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अमेरिका-ईरान के बीच शांति के लिए फिर शुरु होगी वार्ता, मध्यस्थता में जुटे कई देश?
15 Apr, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई हालिया उच्च स्तरीय वार्ता के बेनतीजा रहने के बाद, दोनों देश एक बार फिर मेज पर आमने-सामने बैठने की तैयारी कर रहे हैं। हालिया अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को कम करने और एक स्थायी युद्धविराम समझौते पर पहुंचने के उद्देश्य से दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे राजनयिक संपर्क फिर से सक्रिय हो गए हैं। इस महीने की शुरुआत में हुआ अस्थायी युद्धविराम जल्द ही समाप्त होने वाला है, जिससे पहले एक ठोस समाधान खोजने का दबाव दोनों पक्षों पर बना हुआ है।
रिपोर्टों के मुताबिक, इस्लामाबाद वार्ता विफल होने के बावजूद दोनों ही देशों ने संकेत दिए हैं कि बातचीत के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पाकिस्तान से विदा होते समय स्पष्ट किया था कि उन्होंने ईरान के सामने वाशिंगटन का अंतिम और सर्वोत्तम प्रस्ताव रख दिया है। हालांकि, ईरानी पक्ष ने उन शर्तों को तत्काल स्वीकार नहीं किया, जिसके कारण वार्ता का पहला दौर बिना किसी ठोस समझौते के समाप्त हो गया। अब चर्चा है कि दूसरे चरण की वार्ता भी इस्लामाबाद में ही आयोजित की जा सकती है, जहां पाकिस्तान मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। वर्तमान में पाकिस्तान के अधिकारी दोनों देशों के निरंतर संपर्क में हैं ताकि अस्थायी सीजफायर की अवधि समाप्त होने से पहले किसी स्थायी शांति समझौते पर मुहर लग सके। हालांकि, वाशिंगटन की सख्त शर्तों और तेहरान के अपने रुख पर अड़े रहने के कारण चुनौतियां बरकरार हैं। आने वाले कुछ दिन वैश्विक राजनीति और क्षेत्रीय शांति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं, क्योंकि इसी पर तय होगा कि यह कूटनीतिक प्रयास युद्ध को रोकने में कितने सफल साबित होते हैं। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोमवार को इस संबंध में सकारात्मक संकेत देते हुए कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच अगले दौर की वार्ता जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद यह पहला मौका था जब दोनों देशों के शीर्ष अधिकारियों ने सीधे तौर पर बातचीत में हिस्सा लिया। आसिफ ने संसद भवन के बाहर मीडिया से बात करते हुए कहा कि पिछले दौर की बातचीत के बाद एक तरह का संतोष है क्योंकि अब तक कोई नकारात्मक घटनाक्रम सामने नहीं आया है। उन्होंने इसे एक रचनात्मक दिशा में बढ़ता कदम बताया है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में युद्ध के बादल: अमेरिका ने की ईरान की नाकेबंदी, 15 से ज्यादा युद्धपोत तैनात
15 Apr, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। सामरिक रूप से महत्वपूर्ण फारस की खाड़ी में स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। ईरान द्वारा इस समुद्री रास्ते पर नियंत्रण की कोशिशों के जवाब में अब अमेरिका ने भी वहां कड़ा पहरा लगा दिया है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने इस क्षेत्र में अपने 15 से ज्यादा शक्तिशाली युद्धपोत तैनात कर दिए हैं, जो ईरानी बंदरगाहों और तटीय इलाकों के आसपास पूर्ण नाकेबंदी लागू कर रहे हैं। इस सैन्य कार्रवाई के बाद खाड़ी क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात पैदा हो गए हैं।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की है कि यह नाकेबंदी बेहद सख्ती के साथ लागू की जा रही है। इस ऑपरेशन का मुख्य आकर्षण अमेरिका का अत्याधुनिक युद्धपोत यूएसएस ट्रिपोली है। इस जहाज को विशेष रूप से फाइटर जेट्स के संचालन के लिए डिजाइन किया गया है, जो एक समय में 20 से अधिक एफ-35बी लाइटनिंग 2 स्टील्थ फाइटर जेट ऑपरेट करने की क्षमता रखता है। इसके अलावा, एमवी-22 ओस्प्रे विमान और हेलिकॉप्टरों के जरिए भी होर्मुज जलमार्ग की निरंतर निगरानी की जा रही है। बयान के अनुसार, नाकेबंदी का उद्देश्य उन सभी जहाजों को रोकना है जो ईरान के बंदरगाहों में प्रवेश कर रहे हैं या वहां से बाहर जा रहे हैं। हालांकि, अमेरिका ने यह साफ किया है कि यह कार्रवाई केवल ईरान केंद्रित है। जो जहाज अन्य देशों के बंदरगाहों के लिए इस रास्ते का उपयोग कर रहे हैं, उन्हें सुरक्षित मार्ग दिया जाएगा। इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि ईरान का कोई भी फास्ट अटैकर जहाज नाकेबंदी के करीब आता है, तो उसे तुरंत नष्ट कर दिया जाएगा।
दरअसल, यह तनाव तब शुरू हुआ जब पिछले शनिवार को पाकिस्तान में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता बेनतीजा रही। 28 फरवरी को हुए सशर्त युद्ध-विराम को स्थायी समझौते में बदलने की कोशिशें नाकाम होने के बाद अमेरिका ने सैन्य दबाव बढ़ाने का फैसला किया। अमेरिका के इस एक्शन पर ईरान ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी सेना ने धमकी दी है कि यदि उनके बंदरगाहों को रोका गया, तो फारस और ओमान की खाड़ी का कोई भी बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेगा। ईरान का कहना है कि सुरक्षा या तो सबके लिए होगी या किसी के लिए भी नहीं। फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीति के जरिए इस सैन्य टकराव को टाला जा सकेगा या क्षेत्र एक बड़े संघर्ष की ओर बढ़ेगा।
हरियाणा की सियासत में बड़ा बदलाव, विधानसभा सीटें बढ़कर 119
