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जॉर्जिया से डिपोर्ट हुआ वेंकटेश, STF ने लंबे समय से फरार गैंगस्टर को दबोचा
12 Jun, 2026 01:09 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अंबाला। हरियाणा पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) को संगठित अपराध के खिलाफ एक बहुत बड़ी सफलता हाथ लगी है। एसटीएफ की टीम ने लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़े बेहद खूंखार और वांछित गैंगस्टर वेंकट गर्ग उर्फ वेंकटेश को यूरोपीय देश जॉर्जिया से डिपोर्ट (प्रत्यर्पित) कराकर भारत लाने में कामयाबी हासिल की है। नारायणगढ़ का मूल निवासी वेंकटेश साल 2017 से लगातार बिश्नोई गैंग के सक्रिय सदस्य के रूप में काम कर रहा था। उसने अंबाला, यमुनानगर और पंचकूला समेत हरियाणा के कई जिलों में हत्या, कातिलाना हमले और रंगदारी जैसी अनेक संगीन वारदातों को अंजाम दिया था, जिसके चलते स्थानीय पुलिस को लंबे समय से उसकी तलाश थी। एसटीएफ हरियाणा के महानिरीक्षक (आईजी) सतीश बालन ने बताया कि यह कुख्यात अपराधी साल 2024 में एक जाली पासपोर्ट का इस्तेमाल कर देश से चकमा देकर दुबई फरार हो गया था, जिसके बाद उसने अपनी लोकेशन बदली और जॉर्जिया में जाकर छिप गया था।
विदेशी धरती से चला रहा था जबरन वसूली का रैकेट
आईजी सतीश बालन के मुताबिक, गैंगस्टर वेंकटेश को जॉर्जिया से वापस भारत लाने की इस कानूनी प्रक्रिया को अमलीजामा पहनाने में एसटीएफ को करीब एक साल का लंबा वक्त लगा। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियों के साथ निरंतर समन्वय स्थापित कर आखिरकार उसे डिपोर्ट कराने में सफलता पाई। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, जब यह अपराधी नकली पहचान पत्र के सहारे दुबई भागा था, तब तक अकेले हरियाणा में ही उसके खिलाफ 23 गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज हो चुके थे। दुबई से जॉर्जिया पहुंचने के बाद भी उसकी आपराधिक गतिविधियां थमी नहीं और उसने वहां सुरक्षित बैठकर भारत के व्यापारियों, उद्योगपतियों और रसूखदार लोगों को धमकी भरे फोन कर करोड़ों रुपये की रंगदारी (फिरौती) मांगना शुरू कर दिया था। वह सात समंदर पार से ही भारत में मौजूद अपने गुर्गों के नेटवर्क को संचालित कर रहा था।
अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की मदद से कसा शिकंजा
एसटीएफ प्रमुख ने आगे खुलासा किया कि वेंकटेश विदेश में रहकर भी तकनीक के माध्यम से अपने लोकल शूटरों और गुर्गों के साथ लगातार संपर्क में बना हुआ था। जिन लोगों ने उसकी धमकियों के आगे झुकने और फिरौती देने से इनकार किया, उन पर दबाव बनाने के लिए उसने अपने शूटरों से सरेआम गोलियां भी चलवाईं। इन वारदातों के बाद हरियाणा एसटीएफ ने खुफिया इनपुट जुटाकर गैंगस्टर की सटीक लोकेशन का पता लगाया और जॉर्जिया सरकार तथा वहां की जांच एजेंसियों के साथ पुख्ता सबूत साझा किए। विदेशी धरती पर चौतरफा घेराबंदी होने के बाद जॉर्जियाई प्रशासन ने उसे भारत डिपोर्ट कर दिया। गौरतलब है कि हरियाणा एसटीएफ इससे पहले भी विदेशों में शरण लिए कई बड़े गैंगस्टरों को भारत वापस लाकर सलाखों के पीछे पहुंचा चुकी है।
अदालती रिमांड के दौरान होंगे कई बड़े खुलासे
सुरक्षा के कड़े पहरे के बीच भारत लाए गए गैंगस्टर वेंकटेश को अब संबंधित जिला अदालत में पेश करने की कानूनी तैयारी की जा रही है। एसटीएफ के जांच अधिकारी न्यायालय से उसकी अधिकतम दिनों की पुलिस रिमांड की मांग करेंगे। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि कस्टडी में लेकर की जाने वाली कड़ाई से पूछताछ के दौरान वेंकटेश से लॉरेंस बिश्नोई गैंग के भविष्य के प्लान, भारत में छिपे उसके सक्रिय शूटरों के ठिकानों, हथियारों की तस्करी के रूट और विदेशों से हो रही फंडिंग के स्रोतों के बारे में कई चौंकाने वाले और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।
भारत-बांग्लादेश वार्ता में बॉर्डर सुरक्षा पर अहम समझौता
12 Jun, 2026 12:16 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका: भारत और बांग्लादेश के सीमा सुरक्षा बलों के प्रमुखों ने सीमा पार होने वाले अपराधों, उग्रवादी गतिविधियों और बॉर्डर सिक्योरिटी को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी हरकत के खिलाफ 'ज़ीरो टॉलरेंस' (शून्य सहशीलता) की नीति अपनाने के अपने साझा संकल्प को एक बार फिर दृढ़ता से दोहराया है। दोनों देशों के बीच सीमा प्रबंधन को अधिक चाक-चौबंद बनाने के लिए बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) और बॉर्डर गार्ड्स बांग्लादेश (BGB) के बीच 57वीं महानिदेशक (DG) स्तर की द्विपक्षीय 'बॉर्डर कोऑर्डिनेशन कॉन्फ्रेंस' का आयोजन नई दिल्ली स्थित बीएसएफ मुख्यालय में किया गया। 8 जून से 11 जून तक चली इस चार दिवसीय उच्च स्तरीय बैठक में सीमा सुरक्षा से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए।
सौहार्दपूर्ण माहौल में दोस्ताना और भविष्योन्मुखी चर्चा
इस द्विपक्षीय सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई बीएसएफ के महानिदेशक प्रवीण कुमार ने की, जबकि बांग्लादेशी दल का नेतृत्व बीजीबी के महानिदेशक मेजर जनरल मोहम्मद अशरफुज़्ज़मान सिद्दीकी ने संभाला। दोनों बलों के बीच यह बैठक बेहद सकारात्मक, दोस्ताना और भविष्य की सोच वाले माहौल में संपन्न हुई, जो दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे आपसी भरोसे और ऐतिहासिक सहयोग को दर्शाती है। दोनों बलों के बीच शीर्ष स्तर का यह द्विपक्षीय तंत्र सीमा की जमीनी स्थिति की समीक्षा करने और आपसी चिंताओं को दूर करने का एक बेहद प्रभावी मंच साबित हो रहा है।
तस्करी और अवैध घुसपैठ को रोकने के लिए 'कोऑर्डिनेटेड बॉर्डर मैनेजमेंट'
सम्मेलन के दौरान दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पर होने वाले गंभीर अपराधों को पूरी तरह रोकने के व्यावहारिक उपायों पर विस्तार से मंथन किया। इस चर्चा के मुख्य बिंदु निम्नलिखित रहे:
प्रतिबंधित वस्तुओं की तस्करी पर रोक: नशीले पदार्थों, हथियारों, जाली भारतीय मुद्रा (FICN), सोने और अन्य प्रतिबंधित सामग्रियों की तस्करी नेटवर्क को ध्वस्त करना।
अवैध घुसपैठ और मानव तस्करी: सीमा पार से होने वाली अवैध आवाजाही और मानव तस्करी (ह्यूमन ट्रैफिकिंग) के खिलाफ सख्त कदम उठाना।
बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास: सीमावर्ती इलाकों में बुनियादी ढांचे और कंटीले तारों के निर्माण को गति देना।
समन्वित सीमा प्रबंधन योजना (CBMP): सीमा पर होने वाली अवांछित मौतों और अनजाने में सीमा पार करने की घटनाओं को न्यूनतम करने के लिए संयुक्त कार्ययोजना को कड़ाई से लागू करना।
रियल-टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग और साझा गश्त पर सहमति
भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थायी शांति, स्थिरता और अमन-चैन बनाए रखने के लिए दोनों बल आपसी तालमेल से काम करने पर सहमत हुए हैं। इसके तहत संवेदनशील इलाकों में संयुक्त रूप से गश्त (पेट्रोलिंग) बढ़ाने, अत्याधुनिक तकनीक से निगरानी मजबूत करने और आपराधिक नेटवर्कों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई के लिए 'रियल-टाइम इंफॉर्मेशन शेयरिंग' (पल-पल की खुफिया जानकारी साझा करना) को तेज किया जाएगा। इसके अलावा, सीमावर्ती आबादी को अंतरराष्ट्रीय सीमा के नियमों के प्रति जागरूक करने के लिए दोनों देश मिलकर जन-जागरूकता अभियान भी चलाएंगे।
अगला पड़ाव: नवंबर 2026 में ढाका में होगी अगली बैठक
11 जून को दोनों देशों के महानिदेशकों द्वारा 'संयुक्त चर्चा रिकॉर्ड' (Joint Record of Discussions) पर हस्ताक्षर किए जाने के साथ ही यह बेहद सफल सम्मेलन सकारात्मक माहौल में समाप्त हुआ। दोनों पक्षों ने विश्वास व्यक्त किया कि इस कॉन्फ्रेंस में बनी सहमति से दोनों देशों के मैत्रीपूर्ण संबंध और अधिक प्रगाढ़ होंगे। इस द्विपक्षीय वार्ता के सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए अगला डीजी स्तर का सम्मेलन आगामी नवंबर 2026 में बांग्लादेश की राजधानी ढाका में आयोजित करने का प्रस्ताव रखा गया है।
ज्वालामुखी के गर्भ में बना हरा-भरा स्टेडियम, नाम रखा देवताओं का मैदान
12 Jun, 2026 11:46 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेक्सिको सिटी: दुनिया भर में जहां अत्याधुनिक और आलीशान फुटबॉल स्टेडियमों के निर्माण पर अरबों रुपये खर्च किए जाते हैं, वहीं मेक्सिको का एक बेहद साधारण सा मिट्टी का मैदान इन दिनों पूरी दुनिया के कौतूहल का केंद्र बना हुआ है। मेक्सिको सिटी के दक्षिणी छोर पर स्थित एक प्राचीन और बुझे हुए ज्वालामुखी के खोखले हिस्से (क्रेटर) के ठीक बीचों-बीच एक अनोखा फुटबॉल मैदान तैयार किया गया है। स्थानीय लोग इसे 'फील्ड ऑफ द गॉड्स' यानी देवताओं का मैदान कहकर पुकारते हैं। हरी-भरी झाड़ियों और ऊंचे पहाड़ों की प्राकृतिक गोद में बसा यह मैदान हर रविवार को जीवंत हो उठता है, जब यहां ‘सांता सेसिलिया टेपेटलापा’ कस्बे की पारंपरिक फुटबॉल लीग का रोमांच शुरू होता है।
एक ही परिवार की 10 टीमें और दादा-पोते का अनोखा मुकाबला
इस खास मैदान पर 'टेओका एमेच्योर लीग' का आयोजन किया जाता है, जिसमें कुल 10 टीमें हिस्सा लेती हैं। इस लीग की सबसे अनोखी और खूबसूरत बात यह है कि यहां खेलने वाली हर टीम इसी कस्बे के एक ही परिवार के सदस्यों से मिलकर बनती है। यहां खेल और उम्र के बीच कोई दीवार नहीं है; यही वजह है कि मैदान पर 15 साल के युवा अपने ही परिवार के 65 साल के बुजुर्गों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर फुटबॉल के पीछे दौड़ते नजर आते हैं। हालांकि, इस लीग में महिलाएं खुद मैदान पर खेलने नहीं उतरती हैं, लेकिन हर रविवार को वे बेहद उत्साह के साथ बाउंड्री के बाहर खड़े होकर तालियों की गड़गड़ाहट से अपनी पारिवारिक टीमों का हौसला बढ़ाती हैं।
संकट से निकला समाधान: ज्वालामुखी के गर्त में बना खेल का मैदान
इस अद्भुत मैदान के वजूद में आने की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। सांता सेसिलिया टेपेटलापा कस्बा बेहद संकरी, पथरीली और ढलान वाली खड़ी पहाड़ियों के बीच बसा हुआ है, जिसके कारण पूरे इलाके में खेल का मैदान बनाने के लिए कहीं भी समतल जमीन उपलब्ध नहीं थी। इस भौगोलिक संकट का हल निकालने के लिए ग्रामीणों ने इस बुझे हुए ज्वालामुखी के गड्ढे का रुख किया, क्योंकि इसके अंदरूनी हिस्से का धरातल सबसे सीधा और सपाट था। भले ही यह पूरी तरह धूल और मिट्टी से भरा मैदान है, लेकिन इसकी देखरेख पूरे गांव की सामूहिक प्रतिष्ठा और स्वाभिमान से जुड़ी हुई है।
सरकारी हस्तक्षेप से दूरी: आत्मनिर्भरता और स्वाभिमान की मिसाल
इस मैदान की सफाई, रखरखाव और मरम्मत का सारा जिम्मा गांव वाले खुद बारी-बारी से संभालते हैं। इसके लिए वे आपस में चंदा इकट्ठा करते हैं और किसी भी तरह की सरकारी मदद लेने से साफ इनकार करते हैं। आत्मनिर्भरता के पीछे ग्रामीणों का अपना एक मजबूत तर्क है। उनका मानना है कि यदि सरकार या नगर पालिका ने इस मैदान के विकास के नाम पर एक भी रुपया खर्च किया, तो वे इस पर अपना बोर्ड लगा देंगे और इस अनूठी विरासत पर अपना मालिकाना हक जताने लगेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि यह मैदान और पहाड़ी पूरे गांव की सामूहिक धरोहर है, और सरकार को इससे दूर रखकर ही वे इस खेल की स्वतंत्रता को अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रख सकते हैं।
POK में प्रदर्शन के दौरान गोलीबारी, 16 लोगों की दर्दनाक मौत
12 Jun, 2026 11:39 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रावलकोट: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के रावलकोट में बुनियादी अधिकारों, बेतहाशा महंगाई और बिजली की बढ़ी हुई दरों के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे नागरिकों पर सुरक्षा बलों ने अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं। पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स द्वारा की गई इस बर्बर फायरिंग में कम से कम 16 प्रदर्शनकारियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 37 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। यह खूनी झड़प उस समय हुई जब हजारों की संख्या में स्थानीय लोग अपने राजनीतिक और आर्थिक अधिकारों को लेकर सड़क पर उतरे थे।
ईदगाह मैदान में शांतिपूर्ण भीड़ पर सेना ने दागीं गोलियां
