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे सिर्फ बीमारी से हुई मौत मानने से इनकार किया है।
गौरतलब है कि रमेश चंद्र सेन बांग्लादेश की राजनीति में एक प्रभावशाली नाम थे। वे पांच बार सांसद चुने गए और शेख हसीना सरकार में जल संसाधन मंत्री रह चुके थे। उन्होंने 2024 के आखिरी आम चुनाव में भी जीत दर्ज की थी। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि शेख हसीना सरकार के पतन के बाद अवामी लीग नेताओं के खिलाफ जिस तरह से मामले दर्ज किए गए, उनमें राजनीतिक बदले की भावना साफ नजर आती है। सेन के खिलाफ भी हाल के महीनों में हत्या समेत तीन मामले दर्ज किए गए थे, जिन्हें कई विश्लेषक “घोस्ट केस” करार दे रहे हैं।
सूत्रों का दावा है कि हिरासत के दौरान रमेश चंद्र सेन को पर्याप्त चिकित्सा सुविधा नहीं दी गई। अगस्त 2024 में उनकी गिरफ्तारी के समय सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें वायरल हुई थीं, जिनमें उनके हाथ रस्सियों से बंधे हुए दिखे थे। उस वक्त भी उनकी उम्र और स्वास्थ्य को लेकर सवाल उठे थे। कई अवामी लीग नेता देश छोड़कर चले गए थे, लेकिन सेन अपने घर पर ही रुके रहे। उनका कहना था कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया और उन्हें न्याय व्यवस्था पर भरोसा है।
उनकी मौत के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कई यूजर्स ने इसे “प्रिजन मर्डर” और “कस्टोडियल किलिंग” बताया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हिरासत में बीमारी के दौरान मरने वाले अवामी लीग नेताओं की संख्या अब कम से कम पांच हो चुकी है।
रमेश चंद्र सेन का राजनीतिक कद इस बात से भी समझा जा सकता है कि उन्होंने विपक्ष के बड़े नेता मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगिर को चुनाव में हराया था। उनकी मौत ने बांग्लादेश में मानवाधिकार, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और राजनीतिक प्रतिशोध को लेकर एक बार फिर गंभीर बहस छेड़ दी है।
ईरान की ये ‘डांसिंग मिसाइल..........जो इजराइल में मचा चुकी तबाही
7 Feb, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान । एक ओर अमेरिका और ईरान वार्ता की मेज पर आने वाले हैं, लेकिन इससे पहले अमेरिका की ओर से ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को खुली धमकी दी गई है। ट्रंप पहले ही अपने जंगी जहाजों को समंदर में उतार चुके हैं, वहीं अब वे खुली धमकी दे रहे हैं कि ईरान को चिंतित होने की जरूरत है। अमेरिका की ये धमकी ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर है, इस अमेरिका ने पिछले साल जून में नेस्तानबूत करने का दावा किया था। हालांकि ईरान बार-बार कहता रहा कि उसके परमाणु कार्यक्रम को नुकसान नहीं पहुंचा। हालांकि ईरान के तरकश में भी कई तीर हैं, जिन्हें उसने इस्तेमाल किया तब अमेरिकी एडवांस टेक्नोलॉजी को कड़ी टक्कर मिल सकती है। ऐसा ही एक ईरानी हथियार है, उसकी ‘डांसिंग मिसाइल’, जिसका कहर 12 दिनों के छोटे से युद्ध में इजरायल देख चुका है। इजारयल की राजधानी तेल अवीव पर इस मिसाइल ने घूम-घूमकर हमला किया था।
ईरानी सेजिल मिसाइल का नाम चर्चा में जून, 2025 में आया था, जब इस मिसाइल ने अपना कहर ढाया था। ये मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है, जो सॉलिड फ्यूल से चलती है और इस मिसाइल को तेजी से लांच किया जा सकता है। सेजिल मिसाइल फैमिली की ये दूसरी पीढ़ी की मिसाइल है। जैसा नाम से ही पता चलता है कि अपडेटेड वर्जन और भी ज्यादा ताकतवर और सटीक है। इस मिसाइल की की मारक क्षमता लगभग 2000–2500 किलोमीटर तक है यानि यह ईरान से सीधे इजरायल जैसे देशों को निशाना बना सकती है। इस मिसाइल को इंटरसेप्ट करना बेहद मुश्किल है क्योंकि ये दुश्मन के रेडार सिस्टम को चकमा देने में एक्सपर्ट है।
ईरान की सेजिल-2 एक मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है, जो दो चरणों वाली और ठोस ईंधन पर आधारित है। यह लगभग 700 किलोग्राम तक का वारहेड ले जा सकती है। सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (सीएसआईएस) के मुताबिक सेजिल मिसाइल लगभग 18 मीटर लंबी, 1.25 मीटर चौड़ी है और इसका वजन करीब 23600 किलोग्राम तक है।
सेजिल-2 की सबसे बड़ी खासियत इसका ठोस ईंधन होता है। इससे इस मिसाइल को लांच करने की तैयारी बहुत तेजी से हो जाती है, जो पुराने तरल ईंधन वाली शाहाब मिसाइलों की तुलना में इसे और ज्यादा प्रभावी बना देता है। इस मिसाइल का पहला परीक्षण साल 2008 में किया गया था, जिसमें यह करीब 800 किलोमीटर तक गई थी। इसके बाद मई 2009 में दूसरा परीक्षण हुआ, जिसमें इसके मार्गदर्शन और नेविगेशन सिस्टम को परखा गया।
59 फीट लंबी मिसाइल अपने साथ 7 क्विंटल का पेलोड ले जा सकती है, लेकिन वहां जिस तरह से इस्तेमाल करती है, वही इस मिसाइल की खासियत है। डांसिंग मिसाइल इसलिए कहते हैं क्योंकि ये हाइली मैनुवरेबल है। ये सेजिल मिसाइल अपने टार्गेट को हिट करने के लिए न सिर्फ तेजी दिखाती है बल्कि घूम-घूमकर हिट भी करती है।
एप्स्टीन: गलत आदमी से दोस्ती के चक्कर में फंसे ब्रिटेन के पीएम स्टार्मर, अब कुर्सी पर मंडराया संकट
