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तनाव के बीच उम्मीद: ईरान और अमेरिका के बीच 45 दिन के युद्धविराम पर मंथन
6 Apr, 2026 12:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
US Iran War: ईरान-इजरायल-अमेरिका जंग को 38 दिनों का समय हो चुका है. इस जंग के कारण ईरान हजारों लोगों की मौत तो वहीं लाखों लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं. इस जंग की वजह से दुनियाभर में महंगाई तेजी से बढ़ती जा रही है. इसके बाद भी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप लगातार ईरान को धमकी देते नजर आ रहे हैं, इस बीच एक मीडिया रिपोर्ट से जंग रुकने की उम्मीद नज़र आ रही है. ऐसा कहा जा रहा है कि अमेरिका-ईरान और मीडिएटर 45 दिन के सीजफायर के लिए जोर दे रहे हैं.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच एक मीडिएटर के जरिए बातचीत चल रही है. इस बातचीत में अभी तक मीडिएटर का एक ग्रुप 45 दिन के संभावित सीजफायर की शर्तों पर चर्चा कर रहा है. इससे ऐसा माना जा रहा है कि अगर 45 दिनों का सीजफायर होता है, तो फिर बातचीत के जरिए जंग पूरी तरह खत्म हो सकती है.
अमेरिका और ईरान के बीच हो रही बातचीत
अमेरिकी आउटलेट ने बातचीत की जानकारी रखने वाले चार यूएस, इजरायली और रीजनल सोर्स का ज़िक्र किया है. उन्होंने एक्सियोस को बताया कि “बातचीत पाकिस्तानी, मिस्र और तुर्की के मीडिएटर के ज़रिए हो रही है. ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच भेजे गए टेक्स्ट मैसेज के ज़रिए भी हो रही है. सूत्रों ने अगले 48 घंटों में किसी पार्शियल डील पर पहुंचने की उम्मीद को बहुत ही कम बताया है.
ईरान ने क्या रखी सीजफायर के लिए शर्त
एक्सियोस के मुताबिक, ईरानी अधिकारियों ने मीडिएटर को साफ़ कर दिया है कि वे गाजा या लेबनान जैसी स्थिति में नहीं फंसना चाहते हैं. जहां कागज पर तो सीजफायर है लेकिन जहां US और इजरायल जब चाहें फिर से हमला कर सकते हैं. यही वजह है कि बातचीत के बात भी अब तक कोई फैसला नहीं हो पाया है. अगर आने वाले दिनों में बातचीत सफल होती है और कोई एक डिसीजन लिया जाता है तो यह भी साफ है कि जंग रुक सकती है.
अमेरिका की तरफ से ईरान पर हमले की शुरुआत 28 को गई थी. इसके बाद ईरान ने भी पलटवार शुरू किया. हालांकि अमेरिका और इजरायल के हमलो में ईरान के कई सीनियर लीडर और नागरिक मारे जा चुके हैं. वहीं ईरान भी लगातार अमेरिका के सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है. यह जंग हर रोज तेज होती जा रही है. दूसरी तरफ बातचीत शुरू होने के बाद युद्ध के खत्म होने की उम्मीद बढ़ गई है.
डगमगाती कुर्सी को बचाने के लिए कैबिनेट में बड़े फेरबदल की तैयारी कर रहे राष्ट्रपति ट्रंप
6 Apr, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। ईरान के साथ जारी भीषण युद्ध के बीच अमेरिकी प्रशासन में बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। एक तरफ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दुनिया को यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि स्थितियां उनके पूर्ण नियंत्रण में हैं, वहीं दूसरी ओर व्हाइट हाउस के भीतर रिजीम चेंज जैसा सियासी दबाव खुद ट्रंप सरकार पर बनता दिख रहा है। अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी को हटाए जाने के बाद अब कैबिनेट में बड़े स्तर पर फेरबदल की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
करीब पांच हफ्तों से चल रही इस जंग का सीधा असर अब अमेरिकी जनता की जेब और राष्ट्रपति की लोकप्रियता पर दिखने लगा है। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और महंगाई ने आम नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है। हालिया सर्वे के अनुसार, ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग गिरकर महज 36 प्रतिशत रह गई है, जो उनके मौजूदा कार्यकाल का सबसे निचला स्तर है। व्हाइट हाउस के भीतर भी यह स्वीकार किया जा रहा है कि राष्ट्रपति का हालिया राष्ट्र के नाम संबोधन जनता का भरोसा जीतने में विफल रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप अपनी टीम के कुछ प्रमुख सदस्यों के कामकाज से नाखुश हैं। नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर तुलसी गबार्ड और कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लुटनिक के नामों पर तलवार लटकती दिख रही है। बताया जा रहा है कि ट्रंप ने गबार्ड के विकल्पों पर अपने करीबियों से चर्चा शुरू कर दी है, जबकि लुटनिक अपने पुराने संबंधों को लेकर विवादों में घिरे हैं। हालांकि, आधिकारिक तौर पर व्हाइट हाउस इन खबरों का खंडन कर रहा है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रपति छोटे लेकिन असरदार बदलावों की रणनीति पर काम कर रहे हैं ताकि सरकार की सक्रियता का संदेश दिया जा सके।ट्रंप के लिए सबसे बड़ी चुनौती जनता का मिजाज है। एक अनुमान के मुताबिक, लगभग 60 प्रतिशत अमेरिकी नागरिक इस युद्ध के खिलाफ हैं। उन्हें डर है कि लंबी खिंचती यह लड़ाई देश पर भारी आर्थिक बोझ डाल देगी। ट्रंप के अपने समर्थकों में भी बढ़ती कीमतों को लेकर बेचैनी साफ देखी जा सकती है। इसके अलावा, ट्रंप युद्ध की मीडिया कवरेज से भी खासे नाराज हैं और अपनी टीम से अधिक सकारात्मक खबरें सुनिश्चित करने को कहा है। फिलहाल, वाशिंगटन के गलियारों में चर्चा आम है कि पाम बॉन्डी के बाद अभी कई और बड़े चेहरों की छुट्टी हो सकती है।
ईरान-अमेरिका टकराव तेज: ट्रंप ने तय किया हमले का समय, होर्मुज को लेकर दुनिया में हलचल
6 Apr, 2026 11:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति (US President) डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ईरान की तरफ से होर्मुज (Hormuz) न खोले जाने से बेहद गुस्से में हैं, जो उनके शब्दों में साफ झलक रहा है। उन्होंने पहले ईरान (Iran) को 48 घंटे का अल्टीमेटम (Ultimatum) दिया था, फिर इस पर मुहर लगाते हुए मंगलवार का दिन घोषित किया। अब ट्रंप ने ईरान पर हमले का समय भी तय कर दिया है। उनके अनुसार समझौता न होने पर मंगलवार रात 8 बजे (भारतीय समयानुसार बुधवार सुबह 5:30 बजे) ईरान पर हमला किया जाएगा।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को दी गई अपनी समय-सीमा एक बार फिर आगे बढ़ा दी है। ट्रंप ने साफ कहा है कि अगर ईरान जल्द ही होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोलता और समझौता नहीं करता, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
मंगलवार रात 8 बजे- ईरान पर हमले का समय तय
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए लिखा, ‘मंगलवार रात 8 बजे (ईस्टर्न टाइम)!’
