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भारतीय समुदाय पर भेदभाव का मामला, एचएएफ पहुंचा अदालत
9 Apr, 2026 01:27 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कैलिफोर्निया | अमेरिका में जाति आधारित भेदभाव को लेकर विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (HAF) ने कैलिफोर्निया की नागरिक अधिकार नियामक एजेंसी के खिलाफ नौवीं सर्किट अपील न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। संगठन का आरोप है कि एजेंसी ने गलत तरीके से जाति को हिंदू धर्म से जोड़ते हुए भारतीय और दक्षिण एशियाई समुदायों को निशाना बनाया है।6 अप्रैल को दाखिल जवाबी याचिका में एचएएफ ने अदालत से अनुरोध किया है कि निचली अदालत द्वारा उसके मुकदमे को खारिज करने में जिन प्रक्रियात्मक बाधाओं का हवाला दिया गया था, उन्हें हटाया जाए। संगठन का कहना है कि जिला अदालत ने उसके दावों के मूल मुद्दों पर विचार किए बिना ही मामला खारिज कर दिया।
क्यों हो रहा यह विवाद?
यह पूरा विवाद कैलिफोर्निया नागरिक अधिकार विभाग (CRD) द्वारा सिस्को सिस्टम्स और उसके दो प्रबंधकों के खिलाफ दर्ज शिकायत से जुड़ा है। इस शिकायत में जाति के आधार पर भेदभाव के आरोप लगाए गए थे और यह कार्रवाई कैलिफोर्निया के फेयर एम्प्लॉयमेंट एंड हाउसिंग एक्ट के तहत की गई थी। सीआरडी ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि उसने सिस्को और उसके पूर्व प्रबंधकों के खिलाफ जाति-आधारित भेदभाव का मामला दर्ज किया है।एचएएफ का आरोप है कि सीआरडी ने अपनी कार्रवाई में जाति को हिंदू धर्म और भारतीय मूल के कर्मचारियों से जोड़ने की कोशिश की। संगठन के मुताबिक, एजेंसी की शिकायत में जाति शब्द का बार-बार इस्तेमाल किया गया और यह धारणा बनाई गई कि भारतीय कर्मचारियों के बीच जाति-आधारित भेदभाव होता है, जिसे कंपनी को रोकना चाहिए था।
एजेंसी की कार्रवाई नस्लवादी और तथ्यहीन धारणाओं पर आधारित है
संगठन ने यह भी कहा कि एजेंसी की प्रस्तुति भारतीयों और हिंदुओं के बारे में नस्लवादी और तथ्यहीन धारणाओं पर आधारित है। एचएएफ ने सीआरडी के एक पुराने बयान का हवाला दिया, जिसमें भारत की जाति व्यवस्था को कठोर हिंदू सामाजिक और धार्मिक पदानुक्रम बताया गया था। हालांकि, बाद में विभाग ने इस विवादित वाक्यांश को हटा दिया और मामले को अप्रासंगिक बताया, लेकिन संगठन का कहना है कि इससे मूल समस्या खत्म नहीं होती।फाउंडेशन का कहना है कि हिंदू सामाजिक और धार्मिक पदानुक्रम जैसे शब्द हटाने के बावजूद सीआरडी अब भी कंपनी के भारतीय, दक्षिण एशियाई और हिंदू कर्मचारियों पर जाति से जुड़ी नीतियां लागू करने की कोशिश कर रहा है।
इस मामले का असर केवल एक केस तक सीमित नहीं
एचएएफ की सीनियर लीगल डायरेक्टर निधि शाह ने चेतावनी दी कि इस मामले का असर सिर्फ एक केस तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि हिंदू अमेरिकी, भारतीय अमेरिकी और दक्षिण एशियाई अमेरिकी समुदाय इस मुद्दे को लेकर चिंतित हैं।शाह ने आरोप लगाया कि नागरिक अधिकार विभाग अपनी प्रवर्तन शक्तियों का इस्तेमाल उन्हीं अल्पसंख्यक समूहों को अलग करने के लिए कर रहा है, जिनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी उस पर है। उन्होंने कहा कि कैलिफोर्निया के लोग, नियोक्ता और कारोबारी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।उन्होंने यह भी कहा कि एजेंसी जाति के आधार पर कार्रवाई करते हुए इसका दोष हिंदू धर्म पर डाल रही है और यह आशंका जताई कि भविष्य में और हिंदू संगठनों या व्यक्तियों को निशाना बनाया जा सकता है।
आदियाला जेल से जुड़े मामले में बड़ा एक्शन, इमरान खान परिवार पर आरोप
9 Apr, 2026 01:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रावलपिंडी | पाकिस्तान के रावलपिंडी में आदियाला रोड पर हुए विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बहनों, कई सांसदों और करीब 1,400 अज्ञात लोगों के खिलाफ आतंकवाद निरोधक कानून के तहत मामला दर्ज किया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह एफआईआर बुधवार को आदियाला चेकपोस्ट के प्रभारी सब-इंस्पेक्टर की शिकायत पर दर्ज की गई।पुलिस ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शनकारियों ने कानून-व्यवस्था को चुनौती दी, पथराव किया और पुलिस पर हमला किया, जिससे कम से कम नौ पुलिसकर्मी घायल हो गए। एफआईआर में हत्या के प्रयास और सरकारी काम में बाधा डालने जैसी गंभीर धाराएं भी शामिल की गई हैं।
क्या है मामला?