7 Feb, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन। यौन अपराधी जेफ्री एप्स्टीन से जुड़े नए सनसनीखेज खुलासों ने ब्रिटेन के राजनीतिक गलियारों में भूचाल ला दिया है। हालांकि प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर का एप्स्टीन से कभी कोई सीधा व्यक्तिगत संबंध नहीं रहा, लेकिन अपनी सरकार में एप्स्टीन के करीबी रहे पीटर मैंडलसन की नियुक्ति को लेकर वे अब चौतरफा घिर गए हैं। ताजा दस्तावेजों में मैंडलसन और एप्स्टीन के बीच गहरी दोस्ती की बात सामने आने के बाद स्टार्मर की मध्यमार्गी-वामपंथी सरकार के अस्तित्व पर ही सवाल खड़े होने लगे हैं।
यह संकट तब गहराया जब स्टार्मर को एप्स्टीन के अपराधों के पीड़ितों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पड़ी। उन्होंने स्वीकार किया कि मैंडलसन ने अपनी दोस्ती को लेकर उनसे लगातार झूठ बोला और वे उस झूठ को पहचान नहीं सके। स्टार्मर ने भावुक अपील करते हुए कहा, मैं उन पीड़ितों से माफी मांगता हूँ जिन्होंने ताकतवर लोगों के हाथों उत्पीड़न सहा। मुझे खेद है कि मैंने मैंडलसन के दावों पर यकीन किया और उन्हें महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किया। प्रधानमंत्री की इस माफी को उनकी राजनीतिक कमजोरी और खराब निर्णय क्षमता के रूप में देखा जा रहा है।
विवाद की जड़ में पीटर मैंडलसन की वह नियुक्ति है, जिसे स्टार्मर ने लेबर पार्टी के अंदरूनी विरोध के बावजूद आगे बढ़ाया था। हाल ही में सार्वजनिक हुई एप्स्टीन फाइल्स ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मैंडलसन और एप्स्टीन के बीच संबंध केवल औपचारिक नहीं, बल्कि काफी करीबी थे। इस खुलासे के बाद स्टार्मर ने मैंडलसन को पद से तो हटा दिया है, लेकिन अब पार्टी के भीतर ही उनके खिलाफ बगावत के सुर तेज हो गए हैं। लेबर पार्टी की सांसद पाउला बार्कर ने खुले तौर पर कहा है कि प्रधानमंत्री का निर्णय संदिग्ध था और अब उन्हें जनता के साथ-साथ अपनी पार्टी का विश्वास फिर से जीतने के लिए कड़ा संघर्ष करना होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रकरण स्टार्मर की प्रतिष्ठा के लिए एक मृत्यु दंड जैसा साबित हो सकता है। जानकारों के अनुसार, भले ही सरकार अभी न गिरे, लेकिन स्टार्मर की साख को जो ठेस पहुँची है, उससे उबरना नामुमकिन लग रहा है। प्रोफेसर रॉब फोर्ड जैसे विशेषज्ञों का कहना है कि उनकी सरकार की उम्र अब महीनों या शायद कुछ ही सालों की बची है। ब्रिटेन के पूर्व राजकुमार एंड्रयू के बाद अब मैंडलसन और स्टार्मर का नाम इस विवाद से जुड़ने के कारण यह मामला केवल एक कूटनीतिक चूक न रहकर एक बड़ा नैतिक संकट बन गया है। आने वाले दिन तय करेंगे कि स्टार्मर अपनी कुर्सी बचा पाते हैं या एप्स्टीन का काला साया उनकी सरकार को निगल जाएगा।
ईरान से खजाना लेकर भाग रहे थे 2 जहाज, खामेनेई के दूतों ने बीच समंदर में पकड़ा, यूएस ने चेताया
7 Feb, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। ओमान की राजधानी मस्कट में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली महत्वपूर्ण परमाणु वार्ता से ठीक पहले पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर पहुँच गया है। फारस की खाड़ी में बारूद की गंध उस समय तेज हो गई जब ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (आईआरजीसी) ने बीच समंदर में एक बड़ी सैन्य कार्रवाई करते हुए दो विदेशी जहाजों को अपने कब्जे में ले लिया। ईरान का दावा है कि ये जहाज एक संगठित नेटवर्क के जरिए ईरानी खजाने यानी डीजल की तस्करी कर रहे थे।
ईरानी नौसेना के अनुसार, गुरुवार 5 फरवरी को फारसी द्वीप के पास की गई इस कार्रवाई में जब्त किए गए जहाजों से 10 लाख लीटर से अधिक ईंधन बरामद किया गया है। जहाजों पर सवार 15 विदेशी क्रू मेंबर्स को हिरासत में लेकर बुशहर बंदरगाह भेज दिया गया है। हालांकि ईरान ने अभी तक यह खुलासा नहीं किया है कि ये जहाज किस देश के थे, लेकिन इस घटना की टाइमिंग ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है।
जहाजों की जब्ती के कुछ ही घंटों बाद ईरान के पूर्व मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी इज्जतुल्लाह जरघामी ने अमेरिका को सीधी और तीखी सैन्य चेतावनी जारी की। जरघामी ने सोशल मीडिया पर कड़े शब्दों में लिखा कि होर्मुज जलडमरूमध्य अमेरिका के लिए नर्क की जगह बनेगा। उन्होंने अमेरिकी नौसेना की ताकत का मजाक उड़ाते हुए कहा कि युद्ध की स्थिति में अमेरिकी जहाजों का अंजाम भयानक होगा और ईरान यह साबित कर देगा कि ऐतिहासिक रूप से इस क्षेत्र पर उसी का अधिकार है। यह घटनाक्रम 7 फरवरी को ओमान में होने वाली भारत-अमेरिका-ईरान से जुड़ी कूटनीतिक हलचलों और परमाणु वार्ता से ठीक पहले हुआ है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से बढ़ते सैन्य दबाव और परमाणु ठिकानों पर संभावित हमलों की धमकियों के बीच ईरान अपनी नौसैनिक शक्ति का प्रदर्शन कर कूटनीतिक बढ़त बनाने की कोशिश कर रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की दुखती रग माना जाता है क्योंकि वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20-25 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। ईरान अक्सर इस रास्ते को बंद करने की धमकी देकर अंतरराष्ट्रीय बाजार और कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बनाने की रणनीति अपनाता रहा है। इस ताजा सैन्य कार्रवाई ने वार्ता की मेज पर बैठने से पहले माहौल को और अधिक विस्फोटक बना दिया है।