इससे पहले उन्होंने कड़ी भाषा में चेतावनी दी थी कि अगर ईरान ने रास्ता नहीं खोला, तो अमेरिका उसकी ऊर्जा और बुनियादी ढांचे को पूरी तरह तबाह कर सकता है। उन्होंने यहां तक कहा कि ‘अगर होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोला गया, तो ईरान में पावर प्लांट और पुल सब कुछ निशाने पर होगा।’
पहले ट्रंप ने दिया था 48 घंटे का अल्टीमेटम
बता दें कि, ट्रंप पहले भी ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दे चुके थे, लेकिन बाद में इस समय-सीमा को कई बार बढ़ाया गया। अब इसे बढ़ाकर 8 अप्रैल की रात तक कर दिया गया है। एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि समझौते की संभावना अभी भी है, लेकिन अगर बात नहीं बनी तो वे ‘सब कुछ खत्म कर देंगे।’ उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान के आम लोग अपनी सरकार से खुश नहीं हैं और वे अमेरिका की कार्रवाई का समर्थन कर सकते हैं।
ईरान-अमेरिका में समझौता न होने पर बढ़ सकता है हमला
इससे पहले ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान का एक बड़ा पुल हमला कर गिरा दिया गया है और चेतावनी दी थी कि अगर जल्द समझौता नहीं हुआ, तो और भी बड़े हमले हो सकते हैं। अमेरिका और ईरान के बीच हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। एक तरफ बातचीत की कोशिशें जारी हैं, वहीं दूसरी ओर सख्त बयानबाजी और सैन्य कार्रवाई की आशंका भी लगातार बढ़ती जा रही है। आने वाले कुछ दिन इस पूरे मामले में बेहद अहम माने जा रहे हैं।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री की विवादित टिप्पणी: संघर्ष छिड़ा तो कोलकाता तक पहुँचने की दी धमकी
6 Apr, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। ऑपरेशन सिंदूर में तबाही से बचने के लिए अमेरिका के तलबे चाटकर खुद को बचाने की जद्दो जहद करने वाला पाकिस्तान एक बार फिर गीदड़ भभकी देने लगा है। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक बार फिर भारत के खिलाफ भड़काऊ बयानबाजी करते हुए गीदड़ भभकी दी है। शनिवार को सियालकोट में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में दोनों देशों के बीच कोई संघर्ष होता है, तो वह केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उसकी मार कोलकाता तक पहुँच सकती है।आसिफ ने बिना किसी ठोस सबूत के भारत पर फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन (छिपकर हमला करने की साजिश) का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अगर भारत की ओर से कोई भी सैन्य कार्रवाई की जाती है, तो पाकिस्तान उसका जवाब भारतीय क्षेत्र के काफी अंदर तक घुसकर देगा। रक्षा मंत्री ने आक्रामक लहजे में कहा कि अगली बार संघर्ष 200-250 किलोमीटर के दायरे तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हम उनके घरों तक जाएंगे।
पाकिस्तानी नेतृत्व की ओर से यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि पाकिस्तान की किसी भी हिमाकत का निर्णायक और मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। यह पहली बार नहीं है जब पड़ोसी देश के किसी जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति या राजनयिक ने भारतीय शहरों को निशाना बनाने की बात कही हो। हाल ही में पाकिस्तान के पूर्व उच्चायुक्त अब्दुल बसित ने भी दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों को दहलाने की धमकी दी थी।
विशेषज्ञ ख्वाजा आसिफ के इस बयान को पाकिस्तान की आंतरिक विफलताओं से ध्यान भटकाने और घरेलू राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं। फिलहाल, भारत की ओर से इस गीदड़ भभकी पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सीमा पर चौकसी हमेशा की तरह सख्त बनी हुई है।
ईरान जंग का असर, पाकिस्तान में 6 महीने नहीं मिलेगी मंत्रियों को तनख्वाह
6 Apr, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान में इजराइल-अमेरिका की ईरान से जंग का असर दिख रहा है। पाकिस्तान में अगले 6 महीने तक मंत्रियों का वेतन पर रोक लगा दी गई है। दो दिन पहले पेट्रोल 137 पाकिस्तानी रुपया और डीजल 184 रुपया महंगा किया गया था। हालांकि देशभर में विरोध हुआ तो सरकार ने पेट्रोल 80 रुपया सस्ता कर दिया। अब पाकिस्तान में पेट्रोल 378 रुपया प्रति लीटर मिलेगा। डीजल बढ़ी हुई कीमत 520.35 रुपया प्रति लीटर पर ही मिलेगा।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बढ़ती महंगाई और आर्थिक संकट से निपटने के लिए पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने कड़े उपायों का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि पहले कैबिनेट मंत्रियों की 2 महीने की सैलरी रोकने का फैसला लिया गया था, लेकिन अब मंत्रियों को अगले 6 महीने तक वेतन नहीं मिलेगा। शुक्रवार आधी रात को राष्ट्र को संबोधित करते हुए पीएम शहबाज ने कहा कि सरकार ने जनता पर बोझ कम करने के लिए पेट्रोल टैक्स को 80 रुपया घटाने का फैसला किया है। नई कीमतें देशभर के पेट्रोल पंपों पर तुरंत लागू हो गई हैं। शरीफ ने यह कहा कि पेट्रोल की ये कीमतें कम से कम अगले एक महीने तक स्थिर रहेंगी।
