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दुनिया का सबसे बड़ा इनलैंड शिपलॉक बना रहा चीन, शिपिंग सेक्टर में बड़ी छलांग
11 Jun, 2026 12:35 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। चीन ने अपनी अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा मानी जाने वाली यांग्त्जी नदी पर एक विशाल वॉटर वे (जलमार्ग) प्रोजेक्ट का निर्माण शुरू कर दिया है। करीब 11.4 अरब डॉलर (लगभग 77.2 अरब युआन) की लागत से बनने वाले इस प्रोजेक्ट के तहत दुनिया का सबसे बड़ा इनलैंड शिप लॉक (अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग का लॉकिंग सिस्टम) तैयार किया जा रहा है।
15वीं पंचवर्षीय योजना का पहला बड़ा प्रोजेक्ट
यह मेगा प्रोजेक्ट चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना (2026-2030) के तहत शुरू किया गया है, जो इस नई योजना की पहली सबसे बड़ी राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर) परियोजना है। इसके तहत दुनिया के सबसे बड़े जलविद्युत बांध 'थ्री गोर्जेस डैम' के पास पहले से मौजूद शिप लॉक के समानांतर (पैरेलल) एक नया जलमार्ग बनाया जाएगा।
कैसा होगा नया शिप लॉक सिस्टम?
इस नए प्रोजेक्ट में दोहरी लाइन (डबल-लेन) वाला पांच चरणों का एक विशाल शिप लॉक सिस्टम तैयार किया जा रहा है, जिसकी कुल लंबाई लगभग 6.7 किलोमीटर होगी। इस सिस्टम की मदद से 10,000 टन तक के विशाल मालवाहक जहाज आसानी से बांध को पार कर सकेंगे। इसके प्रत्येक लॉक चैंबर (पानी के ब्लॉक) की लंबाई 280 मीटर और चौड़ाई 40 मीटर होगी। यह एक सीढ़ी की तरह काम करेगा, जिससे जहाजों को पानी के स्तर के हिसाब से ऊपर उठाया या नीचे उतारा जा सकेगा।
चीन की 40% जीडीपी वाले क्षेत्र को फायदा
जानकारों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह प्रोजेक्ट सिर्फ जहाजों की आवाजाही को ही आसान नहीं बनाएगा, बल्कि यांग्त्जी नदी के किनारे बसे चीन के 11 राज्यों (आर्थिक गलियारे) की किस्मत बदल देगा। यह पूरा क्षेत्र चीन की कुल आबादी और देश की जीडीपी (GDP) का 40 फीसदी से भी ज्यादा हिस्सा पैदा करता है। इतना ही नहीं, चीन की टॉप 500 कंपनियों में से करीब 200 कंपनियां इसी इकोनॉमिक कॉरिडोर में काम करती हैं। यांग्त्जी नदी दुनिया की तीसरी सबसे लंबी नदी है, जिसके किनारे चीन के सबसे बड़े औद्योगिक और व्यापारिक शहर बसे हैं।
क्षमता से ज्यादा बढ़ा दबाव, इसलिए पड़ी जरूरत
थ्री गोर्जेस बांध के मौजूदा शिप लॉक सिस्टम को सालाना 10 करोड़ टन माल की ढुलाई संभालने के लिए डिजाइन किया गया था। लेकिन चीन के तेजी से बढ़ते व्यापार के कारण इस सिस्टम ने यह लक्ष्य तय समय से 19 साल पहले ही पार कर लिया। हाल ही में इस मार्ग से रिकॉर्ड 17.3 करोड़ टन माल की आवाजाही हुई, जिससे यहां जहाजों का लंबा जाम लगने लगा और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ गई। इसी भारी दबाव और बॉटलनेक (रुकावट) को खत्म करने के लिए चीनी सरकार ने इस नए वॉटर वे प्रोजेक्ट को हरी झंडी दिखाई है, ताकि व्यापार को कई गुना बढ़ाया जा सके।
प्रोजेक्ट के साथ जुड़े विवाद और चिंताएं
एक तरफ जहां थ्री गोर्जेस डैम ने चीन को भारी मात्रा में बिजली उत्पादन और आर्थिक तरक्की दी है, वहीं शुरुआत से ही इसके साथ कई बड़े विवाद भी जुड़े रहे हैं। इस विशाल बांध के निर्माण के कारण पहले ही 10 लाख से ज्यादा स्थानीय लोगों को अपने घरों को छोड़कर दूसरी जगहों पर विस्थापित होना पड़ा था। इसके अलावा, वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर पानी का भंडारण बढ़ने से आसपास के इलाकों में भूस्खलन (लैंडस्लाइड) और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा काफी ज्यादा बढ़ गया है।
डोनाल्ड ट्रंप का सनसनीखेज दावा, पाकिस्तान की वजह से ईरान को दी मोहलत
11 Jun, 2026 12:19 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन/तेहरान। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को एक बार फिर पाकिस्तान की तारीफ करते हुए कई बड़े और हैरान करने वाले खुलासे किए हैं। व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए ट्रंप ने दावा किया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की खास गुजारिश पर उन्होंने ईरान को कुछ मोहलत (राहत) दी है। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिकी सेना के एक बेहद गुप्त मिशन की जानकारी दी और भारत-पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध रुकवाने का अपना पुराना दावा भी दोहराया।
पाकिस्तान के अनुरोध पर ईरान को दी राहत
अमेरिकी सेना को दुनिया की सबसे ताकतवर फौज बताते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि वाशिंगटन ने हमेशा इस्लामाबाद की मदद की है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व के अनुरोध पर ही उन्होंने ईरान के खिलाफ अपने रुख में थोड़ी नरमी बरती है। ट्रंप के मुताबिक, पाकिस्तानी नेतृत्व ने उनसे यह भी गुजारिश की थी कि अमेरिका हस्तक्षेप करे, जिसके बाद उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित जंग को टाला। ट्रंप ने दावा किया कि अगर वह बीच-बचाव न करते, तो दोनों पड़ोसी देशों के बीच विनाशकारी परमाणु युद्ध छिड़ जाता। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान के ईरान के साथ करीबी रिश्ते हैं और वह ईरान को समझाने की कोशिश कर रहा है।
'परमाणु संपन्न ईरान पूरी दुनिया के लिए खतरा'
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बेहद सख्त रुख अपनाते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि अगर ईरान परमाणु बम बनाने में कामयाब हो जाता, तो इजरायल का नामोनिशान मिट जाता, पूरा मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) तबाह हो जाता और वे अमेरिका पर भी हमला कर देते। ट्रंप ने साफ किया कि अमेरिका ने ईरान के ठिकानों पर कड़े प्रहार किए हैं और यह सैन्य कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि ईरान द्वारा अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराए जाने के बाद अमेरिका को उस पर चौतरफा सैन्य कार्रवाई करने का पूरा हक मिल गया है। ट्रंप ने कड़े शब्दों में कहा कि अमेरिका ने कल भी उन पर करारा प्रहार किया था और आगे भी यह सिलसिला बेहद आक्रामक तरीके से जारी रहेगा।
अमेरिका ने चलाया बड़ा खुफिया ऑपरेशन
इसके अलावा ट्रंप ने अमेरिकी सेना द्वारा अंजाम दिए गए एक बड़े सीक्रेट मिशन का ब्यौरा साझा किया। उन्होंने बताया कि अमेरिकी सेना ने 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (होर्मुज की खाड़ी) से गुजरने वाले तेल टैंकरों और कमर्शियल जहाजों की सुरक्षा के लिए एक खुफिया ऑपरेशन चलाया था। इस मिशन के तहत 10 करोड़ बैरल से ज्यादा तेल इस संवेदनशील समुद्री रास्ते से सुरक्षित निकाला गया और 200 से अधिक कमर्शियल जहाजों को सुरक्षा दी गई।
होर्मुज की खाड़ी पर अब अमेरिका का नियंत्रण