डिएगो गार्सिया पर ट्रंप की दो टूक: सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेंगे ये हमारा अधिकार
7 Feb, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। हिंद महासागर के रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण द्वीप डिएगो गार्सिया को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि वे इस द्वीप पर अमेरिकी सेना की मौजूदगी और परिचालन को कभी भी खतरे में नहीं पड़ने देंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में कोई समझौता टूटता है या अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा पर आंच आती है, तो उनके पास बेस को सैन्य तरीके से सुरक्षित और मजबूत करने का पूर्ण अधिकार है।
अपने हालिया बयान में राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि उन्होंने डिएगो गार्सिया द्वीप के भविष्य को लेकर ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के साथ सीधी बातचीत की है। यह द्वीप हिंद महासागर के बीचों-बीच स्थित है और अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक अनिवार्य स्तंभ माना जाता है। ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया कि विदेशों में स्थित अमेरिकी सैन्य बेस केवल भौतिक संपत्ति नहीं हैं, बल्कि ये अमेरिकी सैनिकों की ताकत, आधुनिक उपकरणों की क्षमता और रणनीतिक स्थिति का संगम हैं, जिन्होंने पिछले वर्षों में कई ऑपरेशनों को सफल बनाया है। यूनाइटेड किंगडम और मॉरीशस के बीच इस द्वीप को लेकर हुए हालिया लीज समझौते पर ट्रंप ने संतुलित रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि वे प्रधानमंत्री स्टार्मर की स्थिति को समझते हैं और कई जानकारों के अनुसार, यह उस समय संभव सबसे बेहतर डील थी। हालांकि, राष्ट्रपति ने कूटनीतिक शिष्टाचार के साथ-साथ कड़ा संदेश भी दिया। उन्होंने साफ कहा कि अगर यह लीज डील भविष्य में कभी बाधित होती है या कोई बाहरी तत्व अमेरिकी बेस को धमकी देता है, तो वे बल प्रयोग से पीछे नहीं हटेंगे।
ट्रंप ने उन चुनौतियों और दावों को भी सिरे से खारिज कर दिया जो अक्सर मानवाधिकारों या पर्यावरण के नाम पर इस बेस की मौजूदगी पर सवाल उठाते हैं। उन्होंने इसे बकवास करार देते हुए कहा कि झूठे दावों के आधार पर वे दुनिया के इस सबसे महत्वपूर्ण सैन्य केंद्र को कमजोर नहीं होने देंगे। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने भी राष्ट्रपति के इस रुख की पुष्टि की है। उन्होंने ब्रीफिंग के दौरान कहा कि अमेरिका अपनी संपत्तियों की रक्षा करने का संप्रभु अधिकार रखता है और डिएगो गार्सिया सहित दुनिया के किसी भी कोने में अपनी सैन्य शक्ति को बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। डिएगो गार्सिया न केवल हिंद महासागर का एक हब है, बल्कि यह मध्य पूर्व, अफ्रीका और दक्षिण एशिया में अमेरिकी सैन्य प्रभाव बनाए रखने के लिए केंद्रीय भूमिका निभाता है। लंबे समय से संप्रभुता के विवादों में घिरे इस द्वीप पर ट्रंप का यह बयान यह संकेत देता है कि नई अमेरिकी सरकार अपनी विदेशी सैन्य नीति में किसी भी तरह के समझौते के मूड में नहीं है। राष्ट्रपति के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय गलियारों में यह संदेश भेज दिया है कि डिएगो गार्सिया की सुरक्षा अमेरिका की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी।
जुमें की नमाज के वक्त मस्जिद में आत्मघाती हमला, 31 लोगों की मौत, 169 घायल
7 Feb, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शुक्रवार को जुमे की नमाज के दौरान एक शिया मस्जिद (इमामबाड़ा) को निशाना बनाकर भीषण आत्मघाती हमला किया गया। इस हमले में अब तक 31 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 169 लोग घायल बताए जा रहे हैं। मृतकों और घायलों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार प्रत्यक्षदर्शियों ने धमाके के संबंध बताते हुए कहा, कि जुमे की नमाज के लिए मस्जिद में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। इसी दौरान एक आत्मघाती हमलावर ने खुद को विस्फोट से उड़ा लिया, जिससे मस्जिद परिसर में अफरा-तफरी मच गई। धमाका इतना शक्तिशाली था कि आसपास की इमारतों के शीशे तक टूट गए। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और रेस्क्यू टीमें मौके पर पहुंच गईं और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। इस्लामाबाद के पुलिस प्रमुख ने पूरे शहर में आपातकाल घोषित कर दिया है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। अस्पतालों को हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
अधिकारियों के अनुसार, अब तक किसी भी आतंकी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। सुरक्षा एजेंसियां मामले की जांच में जुट गई हैं और हमले के पीछे के कारणों का पता लगाने का प्रयास कर रही हैं।
राष्ट्रपति जरदारी ने घटना को मानवता के खिलाफ बताया
इस हमले पर पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि निर्दोष लोगों को निशाना बनाना मानवता के खिलाफ अपराध है। राष्ट्रपति ने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की और प्रशासन को निर्देश दिए कि पीड़ितों को हरसंभव बेहतर इलाज मुहैया कराया जाए।
