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“AI से होमवर्क न करें, सीखें”— पोप लियो का युवाओं को संदेश
22 Nov, 2025 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इंडियानापोलिस, इंडियाना में एक नेशनल कैथोलिक यूथ कॉन्फ्रेंस में वेटिकन से लाइव प्रसारण में पोप लियो ने युवाओं को कई अहम संदेश दिए। उन्होंने एक सवाल जवाब के सत्र के दौरान 15,000 US युवाओं से कहा कि एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग हमें सोच समझकर करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सीखने के लिए एक उपयोगी टूल हो सकता है, लेकिन इसे अपने होमवर्क के लिए इस्तेमाल न करें। पोप ने यह संदेश ऐसे समय पर दिया है, जब पूरी दुनिया में एआई का प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि AI हमारे समय की खासियतों में से एक बन रहा है।
'AI का जिम्मेदारी से किया जाए इस्तेमाल'
पोप का कहना है कि एआई का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने का मतलब है कि इसे ऐसे तरीकों से इस्तेमाल करना जो आपको आगे बढ़ने में मदद करें। इसको अपना होमवर्क करने के लिए न कहें।
बता दें कि यूएसस के पहले पोप लियो ने अपने छह महीने के पोप कार्यकाल के पहले ऐसे इवेंट में युवाओं से लगभग 40 मिनट तक बात की। वहीं, उन्होंने कैथोलिक धर्म के बारे में सवालों के जवाब दिए और स्कूल में दोस्त बनाने की सलाह दी।
राजनीति पर भी लियो पोप ने की बात
इतना ही नहीं उन्होंने अपने सेशन में कुछ समय के राजनीति पर भी बात की। उन्होंने कहा कि जीसस चाहते हैं कि ईसाई दीवारों के बजाय पुल बनाने वाले लोग बनें और उन्होंने दिवंगत पोप फ्रांसिस की ट्रंप की सबसे कड़ी आलोचनाओं में से एक का जिक्र किया।
लियो ने युवाओं से कहा कि कृपया ध्यान रखें कि आस्था, चर्च के बारे में बात करने के लिए पॉलिटिकल कैटेगरी का इस्तेमाल करें। उन्होंने आगे कहा कि चर्च किसी पॉलिटिकल पार्टी से जुड़ा नहीं है। बल्कि, वह आपकी अंतरात्मा को बनाने में मदद करता है ताकि आप समझदारी और प्यार से सोच सकें और काम कर सकें।
पीस प्लान पर ट्रंप का अल्टीमेटम — जेलेंस्की मुश्किल मोड़ पर
22 Nov, 2025 01:22 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रूस-यूक्रेन के बीच लगभग लंबे समय से युद्ध चल रहा है. इस बीच अब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कथित तौर पर 28-प्वाइंट का पीस प्लान तैयार किया है. अब इस पीस प्लान को लेकर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्दोमीर जेलेंस्की ने शुक्रवार को अपने देश को संबोधित करते हुए कहा कि यूक्रेन को एक अहम फैसला करना पड़ सकता है.
जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन को या तो अपनी संप्रभुता के अधिकारों के लिए खड़ा होना होगा या फिर उसको अमेरिका का समर्थन बनाए रखना होगा जो उसको चाहिए. यह संबोधन ऐसे समय में आया जब दुनिया के नेता अमेरिका की एक शांति प्रस्तावना पर चर्चा कर रहे हैं, जिसे रूस के पक्ष में माना जा रहा है.
रूस ने किया प्लान का स्वागत
इस बीच, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने सावधानीपूर्वक यूएस के इस प्रस्ताव का स्वागत किया. इसमें कई लंबे समय से रूस की मांगें शामिल हैं, जबकि यूक्रेन के लिए सुरक्षा की सीमित गारंटियां दी गई हैं. पुतिन ने कहा कि यह अंतिम शांति समझौते का आधार बन सकता है, और आरोप लगाया कि यूक्रेन इस योजना का विरोध कर रहा है और असंभव अपेक्षाएं रखता है.
इस योजना के तहत यूक्रेन को कुछ क्षेत्र रूस को सौंपने होंगे — जिसे कीव बार-बार अस्वीकार कर चुका है — साथ ही अपनी सेना का आकार कम करना होगा और NATO सदस्यता के अपने महत्वाकांक्षी रास्ते को रोकना होगा.
रूस की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक में बोलते हुए पुतिन ने इस योजना को एक नया संस्करण और आधुनिक योजना कहा, जो अगस्त में ट्रंप के साथ अलास्का शिखर सम्मेलन से पहले अमेरिका के साथ चर्चा की गई थी. उन्होंने कहा कि मास्को को यह योजना हासिल हो चुकी है. मुझे विश्वास है कि यह भी अंतिम शांति समझौते का आधार बन सकती है, उन्होंने कहा.
लेकिन, पुतिन ने कहा कि इस प्रस्ताव का टेकस्ट (TEXT) हमारे साथ किसी ठोस तरीके से चर्चा नहीं किया गया है और मैं अंदाजा लगा सकता हूं क्यों. उन्होंने आगे कहा कि अब तक वॉशिंगटन यूक्रेन की सहमति प्राप्त करने में असफल रहा है. पुतिन ने कहा, यूक्रेन इसके खिलाफ है. जाहिर है, यूक्रेन और उसके यूरोपीय सहयोगी अभी भी भ्रम में हैं और युद्धभूमि पर रूस को रणनीतिक रूप से हराने का सपना देख रहे हैं.
जेलेंस्की ने क्या-क्या कहा?
जेलेंस्की ने अपने संबोधन में योजना को पूरी तरह खारिज नहीं किया, लेकिन न्यायपूर्ण व्यवहार की मांग की और कहा कि वो शांतिपूर्ण तरीके से वॉशिंगटन और अन्य साझेदारों के साथ काम करेंगे. उन्होंने इसे हमारे इतिहास के सबसे मुश्किल पलों में से एक बताया.
जेलेंस्की ने कहा कि उन्होंने शुक्रवार को लगभग एक घंटे तक अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस और सेना सचिव डैन ड्रिस्कॉल से शांति प्रस्ताव पर चर्चा की.
वर्तमान में, यूक्रेन पर दबाव सबसे ज्यादा है, जेलेंस्की ने अपने रिकॉर्ड किए गए भाषण में कहा. यूक्रेन को अब एक बहुत ही कठिन निर्णय का सामना करना पड़ सकता है. या तो अपनी गरिमा खोना या एक प्रमुख साझेदार खोने का जोखिम उठाना.
ट्रंप ने दिया अल्टीमेटम
ट्रंप ने कहा कि जेलेंस्की को अमेरिकी प्रस्ताव को स्वीकार करना होगा और अगर वो ऐसा नहीं करते हैं, तो तो शायद उन्हें बस लड़ते रहना चाहिए. ट्रंप ने शुक्रवार को एक रेडियो इंटरव्यू में कहा कि वो जेलेंस्की से अपने 28-बिंदु योजना पर जवाब चाहते हैं, जिसकी समय सीमा गुरुवार है, लेकिन शर्तों को अंतिम रूप देने के लिए समय बढ़ाया जा सकता है.
यूरोपीय देशों ने किया समर्थन
जेलेंस्की ने पहले जर्मनी, फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम के नेताओं के साथ फोन पर बात की, जिन्होंने उन्हें यूक्रेन के लिए अपनी निरंतर समर्थन की गारंटी दी. कीर स्टारमर ने कहा कि यूक्रेन का अपना भविष्य अपनी संप्रभुता के तहत तय करने का अधिकार एक मौलिक सिद्धांत है.