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, रावलकोट के ईदगाह मैदान में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी शांतिपूर्वक अपनी मांगें रख रहे थे। इसी दौरान पाकिस्तानी रेंजर्स और सुरक्षा बलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए उन पर सीधी फायरिंग शुरू कर दी। अचानक हुई इस गोलीबारी से मैदान में चीख-पुकार मच गई और चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों की मदद से आनन-फानन में घायलों को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया है, जहां कई की हालत गंभीर बनी हुई है।
JAAC पर प्रतिबंध के बाद और भड़का जन-आक्रोश
PoK में पिछले कई दिनों से सस्ती बिजली, सब्सिडी वाले गेहूं-चावल और अधिक लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग को लेकर बड़े पैमाने पर जन-आंदोलन चल रहा है। हाल ही में वहां के प्रशासन द्वारा इस आंदोलन की अगुवाई कर रही 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद तनाव और ज्यादा गहरा गया। गुस्साए लोगों को दबाने के लिए प्रशासन ने कई सामाजिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारियां की हैं तथा सुरक्षा के नाम पर कुछ अशांत क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाएं भी पूरी तरह बंद कर दी हैं।
बर्बर कार्रवाई के खिलाफ सड़कों पर उतरे महिला और बच्चे
रावलकोट में हुए इस भीषण गोलीकांड की खबर फैलते ही खाई गाला समेत PoK के कई अन्य इलाकों में विरोध प्रदर्शन और ज्यादा तेज हो गए हैं। सुरक्षा बलों की इस बर्बर कार्रवाई के खिलाफ लोगों में भारी गुस्सा है, जिसके विरोध में पूरे क्षेत्र में बाजार पूरी तरह बंद रहे। सुरक्षा बलों की ज्यादतियों के खिलाफ पुरुषों के साथ-साथ बड़ी संख्या में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों ने भी सड़कों पर उतरकर मार्च निकाला और पाकिस्तानी प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
मनाली-जयपुर वॉल्वो बस पलटी, 11 यात्री गंभीर; दो की मौत से मचा हड़कंप
12 Jun, 2026 11:12 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महेंद्रगढ़। हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले में नेशनल हाईवे-152D पर शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना सामने आई है। बुचावास के समीप एक तेज रफ्तार टूरिस्ट बस सड़क किनारे खड़े ट्रक से पीछे से टकरा गई। इस भीषण टक्कर में बस में सवार दो यात्रियों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, जबकि 11 अन्य सहयात्री गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे का शिकार हुए सभी लोग हिमाचल प्रदेश के मनाली से छुट्टियां मनाकर वापस अपने घर जयपुर लौट रहे थे। दुर्घटना की तीव्रता इतनी अधिक थी कि टक्कर के बाद बस का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और यात्रियों में चीख-पुकार मच गई।
चालक को झपकी आने की आशंका
अस्पताल में उपचाराधीन घायल यात्रियों ने आपबीती बताते हुए कहा कि हाईवे के किनारे लोहे के सरियों से लदा एक ट्रक खड़ा हुआ था, जिसे बस चालक भांप नहीं पाया और गाड़ी सीधे उसमें जा घुसी। शुरुआती अनुमानों के आधार पर यह अंदेशा जताया जा रहा है कि अलसुबह बस चलाते समय ड्राइवर को अचानक नींद की झपकी आ गई होगी या फिर कम दृश्यता के कारण उसे खड़ा हुआ ट्रक समय पर दिखाई नहीं दिया। टक्कर के बाद लोहे के सरिए बस के अंदर तक घुस गए, जिससे यात्रियों को संभलने का मौका भी नहीं मिला।
राहत दल ने घायलों को पहुंचाया अस्पताल
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन, हाईवे रेस्क्यू टीम और एम्बुलेंस कर्मी बिना वक्त गंवाए मौके पर पहुंचे। पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से काफी मशक्कत के बाद बस की बॉडी को काटकर भीतर फंसे यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला। सभी घायलों को तुरंत एम्बुलेंस के जरिए महेंद्रगढ़ के सिविल अस्पताल में दाखिल कराया गया। डॉक्टरों के मुताबिक, प्राथमिक इलाज के बाद गंभीर रूप से जख्मी मरीजों की नाजुक हालत को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए बड़े चिकित्सा केंद्र (हायर सेंटर) रेफर कर दिया गया है।
हादसे के बाद हाईवे पर लगा लंबा जाम
इस भीषण एक्सीडेंट के बाद नेशनल हाईवे पर कुछ समय के लिए वाहनों का आवागमन पूरी तरह ठप हो गया, जिससे दोनों तरफ गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं। मौके पर मौजूद पुलिस बल ने तुरंत क्रेन की मदद से दुर्घटनाग्रस्त बस को हाईवे के बीच से हटाकर किनारे किया और सुचारू रूप से ट्रैफिक चालू कराया। पुलिस ने मृतकों के शवों को कब्जे में लेकर पंचनामा तैयार किया है और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है, साथ ही हादसे के वास्तविक कारणों की कानूनी जांच शुरू कर दी गई है।
7 करोड़ के खर्च पर ब्रेक: हरियाणा में अफसरों के विदेशी दौरों पर प्रतिबंध
12 Jun, 2026 11:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में प्रशासनिक अधिकारियों की विदेश यात्राओं के लिए कुल 6 करोड़ 90 लाख रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया था। हालांकि, अब राज्य सरकार इस निर्धारित राशि में भारी कटौती करते हुए इसे आधा या उससे भी कम करने की योजना बना रही है। इसके साथ ही एक बड़े प्रशासनिक निर्णय के अंतर्गत सरकार ने आगामी सितंबर महीने तक सभी श्रेणी के अधिकारियों के विदेशी दौरों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। शासन का संकेत है कि यदि आगामी दिनों में वित्तीय और अन्य परिस्थितियां अनुकूल नहीं रहीं, तो इस रोक की समय सीमा को आगे के लिए भी बढ़ाया जा सकता है।
वित्त विभाग द्वारा तैयार किए गए आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न महकमों के लिए विदेश यात्रा भत्ते का निर्धारण अलग-अलग किया गया था। इस मद में मुख्य सचिवालय के हिस्से 4 करोड़ रुपये, सिंचाई विभाग के खाते में ढाई करोड़ रुपये तथा लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के लिए 30 लाख रुपये का बजटीय प्रावधान था। इसके साथ ही कृषि, पशुपालन, सहकारिता और अन्य छोटे विभागों को भी उनकी जरूरत के हिसाब से सीमित फंड दिया गया था। गौरतलब है कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार विदेशी दौरों के बजट में लगभग 175 प्रतिशत का भारी इजाफा किया गया था, जबकि बीते साल यह राशि महज ढाई करोड़ रुपये के स्तर पर सीमित थी। इस बार मुख्य सचिवालय और सिंचाई विभाग के बजट में बड़ा उछाल देखा गया था, परंतु अब सरकार अपने इस गैर-जरूरी खर्च को सीमित करने के प्रयास में जुट गई है। अधिकारियों के विदेश जाने पर लगाई गई इस पाबंदी के दौरान केवल किसी अति-आवश्यक चिकित्सीय आपातकाल (मेडिकल इमरजेंसी) की स्थिति में ही देश से बाहर जाने की विशेष छूट दी जाएगी। सरकार का तर्क है कि यह निर्णय राजकोषीय संतुलन बनाए रखने और वर्तमान हालातों को देखते हुए लिया गया है।
