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पाकिस्तान में शेरशाह सूरी की प्रतिमा हटाने पर छिड़ी बहस, सरंग खान की प्रतिमा लगाई
20 Feb, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लाहौर,। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के झेलम में शेरशाह सूरी की प्रतिमा हटाए जाने की खबर ने बहस छेड़ दी है। कुछ दिन पहले ही स्थानीय प्रशासन ने चौराहे पर लगी प्रतिमा को हटाकर उसकी जगह सुल्तान सरंग खान गखर की मूर्ति लगा दी है। इस तरह सिंध के कुछ इलाकों में भी पुराने शासकों से जुड़ी प्रतिमाओं और प्रतीकों को हटाने की खबरें सामने आई हैं। सवाल उठ रहा है कि जिन ऐतिहासिक शख्सियतों को पाकिस्तान दशकों तक अपना गौरव बताता रहा, उनसे दूरी क्यों बनाई जा रही है? शेरशाह सूरी की प्रतिमा हटाए जाने की घटना ने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या पाकिस्तान अपने ऐतिहासिक प्रतीकों को अब नई नजर से देख रहा है? अब उनकी मूर्तियां हटाई जा रहीं है और उनके स्थान पर स्थानीय नायकों को क्यों जगह दी जा रही है?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 1947 में भारत से अलग होकर बने पाकिस्तान ने अपनी वैचारिक नींव मुस्लिम पहचान पर रखी थी। देश के संस्थापक मुहम्मद अली जिन्ना ने एक अलग राष्ट्र की परिकल्पना की थी। इसके बाद पाकिस्तान के इतिहास लेखन में मध्यकालीन इस्लामी शासकों को प्रमुखता दी गई। शेरशाह सूरी, महमूद गजनी और मुहम्मद गोरी जैसे शासकों को वहां की पाठ्य पुस्तकों में मुस्लिम शक्ति और विजय के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया। शेरशाह सूरी को ग्रैंड ट्रंक रोड का निर्माता और कुशल प्रशासक बताया गया। महमूद गजनवी और मुहम्मद गोरी को भारतीय उपमहाद्वीप में मुस्लिम शासन की नींव रखने वाला बताया और पाकिस्तानी मुस्लिम कौम का हीरो माना।
पाकिस्तान ने अपने सैन्य उपकरणों के नाम भी इन शासकों पर रखे। उदाहरण के लिए, पाकिस्तान की शॉर्ट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल का नाम गजनवी और मीडियम रेंज मिसाइल का नाम गौरी रखा। यह दिखाता है कि इन ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को राष्ट्रीय गौरव से जोड़ा गया। ऐसे में झेलम में शेरशाह सूरी की प्रतिमा हटाए जाने को केवल स्थानीय प्रशासनिक फैसला मानना आसान नहीं है। बता दें शेरशाह सूरी का जन्म 15वीं सदी के अंत में बिहार के सासाराम में हुआ था। वे अफगान मूल के सूरी कबीले से थे। उन्होंने 16वीं सदी में दिल्ली की गद्दी पर कब्जा किया और मुगल बादशाह हुमायूं को कुछ समय के लिए सत्ता से बेदखल कर दिया था। शेरशाह सूरी (1486-1545) उत्तर भारत में सूरी साम्राज्य के संस्थापक थे। उन्होंने 1540 से 1545 तक केवल पांच सालों के लिए दिल्ली पर शासन किया था। उनका शासनकाल छोटा था, लेकिन प्रशासनिक सुधारों के लिए उन्हें जाना जाता है। उन्होंने सड़क, डाक व्यवस्था और राजस्व प्रणाली में बदलाव किए। यही कारण है कि भारतीय इतिहास में उन्हें एक सक्षम शासक के रूप में भी याद किया जाता है।
इतिहासकार बताते हैं कि महमूद गजनवी और मोहम्मद गौरी दोनों का मूल अफगानिस्तान और मध्य एशिया से जुड़ा था। हाल के वर्षों में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्तों में तनाव देखने को मिला है। सीमा पर झड़पों और कूटनीतिक मतभेदों ने दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित किया है। पाकिस्तान में अब ऐतिहासिक प्रतीकों की पुनर्व्याख्या हो रही है। झेलम में सुल्तान सरंग खान गखर की प्रतिमा स्थापित किया जाना भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है, जहां स्थानीय नायकों को आगे लाने की कोशिश हो रही है।
रिहाई की मांग को लेकर अटक ब्रिज पर इमरान समर्थकों का कब्जा, मुनीर ने भेजी सेना
20 Feb, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर पाकिस्तान में हालात बेकाबू हो गए हैं। इमरान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के हजारों समर्थकों ने खैबर प्रांत में सामरिक और रणनीतिक रूप से अहम अटक ब्रिज पर बुधवार को कब्जा कर लिया। ब्रिज के दोनों ओर इमरान समर्थकों के जमावड़े के कारण वाहन अटग गए।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पीटीआई के तेवरों को देखते हुए पाक आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने इस्लामाबाद, पेशावर व रावलपिंडी कैंट से करीब 5 हजार सैनिकों को रवाना किया। उधर, खैबर के सीएम सुहैल अफरीदी ने रिहाई के लिए युवाओं की इमरान रिलीज फोर्स बनाने का ऐलान किया है। इमरान के समर्थन में तहाफुज पार्टी (टीटीपी) ने भी इस्लामाबाद कूच का ऐलान किया है।
