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डोनाह्यू के इस्तीफे से फिर चर्चा में आया अफगानिस्तान से अमेरिकी वापसी का अध्याय
25 Jun, 2026 05:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन: अफगानिस्तान में दो दशक लंबे चले युद्ध के बाद जब अमेरिकी सेना वहां से वापस लौट रही थी, तब काबुल एयरपोर्ट से उड़ान भरने वाले आखिरी अमेरिकी फौजी के रूप में जनरल क्रिस डोनाह्यू का चेहरा पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया था। उनकी नाइट विजन कैमरे से ली गई वह आखिरी तस्वीर वैश्विक मीडिया में अमेरिकी सैन्य अभियान के अंत का प्रतीक बनी थी। अब उन्हीं जनरल क्रिस डोनाह्यू से जुड़ी एक बड़ी खबर आ रही है कि उन्होंने अपनी मौजूदा जिम्मेदारी छोड़ने का फैसला कर लिया है। हालांकि, उनके पद छोड़ने की कोई आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के साथ चल रहे मतभेदों को इसकी मुख्य वजह माना जा रहा है। डोनाह्यू के हटने के बाद अब उनके डिप्टी (उपाध्यक्ष) इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को संभालेंगे।
चार-स्टार कमांड को घटाने की तैयारी में थे रक्षा मंत्री
रिपोर्ट्स के अनुसार, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ जनरल डोनाह्यू की ताकत और उनके अधिकारों को कम करने की तैयारी कर रहे थे। हेगसेथ की योजना डोनाह्यू के चार-स्टार कमांड (फोर-स्टार) दर्जे को घटाकर तीन-स्टार (थ्री-स्टार) करने की थी। अगर ऐसा होता, तो जनरल डोनाह्यू के अधिकार और सैन्य जिम्मेदारियां काफी सीमित हो जातीं, जिसका उनके शानदार सैन्य करियर पर बहुत बुरा असर पड़ता। इस फैसले से आहत होकर ही उन्होंने पद छोड़ने का मन बनाया।
सेना प्रमुख पद के माने जा रहे थे मजबूत दावेदार
साल 1992 में अमेरिकी सेना में बतौर अधिकारी शामिल होने वाले जनरल क्रिस डोनाह्यू को अपनी बेहतरीन नेतृत्व क्षमता के लिए जाना जाता है। अगस्त 2021 में अफगानिस्तान से सेना की अंतिम विदाई के समय उनके द्वारा निभाए गए नेतृत्व के बाद से उन्हें भविष्य में अमेरिकी सेना प्रमुख (आर्मी चीफ) या जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जैसे देश के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण सैन्य पदों के लिए एक बेहद मजबूत दावेदार माना जा रहा था।
पेंटागन में बड़े स्तर पर फेरबदल का दौर जारी
जनरल डोनाह्यू का अपना पद छोड़ने का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के नेतृत्व में अमेरिकी रक्षा मंत्रालय 'पेंटागन' के भीतर बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल चल रहा है। डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा सत्ता संभालने के बाद से ही रक्षा क्षेत्र की नीतियों और नेतृत्व में कई बड़े बदलाव किए जा रहे हैं, जिसके तहत अब तक कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को या तो उनके पदों से हटाया जा चुका है या फिर वे स्वयं अपने पदों से इस्तीफा दे रहे हैं।
माहरंग बलूच को उम्रकैद के बाद पाकिस्तान पर दोतरफा दबाव, मानवाधिकार सवालों के घेरे में
25 Jun, 2026 04:23 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
क्वेटा/इस्लामाबाद: बलूचिस्तान में मानवाधिकारों और स्थानीय अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाली 'बलूच यकजेहती कमेटी' (BYC) की प्रमुख नेता माहरंग बलूच और उनके साथी कार्यकर्ताओं को पाकिस्तान की एक आतंकवाद रोधी अदालत द्वारा उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद पूरे प्रांत में भारी उबाल है। इस फैसले के विरोध में बुधवार को बलूचिस्तान के कोने-कोने में ऐतिहासिक और पूर्ण चक्का जाम व बंद देखा गया। इस दौरान सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा और बाजार व व्यावसायिक प्रतिष्ठान पूरी तरह ठप रहे। एक तरफ बलूचिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आंतरिक असंतोष गहराता जा रहा है, तो दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी इस न्यायिक फैसले को लेकर पाकिस्तान सरकार और वहां के सैन्य नेतृत्व की कड़ी निंदा शुरू हो गई है।
बंद से पाकिस्तान की आर्थिक रीढ़ पर सीधा असर
क्षेत्रफल के लिहाज से बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, जो प्राकृतिक संसाधनों और रणनीतिक नजरिए से बेहद खास महत्व रखता है। यह क्षेत्र भले ही विकास के मामले में काफी पिछड़ा हो, लेकिन इसे पाकिस्तान की आर्थिक रीढ़ माना जाता है। बलूचिस्तान के सुई इलाके से निकलने वाली प्राकृतिक गैस पूरे पाकिस्तान के घरों और उद्योगों को ऊर्जा देती है, जबकि रेको दिक जैसी जगहों पर सोने और तांबे के विशाल भंडार मौजूद हैं। इस ऐतिहासिक बंद के कारण खदानों में काम रुक गया है और माल की सप्लाई चेन पूरी तरह टूट गई है। जानकारों के मुताबिक, इस बड़े चक्का जाम से आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान को हर दिन करोड़ों रुपये का सीधे तौर पर नुकसान झेलना पड़ रहा है, जिससे चीनी निवेश और आंतरिक सुरक्षा पर भी गहरा असर पड़ने की आशंका है।
फ्रंटियर कॉर्प्स अधिकारी की हत्या का मामला और बंद कमरे में सुनवाई