यूक्रेनी अधिकारियों ने कहा कि वो अमेरिकी प्रस्तावों पर विचार कर रहे हैं और जेलेंस्की ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में वो ट्रंप से इस पर चर्चा करेंगे.
बांग्लादेश में 5.7 तीव्रता का भूकंप, 10 की मौत और 100 घायल
22 Nov, 2025 12:41 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका और देश के कई हिस्सों में शुक्रवार को 5.7 तीव्रता के भीषण भूकंप में कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई और सौ से ज़्यादा घायल हो गए. इस भूकंप से कई इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं, कई जगहों पर आग लग गई और निवासियों में दहशत फैल गई. अधिकारियों ने बताया कि चार पीड़ितों की मौत राजधानी ढाका में, पांच की मौत भूकंप के केंद्र नरसिंगडी में और एक की मौत उपनगरीय नदी बंदरगाह शहर नारायणगंज में हुई.
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, राजधानी गाजीपुर के बाहरी इलाके में स्थित औद्योगिक शहर में ही, भूकंप के दौरान इमारतों से बाहर निकलने की कोशिश में विभिन्न इकाइयों में कम से कम 100 कर्मचारी घायल हो गए.
नरसिंगडी में भूकंप का केंद्र
मौसम विभाग ने बताया कि सुबह 10:38 बजे (स्थानीय समयानुसार) आए भूकंप का केंद्र नरसिंगडी में सतह से लगभग 10 किलोमीटर नीचे स्थित था, जो ढाका के अगरगांव क्षेत्र में भूकंपीय केंद्र से लगभग 13 किलोमीटर पूर्व में है. ढाका के पुलिस उपायुक्त मलिक अहसान उद्दीन सामी ने अग्निशमन सेवा के हवाले से बताया कि पुराने ढाका के अरमानीटोला इलाके में एक पांच मंजिला इमारत की रेलिंग, बाँस की मचान और मलबा गिरने से कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई.
भूकंप ने ली कई लोगों की जान
सामी ने पुष्टि की कि मृतकों में से एक मेडिकल छात्र था, जो अपनी मां के साथ मांस खरीदने गया था. उन्होंने बताया कि वह गंभीर रूप से घायल है और उसे आपातकालीन सर्जरी की आवश्यकता है. मृतकों में एक आठ साल का लड़का भी शामिल है, जबकि मीडिया ने परिवार के सदस्यों के हवाले से बताया कि उसके घायल पिता को भी ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डॉक्टरों ने बाद में मृत घोषित कर दिया.
रिपोर्टों के अनुसार, ढाका में मृतकों में एक 50 वर्षीय निजी सुरक्षा गार्ड भी शामिल है, जो भूकंप के दौरान एक इमारत की दीवार का एक हिस्सा गिरने से मारा गया. नरसिंगडी जिला प्रशासन ने एक बयान में कहा कि पांच लोग मारे गए और एक लड़के और उसके पिता सहित कम से कम चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए.
कई इमारतें झुकीं
उपनगरीय नारायणगंज में एक दीवार गिरने से एक बच्चे की मौत हो गई तथा उसकी मां गंभीर रूप से घायल हो गई. पुराने ढाका में स्थित सूत्रपुर के स्वामीबाग इलाके में भी भूकंप के बाद एक आठ मंजिला इमारत के दूसरी इमारत से टकराने की खबर है, जबकि कलाबागान इलाके में एक सात मंजिला इमारत झुकी हुई दिख रही थी, हालांकि अग्निशमन अधिकारियों ने बताया कि इमारत की संरचना मज़बूत बनी हुई है.
भूकंप के तुरंत बाद ढाका के पॉश बारीधारा इलाके में एक घर में आग लग गई, लेकिन अग्निशमन कर्मी तुरंत इस बात की पुष्टि नहीं कर पाए कि यह भूकंप से जुड़ी थी या नहीं. उपनगरीय मुंशीगंज के गजारिया इलाके से एक आवासीय इमारत में आग लगने की खबर मिली, जहां अग्निशमन विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आग बुझाई.
कुछ इमारतों में आईं हल्की दरारें
राजधानी और उसके आसपास के इलाकों, जिनमें नरसिंगडी भी शामिल है, से कुछ इमारतों में हल्की दरारें आने की खबरें भी मिली हैं. रिपोर्टों से पता चला है कि भूकंप से उपनगरीय मुंशीगंज, उत्तर-पश्चिमी राजशाही और दक्षिण-पूर्वी चटगाँव में भी इमारतों को नुकसान पहुंचा और आग लग गई. विशेषज्ञ लंबे समय से कहते रहे हैं कि सक्रिय टेक्टोनिक प्लेटों की सीमाओं पर स्थित होने के कारण बांग्लादेश में बड़े भूकंपों का खतरा ज़्यादा है. कई विशेषज्ञों का कहना है कि एक बड़ा भूकंप आना निश्चित है, हालाँकि इसमें दशकों लग सकते हैं.
ढाका के नजदीक इतनी तीव्रता का भूकंप
मौसम विज्ञान विभाग के अधिकारियों ने कहा कि ढाका के इतने नजदीक इतनी तीव्रता का भूकंप पहले कभी नहीं आया और आशंका जताई कि अगर यह सिर्फ़ 5-7 सेकंड और जारी रहता, तो हताहतों और इमारतों के ढहने की संख्या कई गुना बढ़ सकती थी. बांग्लादेश इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (बीयूईटी) के भूकंप विशेषज्ञ प्रोफ़ेसर मेहेदी अहमद अंसारी ने कहा कि 6 तीव्रता का भूकंप देश की ज़्यादातर इमारतों को ध्वस्त कर सकता है. अंसारी ने कहा कि शुक्रवार को आया यह भूकंप बांग्लादेश के लिए खतरे की घंटी है.
