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अमेरिकी पासपोर्ट में बड़ा बदलाव, ट्रंप की फोटो को लेकर हलचल तेज
29 Jun, 2026 11:46 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद बड़ा और प्रतीकात्मक फैसला लिया है, जिसके तहत अब अमेरिकी पासपोर्ट पर उनकी तस्वीर छापी जाएगी। अमेरिका के 250वें स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर सरकार ने एक विशेष 'लिमिटेड एडिशन' पासपोर्ट जारी करने का ऐलान किया है। इस अनूठे पासपोर्ट के एक पन्ने पर ट्रंप की गंभीर मुद्रा वाली तस्वीर दिखाई देगी, जबकि दूसरी तरफ साल 1776 में अमेरिका की आजादी के समय हस्ताक्षरित घोषणा पत्र और उस दौर की एक प्रतीकात्मक छवि होगी, जो अमेरिकी इतिहास और उसके मूल्यों को बयां करेगी। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस नए पासपोर्ट के डिजाइन को खुद अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किया है, जिसके बाद से यह पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया है।
ट्रुथ सोशल पर साझा किया 'पैट्रियट पासपोर्ट' का डिजाइन
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर इस नए अमेरिकी पासपोर्ट की झलक दिखाते हुए एक खास कैप्शन लिखा, "अमेरिका का नया पासपोर्ट, जिस पर लिखा है—आपका स्वागत है, लेकिन अच्छे से रहिए।" उनके द्वारा शेयर किए गए डिजाइन में उनकी तस्वीर को प्रमुखता से जगह दी गई है। इसके साथ ही, पासपोर्ट पर 'यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका 250' अंकित है, जो देश की आजादी की 250वीं वर्षगांठ को दर्शाता है। व्हाइट हाउस ने भी इस डिजाइन को साझा करते हुए इसे 'पैट्रियट पासपोर्ट' (देशभक्त पासपोर्ट) का नाम दिया है, ताकि इसे राष्ट्रभक्ति के एक बड़े प्रतीक के रूप में पहचान मिल सके।
सीमित स्टॉक और विशेष मांग पर ही होगा उपलब्ध
अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, आगामी 6 जुलाई के बाद से इस नए कस्टम डिजाइन वाले पासपोर्ट के लिए ऑर्डर दिए जा सकेंगे। प्रशासन ने साफ किया है कि ट्रंप की तस्वीर वाला यह विशेष पासपोर्ट केवल वॉशिंगटन में व्यक्तिगत रूप से मांग करने पर ही जारी किया जाएगा। सरकार इसे बेहद सीमित संख्या में तैयार करवा रही है, इसलिए एक बार इसका तय स्टॉक खत्म होने के बाद इसे दोबारा प्रिंट नहीं किया जाएगा। सीमित संख्या के कारण भविष्य में यह पासपोर्ट एक दुर्लभ और संग्रहणीय वस्तु (कलेक्टर्स आइटम) बन जाएगा।
हर जगह अपनी अमिट छाप छोड़ना चाहते हैं राष्ट्रपति ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस की सत्ता में आने से पहले से ही अपनी आलीशान जीवनशैली और हर काम पर अपनी अनूठी छाप छोड़ने के लिए जाने जाते हैं। अपने दूसरे कार्यकाल में उन्होंने शुरुआत से ही अपनी इस विरासत को मजबूत करना शुरू कर दिया है। इसके तहत उन्होंने अमेरिकी सरकारी इमारतों के बाहर बड़े-बड़े बैनर लगवाए और जॉन एफ. कैनेडी सेंटर फॉर द परफॉर्मिंग आर्ट्स के साथ भी अपना नाम जोड़ने की कोशिश की, हालांकि कोर्ट के आदेश के बाद इसे हटाना पड़ा था। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी ट्रेजरी ने भी संकेत दिए हैं कि जल्द ही एक डॉलर के नोट पर राष्ट्रपति ट्रंप के सिग्नेचर देखने को मिलेंगे। इतना ही नहीं, ट्रंप ने अमेरिका की ऐतिहासिक 'मुनरो डॉक्टरीन' का नाम बदलकर 'डॉनरो डॉक्टरीन' करने की इच्छा भी जताई है, जो उनकी अपनी खास राजनीतिक विरासत बनाने की चाह को दर्शाता है।
पासपोर्ट पर जगह पाने वाले इतिहास के पहले अमेरिकी नागरिक
यदि यह पासपोर्ट आधिकारिक तौर पर नागरिकों के हाथों में पहुंचता है, तो डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस में रहते हुए ऐसे पहले अमेरिकी नागरिक बन जाएंगे, जिनकी तस्वीर देश के पासपोर्ट पर मुद्रित होगी। अमेरिकी इतिहास में यह अपने आप में एक अभूतपूर्व घटना होगी, जो ट्रंप के राजनैतिक और व्यक्तिगत जीवन में एक और बड़ा मील का पत्थर साबित होने जा रही है।
जीवित मानव कोशिकाओं से AI तैयार करने का ईरान का दावा, वैज्ञानिक हैरान
29 Jun, 2026 09:41 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान: ईरान ने हाल ही में एक ऐसा सनसनीखेज दावा किया है जिसने वैश्विक वैज्ञानिक जगत में खलबली मचा दी है। तेहरान का कहना है कि उसके वैज्ञानिकों ने जीवित मानव तंत्रिका कोशिकाओं (न्यूरॉन्स) का इस्तेमाल करके ‘बायोलॉजिकल इंटेलिजेंस’ (BI) या ‘ऑर्गेनॉइड इंटेलिजेंस’ (OI) पर आधारित एक शुरुआती सिस्टम तैयार करने में कामयाबी हासिल की है। इस चौंकाने वाले एलान के बाद दुनिया भर में इस बेहद एडवांस तकनीक के भविष्य और इसकी सीमाओं को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। हालांकि, अधिकांश ग्लोबल एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसे अभी किसी तैयार प्रोडक्ट या खतरनाक हथियार के रूप में देखना जल्दबाजी होगी, क्योंकि यह तकनीक अभी अपने शुरुआती रिसर्च और डेवलपमेंट के दौर से गुजर रही है।
पारंपरिक एआई से एकदम जुदा है 'बायोलॉजिकल इंटेलिजेंस'
बायोलॉजिकल इंटेलिजेंस (BI) की मूल अवधारणा आज के पारंपरिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से पूरी तरह अलग है। वर्तमान एआई जहां सिलिकॉन चिप्स, जटिल कंप्यूटर एल्गोरिद्म और भारी-भरकम डेटासेट के दम पर काम करता है, वहीं बीआई में प्रयोगशाला के भीतर विकसित किए गए जीवित न्यूरॉन्स या मस्तिष्क जैसी सूक्ष्म कोशिका संरचनाओं का उपयोग करके कंप्यूटिंग पावर और सीखने की क्षमता का अध्ययन किया जाता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि जीवित न्यूरॉन्स बेहद मामूली ऊर्जा की खपत करके भी पेचीदा से पेचीदा सूचनाओं को प्रोसेस करने की अद्भुत क्षमता रखते हैं, जो आने वाले समय में सुपर-एफिशिएंट कंप्यूटिंग का एक क्रांतिकारी विकल्प बन सकता है।
ईरानी वैज्ञानिकों के दावे और उनकी जमीनी हकीकत
ईरान के शोधकर्ताओं का दावा है कि उन्होंने लैब की नियंत्रित परिस्थितियों में न केवल मानव तंत्रिका कोशिकाओं को जीवित रखने में सफलता पाई है, बल्कि उनका एक फंक्शनल नेटवर्क बनाकर उनसे सीखने योग्य व्यवहार भी प्रदर्शित कराया है। उनका तर्क है कि यह नया सिस्टम पारंपरिक सुपरकंप्यूटरों के मुकाबले न के बराबर बिजली खर्च करता है। हालांकि, ईरान के इन दावों का अभी तक किसी भी स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक संस्था द्वारा रिव्यू या वेरिफिकेशन नहीं किया गया है, और न ही ऐसे कोई पुख्ता सबूत मिले हैं जिनसे यह साबित हो सके कि ईरान ने कमर्शियल या मिलिट्री इस्तेमाल के लिए कोई व्यावहारिक जैविक प्रोसेसर (Biological Processor) तैयार कर लिया है।
वैश्विक स्तर पर रिसर्च और इसके दूरगामी प्रभाव
यह समझना बेहद जरूरी है कि ऑर्गेनॉइड इंटेलिजेंस पर काम करने वाला ईरान अकेला देश नहीं है; दुनिया के कई विकसित देश इस क्षेत्र में बरसों से गहन रिसर्च कर रहे हैं। इस अत्याधुनिक तकनीक का मुख्य उद्देश्य भविष्य में मेडिकल रिसर्च को नई दिशा देना, अल्जाइमर और पार्किंसंस जैसी न्यूरोलॉजिकल बीमारियों को ठीक करना और अगली पीढ़ी के ऊर्जा-कुशल रोबोटिक्स व सुपरकंप्यूटर बनाना है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि यह तकनीक पूरी तरह सफल रही तो चिकित्सा और विज्ञान के क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव आएंगे। लेकिन इसके साथ ही बायो-एथिक्स (जैव-नैतिकता), सुरक्षा जोखिमों और इसके संभावित गलत इस्तेमाल को लेकर भी कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, जिन पर वैश्विक समुदाय को सख्त नियम बनाने होंगे।
खतरे का आकलन और भविष्य की चुनौतियां
