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G20 से गायब ट्रंप बोले—2026 में साउथ अफ्रीका नहीं बनेगा मेज़बान! माहौल गर्म
29 Nov, 2025 12:49 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को सफाई देते हुए बताया है कि आखिर अमेरिका ने हाल ही में साउथ अफ्रीका में हुई G20 समिट में हिस्सा क्यों नहीं लिया. साथ ही उन्होंने यह भी घोषणा की कि अगले साल जब अमेरिका G20 की अध्यक्षता करेगा, तब साउथ अफ्रीका को आमंत्रण ही नहीं भेजा जाएगा. इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है. एक लंबी पोस्ट में ट्रंप ने साउथ अफ्रीका की सरकार पर गंभीर आरोप लगाए |
उन्होंने लिखा कि अफ्रीकानर्स और डच, फ्रेंच, जर्मन मूल के बसने वालों पर मानवाधिकार उल्लंघन हो रहे हैं. ट्रंप ने दावा किया, ‘साफ शब्दों में कहूं तो वे श्वेत लोगों को मार रहे हैं और उनकी जमीन छीनने रहे हैं.’ यह वही पुराना आरोप है जिसे ट्रंप पहले भी कई बार दोहरा चुके हैं, हालांकि साउथ अफ्रीकी सरकार और व्हाइट समुदाय के कई नेताओं ने इसे पहले भी खारिज किया है |
G20 समिट में अमेरिका क्यों नहीं गया?
G20 समिट पिछले हफ्ते जोहान्सबर्ग में हुई थी, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई वैश्विक नेता मौजूद थे. अमेरिका ने पहले ही संकेत दे दिया था कि वह इस बार समिट में हिस्सा नहीं लेगा. अब ट्रंप ने कहा कि साउथ अफ्रीका जमीन पर हो रहे अत्याचारों पर चुप है, इसलिए अमेरिका ने दूरी बनाई |
दक्षिण अफ्रीका को G20 में क्यों नहीं बुलाएंगे ट्रंप?
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पोस्ट में यह भी कहा है कि वह अमेरिका में होने वाले G20 में साउथ अफ्रीका को नहीं बुलाने वाले हैं. इसका उन्होंने कारण बताते हुए कहा कि दक्षिण अफ्रीका ने औपचारिक रूप से अध्यक्षता नहीं सौंपी थी. उन्होंने पोस्ट में लिखा,’जी-20 के समापन पर, दक्षिण अफ्रीका ने हमारे अमेरिकी दूतावास के एक वरिष्ठ प्रतिनिधि को जी-20 की अध्यक्षता सौंपने से इनकार कर दिया, जो समापन समारोह में उपस्थित थे. इसलिए, मेरे निर्देश पर, दक्षिण अफ्रीका को 2026 के जी-20 का निमंत्रण नहीं मिलेगा, जिसका आयोजन अगले वर्ष फ्लोरिडा के मियामी शहर में होगा |
साउथ अफ्रीका ने क्यों नहीं सौंपी G20 की अध्यक्षता?
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति ने अमेरिका को अध्यक्षता नहीं सौंपी थी. इसका कारण भी दक्षिण अफ्रीका ने बताया था. दक्षिण अफ्रीका ने कहा था कि राष्ट्रपति किसी को भी अध्यक्षता नहीं दे सकते. ऐसा नहीं हो सकता कि अमेरिका किसी भी अधिकारी को भेजे और राष्ट्रपति उसे अध्यक्षता देंगे. अमेरिका को उनके ही लेवल का नेता भेजना चाहिए था न कि दूतावास का कोई अधिकारी. दक्षिण अफ्रीका ने कहा था कि उनके विदेश मंत्रालय का कोई अधिकारी जल्द ही दूतावास में जाकर अध्यक्षता दे देगा |
ट्रंप के फैसले पर क्या बोला दक्षिण अफ्रीका?
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने कहा कि यह फैसला निराशाजनक है. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार हमेशा अमेरिका के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश करती रही है. साउथ अफ्रीका की विदेश मंत्रालय ने भी ट्रंप के दावे को गलत बताते हुए कहा कि चूंकि अमेरिका का कोई प्रतिनिधि समिट में मौजूद नहीं था, इसलिए G20 की अध्यक्षता का प्रतीक चिह्न (गैवल) अमेरिकी दूतावास के प्रतिनिधि को बाद में उनके मंत्रालय के मुख्यालय में सौंप दिया गया था |
क्या दक्षिण अफ्रीका में श्वेत किसानों पर हमले हो रहे हैं?
