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अतिक्रमण की शिकायतों ने प्रशासन का ध्यान खींचा
5 May, 2026 01:21 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिसार: समाधान शिविर में उठीं सफाई, अतिक्रमण और जल आपूर्ति से जुड़ी शिकायतें, अधिकारियों को तुरंत समाधान के निर्देश
शिविर में रखी गईं जनसमस्याएं, कई विभागों को दिए गए मौके पर कार्रवाई के आदेश
हिसार के जिला सचिवालय परिसर में आयोजित समाधान शिविर में जगदीश कॉलोनी में नालियों की सफाई, गली में अवैध अतिक्रमण, डाकघर के पास पाइपलाइन लीकेज और मामनपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल आपूर्ति जैसी कई शिकायतें सामने आईं। अतिरिक्त उपायुक्त लक्षित सरीन ने सभी शिकायतों को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित विभागों को तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
गांव-शहर से पहुंची शिकायतों पर तेज हुई प्रशासनिक कार्रवाई
उमरा गांव के वीरेंद्र सिंह ने खेतों में जर्जर बिजली खंभों और तारों को बदलने की मांग रखी, जिस पर बिजली विभाग को तुरंत सुधार कार्य के आदेश दिए गए। वहीं जगदीश कॉलोनी के अनिल कुमार ने नालों की सफाई और अवैध कब्जा हटाने की मांग की, जिस पर नगर परिषद को निरीक्षण कर कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
पेयजल, अतिक्रमण और कृषि से जुड़ी समस्याओं पर सख्त निर्देश
डाकघर के पास पानी की पाइपलाइन रिसाव को लेकर जन स्वास्थ्य विभाग को तुरंत मरम्मत के आदेश दिए गए। इसके अलावा बंद गली खुलवाने, खेतों से मिट्टी हटाने और दूषित पेयजल समस्या के समाधान के लिए भी अधिकारियों को तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए गए। एडीसी ने साफ कहा कि हर शिकायत का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए ताकि लोगों को जल्द राहत मिल सके।
यूक्रेन के Zaporizhzhia Nuclear Power Plant पर बड़ा हमला, दुनिया में चिंता की लहर
5 May, 2026 12:21 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मॉस्को: रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा संघर्ष अब एक ऐसे विनाशकारी मोड़ पर आ चुका है जिसने पूरी दुनिया को परमाणु खतरे के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। यूरोप के सबसे विशाल परमाणु ऊर्जा केंद्र, जापोरिजिया की रेडिएशन निगरानी प्रयोगशाला पर हुए हालिया ड्रोन हमले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा चिंताओं को गहरा दिया है। रूसी अधिकारियों ने इस घटना के लिए सीधे तौर पर यूक्रेनी सेना को जिम्मेदार ठहराया है। उनका दावा है कि यह हमला जानबूझकर उस महत्वपूर्ण इकाई को निशाना बनाकर किया गया है जो संयंत्र के इर्द-गिर्द विकिरण की स्थिति पर बारीक नजर रखती है। हालांकि प्रारंभिक जांच में संयंत्र के उपकरणों को किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस हमले के रणनीतिक और सुरक्षात्मक निहितार्थ बेहद डरावने माने जा रहे हैं।
मानवता के लिए बड़ा खतरा और निगरानी तंत्र पर चोट
यह प्रयोगशाला जापोरिजिया संयंत्र की सुरक्षा व्यवस्था का एक अनिवार्य हिस्सा है क्योंकि यह चौबीसों घंटे वातावरण में रेडिएशन के स्तर की निगरानी करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह इकाई पूरी तरह से ध्वस्त हो जाती है, तो किसी भी संभावित रेडियोधर्मी रिसाव की पहचान करना लगभग नामुमकिन हो जाएगा। ऐसी स्थिति में न तो समय रहते बचाव कार्य शुरू किए जा सकेंगे और न ही आम जनता को सचेत किया जा सकेगा। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने भी इस घटना को अत्यंत जोखिम भरा करार देते हुए चेतावनी दी है कि परमाणु संयंत्र के पास इस तरह की सैन्य गतिविधियां विनाशकारी साबित हो सकती हैं।
संभावित परमाणु आपदा का व्यापक भौगोलिक प्रभाव
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि जापोरिजिया दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा केंद्रों में से एक है और यहां होने वाली कोई भी चूक केवल युद्धरत देशों तक सीमित नहीं रहेगी। यदि संयंत्र में कोई बड़ा विस्फोट या रिसाव होता है, तो उससे निकलने वाले रेडियोएक्टिव बादल पूरे यूरोप की हवा को दूषित कर देंगे। यह त्रासदी न केवल वर्तमान पीढ़ी के लिए घातक होगी बल्कि इसका जहरीला प्रभाव आने वाले कई दशकों तक मानवता को झेलना पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिए यह स्थिति एक अग्निपरीक्षा की तरह बन गई है क्योंकि एक छोटी सी सैन्य गलती भी वैश्विक परमाणु आपदा का कारण बन सकती है।
रूसी रुख और भविष्य की भीषण सैन्य कार्रवाई के संकेत
इस हमले के बाद राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के नेतृत्व में रूसी प्रशासन ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है और इसे परमाणु सुरक्षा के साथ गंभीर खिलवाड़ बताया है। मॉस्को ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने परमाणु ठिकानों की रक्षा के लिए किसी भी कठोर कदम से पीछे नहीं हटेगा। कूटनीतिक विशेषज्ञों का अनुमान है कि रूस इस ड्रोन हमले के प्रतिशोध में यूक्रेन के ऊर्जा और बुनियादी ढांचे पर अपने हमलों को और अधिक तेज कर सकता है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अब यह स्पष्ट है कि युद्ध का यह नया चरण न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए एक बड़ा संकट बन गया है।
भाजपा और निर्दलीय प्रत्याशी के कार्यकर्ताओं में टकराव, चार घायल
