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खामेनेई के बाद फिर गदगद हुए नेतन्याहू, लाइव आकर कहा- आईआरजीसी का गुंडा मार दिया
19 Mar, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यरूशलेम। ईरान और अमेरिका के बीच जारी भीषण युद्ध के 18वें दिन इजरायल ने एक बड़ा सैन्य दावा करते हुए पूरी दुनिया को चौंका दिया है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि ईरान के सुरक्षा प्रमुख और डी-फैक्टो लीडर अली लारीजानी को एक सटीक हवाई हमले में मार गिराया गया है। 28 फरवरी को सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मृत्यु के बाद, लारीजानी ही व्यावहारिक रूप से ईरान की कमान संभाल रहे थे। उनकी मौत को मौजूदा संघर्ष में ईरान के सैन्य और रणनीतिक ढांचे के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने एक लाइव संबोधन और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस ऑपरेशन की जानकारी साझा की। उन्होंने लारीजानी को आईआरजीसी के गुंडों का बॉस करार देते हुए कहा कि यह कार्रवाई ईरान की कमर तोड़ने वाली साबित होगी। नेतन्याहू ने अपने संबोधन में कहा, आज सुबह हमने अली लारीजानी का खात्मा कर दिया। वह रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का नेतृत्व कर रहे थे, जो वास्तव में गुंडों की एक सेना है। लारीजानी के साथ ही हमने बसीज कमांडर को भी मार गिराया है। ये वे लोग थे जो तेहरान और ईरान के अन्य शहरों में नागरिकों को आतंकित करते थे।
इजरायली रक्षा मंत्रालय और सेना के अनुसार, यह हमला तेहरान स्थित उन सेफ हाउसेस को निशाना बनाकर किया गया था, जहां लारीजानी छिपे हुए थे। खुफिया सूचनाओं के आधार पर किए गए इस सर्जिकल स्ट्राइक में लारीजानी के साथ रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कई अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारी भी मारे गए हैं। लारीजानी की मौत न केवल सैन्य ऑपरेशन्स के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम की कमान भी उन्हीं के हाथों में थी, जिससे अब ईरान की रक्षा क्षमताओं पर बड़ा सवालिया निशान लग गया है।
दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका ने पहले ही ईरान के कई शीर्ष अधिकारियों पर करोड़ों डॉलर का इनाम घोषित कर रखा था, जिनमें लारीजानी का नाम प्रमुखता से शामिल था। इजरायली मीडिया और अधिकारियों ने इस पर चुटकी लेते हुए कहा कि इनाम की घोषणा के बावजूद लारीजानी मुफ्त में ही मारे गए। खामेनेई के बाद लारीजानी की इस तरह अचानक मौत ने ईरान के सत्ता गलियारों में शून्यता पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना के बाद ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई और तेज हो सकती है, जिससे मध्य पूर्व में युद्ध की आग और भड़कने की आशंका है।
तबाही: सुलेमानी की मौत के बाद भड़का ईरान, इजरायल पर बरसा दिए क्लस्टर बम
19 Mar, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। ईरान और इजरायल के बीच छिड़ा संघर्ष अब अपने 19वें दिन में प्रवेश कर चुका है, और स्थिति पहले से कहीं अधिक विस्फोटक हो गई है। युद्ध के 18वें दिन इजरायल द्वारा तेहरान में की गई एक बड़ी सैन्य कार्रवाई ने इस आग में घी डालने का काम किया है। इस हमले में ईरान के दो बेहद प्रभावशाली नेता सुरक्षा प्रमुख अली लारिजानी और बसीज बलों के कमांडर गुलारजा सुलेमानी मारे गए हैं। इन मौतों की पुष्टि के बाद पूरे तेहरान में शोक की लहर है और ईरान ने इसका भीषण बदला लेने का संकल्प लिया है। जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान ने इजरायल पर क्लस्टर बमों और मल्टी-वॉरहेड मिसाइलों से हमला किया है।
ईरान का दावा है कि ये हमले सीधे तौर पर तेहरान में हुई हत्याओं का प्रतिशोध हैं। इस बीच, युद्ध की लपटें अन्य खाड़ी देशों तक भी पहुंचती दिख रही हैं। सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस के पास एक बैलिस्टिक मिसाइल को इंटरसेप्ट किया गया है, जबकि दुबई और दोहा से भी धमाकों की खबरें मिली हैं। बगदाद में स्थित अमेरिकी दूतावास को भी ड्रोन के जरिए निशाना बनाया गया है, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ गई है। मानवीय क्षति के आंकड़े भी डराने वाले हैं। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत आमिर सईद इरवानी के अनुसार, अब तक अमेरिका-इजरायल हमलों में 1,300 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों का अनुमान है कि यह संख्या 1,858 तक पहुंच सकती है। इसके अलावा, लेबनान में हिज्बुल्लाह और इजरायल के बीच जारी संघर्ष में अब तक 773 लोगों की जान जा चुकी है। राजनयिक स्तर पर भी तनाव कम होने के संकेत नहीं मिल रहे हैं। खबरों के अनुसार, ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका के साथ किसी भी समझौते या मध्यस्थता के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो की भूमिका पर सवाल उठाए हैं, जबकि वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में 1% की मामूली गिरावट देखी गई है। जैसे-जैसे संघर्ष लंबा खींच रहा है, अंतरराष्ट्रीय समुदाय एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की आशंका से सहमा हुआ है।
ट्रंप का बयान: ईरान से युद्ध जल्द खत्म, ब्रिटिश-फ्रांसीसी प्रतिक्रिया पर भी टिप्पणी
18 Mar, 2026 11:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ जारी युद्ध “ज्यादा लंबा नहीं चलेगा,” लेकिन उन्होंने इसके समाप्त होने की कोई स्पष्ट समयसीमा बताने से इंकार किया है जिससे अमरीकी रणनीति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान इस संघर्ष को एक संक्षिप्त “अभियान” बताया और संकेत दिया कि यह “कुछ हफ्तों” में समाप्त हो सकता है, हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया कि वह बीते समय की बात कर रहे थे या आने वाले समय की। उन्होंने यह भी कहा कि अमरीका “अभी हटने के लिए तैयार नहीं” है, लेकिन “बहुत जल्द” वापसी कर सकता है।
ट्रंप ने युद्ध के बाद की योजनाओं पर पूछे जाने पर केवल सामान्य रूपरेखा दी और कहा कि अमेरिका यह सुनिश्चित करना चाहेगा कि संघर्ष के बाद ईरान “ठीक से संचालित” हो। श्री ट्रंप ने वरिष्ठ ईरानी नेताओं की हत्या पर टिप्पणी करते हुए मजाकिया अंदाज में कहा कि इससे कूटनीति जटिल हो गयी है और “हमें नहीं पता कि बातचीत किससे करें।” नाटो को लेकर अपनी आलोचना दोहराते हुए ट्रंप ने सहयोगियों द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए अमेरिकी नेतृत्व वाले प्रयास का समर्थन न करने पर नाराजगी जताई और यूरोपीय देशों के रुख को “बहुत बड़ी गलती” बताया।
उन्होंने ब्रिटेन और फ्रांस का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर “समर्थन नहीं दे रहे हैं, जो एक बड़ी गलती है,” जबकि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बारे में उन्होंने कहा कि “वह जल्द ही पद छोड़ने वाले हैं।”
अमरीकी राष्ट्रपति ने इससे पहले संकेत दिया था कि पेरिस और लंदन सहित कुछ अन्य देश अमेरिकी पहल में शामिल हो सकते हैं, लेकिन फ्रांस ने कहा है कि वह नौसैनिक एस्कॉर्ट मिशन पर तभी विचार करेगा जब तेहरान के साथ तनाव कम होगा। वहीं ब्रिटेन ने सैन्य अभियानों में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है, जबकि अन्य एशियाई और यूरोपीय सहयोगी भी सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। इसके विपरीत, ट्रंप ने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर और बहरीन जैसे खाड़ी देशों की रक्षात्मक तैयारियों की सराहना की। इनमें से हालांकि किसी ने भी सार्वजनिक रूप से नौसैनिक मिशन में शामिल होने की प्रतिबद्धता नहीं जताई है।
NIA की कार्रवाई: ड्रोन से हमला करने की साजिश में सात विदेशी नागरिक पकड़े गए
18 Mar, 2026 11:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
एनआईए ने भारत के खिलाफ आतंकी साजिश के मामले में एक अमरीकी और छह यूके्रनी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। इन पर आरोप है कि इन्होंने भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों की योजना बनाई और म्यांमार के विद्रोही गुटों के लिए ड्रोन सप्लाई करने का काम किया। सूत्रों के अनुसार, एजेंसी ने कोर्ट में कहा है कि आरोपियों से पूछताछ करना बेहद आवश्यक है, ताकि उनके अन्य सहयोगियों और नेटवर्क का पता लगाया जा सके। ये सभी आरोपी न केवल भारत में आतंकवादी गतिविधियों में शामिल थे, बल्कि हैंड्स-ऑन ड्रोन प्रशिक्षण भी दिया। इन सभी का अवैध प्रवेश, हथियार और ड्रोन युद्ध प्रशिक्षण और यूरोप से ड्रोन आयात करने के आरोप में एनआईए ने मामला दर्ज किया है।
