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ईरान से वार्ता से पहले अमेरिका का नरम रुख, जेडी वेंस बोले—दोस्ती के लिए तैयार
11 Apr, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद,। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित वार्ता से पहले कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस बातचीत के लिए इस्लामाबाद पहुंच रहे हैं और उन्होंने सकारात्मक संकेत दिए हैं।
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने वार्ता से पहले कहा कि अमेरिका इस बातचीत को लेकर उत्साहित है और उसे उम्मीद है कि यह सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ेगी। उन्होंने कहा, अगर ईरान सद्भावना के साथ बातचीत करता है, तो हम भी दोस्ती का हाथ बढ़ाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इसी तरह का रुख अपनाने की बात कही है।
गृह मंत्री नकवी ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की
यह वार्ता दोनों देशों के बीच प्रस्तावित युद्धविराम समझौते को आगे बढ़ाने के लिए अहम मानी जा रही है। क्षेत्रीय तनाव और हालिया घटनाओं के बीच इस बैठक पर वैश्विक नजर बनी हुई है।
इधर, पाकिस्तान सरकार ने इस उच्चस्तरीय वार्ता को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने एक उच्चस्तरीय बैठक में तैयारियों की समीक्षा की और अधिकारियों को विदेशी मेहमानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने इस वार्ता की मेजबानी को सम्मान की बात बताते हुए कहा है कि देश हर स्तर पर मेहमाननवाजी और सुरक्षा के लिए तैयार है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि दोनों देशों के बीच यह बातचीत कितनी सफल रहती है और क्या इससे क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में ठोस कदम निकलते हैं।
भिवानी की आशा मिड्ढा की दर्दनाक मौत से परिवार में मातम
11 Apr, 2026 06:12 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भिवानी। वृंदावन में हुए नाव हादसे में भिवानी के जगत कॉलोनी निवासी 55 वर्षीय आशा मिड्ढा की मौत हो गई। वह रेलवे रोड स्थित जगदंबा भोजनालय के संचालक अर्जुन मिड्ढा की पत्नी थीं। हादसे की सूचना जैसे ही भिवानी में परिजनों को मिली, परिवार में कोहराम मच गया और सभी लोग तत्काल वृंदावन रवाना हो गए। घर में मातम छा गया। जानकारी के अनुसार आशा मिड्ढा वीरवार सुबह भिवानी से निकली थीं। उन्होंने लुधियाना में रह रहे अपने मायके पक्ष के साथ तीर्थ यात्रा की योजना बनाई थी। हादसे के समय उनके साथ मायके से भाभी और भतीजी भी मौजूद थीं। आशा तीन बच्चों की मां थीं। उनके दो बेटे अजय और दिनेश तथा एक बेटी है। तीनों बच्चे विवाहित हैं।
परिजनों के अनुसार आशा के ननदोई राधेश्याम ने बताया कि वह पिछले वर्ष भी वृंदावन गई थीं। इस बार उन्होंने लुधियाना से मायके पक्ष के साथ यात्रा का निर्णय लिया था। आशा नौ अप्रैल को घर से निकली थीं। उन्हें उनका बेटा सोनीपत छोड़ने गया था। वहां वह रात को अपनी बेटी के घर रुकी थीं। इसके बाद शुक्रवार सुबह वह लुधियाना से आ रही बस में मुरथल से सवार होकर मथुरा पहुंची थीं कि यह हादसा हो गया।
तीर्थ यात्रा पर जाने के लिए थी बेहद उत्साहित थीं आशा
आशा मथुरा जाने को लेकर बेहद उत्साहित थीं। एक दिन पहले ही वह लुधियाना से आने वाली बस के इंतजार में सोनीपत अपनी बेटी के पास रुकने गई थीं। उन्हें बेटा वहां तक छोड़कर आया था। अगले दिन बेटी और दामाद उन्हें मुरथल तक बस में बैठाने के लिए छोड़ने गए थे। उस समय भी आशा काफी खुश नजर आ रही थीं। किसी को अंदेशा नहीं था कि यह तीर्थ यात्रा उनका अंतिम सफर साबित होगी।
सीजफायर के बीच यूरेनियम को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तानातनी जारी
10 Apr, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। ईरान और अमेरिका के बीच हुए हालिया सीजफायर के बाद फिर यूरेनियम को लेकर वैश्विक स्तर पर चर्चा तेज हुई है। इस मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का सख्त रुख सामने आया है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि यूरेनियम के मुद्दे की अनदेखी कर कोई भी समझौता नहीं होगा। एक साक्षात्कार में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि यूरेनियम पर पूरी निगरानी रखी जाएगी और इसके बिना किसी भी समझौते की कल्पना नहीं की जा सकती। उनसे जब संवर्धित (एनरिच्ड) यूरेनियम के भविष्य को लेकर सवाल किया गया, तब उन्होंने इस बात को अमेरिका की “पूर्ण जीत” से जोड़ते हुए कड़ा रुख अपनाया।
