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तारिक ने सत्ता संभालते ही सेंट्रल बैंक के गवर्नर को हटाया, बांग्लादेश में मचा घमासान
28 Feb, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। बांग्लादेश में सरकार बदलने के बाद भी घमासान थमा नहीं है। अब विवाद सेंट्रल बैंक के गवर्नर को लेकर है। जब मोहम्मद यूनुस की सरकार थी तो उन्होंने अहसान हबीब मंसूर को कमान सौपी थी, लेकिन तारिक रहमान ने सत्ता संभाले ही उन्हें निकाल दिया। सरकार ने अब मोस्तकुर रहमान को बांग्लादेश बैंक का नया गवर्नर बनाया है और इस फैसले ने पूरे देश के आर्थिक और राजनीतिक गलियारों में आग लगा दी है। लोग सवाल कर रहे हैं कि एक कारोबारी को बैंक की चाबी क्यों दे दी गई?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अहसान हबीब मंसूर जो गवर्नर थे वो जाने-माने अर्थशास्त्री भी थे और उन्हें मोहम्मद यूनुस वाली अंतरिम सरकार ने नियुक्त किया था। उनका कार्यकाल 2028 तक था, लेकिन उन्हें अचानक हटा दिया गया। हैरानी की बात ये है कि मंसूर को खुद नहीं पता था कि उन्हें हटाया जा रहा है। उन्होंने मीडिया से कहा कि न मैंने इस्तीफा दिया, न मुझे आधिकारिक तौर पर हटाया गया। मैंने टीवी पर खबर देखी, तो अपना बोरिया-बिस्तर समेटा और घर चल दिया।
एक रिपोर्ट के मुताबिक अब तक की परंपरा ये रही है कि सेंट्रल बैंक का गवर्नर कोई बड़ा बैंकर, अर्थशास्त्री या अनुभवी अफसर बनता है, लेकिन मोस्तकुर रहमान एक गारमेंट कारोबारी हैं। उनका बैंकिंग या मॉनेटरी पॉलिसी से कोई लेना-देना नहीं है। ऊपर से वह खालिदा जिया की पार्टी में काफी सक्रिय रहे हैं यानी एक राजनैतिक कारोबारी को बैंक की कमान सौंप दी गई है।
सबसे बड़ा बवाल मोस्तकुर रहमान के पिछले रिकॉर्ड को लेकर है। खबरों के मुताबिक गवर्नर बनने के कुछ महीने पहले उनके अपनी कंपनी ‘हेरा स्वेटर्स’ के 89 करोड़ टका के फंसे हुए लोन को री-शेड्यूल किया गया था। उन्हें 10 साल में पैसा लौटाने की मोहलत दी गई। अब सवाल ये उठ रहा है कि जो आदमी खुद अपनी कंपनी के लिए बैंकों से रियायतें ले रहा था, वह पूरे देश के बैंकिंग सिस्टम को ईमानदारी से कैसे चलाएगा? क्या वो उन बैंकों पर सख्ती कर पाएगा जिनसे उन्होंने खुद कर्ज लिया है?
रिपोर्ट के मुताबिक जमात-ए-इस्लामी ने इसे ‘मॉब कल्चर’ की शुरुआत बताया है और कहा कि इस तरह सम्मानित हस्तियों को अपमानित करना अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर देगा। विशेषज्ञों का कहना है कि एक बिजनेसमैन को रेगुलेटर बनाना वैसा ही है जैसे बिल्ली को दूध की रखवाली सौंप देना। कुछ विपक्षी नेताओं ने तो यहां तक कह दिया कि सरकार ने देश के खजाने की ‘लूट’ का रास्ता साफ करने के लिए अपने चहेते कारोबारी को बैठाया है। अब बांग्लादेश में लोगों को लग रहा है कि अगर सेंट्रल बैंक की आजादी खत्म हुई और वहां राजनीति हावी हो गई, तो पहले से ही लड़खड़ाता हुआ बैंकिंग सिस्टम पूरी तरह ढह सकता है।
राजनीतिक टकराव के बाद ममदानी ने व्हाइट हाउस में की ट्रंप से मुलाकात
28 Feb, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने व्हाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप के साथ मुलाकात की। हाल के महीनों में जारी मतभेदों और राजनीतिक टकराव के बाद, इन दो विपरीत विचारधारा वाले नेताओं के बीच यह एक अहम बैठक थी। खास बात यह रही कि दोनों नेताओं की यह मुलाकात पूर्व-निर्धारित सार्वजनिक कार्यक्रम का हिस्सा नहीं थी। ममदानी ने इस बातचीत को एक सार्थक बैठक बताया। उन्होंने कहा कि वे न्यूयॉर्क शहर में और ज्यादा आवास बनाने के लिए उत्सुक हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मेयर ममदानी ने कुछ ऐसे प्रस्ताव रखे हैं जिनसे कुछ ही परियोजनाओं में पिछले 50 सालों में बने आवासों से कहीं ज्यादा आवासों का निर्माण हो सकेगा। प्रस्तावित आवास परियोजनाओं के दायरे, स्थान या वित्तपोषण के बारे में तत्काल कोई और जानकारी नहीं दी गई। इस मुलाकात में अप्रवासन को लेकर भी अप्रत्याशित मोड़ आया। व्हाइट हाउस से निकलने के बाद जोहरान ममदानी ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि हमारी पिछली मुलाकात में मैंने कोलंबिया की छात्रा के बारे में अपनी चिंता व्यक्त की थी, जिन्हें शुक्रवार सुबह आईसीई ने हिरासत में लिया था। उन्होंने अभी मुझे सूचित किया है कि उन्हें जल्द ही रिहा कर दिया जाएगा। बाद में अघायेवा को रिहा कर दिया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक गुरुवार तड़के संघीय एजेंटों द्वारा कोलंबिया विश्वविद्यालय के मैनहट्टन परिसर में एक आवासीय भवन में प्रवेश करने के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया था। कोलंबिया विश्वविद्यालय ने कहा कि आव्रजन अधिकारियों ने उन्हें गिरफ्तार करने के लिए भवन में प्रवेश पाने के लिए गलत जानकारी दी। कार्यवाहक अध्यक्ष ने कहा कि फिलहाल हमारी समझ यह है कि संघीय एजेंटों ने लापता व्यक्ति की तलाश में भवन में प्रवेश पाने के लिए गलत जानकारी दी। हम अधिक जानकारी जुटाने का प्रयास कर रहे हैं।
बता दें व्हाइट हाउस ने इस बैठक पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। यह मुलाकात डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट ममदानी और रिपब्लिकन राष्ट्रपति ट्रंप के बीच बदलते संबंधों को दिखाती है। ट्रंप अक्सर उन शहरों की आलोचना करते रहे हैं, जहां डेमोक्रेटिक पार्टी की सरकार है, खासकर प्रवासन और केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर। चुनाव प्रचार के दौरान तीखी बयानबाजी के बावजूद, दोनों अब ओवल ऑफिस में एक से अधिक बार मिल चुके हैं।
सालों तक भारत पर राज करने वाले ईस्ट इंडिया कंपनी का हुआ अंत
28 Feb, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन। कभी एशिया और खासकर भारत की तकदीर तय करने वाली ईस्ट इंडिया कंपनी एक बार फिर इतिहास के पन्नों में सिमट गई है। इस बार उसका अंत किसी साम्राज्य के पतन की तरह नहीं, बल्कि लंदन में एक लक्जरी रिटेल कारोबार के दिवालिया होने के रूप में हुआ है।
