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ट्रंप और नेतन्याहू की गुप्त बैठक: ईरान के साथ कूटनीति और मिडनाइट हैमर की चेतावनी पर चर्चा
13 Feb, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बुधवार को व्हाइट हाउस में एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक की। लगभग तीन घंटे तक बंद कमरे में चली इस मुलाकात ने वैश्विक कूटनीति के गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु ईरान का परमाणु कार्यक्रम और इस क्षेत्र में भविष्य की रणनीतियां थीं। हालांकि बैठक के बाद कोई संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की गई, लेकिन दोनों नेताओं के अलग-अलग बयानों से स्पष्ट है कि ईरान के मुद्दे पर दृष्टिकोण में कुछ अंतर के बावजूद रणनीतिक तालमेल बना हुआ है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बैठक के बाद सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी कि चर्चा सकारात्मक रही, हालांकि किसी अंतिम समझौते पर मुहर नहीं लगी है। ट्रंप ने इजरायल के संदेहों के बावजूद ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत के मार्ग को खुला रखने की वकालत की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि एक व्यावहारिक समझौता संभव है, तो वह सबसे बेहतर विकल्प होगा। इसके साथ ही उन्होंने ईरान को पिछली सैन्य कार्रवाई की याद दिलाते हुए अप्रत्यक्ष चेतावनी भी दी। ट्रंप ने ऑपरेशन मिडनाइट हैमर का उल्लेख किया, जिसके तहत पिछले साल अमेरिका ने ईरानी परमाणु ठिकानों पर बमबारी की थी। उन्होंने कहा कि पिछली बार समझौते से पीछे हटने के कारण ईरान को भारी कीमत चुकानी पड़ी थी और इस बार अमेरिका एक ज्यादा जिम्मेदार व्यवहार की उम्मीद करता है।
दूसरी ओर, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का रुख इजरायल की सुरक्षा चिंताओं को लेकर अडिग रहा। उनके कार्यालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप के समक्ष स्पष्ट किया कि इजरायल अपनी सुरक्षा जरूरतों से कोई समझौता नहीं करेगा। इजरायली सुरक्षा हलकों में यह आशंका प्रबल है कि ईरान के साथ किया गया कोई भी सीमित समझौता उसकी परमाणु और सैन्य क्षमताओं को रोकने में नाकाफी साबित होगा। नेतन्याहू ने ईरान के साथ-साथ गाजा और पूरे मध्य पूर्व के सुरक्षा हालात पर चर्चा की और अमेरिका के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखने पर सहमति जताई। यह उच्चस्तरीय बैठक ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य उपस्थिति को और अधिक सुदृढ़ कर दिया है। क्षेत्र में एक नया विमानवाहक पोत भेजने की तैयारी चल रही है, जो ईरान पर दबाव बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा है। इस सैन्य दबाव के बीच भी अमेरिका कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय है; हाल ही में ओमान में अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता का पहला दौर संपन्न हुआ है और दूसरे दौर की तैयारी की जा रही है। अमेरिका चाहता है कि किसी भी संभावित समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम के साथ-साथ उसके बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों पर भी अंकुश लगाया जाए।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी इस नीति को स्पष्ट करते हुए संकेत दिया कि वर्तमान प्रशासन का प्राथमिक लक्ष्य ईरान में सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि उसे परमाणु हथियार प्राप्त करने से रोकना है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ दिया कि यदि कूटनीति विफल रहती है, तो अन्य सभी विकल्प मेज पर हैं। जानकारों का मानना है कि यदि बातचीत का यह दौर किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुँचता है, तो आने वाले समय में अमेरिका और इजरायल संयुक्त सैन्य कार्रवाई की ओर कदम बढ़ा सकते हैं। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें ओमान में होने वाले अगले दौर की वार्ता और व्हाइट हाउस की इस गुप्त बैठक के बाद निकलने वाले कूटनीतिक निष्कर्षों पर टिकी हैं।
पूर्व पीएम इमरान खान की आंखों की जांच और बच्चों से फोन पर कराएं बात
13 Feb, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व पीएम इमरान खान की सेहत और परिवार से बातचीत की सुविधा देने को लेकर आदेश जारी किया है। कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि 16 फरवरी तक किसी योग्य नेत्र विशेषज्ञ से इमरान खान की आंखों की जांच कराई जाए, साथ ही इमरान के परिवार से फोन पर बातचीत कराने का निर्देश दिया है। इमरान खान की ओर से दायर की गई मानवीय आधार वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान की सेहत को प्राथमिकता देते हुए जेल प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कोर्ट ने निर्देश दिए कि आंखों की जांच में कोई देरी नहीं होनी चाहिए और इसके लिए 16 फरवरी की समयसीमा तय की है। विशेषज्ञ डॉक्टर इमरान की आंखों की स्थिति की जांच करेंगे और जरूरत पड़ने पर उचित इलाज की सलाह देंगे। कोर्ट ने केवल स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि इमरान खान के मानवीय अधिकारों का भी सम्मान किया है। कोर्ट ने अधिकारियों को आदेश दिया है कि इमरान खान को उनके बच्चों से फोन पर बात करने की अनुमति और सुविधा दी जाए। लंबे वक्त से अपने परिवार और बच्चों से दूर जेल में बंद इमरान के लिए ये एक बड़ी भावनात्मक राहत है।
बता दें पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान को 2023 में गिरफ्तार किया गया था और तब से वह जेल में बंद हैं। उनकी पत्नी बुशरा बीबी भी जेल में बंद हैं। पीटीआई का दावा है कि इमरान खान की सेहत बिगड़ रही है और उन्हें मेडिकल जांच की जरूरत है।
