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एपस्टीन ने कराई थी ट्रम्प से मुलाकात, नाबालिग थी जब दोनों ने किया यौन शोषण
8 Mar, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिका में न्याय विभाग ने कुख्यात यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े नए दस्तावेज जारी किए हैं। एक इंटरव्यू में महिला ने दावा किया कि एपस्टीन ने उसकी मुलाकात डोनाल्ड ट्रम्प से कराई थी। ट्रम्प ने उनका यौन शोषण किया। तब वे नाबालिग थीं। ये पेज पहले जारी नहीं किए गए थे। एपस्टीन फाइल्स में ट्रम्प का नाम 38 हजार से ज्यादा बार दर्ज है। रिकॉर्ड में 1990 के दशक में एपस्टीन के निजी विमान से 7-8 यात्राओं का जिक्र है। ट्रम्प के मार-ए-लागो क्लब की गेस्ट लिस्ट में भी शामिल हैं।
एफबीआई ने महिला के दावों से जुड़े चार इंटरव्यू किए थे लेकिन शुरुआती रिलीज में सिर्फ एक इंटरव्यू का सार दिखाया गया, जिसमें महिला ने एपस्टीन के खिलाफ आरोप बताए थे। बाकी तीन इंटरव्यू गायब होने पर सवाल उठ रहे थे। अधिकारियों ने अब कहा कि इन्हें गलती से ‘डुप्लीकेट’ मानकर रोक दिया गया था। बाद में रिव्यू किया तो यह बात गलत निकली।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका की विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता एपस्टीन से जुड़े दस्तावेज हैंडल करने के तरीके को लेकर ट्रम्प सरकार पर सवाल उठा रही है। उनका आरोप है कि ट्रम्प प्रशासन ने एपस्टीन जांच से जुड़ी ऐसी जानकारियां दबाईं, जो ट्रम्प को नुकसान पहुंचा सकती थीं। हाउस की एक कमेटी ने अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी को नोटिस जारी करने के पक्ष में वोट किया। उन्हें कोर्ट में जवाब देना होगा। ट्रम्प पर आरोप लगाने वाली महिला के 2019 में एफबीआई ने कई इंटरव्यू लिए थे। गुरुवार को जो दस्तावेज जारी हुए हैं, उनमें इन्हीं इंटरव्यू के डिटेल्स शामिल हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस इंटरव्यू में उस महिला ने आरोप लगाया कि जब उसकी उम्र 13 से 15 साल के बीच थी, तब एपस्टीन और ट्रम्म ने उसका यौन-शोषण किया था। महिला ने कहा कि एपस्टीन उसे न्यूयॉर्क या न्यूजर्सी ले गया था और वहीं ट्रम्प से मिलवाया था। महिला ने जांचकर्ताओं को बताया कि जब ट्रम्प उस पर सेक्स करने के लिए दबाव डाल रहे थे, तब उसने उन्हें काट भी लिया था। महिला का दावा है कि पिछले कई सालों में उसे और उसके करीबी लोगों को चुप रहने के लिए धमकी भरे फोन कॉल भी आए। महिला का मानना है कि ये कॉल एपस्टीन से जुड़े लोगों की तरफ से हो सकते थे।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जांच में सामने आया कि यौन शोषण का नेटवर्क अमेरिका तक सीमित नहीं था। एपस्टीन ने संगठित ट्रैफिकिंग नेटवर्क बनाया। एपस्टीन फाइल्स में अब तक 15 देशों के रईसों, नेताओं और अंतरराष्ट्रीय हस्तियों के नाम सामने आए हैं। ट्रम्प ने एपस्टीन से जुड़े सभी आरोपों में किसी भी गलत काम से इनकार किया है। पहले न्याय विभाग ने भी कहा था कि जारी किए गए कुछ दस्तावेजों में ट्रम्प के खिलाफ “झूठे और सनसनीखेज दावे” हैं। वहीं विपक्षी डेमोक्रेटिक नेताओं ने ट्रम्प सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने एपस्टीन जांच से जुड़ी कुछ ऐसी जानकारियों को छिपाने की कोशिश की, जो ट्रम्प को नुकसान पहुंचा सकती थीं।
मिसाइल का मलबा गिरने से बंद हुईं उड़ानें दुबई एयरपोर्ट ने फिर की शुरु
8 Mar, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दुबई। मिडिल-ईस्ट में जारी तनाव के बीच दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर मिसाइल का मलबा गिरने से विमानों की उड़ान अनिश्चितकाल के लिए रोक दी गई थी, जिसके कारण यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। अब उड़ानों पर लगी रोक को हटा दी गई है। एयरपोर्ट प्रशासन ने शनिवार से आंशिक रूप से विमानों की आवाजाही फिर से शुरू कर दी है।
एयरलाइन स्थिति पर नजर रखना जारी रखेगी।
बता दें दुनिया के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में से एक, दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ईरानी द्वारा दागी गई मिसाइल का मलबा शनिवार सुबह गिर गया, जिसके बाद एयरपोर्ट से सभी उड़ानें रोक दी गईं थी। हालात सामान्य होने के बाद उड़ानों को शुरू किया गया है। एयरपोर्ट ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा- शनिवार को हमने आंशिक रूप से संचालन फिर से शुरू कर दिया है और कुछ उड़ानें डीएक्सबी और डीडब्ल्यूसी से संचालित हो रही हैं। कृपया एयरपोर्ट की ओर तब तक न जाएं जब तक आपकी एयरलाइन आपसे संपर्क करके यह पुष्टि न कर दे कि आपकी फ्लाइट कन्फर्म है, क्योंकि उड़ानों का शेड्यूल लगातार बदल रहा है।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2026: शिखर की ओर बढ़ते नारी शक्ति के कदम
7 Mar, 2026 06:54 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
8 मार्च को दुनिया भर में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाएगा, जो इस बार भारत के लिए बेहद खास है। साल 2026 का यह अवसर केवल औपचारिक आयोजनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस अटूट हौसले का उत्सव है जिसने भारतीय महिलाओं को ज़मीन से लेकर अंतरिक्ष तक एक नई पहचान दिलाई है। इस वर्ष की वैश्विक थीम 'गिव टू गेन' (Give To Gain) रखी गई है, जिसका सीधा संदेश है कि समाज में महिलाओं को समान अवसर और संसाधन देकर ही सामूहिक प्रगति हासिल की जा सकती है।
