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IRGC के हमलों ने बढ़ाई चिंता, कुवैत पर एयरस्ट्राइक की खबर
10 Jun, 2026 10:59 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी सैन्य संघर्ष अब और अधिक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना के एक अपाचे हेलीकॉप्टर के क्रैश होने के बाद, अमेरिकी वायुसेना ने ईरान पर जवाबी कार्रवाई करते हुए उसके चार प्रमुख ठिकानों को निशाना बनाया। इस अमेरिकी हमले से भड़के ईरान के 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) ने भी तुरंत और भीषण पलटवार शुरू कर दिया है। ईरान ने बहरीन में अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट और जॉर्डन के मुवफ्फाक साल्टी एयरबेस (अल-अज़राक एयरबेस) पर बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागने के बाद, अब अमेरिका के एक और बड़े रणनीतिक साझेदार कुवैत पर बड़ा हमला बोल दिया है।
कुवैत पर हवाई हमले और एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव
ईरान की आईआरजीसी (IRGC) ने तड़के सुबह कुवैत की सीमा में घुसकर कई हवाई हमले (एयरस्ट्राइक्स) किए हैं। इस अचानक हुए मिसाइल और ड्रोन हमले के बाद कुवैती सेना के जनरल स्टाफ ने देश में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। कुवैत सरकार की ओर से आधिकारिक बयान जारी कर बताया गया है कि दुश्मन के इन हवाई हमलों को हवा में ही मार गिराने के लिए कुवैत के अत्याधुनिक 'एयर डिफेंस सिस्टम्स' को पूरी क्षमता के साथ एक्टिव कर दिया गया है। इसके साथ ही कुवैती सेना ने अपने नागरिकों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और केवल अधिकृत सरकारी स्रोतों से आने वाली खबरों पर ही भरोसा करते हुए सुरक्षा गाइडलाइंस का पालन करें।
अमेरिकी सैनिकों के गढ़ 'अली अल सलेम एयरबेस' को बनाया निशाना
ईरानी सेना ने कुवैत में विशेष रूप से 'अली अल सलेम एयरबेस' को अपना मुख्य निशाना बनाया है। सामरिक दृष्टि से यह एयरबेस अमेरिका के लिए मिडिल ईस्ट में सबसे महत्वपूर्ण और सुरक्षित सैन्य ठिकानों में से एक माना जाता है। इस एयरबेस की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां करीब 13,000 अमेरिकी सैनिक हर वक्त तैनात रहते हैं और अमेरिका के कई अत्याधुनिक लड़ाकू विमान और घातक हथियारों का जखीरा भी यहीं मौजूद है।
ईरान के साथ जारी इस युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना ने इसी एयरबेस का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हवाई हमलों के लिए किया है। यही वजह है कि ईरान इस एयरबेस को अपने लिए बड़ा खतरा मानता है और इसे निशाना बना रहा है। कुवैत लंबे समय से इस क्षेत्र में अमेरिका का सबसे करीबी सहयोगी रहा है, जिसके कारण वह अमेरिकी सेना को अपने एयरबेस इस्तेमाल करने की अनुमति देता है, और अब इसी सहयोग की वजह से कुवैत को ईरान के सीधे गुस्से का सामना करना पड़ रहा है।
राजस्व नुकसान के आरोप में फंसे कंडक्टर को हाईकोर्ट से राहत, 36 साल बाद मिला न्याय
10 Jun, 2026 10:41 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। सरकारी राजस्व को पहुंचे मात्र 108 रुपये के मामूली नुकसान का एक कानूनी विवाद पिछले 36 सालों से विभिन्न अदालतों के चक्कर काट रहा था, जिसका अंततः पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के अंतिम निर्णय के साथ पटाक्षेप हो गया है। हाई कोर्ट ने हरियाणा रोडवेज के एक पूर्व बस परिचालक (कंडक्टर) की याचिका को सिरे से खारिज करते हुए परिवहन विभाग द्वारा वर्षों पहले दी गई सजा को पूरी तरह से कानूनी और वैध करार दिया है। यह दिलचस्प और लंबा खिंचा मामला हरियाणा रोडवेज के जींद डिपो में तैनात तत्कालीन कंडक्टर राम कुमार से संबद्ध है। वर्ष 1989 में विभाग द्वारा की गई एक औचक जांच के दौरान उन पर यह गंभीर आरोप लगा था कि उन्होंने मछरौली से सिवाह के मार्ग पर कुछ यात्रियों को बिना टिकट बस में सफर करवाया था। इस अनियमितता के कारण सरकारी खजाने को 108 रुपये के राजस्व की चपत लगी थी और जांच टीम ने मौके पर बिना टिकट यात्रियों को सफर करते हुए पकड़ा था।
विभागीय जांच के बाद वेतन वृद्धि रोकने की मिली थी सजा
इस गड़बड़ी को लेकर जब विभाग ने अपनी जांच प्रक्रिया पूरी की, तो मार्च 1990 में राम कुमार के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की गई। विभाग ने उनकी एक वार्षिक वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) को संचयी प्रभाव (कम्युलेटिव इफेक्ट) के साथ रोकने का आदेश जारी कर दिया। कंडक्टर ने विभाग के इस फैसले का विरोध करते हुए इसे उच्च अधिकारियों के समक्ष चुनौती दी, परंतु जब वहां से कोई प्रशासनिक राहत नहीं मिली, तो उन्होंने न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया।
निचली अदालत से जिला जज तक चला कानूनी सफर
मामला अदालत पहुंचने के लगभग सात सालों के बाद, वर्ष 1996 में जींद की एक निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) ने परिचालक राम कुमार के पक्ष में अपना निर्णय सुनाया और रोडवेज विभाग द्वारा दिए गए दंड को पूरी तरह से निरस्त कर दिया। निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने अपील दायर की, जिस पर सुनवाई करते हुए वर्ष 1999 में जिला न्यायाधीश (डिस्ट्रिक्ट जज) ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को उलट दिया और परिवहन विभाग की अनुशासनात्मक कार्रवाई को बिल्कुल सही ठहराया। जिला अदालत के इस फैसले को चुनौती देते हुए कंडक्टर ने हाई कोर्ट का रुख किया था।
हाई कोर्ट ने विभाग की कार्रवाई को ठहराया पूरी तरह सही
विगत कई वर्षों से पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में लंबित चल रहे इस मुकदमे पर अब जाकर स्थिति साफ हुई है। मामले की अंतिम सुनवाई करते हुए जस्टिस सुदीप्ति शर्मा की एकल पीठ ने अपना फैसला सुनाया। उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मामले से जुड़े तमाम साक्ष्यों, विभागीय रिकॉर्डों और उपलब्ध तथ्यों का गहराई से अवलोकन करने के बाद यह साफ है कि विभाग द्वारा की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है और इसे किसी भी सूरत में अवैध नहीं माना जा सकता। इसके साथ ही कोर्ट ने कंडक्टर की अपील को खारिज कर दिया।
हरियाणा में नर्सिंग कर्मियों की हड़ताल फिलहाल रुकी, रेनु भाटिया के इस्तीफे से बदले हालात
