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ईरान बनाम अमेरिका तनाव बढ़ा, होर्मुज को लेकर दी कड़ी धमकी
4 May, 2026 08:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन डीसी/तेहरान: पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक और सैन्य रस्साकशी एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। मई 2026 के शुरुआती हफ्तों में आ रही रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान की 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर' (IRGC) ने अमेरिका को सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास अब सीमित विकल्प बचे हैं।
ईरान का 14 सूत्रीय शांति प्रस्ताव और ट्रंप की प्रतिक्रिया
ईरानी मीडिया और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के अनुसार, तेहरान ने पाकिस्तान की मध्यस्थता के जरिए अमेरिका को एक 14 सूत्रीय व्यापक शांति प्रस्ताव भेजा है। यह प्रस्ताव अमेरिका के पिछले 9 सूत्रीय प्लान के जवाब में है।
प्रमुख मांगें: 30 दिनों के भीतर सभी विवादों का समाधान, भविष्य में किसी भी सैन्य हमले के खिलाफ लिखित गारंटी, क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों की पूर्ण वापसी, जब्त किए गए ईरानी एसेट्स की रिहाई और प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाना।
ट्रंप का रुख: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर पुष्टि की है कि उन्हें पाकिस्तान के माध्यम से प्रस्ताव का कांसेप्ट मिला है। हालांकि, उन्होंने कहा, "वे समझौता करना चाहते हैं, लेकिन मैं वर्तमान प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं हूं। वे ऐसी चीजें मांग रहे हैं जिन पर सहमति जताना कठिन है।" ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यदि ईरान कोई गलती करता है, तो सैन्य हमले का विकल्प अब भी मेज पर है।
होर्मुज जलडमरूमध्य: "अमेरिकी सेना की कब्रगाह"
ईरान के वरिष्ठ सैन्य सलाहकार और पूर्व IRGC कमांडर मोहसिन रजाई ने अमेरिका को सीधी धमकी दी है। उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को अमेरिकी नौसेना के लिए 'कब्रगाह' बना दिया जाएगा। रजाई ने अमेरिका को 'विमान वाहक पोतों वाला समुद्री लुटेरा' करार देते हुए अप्रैल 2026 में इस्फहान के पास मार गिराए गए अमेरिकी F-15E स्ट्राइक ईगल विमान का उदाहरण दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिकी जहाजों का हश्र भी उस विमान के मलबे जैसा ही होगा।
ईरानी संसद का नया कानून: इजरायली जहाजों पर स्थायी प्रतिबंध
तेहरान में ईरानी सांसदों ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण कड़ा करने के लिए एक 12 सूत्रीय मसौदा योजना पेश की है।
इजरायल पर पाबंदी: इस योजना के तहत इजरायली जहाजों के इस महत्वपूर्ण समुद्री गलियारे से गुजरने पर स्थायी प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है।
अमेरिका के लिए शर्त: अमेरिकी जहाजों को केवल तभी अनुमति दी जाएगी, जब अमेरिका युद्ध के दौरान ईरान को हुए सभी आर्थिक और बुनियादी नुकसानों की भरपाई (मुआवजा) करेगा।
नया प्रबंधन: ईरानी संसद के उपाध्यक्ष अली निकजाद ने कहा कि जलडमरूमध्य का नया प्रबंधन "ईरान के तेल उद्योग के राष्ट्रीयकरण" जितना ही महत्वपूर्ण है और अब स्थिति युद्ध से पहले जैसी नहीं रहेगी।
युद्ध या समझौता: मझधार में फंसे डोनाल्ड ट्रंप
3 May, 2026 11:25 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी सैन्य तनाव अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में मीडिया से चर्चा के दौरान स्पष्ट किया है कि वर्तमान परिस्थितियों में अमेरिका के पास केवल दो ही विकल्प शेष हैं या तो ईरान के विरुद्ध एक व्यापक सैन्य अभियान छेड़ दिया जाए या फिर कूटनीतिक बातचीत के जरिए किसी ठोस समझौते पर पहुंचा जाए। ट्रंप ने संकेत दिया कि हालांकि वह व्यक्तिगत रूप से युद्ध के बजाय समाधान पसंद करेंगे, लेकिन ईरान द्वारा हाल ही में भेजा गया शांति प्रस्ताव अमेरिका की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरता है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने रक्षा अधिकारियों के साथ हुई उच्च स्तरीय बैठक का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका ऐसी कोई आधी-अधूरी डील स्वीकार नहीं करेगा जिससे कुछ वर्षों बाद पुन: संकट खड़ा हो। गौरतलब है कि ईरान ने पाकिस्तान की मध्यस्थता के जरिए अपना नया प्रस्ताव गुरुवार को इस्लामाबाद को सौंपा था, जिसे अमेरिकी प्रशासन ने फिलहाल अपर्याप्त माना है। याद रहे कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों के बाद शुरू हुआ संघर्ष 8 अप्रैल से युद्धविराम की स्थिति में है, लेकिन कूटनीतिक गतिरोध अब भी बना हुआ है।
इस तनाव का सबसे गंभीर असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पड़ रहा है, जहां ईरान की पकड़ के कारण वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति बाधित हुई है। जवाब में अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी कर दी है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की कीमतों में अस्थिरता देखी जा रही है। अमेरिका की मुख्य शर्त यह है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और समृद्ध यूरेनियम से जुड़ी गतिविधियों को पूरी तरह बंद करे, जबकि ईरान के अधिकारियों का कहना है कि वे दबाव में आकर कोई समझौता नहीं करेंगे।
वर्तमान में दोनों देश आंतरिक चुनौतियों से भी जूझ रहे हैं। अमेरिका में बढ़ती महंगाई और युद्ध के अनिश्चित परिणामों के कारण ट्रंप प्रशासन पर राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है, वहीं ईरान में महंगाई की दर 50% के पार पहुंच गई है जिससे वहां की अर्थव्यवस्था चरमरा रही है। इसी बीच अमेरिका ने ईरान की तीन विदेशी मुद्रा कंपनियों पर नए प्रतिबंध लगाकर आर्थिक दबाव और बढ़ा दिया है। फिलहाल युद्धविराम तो कायम है, लेकिन शांति वार्ता के असफल होने की आशंका ने पूरी दुनिया को अनिश्चितता के भंवर में डाल दिया है। कूटनीतिक गलियारों में अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या दोनों देश युद्ध के विनाशकारी विकल्प को छोड़कर किसी साझा सहमति पर पहुंच पाएंगे।