अमेरिका में जान गंवाने वाली भारतीय छात्रा के परिवार को मिलेंगे 2.9 करोड डॉलर
13 Feb, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिका के सिएटल शहर ने एक पुलिस अधिकारी की तेज रफ्तार गाड़ी की टक्कर से जान गंवाने वाली भारतीय छात्रा के परिवार के साथ 2.9 करोड़ अमेरिकी डॉलर के समझौते पर सहमति जताई है। बता दें छात्रा जाह्नवी कंदुला को पुलिस अधिकारी की गाड़ी ने उस समय टक्कर मारी थी, जब वह मादक पदार्थ संबंधी एक कॉल के बाद कार्रवाई के लिए 40 किलोमीटर प्रति घंटे की सीमा वाले क्षेत्र में 119 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से जा रहे थे। उनकी गाड़ी की आपातकालीन लाइट जल रही थीं और चौराहों पर सायरन का इस्तेमाल भी किया जा रहा था।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सिटी अटॉर्नी ने कहा कि जाह्नवी कंदुला की मौत हृदयविदारक है और शहर को उम्मीद है कि यह वित्तीय समझौता कंदुला परिवार को कुछ हद तक संतोष देगा। जाह्नवी का जीवन अहम था। यह उनके परिवार, मित्रों और हमारे समुदाय के लिए मायने रखता था। कंदुला सिएटल स्थित नॉर्थईस्टर्न यूनिवर्सिटी परिसर में सूचना प्रणाली में मास्टर डिग्री के लिए पढ़ाई कर रही थीं। जाह्नवी कंदुला के परिवार के वकीलों ने प्रतिक्रिया नहीं दी है। दोनों पक्षों ने पिछले शुक्रवार को कोर्ट में समझौते की सूचना दाखिल की थी। कंदुला की मौत के बाद व्यापक प्रदर्शन हुए थे। लोगों का आक्रोश इस बात को लेकर भड़क उठा जब एक पुलिस अधिकारी के बॉडी कैमरा की रिकॉर्डिंग सामने आई, जिसमें वह हंसते हुए कंदुला के जीवन को मामूली बताते और यह कहते सुनाई दिया कि शहर को सिर्फ एक चेक लिख देना चाहिए।
भारत के राजनयिकों ने भी मामले की जांच की मांग की थी। शहर के नागरिक निगरानी प्राधिकरण ने पाया कि यूनियन नेता रहे अधिकारी की टिप्पणियों से विभाग की साख को नुकसान पहुंचा और लोगों का विश्वास कमजोर हुआ। अधिकारी को बर्खास्त कर दिया गया और उन्होंने गलत तरीके से सेवा समाप्ति के खिलाफ शहर पर मुकदमा दायर किया है। उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणियां इस बात की आलोचना करने के उद्देश्य से थीं कि वकील इस मौत पर संभवत: किस तरह प्रतिक्रिया देंगे।
रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस विभाग ने वाहन चला रहे अधिकारी को भी बर्खास्त कर दिया। उन्हें लापरवाही से वाहन चलाने का दोषी ठहराया गया और 5,000 डॉलर का जुर्माना भरने का आदेश दिया गया। किंग काउंटी के अभियोजकों ने उनके खिलाफ गंभीर आपराधिक आरोप दायर करने से इनकार करते हुए कहा कि यह साबित नहीं किया जा सका कि उन्होंने जानबूझकर सुरक्षा की अनदेखी की। समझौते की लगभग दो करोड़ डॉलर की राशि शहर की बीमा पॉलिसी के तहत कवर होने की संभावना है।
आर्थिक संकट की आहट के बीच जापान की नई प्रधानमंत्री सनाए तकाची के सामने कई चुनौतियां
12 Feb, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
टोक्यो। जापान में नई सरकार के साथ साथ नई चुनौतियां भी दिखाई दे रही हैं। जापान में हाल ही में संपन्न हुए आम चुनावों ने न केवल देश की राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ दिया है, बल्कि वैश्विक स्तर पर जापान की छिपी हुई आर्थिक कमजोरियों को भी उजागर कर दिया है। लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता सनाए तकाची ने इन चुनावों में 75.7 फीसदी सीटों पर ऐतिहासिक कब्जा जमाकर जबरदस्त जीत हासिल की है। दूसरे विश्व युद्ध के बाद किसी भी जापानी नेता को मिला यह अब तक का सबसे बड़ा जनादेश है। हालांकि, यह जीत जितनी भव्य है, नई सरकार के सामने खड़ी आर्थिक चुनौतियां उतनी ही विकराल हैं। दुनिया अब तक जापान को केवल एक आर्थिक रोल मॉडल और तकनीक के गढ़ के रूप में देखती आई है, लेकिन इस चुनाव और इसके बाद की घोषणाओं ने वहां की अर्थव्यवस्था की एक बेहद पिछड़ी और संकटग्रस्त तस्वीर पेश की है।
ऐतिहासिक आंकड़ों पर नजर डालें तो दूसरे विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद जापान वर्ष 1960 से 1980 के बीच एक वैश्विक आर्थिक महाशक्ति बनकर उभरा था। 90 के दशक तक जापान की जीडीपी ग्रोथ जी-7 देशों के मुकाबले काफी तेज थी, लेकिन इसके बाद से ही अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने लगा। 60 और 80 के दशक के बीच जहाँ जापान की विकास दर 16.4 फीसदी से 17.9 फीसदी के बीच रही थी, वहीं साल 2010 से 2024 के बीच यह गिरकर शून्य से भी 2.4 फीसदी नीचे चली गई है। यानी वर्तमान में जापान एक गंभीर मंदी के दौर से गुजर रहा है।
जापान इस समय आगे कुआं और पीछे खाई जैसी स्थिति का सामना कर रहा है। एक तरफ जीडीपी विकास दर नकारात्मक है, तो दूसरी तरफ सरकारी कर्ज का बोझ जीडीपी के मुकाबले 230 फीसदी के खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। यह दशकों से चले आ रहे घाटे वाले खर्चों का परिणाम है। नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री सनाए तकाची ने अपने चुनावी वादों में अतिरिक्त खर्चों को घटाने और टैक्स में कटौती का ऐलान किया है। इस घोषणा के बाद जापान के बॉन्ड मार्केट में भारी हलचल देखी जा रही है और बॉन्ड यील्ड 3.56 फीसदी के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। विशेषज्ञ इसे जापान के लिए डेट क्राइसिस यानी ऋण संकट की शुरुआत मान रहे हैं, जो पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
