ख़बर
तनाव के बीच चीन का बयान, भारत के साथ सहयोगी संबंधों पर दिया जोर
8 Jun, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। एशियाई महाद्वीप के दो सबसे बड़े पड़ोसी देशों के बीच कूटनीतिक रिश्तों को लेकर चीन के एक शीर्ष राजनयिक ने बेहद सकारात्मक रुख व्यक्त किया है। चीनी विदेश मंत्रालय का मानना है कि बीजिंग और नई दिल्ली को इस बुनियादी रणनीतिक सोच पर मजबूती से आगे बढ़ना चाहिए कि दोनों देश एक-दूसरे के धुर विरोधी या प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि सहयोगात्मक साझेदार हैं। इसके साथ ही, दोनों महाशक्तियों का तीव्र विकास एक-दूसरे के लिए नए आर्थिक अवसरों के द्वार खोलता है, न कि किसी प्रकार की सुरक्षा चुनौती या खतरा पैदा करता है। चीनी विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता लिन जियान ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया ब्रीफिंग के दौरान द्विपक्षीय संबंधों पर यह महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया दी। यह रणनीतिक बयान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की उस हालिया टिप्पणी के बाद आया है, जिसमें उन्होंने वैश्विक मंच पर रूस के भारत और चीन दोनों के साथ बेहद घनिष्ठ और मजबूत संबंधों का विशेष उल्लेख किया था। चीनी प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में भारत-चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर जमीनी स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में और स्थिर बनी हुई है तथा दोनों देशों के सैन्य व कूटनीतिक अधिकारियों के बीच बातचीत के रास्ते खुले हुए हैं।
रणनीतिक परिप्रेक्ष्य से आपसी मतभेदों को सुलझाने और सहयोग बढ़ाने पर जोर
अंतरराष्ट्रीय प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए चीनी प्रवक्ता लिन जियान ने दोनों विकासशील देशों के नीति-निर्माताओं को पुरानी कड़वाहट भुलाकर आगे बढ़ने की वसीहत दी। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों की यह प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वे आपसी द्विपक्षीय संबंधों को तात्कालिक विवादों के बजाय रणनीतिक ऊंचाई और दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य (लॉन्ग टर्म विजन) से देखें और उनका बेहतर प्रबंधन करें। बीजिंग का मानना है कि सीमा गतिरोध को पीछे छोड़कर दोनों देशों को व्यापारिक और सांस्कृतिक मोर्चे पर आपसी विश्वास का विस्तार करना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐतिहासिक मतभेदों को उचित और शांतिपूर्ण वार्ता के माध्यम से संभाला जाना चाहिए ताकि दुनिया की दो सबसे बड़ी आबादियों वाले देशों के मध्य संबंधों के सुचारू, सुदृढ़ और निरंतर विकास को एक नई गति प्रदान की जा सके।
भारत-पाकिस्तान विवाद पर चीन का नजरिया और त्रिपक्षीय वैश्विक अर्थव्यवस्था का महत्व
इस्लामाबाद और बीजिंग की सदाबहार दोस्ती को लेकर नई दिल्ली द्वारा समय-समय पर जताई जाने वाली गंभीर चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए चीनी प्रवक्ता ने एक संतुलित रुख अपनाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि चीन हमेशा से यह चाहता है कि भारत और पाकिस्तान दोनों पड़ोसी देश किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप के बिना आपसी संवाद, कूटनीतिक विमर्श और द्विपक्षीय परामर्श के माध्यम से अपने सभी जलते विवादों को ठीक से सुलझाएं, ताकि दक्षिण एशियाई क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति, सुरक्षा और स्थिरता का माहौल कायम रह सके। वहीं, भारत, चीन और रूस के त्रिपक्षीय गठजोड़ पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने तीनों देशों को दुनिया की सबसे तेजी से उभरती हुई आर्थिक महाशक्ति बताया। उन्होंने कहा कि इन तीनों राजधानियों के बीच मैत्रीपूर्ण और मजबूत संबंध बने रहना न केवल उनके अपने राष्ट्रीय हितों के अनुकूल है, बल्कि वैश्विक शांति के संतुलन के लिए भी एक अनिवार्य आवश्यकता है।
रूसी राष्ट्रपति पुतिन द्वारा भारतीय और चीनी नेतृत्व की सराहना और हस्तक्षेप न करने की सलाह
इससे पूर्व, रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में दुनिया की प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के प्रमुखों के साथ एक अनौपचारिक और विस्तृत संवाद के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की कार्यशैली और राजनीतिक इच्छाशक्ति की जमकर तारीफ की थी। पुतिन ने स्पष्ट किया था कि मॉस्को की नई दिल्ली और बीजिंग के साथ चली आ रही दशकों पुरानी रणनीतिक साझेदारी पूरी तरह से स्वाभाविक और एक-दूसरे से स्वतंत्र है। भारतीय मीडिया नेतृत्व द्वारा पूछे गए एक सीधे सवाल का जवाब देते हुए पुतिन ने दो टूक शब्दों में कहा था कि भारत और चीन के बीच संबंध अत्यंत संवेदनशील, नाजुक और बहुआयामी हैं, इसलिए किसी भी बाहरी या तीसरे देश को इनके आपसी मामलों में टांग अड़ाने या हस्तक्षेप करने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने पूरा भरोसा जताया कि पीएम मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग इतने सक्षम नेता हैं कि वे सीमा विवाद सहित अपने सभी लंबित द्विपक्षीय मुद्दों का सम्मानजनक समाधान स्वयं तलाश लेंगे। मॉस्को के इस संतुलनकारी रुख से यह साफ हो गया है कि रूस की भारत से बढ़ती नजदीकियां चीन की कीमत पर नहीं हैं और न ही चीन के साथ उसका मजबूत गठबंधन भारत के साथ उसके ऐतिहासिक संबंधों को प्रभावित करता है।
कानून-व्यवस्था पर सवाल, भीड़ के हमले में पांच पुलिसकर्मियों की जान गई
8 Jun, 2026 02:51 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुजफ्फराबाद: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में इस समय हालात बेहद विस्फोटक बने हुए हैं और आम जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। रविवार देर रात एक प्रदर्शनकारी के अंतिम संस्कार के दौरान पाकिस्तानी सेना और स्थानीय लोगों के बीच हुई हिंसक झड़प ने जलती आग में घी का काम किया है। आरोप है कि सुरक्षा बलों ने जनाजे में शामिल आम लोगों पर बेरहमी से बल प्रयोग किया, जिसके बाद पूरे इलाके में तनाव चरम पर पहुंच गया। इस ताजा हिंसा को देखते हुए पाकिस्तानी सेना ने प्रभावित क्षेत्रों को चारों तरफ से पूरी तरह घेर लिया है।
हिंसा में 8 की मौत, इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह ठप
क्षेत्र में भड़की इस ताजा हिंसा में अब तक कुल 8 लोगों की जान जाने की खबर है, जिनमें 5 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। हालात इस कदर बेकाबू हो चुके हैं कि रावलकोट और मुजफ्फराबाद समेत कई संवेदनशील इलाकों में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह ठप कर दिया है ताकि अफवाहों को फैलने से रोका जा सके।