बता दें करीब 152 साल पहले निष्क्रिय हो चुकी मूल ईस्ट इंडिया कंपनी को 2010 में भारतीय मूल के ब्रिटिश कारोबारी संजीव मेहता ने इसके नाम के अधिकार खरीद कर फिर से जीवित किया था। उस समय इसे औपनिवेशिक इतिहास पर प्रतीकात्मक पलटवार के रूप में देखा गया। दुनिया भर के मीडिया में सुर्खियां बनीं कि जिस कंपनी ने भारत पर शासन किया, अब वह एक भारतीय के स्वामित्व में है।
अब यह आधुनिक कंपनी भी समाप्त हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक ईस्ट इंडिया कंपनी लिमिटेड ने अक्टूबर 2025 में परिसमापक नियुक्त कर दिए। कंपनी पर छह लाख पाउंड से अधिक की देनदारी अपने मूल समूह के प्रति थी, जो ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में पंजीकृत था। इसके अलावा उस पर टैक्स बकाया और कर्मचारियों के वेतन से जुड़ी भारी राशि भी बाकी थी। लंदन के मेफेयर स्थित 97 न्यू बॉन्ड स्ट्रीट पर बना इसका शानदार स्टोर अब खाली बताया जा रहा है और वह किराये पर उपलब्ध है। कंपनी की वेबसाइट भी बंद हो चुकी है। इससे जुड़ी अन्य कंपनियां, जिनके नाम में ईस्ट इंडिया शब्द शामिल था, वह भी भंग कर दी गई हैं।
इसे ब्रिटेन के प्रसिद्ध स्टोर फोर्टनम एंड मेसन जैसी श्रेणी में रखा गया था। संजीव मेहता ने इसे औपनिवेशिक प्रतीक को सकारात्मक पहचान देने का प्रयास बताया था। वर्ष 2017 में दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि ऐतिहासिक कंपनी आक्रामकता पर बनी थी, लेकिन आज की कंपनी करुणा और सहयोग की भावना से प्रेरित है। फिर भी व्यावसायिक चुनौतियों और वित्तीय दबावों के बीच यह प्रयोग ज्यादा समय तक टिक नहीं सका। इस प्रकार ईस्ट इंडिया कंपनी का यह दूसरा अवसान भी इतिहास में दर्ज हो गया है।
बता दें मूल ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 31 दिसंबर 1600 को महारानी एलिजाबेथ-1 के शाही चार्टर के तहत हुई थी। इसे पूर्वी देशों खासकर भारत और दक्षिण पूर्व एशिया के साथ मसालों और अन्य वस्तुओं के व्यापार के लिए बनाया गया था। यह दुनिया की शुरुआती संयुक्त पूंजी कंपनियों में से एक थी, जिसमें निवेशक शेयर खरीद कर लाभ और जोखिम दोनों में भागीदार बनते थे। 1612-13 में इसने सूरत में अपनी पहली व्यापारिक चौकी स्थापित की थी। धीरे धीरे इसे केप ऑफ गुड होप के पूर्व में ब्रिटिश व्यापार पर एकाधिकार मिल गया।
18वीं सदी तक यह कंपनी व्यापारिक संस्था के साथ-साथ एक राजनीतिक शक्ति बन गई थी। उसने किले बनाए, स्थानीय शासकों से संधियां कीं और प्रतिद्वंद्वी यूरोपीय शक्तियों तथा भारतीय राज्यों से युद्ध लड़े। 1757 के प्लासी के युद्ध के बाद बंगाल पर उसका नियंत्रण स्थापित हो गया और वह कर वसूली, न्याय व्यवस्था तथा प्रशासन चलाने लगी। वह मसाले, कपास, रेशम, चाय और नील जैसे उत्पादों के वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा नियंत्रित करती थी।
ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन को व्यापक शोषण और दमन के लिए याद किया जाता है। नकदी फसलों की जबरन खेती, कठोर कर व्यवस्था और निर्यात नीतियों ने कई क्षेत्रों में अकाल को और भी भयावह बना दिया था। बंगाल के अकाल में लाखों लोगों की जान गई थी। 1857 का विद्रोह, जिसे सिपाही विद्रोह भी कहा जाता है, कंपनी शासन के अंत की शुरुआत साबित हुआ था। 1858 में ब्रिटिश सरकार ने सीधे नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया था और भारत में ब्रिटिश राज की स्थापना हुई थी। 1874 में ब्रिटिश संसद ने ईस्ट इंडिया कंपनी को पूरी तरह भंग कर दिया था।
ट्रंप ने जेरेड कुश्नर और स्टीव विटकॉफ को यूक्रेन तथा ईरान संकट सुलझाने की सौंपी जिम्मेदारी
27 Feb, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक तनाव को सुलझाने के लिए अपने सबसे भरोसेमंद सहयोगियों पर दांव लगाया है। ट्रंप ने अपने दामाद जेरेड कुश्नर और करीबी मित्र स्टीव विटकॉफ को इन संकटों के समाधान के लिए विशेष दूत के रूप में नियुक्त किया है। गुरुवार को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में इन दोनों दूतों ने कुछ ही घंटों के भीतर कूटनीतिक सक्रियता दिखाते हुए कई महत्वपूर्ण बैठकें कीं, जिसने अंतरराष्ट्रीय बिरादरी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
जिनेवा में इन दूतों का दौर बेहद व्यस्त रहा। सबसे पहले उन्होंने ओमान के राजदूत के आवास पर ईरानी अधिकारियों के साथ गुप्त वार्ता की। इस बैठक का प्राथमिक उद्देश्य तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर एक टिकाऊ समझौते की रूपरेखा तैयार करना और अमेरिका व इजरायल द्वारा संभावित सैन्य हमलों के खतरे को टालना था। इसके तुरंत बाद, कुश्नर और विटकॉफ ने इंटरकॉन्टिनेंटल होटल में यूक्रेनी प्रतिनिधियों के साथ चर्चा की, जहाँ रूसी आक्रमण के पांचवें वर्ष में प्रवेश करने के बीच शांति की संभावनाओं को तलाशा गया। कूटनीति का यह सिलसिला यहीं नहीं थमा; उन्होंने फोर सीजन्स होटल में रूस और यूक्रेन के दूतों से अलग-अलग मंजिलों पर मुलाकात की, ताकि किसी साझा मंच की गुंजाइश बन सके। देर रात अमेरिका रवाना होने से पहले वे दोबारा ओमान के राजदूत के आवास पर भी गए।
जेरेड कुश्नर और विटकॉफ की यह सक्रियता केवल यूरोप और खाड़ी तक सीमित नहीं है। हाल ही में उन्होंने बोर्ड ऑफ पीस की उद्घाटन बैठक में हिस्सा लिया था, जिसका गठन गाजा पट्टी में हमास और इजरायल के बीच युद्धविराम समझौते की निगरानी के लिए किया गया है। ट्रंप की यह रणनीति स्पष्ट करती है कि वे विदेश विभाग जैसे विशाल और पारंपरिक सरकारी तंत्र के बजाय अपने निजी व व्यावसायिक रूप से सफल सहयोगियों पर अधिक भरोसा कर रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञ इस कार्यप्रणाली को लेकर आशंकित हैं। पूर्व वार्ताकारों का मानना है कि यूक्रेन, ईरान और गाजा जैसे जटिल मुद्दों को एक साथ संभालना व्यावहारिक रूप से असंभव है, क्योंकि इनमें से प्रत्येक मुद्दा तकनीकी और ऐतिहासिक बारीकियों का महासागर है।