15 Apr, 2026 08:06 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। केंद्र सरकार ने लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को एक तिहाई यानी 33 फीसदी आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसके लिए एक साथ तीन विधेयक लाए जा रहे हैं। इसमें एक विधेयक परिसीमन आयोग के गठन से जुड़ा है। जिसका उद्देश्य सीटों व चुनावी क्षेत्र की सीमाओं का नए सिरे से निर्धारण करना है। परिसीमन के बाद ही महिला आरक्षण को लागू किया जा सकेगा। नए परिसीमन के तहत राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़कर 850 हो जाएगी। इनमें से 815 सीटें राज्यों में और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों में होंगी। अभी लोकसभा में 543 सीटें हैं। हरियाणा की भी लोकसभा की सीटें 10 से बढ़कर 15 हो जाएंगी।
अभी लोकसभा की हैं 10 सीटें
सीटों के मौजूदा बंटवारे को देखें तो हरियाणा के पास लोकसभा की कुल 543 में से 1.89 फीसदी यानी 10 सीटें हैं। अगर 815 सदस्यों वाली लोकसभा में भी यह अनुपात बरकरार रखा जाता है, तो हरियाणा के पास 15 सीटें होंगी, जिनमें से 5 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। वहीं, विधानसभा में अभी 90 सीटें हैं, नए परिसीमन के हिसाब से बढ़कर 119 या 120 सीटें हो जाएंगी। इनमें से 40 सीटें सिर्फ महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यानी लोकसभा हो या विधानसभा में हर तीसरी सीट महिला प्रतिनिधि की होगी। नए परिसीमन व लोकसभा व विधानसभा में 33 फीसदी आरक्षण लागू होने की कार्यवाही को आगे बढ़ाने की बात से पूरे हरियाणा में हलचल तेज हो गई है।
हरियाणा को विधानसभा का नया भवन जरूरी होगा
विधानसभा की सीटें बढ़ने से 2029 से पहले हरियाणा को नए विधानसभा की भी आवश्यकता पड़ेगी। वर्तमान विधानसभा भवन नए परिसीमन के हिसाब से छोटा पड़ेगा। इसमें विधायकों, अधिकारियों और मीडिया के लिए पर्याप्त स्थान और सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, जिससे कार्य संचालन में कई बार कठिनाई आती है। पिछले कई वर्षों से हरियाणा सरकार इस दिशा में नए भवन के निर्माण या वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर प्रयासरत रहे हैं। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता के कार्यकाल के दौरान चंडीगढ़ प्रशासन के साथ नई जमीन के लिए भूमि आदान-प्रदान को लेकर बातचीत लगभग अंतिम चरण तक पहुंच चुकी थी। हालांकि, यह प्रक्रिया पूरी तरह आगे नहीं बढ़ पाई।
फरीदाबाद, गुरुग्राम व सोनीपत में सबसे ज्यादा सीटें बढ़ेगी
नए परिसीमन के हिसाब से गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत व करनाल जिले में विधानसभा की सबसे ज्यादा सीटें बढ़ेंगी। 2011 के जनसंख्या के अनुसार फरीदाबाद जिले की आबादी 18 लाख से ज्यादा है। वहीं, गुरुग्राम की 15 लाख, करनाल की 15 लाख और सोनीपत की साढ़े 14 लाख आबादी है। ये सारे शहर शहरी इलाके हैं। ऐसे में अब हरियाणा में शहरी विधानसभा क्षेत्र ज्यादा होंगे। यानी हरियाणा में राजनीति जो अभी ग्रामीण क्षेत्रों पर केंद्रित है, अब वह शहरी केंद्रित हो सकती है। इससे खासकर क्षेत्रीय दलों के सामने नया संकट आ सकता है। क्षेत्रीय दलों की राजनीति मुख्य रूप से ग्रामीण इलाकों पर ही केंद्रित रहती है।
16 साल तक सत्ता में रहे विक्टर ऑर्बन प्रधानमंत्री चुनाव हारे, ट्रंप-पुतिन के हैं करीबी
15 Apr, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बुडापेस्ट। हंगरी के पीएम विक्टर ऑर्बन चुनाव हार गए हैं। वे 16 साल से सत्ता पर काबिज थे। हंगरी की जनता ने विपक्षी तिस्जा पार्टी के पीटर मग्यार को अपना अगला पीएम चुना लिया है। मग्यार पहले ऑर्बन की पार्टी फिदेस से जुड़े थे, लेकिन पार्टी में भ्रष्टाचार के खिलाफ उनसे अलग हो गए थे। ऑर्बन दुनिया के गिने-चुने नेताओं में हैं, जो डोनाल्ड ट्रम्प, व्लादिमीर पुतिन के करीबी हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस बार के चुनाव में करीब 80फीसदी रिकॉर्ड मतदान हुआ था। नतीजों को बड़े राजनीतिक उलटफेर के रूप में देखा जा रहा है। इसका असर यूरोप और ग्लोबल राजनीति पर पड़ेगा। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने 7 अप्रैल 2026 को हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट का दौरा किया। उनका यह दौरा काफी चर्चा में रहा, क्योंकि यह हंगरी के संसदीय चुनाव से सिर्फ पांच दिन पहले हुआ था और इसे पीएम विक्टर ऑर्बन के समर्थन के तौर पर देखा गया था। अमेरिकी इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब कोई मौजूदा उपराष्ट्रपति दूसरे देश जाकर किसी खास नेता के पक्ष में चुनाव प्रचार करता नजर आया हो।
रिपोर्ट के मुताबिक शुरुआती नतीजों में तिस्जा पार्टी ने 199 में 138 सीटों पर जीत दर्ज की है। वहीं ऑर्बन की फिदेस पार्टी को सिर्फ 55 सीटें ही मिली हैं। तिस्जा को करीब 53फीसदी और फिदेस को करीब 37फीसदी वोट मिले। इन चुनाव नतीजों के बाद बुडापेस्ट में देर रात तक मनाया गया। डेन्यूब नदी किनारे हजारों लोग जमा हुए। कारों के हॉर्न, झंडे और नारेबाजी के बीच जश्न चलता रहा। कई जगह लोगों ने रूसियों घर जाओ जैसे नारे लगाए।
स्कूल में गोलीबारी से दहशत, पूर्व छात्र ने बरसाईं गोलियां
14 Apr, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अंकारा। तुर्किए के एक स्कूल में हुई गोलीबारी की घटना ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी है। एक पूर्व छात्र ने स्कूल के अंदर घुसकर अंधाधुंध फायरिंग कर दी, जिसमें कई लोग घायल हो गए। इस घटना ने एक बार फिर स्कूलों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं और स्थानीय प्रशासन को अलर्ट कर दिया है। यह घटना सिवेरेक जिले के एक स्कूल में हुई, जहां आरोपी ने गलियारे में घुसकर अचानक गोलीबारी शुरू कर दी। अधिकारियों के मुताबिक इस हमले में कुल 16 लोग घायल हुए हैं, जिनमें शिक्षक, छात्र और अन्य कर्मचारी शामिल हैं। घटना के बाद आरोपी ने खुद को गोली मार ली और उसकी मौत हो गई।
हमले में छात्र और शिक्षक भी हुए घायल