5 May, 2026 11:12 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिसार: उकलाना क्षेत्र में सोमवार की रात उस समय भारी तनाव फैल गया जब चुनावी जनसभा से वापस आ रहे भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं और एक निर्दलीय उम्मीदवार के समर्थकों के बीच हिंसक झड़प हो गई। इस टकराव के दौरान हुई गोलीबारी ने एक भयंकर रूप ले लिया, जिसमें एक व्यक्ति को अपनी जान गंवानी पड़ी और चार अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय थाना प्रभारी कुलदीप ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि दो गुटों के आपसी विवाद में चली गोलियों के कारण एक युवक की मौत हुई है और पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है।
चुनावी जनसभा के बाद उपजा हिंसक विवाद
घटना की शुरुआत उकलाना की नई अनाज मंडी में आयोजित एक चुनावी सभा के समापन के बाद हुई, जब भाजपा और निर्दलीय प्रत्याशी के समर्थक आमने-सामने आ गए। विवाद इतना बढ़ा कि हथियारों से फायरिंग शुरू हो गई, जिसकी चपेट में आकर भाना निवासी शुभम और विवेक के साथ-साथ सदलपुर के मुकेश को गोलियां लगीं। इसी अफरा-तफरी में सदलपुर निवासी सुग्रीव भी चोटिल हो गया। घायलों को तुरंत चिकित्सा सहायता के लिए ले जाया गया, परंतु अस्पताल पहुंचने से पहले ही शुभम ने दम तोड़ दिया। पुलिस ने इस मामले में घायल प्रदीप को अपनी कस्टडी में लेकर एक निजी अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया है।
पुरानी रंजिश या राजनीतिक निष्ठा में बदलाव का असर
अस्पताल में उपचाराधीन प्रदीप ने बताया कि उसने हाल ही में अपने साथियों के साथ मिलकर भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी और वह पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष की मौजूदगी में दल में शामिल हुआ था। सोमवार रात वह भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में आयोजित जनसभा में शामिल होकर अपने घर की ओर प्रस्थान कर रहा था। रास्ते में जब वह अपने परिवार के बच्चों के लिए आइसक्रीम खरीदने के उद्देश्य से एक स्थान पर रुका, तभी अचानक एक गाड़ी में सवार होकर आए हमलावरों ने उन पर अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं।
पुलिस प्रशासन की कार्रवाई और इलाके में सुरक्षा
इस खूनी संघर्ष के बाद क्षेत्र में स्थिति काफी संवेदनशील बनी हुई है और पुलिस बल ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए मोर्चा संभाल लिया है। हमलावरों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने के लिए विभिन्न टीमें गठित की गई हैं जो घटना के चश्मदीदों और आसपास के साक्ष्यों के आधार पर तफ्तीश को आगे बढ़ा रही हैं। चुनावी माहौल के बीच हुई इस हत्या और गोलीबारी ने स्थानीय प्रशासन के सामने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं, जिसके चलते संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव, अमेरिकी हमले से 5 ईरानी मारे गए—दावा
5 May, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दुबई/तेहरान: मध्य पूर्व के समुद्री गलियारों में बारूद की गंध एक बार फिर गहरी हो गई है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक जलमार्गों में से एक, 'स्ट्रेट ऑफ होरमुज' (होरमुज जलडमरूमध्य) में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने भीषण रूप ले लिया है। इस बार विवाद एक ताजा सैन्य कार्रवाई को लेकर है, जिसमें ईरानी मीडिया ने निर्दोष नागरिकों की मौत का दावा किया है। फरवरी में शुरू हुए हमलों और अप्रैल में हुई अस्थायी शांति की कोशिशों के बाद, अब यह इलाका फिर से एक बड़े युद्ध की दहलीज पर खड़ा नजर आ रहा है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
ईरान का नागरिकों की मौत का दावा और सैन्य खंडन
ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसियों ने एक सैन्य सूत्र के हवाले से सनसनीखेज दावा किया है कि अमेरिकी सेना की हालिया कार्रवाई में पांच आम नागरिकों ने अपनी जान गंवाई है। ईरानी पक्ष के अनुसार, ओमान के खासाब तट से ईरान की ओर लौट रही दो छोटी मालवाहक नावों पर अमेरिकी बलों ने हमला किया। ईरान ने स्पष्ट किया कि इन नावों में केवल घरेलू सामान और आम लोग सवार थे, न कि कोई सैन्य दस्ता। तेहरान ने उन अमेरिकी दावों को भी सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की छह लड़ाकू स्पीडबोट को निशाना बनाया गया है। ईरान का मानना है कि अमेरिकी नौसेना ईरानी नौकाओं की गति से खौफ में है और डर के कारण जल्दबाजी में निर्दोषों पर गोलियां चला रही है।
अमेरिकी डिफेंस का पक्ष: समुद्री यातायात की सुरक्षा
वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस घटना को एक वैध सैन्य ऑपरेशन करार दिया है। अमेरिका का तर्क है कि उनके हेलीकॉप्टरों ने उन संदिग्ध नावों को निशाना बनाया जो अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही थीं। वॉशिंगटन का दावा है कि ये छोटी नावें समुद्री यातायात को बाधित करने और जहाजों को डराने का प्रयास कर रही थीं, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई करना अनिवार्य हो गया था। अमेरिका इस इलाके में 13 अप्रैल से ही कड़ी समुद्री नाकेबंदी लागू कर चुका है, जिसका उद्देश्य ईरानी गतिविधियों पर अंकुश लगाना है। अमेरिका का कहना है कि वे किसी भी कीमत पर वैश्विक व्यापारिक मार्ग को बंद नहीं होने देंगे।
होरमुज की नाकेबंदी और टूटता संघर्षविराम