10 Jun, 2026 10:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अंबाला। हरियाणा के सरकारी नागरिक अस्पतालों में नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन की ओर से प्रस्तावित दो घंटे की 'पेन डाउन' हड़ताल को फिलहाल टाल दिया गया है। अंबाला की प्रधान नर्सिंग ऑफिसर नीलम ने इस संबंध में जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि संगठन की आगामी गेट मीटिंग के दौरान सभी प्रमुख मांगों और रणनीति पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। इससे पहले, कुरुक्षेत्र के एलएनजेपी अस्पताल में एक नाबालिग लड़की के साथ हुए यौन उत्पीड़न के संवेदनशील मामले में महिला आयोग की अध्यक्ष रेनू भाटिया द्वारा दिए गए एक विवादित बयान के खिलाफ नर्सिंग कर्मियों में भारी आक्रोश था, जिसके विरोध में पूरे प्रदेश के नर्सिंग स्टाफ ने मंगलवार को दो घंटे तक कार्य बहिष्कार किया था और बुधवार को भी इस हड़ताल को जारी रखने की घोषणा की गई थी।
काउंसलिंग की गोपनीय बातें सार्वजनिक करने का आरोप
प्रदेश नर्सिंग ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन की प्रांतीय अध्यक्ष विनीता कुमारी ने महिला आयोग की प्रमुख पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि रेनू भाटिया एक काउंसलर की हैसियत से पीड़ित नाबालिग बच्ची से मिलने गई थीं। एक काउंसलर के तौर पर पीड़ित बच्ची ने जो भी बातें साझा कीं, उन्हें मीडिया के सामने उजागर करना बच्ची को मानसिक रूप से और ज्यादा प्रताड़ित करने जैसा है। उन्होंने सवाल उठाया कि बंद कमरे में हुई काउंसलिंग की गोपनीय बातें आखिर सार्वजनिक रूप से बाहर कैसे आ गईं।
नर्सिंग स्टाफ के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी पर नाराजगी
एसोसिएशन की अध्यक्ष ने कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि रेनू भाटिया ने ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्सों को लेकर बेहद आपत्तिजनक और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग की अध्यक्ष ने हमारी साथी नर्सों पर अपनी बच्चियों को दुष्कर्मी के पास भेजने जैसी घिनौनी बात कही है। विनीता कुमारी ने कहा कि एक महिला आयोग की शीर्ष जिम्मेदारी संभालते हुए महिलाओं और सेवा भाव से काम करने वाली नर्सों के लिए ऐसे शब्दों का प्रयोग करना कतई बर्दाश्त के काबिल नहीं है। यह पूरे नर्सिंग जगत की महिलाओं का घोर अपमान है।
अमर्यादित बयानों से परिवारों और बच्चों पर पड़ रहा असर
विनीता ने नर्सिंग स्टाफ की पारिवारिक और मानसिक पीड़ा को बयां करते हुए कहा कि आज हमारी बेटियां बड़ी हो रही हैं, वे समाज की हर खबर को सुनती और समझती हैं। इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना और अमर्यादित बयानों के कारण जब नर्सें ड्यूटी के बाद अपने घर लौटती हैं, तो उनके खुद के बच्चे उनसे असहज करने वाले सवाल पूछ रहे हैं कि क्या उन्होंने ऐसा कृत्य करवाया है। इस मानसिक प्रताड़ना के विरोध में ही पूरे राज्य का नर्सिंग स्टाफ लामबंद हुआ था।
मृतकों के परिवारों को मिलेगी 10 लाख की अनुग्रह राशि, सीएम सैनी ने की घोषणा
10 Jun, 2026 10:28 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रोहतक। जिला मुख्यालय के डी पार्क क्षेत्र में मंगलवार की दोपहर को एक भीषण अग्निकांड का दर्दनाक वाकया सामने आया, जहां एक फुटवियर शोरूम सहित करीब दस दुकानें आग की लपटों की चपेट में आ गईं। इस भयावह हादसे में तीन लोगों की जिंदा जलने से दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों में से दो व्यक्तियों की पहचान 19 वर्षीय सौरभ उर्फ रोहित और 38 वर्षीय अमन के रूप में की गई है, जबकि बुरी तरह झुलस चुके तीसरे शव की शिनाख्त के प्रयास अभी भी जारी हैं।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने जताया गहरा दुख
रोहतक में घटित हुए इस दर्दनाक हादसे पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने गहरा शोक प्रकट किया है। उन्होंने इस अगिनकांड में अपनी जान गंवाने वाले अभागे लोगों के शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने आग की चपेट में आकर अस्पताल में उपचाराधीन सभी घायलों के जल्द से जल्द पूरी तरह स्वस्थ होने की मंगलकामना की है।
पीड़ित परिवारों को आर्थिक मदद की घोषणा
सरकार की तरफ से त्वरित राहत पहुंचाते हुए मुख्यमंत्री ने इस हादसे में जान गंवाने वाले प्रत्येक मृतक के आश्रित परिजनों को 10-10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि (एक्स-ग्रेशिया) देने का ऐलान किया है। इसके साथ ही अग्निकांड में झुलसे और जख्मी हुए पीड़ित परिवारों को संबल प्रदान करने के लिए 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि देने की भी आधिकारिक घोषणा की गई है।
मुफ्त इलाज और नुकसान के सटीक आकलन के निर्देश
प्रशासनिक स्तर पर उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए सरकार ने स्पष्ट किया है कि हादसे में घायल हुए सभी नागरिकों का सरकारी अस्पताल में पूरी तरह से निशुल्क (मुफ्त) इलाज सुनिश्चित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री ने रोहतक के उपायुक्त (डीसी) को इस भीषण आगजनी के कारण दुकानों और संपत्तियों को हुए कुल आर्थिक नुकसान का बारीकी से आकलन करने तथा जल्द से जल्द एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर शासन को सौंपने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।
रूस के तेल क्षेत्र में यूक्रेन के ड्रोन हमले का असर
9 Jun, 2026 05:35 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कीव: रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा भीषण युद्ध अब एक नए और बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। एक तरफ जहां दोनों देश एक-दूसरे पर लगातार घातक ड्रोन हमले कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पर्दे के पीछे चल रही बड़ी कूटनीति (डिप्लोमेसी) का भी पहली बार आधिकारिक तौर पर खुलासा हुआ है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि रूसी अरबपति और मशहूर फुटबॉल क्लब 'चेल्सी' के पूर्व मालिक रोमन अब्रामोविच दोनों देशों के बीच शांति वार्ता के लिए मध्यस्थ (बिचौलिए) की भूमिका निभा रहे हैं। जेलेंस्की ने बताया कि अब्रामोविच हाल ही में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का एक गोपनीय संदेश लेकर यूक्रेन की राजधानी कीव आए थे, ताकि यह समझा जा सके कि यूक्रेन शांति समझौते के लिए किस हद तक और क्या करने को तैयार है।