9 जून को महाआंदोलन का ऐलान
यह पूरा बवाल जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के नेतृत्व में हो रहा है, जिसने सरकार के खिलाफ खुला मोर्चा खोल रखा है। संगठन ने आगामी 9 जून को एक ऐतिहासिक महाआंदोलन और बड़े मार्च का ऐलान किया है, जिससे माहौल के और अधिक हिंसक होने की आशंका बढ़ गई है। दूसरी तरफ, सरकार ने इस संगठन पर कड़ा रुख अपनाते हुए आतंकवाद विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की है और इसे अराजकता फैलाने वाला समूह घोषित कर दिया है। हालांकि, कमेटी के नेताओं ने सरकार के इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और इसे आतंकवाद से जोड़ना उनके साथ सरासर अन्याय है।
आरक्षित सीटें हटाने और सस्ती बिजली की मांग
आंदोलन कर रही कमेटी की मुख्य मांग विधानसभा में उन 12 आरक्षित सीटों को पूरी तरह समाप्त करने की है, जो जम्मू-कश्मीर से विस्थापित होकर पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में रहने वाले लोगों के लिए तय की गई हैं। स्थानीय लोगों का साफ मानना है कि इन सीटों के जरिए बाहरी लोग और पाकिस्तान की मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियां यहां की राजनीति को अपनी उंगलियों पर नचाती हैं। इसके अलावा, स्थानीय लोग सस्ती बिजली, आर्थिक सुधारों और मुफ्त स्वास्थ्य सेवाओं जैसी बुनियादी हक की मांगों को लेकर भी लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं।
चौतरफा संकट में घिरी पाकिस्तानी सेना
सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, पीओके में बिगड़ती कानून-व्यवस्था वहां के स्थानीय प्रशासन और पुलिस की गंभीर नाकामी को दर्शाती है। पाकिस्तान इस समय केवल यहीं नहीं, बल्कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी), बलूच विद्रोहियों और अफगान सीमा पर मिल रही बड़ी सुरक्षा चुनौतियों से भी जूझ रहा है। इस वजह से उसके सुरक्षा बलों और संसाधनों को दूसरे मोर्चों पर लगाना पड़ा है, जिससे पीओके की स्थिति पूरी तरह बेकाबू हो गई है।
मुजफ्फराबाद में लॉकडाउन जैसी पाबंदियां
अब बिगड़ते हालात को संभालने के लिए विशेष अर्धसैनिक बलों और रेंजर्स की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात की गई हैं। मुजफ्फराबाद में पूर्ण लॉकडाउन की आशंका के कारण स्थानीय लोग घरों में जरूरी राशन और सामान जमा करने में जुट गए हैं। चप्पे-चप्पे पर सेना की भारी तैनाती और फोन-इंटरनेट बंद होने से आम जनता के बीच भारी असंतोष और खौफ का माहौल बना हुआ है।
बिना समझौते कोई रियायत नहीं, ट्रंप का सख्त संदेश
8 Jun, 2026 01:42 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के संदर्भ में अपनी सरकार के कड़े और स्पष्ट रुख को एक बार फिर दुनिया के सामने रखा है। रविवार को दिए एक बयान में उन्होंने साफ कर दिया है कि उनका प्रशासन ईरान के साथ किसी भी अंतिम समझौते पर पहुंचने से पहले उसकी जब्त की गई संपत्तियों को किसी भी कीमत पर वापस नहीं लौटाएगा। एक प्रमुख समाचार चैनल 'एनबीसी न्यूज' के कार्यक्रम 'मीट द प्रेस' को दिए एक विशेष साक्षात्कार में डोनाल्ड ट्रंप ने दृढ़ता से कहा कि ईरान पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों से किसी भी तरह की राहत तभी संभव है, जब तेहरान भविष्य में होने वाले समझौते के तहत अपनी सभी शर्तों और प्रतिबद्धताओं को पूरी तरह से जमीन पर लागू कर देगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि प्रतिबंधों में ढील देने की चर्चा शुरू करने के लिए भी तेहरान को पहले अपनी नीयत और वादों का ठोस सबूत देना होगा।
ईरान के अच्छे व्यवहार के बाद ही शुरू होगी बातचीत
साक्षात्कार के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि यदि ईरान सही व्यवहार करता है और जिम्मेदारी से आगे कदम बढ़ाता है, तभी अमेरिका उसके साथ औपचारिक तौर पर बातचीत की शुरुआत करेगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे लेबनान को तेहरान के साथ होने वाले किसी भी कम समय या अल्पकालिक समझौते में शामिल करने के लिए कोई दबाव नहीं बना रहे हैं। ट्रंप के अनुसार, हालांकि उन्हें लगता है कि लेबनान के लोग ऐसा देखना पसंद करेंगे, लेकिन वे व्यक्तिगत रूप से इस बात की कोई मांग नहीं कर रहे हैं। अमेरिका की प्राथमिकता इस समय ईरान को उसकी जिम्मेदारियों का अहसास कराने पर टिकी हुई है।
पश्चिम एशिया में शांति के लिए जारी कूटनीतिक प्रयास
पश्चिम एशिया में पिछले कई महीनों से जारी भारी संघर्ष और आसमान छूते सैन्य तनाव के बाद, अब वहां एक स्थायी समाधान सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक कोशिशें बहुत तेज हो गई हैं। इस पूरे मामले में ट्रंप प्रशासन भी अपनी तरफ से एक संभावित और मजबूत शांति समझौते का खाका तैयार करने के प्रयासों में जुटा हुआ है। हालांकि, अमेरिका का यह ताजा और सख्त रुख यह दिखाता है कि वह किसी भी समझौते से पहले ईरान को कोई भी वित्तीय या आर्थिक ढील देकर अपने हाथ कमजोर नहीं करना चाहता, बल्कि वह पूरी तरह से ठोस और सुरक्षित नतीजे चाहता है।
अमेरिका ने दो ईरानी ड्रोन गिराए, ईरान ने सीजफायर उल्लंघन का लगाया आरोप
8 Jun, 2026 12:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच भले ही कागजों पर युद्धविराम (सीजफायर) लागू हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि दोनों देशों के बीच हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में अमेरिकी सेना ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए होर्मुज स्ट्रेट (जलडमरू मध्य) के ऊपर उड़ रहे ईरान के दो ड्रोनों को मार गिराया है। इस ताजा सैन्य कार्रवाई के बाद मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में एक बार फिर से युद्ध का तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना का कहना है कि ये दोनों ईरानी ड्रोन अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात और व्यापारिक जहाजों के लिए एक बड़ा और सीधा खतरा बने हुए थे, जिसके चलते उन्हें हवा में ही नष्ट करना बेहद जरूरी था।
ईरान-अमरीका युद्ध के 100 दिन पूरे, वैश्विक बाजार में हड़कंप
इस बीच, ईरान और अमेरिका के बीच जारी यह भीषण युद्ध अपने 100वें दिन पर पहुंच चुका है, लेकिन फिलहाल इसका कोई स्थायी अंत नजर नहीं आ रहा है। दोनों देशों के बीच बीते 8 अप्रैल को हुआ नाजुक सीजफायर अब पूरी तरह से दबाव में आ गया है, क्योंकि इस अस्थायी युद्धविराम को एक पक्के शांति समझौते में बदलने की तमाम राजनयिक कोशिशें बार-बार नाकाम हो रही हैं। इस लंबे खिंचते जा रहे युद्ध ने जहां एक तरफ वैश्विक बाजार और अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति को बुरी तरह हिलाकर रख दिया है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका में होने वाले आगामी मिडटर्म (मध्यावधि) चुनावों से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भी घरेलू मोर्चे पर राजनीतिक दबाव काफी ज्यादा बढ़ा दिया है।
