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एक माह में ही नेपाल सरकार के गृहमंत्री ने दिया इस्तीफा, वित्तीय मामलों में फंसे
24 Apr, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काठमांडु। नेपाल में जेन जी आंदोलन के बाद बनी नई बालेन सरकार को एक महीने का भी वक्त नहीं हुआ है और देश के गृहमंत्री सुदन गुरुंग ने इस्तीफा दे दिया है। यह वही सुदन गुरुंग हैं, जो जेन जी आंदोलन में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक चेहरा बनकर उभरे थे। भ्रष्टाचारियों के घर से एक-एक पाई निकाल लाने जैसे बयानों की खूब चर्चा हुआ करती थी। नेपाल सरकार में गृहमंत्री बनने के बाद भी उनकी पहली टिप्पणी यही थी कि मैं भ्रष्ट लोगों को दुनिया के सामने लाऊंगा और बताऊंगा कि नेपाल में कैसे बदलाव हो रहे हैं। उनका कहना था कि यदि उन्होंने कुछ गलती की होगी तो भ्रष्टाचार के मामले में मैं अपने पिता तक को नहीं बख्शूंगा। ऐसे में बड़ा सवाल है कि गुरुंग आखिर खुद कैसे वित्तीय मामलों में फंस गए।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इसकी वजह यह है कि मनी लॉन्ड्रिंग की जांच में घिरे एक कारोबारी के साथ उनके रिश्तों की चर्चा है। उन पर आरोप है कि उस कारोबारी के बिजनेस में सुदन गुरुंग ने कुछ निवेश किया है यानी हिस्सेदारी रखते हैं। यह विवाद इतना बढ़ा कि सुदन गुरुंग को इस्तीफा देना पड़ा। इसके अलावा उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में जांच भी कराई जा सकती है। कारोबारी दीपक भट्ठा का नाम बीते कुछ सालों में चर्चा में रहा है और उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच चल रही है। ऐसे में उनसे संबंधों के चलते सुदन गुरुंग को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी है।
रिपोर्ट के मुताबिक मामला यहीं खत्म नहीं हुआ है। पूर्व सचिव शारदा प्रसाद त्रितल और कई अन्य लोगों ने मांग की है कि इस्तीफा ही काफी नहीं है। इस मामले में गहन जांच की जरूरत है। शारदा प्रसाद ने कहा कि यदि सुदन गुरुंग के खिलाफ कुछ नहीं पाया जाता तो फिर उन्हें क्लीन चिट भी मिलनी चाहिए। इसके अलावा गलती पाई जाए तो जांच आगे बढ़नी चाहिए। इस मामले में जांच की मांग तेज हो रही है तो संभव है कि गुरुंग अगले कुछ दिनों में घिर सकते हैं।
माना जा रहा है कि नेपाल पीएम बालेंद्र शाह भी दबाव में हैं और उन्होंने ही इस्तीफा मांगा था। ऐसा इसलिए क्योंकि इस्तीफा देने से पहले सुदन गुरुंग आपदा प्रबंधन विभाग की एक बैठक में थे और मॉनसून से पहले की तैयारी का जायजा ले रहे थे। यह बैठक किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई थी और सुदन गुरुंग बीच में ही उठ गए। इसके बाद वह सीधे पीएम आवास से निकल गए और फिर मंत्री परिषद के लोगों से मिले। आधे घंटे के बाद उन्होंने सार्वजनिक तौर पर इस्तीफे का ऐलान कर दिया।
इससे स्पष्ट है कि वह पीएम बालेन शाह के कहने पर ही बैठक से निकले थे और उन्हें इस्तीफा देकर आए। हालांकि अब भी वह खुद को निर्दोष बता रहे हैं और क्रांति की गरिमा बनाए रखने की बात कर रहे हैं। उनका कहना है कि जिस शुचिता और ईमानदारी वाले शासन की चाह लेकर आंदोलन हुआ और 46 युवा उसमें मारे गए। उसका अपमान नहीं होना चाहिए। आंदोलन से बनी सरकार की गरिमा बनी रहनी चाहिए। इसलिए निष्पक्ष जांच के उद्देश्य से मैं इस्तीफा दे रहा हूं।
चुनाव आयोग की कार्रवाई: खर्च विवरण नहीं देने वालों पर 5 साल की पाबंदी
24 Apr, 2026 09:09 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणा। राज्य चुनाव आयोग ने आगामी निकाय चुनावों से पहले एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए 115 उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित कर दिया है। आयोग की नई अधिसूचना के मुताबिक, ये प्रत्याशी अगले 5 वर्षों तक किसी भी स्तर का चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।
यह सख्त कदम उन उम्मीदवारों पर उठाया गया है, जो पिछला चुनाव लड़ने के बाद अपने चुनावी खर्च का अनिवार्य विवरण (Expentiture Details) समय पर जमा करने में विफल रहे।
कार्रवाई का मुख्य कारण
चुनाव नियमों के अनुसार, परिणाम घोषित होने के 30 दिनों के भीतर हर प्रत्याशी को अपने खर्च का पूरा ब्योरा देना होता है। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह एक अनिवार्य प्रक्रिया है। जिन उम्मीदवारों ने तय समय सीमा के भीतर और नोटिस मिलने के बाद भी रिकॉर्ड पेश नहीं किया, उन्हें जिला निर्वाचन अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर अयोग्य ठहराया गया है।
चुनावी खर्च की निर्धारित सीमाएं
आयोग ने विभिन्न पदों के लिए खर्च की अधिकतम सीमा तय की है, जिसका उल्लंघन करना दंडनीय है:
पद का नाम
अधिकतम खर्च सीमा
नगर निगम महापौर (Mayor)
₹30 लाख
नगर परिषद अध्यक्ष
₹20 लाख
नगर निगम पार्षद
₹7.5 लाख
जिला परिषद सदस्य
₹6 लाख
नगर परिषद सदस्य
₹4 लाख
सरपंच
₹2 लाख
क्षेत्रवार अयोग्य उम्मीदवारों की संख्या
आयोग द्वारा जारी सूची के अनुसार, विभिन्न निकायों के अयोग्य घोषित प्रत्याशियों का विवरण इस प्रकार है:
नारनौल नगर परिषद: 41 उम्मीदवार (सर्वाधिक)
सोनीपत नगर निगम: 18 उम्मीदवार
पुन्हाना नगर पालिका: 17 उम्मीदवार
नूंह नगर परिषद: 14 उम्मीदवार
राजौंद नगर पालिका: 13 उम्मीदवार
अन्य: झज्जर (5), फिरोजपुर झिरका (5) और टोहाना (1)।