इमरान समर्थकों के अटक ब्रिज पर कब्जे से खैबर सूबा से पाक से कट गया है। इससे पाकिस्तान में अफरा-तफरी मच गई। आनन फानन में मुनीर को फौज भेजने का फैसला लेना पड़ा। बता दें पूर्व पीएम इमरान खान अगस्त, 2023 से इस्लामाबाद की अडियाला जेल में बंद हैं। अभी वे तोशाखाना भ्रष्टाचार मामले में 14 साल की जेल काट रहे हैं। इमरान की पत्नी बुशरा बीबी भी अडियाला जेल में सजा काट रही है। इमरान के खिलाफ करीब एक सौ से ज्यादा मामले दर्ज हैं। इसमें से करीब एक दर्जन मामले लोअर-हाईकोर्ट में चल रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक इमरान को जेल में रखने में आर्मी चीफ मुनीर की बड़ी भूमिका है। पीएम रहते हुए इमरान ने मुनीर को खुफिया एजेंसी आईएसआई चीफ के पद से हटा दिया था। जानकारों के मुताबिक इमरान की जेल पर भले ही मुनीर का ताला हो, लेकिन इसकी चाबी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के पास है। अंतराष्ट्रीय स्तर पर फ्री इमरान मूवमेंट के बाद भी ट्रम्प मुनीर पर रिहाई का दबाव डालने के मूड में नहीं हैं।
दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल को उम्रकैद
20 Feb, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सियोल। दक्षिण कोरिया की एक अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल को 2024 में देश में मार्शल लॉ लागू करने, सत्ता के दुरुपयोग और विद्रोह की साजिश रचने का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अभियोजकों ने उनके लिए मृत्युदंड की मांग की थी, लेकिन अदालत ने उम्रकैद का फैसला दिया। इसी मामले में पूर्व रक्षा मंत्री को 30 साल की सजा सुनाई गई है। दक्षिण कोरिया में 1997 के बाद से किसी को फांसी नहीं दी गई है, इसलिए मृत्युदंड व्यवहारिक रूप से स्थगित माना जाता है।
65 वर्षीय यून पर आरोप था कि उन्होंने दिसंबर 2024 में सेना और पुलिस बलों को सक्रिय कर उदारवादी बहुमत वाली नेशनल असेंबली पर नियंत्रण की कोशिश की। भारी हथियारों से लैस सुरक्षा बलों ने संसद भवन की घेराबंदी की, हालांकि सांसदों ने अवरोध तोड़कर भीतर पहुंचते हुए सर्वसम्मति से मार्शल लॉ हटाने के पक्ष में मतदान किया। करीब छह घंटे बाद आपात आदेश वापस लेना पड़ा। इस घटना से देश में गहरा राजनीतिक संकट पैदा हो गया था।
अदालत ने पाया कि असंवैधानिक आपात आदेश के जरिए लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश की गई। अभियोजन पक्ष का तर्क था कि इस कदम से संसद और चुनाव आयोग के कामकाज को बाधित किया गया।
मार्शल लॉ लागू कराने में शामिल अन्य अधिकारियों पर भी कार्रवाई हुई है। पूर्व रक्षा मंत्री किम योंग ह्यून को 30 वर्ष की सजा सुनाई गई। इसके अलावा, पूर्व प्रधानमंत्री हेन ड्यूक-सू को एक अलग मामले में 23 वर्ष की सजा दी गई है। उन पर कैबिनेट प्रक्रिया में हेरफेर और शपथ के तहत झूठ बोलने का आरोप सिद्ध हुआ। हान डक-सू ने फैसले के खिलाफ अपील दायर की है।
इस फैसले को दक्षिण कोरिया की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए ऐतिहासिक और निर्णायक माना जा रहा है।
मोहन भागवत के 'घर वापसी' बयान पर भड़के मौलाना अरशद मदनी
19 Feb, 2026 03:49 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत द्वारा 'घर वापसी' और पूर्वजों को लेकर दिए गए हालिया बयान ने देश के सियासी और धार्मिक गलियारों में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया है। मदनी ने भागवत के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि "सिर्फ उन्हीं ने अपनी मां का दूध पिया है," जो यह साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि सबके पूर्वज हिंदू थे। उनका यह पलटवार सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।
विवाद की जड़ मोहन भागवत का वह संबोधन है जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत में रहने वाले सभी लोगों का डीएनए एक है और सभी के पूर्वज हिंदू थे, इसलिए जो लोग दूसरे धर्मों में चले गए हैं, उन्हें अपनी जड़ों की ओर लौटना चाहिए। इस पर आपत्ति जताते हुए मौलाना मदनी ने स्पष्ट किया कि इस्लाम का इतिहास और पहचान अपनी जगह स्वतंत्र है। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान थोपना ऐतिहासिक और धार्मिक रूप से गलत है। मदनी के अनुसार, हर इंसान को अपने धर्म और पूर्वजों की पहचान का पूरा अधिकार है और किसी एक विचारधारा को सब पर मढ़ा नहीं जा सकता।