जापानी मुद्रा येन की कमजोरी ने भी सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। येन वर्तमान में डॉलर के मुकाबले कई वर्षों के निचले स्तर पर है। ब्याज दरों में बढ़ोतरी के कारण आयात महंगा हो गया है जिससे घरेलू बाजार में महंगाई तेजी से बढ़ी है। अमेरिका के साथ जारी टैरिफ वॉर ने निर्यात को चोट पहुंचाई है और विदेशी निवेश को कमजोर कर दिया है। इन हालातों में अब सबकी निगाहें बैंक ऑफ जापान की आगामी मौद्रिक नीतियों पर टिकी हैं। प्रधानमंत्री तकाची ने गरीबों और निम्न आय वर्ग को राहत देने के लिए बड़े कदम उठाने का वादा किया है। इस दिशा में उन्होंने खाद्य उत्पादों पर लगने वाले 8 फीसदी कंजम्पशन टैक्स को दो साल के लिए खत्म करने का निर्णय लिया है। इससे गरीब परिवारों के लिए भोजन की लागत कम होगी और उनके जीवन यापन में सुधार आने की उम्मीद है। साथ ही, निम्न आय वर्ग की बचत बढ़ाने के लिए टैक्स छूट का दायरा बढ़ाने की भी तैयारी है। अब देखना यह होगा कि प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आईं तकाची किस तरह जापान को इस भयंकर आर्थिक संकट से बाहर निकाल पाती हैं।
बांग्लादेश में मतदान के एक दिन पहले हुई झड़प में नेता की आंख निकाली, सदमे से मां ने तोड़ा दम
12 Feb, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। बांग्लादेश के बोगुरा जिले के नंदीग्राम उपजिले में चुनावी रंजिश और हिंसा का एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहां कल यानी 12 फरवरी को होने वाले मतदान से ठीक पहले बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और जमात-ए-इस्लामी के कार्यकर्ताओं के बीच हुई हिंसक झड़प में न केवल छह लोग गंभीर रूप से घायल हुए, बल्कि नफरत इस कदर हावी हुई कि एक नेता की आंख ही निकाल दी गई। इस वीभत्स घटना के बाद इलाके में भारी तनाव व्याप्त है और राजनीतिक माहौल गरमा गया है।
घटनाक्रम के अनुसार, सोमवार शाम करीब 7:30 बजे परशुन गांव में उस समय विवाद शुरू हुआ था जब जमात-ए-इस्लामी के कार्यकर्ता चुनाव प्रचार कर रहे थे। मौके पर मौजूद बीएनपी समर्थकों ने उन पर मतदाताओं को लुभाने के लिए पैसे बांटने का आरोप लगाया। यह आरोप-प्रत्यारोप देखते ही देखते हिंसक झड़प में तब्दील हो गया। बताया जा रहा है कि बीएनपी कार्यकर्ताओं ने जमात के कुछ लोगों को पकड़ लिया और उन्हें स्थानीय नेता मसूद राना के घर ले गए। इसके कुछ ही देर बाद, अपने साथियों को छुड़ाने के लिए बड़ी संख्या में जमात कार्यकर्ता मसूद राना के घर पर धावा बोल दिया। इस हमले के दौरान हुई बर्बरता ने सबको हैरान कर दिया। बीएनपी उम्मीदवार मोशर्रफ हुसैन ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि हमलावरों ने मसूद राना की दाहिनी आंख फोड़कर निकाल दी। मसूद को तत्काल बोगुरा के शहीद जियाउर रहमान मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को अत्यंत गंभीर बताया। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, मसूद की आंख की हड्डी टूट चुकी है और उनकी रोशनी वापस आने की संभावना बहुत कम है। उन्हें बेहतर उपचार के लिए ढाका स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑप्थैल्मोलॉजी रेफर कर दिया गया है। इस हिंसा का दुखद पहलू केवल यहीं तक सीमित नहीं रहा। मोशर्रफ हुसैन ने दावा किया कि अपने बेटे के साथ हुई इस भयानक दरिंदगी की खबर सुनते ही मसूद राना की मां, राबेया की तबीयत बिगड़ गई और सदमे के कारण उनकी मौत हो गई। उनके पैतृक घर में नमाज-ए-जनाजा अदा की गई है, जिससे पूरे गांव में मातम छाया हुआ है। दूसरी ओर, जमात के उम्मीदवार मोस्तफा फैसल ने वोट खरीदने के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने जवाबी आरोप लगाते हुए कहा कि बीएनपी कार्यकर्ताओं ने बिना किसी उकसावे के उनके लोगों पर हमला किया, जिसमें उनके भी दो कार्यकर्ता घायल हुए हैं। स्थानीय पुलिस प्रशासन ने घटना की पुष्टि की है, लेकिन मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विस्तृत जानकारी देने से बच रहा है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच और शांति व्यवस्था बनाए रखने में जुटी है।
गुयाना की संसद में गूंजी शुद्ध हिंदी, भारतीय मूल के मंत्री ने बिना कागज के बहस की चुनौती दी
12 Feb, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जॉर्जटाउन। दक्षिण अमेरिकी देश गुयाना की संसद में उस समय एक ऐतिहासिक और गौरवशाली पल देखने को मिला, जब बजट 2026 पर चर्चा के दौरान हिंदी भाषा की गूँज सुनाई दी। भारतीय मूल के कृषि राज्य मंत्री विकाश रामकिसून ने अपनी भाषाई क्षमता पर सवाल उठाने वाले विपक्षी सांसदों को न केवल हिंदी में करारा जवाब दिया, बल्कि उन्हें बिना किसी तैयारी के शुद्ध हिंदी में बहस करने की खुली चुनौती भी दे डाली। सदन के भीतर हिंदी की यह दहाड़ अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और इसे वैश्विक स्तर पर हिंदी के बढ़ते गौरव के रूप में देखा जा रहा है।
पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब विपक्षी सांसद विष्णु पांडे ने मंत्री विकाश रामकिसून की हिंदी बोलने की काबिलियत पर तंज कसा। विपक्ष को उम्मीद नहीं थी कि इसका जवाब इतनी प्रखरता से मिलेगा। रामकिसून तुरंत अपनी कुर्सी से खड़े हुए और बिना किसी हिचकिचाहट के शुद्ध हिंदी में कहा, माननीय अध्यक्ष महोदय, आदरणीय सदस्य विष्णु पांडे... मैं अभी इसी वक्त उनको चुनौती देता हूं कि किसी भी स्तर पर, किसी भी जगह पर जाकर, विषय वे तय करें, और मैं बिना कागज लिए वहां डिबेट करूंगा। सदन में मौजूद सदस्य मंत्री के इस आत्मविश्वास और भाषा पर पकड़ को देखकर हक्के-बक्का रह गए। जॉर्जटाउन स्थित भारतीय उच्चायोग ने भी इस घटना की सराहना करते हुए इसे गुयाना की संसद में गूंजी हमारी हिंदी के रूप में गर्व के साथ साझा किया है। गौरतलब है कि विकाश रामकिसून की जड़ें भारत से गहरी जुड़ी हुई हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से कॉमर्स में मास्टर डिग्री ली है और वे कानून के भी जानकार हैं। राजनीति में कदम रखने से पहले वे बैंकिंग क्षेत्र में एक सफल प्रबंधक के रूप में कार्य कर चुके हैं। गुयाना की करीब 40 प्रतिशत आबादी भारतीय मूल की है, जिनके पूर्वज 1838 से 1917 के बीच उत्तर प्रदेश और बिहार से गिरमिटिया मजदूर के रूप में वहां गए थे। आज विकाश रामकिसून जैसे नेता न केवल वहां की राजनीति में सक्रिय हैं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक और भाषाई विरासत को भी गर्व के साथ संजोए हुए हैं। उनकी इस चुनौती ने साबित कर दिया है कि सात समंदर पार भी हिंदी न केवल जीवित है, बल्कि राजनीतिक संवाद का एक सशक्त माध्यम बनी हुई है।
ईरान समझौते की शर्तों को नहीं मानता है, तो भुगतने होंगे गंभीर सैन्य परिणाम
12 Feb, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। ईरान और अमेरिका के बीच एक नए परमाणु समझौते को लेकर जारी बातचीत के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सख्त रुख अपनाया है। एक इंटरव्यू में ट्रंप ने साफ किया कि यदि ईरान समझौते की शर्तों को नहीं मानता है, तो उसे गंभीर सैन्य परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। सैन्य बेड़े की रवानगी और चेतावनी देते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका का एक विशाल नौसैनिक बेड़ा ईरान की ओर रवाना हो चुका है। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि ईरान समझौता करना चाहता हैं, और अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो यह उनकी बेवकूफी होगी। हमने पहले भी उनके न्यूक्लियर ठिकानों को तबाह कर दिया है, और हम देखेंगे कि इस बार हम और क्या नष्ट कर सकते हैं।
ट्रंप का यह बयान उस समय आया है जब सोमवार को ओमान की मध्यस्थता में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच सीधी मुलाकात हुई। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाक़ाई ने बातचीत को सकारात्मक बताया और संकेत दिया कि वार्ता आगे भी जारी रहेगी। एक तरफ जहां कूटनीतिक रास्तों से समाधान निकालने की कोशिश हो रही है, वहीं ट्रंप की सैन्य कार्रवाई की धमकी ने इस बातचीत पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। बता दें अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने यूरेनियम संवर्धन और परमाणु ठिकानों को पूरी तरह नियंत्रित करे। ट्रंप प्रशासन मैक्सिमम प्रेशर की नीति अपना रहा है ताकि ईरान को उसकी शर्तों पर झुकने के लिए मजबूर किया जा सके।
थाईलैंड में डे-केयर सेंटर में गोलीबारी, 22 बच्चों समेत 34 की मौत
12 Feb, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बैंकॉक। थाईलैंड से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। दक्षिणी थाईलैंड में एक डे-केयर सेंटर में अंधाधुंध फायरिंग की घटना में 22 बच्चों समेत कुल 34 लोगों की मौत हो गई। घटना के पीछे एक पूर्व पुलिस अधिकारी का हाथ बताया जा रहा है, जिसने कथित तौर पर डे-केयर सेंटर में घुसकर इस वारदात को अंजाम दिया।
मीडिया रिपोर्ट्स से प्राप्त प्रारंभिक जानकारी अनुसार, हमलावर ने पहले बच्चों और शिक्षकों को बंधक बनाया और उसके बाद गोलीबारी शुरू कर दी। मृतकों में बड़ी संख्या में मासूम बच्चे शामिल हैं, जिससे पूरे देश में शोक और आक्रोश का माहौल है। हालांकि स्थानीय प्रशासन की ओर से अब तक आधिकारिक रूप से मृतकों की कुल संख्या की पुष्टि नहीं की गई है।
हाट याई क्षेत्र में भी गोलीबारी
इसी बीच, दक्षिणी थाईलैंड के हाट याई क्षेत्र से भी गोलीबारी की एक अलग घटना की खबर है। बताया जा रहा है कि वहां एक 18 वर्षीय युवक ने एक स्कूल परिसर में फायरिंग की, जिसमें दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनकी हालत पर नजर रखी जा रही है।
सोंगखला प्रांत के स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, एक स्कूल में बंदूकधारी द्वारा छात्रों और शिक्षकों को बंधक बनाए जाने की सूचना के बाद पुलिस ने इलाके को चारों ओर से घेर लिया। सुरक्षा बलों ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अभियान शुरू किया। इसी दौरान गोलीबारी की घटना सामने आई। घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस हमलावर की पृष्ठभूमि, हथियार के स्रोत और घटना के पीछे के संभावित कारणों की जांच कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या दोनों घटनाओं के बीच कोई संबंध है या वे अलग-अलग वारदातें हैं।
इस दर्दनाक घटना ने थाईलैंड में स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार की ओर से जल्द आधिकारिक बयान जारी किए जाने की संभावना है।
ब्रिटेन में हो रहे शबाना महमूद के चर्चे बन सकती हैं देश की पहली मुस्लिम महिला प्रधानमंत्री
11 Feb, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन। ब्रिटेन के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों एक नाम सबसे अधिक चर्चा का विषय बना हुआ है-शबाना महमूद। लेबर पार्टी की यह दिग्गज नेता न केवल वर्तमान सरकार में जस्टिस सेक्रेटरी और लॉर्ड चांसलर की महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं, बल्कि राजनीतिक विश्लेषकों ने उन्हें भविष्य की प्रधानमंत्री पद की एक बेहद मजबूत और प्रभावशाली दावेदार के रूप में देखना शुरू कर दिया है। एक टैक्सी ड्राइवर की बेटी से लेकर देश की न्याय प्रणाली के सर्वोच्च पद तक पहुँचने का उनका सफर लाखों प्रवासियों और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।