‘ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी’ के साथ प्रभावी व सफल नौसैनिक नाकेबंदी भी जारी
24 Apr, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान के साथ अपने युद्धविराम को बढ़ा दिया है, जबकि व्यापक नौसैनिक नाकेबंदी जारी है। व्हाइट हाउस ने कहा है कि बातचीत के लिए कोई समय-सीमा तय नहीं है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लीविट ने कहा कि अमेरिका दोहरी रणनीति अपना रहा है सैन्य हमलों को रोकते हुए वित्तीय और समुद्री प्रतिबंधों को और कड़ा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने युद्धविराम के विस्तार की घोषणा की है…और ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के कारण पूरी तरह बदनाम हो चुके एक शासन को उदारता से कुछ लचीलापन भी दिया है।
उन्होंने कहा कि सैन्य कार्रवाई में विराम का मतलब दबाव में कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि सैन्य और प्रत्यक्ष हमलों पर युद्धविराम है लेकिन ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी’ जारी है और प्रभावी व सफल नौसैनिक नाकेबंदी भी जारी है। इस नाकेबंदी से ईरान को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। लीविट ने कहा कि हम इस नाकेबंदी के जरिए उनकी अर्थव्यवस्था को पूरी तरह जकड़ रहे हैं…उन्हें रोज़ 500 मिलियन डॉलर का नुकसान हो रहा है और ईरान तेल की खेप भेजने या भुगतान बनाए रखने में असमर्थ है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा कि आर्थिक दबाव बढ़ने के बावजूद, प्रशासन ने बातचीत के लिए कोई समय-सीमा तय करने से परहेज किया है। राष्ट्रपति ने कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं की है… अंततः समय-सीमा का निर्धारण कमांडर-इन-चीफ द्वारा किया जाएगा और बातचीत के लिए कम समय होने की खबरों को खारिज किया। जब उनसे पूछा गया कि क्या युद्धविराम या नाकेबंदी अनिश्चित काल तक जारी रहेगी, तो लीविट ने जवाब देने से इनकार कर दिया और कहा कि राष्ट्रपति ही तय करेंगे कि “कब उन्हें लगे कि यह संयुक्त राज्य अमेरिका और अमेरिकी जनता के हित में है।”
उन्होंने कहा कि अमेरिकी वार्ताकार पहले ही ईरानी समकक्षों से सीधे संपर्क कर चुके हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि अंततः निर्णय लेने का अधिकार किसके पास है। प्रशासन के रुख का बचाव करते हुए लीविट ने कहा कि वॉशिंगटन के पास बढ़त है। उन्होंने कहा कि इस समय सभी पत्ते राष्ट्रपति ट्रंप के हाथ में हैं… ईरान बहुत कमजोर स्थिति में है। उन्होंने कहा कि संकट के दौरान राष्ट्रपति के सार्वजनिक बयानबाजी से बातचीत पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा है। अमेरिका और राष्ट्रपति ट्रंप अपनी मांगों और ‘रेड लाइन्स’ को लेकर बहुत स्पष्ट रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन विमानन क्षेत्र के घटनाक्रमों पर नजर रख रहा है, खासकर स्पिरिट एयरलाइंस के संभावित राहत पैकेज की खबरों के बीच, लेकिन इस पर कोई विवरण नहीं दिया।
भारत, चीन और कई देश नरक, नौकरियों पर कब्जा कर उठा रहे फायदा
24 Apr, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने बयानों से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। अपने ट्रुथ सोशल पर एक बेहद कड़ा और विवादित पत्र पोस्ट करते हुए ट्रंप ने भारत, चीन और कई अन्य देशों को नरक बताया है। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिका की दशकों पुरानी जन्मसिद्ध नागरिकता की नीति पर तीखा प्रहार किया है। इस पत्र में कैलिफ़ोर्निया के टेक सेक्टर में भर्ती के तरीकों को लेकर कुछ दावे किए गए हैं। इसमें आरोप लगाया गया है कि ज़्यादातर नौकरियां भारत और चीन के लोगों के पास हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पत्र में कहा गया है कि दूसरों के लिए मौके बहुत कम हैं, हालांकि इस दावे के समर्थन में कोई सबूत नहीं दिया गया है। यह पत्र जन्मसिद्ध नागरिकता को लेकर चल रही बहस पर केंद्रित है। यह एक अहम मुद्दा है जो अमेरिका में राजनीतिक और कानूनी चर्चाओं में फिर से उठ खड़ा हुआ है। पत्र में दावा किया गया है कि इस नीति की वजह से अप्रवासी अपने बच्चों के लिए नागरिकता हासिल कर लेते हैं और बाद में परिवार के दूसरे सदस्यों को भी बुला लेते हैं।
पत्र में तर्क दिया गया है कि जन्मसिद्ध नागरिकता के मुद्दे पर फ़ैसला अदालतों या वकीलों को नहीं, बल्कि पूरे देश की जनता को वोट के जरिए करना चाहिए। इसमें सोशल मीडिया पर हुए एक पोल का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि ज़्यादातर लोग इस नीति पर रोक लगाने के पक्ष में हैं। साथ ही, इस मामले को देख रही कानूनी संस्थाओं पर भी अविश्वास जताया है। इस पत्र में अमेरिकन सिविल लिबर्टीज़ यूनियन की भी आलोचना की गई है। इस पर आरोप लगाया गया है कि यह ऐसी नीतियों का समर्थन करता है जिनसे अमेरिकी नागरिकों के बजाय अवैध अप्रवासियों को फ़ायदा होता है।