पुतिन का संदेश और जेलेंस्की की दो टूक
इस गुप्त मुलाकात के दौरान रोमन अब्रामोविच ने जेलेंस्की के सामने दोनों देशों के बीच बातचीत का एक ढांचा तैयार करने का प्रस्ताव रखा था। इस पर जेलेंस्की ने भी दो टूक शब्दों में अपना संदेश पुतिन तक पहुंचाने को कहा। जेलेंस्की ने साफ कर दिया कि यूक्रेन किसी भी कीमत पर अपने पूर्वी डोनबास क्षेत्र को नहीं छोड़ेगा, जिसके कुछ हिस्सों पर वर्तमान में रूस का अवैध कब्जा है। जेलेंस्की ने कहा कि उनका संदेश बिल्कुल स्पष्ट है—वे पुतिन से बातचीत करने के लिए हमेशा तैयार हैं। यह मुलाकात रूस और बेलारूस को छोड़कर दुनिया के किसी भी स्थान पर हो सकती है, चाहे यह बैठक केवल दोनों देशों के बीच हो या फिर इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूरोपीय देशों के नेता शामिल हों। हालांकि, जेलेंस्की ने शर्त रखी है कि किसी भी समझौते या कूटनीतिक समझौते से पहले रूस को पूरी तरह युद्धविराम (सीजफायर) करना होगा।
ड्रोन हमलों से दहला तेल संयंत्र और हवाई रक्षा प्रणाली
पर्दे के पीछे चल रही इस बातचीत के बीच जमीन पर जंग और तेज हो गई है। यूक्रेन ने रूस के भीतर और रूसी कब्जे वाले इलाकों में मौजूद तेल ठिकानों को निशाना बनाकर ड्रोनों की झड़ी लगा दी है। यूक्रेन के जनरल स्टाफ के मुताबिक, यूक्रेनी सेना ने रातभर रूस के क्रास्नोदार क्राई क्षेत्र में बड़ा हमला किया, जिससे नोवोरोस्सियस्क के पास स्थित ग्रुशोवाया तेल ट्रांसशिपमेंट बेस में भीषण आग लग गई। इसके अलावा वोल्गोग्राद क्षेत्र में स्थित क्रास्नी यार के एक अन्य संयंत्र को भी निशाना बनाया गया। इस बीच तेल और ईंधन के इस बड़े संकट को लेकर क्रेमलिन (रूसी राष्ट्रपति कार्यालय) के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि ऊर्जा मंत्रालय और अन्य सुरक्षा एजेंसियां इस आपात स्थिति से निपटने के उपायों पर लगातार काम कर रही हैं।
दूसरी तरफ, रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उनकी सेनाओं ने सोमवार को आसमान में यूक्रेन के 310 ड्रोनों को मार गिराया। इनमें मॉस्को क्षेत्र, पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी रूस के साथ-साथ रूसी-अधिकृत क्रीमिया, काला सागर और आजोव सागर के ऊपर मंडरा रहे ड्रोन शामिल थे। रूसी वायु सेना ने यह भी बताया कि उन्होंने खुद 155 ड्रोनों का इस्तेमाल कर यूक्रेन के ठिकानों पर हमला किया, जिनमें से यूक्रेन की वायु रक्षा प्रणाली ने 124 ड्रोनों को हवा में ही नष्ट या निष्क्रिय कर दिया।
रूस पर यूरोपीय संघ की नई पाबंदियों की तैयारी
इस पूरे सैन्य और कूटनीतिक घटनाक्रम के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी रूस की घेराबंदी तेज हो गई है। यूरोपीय संघ (EU) की विदेश नीति इकाई ने घोषणा की है कि वे रूस के खिलाफ बेहद कड़े और नए प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव पर काम कर रहे हैं। इस नए प्रतिबंध प्रस्ताव में करीब 80 मुख्य बिंदु शामिल किए गए हैं। इनका मुख्य मकसद रूस के 'सैन्य औद्योगिक परिसर' (मिलिट्री-इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स), मानवाधिकारों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों और रूसी प्रोपेगैंडा (प्रचार) फैलाने वाले तंत्र को आर्थिक रूप से पूरी तरह पंगु बनाना है।
जॉकी शोरूम मैनेजर मर्डर केस में खुलासा, नरवाना से पकड़े गए दो संदिग्ध
9 Jun, 2026 04:39 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हांसी। बहुचर्चित सूरज जैन हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने में जुटी स्पेशल टास्क फोर्स (STF) हिसार के प्रभारी उपनिरीक्षक अनूप, सीआईए और स्थानीय सदर थाना पुलिस की संयुक्त टीम को एक बड़ी कामयाबी मिली है। सुरक्षा बलों ने कत्ल की इस सनसनीखेज वारदात में सीधे तौर पर शामिल दो वांटेड अपराधियों को दबोच लिया है। पुलिस गिरफ्त में आए इन हमलावरों की पहचान दुर्गा कॉलोनी के रहने वाले गौरव उर्फ गोचु और रवि उर्फ गोलू के रूप में हुई है। पुलिस टीम आज मंगलवार को दोनों को जिला अदालत में पेश कर गहन पूछताछ के लिए रिमांड पर लेगी।
वारदात के बाद राज्यों में छिपे रहे हत्यारोपी और मुख्य सरगना की तलाश जारी
पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार ने सोमवार को अपने कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस सफलता का ब्योरा साझा किया। उन्होंने बताया कि दोनों आरोपियों को सोमवार के दिन नरवाना इलाके से नाकाबंदी के दौरान दबोचा गया। हत्या को अंजाम देने के बाद से ही ये दोनों कानूनी शिकंजे से बचने के लिए राजस्थान, दिल्ली और भिवानी जैसे अलग-अलग शहरों के गुप्त ठिकानों पर फरारी काट रहे थे। प्रारंभिक जांच में यह बात खुलकर सामने आई है कि ये दोनों मुख्य आरोपी साहिल बामल के बेहद करीबी दोस्त हैं और वारदात के समय मौके पर मौजूद थे। पकड़े गए आरोपियों में से गौरव उर्फ गोचु का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी रहा है, जिसके खिलाफ हिसार के सिविल लाइन थाने में हत्या के प्रयास (धारा 307) और आर्म्स एक्ट के दो संगीन मुकदमे पहले से दर्ज हैं, जबकि मुख्य साजिशकर्ता साहिल बामल अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।
हत्या से पहले एक साथ पी थी शराब और स्कॉर्पियो छोड़कर हुए थे फरार
मामले की परतों को खंगाल रही पुलिस जांच में यह सच भी सामने आया है कि सूरज की बेरहमी से हत्या करने से पहले इन सभी आरोपियों ने एक साथ बैठकर भारी मात्रा में शराब का सेवन किया था। नशे में धुत होने के बाद इन्होंने सूरज पर जानलेवा हमला किया और उसकी जान ले ली। इस खूनी खेल को अंजाम देने के बाद सभी आरोपी वारदात में इस्तेमाल की गई स्कॉर्पियो गाड़ी को मुंढाल के पास लावारिस हालत में छोड़कर अलग-अलग दिशाओं में भाग निकले थे। गाड़ी छोड़ने के बाद गौरव और रवि एक साथ छिपे रहे, जबकि बाकी के तीन आरोपी दूसरे रास्तों से फरार हो गए। पुलिस रिमांड के दौरान इन दोनों से हत्या में प्रयुक्त हथियारों की बरामदगी और फरार सह-आरोपियों के ठिकानों के बारे में सघन पूछताछ करेगी।
प्रेम प्रसंग के चलते मॉल मैनेजर की चाकू गोदकर सरेआम की गई थी हत्या