मौलाना मदनी ने यह भी तर्क दिया कि इस तरह की बयानबाजी से समाज में दूरियां बढ़ती हैं और भाईचारे को नुकसान पहुँचता है। उन्होंने भागवत के 'डीएनए' वाले तर्क पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर पूर्वजों की ही बात करनी है, तो मनुष्य की उत्पत्ति और इतिहास के धार्मिक ग्रंथों के अपने-अपने प्रमाण हैं। फिलहाल इस जुबानी जंग ने 'घर वापसी' और 'साझा विरासत' के मुद्दे पर एक बार फिर नई बहस छेड़ दी है, जहाँ एक पक्ष अपनी सांस्कृतिक एकता की बात कर रहा है, तो दूसरा पक्ष अपनी धार्मिक स्वायत्तता और पहचान को बचाने की दलील दे रहा है।
“शो देखना है तो नीचे बैठो” — मासूम शर्मा का सख्त संदेश
19 Feb, 2026 02:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणवीं सिंगर मासूम शर्मा के बुधवार रात को शहर के एक होटल में लाइव शो के दौरान हंगामा हो गया। इस दौरान उन्होंने स्टेज पर खड़े मुआना गांव के पूर्व सरपंच तथा अन्य को नीचे उतरने को कह दिया। नहीं उतरे तो बोले तो कि कार्यक्रम के बीच में कोई सरपंच हो, कोई एमएलए हो, कोई मंत्री हो, मैं किसी ने कुछ नहीं मानता। इसलिए सरपंच हो, नीचे बैठकर देखो। नहीं तो यहां से चले जाओ।
मनेंद्रगढ़ में अमृतधारा महोत्सव: नपाध्यक्ष-विधायक प्रतिनिधि ने नाराज होकर छोड़ा कार्यक्रम, क्यों हुआ विवाद?
बुधवार को कलाकार मासूम शर्मा की बहन कविता शर्मा की 25वीं सालगिरह थी। इस खुशी में सफीदो रोड स्थित एक होटल में प्रोग्राम रखा गया। यह कार्यक्रम कलाकार मासूम शर्मा के जीजा यूटयूबर धरमू ने आयोजित करवाया था। प्रोग्राम में धरमू के रिश्तेदार, परिवार व गांव मुआना के कुछ करीबी लोग शामिल थे। धरमू ने अपने गांव मुआना के पूर्व सरपंच राजेश शर्मा को भी बुलाया हुआ था। यह शो करीब एक घंटा ही चल पाया। उस वक्त स्टेज से युवाओं को उतारते समय हंगामा हो गया। जब भीड़ मंच से नहीं उतरी तो बाउंसरों ने उनके साथ धक्का-मुक्की की, जिससे मामला और बढ़ गया।
फर्जी आईडी कार्ड के साथ आरोपी गिरफ्तार
19 Feb, 2026 01:29 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पानीपत| अर्धसैनिक बल की नकली वर्दी पहनकर अवैध शराब की तस्करी करने वाले दो युवकों को सीआईए-1 की टीम ने सेक्टर-40 स्थित पार्किंग से गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 502 पेटी अंग्रेजी शराब व बीयर से भरा कैंटर बरामद हुआ। थाना सेक्टर 13/17 में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस के अनुसार 18 फरवरी को एएसआई अनिल कुमार टीम के साथ गश्त पर थे। टोल प्लाजा के पास मुखबिर ने सूचना दी कि दो व्यक्ति सीआरपीएफ की वर्दी में नीले रंग के कैंटर में भारी मात्रा में शराब लेकर सेक्टर-40 की पार्किंग में खड़े हैं। सूचना पर आबकारी निरीक्षक अरविंद डागर को साथ लेकर पुलिस टीम ने मौके पर दबिश दी। पार्किंग में खड़े कैंटर के आगे पुलिस लिखा मिला और दो युवक अंदर बैठे मिले। ड्राइवर साइड पर बैठे युवक ने पूछताछ में अपना नाम मोनू पुत्र सतपाल निवासी खोजकीपुर, थाना बापौली बताया। उसकी तलाशी में सीआरपीएफ का पहचान पत्र बरामद हुआ, जिसे उसने नकली बताया। उसने कबूल किया कि वह तस्करी के दौरान लोगों को भ्रमित करने के लिए नकली वर्दी पहनता है। कंडक्टर साइड पर बैठे सन्दीप पुत्र सुखबीर निवासी गांव अट्टा, थाना समालखा से भी इसी प्रकार का पहचान पत्र मिला। उसने भी माना कि दोनों मिलकर अवैध शराब की तस्करी करते हैं और शक से बचने के लिए अर्धसैनिक बल की वर्दी पहनते हैं।
जेएनयू का ये पूर्व छात्र...........जिसे तारिक रहमान ने बनाया बांग्लादेश का विदेश मंत्री
19 Feb, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका । बांग्लादेश में हत्याओं और कानूनी अव्यस्थाओं के एक लंबे दौर के बाद अब नई सरकार बन चुकी है। तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ले ली है और कैबिनेट भी सीट पर बैठ चुकी है। उनकी कैबिनेट में एक से बढ़कर दिग्गज शामिल हैं। इसके अलावा तारिक की कैबिनेट में एक ऐसा शख्स भी है, जो जेएनयू का पूर्व छात्र रह चुका है। पीएम रहमान ने इस शख्स को विदेश मंत्रालय का काम दिया है। यानी भारत से जुड़े सारे मुद्दों को यही मंत्री डील करेगा।
दरअसल, ये शख्स बांग्लादेश की नई रहमान सरकार में विदेश मंत्री का पद संभालने वाले डॉ खलीलुर रहमान हैं। जिनका व्यक्तित्व बेहद गहरा और कूटनीतिक रूप से सुलझे हुए नेता के तौर पर देखा जाता है। वहां एक इसतरह के अनुभवी राजनयिक हैं, जिनके भारत के साथ पुराने संबंध हैं। तारिक रहमान की कैबिनेट में खलीलुर भारत-बांग्लादेश के बीच महत्वपूर्ण ब्रिज की भूमिका निभा सकते हैं।