पत्र में इस संगठन को एक अपराधी संस्था बताया गया है। यहां तक कि यह भी सुझाव दिया गया है कि इस पर कानूनों के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। ये गंभीर कानूनी प्रावधान हैं जिनका इस्तेमाल आम तौर पर संगठित अपराधों के ख़िलाफ किया जाता है। पत्र में आरोप लगाया गया है कि अप्रवासी स्वास्थ्य सेवा जैसी सार्वजनिक सुविधाओं का गलत फ़ायदा उठाते हैं। इसमें इमरजेंसी रूम में इलाज के लिए जाने का ज़िक्र करते हुए दावा किया गया है कि बिना दस्तावेज़ वाले लोगों के इलाज का खर्च टैक्स देने वाले लोगों को उठाना पड़ता है। इसके अलावा, कैलिफ़ोर्निया जैसे राज्यों में कल्याणकारी योजनाओं में धोखाधड़ी को लेकर भी चिंता जताई गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक पत्र में जन्मसिद्ध नागरिकता को लेकर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई का भी ज़िक्र किया गया है। इसमें अदालत में पेश किए गए कानूनी तर्कों पर असंतोष जताया गया है। पत्र में तर्क दिया कि संविधान की व्याख्या अब आज की असलियत से पूरी तरह कट चुकी है। यह बात आज के जमाने में यात्रा और अप्रवासन के बदलते तरीकों के संदर्भ में खास तौर पर कही गई है।
स्कूलों को धमकी भरे मेल से दहशत, सुरक्षा एजेंसियां सतर्क
23 Apr, 2026 12:11 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अंबाला। अंबाला के सैन्य क्षेत्र और शहर के कई प्रतिष्ठित स्कूलों को ईमेल के माध्यम से बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद हड़कंप मच गया है। वीरवार सुबह मिली इस सूचना के बाद सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस बल पूरी तरह मुस्तैद हैं।
सैन्य क्षेत्र के स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी: अलर्ट पर पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां
अंबाला छावनी (कैंट) स्थित आर्मी पब्लिक स्कूल की जूनियर व सीनियर शाखाओं सहित केंद्रीय विद्यालय (नंबर 1, 2, 3 और 4) और एक अन्य बड़े निजी स्कूल को निशाना बनाने की धमकी दी गई है। यह चेतावनी ईमेल के माध्यम से भेजी गई, जिसके बाद प्रशासन में खलबली मच गई।
स्थिति नियंत्रण में, जारी है चेकिंग अभियान
धमकी मिलने के बावजूद स्कूलों में अफरातफरी का माहौल नहीं बनने दिया गया:
छुट्टी नहीं: वर्तमान में किसी भी स्कूल में छुट्टी नहीं की गई है और शैक्षणिक गतिविधियां जारी हैं।
सघन जांच: पुलिस प्रशासन और बम निरोधक दस्ते ने सभी संबंधित स्कूलों के परिसर की बारीकी से तलाशी ली है। पुलिस का दावा है कि स्थिति पूरी तरह सामान्य है और घबराने की आवश्यकता नहीं है।
मेल की सामग्री: अपुष्ट सूत्रों के अनुसार, ईमेल में 'खालिस्तान जिंदाबाद' के नारे और विस्फोट करने की बात कही गई है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर अभी इस मेल के विवरण की पुष्टि होना बाकी है।
छावनी में अभेद्य सुरक्षा: सेना ने संभाला मोर्चा
चूंकि मामला सैन्य क्षेत्र (कैंट) से जुड़ा है, इसलिए सुरक्षा व्यवस्था को बेहद कड़ा कर दिया गया है:
सैन्य पुलिस की तैनाती: स्थानीय पुलिस के साथ-साथ मिलिट्री पुलिस और सेना के जवानों ने भी स्कूलों के बाहर मोर्चा संभाल लिया है।
सख्त निगरानी: स्कूल परिसर के आसपास किसी भी बाहरी व्यक्ति या संदिग्ध वाहन को रुकने की इजाजत नहीं दी जा रही है। चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बलों का पहरा है।
जांच के घेरे में 'साइबर साजिश'
खुफिया एजेंसियां और साइबर सेल ईमेल के स्रोत का पता लगाने में जुटी हैं:
ट्रेसिंग: तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा ईमेल के सर्वर और लोकेशन को ट्रेस किया जा रहा है ताकि भेजने वाले की पहचान हो सके।
पुराना कनेक्शन: गौरतलब है कि इस साल 26 जनवरी से पहले भी अंबाला के 15 स्कूलों को इसी तरह की फर्जी धमकियां मिली थीं। पुलिस अब इस पहलू पर भी काम कर रही है कि क्या इन दोनों वारदातों के पीछे एक ही शरारती तत्व या गिरोह सक्रिय है।
चीन के ह्यूमनॉइड रोबोट की रफ्तार से पूरी दुनिया हैरत में
23 Apr, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। पडोसी देश चीन ने रोबोटिक्स के क्षेत्र में अपनी गहरी छाप छोड़ी है, और हालिया प्रगति ने पूरी दुनिया को हैरत में डाल दिया है। चीन में हाल ही में रोबोट्स का मैराथन आयोजित किया गया था, जिसमें देश के कई ह्यूमनॉइड मशीनों ने भाग लिया। इस मैराथन में चीनी रोबोटिक्स कंपनी यूनिट्री रोबोटिक्स ने अपने नवीनतम ‘एच1’ ह्यूमनॉइड रोबोट की रफ्तार से पूरी दुनिया को हैरत में डाल दिया है। एक मैराथन के दौरान जारी किए गए वीडियो में यह रोबोट ट्रैक पर 10.1 मीटर प्रति सेकंड, यानी लगभग 36 किलोमीटर प्रति घंटा की अविश्वसनीय गति से दौड़ता दिखा है। यह रफ्तार विश्व के सबसे तेज धावक, जमैका के दिग्गज एथलीट उसैन बोल्ट द्वारा 2009 में बनाए गए 100 मीटर विश्व रिकॉर्ड की औसत गति के बेहद करीब है। उस ऐतिहासिक दौड़ में, उसैन बोल्ट ने 9.58 सेकंड में 100 मीटर की दूरी तय की थी, जिसकी औसत गति लगभग 10.44 मीटर प्रति सेकंड थी। यूनिट्री का ‘एच1’
अब इस जादुई आंकड़े के बेहद करीब पहुंच गया है। कंपनी ने वीडियो जारी करते हुए गर्व से लिखा, ’10 मीटर/सेकंड!! यूनिट्री ने फिर तोड़ा वर्ल्ड रिकॉर्ड। एक आम इंसान के शरीर वाले आकार के साथ वर्ल्ड चैंपियन की स्पीड।’ ‘एच1’ रोबोट को विशेष रूप से इंसानी चाल और गतिशीलता की नकल करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसका कुल वजन 62 किलोग्राम है और इसके पैरों की लंबाई लगभग 0.8 मीटर है। इसकी अद्भुत गति क्षमताओं के पीछे इन-हाउस विकसित हाई-टॉर्क जॉइंट मोटर्स, एक अनुकूलित गियर सिस्टम और लिदारल तथा डेप्थ कैमरा जैसी अत्याधुनिक सेंसिंग तकनीक का संयोजन है।