शहबाज सरकार ने दो दिन पहले पेट्रोल पर टैक्स 105 रुपया से बढ़ाकर 160 रुपया कर दिया था। इससे यहां पेट्रोल की कीमत 321.17 रुपया से बढ़कर 458.41 रुपया प्रति लीटर पर पहुंच गई थी। हाई-स्पीड डीजल की कीमत भी 184.49 रुपया बढ़कर 520.35 रुपया प्रति लीटर हो गई थी। हालांकि, डीजल पर लेवी को खत्म कर दिया गया था, जिसके बाद पेट्रोल की कीमतों में भी राहत देने की मांग उठ रही थी।
शहबाज शरीफ ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने की वजह से दुनियाभर में पेट्रोलियम सप्लाई प्रभावित हुई है। इसके कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं। उन्होंने कहा कि पिछले तीन हफ्तों से तेल की कीमतें रोजाना बढ़ रही थीं, लेकिन हमने आम आदमी की मुश्किलों को देखते हुए इसका बोझ जनता पर नहीं डाला। सरकार ने इस दौरान करीब 129 अरब रुपया की सब्सिडी दी है। मोटरसाइकिल वालों को पेट्रोल पर 100 रुपया प्रति लीटर की अतिरिक्त सब्सिडी दी जाएगी। छोटे किसानों को प्रति एकड़ 1,500 रुपया की वित्तीय सहायता मिलेगी। पाकिस्तान रेलवे के इकोनॉमी क्लास के किरायों में कोई बढ़ोतरी नहीं करने का फैसला किया है।
अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के बीच कच्चे तेल की कीमतों में भारी तेजी देखी जा रही है। ब्रैंट क्रूड की कीमत आज 7फीसदी की बढ़त के साथ 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया हैं। इससे पहले भारत में भी सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर स्पेशल एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपया की कटौती की थी। पेट्रोल पर ड्यूटी 13 रुपया प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपया, जबकि डीजल पर 10 रुपया से शून्य कर दी गई। एक्साइज ड्यूटी घटाकर पेट्रोल-डीजल के दामों को स्थिर रखा गया है।
इराकी जहाजों के लिए खुला है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, संघर्ष में इराकी लोगों का मिल रहा समर्थन
6 Apr, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच ईरान ने इराक की जनता को खास संदेश दिया है। ईरान ने इराक के लोगों के प्रति आभार जताते हुए उनसे और करीब आएं ईराकी भाई। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल इब्राहिम जुल्फघारी ने कहा कि इस पूरे संघर्ष में इराक के लोगों का समर्थन महसूस किया गया है। उन्होंने कहा कि इराक के लोगों का दिल, उनकी भावनाएं और उनका मजबूत रुख हमेशा ईरान के साथ रहा है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इब्राहिम ने कहा कि ईरान अकेला नहीं है और इराक के लोग उनके साथ मजबूती से खड़े हैं। ईरान ने अमेरिका-इजराइल पर गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि इन देशों ने ईरान की संप्रभुता पर हमला किया है और महिलाओं, बच्चों और आम लोगों को निशाना बनाया है। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूल, अस्पताल और सार्वजनिक जगहों पर हमले किए गए हैं। सबसे अहम बात यह रही कि ईरान ने घोषणा की कि इराक को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर लगाए गए प्रतिबंधों से बाहर रखा गया है यानी इराक के जहाजों को इस रास्ते से गुजरने में कोई रोक नहीं होगी। ईरान ने कहा कि यह प्रतिबंध सिर्फ दुश्मन देशों पर लागू हैं और वह इराक की संप्रभुता का सम्मान करता है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी कहा कि जो देश दुश्मन नहीं हैं, उनके जहाज ईरानी पानी से गुजर सकते हैं, लेकिन इसके लिए पहले से जानकारी देना जरूरी होगा। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर 48 घंटे के अंदर कोई समझौता नहीं हुआ, तो हालात और गंभीर हो सकते हैं। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर लिखा कि समय तेजी से खत्म हो रहा है और अगर जल्द फैसला नहीं हुआ तो बड़ा एक्शन लिया जाएगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान के परमाणु ठिकाने के पास हमले के बाद लोगों को हटाया गया और ईरान ने भी इलाके में नए हमले शुरू करने की बात कही है।
नेपाल में गहराया तेल संकट.................सप्ताह में दो दिन छुट्टी रखने का प्रस्ताव