17 सितंबर 1980 को बर्मिंघम में जन्मी शबाना महमूद के पिता पाकिस्तान से ब्रिटेन आए थे। एक सामान्य प्रवासी परिवार में पली-बढ़ी शबाना ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के बाद बर्मिंघम विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की और एक सफल बैरिस्टर के रूप में अपनी पहचान बनाई। कानून की बारीक समझ और सामाजिक न्याय के प्रति उनके झुकाव ने उन्हें राजनीति की ओर प्रेरित किया। साल 2010 में उन्होंने पहली बार बर्मिंघम लेडीवुड सीट से चुनाव जीता और ब्रिटिश संसद में कदम रखा। तब से लेकर आज तक, उन्होंने न केवल अपनी सीट पर लेबर पार्टी की पकड़ मजबूत रखी है, बल्कि संसद के भीतर भी महिलाओं के अधिकार और अल्पसंख्यकों के मुद्दों पर प्रखरता से आवाज उठाई है।
शबाना महमूद की सबसे बड़ी ताकत उनकी व्यावहारिक और संतुलित राजनीति मानी जाती है। 2024 में लेबर पार्टी की भारी जीत के बाद उन्हें लॉर्ड चांसलर और जस्टिस सेक्रेटरी नियुक्त किया गया, जो ब्रिटिश कैबिनेट के सबसे प्रतिष्ठित पदों में से एक है। इस पद पर आसीन होने वाली वे पहली मुस्लिम महिला हैं। उनके कार्यकाल में अदालती प्रणाली में सुधार और पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने की दिशा में किए गए प्रयासों की काफी सराहना हो रही है। उन्होंने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि भले ही इस्लाम उनकी व्यक्तिगत पहचान है, लेकिन जब बात नीति निर्माण और शासन की आती है, तो उनके लिए संवैधानिक मूल्य और समानता सर्वोपरि हैं। ब्रिटेन की बदलती जनसांख्यिकी और राजनीति में मुस्लिम समुदाय के बढ़ते प्रभाव के बीच शबाना महमूद का नाम एक सर्वमान्य नेता के रूप में उभर रहा है। उनकी साफ-सुथरी छवि और किसी भी बड़े विवाद से उनकी दूरी उन्हें मुख्यधारा के मतदाताओं के बीच भी लोकप्रिय बनाती है। उन्होंने हमेशा कट्टरपंथ से दूरी बनाए रखी है और कानून के दायरे में रहकर अपनी बात कही है, जिससे न केवल लेबर पार्टी के नेतृत्व बल्कि आम जनता का भरोसा भी उन पर बढ़ा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ब्रिटेन में नेतृत्व परिवर्तन की जब भी बात आएगी, शबाना महमूद का प्रशासनिक अनुभव और उनकी नेतृत्व क्षमता उन्हें रेस में सबसे आगे रखेगी। उनकी कहानी न केवल आधुनिक ब्रिटेन की समावेशी राजनीति का प्रतीक है, बल्कि यह इस ओर भी इशारा करती है कि ब्रिटेन की सत्ता के शीर्ष पर आने वाले समय में एक नया इतिहास रचा जा सकता है। फिलहाल, जस्टिस सेक्रेटरी के तौर पर उनका काम यह तय करेगा कि ब्रिटेन के अगले सर्वोच्च नेतृत्व के रूप में उनकी दावेदारी कितनी ठोस होती है।
आर्मी चीफ की चापलूसी और फिर यू-टर्न लेने को मजबूर हुआ पाकिस्तान, अब भारत से होगा मैच
11 Feb, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। क्रिकेट के मैदान पर अपनी हरकतों और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दोहरे मापदंडों के लिए मशहूर पाकिस्तान ने एक बार फिर अपनी फजीहत करा ली है। भारत और पाकिस्तान के बीच आगामी 15 फरवरी को होने वाले टी20 वर्ल्ड कप मैच को लेकर चल रहा लंबा ड्रामा अब खत्म हो गया है। पाकिस्तान सरकार और वहां के क्रिकेट बोर्ड ने घुटने टेकते हुए कोलंबो में भारत के खिलाफ मैच खेलने की इजाजत दे दी है। हालांकि, इस फैसले से ठीक पहले पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के प्रमुख और वहां के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का नाम घसीटकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया।
मैच खेलने की पुष्टि करने से चंद घंटे पहले मोहसिन नकवी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बेहद तल्ख तेवर दिखाए थे। उन्होंने गीदड़ भभकी देते हुए कहा कि पाकिस्तान न तो भारत से डरता है और न ही आईसीसी की धमकियों से। अपनी चापलूसी की हद पार करते हुए नकवी ने बयान दिया कि फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर कभी किसी दबाव में नहीं आते और पूरी सरकार उनके पीछे खड़ी है। राजनीतिक गलियारों में इस बयान को सेना प्रमुख को खुश करने की एक हताश कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। नकवी ने जानबूझकर इस खेल के मामले में सेना को शामिल किया ताकि घरेलू स्तर पर अपनी कमजोरी को ढका जा सके।
मोहसिन नकवी द्वारा आसिम मुनीर का नाम लेने के पीछे ऑपरेशन सिंदूर का वो जख्म है जो भारत ने मई 2025 में पाकिस्तान को दिया था। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया था। उस हार और शर्मिंदगी को छिपाने के लिए पाकिस्तान ने जनरल आसिम मुनीर को फील्ड मार्शल का रैंक दे दिया था, जो 1959 के बाद वहां किसी को नहीं मिला। अब उसी काल्पनिक बहादुरी का सहारा लेकर नकवी भारत के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उनकी यह कोशिश कुछ ही घंटों में नाकाम साबित हुई। पाकिस्तान का यह यू-टर्न अंतरराष्ट्रीय दबाव और आर्थिक नुकसान के डर का परिणाम माना जा रहा है। शुरुआत में पाकिस्तान ने बांग्लादेश के साथ एकजुटता दिखाने के नाम पर मैच के बहिष्कार की धमकी दी थी, लेकिन आईसीसी ने पाकिस्तान की इस रणनीति को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। आईसीसी के सख्त रुख के बाद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने खुद पाकिस्तान को भारत के साथ खेलने की सलाह दे डाली। इसके अलावा श्रीलंका के राष्ट्रपति और यूएई की ओर से आए कूटनीतिक संदेशों ने पाकिस्तान को यह अहसास करा दिया कि मैच रद्द करने की स्थिति में वह विश्व क्रिकेट में पूरी तरह अलग-थलग पड़ जाएगा। अंततः, भारी भरकम बयानों और सेना प्रमुख के नाम की दुहाई देने के बाद पाकिस्तान को अपनी असलियत समझ आ गई। कोलंबो में 15 फरवरी को होने वाले इस महामुकाबले के लिए पाकिस्तान राजी तो हो गया है, लेकिन मोहसिन नकवी की इस बहादुरी और फिर अचानक आए यू-टर्न ने दुनिया भर में पाकिस्तान की जमकर किरकिरी करा दी है। क्रिकेट जगत अब इसे पाकिस्तान की कूटनीतिक हार के रूप में देख रहा है।