हाई-स्पीड टेस्ट के दौरान रोबोट के प्रदर्शन को अधिकतम करने के लिए कुछ गैर-आवश्यक हिस्सों, जैसे कि सिर, को हटा दिया गया था। यूनिट्री रोबोटिक्स के सीईओ वांग जिंगजिंग ने तो यहां तक दावा किया है कि 2026 के मध्य तक उनके ह्यूमनॉइड रोबोट 100 मीटर की रेस में 10 सेकंड की बाधा को भी तोड़ देंगे। इस बीच, चीन की ही एक अन्य कंपनी मिररमी ने फरवरी 2026 में अपना प्रतिद्वंद्वी रोबोट ‘बोल्ट’ पेश किया है, जो 175 सेंटीमीटर लंबा और 75 किलो वजनी है और यह भी 10 मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से दौड़ने में सक्षम है। अब तकनीक और रोबोटिक्स के शौकीनों की नजरें 19 अप्रैल को बीजिंग में होने वाली ‘ह्यूमनॉइड रोबोट हाफ मैराथन’ पर टिकी हैं। इस महामुकाबले में 70 से अधिक टीमें हिस्सा लेने के लिए लगातार ट्रायल कर रही हैं।
NIT कुरुक्षेत्र में लगातार घटनाओं पर मानवाधिकार आयोग की कार्रवाई, प्रशासन से जवाब तलब
23 Apr, 2026 11:49 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणा। मानवाधिकार आयोग ने कुरुक्षेत्र स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) में छात्रों द्वारा आत्महत्या करने और जान देने की कोशिश के बढ़ते मामलों पर कड़ा संज्ञान लिया है। आयोग ने इन घटनाओं को बेहद गंभीर मानते हुए संस्थान के प्रशासन, जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से जवाब तलब किया है।
NIT कुरुक्षेत्र में छात्रों की मौतों पर मानवाधिकार आयोग सख्त: रिपोर्ट तलब
हरियाणा मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने संस्थान में हो रही लगातार दुखद घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की है। आयोग का मानना है कि छात्रों की सुरक्षा और उनके मानसिक स्वास्थ्य को लेकर संस्थान की मौजूदा व्यवस्था में बड़ी खामियां हैं।
हालिया घटनाओं का सिलसिला
संस्थान में पिछले कुछ महीनों के भीतर कई ऐसी घटनाएं हुई हैं जिन्होंने सबको झकझोर कर रख दिया है:
18 अप्रैल: प्रथम वर्ष के एक छात्र ने हॉस्टल की पांचवीं मंजिल से छलांग लगाकर जान देने की कोशिश की।
16 अप्रैल: द्वितीय वर्ष के एक छात्र का शव उसके कमरे में मिला।
फरवरी-मार्च: इन दो महीनों के दौरान भी दो छात्रों की मौत के मामले सामने आए थे।
संस्थान की कार्रवाई पर असंतोष
आयोग ने स्पष्ट किया कि प्रशासन द्वारा अब तक उठाए गए कदम, जैसे कि दो प्रोफेसरों का तबादला करना, नाकाफी हैं। आयोग के अनुसार:
मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी: यह स्थिति दर्शाती है कि कैंपस में काउंसलिंग और संकट प्रबंधन की उचित व्यवस्था नहीं है।
प्रशासनिक जिम्मेदारी: शैक्षणिक संस्थानों का दायित्व केवल पढ़ाई कराना ही नहीं, बल्कि छात्रों के जीवन की रक्षा करना और उन्हें सुरक्षित माहौल देना भी है।
इन अधिकारियों से मांगा गया जवाब
आयोग ने मामले की तह तक जाने के लिए विस्तृत रिपोर्ट मांगी है:
NIT निदेशक: उन्हें आत्महत्या की परिस्थितियों, उपलब्ध कराई जा रही काउंसलिंग सेवाओं, सुरक्षा प्रबंधों और अचानक हॉस्टल खाली कराने के फैसलों पर स्पष्टीकरण देना होगा।
DC और SP कुरुक्षेत्र: जिला प्रशासन और पुलिस से अब तक की गई जांच और सुरक्षा के लिए उठाए गए प्रशासनिक कदमों की जानकारी मांगी गई है।
सुनवाई की तारीख
असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा के मुताबिक, आयोग इस मामले पर 19 मई 2026 को अगली सुनवाई करेगा। सभी संबंधित अधिकारियों को इस तारीख से एक सप्ताह पहले अपनी विस्तृत रिपोर्ट आयोग के कार्यालय में जमा करनी होगी।
सांपला नगरपालिका चुनाव में BJP का दांव, प्रवीण कोच को चेयरमैन उम्मीदवार घोषित
23 Apr, 2026 11:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रोहतक। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के गढ़ माने जाने वाले गढ़ी सांपला-किलोई निर्वाचन क्षेत्र में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सांपला नगर पालिका चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी चुनावी बिसात बिछाते हुए चेयरमैन और वार्ड प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी है।
सांपला नगर पालिका चुनाव: भाजपा ने प्रवीण कोच पर खेला दांव
भाजपा ने चेयरमैन पद के लिए प्रवीण कोच को अपना उम्मीदवार बनाया है। गौर करने वाली बात यह है कि प्रवीण कोच हाल ही में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं। उनके पास नगर पालिका का पुराना अनुभव है; उन्होंने 2008 में पार्षद का चुनाव जीता था और पार्षदों के समर्थन से चेयरमैन की कुर्सी भी संभाली थी।
नामांकन की तैयारी
प्रवीण कोच शुक्रवार को अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। इस दौरान भाजपा के कई दिग्गज नेताओं के शामिल होने की संभावना है, जो इसे शक्ति प्रदर्शन के रूप में देख रहे हैं। हालांकि, पार्टी के भीतर उन कार्यकर्ताओं को मनाना एक चुनौती होगी जो लंबे समय से चेयरमैन की टिकट की आस लगाए बैठे थे।
वार्ड प्रत्याशियों का गणित
भाजपा ने कुल 16 वार्डों में से 15 उम्मीदवारों के नामों का एलान कर दिया है। केवल वार्ड नंबर 12 के प्रत्याशी की घोषणा अभी शेष है।
महिला प्रतिनिधित्व: पार्टी ने सामाजिक संतुलन साधने के लिए छह महिलाओं को चुनावी मैदान में उतारा है।
उम्मीदवारों की सूची:
वार्ड,प्रत्याशी का नाम
1,रमेश दलाल
2,हेमंत
3,महेश बंसल
4,कमल खटक
5,संजय कुमार