यूएन महासचिव की अपील— ‘G20 अपनी ताकत मानवता के लिए इस्तेमाल करे’
22 Nov, 2025 11:33 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा है कि जी20 देशों में दुनिया की मुश्किलों को कम करने और दुनिया को ज्यादा शांतिपूर्ण रास्ते पर लाने की क्षमता है। उन्होंने जी20 देशों के समूह से अपनी ताकत का इस्तेमाल गरीब और विकासशील देशों की परेशानियों को कम करने में इस्तेमाल करने की अपील की। गुटेरेस ने यह बात शुक्रवार को जोहान्सबर्ग पहुंचने के बाद एक मीडिया बातचीत में कही। गुटेरेस जोहान्सबर्ग में हो रहे जी20 सम्मेलन में शिरकत करेंगे।
'बढ़ता सैन्य खर्च विकास संसाधनों को खींच रहा'
गुटेरेस ने कहा, 'अगले दो दिनों में जी20 नेताओं के लिए मेरा संदेश आसान है। अब लीडरशिप और विजन का समय है। उन्होंने दुनिया भर में जारी संघर्षों, जलवायु की गड़बड़ी, आर्थिक अनिश्चितता, असमानता और वैश्विक मदद में कमी का जिक्र किया। उन्होंने आगे कहा कि बढ़ता सैन्य खर्च विकास संसाधनों को खींच रहा है। उन्होंने कहा, 'दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के नाते, G20 देश मुश्किलों को कम करने, यह पक्का करने में बहुत बड़ा असर डाल सकते हैं कि आर्थिक विकास सबका हो। जो हमारी दुनिया को भविष्य के लिए एक बेहतर, ज़्यादा शांतिपूर्ण रास्ते पर ले जा सके।'
'अफ्रीका को हर वैश्विक मंच पर जगह मिलनी चाहिए, जहां फैसले लिए जाते हैं'
गुटेरेस ने कहा कि 'अफ्रीका को हर उस फोरम में सही जगह मिलनी चाहिए जहां फैसले लिए जाते हैं, जिनमें अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के बोर्ड से लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट और दूसरी वैश्विक निकायों तक भी पहुंच होनी चाहिए।' गुटेरेस ने सुझाव दिया, 'G20 इस ऐतिहासिक अन्याय को ठीक करने और ऐसे सुधार लाने में मदद कर सकता है जो विकासशील देशों और खासकर अफ्रीका को वैश्विक नीति बनाने में आवाज़ दें, और आने वाले वर्षों में वैश्विक आर्थिक प्रशासन को ज्यादा समावेशी, समान और असरदार बनाएं।' गुटेरेस ने कहा कि वह जी20 सदस्यों से ये भी कहेंगे कि वे सूडान, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, माली, यूक्रेन, गाजा, हैती, यमन और म्यांमार समेत दुनिया भर में मौत, तबाही और अस्थिरता पैदा करने वाले झगड़ों को खत्म करने के लिए अपने असर और आवाज का इस्तेमाल करें।
सऊदी को मिला F-35 जेट और रणनीतिक सुरक्षा पैकेज, दुनिया की नजर सौदे पर
22 Nov, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के बीच हाल ही में मुलाकात हुई. इससे पहले साल 2018 में क्राउन प्रिंस ने अमेरिका का दौरा किया था. साथ ही तीन साल पहले तक अमेरिका खुले तौर पर सऊदी अरब के साथ अपने रिश्तों पर पुनर्विचार कर रहा था. राष्ट्रपति जो बाइडन ने मोहम्मद बिन सलमान को वैश्विक स्तर पर अलग-थलग करने की बात कही थी.
इस हफ्ते, सऊदी क्राउन प्रिंस और क्राउन प्रिंस जब ओवल ऑफिस पहुंचे, तो माहौल बिल्कुल बदल चुका था — राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उनका इतना जोरदार बचाव किया कि जब एक पत्रकार ने वॉशिंगटन पोस्ट के पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या पर सवाल पूछा, तो ट्रंप ने पत्रकार को ही डांटते हुए कहा कि वो हमारे मेहमान को शर्मिंदा कर रही हैं.
सऊदी को क्या-क्या हुआ हासिल
ओवल ऑफिस की इन घटनाओं से हटकर, प्रशासन की ओर से किए गए ऐलान बताते हैं कि मोहम्मद बिन सलमान की वॉशिंगटन में छवि कितनी जल्दी सुधर गई है. यह इस बात को भी उजागर करता है कि ट्रंप किस तरह खशोगी मामले को पीछे छोड़कर उस देश से रिश्ते मजबूत करना चाहते हैं, जिसने अमेरिका में लगभग एक ट्रिलियन डॉलर के निवेश का वादा किया है और जिसका व्यावसायिक संबंध ट्रंप के परिवार से भी जुड़ा है.
अमेरिका लंबे समय से इस बात पर जोर दे रहा है कि सऊदी अरब और इजराइल के बीच रिश्ते सामान्य हो जाए. लेकिन सऊदी की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि उन्होंने ट्रंप को राजी कर लिया कि वो, वो एक शर्त छोड़ दें जिस पर वॉशिंगटन लंबे समय से सऊदी अरब के साथ बड़े रक्षा और व्यापार समझौते अंतिम रूप देने से पहले जोर दे रहा था: इजराइल के साथ पूर्ण सामान्यीकरण.
इजराइल के साथ सामान्यीकरण की शर्त नहीं मानी
यह बदलाव पिछले साल से पूरी तरह उलट है, जब बाइडन प्रशासन ने कहा था कि कोई भी व्यापक अमेरिकी-सऊदी समझौता तभी आगे बढ़ सकता है जब इसके तीन हिस्से द्विपक्षीय रक्षा और व्यापार समझौते, सऊदी अरब का इजराइल के साथ सामान्यीकरण और इजराइल का फिलिस्तीनी राज्य के लिए रास्ता सुनिश्चित करना सभी एक साथ आगे बढ़ें. लेकिन, इजराइल ने फिलिस्तीनी राज्य की संभावना को खारिज कर दिया और सऊदी अरब ने अपनी स्थिति नरम नहीं की.
अब, ट्रंप प्रशासन ने इन हिस्सों को अलग कर दिया है, जिससे सऊदी अरब को लंबे समय से चाही गई रक्षा, आर्थिक और क्षेत्रीय सुरक्षा संबंधी सुविधाएं मिल गई हैं. साथ ही उसको इजराइल के साथ संबंध सामान्य करने की शर्त को भी नहीं मानना पड़ा.
F-35 लड़ाकू विमान, रणनीतिक रक्षा समझौता
इस हफ्ते, अमेरिका ने सऊदी अरब को प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी (Major Non-NATO Ally) घोषित किया, F-35 लड़ाकू विमानों की बिक्री की योजना आगे बढ़ाई जो इजराइल के विमानों के समान होंगी और एक नया रणनीतिक रक्षा समझौता भी किया.
AI- एडवांस चिप्स की बिक्री
क्राउन प्रिंस के सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था को तेल पर निर्भरता से मुक्त करने के उनके विशेष प्रयास को ध्यान में रखते हुए, दोनों देशों ने एक AI सहयोग ढांचा शुरू किया, जिसमें सऊदी अरब को एडवांस चिप्स की बिक्री की मंजूरी शामिल है. इसके अलावा, एक अहम खनिज समझौता किया गया और परमाणु ऊर्जा में सहयोग बढ़ाने का मार्ग भी खोला गया.
ट्रंप ने मोहम्मद बिन सलमान के क्षेत्रीय अनुरोधों को भी पूरा किया, जैसे सूडान के गृह युद्ध को समाप्त करने में मदद करने पर सहमति देना. ओवल ऑफिस में क्राउन प्रिंस ने नए समझौतों को अमेरिका और सऊदी अरब दोनों के लिए लाभकारी बताया.
मोहम्मद बिन सलमान ने मंगलवार को ओवल ऑफिस में ट्रंप के बगल में बैठकर कहा, आज हमारे इतिहास में एक बहुत महत्वपूर्ण समय है.
अमेरिका में फिर गन हिंसा, क्रिसमस कार्यक्रम बना खून से लाल
22 Nov, 2025 10:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका में एक बार फिर फायरिंग की घटना सामने आई है. कॉनकॉर्ड के सालाना क्रिसमस समारोह के दौरान गोलीबारी हुई है, जिसमें 4 लोगों के घायल होने की खबर है. शुरुआती जानकारी के मुताबिक शहर के 28वें सालाना क्रिसमस ट्री लाइटिंग सेरेमनी के दौरान गोलियां चलीं हैं, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई और लोग इलाके से भाग गए.
सोशल मीडिया पर शेयर की गई वीडियो में गोलियों की आवाज सुनी जा सकती है, साथ ही भीड़ को सुरक्षित जगह पर भागते हुए दिखा जा सकता है. कॉनकॉर्ड पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए चर्च स्ट्रीट और कैबरस एवेन्यू के पास क्राइम सीन टेप से इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया है. अभी ये नहीं पता चल पाया है कि फायरिंग किसने की, लेकिन सुरक्षा एजेंसिया जांच में जुट गई हैं.
फायरिंग पर पुलिस की प्रतिक्रिया
नॉर्थ कैरोलिना के कॉनकॉर्ड में हुई घटना पर पुलिस ने जानकारी देते हुए कहा कि शुक्रवार शाम को सालाना ट्री लाइटिंग सेरेमनी के दौरान भीड़ में हुई गोलीबारी में चार लोग घायल हो गए.