गौरतलब है कि यह पूरी वारदात बीती 30 मई की रात करीब पौने नौ बजे घटित हुई थी, जब हिसार रोड पर स्थित एनएच 10 मॉल के जॉकी शोरूम में मैनेजर के पद पर तैनात मॉडल टाउन निवासी सूरज जैन की साहिल बामल ने अपने चार-पांच गुर्गों के साथ मिलकर सरेआम चाकुओं से गोदकर बेरहमी से हत्या कर दी थी। पुलिस ने मृतक के लाचार पिता दीपक जैन की तहरीर पर मुख्य आरोपी साहिल सहित अन्य हमलावरों के खिलाफ केस दर्ज किया था। कत्ल की मुख्य वजह त्रिकोणीय प्रेम प्रसंग (लव ट्रायंगल) बताई जा रही है, क्योंकि मुख्य आरोपी साहिल की पूर्व प्रेमिका इन दिनों मृतक सूरज जैन के संपर्क में थी, जिससे खुन्नस खाकर साहिल ने उसकी जान लेने की साजिश रची। फरार मुख्य आरोपी साहिल बामल पर पुलिस ने 5 हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा है और सीआईए सहित थाना सदर हांसी की टीमें उसे दबोचने के लिए लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।
नित्या ने मेयर पद पर कब्जा किया, भारतवंशी गौरव की कहानी
9 Jun, 2026 04:19 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लॉस एंजिल्स: भारतवंशी नित्या रमन ने लॉस एंजिल्स के मेयर पद की दौड़ में एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक जीत हासिल की है। इस जीत के साथ ही उन्होंने नवंबर में होने वाले मुख्य आम चुनाव (रन-ऑफ इलेक्शन) के लिए अपना टिकट पक्का कर लिया है। नित्या रमन ने इस त्रिकोणीय मुकाबले में पूर्व रियलिटी टीवी स्टार और रिपब्लिकन उम्मीदवार स्पेंसर प्रैट को कड़े मुकाबले में पीछे छोड़ते हुए चुनाव के अगले और अंतिम चरण में प्रवेश किया है। अब नवंबर के आम चुनाव में उनका सीधा मुकाबला मौजूदा मेयर करेन बैस से होगा। इस शानदार सफलता के बाद नित्या रमन ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लॉस एंजिल्स के मतदाताओं और अपने समर्थकों का दिल से आभार व्यक्त किया।
नित्या रमन ने अपने संदेश में कहा कि यह सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि उन हजारों कार्यकर्ताओं और समर्थकों की मेहनत का परिणाम है जिन्होंने दिन-रात एक करके उनके लिए घर-घर जाकर प्रचार किया, लोगों को फोन कॉल किए, संदेश भेजे, आर्थिक योगदान दिया और उनके इस चुनावी अभियान को जमीन पर मजबूत बनाया। रमन ने इसके साथ ही शहर के सामने मौजूद गंभीर चुनौतियों का भी खुलकर जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक लंबे समय से लॉस एंजिल्स की राजनीति में आम जनता के बजाय केवल प्रभावशाली और शक्तिशाली हित समूहों के फायदों को प्राथमिकता दी जाती रही है। इसी का नतीजा है कि आज शहर के आम नागरिक लगातार बढ़ते किराए, कमजोर सार्वजनिक सेवाओं और कई बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे हैं। उन्होंने वादा किया कि मेयर बनने के बाद वे एक ऐसा लॉस एंजिल्स बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से काम करेंगी जो सभी नागरिकों के लिए सुरक्षित, किफायती और हर मायने में बेहतर हो।
सामाजिक कार्यों से शुरू हुआ था राजनीतिक सफर
नित्या रमन का राजनीति में आने का सफर बेहद जमीनी और सामाजिक कार्यों से जुड़ा रहा है। लॉस एंजिल्स की सिटी काउंसिल में चुने जाने से पहले वह बेघर लोगों (होमलेसनेस) के मुद्दों पर सक्रिय रूप से काम करने वाली एक प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता थीं। उन्होंने इस समस्या के समाधान के लिए जमीनी स्तर पर कई संगठन भी बनाए। उनके चुनावी घोषणापत्र में भी शहर के बेघर लोगों की संख्या को कम करना और साल 2028 में लॉस एंजिल्स में होने वाले ओलंपिक खेलों से पहले सड़कों और अस्थायी शिविरों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर व स्थिति में बड़ा सुधार लाना सबसे प्रमुख लक्ष्य है।
हार्वर्ड और एमआईटी से ली है उच्च शिक्षा
एक कुशल शहरी योजनाकार (अर्बन प्लानर) के रूप में प्रशिक्षित नित्या रमन शैक्षणिक रूप से बेहद मजबूत पृष्ठभूमि से आती हैं। उन्होंने अमेरिका के बेहद प्रतिष्ठित संस्थानों हार्वर्ड विश्वविद्यालय और मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) से उच्च शिक्षा हासिल की है। राजनीति में आने से पहले उन्होंने भारत के चेन्नई में भी रहकर स्वच्छता और कमजोर वर्गों के राजनीतिक अधिकारों के लिए एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) का संचालन किया था।
लॉस एंजिल्स की राजनीति में पहले भी रच चुकी हैं इतिहास
साल 2020 में नित्या रमन ने पहली बार लॉस एंजिल्स सिटी काउंसिल का चुनाव जीतकर एक बड़ा राजनीतिक इतिहास रचा था। वह इस प्रतिष्ठित पद पर पहुंचने वाली पहली एशियाई-अमेरिकी और पहली दक्षिण एशियाई महिला बनी थीं। इसके बाद, मार्च 2024 में हुए चुनावों में भी उन्हें जनता का भारी समर्थन मिला और वे दूसरे कार्यकाल के लिए चुनी गईं। सिटी काउंसिल में छह साल के मजबूत अनुभव और अपनी प्रगतिशील नीतियों के दम पर अब उनकी नजर लॉस एंजिल्स के सर्वोच्च मेयर पद को जीतकर एक और नया इतिहास रचने पर टिकी है।
नारनौल में प्रशासनिक कार्रवाई, स्वास्थ्य मंत्री ने DDPO को किया निलंबित
9 Jun, 2026 04:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नारनौल। प्रशासनिक कामकाज में ढिलाई, लापरवाही और अनुशासनहीनता के मामलों को लेकर हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने बेहद सख्त तेवर दिखाए हैं। नारनौल स्थित पीडब्ल्यूडी (PWD) रेस्ट हाउस में आयोजित जिला स्तरीय आला अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक के दौरान कैबिनेट मंत्री ने ऑन-द-स्पॉट बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। उन्होंने कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही बरतने के आरोप में जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी (DDPO) प्रमोद कुमार को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया है।
विकास कार्यों में खामियां और लेटलतीफी बनी निलंबन की मुख्य वजह