अमरीकी नागरिक को कोलकाता हवाई अड्डे पर पकड़ा गया, जबकि लखनऊ और दिल्ली के एयरपोर्ट पर तीन-तीन यूक्रेनी नागरिकों को हिरासत में लिया गया। इन संदिग्धों को दिल्ली लाकर ड्यूटी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहां से इन्हें तीन दिन की हिरासत में भेजा गया। सूत्रों के अनुसार, ये सभी पहले मिजोरम गए और फिर वहां से म्यांमार की ओर बढ़े। इनमें से कुछ जातीय समूह भारतीय विद्रोही गुटों से जुड़े हुए हैं। आरोपियों पर यह भी आरोप है कि इन्होंने इन समूहों को ट्रेनिंग दी। एनआईए इस बात की गहन जांच कर रही है कि इन ड्रोन का उपयोग किसी बड़ी आतंकी योजना में किया जाना था।
ईरान के प्रमुख सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी की मौत, सरकार ने की घोषणा
18 Mar, 2026 10:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। ईरान ने बुधवार तडक़े आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि उसके शीर्ष सुरक्षा अधिकारी और सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी की मौत हो गई है। परिषद सचिवालय ने स्थानीय समयानुसार बुधवार तडक़े एक बयान जारी कर श्री लारीजानी के मारे जाने की घोषणा की। इस बयान में उन्हें ताउम्र सार्वजनिक सेवा करने वाला बताते हुए शहीद कहा गया है। इससे पहले मंगलवार को इजरायली रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने कहा था कि उसके हमले में श्री लारीजानी मारे गए हैं, लेकिन तब ईरान ने इस पर कोई प्रतिक्रिया या पुष्टि नहीं की थी। ईरान परिषद के अनुसार श्री लारीजानी के साथ उनके बेटे और सुरक्षाकर्मियों सहित कई अन्य लोग भी मारे गए हैं।
वक्तव्य में श्री लारीजानी के लंबे राजनीतिक करियर की प्रशंसा करते हुए उन्हें एक ऐसी शख्सियत बताया गया जिसने जीवन के अंतिम क्षणों तक ईरान की प्रगति और बाहरी खतरों के खिलाफ एकजुटता के लिए काम किया। इससे पहले मंगलवार को ईरान ने अपने अर्धसैनिक बल बसिज के प्रमुख गुलामरेजा सुलेमानी के मारे जाने की भी पुष्टि की थी। ईरान ने इसे अमरीकी-जायोनी दुश्मन द्वारा किया गया एक आतंकवादी हमला करार दिया है। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी मेहर के अनुसार, लारीजानी और सुलेमानी दोनों का अंतिम संस्कार बुधवार को किया जाएगा। ईरान की समाचार एजेंसी फार्स के अनुसार, राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने लारीजानी के निधन पर गहरा दुख और खेद व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि उनमें परोपकार, अंतर्दृष्टि, साथ और दूरदर्शिता के अलावा कुछ नहीं देखा और निस्संदेह इस क्षति की भरपाई करना बहुत कठिन है।
दुबई में चेतावनी: मिसाइल अटैक अलर्ट के बाद नागरिकों को सुरक्षा का निर्देश
18 Mar, 2026 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दुबई। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने मिसाइल हमलों के खतरे को ध्यान में रखते हुए बुधवार को मोबाइल अलर्ट जारी कर दुबई के निवासियों से सुरक्षित जगहों पर शरण लेने का आग्रह किया। सोशल प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी एक बयान में, यूएई के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि हवाई रक्षा प्रणालियां मिसाइलों को रोक रही हैं और जनता से सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए आधिकारिक सूचनाओं का पालन करने का आग्रह किया।
दुबई के विभिन्न हिस्सों में तेज़ आवाज़ें सुनाई देने के बाद अधिकारियों ने जनता से शांति बनाए रखने और बिना पुष्टि वाली जानकारी साझा करने से बचने की अपील की। यूएई ने राष्ट्रीय एकता और स्थिरता को बनाए रखते हुए अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की दृढ़ता से रक्षा करने का संकल्प लिया है।
इजराइल का ईरान के सुप्रीम लीडर को सीधा संदेश, “जो खतरा बनेगा, उसे खत्म करेंगे”