आज की भारतीय महिला केवल बदलाव का हिस्सा नहीं बल्कि उसकी सूत्रधार बन चुकी है। हाल ही में अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में आंध्र प्रदेश की जान्हवी डांगेती का नासा मिशन के लिए चयन होना और साहित्य जगत में बानु मुश्ताक द्वारा 'इंटरनेशनल बुकर प्राइज़' जीतकर भारतीय मनीषा का मान बढ़ाना इस बात का जीवंत प्रमाण है। खेलों के मैदान में भी हमारी बेटियों ने अपनी धाक जमाई है, जहाँ हरमनप्रीत कौर के नेतृत्व में भारतीय टीम ने विश्व पटल पर तिरंगा फहराया है। प्रशासनिक सेवाओं में भी महिलाओं का दबदबा निरंतर बढ़ रहा है, जिसका ताज़ा उदाहरण यूपीएससी परिणामों में बेटियों का शानदार प्रदर्शन है।
क्षेत्रीय स्तर पर देखें तो मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी महिला सशक्तिकरण की नई इबारत लिखी जा रही है। जहाँ एक ओर ग्रामीण इलाकों में महिलाएं 'नमो ड्रोन दीदी' बनकर आधुनिक खेती की कमान संभाल रही हैं, वहीं दूसरी ओर 'महतारी गौरव वर्ष' जैसे अभियानों के ज़रिए आदिवासी अंचलों में महिलाओं के कौशल विकास को नई गति मिली है। शासन और प्रशासन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के तहत 33 प्रतिशत आरक्षण की दिशा में भी तेज़ी से कदम बढ़ाए जा रहे हैं, जो आने वाले समय में देश की राजनीतिक तस्वीर को पूरी तरह बदल देगा।
2026 का यह महिला दिवस हमें याद दिलाता है कि आज की नारी सिर्फ अपनी समस्याओं का समाधान ही नहीं ढूँढ रही, बल्कि वह नेतृत्व कर रही है और राष्ट्र निर्माण में पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है। यह दिन उन सभी महिलाओं के संघर्ष और उनकी असीमित क्षमताओं को नमन करने का है जिन्होंने तमाम बाधाओं को पार कर खुद को साबित किया है।
क्यों मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस?
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस को मनाने के पीछे एक लंबा संघर्ष और आंदोलनों का इतिहास छिपा है। यह केवल एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि महिलाओं द्वारा अपने अधिकारों के लिए लड़ी गई लंबी लड़ाई का परिणाम है।
1. मज़दूर आंदोलन और अधिकारों की मांग
महिला दिवस की जड़ें मज़दूर आंदोलनों से जुड़ी हैं। इसकी शुरुआत 1908 में हुई थी, जब न्यूयॉर्क शहर में लगभग 15,000 महिलाओं ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया था। उनकी मुख्य मांगें थीं:
काम के घंटों में कमी (Short working hours)।
बेहतर वेतन (Better pay)।
मतदान का अधिकार (Right to vote)।
2. पहली बार कब मनाया गया?
न्यूयॉर्क के इस आंदोलन के एक साल बाद, यानी 1909 में 'सोशलिस्ट पार्टी ऑफ अमेरिका' ने पहली बार 'राष्ट्रीय महिला दिवस' मनाने की घोषणा की।
3. अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप (क्लारा ज़ेटकिन का विचार)
इसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने का विचार क्लारा ज़ेटकिन (Clara Zetkin) नाम की महिला ने दिया था। उन्होंने 1910 में कोपेनहेगन में कामकाजी महिलाओं की एक इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में यह प्रस्ताव रखा कि हर देश में एक ही दिन महिलाओं को समर्पित होना चाहिए। उस समय वहां मौजूद 17 देशों की 100 महिलाओं ने इस विचार का सर्वसम्मति से समर्थन किया।
4. 8 मार्च की तारीख ही क्यों?
तारीख को लेकर शुरुआत में काफी असमंजस था, लेकिन 1917 के रूसी क्रांति के दौरान एक ऐतिहासिक घटना हुई। रूस की महिलाओं ने 'रोटी और शांति' (Bread and Peace) की मांग को लेकर हड़ताल कर दी। यह हड़ताल रूसी कैलेंडर के अनुसार 23 फरवरी को शुरू हुई थी, जो ग्रेगोरियन कैलेंडर (जो हम आज इस्तेमाल करते हैं) के हिसाब से 8 मार्च थी।
रूस के सम्राट (ज़ोर) को पद छोड़ना पड़ा और अंतरिम सरकार ने महिलाओं को मतदान का अधिकार दे दिया। इसी ऐतिहासिक जीत की याद में 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में तय किया गया।
5. संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक मान्यता
काफी समय तक यह दिवस अलग-अलग देशों में मनाया जाता रहा, लेकिन 1975 में संयुक्त राष्ट्र (United Nations) ने इसे आधिकारिक मान्यता दी। 1996 से संयुक्त राष्ट्र ने इसे एक विशेष 'थीम' के साथ मनाना शुरू किया, ताकि हर साल महिलाओं से जुड़ी किसी खास समस्या या उपलब्धि पर दुनिया का ध्यान केंद्रित किया जा सके।
वर्तमान प्रासंगिकता
आज के समय में इसे मनाने के तीन मुख्य उद्देश्य हैं:
उपलब्धियों का जश्न: विज्ञान, राजनीति, खेल और कला जैसे क्षेत्रों में महिलाओं की कामयाबी को दुनिया के सामने रखना।
जागरूकता: लिंग भेद (Gender Bias) को खत्म करना और महिलाओं की सुरक्षा के प्रति समाज को सचेत करना।
समानता की मांग: आज भी कई जगहों पर महिलाओं को समान वेतन और नेतृत्व के अवसर नहीं मिलते, जिसके लिए आवाज़ उठाना इस दिन का प्रमुख हिस्सा है।
पाकिस्तान के बलूचिस्तान में मुठभेड़, सेना ने 15 आतंकियों को मार गिराया
7 Mar, 2026 04:21 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने बलूचिस्तान प्रांत में दो अलग-अलग अभियानों में 15 विद्रोही को मार गिराया है। सेना की मीडिया विंग (आईएसपीआर) ने शनिवार को यह जानकारी दी। ये ऑपरेशन खुफिया जानकारी मिलने के बाद गुरुवार को किए गए थे। पहला ऑपरेशन हरनाई जिले में हुआ। यहां सेना ने खवारिज के ठिकाने पर हमला किया। भीषण मुठभेड़ के बाद 12 विद्रोही मारे गए। पाकिस्तान सरकार ने साल 2024 में प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) को 'फितना अल-खवारिज' नाम दिया है। यह नाम इतिहास के एक हिंसक समूह के संदर्भ में रखा गया है।दूसरा ऑपरेशन बसिमा जिले में चलाया गया। यहां सेना ने आतंकवादियों की मौजूदगी का पता लगाया और उन पर हमला किया। इस जोरदार गोलीबारी में तीन और आतंकवादी ढेर हो गए। सेना ने मारे गए आतंकियों के पास से भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक बरामद किए हैं। बलूचिस्तान में लंबे समय से अशांति बनी हुई है। यहां आतंकवादी अक्सर सुरक्षा बलों और सरकारी इमारतों को निशाना बनाते रहते हैं। पाकिस्तान सरकार इन हमलों के लिए बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) और टीटीपी जैसे संगठनों को जिम्मेदार मानती है।