कॉनकॉर्ड पुलिस मेजर पैट्रिक टियरनी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि शूटिंग शाम करीब 7:30 बजे यूनियन स्ट्रीट पर कॉर्बिन एवेन्यू के पास हुई, जो इवेंट के सेंटर से कुछ ही कदम दूर है.
दूसरे इवेंट हुए कैंसिंल
शहर के अधिकारियों ने घटना की पुष्टि करते हुए शहर में होने वाले बाकी के इवेंट कैंसिल कर दिया हैय. अभी तक, अधिकारियों ने किसी के घायल होने, संदिग्धों या मकसद के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है, लेकिन जांच जारी है. साथ ही अपील की गई है कि अगर किसी के पास कोई जानकारी है तो उनसे कॉनकॉर्ड PD से (704) 920-5027 पर संपर्क करे. हालांकिशहर की क्रिसमस परेड अभी भी शनिवार, 22 नवंबर को होनी है, जिसे अभी कैंसिल नहीं किया गया है.
नवंबर के महीने में दूसरी फायरिंग की घटना
15 नवंबर 2025 को नेवाडा के हेंडरसन में एक भयानक रोड रेज घटना हुई. जिसमें एक 11 साल के बच्चे की मौत हो गई. जैकब एडम्स स्कूल जा रहा था, जब दो ड्राइवरों के बीच बहस हो गई, एक ने गोलियां चला दीं, जिसमें लड़का मारा गया. अमेरिका में 2025 में अब तक 350+ मास शूटिंग्स की घटनाएं हो चुकी हैं, जिसमें 316 लोग मारे गए हैं.
एचटेट रिजल्ट पर विवाद: उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की संख्या बढ़ी, 1284 के अंतर ने उठाए सवाल
21 Nov, 2025 03:49 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा (एचटेट) में बॉयोमीट्रिक के बाद परिणाम में 1284 अभ्यर्थियों के अंतर का मामला बोर्ड अधिकारियों की गलफांस बन गया है। हालांकि बोर्ड के चेयरमैन ने अभ्यर्थियों को बेनिफिट आफ डाउट देने का तर्क दिया है पर सवाल उठता है कि इतने अभ्यर्थियों को कैसे दिया जा सकता है। इससे पहले आयोजित एचटेट में इस तरह का लाभ इतने विद्यार्थियों को कभी नहीं मिला।
अभ्यर्थियों के लिए ओमएमआर शीट में स्पष्ट हिदायतें होती हैं। गोला भरने से लेकर उत्तरकुंजी पर उसी हिसाब से सवालों के जवाबों को सही माना जाता है जो पहले से तय होते हैं। किसी भी तरह गलत गोला या फिर फीके रंग का होना मानक में शामिल नहीं है तो फिर उसका परीक्षार्थी को लाभ देना भी संदेह पैदा करता है।
उधर, बोर्ड अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार ने कहा कि एचटेट में पहली बार ऑडिट कराई गई है। अलग-अलग एजेंसियों द्वारा परीक्षा परिणाम की जांच की जा चुकी है। इसमें किसी तरह की गड़बड़ी की कोई संभावना नहीं है। जो अभ्यर्थी बढ़े हैं, उन्हें बोयोमिट्रिक सत्यापन के लिए बुलाया जाएगा। गौरतलब है कि परीक्षा में तीन लाख 31 हजार परीक्षार्थी शामिल हुए थे। बोयोमिट्रिक सत्यापन के लिए 46094 को बुलाया गया, लेकिन 10 नवंबर को परिणाम घोषित किया तब इनकी संख्या 47378 हो गई।
ये उठ रहे सवाल
पहले से तैयार परिणाम को संशोधित करने की नौबत क्यों आई, जबकि पूरी प्रक्रिया कैमरों की निगरानी में होती है।
जब पेपर तैयार करने, पेपर लेने और परिणाम तैयार करने का काम अलग-अलग फर्मों ने किया और 3-4 बार सत्यापन हुआ, तो नया परिणाम किस आधार पर तैयार किया गया।
सिक्योरिटी ऑडिट के नाम पर भारी राशि क्यों खर्च की गई? जब सभी फर्म बाहरी थीं, तो संदेह किस बात का था।
धांधली की आशंका, उच्चस्तरीय जांच हो: दिग्विजय
जजपा नेता दिग्विजय सिंह चौटाला ने एचटेट में धांधली का आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में कहा कि बोर्ड अध्यक्ष और सचिव ने रातोरात रिजल्ट बदल दिया। आरोप लगाया कि जिन 1,284 उम्मीदवारों के नाम बाद में जुड़े हैं, वे बोर्ड के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के रिश्तेदार हो सकते हैं।
भ्रष्टाचार में अपने ही रिकार्ड तोड़ रही सरकार : दीपेंद्र हुड्डा
रोहतक सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने परीक्षा परिणाम में आए 1,284 अभ्यर्थियों के अंतर पर कहा कि यह बड़ी अनियमितता की ओर इशारा करता है। सरकार को अभ्यर्थियों और जनता को संतोषजनक जवाब देना चाहिए।
कुशल विदेशी लोगों का अमेरिका आना जरूरी, जानें आव्रजन नीति पर क्या बोले राष्ट्रपति ट्रंप
21 Nov, 2025 11:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
न्यूयॉर्क। अमेरिकी राष्ट्रपति (us President) डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) आव्रजन (इमिग्रेशन) पर सख्त रुख के लिए जाने जाते हैं। लेकिन बुधवार को उन्होंने कहा कि कुछ विदेशी कुशल लोगों (skilled foreigners) का अमेरिका (America) में आना जरूरी है। उन्होंने माना कि उनके अपने ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ (मागा) समर्थक इस बात पर उनसे नाराज हैं। ट्रंप न्यूयॉर्क में अमेरिका-सऊदी अरब निवेश मंच में बोल रहे थे। कार्यक्रम में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान भी मौजूद थे।
ट्रंप ने व्यापार जगत के दिग्गजों से कहा कि अमेरिका को ऐसे प्रवासियों की जरूरत है, जो हाई-टेक फैक्ट्रियों में अमेरिकी कामगारों को प्रशिक्षण दे सकें। यह बात उनके राजनीतिक विचारों के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा, मैं अपने मेक अमेरिका ग्रेट अगेन के समर्थकों से प्यार करता हूं। लेकिन यह भी मेक अमेरिका ग्रेट अगेन ही है। उन्होंने कहा कि विदेशी कुशल लोग अमेरिकियों को कंप्यूटर चिप बनाना सिखाएंगे। कुछ ही समय बाद अमेरिकी लोग खुद यह काम करने लगेंगे। उसके बाद विदेशी लोग अपने देश वापस जा सकते हैं।
इस बात पर वहां मौजूद लोगों ने तालियां बजाईं। लेकिन पिछले हफ्ते ट्रंप की फॉक्स न्यूज की एंकर लॉरा इनग्राहम से इसी मुद्दे पर बहस हो गई थी। लॉरा ने इंटरव्यू में कहा था कि देश को हजारों-लाखों विदेशी कामगारों से नहीं भरा जा सकता, जिस पर ट्रंप ने जवाब दिया था,आपको प्रतिभाओं (टैलेंट) को लाना ही पड़ेगा। जब लॉरा ने कहा कि हमारे पास यहां काफी प्रतिभाशाली लोग हैं, तो ट्रंप ने कहा- नहीं, आपके पास नहीं हैं। लोगों को सीखना पड़ेगा।