आतंकी घटनाएं हौसला नहीं तोड़ सकतीं: चौधरी
पाकिस्तान के संसदीय मामलों के मंत्री डॉ. तारिक फजल चौधरी ने सोशल मीडिया पर हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि ऐसी आतंकी घटनाएं देश और उसके लोगों के हौसले को नहीं तोड़ सकतीं। उन्होंने जनता से शांति बनाए रखने और सुरक्षा एजेंसियों के साथ सहयोग करने की अपील की। इस्लामाबाद में हुए इस आतंकी हमले ने एक बार फिर पाकिस्तान में सुरक्षा व्यवस्था और सांप्रदायिक हिंसा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सिर्फ कुछ दिन बाद आसमान में दिखेगा अद्भुत नजारा? सूरज की तरफ तेजी से बढ़ रहा है धूमकेतु
6 Feb, 2026 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
डेस्क। यूनिवर्स में दिलचस्पी रखने वालों के लिए एक बहुत अच्छी खबर सामने आई है। पिछले दिनों एक नए धूमकेतु C/2026 A1 (MAPS) की खोज हुई है, जिसकी वजह से अप्रैल की शुरुआत में आकाश में शानदार नजारा देखने को मिल सकता है। बता दें कि यह धूमकेतु सूरज के बहुत करीब से गुजरेगा और अगर इसमें कोई टूट-फूट नहीं हुई, तो यह दिन के उजाले में भी नजर आ सकता है। इस धूमकेतु को 13 जनवरी 2026 को चिली के अटाकामा रेगिस्तान में स्थित एक रिमोट कंट्रोल्ड टेलिस्कोप से 4 शौकिया खगोलशास्त्रियों की टीम ने खोजा था।
एलेन मॉरी, जॉर्जेस अटार्ड, डैनियल पैरॉट और फ्लोरियन सिग्नोरेट नाम के इन खगोलशास्त्रियों ने MAPS प्रोग्राम के तहत यह खोज की थी। खोज के समय धूमकेतु सूरज से 2.056 AU यानी कि करीब 30 करोड़ किलोमीटर दूर था, और यह सूर्य से सबसे ज्यादा दूरी पर खोजा जाने वाला धूमकेतु बन गया है। इससे पहले यह रिकॉर्ड 1965 के धूमकेतु इकेया-सेकी के पास था। यह धूमकेतु ‘क्रूट्स सनग्रेजिंग’ परिवार का सदस्य है। बता दें कि इस परिवार के धूमकेतु सूरज के बहुत करीब से गुजरते हैं। इतिहास के कई चमकीले और शानदार नजारा दिखाने वाले धूमकेतु इसी परिवार से आए हैं।
‘क्रूट्स सनग्रेजिंग’ परिवार के कुछ सबसे चर्चित धूमकेतुओं में 1882 का ग्रेट कमेट, 1965 का Ikeya-Seki और 2011 का Lovejoy धूमकेतु शामिल हैं। इकेया-सेकी 20वीं सदी का सबसे चमकदार धूमकेतु था और इसने पूर्णिमा के चांद जितना उजाला किया था जबकि लवजॉय शुक्र ग्रह जितना चमकीला नजर आया था। क्रूट्ज परिवार के धूमकेतु एक पुराने बड़े धूमकेतु के टुकड़े हैं। हजारों साल पहले, शायद तीसरे या चौथे ईसा पूर्व में एक 100 किलोमीटर से भी बड़ा धूमकेतु सूरज के बहुत करीब आया और टूट गया। उसके बाद उसके टुकड़े अलग-अलग समय पर लौटते रहे और और टूटते गए।
सन 363 में कई धूमकेतु एक साथ दिन के उजाले में दिखे थे। 11वीं सदी में 1106 और 1138 में नजर आए ग्रेट कमेट या बड़े धूमकेतु भी इसी परिवार से थे। आज भी हजारों छोटे टुकड़े SOHO स्पेसक्राफ्ट से देखे जाते हैं, लेकिन बड़े टुकड़े दुर्लभ होते हैं। C/2026 A1 (MAPS) की खोज दूर से होने के कारण ये खास हो गया है। इससे लगता है कि इसका नाभिक या न्यूक्लियस सामान्य से बड़ा हो सकता है। यह धीरे-धीरे चमकदार हो रहा है, जो बताता है कि यह बड़ा टुकड़ा है, और अभी टूट भी नहीं रहा है। हालांकि, आधुनिक तकनीक से पुराने धूमकेतुों की तुलना में इसका नाभिक इकेया-सेकी जितना बड़ा नहीं लगता, इसलिए यह उतना चमकीला नहीं होगा।
अप्रैल की शुरुआत में यह धूमकेतु सूरज की सतह से सिर्फ 1,20,000 किलोमीटर की दूरी से गुजरेगा। अगर यह अपने रास्ते पर तेज गर्मी और गुरुत्वाकर्षण से बच गया, तो शाम के समय आकाश में शानदार नजारा दिखेगा। इसके आकार को देखते हुए माना जा रहा है कि यह दिन के उजाले में भी दिख सकता है। Kreutz धूमकेतु दक्षिणी गोलार्ध से ज्यादा आसानी से दिखते हैं, इसलिए भारत के दक्षिणी हिस्सों या ऑस्ट्रेलिया जैसे इलाकों में बेहतर नजर आएगा। अगर सूर्य के पास से गुजरते हुए यह टूट भी जाता है तो अचानक काफी ज्यादा चमक बिखेर सकता है। हालांकि अभी कुछ कहना मुश्किल है, और ऐसे धूमकेतु कई बार टूट जाते हैं।
इस धूमकेतु को लेकर कोई कुछ भी कहे, लेकिन अगर यह सूर्य की गर्मी को झेल पाया तो अप्रैल में शाम के आकाश में शानदार नजारा देखने को मिलेगा। SOHO स्पेसक्राफ्ट से इसकी अच्छी तस्वीरें मिलेंगी। खगोलशास्त्री जेनेक सेकानिया की भविष्यवाणी के मुताबिक, आने वाले दशकों में 2 बड़े क्रूट्ज धूमकेतु दिख सकते हैं, और यह उनमें से एक हो सकता है। ऐसे में अब सभी की नजरें फिलहाल अप्रैल की तरफ हैं जब हमें एक ऐसा शानदार नजारा देखने को मिल सकता है जो हम शायद जिंदगी में कोई दोबारा न देख पाएं।
पाकिस्तान में जुमे की नमाज के दौरान शिया मस्जिद में बड़ा धमाका; आत्मघाती हमले में 31 की मौत, 150 से ज्यादा घायल
6 Feb, 2026 04:58 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Pakistan mosque suicide bombing: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शुक्रवार को जुमे की नमाज के दौरान शिया मस्जिद में बड़ा धमाका हो गया. पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक इस आत्मघाती हमले में अब तक 31 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 150 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं. सूचना मिलते ही पुलिस और रेस्क्यू की टीम मौके पर पहुंच गई हैं और बचाव कार्य जारी है.