18 Mar, 2026 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यरूशलेम। मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच इस्राइल ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। इस्राइल रक्षा बल ने साफ कहा है कि जो भी व्यक्ति इस्राइल की सुरक्षा के लिए खतरा बनेगा, उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। इस चेतावनी में ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई का नाम भी शामिल बताया जा रहा है। आईडीएफ के सैन्य प्रवक्ता एफि डेफ्रिन ने कहा कि फिलहाल उनके पास खामेनेई के ठिकाने की कोई पक्की जानकारी नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि इस्राइल अपनी कार्रवाई जारी रखेगा। उनका कहना था कि जो भी इस्राइल के खिलाफ कदम उठाएगा, उसे ढूंढकर खत्म किया जाएगा। इस्राइल ने ईरान के अर्धसैनिक संगठन बासिज बल को भी सीधा निशाना बनाने की चेतावनी दी है। डेफ्रिन ने कहा कि इस संगठन से जुड़े लोग भी सुरक्षित नहीं हैं और जरूरत पड़ने पर कहीं भी कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले इस्राइल यह दावा कर चुका है कि उसने बासिज के कमांडर गुलामरेजा सुलेमानी को मार गिराया है।
इस बीच इस्राइल ने साफ संकेत दिए हैं कि वह लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष के लिए तैयार है। यहां तक कि यह अभियान यहूदियों के प्रमुख त्योहार फसह के दौरान भी जारी रह सकता है, जो इस साल अप्रैल की शुरुआत में मनाया जाएगा। दूसरी ओर ईरान की तरफ से मिसाइल हमलों का खतरा बना हुआ है। इस्राइल का कहना है कि वह ईरान से दागी जा रही नई मिसाइलों को रोकने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। इसी दौरान तेल अवीव और यरुशलम में एयर रेड सायरन बजने की खबर सामने आई है। रात के समय आसमान में तेज रोशनी और धमाकों जैसी स्थिति देखी गई, जिसके बाद राहत और बचाव दलों को कई जगहों पर भेजा गया। वहीं खाड़ी देश बहरीन ने भी अपनी वायु रक्षा प्रणाली को सक्रिय कर रखा है। बहरीन रक्षा बल का दावा है कि पिछले दो हफ्तों में उसने 129 मिसाइलों और 233 ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया है। यह घटनाक्रम दिखाता है कि पूरे क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और हालात अभी शांत होने के आसार कम नजर आ रहे हैं।
खाने में सुरक्षित और प्राकृतिक स्वाद के करीब.............ये स्मार्ट फल
18 Mar, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। कल्पना करें कि आप ब्लैकबेरी खा रहे हैं और दांतों के बीच एक भी सख्त बीज नहीं आ रहा, या आप चेरी का लुत्फ उठा रहे हैं और गुठली थूकने की जरूरत नहीं है। यह कल्पना हकीकत बनने जा रही है। अमेरिका की बायोटेक कंपनी ने जीन-एडिटिंग और एआई की मदद से फलों का हुलिया और स्वाद बदलने की तैयारी कर ली है। बायोटेक कंपनी ऐसी ब्लैकबेरी विकसित कर रही है जिसमें बीज तकनीकी रूप से तब मौजूद होगा, लेकिन वे इतने छोटे और मुलायम हो सकते हैं कि खाते वक्त महसूस ही नहीं हो। ठीक वैसे ही जैसे हम बिना बीज वाले अंगूर खाते हैं। कंपनी अब ‘स्टोनलेस चेरी’ यानी बिना गुठली वाली चेरी भी बना रही है।
वैज्ञानिक कहते हैं, ‘एक बार बिना बीज वाला फल चख लेते हैं, तब पुराने बीज वाले फल खटकने लगते हैं। इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ी ताकत ‘क्रिस्पर तकनीक’ है। यह एक तरह की ‘जीन-एडिटिंग’ मशीन है जो किसी फल के अपने ही डीएनए में से उस हिस्से को हटा देती है जो बीज या कड़वाहट पैदा करता है। यह पुरानी जेनेटिक मॉडिफाइड तकनीक से अलग है। इसमें किसी बाहरी जीव का डीएनए नहीं डाला जाता, इसलिए ये फल खाने में पूरी तरह सुरक्षित और प्राकृतिक स्वाद के करीब होते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में वैज्ञानिकों का सबसे बड़ा मददगार एआई है।
मशीन लर्निंग के जरिए वैज्ञानिक यह पहले ही जान लेते हैं कि अलग-अलग जीन मिलकर फल के स्वाद, खुशबू और सेहत पर क्या असर डाल सकते है। कैलिफोर्निया की कंपनी इस तकनीक का इस्तेमाल इसतरह के ‘एवोकाडो’ बनाने में कर रही है, जो कटने के बाद काले नहीं पड़ने वाले है। वहीं, चीन के वैज्ञानिकों ने टमाटर के जीन में बदलाव कर उस 30 प्रतिशत ज्यादा मीठा बनाने में सफलता हासिल की है। इंसान सदियों से फलों को पसंद के हिसाब से ढालता आया है। आज हम जो आड़ू खाते हैं, वह अपने पूर्वजों की तुलना में 16 गुना बड़ा है। तरबूज की 1,200 किस्में भी प्रयोगों का नतीजा हैं। पहले इन बदलावों में सैकड़ों साल लगते थे, तकनीक की मदद से यह समयसीमा घट गई है।
