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पाकिस्तान के परमाणु हथियार इजराइल के लिए एक बड़ा खतरा
21 Feb, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यरूशलेम। इजराइल के पूर्व पीएम नफ्ताली बेनेट ने पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को लेकर दिए बयान ने अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति में हलचल मचा दी है, बल्कि पाकिस्तान की शहबाज सरकार के लिए भी मुसीबत खड़ी कर दी है। बेनेट ने सीधे तौर पर पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को इजराइल के लिए एक बड़ा खतरा बताया है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यरूशलेम में अमेरिकी यहूदी संगठनों के अध्यक्षों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए नफ्ताली बेनेट के बयान ने पाकिस्तान के रक्षा गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। बेनेट ने कहा कि क्षेत्र में एक नया और खतरनाक गठबंधन आकार ले रहा है। बेनेट ने दावा किया कि इजराइल के खिलाफ एक नया मोर्चा तैयार हो रहा है, जिसमें तुर्की, कतर, और मुस्लिम ब्रदरहुड शामिल हैं। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इस गठबंधन को परमाणु हथियारों से लैस पाकिस्तान का समर्थन मिला हुआ है। तुर्की के नेतृत्व में चल रहा यह गठबंधन इजराइल के प्रति शत्रुता को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन को ‘खतरनाक विरोधी’ बताते हुए चेतावनी दी कि ‘तुर्की अब नया ईरान’ बनता जा रहा है।
इजराइल से आए इस बयान के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय को बचाव में आना पड़ा। विदेश कार्यालय की प्रवक्ता ने नफ्ताली बेनेट के बयान को पूरी तरह से ‘अटकलबाजी और अनुमान’ पर आधारित बताया है। प्रवक्ता ने कहा कि हम ऐसे देश के अधिकारी के बयान पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे जिसे हम मान्यता तक नहीं देते। यह पूरी तरह से बेतुका बयान है।
इजराइल की इस नाराजगी के पीछे हाल के दिनों में हुए कुछ बड़े रक्षा समझौते हैं। पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ एक ‘रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौता’ किया है, जिसके तहत किसी भी देश पर हमला दोनों देशों पर हमला माना जाएगा। सऊदी अरब के पास अथाह पैसा है। तुर्की के पास आधुनिक रक्षा उद्योग और ड्रोन तकनीक है। पाकिस्तान एकमात्र मुस्लिम देश है जिसके पास परमाणु बम और लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये तीनों ताकतें एक साथ आती हैं, तो यह इजराइल के वर्चस्व के लिए बड़ी चुनौती होगी।
थिंक टैंक के मुताबिक अमेरिका और इजराइल के हितों को प्राथमिकता दिए जाने के कारण अब ये देश अपने दोस्तों और दुश्मनों की पहचान के लिए नए तंत्र विकसित कर रहे हैं। इजराइल में एक बड़ा धड़ा यह मानता है कि पाकिस्तान के परमाणु हथियार ईरान के संभावित हथियारों से कहीं ज्यादा खतरनाक हैं। इजराइली मीडिया और थिंक टैंक लगातार इस बात को उठाते रहे हैं कि पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम को सऊदी अरब ने ही फंडिंग दी थी, इसलिए संकट की स्थिति में ये हथियार सऊदी अरब के लिए ‘परमाणु छत्र’ का काम कर सकते हैं। पाकिस्तान आधिकारिक तौर पर हमेशा यही कहता आया है कि उसके परमाणु हथियार केवल भारत के खिलाफ रक्षा के लिए हैं, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि जब सऊदी अरब और पाकिस्तान अपने गठबंधन को सार्वजनिक करते हैं, तो वे उन अफवाहों को हवा देते हैं जो पहले केवल बंद कमरों में होती थीं।
जंग को खत्म करने के लिए हिस्टोरिकल बकवास की जरूरत नहीं: जेलेंस्की
21 Feb, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जिनेवा। जिनेवा में रूस और यूक्रेन के बीच बुधवार को बैठक हुई थी। इस बैठक के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की रूस पर भड़क गए। जेलेंस्की ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा- मुझे इस जंग को खत्म करने और डिप्लोमेसी की तरफ बढ़ने के लिए हिस्टोरिकल बकवास की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह बस देर करने का तरीका है। मैंने पुतिन से कम हिस्ट्री की किताबें नहीं पढ़ी हैं और मैंने बहुत कुछ सीखा है। मैं उनके देश के बारे में उनसे ज्यादा जानता हूं जितना वे यूक्रेन के बारे में जानते हैं, सिर्फ इसलिए क्योंकि मैं रूस गया हूं, कई शहरों में, और मैं वहां बहुत से लोगों को जानता था। वे इतनी बार यूक्रेन कभी नहीं गए होंगे। वे सिर्फ बड़े शहरों में गए थे। मैं छोटे शहरों में भी गया, उत्तरी हिस्से से लेकर दक्षिणी हिस्से तक हर जगह।