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जिनेवा में बातचीत हुई फेल, तो ईरान पर हमले की तैयारी में जुटा है अमेरिका!
17 Feb, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु मुद्दे पर बातचीत जारी है। जिनेवा में दूसरे चरण की बातचीत के लिए ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची पहुंचे, लेकिन परदे के पीछे हालात गरम नजर आ रहे है। जानकारी के मुताबिक दिसंबर में फ्लोरिडा के मार-ए-लागो में हुई मुलाकात में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजराइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू से साफ कहा था कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच समझौता नहीं हुआ तो वह ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर इजराइली हमले का समर्थन करेंगे।
मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है अब अमेरिकी सेना और खुफिया एजेंसियों के अंदर इस बात पर चर्चा हो रही है कि अगर इजराइल ईरान पर हमला करता है तो अमेरिका किस तरह उसकी मदद कर सकता है। चर्चा इस बात पर ज्यादा है कि अमेरिका सीधे हमला करेगा या नहीं, बल्कि इस पर है कि वह इजराइल को कैसे मदद दे सकता है। अंदरूनी बातचीत में यह विचार किया जा रहा है कि अमेरिकी वायुसेना इजराइली लड़ाकू विमानों को हवा में ईंधन भरने में मदद कर सकती है। इसके अलावा एक बड़ा सवाल यह भी है कि किन देशों से इजराइली विमानों को अपने हवाई रास्ते से गुजरने की अनुमति मिलेगी। जॉर्डन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि वे अपने हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल ईरान पर किसी भी हमले के लिए नहीं होने देंगे। ऐसे में यह साफ नहीं है कि संभावित कार्रवाई के लिए रास्ता कैसे तय होगा।
रिपोर्ट के मुताबिक इसी बीच अमेरिका ने पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य ताकत बढ़ा दी है। खबर है कि दूसरा अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस जेराल्ड आर फोर्ड भी क्षेत्र में भेजा जा रहा है। यह अमेरिकी सैन्य ताकत के साथ मिलकर ईरान के करीब भारी हथियारों की मौजूदगी सुनिश्चित करेगा1 ट्रंप ने इसे एहतियाती कदम बताया है। उनका कहना है कि अगर बातचीत विफल होती है तो अमेरिका तैयार रहना चाहता है। इजराइली पीएम नेतन्याहू खुले तौर पर ईरान के साथ समझौते को लेकर संदेह जता चुके हैं। उनका कहना है कि किसी भी समझौते में सिर्फ परमाणु कार्यक्रम ही नहीं, बल्कि ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्र में उसके समर्थित संगठनों की फंडिंग पर भी रोक होनी चाहिए।
दूसरी तरफ, ईरान ने भी संकेत दिया है कि वह कुछ हद तक यूरेनियम संवर्धन कम करने पर विचार कर सकता है, लेकिन बदले में उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटाने होंगे1 अभी तक किसी लिखित समझौते की स्थिति नहीं बनी है। अमेरिका और ईरान के बीच जेनेवा में दूसरे दौर की बातचीत मंगलवार को ओमान की मध्यस्थता में जेनेवा में बातचीत होगी। अमेरिकी प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर इसमें हिस्सा लेंगे। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप पहले बातचीत चाहते हैं, लेकिन सभी विकल्प खुले हैं।
75 साल पुराने सैन्य गठबंधन को नई मजबूती
17 Feb, 2026 09:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका और फिलीपींस ने अपनी ऐतिहासिक साझेदारी को एक बार फिर मजबूत करने का एलान किया है। संयुक्त राज्य अमेरिका और फिलीपींस के वरिष्ठ अधिकारियों ने मनीला में आयोजित 12वीं द्विपक्षीय सामरिक वार्ता के दौरान रक्षा, आर्थिक और समुद्री सहयोग को और गहरा करने पर सहमति जताई।
1951 की रक्षा संधि पर फिर मुहर
दोनों देशों ने 1951 की पारस्परिक रक्षा संधि के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। संयुक्त बयान में स्पष्ट किया गया कि यह संधि प्रशांत क्षेत्र में किसी भी सशस्त्र हमले की स्थिति में दोनों देशों की सेनाओं, विमानों और सरकारी जहाजों यहां तक कि कोस्ट गार्ड पर भी लागू होगी। दक्षिण चीन सागर में बढ़ते तनाव के बीच इस संधि का महत्व और बढ़ गया है। बयान में समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान पर जोर दिया गया।
दक्षिण चीन सागर पर चीन को संदेश
संयुक्त बयान में चीन की अवैध, आक्रामक और दबावपूर्ण गतिविधियों की आलोचना की गई और कहा गया कि इससे क्षेत्रीय शांति और स्थिरता प्रभावित हो रही है। दोनों देशों ने इंडो-पैसिफिक में मुक्त, खुला और सुरक्षित क्षेत्र बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही यह भी कहा गया कि प्रथम द्वीप श्रृंखला में सामूहिक रक्षा किसी भी आक्रामकता को रोकने के लिए जरूरी है।
सैन्य सहयोग और नई तैनाती
अमेरिका और फिलीपींस ने 2026 में पांचवीं टू प्लस टू मंत्री स्तरीय वार्ता आयोजित करने का फैसला किया है। दोनों पक्षों ने संयुक्त सैन्य क्षमता और आपसी तालमेल बढ़ाने, अत्याधुनिक मिसाइल और मानवरहित प्रणालियों की तैनाती बढ़ाने तथा साइबर सुरक्षा सहयोग मजबूत करने पर सहमति जताई। इसके अलावा जापान के साथ विदेश मंत्रियों स्तर की त्रिपक्षीय वार्ता भी प्रस्तावित है, जिससे क्षेत्रीय रणनीतिक संतुलन को नई दिशा मिल सकती है।