6 Apr, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काठमांडू। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और युद्ध के कारण दुनिया के कई देशों में तेल की आपूर्ति बाधित हुई है। नेपाल भी तेल के वैश्विक संकट से अछूता नहीं रहा। पेट्रोलियम और डीजल की कमी को देखकर नेपाल सरकार ने अहम निर्णय लिया है। राजधानी काठमांडू में हुई शाह कैबिनेट की बैठक में हर हफ्ते दो दिन की छुट्टी देने का प्रस्ताव पास किया गया, ताकि ऊर्जा की खपत कम की जा सके और पेट्रोलियम की बचत सुनिश्चित हो सके।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह नई नीति विशेष रूप से निजी और सरकारी कार्यालयों में लागू होगी। कैबिनेट ने बताया कि कदम देश में ईंधन की कमी को देखकर अस्थायी उपाय के रूप में लिया है। अधिकारियों ने कहा कि छुट्टी का दिन सप्ताह के मध्य और अंत में निर्धारित किया जा सकता है, ताकि कार्यालयों और उद्योगों में काम प्रभावित न हो।
नेपाल में पेट्रोलियम संकट पिछले कुछ महीनों से बढ़ता जा रहा है। मिडिल ईस्ट में जारी जंग के कारण तेल के निर्यात में बाधाएं आई हैं, जिससे देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में औसतन तेल की खपत में 15-20 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। इसकारण सरकार ने ऊर्जा बचत के लिए यह कदम उठाया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस निर्णय से ईंधन की बचत होगी, लेकिन आर्थिक गतिविधियों पर इसका असर भी पड़ेगा। कई उद्योगों ने चिंता जाहिर की है कि सप्ताह में दो दिन की छुट्टी से उत्पादन और व्यवसाय प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि सरकार का कहना है कि यह अस्थायी कदम है और स्थिति के अनुरूप बदलाव किए जाएंगे। नेपाल की जनता और व्यापारिक वर्ग नए निर्णय पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ लोग ऊर्जा संकट से निपटने का सकारात्मक उपाय मान रहे हैं, जबकि अन्य दैनिक जीवन और उद्योगों के लिए चुनौतीपूर्ण कदम मान रहे हैं।
कुवैत में वित्त मंत्रालय और तेल रिफाइनरी पर ड्रोन हमले
5 Apr, 2026 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दोहा। कुवैत में वित्त मंत्रालय पर ड्रोन से हमला किया गया जिससे इमारत को काफी नुकसान पहुंचा है जबकि शुवैख जिले में एक तेल रिफाइनरी में आग लग गई। हमलों में किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है। कुना समाचार एजेंसी के अनुसार हमले में मंत्रालय की इमारत को हुए भारी नुकसान के बाद कर्मचारियों को घर से काम करने का निर्देश दिया गया है। इससे पहले, बुधवार को कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को निशाना बनाया था। इस ड्रोन हमले से ईंधन के टैंकों में आग लग गई थी। उल्लेखनीय है कि गत 28 फरवरी को अमेरिका और इज़रायल ने ईरान में विभिन्न ठिकानों पर हमले शुरू किए, जिससे काफी जान माल का नुकसान हुआ। ईरान, इज़रायली क्षेत्र के साथ-साथ पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले कर रहा है।
हमने पायलट को ईरान से सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया है, ट्रंप का बड़ा दावा
5 Apr, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार सुबह घोषणा की कि अमरीका ने ईरानी क्षेत्र से उन दो लड़ाकू पायलटों को सुरक्षित निकाल लिया है, जो शनिवार को ईरानी सेना के हमले में दो अमेरिकी विमानों के गिराए जाने के बाद से लापता हो गए थे। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया ट्रूथ सोशल पर कहा, “हमने उन्हें पा लिया है! मेरे प्यारे देशवासियों, पायलट अब पूरी तरह सुरक्षित हैं।” उन्होंने बताया कि इस ‘चमत्कारी’ अभियान में दूसरे पायलट को सफलतापूर्वक सुरक्षित निकाल लिया गया है। इससे पहले एक अन्य पायलट को भी सुरक्षित निकाल लिया गया था, लेकिन इसकी पुष्टि इसलिए नहीं कि गयी थी क्योंकि वे दूसरे बचाव अभियान को खतरे में नहीं डालना चाहते थे।
अमरीकी राष्ट्रपति ने बताया कि पिछले कुछ घंटों के दौरान, अमेरिकी सेना ने अमरीकी इतिहास के सबसे साहसी बचाव अभियानों में से एक को अंजाम दिया। उन्होंने कहा कि पायलट ईरान के दुर्गम पहाड़ों में दुश्मन की सीमा के पीछे था और दुश्मन हर घंटे उसके करीब पहुंच रहे थे। ट्रंप ने कहा कि वह पायलट कभी अकेला नहीं था क्योंकि कमांडर-इन-चीफ, युद्ध सचिव और ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष चौबीसों घंटे उसकी लोकेशन पर नजर रख रहे थे और बचाव की योजना बना रहे थे। उन्होंने बताया कि अमरीकी सेना ने उसे वापस लाने के लिए दुनिया के सबसे घातक हथियारों से लैस दर्जनों विमान भेजे थे। पायलट को कुछ चोटें आई हैं, लेकिन वह ठीक हो जाएगा।
अमरीकी सैन्य इतिहास में यह पहली बार है जब दो अमरीकी पायलटों को दुश्मन के इलाके के काफी अंदर से अलग-अलग बचाया गया है। ट्रंप ने गर्व से कहा, “हम कभी भी किसी अमरीकी योद्धा को पीछे नहीं छोड़ेंगे।” ट्रंप ने दावा किया कि बिना किसी अमेरिकी सैनिक के हताहत हुए इन दोनों ऑपरेशनों को पूरा करना यह साबित करता है कि अमरीका ने ईरानी आसमान पर पूर्ण वर्चस्व हासिल कर लिया है। अमरीकी राष्ट्रपति ने अंत में कहा, “यह एक ऐसा क्षण है जिस पर सभी अमेरिकियों को गर्व होना चाहिए और एकजुट होना चाहिए। हमारे पास दुनिया के इतिहास की सबसे अच्छी और पेशेवर सेना है। सभी को ईस्टर की शुभकामनाएं।”
