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सिरसा के गांव खेड़ी में खेत की ढाणी में गिरा संदिग्ध गुब्बारा
22 Apr, 2026 12:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सिरसा/खेड़ी: हरियाणा और राजस्थान की सीमा पर बसे गांव खेड़ी में बुधवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब एक किसान की ढाणी (खेत स्थित आवास) में पाकिस्तान के निशान वाला एक संदिग्ध गुब्बारा उतरा। अंतरराष्ट्रीय प्रतीकों वाले इस गुब्बारे को देखकर स्थानीय ग्रामीणों में सुरक्षा को लेकर चिंता और कौतूहल का माहौल बन गया।
विमान के आकार का गुब्बारा और पाकिस्तानी चिह्न
जानकारी के अनुसार, यह गुब्बारा हूबहू एक छोटे हवाई जहाज के आकार में बना हुआ है। सफेद और हरे रंग के इस गुब्बारे पर 'PIA' (पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस) लिखा हुआ है। साथ ही इस पर पड़ोसी देश का नाम और चांद-सितारे का आधिकारिक चिह्न भी अंकित है।
किसान ने दी पुलिस को सूचना
बुधवार सुबह जब ग्रामीण जयवीर सिंह शर्मा अपनी ढाणी पहुंचे, तो उन्होंने इस अजीबोगरीब गुब्बारे को वहां पड़ा देखा। गुब्बारे पर पाकिस्तानी एयरलाइंस का नाम देखकर उन्होंने तुरंत सतर्कता बरती और इसकी जानकारी कागदाना पुलिस चौकी को दी। सूचना मिलते ही सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस टीम तुरंत हरकत में आई।
पुलिस की प्रारंभिक जांच और बरामदगी
कागदाना चौकी प्रभारी दीपक शर्मा अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और गुब्बारे को सुरक्षित रूप से अपने कब्जे में ले लिया। पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के खेतों की सघन तलाशी भी ली।
पुलिस का बयान: चौकी प्रभारी दीपक शर्मा ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह गुब्बारा काफी हल्का है। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि तेज हवा के रुख के कारण यह सीमा पार से उड़कर भारतीय क्षेत्र में आ गया होगा।
जांच जारी: पुलिस ने संबंधित उच्चाधिकारियों को इस बारे में सूचित कर दिया है। हालांकि गुब्बारे के साथ कोई संदिग्ध वस्तु या उपकरण बरामद नहीं हुआ है, फिर भी एहतियात के तौर पर मामले की जांच की जा रही है।
बच्चों की छोटी-छोटी समस्याओं को न करें नजरअंदाज
22 Apr, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन । बचपन में की गई छोटी-मोटी लापरवाही भी बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर गहरा असर डाल सकती है। नेशनल हेल्थ मिशन के अनुसार, बच्चों में पाचन संबंधी समस्याएं काफी आम हैं, लेकिन माता-पिता अक्सर इनके शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। यदि समय रहते इन संकेतों को पहचान लिया जाए, तो बच्चे को कई गंभीर परेशानियों से बचाया जा सकता है। बच्चों का पाचन तंत्र अभी विकसित हो रहा होता है, इसलिए छोटी-छोटी समस्याएं भी जल्दी बढ़ सकती हैं और आगे चलकर बड़ी समस्या का रूप ले सकती हैं। डॉक्टरों की सलाह है कि माता-पिता को बच्चों के हर छोटे बदलाव पर गहरी नजर रखनी चाहिए ताकि वे स्वस्थ और खुशहाल रह सकें। पहला और सबसे आम संकेत है कब्ज। यदि आपका बच्चा कठोर मल त्याग करता है, शौच के समय रोता-चिल्लाता है, या शौच करने से डरने लगता है, तो यह कब्ज का संकेत हो सकता है। दूसरा महत्वपूर्ण संकेत है दस्त।
बच्चे को बार-बार पतला मल आना दस्त का लक्षण है, जिससे उसके शरीर में पानी की कमी का खतरा बढ़ जाता है और वह सुस्त व कमजोर दिखने लगता है। तीसरा संकेत है पेट में जलन और एसिडिटी। यदि बच्चा बार-बार पेट में जलन की शिकायत करता है, उसे उल्टी आती है या खट्टी डकारें आती हैं, तो यह एसिडिटी या पाचन संबंधी गड़बड़ी का संकेत है। चौथी समस्या है भोजन असहजता या फूड इनटॉलेरेंस। इसमें बच्चा किसी विशेष भोजन, जैसे दूध, गेहूं या ग्लूटेन, को ठीक से पचा नहीं पाता। इसके लक्षण पेट फूलना, दर्द होना या शरीर पर चकत्ते पड़ना हो सकते हैं। पांचवीं समस्या कृमि संक्रमण है, जो अस्वच्छता और साफ-सफाई की कमी के कारण बच्चों में काफी आम है। इसमें बच्चा बार-बार पेट दर्द की शिकायत कर सकता है, उसकी भूख कम हो सकती है, वजन नहीं बढ़ता और कभी-कभी नींद में दांत पीसने जैसी आदतें भी देखने को मिलती हैं।
Rohtak हादसा: कैफे किचन में धमाका, गैस सिलिंडर फटा; अफरातफरी
