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अवैध रूप से रह रहे 13 बांग्लादेशी नागरिकों पर शिकंजा, क्राइम ब्रांच की कार्रवाई
17 Jun, 2026 12:36 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गुरुग्राम। पश्चिम बंगाल में शासन व्यवस्था में बदलाव आते ही अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी प्रवासियों के विरुद्ध प्रशासनिक रवैया बेहद कड़ा हो गया है और उन्हें चिन्हित कर वापस भेजने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इसी तरह की एक बड़ी और सख्त कार्रवाई अब हरियाणा के साइबर सिटी गुरुग्राम में भी देखने को मिल रही है। यहां गुरुग्राम पुलिस की अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) ने एक गुप्त सूचना के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से निवास कर रहे 13 बांग्लादेशी नागरिकों को अपनी कस्टडी में लिया है। पकड़े गए इन सभी विदेशी नागरिकों को अब कानूनी कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद देश से बाहर निकालने (डिपोर्ट करने) की तैयारी की जा रही है। आंतरिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के पहलुओं को ध्यान में रखते हुए स्थानीय पुलिस प्रशासन ने ऐसे अवैध घुसपैठियों के खिलाफ एक व्यापक धरपकड़ अभियान शुरू किया है। अपराध शाखा के उच्चाधिकारियों के सीधे मार्गदर्शन में सेक्टर-39 की विशेष टीम ने शहर के अलग-अलग इलाकों में चल रहे कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स और झुग्गी-झोपड़ियों में अचानक सघन तलाशी अभियान चलाया, जहां से इन 13 लोगों को दबोचा गया। तलाशी के दौरान इनके पास से बांग्लादेशी नागरिकता से जुड़े मूल दस्तावेज भी बरामद हुए हैं।
दलालों के माध्यम से सीमा पार कर भारत में ली थी एंट्री
पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ और जांच-पड़ताल में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ये सभी आरोपी कालियागंज अंतरराष्ट्रीय सीमा के रास्ते बांग्लादेशी एजेंटों की साठगांठ से अवैध तरीके से भारतीय सीमा में दाखिल हुए थे। वहां से देश के विभिन्न हिस्सों से होते हुए ये गुरुग्राम पहुंचे और यहां खुद को मजदूर बताकर निर्माण स्थलों तथा झुग्गियों में छिपकर रहने लगे ताकि किसी को इन पर शक न हो। पुलिस अधिकारियों ने साफ किया है कि इन सभी के विरुद्ध तय कानूनी प्रक्रियाओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया है और इन्हें डिपोर्ट करने की औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। इस बीच, सुरक्षा के मद्देनजर शहर की सभी बस्तियों, कॉलोनियों, किराए के मकानों, औद्योगिक परिसरों और होटलों में रह रहे संदिग्धों के पहचान पत्रों की सघन चेकिंग का काम लगातार जारी है।
स्थानीय निवासियों से पुलिस की विशेष अपील और गाइडलाइन
सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से गुरुग्राम पुलिस ने आम नागरिकों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन्स (RWA) से एक विशेष अपील जारी की है। पुलिस ने कहा है कि यदि उनके आस-पास कोई भी संदिग्ध व्यक्ति या अवैध रूप से रह रहा विदेशी नागरिक दिखाई दे, तो उसकी सूचना तुरंत आपातकालीन नंबर 112 या अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन को दें। इसके साथ ही मकान मालिकों और नियोक्ताओं को सख्त हिदायत दी गई है कि वे अपने यहां रखने वाले किराएदारों, घरेलू नौकरों और निजी कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन (सत्यापन) अनिवार्य रूप से करवाएं। पुलिस ने आम जनता को आश्वस्त किया है कि इस अभियान से किसी भी वैध भारतीय नागरिक या नियम सम्मत तरीके से रह रहे विदेशी मूल के व्यक्ति को डरने की बिल्कुल जरूरत नहीं है, और किसी भी बेकसूर को कतई परेशान नहीं किया जाएगा।
मानेसर डिटेंशन सेंटर में रखे गए आरोपी और अफवाहों पर चेतावनी
पुलिस प्रशासन ने इस संवेदनशील अभियान को लेकर सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से किसी भी तरह की भ्रामक खबर या अफवाह फैलाने वाले तत्वों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की कड़ी चेतावनी दी है। वर्तमान में हिरासत में लिए गए सभी 13 बांग्लादेशी प्रवासियों को सुरक्षा के घेरे में गुरुग्राम के मानेसर स्थित रिपोर्ट हाउस (डिटेंशन सेंटर) में सुरक्षित रखा गया है। स्थानीय पुलिस और विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) के अधिकारी मिलकर इनके प्रत्यर्पण से जुड़े दस्तावेजों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं, और जैसे ही यह प्रशासनिक और कागजी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, इन सभी को कड़ी सुरक्षा के बीच सीमा पार कराकर वापस बांग्लादेश भेज दिया जाएगा।
इंडो-पैसिफिक कमांड का नया नाम, वैश्विक सुरक्षा समीकरण पर असर
17 Jun, 2026 11:51 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन: अमेरिका ने एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाते हुए अपने 'यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड' (USINDOPACOM) का नाम बदलकर एक बार फिर 'यूएस पैसिफिक कमांड' (USPACOM) कर दिया है। इसके साथ ही अमेरिकी रक्षा विभाग ने वर्ष 2018 में लिए गए अपने आठ साल पुराने फैसले को पलट दिया है। मंगलवार को इसकी आधिकारिक घोषणा करते हुए पेंटागन ने स्पष्ट किया कि यह बदलाव कमांड के ऐतिहासिक गौरव, गहरी जड़ों और समृद्ध विरासत को सम्मान देने के लिए किया गया है। गौरतलब है कि इस सबसे पुरानी और सबसे बड़ी सैन्य कमांड की स्थापना साल 1947 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी एस. ट्रूमैन ने की थी।
ऐतिहासिक विरासत की बहाली और पेंटागन का तर्क
अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन के अनुसार, 1 जनवरी 1947 को स्थापित यह सैन्य बल लगभग 70 वर्षों से अधिक समय तक 'यूएस पैसिफिक कमांड' के नाम से ही संचालित होता रहा। यह अमेरिका की सभी एकीकृत सैन्य कमांडों में सबसे पुरानी और क्षेत्रफल के लिहाज से सबसे बड़ी कमांड है।
रक्षा विभाग ने अपने बयान में कहा कि पुराने नाम की बहाली प्रशांत क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैन्यकर्मियों के बीच गर्व और सामूहिक भावना को मजबूत करेगी। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था से लेकर कोरियाई युद्ध, वियतनाम युद्ध और दुनिया भर में चलाए गए अनेक मानवीय अभियानों के समन्वय तक, 'यूएस पैसिफिक कमांड' का नाम हमेशा सैन्य शौर्य और क्षेत्रीय साझेदारियों का प्रतीक रहा है।