यह पूरा विवाद सोमवार को पाकिस्तान की एक आतंकवाद रोधी अदालत द्वारा सुनाए गए फैसले के बाद शुरू हुआ। स्थानीय मीडिया के अनुसार, यह मामला फ्रंटियर कॉर्प्स के एक सैन्य अधिकारी की कथित हत्या से जुड़ा हुआ था। इस मामले में अदालत ने बीवाईसी की फायरब्रांड नेता माहरंग बलूच, बलूच स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (BSO) के अध्यक्ष बलाच कादिर, केंद्रीय नेता अबू बकर कलांची और बीवाईसी के एक अन्य नेता सिबगतुल्लाह शाह को उम्रकैद की सजा सुनाई है। बीवाईसी ने इस फैसले को पूरी तरह 'अन्यायपूर्ण' और 'राजनीतिक बदले की भावना' से प्रेरित बताया है। संगठन का आरोप है कि क्वेटा जेल के अंदर बंद कमरे में हुई यह सुनवाई पूरी तरह अपारदर्शी थी, जिसका मकसद केवल बलूचिस्तान की लोकतांत्रिक आवाजों को दबाना था।
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने जताई गंभीर चिंता
इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी पाकिस्तान की किरकिरी शुरू हो गई है। एमनेस्टी इंटरनेशनल और इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन जैसे वैश्विक मानवाधिकार संगठनों ने इस न्यायिक प्रक्रिया की कड़ी आलोचना करते हुए इसे निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का खुला उल्लंघन बताया है। एमनेस्टी इंटरनेशनल की दक्षिण एशिया की कार्यवाहक क्षेत्रीय निदेशक इसाबेल लासी ने अपने बयान में कहा कि यह फैसला साफ तौर पर दिखाता है कि पाकिस्तान किस तरह अपने आतंकवाद विरोधी कानूनों का दुरुपयोग कर शांतिपूर्ण ढंग से विरोध दर्ज कराने वाले राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं की आवाजों को कुचलने का प्रयास कर रहा है।
न्यूक्लियर साइट्स पर निरीक्षण को लेकर ईरान का रुख स्पष्ट, पहले समझौता फिर पहुंच
25 Jun, 2026 03:54 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान: ईरान के परमाणु संयंत्रों की जांच संयुक्त राष्ट्र (UN) की परमाणु एजेंसी करेगी या नहीं, इसे लेकर वैश्विक स्तर पर बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। तमाम दावों के बीच ईरान ने एक बार फिर अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निरीक्षकों को उसके परमाणु स्थलों (न्यूक्लियर साइट्स) पर जाने की इजाजत केवल अमेरिका के साथ एक अंतिम और पूर्ण समझौता होने के बाद ही दी जाएगी। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' के जरिए अपनी बात रखी है।
प्रतिबंध हटने पर ही मिलेगी परमाणु स्थलों तक पहुंच
ईरान के उप विदेश मंत्री गरीबाबादी ने स्पष्ट किया कि यूएन निरीक्षकों की पहुंच और परमाणु सामग्री से जुड़े सभी मुद्दों को केवल अंतिम समझौते के दायरे में ही सुलझाया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह पूरी प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करती है कि दूसरा पक्ष (अमेरिका और उसके सहयोगी) ईरान पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने के लिए कितने व्यावहारिक और ठोस कदम उठाता है। गरीबाबादी ने यह भी खुलासा किया कि स्विट्जरलैंड में हुई हालिया बातचीत के दौरान अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रोसी के अनुरोध के बावजूद ईरान के किसी भी अधिकारी ने उनसे मुलाकात नहीं की।
राफेल ग्रोसी और अमेरिका के दावों पर ईरान का पलटवार
दूसरी तरफ, टोक्यो में मौजूद आईएईए (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रोसी ने दृढ़ता से कहा है कि ईरान के परमाणु स्थलों का निरीक्षण हर हाल में होकर रहेगा। उन्होंने कहा कि यह जांच आज हो, परसों हो, एक हफ्ते या दस दिनों में हो—यह अलग बात है, लेकिन यह निश्चित रूप से होगी। इससे पहले अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी दावा किया था कि ईरान अपनी न्यूक्लियर साइट्स पर आईएईए के निरीक्षकों को वापस बुलाने के लिए राजी हो गया है। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने अमेरिकी दावों को खारिज करते हुए साफ किया कि ग्रोसी के साथ उनकी कोई बैठक नहीं हुई है और न ही निरीक्षण के लिए कोई समय-सीमा तय की गई है।
साल 2025 के संघर्ष के बाद से लगी है पाबंदी
दरअसल, जून 2025 में हुए सैन्य संघर्ष के बाद से ही तेहरान (ईरान) ने आईएईए को अपने उन यूरेनियम संवर्धन स्थलों (एनरिचमेंट साइट्स) की जांच करने से पूरी तरह रोक दिया था, जहां माना जाता है कि उसने बहुत बड़े पैमाने पर उच्च स्तर का संवर्धित यूरेनियम इकट्ठा कर लिया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस सामग्री से ईरान चाहे तो करीब 10 परमाणु हथियार तैयार कर सकता है। हालांकि, इन आरोपों के बीच ईरान लंबे समय से दुनिया के सामने यही दावा करता आया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण और ऊर्जा जरूरतों के लिए है।
नाटो को ज्ञान दे रहे थे ट्रंप, सामने से मिला करारा जवाब
25 Jun, 2026 03:23 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के दौरान उम्मीद के मुताबिक पूरा साथ न मिलने पर अपने ही नाटो (NATO) सहयोगी देशों के प्रति गहरी नाराजगी जताई है। व्हाइट हाउस में नाटो के महासचिव मार्क रुटे के साथ हुई एक अहम बैठक के दौरान ट्रंप ने साफ लफ्जों में कहा कि भले ही अमेरिका को ईरान के खिलाफ किसी की सीधी मदद की जरूरत नहीं थी, लेकिन वह अपने साथियों से कम से कम वफादारी और नैतिक समर्थन की उम्मीद तो कर ही रहा था। ट्रंप ने तल्ख अंदाज में कहा, "हमने ईरान को पहले ही हफ्ते में पूरी तरह तबाह कर दिया था। हमें किसी की मदद नहीं चाहिए थी, लेकिन अगर हमारे सहयोगी देश संकट के समय यह कहते कि 'हम आपके साथ हैं', तो अच्छा लगता।" जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या यूरोपीय देशों ने अमेरिका का साथ दिया, तो उन्होंने सीधा जवाब दिया, "नहीं।"