फिलहाल, इस बात की कोई विश्वसनीय या आधिकारिक पुष्टि नहीं है कि बायोलॉजिकल इंटेलिजेंस परमाणु हथियारों से भी ज्यादा विनाशकारी तकनीक का रूप ले चुकी है, या इस रेस में ईरान, अमेरिका जैसे महाशक्तियों से आगे निकल चुका है। वर्तमान परिस्थितियों में इसे केवल एक उभरती हुई शोध तकनीक के रूप में ही देखा जाना चाहिए, जिसकी असली ताकत और सीमाओं का सटीक अंदाजा आने वाले कई सालों के गहन अध्ययनों के बाद ही लग पाएगा। यह एक ऐसा संवेदनशील क्षेत्र है जहां मानवता की भलाई के लिए बहुत फूंक-फूंक कर कदम रखने और कड़े नैतिक दिशानिर्देशों का पालन करने की आवश्यकता है।
नेपाल की राजनीति में नई हलचल, ओली-प्रचंड की दोस्ती पर सबकी नजर
29 Jun, 2026 08:38 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काठमांडू: नेपाल के सियासी गलियारों में एक बार फिर बहुत बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। सालों तक सत्ता की जंग में एक-दूसरे के धुर विरोधी रहे केपी शर्मा ओली और पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' एक बार फिर नजदीक आ रहे हैं। दोनों दिग्गज नेताओं के बीच लगातार हो रही गुप्त मुलाकातों और चर्चाओं से यह संकेत साफ मिल रहे हैं कि देश में बहुत जल्द वामपंथी दलों का एक नया मोर्चा आकार ले सकता है। ऐसे में हर तरफ यही सवाल गूंज रहा है कि हमेशा एक-दूसरे को पटखनी देने वाले ये दोनों धुरंधर आखिर फिर से हाथ मिलाने को मजबूर क्यों हुए? राजनीति के जानकारों का मानना है कि इस अप्रत्याशित नजदीकी के पीछे सिर्फ कुर्सी का मोह नहीं, बल्कि नेपाल की तेजी से बदलती सियासी परिस्थितियां और नए प्रधानमंत्री बालेन शाह का बढ़ता राजनीतिक दबदबा है।
बालेन शाह के खौफ ने पुराने सूरमाओं को किया एकजुट
नेपाल की कमान संभालते ही युवा प्रधानमंत्री बालेन शाह ने पुराने और पारंपरिक राजनेताओं के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। बालेन शाह की सरकार पुराने दिग्गज नेताओं की गुप्त संपत्तियों और उनके कार्यकाल में हुए भ्रष्टाचार के बड़े मामलों की ताबड़तोड़ जांच करवा रही है। इस कार्रवाई ने ओली और प्रचंड की मुश्किलें बेहद बढ़ा दी हैं। दोनों वामपंथी नेताओं को अब यह बखूबी अहसास हो चुका है कि यदि वे अलग-अलग रहे, तो इस नए सियासी बवंडर में उनका वजूद खतरे में पड़ सकता है। इसी बड़ी चुनौती का मुकाबला करने के लिए दोनों ने अपनी पुरानी कड़वाहट भूलकर एकजुट होने का मन बनाया है। हालांकि, अपने पुराने और धोखे से भरे इतिहास को देखते हुए यह गठबंधन आगे कितने दिन टिक पाएगा, इस पर अभी से संशय के बादल मंडराने लगे हैं।
ओली की चतुराई बनाम प्रचंड का पाला बदलने का इतिहास
गठबंधन की सुगबुगाहट के बीच दोनों नेताओं के पुराने इतिहास पर नजर डालना जरूरी है। एक बेहद साधारण परिवार से निकलकर प्रधानमंत्री की कुर्सी तक का सफर तय करने वाले केपी शर्मा ओली ने कम्युनिस्ट आंदोलन के दौरान करीब 14 साल जेल की सलाखों के पीछे गुजारे हैं। वह बेहद चालाक, दृढ़ इच्छाशक्ति वाले और अपनी शर्तों पर राजनीति करने के लिए जाने जाते हैं, जिनकी छवि एक धुर भारत-विरोधी नेता की भी रही है। वहीं दूसरी तरफ, पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' का इतिहास 10 सालों तक हिंसक माओवादी विद्रोह का नेतृत्व करने का रहा है, जो साल 2006 में शांति समझौते के जरिए मुख्यधारा की राजनीति में आए। प्रचंड की छवि आज भी एक ऐसे नेता की है जो फायदे के लिए कभी भी पाला बदल सकते हैं। स्वभाव में इतने विरोधाभास के बाद भी दोनों में एक बात बिल्कुल समान है—सत्ता की चरम भूख, जिसके लिए वे कभी जिगरी दोस्त तो कभी कट्टर दुश्मन बन जाते हैं।
दोस्ती और दगाबाजी का उतार-चढ़ाव भरा पुराना सफर
इन दोनों नेताओं के बीच शह और मात का खेल बेहद पुराना है। साल 2015 में नेपाल का नया संविधान बनने के बाद दोनों समझ चुके थे कि अकेले दम पर सत्ता पाना नामुमकिन है। लिहाजा, ओली और प्रचंड साल 2017 में पहली बार साथ आए और इनके गठबंधन ने रिकॉर्ड दो-तिहाई बहुमत हासिल किया। तब दोनों के बीच ढाई-ढाई साल के लिए प्रधानमंत्री बनने का गुप्त समझौता हुआ था। लेकिन ओली को सत्ता मिलते ही उन्होंने प्रचंड को हाशिए पर धकेलना शुरू कर दिया, उनके करीबियों को कैबिनेट में तवज्जो नहीं दी और सारे फैसले खुद लेने लगे। आखिरकार सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले से उनकी एकीकृत पार्टी बिखर गई। इसके बाद साल 2022 के चुनाव में कमजोर पड़ने पर दोनों फिर दो महीने के लिए साथ आए, लेकिन प्रचंड ने महज दो महीने बाद ही नेपाली कांग्रेस के साथ मिलकर ओली को धोखा दे दिया और खुद प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठ गए, जिससे दोनों के रिश्तों में भारी कड़वाहट आ गई थी।
मदन भंडारी जयंती पर साझा मंच से शक्ति प्रदर्शन की तैयारी
अब एक बार फिर प्रधानमंत्री बालेन शाह की ताबड़तोड़ कार्रवाइयों के खौफ से सिर्फ ओली और प्रचंड ही नहीं, बल्कि दोनों पार्टियों के कई बड़े नेता भी एक-दूसरे के संपर्क में हैं। प्रांतीय सरकारों में तालमेल बैठाने, संविधान की दुहाई देने और बालेन शाह के खिलाफ एक साझा चक्रव्यूह तैयार करने पर लगातार माथापच्ची चल रही है। इसी कड़ी में 28 जून को कम्युनिस्ट नेता मदन भंडारी की 75वीं जयंती के मौके पर ओली और प्रचंड लंबे समय बाद एक साथ एक ही मंच साझा करते नजर आएंगे। राजनैतिक पंडित इसे दोनों के बीच जमी बर्फ पिघलने का सबसे बड़ा सबूत मान रहे हैं। यह साझा मंच न केवल उनके कार्यकर्ताओं को कम्युनिस्ट एकता का संदेश देगा, बल्कि वर्तमान बालेन शाह सरकार के लिए भी एक खुली चेतावनी होगी कि आने वाले दिनों में उन्हें संसद से लेकर सड़क तक मिलकर घेरा जाएगा।
हवाई जंग में बढ़ा तनाव, दो लड़ाकू विमान मार गिराने का रूस का दावा
28 Jun, 2026 06:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मॉस्को/कीव: रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध लगातार और भीषण होता जा रहा है, जिसमें दोनों देश एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों पर विनाशकारी हमले कर रहे हैं। इस टकराव के बीच रूसी रक्षा मंत्रालय ने बड़ा दावा किया है कि उसके बलों ने दक्षिणी यूक्रेन में एक एयरबेस पर हवाई हमला करके यूक्रेनी वायुसेना के दो मिग-29 (MiG-29) लड़ाकू विमानों को पूरी तरह तबाह कर दिया है। दूसरी तरफ, यूक्रेन ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए रूस के भीतर घुसकर उसके एक बेहद महत्वपूर्ण सैन्य कारखाने पर मिसाइल हमला किया है।
रूस का यूक्रेन के एयरबेस पर सटीक ड्रोन हमला
रूसी रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार, यह हमला वोज्नेसेंस्क एयरफील्ड पर किया गया था। इस सटीक ड्रोन हमले के दौरान यूक्रेन का एक मिग-29 लड़ाकू विमान बंकर के बाहर खुले मैदान (टारमैक) पर खड़ा था, जबकि दूसरा फाइटर जेट बंकर के अंदर ईंधन (रीफ्यूलिंग) भरने की प्रक्रिया में था। रूस ने इस पूरी तबाही का एक वीडियो भी जारी किया है, जिसमें हमले से पहले रनवे पर खड़े विमान और ड्रोन स्ट्राइक के तुरंत बाद वहां उठती हुई आग की भीषण लपटें साफ देखी जा सकती हैं।
यूक्रेन का रूस के सैन्य कारखाने पर मिसाइल प्रहार
रूस के इस हमले के तुरंत बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने मोर्चा संभालते हुए सोशल मीडिया पर एक बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि उनकी सेना ने रूस के वोल्गोग्राद शहर में स्थित 'टायटन-बैरिकाडी' सैन्य प्रतिष्ठान को अपनी नई फ्लेमिंगो मिसाइलों से निशाना बनाया है। इस सफल मिसाइल स्ट्राइक के बाद रूसी रक्षा संयंत्र के पूरे परिसर में भयंकर आग लग गई, जिससे पुतिन की सेना को एक बहुत बड़ा झटका लगा है।
क्यों खास है टायटन-बैरिकाडी सैन्य परिसर?