ट्रंप और चांसलर मर्ज के विवाद के बाद लिया गया जर्मनी से सैनिक हटाने का फैसला
3 May, 2026 10:23 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। ईरान को लेकर जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के बयान पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नाराजगी के बाद ट्रांस-अटलांटिक संबंधों में तनाव बढ़ा और सैन्य वापसी का ऐलान कर दिया। अब सवाल है कि आखिर जर्मनी को क्यों जरूरत है अमेरिकी सेना की, क्या है इसका इतिहास? जर्मनी में अमेरिकी सेना की मौजूदगी की शुरुआत दूसरे विश्व युद्ध के समय 1945 में हुई थी। जब नाजी शासन ने सरेंडर किया था, तब देश में 16 लाख अमेरिकी सैनिक थे, यह संख्या एक साल के अंदर घटकर 3 लाख से भी कम रह गई थी और ये सैनिक मुख्य रूप से अमेरिकी कब्जे वाले इलाके का इंतजाम संभाल रहे थे।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक शीत युद्ध शुरू होने तक जर्मनी में अमेरिकी मौजूदगी लगातार कम होती रही। इस दौरान अमेरिकी सेना का मकसद नाजीवाद को खत्म करने से बदलकर जर्मनी को फिर से खड़ा करना था, ताकि वह सोवियत संघ के खिलाफ एक मजबूत दीवार की तरह खड़ा हो सके। 1949 में नाटो और पश्चिमी जर्मनी के बनने के साथ ही, ये मिलिट्री बेस हमेशा के लिए वहीं जम गए। शीत युद्ध के चरम पर अमेरिका जर्मनी में करीब 50 बड़े बेस और 800 से ज़्यादा जगहों से अपना काम चला रहा था। इनमें बड़े-बड़े हवाई अड्डों और बैरकों से लेकर जासूसी करने वाले ठिकाने तक शामिल थे। 1989 में बर्लिन की दीवार गिरने और उसके दो साल बाद सोवियत संघ की टूट के बाद से इनमें से कई बेस बंद हो गए। 1960, 1970 और 1980 के दशकों में, जर्मनी में अमेरिकी सैनिकों की संख्या अक्सर 2,50,000 से ज्यादा रहती थी। इसके अलावा, लाखों लोग यानी सैनिकों के परिजन इन बेस के अंदर या आस-पास ही रहते थे। ये बेस धीरे-धीरे अपने आप में पूरे-पूरे अमेरिकी शहरों जैसे बन गए थे, जहां उनके अपने स्कूल, दुकानें और सिनेमाघर थे।
रिपोर्ट में अमेरिकी रक्षा विभाग के डेटा के मुताबिक यूरोप में करीब 68,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, जिनमें से करीब 36,400 सिर्फ जर्मनी में हैं। ये सैनिक 20 से 40 सैन्य अड्डों में फैले हैं, जिनकी संख्या बेस की परिभाषा के आधार पर अलग-अलग मानी जाती है। जर्मनी स्थित स्टटगार्ट मुख्यालय यूनाइटेड स्टेट्स यूरोपियन कमांड और यूनाइटेड स्टेट्स अफ्रीका कमांड का केंद्र है, जो यूरोप और अफ्रीका में अमेरिकी सैन्य अभियानों का संचालन करते हैं। इसके अलावा, रामस्टीन एयरबेस अमेरिका की यूरोप स्थित वायुसेना का मुख्यालय है, जहां करीब 8,500 वायुसेना कर्मी तैनात हैं।
बवेरिया क्षेत्र में ग्राफेनवोहर, विलसेक और होहेनफेल्स जैसे अड्डे यूरोप के सबसे बड़े अमेरिकी सैन्य प्रशिक्षण क्षेत्रों में शामिल हैं। वहीं, विस्बाडेन में अमेरिकी सेना यूरोप और अफ्रीका का मुख्यालय स्थित है। लैंडस्टूल मेडिकल सेंटर अमेरिका के बाहर सबसे बड़ा सैन्य अस्पताल माना जाता है। शीत युद्ध के बाद इन सैन्य अड्डों की भूमिका में बड़ा बदलाव आया। अब ये केवल रक्षा ठिकाने नहीं, बल्कि अमेरिका के लिए “फॉरवर्ड स्टेजिंग” और लॉजिस्टिक्स हब बन चुके हैं। यहीं से इराक, अफगानिस्तान और हालिया पश्चिम एशिया अभियानों जैसे युद्धों को समर्थन मिला है। ट्रंप पहले भी जर्मनी में तैनात सैनिकों को लेकर सख्त रुख अपना चुके हैं। वर्तमान में जर्मनी में अमेरिकी सेना की मौजूदगी को केवल यूरोप की सुरक्षा ही नहीं, बल्कि अमेरिका की वैश्विक सैन्य रणनीति का अहम हिस्सा माना जाता है। ऐसे में ट्रंप और मर्ज के बीच बढ़ता बयानबाजी का टकराव इस मुद्दे को और संवेदनशील बना रहा है, जिसका असर आने वाले समय में अमेरिका-यूरोप संबंधों और वैश्विक सुरक्षा संतुलन पर पड़ सकता है।
होर्मुज की घेराबंदी से ईरान को 40 हजार करोड़ का झटका
3 May, 2026 09:21 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। ईरान के खिलाफ अमेरिका की सख्त रणनीतिक घेराबंदी का व्यापक आर्थिक असर अब स्पष्ट रूप से धरातल पर दिखने लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में होर्मुज जलडमरूमध्य में की गई नाकेबंदी ने ईरानी अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इस ब्लॉकेड के कारण ईरान को अब तक लगभग 5 अरब डॉलर (करीब 40 हजार करोड़ रुपये) के तेल राजस्व का भारी नुकसान हो चुका है। अमेरिकी कार्रवाई के चलते ईरान के 40 से अधिक जहाजों को रास्ते से वापस भेज दिया गया है, जबकि 31 तेल टैंकर, जिनमें लगभग 53 मिलियन बैरल कच्चा तेल भरा है, वर्तमान में खाड़ी के बीच फंसे हुए हैं। इन फंसे हुए टैंकरों की कुल कीमत लगभग 4.8 अरब डॉलर आंकी गई है।
ईरान के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती तेल भंडारण की खड़ी हो गई है। जमीन पर जगह कम पड़ने के कारण वह अपने पुराने टैंकरों को ही ‘फ्लोटिंग स्टोरेज’ के रूप में इस्तेमाल करने को मजबूर है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही स्थिति कुछ और हफ्तों तक बनी रही, तो ईरान को विवश होकर अपना तेल उत्पादन रोकना पड़ सकता है, जो उसकी अर्थव्यवस्था के लिए आत्मघाती सिद्ध होगा। हालांकि, इस समुद्री घेराबंदी के बीच पाकिस्तान की भूमिका ने अंतरराष्ट्रीय जगत को चौंका दिया है। पाकिस्तान ने ईरान के साथ अपनी सीमा पर 6 नए व्यापारिक कॉरिडोर खोल दिए हैं, जिससे समुद्री रास्ता बंद होने के बावजूद ईरान को जमीनी मार्ग से आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।