शेख हसीना सरकार के गिरने के बाद बनी मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार में उन्हें रोहिंग्या संकट और अन्य मुद्दों पर मुख्य सलाहकार का उच्च प्रतिनिधि बनाया गया था। वे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) के रूप में भी सक्रिय रहे। इस दौरान उन्होंने अपने भारतीय समकक्ष यानी एनएसए अजीत डोभाल से मुलाकात कर सुरक्षा और इंटेलिजेंस के मोर्चे पर सहयोग की बात की थी।
बात दें कि रहमान के भारत के साथ संबंधों की जड़ें उनके छात्र जीवन से जुड़ी हैं। उन्होंने दिल्ली के प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) से ‘पब्लिक हेल्थ’ में पीएचडी की डिग्री हासिल की है। जेएनयू से पढ़ा होना उन्हें भारतीय प्रशासनिक और बौद्धिक व्यवस्था की गहरी समझ देता है।
जब निज्जर केस को लेकर भारत और कनाडा के बीच कूटनीतिक विवाद बढ़ा था, तब कनाडा में बांग्लादेश के उच्चायुक्त के रूप में डॉ खलीलुर रहमान ने कनाडा पुलिस की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि कनाडा अपराधियों और भगौड़ों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बनता जा रहा है, जो भारत के रुख का समर्थन था।
उन्हें बांग्लादेशी कूटनीति में भारत के प्रति बैलेंस और सकारात्मक नजरिया रखने वाला चेहरा माना जाता है। वे करियर डिप्लोमैट रहे हैं और भारत में बांग्लादेश उच्चायोग में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
खलीलुर रहमान 1985 बैच के विदेश सेवा अधिकारी हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र (यूएन), विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और कनाडा में उच्चायुक्त के रूप में काम किया है। एक मेडिकल डॉक्टर (एमबीबीएस) होने के साथ-साथ उनके पास अर्थशास्त्र और कूटनीति की डिग्री भी है।
बांग्लादेश के नए पीएम रहमान ने उन्हें विदेश मंत्री बनाकर यह संकेत दिया है कि बीएनपी सरकार भारत के साथ टकराव के बजाय संवाद और सहयोग चाहती है। खलीलुर रहमान की रणनीति और पुरानी जान-पहचान भारत के साथ तीस्ता जल समझौता और सीमा सुरक्षा जैसे पेंडिंग मुद्दों को सुलझाने में मददगार साबित हो सकती है।
इमरान को मिल सकती है बड़ी राहत, जेल से अस्पताल शिफ्ट करने की तैयारी
19 Feb, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को इस सप्ताह जेल से अस्पताल शिफ्ट किया जा सकता है। उनकी सेहत, विशेषकर आंखों की रोशनी में गिरावट की रिपोर्ट के बाद सरकार ने यह कदम उठाने के संकेत दिए हैं। जानकारी के मुताबिक 21 से 26 फरवरी के बीच उनकी आंख में इंजेक्शन लगाया जाना प्रस्तावित है, जिसके लिए जेल प्रशासन अस्पताल ले जाने की तैयारी कर रहा है।
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इमरान खान को आंखों के विशेष इलाज के लिए एआई-शिफा आई ट्रस्ट हॉस्पिटल ले जाया जा सकता है। यह अस्पताल आधुनिक मशीनों और विशेषज्ञ डॉक्टरों के लिए जाना जाता है। फिलहाल इस बात पर विचार चल रहा है कि उन्हें अस्पताल में भर्ती रखा जाए या जरूरी डोज देने के बाद वापस जेल लाया जाए। अंतिम निर्णय डॉक्टरों की मेडिकल टीम लेगी।
इमरान खान 2023 से अदिअला जेल में बंद हैं। हाल ही में आई स्वास्थ्य रिपोर्ट में दावा किया गया कि उनकी एक आंख की रोशनी 85 प्रतिशत तक प्रभावित हो चुकी है। इस रिपोर्ट के बाद उनके समर्थकों की चिंता बढ़ गई है।
पाकिस्तान की शहबाज सरकार के मंत्री तारिक फजल चौधरी ने भी कहा है कि इमरान खान की सेहत को देखते हुए मेडिकल बोर्ड गठित करने और उन्हें अस्पताल शिफ्ट करने का फैसला लिया गया है। इधर, सुप्रीम कोर्ट ने भी इमरान खान की स्वास्थ्य स्थिति का संज्ञान लिया है। अदालत ने उनकी आंखों की जांच के लिए मेडिकल टीम गठित करने और परिवार से मुलाकात की अनुमति देने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा एमिकस क्यूरी नियुक्त किए गए वकील सलमान ने हाल ही में जेल में उनसे मुलाकात कर स्वास्थ्य संबंधी रिपोर्ट अदालत को सौंपी। कोर्ट के निर्देश के बाद उनकी पत्नी बुशरा बीबी से बातचीत की अनुमति भी दी जा सकती है।
गौरतलब है कि राजनीति में आने से पहले इमरान खान अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के प्रमुख ऑलराउंडर और कप्तान रह चुके हैं। दुनियाभर के कई पूर्व क्रिकेटरों ने भी उनके बेहतर इलाज की मांग उठाई है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि मेडिकल बोर्ड की सिफारिशों के बाद आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