स्ट्रेट ऑफ होरमुज इस समय वैश्विक भू-राजनीति का सबसे अशांत केंद्र बना हुआ है। फरवरी के अंत में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच शुरू हुई सीधी जंग के बाद से ही यहां शांति की हर कोशिश विफल रही है। हालांकि, अप्रैल में पाकिस्तान ने मध्यस्थता कर एक अस्थायी युद्धविराम कराया था और डोनाल्ड ट्रंप ने भी इसे आगे बढ़ाने की बात कही थी, लेकिन धरातल पर कूटनीतिक बातचीत किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी। ईरान द्वारा इस सामरिक मार्ग को बंद करने की धमकियों ने वैश्विक तेल बाजार में हलचल मचा दी है। वर्तमान नाकेबंदी और ताजा गोलीबारी की घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि क्षेत्र में छोटी सी चिंगारी भी किसी बड़ी त्रासदी या पूर्ण युद्ध का रूप ले सकती है।
धर्मनगरी दौरे पर नायब सैनी, धार्मिक कार्यक्रम में की आहुति
5 May, 2026 10:25 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कुरुक्षेत्र: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी आज अपने निर्धारित दौरों के तहत धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में मौजूद रहेंगे, जहां वे विभिन्न सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रमों में शिरकत कर जनता के बीच समय व्यतीत करेंगे। मुख्यमंत्री अपने विधानसभा क्षेत्र लाडवा पहुंच चुके हैं, जहां उनके आगमन को लेकर प्रशासन और स्थानीय नेताओं ने पुख्ता तैयारियां की हैं। उनके दिन की शुरुआत शिवाला रामकुंडी में आयोजित एक पावन हवन यज्ञ में आहुति देने के साथ होगी, जिसके माध्यम से वे क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना करेंगे।
धार्मिक अनुष्ठान और सामाजिक सरोकार के कार्य
हवन यज्ञ के पश्चात मुख्यमंत्री लाडवा में ही एक रक्तदान शिविर का विधिवत शुभारंभ करेंगे, जिसका उद्देश्य समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाना और युवाओं को इस नेक कार्य के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके अतिरिक्त लाडवा के अग्रसेन चौक पर एक विशेष उत्साह का माहौल देखने को मिलेगा, जहां चुनावी विजय की खुशी में जलेबी वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया है। मुख्यमंत्री स्वयं इस उत्सव का हिस्सा बनकर कार्यकर्ताओं और स्थानीय निवासियों के साथ अपनी जीत का जश्न साझा करेंगे।
महिला सशक्तिकरण और विश्वविद्यालय का विशेष कार्यक्रम
दोपहर के समय मुख्यमंत्री कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का रुख करेंगे, जहां वे 'सकशत नारी, सशक्त समाज' जैसे महत्वपूर्ण विषय पर आधारित एक विशेष संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। इस कार्यक्रम के जरिए वे समाज में महिलाओं की भूमिका और उनके सशक्तिकरण के प्रयासों पर अपने विचार साझा करेंगे। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित यह आयोजन शिक्षाविदों और छात्रों के बीच नारी शक्ति के महत्व को रेखांकित करने का एक बड़ा मंच साबित होगा।
श्रद्धालुओं के लिए विशेष ट्रेन को हरी झंडी
मुख्यमंत्री के आज के दौरे का एक मुख्य आकर्षण श्री हुजूर साहिब के लिए रवाना होने वाली विशेष ट्रेन होगी, जिसे वे दोपहर करीब दो बजे हरी झंडी दिखाकर प्रस्थान कराएंगे। कुरुक्षेत्र रेलवे स्टेशन से रवाना होने वाली इस यात्रा में कुरुक्षेत्र सहित पड़ोसी जिलों के लगभग 850 श्रद्धालु सवार होंगे, जो गुरुधाम के दर्शन के लिए प्रस्थान करेंगे। सरकार के इस कदम से तीर्थयात्रियों में भारी उत्साह देखा जा रहा है और इस विशेष ट्रेन की रवानगी के साथ ही मुख्यमंत्री का कुरुक्षेत्र का यह दौरा भक्ति और सेवा के संगम के साथ संपन्न होगा।
पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट में 21 की मौत, 61 लोग घायल—चीन से बड़ी खबर
5 May, 2026 08:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग: चीन के हुनान प्रांत स्थित लियुयांग शहर सोमवार को एक भीषण औद्योगिक त्रासदी का गवाह बना, जब वहां की एक पटाखा फैक्ट्री जोरदार धमाकों से दहल उठी। हुआशेंग पटाखा कंपनी के इस कारखाने में हुए विस्फोट की तीव्रता इतनी अधिक थी कि पल भर में पूरी इमारत आग की लपटों में घिर गई और मीलों दूर तक धुएं का काला गुबार देखा गया। इस हादसे का असर फैक्ट्री की चारदीवारी तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि धमाके के दबाव से 3 किलोमीटर के दायरे में आने वाले रिहायशी मकानों की खिड़कियों के शीशे चकनाचूर हो गए और दरवाजे उखड़ गए। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर प्रभावित क्षेत्र के निवासियों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित होने के निर्देश जारी किए हैं।
जान-माल की भारी क्षति और हताहतों का विवरण
इस भयावह अग्निकांड ने कई परिवारों को उम्र भर का गम दे दिया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, कारखाने के भीतर काम करने वाले 21 श्रमिकों की इस धमाके में जान चली गई है। वहीं, मलबे और आग की चपेट में आने से 61 अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं। घायलों को तुरंत स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनकी जान बचाने का प्रयास कर रही है। चिकित्सा विभाग के अनुसार, कुछ घायलों की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है, जबकि शेष लोगों का उपचार जारी है और वे खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं।
व्यापक बचाव अभियान और तकनीक का प्रयोग