नहीं दूंगा इस्तीफा, सरकार चलाने का संकल्प मेरे ‘सार्वजनिक कर्तव्य’ से बंधा है: स्टार्मर
11 Feb, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन। ब्रिटेन की राजनीति में फिर भूचाल आ गया है। पीएम कीर स्टार्मर की कुर्सी खतरे में नजर आ रही है। ये खतरा बोरिस जॉनसन से शुरू हुई थी और ऋषि सुनक तक चली थी। लेकिन, ऐसा लग रहा है कि अब पीएम स्टार्मर की भी कुर्सी खतरे में है। मैंडेलसन का नाम एपस्टीन फाइल में आने के बाद से स्टार्मर की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दरअसल, पीएम स्टार्मर ने मैंडलसन को अमेरिका में राजदूत की नियुक्ति के लिए चुना था। तमाम विरोध और राजनीतिक प्रेशर के बावजूद स्टार्मर ने साफ कर दिया है कि वे इस्तीफा नहीं देंगे।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन में स्टार्मर के खिलाफ लोगों के बीच गुस्सा है। लोगों और विपक्ष का कहना है कि जेफ्री एपस्टीन जैसे कुख्यात अपराधी से पीटर मैंडेलसन की नजदीकी की जानकारी के बावजूद उन्होंने नियुक्ति की सिफारिश की थी। स्टार्मर ने सोमवार को 10 डाउनिंग स्ट्रीट में अपने स्टाफ को संबोधित किया था। इस दौरान उन्होंने तमाम राजनीतिक दबाव के अपने इरादे साफ कर दिए। उन्होंने बताया कि उनका सरकार चलाने का संकल्प ‘सार्वजनिक कर्तव्य’ से बंधा है। वे इन विवादों के बीच भी देश को बदलने का काम जारी रखेंगे।
स्टार्मर पर सबसे ज्यादा दबाव पीटर मैंडेलसन की नियुक्ति को लेकर है। मैंडेलसन के तार जेफ्री एपस्टीन से जुड़े होने की बात सामने आने के बाद ब्रिटिश राजनीति में तूफान आ गया। इस गलती को स्वीकार करते हुए पीएम स्टार्मर ने कहा कि मैं इस बात को लेकर बिल्कुल स्पष्ट हूं कि मुझे पीटर मैंडेलसन को नियुक्त करने के अपने फैसले पर गहरा अफसोस है। यह गलत फैसला था। मैंने इसके लिए पीड़ितों से माफी मांगी है। ये बिल्कुल सही कदम है। स्टार्मर ने कहा कि उन्हें सबसे ज्यादा गुस्सा इस बात का है कि इस विवाद से लोगों के उस विश्वास को कमजोर हो गया है1 उन्होंने अपने स्टाफ से कहा कि हमें साबित करना होगा कि राजनीति लोगों की जिंदगी बदल सकती है। हम यहां से आगे बढ़ेंगे और आत्मविश्वास के साथ देश को बदलने का काम जारी रखेंगे। भले ही स्टार्मर ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया हो, लेकिन इस विवाद की गाज उनके सबसे करीबी सहयोगियों पर गिरी है।
पीएम के चीफ ऑफ स्टाफ मैकस्वीनी ने रविवार को इस्तीफा दे दिया है। उन पर आरोप था कि उन्होंने एपस्टीन से लिंक होने के बावजूद मैंडेलसन का समर्थन किया था। स्टार्मर ने भावुक होते हुए कहा कि मैंने और मॉर्गन ने पिछले 8 सालों में हर राजनीतिक लड़ाई साथ लड़ी है। उनका जाना मेरे लिए व्यक्तिगत नुकसान है। पीएम के कम्युनिकेशन डायरेक्टर टिम एलन ने भी सोमवार को इस्तीफा दे दिया। स्टार्मर को अपनी ही लेबर पार्टी के सांसदों के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है। कई सांसद दबी जुबान में यह कह रहे हैं कि पीएम को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ देना चाहिए
चिनाब नदी पर भारत बना रहा नया हाइड्रोइलेक्ट्रिक डैम...............चिंतित पाकिस्तान ने शुरु की समीक्षा
11 Feb, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर भारत द्वारा बन रहे नए हाइड्रोइलेक्ट्रिक डैम, सावलकोट प्रोजेक्ट, की समीक्षा शुरू की है। भारत ने इस परियोजना की लागत करीब 5,129 करोड़ रुपये आंकी है। मोदी सरकार ने सिंधु जल संधि को पिछले साल सस्पेंड करने के बाद प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी। पाकिस्तान इस परियोजना को अपनी कृषि और सिंचाई के लिए खतरा बता रहा है।
सूत्रों के अनुसार, भारत ने चिनाब नदी पर चार बड़े हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए हैं। इसमें पाकल दुल और किरू प्रोजेक्ट्स को दिसंबर 2026 तक शुरू करने और क्वार प्रोजेक्ट को मार्च 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके साथ ही रतले डैम पर भी युद्धस्तर पर निर्माण कार्य शुरू करने का आदेश दिया है।
इतना ही नहीं भारत ने सिंधु जल संधि सस्पेंड करने के बाद पाकिस्तान के साथ डेटा साझा करने और पूर्व सूचना देने की जरूरत को नहीं माना है। इसके अलावा, भारत ने कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के फैसलों को भी गैर-कानूनी बताकर खारिज कर दिया है।
वहीं दूसरी ओर चिनाब नदी पाकिस्तान के लिए जीवनरेखा मानी जाती है। पाकिस्तान की करीब 90 प्रतिशत कृषि इस नदी पर निर्भर है, और इसके डैम और नहरों का पूरा नेटवर्क इसी पर आधारित है। पाकिस्तान के दस में से नौ नागरिक इसी पानी पर निर्भर हैं। इसके बाद भारत का नया प्रोजेक्ट पाकिस्तान के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है। क्योंकि भारत का ये प्रोजेक्ट पाकिस्तान में खेती को पूरी तरह से बर्बाद हो सकती है। इसके बाद वहां भूखमरी की नौबत आ सकती है। इस बात से चिंतित पाकिस्तान की जल संसाधन मंत्रालय, इंडस वॉटर कमिश्नर, विदेश मंत्रालय और अन्य विभाग इस परियोजना की समीक्षा कर रहे हैं। खुफिया सूत्रों के अनुसार, एक संयुक्त रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजी जाएगी। इसके अलावा, पाकिस्तान डैम और डी-वाटरिंग से निपटने के लिए कई विकल्पों पर काम कर रहा है। इतना ही नहीं पाकिस्तान भारत के इस प्रोजेक्ट को अंतरराष्ट्रीय मंचों जैसे इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस पर चुनौती देने की तैयारी कर सकता है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि उन्हें इस स्थिति की जानकारी है और वे जल्द ही विस्तृत जवाब देने वाले है। पाकिस्तान पहले ही भारत के सिंधु जल संधि सस्पेंड करने के फैसले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चुनौती दे चुका है।