नाटो प्रमुख ने किया बचाव, विमानों की उड़ानों का दिया हवाला
डोनाल्ड ट्रंप के इन तीखे आरोपों के बाद नाटो महासचिव मार्क रुटे ने यूरोपीय देशों का खुलकर बचाव किया। उन्होंने ट्रंप के सामने ही स्पष्ट किया कि ईरान के खिलाफ छह हफ्तों तक चले लंबे सैन्य अभियान के दौरान यूरोप ने अमेरिका का पूरा साथ दिया था। रुटे ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि इस जंग के दौरान यूरोप के अलग-अलग सैन्य ठिकानों से अमेरिका के करीब 4,000 से 5,000 लड़ाकू विमानों ने लगातार उड़ानें भरी थीं। उन्होंने उदाहरण दिया कि रोमानिया के बुखारेस्ट हवाई अड्डे को तो आम जनता के लिए कुछ समय तक बंद रखना पड़ा था, ताकि अमेरिकी सैन्य विमान वहां से बिना किसी रुकावट के उड़ान भर सकें। रुटे ने कहा कि एकाध घटनाओं को छोड़कर पूरा यूरोप अमेरिका के साथ मुस्तैदी से खड़ा रहा।
यूरोपीय देशों को ट्रंप की दोटूक- 'मुफ्त की सवारी' नहीं चलेगी
इस बैठक में राष्ट्रपति ट्रंप ने यूरोप के कई बड़े देशों का नाम लेकर अपनी भड़ास निकाली। उन्होंने कहा, "स्पेन का रवैया पूरी तरह निराशाजनक रहा। मैं इटली, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस से भी बेहद निराश हूं। ज्यादातर देश रक्षा के नाम पर कुछ भी खर्च करना नहीं चाहते। उन्हें लगता है कि अमेरिका हमेशा उनकी रक्षा करता रहेगा और उन्हें मुफ्त की सवारी (फ्री राइड) मिलती रहेगी।" ट्रंप ने याद दिलाया कि अमेरिका के हजारों सैनिक यूरोप की सुरक्षा में तैनात हैं, जिसमें अकेले जर्मनी में ही करीब 50,000 अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं। ट्रंप ने साफ किया कि अमेरिका को सहयोगियों के पैसे की नहीं बल्कि उनकी वफादारी की जरूरत है। उन्होंने कहा, "हमारे पास दुनिया की सबसे ताकतवर सेना है, हमें सिर्फ वफादारी चाहिए। हम हमेशा उनके लिए लड़ते हैं, लेकिन बदले में थोड़ा समर्थन भी नहीं मिलता।"
दबाव के बाद यूरोप ने बढ़ाया रक्षा बजट
तनावपूर्ण बहस के बीच नाटो महासचिव मार्क रुटे ने यह भी दावा किया कि डोनाल्ड ट्रंप के लगातार बनाए गए दबाव का ही असर है कि यूरोप और कनाडा ने अपने रक्षा खर्च में करीब 1.2 ट्रिलियन डॉलर की भारी बढ़ोतरी की है। इसके साथ ही यूरोपीय देशों द्वारा अमेरिकी डिफेंस कंपनियों को भी अरबों डॉलर के नए हथियारों के ऑर्डर दिए गए हैं। रुटे के मुताबिक, ये आंकड़े बताते हैं कि सहयोगी देशों ने रक्षा के क्षेत्र में अपना बड़ा और महत्वपूर्ण योगदान दिया है। बहरहाल, व्हाइट हाउस की इस बैठक ने अमेरिकी विदेश नीति और नाटो देशों के आपसी रिश्तों में चल रही खींचतान को एक बार फिर दुनिया के सामने ला दिया है।
रिश्तों का खून: नशे के पैसों को लेकर भाई ने भाई की ली जान
25 Jun, 2026 03:22 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
करनाल। हरियाणा के करनाल स्थित रास रेजिडेंसी में बुधवार देर रात करीब 12 बजे रिश्तों को शर्मसार करने वाली एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है। यहाँ नशे की लत में अंधे हो चुके एक कलयुगी भाई ने पैसे न देने पर अपने ही सगे भाई की कांच की टूटी बोतल से गला रेतकर बेरहमी से हत्या कर दी। मृतक की पहचान 28 वर्षीय कमल शर्मा के रूप में हुई है, जो पेशे से किसान था और शादीशुदा था। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी भाई मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है।
स्मैक के लिए मांग रहा था पैसे, मना करने पर मां के सामने ही कर दिया हमला
पुलिस से मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आरोपी कपिल लंबे समय से स्मैक के नशे का आदी है और कोई काम-धंधा नहीं करता था। बुधवार रात उसने अपने भाई कमल से स्मैक खरीदने के लिए पैसों की मांग की। कमल ने उसे नशे के लिए पैसे देने से साफ इनकार कर दिया, जिससे दोनों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। विवाद इतना बढ़ा कि आरोपी कपिल ने गुस्से में आकर घर में रखी कांच की एक बोतल तोड़ी और उसके नुकीले हिस्से से कमल के गले पर ताबड़तोड़ वार कर दिया। घटना के वक्त दोनों की मां भी घर में मौजूद थी, जो इस खौफनाक मंजर को देखकर सख्ते में आ गईं।
अस्पताल पहुंचने से पहले बह गया काफी खून, डॉक्टरों की कोशिशें रहीं नाकाम
हमले के बाद कमल के गले से भारी मात्रा में खून बहने लगा, जिससे वह वहीं तड़पकर गिर गया। परिजन और आस-पड़ोस के लोग आनन-फानन में गंभीर रूप से घायल कमल को इलाज के लिए कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे। अस्पताल के डॉक्टरों ने उसे बचाने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन घाव गहरा होने और अत्यधिक रक्तस्राव (ब्लीडिंग) हो जाने के कारण इलाज के दौरान उसकी सांसें थम गईं।
एफएसएल टीम ने जुटाए साक्ष्य; पुलिस का दावा- जल्द सलाखों के पीछे होगा हत्यारा भाई
