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दुनिया में अलग-थलग पड़ा अमेरिका, अब हाथ बांधे खड़े रह जाएंगे ट्रंप और खुल जाएगा होर्मुज
16 Apr, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बड़ा कूटनीतिक झटका लगा है। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से अमेरिका के सबसे करीबी रहे यूरोपीय सहयोगियों ने अब अपनी राह अलग करने के संकेत दे दिए हैं। ईरान और इजरायल के साथ जारी अमेरिकी सैन्य गठजोड़ से दूरी बनाते हुए यूरोपीय देशों ने अब दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सुरक्षित करने के लिए एक स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने की योजना तैयार की है। योजना के तहत होर्मुज का रास्ता खुल जाएगा और राष्ट्रपति डोनाल्ट ट्रंप हाथ बांधे खड़े रहेंगे।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस गठबंधन से अमेरिका को पूरी तरह बाहर रखा गया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, यह नई पहल युद्ध समाप्ति के बाद लागू की जाएगी, जिसमें समुद्री माइन्स को हटाने और युद्धपोत तैनात करने का प्रावधान होगा। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने स्पष्ट किया कि यह एक शुद्ध रूप से रक्षात्मक अंतरराष्ट्रीय मिशन होगा, जिसमें अमेरिका, इजराइल और ईरान जैसे युद्धरत पक्षों को शामिल नहीं किया जाएगा। यूरोपीय राजनयिकों का मानना है कि उनकी नौसेना की तैनाती अमेरिकी कमांड के अधीन नहीं होगी। इस योजना के पीछे ब्रिटेन और फ्रांस मुख्य सूत्रधार की भूमिका निभा रहे हैं। उनका लक्ष्य शिपिंग कंपनियों में यह भरोसा जगाना है कि युद्ध के बाद होर्मुज का मार्ग सुरक्षित है। वर्तमान में ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच तनाव के कारण जहाजों पर हमले और माइनिंग का खतरा बढ़ गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति संकट में है। चूंकि दुनिया का 20 प्रतिशत तेल इसी मार्ग से गुजरता है, इसलिए यूरोप अपनी आर्थिक सुरक्षा को लेकर चिंतित है। दूसरी ओर, राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के साथ शांति वार्ता के प्रयासों में जुटे हैं। उन्होंने संकेत दिए हैं कि अगले दो दिनों में पाकिस्तान की मेजबानी में तेहरान के साथ दूसरे दौर की बातचीत हो सकती है। हालांकि, पिछली वार्ता की विफलता के बाद अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर लगाया गया नौसैनिक ब्लॉकेड सहयोगियों को रास नहीं आ रहा है। जर्मनी ने भी इस स्वतंत्र मिशन में शामिल होने की संभावना जताई है, जो बर्लिन की पारंपरिक सैन्य नीति में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। यूरोप का यह कदम ट्रंप प्रशासन की वैश्विक साख और नेतृत्व क्षमता के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रहा है।
UK की बड़ी सैन्य सहायता से बढ़ा तनाव, रूस बोला—यूरोप हालात बिगाड़ रहा
16 Apr, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यूक्रेन | यूक्रेन को ब्रिटेन की ओर से घोषित अब तक के सबसे बड़े ड्रोन पैकेज की आपूर्ति शुरू हो गई है। यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को बताया कि ड्रोन की खेप पहुंचनी शुरू हो चुकी है और इससे उसकी फ्रंटलाइन की ताकत मजबूत हो रही है।
यूक्रेन ने क्या बताया?
मंत्रालय ने टेलीग्राम पर जारी बयान में कहा कि हम यूके के आभारी हैं, जिसने यूक्रेन के लिए अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन पैकेज दिया है। ये ड्रोन पहुंचने लगे हैं और हमारी फ्रंटलाइन को मजबूत कर रहे हैं।बयान के अनुसार, इस वर्ष यूक्रेन को कुल 1.2 लाख (120,000) ड्रोन मिलने की उम्मीद है। इस पैकेज में स्ट्राइक, टोही, लॉजिस्टिक्स और समुद्री ड्रोन शामिल हैं, जो युद्ध के अलग-अलग मोर्चों पर इस्तेमाल किए जाएंगे।
ब्रिटेन ने क्या घोषणा की थी?
इससे पहले ब्रिटेन ने घोषणा की थी कि वह 2026 में यूक्रेन को कम से कम 1.2 लाख ड्रोन उपलब्ध कराएगा। यह पहल ब्रिटेन की इस साल की करीब 3 अरब पाउंड (लगभग 4.07 अरब अमेरिकी डॉलर) की सैन्य सहायता योजना का हिस्सा है। इसके साथ ही यह G7 की एक्स्ट्राऑर्डिनरी रेवेन्यू एक्सेलरेशन फॉर यूक्रेन पहल से भी समर्थित है, जिसका उद्देश्य यूक्रेन की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करना है।
रूस ने की कड़ी आलोचना
दूसरी ओर, रूसी रक्षा मंत्रालय ने इस कदम की कड़ी आलोचना की है। रूस ने कहा कि यूरोपीय देशों द्वारा यूक्रेन के लिए ड्रोन उत्पादन और आपूर्ति बढ़ाने से महाद्वीप सीधे तौर पर रूस के साथ संघर्ष में और अधिक उलझता जा रहा है।रूसी रक्षा मंत्रालय ने बयान में कहा कि यूरोपीय नेताओं के ऐसे कदम उनकी सुरक्षा बढ़ाने के बजाय उन्हें युद्ध की ओर धकेल रहे हैं। मंत्रालय के मुताबिक, 26 मार्च को कई यूरोपीय देशों ने यूक्रेन के लिए ड्रोन उत्पादन और आपूर्ति बढ़ाने का निर्णय लिया, खासकर उस समय जब यूक्रेनी सेना को बढ़ते नुकसान और जनशक्ति की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
रूस का दावा
रूस ने यह भी दावा किया कि यूक्रेनी ड्रोन निर्माता कंपनियों की शाखाएं यूरोप के आठ देशों में सक्रिय हैं। इनमें से कुछ इकाइयां स्ट्राइक ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन जैसे हथियारों के निर्माण में लगी हैं, जिनके उत्पादन के लिए यूरोप में अतिरिक्त फंडिंग भी बढ़ाई जा रही है।
वेस्ट एशिया में हलचल: पाकिस्तान-सऊदी बातचीत के बीच ईरान में मुनीर की अहम मुलाकात
16 Apr, 2026 10:19 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद | पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने गुरुवार को पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच संवाद को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने यह बात सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ जेद्दा में हुई मुलाकात के दौरान कही।
शरीफ ने क्या कहा?
शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि क्राउन प्रिंस से मुलाकात उनके लिए सम्मान और खुशी की बात रही। उन्होंने सऊदी अरब के प्रति पाकिस्तान की एकजुटता जताई और मौजूदा तनावपूर्ण हालात में क्राउन प्रिंस के नेतृत्व में दिखाए गए धैर्य और संयम की सराहना की।शरीफ ने अपनी पोस्ट में पाकिस्तान की हालिया कूटनीतिक कोशिशों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों ने अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम कराने में भूमिका निभाई और इस्लामाबाद में ऐतिहासिक शांति वार्ता शुरू कराने का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने दोहराया कि पाकिस्तान,अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए समझौते की दिशा में अपने प्रयास जारी रखेगा।
वार्ता को पुनर्जीवित करने की कोशिशें तेज
प्रधानमंत्री बुधवार को एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ सऊदी अरब पहुंचे थे। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है और अमेरिका-ईरान वार्ता को पुनर्जीवित करने की कोशिशें तेज हो रही हैं।
मुनीर पहुंचे तेहरान
इसी बीच, पाकिस्तान ने समानांतर रूप से एक और कूटनीतिक कदम उठाया है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर भी एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ तेहरान पहुंचे हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने तेहरान पहुंचने पर प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया। उनका यह दौरा वाशिंगटन और तेहरान के बीच रुकी हुई बातचीत को फिर से पटरी पर लाने की कोशिशों का हिस्सा माना जा रहा है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने फिर असीम मुनीर की तारीफ कर सभी को चौंकाया, अब आगे रणनीति पर चर्चा
16 Apr, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपनी अप्रत्याशित कूटनीति से दुनिया को हैरान कर दिया है। ईरान के साथ जारी भीषण तनाव के बीच ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता अगले दो दिनों के भीतर शुरू हो सकती है। इस महत्वपूर्ण बातचीत के लिए ट्रंप ने एक बार फिर पाकिस्तान को ही आयोजन स्थल (वेन्यू) के रूप में चुना है। ट्रंप के इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय रणनीतिकारों के बीच नई बहस छेड़ दी है, क्योंकि हाल ही में इस्लामाबाद में हुई पहले दौर की वार्ता बेनतीजा रही थी।
राष्ट्रपति ट्रंप ने न्यूयॉर्क में मीडिया से बात करते हुए कहा कि अगले दो दिनों में कुछ बड़ा होने की संभावना है। उन्होंने किसी अन्य देश के बजाय पाकिस्तान में ही बातचीत जारी रखने का तर्क देते हुए कहा कि हमें ऐसे स्थान पर जाने की जरूरत नहीं है जिसका इस पूरे मामले से सीधा सरोकार न हो। इस दौरान ट्रंप का सबसे चौंकाने वाला रुख पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर के प्रति रहा। ट्रंप ने मुनीर की कार्यशैली की जमकर तारीफ करते हुए उन्हें अपना पसंदीदा फील्ड मार्शल करार दिया। जानकारों का मानना है कि पिछले वर्ष क्षेत्रीय तनाव कम करने में मुनीर की भूमिका से ट्रंप काफी प्रभावित हैं।
बता दें कि पिछले शनिवार को इस्लामाबाद में करीब 21 घंटे तक चली अमेरिका-ईरान की पहली उच्चस्तरीय बैठक बिना किसी ठोस परिणाम के खत्म हो गई थी। अब होने वाली इस दूसरी बैठक का मुख्य उद्देश्य दो सप्ताह के नाजुक युद्धविराम (सीजफायर) को टूटने से बचाना है। वर्तमान में सबसे बड़ा विवाद होर्मुज की खाड़ी को लेकर है, जिसे ईरान ने बंद कर रखा है। अमेरिका हर हाल में इस व्यापारिक मार्ग को खुलवाना चाहता है, जबकि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और आर्थिक प्रतिबंधों पर रियायत की मांग पर अड़ा है। दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप प्रशासन इस पूरी कूटनीतिक प्रक्रिया में पाकिस्तान की चुनी हुई सरकार के बजाय सैन्य नेतृत्व को अधिक तवज्जो दे रहा है। ट्रंप के बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बजाय आर्मी चीफ असीम मुनीर का जिक्र अधिक होना इस बात का संकेत है कि अमेरिका पाकिस्तान में सेना को ही मुख्य वार्ताकार मान रहा है। जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस्लामाबाद पहुंचे थे, तब भी उनकी अगवानी मुनीर ने ही की थी। अब पूरी दुनिया की नजरें अगले 48 घंटों पर टिकी हैं कि क्या पाकिस्तान की धरती पर होने वाली यह दूसरी कोशिश मध्य पूर्व में शांति का रास्ता साफ कर पाएगी या नहीं।
इस्राइल-हिज़्बुल्लाह टकराव तेज: लगातार हमलों से बढ़ी चिंता
16 Apr, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेरूत | लेबनान के सशस्त्र समूह हिजबुल्लाह ने दावा किया है कि उसके लड़ाकों ने पिछले 24 घंटों में 39 सैन्य अभियान चलाए हैं। इन हमलों में इस्राइली बस्तियों, सैनिकों की टुकड़ियों और सैन्य वाहनों को निशाना बनाया गया। साथ ही दक्षिणी सीमा और उत्तरी इस्राइल में दोनों पक्षों के बीच आमने-सामने की झड़पें भी हुईं। अल जजीरा की रिपोर्ट में बात सामने आई है।
नेतन्याहू ने क्या कहा?