22 Apr, 2026 11:41 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रोहतक: शहर के व्यस्ततम इलाके सोनीपत स्टैंड पर मंगलवार दोपहर एक पिज्जा-बर्गर कैफे में भीषण आग लग गई। आग की वजह से रसोई में रखा एलपीजी सिलेंडर जोरदार धमाके के साथ फट गया, जिससे आसपास की दुकानों और मकानों में हड़कंप मच गया। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन संपत्ति का भारी नुकसान हुआ है।
शॉर्ट-सर्किट बना आग का कारण
कैफे संचालक जतिन के अनुसार, दोपहर करीब 3:30 बजे रसोई में कोई मौजूद नहीं था, जबकि नीचे के केबिन में ग्राहक बैठे थे। तभी अचानक शॉर्ट-सर्किट के कारण रसोई में आग भड़क गई। धुआं देख जब कर्मचारी ऊपर पहुंचा, तो लपटें विकराल रूप ले चुकी थीं। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की तीन गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और बचाव कार्य शुरू किया।
धमाके की तीव्रता: 50 मीटर दूर मिली सिलेंडर की बॉडी
आग बुझाने की प्रक्रिया के दौरान रसोई में रखे तीन सिलेंडरों में से एक अचानक फट गया। धमाका इतना जबरदस्त था कि:
पास की एक दुकान और एक मकान के खिड़कियों के शीशे चकनाचूर हो गए।
फटने वाले सिलेंडर का ऊपरी हिस्सा हवा में उड़कर करीब 50 मीटर दूर एक मकान की छत पर जा गिरा।
पास के निजी अस्पताल में मौजूद डॉक्टर, मरीज और मेडिकल स्टोर संचालक दहशत के कारण बाहर निकल आए।
फायर ब्रिगेड की तत्परता से टला बड़ा हादसा
दमकल कर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर रसोई में मौजूद अन्य दो सिलेंडरों को समय रहते बाहर निकाल लिया, अन्यथा तबाही और अधिक हो सकती थी। सिविल लाइन थाना प्रभारी महेंद्र सिंह ने बताया कि आग पर काबू पा लिया गया है, लेकिन देरी होने पर यह एक बड़ी त्रासदी में बदल सकता था।
लाखों का नुकसान, प्रशासन पर उठे सवाल
कैफे संचालक ने बताया कि उन्होंने हाल ही में करीब 4 लाख रुपये निवेश कर यह कैफे शुरू किया था, जो अब पूरी तरह जलकर खाक हो गया है।
इस हादसे ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:
नियमों की अनदेखी: व्यावसायिक गतिविधि होने के बावजूद कैफे में कमर्शियल की जगह घरेलू गैस सिलेंडरों का इस्तेमाल किया जा रहा था।
अधिकारियों की चुप्पी: शहर में कई स्थानों पर धड़ल्ले से घरेलू सिलेंडरों का व्यावसायिक उपयोग हो रहा है, लेकिन संबंधित विभाग मूकदर्शक बना हुआ है।
ट्रम्प का बयान: ईरान में एकजुटता की कमी, इसलिए बढ़ाया गया सीजफायर
22 Apr, 2026 11:06 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन/इस्लामाबाद: मध्य-पूर्व में युद्ध के बादलों के बीच एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की समय सीमा (डेडलाइन) समाप्त होने से महज कुछ घंटे पहले सीजफायर को अनिश्चितकाल के लिए आगे बढ़ाने का एलान किया है। दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप ने इस कूटनीतिक जीत का पूरा श्रेय पाकिस्तान के नेतृत्व को दिया है।
पाकिस्तान बना 'ग्लोबल पीसमेकर'
ट्रंप ने अपनी सोशल मीडिया साइट 'ट्रुथ' पर स्पष्ट किया कि यह फैसला पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के परामर्श के बाद लिया गया है। ट्रंप के अनुसार विभाजित शासन को समय: ईरान का मौजूदा शासन आंतरिक रूप से बंटा हुआ है, इसलिए उन्हें एक ठोस और एकीकृत शांति प्रस्ताव तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है। यह पहली बार है जब अमेरिका ने ईरान के लिए कोई निश्चित समय सीमा तय नहीं की है। ट्रंप ने कहा कि हमला तब तक स्थगित रहेगा जब तक ईरान के प्रतिनिधि बातचीत के मेज पर नहीं आ जाते।
सैन्य सतर्कता और नाकाबंदी बरकरार
भले ही ट्रंप ने युद्धविराम बढ़ा दिया हो, लेकिन उन्होंने ईरान पर दबाव कम नहीं किया है। उन्होंने साफ किया कि होर्मूज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): ईरान के तटीय बंदरगाहों की अमेरिकी नाकाबंदी पहले की तरह जारी रहेगी। अमेरिकी सेना किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद और सक्षम बनी रहेगी।
इस्लामाबाद में वार्ता का अगला दौर
पाकिस्तान ने इस वैश्विक जिम्मेदारी को निभाने पर गर्व व्यक्त किया है। फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने राष्ट्रपति ट्रंप का आभार जताते हुए कहा कि पाकिस्तान इस संघर्ष के स्थायी समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। अब सबकी निगाहें इस्लामाबाद पर टिकी हैं, जहाँ शांति समझौते के लिए दूसरे दौर की वार्ता होनी प्रस्तावित है। पाकिस्तान के लिए इस भूमिका के मायने