वारदात की सूचना मिलते ही सेक्टर-32/33 थाना पुलिस और फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीमें रास रेजिडेंसी स्थित घटनास्थल पर पहुंचीं। एफएसएल की टीम ने मौके से खून के नमूने और अन्य महत्वपूर्ण भौतिक साक्ष्य एकत्र किए हैं। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज की मोर्चरी में भिजवा दिया है।
थाना प्रभारी जगदीश कुमार ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि हत्या का शिकार हुआ युवक और आरोपी दोनों सगे भाई हैं और मूल रूप से समाना बाहू गांव के निवासी हैं। परिजनों की शिकायत के आधार पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। आरोपी भाई की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की अलग-अलग टीमें संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं।
टी-कनेक्शन पर सरकार का इंकार, अलग लाइन के आश्वासन से नई उम्मीद
25 Jun, 2026 03:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़/चानौत। चानौत गांव के एक विशेष प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार सुबह चंडीगढ़ में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात कर गांव की समस्याओं को उनके सामने रखा। ग्रामीणों के अनुसार, मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से आश्वस्त किया कि चानौत गांव में पीने के पानी की कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी। जल संकट को दूर करने के लिए गांव को एक अलग स्वतंत्र पाइपलाइन की सौगात दी जाएगी। हालांकि, मुख्यमंत्री ने तकनीकी या प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए भाखड़ा पाइपलाइन पर टी-कनेक्शन (T-Connection) के जरिए पानी देने की मांग को खारिज कर दिया।
ग्रामीणों की टी-कनेक्शन की मांग बरकरार, महापंचायत बुलाकर तय करेंगे आगे की रणनीति
मुख्यमंत्री से सकारात्मक बातचीत के बावजूद ग्रामीण अब भी अपनी पुरानी मांग पर अड़े हुए हैं। ग्रामीणों का मुख्य रूप से कहना है कि उन्हें भाखड़ा मुख्य पाइपलाइन पर लगाए गए टी-कनेक्शन से ही पानी की सप्लाई दी जाए। सीएम सैनी से मुलाकात के बाद प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने बताया कि वे इस फैसले को लेकर चानौत और आसपास के अन्य गांवों के मौजिज लोगों के साथ एक साझा बैठक (महापंचायत) बुलाएंगे। इस सामूहिक चर्चा के बाद ही इस मुद्दे पर आगे की रणनीति और आंदोलन की दिशा तय की जाएगी।
जल्द चानौत गांव का दौरा करेंगे मुख्यमंत्री, विकास कार्यों को प्राथमिकता देने का वादा
प्रतिनिधिमंडल से चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने केवल पानी ही नहीं, बल्कि गांव के समग्र विकास को लेकर भी बड़ी बात कही। उन्होंने भरोसा दिलाया कि चानौत गांव में लंबित पड़े विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द शुरू कराया जाएगा। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों से कहा कि वे स्वयं जमीनी हकीकत, जनसमस्याओं और विकास योजनाओं का जायजा लेने के लिए बहुत जल्द चानौत गांव का दौरा करेंगे। बहरहाल, सीएम से हुई इस हाई-प्रोफाइल वार्ता के बाद अब सबकी नजरें ग्रामीणों की आगामी महापंचायत और उनके अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं।
कश्मीर यात्रा से लौटते समय हादसा, परिवार के 10 सदस्य घायल
25 Jun, 2026 03:09 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से कश्मीर की वादियों में छुट्टियां मनाने गया एक परिवार बुधवार की अलसुबह भीषण सड़क हादसे का शिकार हो गया। अंबाला-जगाधरी हाईवे पर कैंट रामपुर मोड़ के समीप तड़के करीब 4 बजे यात्रियों से भरी एक तेज रफ्तार टेम्पो ट्रैवलर हाईवे पर मुड़ रहे एक हाइड्रा वाहन से सीधे टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि टेम्पो ट्रैवलर का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया। इस दर्दनाक दुर्घटना में वाहन में सवार महिलाओं और बच्चों समेत एक ही परिवार के 10 लोग गंभीर रूप से जख्मी हो गए, जिसके बाद हाईवे पर चीख-पुकार मच गई।
सहारनपुर की पीर वाली गली का है पीड़ित परिवार, राहगीरों और पुलिस ने निकाला बाहर
स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, दुर्घटना के शिकार हुए सभी लोग सहारनपुर के पीर वाली गली इलाके के निवासी हैं। पूरा परिवार गर्मियों की छुट्टियां बिताने के लिए किराए की टेम्पो ट्रैवलर गाड़ी से कश्मीर गया था और वापस घर लौट रहा था। तभी रामपुर मोड़ के पास यह हादसा हो गया। दुर्घटना की आवाज सुनकर मौके पर पहुंचे राहगीरों और पुलिसकर्मियों ने भारी मशक्कत के बाद क्षतिग्रस्त गाड़ी की खिड़कियों और दरवाजों को तोड़कर घायलों को बाहर निकाला और तुरंत एम्बुलेंस के जरिए नजदीकी नागरिक अस्पताल पहुंचाया।
घायलों में 10 साल की बच्ची भी शामिल; नाजुक हालत के चलते 3 मरीज हायर सेंटर रेफर
इस हादसे में घायल होने वाले सभी लोग आपस में रिश्तेदार हैं, जिनमें पुरुष, महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। घायलों की पहचान अब्दुल वाहिद, जहांगीर आलम, गुलफाम, सलमान, अवदोत, सामत, मिस्बा, गुलअफशां, उजमा और 10 वर्षीय मासूम बच्ची महिमा के रूप में हुई है। अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक, सभी को काफी चोटें आई हैं। इनमें से बच्ची महिमा समेत 3 लोगों की नाजुक हालत को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए हायर मेडिकल सेंटर रेफर कर दिया गया है। पुलिस ने दुर्घटना में शामिल दोनों वाहनों को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है।
