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अमेरिका ने एयरस्ट्राइक कर सीरिया में आईएस के 30 ठिकानों को किया ध्वस्त, कई आतंकी ढेर
16 Feb, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी सेना ने सीरिया में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज करते हुए कई बड़े हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी केंद्रीय कमान द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह सैन्य कार्रवाई दिसंबर में हुए उस घातक आतंकी हमले का जवाब है, जिसमें दो अमेरिकी सैनिकों और एक नागरिक अनुवादक (ट्रांसलेटर) की जान चली गई थी। 13 दिसंबर को हुए उस हमले में सार्जेंट एडगर ब्रायन टोरेस-टोवर, सार्जेंट विलियम नथानिएल हॉवर्ड और नागरिक अनुवादक अयाद मंसूर सकात शहीद हुए थे।ताजा सैन्य कार्रवाई के तहत अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने 3 फरवरी से गुरुवार के बीच इस्लामिक स्टेट के 30 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया।
इन 10 प्रमुख हवाई हमलों में आतंकियों के हथियारों के गोदाम, प्रशिक्षण केंद्र और अन्य रणनीतिक सुविधाओं को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है। केंद्रीय कमान के आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर के हमले के बाद से अब तक अमेरिका ने इस्लामिक स्टेट के कम से कम 50 आतंकियों को या तो मार गिराया है या उन्हें हिरासत में लिया है। इस दौरान आतंकियों के 100 से अधिक ठिकानों पर बमबारी की गई है। दूसरी ओर, सीरियाई रक्षा मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में बताया कि सरकारी सुरक्षा बलों ने देश के पूर्वी हिस्से में स्थित एक प्रमुख सैन्य अड्डे पर नियंत्रण कर लिया है। बताया जा रहा है कि इस अड्डे का इस्तेमाल अमेरिकी सैनिक इस्लामिक स्टेट के खिलाफ अपनी गतिविधियों के संचालन के लिए कर रहे थे। गौरतलब है कि साल 2014 में जब इस्लामिक स्टेट ने सीरिया और इराक के एक बड़े भू-भाग पर अपनी खिलाफत की घोषणा की थी, तब अल-तनफ जैसे अड्डों ने इस आतंकी संगठन को पीछे धकेलने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वर्तमान सैन्य कार्रवाई क्षेत्र में आईएस के बचे हुए नेटवर्क को पूरी तरह समाप्त करने के उद्देश्य से की जा रही है।
यूएस ने भारत से केवल अतिरिक्त रूसी तेल की खरीद न करने की प्रतिबद्धता हासिल की: रुबियो
16 Feb, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
म्यूनिख। भारत और अमेरिका के बीच हालिया व्यापार समझौते को लेकर अंतरराष्ट्रीय गलियारों में जारी अटकलों पर अब विराम लग गया है। पिछले कुछ समय से रक्षा और कूटनीतिक विशेषज्ञों के बीच यह दावा किया जा रहा था कि इस डील के बदले अमेरिका ने भारत पर रूस से तेल खरीद बंद करने का दबाव बनाया है। हालांकि, म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के बयान और भारतीय विदेश मंत्रालय के स्पष्ट रुख ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। यह साफ हो गया है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता से कोई समझौता नहीं करेगा और रूस से तेल की खरीद जारी रहेगी।
म्यूनिख में वैश्विक नेताओं को संबोधित करते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने भारत से केवल अतिरिक्त रूसी तेल की खरीद न करने की प्रतिबद्धता हासिल की है। रूबियो के इस बयान में अतिरिक्त शब्द का प्रयोग बेहद मायने रखता है। इसका सीधा अर्थ यह है कि भारत वर्तमान में रूस से जितना तेल आयात कर रहा है, उसे रोकने या कम करने की कोई शर्त इस ट्रेड डील में शामिल नहीं है। यह बयान अमेरिकी प्रशासन की ओर से भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को एक प्रकार की अप्रत्यक्ष मान्यता है। रूबियो ने यह भी स्वीकार किया कि भारत के साथ चल रही बातचीत में भारत ने केवल नई या अतिरिक्त खरीद न बढ़ाने की बात कही है, जो मौजूदा आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित नहीं करती।
भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि देश की ऊर्जा नीति केवल लागत, उपलब्धता और जोखिम प्रबंधन पर आधारित है, न कि किसी बाहरी राजनीतिक दबाव पर। आंकड़ों के लिहाज से देखें तो भारत ने बाजार की स्थितियों और कीमतों में बदलाव के कारण रूसी तेल के आयात में खुद ही कुछ बदलाव किए हैं। 2025 के मध्य में जहां यह आयात लगभग 20 लाख बैरल प्रतिदिन था, वहीं हाल के महीनों में यह घटकर 12 लाख बैरल के करीब पहुंच गया है। लेकिन यह कमी किसी अमेरिकी दबाव का परिणाम नहीं, बल्कि भारत द्वारा अपनी ऊर्जा टोकरी के विविधीकरण का हिस्सा है। भारत अब अमेरिका और वेनेजुएला जैसे अन्य स्रोतों से भी तेल खरीद की संभावनाएं तलाश रहा है, लेकिन इसका मतलब रूस से पूरी तरह किनारा करना नहीं है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में भारत-अमेरिका संबंधों में व्यापार और ऊर्जा क्षेत्र को प्राथमिकता दी जा रही है। रूबियो ने सम्मेलन में यूक्रेन युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि यद्यपि रूस ने संघर्ष समाप्त करने की इच्छा जताई है, लेकिन शर्तें अभी भी जटिल बनी हुई हैं। ऐसी स्थिति में अमेरिका रूस पर प्रतिबंधों का दबाव बनाए रखना चाहता है, फिर भी वह भारत जैसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार की जरूरतों को समझता है। रूस से मिलने वाला सस्ता तेल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए रीढ़ की हड्डी के समान है, जो न केवल ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करता है बल्कि घरेलू स्तर पर महंगाई को नियंत्रित रखने में भी बड़ी भूमिका निभाता है। अंततः, यह पूरा घटनाक्रम दर्शाता है कि भारत वैश्विक शक्तियों के बीच संतुलन बनाए रखते हुए अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखने में सफल रहा है।