दिलचस्प बात यह है कि इस जमीनी राहत पर अमेरिकी रुख काफी लचीला नजर आ रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस पर कोई कड़ी आपत्ति जताने के बजाय पाकिस्तानी नेतृत्व की सराहना की है, जिससे यह संकेत मिलता है कि संभवतः पाकिस्तान ने यह कदम अमेरिका की मौन सहमति से ही उठाया है। कूटनीतिक हलकों में चर्चा है कि ट्रंप प्रशासन ईरान को पूरी तरह तबाह करने के बजाय उसे एक सीमित राहत देकर समझौते की मेज पर लाने के लिए मजबूर करना चाहता है। दूसरी ओर, ईरान भी इस दबाव को कम करने के लिए नए रास्ते तलाश रहा है। उसके कुछ टैंकर अब भारत और मलेशिया के तटों से होते हुए मलक्का स्ट्रेट के जरिए चीन तक तेल पहुँचाने की कोशिश कर रहे हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि पश्चिम एशिया में चल रहा यह संघर्ष अब एक जटिल रणनीतिक खेल बन चुका है।
अदन की खाड़ी में समुद्री लुटेरों ने ऑयल टैंकर पर किया कब्जा
3 May, 2026 08:18 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अदन। अदन की खाड़ी में समुद्री डकैती की एक गंभीर घटना सामने आई है। शनिवार को अज्ञात हमलावरों ने यमन के तट के पास एक तेल टैंकर का अपहरण कर लिया और उसे सोमालिया की दिशा में मोड़ दिया। यमन के कोस्ट गार्ड ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि उन्होंने टैंकर की लोकेशन का पता लगा लिया है और वर्तमान में उस पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन अब चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करने और जहाज को लुटेरों के चंगुल से मुक्त कराने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर रणनीति बना रहा है।
जानकारी के अनुसार, हमलावरों ने यमन के शबवा प्रांत के पास टोगो के झंडे वाले तेल टैंकर यूरेका को निशाना बनाया। हमलावर जबरन जहाज पर चढ़ गए और चालक दल को बंधक बनाकर जहाज का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। मरीन ट्रैफिक डेटा के मुताबिक, इस टैंकर को आखिरी बार मार्च के अंत में संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह बंदरगाह पर देखा गया था। फिलहाल टैंकर पर सवार चालक दल के सदस्यों की कुल संख्या और उनकी नागरिकता के बारे में स्पष्ट जानकारी साझा नहीं की गई है। कोस्ट गार्ड के एक आधिकारिक बयान में कहा गया, हमने टैंकर की स्थिति को ट्रैक कर लिया है। हमारी प्राथमिकता चालक दल को सुरक्षित बचाना और हमलावरों को उनके मंसूबों में नाकाम करना है। हम इसे वापस नियंत्रण में लेने के लिए सभी आवश्यक सुरक्षा उपाय कर रहे हैं।
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब अदन की खाड़ी और सोमालियाई तट पर समुद्री डकैती का खतरा एक बार फिर गहराने लगा है। 2000 के दशक की शुरुआत में यह क्षेत्र समुद्री लूट का केंद्र था, जो 2011 में अपने चरम पर पहुंच गया था। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय नौसेनाओं की तैनाती के बाद इन घटनाओं में भारी कमी आई थी, लेकिन हाल के हफ्तों में आए उछाल ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। यूरोपीय संघ के नौसैनिक मिशन ऑपरेशन अटलांटा ने भी पिछले कुछ समय में हमलों की बढ़ती संख्या पर रिपोर्ट दी है।
हालांकि यह क्षेत्र वर्तमान में विभिन्न वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों से जूझ रहा है, लेकिन प्राथमिक जांच में इस अपहरण का मौजूदा युद्ध या राजनीतिक संघर्षों से सीधा संबंध होने का कोई संकेत नहीं मिला है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सोमालिया के पुंटलैंड क्षेत्र में समुद्री लुटेरों के नए समूहों की सक्रियता इस पुनरुत्थान का मुख्य कारण हो सकती है। फिलहाल, यमनी प्रशासन अंतरराष्ट्रीय बलों के साथ समन्वय कर टैंकर को मुक्त कराने के प्रयास तेज कर दिए हैं।
पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा, सैन्य बयान से हलचल तेज
2 May, 2026 06:33 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका ने ठुकराया ईरान का शांति प्रस्ताव, ईरानी सेना ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी
तेहरान/वॉशिंगटन: मध्य पूर्व (West Asia) में शांति बहाली की कोशिशों को उस समय बड़ा झटका लगा, जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुँच गया। शनिवार को ईरानी सेना के एक वरिष्ठ कमांडर ने दोनों देशों के बीच दोबारा युद्ध छिड़ने की आशंका जताते हुए अपनी सेना को 'हाई अलर्ट' पर रहने का निर्देश दिया है। यह तीखा बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के नए शांति प्रस्ताव को खारिज किए जाने के बाद सामने आया है।
ईरानी सेना का कड़ा रुख: "हम हर स्थिति के लिए तैयार"
ईरानी सशस्त्र बल मुख्यालय के उप प्रमुख मोहम्मद जाफर असदी ने स्पष्ट किया है कि ईरान अब अमेरिका की कूटनीतिक चालों में नहीं आने वाला। उनके बयान के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
ईमानदारी का अभाव: असदी ने आरोप लगाया कि अमेरिका किसी भी समझौते को लेकर कभी ईमानदार नहीं रहा है।
रणनीतिक जवाब: उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ने कोई भी उकसावे वाली कार्रवाई की, तो ईरानी सेना उसका कड़ा और निर्णायक जवाब देने के लिए तैयार है।
तेल की राजनीति: ईरानी कमांडर ने दावा किया कि अमेरिकी अधिकारियों के बयान केवल तेल की कीमतों को नियंत्रित करने और अपनी घरेलू स्थिति को सुधारने के लिए दिए जाते हैं।
ट्रंप का सख्त फैसला: "शर्तें स्वीकार्य नहीं"
इससे पहले व्हाइट हाउस में पत्रकारों से चर्चा करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी प्रस्ताव को यह कहते हुए ठुकरा दिया कि उसकी शर्तें अमेरिका के हितों के अनुकूल नहीं हैं।
बिखरा हुआ नेतृत्व: ट्रंप ने कहा कि ईरान का नेतृत्व वर्तमान में एकजुट नहीं है, जिससे किसी ठोस समझौते पर पहुँचना मुश्किल हो रहा है।
परमाणु कार्यक्रम पर 'नो कॉम्प्रोमाइज': ट्रंप ने दोहराया कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु शक्ति नहीं बनने देगा। उन्होंने कहा कि "पागलों के हाथ में परमाणु हथियार" पूरी दुनिया, विशेषकर इजरायल और यूरोप के लिए बड़ा खतरा हैं।
क्या फिर भड़केगी जंग की आग?