दरअसल, इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने अदियाला जेल में बंद अपने नेता से मुलाकात पर लगे प्रतिबंध के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आह्वान किया था। हालांकि, प्रशासन ने पूरे जिले में धारा 144 लागू कर दी थी, जिसके तहत 15 दिनों के लिए किसी भी तरह के सार्वजनिक जमावड़े पर रोक लगा दी गई।कड़े प्रतिबंधों के बीच पुलिस ने जेल के बाहर प्रदर्शन कर रहे पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। इनमें इमरान खान की बहनें नूरीन नियाजी और उज्मा खानम भी शामिल हैं। पुलिस का दावा है कि मौके पर 41 संदिग्धों को पकड़ा गया था, लेकिन वे बाद में फरार हो गए, जबकि कई अन्य लोग भी घटनास्थल से भाग निकले।
एफआईआर में क्या आया सामने?
एफआईआर में यह भी उल्लेख किया गया है कि पथराव और लाठियों के इस्तेमाल से सरकारी और निजी वाहनों को नुकसान पहुंचा। पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने राजनीतिक लाभ के लिए जानबूझकर अशांति फैलाने की कोशिश की, ताकि पंजाब की प्रांतीय सरकार पर दबाव बनाया जा सके।
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकर ने की आलोचना
वहीं, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। संगठन ने इसे अवैध करार देते हुए कहा कि यह पाकिस्तान में शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को दबाने का एक और उदाहरण है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का हमला, नाटो और सहयोगियों पर उठाए सवाल
9 Apr, 2026 12:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन | अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ग्रीनलैंड को लेकर विवादित टिप्पणी कर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज कर दी है। ईरान के साथ हालिया संघर्ष विराम के बाद ट्रंप ने नाटो देशों पर तीखा हमला बोला और सहयोग की कमी पर सवाल उठाए।ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा 'नाटो हमारे साथ तब नहीं था जब हमें उनकी जरूरत थी और आगे भी नहीं होगा। ग्रीनलैंड को याद रखें, वह बड़ा और खराब तरीके से संचालित बर्फ का टुकड़ा!'ग्रीनलैंड, जो डेनमार्क के अधीन एक स्वायत्त क्षेत्र है, लंबे समय से अमेरिका की रणनीतिक नजर में रहा है। ट्रंप पहले भी इस क्षेत्र को खरीदने या नियंत्रण में लेने की बात कह चुके हैं। ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति और खनिज संसाधन इसे वैश्विक राजनीति में महत्वपूर्ण बनाते हैं, खासकर रूस और चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच।
NATO पर ट्रंप का निशाना
नाटो को लेकर ट्रंप की नाराजगी नई नहीं है, लेकिन इस बार उनका बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम हुआ है। ट्रंप का कहना है कि युद्ध के दौरान कई सहयोगी देश अमेरिका के साथ खड़े नहीं हुए। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि जापान, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और नाटो देशों ने अपेक्षित समर्थन नहीं दिया।
यूरोप में बढ़ी चिंता
ट्रंप के बयानों से यूरोपीय देशों में चिंता बढ़ गई है। फ्रांस और जर्मनी ने पहले ही यूरोपीय संघ से सुरक्षा मामलों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की अपील की थी। यूरोपीय नेताओं ने स्पष्ट किया है कि ग्रीनलैंड के भविष्य का फैसला वहां की जनता ही करेगी और किसी भी बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
ईरान के साथ थम गई जंग
गौरतलब है कि हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच एक अस्थायी युद्ध विराम समझौता हुआ है। दोनों देशों ने 10 सूत्रीय योजना पर सहमति जताई है और आगे की बातचीत के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में बैठक तय की गई है। यह समझौता कई हफ्तों से जारी तनाव और संघर्ष के बाद संभव हो पाया है, जिससे फिलहाल हालात में कुछ स्थिरता आई है।
रक्षा खर्च में बढ़ोतरी से घरेलू उत्पादन को बढ़ावा, IMF की रिपोर्ट