दीपू दास के परिवार को आर्थिक मदद मिलेगी, बांग्लादेश की अंतरिम सरकार का ऐलान पक्का घर बनाएंगे
11 Feb, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने मयमनसिंह जिले में कट्टरपंथी भीड़ की हिंसा का शिकार हुए हिंदू युवक दीपू चंद्र दास के परिवार के लिए व्यापक आर्थिक सहायता और पुनर्वास पैकेज की घोषणा की है। सरकार ने साफ किया है कि इस जघन्य हत्या के दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
दीपू दास बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखते थे और अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। उनकी हत्या के बाद परिवार पर गंभीर आर्थिक और सामाजिक संकट खड़ा हो गया था। इसी को ध्यान में रखते हुए अंतरिम सरकार ने परिवार के लिए आर्थिक मदद और स्थायी आवास की व्यवस्था करने का फैसला लिया है। गौरतलब है कि 18 दिसंबर 2025 को मयमनसिंह जिले के वालुका उपजिला स्थित स्क्वायर मास्टरबाड़ी क्षेत्र में कथित ईशनिंदा के आरोप में उग्र भीड़ ने दीपू दास की नृशंस हत्या कर दी थी। उन्हें पहले बेरहमी से पीटा गया, फिर आग के हवाले किया गया और बाद में पेड़ से लटका दिया गया। इस घटना ने पूरे देश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई गई थी।
अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार के निर्देश पर शिक्षा सलाहकार डॉ. सी. आर. अबरार ने 23 दिसंबर 2025 को मयमनसिंह जिले के ताराकांदा उपजिला स्थित बनीहाला यूनियन के मोकामियाकांदा गांव पहुंचकर दीपू दास के परिवार से मुलाकात की। उन्होंने परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की और सरकार की ओर से हर संभव मदद का आश्वासन दिया।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अब सरकार ने घोषणा की है कि दीपू दास के परिवार के लिए एक स्थायी पक्का घर का निर्माण कराया जाएगा। इसके लिए 25 लाख बांग्लादेशी टका की राशि स्वीकृत की गई है और यह निर्माण राष्ट्रीय आवास प्राधिकरण के माध्यम से किया जाएगा। इसके अलावा, दीपू दास के पिता और उनकी पत्नी को 10-10 लाख टका की सीधी आर्थिक सहायता दी जाएगी, ताकि परिवार की तत्काल जरूरतों को पूरा किया जा सके। बच्चों के भविष्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 5 लाख टका का एक फिक्स्ड डिपॉजिट भी बनाने का फैसला किया है, जिससे उनकी शिक्षा और पालन-पोषण में मदद मिल सके।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस मौके पर शिक्षा सलाहकार डॉ. सी. आर. अबरार ने कहा कि दीपू चंद्र दास की हत्या एक घोर अपराध है, जिसका समाज में कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा दी जा रही सहायता किसी इंसानी जान की भरपाई नहीं कर सकती, लेकिन राज्य पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है और न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
दीपू दास हत्याकांड में अब तक 12 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और मामले की जांच जारी है। अंतरिम सरकार ने दोहराया है कि इस घटना में शामिल सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और उन्हें कानून के अनुसार सजा दिलाई जाएगी।
अब खालिस्तानियों के लिए कनाडा नहीं रहेगा सुरक्षित पनाहगाह, हर हरकत पर रहेगी नजर
10 Feb, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ओटावा। कनाडा पिछले काफी समय से खालिस्तानी चरमपंथियों की सुरक्षित पनाहगाह बना हुआ है, अब वहां इन भारत-विरोधियों के लिए ‘नो एंट्री’ का बोर्ड लगने वाला है। नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (एनएसए) अजीत डोभाल ने कनाडा की एनएसए नथाली ड्रौइन के साथ दो दिनों तक ऐसी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ वाली कूटनीति की कि अब खालिस्तानियों के पास भागने का रास्ता भी नहीं बचेगा। अब कनाडा की धरती खालिस्तानी नेटवर्क के लिए सुरक्षित पनाहगाह नहीं रहेगी। कनाडा सरकार अब खालिस्तानी गतिविधियों को फ्री स्पीच के बजाय आर्गनाइज्ड क्राइम के रूप में देखेगी। इतना ही नहीं, खालिस्तानी वहां भारत के खिलाफ कुछ भी करेंगे तो इसकी जानकारी कनाडा की सरकार भारत को देगी।
मीडिया रिपोर्ट में शीर्ष सरकारी सूत्रों ने बताया कि डोभाल और ड्रौइन के बीच हुई इस बातचीत ने भारत-कनाडा संबंधों को रीसेट कर दिया है। कनाडा ने साफ कहा कि वह खालिस्तानी लिंक वाले नेटवर्क जैसे हिंसक समूहों को किसी भी तरह समर्थन नहीं देगी। वहीं नशीली दवाओं की तस्करी, साइबर खतरों और आतंकवाद पर रीयल-टाइम खुफिया जानकारी साझा किया जाएगा। सबसे बड़ी बात, इसमें खालिस्तानी लिंक वाले समूह फोकस में होंगे। सूत्रों के मुताबिक यह चर्चा भारत विरोधी गतिविधियों पर ओटावा के रुख में आए बदलाव को दर्शाती है। अब तक कनाडा ऐसे समूहों की मौजूदगी से इनकार करता रहा है।
