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ईरान-सऊदी विदेश मंत्रियों की फोन पर हुई बातचीत, द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा
10 Apr, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। ईरान और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों के बीच हाल ही में फोन पर बातचीत हुई है, जिसमें दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा की गई। तेहरान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान से यह बातचीत की। हालांकि, इस वार्ता के समय को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी साझा नहीं की गई है।
दूसरी ओर, सऊदी अरब के सरकारी मीडिया के मुताबिक, प्रिंस फैसल बिन फरहान को बुधवार शाम कतर, संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन और तुर्किये के विदेश मंत्रियों के भी फोन आए थे। हालांकि, इस आधिकारिक बयान में ईरान के साथ हुई बातचीत का उल्लेख नहीं किया गया। गौरतलब है कि ईरान और सऊदी अरब लंबे समय से मध्य पूर्व में क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर प्रतिस्पर्धा करते रहे हैं। इस प्रतिस्पर्धा के पीछे राजनीतिक और आर्थिक हितों के साथ-साथ धार्मिक मतभेद भी एक बड़ी वजह रहे हैं। सऊदी अरब में सुन्नी मुस्लिम बहुसंख्यक हैं, जबकि ईरान में शिया समुदाय प्रमुख है, जिससे दोनों देशों के बीच वैचारिक टकराव भी बना रहता है।
संबंधों में साल 2023 में आया सुधार
दोनों देशों के संबंधों में 2023 में तब सुधार आया था, जब करीब सात साल बाद कूटनीतिक रिश्ते बहाल किए गए। इससे पहले रियाद द्वारा शिया धर्मगुरु शेख निमर अल-निमर को फांसी दिए जाने के बाद दोनों देशों के बीच संबंध टूट गए थे। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा बातचीत क्षेत्र में बदलते हालात के बीच दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकती है।
इजरायल ने दो टूक कहा- भरोसेमंद नहीं है पाकिस्तान, अमेरिका ने सिर्फ यूज किया
10 Apr, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेल अवीव। भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इजरायल पाकिस्तान को एक भरोसेमंद या क्रेडिबल प्लेयर के रूप में नहीं देखता है। अजार के अनुसार, अमेरिका अपनी रणनीतिक जरूरतों और विशिष्ट कारणों से पाकिस्तान की मध्यस्थता सेवाओं का उपयोग कर रहा है, ठीक उसी तरह जैसे उसने पहले कतर और तुर्की जैसे समस्याग्रस्त देशों का उपयोग किया था।
मध्य पूर्व में शांति की उम्मीदों के बीच घोषित युद्धविराम शुरू होते ही विवादों की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ घोषित दो हफ्ते के युद्धविराम को अभी 24 घंटे भी पूरे नहीं हुए थे कि धरातल पर स्थितियां तनावपूर्ण हो गईं। इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल युद्धविराम की स्थिरता पर सवाल उठाए हैं, बल्कि वैश्विक कूटनीति में पाकिस्तान की भूमिका को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। विवाद की मुख्य जड़ लेबनान को लेकर किए गए अलग-अलग दावे बने। ईरान और पाकिस्तान का तर्क है कि सीजफायर की शर्तों में लेबनान पर हमले रोकना शामिल था, लेकिन इजरायल ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया। इजरायल के स्पष्ट इनकार के बाद लेबनान में भारी हवाई हमले हुए, जिनमें सैकड़ों लोगों के मारे जाने की सूचना है। इन हमलों ने स्पष्ट कर दिया कि मध्यस्थता करने वाले देश शर्तों को लेकर स्पष्टता सुनिश्चित करने में विफल रहे हैं।
इजरायल का यह रुख एक सख्त संदेश है कि कूटनीतिक गलियारों में केवल मध्यस्थता का दावा करना काफी नहीं है, बल्कि उसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साख होना अनिवार्य है। इजरायली राजदूत ने जोर देकर कहा कि उनके देश के लिए सबसे महत्वपूर्ण अमेरिका के साथ सुरक्षा परिणामों पर तालमेल बिठाना है, विशेष रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल क्षमता जैसे संवेदनशील मुद्दों पर। वर्तमान परिस्थितियां दर्शाती हैं कि जब तक मध्यस्थ अपनी भूमिका में पारदर्शिता और स्पष्टता नहीं लाते, तब तक ऐसे युद्धविराम स्थायी शांति के बजाय नए संघर्षों का आधार बनते रहेंगे। इजरायल के सख्त बयानों ने यह साफ कर दिया है कि वह अपनी सुरक्षा के मामले में किसी भी ऐसे देश पर भरोसा करने को तैयार नहीं है जिसकी छवि संदिग्ध हो।
सैन्य सहयोग से पीछे हटने की खबरों पर चीन की सफाई
9 Apr, 2026 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग|अमेरिका और इस्राइल के साथ ईरान के तनाव के बीच चीन ने बड़ा बयान दिया है। चीन ने उन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें कहा जा रहा था कि उसने युद्ध के दौरान ईरान की सैन्य मदद की। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है और चीन की भूमिका पर बहस शुरू हो गई है।
दरअसल, चीन के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता झांग शियाओगांग ने साफ कहा कि चीनी कंपनियों द्वारा ईरान को सैटेलाइट तस्वीरें या चिप बनाने का उपकरण देने की खबरें पूरी तरह गलत हैं। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ अफवाह और भ्रामक जानकारी है, जिसका कोई आधार नहीं है। चीन ने अमेरिका के उन आरोपों को भी खारिज किया, जिनमें कहा गया था कि चीन और रूस ईरान की मदद कर रहे हैं।
क्या चीन ने ईरान को कोई सैन्य मदद दी थी?
चीन ने साफ शब्दों में कहा कि उसने ईरान को किसी भी तरह की सैन्य सहायता नहीं दी है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि चीनी कंपनी ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों की तस्वीरें जारी की थीं और सेमीकंडक्टर उपकरण उपलब्ध कराए थे, लेकिन चीन ने इन सभी आरोपों को नकार दिया।
अमेरिका के आरोपों पर क्या बोला चीन?
चीन ने अमेरिका के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि कुछ देश जानबूझकर चीन के खिलाफ गलत जानकारी फैला रहे हैं। चीन ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय समझता है कि कौन युद्ध को बढ़ावा दे रहा है और कौन शांति की बात कर रहा है।
चीन ने अपनी भूमिका को कैसे बताया?