ट्रंप का यह दावा नया नहीं है. वह कई बार कह चुके हैं कि साउथ अफ्रीका में व्हाइट अल्पसंख्यक ‘उत्पीड़न और हमलों’ का शिकार हैं. लेकिन इन दावों को साउथ अफ्रीकी सरकार, स्वतंत्र संस्थाओं और व्हाइट किसानों के कई प्रतिनिधियों ने भी तथ्यहीन बताया है. स्थानीय अध्ययनों में पाया गया है कि हिंसा का पैटर्न व्यापक है और यह पूरी आबादी को प्रभावित करता है, न कि किसी एक समूह को लक्ष्य बनाकर |
भारत का ‘ऑपरेशन दोस्त’ सक्रिय: IAF का विमान 12 टन राहत सामग्री के साथ कोलंबो पहुंचा
29 Nov, 2025 11:48 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत का पड़ोसी देश श्रीलंका प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहा है. यहां बारिश और बाढ़ की वजह से लोगों को काफी मुश्किलें उठानी पड़ रही हैं. पड़ोसी देश की इस मुश्किल घड़ी में मदद के लिए भारतीय वायुसेना का C-130J विमान लगभग 12 टन राहत सामग्री लेकर आज श्रीलंका के कोलंबो में उतरा. यह सामान ऑपरेशन सागर बंधु के तहत भेजा गया है. विमान में खाने-पीने का सामान, दवाइयां और जरूरी राहत सामग्री शामिल है. कोलंबो एयरपोर्ट पर भारतीय टीम ने यह मदद श्रीलंकाई अधिकारियों को सौंप दी |
अधिकारियों के मुताबिक यहां पर खराब मौसम की वजह से 12,313 परिवारों के 43,991 लोग प्रभावित हुए हैं. खराब मौसम और भूस्खलन की वजह से यहां पर 56 लोगों की मौत हो चुकी है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि ऑपरेशन सागर बंधु शुरू हो गया है. INS विक्रांत और INS उदयगिरी ने कोलंबो में राहत सामग्री सौंपी. आगे की कार्रवाई चल रही है | विदेश मंत्री ने कहा कि इंडियन एयर फ़ोर्स का C-130 J प्लेन लगभग 12 टन मानवीय मदद लेकर कोलंबो पहुंचा. इसमें टेंट, तिरपाल, कंबल, हाइजीन किट और खाने के लिए तैयार खाने की चीज़ें शामिल हैं |
क्या है ऑपरेशन सागर बंधु?
ऑपरेशन सागर बंधु इंडियन नेवी का एक मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) मिशन है. इसे प्राकृतिक आपदाओं या इमरजेंसी के दौरान पड़ोसी देशों की मदद के लिए शुरू किया गया है. सागर शब्द भारत के समुद्री विज़न सिक्योरिटी एंड ग्रोथ फॉर ऑल इन द रीजन से मेल खाता है, और वहीं बंधु का मतलब दोस्त है, जो हिंद महासागर क्षेत्र में एक सपोर्टिव पार्टनर के तौर पर भारत की भूमिका को दिखाता है |इस ऑपरेशन के तहत, भारत साइक्लोन, बाढ़ या दूसरे संकटों से प्रभावित देशों में नेवी के जहाज, एयरक्राफ्ट, मेडिकल टीम और राहत सप्लाई भेजता है, जिसमें खाना, दवाइयां, बचाव में मदद और लॉजिस्टिक्स जैसी तुरंत मदद देता है |
भड़के राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा 2026 के जी20 सम्मेलन में दक्षिण अफ्रीका को शामिल नहीं होने देंगे
28 Nov, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दक्षिण अफ्रीका पर तीखा प्रहार करते हुए 2026 के जी20 शिखर सम्मेलन से उसे बहिष्कृत करने का ऐलान किया है। ट्रुथ सोशल पर पोस्ट के जरिए उन्होंने कहा कि फ्लोरिडा के मियामी में आयोजित होने वाले इस सम्मेलन में दक्षिण अफ्रीका को निमंत्रण नहीं भेजा जाएगा। ट्रंप का गुस्सा दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा पर केंद्रित है, जिन्हें उन्होंने श्वेत समुदाय के अधिकारों की रक्षा में नाकाम बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि दक्षिण अफ्रीका में श्वेत किसानों पर खुले आम अत्याचार हो रहे हैं, उनकी हत्याएं की जा रही हैं और जमीनें जबरन हड़पी जा रही हैं। ट्रंप ने इसे श्वेत नरसंहार करार दिया, जो अफ्रीका में डच, फ्रेंच और जर्मन सेटलर्स के वंशजों के खिलाफ मानवाधिकार हनन का उदाहरण है।
इससे पहले, दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में नवंबर 2025 में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन में अमेरिका ने बहिष्कार किया था। सम्मेलन के घोषणापत्र पर अमेरिका ने हस्ताक्षर नहीं किए और कोई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद नहीं था। परंपरा के अनुसार, अध्यक्षता सौंपने के लिए प्रतीकात्मक लकड़ी का हथौड़ा सौंपा जाता है, लेकिन दक्षिण अफ्रीका ने अमेरिकी दूतावास के कनिष्ठ अधिकारी को यह सम्मान देने से इनकार कर दिया, जिसे ट्रंप ने अपमान माना। सोमवार को अमेरिका को जी20 की अध्यक्षता मिली, लेकिन खाली कुर्सी को ही यह जिम्मेदारी सौंपी गई। ट्रंप ने इसे दक्षिण अफ्रीका की अनुचित हरकतों का सबूत बताते हुए सभी अमेरिकी भुगतान और सब्सिडी तत्काल रोकने का आदेश दिया। फरवरी से ही अमेरिका ने दक्षिण अफ्रीका को सहायता रोक दी थी, जिसमें एचआईवी कार्यक्रमों के लिए 500 मिलियन डॉलर से अधिक शामिल हैं।