आर्थिक तंगी और बिजली कटौती जैसे संकटों से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए यह 'राजनयिक ढाल' संजीवनी साबित हो सकती है वैश्विक स्तर पर एक शांतिदूत के रूप में उभरने से पाकिस्तान की कूटनीतिक साख बढ़ेगी। यदि पाकिस्तान इस तनाव को सुलझाने में सफल रहता है, तो उसे अंतरराष्ट्रीय निवेश आकर्षित करने और अपनी जर्जर अर्थव्यवस्था को संभालने में मदद मिल सकती है।
अमेरिका-ईरान जंग में करीब 3,375 लोगों की मौत.....2,875 पुरुष और 496 महिलाएं
22 Apr, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान । ईरान और अमेरिका के बीच 28 फरवरी को शुरु हुई जंग के बाद अमेरिकी हमलों की वजह से ईरान में करीब 3,375 लोगों की मौत हो गई है। यह आंकड़ा ईरान के विधिक चिकित्सा संगठन के प्रमुख अब्बास मस्जेदी की ओर से दिया गया। मीडिया रिपोर्ट में मस्जेदी के हवाले से बताया कि मारे गए लोगों में से केवल चार की पहचान नहीं हुई है।
उन्होंने यह ब्यौरा नहीं दिया कि हताहतों में कितने आम नागरिक हैं और कितने सुरक्षा बल के जवान हैं, केवल इतना बताया कि मारे गए लोगों में 2,875 पुरुष और 496 महिलाएं शामिल हैं। मस्जेदी ने कहा कि मृतकों में 18 वर्ष या उससे कम आयु के 383 बच्चे भी हैं। इन आंकड़ों से ये सवाल उठ रहे हैं कि इसमें सुरक्षा बलों के सदस्य शामिल हैं या नहीं, खासकर तब जब देश में सैन्य ठिकानों और हथियार भंडारों पर हमले तेज होने की खबरें सामने आई हैं।
चर्चा है कि पाकिस्तान के इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका में दूसरे चरण की वार्ता शुरू होगी। इस वार्ता के लिए अमेरिका पूरी तरह से तैयार दिख रहा है। वहीं ईरान ने बातचीत से इंकार किया है। इसकी मुख्य वजह मुख्य कारण ईरानी बंदरगाहों पर जारी अमेरिकी नाकेबंदी बताया गया है। इस बीच, अमेरिकी सेना ने एक ईरानी मालवाहक जहाज को जब्त किया, जिससे पश्चिम एशिया में नाजुक दौर से गुजर रही शांति पर और अनिश्चितता व्याप्त हो गई है। ईरान ने पुष्टि की कि अमेरिकी नौसेना ने ओमान की खाड़ी में ईरानी जहाज टौस्का को हमला कर जब्त किया, इस घटना को युद्धविराम का उल्लंघन बताकर जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी। ईरान के खत्म उल-अंबिया मुख्यालय ने कहा कि अमेरिकी कार्रवाई ईरानी वाणिज्यिक जहाजों पर हमला है और सशस्त्र समुद्री डकैती करार दिया। ईरानी मीडिया के अनुसार, इस घटना के बाद ईरान ने अमेरिकी युद्धपोतों पर ड्रोन हमले भी किए, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ईरानी अधिकारियों ने कहा कि अमेरिकी शर्तें अवास्तविक और अनुचित हैं और जब तक नाकेबंदी नहीं हटायी जाती, वार्ता संभव नहीं है। उन्होंने अमेरिका पर शर्तें बदलने का आरोप भी लगाया। ईरानी मीडिया के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों में वार्ता के सफल होने की कोई स्पष्ट संभावना नहीं है। यह निर्णय तब आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान में फिर वार्ता की घोषणा की है। दोनों देशों के बीच जारी दो सप्ताह का युद्धविराम 22 अप्रैल को समाप्त होने वाला है। इस बीच, अमेरिकी केन्द्रीय कमान (सेंटकॉम) ने पुष्टि की कि अमेरिकी बलों ने अरब सागर में ईरानी झंडे वाले मालवाहक जहाज को रोका। सेंटकॉम के अनुसार, निर्देशित मिसाइल विध्वंसक यूएसएस स्प्रूअन्स ने टौस्का को रोका, जो ईरान के बंदर अब्बास की ओर जा रहा था। कई चेतावनियों के बावजूद जहाज के चालक दल ने निर्देशों का पालन नहीं किया।
सुप्रीम लीडर की मंजूरी के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल वार्ता को तैयार
22 Apr, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। जानकारी के अनुसार, ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई से हरी झंडी मिलने के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद में संभावित वार्ता के लिए तैयार है। यदि यह बैठक तय होती है, तो अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेन्स आज मंगलवार को ही उच्च स्तरीय टीम के साथ इस्लामाबाद पहुंच सकते हैं। यह पहल ऐसे समय में हो रही है जब मौजूदा संघर्ष विराम की समयसीमा समाप्त होने वाली है।
वार्ता के लिए अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विट्कॉफ और दामाद जे कुशनेर भी शामिल हो सकते हैं। हालांकि, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजेशकियन ने स्पष्ट किया है कि दोनों देशों के बीच “गहरा ऐतिहासिक अविश्वास” अभी भी बना हुआ है, जो वार्ता की राह को जटिल बनाता है। पेज़ेशकियन ने अमेरिका पर भड़काऊ गतिविधि करने और विरोधाभासी बयान देने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति हो सकती है। उन्होंने दो टूक कहा, “ईरानी जनता दबाव में झुकने वाली नहीं है।” दूसरी ओर, मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने संकेत दिया है कि तेहरान इस वार्ता पर “सकारात्मक विचार” कर रहा है। बैठक में ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गलिबफ नेतृत्व कर सकते हैं।