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जेलेंस्की ने कहा कि मैं पुतिन की सोच जानता हूं, इसीलिए मैं इन सब चीजों पर समय बर्बाद नहीं करना चाहता। यह उनके बारे में है1 उन्होंने ऐसा सिस्टम बनाने का फैसला किया है। रूसियों ने खुद को बदलने का फैसला किया है। जेलेंस्की ने कहा कि हमारे खिलाफ एक बड़ी जंग छिड़ी हुई है। यह हमारी जिंदगी है। मैं उनसे बस यही बात करना चाहता हूं कि मुझे लगता है कि हमें इसे सबसे कामयाब तरीके से हल करने की जरूरत है। मेरा मतलब है कि इस जंग को जल्द खत्म करना है, इसलिए मैं सिर्फ ऐसी चीजों के बारे में ही बात करना चाहता हूं।
जेलेंस्की ने कहा कि मुझे पता है कि अमेरिकी और शायद कुछ यूरोपीय देश रूस के साथ नाटो और रूस के बीच एक नए डॉक्यूमेंट पर चर्चा कर रहे हैं। जब उनके पास ऐसा डॉक्यूमेंट होगा, तो वे हर चीज पर चर्चा कर सकते हैं, लेकिन मेरे लिए यह जरूरी है कि वे नाटो में हमारी संभावित जगह पर हमारे साथ चर्चा करें। सिर्फ रूसियों के साथ नहीं, हमारे साथ, क्योंकि यह हमारे बारे में है, लेकिन वे हमारे बिना भी ऐसा कर सकते हैं। हो सकता है कि हमें कुछ पता न हो। किसी भी हाल में अगर कोई हैरान होता है तो हम उस पर प्रतिक्रिया देंगे।
अमेरिकी सांसद का दावा कहा- भारत पर ज्यादा टैरिफ लगाने का बहाना खोज रहे हैं ट्रंप
20 Feb, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक संबंधों में टैरिफ (आयात शुल्क) को लेकर खींचतान कम होने का नाम नहीं ले रही है। अमेरिकी सांसद ब्रैड शर्मन ने एक चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अभी भी भारत के खिलाफ भारी टैरिफ लगाने के बहाने तलाश रहे हैं। शर्मन के अनुसार, भारत को रूसी तेल की खरीद के नाम पर अलग से निशाना बनाया जा रहा है, जबकि इसी मुद्दे पर अन्य देशों के प्रति नरम रुख अपनाया जा रहा है।
सांसद ब्रैड शर्मन ने ट्रंप सरकार की नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि राष्ट्रपति दावा कर रहे हैं कि रूसी तेल के आयात के कारण भारत पर सख्ती जरूरी है। हालांकि, आंकड़ों के साथ इस तर्क को काटते हुए उन्होंने बताया कि हंगरी जैसा देश अपना 90 प्रतिशत तेल रूस से लेता है और उस पर कोई टैरिफ नहीं है। वहीं, रूस के सबसे बड़े खरीदार चीन पर भी रूसी तेल के कारण कोई अतिरिक्त प्रतिबंध नहीं लगाए गए हैं। शर्मन ने जोर देकर कहा कि भारत अपनी जरूरतों का केवल 21 प्रतिशत कच्चा तेल ही रूस से लेता है, फिर भी एक रणनीतिक सहयोगी होने के बावजूद उसे निशाना बनाना अनुचित है। उन्होंने मांग की है कि प्रशासन को तत्काल इस भेदभावपूर्ण नीति में बदलाव करना चाहिए।
हाल के महीनों में इस व्यापार युद्ध का असर भारत के निर्यात आंकड़ों पर साफ दिखाई दिया है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी में अमेरिका को भारत का वस्तु निर्यात लगभग 21.77 प्रतिशत गिरकर 6.6 अरब डॉलर रह गया। यह गिरावट पिछले साल के सितंबर, अक्टूबर और दिसंबर महीनों में भी दर्ज की गई थी। हालांकि, इसी अवधि में अमेरिका से भारत का आयात 23.71 प्रतिशत बढ़कर 4.5 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। उल्लेखनीय है कि अमेरिका ने अगस्त में भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत का भारी शुल्क लगाया था, जिसे हाल ही में एक अंतरिम समझौते के बाद घटाकर 18 प्रतिशत किया गया है। दिलचस्प बात यह है कि टैरिफ की इस मार से खुद अमेरिकी जनता भी त्रस्त है। फेडरल रिजर्व बैंक ऑफ न्यूयॉर्क के अर्थशास्त्रियों के एक नए विश्लेषण से पता चला है कि इन आयात शुल्कों का करीब 90 प्रतिशत बोझ विदेशी कंपनियों के बजाय खुद अमेरिकी उपभोक्ताओं और कारोबारियों ने उठाया है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इन शुल्कों के कारण 2025 में हर अमेरिकी परिवार पर औसतन 1000 डॉलर का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ा, जो 2026 में बढ़कर 1300 डॉलर होने का अनुमान है। ऐसे में यह नीति न केवल भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्तों को प्रभावित कर रही है, बल्कि घरेलू स्तर पर भी महंगाई का कारण बन रही है।
अमेरिकी सेना इस वीकेंड तक ईरान पर कर सकती है हमला! ट्रंप के इशारे का इंतजार