ट्रंप ने जोर देकर कहा कि दक्षिण अफ्रीका ने अपनी कारगुजारियों से साबित कर दिया है कि वह जी20 सदस्यता के लायक नहीं। मई में ओवल ऑफिस में रामाफोसा से मुलाकात के दौरान ट्रंप ने वीडियो दिखाकर श्वेत किसानों पर अत्याचार के दावे पेश किए थे, लेकिन रामाफोसा ने इन्हें खारिज कर दिया। दक्षिण अफ्रीकी अपराध आंकड़ों के अनुसार, श्वेत किसानों की हत्याएं कुल 27,000 वार्षिक हत्याओं का मात्र 1 प्रतिशत हैं, और ये दावे व्यापक रूप से खारिज हो चुके हैं।
रामाफोसा ने ट्रंप के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण और गलत सूचनाओं पर आधारित बताया। उन्होंने कहा कि जोहान्सबर्ग सम्मेलन बहुपक्षीयता का प्रतीक था और दक्षिण अफ्रीका सहयोग की भावना से जी20 में भाग लेना चाहता है। रामाफोसा के कार्यालय ने इसे दंडात्मक कदम करार दिया, जो अमेरिका-दक्षिण अफ्रीका संबंधों को और खराब कर सकता है। ट्रंप प्रशासन पोलैंड को 2026 सम्मेलन में ऊंचा दर्जा देने की योजना बना रहा है। यह विवाद अमेरिकी विदेश नीति में नस्लीय मुद्दों को उभार रहा है, जबकि दक्षिण अफ्रीका उपनिवेशवाद के प्रभावों से निपटने पर जोर दे रहा है।
ढाका की कोरेल झुग्गी-बस्ती में भीषण आग, 1,500 झोपड़ियाँ स्वाहा, हजारों लोग बेघर
28 Nov, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। बांग्लादेश की राजधानी ढाका के भीड़भाड़ वाले कोरेल स्लम में लगी भीषण आग ने करीब 1,500 झोपड़ियों को पूरी तरह या आंशिक रूप से नष्ट कर दिया। इस हादसे से हजारों निवासी बेघर हो गए, हालांकि राहत की बात यह है कि अभी तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
अग्निशमन अधिकारियों के अनुसार आग पर काबू पाने में पूरे 16 घंटे लग गए। फायर सर्विस के ड्यूटी अधिकारी राशिद बिन खालिद ने बताया कि आग बहुत तेजी से फैली और इसे पूरी तरह बुझाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। दमकल सेवा के निदेशक लेफ्टिनेंट कर्नल मोहम्मद ताजुल इस्लाम चौधरी ने कहा कि लगभग 1,500 झोपड़ियाँ या तो जलकर राख हो गईं या बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं, जिससे बड़ी संख्या में लोग सड़क पर आ गए।
160 एकड़ में फैली कोरेल बस्ती ढाका के हाई-प्रोफाइल गुलशन और बनानी इलाकों के ठीक बीच बसी है और इसके चारों तरफ ऊँची-ऊँची इमारतें हैं। यहाँ लगभग 60,000 परिवार रहते हैं, जिनमें जलवायु परिवर्तन की मार झेलकर आए कई शरणार्थी भी शामिल हैं। आग लगते ही इलाके में घना धुआँ फैल गया और रात भर लोग अपनी झोपड़ियाँ जलते देखते रहे। सुबह होते-होते कई लोग मलबे से अपना बचा-खुचा सामान निकालते नजर आए। दमकलकर्मियों का कहना है कि बस्ती की बेहद संकरी गलियाँ आग बुझाने में सबसे बड़ी रुकावट बनीं, जिससे गाड़ियाँ और उपकरण अंदर तक पहुँचने में देरी हुई। ढाका, जिसकी आबादी 2024 तक करीब 1.02 करोड़ हो चुकी है, में सैकड़ों ऐसी झुग्गी-बस्तियाँ हैं। गाँवों से गरीबी, बेरोजगारी और जलवायु परिवर्तन की वजह से आए लोग यहीं बसते हैं और रिक्शा चलाना, घरेलू काम या सफाई जैसे दिहाड़ी मजदूरी से जीवन चलाते हैं। कोरेल जैसी बस्तियाँ इनके लिए आखिरी सहारा होती हैं, लेकिन बार-बार लगने वाली आग उन्हें फिर से खाली हाथ छोड़ देती है।
ट्रम्प प्रशासन ने नर्सिंग को ‘प्रोफेशनल डिग्री’ सूची से बाहर रखा, छात्र ऋण पर बड़ा असर संभव
28 Nov, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन ने फेडरल स्टूडेंट लोन सिस्टम में बड़े बदलाव किए हैं, जिसके बाद नर्सिंग शिक्षा से जुड़े लाखों छात्रों के लिए चिंता बढ़ गई है। सरकार ने जिन डिग्रियों को “प्रोफेशनल” श्रेणी में रखा है, उनमें लॉ, मेडिसिन और डेंटिस्ट्री शामिल हैं। लेकिन नर्सिंग को इस सूची से बाहर कर दिया गया है।
नई व्यवस्था के तहत, प्रोफेशनल डिग्री करने वाले छात्रों को सालाना 50 हजार डॉलर और कुल 2 लाख़ डॉलर तक का फेडरल लोन मिल सकेगा।जबकि गैर-प्रोफेशनल कार्यक्रमों में यह सीमा काफी कम सालाना 20,500 डॉलर और कुल 1 लाख़ डॉलर निर्धारित की गई है। चूंकि नर्सिंग को प्रोफेशनल डिग्री नहीं माना गया है, इसलिए नर्सिंग ग्रेजुएट छात्रों को कम राशि का ऋण ही मिलेगा। अमेरिकन नर्सेस एसोसिएशन ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। संगठन का कहना है कि नर्सिंग को प्रोफेशनल सूची से बाहर रखने से न केवल छात्रों की पहुंच उच्च शिक्षा तक सीमित होगी, बल्कि स्वास्थ्य क्षेत्र में बढ़ती नर्सों की मांग को भी गंभीर नुकसान पहुँचेगा। एसोसिएशन ने सरकार से अविलंब शब्दावली संशोधित करने की अपील की है ताकि नर्सिंग छात्रों को पहले की तरह अधिक ऋण उपलब्ध रहे। यह बदलाव 1 जुलाई 2026 से लागू होगा। मौजूदा छात्र अपनी पढ़ाई पूरी होने तक पुराने नियमों के तहत ही लोन प्राप्त कर सकेंगे। सरकार का दावा है कि यह कदम शिक्षा लागत को नियंत्रित करने और छात्रों को अत्यधिक कर्ज से बचाने के लिए उठाया गया है।