इतनी खूबियों के बावजूद बाजार में जीन एडिटेड फल कम ही हैं। जीव विज्ञानी कहते हैं,‘बदले बीज से नई पीढ़ी का फल बनने में वर्षों लगते हैं। सेब-आड़ू पेड़ों को लंबा समय चाहिए। पर एआई व क्रिस्पर से ये वक्त घट रहा है। टमाटर व स्ट्रॉबेरी में तकनीक तेजी से काम करती है, क्योंकि प्रक्रिया महीनों में पूरी हो जाती है। जीव विज्ञानी मानते हैं, बाजार में इसतरह के फल आएंगे, तब लोगों की रुचि बढ़ेगी। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में 2000 से 2020 के बीच ताजा ब्लूबेरी का आयात 10 गुना बढ़ गया।
राज्यसभा चुनाव बना मुद्दा, हरियाणा विधानसभा में जोरदार बवाल
18 Mar, 2026 11:59 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। हरियाणा विधानसभा में बुधवार को राज्यसभा चुनाव को लेकर जोरदार हंगामा हुआ। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी हुई, जिसमें लोकतंत्र को लेकर एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए गए। विधानसभा में बहस के दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि इन लोगों ने लोकतंत्र का गला घोंटा है। इसके जवाब में नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने पलटवार करते हुए कहा कि मैं कहता हूं कि आप लोग लोकतंत्र के हत्यारे हैं। इस दौरान स्पीकर ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि इस पूरे मामले पर अंतिम फैसला जनता करेगी। मुख्यमंत्री सैनी ने स्पष्ट किया कि भाजपा के अधिकृत उम्मीदवार संजय भाटिया थे। तीसरा उम्मीदवार निर्दलीय था। कांग्रेस विधायक रघुवीर कादियान ने सदन में प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस मुद्दे को पहले असंबंधित बताया गया, उसी पर बाद में अन्य सदस्यों को बोलने की अनुमति दे दी गई। इस पर शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने कांग्रेस से सवाल किया कि क्या वह यह मानती है कि उसके विधायक बिकाऊ हैं। निर्दलीय विधायक देवेंद्र कादियान ने कहा कि उन्होंने अपनी विचारधारा से जुड़े विधायकों से चर्चा के बाद ही सतीश नांदल को मैदान में उतारा था। राज्यसभा चुनाव को लेकर जारी इस सियासी घमासान ने विधानसभा का माहौल गरमा दिया है।
कांग्रेस ने खोला क्रॉस वोटिंग का राज, गद्दार विधायकों के नाम सार्वजनिक
18 Mar, 2026 11:41 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। हरियाणा कांग्रेस के प्रभारी बी के हरिप्रसाद ने हरियाणा के राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोट करने वाले विधायकों के नाम बता दिए हैं। उनके अनुसार, नारायणगढ़ से शैली चौधरी, पुनहाना से मोहम्मद इलियास, हथीन से मोहम्मद इसराइल और सढाैरा से रेणु बाला ने क्रॉस वोट किया। दिल्ली में पत्रकारवार्ता के दाैरान बीके हरिप्रसाद ने कहा कि हमने डिसिप्लिनरी कमेटी को जानकारी दे दी है। आज इन सभी विधायकों को शोकॉज नोटिस भेजा जाएगा। हालांकि अभी पांचवां नाम नहीं बताया गया है।
शैली चाैधरी के पति दे चुके हैं इस्तीफा
राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के पांच विधायकों के क्रास वोटिंग के बाद पार्टी के अंदर खलबली मची हुई है। मंगलवार को नारायणगढ़ से कांग्रेस विधायक शैली चौधरी के पति व कांग्रेस के कार्यवाहक अध्यक्ष रामकिशन गुर्जर ने पार्टी की सदस्यता व सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन को भेजे पत्र में उन्होंने फिलहाल इस्तीफा का कारण नहीं लिखा है।
पार्टी की रणनीति पर उठे सवाल
राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस भले ही एक सीट जीतने में सफल रही हो, लेकिन इस जीत के पीछे छिपी सच्चाई पार्टी के लिए ज्यादा चिंताजनक है। चार वोटों का रद्द होना और पांच विधायकों का क्रॉस वोट करना यह साफ संकेत देता है कि पार्टी के भीतर अनुशासन और एकजुटता की गंभीर कमी है।
नारायणगढ़ में रामकिशन गुज्जर का फूटा दर्द
कांग्रेस के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष रहे रामकिशन गुज्जर का बुधवार को नारायणगढ़ में दर्द फूटा। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह में पत्रकारों से इस मसले पर बात की। उन्होंने बताया कि क्रॉस वोटिंग का आरोप नहीं लगाना चाहिए था। अगर आप झूठे अारोप लगाओगे तो उनके पास ही बोलने को बहुत कुछ है। उन्होंने कहा कि झूठे आरोप लगाने वाले को वह लीगल नोटिस देंगे। उन्होंने कहा कि शैली चौधरी का विरोध करना है तो राजनैतिक रूप से करो मगर झूठे आरोपों से नहीं। पार्टी के भीतर कोई सुनने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी छोड़ दी है अब आने वाले समय में नारायणगढ़ के समर्थकों के साथ मिलकर निर्णय लेंगे।