दूसरी ओर, ईरान ने भी सीजफायर के लिए अपनी शर्तों में यूरेनियम संवर्धन को शामिल किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने अमेरिका के सामने जो प्रस्ताव रखे हैं, उसमें यूरेनियम संवर्धन की अनुमति एक अहम मुद्दा है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि इन शर्तों के आधार पर ही आगे बातचीत होगी। इस बीच ईरान ने अमेरिका पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने दावा किया कि अमेरिकी कार्रवाई के पीछे संवर्धित यूरेनियम हासिल करने की मंशा हो सकती है, इस उन्होंने एक “छलपूर्ण कोशिश” बताया। यह बयान उस घटना के बाद आया, जब ईरान में एक अमेरिकी लड़ाकू विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद अमेरिका ने बड़े स्तर पर खोज अभियान चलाया था।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मुद्दे को लेकर चिंता बढ़ी है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख राफेल ग्रोसी के अनुसार, ईरान के पास मौजूद संवर्धित यूरेनियम की मात्रा 10 से अधिक परमाणु हथियार बनाने की क्षमता रखती है। वर्तमान में ईरान के पास करीब 440 किलोग्राम यूरेनियम है, जिसे 60 प्रतिशत तक संवर्धित किया जा चुका है, जबकि परमाणु हथियार के लिए करीब 90 प्रतिशत तक शुद्ध करना जरूरी होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के लिए इस यूरेनियम को सुरक्षित रूप से हासिल करना आसान नहीं होगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसका एक बड़ा हिस्सा पिछले सैन्य हमलों के बाद इस्फहान और नतांज जैसे क्षेत्रों के मलबे में दबा हुआ है। इस निकालने के लिए बड़े पैमाने पर सैन्य और तकनीकी संसाधनों की जरूरत होगी। कुल मिलाकर, सीजफायर के बावजूद यूरेनियम का मुद्दा अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का प्रमुख कारण बना हुआ है और आने वाले समय में यह वैश्विक राजनीति को प्रभावित कर सकता है।
22 दिन पहले घूमने गया, अब आई मौत की दुखद खबर
10 Apr, 2026 11:39 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
करनाल। टूरिस्ट वीजा पर 22 दिन पहले रूस घूमने गए बसंत विहार के 17 वर्षीय देव पुंडीर की संदिग्ध मौत की सूचना मिली है। परिवार को व्हाट्सएप पर बेटे की फोटो के साथ उसकी मौत की जानकारी उसके साथियों के माध्यम से मिली है। इकलौते बेटे की मौत से परिवार में मातम पसर गया है और परिवार से भारत सरकार से बेटे की मौत के कारण का पता लगाने और शव वापस लाने की गुहार लगाई है।
इलेक्टि्रशियन पिता विनोद कुमार ने बताया कि 16 मार्च को उनका बेटा रूस घूमने के लिए गया था। शनिवार से ही उससे संपर्क नहीं हो पा रहा था। न ही फोन लग रहा था, अब बुधवार को अचानक उन्हें व्हाट्सएप पर बेटे की मौत की सूचना मिली है। उसकी मौत कैसे हुई, कब हुई, इसकी कोई जानकारी नहीं है। मामी पूजा ने बताया कि देव और तीन भाई-बहन हैं। मां घर पर सिलाई का काम करती हैं। पार्षद प्रतिनिधि सुभाष कोच के साथ परिवार के सदस्य केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के प्रतिनिधि कविंद्र राणा से भी मिले। उन्होंने परिवार को बेटे की मौत का पता लगाने का आश्वासन दिया है। ताकि बेटै के शव का अंतिम संस्कार किया जा सके।
पिता बोले, मैने रोका था तो उसने कहा कि वहां बसने थोड़ी जा रहा...
पिता विनोद कुमार और मां का कहना है कि विदेश जाने से पहले उन्होंने अपने बेटे को रोका था कि अभी मत जा अपनी पढ़ाई पूरी कर ले। तब बेटे ने यह कहा था कि टूरिस्ट वीजा पर घूमने जा रहा हूं, वहां बसने थोड़ी जा रहा हूं। वापस लौटकर पढ़ाई कर लेगा। उन्होंने बताया कि बेटे ने पिछले साल ही 12वीं की पढ़ाई पूरी की थी और वर्तमान में होटल मैनेजमेंट का डिप्लोमा कर रहा था।
भारत-अमेरिका रिश्तों को नई मजबूती, विक्रम मिसरी और काश पटेल की अहम बैठक
10 Apr, 2026 11:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिसरी (Vikram Misri) इस समय अमेरिका दौरे पर हैं। उनका यह दौरा तीन दिवसीय होगा। मिसरी के इस दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत (India) और अमेरिका (United States of America) के रणनीतिक जुड़ाव को और बढ़ाना है। अमेरिका दौरे के दौरान मिसरी ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो (Marco Rubio) के साथ एक अहम मीटिंग की। इसके साथ ही उन्होंने एफबीआई (FBI) चीफ काश पटेल (Kash Patel) समेत अमेरिका के कई सीनियर अधिकारियों के साथ अलग से मुलाकात की।
भारत-अमेरिका संबंधों में मज़बूती पर की चर्चा
रुबियो और पटेल से मुलाकात के दौरान मिसरी ने भारत-अमेरिका संबंधों में मज़बूती पर चर्चा की। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच रक्षा, आतंकवाद-रोधी उपाय, व्यापार, एआई सप्लाई, प्राकृतिक खनिजों, क्वाड को-ऑपरेशन और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
अगले महीने भारत आएंगे अमेरिकी विदेश मंत्री
अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो अगले महीने भारत आएंगे। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर (Sergio Gor) ने भी इसकी पुष्टि की और बताया कि रुबियो बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं। यह इस बात का संकेत है कि जल्द ही कोई उच्च-स्तरीय यात्रा हो सकती है।
मिडिल ईस्ट में तनाव पर भी हुई बातचीत