यह तनाव ऐसे समय में बढ़ा है जब हाल ही में (8 अप्रैल 2026 को) एक अस्थायी युद्धविराम के बाद स्थिति कुछ शांत हुई थी। लेकिन अब बातचीत की मेज पर गतिरोध ने फिर से सैन्य टकराव की स्थिति पैदा कर दी है।
विवाद के मुख्य कारण:
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: वैश्विक तेल आपूर्ति का सबसे संवेदनशील मार्ग, जिस पर ईरान अपना प्रभुत्व चाहता है।
यूरेनियम संवर्धन: अमेरिका चाहता है कि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह बंद करे, जबकि ईरान इसे अपना संप्रभु अधिकार मानता है।
वॉर पावर्स रेजोल्यूशन: ट्रंप ने इस कानून को असंवैधानिक बताते हुए विदेशी संघर्षों में अपनी सैन्य शक्तियों के प्रयोग को सही ठहराया है।
मैडम तुसाद में भारतीय सितारों का जलवा, दुनिया देख रही भारत की शान
2 May, 2026 06:22 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन के मैडम तुसाद में 'आइकन्स ऑफ इंडिया' का आगाज: एक ही छत के नीचे सजे भारत के 13 दिग्गज, सिनेमा और क्रिकेट का दिखेगा अनूठा संगम
लंदन स्थित दुनिया के सबसे मशहूर वैक्स म्यूजियम 'मैडम तुसाद' ने इस सप्ताह भारतीय प्रशंसकों के लिए एक विशेष उपहार पेश किया है। म्यूजियम में 'आइकन्स ऑफ इंडिया' उत्सव की शुरुआत की गई है, जहाँ भारतीय सिनेमा और क्रिकेट जगत की 13 महान हस्तियों के मोम के पुतलों को एक साथ प्रदर्शित किया गया है। यह आयोजन भारत की वैश्विक सांस्कृतिक धाक को लंदन के केंद्र में जीवंत कर रहा है।
सितारों के साथ सेल्फी का सुनहरा मौका
यह प्रदर्शनी केवल सीमित समय के लिए आयोजित की जा रही है। म्यूजियम के भव्य 'अवार्ड्स पार्टी जोन' को मई और जून के पूरे महीने के लिए भारतीय थीम पर आधारित एक रंगीन और जीवंत स्थान में तब्दील कर दिया गया है।
दिग्गज हस्तियाँ: यहाँ आने वाले पर्यटक सदी के महानायक अमिताभ बच्चन और क्रिकेट जगत के गौरव सचिन तेंदुलकर जैसे प्रतिष्ठित चेहरों के साथ रूबरू हो सकेंगे।
बॉलीवुड का जादू: प्रशंसक अपनी पसंदीदा अदाकाराओं जैसे दीपिका पादुकोण, प्रियंका चोपड़ा, कैटरीना कैफ, ऐश्वर्या राय और माधुरी दीक्षित के साथ-साथ रणवीर सिंह, ऋतिक रोशन और रणबीर कपूर के पुतलों के साथ पोज दे सकेंगे।
वैश्विक स्तर पर जुटाए गए पुतले
इस प्रदर्शनी को खास बनाने के लिए दुनिया भर के विभिन्न मैडम तुसाद केंद्रों से पुतले मंगाए गए हैं:
विराट कोहली: बैंकॉक से विशेष रूप से यहाँ लाए गए हैं।
ऐश्वर्या राय और रणबीर कपूर: इनके पुतले न्यूयॉर्क से लंदन पहुँचे हैं।
काजल अग्रवाल: दक्षिण भारतीय सिनेमा की इस स्टार का पुतला सिंगापुर से मंगाया गया है।
सांस्कृतिक संबंधों की नई ऊँचाई
मैडम तुसाद लंदन के जनरल मैनेजर स्टीव ब्लैकबर्न ने इस अवसर पर कहा, "बॉलीवुड और भारतीय क्रिकेट की वैश्विक अपील अद्भुत है। लंदन का इन क्षेत्रों के प्रति प्रेम साल-दर-साल और गहरा होता जा रहा है। इस प्रदर्शनी के जरिए हम प्रशंसकों को उनके चहेते सितारों के और भी करीब ला रहे हैं।"
वहीं, लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे भारत और यूके के बीच एक 'स्थायी सांस्कृतिक सेतु' बताया है। उच्चायोग के अनुसार, यह पहल न केवल भारत की भावना को लंदन के दिल में लाती है, बल्कि दोनों देशों के बीच मानवीय संबंधों को भी और मजबूती प्रदान करती है।
कला और तकनीक का 200 साल पुराना इतिहास
लगभग दो सदियों के गौरवशाली इतिहास वाला मैडम तुसाद म्यूजियम आज दुनिया के 24 शहरों में फैल चुका है। अपनी पारंपरिक कलात्मकता और आधुनिक तकनीक के बेजोड़ मेल के लिए प्रसिद्ध यह म्यूजियम खेल, सिनेमा और राजनीति की हस्तियों को मोम के जरिए जीवंत रूप देने के लिए दुनिया भर में जाना जाता है।
लंदन में भारतीय प्रतिभा को मिला अंतरराष्ट्रीय मंच
2 May, 2026 04:14 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन में भारतीय सितारों का जलवा: मैडम तुसाद में शुरू हुआ 'आइकन्स ऑफ इंडिया' उत्सव, एक ही छत के नीचे दिखेंगे सिनेमा और क्रिकेट के 13 दिग्गज
लंदन| ब्रिटेन की राजधानी लंदन स्थित दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित वैक्स म्यूजियम 'मैडम तुसाद' में इस सप्ताह से एक भव्य भारतीय उत्सव का आगाज हुआ है। 'आइकन्स ऑफ इंडिया' नाम की इस विशेष प्रदर्शनी में भारतीय फिल्म जगत और क्रिकेट की 13 महान हस्तियों के मोम के पुतलों को एक साथ प्रदर्शित किया गया है। यह आयोजन भारतीय संस्कृति और वैश्विक मनोरंजन में भारत के बढ़ते प्रभाव का एक शानदार मेल है।
मई-जून तक चलेगा सितारों का मेला
म्यूजियम के प्रसिद्ध 'अवार्ड्स पार्टी जोन' को विशेष रूप से इस उत्सव के लिए तैयार किया गया है। पूरे मई और जून के महीने में यह हिस्सा भारतीय रंग-ढंग में रंगा नजर आएगा। यहाँ आने वाले पर्यटकों को सदी के महानायक अमिताभ बच्चन और मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर जैसे दिग्गजों के करीब जाने और उनके साथ तस्वीरें खिंचवाने का सुनहरा अवसर मिल रहा है।
दुनियाभर से जुटाए गए भारतीय सितारे
इस प्रदर्शनी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें शामिल कई पुतले दुनिया के अलग-अलग देशों के मैडम तुसाद म्यूजियम से विशेष रूप से लोन पर मंगाए गए हैं:
विराट कोहली: बैंकॉक से लंदन पहुँचे।