ईरान ने वार्ता के लिए प्रमुख शर्त के रूप में होर्मुज पर अमेरिकी नाकाबंदी हटाने की मांग रखी है। वहीं, ट्रंप ने दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी, हालांकि उन्होंने ईरानी नेताओं से सीधे मिलने की इच्छा भी जताई है। ट्रंप के हालिया बयान से स्थिति कुछ उलझी भी नजर आई। उन्होंने पहले कहा था कि वेंस तत्काल रवाना होंगे, लेकिन बाद में अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यात्रा मंगलवार को ही संभव है, वह भी वार्ता की पुष्टि के बाद।
समझौता नहीं तो सैन्य कार्रवाई होगी: ट्रंप
फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई के बाद शुरू हुए इस संघर्ष को रोकने के लिए यह दूसरा बड़ा प्रयास होगा। ट्रंप ने संघर्ष विराम की समयसीमा को 24 घंटे बढ़ाते हुए इसे इस्लामाबाद वार्ता के लिए अहम बताया है। हालांकि, ट्रंप ने चेतावनी भी दी है कि यदि समझौता नहीं हुआ, तो सैन्य कार्रवाई फिर शुरू हो सकती है। इसके बावजूद उन्होंने कहा, “हम जल्दबाजी में कोई खराब समझौता नहीं करेंगे।” गौरतलब है कि इससे पहले 21 घंटे चली बातचीत विफल रही थी, जिसमें ईरान ने परमाणु संवर्धन रोकने की अमेरिकी मांग ठुकरा दी थी।
यमुनानगर में सनसनी, बाइक सवार बदमाशों ने घर पर की फायरिंग
22 Apr, 2026 09:22 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रादौर (यमुनानगर): रादौर के गांव भूरेवाला में मंगलवार और बुधवार की दरम्यानी रात अज्ञात हमलावरों ने भारी आतंक मचाया। बेखौफ बदमाशों ने पूर्व सरपंच के आवास को निशाना बनाते हुए ताबड़तोड़ फायरिंग की, जिससे पूरा इलाका गोलियों की गूंज से दहल उठा।
ताबड़तोड़ फायरिंग से फैली दहशत
जानकारी के मुताबिक, देर रात बाइक पर सवार होकर आए तीन नकाबपोश युवक गांव में दाखिल हुए। उन्होंने पूर्व सरपंच के घर के बाहर रुककर अचानक फायरिंग शुरू कर दी। हमलावरों ने करीब 12 से 15 राउंड गोलियां चलाईं, जिनमें से कई गोलियां घर के दरवाजों और दीवारों पर जा लगीं। गनीमत यह रही कि हमले के समय परिवार के सभी सदस्य घर के सुरक्षित हिस्सों में थे, जिससे किसी को चोट नहीं आई और एक बड़ा हादसा टल गया।
सीसीटीवी में कैद हुए हमलावर
फायरिंग की यह पूरी वारदात घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो गई है। फुटेज में बदमाश बाइक पर सवार होकर आते और गोलियां बरसाकर भागते हुए साफ नजर आ रहे हैं। पुलिस अब इस डिजिटल साक्ष्य के आधार पर हमलावरों के हुलिए और बाइक के नंबर की पड़ताल कर रही है।
पुलिस की कार्रवाई और जांच
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है:
साक्ष्य जुटाना: पुलिस ने घटनास्थल से गोलियों के खोल बरामद किए हैं।
पूछताछ: पूर्व सरपंच के परिवार और आसपास के पड़ोसियों से जानकारी ली जा रही है ताकि किसी पुरानी रंजिश या धमकी के कोण की जांच की जा सके।
सुरक्षा: घटना के बाद से गांव में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बनी हुई है।
कानून व्यवस्था पर सवाल
शांतिपूर्ण ग्रामीण इलाके में इस तरह सरेआम हुई गोलीबारी ने कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय निवासियों में असुरक्षा का भाव है। हालांकि, पुलिस अधिकारियों का दावा है कि आरोपियों के सुराग मिल चुके हैं और बहुत जल्द उन्हें सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा।
अगर इजराइली पीएम नेतन्याहू हंगरी आए तो उन्हें हिसारत में लिया जाएगा
22 Apr, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बुडापेस्ट। हंगरी के नव निर्वाचित पीएम पीटर मैग्यार ने अपने इजराइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू को हिरासत में लेने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (आईसीसी) में वॉन्टेड किसी भी नेता को हंगरी आने पर गिरफ्तार कर लिया जाएगा। खास बात है कि मैग्यार ने हाल ही में नेतन्याहू को हंगरी आने का न्योता भी दिया था।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पीएम मैग्यार ने कहा कि अगर कोई आईसीसी का सदस्य है और कोई वांछित व्यक्ति हमारे देश की सीमा में प्रवेश करता है, तो उसे हिरासत में लिया जाना चाहिए...हर राज्य और सरकार के प्रमुख इन कानूनों से वाकिफ हैं। उन्होंने साफ कहा कि हंगरी को आईसीसी का सदस्य बना रहने दिया जाएगा। साथ ही कहा कि इस संस्था से हटने के पूर्व पीएम विक्टर ओरबान के फैसले को भी रद्द किया जाएगा।