मिसरी ने रुबियो, पटेल और अमेरिकी अधिकारियों से मिडिल ईस्ट में तनाव पर भी बातचीत जो ईरान-अमेरिका इज़रायल युद्ध की वजह से पैदा हुआ। मिसरी ने शांति स्थापित करने का सुझाव दिया। फिलहाल युद्ध में दोनों पक्षों के बीच दो हफ्ते का सीज़फायर चल रहा है और जल्द ही स्थायी समाधान के लिए पाकिस्तान (Pakistan) में बातचीत का दौर शुरू होगा।
खतरनाक एंड्रॉइड मालवेयर ‘नो वॉइस...........करीब 23 लाख स्मार्टफोन प्रभावित
10 Apr, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन । हाल ही में एक बेहद खतरनाक एंड्रॉइड मालवेयर ‘नो वॉइस’ सामने आया है, जिसने करीब 23 लाख स्मार्टफोन को प्रभावित किया है। यह मालवेयर मुख्य रूप से पुराने और बजट स्मार्टफोन को निशाना बना रहा है, जिसमें मई 2021 के बाद कोई सुरक्षा अपडेट नहीं हुआ है। मैकेफी के शोधकर्ताओं के अनुसार, यह मालवेयर सामान्य फैक्ट्री रीसेट के बाद भी फोन से हटता नहीं है, जिससे उपयोगकर्ताओं के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
‘नो वॉइस’ 50 से अधिक एप में छिपा पाया गया था, जैसे सिस्टम क्लीनर, गेम्स और फोटो गैलरी, जो शुरुआत में निर्दोष लगते हैं। उपयोगकर्ता इन्हें बिना किसी संदेह के इंस्टॉल कर लेते हैं। इंस्टॉल होने के बाद, यह एंड्रॉइड की पुरानी कमजोरियों का फायदा उठाकर फोन में रूट एक्सेस हासिल कर लेता है, जिससे यह डिवाइस पर लगभग पूर्ण नियंत्रण प्राप्त कर लेता है। रूट एक्सेस मिलने के बाद, ‘नो वॉइस’ कई खतरनाक गतिविधियां करता है। यह वित्तीयद एप से संवेदनशील डेटा, जैसे यूजरनेम और पासवर्ड चुरा सकता है, जिससे आर्थिक सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। इसके अलावा यह निजी तस्वीरों को देखकर डिलीट कर सकता है और जरूरी एप को भी हटाकर फोन की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है।
इसकी सबसे बड़ी समस्या इसकी अत्यधिक चिपचिपी प्रकृति है, जो इसे सिस्टम के गहरे हिस्सों में छिपने में सक्षम बनाती है। केवल फोन का पूरा फर्मवेयर दोबारा इंस्टॉल करने से इसे पूरी तरह हटाया जा सकता है। वैश्विक स्तर पर इसका प्रभाव अफ्रीकी देशों में अधिक देखा गया है, लेकिन भारत, अमेरिका और यूरोप में भी कई उपयोगकर्ता इससे प्रभावित हुए हैं। हालांकि, जिन स्मार्टफोन को मई 2021 के बाद नियमित सुरक्षा पैच और अपडेट मिल रहे हैं, वे इस मालवेयर से सुरक्षित हैं। गूगल ने प्रभावित ऐप्स को प्ले स्टोर से हटा दिया है, जिससे नए इंस्टॉलेशन का जोखिम कम हो गया है। सुरक्षा के लिए उपयोगकर्ताओं को केवल विश्वसनीय स्रोतों से ऐप डाउनलोड करना चाहिए, नियमित अपडेट करना चाहिए और संदिग्ध ऐप्स से बचना चाहिए। साथ ही, फोन में किसी भी असामान्य गतिविधि या प्रदर्शन में बदलाव पर तुरंत विशेषज्ञ की मदद लेनी चाहिए। यह सचेत रहना ही ‘नो वॉइस’ जैसे खतरनाक मालवेयर से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।
सोशल मीडिया पर घमासान: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने विवादित पोस्ट हटाई
10 Apr, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Pakistan: ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध में सीजफायर के बीच पाकिस्तान के लिए बहुत असहज करने वाली स्थिति सामने आ गई है। इस्लामाबाद में होने वाली अहम कूटनीतिक बैठकों से पहले पाकिस्तान को एक अजीब और थोड़ी असहज स्थिति का सामना करना पड़ा है। इसकी जड़ में खुद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ हैं। जिनकी एक सोशल मीडिया पोस्ट ने अंतरराष्ट्रीय हलकों में हलचल मचा दी। दरअसल, ख्वाजा आसिफ ने अपने एक्स अकाउंट पर इजरायल को लेकर बेहद तीखी टिप्पणी कर दी थी। उन्होंने इजरायल को “मानवता के लिए अभिशाप” तक कह दिया। यह बयान आते ही मामला तूल पकड़ गया।
ख्वाजा आसिफ ने क्या कहा था?
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक्स पर पोस्ट करते हुए इजरायल को बुराई और इंसानियत के लिए अभिशाप बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस्लामाबाद में शांति वार्ता चल रही है, लेकिन लेबनान में नरसंहार हो रहा है।
इजरायल की सख्त प्रतिक्रिया
इजरायल ने इस बयान को हल्के में नहीं लिया। सीधे बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई। बयान में कहा गया कि इस तरह की भाषा “अपमानजनक” है और खासकर तब और भी ज्यादा अस्वीकार्य हो जाती है, जब कोई देश खुद को शांति प्रक्रिया में तटस्थ बताने की कोशिश कर रहा हो। यह प्रतिक्रिया साफ तौर पर एक कूटनीतिक चेतावनी जैसी थी।
दबाव में आया पाकिस्तान?
इजरायल की इस तीखी आपत्ति के बाद घटनाक्रम तेजी से बदला। ज्यादा देर नहीं लगी और ख्वाजा आसिफ ने अपनी विवादित पोस्ट हटा दी। यही कदम अब चर्चा का विषय बन गया है। कई एक्सपर्ट इसे पाकिस्तान के “कूटनीतिक बैकफुट” या कहें तो दबाव में उठाया गया कदम मान रहे हैं। उनका कहना है कि अगर पाकिस्तान सच में एक मध्यस्थ की भूमिका निभाना चाहता है, तो उसे अपने बयानों में ज्यादा सावधानी बरतनी होगी।
क्यों अहम है यह विवाद?