आर्थिक सुरक्षा भी राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा
बैठक में आर्थिक सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला को राष्ट्रीय सुरक्षा का अभिन्न हिस्सा बताया गया। दोनों देशों ने लूजोन इकोनॉमिक कॉरिडोर में निवेश बढ़ाने और 2026 में मनीला में पहला निवेश फोरम आयोजित करने की घोषणा की। परिवहन, लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देने पर भी सहमति बनी। साथ ही सुरक्षित और मानक-आधारित क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई चेन विकसित करने का संकल्प लिया गया।
परमाणु और स्वास्थ्य सहयोग
नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में अमेरिका ने 15 लाख डॉलर की सहायता की घोषणा की है, जिसके तहत फिलीपींस में स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) कंट्रोल रूम सिम्युलेटर विकसित किया जाएगा। इसके अलावा अमेरिका ने फिलीपींस की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए 250 मिलियन डॉलर की प्रतिबद्धता भी दोहराई। संयुक्त बयान में ताइवान जलडमरूमध्य में शांति और स्थिरता के महत्व को रेखांकित किया गया। साथ ही किसी भी देश की क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ बल प्रयोग का विरोध किया गया।
भारत और इंडो-पैसिफिक के लिए क्या मायने?
अमेरिका-फिलीपींस गठबंधन में बढ़ती सक्रियता को भारत सहित अन्य इंडो-पैसिफिक साझेदार ध्यान से देख रहे हैं। समुद्री सुरक्षा, सप्लाई चेन विविधीकरण और आसियान की भूमिका क्षेत्रीय रणनीतिक संतुलन के केंद्र में हैं। स्पष्ट है कि इंडो-पैसिफिक अब वैश्विक शक्ति संतुलन का अहम मंच बन चुका है, जहां अमेरिका अपने सहयोगियों के साथ रक्षा और आर्थिक साझेदारी को नए स्तर पर ले जाने में जुटा है।
नेपाल में चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज, आरपीपी ने जारी किया घोषणा-पत्र
17 Feb, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काठमांडू। नेपाल में 5 मार्च को होने वाले चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसे लेकर सभी पार्टियां अपने-अपने वादे कर रही हैं। नेपाल की राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (आरपीपी) ने नेपाल में राजतंत्र की वापसी की मांग मेनिफेस्टो के जरिए उठाई है। अपने चुनावी घोषणा-पत्र में पार्टी ने ‘पृथ्वी पथ’ को राष्ट्र निर्माण का मार्गदर्शक सिद्धांत बताया है। इसमें सेक्युलरिज्म को खारिज कर ‘हिंदू राष्ट्र’ बनाने की बात कही है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पार्टी अध्यक्ष राजेंद्र लिंगदेन ने काठमांडू में पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में घोषणा-पत्र पेश किया, जिसमें नेपाल को हिंदू राष्ट्र बनाने, राजतंत्र की बहाली, प्रांतीय संरचना को समाप्त कर दो-स्तरीय शासन अपनाने, चुनावी सुधार और अच्छे शासन पर जोर दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी ने 5 मार्च को होने वाले चुनाव के लिए इस घोषणा-पत्र को तैयार किया है, जिसमें आर्थिक परिवर्तन के 6 स्तंभों वाले मॉडल को नेपाल की समृद्धि का आधार बताया है।
पार्टी ने भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस, स्थानीय क्षेत्रों को स्वतंत्र बनाने और ‘पृथ्वी पथ’ को शासन की भावी दिशा के रूप में अपनाया है। घोषणा-पत्र में राजनीतिक स्थिरता, सुशासन, आर्थिक सुधार और सामाजिक न्याय के जरिए समृद्धि को बढ़ावा देने पर फोकस है। इसके अलावा पूर्व-पश्चिम महेंद्र राजमार्ग को तीन सालों में अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने और अगले 10 सालों को ऊर्जा उत्पादन का दशक घोषित करने का वादा किया है। जीरो टॉलरेंस की नीति और अच्छे शासन के प्रस्ताव में ‘हम कुचले जाएंगे, भ्रष्ट नहीं होंगे’ का आक्रामक नारा शामिल किया है। भ्रष्टाचार से लड़ने के इस वादे को अमल में लाने के लिए, पार्टी ने 1990 के बाद बड़े नेताओं और कर्मचारियों की संपत्ति की जांच करने और गैर-कानूनी संपत्ति जब्त करने के लिए कानूनी व्यवस्था का प्रस्ताव रखा है। इसने जाति भेदभाव और छुआछूत समेत सभी तरह के धार्मिक भेदभाव को अपराध बनाने का प्रण भी शामिल है। पार्टी का दावा है कि उसका विजन नेपाल में सभी धार्मिक समुदायों के सम्मान की रक्षा करना है, ताकि आजादी पक्की हो सके।
Boko Haram के बढ़ते खतरे के बीच बढ़ी हलचल
17 Feb, 2026 08:05 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नाइजीरिया में आतंकवाद और हथियारबंद गिरोहों से लड़ाई तेज होती जा रही है। इसी बीच अमेरिका ने करीब 100 सैनिक और सैन्य उपकरण वहां भेजे हैं। नाइजीरियाई सेना ने बताया कि ये अमेरिकी सैनिक लड़ाई नहीं करेंगे, बल्कि वहां की सेना को ट्रेनिंग देंगे, तकनीकी मदद देंगे और खुफिया जानकारी साझा करेंगे।
क्यों भेजे गए अमेरिकी सैनिक?