पाकिस्तानी गृह मंत्री की तेहरान में शांति की बड़ी कोशिश
इस भयानक युद्ध को रोकने और दोनों देशों के बीच फिर से बातचीत शुरू कराने के लिए अब नए सिरे से कूटनीतिक प्रयास शुरू हो गए हैं। इसी सिलसिले में मध्यस्थता की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी खुद तेहरान पहुंच चुके हैं। वह ईरान और अमेरिका के बीच टूटे हुए संवाद को दोबारा जोड़ने की कोशिशों में जुटे हैं। उनके इस दौरे को इसलिए भी बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि वे अपने साथ पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का एक बेहद खास और सीक्रेट संदेश लेकर ईरान के सुप्रीम लीडर के पास पहुंचे हैं। पाकिस्तानी सेना प्रमुख मुनीर इससे पहले इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच सीधे संवाद का एक दौर आयोजित कराकर मध्यस्थ के रूप में बड़ी भूमिका निभा चुके हैं।
मिसाइल हमलों से भड़के खाड़ी देश, ईरान ने दी अमेरिकी उकसावे की दुहाई
इस पूरे शांति प्रयास के बीच तनाव तब और ज्यादा गहरा गया जब शनिवार को ईरान ने अमेरिका के सहयोगी देशों बहरीन और कुवैत पर एक के बाद एक कई मिसाइलें दाग दीं। ईरान की इस अप्रत्याशित सैन्य कार्रवाई से खाड़ी देशों में भारी नाराजगी और गुस्सा फैल गया है। हालांकि, इन हमलों पर सफाई देते हुए ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका की हालिया सैन्य कार्रवाइयों को अंतरराष्ट्रीय नियमों का खुला उल्लंघन बताया है। तेहरान ने वाशिंगटन के इस रवैये की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा है कि अमेरिका का यह दुश्मनी भरा और उकसावे वाला व्यवहार ही क्षेत्र में शांति बहाली के रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा बना हुआ है।
पत्रकार से भिड़ंत के बाद ट्रंप ने माइक फेंककर जताया गुस्सा
8 Jun, 2026 12:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने बेहद तीखे और आक्रामक तेवरों को लेकर वैश्विक चर्चा में आ गए हैं। एक मशहूर टीवी न्यूज कार्यक्रम के दौरान ट्रंप और एक महिला पत्रकार के बीच हुई तीखी नोकझोंक ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक एक नया विवाद छेड़ दिया है। इंटरव्यू के दौरान पूछे गए सवालों से बुरी तरह भड़के डोनाल्ड ट्रंप ने न केवल महिला पत्रकार पर व्यक्तिगत टिप्पणियां कीं, बल्कि उन्हें अपमानजनक शब्द कहते हुए 'धोखेबाज' और 'मूर्ख' तक कह डाला। विवाद इतना बढ़ गया कि ट्रंप ने अंत में अपना माइक खींचकर हटा दिया और बातचीत को बीच में ही अधूरा छोड़कर वहां से उठकर चले गए। इस पूरे नाटकीय घटनाक्रम का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
जानकारी के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप एनबीसी न्यूज के चर्चित कार्यक्रम 'मीट द प्रेस' के लिए वरिष्ठ एंकर क्रिस्टन वेल्कर को इंटरव्यू दे रहे थे। बातचीत के दौरान जब महिला पत्रकार ने उनसे वर्ष 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में कथित धांधली के दावों पर सवाल दाग दिए और इन आरोपों के समर्थन में पुख्ता सबूत मांगे, तो ट्रंप का पारा चढ़ गया। यहीं से दोनों के बीच तीखी बहस का सिलसिला शुरू हुआ।
'एंटी-वेपनाइजेशन इनिशिएटिव' और जो बाइडन पर हमला
यह राजनीतिक विवाद तब और ज्यादा गहरा गया जब पत्रकार ने ट्रंप प्रशासन के प्रस्तावित 1.8 बिलियन डॉलर (लगभग 1,800 करोड़ रुपये) के 'एंटी-वेपनाइजेशन इनिशिएटिव' (Anti-Weaponization Initiative) को लेकर सवाल उठाया। यह विवादित फंड उन लोगों को आर्थिक सहायता और मुआवजा देने के लिए तैयार किया जा रहा है, जिनका मानना है कि पिछले प्रशासन ने राजनीतिक द्वेष के चलते उन्हें अनुचित तरीके से निशाना बनाया था। इस विषय पर अपनी सरकार का बचाव करते हुए ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन की कड़े शब्दों में आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि बाइडन सरकार के दौरान कई निर्दोष लोगों के खिलाफ फर्जी कार्रवाई की गई, जिससे उनका रोजगार छिन गया और उनकी पूरी जिंदगी तबाह हो गई।
कैलिफोर्निया चुनाव और धीमी मतगणना पर खड़े किए सवाल
जब पत्रकार ने ट्रंप से इन सभी गंभीर आरोपों के समर्थन में कानूनी प्रमाण या दस्तावेज पेश करने को कहा, तो ट्रंप ने बात को घुमाते हुए वर्ष 2020 के चुनाव और हाल ही में कैलिफोर्निया में हुई वोटों की गिनती का मुद्दा उठा दिया। उन्होंने दावा किया कि चुनाव प्रक्रियाओं में आज भी गंभीर गड़बड़ियां की जा रही हैं और मतदान खत्म होने के कई दिनों बाद तक मतगणना का जारी रहना गहरी साजिश और संदेह को पैदा करता है। ट्रंप ने कैमरे के सामने दावा किया कि उनके पास अपने दावों को सच साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं और अमेरिका में चुनाव व्यवस्था निष्पक्ष नहीं रह गई है।
मीडिया को बताया पक्षपाती और बीच में ही छोड़ दिया इंटरव्यू
जब पत्रकार क्रिस्टन वेल्कर ने चुनाव अधिकारियों के आधिकारिक बयानों का हवाला देते हुए ट्रंप को टोकने की कोशिश की और बताया कि धीमी मतगणना के पीछे पूरी तरह से प्रशासनिक व तकनीकी कारण थे, तो ट्रंप ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया। इसके बाद वे पूरी तरह से भड़क गए और मीडिया की निष्पक्षता पर ही उंगली उठाते हुए एनबीसी सहित कई बड़े समाचार संस्थानों को 'बिकाऊ और धोखेबाज' कह डाला। ट्रंप ने आरोप लगाया कि मुख्यधारा का मीडिया पूरी तरह एकतरफा रवैया अपनाता है और जनता के सामने कभी पूरी सच्चाई नहीं आने देता।
जब पत्रकार ने खुद को निष्पक्ष बताते हुए ट्रंप की टिप्पणियों का कड़ा विरोध किया, तो ट्रंप ने उनकी बात बीच में ही काट दी और कहा कि वह या तो सच देखना नहीं चाहतीं या फिर वास्तविक स्थिति को समझने के लायक ही नहीं हैं। आखिरकार, अत्यधिक गुस्से में आकर ट्रंप ने बातचीत को वहीं समाप्त करने का एलान कर दिया। उन्होंने अपने कोट से माइक हटाया, उसे नीचे रखा और कहा, "बस अब बहुत हुआ, हमें यह इंटरव्यू यहीं खत्म कर देना चाहिए।" पत्रकार ने उनसे बार-बार बातचीत पूरी करने और सीट पर बने रहने का आग्रह किया, लेकिन ट्रंप ने इसे पूरी तरह अनसुना कर दिया। उन्होंने चलते-चलते मीडिया की भूमिका पर एक बार फिर तंज कसा और अपनी सीट से उठकर तेजी से कमरे से बाहर चले गए।
हरियाणा ब्यूरोक्रेसी में हलचल, नए मुख्य सचिव की रेस में कौन सबसे आगे?