तकनीक में चीन का बड़ा धमाका, दुनिया का सबसे ताकतवर सुपरकंप्यूटर लॉन्च
25 Jun, 2026 11:22 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। तकनीक की दुनिया से एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। चीन ने सुपरकंप्यूटिंग के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचते हुए अमेरिका को तगड़ा झटका दिया है। चीन के 'लाइनशाइन' नामक सुपरकंप्यूटर ने अमेरिका के सबसे तेज कंप्यूटर को पीछे छोड़कर दुनिया में पहला स्थान हासिल कर लिया है। साल 2017 के बाद यह पहला मौका है जब किसी चीनी कंप्यूटर ने दुनिया में यह गौरव हासिल किया है, जो वैश्विक स्तर पर चीन की बढ़ती तकनीकी ताकत का लोहा मनवाता है।
धमाकेदार एंट्री के साथ टॉप500 रैंकिंग में शीर्ष पर
चीन के शेनझेन शहर में स्थित नेशनल सुपरकंप्यूटिंग सेंटर में स्थापित 'लाइनशाइन' को दुनिया के सबसे शक्तिशाली सुपरकंप्यूटरों की प्रतिष्ठित 'टॉप500' सूची में पहला स्थान मिला है। मंगलवार को जारी हुई इस ग्लोबल रैंकिंग में लाइनशाइन ने पहली ही बार में बाजी मार ली। इसकी गणना करने की रफ़्तार अविश्वसनीय रूप से 2.198 एक्साफ्लॉप्स आंकी गई है। इसे आसान शब्दों में समझें, तो यह जादुई कंप्यूटर महज एक सेकंड में 2 क्विंटिलियन (यानी 1 के बाद 18 शून्य) से भी ज्यादा गणनाएं कर सकता है। इतनी तेज गति से मौसम के सटीक पूर्वानुमान से लेकर नई दवाओं की खोज और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे जटिल क्षेत्रों में एक नई क्रांति आ सकती है।
अमेरिकी कंप्यूटर दूसरे स्थान पर खिसका
चीन की इस कामयाबी से अमेरिकी खेमे में हलचल मचना तय है। अब तक दुनिया में नंबर वन का रुतबा रखने वाला अमेरिका का 'एल कैपिटन' सुपरकंप्यूटर, जो कैलिफोर्निया की लॉरेंस लिवरमोर नेशनल लैबोरेटरी में है, अब दूसरे पायदान पर खिसक गया है। इसके अलावा, तीसरे और चौथे स्थान पर भी अमेरिकी सुपरकंप्यूटर ही काबिज हैं, जबकि जर्मनी का 'जुपिटर' सुपरकंप्यूटर पांचवें स्थान पर है। वर्तमान में दुनिया भर में केवल यही पांच कंप्यूटर ऐसे हैं जिन्हें आधिकारिक तौर पर 'एक्सास्केल' यानी दुनिया के सबसे तेज कंप्यूटरों की श्रेणी में रखा गया है।
बिना ग्राफिक्स चिप के स्वदेशी सीपीयू से किया कमाल
लाइनशाइन की सबसे अनोखी और हैरान करने वाली बात यह है कि इसने यह मुकाम बिना किसी विशेष ग्राफिक्स चिप (GPU) के, सिर्फ सामान्य कंप्यूटर चिप यानी सीपीयू (CPU) के दम पर हासिल किया है। आज के समय में जहां एआई के ज्यादातर बड़े सुपरकंप्यूटर ग्राफिक्स चिप का इस्तेमाल करते हैं, वहीं चीन ने अपने स्वदेशी सीपीयू के बेहतर तालमेल और शानदार इंजीनियरिंग से यह रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन कर दिखाया है। इस महामशीन को सुचारू रूप से चलाने के लिए लगभग 42.2 मेगावाट बिजली की जरूरत पड़ती है। इस बड़ी छलांग के साथ चीन ने भविष्य के वैज्ञानिक अनुसंधानों की दौड़ में खुद को सबसे आगे ला खड़ा किया है।
मिसाइलों को लेकर ट्रंप का बड़ा तर्क, ईरान पर कही अहम बात
25 Jun, 2026 09:16 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
न्यूयार्क। अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में शुरू हुई वार्ता को एक बड़ी कूटनीतिक कामयाबी के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, जमीनी हकीकत इसके उलट है। जिन मुख्य विवादों के कारण दोनों देशों के बीच युद्ध जैसी स्थिति पैदा हुई थी, उन पर आज भी कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी है। हैरान करने वाली बात यह है कि ईरान के जिस बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को रोकना इजराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू का सबसे बड़ा मकसद था, उसे बातचीत के एजेंडे से ही पूरी तरह बाहर कर दिया गया है।
मिसाइल कार्यक्रम पर ईरान की दो टूक और ट्रंप का बदलता रुख
युद्ध की शुरुआत में अमेरिका और इजराइल ने दावा किया था कि तेहरान की मिसाइल क्षमता पूरी दुनिया और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है और इसे नष्ट करना उनका मुख्य उद्देश्य है। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने साफ किया है कि अमेरिका-ईरान समझौते में मिसाइल कार्यक्रम का कोई जिक्र ही नहीं है। वहीं, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भी दो टूक कहा है कि उनका देश अपने मिसाइल कार्यक्रम पर किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा, क्योंकि यही मिसाइलें उनकी सुरक्षा की गारंटी हैं। दिलचस्प बात यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी अपने पुराने रुख से पीछे हटते दिख रहे हैं। अप्रैल में जहाँ वाशिंगटन ईरान की मिसाइलों को नष्ट करना चाहता था, वहीं अब ट्रंप कह रहे हैं कि अगर दूसरे देशों के पास मिसाइलें हैं, तो ईरान के पास भी कुछ मिसाइलें होना गलत नहीं है।
परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज स्ट्रेट पर बरकरार है सस्पेंस
दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा भी अब तक अनसुलझा है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु ठिकानों की अंतरराष्ट्रीय जांच (निरीक्षण) कराए और परमाणु हथियार न बनाने की लिखित गारंटी दे। दूसरी तरफ, तेहरान का लगातार कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों और ऊर्जा के लिए है। दोनों पक्षों के बीच अविश्वास की खाई इतनी गहरी है कि तेल व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण रास्ते 'होर्मुज स्ट्रेट' को लेकर भी तनाव कम नहीं हुआ है। अमेरिका इस समुद्री मार्ग को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए पूरी तरह खुला और सुरक्षित रखना चाहता है, जबकि ईरान इस रणनीतिक रास्ते पर अपना दबदबा छोड़ने को तैयार नहीं है।
इजराइल बना शांति समझौते की सबसे बड़ी बाधा
इस पूरे शांति समझौते में इजराइल सबसे बड़ा रोड़ा बनकर उभरा है। अमेरिका जहाँ क्षेत्र में संघर्ष को पूरी तरह खत्म करना चाहता है, वहीं इजराइल अब भी दक्षिणी लेबनान से अपनी सेना हटाने को राजी नहीं है। इजराइल ने शर्त रखी है कि जब तक हिज्बुल्लाह का पूरी तरह से निशस्त्रीकरण नहीं हो जाता, वह पीछे नहीं हटेगा। इससे साफ है कि इस मामले में वाशिंगटन और इजराइल की सोच और प्राथमिकताओं में बड़ा अंतर आ चुका है।
युद्ध टला, पर स्थायी शांति की उम्मीद कम
स्विट्जरलैंड में अगले 60 दिनों के भीतर एक अंतिम समझौते पर पहुँचने की कोशिशें की जाएंगी। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों को देखकर ऐसा लगता है कि न तो मिसाइल मुद्दे पर कोई सहमति बनी है, न परमाणु विवाद का हल निकला है और न ही इजराइल अमेरिकी रणनीति के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है। ऐसे में यह कहना बेहद मुश्किल है कि यह युद्ध विराम कुछ हफ्तों या महीनों का है, या फिर यह किसी बड़े और नए टकराव की उलटी गिनती है।
वेनेजुएला में विनाशकारी भूकंप, USGS ने जताई 10 हजार से 1 लाख मौतों की आशंका
25 Jun, 2026 08:39 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काराकास। दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला से एक बहुत ही दुखद और बड़ी खबर सामने आ रही है। यहाँ प्रकृति का ऐसा कहर टूटा है जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। वेनेजुएला में एक के बाद एक आए दो भीषण भूकंपों ने भयंकर तबाही मचाई है, जिससे चारों तरफ सिर्फ मलबे का ढेर और चीख-पुकार सुनाई दे रही है।
मात्र एक मिनट में दो तगड़े झटके
इस प्राकृतिक आपदा की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ मात्र एक मिनट के भीतर दो बेहद शक्तिशाली भूकंप आए। पहले झटके की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 7.1 मापी गई, और लोग संभल पाते उससे पहले ही 7.5 तीव्रता का दूसरा विनाशकारी झटका आ गया। इन दोनों बड़े झटकों ने संभलने का जरा सा भी मौका नहीं दिया और देखते ही देखते हंसते-खेलते शहर मलबे में तब्दील हो गए।
चारों तरफ भारी तबाही और नुकसान
भूकंप के इन तेज झटकों के कारण देश में भारी नुकसान हुआ है। कई गगनचुंबी इमारतें, दफ्तर और सैकड़ों मकान ताश के पत्तों की तरह ढह गए हैं। इस भीषण त्रासदी में अब तक 10 हजार से भी अधिक लोगों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है। मलबे के नीचे अभी भी भारी संख्या में लोग दबे हुए हैं, जिससे जान-माल का नुकसान और ज्यादा बढ़ने का खतरा बना हुआ है।
युद्ध स्तर पर राहत और बचाव कार्य जारी
इस महाविनाश के बाद प्रभावित इलाकों में हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं। स्थानीय प्रशासन और राहत एजेंसियां युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं। मलबे को हटाकर दबे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की हरसंभव कोशिश की जा रही है। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया जा रहा है, जहाँ डॉक्टरों की टीमें चौबीसों घंटे घायलों के इलाज में जुटी हुई हैं। इस मुश्किल घड़ी में पूरे देश में हाहाकार मचा हुआ है।
सुरक्षा रणनीति में बड़ा बदलाव, इजराइल करेगा स्वदेशी हथियारों का निर्माण
24 Jun, 2026 04:20 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेल अवीव:इजराइल के प्रधानमंत्री ने देश की सुरक्षा और रक्षा नीतियों को लेकर एक बेहद बड़ा और रणनीतिक बयान दिया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि इजराइल को अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अब अमेरिका पर अपनी सैन्य और हथियारों की निर्भरता को धीरे-धीरे कम करना होगा। प्रधानमंत्री के मुताबिक, भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए इजराइल को अब आत्मनिर्भर बनना होगा और अपने अत्याधुनिक रक्षा उपकरण व हथियार खुद बनाने की क्षमता (सेल्फ-रिलायंस) तेजी से विकसित करनी होगी।
अमेरिका पर निर्भरता कम करने की वजह
इजराइल लंबे समय से आधुनिक हथियारों, मिसाइल डिफेंस सिस्टम (जैसे आयरन डोम के इंटरसेप्टर्स) और सैन्य फंड के लिए बहुत हद तक अमेरिका पर निर्भर रहा है। हालांकि, हाल के दिनों में वैश्विक राजनीति और आंतरिक अमेरिकी राजनीति के बदलते रुख को देखते हुए इजराइली नेतृत्व को यह अहसास हुआ है कि किसी एक देश पर पूरी तरह निर्भर रहना दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