भारत की पश्चिमी सीमा तक दायरा, पर मिशन में कोई बदलाव नहीं
पेंटागन ने साफ किया है कि नाम बदले जाने के बावजूद कमांड के भौगोलिक अधिकार क्षेत्र (Area of Responsibility) में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इस कमांड का संचालन क्षेत्र आज भी अमेरिका के पश्चिमी तट से शुरू होकर भारत की पश्चिमी सीमा तक फैला हुआ है।
रक्षा विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि कमांड का मूल मिशन, उसकी रणनीतिक प्राथमिकताएं और क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर एक स्वतंत्र, सुरक्षित और खुले क्षेत्र को बनाए रखने की प्रतिबद्धता पहले की तरह ही मजबूत रहेगी।
2018 में नाम बदलने की वजह और वर्तमान भू-राजनीतिक मायने
साल 2018 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान तत्कालीन अमेरिकी रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस ने इस कमांड का नाम बदलकर 'इंडो-पैसिफिक कमांड' करने की घोषणा की थी। उस समय हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के बीच बढ़ती रणनीतिक और आर्थिक परस्पर निर्भरता तथा भारत के बढ़ते वैश्विक महत्व को देखते हुए यह कदम उठाया गया था। मैटिस ने तब चुटीले अंदाज में कहा था कि यह कमांड 'बॉलीवुड से हॉलीवुड तक और पेंगुइन से ध्रुवीय भालुओं तक' फैले विशाल क्षेत्र की सुरक्षा संभालती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि 2018 में 'इंडो' शब्द जोड़ना भारत-अमेरिका के रणनीतिक रिश्तों में आ रही तेजी का प्रतीक था। हालांकि, ट्रंप प्रशासन के वर्तमान दूसरे कार्यकाल में भारत और अमेरिका के रिश्तों में कुछ उतार-चढ़ाव देखे गए हैं। व्यापारिक टैरिफ (शुल्क) को लेकर हुए विवादों और फिर 'ऑपरेशन सिंदूर' में युद्धविराम के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच खुलकर मतभेद सामने आए हैं। ऐसे संवेदनशील समय में अमेरिका द्वारा 'इंडो' शब्द को हटाकर दोबारा पुराना नाम बहाल करना वैश्विक कूटनीति के गलियारों में कई नए सवाल खड़े कर रहा है।
एनसीआर सीमा विस्तार पर विराम, मौजूदा ढांचा रहेगा बरकरार; 14 जिलों को राहत
17 Jun, 2026 11:31 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। हरियाणा के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) की सीमाओं में कोई फेरबदल नहीं किया जाएगा। करनाल, पानीपत, जींद, महेंद्रगढ़ और भिवानी सहित राज्य के सभी 14 जिले पहले की तरह ही एनसीआर का हिस्सा बने रहेंगे। यह अहम निर्णय केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री की अगुवाई में आयोजित एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की 42वीं बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया। बैठक के संपन्न होने के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्पष्ट किया कि राजधानी क्षेत्र के मौजूदा भौगोलिक दायरे में कोई भी कटौती नहीं होगी। इससे पहले राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में यह कयास लगाए जा रहे थे कि हरियाणा के पांच प्रमुख जिलों को इस दायरे से बेदखल किया जा सकता है, जिससे एनसीआर में राज्य की हिस्सेदारी बेहद कम हो जाती। वर्तमान में हरियाणा के कुल 23 जिलों में से 14 जिले इस क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। जानकार सूत्रों का कहना है कि यदि यह कटौती लागू होती तो राजस्थान सबसे ज्यादा प्रभावित होता, क्योंकि नए प्रस्ताव के तहत उसका केवल भिवाड़ी इलाका ही एनसीआर में बचता। राजस्थान सरकार के कड़े विरोध के चलते ही इस प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डालना पड़ा।
रीजनल प्लान 2041 के लिए विशेष समिति का गठन
इस उच्च स्तरीय बैठक में 'रीजनल प्लान-2041' को अंतिम रूप देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार और चारों संबंधित राज्यों (हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान व दिल्ली) के आला अधिकारियों को मिलाकर एक उप-समिति (सब-कमेटी) बनाने का फैसला हुआ है। यह विशेष समिति आगामी 15 अगस्त तक अपनी विस्तृत और अंतिम रिपोर्ट बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत करेगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भरोसा जताया कि योजना बोर्ड के इन दूरगामी फैसलों से पूरे दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र का एक समान और मजबूत विकास हो सकेगा। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार एनसीआर के चहुंमुखी विकास को अपनी प्राथमिकताओं में ऊपर रखती है और आने वाले समय में ग्रीनफील्ड शहरों व आरआरटीएस (रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम) की परियोजनाओं को युद्धस्तर पर आगे बढ़ाएगी।
हरियाणा में बनेगा नया 'नमो सिटी' मॉडल टाउन
मुख्यमंत्री ने आगे जानकारी दी कि बैठक के दौरान आरआरटीएस रूट के साथ-साथ चार नए ग्रीनफील्ड शहर बसाने का एक बेहद क्रांतिकारी निर्णय लिया गया है। बोर्ड में शामिल सभी भागीदार राज्य एक-एक नए ग्रीनफील्ड शहर के निर्माण का खाका तैयार करके भेजेंगे। 'नमो सिटी' के नाम से पहचाने जाने वाले ये नए शहर पूरी तरह से आधुनिक, पर्यावरण के अनुकूल और आत्मनिर्भर शहरी केंद्रों के तौर पर स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही यह भी तय किया गया है कि राष्ट्रीय राजधानी योजना बोर्ड की अगली समीक्षा बैठक दिसंबर 2026 में हरियाणा के गुरुग्राम शहर में बुलाई जाएगी।
करनाल तक ही रहेगी रैपिड रेल, नहीं बढ़ेगी अंबाला की ओर
परिवहन सुविधाओं के विस्तार पर बात करते हुए केंद्रीय मंत्री ने साफ किया कि रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) का रूट सिर्फ करनाल तक ही सीमित रहेगा और इसे अंबाला तक ले जाने का फिलहाल कोई इरादा नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि एनसीआर का मुख्य उद्देश्य केवल दिल्ली के प्रभाव क्षेत्र को अंतहीन बढ़ाना नहीं है, बल्कि उसके आस-पास ऐसे व्यवस्थित और सर्वसुविधायुक्त शहर तैयार करना है जो स्वयं निवेश, रोजगार, उद्योग, शिक्षण संस्थाओं और जनसंख्या को अपनी तरफ आकर्षित कर सकें। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में करनाल और अंबाला जैसे शहर 'मैग्नेट सिटी' के रूप में उभरेंगे, जो दिल्ली की तरफ भागने वाली आबादी और विकास के दबाव को अपने स्तर पर ही संभालकर क्षेत्रीय आर्थिक तरक्की के नए पावरहाउस बनेंगे।