रिपोर्ट के मुताबिक मैग्यार से नेतन्याहू को हंगरी की नेशनल सेरेमनी में शामिल होने के लिए न्योता देने पर भी सवाल किया। इसपर नव निर्वाचित पीएम मैग्यार ने कहा कि चुनाव जीतने के बाद उन्होंने दुनिया के कई नेताओं से बात की है और सभी को 1956 के आंदोलन की 70 साल पूरे होने पर आमंत्रित किया है। उन्होंने कहा कि इजराइली पीएम नेतन्याहू को यह भी स्पष्ट कर दिया है कि हम आईसीसी से हटने के फैसले को रद्द करने से पीछे नहीं हटेंगे, क्योंकि मेरे सहयोगियों ने इसकी जांच की है और हम अभी भी इस फैसले को रोक सकते हैं।
बता दें बीते साल ओरबान ने ऐलान किया था कि हंगरी आईसीसी से बाहर हो रहा है। यह घोषणा उन्होंने नेतन्याहू से बुडापेस्ट में मुलाकात के बाद की थी। खास बात है कि यह फैसला 2 जून 2026 से प्रभावी होना था। अब बीते सप्ताह मैग्यार ने कहा है कि वह इस फैसले को पलटना चाहते हैं। साथ ही उन्होंने नेतन्याहू को अक्टूबर में हंगरी आने का न्योता भी दिया था।
बता दें अप्रैल में हुए हंगरी चुनाव में मैग्यार ने ओरबान को हरा दिया था। इसके साथ ही ओरबान के 16 साल के शासन का अंत हो गया। खास बात है कि पीटर कभी उनके ही वफादार रहे थे और चुनाव में भ्रष्टाचार और स्वास्थ्य सेवा और सार्वजनिक परिवहन जैसे रोजमर्रा के मुद्दों को उठाया था। साथ ही ओरबान के कार्यकाल में कमजोर पड़े ईयू और नाटो से हंगरी के रिश्तों को मजबूती देने की बात कही थी।
पाकिस्तान ने भारतीय विमानों के लिए अपना एयरस्पेस बंद रखने की अवधि बढ़ाई
22 Apr, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान ने भारतीय विमानों के लिए अपने एयरस्पेस को 24 मई तक बंद रखने का निर्णय लिया है। इस फैसले के साथ ही दोनों देशों के बीच हवाई यातायात पर लगी पाबंदियां एक साल से अधिक समय तक जारी रहने वाली हैं।
यह प्रतिबंध पिछले वर्ष पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद लगाया गया था। 22 अप्रैल को हुए इस हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी, जिसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव काफी बढ़ गया था। घटना के बाद 24 अप्रैल 2025 से पाकिस्तान ने भारतीय विमानों के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया था। इसके जवाब में भारत ने भी 30 अप्रैल 2025 से पाकिस्तानी विमानों के लिए अपने एयरस्पेस के उपयोग पर रोक लगा दी थी। तब से दोनों देशों के बीच यह प्रतिबंध लगातार जारी है।
हवाई क्षेत्र बंद होने का सीधा असर अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों पर पड़ रहा है। एयरलाइंस को लंबा रूट अपनाना पड़ रहा है, जिससे यात्रा का समय बढ़ने के साथ-साथ परिचालन लागत भी अधिक हो रही है। यात्रियों को भी टिकट की कीमतों में बढ़ोतरी और लंबी उड़ानों का सामना करना पड़ रहा है।
“बेटे के साथ ही खुशियां चली गईं”, पहलगाम हमले पर पिता का भावुक बयान
21 Apr, 2026 01:43 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणा। दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले को आज एक साल पूरा हो गया है, लेकिन लेफ्टिनेंट विनय नरवाल के परिवार के लिए समय जैसे ठहर सा गया है। 22 अप्रैल, 2025 को हुए उस आत्मघाती हमले में भारतीय नौसेना के युवा अधिकारी विनय नरवाल सहित 26 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। आज एक साल बाद भी करनाल स्थित उनके घर में मातम का सन्नाटा पसरा है।
एक फरिश्ता, जिसने बुने थे कई सपने- राजेश नरवाल
विनय के पिता राजेश नरवाल ने नम आंखों से अपने बेटे को याद करते हुए कहा कि विनय केवल एक अधिकारी नहीं, बल्कि उनके घर का 'फरिश्ता' था। उन्होंने बताया कि विनय ने अपने भविष्य और परिवार के लिए ढेरों योजनाएं बनाई थीं, जिन्हें उसने एक डायरी में भी दर्ज किया था। कहा कि जिस दिन हमें यह दिल तोड़ने वाली खबर मिली, उसी दिन हमारे लिए जिंदगी सचमुच खत्म हो गई। एक पिता के लिए जवान बेटे का कंधा उठाना सबसे बड़ा दुख है, और यह दर्द ताउम्र बना रहेगा।
हनीमून पर गई खुशियों को लगी नजर
महज 26 साल के लेफ्टिनेंट विनय अपनी पत्नी हिमांशी के साथ हनीमून के लिए पहलगाम गए थे। किसे पता था कि अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करने गया यह जोड़ा आतंकवाद की बर्बरता का शिकार हो जाएगा। आतंकवादियों ने उन्हें बेहद करीब से निशाना बनाया था।
सरकार की कार्रवाई पर गर्व