स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव आज नारनौल दौरे पर थीं, जहां वे जिले में चल रहे विभिन्न विकास प्रोजेक्ट्स और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की हकीकत परखने के लिए अधिकारियों की क्लास ले रही थीं। डीडीपीओ प्रमोद कुमार पर गाज गिरने के पीछे दो बड़े कारण सामने आए हैं। पहला यह कि जिले के ग्रामीण इलाकों में चल रहे विभिन्न पंचायत एवं विकास कार्यों में गंभीर विसंगतियां और वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें मंत्री तक पहुंची थीं, जिससे वे बेहद खफा थीं। दूसरा, सरकार के कड़े निर्देशों के बावजूद डीडीपीओ इस अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में तय समय पर पहुंचने के बजाय काफी देरी से पहुंचे, जिसे मंत्री ने अनुशासनहीनता की पराकाष्ठा माना।
लापरवाही पर त्वरित एक्शन से प्रशासनिक महकमे में मचा हड़कंप
सरकारी कामकाज में अधिकारियों की इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना कार्यशैली और समय की पाबंदी न होने पर स्वास्थ्य मंत्री ने बिना कोई वक्त गंवाए कड़ा रुख अख्तियार किया। उन्होंने बैठक के बीच में ही डीडीपीओ प्रमोद कुमार के निलंबन पत्र जारी करने के आदेश प्रशासनिक अमले को दे दिए। कैबिनेट मंत्री द्वारा की गई इस औचक और बड़ी कार्रवाई से बैठक हॉल में सन्नाटा पसर गया और पूरे जिला प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मच गया है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में सख्त संदेश
नारनौल में आयोजित इस हाई-प्रोफाइल बैठक में क्षेत्र के स्थानीय विधायक ओमप्रकाश यादव, जिले के उपायुक्त (कलेक्टर) के साथ-साथ तमाम विभागों के शीर्ष प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौजूद थे। सभी बड़े अफसरों की मौजूदगी में की गई इस कार्रवाई के जरिए स्वास्थ्य मंत्री ने पूरे प्रदेश के नौकरशाहों को एक कड़ा और सीधा संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि जनहित से जुड़े विकास कार्यों में किसी भी स्तर पर बरती जाने वाली कोताही, लेटलतीफी और ढीला ढाला रवैया कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषी अधिकारियों के खिलाफ आगे भी ऐसी ही दंडात्मक कार्रवाई जारी रहेगी।
होर्मुज स्ट्रेट: अमेरिकी हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त, पायलटों को सुरक्षित निकाला
9 Jun, 2026 03:33 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन: मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी भारी तनाव और हॉर्मुज स्ट्रेट (स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज) पर बढ़ते सैन्य दबाव के बीच अमेरिकी सेना का एक एएच-64 अपाचे (AH-64 Apache) गनशिप हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया है। यह हादसा उस समय हुआ जब इसके एक दिन पहले ही ईरान और इजरायल ने मिसाइलों और ड्रोनों से एक-दूसरे पर भीषण हमले किए थे, जिससे इलाके में तनाव चरम पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि हेलीकॉप्टर में मौजूद दोनों पायलटों को सुरक्षित बचा लिया गया है और वे पूरी तरह ठीक हैं। हालांकि, अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि यह हेलीकॉप्टर किसी तकनीकी खराबी के कारण गिरा या फिर ईरानी सुरक्षा बलों की फायरिंग का शिकार हुआ। अमेरिकी विदेश विभाग और यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस घटना पर फिलहाल कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है और मामले की जांच की जा रही है।
पहली बार अमेरिकी सेना ने खोया अपाचे गनशिप
द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा संघर्ष के दौरान यह पहला ऐसा मौका है जब अमेरिकी सेना का कोई अपाचे गनशिप हेलीकॉप्टर तबाह हुआ है। फरवरी 2025 से शुरू हुए इस क्षेत्रीय संघर्ष में ईरान पहले ही अमेरिका के कई एमक्यू-9 रीपर ड्रोनों और कुछ अमेरिकी फाइटर जेट्स को मार गिराने का दावा कर चुका है। इस नए हेलीकॉप्टर हादसे ने खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को और ज्यादा गंभीर बना दिया है। आपको बता दें कि हॉर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक है और इस रास्ते पर बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार (ग्लोबल ऑयल मार्केट) में भी चिंता की लकीरें खींच दी हैं।
अमेरिकी सेना की सबसे घातक अटैक मशीनों में से एक
एएच-64 अपाचे हेलीकॉप्टर को अमेरिकी सेना की सबसे ताकतवर और घातक अटैक मशीनों में गिना जाता है। खतरनाक हेलफायर मिसाइलों और अत्याधुनिक टारगेटिंग सिस्टम से लैस इस हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल अमेरिकी सेना ईरान के खिलाफ चल रहे अपने अभियानों में बड़े पैमाने पर कर रही है। वर्तमान में अमेरिकी सेना इसका उपयोग तेल टैंकरों की सुरक्षा व निगरानी करने, समुद्री नाकेबंदी को मजबूत करने और दुश्मन के ड्रोन हमलों को हवा में ही रोकने के लिए कर रही है। हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भी इसी हेलीकॉप्टर की मदद से कई ईरानी ड्रोनों को मार गिराया था। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह हेलीकॉप्टर दुश्मन की गोलीबारी से गिरा है, तो यह अमेरिका के लिए एक बहुत बड़ा सामरिक और रणनीतिक झटका माना जाएगा।
राष्ट्रपति ट्रंप ने फिर जताई शांति समझौते की उम्मीद
न्यूयॉर्क के जॉन एफ कैनेडी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उनकी टीम जल्द ही इस हादसे पर एक विस्तृत रिपोर्ट जारी करेगी। इस दौरान उन्होंने ईरान के साथ संभावित शांति समझौते को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया। ट्रंप ने कहा कि वे ईरान के साथ एक बहुत मजबूत और अच्छा समझौता करने के बेहद करीब हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में यह भी कहा कि अगर अमेरिका बड़े स्तर पर बमबारी करता है तो वहां भारी तबाही मच सकती है, लेकिन वे ऐसा बिल्कुल नहीं चाहते क्योंकि इससे हजारों बेकसूर लोगों की जान जा सकती है। फिलहाल पाकिस्तान की मध्यस्थता में दोनों देशों के बीच समझौते के प्रयास लगातार जारी हैं, लेकिन यूरेनियम भंडार की सीमा और प्रतिबंध हटाने जैसे पेचीदा मुद्दों पर अभी भी गतिरोध बना हुआ है।
रूस और पाकिस्तान ने SCO बैठक में किया रणनीतिक सहयोग का समझौता
9 Jun, 2026 12:41 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिश्केक (किर्गिस्तान): किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के गृह और सार्वजनिक सुरक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान पाकिस्तान और रूस के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। पाकिस्तानी गृह मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, दोनों देशों ने अवैध इमिग्रेशन (प्रवासन) और नशीले पदार्थों की अंतरराष्ट्रीय तस्करी (ड्रग ट्रैफिकिंग) पर कड़ाई से लगाम लगाने के लिए साथ मिलकर काम करने का फैसला किया है। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी इस बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे थे, जहां उन्होंने रूस के अलावा कई अन्य मध्य एशियाई सदस्य देशों के नेताओं से भी मुलाकात की।