राष्ट्रपति जेलेंस्की ने जानकारी दी कि जिस टायटन-बैरिकाडी उद्योग पर यूक्रेन ने मिसाइलें दागी हैं, वह रूस का एक बहुत बड़ा और बेहद खास औद्योगिक परिसर है। इसी कारखाने में रूसी सेना के लिए उन घातक तोपखाना प्रणालियों (आर्टिलरी सिस्टम) और विशेष सैन्य उपकरणों का निर्माण किया जाता है, जिनका इस्तेमाल रूस यूक्रेन के खिलाफ जारी जंग में लगातार कर रहा है। जेलेंस्की ने साफ शब्दों में कहा कि इस बड़ी कार्रवाई के जरिए यूक्रेन ने रूस के खिलाफ अपने लंबी दूरी के हमलों के दायरे को और ज्यादा बढ़ा दिया है।
ऑटो इंडस्ट्री में हलचल: फॉक्सवैगन की बड़ी छंटनी की चर्चा तेज
28 Jun, 2026 06:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बर्लिन: जर्मनी की मशहूर कार निर्माता कंपनी फॉक्सवैगन इस समय अपने 89 साल के इतिहास के सबसे बड़े संकट से गुजर रही है। खबरों के मुताबिक, कंपनी बड़े पैमाने पर छंटनी करने की तैयारी में है, जिससे करीब एक लाख कर्मचारियों की नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है। इस बड़े फैसले के तहत फॉक्सवैगन अपने चार बड़े फैक्टरी प्लांट भी बंद कर सकती है। दुनिया की सबसे बड़ी ऑटो कंपनियों में शुमार फॉक्सवैगन के इस कदम को ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के इतिहास का सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
क्यों बंद हो रहे हैं प्लांट और क्यों जा रही हैं नौकरियां?
फॉक्सवैगन की इस हालत के पीछे कई बड़ी वजहें हैं। सबसे बड़ा कारण यूरोप के बाजारों में कारों की मांग का लगातार कम होना है। इसके साथ ही अमेरिका द्वारा लगाए जा रहे भारी टैरिफ (टैक्स) ने भी कंपनी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लेकिन सबसे बड़ी चुनौती चीन से मिल रही है। कभी यूरोप और चीन के बाजारों में राज करने वाली फॉक्सवैगन को अब चीनी कार कंपनियों से कड़ी टक्कर मिल रही है। चीनी कंपनियां कम कीमत में बेहतरीन टेक्नोलॉजी और शानदार इलेक्ट्रिक कारें बाजार में उतार रही हैं, जिससे फॉक्सवैगन की बिक्री पर बहुत बुरा असर पड़ा है।
किन फैक्ट्रियों पर लटकी है बंदी की तलवार?
कंपनी के भीतर चल रही चर्चाओं के अनुसार, जिन चार बड़े प्लांट को बंद करने की योजना बनाई गई है, उनमें हनोवर, ज्विकौ, एम्डेन और ऑडी का नेकार्सुल्म प्लांट शामिल हैं। इन प्लांट्स को बंद करने के प्रस्ताव पर जुलाई के महीने में होने वाली बोर्ड मीटिंग में अंतिम चर्चा की जा सकती है। अगर इस योजना को मंजूरी मिल जाती है, तो सीधे तौर पर लगभग 45 हजार लोगों की नौकरियां चली जाएंगी। इसके अलावा, लगभग 50 हजार कर्मचारियों को कम करने के लिए कंपनी पहले ही यूनियन से बातचीत कर चुकी है, जिससे प्रभावित होने वाले कुल लोगों की संख्या एक लाख तक पहुंच सकती है।
चीनी बाजार में खोया अपना पुराना दबदबा
एक समय था जब फॉक्सवैगन चीन के बाजार में सबसे ज्यादा कारें बेचने वाली कंपनी हुआ करती थी, लेकिन वहां की स्थानीय कंपनी बीवाईडी (BYD) ने फॉक्सवैगन को पछाड़कर नंबर वन का स्थान हासिल कर लिया है। चीन के बाजार में अब विदेशी कार कंपनियों का क्रेज तेजी से घट रहा है। आंकड़ों के अनुसार, साल 2020 में चीनी मार्केट में गैर-चीनी कार कंपनियों की हिस्सेदारी 57 फीसदी थी, जो अब घटकर महज 32 फीसदी रह गई है। इसी का नतीजा है कि फॉक्सवैगन जैसी दिग्गज कंपनी को आज इतने कड़े और नुकसानदेह फैसले लेने पड़ रहे हैं।
ईरान का जवाबी हमला, कुवैत समेत 8 ठिकानों को बनाया निशाना
28 Jun, 2026 10:41 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच घोषित हुआ युद्धविराम (सीजफायर) एक बार फिर पूरी तरह चरमरा गया है। आज रविवार को दोनों देश एक बार फिर सीधे सैन्य टकराव के रास्ते पर आ गए। अमेरिकी सेना ने ईरान के करीब 10 रणनीतिक ठिकानों पर जोरदार हवाई हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने भी त्वरित कार्रवाई करते हुए अमेरिकी सेना के 8 प्रमुख ठिकानों को निशाना बनाया। इस नए घटनाक्रम के बाद दोनों देशों के बीच हुआ सीजफायर समझौता अब टूटने की कगार पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरी स्थिति के लिए सीधे तौर पर ईरान को जिम्मेदार ठहराया है।
ट्रंप की चेतावनी: 'खत्म हो जाएगा ईरान का अस्तित्व'
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट के जरिए इस सैन्य कार्रवाई की पुष्टि की। उन्होंने लिखा कि अमेरिकी युद्धक विमानों ने ईरान के मिसाइल व ड्रोन स्टोरेज सेंटरों और तटीय रडार साइटों पर बमबारी की है। ट्रंप ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई ईरान द्वारा युद्धविराम समझौते का बार-बार उल्लंघन करने के बाद की गई है। उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि एक वक्त ऐसा आ सकता है जब अमेरिका संयम खो दे और सैन्य तरीके से इस काम को अंजाम तक पहुंचाए। अगर ऐसा हुआ, तो ईरान का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा।
ईरान का पलटवार: कुवैत और बहरीन में अमेरिकी बेस निशाना
दूसरी ओर, ईरान की सेना ‘इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) ने भी अमेरिका को उसी की भाषा में जवाब दिया है। IRGC के मुताबिक, उनकी नौसेना और एयरोस्पेस विंग ने आज तड़के 2:00 से 3:00 बजे के बीच एक साझा ऑपरेशन चलाया। इस दौरान मिसाइलों और ड्रोनों की मदद से अमेरिकी सेना के आठ बड़े बुनियादी ढांचों को निशाना बनाया गया। ईरान ने कुवैत में स्थित अली अल-सलेम एयर बेस और सलमान पोर्ट के साथ-साथ बहरीन में तैनात अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े (5th Fleet) के बेस पर भी सीधे हमले किए।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का दावा
इस सैन्य टकराव के बीच IRGC ने एक बड़ा रणनीतिक दावा करते हुए कहा है कि वैश्विक व्यापार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली जहाजों की आवाजाही की पूरी जिम्मेदारी अब ईरान की है। ईरान ने साफ किया है कि इस क्षेत्र में जो भी नियमों का उल्लंघन करेगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल दोनों ही देश इस ताजा तनाव के लिए एक-दूसरे को कसूरवार ठहरा रहे हैं, जहां अमेरिका ने ईरान पर समझौते की अनदेखी का आरोप लगाया है, वहीं ईरान का कहना है कि अमेरिका पहले भी कई बार सीजफायर का उल्लंघन कर चुका है।
सेशेल्स पहुंचे PM मोदी, कछुओं को खिलाईं पत्तियां और राष्ट्रपति पैट्रिक संग बिताए यादगार पल
27 Jun, 2026 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
विक्टोरिया। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी तीन दिवसीय आधिकारिक राजनयिक यात्रा पर सेशेल्स पहुंच गए हैं। सेशेल्स इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर वहां के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी ने प्रोटोकॉल से परे जाकर उनका भव्य और ऐतिहासिक स्वागत किया, जिसके बाद प्रधानमंत्री को प्रतिष्ठित 'गार्ड ऑफ ऑनर' दिया गया। हवाई अड्डे पर मौजूद प्रवासी भारतीय समुदाय के नागरिकों ने भी पारंपरिक कच्छी नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति के साथ देश के प्रधानमंत्री का गर्मजोशी से अभिनंदन किया। इसके पश्चात, दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने विक्टोरिया स्थित प्रसिद्ध नेशनल बोटैनिकल गार्डन का भ्रमण किया, जहां प्रधानमंत्री मोदी ने न केवल एक स्मृति पौधा रोपा, बल्कि वहां के मुख्य आकर्षण माने जाने वाले दुर्लभ प्रजाति के 'एल्डाब्रा जाइंट' कछुओं को अपने हाथों से भोजन भी कराया।