ट्रंप का दावा है कि ईरान को इस अमेरिकी मिशन की भनक तक नहीं लगी और अब होर्मुज की खाड़ी पर ईरान का नहीं बल्कि अमेरिका का नियंत्रण है। उन्होंने इसे ईरान की बड़ी सैन्य और आर्थिक हार बताया। कुल मिलाकर, ट्रंप का यह बयान दर्शाता है कि अमेरिका एक तरफ ईरान के साथ बातचीत के रास्ते खुले रखना चाहता है, तो दूसरी तरफ उसने उस पर सैन्य दबाव को चरम पर पहुंचा दिया है।
चीन में बड़ा हादसा: धमाके में 7 की मौत, 16 लोग घायल
11 Jun, 2026 12:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। दक्षिण-पश्चिमी चीन के गुआंग्शी प्रांत से एक बेहद दर्दनाक और भीषण धमाके की खबर सामने आई है। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, इस जोरदार ब्लास्ट की चपेट में आने से कम से कम सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई है, जबकि 16 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। यह धमाका इतना जबरदस्त था कि इसकी गूंज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी, जिससे आसपास की इमारतों को भी भारी नुकसान पहुंचा है और स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई।
मौके पर पहुंचा राहत दल
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और आपातकालीन राहत सेवाएं तुरंत एक्शन में आ गईं। बचाव दल ने बिना समय गंवाए मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव का काम शुरू किया। मलबे से निकाले गए और मलबे की चपेट में आए सभी घायलों को तुरंत पास के अस्पतालों में ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज चल रहा है।
गैस पाइपलाइन लीक होने की आशंका खारिज
शुरुआत में इस बड़े हादसे की वजह गैस पाइपलाइन में लीकेज या किसी तकनीकी खराबी को माना जा रहा था। हालांकि, स्थानीय अधिकारियों ने शुरुआती जांच और तकनीकी मुआयने के बाद साफ कर दिया है कि यह धमाका गैस पाइपलाइन की वजह से नहीं हुआ है। फिलहाल, हादसे के असली और सटीक कारणों का पता लगाने के लिए प्रशासन द्वारा गहराई से जांच की जा रही है।
चीन में पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे
चीन के औद्योगिक या रिहायशी इलाकों में इस तरह के धमाके पहले भी चिंता का विषय रहे हैं। इससे पहले चीन के पूर्वी प्रांत जियांग्सू के एक इंडस्ट्रियल पार्क में स्थित केमिकल प्लांट में भी ऐसा ही भीषण विस्फोट हुआ था, जिसमें कई लोगों की जान गई थी और दर्जनों लोग घायल हुए थे। उस समय भी जांच में सुरक्षा नियमों की अनदेखी की बात सामने आई थी, जिसके बाद चीनी सरकार ने देश भर के औद्योगिक और रिहायशी क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों को सख्त करने के आदेश दिए थे।
तेल टैंकर हमले के बाद होर्मुज स्ट्रेट में बंदिश, वैश्विक तेल बाजार में असर
11 Jun, 2026 12:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहा तनाव एक बार फिर से सीधे सैन्य टकराव में बदल गया है। अमेरिका द्वारा किए गए ताजा हवाई हमलों के बाद ईरान ने बहुत बड़ा पलटवार करने का दावा किया है। ईरान की सेना का कहना है कि उसने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में बने प्रमुख अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जोरदार हमले किए हैं। इसके साथ ही ईरान की 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील समुद्री रास्ते 'होर्मुज स्ट्रेट' को अगले आदेश तक सभी तरह के जहाजों के लिए पूरी तरह बंद करने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है।
अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम को किया तबाह
ईरान ने दावा किया है कि उसने बहरीन में मौजूद अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े (Fifth Fleet) को निशाना बनाया है। इस हमले में वहां तैनात पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम के कम्युनिकेशन एंटीना और रडार सिस्टम को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया है। इसके अलावा जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सेना के अल-अजराक और मुवाफ्फाक सल्ती एयर बेस पर भी भीषण धमाके हुए हैं। दूसरी तरफ, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर ईरान के भीतर कई ठिकानों पर 'आत्मरक्षा में' हमले किए गए हैं, जो ईरान की लगातार बढ़ती आक्रामकता का जवाब हैं।
18 अमेरिकी ठिकानों को नुकसान पहुंचाने का दावा
ईरानी सेना के मुताबिक, गुरुवार तड़के कुवैत में स्थित अमेरिकी एयर बेस 'अली अल सलेम' और 'अहमद अल-जाबेर' पर ड्रोन से सिलसिलेवार हमले किए गए। बहरीन के शेख ईसा एयरबेस को भी निशाना बनाया गया है। ईरान का दावा है कि इस जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी सेना की करीब 18 संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा है। ईरानी सेना ने अमेरिका पर अप्रैल महीने में हुए युद्धविराम (Ceasefire) को तोड़ने का आरोप लगाया है और चेतावनी दी है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले किसी भी व्यापारिक या तेल टैंकर जहाज को अब निशाना बनाया जाएगा। ईरान ने कहा है कि उसने नियमों का उल्लंघन करने वाले दो जहाजों पर पहले ही हमला कर दिया है।
ईरान को भी उठाना पड़ा नुकसान
अमेरिकी हवाई हमलों के कारण ईरान के तटीय इलाकों जैसे केशम द्वीप, बंदर अब्बास, सीरिक और करगान में भारी तबाही और विस्फोट हुए हैं, जिसमें कुछ आम नागरिकों के घायल होने की भी खबर है। इस ताजा विवाद की शुरुआत तब हुई जब कुछ दिन पहले होर्मुज स्ट्रेट के पास ईरान ने अमेरिका के एक अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराया था। इसके बाद से ही दोनों देशों के बीच मिसाइल और ड्रोन दागने का दौर दोबारा शुरू हो गया।
दोनों देशों के राष्ट्रपतियों के कड़े रुख
इस पूरे घटनाक्रम पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर शांति वार्ता को जानबूझकर लटकाने का आरोप लगाया है। उन्होंने दोटूक चेतावनी दी है कि अगर ईरान समझौते के लिए तैयार नहीं हुआ, तो उस पर और बड़ा सैन्य प्रहार किया जाएगा। इसके जवाब में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भी साफ कर दिया है कि उनका देश किसी भी धमकी के आगे घुटने नहीं टेकेगा और अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। इस तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की सप्लाई रुकने और कीमतें बढ़ने का खतरा मंडराने लगा है।
भारत की उपलब्धि पर चीन की नजर, परीक्षा आयोजन को बताया ऐतिहासिक
11 Jun, 2026 12:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत में इस समय मेडिकल प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी) में पेपर लीक और कथित धांधली को लेकर पूरे देश में हंगामा मचा हुआ है। परीक्षा की सुरक्षा और मैनेजमेंट पर उठ रहे गंभीर सवालों के बीच पड़ोसी देश चीन ने इशारों-इशारों में भारत की परीक्षा प्रणाली पर चुटकी ली है। भारत में मौजूद चीनी दूतावास ने दावा किया है कि उन्होंने अपने देश में करीब 1.3 करोड़ छात्रों की 'गाओकाओ' परीक्षा को बिना किसी गड़बड़ी, रुकावट या धांधली के सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। आपको बता दें कि गाओकाओ को दुनिया की सबसे कठिन और बड़ी परीक्षाओं में से एक माना जाता है।
चीन ने कैसे कसा तंज?
चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर अपनी इस राष्ट्रीय परीक्षा के कड़े और शानदार मैनेजमेंट की तारीफ की। उन्होंने सीधे तौर पर इसकी तुलना भारत की इंजीनियरिंग परीक्षा (जेईई) और मेडिकल परीक्षा (नीट) से करते हुए लिखा कि चीन की गाओकाओ दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षा है और यह भारत की जेईई व नीट का एक मिला-जुला रूप है। उन्होंने आगे लिखा कि महज दो दिनों के भीतर 1.3 करोड़ छात्रों के लिए इस बेहद जटिल परीक्षा को बिना किसी परेशानी के आयोजित कर लिया गया।
परीक्षा के लिए बंद कर दी थीं फैक्ट्रियां
चीनी प्रवक्ता ने बताया कि इस परीक्षा को शांतिपूर्ण ढंग से कराने के लिए देश में कितने बड़े इंतजाम किए गए थे। परीक्षा के दौरान बच्चों को डिस्टर्बेंस न हो, इसके लिए शोर-शराबा रोकने के लिए फैक्ट्रियों तक का काम रोक दिया गया था। सड़कों पर ट्रैफिक को पूरी तरह शांत कर दिया गया था और छात्रों की मदद के लिए पूरा देश एकजुट होकर खड़ा था।
संवेदनशील समय पर आया बयान
चीन का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब भारत में परीक्षाओं के आयोजन और उनकी विश्वसनीयता को लेकर चौतरफा बहस छिड़ी हुई है। मई महीने में हुई नीट परीक्षा में पेपर लीक की बात सामने आने के बाद से ही देश भर में छात्र और अभिभावक लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि, चीनी दूतावास ने अपने पोस्ट में भारत के मौजूदा विवाद का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया है, लेकिन जिस तरह से उन्होंने अपनी परीक्षा के बेहतरीन मैनेजमेंट और निष्पक्षता का ढिंढोरा पीटा है, उसे जानकार सीधे तौर पर भारत की व्यवस्था पर एक कूटनीतिक कटाक्ष के रूप में देख रहे हैं।
क्या है गाओकाओ परीक्षा और भारत से इसकी तुलना?
गाओकाओ चीन के विश्वविद्यालयों (यूनिवर्सिटी) में एडमिशन के लिए होने वाली एकमात्र और सबसे मुख्य प्रवेश परीक्षा है। किसी भी चीनी छात्र और उसके परिवार के लिए यह परीक्षा जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट मानी जाती है, जिसके लिए बच्चे सालों तक कड़ी मेहनत करते हैं। इस साल दो दिन तक चले इस महा-एग्जाम में करीब 1.3 करोड़ छात्र शामिल हुए।
अगर आंकड़ों के लिहाज से भारत से तुलना करें, तो हमारे देश में इंजीनियरिंग के लिए जेईई (लगभग 15 लाख छात्र) और मेडिकल के लिए नीट (लगभग 24 लाख छात्र) जैसी अलग-अलग परीक्षाएं होती हैं। अगर इन दोनों परीक्षाओं के छात्रों की संख्या को मिला भी दिया जाए, तो भी चीन की गाओकाओ परीक्षा में बैठने वाले उम्मीदवारों की संख्या भारत से कहीं ज्यादा है। ऐसे में इतनी बड़ी परीक्षा को बिना किसी धांधली के कराने का दावा करके चीन कहीं न कहीं भारतीय व्यवस्था को आईना दिखाने की कोशिश कर रहा है।
हांसी मर्डर केस: जिम संचालक को बनाया निशाना, ताबड़तोड़ फायरिंग में मौत
11 Jun, 2026 11:14 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हांसी। शहर के फव्वारा चौक के पास गुरुवार सुबह करीब 5:30 बजे एक बेहद सनसनीखेज और दुस्साहसिक वारदात सामने आई है। यहां मोटरसाइकिल पर सवार होकर आए अज्ञात हमलावरों ने एक जिम संचालक की अंधाधुंध गोलियां बरसाकर बेरहमी से हत्या कर दी। हमलावरों ने महज 5 सेकंड के भीतर करीब 10 राउंड फायरिंग की, जिससे कई गोलियां सीधे जिम संचालक की पीठ और सिर में जा लगीं और अत्यधिक खून बह जाने के कारण उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। यह पूरी खौफनाक वारदात वहां लगे एक कैमरे में भी रिकॉर्ड हो गई है। घटना के समय जिम संचालक कपिल फव्वारा चौक के समीप दुकानों के बाहर बने रैंप पर कुछ युवक-युवतियों को सुबह की कसरत करवा रहा था, तभी हेलमेट पहने शूटरों ने इस वारदात को अंजाम दिया और हथियार लहराते हुए फरार हो गए।
फायरिंग के दौरान एक युवती भी हुई जख्मी
बदमाशों द्वारा की गई इस ताबड़तोड़ गोलीबारी के दौरान वहां वार्म-अप कर रही शिखा नामक एक युवती भी छर्रे लगने से गंभीर रूप से घायल हो गई। वारदात के तुरंत बाद आसपास के लोगों ने लहूलुहान हालत में युवती को संभाला और इलाज के लिए हिसार के एक निजी चिकित्सालय में दाखिल कराया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उसका उपचार चल रहा है। इस दुस्साहसिक हत्याकांड के बाद से पूरे इलाके के व्यापारियों और निवासियों में भारी डर और दहशत का माहौल बना हुआ है।
वारदात की कड़ियां जोड़ने में जुटी पुलिस और फॉरेंसिक टीम
हत्या की इस खौफनाक घटना की भनक लगते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में भारी पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी। मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए अपराध शाखा (सीआईए) और फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की टीमों को भी साक्ष्य जुटाने के लिए घटनास्थल पर बुलाया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मौके से मिले सीसीटीवी फुटेज को खंगाला जा रहा है, जिसमें आरोपियों की मोटरसाइकिल और उनकी कद-काठी के अहम सुराग मिले हैं, जिनके आधार पर शूटरों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।
प्रेम विवाह और आपसी रंजिश के कोण से जांच शुरू
शुरुआती तफ्तीश में यह बात सामने आई है कि मृतक कपिल मूल रूप से जींद जिले के दलम वाला गांव का निवासी था और पिछले लंबे समय से हांसी शहर में अपना जिम संचालित कर रहा था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मृतक ने कुछ ही दिनों पहले अपनी मर्जी से प्रेम विवाह (लव मैरिज) किया था। इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए पुलिस ऑनर किलिंग या किसी पुरानी आपसी रंजिश सहित तमाम संभावित कोणों से मामले की गहराई से पड़ताल कर रही है ताकि जल्द से जल्द हत्यारों को सलाखों के पीछे भेजा जा सके।
एसिड अटैक केस में न्याय, इंडोनेशिया की अदालत ने चार जवानों को ठहराया दोषी
10 Jun, 2026 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जकार्ता (इंडोनेशिया): इंडोनेशिया की एक सैन्य अदालत ने देश के एक प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता और मानवाधिकार वकील पर जानलेवा तेजाब (एसिड) हमला करने के जुर्म में सेना के चार जवानों को दोषी करार देते हुए जेल की सजा सुनाई है। पीड़ित एक्टिविस्ट ने घटना से कुछ समय पहले सेना के राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर एक डिजिटल पॉडकास्ट किया था, जिससे नाराज होकर सैनिकों ने इस बर्बर वारदात को अंजाम दिया था। इस एसिड अटैक में एक्टिविस्ट बुरी तरह झुलस गए थे।