9 Apr, 2026 12:07 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन | अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भारत के रक्षा क्षेत्र में बढ़ते स्वदेशी उत्पादन को देश की आर्थिक वृद्धि के लिए एक महत्वपूर्ण सकारात्मक कदम बताया है। आईएमएफ के एक हालिया विश्लेषण के अनुसार, जब सैन्य खर्च स्थानीय उद्योगों को समर्थन देता है, तो यह न केवल उत्पादन में बढ़ोतरी करता है बल्कि समग्र अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करता है।आईएमएफ के वैश्विक रक्षा रुझानों पर आधारित इस विश्लेषण में कहा गया है कि रक्षा क्षेत्र में होने वाली वृद्धि अल्पावधि में आर्थिक गतिविधियों को तेज कर सकती है। इससे उपभोग और निवेश दोनों में वृद्धि देखी जा सकती है, जो अर्थव्यवस्था के लिए एक शुभ संकेत है।यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब दुनिया भर में भू-राजनीतिक तनावों के बढ़ते माहौल के बीच रक्षा खर्च में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। हाल के वर्षों में करीब आधे देशों ने अपने रक्षा बजट में वृद्धि की है, जिसने शीत युद्ध के बाद देखी गई गिरावट को पलट दिया है।
घरेलू उत्पादन पर जोर, फायदे अनेक
भारत के संदर्भ में आईएमएफ के निष्कर्ष स्पष्ट रूप से आर्थिक बढ़त की ओर इशारा करते हैं। आईएमएफ का मानना है कि जब रक्षा खर्च आयात पर निर्भर रहने के बजाय घरेलू उत्पादन पर आधारित होता है, तो इसके फायदे और भी अधिक हो जाते हैं।आईएमएफ ने कहा है कि रक्षा खर्च का मल्टीप्लायर औसतन 1 के करीब होता है, जिसका अर्थ है कि खर्च में की गई हर बढ़ोतरी मोटे तौर पर आर्थिक उत्पादन में वैसी ही बढ़ोतरी में बदल जाती है। हालांकि, यह प्रभाव देशों के बीच अलग-अलग होता है। जिन देशों की हथियारों के आयात पर निर्भरता अधिक होती है, उनमें रक्षा खर्च मल्टीप्लायर छोटे होते हैं, क्योंकि मांग का एक हिस्सा विदेशों में चला जाता है।यह अंतर भारत के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है। भारत ने विदेशी हथियारों पर अपनी निर्भरता कम करने और एक मजबूत घरेलू रक्षा आधार स्थापित करने के प्रयासों को तेज किया है। रक्षा खर्च का एक बड़ा हिस्सा अब स्थानीय विनिर्माण, निजी कंपनियों और संयुक्त उद्यमों की ओर निर्देशित किया जा रहा है।
आर्थिक संतुलन और रोजगार सृजन
आईएमएफ ने यह भी बताया है कि आयात पर अधिक खर्च बाहरी संतुलन को कमजोर कर सकता है, क्योंकि मांग आयातित उपकरणों की ओर बढ़ जाती है। भारत का स्वदेशीकरण पर जोर ऐसे दबावों को कम करने में सहायक है। इससे मांग का एक बड़ा हिस्सा देश की अर्थव्यवस्था के भीतर ही बना रहता है, जो रोजगार सृजन और निवेश को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।रिपोर्ट के अनुसार, रक्षा खर्च एक लक्षित मांग झटके के रूप में कार्य करता है। यह सरकारी उपभोग को बढ़ाता है और विशेष रूप से रक्षा से जुड़े क्षेत्रों में निजी खर्च को प्रोत्साहित कर सकता है। समय के साथ, यह उत्पादकता को भी समर्थन दे सकता है। आईएमएफ का मानना है कि सार्वजनिक निवेश को प्राथमिकता देने वाला निर्माण लंबे समय तक उत्पादकता वृद्धि का समर्थन कर सकता है।
खर्च में तेजी के जोखिम
हालांकि, आईएमएफ ने रक्षा खर्च में बहुत तेजी से वृद्धि होने पर कुछ जोखिमों की ओर भी इशारा किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अत्यधिक वृद्धि से राजकोषीय घाटा जीडीपी के लगभग 2.6 प्रतिशत तक बढ़ सकता है और सार्वजनिक ऋण तीन साल के भीतर लगभग 7 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। ये दबाव संघर्ष की स्थिति में और बढ़ सकते हैं, जब कर्ज तेजी से बढ़ता है और सामाजिक खर्चों में कटौती करनी पड़ सकती है।
वैश्विक परिदृश्य और भारत का स्थान
2010 के दशक के मध्य से दुनिया भर में रक्षा खर्च बढ़ रहा है। वर्तमान में लगभग 40 प्रतिशत देश अपनी जीडीपी का 2 प्रतिशत से अधिक रक्षा पर खर्च करते हैं। नाटो सदस्यों ने 2035 तक अपने रक्षा और सुरक्षा खर्च को जीडीपी के 5 प्रतिशत तक बढ़ाने का वादा किया है, जो सैन्य खर्च में निरंतर वृद्धि की ओर संकेत करता है।भारत अपनी जीडीपी का लगभग 2 प्रतिशत रक्षा पर खर्च करता है। हाल के वर्षों में, नीतिगत सुधारों और प्रोत्साहनों के माध्यम से देश ने घरेलू उत्पादन को बढ़ाने में महत्वपूर्ण प्रगति की है। आईएमएफ के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि जिन देशों की स्थानीय रक्षा उद्योग मजबूत है, वे अपने सैन्य खर्च को आर्थिक विकास में बदलने और बाहरी जोखिमों को कम करने के लिए बेहतर स्थिति में हैं।