पीएम विक्टर ओर्बन केवल अपना पेट बढ़ा रहे हैं, सेना नहीं
16 Feb, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मास्को। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को तीन साल पूरे हो गए हैं। जेलेंस्की लगातार यूरोपीय देशों को रूस के प्रति आगाह करते हुए अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने के लिए चेतावनी देते रहे हैं। अब उन्होंने चेतावनी नजर अंदाज करने के लिए हंगरी के पीएम विक्टर ओर्बन पर हमला बोला। जेलेंस्की ने कहा कि विक्टर क्षेत्रीय सुरक्षा पर ध्यान देने की बजाय घरेलू राजनीति को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं। वह केवल अपना पेट बढ़ा रहे हैं, सेना नहीं। जेलेंस्की का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब हंगरी की तरफ से यूक्रेन की मदद करने की अनिच्छा व्यक्त की गई है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबकि तीन साल से जारी यूक्रेन और रूस के युद्ध ने यूरोपीय संघ के देशों के अंदर भी कलह को बढ़ा दिया है। ज्यादातर देश रूस के खिलाफ यूक्रेन को राहत पैकेज देने और मॉस्को पर बैन का समर्थन करते हैं, लेकिन हंगरी बार-बार इन उपायों को किसी न किसी वजह से या बहाने से नजरअंदाज करता है। हंगरी लगातार इस युद्ध को आगे न बढ़ाने के लिए भी चेतावनी देता है। दरअसल, विक्टर ओर्बन को पुतिन का करीबी माना जाता है, जिसकी वजह से उन्हें कीव समेत कई यूरोपीय देशों से आलोचना का सामना करना पड़ता है।
रिपोर्ट के मुताबिक हंगरी के पीएम विक्टर ओर्बन ने शुरुआत से ही यूरोपीय देशों द्वारा यूक्रेन को दिए जा रहे अतिरिक्त फंडिंग का विरोध किया है। इतना ही नहीं उन्होंने सीधे हथियारों की आपूर्ति का भी विरोध किया। ओर्बन ने हंगरी के हथियारों को यूक्रेन को देने से इनकार करते हुए कहा था कि बुडापेस्ट को अपनी आर्थिक स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा को ज्यादा प्राथमिकता देनी है। इसके अलावा उन्होंने पश्चिमी यूक्रेन में रहने वाले हंगेरियाई मूल के लोगों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार को लेकर भी यूक्रेनी सरकार पर सवाल उठाया था।
बता दें रूस और यूक्रेन युद्ध पिछले तीन साल से जारी है। अमेरिका समेत तमाम देश इसे खत्म करवाने की कोशिश कर चुके हैं। दोनों देशों की तरफ से कई लाख सैनिक अपनी जान गंवा चुके हैं। युद्ध के पहले यूक्रेन जिस नाटो की सदस्यता लेने की जिद कर रहा था, अब वह भी उससे दूर जा चुकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कहा है कि यूक्रेन को नाटो की सदस्यता नहीं मिलेगी। अभी रूस और यूक्रेन के बीच में विवाद जमीन को लेकर है। रूस युद्ध में कब्जाई जमीन को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है, ऐसे में युद्ध जारी है।
दावा: रुसी विपक्षी नेता नवलनी की मौत प्राकृतिक नहीं, एक राजनीतिक हत्या थी
16 Feb, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मास्को। रूस के सबसे बड़े विपक्षी नेता एलेक्सी नवलनी की मौत का रहस्य फिर चर्चा में आ गया। हाल ही में पांच यूरोपीय देशों ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, स्वीडन और नीदरलैंड ने इस रहस्यमयी मौत को लेकर दावा किया है कि एलेक्सी नवलनी की मौत प्राकृतिक नहीं, बल्कि एक राजनीतिक हत्या थी। दावा किया जा रहा है कि इन देशों के वैज्ञानिकों को नवलनी के सैंपल्स में एक ऐसे दुर्लभ और जानलेवा जहर मिला है, जिसका इस्तेमाल प्राचीन काल में आदिवासी शिकार के लिए किया करते थे। इस एक प्रकार के मेंढक का विष बताया जा रहा है। इस खुलासे के जरिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की गई है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, स्वीडन और नीदरलैंड ने शनिवार को एक संयुक्त बयान जारी कर दावा किया है कि एलेक्सी नवलनी को एपाइबेटिडाइन नाम का एक घातक जहर दिया गया था। एपाइबेटिडाइन दक्षिण अमेरिका के रेन फॉरेस्ट में पाए जाने वाले जहरीले डार्ट मेंढकों की त्वचा से निकाला जाता है। ये जहर इतना खतरनाक होता है कि इसकी इसकी छोटी मात्रा भी इंसान को दे दी जाए तो उसे तुरंत लकवा मार जाता है और उसकी जान भी जा सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक मेंढक का ये जहर निकोटीन की तुलना में 200 गुना ज्यादा शक्तिशाली होता है और शरीर के रेस्पिरेटरी सिस्टम को फेल कर देता है, जिससे मौत प्राकृतिक जैसी दिखाई देती है। वैज्ञानिक के मुताबित एपाइबेटिडाइन शरीर के निकोटिनिक एसिटाइलकोलाइन रिसेप्टर्स पर हमला करता है। इन यूरोपीय सरकारों का तर्क है कि इस तरह के दुर्लभ जहर को जुटाना, उसे लैब में प्रोसेस करना और जेल जैसी सुरक्षित जगह पर किसी को देना केवल एक सरकारी मशीनरी के लिए ही संभव है।