वाहनों के ईंधन खर्च पर भी चलेगी कैंची
हरियाणा में मंत्रियों और उच्च अधिकारियों के शासकीय वाहनों के ईंधन (पेट्रोल-डीजल) पर भी करोड़ों रुपये का आवंटन किया गया था। वित्त मंत्रालय के विवरण के अनुसार, मंत्रियों की गाड़ियों के ईंधन के लिए लगभग छह करोड़ रुपये और अफसरों के वाहनों के वास्ते चार करोड़ 20 लाख रुपये की व्यवस्था की गई थी। अब फिजूलखर्ची पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने सितंबर 2026 तक सभी सरकारी विभागों के पेट्रोलियम संबंधी खर्चों में अनिवार्य रूप से 20 प्रतिशत की कटौती करने का कड़ा फैसला किया है।
निगरानी के लिए तैयार होगा विशेष डिजिटल पोर्टल
इस नई व्यवस्था के तहत सरकार ने यह भी अनिवार्य कर दिया है कि प्रत्येक शासकीय विभाग को हर महीने अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी, जिसमें उनके द्वारा वाहनों के उपयोग में कम से कम 10 फीसदी की कमी दर्ज होना आवश्यक है। इस नियम का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित कराने और ईंधन की कुल बचत का सटीक हिसाब रखने के लिए हरियाणा सरकार एक विशेष डिजिटल पोर्टल भी विकसित करने जा रही है, जिसके माध्यम से हर विभाग की गतिविधियों की ऑनलाइन निगरानी की जाएगी।
एक वित्तीय वर्ष में केवल दो दौरों की व्यवस्था
उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने अधिकारियों और कर्मचारियों की विदेश यात्राओं को व्यवस्थित करने के लिए पिछले साल ही एक नई नीति लागू की थी। इस नीति के अंतर्गत सरकारी खर्चे पर होने वाले विदेशी दौरों की संख्या को सीमित कर दिया गया है। नए नियमों के मुताबिक, कोई भी प्रशासनिक अधिकारी एक वित्तीय वर्ष के भीतर अधिकतम एक आधिकारिक (ऑफिशियल) विदेश यात्रा और एक निजी विदेश यात्रा ही कर सकेगा। इसके अलावा, यदि कोई अफसर पूरी तरह से अपने निजी खर्च पर भी विदेश यात्रा करने का इच्छुक है, तो उसे भी एक वित्त वर्ष में केवल एक ही निजी यात्रा करने की प्रशासनिक अनुमति प्रदान की जाएगी।
‘आखिरी नजर’ की चाह में पर्यटक, ध्रुवीय भालू देखने को बढ़ी भीड़
12 Jun, 2026 10:43 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चर्चिल: जलवायु परिवर्तन के कारण विलुप्ति की कगार पर खड़े ध्रुवीय भालुओं (पोलर बीयर) को अंतिम बार देखने के लिए दुनिया भर के पर्यटक कनाडा के चर्चिल शहर में लाखों रुपये खर्च कर रहे हैं। कनाडाई राज्य मैनिटोबा के उत्तरी छोर पर स्थित इस छोटे से कस्बे को 'दुनिया की पोलर बीयर कैपिटल' (ध्रुवीय भालुओं की राजधानी) कहा जाता है। कभी यह शहर रेलवे, बंदरगाह और सैन्य ठिकानों पर निर्भर था, लेकिन इन सुविधाओं के बंद होने के बाद महज 900 की आबादी वाले इस कस्बे के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया। ऐसे कठिन समय में इस शहर ने खुद को ध्रुवीय भालू पर्यटन के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित किया।
लाखों रुपये खर्च कर 'लास्ट चांस टूरिज्म' का हिस्सा बन रहे पर्यटक
हडसन बे के तट पर बसा यह इलाका हर साल सर्दियों में समुद्री बर्फ जमने का इंतजार कर रहे ध्रुवीय भालुओं का मुख्य ठिकाना बन जाता है। स्थानीय निवासियों ने इस प्राकृतिक घटना को एक बड़े अवसर में बदला और विशेष 'टुंड्रा वाहनों' के जरिए सैलानियों को भालुओं के बेहद करीब ले जाने लगे। आज यहां पोलर बीयर देखने के लिए पर्यटक 3,000 से 8,000 डॉलर (लगभग 2.5 से 6.6 लाख रुपये) तक खर्च कर रहे हैं, जबकि कुछ आलीशान लग्जरी आर्कटिक सफारी पैकेजों की कीमत 25,000 डॉलर (लगभग 20.8 लाख रुपये) प्रति व्यक्ति तक पहुंच गई है। यह अनोखा पर्यटन चर्चिल की स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है।
जलवायु परिवर्तन से आधी रह गई ध्रुवीय भालुओं की आबादी
इस फलते-फूलते पर्यटन उद्योग के पीछे एक बेहद कड़वा और परेशान करने वाला सच भी छिपा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि हडसन बे में वैश्विक तापमान बढ़ने के कारण समुद्री बर्फ लगातार कम होती जा रही है, जो इन भालुओं के लिए शिकार का मुख्य आधार है। बर्फ के समय से पहले पिघलने और देरी से जमने के कारण पोलर बीयरों को भरपेट भोजन नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनकी सेहत और प्रजनन क्षमता पर बहुत बुरा असर पड़ा है। यूनिवर्सिटी ऑफ मैनिटोबा के शोध के अनुसार, वर्ष 2016 से 2021 के बीच ही चर्चिल के ध्रुवीय भालुओं की संख्या में 27 प्रतिशत से अधिक की भारी गिरावट आई है, जो कि 1980 के दशक के मुकाबले अब करीब आधी ही बची है।
वर्ष 2050 तक विलुप्त होने का खतरा और बढ़ती विडंबना
पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि ग्लोबल वार्मिंग की रफ्तार पर लगाम नहीं कसी गई, तो वर्ष 2050 तक इन बेजुबान जीवों का अस्तित्व पूरी तरह खतरे में पड़ सकता है। इसी गंभीर संकट को देखते हुए पर्यटन कंपनियां अब इस यात्रा को ‘लास्ट चांस टूरिज्म’ यानी 'आखिरी मौका पर्यटन' के रूप में प्रमोट कर रही हैं। दुनिया भर के लोग इस खौफ के साथ चर्चिल पहुंच रहे हैं कि शायद अगली पीढ़ी इन शानदार जीवों को कभी साक्षात न देख पाए। यह एक बड़ी विडंबना है कि जैसे-जैसे इन जीवों का भविष्य धुंधला हो रहा है, उन्हें देखने की होड़ और पर्यटन उद्योग का मुनाफा उतनी ही तेजी से बढ़ रहा है।
ट्रंप का दावा समाप्त युद्ध, ईरान ने नकारा डील
12 Jun, 2026 09:47 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच फरवरी महीने से जारी सैन्य टकराव का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर देखने को मिल रहा है। हालांकि, कुछ समय के लिए संघर्ष विराम जरूर लागू हुआ था, लेकिन इसके बावजूद दोनों तरफ से छिटपुट हमले जारी रहे। इस तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि दोनों देशों के बीच जारी यह जंग अब समाप्त हो चुकी है। ट्रंप के मुताबिक, इस वीकेंड तक यूरोप में शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने की पूरी उम्मीद है। दूसरी तरफ, ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से चर्चा करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के साथ एक बेहद शानदार डील तैयार कर ली है, जो जल्द ही अंतिम रूप ले लेगी।