20 Feb, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ा सैन्य कदम उठाया जा सकता है। मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि अमेरिकी सेना इस वीकेंड तक ईरान पर हमला करने के लिए तैयार है, हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी अंतिम फैसला नहीं लिया है। सूत्रों ने बताया कि व्हाइट हाउस को जानकारी दे दी गई है कि अगर आदेश मिलता है तो अमेरिकी सेना कुछ ही घंटों में कार्रवाई कर सकती है। पिछले कुछ दिनों में मिडिल ईस्ट में अमेरिकी वायु और नौसैनिक ताकत में भारी बढ़ोतरी की गई है। दुनिया का सबसे आधुनिक विमानवाहक पोत गेराल्ड आर फोर्ड क्षेत्र में पहुंच सकते है।
ब्रिटेन में तैनात अमेरिकी फाइटर जेट और ईंधन भरने वाले टैंकर विमानों को मिडिल ईस्ट में भेजा जा रहा है। सूत्र ने बताया कि राष्ट्रपति इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। वह सैन्य कार्रवाई के पक्ष और विपक्ष दोनों तर्क सुन रहे हैं। जिनेवा में ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधियों के बीच करीब साढ़े तीन घंटे तक अप्रत्यक्ष बातचीत हुई। ईरान ने कहा कि कुछ ‘मार्गदर्शक सिद्धांतों’ पर सहमति बनी है, लेकिन अमेरिकी पक्ष का कहना है कि अभी कई मुद्दों पर साफ बातचीत होनी बाकी है।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने कहा कि कूटनीति ट्रंप की पहली पसंद है, लेकिन सैन्य विकल्प भी मेज पर मौजूद है। उन्होंने किसी समयसीमा का ऐलान करने से इनकार किया। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 28 फरवरी को इजराइल जाएंगे और पीएम बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात करेंगे। इजराइल लगातार ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है। उधर सैटेलाइट तस्वीरों से संकेत मिले हैं कि ईरान अपने परमाणु ठिकानों को और मजबूत कर रहा है। कई अहम स्थलों को कंक्रीट और मिट्टी की मोटी परत से ढका जा रहा है, ताकि संभावित हवाई हमलों से बचाव हो सके। फिलहाल ट्रंप ने सार्वजनिक तौर पर साफ टार्गेट नहीं बताया है कि हमला होने की स्थिति में उसका अंतिम उद्देश्य क्या होगा। उन्होंने सिर्फ इतना कहा है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले कुछ दिन बेहद अहम होंगे।
पाकिस्तान में शेरशाह सूरी की प्रतिमा हटाने पर छिड़ी बहस, सरंग खान की प्रतिमा लगाई
20 Feb, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लाहौर,। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के झेलम में शेरशाह सूरी की प्रतिमा हटाए जाने की खबर ने बहस छेड़ दी है। कुछ दिन पहले ही स्थानीय प्रशासन ने चौराहे पर लगी प्रतिमा को हटाकर उसकी जगह सुल्तान सरंग खान गखर की मूर्ति लगा दी है। इस तरह सिंध के कुछ इलाकों में भी पुराने शासकों से जुड़ी प्रतिमाओं और प्रतीकों को हटाने की खबरें सामने आई हैं। सवाल उठ रहा है कि जिन ऐतिहासिक शख्सियतों को पाकिस्तान दशकों तक अपना गौरव बताता रहा, उनसे दूरी क्यों बनाई जा रही है? शेरशाह सूरी की प्रतिमा हटाए जाने की घटना ने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या पाकिस्तान अपने ऐतिहासिक प्रतीकों को अब नई नजर से देख रहा है? अब उनकी मूर्तियां हटाई जा रहीं है और उनके स्थान पर स्थानीय नायकों को क्यों जगह दी जा रही है?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 1947 में भारत से अलग होकर बने पाकिस्तान ने अपनी वैचारिक नींव मुस्लिम पहचान पर रखी थी। देश के संस्थापक मुहम्मद अली जिन्ना ने एक अलग राष्ट्र की परिकल्पना की थी। इसके बाद पाकिस्तान के इतिहास लेखन में मध्यकालीन इस्लामी शासकों को प्रमुखता दी गई। शेरशाह सूरी, महमूद गजनी और मुहम्मद गोरी जैसे शासकों को वहां की पाठ्य पुस्तकों में मुस्लिम शक्ति और विजय के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया। शेरशाह सूरी को ग्रैंड ट्रंक रोड का निर्माता और कुशल प्रशासक बताया गया। महमूद गजनवी और मुहम्मद गोरी को भारतीय उपमहाद्वीप में मुस्लिम शासन की नींव रखने वाला बताया और पाकिस्तानी मुस्लिम कौम का हीरो माना।
पाकिस्तान ने अपने सैन्य उपकरणों के नाम भी इन शासकों पर रखे। उदाहरण के लिए, पाकिस्तान की शॉर्ट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल का नाम गजनवी और मीडियम रेंज मिसाइल का नाम गौरी रखा। यह दिखाता है कि इन ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को राष्ट्रीय गौरव से जोड़ा गया। ऐसे में झेलम में शेरशाह सूरी की प्रतिमा हटाए जाने को केवल स्थानीय प्रशासनिक फैसला मानना आसान नहीं है। बता दें शेरशाह सूरी का जन्म 15वीं सदी के अंत में बिहार के सासाराम में हुआ था। वे अफगान मूल के सूरी कबीले से थे। उन्होंने 16वीं सदी में दिल्ली की गद्दी पर कब्जा किया और मुगल बादशाह हुमायूं को कुछ समय के लिए सत्ता से बेदखल कर दिया था। शेरशाह सूरी (1486-1545) उत्तर भारत में सूरी साम्राज्य के संस्थापक थे। उन्होंने 1540 से 1545 तक केवल पांच सालों के लिए दिल्ली पर शासन किया था। उनका शासनकाल छोटा था, लेकिन प्रशासनिक सुधारों के लिए उन्हें जाना जाता है। उन्होंने सड़क, डाक व्यवस्था और राजस्व प्रणाली में बदलाव किए। यही कारण है कि भारतीय इतिहास में उन्हें एक सक्षम शासक के रूप में भी याद किया जाता है।