बता दें भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले नवलनी की फरवरी 2024 में रूस की सबसे खतरनाक आर्कटिक जेल में मौत हो गई थी। रूसी अधिकारियों ने दावा किया था कि टहलकर लौटे तो अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और इसके बाद हालत बिगड़ती ही चली गई, आखिरकार उनकी मौत हो गई। हालांकि जेल प्रशासन के इस बयान को नवलनी परिवार ने कभी स्वीकार नहीं किया। नवलनी की विधवा पत्नी यूलिया ने पहले ही दावा किया था कि दो स्वतंत्र प्रयोगशालाओं ने नवलनी के शरीर में जहर की पुष्टि की है। उन्होंने वैश्विक मंच पर बार-बार पुतिन पर सवाल उठाए थे।
सम्मेलन में हिस्सा लेने जर्मनी पहुंचे मुनीर, प्रवेश से पहले ही सुरक्षकर्मियों ने रोका मांगी आईडी
16 Feb, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
म्यूनिख। पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को जर्मनी में आयोजित कॉन्फ्रेंस के दौरान सुरक्षा जांच में रोके जाने का मामला चर्चा में है। 13 से 15 फरवरी के बीच आयोजित इस सम्मेलन में शामिल होने पहुंचे मुनीर को कार्यक्रम स्थल के प्रवेश द्वार पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने पहचान पत्र दिखाने को कहा। वीडियो में सुरक्षाकर्मी उन्हें रोकते हुए कहते सुनाई देते हैं, “रुकिए… आपकी आईडी कहां है? कृपया आईडी कार्ड दिखाइए।”
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह कार्रवाई सम्मेलन में लागू मानक सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत की गई। म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में वैश्विक नेता, रक्षा अधिकारी, राजनयिक और नीति विशेषज्ञ बड़ी संख्या में शामिल होते हैं, ऐसे में कड़ी पहचान जांच सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है। हालांकि, इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही है। कई यूजर्स ने इसे पाकिस्तान की कूटनीतिक असहजता से जोड़कर देखा, जबकि अन्य लोगों ने कहा कि उच्चस्तरीय अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में सभी प्रतिभागियों के लिए समान सुरक्षा नियम लागू होते हैं।
पाकिस्तान के पूर्व सैन्य अधिकारी और टिप्पणीकार ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहचान सत्यापन एक सामान्य प्रक्रिया है और इसमें असामान्य कुछ नहीं है। इस बीच जर्मनी स्थित सिंधी राजनीतिक संगठन जेये सिंध मुत्ताहिदा महाज ने सम्मेलन स्थल के बाहर मुनीर की भागीदारी का विरोध किया। संगठन के अध्यक्ष शफी बुरफत ने संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और जर्मन सरकार को संबोधित बयान में पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व को आमंत्रित किए जाने पर आपत्ति जताई।
संगठन ने अपने बयान में 1971 की घटनाओं और बांग्लादेश मुक्ति संग्राम का उल्लेख करते हुए पाकिस्तान की सैन्य व्यवस्था पर मानवाधिकार उल्लंघन और राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप लगाए। पाकिस्तान इन आरोपों को पहले भी खारिज करता रहा है। म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन हर वर्ष वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर विचार-विमर्श का प्रमुख मंच माना जाता है। इस बार भी सम्मेलन में विभिन्न देशों के शीर्ष सैन्य और राजनीतिक प्रतिनिधि शामिल हुए, जहां सुरक्षा, भू-राजनीति और वैश्विक स्थिरता जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
विधानसभा का बजट सत्र 20 फरवरी से, बजट पेश करने की संभावित तारीख 2 मार्च
16 Feb, 2026 04:59 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़ | हरियाणा सरकार का प्रस्तावित बजट सत्र 20 फरवरी 2026 से शुरू होगा। विधानसभा अध्यक्ष की ओर से प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार सत्र का शुभारंभ 20 फरवरी को सुबह 11 बजे से राज्यपाल के अभिभाषण के साथ होगा। पहले दिन शोक प्रस्ताव और पटल पर पत्र रखे जाने की कार्यवाही भी होगी। 23 से 26 फरवरी तक राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा चलेगी। 27 फरवरी को मुख्यमंत्री अभिभाषण पर जवाब देंगे व धन्यवाद प्रस्ताव पर मतदान कराया जाएगा। इसी दिन अनुपूरक बजट (तृतीय किश्त) 2025-26 से संबंधित विनियोग विधेयक भी पारित किया जाएगा।
हरियाणा विधानसभा का बजट सत्र 20 फरवरी 2026 से शुरू होगा
2 मार्च 2026 को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बजट अनुमान पेश किए जाने की संभावना है। बजट पेश होने के बाद 10 से 13 मार्च तक बजट पर सामान्य चर्चा निर्धारित की गई है। 14 और 15 मार्च को अवकाश रहेगा। 16 मार्च को बैठकों की रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी तथा बजट पर चर्चा और वित्त मंत्री का उत्तर होगा। 17 मार्च को विनियोग विधेयक और अन्य विधायी कार्य निपटाए जाएंगे। 18 मार्च को अन्य शासकीय कार्य लिए जाने का कार्यक्रम है। हालांकि इस पर मुहर लगाने के लिए 19 फरवरी को बिजनेस काउंसिल की बैठक होगी।
Indian Student Death: अमेरिका में भारतीय छात्र का मिला शव, 6 दिन पहले हुआ था लापता
15 Feb, 2026 01:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Indian Student Death In USA: भारतीय मूल के छात्र साकेत श्रीनिवासैया अमेरिका में 9 फरवरी को लापता हो गए थे, जिनका आज रविवार को शव बरामद किया गया है. छात्र के लापता होने के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था. हर तरफ मदद की गुहार लगाई, लेकिन अंत में उनका शव मिला. इसकी पुष्टि सैन फ्रांसिस्को स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने रविवार को की है. दूतावास ने पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत भेजने की बात कही है.