चीन ने कहा कि वह हमेशा से ईरान मुद्दे पर निष्पक्ष और संतुलित रुख अपनाता रहा है। उसने दावा किया कि वह लगातार शांति वार्ता को बढ़ावा देता रहा है और कभी भी हालात को भड़काने का काम नहीं किया। चीन ने खुद को शांति समर्थक देश बताया। हालांकि माना जा रहा है कि अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप के सख्त रुख और टैरिफ नीति के चलते चीन पर दबाव बना हुआ है। ऐसे में चीन का यह बयान वैश्विक कूटनीति में संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
आतंक के साए में कूटनीति, पाकिस्तान की भूमिका पर उठे सवाल
9 Apr, 2026 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ईरान | ईरान और अमेरिका के बीच बीते एक महीने से ज्यादा समय से जारी युद्ध कुछ दिन के लिए टल गया है। दोनों देशों के बीच हुए इस युद्ध विराम में पाकिस्तान, तुर्किये और मिस्र ने भी भूमिका निभाई है। अब आगे के समझौते के लिए ईरान और अमेरिका इस्लामाबाद में मिलेंगे। भले ही पाकिस्तान ने इस संघर्ष को रुकवाने के लिए लगातार ट्रंप प्रशासन और ईरानी शासन के बीच संदेशों का आदान-प्रदान किया, लेकिन यह युद्ध विराम भी सिर्फ अस्थायी ही है और दो हफ्तों के लिए तय किया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और उसके फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के जिक्र के बाद कई तरह की चिंताएं जताई जा रही हैं।विश्लेषकों की तरफ से यह चिंता जताई गई है कि आखिर कैसे लंबे समय तक अपनी आतंकी गतिविधियों और आतंकवादियों के सुरक्षित पनाहगाह बने रहने की वजह से अलग-थलग हुआ पाकिस्तान अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर दो देशों के बीच युद्ध विराम के लिए बातचीत का जरिया बन रहा है? वह भी तब जब इस युद्ध के बीच खुद पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में तालिबान पर हमलों के नाम पर वहां आम लोगों को निशाना बनाया है। आखिर डोनाल्ड ट्रंप के दूसरी बार शासन में आने के बाद से ऐसा क्या-क्या हुआ है, जो पाकिस्तान के लिए फायदेमंद बन गया? आइये जानते हैं...
ट्रंप के फिर शासन में आने के बाद कैसे बढ़े अमेरिका-पाकिस्तान के रिश्ते?
बीते करीब डेढ़ दशक से पाकिस्तान की बढ़ती आतंकी गतिविधियों और उसके आतंकियों के पनाहगाह बनने की वजह से यह देश लगातार वैश्विक परिदृश्य में अलग-थलग पड़ा था। खासकर अमेरिका में राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल से लेकर डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल और फिर जो बाइडन के नेतृत्व वाली सरकार में भी पाकिस्तान हाशिए पर ही रहा। हालांकि, ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अमेरिका और पाकिस्तान के संबंधों में एक बड़ा और आश्चर्यजनक बदलाव देखने को मिला है। बताया जाता है कि रिश्तों में आई इस अप्रत्याशित गर्माहट के पीछे पाकिस्तान की कूटनीति, भारी लॉबिंग और ट्रंप के साथ किए गए व्यापारिक सौदों का बड़ा हाथ रहा है।
वॉशिंगटन में भारी लॉबिंग और ट्रंप के करीबियों की नियुक्ति
डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका की सत्ता में आने के बाद से पाकिस्तान ने अमेरिकी नीतियों को अपने पक्ष में करने के लिए करोड़ों डॉलर खर्च किए हैं। अप्रैल-मई 2025 के बीच वॉशिंगटन में लॉबिंग पर पाकिस्तान ने भारत के मुकाबले तीन गुना अधिक पैसा खर्च किया। पाकिस्तान ने अपनी लॉबिंग के लिए ट्रंप के पूर्व बॉडीगार्ड कीथ शिलर और ट्रंप ऑर्गनाइजेशन के पूर्व अधिकारी जॉर्ज सोरियल जैसी ट्रंप की बेहद करीबी हस्तियों को काम पर रखा।
व्यक्तिगत चापलूसी और नोबेल पुरस्कार का नामांकन
पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख असीम मुनीर ने ट्रंप को खुश करने के लिए उनकी जमकर प्रशंसा की कूटनीति अपनाई। मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य संघर्ष को रोकने का पूरा श्रेय ट्रंप को दिया गया और पाकिस्तान ने उन्हें वैश्विक शांतिदूत बताते हुए नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित कर दिया। इसके जवाब में ट्रंप ने भी मुनीर को एक महान व्यक्ति कहना शुरू कर दिया। जून 2025 में ट्रंप ने व्हाइट हाउस में मुनीर के साथ एक विशेष निजी लंच भी किया, जो पाकिस्तानी कूटनीति के लिए अहम पड़ाव रही। बताया जाता है कि इस लंच से ठीक पहले डोनाल्ड ट्रंप कनाडा में जी20 सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे थे। यहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी भारत लौटने से पहले व्हाइट हाउस आने का न्योता दिया था। हालांकि, पीएम मोदी ने इस आमंत्रण को ठुकराते हुए अपने पूर्व के कार्यक्रम को महत्व देने की बात कही।
ट्रंप परिवार के साथ व्यापारिक और क्रिप्टो सौदे
कूटनीति के साथ-साथ पाकिस्तान ने ट्रंप को लुभाने के लिए बड़े व्यापारिक प्रस्ताव भी दिए। पाकिस्तान ने ट्रंप परिवार की क्रिप्टो कंपनी- वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल के साथ साझेदारी की पेशकश की और अमेरिका के सामने 50 करोड़ डॉलर का अहम खनिजों के खनन का समझौता पेश किया। इसके अलावा, पाकिस्तान ने न्यूयॉर्क में अपने बंद पड़े रूजवेल्ट होटल को फिर से विकसित करने का सौदा भी ट्रंप के एक करीबी स्टीव विटकॉफ के साथ किया।
अपने कृषि क्षेत्र को कुर्बान करने में भी गुरेज नहीं
इस लॉबिंग और कूटनीतिक प्रयासों का सीधा आर्थिक फायदा पाकिस्तान को मिला। ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तानी सामानों पर लगने वाले टैरिफ को घटाकर 19% कर दिया, जो प्रमुख एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में सबसे कम दरों में से एक है, जबकि इसके ठीक उलट भारत के टैरिफ को बढ़ाकर 50% कर दिया गया। पाकिस्तान ने इसके बदले अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए अपने बाजार भी खोल दिए।
अपने ही पाले आतंकियों को सौंपकर नजर में आया
अमेरिका की नजर में पाकिस्तान की अहमियत तब और बढ़ गई जब पाकिस्तान ने 2021 के काबुल एयरपोर्ट (एबी गेट) हमले के एक कथित साजिशकर्ता (आईएसआईएस आतंकी) को पकड़कर अमेरिका को सौंप दिया। ट्रंप ने इसके लिए कांग्रेस में खुले तौर पर पाकिस्तान को धन्यवाद दिया। दूसरी तरफ इसी पाकिस्तान में 2011 में ओसामा बिन-लादेन छिपा हुआ था। जिसे अमेरिकी सैनिकों ने पाकिस्तान में घुसकर मारा था। इसके अलावा लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक हाफिज सईद, जो कि अमेरिका-संयुक्त राष्ट्र की तरफ से घोषित आतंकी है, वह भी पाकिस्तान में ही छिपा हुआ है। इसी तरह हिज्बुल मुजाहिद्दीन का सैयद सलाउद्दीन, डी-गैंग का सरगना दाऊद इब्राहिम, और अन्य कई नाम, जिन्हें अमेरिका वांछित आतंकी घोषित कर चुका है, वह भी लगातार पाकिस्तान में छिपे हैं, लेकिन ट्रंप ने इसे पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है।
क्या अमेरिकी फायदे के लिए पाकिस्तान फिर मोहरा बना?