8 Jun, 2026 11:58 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। हरियाणा के प्रशासनिक हलकों में नए मुख्य सचिव (चीफ सेक्रेटरी) के चयन को लेकर सरगर्मियां काफी तेज हो गई हैं। वर्तमान मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी का सेवा विस्तार आगामी 30 जून को पूरा होने जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, खराब स्वास्थ्य के कारण उन्हें दोबारा सेवा विस्तार मिलने की उम्मीद बेहद कम है। ऐसे में प्रदेश के इस सर्वोच्च प्रशासनिक पद की कमान किसे सौंपी जाएगी, इसे लेकर कयासों का दौर शुरू हो गया है। इस दौड़ में 1990 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सुधीर राजपाल, इसी बैच की सुमिता मिश्रा और 1992 बैच के आईएएस अरुण कुमार गुप्ता के नाम सबसे आगे चल रहे हैं।
वरिष्ठता सूची में सुधीर राजपाल और सुमिता मिश्रा सबसे आगे
सूबे की आईएएस वरिष्ठता सूची पर नजर डालें तो 1990 बैच के सुधीर राजपाल सबसे सीनियर अधिकारी हैं। यूपीएससी में दूसरी रैंक हासिल करने वाले राजपाल वर्तमान में गृह सचिव और वन विभाग के मुखिया हैं। वर्ष 2024 में राज्य के लिंगानुपात में सुधार लाने में उनकी भूमिका सराहनीय रही है और वे इसी साल नवंबर में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। वहीं, इसी बैच की सुमिता मिश्रा वरिष्ठता में दूसरे स्थान पर हैं और फिलहाल वित्तीय आयुक्त (एफसीआर) व स्वास्थ्य सचिव का जिम्मा संभाल रही हैं। गृह सचिव के तौर पर गैंबलिंग एक्ट और ट्रैवलिंग एजेंट बिल लाने में उनकी बड़ी भूमिका रही थी। वे जनवरी 2027 में रिटायर होंगी।
मुख्यमंत्री के विश्वासपात्र अरुण कुमार गुप्ता भी मजबूत दावेदार
इस रेस में 1992 बैच के आईएएस अरुण कुमार गुप्ता का नाम भी बेहद मजबूती से उभरा है। मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव और वित्त सचिव की दोहरी जिम्मेदारी संभाल रहे गुप्ता को सरकार का बेहद खास और भरोसेमंद माना जाता है। बैंक घोटाले की जांच कमेटी के प्रमुख रहे गुप्ता ने हाल ही में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी के अस्वस्थ होने के दौरान साल 2026-27 का राज्य बजट समय पर तैयार करने में मुख्य भूमिका निभाई थी। हालांकि, उनका कार्यकाल इसी वर्ष 30 सितंबर तक ही है। इनके अलावा केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर तैनात 1991 बैच के अनिल मलिक और 1993 बैच के वी उमाशंकर के नामों की भी सुगबुगाहट है।
निवर्तमान मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी को मिल सकती है नई जिम्मेदारी
दूसरी तरफ, यदि निवर्तमान मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी को नया सेवा विस्तार नहीं मिलता है, तो सरकार उन्हें किसी अन्य महत्वपूर्ण संवैधानिक या प्रशासनिक पद पर समायोजित कर सकती है। वर्तमान में उनके पास 'सेवा का अधिकार आयोग' (राइट टू सर्विस) के चेयरमैन पद का अतिरिक्त प्रभार है और पूर्णकालिक चेयरमैन के रूप में उनकी नियुक्ति की संभावनाएं सबसे अधिक हैं, क्योंकि सरकार ने इस पद के लिए अब तक कोई नया विज्ञापन जारी नहीं किया है। इसके अतिरिक्त, उन्हें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष पद की कमान सौंपने पर भी उच्च स्तर पर विचार किया जा रहा है।
भारत-इंडोनेशिया के बीच महा-मंथन, रक्षा और सामरिक साझेदारी को और मजबूत करने का संकल्प
8 Jun, 2026 11:35 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इंडोनेशिया। पड़ोसी देशों के साथ मजबूत होते रिश्तों के बीच राजधानी दिल्ली अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का बड़ा केंद्र बन गई है। नेपाल की नई सरकार के विदेश मंत्री शिशिर खनाल का मौजूदा भारत दौरा दोनों देशों के बीच सहयोग की एक नई पटकथा लिख रहा है। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के नेतृत्व वाली नेपाल की नई सरकार की ओर से यह पहला उच्च स्तरीय संवाद है, जो सीमा मुद्दों पर हालिया तनाव को भुलाकर द्विपक्षीय संबंधों को एक नई दिशा में ले जाने के नेपाल के गंभीर प्रयासों को दर्शाता है। नेपाल की इस कूटनीतिक पहल का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास को मजबूत करना और साझा समृद्धि के नए रास्ते तलाशना है।
नेपाल का व्यावहारिक रुख और सीमा विवाद पर कूटनीति
भारत दौरे पर आए नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने साफ किया है कि उनकी सरकार भारत के साथ संबंधों को किसी भू-राजनीतिक चश्मे या पूर्वाग्रह से नहीं देखती है। वे भारत को यह भरोसा दिलाने में पूरी तरह सक्रिय दिखे कि नेपाल की नई सरकार पुरानी राष्ट्रवादी बयानबाजी के बजाय धरातल पर व्यावहारिक जुड़ाव को प्राथमिकता देती है। नेपाल यह सुनिश्चित करने के लिए बेहद उत्सुक है कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से चला आ रहा सीमा विवाद आपसी व्यापार, यातायात और ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग के आड़े न आए। नेपाल अब सीमा मुद्दों को किसी भी अति-संवेदनशील पूर्वाग्रह से दूर रखकर पूरी तरह से राजनयिक माध्यमों से सुलझाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है।
भारत और इंडोनेशिया के बीच मजबूत होगी सामरिक साझेदारी
नेपाल के साथ संवाद के बीच, भारत ने दक्षिण-पूर्व एशिया के अपने बेहद महत्वपूर्ण सहयोगी इंडोनेशिया के साथ भी रक्षा और व्यापार के मोर्चे पर बड़ा कदम आगे बढ़ाया है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने इंडोनेशिया के विदेश मंत्री सुगियोनो के साथ मिलकर '8वीं भारत-इंडोनेशिया संयुक्त आयोग बैठक' (जेसीएम) की सह-अध्यक्षता की। इस उच्च स्तरीय बैठक में दोनों देशों ने व्यापक सामरिक साझेदारी के अंतर्गत अपने द्विपक्षीय संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाने की मजबूत प्रतिबद्धता जताई है।
इन प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर बनी आपसी सहमति
भारत और इंडोनेशिया के बीच हुई इस बैठक में राजनीतिक, रक्षा और सुरक्षा, समुद्री सहयोग, व्यापार और निवेश, औषधि (फार्मास्युटिकल), स्वास्थ्य सेवा, डिजिटल तकनीक, ऊर्जा, और सांस्कृतिक क्षेत्रों सहित तमाम द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा की गई। दोनों ही देश आपसी आर्थिक और सामरिक हितों को साधने के साथ-साथ लोगों के बीच परस्पर आदान-प्रदान और रक्षा सहयोग को पहले से कहीं अधिक सुदृढ़ करने के उपायों पर आगे बढ़ रहे हैं। यह बैठक आने वाले समय में दोनों देशों के बीच व्यापार और सुरक्षा के चक्र को और मजबूत करेगी।
बांग्लादेश में धार्मिक तनाव, राधा-गोविंद मंदिर को लेकर विवाद
8 Jun, 2026 10:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका: बांग्लादेश के गैबांधा जिले के हंसबारी गांव में स्थित ऐतिहासिक राधा-गोविंद मंदिर की सुरक्षा को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। देश में अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए काम करने वाले एक मानवाधिकार संगठन ने दावा किया है कि कुछ असामाजिक तत्व इस ऐतिहासिक मंदिर पर हमला करने और उसे जमींदोज करने की लगातार धमकियां दे रहे हैं। इन धमकियों के बाद से स्थानीय हिंदू समुदाय और आसपास के निवासियों में डर और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल और सुरक्षा की मांग