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ है जब पाकिस्तान, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति वार्ता की मेजबानी करने की तैयारी में है। ऐसे में इस तरह का विवाद उसकी छवि को नुकसान पहुंचा रहा है। दरअसल, पाकिस्तान इस वक्त अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी साख सुधारना चाहता है। साथ ही वह खुद को एक 'शांतिदूत' के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में आक्रामक बयानबाजी उसकी रणनीति को कमजोर कर सकती है।
20 अप्रैल से इलाज रोकने की तैयारी, मरीजों पर पड़ेगा असर
10 Apr, 2026 10:33 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। हरियाणा में आयुष्मान भारत योजना पर बड़ा संकट गहराता जा रहा है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन हरियाणा ने संकेत दिए हैं कि राज्य के अस्पताल अब इस योजना को जारी रखने की स्थिति में नहीं हैं। आईएमए की ओर से आयुष्मान भारत हेल्थ प्रोटेक्शन अथॉरिटी के सीईओ को भेजे गए पत्र में कई गंभीर खामियों और लंबित मुद्दों को उठाया गया है।
अस्पतालों का कहना है कि योजना के तहत 15 दिन में भुगतान का प्रावधान है, लेकिन सितंबर 2025 से ही करोड़ों रुपये के बिल लंबित पड़े हैं। लगातार हो रही इस देरी से निजी अस्पतालों की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ता जा रहा है, जिससे सेवाएं जारी रखना मुश्किल हो गया है। सात अप्रैल को हुई ऑनलाइन बैठक में राज्यभर के अस्पतालों ने बड़ा फैसला लेते हुए अपने सरेंडर लेटर आईएमए हरियाणा अध्यक्ष को सौंपने का निर्णय लिया। आईएमएने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो 20 अप्रैल 2026 से आयुष्मान भारत योजना के तहत सेवाएं पूरी तरह बंद कर दी जाएंगी।
कमेटियां ठप, फैसले अटके
जनवरी 2025 में मुख्यमंत्री स्तर पर आईएमए प्रतिनिधियों को एम्पैनलमेंट और ग्रीवेंस कमेटियों में शामिल करने की मंजूरी दी गई थी, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया। इससे अस्पतालों से जुड़े कई अहम फैसले लंबित हैं।
पांच महीने से नहीं हुई बैठक
पिछले पांच महीनों से मासिक बैठकें भी नहीं हुई हैं। इसके चलते नए अस्पतालों का पैनल में जुड़ना और नई स्पेशलिटी की मंजूरी पूरी तरह ठप पड़ी है।
लाखों मरीजों पर पड़ेगा असर
अगर अस्पतालों ने सेवाएं बंद कर दीं, तो इसका सीधा असर गरीब और जरूरतमंद मरीजों पर पड़ेगा, जो इस योजना के तहत मुफ्त इलाज पर निर्भर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार और अस्पतालों के बीच जल्द समाधान नहीं निकला तो स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
अमेरिका का दावा कहा- राष्ट्रपति ट्रंप ने कूड़ेदान में फेक दिया था ईरान की 10 मांगों वाला प्रस्ताव
10 Apr, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के उस शुरुआती प्रस्ताव को वास्तव में कूड़ेदान में फेंक दिया था, जो गंभीर नहीं था और अमेरिकी हितों के खिलाफ था। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान ने शुरुआत में जो 10 बिंदुओं का मसौदा दिया था, वह स्वीकार्य नहीं था और उसे पूरी तरह खारिज कर दिया गया था। हालांकि, उन्होंने यह भी जानकारी दी कि बाद में ईरान होर्मुज स्ट्रेट को खोलने पर सहमत हुआ है और अब एक नया प्रस्ताव मिला है, जिसे बातचीत के लिए एक व्यावहारिक आधार माना जा सकता है।
लेविट ने मीडिया और विपक्षी नेताओं से आग्रह किया कि वे ऐसी भ्रामक बातों को बढ़ावा न दें जिनका तथ्यों से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने देश को आश्वस्त किया कि राष्ट्रपति ट्रंप कभी भी ईरान की इच्छाओं की सूची पर समझौता नहीं करेंगे। प्रशासन का रुख स्पष्ट है कि कोई भी समझौता तभी होगा जब वह अमेरिकी जनता और वैश्विक सुरक्षा के हित में होगा। फिलहाल, ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी इस जंग ने अमेरिकी कूटनीति की कड़ी परीक्षा ले रखी है।
ट्रंप की मानसिक स्थिति ठीक नहीं
अमेरिकी सीनेटर क्रिस मर्फी ने राष्ट्रपति ट्रंप पर कड़ा प्रहार करते हुए उन्हें पद के लिए मानसिक रूप से अनफिट करार दिया है। उन्होंने ट्रंप को हटाने के लिए हर संभव कदम उठाने की अपील करते हुए ईरान की ओर से आए 10 सूत्रीय प्रस्ताव को ट्रंप का सरेंडर बताया। विपक्ष के इन हमलों ने वाशिंगटन के राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, जिसके जवाब में अब व्हाइट हाउस को आधिकारिक सफाई पेश करनी पड़ी है।
ईरान ने बंद किया होर्मुज स्ट्रेट
अमेरिका की मध्यस्थता से शांति की जो उम्मीद एक दिन पहले जगी थी, वह लेबनान पर इजरायल के ताजा हमलों के बाद फिर से धुंधली पड़ती दिख रही है। ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के अपने फैसले को कुछ ही घंटों के भीतर पलटते हुए इसे फिर से बंद करने का ऐलान कर दिया है। ईरान के इस कड़े रुख ने अमेरिका के सामने एक स्पष्ट लकीर खींच दी है कि उसे अब यह तय करना होगा कि वह क्षेत्र में युद्धविराम चाहता है या इजरायल के जरिए युद्ध को और हवा देना चाहता है। इस भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच, अमेरिका के भीतर भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को लेकर तीखी आलोचना शुरू हो गई है।
समर्थकों की भीड़ की आशंका, पुलिस ने बढ़ाई निगरानी
10 Apr, 2026 09:48 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिसार। सतलोक आश्रम के प्रमुख रामपाल आज शुक्रवार को 11 साल 5 महीने की जेल कैद के बाद सलाखों से बाहर आने वाले हैं। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से मिली जमानत के आधार पर वे हिसार की जेल नंबर 2 से रिहा होंगे। रामपाल के रिहाई के मद्देनजर प्रशासन और पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। उनके हजारों अनुयायियों के हिसार पहुंचने की संभावना को देखते हुए राजगढ़ रोड, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, जेल परिसर और शहर के विभिन्न पार्कों में भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। कानून-व्यवस्था बिगड़ने की किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है। रामपाल के वकील एडवोकेट सचिन दास ने बताया कि एडीजे गगनदीप मित्तल की अदालत में आज बेल बॉन्ड भर दिया जाएगा। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी के बाद शाम 5 बजे के बाद रामपाल जेल से बाहर आएंगे। इसके बाद वे सीधे सोनीपत के धनाना स्थित आश्रम के लिए रवाना हो जाएंगे। अदालत द्वारा लगाई गई सभी शर्तों का पालन किया जाएगा।