भारतीय वाणिज्य दूतावास ने की मौत की पुष्टि
भारत के वाणिज्य दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लापता युवक की मौत की पुष्टि की है. ‘एक्स’ पर लिखा, “वाणिज्य दूतावास को यह सूचित करते हुए गहरा खेद है कि स्थानीय पुलिस ने लापता भारतीय छात्र साकेत श्रीनिवासैया का शव बरामद होने की पुष्टि कर दी है. इस अत्यंत कठिन समय में हम उनके परिवार और प्रियजनों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करते हैं.
वाणिज्य दूतावास परिवार को सभी आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए तत्पर है, जिसमें स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय और पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत वापस भेजने की व्यवस्था करना शामिल है. हमारे कांसुलर अधिकारी परिवार के साथ सीधे संपर्क में हैं और सभी आवश्यक औपचारिकताओं और सेवाओं में उनका सहयोग करेंगे.”
मई 2026 में पूरी होनी थी डिग्री
साकेत श्रीनिवासैया यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया बर्कले में केमिकल और बायोमॉलिक्यूलर इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में पढ़ाई करते थे, उनकी डिग्री मई 2026 में पूरी होनी था, लेकिन इससे पहले ही उनकी मौत हो गई. वे मूल रूप से भारतीय थे. कर्नाटक के रहने वाले साकेत श्रीनिवासैया ने इससे पहले आईआईटी मद्रास से अंडरग्रजुएट की डिग्री ली है. साकेत श्रीनिवासैया की मौत की सूचना मिलते ही परिजन बेसुध हैं, उनका रो-रोकर बुरा हाल है.
आखिरी बार 9 फरवरी को परिवार से हुई थी बात
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार साकेत श्रीनिवासैया आखिर बार कैलिफोर्निया के टिल्डन रीजनल पार्क के पास देखे गए थे. साकेत के पिता ने बताया कि आखिरी बार 9 फरवरी को बात हुई थी. इसके बाद कोई संपर्क नहीं हुआ. उसके दोस्तों और रूममेट्स से संपर्क किया, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली. इसके बाद बर्कले पुलिस विभाग में शिकायत दर्ज कराई थी. आज रविवार को साकेत के शव मिलने की पुष्टि हुई है.
फॉरेंसिक विशेषज्ञ का दावा, कहा- जेफ्री एपस्टीन ने आत्महत्या नहीं की उनकी हत्या हुई थी
15 Feb, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन की 2019 में हुई मौत आज भी रहस्यों के घेरे में है। न्यूयॉर्क की जेल में हुई इस संदिग्ध मौत को लेकर फॉरेंसिक पैथोलॉजिस्ट डॉ. मिशेल बाडेन ने एक चौंकाने वाला दावा किया है। डॉ. बाडेन का मानना है कि एपस्टीन की मौत फांसी लगाने से नहीं, बल्कि गला घोंटने की वजह से हुई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के सूक्ष्म विश्लेषण के बाद उन्होंने इसे आत्महत्या के बजाय हत्या का मामला करार दिया है।
एक हालिया इंटरव्यू में डॉ. बाडेन ने स्पष्ट किया कि एपस्टीन के गले पर मिले निशान और फ्रैक्चर सामान्य आत्महत्या के मामलों से मेल नहीं खाते। उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम के दौरान एपस्टीन की गर्दन में तीन अलग-अलग जगहों पर फ्रैक्चर पाए गए थे। डॉ. बाडेन के अनुसार, उन्होंने अपने लंबे करियर में फांसी लगाने के किसी भी मामले में इस तरह के गंभीर फ्रैक्चर नहीं देखे हैं। इसके अलावा, गर्दन पर तीन निशान मिले थे—दो आगे की तरफ और एक पीछे की ओर—जो गला घोंटे जाने की ओर इशारा करते हैं।
हालांकि उस समय की चीफ मेडिकल एग्जामिनर डॉ. बारबारा सैंपसन ने इसे आधिकारिक तौर पर आत्महत्या बताया था, लेकिन डॉ. बाडेन ने इस पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि सैंपसन पोस्टमार्टम के समय वहां मौजूद भी नहीं थीं और मौत के महज पांच दिन बाद ही जल्दबाजी में डेथ सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया था। डॉ. बाडेन ने कहा कि पोस्टमार्टम करने वाले अन्य विशेषज्ञ भी इस बात पर सहमत थे कि असली कारण जानने के लिए और अधिक गहन जांच की जरूरत थी।
एपस्टीन के वकील भी पूर्व में मेडिकल एग्जामिनर की रिपोर्ट पर असंतोष जता चुके हैं। अगस्त 2019 में जेल के भीतर हुई इस हाई-प्रोफाइल मौत ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा था, क्योंकि एपस्टीन के संबंध कई ताकतवर हस्तियों के साथ थे। डॉ. बाडेन के इन नए दावों ने एक बार फिर इस बहस को छेड़ दिया है कि क्या एपस्टीन की मौत के पीछे कोई बड़ी साजिश थी।