स्वतंत्रता की स्वर्ण जयंती, जोनाथन कछुए का इतिहास और दीर्घायु का वैज्ञानिक रहस्य
यह राजकीय यात्रा वैश्विक स्तर पर इसलिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि २९ जून २०२६ को प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे, जो इस द्वीपीय राष्ट्र की स्वतंत्रता के ५० वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है। इस भव्य परेड में भारतीय नौसेना के दो आधुनिक युद्धपोतों के साथ सशस्त्र बलों की एक विशेष टुकड़ी भी अपनी शक्ति का प्रदर्शन करेगी। सेशेल्स के कछुओं की विशेषता को देखें तो यहां पाए जाने वाले एल्डाब्रा जाइंट कछुए अपनी १५० वर्ष की औसत आयु के लिए पूरी दुनिया में विख्यात हैं, जिनमें १९४ वर्षीय 'जोनाथन' को विश्व का सबसे उम्रदराज जीवित स्थलीय जीव माना जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, कछुओं के इतने लंबे जीवनकाल के पीछे उनकी अत्यंत धीमी चयापचय (धीमी जीवनशैली) प्रणाली है, जिससे उनकी शारीरिक कोशिकाएं जल्दी बूढ़ी नहीं होतीं, साथ ही उनका अभेद्य और सख्त बाहरी कवच उन्हें प्राकृतिक शत्रुओं व आंतरिक बीमारियों से जीवनभर सुरक्षा प्रदान करता है।
द्विपक्षीय संबंधों के ५० वर्ष, विजन महासागर और नेशनल असेंबली में संबोधन
भारत और सेशेल्स के मध्य आधिकारिक कूटनीतिक संबंधों की स्थापना का यह ५०वां वर्ष है, जिसे रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने सेशेल्स को भारत के 'विजन महासागर' (MAHASAGAR) का एक अपरिहार्य और मजबूत समुद्री साझेदार बताया है। फरवरी २०२६ में राष्ट्रपति हर्मिनी की सफल भारत यात्रा के बाद हो रहे इस दौरे में दोनों राष्ट्रों के बीच हिंद महासागर की सुरक्षा, क्षेत्रीय संप्रभुता और आर्थिक समृद्धि को लेकर कई उच्चस्तरीय समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स की नेशनल असेंबली (संसद) को संबोधित करने वाले भारत के इतिहास के पहले प्रधानमंत्री बनकर एक नया कीर्तिमान स्थापित करेंगे। प्रधानमंत्री ने पूर्ण विश्वास जताया है कि इस ऐतिहासिक पहल से न केवल सदियों पुराने लोकतांत्रिक और विधायी मूल्यों को मजबूती मिलेगी, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में दोनों देशों का आपसी नौसैनिक सहयोग भी एक नए युग में प्रवेश करेगा।
इंदिरा गांधी के दौर की कूटनीति, सामरिक निगरानी और चीन की घेराबंदी का रोडमैप
ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में देखें तो वर्ष १९७६ में सेशेल्स की स्वतंत्रता के समय तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने वहां का दौरा किया था और भारत ने अपनी नौसेना का पराक्रमी युद्धपोत आईएनएस नीलगिरि भी वहां भेजा था। वर्ष १९८१ में उनके दूसरे दौरे के बाद लगभग ३४ वर्षों तक किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने सेशेल्स की सुध नहीं ली, जिसके बाद २०१५ में प्रधानमंत्री मोदी ने वहां की यात्रा कर इस कूटनीतिक गतिरोध को समाप्त किया था। वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य में जब चीन हिंद महासागर के छोटे द्वीपीय देशों में अपना सैन्य प्रभाव बढ़ाने की निरंतर कोशिश कर रहा है, भारत ने सेशेल्स की तटीय सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए उसे दूसरा अत्याधुनिक डोर्नियर समुद्री निगरानी विमान सौंपने की आधिकारिक घोषणा की है। इसके साथ ही, भारत के सहयोग से निर्मित अत्याधुनिक तटीय निगरानी रडार नेटवर्क का उद्घाटन इस क्षेत्र में जहाजों के आवागमन पर पैनी नजर रखने और भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' (पड़ोसी पहले) की सामरिक नीति को धरातल पर उतारने की दिशा में एक बेहद निर्णायक और दूरगामी कदम है।
पाकिस्तान पर कर्ज का पहाड़, रिकॉर्ड देनदारी ने बढ़ाई शहबाज सरकार की चिंता
27 Jun, 2026 04:22 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पड़ोसी देश पाकिस्तान इस समय अपने संपूर्ण इतिहास के सबसे गंभीर और रिकॉर्डतोड़ कर्ज संकट के जाल में फंस गया है। बेहद नाजुक आर्थिक परिस्थितियों और वित्तीय कुप्रबंधन से जूझ रहे पाकिस्तान पर कुल संचयी कर्ज का बोझ बढ़कर ८१.९३ ट्रिलियन (लाख करोड़) रुपये के अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गया है। इस भयावह स्थिति का मुख्य कारण अप्रैल २०२६ के दौरान सरकार द्वारा लिया गया भारी-भरकम कर्ज है। आधिकारिक वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान की केंद्र सरकार का कुल कर्ज केवल अप्रैल के महीने में ही १.४ ट्रिलियन रुपये बढ़ गया, जिसने पुराने सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। यह तीव्र उछाल देश की खोखली हो चुकी आर्थिक व्यवस्था, बढ़ते राजकोषीय दबाव और अपने दैनिक प्रशासनिक खर्चों व सरकारी दायित्वों को पूरा करने के लिए केवल बाहरी व आंतरिक उधारी पर टिकी रहने की विवशता को साफ तौर पर उजागर करता है।
चालू वित्त वर्ष में बेकाबू उधारी और घरेलू-विदेशी कर्ज का विश्लेषण
आर्थिक विश्लेषकों और वित्तीय रिपोर्टों के अनुसार, कर्ज के ये ताजा आंकड़े पाकिस्तानी सरकारी खजाने की उस स्थायी संरचनात्मक कमजोरी को दर्शाते हैं, जिसके कारण पूरा देश इस समय वेंटिलेटर पर चल रहा है। चालू वित्त वर्ष के शुरुआती १० महीनों के भीतर ही केंद्र सरकार के ऋण में ४ ट्रिलियन रुपये से अधिक की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। इस कुल बढ़ोतरी का सूक्ष्म विश्लेषण करें तो इसमें से घरेलू स्रोतों से लिया गया कर्ज ३.६ ट्रिलियन रुपये से ज्यादा था, जबकि विदेशी संस्थाओं से लिया गया ऋण ४०० बिलियन (अरब) रुपये से अधिक बढ़ा है। बजट घाटे को पाटने और पुराने अंतरराष्ट्रीय ऋणों की किस्तों को चुकाने के लिए शहबाज शरीफ सरकार पूरी तरह से नई उधारी पर निर्भर हो चुकी है, जिसके दुष्परिणामों को लेकर वैश्विक वित्तीय विशेषज्ञ लगातार इस्लामाबाद को सचेत कर रहे हैं।
कर्ज का दुष्चक्र, चेतावनियों की अनदेखी और विकास कार्यों पर ताला
पाकिस्तान की लगातार आती रही सरकारों की इसी अदूरदर्शी नीति के कारण देश में एक ऐसा आत्मघाती आर्थिक चक्र बन चुका है, जिसे अब उलटना या नियंत्रित करना लगभग असंभव नजर आ रहा है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों, नीति-निर्माताओं और अर्थशास्त्रियों द्वारा राजस्व वसूली में आ रही भारी गिरावट और लगातार बढ़ते राजकोषीय घाटे को लेकर बार-बार रेड अलर्ट जारी करने के बावजूद कर्ज का यह पहाड़ बड़ा होता जा रहा है। इसका सबसे घातक और व्यापक असर देश के सामाजिक ताने-बाने पर पड़ रहा है, क्योंकि बजट का एक बहुत बड़ा और मुख्य हिस्सा देश की शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) और लोक कल्याणकारी योजनाओं में निवेश होने के बजाय केवल पुराने कर्ज का ब्याज और किस्तें चुकाने में ही स्वाहा हो रहा है।
पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक तनाव और संकट से उबरने के कड़े विकल्प