देश की शीर्ष खुफिया एजेंसी में तैनात थे चारों हमलावर
दोषी पाए गए सैनिकों में नौसेना के तीन मरीन- सार्जेंट एडी सुडार्को, फर्स्ट लेफ्टिनेंट बुधी हरियांतो विधी काह्योंनो, कैप्टन नंदाला ड्वी प्रासेत्या और वायु सेना के अधिकारी लेफ्टिनेंट सामी लक्का शामिल हैं। ये चारों इंडोनेशियाई राष्ट्रीय सशस्त्र बल की बेहद संवेदनशील खुफिया इकाई (इंटेलिजेंस एजेंसी) में तैनात थे। अदालत ने इन चारों को एक्टिविस्ट एंड्री यूनुस पर घात लगाकर हमला करने का मुख्य आरोपी माना है।
पॉडकास्ट में सेना के बढ़ते प्रभाव को उजागर करने पर मिली सजा
पीड़ित एंड्री यूनुस 'कमीशन फॉर द डिसअपियर्ड एंड विक्टिम्स ऑफ वायलेंस' (KontraS) नामक प्रतिष्ठित मानवाधिकार संस्था के वरिष्ठ सदस्य हैं। उन्होंने अपने एक पॉडकास्ट कार्यक्रम में इंडोनेशियाई हुकूमत और नागरिक व्यवस्था पर सेना के अत्यधिक प्रभाव की तीखी आलोचना की थी। इसी बात से खुन्नस खाकर चारों खुफिया अधिकारियों ने उनके खिलाफ साजिश रची। जब 27 वर्षीय यूनुस वाहन चलाकर जा रहे थे, तभी मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने उनके चेहरे पर एसिड फेंक दिया। इस कायराना हमले में यूनुस का चेहरा बुरी तरह झुलस गया और उनकी दाहिनी आंख की रोशनी हमेशा के लिए चली गई।
अदालत ने कहा- 'सैनिकों ने सेना की छवि को पहुंचाई ठेस'
जकार्ता की सैन्य अदालत की तीन सदस्यीय जजों की पीठ ने आरोपियों को निम्नलिखित सजा सुनाई:
सार्जेंट एडी सुडार्को: 3 वर्ष की सश्रम जेल।
लेफ्टिनेंट काह्योंनो: ढाई वर्ष की कैद।
कैप्टन प्रासेत्या: 2 वर्ष की जेल।
लेफ्टिनेंट सामी लक्का: 18 महीने के कारावास की सजा।
फैसला सुनाते हुए सैन्य न्यायाधीश फ्रेडी इस्नार्टांतो ने सख्त लहजे में कहा, "देश की सेना का हिस्सा होने के बावजूद, आरोपियों ने एक नागरिक पर जानबूझकर तेजाब फेंककर अपने दायित्वों और देश के भरोसे के साथ गद्दारी की है। इस कृत्य से इंडोनेशियाई सेना की प्रतिष्ठा को गहरा धक्का लगा है और पीड़ित को जीवनभर की असहनीय शारीरिक व मानसिक पीड़ा मिली है।"
न्याय प्रणाली पर उठे सवाल: मानवाधिकार संगठनों ने बताया 'दिखावा'
इस अदालती फैसले के बाद वैश्विक और स्थानीय मानवाधिकार संगठनों ने असंतोष जाहिर किया है। एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडोनेशिया ने इस पूरी न्यायिक प्रक्रिया को महज एक दिखावा करार देते हुए कहा कि सरकारी वकीलों ने बेहद कम सजा (ढाई साल) की मांग की थी। संगठनों का आरोप है कि इस हमले के पीछे सेना के कुछ बेहद रसूखदार और उच्च पदों पर बैठे मास्टरमाइंड शामिल हैं, जिन्हें बचाने के लिए जांच को दबा दिया गया।
इंडोनेशियाई मानवाधिकार आयोग (Komnas HAM) की स्वतंत्र जांच रिपोर्ट में भी यह बात सामने आई है कि यह हमला पूरी तरह से सुनियोजित (वेल-प्लान्ड) और बकायदा फंडेड था, जिसकी सिविल कोर्ट (नागरिक अदालत) में दोबारा निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि पर्दे के पीछे छिपे असली गुनहगार बेनकाब हो सकें।
लॉटरी ने बदली जिंदगी, 70 करोड़ जीतकर रातोंरात बने अमीर
10 Jun, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अबू धाबी: किस्मत कब और किस करवट बदल जाए, इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। ऐसा ही कुछ हुआ यूएई (UAE) के अबू धाबी स्थित रुवैस इंडस्ट्रियल एरिया में, जहां ईद-उल-अजहा की छुट्टी वाली रात एक साधारण सुरक्षा गार्ड (सिक्योरिटी गार्ड) की जिंदगी हमेशा-हमेशा के लिए बदल गई। मूल रूप से नेपाल के रहने वाले 26 वर्षीय तैयब खान अपनी रूटीन नाइट शिफ्ट की ड्यूटी पर तैनात थे, तभी उनके मोबाइल पर आए एक सिंगल ईमेल ने उन्हें रातोंरात करोड़पति बना दिया।
ईमेल खुलते ही उड़ गए होश, जीता 70 करोड़ का जैकपॉट
रोज की तरह गेट पर आने-जाने वालों की जांच और सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे तैयब के फोन पर ड्यूटी के दौरान एक नोटिफिकेशन आया। पहले तो उन्हें लगा कि यह कोई सामान्य सा आधिकारिक मेल या छोटा-मोटा इनाम होगा। लेकिन जब उन्होंने मेल खोलकर विवरण पढ़ा, तो उन्हें अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हुआ। यूएई की आधिकारिक राष्ट्रीय लॉटरी के 'लकी डे ड्रा' (Lucky Day Draw) में उनके ग्रुप ने 30 मिलियन दिर्हम (भारतीय मुद्रा में करीब 70 करोड़ रुपये से अधिक) का बंपर ग्रैंड जैकपॉट अपने नाम कर लिया था।
'फ्यूचर मिलियनेयर्स' ग्रुप की सच्ची दोस्ती लाई रंग
तैयब यह विशालकाय इनामी राशि अकेले नहीं जीते हैं, बल्कि इसके पीछे उनकी और उनके दोस्तों की अटूट समझदारी और निरंतरता थी। 4 साल पहले नेपाल से यूएई आए तैयब ने अपने चार अन्य नेपाली दोस्तों के साथ मिलकर साल 2024 में एक ग्रुप बनाया था, जिसका नाम उन्होंने बेहद सोच-समझकर 'फ्यूचर मिलियनेयर्स' (Future Millionaires) रखा था।
ये पांचों दोस्त हर हफ्ते अपनी गाढ़ी कमाई में से 50-50 दिर्हम (लगभग 1,100 रुपये) इकट्ठा करते थे और नियमित रूप से लॉटरी का एक टिकट खरीदते थे। आखिरकार उनकी यह अनोखी तरकीब रंग लाई। 30 मिलियन दिर्हम की इस पूरी इनामी राशि को पांचों दोस्तों में बराबर-बराबर बांटा गया है, जिसके तहत तैयब खान के हिस्से में 6 मिलियन दिर्हम (करीब 14 से 15 करोड़ रुपये) आए हैं।
सुरक्षा गार्ड की नौकरी छोड़ अब बनेंगे बिजनेसमैन
इस ऐतिहासिक और लाइफ-चेंजिंग जीत के बाद तैयब ने अपनी सुरक्षा गार्ड की नौकरी को अलविदा कहने का फैसला कर लिया है। अपनी भविष्य की योजनाओं और सपनों को साझा करते हुए तैयब ने बताया:
आलीशान घर: उनका सबसे पहला और मुख्य लक्ष्य नेपाल में रह रहे अपने माता-पिता और परिवार के लिए एक बड़ा और सर्वसुविधाजनक आलीशान घर बनवाना है।
शौक होंगे पूरे: वह काफी समय से एक 'महिंद्रा थार' (Mahindra Thar) गाड़ी और एक लग्जरी 'रोलेक्स' (Rolex) घड़ी खरीदने की हसरत रखते थे, जिसे वे अब तुरंत पूरा करेंगे।
दुबई में निवेश: तैयब इस बड़ी रकम का एक बड़ा हिस्सा दुबई के फलते-फूलते रियल एस्टेट मार्केट में इन्वेस्ट करेंगे। वे यूएई में ही अपना खुद का नया बिजनेस शुरू कर एक सफल बिजनेसमैन के रूप में अपने जीवन की नई पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं।
क्या है यह यूएई लॉटरी?