इस बीच, इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बुधवार को एक वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि इस्राइली सेना दक्षिण लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ अभियान जारी रखेगी। नेतन्याहू ने बिंट जबील को हिजबुल्लाह का मुख्य गढ़ बताया और इसे पूरी तरह खत्म करने का संकल्प लिया।
WHO ने जताई चिंता
इस बीच, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख टेड्रोस एडहानोम घेब्रेयेसस ने लेबनान के अस्पतालों की हालत पर चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि दक्षिण लेबनान का 'तेबनीन सरकारी अस्पताल' गंभीर संकट में है। अप्रैल में अस्पताल के पास हुए दो अलग-अलग हमलों में इसे काफी नुकसान पहुंचा है। इन घटनाओं में 11 स्वास्थ्य कर्मी घायल हुए। अस्पताल का इमरजेंसी विभाग, वेंटिलेटर, मॉनिटर और फार्मेसी जैसी जरूरी चीजें खराब हो गई हैं। हालांकि कुछ सेवाएं अभी भी चालू हैं, टेड्रोस ने कहा कि WHO प्राथमिकता वाली जरूरतों के आधार पर तत्काल आपातकालीन रखरखाव में सहायता कर रहा है।
WHO प्रमुख ने स्वास्थ्य सेवाओं पर हो रहे हमलों के आंकड़े भी साझा किए। संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक स्वास्थ्य सेवाओं पर 133 हमले हुए हैं। इनमें 88 लोगों की मौत हुई और 206 लोग घायल हुए हैं। हमलों की वजह से 15 अस्पताल और 7 स्वास्थ्य केंद्र क्षतिग्रस्त हुए हैं। वहीं, 5 अस्पतालों और 56 स्वास्थ्य केंद्रों को पूरी तरह बंद करना पड़ा है। उन्होंने स्वास्थ्य केंद्रों, एम्बुलेंस और मरीजों की सुरक्षा की अपील की है। अल जजीरा के अनुसार, एक अन्य घटना में, दक्षिण लेबनान के मईफादौन में इस्राइली हमलों में कम से कम चार पैरामेडिक्स की मौत हो गई और छह अन्य घायल हो गए। अधिकारियों ने इसे एम्बुलेंस पर किया गया हमला बताया है।
शांति के लिए बातचीत जारी
नेतन्याहू ने यह भी कहा कि इस्राइल शांति के लिए लेबनान के साथ बातचीत कर रहा है। उनका लक्ष्य हिजबुल्लाह को खत्म करना और ताकत के जरिए शांति हासिल करना है। इस्राइल की सुरक्षा कैबिनेट जल्द ही युद्धविराम की संभावनाओं पर चर्चा कर सकती है। हालांकि, कूटनीतिक कोशिशों के बावजूद दोनों ओर से गोलाबारी जारी है। CNN की रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ते तनाव को देखते हुए दक्षिण लेबनान के निवासियों को इलाका खाली करने की सलाह दी गई है।
वेस्ट एशिया तनाव पर पोप लियो की पहल, कहा—हिंसा नहीं, करुणा ही समाधान
16 Apr, 2026 09:54 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन | पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप और पोप लियो XIV के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर जहां अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने पोप पर निशाना साधा है, वहीं पोप ने वैश्विक शांति की अपील करते हुए हिंसा को त्यागने का संदेश दिया है।
दुनिया को शांति चाहिए- पोप
पोप लियो XIV ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि दुनिया को युद्ध और हिंसा की सोच से बाहर निकलना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि शांति प्रेम और न्याय पर आधारित होनी चाहिए, न कि डर, हथियारों या धमकियों पर। उन्होंने लिखा कि दुनिया को शांति चाहिए। अब युद्ध और उससे होने वाली मौत, विनाश और विस्थापन को रोकना होगा।पोप ने यह भी स्पष्ट किया कि सच्ची शांति जबरदस्ती से नहीं आती, बल्कि यह विश्वास, सहानुभूति और उम्मीद पैदा करती है। उन्होंने निर्अस्त्र शांति की अवधारणा पर बल देते हुए कहा कि यही मॉडल दुनिया को स्थिरता की ओर ले जा सकता है।
पोप का रुख वास्तविकता से दूर है- ट्रंप
दूसरी तरफ, डोनाल्ड ट्रंप ने पोप के इस रुख पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दावा किया कि ईरान ने हाल के महीनों में हजारों निहत्थे प्रदर्शनकारियों को मार दिया है और ऐसे देश को परमाणु हथियार हासिल करने देना पूरी तरह अस्वीकार्य है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर पोप की टिप्पणी की आलोचना करते हुए कहा कि पोप का रुख वास्तविकता से दूर है। ट्रंप ने पहले भी पोप की आलोचना करते हुए उन्हें कमजोर बताया था और माफी मांगने से साफ इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा कि वे पोप की राय से सहमत नहीं हैं और अपनी नीतियों पर कायम रहेंगे।
पोप ने राजनीतिक विवाद में उलझने से इनकार किया
हालांकि, पोप ने इस राजनीतिक विवाद में उलझने से इनकार किया है। अल्जीरिया की यात्रा के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि वे राजनीति में नहीं पड़ना चाहते। उन्होंने कहा कि मैं कोई राजनेता नहीं हूं और न ही मेरी किसी राजनीतिक बहस में शामिल होने की मंशा है। लोग खुद निष्कर्ष निकाल सकते हैं।पोप ने यह भी चेतावनी दी कि धार्मिक संदेशों का राजनीतिक इस्तेमाल नहीं होना चाहिए और उनका ध्यान केवल वैश्विक शांति और मानवीय मूल्यों पर केंद्रित रहेगा। इस पूरे घटनाक्रम ने अमेरिका और वेटिकन के बीच वैचारिक टकराव को उजागर कर दिया है, जहां एक तरफ सुरक्षा और शक्ति की राजनीति है, तो दूसरी तरफ शांति और नैतिक मूल्यों की अपील।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट: ईरान की धमकी से US-ईरान तनाव चरम पर
16 Apr, 2026 09:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान | इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच हुई बातचीत नाकाम होने के बाद हालात बिगड़ गए हैं। अमेरिका ने अरब और ओमान की खाड़ी में ईरानी बंदरगाहों की पूरी तरह नाकेबंदी कर दी है। अब किसी भी देश का जहाज ईरान के बंदरगाहों पर न तो आ सकता है और न ही वहां से जा सकता है। अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत ओमान की खाड़ी में लगातार गश्त कर रहे हैं।