व्हाइट हाउस ने इन चिंताओं को खारिज करते हुए तर्क दिया है कि कुश्नर और विटकॉफ का व्यावसायिक बैकग्राउंड उन्हें विश्व नेताओं के साथ प्रभावी ढंग से बातचीत करने में मदद करता है। लेकिन आलोचक उनके व्यक्तिगत व्यावसायिक हितों के टकराव पर सवाल उठा रहे हैं। जेरेड कुश्नर की निवेश फर्म अरबों डॉलर के कतरी फंड का प्रबंधन करती है, वहीं विटकॉफ की क्रिप्टो फर्म के संबंध अबू धाबी के सरकारी फंडों से हैं। रिपब्लिकन सीनेटरों ने भी चिंता जताई है कि ये दूत सीनेट की मंजूरी या किसी सरकारी निगरानी के अधीन नहीं हैं। इसके बावजूद, यूक्रेन ने इस भागीदारी का स्वागत किया है। यूक्रेन को उम्मीद है कि ट्रंप से सीधे संपर्क रखने वाले इन दूतों के माध्यम से राष्ट्रपति जेलेंस्की और व्लादिमीर पुतिन के बीच सीधी वार्ता का रास्ता साफ हो सकेगा। पूर्व अमेरिकी दूतों का मानना है कि ट्रंप से सीधा जुड़ाव एक सकारात्मक पहलू तो है, लेकिन इन मुद्दों की संवेदनशीलता और गहरी समझ की कमी वार्ता को जोखिम में भी डाल सकती है।
अफगान हमले से थरथर कांपा पाकिस्तान फिर आधी रात काबुल में बरसी आग
27 Feb, 2026 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काबुल/इस्लामाबाद। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर तनाव अब खुले सैन्य टकराव और हमलों में बदलता दिख रहा है। दोनों देशों के दावों और पलटवारों के बीच हालात युद्ध जैसे बन गए हैं। अफगानिस्तान का दावा है कि उसकी जवाबी कार्रवाई में 55 से अधिक पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं, जबकि कुछ सैनिकों को जिंदा पकड़ा गया है। अफगानी सैनिकों ने डूरंड लाइन पर पाकिस्तान की करीब 15 चौकियों पर कब्जा कर लिया है। वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान ने आधी रात को अफगानिस्तान की राजधानी काबुल समेत कई इलाकों में हवाई हमले कर 130 से अधिक अफगान लड़ाकों को मार गिराने का दावा किया है।
पाकिस्तान ने अफगान तालिबान शासन के खिलाफ ‘ऑपरेशन ग़ज़ब लिल हक’ शुरू करने की घोषणा की है। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार के अनुसार, इस ऑपरेशन के तहत 133 अफगान तालिबान ऑपरेटिव मारे गए और 200 से अधिक घायल हुए। पाकिस्तान का कहना है कि उसने काबुल के अलावा पक्तिका और कंधार में तालिबान के रक्षा ठिकानों को निशाना बनाया। पाकिस्तानी दावे के मुताबिक 27 चौकियां तबाह की गईं और 9 चौकियों पर कब्जा भी कर लिया गया।
पाकिस्तान का कहना है कि यह कार्रवाई अफगानिस्तान की ओर से किए गए क्रॉस-बॉर्डर हमलों के जवाब में की गई। इस्लामाबाद के अनुसार, अफगान हमलों में उसके 50 से अधिक सैनिक मारे गए थे। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि सेना तालिबान सरकार के हमलों का “करारा जवाब” दे रही है। पाकिस्तान ने यह भी दावा किया कि उसने दो कोर मुख्यालय, तीन ब्रिगेड मुख्यालय, दो गोला-बारूद डिपो और कई सैन्य ठिकाने नष्ट कर दिए। हालांकि, पाकिस्तान ने अपने नुकसान को सीमित बताते हुए कहा कि उसके केवल दो सैनिक मारे गए और तीन घायल हुए हैं। इस्लामाबाद ने काबुल में बड़े पैमाने पर नागरिक हताहत होने के दावों को भी खारिज किया है।
अफगानिस्तान का दावा- पाक चौकियों पर कब्जा
इसी बीच अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के दावों को खारिज करते हुए कहा है कि उसके सैनिकों ने डूरंड लाइन पर पाकिस्तान की 15 चौकियों पर कब्जा कर लिया है। इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि कंधार और हेलमंद में पाकिस्तानी सैन्य पोस्ट को निशाना बनाया गया है। अफगान रक्षा मंत्रालय का दावा है कि कई पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और कुछ को जिंदा पकड़ लिया गया है।
पहले भी हुए थे हवाई हमले
संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन, अफगानिस्तान (यूएनएएमए) ने हाल ही में पुष्टि की थी कि पाकिस्तान द्वारा नंगरहार और पक्तिका प्रांतों में किए गए हवाई हमलों में 13 नागरिकों की मौत हुई थी, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल थे। सीमा पर जारी गोलीबारी और हवाई हमलों ने पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा दी है। दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय हालात पर नजर बनाए हुए है। फिलहाल, हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं और किसी बड़े संघर्ष की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
हिलेरी क्लिंटन ने जेफ्री एपस्टीन से किसी भी तरह की मुलाकात से किया इनकार
27 Feb, 2026 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने प्रतिनिधि सभा की ‘निगरानी एवं सरकारी सुधार समिति’ के समक्ष पेश होकर जेफ्री एपस्टीन से किसी भी प्रकार के संबंध या मुलाकात से साफ इनकार किया। उन्होंने कहा कि उन्हें एपस्टीन की आपराधिक गतिविधियों की कोई जानकारी नहीं थी और न ही उन्हें उससे मिलने की कोई याद है।
क्लिंटन ने अपने बयान में कहा, मुझे उसकी आपराधिक गतिविधियों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। मुझे याद नहीं कि मेरी कभी एपस्टीन से मुलाकात हुई हो। मैंने कभी उसके विमान में यात्रा नहीं की और न ही उसके द्वीप, घरों या कार्यालयों का दौरा किया। यह सुनवाई उस जांच के तहत हुई, जिसकी अगुवाई प्रतिनिधि सभा की रिपब्लिकन नेतृत्व वाली समिति कर रही है। जांच का फोकस संघीय एजेंसियों द्वारा जेफ्री एपस्टीन और उसकी सहयोगी जी मैक्सवेल के खिलाफ मामलों के संचालन पर है। एपस्टीन की 2019 में यौन तस्करी के आरोपों के बीच हिरासत में मौत हो गई थी, जबकि मैक्सवेल वर्तमान में संघीय जेल में सजा काट रही है।
जांच पर उठाए सवाल