इतिहासकार बताते हैं कि महमूद गजनवी और मोहम्मद गौरी दोनों का मूल अफगानिस्तान और मध्य एशिया से जुड़ा था। हाल के वर्षों में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्तों में तनाव देखने को मिला है। सीमा पर झड़पों और कूटनीतिक मतभेदों ने दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित किया है। पाकिस्तान में अब ऐतिहासिक प्रतीकों की पुनर्व्याख्या हो रही है। झेलम में सुल्तान सरंग खान गखर की प्रतिमा स्थापित किया जाना भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है, जहां स्थानीय नायकों को आगे लाने की कोशिश हो रही है।
रिहाई की मांग को लेकर अटक ब्रिज पर इमरान समर्थकों का कब्जा, मुनीर ने भेजी सेना
20 Feb, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर पाकिस्तान में हालात बेकाबू हो गए हैं। इमरान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के हजारों समर्थकों ने खैबर प्रांत में सामरिक और रणनीतिक रूप से अहम अटक ब्रिज पर बुधवार को कब्जा कर लिया। ब्रिज के दोनों ओर इमरान समर्थकों के जमावड़े के कारण वाहन अटग गए।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पीटीआई के तेवरों को देखते हुए पाक आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने इस्लामाबाद, पेशावर व रावलपिंडी कैंट से करीब 5 हजार सैनिकों को रवाना किया। उधर, खैबर के सीएम सुहैल अफरीदी ने रिहाई के लिए युवाओं की इमरान रिलीज फोर्स बनाने का ऐलान किया है। इमरान के समर्थन में तहाफुज पार्टी (टीटीपी) ने भी इस्लामाबाद कूच का ऐलान किया है।
इमरान समर्थकों के अटक ब्रिज पर कब्जे से खैबर सूबा से पाक से कट गया है। इससे पाकिस्तान में अफरा-तफरी मच गई। आनन फानन में मुनीर को फौज भेजने का फैसला लेना पड़ा। बता दें पूर्व पीएम इमरान खान अगस्त, 2023 से इस्लामाबाद की अडियाला जेल में बंद हैं। अभी वे तोशाखाना भ्रष्टाचार मामले में 14 साल की जेल काट रहे हैं। इमरान की पत्नी बुशरा बीबी भी अडियाला जेल में सजा काट रही है। इमरान के खिलाफ करीब एक सौ से ज्यादा मामले दर्ज हैं। इसमें से करीब एक दर्जन मामले लोअर-हाईकोर्ट में चल रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक इमरान को जेल में रखने में आर्मी चीफ मुनीर की बड़ी भूमिका है। पीएम रहते हुए इमरान ने मुनीर को खुफिया एजेंसी आईएसआई चीफ के पद से हटा दिया था। जानकारों के मुताबिक इमरान की जेल पर भले ही मुनीर का ताला हो, लेकिन इसकी चाबी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के पास है। अंतराष्ट्रीय स्तर पर फ्री इमरान मूवमेंट के बाद भी ट्रम्प मुनीर पर रिहाई का दबाव डालने के मूड में नहीं हैं।
दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल को उम्रकैद
20 Feb, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सियोल। दक्षिण कोरिया की एक अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल को 2024 में देश में मार्शल लॉ लागू करने, सत्ता के दुरुपयोग और विद्रोह की साजिश रचने का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अभियोजकों ने उनके लिए मृत्युदंड की मांग की थी, लेकिन अदालत ने उम्रकैद का फैसला दिया। इसी मामले में पूर्व रक्षा मंत्री को 30 साल की सजा सुनाई गई है। दक्षिण कोरिया में 1997 के बाद से किसी को फांसी नहीं दी गई है, इसलिए मृत्युदंड व्यवहारिक रूप से स्थगित माना जाता है।
65 वर्षीय यून पर आरोप था कि उन्होंने दिसंबर 2024 में सेना और पुलिस बलों को सक्रिय कर उदारवादी बहुमत वाली नेशनल असेंबली पर नियंत्रण की कोशिश की। भारी हथियारों से लैस सुरक्षा बलों ने संसद भवन की घेराबंदी की, हालांकि सांसदों ने अवरोध तोड़कर भीतर पहुंचते हुए सर्वसम्मति से मार्शल लॉ हटाने के पक्ष में मतदान किया। करीब छह घंटे बाद आपात आदेश वापस लेना पड़ा। इस घटना से देश में गहरा राजनीतिक संकट पैदा हो गया था।
अदालत ने पाया कि असंवैधानिक आपात आदेश के जरिए लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश की गई। अभियोजन पक्ष का तर्क था कि इस कदम से संसद और चुनाव आयोग के कामकाज को बाधित किया गया।