सोनू मर्डर केस में गैंगवार का खुलासा, रोहित गोदारा गैंग का नाम सामने
9 Apr, 2026 12:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
झज्जर। डीघल गांव निवासी फाइनेंसर साहिल उर्फ़ सोनू रोहतक के सनी रिटोलिया गैंग का सदस्य रहा हैं। उसे नवंबर 2025 में रोहतक में अवैध हथियारों के साथ पकड़ा गया था और पीजीआई थाने में केस भी दर्ज हुआ था। उस समय रोहतक पुलिस ने खुलासा किया था कि साहिल खुद अपना गैंग बनाना चाहता था। साहिल कई माह जेल में भी रहा और अब जमानत पर बाहर था। वह फाइनेंस के अलावा प्रॉपर्टी और शराब के कारोबार में भी था। यही नहीं जिस लोगों ने साहिल की हत्या की हैं, वह हिमांशु भाऊ गैंग के सदस्य बताए जा रहे हैं जबकि साहिल की हत्या के मामले में रोहित गोदारा गैंग के सदस्यों की पोस्ट वायरल हुई हैं। पोस्ट में रोहित गोदारा गैंग के सदस्यों ने साहिल की हत्या की जिम्मेदारी ली हैं। इस पोस्ट की संवाद न्यूज एजेंसी पुष्टि नहीं करता।
पोस्ट में ये लिखा
इस पोस्ट में लिखा हैं कि मैं ज़ोरा डबास, नवीन बॉक्सर गोरिपुर, महेन्द्र देलाना, आज जो हरियाणा के डीघल में जो ये सोनू डीघल फाइनेंसर की हत्या हुई हैं, उसकी जिम्मेदारी हम लेते हैं। ये गरीब और मजदूर लोगों को 10, 20 प्रतिशत ब्याज दर पर रुपये देकर जब उनसे रुपये टाइम पर वापस नहीं चुकाये जाने पर उनके घर और जमीन हड़प लेता था। इसको 6 माह पहले समझाया था, लेकिन इसको समझ नहीं आया। इसलिए आज इसको मरवा दिया। जो भी ब्याज बुक का और गकत काम करते हैं वो समय रहते समय सुधार जाओ वरना वो हाल करेंगे की देखने वाले की रूह कांप जाएगी और जो भी हमारे दुश्मन हैं, वो तैयार रहे जल्द मुलाक़ात होगी।
गैंगवार न हो, 100 से अधिक पुलिस तैनात
यह मामला अब गैंगवार से जोड़कर देखा जा रहा हैं। इस मामले में गैंग के नाम सामने आने के बाद पुलिस और ज्यादा सतर्क हो गई हैं। डीघल गांव में ही पुलिस वर्दी और सादे कपड़ो पर पुलिस कर्मी तैनात कर दिए गए हैं।
गाड़ी बरामद, टेम्प्रेरी नंबर
इस मामले में पुलिस ने अमादलपुर-पटोदा के बीच लिंक रोड से देर रात वारदात में प्रयोग की गाड़ी को बरामद कर लिया हैं। इस पर कोई नंबर प्लेट नहीं हैं और चेसिस भी मुड़ी हुई हैं। बताया जा रहा हैं कि आरोपी जब वारदात के बाद भाग रहे थे तो उनकी गाड़ी लकड़िया चौक पर पलट गई थी। इसके बाद उसे उठाकर दोबारा आरोपी फरार हुए। फिलहाल गाड़ी पर टेम्प्रेरी नंबर लगे हैं। इसके मालिक की पहचान की जा रही हैं।
US का खुलासा, सीजफायर जानकारी से पहले ट्रंप ने किया था चेक
9 Apr, 2026 11:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ईरान | युद्ध विराम को लेकर अब एक अहम खुलासा सामने आया है, जो बताता है कि पूरी प्रक्रिया के पीछे अमेरिका और पाकिस्तान के बीच गहरी कूटनीतिक बातचीत चल रही थी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने जो सोशल मीडिया पोस्ट कर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से डेडलाइन बढ़ाने की अपील की थी, वह पोस्ट पहले ही व्हाइट हाउस की मंजूरी से तैयार किया गया था। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, शरीफ के पोस्ट करने से पहले ही व्हाइट हाउस उस बयान को देख चुका था और उसे हरी झंडी दे चुका था।
दोनों देशों के बीच तनाव कम करने को लेकर शरीफ का पोस्ट
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब ट्रंप ने ईरान को मंगलवार रात 8 बजे तक की सख्त डेडलाइन दी थी और क्षेत्र में तनाव चरम पर था। इसी बीच पाकिस्तान ने दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करने और एक समझौता कराने की कोशिश की। इसी कड़ी में शरीफ ने सोशल मीडिया का सहारा लेते हुए ट्रंप से दो हफ्ते का समय बढ़ाने की सार्वजनिक अपील की।
शरीफ की पोस्ट में ट्रंप की शैली में लिखी गई थी बात
अपने पोस्ट में शरीफ ने ट्रंप की शैली में कहा कि कूटनीति लगातार, मजबूती से और प्रभावशाली ढंग से आगे बढ़ रही है। उन्होंने ट्रंप और उनके शीर्ष सलाहकारों को टैग करते हुए डेडलाइन बढ़ाने का आग्रह किया।हालांकि, इस पोस्ट के पीछे असली कहानी और भी अहम थी। व्हाइट हाउस, जो एक ओर ईरान पर कड़ा रुख अपनाए हुए था और सख्त बयान दे रहा था, वहीं दूसरी ओर पर्दे के पीछे इस संकट का कूटनीतिक समाधान भी तलाश रहा था।
कैसे खुली पोल?