केन्या की राजधानी नैरोबी में भारी बारिश का कहर, 8 की मौत
केन्या की राजधानी नैरोबी में शुक्रवार रात से हो रही मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। इस आपदा में अब तक आठ लोगों की मौत हो चुकी है। पुलिस प्रमुख जॉर्ज सेडा के अनुसार, मृतको में छह लोग डूब गए और दो लोगों की जान बिजली का करंट लगने से गई। राहत और बचाव कार्य अभी जारी है। हालांकि मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है। सड़कों पर कमर तक पानी भरने की वजह से 100 से ज्यादा गाड़ियां खराब हो गई हैं। केन्या एयरवेज ने अपनी उड़ानें रोक दी हैं और कुछ विमानों को मोम्बासा शहर की ओर भेज दिया गया है।हालात को देखते हुए सरकार ने आपातकालीन सेवाओं की मदद के लिए सेना को तैनात किया है। टोल रोड ऑपरेटर ने भी एलिवेटेड रोड पर लगने वाली फीस माफ कर दी है ताकि लोगों को निकलने में आसानी हो। रेड क्रॉस की टीमें फंसे हुए लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन सड़कों की खराब हालत और ट्रैफिक की वजह से उन्हें काफी दिक्कतें आ रही हैं। सार्वजनिक सेवा मंत्री जेफ्री रुकू खुद राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। स्थानीय लोग इस बाढ़ के लिए शहर के खराब ड्रेनेज सिस्टम को जिम्मेदार मान रहे हैं। केन्या में फरवरी के अंत से ही बारिश का मौसम शुरू हो गया है, जिससे पहले भी काफी नुकसान हो चुका है।
रिहायशी इलाके पर मिसाइल हमला, जेलेंस्की ने की कड़ी कार्रवाई की मांग
7 Mar, 2026 04:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कीव|रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच शनिवार को यूक्रेन के दूसरे सबसे बड़े शहर खारकीव में एक भीषण मिसाइल हमला हुआ। अधिकारियों के अनुसार रूसी मिसाइल एक पांच मंजिला रिहायशी इमारत से टकरा गई, जिससे कम से कम 7 लोगों की मौत हो गई और 10 अन्य घायल हो गए। घायलों में तीन बच्चे भी शामिल हैं। हमले के बाद राहत और बचाव दल मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं।
जेलेंस्की ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया की मांग की
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि दुनिया को ऐसे हमलों के खिलाफ सख्त प्रतिक्रिया देनी चाहिए। उन्होंने बताया कि रूस ने रातभर में यूक्रेन पर 29 मिसाइलें और करीब 480 ड्रोन दागे, जिनका निशाना ऊर्जा ढांचे और कई अहम शहर थे, जिनमें कीव भी शामिल है।
यूक्रेनी एयर डिफेंस ने कई हमले नाकाम किए
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक यूक्रेन की वायु रक्षा प्रणाली ने 19 मिसाइलें और 453 ड्रोन मार गिराए। हालांकि 9 मिसाइलें और 26 ड्रोन अलग-अलग जगहों पर जाकर गिरे, जिससे कई इलाकों में नुकसान हुआ। हमलों से देश के कम से कम 22 स्थानों पर क्षति की सूचना मिली है। दक्षिणी क्षेत्र ओडेसा में ड्रोन हमलों के बाद बुनियादी ढांचे में आग लग गई, जिसे बुझाने के लिए लगभग 80 दमकलकर्मियों को तैनात किया गया। वहीं यूक्रेन की सरकारी रेलवे कंपनी Ukrzaliznytsia ने बताया कि रेल ढांचे को नुकसान पहुंचने के कारण कई ट्रेनों के मार्ग बदलने पड़े हैं।
चार साल से जारी है रूस-यूक्रेन युद्ध
यूक्रेन पर रूस के हमले को चार साल से ज्यादा समय हो चुका है। इस दौरान रूस ने ईरानी डिजाइन वाले शहीद ड्रोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया है और कई बार एक ही रात में सैकड़ों ड्रोन से हमले किए गए हैं। इस बीच पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अन्य वैश्विक संकटों के कारण इस युद्ध से अंतरराष्ट्रीय ध्यान कुछ हद तक हटता भी दिखाई दे रहा है।
अमेरिका-इस्राइल संघर्ष के बीच ईरान की सफाई, पड़ोसी देशों से दुश्मनी नहीं
7 Mar, 2026 01:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान|पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिका की उस मांग को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें ईरान से बिना शर्त आत्मसमर्पण करने को कहा गया था। उन्होंने कहा कि ऐसी उम्मीद रखना सिर्फ एक सपना है, जो कभी पूरा नहीं होगा। राज्य टीवी पर प्रसारित अपने रिकॉर्डेड संदेश में उन्होंने अमेरिका पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि ईरान किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।
पड़ोसी देशों पर हमलों के लिए जताया खेद
हालांकि अपने बयान में राष्ट्रपति पेजेशकियन ने क्षेत्रीय देशों पर हुए हमलों को लेकर खेद भी व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हाल में खाड़ी के कुछ देशों पर हुए हमले गलतफहमी के कारण हुए और तेहरान आगे ऐसी घटनाओं को रोकने की कोशिश करेगा। जब तक कि उन देशों की जमीन से ईरान पर कोई हमला न किया जाए। ईरानी मीडिया के अनुसार राष्ट्रपति ने बताया कि ईरान की अंतरिम नेतृत्व परिषद ने कल इस फैसले को मंजूरी दी है। ईरान की ओर से यह बयान ऐसे समय आया है जब शनिवार सुबह बहरीन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात पर हमलों की खबरें सामने आईं, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है।