6,विकास
7,अंजु धमीजा
8,अजय
9,अजीत ओहल्याण
10,मीनाक्षी
11,रविका
13,सोनिया
14,आशा
15,अंजू
16,अश्विन
चीन से ईरान को भेजा गिफ्ट, हमने पकड़ा, इसमें कुछ चीजें जो बहुत अच्छी नहीं थीं
23 Apr, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार आरोप लगाया है कि चीन ईरान को युद्ध में हथियार और दूसरी मदद पहुंचा रहा है। ट्रंप ने बुधवार को एक बयान में कहा कि चीन से ईरान के लिए एक गिफ्ट भेजा था, लेकिन इसे अमेरिका ने पकड़ लिया। ट्रंप ने यह भी कहा कि ये अमेरिका के लिए धैर्य की परीक्षा है। बता दें अमेरिका ने चीन पर पहले भी इस तरह के आरोप लगाए हैं। हालांकि चीन ने इसे बेबुनियाद बताते हुए आरोपों को खारिज किया है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक इंटरव्यू में कहा था कि अमेरिका को चीन से गिफ्ट ले जाने वाली नाव मिली है। ट्रंप ने कहा कि हमने कल एक जहाज पकड़ा जिस पर कुछ चीजें थीं, जो बहुत अच्छी नहीं थीं, शायद चीन से कोई गिफ्ट, मुझे नहीं पता। मुझे लगा है कि प्रेसिडेंट शी और हमारे बीच सहमति है, लेकिन ठीक है। जंग ऐसे ही चलती है, है ना?”
बता दें इससे पहले अमेरिका ने ईरान के झंडे वाले कंटेनर जहाज तूस्का को जब्त किया है, जिससे तनाव बढ़ गया है। अमेरिका ने कहा है कि शिप से कई आपत्तिजनक चीजें बरामद हुई हैं। मंगलवार को रिपब्लिकन नेता निक्की हेली ने एक बयान में कहा था कि इस शिप से चीन ईरान को मिसाइल केमिकल की डिलीवरी कर रहा था। वहीं अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक शिप पर कुछ धातु, पाइप और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल मिसाइल प्रोग्राम में भी किया जा सकता है। एक अधिकारी ने बताया कि यह जहाज पहले भी ऐसे सामान ले जा चुका है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने जब्त किए शिप को लेकर किए जा रहे दावों को भी झूठा बताया। उन्होंने कहा कि जहाज एक विदेशी कंटेनर शिप है और चीन का इससे कोई संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि चीन सैन्य सामान के एक्सपोर्ट को बहुत सावधानी और जिम्मेदारी के साथ करता है।
वहीं अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि अगर चीन ईरान को हथियार या युद्ध से जुड़ा सामान देता है, तो यह अमेरिका की रेड लाइन को पार करने जैसा होगा। बता दें ट्रंप पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि जो देश ईरान को हथियार देगा, उस पर 50 फीसदी तक टैरिफ लगाया जा सकता है और इसमें कोई छूट नहीं होगी। ऐसे में नए आरोपों के बाद दोनों देशों के बीच नई जुबानी जंग छिड़ सकती है।
ट्रंप ने बढ़ाया सीजफायर का समय, अपनी नाकामी छिपाने पाकिस्तान का लिया नाम
23 Apr, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार तड़के ईरान के साथ चल रहे तनाव के बीच सीजफायर की अवधि आखिरी समय पर बढ़ा दी। यह फैसला उस वक्त लिया गया जब सीजफायर की समय सीमा खत्म होने वाली थी और खुद ट्रंप एक दिन पहले संकेत दे चुके थे कि अगर समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका फिर से ईरान पर बमबारी शुरू कर सकता है। ऐसे में अचानक सीजफायर बढ़ाने का फैसला कई सवाल खड़े करता है। क्या यह रणनीतिक कदम है या फिर अमेरिका अपनी असफलता को छिपाने की कोशिश कर रहा है?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान की सरकार इस समय अंदर से बंटी हुई है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर और पीएम शहबाज शरीफ के अनुरोध पर अमेरिका ने हमला टाल दिया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार है, लेकिन फिलहाल ईरान को एक संयुक्त प्रस्ताव देने का समय दिया जा रहा है। हालांकि, इस दौरान ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रहेगी।
यहीं से इस पूरे घटनाक्रम का विरोधाभास सामने आता है। एक तरफ अमेरिका सीजफायर की बात कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ ईरान के समुद्री व्यापार को रोकने के लिए सख्त नाकेबंदी कर रखी है। अंतरराष्ट्रीय कानून के नजरिए से देखें तो किसी देश के बंदरगाहों की नाकेबंदी को युद्ध जैसी कार्रवाई माना जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह वास्तव में सीजफायर है या दबाव बनाने की रणनीति? अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने साफ कहा है कि ईरान के खार्ग आइलैंड पर तेल भंडारण जल्द ही भर जाएगा, जिससे ईरान को अपने तेल उत्पादन को रोकना पड़ सकता है।
खार्ग आइलैंड ईरान के तेल निर्यात का प्रमुख केंद्र है। इसका मतलब यह है कि अमेरिका सीधे तौर पर ईरान की अर्थव्यवस्था को निशाना बना रहा है। साथ ही अमेरिका ने चेतावनी दी है कि जो भी जहाज या व्यक्ति ईरान की मदद करेगा, उस पर सख्त प्रतिबंध लगाए जाएंगे। ईरान ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर कालीबाफ के सलाहकार महदी मोहम्मदी ने ट्रंप के बयान को बेकार बताया और कहा इसका कोई मतलब नहीं है।
इस बीच कूटनीतिक मोर्चे पर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वैंस का इस्लामाबाद दौरा रद्द कर दिया गया है। वह दूसरे दौर की वार्ता का नेतृत्व करने वहां जाने वाले थे। उनके साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और वरिष्ठ सलाहकार जेयर्ड कुशनर भी जाने वाले थे। दौरा रद्द होने से साफ होता है कि बातचीत की प्रक्रिया भी पूरी तरह स्थिर नहीं है।