लेफ्टिनेंट विनय नरवाल के पिता ने कहा कि दुख की इस घड़ी में भी परिवार को भारतीय सेना और सरकार पर गर्व है। पिछले साल मई में भारतीय सेना द्वारा चलाए गए। वहीं, राजेश नरवाल ने 'ऑपरेशन सिंदूर' का जिक्र करते हुए कहा कि दोषियों को कड़ा सबक सिखाकर सरकार ने एक स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि ऐसी जवाबी कार्रवाई के बाद दुश्मन दोबारा ऐसी हिमाकत करने से पहले सौ बार सोचेगा।
होर्मुज में बढ़ा तनाव, अमेरिका ने ईरानी जहाज कब्जे में लिया, ईरान ने बताया समुद्री डकैती
21 Apr, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान/वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। ताजा घटनाक्रम में अमेरिका ने ईरान के एक मालवाहक जहाज को अपने कब्जे में ले लिया है, जिससे क्षेत्रीय हालात और संवेदनशील हो गए हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अनुसार ईरान का ‘टॉस्का’ नामक यह जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने की कोशिश कर रहा था। इसे अमेरिकी नौसेना के डेस्ट्रॉयर ने रोका। ट्रंप ने दावा किया कि जहाज को कई बार चेतावनी दी गई, लेकिन उसने निर्देशों का पालन नहीं किया, जिसके बाद अमेरिकी मरीन ने कार्रवाई करते हुए उसे अपने नियंत्रण में ले लिया। ईरान ने इसे समुद्री डकैती बताया है और सख्त से सख्त जवाब देने की बात कही है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा, कि ईरानी जहाज टॉस्का फिलहाल पूरी तरह अमेरिकी नियंत्रण में है और उसकी जांच की जा रही है कि उसमें क्या सामग्री मौजूद है। इस कार्रवाई को अमेरिका ने सुरक्षा और निगरानी के तहत उठाया गया कदम बताया है।
वहीं, ईरान ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरान के हजरत खातम अल-अनबिया सैन्य मुख्यालय ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने संघर्षविराम का उल्लंघन करते हुए ओमान की खाड़ी में ईरानी व्यापारिक जहाज पर फायरिंग की, जिससे उसका नेविगेशन सिस्टम प्रभावित हुआ। ईरान की सरकारी एजेंसियों के मुताबिक, यह जहाज चीन से ईरान की ओर जा रहा था। तेहरान ने इस कार्रवाई को “समुद्री डकैती” करार देते हुए चेतावनी दी है कि इसका सख्त से सख्त जवाब जल्द दिया जाएगा।
वार्ता पर पड़ सकता है असर
इस घटनाक्रम के बीच दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक प्रयासों पर भी असर पड़ता दिख रहा है। पहले दौर की वार्ता असफल रहने के बाद दूसरे दौर को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ईरान की सरकारी एजेंसी ने इस्लामाबाद में प्रस्तावित वार्ता की खबरों को खारिज करते हुए उन्हें “झूठा प्रचार” बताया है। वहीं दूसरी तरफ विशेषज्ञों की राय है, कि होर्मुज जैसे रणनीतिक जलमार्ग में इस तरह की कार्रवाई वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर असर डाल सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में स्थिति किस दिशा में जाती है, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती, मेडिकल कॉलेजों में लेवल-3 ट्रॉमा सेंटर की तैयारी
21 Apr, 2026 11:02 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को आधुनिक बनाने और सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। अब राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में लेवल-3 ट्रॉमा सेंटर खोलने की तैयारी शुरू हो गई है।
यहाँ इस खबर का परिवर्तित और व्यवस्थित रूप दिया गया है:
हरियाणा: मेडिकल कॉलेजों में बनेंगे हाई-टेक ट्रॉमा सेंटर, सड़क हादसों में जान बचाने के लिए सरकार का बड़ा फैसला
चंडीगढ़: सड़क दुर्घटनाओं के दौरान 'गोल्डन ऑवर' (हादसे के बाद का पहला घंटा) में घायलों को तुरंत उपचार उपलब्ध कराने के लिए हरियाणा सरकार ने प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में लेवल-3 ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने की योजना बनाई है। इसके लिए एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है।
विशेषज्ञ कमेटी करेगी आकलन
इस पूरी परियोजना की रूपरेखा तैयार करने के लिए रोहतक पीजीआई (PGIMS) के निदेशक की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई है।
सदस्य: इस समिति में करनाल, सोनीपत (खानपुर कलां) और नूंह के मेडिकल कॉलेजों के निदेशक भी शामिल हैं।
समय सीमा: कमेटी को अगले 10 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी, जिसमें ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने की संभावनाओं और चरणों का विवरण होगा।
लेवल-3 ट्रॉमा सेंटर में क्या होगा खास?