घटना में घायल 16 लोगों में चार शिक्षक और 10 छात्र शामिल हैं। इसके अलावा एक पुलिसकर्मी और एक कैंटीन कर्मचारी भी घायल हुए हैं। प्रशासन के अनुसार चार लोगों की हालत मध्यम बताई गई है, जिन्हें शहर के बड़े अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि बाकी का इलाज स्थानीय अस्पताल में चल रहा है।
आरोपी स्कूल का ही पूर्व छात्र था
अधिकारियों ने बताया कि हमलावर उसी स्कूल का पूर्व छात्र था, जिसने सिर्फ 9वीं कक्षा तक वहां पढ़ाई की थी। बाद में वह ओपन स्कूल में चला गया था। वर्ष 2007 में जन्मे इस युवक ने पुलिस द्वारा पकड़ने की कोशिश के दौरान आत्महत्या कर ली।
प्रशासन ने स्कूल को खाली कराया
घटना के तुरंत बाद प्रशासन ने पूरे स्कूल को खाली करा दिया और इलाके को सुरक्षित कर लिया। तुर्की के सानलिउरफा प्रांत के गवर्नर हसन सिल्दाक ने अस्पताल पहुंचकर घायलों से मुलाकात की और स्थिति की जानकारी ली।
घटना की जांच में क्या आया सामने
प्रशासन ने इस मामले की जांच कई स्तरों पर शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था। मुख्य अभियोजक कार्यालय इस मामले की न्यायिक जांच करेगा, जबकि प्रशासनिक जांच भी जारी है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना के बाद स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। हालांकि प्रशासन ने कहा कि सभी जरूरी सुरक्षा उपाय किए गए थे, लेकिन इस तरह की घटनाएं फिर भी हो सकती हैं। सरकार ने आश्वासन दिया है कि पूरी सच्चाई सामने लाई जाएगी और जिम्मेदारियों को तय किया जाएगा।
कर्ज संकट गहराया: यूएई की पाकिस्तान से 3 अरब डॉलर लौटाने की सख्त अपील
14 Apr, 2026 04:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों और विदेशी कर्ज के चौतरफा दबाव के बीच पाकिस्तान की आर्थिक चुनौतियां एक बार फिर चरम पर पहुंच गई हैं। देश के विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने की जद्दोजहद के बीच संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने पाकिस्तान को दिए गए 3 अरब डॉलर के कर्ज की पूरी अदायगी की मांग कर दी है। पिछले सात वर्षों में यह पहला मौका है जब यूएई ने कर्ज चुकाने की अवधि को आगे बढ़ाने या मोहलत देने से साफ इनकार कर दिया है। इस अप्रत्याशित मांग ने शहबाज शरीफ सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं और देश के बाहरी वित्तीय सुरक्षा कवच पर गंभीर संकट पैदा कर दिया है।
वाशिंगटन में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और वर्ल्ड बैंक की बैठकों के दौरान वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने स्वीकार किया कि यूएई के साथ कर्ज अदायगी की समय सीमा बढ़ाने पर सहमति नहीं बन पाई है। इस कमी को पूरा करने के लिए अब पाकिस्तान वाणिज्यिक विकल्पों और अन्य देशों से नए कर्ज लेने पर विचार कर रहा है। हालांकि, वित्त मंत्री ने दावा किया कि मार्च के अंत तक पाकिस्तान के पास 16.4 अरब डॉलर का मुद्रा भंडार था, जो तीन महीने के आयात के लिए पर्याप्त है। उन्होंने भरोसा जताया कि पाकिस्तान अपने कर्जदाताओं का पैसा चुकाने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए वैकल्पिक संसाधनों का इंतजाम किया जा रहा है।
अपनी आर्थिक स्थिति को संभालने के लिए पाकिस्तान अब चार साल के अंतराल के बाद ग्लोबल बॉन्ड मार्केट में उतरने की तैयारी कर रहा है। सरकार जल्द ही यूरोबॉन्ड, इस्लामिक सुकुक और पांडा बॉन्ड जारी करने की योजना बना रही है। विशेष रूप से, चीनी मुद्रा युआन में कर्ज लेने के लिए पांडा बॉन्ड जारी किए जाएंगे, जिसे एशियन डेवलपमेंट बैंक का समर्थन प्राप्त होगा। इसका शुरुआती लक्ष्य 25 करोड़ डॉलर रखा गया है, जिसे बाद में 1 अरब डॉलर तक बढ़ाया जाएगा।
दूसरी ओर, पाकिस्तान को उम्मीद है कि आईएमएफ जल्द ही 7 अरब डॉलर के बेलआउट प्रोग्राम की अगली किश्त को मंजूरी दे देगा, जिससे देश को लगभग 1.3 अरब डॉलर की तत्काल राहत मिल सकेगी। फिलहाल सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह तेल संकट के बावजूद आईएमएफ से मौजूदा प्रोग्राम की रकम बढ़ाने की मांग नहीं कर रही है। कुल मिलाकर, पाकिस्तान इस समय एक ऐसे दोराहे पर खड़ा है जहां उसे पुराने कर्जों को चुकाने के लिए नए और महंगे कर्ज लेने पड़ रहे हैं। वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति में बाधा और मध्य पूर्व के तनाव ने इस्लामाबाद की राह को और भी कठिन बना दिया है।
मध्यस्थता के प्रयासों से अमेरिका-ईरान बातचीत की वापसी की उम्मीद, कई देश सक्रिय
14 Apr, 2026 03:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई हालिया उच्च स्तरीय वार्ता के बेनतीजा रहने के बाद, दोनों देश एक बार फिर मेज पर आमने-सामने बैठने की तैयारी कर रहे हैं। हालिया अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को कम करने और एक स्थायी युद्धविराम समझौते पर पहुंचने के उद्देश्य से दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे राजनयिक संपर्क फिर से सक्रिय हो गए हैं। इस महीने की शुरुआत में हुआ अस्थायी युद्धविराम जल्द ही समाप्त होने वाला है, जिससे पहले एक ठोस समाधान खोजने का दबाव दोनों पक्षों पर बना हुआ है।