समुद्री जीव बारनाक्ले को कैल्शियम कार्बोनेट का कवच रखता है सुरक्षित
18 Mar, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन । हाल ही में एक समुद्री जीव चर्चा में आया है, जो चट्टानों से मजबूती से चिपककर जीवन बिताता है। इस जीव की खासियत यह है कि यह अपने चारों ओर कैल्शियम कार्बोनेट का कठोर कवच बनाकर समुद्र की तेज लहरों के बीच भी सुरक्षित रहता है। यह जीव बारनाक्ले के रूप में जाना जाता है और आर्थ्रोपोडा समुदाय से संबंधित माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह जीव समुद्र में मौजूद चट्टानों या अन्य कठोर सतहों से स्थायी रूप से चिपक जाता है। समय के साथ यह अपने शरीर के चारों ओर कैल्शियम कार्बोनेट का एक मजबूत खोल तैयार कर लेता है, जो उसका स्थायी घर बन जाता है। यह कवच उसे बाहरी खतरों और समुद्री लहरों के दबाव से बचाता है। कई बार जब समुद्र की तेज लहरें चट्टानों से टकराती हैं तो यह खोल टूटकर किनारे तक आ जाते हैं। समुद्र तट पर घूमने आने वाले लोग इन खोलों को देखकर आकर्षित हो जाते हैं और कई बार इन्हें यादगार या सजावटी वस्तु के रूप में अपने साथ ले जाते हैं।
जंतु विज्ञान के विशेषज्ञों के अनुसार समुद्र तटों पर मिलने वाले इन कैल्शियम के खोलों का उपयोग कई लोग घर की सजावट के लिए भी करते हैं। इन खोलों की सतह पर अक्सर समुद्री काई या एल्गी जमी होती है, जिससे इनकी बनावट और भी दिलचस्प और आकर्षक दिखाई देती है। यही वजह है कि समुद्र तटों पर आने वाले पर्यटक इन्हें स्मृति चिह्न के रूप में अपने साथ ले जाना पसंद करते हैं। उन्होंने बताया कि जंतु विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए भी यह जीव अध्ययन का एक महत्वपूर्ण विषय है। यह जीव अपनी सुरक्षा के लिए खुद ही कठोर कवच तैयार करता है, जो वैज्ञानिक दृष्टि से काफी रोचक प्रक्रिया मानी जाती है। अपने आसपास कैल्शियम जमा कर यह धीरे-धीरे एक मजबूत संरचना बना लेता है, जो प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है और उसे समुद्री वातावरण में जीवित रहने में मदद देती है। भोजन के मामले में यह जीव समुद्र में पाए जाने वाले सूक्ष्म जीवों और छोटे-छोटे कीड़े-मकोड़ों पर निर्भर रहता है।
समुद्र की लहरों के साथ बहकर आने वाले इन सूक्ष्म जीवों को पकड़कर यह अपना भोजन प्राप्त करता है। इस तरह यह समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र का एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। विशेषज्ञों ने बताया कि उन्हें इस जीव का एक नमूना ओडिशा के समुद्र तट पर घूमने के दौरान मिला था। संभव है कि समुद्र की तेज लहरों के कारण यह चट्टानों से अलग होकर किनारे तक पहुंच गया हो। ऐसे नमूने समुद्री जीवन की विविधता और प्रकृति के अनोखे रहस्यों को समझने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं। समुद्र तटों पर टहलते समय कई बार ऐसे छोटे-छोटे जीव दिखाई देते हैं, जो पहली नजर में साधारण लगते हैं, लेकिन वैज्ञानिक दृष्टि से बेहद दिलचस्प होते हैं।
अमीर और गरीब देशों के बीच की दूरी को और बढ़ा सकता है एआई
18 Mar, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन। यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम (यूएनडीपी) की एक नई रिपोर्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का तेजी से बढ़ता प्रभाव भविष्य में दुनिया में अमीर और गरीब देशों के बीच की दूरी को और बढ़ा सकता है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार एआई तकनीक से मिलने वाले फायदे मुख्य रूप से विकसित और संपन्न देशों तक सीमित रह सकते हैं, जबकि दुनिया के कई हिस्सों में रहने वाले लोग इससे पीछे छूटने का खतरा झेल सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में लाखों लोग अभी भी डिजिटल कौशल, स्थिर बिजली आपूर्ति और इंटरनेट जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। ऐसे में एआई आधारित नई तकनीकों का लाभ उन्हें मिल पाना मुश्किल होगा। इससे तकनीकी विकास का फायदा केवल सीमित क्षेत्रों तक सिमट सकता है और असमानता बढ़ने की आशंका है।