निजी टिप्पणियों पर भड़के फ्रांसीसी राष्ट्रपति, ट्रंप के पत्नी वाले बयान को बताया मर्यादाहीन
5 Apr, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पेरिस। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अमेरिका और फ्रांस के बीच जुबानी तनातनी तेज हुई है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अपनी पत्नी ब्रिगिट मैक्रों के बारे में की गई टिप्पणियों की कड़ी निंदा की। दक्षिण कोरिया की यात्रा के दौरान मैक्रों ने कहा कि ट्रंप की बातें अशालीन और स्तरहीन हैं और वे बहुत ज्यादा बोलते हैं। दरअसल यह प्रतिक्रिया ट्रंप के उस बयान के कुछ घंटे बाद आई, जिसमें उन्होंने मैक्रों के साथ हुई फ़ोन कॉल का जिक्र कर फ्रांसीसी राष्ट्रपति का मजाक उड़ाया। ट्रंप ने कहा कि मैक्रों की पत्नी उनके साथ बेहद बुरा बर्ताव करती हैं और वीडियो क्लिप का संदर्भ दिया जिसमें ब्रिगिट मैक्रों ने विमान से उतरते समय मैक्रों के चेहरे को हल्का धक्का दिया था। मैक्रों ने पहले गलत जानकारी बताकर हल्के अंदाज़ में मज़ाक बताया था।
ट्रंप की टिप्पणियाँ ईरान से संबंधित अमेरिकी नेतृत्व वाले संघर्ष के संदर्भ में आईं, जिसमें उन्होंने फ्रांस से खाड़ी क्षेत्र में मदद भेजने की मांग की थी। मैक्रों ने कहा कि फ्रांस युद्ध के बाद मदद कर सकता है, जिसका ट्रंप ने मजाक उड़ाया। इसके अलावा, ट्रंप ने नाटो की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर कागज़ी शेर कहा।
फ्रांस में ट्रंप की इन टिप्पणियों का व्यापक विरोध हुआ। नेशनल असेंबली की अध्यक्ष येल ब्रौन-पिवेट ने कहा कि यह स्तरहीन था, और फ्रांस अनबाउड पार्टी के मैनुअल बॉम्पार्ड ने टिप्पणी की कि मैक्रों और उनकी पत्नी के बारे में ऐसा कहना अस्वीकार्य है। फ्रांसीसी मीडिया ने इस एक और विवादास्पद बयानबाजी बताया।
सैन्य और कूटनीति के मुद्दों पर, मैक्रों ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के किसी भी बलप्रयोजन के खिलाफ चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ऐसा अभियान लंबा, जोखिम भरा और वैश्विक जहाज़रानी के लिए खतरनाक होगा। मैक्रों ने कहा कि कूटनीति ही व्यावहारिक रास्ता है और जलडमरूमध्य को केवल ईरान के साथ परामर्श करके ही खोला जा सकता है।
मैक्रों ने अमेरिका और नाटो के बदलते रुख पर टिप्पणी कर कहा कि युद्ध और शांति के मामलों में गंभीरता जरूरी है। सहयोगियों से समर्थन न मिलने पर अफ़सोस जताया जा सकता है, लेकिन यह हमारा अभियान नहीं है। नाटो को कमजोर करने वाले सार्वजनिक संदेह पर उन्होंने चेतावनी दी कि इससे गठबंधन का मूल तत्व खोखला हो जाएगा।
अमेरिका और ईरान के बीच भीषण जंग में 2 अमेरिकी विमान ढेर, एक जवान लापता
5 Apr, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य संघर्ष अब एक अत्यंत गंभीर और संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। युद्ध के पांचवें हफ्ते में प्रवेश करते ही ईरान ने शुक्रवार को एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि उसने अलग-अलग हमलों में अमेरिका के दो सैन्य विमानों को मार गिराया है। इस घटना ने पश्चिम एशिया के शक्ति संतुलन और जारी युद्ध की दिशा को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। जानकारी के अनुसार, मार गिराए गए विमानों में से एक ईरान की सीमा के भीतर गिरा है। इस विमान में सवार एक अमेरिकी सैन्य कर्मी को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जबकि कम से कम एक अन्य सैनिक अभी भी लापता बताया जा रहा है, जिसकी तलाश के लिए अमेरिकी सेना ने बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है।
ईरान के सरकारी तंत्र और वहां के मीडिया ने दावा किया है कि फारस की खाड़ी में एक अमेरिकी ए-10 अटैक विमान को निशाना बनाया गया, जबकि एक अन्य दावे में एफ-15ई स्ट्राइक ईगल विमान को गिराने की बात कही गई है। एफ-15ई आमतौर पर दो चालक दल के सदस्यों—एक पायलट और एक हथियार विशेषज्ञ- के साथ उड़ान भरता है। ईरान के सरकारी टेलीविजन पर इस घटना से जुड़े कुछ वीडियो भी प्रसारित किए गए हैं, जिनमें पहाड़ी इलाकों के ऊपर अमेरिकी ड्रोन और हेलीकॉप्टर उड़ते देखे जा सकते हैं। साथ ही, ईरानी मीडिया ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि यदि उन्हें कोई विदेशी पायलट मिले, तो वे उसे तुरंत पुलिस के हवाले करें, जिसके लिए इनाम की भी घोषणा की गई है। यह इस संघर्ष के दौरान पहला मौका है जब अमेरिकी विमानों को इस तरह के सीधे नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई हैं।