रिपोर्टों के मुताबिक, इस्लामाबाद वार्ता विफल होने के बावजूद दोनों ही देशों ने संकेत दिए हैं कि बातचीत के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पाकिस्तान से विदा होते समय स्पष्ट किया था कि उन्होंने ईरान के सामने वाशिंगटन का अंतिम और सर्वोत्तम प्रस्ताव रख दिया है। हालांकि, ईरानी पक्ष ने उन शर्तों को तत्काल स्वीकार नहीं किया, जिसके कारण वार्ता का पहला दौर बिना किसी ठोस समझौते के समाप्त हो गया। अब चर्चा है कि दूसरे चरण की वार्ता भी इस्लामाबाद में ही आयोजित की जा सकती है, जहां पाकिस्तान मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। वर्तमान में पाकिस्तान के अधिकारी दोनों देशों के निरंतर संपर्क में हैं ताकि अस्थायी सीजफायर की अवधि समाप्त होने से पहले किसी स्थायी शांति समझौते पर मुहर लग सके। हालांकि, वाशिंगटन की सख्त शर्तों और तेहरान के अपने रुख पर अड़े रहने के कारण चुनौतियां बरकरार हैं। आने वाले कुछ दिन वैश्विक राजनीति और क्षेत्रीय शांति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं, क्योंकि इसी पर तय होगा कि यह कूटनीतिक प्रयास युद्ध को रोकने में कितने सफल साबित होते हैं। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोमवार को इस संबंध में सकारात्मक संकेत देते हुए कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच अगले दौर की वार्ता जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद यह पहला मौका था जब दोनों देशों के शीर्ष अधिकारियों ने सीधे तौर पर बातचीत में हिस्सा लिया। आसिफ ने संसद भवन के बाहर मीडिया से बात करते हुए कहा कि पिछले दौर की बातचीत के बाद एक तरह का संतोष है क्योंकि अब तक कोई नकारात्मक घटनाक्रम सामने नहीं आया है। उन्होंने इसे एक रचनात्मक दिशा में बढ़ता कदम बताया है।
सांस्कृतिक प्रसारण पर बवाल: पाकिस्तान में टीवी चैनल को मिला नोटिस
14 Apr, 2026 02:27 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। दिग्गज भारतीय गायिका आशा भोसले के निधन के बाद उन्हें श्रद्धांजलि देना पड़ोसी देश पाकिस्तान के एक निजी समाचार चैनल को भारी पड़ गया है। पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक प्राधिकरण ने चैनल को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए स्पष्टीकरण मांगा है कि उसने अपनी रिपोर्टिंग के दौरान भारतीय सामग्री का प्रसारण क्यों किया। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब पूरी दुनिया संगीत जगत की इस महान हस्ती को याद कर रही है।
नियामक संस्था द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि पाकिस्तान में भारतीय कंटेंट का प्रसारण पूरी तरह प्रतिबंधित है। नोटिस में पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय के 2018 के उस फैसले का हवाला दिया गया है, जिसमें भारतीय फिल्मों, गानों और अन्य सामग्री के प्रसारण पर रोक लगाई गई थी। प्राधिकरण के अनुसार, चैनल ने आशा भोसले की मृत्यु की खबर दिखाते समय उनके गानों और फिल्मों के दृश्यों का उपयोग कर अदालत के आदेशों का जानबूझकर उल्लंघन किया है। इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए चैनल के प्रबंध निदेशक ने इसे परंपराओं के विपरीत बताया। उन्होंने एक पोस्ट में कहा कि महान कलाकारों की मृत्यु पर उनके कार्यों को याद करना और उनकी कला की सराहना करना हमेशा से पत्रकारिता और समाज की परंपरा रही है। उन्होंने तर्क दिया कि आशा भोसले जैसी कालजयी गायिका के योगदान को देखते हुए उनके यादगार गीतों को साझा करना स्वाभाविक था, लेकिन नियामक ने इसे नियमों का उल्लंघन माना।
गौरतलब है कि आशा भोसले का रविवार को मुंबई के एक अस्पताल में 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। सोमवार को मुंबई के शिवाजी पार्क श्मशान घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। आठ दशकों लंबे अपने करियर में लगभग 12,000 गीतों को आवाज देने वाली इस गायिका को अंतिम विदाई देने के लिए राजनीति और सिनेमा जगत की तमाम बड़ी हस्तियां मौजूद रहीं। विडंबना यह है कि जहां पूरी दुनिया उनके संगीत का जश्न मना रही है, वहीं सीमा पार उनके गीतों को प्रसारित करना एक कानूनी अपराध बन गया है। यह घटना दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों में बढ़ती कड़वाहट और कड़े प्रतिबंधों को उजागर करती है।
होर्मुज तनाव बढ़ा: चीन ने अमेरिका से कहा—हमारे व्यापार में दखल न दे
14 Apr, 2026 01:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। होर्मुज के बहाने ईरान को चारों तरफ से अमेरिका घेरने में लगा हुआ है। इसी घेराबंदी के चलते उसने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी कर दी। इससे चीन भड़क गया है और अमेरिका को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि हमारे काम में किसी भी तरह दखल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चीन का यह बयान ऐसे समय पर सामने आया है, जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से चीन के जहाजों को वापस लौटना पड़ा। पाकिस्तान में हुई ईरान के साथ वार्ता फेल होने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाकेबंदी के आदेश दिए थे। बता दें कि अमेरिका-ईरान वार्ता के विफल रहने और नाकेबंदी की घोषणा के बाद तेल कीमतों में तेज उछाल देखा गया। ब्रेंट क्रूड 101.88 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी क्रूड 104.69 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज पर तनाव की आशंका के चलते दुनिया के एनर्जी मार्केट में अस्थिरता बनी रह सकती है।
चीन के रक्षा मंत्री डोंग जुन ने कहा कि उनका देश क्षेत्र में शांति और स्थिरता के पक्ष में है, लेकिन वह ईरान के साथ अपने ऊर्जा और व्यापार समझौतों का सम्मान करेगा और अपने हितों में किसी बाहरी दखल को स्वीकार नहीं करेगा। चीन ने इस बात पर जोर दिया है कि स्ट्रेट पर ईरान का नियंत्रण है और यह जलमार्ग चीन के लिए खुला रहेगा। उन्होंने कहा, हमारे जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पानी में आ और जा रहे हैं। ईरान के साथ हमारे व्यापार और ऊर्जा के समझौते हैं। हम उन समझौतों का सम्मान करेंगे और उन्हें निभाएंगे, और हम उम्मीद करते हैं कि दूसरे हमारे मामलों में दखल नहीं देंगे।
स्पेन,आस्ट्रेलिया जैसे देशों में नाराजगी