पन्नू हत्या साजिश मामला: न्यूयॉर्क की अदालत ने निखिल गुप्ता को सुनाई 24 साल की सजा
15 Feb, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
न्यूयॉर्क। प्रतिबंधित खालिस्तानी संगठन सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) के सरगना और घोषित आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश रचने के हाई-प्रोफाइल मामले में अमेरिकी अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। न्यूयॉर्क की एक अदालत ने भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता को इस साजिश में संलिप्तता के लिए 24 साल के कठोर कारावास की सजा दी है। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान निखिल गुप्ता ने अपने ऊपर लगे सभी गंभीर आरोपों को स्वीकार कर लिया, जिसके बाद न्यायाधीश ने सजा का निर्णय लिया। हालांकि, सजा का औपचारिक और विस्तृत ऐलान 29 मई को किया जाएगा।
अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई और अटॉर्नी ऑफिस द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, निखिल गुप्ता (उर्फ निक) ने सेकंड सुपरसिडिंग इंडिक्टमेंट के तहत खुद पर लगे तीन प्रमुख आरोपों को कबूल किया है। इन आरोपों में सुपारी देकर हत्या की कोशिश (मर्डर-फॉर-हायर), इस हत्या के लिए साजिश रचना और मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश शामिल है। अमेरिकी एजेंसियों ने स्पष्ट किया कि यह पूरी साजिश एक अमेरिकी नागरिक के विरुद्ध रची गई थी, जिसे समय रहते खुफिया कार्रवाई के माध्यम से नाकाम कर दिया गया।
अमेरिकी प्रॉसिक्यूटर्स द्वारा अदालत में पेश की गई चार्जशीट इस पूरी साजिश की परतें खोलती है। इसके अनुसार, साजिश की शुरुआत मई 2023 में हुई थी। आरोप है कि भारत के एक पूर्व सुरक्षा अधिकारी, जिसकी पहचान विकास यादव (सीसी-1) के रूप में की गई है, ने निखिल गुप्ता को इस काम के लिए तैयार किया था। इस योजना के तहत पन्नू की हत्या के लिए एक हिटमैन से संपर्क किया गया, लेकिन निखिल को इस बात का अंदाजा नहीं था कि वह जिस व्यक्ति को सुपारी दे रहा है, वह असल में अमेरिकी जांच एजेंसी का अंडरकवर एजेंट है। जून 2023 में इस हत्या के लिए कुल 1 लाख डॉलर (लगभग 84 लाख रुपये) की डील तय हुई थी, जिसमें से 15 हजार डॉलर की एडवांस पेमेंट एक माध्यम के जरिए पहुंचाई गई। इसी दौरान कनाडा में आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या हुई, जिसके बाद निखिल ने कथित तौर पर हिटमैन से काम में तेजी लाने को कहा था। निखिल गुप्ता को 30 जून 2023 को चेक रिपब्लिक में गिरफ्तार किया गया था और करीब एक साल बाद जून 2024 में उसे अमेरिका प्रत्यर्पित किया गया। शुरुआत में खुद को निर्दोष बताने वाले निखिल ने अब सबूतों के आगे घुटने टेकते हुए अपना अपराध स्वीकार कर लिया है।
इस मामले में अमेरिकी एजेंसी एफबीआई ने विकास यादव को भी वांटेड घोषित किया है। हालांकि, भारत सरकार ने इस पूरे मामले पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि जिस व्यक्ति का नाम अमेरिकी चार्जशीट में आया है, वह अब भारत सरकार का कर्मचारी नहीं है। भारत ने इस मामले की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति भी गठित की है। वहीं, जिस गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की यह साजिश थी, वह भारत में यूएपीए के तहत घोषित आतंकी है। पंजाब के खानकोट का रहने वाला पन्नू अमेरिका और कनाडा की नागरिकता रखता है और लगातार भारत विरोधी गतिविधियों और अलगाववाद को बढ़ावा देने के मामलों में वांछित है। अमेरिकी अदालत का यह फैसला अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बीएनपी अध्यक्ष रहमान 16 या 17 फरवरी को ले सकते हैं प्रधानमंत्री की शपथ
15 Feb, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। बांग्लादेश में 13वें संसदीय चुनाव के बाद नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। नई संसद के लिए चुने गए सांसदों के शपथ ग्रहण की संभावना कल रविवार को जताई जा रही है। इसके बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के अध्यक्ष तारिक रहमान प्रधानमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। सूत्रों की मानें तो शपथ ग्रहण समारोह 16 या फिर 17 फरवरी की शाम को आयोजित किया जा सकता है। बांग्लादेश की राजनीतिक परंपरा के अनुसार प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद का शपथ ग्रहण आमतौर पर शाम के समय ही होता है।