धमाके के बाद इस्लामाबाद में इमरजेंसी घोषित
पूरा मामला इस्लामाबाद के तरलाई इलाके में स्थित इमाम बारगाह खदीजत-उल-कुबरा का है. यहां जुमे की नमाज के दौरान अचानक हुए आत्मघाती हमले से पूरा इलाका दहल गया. सूचना मिलते ही पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां मौके पर पहुंच गईं हैं. इस्लामाबाद में इमरजेंसी घोषित की गई है. साथ ही सभी अस्पतालों को अलर्ट मोड पर रखा गया है.
शिया मस्जिद के गेट पर खुद को उड़ाया
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो सुसाइड बॉम्बर ने शिया मस्जिद के गेट पर जाकर खुद को उड़ा लिया. जिससे बड़ा धमाका हुआ. धमाके में घायल हुए लोगों का लगातार रेस्क्यू किया जा रहा है.
वहीं आत्मघाती हमले के बाद पाकिस्तान सरकार ने आतंकी घटनाएं हमारे हौसले को तोड़ नहीं सकती हैं. ये वक्त हमसब को मिलकर मजबूती के साथ देश और सुरक्षा एजेंसियों के साथ खड़ा रहने की है.
3 महीने पहले भी हुआ था आत्मघाती हमला
इससे पहले करीब 3 महीन पहले भी इस्लामाबाद में इस तरह आत्मघाती हमला हुआ था. साल 2025 में 11 नवंबर को इस्लामाबाद के G-11 इलाके में जिला और सत्र न्यायालय के बाहर सुसाइड ब्लास्ट किया गया था. जिसमें 12 लोगों की मौत हुई थी और 30 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे. पाकिस्तान ने आरोप लगाया था कि इस आत्मघाती हमले में भारत का हाथ है. हालांकि भारत ने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा था कि ये पाकिस्तान की पुरानी फितरत है. पाकिस्तान आतंक की फैक्ट्री चलाता है और जब उसके यहां आतंकी घटनाएं होती हैं, तो भारत पर आरोप लगाता है.
पुर्तगाल में तूफानों का कहर: अब तक 11 लोगों की मौत और अरबों यूरो का नुकसान
6 Feb, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लिस्बन। पुर्तगाल में जनवरी के अंत से शुरू हुआ तूफानी मौसम थमने का नाम नहीं ले रहा है। देश में एक के बाद एक आ रहे विनाशकारी तूफानों ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें अब तक 11 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। ताजा घटना दक्षिणी पुर्तगाल के सेरपा क्षेत्र की है, जहाँ अमोरेइरा बांध के पास एक 64 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई। राष्ट्रीय रिपब्लिकन गार्ड के अधिकारियों के अनुसार, वह व्यक्ति अपनी कार से सड़क पार करने की कोशिश कर रहा था, तभी अचानक आई बाढ़ के तेज बहाव में उसकी गाड़ी बह गई। हाल के दिनों में पुर्तगाल कई शक्तिशाली तूफानी प्रणालियों की चपेट में रहा है, जिनमें तूफान क्रिस्टिन सबसे अधिक घातक साबित हुआ है। इस विनाशकारी सिलसिले के बीच अब तूफान लियोनार्डो ने भी देश को प्रभावित करना शुरू कर दिया है, जिससे राहत कार्यों में बाधा आ रही है।
प्राकृतिक आपदा की गंभीरता को देखते हुए पुर्तगाल के प्रधानमंत्री लुईस मोंटेनेग्रो ने प्रभावित परिवारों और व्यापारियों की मदद के लिए 2.5 बिलियन यूरो के विशाल सहायता पैकेज की घोषणा की है। सरकार ने मंत्रिपरिषद की आपात बैठक के बाद देश में लागू राष्ट्रीय आपदा की स्थिति को 8 फरवरी तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। इस आर्थिक पैकेज का उद्देश्य घरों का पुनर्निर्माण, आय का नुकसान झेल रहे परिवारों को वित्तीय सहायता प्रदान करना और संकटग्रस्त कारोबारियों को नकद राशि उपलब्ध कराना है। इसके अतिरिक्त, करों और ऋण भुगतान में भी बड़ी राहत देने का प्रावधान किया गया है। सहायता योजना के तहत जिन मुख्य घरों का बीमा नहीं है, उनके पुनर्निर्माण और कृषि व वानिकी कार्यों के लिए सरकार अधिकतम 10 हजार यूरो तक का सीधा अनुदान प्रदान करेगी। जिन परिवारों की आजीविका प्रभावित हुई है, उन्हें प्रति व्यक्ति 537 यूरो की दर से सहायता मिलेगी, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति परिवार 10,075 यूरो तय की गई है। प्रभावित क्षेत्रों के व्यापारियों के लिए छह महीने तक सामाजिक सुरक्षा अंशदान में छूट और एक विशेष अस्थायी छंटनी योजना शुरू की गई है। साथ ही, घरों और व्यवसायों के ऋण पर 90 दिनों की मोहलत दी गई है, जिसे स्थिति के अनुसार 12 महीने तक बढ़ाया जा सकता है। सरकार ने अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान करने के लिए 1.5 बिलियन यूरो की दो विशेष ऋण सुविधाएं भी शुरू की हैं। इसके अलावा, क्षतिग्रस्त हुए परिवहन ढांचे, सार्वजनिक भवनों और सांस्कृतिक विरासतों की मरम्मत के लिए अतिरिक्त बजट आवंटित किया गया है। वर्तमान में लेइरिया, कोइम्ब्रा, सांतारेम और राजधानी लिस्बन जैसे जिले तूफानों से सबसे अधिक प्रभावित हैं। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि आने वाले दिनों में भी स्थितियां चुनौतीपूर्ण बनी रह सकती हैं, जिसके कारण प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।