अमेरिका ऐतिहासिक रूप से और वर्तमान समय में भी अपने भू-राजनीतिक और सुरक्षा लक्ष्यों को हासिल करने के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल करता रहा है। 1980 का दशक: अमेरिका ने अफगानिस्तान में सोवियत संघ के खिलाफ लड़ने वाले मुजाहिदीन को पैसे और हथियार मुहैया कराने के लिए पाकिस्तान का भरपूर इस्तेमाल किया था।9/11 के बाद का युद्ध: 2001 के हमलों के बाद 'आतंकवाद के खिलाफ युद्ध' के नाम पर भी अमेरिका ने पाकिस्तान को अपना एक प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी बनाकर अफगानिस्तान में अपने ऑपरेशन्स के लिए उसका इस्तेमाल किया। हालांकि, बाद में ओसामा बिन-लादेन का पनाहगार पाकिस्तान ही निकला था।और अब ट्रंप का दौर: हाल ही में खबर आई कि अमेरिका-ईरान के बीच जो युद्ध विराम हुआ, इसमें पाकिस्तान से ज्यादा खुद ट्रंप प्रशासन की भूमिका रही। द फाइनेंशियल टाइम्स और न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध से छुटकारा पाना चाहते थे। इसलिए उन्होंने पाकिस्तान पर ईरान को युद्धविराम के लिए मनाने का दबाव बनाया। बाद में जब ईरान ने अमेरिका की 15-सूत्रीय शर्तों को मानने से इनकार कर दिया, तो ट्रंप ने ईरान की 10-सूत्रीय मांगों पर ही विचार करने की हामी भर दी। रिपोर्ट के मुताबिक, इसे लेकर पाकिस्तान को युद्ध विराम से जुड़ा एक संदेश भेजा गया, जिसे व्हाइट हाउस से मंजूरी मिली थी। इसी युद्ध विराम के संदेश को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने जस का तस कॉपी-पेस्ट कर दिया, जिससे यह खुलासा हो गया कि युद्ध विराम का संदेश उन्हें किसी और जरिए से आया था।
क्या सिर्फ अमेरिका ने पाकिस्तान का इस्तेमाल किया?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिश्ता केवल एकतरफा नहीं है। मौजूदा परिदृश्य में, पाकिस्तान का सैन्य नेतृत्व भी अपने निजी और घरेलू फायदों के लिए अमेरिका (खासकर ट्रंप प्रशासन) का बहुत चालाकी से इस्तेमाल कर रहा है।हाल ही में पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर ने भारी लॉबिंग और कुछ समझौतों के जरिए डोनाल्ड ट्रंप से रिश्ते मजबूत किए और अपने लिए ट्रंप का समर्थन हासिल किया। इस अमेरिकी समर्थन का फायदा उठाकर मुनीर ने पाकिस्तान में 27वां संवैधानिक संशोधन पारित करवा लिया है, जिसने उन्हें चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज के तौर पर निरंकुश शक्तियां और जीवन भर के लिए कानूनी छूट दे दी है। अमेरिका ने पाकिस्तान के इस संवैधानिक तख्तापलट पर पूरी तरह से चुप्पी साधी हुई है।इसके अलावा पाकिस्तान अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए भी अमेरिका के साथ रिश्तों को तवज्जो देने की कोशिश में जुटा है। इसके जरिए वह एफएटीएफ की आतंकी देशों की सूची में जाने से बचने की कोशिश कर रहा है। साथ ही लगातार अलग-थलग होने की वजह से हुए नुकसानों को ट्रंप के जरिए कम करने की कोशिश में भी लगा है।
तानों को बनाया ताकत, भिवानी के भाइयों ने रचा इतिहास
9 Apr, 2026 01:53 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तोशाम/भिवानी। आलोचना हर बार इंसान के हौसलों को नहीं तोड़ती बल्कि मंजिल पाने के जज्बे को और मजबूत कर देती है। भिवानी जिले के संडवा गांव निवासी 2 चचेरे भाई सुमित और अनुज ने ऐसा ही उदाहरण पेश किया है। संगीत की बात करने पर कभी लोगों के ताने सुनने वाले इन दो भाइयों ने हरियाणवी गाने बैरण की बदौलत लोगों के दिलों पर अपनी छाप छोड़ दी है। बिलबोर्ड जैसे बड़े प्लेटफॉर्म पर यह गाना पिछले तीन सप्ताह से टॉप रैंकिंग में बना हुआ है। दोनों भाइयों की प्रतिभा का चर्चा हर किसी की जुबान पर है। गाने में अनुज ने अपनी आवाज दी है और सुमित ने म्यूजिक कंपोज किया है। बैरण गाने को यू-ट्यूब पर अभी तक 70 मिलियन से ज्यादा लोग देख चुके हैं। सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर गाने को रील्स में यूज किया जा रहा है।
शौक को बनाया जुनून, मिल गई सफलता
अनुज और सुमित बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही गाना गाने का शौक था। कोरोना आने पर 2020 में लॉकडाउन लगा तो उन्होंने गायन क्षेत्र में ही करियर बनाने की ठान ली। उन्होंने 2019 में एक गाना लिखा। उन्होंने अपने परिवार से 40 हजार रुपए लेकर हिसार के एक म्यूजिक प्रोड्यूसर से गाना तैयार करवाया। गाने का म्यूजिक दोनों भाइयों को पसंद नहीं आया। इसके बाद 5 और गाने रिलीज किए, लेकिन सफलता नहीं मिली लेकिन छठे गाने बैरण ने तकदीर बदल दी।
कोरोना काल में काम ने पकड़ी रफ्तार
अनुज ने बताया 2020 में कोरोना महामारी के दौरान गाने की सही शुरुआत हुई। हारमोनियम और कंप्यूटर खरीदा। यू-ट्यूब से प्रशिक्षण लिया। 2024 में यू-ट्यूब पर बंजारा के नाम से चैनल बनाया। इसी चैनल से उन्होंने अपने गाने रिलीज करने शुरू कर दिए। 'सूट्स विद मी' पहला गाना रिलीज किया। उसके बाद उन्होंने दूसरा गाना 'डिफरेंट टॉक', आशिक आवारा, मौज, हाय रै रिलीज किया। ये गाने नहीं चले। आखिर में बैरण गाना लिखा। इसका म्यूजिक कंपोज करने के साथ चंडीगढ़ में वीडियो भी शूट किया लेकिन पंसद नहीं आया। आखिर में 23 जनवरी को बैरण ऑडियो सांग रिलीज किया। लोग इस गाने को पसंद करने लगे। इसके बाद एनिमेटेड वीडियो लगाने का प्लान आया। 13 फरवरी को एनिमेटेड वीडियो रिलीज किया।
लोग कहते थे इन गानों में कुछ नहीं रखा
अनुज ने बताया कि कोरोना में लॉकडाउन के दौरान जब उन्होंने गाने बनाना शुरू किया तो कुछ लोग उनसे कहते थे कि गानों में कुछ नहीं रखा है। माता-पिता को भी यही कहते थे कि बच्चों को पढ़ा-लिखाकर आगे बढ़ाओ, क्योंकि गाने के क्षेत्र में सबको कामयाबी नहीं मिलती। माता-पिता ने लोगों की बातों पर ध्यान न देकर हमार साथ मिला। दोनों भाइयों ने हार नहीं मानी और आज हर कोई उनके घर पर पहुंचकर उन्हें बधाई दे रहा है।
बिलबोर्ड इंडिया की टॉप रैंकिंग में आया गाना