शरीफ के पोस्ट में शुरुआत में 'Draft - Pakistan’s PM Message on X' लिखा होने के कारण सोशल मीडिया पर यह अटकलें भी तेज हो गईं कि यह बयान सीधे ट्रंप या उनकी टीम द्वारा तैयार किया गया है। हालांकि, व्हाइट हाउस ने इस दावे से इनकार किया और कहा कि ट्रंप ने यह बयान खुद नहीं लिखा। वहीं, पाकिस्तानी दूतावास की ओर से इस पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।इस पूरी कूटनीतिक कवायद का असर भी तेजी से देखने को मिला। शरीफ के पोस्ट के कुछ ही घंटों बाद ट्रंप ने ईरान के साथ दो हफ्ते के युद्ध विराम पर सहमति जताने का एलान कर दिया।
सोशल मीडिया पर शरीफ हुए ट्रोल
गौरतलब है कि इस घटनाक्रम से पहले शहबाज शरीफ को सोशल मीडिया पर आलोचना का सामना करना पड़ा था और उनके पोस्ट को लेकर सवाल उठाए गए थे। लेकिन अब सामने आई जानकारी से साफ है कि यह कदम एक बड़े अंतरराष्ट्रीय समन्वय का हिस्सा था, जिसमें अमेरिका की सीधी भागीदारी थी।
खैरड़ी गांव में मूर्ति तोड़ने की घटना से हड़कंप, पुलिस अलर्ट
9 Apr, 2026 11:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कलानौर। खंड के गांव खैरड़ी में बुधवार देर रात्रि अज्ञात शरारती तत्वों द्वारा डॉ. भीमराव अम्बेडकर की मूर्ति को खंडित कर दिया गया। घटना के बाद पूरे गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है। जानकारी के अनुसार, देर रात मोटरसाइकिल पर सवार दो युवकों ने इस वारदात को अंजाम दिया और मौके से फरार हो गए। यह पूरी घटना पास के सरकारी स्कूल में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है, हालांकि बाइक का नंबर और आरोपियों की पहचान अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है।
सुबह ग्रामीणों ने मौके पर खंडित मूर्ति को देखा तो रोष प्रदर्शन शुरू हो गया। घटना की सूचना मिलते ही डीएसपी राकेश कुमार, थाना प्रभारी सतपाल सिंह सहित पुलिस बल मौके पर पहुंचा। साथ ही कई सामाजिक व राजनीतिक संगठनों के कार्यकर्ता भी घटनास्थल पर जुटने लगे। ग्रामीण बलजीत अलडिया, मनोज अलडिया,के अनुसार, जिस स्थान पर यह घटना हुई है, वहां पहले “सद्भावना स्थल” बनाया गया था। बाद में गठबंधन सरकार के दौरान पूर्व सरपंच भूपेंद्र सेहरावत द्वारा कम्यूनिटी सेंटर का निर्माण करवाकर उसका नाम चौधरी देवीलाल के नाम पर रखा गया। इसके बाद गांव में असंतोष पैदा हो गया था।
स्थिति को संभालने के लिए ग्रामीणों ने अपने स्तर पर डॉ. भीमराव अम्बेडकर और चौधरी छोटूराम की मूर्तियां स्थापित कर भाईचारे का संदेश दिया था। आगामी 14 अप्रैल को बाबा साहेब की जयंती को लेकर गांव में जोर-शोर से तैयारियां चल रही थीं, लेकिन इस घटना ने माहौल को बिगाड़ दिया। फिलहाल ग्रामीणों में भारी रोष है और वे आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी व कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। साथ ही ग्रामीणों ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर भवन के लिए अलग से स्थान उपलब्ध करवाने की भी मांग उठाई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।
ईरान ने होर्मुज में बदले नियम, समुद्री माइन का अलर्ट; वैश्विक तेल बाजार चिंतित
9 Apr, 2026 09:42 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान | पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अब होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। AFP न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ईरान ने जहाजों की आवाजाही के लिए वैकल्पिक समुद्री रास्तों का एलान किया है, जिससे वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति पर असर पड़ सकता है।ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) की नौसेना ने शुक्रवार को एक बयान जारी कर कहा कि समुद्री सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। IRGC नौसेना ने सभी मालवाहक जहाजों और नौकाओं को इन नए, निर्दिष्ट मार्गों का पालन करने का निर्देश दिया है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जहाजों की आवाजाही IRGC नौसेना की कड़ी निगरानी में हो। विश्व में 20 फीसदी तेल का आवागमन इसी जलडमरूमध्य से होता है, ऐसे में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं। ईरान ने यह कदम एक दो-सप्ताह की अस्थायी संघर्ष विराम के हिस्से के तौर पर उठाया है, जिसके तहत जलडमरूमध्य को अस्थायी रूप से फिर से खोला गया है।
IRGC नौसेना द्वारा जारी किए गए नए मार्गों का विवरण इस प्रकार है:
प्रवेश मार्ग: ओमान सागर से होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश करने वाले जहाज अब लारक द्वीप के उत्तरी हिस्से से गुजरेंगे। इसके बाद वे खाड़ी की ओर बढ़ेंगे। यह मार्ग संभावित खतरों से बचाते हुए जहाजों को सुरक्षित प्रवेश प्रदान करेगा।निकास मार्ग: खाड़ी से बाहर निकलने वाले जहाजों के लिए भी एक नया मार्ग तय किया गया है। ये जहाज लारक द्वीप के दक्षिणी हिस्से से होते हुए ओमान सागर की ओर प्रस्थान करेंगे।ईरान का कहना है कि इन नए रास्तों का उद्देश्य जहाजों को सुरक्षित और निर्बाध रूप से गुजरने में मदद करना है। यह कदम जलमार्ग में किसी भी प्रकार के अप्रिय घटना को रोकने और अंतरराष्ट्रीय नौवहन की निरंतरता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
UN में भारत को बड़ी भूमिका, सतत विकास में निभाएगा अहम जिम्मा
9 Apr, 2026 09:35 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
न्यूयॉर्क | संयुक्त राष्ट्र में भारत को बड़ी कूटनीतिक सफलता मिली है। भारत ने आर्थिक और सामाजिक परिषद (ECOSOC) से जुड़े चार अहम निकायों के चुनाव में निर्विरोध जीत हासिल की है। इन सभी चुनावों में भारत का चयन सर्वसम्मति से हुआ, जो वैश्विक मंच पर उसकी मजबूत स्थिति को दर्शाता है। इन चुनावों में भारत को विकास के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आयोग , गैर-सरकारी संगठनों की समिति और कार्यक्रम एवं समन्वय समिति में चुना गया है।
प्रीति सरन को सीईएससीआर में फिर से चुना गया
इसके साथ ही, भारत की वरिष्ठ राजनयिक रहीं प्रीति सरन को आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों की समिति (CESCR) में फिर से चुना गया है। वह इससे पहले इस समिति के सत्र की अध्यक्षता भी कर चुकी हैं। प्रीति सरन का 36 वर्षों का लंबा कूटनीतिक अनुभव रहा है, जिसमें उन्होंने वियतनाम में भारत की राजदूत के रूप में सेवा दी, साथ ही टोरंटो, जेनेवा, ढाका, काहिरा और मॉस्को जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर भी तैनाती संभाली।
सीईएससीआर क्या है?