प्रधानमंत्री ने बुलाई बैठक की राहत पैकेज की घोषणा
पिछले सप्ताह 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाले तूफान क्रिस्टिन द्वारा मचाई गई तबाही के बाद अब लियोनार्डो तूफान का खतरा मंडरा रहा है। पुर्तगाल के मौसम विभाग (आईपीएमए) के अनुसार, देश के कई हिस्सों में हवा की रफ्तार 95 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जिससे बाढ़ और परिवहन सेवाएं ठप होने की गंभीर आशंका है। पुर्तगाल में जनवरी के अंत से अब तक इन तूफानी प्रणालियों के कारण 11 लोगों की जान जा चुकी है। ताजा मामले में दक्षिणी पुर्तगाल के सेरपा क्षेत्र में बाढ़ के तेज बहाव में एक कार बह गई, जिससे एक 64 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई। हालात की गंभीरता को देखते हुए पुर्तगाल के प्रधानमंत्री लुईस मोंटेनेग्रो ने प्रभावित परिवारों और व्यापारियों के लिए 2.5 बिलियन यूरो के सहायता पैकेज की घोषणा की है। सरकार ने राष्ट्रीय आपदा की स्थिति को 8 फरवरी तक बढ़ा दिया है। इस आर्थिक मदद के जरिए बेघर हुए लोगों को पुनर्निर्माण और आय सहायता प्रदान की जाएगी। प्रशासन ने नागरिकों को घरों में रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सख्त हिदायत दी है।
अन्तर्राष्ट्रीय मदद में कटौती से वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली हो रही कमजोर
6 Feb, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जिनीवा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने चेतावनी दी है कि अन्तरराष्ट्रीय सहायता में हुई कटौती और वित्तीय समर्थन की निरन्तर क़िल्लत से वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली कमजोर हो रही है। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉक्टर टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा है कि यह स्थिति और भी गम्भीर है, क्योंकि महामारी, दवाओं के प्रति प्रतिरोधी संक्रमण और स्वास्थ्य सेवाओं के नाजुक होने का ख़तरा लगातार बढ़ रहा है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक डॉक्टर टैड्रॉस ने बैठक को सम्बोधित करते हुए बताया कि बीते साल वित्तीय सहायता में भारी कटौती के कारण, स्वास्थ्य संगठन को अपने कार्यबल में कमी करनी पड़ी, जिसके गम्भीर और दूरगामी प्रभाव हुए हैं। यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने आगाह किया है कि द्विपक्षीय सहायता में अचानक, बड़े पैमाने पर हुई कटौती ने, अनेक देशों में स्वास्थ्य प्रणालियों और सेवाओं के सामने चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। डॉक्टर टैड्रॉस ने वर्ष 2025 को विश्व स्वास्थ्य संगठन के इतिहास में “सबसे कठिन वर्षों में से एक” करार दिया। उन्होंने कहा कि डब्ल्यूएचओ का जीवनरक्षक कार्य जारी है, लेकिन वित्तीय संकट ने वैश्विक स्वास्थ्य संचालन में मौजूदा कमज़ोरियों को उजागर किया है, विशेष रूप से उन निम्न और मध्यम आय वाले देशों में, जो आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं को बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
रिपोर्ट में डॉक्टर टैड्रॉस के मुताबिक डब्ल्यूएचओ में वित्तीय संकट अन्तरराष्ट्रीय स्वास्थ्य के लिए वित्तीय समर्थन में व्यापक कमी का हिस्सा है, जिससे देशों को कठिन निर्णय लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि वित्तीय कटौतियों की प्रतिक्रिया में डब्ल्यूएचओ, अनेक देशों को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं को बनाए रखने और सहायता पर निर्भरता से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने में सहयोग दे रहा है। इसके लिए तम्बाकू, शराब और शुगरयुक्त पेय पदार्थों पर स्वास्थ्य ‘कर’ बढ़ाने समेत घरेलू संसाधन जुटाने पर जोर दिया जा रहा है। यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के मुताबिक आज भी 4.6 अरब लोग आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच से वंचित हैं, जबकि 2.1 अरब लोग स्वास्थ्य पर होने वाले ख़र्चों के कारण वित्तीय कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। इसके साथ ही दुनिया भर में, 2030 तक 1.1 करोड़ स्वास्थ्य कर्मियों की कमी का भी अनुमान है, जिसमें से आधी से अधिक संख्या केवल नर्स की हैं।
इन सुधारों के परिणामस्वरूप डब्ल्यूएचओ ने वर्ष 2026-27 में अपने मूल बजट के लिए आवश्यक संसाधनों का करीब 85 फीसदी जुटा लिया है, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि शेष वित्त पोषण जुटाना मुश्किल होगा, ख़ासकर वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों को देखते हुए। उन्होंने चेतावनी दी कि आपात तैयारी, दवाओं के प्रति प्रतिरोध और जलवायु परिवर्तन के प्रति सुदृढ़ता जैसे क्षेत्रों में गम्भीर कमी बनी हुई है, जिससे ये प्राथमिकताएं जोखिम में हैं और आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं।