जिस लॉटरी के जरिए इन पांचों कामगारों की किस्मत चमकी है, वह संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) सरकार द्वारा पूरी तरह से नियंत्रित, विनियमित और लाइसेंस प्राप्त राष्ट्रीय लॉटरी है। इसके सबसे लोकप्रिय गेम 'लकी डे' के एक टिकट की कीमत महज 50 दिर्हम होती है, जिसमें प्रतिभागियों को अपने पसंदीदा नंबर चुनने होते हैं। पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित होने के कारण खाड़ी देशों में काम करने वाले हजारों प्रवासी मजदूर हर हफ्ते इसमें अपनी किस्मत आजमाते हैं। तैयब और उनके दोस्तों की यह जादुई कहानी साबित करती है कि सामूहिक प्रयास, सच्ची दोस्ती और बुलंद किस्मत इंसान को फर्श से अर्श पर पहुंचा सकती है।
पीओके की आजादी की मांग को लेकर लंदन में विरोध प्रदर्शन
10 Jun, 2026 03:18 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में पाकिस्तानी सेना द्वारा की जा रही दमनकारी सैन्य कार्रवाई, मानवाधिकारों के हनन और स्थानीय नागरिकों की आवाज को बलपूर्वक दबाए जाने के खिलाफ ब्रिटेन में रहने वाले कश्मीरी समुदाय और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने मोर्चा खोल दिया है। सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारियों ने लंदन स्थित पाकिस्तान हाई कमीशन (उच्चायोग) के बाहर इकट्ठा होकर शाहबाज शरीफ सरकार और पाकिस्तानी सेना के खिलाफ एक बेहद आक्रामक और जोरदार प्रदर्शन किया।
पाकिस्तानी सेना के खिलाफ गूंजे तीखे नारे
प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान सरकार पर आरोप लगाया कि वह पीओके में निर्दोष नागरिकों की हत्याएं करवा रही है, बड़े पैमाने पर राजनीतिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर रही है और सच को बाहर आने से रोकने के लिए इंटरनेट सेवाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगा रही है। लंदन की सड़कों पर प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तानी सेना को सीधी चुनौती देते हुए कई तीखे नारे गूंज उठे:
"पाकिस्तानी आर्मी गो बैक" (पाकिस्तानी सेना वापस जाओ)
"हम छीन कर लेंगे आजादी"
"ये जो दहशतगर्दी है, इसके पीछे वर्दी है"
"तेरा बाप भी देगा आजादी"
प्रदर्शनकारियों ने साफ किया कि पीओके में पिछले कुछ दिनों से शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को सेना के बूटों तले कुचला जा रहा है, जिससे वहां रहने वाले आम नागरिकों में असंतोष और गुस्सा अपने चरम पर पहुंच गया है।
ब्रिटेन के कई शहरों में फैली विरोध की आग
पाकिस्तान सरकार की इन क्रूर नीतियों के खिलाफ केवल लंदन ही नहीं, बल्कि बर्मिंघम, मैनचेस्टर और ब्रैडफोर्ड जैसे ब्रिटेन के कई अन्य प्रमुख शहरों में स्थित पाकिस्तानी राजनयिक मिशनों (कंसुलेट) के बाहर भी प्रवासियों ने भारी विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय, संयुक्त राष्ट्र (UN) और वैश्विक मानवाधिकार संगठनों से पीओके की गंभीर स्थिति पर तत्काल ध्यान देने तथा वहां हो रहे अत्याचारों की एक स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच कराने की पुरजोर मांग की है।
विवाद की मुख्य वजह: विधानसभा की 12 आरक्षित सीटें
पीओके में हालिया तनाव उस समय और अधिक बढ़ गया जब वहां के सबसे बड़े नागरिक संगठन 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) पर पाकिस्तान सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया और उसके शीर्ष नेताओं को जेल में डाल दिया।
क्या है 12 सीटों का विवाद? दरअसल, पीओके की 45 सदस्यीय विधानसभा में 12 सीटें उन शरणार्थियों के लिए आरक्षित की गई हैं जो मूल रूप से कश्मीर से जुड़े होने का दावा करते हैं, लेकिन वर्तमान में वे पीओके में न रहकर पाकिस्तान के अन्य हिस्सों (जैसे पंजाब और सिंध) में रहते हैं। जेएएसी और अन्य स्थानीय संगठनों का आरोप है कि इस विवादास्पद व्यवस्था के जरिए पाकिस्तानी हुक्मरान और वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) चुनाव में धांधली करके अपने पसंदीदा 'बाहरी' लोगों को विधानसभा में भेजते हैं। इससे स्थानीय लोगों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व कमजोर हो रहा है और क्षेत्र के भविष्य से जुड़े फैसलों पर वहां रहने वाले वास्तविक नागरिकों का कोई अधिकार नहीं रह गया है।
महंगाई, बिजली संकट और राजनीतिक उपेक्षा से बेहाल जनता
इस राजनीतिक विवाद के अलावा, पिछले दो वर्षों के दौरान जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) ने पीओके में आसमान छूती महंगाई, गंभीर बिजली संकट, बेरोजगारी और बदहाल प्रशासनिक व्यवस्था के खिलाफ लगातार बड़े आंदोलन किए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पीओके में प्रचुर मात्रा में जलविद्युत (हाइड्रोइलेक्ट्रिसिटी) का उत्पादन होता है, लेकिन पाकिस्तान की केंद्र सरकार वहां के स्थानीय लोगों को ही अंधेरे में रखकर वह बिजली अपने राज्यों को सप्लाई कर देती है। आटे और बिजली जैसी बुनियादी चीजों की बढ़ती कीमतों के खिलाफ जब भी लोग आवाज उठाते हैं, तो पाकिस्तानी सुरक्षा बल गोलियां और लाठियां चलाकर उनका दमन करते हैं, जिसे अब कश्मीरी प्रवासी वैश्विक मंच पर उजागर कर रहे हैं।
खाद्य संकट से जूझता ईरान, महंगाई ने बढ़ाई आम लोगों की मुश्किलें
10 Jun, 2026 02:16 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान: इजराइल और अमेरिका के साथ जारी भीषण सैन्य संघर्ष के बीच ईरान में युद्ध की विभीषिका अब केवल मोर्चों तक सीमित नहीं रह गई है। इसका सबसे खतरनाक असर अब आम नागरिकों की जिंदगी और देश की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। बेकाबू महंगाई, दवाओं की भारी किल्लत, ठप पड़ते उद्योग और गहराते रोजगार संकट ने ईरान को एक अभूतपूर्व मानवीय और आर्थिक संकट के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि आम मध्यमवर्गीय परिवारों की पूरी मासिक आय महीने के आधे दिनों में ही दम तोड़ रही है, जिससे लोग अब रोजमर्रा का राशन और खाने-पीने का सामान भी किस्तों (उधार) पर खरीदने को मजबूर हैं।
रसोई पर महंगाई का 'परमाणु बम', आसमान छू रहे दाम
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स और तेहरान के आम नागरिकों के अनुसार, देश में महंगाई की रफ्तार इतनी तेज है कि सुबह जो सामान जिस कीमत पर मिलता है, शाम होते-होते उसकी कीमत बदल जाती है। तेहरान के एक बुजुर्ग सरकारी कर्मचारी ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि उन्होंने मोहल्ले के किराना दुकानदार से जो राशन उधार लिया था, अगले ही दिन जब वे उसका भुगतान करने पहुंचे तो सामान का बिल लगभग दोगुना हो चुका था।
युद्ध की शुरुआत के बाद से ईरान में आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों में ऐतिहासिक और रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसने आम जनता की कमर तोड़ दी है:
खाद्य वस्तु
कीमत में रिकॉर्ड बढ़ोतरी (%)
कुकिंग ऑयल (खाद्य तेल)
430%
अंडा
345%
चावल
287%