सीईएससीआर में 18 स्वतंत्र विशेषज्ञ शामिल होते हैं, जो आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय समझौते के पालन की निगरानी करते हैं। यह समिति भोजन, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा, पानी और स्वच्छता जैसे बुनियादी अधिकारों से जुड़े मामलों पर नजर रखती है।वहीं, एनजीओ समिति संयुक्त राष्ट्र में सिविल सोसाइटी संगठनों की भागीदारी तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आयोग विकास और सतत भविष्य से जुड़े मुद्दों पर दिशा तय करता है, जबकि कार्यक्रम एवं समन्वय समिति संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के कामकाज में तालमेल सुनिश्चित करती है।
ECOSOC क्या है?
गौरतलब है कि ECOSOC संयुक्त राष्ट्र की उस केंद्रीय व्यवस्था का हिस्सा है, जो सतत विकास के तीनों आयाम आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय को आगे बढ़ाने का काम करती है। यह सफलता इन वैश्विक मुद्दों पर भारत की बढ़ती भूमिका और प्रभाव को भी रेखांकित करती है।
अमेरिका ने राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति का हवाला दिया
8 Apr, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन|अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बड़ा एलान किया है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि जो भी देश ईरान को सैन्य हथियार या युद्ध सामग्री सप्लाई करेगा, उसे भारी आर्थिक नुकसान झेलना होगा। ट्रंप ने घोषणा की है कि ऐसे देशों से अमेरिका आने वाले हर सामान पर तुरंत प्रभाव से 50 फीसदी का आयात शुल्क, यानी की टैरिफ लगा दिया गया है। राष्ट्रपति ने साफ-साफ कहा कि इस फैसले में किसी भी देश को कोई छूट या रियायत नहीं दी जाएगी।
ईरान में नई शुरुआत का दावा
राष्ट्रपति ट्रंप ने चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि ईरान में 'सत्ता परिवर्तन' हो चुका है। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था के तहत अब ईरान में यूरेनियम का संवर्धन पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। ट्रंप ने कहा कि हम ईरान के साथ मिलकर काम करेंगे और वहां जमीन के नीचे दबे हुए परमाणु मलबे को बाहर निकालकर नष्ट करेंगे।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने आगे कहा कि ईरान के इन संवेदनशील ठिकानों पर अमेरिकी 'स्पेस फोर्स' के जरिए उपग्रह से पैनी नजर रखी जा रही है। उन्होंने दावा किया कि पिछले हमलों के बाद से उन ठिकानों पर किसी भी चीज को छुआ तक नहीं गया है।
15 सूत्रीय समझौते पर बातचीत शुरू
युद्ध के बाद अब शांति की ओर कदम बढ़ाते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच प्रतिबंधों में ढील देने पर चर्चा चल रही है। उन्होंने खुलासा किया कि दोनों पक्षों के बीच एक 15 सूत्रीय एजेंडा तैयार किया गया है, जिसमें से कई बिंदुओं पर सहमति भी बन चुकी है।
ईरान के खिलाफ ट्रंप का यह रुख दिखाता है कि वे तेहरान को आर्थिक रूप से पूरी दुनिया से अलग-थलग कर देना चाहते हैं, जिससे कोई भी बाहरी ताकत ईरान की सैन्य मदद न कर सके। वहीं दूसरी ओर, वे परमाणु खतरे को जड़ से खत्म करने की योजना पर काम कर रहे हैं।
वैश्विक बाजार पर पड़ेगा गहरा असर
जानकारों का मानना है कि ट्रंप के इस '50% टैरिफ' वाले फैसले से वैश्विक व्यापार में हड़कंप मच सकता है। चीन और रूस जैसे देश ईरान के करीबी रहे हैं, उनके लिए अब अमेरिका के साथ व्यापार करना बड़ी चुनौती बन सकता है। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने किन-किन देशों के खिलाफ 50 फीसदी टैरिफ लगाने की बात कही है।
युद्धविराम के बावजूद खाड़ी में तनाव जारी, UAE-कुवैत पर हमले और ईरान में विस्फोट
8 Apr, 2026 04:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ईरान के साथ चल युद्ध के बीच अमेरिका के नेशनल काउंटर टेररिज्म सेंटर के निदेशक पद से इस्तीफा देने वाले जो केंट ने सीजफायर को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि अगर इस युद्धविराम को सफल बनाना है तो सबसे पहले यह जरूरी है कि इजरायल को संयम में रखा जाए. उनका कहना है कि सिर्फ सीजफायर का ऐलान कर देना ही काफी नहीं होता, बल्कि उसे सही तरीके से लागू करना ज्यादा अहम होता है. अगर किसी भी पक्ष की ओर से हमले जारी रहते हैं तो यह समझौता कमजोर पड़ सकता है.
जो केंट का बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि मौजूदा हालात में इजरायल की भूमिका काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है. अगर वह अपने सैन्य कदमों को नियंत्रित रखता है तो बातचीत आगे बढ़ सकती है और तनाव कम होने की संभावना बढ़ जाती है. यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्तों के लिए सीजफायर लागू किया गया है और क्षेत्र में शांति लाने की कोशिशें जारी हैं.