अपने शुरुआती बयान में क्लिंटन ने समिति की मंशा पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं होने के बावजूद गवाही के लिए बुलाया गया, जो जांच में सहायक नहीं है। उनके अनुसार, यह कार्रवाई पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जुड़े मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश हो सकती है। क्लिंटन ने कहा कि यह जांच पीड़ितों और बचे लोगों के लिए न्याय सुनिश्चित करने के बजाय राजनीतिक हितों की रक्षा के लिए की जा रही है। उन्होंने दोहराया कि जनवरी में दिए गए अपने शपथ पत्र के अलावा उनके पास बताने को और कुछ नहीं है।
सुनवाई के दौरान विवाद
बंद कमरे में हुई सुनवाई के दौरान एक तस्वीर लीक होकर ऑनलाइन सामने आई, जिस पर क्लिंटन ने कड़ी आपत्ति जताई। सदन के नियमों के तहत ऐसी कार्यवाही के दौरान फोटो लेना प्रतिबंधित है। क्लिंटन ने इसे “बेहद परेशान करने वाला” बताया। समिति के रिपब्लिकन अध्यक्ष जेम्स आर कॉमर ने जांच प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा, कि यह कोई पक्षपातपूर्ण कार्रवाई नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन से भी आगे पूछताछ की जा सकती है। वहीं, समिति के डेमोक्रेट सदस्य यासमिन अंसारी और रॉबर्ट गेरेसिया ने क्लिंटन का समर्थन किया और कहा कि उनके खिलाफ किसी भी गलत काम का प्रमाण नहीं है।
सीनेट में डेमोक्रेटिक नेता कार्लेस ई स्कूमर ने कहा कि वे न्याय विभाग से संबंधित फाइलों की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे। एपस्टीन प्रकरण अमेरिकी राजनीति और न्याय व्यवस्था में लंबे समय से विवाद का विषय रहा है, और यह ताजा सुनवाई उस बहस को एक बार फिर सुर्खियों में ले आई है।
उदयपुर में एक हुए विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना; पारंपरिक रीति-रिवाजों से संपन्न हुई 'शाही शादी'
27 Feb, 2026 05:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
उदयपुर। फिल्म 'गीता गोविंदम' और 'डियर कॉमरेड' में अपनी ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री से लाखों दिलों को जीतने वाले विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना अब असल जिंदगी में भी हमसफर बन गए हैं। 26 फरवरी 2026 को उदयपुर के अरावली पहाड़ियों के बीच स्थित आलीशान ITC मेमेंटोस (ITC Mementos) होटल में दोनों ने सात फेरे लिए।
दो संस्कृतियों का मिलन: तेलुगु और कोडवा रीति-रिवाज
इस शादी की सबसे खास बात यह थी कि इसमें दोनों परिवारों की परंपराओं का पूरा सम्मान रखा गया।
सुबह की रस्म: सुबह 10:10 बजे विजय के परिवार की परंपरा के अनुसार तेलुगु हिंदू रीति-रिवाजों से शादी संपन्न हुई।
शाम की रस्म: शाम को रश्मिका की जड़ों का सम्मान करते हुए पारंपरिक कोडवा (कूर्गी) रस्मों को निभाया गया।
कैसा था दूल्हा-दुल्हन का लुक?
सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरों में यह जोड़ा किसी राजसी जोड़े से कम नहीं लग रहा था:
रश्मिका मंदाना: रश्मिका ने मशहूर डिजाइनर अनामिका खन्ना द्वारा डिजाइन की हुई पारंपरिक 'रस्ट' (नारंगी-लाल) रंग की सिल्क साड़ी पहनी थी, जिसे उन्होंने सोने के भारी गहनों (टेंपल ज्वेलरी) के साथ टीम-अप किया था।
विजय देवरकोंडा: विजय ने क्रीम रंग की धोती और सुनहरे अंगवस्त्रम में एक सादगी भरे लेकिन शाही दूल्हे के रूप में एंट्री की।
'बेस्ट फ्रेंड को बनाया अपनी पत्नी' - विजय का इमोशनल पोस्ट
शादी के बाद विजय देवरकोंडा ने इंस्टाग्राम पर एक बेहद भावुक नोट साझा किया। उन्होंने लिखा, "एक दिन मुझे उसकी कमी महसूस हुई... ऐसी कमी कि मुझे लगा कि मेरा हर दिन और मेरा हर भोजन उसके बिना अधूरा है। इसलिए मैंने अपनी सबसे अच्छी दोस्त को अपनी पत्नी बना लिया।" वहीं रश्मिका ने विजय को अपना 'पति' बताते हुए लिखा कि वे उनके साथ अपनी नई जिंदगी शुरू करने के लिए बेहद उत्साहित हैं।
क्रिकेट मैच और संगीत: प्री-वेडिंग का जलवा
शादी से पहले 24 और 25 फरवरी को हल्दी, मेहंदी और संगीत के कार्यक्रम हुए। इस दौरान मेहमानों के लिए एक खास क्रिकेट मैच का आयोजन किया गया था, जिसे 'विरोश प्रीमियर लीग' (Virosh Premier League) नाम दिया गया। इसमें दोनों परिवारों और दोस्तों ने जमकर मस्ती की।
हैदराबाद में होगा भव्य रिसेप्शन
उदयपुर की शादी एक प्राइवेट अफेयर थी जिसमें केवल करीबी दोस्त और परिवार शामिल हुए। लेकिन फिल्मी हस्तियों और उद्योग जगत के लिए एक बड़ा रिसेप्शन 4 मार्च 2026 को हैदराबाद के ताज कृष्णा होटल में आयोजित किया जाएगा, जिसमें साउथ और बॉलीवुड के बड़े सितारों के शामिल होने की उम्मीद है।
पीएम तारिक रहमान ने आर्मी चीफ जनरल वकर-उज-जमां की ‘कमान’ बहाल की
27 Feb, 2026 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। बांग्लादेश की राजनीति में फरवरी महीना बड़े बदलाव लेकर आया है। 18 महीने के अंतरिम शासन के बाद तारिक रहमान के नेतृत्व में पूर्ण राजनीतिक सरकार के गठन के साथ सत्ता समीकरण बदल गए हैं। इसका सीधा असर सेना पर भी पड़ा है। सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमां की ‘कमान’ एक बार फिर मजबूत होती दिख रही है।
सूत्रों के अनुसार, अंतरिम सरकार के दौरान सेना पर जो निगरानी और नियंत्रण तंत्र लागू किया गया था, वह अब समाप्त कर दिया गया है। पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) सचिवालय के माध्यम से सेना के निर्णयों पर ओवरसाइट रखी जा रही थी। अंतरिम शासन का नेतृत्व कर रहे मोहम्मद यूनुस के कार्यकाल में यह व्यवस्था लागू की गई थी, जिससे सेना मुख्यालय के कई फैसले प्रभावित हुए थे।
दो बड़ी बाधाएं हुईं दूर
जानकारी के मुताबिक, जनरल जमां के पूर्ण अधिकार में दो प्रमुख बाधाएं थीं पहली, राजनीतिक सरकार का अभाव और दूसरी, एनएसए सचिवालय के जरिए सैन्य मामलों में दखल। अब पूर्ण सरकार बनने और निगरानी तंत्र हटने के बाद सेना प्रमुख को राहत मिली है। पूर्व एनएसए और वर्तमान विदेश मंत्री खलिलुर रहमान पर आरोप था कि उन्होंने सैन्य मामलों में गहरी दखलंदाजी की। कई मौकों पर आर्मी मुख्यालय के फैसलों को एनएसए कार्यालय से पलट दिया गया। इससे सेना के भीतर असंतोष की स्थिति बनी रही।