डॉक्टर टैड्रॉस ने चेतावनी दी कि विश्व भर में हर 6 में से 1 बैक्टीरियल संक्रमण अब एंटीबायोटिक्स के प्रति प्रतिरोधी हो गया है, और यह प्रवृत्ति कुछ क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी ने हमें अनेक सबक सिखाए…ख़ासकर यह कि वैश्विक ख़तरे से निपटने के लिए वैश्विक प्रतिक्रिया की जरुरत होती है। एकता ही सबसे अच्छी सुरक्षा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वित्तीय संसाधन पूर्वानुमानित और पर्याप्त नहीं रहे, तो दुनिया अगले स्वास्थ्य संकट के लिए कम तैयार हो सकती है। यह आपका डब्ल्यूएचओ है। इसकी शक्ति आपकी एकता में है। इसका भविष्य आपका चुनाव है।
ईरान ने नए अंडरग्राउंड मिसाइल बेस का किया अनावरण, कमांडर ने किया दौरा
6 Feb, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने नए अंडरग्राउंड मिसाइल बेस का अनावरण किया। ईरान के हवाले से बताया कि बुधवार को ईरानी रक्षा बलों के चीफ ऑफ स्टाफ अब्दोलरहीम मौसवी और आईआरजीसी के एयरोस्पेस डिवीजन के कमांडर सईद मजीद मौसवी दौरे पर पहुंचे थे। इस दौरे के दौरान ही मिसाइल बेस का अनावरण किया गया।
रिपोर्ट में बताया गया कि दौरे के दौरान आईआरजीसी की मिसाइल इकाइयों की क्षमताओं और उनकी संचालन संबंधी तैयारियों का आकलन किया गया। इसके साथ ही ईरान की सुरक्षा बलों के वरिष्ठ कमांडरों को रणनीतिक इकाइयों की प्रगति और मौजूदा तैयारियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।
मौसवी ने कहा कि ईरान ने अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों को सभी तकनीकी मामलों में अपग्रेड करके हमलों को रोकने की ताकत को मजबूत करने में कामयाबी हासिल की। उन्होंने कहा कि देश दुश्मनों की किसी भी कार्रवाई का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। जून 2025 में इजरायल के साथ संघर्ष के बाद, ईरान ने अपनी सैन्य रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। अब सैन्य डॉक्ट्रिन को रक्षात्मक से आक्रामक रुख में बदला गया है, जो तेज गति से और व्यापक स्तर पर अभियान चलाने पर केंद्रित है। इसके साथ ही असममित युद्ध पद्धतियों और निर्णायक, कुचल देने वाली सैन्य रणनीति को अपनाया गया है।
बता दें ईरान के पास वॉशिंगटन की मिलिट्री मौजूदगी बढ़ने की वजह से दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है। ट्रंप ने ईरान को धमकी दी है कि या तो वह अमेरिका के साथ डील करे या फिर उस पर हमला होने का खतरा हो। मौसवी ने भी चेतावनी दी कि अमेरिका की किसी भी गलती का ईरान मुंहतोड़ जवाब देगा। अगर अमेरिका ईरान पर हमला करता है, तो यह केवल यूएस के साथ नहीं, बल्कि एक क्षेत्रीय युद्ध होगा। उन्होंने कहा कि जरा सी भी गलती ईरान को एक्शन लेने की आजादी दे देगी, फिर कोई भी अमेरिकी सुरक्षित नहीं रहेगा और इलाके की आग अमेरिका और उसके साथियों को जला देगी।
सीएम ममता को व्हाट्सएप आयोग नहीं बीजेपी का विंग कहना चाहिए था: हसन
6 Feb, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुरादाबाद। समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व सांसद एसटी हसन ने पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के बयान का समर्थन करते हुए चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में चुनाव आयोग अपनी संवैधानिक भूमिका से हटकर काम कर रहा है और अब वह बीजेपी का एक राजनीतिक विंग बनता नजर आ रहा है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एसटी हसन ने कहा कि ममता बनर्जी को यह कहना चाहिए कि चुनाव आयोग बीजेपी का एक विंग बन गया है। बजाए इसके कि चुनाव आयोग एक व्हाट्सएप आयोग बनकर रह गया है। बता दें ममता बनर्जी ने बुधवार को चुनाव आयोग को व्हाट्सएप कमीशन कहा था। हसन ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग एसआईआर के जरिए मतदाताओं के नाम काटने का काम कर रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर सब कुछ पहले से तय ही है, तो फिर चुनाव कराने का क्या मतलब है? तानाशाही की तरह ही तय कर दें कि पीएम कौन होगा और सीएम कौन होगा।
उन्होंने असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा के मिया वाले बयान पर कहा कि असम में मिया समुदाय को लेकर आरोप लगाए जाते हैं कि वे बांग्लादेशी हैं। जब एक संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति यह कहता है कि अगर मिया द्वारा चलाए जा रहे रिक्शे में किराया पांच रुपए तय है, तो चार रुपए ही देने चाहिए, तो यह बेहद अनैतिक बयान है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतने खुले तौर पर दिए गए ऐसे बयानों के बावजूद सीएम के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई। नैतिक मूल्यों का क्या हो गया है?