इस पहले से ही बदतर स्थिति के बीच, पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी तीव्र भू-राजनीतिक और सैन्य तनाव ने पाकिस्तान के लिए एक नया संकट खड़ा कर दिया है। इस वैश्विक उथल-पुथल के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और ऊर्जा की कीमतों में लगी आग ने पाकिस्तान के आयात बिल को अत्यधिक बढ़ा दिया है, जिससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार और विदेशी खातों पर असहनीय दबाव आ गया है। इस गहरे दलदल से बाहर निकलने के लिए आर्थिक विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि यदि पाकिस्तान को अपने अस्तित्व को बचाना है, तो उसे तत्काल प्रभाव से कड़े संरचनात्मक सुधार लागू करने होंगे, कर चोरी रोककर मजबूत राजस्व सृजन करना होगा और सरकारी फिजूलखर्ची व सार्वजनिक खर्चों पर कठोरता से अंकुश लगाना होगा। यदि कर्ज बढ़ने के इन बुनियादी कारणों का समय रहते स्थायी इलाज नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में पाकिस्तान पूरी तरह से दिवालिया होने की कगार पर पहुंच जाएगा।
नेशनल चैंपियनशिप में हरियाणा का दबदबा, डिस्कस थ्रो के तीनों मेडल अपने नाम
27 Jun, 2026 03:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भुवनेश्वर:ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में खेली जा रही 65वीं नेशनल इंटर स्टेट सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में हरियाणा की महिला खिलाड़ियों ने भारतीय खेल इतिहास में एक नया और स्वर्णिम अध्याय लिख दिया है। कलिंगा स्टेडियम में आयोजित इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में हरियाणा की बेटियों ने पूरी तरह दबदबा बनाते हुए गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज यानी तीनों ही पदक अपने नाम कर लिए। इस ऐतिहासिक कामयाबी के साथ ही तीनों धुरंधर खिलाड़ियों ने आगामी एशियन गेम्स के लिए तय कड़े क्वालिफाइंग मानकों को भी सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने का अपना दावा बेहद मजबूत कर लिया है।
भिवानी, महेंद्रगढ़ और रोहतक की त्रिमूर्ति ने मैदान पर गाड़े झंडे
एथलेटिक्स हरियाणा की ओर से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इस महामुकाबले में भिवानी की रहने वाली सीमा ने मैदान पर जादुई प्रदर्शन किया। उन्होंने 59.73 मीटर की शानदार थ्रो फेंककर प्रतियोगिता का स्वर्ण पदक अपने नाम किया और एशियन गेम्स की भारतीय टीम में अपनी सीट पक्की कर ली। इसी स्पर्धा में महेंद्रगढ़ की होनहार एथलीट सान्या यादव ने भी कमाल का दमखम दिखाया और 56.05 मीटर की थ्रो के साथ रजत पदक पर कब्जा जमाया। वहीं, रोहतक की निधि रानी ने भी पीछे न रहते हुए 55.92 मीटर की बेहतरीन थ्रो के साथ कांस्य पदक अपने नाम किया और एशियन गेम्स का टिकट पाने वाले एथलीटों की सूची में अपनी जगह सुरक्षित कर ली।
जापान एशियन गेम्स का टिकट पाने की रेस, हैमर थ्रो में भी चमका झज्जर
कलिंगा स्टेडियम में चल रही यह पांच दिवसीय राष्ट्रीय चैंपियनशिप 24 से 28 जून तक आयोजित की जा रही है, जहां देश भर के एथलीट 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक आइची-नगोया (जापान) में होने वाले आगामी एशियन गेम्स की भारतीय टीम में जगह बनाने के लिए जी-जान से जुटे हैं। महिलाओं के अलावा पुरुषों की हैमर थ्रो स्पर्धा में भी हरियाणा के झज्जर निवासी आशीष जाखड़ ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 67.61 मीटर की थ्रो के साथ कांस्य पदक जीतकर राज्य का मान बढ़ाया। इसी कड़े मुकाबले में पंजाब के दमनीत सिंह ने 69.72 मीटर की थ्रो के साथ पहला स्थान पाते हुए गोल्ड मेडल जीता, जबकि राजस्थान के परवीन कुमार ने 69.58 मीटर की थ्रो के साथ सिल्वर मेडल अपने नाम किया और इन दोनों खिलाड़ियों ने भी एशियन गेम्स के लिए क्वालिफाई कर लिया।
खिलाड़ियों की ऐतिहासिक सफलता पर खेल जगत में जश्न का माहौल
एक ही स्पर्धा में तीनों राष्ट्रीय पदकों पर कब्जा जमाने और एशियन गेम्स के कड़े क्वालिफिकेशन बेंचमार्क को पार करने की इस अद्भुत उपलब्धि पर खेल जगत से जुड़े दिग्गजों ने खुशी जाहिर की है। एथलेटिक्स हरियाणा के अध्यक्ष दिलबाग सिंह, महासचिव प्रदीप मलिक और एएफआई ग्रीवेंस कमेटी के सदस्य राजकुमार मिटान के साथ-साथ टीम के मुख्य कोच और मैनेजर जसवंत सिवाच व अजय कुमार ने सभी पदक विजेताओं की हौसलाअफजाई की है। खेल संघ के पदाधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि राष्ट्रीय मंच पर तिरंगा लहराने वाले ये जांबाज खिलाड़ी आने वाले समय में जापान की धरती पर भी देश का मान बढ़ाएंगे।
भारत की ऊर्जा जरूरतों पर अमेरिका का प्रस्ताव, मार्को रुबियो बोले- हर चुनौती का समाधान हमारे पास
27 Jun, 2026 03:19 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक महत्वपूर्ण बयान में कहा है कि वाशिंगटन भारत की तेजी से बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति में एक बड़ी और सहयोगी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है। भारत की ओर से अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने (डाइवर्सिफिकेशन) की दूरदर्शी रणनीति का पुरजोर समर्थन करते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच इस क्षेत्र में बढ़ता समन्वय दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को एक नया संबल प्रदान करेगा। व्हाइट हाउस में दिए गए एक विशेष साक्षात्कार के दौरान विदेश मंत्री रुबियो ने स्पष्ट किया कि भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के गहरे होते आयामों के बीच, अमेरिका भारतीय बाजारों की घरेलू मांगों को पूरा करने के लिए अत्यंत सुदृढ़ स्थिति में है।
वैश्विक तेल बाजार की स्थिरता और वेनेजुएला से कच्चे तेल की आपूर्ति
अमेरिकी विदेश मंत्री ने भारत की आयात निर्भरता को सुरक्षित करने के लिए अलग-अलग देशों से आपूर्ति शृंखला बनाए रखने की वकालत की। उन्होंने इस पूरे परिदृश्य को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उन कूटनीतिक कोशिशों से जोड़ा, जिसके तहत पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भू-राजनीतिक तनाव को कम कर वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि सहयोगी राष्ट्रों के लिए बाजार में ईंधन की उपलब्धता बढ़ सके। इसी क्रम में रुबियो ने भारत के लिए कच्चे तेल के एक अन्य बड़े विकल्प के रूप में वेनेजुएला की ओर संकेत किया और बताया कि अमेरिका वहां तेल उत्पादन की क्षमता को पुनर्जीवित करने के लिए बेहद करीब से काम कर रहा है।
भारी कच्चे तेल की रिफाइनिंग क्षमता और साझा रणनीतिक हित
भारत की तकनीकी विशेषज्ञता की सराहना करते हुए मार्को रुबियो ने कहा कि भारतीय रिफाइनरियों के पास वेनेजुएला के 'हेवी क्रूड' (भारी कच्चे तेल) को प्रोसेस करने की एक विशेष और विश्वस्तरीय क्षमता है, जो दुनिया के बहुत कम देशों के पास उपलब्ध है। इस लिहाज से अमेरिका वेनेजुएला से भारत को होने वाली तेल आपूर्ति के विधिक व तकनीकी रास्तों को और सुगम बनाने की दिशा में काम करेगा। उन्होंने आगे कहा कि ऊर्जा के अतिरिक्त दोनों देशों के बीच अर्थव्यवस्था, मजबूत आपूर्ति शृंखला (सप्लाई चेन), महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स), रक्षा सुरक्षा और समुद्री नौवहन की स्वतंत्रता जैसे कई ऐसे महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं, जहां दुनिया के सबसे बड़े और सबसे पुराने लोकतंत्र के साझा रणनीतिक हित आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं।
प्रवासी भारतीयों का विशेष योगदान और द्विपक्षीय साझेदारी के मजबूत स्तंभ