ऐश्वर्या राय और रणबीर कपूर: न्यूयॉर्क म्यूजियम से लाए गए।
काजल अग्रवाल: सिंगापुर से पहली बार लंदन की गैलरी का हिस्सा बनीं।
इसके अलावा प्रशंसक दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह, प्रियंका चोपड़ा, ऋतिक रोशन, कैटरीना कैफ और माधुरी दीक्षित जैसे चहेते सितारों के दीदार भी एक साथ कर सकेंगे।
सांस्कृतिक सेतु का जीवंत प्रमाण
मैडम तुसाद लंदन के जनरल मैनेजर स्टीव ब्लैकबर्न ने कहा, "बॉलीवुड और क्रिकेट की वैश्विक अपील बेमिसाल है। लंदन का इन दोनों क्षेत्रों के प्रति प्रेम साल-दर-साल बढ़ रहा है। हम इस जादू को अपने मेहमानों के लिए पेश करते हुए रोमांचित हैं।"
वहीं, लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग ने भी इस पहल की सराहना की है। उच्चायोग ने एक बयान में कहा कि यह प्रदर्शनी भारत की जीवंत भावना को लंदन के दिल में लाती है। यह आयोजन भारत और ब्रिटेन के बीच मजबूत होते सांस्कृतिक संबंधों और 'पीपल-टू-पीपल' कनेक्ट का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
कला और इतिहास का संगम
लगभग 200 साल पुराने इतिहास वाले मैडम तुसाद म्यूजियम ने अपनी पारंपरिक कलात्मकता और आधुनिक तकनीक के जरिए इन भारतीय आइकन को जीवंत रूप दिया है। अब दुनिया भर के पर्यटकों के लिए लंदन का यह म्यूजियम भारतीय सिनेमा और खेल की एक भव्य गैलरी में तब्दील हो चुका है।
नौसेना प्रमुख का म्यांमार दौरा, रक्षा सहयोग पर होगी अहम चर्चा
2 May, 2026 02:50 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
समुद्री सुरक्षा: म्यांमार के 4 दिवसीय दौरे पर नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी, हिंद महासागर में भारत की रणनीति होगी मजबूत
नेप्यीडॉ: हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच, भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी 2 मई से 5 मई 2026 तक म्यांमार की आधिकारिक यात्रा पर हैं। चार दिनों के इस महत्वपूर्ण दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत और म्यांमार के बीच द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को प्रगाढ़ करना और समुद्री क्षेत्र में साझा सुरक्षा हितों को बढ़ावा देना है।
सैन्य और कूटनीतिक बैठकों का दौर
एडमिरल त्रिपाठी अपने प्रवास के दौरान म्यांमार के शीर्ष सैन्य नेतृत्व के साथ उच्च स्तरीय वार्ता करेंगे। इन मुलाकातों में मुख्य रूप से निम्नलिखित चर्चाएँ शामिल होंगी:
रणनीतिक संवाद: म्यांमार के सेना प्रमुख जनरल ये विन ऊ और रक्षा मंत्री जनरल यू हटुन आंग के साथ सुरक्षा समीकरणों पर मंथन।
नौसेना सहयोग: म्यांमार नौसेना प्रमुख एडमिरल ह्टीन विन के साथ परिचालन समन्वय (Operational Synergy) बढ़ाने और सहयोग के नए आयामों पर चर्चा।
प्रमुख कार्यक्रम और निरीक्षण
नौसेना प्रमुख का यह दौरा केवल बैठकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सैन्य प्रतिष्ठानों का जमीनी अवलोकन भी शामिल है:
वे म्यांमार नौसेना के सेंट्रल नेवल कमांड और नेवल ट्रेनिंग कमांड का दौरा करेंगे।
नंबर-1 फ्लीट के निरीक्षण के साथ-साथ शहीद सैनिकों के स्मारक पर जाकर श्रद्धासुमन भी अर्पित करेंगे।
ट्रेनिंग, क्षमता निर्माण (Capacity Building) और तकनीकी सहयोग पर विशेष फोकस रहेगा।
भारत-म्यांमार: समुद्री सुरक्षा के साझेदार
दोनों देशों के बीच नौसैनिक संबंध काफी गहरे हैं, जो इस दौरे से और अधिक सुदृढ़ होंगे।
संयुक्त अभ्यास: दोनों नौसेनाएँ नियमित रूप से IMNEX और IMCOR जैसे अभ्यास आयोजित करती हैं।
क्षेत्रीय सुरक्षा: हाइड्रोग्राफी सर्वे और पोर्ट विजिट के माध्यम से दोनों देश हिंद महासागर की सुरक्षा सुनिश्चित करने में एक-दूसरे का सहयोग कर रहे हैं।
दौरे का महत्व
विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' (पड़ोसी पहले) और 'एक्ट ईस्ट' नीति के तहत अत्यंत महत्वपूर्ण है। हिंद महासागर में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए म्यांमार के साथ तालमेल बिठाना भारत की समुद्री रणनीति का एक अहम हिस्सा है। एडमिरल त्रिपाठी की यह यात्रा क्षेत्र में भारत की सशक्त उपस्थिति और कूटनीतिक गंभीरता को दर्शाती है।
युद्ध का व्यापार पर वार, फुटवियर इंडस्ट्री को भारी झटका
2 May, 2026 01:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बहादुरगढ़ फुटवियर उद्योग पर संकट: खाड़ी युद्ध के चलते उत्पादन गिरा आधा, 10 हजार करोड़ की चपत
बहादुरगढ़। भारत का प्रमुख नॉन-लेदर फुटवियर केंद्र, बहादुरगढ़, इस समय अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। सालाना करीब 70 हजार करोड़ रुपये का कारोबार करने वाला यह उद्योग अंतरराष्ट्रीय तनाव और सप्लाई चेन में आई बाधाओं के कारण गंभीर संकट में है।
उत्पादन की रफ्तार हुई धीमी
बहादुरगढ़ में देश का लगभग 60 प्रतिशत नॉन-लेदर फुटवियर तैयार होता है, लेकिन मौजूदा हालात ने इसकी रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है:
आधा रह गया उत्पादन: सामान्य दिनों में यहाँ रोजाना एक से सवा करोड़ जोड़ी जूते-चप्पल बनते थे, जो अब घटकर मात्र 50 लाख जोड़ी रह गए हैं।
बंद पड़ी मशीनें: फैक्टरियों में काम ठप होने के कगार पर है। कई उद्यमियों को अपने प्लांट की आधी मशीनें बंद रखनी पड़ रही हैं।
क्यों गहराया संकट?