पाकिस्तान और रूस के बीच समझौता: मुख्य बिंदु
पाकिस्तानी गृह मंत्री मोहसिन नकवी और रूस के गृह मंत्री व्लादिमीर कोलोकोलत्सेव के बीच हुई बैठक में दो अहम पैक्ट (pacts) साइन किए गए, जिसके तहत कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी है:
अवैध प्रवासन और वतन वापसी: दोनों देश एक-दूसरे के यहां अवैध रूप से रह रहे नागरिकों की पहचान करने और उनके डिपोर्टेशन (वतन वापसी) की प्रक्रिया को आसान बनाने में पूरा सहयोग करेंगे।
इंटेलिजेंस और तकनीकी सहयोग: सीमा पार होने वाली गैर-कानूनी घुसपैठ और आवाजाही को रोकने के लिए दोनों देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच तकनीकी व खुफिया सहयोग को मजबूत किया जाएगा।
ड्रग सिंडिकेट्स पर प्रहार: नशीले पदार्थों की अंतरराष्ट्रीय हेराफेरी को जड़ से खत्म करने के लिए दोनों पक्षों ने ड्रग तस्करी नेटवर्क के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई करने का फैसला किया है।
संयुक्त वर्किंग ग्रुप का गठन: इस पूरे सहयोग और समझौतों को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए दोनों देशों के गृह मंत्रालयों के बीच एक विशेष 'वर्किंग ग्रुप' (कार्य समूह) स्थापित करने का निर्णय लिया गया है।
अफगानिस्तान से पनप रहे आतंकवाद पर जताई चिंता
रूस और पाकिस्तान के गृह मंत्रियों ने बैठक के दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा पर बात करते हुए अफगानिस्तान से पनप रहे खतरों पर गहरी चिंता व्यक्त की। दोनों पक्षों ने माना कि अफगानिस्तान के भीतर सक्रिय आतंकवादी शिविर (Terrorist Camps) और बड़े पैमाने पर हो रहा नशीले पदार्थों का उत्पादन पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए एक गंभीर सुरक्षा जोखिम हैं। इन साझा चुनौतियों से निपटने के लिए एक समन्वित क्षेत्रीय दृष्टिकोण अपनाने पर सहमति बनी।
मध्य एशियाई देशों के साथ भी पाकिस्तान की बैठकें
इस बहुपक्षीय मंच का उपयोग करते हुए पाकिस्तानी गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान और कजाकिस्तान के प्रतिनिधियों के साथ भी सुरक्षा मसलों पर अलग से द्विपक्षीय बैठकें कीं:
उज्बेकिस्तान: कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच आपसी सहयोग बढ़ाने और सुरक्षा बलों के लिए संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम (Joint Training Programs) शुरू करने के उद्देश्य से एक वर्किंग ग्रुप बनाने का फैसला लिया गया।
किर्गिस्तान: किर्गिस्तान के गृह मंत्री उलान नियाजबेकोव के साथ मुलाकात में आपसी हितों के विस्तार और सुरक्षा साझेदारी मजबूत करने पर सहमति बनी। साथ ही मोहसिन नकवी ने किर्गिस्तान को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का गैर-स्थायी सदस्य चुने जाने पर बधाई भी दी।
कजाकिस्तान: कजाकिस्तान के गृह मंत्री येरझान सादेनोव के साथ हुई बैठक में भी अवैध प्रवासन को रोकने और द्विपक्षीय सहयोग को एक संस्थागत रूप देने के लिए दोनों मंत्रालयों के बीच एक विशेष वर्किंग ग्रुप गठित करने पर रजामंदी हुई।
पाकिस्तान में विरोध प्रदर्शन हिंसक, 11 लोगों की मौत
9 Jun, 2026 12:41 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में हालात एक बार फिर पूरी तरह बेकाबू हो गए हैं। नागरिक समाज के प्रमुख संगठन 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) पर सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के बाद पूरे क्षेत्र में भयंकर जन-आक्रोश फूट पड़ा है। आज मंगलवार को बुलाए गए पूर्ण क्षेत्र बंद (शटर-डाउन और चक्का जाम) से ठीक पहले रावलकोट में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच हुई भीषण हिंसक झड़पों में कम से कम 11 लोगों की जान चली गई है, जबकि 70 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इलाके में बने अत्यधिक तनाव को देखते हुए एक बार फिर बड़े बवाल की आशंका पैदा हो गई है।
मुर्दाघर के बाहर भड़की हिंसा, लॉन्ग मार्च पर रोक
यह ताजा और भयानक हिंसा उस वक्त भड़की जब बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी कंबाइंड मिलिट्री हॉस्पिटल (CMH) के मुर्दाघर के बाहर इकट्ठा हुए थे। वहां इससे पहले हुई एक गोलीबारी में मारे गए संगठन के एक कार्यकर्ता का शव रखा गया था। प्रशासन ने आतंकवाद विरोधी कानून के तहत पिछले हफ्ते ही इस नागरिक संगठन को प्रतिबंधित घोषित किया था, जिससे लोग पहले से ही गुस्से में थे।
अपनी पूर्व घोषित योजना के मुताबिक, संगठन ने दक्षिणी जिले भिंबर से एक 'लॉन्ग मार्च' शुरू करने का ऐलान किया है, जो विभिन्न जिलों से होते हुए विधानसभा के बाहर एक अनिश्चितकालीन धरने में तब्दील होना है। हालांकि, मुजफ्फराबाद प्रशासन ने इस मार्च पर पूरी तरह रोक लगा दी है और अब तक 200 से अधिक प्रदर्शनकारियों व नेताओं को हिरासत में लिया जा चुका है।
रावलकोट में गोरिल्ला युद्ध जैसे हालात, जान बचाकर भागे डॉक्टर्स
रावलकोट में स्थिति बेहद संवेदनशील हो गई है। रविवार आधी रात को उग्र प्रदर्शनकारियों ने कंबाइंड मिलिट्री हॉस्पिटल का रास्ता रोककर उसे पूरी तरह अपने नियंत्रण में ले लिया, जिसके कारण डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को अपनी जान बचाकर वहां से भागना पड़ा। प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक:
पेट्रोल बम से हमले: उपद्रवियों ने तंग गलियों में छिपकर 'गोरिल्ला युद्ध' की तर्ज पर सुरक्षाकर्मियों पर पेट्रोल बम, पत्थरों और अत्याधुनिक हथियारों से घात लगाकर हमले किए।
हताहतों की संख्या: पुंछ सेक्टर के कमिश्नर ने पुष्टि की है कि इस भीषण गोलीबारी में 4 पुलिसकर्मी, 1 राहगीर और जवाबी कार्रवाई में 6 प्रदर्शनकारी मारे गए हैं।
घायलों की स्थिति: पुलिस प्रमुख के अनुसार, झड़पों में 23 सुरक्षाकर्मी और 50 प्रदर्शनकारी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। हालांकि, स्थानीय सूत्रों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का दावा है कि मरने वाले आम नागरिकों की वास्तविक संख्या सरकारी आंकड़ों से कहीं ज्यादा है।