नाइजीरिया की सरकार ने खुद अमेरिका से मदद मांगी थी। देश में कई आतंकवादी और हथियारबंद गिरोह सक्रिय हैं। इनमें बोको हराम, आईएस से जुड़े संगठन और अपहरण करने वाले गिरोह शामिल हैं। इन हमलों में अब तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है।
नाइजीरिया में क्या करेंगे अमेरिकी सैनिक?
नाइजीरिया के डिफेंस हेडक्वार्टर के स्पोक्सपर्सन मेजर जनरल समैला उबा के अनुसार, अमेरिकी सैनिक सीधे युद्ध में हिस्सा नहीं लेंगे, केवल ट्रेनिंग, सलाह और जानकारी देंगे। इस दौरान पूरे ऑपरेशन की कमान नाइजीरिया के पास ही रहेगी।
अमेरिका-नाइजीरिया तनाव
कुछ समय पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आरोप लगाया था कि नाइजीरिया में ईसाइयों की सुरक्षा नहीं हो रही। लेकिन नाइजीरिया सरकार ने इस आरोप को गलत बताया और कहा कि आतंकवादी धर्म देखकर नहीं, बल्कि इलाके के हिसाब से हमला करते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, हमलों के ज्यादातर शिकार नाइजीरिया के मुस्लिम बहुल उत्तरी इलाकों के लोग हैं।
नाइजीरिया में हालात क्यों बिगड़े?
दरअसल, नाइजीरिया में स्थानीय आतंकवादी संगठन सक्रिय हैं और पड़ोसी देशों से भी आतंकी घुसपैठ बढ़ी है। इसके साथ अपहरण और अवैध खनन करने वाले गिरोह भी हिंसा फैला रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार अभी तक आम लोगों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा पाई है। दिसंबर में, अमेरिकी सेना ने उत्तर-पश्चिमी नाइजीरिया में इस्लामिक स्टेट ग्रुप से जुड़े आतंकवादियों पर एयरस्ट्राइक की थी।
बीएनपी के हिंदू सांसद ने भारत के विदेश नीति पर उठाए सवाल........हसीना के अलावा किसी को नहीं पूछा
17 Feb, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। बांग्लादेश की हालिया चुनाव में बीएनपी गठबंधन ने शानदार जीत दर्ज की है। 12 फरवरी को हुए चुनाव में बीएनपी ने 212 सीटें जीती हैं और पार्टी के नेता तारिक रहमान 17 फरवरी को प्रधानमंत्री पद की शपथ ले रहे है। इस चुनाव में तीन हिंदू सांसद भी चुने गए हैं, जिसमें ढाका-3 से जीते गोयेश्वर चंद्र रॉय संभावित मंत्री हैं। गोयेश्वर पहले भी बीएनपी सरकार में मंत्री रह चुके हैं और भारत से अच्छे संबंधों के समर्थक हैं, लेकिन उनके अनुसार भारत ने बांग्लादेश में हिंदुओं के उत्पीड़न पर कभी कार्रवाई नहीं की।
बीएनपी सांसद रॉय ने बताया कि चुनाव से पहले बीएनपी ने अपनी योजनाओं को जनता के सामने रखा और युवाओं पर विशेष ध्यान देने की बात कही। उनका कहना है कि बीएनपी सरकार कानून और व्यवस्था बनाएगी, अर्थव्यवस्था मजबूत करेगी और निर्यात बढ़ाने पर ध्यान देगी। उन्होंने जोर दिया कि बांग्लादेश में हर व्यक्ति को संविधान के अनुसार बराबरी का अधिकार है और सरकार तथा प्रशासन निष्पक्ष तरीके से काम करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हसीना सरकार के दौरान कई हिंदू समुदाय के लोग टॉर्चर किए गए, लेकिन भारत ने इस पर कभी कोई कदम नहीं उठाया।
गोयेश्वर ने स्पष्ट किया कि बीएनपी के समर्थन में सभी धर्मों के लोग शामिल थे.....हिंदू, मुस्लिम, बौद्ध और ईसाई—और बांग्लादेश में सांप्रदायिक सद्भाव की लंबी परंपरा रही है। उन्होंने अंतरिम सरकार की सराहना करते हुए कहा कि उसने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराए, लेकिन आर्थिक और कानून व्यवस्था की चुनौतियों के कारण पूरी क्षमता से काम नहीं कर सकी। अब चुनी हुई सरकार को संविधान और कानून के अनुसार काम करना चाहिए, न कि पार्टी की प्राथमिकताओं के अनुसार।
गोयेश्वर ने भारत की विदेश नीति पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि भारत ने बांग्लादेश में केवल शेख हसीना से दोस्ती की और बीएनपी नेताओं को नजरअंदाज किया। भारत को यह स्वीकार करना चाहिए कि उन्होंने पिछली नीतियों में गलती की। उन्होंने कहा कि हसीना को भारत में पनाह नहीं दी जानी चाहिए और सभी अपराधियों को कोर्ट का सामना करना चाहिए। उनका मानना है कि पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंध जरूरी हैं और यह केवल किसी एक पार्टी या देश के बड़ेपन पर निर्भर नहीं करता, बल्कि बराबरी और पारस्परिक सम्मान पर आधारित होना चाहिए।
दाहिनी आंख की रोशनी पर उठे सवाल
17 Feb, 2026 07:52 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के संस्थापक और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रावलपिंडी के अदियाला जेल में एक टीम ने मेडिकल जांच की, जिसमें उनकी दाहिनी आंख में बिना चश्मे के 6/24 और बायीं आंख में 6/9 आशिंक दृष्टि पाई गई। पाकिस्तानी की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।
चश्मे के साथ दृष्टि की स्थिति क्या है?