अमेरिका और ईरान युद्ध की शुरुआत
अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया था. हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई समेत कई नेताओं की मौत हो गई थी.उस हमले के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए मिडिल ईस्ट के कई देशों में स्थिति अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया था, जिसमें बहरीन, कुवैत, दुबई शामिल था. इस जंग की शुरुआत से वैश्विक स्तर पर गैस और तेल की किल्लत भी हो गई थी. इसका सबसे बड़ा कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना था. ये ऐसा रास्ता है, जिसके माध्यम से दुनिया का 20 फीसदी तेल ट्रांसपोर्ट किया जाता है.
सड़क पर मिले दो खोखे, गोलीबारी की घटना से सनसनी
8 Apr, 2026 11:06 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
करनाल। असंध में कैथल रोड पर स्थित एक रेस्टोरेंट पर बीती रात अज्ञात व्यक्ति ने फायरिंग कर दी। वारदात को अंजाम कैफे बंद होने के बाद दिया गया। मालिक को भी सुबह कैफे पर आने के बाद पता लग पाया। सूचना मिलते ही पुलिस और असंध सीआईए की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। रेस्टोरेंट के सामने सड़क पर दो खोल मिले हैं। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। फिलहाल किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।
असंध निवासी कुलदीप सिंह ने करीब एक महीने पहले ही कैथल रोड पर अपना कैफे खोला था। बीती रात वह रोजाना की तरह कैफे बंद करके घर चले गए थे। उनके जाने के बाद किसी अज्ञात हमलावर ने बंद कैफे के शीशे पर फायरिंग कर दी। शटर से गोली आर-पार होकर कांच के दरवाजे पर लगी। दरवाजा चकनाचूर हो गया। इसके बाद आरोपी मौके से भाग गए। सूचना के बाद सुबह असंध थाना और सीआईए की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस सीसीटीवी फुटेज जांच रही है और वहीं, रेस्टोरेंट मालिक से पूछताछ कर रही है।
रंजिश या फिरौती, हर पहलू पर चल रही जांच
असंध पुलिस मामले को गंभीरता से लेते हुए हर पहलू पर जांच कर रही है। फिलहाल साफ नहीं हो पाया है कि फायरिंग के पीछे कोई पुरानी रंजिश है या फिर किसी प्रकार की फिरौती की मांग से जुड़ा मामला है। दोनों ही संभावनाओं को ध्यान में रखकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। क्योंकि इससे पहले असंध में अस्पताल और मेडिकल लैब पर फायरिंग हुई थी। वह मामला रंगदारी से जुदा पाया गया था। अब पुलिस उसी आधार पर भी मामले की जांच कर रही है।
रात को 10 बजे के बाद दिया वारदात को अंजाम
असंध थाना प्रभारी नसीब सिंह ने बताया कि घटना रात करीब 10 बजे के बाद की है। मौके से गोली के दो खोल बरामद हुए हैं। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फटेज खंगाली जा रही है। कैफे मालिक से भी पूछताछ की जा रही है।
बेमौसम बारिश से किसानों को बड़ा झटका, गेहूं की फसल भीगी
8 Apr, 2026 10:16 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
करनाल। हरियाणा में मंगलवार रात से मौसम ने एक बार फिर करवट ली। बीते 24 घंटों में प्रदेश के 20 जिलों में हल्की से मध्यम स्तर की बारिश हुई। इससे अधिकतम तापमान में 12 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है। पूरे प्रदेश में दिन का तापमान 24 से 29 डिग्री के बीच रहा। बारिश के कारण गर्मी से तो राहत मिली लेकिन किसानों की मुश्किल बढ़ गई है।
नूंह व सोनीपत में किसानों को नहीं मिला तिरपाल
मौसम विभाग की चेतावनी के बावजूद मंडियों में फसल प्रबंधन के उचित प्रबंध नहीं किए गए। कहीं तिरपाल कम पड़ गईं तो कहीं प्रबंध ही नहीं किया गया। नतीजा हजारों क्विंटल गेहूं व बोरियां भीग गईं। अकेले पानीपत में 20 हजार क्विंटल गेहूं भीग गई। इससे प्रदेश की अधिकतर मंडियों में सरकारी और निजी खरीद भी ठप रही। पूरा दिन किसान अपने स्तर पर मंडियों में लाई गई फसल को बचाते नजर आए। नूंह व सोनीपत में किसानों को तिरपाल ही नहीं मिला।
रेवाड़ी में खराब मौसम के कारण मंडी की बंद
वहीं, झज्जर में हजारों क्विंटल गेहूं भीगने के बाद बुलडोजर की मदद से उसे शेड के नीचे करने का प्रयास किया गया। रेवाड़ी में तो खराब मौसम के कारण मंडी ही बंद कर दी गई। हिसार व भिवानी में जिला मुख्यालय की मंडी में फसल को तिरपाल से ढका पर तेज हवा के कारण फसल भीग गई। करनाल में भी शेड के बाहर पड़े गेहूं को किसान तिरपाल से ढकते नजर आए। अंबाला में केवल साहा अनाज मंडी में थोड़ा गेहूं भीगा है। हालांकि कैथल, यमुनानगर व फतेहाबाद में बचाव रहा।
किसानों के चेहरे पर चिंता
मंडियों में उचित प्रबंध नहीं होने के कारण किसानों के चेहरे पर चिंता और बेबसी साफ झलकी। पलवल की मंडी में पहुंचे किसान रघुवीर ने बताया कि सरकार ने 12 प्रतिशत नमी का मानक तय किया है लेकिन लगातार खराब मौसम के कारण फसल ठीक से सूख ही नहीं पा रही। पहले ओलावृष्टि ने फसल को नुकसान पहुंचाया। अब बारिश से हालत और खराब हो गई है। फसल मानकों पर खरी नहीं उतर रही तो खरीद कैसे होगी। इस बीच खेतों में गेहूं कटान व थ्रेसिंग का कार्य रुक गया है। फसल भीगने के कारण नमी की मात्रा बढ़ने की पूरी संभावना है।
सिरसा, फरीदाबाद व हांसी में नहीं बरसे बादल
अंबाला, पंचकूला, हिसार, महेंद्रगढ़, रोहतक, कुरुक्षेत्र भिवानी, जींद, रेवाड़ी, गुरुग्राम, करनाल, पलवल, नूंह, पानीपत, झज्जर, सोनीपत, चरखी-दादरी, कैथल, यमुनानगर, फतेहाबाद में बारिश हुई है। हालांकि सभी जिलों में दिनभर बादल छाए रहे। फरीदाबाद, हांसी व सिरसा में बारिश नहीं हुई। तापमान में एक दिन में इतनी गिरावट से लोगों को सर्दी महसूस हुई।
सीजफायर का असर: तेल सस्ता होते ही Sensex-Nifty में जोरदार उछाल
8 Apr, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
US-Iran Ceasefire: अमेरिका ने ईरान के साथ चल रही जंग को लेकर सीजफायर का ऐलान किया है. सीजफायर के ऐलान होते ही कच्चे तेली की कीमत भर-भराकर गिर गई और अमेरिकी शेयर बाजार में तूफानी तेजी आ गई. भारतीय शेयर बाजार में भी तगड़ी उछाल देखने को मिली है. निफ्टी करीब 800 अंक और सेंसेक्स 26,00 अंक बढ़ा है.