इस बात पर मेक अमेरिका ग्रेट अगेन के समर्थकों ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी, जो अक्सर एच-1बी वीजा बढ़ाने जैसे कदमों के खिलाफ रहते हैं। फिर भी ट्रंप ने बुधवार को यही बात दोहराई। उन्होंने कहा कि आलोचक बहुत समझदार और देशभक्त हैं। लेकिन वे यह बात नहीं समझते कि हमारे लोगों को प्रशिक्षण चाहिए।
ट्रंप ने कहा कि कंप्यूटर, मोबाइल और मिसाइल जैसे ‘बहुत जटिल’ कारखानों में आप बेरोजगारों की लाइन से किसी को पकड़कर काम पर नहीं लगा सकते। उन्होंने कहा कि विदेशी कंपनियां जब अमेरिका में ऐसे कारखाने लगाती हैं तो उन्हें अपने साथ हजारों कुशल लोग लाने पड़ते हैं। ट्रंप ने कहा, मैं ऐसे लोगों का स्वागत करूंगा।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सितंबर में जॉर्जिया के हुंडई इलेक्ट्रिक कार प्लांट पर छापे में सैकड़ों दक्षिण कोरियाई लोग पकड़े गए थे और उन्हें बाहर जाना पड़ा था। कुछ अब वापस आकर वही काम कर रहे हैं। ट्रंप ने कहा, उन्हें बाहर निकालने का आदेश दिया गया था। लेकिन मैंने कहा- रुकिये, बेवकूफी मत कीजिए।
पश्चिम के दबाव के बावजूद हम भारत को… रूस ने अमेरिका को ठेंगा दिखाकर कह दी बड़ी बात
21 Nov, 2025 10:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: रूस और भारत (Russia and India) के संबंधों को फिलहाल काफी दबाव का सामना करना पड़ रहा है. पश्चिमी देश चाहते हैं कि भारत, रूस से तेल खरीदना बंद कर दें. भारत, रूस से लगातार तेल खरीद रहा है, जिससे खफा डोनाल्ड ट्रंप पहले ही भारत पर टैरिफ लगा चुके हैं. लेकिन इन सबके बावजूद भारत में रूस के राजदूत ने बड़ा बयान दिया है.
भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलिपोव ने TASS को दिए इंटरव्यू में कहा कि रूस पश्चिम की सारी रुकावटों के बावजूद भारत को तेल का सबसे बड़ा सप्लायर बना हुआ है. हम भारत को ऊर्जा संसाधनों की खरीद के लिए अच्छी-अच्छी डील देते रहने को तैयार हैं.
रूस के राजदूत ने रोसनेफ्ट और लुकोइल जैसी रूसी तेल कंपनियों पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि रोसनेफ्ट और लुकोइल पर अमेरिकी प्रतिबंध निश्चित रूप से तेल की सप्लाई को प्रभावित कर सकते हैं. लेकिन फिर भी हमारे लिए हमेशा प्राथमिकता है. हम मानते हैं कि रूस, भारत का प्रमुख तेल सप्लायर्स में से एक का दर्जा बनाए रखेगा.
अलिपोव ने रूस-भारत संबंधों पर पश्चिमी दबाव को खारिज करते हुए कहा कि भारत ने रूस और भारतीय संबंधों को कमजोर करने और प्रमुख वैश्विक मुद्दों पर अपनी स्थिति थोपने के पश्चिमी प्रयासों का मजबूती से मुकाबला किया है. उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को दरकिनार कर लगाए गए एकतरफा अवैध प्रतिबंधों को मान्यता नहीं देता. वे स्पष्ट रूप से समझते हैं कि ऐसी प्रतिबंध पश्चिमी व्यापार और वित्तीय प्रणालियों में विश्वास को कमजोर करते हैं, जिससे स्वतंत्र अभिनेता वैकल्पिक तंत्रों की तलाश करने को प्रेरित होते हैं. हम ब्रिक्स और एससीओ जैसे गठबंधनों की क्षमता का पूर्ण उपयोग करने में आशाजनक अवसर देखते हैं.
इस इंटरव्यू में अलिपोव ने कहा कि प्रतिबंधों के बावजूद रूस और भारत के बीच सहयोग के नए क्षेत्रों को खोला है. अमेरिकी टैरिफ दबाव के कारण रूस का बाजार भारतीय समुद्री भोजन और अन्य वस्तुओं के लिए समाधान बन सकता है. संयुक्त उर्वरक उत्पादन के लिए अच्छे अवसर हैं.
भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलिपोव ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगामी शिखर सम्मेलन को लेकर उत्साह जताया है. उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन दोनों देशों के बीच सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा, खासकर ऊर्जा, व्यापार और वैश्विक चुनौतियों के संदर्भ में. उन्होंने कहा कि पुतिन-मोदी शिखर सम्मेलन के लिए महत्वाकांक्षी योजनाएं चल रही हैं.
फर्जी खिलाड़ियों ने छीना असली खिलाड़ियों का हक, अब होगी कानूनी कार्रवाई
21 Nov, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सरकारी भर्तियों में खेल कोटे के नाम पर फर्जीवाड़ा अब बड़े स्तर पर सामने आया है। राज्य सरकार को भेजी गई जांच रिपोर्ट में खेल विभाग ने कई खिलाड़ियों के प्रमाणपत्रों को संदिग्ध, अमान्य और यहां तक कि फर्जी घोषित किया है।
रिपोर्ट में कई ऐसे सर्टिफिकेट भी पाए गए हैं, जो न तो किसी मान्यता प्राप्त राज्य संघ की ओर से जारी किए गए हैं और न ही राष्ट्रीय महासंघ या इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन से संबद्ध हैं। एसोसिएशन ने बिना मान्यता के ही खेल के प्रमाणपत्र खिलाड़ियों को जारी कर दिए। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, खिलाड़ियों के सर्टिफिकेट की सूची बनाकर संबंधित फेडरेशनों से सत्यापन कराया गया। जांच में बड़ी संख्या ऐसे प्रमाणपत्र निकले, जो संबंधित एसोसिएशन से संबद्ध नहीं है। उन पर सर्टिफिकेट फर्जी और मान्य नहीं है जैसी टिप्पणियां दर्ज की गईं हैं।
जांच रिपोर्ट में दर्शाया गया है कि ताइक्वांडो, एथलेटिक्स, वॉलीबाल, थ्रोबाल और सर्कल कबड्डी के प्रमाणपत्रों में बड़े स्तर पर अनियमितताएं मिलीं। ताइक्वांडो में कई खिलाड़ियों के सर्टिफिकेट मान्य नहीं पाए गए। कोई भी दस्तावेज मान्यता प्राप्त राज्य संघ से जारी नहीं हुआ था, जबकि कुछ में राष्ट्रीय फेडरेशन की मान्यता ही नहीं थी। एथलेटिक्स में कई प्रमाणपत्र सीधे फर्जी घोषित हुए।
संबंधित संघ ने स्पष्ट लिखा कि ऐसे किसी खिलाड़ी का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। वॉलीबाल व थ्रोबाल में भी कई सर्टिफिकेट ऐसे निकले जिन पर दर्ज उपलब्धियां असत्य साबित हुईं। कबड्डी में कई खिलाड़ियों के प्रमाणपत्र न मान्यता प्राप्त संघ से जारी पाए गए और न ही इवेंट के वर्ष में फेडरेशन की कोई अधिकृत प्रतियोगिता हुई थी।