'डॉन' अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, चश्मे के साथ दाहिनी आंख में 6/9 और बायीं आंख में 6/6 दृष्टि थी। 6/6 दृष्टि का मतलब है कि व्यक्ति छह मीटर की दूरी पर सामान्य दृष्टि वाले किसी व्यक्ति की तरह चीजें स्पष्ट रूप से देख सकता है। जबकि 6/9 दृष्टि का अर्थ है कि व्यक्ति छह मीटर पर केवल उतना ही देख सकता है, जितना सामान्य दृष्टि वाला नौ मीटर की दूरी से देख सकता है।
मेडिकल बोर्ड में कौन-कौन शामिल थे?
रिपोर्ट के मुताबिक, मेडिकल बोर्ड में डॉ. प्रोफेसर नदीम कुरैशी, रावलपिंडी के अल-शिफा ट्रस्ट नेत्र अस्पताल के रेटिना विभाग के प्रमुख और डॉ. प्रोफेसर एम अरिफ, इस्लामाबाद के पाकिस्तान मेडिकल साइंसेज इंस्टीट्यूट (पीआईएमएस) में नेत्र रोग विभाग के प्रमुख शामिल थे। स्लिट लैम्प जांच में यह पाया गया कि दोनों आंखों की बाहरी परत (कॉर्निया) बिलकुल साफ थी और आंख के सामने वाले हिस्से में कोई गड़बड़ी नहीं थी। दाहिने आंख के अंदर का पारदर्शी तरल (विट्रियस) भी ज्यादातर साफ था, लेकिन उसमें कुछ छोटे-छोटे रेशेदार धब्बे दिखे और आंख के नीचे थोड़ी बहुत रक्तस्राव जैसी समस्या थी।
रेटिना और मैकुलर एडिमा की स्थिति क्या है?
रिपोर्ट के मुताबिक, दाहिने आंख के रेटिना यानी पीछे की परत में चारों हिस्सों में मध्यम मात्रा में रक्तस्राव था और कुछ छोटे सफेद धब्बे (कॉटन वूल स्पॉट्स) भी दिखे। आंख के बीच वाले हिस्से (मैकुलर एडिमा) में सूजन धीरे-धीरे ठीक हो रही थी और फोकस का मुख्य हिस्सा (फोवीअल कॉन्टूर) साफ नजर आ रहा था। रेटिना अपनी जगह जुड़ा हुआ था। खास जांच (ऑप्टिकल कोहेरेंस टोमोग्राफी) में भी पाया गया कि मैकुलर सूजन घटकर कम हो गई थी और आंख के बीच की मोटाई 550 से घटकर 350 हो गई।
पीटीआई के नेताओं को दी गई जानकारी
रिपोर्ट के मुताबिक, पीटीआई अध्यक्ष गोहर खान और सीनेट में विपक्षी नेता अल्लामा राजा नासिर अब्बास रविवार को पीआईएमएस पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उन्हें इमरान खान की स्थिति से अवगत कराया। इमरान खान के निजी चिकित्सकों को भी फोन पर जानकारी दी गई। हालांकि, इससे पहले पीटीआई नेता लतीफ खोसा ने पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश याह्या अफरीदी से औपचारिक रूप से संपर्क किया और इमरान खान की जांच के तरीके पर गंभीर आपत्तियां जताईं। उनके पत्र में बताया गया कि पूर्व प्रधानमंत्री की जांच अदियाला जेल में बहुत गोपनीय तरीके से की गई, जिससे लोगों में कई तरह की चिंता पैदा हो गई।
प्रशासनिक कार्यक्रम में हंगामा, SDM को झुनझुना थमाने पर FIR
16 Feb, 2026 06:42 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कैथल| हरियाणा के कैथल जिले में कांग्रेस विधायक देवेंद्र हंस और उनके चार सहयोगियों पर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। यह मामला गुहला के SDM कैप्टन परमेश सिंह को झुनझुना थमाने और अपमानजनक बयान देने से जुड़ा है। घटना जनवरी 2026 में हुई, जब विधायक देवेंद्र हंस और उनके समर्थक अवैध निर्माण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे।
यमुना नगर
विधायक ने आरोप लगाया कि SDM अवैध निर्माण नहीं रोक रहे और ठेकेदारों से मिलीभगत कर रहे हैं। SDM के बयानों में बदलाव से नाराज होकर उन्होंने SDM को झुनझुना थमाने की कोशिश की।
ये था मामला
विधायक ने कहा: "पकड़ो और जाकर बजाते रहो", "तुम्हारे बस का कुछ नहीं है, इसे बजाते रहो", या इसी तरह के शब्द बोले, जिसे अपमानजनक माना गया। SDM ने इसे ठुकरा दिया और कहा कि अपने पास रख लो। SDM ने विधायक पर दुर्व्यवहार, अधिकारी के कर्तव्य में बाधा डालने, और आधिकारिक काम में रुकावट का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी। सेना से रिटायर लोगों ने एसडीएम का समर्थन किया था।
पत्नी के मायके जाने के दौरान पूर्व सैनिक का दर्दनाक कदम
16 Feb, 2026 04:52 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चरखी दादरी|दादरी की हरिनगर कॉलोनी निवासी एक व्यक्ति ने रविवार देर रात को घर पर अपनी लाइसेंसी पिस्तौल से सिर में गोली मारकर आत्महत्या कर ली। मृतक 41 वर्षीय रविंद्र मूल रूप से झज्जर जिले के गांव खाचरौली तथा वर्तमान में दादरी की हरिनगर कॉलोनी में रहता था।
साल 2019 में भारतीय से हुआ था रिटायर