इन सेंटरों को इस तरह तैयार किया जाएगा कि गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को भागना न पड़े। यहाँ मिलने वाली प्रमुख सुविधाएँ होंगी:
24/7 इमरजेंसी: चौबीसों घंटे आपातकालीन चिकित्सा सुविधा।
विशेषज्ञ डॉक्टर: सर्जन और एनेस्थीसिया विशेषज्ञों की ऑन-कॉल उपलब्धता।
अत्याधुनिक लैब: हड्डी रोग उपचार, आईसीयू, डिजिटल एक्स-रे और आधुनिक प्रयोगशालाएँ।
रेफरल सिस्टम: अत्यंत गंभीर स्थिति में मरीज को उच्च स्तरीय केंद्रों (लेवल-1 या 2) में भेजने की त्वरित व्यवस्था।
क्यों पड़ी इसकी जरूरत? (भयावह आंकड़े)
हरियाणा में सड़क हादसों के आंकड़े डराने वाले हैं, जो इस फैसले की अनिवार्यता को दर्शाते हैं:
मृत्यु दर: साल 2014 से अब तक प्रदेश में 57,901 लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवा चुके हैं।
हादसे: बीते 11 वर्षों में लगभग 1.15 लाख दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं।
सबसे प्रभावित जिले: गुरुग्राम, सोनीपत, करनाल, पानीपत और झज्जर में दुर्घटनाओं और मौतों की संख्या सर्वाधिक रही है।
पाकिस्तान की मध्यस्थता पर सवाल, अमेरिकी विशेषज्ञ ने ट्रंप को दी चेतावनी
21 Apr, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर नई बहस छिड़ गई है। अमेरिकी थिंक टैंक अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ फेलो माइकल रुबिन ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे अमेरिका के लिए “शर्मनाक और खतरनाक” करार दिया है।
दरअसल एक लेख में रुबिन ने पाकिस्तान के पुराने रिकॉर्ड का उल्लेख करते हुए सवाल उठाए हैं और कहा, कि उसकी भूमिका अक्सर विवादों से जुड़ी रही है। उन्होंने पाकिस्तान के परमाणु वैज्ञानिक अब्दुल कादिर खान का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम में मदद की थी। ऐसे में उसी देश को मध्यस्थता की जिम्मेदारी देना एक गंभीर रणनीतिक गलती हो सकती है।
रुबिन ने यह भी कहा कि पाकिस्तान में यहूदी-विरोध और अमेरिका-विरोधी भावनाएं व्यापक हैं, जिससे उस पर भरोसा करना और भी मुश्किल हो जाता है। उन्होंने ओसामा बिन लादेन के मामले का जिक्र करते हुए कहा कि जब अमेरिकी सेना ने उसे मार गिराया था, तब पाकिस्तान की प्रतिक्रिया भी सवालों के घेरे में रही थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसलों पर टिप्पणी करते हुए रुबिन ने कहा कि पाकिस्तान पर भरोसा करना वैसी ही गलतियों को दोहराने जैसा है, जो पहले अफगानिस्तान, गाजा, सीरिया और यमन जैसे मामलों में देखी जा चुकी हैं।
इस संदर्भ में भारत का भी उल्लेख किया और रुबिन ने कहा कि इस तरह की संवेदनशील वार्ताओं के लिए भारत अधिक भरोसेमंद विकल्प हो सकता था। उन्होंने भारत को इस स्थिति में सतर्क रहने की सलाह भी दी।
ट्रंप बातचीत के साथ दे रहे चेतावनी
पहले दौर की बातचीत फेल रहने के बाद ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल 20 अप्रैल को पाकिस्तान पहुंचकर ईरान के साथ दूसरे दौर की बातचीत की कोशिश करेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान ने अमेरिकी प्रस्तावों को नहीं माना, तो उसके नागरिक ढांचे को नुकसान पहुंचाया जा सकता है। हालांकि, ईरान की ओर से इस संभावित वार्ता में शामिल होने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। मौजूदा संघर्षविराम 22 अप्रैल को समाप्त होने वाला है, ऐसे में आने वाले दिनों में क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।
3 साल पहले की लव मैरिज, विवाद के चलते PG में रह रही महिला ने उठाया कदम
21 Apr, 2026 10:27 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कुरुक्षेत्र/करनाल। तीन वर्ष पूर्व समाज की परवाह किए बिना प्रेम विवाह करने वाले विक्रम (26) और देवी (21) की प्रेम कहानी अब यादों में सिमट गई है। घरेलू विवाद के कारण पहले पति और फिर पत्नी ने आत्मघाती कदम उठा लिया।
अलग रहने के दौरान उठाया कदम
पुलिस जांच के अनुसार, तरावड़ी निवासी विक्रम और जींद की रहने वाली देवी के बीच पिछले कुछ समय से अनबन चल रही थी। करीब एक महीने पहले विवाद इतना बढ़ा कि देवी कुरुक्षेत्र के सेक्टर 13 स्थित एक पीजी (PG) में रहने चली गई थी।