उद्योग विशेषज्ञों और फैक्ट्री मालिकों के अनुसार, इस मंदी के पीछे तीन मुख्य कारण हैं:
सप्लाई चेन और कच्चा माल: युद्ध के कारण विदेशों से आने वाले कच्चे माल की आवक रुक गई है और तैयार माल भेजने के रास्ते प्रभावित हुए हैं।
मजदूरों का पलायन: गैस की किल्लत और अनिश्चित भविष्य के डर से यहाँ काम करने वाले करीब 40 प्रतिशत श्रमिक अपने गांवों को लौट गए हैं।
बढ़ती लागत: ऊर्जा संकट और कच्चे माल की महंगाई ने उत्पादन लागत को बढ़ा दिया है, जिससे हर रोज लाखों का घाटा हो रहा है।
उद्यमियों का दर्द: रोज़ाना हो रहा लाखों का नुकसान
फुटवियर पार्क एसोसिएशन के वरिष्ठ उपप्रधान नरेंद्र छिकारा का कहना है कि एक महीने से अधिक समय से उत्पादन आधा रहने के कारण नुकसान का आंकड़ा 10 हजार करोड़ के पार पहुँच गया है। स्थिति सामान्य होने में अभी वक्त लगेगा।
उद्यमी मुकेश (MIE पार्ट-A): "जहाँ हम रोज़ाना 1,000 जोड़ी फुटवियर बनाते थे, अब 500 पर सिमट गए हैं। हर दिन 10 हजार रुपये का सीधा नुकसान हो रहा है।"
उद्यमी सुभाष जग्गा: "लेबर की भारी कमी है। उत्पादन 50% रह गया है और नुकसान लाखों में पहुँच रहा है।"
भविष्य की अनिश्चितता
बहादुरगढ़ में करीब 2,500 फैक्टरियां हैं, जिनसे ढाई से तीन लाख लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी है। जानकारों का मानना है कि अगर आज भी हालात सुधरते हैं, तो सप्लाई चेन को पटरी पर आने में कम से कम एक महीना लगेगा। वहीं, घर लौट चुके श्रमिकों की वापसी गर्मी के मौसम के बाद ही संभव लग रही है।
कर्नाल में सनसनी, बदमाश ने कैश के लिए सेल्समैन को धमकाया
2 May, 2026 01:14 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तरावड़ी में पेट्रोल पंप पर लूट की कोशिश: सेल्समैन की बहादुरी से भागे बदमाश, हवाई फायरिंग से मचा हड़कंप
तरावड़ी (करनाल)। राष्ट्रीय राजमार्ग-44 के किनारे स्थित चौधरी पेट्रोल पंप पर शनिवार तड़के बाइक सवार बदमाशों ने लूट की वारदात को अंजाम देने की कोशिश की। हालांकि, कर्मचारियों की मुस्तैदी के कारण आरोपी बिना कुछ हाथ लगे मौके से फरार हो गए।
वारदात का घटनाक्रम
पुलिस को दी गई जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह एक युवक बिना नंबर प्लेट वाली काली मोटरसाइकिल पर पेट्रोल पंप पहुंचा।
सामान्य व्यवहार: शुरुआत में युवक ने बिल्कुल सामान्य ग्राहक की तरह व्यवहार किया और सेल्समैन सुरेश कुमार से 100 रुपये का पेट्रोल डलवाया। उसने पेट्रोल के पैसे भी चुका दिए।
अचानक हमला: जैसे ही सेल्समैन पैसे लेकर अंदर केबिन की ओर मुड़ा, बदमाश उसके पीछे गया और अचानक उस पर पिस्तौल तान दी। आरोपी ने जान से मारने की धमकी देकर सारा कैश सौंपने को कहा।
बहादुरी ने पलटी बाजी
सेल्समैन सुरेश कुमार डरा नहीं और उसने हिम्मत दिखाते हुए आरोपी का हाथ झटक दिया।
हवाई फायरिंग: हाथ झटकने के दौरान पिस्तौल से गोली चल गई, जो गनीमत रही कि हवा में चली और किसी को नहीं लगी।
मदद के लिए शोर: गोली की आवाज और सुरेश का शोर सुनकर अंदर से दूसरा कर्मचारी नरेश कुमार भी बाहर की तरफ भागा। खुद को घिरता देख और शोर मचते देख बाइक सवार बदमाश तुरंत मौके से भाग निकला।
पुलिस की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही तरावड़ी पुलिस टीम मौके पर पहुंची और साक्ष्य जुटाए।
खोल बरामद: पुलिस को घटनास्थल से कारतूस का एक खोल मिला है, जिसे कब्जे में ले लिया गया है।
सीसीटीवी की जांच: थाना प्रभारी राजपाल ने बताया कि पंप पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि आरोपी की पहचान कर उसे जल्द से जल्द पकड़ा जा सके।
8.6 अरब डॉलर के हथियार चार देशों को देने की तैयारी, US में हलचल
2 May, 2026 01:11 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन: ट्रंप प्रशासन का बड़ा फैसला, खाड़ी देशों को 8.6 अरब डॉलर के हथियार बेचेगा अमेरिका; ईरान पर युद्ध 'विराम' का दावा
वाशिंगटन: अमेरिकी प्रशासन ने पश्चिम एशिया में अपने रणनीतिक दबदबे को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ने अपने चार प्रमुख सहयोगी देशों—इस्राइल, कतर, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को 8.6 अरब डॉलर (लगभग 72,000 करोड़ रुपये) से अधिक के अत्याधुनिक हथियार बेचने का प्रस्ताव दिया है। विशेष बात यह है कि यह निर्णय अमेरिकी कांग्रेस (संसद) की अनिवार्य समीक्षा प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए लिया गया है।
हथियारों के सौदे में क्या है खास?