वह वर्ष 2019 में भारतीय सेना से रिटायर हुआ था और करीब ढाई वर्ष से सिंचाई विभाग में कार्यरत था। घटना के समय घर पर वह और उसका छोटा बेटा मौजूद थे। बेटे ने गांव में रह रहे अपने बड़े भाई को फोन पर घटना की सूचना दी। फिर मामले की जानकारी पुलिस को दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। हालांकि अभी तक घटना के कारणों का पता नहीं चल सका है।
पत्नी गई थी मायके
वारदात के समय मृतक की पत्नी खाटू श्याम से सीधे अपने मायके चली गई थी। सोमवार दोपहर को पुलिस ने मृतक के बड़े बेटे रचित के बयान के आधार पर इत्तफाकिया मौत की कार्रवाई करते हुए शव का पोस्टमार्टम करवाया।
घर में अकेले थे, सिर में गोली मारकर दी जान
16 Feb, 2026 04:42 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चरखी दादरी| दादरी की हरिनगर कॉलोनी निवासी एक व्यक्ति ने रविवार देर रात को घर पर अपनी लाइसेंसी पिस्तौल से सिर में गोली मारकर आत्महत्या कर ली। मृतक 41 वर्षीय रविंद्र मूल रूप से झज्जर जिले के गांव खाचरौली तथा वर्तमान में दादरी की हरिनगर कॉलोनी में रहता था।
साल 2019 में भारतीय से हुआ था रिटायर
वह वर्ष 2019 में भारतीय सेना से रिटायर हुआ था और करीब ढाई वर्ष से सिंचाई विभाग में कार्यरत था। घटना के समय घर पर वह और उसका छोटा बेटा मौजूद थे। बेटे ने गांव में रह रहे अपने बड़े भाई को फोन पर घटना की सूचना दी। फिर मामले की जानकारी पुलिस को दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। हालांकि अभी तक घटना के कारणों का पता नहीं चल सका है।
पत्नी गई थी मायके
वारदात के समय मृतक की पत्नी खाटू श्याम से सीधे अपने मायके चली गई थी। सोमवार दोपहर को पुलिस ने मृतक के बड़े बेटे रचित के बयान के आधार पर इत्तफाकिया मौत की कार्रवाई करते हुए शव का पोस्टमार्टम करवाया।
अमेरिका ने एयरस्ट्राइक कर सीरिया में आईएस के 30 ठिकानों को किया ध्वस्त, कई आतंकी ढेर
16 Feb, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी सेना ने सीरिया में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज करते हुए कई बड़े हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी केंद्रीय कमान द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह सैन्य कार्रवाई दिसंबर में हुए उस घातक आतंकी हमले का जवाब है, जिसमें दो अमेरिकी सैनिकों और एक नागरिक अनुवादक (ट्रांसलेटर) की जान चली गई थी। 13 दिसंबर को हुए उस हमले में सार्जेंट एडगर ब्रायन टोरेस-टोवर, सार्जेंट विलियम नथानिएल हॉवर्ड और नागरिक अनुवादक अयाद मंसूर सकात शहीद हुए थे।ताजा सैन्य कार्रवाई के तहत अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने 3 फरवरी से गुरुवार के बीच इस्लामिक स्टेट के 30 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया।
इन 10 प्रमुख हवाई हमलों में आतंकियों के हथियारों के गोदाम, प्रशिक्षण केंद्र और अन्य रणनीतिक सुविधाओं को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है। केंद्रीय कमान के आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर के हमले के बाद से अब तक अमेरिका ने इस्लामिक स्टेट के कम से कम 50 आतंकियों को या तो मार गिराया है या उन्हें हिरासत में लिया है। इस दौरान आतंकियों के 100 से अधिक ठिकानों पर बमबारी की गई है। दूसरी ओर, सीरियाई रक्षा मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में बताया कि सरकारी सुरक्षा बलों ने देश के पूर्वी हिस्से में स्थित एक प्रमुख सैन्य अड्डे पर नियंत्रण कर लिया है। बताया जा रहा है कि इस अड्डे का इस्तेमाल अमेरिकी सैनिक इस्लामिक स्टेट के खिलाफ अपनी गतिविधियों के संचालन के लिए कर रहे थे। गौरतलब है कि साल 2014 में जब इस्लामिक स्टेट ने सीरिया और इराक के एक बड़े भू-भाग पर अपनी खिलाफत की घोषणा की थी, तब अल-तनफ जैसे अड्डों ने इस आतंकी संगठन को पीछे धकेलने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वर्तमान सैन्य कार्रवाई क्षेत्र में आईएस के बचे हुए नेटवर्क को पूरी तरह समाप्त करने के उद्देश्य से की जा रही है।
यूएस ने भारत से केवल अतिरिक्त रूसी तेल की खरीद न करने की प्रतिबद्धता हासिल की: रुबियो
16 Feb, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