दूसरी ओर, इस संवेदनशील मुद्दे पर व्हाइट हाउस और पेंटागन ने अभी तक कोई विस्तृत धिकारिक बयान जारी नहीं किया है, हालांकि पेंटागन ने हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी को सूचित किया है कि एक सैनिक की स्थिति अभी भी अज्ञात है। एक अमेरिकी अधिकारी ने गोपनीयता की शर्त पर पुष्टि की है कि क्षेत्र में एक लड़ाकू विमान के गिरने की घटना हुई है, लेकिन उन्होंने अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की है कि विमान किसी तकनीकी खराबी के कारण दुर्घटनाग्रस्त हुआ या उसे वास्तव में ईरान द्वारा मार गिराया गया है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले पर अधिक विवरण देने से इनकार किया, लेकिन उनका मानना है कि इस घटना का असर ईरान के साथ चल रही किसी भी संभावित बातचीत पर नहीं पड़ेगा, हालांकि उन्होंने हाल ही में ईरान को सैन्य रूप से कमजोर करने का दावा किया था। इस घटना के बाद न केवल युद्ध क्षेत्र में तनाव चरम पर है, बल्कि इसका व्यापक असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है। ईरान की होरमुज जलडमरूमध्य पर मजबूत पकड़ के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में अचानक उछाल आया है। चूंकि दुनिया के ईंधन व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए सप्लाई चेन बाधित होने की आशंका ने शेयर बाजारों को भी नीचे गिरा दिया है। यदि यह तनाव और बढ़ता है, तो खाद्य वस्तुओं और आम जरूरत की चीजों की कीमतों में भारी वृद्धि का खतरा पैदा हो सकता है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें अमेरिका के अगले कदम और लापता सैनिक की तलाश पर टिकी हुई हैं, क्योंकि यह घटना भविष्य में युद्ध के और भीषण होने का संकेत दे रही है।
यूएस बजट 2027: ईरान से भिड़े ट्रंप हांफते हुए बोले- घरेलू खर्च में कटौती कर रक्षा बजट बढ़ा दो
5 Apr, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वित्तीय वर्ष 2027 के लिए अपना प्रस्तावित बजट पेश कर दिया है, जिसमें घरेलू कार्यक्रमों में व्यापक कटौती और फेडरल एजेंसियों के पुनर्गठन की सख्त रूपरेखा तैयार की गई है। इस बजट का मुख्य उद्देश्य सरकारी खर्च पर लगाम लगाना और फेडरल सरकार के ढांचे को पूरी तरह बदलना है। ये बजट ऐसे समय पर आया है जब अमेरिका, ईरान ये जंग लड़ रहा है और बहुत बुरा फंसा हुआ है, शायद यही वजह है कि ट्रंप कहते सुने गए कि भले ही घरेलू खर्च में कटौती कर दो लेकिन रक्षा बजट बढ़ा दो।
बजट प्रस्ताव में वर्ष 2026 के गैर-रक्षा स्तरों की तुलना में 10 फीसदी की कटौती का प्रावधान किया गया है, जिसे प्रशासन ने फिजूल और अप्रभावी कार्यक्रमों को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है। हालांकि, सीमा सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और वेटरन्स (पूर्व सैनिकों) से जुड़ी सेवाओं के लिए फंडिंग को प्राथमिकता के आधार पर बरकरार रखा गया है। बजट प्रस्ताव के अनुसार, कई प्रमुख विभागों की फंडिंग में दोहरे अंकों में कमी की गई है। कृषि विभाग के बजट में 19 फीसदी की कटौती कर इसे 20.8 अरब डॉलर करने का प्रस्ताव है, जबकि वाणिज्य विभाग के बजट में 12.2 फीसदी की कमी के साथ 9.2 बिलियन डॉलर का प्रावधान किया गया है। शिक्षा विभाग को 76.5 बिलियन डॉलर आवंटित किए गए हैं, लेकिन साथ ही इसे धीरे-धीरे खत्म करने की मंशा भी जताई गई है। स्वास्थ्य और मानवीय सेवाओं के बजट में 12.5 फीसदी और हाउसिंग एवं शहरी विकास विभाग में 13 फीसदी की कटौती प्रस्तावित है। सबसे अधिक मार अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों और राज्य विभाग पर पड़ी है, जहां फंडिंग में 30 फीसदी की भारी कमी कर इसे 35.6 बिलियन डॉलर तक सीमित कर दिया गया है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नए निकाय एडमिनिस्ट्रेशन फॉर अ हेल्दी अमेरिका के गठन का प्रस्ताव है, जो पोषण और खाद्य सुरक्षा जैसे विषयों पर केंद्रित होगा। गृह सुरक्षा विभाग के कुल बजट में कमी के बावजूद सीमा प्रवर्तन और आव्रजन नियंत्रण पर निवेश जारी रहेगा। इसी तरह, न्याय विभाग को पुलिसिंग के लिए अधिक संसाधन दिए जाएंगे, लेकिन गैर-जरूरी ग्रांट प्रोग्राम बंद कर दिए जाएंगे।
बजट का एक बड़ा हिस्सा फेडरल ब्यूरोक्रेसी को कम करने और शिक्षा व वर्कफोर्स डेवलपमेंट जैसी जिम्मेदारियां राज्यों और स्थानीय सरकारों को सौंपने पर जोर देता है। ओएमबी के डायरेक्टर रसेल टी. वॉट ने इसे एक ऐतिहासिक वित्तीय बदलाव करार दिया है। अब यह प्रस्ताव कांग्रेस में जाएगा, जहां घरेलू कटौतियों और फेडरल कार्यक्रमों के पुनर्गठन के मुद्दों पर सांसदों के बीच तीखी बहस होने की संभावना है।
विवादों में घिरे ओपन एआई के सीईओ ऑल्टमैन.........बहन ने लगाया यौन शोषण का आरोप
5 Apr, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। ओपन एआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, क्योंकि उनकी बहन एनी ऑल्टमैन ने अपने सिविल मुकदमे में संशोधन कर उन पर 1997 से 2006 के बीच यौन शोषण का आरोप लगाया है। एनी का दावा है कि यह शोषण उनके पारिवारिक घर में हुआ, जब वह केवल तीन साल की थीं और सैम 12 साल के थे। सैम ने इन आरोपों से इंकार कर बहन के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया है।