इसके अलावा उत्तराखंड में दुकानदार से जुड़े मामले में मोहम्मद दीपक पर दर्ज एफआईआर को लेकर भी हसन ने कहा कि हम दीपक को सलाम करते हैं और अल्लाह से दुआ करते हैं कि हर शहर में ऐसे कम से कम 20 दीपक होने चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा हुआ तो देश का माहौल बेहतर होगा और प्रेम व भाईचारे से भर जाएगा। हसन ने दीपक को सच्चा देशभक्त बताते हुए कहा कि हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई, हर समुदाय के लोग उसके काम की सराहना कर रहे हैं। इसके बावजूद उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज होना दुर्भाग्यपूर्ण है।
इमरान खान की स्वास्थ्य स्थिति चिंताजनक.......बेटे कासिम ने वीजा नहीं देने का लगाया आरोप
6 Feb, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद । जेल में बंद पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की स्वास्थ्य स्थिति चिंताजनक है। उनके बेटे कासिम खान ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तान सरकार जानबूझकर उनके और उनके बड़े भाई सुलेमान के वीजा आवेदन रोक रही है, जिससे वे अपने पिता से मिलने पाकिस्तान नहीं जा पा रहे हैं। कासिम ने पोस्ट में लिखा कि उनके पिता को 914 दिनों से एकांत कारावास में रखा गया है, जहां उनकी सेहत बिगड़ रही है और उन्हें स्वतंत्र चिकित्सा सुविधा से वंचित रखा गया है। उन्होंने कैदी के इलाज से वंचित रखने और बच्चों को पिता से मिलने के अधिकार से वंचित करने वाला सामूहिक दंड बताया।
रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला तब सामने आया जब सरकार ने इमरान खान को पाकिस्तान चिकित्सा विज्ञान संस्थान (पीआईएमएस) में स्थानांतरित करने की पुष्टि की। उधर इमरान की पार्टी पीटीआई ने गुप्त स्थानांतरण बताकर अधिकारियों पर आरोप लगाया कि उन्होंने परिवार और पार्टी नेतृत्व को अनभिज्ञ रखा और निजी डॉक्टरों से मिलने से रोका। विपक्ष के नेता महमूद खान अचकज़ई ने भी नेशनल असेंबली में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से अपील की कि इमरान को उनके विश्वसनीय चिकित्सकों द्वारा चिकित्सा जांच की अनुमति दी जाए। बात दें कि कासिम और सुलेमान फिलहाल अपनी मां जेमिमा गोल्डस्मिथ के साथ लंदन में रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने दिसंबर 2025 में वीजा के लिए आवेदन किया था और जनवरी में पाकिस्तान आने की योजना बनाई थी, लेकिन अब अधिकारियों ने वीजा जारी करने से इंकार किया है। इससे इमरान खान तक पहुंच और उनके इलाज को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं। वहीं इमरान के सुपुत्र कासिम ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे इमरान की सेहत और मानवाधिकार की सुरक्षा के लिए तत्काल हस्तक्षेप करें ताकि अपरिवर्तनीय नुकसान से पहले उनकी मदद की जा सके। इस पूरी स्थिति को पाकिस्तान में राजनीतिक और मानवाधिकार संकट के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि पूर्व प्रधानमंत्री की स्वास्थ्य समस्याओं और परिवार तक उनकी पहुंच पर रोक के बीच व्यापक चिंता पैदा हो गई है।
यूरोपीय ऑटो सेक्टर संकट में, कंपनियों ने मांगा सरकारी सहारा
5 Feb, 2026 05:41 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यूरोपीय संघ से की गई अपील में दोनों कंपनियों ने सुझाव दिया है कि यूरोप में निर्मित वाहनों के लिए कार्बन डाइऑक्साइड बोनस की व्यवस्था की जाए।मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियों का मानना है कि इससे स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा, नौकरियां सुरक्षित रहेंगी और जलवायु लक्ष्यों को हासिल करना आसान होगा।
भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को लेकर चेतावनी
Stellantis (स्टेलेंटिस) के सीईओ एंटोनियो फिलोसा और Volkswagen (फॉक्सवैगन) के सीईओ ओलिवर ब्लूम ने संयुक्त रूप से चेताया कि यूरोप एक नए भू-राजनीतिक दौर में प्रवेश कर चुका है।उनका कहना है कि अब व्यापार, तकनीक और औद्योगिक क्षमताओं का इस्तेमाल राष्ट्रीय हितों को साधने के लिए पहले से कहीं ज्यादा किया जा रहा है। और ऐसे में यूरोपीय संघ को जल्द अपना रास्ता चुनना होगा।
'EU प्रेफरेंस' नियमों पर बढ़ती बहस
इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर 'EU प्रेफरेंस' नियमों पर भी बहस तेज हो गई है।फ्रांस जैसे कुछ देश चाहते हैं कि इलेक्ट्रिक कारों के लिए "मेड इन यूरोप" को प्राथमिकता दी जाए। हालांकि, यूरोपीय आयोग के भीतर मतभेदों के चलते इस पर फैसला कम से कम एक महीने के लिए टल गया है।
इलेक्ट्रिफिकेशन की लागत पर Stellantis की आपत्ति
Fiat (फिएट) और Peugeot (प्यूजो) की मूल कंपनी स्टेलेंटिस ने यूरोपीय आयोग द्वारा प्रस्तावित कुछ बदलावों की आलोचना की है।कंपनी का कहना है कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर संक्रमण अब भी कार निर्माताओं पर भारी लागत का दबाव बना रहा है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
बैटरी मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी दुविधा
फॉक्सवैगन और स्टेलेंटिस के प्रमुखों ने कहा कि यूरोप में ईवी बैटरी सेल निर्माण से जुड़ी दिक्कतें यूरोपीय संघ की दुविधा को साफ दिखाती हैं।एक ओर तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिए स्थानीय उत्पादन जरूरी है। वहीं दूसरी ओर ग्राहक सस्ती इलेक्ट्रिक कारों की उम्मीद करते हैं। कीमतें कम रखने के दबाव में सस्ती आयातित बैटरियों पर निर्भरता बढ़ जाती है।
बैटरी जॉइंट वेंचर्स की समीक्षा
एंटोनियो फिलोसा इस समय स्टेलेंटिस के वैश्विक परिचालन की समीक्षा कर रहे हैं।सूत्रों के मुताबिक, कंपनी कुछ बैटरी जॉइंट वेंचर्स का आकार घटाने या उन्हें बंद करने पर भी विचार कर सकती है। यह समीक्षा ऐसे वक्त में हो रही है, जब बैटरी-इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग में नरमी देखने को मिल रही है।
निष्कर्ष: संरक्षण और प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन की चुनौती
फॉक्सवैगन और स्टेलेंटिस की अपील यह दिखाती है कि यूरोप का ऑटो उद्योग अब नीतिगत समर्थन, लागत नियंत्रण और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन की मांग कर रहा है। आने वाले फैसले यह तय करेंगे कि यूरोप इस बदलते ऑटोमोटिव परिदृश्य में अपनी स्थिति कैसे मजबूत करता है।
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