कच्चे तेली कीमत जो मंगलवार की रात लगभग 116 डॉलर प्रति बैरल रही है. वह गिरकर अब सिर्फ 95 डॉलर के करीब पहुंच गई है. यानी सीजफायर की घोषणा के बाद करीब 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. डाउ जोंस फ्यूचर करीब 900 अंक उछला है. इसके साथ ही गिफ्ट निफ्टी भी करीब 3.5 प्रतिशत ऊपर है. भारतीय शेयर बाजार भी तगड़ी उछाल के साथ खुला.
क्या बोले डोनाल्ड ट्रंप?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ईरान के साथ दो हफ्तों के लिए सीजफायर पर सहमति जताई है. यह समझौता इस शर्त पर आधारित है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य को सुरक्षित रूप से तुरंत खोला जाएगा. ट्रंप ने सीजफायर का ऐलान उस दौरान किया. जब उनकी डेडलाइन का समय खत्म होने वाला था. ट्रंप ने कहा था कि अगर ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज नहीं खोलता तो उस पर ऐसा हमला करेंगे कि याद रखेगा. क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने की वजह से न सिर्फ अमेरिका बल्कि दुनियाभर के देशों को नुकसान हो रहा था. कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगी थीं.
तनाव कम करने के लिए अहम कदम
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीजफायर की घोषणा करने के दौरान कहा कि यह तनाव कम करने के लिए अहम कदम है. ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना होगा. ट्रंप ने कहा कि सीजफायर का फैसला पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर के साथ बातचीत के बाद लिया गया है.
‘48 घंटे घर से बाहर न निकलें’: ट्रंप के बयान के बाद ईरान में भारतीयों के लिए चेतावनी
8 Apr, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Indian Embassy Advisory: अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान को धमकी देते हुए मंगलवार (7 अप्रैल 2026) को सोशल मीडिया साइट ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट किया. इसमें उन्होंने लिखा कि आज रात पूरी सभ्यता खत्म होने वाली है, जो दोबारा वापस नहीं आ सकती है. इस चेतावनी भरी पोस्ट के बाद पूरी दुनिया में हलचल मच गई है. ईरान की राजधानी तेहरान में स्थित भारतीय दूतावास ने भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है.
‘अगले 48 घंटे तक घर से ना निकलें’
ईरान को ट्रंप की धमकी के बाद भारतीय दूतावास ने भारतीयों के लिए एडवाइजरी जारी की है. इसमें कहा गया है कि जो भारतीय नागरिक ईरान में रह रहे हैं, वे जहां हैं, अगले 48 घंटे तक वहीं रहें. अगर जरूरत ना हो तो यात्रा और किसी तरह के मूवमेंट करने से बचना चाहिए. इसके साथ ही एडवाइजरी में साफ किया गया है कि किसी भी इलेक्ट्रिक इंस्टॉलेशन, पावर प्लांट, सैन्य ठिकानों और सरकारी भवनों से दूरी बनाकर रखें. ये हमले की स्थिति में ये अहम लक्ष्य हो सकते हैं.
निचली मंजिलों में रहने की सलाह
एडवाइजरी में कहा गया है कि सुरक्षा वजहों से बहुमंजिला इमारतों की ऊपरी मंजिलों की वजह निचली मंजिलों में रहने की सलाह दी गई है. इसके साथ ही कहा गया है कि जरूरत ना हो तो हाईवे पर ना निकलें. सड़क मार्ग से जाना ही पड़े तो भारतीय दूतावास से तालमेल बनाकर रखना चाहिए.
हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया
दूतावास ने भारतीय नागरिकों की मदद के लिए मोबाइल हेल्पलाइन नंबर और ईमेल जारी किया गया है. ये अगले 24 घंटे के लिए संचालित रहेगी. इन मोबाइल नंबर पर संपर्क किया जा सकता है, +989128109115, +989128109109, +989128109102, +989932179359. ईमेल एड्रेस – cons.tehran@mea.gov.in है.
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