ट्रंप का दावा और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने का एलान
अमेरिकी राष्ट्रपति ने मीडिया से बातचीत में कहा कि इस शांति समझौते के लागू होते ही होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को आधिकारिक तौर पर पूरी तरह खोल दिया जाएगा। इसके बाद वहां से अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही पर लगी सभी पाबंदियां हट जाएंगी और व्यापार पहले की तरह सामान्य हो सकेगा। दिलचस्प बात यह है कि इस शांति घोषणा से ठीक पहले ट्रंप ने ईरान पर अब तक के सबसे भीषण हमले की चेतावनी दी थी, लेकिन ऐन वक्त पर उन्होंने अपने सैन्य आदेश को वापस ले लिया। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान भविष्य में कभी भी परमाणु हथियार न बनाने की शर्त पर राजी हो गया है।
ट्रंप पहले भी 38 बार कर चुके हैं ऐसा ही दावा
यह पहली बार नहीं है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने युद्ध खत्म होने की बात कही है। आंकड़ों के मुताबिक, वह अब तक अलग-अलग मौकों पर लगभग 38 बार जंग रोकने या समझौता होने का दावा कर चुके हैं। हालांकि, हर बार उनके ये दावे कुछ ही घंटों में जमीन पर धरे के धरे रह गए और दोनों देशों के बीच फिर से गोलाबारी शुरू हो गई। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ और कूटनीतिज्ञ ट्रंप के इस नए दावे को भी बेहद संदेह की नजर से देख रहे हैं।
ईरान ने अमेरिकी दावों को बताया हकीकत से दूर
डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। तेहरान का कहना है कि जब तक उनकी सरकार की तरफ से आधिकारिक तौर पर कोई घोषणा नहीं की जाती, तब तक अमेरिकी दावों में कोई सच्चाई नहीं है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि अभी तक किसी भी अंतिम समझौते पर मुहर नहीं लगी है। उनके मुताबिक, शांति प्रस्ताव अभी भी समीक्षा के दौर में है और कई बेहद संवेदनशील व महत्वपूर्ण मुद्दों पर आम सहमति बनना बाकी है।
किशोरों की ऑनलाइन गतिविधियों पर रोक लगाने की तैयारी, कनाडा में नया प्रस्ताव
12 Jun, 2026 08:39 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ओटावा: दुनिया भर में बच्चों और किशोरों के मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य पर सोशल मीडिया के पड़ रहे नकारात्मक प्रभावों को देखते हुए अब कनाडा सरकार ने एक बेहद सख्त कदम उठाया है। कनाडाई सरकार ने बच्चों को ऑनलाइन दुनिया के खतरों से बचाने के लिए संसद में एक नया डिजिटल सुरक्षा विधेयक पेश किया है। इस नए प्रस्तावित कानून के तहत 16 साल से कम उम्र के बच्चों और किशोरों के सोशल मीडिया इस्तेमाल करने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का प्रावधान किया गया है। हालांकि, इस कानून में उन टेक प्लेटफॉर्म्स को कुछ शर्तों के साथ छूट मिल सकती है, जो सरकार द्वारा तय किए गए कड़े सेफ्टी नियमों और मानकों का पूरी तरह पालन करेंगे।
डिजिटल रेगुलेटर की स्थापना और एआई चैटबॉट्स पर नकेल
इस डिजिटल सुरक्षा विधेयक के तहत न केवल सोशल मीडिया बल्कि तेजी से लोकप्रिय हो रहे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) चैटबॉट्स को भी बच्चों के लिए सुरक्षित बनाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए एक नया डिजिटल रेगुलेटर (नियामक) बनाने का प्रस्ताव रखा गया है, जो मुख्य रूप से ऑनलाइन सुरक्षा नियमों को तैयार और लागू करेगा। कनाडा के इस कड़े रुख के साथ ही वह अब उन देशों की कतार में शामिल हो गया है जो टेक कंपनियों पर नकेल कस रहे हैं। कनाडाई सरकार के मंत्रियों ने इस पर चिंता जताते हुए कहा है कि इंटरनेट के माध्यम से होने वाले ऑनलाइन नुकसान के बेहद गंभीर परिणाम सामने आ रहे हैं और बच्चों की सुरक्षा के मामले को अब और टाला नहीं जा सकता है।
लापरवाही बरतने वाली टेक कंपनियों पर लगेगा भारी जुर्माना
कनाडा के इस प्रस्तावित कानून की सबसे खास बात यह है कि इसमें नियमों की अनदेखी करने वाली कंपनियों के लिए भारी-भरकम जुर्माने का प्रावधान किया गया है। यदि कोई सोशल मीडिया या टेक कंपनी इन सुरक्षा नियमों का पालन करने में विफल रहती है, तो उस पर उसके कुल वैश्विक राजस्व (ग्लोबल रेवेन्यू) का 3 प्रतिशत या 1 करोड़ कनाडाई डॉलर (लगभग 68 करोड़ रुपये) तक की पेनाल्टी लगाई जा सकती है, जो भी राशि अधिक होगी। सरकार ने बिल सी-34 के प्रस्ताव में स्पष्ट रूप से कहा है कि ऑनलाइन होने वाले नुकसान सिर्फ यूज़र्स की वजह से नहीं, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के डिजाइन और उनके काम करने के तौर-तरीकों के कारण भी होते हैं। कंपनियों को अब अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद संभावित जोखिमों को खुद पहचानना होगा और उन्हें दूर करना होगा।
कनाडा से पहले इन देशों ने भी उठाए हैं कड़े कदम
कनाडा से पहले कई अन्य देश भी इस दिशा में ठोस कदम उठा चुके हैं। ऑस्ट्रेलिया पिछले साल दिसंबर में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया को पूरी तरह प्रतिबंधित करने वाला दुनिया का पहला देश बना था, जिसके बाद कंपनियों ने एक महीने के भीतर करीब 50 लाख टीनएजर्स के अकाउंट बंद कर दिए थे। इसी तरह का एक और संदर्भ यूरोपीय देश ग्रीस से भी सामने आया है, जिसने पहले ही यह ऐलान कर दिया है कि वह आगामी जनवरी 2027 से 15 साल से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूरी तरह रोक लगा देगा। ब्रिटेन और फ्रांस जैसे कई अन्य प्रमुख देश भी बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए अपने नियामक कानूनों को लगातार कड़ा कर रहे हैं।
सुरक्षा योजनाओं में निवेश की कमी पर घिरे रक्षा मंत्री, पद छोड़ने को हुए मजबूर