सेना में बड़े फेरबदल
हालिया घटनाक्रम के बाद सेना के शीर्ष पदों पर बदलाव किए गए हैं। जनरल जमां के भरोसेमंद लेफ्टिनेंट जनरल मैनुर्रहमान को चीफ ऑफ जनरल स्टाफ (सीजीएस) नियुक्त किया गया है। वहीं लेफ्टिनेंट जनरल कमरुल हसन को विदेश मंत्रालय में राजनयिक भूमिका सौंपी गई है। ब्रिगेडियर कैसर राशिद को पदोन्नत कर मेजर जनरल बनाया गया और उन्हें डीजीएफआई का महानिदेशक नियुक्त किया गया है।
विश्लेषकों का कहना है कि इन बदलावों से सेना के भीतर कथित ‘जमातीकरण’ में कमी आई है और पेशेवर ढांचे को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा है। जनरल जमां लंबे समय से सेना को एक पेशेवर और राजनीतिक प्रभाव से मुक्त बल के रूप में स्थापित करने की वकालत करते रहे हैं।
बैरकों में वापसी की तैयारी
अंतरिम शासन के दौरान कानून-व्यवस्था संभालने के लिए सेना को सड़कों पर उतारा गया था। अब नई सरकार बनने के बाद उम्मीद है कि सेना धीरे-धीरे बैरकों में लौटेगी। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह सामान्य होने तक सैनिकों की तैनाती जारी रह सकती है।
ट्रंप का आदेश.....अवैध प्रवासियों को कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस जारी नहीं किया जाएगा
27 Feb, 2026 04:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिका में फिर अवैध प्रवासन और सड़क सुरक्षा का मुद्दा गर्मा गया है। अमेरिकी डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में डेलिला लॉ पारित करने की अपील की है। प्रस्तावित कानून का उद्देश्य राज्यों द्वारा अवैध प्रवासियों को कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने पर रोक लगाना है।राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार, इस विधेयक का नाम डेलिला कोलमैन के सम्मान में रखा गया है, जो पहली कक्षा की छात्रा है और एक भीषण सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुई थी। यह दुर्घटना एक सेमी-ट्रक से हुई, जिसे कथित रूप से एक अवैध प्रवासी चला रहा था और उसके पास वैध कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस मौजूद था।
ट्रंप ने कहा कि कई अवैध प्रवासी इंग्लिश नहीं जानते और सड़क संकेतों को पढ़ने में सक्षम नहीं होते। उनके अनुसार, यह स्थिति सड़क सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि डेलिला लॉ पारित कर यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी राज्य अवैध प्रवासियों को कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस जारी न कर सके।
व्हाइट हाउस की ओर से बताया गया कि इस दुर्घटना में डेलिला को गंभीर सर पर चोट (ट्रॉमेटिक ब्रेन इंजरी) और सेरेब्रल पाल्सी हो गई है। डॉक्टरों के मुताबिक, उन्हें जीवनभर विशेष देखभाल और चिकित्सा सहायता की आवश्यकता रहेगी। इस हादसे के लिए जिम्मेदार चालक प्रताप सिंह बताया जा रहा है, जो भारत से आया एक अवैध प्रवासी है। वह वर्ष 2022 में अमेरिका की सीमा पार कर देश में दाखिल हुआ था।
तालिबान पर पाकिस्तानी लड़ाकू विमान मार गिराने के आरोप
27 Feb, 2026 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के खिलाफ हवाई हमलों के बाद शुक्रवार को जंग का एलान कर दिया। इस बीच तालिबान ने दावा किया है कि उसने पाकिस्तान का एक अमेरिकी लड़ाकू विमान एफ-16 मार गिराया है। अफगानिस्तान डिफेंस नाम के एक सोशल मीडिया हैंडल ने एक जलते हुए एफ-16 विमान के मलबे का वीडियो साझा किया है।वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि इस लड़ाकू विमान के पिछले हिस्से में एक छोटा पाकिस्तानी झंडा बना हुआ है। इसके साथ ही विमान पर '85510' नंबर लिखा दिखाई दे रहा है। अमर उजाला इस वीडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
एफ-16 को भारतीय वायुसेना भी चटा चुकी है धूल
बीते कुछ वर्षों में भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान के खिलाफ हवाई लड़ाइयों में दो या दो से ज्यादा पाकिस्तानी एफ-16 विमानों को मार गिराया है। विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तानी शस्त्रागर का अहम हिस्सा माना जाने वाला एफ-16 लड़ाकू विमान केवल नाम का ही खतरनाक है। यह वीडियो ऐसे समय में सामने आया है, जब पाकिस्तान की ओर से काबुल और कंधार पर हवाई हमले किए गए हैं। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में आतंकी संगठनों के खिलाफ ऑपरेशन 'गजब-लिल-हक' चलाया है। पाकिस्तान का दावा है कि उसने हमलों में 133 आतंकियों को ढेर किया है। वहीं, इन हमलों के बाद अफगानिस्तान ने भी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है। अफगान सैनिकों ने सीमा पर हमले तेज कर दिए हैं।
आतंकी संगठनों को पनाह देने पर भिड़े पाकिस्तान-तालिबान
पाकिस्तान ने कहा है कि उसके हवाई हमले गुरुवार रात को अफगान बलों द्वारा पाकिस्तानी सीमा सैनिकों पर किए गए हमले के जवाब में हैं। इन हमलों को तालिबान सरकार ने पहले हुए घातक हवाई हमलों का प्रतिशोध बताया है। पाकिस्तान ने आरोप लगाया है कि अफगानिस्तान ने पाकिस्तान में हमले करने वाले आतंकवादी समूहों के खिलाफ कुछ नहीं किया है, जिसे तालिबान सरकार ने नकार दिया है।
मुलाकात के दौरान नीतियों और बयानों पर हुई चर्चा
27 Feb, 2026 12:24 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी ने गुरुवार को व्हाइट हाउस की यात्रा के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने ट्रंप को एक नकली अखबार का मुखपृष्ठ भेंट किया, ताकि शहर में बड़े पैमाने पर नए आवास निवेश पर चर्चा की जा सके।यह रणनीति डोनाल्ड ट्रंप को लुभाने के लिए बनाई गई है, जो अपनी मीडिया कवरेज को लेकर काफी चौकन्ने रहते हैं। रिपब्लिकन राष्ट्रपति और डेमोक्रेटिक मेयर के बीच पिछले साल हुई पहली मुलाकात के बाद से सौहार्दपूर्ण संबंध बने हुए हैं।
नकली अखबार में छिपा क्या संदेश?