स्पेन की रक्षा मंत्री मार्गरीटा रोब्लेस ने नाकेबंदी की चेतावनी को बेमतलब करार देते हुए कहा कि यह संघर्ष पहले ही दुनिया को एक खतरनाक स्थिति में ले जा चुका है। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने कहा कि उन्हें नाकेबंदी में शामिल होने के लिए कोई अनुरोध नहीं मिला है और जलमार्ग सभी देशों के लिए खुला रहना चाहिए।
ईरान ने कहा तो ध्वस्त कर देंगे बंदरगाह
वहीं दूसरी तरफ जवाब में ईरान ने फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के सभी बंदरगाहों को निशाना बनाने की धमकी दी। इससे दोनों पक्षों के बीच युद्ध-विराम के विफल होने और लड़ाई फिर से छिड़ने की आशंका बढ़ गई है। समुद्री सुरक्षा की निगरानी करने वाली यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस एजेंसी ने नाविकों के लिए एक नोटिस जारी किया, जिसमें कहा गया है कि नाकेबंदी में बंदरगाहों और ऊर्जा बुनियादी ढांचे सहित पूरी ईरानी तटरेखा शामिल है। इसमें कहा गया है कि गैर-ईरानी ठिकानों से आने वाले या वहां जाने वाले जहाजों के लिए स्ट्रेट से गुजरने पर प्रतिबंध नहीं होने की खबरें हैं, लेकिन क्षेत्र में जहाजों को सैन्य उपस्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
होर्मुज संकट गहराया: अमेरिकी दादागीरी से वैश्विक तेल आपूर्ति पर खतरे के बादल
14 Apr, 2026 12:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा के बाद अमेरिकी नौसेना सोमवार से ही इस सामरिक जलमार्ग पर ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले और वहां से आने वाले जहाजों की आवाजाही पर रोक लगाएगी। इस फैसले के बाद खाड़ी क्षेत्र में सैन्य संघर्ष की आशंका तेज हो गई है, जिसका सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ सकता है।यूएस सेंट्रल कमांड द्वारा जारी बयान के अनुसार, अमेरिकी बल ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में आने-जाने वाले सभी देशों के जहाजों की नाकेबंदी शुरू कर देंगे। यह आदेश अरब की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के सभी ईरानी बंदरगाहों पर निष्पक्ष रूप से लागू होगा। हालांकि, अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज से गैर-ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले जहाजों को बाधित नहीं किया जाएगा। नाविकों को सलाह दी गई है कि वे अमेरिकी नौसेना के संपर्क में रहें और सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।
यह कड़ा फैसला पाकिस्तान में हुई उस द्विपक्षीय वार्ता के विफल होने के बाद आया है, जिसमें दोनों देश परमाणु हथियारों के मुद्दे पर किसी सहमति पर नहीं पहुंच सके थे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर अपने कड़े रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि ईरानी प्रशासन को पैसा और परमाणु हथियार चाहिए, जिसे अमेरिका किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने अमेरिकी नौसेना को निर्देश दिया है कि वे उन सभी जहाजों की पहचान करें जिन्होंने ईरान को जलमार्ग का टोल भुगतान किया है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि ईरान को भुगतान करने वाले किसी भी जहाज को सुरक्षित आवागमन की अनुमति नहीं दी जाएगी। दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिकी दावे को चुनौती देते हुए इस जलमार्ग पर अपना नियंत्रण होने की बात दोहराई है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड नौसेना ने रविवार को कड़े शब्दों में कहा कि होर्मुज के पास आने वाले किसी भी विदेशी सैन्य जहाज को दृढ़ और बलपूर्वक जवाब दिया जाएगा। ईरान के इस रुख से स्पष्ट है कि वह अमेरिका की नाकेबंदी के आगे झुकने को तैयार नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों सेनाओं के बीच टकराव होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिससे दुनिया के कई देशों में गंभीर तेल संकट पैदा हो जाएगा। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर टिकी हैं, जहां तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है।
हलफनामे में बड़ा दावा, चचेरे भाई पर संपत्ति हड़पने का आरोप
14 Apr, 2026 11:04 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिसार। पूर्व विधायक रेलुराम पूनिया हत्याकांड में उम्रकैद से दंडित और अभी जमानत पर जेल से बाहर सोनिया ने सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में खुद को पीड़ित बताया है। उसने दावा किया कि पैतृक संपत्ति कब्जाने के लिए उसे जानबूझकर इस केस में फंसाया गया। उसके शरीर में वही जहर मिला जिससे अन्य लोगों की मौत हुई थी। सोनिया और उसके पति संजीव को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 9 दिसंबर 2025 को जमानत पर रिहा किया था। इस फैसले के खिलाफ सोनिया के चचेरे भाई जितेंद्र पूनिया ने जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। इस पर 7 अप्रैल को सुनवाई के दौरान अदालत ने सोनिया और संजीव को हलफनामा पेश करने के आदेश दिए थे। जितेंद्र के अधिवक्ता लाल बहादुर खोवाल ने बताया कि अदालत के जरिए शपथ पत्र मिला है। इसमें सोनिया ने खुद को पीड़ित बताया है। सोनिया ने दावा किया कि वह अपने माता-पिता के परिवार की एकमात्र जीवित सदस्य है। सोनिया ने आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता (जितेंद्र) उसे आखिरी सांस तक जेल में रखना चाहता है ताकि वे उसके पिता की करोड़ों की संपत्ति पर कब्जा कर सके। उसने दावा किया कि याचिकाकर्ता असली पीड़ित नहीं है।
जेल में मिला अवॉर्ड
सोनिया ने बताया कि जेल में उसने ब्यूटी पार्लर और सिलाई-कढ़ाई जैसे कोर्स किए हैं। वह रेडियो जॉकी भी बन चुकी हैं और 2021 में तिनका-तिनका बंदिनी अवॉर्ड से सम्मानित की गईं।
क्या था मामला?