जानकारों का मानना है कि ट्रंप की ओर से पाकिस्तान का नाम आगे करना एक तरह से रणनीतिक असमंजस को छिपाने की कोशिश है। असल में ट्रंप प्रशासन एक कठिन संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। एक तरफ वह ईरान पर अधिकतम दबाव बनाए रखना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ खुले युद्ध से भी बचना चाहता है। सीजफायर बढ़ाना इसी रणनीति का हिस्सा है, जहां बातचीत की गुंजाइश भी बनी रहे और दबाव भी कम न हो, लेकिन इस रणनीति में सबसे बड़ा विरोधाभास यही है कि सीजफायर के बावजूद आक्रामक आर्थिक और समुद्री कदम जारी हैं। ईरान इसे साफ तौर पर उकसावे की कार्रवाई मान रहा है और उसने संकेत दिया है कि वह ऐसे दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। ईरान का दावा है कि उसे प्रतिबंधों से निपटना आता है और वह अपने हितों की रक्षा करना भी जानता है।
नेपाल में बालेन शाह के हनीमून पीरियड में ही शुरु हो गया व्यापक जनआक्रोश.....सड़क पर लोग
23 Apr, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काठमांडू। नेपाल में बालेन शाह की सरकार बनने के मात्र एक माह के भीतर ही व्यापक जनआक्रोश देखने को मिल रहा है। काठमांडू के मेयर से देश के प्रधानमंत्री पद तक पहुंचे शाह के लिए सत्ता की शुरुआत काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो रही है। दो-तिहाई बहुमत के बावजूद उनकी सरकार को सड़कों से लेकर प्रशासनिक केंद्र ‘सिंघा दरबार’ तक विरोध का सामना करना पड़ रहा है। जानकार के मुताबिक 6 माह का समय किसी भी सरकार के लिए हनीमून पीरिड होता हैं, लेकिन बोलेन के खिलाफ सड़कों पर उतरा यह जनसैलाब बताता हैं कि वे अपने किए गए वादों पर खरे उतरते नहीं दिख रहे है।
इस विरोध का सबसे बड़ा कारण भारत से आने वाले सामान पर लगाया गया नया अनिवार्य सीमा शुल्क है। नेपाल सरकार के फैसले के तहत 100 रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर शुल्क लगाया जा रहा है, जिससे खासतौर पर सीमावर्ती क्षेत्रों के लोग प्रभावित हुए हैं। इन इलाकों के निवासी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भारत पर काफी हद तक निर्भर रहते हैं। इसके बाद यह नीति उनके लिए आर्थिक बोझ बन गई है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार ने यह निर्णय लेते समय जमीनी वास्तविकताओं को नजरअंदाज किया है, जिससे आम जनता की परेशानियां बढ़ गई हैं।
दूसरा बड़ा मुद्दा छात्र संगठनों से जुड़ा है। बालेन शाह सरकार पर आरोप है कि उसने राजनीतिक दलों से जुड़े छात्र संघों को दरकिनार करने या कमजोर करने की कोशिश की है। इस कारण युवाओं में गहरी नाराजगी देखी जा रही है। छात्र नेताओं का कहना है कि सरकार संवाद के बजाय दमनकारी रवैया अपना रही है। देशभर में स्कूल और कॉलेज के छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किए हैं, जिसमें हजारों की संख्या में छात्र शामिल हुए। कई जगहों पर छात्रों को स्कूल यूनिफॉर्म में तख्तियां लेकर नारेबाजी करते देखा गया, जो इस आंदोलन के व्यापक सामाजिक प्रभाव को दर्शाता है। विरोध का तीसरा बड़ा केंद्र गृह मंत्री सूडान गुरुंग के खिलाफ लगे आरोप हैं। उन पर आय से अधिक संपत्ति रखने और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन में शामिल होने के आरोप लगाए गए हैं। विपक्षी दलों और प्रदर्शनकारियों का दावा है कि गुरुंग के कथित तौर पर ऐसे लोगों से संबंध रहे हैं जो वित्तीय अपराधों में संलिप्त रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों में इसतरह के दस्तावेजों का भी जिक्र किया गया है जो विवादास्पद निवेश और शेयरधारिता की ओर इशारा करते हैं। इन आरोपों के चलते उनके इस्तीफे की मांग तेज होती जा रही है और यह मुद्दा आंदोलन का प्रमुख हिस्सा बन गया है।
इन सभी कारणों से बालेन शाह सरकार पर बहुआयामी दबाव बन गया है। आर्थिक नीतियों को लेकर असंतोष, छात्रों का उग्र विरोध और सरकार के भीतर कथित भ्रष्टाचार के आरोप—इन सबने मिलकर स्थिति को गंभीर बना दिया है। जो विरोध शुरुआत में एक नीति के खिलाफ था, वह अब एक व्यापक राजनीतिक चुनौती का रूप ले चुका है। सड़कों पर बढ़ती भीड़ और लगातार हो रहे प्रदर्शनों से यह साफ है कि सरकार को जल्द ही ठोस कदम उठाना होगा।
बालेन शाह सरकार दबाव में
विरोध प्रदर्शन के पैमाने और तीव्रता में वृद्धि के साथ, बालेन शाह सरकार को कई मोर्चों पर प्रतिक्रिया देने के लिए बढ़ते दबाव का सामना करना पड़ रहा है: आर्थिक नीति संबंधी चिंताएँ, छात्र अशांति, और इसके रैंकों के भीतर अनुचितता के आरोप। नीतिगत निर्णयों पर असंतोष के रूप में जो शुरू हुआ वह अब एक व्यापक राजनीतिक चुनौती में बदल गया है, सड़कों पर और नेपाल के राजनीतिक परिदृश्य में विरोध की आवाज़ें तेज़ हो रही हैं।
रुसी टीवी एंकर ने इटली की पीएम मेलोनी को मूर्ख, जानवर व फासीवादी कहा