म्यूनिख। भारत और अमेरिका के बीच हालिया व्यापार समझौते को लेकर अंतरराष्ट्रीय गलियारों में जारी अटकलों पर अब विराम लग गया है। पिछले कुछ समय से रक्षा और कूटनीतिक विशेषज्ञों के बीच यह दावा किया जा रहा था कि इस डील के बदले अमेरिका ने भारत पर रूस से तेल खरीद बंद करने का दबाव बनाया है। हालांकि, म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के बयान और भारतीय विदेश मंत्रालय के स्पष्ट रुख ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। यह साफ हो गया है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता से कोई समझौता नहीं करेगा और रूस से तेल की खरीद जारी रहेगी।
म्यूनिख में वैश्विक नेताओं को संबोधित करते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने भारत से केवल अतिरिक्त रूसी तेल की खरीद न करने की प्रतिबद्धता हासिल की है। रूबियो के इस बयान में अतिरिक्त शब्द का प्रयोग बेहद मायने रखता है। इसका सीधा अर्थ यह है कि भारत वर्तमान में रूस से जितना तेल आयात कर रहा है, उसे रोकने या कम करने की कोई शर्त इस ट्रेड डील में शामिल नहीं है। यह बयान अमेरिकी प्रशासन की ओर से भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को एक प्रकार की अप्रत्यक्ष मान्यता है। रूबियो ने यह भी स्वीकार किया कि भारत के साथ चल रही बातचीत में भारत ने केवल नई या अतिरिक्त खरीद न बढ़ाने की बात कही है, जो मौजूदा आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित नहीं करती।
भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि देश की ऊर्जा नीति केवल लागत, उपलब्धता और जोखिम प्रबंधन पर आधारित है, न कि किसी बाहरी राजनीतिक दबाव पर। आंकड़ों के लिहाज से देखें तो भारत ने बाजार की स्थितियों और कीमतों में बदलाव के कारण रूसी तेल के आयात में खुद ही कुछ बदलाव किए हैं। 2025 के मध्य में जहां यह आयात लगभग 20 लाख बैरल प्रतिदिन था, वहीं हाल के महीनों में यह घटकर 12 लाख बैरल के करीब पहुंच गया है। लेकिन यह कमी किसी अमेरिकी दबाव का परिणाम नहीं, बल्कि भारत द्वारा अपनी ऊर्जा टोकरी के विविधीकरण का हिस्सा है। भारत अब अमेरिका और वेनेजुएला जैसे अन्य स्रोतों से भी तेल खरीद की संभावनाएं तलाश रहा है, लेकिन इसका मतलब रूस से पूरी तरह किनारा करना नहीं है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में भारत-अमेरिका संबंधों में व्यापार और ऊर्जा क्षेत्र को प्राथमिकता दी जा रही है। रूबियो ने सम्मेलन में यूक्रेन युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि यद्यपि रूस ने संघर्ष समाप्त करने की इच्छा जताई है, लेकिन शर्तें अभी भी जटिल बनी हुई हैं। ऐसी स्थिति में अमेरिका रूस पर प्रतिबंधों का दबाव बनाए रखना चाहता है, फिर भी वह भारत जैसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार की जरूरतों को समझता है। रूस से मिलने वाला सस्ता तेल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए रीढ़ की हड्डी के समान है, जो न केवल ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करता है बल्कि घरेलू स्तर पर महंगाई को नियंत्रित रखने में भी बड़ी भूमिका निभाता है। अंततः, यह पूरा घटनाक्रम दर्शाता है कि भारत वैश्विक शक्तियों के बीच संतुलन बनाए रखते हुए अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखने में सफल रहा है।
पीएम विक्टर ओर्बन केवल अपना पेट बढ़ा रहे हैं, सेना नहीं
16 Feb, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मास्को। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को तीन साल पूरे हो गए हैं। जेलेंस्की लगातार यूरोपीय देशों को रूस के प्रति आगाह करते हुए अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने के लिए चेतावनी देते रहे हैं। अब उन्होंने चेतावनी नजर अंदाज करने के लिए हंगरी के पीएम विक्टर ओर्बन पर हमला बोला। जेलेंस्की ने कहा कि विक्टर क्षेत्रीय सुरक्षा पर ध्यान देने की बजाय घरेलू राजनीति को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं। वह केवल अपना पेट बढ़ा रहे हैं, सेना नहीं। जेलेंस्की का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब हंगरी की तरफ से यूक्रेन की मदद करने की अनिच्छा व्यक्त की गई है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबकि तीन साल से जारी यूक्रेन और रूस के युद्ध ने यूरोपीय संघ के देशों के अंदर भी कलह को बढ़ा दिया है। ज्यादातर देश रूस के खिलाफ यूक्रेन को राहत पैकेज देने और मॉस्को पर बैन का समर्थन करते हैं, लेकिन हंगरी बार-बार इन उपायों को किसी न किसी वजह से या बहाने से नजरअंदाज करता है। हंगरी लगातार इस युद्ध को आगे न बढ़ाने के लिए भी चेतावनी देता है। दरअसल, विक्टर ओर्बन को पुतिन का करीबी माना जाता है, जिसकी वजह से उन्हें कीव समेत कई यूरोपीय देशों से आलोचना का सामना करना पड़ता है।
