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नौकरी का मौका: शिक्षा विभाग में DSS और DMS पदों पर भर्ती निकली
16 Jun, 2026 11:09 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। हरियाणा शिक्षा विभाग द्वारा राज्य में शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए जिला विज्ञान विशेषज्ञ (डीसीएस) और जिला गणित विशेषज्ञ (डीएमएस) के रिक्त पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे गए हैं। यह विशेष भर्ती अभियान केवल सरकारी विद्यालयों में सेवा दे रहे परमानेंट (नियमित) पीजीटी शिक्षकों के लिए ही आयोजित किया जा रहा है। विभाग ने इस योजना के तहत डीसीएस के 22 पद और डीएमएस के 21 पद तय किए हैं, हालांकि प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुसार इन पदों की कुल संख्या को घटाया या बढ़ाया भी जा सकता है।
इस भर्ती प्रक्रिया का हिस्सा बनने के लिए इच्छुक शिक्षकों के पास अपने संबंधित विषय को पढ़ाने का न्यूनतम 5 सालों का व्यावहारिक अनुभव होना अनिवार्य है। इसके साथ ही, आवेदकों की अंग्रेजी भाषा और संवाद कौशल पर मजबूत पकड़ होनी चाहिए। शासकीय सेवा के नियमों के तहत आवेदन करने वाले किसी भी शिक्षक के खिलाफ पूर्व से कोई विभागीय जांच, चार्जशीट या अन्य अनुशासनात्मक कानूनी कार्रवाई प्रक्रियाधीन अथवा लंबित नहीं होनी चाहिए।
लिखित परीक्षा और साक्षात्कार से होगा चयन
इन पदों के लिए योग्य उम्मीदवारों का चुनाव कुल 50 अंकों के मूल्यांकन के आधार पर किया जाएगा। इस चयन प्रक्रिया में अभ्यर्थियों को सबसे पहले 40 अंकों की एक लिखित रीजनिंग परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी, जिसके बाद सफल उम्मीदवारों को 10 अंकों के व्यक्तिगत साक्षात्कार (इंटरव्यू) के लिए आमंत्रित किया जाएगा।
प्रारंभिक तौर पर तीन साल का होगा कार्यकाल
सफलतापूर्वक चुने गए शिक्षकों की इन पदों पर नियुक्ति शुरुआत में 3 वर्षों के कार्यकाल के लिए की जाएगी। इसके बाद, उनके काम की समीक्षा और बेहतर प्रदर्शन को देखते हुए इस सेवा अवधि को 1 वर्ष के लिए और आगे विस्तारित किया जा सकेगा।
एमआईएस पोर्टल से ऑनलाइन आवेदन की सुविधा
योग्य व इच्छुक शिक्षक 19 जून 2026 की रात 11:59 बजे तक विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपने एमआईएस (MIS) लॉगिन के जरिए ऑनलाइन माध्यम से अपना फॉर्म जमा कर सकते हैं। नियुक्त होने वाले विशेषज्ञों के कंधों पर अपने-अपने जिलों में विज्ञान और गणित की शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने, अन्य शिक्षकों को आधुनिक प्रशिक्षण देने और स्कूलों की शैक्षणिक मॉनिटरिंग करने की अहम जिम्मेदारी होगी।
प्राचीन जीवाश्म ने खोला राज: मगरमच्छ के शुरुआती रूप की खोज
16 Jun, 2026 11:04 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। जीवाश्म विज्ञानियों (Palaeontologists) ने अमेरिका के न्यू मैक्सिको में एक ऐसे प्राचीन और विचित्र जीव के अवशेषों की पहचान की है, जिसे आधुनिक मगरमच्छों का सुदूर पूर्वज माना जा रहा है। 'लैब्रूजास्यूकस एक्सपेक्टेटस' (Labrujasuchus expectatus) नाम का यह अद्भुत जीव आज से करीब 212 मिलियन (21.2 करोड़) साल पहले लेट ट्रायसिक काल में पृथ्वी पर मौजूद था। हालांकि, यह जीव दिखने और चलने-फिरने के मामले में आज के रेंगने वाले खूंखार मगरमच्छों से बिल्कुल जुदा था। स्टोनी ब्रुक यूनिवर्सिटी के मुख्य शोधकर्ता एलन टर्नर के मुताबिक, यह आज के घड़ियालों का सीधा पूर्वज नहीं, बल्कि मगरमच्छों के खानदान की एक अलग शाखा का 'दूर का चचेरा भाई' था।
दो पैरों पर दौड़ने वाला बिना दांतों का 'मगरमच्छ'
जीवाश्म विज्ञानियों के अनुसार, विकासक्रम की इस अलग शाखा ने 'शुवोसॉर' (Shuvosaur) नाम के जीवों को जन्म दिया था। इस प्रजाति की सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि इनका शरीर मगरमच्छों के बजाय क्रेटेशियस काल के डायनासोरों से काफी मिलता-जुलता था।
बनावट: ये जीव बेहद छरहरे थे और आज के मगरमच्छों की तरह चार पैरों के बजाय दो पैरों पर सीधे खड़े होकर दौड़ते थे।
चोंच: इनके मुंह में नुकीले दांतों की जगह एक तीखी चोंच होती थी, जिसमें दांत बिल्कुल नहीं पाए जाते थे।
वैज्ञानिक इसे अभिसारी विकास (Convergent Evolution) का एक बेहतरीन उदाहरण मान रहे हैं, जहां दो बिल्कुल अलग प्रजातियों (डायनासोर/पक्षी और मगरमच्छ के रिश्तेदार) ने जीवित रहने के लिए एक जैसी शारीरिक बनावट और दो पैरों पर चलने का तरीका अपनाया।
'चुड़ैलों के रेंच' से मिला अनोखा नाम
इस विचित्र जीव के नामकरण के पीछे भी एक बेहद दिलचस्प कहानी है। इसके जीवाश्म उत्तरी न्यू मैक्सिको के 'घोस्ट रेंच' (Ghost Ranch) नामक इलाके से मिले हैं, जो दशकों से प्राचीन जीवाश्मों का गढ़ रहा है। इस रेंच का पुराना स्पैनिश नाम 'रैंचोस डी लॉस ब्रुजोस' था, जिसका हिंदी अनुवाद 'चुड़ैलों का रेंच' होता है। इसी आधार पर स्पैनिश शब्द 'लैब्रूजा' (चुड़ैल) और ग्रीक शब्द 'स्यूकस' (मगरमच्छ) को मिलाकर इसका नाम 'लैब्रूजास्यूकस' रखा गया। वहीं, इसकी प्रजाति का नाम 'एक्सपेक्टेटस' इसलिए पड़ा क्योंकि वैज्ञानिकों को इस क्षेत्र में मिले दो अन्य शुवोसॉर जीवों के बीच की कमान (कड़ी) मिलने की पहले से 'उम्मीद' (Expectation) थी।