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अनुसार, इन रक्षा सौदों में मुख्य रूप से निम्नलिखित तकनीक शामिल हैं:
प्रिसिजन गाइडेड वेपन्स: सटीक लक्ष्य भेदने वाली आधुनिक मिसाइल प्रणालियाँ।
मिसाइल डिफेंस रिप्लेनिशमेंट: हवाई हमलों और मिसाइलों से बचाव के लिए रक्षा तंत्र की आपूर्ति।
बैटल कमांड सिस्टम: एक एकीकृत युद्ध कमान प्रणाली, जो युद्ध क्षेत्र में त्वरित निर्णय लेने में सक्षम है।
"ईरान के साथ युद्ध समाप्त": ट्रंप का कांग्रेस को पत्र
इस रक्षा सौदे के बीच, राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी सांसदों को एक औपचारिक पत्र लिखकर सूचित किया है कि ईरान के साथ चल रहा सैन्य संघर्ष अब 'समाप्त' हो चुका है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि 7 अप्रैल 2026 के बाद से दोनों देशों के बीच कोई गोलाबारी नहीं हुई है।
युद्ध शक्तियों का विवाद: यह पत्र असल में 1973 के 'वार पावर्स रेजोल्यूशन' (War Powers Resolution) के कानूनी पेंच को सुलझाने की कोशिश है। इस कानून के तहत, बिना संसद की मंजूरी के शुरू की गई सैन्य कार्रवाई को 60 दिनों के भीतर खत्म करना अनिवार्य होता है। ट्रंप ने दावा किया कि 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ यह संघर्ष अब पूरी तरह थम चुका है।
ईरान की सैन्य क्षमता पर ट्रंप का बड़ा दावा
पत्रकारों से बातचीत में राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के मौजूदा नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि वहां अंदरूनी कलह व्याप्त है और यह स्पष्ट नहीं है कि सत्ता की असली बागडोर किसके हाथ में है। ट्रंप ने दावा किया:
हालिया संघर्षों के बाद ईरान की नौसेना और वायुसेना काफी कमजोर हो चुकी है।
ईरान समझौता करना चाहता है, लेकिन उनके द्वारा दिए गए वर्तमान प्रस्ताव संतोषजनक नहीं हैं।
अमेरिका शांतिपूर्ण कूटनीति के लिए तैयार है, लेकिन यदि वार्ता विफल रहती है, तो 'सैन्य विकल्प' अभी भी खुला रखा गया है।
गरनाला गोलीकांड पर मंत्री का एक्शन, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश
2 May, 2026 12:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अंबाला गोलीबारी कांड: अनिल विज ने परिजनों को बंधाया ढांढस, एसपी को आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी के निर्देश
अंबाला। हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज शनिवार सुबह अंबाला छावनी के सिविल अस्पताल पहुंचे। यहाँ उन्होंने मृतक गुरप्रीत सिंह के शोकाकुल परिजनों से मुलाकात की और उन्हें विश्वास दिलाया कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
घटनाक्रम और पुलिस की कार्रवाई
मंत्री अनिल विज ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए घटना की जानकारी साझा की:
गौ तस्करी का मामला: बीती रात गौ तस्कर गायों को लेकर भाग रहे थे। सूचना मिलते ही पुलिस की दो पीसीआर टीमों ने उनका पीछा शुरू किया।
फायरिंग की चपेट में आया युवक: पीछा करने के दौरान आरोपियों ने पुलिस पर गोलियां चलाईं। इसी बीच गांव गरनाला का निवासी गुरप्रीत सिंह गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसकी बाद में मौत हो गई।
पोस्टमार्टम का इंतजार: विज ने स्पष्ट किया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही यह पूरी तरह साफ होगा कि गोली किसकी तरफ से चली और किसे लगी।
एसपी को फोन पर कड़े निर्देश
अस्पताल परिसर से ही अनिल विज ने पुलिस अधीक्षक (SP) से फोन पर बात की और मामले की जांच तेज करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि:
वारदात में शामिल सभी आरोपियों को बिना देरी किए गिरफ्तार किया जाए।
घटनास्थल से जुड़े तमाम साक्ष्य जुटाए जाएं और कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित हो।
पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए प्रशासन हर संभव कदम उठाए।
परिजनों को मदद का भरोसा
मृतक के परिवार से मिलकर अनिल विज ने अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं और कहा कि सरकार इस दुख की घड़ी में उनके साथ खड़ी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी और आरोपियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई की जाएगी जो मिसाल बनेगी।
कनाडा की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: खालिस्तानी तत्वों से सुरक्षा को खतरा
2 May, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कनाडा की सुरक्षा रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: खालिस्तानी तत्वों को माना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा
ओटावा| कनाडा की सुरक्षा खुफिया सेवा (CSIS) ने वर्ष 2025 की अपनी वार्षिक रिपोर्ट संसद में पेश की है, जिसमें देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर कई चौंकाने वाले दावे किए गए हैं। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से माना गया है कि कनाडा की धरती पर सक्रिय खालिस्तानी तत्व देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों के लिए लगातार खतरा पैदा कर रहे हैं।
हिंसक एजेंडे को बढ़ावा दे रहे हैं चरमपंथी
इंटेलिजेंस रिपोर्ट के अनुसार, कनाडा में मौजूद कुछ खालिस्तानी समूहों की गतिविधियां एक हिंसक चरमपंथी एजेंडे को हवा दे रही हैं। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि ये तत्व कनाडाई संस्थानों का उपयोग करके धन जुटाते हैं, जिसका इस्तेमाल बाद में हिंसक गतिविधियों के लिए किया जाता है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी राहत की बात कही गई है कि साल 2025 में इन समूहों से जुड़ा कोई बड़ा आतंकी हमला नहीं हुआ है।