धार्मिक भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाने वाले प्रमुख संगठन ‘बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद’ के अनुसार, मंदिर को नुकसान पहुंचाने की धमकी से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। संगठन ने चेतावनी दी है कि इस तरह की उकसावे वाली हरकतों से इलाके में सांप्रदायिक तनाव भड़क सकता है और आपसी सामाजिक सद्भाव को भारी नुकसान पहुंच सकता है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए संगठन ने बांग्लादेश सरकार, स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक दलों और नागरिक समाज से तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है। उनकी मांग है कि नफरत फैलाने और माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वाले दोषियों की जल्द पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
मंदिर का ऐतिहासिक और सामाजिक महत्व
स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह राधा-गोविंद मंदिर सिर्फ एक धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि इसका बड़ा सामाजिक महत्व भी है। इस विशाल मंदिर परिसर के भीतर एक वृद्धाश्रम, एक मुफ्त चिकित्सा सेवा केंद्र और समाज कल्याण से जुड़ी कई अन्य जनोपयोगी सुविधाएं संचालित की जा रही हैं। इसके अलावा, लंबे समय से मंदिर के विकास और रख-रखाव का काम भी स्थानीय स्तर पर चल रहा है। ऐसे में इस ऐतिहासिक और जनकल्याणकारी स्थल को निशाना बनाए जाने की धमकी से आम जनता में भारी आक्रोश है और सभी लोग इसकी चौबीसों घंटे सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं।
रिपोर्ट में अल्पसंख्यकों पर हिंसा को लेकर बड़ा खुलासा
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पिछले महीने ही जारी एक मानवाधिकार रिपोर्ट ने देश में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर कई चिंताजनक खुलासे किए हैं। ‘ह्यूमन राइट्स कांग्रेस फॉर बांग्लादेश माइनॉरिटीज’ (HRCBM) की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच महज चार महीनों के भीतर बांग्लादेश के 62 जिलों में अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हिंसा की 505 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन मामलों में हत्या, मारपीट, अपहरण, यौन शोषण, जमीनों पर अवैध कब्जे और धार्मिक स्थलों पर तोड़फोड़ व आगजनी जैसी गंभीर वारदातें शामिल हैं।
मानवाधिकार संगठन का आरोप है कि ये घटनाएं छिटपुट नहीं हैं, बल्कि अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ते एक तय पैटर्न को दर्शाती हैं। कई मामलों में पुलिस और प्रशासन की सुस्ती और कमजोर जांच के चलते पीड़ितों को समय पर न्याय नहीं मिल सका है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई जा रही है।
ढाबे के पास खड़ी कार में मिला दिल्ली पुलिसकर्मी मृत, मौत की वजह बनी रहस्य
8 Jun, 2026 09:50 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रोहतक। सांपला क्षेत्र में एक ढाबे के नजदीक खड़ी कार के भीतर दिल्ली पुलिस के एक जवान का शव संदिग्ध परिस्थितियों में बरामद हुआ है। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए पीजीआई (PGI) रोहतक भिजवा दिया है। शुरुआती जांच में मौत के कारणों का पता नहीं चल पाया है, जिसके लिए पुलिस विसरा रिपोर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।
दस्तावेजों से हुई दिल्ली पुलिस के जवान की पहचान
गाड़ी की तलाशी के दौरान मिले जरूरी कागजातों और पहचान पत्र के आधार पर मृतक की शिनाख्त सुधीर (39 वर्ष) के रूप में की गई है। सुधीर झज्जर जिले के आसौदा गांव का रहने वाला था और उसके पिता का नाम ओम है। वह वर्तमान में दिल्ली पुलिस में अपनी सेवाएं दे रहा था। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, प्रथम दृष्टया जवान के शरीर पर किसी भी तरह के बाहरी चोट या हमले के निशान नहीं पाए गए हैं।
ढाबे पर खाना खाने आने की आशंका
आशंका जताई जा रही है कि दिल्ली पुलिस का यह जवान हाईवे पर स्थित इस ढाबे पर भोजन करने के उद्देश्य से रुका होगा। पुलिस इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि सुधीर अपनी ड्यूटी के अलावा सांपला इलाके में किस सिलसिले में आया था। फिलहाल इस दुखद घटना की जानकारी झज्जर में रह रहे जवान के परिजनों को दे दी गई है, जिसके बाद परिवार में कोहराम मच गया है।
मामले की आगामी जांच और पुलिसिया कार्रवाई
स्थानीय थाना पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस ढाबे और उसके आसपास लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की फुटेज खंगाल रही है ताकि यह साफ हो सके कि कार कब से वहां खड़ी थी और सुधीर के साथ गाड़ी में कोई और मौजूद था या नहीं। परिजनों के बयान और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का खुलासा हो सकेगा।
फिलीपींस में विनाशकारी भूकंप, कई इमारतें ढहीं; सुनामी की आशंका
8 Jun, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मनीला: फिलीपींस में सोमवार सुबह एक बेहद जोरदार और शक्तिशाली भूकंप आया, जिसकी तीव्रता रिएक्टर पैमाने पर 7.8 मापी गई है। इस भीषण भूकंप के तुरंत बाद फिलीपींस समेत पड़ोसी देश इंडोनेशिया और मलेशिया के तटीय क्षेत्रों के लिए सुनामी का हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। शुरुआती जानकारियों के अनुसार, भूकंप की वजह से कई रिहायशी मकानों और इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा है, जबकि मलबे की चपेट में आने से एक व्यक्ति की जान जाने की खबर भी सामने आई है।
सुबह-सुबह कांपी धरती और यह था भूकंप का केंद्र
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के आंकड़ों के मुताबिक, यह जोरदार भूकंप भारतीय समयानुसार सुबह करीब 5:07 बजे आया, जब ज्यादातर लोग सो रहे थे। भूकंप का मुख्य केंद्र फिलीपींस के मिंडानाओ द्वीप पर स्थित जनरल सैंटोस शहर के पास जमीन के नीचे था। यह शहर से करीब 13 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम की तरफ केंद्रित था। हालांकि, भूकंप की गहराई को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। फिलीपींस के स्थानीय भूकंप संस्थान का कहना है कि यह जमीन से महज 10 किलोमीटर नीचे था, जबकि अमेरिकी एजेंसी (USGS) ने इसकी गहराई जमीन के अंदर 55 किलोमीटर दर्ज की है। जमीन के नीचे कम गहराई पर आने वाले भूकंप आमतौर पर ज्यादा तबाही मचाते हैं।
तटीय इलाकों में सुनामी का बड़ा खतरा और ऊंची लहरों की चेतावनी