जोहरान ममदानी की संचार निदेशक अन्ना बहर ने बताया कि मेयर की टीम ने ट्रंप को दिखाने के लिए एक नकली मुखपृष्ठ और सुर्खियां तैयार कीं। जिससे उन्हें पता चले कि नए संघीय आवास निवेश से किस तरह की प्रतिक्रिया हो सकती है। नकली न्यूयॉर्क डेली न्यूज के मुखपृष्ठ पर लिखा है, 'ट्रंप ने शहर से कहा: चलो निर्माण करें।' यह 1975 के उस मशहूर मुखपृष्ठ का एक व्यंग्यात्मक रूप है, जिस पर लिखा था, 'फोर्ड ने शहर से कहा: मर जाओ।' जो जेराल्ड फोर्ड की ओर से शहर को वित्तीय सहायता पर रोक लगाने की कसम का संदर्भ था।न्यूयॉर्क के मेयर ने ट्रंप के साथ अखबारों के पहले पन्नों वाली बैठक की तस्वीर अपने सोशल मीडिया पेज पर पोस्ट की। बहर ने कहा कि ट्रंप, ममदानी के प्रस्ताव को लेकर बेहद उत्साहित थे। इस प्रस्ताव के तहत क्वींस के सनसाइड यार्ड में रेल यार्ड के ऊपर एक डेक बनाने के लिए 21 अरब डॉलर से अधिक के संघीय अनुदान प्राप्त करके 12,000 नए किफायती घर बनाए जा सकेंगे।
निवेश से रोजगार पैदा करने की परियोजना :मेयर कार्यालय
मेयर कार्यालय का अनुमान है कि इस परियोजना से 30,000 नौकरियां पैदा हो सकती हैं और यह पिछले 50 वर्षों में आवास और बुनियादी ढांचे में किया गया सबसे बड़ा निवेश होगा। बहर ने बताया कि जब ट्रंप और ममदानी की आखिरी मुलाकात नवंबर में हुई थी, तब राष्ट्रपति ने ममदानी को न्यूयॉर्क शहर में मिलकर बड़ी-बड़ी चीजें बनाने के विचार के साथ उनके पास वापस आने के लिए प्रोत्साहित किया था।
तानाशाह किम जोंग उन ने की ट्रंप की मुराद पूरी, दोस्ती करने के लिए रखी कड़ी शर्त
27 Feb, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्योंग यांग। उत्तर कोरियाई तानाशाह किम जोंग उन ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की मुराद सुन ली है। उन्होंने पहली बार संकेत दिए हैं कि वे ट्रंप के साथ दोस्ती करने को तौयार हैं लेकिन इसके लिए उन्होंने कड़ी शर्तें रखी हैं। किम ने साफ कहा है कि अगर अमेरिका को उत्तर कोरिया का दोस्त बनना है तो ये सब उनकी शर्तों पर होगा, यहां पर ट्रंप की दादागीरी नहीं चलेगी। किम ने शर्तिया दोस्ती का हाथ ऐसे समय में बढ़ाया है, जब ट्रंप कुछ महीनों में चीन दौरे पर जाने वाले हैं। नॉर्थ कोरिया के तानाशाह ने अपनी शर्तें गिनाते हुए ट्रंप को ऑफर दिया।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक खूंखार तानाशाह किम जोंग उन से दोस्ती के लिए ट्रंप बेचैन हैं और कई बार उनसे मिलने की इच्छा जता चुके हैं। वहीं, हाल ही में प्योंगयांग में एक समारोह में ट्रंप को गुड न्यूज मिली है। किम जोंग उन ने उनसे दोस्ती का हाथ बढ़ाया है लेकिन उनकी एक शर्त भी है। किम का कहना है कि अमेरिका, उत्तर कोरिया को एक ‘परमाणु शक्ति’ के रूप में स्वीकार करता है और अपनी ‘दुश्मनी वाली नीति’ छोड़ता है, तो उन्हें ट्रंप के साथ हाथ मिलाने में कोई ऐतराज नहीं ।
किम का ये बयान ठीक उस समय आया है जब ट्रंप मार्च के आखिर या अप्रैल की शुरुआत में चीन जाने वाले हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस यात्रा में ट्रंप और किम के बीच एक और ‘सुपर समिट’ हो सकती है लेकिन इसमें एक बड़ा ट्विस्ट है, किम ने अपने पड़ोसी दक्षिण कोरिया को ‘धोखेबाज’ करार देते हुए बातचीत के सारे दरवाजे बंद कर दिए हैं, जिससे एशिया में तनाव का एक नया मोर्चा खुल गया है। बता दें अक्टूबर 2025 में एयरफोर्स वन पर ट्रंप ने कहा था, ‘किम के साथ मेरे रिश्ते बेहतरीन रहे हैं और मैं उनसे दोबारा मिलने के लिए 100फीसदी तैयार हूं’। ट्रंप ने पहले ही उत्तर कोरिया को ‘एक तरह की परमाणु शक्ति’ मानकर दशकों पुरानी अमेरिकी नीति को हिला दिया है, जो किम के लिए किसी जीत से कम नहीं है। आखिरी बार दोनों 2019 में मिले थे, जब हनोई समिट बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई थी।
विशेषज्ञों का कहना है कि किम जोंग उन अब पहले से कहीं ज्यादा आत्मविश्वास में हैं। ‘उत्तर कोरिया अब अमेरिका के परमाणु निशस्त्रीकरण के दबाव में आने वाला नहीं है’। किम ने अपनी फौज से परमाणु हथियारों का जखीरा और तेजी से बढ़ाने को कहा है। उनका संदेश साफ है कि ‘वे ट्रंप से मिलेंगे तो जरूर, लेकिन एक बराबर की ‘परमाणु शक्ति’ बनकर न कि किसी कमजोर देश की तरह।
अफगान बलों का पाकिस्तान के खिलाफ जवाबी हमला, 17 आर्मी पोस्ट पर कब्जा किया, 40 सैनिक मारने का दावा
27 Feb, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काबुल: अफगानिस्तान के सैन्य बलों ने गुरुवार को पाकिस्तान के खिलाफ जवाबी हमला किया और अपने पड़ोसी देश की कई आर्मी पोस्ट पर कब्जा करने का दावा किया है. अफगान बलों ने यह हमला पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक का बदला लेने के लिए किया. इससे दोनों पड़ोसी देशों के बीच संघर्ष बढ़ गया है.