वर्ष 2001 में बरवाला के पूर्व विधायक रेलुराम पूनिया (50), उनकी पत्नी कृष्णा देवी (41), बच्चे प्रियंका (14), सुनील (23), बहू शकुंतला (20), पोता लोकेश (4) और दो पोतियां शिवानी (2) व 45 दिन की प्रीति की लितानी गांव के फार्म हाउस में हत्या कर दी गई थी। इस मामले में रेलुराम की छोटी बेटी सोनिया और उसके पति संजीव को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई जिसे 6 अगस्त 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद में बदल दिया था।
कब-कब क्या हुआ?
वर्ष 2004 में हिसार जिला अदालत ने सोनिया और संजीव को फांसी की सजा सुनाई। वर्ष 2007 में सुप्रीम कोर्ट ने इस सजा को बरकरार रखा। 6 अगस्त 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने दोनों की दया याचिका पर फैसला सुनाते हुए फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील करते हुए पूरी जिंदगी जेल में बिताने के आदेश दिए। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 11 दिसंबर 2025 को दोनों को अंतरिम जमानत दी और 16 दिसंबर 2025 को करनाल जेल से रिहा कर दिया।
क्यूबा के राष्ट्रपति Miguel Díaz-Canel बोले — सैन्य दखल या सत्ता परिवर्तन की कोशिश पर देंगे जवाब, ट्रंप को सीधा संदेश
14 Apr, 2026 10:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हवाना। कैरेबियन देश क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनेल ने हाल ही में अमेरिका को कड़ी चेतावनी देकर स्पष्ट कहा कि यदि उनके देश पर किसी भी प्रकार का सैन्य हमला या सत्ता परिवर्तन की कोशिश हुई, तब क्यूबा उसका मजबूती से जवाब देगा। यह बयान उन्होंने अमेरिकी मीडिया चैनल को दिए साक्षात्कार के दौरान दिया।
राष्ट्रपति ने कहा कि क्यूबा पर किसी भी तरह के आक्रमण, “सर्जिकल ऑपरेशन” या नेतृत्व को हटाने के प्रयास का कोई वैध आधार नहीं है। उन्होंने दो टूक कहा कि यदि ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है, तब क्यूबा पीछे नहीं हटेगा और अपने देश की रक्षा पूरी ताकत से करेगा।
डियाज़-कैनेल ने अमेरिका पर “शत्रुतापूर्ण नीति” अपनाने का आरोप लगाकर कहा कि अमेरिका को क्यूबा के राजनीतिक ढांचे में बदलाव की मांग करने का नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि क्यूबा और अमेरिका के बीच बातचीत की संभावना बनी हुई है, लेकिन यह बिना किसी शर्त के और समानता के आधार पर होनी चाहिए। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि क्यूबा किसी भी बाहरी दबाव में अपने राजनीतिक सिस्टम में बदलाव स्वीकार नहीं करेगा।
यह बयान तब आया है जब दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है, हालांकि कुछ स्तर पर संवाद की प्रक्रिया भी चल रही है। क्यूबा सरकार लंबे समय से अपनी आर्थिक समस्याओं के लिए अमेरिकी प्रतिबंधों और ऊर्जा नाकेबंदी को जिम्मेदार ठहराती रही है। राष्ट्रपति के अनुसार, इन प्रतिबंधों के कारण देश की स्वास्थ्य सेवाओं, सार्वजनिक परिवहन और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ा है।
देश की ऊर्जा स्थिति भी बेहद चुनौतीपूर्ण बताई गई है। क्यूबा अपनी जरूरत का केवल लगभग 40 प्रतिशत ईंधन ही खुद उत्पादन कर पाता है। हाल ही में वेनेजुएला से तेल आपूर्ति रुकने के बाद संकट और बढ़ गया। इसके बाद रूस से एक टैंकर तेल पहुंचा, जिससे कुछ राहत मिली, और आगे और आपूर्ति की उम्मीद जताई गई है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा नेतृत्व की आलोचना कर भ्रष्ट बताया और कहा कि बाहरी तेल आपूर्ति से स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। इस पर क्यूबा के राष्ट्रपति ने गंभीर चेतावनी के रूप में लिया और देश की सुरक्षा, संप्रभुता और राजनीतिक व्यवस्था की रक्षा के लिए तैयार रहने की बात दोहराई।
इलाज का इंतजार घटेगा, PGI में डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने का फैसला
14 Apr, 2026 09:52 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। पीजीआई में सुपर-स्पेशियलिटी कोर्सेज की सीटें बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। इस फैसले के तहत कुल 68 सीटों में इजाफा किया जाएगा जिससे मरीजों को बेहतर और समय पर इलाज मिल सकेगा। आजकल हृदय, मस्तिष्क, लीवर और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। इन जटिल बीमारियों के इलाज के लिए उच्च प्रशिक्षित सुपर-स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की भारी जरूरत है।
पीजीआई प्रशासन के अनुसार स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी से स्वीकृति मिलने के बाद अब आगे की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। सीटें बढ़ने से न केवल विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ेगी बल्कि ओपीडी, जांच और सर्जरी के लिए लंबा इंतजार भी कम होगा। प्रस्ताव के तहत न्यूरोसर्जरी में 6, कार्डियोलॉजी में 12, न्यूरोलॉजी में 14, हेपेटोलॉजी में 7 और क्लिनिकल हेमेटोलॉजी में 6 सीटें बढ़ाई जाएंगी। इसके अलावा पीडियाट्रिक क्रिटिकल केयर में 9, प्लास्टिक सर्जरी में 4 और कार्डियक एनेस्थीसिया व इंटेंसिव केयर में 10 सीटों का इजाफा किया जाएगा। पीजीआई में रोजाना 10 से 12 हजार मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण लंबी कतारें और सर्जरी के लिए महीनों की वेटिंग आम है। ऐसे में सीटों में यह बढ़ोतरी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