ईरान ने दी धमकी
इस कार्रवाई पर ईरान ने बहुत सख्त रुख अपनाया है। ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के सैन्य सलाहकार मोहसिन रेजाई ने अमेरिका को सीधी धमकी दी है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी करने का फैसला करता है, तो ईरान अमेरिकी जहाजों को डुबो देगा।मोहसिन रेजाई को पिछले महीने ही सैन्य सलाहकार नियुक्त किया गया था। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप पर तंज कसते हुए पूछा कि क्या ट्रंप अब होर्मुज जलडमरूमध्य के पुलिस बनना चाहते हैं? उन्होंने सवाल किया कि क्या यह वास्तव में आपका काम है? क्या यह अमेरिका जैसी शक्तिशाली सेना का काम है? एक सरकारी टीवी चैनल को दिए बयान में रेजाई ने कहा कि अमेरिकी जहाज ईरान की पहली मिसाइल की मार से ही समुद्र में डूब जाएंगे। उन्होंने दावा किया कि ये जहाज निश्चित रूप से ईरानी मिसाइलों की चपेट में आ सकते हैं और हम इन्हें नष्ट कर सकते हैं।
मोहसिन रेजाई नहीं चाहते युद्धविराम
रेजाई ने यह भी कहा कि अगर अमेरिका ईरान पर जमीनी हमला करता है, तो यह ईरान के लिए और भी अच्छा होगा। उन्होंने दावा किया कि वे हजारों अमेरिकी सैनिकों को पकड़ लेंगे और फिर हर एक बंधक सैनिक के बदले अमेरिका से एक अरब डॉलर की मांग करेंगे। रेजाई ने साफ किया कि वे व्यक्तिगत रूप से युद्धविराम को आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं।
संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख ने की अपील
बढ़ते तनाव को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस ने एक बार फिर शांति की अपील की है। उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय गहरे तनाव और मानवीय पीड़ा के दौर से गुजर रही है। उन्होंने सभी देशों से बातचीत करने, तनाव कम करने और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करने को कहा है।
पोप लियो की शांति की अपील
वहीं, पोप लियो ने भी कहा है कि दुनिया शांति के लिए तरस रही है। उन्होंने हिंसा और युद्ध का रास्ता छोड़कर प्रेम और न्याय अपनाने पर जोर दिया। पोप ने कहा कि युद्ध से होने वाली मौत और विनाश के दर्द को अब और बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
ईरान पर शिकंजा कसने की तैयारी: अमेरिका ला सकता है सख्त आर्थिक प्रतिबंध
16 Apr, 2026 09:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन | पश्चिम एशिया में तनाव थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक महीने से ज्यादा चले भीषण सैन्य टकराव के बाद भले ही अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम हुआ हो, लेकिन जंग अब नए मोर्चे पर पहुंच गई है। गोलियों और मिसाइलों की जगह अब आर्थिक हथियारों का इस्तेमाल तेज हो गया है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान की कमर तोड़ने के लिए कड़े आर्थिक प्रतिबंधों की नई रणनीति तैयार कर ली है। ईरान के तेल कारोबार से लेकर वैश्विक बैंकिंग नेटवर्क तक, हर रास्ता बंद करने की कोशिश की जा रही है, जिससे ईरान पर चौतरफा दबाव बनाया जा सके।बढ़ते इस तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप की प्रशासन ने अपना रुख साफ किया है कि वह ईरान पर और सख्त प्रतिबंध लगाने की तैयारी में है। इसमें उन देशों और बैंकों पर भी कार्रवाई शामिल हो सकती है, जो ईरान के तेल कारोबार से जुड़े हैं। अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह कदम ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी के तहत उठाया जा रहा है। उनका कहना है कि पिछले एक साल से ईरान पर मैक्सिमम प्रेशर यानी अधिकतम दबाव बनाया जा रहा है।
समझिए क्या है नई रणनीति?
इस बात को ऐसे समझिए कि अमेरिका अब उन देशों से भी सख्त कदम उठाने को कह रहा है, जिनके पास ईरान से जुड़े पैसे हैं। खासकर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर और ईरानी नेतृत्व से जुड़े फंड को फ्रीज करने की मांग की जा रही है। ऐसे में अमेरिका ने साफ चेतावनी दी है कि अगर कोई देश ईरानी तेल खरीदता है या उसके पैसे अपने बैंकों में रखता है, तो उस पर सेकेंडरी सैंक्शन यानी अप्रत्यक्ष प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
चीन के बैंकों को चेतावनी भी दी
इसके इतर अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने बताया कि चीन के कुछ बैंकों को पहले ही चेतावनी दी जा चुकी है। अगर उनके जरिए ईरान के पैसे का लेन-देन पाया गया, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी। अमेरिका ने यह भी कहा है कि वह ईरान के तेल से जुड़ी सामान्य छूट (लाइसेंस) को आगे नहीं बढ़ाएगा। इसका मतलब है कि ईरान के लिए तेल बेचकर कमाई करना और मुश्किल हो जाएगा।
क्षेत्रीय हालात का असर
गौतरलब है कि अमेरिका का कहना है कि हाल ही में ईरान की कुछ गतिविधियों, खासकर पड़ोसी खाड़ी देशों के साथ तनाव, की वजह से अब कई देश भी सतर्क हो गए हैं और पैसे के लेन-देन पर ज्यादा नजर रख रहे हैं।व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि ये कदम अमेरिका के लंबे समय के सुरक्षा लक्ष्यों को हासिल करने के लिए उठाए जा रहे हैं।
ईरान के हमलों के बाद सऊदी अरब को नहीं रहा अमेरिका पर भरोसा