पाकिस्तान सरकार ने पुष्टि की है कि गुरुवार को सीमा पर झड़पें हो रही थीं, लेकिन आर्मी पोस्ट पर कब्जा करने के अफगानिस्तान के दावों पर तुरंत कोई जवाब नहीं दिया. पाकिस्तान ने गुरुवार को अफगानिस्तान के हमलों को बिना उकसावे के बताया.
पूर्वी अफगानिस्तान की मिलिट्री कोर ने एक बयान में कहा कि पूर्वी अफगानिस्तान में पाकिस्तानी सेना के हाल के हवाई हमलों के जवाब में गुरुवार रात को 'भारी झड़पें' शुरू हो गईं.
अफगान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने गुरुवार रात एक पोस्ट में कहा, "पाकिस्तानी सेना के बार-बार होने वाले हमलों के जवाब में, डूरंड लाइन पर पाकिस्तानी मिलिट्री बेस और सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हमले किए गए."
दोनों देशों के बीच 2,611 किलोमीटर (1,622 मील) लंबी सीमा डूरंड लाइन के नाम से जानी जाती है, जिसे अफगानिस्तान ने आधिकारिक मान्यता नहीं दी है. अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि जवाबी हमले सीमा पर पांच प्रांतों में हो रहे हैं. 17 पाकिस्तानी आर्मी पोस्ट पर कब्जा कर लिया गया है और 40 सैनिक मारे गए हैं, जिनमें से 13 की लाशें अफगानिस्तान लाई गई हैं.
सरकारी प्रवक्ता मुजाहिद ने एक्स पोस्ट में कहा कि कुछ पाकिस्तानी सैनिकों को जिंदा पकड़ लिया गया है. हताहतों या सैनिकों के पकड़े जाने के दावों पर पाकिस्तान की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.
पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने एक्स पोस्ट में कहा कि अफगानिस्तान ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में पाकिस्तान-अफगानिस्तान बॉर्डर पर कई जगहों पर 'बिना उकसावे के फायरिंग' की थी और इस कार्रवाई का पाकिस्तान के सुरक्षा बलों की तरफ से प्रभावी जवाब दिया जा रहा है. बयान में कहा गया है कि शुरुआती रिपोर्ट्स से पता चला है कि अफगानिस्तान के सैन्य बलों को भारी नुकसान पहुंचा है और कई पोस्ट और सैन्य उपकरण तबाह हो गए हैं. बयान में कहा गया है, "पाकिस्तान अपनी जमीनी एकता और अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा."
अफगानिस्तान की सेना ने रात में चलते सैन्य वाहनों और भारी गोलीबारी का वीडियो फुटेज जारी किया है.
दोनों पड़ोसियों के बीच महीनों से तनाव बना हुआ है. पिछले साल अक्टूबर में सीमा पर हुई जानलेवा झड़पों में दर्जनों सैनिक, आम लोग और संदिग्ध आतंकवादी मारे गए थे. यह हिंसा काबुल में हुए धमाकों के बाद हुई थी, जिसके लिए अफगान अधिकारियों ने पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया था. उस समय पाकिस्तान ने आतंकी ठिकानों को निशाना बनाने के लिए अफगानिस्तान में हमले किए थे. बाद में दोनों देशों के बीच कतर की मध्यस्थता से युद्धविराम हुआ था, लेकिन दोनों पक्षों के बीच सीमा पार से गोलीबारी होती रहती है.
बीते रविवार को, पाकिस्तान की सेना ने अफगानिस्तान से लगती सीमा के पार हमले किए और कम से कम 70 आतंकवादियों को मारने का दावा किया. अफगानिस्तान ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि महिलाओं और बच्चों समेत दर्जनों आम नागरिक मारे गए हैं. रक्षा मंत्रालय ने कहा कि पूर्वी अफगानिस्तान में अलग-अलग रिहायशी इलाकों पर हमला हुआ है, जिसमें एक मदरसा और कई घर शामिल हैं. मंत्रालय ने कहा कि हमलों ने अफगानिस्तान के एयरस्पेस और संप्रभुता का उल्लंघन किया है.
तकनीकी कारणों से तय समय से पहले लौटा अंतरिक्ष दल
27 Feb, 2026 08:06 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने स्पेसएक्स के क्रू-11 मिशन की समय से पहले वापसी को लेकर जानकारी दी है। अंतरिक्ष यात्री माइक फिंके ने बताया कि 7 जनवरी को अंतरिक्ष स्टेशन पर उन्हें स्वास्थ्य समस्या हुई, इसके बाद सभी चार सदस्यों को निर्धारित समय से पहले लौटाने का फैसला किया। नासा के अनुसार यह आपात स्थिति नहीं थी, बल्कि उन्नत मेडिकल जांच के लिए कदम था। क्रू-11 का कैप्सूल 15 जनवरी को सैन डिएगो तट के पास सुरक्षित उतरा और साढ़े पांच माह का मिशन पूरा हुआ।
पेंटागन ने ज्वाइंट स्टाफ निदेशक पद से वाइस एडमिरल को हटाया
पेंटागन ने अमेरिकी नौसेना के वाइस एडमिरल फ्रेड कैचर को ज्वाइंट स्टाफ के निदेशक पद से हटा दिया है। कैचर ने दिसंबर में ही यह पद संभाला था। प्रवक्ता ने पुष्टि की कि काचर अब अमेरिकी नौसेना में अपनी सेवाएं जारी रखेंगे, लेकिन हटाने का कारण नहीं बताया। सूत्रों के अनुसार वे इस पद के लिए उपयुक्त नहीं माने गए, हालांकि किसी विशेष वजह का खुलासा नहीं हुआ। डेन केन ने उनके योगदान की सराहना की। कैचर इससे पहले जापान स्थित अमेरिकी सातवें बेड़े के कमांडर और यूएस नेवल अकादमी के प्रमुख रह चुके हैं।
अमेरिका: रिटायर्ड पायलट ने चीन में दी ट्रेनिंग, गिरफ्तार
अमेरिका से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां पर पूर्व अमेरिकी वायु सेना के एलीट फाइटर पायलट और एफ-35 प्रशिक्षक गेराल्ड एडी ब्राउन जूनियर को चीनी सैन्य पायलटों को गुप्त रूप से लड़ाकू प्रशिक्षण देने के गंभीर आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल जॉन ए आइजेनबर्ग ने कहा, अमेरिकी वायु सेना ने मेजर ब्राउन को एक विशिष्ट लड़ाकू पायलट के रूप में प्रशिक्षित किया था और राष्ट्र की रक्षा की जिम्मेदारी सौंपी थी। एजेंसी 2023 में ब्राउन ने चीन जाकर दिया प्रशिक्षण...ब्राउन के सैन्य करियर में संवेदनशील इकाइयों का नेतृत्व, युद्ध अभियानों का संचालन और एफ-4, एफ-15, एफ-16, ए-10 तथा एफ-35 जैसे विमानों पर लड़ाकू पायलट एवं सिम्युलेटर प्रशिक्षक के रूप में सेवा शामिल थी।
हांगकांग कोर्ट ने जिमी लाई की धोखाधड़ी में मिली सजा रद्द की
हागकांग की अपीलीय अदालत ने पूर्व मीडिया कारोबारी जिमी लाई को राहत देते हुए उनकी धोखाधड़ी मामले में सजा रद्द कर दी। 78 वर्षीय लाई ने बंद हो चुके अखबार एपल डेली की स्थापना की थी और वे चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के मुखर आलोचक रहे हैं। हालांकि, उन्हें हाल ही में चीन की ओर से लागू राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत एक अन्य मामले में 20 साल की सजा सुनाई गई है, इसलिए वे जेल में ही रहेंगे।
आईएमएफ ने कहा- अमेरिकी अर्थव्यवस्था बेहद मजबूत
अंतरराष्ट्रीय मॉन्ट्रियल फंड ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत बताते हुए कहा कि 2026 में वृद्धि दर बढ़कर 2.4 फीसदी तक पहुंच सकती है, जो 2025 के 2.2 फीसदी से अधिक होगी। आईएमएफ प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जिएवा ने कहा कि बेरोजगारी दर 4.5 फीसदी से घटकर 4.1 फीसदी हो सकती है और महंगाई 2027 तक फेडरल रिजर्व के दो फीसदी लक्ष्य तक आ सकती है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई कि डोनाल्ड ट्रंप की आयात शुल्क नीतियां विकास पर असर डाल सकती हैं।
सूडान के दारफुर में हिंसा
सूडान के दारफुर क्षेत्र में अर्धसैनिक बलों के हमलों के बाद हालात और बिगड़ गए हैं। डॉक्टरों के एक समूह के अनुसार, हालिया हमलों में कम से कम 28 लोगों की मौत हुई और 39 घायल हुए। तीन हजार से ज्यादा लोग अपने घर छोड़कर भागने को मजबूर हुए हैं। ज्यादातर विस्थापित महिलाएं और गर्भवती महिलाएं हैं, जिनके पास न भोजन है न ही आश्रय। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि 2023 से चल रहे गृहयुद्ध में अब तक 40 हजार से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और करीब 1.2 करोड़ लोग बेघर हुए हैं।
कोलंबिया यूनिवर्सिटी की छात्रा की गिरफ्तारी
न्यूयॉर्क की कोलंबिया यूनिवर्सिटी की छात्रा एली आघायेवा को इमिग्रेशन अधिकारियों ने हिरासत में लिया। अधिकारियों ने अपार्टमेंट में प्रवेश के लिए 'लापता व्यक्ति' की तलाश का बहाना बनाया। छात्रा के वकीलों का दावा है कि बिना वारंट गिरफ्तारी की गई। बाद में न्यूयॉर्क के मेयर ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप से बात के बाद छात्रा को रिहा करने पर सहमति बनी। यह मामला अमेरिका में सख्त हो रही इमिग्रेशन नीति पर नई बहस छेड़ रहा है।
संयुक्त राष्ट्र की जांचकर्ता पर अमेरिकी प्रतिबंध
संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार जांचकर्ता फ्रांसेस्का अल्बानीज के परिवार ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। उनका कहना है कि इस्राइल की आलोचना करने पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंध अभिव्यक्ति की आजादी का उल्लंघन हैं। अल्बानीज ने गाजा में इजराइली कार्रवाई को “जनसंहार” बताया था, जिसे अमेरिका और इस्राइल ने खारिज किया। परिवार का कहना है कि प्रतिबंधों से उनका निजी और पेशेवर जीवन प्रभावित हुआ है।
स्विस बैंक पर अमेरिकी कार्रवाई
अमेरिका ने एक छोटे स्विस बैंक पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की है। आरोप है कि बैंक ने ईरान और रूस से जुड़े लोगों के 100 मिलियन डॉलर से ज्यादा धन को अमेरिकी वित्तीय प्रणाली के जरिए स्थानांतरित किया। ट्रेजरी विभाग का कहना है कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। यदि नियम लागू होता है तो अमेरिकी संस्थानों को उस बैंक से लेनदेन करने से रोक दिया जाएगा।
ईआरएस द्वारा गोपनीय जानकारी साझा करने पर अदालत की टिप्पणी
एक अमेरिकी जज ने कहा है कि टैक्स विभाग आईआरएस ने लगभग 42,695 बार गोपनीय करदाता जानकारी इमिग्रेशन एजेंसी ICE के साथ साझा कर कानून तोड़ा। अदालत के अनुसार, बिना उचित कानूनी आधार के पतों की जानकारी दी गई। सरकार इस फैसले के खिलाफ अपील कर रही है, लेकिन फिलहाल अदालत ने इसे गोपनीयता कानून का उल्लंघन माना है।
भारत-इस्राइल रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति
26 Feb, 2026 02:59 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
PM Modi-Prez Herzog Meet: इस्राइली राष्ट्रपति और मोदी की मुलाकात, भारत आमंत्रित किया; संबंध मजबूत करने पर जोर भारत और Israel के बीच उच्चस्तरीय कूटनीतिक संपर्कों के तहत इस्राइली राष्ट्रपति आइजैक हर्ज़ोग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आधिकारिक रूप से इस्राइल आने का निमंत्रण दिया है। दोनों नेताओं की हालिया मुलाकात/वार्ता में द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया गया।
बैठक में क्या-क्या हुआ?
आधिकारिक निमंत्रण: राष्ट्रपति हर्ज़ोग ने पीएम मोदी को सुविधाजनक समय पर इस्राइल यात्रा के लिए आमंत्रित किया।
रणनीतिक साझेदारी पर जोर: रक्षा, आंतरिक सुरक्षा, साइबर टेक्नोलॉजी और नवाचार के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति।
कृषि व जल प्रबंधन: ड्रिप इरिगेशन, स्मार्ट खेती और जल संरक्षण तकनीकों में साझेदारी को विस्तार देने की बात।
व्यापार और निवेश: द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने और स्टार्टअप इकोसिस्टम के बीच सीधा जुड़ाव मजबूत करने पर चर्चा।
क्षेत्रीय मुद्दे: पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति और वैश्विक मंचों पर समन्वय बढ़ाने पर विचार-विमर्श।
माओवाद की समाप्ति के बाद अब बस्तर का सर्वांगीण विकास होगा: मंत्री राम विचार नेताम
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यूरिया का प्रभावी विकल्प बन रही हरी खाद, जशपुर में 600 हेक्टेयर में प्रदर्शन