भूकंप के भीषण झटकों के फौरन बाद पैसिफिक सुनामी वार्निंग सेंटर ने समुद्र में ऊंची लहरें उठने का गंभीर खतरा जताया है। एजेंसी ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि फिलीपींस के कुछ संवेदनशील तटीय इलाकों में समुद्र के अंदर 3 मीटर (करीब 10 फीट) तक ऊंची और विनाशकारी लहरें उठ सकती हैं। इसके साथ ही इस खतरे का असर पड़ोसी देशों में भी देखने को मिल सकता है, जिसके तहत इंडोनेशिया और मलेशिया के कुछ तटीय भागों में 1 मीटर तक ऊंची लहरें उठने की आशंका है। प्रशासन ने इन सभी देशों के तटीय इलाकों में रहने वाले नागरिकों को सुरक्षित और ऊंचाई वाले स्थानों पर जाने की सलाह दी है।
सीजफायर के बावजूद नहीं थमा संघर्ष, ईरान-इजराइल ने एक-दूसरे पर किए हमले
8 Jun, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान: मध्य पूर्व में एक बार फिर युद्ध के बादल गहरा गए हैं। अप्रैल में हुए युद्धविराम (सीजफायर) के बाद ईरान ने पहली बार इजराइल पर सीधे मिसाइल हमला किया है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, रविवार रात को इजराइल की तरफ ताबड़तोड़ मिसाइलें दागी गईं। इस अचानक हुए हमले के बाद पूरे इजराइल में युद्ध के सायरन गूंज उठे और नागरिकों को जान बचाने के लिए बंकरों की शरण लेनी पड़ी। इजराइली सेना ने दावा किया है कि उसने रक्षा प्रणाली की मदद से ज्यादातर मिसाइलों को हवा में ही नष्ट (इंटरसेप्ट) कर दिया, हालांकि उत्तरी इजराइल के इलाकों में कई जोरदार धमाके सुने गए हैं।
इजराइल का पलटवार और ईरान के कई शहरों में धमाके
मिसाइल हमले के कुछ ही घंटों बाद इजराइल ने भी ईरान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और सोमवार तड़के बड़ी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। इजराइली सेना के बयान के मुताबिक, उसके लड़ाकू विमानों ने पश्चिमी और मध्य ईरान में स्थित कई सैन्य ठिकानों को अपना निशाना बनाया है। ईरानी समाचार एजेंसी 'इर्ना' (IRNA) के अनुसार, इस जवाबी हमले के बाद ईरान की राजधानी तेहरान समेत तबरीज और इस्फहान जैसे प्रमुख शहरों में कई भीषण विस्फोट हुए हैं। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का दावा है कि इजराइल ने इस हमले को अंजाम देने के लिए हवा से दागी जाने वाली (एयर-लॉन्च) बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया है।
तीन देशों ने बंद किया अपना हवाई क्षेत्र (एयरस्पेस)
दोनों देशों के बीच बढ़े इस भीषण तनाव के बाद पूरे क्षेत्र की हवाई सुरक्षा को लेकर अलर्ट जारी कर दिया गया है। ईरान ने अपनी राजधानी तेहरान के इमाम खोमैनी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास और अपने पश्चिमी हिस्से का पूरा एयरस्पेस अगली सूचना तक बंद कर दिया है। इस टकराव के प्रभाव को देखते हुए पड़ोसी देश इराक ने अगले 72 घंटों के लिए और सीरिया ने अगले 12 घंटों के लिए अपनी हवाई सीमाओं को पूरी तरह सील करने का फैसला लिया है, जिससे इस रूट की अंतरराष्ट्रीय उड़ानें प्रभावित हुई हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति की अपील बेअसर और सीजफायर पर संकट
इस संवेदनशील घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बातचीत कर संयम बरतने की अपील की थी। उन्होंने इजराइल को तत्काल कोई भी बड़ा जवाबी हमला न करने की सलाह दी थी, लेकिन इसके बावजूद इजराइल ने ईरान के भीतर घुसकर सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया। यह ताजा टकराव ठीक उस समय हुआ है जब कुछ ही समय पहले लेबनान और इजराइल की सरकारें अमेरिकी मध्यस्थता में युद्धविराम पर सहमत हुई थीं, लेकिन हिजबुल्लाह द्वारा इस समझौते को खारिज करने और इजराइल द्वारा बेरूत में किए गए हमलों के बाद स्थिति फिर से नियंत्रण से बाहर हो गई।
होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी कार्रवाई और बातचीत में गतिरोध
इस युद्ध के बीच समुद्री व्यापार मार्गों पर भी खतरा बढ़ गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया है कि उसने होर्मुज स्ट्रेट (जलडमरूमध्य) में अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को देखते हुए दो ईरानी ड्रोनों को मार गिराया है। दूसरी तरफ, ईरान ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि उसके बार-बार बदलते रुख के कारण शांति वार्ता आगे नहीं बढ़ पा रही है। तेहरान ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी फ्रीज (रोकी गई) अरबों डॉलर की संपत्ति को जारी करने और यूरेनियम संवर्धन के अपने अधिकार की मांग को फिर से दोहराया है। इस तनाव का असर खेलों पर भी पड़ा है, जहां सख्त अमेरिकी वीजा प्रतिबंधों के चलते ईरानी फुटबॉल टीम को वर्ल्ड कप मैच के दिन ही अमेरिका छोड़ना होगा और उन्होंने अपना ट्रेनिंग कैंप मेक्सिको में बनाया है।
अमेरिकी रक्षा विभाग में संभावित खुफिया सेंध की आशंका, जांच शुरू
7 Jun, 2026 12:04 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन: अमेरिका और इजराइल के बीच ईरान नीति को लेकर चल रहे मतभेदों के बीच एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है. अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) के भीतर इस बात को लेकर चिंताएं बेहद बढ़ गई हैं कि इजराइल अमेरिकी अधिकारियों और नवगठित डोनाल्ड ट्रम्प सरकार की अंदरूनी व गोपनीय जानकारियां जुटाने के लिए जासूसी का सहारा ले रहा है. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, पेंटागन की डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी ने हाल ही में इजराइल से जुड़े 'काउंटर-इंटेलिजेंस खतरे' के स्तर को बढ़ाकर 'क्रिटिकल' (Critical) कर दिया है, जो कि इस एजेंसी का सबसे गंभीर अलर्ट माना जाता है. अमेरिका और इजराइल जैसे दुनिया के दो सबसे करीबी सहयोगियों के बीच खुफिया मोर्चे पर ऐसा तनाव दिखना बेहद असाधारण माना जा रहा है. हालांकि, इजराइली दूतावास ने इन आरोपों को पूरी तरह सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि उनकी खुफिया एजेंसियां सहयोगियों की नहीं, बल्कि सिर्फ दुश्मनों पर नजर रखती हैं.
सुरक्षा अलर्ट बढ़ने से इजराइल जाने वाले अमेरिकी अधिकारियों की बढ़ी मुश्किलें
पेंटागन द्वारा काउंटर-इंटेलिजेंस खतरे का स्तर बढ़ाने का सबसे सीधा और बड़ा असर उन अमेरिकी अधिकारियों पर पड़ेगा जो आधिकारिक दौरों पर इजराइल जाते हैं या इजराइली राजनयिकों के साथ सीधे संपर्क में रहते हैं. एक अधिकारी ने बताया कि अमेरिकी प्रशासन पहले से ही अपने वरिष्ठ अधिकारियों की इजराइल यात्रा के दौरान असाधारण सावधानी बरतता आया है. इसके तहत अमेरिकी अधिकारी इजराइल में अपने पर्सनल या रूटीन फोन और लैपटॉप का इस्तेमाल करने से बचते हैं और उनकी जगह अस्थायी (बर्नर) मोबाइल फोन और अलग कंप्यूटर्स का इस्तेमाल किया जाता है. यहां तक कि वे होटल के कमरों में भी किसी संवेदनशील मुद्दे पर बात करने से बचते हैं, क्योंकि इजराइली खुफिया एजेंसियों को जानकारी जुटाने के मामले में बेहद आक्रामक माना जाता है. हालांकि, इस नए अलर्ट के बावजूद दोनों देशों के बीच खुफिया जानकारियां साझा करने का आधिकारिक सहयोग फिलहाल जारी रहेगा.