16 Apr, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दुबई। सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान ने अमेरिका को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अब अमेरिका पर निर्भर रहने का दौर खत्म हो चुका है। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि जब वह अपने ही देश की सुरक्षा नहीं कर पा रहे हैं, तो सऊदी अरब की रक्षा कैसे करेंगे। उनके इस बयान को क्षेत्रीय राजनीति में बदलते समीकरणों और अमेरिका पर घटती निर्भरता के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
सऊदी अरब का युद्ध के समय में ऐसा कहना इसलिए अहम है क्योंकि ईरान युद्ध में उसे बीच में होने की वजह से काफी नुकसान उठाना पड़ा है। सऊदी में मौजूद मिलिट्री बेस पर ईरान ने सैकड़ों मिसाइलें दागीं। इस युद्ध की वजह से होर्मुज ब्लॉक होने से सऊदी को आर्थिक नुकसान हुआ, जबकि उसकी ऑयल रिफायनरीज पर भी ईरान ने हमला किया और अमेरिका कुछ नहीं कर पाया। इन्हीं घटनाओं की वजह से फिलहाल परिस्थिति ये है कि सऊदी को अमेरिका पर जो भरोसा हुआ था, वह अब टूट चुका है।
अमेरिकी अखबार के मुताबिक सऊदी अरब, अमेरिका पर दबाव डाल रहा है कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नौसैनिक घेराबंदी तुरंत हटा ले और दोबारा बातचीत की मेज पर लौट आए। सऊदी और अन्य खाड़ी देशों को डर है कि अगर अमेरिका ने घेराबंदी जारी रखी तो ईरान बदला लेने के लिए उनके वैकल्पिक रास्ते भी बंद कर सकता है। ऐसी स्थिति उनकी अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका होगी। बता दें फिलहाल सऊदी का तेल लाल सागर के रास्ते बाब अल मंदेब से जाता है। अगर युद्ध बढ़ा, तो ये रास्ता भी बंद होने के आसार हैं और सऊदी ये बिल्कुल नहीं चाहता।
बता दें 2017 में ट्रंप सत्ता में आए तो अमेरिका-सऊदी संबंध काफी खराब हालत में थे। ओबामा प्रशासन ने 2015 में ईरान के साथ परमाणु समझौता किया था, जिसे सऊदी अरब अपना सुरक्षा खतरा मानता था। सऊदी को लगा कि अमेरिका ईरान को मजबूत कर रहा है और खाड़ी में अपने पुराने सहयोगी को नजरअंदाज कर रहा है। ट्रंप ने सत्ता संभालते ही ये रिश्ते मजबूत और व्यक्तिगत स्तर पर सुधारने का फैसला किया। मई 2017 में ट्रंप ने अपना पहला विदेश दौरा सऊदी अरब से शुरू किया। इस दौरान अमेरिका और सऊदी ने 110 बिलियन डॉलर का प्रभावी हथियार सौदा किया।
रिपोर्ट के मुताबिक 10 साल में कुल 350 बिलियन डॉलर का समझौता हुआ। इसमें टैंक, युद्धपोत, मिसाइल डिफेंस सिस्टम, रडार और साइबर सुरक्षा उपकरण शामिल थे। यह सौदा ईरान के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए था। ट्रंप ने ओबामा के ईरान परमाणु समझौते से अमेरिका को बाहर निकाला और ईरान पर भारी प्रतिबंध लगाए, तब सऊदी को ये उसके लिए सबसे बेहतर लगा। हालांकि अब हालात अलग हो चुके हैं और सऊदी को यही अमेरिका खतरा नजर आ रहा है।
अमेरिका-ईरान फिर शांति वार्ता शुरू कराने पाक पीएम शहबाज सऊदी और तुर्किये जाएंगे
16 Apr, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव के बीच फिर शांति वार्ता शुरू कराने की कोशिशें तेज हो गई हैं। पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ इसमें सक्रिय भूमिका निभाते हुए इस सप्ताह सऊदी अरब और तुर्किये के दौरे पर जा रहे हैं। उनका उद्देश्य मध्यस्थ देशों के साथ बातचीत कर अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत को आगे बढ़ाना है। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने एक बयान में कहा कि पीएम शहबाज शरीफ ने उन्हें इस पहल की जानकारी दी है। उन्होंने शहबाज शरीफ और अन्य अधिकारियों से अपील की है कि वे अमेरिका, ईरान और अन्य प्रमुख देशों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखें, ताकि शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।
रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका-ईरान के बीच हाल ही में 21 घंटे तक चली बातचीत बेनतीजा रही थी। पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हुई इस बैठक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कालिबाफ शामिल हुए थे, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका। हालांकि, अब नए सिरे से बातचीत की उम्मीदें बढ़ गई हैं। ट्रंप ने संकेत दिया है कि आने वाले दो दिनों में फिर से बातचीत शुरू हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि इस बार बातचीत पाकिस्तान में ही होने की संभावना ज्यादा है। ट्रंप ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की तारीफ करते हुए उनकी भूमिका को अहम बताया।
सूत्रों के मुताबिक अमेरिका और ईरान दोनों ही नए दौर की बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन इसकी तारीख, स्थान और प्रतिनिधिमंडल की संरचना अभी तय नहीं हुई है। इस्लामाबाद और जिनेवा को संभावित मेजबान शहरों के तौर पर देखा जा रहा है। इस बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने उम्मीद जताई है कि युद्धविराम वार्ता फिर से शुरू हो सकती है। उन्होंने कहा कि इतने जटिल और लंबे समय से चले आ रहे विवाद का समाधान एक ही बैठक में संभव नहीं है, इसलिए लगातार बातचीत और युद्धविराम बनाए रखना जरूरी है।
बता दें अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह का युद्धविराम लागू है, जिसने हालात को कुछ हद तक शांत कर दिया है, लेकिन इस दौरान अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी कर दी है, वहीं ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण कड़ा कर दिया है, जिससे वैश्विक तेल कीमतों में भारी उछाल देखा गया। रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा स्थिति में सबसे अहम बात यह है कि दोनों देशों के बीच संवाद के रास्ते खुले हैं और युद्धविराम कायम है। यही कारण है कि मध्यस्थ देशों को उम्मीद है कि जल्द ही दोनों पक्ष फिर से बातचीत की मेज पर लौट सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह वार्ता दोबारा शुरू होती है, तो यह न सिर्फ क्षेत्रीय तनाव कम करने में मदद करेगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक स्थिरता के लिए भी अहम साबित हो सकती है। फिलहाल सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या पाकिस्तान की मध्यस्थता अमेरिका और ईरान के बीच जमी बर्फ को पिघला पाएगी या नहीं।