पति की मौत: पत्नी के अलग होने से परेशान विक्रम करनाल के गांव चौपड़ी में अपनी नानी के पास चला गया था। तीन दिन पहले एक बंद कमरे से बदबू आने पर जब दरवाजा खोला गया, तो विक्रम का शव फंदे से लटका मिला।
पत्नी की मौत: पति की मौत के गम या आपसी तनाव के बीच सोमवार देर रात देवी ने भी अपने पीजी के कमरे में फंदा लगा लिया। जब लंबे समय तक कमरे में कोई हलचल नहीं हुई, तो खिड़की से देखने पर घटना का पता चला।
पुलिस की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची और देवी के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया।
डीएसपी सुनील कुमार ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह मामला आपसी कलह और मानसिक तनाव का लग रहा है।
देवी के परिजनों को सूचना दे दी गई है और पुलिस दोनों मौतों के बीच की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर रही है।
होर्मुज पर बढ़ते तनाव के बीच अजीत डोभाल रियाद पहुंचे, ऊर्जा मंत्री से की मुलाकात
21 Apr, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप होर्मुज को लेकर सख्त रवैया अपनाए हुए हैं। वहीं ईरान भी पीछे हटने को तैयार नहीं है। संकट गहराता जा रहा है। अमेरिकी नौसेना ने गल्फ ऑफ ओमान में ईरानी कार्गो जहाज तौस्का पर फायरिंग कर उसे जब्त कर लिया है। इधर ईरान ने सोमवार को इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता का प्रस्ताव ठुकरा दिया है। होर्मुज पर बढ़ते तनाव के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल रविवार को आधिकारिक दौरे पर रियाद पहुंचे। बता दें होर्मुज पर बढ़ते संकट के बीच भारत अब कच्चे तेल के लिए और देशों के ऑप्शन पर काम कर रहा है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इसी बढ़ते तनाव और अनिश्चितता के बीच डोभाल का यह दौरा एक औपचारिक यात्रा नहीं है, बल्कि पश्चिम एशिया में बदलते समीकरणों के बीच भारत की सक्रिय कूटनीतिक रणनीति का संकेत है। रियाद में होने वाली बैठकों में ऊर्जा सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और आपसी सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। ऐसे समय में जब वैश्विक शक्तियां आमने-सामने हैं, भारत खुद को एक संतुलित और भरोसेमंद मध्यस्थ के रूप में पेश करता दिख रहा है। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब होर्मुज में तनाव चरम पर है।
रिपोर्ट के मुताबिक अजीत डोभाल ने रियाद पहुंचकर सऊदी अरब के शीर्ष नेतृत्व के साथ कई अहम बैठकें कीं। उन्होंने ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुल अजीज बिन सलमान, विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान और अपने समकक्ष मुसैद अल-ऐबान से मुलाकात की। इन बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय हालात पर विस्तार से चर्चा हुई। भारतीय दूतावास ने भी इस दौरे को रणनीतिक रूप से अहम बताया है। डोभाल की इस यात्रा का सबसे बड़ा फोकस ऊर्जा सुरक्षा रहा। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से पूरा करता है। ऐसे में सऊदी अरब जैसे देश के साथ करीबी सहयोग बेहद जरूरी है। इसके अलावा क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव और समुद्री सुरक्षा भी चर्चा का अहम हिस्सा रहे। अगर होर्मुज में तनाव बढ़ता है तो सबसे बड़ा असर तेल की कीमतों पर पड़ेगा। इससे भारत की अर्थव्यवस्था और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा समुद्री व्यापार भी प्रभावित हो सकता है। यही कारण है कि भारत पहले से ही वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों और आपूर्ति के रास्तों पर काम कर रहा है।
भारत की विदेश नीति का आधार संतुलन, संवाद और रणनीतिक स्वायत्तता है। भारत अमेरिका के साथ मजबूत साझेदारी रखता है, वहीं ईरान के साथ ऊर्जा, व्यापार और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के रिश्ते भी बनाए हुए हैं। यही संतुलन उसे एक विश्वसनीय और व्यावहारिक खिलाड़ी बनाता है। भारत सीधे तौर पर ‘मध्यस्थ’ का दावा नहीं करता, लेकिन बैक-चैनल बातचीत, रणनीतिक साझेदारी और बहुपक्षीय मंचों के जरिए माहौल बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है। यही वजह है कि मौजूदा संकट में भारत की कूटनीति को स्थिरता लाने वाली ताकत के रूप में देखा जा रहा है।
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