मार्शल लॉ लागू कराने में शामिल अन्य अधिकारियों पर भी कार्रवाई हुई है। पूर्व रक्षा मंत्री किम योंग ह्यून को 30 वर्ष की सजा सुनाई गई। इसके अलावा, पूर्व प्रधानमंत्री हेन ड्यूक-सू को एक अलग मामले में 23 वर्ष की सजा दी गई है। उन पर कैबिनेट प्रक्रिया में हेरफेर और शपथ के तहत झूठ बोलने का आरोप सिद्ध हुआ। हान डक-सू ने फैसले के खिलाफ अपील दायर की है।
इस फैसले को दक्षिण कोरिया की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए ऐतिहासिक और निर्णायक माना जा रहा है।
मोहन भागवत के 'घर वापसी' बयान पर भड़के मौलाना अरशद मदनी
19 Feb, 2026 03:49 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत द्वारा 'घर वापसी' और पूर्वजों को लेकर दिए गए हालिया बयान ने देश के सियासी और धार्मिक गलियारों में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया है। मदनी ने भागवत के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि "सिर्फ उन्हीं ने अपनी मां का दूध पिया है," जो यह साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि सबके पूर्वज हिंदू थे। उनका यह पलटवार सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।
विवाद की जड़ मोहन भागवत का वह संबोधन है जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत में रहने वाले सभी लोगों का डीएनए एक है और सभी के पूर्वज हिंदू थे, इसलिए जो लोग दूसरे धर्मों में चले गए हैं, उन्हें अपनी जड़ों की ओर लौटना चाहिए। इस पर आपत्ति जताते हुए मौलाना मदनी ने स्पष्ट किया कि इस्लाम का इतिहास और पहचान अपनी जगह स्वतंत्र है। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान थोपना ऐतिहासिक और धार्मिक रूप से गलत है। मदनी के अनुसार, हर इंसान को अपने धर्म और पूर्वजों की पहचान का पूरा अधिकार है और किसी एक विचारधारा को सब पर मढ़ा नहीं जा सकता।
मौलाना मदनी ने यह भी तर्क दिया कि इस तरह की बयानबाजी से समाज में दूरियां बढ़ती हैं और भाईचारे को नुकसान पहुँचता है। उन्होंने भागवत के 'डीएनए' वाले तर्क पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर पूर्वजों की ही बात करनी है, तो मनुष्य की उत्पत्ति और इतिहास के धार्मिक ग्रंथों के अपने-अपने प्रमाण हैं। फिलहाल इस जुबानी जंग ने 'घर वापसी' और 'साझा विरासत' के मुद्दे पर एक बार फिर नई बहस छेड़ दी है, जहाँ एक पक्ष अपनी सांस्कृतिक एकता की बात कर रहा है, तो दूसरा पक्ष अपनी धार्मिक स्वायत्तता और पहचान को बचाने की दलील दे रहा है।
“शो देखना है तो नीचे बैठो” — मासूम शर्मा का सख्त संदेश
19 Feb, 2026 02:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणवीं सिंगर मासूम शर्मा के बुधवार रात को शहर के एक होटल में लाइव शो के दौरान हंगामा हो गया। इस दौरान उन्होंने स्टेज पर खड़े मुआना गांव के पूर्व सरपंच तथा अन्य को नीचे उतरने को कह दिया। नहीं उतरे तो बोले तो कि कार्यक्रम के बीच में कोई सरपंच हो, कोई एमएलए हो, कोई मंत्री हो, मैं किसी ने कुछ नहीं मानता। इसलिए सरपंच हो, नीचे बैठकर देखो। नहीं तो यहां से चले जाओ।
मनेंद्रगढ़ में अमृतधारा महोत्सव: नपाध्यक्ष-विधायक प्रतिनिधि ने नाराज होकर छोड़ा कार्यक्रम, क्यों हुआ विवाद?
बुधवार को कलाकार मासूम शर्मा की बहन कविता शर्मा की 25वीं सालगिरह थी। इस खुशी में सफीदो रोड स्थित एक होटल में प्रोग्राम रखा गया। यह कार्यक्रम कलाकार मासूम शर्मा के जीजा यूटयूबर धरमू ने आयोजित करवाया था। प्रोग्राम में धरमू के रिश्तेदार, परिवार व गांव मुआना के कुछ करीबी लोग शामिल थे। धरमू ने अपने गांव मुआना के पूर्व सरपंच राजेश शर्मा को भी बुलाया हुआ था। यह शो करीब एक घंटा ही चल पाया। उस वक्त स्टेज से युवाओं को उतारते समय हंगामा हो गया। जब भीड़ मंच से नहीं उतरी तो बाउंसरों ने उनके साथ धक्का-मुक्की की, जिससे मामला और बढ़ गया।
फर्जी आईडी कार्ड के साथ आरोपी गिरफ्तार
19 Feb, 2026 01:29 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पानीपत| अर्धसैनिक बल की नकली वर्दी पहनकर अवैध शराब की तस्करी करने वाले दो युवकों को सीआईए-1 की टीम ने सेक्टर-40 स्थित पार्किंग से गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 502 पेटी अंग्रेजी शराब व बीयर से भरा कैंटर बरामद हुआ। थाना सेक्टर 13/17 में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस के अनुसार 18 फरवरी को एएसआई अनिल कुमार टीम के साथ गश्त पर थे। टोल प्लाजा के पास मुखबिर ने सूचना दी कि दो व्यक्ति सीआरपीएफ की वर्दी में नीले रंग के कैंटर में भारी मात्रा में शराब लेकर सेक्टर-40 की पार्किंग में खड़े हैं। सूचना पर आबकारी निरीक्षक अरविंद