सख्त नियमों के बाद नेपाली फैक्ट्रियों में उत्पादन ठप
17 Jun, 2026 11:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काठमांडू: भारत सरकार द्वारा लागू की गई नई चाय आयात नीति के बाद नेपाल के चाय उद्योग पर एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। भारतीय चाय बोर्ड द्वारा गुणवत्ता जांच के नियमों को बेहद कड़ा कर दिए जाने के कारण नेपाल से भारत होने वाला चाय का निर्यात लगभग पूरी तरह ठप हो गया है। इस गतिरोध की वजह से नेपाल के पूर्वी जिलों, इलाम और झापा में स्थित दर्जनों चाय फैक्ट्रियों में ताले लटक गए हैं।
नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इलाम में 53 चाय फैक्ट्रियों ने 15 जून से अपना कामकाज पूरी तरह बंद कर दिया है, जबकि झापा की 30 फैक्ट्रियों ने भी आने वाले कुछ दिनों में उत्पादन रोकने का आधिकारिक एलान कर दिया है।
हजारों मजदूरों और किसानों की आजीविका पर मंडराया संकट
इन फैक्ट्रियों के अचानक बंद होने से नेपाल के चाय क्षेत्र पर निर्भर हजारों कामगारों और किसानों की आजीविका सीधे तौर पर दांव पर लग गई है। केवल झापा जिले की बात करें, तो यहाँ करीब 20,000 मजदूर और किसान अपनी दैनिक कमाई के लिए पूरी तरह इसी उद्योग पर आश्रित हैं। इसके अलावा, अकेले सूर्योदय नगरपालिका में 2,995 किसान चाय की खेती से जुड़े हैं, जहाँ 33,655 रोपनी ज़मीन पर सालाना लगभग 2 करोड़ किलोग्राम हरी चाय की पत्तियों का उत्पादन होता है। फैक्ट्रियों के बंद होने से अब इन छोटे किसानों के सामने भुखमरी की नौबत आ गई है।
गोदामों में भरी 7 लाख किलो चाय, भुगतान करने में असमर्थ हुए मालिक
नेपाली चाय एसोसिएशन के पदाधिकारियों के अनुसार, इस समय 3 लाख किलोग्राम से ज़्यादा नेपाली चाय भारतीय सीमा और बाजारों में पहुँच तो चुकी है, लेकिन अनिवार्य क्वालिटी टेस्टिंग (गुणवत्ता जाँच) प्रक्रियाओं के कारण वहीं फँसी हुई है। इसके अलावा, लगभग 7 लाख किलोग्राम से अधिक तैयार (प्रोसेस्ड) चाय फैक्ट्रियों के गोदामों में बिना बिकी पड़ी है।
सूर्योदय ऑर्थोडॉक्स टी प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष दिल्ली श्रेष्ठ का कहना है कि बिक्री पूरी तरह रुक जाने के कारण स्टोरेज की जगह खत्म हो चुकी है। जब तक तैयार माल बाज़ार में नहीं बिकता, तब तक फैक्ट्रियों को दोबारा चालू करना और किसानों को उनकी हरी पत्तियों का भुगतान करना पूरी तरह असंभव है।
भारतीय चाय बोर्ड की नई एसओपी (SOP) बनी नेपाल के लिए गले की फांस
चाय में मिलावटखोरी को रोकने और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए टी बोर्ड ऑफ इंडिया ने 1 मई से एक नया स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) लागू किया है। इस नए नियम के तहत नेपाल से आने वाली चाय की हर एक खेप (कंसाइनमेंट) की कड़ाई से लैबोरेट्री टेस्टिंग अनिवार्य कर दी गई है।
नेपाली चाय उत्पादकों की शिकायत है कि इस टेस्ट की रिपोर्ट आने में दो हफ्ते से भी ज़्यादा का समय लग जाता है, और इस दौरान वे अपनी खेप को बेच नहीं सकते। कड़े नियमों के तहत यदि कोई भी सैंपल टेस्ट में फेल हो जाता है, तो पूरी चाय को या तो नेपाल वापस भेजना पड़ता है या फिर उसे वहीं नष्ट कर दिया जाता है।
भगवान राम की मूर्ति को लेकर बढ़ा विवाद, धमकियों के बीच निर्माण कार्य रोका गया
17 Jun, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय, विशेषकर हिंदू आबादी के खिलाफ उत्पीड़न और हिंसा के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। तख्तापलट के बाद से वहां की स्थिति और भी ज्यादा चिंताजनक बन गई है। इसी बीच रंगपुर संभाग के पलाशबाड़ी क्षेत्र से एक नया मामला प्रकाश में आया है, जहां कट्टरपंथी तत्वों के भारी दबाव के चलते भगवान राम की एक निर्माणाधीन प्रतिमा का काम बीच में ही रुकवा दिया गया है।
धमकियों के बीच मंदिर समिति का बड़ा निर्णय
इस पूरे मामले पर मंदिर प्रबंधन का कहना है कि उन्हें उग्रवादी सोच रखने वाले संगठनों की तरफ से लगातार डराया-धमकाया जा रहा था। इन समूहों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी थी कि वे इस प्रतिमा को नुकसान पहुंचाएंगे और पूरे इलाके का माहौल खराब कर देंगे। ऐसे में क्षेत्र में शांति व्यवस्था और आपसी भाईचारा बनाए रखने के उद्देश्य से समिति ने फिलहाल के लिए निर्माण कार्य को रोकने का फैसला किया है। प्रबंधन के एक पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह कदम समाज और देश की भलाई को ध्यान में रखकर उठाया है, और आगे चलकर यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं, तो सभी पक्षों के साथ बातचीत और मशविरा करने के बाद ही काम दोबारा शुरू करने पर कोई फैसला लिया जाएगा।
कट्टरपंथी संगठन के अल्टीमेटम से गहराया विवाद
इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब 'इंसाफ कायमकारी छात्र श्रमिक जनता' नामक एक चरमपंथी गुट से जुड़े एक उपदेशक ने इस निर्माणाधीन प्रतिमा को लेकर खुलेआम धमकी दे डाली। इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हुए एक बयान में इस उपदेशक ने पलाशबाड़ी में तैयार हो रही भगवान राम की इस प्रतिमा को बुलडोजर से ढहाने की मांग की थी। इतना ही नहीं, उसने स्थानीय प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर हुकूमत ने इसे खुद नहीं हटाया, तो आम जनता सड़कों पर उतरकर इसे ध्वस्त कर देगी।
भड़काऊ बयानों से बढ़ा तनाव और अल्पसंख्यकों में भय
इस चरमपंथी उपदेशक ने केवल प्रतिमा के खिलाफ ही मोर्चा नहीं खोला, बल्कि समाज में नफरत फैलाने वाले कई भड़काऊ भाषण भी दिए, जिसमें भारत और दक्षिण एशियाई देशों के आपसी रिश्तों व क्षेत्रीय शांति को लेकर भी बेहद आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। इन हरकतों की वजह से पूरे इलाके में सांप्रदायिक तनाव काफी ज्यादा बढ़ गया, जिसके चलते मंदिर समिति को पीछे हटना पड़ा। गौरतलब है कि बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही हिंदू समाज लगातार दंगाइयों के निशाने पर है, जहां कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है और उनके घरों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों व धर्मस्थलों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया गया है, जिससे वहां के अल्पसंख्यकों में दहशत का माहौल है।