इवोल्यूशन की गुत्थी सुलझाएंगी हड्डियां
लॉस एंजिल्स काउंटी के नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम से जुड़े नाथन स्मिथ ने बताया कि इस खोज में जीव के हाथ-पैर की हड्डियां, रीढ़ के हिस्से और कई महत्वपूर्ण टुकड़े बरामद हुए हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, लैब्रूजास्यूकस पश्चिमी उत्तरी अमेरिका के इलाके में कम से कम 10 मिलियन (1 करोड़) सालों तक बिना किसी बड़े बदलाव के जीवित रहा। इस खोज से उस कालखंड के जीवों के शरीर में होने वाले क्रमिक बदलावों को समझने में बड़ी मदद मिलेगी। यह दुनिया भर में खोजा गया अपनी तरह का चौथा और उत्तरी अमेरिका का तीसरा 'शुवोसॉर' जीव है, जिसके अन्य अवशेष इससे पहले टेक्सास और अर्जेंटीना में भी मिल चुके हैं।
ब्रेन-टेक रेस में चीन आगे, मस्क की कंपनी को मिली चुनौती
16 Jun, 2026 10:58 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) तकनीक को बाजार में उतारने की वैश्विक होड़ में चीन ने अमेरिकी दिग्गज एलन मस्क की कंपनी 'न्यूरालिंक' (Neuralink) को पछाड़ते हुए बाजी मार ली है। चीन ने दुनिया की पहली कमर्शियल ब्रेन-चिप 'नियो' (NEO) को आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया है। कड़े और सफल क्लिनिकल ट्रायल्स से गुजरने के बाद इस चिप को व्यावसायिक उपयोग (वाणिज्यिक बिक्री) के लिए नियामक मंजूरी मिल गई है, जो इंसानी दिमाग और मशीनों के बीच सीधे संवाद के इतिहास में एक क्रांतिकारी मील का पत्थर है।
मस्क की न्यूरालिंक को पछाड़ चीन ने मारी बाजी
बीजिंग की सिंघुआ यूनिवर्सिटी और शंघाई की 'न्यूराकल टेक्नोलॉजी' के वैज्ञानिकों द्वारा तैयार की गई यह 'नियो' चिप सिक्कों के आकार की है। जहां एक तरफ एलन मस्क की न्यूरालिंक अभी भी अमेरिका में शुरुआती इंसानी ट्रायल्स के दौर से गुजर रही है और उसे कमर्शियल सेल की अनुमति नहीं मिली है, वहीं चीन ने इसे बाजार में उतार दिया है। मस्क ने अपनी चिप को 'जीसस-लेवल टेक्नोलॉजी' (बेहद चमत्कारी) बताते हुए दावा किया था कि इससे लोग सोचकर ही टाइप और डिवाइस कंट्रोल कर सकेंगे, लेकिन नियामक मंजूरियों के मामले में चीन ने बाजी मार ली। वर्तमान में चीन में 36 मरीजों पर इसके सफल परिणाम देखे जा चुके हैं और 11 लोग इसका लाइव उपयोग कर रहे हैं।
कम जोखिम वाला 'सॉफ्ट डिजाइन' बना सफलता की चाबी
तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, 'नियो' चिप की इस तेज सफलता के पीछे इसका अनूठा और सुरक्षित डिजाइन है।
न्यूरालिंक (N1): मस्क की चिप के इलेक्ट्रोड को सीधे दिमाग के बेहद संवेदनशील हिस्से (सेरेब्रल कॉर्टेक्स) के अंदर गहराई में डाला जाता है, जो कि काफी इनवेसिव (दखलंदाजी वाली) और जोखिम भरी सर्जिकल प्रक्रिया है।
चीन की नियो (NEO): इसके विपरीत, चीनी वैज्ञानिकों ने इसे 'कम-इनवेसिव' बनाया है। यह चिप खोपड़ी और दिमाग के बीच की परत (ड्यूरा मेटर) के पास फिट हो जाती है, जिसमें आठ एडवांस सेंसर लगे हैं। यह दिमाग के मुख्य ऊतकों को नुकसान पहुंचाए बिना काम करती है, जिससे चिकित्सा जोखिम और इन्फेक्शन का खतरा बेहद कम हो जाता है।
लकवाग्रस्त मरीजों को नई जिंदगी, पर 'थॉट हैकिंग' का खतरा
शुरुआती तौर पर यह डिवाइस रीढ़ की हड्डी की गंभीर चोट और लकवा (पैरालिसिस) से जूझ रहे मरीजों के तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) को दोबारा सक्रिय करने के लिए बनाया गया है। भविष्य में इसका उपयोग पार्किंसंस, मिर्गी, स्ट्रोक और डिप्रेशन जैसी बीमारियों के इलाज में भी होगा।
चिंता का विषय: इस तकनीकी कामयाबी के साथ ही साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने गंभीर चेतावनी भी दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि यह चिप सीधे इंसानी दिमाग के न्यूरल डेटा को पढ़ती है, इसलिए भविष्य में इसके हैक होने का खतरा है। यदि कोई हैकर इस सिस्टम में सेंध लगाता है, तो वह मरीज के संवेदनशील विचारों, यादों और न्यूरल गतिविधियों तक पहुंच सकता है, जो प्राइवेसी और सिक्योरिटी के लिहाज से एक नया और खतरनाक संकट पैदा करेगा।
अंतरिक्ष विज्ञान में ऐतिहासिक उपलब्धि, पुराना रहस्य हुआ हल
16 Jun, 2026 09:58 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में खगोलविदों ने एक ऐसी ऐतिहासिक सफलता हासिल की है, जिसकी केवल कल्पना वैज्ञानिक पिछले पांच दशकों से कर रहे थे। वैज्ञानिकों ने पहली बार हमारी आकाशगंगा 'मिल्की वे' (Milky Way) के ठीक बीचों-बीच मौजूद महाविशाल ब्लैक होल से निकलने वाली अत्यधिक शक्तिशाली हवाओं के सीधे और पुख्ता सबूत ढूंढ निकाले हैं। इस खोज ने ब्लैक होल के रहस्यमयी व्यवहार और आकाशगंगाओं के निर्माण व विकास को समझने की दिशा में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। हमारी आकाशगंगा के इस केंद्रीय सुपरमैसिव ब्लैक होल को वैज्ञानिक भाषा में सैजिटेरियस ए-स्टार (Sgr A∗ ) कहा जाता है।
क्या हैं 'ब्लैक होल विंड्स' और यह कैसे बनती हैं?