इमरान खान जेल में ही हैं और पूरी तरह सलामत हैं – अदियाला जेल प्रशासन
28 Nov, 2025 09:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रावलपिंडी/दुबई । अदियाला जेल प्रशासन (Adiala Jail Administration) ने कहा कि इमरान खान जेल में ही हैं और पूरी तरह सलामत हैं (Imran Khan is in Jail and is completely Safe) । अदियाला जेल प्रशासन ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के संस्थापक इमरान खान के कथित ‘ट्रांसफर’ को लेकर फैल रही अफवाहों पर विराम लगा दिया है।
जेल अधिकारियों ने साफ किया है कि इमरान खान जेल के अंदर ही मौजूद हैं और उनकी सेहत पूरी तरह सामान्य है। जेल प्रशासन ने कहा—“अदियाला जेल से उनके ट्रांसफर की खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। वह पूरी तरह स्वस्थ हैं और उन्हें पूरा चिकित्सकीय उपचार मिल रहा है।” अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सेहत को लेकर लगाए जा रहे कयास “बेबुनियाद” हैं और खान की मेडिकल जरूरतों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है।
उधर, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक बयान में कहा कि पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के संस्थापक को जेल में ऐसी सुविधाएं दी जा रही हैं जो किसी आम कैदी को प्राप्त नहीं होतीं।आसिफ के अनुसार, “अदियाला जेल में इमरान खान को फाइव-स्टार गुणवत्ता का भोजन और कई विशेष सुविधाएं दी जा रही हैं। सलाखों के पीछे उन्हें जितनी कठिनाई पहले उठानी पड़ती थी, उसकी तुलना में अब वह काफ़ी आराम में हैं।”
इमरान खान अगस्त 2023 से अदियाला जेल में बंद हैं। अप्रैल 2022 में अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से सत्ता से बेदखल किए जाने के बाद से उन पर भ्रष्टाचार से लेकर आतंकवाद तक कई मामलों में मुकदमे दर्ज हैं। जेल प्रशासन और सरकार, दोनों के दावों का लब्बोलुआब यही है—इमरान खान जेल में सुरक्षित हैं, उनकी सेहत ठीक है और ट्रांसफर की खबरें सिर्फ अफवाहें हैं।
इमरान हत्या की अफवाहों पर बोली सरकार: फाइव स्टार से बेहतर मिल रहीं सुविधाएं
28 Nov, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पीटीआई संस्थापक इमरान खान की जेल में कथित हत्या की अफवाहों ने पूरे देश में हड़कंप मचा दिया था। सोशल मीडिया पर तेजी से फैली इन अटकलों को देखते हुए अदियाला जेल प्रशासन को बुधवार देर रात आधिकारिक बयान जारी करना पड़ा। प्रशासन ने साफ कहा कि इमरान खान को जेल से कहीं बाहर नहीं ले जाया गया है, वे पूरी तरह स्वस्थ हैं और उनकी सेहत पर चल रही सारी बातें “बुनियादी रूप से गलत” हैं। उन्हें हर तरह की चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई जा रही है।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने तो तंज कसते हुए दावा किया कि इमरान खान को जेल में “फाइव स्टार होटल से भी बेहतर” सुविधाएँ मिल रही हैं। उनके मुताबिक, इमरान के पास डबल बेड, मखमली गद्दा, एक्सरसाइज मशीनें, टीवी और पसंदीदा चैनल देखने की पूरी छूट है। ख्वाजा आसिफ ने अपने पुराने जेल अनुभव का जिक्र करते हुए कहा, मैंने तो सर्दियों में ठंडी फर्श पर सिर्फ दो कंबलों के साथ रातें काटी थीं, गर्म पानी तक नहीं मिलता था। इमरान को चाहिए कि जेल के लाउडस्पीकर पर अपना वॉशिंगटन एरीना वाला भाषण सुन लें।
इसी बीच, अदियाला जेल के बाहर इमरान की बहन अलीमा खान के नेतृत्व में कई घंटों से चल रहा धरना बुधवार शाम शांतिपूर्वक खत्म हो गया। अलीमा ने आरोप लगाया था कि उनके भाई को “एकांतवास” में रखा जा रहा है, जो गैरकानूनी और अन्यायपूर्ण है। उन्होंने कहा था, जब तक मुझे इमरान से मिलने की इजाजत नहीं मिलेगी, मैं यहां से नहीं हटूंगी। धरने में बड़ी संख्या में पीटीआई कार्यकर्ता भी शामिल हुए थे। पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से लंबी बातचीत के बाद मामला सुलझ गया। अधिकारियों ने लिखित आश्वासन दिया कि अलीमा खान और परिवार को आज (गुरुवार) और फिर अगले मंगलवार को इमरान खान से मुलाकात कराई जाएगी। इसके बाद अलीमा ने धरना खत्म करने का ऐलान किया। जाते-जाते उन्होंने उन लोगों पर भी निशाना साधा जो उनके प्रदर्शन को “ड्रामा” बता रहे थे। उनका सवाल था, अगर यह ड्रामा है तो इतनी भारी पुलिस तैनाती क्यों की गई? मुझे गिरफ्तार करना चाहते हैं तो कर लें, मैं डरने वाली नहीं हूं। इमरान खान अगस्त 2023 से अदियाला जेल में बंद हैं और उन पर भ्रष्टाचार, राजद्रोह से लेकर आतंकवाद तक के दर्जनों मामले चल रहे हैं। उनकी सेहत और सुरक्षा को लेकर बार-बार उठने वाले सवालों ने शहबाज शरीफ सरकार को हर बार सफाई देने पर मजबूर कर दिया है। इस बार अफवाहों ने इतना जोर पकड़ा कि जेल प्रशासन को आधी रात को बयान जारी करना पड़ा।