23 Apr, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रोम। इटली और रूस के बीच कूटनीतिक तनाव उस समय और बढ़ गया जब रूसी टीवी एंकर व्लादिमीर सोलोवियोव ने इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी। अपने शो में उन्होंने मेलोनी को “मूर्ख”, “जंगली जानवर”, “मानवता के लिए कलंक” और “नीच महिला” जैसे शब्दों से संबोधित किया। उन्होंने केवल इतना ही नहीं कहा बल्कि रूसी भाषा में मेलोनी को “फासीवादी” भी बताया और आरोप लगाया कि उन्होंने अपने वोटर्स के साथ-साथ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प को भी “धोखा” दिया है। इस तरह की व्यक्तिगत और तीखी टिप्पणी ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस बयान के बाद इटली सरकार ने सख्त प्रतिक्रिया दी। इटली के विदेश मंत्री ने बताया कि रोम में तैनात रूस के राजदूत को विदेश मंत्रालय में तलब किया गया। वहां इटली की तरफ से इस पूरे मामले पर औपचारिक विरोध दर्ज कराया गया और इस भाषा को “बेहद गंभीर और अस्वीकार्य” बताया। इटली ने साफ कहा है कि वह अपनी पीएम मेलोनी के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी बर्दाश्त नहीं करेगा। खास बात यह रही कि इस मुद्दे पर इटली की विपक्षी पार्टियां भी सरकार के साथ खड़ी नजर आईं और सभी ने मिलकर इस बयान की निंदा की।
दरअसल, इटली और रूस के रिश्ते पहले से ही तनावपूर्ण हैं। इसकी मुख्य वजह यूक्रेन है। इटली की सरकार लगातार यूक्रेन का समर्थन कर रही है और उसे सैन्य व मानवीय मदद भी दे रही है। इससे रुस नाराज है। वहीं मेलोनी की सरकार दक्षिणपंथी विचारधारा वाली है, लेकिन उनके गठबंधन में कुछ ऐसे दल भी हैं जिनके रूस के साथ पुराने संबंध हैं। इसके बावजूद मेलोनी ने यूक्रेन के मुद्दे पर रूस के खिलाफ सख्त रुख अपनाया हुआ है।
बता दें हाल में मेलोनी और ट्रंप के बीच भी दूरी देखने को मिली है। पहले दोनों को करीब माना जाता था, लेकिन ईरान युद्ध और कुछ अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर मेलोनी ने ट्रंप के बयानों से अलग रुख अपनाया, जिससे राजनीतिक समीकरण बदलते दिखे। इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि एक टीवी एंकर के बयान ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। पहले से ही यूक्रेन युद्ध के कारण तनाव झेल रहे यूरोप और रूस के रिश्ते अब और बिगड़ते नजर आ रहे हैं। आने वाले समय में यह विवाद और गहरा सकता है, क्योंकि इटली ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना जंग का मैदान: भारत आ रहे 'एपामिनोडेस' जहाज पर हमला
22 Apr, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ईरान-अमेरिका तनाव: ईरान और अमेरिका के मध्य बढ़ती तल्खी का सीधा असर अब होर्मुज स्ट्रेट पर दिखाई दे रहा है। इस सामरिक मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को दोनों देशों के बीच जारी खींचतान का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। शनिवार को एक भारतीय जहाज पर फायरिंग की घटना के बाद सोमवार को भी तनावपूर्ण स्थिति बनी रही, जब ईरान की इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने भारत आ रहे एक जहाज को रोककर अपने कब्जे में ले लिया।
जहाज पर फायरिंग की वजह फायरिंग के मामले में ईरान का पक्ष है कि जहाज बिना अनुमति के होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने का प्रयास कर रहा था। ईरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वह समुद्री सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करेगा। ईरान के अनुसार, सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने के कारण ही बल प्रयोग करना पड़ा।
किस जहाज को बनाया गया निशाना? लाइबेरिया के ध्वज वाला 'एपामिनोडेस' (EPAMINODES) नामक जहाज ईरान के होर्मुज स्ट्रेट को पार कर भारत के गुजरात स्थित मुंद्रा पोर्ट की ओर बढ़ रहा था। इसी दौरान उस पर फायरिंग की गई। ईरान का आरोप है कि जहाज के नेविगेशन सिस्टम में हेरफेर की गई थी, जिससे समुद्री सुरक्षा को खतरा पैदा हुआ। इसी कारण जहाज को जब्त कर लिया गया है।
प्रतिशोध की कार्रवाई? ईरानी मीडिया के अनुसार, यूनान (ग्रीक) के एक जहाज पर भी हमला हुआ है। माना जा रहा है कि यह कार्रवाई रविवार (20 अप्रैल) को अमेरिकी सेना द्वारा एक ईरानी जहाज को कब्जे में लेने का जवाब है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने महज 48 घंटों के भीतर अमेरिका से अपना बदला ले लिया है। फिलहाल, जब्त किए गए जहाजों—MSC FRANCESCA और EPAMINODES—पर लदे सामान के बारे में कोई आधिकारिक विवरण साझा नहीं किया गया है।
शांति वार्ता पर संकट, होर्मुज में फिर भड़का सैन्य तनाव
22 Apr, 2026 04:52 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान: दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य में एक बार फिर युद्ध की आहट सुनाई दे रही है। बुधवार को ईरानी सेना ने अंतरराष्ट्रीय जलसीमा से गुजर रहे तीन व्यापारिक जहाजों पर अंधाधुंध फायरिंग की, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका और इस्राइल के साथ ईरान की शांति वार्ता को लेकर कूटनीतिक प्रयास तेज थे।
हमले के पीछे ईरान का तर्क
ईरान की अर्धसैनिक इकाई 'रिवोल्यूशनरी गार्ड' ने बुधवार सुबह इस आक्रामक कार्रवाई को अंजाम दिया। जानकारी के अनुसार, ईरानी बल ने पहले एक कंटेनर जहाज पर गोलियां चलाईं और उसके तुरंत बाद दूसरे जहाज को निशाना बनाया। ईरानी मीडिया का दावा है कि इन जहाजों ने सैन्य चेतावनियों की अनदेखी की थी, जिसके कारण उन पर 'कानूनी कार्रवाई' की गई। कब्जे में लिए गए जहाजों की पहचान एमएससी फ्रांसिस्का और एपाामिनोड्स के रूप में हुई है। इसके कुछ देर बाद एक तीसरे जहाज 'यूफोरिया' पर भी हमला हुआ, जो फिलहाल ईरानी तट के पास फंसा हुआ है।
ट्रंप का दांव पड़ा उल्टा?