सुपर-स्पेशलिस्ट की बढ़ती जरूरत
विशेषज्ञों के अनुसार हृदय, मस्तिष्क, लीवर और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इन बीमारियों के इलाज के लिए उच्च प्रशिक्षित सुपर-स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की आवश्यकता होती है। सीटें बढ़ने से आने वाले वर्षों में अधिक विशेषज्ञ तैयार होंगे जिससे इलाज की गुणवत्ता और पहुंच दोनों बेहतर होंगी।
मरीजों को होगा सीधा फायदा
इस फैसले से ओपीडी में भीड़ कम होगी और मरीजों को जांच व सर्जरी की तारीख जल्दी मिल सकेगी। गंभीर मरीजों को समय पर विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध होगा, जिससे उनकी स्वास्थ्य स्थिति में सुधार की संभावनाएं बढ़ेंगी। पीजीआई का यह कदम ट्राइसिटी ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर भारत के मरीजों के लिए राहत भरा साबित होगा और स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती देगा।
बातचीत बेनतीजा, Middle East बना फिर से जंग का मैदान
14 Apr, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ईरान संग खुलकर आया चीन, ट्रंप को दी वॉर्निंग-हमारे मामले में दखल न दें..
होर्मुज के चक्रव्यूह में अमेरिका के सामने चीन
अमेरिका को ईरानी पोर्ट पर हमला न करने की चेतावनी, ईरान बोला- हमारे पोर्ट को निशाना बनाया तो इलाके का कोई बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेगा
तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर से बढ़ गया है। पाकिस्तान में हुई शांति वार्ता फेल होने के बाद दोनों ही एक-दूसरे पर निशाना साधते नजर आ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जहां होर्मुज पर नाकाबंदी का ऐलान किया है, तो वहीं ईरान ने पलटवार करते हुए तेल को लेकर वार्निंग दे डाली है। ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि अगर उसके बंदरगाहों को निशाना बनाया गया, तो फारस की खाड़ी और ओमान सागर में कोई भी पोर्ट सुरक्षित नहीं रहेगा। ईरान की सेना और रिवोल्यूशनरी गाड्र्स ने कहा कि क्षेत्र की समुद्री सुरक्षा सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है। अगर सुरक्षा सबके लिए नहीं होगी, तो किसी के लिए भी नहीं होगी। इस बीच ट्रंप की ओर से चीन को दी गई टैरिफ धमकी पर अब ड्रैगन ने भी अटैक किया है और ईरान के साथ खुलकर खड़ा हो गया है। चीन ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा है कि, हमारे मामले में दखल न दें। यानी अब होर्मुज के चक्रव्यूह में अमेरिका के सामने चीन खड़ा हो गया है।
डोनाल्ड ट्रंप ईरान को लेकर धड़ाधड़ एक्शन लेते नजर आ रहे हैं और उनके ज्यादातर फैसलों से न सिर्फ ईरान, बल्कि चीन भी प्रभावित हो रहा है। चीन द्वारा ईरान को सैन्य हथियारों की मदद करने से जुड़े इंटेल के बाद बीते दिनों डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया था और कहा था कि चीन द्वारा ईरान की सैन्य मदद करने से जुड़े सवाल पर ट्रंप ने कहा था कि, इसके परिणाम गंभीर होंगे। मुझे शक है कि वे ऐसा करेंगे, अगर हमने उन्हें ऐसा करते हुए पकड़ लिया, तो उन पर 50 प्रतिशत का टैरिफ लगेगा, जो कि सचमुच एक बहुत बड़ी रकम है।
हमारे जहाज रोका तो होंगे गंभीर परिणाम
अब चीन ट्रंप की धमकियों के बीच खुलकर ईरान के साथ खड़ा नजर आ रहा है। ट्रंप की होर्मुज पर नाकाबंदी की घोषणा के बाद ड्रैगन ने ईरान का समर्थन किया है और अमेरिका को बड़ी चेतावनी भी दी है। ट्रंप के कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए चीनी रक्षा मंत्री डोंग जून ने कहा कि, बीजिंग दुनिया में शांति और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है और मध्य पूर्व की स्थिति पर नजर रख रहा है। उन्होंने आगे सख्त लहजे में कहा कि, हमारे जहाज होर्मुज स्ट्रेट में लगातार आ-जा रहे हैं। ईरान के साथ हमारे व्यापारिक और ऊर्जा समझौते हैं। हम उनका सम्मान करेंगे और उम्मीद करते हैं कि कोई और हमारे मामलों में दखल न दे। होर्मुज पर ईरान का कंट्रोल है और यह हमारे लिए खुला है।
ट्रंप के निशाने पर है चीन
अमेरिका की ईरान से जंग हो या फिर वेनेजुएला में स्ट्राइक, कहीं न कही निशाने पर चीन रहा है। यही वजह है कि चीन अब खुलकर ईरान के समर्थन में खड़ा हो गया है और ऐसा हो भी क्यों न आखिर उसकी एनर्जी सुरक्षा जो खतरे में है। पहले वेनेजुएला के तेल पर कंट्रोल करके ट्रंप ने चीन पर चोट की थी, क्योंकि वहां के तेल का चीन प्रमुख खरीदार था। तो वहीं ईरानी तेल का भी सबसे बड़ा ग्राहक चीन ही है, तो ट्रंप ने ईरान पर अटैक कर एक तीर से दो निशाने साधे हैं।