डागर को साथ लेकर पुलिस टीम ने मौके पर दबिश दी। पार्किंग में खड़े कैंटर के आगे पुलिस लिखा मिला और दो युवक अंदर बैठे मिले। ड्राइवर साइड पर बैठे युवक ने पूछताछ में अपना नाम मोनू पुत्र सतपाल निवासी खोजकीपुर, थाना बापौली बताया। उसकी तलाशी में सीआरपीएफ का पहचान पत्र बरामद हुआ, जिसे उसने नकली बताया। उसने कबूल किया कि वह तस्करी के दौरान लोगों को भ्रमित करने के लिए नकली वर्दी पहनता है। कंडक्टर साइड पर बैठे सन्दीप पुत्र सुखबीर निवासी गांव अट्टा, थाना समालखा से भी इसी प्रकार का पहचान पत्र मिला। उसने भी माना कि दोनों मिलकर अवैध शराब की तस्करी करते हैं और शक से बचने के लिए अर्धसैनिक बल की वर्दी पहनते हैं।
जेएनयू का ये पूर्व छात्र...........जिसे तारिक रहमान ने बनाया बांग्लादेश का विदेश मंत्री
19 Feb, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका । बांग्लादेश में हत्याओं और कानूनी अव्यस्थाओं के एक लंबे दौर के बाद अब नई सरकार बन चुकी है। तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ले ली है और कैबिनेट भी सीट पर बैठ चुकी है। उनकी कैबिनेट में एक से बढ़कर दिग्गज शामिल हैं। इसके अलावा तारिक की कैबिनेट में एक ऐसा शख्स भी है, जो जेएनयू का पूर्व छात्र रह चुका है। पीएम रहमान ने इस शख्स को विदेश मंत्रालय का काम दिया है। यानी भारत से जुड़े सारे मुद्दों को यही मंत्री डील करेगा।
दरअसल, ये शख्स बांग्लादेश की नई रहमान सरकार में विदेश मंत्री का पद संभालने वाले डॉ खलीलुर रहमान हैं। जिनका व्यक्तित्व बेहद गहरा और कूटनीतिक रूप से सुलझे हुए नेता के तौर पर देखा जाता है। वहां एक इसतरह के अनुभवी राजनयिक हैं, जिनके भारत के साथ पुराने संबंध हैं। तारिक रहमान की कैबिनेट में खलीलुर भारत-बांग्लादेश के बीच महत्वपूर्ण ब्रिज की भूमिका निभा सकते हैं।
शेख हसीना सरकार के गिरने के बाद बनी मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार में उन्हें रोहिंग्या संकट और अन्य मुद्दों पर मुख्य सलाहकार का उच्च प्रतिनिधि बनाया गया था। वे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) के रूप में भी सक्रिय रहे। इस दौरान उन्होंने अपने भारतीय समकक्ष यानी एनएसए अजीत डोभाल से मुलाकात कर सुरक्षा और इंटेलिजेंस के मोर्चे पर सहयोग की बात की थी।
बात दें कि रहमान के भारत के साथ संबंधों की जड़ें उनके छात्र जीवन से जुड़ी हैं। उन्होंने दिल्ली के प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) से ‘पब्लिक हेल्थ’ में पीएचडी की डिग्री हासिल की है। जेएनयू से पढ़ा होना उन्हें भारतीय प्रशासनिक और बौद्धिक व्यवस्था की गहरी समझ देता है।
जब निज्जर केस को लेकर भारत और कनाडा के बीच कूटनीतिक विवाद बढ़ा था, तब कनाडा में बांग्लादेश के उच्चायुक्त के रूप में डॉ खलीलुर रहमान ने कनाडा पुलिस की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि कनाडा अपराधियों और भगौड़ों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बनता जा रहा है, जो भारत के रुख का समर्थन था।
उन्हें बांग्लादेशी कूटनीति में भारत के प्रति बैलेंस और सकारात्मक नजरिया रखने वाला चेहरा माना जाता है। वे करियर डिप्लोमैट रहे हैं और भारत में बांग्लादेश उच्चायोग में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
खलीलुर रहमान 1985 बैच के विदेश सेवा अधिकारी हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र (यूएन), विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और कनाडा में उच्चायुक्त के रूप में काम किया है। एक मेडिकल डॉक्टर (एमबीबीएस) होने के साथ-साथ उनके पास अर्थशास्त्र और कूटनीति की डिग्री भी है।
बांग्लादेश के नए पीएम रहमान ने उन्हें विदेश मंत्री बनाकर यह संकेत दिया है कि बीएनपी सरकार भारत के साथ टकराव के बजाय संवाद और सहयोग चाहती है। खलीलुर रहमान की रणनीति और पुरानी जान-पहचान भारत के साथ तीस्ता जल समझौता और सीमा सुरक्षा जैसे पेंडिंग मुद्दों को सुलझाने में मददगार साबित हो सकती है।
इमरान को मिल सकती है बड़ी राहत, जेल से अस्पताल शिफ्ट करने की तैयारी
19 Feb, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को इस सप्ताह जेल से अस्पताल शिफ्ट किया जा सकता है। उनकी सेहत, विशेषकर आंखों की रोशनी में गिरावट की रिपोर्ट के बाद सरकार ने यह कदम उठाने के संकेत दिए हैं। जानकारी के मुताबिक 21 से 26 फरवरी के बीच उनकी आंख में इंजेक्शन लगाया जाना प्रस्तावित है, जिसके लिए जेल प्रशासन अस्पताल ले जाने की तैयारी कर रहा है।