दुर्घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय आपातकालीन प्रबंधन विभाग ने मोर्चा संभाल लिया। घटनास्थल पर स्थिति की गंभीरता को देखते हुए लगभग 500 बचाव कर्मियों को तैनात किया गया है। मलबे के नीचे दबे संभावित लोगों की खोज के लिए भारी क्रेन और आधुनिक मशीनों के साथ-साथ रोबोट्स की भी मदद ली जा रही है, ताकि खतरनाक और दुर्गम हिस्सों में राहत कार्य को तेजी से पूरा किया जा सके। रेस्क्यू टीम आग पर पूरी तरह काबू पाने और लापता श्रमिकों की तलाश में दिन-रात एक कर रही है।
राष्ट्रपति का कड़ा रुख और प्रशासनिक कार्रवाई
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस दुखद घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि घायलों का उपचार और पीड़ितों की सहायता उनकी प्राथमिकता है। राष्ट्रपति ने हादसे की उच्च स्तरीय जांच के आदेश जारी कर दिए हैं ताकि विस्फोट के मूल कारणों का पता लगाया जा सके। इस बीच, सुरक्षा मानकों की अनदेखी के आरोप में पटाखा कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। उनसे कड़ी पूछताछ की जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस बड़ी लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों को सख्त सजा मिले।
11 दिनों की मशक्कत के बाद बुझी जापान की आग, हालात काबू में
4 May, 2026 05:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
टोक्यो। जापान के उत्तर-पूर्वी प्रांत इवाते के ओत्सुची शहर में करीब 11 दिनों तक तांडव मचाने वाली भीषण वन्य अग्नि (Forest Fire) पर आखिरकार पूरी तरह काबू पा लिया गया है। स्थानीय प्रशासन और फायर एजेंसी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस भयावह आग ने देखते ही देखते 1,633 हेक्टेयर वन क्षेत्र को अपनी चपेट में लेकर खाक कर दिया। जापानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह पिछले 30 वर्षों में देश की दूसरी सबसे बड़ी वनाग्नि की घटना है, जिसने न केवल पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाया, बल्कि आठ इमारतों को भी पूरी तरह नष्ट कर दिया।
प्रशासनिक मुस्तैदी और भारी बारिश से थमी आग की लपटें
ओत्सुची के मेयर कोजो हिरानो ने एक प्रेस वार्ता में बताया कि आग पर नियंत्रण पाने में हवाई और जमीनी स्तर पर किए गए व्यापक फायरफाइटिंग ऑपरेशंस के साथ-साथ प्रकृति का भी बड़ा योगदान रहा। क्षेत्र में हुई भारी बारिश ने आग को बुझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे स्थिति में तेजी से सुधार आया। इस सप्ताह की शुरुआत में जोखिम वाले इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए जारी किए गए 'निकासी आदेश' भी अब वापस ले लिए गए हैं। हालांकि, मेयर ने चेतावनी दी है कि अभी भी पूर्ण सतर्कता बरतने की आवश्यकता है, क्योंकि सूखे पत्तों और लकड़ियों के नीचे दबे अंगारे फिर से सुलग सकते हैं।
जापान में बढ़ती वनाग्नि और ऐतिहासिक संदर्भ
आंकड़ों पर नजर डालें तो जापान में जंगल की आग की घटनाएं समय के साथ और विकराल होती जा रही हैं। पिछले साल भी इवाते प्रीफेक्चर के ओफुनातो में लगी आग ने 2,600 हेक्टेयर क्षेत्र को जला दिया था। इससे पहले साल 1975 में होक्काइडो के कुशिरो में 2,700 हेक्टेयर जमीन आग की भेंट चढ़ी थी। ओत्सुची की हालिया घटना ने 22 अप्रैल से शुरू होकर 2 मई 2026 तक तबाही मचाई, जो आधुनिक जापान के इतिहास में वनों के विनाश की एक बड़ी मिसाल बन गई है।
जलवायु परिवर्तन और सूखे वसंत का दोहरा खतरा
वैज्ञानिकों और पर्यावरण विशेषज्ञों ने जापान के जंगलों में बढ़ती आग की इन घटनाओं के पीछे जलवायु परिवर्तन (Climate Change) को मुख्य कारण माना है। विशेषज्ञों के अनुसार, जापान में मार्च से मई के बीच वसंत ऋतु के दौरान हवाएं काफी शुष्क होती हैं और बारिश कम होती है, जिससे जंगलों में सूखी लकड़ियों और पुराने पत्तों का ढेर 'बारूद' की तरह काम करता है। 50-60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं ने इस आग को नियंत्रित करना नामुमकिन बना दिया था। ड्राई विंटर्स (शुष्क शीतकाल) की बढ़ती अवधि ने वनों में नमी कम कर दी है, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति का खतरा और बढ़ गया है।
इसरो का बड़ा कारनामा, ‘ऑप्टोसार’ सैटेलाइट लॉन्च
4 May, 2026 01:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेंगलुरु: भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी ने एक नया इतिहास रच दिया है, जहां बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप 'गैलेक्सआई' ने 'मिशन दृष्टि' के माध्यम से दुनिया का पहला ऑप्टोसार (Drishti Opto SAR) उपग्रह सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया है। इस अत्याधुनिक उपग्रह को कैलिफोर्निया से स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट द्वारा प्रक्षेपित किया गया, जो भारत में किसी निजी संस्थान द्वारा निर्मित अब तक का सबसे विशाल उपग्रह है। इस मिशन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी हाइब्रिड तकनीक है, जो एक ही प्लेटफॉर्म पर ऑप्टिकल इमेजिंग और सिंथेटिक एपर्चर राडार (एसएआर) को एक साथ संचालित करने में सक्षम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि को भारतीय युवाओं के नवाचार और राष्ट्र निर्माण के प्रति उनके जुनून का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया है।
ऑप्टोसार तकनीक और इसकी कार्यप्रणाली