क्या आप जानते हैं? 80 के ट्रम्प कई देशों के नेताओं से हैं छोटे
17 Jun, 2026 08:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में अपना 80वां जन्मदिन मनाया है। इसके साथ ही वे पद पर रहते हुए इस उम्र को छूने वाले अमेरिका के दूसरे राष्ट्रपति बन गए हैं। उनसे पहले जो बाइडेन नवंबर 2022 में राष्ट्रपति पद पर रहते हुए 80 वर्ष के हुए थे। हालांकि ट्रम्प दुनिया के सबसे बुजुर्ग नेताओं की सूची में शामिल हैं, लेकिन वैश्विक स्तर पर कई ऐसे राष्ट्रप्रमुख हैं जो उम्र के मामले में उनसे काफी आगे हैं।
दुनिया के 91 प्रतिशत राष्ट्रीय नेताओं से बड़े हैं ट्रम्प
एक हालिया अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र के 186 देशों के राष्ट्रप्रमुखों में से केवल 16 नेता ही ऐसे हैं जिनकी उम्र वर्तमान में डोनाल्ड ट्रम्प से अधिक है। इस लिहाज से ट्रम्प दुनिया के लगभग 91 प्रतिशत राष्ट्रीय नेताओं से अधिक उम्र के हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि इस समय वैश्विक स्तर पर शासन कर रहे नेताओं की औसत आयु करीब 63 वर्ष है, जबकि ट्रम्प इस औसत आंकड़े से काफी ऊपर हैं।
93 वर्षीय पॉल बिया हैं दुनिया के सबसे उम्रदराज मौजूदा शासक
मौजूदा समय में दुनिया के सबसे बुजुर्ग राष्ट्रीय नेता कैमरून के राष्ट्रपति पॉल बिया हैं, जिनकी आयु 93 वर्ष हो चुकी है और वे साल 1982 से लगातार सत्ता में काबिज हैं। इस सूची में दूसरे स्थान पर सऊदी अरब के राजा सलमान बिन अब्दुलअजीज अल सऊद हैं, जिनकी उम्र 90 वर्ष है और वे 2015 से शासन संभाल रहे हैं। यानी सऊदी किंग उम्र के मामले में ट्रम्प से करीब 10 साल बड़े हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के सबसे बुजुर्ग नेताओं में एक बड़ी संख्या अफ्रीकी देशों के राष्ट्राध्यक्षों की है, जिनमें युगांडा, इक्वेटोरियल गिनी, मलावी, आइवरी कोस्ट, जिम्बाब्वे और रिपब्लिक ऑफ कांगो जैसे देश शामिल हैं। युगांडा के राष्ट्रपति योवेरी मुसेवेनी 82 वर्ष के हैं और लगभग चार दशकों से सत्ता में हैं।
लंबे कार्यकाल और लोकतांत्रिक जवाबदेही पर छिड़ी नई बहस
इस रिपोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण और चिंताजनक तथ्य भी उजागर किया है। आंकड़ों के अनुसार, दुनिया के दस सबसे उम्रदराज नेताओं में से सात नेता उन देशों का नेतृत्व कर रहे हैं जिन्हें 'फ्रीडम हाउस' (मानवाधिकार और लोकतंत्र पर नज़र रखने वाली संस्था) ने "नॉट फ्री" (स्वतंत्र नहीं) की श्रेणी में रखा है। इसमें इक्वेटोरियल गिनी के राष्ट्रपति तेओदोरो ओबियांग का नाम भी शामिल है जो 1979 से शासन कर रहे हैं। इन आँकड़ों के सामने आने के बाद वैश्विक राजनीति में इस बात को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है कि नेताओं का लंबे समय तक सत्ता में बने रहना और लोकतांत्रिक जवाबदेही में कमी आना आपस में किस तरह जुड़े हुए हैं।
प्री-मानसून हुआ मेहरबान, 20 जून तक बरसेंगे बादल; हिसार में तेज आंधी का कहर
17 Jun, 2026 07:56 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। हरियाणा में प्री-मानसून की दस्तक और लगातार सक्रिय हो रहे पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। सूबे के 19 जिलों में अंधड़ चलने और कड़कती बिजली के साथ हुई झमाझम बारिश ने झुलसाने वाली गर्मी से आमजन को बड़ी राहत पहुंचाई है, जिसके चलते दिन का पारा सामान्य के मुकाबले लगभग 11 डिग्री सेल्सियस तक नीचे गिर गया है। मौसम विज्ञान केंद्र ने आने वाली 20 जून तक राज्य के विभिन्न हिस्सों में रुक-रुक कर धूलभरी आंधी चलने और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने का सिलसिला जारी रहने की संभावना व्यक्त की है।
तापमान में जबरदस्त गिरावट और सुहावना हुआ मौसम
लगातार हो रही बारिश और ठंडी हवाओं के चलने से पूरे प्रदेश में भीषण गर्मी का असर कम हो गया है और दिन का अधिकतम तापमान 31 डिग्री से 37 डिग्री सेल्सियस के दायरे में सिमट गया है। कई जिलों में तो पारा सामान्य से बेहद कम रिकॉर्ड किया गया है, जिससे लोगों को उमस और तपिश से पूरी तरह निजात मिल गई है। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक, वर्तमान में जो मौसमी बदलाव दिखाई दे रहे हैं, उसके पीछे एक के बाद एक आ रहे वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (पश्चिमी विक्षोभ) और टर्फ लाइन की मौजूदगी मुख्य वजह है। वर्तमान में पूर्वी पाकिस्तान, पंजाब, राजस्थान सहित हरियाणा के आसमान पर नए बादलों की खेप लगातार तैयार हो रही है, जिससे हल्की बूंदाबांदी का माहौल बना रहेगा।
आगामी तीन दिनों के लिए नया मौसमी सिस्टम और अलर्ट
पूर्वानुमान के अनुसार, 18 से 20 जून के बीच उत्तर-पश्चिम भारत में एक और नया तथा अधिक प्रभावी पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की राह पर है। इस नए मौसमी तंत्र के असर से हरियाणा के साथ-साथ समूचे दिल्ली-एनसीआर के क्षेत्रों में हवाओं की रफ्तार काफी तेज हो जाएगी और अनेक स्थानों पर हल्की से लेकर मध्यम दर्जे की बारिश होने के प्रबल आसार बन रहे हैं। इस दौरान आंधी की वजह से खुले स्थानों पर विशेष एहतियात बरतने की सलाह दी गई है।
हिसार में अंधड़ से भारी तबाही और बुनियादी ढांचा प्रभावित
दूसरी ओर, बीते सोमवार की दोपहर बाद आए भीषण अंधड़ ने अकेले हिसार जिले में भारी तबाही मचाई है, जिससे वहां आम जनजीवन और विद्युत आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह से ढह गई। चक्रवाती आंधी के कारण पूरे जिले में करीब 158 बिजली के पोल और 15 बड़े ट्रांसफार्मर जमीन से उखड़ कर गिर पड़े, जिसकी वजह से दर्जनों गांवों और शहरी इलाकों में घंटों तक घने अंधेरे (ब्लैकआउट) की स्थिति बनी रही। इसके अलावा, तकरीबन 40 विशालकाय पेड़ समूल नष्ट हो गए और 150 से ज्यादा पेड़ों की डालियां टूटकर गिरने से मुख्य मार्गों व कृषि क्षेत्रों में आवागमन ठप हो गया। हवा के झोंके इतने विनाशकारी थे कि लगभग 110 मकानों की छतों पर लगी सोलर प्लेटें उखड़ गईं और कई घरों के टिन शेड हवा में ताश के पत्तों की तरह उड़ गए।
किंगहाई में भूकंप से हिली धरती, रिक्टर स्केल पर 6.3 मापी गई तीव्रता