आम तौर पर माना जाता है कि ब्लैक होल अपने अत्यधिक गुरुत्वाकर्षण के कारण प्रकाश सहित हर चीज को अपने अंदर निगल लेते हैं। लेकिन वैज्ञानिक सिद्धांतों के अनुसार, ब्लैक होल केवल पदार्थ का भक्षण ही नहीं करते, बल्कि ऊर्जा का उत्सर्जन भी करते हैं। जब अंतरिक्ष की गैस और ब्रह्मांडीय धूल ब्लैक होल की तरफ तेजी से खिंचती है, तो घर्षण और प्रचंड गुरुत्वाकर्षण के कारण वहां अत्यधिक ऊर्जा पैदा होती है। यही ऊर्जा आसपास मौजूद तैरते पदार्थों को बाहर की तरफ एक तेज रफ्तार से धकेलती है, जिसे वैज्ञानिक 'ब्लैक होल विंड्स' (Black Hole Winds) कहते हैं। सैजिटेरियस ए-स्टार अपेक्षाकृत शांत रहने के बावजूद इस तरह की हवाएं पैदा कर रहा है।
अल्मा और चंद्रा वेधशाला के डेटा से हुआ बड़ा खुलासा
इस अनसुलझे रहस्य से पर्दा उठाने के लिए खगोलविदों ने चिली के रेगिस्तान में स्थित 'अटाकामा लार्ज मिलीमीटर/सबमिलीमीटर एरे' (ALMA) वेधशाला के पांच साल के आंकड़ों का बारीकी से अध्ययन किया। 66 एडवांस रेडियो एंटेना से लैस इस वेधशाला की मदद से वैज्ञानिकों को ब्लैक होल के करीब ठंडी आणविक गैस के बीच लगभग तीन प्रकाश-वर्ष लंबी एक त्रिकोणीय (शंक्वाकार) खाली जगह दिखाई दी। शुरुआत में लगा कि यह तारों की हवाओं का असर है, लेकिन गणनाओं ने इसे खारिज कर दिया। इसके बाद जब नासा की 'चंद्रा एक्स-रे वेधशाला' के डेटा को अल्मा के डेटा के साथ मिलाया गया, तो साफ हुआ कि उस खाली स्थान से एक्स-रे निकल रही थीं, जिसने ब्लैक होल से निकलने वाली गर्म हवाओं की मौजूदगी पर अंतिम मुहर लगा दी।
पृथ्वी से दूरी और शांत ब्लैक होल का अनोखा व्यवहार
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि ब्लैक होल से निकलने वाली यह अदृश्य आंधी पिछले करीब 20 हजार वर्षों से लगातार बह रही है। हालांकि, इससे हमारी पृथ्वी या सौर मंडल को डरने की बिल्कुल जरूरत नहीं है, क्योंकि यह ब्लैक होल हमसे लगभग 26 हजार प्रकाश-वर्ष की सुरक्षित दूरी पर स्थित है। यह खोज इसलिए सबसे अलग है क्योंकि अब तक का अधिकांश शोध अत्यधिक सक्रिय और हिंसक ब्लैक होलों पर ही होता आया है। सैजिटेरियस ए-स्टार के जरिए वैज्ञानिकों को पहली बार यह समझने का मौका मिला है कि एक शांत और कम पदार्थ निगलने वाला ब्लैक होल अपने शांत काल में किस तरह काम करता है।
G7 शिखर सम्मेलन: पीएम मोदी करेंगे विश्व नेताओं से अहम मुलाकात
16 Jun, 2026 08:35 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
एविआं : फ्रांस के एविआं (Evian) में आयोजित हो रहे 52वें G7 शिखर सम्मेलन (16-17 जून 2026) के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वैश्विक मंच पर भारत की मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। इस शिखर सम्मेलन के इतर (sidelines) पीएम मोदी दुनिया के कई शीर्ष नेताओं के साथ द्विपक्षीय (Bilateral) बैठकें और अहम मुलाकातें करने जा रहे हैं। पीएम मोदी इस दौरान मुख्य रूप से इन दिग्गज नेताओं के साथ रणनीतिक, व्यापारिक और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे:
डोनाल्ड ट्रंप (राष्ट्रपति, अमेरिका)
इस समिट के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की होने वाली मुलाकात की है। अमेरिकी प्रशासन और भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Trade Pact) को लेकर बातचीत आगे बढ़ेगी। इसके अलावा हिंद-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific) की सुरक्षा और वैश्विक भू-राजनीतिक हालातों पर भी दोनों दिग्गज गहन चर्चा करेंगे।
इमैनुएल मैक्रॉन (राष्ट्रपति, फ्रांस)
फ्रांस इस बार G7 समिट की मेजबानी कर रहा है। पीएम मोदी की राष्ट्रपति मैक्रॉन के साथ द्विपक्षीय वार्ता काफी अहम है, क्योंकि हाल ही में दोनों देशों के संबंधों को 'विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी' (Special Global Strategic Partnership) के स्तर पर ले जाया गया है। दोनों नेता रक्षा सहयोग (विशेषकर राफेल डील और मेक इन इंडिया), स्पेस टेक्नोलॉजी, एआई (AI) और भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (India-EU FTA) को गति देने पर चर्चा करेंगे।
कीर स्टार्मर (प्रधानमंत्री, ब्रिटेन)
ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के साथ भी पीएम मोदी की मुलाकात की रूपरेखा तैयार है। इस बैठक में मुख्य रूप से भारत और ब्रिटेन के बीच लंबे समय से लंबित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप देने और दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
अन्य आमंत्रित देशों और वैश्विक संगठनों के प्रमुख
G7 देशों (अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा) के नेताओं के अलावा, समिट में 'आउटरीच पार्टनर्स' के तौर पर बुलाए गए अन्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों से भी पीएम मोदी मिलेंगे:
आमंत्रित देश: ब्राजील, दक्षिण कोरिया, मिस्र (Egypt) और केन्या जैसे देशों के प्रमुखों से भी उनकी मुलाकातें संभावित हैं।
ग्लोबल साउथ की आवाज: प्रधानमंत्री मोदी इन मुलाकातों के जरिए न सिर्फ भारत का पक्ष रखेंगे, बल्कि विकासशील और कम विकसित देशों (Global South) की आकांक्षाओं, जलवायु परिवर्तन, सतत आर्थिक विकास और एआई के सुरक्षित उपयोग जैसे मुद्दों को भी वैश्विक मंच पर उठाएंगे।
वैश्विक तेल बाजार में बदलाव की आहट, ईरान-अमेरिका समझौते पर बढ़ी बहस
15 Jun, 2026 09:32 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेल अवीव/ सिडनी। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जहां अमेरिका और ईरान के मध्य अप्रत्याशित रूप से हुए एक समझौते ने वैश्विक राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। इस आपसी रजामंदी के बाद दोनों मुल्कों के बीच लंबे समय से जारी गतिरोध थमने और सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य का व्यापारिक मार्ग पुनः बहाल होने की उम्मीद जगी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटनाक्रम को पश्चिम एशिया की स्थिरता और सुरक्षा के लिहाज से एक युगांतरकारी कदम करार दिया है, मगर दूसरी तरफ वैश्विक रक्षा और सामरिक मामलों के जानकार इस डील की प्रासंगिकता पर गंभीर संशय जता रहे हैं।
स्थायी शांति के बजाय चुनावी लाभ के लिए महज एक अल्पकालिक युद्धविराम
यरुशलम सेंटर फॉर सिक्योरिटी एंड फॉरेन अफेयर्स (JCFA) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सागिव स्टैनबर्ग ने इस समझौते के वास्तविक आधार पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। उनका दावा है कि इसे कोई टिकाऊ शांति समझौता मानना बड़ी भूल होगी, बल्कि यह आगामी अमेरिकी मध्यावधि चुनावों को साधने के लिए तैयार किया गया मात्र 60 दिनों का एक अस्थायी युद्धविराम है। स्टैनबर्ग के अनुसार, वॉशिंगटन इस टकराव में अपने किसी भी मुख्य उद्देश्य को हासिल करने में नाकाम रहा है और इस आंशिक ढील से मिलने वाले भारी फंड का इस्तेमाल तेहरान अपने हिजबुल्ला और हूती जैसे आक्रामक प्रॉक्सी गुटों को पुनर्जीवित करने में करेगा, जबकि ईरान के परमाणु कार्यक्रम का खतरा जस का तस बना हुआ है।
पूर्व ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री की चेतावनी और आत्मनिर्भरता की जरूरत
दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने भी इस समझौते की स्थिरता को लेकर वैश्विक बिरादरी को सचेत किया है। ईरान को एक विनाशकारी सोच वाली सत्ता बताते हुए उन्होंने आशंका व्यक्त की कि यह समझौता बेहद कमजोर बुनियाद पर टिका है जो कभी भी बिखर सकता है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि आज के दौर में वैश्विक आर्थिक आपूर्ति शृंखलाओं (सप्लाई चेन) को एक कूटनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, इसलिए भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे लोकतांत्रिक देशों को केवल पारंपरिक ईंधन तक सीमित न रहकर डेटा सुरक्षा, सबमरीन केबल्स और अंतरिक्ष जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में अपनी आत्मनिर्भरता को युद्धस्तर पर बढ़ाना होगा।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र का भविष्य और समझौते के क्रियान्वयन की कड़ी शर्तें
स्कॉट मॉरिसन ने मौजूदा वैश्विक उथल-पुथल के बीच संतुलन साधने के लिए भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी कूटनीति की सराहना की और हिंद-प्रशांत क्षेत्र को वैश्विक राजनीति का नया धुरी केंद्र बताया। उन्होंने रेखांकित किया कि इस क्षेत्र को किसी भी अधिनायकवादी ताकत के वर्चस्व से सुरक्षित रखने के लिए भारत-ऑस्ट्रेलिया की रणनीतिक भागीदारी बेहद निर्णायक साबित होगी। गौरतलब है कि स्विट्जरलैंड में इस शुक्रवार को दोनों देश आधिकारिक रूप से इस दस्तावेज पर दस्तखत करने वाले हैं, हालांकि ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गारीबाबादी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका द्वारा उनके फ्रीज किए गए फंड को जारी करने और आर्थिक प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाने के बाद ही तेहरान मुख्य परमाणु वार्ता की मेज पर बैठेगा।
भाषण के दौरान छात्रों का विरोध, सुंदर पिचाई को लेकर विवाद बढ़ा
15 Jun, 2026 05:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कैलिफोर्निया (अमेरिका)। गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई को अपनी ही पूर्व यूनिवर्सिटी, 'स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी' के ग्रेजुएशन कार्यक्रम में छात्रों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। सुंदर पिचाई जैसे ही मंच पर अपना भाषण शुरू करने वाले थे, तभी वहां मौजूद छात्रों ने नारेबाजी शुरू कर दी और कई छात्र कार्यक्रम बीच में ही छोड़कर बाहर (वॉक आउट) चले गए।
क्यों हो रहा था सुंदर पिचाई का विरोध?