ट्रैक पर काम कर रहे थे कर्मचारी, टेस्टिंग ट्रेन की चपेट में आने से 11 की मौत
28 Nov, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। चीन के दक्षिणी इलाके युन्नान में गुरुवार सुबह रेलवे ट्रैक पर तकनीकी टीम से टकराई टेस्टिंग ट्रेन में 11 की मौत हो गई। इस ट्रेन हादसे ने पूरे क्षेत्र को सदमे में डाल दिया। एक नियमित तकनीकी जांच में यह टकराव रेलवे सुरक्षा व्यवस्थाओं पर कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। हादसे में कई कर्मचारियों की ज़िंदगी दांव पर लग गई, जबकि विभाग घटना की तह तक जाने में जुट गया है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक युन्नान प्रांत में गुरुवार तड़के जब भूकंपीय उपकरणों की जांच कर रही एक ट्रेन ने उन कर्मचारियों को अपनी चपेट में ले लिया, जो ट्रैक के मोड़ वाले हिस्से में कार्य कर रहे थे। इस दर्दनाक हादसे में ट्रैक पर काम कर रहे 11 कर्मचारियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो गंभीर रूप से घायल हो गए जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
जानकारी के मुताबिक कुनमिंग शहर के लुओयांग टाउन रेलवे स्टेशन के अंदर एक घुमावदार सेक्शन पर रेलवे कर्मचारी उपकरणों की टेस्टिंग कर रहे थे। उसी दौरान भूकंप मापने वाले सेंसरों की जांच कर रही तेज रफ्तार टेस्टिंग ट्रेन ने कर्मचारियों को अपनी चपेट में ले लिया। अब विभाग इस हादसे की जांच में जुट गया है।
फ्रेंड्स कॉलोनी हादसा: डीजल भट्ठी में आग लगने से दो बच्चे झुलसे, प्रांजल की दर्दनाक मौत
27 Nov, 2025 05:39 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अंबाला शहर के भीड़भाड़ वाले क्षेत्र जगाधरी गेट के पास फ्रैंडस कॉलोनी में एक घर में डीजल की भट्ठी में आग लगने का मामला सामने आया है। हादसे के दौरान घर में दो बच्चे भीतर ही फंस गए। जिसमें एक प्रांजल नामक बच्चे की मौत हो गई तो वहीं दूसरी बच्ची तनुष्का बुरी तरह झुलस गई। घायल बच्ची को इलाज के लिए चंडीगढ़ रेफर किया गया है।
दोपहर 2 बजे हुआ हादसा
जानकारी के मुताबिक दोपहर करीब दो बजे अचानक से भट्ठी में आग लग गई। स्थानीय लोगों ने बताया कि यह राजा का घर था, जो गोलगप्पे और गज्जक बनाने का काम करता था। दोपहर को वह रोजाना की तरह डीजल की भट्ठी पर काम कर रहा था तभी जोरदार धमका हुआ। धमाके के बाद स्थानीय लोग घर से बाहर निकल कर आए। वहीं, घर के अंदर फंसे लोग चीख पुकार करने लगे।
दमकल विभाग आग पर पा रहा काबू
धमाके के बाद आग की लपटें घर के दूसरे कोने तक पहुंच गईं। आग को बुझाने के लिए स्थानीय लोगों ने बाल्टी से पानी डालने का प्रयास किया। इसके बाद मौके पर दमकल विभाग की गाड़ी आई जो अभी भी आग बुझाने का प्रयास कर रही है। इस घटना में एक बच्चे की मौत और एक बच्ची गंभीर रूप से जल गया। जिस स्थान पर भट्ठी फटी वहां पर कई सिलेंडर भी रखे गए थे। फिलहाल प्रशासन मौके पर पहुंचकर हालात का जाएजा ले रहा है।
सिरसा में ब्लास्ट की गुत्थी सुलझाने उतरी NIA, पुलिस ने पांच युवकों को लिया हिरासत में
27 Nov, 2025 02:28 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महिला थाने की दीवार के पास ग्रेनेड फैंकने के मामले में पुलिस की विभिन्न टीमें बुधवार दोपहर से ही लगी हुई हैं। इस मामले में सात लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। रानियां का गांव खारियां मुख्य केंद्र रहा है। खारियां से चार से पांच युवाओं को पुलिस ने बुधवार देर रात को हिरासत में लिया था। गांव खारियां के युवाओं के बैकग्रांउड पहले ही अपराधिक प्रवृति के बताएं जा रहा हैं। ऐसे में कई अन्य वारदातों का खुलासा भी इन आरोपियों से हो सकता है। इस पूरे मामले में आज दोपहर बाद एसपी दीपक सहारन खुलासा करेंगे।