इस मामले में सेंट लुइस की फेडरल कोर्ट ने पहले एनी की याचिका को खारिज किया था, लेकिन जज जैकरी ब्लूस्टोन ने उन्हें मिसौरी के बाल यौन शोषण कानून के तहत अपना केस आगे बढ़ाने की सलाह दी। जज ने कहा कि एनी के अलग-अलग यौन दुर्व्यवहार से जुड़े दावे 2008 में समाप्त हो गए थे, लेकिन यह कानून कुछ पुराने मामलों में मुकदमा दाखिल करने की अनुमति देता है। इसके बाद एनी ने अपनी संशोधित शिकायत दायर की। सैम के वकीलों ने अभी तक इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है। ऑल्टमैन परिवार का कहना है कि एनी की मानसिक हालत ठीक नहीं है और उनके मुकदमे का उद्देश्य जबरदस्ती है। सैम ने कहा कि उनका परिवार हर संभव मदद कर रहा है, जिसमें आर्थिक मदद भी शामिल है।
सैम ऑल्टमैन ओपन एआई के सह-संस्थापक हैं और 2022 में एआई चैटबॉट चैटजीपीटी की रिलीज़ के बाद वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में एक जाना-पहचाना चेहरा बन गए हैं। फोर्ब्स के अनुसार उनकी कुल संपत्ति 3.3 बिलियन डालर है। यह मामला न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन बल्कि पेशेवर छवि पर भी प्रभाव डाल सकता है, क्योंकि सैम ने एआई उद्योग में महत्वपूर्ण स्थान बनाया है। इस विवाद से जुड़े कानूनी और सामाजिक पहलुओं की निगरानी जारी है, और अदालत के निर्णय के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
ईरान के बुशहर परमाणु संयंत्र के पास हमला, एक सुरक्षा कर्मी की मौत
5 Apr, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान के बुशहर स्थित बुशहर न्यूक्लियर पॉवर प्लांट के पास शनिवार को हमला हुआ, जिसमें एक सुरक्षा कर्मी की मौत हो गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, संयंत्र के नजदीक एक प्रोजेक्टाइल गिरा, जिससे यह हादसा हुआ।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस हमले के साथ ही इजरायल ने ईरान के दक्षिणी खुजेस्तान प्रॉविंन्स के महशहर स्थित पेट्रोकेमिकल स्पेशल इकोनॉमिक जोन पर एयरस्ट्राइक का दावा किया है। बताया जा रहा है कि हमले के दौरान कई विस्फोट हुए और पूरे इलाके में धुएं का गुबार उठता देखा गया।
इजराइली सुरक्षा सूत्रों ने इन हमलों की पुष्टि करते हुए बताया कि वायुसेना ने रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया। हमले में कम से कम तीन कंपनियां प्रभावित हुई हैं, जबकि पांच लोगों के घायल होने की खबर है। विशेषज्ञों का मानना है कि परमाणु संयंत्र के पास हमला और पेट्रोकेमिकल जोन पर एयरस्ट्राइक इस बात का संकेत है कि संघर्ष अब ऊर्जा और रणनीतिक ठिकानों तक पहुंच चुका है। इससे न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है। लगातार बढ़ते हमलों के बीच मिडिल ईस्ट में हालात और गंभीर होते जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब इस पर टिकी हैं कि यह संघर्ष और कितना विस्तार लेता है।
अमेरिका के भारी हमलों के बावजूद ईरान की मजबूती बरकरार, क्या है राज?
4 Apr, 2026 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान | अमेरिका और इस्राइल पांच हफ्तों में 12,300 से ज़्यादा ईरानी ठिकानों पर हमले कर चुके हैं। व्हाइट हाउस और पेंटागन बड़ी कामयाबी का दावा कर रहे हैं, लेकिन अमेरिकी मीडिया की मानें तो खुफिया एजेंसियां खुद इन दावों पर सवाल उठा रही हैं। ईरान के मिसाइल बंकर घंटों में दोबारा चालू हो रहे हैं। आधे से ज्यादा लॉन्चर अभी भी सुरक्षित हैं और हजारों ड्रोन अभी भी तैयार हैं। तो असली तस्वीर क्या है? जानिए
ईरान युद्ध को लेकर पहले वो बड़ी बातें, जो आपको जाननी चाहिए:
ईरानी सेना ने एक अमेरिकी F-15E लड़ाकू जेट को गोलाबारी में मार गिराया। दो पायलट वाले इस विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने की पुष्टि दोनों देशों के अधिकारियों ने की है। घटना के बाद एक पायलट को बचा लिया गया है, जबकि दूसरा अभी भी लापता है। दूसरे पायलट की तलाश की जा रही है। इस बीच, ईरान ने मध्यस्थता की पाकिस्तान की पेशकश को सिरे से खारिज कर दिया है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह पाकिस्तान में अमेरिका नेतृत्व वाले किसी भी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात नहीं करेगा। अमेरिका पांच हफ्तों में ईरान के 12,300 ठिकानों पर हमले कर चुका है। अमेरिकी मीडिया के अनुसार, ईरान घंटों में अपने मिसाइल बंकर दोबारा चालू कर रहा है।ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, 28 फरवरी से शुरू हुए युद्ध के बाद से अब तक कम से कम 2,076 लोगों की मौत हो चुकी है और 26,500 लोग घायल हुए हैं।अब सवाल-दर-सवाल जानते हैं असली हालात...
क्या ईरान की मिसाइल क्षमता सच में तबाह हो गई?