छात्रों की इस नाराजगी की मुख्य वजह गूगल का इजराइल सरकार के साथ हुआ एक बिजनेस एग्रीमेंट है:
प्रोजेक्ट निम्बस (Project Nimbus): इजराइल सरकार ने गूगल और अमेजन कंपनी को 1.2 बिलियन डॉलर का एक प्रोजेक्ट दिया है, जो क्लाउड कंप्यूटिंग और एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से जुड़ा हुआ है।
छात्रों का तर्क: प्रदर्शन कर रहे छात्रों का मानना है कि गूगल की यह तकनीक इजराइली सरकार की सैन्य और अन्य सरकारी कार्रवाइयों को समर्थन देती है।
फ्री पैलेस्टीन के नारे: विरोध के दौरान छात्र 'फ्री पैलेस्टीन' के नारे लगा रहे थे। सिर्फ पिचाई ही नहीं, बल्कि कार्यक्रम में आए कई अन्य मेहमानों को भी छात्रों के इस गुस्से का सामना करना पड़ा।
सुंदर पिचाई ने छात्रों को दिया यह संदेश
इतने भारी विरोध और तनाव के बावजूद सुंदर पिचाई ने मंच से अपनी बात रखी। उन्होंने अपने भाषण में एआई (AI) या इस विवाद से जुड़े किसी भी तकनीकी विषय का जिक्र नहीं किया, बल्कि छात्रों को जीवन का एक बड़ा मंत्र दिया:
उन्होंने कहा, "मेरे लिए यह याद रखना मददगार है कि हर पीढ़ी ने अपने समय में अपनी तरह की मुश्किलों और चुनौतियों का सामना किया है।"
उन्होंने आगे कहा, "हमें यह चुनने का मौका तो नहीं मिलता कि हम किस तरह की दुनिया में कदम रख रहे हैं, लेकिन हमें अपने हालात को खुद तय करने और उन्हें बदलने का मौका जरूर मिलता है।"
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौते पर मुहर लगी है। हालांकि, कार्यक्रम खत्म होने के बाद जब पत्रकारों ने सुंदर पिचाई से छात्रों के इस विरोध प्रदर्शन पर सवाल पूछा, तो उन्होंने इस पर कोई भी प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया।
भारत-फ्रांस साझेदारी मजबूत, इनोवेशन रोडमैप 2030 पर बनी सहमति
15 Jun, 2026 04:41 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली / पेरिस। भारत और फ्रांस ने अपने आर्थिक और तकनीकी रिश्तों को और मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। भारत के 'विकसित भारत 2047 विजन' और फ्रांस की 'फ्रांस 2030 महत्वाकांक्षा' को एक साथ मिलाते हुए दोनों देशों ने 'इंडिया-फ्रांस इनोवेशन रोडमैप 2030' को अपनाने पर सहमति जताई है।
इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच नई तकनीकों में निवेश बढ़ाना और मिलकर विकास करना है। इस पूरी खबर को नीचे दिए गए मुख्य बिंदुओं के माध्यम से आसानी से समझा जा सकता है:
सुरक्षित और भरोसेमंद AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) पर जोर
दोनों देशों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अपनी साझेदारी का मुख्य हिस्सा बनाया है। इसके तहत निम्नलिखित बातों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा:
भरोसेमंद AI सिस्टम: दोनों देश मिलकर ऐसे सुरक्षित AI सिस्टम को बढ़ावा देंगे जो लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवाधिकारों के अनुकूल हो। साथ ही यह समाज में भेदभाव और गलत सूचनाओं (फेक न्यूज) को रोकने में मदद करेगा।
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा: दोनों देशों का मानना है कि AI और डिजिटल माहौल से बच्चों जैसे संवेदनशील वर्गों को खतरा हो सकता है। इसलिए बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को इस साझेदारी में प्राथमिकता दी गई है।
डेटा गोपनीयता: एआई तकनीक का सही और पूरा फायदा उठाने के लिए लोगों की प्राइवेसी (गोपनीयता) को सुरक्षित रखते हुए डेटा शेयर करने की व्यवस्था बनाई जाएगी।
30,000 भारतीय छात्रों का स्वागत और शिक्षा में सहयोग
भारत और फ्रांस के बीच सांस्कृतिक और शैक्षणिक रिश्तों को मजबूत करने के लिए शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़े फैसले लिए गए हैं:
फ्रांस ने साल 2030 तक 30,000 भारतीय छात्रों को अपने यहाँ पढ़ाई के लिए आमंत्रित करने का लक्ष्य रखा है।
दोनों देशों के कई प्रमुख शिक्षण संस्थानों ने छात्रों के आदान-प्रदान (स्टूडेंट एक्सचेंज) और मिलकर रिसर्च (संयुक्त शोध) करने पर सहमति जताई है।
छोटे उद्योगों (SMEs) को बढ़ावा
दोनों देशों ने माना कि छोटे और मध्यम उद्योग (SMEs) रोजगार देने और आर्थिक विकास में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसे देखते हुए भारत और फ्रांस के छोटे उद्योगों के बीच आपसी तालमेल और सहयोग बढ़ाने के नए अवसर तलाशे जाएंगे।
इस रोडमैप के जरिए दोनों देश न केवल अपनी तकनीकी और औद्योगिक संप्रभुता को मजबूत करेंगे, बल्कि मिलकर वैश्विक चुनौतियों का समाधान भी ढूंढेंगे।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर राहत भरे संकेत, ट्रंप के एलान से बाजार प्रभावित
15 Jun, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन/तेहरान। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में पिछले कई महीनों से जारी भारी तनाव और युद्ध के बीच एक बहुत बड़ा ऐतिहासिक और कूटनीतिक मोड़ सामने आया है। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध को समाप्त करने और शांति समझौता करने को लेकर एक बड़े फ्रेमवर्क (सहमति) पर मुहर लग गई है। दोनों देशों के बीच इस समझौते का औपचारिक दस्तावेज (MoU) आगामी 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा शहर में साइन किया जाएगा।
युद्ध रोकने और समुद्री रास्ता खोलने पर बनी सहमति
इस शांति समझौते के तहत दोनों देशों के बीच मुख्य रूप से निम्नलिखित शर्तों पर सहमति बनी है:
सैन्य अभियानों पर तुरंत रोक: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही सैन्य कार्रवाइयां और युद्ध तुरंत प्रभाव से पूरी तरह रुक जाएंगे। ईरान के मुताबिक, इस संघर्ष विराम के दायरे में लेबनान का मोर्चा भी शामिल होगा।
होर्मुज स्ट्रेट को खोलना: दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्ग 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) को कमर्शियल जहाजों के लिए फिर से पूरी तरह खोल दिया जाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि अब वैश्विक तेल की सप्लाई फिर से सुचारू रूप से शुरू हो सकेगी।
नौसैनिक नाकेबंदी खत्म: अमेरिका द्वारा ईरान के बंदरगाहों पर लगाई गई नौसैनिक नाकेबंदी को भी तुरंत और पूरी तरह से हटा लिया जाएगा।
पाकिस्तान और कतर ने निभाई मध्यस्थ की भूमिका