जानकारी के मुताबिक हैंड ग्रेनेड की क्षमता व गुणवत्ता पर भी सवालिया निशान हैं। इन ग्रेनेड को बाहर से लाया गया था या इसका निर्माण आरोपियों ने किया था। इसमें प्रयोग किया गया मैटीरियल कौन सा था। क्योंकि महिला थाने के पास जहां पर हैंड ग्रेनेड फैंका गया था, उससे कोई खास नुकसान नहीं हुआ है। धमाके के अलावा न थाने की दीवार को नुकसान पहुंचा है और न ही कोई बड़ा गड्ढा वहां पर हुआ है इसलिए हैंड ग्रेनेड के निर्माण के लिए प्रयोग हुई सामग्री का भी पुलिस की फॉरेंसिक टीम जांच कर रही है
एनआईए टीम की सिरसा पहुंचने की सूचना
सूत्रों के अनुसार इस पूरे मामले की जांच करने के लिए एनआईए की टीम भी सिरसा पहुंची है। वह इस पूरे मामले की जानकारी जुटा रही है। मामले की जिम्मेदारी खालिस्तान लिबरेशन आर्मी ने ली है। साथ ही घटना को अंजाम देने के बाद वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया गया।
पूर्व कांग्रेस के अध्यक्ष डा अशोक तंवर के घर के पास से फैंका था ग्रेनेड
जिन दो युवकों ने इस घटना को अंजाम दिया था और जहां से ग्रेनेड फैंका था। उससे 10 मीटर की दूरी पर पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर का आवास है। वहीं, 20 मीटर की दूरी पर महिला थाना है। युवक ग्रेनेड फैंकने के बाद वापस हुड्डा ग्राउंड की ओर बाइक लेकर भाग गए थे। इसी पॉश इलाके में पूर्व सांसद सुनीता दुग्गल, विधायक शीशपाल केहरवाला रहते हैं। जिस दिशा में युवक भागे थे, उस क्षेत्र में भाजपा कार्यालय सरसाईनाथ सदन भी पड़ता है।
पूर्वी एशिया में तनाव: योनागुनी पर मिसाइल तैनाती से चीन भड़का, ट्रंप का ताइवान पर दबाव बढ़ा
27 Nov, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
टोक्यो। जापान के दक्षिणी द्वीप योनागुनी पर मध्यम दूरी की सतह-से-हवा मिसाइल इकाई तैनाती की योजना तेज होने से पूर्वी एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और गहरा गया है। रविवार को जापानी रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजूमी ने ताइवान से मात्र 110 किलोमीटर दूर इस सैन्य अड्डे का दौरा किया और स्पष्ट कहा, “यह तैनाती हमले की संभावना कम करेगी, बढ़ाएगी नहीं।” कोइजूमी का यह बयान चीन-जापान के बीच ताइवान विवाद पर बढ़ती कड़वाहट के बीच आया है, जहां अमेरिका भी ताइवान पर आर्थिक व सैन्य दबाव बना रहा है। जापान योनागुनी को अपनी दक्षिणी द्वीप श्रृंखला की रणनीतिक कड़ी मानता है, जो ताइवान जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
जापान ने पहले ही इशिगाकी द्वीप पर एंटी-शिप मिसाइलें और मियाको पर हवाई निगरानी प्रणाली तैनात कर दी है। कोइजूमी ने जोर देकर कहा कि जापान और अमेरिका को संयुक्त रूप से प्रतिरोध क्षमता मजबूत करनी होगी, क्योंकि “द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह सबसे गंभीर सुरक्षा परिदृश्य है।” उन्होंने क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि मिसाइलें योनागुनी की रक्षा सुनिश्चित करेंगी। यह योजना 2016 से चली आ रही है, जब द्वीप पर सेल्फ-डिफेंस फोर्सेस का बेस स्थापित किया गया था, स्थानीय निवासियों के शुरुआती विरोध के बावजूद।चीन की नाराजगी क्यों बढ़ी? जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने हाल ही में कहा था कि ताइवान पर चीनी हमले की स्थिति में जापान अन्य देशों के साथ सैन्य कार्रवाई में शामिल हो सकता है। चीन ने इसे “उकसावे वाला” बयान बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने सोमवार को कहा, “यह मिसाइल तैनाती क्षेत्रीय तनाव पैदा करने और सैन्य टकराव भड़काने की जानबूझकर कोशिश है। ताकाइची के गलत बयानों के साथ मिलकर यह बेहद खतरनाक प्रवृत्ति है।” बीजिंग ने जापान पर “दकियानूसी सोच” का आरोप लगाते हुए आर्थिक दबाव बढ़ाया है, जैसे जापानी सीफूड पर प्रतिबंध। ताइवान ने जापान का खुलकर समर्थन किया। उप विदेश मंत्री फ्रांसिस वू ने कहा, “जापान संप्रभु राष्ट्र है और अपनी सुरक्षा के लिए कदम उठा सकता है। यह ताइवान जलडमरूमध्य में स्थिरता बनाए रखेगा।” जापानी मीडिया के अनुसार, कुछ स्थानीय निवासी तैनाती से चिंतित हैं, क्योंकि यह उन्हें भू-राजनीतिक संघर्ष के केंद्र में ला सकता है।
ताइवान पर अमेरिका का नया दबाव। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ताइवान पर चिप्स, टैरिफ और रक्षा बजट के मुद्दों पर कड़ा दबाव डाल रहे हैं। ट्रंप चाहते हैं कि ताइवान अपनी सेमीकंडक्टर उत्पादन का 50 प्रतिशत अमेरिका स्थानांतरित करे, जिसे ताइवान “अव्यावहारिक” बता रहा है। ताइवान के पास विश्व का सबसे उन्नत चिप इकोसिस्टम है, जबकि अमेरिका में पूरी इंडस्ट्री विकसित नहीं हुई। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इतना बड़ा शिफ्ट एक दशक से अधिक ले सकता है। अप्रैल 2025 में ट्रंप ने ताइवान पर 32 प्रतिशत टैरिफ लगाए, जो जापान व दक्षिण कोरिया जैसे सहयोगियों से अधिक है। अगस्त में इसे 20 प्रतिशत तक कम किया गया, लेकिन स्टील-एल्यूमिनियम पर 50 प्रतिशत टैरिफ बरकरार हैं। ताइवान के उद्योगपति चिंतित हैं कि टेक्सटाइल, मशीन टूल्स और साइकिल जैसे क्षेत्र प्रभावित होंगे।