इस रणनीतिक जुड़ाव को मानवीय दृष्टिकोण से जोड़ते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री ने वहां रह रहे मजबूत और प्रभावशाली भारतीय-अमेरिकी समुदाय के योगदान को भी विशेष रूप से सराहा, जो दोनों देशों के बीच एक जीवंत कूटनीतिक सेतु का कार्य कर रहा है। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में भारत दुनिया का सबसे तेजी से विकसित होता ऊर्जा उपभोक्ता बनकर उभरा है, जिसने अपनी विशाल घरेलू औद्योगिक मांगों को पूरा करने के लिए कच्चे तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) के आयात तंत्र को आधुनिक बनाया है। ऐसे में तेल और गैस के व्यापार के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा तकनीक (क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी) और असैन्य परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में हो रहा यह द्विपक्षीय सहयोग आने वाले समय में भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी का सबसे मजबूत स्तंभ साबित होगा।
मिडिल ईस्ट में फिर बढ़ा तनाव, ईरान ने US से जुड़े ठिकानों को बनाया निशाना
27 Jun, 2026 01:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। वैश्विक कूटनीति और मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) के रणक्षेत्र से इस समय की सबसे बड़ी हलचल सामने आ रही है, जहां एक तरफ शांति की शुरुआत हुई है तो दूसरी तरफ सैन्य टकराव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस्राइल और चरमपंथी संगठन हिजबुल्ला के बीच महीनों से जारी खूनी संघर्ष को थामने के लिए एक प्रारंभिक शांति समझौते की आधिकारिक घोषणा की है। वाशिंगटन में इस्राइली राजदूत येखिएल लीटर और लेबनानी राजदूत नादा हमादेह द्वारा हस्ताक्षरित यह त्रिपक्षीय फ्रेमवर्क लेबनान की संप्रभुता को बहाल करने और नागरिकों की सुरक्षित घर वापसी की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है। हालांकि, इस ऐतिहासिक शांति वार्ता से ईरान और हिजबुल्ला को पूरी तरह अलग रखा गया है। इस बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य में सिंगापुर के एक मालवाहक जहाज पर हुए ड्रोन हमले के बाद खाड़ी में बारूद सुलग उठा है। अमेरिकी सेना की मध्य कमान (सेंटकॉम) ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान के मिसाइल-ड्रोन ठिकानों और तटीय रडार साइट्स पर भीषण हवाई हमले किए हैं, जिसके जवाब में ईरानी सशस्त्र बलों ने भी आत्मरक्षा का हवाला देते हुए अमेरिका से जुड़े गुप्त ठिकानों पर ताबड़तोड़ पलटवार करने का दावा किया है।
पश्चिम एशिया का नया समीकरण, संप्रभुता की मांग और नेतन्याहू का रुख
इस द्विपक्षीय फ्रेमवर्क समझौते को लेकर इस्राइल और लेबनान के नेतृत्व की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आई हैं। लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने कहा है कि इस समझौते का मुख्य लक्ष्य देश की संप्रभुता को बहाल करना और सभी लेबनानी क्षेत्रों से इस्राइली सेना की पूर्ण वापसी सुनिश्चित करना है, ताकि युद्ध और शांति का निर्णय केवल वहां की चुनी हुई सरकार के हाथों में रहे। इसके विपरीत, इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस त्रिपक्षीय समझौते को ईरान के क्षेत्रीय प्रभाव के लिए एक बहुत बड़ा झटका बताया है। नेतन्याहू ने साफ लहजे में स्पष्ट कर दिया है कि भले ही यह प्रारंभिक समझौता हो गया हो, लेकिन जब तक लेबनान की सेना हिजबुल्ला का पूरी तरह से निरस्त्रीकरण (हथियार छीनना) नहीं कर देती, तब तक इस्राइली सेना दक्षिणी लेबनान के रणनीतिक मोर्चों पर मजबूती से डटी रहेगी।
डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी, सुलेमानी का जिक्र और ईरान का प्रतिशोध
खाड़ी में बढ़े इस ताजा तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बेहद आक्रामक बयान सामने आया है। एक नीति सम्मेलन को संबोधित करते हुए ट्रंप ने दो टूक कहा कि अमेरिका ने एक ऐसी विधिक रूपरेखा तैयार की है जिसके बाद ईरान चाहकर भी कभी परमाणु हथियार विकसित नहीं कर पाएगा। ईरान द्वारा हाल ही में किए गए संघर्षविराम उल्लंघन और अमेरिकी हमलों पर बोलते हुए ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि तेहरान ने अपनी हरकतों पर लगाम नहीं लगाई तो उसे इसके बेहद गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इसके साथ ही उन्होंने पूर्व ईरानी सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की हत्या को पिछले 100 वर्षों की सबसे युगांतरकारी घटना बताते हुए दावा किया कि सुलेमानी के खौफ से खुद ईरान का शीर्ष नेतृत्व भी डरा हुआ था। दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए खाड़ी देशों से अपील की है कि वे अपनी धरती का इस्तेमाल अमेरिकी सेना की शत्रुतापूर्ण कार्रवाइयों के लिए न होने दें।
होर्मुज जल संकट का वीडियो साक्ष्य और कतर हादसे के पीड़ितों की घर वापसी
सैन्य मोर्चे की बात करें तो अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर किए गए हवाई हमलों का एक प्रामाणिक वीडियो फुटेज जारी किया है। अमेरिका का दावा है कि ओमान के तट के पास होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे सिंगापुर के झंडे वाले मालवाहक जहाज 'एम/वी एवर लवली' पर ईरानी ड्रोनों द्वारा हमला किया गया था, जिसमें भारी नुकसान हुआ है और यह हवाई कार्रवाई उसी का प्रत्यक्ष जवाब है। इन भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच एक अन्य दुखद घटनाक्रम में, कतर के रास लाफान औद्योगिक क्षेत्र स्थित बरजान गैस आपूर्ति केंद्र में हुए भीषण विस्फोट में जान गंवाने वाले आठ और भारतीय नागरिकों के पार्थिव शरीरों को कानूनी प्रक्रियाओं के बाद सुरक्षित स्वदेश भेज दिया गया है। दोहा स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, इस दर्दनाक हादसे में अपनी जान गंवाने वाले कुल 13 लोगों में से अब तक 12 भारतीयों के शव भारत लाए जा चुके हैं, जबकि अस्पताल में भर्ती अन्य घायल नागरिकों को कतर सरकार के सहयोग से उचित चिकित्सा सहायता प्रदान की जा रही है।
हिसार में परिवहन नियमों की अनदेखी पड़ी भारी, 10 वाहन चालकों पर कार्रवाई
27 Jun, 2026 01:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिसार:सड़कों पर दौड़ते ओवरलोड और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ सीएम फ्लाइंग हिसार ने शनिवार सुबह एक बड़ा कदम उठाया। टीम ने विशेष चेकिंग अभियान चलाकर यातायात नियमों की अनदेखी करने वाले 10 वाहनों के चालान काटे। विभिन्न प्रकार की अनियमितताओं और टैक्स चोरी के चलते इन वाहनों पर कुल 5 लाख 50 हजार 500 रुपये का भारी-भरकम जुर्माना लगाया गया है।
गुप्त सूचना पर सुबह-सुबह बिछाया गया जाल
इस विशेष कार्रवाई का नेतृत्व सीएम फ्लाइंग हिसार रेंज की इंचार्ज सुनैना ने किया। उनके साथ क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (आरटीए) के यातायात निरीक्षक हरविंदर सिंह, एसआई कृष्ण कुमार, एएसआई सुरेंद्र और हेड कांस्टेबल विजय सहित अन्य अधिकारी भी पूरी मुस्तैदी के साथ मैदान में डटे रहे। दरअसल, विभाग को पिछले काफी समय से गुप्त शिकायतें मिल रही थीं कि क्षेत्र के प्रमुख मार्गों पर धड़ल्ले से ओवरलोड वाहन दौड़ रहे हैं, जिससे न केवल सड़कों को नुकसान पहुंच रहा है बल्कि आम लोगों की सुरक्षा भी खतरे में है। इसके अलावा बिना वैध बीमा, टैक्स चोरी और प्रदूषण प्रमाण-पत्र के बिना गाड़ी चलाने की भी इनपुट मिली थी, जिसके बाद शनिवार तड़के ही विभिन्न रास्तों पर नाकेबंदी कर दी गई।