शाहाबाद अनाज मंडी में बड़ा हादसा, चार बच्चों की मां की गई जान
15 Apr, 2026 12:42 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कुरुक्षेत्र। शाहाबाद अनाज मंडी में हुए गेहूं से भरी बोरियों के ढेर के नीचे दबने से 27 वर्षीय महिला मजदूर हसीना खातून मौके पर ही अपनी जान गंवा बैठी। मृतक यमुनानगर के बिलासपुर गांव की रहने वाली थी और वर्तमान में अपने पति राहुल कुमार व चार छोटे बच्चों के साथ शाहाबाद की अटारी कालोनी में रह रही थी। वह अनाज मंडी की 103 नंबर दुकान पर झाड़ू-पोछा का काम करती थी।
पति राहुल कुमार ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि हसीना सुबह करीब चार बजे मंडी में गेहूं इकट्ठा करने और सफाई का काम करने गई थी। वह गेहूं के रैक के नीचे से गेहूं इक्कट्ठी कर रही थी, जैसे ही नीचे की बोरी के पास से गेहूं निकालने लगी तो अचानक रैक में लगी भारी बोरियों उनके ऊपर गिर पड़ी। बोरियों के भारी दबाव से उनके सिर और माथे पर गहरी चोट आई और घटना इतनी अचानक हुई कि आसपास मौजूद लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही हसीना की मौके पर ही मौत हो गई। मंडी में काम करने वाले मजदूरों ने बताया कि महिला के साथ आई अन्य तीन से चार महिला हसीना को बोरियों के नीचे दबता देख शोर मचाते हुए मौके से भाग गई। आसपास काम कर रहे अन्य मजदूरों ने तुरंत बोरियों को हटाकर महिला को बाहर निकाला, लेकिन तब तक उनकी सांसें थम चुकी थी। मजदूरों ने तुरंत डायल-112 को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम करवाने के बाद परिजनों को सौंप दिया। पुलिस ने पति राहुल कुमार का बयान पर मामले में इत्तेफाकिया कार्रवाई की है।
रैक में थी लगभग 700 बोरियां
मंडी में उठान धीमा चल रहा है। इसके चलते आढ़ती गेहूं की तुलाई करने के बाद जगह कम होने के चलते बोरियों का रैक लगवा देते हैं। आढ़ती ने यह रैक रात दो बजे मजदूरों से लगवाया था और सुबह करीब चार बजे यह हादसा हो गया। रैक में लगभग 700 के करीब बोरियां थी, जिसमें सुबह मजदूरों को और भी बोरियां लगानी थी।
हादसा मंडी सुरक्षा पर कर रहा गंभीर सवाल खड़े
हादसा मंडी में सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है कि इतनी रात को कोई बोरियों के पास से गेहूं एकत्रित कर रहा है और आसानी से उसे बिना रोक टोक ले जाता है तो मंडी के चौकीदार उस समय क्या कर रहे होते हैं। दूसरी तरफ उठान समय पर क्यों नहीं करवाया गया। यह तो गनीमत रही की बोरियां रात के समय खिसकी अगर दिन में खिसकती तो गेहूं लेकर आए किसान व आस-पास काम कर रहें मजदूर भी इसके चपेट में आ सकते थे, जिससे बड़ा हादसा हो सकता था। इस सवाल के जवाब में मंडी सचिव कृष्ण मलिक का कहना है कि सीजन में मजदूरों का देर रात तक आना जाना लगा रहता है और सीजन में देर रात तक काम करते हैं तो कोई उन्हें परिसर में कुछ कहता नहीं है। बाहर ले जाने की बात पर उन्होंने कहा कि मंडी लाडवा व बराड़ा रोड पर स्थित है और यहां पूरी रात वाहन आते जाते रहते हैं। कोई पैदल अगर कुछ लेकर जा रहा है तो चौकीदार पूछताछ कर लेता है। परंतु रात के समय गाड़ियों को चेक नहीं किया जाता।
पति के बयान पर इत्तेफाकिया कार्रवाई कर शव सौंपा : जगदीश चंद
थाना शाहाबाद के प्रभारी जगदीश चंद ने बताया कि महिला दिन में मंडी में ही काम करती थी और रात के समय रैक के पास से बोरियों में निकली गेहूं एकत्रित करती थी। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि महिला रैक के नीचे लगी बोरियों के पास गेहूं इक्कट्ठा करने की प्रयास कर रही थी और इसी प्रयास में बोरियां हिल गई और महिला पर आ गिरी।
मामले में नियमानुसार की जाएगी कार्रवाई : कृष्ण मलिक
शाहाबाद मार्केट कमेटी के सचिव कृष्ण मलिक ने कहा कि पूरी घटना बेहद दुखद है। पूरे मामले की जांच की जा रही है कि महिला कहां काम करती थी और मंडी में इतनी रात को आई कैसे। वहीं इस बारे में चौकीदार से भी पूछताछ की जा रही है। पूरे मामले में जो भी नियमों का उल्लंघन करता हुआ पाया गया उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी दादागीरी के चलते दुनिया में मचेगा तेल को लेकर हाहाकार
15 Apr, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा के बाद अमेरिकी नौसेना सोमवार से ही इस सामरिक जलमार्ग पर ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले और वहां से आने वाले जहाजों की आवाजाही पर रोक लगाएगी। इस फैसले के बाद खाड़ी क्षेत्र में सैन्य संघर्ष की आशंका तेज हो गई है, जिसका सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ सकता है।यूएस सेंट्रल कमांड द्वारा जारी बयान के अनुसार, अमेरिकी बल ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में आने-जाने वाले सभी देशों के जहाजों की नाकेबंदी शुरू कर देंगे। यह आदेश अरब की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के सभी ईरानी बंदरगाहों पर निष्पक्ष रूप से लागू होगा। हालांकि, अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज से गैर-ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले जहाजों को बाधित नहीं किया जाएगा। नाविकों को सलाह दी गई है कि वे अमेरिकी नौसेना के संपर्क में रहें और सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।