क्या है पूरा मामला
वर्ष 2006 में रोहतक के करोंथा गांव स्थित रामपाल के आश्रम में हुई हिंसा के दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। इस मामले में रामपाल पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था। करीब 22 महीने जेल में रहने के बाद अप्रैल 2008 में उन्हें जमानत मिल गई थी। जुलाई 2014 में करोंथा हिंसा मामले में हिसार अदालत में पेशी के दौरान उनके समर्थकों और वकीलों के बीच झड़प हो गई थी। इसके बाद हाईकोर्ट के आदेश पर नवंबर 2014 में बरवाला आश्रम में 14 दिन तक चले गतिरोध के बाद पुलिस ने रामपाल को गिरफ्तार किया था। तब से वे लगातार जेल में बंद थे।
ईरान-सऊदी विदेश मंत्रियों की फोन पर हुई बातचीत, द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा
10 Apr, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। ईरान और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों के बीच हाल ही में फोन पर बातचीत हुई है, जिसमें दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा की गई। तेहरान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान से यह बातचीत की। हालांकि, इस वार्ता के समय को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी साझा नहीं की गई है।
दूसरी ओर, सऊदी अरब के सरकारी मीडिया के मुताबिक, प्रिंस फैसल बिन फरहान को बुधवार शाम कतर, संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन और तुर्किये के विदेश मंत्रियों के भी फोन आए थे। हालांकि, इस आधिकारिक बयान में ईरान के साथ हुई बातचीत का उल्लेख नहीं किया गया। गौरतलब है कि ईरान और सऊदी अरब लंबे समय से मध्य पूर्व में क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर प्रतिस्पर्धा करते रहे हैं। इस प्रतिस्पर्धा के पीछे राजनीतिक और आर्थिक हितों के साथ-साथ धार्मिक मतभेद भी एक बड़ी वजह रहे हैं। सऊदी अरब में सुन्नी मुस्लिम बहुसंख्यक हैं, जबकि ईरान में शिया समुदाय प्रमुख है, जिससे दोनों देशों के बीच वैचारिक टकराव भी बना रहता है।
संबंधों में साल 2023 में आया सुधार
दोनों देशों के संबंधों में 2023 में तब सुधार आया था, जब करीब सात साल बाद कूटनीतिक रिश्ते बहाल किए गए। इससे पहले रियाद द्वारा शिया धर्मगुरु शेख निमर अल-निमर को फांसी दिए जाने के बाद दोनों देशों के बीच संबंध टूट गए थे। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा बातचीत क्षेत्र में बदलते हालात के बीच दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकती है।
इजरायल ने दो टूक कहा- भरोसेमंद नहीं है पाकिस्तान, अमेरिका ने सिर्फ यूज किया
10 Apr, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेल अवीव। भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इजरायल पाकिस्तान को एक भरोसेमंद या क्रेडिबल प्लेयर के रूप में नहीं देखता है। अजार के अनुसार, अमेरिका अपनी रणनीतिक जरूरतों और विशिष्ट कारणों से पाकिस्तान की मध्यस्थता सेवाओं का उपयोग कर रहा है, ठीक उसी तरह जैसे उसने पहले कतर और तुर्की जैसे समस्याग्रस्त देशों का उपयोग किया था।
मध्य पूर्व में शांति की उम्मीदों के बीच घोषित युद्धविराम शुरू होते ही विवादों की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ घोषित दो हफ्ते के युद्धविराम को अभी 24 घंटे भी पूरे नहीं हुए थे कि धरातल पर स्थितियां तनावपूर्ण हो गईं। इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल युद्धविराम की स्थिरता पर सवाल उठाए हैं, बल्कि वैश्विक कूटनीति में पाकिस्तान की भूमिका को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। विवाद की मुख्य जड़ लेबनान को लेकर किए गए अलग-अलग दावे बने। ईरान और पाकिस्तान का तर्क है कि सीजफायर की शर्तों में लेबनान पर हमले रोकना शामिल था, लेकिन इजरायल ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया। इजरायल के स्पष्ट इनकार के बाद लेबनान में भारी हवाई हमले हुए, जिनमें सैकड़ों लोगों के मारे जाने की सूचना है। इन हमलों ने स्पष्ट कर दिया कि मध्यस्थता करने वाले देश शर्तों को लेकर स्पष्टता सुनिश्चित करने में विफल रहे हैं।
इजरायल का यह रुख एक सख्त संदेश है कि कूटनीतिक गलियारों में केवल मध्यस्थता का दावा करना काफी नहीं है, बल्कि उसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साख होना अनिवार्य है। इजरायली राजदूत ने जोर देकर कहा कि उनके देश के लिए सबसे महत्वपूर्ण अमेरिका के साथ सुरक्षा परिणामों पर तालमेल बिठाना है, विशेष रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल क्षमता जैसे संवेदनशील मुद्दों पर। वर्तमान परिस्थितियां दर्शाती हैं कि जब तक मध्यस्थ अपनी भूमिका में पारदर्शिता और स्पष्टता नहीं लाते, तब तक ऐसे युद्धविराम स्थायी शांति के बजाय नए संघर्षों का आधार बनते रहेंगे। इजरायल के सख्त बयानों ने यह साफ कर दिया है कि वह अपनी सुरक्षा के मामले में किसी भी ऐसे देश पर भरोसा करने को तैयार नहीं है जिसकी छवि संदिग्ध हो।
सैन्य सहयोग से पीछे हटने की खबरों पर चीन की सफाई
9 Apr, 2026 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग|अमेरिका और इस्राइल के साथ ईरान के तनाव के बीच चीन ने बड़ा बयान दिया है। चीन ने उन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें कहा जा रहा था कि उसने युद्ध के दौरान ईरान की सैन्य मदद की। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है और चीन की भूमिका पर बहस शुरू हो गई है।
दरअसल, चीन के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता झांग शियाओगांग ने साफ कहा कि चीनी कंपनियों द्वारा ईरान को सैटेलाइट तस्वीरें या चिप बनाने का उपकरण देने की खबरें पूरी तरह गलत हैं। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ अफवाह और भ्रामक जानकारी है, जिसका कोई आधार नहीं है। चीन ने अमेरिका के उन आरोपों को भी खारिज किया, जिनमें कहा गया था कि चीन और रूस ईरान की मदद कर रहे हैं।
क्या चीन ने ईरान को कोई सैन्य मदद दी थी?
चीन ने साफ शब्दों में कहा कि उसने ईरान को किसी भी तरह की सैन्य सहायता नहीं दी है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि चीनी कंपनी ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों की तस्वीरें जारी की थीं और सेमीकंडक्टर उपकरण उपलब्ध कराए थे, लेकिन चीन ने इन सभी आरोपों को नकार दिया।
अमेरिका के आरोपों पर क्या बोला चीन?