कागजातों की गहन जांच और मौके पर ही ऑनलाइन जुर्माना
चेकिंग के दौरान अधिकारियों ने रास्ते से गुजरने वाले संदिग्ध वाहनों को रोककर उनके रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आरसी), ड्राइविंग लाइसेंस, फिटनेस और प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण-पत्र (पीयूसी) की बारीकी से जांच की। इसके साथ ही गाड़ियों में लदे माल की चौड़ाई और वजन को भी मापा गया। इस सघन चेकिंग में 10 वाहन पूरी तरह नियमों का उल्लंघन करते पाए गए, जिन पर ओवरलोडिंग और जरूरी कागजात न होने के चलते मौके पर ही जुर्माना ठोक दिया गया। जिन वाहन मालिकों ने ऑनलाइन माध्यम से तुरंत अपनी चालान राशि का भुगतान कर दिया, उन्हें सख्त हिदायत देकर आगे जाने की अनुमति दी गई।
हादसों को न्योता देते हैं ओवरलोड वाहन
मामले की जानकारी देते हुए रेंज इंचार्ज सुनैना ने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार के सख्त निर्देश हैं कि सड़कों पर किसी भी सूरत में ओवरलोड गाड़ियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भारी वाहन अक्सर भीषण सड़क हादसों की वजह बनते हैं, जिससे कई बार मासूम लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ती है। उन्होंने सभी वाहन चालकों और मालिकों से अपील की है कि वे अपनी गाड़ियों के टैक्स समय पर भरें और ड्राइविंग के दौरान हमेशा वैध बीमा, आरसी और लाइसेंस अपने पास रखें ताकि किसी भी कानूनी कार्रवाई से बचा जा सके।
स्कूल बसों की सुरक्षा को लेकर कड़े निर्देश
इस अभियान के दौरान स्कूली बच्चों की सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। अधिकारियों ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं हो सकता। सभी स्कूल और कॉलेज प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी बसों में सीसीटीवी कैमरे, फर्स्ट एड बॉक्स, वर्दीधारी ड्राइवर और एक प्रशिक्षित अटेंडेंट अनिवार्य रूप से मौजूद हों। साथ ही बसों को निर्धारित गति सीमा में ही चलाया जाए और बच्चों को उतारते व चढ़ाते समय विशेष सावधानी बरती जाए, अन्यथा उनके खिलाफ भी सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
क्या है सेशेल्स की खासियत? PM मोदी के दौरे से क्यों चर्चा में आया यह द्वीपीय देश
27 Jun, 2026 01:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
विक्टोरिया। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी तीन दिवसीय आधिकारिक कूटनीतिक यात्रा पर हिंद महासागर के रणनीतिक देश सेशेल्स पहुंच गए हैं। हवाई अड्डे पर आगमन के दौरान राजनयिक शिष्टाचार (प्रोटोकॉल) को किनारे रखते हुए सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ पैट्रिक हर्मिनी ने स्वयं उपस्थित होकर प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से आत्मीय स्वागत किया। इस अभूतपूर्व और भव्य स्वागत के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सेशेल्स हिंद महासागर क्षेत्र में भारत का एक अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री साझेदार और दीर्घकालिक विश्वसनीय मित्र है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस ऐतिहासिक राजकीय यात्रा का मुख्य ध्येय दोनों राष्ट्रों के पारस्परिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाना और आपसी सहयोग के माध्यम से दोनों देशों की जनता के लिए प्रगति के नए मार्ग प्रशस्त करना है।
राष्ट्रीय दिवस का स्वर्ण जयंती समारोह और नेशनल असेंबली में ऐतिहासिक संबोधन
इस रणनीतिक यात्रा के मुख्य एजेंडे के तहत प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस के पावन अवसर पर आयोजित होने वाले भव्य स्वर्ण जयंती समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित होंगे। यह अवसर इसलिए भी अत्यंत विशिष्ट है क्योंकि यह वर्ष भारत और सेशेल्स के मध्य आधिकारिक राजनयिक संबंधों की स्थापना की 50वीं वर्षगांठ का भी प्रतीक है। अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स की नेशनल असेंबली (संसद) को भी संबोधित करेंगे, और यह गौरवपूर्ण उपलब्धि हासिल करने वाले वे भारत के इतिहास के सर्वप्रथम प्रधानमंत्री बनेंगे। दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच होने वाली द्विपक्षीय वार्ता का मुख्य फोकस 'विजन महासागर' (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) तथा 'ग्लोबल साउथ' के साझा हितों को वैश्विक मंचों पर मजबूती से आगे बढ़ाना है।
भारतीय सैन्य दल की भागीदारी और पश्चिमी हिंद महासागर में रणनीतिक अवस्थिति
इस ऐतिहासिक स्वर्ण जयंती उत्सव की भव्यता को बढ़ाने के लिए भारतीय सशस्त्र बलों की एक विशेष टुकड़ी और भारतीय नौसेना के दो अत्याधुनिक युद्धपोत भी सेशेल्स के तट पर पहुंच चुके हैं। भौगोलिक दृष्टिकोण से देखें तो सेशेल्स पश्चिमी हिंद महासागर में लगभग 455 वर्ग किलोमीटर के दायरे में बिखरे 115 सुरम्य द्वीपों पर आधारित एक समृद्ध देश है, जिसकी राजधानी माहे द्वीप पर स्थित विक्टोरिया शहर है। मेडागास्कर के उत्तर-पूर्व और मुख्य भूमि अफ्रीका से करीब 1,600 किलोमीटर दूर स्थित यह द्वीपीय राष्ट्र अपनी प्राचीन सफेद रेत, बेजोड़ मूंगा चट्टानों (कोरल रीफ) और दुर्लभ जैविक विविधता के लिए पूरी दुनिया के पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र माना जाता है।
चीन की घेराबंदी, ब्लू इकोनॉमी और समुद्री सुरक्षा में साझा रक्षा सहयोग
हिंद महासागर क्षेत्र में चीन के बढ़ते सैन्य और आर्थिक प्रभाव को संतुलित करने के नजरिए से सेशेल्स की भौगोलिक स्थिति भारत के लिए अत्यधिक सामरिक महत्व रखती है। दोनों देशों के रक्षा बल समुद्री व्यापारिक मार्गों की रक्षा करने, समुद्री डकैती (पायरेसी) को रोकने, अवैध शिकार पर अंकुश लगाने और आतंकवाद के सफाए के लिए निरंतर संयुक्त गश्त और खुफिया जानकारियों का आदान-प्रदान करते हैं। इसी सुदृढ़ रक्षा साझेदारी के तहत भारत ने पूर्व में सेशेल्स के कोस्ट गार्ड को शक्तिशाली नौसैनिक जहाज और डोर्नियर निगरानी विमान उपहार स्वरूप सौंपे हैं। इसके अतिरिक्त, सेशेल्स का विशाल विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) समुद्री संसाधनों के दोहन और 'ब्लू इकोनॉमी' को बढ़ावा देने के लिए भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसे वहां रह रही लगभग 11% भारतीय मूल की आबादी का मजबूत सामाजिक समर्थन प्राप्त है।
भारत की बढ़ी टेंशन! तीस्ता प्रोजेक्ट में चीन की एंट्री और उसके रणनीतिक मायने
27 Jun, 2026 12:09 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग । बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की बीजिंग यात्रा के संपन्न होने के बाद तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन परियोजना को लेकर चीन का एक बड़ा और रणनीतिक बयान सामने आया है। चीनी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बांग्लादेश के साथ उसका द्विपक्षीय सहयोग किसी भी तीसरे देश को लक्षित करके नहीं किया जा रहा है और न ही इस पर किसी बाहरी पक्ष का कोई दखल होना चाहिए। बीजिंग का यह रुख ऐसे समय में आया है जब भारत इस परियोजना में चीनी निवेश और उसकी भौतिक उपस्थिति को लेकर अपनी सुरक्षा संबंधी चिंताएं लगातार जता रहा है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने आधिकारिक तौर पर कहा कि उनका देश तीस्ता नदी के पुनरुद्धार और प्रबंधन से जुड़ी इस जनकल्याणकारी योजना को वित्तीय व तकनीकी सहयोग देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