घरेलू रक्षा उद्योग को मिलेगा बढ़ावा
इस फैसले के बाद अब इजराइल अपने घरेलू रक्षा विनिर्माण (डोमेस्टिक डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग) पर निवेश बढ़ाएगा। इजराइल की राफेल (Rafael), एलबिट सिस्टम्स (Elbit Systems) और इजराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) जैसी दिग्गज कंपनियां अब घरेलू स्तर पर ही बड़े पैमाने पर हथियारों और गोला-बारूद का उत्पादन शुरू करेंगी, ताकि विदेशी सप्लायर्स पर निर्भरता खत्म की जा सके। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया शांति समझौते के बाद मध्य-पूर्व (मिडल-ईस्ट) के समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और इजराइल अपनी भविष्य की सुरक्षा प्राथमिकताओं को नए सिरे से तय कर रहा है।
मिडिल ईस्ट संकट के बावजूद होर्मुज से तेल परिवहन में नहीं आई रुकावट
24 Jun, 2026 03:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि सोमवार को 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) से रिकॉर्ड 1.9 करोड़ (19 मिलियन) बैरल कच्चे तेल की आवाजाही हुई है। राष्ट्रपति ट्रंप के मुताबिक, वैश्विक तेल व्यापार के इतिहास में एक ही दिन के भीतर इस समुद्री मार्ग से कच्चे तेल की इतनी बड़ी मात्रा की सप्लाई होना अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है।
शांति समझौते का सीधा असर
अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को हुए ऐतिहासिक शांति समझौते के बाद इस क्षेत्र में बना सैन्य तनाव काफी कम हुआ है। पहले जहां युद्ध और जहाजों के पकड़े जाने के डर से तेल टैंकर इस रूट पर आने से कतरा रहे थे, वहीं अब तनाव घटने के बाद से व्यापारिक जहाजों और तेल टैंकरों ने पूरी क्षमता के साथ इस मार्ग का उपयोग करना शुरू कर दिया है।
वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए संजीवनी
होर्मुज स्ट्रेट से रिकॉर्ड मात्रा में तेल की इस सुरक्षित निकासी से वैश्विक ऊर्जा बाजार (ग्लोबल एनर्जी मार्केट) ने बड़ी राहत की सांस ली है। कच्चे तेल की इतनी भारी और निर्बाध सप्लाई से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलेगी, जिससे भारत सहित दुनिया के तमाम बड़े आयातक देशों को बड़ी आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।
पानीपत हिंसा का मामला फिर गरमाया, पीजीआई रोहतक में घायल युवक की मौत के बाद हंगामा
24 Jun, 2026 02:35 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रोहतक: सदर थाना के तहत आने वाले बडौली गांव में करीब दो माह पूर्व हुए पारिवारिक विवाद के दौरान गंभीर रूप से जख्मी हुए युवक शेखर की इलाज के दौरान मौत हो गई। वारदात के बाद से ही उसका इलाज पीजीआई रोहतक में चल रहा था, जहाँ उसने दम तोड़ दिया। जैसे ही युवक की मौत की सूचना उसके परिवार तक पहुँची, परिजनों का धैर्य जवाब दे गया। उन्होंने स्थानीय पुलिस प्रशासन पर मामले में ढिलाई बरतने का आरोप लगाते हुए अस्पताल और इलाके में जमकर हंगामा किया।
सगे ताऊ के परिवार के साथ हुआ था जानलेवा विवाद
घटनाक्रम के अनुसार, बीते अप्रैल महीने में बडौली गांव में शेखर का अपने सगे ताऊ के परिवार के साथ किसी घरेलू बात को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। देखते ही देखते इस कहासुनी ने एक भयानक खूनी संघर्ष का रूप ले लिया, जिसमें दोनों पक्षों की ओर से लाठी-डंडों और तेजधार हथियारों का खुलकर इस्तेमाल किया गया। इस हिंसक झड़प में शेखर को सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में जानलेवा चोटें आई थीं। उसे तुरंत गंभीर हालत में पीजीआई रोहतक रेफर किया गया था, जहाँ पिछले 60 दिनों से वह वेंटिलेटर और डॉक्टरों की निगरानी में था।
जांच में ढिलाई और आरोपियों को शह देने के आरोप
शेखर की मौत की खबर के बाद से बडौली गांव और मृतक के कुनबे में गहरा आक्रोश व्याप्त है। रोते-बिलखते परिजनों ने आरोप लगाया कि वारदात के दिन से ही पुलिस इस पूरे मामले को दबाने की कोशिश कर रही थी। उनका कहना है कि मुख्य आरोपियों की समय पर गिरफ्तारी न होना पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों और परिजनों के बढ़ते गुस्से व विरोध-प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रभावित जगहों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जा रहा है।
चानौत में तनावपूर्ण हालात, विरोध के बीच 36 इंची पाइपलाइन बिछाने का काम ठप
24 Jun, 2026 02:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हांसी: हरियाणा के हांसी क्षेत्र अंतर्गत आने वाले चानौत गांव में पेयजल संकट को लेकर चल रहा विवाद सोमवार को एक बार फिर सुलग उठा। प्रशासन द्वारा 36 इंची मुख्य पेयजल पाइपलाइन को दोबारा बिछाने की कोशिशों की खबर मिलते ही सैकड़ों की तादाद में ग्रामीण प्रदर्शनकारी मोर्चे पर डट गए। देखते ही देखते भारी पुलिस बल और ग्रामीणों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई। माहौल को बिगड़ता देख प्रशासन को बैकफुट पर आना पड़ा और काम को बीच में ही रोक दिया गया। मौके की नजाकत को भांपते हुए डीएसपी रविंद्र सांगवान ने पुलिसकर्मियों को पीछे हटने के आदेश दिए, जबकि बिजली निगम के एसडीओ मोहनलाल को बतौर ड्यूटी मजिस्ट्रेट तैनात किया गया है।