दूध
139%
Export to Sheets
हालात यह हैं कि तेहरान, इस्फहान, अहवाज और मशहद जैसे देश के बड़े और प्रमुख शहरों में रहने वाले लोग अब आसमान से गिरने वाले इजरायली बमों से ज्यादा रसोई के खर्च और भविष्य की अनिश्चितता को लेकर खौफजदा हैं।
लंबा खिंचता युद्ध और टूटती उम्मीदें
शुरुआती दिनों में जब इजराइल के हमलों के बाद यह जंग शुरू हुई थी, तब ईरानी अवाम को लगा था कि यह सैन्य टकराव कुछ ही दिनों में थम जाएगा। कुछ धड़ों को यह भी उम्मीद थी कि इस संकट से देश में कोई बड़ा राजनीतिक बदलाव आएगा। लेकिन इस जंग में अमेरिका की सीधी एंट्री (प्रवेश) ने इसे बेहद लंबा, थकाऊ और विनाशकारी बना दिया है। समय बीतने के साथ ही अब सरकार के धुर विरोधियों और आलोचकों का ध्यान भी राजनीतिक बदलावों से हटकर सिर्फ और सिर्फ देश में शांति, स्थिरता और भुखमरी से निजात पाने की मांग पर केंद्रित हो गया है।
कच्चे माल की कमी से उद्योग ठप, पेट्रोकेमिकल सेक्टर को भारी नुकसान
इस युद्ध की सीधी मार ईरान के औद्योगिक उत्पादन पर पड़ी है। मशहद शहर के पास स्थित एक बड़ी मैन्युफैक्चरिंग फैक्ट्री के प्रबंधन ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और युद्ध के चलते कच्चे माल की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो चुकी है। इस वजह से उत्पादन बंद करना पड़ा है और सैकड़ों कर्मचारियों को बिना वेतन या जबरन छुट्टी पर भेज दिया गया है, जिससे बेरोजगारी का संकट गहरा गया है। इसके अलावा, इजराइली हवाई हमलों ने ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले पेट्रोकेमिकल (तेल और गैस) उद्योग को भी भारी नुकसान पहुंचाया है, जिससे सरकार की कमाई के साधन सीमित हो गए हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं में हाहाकार, दवाओं का स्टॉक खत्म
ईरान में स्वास्थ्य क्षेत्र की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक और गंभीर बनी हुई है। अस्पतालों और डॉक्टरों के अनुसार, फार्मेसियों (दवा दुकानों) में जीवनरक्षक दवाओं का स्टॉक लगभग खत्म होने की कगार पर है, जिसके कारण अब दवाएं बेहद सीमित मात्रा में (राशनिंग के आधार पर) दी जा रही हैं।
देश के स्वास्थ्य मंत्रालय ने आपातकालीन गाइडलाइंस जारी कर सभी चिकित्सकों को केवल और केवल 'अत्यावश्यक' दवाएं ही पर्चे पर लिखने की सख्त सलाह दी है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 'हीमोफीलिया' जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों के लिए जरूरी दवाओं का राष्ट्रीय भंडार पूरी तरह समाप्त हो चुका है। युद्ध के कारण मचे कूटनीतिक गतिरोध की वजह से विदेशों से दवाओं के आयात में भी भारी तकनीकी और वित्तीय दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सैन्य गोलाबारी और आर्थिक तबाही के इस दोहरे और क्रूर दबाव ने ईरान के आम नागरिकों को एक ऐसे चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहां से आगे का रास्ता सिर्फ और सिर्फ अनिश्चितता से भरा नजर आता है।
अध्ययन में दावा: गहरी त्वचा से मिलती है प्राकृतिक सुरक्षा
10 Jun, 2026 02:09 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अफ्रीकी मूल के लोगों के लिए उनकी त्वचा का गहरा काला रंग किसी वरदान से कम नहीं है। यह रंग उन्हें वहां की चिलचिलाती और अत्यधिक तीव्र धूप से बचाने के लिए प्रकृति द्वारा दिया गया एक बेहद शक्तिशाली सुरक्षा कवच है।
वैज्ञानिक शोधों के अनुसार, इंसानी त्वचा का रंग मेलेनिन (Melanin) नामक एक विशेष वर्णक (पिगमेंट) से तय होता है। शरीर में मेलेनिन की मात्रा जितनी अधिक होगी, त्वचा का रंग उतना ही गहरा या काला होता जाता है। अफ्रीका के भूमध्यरेखीय (इक्वेटोरियल) क्षेत्रों में सूरज की किरणें साल भर एकदम सीधी और प्रचंड पड़ती हैं, जिससे वहां खतरनाक अल्ट्रावायलेट (यूवी) किरणों का स्तर पृथ्वी पर सबसे ज्यादा होता है। ऐसी कठोर जलवायु में जीवित रहने के लिए गहरा रंग ही सबसे बड़ा मददगार साबित होता है।
स्किन कैंसर से बचाता है 'मेलेनिन' का उच्च स्तर
त्वचा में मौजूद मेलेनिन इन हानिकारक पराबैंगनी (यूवी) किरणों को एक स्पंज की तरह प्रभावी ढंग से सोख लेता है। यह सूरज की किरणों को त्वचा की गहराई तक जाने से रोकता है, जिससे कोशिकाओं के डीएनए को होने वाले नुकसान, समय से पहले झुर्रियां पड़ने और अन्य गंभीर त्वचा रोगों का खतरा टल जाता है। यही मुख्य कारण है कि अफ्रीका के मूल निवासियों में स्किन कैंसर (त्वचा के कैंसर) की दर दुनिया के अन्य गोरे रंग वाले हिस्सों की तुलना में बेहद कम पाई जाती है।
लाखों सालों के मानव विकास (इवोल्यूशन) का परिणाम
विज्ञान के विकासवाद सिद्धांत के अनुसार, अफ्रीका को मानव सभ्यता का उद्गम स्थल (पालना) माना जाता है। लाखों साल पहले जब इंसानी आबादी केवल अफ्रीका में थी, तब वहां की भीषण गर्मी और धूप का सामना करने के लिए शरीर में मेलेनिन का उच्च स्तर बना रहा। लेकिन जैसे-जैसे इंसान अफ्रीका से निकलकर यूरोप और एशिया के ठंडे व कम धूप वाले हिस्सों की ओर बढ़े, जलवायु के अनुसार उनकी त्वचा का रंग भी बदलता गया।
ठंडे और कम धूप वाले क्षेत्रों में जीवित रहने के लिए शरीर को विटामिन डी (Vitamin D) के निर्माण की अधिक आवश्यकता थी। कम धूप में विटामिन डी का पर्याप्त संश्लेषण (सिंथेसिस) करने के लिए इंसानी शरीर ने मेलेनिन का उत्पादन कम कर दिया, जिससे वहां के लोगों का रंग धीरे-धीरे गोरा होता चला गया। इसके विपरीत, अफ्रीका में सूरज की प्रचंडता बरकरार रही, इसलिए वहां की आबादी में मेलेनिन का यह प्राकृतिक सुरक्षा कवच आज भी वैसा ही मजबूत बना हुआ है।
ग्लोबल वार्मिंग के दौर में जैविक रूप से अधिक सुरक्षित
आज के आधुनिक समय में, जब ग्लोबल वार्मिंग और ओजोन परत के क्षरण (डैमेज) के कारण पृथ्वी पर हानिकारक यूवी किरणों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है, तब काले रंग का यह जैविक लाभ और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। गहरे रंग की त्वचा वाले लोग इस बदलती और कठोर होती जलवायु में स्वाभाविक रूप से अधिक सुरक्षित हैं।
प्रकृति का यह सटीक अनुकूलन हमें सिखाता है कि जैविक रूप से दुनिया में हर रंग की अपनी एक अनूठी खूबी और महत्ता है। जहां गोरा रंग कम धूप वाले ठंडे इलाकों में जीने के लिए अनुकूल है, वहीं गहरा काला रंग भीषण गर्मी और तपती धूप में इंसानी जीवन की रक्षा करने वाला एक अद्भुत प्राकृतिक आशीर्वाद है।
ब्राजील की महिला की अनोखी शादी में ड्रामा, गुड्डे पर बेवफाई का आरोप
10 Jun, 2026 01:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ब्रासीलिया: ब्राजील की रहने वाली मेइरीवोने रोचा मोराएस अपनी एक बेहद हैरान कर देने वाली और अनोखी प्रेम कहानी के चलते एक बार फिर पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गई हैं। कुछ समय पहले एक कपड़े के पुतले (रैग डॉल) से पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ शादी रचाकर सुर्खियों में आईं मेइरीवोने ने अब अपने उसी निर्जीव पति पर 'बेवफाई' का बेहद गंभीर आरोप लगाया है। इस अजीबोगरीब घटनाक्रम ने सोशल मीडिया पर वास्तविकता और कल्पना को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।