16 Jun, 2026 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। चीन का किंगहाई प्रांत मंगलवार को शक्तिशाली भूकंप के तेज झटकों से कांप उठा। रिक्टर पैमाने पर इस भूगर्भीय हलचल की तीव्रता 6.3 दर्ज की गई है। इस भीषण झटके के कारण समूचे प्रभावित क्षेत्र में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल पैदा हो गया। लोग अपनी जान बचाने के लिए आनन-फानन में घरों, दुकानों और बहुमंजिला दफ्तरों से निकलकर खुले मैदानों की तरफ भागने लगे। बताया जा रहा है कि इस भूकंप का मुख्य केंद्र हैक्सी प्रांत के अंतर्गत था। आपदा की गंभीरता को देखते हुए चीनी प्रशासन और आपदा प्रबंधन ने बिना वक्त गंवाए स्थानीय राहत एवं बचाव दस्तों को आपातकालीन अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
धरातल से महज 10 किलोमीटर नीचे था केंद्र
अंतरराष्ट्रीय भूकंपीय वेधशाला से प्राप्त तकनीकी आंकड़ों के अनुसार, भूकंप के यह तेज झटके स्थानीय समयानुसार शाम को करीब 5:06 बजे महसूस किए गए। वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस भूकंपीय तरंग का केंद्र जमीन की सतह से केवल 10 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था। केंद्र की गहराई बेहद कम होने के कारण ही सतह पर झटकों का प्रभाव बहुत ज्यादा विनाशकारी और तीव्र महसूस हुआ। भूकंप का यह केंद्र हैक्सी प्रांत के पहाड़ी और सुदूर ग्रामीण अंचल में स्थित है। यह झटका इतना जबरदस्त था कि मुख्य केंद्र से सटे कई पड़ोसी जिलों और कस्बों में भी लंबे समय तक धरती हिलने की पुष्ट खबरें सामने आई हैं, जिससे शुरुआती झटके के बाद भी लोग काफी देर तक सहमे रहे।
कम आबादी वाले पहाड़ी क्षेत्र होने से टला बड़ा संकट
इस प्राकृतिक आपदा के बीच सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि जिस पहाड़ी क्षेत्र में भूकंप का केंद्र था, वहां रिहायशी आबादी का घनत्व बहुत कम है। सरकारी एजेंसियों के प्रारंभिक अनुमानों के मुताबिक, मुख्य रूप से करीब 8,660 लोग ही इस भूकंप के सीधे असर वाले दायरे में आए हैं। क्षेत्रीय प्रशासन वर्तमान में प्रभावित सुदूरवर्ती इलाकों में संपत्ति और बुनियादी ढांचे को पहुंचे नुकसान का सटीक डेटा जुटाने में लगा हुआ है। इसके लिए सुदूर पर्वतीय गांवों से उपग्रह संचार के जरिए संपर्क स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशासनिक तत्परता के बीच सबसे अच्छी खबर यह रही कि शुरुआती दौर में किसी भी नागरिक के हताहत होने, घायल होने या किसी बड़े ढांचागत नुकसान की कोई अप्रिय सूचना प्राप्त नहीं हुई है।
ट्रंप बोले- ईरान में हमारा कोई निवेश नहीं, कतर बैठक के बाद बयान चर्चा में
16 Jun, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
एवियन। फ्रांस के खूबसूरत शहर एवियन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी के बीच एक अत्यंत महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक संपन्न हुई है। इस द्विपक्षीय वार्ता के दौरान ईरान के साथ हाल ही में हुए नए रणनीतिक समझौते पर विशेष रूप से चर्चा की गई। बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी प्रशासनिक नीति को पूरी तरह स्पष्ट करते हुए दृढ़ शब्दों में कहा कि अमेरिका, ईरान के भीतर एक भी पैसा निवेश नहीं करने जा रहा है। गौरतलब है कि इससे पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने आपसी सहमति से तैयार इस शांति समझौते के मसौदे पर डिजिटल माध्यम से अपने हस्ताक्षर दर्ज किए हैं।
जिनेवा में औपचारिक हस्ताक्षर के बाद सामने आएगा पूरा मसौदा
इस बहुचर्चित अंतरराष्ट्रीय समझौते को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही यह साफ कर दिया था कि इस संधि के सभी गुप्त पहलुओं और संपूर्ण विवरण को शुक्रवार को जिनेवा में होने वाले मुख्य समारोह के बाद ही पूरी दुनिया के सामने सार्वजनिक किया जाएगा। उन्होंने इस आगामी कार्यक्रम की रूपरेखा बताते हुए कहा कि इस ऐतिहासिक औपचारिक हस्ताक्षर समारोह में अमेरिका का प्रतिनिधित्व करने के लिए उपराष्ट्रपति जेडी वेंस विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।
समारोह में राष्ट्रपति ट्रंप की मौजूदगी अभी तय नहीं
जहां एक ओर उपराष्ट्रपति वेंस का जिनेवा जाना पूरी तरह सुनिश्चित हो चुका है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी व्यक्तिगत भागीदारी को लेकर सस्पेंस बरकरार रखा है। उन्होंने मीडिया को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि इस मुख्य हस्ताक्षर समारोह में उनकी स्वयं की भौतिक उपस्थिति अभी तक निश्चित नहीं हो पाई है और इस पर अंतिम निर्णय लिया जाना अभी बाकी है।
वैश्विक मंच पर शांति समझौते के दूरगामी परिणाम
अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि इस डिजिटल हस्ताक्षर के बाद अब पूरी दुनिया की नजरें शुक्रवार को होने वाले औपचारिक कार्यक्रम पर टिकी हुई हैं। खाड़ी देशों में शांति और स्थिरता स्थापित करने के उद्देश्य से किए जा रहे इस समझौते को वैश्विक राजनीति के लिहाज से एक बड़े टर्निंग पॉइंट के रूप में देखा जा रहा है। कतर के अमीर के साथ हुई इस ताजा बैठक से यह भी साफ हो गया है कि अमेरिका भले ही शांति स्थापित करने के पक्ष में है, लेकिन वह ईरान को किसी भी प्रकार की प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता या निवेश देने के मूड में बिल्कुल नहीं है।
समझौते की अटकलों से तेल-गैस बाजार में उतार-चढ़ाव
16 Jun, 2026 03:53 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच 100 से अधिक दिनों तक चले भीषण युद्ध की समाप्ति और 19 जून को जेनेवा में होने वाले ऐतिहासिक शांति समझौते की खबरों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को बहुत बड़ी राहत दी है। जैसे ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को व्यापार के लिए दोबारा खोलने और नौसैनिक नाकेबंदी हटाने का संकेत दिया, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट (क्रैश) दर्ज की गई।
संकट के चरम दौर में 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुका ब्रेंट क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) लुढ़क कर तीन महीने के सबसे निचले स्तर यानी 82 डॉलर प्रति बैरल के करीब आ गया है। इसके साथ ही यूरोपीय बाजार में थोक गैस की कीमतों में भी 6% तक की कमी आई है। हालांकि, इस भारी गिरावट के बावजूद ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि आम उपभोक्ताओं की जेब (पेट्रोल-डीजल के खुदरा दामों) तक इसका सीधा फायदा पहुंचने में अभी कई महीनों का समय लग सकता है।
राहत मिलने में देरी क्यों? क्या हैं तकनीकी पेच?