क्यों गुस्से में हैं PoK के लोग? (विवाद की मुख्य वजहें)
इस बड़े जन-आक्रोश और हिंसक प्रदर्शनों के पीछे मुख्य रूप से राजनीतिक और आर्थिक कारण जिम्मेदार हैं:
शरणार्थी सीटों का विवाद: जनता के गुस्से की सबसे मुख्य वजह 45 सदस्यों वाली PoK विधानसभा में उन शरणार्थियों के लिए 12 सीटें आरक्षित करने का सरकारी फैसला है, जो कश्मीर से बाहर पाकिस्तान के अन्य हिस्सों (जैसे पंजाब या सिंध) में रहते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह फैसला उनके अपने लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को कमजोर करने और इस्लामाबाद के हस्तक्षेप को बढ़ाने की एक साजिश है।
महंगाई और बदहाली: इसके अलावा, पिछले दो सालों से स्थानीय लोग आटे की आसमान छूती कीमतों, बिजली की भारी किल्लत व भारी-भरकम बिलों, रिकॉर्ड बेरोजगारी और बदहाल गवर्नेंस के खिलाफ भी सड़कों पर हैं। सरकार द्वारा इन बुनियादी मांगों को दबाने के लिए बल प्रयोग करने से यह आंदोलन अब एक हिंसक विद्रोह का रूप ले चुका है।
संदिग्ध ट्रांजेक्शन केस में NIA की कार्रवाई, पानीपत के दवा कारोबारी से पूछे कई सवाल
9 Jun, 2026 11:50 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पानीपत। हरियाणा के पानीपत में आज तड़के राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की एक विशेष टीम ने अचानक छापेमारी कर हड़कंप मचा दिया। केंद्रीय एजेंसी के अधिकारियों ने शहर की किशनपुरा कॉलोनी में रहने वाले एक दवा कारोबारी के घर पर सुबह-सुबह दस्तक दी। जांच टीम ने स्थानीय व्यापारी को अपनी कस्टडी में लेकर करीब दो घंटे तक गहन पूछताछ की। इस आकस्मिक कार्रवाई से पूरी कॉलोनी और स्थानीय व्यापारिक जगत में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
संदिग्ध बैंक ट्रांजेक्शन और गिरोह से जुड़ाव की आशंका
आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों को इनपुट मिले थे कि उक्त दवा कारोबारी के बैंक खाते से लगभग आठ महीने पहले एक बेहद संदिग्ध वित्तीय लेनदेन (ट्रांजेक्शन) किया गया था। इस संदिग्ध रकम के तार देश विरोधी गतिविधियों या किसी बड़े अंतरराज्यीय अपराधी गिरोह से जुड़े होने का अंदेशा जताया जा रहा है। इसी सिलसिले में कड़ियों को जोड़ने और फंडिंग के मुख्य स्रोत का पता लगाने के लिए एनआईए की टीम ने यह दबिश दी थी।
दो घंटे तक खंगाले गए डिजिटल दस्तावेज और यूपीआई खाते
अधिकारियों की यह टीम मंगलवार सुबह ठीक पांच बजे किशनपुरा स्थित दवा व्यापारी के आवास पर पहुंची थी। घर के सभी कोनों की तलाशी लेने के साथ ही टीम ने कारोबारी के मोबाइल फोन, डिजिटल दस्तावेज, बैंक खातों की पासबुक और ऑनलाइन यूपीआई (UPI) पेमेंट्स के ब्योरे को बारीकी से खंगाला। करीब दो घंटे तक चली इस मैराथन पूछताछ के बाद सुबह आठ बजे केंद्रीय एजेंसी के अधिकारी वहां से रवाना हो गए।
बैंक डिटेल्स अपने साथ ले गई टीम और जांच जारी
भले ही दो घंटे की तफ्तीश के बाद एनआईए की टीम वापस लौट गई, लेकिन वह दवा व्यापारी के बैंक खातों से जुड़े तमाम जरूरी दस्तावेज, स्टेटमेंट और वित्तीय डिटेल अपने साथ ले गई है। हालांकि, जांच एजेंसी की तरफ से अभी तक आधिकारिक तौर पर इस बात का खुलासा नहीं किया गया है कि यह पूरा मामला किस विशिष्ट केस या आतंकी-गैंगस्टर नेटवर्क की तफ्तीश से जुड़ा हुआ है। फिलहाल इस मामले की आगे की कड़ियों को जोड़ा जा रहा है।
अमेरिकी अदालत का अहम आदेश, H-1B वीजा फीस पर लगी रोक हटाई
9 Jun, 2026 10:28 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नए एच-1बी (H-1B) वीजा आवेदनों पर लगाए गए 1 लाख डॉलर के भारी-भरकम शुल्क को अमेरिकी अदालत ने अवैध करार देकर पूरी तरह से रद्द कर दिया है। बोस्टन में यूएस डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज लियो सोरोकिन ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि ट्रंप प्रशासन की यह नीति संसद (कांग्रेस) की आवश्यक मंजूरी के बिना एच-1बी याचिकाओं पर टैक्स लगाने जैसी है। अदालत का यह ऐतिहासिक फैसला अमेरिकी तकनीकी कंपनियों में काम करने वाले और वहां जाकर करियर बनाने की इच्छा रखने वाले भारतीय पेशेवरों के लिए एक बहुत बड़ी राहत लेकर आया है।
राष्ट्रपति ट्रंप का फैसला और उसके पीछे का तर्क
एच-1बी कार्यक्रम अमेरिका का सबसे लोकप्रिय और महत्वपूर्ण कार्य वीजा कार्यक्रम है। इसके जरिए वहां की कंपनियों (विशेषकर सिलिकॉन वैली की दिग्गज टेक कंपनियों) को वैश्विक स्तर पर कुशल और तकनीकी प्रतिभाओं को नियुक्त करने की अनुमति मिलती है। पिछले वर्ष सितंबर 2025 में राष्ट्रपति ट्रंप ने एक घोषणापत्र जारी कर विदेशों से आने वाले नए आवेदनों के लिए सालाना 1 लाख डॉलर का भारी शुल्क अनिवार्य कर दिया था। ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों का दावा था कि इस कड़े कदम से अमेरिकी नागरिकों को स्थानीय नौकरियों में प्राथमिकता मिलेगी और कंपनियों को घरेलू प्रतिभाओं को प्रशिक्षित करने का प्रोत्साहन मिलेगा। आमतौर पर यह भारी शुल्क नौकरी देने वाली प्रायोजक कंपनी की ओर से चुकाया जाता था।
अदालत ने नीति को बताया अवैध 'टैक्स'
ट्रंप प्रशासन के इस फैसले के खिलाफ 20 अमेरिकी राज्यों के समूह ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। न्यायाधीश लियो सोरोकिन ने राज्यों की दलीलों से पूरी तरह सहमति जताते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन ने इस शुल्क को लागू कर अपनी संवैधानिक अधिकार सीमा का उल्लंघन किया है। अमेरिकी संविधान के अनुसार, देश में किसी भी प्रकार का कर (टैक्स) लगाने का विशेष अधिकार केवल वहां की संसद यानी कांग्रेस के पास है। जज सोरोकिन ने अपने 42 पन्नों के फैसले में लिखा कि इस भुगतान का जो स्वरूप और उपयोग है, उससे यह साफ हो जाता है कि यह एक नया टैक्स है, भले ही सरकार इसे कोई भी नाम क्यों न दे। अदालत ने इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले का भी हवाला दिया।
भारतीय आईटी विशेषज्ञों को बड़ी राहत