ईरान में आज रात होगा सबसे बड़ा हमला- स्कॉट बेसेंट
वहीं, अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने शनिवार को फॉक्स न्यूज से बातचीत में कहा है कि आज रात ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस हमले का मकसद ईरान के मिसाइल लॉन्चर और मिसाइल बनाने वाली फैक्ट्रियों को भारी नुकसान पहुंचाना है।
अरब लीग के विदेश मंत्रियों की कल आपात बैठक
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरानी हमलों के मुद्दे पर अरब लीग के विदेश मंत्री रविवार को एक आपात बैठक करने जा रहे हैं। इस बैठक में कई अरब देशों के क्षेत्रों पर हुए ईरानी हमलों और क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति पर चर्चा की जाएगी। समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार, अरब लीग के सहायक महासचिव हुसाम जाकी ने बताया कि यह बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आयोजित की जाएगी।जानकारी के मुताबिक, इस आपात बैठक की मांग सऊदी अरब, कुवैत, कतर, ओमान, जॉर्डन और मिस्र ने संयुक्त रूप से की है। इन देशों का कहना है कि क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव और हमलों को देखते हुए तत्काल चर्चा और सामूहिक रुख तय करना जरूरी हो गया है।
पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव
पश्चिम एशिया में हाल के दिनों में हालात तेजी से बदल रहे हैं। 28 फरवरी को जंग की शुरुआत से अब तक ईरान इस्राइल समेत पश्चिम एशिया के 13 देशों को निशाना बना चुका है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के साथ बढ़ते टकराव के बीच ईरान की सैन्य गतिविधियों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है।
ऐलनाबाद के पास खेतों में मिले लाहौर कॉलेज के नाम वाले गुब्बारे, मचा हड़कंप
7 Mar, 2026 01:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ऐलनाबाद (सिरसा)।गांव धौलपालिया में शनिवार को उस समय ग्रामीणों में भय का माहौल बन गया जब खेतों में कुछ गुब्बारे आकर गिरे। इन गुब्बारों पर पाकिस्तान के लाहौर स्थित एक कॉलेज के फंक्शन का नाम लिखा हुआ बताया जा रहा है। गांव के किसानों ने जब खेतों में पड़े इन गुब्बारों को देखा तो उन्होंने तुरंत इसकी सूचना स्थानीय प्रशासन और पुलिस को दी।
सूचना मिलते ही थाना प्रभारी प्रगट सिंह पुलिस कर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे और मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर गुब्बारों का निरीक्षण किया और ग्रामीणों से भी जानकारी जुटाई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार माना जा रहा है कि ये गुब्बारे किसी कार्यक्रम के दौरान छोड़े गए होंगे, जो हवा के रुख के कारण सीमा पार से उड़ते हुए यहां तक पहुंच गए। इस घटना के बाद गांव में चर्चा का विषय बन गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर एकत्रित हो गए। पुलिस ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है और किसी भी संदिग्ध वस्तु की सूचना तुरंत प्रशासन को देने के लिए कहा है। थाना प्रभारी प्रगट सिंह ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और गुब्बारों पर लिखे विवरण के आधार पर आगे की जानकारी जुटाई जा रही है। फिलहाल स्थिति सामान्य है और ग्रामीणों को घबराने की आवश्यकता नहीं है।
पुलिस का बड़ा कदम, Badshah के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर की पहल
7 Mar, 2026 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। हरियाणा पुलिस ने गायक आदित्य प्रतीक सिंह सिसोदिया उर्फ बादशाह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है।पंचकूला पुलिस ने उनके हाल ही में जारी गीत/वीडियो टटीरी के मामले में एफआईआर दर्ज करते हुए उनके खिलाफ लुक आउट सर्कुलर (LOC) जारी कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि आरोपी देश छोड़कर बाहर न जा सके। इसके साथ ही पंचकूला पुलिस ने संबंधित वीडियो को सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटवाने के लिए नोटिस जारी किए हैं।
आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर मामला दर्ज
इस संबंध में साइबर थाना सेक्टर-20, पंचकूला में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार वीडियो में स्कूल यूनिफॉर्म पहने नाबालिग बच्चियों को स्कूल बैग फेंकते हुए और पढ़ाई से दूर भागते हुए दिखाया गया है। साथ ही बादशाला जैसे शब्दों का प्रयोग कर स्कूल और शिक्षा के माहौल को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है। इसके अतिरिक्त गीत में महिलाओं और लड़कियों के प्रति आपत्तिजनक व अशोभनीय शब्दों का प्रयोग भी पाया गया है।
हरियाणा रोडवेज बस और सरकारी स्कूल के उपयोग की जांच
जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि वीडियो में जींद डिपो की हरियाणा रोडवेज बस दिखाई गई है। पुलिस यह जांच कर रही है कि बस को वीडियो में दिखाने के लिए संबंधित विभाग से विधिवत अनुमति ली गई थी या नहीं। यदि बिना अनुमति बस का उपयोग किया गया पाया गया, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ धारा 120-बी के तहत भी कार्रवाई की जाएगी। इसी प्रकार वीडियो में एक सरकारी स्कूल परिसर को भी दर्शाया गया है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि शूटिंग के लिए सक्षम प्राधिकारी से अनुमति ली गई थी या नहीं। यदि बिना अनुमति सरकारी परिसर का उपयोग किया गया पाया गया, तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