कनिष्क बम विस्फोट की 40वीं बरसी का जिक्र
खुफिया रिपोर्ट में कनाडा के इतिहास के सबसे काले अध्याय, एअर इंडिया उड़ान 182 (कनिष्क) बम विस्फोट का भी उल्लेख किया गया है। पिछले साल इस भीषण हमले की 40वीं बरसी थी। रिपोर्ट ने दोहराया कि इस हमले के संदिग्ध कनाडा स्थित खालिस्तानी चरमपंथी समूहों के सदस्य थे। इस आतंकी हमले में 329 लोगों की जान गई थी, जिनमें से अधिकांश कनाडाई नागरिक थे।
भारत और अन्य देशों पर हस्तक्षेप के आरोप
कनाडाई खुफिया एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में चीन, रूस, भारत, ईरान और पाकिस्तान जैसे देशों पर कनाडा की आंतरिक राजनीति में दखल देने का आरोप लगाया है। भारत के संदर्भ में रिपोर्ट कहती है कि वहां की सरकार ने अपने हितों की रक्षा के लिए कुछ समुदायों और नेताओं के साथ संपर्क बनाए हैं, जिसे कनाडा 'ट्रांसनेशनल रेप्रेशन' (सीमा पार दमन) के रूप में देख रहा है। रिपोर्ट यह भी मानती है कि भारत अपनी आंतरिक स्थिरता के लिए खालिस्तानी अलगाववाद को एक बड़े खतरे के रूप में देखता है।
प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के दौर में सुधरते रिश्ते
गौर करने वाली बात यह है कि यह रिपोर्ट 2025 के शुरुआती खुफिया आकलनों पर आधारित है। लेकिन, कनाडा में नेतृत्व परिवर्तन और प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के कार्यभार संभालने के बाद से भारत और कनाडा के संबंधों में सकारात्मक बदलाव देखे जा रहे हैं।
वर्तमान स्थिति:
आरसीएमपी का बयान: रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) के प्रमुख माइक ड्यूहेम ने हाल ही में कहा है कि वर्तमान में कनाडा के लिए किसी विदेशी एजेंट से कोई सीधा खतरा साबित नहीं हुआ है।
बदला हुआ रुख: कनाडाई अधिकारियों का अब मानना है कि भारत कनाडा की धरती पर किसी भी हिंसक अपराध में शामिल नहीं है।
तनाव का अंत: पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल के दौरान हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर जो राजनयिक गतिरोध पैदा हुआ था, वह अब धीरे-धीरे संवाद और सुधार की ओर बढ़ रहा है।
60 दिन की समयसीमा पूरी, ट्रंप ने संसद को दी जानकारी
2 May, 2026 08:56 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन: राष्ट्रपति ट्रंप का बड़ा एलान—"ईरान के साथ युद्ध अब समाप्त", कांग्रेस को पत्र लिख दी सैन्य कार्रवाई रोकने की जानकारी
वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। राष्ट्रपति ने अमेरिकी संसद (कांग्रेस) को पत्र लिखकर सूचित किया कि निर्धारित 60 दिनों की कानूनी समयसीमा पूरी होने के साथ ही शत्रुता समाप्त कर दी गई है।
7 अप्रैल के बाद से शांति का दावा
सांसदों को संबोधित अपने पत्र में ट्रंप ने स्पष्ट किया कि 7 अप्रैल 2026 के बाद से अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी प्रकार की गोलीबारी या सैन्य झड़प नहीं हुई है। उन्होंने कहा, "28 फरवरी 2026 को शुरू हुई शत्रुता अब औपचारिक रूप से समाप्त हो चुकी है।"
'वार पावर्स रिजोल्यूशन' और कानूनी मजबूरी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह कदम अमेरिका के 1973 के 'वार पावर्स रिजोल्यूशन' (War Powers Resolution) के कानूनी पेच को सुलझाने की कोशिश है।
इस कानून के तहत राष्ट्रपति को किसी भी सैन्य कार्रवाई की सूचना कांग्रेस को देनी होती है।
बिना संसद की विशेष मंजूरी के ऐसी कार्रवाई को 60 दिनों के भीतर समाप्त करना अनिवार्य है।
2 मार्च को कांग्रेस को दी गई जानकारी के बाद, यह समयसीमा 1 मई को समाप्त हो रही थी।
ईरान के प्रस्तावों से असंतुष्ट हैं ट्रंप
युद्ध समाप्ति की घोषणा के बावजूद राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के रुख पर अनिश्चितता जताई है। उन्होंने पत्रकारों से चर्चा में कहा, "वे (ईरान) समझौता तो करना चाहते हैं, लेकिन उनके वर्तमान प्रस्तावों से मैं संतुष्ट नहीं हूँ। हमें देखना होगा कि आगे क्या होता है।"
ईरानी नेतृत्व पर साधा निशाना
ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व को "असंगठित और बिखरा हुआ" करार दिया। उन्होंने दावा किया कि तेहरान के भीतर भारी आंतरिक मतभेद हैं, जिसके कारण बातचीत की स्थिति कमजोर हो रही है। ट्रंप के अनुसार:
ईरान का नेतृत्व अंदरूनी कलह से घिरा हुआ है।
यह स्पष्ट नहीं है कि वहां सत्ता की बागडोर असल में किसके हाथ में है।
नेतृत्व में आपसी सहमति की कमी के कारण कूटनीतिक वार्ता जटिल हो रही है।
कूटनीति बनाम सैन्य विकल्प
कड़ी बयानबाजी के बीच ट्रंप ने मानवीय आधार पर कूटनीतिक समाधान को अपनी प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा, "क्या हमें पूरी तरह हमला कर इसे खत्म कर देना चाहिए या समझौते की कोशिश करनी चाहिए? मैं समझौते के पक्ष में हूँ।" हालांकि, उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि यदि कूटनीति विफल रहती है, तो सैन्य कार्रवाई का विकल्प अभी भी खुला रखा गया है।
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इस्राइल ने शुरू किया था साझा सैन्य अभियान।
1 मई को सैन्य कार्रवाई की 60 दिनों की कानूनी समयसीमा हुई पूरी।
अमेरिकी प्रशासन ने कूटनीतिक और सैन्य, दोनों रास्ते खुले रखने की बात कही।
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