11 Jun, 2026 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन (ब्रिटेन): ब्रिटेन की राजनीति से इस वक्त की एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। ब्रिटेन के रक्षा मंत्री जॉन हीली ने गुरुवार को अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया है। अपने इस कड़े फैसले के साथ ही उन्होंने देश के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं और उन पर सीधे आरोप लगाए हैं। जॉन हीली का कहना है कि प्रधानमंत्री देश की सीमाओं और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए आवश्यक सरकारी संसाधन और फंड (बजट) उपलब्ध नहीं करा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि सेना और देश की सुरक्षा के लिए सैन्य खर्च बढ़ाने की लगातार उठ रही मांगों को लेकर ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय और वित्त मंत्रालय (ट्रेजरी) के बीच पिछले कई महीनों से भारी खींचतान चल रही थी। मंत्रालयों के बीच जारी इस आपसी विवाद और असहमति के कारण ही पिछले साल से ब्रिटेन का महत्वपूर्ण रक्षा निवेश प्लान (डिफेंस इन्वेस्टमेंट प्लान) पूरी तरह अटका हुआ है, जिसे लेकर रक्षा मंत्री बेहद खफा थे।
'देश को सुरक्षित रखने में नाकाम रहे प्रधानमंत्री' - जॉन हीली
पूर्व रक्षा मंत्री जॉन हीली ने प्रधानमंत्री कीर स्टारमर को भेजे अपने आधिकारिक त्याग पत्र (इस्तीफे की चिट्ठी) में बेहद तीखे शब्दों का इस्तेमाल किया है। उन्होंने पत्र में लिखा, "पूरी दुनिया में जिस तरह से लगातार सुरक्षा के खतरे बढ़ रहे हैं, उस नाजुक दौर में भी आप देश की रक्षा के लिए जरूरी वित्तीय संसाधन और फंड जुटाने में पूरी तरह नाकाम साबित हुए हैं। इसके साथ ही देश का सरकारी खजाना (ट्रेजरी विभाग) भी सुरक्षा प्राथमिकताओं के लिए बजट देने को तैयार नहीं है।"
ब्रिटिश डिफेंस इंडस्ट्री में भारी नाराजगी, सुरक्षा पर मंडराया खतरा
रक्षा बजट और निवेश प्रस्तावों में हो रही इस प्रशासनिक देरी की वजह से ब्रिटेन की डिफेंस इंडस्ट्री (हथियार और सैन्य उपकरण बनाने वाली कंपनियां) सरकार से बेहद नाराज चल रही है। डिफेंस एक्सपर्ट्स और औद्योगिक घरानों का कहना है कि वर्तमान में वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक हालात (जियोपॉलिटिकल सिचुएशन) बेहद अस्थिर और तनावपूर्ण बने हुए हैं।
ऐसे संवेदनशील समय में, जब महाशक्ति अमेरिका धीरे-धीरे यूरोप की सामूहिक सुरक्षा से अपना ध्यान हटा रहा है, तब ब्रिटेन का अपने रक्षा निवेश को रोकना आत्मघाती साबित हो सकता है। कंपनियों का तर्क है कि बजट की कमी और अनिश्चितता के कारण वे देश की सुरक्षा से जुड़े दूरगामी और लंबे समय के सैन्य प्रोग्रामों में नया निवेश करने की स्थिति में नहीं हैं। जॉन हीली के इस इस्तीफे के बाद अब स्टारमर सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अपने देश के भीतर ही विपक्ष के कड़े घेरे में आ गई है।
जवाबी हमले पूरे, ट्रंप का तेहरान को चेतावनी भरा बयान
11 Jun, 2026 05:09 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव अब एक भीषण सैन्य टकराव में बदल गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने एलान किया है कि 10 जून को ईरान के भीतर कई सैन्य ठिकानों पर किए गए 'आत्मरक्षा हमले' पूरी तरह सफल रहे हैं। इस अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में ईरान की सेना 'इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कोर' (IRGC) ने भी दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते 'होर्मुज़ स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) में जहाजों को निशाना बनाकर पलटवार किया है।
अमेरिका ने ईरान के भीतर किन ठिकानों को बनाया निशाना?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने गुरुवार सुबह बयान जारी कर बताया कि बुधवार को शुरू हुई यह कार्रवाई ईरान की लगातार जारी आक्रामकता का जवाब थी। अमेरिकी मरीन कोर, वायु सेना और नौसेना ने मिलकर ईरान के भीतर निम्नलिखित ठिकानों पर सटीक हथियारों (Precision Weapons) से भीषण बमबारी की:
ईरान की सैन्य निगरानी क्षमताएं (Military Surveillance)
सेना के संचार सिस्टम (Communication Systems)
ईरान के एयर डिफेंस ठिकाने (Air Defense Sites)
अमेरिका का दावा है कि ये वो ठिकाने थे, जिनसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों और अमेरिकी सुरक्षा बलों को सीधा खतरा था। इस ताजा हमले ने अप्रैल महीने में दोनों देशों के बीच हुए बेहद नाजुक युद्धविराम (Ceasefire) को पूरी तरह खत्म कर दिया है।
ईरान का पलटवार: होर्मुज़ स्ट्रेट में जहाजों पर हमला
अमेरिका के इस बड़े हवाई हमले के जवाब में ईरान की घातक सेना IRGC ने भी मोर्चा खोल दिया है। ईरान ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए सबसे संवेदनशील माने जाने वाले 'होर्मुज़ स्ट्रेट' में दो जहाजों पर हमला किया।
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसथ ने इस पर सख्त लहजा अपनाते हुए कहा कि ईरान को शांति समझौता करने का पूरा मौका दिया गया था, लेकिन उसने इसका फायदा नहीं उठाया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान अब भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आया, तो उसके अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों पर भी बम गिराए जाएंगे।
राष्ट्रपति ट्रंप की दो टूक और ईरान का जवाब
इस ताजा सैन्य कार्रवाई से कुछ घंटे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा था, "हमने कल भी उन पर सख्ती से हमला किया था और आज भी हम उन पर सख्ती से हमला करने जा रहे हैं।" ट्रंप ने साफ कहा कि ईरानी नेताओं ने शांति समझौते पर बातचीत करने में बहुत ज्यादा देर कर दी है और अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है।
ईरान का रुख: ट्रंप की इस खुली धमकी पर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने पलटवार करते हुए कहा कि ईरान किसी भी महाशक्ति के दबाव या धमकी के सामने घुटने नहीं टेकेगा और डटकर खड़ा रहेगा। वहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह एक तरफ हमले कर रहा है और दूसरी तरफ बातचीत का ढोंग रचकर कूटनीतिक प्रक्रिया को खुद नुकसान पहुंचा रहा है।
कुवैत ने हवाई क्षेत्र बंद किया, ईरानी हमलों के चलते एयर ट्रैफिक डायवर्ट