हरियाणा में ठंड का कहर: कई शहर कांपे, न्यूनतम तापमान सबसे नीचे—अभी और गिरेगा पारा
27 Nov, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्रदेश के नारनौल में बुधवार को न्यूनतम तापमान 5.5 डिग्री पहुंच गया जो इस सीजन का सबसे कम है। प्रदेश के ज्यादातर जिलों में रात का तापमान 10 डिग्री से नीचे चला गया है। मौसम विशेषज्ञ के मुताबिक आने वाले दिनों में हरियाणा, एनसीआर व दिल्ली में ठंड और बढ़ेगी।
मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि उत्तरी पर्वतीय क्षेत्रों पर हो रही बर्फबारी का असर मैदानी राज्यों विशेषकर हरियाणा, एनसीआर व दिल्ली पर साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। इन क्षेत्रों में अधिकतर स्थानों पर रात का तापमान सिंगल डिजिट (10 डिग्री से नीचे) में पहुंच गया है। हालांकि दिनभर धूप खिली रहने से अभी लोगों को राहत है।
आगे ऐसा रहेगा मौसम
आने वाले दिनों में हरियाणा, एनसीआर व दिल्ली में ठंड और बढ़ेगी। हालांकि वीरवार को एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ उत्तरी पर्वतीय क्षेत्रों पर सक्रिय होने से 27-28 नवंबर को हरियाणा, एनसीआर व दिल्ली में कहीं कहीं आंशिक बादलवाही देखने को मिलेगी। इससे तापमान में हल्का उतार-चढ़ाव दिखेगा जबकि उत्तरी पर्वतीय क्षेत्रों के इसके असर से बर्फबारी होगी। मैदानी राज्यों में अभी मौसम आमतौर पर शुष्क और साफ बना हुआ है। अभी वातावरण में भी नमी भी नहीं है। ऐसे में तापमान में गिरावट से आने वाले दिनों में पाला जमने की स्थिति बनेगी।
शंघाई एयरपोर्ट विवाद: चीन ने खारिज किया दुर्व्यवहार का आरोप, अरुणाचल पर फिर दोहराया दावा
27 Nov, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। चीनी विदेश मंत्रालय ने शंघाई हवाई अड्डे पर अरुणाचल प्रदेश की एक भारतीय महिला के साथ कथित दुर्व्यवहार की सभी खबरों को सिरे से खारिज कर दिया। प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि महिला को न हिरासत में लिया गया, न उत्पीड़न हुआ और न ही कोई अनुचित व्यवहार किया गया। सीमा अधिकारियों ने पूरी तरह कानून के दायरे में काम किया तथा एयरलाइन ने उन्हें विश्राम कक्ष, भोजन और पानी उपलब्ध कराया। हालांकि इस मौके का उपयोग करते हुए माओ निंग ने एक बार फिर चीन का पुराना दावा दोहराया कि जांगनान (अरुणाचल प्रदेश) चीन का अभिन्न क्षेत्र है और चीन ने कभी भारत द्वारा अवैध रूप से स्थापित तथाकथित अरुणाचल प्रदेश को मान्यता नहीं दी।
घटना 21 नवंबर की है। लंदन में रहने वाली भारतीय मूल की ब्रिटिश नागरिक पेमा वांगजोम थोंगडोक लंदन से जापान जा रही थीं। शंघाई पुडोंग एयरपोर्ट पर ट्रांजिट के दौरान उनकी तीन घंटे की स्टॉपओवर अचानक 18 घंटे तक खिंच गई। चीनी इमिग्रेशन अधिकारियों ने उनके पासपोर्ट में जन्मस्थान के तौर पर अरुणाचल प्रदेश लिखा देखते ही उसे “अमान्य” घोषित कर दिया और उन्हें आगे जाने से रोक दिया। परेशान पेमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी आपबीती साझा की, जिसके बाद मामला तूल पकड़ लिया।
भारत ने इस घटना पर कड़ा विरोध जताया। सूत्रों के मुताबिक नई दिल्ली ने बीजिंग के सामने औपचारिक आपत्ति दर्ज करते हुए कहा कि ट्रांजिट यात्री को केवल जन्मस्थान के आधार पर हिरासत में लेना और भारतीय पासपोर्ट को अमान्य बताना पूरी तरह अस्वीकार्य है। भारत ने स्पष्ट किया कि अरुणाचल प्रदेश उसका अभिन्न एवं अविभाज्य हिस्सा है और उसके नागरिकों को भारतीय पासपोर्ट से विश्व में कहीं भी यात्रा करने का पूर्ण अधिकार है। भारतीय पक्ष ने यह भी रेखांकित किया कि चीनी अधिकारियों का यह व्यवहार शिकागो कन्वेंशन तथा मॉन्ट्रियल कन्वेंशन समेत अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नियमों का खुला उल्लंघन है। इस तरह की कार्रवाइयाँ दोनों देशों के बीच चल रहे संबंध सामान्यीकरण के प्रयासों में अनावश्यक बाधा उत्पन्न करती हैं। चीन ने महिला को अंततः जापान के लिए रवाना होने दिया, लेकिन अरुणाचल प्रदेश पर अपने दावे को फिर से जोरदार तरीके से सामने लाकर उसने विवाद को नया आयाम दे दिया है।
पाक रक्षा मंत्री ने कबूला बोले- सभी उम्मीदें खत्म, तालिबान से रिश्ते कभी ठीक नहीं होंगे