भर्तियों पर भी पड़ा असर
रिपोर्ट से पता चलता है कि पिछले कुछ वर्षों में खेल कोटे के नाम पर बड़े पैमाने पर फर्जी सर्टिफिकेट बनाकर नौकरियों में फायदा उठाने की कोशिश हुई। इससे न केवल वास्तविक खिलाड़ियों का हक मारा गया, बल्कि भर्तियों की पारदर्शिता पर भी सवाल उठे। कई सर्टिफिकेट तो 2012, 2014, 2016 और 2018 की प्रतियोगिताओं के बताए जा रहे थे, लेकिन संबंधित संघों ने ऐसे आयोजनों के होने से ही इन्कार कर दिया। वहीं कुछ खिलाड़ियों को असली और नकली दोनों तरह के दस्तावेज लेकर आते पाया गया। जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि कई प्रमाणपत्र जूनियर कैटेगरी के थे, जबकि उम्मीदवार ने उन्हें सीनियर कैटेगरी के रूप में नौकरी में लगाया जो नियमों के खिलाफ है।
प्रदेश सरकार ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश
खेल विभाग की इस रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने सभी जिलों को निर्देश भेजे हैं कि भविष्य में किसी भी भर्ती में खेल प्रमाणपत्रों का 100 प्रतिशत सत्यापन अनिवार्य किया जाए। साथ ही फर्जी प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल करने वाले खिलाड़ियों पर केस दर्ज करने की भी सिफारिश की गई है।
सबसे ज्यादा हिसार, जींद व फतेहाबाद के खिलाड़ी शामिल
जारी सूची में हिसार के 36 खिलाड़ी, जींद के 31, फतेहाबाद के 20, चरखी दादरी के 8, सोनीपत के 6, कैथल के 6, महेंद्रगढ़ के 9, रोहतक के 3, करनाल के 4, पानीपत के 13, कुरुक्षेत्र व भिवानी के 2, रेवाड़ी, सिरसा व झज्जर के एक-एक खिलाड़ी शामिल हैं।
अधिकारी के अनुसार
मुख्यालय की ओर से जिले के करीब 20 खिलाड़ियों के प्रमाणपत्र रद्द करने के बारे में पत्र जारी हुआ है। जिन खिलाड़ियों को जिस एसोसिएशन ने प्रमाणपत्र दिए है, उस समय उस एसोसिएशन को मान्यता नहीं थी। जिस कारण पूरे प्रदेश में मुख्यालय की ओर से करीब 143 प्रमाण पत्रों को रद्द करने के लिए बोला गया है।
नेपाल में फिर से जेन-Z युवाओं का प्रदर्शन, कर्फ्यू लगाया गया
21 Nov, 2025 09:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: 2 महीने पहले हुए जेन-Z प्रदर्शन के बाद नेपाल में फिर युवाओं का गुस्सा फूटा है. बारा जिले के सिमरा इलाके में हालात एक बार फिर बिगड़ गए. बुधवार को Gen-Z युवाओं और CPN-UML पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई थी. इसी तनाव के बाद गुरुवार को Gen-Z युवा फिर से सड़क पर उतर आए. हालात तो नियंत्रित करने के लिए जिला प्रशासन ने दोपहर 12:45 बजे से रात 8 बजे तक कर्फ्यू लगाने का आदेश दे दिया है. CPN-UML नेपाल के पूर्व PM केपी शर्मा ओली की पार्टी है.
गुरुवार को सुबह 11 बजे कई युवा सिमरा चौक पर इकट्ठा हुए. भीड़ बढ़ने पर पुलिस ने उन्हें हटाने के लिए बल का इस्तेमाल किया. आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए. इसके बाद स्थिति और न बिगड़े इसलिए कर्फ्यू लगा दिया गया. Gen-Z युवाओं का कहना था कि पुलिस ने बुधवार को हुई झड़प में जिन UML कार्यकर्ताओं के खिलाफ उनकी शिकायत दर्ज हुई थी, उन सभी को गिरफ्तार नहीं किया.
इसी आरोप के बाद पुलिस ने दो लोगों को पकड़ा है. इनमें जीतपुरसिमरा उपमहानगर के वार्ड 2 के अध्यक्ष धन बहादुर श्रेष्ठ और वार्ड 6 के अध्यक्ष कैमुद्दीन अंसारी शामिल हैं. बुधवार की झड़प में Gen-Z के 6 समर्थक घायल हुए थे. इसी घटना के बाद Gen-Z समूह ने UML के 6 कार्यकर्ताओं के खिलाफ शिकायत दी थी.
Gen-Z के जिला संयोजक सम्राट उपाध्याय ने कहा कि कुछ आरोपियों को न पकड़े जाने के कारण वे फिर से विरोध करने उतरे. बुधवार को तनाव इतना बढ़ गया कि पुलिस को आंसू गैस के गोले भी छोड़ने पड़े. इससे सिमरा एयरपोर्ट को अपनी उड़ानें रोकनी पड़ीं. बारा जिले के प्रमुख चौराहों और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है. प्रशासन हालात पर लगातार नजर रख रहा है, क्योंकि जिले में राजनीतिक तनाव और बीच-बीच में होने वाली झड़पें बढ़ती जा रही हैं.
जेन-Z युवाओं और UML कार्यकर्ताओं के बीच झड़प की शुरुआत बुधवार को हुई, जब UML पार्टी अपना यूथ अवेकनिंग कैंपेन करने की तैयारी में थी. UML के महासचिव शंकर पोखरेल और पोलितब्यूरो सदस्य महेश बस्नेत बुधवार सुबह 10:30 बजे काठमांडू से सिमरा आने वाले थे और यहां उनको सरकार विरोधी रैली में संबोधन देना था. लेकिन जैसे ही जेन-Z युवाओं को खबर मिली, उन्होंने सेमरा एयरपोर्ट का घेराव किया. इसके बाद UML कार्यकर्ताओं से उनकी झड़प हो गई.
यूरोप में बहुत तेजी से घट रही आबादी, 2100 तक कोलैप्स कर जाएगी जनसंख्या
21 Nov, 2025 08:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली. यूरोप (Europe) अब ‘बूढ़ा’ (‘old man’) हो रहा है. इटली, पोलैंड और स्पेन जैसे देशों में लोग इतनी तेजी से कम हो रहे हैं कि साल 2100 से पहले ही पूरी आबादी (population) आधी रह जाएगी. यह कोई दूर की बात नहीं है – अभी से गांव खाली हो रहे हैं. घर बिक नहीं रहे और युवा दूसरे देशों में नौकरी ढूंढने भाग रहे हैं. जन्म दर बहुत कम हो गई है.
बुजुर्ग ज्यादा हैं और माइग्रेशन से भी मदद नहीं मिल रही. अगर पेंशन देने के पैसे खत्म हो गए तो अर्थव्यवस्था बर्बाद हो सकती है. स्पेन में तो 2024 में जन्म का आंकड़ा सबसे कम हो गया – सिर्फ 3 लाख 18 हजार 5 बच्चे पैदा हुए, जो 1941 से अब तक का सबसे निचला स्तर है.
स्पेन में 2024 का जन्म आंकड़ा चौंकाने वाला है…
कुल बच्चे: 3,18,005 – सबसे कम का रिकॉर्ड.
देशी स्पेनियों के बच्चे बहुत कम हो गए, जबकि हर 3 में से 1 बच्चा विदेशी मां से पैदा हुआ.
प्राकृतिक रूप से आबादी घटी: 1.16 लाख से ज्यादा लोग कम हुए (जन्म से ज्यादा मौतें).
पिछले 10 साल में देशी जन्म दर 25.6% गिर गई.