रिपोर्ट के मुताबिक हंगरी के पीएम विक्टर ओर्बन ने शुरुआत से ही यूरोपीय देशों द्वारा यूक्रेन को दिए जा रहे अतिरिक्त फंडिंग का विरोध किया है। इतना ही नहीं उन्होंने सीधे हथियारों की आपूर्ति का भी विरोध किया। ओर्बन ने हंगरी के हथियारों को यूक्रेन को देने से इनकार करते हुए कहा था कि बुडापेस्ट को अपनी आर्थिक स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा को ज्यादा प्राथमिकता देनी है। इसके अलावा उन्होंने पश्चिमी यूक्रेन में रहने वाले हंगेरियाई मूल के लोगों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार को लेकर भी यूक्रेनी सरकार पर सवाल उठाया था।
बता दें रूस और यूक्रेन युद्ध पिछले तीन साल से जारी है। अमेरिका समेत तमाम देश इसे खत्म करवाने की कोशिश कर चुके हैं। दोनों देशों की तरफ से कई लाख सैनिक अपनी जान गंवा चुके हैं। युद्ध के पहले यूक्रेन जिस नाटो की सदस्यता लेने की जिद कर रहा था, अब वह भी उससे दूर जा चुकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कहा है कि यूक्रेन को नाटो की सदस्यता नहीं मिलेगी। अभी रूस और यूक्रेन के बीच में विवाद जमीन को लेकर है। रूस युद्ध में कब्जाई जमीन को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है, ऐसे में युद्ध जारी है।
दावा: रुसी विपक्षी नेता नवलनी की मौत प्राकृतिक नहीं, एक राजनीतिक हत्या थी
16 Feb, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मास्को। रूस के सबसे बड़े विपक्षी नेता एलेक्सी नवलनी की मौत का रहस्य फिर चर्चा में आ गया। हाल ही में पांच यूरोपीय देशों ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, स्वीडन और नीदरलैंड ने इस रहस्यमयी मौत को लेकर दावा किया है कि एलेक्सी नवलनी की मौत प्राकृतिक नहीं, बल्कि एक राजनीतिक हत्या थी। दावा किया जा रहा है कि इन देशों के वैज्ञानिकों को नवलनी के सैंपल्स में एक ऐसे दुर्लभ और जानलेवा जहर मिला है, जिसका इस्तेमाल प्राचीन काल में आदिवासी शिकार के लिए किया करते थे। इस एक प्रकार के मेंढक का विष बताया जा रहा है। इस खुलासे के जरिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की गई है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, स्वीडन और नीदरलैंड ने शनिवार को एक संयुक्त बयान जारी कर दावा किया है कि एलेक्सी नवलनी को एपाइबेटिडाइन नाम का एक घातक जहर दिया गया था। एपाइबेटिडाइन दक्षिण अमेरिका के रेन फॉरेस्ट में पाए जाने वाले जहरीले डार्ट मेंढकों की त्वचा से निकाला जाता है। ये जहर इतना खतरनाक होता है कि इसकी इसकी छोटी मात्रा भी इंसान को दे दी जाए तो उसे तुरंत लकवा मार जाता है और उसकी जान भी जा सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक मेंढक का ये जहर निकोटीन की तुलना में 200 गुना ज्यादा शक्तिशाली होता है और शरीर के रेस्पिरेटरी सिस्टम को फेल कर देता है, जिससे मौत प्राकृतिक जैसी दिखाई देती है। वैज्ञानिक के मुताबित एपाइबेटिडाइन शरीर के निकोटिनिक एसिटाइलकोलाइन रिसेप्टर्स पर हमला करता है। इन यूरोपीय सरकारों का तर्क है कि इस तरह के दुर्लभ जहर को जुटाना, उसे लैब में प्रोसेस करना और जेल जैसी सुरक्षित जगह पर किसी को देना केवल एक सरकारी मशीनरी के लिए ही संभव है।
बता दें भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले नवलनी की फरवरी 2024 में रूस की सबसे खतरनाक आर्कटिक जेल में मौत हो गई थी। रूसी अधिकारियों ने दावा किया था कि टहलकर लौटे तो अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और इसके बाद हालत बिगड़ती ही चली गई, आखिरकार उनकी मौत हो गई। हालांकि जेल प्रशासन के इस बयान को नवलनी परिवार ने कभी स्वीकार नहीं किया। नवलनी की विधवा पत्नी यूलिया ने पहले ही दावा किया था कि दो स्वतंत्र प्रयोगशालाओं ने नवलनी के शरीर में जहर की पुष्टि की है। उन्होंने वैश्विक मंच पर बार-बार पुतिन पर सवाल उठाए थे।
सम्मेलन में हिस्सा लेने जर्मनी पहुंचे मुनीर, प्रवेश से पहले ही सुरक्षकर्मियों ने रोका मांगी आईडी
16 Feb, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