11 Jun, 2026 04:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कुवैत सिटी। खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) में अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी भीषण जंग का असर अब पड़ोसी देशों पर भी साफ दिखने लगा है। ईरान की तरफ से लगातार दागी जा रही मिसाइलों और ड्रोन हमलों के खतरे को देखते हुए कुवैत सरकार ने एक बेहद कड़ा सुरक्षा कदम उठाया है। कुवैत ने अपने पूरे हवाई क्षेत्र (Airspace) को अस्थायी रूप से पूरी तरह बंद करने का एलान किया है।
कुवैत के नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने इस फैसले की पुष्टि करते हुए बताया कि यात्रियों की सुरक्षा को सबसे ऊपर रखते हुए कुवैत आने वाली सभी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स का रूट बदल दिया गया है और उन्हें सुरक्षित हवाई अड्डों की तरफ डायवर्ट किया जा रहा है। इस पूरी खबर को आसान शब्दों में नीचे समझें:
हवाई क्षेत्र बंद होने से पहले आसमान में मंडराते रहे विमान
कुवैत सरकार द्वारा एयरस्पेस बंद करने की अचानक की गई इस घोषणा से पहले कई यात्री विमान आसमान में ही काफी देर तक चक्कर काटते रहे। कुवैत की सेना ने बताया कि ईरान की तरफ से बढ़ रहे हवाई खतरों को देखते हुए देश की एयर डिफेंस प्रणालियां (Air Defense Systems) पूरी तरह एक्टिव हैं और जवाबी गोलीबारी कर रही हैं। गौरतलब है कि हाल ही में कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी ईरानी हमले की चपेट में आ गया था, जिसमें एक व्यक्ति की जान चली गई थी और कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसी के बाद नागरिक विमानों की सुरक्षा के लिए यह बड़ा फैसला लिया गया।
बगदाद में अमेरिकी दूतावास का अलर्ट: 'तुरंत देश छोड़ें अमेरिकी नागरिक'
खाड़ी में बढ़ते युद्ध के बाद इराक की राजधानी बगदाद में स्थित अमेरिकी दूतावास (US Embassy) ने एक बेहद गंभीर सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। दूतावास ने अपने सभी नागरिकों को तुरंत इराक छोड़ने की सख्त हिदायत दी है। साथ ही अमेरिकी नागरिकों को मौजूदा हालातों में इराक की यात्रा न करने की सलाह दी गई है। दूतावास ने चेतावनी दी है कि क्षेत्र में युद्ध के हालात पल-पल बदल रहे हैं, जिससे बिना किसी पूर्व सूचना के कभी भी एयरस्पेस बंद हो सकता है और उड़ानों में रुकावट आ सकती है।
जॉर्डन के आसमान में मिसाइल-ड्रोन, अमेरिकी नागरिकों को शेल्टर में रहने की सलाह
इराक के साथ-साथ जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी दूतावास ने भी अपने नागरिकों के लिए 'रेड अलर्ट' जारी किया है। दूतावास ने कहा है कि ऐसी पुख्ता रिपोर्ट्स हैं कि इस समय जॉर्डन के हवाई क्षेत्र (आसमान) में भारी मात्रा में मिसाइलें, रॉकेट और आत्मघाती ड्रोन उड़ रहे हैं। अमेरिकी दूतावास ने नागरिकों से अपील की है कि वे तुरंत अपने घरों या सुरक्षित बंकरों (शेल्टर) में छिप जाएं, छतों या खुले आसमान के नीचे बिल्कुल न जाएं और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी किए जा रहे सुरक्षा अलर्ट पर लगातार नजर बनाए रखें।
जनता सड़कों पर, कुशनर के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन तेज
11 Jun, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तिराना। अल्बानिया में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जारेड कुशनर की प्रस्तावित निवेश परियोजना के खिलाफ जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। राजधानी तिराना सहित देश के कई हिस्सों में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं और इसे 'फ्लेमिंगो रेवोल्यूशन' (Flamingo Revolution) का नाम दिया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री कार्यालय का घेराव कर सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की है।
क्यों हो रहा है जारेड कुशनर के प्रोजेक्ट का विरोध?
जारेड कुशनर की निवेश फर्म 'एफिनिटी पार्टनर्स' अल्बानिया के खूबसूरत और पर्यावरण के लिहाज से बेहद संवेदनशील तटीय क्षेत्र (नार्टा लैगून और साजान द्वीप) में करीब 4 अरब डॉलर की लागत से एक बड़ा लग्जरी रिसॉर्ट, विला और होटल प्रोजेक्ट विकसित करना चाहती है। स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण संगठनों का आरोप है कि इस भारी-भरकम निर्माण से वहां के प्राकृतिक संसाधनों को गंभीर नुकसान पहुंचेगा। यह इलाका लुप्तप्राय प्रजातियों और प्रवासी पक्षियों, खासकर 'पिंक फ्लेमिंगो' (राजहंस) का प्राकृतिक आवास है। यही वजह है कि प्रदर्शनकारी हाथों में गुलाबी फ्लेमिंगो के कट-आउट लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
सुरक्षा गार्ड की बदसलूकी के बाद भड़का गुस्सा
यह विवाद तब और ज्यादा बढ़ गया जब पिछले दिनों निर्माण स्थल पर काम शुरू करने के लिए बुलडोज़र और भारी मशीनें पहुंच गईं। इस दौरान विरोध कर रहे एक पर्यावरण कार्यकर्ता को निजी सुरक्षा गार्ड द्वारा घसीटे जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस घटना ने आग में घी का काम किया, जिसके बाद प्रदर्शनों का दायरा राजधानी तिराना तक फैल गया। प्रदर्शनकारियों ने "अल्बानिया बिकाऊ नहीं है" के नारे लगाते हुए जारेड कुशनर और उनकी पत्नी इवांका ट्रंप के इस प्रोजेक्ट को तुरंत रद्द करने की मांग की है।
भ्रष्टाचार के आरोप और सरकारी रुख
आंदोलनकारियों का आरोप है कि अल्बानिया की सरकार ने इस प्रोजेक्ट को मंजूरी देने में पारदर्शिता नहीं बरती और इसके लिए साल 2024 में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कानूनों में भी चुपके से बदलाव कर दिए गए। विवाद बढ़ता देख देश की एंटी-करप्शन जांच एजेंसी (SPAK) ने इस जमीन सौदे और नियमों में हुए बदलावों की औपचारिक जांच शुरू कर दी है। दूसरी तरफ, अल्बानिया के प्रधानमंत्री एदी रामा इस परियोजना के समर्थन में खड़े हैं। उनका कहना है कि इस मेगा प्रोजेक्ट से देश में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और वे किसी भी कीमत पर इस निवेश को रुकने नहीं देंगे।
तीन युवकों को रौंदकर निकली स्कॉर्पियो, परिजनों ने कहा- यह दुर्घटना नहीं, सुनियोजित हत्या