ईरान समझौते पर बढ़े मतभेद, ट्रम्प ने नेतन्याहू से फोन पर की तीखी बात
यह पूरा विवाद ऐसे समय में गहराया है जब ईरान को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच रणनीतिक मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं. दरअसल, हाल ही में हुए युद्धविराम के बाद ट्रम्प प्रशासन ईरान के साथ एक बड़ा और ऐतिहासिक समझौता करने की कोशिशों में जुटा है, जबकि इजराइली पीएम नेतन्याहू का मानना है कि ईरान किसी भी समझौते का पालन नहीं करेगा और उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता. इसके अलावा लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ सैन्य अभियानों को लेकर भी दोनों देशों के बीच मतभेद की खबरें हैं. रिपोर्टों के अनुसार, हाल ही में ट्रम्प और नेतन्याहू के बीच फोन पर काफी तीखी बातचीत हुई थी, जिसके बाद खुद ट्रम्प ने स्वीकार किया था कि उन्होंने इजराइली प्रधानमंत्री के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल किया था. इस घटना ने दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) की रणनीति को लेकर चल रही बड़ी तनातनी को जगजाहिर कर दिया है.
डी-डे समारोह में आव्रजन मुद्दे पर अमेरिकी रक्षा मंत्री की तीखी टिप्पणी
7 Jun, 2026 10:03 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन: फ्रांस में द्वितीय विश्व युद्ध की ऐतिहासिक 'डी-डे' (D-Day) लैंडिंग की 82वीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने प्रवासियों को लेकर एक बेहद विवादित बयान दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छिड़ गई है. नॉर्मंडी में बने अमेरिकी स्मारक कब्रिस्तान में सैनिकों को श्रद्धांजलि देने पहुंचे हेगसेथ ने यूरोप में बढ़ रहे अवैध प्रवासन और समुद्री रास्तों से आने वाले शरणार्थियों की तुलना युद्ध के समय होने वाले सैन्य आक्रमण से कर दी. उनके इस बयान के बाद प्रवासन नीतियों और इस तरह के संवेदनशील मंचों पर ऐसे मुद्दों को उठाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है.
प्रवासियों की आमद को बताया 'खतरनाक विचारधारा का आक्रमण'
अपने संबोधन के दौरान अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि जिस तरह द्वितीय विश्व युद्ध के समय लोकतंत्र की रक्षा के लिए यूरोप के समुद्र तटों पर मित्र देशों के जांबाज सैनिक उतरे थे, आज उसी तरह स्पेन, इटली, ग्रीस और बुल्गारिया के तटों के जरिए खतरनाक विचारधाराएं यूरोप में प्रवेश कर रही हैं. उन्होंने यूरोपीय देशों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर यूरोपीय राजधानियां इस गंभीर स्थिति से निपटने और अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए ठोस कदम कब उठाएंगी.
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की सख्त प्रवासन नीति से जुड़े तार
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पीट हेगसेथ का यह बयान सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की उस सख्त नीति को दर्शाता है, जिसके तहत यूरोपीय देशों की ढीली आव्रजन (इमिग्रेशन) नीतियों और कमजोर सीमा सुरक्षा की लगातार आलोचना की जाती रही है. पिछले कुछ महीनों में ट्रंप प्रशासन के कई आला अधिकारियों ने भी यूरोप में बिना किसी नियंत्रण के हो रहे प्रवासन पर चिंता जताई है. हेगसेथ के इस बयान को उसी अमेरिकी रुख के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है, जो अवैध प्रवासन को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा मानता है.
बयान पर छिड़ा राजनीतिक विवाद, आलोचक और समर्थक आमने-सामने
रक्षा मंत्री के इस बयान के सामने आते ही इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं. आलोचकों का साफ कहना है कि डी-डे जैसा पवित्र अवसर सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान और शहादत को याद करने का दिन है, इसलिए इस ऐतिहासिक और भावुक मंच का इस्तेमाल प्रवासन जैसे विवादित राजनीतिक मुद्दे को उठाने के लिए करना पूरी तरह से अनुचित और शहीदों का अपमान है. दूसरी तरफ, हेगसेथ के समर्थकों का तर्क है कि उन्होंने केवल उस जमीनी हकीकत और सुरक्षा चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित किया है, जिससे आज पूरा यूरोप जूझ रहा है. बहरहाल, यह बयान ऐसे समय आया है जब यूरोप के कई देशों में सीमा सुरक्षा, सांस्कृतिक पहचान और प्रवासियों का मुद्दा पहले से ही राजनीति के केंद्र में बना हुआ है.
भारत को टारगेट करने वाली सामग्री पर सिंगापुर सरकार हुई सख्त
7 Jun, 2026 08:54 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सिंगापुर: भारतीय समुदाय और भारत को निशाना बनाकर सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही नफरत और भ्रामक जानकारी के खिलाफ सिंगापुर सरकार ने बेहद सख्त कदम उठाया है. सिंगापुर के गृह मंत्रालय (MHA) के निर्देश पर पुलिस ने यूट्यूब, फेसबुक और एक्स (X) जैसे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भारतीय समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक और भड़काऊ सामग्री प्रसारित करने वाले 14 पोस्ट्स को ब्लॉक करने के कड़े आदेश दिए हैं. सरकार का मानना है कि यह डिजिटल कंटेंट देश के बहुसांस्कृतिक ऊतकों और सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने की एक सोची-समझी साजिश है.
चीन आधारित प्लेटफॉर्म से शुरू हुआ था दुष्प्रचार
मामले की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि भारत विरोधी और भारतीय समुदाय को निशाना बनाने वाली यह सामग्री मूल रूप से चीन के एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर तैयार की गई थी. इसके बाद इसे इंटरनेट के माध्यम से अन्य सोशल मीडिया वेबसाइटों पर तेजी से शेयर किया गया. इन वीडियो और पोस्ट्स में भ्रामक दावे किए जा रहे थे कि सिंगापुर में भारतीयों की संख्या बहुत ज्यादा बढ़ गई है और वे वहां के समाज पर हावी हो रहे हैं. इसके लिए लिटिल इंडिया जैसे इलाकों की भीड़भाड़ वाले पुराने वीडियो का गलत संदर्भों में इस्तेमाल किया गया था.
विदेशी ताकतों द्वारा नफरत फैलाने की कोशिश दोगुनी नामंजूर
सिंगापुर के गृह मामलों के द्वितीय मंत्री एडविन टोंग और गृह मंत्री के. शणमुगम ने इस मामले पर सख्त नाराजगी जाहिर की है. मंत्रियों का कहना है कि सिंगापुर एक बहुनस्लीय और बहुसांस्कृतिक समाज है, जहां हर समुदाय का बराबर सम्मान है. ऐसे में विदेशी धरती या विदेशी नागरिकों द्वारा किसी एक खास समुदाय को निशाना बनाकर नफरत फैलाना और समाज को बांटने की कोशिश करना 'दोगुनी तौर पर अस्वीकार्य' है. हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अभी तक इस बात के सबूत नहीं मिले हैं कि इस दुष्प्रचार के पीछे किसी विदेशी सरकार का हाथ है; ऐसा लगता है कि यह कुछ विदेशी इंटरनेट यूजर्स की शरारत है.