अजीत डोभाल ने इस बैठक में खालिस्तानियों के सबसे बड़े वित्तीय स्रोत की कमर तोड़ दी है। उन्होंने बताया कि कैसे ये समूह नशीली दवाओं विशेषकर फेंटानिल की तस्करी से करोड़ों रुपए कमा रहे हैं और उस ड्रग मनी का इस्तेमाल भारत के खिलाफ जहर उगलने में कर रहे हैं। डोभाल ने कनाडा को बताया कि कैसे ये ग्रुप वहां रहने वाले प्रवासी भारतीयों को डराते-धमकाते हैं और उनसे जबरन वसूली करते हैं। आतंकी इमिग्रेशन के नियमों की खामियों का फायदा उठाकर कनाडा में घुसते हैं। अब इस लूपहोल को बंद करने के लिए डेटा शेयरिंग का तगड़ा प्लान तैयार है।
अब तक भारत-कनाडा के बीच खालिस्तान का मुद्दा केवल एक राजनयिक विवाद माना जाता था, लेकिन अब कनाडा ने इसे अपनी पब्लिक सेफ्टी का मुद्दा मान लिया है। डोभाल ने कनाडा के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री गैरी आनंदसंगरी से मिलकर यह सुनिश्चित किया कि ओटावा अब भारत विरोधी तत्वों को लाड़-प्यार देना बंद करे। डोभाल का यह दौरा असल में एक बड़ी जमीन तैयार करने के लिए था। मार्च के पहले हफ्ते में कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी भारत आ रहे हैं। कार्नी की इस यात्रा में भारत के साथ यूरेनियम, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज और एआई जैसे क्षेत्रों में अरबों डॉलर के समझौते होने वाले हैं। डोभाल ने कनाडा को समझा दिया है कि व्यापार और आतंकवाद एक साथ नहीं चल सकते। अगर कनाडा को भारत का साथ चाहिए, तो उसे खालिस्तानियों का बोरिया-बिस्तर समेटना ही होगा।
विंटर ओलंपिक के विरोध में प्रदर्शन हिंसक झड़पों में बदला, पुलिस ने किया लाठीचार्ज
10 Feb, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रोम। उत्तरी इटली के मिलान शहर में विंटर ओलंपिक के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन हिंसक झड़पों में बदल गया। ओलंपिक विलेज के पास हजारों लोगों ने पर्यावरणीय नुकसान और सामाजिक-आर्थिक प्रभावों के खिलाफ मार्च किया, लेकिन भीड़ के छंटने के बाद एक छोटे समूह ने पुलिस पर पथराव और आतिशबाजी कर दी। हालात बेकाबू होते देख पुलिस को लाठियां, वॉटर कैनन और आंसू गैस छोड़नी पड़ी। पुलिस के मुताबिक करीब 10,000 प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे थे। हाथों में तख्तियां, बैनर और पोस्टर लिए लोग हाथों में हाथ डालकर गाते-नाचते नजर आए।
प्रदर्शन का मुख्य केंद्र ओलंपिक विलेज के आसपास का इलाका रहा, जहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। शाम होते-होते जब बड़ी शांतिपूर्ण भीड़ लौट गई, तभी कुछ उपद्रवी तत्वों ने माहौल बिगाड़ना शुरू किया। प्रदर्शनकारियों का गुस्सा खास तौर पर मिलान-कोर्तिना विंटर ओलंपिक 2026 के लिए हो रहे निर्माण कार्यों को लेकर था। उनका आरोप है कि खेलों के नाम पर पहाड़ों, जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों को भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। “शहरों को वापस लो और पहाड़ों को आज़ाद करो” जैसे नारे लिखे बैनर लोगों के हाथों में दिखाई दिए।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कई प्रदर्शनकारियों ने कार्डबोर्ड से बने पेड़ों के मॉडल लिए हुए थे, जो कोर्तिना में नए बॉब्स्ले ट्रैक के लिए काटे गए जंगलों का प्रतीक बताए गए। स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब कुछ प्रदर्शनकारी ओलंपिक विलेज के पास पहुंच गए। पुलिस बैरिकेड्स की ओर पटाखे और धुएं के बम फेंकने लगे। सुरक्षा घेरा इतना मजबूत था कि ये वस्तुएं एथलीटों के आवास तक नहीं पहुंच सकीं। इसके बाद मार्च वाया बेनाको की ओर बढ़ा। पियाजाले कोरवेटो पहुंचते-पहुंचते पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प शुरू हो गई।
कई इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल हो गया और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भागते देखा गया। पुलिस वैन को भी निशाना बनाए जाने की खबरें है। यह प्रदर्शन उसी समय हुआ, जब अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस मिलान के दौरे पर थे। वे अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख के रूप में ओलंपिक उद्घाटन समारोह में शामिल हुए थे। शुक्रवार को सैन सिरो स्टेडियम में हुए भव्य उद्घाटन समारोह में उन्हें कुछ लोगों की हूटिंग का सामना भी करना पड़ा। प्रदर्शन के समय उनकी मौजूदगी ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और बढ़ा दी।
इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी ने पोस्ट करते हुए लिखा प्रदर्शनीकारी इटली और इटालियनों के दुश्मन हैं। उन्होंने पुलिस और मिलान शहर के प्रति एकजुटता जताते हुए कहा कि ऐसे आपराधिक गिरोहों को मेहनतकश लोगों का काम बर्बाद करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। इस प्रदर्शन का आयोजन अनसस्टेनेबल ओलंपिक्स कमेटी नामक संगठन ने किया था। इसमें पर्यावरण समूहों, छात्रों, खेल संगठनों, हाउसिंग एक्टिविस्टों, यूनियनों, फिलिस्तीन समर्थक नेटवर्क और ट्रांसफेमिनिस्ट समूहों ने भाग लिया। इन संगठनों का आरोप है कि ओलंपिक न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि आम लोगों पर आर्थिक और सामाजिक बोझ भी डाल रहे हैं। वे सरकार की सुरक्षा नीतियों और अल्पसंख्यकों के प्रति रवैये का भी विरोध कर रहे हैं।
बता दें मिलान-कोर्तिना विंटर ओलंपिक 2026 का आगाज शुक्रवार को हुआ था। उद्घाटन समारोह में इटली की कला और संस्कृति की भव्य झलक देखने को मिली। इसमें मशहूर टेनर आंद्रेआ बोचेली और अमेरिकी गायिका मारिया केरी ने प्रस्तुति दी थी, लेकिन खेलों की चमक-दमक के बीच सड़कों पर उतरा यह गुस्सा साफ संकेत दे रहा है कि ओलंपिक को लेकर इटली में विरोध की आग अभी शांत होने वाली नहीं है।
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