शपथ के बाद एक्शन में तारिक रहमान...........हिंदुओं के खिलाफ हिंसा करने वालों पर कार्रवाई शुरु
19 Feb, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। तारिक रहमान ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ले ली है। उनके साथ 13 और कैबिनेट मंत्रियों ने शपथ ली है। कैबिनेट में दो हिंदू नेताओं को शामिल किया है। भारत की ओर से शपथ ग्रहण में शामिल होने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और विदेश सचिव विक्रम मिश्री पहुंचे। वहीं बांग्लादेश के पीएम की शपथ लेते ही तारिक रहमान एक्शन में दिख रहे हैं। रहमान ने चुनाव से पहले जो वादे किए थे उन पर उन्होंने काम करना भी शुरू कर दिया है। तारिक रहमान का कोई वादा सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहा, तब वहां था बांग्लादेश की कानून व्यवस्था को फिर से पटरी पर लाना और हिंदुओं के खिलाफ होने वाली हिंसा को रोकने के लिए सख्त कानूनी सुरक्षा तंत्र लागू करना।
शपथ लेने के बाद तारिक रहमान ने हिंदुओं पर हो रहे हमलों पर बड़ा एक्शन लिया है। जो भी इन हमले के जिम्मेदार रहे हैं उन पर सबसे तगड़ा एक्शन तेज किया है। दरअसल रहमान ने हिंदुओं के खिलाफ हिंसा करने और चुनाव के दौरान मारपीट करने वाले नेताओं के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया है। बांग्लादेश के सिराजगंज में अल्पसंख्यकों की दुकानों में तोड़फोड़ और जबरदस्ती वसूली के आरोप में बीएनपी ने तीन नेताओं को कारण बताओ नोटिस दिया है। वोटरों को डराने, धमकाने सहित कई आरोपों में दो और नेताओं को सस्पेंड किया गया है। चुनाव जीतने के बाद से तारिक रहमान की पार्टी ने पार्टी अनुशासन को लेकर कड़ा कदम उठाया है। तारिक चुनाव प्रचार के बाद से ही बांग्लादेश में नॉर्मल हालात बहाल करने की बात कर रहे हैं। उन्होंने कानून व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया है। उनकी पार्टी में अनुशासन को भी उतनी ही अहमियत दी जा रही है। हमलों के आरोप में बीएनपी के तीन नेताओं को कारण बतौर नोटिस दिया है। इसमें फिरोज और आरजू अहमद शामिल हैं।
शपथ से कुछ घंटे पहले भी रहमान ने बड़ा बयान देकर कहा था कि हमें सुरक्षित और मानवीय बांग्लादेश बनाने के लिए सभी का सहयोग चाहिए। किसी भी बहाने से किसी के साथ अन्याय नहीं हो सकता। कानून व्यवस्था हर हाल में बनाए रखनी होगी। तारिक रहमान ने दंगाइयों को चेतावनी दी कि किसी भी कीमत पर हिंसा प्रतिशोध या उकसावे की कारवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
श्रीलंका में ऐतिहासिक बदलाव: सांसदों की पेंशन खत्म, दिसानायके सरकार ने पूरा किया चुनावी वादा
19 Feb, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलंबो। श्रीलंका के सांसदों ने मंगलवार को अपनी पेंशन रद्द करने के पक्ष में भारी बहुमत से मतदान किया है। यह साहसिक कदम देश के गंभीर आर्थिक संकट और जनता के बढ़ते आक्रोश के बीच श्रीलंका सरकार द्वारा किए गए एक प्रमुख चुनावी वादे को पूरा करने के लिए उठाया गया है। 225 सदस्यीय श्रीलंकाई संसद में इस विधेयक को लेकर जबरदस्त सहमति दिखाई दी।
सांसदों ने 225 सदस्यीय सदन में 154 मतों से विधेयक पारित कर दिया, जबकि केवल दो मत इसके विरोध में पड़े। शेष विधायक मतदान के दौरान अनुपस्थित रहे। इसके पहले श्रीलंका में सांसद पांच साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद पेंशन पाने के हकदार होते थे। नए कानून के तहत, जो लोग पहले से ही पेंशन प्राप्त कर रहे हैं या इसके लिए पात्र हैं, उन्हें भी पेंशन का भुगतान नहीं होगा।
वर्ष 2024 में चुने गए राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके ने अपने चुनाव अभियान के दौरान पेंशन संबंधी प्रावधान को समाप्त करने का वादा किया था। इसी तरह दिसानायके सरकार ने जनता की मांग पर पूर्व राष्ट्रपतियों को मिलने वाली सुविधाओं को सितंबर में समाप्त कर दिया।
इनमें आवास, भत्ते, पेंशन और परिवहन के लिए सरकारी अनुदान शामिल थे। विधि मंत्री हर्षना नानायक्कारा ने संसद में पेंशन संबंधी विधेयक पेश करते हुए कहा कि चुनावी वादा पूरा किया गया है और सांसदों को ऐसे समय में पेंशन प्राप्त करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है जब देश अपने सबसे बुरे आर्थिक संकट से उबरने के लिए संघर्ष कर रहा है। श्रीलंका ने 83 अरब डॉलर से अधिक का कर्ज होने पर अप्रैल 2022 में खुद को दिवालिया घोषित कर दिया था। इसमें से आधे से अधिक कर्ज विदेशी लेनदारों का है।