पारंपरिक उपग्रह अब तक या तो केवल ऑप्टिकल सेंसर पर निर्भर थे या फिर राडार सिस्टम पर, जिनकी अपनी सीमाएं होती हैं। ऑप्टिकल सिस्टम दिन के उजाले में रंगीन और विस्तृत तस्वीरें तो देते हैं, लेकिन बादलों और अंधेरे के सामने विफल हो जाते हैं, जबकि राडार रात में देख तो सकते हैं पर उनकी तस्वीरें उतनी स्पष्ट नहीं होतीं। गैलेक्सआई की नवीन 'ऑप्टोसार' प्रणाली इन दोनों तकनीकों को एकीकृत कर एक ही समय में ऑप्टिकल और राडार डेटा कैप्चर करती है। इन दोनों डेटा सेट्स को मिलाकर एक ऐसी स्पष्ट छवि तैयार की जाती है, जो बादलों के पार और घने अंधेरे में भी जमीन की बारीक से बारीक जानकारी सटीकता के साथ प्रदान करती है।
आपदा प्रबंधन और सीमा सुरक्षा में क्रांतिकारी बदलाव
यह उपग्रह भारत के सबसे उच्च-रिजोल्यूशन वाले उपग्रहों में से एक है, जो हर मौसम और हर परिस्थिति में पृथ्वी की निगरानी करने के तरीके को पूरी तरह बदल देगा। इसकी मदद से चक्रवात या भारी वर्षा जैसी प्रतिकूल मौसम स्थितियों में आपदा के प्रभाव का आकलन करना बेहद आसान हो जाएगा। साथ ही, कृषि क्षेत्र में फसलों की स्थिति और सीमाओं पर घुसपैठ की निगरानी के लिए यह तकनीक एक अभेद्य सुरक्षा कवच की तरह काम करेगी। मौसम की परवाह किए बिना विश्वसनीय और निरंतर डेटा मिलने से महत्वपूर्ण राष्ट्रीय निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी तेजी आएगी।
निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए मील का पत्थर
मिशन दृष्टि की सफलता ने वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में भारत की साख को और मजबूती दी है। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि भारतीय स्टार्टअप्स न केवल अंतरराष्ट्रीय मानकों के उपकरण बना रहे हैं, बल्कि ऐसी तकनीक विकसित कर रहे हैं जो अब तक दुनिया में कहीं और उपलब्ध नहीं थी। एक निजी स्टार्टअप द्वारा इतने बड़े और जटिल उपग्रह का निर्माण करना देश के निजी अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक नया अध्याय है। यह सफलता भविष्य में और भी जटिल अंतरिक्ष अभियानों के लिए मार्ग प्रशस्त करेगी और वैश्विक स्तर पर उपग्रह इमेजिंग की सेवाओं में भारत की हिस्सेदारी को बढ़ाएगी।
निकाय चुनाव में BJP का जोर, CM सैनी ने संभाली कमान
4 May, 2026 01:04 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सोनीपत। हरियाणा में नगर निकाय चुनावों के बढ़ते उत्साह के बीच मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सोनीपत में चुनावी बिगुल फूंक दिया है। सोमवार को उन्होंने वार्ड नंबर-8 से अपने जनसंपर्क अभियान का आगाज किया और राई गांव में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। मुख्यमंत्री आज पूरे दिन सोनीपत में सक्रिय रहेंगे, जहाँ वे लगभग दो दर्जन छोटी सभाओं के माध्यम से जनता से रूबरू होंगे। मेयर पद के प्रत्याशी की ओर से आज करीब 19 अलग-अलग कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है।
सरकार की उपलब्धियों का रखा ब्योरा
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अपनी सरकार के कामकाज का लेखा-जोखा पेश करते हुए कहा:
संकल्प पत्र की प्रगति: विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए 217 वादों में से 63 को मात्र डेढ़ वर्ष में पूरा कर लिया गया है, जबकि शेष 163 संकल्पों पर तेजी से कार्य जारी है।
गरीब कल्याण: कम आय वाले परिवारों को मात्र 500 रुपये में गैस सिलेंडर दिया जा रहा है।
किसान और युवा: हरियाणा देश का ऐसा राज्य है जहाँ किसानों की पूरी फसल MSP पर खरीदी जा रही है। साथ ही, युवाओं को बिना किसी 'पर्ची-खर्ची' (भ्रष्टाचार) के 2 लाख सरकारी नौकरियां प्रदान की गई हैं।
महिला सशक्तिकरण: प्रदेश में 'लाडो लक्ष्मी योजना' को प्रभावी ढंग से लागू कर दिया गया है।
विपक्ष पर तीखा प्रहार
कांग्रेस को निशाने पर लेते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकारें हैं, वहां महिलाओं की सुरक्षा की स्थिति बेहद चिंताजनक है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस ने दिल्ली में जो गलतियां कीं, वही दोहराव हरियाणा में भी देखने को मिला। महिलाओं के हक में खड़े होने के बजाय विपक्षी नेता जिम्मेदारी से भाग खड़े हुए।
मतदान की अपील
मुख्यमंत्री ने सोनीपत की जनता से आह्वान किया कि विकास की गति को बनाए रखने के लिए 'कमल' के फूल पर बटन दबाएं और भाजपा के मेयर व पार्षद प्रत्याशियों को भारी मतों से विजयी बनाएं। इस दौरान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बड़ोली ने भी स्थानीय लोगों से पार्टी के पक्ष में मतदान करने की भावुक अपील की।
दिनदहाड़े वारदात: फॉर्च्यूनर पर हमला, परिवार जख्मी, फिरौती मांगी
4 May, 2026 12:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अंबाला-दिल्ली। नेशनल हाईवे पर मोहड़ा फाटक के पास रविवार शाम को बदमाशों ने दुस्साहस दिखाते हुए एक फॉर्च्यूनर गाड़ी को निशाना बनाया। फिल्मी अंदाज में अंजाम दी गई इस वारदात में बदमाशों ने न केवल गाड़ी को बीच सड़क पर रोका, बल्कि उसमें सवार बुजुर्गों, महिलाओं और एक मासूम बच्ची पर लोहे की रॉड से हमला कर उन्हें घायल कर दिया।
बीच सड़क पर खूनी खेल
करनाल के माखुमाजरा निवासी रणधीर सिंह ने बताया कि वे रविवार शाम करीब 6 बजे अपने परिवार के साथ इस्माइलपुर गांव से वापस लौट रहे थे। जब उनकी गाड़ी मोहड़ा फाटक के पास पहुंची, तो एक स्कॉर्पियो और मोटरसाइकिल पर सवार करीब 6-7 बदमाशों ने उनकी फॉर्च्यूनर के आगे अपनी गाड़ी अड़ा दी।
शीशे तोड़कर हमला: पीड़ित परिवार ने डर के मारे गाड़ी के दरवाजे अंदर से लॉक कर लिए, लेकिन हमलावरों ने लोहे की रॉड से गाड़ी के सभी शीशे चकनाचूर कर दिए और भीतर बैठे परिवार के सदस्यों पर जानलेवा हमला किया।