संयुक्त राष्ट्र ने इस स्थिति की तुलना ऐतिहासिक औद्योगिक क्रांति से की है। उस दौर में पश्चिमी देशों ने तेजी से आर्थिक और तकनीकी प्रगति की, जबकि कई अन्य देश विकास की दौड़ में पीछे रह गए। रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई के दौर में भी कुछ वैसा ही परिदृश्य बन सकता है। अगर समावेशी नीतियां नहीं अपनाई गईं तो गरीब और विस्थापित समुदाय तकनीकी विकास की मुख्यधारा से बाहर हो सकते हैं, जिससे उनकी जरूरतें एआई सिस्टम में भी नजरअंदाज हो सकती हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वर्तमान में कंपनियां और संस्थान एआई के इस्तेमाल को मुख्य रूप से उत्पादकता, प्रतिस्पर्धा और आर्थिक वृद्धि के नजरिए से देख रहे हैं। हालांकि एआई के सकारात्मक पहलू भी सामने आ रहे हैं।
यह तकनीक खेती के लिए बेहतर सलाह देने, एक्स-रे जैसी मेडिकल जांच का तेजी से विश्लेषण करने, जल्दी बीमारी का पता लगाने और मौसम की सटीक भविष्यवाणी करने में मददगार साबित हो सकती है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों और आपदा प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों को भी लाभ मिल सकता है। हालांकि विकसित देशों में भी एआई को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। बड़े एआई डाटा सेंटर भारी मात्रा में बिजली और पानी का उपयोग करते हैं। ऊर्जा की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए जीवाश्म ईंधन का ज्यादा इस्तेमाल करना पड़ सकता है, जिससे ग्लोबल वार्मिंग को कम करने के प्रयास प्रभावित हो सकते हैं।
हरियाणा में दर्दनाक हादसा, सिलेंडर ब्लास्ट में एक ही परिवार के 8 लोग झुलसे
18 Mar, 2026 09:04 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कुरुक्षेत्र। के यारा गांव में आज सुबह एक घर में गैस सिलेंडर के फटने से भीषण हादसा हो गया। इस घटना में परिवार के लगभग आठ सदस्य झुलस गए, जिनमें एक छोटी बच्ची भी शामिल है। सभी घायलों को तत्काल निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। घटना की जानकारी के अनुसार, सुबह करीब 6:30 बजे कोमल नाम की महिला खाना बना रही थीं। इसी दौरान घर का एक गैस सिलेंडर खत्म हो गया। जब परिवार के सदस्य दूसरे सिलेंडर को कनेक्ट करने की कोशिश कर रहे थे, तभी अचानक विस्फोट हो गया। सिलेंडर फटने से घर में तेज आग लग गई, जिससे पूरा परिवार आग की चपेट में आ गया। आग पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड की टीम को बुलाया गया, जिन्होंने कुछ समय बाद आग पर नियंत्रण पा लिया। हादसे में सबसे अधिक चिंता एक छोटी बच्ची की हालत को लेकर है, जिसे गंभीर रूप से झुलसने के कारण निजी अस्पताल से पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआई), चंडीगढ़ रेफर कर दिया गया है। बाकी घायलों की स्थिति स्थिर बताई जा रही है, लेकिन वे इलाज के अधीन हैं।
शर्मनाक करतूत: पाकिस्तान ने आतंकी बताकर 400 मरीजों और आम लोगों की कर दी हत्या
18 Mar, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काबुल। अफ़गानिस्तान की राजधानी काबुल से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां नशा मुक्ति केंद्र के रूप में संचालित एक अस्पताल पर हुए हवाई हमले में मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 400 हो गया है। अफ़गान सरकार के उप-प्रवक्ता हमदुल्ला फितरत ने मंगलवार सुबह पुष्टि की कि सोमवार देर रात हुए इस हमले ने 2,000 बेड की क्षमता वाले उमर एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल के एक बड़े हिस्से को मलबे में तब्दील कर दिया है। इस हमले में लगभग 250 अन्य लोगों के घायल होने की खबर है, जबकि बचाव दल अभी भी इमारत में लगी आग बुझाने और मलबे से शवों को निकालने के कार्य में जुटे हुए हैं।
पाकिस्तानी पक्ष ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें झूठा और गुमराह करने वाला करार दिया है। पाकिस्तान का दावा है कि उसने केवल काबुल और नंगरहार प्रांत में स्थित सैन्य ठिकानों और आतंकवादियों के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया था। पाकिस्तानी सूचना मंत्रालय के अनुसार, इन हमलों में तालिबान के तकनीकी उपकरणों और गोला-बारूद के गोदामों को सटीक निशाना बनाया गया, जिनका उपयोग पाकिस्तानी नागरिकों के खिलाफ हो रहा था। प्रधानमंत्री के प्रवक्ता मुशर्रफ़ ज़ैदी ने स्पष्ट किया कि किसी भी अस्पताल को निशाना नहीं बनाया गया है।