चीनी ह्यूमनॉइड रोबोट्स का डांस देख विशेषज्ञ बोले- रोबोटिक्स में चीन ने अमेरिका को दी कड़ी टक्कर
19 Feb, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। चीन ने एक भव्य तकनीकी कार्यक्रम में अपनी रोबोटिक्स क्षमता का ऐसा प्रदर्शन किया, जिसने दुनिया का ध्यान खींच लिया। इंसानों जैसे दिखने वाले करीब 25 ह्यूमनॉइड रोबोट्स ने मंच पर बच्चों के साथ मार्शल आर्ट्स और सिंक्रोनाइज्ड डांस कर दर्शकों को चौंका दिया। रोबोट्स तलवार भांजते, डंडे घुमाते और बैकफ्लिप जैसी जटिल हरकतें करते नजर आए, और खास बात यह रही कि प्रदर्शन के दौरान एक भी रोबोट नहीं गिरा।
यह प्रदर्शन चीन के चर्चित टीवी आयोजन सीसीटीवी स्प्रिंग फेस्टिवल गाला में हुआ, जिसे दुनिया के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले कार्यक्रमों में गिना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मंच लंबे समय से चीन की तकनीकी और औद्योगिक उपलब्धियों को प्रदर्शित करने का माध्यम रहा है—चाहे वह अंतरिक्ष कार्यक्रम हो, ड्रोन तकनीक या रोबोटिक्स।
एशिया स्थित टेक्नोलॉजी कंसल्टेंसी फर्म के प्रमुख जॉर्ज स्टीलर के अनुसार, इस तरह के राष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शन का सीधा संबंध सरकार की औद्योगिक नीति से होता है। जिन कंपनियों को यहां अपने उत्पाद दिखाने का अवसर मिलता है, उन्हें बाद में सरकारी ऑर्डर, निवेश और बाजार में बेहतर पहुंच जैसे लाभ मिल सकते हैं।
रोबोट्स के विकास में चीन की कंपनी युनिट्री रोबोटिक्स का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बीते एक वर्ष में रोबोट्स की चाल-ढाल, संतुलन और रियल-टाइम मूवमेंट में जबरदस्त सुधार हुआ है। पिछले साल जहां ये रोबोट साधारण हरकतें करते दिखे थे, वहीं इस बार उन्होंने जटिल मार्शल आर्ट्स मूव्स को भी सटीकता से अंजाम दिया।
तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि यह प्रगति केवल हार्डवेयर तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सॉफ्टवेयर में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। रोबोट्स के ‘दिमाग’ को इस तरह प्रशिक्षित किया जा रहा है कि वे भविष्य में फैक्ट्रियों, लॉजिस्टिक्स और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में बारीक और वास्तविक काम कर सकें।
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि रोबोटिक्स और एआई के क्षेत्र में चीन अब अमेरिका को कड़ी चुनौती दे रहा है। हालांकि, तकनीकी प्रतिस्पर्धा का यह दौर आने वाले वर्षों में और तेज होने की संभावना है, जहां दोनों देश उन्नत रोबोटिक्स, स्वचालन और स्मार्ट मशीनों के विकास में निवेश बढ़ा रहे हैं।
पात्र छात्र समय रहते भरें फॉर्म, अंतिम तिथि नजदीक
19 Feb, 2026 07:52 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और विमुक्त जनजाति के विद्यार्थियों से ऑनलाइन आवेदन मांगे गए हैं। पात्र विद्यार्थियों को नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल पर पंजीकरण करना अनिवार्य है। विद्यार्थी 28 फरवरी तक www.scholarships.gov.in पर आवेदन कर सकते हैं। विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि 10वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद सरकारी या निजी शिक्षण संस्थानों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थी इस योजना का लाभ ले सकते हैं। योजना के तहत उच्च शिक्षा जारी रखने के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है ताकि कोई भी छात्र पैसों की कमी के कारण पढ़ाई से वंचित न रहे। पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए अनुसूचित जाति के विद्यार्थी पीएमएस-एससी श्रेणी तथा अन्य पिछड़ा वर्ग या विमुक्त जनजाति के विद्यार्थी पीएम-यशस्वी घटक-2 के तहत आवेदन कर सकते हैं। आवेदक हरियाणा का निवासी हो और परिवार की वार्षिक आय 2 लाख 50 हजार रुपये से अधिक नहीं होना चाहिए। ब्यूरो
इंडिया AI समिट में 'चीनी रोबोट' पर बवाल: गलगोटिया यूनिवर्सिटी पर सरकार का सख्त एक्शन, स्टॉल खाली करने के आदेश
18 Feb, 2026 04:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 'इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026' में आज उस समय हड़कंप मच गया जब सरकार ने गलगोटिया यूनिवर्सिटी को अपना स्टॉल तुरंत खाली करने और समिट से बाहर निकलने का आदेश दे दिया। यह कड़ी कार्रवाई तब की गई जब यूनिवर्सिटी द्वारा 'स्वदेशी आविष्कार' के रूप में पेश किया गया एक रोबोटिक कुत्ता असल में एक चीनी कंपनी का प्रोडक्ट निकला।
क्या है पूरा विवाद?