घायल: इस हमले में रणधीर सिंह, उनकी पत्नी सुदेश रानी, पुत्रवधू शालिनी और पोती आस्था सहित परिवार के पांच लोग जख्मी हुए हैं।
करोड़ों की फिरौती का आरोप
पीड़ित परिवार ने पुलिस को बताया कि यह हमला किसी मामूली रंजिश का नतीजा नहीं, बल्कि उगाही से जुड़ा मामला है। रणधीर सिंह के अनुसार:
रमेश पहलवान गिरोह का हाथ: सोनीपत के नयावास निवासी रमेश पहलवान का गिरोह पिछले 3 साल से उन्हें धमका रहा है।
वसूली: परिवार का आरोप है कि यह गिरोह अब तक उनसे 4 करोड़ रुपये वसूल चुका है।
नई मांग: अब रमेश और उसके साले मोनू ने 5 करोड़ रुपये की अतिरिक्त फिरौती मांगी है। पैसे देने से इनकार करने पर ही इस वारदात को अंजाम दिया गया।
पुलिस की कार्रवाई
सूचना मिलते ही पड़ाव थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। रणधीर सिंह की शिकायत पर पुलिस ने विक्रम, पागल और अन्य हमलावरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।
लगी धाराएं: पुलिस ने दंगा करने (191(2)) और घातक हथियारों से लैस होकर हमला करने (191(3)) जैसी गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।
तलाश जारी: पुलिस की टीमें हमलावरों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं।
ड्रैगन का सख्त रुख, अमेरिकी पाबंदियों को बताया दखलअंदाजी
4 May, 2026 12:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चीन और अमेरिका के बीच व्यापारिक युद्ध अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है, जहां चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने अमेरिकी प्रतिबंधों को सीधी चुनौती देते हुए उन पर रोक लगा दी है। बीजिंग ने स्पष्ट रूप से घोषणा की है कि वह अपनी पांच तेल कंपनियों पर लगाए गए अमेरिकी अंकुशों को न तो कानूनी मान्यता देगा और न ही अपने क्षेत्र में इन्हें प्रभावी होने देगा। अमेरिका ने अप्रैल महीने में ईरान के विरुद्ध चलाए जा रहे एक विशेष अभियान के दौरान इन चीनी कंपनियों को निशाना बनाया था, जिसमें दिग्गज कंपनी ‘हेंगली पेट्रोकेमिकल’ का नाम भी शामिल है। चीन ने इस अमेरिकी कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन और दूसरे देश के आंतरिक मामलों में अनुचित दखलअंदाजी करार दिया है।
व्यापारिक स्वायत्तता और राष्ट्रीय कानून
चीन ने अपने कॉर्पोरेट हितों की रक्षा के लिए हाल ही में बनाए गए नए कानूनों का हवाला देते हुए अमेरिकी पाबंदियों को निष्प्रभावी कर दिया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कड़े लहजे में कहा है कि उनका देश अपनी कंपनियों के वैध अधिकारों की सुरक्षा के लिए पूरी मजबूती से खड़ा है और किसी भी विदेशी शक्ति को अपने व्यापारिक हितों को चोट पहुंचाने की अनुमति नहीं देगा। चीन का तर्क है कि अमेरिका द्वारा एकतरफा तरीके से कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करना और उन पर मनमाने नियम थोपना वैश्विक मुक्त व्यापार की भावना के विरुद्ध है, जिसे रोकने के लिए अब बीजिंग ने कानूनी सुरक्षा चक्र तैयार कर लिया है।
हेंगली पेट्रोकेमिकल और ईरान का विवाद
अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि ये पांचों चीनी कंपनियां ईरान से तेल खरीदकर उसे आर्थिक रूप से मजबूत कर रही हैं, जिससे अमेरिकी प्रतिबंधों का प्रभाव कम हो रहा है। हालांकि, इस विवाद के केंद्र में मौजूद ‘हेंगली पेट्रोकेमिकल’ ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि उसका ईरान के साथ कभी कोई व्यापारिक संबंध नहीं रहा है। कंपनी के इस रुख को चीनी सरकार का पूरा समर्थन मिला है, जो अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों और आरोपों को आधारहीन मान रही है। इस टकराव ने दोनों महाशक्तियों के बीच पहले से मौजूद कूटनीतिक दरार को और गहरा कर दिया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी अनिश्चितता का माहौल बन रहा है।
एकतरफा प्रतिबंधों के खिलाफ कड़ा प्रतिरोध
बीजिंग लगातार यह संदेश दे रहा है कि वह विश्व मंच पर अमेरिका की 'प्रतिबंध कूटनीति' के आगे झुकने वाला नहीं है। चीनी वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, किसी भी देश द्वारा लगाए गए एकतरफा और अवैध प्रतिबंध न केवल संबंधित कंपनियों को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला को भी बाधित करते हैं। चीन ने अपने घरेलू संस्थानों और बैंकों को भी निर्देश दिए हैं कि वे इन अमेरिकी नियमों का पालन न करें। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि चीन अब वैश्विक व्यापार प्रणाली में अपनी स्वयं की शर्तें तय करने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है और अमेरिकी आर्थिक दबाव का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
गैंगस्टर रोहित गोदारा के नाम से धमकी, कांग्रेस नेता से मांगे 5 करोड़
4 May, 2026 11:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पानीपत। हरियाणा के पानीपत से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहाँ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन कुंडू को जान से मारने की धमकी देकर भारी-भरकम रंगदारी मांगी गई है। पानीपत के सेक्टर-18 निवासी कुंडू से एक विदेशी नंबर के जरिए 5 करोड़ रुपये की मांग की गई है। सचिन कुंडू पानीपत ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव भी लड़ चुके हैं।
विदेशी नंबर से आया धमकी भरा संदेश
सचिन कुंडू ने सेक्टर 13-17 थाना पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में बताया कि रविवार को जब वे एक सार्वजनिक कार्यक्रम में व्यस्त थे, तब उनके व्हाट्सएप पर एक अज्ञात विदेशी नंबर से कॉल आई। व्यस्तता के कारण वे फोन नहीं उठा सके।