अनुज ने बताया गाने के बोल लिखने के दौरान उन्होंने बार-बार इसके लिरिक्स बदले। गाने के बोल हैं- “हो, मन्नै सांभ-सांभ राखे तेरे झांझरा के जोड़े। मेरी गेल रो-रो ये भी छोरी बावले से होरे। मन्नै आए जावै ख्याल तेरे, खाए जावै ख्याल तेरे। जीण कोन्या देती, हाय बैरी तन्हाई मन्नै।” 17 मार्च को बैरण गाना बिलबोर्ड इंडिया की टॉप रैंकिंग में आ गया। बिलबोर्ड इंडिया कैटेगरी अनुसार सबसे ज्यादा सुने जाने वाले गानों की रैंक तय करता है। सिंगर की पॉपुलैरिटी, फॉलोअर्स, सोशल मीडिया एंगेजमेंट देखी जाती है। 50 हजार में तैयार हुए गाने के लोग मुरीद हो गए।
पॉपुलैरिटी के बाद बॉलीवुड से भी ऑफर आए
अनुज ने बताया कि बिलबोर्ड इंडिया की नंबर वन रैंकिंग में आने के बाद हरियाणा, पंजाब और बॉलीवुड से उन्हें लगातार ऑफर आ रहे हैं। उनकी मुंबई में एक बड़ी कंपनी के साथ भी बातचीत हुई, लेकिन वहां पर ठीक नहीं लगा और इसलिए काम नहीं किया। हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा, केडी, अमित सैनी रोहतक की तरफ से भी साथ काम करने के लिए ऑफर आए। पंजाब से दिलप्रीत ढिल्लों की तरफ से भी ऑफर मिला।
ये है पारिवारिक बैकग्राउंड
सुमित के पिता सत्यवान पीटीआई अध्यापक हैं। उन्होंने अंबाला पॉलिटेक्निक से मैकेनिकल ट्रेड में कोर्स किया। उसके बाद हिसार एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी से एग्रीकल्चर में बीटेक की। सुमित भी गाने के साथ म्यूजिक कंपोज करते हैं। उनका छोटा भाई सहायक प्रोफसर है। वहीं अनुज के पिता राजेंद्र सिंह जेबीटी अध्यापक हैं। अनुज की एक बड़ी बहन भी है। उसकी बहन ने जेआरएफ क्वालीफाई किया हुआ है। अनुज ने पॉलिटिकल साइंस में एमए करने के बाद नेट का एग्जाम भी क्रैक किया। अनुज ने बताया कि गूगल की टीम ने उन्हें फोन कर मुंबई बुलाया था। अभी वे मुंबई में हैं।
भारतीय समुदाय पर भेदभाव का मामला, एचएएफ पहुंचा अदालत
9 Apr, 2026 01:27 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कैलिफोर्निया | अमेरिका में जाति आधारित भेदभाव को लेकर विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (HAF) ने कैलिफोर्निया की नागरिक अधिकार नियामक एजेंसी के खिलाफ नौवीं सर्किट अपील न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। संगठन का आरोप है कि एजेंसी ने गलत तरीके से जाति को हिंदू धर्म से जोड़ते हुए भारतीय और दक्षिण एशियाई समुदायों को निशाना बनाया है।6 अप्रैल को दाखिल जवाबी याचिका में एचएएफ ने अदालत से अनुरोध किया है कि निचली अदालत द्वारा उसके मुकदमे को खारिज करने में जिन प्रक्रियात्मक बाधाओं का हवाला दिया गया था, उन्हें हटाया जाए। संगठन का कहना है कि जिला अदालत ने उसके दावों के मूल मुद्दों पर विचार किए बिना ही मामला खारिज कर दिया।
क्यों हो रहा यह विवाद?
यह पूरा विवाद कैलिफोर्निया नागरिक अधिकार विभाग (CRD) द्वारा सिस्को सिस्टम्स और उसके दो प्रबंधकों के खिलाफ दर्ज शिकायत से जुड़ा है। इस शिकायत में जाति के आधार पर भेदभाव के आरोप लगाए गए थे और यह कार्रवाई कैलिफोर्निया के फेयर एम्प्लॉयमेंट एंड हाउसिंग एक्ट के तहत की गई थी। सीआरडी ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि उसने सिस्को और उसके पूर्व प्रबंधकों के खिलाफ जाति-आधारित भेदभाव का मामला दर्ज किया है।एचएएफ का आरोप है कि सीआरडी ने अपनी कार्रवाई में जाति को हिंदू धर्म और भारतीय मूल के कर्मचारियों से जोड़ने की कोशिश की। संगठन के मुताबिक, एजेंसी की शिकायत में जाति शब्द का बार-बार इस्तेमाल किया गया और यह धारणा बनाई गई कि भारतीय कर्मचारियों के बीच जाति-आधारित भेदभाव होता है, जिसे कंपनी को रोकना चाहिए था।
एजेंसी की कार्रवाई नस्लवादी और तथ्यहीन धारणाओं पर आधारित है
संगठन ने यह भी कहा कि एजेंसी की प्रस्तुति भारतीयों और हिंदुओं के बारे में नस्लवादी और तथ्यहीन धारणाओं पर आधारित है। एचएएफ ने सीआरडी के एक पुराने बयान का हवाला दिया, जिसमें भारत की जाति व्यवस्था को कठोर हिंदू सामाजिक और धार्मिक पदानुक्रम बताया गया था। हालांकि, बाद में विभाग ने इस विवादित वाक्यांश को हटा दिया और मामले को अप्रासंगिक बताया, लेकिन संगठन का कहना है कि इससे मूल समस्या खत्म नहीं होती।फाउंडेशन का कहना है कि हिंदू सामाजिक और धार्मिक पदानुक्रम जैसे शब्द हटाने के बावजूद सीआरडी अब भी कंपनी के भारतीय, दक्षिण एशियाई और हिंदू कर्मचारियों पर जाति से जुड़ी नीतियां लागू करने की कोशिश कर रहा है।
इस मामले का असर केवल एक केस तक सीमित नहीं
एचएएफ की सीनियर लीगल डायरेक्टर निधि शाह ने चेतावनी दी कि इस मामले का असर सिर्फ एक केस तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि हिंदू अमेरिकी, भारतीय अमेरिकी और दक्षिण एशियाई अमेरिकी समुदाय इस मुद्दे को लेकर चिंतित हैं।शाह ने आरोप लगाया कि नागरिक अधिकार विभाग अपनी प्रवर्तन शक्तियों का इस्तेमाल उन्हीं अल्पसंख्यक समूहों को अलग करने के लिए कर रहा है, जिनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी उस पर है। उन्होंने कहा कि कैलिफोर्निया के लोग, नियोक्ता और कारोबारी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।उन्होंने यह भी कहा कि एजेंसी जाति के आधार पर कार्रवाई करते हुए इसका दोष हिंदू धर्म पर डाल रही है और यह आशंका जताई कि भविष्य में और हिंदू संगठनों या व्यक्तियों को निशाना बनाया जा सकता है।
आदियाला जेल से जुड़े मामले में बड़ा एक्शन, इमरान खान परिवार पर आरोप
9 Apr, 2026 01:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रावलपिंडी | पाकिस्तान के रावलपिंडी में आदियाला रोड पर हुए विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बहनों, कई सांसदों और करीब 1,400 अज्ञात लोगों के खिलाफ आतंकवाद निरोधक कानून के तहत मामला दर्ज किया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह एफआईआर बुधवार को आदियाला चेकपोस्ट के प्रभारी सब-इंस्पेक्टर की शिकायत पर दर्ज की गई।पुलिस ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शनकारियों ने कानून-व्यवस्था को चुनौती दी, पथराव किया और पुलिस पर हमला किया, जिससे कम से कम नौ पुलिसकर्मी घायल हो गए। एफआईआर में हत्या के प्रयास और सरकारी काम में बाधा डालने जैसी गंभीर धाराएं भी शामिल की गई हैं।
क्या है मामला?