अमेरिका और ईरान को बातचीत की मेज पर लाने और इस ऐतिहासिक युद्धविराम को अमलीजामा पहनाने में पाकिस्तान और कतर जैसे क्षेत्रीय देशों ने एक बहुत बड़ी और महत्वपूर्ण मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभाई है। वैश्विक नेताओं सहित भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस शांति समझौते का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इससे दुनिया की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और क्षेत्र में स्थिरता आएगी।
परमाणु कार्यक्रम पर 60 दिनों की आगे की बातचीत
यह समझौता अभी एक अंतरिम ढांचा (शुरुआती ढांचा) है, कोई अंतिम शांति संधि नहीं है। 19 जून को स्विट्जरलैंड में आधिकारिक हस्ताक्षर होने के बाद दोनों देशों के बीच 60 दिनों की तकनीकी बातचीत का दौर शुरू होगा। इस दौरान ईरान के परमाणु कार्यक्रम, उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने और जब्त की गई ईरानी संपत्ति (फ्रीज एसेट्स) को वापस करने जैसे बेहद संवेदनशील मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
स्लोवाकिया दौरे पर पीएम मोदी को दिया गया गार्ड ऑफ ऑनर
15 Jun, 2026 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ब्रातिस्लावा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा पहुंचे, जहां उनका जोरदार स्वागत किया गया और उन्हें 'गार्ड ऑफ ऑनर' दिया गया। इस दौरान स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको भी उनके साथ मौजूद रहे। साल 1993 में स्लोवाकिया की स्वतंत्रता के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली यात्रा है, जो दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने के लिए काफी अहम मानी जा रही है।
रोटी और नमक से हुआ पारंपरिक स्वागत
प्रधानमंत्री मोदी के आगमन पर उनका स्वागत स्लोवाकिया की गहरी सांस्कृतिक परंपरा के अनुसार 'ब्रेड और सॉल्ट' (रोटी और नमक) भेंट करके किया गया। स्लाविक संस्कृति में इस परंपरा का बहुत महत्व है, जहां रोटी समृद्धि और जीवन-निर्वाह का संकेत देती है, वहीं नमक मित्रता, मूल्य और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। पीएम मोदी ने इस परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह स्लोवाकिया की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और अतिथि सत्कार की भावना को दर्शाती है।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन
होटल पहुंचने पर प्रधानमंत्री ने स्लोवाकिया के विभिन्न सांस्कृतिक समूहों द्वारा प्रस्तुत किए गए अद्भुत कार्यक्रमों का आनंद लिया:
संगीत समूह 'महादेवा कीर्तन प्रोजेक्ट' ने एक आध्यात्मिक प्रस्तुति दी।
प्रसिद्ध सांस्कृतिक समूह 'ल्यूक्निका एन्सेम्बल' ने वंदे मातरम की बेहद मनमोहक प्रस्तुति पेश की।
म्यावा क्षेत्र के प्रसिद्ध बाल लोक-नृत्य समूह 'कोपानिसियारिक' के कलाकारों ने अपनी पारंपरिक लोक नृत्य कला का प्रदर्शन किया, जिसकी प्रधानमंत्री ने जमकर सराहना की।
पीएम मोदी ने भारतीय समुदाय का जताया आभार
ब्रातिस्लावा में मिले भव्य और भावुक कर देने वाले स्वागत के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स (पहले ट्विटर) पर भारतीय समुदाय का आभार व्यक्त किया। उन्होंने लिखा कि वहां मिला स्नेह और अपनत्व वास्तव में विशेष था और ऐसे भावनात्मक संबंध ही भारत-स्लोवाकिया की मित्रता को और अधिक मजबूत बनाते हैं।
प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के साथ द्विपक्षीय बैठक
सांस्कृतिक स्वागत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रातिस्लावा कैसल में स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय मुलाकात की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग के नए रास्ते तलाशना और पुराने रिश्तों को एक नई ऊंचाई पर ले जाना है।
मूर्ति तोड़ने की धमकी से बढ़ा तनाव, बांग्लादेश में मानवाधिकार संगठनों ने जताई चिंता
15 Jun, 2026 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। पड़ोसी देश बांग्लादेश के गाईबांधा जिले के पलाशबाड़ी स्थित राधा-गोविंद मंदिर में भगवान श्री राम की तस्वीर के अपमान का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। इस घटना की 'बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद' नामक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने कड़े शब्दों में भर्त्सना की है। संगठन द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि एक विशेष कट्टरपंथी समूह द्वारा निकाले गए जुलूस के दौरान भगवान राम की छवि का घोर अनादर किया गया, जिससे स्थानीय हिंदू समाज और अल्पसंख्यक समुदाय की धार्मिक भावनाएं बुरी तरह आहत हुई हैं।
कट्टरपंथियों द्वारा लगातार धमकियां और नफरत फैलाने का आरोप
मानवाधिकार परिषद के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि पलाशबाड़ी इलाके में पिछले कुछ समय से सक्रिय शरारती तत्व मंदिर में स्थापित भगवान श्री रामचंद्र की मूर्ति को क्षतिग्रस्त करने और उसे हटाने की लगातार धमकियां दे रहे हैं। इसके साथ ही, देश की राजधानी सहित विभिन्न प्रांतों में अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बनाकर नफरत फैलाने के लिए सुनियोजित अभियान चलाए जा रहे हैं। संगठन ने अंदेशा जताया है कि यदि इन भड़काऊ और समाज को बांटने वाली गतिविधियों पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई, तो देश का सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ सकता है और हिंसा भड़क सकती है।
सरकार से सख्त कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग
इस संवेदनशील मामले को लेकर मानवाधिकार समूह ने बांग्लादेश सरकार से विशेष अपील की है। उन्होंने कहा कि एक लोकतांत्रिक और बहुधार्मिक समाज में इस प्रकार की विभाजनकारी हरकतें कतई स्वीकार्य नहीं हैं। परिषद ने मांग की है कि देश में अमन-चैन कायम रखने के लिए सरकार इन सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ त्वरित और सख्त प्रशासनिक कदम उठाए, घटना के मुख्य दोषियों को तुरंत सलाखों के पीछे भेजा जाए और उन्हें सख्त सजा दिलाई जाए। इसके अलावा, संगठन ने देश के धर्मनिरपेक्ष नागरिकों, सिविल सोसाइटी और प्रबुद्ध राजनीतिक दलों से भी इन ताकतों के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया है।