अकेलेपन से शुरू हुआ था कपड़े के पुतले से प्यार
इस अनोखे रिश्ते की शुरुआत तब हुई थी जब मेइरीवोने के अकेलेपन और उदासी को दूर करने के लिए उनकी मां ने उन्हें इंसानी कद का एक कपड़े का गुड्डा (लाइफ-साइज रैग डॉल) बनाकर तोहफे में दिया था, जिसका नाम 'मार्सेलो' रखा गया। मेइरीवोने को धीरे-धीरे उस निर्जीव गुड्डे से इतना गहरा भावनात्मक लगाव हो गया कि उन्होंने उसे अपना जीवनसाथी मान लिया। इसके बाद उन्होंने बाकायदा बड़ी संख्या में मेहमानों को आमंत्रित कर पूरे धूमधाम और पारंपरिक रस्मों के साथ मार्सेलो से शादी कर ली। इस अनोखी शादी की तस्वीरें और वीडियो इंटरनेट पर खूब वायरल हुए थे। बात यहीं नहीं रुकी, मेइरीवोने ने सार्वजनिक रूप से दावा किया कि मार्सेलो से उनके दो बच्चे भी हैं, जो असल में छोटे गुड्डे ही थे, लेकिन वे उन्हें अपने सगे बच्चों की तरह ही मानती हैं।
अस्पताल में भर्ती थीं पत्नी, पीछे से पति ने की 'बेवफाई'
लंबे समय तक सुखी वैवाहिक जीवन का दावा करने के बाद अब इस कहानी में एक बेहद नाटकीय मोड़ आ गया है। मेइरीवोने ने सोशल मीडिया पर रोते हुए एक वीडियो साझा कर दावा किया है कि उनके पति मार्सेलो ने उन्हें धोखा दिया है। उनका कहना है कि जब वह अस्वस्थ होने के कारण अस्पताल में भर्ती थीं, तब उनकी एक सहेली ने मार्सेलो को किसी दूसरी महिला के साथ घूमते हुए देखा था। इतना ही नहीं, मेइरीवोने का दावा है कि उन्हें इस धोखेबाजी के पुख्ता सबूत के तौर पर कुछ संदिग्ध मैसेज भी मिले हैं। इस बात से बेहद आहत और नाराज होकर मेइरीवोने ने मार्सेलो को बेडरूम से बाहर निकाल दिया है और सजा के तौर पर उसे सोफे पर सोने के लिए मजबूर कर दिया है।
मनोवैज्ञानिकों का नजरिया और सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले को लेकर मनोचिकित्सकों और मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि यह अत्यधिक अकेलेपन, मानसिक अवसाद और गहरी कल्पनाशीलता का मामला है। वास्तविक दुनिया के रिश्तों और इंसानों से मिले धोखे या निराशा के बाद कई बार लोग ऐसी काल्पनिक दुनिया (डेल्यूजन) का निर्माण कर लेते हैं, जहां वे एक निर्जीव वस्तु में भी अपनी पसंद का साथी देखने लगते हैं। फिलहाल, यह घटना इंटरनेट पर लोगों के लिए भारी मनोरंजन, अचरज और जिज्ञासा का केंद्र बनी हुई है। दुनिया भर के यूजर्स इस बात को लेकर हैरान हैं कि कोई इंसान एक कपड़े के पुतले के साथ इस हद तक गंभीर रिश्ता और भावनाएं कैसे रख सकता है।
ट्रंप पर बरसे डेमोक्रेटिक नेता जेफरीज, महंगाई और युद्ध को बताया बड़ी विफलता
10 Jun, 2026 12:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन: अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (प्रतिनिधि सभा) में डेमोक्रेटिक पार्टी के शीर्ष नेता हकीम जेफरीज ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन के खिलाफ चौतरफा हमला बोला है। कैपिटल हिल में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए जेफरीज ने ट्रंप सरकार की नीतियों की कड़े शब्दों में आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार देश में जीवन यापन की लागत बढ़ाने, स्वास्थ्य सेवाओं (हेल्थकेयर) का प्रभावी प्रबंधन न करने और अमेरिका को ईरान के साथ एक बेहद लापरवाही भरी एवं महंगी जंग की ओर धकेलने के लिए जिम्मेदार है, जिसे बहुत आसानी से टाला जा सकता था।
महंगाई और ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप पर साधा निशाना
हकीम जेफरीज ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव के वक्त वादा किया था कि वे पहले ही दिन से आम जनता के खर्चों को कम करेंगे, लेकिन उनके सत्ता में आने के बाद से महंगाई और अधिक बढ़ गई है। उन्होंने किराने का सामान, घर, हेल्थकेयर और बिजली-पानी जैसी बुनियादी यूटिलिटी सेवाओं की आसमान छूती कीमतों का जिक्र करते हुए कहा कि कई कामकाजी परिवारों के लिए अब अमेरिका में गुजारा करना बेहद मुश्किल हो गया है। जेफरीज ने इसके लिए सीधे तौर पर ट्रंप की टैरिफ (आयात शुल्क) नीतियों को जिम्मेदार ठहराया, जिनकी वजह से आम अमेरिकियों का सालाना खर्च हजारों डॉलर बढ़ गया है। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान में अपनी मर्जी से शुरू की गई ट्रंप की गैर-जिम्मेदाराना जंग की वजह से देश में गैस और ईंधन की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं।
रिपब्लिकन बजट पैकेज का पूरी तरह विरोध करने का एलान
डेमोक्रेटिक नेता ने साफ किया कि हाउस डेमोक्रेट्स रिपब्लिकन पार्टी के 'बजट रिकॉन्सिलिएशन पैकेज' (बजट मिलान पैकेज) का संसद में पूरी तरह से विरोध करेंगे। उनका मानना है कि अमेरिकी करदाताओं के खून-पसीने की कमाई का इस्तेमाल आम लोगों की जेब का बोझ कम करने के लिए किया जाना चाहिए, न कि 'इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट' (ICE) को 70 अरब डॉलर का एक और ब्लैंक चेक सौंपने के लिए। जेफरीज ने तंज कसते हुए कहा कि हाउस रिपब्लिकन सिर्फ डोनाल्ड ट्रंप के चरम एजेंडे के लिए एक लापरवाह 'रबर स्टैम्प' की तरह काम कर रहे हैं और अपनी इन्हीं जनविरोधी नीतियों के कारण वे आगामी नवंबर में अपना बहुमत खोने की कगार पर हैं। उन्होंने वादा किया कि भविष्य का डेमोक्रेटिक शासन एजेंडा पूरी तरह से किफायती जीवन और सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं पर केंद्रित होगा।
विवादित नियुक्तियों पर दी गंभीर चेतावनी
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हकीम जेफरीज ने बिल पुल्टे को 'नेशनल इंटेलिजेंस' (राष्ट्रीय खुफिया विभाग) का एक्टिंग डायरेक्टर बनाने के ट्रंप के फैसले की भी तीखी आलोचना की। उन्होंने पुल्टे को एक राजनीतिक चमचा करार देते हुए कहा कि वे फेडरल सरकार में किसी भी महत्वपूर्ण पद पर काम करने के लिए बिल्कुल भी काबिल नहीं हैं। उन्होंने प्रशासन को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए साफ किया कि यदि बिल पुल्टे इस संवेदनशील पद पर बने रहते हैं, तो डेमोक्रेट्स संसद में विदेशी निगरानी से जुड़े अहम खुफिया अधिकारों (फॉरेन सर्विलांस राइट्स) को आगे बढ़ाने का बिल्कुल भी समर्थन नहीं करेंगे। इसके अलावा, उन्होंने न्यूयॉर्क निक्स के एक बास्केटबॉल मैच में डोनाल्ड ट्रंप के शामिल होने की चर्चा को खारिज करते हुए मजाकिया अंदाज में कहा कि राष्ट्रपति सिर्फ एनबीए (NBA) फाइनल के साथ खुद को जोड़कर हेडलाइंस बटोरने और लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं।
ईरान-अमेरिका तनाव बढ़ा, ईरान ने दी कड़ी चेतावनी