हालांकि, प्रत्यक्षदर्शियों और अफ़गान अधिकारियों का बयान इसके उलट है। अस्पताल के सुरक्षा गार्ड ओमिद स्तानिकज़ई ने बताया कि हमले से पहले आसमान में लड़ाकू विमान गश्त कर रहे थे। जब स्थानीय सैन्य टुकड़ियों ने जेट पर गोलीबारी की, तो जेट ने बम गिराए जिससे भीषण आग लग गई। अफ़गान प्रवक्ता ज़बीहुल्ला मुजाहिद ने इसे हवाई क्षेत्र का उल्लंघन और इंसानियत के खिलाफ जुर्म बताया है। इस त्रासदी पर दुख जताते हुए अफ़ग़ानी क्रिकेटर राशिद खान ने सोशल मीडिया पर इसे युद्ध अपराध करार दिया। उन्होंने कहा कि पवित्र रमज़ान के महीने में चिकित्सा संस्थानों को निशाना बनाना घिनौना कृत्य है। राशिद ने संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार एजेंसियों से इस घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को जवाबदेह ठहराने की अपील की है। यह हवाई हमला दोनों देशों के बीच साझा सीमा पर हुई गोलीबारी के कुछ ही घंटों बाद हुआ। पिछले तीन हफ्तों से पड़ोसी देशों के बीच जारी यह तनाव अब तक के सबसे भीषण दौर में पहुंच गया है, जिससे क्षेत्र में स्थिरता को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं।
अमेरिका खर्ग द्वीप की तेल पाइपलाइनों पर करेगा हमला, ट्रंप ने दी ईरान को चेतावनी
18 Mar, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध थमता नजर नहीं आ रहा है। इस जंग के बीच खर्ग द्वीप चर्चा का केंद्र बना हुआ है, जो ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और खुद ट्रंप ने इसे ईरान का क्राउन ज्वेल बताया है। बीते दिनों अमेरिकी हमले में यहां मौजूद सैन्य ठिकानों को नष्ट करने का दावा ट्रंप ने किया था और अब उन्होंने फिर से इस आइलैंड को लेकर बड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका सेना यहां मौजूद तेल पाइपलाइनों पर हमला कर सकती है। अगर ऐसा होता है, तो ये ईरान के लिए बड़ा झटका होगा।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर ईरान को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना ईरान के खर्ग द्वीप पर स्थित तेल पाइपलाइनों पर हमला कर सकती है। ट्रंप ने ये भी कहा कि अमेरिका ने पिछले हमलों के दौरान जानबूझकर एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने से परहेज किया था। उन्होंने बताया कि हमने द्वीप पर हमला किया था और उसे तबाह कर दिया, जिसमें वहां मौजूद तेल भंडार वाले क्षेत्र को छोड़कर सब कुछ नष्ट हो गया है।
ट्रंप के मुताबिक खर्ग द्वीप पर मौजूद पाइपलाइनें छोड़ दी थी, हम ऐसा नहीं करना चाहते थे, लेकिन हमें ऐसा करना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह संयम आंशिक रूप से उस बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाने से बचने के लिए था, जिसका उपयोग भविष्य में ईरान के पुनर्निर्माण के दौरान किया जा सकता है।
बता दें ईरान का खर्ग द्वीप इसका मुख्य तेल टर्मिनल और ऑयल एक्सपोर्ट का सेंटर है। वैश्विक बाजारों में देश के कच्चे तेल के लगभग 90फीसदी शिपमेंट को यहीं से संभाला जाता है। इसे ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहा जाता है। फारस की खाड़ी में ईरानी दक्षिणी तट से करीब 25 किलोमीटर दूर स्थित यह द्वीप तेल पाइपलाइनों, भंडारण सुविधाओं और बड़े सुपरटैंकरों को संभालने की क्षमता रखता है और गहरे पानी के लोडिंग जेट्टी के जरिए अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से इसे जोड़ता है। ये ईरान सरकार के लिए करीब 78 अरब डॉलर की रेवेन्यू मशीन है, इस आय का एक बड़ा हिस्सा ईरान की सैन्य क्षमता पर खर्च होता है।
बता दें ट्रंप ने एक बार फिर अन्य देशों से होर्मुज स्ट्रेट को लेकर सहयोगी देशों से मदद की अपील की है। उन्होंने कहा कि हम उन अन्य देशों को प्रोत्साहित करते हैं, जिनकी अर्थव्यवस्था इस समुद्री तेल रूट पर हमारी तुलना में कहीं ज्यादा निर्भर है, जबकि हमें इसके जरिए अपने तेल का सिर्फ 1फीसदी से भी कम प्राप्त होता है। जापान को 95फीसदी, चीन को 90फीसदी और कई यूरोपीय देशों को काफी मात्रा में यहां से तेल प्राप्त होता है। हम चाहते हैं कि वे होर्मुज के मामले में हमारी मदद करें। बता दें तमाम देशों ने ट्रंप के होर्मुज पर युद्धपोत भेजने के आग्रह को ठुकराकर उन्हें झटका दिया है।
आदि शंकराचार्य का दर्शन भारतीय संस्कृति, धर्म और आध्यात्मिक एकता का बना आधार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों पर पुलिस कार्रवाई, CM हाउस के बाहर तनाव