27 Nov, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने पहली बार खुलकर स्वीकार किया है कि अफगानिस्तान के साथ पाकिस्तान के संबंध अब कभी सामान्य नहीं हो सकते। तालिबान शासन के चार साल बाद भी इस्लामाबाद को मुंह की खानी पड़ रही है और उसकी सारी उम्मीदें ध्वस्त हो चुकी हैं।
एक साक्षात्कार में ख्वाजा आसिफ ने कहा, हमने तालिबान का स्वागत किया था, कई बार काबुल जाकर बात की, लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ। हमें लगा था कि तालिबान हम पर निर्भर रहेंगे और पुराना प्रभाव बना रहेगा, मगर ठीक उलटा हुआ। अब हमारी सारी उम्मीदें खत्म हो चुकी हैं। तालिबान से किसी सकारात्मक बदलाव की कोई गुंजाइश नहीं बची।यह बयान ऐसे समय आया है जब अक्टूबर 2025 से दोनों देशों के बीच सीमा पर गोलीबारी और हवाई हमले चल रहे हैं। तीन दौर की बातचीत बेनतीजा रही क्योंकि पाकिस्तान टीटीपी हमलों की जिम्मेदारी अफगान तालिबान पर डालता रहा। आसिफ ने माना कि तालिबान ने पाकिस्तान की एक नहीं मानी और अब दोनों देशों के रिश्ते सुधारने की संभावना लगभग शून्य हो गई है। पाकिस्तानी सेना और सरकार की नाराजगी की असली वजह तालिबान की स्वतंत्र विदेश नीति है। अफगान मंत्री लगातार भारत आ रहे हैं, दोनों देशों के बीच व्यापार, शिक्षा और कनेक्टिविटी के नए समझौते हो रहे हैं। इस्लामाबाद को यह हजम नहीं हो रहा कि जिस तालिबान को उसने सत्ता दिलाई, वह अब इस्लाम के नाम पर पाकिस्तान की बात मानने के बजाय विकास और भारत के साथ मजबूत रिश्तों की राह पर चल पड़ा है।
ख्वाजा आसिफ का यह कबूलनामा पाकिस्तान की अफगान नीति की सबसे बड़ी नाकामी का सार्वजनिक ऐलान है। चार साल पहले जिस तालिबान को इस्लामाबाद अपना स्ट्रैटेजिक एसेट मानता था, आज उसी से उसे स्थायी दुश्मनी का डर सता रहा है।
वाइट हाउस में बैठक को ट्रंप ने बताया था शानदार पर सलमान के दिखे थे सख्त तेवर
27 Nov, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रियाद। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बीते सप्ताह वाइट हाउस में बैठक हुई थी। इस बैठक को ट्रंप ने शानदार बताया, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस दौरान तनाव देखने को मिला था। मीडिया कैमरों से दूर हुई इस बैठक में कई मसलों पर ट्रंप और प्रिंस सलमान के बीच असहमति नजर आई। इनमें सबसे बड़ा मसला अब्राहम अकॉर्ड है। ट्रंप ने अपील की थी कि सऊदी अरब भी इसका हिस्सा बने, लेकिन मोहम्मद बिन सलमान ने इसे पूरी तरह से खारिज कर दिया। इसके अलावा एक ऐसी शर्त भी रखी, जिसका पूरा होना मुश्किल है। ऐसे में ट्रंप का सऊदी अरब से दोबारा अब्राहम अकॉर्ड के लिए अपील करना मुश्किल होगा।
रिपोर्ट के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप इस बात को लेकर निराश हुए कि सऊदी अरब ने अब्राहम अकॉर्ड में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया। इसकी शुरुआत अमेरिका और इजराइल ने 2020 में की थी। इसमें यूएई और बहरीन जैसे देशों को शामिल किया गया था। इसके अलावा कजाखस्तान भी इसका हिस्सा बन चुका है। अब अमेरिका चाहता है कि ज्यादा से ज्यादा मुस्लिम देश इसका हिस्सा बनें ताकि मिडल ईस्ट में शांति रहे और इजराइल के साथ इनके रिश्ते बेहतर हों। इस लिहाज से सऊदी अरब सबसे अहम देश है, जिसे इस्लामिक मुल्क अपने नेता के तौर पर देखते हैं। ऐसी स्थिति में यदि सऊदी अरब ने साफ इनकार किया है तो अमेरिका के लिए यह झटका है।
बैठक में प्रिंस सलमान ने साफ कहा कि उनके देश की जनता अब्राहम अकॉर्ड में शामिल होने के लिए तैयार नहीं है। हमारे देश में इसके पक्ष में कोई माहौल नहीं है। इसके अलावा यदि आप हमें इसमें देखना ही चाहते हैं तो फिर फिलिस्तीन को टू-स्टेट सॉलूशन के तहत मान्यता दें। यदि हमारी इस शर्त को पूरा किया जाता है तो हम इसके बारे में विचार करेंगे। प्रिंस सलमान ने कहा कि सऊदी अरब के लोग पूरी तरह से फिलिस्तीन के साथ खड़े हैं। इसके अलावा इजराइल और हमास की जंग को लेकर भी हमारी एक राय है।
बता दें प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान एक सख्त नेता हैं। डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत में भी उनका यही रवैया देखने को मिला। उन्होंने कहा कि इजराइल को पीछे हटना चाहिए। फिलिस्तीन को मान्यता मिलनी चाहिए। तभी बातचीत के लिए हमारे दरवाजे खुल सकते हैं। वाइट हाउस के सूत्रों का कहना है कि ट्रंप इसलिए मिडल ईस्ट के देशों को इस अब्राइम अकॉर्ड में लाना चाहते हैं ताकि गाजा में जंग खत्म हो। इसके अलावा ईरान का परमाणु कार्यक्रम भी मजबूती से आगे बढ़े।
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