दक्षिण लेबनान में इजराइली सेना का ग्राउंड ऑपरेशन शुरू
इजराइल की सेना ने सोमवार को कहा कि उसने दक्षिण लेबनान के बिन्त जबील इलाके में ग्राउंड ऑपरेशन शुरू कर दिया है। सेना के मुताबिक, यह खास टारगेट्स को निशाना बनाकर हमला किया जा रहा है। वहीं, ईरान और पाकिस्तान का कहना है कि पिछले हफ्ते जो अस्थायी सीजफायर हुआ था, उसमें लेबनान भी शामिल है। लेकिन इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने इस दावे को खारिज कर दिया है। उन्होंने साफ कहा कि लेबनान में कोई सीजफायर नहीं है और इजराइल हिजबुल्लाह पर पूरी ताकत से हमला जारी रखेगा।
ईरान के प्रमुख बंदरगाह अमेरिकी नाकेबंदी की जद में
अमेरिका की नाकेबंदी के तहत ईरान के सभी प्रमुख बंदरगाह निशाने पर होंगे। इसमें फारस की खाड़ी के साथ ओमान सागर में स्थित बंदरगाह भी शामिल हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, नाकेबंदी ईरान के बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों से आने-जाने वाले सभी देशों के जहाजों पर लागू होगी। ईरान का सबसे बड़ा बंदरगाह बंदर अब्बास है, जो खाड़ी के मुहाने पर स्थित है और हर साल करीब 3.7 करोड़ टन माल व लगभग 10 लाख कंटेनर हैंडल करता है। इस बंदरगाह से पेट्रोलियम उत्पाद, स्टील, क्रोम, खाद, अनाज और निर्माण उपकरण का बड़ा व्यापार होता है। इसके अलावा बंदर इमाम खुमैनी ईरान का आधुनिक बंदरगाह है, जो हर साल 1.6 करोड़ टन से ज्यादा कार्गो संभालता है और पेट्रोकेमिकल निर्यात का प्रमुख केंद्र है।
जापान ने होर्मुज में माइंसवीपर भेजने पर फैसला टाला
जापान ने होर्मुज स्ट्रेट में माइंसवीपर भेजने के फैसले को फिलहाल टाल दिया है। सरकार ने कहा है कि सेल्फ-डिफेंस फोर्स की तैनाती पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। हालात पर नजर बनाए हुए है और आगे का फैसला स्थिति के अनुसार लिया जाएगा। जापान का कहना है कि फिलहाल सबसे जरूरी है क्षेत्र में तनाव कम करना और समुद्री रास्तों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना। साथ ही, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने और व्यापक समझौते की दिशा में प्रगति पर भी जोर दिया गया है। माइंसवीपर ऐसे खास नौसैनिक जहाज होते हैं, जो समुद्र में बिछी बारूदी सुरंगों को हटाकर जहाजों के लिए रास्ता सुरक्षित बनाते हैं। ये जहाज तकनीक की मदद से पानी के अंदर छिपी माइंस का पता लगाते हैं और उन्हें निष्क्रिय या नष्ट कर देते हैं।
14 प्लॉट आवंटन में गड़बड़ी, हुड्डा के खिलाफ केस की मंजूरी
14 Apr, 2026 08:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने पंचकूला के इंडस्ट्रियल एरिया में 14 औद्योगिक प्लॉटों के आवंटन से जुड़े सीबीआई मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी है। ये आवंटन वर्ष 2013 में किए गए थे, जब भूपेंद्र हुड्डा मुख्यमंत्री थे। सीबीआई ने फरवरी में हरियाणा सरकार से कानूनी कार्रवाई की मंजूरी मांगी थी। हुड्डा के साथ-साथ राज्य सरकार ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के पूर्व अधिकारियों—पूर्व मुख्य प्रशासक डीपीएस नागल, पूर्व मुख्य वित्त नियंत्रक एससी कंसल और पूर्व डिप्टी सुपरिंटेंडेंट बीबी तनेजा के खिलाफ भी अभियोजन की मंजूरी दी है। अभियोजन की अनुमति मिलने के बाद सीबीआई अब हुड्डा, पूर्व सरकारी अधिकारियों और प्लॉट आवंटियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करेगी। इससे पहले इसी केस में ईडी ने 2021 में ही हुड्डा और प्लॉट आवंटियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। ईडी ने सीबीआई की एफआईआर के आधार पर मामला दर्ज किया था। ईडी ने हुड्डा को मुख्य साजिशकर्ता बताया है। ईडी ने पंचकूला इंडस्ट्रियल प्लॉट आवंटन मामले में अपनी शिकायत में हुड्डा को मुख्य साजिशकर्ता बताया है।
ईडी के अनुसार, हुड्डा ने अवैध आवंटन की योजना बनाई और चयनित आवंटियों को लाभ पहुंचाने के लिए पात्रता मानदंड में बदलाव किया। जांच एजेंसी ने यह भी दावा किया कि कई आवंटी हुड्डा के परिचित या उनके करीबी लोगों से जुड़े थे। रेनू हुड्डा और नंदिता हुड्डा उनके पैतृक गांव सांघी से थीं। कंवर प्रीत सिंह संधू उनके स्कूल मित्र के बेटे थे। मोना बेरी उनके ओएसडी की बहू थीं। डॉ. गणेश दत्त रतन उनके साथ टेनिस खेलते थे। प्रदीप कुमार उनके निजी सचिव के बेटे थे। इसके अलावा, अन्य आवंटियों के भी हुड्डा से प्रत्यक्ष या परोक्ष संबंध बताए गए हैं।
आवंटन में गड़बड़ी और नुकसान
ईडी के मुताबिक 14 प्लॉटों के लिए कुल 582 आवेदन आए थे। कई चयनित आवंटी आर्थिक रूप से कमजोर और अनुभवहीन थे। प्लॉट 6,400 प्रति वर्ग मीटर की दर से दिए गए, जबकि बाजार दर इससे कई गुना अधिक थी। जांच में सामने आया कि लगभग 30.34 करोड़ मूल्य के प्लॉट सिर्फ 7.85 करोड़ में बेच दिए गए, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।
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