ग्लोबल एनर्जी एक्सपर्ट्स और 'गोल्डमैन सैक्स' जैसी वित्तीय संस्थाओं के विश्लेषकों का कहना है कि भले ही कागजों पर शांति बहाल हो रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर तेल की आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को पूरी तरह सामान्य होने में 6 से 12 महीने का समय लग सकता है। इसके पीछे निम्नलिखित प्रमुख कारण हैं:
शिपिंग इंश्योरेंस और माइंस की सफाई: युद्ध के दौरान फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में बिछाई गई समुद्री बारूदी सुरंगों (Mines) को हटाने में समय लगेगा। जब तक शिपिंग कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय बीमा एजेंसियों को यह भरोसा नहीं हो जाता कि यह जलमार्ग 100% सुरक्षित है, तब तक बड़े तेल टैंकरों का परिचालन सामान्य गति से शुरू नहीं हो पाएगा।
रणनीतिक भंडारों (Stockpiles) को दोबारा भरना: युद्ध के कारण दुनिया भर के देशों के आपातकालीन तेल भंडार पूरी तरह खाली हो चुके हैं। बाजार में तेल आते ही सबसे पहले इन खाली भंडारों को भरने की होड़ मचेगी, जिसके कारण कच्चे तेल की कीमतें फिलहाल 80 से 90 डॉलर प्रति बैरल के बीच ही टिकी रह सकती हैं।
बंद कुओं को दोबारा शुरू करना: तेल उत्पादक देशों ने संघर्ष के दौरान जिन कुओं और रिफाइनरियों का उत्पादन बंद या धीमा कर दिया था, उन्हें दोबारा चालू करना एक जटिल तकनीकी प्रक्रिया है। अमेरिकी पेट्रोलियम विश्लेषकों के अनुसार, ईंधन की कीमतें पूरी तरह से युद्ध-पूर्व (Pre-war) स्तर पर 2027 के मध्य तक ही लौट पाएंगी।
भारत की स्थिति मजबूत: पर्याप्त भंडार और सामान्य रिफाइनिंग
वैश्विक स्तर पर मचे इस हाहाकार के बीच भारत के लिए राहत की बात यह है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा पूरी तरह नियंत्रण में है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक उच्च स्तरीय समीक्षा के बाद स्पष्ट किया है:
मंत्रालय का आधिकारिक रुख: भारत के पास पेट्रोल, डीजल, एलपीजी (रसोई गैस) और पीएनजी का पर्याप्त बफर स्टॉक मौजूद है। देश की सभी प्रमुख रिफाइनरियां (सरकारी और निजी) अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं। चूंकि भारत ने संकट के दौरान अन्य वैकल्पिक मार्गों और स्रोतों से कच्चे तेल का आयात जारी रखा था, इसलिए देश में ईंधन की किल्लत जैसी कोई स्थिति नहीं है।
सरकार ने घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे ऊर्जा का जिम्मेदारी से उपयोग करें। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम स्थिर होते ही भारतीय तेल कंपनियां भी खुदरा कीमतों की समीक्षा कर आम जनता को बड़ी राहत दे सकती हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते पर वैश्विक नजर
16 Jun, 2026 01:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच तीन महीने से अधिक समय से जारी भीषण सैन्य संघर्ष (पश्चिम एशिया युद्ध) को समाप्त करने के लिए एक ऐतिहासिक शांति समझौता (Peace Deal) हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आधिकारिक घोषणा करते हुए बताया कि दोनों देशों के बीच बातचीत के बाद शांति समझौते (MOU) को अंतिम रूप दिया जा चुका है।
इस ऐतिहासिक समझौते पर 19 जून 2026 को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में औपचारिक रूप से आमने-सामने (In-Person) हस्ताक्षर किए जाएंगे। राष्ट्रपति ट्रंप के मुताबिक, इस हस्ताक्षर समारोह के लिए अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस (JD Vance) करेंगे।
डिजिटल हस्ताक्षर संपन्न, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलेगा
राजनयिक सूत्रों के अनुसार, इस समझौते के प्रारंभिक मसौदे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस और ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ डिजिटल (इलेक्ट्रॉनिक) माध्यम से पहले ही हस्ताक्षर कर चुके हैं।
नौसैनिक नाकेबंदी खत्म: समझौता पूरा होते ही राष्ट्रपति ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी हटाने के आदेश दे दिए हैं।
तनाव से राहत: ट्रंप ने सोशल मीडिया पर 'बधाई' संदेश लिखते हुए कहा कि शुक्रवार (19 जून) को औपचारिक हस्ताक्षर के बाद यह महत्वपूर्ण वैश्विक तेल मार्ग पूरी तरह टोल-फ्री और स्वतंत्र आवाजाही के लिए खुल जाएगा, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिलेगी।
14 बिंदुओं का मसौदा: परमाणु कार्यक्रम और जमी हुई संपत्ति पर डील
दोनों देशों के बीच मध्यस्थ देश पाकिस्तान (प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर) की मदद से 14 बिंदुओं का एक प्रारंभिक सहमति पत्र तैयार किया गया है। इसके तहत अगले 60 दिनों तक दोनों देशों के बीच तकनीकी स्तर की वार्ताएं जारी रहेंगी।
परमाणु प्रतिबद्धता: उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने स्पष्ट किया है कि इस डील के तहत अंतरराष्ट्रीय परमाणु निरीक्षकों को "बिल्कुल" ईरान लौटने की अनुमति दी जाएगी और ईरान कभी भी परमाणु हथियार न बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराएगा।
28 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज का सच: मीडिया में ईरान को पुनर्निर्माण के लिए 28 लाख करोड़ रुपये ($300 Billion) दिए जाने की खबरों को राष्ट्रपति ट्रंप ने 'फेक न्यूज' बताते हुए खारिज किया है। हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका वार्ता शुरू होने से पहले ईरान की फ्रीज (जब्त) की गई संपत्तियों में से लगभग 12 बिलियन डॉलर (96,000 करोड़ रुपये से अधिक) की राशि जारी करने पर सहमत हुआ है।
ईरानी राष्ट्रपति बोले- "यह हमारी जीत का दस्तावेज"
तेहरान का रुख: इस बीच, ईरान ने इस समझौते को अपनी बहुत बड़ी कूटनीतिक और सैन्य सफलता के रूप में पेश किया है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने इसे “जीत का दस्तावेज” घोषित करते हुए कहा कि ईरान ने युद्ध के मैदान और कूटनीति दोनों में अपनी शर्तों को मनवाया है। वहीं, ईरान के रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि इस समझौते ने साबित कर दिया है कि अमेरिकी और इजरायली ताकतों को हमारी इच्छा के आगे झुकना पड़ा। ईरान ने यह भी तंज कसा कि इस समझौते से इजराइल की बौखलाहट ही यह साफ करने के लिए काफी है कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में पूरी तरह सफल रहा है।
इस समझौते को 21वीं सदी के पश्चिम एशिया इतिहास का सबसे बड़ा 'यू-टर्न' माना जा रहा है, जो क्षेत्र में युद्ध को रोककर एक नए रणनीतिक युग की शुरुआत करेगा।
ब्रातिस्लावा में भारतीय संस्कृति की गूंज, पीएम ने कलाकारों की सराहना की