आरोपी को नोटिस, गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें सक्रिय
पंचकूला पुलिस ने आरोपी गायक को पुलिस के समक्ष तत्काल पेश होने के लिए विधिवत नोटिस जारी किया है। आरोपी की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए पुलिस की कई टीमें गठित की गई हैं, जो विभिन्न संभावित स्थानों पर लगातार दबिश दे रही हैं। साथ ही आरोपी के देश से बाहर जाने की संभावना को देखते हुए उसके खिलाफ लुक आउट सर्कुलर (LOC) जारी कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
यू ट्यूब से हटवाया गया गाना
पंचकूला पुलिस द्वारा यू ट्यूब चैनल से इस गाने को हटवा दिया गया है। इसके अतिरिक्त, संबंधित वीडियो को सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटवाने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं, ताकि आपत्तिजनक सामग्री का प्रसार रोका जा सके। पंचकूला पुलिस की त्वरित कार्रवाई और प्रयासों के फलस्वरूप आरोपी के आधिकारिक यूट्यूब चैनल से उक्त विवादित गीत को टेकडाउन करा दिया गया है। अन्य म्यूजिक प्लेटफॉर्म, यूट्यूब चैनलों तथा व्यक्तिगत सोशल मीडिया हैंडल्स से भी इस गाने से संबंधित रील्स व शॉर्ट वीडियो को हटवाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
आपत्तिजनक सामग्री साझा करने वालों पर भी होगी कार्रवाई
पंचकूला पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति इस विवादित गाने से संबंधित रील या वीडियो बनाकर अथवा साझा करके आपत्तिजनक सामग्री का प्रसार करता हुआ पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध भी कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस द्वारा मामले की निष्पक्ष और गहन जांच करते हुए नियमानुसार आगे की कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।
ईरान जंग के बीच पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल, सऊदी अरब से बढ़ी बातचीत
7 Mar, 2026 12:29 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दुबई|अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब सीधे निशाने पर है। खाड़ी के इस देश के ऑयल फील्ड और एयरपोर्ट पर लगातार हमले हो रहे हैं। इसी बीच रियाद में पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और सऊदी रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान की अहम बैठक हुई।
बैठक में ईरान के हालिया हमलों और उन्हें रोकने के उपायों पर चर्चा हुई। सऊदी रक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि बैठक संयुक्त रणनीतिक रक्षा समझौते के तहत हुई और इस दौरान दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को बनाए रखने पर जोर दिया।
सऊदी अरब के ऑयल फील्ड पर हमले
हाल के दिनों में ईरान ने सऊदी अरब के शायबा ऑयल फील्ड को निशाना बनाया। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि छह ड्रोन को मार गिराया गया, जबकि दो बैलिस्टिक मिसाइलें प्रिंस सुल्तान एयर बेस के पास नष्ट की गईं। यह क्षेत्र यूएई की सीमा के पास स्थित है और पिछले हमलों के बाद अब ईरान सीधे इसमें शामिल हो रहा है।
क्या बढ़ेगी पश्चिम एशिया में जंग?
ईरान और सऊदी अरब के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका अहम हो गई है। पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने संसद में खुलासा करते हुए कहा कि हाल के दिनों में ईरान द्वारा सऊदी अरब पर हमलों में कमी या प्रतिक्रिया न देने के पीछे पाकिस्तान की कूटनीतिक पहल रही है। यह खुलासा पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक स्थिति को और जटिल बना देता है।
पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका का खुलासा
इशाक डार ने बताया कि पाकिस्तान का सऊदी अरब के साथ एक रणनीतिक रक्षा समझौता है। जब ईरान और सऊदी अरब के बीच तनाव बढ़ा, तो पाकिस्तान ने तत्काल ईरान से संपर्क किया। पाकिस्तान ने ईरान को इस रक्षा समझौते के बारे में आगाह किया और आश्वासन मांगा कि सऊदी अरब की जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ नहीं किया जाएगा। पाकिस्तान ने ईरान को यह आश्वासन भी प्रदान किया। इस कूटनीतिक प्रयास ने तत्काल टकराव को टालने में मदद की।
जंग फैलने की आशंका
अब तक चल रहे संघर्ष में खाड़ी देशों ने सीधे टकराव से खुद को दूर रखा था और अमेरिका ने भी इन देशों की जमीन का इस्तेमाल अपने हमलों के लिए नहीं किया था। हालांकि, अगर ईरान द्वारा सऊदी अरब पर हमले जारी रहते हैं और सऊदी अरब-पाकिस्तान रक्षा समझौता सक्रिय हो जाता है, तो स्थिति पूरी तरह से बदल सकती है। यदि पाकिस्तान सऊदी अरब की ओर से ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई में शामिल होता है, तो यह संघर्ष केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा। यह सीधे तौर पर दक्षिण एशिया में भी फैल जाएगा, क्योंकि पाकिस्तान और ईरान के बीच एक लंबी सीमा लगती है।
जंग के बीच अमेरिका का बड़ा कदम, इस्राइल को देगा हथियार
7 Mar, 2026 12:22 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन|पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने अपने प्रमुख सहयोगी इस्राइल को 151 मिलियन डॉलर (लगभग 1300 करोड़ रुपये) के भारी बमों की आपूर्ति को मंजूरी दे दी है। अमेरिकी विदेश विभाग ने शुक्रवार देर रात इस हथियार सौदे की घोषणा की, जिसमें आपातकालीन स्थिति का हवाला देते हुए संसद की सामान्य समीक्षा प्रक्रिया को छोड़ दिया गया।