तीस्ता परियोजना का स्वरूप और चीन की बढ़ती दिलचस्पी
तीस्ता नदी भारत के सिक्किम राज्य से उद्गमित होकर पश्चिम बंगाल के रास्ते बांग्लादेश में प्रवेश करती है, जिसकी कुल लंबाई लगभग 414 किलोमीटर है। इस नदी का प्रवाह क्षेत्र बांग्लादेश के उत्तरी जिलों की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा माना जाता है। ढाका प्रशासन लंबे समय से इस क्षेत्र में आने वाली विनाशकारी बाढ़, नदी के कटाव और सूखे की समस्या से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर ड्रेजिंग, जल संचयन और मजबूत तटबंधों के निर्माण की योजना पर काम कर रहा है। चीन ने इस 'तीस्ता रिवर कॉम्प्रिहेंसिव मैनेजमेंट एंड रिस्टोरेशन प्रोजेक्ट' को अपने महत्वाकांक्षी 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (बीआरआई) से जोड़ते हुए इसमें भारी निवेश करने की इच्छा प्रकट की है, जिसे बांग्लादेश अपने आर्थिक विकास के लिए बेहद जरूरी मानता है।
भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर की संवेदनशीलता और सुरक्षा सरोकार
इस विकास परियोजना के भौगोलिक मानचित्र को देखने पर भारत की रणनीतिक चिंताएं पूरी तरह स्पष्ट हो जाती हैं। प्रस्तावित परियोजना का कार्यक्षेत्र भारत के सबसे संवेदनशील भूभाग 'सिलीगुड़ी कॉरिडोर' के अत्यंत निकट है, जिसे सामरिक भाषा में 'चिकेन नेक' कहा जाता है। यह मात्र 20-22 किलोमीटर चौड़ा एक संकरा जमीनी मार्ग है, जो भारत के सभी आठ पूर्वोत्तर राज्यों को देश के मुख्य हिस्से से जोड़ता है। सैन्य दृष्टि से यह क्षेत्र देश का सबसे नाजुक रक्षा बिंदु है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि गलवान, डोकलाम और अरुणाचल प्रदेश सीमा पर चीन के आक्रामक रवैये को देखते हुए, यदि चीनी कंपनियां इस इलाके के पास दीर्घकालिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में शामिल होती हैं, तो इससे भारतीय सीमाओं की सुरक्षा, निगरानी और सामरिक संतुलन के लिए एक बड़ा खतरा उत्पन्न हो सकता है।
दक्षिण एशिया में बीजिंग का बढ़ता दखल और कूटनीतिक चुनौती
पिछले एक दशक में चीन पद्मा ब्रिज रेल लिंक और पायरा व मोंगला बंदरगाहों जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के जरिए बांग्लादेश का सबसे बड़ा आर्थिक साझेदार बनकर उभरा है। दूसरी ओर, भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता नदी के जल बंटवारे का ऐतिहासिक समझौता पश्चिम बंगाल सरकार की तकनीकी आपत्तियों के कारण लंबे समय से लंबित पड़ा हुआ है। कूटनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इसी राजनीतिक शून्यता का लाभ उठाकर चीन भारत के इस सबसे संवेदनशील हिस्से के करीब अपनी रणनीतिक पहुंच मजबूत करना चाहता है। नई दिल्ली के लिए यह एक बड़ी भू-राजनीतिक चुनौती है, क्योंकि यदि भारत सीमा-पार नदी परियोजनाओं पर बांग्लादेश के साथ त्वरित गति से आगे नहीं बढ़ता, तो ढाका का झुकाव बीजिंग की ओर और अधिक बढ़ सकता है, जिससे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन प्रभावित होगा।
शोएब अख्तर के भाई के जनाजे में आतंकी चेहरों की मौजूदगी के दावे, तस्वीरें हुईं वायरल
27 Jun, 2026 11:47 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व दिग्गज तेज गेंदबाज शोएब अख्तर के बड़े भाई शाहिद अख्तर के अंतिम संस्कार (जनाजे) को लेकर एक नया अंतरराष्ट्रीय विवाद छिड़ गया है। डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहे कुछ वीडियो तथा तस्वीरों के आधार पर यह दावा किया जा रहा है कि इस शवयात्रा में प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से ताल्लुक रखने वाले कुछ खूंखार चेहरे शामिल हुए थे। इन तस्वीरों के सार्वजनिक पटल पर आने के बाद पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में वैश्विक स्तर पर प्रतिबंधित आतंकियों की खुलेआम आवाजाही और उन्हें वहां के रसूखदारों द्वारा मिलने वाले परोक्ष व अपरोक्ष संरक्षण को लेकर पूरी दुनिया में एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।
इस्लामाबाद के कब्रिस्तान में अंतिम विदाई और विवादित चेहरे
विदित हो कि शोएब अख्तर के भाई शाहिद अख्तर का बीते 24 जून को आकस्मिक देहावसान हो गया था, जिसके उपरांत इस्लामाबाद के एच-8 (H-8) स्थित प्रमुख कब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस अंतिम विदाई कार्यक्रम में खेल जगत, स्थानीय राजनीति और सामाजिक क्षेत्र से जुड़ी कई नामचीन हस्तियों ने शिरकत की थी। इसी दौरान इंटरनेट पर वायरल हुए फुटेज में लश्कर-ए-तैयबा के उप प्रमुख सैफुल्लाह कसूरी और पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग (पीएमएमएल) से जुड़े कुछ शीर्ष नेताओं की संदिग्ध मौजूदगी की बात कही जा रही है। यद्यपि किसी भी स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय संस्था ने अभी तक इन वायरल कड़ियों की आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की है, परंतु भारतीय सुरक्षा एजेंसियां सैफुल्लाह कसूरी को 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले का मुख्य सूत्रधार मानती हैं, जिसमें 25 निर्दोष पर्यटकों की जान चली गई थी।
पीएमएमएल नेताओं की उपस्थिति और पाकिस्तान का दोहरा रवैया
इंटरनेट पर प्रसारित साक्ष्यों में यह भी रेखांकित किया गया है कि जनाजे में पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग (पीएमएमएल) के इस्लामाबाद विंग के सदर इनाम-उर-रहमान कम्बोह सहित कई अन्य विवादित चेहरे भी अग्रिम पंक्ति में खड़े थे। गौरतलब है कि वैश्विक रक्षा विश्लेषक पीएमएमएल को संयुक्त राष्ट्र (यूएन) द्वारा घोषित अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी हाफिज सईद के पुराने नेटवर्क और लश्कर-ए-तैयबा का ही एक नया मुखौटा व राजनीतिक मंच मानते हैं। इस शवयात्रा में ऐसे तत्वों की खुलेआम मौजूदगी ने भारत और अन्य पश्चिमी देशों के उन पुराने आरोपों को पुनर्जीवित कर दिया है, जिसमें कहा जाता रहा है कि पाकिस्तान अपनी धरती पर पल रहे आतंकी बुनियादी ढांचे को नष्ट करने के बजाय उन्हें मुख्यधारा में संरक्षण प्रदान कर रहा है।
क्रिकेटर परिवार और पाक प्रशासन की रहस्यमयी खामोशी
इस पूरे गंभीर और संवेदनशील विवाद के वैश्विक मीडिया की सुर्खियों में आने के बाद भी अभी तक पूर्व क्रिकेटर शोएब अख्तर, उनके पारिवारिक सदस्यों अथवा उनके विधिक सलाहकारों की तरफ से किसी भी प्रकार की आधिकारिक सफाई या खंडन सामने नहीं आया है। दूसरी ओर, हमेशा की तरह इस बार भी पाकिस्तान के आंतरिक सुरक्षा मंत्रालय और वहां की सरकार ने इन तस्वीरों व वीडियो पर पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है और उनकी ओर से कोई भी प्रतिक्रियात्मक वक्तव्य जारी नहीं किया गया है। फिलहाल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यह विषय अत्यंत तीखी बहसों और भू-राजनीतिक टिप्पणियों के केंद्र में बना हुआ है और लोग इस पर लगातार अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
हादसे के बाद प्रशासन सख्त, सुपरवाइजर पर गिरी गाज और कंपनी हुई ब्लैकलिस्ट