विवाद की शुरुआत तब हुई जब गलगोटिया यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नेहा सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इस वीडियो में वे 'ओरियन' (Orion) नामक एक रोबोटिक कुत्ते का प्रदर्शन कर रही थीं और दावा कर रही थीं कि इसे यूनिवर्सिटी के 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' ने विकसित किया है। उन्होंने यह भी कहा कि यूनिवर्सिटी AI क्षेत्र में 350 करोड़ रुपये का निवेश कर रही है और यह रोबोटिक कुत्ता सर्विलांस और मॉनिटरिंग के लिए बनाया गया है।
जैसे ही यह वीडियो इंटरनेट पर आया, टेक एक्सपर्ट्स और नेटिजन्स ने इसे तुरंत पहचान लिया। जांच में पाया गया कि यह कोई स्वदेशी आविष्कार नहीं, बल्कि चीनी कंपनी 'Unitree Robotics' का कमर्शियल मॉडल 'Unitree Go2' है, जो बाजार में करीब 2.5 से 3 लाख रुपये में आसानी से उपलब्ध है।
सरकार का सख्त रुख और एक्शन
शिखर सम्मेलन की गरिमा और भारत की 'इनोवेशन इमेज' को पहुंच रहे नुकसान को देखते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने त्वरित कार्रवाई की: सरकारी सूत्रों के अनुसार, यूनिवर्सिटी को प्रदर्शनी क्षेत्र से तत्काल हटने के निर्देश दिए गए। विवाद बढ़ने के बाद यूनिवर्सिटी के पवेलियन की बिजली सप्लाई भी काट दी गई ताकि गलत जानकारी का प्रसार रोका जा सके। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय स्तर के मंच पर विदेशी उत्पादों को स्वदेशी बताकर पेश करना गंभीर धोखाधड़ी है और इसकी जवाबदेही तय की जाएगी।
विवाद से जुड़ी प्रमुख धाराएं और कानूनी पहलू
यद्यपि यह मामला अभी प्रशासनिक कार्रवाई के दायरे में है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह के कृत्य पर निम्नलिखित कानूनी धाराओं के तहत विचार किया जा सकता है:
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318 (धोखाधड़ी): यदि कोई संस्थान गलत जानकारी देकर किसी को गुमराह करता है या लाभ प्राप्त करने की कोशिश करता है, तो यह धोखाधड़ी (पुराने IPC की धारा 420) के अंतर्गत आता है।
कॉपीराइट और बौद्धिक संपदा कानून (IPR Laws): किसी दूसरे देश या कंपनी के पेटेंटेड उत्पाद को अपना बताकर पेश करना बौद्धिक संपदा अधिकारों का उल्लंघन है।
IT एक्ट की धाराएं: डिजिटल माध्यमों और सार्वजनिक मंचों पर गलत सूचना (Misinformation) फैलाने के लिए आईटी एक्ट के तहत भी कार्रवाई संभव है।
यूनिवर्सिटी की सफाई
चौतरफा घिरने के बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने आधिकारिक बयान जारी कर इसे 'गलतफहमी' बताया। यूनिवर्सिटी का कहना है कि उन्होंने कभी यह दावा नहीं किया कि रोबोट उन्होंने बनाया है, बल्कि इसे छात्रों को सिखाने के लिए एक 'लर्निंग टूल' के रूप में लाया गया था। प्रोफेसर ने भी अपनी बात को शब्दों का चयन करने में हुई गलती करार दिया है।
विपक्ष का हमला
इस घटना ने राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी ने इसे सरकार का 'पीआर तमाशा' बताते हुए कहा कि समिट में भारतीय प्रतिभा की जगह चीनी उत्पादों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो देश के लिए शर्मिंदगी की बात है।
जेफ्री पर मरती थी निकोल, ई-मेल में लिखा– क्या तुम मेरे साथ बच्चा करोगे?