इस आपातकालीन पैकेज में BLU-110A/B सामान्य उपयोग वाले बम शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, अमेरिका इस्राइल को लॉजिस्टिक सहायता और अन्य आवश्यक सपोर्ट सेवाएं भी प्रदान करेगा। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, यह सौदा अमेरिका की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में है। इसका उद्देश्य पश्चिम एशिया में अमेरिका के एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार की सुरक्षा को मजबूत करना है, जो क्षेत्र में राजनीतिक स्थिरता और आर्थिक प्रगति में अहम भूमिका निभाता रहा है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इस्राइल इन बमों का इस्तेमाल किस विशिष्ट उद्देश्य या स्थान के लिए करने की योजना बना रहा है। अधिकारियों का मानना है कि यह सौदा इस्राइल की वर्तमान और भविष्य की सुरक्षा क्षमताओं को बढ़ाएगा, उसकी घरेलू रक्षा को मजबूत करेगा और क्षेत्रीय खतरों के खिलाफ एक निवारक शक्ति के रूप में कार्य करेगा।
ईरान पर संभावित हमले की तैयारी
इसी बीच, अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने एक महत्वपूर्ण बयान में कहा कि अमेरिका की ओर से ईरान पर आज रात अब तक का सबसे बड़ा हमला किया जाएगा। बेसेंट के अनुसार, इस अभियान का मुख्य लक्ष्य ईरानी मिसाइल लॉन्चिंग स्थल और मिसाइल निर्माण कारखानों को निशाना बनाना होगा, जिससे ईरान की सैन्य उत्पादन क्षमता को काफी नुकसान पहुंचेगा।
उन्होंने ईरान पर आर्थिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया। बेसेंट ने कहा कि ईरान का होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस मार्गों में से एक है, इस अस्थिरता का एक प्रमुख कारण है। अमेरिका और इस्राइल पहले से ही ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में संलग्न हैं और हाल के दिनों में कई बड़े हमले किए गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है।
ईरान में जमीनी सैनिकों को भेजने की तैयारी में ट्रंप
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान में जमीनी स्तर पर अमेरिकी सैनिकों को भेजने की तैयारी कर रहे हैं। एनबीसी न्यूज की रिपोर्ट में कई सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने व्हाइट हाउस के सहयोगियों और रिपब्लिकन नेताओं के साथ अपनी बातचीत में इस विचार का उल्लेख किया है। इन चर्चाओं के दौरान, उन्होंने युद्ध के बाद ईरान के भविष्य को लेकर अपनी योजनाओं पर भी प्रकाश डाला, जिसमें तेहरान और वाशिंगटन के बीच तेल क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं का जिक्र किया गया।
हालांकि, सूत्रों का कहना है कि ट्रंप बड़े पैमाने पर जमीनी हमले की योजना पर चर्चा नहीं कर रहे हैं, बल्कि वह सीमित संख्या में अमेरिकी सैनिकों को विशेष रणनीतिक मिशनों के लिए भेजने के विकल्प पर विचार कर रहे हैं। यह भी बताया गया है कि इस मुद्दे पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है और ट्रंप ने इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक फैसला नहीं किया है।
ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’ तेज, अमेरिका ने ईरान के 3000 ठिकानों पर किए हमले
7 Mar, 2026 12:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काठमांडू|अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को और तेज कर दिया है। मिलिट्री कमांड ने पुष्टि की है कि पिछले एक हफ्ते में ईरान के अंदर हजारों ठिकानों पर हमले किए गए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक बयान में कमांड ने इस मिशन की जानकारी दी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि ऑपरेशन के पहले हफ्ते में ही 3,000 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि वे अपनी कार्रवाई धीमी नहीं कर रहे हैं।
ट्रंप ने रखी ये मांग
इस सैन्य वृद्धि के साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ईरान से बिना शर्त आत्मसमर्पण की मांग की। उन्होंने कहा कि ईरान के आत्मसमर्पण के बिना कोई समझौता नहीं होगा। ट्रंप ने जोर दिया कि अमेरिका और उसके सहयोगी, खासकर इस्राइल, ईरान के नेतृत्व बदलने के बाद ही किसी समझौते पर विचार करेंगे। उन्होंने 'मेक ईरान ग्रेट अगेन' का नारा भी दिया। ट्रंप ने कहा कि आत्मसमर्पण के बाद वे ईरान को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में मदद करेंगे। ये घटनाक्रम 28 फरवरी को हुए अमेरिका-इस्राइल के संयुक्त सैन्य हमले के बाद आए हैं। इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई और अन्य वरिष्ठ नेता मारे गए थे। इसके जवाब में ईरान ने कई अरब देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इस्राइली संपत्तियों पर ड्रोन व मिसाइल हमले किए। इस्राइल ने भी तेहरान और लेबनान में हिजबुल्लाह पर हमले जारी रखे हैं।
अगले नेता के चयन में ट्रंप क्या बोले?
खामेनेई की मौत के बाद, ट्रंप ने ईरान के अगले सर्वोच्च नेता के चयन में व्यक्तिगत रूप से शामिल होने की इच्छा जताई। उन्होंने वेनेजुएला के राजनीतिक घटनाक्रम में अपनी भागीदारी से इसकी तुलना की। ट्रंप ने दिवंगत सर्वोच्च नेता के बेटे मोजतबा खामेनेई के संभावित उत्तराधिकार की आलोचना की। उन्होंने मोजतबा को कमजोर और अस्वीकार्य बताया। ट्रंप ने कहा कि वह ईरान में सद्भाव और शांति लाने वाले नेता को पसंद करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि खामेनेई की नीतियों को जारी रखने से अमेरिका के साथ फिर से संघर्ष हो सकता है।
ईरान सरकार ने क्या कहा?