चूंकि एच-1बी वीजा धारकों में भारतीय आईटी पेशेवर और विशेषज्ञ दुनिया के सबसे बड़े समूहों में से एक हैं, इसलिए इस फैसले का सबसे सकारात्मक असर भारतीय युवाओं और कंपनियों पर पड़ेगा। यह अदालती फैसला ऐसे समय में आया है जब कुछ ही समय पहले होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने सीनेट पैनल को सूचित किया था कि वित्त वर्ष 2026 में 2 लाख से अधिक आवेदकों ने तेज प्रोसेसिंग की उम्मीद में इस 1 लाख डॉलर के शुल्क का भुगतान भी कर दिया था। अब कोर्ट के इस स्पष्ट आदेश के बाद विदेशी पेशेवरों की नियुक्ति प्रक्रिया में बना हुआ भारी आर्थिक बोझ और अनिश्चितता पूरी तरह खत्म होने की उम्मीद है। हालांकि, माना जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील कर सकता है।
दुबई में सड़क हादसा, खड़े ट्रक से टकराई मिनीबस, 7 भारतीयों की मृत्यु
9 Jun, 2026 09:23 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दुबई: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दुबई शहर से एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आई है, जहां सोमवार को एक भीषण सड़क हादसे में 7 भारतीय कामगारों की मौत हो गई। यह दुर्घटना तब हुई जब बीच सड़क पर अचानक एक ट्रक के खड़े होने से पीछे से आ रही तेज रफ्तार मिनीबस उससे जोरदार तरीके से टकरा गई। स्थानीय प्रशासन और दुबई स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने इस दुखद घटना की पुष्टि की है।
भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया पर अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि वे इस हादसे से अत्यंत दुखी हैं और मृतकों के परिवारों के साथ हैं। भारतीय मिशन ने स्पष्ट किया है कि वे पीड़ितों को हर संभव सहायता और कानूनी समर्थन प्रदान करने के लिए दुबई के स्थानीय अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हैं।
सुरक्षित दूरी न रख पाने के कारण हुई टक्कर
दुर्घटना के कारणों को लेकर दुबई पुलिस के यातायात विभाग के निदेशक ब्रिगेडियर जुमा सलेम बिन सुवैदान ने बताया कि शुरुआती जांच के अनुसार, तकनीकी खराबी के कारण ट्रक अचानक सड़क के बीचों-बीच रुक गया था। इसी दौरान पीछे से आ रही मिनीबस के चालक ने ध्यान नहीं दिया और सुरक्षित दूरी न रख पाने के कारण बस सीधे ट्रक के पिछले हिस्से से जा टकराई।
घायलों की स्थिति और राहत कार्य
दुबई पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस भीषण टक्कर में 7 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 9 अन्य लोग घायल हुए हैं। घायलों में से पांच की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है और चार की स्थिति सामान्य है। सभी पीड़ितों को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां भारतीय मिशन के अधिकारी भी घायलों की स्थिति जानने और उनसे मिलने पहुंचे हैं।
हादसे की विस्तृत जांच जारी
हादसे की जांच के लिए ट्रैफिक एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन सेक्शन के विशेषज्ञों की टीम को घटनास्थल पर भेजा गया है, जो साक्ष्य जुटाकर दुर्घटना के सटीक कारणों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रही है। पुलिस और बचाव दलों ने क्षतिग्रस्त वाहनों को सड़क से हटाकर यातायात को सुचारू रूप से बहाल कर दिया है।
अमेरिका-Iran डील पर Donald Trump का बड़ा बयान
9 Jun, 2026 08:10 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव अब एक बड़े समझौते की ओर बढ़ता दिख रहा है। दोनों देशों के बीच पाकिस्तान के माध्यम से अप्रत्यक्ष बातचीत का दौर जारी है और जल्द से जल्द इस डील को फाइनल करने की कोशिशें की जा रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जो पहले भी कई बार ईरान के साथ जल्द समझौता होने की उम्मीद जता चुके हैं, उन्होंने अब इस मामले में एक बहुत बड़ा अपडेट दिया है। ट्रंप का दावा है कि अमेरिका और ईरान के बीच अगले दो हफ्तों के भीतर एक बड़ी डील हो जाएगी।
ईरान परमाणु हथियार छोड़ने को तैयार: ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप ने एक रैली के दौरान दावा किया कि ईरान इस समझौते के लिए अपनी कई बड़ी मांगें और परमाणु हथियारों का दावा पूरी तरह से छोड़ने को तैयार हो गया है। ट्रंप के मुताबिक, ईरानी वार्ताकार अमेरिका को सबकुछ सौंपने के लिए राजी हैं। हालांकि, दूसरी ओर ईरान हमेशा से इस बात को दोहराता रहा है कि वह कभी भी परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं कर रहा था, बल्कि उसका एकमात्र लक्ष्य नागरिक सुविधाओं और अपने देशवासियों के लिए शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा विकसित करना है।
अमेरिका की 'पूर्ण जीत' और तेल की कीमतों पर असर
अमेरिकी राष्ट्रपति ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि ईरान के साथ यह डील फाइनल होते ही अमेरिका अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी 'पूर्ण जीत' (Total Victory) की घोषणा करेगा। उन्होंने यह भी साफ किया कि इस ऐतिहासिक डील के संपन्न होते ही वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आएगी, जिससे आम जनता को बड़ी राहत मिलेगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल ही में ईरान और इजरायल के बीच अमेरिकी हस्तक्षेप के बाद गोलाबारी थमी है।
संवर्धित यूरेनियम को लेकर फंसा पेंच
इस पूरी बातचीत में सबसे अहम और पेचीदा मुद्दा ईरान के पास मौजूद संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) के विशाल भंडार का है। अमेरिका का स्पष्ट कहना है कि ईरान को इस भंडार को पूरी तरह छोड़ना होगा। इसके लिए अमेरिकी प्रशासन ने ईरान के सामने दो कड़े विकल्प रखे थे; पहला यह कि ईरान अपना सारा संवर्धित यूरेनियम अमेरिका के हवाले कर दे, या फिर उसे किसी तीसरे सुरक्षित स्थान पर ले जाकर पूरी तरह नष्ट कर दे।
ईरान ने शुरुआत में अमेरिका के इन दोनों विकल्पों को मानने से साफ इनकार कर दिया था। इस बीच, रूस ने भी इस यूरेनियम भंडार को अपने पास लेने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप इसके सख्त खिलाफ हैं। ट्रंप पहले ही साफ कर चुके हैं कि वे ईरान का संवर्धित यूरेनियम रूस या चीन जैसे देशों को सौंपने के पक्ष में कतई नहीं हैं, क्योंकि इन दोनों देशों के ईरान के साथ बेहद करीबी संबंध हैं और ईरान उन्हें यह सौंपने के लिए आसानी से तैयार हो सकता है। फिलहाल इस यूरेनियम का क्या किया जाएगा, इस पर अंतिम फैसला दोनों देशों के बीच आधिकारिक डील साइन होने के बाद ही साफ हो पाएगा।
हादसे के बाद प्रशासन सख्त, सुपरवाइजर पर गिरी गाज और कंपनी हुई ब्लैकलिस्ट
