हर किसी को नहीं मिलता पीएम विश्वकर्मा योजना का फायदा, जानिए कौन हैं अपात्र
केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही 'प्रधानमंत्री विश्वकर्मा कौशल सम्मान योजना' न केवल कारीगरों को प्रशिक्षित करने का एक माध्यम है, बल्कि यह उनके आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। इस योजना का लाभ उठाने के लिए यह जानना आवश्यक है कि इसमें पात्रता की शर्तें क्या हैं और कौन से वर्ग इस दायरे में आते हैं।
योजना के प्रमुख लाभ
इस योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं:
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प्रशिक्षण और स्टाइपैंड: लाभार्थियों को उनके कौशल को निखारने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। इस प्रशिक्षण अवधि के दौरान प्रत्येक दिन 500 रुपये का स्टाइपैंड प्रदान किया जाता है।
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टूलकिट प्रोत्साहन: आधुनिक उपकरणों और टूलकिट की खरीद के लिए 15,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है।
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सस्ता ऋण (लोन): व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए रियायती ब्याज दर पर 3 लाख रुपये तक का लोन उपलब्ध कराया जाता है। इसके तहत पहले 18 महीनों के लिए 1 लाख रुपये और उसके बाद अगले 30 महीनों के लिए 2 लाख रुपये तक का लोन लेने की सुविधा है।
कौन इस योजना से नहीं जुड़ सकता?
यह योजना विशेष रूप से 18 पारंपरिक व्यापारों से जुड़े कारीगरों और शिल्पकारों के लिए ही बनाई गई है। यदि कोई व्यक्ति इन निर्धारित श्रेणियों में नहीं आता है, तो वह इस योजना का पात्र नहीं है।
पात्र कारीगरों/शिल्पकारों की सूची
इस योजना के अंतर्गत निम्नलिखित 18 प्रकार के कार्यों से जुड़े लोग ही आवेदन कर सकते हैं:
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कारीगर: मोची/जूता बनाने वाले, नाई, धोबी और दर्जी।
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निर्माता: टोकरी/चटाई/झाड़ू निर्माता, गुड़िया और खिलौना निर्माता, नाव निर्माता, मछली पकड़ने के जाल (फिशिंग नेट) निर्माता, हथौड़ा और टूलकिट निर्माता, ताला बनाने वाले।
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शिल्प और निर्माण कार्य: अस्त्रकार, पत्थर तोड़ने वाले, पत्थर तराशने वाले, मूर्तिकार, राजमिस्त्री, मालाकार।
यदि आप इन श्रेणियों में से किसी में भी आते हैं, तो आप योजना के लिए अपना आवेदन प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। इसके विपरीत, यदि आप इन 18 पारंपरिक व्यवसायों से इतर किसी अन्य क्षेत्र में कार्यरत हैं, तो आप इस विशेष सरकारी योजना के लाभ हेतु पात्र नहीं माने जाएंगे।

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