यह टकराव उस वक्त बढ़ा जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने बुधवार को समाप्त होने वाले संघर्षविराम (सीजफायर) को अनिश्चित काल के लिए बढ़ाने की घोषणा की थी। ट्रंप को उम्मीद थी कि इससे बातचीत का माहौल बनेगा, लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी जारी रहेगी। ईरान इसी बात से आक्रोशित है। ईरानी राजनयिकों का तर्क है कि जब तक अमेरिका अपनी घेराबंदी पूरी तरह खत्म नहीं करता, वे वार्ता की मेज पर नहीं लौटेंगे।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
होर्मुज में बढ़ते गतिरोध का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है:
तेल की कीमतें: अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड $98 प्रति बैरल के पार निकल गया है। युद्ध छिड़ने के बाद से इसमें 35% की वृद्धि हो चुकी है।
महंगाई की मार: ईंधन की सप्लाई बाधित होने से न केवल पेट्रोल-डीजल बल्कि माल ढुलाई महंगी होने के कारण आवश्यक वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ रही हैं। यदि यह मार्ग लंबे समय तक बाधित रहा, तो दुनिया के सामने भीषण मंदी का संकट खड़ा हो जाएगा।
क्षेत्रीय स्थिति और कूटनीति
शांति की कोशिशों के बीच पाकिस्तान अभी भी ईरान से किसी सकारात्मक संकेत की प्रतीक्षा कर रहा है। इस्लामाबाद अगले दौर की वार्ता आयोजित करना चाहता है, लेकिन ईरान ने अपना प्रतिनिधिमंडल भेजने से इनकार कर दिया है। मिस्र में तैनात ईरानी दूत मुजतबा फिरदौसी पोर ने साफ कहा कि घेराबंदी जारी रहने तक कोई समझौता संभव नहीं है।
अब तक का नुकसान
28 फरवरी से शुरू हुए इस खूनी संघर्ष ने भारी तबाही मचाई है
ईरान: लगभग 3,375 लोगों की मौत।
लेबनान: 2,290 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं।
इस्राइल: 23 नागरिक और 15 सैनिक हताहत।
अमेरिकी सेना: क्षेत्र में तैनात 13 सैनिकों ने जान गंवाई है।
ईरान के तेवर फिलहाल बेहद कड़े हैं। रिवोल्यूशनरी गार्ड ने चेतावनी दी है कि वे दुश्मन पर 'अकल्पनीय प्रहार' करेंगे। भले ही लेबनान में 10 दिनों का सीजफायर लागू हो, लेकिन दावों और जवाबी हमलों ने इसे बेहद कमजोर कर दिया है। जब तक कोई ठोस कूटनीतिक हल नहीं निकलता, तब तक समुद्र से लेकर जमीन तक अशांति बने रहने की आशंका है।
नेपाल में हंगामा, PM के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन
22 Apr, 2026 01:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काठमांडू:नेपाल में प्रधानमंत्री बालेन शाह के नेतृत्व वाली सरकार के विरुद्ध जन-आक्रोश प्रचंड हो गया है। सत्ता संभाले अभी एक माह का समय भी व्यतीत नहीं हुआ है, लेकिन पूरे देश में जनता विरोध में उतर आई है। राजधानी काठमांडू सहित विभिन्न महानगरों में छात्र, राजनैतिक दल और सामान्य नागरिक लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।
यह आंदोलन अब केवल गलियों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के मुख्य प्रशासनिक केंद्र सिंह दरबार तक की दहलीज पर पहुँच चुका है। विरोध का मुख्य कारण सरकार के कुछ हालिया फैसलों से उपजा असंतोष है। विशेषकर, भारत से आयात होने वाले 100 रुपये से अधिक के सामान पर अनिवार्य सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) लगाने के निर्णय ने आग में घी डालने का काम किया है।
सीमावर्ती इलाकों में भारी रोष
भारत-नेपाल सीमा पर बसे नागरिकों का तर्क है कि वे अपनी दैनिक आवश्यकताओं के लिए भारतीय बाजारों पर निर्भर हैं, ऐसे में यह नया नियम उनकी आजीविका को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार ने क्षेत्रीय परिस्थितियों की अनदेखी की है, जिससे आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है।
छात्र संगठनों का आंदोलन
असंतोष की दूसरी बड़ी वजह छात्र संघों के प्रति सरकार का सख्त रुख है। छात्र नेताओं का आरोप है कि प्रशासन राजनैतिक दलों से संबद्ध छात्र संगठनों के अस्तित्व को मिटाने का प्रयास कर रहा है। आंदोलन में हजारों छात्र अपनी स्कूल यूनिफॉर्म में शामिल होकर नारेबाजी कर रहे हैं, जो इस विद्रोह की व्यापकता को दर्शाता है।
गृह मंत्री पर गहराया भ्रष्टाचार का साया
प्रदर्शनों के केंद्र में गृह मंत्री सुदान गुरूंग भी हैं, जिन पर पद के दुरुपयोग और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के गंभीर आरोप लगे हैं। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों का दावा है कि गुरूंग के संबंध संदिग्ध व्यापारियों से रहे हैं। नेपाली मीडिया में उजागर हुए कुछ दस्तावेजों के बाद अब उनके इस्तीफे की मांग जोर पकड़ने लगी है, जिससे सरकार की साख पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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