यह कड़ा फैसला पाकिस्तान में हुई उस द्विपक्षीय वार्ता के विफल होने के बाद आया है, जिसमें दोनों देश परमाणु हथियारों के मुद्दे पर किसी सहमति पर नहीं पहुंच सके थे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर अपने कड़े रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि ईरानी प्रशासन को पैसा और परमाणु हथियार चाहिए, जिसे अमेरिका किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने अमेरिकी नौसेना को निर्देश दिया है कि वे उन सभी जहाजों की पहचान करें जिन्होंने ईरान को जलमार्ग का टोल भुगतान किया है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि ईरान को भुगतान करने वाले किसी भी जहाज को सुरक्षित आवागमन की अनुमति नहीं दी जाएगी। दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिकी दावे को चुनौती देते हुए इस जलमार्ग पर अपना नियंत्रण होने की बात दोहराई है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड नौसेना ने रविवार को कड़े शब्दों में कहा कि होर्मुज के पास आने वाले किसी भी विदेशी सैन्य जहाज को दृढ़ और बलपूर्वक जवाब दिया जाएगा। ईरान के इस रुख से स्पष्ट है कि वह अमेरिका की नाकेबंदी के आगे झुकने को तैयार नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों सेनाओं के बीच टकराव होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिससे दुनिया के कई देशों में गंभीर तेल संकट पैदा हो जाएगा। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर टिकी हैं, जहां तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है।
ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी से भड़का चीन कहा- हमारे काम में दखल न दे अमेरिका
15 Apr, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। होर्मुज के बहाने ईरान को चारों तरफ से अमेरिका घेरने में लगा हुआ है। इसी घेराबंदी के चलते उसने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी कर दी। इससे चीन भड़क गया है और अमेरिका को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि हमारे काम में किसी भी तरह दखल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चीन का यह बयान ऐसे समय पर सामने आया है, जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से चीन के जहाजों को वापस लौटना पड़ा। पाकिस्तान में हुई ईरान के साथ वार्ता फेल होने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाकेबंदी के आदेश दिए थे। बता दें कि अमेरिका-ईरान वार्ता के विफल रहने और नाकेबंदी की घोषणा के बाद तेल कीमतों में तेज उछाल देखा गया। ब्रेंट क्रूड 101.88 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी क्रूड 104.69 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज पर तनाव की आशंका के चलते दुनिया के एनर्जी मार्केट में अस्थिरता बनी रह सकती है।
चीन के रक्षा मंत्री डोंग जुन ने कहा कि उनका देश क्षेत्र में शांति और स्थिरता के पक्ष में है, लेकिन वह ईरान के साथ अपने ऊर्जा और व्यापार समझौतों का सम्मान करेगा और अपने हितों में किसी बाहरी दखल को स्वीकार नहीं करेगा। चीन ने इस बात पर जोर दिया है कि स्ट्रेट पर ईरान का नियंत्रण है और यह जलमार्ग चीन के लिए खुला रहेगा। उन्होंने कहा, हमारे जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पानी में आ और जा रहे हैं। ईरान के साथ हमारे व्यापार और ऊर्जा के समझौते हैं। हम उन समझौतों का सम्मान करेंगे और उन्हें निभाएंगे, और हम उम्मीद करते हैं कि दूसरे हमारे मामलों में दखल नहीं देंगे।
स्पेन,आस्ट्रेलिया जैसे देशों में नाराजगी
स्पेन की रक्षा मंत्री मार्गरीटा रोब्लेस ने नाकेबंदी की चेतावनी को बेमतलब करार देते हुए कहा कि यह संघर्ष पहले ही दुनिया को एक खतरनाक स्थिति में ले जा चुका है। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने कहा कि उन्हें नाकेबंदी में शामिल होने के लिए कोई अनुरोध नहीं मिला है और जलमार्ग सभी देशों के लिए खुला रहना चाहिए।
ईरान ने कहा तो ध्वस्त कर देंगे बंदरगाह
वहीं दूसरी तरफ जवाब में ईरान ने फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के सभी बंदरगाहों को निशाना बनाने की धमकी दी। इससे दोनों पक्षों के बीच युद्ध-विराम के विफल होने और लड़ाई फिर से छिड़ने की आशंका बढ़ गई है। समुद्री सुरक्षा की निगरानी करने वाली यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस एजेंसी ने नाविकों के लिए एक नोटिस जारी किया, जिसमें कहा गया है कि नाकेबंदी में बंदरगाहों और ऊर्जा बुनियादी ढांचे सहित पूरी ईरानी तटरेखा शामिल है। इसमें कहा गया है कि गैर-ईरानी ठिकानों से आने वाले या वहां जाने वाले जहाजों के लिए स्ट्रेट से गुजरने पर प्रतिबंध नहीं होने की खबरें हैं, लेकिन क्षेत्र में जहाजों को सैन्य उपस्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
सिनेमा के जरिए मुकाबला! ‘धुरंधर’ के बाद पाकिस्तान ला रहा ‘मेरा ल्यारी’
15 Apr, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: बॉक्स ऑफिस (Box Office) पर इन दिनों फिल्म धुरंधर: द रिवेंज (Dhurandhar: The Revenge) का जबरदस्त क्रेज देखने को मिल रहा है. फिल्म 1700 करोड़ का बिजनेस कर इंडस्ट्री के हर रिकॉर्ड को तोड़ रही है. हर तरफ इसी फिल्म की चर्चा है. दिलचस्प बात ये है कि पाकिस्तान भी इसकी पॉपुलैरिटी से अछूता नहीं है. उस मुल्क में फिल्म बैन होने के बावजूद लोग इसे देखने के तरीके ढूंढ रहे हैं. इतना ही नहीं वहां की फिल्म इंडस्ट्री ने धुरंधर में दिखाई गई कहानी का जवाब देने की तैयारी भी पूरी कर ली है.
धुरंधर से बौखलाया पाकिस्तान!