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इमरान खान को आंखों के विशेष इलाज के लिए एआई-शिफा आई ट्रस्ट हॉस्पिटल ले जाया जा सकता है। यह अस्पताल आधुनिक मशीनों और विशेषज्ञ डॉक्टरों के लिए जाना जाता है। फिलहाल इस बात पर विचार चल रहा है कि उन्हें अस्पताल में भर्ती रखा जाए या जरूरी डोज देने के बाद वापस जेल लाया जाए। अंतिम निर्णय डॉक्टरों की मेडिकल टीम लेगी।
इमरान खान 2023 से अदिअला जेल में बंद हैं। हाल ही में आई स्वास्थ्य रिपोर्ट में दावा किया गया कि उनकी एक आंख की रोशनी 85 प्रतिशत तक प्रभावित हो चुकी है। इस रिपोर्ट के बाद उनके समर्थकों की चिंता बढ़ गई है।
पाकिस्तान की शहबाज सरकार के मंत्री तारिक फजल चौधरी ने भी कहा है कि इमरान खान की सेहत को देखते हुए मेडिकल बोर्ड गठित करने और उन्हें अस्पताल शिफ्ट करने का फैसला लिया गया है। इधर, सुप्रीम कोर्ट ने भी इमरान खान की स्वास्थ्य स्थिति का संज्ञान लिया है। अदालत ने उनकी आंखों की जांच के लिए मेडिकल टीम गठित करने और परिवार से मुलाकात की अनुमति देने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा एमिकस क्यूरी नियुक्त किए गए वकील सलमान ने हाल ही में जेल में उनसे मुलाकात कर स्वास्थ्य संबंधी रिपोर्ट अदालत को सौंपी। कोर्ट के निर्देश के बाद उनकी पत्नी बुशरा बीबी से बातचीत की अनुमति भी दी जा सकती है।
गौरतलब है कि राजनीति में आने से पहले इमरान खान अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के प्रमुख ऑलराउंडर और कप्तान रह चुके हैं। दुनियाभर के कई पूर्व क्रिकेटरों ने भी उनके बेहतर इलाज की मांग उठाई है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि मेडिकल बोर्ड की सिफारिशों के बाद आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
शपथ के बाद एक्शन में तारिक रहमान...........हिंदुओं के खिलाफ हिंसा करने वालों पर कार्रवाई शुरु
19 Feb, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। तारिक रहमान ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ले ली है। उनके साथ 13 और कैबिनेट मंत्रियों ने शपथ ली है। कैबिनेट में दो हिंदू नेताओं को शामिल किया है। भारत की ओर से शपथ ग्रहण में शामिल होने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और विदेश सचिव विक्रम मिश्री पहुंचे। वहीं बांग्लादेश के पीएम की शपथ लेते ही तारिक रहमान एक्शन में दिख रहे हैं। रहमान ने चुनाव से पहले जो वादे किए थे उन पर उन्होंने काम करना भी शुरू कर दिया है। तारिक रहमान का कोई वादा सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहा, तब वहां था बांग्लादेश की कानून व्यवस्था को फिर से पटरी पर लाना और हिंदुओं के खिलाफ होने वाली हिंसा को रोकने के लिए सख्त कानूनी सुरक्षा तंत्र लागू करना।
शपथ लेने के बाद तारिक रहमान ने हिंदुओं पर हो रहे हमलों पर बड़ा एक्शन लिया है। जो भी इन हमले के जिम्मेदार रहे हैं उन पर सबसे तगड़ा एक्शन तेज किया है। दरअसल रहमान ने हिंदुओं के खिलाफ हिंसा करने और चुनाव के दौरान मारपीट करने वाले नेताओं के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया है। बांग्लादेश के सिराजगंज में अल्पसंख्यकों की दुकानों में तोड़फोड़ और जबरदस्ती वसूली के आरोप में बीएनपी ने तीन नेताओं को कारण बताओ नोटिस दिया है। वोटरों को डराने, धमकाने सहित कई आरोपों में दो और नेताओं को सस्पेंड किया गया है। चुनाव जीतने के बाद से तारिक रहमान की पार्टी ने पार्टी अनुशासन को लेकर कड़ा कदम उठाया है। तारिक चुनाव प्रचार के बाद से ही बांग्लादेश में नॉर्मल हालात बहाल करने की बात कर रहे हैं। उन्होंने कानून व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया है। उनकी पार्टी में अनुशासन को भी उतनी ही अहमियत दी जा रही है। हमलों के आरोप में बीएनपी के तीन नेताओं को कारण बतौर नोटिस दिया है। इसमें फिरोज और आरजू अहमद शामिल हैं।
शपथ से कुछ घंटे पहले भी रहमान ने बड़ा बयान देकर कहा था कि हमें सुरक्षित और मानवीय बांग्लादेश बनाने के लिए सभी का सहयोग चाहिए। किसी भी बहाने से किसी के साथ अन्याय नहीं हो सकता। कानून व्यवस्था हर हाल में बनाए रखनी होगी। तारिक रहमान ने दंगाइयों को चेतावनी दी कि किसी भी कीमत पर हिंसा प्रतिशोध या उकसावे की कारवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
श्रीलंका में ऐतिहासिक बदलाव: सांसदों की पेंशन खत्म, दिसानायके सरकार ने पूरा किया चुनावी वादा