द न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने इस दावे पर संदेह जताया है कि अमेरिका ईरान की मिसाइल क्षमता को नष्ट करने के करीब है, जबकि यही इस युद्ध का एक प्रमुख लक्ष्य था। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार ईरान के पास अभी भी इतनी बैलिस्टिक मिसाइलें और लॉन्चर बचे हैं कि वह इस्राइल और खाड़ी के अन्य देशों पर हमले जारी रख सके। खुफिया एजेंसियां बचे हुए लॉन्चरों की सटीक संख्या को लेकर अभी पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं।
व्हाइट हाउस और पेंटागन क्या दावे कर रहे हैं?
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता अन्ना केली ने कहा था कि लोग राष्ट्रपति ट्रंप और अमेरिकी सेना की शानदार उपलब्धियों को कमतर आंकने की कोशिश कर रहे हैं। ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले 90 प्रतिशत कम हो गए हैं। उनकी नौसेना तबाह हो चुकी है। दो-तिहाई सुविधाएं क्षतिग्रस्त या नष्ट हो चुकी हैं और अमेरिका-इस्राइल का ईरान के आसमान पर पूरा दबदबा है।वहीं, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सोमवार को कहा था, 'हां, वे अभी भी कुछ मिसाइलें दागेंगे, लेकिन हम उन्हें मार गिराएंगे। वे जमीन के नीचे जाएंगे, लेकिन हम उन्हें ढूंढ निकालेंगे।'
ईरान हार क्यों नहीं रहा, असली वजह क्या है?
इसकी सबसे बड़ी वजह है ईरान की दशकों पुरानी भूमिगत तैयारी। CNN ने तीन सूत्रों के हवाले से बताया कि ईरान के मिसाइल लॉन्चर सुरंगों और गुफाओं के विशाल नेटवर्क में छुपे हुए हैं। यही वजह है कि उन्हें ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा। द न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान जानबूझकर अपने लॉन्चरों को बंकरों और गुफाओं में सुरक्षित रख रहा है ताकि युद्ध लंबा खिंचने पर दबाव बनाए रख सके।ईरान के मिसाइल बंकर हमलों के बाद इतनी जल्दी
दोबारा कैसे चालू हो जाते हैं?
यही वह सवाल है जो अमेरिकी रणनीतिकारों को सबसे ज़्यादा परेशान कर रहा है। अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान अमेरिकी और इस्राइली बमों से क्षतिग्रस्त हो चुके भूमिगत बंकरों में से लॉन्चरों को सुरक्षित बचा लेता है और उसे मरम्मत कर दोबारा हमले करता है।
ईरान अभी भी कितनी मिसाइलें दाग रहा है?
ईरान अभी भी इस्राइल पर प्रतिदिन करीब 20 मिसाइलें दाग रहा है। वह एक बार में दो-दो मिसाइलें दागता है। एक पश्चिमी अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि ईरान प्रतिदिन 15 से 30 बैलिस्टिक मिसाइलें और 50 से 100 ड्रोन दाग रहा है।
अन्य खुफिया रिपोर्ट्स में क्या सामने आया?
CNN ने अमेरिकी खुफिया आकलन से परिचित तीन सूत्रों के हवाले से बताया कि पांच हफ्तों की लगातार बमबारी के बावजूद ईरान के करीब 50% मिसाइल लॉन्चर अभी भी सुरक्षित हैं। एकतरफा हमला करने वाले ड्रोन भी अभी भी ईरान के पास मौजूद हैं। यानी उसकी करीब 50% ड्रोन क्षमता बरकरार है। एक सूत्र ने कहा, "वे अभी भी पूरे क्षेत्र में भारी तबाही मचाने की स्थिति में हैं।" साथ ही ईरान की तटीय रक्षा से जुड़ी क्रूज मिसाइलों का एक बड़ा हिस्सा अभी भी सुरक्षित है। यह जखीरा हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को खतरे में डालने की क्षमता रखता है।
अमेरिका के लिए ईरानी लॉन्चरों को ट्रैक करना इतना मुश्किल क्यों है?
इसकी कई वजहें हैं। पहली- ईरान बड़ी संख्या में नकली लॉन्चर तैनात कर रहा है और अमेरिका को यकीन नहीं है कि उसने जितने लॉन्चर नष्ट किए, उनमें से कितने असली थे? दूसरी- ईरान 'दागो और भागो' की रणनीति अपना रहा है। मोबाइल प्लेटफॉर्म अपनी मिसाइलें दागने के बाद तुरंत जगह बदल लेते हैं। यह वही चुनौती है, जो यमन में हूतियों के खिलाफ भी झेलनी पड़ी। तीसरी- बमबारी से पहले भी ईरान के लॉन्चरों की कुल संख्या का अमेरिकी अनुमान पूरी तरह सटीक नहीं था। ऐसे में ट्रैकिंग मुश्किल है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज के ईरान कार्यक्रम के वरिष्ठ निदेशक बेहम बेन तालेब्लू के अनुसार, ईरान के हवाई क्षेत्र में अभी भी श्रेष्ठता बनाम वर्चस्व की जंग है। उन्होंने कहा अक्षम वायु रक्षा प्रणाली को नष्ट वायु रक्षा प्रणाली नहीं कह सकते। हमें हैरान नहीं होना चाहिए कि वे अभी भी लड़ रहे हैं। अमेरिकी विमान कम ऊंचाई पर मिशन उड़ा रहे हैं, जिससे वे ईरान की मिसाइलों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं। संभव है कि ईरान ने एफ-15 पर सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल दागी हो, लेकिन अधिक संभावना है कि एक पोर्टेबल लॉन्चर से मिसाइल दागी गई हो या कंधे पर रखकर दागे जाने वाले लॉन्चर का इस्तेमाल किया गया हो। ऐसी मिसाइलों का पता लगाना बहुत मुश्किल होता है और यह दर्शाता है कि ईरान कमजोर है, लेकिन अभी भी घातक है।
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