16 Jun, 2026 01:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ब्रातिस्लावा/नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य यूरोपीय देश स्लोवाकिया की अपनी दो दिवसीय ऐतिहासिक और अत्यंत सफल आधिकारिक यात्रा पूरी कर ली है। साल 1993 में चेकोस्लोवाकिया के विभाजन और स्वतंत्र स्लोवाकिया राष्ट्र के गठन के बाद पिछले 33 वर्षों में किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री का यह पहला स्लोवाकिया दौरा था। इस मील के पत्थर साबित होने वाले दौरे के दौरान दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को एक नया आयाम देते हुए इसे 'व्यापक साझेदारी' (Strategic Comprehensive Partnership) का दर्जा दिया है।
'ब्रातिस्लावा में बनारस': जब वैश्विक मंच पर दिखी काशी की छटा
इस ऐतिहासिक यात्रा का सबसे अनूठा और भावनात्मक पहलू तब सामने आया जब प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर अपने एक बेहद खास अनुभव को साझा करते हुए इसे 'ब्रातिस्लावा में बनारस का जुड़ाव' करार दिया।
दरअसल, स्लोवाकिया के राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी और पीएम मोदी ने संयुक्त रूप से वाराणसी (काशी) की सांस्कृतिक विरासत पर आधारित एक विशेष चित्रकला प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस प्रदर्शनी की खास बातें निम्नलिखित हैं:
यूरोपीय कलाकारों की नजर से काशी: इस प्रदर्शनी में उन स्लोवाक चित्रकारों और कलाकारों की उत्कृष्ट कृतियों को प्रदर्शित किया गया था, जिन्होंने हाल ही में भारत के प्राचीन शहर वाराणसी का दौरा किया था।
सांस्कृतिक पुल: स्लोवाक कलाकारों ने कैनवास पर बनारस के घाटों, गंगा आरती और वहां की आध्यात्मिक जीवंतता को उकेरा, जिसे देखकर पीएम मोदी भावविभोर हो गए।
पीएम का संदेश: प्रधानमंत्री ने कलाकारों को बधाई देते हुए लिखा, "कला और संस्कृति में दुनिया के दो अलग-अलग छोर पर बैठे लोगों को एक-दूसरे के करीब लाने की अद्भुत और जादुई क्षमता होती है।"
आतंकवाद पर प्रहार, शिक्षा और रोजगार पर बड़े समझौते
सांस्कृतिक आदान-प्रदान के साथ-साथ यह यात्रा भू-राजनीतिक और आर्थिक मोर्चे पर भी बेहद रणनीतिक रही। पीएम मोदी और स्लोवाक नेतृत्व के बीच हुई उच्च स्तरीय द्विपक्षीय वार्ता में कई महत्वपूर्ण समझौतों पर मुहर लगी:
आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता: दोनों देशों ने सीमा पार आतंकवाद और साइबर खतरों से निपटने के लिए खुफिया जानकारी साझा करने और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
शिक्षा और मोबिलिटी पार्टनरशिप: भारतीय छात्रों के लिए स्लोवाकिया के विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा के रास्ते आसान बनाने और कुशल भारतीय पेशेवरों (आईटी और इंजीनियरिंग) को स्लोवाकिया में रोजगार के कानूनी अवसर प्रदान करने के लिए 'माइग्रेशन एंड मोबिलिटी' समझौते को अंतिम रूप दिया गया।
हरित ऊर्जा और सेमीकंडक्टर: दोनों देशों ने ऑटोमोबाइल और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को मजबूत करने के साथ-साथ रिन्यूएबल एनर्जी (हरित ऊर्जा) के क्षेत्र में मिलकर काम करने का संकल्प लिया।
सर्वोच्च राजकीय सम्मान से नवाजे गए पीएम मोदी
इस दौरे की ऐतिहासिकता को रेखांकित करते हुए स्लोवाकिया सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने देश के सर्वोच्च राजकीय सम्मान (Highest State Honour) से विभूषित किया। यह सम्मान अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के बढ़ते कद, विश्व बंधुत्व की नीति और भारत-स्लोवाकिया के बीच प्रगाढ़ होती दोस्ती का सबसे बड़ा प्रतीक माना जा रहा है। इस सफल दौरे के बाद पीएम मोदी नई दिल्ली के लिए रवाना हो गए।
पुलिस मुठभेड़ में खत्म हुआ इंद्रपाल का खेल, सामने आई धमकी की कहानी
16 Jun, 2026 12:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
झज्जर। "दो हत्याएं कर चुका हूं, दो-चार और कर दूंगा, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता इसलिए पीछे हट जाओ।" मुठभेड से ठीक पहले यह खौफनाक धमकी शातिर अपराधी इंद्रपाल ने पुलिस टीम को दी थी। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के प्रभारी ने उसे हथियार डालकर आत्मसमर्पण करने की आखिरी चेतावनी दी, लेकिन आरोपी ने उसे अनसुना करते हुए पुलिस दल पर सीधे गोली चला दी। यह गोली वहां तैनात पीएसआई सचिन की बुलेट प्रूफ जैकेट पर जाकर लगी, जिससे वे बाल-बाल बच गए।
इसके जवाब में एसटीएफ इंचार्ज ने आत्मरक्षा में तीन गोलियां चलाईं, जो आरोपी इंद्रपाल को लगीं और वह लहूलुहान होकर जमीन पर गिर गया। जब पुलिस टीम ने आगे बढ़कर उसे पकड़ने की कोशिश की, तो उसने घायल अवस्था में भी दुस्साहस दिखाते हुए इंस्पेक्टर राकेश पर निशाना साधकर फायर कर दिया। इस हमले में गोली इंस्पेक्टर की बाजू को चीरती हुई निकल गई, जिससे वे जख्मी हो गए।
एक और बड़ी हत्या की साजिश में था शामिल
एसटीएफ बहादुरगढ़ के पीएसआई दीपक द्वारा स्थानीय थाने में दर्ज कराई गई शिकायत से एक बड़ा खुलासा हुआ है। इसके मुताबिक, रोहतक के कसरैटी गांव का रहने वाला यह कुख्यात अपराधी इंद्रपाल, विजय सैनी नामक व्यक्ति के बेटे सुनील सैनी की हत्या करने की ताक में था। इसी खूनी साजिश को अंजाम देने के लिए वह रविवार को दुजाना क्षेत्र में दाखिल हुआ था, लेकिन मुखबिर की सूचना पर मुस्तैद पुलिस टीम से उसका सामना हो गया और वह एनकाउंटर में ढेर हो गया।
मजिस्ट्रेट की देखरेख में हुआ पोस्टमार्टम
प्रशासनिक नियमों के तहत सोमवार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट एवं बेरी की एसडीएम रेणुका नांदल की प्रत्यक्ष निगरानी में डॉक्टरों के एक विशेष बोर्ड द्वारा शव का परीक्षण किया गया। इस पूरी प्रक्रिया की बकायदा वीडियोग्राफी भी कराई गई। पोस्टमार्टम से ठीक पहले मृतक का एक्स-रे कराया गया, जिसमें उसे तीन गोलियां लगने की बात सामने आई है। जांच के अनुसार, दो गोलियां शरीर के आर-पार निकल गईं जबकि एक गोली अंदर ही फंसी मिली। दुजाना थाना पुलिस ने मृतक के चाचा के आधिकारिक बयानों के आधार पर कागजी कार्रवाई पूरी कर शव को अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया, जिसके बाद देर शाम गांव में उसका दाह-संस्कार कर दिया गया।
परिजनों ने कहा- जैसा बोया, वैसा काटा
इस घटना के बाद नागरिक अस्पताल पहुंचे मृतक के परिजनों और चुनिंदा रिश्तेदारों के चेहरे पर गम से ज्यादा पछतावा साफ देखा जा सकता था। मृतक अपने पीछे एक बेटा और एक बेटी छोड़ गया है। अस्पताल परिसर में पुलिसकर्मियों से बातचीत के दौरान परिजनों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इंद्रपाल ने जैसा कर्म दूसरों के साथ किया था, आज उसके साथ भी वैसा ही न्याय हुआ है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि जिन बेकसूरों को उसने मौत के घाट उतारा था, आखिर उनके भी तो बच्चे थे। दुजाना थाने के जांच अधिकारी युद्धवीर सिंह ने बताया कि कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर मामला दर्ज कर लिया गया है।