19 Feb, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलंबो। श्रीलंका के सांसदों ने मंगलवार को अपनी पेंशन रद्द करने के पक्ष में भारी बहुमत से मतदान किया है। यह साहसिक कदम देश के गंभीर आर्थिक संकट और जनता के बढ़ते आक्रोश के बीच श्रीलंका सरकार द्वारा किए गए एक प्रमुख चुनावी वादे को पूरा करने के लिए उठाया गया है। 225 सदस्यीय श्रीलंकाई संसद में इस विधेयक को लेकर जबरदस्त सहमति दिखाई दी।
सांसदों ने 225 सदस्यीय सदन में 154 मतों से विधेयक पारित कर दिया, जबकि केवल दो मत इसके विरोध में पड़े। शेष विधायक मतदान के दौरान अनुपस्थित रहे। इसके पहले श्रीलंका में सांसद पांच साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद पेंशन पाने के हकदार होते थे। नए कानून के तहत, जो लोग पहले से ही पेंशन प्राप्त कर रहे हैं या इसके लिए पात्र हैं, उन्हें भी पेंशन का भुगतान नहीं होगा।
वर्ष 2024 में चुने गए राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके ने अपने चुनाव अभियान के दौरान पेंशन संबंधी प्रावधान को समाप्त करने का वादा किया था। इसी तरह दिसानायके सरकार ने जनता की मांग पर पूर्व राष्ट्रपतियों को मिलने वाली सुविधाओं को सितंबर में समाप्त कर दिया।
इनमें आवास, भत्ते, पेंशन और परिवहन के लिए सरकारी अनुदान शामिल थे। विधि मंत्री हर्षना नानायक्कारा ने संसद में पेंशन संबंधी विधेयक पेश करते हुए कहा कि चुनावी वादा पूरा किया गया है और सांसदों को ऐसे समय में पेंशन प्राप्त करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है जब देश अपने सबसे बुरे आर्थिक संकट से उबरने के लिए संघर्ष कर रहा है। श्रीलंका ने 83 अरब डॉलर से अधिक का कर्ज होने पर अप्रैल 2022 में खुद को दिवालिया घोषित कर दिया था। इसमें से आधे से अधिक कर्ज विदेशी लेनदारों का है।
चीनी ह्यूमनॉइड रोबोट्स का डांस देख विशेषज्ञ बोले- रोबोटिक्स में चीन ने अमेरिका को दी कड़ी टक्कर
19 Feb, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। चीन ने एक भव्य तकनीकी कार्यक्रम में अपनी रोबोटिक्स क्षमता का ऐसा प्रदर्शन किया, जिसने दुनिया का ध्यान खींच लिया। इंसानों जैसे दिखने वाले करीब 25 ह्यूमनॉइड रोबोट्स ने मंच पर बच्चों के साथ मार्शल आर्ट्स और सिंक्रोनाइज्ड डांस कर दर्शकों को चौंका दिया। रोबोट्स तलवार भांजते, डंडे घुमाते और बैकफ्लिप जैसी जटिल हरकतें करते नजर आए, और खास बात यह रही कि प्रदर्शन के दौरान एक भी रोबोट नहीं गिरा।
यह प्रदर्शन चीन के चर्चित टीवी आयोजन सीसीटीवी स्प्रिंग फेस्टिवल गाला में हुआ, जिसे दुनिया के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले कार्यक्रमों में गिना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मंच लंबे समय से चीन की तकनीकी और औद्योगिक उपलब्धियों को प्रदर्शित करने का माध्यम रहा है—चाहे वह अंतरिक्ष कार्यक्रम हो, ड्रोन तकनीक या रोबोटिक्स।
एशिया स्थित टेक्नोलॉजी कंसल्टेंसी फर्म के प्रमुख जॉर्ज स्टीलर के अनुसार, इस तरह के राष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शन का सीधा संबंध सरकार की औद्योगिक नीति से होता है। जिन कंपनियों को यहां अपने उत्पाद दिखाने का अवसर मिलता है, उन्हें बाद में सरकारी ऑर्डर, निवेश और बाजार में बेहतर पहुंच जैसे लाभ मिल सकते हैं।
रोबोट्स के विकास में चीन की कंपनी युनिट्री रोबोटिक्स का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बीते एक वर्ष में रोबोट्स की चाल-ढाल, संतुलन और रियल-टाइम मूवमेंट में जबरदस्त सुधार हुआ है। पिछले साल जहां ये रोबोट साधारण हरकतें करते दिखे थे, वहीं इस बार उन्होंने जटिल मार्शल आर्ट्स मूव्स को भी सटीकता से अंजाम दिया।
तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि यह प्रगति केवल हार्डवेयर तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सॉफ्टवेयर में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। रोबोट्स के ‘दिमाग’ को इस तरह प्रशिक्षित किया जा रहा है कि वे भविष्य में फैक्ट्रियों, लॉजिस्टिक्स और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में बारीक और वास्तविक काम कर सकें।
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि रोबोटिक्स और एआई के क्षेत्र में चीन अब अमेरिका को कड़ी चुनौती दे रहा है। हालांकि, तकनीकी प्रतिस्पर्धा का यह दौर आने वाले वर्षों में और तेज होने की संभावना है, जहां दोनों देश उन्नत रोबोटिक्स, स्वचालन और स्मार्ट मशीनों के विकास में निवेश बढ़ा रहे हैं।
माओवाद की समाप्ति के बाद अब बस्तर का सर्वांगीण विकास होगा: मंत्री राम विचार नेताम
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चिन्हारी योजना से सशक्त हो रही छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति
