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कच्चे तेल में गिरावट के बाद पेट्रोल-डीजल पर क्या असर पड़ेगा?
15 Jun, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन : यूएस-ईरान शांति समझौते और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के दोबारा खुलने की खबर से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में 4 प्रतिशत से ज्यादा की भारी गिरावट आई है। ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी क्रूड दोनों के दाम प्रति बैरल 3 से 4 डॉलर तक टूट चुके हैं। वैश्विक बाजार के इस रुख को देखते हुए हर किसी के मन में यही सवाल है: क्या भारत में पेट्रोल-डीजल सस्ता होगा?
इसका सीधा जवाब 'हाँ, लेकिन कुछ शर्तों के साथ' है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर होने वाले असर को हम इन 3 मुख्य बिंदुओं से समझ सकते हैं:
भारतीय तेल कंपनियों को बड़ी राहत
भारत अपनी जरूरत का लगभग 80-85% कच्चा तेल विदेशों से आयात (Import) करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें घटने से भारतीय तेल कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) की कच्चे माल की लागत काफी कम हो जाएगी। जब कंपनियों की लागत घटेगी, तो वे इसका फायदा आम उपभोक्ताओं को पेट्रोल और डीजल के दाम घटाकर दे सकती हैं।
तेल बाजार को स्थिर होने में लगेगा वक्त
भले ही कच्चे तेल के दाम तुरंत गिर गए हैं, लेकिन बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले करीब 4 महीनों से पश्चिम एशिया में जो युद्ध चल रहा था, उसने ग्लोबल सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया है। समुद्री रास्तों और आपूर्ति प्रणालियों को पूरी तरह सामान्य और स्थिर होने में अभी कुछ हफ़्तों या महीनों का समय लग सकता है। इसलिए, घरेलू बाजार में कीमतों में बड़ी कटौती तुरंत होने के बजाय धीरे-धीरे देखने को मिल सकती है।
सरकारी नीतियां और टैक्स का गणित
भारत में पेट्रोल-डीजल की अंतिम कीमत सिर्फ कच्चे तेल पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उस पर लगने वाली सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी, राज्यों के वैट (VAT) और तेल कंपनियों के मुनाफे के मार्जिन पर भी तय होती है।
अगर कच्चे तेल की कीमतें $80 प्रति बैरल के आसपास या उससे नीचे टिकी रहती हैं, तो सरकार और तेल कंपनियों के पास ₹3 से ₹5 प्रति लीटर तक की कटौती करने का अच्छा मौका होगा।
हालांकि, अगर सरकार इस गिरावट के बदले टैक्स बढ़ा देती है, तो आम जनता को मिलने वाली राहत सीमित हो सकती है।
निष्कर्ष: यदि अगले कुछ दिनों (विशेषकर 19 जून को होने वाले आधिकारिक हस्ताक्षर के बाद) यह शांति समझौता पूरी तरह लागू रहता है और कच्चे तेल के दाम स्थिर रहते हैं, तो आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में गिरावट की पूरी संभावना है।
स्थानीय लोगों का आरोप—सुरक्षा एजेंसियां बिना जानकारी लोगों को उठा रही हैं
13 Jun, 2026 04:36 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तुर्बात / केच: बलूचिस्तान के विभिन्न हिस्सों में आम नागरिकों के विरुद्ध बढ़ती हिंसा और मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन के गंभीर मामले एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। स्थानीय मानवाधिकार संगठनों ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर सीधा निशाना साधते हुए एक युवक की संदिग्ध हत्या और दो होनहार छात्रों को जबरन लापता करने के संगीन आरोप लगाए हैं। संगठनों का दावा है कि क्षेत्र में असुरक्षा का माहौल गहराता जा रहा है और निर्दोष नागरिकों की जान को लगातार खतरा बना हुआ है।
तुर्बात में मिला युवक का शव, फैली सनसनी
मानवाधिकार संगठन 'बलूच यकजेहती समिति' की रिपोर्ट के मुताबिक, केच जिले के तुर्बात इलाके में शुक्रवार को एक हृदयविदारक घटना सामने आई। यहाँ के डी-बलूच क्षेत्र में 28 वर्षीय सद्दाम नामक युवक का शव संदिग्ध अवस्था में फेंका हुआ मिला। संगठन ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे बलूचिस्तान में जारी हिंसा और मानवाधिकारों के दमन के उस निरंतर पैटर्न का हिस्सा बताया है, जिसका सामना यहाँ के नागरिक वर्षों से कर रहे हैं।
दो छात्रों के रहस्यमयी तरीके से लापता होने पर हड़कंप
एक अन्य संस्था 'बलूच वॉयस फॉर जस्टिस' (BVJ) ने दो युवा छात्रों की गुमशुदगी का मामला प्रमुखता से उठाया है। आरोपों के अनुसार:
गुमशुदगी का स्थान: 4 जून को प्रांत के दलबंदिन क्षेत्र से इन छात्रों को कथित तौर पर हिरासत में लिया गया।
पहचान: लापता होने वाले छात्रों में 19 वर्षीय शुक्रुल्लाह और 20 वर्षीय जुबैर बलूच शामिल हैं।
परिजनों का दर्द: घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी परिवारों को उनके बच्चों की स्थिति या उनके ठिकाने के बारे में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।
दुनिया से गुहार: न्याय की बाट जोह रहे पीड़ित परिवार
बीवीजे और अन्य स्थानीय निकायों ने वैश्विक बिरादरी से इस ओर ध्यान देने की अपील की है। संगठन ने कहा, ‘सद्दाम की हत्या बलूचिस्तान में जारी त्रासदी की एक और दुखद कड़ी है। समूचे क्षेत्र के परिवार अपनों को खोने का असहनीय दर्द झेल रहे हैं, लेकिन उन्हें कहीं से न्याय नहीं मिल पा रहा है।’
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों, पत्रकारों और वैश्विक संस्थानों से पुरज़ोर मांग की है कि वे बलूचिस्तान में हो रहे इन अत्याचारों का तुरंत संज्ञान लें। उनका तर्क है कि जब तक प्रत्येक व्यक्ति को स्वतंत्रता, कानूनी प्रक्रिया और मनमानी हिरासत से सुरक्षा का अधिकार सुनिश्चित नहीं होता और पीड़ित परिवारों की आवाज नहीं सुनी जाती, तब तक क्षेत्र में शांति बहाली संभव नहीं है।
आतंक के खिलाफ बड़ा अभियान, सुरक्षा बलों ने 21 आतंकियों को किया ढेर
13 Jun, 2026 03:50 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पेशावर: पाकिस्तान के अशांत प्रांत खैबर पख्तूनख्वा से सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी खबर सामने आई है। यहाँ के उत्तरी वजीरिस्तान जिले में सुरक्षा बलों ने एक बड़े सैन्य अभियान के तहत पिछले तीन दिनों (72 घंटों) में 21 खूंखार आतंकवादियों को मौत के घाट उतार दिया है। सेना की मीडिया विंग ने शनिवार को इस सफल ऑपरेशन की आधिकारिक पुष्टि की। अधिकारियों के मुताबिक, यह पूरी कार्रवाई पुख्ता खुफिया इनपुट और सैन्य रणनीति के आधार पर की गई। मारे गए आतंकवादियों में चार कुख्यात रिंग लीडर (कमांडर) भी शामिल हैं, जो सुरक्षा बलों पर घात लगाकर हमला करने और बेकसूर नागरिकों की टारगेट किलिंग में लंबे समय से वांछित थे। सरकार इन आतंकियों को 'फिटना-अल-ख्वारिज' नाम से संबोधित करती है, जो वास्तव में प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) का ही बदला हुआ नाम है।
हफ्ते भर में 48 का सफाया; भारी मात्रा में हथियार जब्त
सेना द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, आतंकवाद के खिलाफ चल रहे इस चौतरफा हमले में पिछले एक सप्ताह के भीतर कुल 48 आतंकवादियों को निष्प्रभावी किया जा चुका है। ताजा कार्रवाई के बाद मुस्तैद सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ स्थल से भारी मात्रा में अत्याधुनिक हथियार, विस्फोटक और घातक गोला-बारूद बरामद किया है।
सैनिटाइजेशन ऑपरेशन जारी: कूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक, वजीरिस्तान और सीमावर्ती जंगली इलाकों में अभी भी कुछ और आतंकियों के छिपे होने की आशंका है। इसके मद्देनजर पूरी घाटी में व्यापक स्तर पर 'सैनिटाइजेशन और सर्च ऑपरेशन' चलाया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक इलाके को पूरी तरह आतंकमुक्त नहीं कर दिया जाता, यह आक्रामक अभियान रुकने वाला नहीं है।
मई से अचानक बिगड़े हालात; बलूचिस्तान और केपी में हिंसा
इस पूरे क्षेत्र में पिछले कुछ समय से तनाव की स्थिति बनी हुई है। इससे पहले मई के अंतिम सप्ताह में भी सेना ने दत्ता खेल क्षेत्र में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 11 उग्रवादियों को मार गिराया था। इसके बाद जून के शुरुआती दिनों में मीरानशाह इलाके में सेना की तत्परता से एक बड़ा आत्मघाती हमला नाकाम किया गया था, जिसके बाद वहां ऐहतियातन धारा 144 लागू कर दी गई थी।
'पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट एंड सिक्योरिटी स्टडीज' (PICSS) की हालिया सुरक्षा रिपोर्ट के आंकड़ों पर नजर डालें, तो देश में सुरक्षा व्यवस्था में भारी गिरावट दर्ज की गई है। मार्च और अप्रैल के महीनों में स्थिति अपेक्षाकृत नियंत्रण में थी, लेकिन मई 2026 की शुरुआत से ही खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान प्रांत में आतंकी हमलों और हिंसक वारदातों में अचानक तेजी से उछाल आया। यही कारण है कि सुरक्षा बलों ने अब आतंकवादियों के खिलाफ यह निर्णायक और बेहद आक्रामक रुख अख्तियार किया है।
अपहरणकांड के बाद एनकाउंटर, पुलिस ने 3 आरोपियों को दबोचा
13 Jun, 2026 02:22 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पानीपत। हरियाणा के पानीपत स्थित थर्मल कॉलोनी से एक महिला कार्यकारी अभियंता (एक्सईएन) के बेटे के सनसनीखेज अपहरण कांड में एक बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। रोहतक में पुलिस और अपहरणकर्ताओं के बीच हुई भीषण मुठभेड़ (एनकाउंटर) के बाद सुरक्षाबलों ने दो शातिर बदमाशों सहित एक महिला सहयोगी को धर-दबोचा है। इस दौरान पुलिसिया कार्रवाई और घेराबंदी से घबराकर खौफ में आए बदमाशों ने मासूम बच्चे को चलती कार से नीचे फेंक दिया, जिससे वह चोटिल हो गया है।
शुक्रवार रात को हुआ था दुस्साहसिक अपहरण, नाकाबंदी कर पुलिस ने किया पीछा
इस वारदात की शुरुआत शुक्रवार रात करीब 9:30 बजे हुई, जब घात लगाए बैठे बदमाशों ने थर्मल कॉलोनी परिसर से बच्चे को जबरन अगवा कर लिया और वाहन में सवार होकर फरार हो गए। घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए जिला पुलिस महकमा तुरंत हरकत में आया और पूरे क्षेत्र की नाकाबंदी कर अलग-अलग टीमें गठित कर आरोपियों की तलाश में जुट गई। आधुनिक सर्विलांस और खुफिया इनपुट के आधार पर पुलिस की टीमें लगातार किडनैपर्स की लोकेशन को ट्रैक करते हुए उनका पीछा कर रही थीं।
रोहतक के पास आमना-सामना, क्रॉस फायरिंग में दो बदमाशों के पैर में लगी गोली
शनिवार को रोहतक के पास आखिरकार पुलिस टीमों ने अपहरणकर्ताओं की गाड़ी को घेर लिया, जिसके बाद खुद को फंसता देख बदमाशों ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस द्वारा की गई क्रॉस फायरिंग के दौरान दो मुख्य बदमाशों के पैरों में गोलियां लगीं, जिससे वे असहाय हो गए। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए दोनों घायल आरोपियों और उनकी महिला साथी को मौके पर ही दबोच लिया, जिससे इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया जा सका।
मासूम बच्चा सुरक्षित बरामद, आरोपियों के आपराधिक इतिहास की खंगाल रही पुलिस
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे राहत की बात यह रही कि बदमाशों द्वारा चलती गाड़ी से फेंके जाने के बावजूद, मासूम बच्चे को त्वरित सूझबूझ से सुरक्षित बचा लिया गया है और उसे प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने खतरे से बाहर बताया है। पुलिस टीम ने दोनों घायल बदमाशों को कड़ी सुरक्षा के बीच नजदीकी अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया है। पुलिस प्रशासन अब पकड़े गए इन अपराधियों के पुराने इतिहास, आपराधिक रिकॉर्ड और इस साजिश के पीछे के मुख्य कारणों की गहनता से तफ्तीश कर रहा है।
US-Iran समझौते की उम्मीद मजबूत, ईरान के परमाणु हथियार न बनाने का दावा
13 Jun, 2026 12:59 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन: पश्चिम एशिया के कूटनीतिक गलियारे में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर यह दावा किया है कि एक प्रस्तावित ऐतिहासिक समझौते के अंतर्गत ईरान ने अनिश्चितकाल तक परमाणु हथियार विकसित न करने और उन्हें हासिल करने की किसी भी कोशिश से दूर रहने की प्रतिबद्धता जताई है। ट्रंप प्रशासन के एक उच्च पदस्थ अधिकारी द्वारा जारी इस बयान ने वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। लंबे समय से जारी परमाणु तनाव के बीच यदि यह समझौता धरातल पर उतरता है, तो यह न केवल वाशिंगटन और तेहरान के रिश्तों में जमी बर्फ को पिघलाएगा, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया के सामरिक संतुलन को भी पूरी तरह बदल देगा।
सत्यापन के बाद ही हटेगी आर्थिक पाबंदी
अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों में ढील देने की प्रक्रिया पूरी तरह से ज़मीनी कार्रवाई पर निर्भर करेगी।
शर्त: यदि ईरान परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने के अपने वादों पर खरा उतरता है और अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण दल को पूर्ण सहयोग देता है, तभी उसे आर्थिक राहत मिलेगी।
रणनीति: अमेरिका का कहना है कि "पहले सत्यापन, फिर राहत" के सिद्धांत पर काम किया जाएगा, ताकि किसी भी प्रकार के उल्लंघन की गुंजाइश न रहे।
परमाणु ढांचे को निष्क्रिय करने की तैयारी
समझौते के मसौदे के अनुसार, ईरान ने अपनी संवर्धित परमाणु सामग्री को नष्ट करने और संदिग्ध परमाणु स्थलों को निष्क्रिय करने पर प्राथमिक सहमति दे दी है। हालांकि, तकनीकी बारीकियों पर अभी विमर्श जारी है। अमेरिका का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान के पास भविष्य में परमाणु हथियार बनाने के लिए कोई भी बुनियादी ढांचा शेष न रहे।
पड़ोसी देशों और इजराइल का रुख
अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि इस समझौते को इजराइल और खाड़ी देशों का समर्थन मिल सकता है, क्योंकि इन देशों की सबसे बड़ी सुरक्षा चिंता ईरान का परमाणु कार्यक्रम ही रही है। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि समझौते के बावजूद किसी भी देश का अपनी रक्षा करने का संप्रभु अधिकार बना रहेगा। यदि तेहरान शर्तों का उल्लंघन करता है, तो क्षेत्रीय प्रतिक्रिया और दोबारा कड़े कदम उठाने के विकल्प खुले रहेंगे।
नागरिक परमाणु ऊर्जा पर आपत्ति नहीं
अमेरिका ने साफ़ किया है कि उसे ईरान के 'शांतिपूर्ण नागरिक परमाणु ऊर्जा' कार्यक्रम से कोई विरोध नहीं है। ईरान बिजली उत्पादन के लिए परमाणु तकनीक का उपयोग कर सकता है, लेकिन चिंता उस सीमा को पार करने की है जहां से हथियार निर्माण की क्षमता शुरू होती है। नया समझौता इसी अंतर को बनाए रखने पर केंद्रित है।
अगले 60 दिन होंगे निर्णायक
प्रस्तावित समझौते के तहत 60 दिनों की एक तकनीकी वार्ता का समय तय किया गया है। इस अवधि में विशेषज्ञ निरीक्षण प्रक्रियाओं और तकनीकी बिंदुओं को अंतिम रूप देंगे। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यदि ईरान अपनी ईमानदारी साबित करता है, तो उसके लिए वैश्विक अर्थव्यवस्था के द्वार खुल जाएंगे। अब पूरी दुनिया की निगाहें इस बात पर हैं कि क्या यह बातचीत किसी ठोस नतीजे पर पहुँचती है या इतिहास की अन्य वार्ताओं की तरह केवल चर्चा तक सिमट कर रह जाती है।
Iran Oil Tanker Case: सात सप्ताह की निगरानी के बाद अमेरिका को मिली बड़ी सफलता
13 Jun, 2026 12:49 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन: अटलांटिक महासागर में हफ्तों तक चले हाई-वोल्टेज ड्रामे और अमेरिकी तटरक्षक बल (कोस्ट गार्ड) के साथ हुई लुकाछिपी के बाद आखिरकार एक प्रतिबंधित तेल टैंकर के कप्तान ने अमेरिकी संघीय अदालत में अपना गुनाह कबूल कर लिया है। अमेरिका का आरोप है कि यह विशाल समुद्री जहाज अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को ताक पर रखकर ईरानी कच्चे तेल की तस्करी कर रहा था और अमेरिकी सुरक्षा बलों द्वारा दिए गए रुकने के आदेशों की लगातार अवहेलना कर रहा था। इस कार्रवाई को व्हाइट हाउस की उस बड़ी रणनीतिक योजना का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य ईरान के अवैध वैश्विक तेल व्यापार और उसके 'शैडो फ्लीट' (गुप्त जहाजी बेड़े) पर पूरी तरह लगाम कसना है।
अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, जॉर्जियाई मूल के नागरिक और 'बेला-1' नामक तेल टैंकर के पूर्व कप्तान अवतांदिल कालांदाद्जे ने अदालत के सामने आत्मसमर्पण करते हुए दोष स्वीकार कर लिया है। उन पर अमेरिकी कानून के तहत तटरक्षक बल के वैध आदेशों को न मानने और भागने का आरोप था। सरकारी वकीलों ने बताया कि दिसंबर 2025 में जब अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने इस संदिग्ध टैंकर को रोकने का प्रयास किया, तो कप्तान ने जहाज की रफ्तार बढ़ाकर भागने की कोशिश की। इसके बाद अटलांटिक महासागर के गहरे पानी में कई हफ्तों तक पीछा करने का सिलसिला चला और आखिरकार 7 जनवरी को अमेरिकी बलों ने इस जहाज को अपने कब्जे में ले लिया।
पहचान छिपाकर 18 लाख बैरल तेल की तस्करी का आरोप
अमेरिकी जांच एजेंसियों का दावा है कि 'बेला-1' टैंकर ने सितंबर से दिसंबर 2025 के बीच प्रतिबंधों को धता बताते हुए करीब 18 लाख बैरल ईरानी मूल के कच्चे तेल को एशियाई देशों के बाजारों तक पहुँचाया। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि इस अवैध कारोबार को छुपाने के लिए कप्तान और चालक दल ने कई शातिराना हथकंडे अपनाए थे। जांच में सामने आया कि:
जहाज के ऑटोमेटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) यानी ट्रैकिंग रडार को जानबूझकर बंद रखा गया था ताकि उसकी लोकेशन ट्रेस न हो सके।
अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमाओं में दूसरे जहाजों में तेल ट्रांसफर (जहाज से जहाज में लोडिंग) करते समय टैंकर की असली पहचान को छुपाया गया था।
अटलांटिक महासागर में कैसे हुआ पीछा?
तटरक्षक बल की रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2025 में यह टैंकर वेनेजुएला के समुद्री क्षेत्र की ओर बढ़ रहा था। इसी दौरान अमेरिकी कोस्ट गार्ड के आधुनिक पोत 'मुनरो' ने उसे घेरकर रुकने की चेतावनी दी। बार-बार मिले सिग्नलों और रेडियो चेतावनियों के बावजूद कप्तान कालांदाद्जे ने जहाज को रोकने से साफ इनकार कर दिया और खतरनाक तरीके से जहाज को भगाता रहा। इस हठधर्मिता के कारण बीच समंदर में बेहद जोखिमभरी स्थिति पैदा हो गई, जिसके बाद अमेरिकी नौसैनिकों को बेहद कठिन और प्रतिकूल परिस्थितियों में रणनीतिक ऑपरेशन चलाकर जहाज को जब्त करना पड़ा।
सबूत मिटाने की कोशिश और संभावित सजा
अदालती दस्तावेजों के अनुसार, कप्तान ने यह सब जहाज का संचालन करने वाली कंपनी के आला अधिकारियों के गुप्त निर्देशों पर किया था। गिरफ्तारी से ठीक पहले कप्तान ने जहाज पर मौजूद कई महत्वपूर्ण लॉग बुक, रूट मैप और डिजिटल रिकॉर्ड को भी नष्ट कर दिया ताकि अमेरिकी एजेंसियों को सबूत न मिल सकें। इस लापरवाही से अमेरिकी कमांडो और नौसैनिकों की जान भी जोखिम में पड़ गई थी।
फैसले की तारीख तय: अमेरिकी अदालत ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में अंतिम सजा सुनाने के लिए 7 अगस्त की तारीख मुकर्रर की है। इस अपराध के लिए कप्तान को अधिकतम 5 साल की कैद हो सकती है। अमेरिकी न्याय विभाग ने साफ किया है कि जेल की अवधि पूरी होने के तुरंत बाद दोषी कप्तान को अमेरिका से डिपोर्ट (निर्वासित) कर दिया जाएगा। सरकार ने कड़ा संदेश दिया है कि प्रतिबंधों का उल्लंघन करने वाले किसी भी विदेशी जहाज को बख्शा नहीं जाएगा।
अमेरिका का नया आदेश, संवेदनशील तकनीक के निर्यात के लिए अनिवार्य हुई अनुमति
13 Jun, 2026 12:43 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन: अमेरिका ने उत्तर कोरिया को किए जाने वाले कुछ खास चिकित्सा उपकरणों के निर्यात नियमों को और ज्यादा सख्त कर दिया है। अमेरिकी वित्त विभाग के अंतर्गत आने वाले 'ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल' (OFAC) ने उन मेडिकल उपकरणों की एक विस्तृत सूची जारी की है, जिन्हें उत्तर कोरिया भेजने के लिए अब अमेरिकी सरकार से विशेष आधिकारिक अनुमति लेना अनिवार्य होगा। नए आदेश के मुताबिक, इन उपकरणों को अब सामान्य लाइसेंस की श्रेणी से बाहर कर दिया गया है। इससे पहले तक उत्तर कोरिया को मानवीय आधार पर कुछ कृषि उत्पादों, दवाइयों और सामान्य चिकित्सा उपकरणों के निर्यात की छूट मिली हुई थी, लेकिन यह नया प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
इन महत्वपूर्ण उपकरणों के निर्यात पर लगी रोक:
अमेरिकी सरकार द्वारा जारी सूची के अनुसार, अब निम्नलिखित उपकरणों को बिना विशेष मंजूरी के उत्तर कोरिया नहीं भेजा जा सकेगा:
श्वसन और इमेजिंग उपकरण: ऑक्सीजन जनरेटर, एक लीटर प्रति मिनट से ज्यादा क्षमता वाले पंप, गामा इमेजिंग उपकरण, टैक्टाइल इमेजिंग उपकरण और थर्मोग्राफी मशीनें।
लैब और सुरक्षा उपकरण: फ्रीज-ड्राइंग व स्प्रे-ड्राइंग सिस्टम, डीकंटैमिनेशन शॉवर, प्रयोगशाला शेकर्स, इन्क्यूबेटर शेकर्स और कार्बन डाइऑक्साइड इन्क्यूबेटर।
सैन्य इस्तेमाल की आशंका के चलते लिया गया फैसला
अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका ने यह कदम उन 'दोहरे उपयोग' (Dual-use) वाले उपकरणों पर लगाम कसने के लिए उठाया है, जिनका इस्तेमाल नागरिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ सैन्य या जैविक गतिविधियों में भी किया जा सकता है। यह प्रतिबंध ऐसे समय में लगाया गया है जब प्योंगयांग अपने मिसाइल और परमाणु कार्यक्रमों को लगातार धार दे रहा है, और परमाणु निरस्त्रीकरण को लेकर अमेरिका व दक्षिण कोरिया के साथ उसकी बातचीत लंबे समय से पूरी तरह बंद है।
G7 शिखर सम्मेलन में ट्रंप और दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति की मुलाकात पर सस्पेंस
पेरिस: दूसरी ओर, आगामी सप्ताह फ्रांस के एवियन शहर में होने वाले जी-7 (G7) शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग के बीच होने वाली संभावित द्विपक्षीय मुलाकात को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। दक्षिण कोरिया के एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने बयान जारी कर कहा है कि दोनों शीर्ष नेताओं के बीच आमने-सामने की वार्ता होगी या नहीं, इस पर अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।
गौरतलब है कि फ्रांस में सोमवार से बुधवार तक आयोजित होने वाले इस सम्मेलन में दक्षिण कोरिया को लगातार दूसरे साल एक साझेदार देश के रूप में आमंत्रित किया गया है। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यदि सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं को समय मिलता है तो बातचीत निश्चित रूप से संभव है, लेकिन फिलहाल इस रणनीतिक बैठक को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की जा सकती।
खिड़वाली के जोहड़ में मिला किसान का शव, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
13 Jun, 2026 11:22 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रोहतक। हरियाणा के रोहतक जिले के खिड़वाली गांव में पिछले तीन दिनों से लापता एक किसान का शव शनिवार सुबह गांव के ही तालाब (जोहड़) में मिलने से सनसनी फैल गई। मृतक के परिवार वालों ने गांव के ही तीन युवकों पर शराब के नशे में हुए विवाद के बाद हत्या करने का गंभीर आरोप लगाया है। घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को अपने कब्जे में ले लिया है और मामले की छानबीन में जुट गई है।
तीन दिन पहले लापता होने की दर्ज थी शिकायत
खिड़वाली गांव के रहने वाले अशोक ने शुक्रवार को सदर थाने में अपने चाचा रोहताश की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया था कि रोहताश बुधवार से अचानक लापता हो गए थे। परिजनों ने जब अपने स्तर पर गांव में सुराग लगाने का प्रयास किया, तो सामने आया कि बुधवार की आधी रात को रोहताश को गांव के ही बलराज, श्रीओम और रविंद्र उर्फ बदलू के साथ जोहड़ के पास देखा गया था। परिजनों ने उसी समय पुलिस से इन तीनों संदिधों से पूछताछ करने की गुहार लगाई थी।
कीचड़ में तैरता मिला शव, जीभ बाहर निकली थी
शनिवार सुबह करीब आठ बजे ग्रामीणों ने डोभी वाले जोहड़ के कीचड़ में एक शव को तैरते हुए देखा, जिसके बाद मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से शव को बाहर निकाला, तो उसकी शिनाख्त लापता रोहताश के रूप में हुई। फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की टीम ने घटनास्थल का मुआयना कर साक्ष्य जुटाए। शव की स्थिति को देखकर परिजनों की आशंका और गहरा गई है, क्योंकि मृतक की जीभ बाहर निकली हुई थी, जो गला दबाए जाने की ओर इशारा करती है।
तीन डॉक्टरों का बोर्ड करेगा पोस्टमार्टम, रिपोर्ट का इंतजार
सदर थाना पुलिस के अनुसार, मृतक के शव को पंचनामा भरकर रोहतक पीजीआई के शवगृह (डेड हाउस) में भेज दिया गया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए चिकित्सकों के तीन सदस्यीय विशेष बोर्ड से शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम की विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का पता चल सकेगा और उसी के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी, फिलहाल पुलिस हर पहलू को ध्यान में रखकर जांच को आगे बढ़ा रही है।
खेल विभाग का सख्त एक्शन, नियमों के विपरीत चल रहीं नर्सरियां बंद
13 Jun, 2026 11:17 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। बुनियादी खेल सुविधाओं के टोटे और रखरखाव में बरती जा रही घोर लापरवाही के चलते हरियाणा के विभिन्न जिलों में संचालित की जा रही 10 खेल नर्सरियों को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है। नियमों और मापदंडों को ताक पर रखकर चलाई जा रही इन खेल नर्सरियों के खिलाफ यह बड़ी कार्रवाई खेल राज्य मंत्री द्वारा मेवात (नूंह), यमुनानगर, हिसार और भिवानी जिलों से प्राप्त हुई आधिकारिक जांच रिपोर्ट के बाद की गई है। हाल ही में खेल राज्य मंत्री गौरव गौतम ने विभागीय अफसरों के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की थी, जिसमें उन्होंने सभी सरकारी स्कूलों और ग्राम पंचायतों के अधीन आने वाली खेल नर्सरियों की धरातल पर जाकर एक विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट तैयार करने के सख्त निर्देश दिए थे।
इन जिलों के स्कूलों और पंचायतों में बंद हुईं खेल नर्सरियां
अधिकारियों द्वारा जमीनी स्तर पर की गई बारीकी से जांच के बाद जारी सरकारी बयान के मुताबिक, नूंह (मेवात) के राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूल में संचालित हो रही 3 खेल नर्सरियों को बंद करने का आदेश दिया गया है। इसके अलावा यमुनानगर के तेजली स्थित शहीद परमिंद्र सिंह राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल में चल रही साइकिलिंग की 1 नर्सरी पर भी ताला लगा दिया गया है। हिसार जिले में भी बड़ा एक्शन लेते हुए राजकीय गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल (आर्य नगर ग्राम पंचायत) की बॉक्सिंग की 1, राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल (गंगवा) की फुटबॉल की 2 और मसूदपुर पंचायत में संचालित फुटबॉल की 2 खेल नर्सरियों को बंद किया गया है। वहीं भिवानी के जीएमएसएसएस में चल रही बॉक्सिंग और वॉलीबॉल की 1-1 नर्सरी को भी तत्काल प्रभाव से बंद करने की कार्रवाई की गई है।
जांच के दौरान धरातल पर उजागर हुईं ये गंभीर खामियां
खेल राज्य मंत्री के अनुसार, विभागीय अधिकारियों की ग्राउंड रिपोर्ट में खेल नर्सरियों के कामकाज और प्रबंधन को लेकर कई चौंकाने वाली अनियमितताएं सामने आई थीं। इन सेंटर्स पर खिलाड़ियों के लिए जरूरी आधुनिक और बुनियादी खेल उपकरणों का पूरी तरह अभाव पाया गया। सबसे चिंताजनक बात यह थी कि खेल के मैदानों की हालत बेहद जर्जर और खस्ताहाल थी, जिससे अभ्यास के दौरान खिलाड़ियों के चोटिल होने का गंभीर खतरा लगातार बना हुआ था। इसके अतिरिक्त, सरकारी रिकॉर्ड और कागजातों में दर्ज खिलाड़ियों के आंकड़ों तथा मैदान पर वास्तव में उपस्थित रहने वाले खिलाड़ियों की वास्तविक संख्या में भी बहुत बड़ा अंतर देखने को मिला, जो सीधे तौर पर धांधली को दर्शाता है।
ओलंपिक-2036 के लक्ष्य को लेकर खेल मंत्री का बड़ा बयान
विभागीय कार्रवाई की जानकारी देते हुए खेल मंत्री ने देश के खेल भविष्य और आगामी महत्वाकांक्षी लक्ष्यों का भी विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत वर्ष 2036 में होने वाले ओलंपिक खेलों की मेजबानी हासिल करने के लिए हर स्तर पर कड़ा प्रयास और तैयारी कर रहा है। ऐसे बड़े वैश्विक मंच पर देश का मान बढ़ाने के लिए जमीनी स्तर पर खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलना अनिवार्य है। खेल मंत्री ने संकल्प दोहराते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य ओलंपिक-2036 में देश की झोली में कम से कम 36 मेडल डालना है, और इस विजन को पूरा करने के लिए खेल प्रणालियों में किसी भी प्रकार की कोताही, फर्जीवाड़ा या लापरवाही को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अमेरिका में AI विवाद गहराया, सरकारी आदेश के विरोध में एंथ्रोपिक का बड़ा कदम
13 Jun, 2026 11:09 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षेत्र की दिग्गज अमेरिकी टेक कंपनी एंथ्रोपिक ने शुक्रवार को एक बड़ा फैसला लेते हुए अपने सबसे नए और बेहद शक्तिशाली एआई मॉडल्स—फेबल 5 (Fable 5) और मायथोस 5 (Mythos 5)—को अस्थाई रूप से ऑफलाइन (बंद) कर दिया है। कंपनी के मुताबिक, यह कदम वर्तमान ट्रंप प्रशासन के उस हालिया आदेश का पालन करने के लिए उठाया गया है, जिसका मकसद विदेशी नागरिकों और बाहरी तत्वों को इन अत्याधुनिक एआई मॉडलों का इस्तेमाल करने से रोकना है। हालांकि, अचानक उठाए गए इस सरकारी कदम को लेकर एंथ्रोपिक प्रबंधन ने गहरी नाराजगी और असहमति भी जाहिर की है।
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल एआई तकनीकों के निर्यात और पहुंच को सीमित करने की दिशा में अमेरिकी सरकार द्वारा उठाया गया यह अब तक का सबसे सख्त और बड़ा कदम है। दिलचस्प बात यह है कि एंथ्रोपिक ने इसी हफ्ते अपने 'फेबल 5' मॉडल को वैश्विक बाजार में उतारा था, जो कि कंपनी के ही एक अन्य महा-उन्नत मॉडल 'मायथोस 5' का थोड़ा सीमित वर्जन है। साइबर सिक्योरिटी और डेटा सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को देखते हुए मायथोस 5 की पहुंच को कंपनी ने पहले से ही काफी गोपनीय और सीमित रखा हुआ था।
बिना स्पष्ट कारणों के कार्रवाई: पारदर्शिता पर उठाए सवाल
इस पूरे घटनाक्रम पर एंथ्रोपिक ने एक कड़ा आधिकारिक बयान जारी करते हुए सरकार के तौर-तरीकों पर सवाल खड़े किए हैं। कंपनी का कहना है कि उसे शुक्रवार दोपहर को वाशिंगटन से यह सरकारी गाइडलाइन प्राप्त हुई, लेकिन इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े उन पुख्ता और तकनीकी कारणों का कोई साफ जिक्र नहीं है, जिनके आधार पर यह रोक लगाई गई है।
"हम इस बात का पूरा समर्थन करते हैं कि सरकार के पास असुरक्षित और जोखिम भरे एआई मॉडल्स की लॉन्चिंग को रोकने का वैधानिक अधिकार होना चाहिए। लेकिन यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष, स्पष्ट और पूरी तरह से तकनीकी तथ्यों व वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित होनी चाहिए। वर्तमान में की गई यह अचानक कार्रवाई इन बुनियादी सिद्धांतों से मेल नहीं खाती।"
कंपनी ने इस पूरे वाकये को एक बड़ी गलतफहमी करार दिया है और उम्मीद जताई है कि वे जल्द ही सरकार के सामने अपनी तकनीक का सही पक्ष रखकर इन मॉडल्स को दोबारा ऑनलाइन व उपलब्ध करा देंगे।
ट्रंप के नए कार्यकारी आदेश (Executive Order) का असर
यह बड़ी कार्रवाई राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा करीब 10 दिन पहले हस्ताक्षरित किए गए एक कड़े कार्यकारी आदेश (एग्जीक्यूटिव ऑर्डर) के बाद देखने को मिली है। इस नए आदेश के तहत अमेरिकी संघीय सरकार को यह विशेष अधिकार दिया गया है कि वह किसी भी अत्याधुनिक एआई सिस्टम से होने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिमों की गहन समीक्षा के लिए एक कड़ा सुरक्षा ढांचा तैयार करे।
नए नियमों के अनुसार, अब किसी भी अत्यधिक एडवांस एआई सॉफ्टवेयर या मॉडल को सार्वजनिक रूप से बाजार में पेश करने से पहले उसके संभावित खतरों का अधिकतम एक महीने तक सरकारी स्तर पर परीक्षण व मूल्यांकन किया जाएगा। हालांकि, इस इवैल्यूएशन प्रोसेस में एआई डेवलपर्स और कंपनियों की हिस्सेदारी को फिलहाल स्वैच्छिक (वॉलंटरी) रखा गया है। इस पूरे मामले पर फिलहाल अमेरिकी वाणिज्य विभाग (US Department of Commerce) की तरफ से कोई भी आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
वैश्विक एआई उद्योग पर पड़ेगा दूरगामी प्रभाव
वैश्विक तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका इसी तरह सुपर-एडवांस एआई तकनीकों पर अपने निर्यात नियंत्रण और प्रतिबंधों को और कड़ा करता है, तो इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय शोध (इंटरनेशनल रिसर्च), वैश्विक तकनीकी सहयोग और दुनिया भर की कंपनियों के बीच जारी एआई रेस (प्रतिस्पर्धा) पर पड़ेगा। इसके विपरीत, इस फैसले के समर्थकों का तर्क है कि साइबर हमलों, डीपफेक और अत्यधिक शक्तिशाली एआई प्रणालियों के संभावित दुरुपयोग व युद्धक इस्तेमाल को रोकने के लिए ऐसे सख्त सुरक्षा कवच और सरकारी नियंत्रण बेहद जरूरी हैं।
भारतीय नाविकों की मौत पर ईरान का गंभीर आरोप, अमेरिका पर निशाना
13 Jun, 2026 09:49 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में गहराते संकट के बीच संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के मध्य छिड़ा वाकयुद्ध एक नए स्तर पर पहुंच गया है। इस ताजा टकराव की मुख्य वजह रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) में जहाजों पर हुए हमले और उनमें भारतीय क्रू मेंबर्स की मौत है। ईरानी सरकार ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन आरोपों को पूरी तरह सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने इन हमलों का दोष तेहरान पर मढ़ा था। ईरान ने अमेरिकी दावों को पूरी तरह तथ्यहीन और मनगढ़ंत करार दिया है।
ट्रंप के आरोपों पर ईरान का तीखा पलटवार
भारत में मौजूद ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया पर एक आधिकारिक बयान जारी कर अमेरिकी राष्ट्रपति के दावों को बेबुनियाद बताया है। ईरान का आरोप है कि बीते एक हफ्ते के भीतर खुद अमेरिकी सेना ने तीन भारतीय जहाजों को निशाना बनाया है, जिसके कारण तीन भारतीय नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी। तेहरान के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप का यह बयान असलियत और अपनी नाकामियों से दुनिया का ध्यान भटकाने की एक सोची-समझी साजिश है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए इसे अमेरिका द्वारा की गई 'सरकारी समुद्री डकैती' करार दिया है।
पश्चिम एशिया में गहराया सुरक्षा का संकट
यह नया विवाद ऐसे नाजुक मोड़ पर सामने आया है जब दोनों देशों के बीच परमाणु करार और क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर पहले से ही तलवारें खिंची हुई हैं। ट्रंप प्रशासन जहां ईरान पर कड़े आर्थिक और सैन्य प्रतिबंधों के जरिए दबाव बना रहा है, वहीं ईरान इन नीतियों को पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता की असली जड़ मान रहा है। भारतीय नाविकों की दुखद मौत से जुड़े इस घटनाक्रम ने पूरे मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया है। दोनों ही देश एक-दूसरे पर अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों की धज्जियां उड़ाने का आरोप लगा रहे हैं, जिससे वैश्विक व्यापार मार्ग की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।
वैश्विक बिरादरी से हस्तक्षेप की मांग और भारत की चिंता
ईरानी प्रवक्ता बघाई ने संयुक्त राष्ट्र (UN) सहित पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे अमेरिका की इन कथित हिंसक कार्रवाइयों की निष्पक्ष जांच कराएं और उसकी जवाबदेही तय करें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसी घटनाओं को नहीं रोका गया, तो अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में नौवहन की आजादी पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। इस पूरे विवाद में भारत की चिंताएं सबसे ज्यादा हैं, क्योंकि प्रभावित जहाजों पर उसके नागरिक सवार थे। पश्चिम एशिया का यह इलाका भारत की ऊर्जा जरूरतों (कच्चे तेल की आपूर्ति) और व्यापार के लिहाज से जीवन रेखा माना जाता है, इसलिए नई दिल्ली इस पूरे घटनाक्रम पर बेहद बारीकी से नजर बनाए हुए है।
हिंसा और नशे के नेटवर्क पर बड़ा प्रहार, ट्रंप ने दिया बयान
13 Jun, 2026 09:21 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि एक विशेष सैन्य अभियान के दौरान अमेरिका ने कुख्यात आपराधिक गिरोह 'ट्रेन डी अरागुआ' के सरगना हेक्टर रश्टेनफोर्ड गुएरो फ्लोरेस को मार गिराया है। ट्रंप के मुताबिक, इस कार्रवाई को वेनेजुएला के साथ मिलकर अंजाम दिया गया। उल्लेखनीय है कि अमेरिका इस संगठन को पहले ही एक आतंकी गुट घोषित कर चुका है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि वेनेजुएला में गैंग के एक ठिकाने पर इस हफ्ते की शुरुआत में यह सैन्य स्ट्राइक की गई थी। फ्लोरेस पर न्यूयॉर्क की अदालत में आतंकवाद और आपराधिक साजिश जैसे कई संगीन मामले दर्ज थे और अमेरिकी विदेश विभाग ने उस पर 50 लाख डॉलर का इनाम रखा था।
खूंखार हत्यारों और ड्रग माफियाओं को ट्रंप की चेतावनी
राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि अब 'ट्रेन डी अरागुआ' के आतंकियों के लिए दुनिया के किसी भी कोने में छिपने की जगह नहीं बची है। उन्होंने साफ किया कि उनके नेतृत्व में ऐसे अपराधियों को कहीं से भी ढूंढ निकाला जाएगा और उनका खात्मा किया जाएगा। हालांकि, इस पूरे सैन्य अभियान को लेकर वेनेजुएला सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सैन्य हमलों में 200 से अधिक लोगों की मौत
ट्रंप प्रशासन पिछले कुछ महीनों से इस गैंग के खिलाफ लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए है। हाल ही में ड्रग तस्करी रोकने के लिए इस गैंग की नावों को निशाना बनाकर कई सैन्य हमले किए गए, जिनमें सितंबर की शुरुआत से अब तक 200 से ज्यादा लोगों के मारे जाने का अनुमान है। हालांकि, इन ऑपरेशन्स के कारण अमेरिका को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना का भी सामना करना पड़ा है। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि देश के शहरों में बढ़ते ड्रग्स और अपराध के पीछे इसी गैंग का हाथ है।
वेनेजुएला की जेल से साम्राज्य खड़ा करने की कहानी
'ट्रेन डी अरागुआ' गैंग का जन्म करीब एक दशक पहले वेनेजुएला की अरागुआ राज्य की एक जेल से हुआ था। देश के खराब आर्थिक हालातों का फायदा उठाकर इस गैंग ने जेल के अंदर ही अपनी समानांतर सरकार बना ली थी। सरगना गुएरो फ्लोरेस ने डरा-धमकाकर कैदियों पर ऐसा नियंत्रण किया कि जेल के भीतर ही चिड़ियाघर, कैसीनो, रेस्तरां और बेसबॉल मैदान जैसी सुविधाएं खड़ी कर लीं और खुद एक आलीशान सुइट में रहने लगा, जहां से बाद में इसका नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैल गया।
अमेरिका की संभावित कटौती से NATO में सुरक्षा संतुलन पर असर की आशंका
12 Jun, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। संयुक्त राज्य अमेरिका यूरोपीय महाद्वीप में उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के सैन्य अभियानों के लिए तैनात किए जाने वाले अपने लड़ाकू विमानों और युद्धपोतों की संख्या में भारी कटौती करने की तैयारी कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नाटो के दो शीर्ष राजनयिकों और सहयोगी देशों को भेजे गए एक आधिकारिक गोपनीय दस्तावेज से इस बड़े रणनीतिक बदलाव का खुलासा हुआ है। इस प्रस्तावित सैन्य कटौती का सीधा असर नाटो के उन सुरक्षा अभियानों पर पड़ेगा जो यूरोपीय सीमाओं की रक्षा के लिए चलाए जाते हैं। इस फैसले के तहत अमेरिका वहां से अपने अग्रिम मोर्चे के लड़ाकू जेट, एडवांस्ड सर्विलांस विमान, हवा में ईंधन भरने वाले टैंकर एयरक्राफ्ट और प्रमुख नौसैनिक जहाजों की तैनाती को कम करने जा रहा है।
अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमानों और नौसैनिक बेड़े में कमी
इस नए रक्षा प्रस्ताव के अनुसार, अमेरिका यूरोप में तैनात अपने आधुनिक एफ-16 और एफ-15ई लड़ाकू विमानों की तादाद को करीब 150 से घटाकर मात्र 100 करने की योजना बना रहा है। इसके साथ ही, समुद्र में टोह लेने वाले विशेष निगरानी विमानों की संख्या को भी 26 से घटाकर 15 कर दिया जाएगा, जबकि आसमान में लड़ाकू विमानों को रीफ्यूलिंग की सुविधा देने वाले सभी आठ टैंकर विमानों को वहां से पूरी तरह हटा लिया जाएगा। नौसैनिक शक्ति में कटौती करते हुए अमेरिका वहां तैनात अपनी एक रणनीतिक मिसाइल पनडुब्बी, एक विशाल विमानवाहक पोत (एयरक्राफ्ट कैरियर) और उससे जुड़े दर्जनों लड़ाकू जहाजों को किसी अन्य क्षेत्र में स्थानांतरित करेगा। यही नहीं, यूरोप की सुरक्षा फेंसिंग में लगे दो बमवर्षक (बॉम्बर) समूहों में से एक को भी वापस बुलाए जाने की प्रबल संभावना है।
रूसी गतिविधियों पर नजर रखने की क्षमता होगी प्रभावित
सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि व्हाइट हाउस के इस बड़े कदम से सुदूर क्षेत्रों में नाटो की टोह लेने और लंबी दूरी तक आक्रामक प्रहार करने की सैन्य क्षमता काफी सीमित हो जाएगी। विशेष रूप से उत्तर अटलांटिक और बाल्टिक महासागर में रूसी पनडुब्बियों की संदिग्ध गतिविधियों पर पैनी नजर रखने और किसी भी आपात स्थिति में लंबी दूरी तक मिसाइल हमला करने की नाटो की संयुक्त परिचालन शक्ति पर इसका गहरा विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। यद्यपि अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने इस सैन्य कटौती की कोई निश्चित समय-सीमा सार्वजनिक नहीं की है और न ही इन सटीक आंकड़ों पर कोई आधिकारिक टिप्पणी की है, लेकिन उसने यूरोपीय कमान के उस सामान्य बयान की पुष्टि की है जिसमें कहा गया है कि अमेरिका वैश्विक सुरक्षा प्राथमिकताओं के आधार पर अपने सैन्य संतुलन को पुनर्गठित कर रहा है।
सहयोगी देशों पर पारंपरिक रक्षा की जिम्मेदारी बढ़ाने का दबाव
अमेरिकी यूरोपीय कमान के वायुसेना जनरल एलेक्सस जी. ग्रिनकेविच के अनुसार, यह पूरी कवायद 'नाटो 3.0' रणनीति और वर्ष 2026 की राष्ट्रीय रक्षा नीति का एक अहम हिस्सा है। इस नीति के तहत अमेरिका नाटो फोर्स मॉडल में अपने सैन्य योगदान को 'उचित आकार' (राइट साइज) दे रहा है क्योंकि अब तक नाटो के सैन्य अभियानों में अमेरिकी बलों पर अत्यधिक और अनुचित निर्भरता बनी हुई थी। इस नीतिगत बदलाव का नेतृत्व कर रहे अमेरिकी युद्ध मामलों के अवर सचिव एल्ब्रिज कोल्बी का तर्क है कि नाटो की रक्षा योजना को अधिक व्यावहारिक और यथार्थवादी बनाने का समय आ गया है, जिसके लिए कनाडा और यूरोपीय महाद्वीप के अन्य अमीर देशों को अपने क्षेत्र की पारंपरिक सैन्य सुरक्षा का वित्तीय और व्यावहारिक बोझ खुद उठाना चाहिए।
कनाडा में फिर चली गोलियां, मिठाई की दुकान पर फायरिंग की घटना
12 Jun, 2026 04:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ब्रैम्पटन। कनाडा के ओंटारियो प्रांत में स्थित ब्रैम्पटन शहर से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहाँ 'महल स्वीट्स' नामक एक रेस्तरां पर अज्ञात हमलावरों द्वारा अंधाधुंध गोलीबारी की गई। इस सनसनीखेज वारदात के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट तेजी से प्रसारित हो रही है, जिसमें भारत के कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने इस हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया है। हालांकि, कनाडाई सुरक्षा एजेंसियां इस इंटरनेट पोस्ट और दावों की प्रामाणिकता की गहराई से जांच कर रही हैं।
सोशल मीडिया पर हथियार का वीडियो और फिरौती की धमकी
इंटरनेट पर यह कथित पोस्ट 'आरजू बिश्नोई' नामक एक फेसबुक प्रोफाइल से साझा की गई है, जिसके साथ एक वीडियो भी संलग्न है। इस वीडियो में एक ऑटोमैटिक गन में गोलियां लोड करके चलाते हुए दिखाया गया है। धमकी भरे इस लिखित संदेश में दावा किया गया है कि मिठाई दुकान पर यह हमला आरजू बिश्नोई, टायसन बिश्नोई और शुभम लोंकर के इशारे पर किया गया है। पोस्ट में रेस्तरां संचालक को चेतावनी देते हुए लिखा गया है कि उसे पहले भी जबरन वसूली (रंगदारी) के लिए फोन किया गया था जिसे उसने नजरअंदाज कर दिया, लेकिन अगर अब दोबारा ऐसा किया तो परिणाम बेहद घातक होंगे।
गैंग के भीतर गुटबाजी और बिखराव की खबरों का खंडन
इस डिजिटल संदेश के जरिए इस कुख्यात आपराधिक गिरोह ने अपने संगठन में किसी भी प्रकार की फूट या आपसी मतभेद की खबरों का पूरी तरह खंडन किया है। पोस्ट में स्पष्ट तौर पर लिखा गया है कि मीडिया या अन्य माध्यमों पर लॉरेंस बिश्नोई ग्रुप के बिखरने की जो भी बातें चल रही हैं, वे महज अफवाहें हैं। गिरोह के सभी सदस्य पूरी तरह एकजुट हैं और भविष्य में भी एक साथ मिलकर अपनी अवैध गतिविधियों को अंजाम देते रहेंगे।
कनाडाई पुलिस और खुफिया एजेंसियां जांच में जुटीं
कनाडा की स्थानीय पुलिस और खुफिया विभाग ने इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। विदेशी धरती पर एक व्यावसायिक प्रतिष्ठान को निशाना बनाकर दी गई इस अंतरराष्ट्रीय धमकी के बाद इलाके के व्यापारियों में डर का माहौल है। पुलिस प्रशासन तकनीक और साइबर विशेषज्ञों की मदद से इस सोशल मीडिया अकाउंट के आईपी एड्रेस और हमले के पीछे शामिल मुख्य साजिशकर्ताओं का सुराग लगाने की कोशिश कर रहा है, ताकि दोषियों को जल्द से जल्द कानून के शिकंजे में लाया जा सके।
क्या फिर जवान हो सकेगा इंसान? नए इंजेक्शन का पहला ट्रायल सफलतापूर्वक शुरू
12 Jun, 2026 03:41 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बोस्टन। चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व क्रांति की शुरुआत करते हुए वैज्ञानिकों ने इंसानों पर 'रिवर्स-एजिंग' (उम्र के असर को उलटने) की दवा का पहला क्लिनिकल ट्रायल शुरू कर दिया है। इतिहास में पहली बार बुढ़ापा रोकने वाले एक विशेष इंजेक्शन को मानव शरीर पर आजमाया गया है। अमेरिकी बायोटेक स्टार्टअप 'लाइफ बायोसाइंसेज' ने घोषणा की है कि उन्होंने सेल्यूलर रीप्रोग्रामिंग (कोशिकाओं के नवीनीकरण) तकनीक पर आधारित इस इंजेक्शन को अपने पहले मरीज की आंख में सफलतापूर्वक इंजेक्ट कर दिया है। यह शुरुआती परीक्षण 'ग्लूकोमा' (काला मोतिया) नामक गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति पर किया गया है।
इस तरह काम करेगी जीनोम रीप्रोग्रामिंग थेरेपी
इस अत्याधुनिक चिकित्सा पद्धति के तहत मरीज की आंख की पुतली में एक एकल जीन थेरेपी (सिंगल जीन थेरेपी) का इंजेक्शन दिया गया है। इसके बाद मरीज को कुछ हफ्तों तक एंटीबायोटिक दवाओं का एक विशेष कोर्स कराया जाएगा। यह एंटीबायोटिक दवाएं शरीर के भीतर जाकर उन तीन उपचारकारी जीनों के लिए 'ऑन स्विच' (सक्रिय करने वाले कारक) का काम करेंगी, जो बूढ़ी हो चुकी कोशिकाओं को फिर से युवा और सक्रिय बनाने की प्रक्रिया शुरू करते हैं। मानव परीक्षण से पहले चूहों और बंदरों पर किए गए रिसर्च में इस तकनीक ने जानवरों की आंखों की रोशनी को सफलतापूर्वक वापस लाने में बड़ी कामयाबी हासिल की थी।
सुरक्षा और साइड इफेक्ट्स की कड़े मानकों पर जांच
वैज्ञानिकों और डॉक्टरों की एक विशेष टीम अगले 6 महीनों तक इस मरीज की बेहद बारीकी से निगरानी करेगी। इस लंबी निगरानी का उद्देश्य यह पता लगाना है कि यह तकनीक मानव शरीर के लिए कितनी सुरक्षित है और इसके क्या संभावित दुष्प्रभाव (साइड इफेक्ट्स) हो सकते हैं। परीक्षण के लिए मानव आंख को इसलिए चुना गया है क्योंकि यह अंग शरीर के बाकी हिस्सों की तुलना में जैविक रूप से अधिक सुरक्षित और नियंत्रित होता है, जिससे किसी भी प्रकार के बदलाव या साइड इफेक्ट का तुरंत और सटीक आकलन करना बेहद आसान हो जाता है।
चिकित्सा जगत में नए युग की शुरुआत और बड़े निवेशकों का भरोसा
'लाइफ बायोसाइंसेज' के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के मुताबिक, यह प्रयोग केवल उनकी कंपनी के लिए नहीं बल्कि पूरी दुनिया के चिकित्सा विज्ञान के लिए एक युगांतरकारी क्षण है। यदि यह क्लिनिकल ट्रायल पूरी तरह सफल रहता है, तो चिकित्सा के क्षेत्र में उम्र के प्रभाव को कम करने का एक नया दौर शुरू हो जाएगा। इस दीर्घकालिक तकनीक का अंतिम लक्ष्य पूरे मानव शरीर की कोशिकाओं को पुनर्जीवित करना है, ताकि बढ़ती उम्र के साथ डीएनए (DNA) के कमजोर होने की प्रक्रिया को सुधारा जा सके। इस क्रांतिकारी परियोजना की महत्ता को देखते हुए अमेज़न के संस्थापक जेफ बेजोस और ओपनएआई (OpenAI) के सैम ऑल्टमैन जैसे दिग्गज वैश्विक निवेशकों ने भी इसमें भारी निवेश किया है।
हादसे के बाद प्रशासन सख्त, सुपरवाइजर पर गिरी गाज और कंपनी हुई ब्लैकलिस्ट