मां बनने की औसत उम्र: 33.2 साल.
हर औरत औसतन सिर्फ 1.10 बच्चे पैदा कर रही है, जबकि आबादी स्थिर रखने के लिए कम से कम 2.1 बच्चे जरूरी हैं.
स्पेन में कोई ठोस नीति नहीं है जो जन्म दर बढ़ाए. सरकार ने कुछ मदद दी है जैसे बच्चे पैदा करने पर छुट्टी या पैसे, लेकिन यह काफी नहीं है. नतीजा यह है कि स्पेन बूढ़ा हो रहा है. गांव खाली हैं. अर्थव्यवस्था पर बोझ बढ़ रहा है.
पूरे यूरोप में यह समस्या क्यों फैल रही है?
इटली में भी जन्म दर 1.2 है. पोलैंड में 1.3 – सभी जगह एक जैसी हालत. दक्षिणी और पूर्वी यूरोप में शहरों से लोग भाग रहे हैं. युवा जर्मनी या अमेरिका जैसे देशों में जा रहे हैं जहां नौकरियां बेहतर हैं. अब वैज्ञानिक कारण समझते हैं कि जन्म दर क्यों इतनी कम हो गई है. यह कोई नई बात नहीं है, बल्कि जनसांख्यिकीय संक्रमण (Demographic Transition) नाम की वैज्ञानिक प्रक्रिया का नतीजा है.
आर्थिक दबाव (Economic Pressure): यूरोप में जीवन बहुत महंगा है. घर खरीदना, बच्चे पालना, स्कूल की फीस – सब कुछ बहुत खर्चीला. महिलाएं अब पढ़ाई और नौकरी पर ध्यान देती हैं, इसलिए शादी और बच्चे देर से होते हैं. वैज्ञानिक अध्ययन बताते हैं कि जब GDP (देश की कमाई) बढ़ती है, तो लोग छोटा परिवार पसंद करते हैं क्योंकि बच्चे महंगे हो जाते हैं. स्पेन में बेरोजगारी ज्यादा है, इसलिए युवा बच्चे पैदा करने से डरते हैं.
सामाजिक बदलाव (Social Changes): महिलाएं अब पुरुषों की तरह काम कर रही हैं. शिक्षा और करियर पहले आता है. औसतन शादी 30 साल की उम्र के बाद होती है. विज्ञान कहता है कि महिलाओं की उम्र बढ़ने से प्रजनन क्षमता (Fertility) कम होती है. 35 साल बाद गर्भधारण मुश्किल हो जाता है क्योंकि अंडों की गुणवत्ता घटती है. यूरोप में तलाक ज्यादा हैं. सिंगल पैरेंट्स बढ़ रहे हैं, जो बच्चे पैदा करने को और मुश्किल बनाता है.
बुजुर्ग आबादी (Aging Population): पहले जन्म दर ज्यादा थी, इसलिए अब बुजुर्ग ज्यादा हैं. लेकिन युवा कम हैं जो उन्हें पेंशन दें या देखभाल करें. यह जनसांख्यिकीय पिरामिड (Population Pyramid) को उलटा कर देता है – नीचे कम युवा, ऊपर ज्यादा बुजुर्ग. वैज्ञानिकों के मुताबिक, अगर जन्म दर 2.1 से कम रहती है, तो आबादी खुद-ब-खुद घटती जाती है. यूरोप में यह 1.5 के आसपास है.
सांस्कृतिक और पर्यावरणीय कारण (Cultural and Environmental Factors): लोग अब पर्यावरण बचाने के लिए कम बच्चे चाहते हैं. जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से डर है कि ज्यादा आबादी संसाधन खत्म कर देगी. साथ ही, मोबाइल और सोशल मीडिया से जीवन व्यस्त हो गया, रिश्ते कम मजबूत हैं. अध्ययन दिखाते हैं कि यूरोप में शून्य बच्चा (Childfree) जीवनशैली रही है.
प्रवास की कमी (Lack of Migration): पहले अफ्रीका या एशिया से लोग आते थे, लेकिन अब सख्त कानून हैं. स्पेन में विदेशी मां से बच्चे बढ़ रहे हैं, लेकिन कुल मिलाकर यह कमी पूरी नहीं कर पा रहा. वैज्ञानिक कहते हैं कि बिना माइग्रेशन के आबादी घटना तय है.
क्या असर होंगे?
यह सिर्फ आंकड़ों की बात नहीं – अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा. कम युवा मतलब कम काम करने वाले, कम टैक्स और पेंशन के लिए पैसे की कमी. स्कूल बंद हो जाएंगे. अस्पतालों में स्टाफ कम होगा. इटली में पहले से गांव बिक रहे हैं क्योंकि कोई रहने वाला नहीं. पोलैंड में युवा जर्मनी भाग रहे हैं.
अगर अब नीतियां नहीं बनीं – जैसे बच्चे पैदा करने पर ज्यादा मदद, सस्ता घर, मुफ्त चाइल्डकेयर – तो उलटा करना मुश्किल होगा. विशेषज्ञ कहते हैं कि रोबोट या AI मदद कर सकते हैं, लेकिन इंसान की जगह नहीं ले सकते.
यूरोप को अब सोचना होगा कि कैसे युवा रखें और जन्म दर बढ़ाएं. स्पेन की सरकार ने कुछ कदम उठाए हैं, लेकिन वे कमजोर हैं. दुनिया के अन्य देश जैसे भारत या अफ्रीका में आबादी बढ़ रही है, लेकिन यूरोप का संकट अलग है.