दरअसल, इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने अदियाला जेल में बंद अपने नेता से मुलाकात पर लगे प्रतिबंध के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आह्वान किया था। हालांकि, प्रशासन ने पूरे जिले में धारा 144 लागू कर दी थी, जिसके तहत 15 दिनों के लिए किसी भी तरह के सार्वजनिक जमावड़े पर रोक लगा दी गई।कड़े प्रतिबंधों के बीच पुलिस ने जेल के बाहर प्रदर्शन कर रहे पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। इनमें इमरान खान की बहनें नूरीन नियाजी और उज्मा खानम भी शामिल हैं। पुलिस का दावा है कि मौके पर 41 संदिग्धों को पकड़ा गया था, लेकिन वे बाद में फरार हो गए, जबकि कई अन्य लोग भी घटनास्थल से भाग निकले।
एफआईआर में क्या आया सामने?
एफआईआर में यह भी उल्लेख किया गया है कि पथराव और लाठियों के इस्तेमाल से सरकारी और निजी वाहनों को नुकसान पहुंचा। पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने राजनीतिक लाभ के लिए जानबूझकर अशांति फैलाने की कोशिश की, ताकि पंजाब की प्रांतीय सरकार पर दबाव बनाया जा सके।
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकर ने की आलोचना
वहीं, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। संगठन ने इसे अवैध करार देते हुए कहा कि यह पाकिस्तान में शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को दबाने का एक और उदाहरण है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का हमला, नाटो और सहयोगियों पर उठाए सवाल
9 Apr, 2026 12:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन | अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ग्रीनलैंड को लेकर विवादित टिप्पणी कर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज कर दी है। ईरान के साथ हालिया संघर्ष विराम के बाद ट्रंप ने नाटो देशों पर तीखा हमला बोला और सहयोग की कमी पर सवाल उठाए।ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा 'नाटो हमारे साथ तब नहीं था जब हमें उनकी जरूरत थी और आगे भी नहीं होगा। ग्रीनलैंड को याद रखें, वह बड़ा और खराब तरीके से संचालित बर्फ का टुकड़ा!'ग्रीनलैंड, जो डेनमार्क के अधीन एक स्वायत्त क्षेत्र है, लंबे समय से अमेरिका की रणनीतिक नजर में रहा है। ट्रंप पहले भी इस क्षेत्र को खरीदने या नियंत्रण में लेने की बात कह चुके हैं। ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति और खनिज संसाधन इसे वैश्विक राजनीति में महत्वपूर्ण बनाते हैं, खासकर रूस और चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच।
NATO पर ट्रंप का निशाना
नाटो को लेकर ट्रंप की नाराजगी नई नहीं है, लेकिन इस बार उनका बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम हुआ है। ट्रंप का कहना है कि युद्ध के दौरान कई सहयोगी देश अमेरिका के साथ खड़े नहीं हुए। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि जापान, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और नाटो देशों ने अपेक्षित समर्थन नहीं दिया।
यूरोप में बढ़ी चिंता
ट्रंप के बयानों से यूरोपीय देशों में चिंता बढ़ गई है। फ्रांस और जर्मनी ने पहले ही यूरोपीय संघ से सुरक्षा मामलों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की अपील की थी। यूरोपीय नेताओं ने स्पष्ट किया है कि ग्रीनलैंड के भविष्य का फैसला वहां की जनता ही करेगी और किसी भी बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
ईरान के साथ थम गई जंग
गौरतलब है कि हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच एक अस्थायी युद्ध विराम समझौता हुआ है। दोनों देशों ने 10 सूत्रीय योजना पर सहमति जताई है और आगे की बातचीत के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में बैठक तय की गई है। यह समझौता कई हफ्तों से जारी तनाव और संघर्ष के बाद संभव हो पाया है, जिससे फिलहाल हालात में कुछ स्थिरता आई है।
रक्षा खर्च में बढ़ोतरी से घरेलू उत्पादन को बढ़ावा, IMF की रिपोर्ट
9 Apr, 2026 12:07 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन | अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भारत के रक्षा क्षेत्र में बढ़ते स्वदेशी उत्पादन को देश की आर्थिक वृद्धि के लिए एक महत्वपूर्ण सकारात्मक कदम बताया है। आईएमएफ के एक हालिया विश्लेषण के अनुसार, जब सैन्य खर्च स्थानीय उद्योगों को समर्थन देता है, तो यह न केवल उत्पादन में बढ़ोतरी करता है बल्कि समग्र अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करता है।आईएमएफ के वैश्विक रक्षा रुझानों पर आधारित इस विश्लेषण में कहा गया है कि रक्षा क्षेत्र में होने वाली वृद्धि अल्पावधि में आर्थिक गतिविधियों को तेज कर सकती है। इससे उपभोग और निवेश दोनों में वृद्धि देखी जा सकती है, जो अर्थव्यवस्था के लिए एक शुभ संकेत है।यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब दुनिया भर में भू-राजनीतिक तनावों के बढ़ते माहौल के बीच रक्षा खर्च में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। हाल के वर्षों में करीब आधे देशों ने अपने रक्षा बजट में वृद्धि की है, जिसने शीत युद्ध के बाद देखी गई गिरावट को पलट दिया है।
घरेलू उत्पादन पर जोर, फायदे अनेक
भारत के संदर्भ में आईएमएफ के निष्कर्ष स्पष्ट रूप से आर्थिक बढ़त की ओर इशारा करते हैं। आईएमएफ का मानना है कि जब रक्षा खर्च आयात पर निर्भर रहने के बजाय घरेलू उत्पादन पर आधारित होता है, तो इसके फायदे और भी अधिक हो जाते हैं।आईएमएफ ने कहा है कि रक्षा खर्च का मल्टीप्लायर औसतन 1 के करीब होता है, जिसका अर्थ है कि खर्च में की गई हर बढ़ोतरी मोटे तौर पर आर्थिक उत्पादन में वैसी ही बढ़ोतरी में बदल जाती है। हालांकि, यह प्रभाव देशों के बीच अलग-अलग होता है। जिन देशों की हथियारों के आयात पर निर्भरता अधिक होती है, उनमें रक्षा खर्च मल्टीप्लायर छोटे होते हैं, क्योंकि मांग का एक हिस्सा विदेशों में चला जाता है।यह अंतर भारत के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है। भारत ने विदेशी हथियारों पर अपनी निर्भरता कम करने और एक मजबूत घरेलू रक्षा आधार स्थापित करने के प्रयासों को तेज किया है। रक्षा खर्च का एक बड़ा हिस्सा अब स्थानीय विनिर्माण, निजी कंपनियों और संयुक्त उद्यमों की ओर निर्देशित किया जा रहा है।
आर्थिक संतुलन और रोजगार सृजन