वॉयस मैसेज से मांग: शाम करीब 4:12 बजे उसी नंबर से एक व्हाट्सएप वॉयस मैसेज आया। मैसेज में स्पष्ट रूप से 5 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी गई और पैसे न देने पर उन्हें व उनके परिवार को खत्म करने की धमकी दी गई।
गैंग का नाम: कॉल करने वाले ने खुद को कुख्यात रोहित गोदारा गैंग का सदस्य बताया है।
पुलिस ने शुरू की जांच
धमकी मिलने के तुरंत बाद कांग्रेस नेता ने पुलिस प्रशासन को मामले की जानकारी दी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर आधिकारिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
नंबर की ट्रैकिंग: जिस विदेशी नंबर से कॉल और मैसेज आए हैं, साइबर सेल की मदद से उसकी लोकेशन और पहचान की जांच की जा रही है।
सुरक्षा और सतर्कता: पुलिस अधिकारी मामले की गंभीरता को देखते हुए सचिन कुंडू की सुरक्षा और आरोपी की धरपकड़ के लिए अलग-अलग पहलुओं पर काम कर रहे हैं।
इजरायल ने दी मंजूरी, अमेरिका से खरीदेगा लड़ाकू विमान
4 May, 2026 11:02 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेल अवीव: इजरायल ने अपनी हवाई शक्ति को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप ढालने के लिए अमेरिका के साथ एक बेहद महत्वाकांक्षी और बहु-अरब डॉलर के रक्षा समझौते को अंतिम रूप दे दिया है। रक्षा मंत्रालय की मंत्रिस्तरीय खरीद समिति से मंजूरी मिलने के बाद अब इजरायली वायुसेना के बेड़े में अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों के दो नए स्क्वाड्रन शामिल किए जाएंगे। यह विशाल रक्षा सौदा लॉकहीड मार्टिन और बोइंग जैसी दिग्गज कंपनियों के साथ किया गया है, जिसके लिए लगभग 119 बिलियन डॉलर का भारी-भरकम फंड निर्धारित हुआ है। इस रणनीतिक निवेश का प्राथमिक लक्ष्य न केवल वर्तमान सुरक्षा परिदृश्य को संभालना है, बल्कि आने वाले दशकों में भी इजरायल की सैन्य श्रेष्ठता को अटूट बनाए रखना है।
वायुसेना की मारक क्षमता में विस्तार
इस ऐतिहासिक समझौते के तहत इजरायल अपनी हवाई ताकत को दोगुना करने की दिशा में बढ़ रहा है। रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वह लॉकहीड मार्टिन से एफ-35 लड़ाकू विमानों का चौथा स्क्वाड्रन प्राप्त करेगा, जो अपनी स्टेल्थ तकनीक के लिए दुनिया भर में मशहूर है। इसके साथ ही बोइंग कंपनी से एफ-15आईए विमानों का दूसरा स्क्वाड्रन भी खरीदा जाएगा, जो अपनी मारक क्षमता और आधुनिक एवियोनिक्स के लिए जाना जाता है। पिछले वर्ष के अंत में बोइंग के साथ शुरू हुई इस प्रक्रिया में अब और तेजी आएगी, जिससे इजरायली सेना की रणनीतिक पहुंच और भी घातक हो जाएगी।
दूरदर्शी रक्षा नीति और रणनीतिक लक्ष्य
रक्षा मंत्रालय के महानिदेशक अमीर बरम ने इस सौदे की आवश्यकता को वर्तमान और भविष्य के बीच के सेतु के रूप में परिभाषित किया है। उनका मानना है कि युद्ध के समय की तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ यह भी अनिवार्य है कि अगले दस वर्षों के लिए सैन्य बढ़त की नींव आज ही रखी जाए। हालिया क्षेत्रीय संघर्षों और ईरान के साथ बढ़ते तनाव ने यह साफ कर दिया है कि आधुनिक युद्धक्षेत्र में वायु शक्ति और मजबूत रणनीतिक साझेदारी ही किसी भी राष्ट्र की सुरक्षा की असली गारंटी है। यह कदम इजरायल को पड़ोसी देशों और संभावित शत्रुओं के मुकाबले एक सुरक्षित रक्षा कवच प्रदान करने की दूरगामी योजना का हिस्सा है।
उन्नत तकनीक से सुरक्षित होता भविष्य
इस रक्षा सौदे के केंद्र में अत्याधुनिक तकनीक का समावेश है, जो इजरायली रक्षा बलों को किसी भी तरह की इलेक्ट्रॉनिक या हवाई बाधा को पार करने में सक्षम बनाएगा। एफ-15आईए और एफ-35 जैसे विमानों का मिश्रण इजरायल को एक ऐसा संतुलन प्रदान करता है, जहां वह एक ओर अदृश्य रहकर हमला कर सकता है और दूसरी ओर भारी पेलोड के साथ दुश्मन के ठिकानों को नेस्तनाबूद करने की क्षमता रखता है। अरबों डॉलर का यह निवेश केवल विमानों की खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इजरायल की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है जिसमें वह अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए विश्व की सबसे उन्नत सैन्य तकनीक को अपनाने से पीछे नहीं हटेगा।
तेल बाजार में हलचल, ओपेक प्लस ने बढ़ाया उत्पादन कोटा
4 May, 2026 10:59 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के ओपेक प्लस से अलग होने के तुरंत बाद तेल उत्पादक देशों के समूह ने कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर बड़ा कदम उठाया है। रविवार को हुई बैठक में समूह के सात प्रमुख देशों ने जून महीने से प्रतिदिन 1.88 लाख बैरल अतिरिक्त तेल बाजार में उतारने का निर्णय लिया है। यूएई की विदाई के बाद ओपेक प्लस ने यह स्पष्ट करने का प्रयास किया है कि संगठन की एकता और बाजार पर उसकी पकड़ अब भी मजबूत है। हालांकि, कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह वृद्धि केवल एक रणनीतिक संदेश है, क्योंकि समूह के कई देश बुनियादी ढांचे की कमी के चलते पहले से ही अपने निर्धारित लक्ष्य से कम उत्पादन कर रहे हैं। भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए यह खबर राहत भरी हो सकती है क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के अचानक बढ़ने का खतरा कम हो जाएगा।
क्षेत्रीय तनाव और आपूर्ति की बाधाएं
मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक तेल व्यापार की दिशा बदल दी है। फरवरी के अंत में ईरान पर हुए हमलों के बाद जवाब में ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी करने से खाड़ी देशों से होने वाला निर्यात संकट में पड़ गया है। इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के बाधित होने से खाड़ी देशों की अतिरिक्त उत्पादन क्षमता चाहकर भी वैश्विक बाजारों तक नहीं पहुंच पा रही है। अमेरिका और इजरायल के साथ जारी इस सैन्य गतिरोध ने न केवल आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ा है, बल्कि कच्चे तेल के सुरक्षित परिवहन पर भी बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर संभावित असर
भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भारी मात्रा में आयातित कच्चे तेल पर निर्भर है, जिसके कारण ओपेक प्लस के इस निर्णय का देश की अर्थव्यवस्था पर सीधा प्रभाव पड़ना तय है। यूएई के समूह से हटने और ओपेक द्वारा उत्पादन बढ़ाए जाने के बीच संतुलन बनने से भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों के स्थिर रहने की उम्मीद बढ़ गई है। यदि बाजार में तेल की उपलब्धता बनी रहती है, तो मुद्रास्फीति पर नियंत्रण पाना सरकार के लिए आसान होगा, जिससे आम उपभोक्ताओं को भी वैश्विक उथल-पुथल के बीच राहत मिल सकती है।
ईरानी तेल क्षेत्र में गहराता संकट
अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी के चलते ईरान को अपने तेल उत्पादन में बड़ी कटौती करने पर मजबूर होना पड़ा है। निर्यात के रास्ते बंद होने के कारण ईरान के भंडारण केंद्र पूरी तरह भर चुके हैं और उसके प्रमुख टर्मिनलों पर टैंकरों की कतारें लग गई हैं। ईरानी अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि वे भंडारण क्षमता पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए उत्पादन में लगभग तीस प्रतिशत तक की कमी कर रहे हैं। अमेरिका की ओर से ऊर्जा आय को रोकने की रणनीति ने ईरान के तेल उद्योग को एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है जहां उसे अपनी व्यवस्था बचाए रखने के लिए उत्पादन घटाने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नजर नहीं आ रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के बीच ‘सर्वशक्ति’ ने दिखाई ताकत
4 May, 2026 09:50 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: ऊर्जा संकट के बादलों के बीच भारत के लिए एक बड़ी और सुखद खबर सामने आई है, जहाँ घरेलू एलपीजी की किल्लत को दूर करने के लिए 'सर्वशक्ति' नामक एक विशाल सुपर टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य की बाधाओं को पार करने में सफल रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी भीषण सैन्य तनाव और व्यापारिक नाकेबंदी के बावजूद लगभग 45 हजार टन एलपीजी लेकर आ रहा यह जहाज भारतीय समुद्र तट की ओर मजबूती से कदम बढ़ा रहा है। पूरी तरह से भारतीय चालक दल द्वारा संचालित यह टैंकर न केवल रसोई गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करेगा, बल्कि यह वैश्विक भू-राजनीतिक दबाव के बीच भारत की कूटनीतिक जीत का भी प्रतीक बनकर उभरा है।
होर्मुज के संकटपूर्ण मार्ग से सफल निकासी
पश्चिम एशिया में मचे घमासान के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य वर्तमान में दुनिया का सबसे खतरनाक समुद्री इलाका बना हुआ है, जहाँ अमेरिका और ईरान की नौसेनाएं आमने-सामने खड़ी हैं। ऐसी विषम परिस्थितियों में भारतीय कंपनियों के लिए गैस लेकर आ रहे 'सर्वशक्ति' का सुरक्षित निकल जाना किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है, क्योंकि इस्लामाबाद वार्ता की विफलता के बाद इस क्षेत्र में सैकड़ों मालवाहक जहाज फंसे हुए हैं। सुरक्षा की चाक-चौबंद व्यवस्था के बीच इस कार्गो शिप को भारतीय बंदरगाह तक लाने की योजना बनाई गई है, ताकि देश के भीतर ईंधन की कमी को जल्द से जल्द दूर किया जा सके।
अमेरिकी प्रतिबंधों की चेतावनी और बढ़ता दबाव
इस सफल आवाजाही के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है, क्योंकि अमेरिकी विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (ओएफएसी) ने एक नई चेतावनी जारी कर वैश्विक शिपिंग उद्योग पर दबाव और बढ़ा दिया है। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई भी जहाजरानी कंपनी होर्मुज से गुजरने के बदले ईरान को किसी भी प्रकार का शुल्क या 'ट्रांजिट फीस' देती है, तो उसे कड़े अमेरिकी प्रतिबंधों का खामियाजा भुगतना होगा। यह चेतावनी उन देशों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस संकरे समुद्री रास्ते पर निर्भर हैं, जहाँ से दुनिया के कुल तेल और गैस व्यापार का पांचवां हिस्सा गुजरता है।
ईंधन सुरक्षा और भविष्य की रणनीतिक चुनौतियां
'सर्वशक्ति' से पहले भारत का 'गरिमा' नामक तेल टैंकर भी मुंबई पोर्ट पहुँचने में सफल रहा था, जिससे यह संकेत मिलते हैं कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर अत्यंत सतर्क है और सुरक्षित गलियारों की तलाश में जुटा है। हालांकि, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) जैसी प्रमुख कंपनियों ने वर्तमान आपूर्ति को लेकर अभी कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन जानकारों का मानना है कि यह खेप बाजार में गैस की कमी को काफी हद तक नियंत्रित कर लेगी। ईरान की सख्ती और अमेरिका की सख्त घेराबंदी के बीच भारत को अपनी तेल कूटनीति और जहाजों की सुरक्षा के लिए आने वाले समय में और भी जटिल रास्तों से गुजरना पड़ सकता है।
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