रिपोर्टों में कहा गया है कि 56 वर्षीय मौलवी मोजतबा खामेनेई, जिनके आईआरजीसी से करीबी संबंध हैं, एक प्रमुख दावेदार हैं। हालांकि, ईरानी सरकार ने इन दावों का आधिकारिक तौर पर खंडन किया है। मुंबई में अपने वाणिज्य दूतावास के माध्यम से अधिकारियों ने बताया कि संभावित उम्मीदवारों से संबंधित रिपोर्टों का कोई आधिकारिक स्रोत नहीं है। उन्होंने इन खबरों को आधिकारिक रूप से खारिज कर दिया। एक्सियोस के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति इस बात पर कायम हैं कि वाशिंगटन को ऐसे किसी भी नए ईरानी नेता को स्वीकार नहीं करना चाहिए। जो दिवंगत खामेनेई जैसी नीतियां अपनाएगा।
करनाल घटना के बाद डॉक्टरों का प्रदर्शन, पंचकूला सिविल अस्पताल में सेवाएं प्रभावित
7 Mar, 2026 11:06 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणा। के करनाल में घरौंडा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर एक सरकारी डॉक्टर के साथ कथित मारपीट की घटना के विरोध में पंचकूला के सेक्टर-6 सिविल अस्पताल के चिकित्सकों ने भी आंदोलन शुरू कर दिया है। डॉक्टरों ने सुरक्षा की मांग को लेकर ओपीडी सेवाएं आंशिक रूप से बंद कर रखी हैं और धरने पर बैठ गए हैं। उन्होंने घटना की कड़ी निंदा की है और प्रशासन से आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
घटना का विवरण
करनाल के घरौंडा में होली के दिन एक शराबी व्यक्ति द्वारा बदसलूकी के बाद डॉक्टर प्रशांत चौहान ने 112 पर दो बार कॉल किया, लेकिन कोई सहायता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने घरौंडा थाना प्रभारी दीपक कुमार से फोन पर बात की, तो कथित तौर पर एसएचओ ने गाली-गलौज की और बाद में अस्पताल पहुंचकर डॉक्टर को कई थप्पड़ मारे, कॉलर पकड़कर धक्का दिया और जबरन वाहन में बैठाकर थाने ले गए। अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए, जिसमें मारपीट के दृश्य साफ दिख रहे हैं। इस घटना के बाद हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन के बैनर तले करनाल जिले में डॉक्टरों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की, जिसमें ओपीडी, इमरजेंसी, लेबोरेटरी, प्रसूति और पोस्टमार्टम सेवाएं भी प्रभावित हुईं। एसएचओ दीपक कुमार को सस्पेंड कर दिया गया है और विभागीय जांच शुरू हो गई है, लेकिन डॉक्टर एफआईआर दर्ज करने और शामिल पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी पर अड़े हैं।
सोनीपत में भी दिखा हड़ताल के असर
सोनीपत के नागरिक अस्पताल सहित जिले के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों ने धरना और हड़ताल शुरू कर दी है। जिले में तैनात 135 से अधिक चिकित्सकों ने ओपीडी सेवाएं पूरी तरह बंद कर धरने पर बैठ गए हैं, जिससे हजारों मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बहादुरगढ़ में डॉक्टरों ने घटना की निंदा करते हुए सुरक्षा की मांग उठाई
बहादुरगढ़ में सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं बंद रखी गई, जिससे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। डॉक्टरों ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि स्वास्थ्यकर्मियों के साथ इस तरह की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जो बेहद चिंताजनक है। हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस एसोसिएशन (एचसीएमएस) की जिला प्रधान आकृति हुड्डा ने मांग की कि आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और अस्पतालों में डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। हड़ताल के कारण अस्पतालों में केवल इमरजेंसी सेवाएं ही चालू रखी गई। सामान्य मरीजों को ओपीडी बंद होने की वजह से इलाज के लिए इंतजार करना पड़ा या निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ा। उनका कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव: ईरान पर बड़े हमले के संकेत, इस्राइल को हथियार देगा अमेरिका
7 Mar, 2026 11:03 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन।अमेरिका ने इस्राइल को 12000 भारी बमों की आपूर्ति के लिए 151 मिलियन डॉलर (करीब 1300 करोड़ रुपये) का हथियार सौदा मंजूर किया है। इस फैसले की घोषणा शुक्रवार देर रात अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट ने की। स्टेट डिपार्टमेंट के अनुसार, अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने आपातकालीन स्थिति के कारण संसद की सामान्य समीक्षा प्रक्रिया को छोड़कर यह सौदा मंजूर किया।हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इस्राइल इन बमों का इस्तेमाल कहां करने की योजना बना रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम इस्राइल की वर्तमान और भविष्य की सुरक्षा क्षमता को मजबूत करेगा, उसकी घरेलू रक्षा को बढ़ाएगा और क्षेत्रीय खतरों के खिलाफ निवारक शक्ति के रूप में काम करेगा।
ईरान पर संभावित हमले की तैयारी
इसी बीच, अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने फॉक्स न्यूज को बताया कि अमेरिका की ओर से ईरान पर आज रात अब तक का सबसे बड़ा हमला किया जाएगा। बेसेंट ने कहा कि यह अभियान ईरानी मिसाइल लॉन्चिंग स्थल और मिसाइल निर्माण कारखानों को निशाना बनाएगा, जिससे उनका सैन्य उत्पादन काफी हद तक प्रभावित होगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ईरान आर्थिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहा है। बेसेंट ने कहा कि इसका एक बड़ा कारण यह है कि ईरान का नियंत्रण होर्मुज जलडमरूमध्य पर है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस मार्गों में से एक माना जाता है। अमेरिका और इस्राइल पहले से ही ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर रहे हैं और हाल के दिनों में कई बड़े हमले किए गए हैं, जिसके बाद क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
रैपर से नेता बने बालेन शाह, अब नेपाल के अगले प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में सबसे आगे
7 Mar, 2026 10:56 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नेपाल।की राजनीति में एक अभूतपूर्व उलटफेर की आहट सुनाई दे रही है। 5 मार्च को हुए आम चुनाव के नतीजे आने से पहले ही, पूर्व काठमांडू मेयर बालेन्द्र (बालेन) शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) ने मतगणना में सुनामी की तरह बढ़त बना ली है। दशकों से सत्ता पर काबिज पारंपरिक राजनीतिक दलों को जनता ने जिस तरह हाशिए पर धकेला है, उससे साफ है कि नेपाल की राजनीति में 36 साल बाद किसी एक दल को प्रचंड बहुमत मिलने की ओर अग्रसर है। इस अभूतपूर्व जीत के साथ, बालेन शाह का अगला प्रधानमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है।
कैसे शुरू हुआ राजनीतिक सफर?