10 Jun, 2026 11:09 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना के एक अपाचे हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद अमेरिका द्वारा ईरान पर की गई जवाबी सैन्य कार्रवाई से दोनों देशों के बीच युद्ध की स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। इस बीच, ईरान ने अमेरिका को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए इस पूरे क्षेत्र को तुरंत खाली करने के लिए कहा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ लहजे में कहा कि यदि अमेरिका अपने सैनिकों को सुरक्षित देखना चाहता है, तो उसे फारस की खाड़ी क्षेत्र को तुरंत छोड़ देना चाहिए।
ईरानी विदेश मंत्री की अमेरिका को सीधी चेतावनी
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के जरिए अमेरिका पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि युद्ध के मैदान में लगातार मिल रही नाकामियों के बाद भी अमेरिका हमारी दृढ़ता और ताकत की परीक्षा लेना चाहता है। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान की शक्तिशाली सशस्त्र सेनाएं किसी भी तरह के हमले या खतरे का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं। अराघची ने अमेरिकी सेना को आगाह करते हुए लिखा कि अगर वे सुरक्षित रहना चाहते हैं, तो हमारे क्षेत्र से दूर रहें, क्योंकि फारस की खाड़ी का इतिहास बाहरी घुसपैठियों के दुखद और भयानक अंजामों से भरा पड़ा है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड का दावा
ईरानी विदेश मंत्री का यह तीखा बयान उस समय आया है, जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने आधिकारिक घोषणा की कि उसने राष्ट्रपति के निर्देश पर ईरान के खिलाफ "आत्मरक्षा" के तहत दंडात्मक सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है। अमेरिकी सेना का दावा है कि यह कदम ईरान की ओर से की गई अनुचित आक्रामकता का एक आनुपातिक और जरूरी जवाब है। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई एक दिन पहले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास अमेरिकी सेना के एक अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराए जाने के विरोध में की गई है।
डोनाल्ड ट्रंप ने दी हमले की जानकारी
इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर साझा की थी। राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि होर्मुज के ऊपर नियमित गश्त लगा रहे अमेरिका के एक अत्याधुनिक अपाचे हेलीकॉप्टर को ईरानी सेना ने निशाना बनाकर मार गिराया।
हालांकि, राहत की बात यह रही कि हेलीकॉप्टर में मौजूद दोनों अमेरिकी पायलट पूरी तरह सुरक्षित हैं और उन्हें कोई गंभीर चोट नहीं आई है, जिन्हें एक त्वरित रेस्क्यू ऑपरेशन के जरिए बचा लिया गया। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि भले ही हमारे जवान सुरक्षित हैं, लेकिन अमेरिका अपने सैन्य उपकरणों पर हुए इस हमले को कतई बर्दाश्त नहीं करेगा और इसका कड़ा जवाब दिया जाएगा, जिसके कुछ ही घंटों बाद अमेरिकी फाइटर जेट्स ने ईरान के तटीय इलाकों में बमबारी शुरू कर दी।
अफगान सीमा पर पाकिस्तान का हमला, एयरस्ट्राइक से भारी जनहानि
10 Jun, 2026 10:59 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काबुल: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर चल रहा तनाव एक बार फिर बेहद हिंसक रूप ले चुका है। दोनों देशों के बीच सीमा विवाद और लगातार होती झड़पें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। इसी बीच, पाकिस्तानी वायुसेना ने देर रात और तड़के सुबह अफगानिस्तान की हवाई सीमा (एयरस्पेस) का उल्लंघन करते हुए कई प्रांतों में भीषण एयरस्ट्राइक की है। इस अचानक हुए हमले से सीमावर्ती इलाकों में भारी तबाही मची है और दोनों देशों के बीच युद्ध जैसी स्थिति और गंभीर हो गई है।
भीषण हमले में 13 निर्दोष नागरिकों की मौत
पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने अफगानिस्तान के कुनार, खोस्त और पक्तिका प्रांतों को अपना निशाना बनाया। तालिबान सरकार के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने इस हमले की आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि पाकिस्तानी सेना ने जानबूझकर आम नागरिकों के आवासीय घरों पर बमबारी की है। इस कायराना हमले में अब तक कम से कम 13 मासूम लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें सबसे ज्यादा दर्दनाक बात यह है कि मृतकों में 11 बच्चे, एक महिला और एक बुजुर्ग शामिल हैं।
कई लोग घायल, बढ़ने लगा मौत का आंकड़ा
पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक के कारण कई घरों के मलबे में तब्दील होने से 14 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनमें महिलाओं की संख्या अधिक है। स्थानीय प्रशासन और बचाव दलों ने घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया है, जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार, कई घायलों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है, जिससे आने वाले समय में मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
सैकड़ों नागरिक गंवा चुके हैं अपनी जान
पिछले एक साल के भीतर पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच आपसी दुश्मनी और रणनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया है। दोनों देशों की सेनाओं के बीच जारी इस खूनी संघर्ष की सबसे बड़ी कीमत अफगानिस्तान के बेकसूर नागरिकों को चुकानी पड़ रही है। पिछले महीनों में हुए लगातार हमलों और सीमा पार से जारी गोलाबारी के कारण अब तक सैकड़ों आम नागरिक अपनी जान गंवा चुके हैं और हजारों की संख्या में लोग पलायन करने को मजबूर हुए हैं।
वैश्विक मंच पर पाकिस्तान के दोगलेपन की खुली पोल
अफगानिस्तान के रिहायशी इलाकों पर की गई इस बमबारी से अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान का दोहरा चरित्र एक बार फिर दुनिया के सामने आ गया है। एक तरफ जहां पाकिस्तान खुद को दुनिया के सामने एक शांतिदूत के रूप में पेश करने की कोशिश करता है और वैश्विक विवादों में मध्यस्थ बनने के दावे करता है, वहीं दूसरी तरफ उसकी अपनी सेना पड़ोसी देश की संप्रभुता को कुचलकर निर्दोष बच्चों और महिलाओं का खून बहा रही है। पाकिस्तान का यह रवैया उसकी कथनी और करनी के बड़े अंतर को साफ उजागर करता है।
तालिबान की जवाबी कार्रवाई और बदले की आशंका
इस घातक हवाई हमले के बाद क्षेत्र में तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है। तालिबान सरकार ने इस हमले पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है और माना जा रहा है कि वे इसका बदला लेने के लिए जल्द ही कोई बड़ी जवाबी सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं। सैन्य विश्लेषकों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में डूरंड रेखा (बॉर्डर) पर तैनात पाकिस्तानी सेना के ठिकानों पर हमले तेज हो सकते हैं। इसके साथ ही पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों, विशेष रूप से खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर खतरा और अधिक बढ़ गया है।
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