आईएमएफ ने यह भी बताया है कि आयात पर अधिक खर्च बाहरी संतुलन को कमजोर कर सकता है, क्योंकि मांग आयातित उपकरणों की ओर बढ़ जाती है। भारत का स्वदेशीकरण पर जोर ऐसे दबावों को कम करने में सहायक है। इससे मांग का एक बड़ा हिस्सा देश की अर्थव्यवस्था के भीतर ही बना रहता है, जो रोजगार सृजन और निवेश को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।रिपोर्ट के अनुसार, रक्षा खर्च एक लक्षित मांग झटके के रूप में कार्य करता है। यह सरकारी उपभोग को बढ़ाता है और विशेष रूप से रक्षा से जुड़े क्षेत्रों में निजी खर्च को प्रोत्साहित कर सकता है। समय के साथ, यह उत्पादकता को भी समर्थन दे सकता है। आईएमएफ का मानना है कि सार्वजनिक निवेश को प्राथमिकता देने वाला निर्माण लंबे समय तक उत्पादकता वृद्धि का समर्थन कर सकता है।
खर्च में तेजी के जोखिम
हालांकि, आईएमएफ ने रक्षा खर्च में बहुत तेजी से वृद्धि होने पर कुछ जोखिमों की ओर भी इशारा किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अत्यधिक वृद्धि से राजकोषीय घाटा जीडीपी के लगभग 2.6 प्रतिशत तक बढ़ सकता है और सार्वजनिक ऋण तीन साल के भीतर लगभग 7 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। ये दबाव संघर्ष की स्थिति में और बढ़ सकते हैं, जब कर्ज तेजी से बढ़ता है और सामाजिक खर्चों में कटौती करनी पड़ सकती है।
वैश्विक परिदृश्य और भारत का स्थान
2010 के दशक के मध्य से दुनिया भर में रक्षा खर्च बढ़ रहा है। वर्तमान में लगभग 40 प्रतिशत देश अपनी जीडीपी का 2 प्रतिशत से अधिक रक्षा पर खर्च करते हैं। नाटो सदस्यों ने 2035 तक अपने रक्षा और सुरक्षा खर्च को जीडीपी के 5 प्रतिशत तक बढ़ाने का वादा किया है, जो सैन्य खर्च में निरंतर वृद्धि की ओर संकेत करता है।भारत अपनी जीडीपी का लगभग 2 प्रतिशत रक्षा पर खर्च करता है। हाल के वर्षों में, नीतिगत सुधारों और प्रोत्साहनों के माध्यम से देश ने घरेलू उत्पादन को बढ़ाने में महत्वपूर्ण प्रगति की है। आईएमएफ के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि जिन देशों की स्थानीय रक्षा उद्योग मजबूत है, वे अपने सैन्य खर्च को आर्थिक विकास में बदलने और बाहरी जोखिमों को कम करने के लिए बेहतर स्थिति में हैं।
सोनू मर्डर केस में गैंगवार का खुलासा, रोहित गोदारा गैंग का नाम सामने
9 Apr, 2026 12:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
झज्जर। डीघल गांव निवासी फाइनेंसर साहिल उर्फ़ सोनू रोहतक के सनी रिटोलिया गैंग का सदस्य रहा हैं। उसे नवंबर 2025 में रोहतक में अवैध हथियारों के साथ पकड़ा गया था और पीजीआई थाने में केस भी दर्ज हुआ था। उस समय रोहतक पुलिस ने खुलासा किया था कि साहिल खुद अपना गैंग बनाना चाहता था। साहिल कई माह जेल में भी रहा और अब जमानत पर बाहर था। वह फाइनेंस के अलावा प्रॉपर्टी और शराब के कारोबार में भी था। यही नहीं जिस लोगों ने साहिल की हत्या की हैं, वह हिमांशु भाऊ गैंग के सदस्य बताए जा रहे हैं जबकि साहिल की हत्या के मामले में रोहित गोदारा गैंग के सदस्यों की पोस्ट वायरल हुई हैं। पोस्ट में रोहित गोदारा गैंग के सदस्यों ने साहिल की हत्या की जिम्मेदारी ली हैं। इस पोस्ट की संवाद न्यूज एजेंसी पुष्टि नहीं करता।
पोस्ट में ये लिखा
इस पोस्ट में लिखा हैं कि मैं ज़ोरा डबास, नवीन बॉक्सर गोरिपुर, महेन्द्र देलाना, आज जो हरियाणा के डीघल में जो ये सोनू डीघल फाइनेंसर की हत्या हुई हैं, उसकी जिम्मेदारी हम लेते हैं। ये गरीब और मजदूर लोगों को 10, 20 प्रतिशत ब्याज दर पर रुपये देकर जब उनसे रुपये टाइम पर वापस नहीं चुकाये जाने पर उनके घर और जमीन हड़प लेता था। इसको 6 माह पहले समझाया था, लेकिन इसको समझ नहीं आया। इसलिए आज इसको मरवा दिया। जो भी ब्याज बुक का और गकत काम करते हैं वो समय रहते समय सुधार जाओ वरना वो हाल करेंगे की देखने वाले की रूह कांप जाएगी और जो भी हमारे दुश्मन हैं, वो तैयार रहे जल्द मुलाक़ात होगी।
गैंगवार न हो, 100 से अधिक पुलिस तैनात
यह मामला अब गैंगवार से जोड़कर देखा जा रहा हैं। इस मामले में गैंग के नाम सामने आने के बाद पुलिस और ज्यादा सतर्क हो गई हैं। डीघल गांव में ही पुलिस वर्दी और सादे कपड़ो पर पुलिस कर्मी तैनात कर दिए गए हैं।
गाड़ी बरामद, टेम्प्रेरी नंबर
इस मामले में पुलिस ने अमादलपुर-पटोदा के बीच लिंक रोड से देर रात वारदात में प्रयोग की गाड़ी को बरामद कर लिया हैं। इस पर कोई नंबर प्लेट नहीं हैं और चेसिस भी मुड़ी हुई हैं। बताया जा रहा हैं कि आरोपी जब वारदात के बाद भाग रहे थे तो उनकी गाड़ी लकड़िया चौक पर पलट गई थी। इसके बाद उसे उठाकर दोबारा आरोपी फरार हुए। फिलहाल गाड़ी पर टेम्प्रेरी नंबर लगे हैं। इसके मालिक की पहचान की जा रही हैं।
US का खुलासा, सीजफायर जानकारी से पहले ट्रंप ने किया था चेक
9 Apr, 2026 11:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ईरान | युद्ध विराम को लेकर अब एक अहम खुलासा सामने आया है, जो बताता है कि पूरी प्रक्रिया के पीछे अमेरिका और पाकिस्तान के बीच गहरी कूटनीतिक बातचीत चल रही थी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने जो सोशल मीडिया पोस्ट कर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से डेडलाइन बढ़ाने की अपील की थी, वह पोस्ट पहले ही व्हाइट हाउस की मंजूरी से तैयार किया गया था। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, शरीफ के पोस्ट करने से पहले ही व्हाइट हाउस उस बयान को देख चुका था और उसे हरी झंडी दे चुका था।
दोनों देशों के बीच तनाव कम करने को लेकर शरीफ का पोस्ट
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब ट्रंप ने ईरान को मंगलवार रात 8 बजे तक की सख्त डेडलाइन दी थी और क्षेत्र में तनाव चरम पर था। इसी बीच पाकिस्तान ने दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करने और एक समझौता कराने की कोशिश की। इसी कड़ी में शरीफ ने सोशल मीडिया का सहारा लेते हुए ट्रंप से दो हफ्ते का समय बढ़ाने की सार्वजनिक अपील की।
शरीफ की पोस्ट में ट्रंप की शैली में लिखी गई थी बात
अपने पोस्ट में शरीफ ने ट्रंप की शैली में कहा कि कूटनीति लगातार, मजबूती से और प्रभावशाली ढंग से आगे बढ़ रही है। उन्होंने ट्रंप और उनके शीर्ष सलाहकारों को टैग करते हुए डेडलाइन बढ़ाने का आग्रह किया।हालांकि, इस पोस्ट के पीछे असली कहानी और भी अहम थी। व्हाइट हाउस, जो एक ओर ईरान पर कड़ा रुख अपनाए हुए था और सख्त बयान दे रहा था, वहीं दूसरी ओर पर्दे के पीछे इस संकट का कूटनीतिक समाधान भी तलाश रहा था।
कैसे खुली पोल?
शरीफ के पोस्ट में शुरुआत में 'Draft - Pakistan’s PM Message on X' लिखा होने के कारण सोशल मीडिया पर यह अटकलें भी तेज हो गईं कि यह बयान सीधे ट्रंप या उनकी टीम द्वारा तैयार किया गया है। हालांकि, व्हाइट हाउस ने इस दावे से इनकार किया और कहा कि ट्रंप ने यह बयान खुद नहीं लिखा। वहीं, पाकिस्तानी दूतावास की ओर से इस पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।इस पूरी कूटनीतिक कवायद का असर भी तेजी से देखने को मिला। शरीफ के पोस्ट के कुछ ही घंटों बाद ट्रंप ने ईरान के साथ दो हफ्ते के युद्ध विराम पर सहमति जताने का एलान कर दिया।
सोशल मीडिया पर शरीफ हुए ट्रोल
गौरतलब है कि इस घटनाक्रम से पहले शहबाज शरीफ को सोशल मीडिया पर आलोचना का सामना करना पड़ा था और उनके पोस्ट को लेकर सवाल उठाए गए थे। लेकिन अब सामने आई जानकारी से साफ है कि यह कदम एक बड़े अंतरराष्ट्रीय समन्वय का हिस्सा था, जिसमें अमेरिका की सीधी भागीदारी थी।
खैरड़ी गांव में मूर्ति तोड़ने की घटना से हड़कंप, पुलिस अलर्ट
9 Apr, 2026 11:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कलानौर। खंड के गांव खैरड़ी में बुधवार देर रात्रि अज्ञात शरारती तत्वों द्वारा डॉ. भीमराव अम्बेडकर की मूर्ति को खंडित कर दिया गया। घटना के बाद पूरे गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है। जानकारी के अनुसार, देर रात मोटरसाइकिल पर सवार दो युवकों ने इस वारदात को अंजाम दिया और मौके से फरार हो गए। यह पूरी घटना पास के सरकारी स्कूल में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है, हालांकि बाइक का नंबर और आरोपियों की पहचान अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है।
सुबह ग्रामीणों ने मौके पर खंडित मूर्ति को देखा तो रोष प्रदर्शन शुरू हो गया। घटना की सूचना मिलते ही डीएसपी राकेश कुमार, थाना प्रभारी सतपाल सिंह सहित पुलिस बल मौके पर पहुंचा। साथ ही कई सामाजिक व राजनीतिक संगठनों के कार्यकर्ता भी घटनास्थल पर जुटने लगे। ग्रामीण बलजीत अलडिया, मनोज अलडिया,के अनुसार, जिस स्थान पर यह घटना हुई है, वहां पहले “सद्भावना स्थल” बनाया गया था। बाद में गठबंधन सरकार के दौरान पूर्व सरपंच भूपेंद्र सेहरावत द्वारा कम्यूनिटी सेंटर का निर्माण करवाकर उसका नाम चौधरी देवीलाल के नाम पर रखा गया। इसके बाद गांव में असंतोष पैदा हो गया था।
स्थिति को संभालने के लिए ग्रामीणों ने अपने स्तर पर डॉ. भीमराव अम्बेडकर और चौधरी छोटूराम की मूर्तियां स्थापित कर भाईचारे का संदेश दिया था। आगामी 14 अप्रैल को बाबा साहेब की जयंती को लेकर गांव में जोर-शोर से तैयारियां चल रही थीं, लेकिन इस घटना ने माहौल को बिगाड़ दिया। फिलहाल ग्रामीणों में भारी रोष है और वे आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी व कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। साथ ही ग्रामीणों ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर भवन के लिए अलग से स्थान उपलब्ध करवाने की भी मांग उठाई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।
ईरान ने होर्मुज में बदले नियम, समुद्री माइन का अलर्ट; वैश्विक तेल बाजार चिंतित
9 Apr, 2026 09:42 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान | पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अब होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। AFP न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ईरान ने जहाजों की आवाजाही के लिए वैकल्पिक समुद्री रास्तों का एलान किया है, जिससे वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति पर असर पड़ सकता है।ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) की नौसेना ने शुक्रवार को एक बयान जारी कर कहा कि समुद्री सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। IRGC नौसेना ने सभी मालवाहक जहाजों और नौकाओं को इन नए, निर्दिष्ट मार्गों का पालन करने का निर्देश दिया है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जहाजों की आवाजाही IRGC नौसेना की कड़ी निगरानी में हो। विश्व में 20 फीसदी तेल का आवागमन इसी जलडमरूमध्य से होता है, ऐसे में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं। ईरान ने यह कदम एक दो-सप्ताह की अस्थायी संघर्ष विराम के हिस्से के तौर पर उठाया है, जिसके तहत जलडमरूमध्य को अस्थायी रूप से फिर से खोला गया है।
IRGC नौसेना द्वारा जारी किए गए नए मार्गों का विवरण इस प्रकार है:
प्रवेश मार्ग: ओमान सागर से होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश करने वाले जहाज अब लारक द्वीप के उत्तरी हिस्से से गुजरेंगे। इसके बाद वे खाड़ी की ओर बढ़ेंगे। यह मार्ग संभावित खतरों से बचाते हुए जहाजों को सुरक्षित प्रवेश प्रदान करेगा।निकास मार्ग: खाड़ी से बाहर निकलने वाले जहाजों के लिए भी एक नया मार्ग तय किया गया है। ये जहाज लारक द्वीप के दक्षिणी हिस्से से होते हुए ओमान सागर की ओर प्रस्थान करेंगे।ईरान का कहना है कि इन नए रास्तों का उद्देश्य जहाजों को सुरक्षित और निर्बाध रूप से गुजरने में मदद करना है। यह कदम जलमार्ग में किसी भी प्रकार के अप्रिय घटना को रोकने और अंतरराष्ट्रीय नौवहन की निरंतरता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
UN में भारत को बड़ी भूमिका, सतत विकास में निभाएगा अहम जिम्मा
9 Apr, 2026 09:35 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
न्यूयॉर्क | संयुक्त राष्ट्र में भारत को बड़ी कूटनीतिक सफलता मिली है। भारत ने आर्थिक और सामाजिक परिषद (ECOSOC) से जुड़े चार अहम निकायों के चुनाव में निर्विरोध जीत हासिल की है। इन सभी चुनावों में भारत का चयन सर्वसम्मति से हुआ, जो वैश्विक मंच पर उसकी मजबूत स्थिति को दर्शाता है। इन चुनावों में भारत को विकास के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आयोग , गैर-सरकारी संगठनों की समिति और कार्यक्रम एवं समन्वय समिति में चुना गया है।
प्रीति सरन को सीईएससीआर में फिर से चुना गया
इसके साथ ही, भारत की वरिष्ठ राजनयिक रहीं प्रीति सरन को आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों की समिति (CESCR) में फिर से चुना गया है। वह इससे पहले इस समिति के सत्र की अध्यक्षता भी कर चुकी हैं। प्रीति सरन का 36 वर्षों का लंबा कूटनीतिक अनुभव रहा है, जिसमें उन्होंने वियतनाम में भारत की राजदूत के रूप में सेवा दी, साथ ही टोरंटो, जेनेवा, ढाका, काहिरा और मॉस्को जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर भी तैनाती संभाली।
सीईएससीआर क्या है?