इस बार के चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने बड़ी जीत दर्ज की है। 300 सदस्यीय संसद में 299 सीटों पर मतदान हुआ, जिनमें से बीएनपी और उसके सहयोगियों ने लगभग 212 सीटें हासिल की हैं। एक सीट पर उम्मीदवार के निधन के कारण मतदान स्थगित कर दिया गया था। चुनाव आयोग ने तीन सीटों के नतीजे फिलहाल रोक रखे हैं, क्योंकि संबंधित उम्मीदवारों के खिलाफ मामले अदालत में लंबित हैं।
इस्लामी दलों के गठबंधन, जिसका नेतृत्व जमात-ए-इस्लामी कर रही है, ने लगभग 70 सीटें जीतकर मुख्य विपक्ष के रूप में उभरने का संकेत दिया है। अन्य छोटे दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों ने करीब 17 सीटों पर सफलता पाई है।
यह चुनाव जुलाई 2024 के आंदोलन के बाद कराया गया, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का लंबा शासन समाप्त हो गया था। अचानक भड़की हिंसा के चलते शेख हसीना को भारत में शरण लेनी पड़ गई। फिलहाल आम चुनाव अंतरिम सरकार की देखरेख में संपन्न हुआ, जिसके प्रमुख सलाहकार नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस नेतृत्व कर रहे थे। इसे हाल के वर्षों में पहला वास्तविक प्रतिस्पर्धी चुनाव माना जा रहा है। मतदान प्रतिशत लगभग 59 फीसदी दर्ज किया गया।
संसदीय चुनाव के साथ ही हुआ जुलाई नेशनल चार्टर
संसदीय चुनाव के साथ ‘जुलाई नेशनल चार्टर’ पर राष्ट्रीय जनमत संग्रह भी कराया गया। प्रारंभिक रुझानों के अनुसार लगभग 65 प्रतिशत मतदाताओं ने इसका समर्थन किया है, हालांकि अंतिम परिणाम अभी घोषित होने बाकी हैं। मतदान के दौरान देशभर में करीब दस लाख सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे और छिटपुट घटनाओं को छोड़कर प्रक्रिया शांतिपूर्ण रही।
पीएम मोदी और पीएम शहबाज ने दी बधाई
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने तारिक रहमान और बीएनपी को जीत की बधाई देते हुए द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की उम्मीद जताई है। अब सबकी नजर नई सरकार के शपथ ग्रहण और नीतिगत दिशा पर टिकी है।
भारत ने भारी मात्रा में रूसी हथियार खरीदे वह यूक्रेन युद्ध में हो रहे धाराशाई
15 Feb, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वारसॉ। पोलैंड के विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की ने यूक्रेन युद्ध में रूसी हथियारों को लेकर कहा है कि भारत ने भारी मात्रा में रूसी हथियार खरीदे हैं और रूसी हथियार, यूक्रेन युद्ध में धाराशाई हो रहे हैं। रूसी तेल पर भारत का विरोध करने के बाद, पोलिश विदेश मंत्री अब भारत की डिफेंस खरीदी का मजाक उड़ा रहे हैं। पोलैंड, जिसके पाकिस्तान के साथ संबंध रहे हैं, पिछले महीने उनका भारतीय विदेश मंत्री ने द्विपक्षीय बैठक के दौरान नसीहत दी थी। एस जयशंकर ने पोलैंड को पाकिस्तान के आतंकवाद को लेकर डबल गेम की आलोचना की थी, लेकिन पोलैंड का पाकिस्तान से प्रेम कम होने का नाम नहीं ले रहा है। अब उन्होंने यूक्रेन युद्ध में रूसी हथियारों को लेकर भारत का मजाक उड़ाया है। ये सच है कि यूक्रेन युद्ध में रूसी हथियार धाराशाई हुए हैं, लेकिन उनकी परिस्थितियां अलग हैं। इसी बात को लेकर भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने पोलैंड के विदेश मंत्री को आईना दिखाया है। उन्होंने कहा है कि सिकोरस्की रूस का कट्टर दुश्मन है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कंवल सिब्बल ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा है कि रूसी मिलिट्री इक्विपमेंट ने भारत के बहुत काम आए हैं। उन्होंने लिखा कि ब्रह्मोस एक जबरदस्त हथियार है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एस-400 बहुत असरदार साबित हुआ। हमारे रक्षा मंत्री ने और एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने में सार्वजनिक तौर पर दिलचस्पी दिखाई है। ओरेशनिक समेत रूसी मिसाइलों की रेंज ने यूक्रेन युद्ध में खुद को साबित किया है। अगर रूसी मिलिट्री इक्विपमेंट काम नहीं करते हैं तो यूरोप क्यों कह रहा है, कि अगर रूस यूक्रेन में कामयाब होता है तो इससे यूरोप को खतरा होगा। यह डर क्यों है?