ऑनलाइन क्रिमिनल हार्म्स एक्ट (OCHA) के तहत बड़ा एक्शन
सिंगापुर पुलिस ने इन आपत्तिजनक पोस्ट्स को ब्लॉक करने के लिए अपने सख्त 'ऑनलाइन क्रिमिनल हार्म्स एक्ट' (OCHA) का इस्तेमाल किया है. इसके तहत सोशल मीडिया कंपनियों को आदेश दिए गए हैं कि वे सिंगापुर के यूजर्स के लिए इन 14 पोस्ट्स के लिंक्स को तुरंत निष्क्रिय (डिसेबल) करें. सरकार के मुताबिक, यह कंटेंट सिंगापुर पीनल कोड की धारा 298A का सीधा उल्लंघन है, जो अलग-अलग समुदायों के बीच नफरत, दुश्मनी या द्वेष फैलाने को एक गंभीर अपराध मानती है. इस अपराध के लिए दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की जेल और भारी जुर्माने का कानूनी प्रावधान है.
खुफिया गतिविधियों को लेकर रिपोर्ट ने बढ़ाई अमेरिका की टेंशन
6 Jun, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन: वैश्विक राजनीति के मंच से एक बेहद हैरान और कूटनीतिक गलियारों को झकझोर देने वाली खबर सामने आ रही है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच ईरान संघर्ष की रणनीतियों को लेकर मतभेद अब खुलकर सतह पर आ गए हैं। इस बीच, अमेरिका के रक्षा मंत्रालय 'पेंटागन' (Pentagon) ने इस्राइली खुफिया गतिविधियों को लेकर एक बेहद गंभीर और गोपनीय चेतावनी जारी की है। पेंटागन के मुताबिक, अमेरिका के शीर्ष और बेहद वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी इस समय इस्राइली जासूसी एजेंसियों के रडार पर हो सकते हैं।
एक बड़ी खोजी रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान और पूर्व अमेरिकी अधिकारियों ने खुलासा किया है कि पेंटागन की डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (DIA) ने हाल ही में इस्राइल से जुड़े काउंटर-इंटेलिजेंस खतरे (प्रति-खुफिया खतरे) की श्रेणी को बढ़ाकर 'गंभीर' (Critical) कर दिया है, जो कि डीआईए के आंतरिक सुरक्षा मूल्यांकन का सबसे उच्चतम स्तर माना जाता है।
इस्राइल दौरे पर अमेरिकी दिग्गजों की सुरक्षा सख्त, बर्नर फोन का हो रहा इस्तेमाल
सुरक्षा विश्लेषकों और पूर्व राजनयिकों के अनुसार, इस्राइली खुफिया एजेंसियों को दुनिया भर में सूचनाएं एकत्र करने के मामले में सबसे ज्यादा आक्रामक और सटीक माना जाता है। इसी जासूसी के खौफ के चलते अमेरिका ने अपने शीर्ष अधिकारियों की सुरक्षा के लिए कई कड़े और हैरान करने वाले कदम उठाए हैं:
सख्त संचार प्रोटोकॉल: उच्च-स्तरीय दौरों के दौरान अमेरिकी अधिकारी अब अपने परमानेंट गैजेट्स के बजाय केवल बर्नर फोन (एक बार इस्तेमाल होने वाले मोबाइल) और अस्थायी कंप्यूटरों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
कमरों में बातचीत पर बैन: खुफिया विशेषज्ञों का कहना है कि वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी अब इस्राइल के होटलों के कमरों या अन्य संभावित संवेदनशील जगहों पर बैठकर आपस में किसी भी गोपनीय या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषय पर चर्चा करने से पूरी तरह बच रहे हैं।
यह असाधारण कदम अमेरिकी रक्षा प्रतिष्ठान की उस गहरी चिंता को उजागर करता है, जिसमें माना जा रहा है कि इस्राइल दरअसल पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) संकट पर ट्रंप प्रशासन की आंतरिक रणनीतियों और फाइलों को आक्रामक तरीके से हासिल करने की कोशिश में जुटा है।
7 पन्नों का सीक्रेट दस्तावेज और ट्रंप-नेतन्याहू का 'पागल' विवाद
डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (DIA) द्वारा प्रसारित किए गए 7 पन्नों के आंतरिक मूल्यांकन दस्तावेज में इस्राइल की सूचना एकत्र करने की अति-आक्रामक क्षमताओं पर गहरी चिंता जताई गई है। अंतरराष्ट्रीय मामलों की विशेषज्ञ एमिली हार्डिंग ने भी माना है कि इस्राइल इस बात में बहुत ज्यादा रुचि रखता है कि वाइट हाउस के बंद कमरों में क्या फैसले लिए जा रहे हैं।
यह विवाद ऐसे समय में गहराया है जब ईरान नीति को लेकर दोनों मित्र देशों के राष्ट्राध्यक्षों में कड़वाहट आ चुकी है:
विवाद का मुख्य मुद्दा
अमेरिकी राष्ट्रपति (डोनाल्ड ट्रंप) का रुख
इस्राइली पीएम (बेंजामिन नेतन्याहू) का रुख
ईरान परमाणु समझौता
राजनयिक प्रयासों के जरिए व्यापक शांति समझौते की वकालत।
तेहरान पर भरोसा करने के खिलाफ, केवल सैन्य दबाव बढ़ाने की मांग।
लेबनान (हिज्बुल्ला) सैन्य एक्शन
बेरूत के नागरिक इलाकों पर भारी हवाई हमलों के सख्त खिलाफ।
आक्रामक सैन्य अभियानों को जारी रखने पर अड़े।
तनावपूर्ण फोन कॉल: हाल ही में दोनों नेताओं के बीच फोन पर हुई एक बेहद तीखी और तनावपूर्ण बातचीत के बाद ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि उन्होंने इस्राइली प्रधानमंत्री को "पागल" तक कह दिया था। अमेरिकी मीडिया के अनुसार, ट्रंप ने नेतन्याहू को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा था, "इन हमलों की वजह से अब हर कोई आपसे नफरत करता है, और इस वजह से हर कोई इस्राइल से नफरत करने लगा है। तुरंत रुकिए।"
इस्राइल और वाइट हाउस ने किया दावों का खंडन
इस सनसनीखेज रिपोर्ट के सामने आने के बाद वॉशिंगटन स्थित इस्राइली दूतावास के प्रवक्ता ने इन तमाम आरोपों का कड़े शब्दों में खंडन किया है। प्रवक्ता ने अमेरिकी अधिकारियों की जासूसी के दावों को पूरी तरह आधारहीन और मनगढ़ंत बताते हुए कहा:
"इस्राइल कभी भी अपने सबसे बड़े सहयोगी अमेरिकी सरकार के अधिकारियों या संस्थाओं पर खुफिया जानकारी एकत्र नहीं करता। हमारे तमाम खुफिया अभियान और एजेंसियां केवल हमारे कट्टर दुश्मनों और विरोधियों पर केंद्रित हैं, मित्रों पर नहीं।"
दूसरी तरफ, वाइट हाउस के एक वर्ग ने भी कूटनीतिक डैमेज कंट्रोल (नुकसान की भरपाई) के तहत इस रिपोर्ट को खारिज किया है। हालांकि, पूर्व खुफिया अधिकारियों का साफ कहना है कि यद्यपि मित्र देशों के बीच सामान्य खुफिया नजर रखना कोई नई बात नहीं है, लेकिन अगर DIA ने खतरे का स्तर 'क्रिटिकल' किया है, तो यह सामान्य सीमाओं से कहीं आगे का गंभीर मामला है। बहरहाल, इस पूरे विवाद के बीच दोनों देशों के बीच आधिकारिक रूप से खुफिया जानकारियां साझा (Intelligence Sharing) करने का काम बिना किसी रुकावट के जारी है।
हादसे के बाद प्रशासन सख्त, सुपरवाइजर पर गिरी गाज और कंपनी हुई ब्लैकलिस्ट