म्यूनिख। पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को जर्मनी में आयोजित कॉन्फ्रेंस के दौरान सुरक्षा जांच में रोके जाने का मामला चर्चा में है। 13 से 15 फरवरी के बीच आयोजित इस सम्मेलन में शामिल होने पहुंचे मुनीर को कार्यक्रम स्थल के प्रवेश द्वार पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने पहचान पत्र दिखाने को कहा। वीडियो में सुरक्षाकर्मी उन्हें रोकते हुए कहते सुनाई देते हैं, “रुकिए… आपकी आईडी कहां है? कृपया आईडी कार्ड दिखाइए।”
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह कार्रवाई सम्मेलन में लागू मानक सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत की गई। म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में वैश्विक नेता, रक्षा अधिकारी, राजनयिक और नीति विशेषज्ञ बड़ी संख्या में शामिल होते हैं, ऐसे में कड़ी पहचान जांच सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है। हालांकि, इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही है। कई यूजर्स ने इसे पाकिस्तान की कूटनीतिक असहजता से जोड़कर देखा, जबकि अन्य लोगों ने कहा कि उच्चस्तरीय अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में सभी प्रतिभागियों के लिए समान सुरक्षा नियम लागू होते हैं।
पाकिस्तान के पूर्व सैन्य अधिकारी और टिप्पणीकार ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहचान सत्यापन एक सामान्य प्रक्रिया है और इसमें असामान्य कुछ नहीं है। इस बीच जर्मनी स्थित सिंधी राजनीतिक संगठन जेये सिंध मुत्ताहिदा महाज ने सम्मेलन स्थल के बाहर मुनीर की भागीदारी का विरोध किया। संगठन के अध्यक्ष शफी बुरफत ने संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और जर्मन सरकार को संबोधित बयान में पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व को आमंत्रित किए जाने पर आपत्ति जताई।
संगठन ने अपने बयान में 1971 की घटनाओं और बांग्लादेश मुक्ति संग्राम का उल्लेख करते हुए पाकिस्तान की सैन्य व्यवस्था पर मानवाधिकार उल्लंघन और राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप लगाए। पाकिस्तान इन आरोपों को पहले भी खारिज करता रहा है। म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन हर वर्ष वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर विचार-विमर्श का प्रमुख मंच माना जाता है। इस बार भी सम्मेलन में विभिन्न देशों के शीर्ष सैन्य और राजनीतिक प्रतिनिधि शामिल हुए, जहां सुरक्षा, भू-राजनीति और वैश्विक स्थिरता जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
विधानसभा का बजट सत्र 20 फरवरी से, बजट पेश करने की संभावित तारीख 2 मार्च
16 Feb, 2026 04:59 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़ | हरियाणा सरकार का प्रस्तावित बजट सत्र 20 फरवरी 2026 से शुरू होगा। विधानसभा अध्यक्ष की ओर से प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार सत्र का शुभारंभ 20 फरवरी को सुबह 11 बजे से राज्यपाल के अभिभाषण के साथ होगा। पहले दिन शोक प्रस्ताव और पटल पर पत्र रखे जाने की कार्यवाही भी होगी। 23 से 26 फरवरी तक राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा चलेगी। 27 फरवरी को मुख्यमंत्री अभिभाषण पर जवाब देंगे व धन्यवाद प्रस्ताव पर मतदान कराया जाएगा। इसी दिन अनुपूरक बजट (तृतीय किश्त) 2025-26 से संबंधित विनियोग विधेयक भी पारित किया जाएगा।
हरियाणा विधानसभा का बजट सत्र 20 फरवरी 2026 से शुरू होगा
2 मार्च 2026 को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बजट अनुमान पेश किए जाने की संभावना है। बजट पेश होने के बाद 10 से 13 मार्च तक बजट पर सामान्य चर्चा निर्धारित की गई है। 14 और 15 मार्च को अवकाश रहेगा। 16 मार्च को बैठकों की रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी तथा बजट पर चर्चा और वित्त मंत्री का उत्तर होगा। 17 मार्च को विनियोग विधेयक और अन्य विधायी कार्य निपटाए जाएंगे। 18 मार्च को अन्य शासकीय कार्य लिए जाने का कार्यक्रम है। हालांकि इस पर मुहर लगाने के लिए 19 फरवरी को बिजनेस काउंसिल की बैठक होगी।
माओवाद की समाप्ति के बाद अब बस्तर का सर्वांगीण विकास होगा: मंत्री राम विचार नेताम
अम्बिकापुर में विकास को नई रफ्तार
ड्रोन के साथ अपने हौसलों को उड़ान दे रही हैं सरूपी मीणा
अल्पविराम की अवधारणा जीवन और कार्य के संतुलन के लिये अत्यंत आवश्यक : अर्गल