विरोध के चलते विश्व की सबसे बड़ी राम मूर्ति का निर्माण कार्य रुका
इस पूरे विवाद के बीच स्थानीय स्तर पर एक और बड़ा फैसला लिया गया है, जिसके तहत पलाशबाड़ी के इस मंदिर परिसर में निर्माणाधीन भगवान राम की विश्व की सबसे बड़ी प्रतिमा के कार्य पर प्रशासन ने रोक लगा दी है। सनातन कॉम्प्लेक्स से जुड़े पदाधिकारियों और मंदिर के सलाहकारों ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि भारी विरोध और तनावपूर्ण परिस्थितियों को देखते हुए फिलहाल निर्माण कार्य को बीच में ही रोक दिया गया है। इस सरकारी आदेश के बाद से ही सनातन समाज और आम जनता में गहरा रोष व्याप्त है। कई जानकारों का स्पष्ट रूप से मानना है कि प्रशासन ने कट्टरपंथी संगठनों के अनुचित दबाव के आगे झुकते हुए यह कदम उठाया है, जिससे आने वाले समय में सामाजिक स्थिरता को एक बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।
खेत में पलटी यात्रियों से भरी बस, तीन मौतों से मचा हड़कंप; सुभाष बराला पहुंचे
15 Jun, 2026 01:55 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
टोहाना। फतेहाबाद से सवारियों को लेकर आ रही विशाल टूर एंड ट्रेवल्स की एक 52 सीटर बस गांव अमानी और भोडी के मध्य अचानक बेकाबू होकर सड़क किनारे खेत में पलट गई। इस दर्दनाक सड़क हादसे में एक महिला सहित तीन लोगों ने अपनी जान गंवा दी, जबकि एक दर्जन से अधिक मुसाफिर गंभीर रूप से जख्मी हो गए। दुर्घटना की भयावहता को देखते हुए सभी घायलों को तुरंत उपचार के लिए टोहाना के नागरिक अस्पताल में दाखिल कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।
सड़क हादसे में होमगार्ड जवान और दो महिलाओं ने गंवाई जान
यह दुखद वाकया सोमवार सुबह के वक्त पेश आया। हादसे की इत्तिला मिलते ही सदर थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ फौरन घटनास्थल पर पहुंचे और स्थानीय लोगों की मदद से राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। पुलिस टीम के मुताबिक, इस दुर्घटना में तीन मौतों की पुष्टि हो चुकी है। जान गंवाने वालों में शहर थाने में तैनात होमगार्ड जवान बलविंदर सिंह (निवासी गांव डुल्ट) शामिल हैं। इनके अलावा 31 वर्षीय भौती देवी और 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला मोनी देवी की भी इस हादसे में मौत हो गई।
मुसाफिरों ने लगाया ड्राइवर पर तेज रफ्तार और लापरवाही का आरोप
बस में यात्रा कर रहे लोगों ने वाहन चालक पर गाड़ी को बेहद गैर-जिम्मेदाराना तरीके से चलाने का आरोप मढ़ा है। दुर्घटना में बाल-बाल बचे गांव चंदड के रहने वाले एक यात्री राममेहर ने बताया कि वह टोहाना आने के लिए इस बस में सवार हुआ था। ड्राइवर शुरुआत से ही बस को बहुत तेज गति से दौड़ा रहा था। सवारियों द्वारा मना करने के बावजूद गति कम नहीं की गई, जिसके चलते गांव भोडी के पास आते-आते बस पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो गई और खेत में जाकर पलट गई। घटना की जानकारी मिलते ही राज्यसभा सांसद सुभाष बराला भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने एंबुलेंस की व्यवस्था करवाकर घायलों को अस्पताल भिजवाया।
शीशे तोड़कर निकाली गईं सवारियां और चालक पर केस दर्ज
पुलिस प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, दुर्घटना के वक्त बस में लगभग 50 से 55 लोग सवार थे। पलटने के बाद बस के भीतर चीख-पुकार मच गई, जिसके बाद ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए गाड़ी के शीशे तोड़े और फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। जख्मी हुए कई यात्रियों की नाजुक हालत को देखते हुए डॉक्टरों की टीम उनकी निगरानी कर रही है। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त बस को अपने कब्जे में ले लिया है और चश्मदीदों के बयानों के आधार पर लापरवाह बस चालक के खिलाफ तेज गति व कोताही से वाहन चलाने का मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी तफ्तीश शुरू कर दी है।
CM सैनी का संवेदनशील संदेश, पीड़ितों से मुलाकात के बाद 5 लाख सहायता राशि की घोषणा
15 Jun, 2026 01:51 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रोहतक। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सोमवार सुबह करीब 10:20 बजे स्थानीय डीपार्क क्षेत्र में पहुंचे, जहां उन्होंने बीते दिनों हुए भीषण अग्निकांड के प्रभावितों से मुलाकात की। इस दुखद घटना पर संवेदना व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने पीड़ित दुकानदारों और परिवारों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की, जिसके तहत मुख्यमंत्री राहत कोष से 50 हजार रुपये से लेकर पांच लाख रुपये तक की मदद दी जाएगी। इसके उपरांत, मुख्यमंत्री इस हादसे में अकाल मृत्यु के शिकार हुए सौरभ, कपिल और अमन के निवास स्थान पर भी गए और शोक संतप्त परिजनों को सांत्वना दी।
शॉर्ट सर्किट और एसी ब्लास्ट बना हादसे की वजह
प्रभावित परिवारों से मिलने के बाद मुख्यमंत्री ने संवाददाताओं को बताया कि डीपार्क में लगी यह भीषण आग शॉर्ट सर्किट की वजह से भड़की थी। शुरुआती जांच के अनुसार, एयर कंडीशनर (एसी) का कंप्रेशर फटने के कारण आग ने बेहद विकराल रूप ले लिया और तेजी से फैल गई। इस दर्दनाक हादसे में सौरभ, कपिल और अमन नामक तीन युवकों को अपनी जान गंवानी पड़ी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस भयानक त्रासदी में जो जनहानि हुई है, उसकी कमी को किसी भी तरह पूरा नहीं किया जा सकता, लेकिन दुकानों और व्यापार में हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए सरकार हर संभव कदम उठाएगी। उन्होंने माना कि घटनास्थल का जायजा लेने पर स्थिति बेहद गंभीर दिखी, जहां बड़े-बड़े शोरूम पूरी तरह जलकर खाक हो चुके हैं।
नुकसान के आकलन के आधार पर मिलेगी राहत राशि
मुआवजे की प्रक्रिया को स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरी स्थानीय निकाय (यूएलबी) विभाग को इस पूरे अग्निकांड की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इस प्रशासनिक रिपोर्ट में प्रत्येक दुकानदार और रेहड़ी-पटरी वाले को हुए नुकसान का पूरा ब्यौरा शामिल होगा, जिसके आधार पर मुआवजा राशि सीधे पीड़ितों तक पहुंचाई जाएगी। सरकार के निर्णय के अनुसार, बड़े शोरूम और दुकानदारों को पांच-पांच लाख रुपये, जूस की दुकान चलाने वालों को दो-दो लाख रुपये तथा सड़क किनारे रेहड़ी-फड़ी लगाने वाले छोटे व्यापारियों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक मदद फौरन मुहैया कराई जाएगी।