सिब्बल ने कहा कि पौलेंड के विदेश मंत्री सिकोरस्की की टाइमलाइन कन्फ्यूज्ड हैं। नॉन-अलाइंड पीरियड के दौरान भारत द्वारा खरीदे गए रूसी हथियार यूक्रेन में कैसे बेअसर साबित हुए? क्या आप अभी भी बीते युग में ही जी रहे हैं। बता दें ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के स्वदेशी हथियारों के साथ रूसी हथियारों ने अपनी क्षमताओं का शानदार प्रदर्शन किया था। एस-400 ने 314 किलोमीटर की दूरी से पाकिस्तान के सर्विलांस अवाक्स एयरक्राफ्ट को मारकर विश्वरिकॉर्ड कायम किया है। वहीं, ब्रह्मोस की मार पाकिस्तान कैसे भूल सकता है। ब्रह्मोस मिसाइलों ने ही पाकिस्तान के 11 एयरबेस पर सटीक हमले किए थे।
पाक पीएम शहबाज ने तारिक रहमान को दी जीत की बधाई, भाई कहकर किया संबोधित
15 Feb, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने बांग्लादेश चुनाव में जीत हासिल करने वाले तारिक रहमान से शुक्रवार शाम को फोन पर बात की है। शहबाज शरीफ ने एक्स पर पोस्ट में ये जानकारी दी। शहबाज ने रहमान को भाई कहकर संबोधित किया और फोन कॉल को गर्मजोशी भरा और दोस्ताना बताया। बांग्लादेश चुनाव नतीजे के बाद तारिक रहमान और शहबाज शरीफ की यह पहली बातचीत थी। इसके पहले भारत के पीएम नरेंद्र मोदी ने भी तारिक रहमान को फोन करके बधाई दी थी। बांग्लादेश चुनाव में तारिक रहमान की पार्टी बीएनपी ने प्रचंड बहुमत से जीत हासिल की है। तारिक रहमान का पीएम बनना तय है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक शहबाज शरीफ ने शुक्रवार रात में की गई पोस्ट में लिखा- आज शाम बांग्लादेश नेशलिस्ट पार्टी के चेयरमैन, मेरे भाई मिस्टर तारिक रहमान को आम चुनावों में उनकी पार्टी की शानदार जीत के बाद हमारी गर्मजोशी भरी और दोस्ताना फोन कॉल के दौरान दिल से बधाई। शहबाज ने आगे लिखा, पाकिस्तान बांग्लादेश के साथ अपने भाईचारे वाले रिश्तों को मजबूत करने, बेगम खालिदा जिया की विरासत को आगे बढ़ाने और शांति, तरक्की और खुशहाली के हमारे साझा लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की उम्मीद करता है। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने भी बांग्लादेश चुनाव में जीत पर तारिक रहमान को बधाई दी।
बता दें बांग्लादेश में 12 फरवरी को हुए चुनावों में बीएनपी ने बड़ी जीत हासिल की है। पार्टी को 299 सीटों पर हुए चुनाव में से 211 पर जीत मिली है। इसके साथ ही तारिक रहमान का बांग्लादेश का अगला पीएम बनने का रास्ता साफ है। अब बस उनके नाम के ऐलान होना बाकी है। बांग्लादेश चुनाव में जीत के बाद रहमान ने समावेशी सरकार बनाने का दावा किया है। उन्होंने कहा है कि नई सरकार सभी की रक्षा करेगी, फिर वे चाहे किसी भी धर्म, संप्रदाय में विश्वास रखते हों।
चीन में सड़क धंसी, 20 मीटर चौड़ा गड्ढा बना, पाइपलाइन फटने से हादसा
14 Feb, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शंघाई,। चीन के प्रमुख महानगर शंघाई में एक व्यस्त सड़क अचानक धंस जाने से हड़कंप मच गया। घटना मिनहांग डिस्ट्रिक्ट स्थित किक्सिन रोड के पास हुई, जहां सड़क की सतह कुछ ही सेकंड में धंसकर 10 से 20 मीटर चौड़े गड्ढे में तब्दील हो गई। पूरा हादसा पास लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गया।
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, घटना से पहले इलाके में पानी के रिसाव की शिकायत मिली थी। 11 फरवरी को निर्माण एजेंसियों ने सड़क के नीचे पानी के रिसाव की पहचान की थी और निगरानी की जा रही थी। आशंका जताई जा रही है कि मुख्य पाइपलाइन फटने के कारण जमीन के नीचे मिट्टी कमजोर हो गई, जिससे सड़क अचानक धंस गई। हादसे में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन आसपास की इमारतों में दरारें पड़ने की खबर है। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल बन गया। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर सड़क को तुरंत बंद कर यातायात डायवर्ट कर दिया।
बताया जा रहा है कि घटनास्थल के पास रेलवे लाइन निर्माण का काम चल रहा था। इस परियोजना से जुड़ी कंपनी चाईना रेलवे टनल ब्यूरो ने मौके पर आपात मरम्मत कार्य शुरू कर दिया है। भारी मशीनों की मदद से गड्ढे के किनारों की जांच की जा रही है और जमीन को स्थिर करने की कोशिश की जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गड्ढे के भीतर से लगातार पानी निकलता दिखाई दे रहा है, जिससे पाइपलाइन फटने की आशंका और मजबूत हो गई है। विशेषज्ञों की टीम यह पता लगाने में जुटी है कि रिसाव का स्रोत क्या है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएं। स्थानीय प्रशासन ने आसपास की इमारतों की संरचनात्मक जांच के आदेश दिए हैं और लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।