पीएम मोदी की यात्रा: भारत-स्लोवाकिया सहयोग में नई संभावनाएं
16 Jun, 2026 12:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ब्रातिस्लावा। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा पहुँचे, जहाँ प्रवासी भारतीयों और स्थानीय नागरिकों ने उनका ऐतिहासिक और भव्य स्वागत किया। यह किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की स्लोवाकिया की पहली आधिकारिक यात्रा है। इस यात्रा को भारत और स्लोवाकिया के द्विपक्षीय संबंधों को एक नई ऊँचाई पर ले जाने और वहाँ रह रहे भारतीय समुदाय की प्राथमिकताओं व हितों को मजबूत करने की दिशा में एक बेहद सकारात्मक कदम माना जा रहा है। आगमन पर प्रधानमंत्री मोदी का अभिनंदन स्लोवाकिया की पारंपरिक कला के अनुसार 'रोटी और नमक' भेंट करके किया गया।
विदेशी कलाकारों ने गाया 'वंदे मातरम', पीएम ने की तारीफ
प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत के लिए ब्रातिस्लावा के ग्रैंड होटल में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का विशेष आयोजन किया गया था। इस दौरान स्लोवाक लोक समूह 'लुक्निका एन्सेम्बल' के कलाकारों ने भारत का राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' प्रस्तुत कर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। समूह की सदस्य नीना ने बताया कि प्रधानमंत्री को यह प्रस्तुति बेहद पसंद आई और उन्होंने स्लोवाक कलाकारों द्वारा किए गए हिंदी के सटीक उच्चारण की खुलकर तारीफ की। इसके साथ ही, प्रसिद्ध स्लोवाक आध्यात्मिक संगीत समूह 'महादेवा कीर्तन प्रोजेक्ट' ने भी अपनी विशेष प्रस्तुति दी। बैंड के संस्थापक मारेक जिलिनेक ने इसे अपने देश और कला समूह के लिए एक बड़ा सम्मान बताया।
प्रवासी भारतीयों का उत्साह और अटूट भरोसा
प्रधानमंत्री मोदी को अपने बीच पाकर स्लोवाकिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लोग बेहद भावुक और उत्साहित नजर आए। कार्यक्रम में शामिल प्रवासियों ने कहा कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि सात समंदर पार उन्हें देश के प्रधानमंत्री से इतने करीब से मिलने और हाथ मिलाने का सौभाग्य मिलेगा। प्रवासियों का मानना है कि इस ऐतिहासिक दौरे से न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का मान बढ़ेगा, बल्कि स्लोवाकिया में रह रहे भारतीयों की स्थानीय और प्रशासनिक समस्याओं के स्थायी समाधान के रास्ते भी खुलेंगे।
भारत-स्लोवाकिया संबंधों में नए अध्याय की शुरुआत
इस उच्च स्तरीय दौरे से दोनों देशों के बीच व्यापार, तकनीक, संस्कृति और कूटनीतिक सहयोग के कई नए द्वार खुलने की उम्मीद है। मध्य यूरोप में स्लोवाकिया भारत के लिए एक महत्वपूर्ण साझेदार बनकर उभर रहा है। प्रधानमंत्री की इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच वैश्विक मुद्दों के साथ-साथ आपसी आर्थिक साझेदारी को बढ़ाने पर भी गहन चर्चा होने की संभावना है, जो भविष्य में भारतीय प्रवासियों के लिए और अधिक सुरक्षित व समृद्ध माहौल तैयार करेगी।
उपभोक्ताओं के लिए अच्छी खबर, पानीपत में बिजली व्यवस्था होगी और मजबूत
16 Jun, 2026 11:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पानीपत। उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड (यूएचबीवीएनएल) ने अपनी विद्युत सेवाओं को पहले से कहीं अधिक सुदृढ़ और उपभोक्ता अनुकूल बनाने के लिए एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। बिजली निगम ने पानीपत सर्कल के अंतर्गत नए तैयार किए गए 'ऑपरेशन डिवीजन सिटी वेस्ट' के साथ-साथ दो नए सब-डिवीजनों—'असंध रोड' और 'जीटी रोड' को पूरी तरह से चालू करने की हरी झंडी दे दी है।
निगम की एडमिनिस्ट्रेशन विंग की ओर से जारी आधिकारिक दिशा-निर्देशों के मुताबिक, मैदानी दफ्तरों के पुनर्गठन की मुहिम के तहत पूर्व में 15 नए डिवीजन और 54 नए सब-डिवीजन स्वीकृत किए गए थे। इनमें से अब तक 10 डिवीजन और 29 सब-डिवीजनों में सुचारू रूप से कामकाज शुरू हो चुका है, जबकि इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए अब पानीपत में भी नया ढांचा सक्रिय किया जा रहा है।
पुराने सब-डिवीजनों को बांटकर बने नए दफ्तर
कार्यप्रणाली को आसान बनाने के लिए मॉडल टाउन सब-डिवीजन को विभाजित करके असंध रोड सब-डिवीजन का गठन किया गया है, वहीं सोनाली रोड सब-डिवीजन के बंटवारे के बाद जीटी रोड सब-डिवीजन को अस्तित्व में लाया गया है। इन नए प्रशासनिक केंद्रों के चालू हो जाने से क्षेत्रीय उपभोक्ताओं को बिजली बिल दुरुस्त करवाने, बिजली आपूर्ति के रखरखाव, फॉल्ट ठीक कराने और अपनी शिकायतों के त्वरित निपटारे में काफी सहूलियत मिलेगी। निगम ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन दफ्तरों का कामकाज फिलहाल मौजूदा एक्सईएन, एसडीओ और उपलब्ध कर्मचारियों के भरोसे ही चलाया जाएगा और इनका पूरा खर्च स्टाफ कॉस्ट बजट हेड से निकाला जाएगा।
अदालती स्टे वाले तकनीकी स्टाफ पर आया बड़ा फैसला
इस बड़े बदलाव के बीच यूएचबीवीएनएल ने असिस्टेंट लाइनमैन (ALM) और शिफ्ट अटेंडेंट (SA) संवर्ग के तकनीकी कर्मचारियों से जुड़े एक बेहद संवेदनशील मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करने के आदेश दिए हैं। निगम के एचआर (मानव संसाधन) विभाग ने इस बाबत सभी मुख्य अभियंताओं और संबंधित सर्कल अधिकारियों को एक महत्वपूर्ण पत्र जारी किया है।
कर्मचारियों को वापस ड्यूटी पर लेने के निर्देश
नए नियमों के तहत, जिन तकनीकी कर्मियों के सेवा संबंधी मामले फिलहाल उच्च न्यायालय में लंबित हैं और जिन्हें अदालत की तरफ से स्थगन आदेश (स्टे) मिला हुआ है, उन्हें आगामी आदेश तक उनके मौजूदा ड्यूटी स्थल से कार्यमुक्त (रिलीव) नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही, जिन कर्मचारियों को प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत पहले ही कार्यमुक्त किया जा चुका है, लेकिन वे अब कोर्ट के स्टे के दायरे में आ रहे हैं, उन्हें बिना किसी देरी के तुरंत प्रभाव से वापस काम पर बुला लिया जाएगा।
प्रशासन ने मांगी प्रभावित कर्मियों की सूची
निगम मुख्यालय ने सभी जोन प्रभारियों को सख्त हिदायत दी है कि वे अपने-अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों से अब तक रिलीव किए जा चुके सभी कर्मचारियों का पूरा ब्योरा तुरंत हेड ऑफिस भेजें। इसके अलावा, जिन कर्मचारियों के पास अदालत का स्टे ऑर्डर है, उनकी एक अलग से सूची तैयार कर मांगी गई है ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की न्यायिक अवमानना या कानूनी उलझन से बचा जा सके।
हादसे के बाद प्रशासन सख्त, सुपरवाइजर पर गिरी गाज और कंपनी हुई ब्लैकलिस्ट