दौरे को लेकर मुस्तैद रहा प्रशासनिक अमला
मुख्यमंत्री इस आपदा क्षेत्र में पीड़ितों को ढाढ़स बंधाने और सहायता का भरोसा देने के बाद सुबह लगभग 11:35 बजे हेलीकॉप्टर के जरिए चंडीगढ़ के लिए रवाना हो गए। उनके इस संक्षिप्त और महत्वपूर्ण दौरे को ध्यान में रखते हुए स्थानीय प्रशासन ने डीपार्क और उसके आसपास के पूरे इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। पुलिस और सुरक्षा बलों की मुस्तैदी के बीच मुख्यमंत्री का यह दौरा संपन्न हुआ, जिससे पीड़ित व्यापारियों में यह उम्मीद जगी है कि सरकार के सहयोग से वे अपने व्यवसाय को एक बार फिर खड़ा करने में सफल हो सकेंगे।
फायरिंग के बाद पुलिस का एक्शन, जर्मनी से डिपोर्ट बदमाश मुठभेड़ में घायल
15 Jun, 2026 11:07 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कुरुक्षेत्र। हरियाणा के कुरुक्षेत्र में मुर्तजापुर गांव के समीप पुलिस और शातिर अपराधियों के बीच सीधी मुठभेड़ हो गई। दोनों तरफ से हुई इस गोलीबारी में एक बदमाश विशाल की टांग में गोली लग गई, जिसके बाद वह गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस ने मौके से मुस्तैदी दिखाते हुए विशाल और उसके मददगार साथी लविश को धर दबोचा। पकड़े गए आरोपियों में से लविश कैथल जिले के किठाना गांव का निवासी बताया जा रहा है, जबकि गोली लगने से जख्मी हुए विशाल को इलाज के लिए तुरंत लोकनायक जय प्रकाश अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
पिहोवा में हुई लूट के मामले में पुलिस को थी तलाश
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पकड़े गए इन दोनों बदमाशों ने कुछ दिनों पहले पिहोवा इलाके में एक बड़ी लूट की वारदात को अंजाम दिया था। इस सनसनीखेज डकैती के बाद से ही स्थानीय पुलिस और सीआईए की टीमें लगातार इन अपराधियों की टोह में जुटी हुई थीं। मुखबिर से मिली पुख्ता सूचना के आधार पर जब पुलिस ने मुर्तजापुर के पास इनकी घेराबंदी की, तो खुद को घिरा देख बदमाशों ने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी, जिसके जवाब में पुलिस को भी गोलियां चलानी पड़ीं।
जर्मनी से डिपोर्ट होकर भारत लौटा है मुख्य आरोपी
इस पूरे मामले में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा भी हुआ है। मुठभेड़ के दौरान घायल हुआ मुख्य आरोपी विशाल महज 12 दिन पहले ही जर्मनी से डिपोर्ट (देश निकाला) होकर भारत वापस आया था। विदेश से लौटने के तुरंत बाद ही उसने यहां पर आपराधिक गतिविधियां शुरू कर दीं और पिहोवा में अपने साथी के साथ मिलकर लूट की घटना को अंजाम दे डाला।
अस्पताल में कड़ी सुरक्षा के बीच चल रहा इलाज और आगे की कार्रवाई
मुठभेड़ समाप्त होने के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को अपनी कस्टडी में ले लिया है। पैर में गोली लगने के कारण खून से लथपथ विशाल को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उसका उपचार जारी है। पुलिस ने अस्पताल परिसर के साथ-साथ आरोपी के वार्ड के बाहर भी कड़ा पहरा बिठा दिया है। वहीं, उसके साथी लविश से गुप्त स्थान पर पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस गिरोह में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
US-ईरान टकराव में बड़ा मोड़: क्या खुलेगा तेल का रास्ता?
15 Jun, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन : वैश्विक तनाव के बीच एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए एक ऐतिहासिक शांति समझौते पर सहमति बन गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर इस बड़ी कामयाबी का एलान किया। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ डील पूरी हो चुकी है, जिसकी पुष्टि ईरानी पक्ष ने भी कर दी है।
होर्मुज जलडमरूमध्य से हटेगी अमेरिकी नाकेबंदी
इस समझौते के तहत एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को व्यापार के लिए दोबारा खोलने की मंजूरी दे दी है। राष्ट्रपति ट्रंप ने दुनिया भर के व्यापारिक जहाजों को बधाई देते हुए लिखा कि अब होर्मुज से अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी हटने जा रही है। उन्होंने वैश्विक जहाजों से अपने इंजन चालू करने और तेल की सप्लाई को सुचारू रूप से शुरू करने का आह्वान किया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार को बड़ी राहत मिलेगी।
मध्यस्थ देशों के सहयोग से स्विट्जरलैंड में होंगे हस्ताक्षर
इस ऐतिहासिक शांति समझौते को अमलीजामा पहनाने में कतर, सऊदी अरब और तुर्किये ने बेहद महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी सोशल मीडिया पर इस सफल कूटनीति की सराहना की। दोनों देशों के बीच आगामी 19 जून (शुक्रवार) को स्विट्जरलैंड में इस समझौते पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर किए जाएंगे। ईरान के उप-विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने स्पष्ट किया है कि समझौते की सभी शर्तें और बिंदु हस्ताक्षर होने के बाद ही कानूनी रूप से लागू माने जाएंगे।
इन कड़े नियमों और शर्तों पर बनी दोनों देशों में सहमति
इस समझौते की कुछ प्रमुख शर्तें सामने आई हैं, जो दोनों देशों को माननी होंगी:
आर्थिक प्रतिबंधों से मुक्ति: ईरान के तेल निर्यात पर लगी सभी पाबंदियां हटा दी जाएंगी और उसे अपने वैश्विक वित्तीय संसाधनों का इस्तेमाल करने की पूरी आजादी होगी।
फंड की बहाली: ईरान के फ्रीज किए गए 24 अरब डॉलर जारी किए जाएंगे, जिसमें से 12 अरब डॉलर बातचीत शुरू होने से पहले ही दे दिए जाएंगे। इसके अलावा, ईरान में बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर की राशि दी जाएगी।
सैन्य वापसी और युद्धविराम: लेबनान समेत सभी मोर्चों पर जारी सैन्य संघर्ष को तुरंत और हमेशा के लिए रोकना होगा। साथ ही, अमेरिकी नौसेना 30 दिनों के भीतर अपनी नाकेबंदी हटा लेगी और अमेरिकी सेनाएं ईरान की सीमाओं के पास से पीछे हट जाएंगी।
हादसे के बाद प्रशासन सख्त, सुपरवाइजर पर गिरी गाज और कंपनी हुई ब्लैकलिस्ट