चीन ने अमेरिका के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि कुछ देश जानबूझकर चीन के खिलाफ गलत जानकारी फैला रहे हैं। चीन ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय समझता है कि कौन युद्ध को बढ़ावा दे रहा है और कौन शांति की बात कर रहा है।
चीन ने अपनी भूमिका को कैसे बताया?
चीन ने कहा कि वह हमेशा से ईरान मुद्दे पर निष्पक्ष और संतुलित रुख अपनाता रहा है। उसने दावा किया कि वह लगातार शांति वार्ता को बढ़ावा देता रहा है और कभी भी हालात को भड़काने का काम नहीं किया। चीन ने खुद को शांति समर्थक देश बताया। हालांकि माना जा रहा है कि अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप के सख्त रुख और टैरिफ नीति के चलते चीन पर दबाव बना हुआ है। ऐसे में चीन का यह बयान वैश्विक कूटनीति में संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
आतंक के साए में कूटनीति, पाकिस्तान की भूमिका पर उठे सवाल
9 Apr, 2026 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ईरान | ईरान और अमेरिका के बीच बीते एक महीने से ज्यादा समय से जारी युद्ध कुछ दिन के लिए टल गया है। दोनों देशों के बीच हुए इस युद्ध विराम में पाकिस्तान, तुर्किये और मिस्र ने भी भूमिका निभाई है। अब आगे के समझौते के लिए ईरान और अमेरिका इस्लामाबाद में मिलेंगे। भले ही पाकिस्तान ने इस संघर्ष को रुकवाने के लिए लगातार ट्रंप प्रशासन और ईरानी शासन के बीच संदेशों का आदान-प्रदान किया, लेकिन यह युद्ध विराम भी सिर्फ अस्थायी ही है और दो हफ्तों के लिए तय किया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और उसके फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के जिक्र के बाद कई तरह की चिंताएं जताई जा रही हैं।विश्लेषकों की तरफ से यह चिंता जताई गई है कि आखिर कैसे लंबे समय तक अपनी आतंकी गतिविधियों और आतंकवादियों के सुरक्षित पनाहगाह बने रहने की वजह से अलग-थलग हुआ पाकिस्तान अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर दो देशों के बीच युद्ध विराम के लिए बातचीत का जरिया बन रहा है? वह भी तब जब इस युद्ध के बीच खुद पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में तालिबान पर हमलों के नाम पर वहां आम लोगों को निशाना बनाया है। आखिर डोनाल्ड ट्रंप के दूसरी बार शासन में आने के बाद से ऐसा क्या-क्या हुआ है, जो पाकिस्तान के लिए फायदेमंद बन गया? आइये जानते हैं...
ट्रंप के फिर शासन में आने के बाद कैसे बढ़े अमेरिका-पाकिस्तान के रिश्ते?
बीते करीब डेढ़ दशक से पाकिस्तान की बढ़ती आतंकी गतिविधियों और उसके आतंकियों के पनाहगाह बनने की वजह से यह देश लगातार वैश्विक परिदृश्य में अलग-थलग पड़ा था। खासकर अमेरिका में राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल से लेकर डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल और फिर जो बाइडन के नेतृत्व वाली सरकार में भी पाकिस्तान हाशिए पर ही रहा। हालांकि, ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अमेरिका और पाकिस्तान के संबंधों में एक बड़ा और आश्चर्यजनक बदलाव देखने को मिला है। बताया जाता है कि रिश्तों में आई इस अप्रत्याशित गर्माहट के पीछे पाकिस्तान की कूटनीति, भारी लॉबिंग और ट्रंप के साथ किए गए व्यापारिक सौदों का बड़ा हाथ रहा है।
वॉशिंगटन में भारी लॉबिंग और ट्रंप के करीबियों की नियुक्ति
डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका की सत्ता में आने के बाद से पाकिस्तान ने अमेरिकी नीतियों को अपने पक्ष में करने के लिए करोड़ों डॉलर खर्च किए हैं। अप्रैल-मई 2025 के बीच वॉशिंगटन में लॉबिंग पर पाकिस्तान ने भारत के मुकाबले तीन गुना अधिक पैसा खर्च किया। पाकिस्तान ने अपनी लॉबिंग के लिए ट्रंप के पूर्व बॉडीगार्ड कीथ शिलर और ट्रंप ऑर्गनाइजेशन के पूर्व अधिकारी जॉर्ज सोरियल जैसी ट्रंप की बेहद करीबी हस्तियों को काम पर रखा।
व्यक्तिगत चापलूसी और नोबेल पुरस्कार का नामांकन
पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख असीम मुनीर ने ट्रंप को खुश करने के लिए उनकी जमकर प्रशंसा की कूटनीति अपनाई। मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य संघर्ष को रोकने का पूरा श्रेय ट्रंप को दिया गया और पाकिस्तान ने उन्हें वैश्विक शांतिदूत बताते हुए नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित कर दिया। इसके जवाब में ट्रंप ने भी मुनीर को एक महान व्यक्ति कहना शुरू कर दिया। जून 2025 में ट्रंप ने व्हाइट हाउस में मुनीर के साथ एक विशेष निजी लंच भी किया, जो पाकिस्तानी कूटनीति के लिए अहम पड़ाव रही। बताया जाता है कि इस लंच से ठीक पहले डोनाल्ड ट्रंप कनाडा में जी20 सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे थे। यहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी भारत लौटने से पहले व्हाइट हाउस आने का न्योता दिया था। हालांकि, पीएम मोदी ने इस आमंत्रण को ठुकराते हुए अपने पूर्व के कार्यक्रम को महत्व देने की बात कही।