चीन में युवा लडके देते है महिलाओं को 5 मिनट की झप्पा
20 Nov, 2025 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। पडोसी देश चीन में जिम जाने वाले युवा लड़के महिलाओं को 5 मिनट की झप्पी (हग) देकर इमोशनल सपोर्ट देते हैं। चीन में यह नया और अनोखा ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, जिसे ‘मैन मम’ कहा जा रहा है। यह कोई रोमांटिक डेट नहीं होती, बल्कि महिलाओं के मानसिक तनाव और काम या पढ़ाई के प्रेशर को कम करने के लिए यह सेवा दी जाती है। इस काम के बदले युवाओं को 20 से 50 युआन, यानी करीब 250 से 600 रुपये मिलते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस ट्रेंड की शुरुआत एक कॉलेज छात्रा की सोशल मीडिया पोस्ट से हुई थी। उसने लिखा कि थिसिस का स्ट्रेस इतना बढ़ गया है कि बस किसी से गले लगना चाहती हूं। इस पोस्ट को लाखों लोगों ने पढ़ा और कमेंट किया, जिससे ‘हग थैरेपी’ तेजी से वायरल हो गई।
पहले यह फ्री में दोस्तों के बीच होती थी, लेकिन अब प्रोफेशनल सेवाओं के रूप में विकसित हो गई है। लड़कियां चैट ऐप्स के माध्यम से इन लड़कों से संपर्क करती हैं और पार्क, मेट्रो स्टेशन या शॉपिंग मॉल जैसी सार्वजनिक जगहों पर मिलती हैं। इस ट्रेंड में शामिल लड़के केवल मजबूत शरीर वाले नहीं होते, बल्कि धैर्यवान और मां जैसे भाव रखने वाले होते हैं। महिलाओं को इन्हें चुनते समय लुक, बिहेवियर, बातचीत करने का अंदाज और एटीट्यूड देखा जाता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, झोउ नाम के एक मैन मम ने 34 हग्स देकर 1758 युआन कमाए। अधिकांश लड़के इसे फुल-टाइम जॉब नहीं मानते, बल्कि साइड बिजनेस के तौर पर करते हैं।
‘मैन मम’ ट्रेंड का मुख्य मकसद पैसा कमाना नहीं, बल्कि महिलाओं को मानसिक राहत देना है। महिलाएं इसमें अपने वर्क स्ट्रेस, बॉडी इमेज प्रेशर और पारिवारिक परेशानियां साझा कर पाती हैं। कुछ महिलाएं इन लड़कों को कॉफी या किताबें भी गिफ्ट करती हैं। हालांकि, इस ट्रेंड को लेकर विवाद भी है। कुछ लोग इसे फिजिकल डिजायर का बहाना बताते हैं, जबकि एक वकील ने चेताया कि कुछ लोग इसे सेक्शुअल हैरासमेंट का जुगाड़ बना सकते हैं। फिर भी, चीन के बड़े शहरों में यह ट्रेंड तेजी से पॉपुलर हो रहा है।
चीन-जापान के बीच हुई पहली मीटिंग क्या बवाल खत्म होगा, नहीं मिला जवाब
20 Nov, 2025 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। जापानी विदेश मंत्रालय के एशियाई एवं ओशिनिया ब्यूरो के महानिदेशक मासाकी कनाई ने चीनी विदेश मंत्रालय के एशियाई मामलों के महानिदेशक लियू जिनसोंग से बातचीत की। इसका का खुलासा चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने प्रेस से किया। उन्होंने कहा कि लियू ने बीजिंग में कनाई के साथ बातचीत की। इस बातचीत के दौरान, चीन ने ताइवान के मुद्दे पर जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची की गलत टिप्पणियों पर एक बार फिर जापान के समक्ष कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा, ‘ताकाइची के भ्रामक बयान अंतर्राष्ट्रीय कानून और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को नियंत्रित करने वाले बुनियादी मानदंडों का गंभीर उल्लंघन करते हैं, युद्धोत्तर अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को गंभीर रूप से कमजोर करते हैं, और एक-चीन सिद्धांत तथा चीन और जापान के बीच चार राजनीतिक दस्तावेजों की भावना का घोर उल्लंघन करते हैं।
माओ ने कहा कि ये टिप्पणियां चीन-जापान संबंधों की राजनीतिक नींव को बुनियादी तौर पर नुकसान पहुंचाती हैं, अत्यंत गंभीर प्रकृति और प्रभाव वाली हैं, जो चीनी लोगों में तीव्र आक्रोश और निंदा पैदा करती हैं। इसके साथ ही माओ ने कहा कि चीन जापान से गंभीरतापूर्वक आग्रह करता है कि वह अपने गलत बयानों को वापस ले, संबंधित मुद्दों पर परेशानी पैदा करना बंद करे, अपनी गलतियों को सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए और चीन-जापान संबंधों की राजनीतिक नींव को बनाए रखे।जापान की पिछली सरकारों ने इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से चर्चा करने से हमेशा परहेज किया है। ताइवान जापान के सबसे पश्चिमी द्वीपों से लगभग 110 किलोमीटर दूर और उन महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों के पास स्थित है जिन पर टोक्यो तेल और गैस की आपूर्ति के लिए निर्भर है। मीडिया ने वीडियो फुटेज जारी कर बताया था कि जापानी विदेश मंत्रालय के एशिया और ओशिनिया ब्यूरो के महानिदेशक मासाकी कनाई अपने समकक्ष लियू जिनसोंग से मिलने के लिए बीजिंग पहुंचे हैं। चीन-जापान के बीच विवाद तब शुरू हुआ था जब प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने 7 नवंबर को अपने सांसदों से कहा था कि ताइवान पर चीन के हमले से जापान के अस्तित्व को खतरा हो सकता है और इसका जवाब उनकी ओर से दिया जा सकता है।
चीन ने अमेरिका पर ग्रीस के साथ रिश्ते बिगाड़ने का आरोप लगाया, पिरियस पोर्ट पर अमेरिकी दखल से नाराज़गी
20 Nov, 2025 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग ।चीन ने अमेरिका पर ग्रीस के साथ उसके द्विपक्षीय संबंधों को कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। यह बयान उस समय आया जब ग्रीस में अमेरिकी राजदूत किम्बर्ली गिलफॉयल ने हाल ही में सुझाव दिया कि एथेंस को चीन द्वारा संचालित पिरियस पोर्ट को बेचने पर विचार करना चाहिए। ग्रीक चैनल एंटेना टीवी को दिए इंटरव्यू में गिलफॉयल ने कहा कि चीन की सरकारी कंपनी कोस्को की इस महत्वपूर्ण बंदरगाह पर मौजूदगी “दुर्भाग्यपूर्ण” है और ग्रीस को “बेहतर विकल्पों” पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में अमेरिकी बुनियादी ढांचे की मौजूदगी ज़रूरी है, जो चीनी प्रभाव का संतुलन साध सके। उनके अनुसार, या तो अन्य पोर्ट्स का विस्तार किया जाए या पिरियस को बिक्री के लिए रखा जाए।
अमेरिका के इन सुझावों पर चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ग्रीस स्थित चीनी दूतावास ने बयान जारी कर कहा कि अमेरिकी राजदूत के बयान “शीत युद्ध मानसिकता और वर्चस्ववादी सोच” से भरे हैं। दूतावास के प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि अमेरिका इस पोर्ट का इस्तेमाल अपने भू-राजनीतिक हित साधने के लिए करना चाहता है, जबकि “पिरियस पोर्ट हमेशा ग्रीक जनता का रहेगा और किसी भी भू-राजनीतिक संघर्ष का शिकार नहीं होना चाहिए।” चीन ने पिरियस पोर्ट को एथेंस और बीजिंग के बीच मजबूत व्यापारिक साझेदारी का प्रतीक बताया और कहा कि वे निवेश बढ़ाते रहेंगे। वर्ष 2016 में ग्रीस के आर्थिक संकट के दौरान जब बंदरगाह को बेचने का निर्णय हुआ, तब कोस्को ही एकमात्र बोलीदाता था। आज कंपनी पोर्ट में बहुमत हिस्सेदारी रखती है और यह चीन की बेल्ट एंड रोड परियोजना का एक अहम केंद्र बन चुका है। पिछले वर्ष पिरियस पोर्ट ने रिकॉर्ड राजस्व और मुनाफा दर्ज किया, जिससे ग्रीस में चीन की बढ़ती आर्थिक भूमिका और स्पष्ट हो गई है।
टीकमगढ़ बस दुर्घटना: मौके पर मची अफरा-तफरी, 15 घायल
मातृत्व और करियर का संतुलन: पत्रलेखा ने बताया प्रोड्यूसर और मां बनने के बीच का चुनौतीपूर्ण सफर।
कलेक्टर का सख्त आदेश: जनगणना ड्यूटी में लगे कर्मियों की छुट्टियों पर रोक, मुख्यालय छोड़ने पर पाबंदी।
क्या जेल जाएंगे बंग सी-ह्युक? 2019 के शेयर घोटाले में फंसी के-पॉप की सबसे बड़ी हस्ती।
उज्जैन में निंजा का आध्यात्मिक अनुभव, महाकाल दरबार में छलके आंसू
100 करोड़ी महागाथा: भारी-भरकम बजट और सितारों की फौज के साथ आ रही है ‘राजा शिवाजी’।
जर्मनी पहुंचे रक्षा मंत्री, हाईटेक डिफेंस और AI पर होगी चर्चा
पार्टी में हलचल: प्रदेश अध्यक्ष ने विजय सिन्हा से की अहम मुलाकात