ग्रामीणों की दोटूक: 'स्थायी समाधान तक नहीं बिछने देंगे लाइन'
तनावपूर्ण माहौल के बीच आंदोलनकारी ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि जब तक चानौत गांव की प्यास बुझाने के लिए कोई ठोस और स्थायी प्रबंध नहीं किया जाता, तब तक वे इस मुख्य पाइपलाइन को किसी भी कीमत पर बिछने नहीं देंगे। ग्रामीण लगातार मौके पर जमे हुए हैं और प्रशासनिक हठधर्मिता के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि यदि 36 इंची लाइन में 'टी' (T-joint) जोड़कर गांव को पानी देने में तकनीकी अड़चन है, तो इस पूरी पाइपलाइन की क्षमता को बढ़ाकर 42 इंची कर दिया जाए ताकि हांसी शहर के साथ-साथ चानौत को भी पर्याप्त पानी मिल सके। दूसरी तरफ, प्रशासन द्वारा भाखड़ा नहर से 8 किलोमीटर लंबी वैकल्पिक लाइन बिछाने के प्रस्ताव को ग्रामीणों ने सिरे से खारिज कर दिया है।
छावनी में तब्दील हुआ गांव, दूसरे जिलों से बुलाई गई फोर्स
कानून-व्यवस्था को बनाए रखने और किसी भी अप्रिय हिंसक घटना को रोकने के लिए चानौत गांव को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। स्थानीय पुलिस के अलावा एहतियात के तौर पर पड़ोसी जिलों से भी अतिरिक्त सुरक्षा बल की टुकड़ियां मंगवाई गई हैं। फिलहाल मौके पर शांति है लेकिन दोनों पक्षों के कड़े रुख को देखते हुए गतिरोध जल्द खत्म होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
समझिए क्या है 39 दिनों से जारी इस पानी विवाद की पूरी इनसाइड स्टोरी
चानौत गांव का यह पेयजल संकट और प्रशासनिक टकराव कोई नया नहीं है। इस मुद्दे की पूरी कड़ियाँ नीचे दिए गए घटनाक्रम से समझी जा सकती हैं:
39 दिनों से जारी धरना: हांसी शहर की प्यास बुझाने के लिए बिछाई जा रही 36 इंची मुख्य लाइन को लेकर ग्रामीण पिछले 39 दिनों से लगातार धरने पर बैठे हैं। पूर्व में इस लाइन को उखाड़े जाने के बाद कई लोगों पर मुकदमे भी दर्ज हुए थे।
आमरण अनशन और प्रशासन की चेतावनी: ग्रामीणों ने पानी की मांग को लेकर आमरण अनशन शुरू कर दिया था, जिसमें कई बुजुर्गों की तबीयत बिगड़ने लगी थी। इस दौरान प्रशासन ने आंदोलनकारी कमेटी को चेतावनी दी थी कि यदि किसी बुजुर्ग की जान गई, तो कमेटी के सदस्यों पर सीधे हत्या का केस दर्ज किया जाएगा।
'टी' लगाने का जश्न और फिर यू-टर्न: इसी बीच धरनास्थल पर यह संदेश पहुंचा कि विभाग ने लाइन में 'टी' लगाने की मंजूरी दे दी है। ग्रामीणों ने खुशी में अनशन तोड़ा और लाइन में जोड़ (टी) लगा दिया। लेकिन अगले ही दिन जन स्वास्थ्य विभाग के एक्सईएन ने इस मंजूरी को फर्जी बताते हुए केस दर्ज करने की बात कही।
आधी रात का एक्शन और 1500 लोगों पर FIR: इसके बाद भारी पुलिस बल ने रात के अंधेरे में धावा बोलकर ग्रामीणों द्वारा लगाई गई 'टी' को उखाड़ फेंका। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस और ग्रामीणों में तीखी झड़प हुई, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 6 नामजद सहित करीब 1500 अज्ञात ग्रामीणों के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दिया है।
तनावपूर्ण हालात के बीच होर्मुज से गुजरे भारत से जुड़े 11 पोत
24 Jun, 2026 02:11 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दुबई: अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को हुए ऐतिहासिक शांति समझौते के बाद वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। इस समझौते के लागू होने के बाद से अब तक भारत से जुड़े 11 बड़े कमर्शियल और व्यापारिक जहाज कच्चे तेल के मुख्य समुद्री मार्ग 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) को सुरक्षित पार कर भारत के लिए रवाना हो चुके हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य का रणनीतिक महत्व
ओमान और ईरान के बीच स्थित होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्ग है। वैश्विक स्तर पर होने वाले कुल कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के व्यापार का लगभग पांचवां (20%) हिस्सा इसी तंग रास्ते से होकर गुजरता है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल खाड़ी देशों (मिडल-ईस्ट) से इसी मार्ग के जरिए आयात करता है।
भारत के लिए क्यों है यह बड़ी राहत?
सप्लाई चेन हुई सुरक्षित: अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कुछ समय से जारी सैन्य तनाव के कारण इस क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों पर हमले और उन्हें बंधक बनाए जाने का खतरा काफी बढ़ गया था। इस नए समझौते से भारत की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) को स्थिरता मिली है।
मालभाड़े और बीमा में कमी: तनाव कम होने से समुद्री जहाजों के लिए युद्ध-जोखिम बीमा प्रीमियम (War-Risk Insurance Premium) और मालभाड़े की दरों में कमी आएगी, जिसका सीधा फायदा भारतीय तेल कंपनियों और अंततः उपभोक्ताओं को मिल सकता है।
इस समझौते के बाद होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है, जिससे खाड़ी क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियां एक बार फिर पूरी रफ्तार से बहाल हो रही हैं।
हादसे के बाद प्रशासन सख्त, सुपरवाइजर पर गिरी गाज और कंपनी हुई ब्लैकलिस्ट