बालेन शाह का यह सफर आसान नही रहा है। साल 2022 में रैप की दुनिया से पहचान बनाने वाले स्ट्रक्चरल इंजीनियर बालेन शाह ने उस वक्त सबको चौंका दिया था, जब उन्होंने नेपाल के बड़े राजनीतिक दलों को हराकर काठमांडू के मेयर का पद जीता। उनका चुनाव चिह्न छड़ी था। उन्हें चुनाव में 61,767 वोट मिले। उन्होंने नेपाली कांग्रेस की सिर्जना सिंह को हराया, जिन्हें 38,341 वोट मिले थे। वहीं, सीपीएन-यूएमएल के उम्मीदवार और पूर्व मेयर केशव स्थापित को 38,117 वोट मिले।अब चार साल बाद 35 साल के बालेन शाह देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री बनने की राह पर हैं। उनकी यह सफलता अचानक नहीं मिली है। साल 2013 में वह 'रॉ बर्ज' रैप बैटल से मशहूर हुए थे। मेयर बनने से पहले उन्होंने ढाई साल तक जमीन पर काम किया। उन्होंने हिमालयन व्हाइट हाउस कॉलेज से इंजीनियरिंग की और भारत से मास्टर डिग्री ली। उनकी पढ़ाई और तकनीकी समझ ने जनता का भरोसा जीता।
दशकों पुराने ओली के दबदबे को किया खत्म
बालेन की राजनीतिक रणनीति बहुत सोची-समझी रही है। सितंबर के विरोध प्रदर्शनों में 77 लोगों की मौत के बाद केपी शर्मा ओली ने इस्तीफा दे दिया था। उस समय युवाओं ने बालेन को अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने के लिए कहा। बालेन ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया और पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की का समर्थन किया। उन्होंने छह महीने की अस्थायी सरकार के बजाय पांच साल के पूर्ण कार्यकाल को चुना। 18 जनवरी 2026 को बालेन औपचारिक रूप से राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) में शामिल हो गए। उन्होंने अगले ही दिन जनकपुर से अपना चुनाव प्रचार शुरू किया। उन्होंने झापा-05 सीट से चुनाव लड़ने का फैसला किया। यह इलाका दिग्गज नेता केपी शर्मा ओली का गढ़ माना जाता है। जानकारों का मानना है कि बालेन की लोकप्रियता ओली के दशकों पुराने दबदबे को खत्म कर दी है।
क्या था चुनाव का एजेंडा?
बालेन सोशल मीडिया पर बहुत सक्रिय हैं। फेसबुक पर उनके 35 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। वह प्रेस कॉन्फ्रेंस के बजाय सीधे जनता से बात करते हैं। हालांकि, वह अपने कड़े बयानों के लिए विवादों में भी रहे। उन्होंने एक बार अमेरिका, भारत और चीन जैसे देशों के साथ-साथ अपनी ही पार्टी की भी आलोचना की थी। उनके समर्थक उन्हें पुराने नेताओं के विकल्प के रूप में देखते हैं। बालेन का जन्म 1990 में हुआ था। उनके स्वर्गीय पिता राम नारायण शाह एक आयुर्वेदिक डॉक्टर थे। उनका निधन बालेन शाह के मेनस्ट्रीम पॉलिटिक्स में फॉर्मल एंट्री से ठीक पहले हुआ था। राजनीति के साथ-साथ बालेन अभी काठमांडू यूनिवर्सिटी से पीएचडी भी कर रहे हैं। नेपाल अब एक नए मोड़ पर है, जहां पुराने नेताओं की पकड़ कमजोर होती दिख रही है।
पेटागन के साथ समझौते के बाद ओपनएआई कर्मचारियों में नाराजगी, बगावत शुरू
6 Mar, 2026 06:41 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। अब एआई केवल टेक्नोलॉजी का विषय नहीं रह गया, बल्कि यह जियोपॉलिटिक्स और सैन्य रणनीति का भी अहम हिस्सा बनता जा रहा है। हाल ही में अमेरिकी रक्षा विभाग पेटागन ने अपनी सुरक्षा और रक्षा प्रणालियों में एआई टूल्स के इस्तेमाल की योजना बनाई है। लेकिन इसी को लेकर टेक कंपनियों और उनके कर्मचारियों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई है।
विवाद तब बढ़ा जब अमेरिकी सरकार ने एआई कंपनियों से कहा कि उनके मॉडल्स का उपयोग सैन्य और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कार्यों में हो सकता है। एआई कंपनी एन्थ्रोपिक, जो एआई मॉडल बनाती है, ने इस प्रस्ताव पर आपत्ति जाहिर की है। कंपनी का कहना था कि उसका एआई“मास सर्विलांस” या पूरी तरह स्वचालित हथियारों (ऑटोनोमस वेपन्स) के लिए इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। इस कारण पेटागन और एन्थ्रोपिक के बीच मतभेद बढ़ गए।
वहीं एन्थ्रोपिक के पीछे हटने के बाद एआई कंपनी ओपन एआई ने पेटागन के साथ समझौता कर लिया। इस डील के तहत ओपनएआई के एआई मॉडल्स को सरकारी और रक्षा से जुड़े सिस्टम में इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि ओपन एआई के सीईओ सैम आल्टनमैन ने कहा कि इस समझौते में कई सुरक्षा शर्तें जोड़ी गई हैं। उनके अनुसार एआई का इस्तेमाल घरेलू निगरानी (डोमेस्टिक सर्विलांस) या पूरी तरह ऑटोनोमस हथियार बनाने के लिए नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद इस फैसले ने टेक इंडस्ट्री के भीतर बहस को और तेज कर दिया। कई कर्मचारियों को डर है कि अगर एआई का सैन्य उपयोग बढ़ता है, तब भविष्य में इसका दुरुपयोग हो सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार गूगल और ओपन एआई के सैकड़ों कर्मचारियों ने एक खुला पत्र लिखकर एआई के सर्विलांस और ऑटोनोमस हथियारों में इस्तेमाल का विरोध किया। इस विवाद के बाद कुछ लोगों ने विरोध के तौर पर चैटजीपीटी को अपने मोबाइल से हटाना भी शुरू कर दिया। वहीं कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अगर एआई का जिम्मेदारी से उपयोग किया जाए, तब यह राष्ट्रीय सुरक्षा, खुफिया विश्लेषण और युद्ध रणनीति में काफी मददगार साबित हो सकता है। दरअसल, अमेरिकी रक्षा कार्यक्रम प्रोजेक्ट मेवन पहले से ही एआई का उपयोग सैटेलाइट और ड्रोन डेटा के विश्लेषण के लिए कर रहा है, जिससे संभावित लक्ष्यों की पहचान करने में सहायता मिलती है। यही कारण है कि एआई का सैन्य उपयोग अब वैश्विक बहस का विषय बन चुका है।
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