ट्रंप परिवार के साथ व्यापारिक और क्रिप्टो सौदे
कूटनीति के साथ-साथ पाकिस्तान ने ट्रंप को लुभाने के लिए बड़े व्यापारिक प्रस्ताव भी दिए। पाकिस्तान ने ट्रंप परिवार की क्रिप्टो कंपनी- वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल के साथ साझेदारी की पेशकश की और अमेरिका के सामने 50 करोड़ डॉलर का अहम खनिजों के खनन का समझौता पेश किया। इसके अलावा, पाकिस्तान ने न्यूयॉर्क में अपने बंद पड़े रूजवेल्ट होटल को फिर से विकसित करने का सौदा भी ट्रंप के एक करीबी स्टीव विटकॉफ के साथ किया।
अपने कृषि क्षेत्र को कुर्बान करने में भी गुरेज नहीं
इस लॉबिंग और कूटनीतिक प्रयासों का सीधा आर्थिक फायदा पाकिस्तान को मिला। ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तानी सामानों पर लगने वाले टैरिफ को घटाकर 19% कर दिया, जो प्रमुख एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में सबसे कम दरों में से एक है, जबकि इसके ठीक उलट भारत के टैरिफ को बढ़ाकर 50% कर दिया गया। पाकिस्तान ने इसके बदले अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए अपने बाजार भी खोल दिए।
अपने ही पाले आतंकियों को सौंपकर नजर में आया
अमेरिका की नजर में पाकिस्तान की अहमियत तब और बढ़ गई जब पाकिस्तान ने 2021 के काबुल एयरपोर्ट (एबी गेट) हमले के एक कथित साजिशकर्ता (आईएसआईएस आतंकी) को पकड़कर अमेरिका को सौंप दिया। ट्रंप ने इसके लिए कांग्रेस में खुले तौर पर पाकिस्तान को धन्यवाद दिया। दूसरी तरफ इसी पाकिस्तान में 2011 में ओसामा बिन-लादेन छिपा हुआ था। जिसे अमेरिकी सैनिकों ने पाकिस्तान में घुसकर मारा था। इसके अलावा लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक हाफिज सईद, जो कि अमेरिका-संयुक्त राष्ट्र की तरफ से घोषित आतंकी है, वह भी पाकिस्तान में ही छिपा हुआ है। इसी तरह हिज्बुल मुजाहिद्दीन का सैयद सलाउद्दीन, डी-गैंग का सरगना दाऊद इब्राहिम, और अन्य कई नाम, जिन्हें अमेरिका वांछित आतंकी घोषित कर चुका है, वह भी लगातार पाकिस्तान में छिपे हैं, लेकिन ट्रंप ने इसे पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है।
क्या अमेरिकी फायदे के लिए पाकिस्तान फिर मोहरा बना?
अमेरिका ऐतिहासिक रूप से और वर्तमान समय में भी अपने भू-राजनीतिक और सुरक्षा लक्ष्यों को हासिल करने के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल करता रहा है। 1980 का दशक: अमेरिका ने अफगानिस्तान में सोवियत संघ के खिलाफ लड़ने वाले मुजाहिदीन को पैसे और हथियार मुहैया कराने के लिए पाकिस्तान का भरपूर इस्तेमाल किया था।9/11 के बाद का युद्ध: 2001 के हमलों के बाद 'आतंकवाद के खिलाफ युद्ध' के नाम पर भी अमेरिका ने पाकिस्तान को अपना एक प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी बनाकर अफगानिस्तान में अपने ऑपरेशन्स के लिए उसका इस्तेमाल किया। हालांकि, बाद में ओसामा बिन-लादेन का पनाहगार पाकिस्तान ही निकला था।और अब ट्रंप का दौर: हाल ही में खबर आई कि अमेरिका-ईरान के बीच जो युद्ध विराम हुआ, इसमें पाकिस्तान से ज्यादा खुद ट्रंप प्रशासन की भूमिका रही। द फाइनेंशियल टाइम्स और न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध से छुटकारा पाना चाहते थे। इसलिए उन्होंने पाकिस्तान पर ईरान को युद्धविराम के लिए मनाने का दबाव बनाया। बाद में जब ईरान ने अमेरिका की 15-सूत्रीय शर्तों को मानने से इनकार कर दिया, तो ट्रंप ने ईरान की 10-सूत्रीय मांगों पर ही विचार करने की हामी भर दी। रिपोर्ट के मुताबिक, इसे लेकर पाकिस्तान को युद्ध विराम से जुड़ा एक संदेश भेजा गया, जिसे व्हाइट हाउस से मंजूरी मिली थी। इसी युद्ध विराम के संदेश को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने जस का तस कॉपी-पेस्ट कर दिया, जिससे यह खुलासा हो गया कि युद्ध विराम का संदेश उन्हें किसी और जरिए से आया था।
क्या सिर्फ अमेरिका ने पाकिस्तान का इस्तेमाल किया?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिश्ता केवल एकतरफा नहीं है। मौजूदा परिदृश्य में, पाकिस्तान का सैन्य नेतृत्व भी अपने निजी और घरेलू फायदों के लिए अमेरिका (खासकर ट्रंप प्रशासन) का बहुत चालाकी से इस्तेमाल कर रहा है।हाल ही में पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर ने भारी लॉबिंग और कुछ समझौतों के जरिए डोनाल्ड ट्रंप से रिश्ते मजबूत किए और अपने लिए ट्रंप का समर्थन हासिल किया। इस अमेरिकी समर्थन का फायदा उठाकर मुनीर ने पाकिस्तान में 27वां संवैधानिक संशोधन पारित करवा लिया है, जिसने उन्हें चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज के तौर पर निरंकुश शक्तियां और जीवन भर के लिए कानूनी छूट दे दी है। अमेरिका ने पाकिस्तान के इस संवैधानिक तख्तापलट पर पूरी तरह से चुप्पी साधी हुई है।इसके अलावा पाकिस्तान अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए भी अमेरिका के साथ रिश्तों को तवज्जो देने की कोशिश में जुटा है। इसके जरिए वह एफएटीएफ की आतंकी देशों की सूची में जाने से बचने की कोशिश कर रहा है। साथ ही लगातार अलग-थलग होने की वजह से हुए नुकसानों को ट्रंप के जरिए कम करने की कोशिश में भी लगा है।