18 Feb, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। एप्सटीन फाइल्स में दुनिया के कोने-कोने में मौजूद मशहूर लोगों के ऐसे राज छिपे हैं, जो उनकी छवि को खराब कर सकते हैं। क्या राजनेता, क्या अभिनेता और क्या कारोबारी, हर किसी का नाम जेफ्री एप्सटीन के ई-मेल्स में है। हाल ही में जर्मनी में जन्मी निवेशक और काउंटेस निकोल जंकरमैन को जेफ्री एप्सटीन से जुड़े नए खुलासों के बाद अपने सार्वजनिक पदों से इस्तीफा देना पड़ा है। अमेरिकी न्याय विभाग के जारी दस्तावेजों में सामने आया कि जंकरमैन सालों तक एप्सटीन के साथ ईमेल संपर्क रहा था। जब उनका नाम फाइल्स में बाहर आया, तो बढ़ते विवाद और सार्वजनिक दबाव के बीच उन्होंने ब्रिटेन की प्रतिष्ठित रॉयल मार्सडेन कैंसर चैरिटी के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक निकोल जंकरमैन एक काउंटेस हैं और उनका शाही परिवार से करीबी नाता है। ऐसे में उनका नाम इस तरह की फाइल में आना और सीधा जेफ्री एप्सटीन से संवाद करना न सिर्फ उनकी बल्कि रॉयल फैमिली की भी प्रतिष्ठा को कहीं न कहीं नुकसान पहुंचाने वाला है। यही वजह है कि उन्होंने इस्तीफा दे दिया है। निकोल जंकरमैन एक जानी-मानी व्यवसायी हैं। वह लंदन में रहकर टेक्नोलॉजी, बायोटेक और फाइनेंस क्षेत्र में सक्रिय रही हैं।
2023 के अंत में उन्हें रॉयल मार्सडेन कैंसर चैरिटी का ट्रस्टी बनाया गया था। यह चैरिटी ब्रिटेन के प्रमुख कैंसर अस्पताल रॉयल मार्सडेन से जुड़ी है।
रिपोर्ट के मुताबिक निकोल का शाही परिवार से भी संबंध रहा है। दरअसल वे एक काउंटेस हैं, यानि उनका परिवार, शाही क्रम में दूसरे नंबर पर आता है। हाल ही में जारी एप्सटीन फाइल्स में जंकरमैन का नाम सैकड़ों बार सामने आया। रिपोर्ट कहती हैं कि उनके और एप्सटीन के बीच करीब दो दशकों तक ईमेल संवाद हुआ, जिनमें कुछ संदेश 2008 में एप्सटीन की सजा के बाद के भी बताए जा रहे हैं। एक ईमेल में उन्होंने सो कॉल्ड पर्सनल और जोशीले शब्दों का इस्तेमाल किया था। यहां तक कि एक ई-मेल में लिखा था– ‘क्या तुम मेरे साथ बच्चा करोगे?’ इस ई-मेल के बाद इन दोनों के रिश्तों को लेकर सवाल उठने लगे। हालांकि इन दस्तावेजों में नाम आने का मतलब किसी अपराध में शामिल होना नहीं माना गया है, लेकिन सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों के लिए ऐसे संबंध गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
निकोल के प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा कि वे उस वक्त एप्सटीन की ओर से भ्रमित और गुमराह की गई थीं और उन्हें इस संपर्क पर गहरा पछतावा है। उन्होंने एप्सटीन के कृत्यों को घृणित बताया और उसके पीड़ितों के प्रति सहानुभूति जताई। बता दें अमेरिकी नागरिक जेफ्री एप्सटीन नाबालिग लड़कियों के शोषण के मामलों में दोषी ठहराया गया था। वो साल 2019 में जेल में मृत पाया गया था, लेकिन उसकी मौत के वर्षों बाद भी उससे जुड़े खुलासे दुनिया भर के प्रभावशाली लोगों और संस्थानों को झकझोर रहे हैं।
ट्रंप प्रशासन एपस्टीन फाइल्स दस्तावेजों को पारदर्शी तरीके से सामने नहीं ला रहा: हिलेरी
18 Feb, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बर्लिन। पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने बर्लिन में आयोजित वर्ल्ड फोरम के दौरान एकए इंटरव्यू में डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। हिलेरी ने मांग की है कि जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक करने की प्रक्रिया को जान-बूझकर धीमा किया जा रहा है। हिलेरी क्लिंटन ने कहा कि फाइलें जारी कीजिए। उन्होंने संकेत दिया कि ट्रंप प्रशासन इन दस्तावेजों को पारदर्शी तरीके से सामने नहीं ला रहा है। यह मामला तब और गंभीर हो गया है जब बिल और हिलेरी क्लिंटन दोनों को अमेरिकी कांग्रेस की समिति के सामने पेश होना है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक हिलेरी के आरोपों पर व्हाइट हाउस ने जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने फाइलें जारी करके पीड़ितों के लिए डेमोक्रेट्स की तुलना में कहीं अधिक काम किया है। बिल क्लिंटन और एपस्टीन का संबंध एपस्टीन, जो 2019 में जेल में मृत पाया गया था, पर यौन अपराधों के गंभीर आरोप थे। इन फाइलों में पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन का नाम शामिल होना विवाद का सबसे बड़ा कारण है। हालांकि बिल क्लिंटन का दावा है कि उन्होंने करीब दो दशक पहले ही एपस्टीन से अपने सारे संबंध खत्म कर लिए थे, लेकिन समिति के सामने उनकी पेशी इस दावे की अग्निपरीक्षा होगी।
बता दें फरवरी के आखिरी हफ्ते में होने वाली यह पेशी अमेरिकी राजनीति की दिशा तय करेगी। क्या इन फाइलों में कुछ ऐसा है जो क्लिंटन परिवार के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है, या यह केवल ट्रंप प्रशासन द्वारा राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति है?
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