सीईएससीआर में 18 स्वतंत्र विशेषज्ञ शामिल होते हैं, जो आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय समझौते के पालन की निगरानी करते हैं। यह समिति भोजन, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा, पानी और स्वच्छता जैसे बुनियादी अधिकारों से जुड़े मामलों पर नजर रखती है।वहीं, एनजीओ समिति संयुक्त राष्ट्र में सिविल सोसाइटी संगठनों की भागीदारी तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आयोग विकास और सतत भविष्य से जुड़े मुद्दों पर दिशा तय करता है, जबकि कार्यक्रम एवं समन्वय समिति संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के कामकाज में तालमेल सुनिश्चित करती है।
ECOSOC क्या है?
गौरतलब है कि ECOSOC संयुक्त राष्ट्र की उस केंद्रीय व्यवस्था का हिस्सा है, जो सतत विकास के तीनों आयाम आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय को आगे बढ़ाने का काम करती है। यह सफलता इन वैश्विक मुद्दों पर भारत की बढ़ती भूमिका और प्रभाव को भी रेखांकित करती है।
अमेरिका ने राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति का हवाला दिया
8 Apr, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन|अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बड़ा एलान किया है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि जो भी देश ईरान को सैन्य हथियार या युद्ध सामग्री सप्लाई करेगा, उसे भारी आर्थिक नुकसान झेलना होगा। ट्रंप ने घोषणा की है कि ऐसे देशों से अमेरिका आने वाले हर सामान पर तुरंत प्रभाव से 50 फीसदी का आयात शुल्क, यानी की टैरिफ लगा दिया गया है। राष्ट्रपति ने साफ-साफ कहा कि इस फैसले में किसी भी देश को कोई छूट या रियायत नहीं दी जाएगी।
ईरान में नई शुरुआत का दावा
राष्ट्रपति ट्रंप ने चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि ईरान में 'सत्ता परिवर्तन' हो चुका है। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था के तहत अब ईरान में यूरेनियम का संवर्धन पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। ट्रंप ने कहा कि हम ईरान के साथ मिलकर काम करेंगे और वहां जमीन के नीचे दबे हुए परमाणु मलबे को बाहर निकालकर नष्ट करेंगे।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने आगे कहा कि ईरान के इन संवेदनशील ठिकानों पर अमेरिकी 'स्पेस फोर्स' के जरिए उपग्रह से पैनी नजर रखी जा रही है। उन्होंने दावा किया कि पिछले हमलों के बाद से उन ठिकानों पर किसी भी चीज को छुआ तक नहीं गया है।
15 सूत्रीय समझौते पर बातचीत शुरू
युद्ध के बाद अब शांति की ओर कदम बढ़ाते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच प्रतिबंधों में ढील देने पर चर्चा चल रही है। उन्होंने खुलासा किया कि दोनों पक्षों के बीच एक 15 सूत्रीय एजेंडा तैयार किया गया है, जिसमें से कई बिंदुओं पर सहमति भी बन चुकी है।
ईरान के खिलाफ ट्रंप का यह रुख दिखाता है कि वे तेहरान को आर्थिक रूप से पूरी दुनिया से अलग-थलग कर देना चाहते हैं, जिससे कोई भी बाहरी ताकत ईरान की सैन्य मदद न कर सके। वहीं दूसरी ओर, वे परमाणु खतरे को जड़ से खत्म करने की योजना पर काम कर रहे हैं।
वैश्विक बाजार पर पड़ेगा गहरा असर
जानकारों का मानना है कि ट्रंप के इस '50% टैरिफ' वाले फैसले से वैश्विक व्यापार में हड़कंप मच सकता है। चीन और रूस जैसे देश ईरान के करीबी रहे हैं, उनके लिए अब अमेरिका के साथ व्यापार करना बड़ी चुनौती बन सकता है। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने किन-किन देशों के खिलाफ 50 फीसदी टैरिफ लगाने की बात कही है।
सपनों को मिला कलेक्टर का साथ, द कलेक्टर्स-15 से शुरू हुई बदलाव की नई इबारत
मध्यप्रदेश पुलिस के अधिकारी राकेश कुमार कुशवाह ने ओपन इंडिया प्री-स्टेट शूटिंग प्रतियोगिता में जीता स्वर्ण पदक
प्रधानमंत्री मोदी ने सीधी जिले में बने 1500 तालाबों और नरसिंहपुर के अमृत सरोवरों का मन की बात में किया उल्लेख
युवाओं के नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को मिलेगा नया आयाम : वित्त मंत्री ओपी चौधरी
जैविक खेती से एरिन भगत बनीं आत्मनिर्भर, प्राकृतिक कृषि से घटी खेती की लागत
अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस में भोपाल में "रन फॉर टाइगर का भव्य आयोजन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवाड़ी के नवीन संयुक्त कलेक्ट्रेट भवन का किया लोकार्पण
बिहान योजना से मिली नई पहचान, पोषण सखी बन महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य की बनीं संरक्षक
एक पेड़ माँ के नाम अभियान के तहत विद्यार्थियों ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