तानों को बनाया ताकत, भिवानी के भाइयों ने रचा इतिहास
9 Apr, 2026 01:53 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तोशाम/भिवानी। आलोचना हर बार इंसान के हौसलों को नहीं तोड़ती बल्कि मंजिल पाने के जज्बे को और मजबूत कर देती है। भिवानी जिले के संडवा गांव निवासी 2 चचेरे भाई सुमित और अनुज ने ऐसा ही उदाहरण पेश किया है। संगीत की बात करने पर कभी लोगों के ताने सुनने वाले इन दो भाइयों ने हरियाणवी गाने बैरण की बदौलत लोगों के दिलों पर अपनी छाप छोड़ दी है। बिलबोर्ड जैसे बड़े प्लेटफॉर्म पर यह गाना पिछले तीन सप्ताह से टॉप रैंकिंग में बना हुआ है। दोनों भाइयों की प्रतिभा का चर्चा हर किसी की जुबान पर है। गाने में अनुज ने अपनी आवाज दी है और सुमित ने म्यूजिक कंपोज किया है। बैरण गाने को यू-ट्यूब पर अभी तक 70 मिलियन से ज्यादा लोग देख चुके हैं। सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर गाने को रील्स में यूज किया जा रहा है।
शौक को बनाया जुनून, मिल गई सफलता
अनुज और सुमित बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही गाना गाने का शौक था। कोरोना आने पर 2020 में लॉकडाउन लगा तो उन्होंने गायन क्षेत्र में ही करियर बनाने की ठान ली। उन्होंने 2019 में एक गाना लिखा। उन्होंने अपने परिवार से 40 हजार रुपए लेकर हिसार के एक म्यूजिक प्रोड्यूसर से गाना तैयार करवाया। गाने का म्यूजिक दोनों भाइयों को पसंद नहीं आया। इसके बाद 5 और गाने रिलीज किए, लेकिन सफलता नहीं मिली लेकिन छठे गाने बैरण ने तकदीर बदल दी।
कोरोना काल में काम ने पकड़ी रफ्तार
अनुज ने बताया 2020 में कोरोना महामारी के दौरान गाने की सही शुरुआत हुई। हारमोनियम और कंप्यूटर खरीदा। यू-ट्यूब से प्रशिक्षण लिया। 2024 में यू-ट्यूब पर बंजारा के नाम से चैनल बनाया। इसी चैनल से उन्होंने अपने गाने रिलीज करने शुरू कर दिए। 'सूट्स विद मी' पहला गाना रिलीज किया। उसके बाद उन्होंने दूसरा गाना 'डिफरेंट टॉक', आशिक आवारा, मौज, हाय रै रिलीज किया। ये गाने नहीं चले। आखिर में बैरण गाना लिखा। इसका म्यूजिक कंपोज करने के साथ चंडीगढ़ में वीडियो भी शूट किया लेकिन पंसद नहीं आया। आखिर में 23 जनवरी को बैरण ऑडियो सांग रिलीज किया। लोग इस गाने को पसंद करने लगे। इसके बाद एनिमेटेड वीडियो लगाने का प्लान आया। 13 फरवरी को एनिमेटेड वीडियो रिलीज किया।
लोग कहते थे इन गानों में कुछ नहीं रखा
अनुज ने बताया कि कोरोना में लॉकडाउन के दौरान जब उन्होंने गाने बनाना शुरू किया तो कुछ लोग उनसे कहते थे कि गानों में कुछ नहीं रखा है। माता-पिता को भी यही कहते थे कि बच्चों को पढ़ा-लिखाकर आगे बढ़ाओ, क्योंकि गाने के क्षेत्र में सबको कामयाबी नहीं मिलती। माता-पिता ने लोगों की बातों पर ध्यान न देकर हमार साथ मिला। दोनों भाइयों ने हार नहीं मानी और आज हर कोई उनके घर पर पहुंचकर उन्हें बधाई दे रहा है।
बिलबोर्ड इंडिया की टॉप रैंकिंग में आया गाना
अनुज ने बताया गाने के बोल लिखने के दौरान उन्होंने बार-बार इसके लिरिक्स बदले। गाने के बोल हैं- “हो, मन्नै सांभ-सांभ राखे तेरे झांझरा के जोड़े। मेरी गेल रो-रो ये भी छोरी बावले से होरे। मन्नै आए जावै ख्याल तेरे, खाए जावै ख्याल तेरे। जीण कोन्या देती, हाय बैरी तन्हाई मन्नै।” 17 मार्च को बैरण गाना बिलबोर्ड इंडिया की टॉप रैंकिंग में आ गया। बिलबोर्ड इंडिया कैटेगरी अनुसार सबसे ज्यादा सुने जाने वाले गानों की रैंक तय करता है। सिंगर की पॉपुलैरिटी, फॉलोअर्स, सोशल मीडिया एंगेजमेंट देखी जाती है। 50 हजार में तैयार हुए गाने के लोग मुरीद हो गए।
पॉपुलैरिटी के बाद बॉलीवुड से भी ऑफर आए
अनुज ने बताया कि बिलबोर्ड इंडिया की नंबर वन रैंकिंग में आने के बाद हरियाणा, पंजाब और बॉलीवुड से उन्हें लगातार ऑफर आ रहे हैं। उनकी मुंबई में एक बड़ी कंपनी के साथ भी बातचीत हुई, लेकिन वहां पर ठीक नहीं लगा और इसलिए काम नहीं किया। हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा, केडी, अमित सैनी रोहतक की तरफ से भी साथ काम करने के लिए ऑफर आए। पंजाब से दिलप्रीत ढिल्लों की तरफ से भी ऑफर मिला।
ये है पारिवारिक बैकग्राउंड
सुमित के पिता सत्यवान पीटीआई अध्यापक हैं। उन्होंने अंबाला पॉलिटेक्निक से मैकेनिकल ट्रेड में कोर्स किया। उसके बाद हिसार एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी से एग्रीकल्चर में बीटेक की। सुमित भी गाने के साथ म्यूजिक कंपोज करते हैं। उनका छोटा भाई सहायक प्रोफसर है। वहीं अनुज के पिता राजेंद्र सिंह जेबीटी अध्यापक हैं। अनुज की एक बड़ी बहन भी है। उसकी बहन ने जेआरएफ क्वालीफाई किया हुआ है। अनुज ने पॉलिटिकल साइंस में एमए करने के बाद नेट का एग्जाम भी क्रैक किया। अनुज ने बताया कि गूगल की टीम ने उन्हें फोन कर मुंबई बुलाया था। अभी वे मुंबई में हैं।
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