धुरंधर में दिखाया गया है कि कैसे हमजा (रणवीर सिंह) पाकिस्तान के ल्यारी में जाता है और वहां पर राज करने वाले कुख्यात रहमान डकैत (अक्षय खन्ना) की बलोच गैंग में शामिल होता है. फिर धीरे-धीरे पूरे पाकिस्तान से आतंक का खात्मा करता है. धुरंधर में जिस तरह से ल्यारी को दिखाया गया है, इससे पाकिस्तानी आवाम इतनी बौखला गई है कि जवाब देने की तैयारी कर बैठी है. खासकर फिल्म में जिस तरह से ल्यारी को गैंगवार और आतंक अड्डा बताया गया, ये बात लोगों को नागवार गुजरी है.अब वहां एक नई फिल्म बनाई गई है, जिसका नाम है ‘मेरा ल्यारी’. ये फिल्म कराची के ल्यारी इलाके पर बेस्ड है और इसका मकसद वहां की छवि को बेहतर तरीके से दिखाना बताया जा रहा है. धुरंधर की रिलीज के बाद से ही पाकिस्तानी आवाम अपनी गुस्सा जाहिर कर रही थी .इसी बात से नाराज होकर मेकर्स ने ‘मेरा ल्यारी’ बनाई, ताकि दुनिया को वहां की दूसरी साइड दिखाई जा सके.
मेरा ल्यारी दिखाएगी रहमान डकैत का सच?
फिल्म की एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर आयशा ओमर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर बताया कि ‘मेरा ल्यारी’ का प्रीमियर लंदन के ब्रिटिश फिल्म इंस्टीट्यूट में होने जा रहा है. ये फिल्म यूके एशियन फिल्म फेस्टिवल में 2 मई को दिखाई जाएगी और इसके बाद इसे पाकिस्तान समेत दुनियाभर में रिलीज करने की तैयारी है. वहीं सिनेमाघरों में इसके एक हफ्ते बाद 8 मई को रिलीज की जाएगी. आयशा फिल्म की एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर तो हैं ही साथ ही इसमें एक्टिंग भी कर रही हैं. ये उनकी डेब्यू फिल्म है.
स्टारकास्ट की बात करें तो फिल्म में पावरी हो रही है फेम दानानीर मोबीन, नायर ऐजाज, अदनान साह टीपू, और समीना मुमताज जैसे कई सेलेब्स नजर आएंगे. अब देखना दिलचस्प होगा कि ‘धुरंधर 2’ के जवाब में आई ‘मेरा लियारी’ दर्शकों को कितनी पसंद आती है और क्या ये सच में लियारी की इमेज बदल पाती है या नहीं. वहीं धुरंधर ने दुनिया को रहमान डकैत का जैसा टेरर दिखाया था, क्या मेरा ल्यारी इससे इंसाफ कर पाएगा.
क्रिकेट से आगे बढ़े युवा, फुटबॉल-वॉलीबॉल की ओर बढ़ा रुझान
15 Apr, 2026 10:14 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणा। लंबे समय से कुश्ती और कबड्डी खेल के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन अब प्रदेश में खेलों का ट्रेंड तेजी से बदल रहा है और खिलाड़ियों की एक नई पौध तैयार हो रही है। नए सत्र 2026-27 के लिए खेल विभाग की ओर से जारी आंकड़े बताते हैं कि पारंपरिक खेलों के साथ-साथ फुटबॉल और वॉलीबाॅल का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में इन खेलों की नर्सरियों की संख्या भी लगातार बढ़ाई जा रही है और युवा खिलाड़ियों का रुझान इनकी ओर साफ दिखाई दे रहा है। प्रत्येक नर्सरी में 25 खिलाड़ी खेलते हैं। प्रदेशभर में इस बार 1063 खेल नर्सरियां अलॉट की गई हैं, जो पिछले साल की 976 नर्सरियों से 87 ज्यादा हैं। लेकिन सरकार की ओर से कुल 2 हजार नर्सरियों के संचालित करवाने का लक्ष्य है। इन नर्सरियों के जरिए खिलाड़ियों को शुरुआती स्तर से ही ट्रेनिंग दी जाएगी। अब भी कबड्डी 148 नर्सरियों के साथ टॉप पर है, लेकिन फुटबॉल (69) और वॉलीबाॅल (64) तेजी से अपनी जगह बना रहे हैं। कुश्ती की 74 नर्सरियां हैं। अन्य खेलों की बढ़ती संख्या बताती है कि युवाओं की पसंद और नजरिया अब बदल रहा है।
फुटबॉल-वॉलीबाॅल के क्रेज बढ़ने के मुख्य वजह
हरियाणा में फुटबॉल कोच हरविंदर सिंह के मुताबिक इस बदलाव के पीछे सबसे पहली वजह प्रदेश के स्कूल और कॉलेज स्तर पर इन खेलों को ज्यादा बढ़ावा मिलना है। गांवों में भी अब फुटबॉल और वॉलीबाॅल के मैदान आसानी से तैयार हो जाते हैं। इससे बच्चों की भागीदारी बढ़ी है। इसी तरह दूसरी वजह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ियों के लिए तेजी से बढ़ते मौके भी है। फुटबॉल और वॉलीबाॅल में करियर के विकल्प बढ़ने से युवा इनकी ओर आकर्षित हो रहे हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया और टीवी पर बड़े टूर्नामेंट देखने से भी बच्चों में इन खेलों के प्रति उत्साह बढ़ा है। वहीं, तीसरी अहम वजह इन खेलों में कम खर्च और आसान संसाधन है, जहां कुश्ती के लिए अखाड़ा और विशेष व्यवस्था चाहिए, इसी तरह दूसरे खेलों में संसाधनों की व्यवस्था पर भारी खर्च है। वहीं फुटबॉल और वॉलीबाॅल कम संसाधनों में भी खेले जा सकते हैं।
जिलों में भी दिखा नया ट्रेंड
खेल नर्सरियों के आंकड़ों में भी यह बदलाव साफ नजर आता है। हिसार 119 नर्सरियों के साथ सबसे बड़ा स्पोर्ट्स हब बनकर उभरा है, जबकि जींद 108 के साथ दूसरे स्थान पर है। कैथल, भिवानी, करनाल और रोहतक जैसे जिलों में भी बड़ी संख्या में नर्सरियां अलॉट की गई हैं। गुरुग्राम, फरीदाबाद और पंचकूला अभी पीछे हैं, जबकि सबसे पीछे नूंह है।
इन जिलों में इतनी नर्सरियां अलॉट
हिसार - 119
जीद - 108
कैथल - 82
भिवानी - 67
करनाल - 75
रोहतक - 65
सोनीपत - 65
झज्जर - 28
यमुनानगर - 28
दादरी - 25
अंबाला - 22
पंचकूला - 18
नूंह - 12
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