11 Jun, 2026 02:28 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पानीपत। समालखा के अंतर्गत आने वाले गांव डिकाडला में बुधवार रात एक बेहद दर्दनाक और संदिग्ध घटनाक्रम सामने आया है। यहां एक तेज रफ्तार स्कॉर्पियो गाड़ी ने गांव के बाहर सड़क के किनारे खड़े तीन युवकों को अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी भीषण थी कि दो युवकों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, जबकि तीसरे युवक ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है, वहीं पीड़ितों के परिवारों में कोहराम मच गया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए वारदात में शामिल स्कॉर्पियो गाड़ी को रात में ही अपने कब्जे में ले लिया है।
खेत पर जाते समय बातचीत के दौरान हुआ हादसा
स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना बुधवार रात करीब 9:00 बजे की है। गांव का रहने वाला विनोद अपनी इलेक्ट्रिक स्कूटी पर सवार होकर खेतों की तरफ जा रहा था। इसी दौरान आट्टा रोड पर उसकी मुलाकात गांव के ही दो अन्य युवकों, नरेंद्र और अनीप से हो गई। तीनों अपनी गाड़ियां सड़क के किनारे खड़ी करके आपस में बातचीत करने लगे। वे अभी चर्चा कर ही रहे थे कि अचानक सामने से आई एक अनियंत्रित और अत्यधिक तेज रफ्तार स्कॉर्पियो गाड़ी ने तीनों को जोरदार टक्कर मार दी, जिससे नरेंद्र और अनीप ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
अस्पताल ले जाते समय तीसरे युवक ने भी तोड़ा दम
इस भीषण टक्कर की आवाज सुनकर आसपास के लोग और राहगीर तुरंत मौके पर पहुंचे। हादसे में गंभीर रूप से जख्मी विनोद सड़क पर लहूलुहान हालत में तड़प रहा था। ग्रामीणों ने बिना समय गंवाए उसे संभाला और तुरंत नजदीकी अस्पताल के लिए रवाना किया। हालांकि, विनोद के शरीर में आई गंभीर चोटों और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उसने अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में दम तोड़ दिया। एक ही गांव के तीन घरों के चिराग बुझने से डिकाडला गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है।
परिजनों ने लगाया सोची-समझी साजिश के तहत हत्या का आरोप
इस पूरे मामले में उस वक्त एक नया मोड़ आ गया जब मृतकों के परिजनों ने इसे महज एक सड़क दुर्घटना मानने से साफ इनकार कर दिया। परिजनों का गंभीर आरोप है कि यह कोई सामान्य हादसा नहीं है, बल्कि एक सोची-समझी साजिश के तहत तीनों युवकों को ठिकाने लगाने के लिए उन पर गाड़ी चढ़ाई गई है। पीड़ितों ने पुलिस प्रशासन से गुहार लगाई है कि इस मामले की हर एक संभावित कोण से गहराई से तफ्तीश की जाए। पुलिस ने परिजनों की शिकायत के आधार पर मामले की गहनता से जांच शुरू कर दी है।
आतंकवाद से निपटने की नई तैयारी, हरियाणा में ATS गठन को मिली मंजूरी
11 Jun, 2026 02:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने और आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियों पर पूरी तरह लगाम लगाने के लिए राज्य में 'एंटी टेररिज्म स्क्वॉड' (एटीएस) के गठन का एक बड़ा फैसला लिया है। इस महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम को लेकर सूबे के गृह विभाग द्वारा आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है। सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, राज्य के राज्यपाल की स्वीकृति के बाद अपराध अन्वेषण विभाग (सीआईडी) के अंतर्गत एक अत्यंत विशिष्ट और अत्याधुनिक जांच एजेंसी के रूप में एटीएस काम करेगी। इस नई विंग का मुख्य दायित्व देश विरोधी ताकतों का मुकाबला करना, आतंकी साजिशों को समय रहते नाकाम करना और आतंकवाद से जुड़े मामलों की त्वरित जांच कर उन्हें अंजाम तक पहुंचाना होगा। इस विशेष इकाई की कमान पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) या उससे उच्च रैंक के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के हाथों में होगी, जो सीआईडी प्रमुख के जरिए सीधे पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।
पंचकूला में बनेगा राज्य स्तरीय मुख्यालय
प्रशासनिक रूप से एटीएस को सुचारू ढंग से संचालित करने के लिए हरियाणा सरकार ने इसका राज्य स्तरीय मुख्य कार्यालय (हेडक्वार्टर) पंचकूला में स्थापित करने का निर्णय लिया है। गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल के हस्ताक्षर से जारी इस सरकारी आदेश में रेखांकित किया गया है कि एक समर्पित आतंकवाद विरोधी बल के अस्तित्व में आने से राज्य की खुफिया और रणनीतिक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। यह विशेष बल भविष्य में सामने आने वाली किसी भी प्रकार की सुरक्षा संबंधी अप्रत्याशित चुनौतियों और संकटों का अधिक मुस्तैदी तथा आधुनिक तकनीकों के सहारे मुकाबला करने में पूरी तरह सक्षम होगा।
पंचकूला और गुरुग्राम में खुलेंगे हाईटेक एटीएस थाने
राज्य में आतंकवाद से संबंधित विशिष्ट अपराधों की विधिक जांच और कानूनी प्रक्रिया को गति देने के लिए सरकार ने दो नए 'एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड' पुलिस थानों की स्थापना की घोषणा भी की है। गृह मंत्रालय की कार्ययोजना के तहत ये दोनों विशेष थाने पंचकूला और गुरुग्राम जैसे प्रमुख कॉर्पोरेट व प्रशासनिक केंद्रों में स्थापित किए गए हैं। इन थानों में केवल आतंकवाद, राष्ट्र विरोधी गतिविधियों, अवैध हथियारों व फंडिंग से जुड़े मामलों की ही एफआईआर दर्ज की जाएगी और यहां तैनात पुलिसकर्मियों को विशेष रूप से ऐसे जटिल मामलों की तफ्तीश करने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।
दोनों विशेष थानों का भौगोलिक अधिकार क्षेत्र तय
सरकार ने काम के बेहतर बंटवारे के लिए दोनों एटीएस पुलिस थानों के भौगोलिक कार्यक्षेत्र का स्पष्ट विभाजन कर दिया है। इसके तहत पंचकूला एटीएस थाना मुख्य रूप से राज्य के उत्तरी और पश्चिमी हिस्से के 15 जिलों क्रमशः पंचकूला, अंबाला, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, करनाल, पानीपत, कैथल, हिसार, हांसी, फतेहाबाद, जींद, सिरसा, रोहतक, भिवानी और चरखी दादरी को कवर करेगा। वहीं, दूसरी ओर गुरुग्राम एटीएस थाने के जिम्मे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) से सटे दक्षिण और पूर्वी हिस्से के 8 जिले सौंपे गए हैं, जिनमें सोनीपत, झज्जर, गुरुग्राम, फरीदाबाद, पलवल, नूंह, रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ शामिल हैं। इन निर्धारित जिलों में होने वाली किसी भी संदिग्ध या आतंकी घटना की जांच का सीधा जिम्मा अब इन्हीं थानों के पास होगा।
हादसे के बाद प्रशासन सख्त, सुपरवाइजर पर गिरी गाज और कंपनी हुई ब्लैकलिस्ट