शेख हसीना के बेटे वाजेद बीएनपी से हाथ मिलाने को तैयार
14 Feb, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। बांग्लादेश में चुनाव के बाद मतगणना जारी और जल्द ही नतीजे आने वाले हैं। शुरुआती रुझानों में तारिक रहमान की पार्टी बीएनपी को कई सीटों पर जीती नजर आ रही है। हालांकि, जमात ए इस्लामी भी पीछे ही है। इन सबके बीच शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद जॉय ने चौंकाने वाला दावा किया है1 जॉय ने अपनी धुर विरोधी पार्टी, बीएनपी की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाने के संकेत दिए हैं। एक इंटरव्यू में वाजेद ने अपनी पार्टी के भविष्य के बारे में बात करते हुए माना किया कि मौजूदा हालातों में बीएनपी बांग्लादेश की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद बांग्लादेश में अवामी लीग पर बैन लगा हुआ है। ऐसे में जॉय ने और पार्टी अपने राजनीतिक भविष्य को बचाने के लिए ‘दुश्मन का दुश्मन दोस्त’ वाली रणनीति अपनाई है। उन्होंने खुलासा किया है कि उनकी पार्टी जल्द ही तारिक रहमान के साथ संपर्क करेगी। वाजेद का यह कदम जमात-ए-इस्लामी के बढ़ते प्रभाव को रोकने की एक सोची-समझी कोशिश मानी जा रही है। सजीब वाजेद ने कहा कि वे जल्द ही बीएनपी से संपर्क करेंगे। उनका यह बयान अवामी लीग की पुरानी रणनीति में एक बड़ा बदलाव है, जो दशकों से बीएनपी को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानती रही है।
वाजेद ने चेतावनी दी है कि अगर जमात सत्ता में आती है या संसद में प्रभाव बढ़ाती है, तो बांग्लादेश में आतंकवाद का दौर फिर शुरू हो जाएगा। उन्होंने दावा किया कि जमात के पास जनसमर्थन कम है और उसे केवल इसलिए बढ़त मिल रही है क्योंकि प्रगतिशील दलों को प्रचार नहीं करने दिया गया। बता दें 299 सीटों पर हुए मतदान के बाद मतगणना जारी है। शुरुआती रुझानों में बीएनपी गठबंधन और जमात-ए-इस्लामी के बीच कांटे की टक्कर है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक बीएनपी को 46.7फीसदी और जमात गठबंधन को 48.5फीसदी वोट मिलते दिख रहे हैं। जहां सजीब वाजेद भविष्य की बात कर रहे हैं, वहीं शेख हसीना ने भारत से जारी अपने बयान में इस चुनाव को फर्जी, अवैध और असंवैधानिक बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की है। उन्होंने दावा किया कि 11 फरवरी की रात को ही चुनावी धांधली की साजिश रची गई थी।
बाथरुम में फिसले या सैनिकों ने पीटा?
14 Feb, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के पूर्व सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा की गंभीर चोटों को लेकर चर्चाएं चल रही हैं वह अस्पताल में भर्ती हैं और उनका स्कल फ्रैक्चर बताया जा रहा है। जब पाकिस्तान में कानाफूसी शुरू हुई तो सेना और परिवार ने आधिकारिक तौर पर बयान जारी करके कहा कि ‘बाथरूम में फिसल जाने’ से उनका ये हाल हुआ। हालांकि भारतीय और अन्य अंतरराष्ट्रीय खुफिया सूत्र को अंदर की बात पता चली है। खुफिया सूत्रों ने बताया है कि बाजवा पर ये अटैक असल में फौजियों ने किया है।
मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है बाजवा के साथ ये घटना 10 फरवरी की सुबह तड़के 4:30 बजे हुई। आईएसपीआर और परिवार ने स्टेटमेंट जारी करते हुए कहा कि जनरल बाथरूम में फिसल गए और उनके सिर पर गंभीर चोटें आई हैं। रावपिंडी के कंबाइंड मिलिट्री हॉस्पिटल के आईसीयू में भर्ती बाजवा के सिर में फ्रैक्चर आया है और उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई है। इस घटना ने पाकिस्तान सेना के अंदर पनप रहे आंतरिक असंतोष और बदले की आग को एक बार फिर सतह पर ला दिया है।
जनरल बाजवा के साले नईम घुम्मन ने बताया कि जनरल नंगे पैर थे और बाथरूम में फिसल गए, जिससे उनके सिर पर गंभीर चोट आई है। इसके बाद आईएसपीआर ISPR ने भी पुष्टि की कि यह एक घरेलू दुर्घटना है और उनका सफल ऑपरेशन हो चुका है। हालांकि खुफिया सूत्रों का मानना है कि यह कोई साधारण बाथरूम में फिसल जाने की घटना नहीं है। असल में जनरल बाजवा को तीन सैन्य कर्मियों ने घेर कर पीटा। उन पर तब तक अटैक किया गया जब तक स्कल फ्रैक्चर नहीं हो गया। सूत्रों का दावा है कि 2022 में इमरान खान की सरकार गिराने के दौरान जनरल बाजवा ने आईएसआई को कुछ ऐसे अधिकारियों के परिवारों को निशाना बनाने का आदेश दिया था जो इस तख्तापलट का विरोध कर रहे थे। माना जा रहा है कि यह हमला उन्हीं पीड़ित अधिकारियों के परिजनों या जूनियर कर्मियों ने किया है।
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