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कतर : तकनीकी खराबी के चलते हेलीकॉप्टर समुद्र में क्रैश, छह की मौत
23 Mar, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दोहा । मिडिल ईस्ट में ईरान जंग के बीच कतर में एक दर्दनाक हादसा सामने आया हैं। खबर है कि कतर के समुद्र क्षेत्र में एक हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया है। उसमें सवार 7 लोगों में से 6 की हादसे में मौत हो गई और एक अभी लापता बताया जा रहा हैं। यह दुर्घटना उस समय हुई जब कतर का एक सैन्य हेलीकॉप्टर तकनीकी खराबी के कारण समुद्र में गिर गया। कतर आंतरिक मंत्रालय के अनुसार, यह हादसा कतर के समुद्री क्षेत्र में हुआ और हेलीकॉप्टर में सवार सभी लोगों की जान चली गई। एक व्यक्ति अभी भी लापता है, जिसकी तलाश के लिए बचाव अभियान जारी है। इससे पहले कतर रक्षा मंत्रालय ने बताया था कि हेलीकॉप्टर नियमित ड्यूटी पर था, तभी उसमें तकनीकी खराबी आ गई, जिसके कारण यह हादसा हुआ।
घटना के बाद तुरंत बचाव दल मौके पर पहुंचा और समुद्र में तलाशी अभियान शुरू किया गया। फिलहाल अधिकारियों ने हादसे की जांच शुरू कर दी है, ताकि दुर्घटना के सटीक कारणों का पता लगाया जा सके। यह घटना मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच सामने आई है, जहां पहले से ही सुरक्षा और सैन्य गतिविधियों को लेकर चिंता बनी हुई है।
अमेरिका-ईरान तनाव चरम पर: ट्रंप का 48 घंटे का अल्टीमेटम
23 Mar, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन से सामने आ रही खबरों के अनुसार अमेरिका और इजरायल के बीच जारी संघर्ष अपने 23वें दिन में पहुंच गया है और स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य को “पूरी तरह और सुरक्षित रूप से” नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स को निशाना बनाएगा। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह भी संकेत दिया कि कार्रवाई की शुरुआत सबसे बड़े पावर प्लांट से हो सकती है, जिससे साफ है कि अमेरिका सीधे ईरान के बुनियादी ढांचे पर बड़े हमले की तैयारी में है।
इस बीच ईरान ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए इजराइल पर अब तक के सबसे बड़े हमलों में से एक को अंजाम दिया है। ईरानी मिसाइलों ने इजराइल के दक्षिणी शहर डिमोना और अराद को निशाना बनाया, जहां भारी नुकसान और दहशत का माहौल है। डिमोना वही स्थान है जहां इजराइल का प्रमुख परमाणु अनुसंधान केंद्र स्थित है। इस हमले में करीब 100 लोग घायल हुए हैं, जिनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। एक 10 वर्षीय बच्चे की हालत भी नाजुक बनी हुई है। इजराइल की एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय होने के बावजूद कई मिसाइलों को रोकने में असफल रही। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस स्थिति को “मुश्किल शाम” करार देते हुए स्पष्ट किया है कि जवाबी कार्रवाई जारी रहेगी और ईरान पर हमले नहीं रुकेंगे।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने पुष्टि की है कि डिमोना के परमाणु केंद्र को कोई नुकसान नहीं हुआ है और वहां रेडिएशन स्तर सामान्य है, हालांकि एजेंसी ने परमाणु ठिकानों के आसपास सैन्य कार्रवाई को अत्यंत खतरनाक बताते हुए संयम बरतने की अपील की है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने एक ही दिन में इजराइल पर कम से कम आठ बार मिसाइल हमले किए, जिससे अराद शहर के कई हिस्सों में भी भारी क्षति हुई और दर्जनों लोग घायल हुए। ईरान का दावा है कि यह हमला उसके नतांज परमाणु केंद्र पर हुए हमलों का जवाब है। इस संघर्ष में अब तक ईरान में 1500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि इजराइल के हमलों से लेबनान के दक्षिणी हिस्सों में भी 1000 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की खबर है। ट्रंप का दावा है कि अमेरिका इस संघर्ष में “जीत के करीब” है, लेकिन ईरान के लगातार जवाबी हमलों से स्पष्ट है कि यह युद्ध अभी समाप्त होने के बजाय और अधिक उग्र होता जा रहा है।
कतर के समुद्री क्षेत्र में हेलीकॉप्टर दुर्घटना, छह लोगों की मौत
22 Mar, 2026 03:14 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका-इजराइल-ईरान युद्ध रविवार को 23वें दिन में प्रवेश कर गया. इस बीच अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर हमले जारी है. वहीं ईरान की ओर से इजराइल और खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया जा रहा है. वहीं होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की पाबंदी भी जारी है. इसे लेकर पूरी दुनिया ऊर्जा को लेकर हाहाकार मचा है. इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को ईरान को चेतावनी दी कि अगर उसने होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोला तो वह उसके पावर प्लांट को तबाह कर देंगे. ट्रंप ने ईरान को इस काम के लिए ठीक 48 घंटे का समय दिया. इसकी शुरुआत सबसे बड़े प्लांट से होगी! इस बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि अमेरिकियों के खिलाफ ताकत दिखाने की ईरान की क्षमता को खत्म करने के उनके मकसद बिल्कुल साफ हैं. वहीं दक्षिणी इजराइल के अराद और डिमोना में बड़े हमले किए गए. इजराइल के विदेश मंत्रालय ने बताया कि इस हमले में बच्चों समेत 100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. वहां से लगभग 150 परिवारों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया. इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को अराद के मेयर, यायर मायान से बात की और घायलों के लिए अपनी प्रार्थनाएं भेजी. ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी के अनुसार इस हमले में ईरान में मरने वालों की संख्या 1500 से ज्यादा हो गई है.
कतर के समुद्री क्षेत्र में हुई हेलीकॉप्टर दुर्घटना में छह लोगों की मौत की पुष्टि हुई, एक व्यक्ति लापता: कतर
कतर के रक्षा मंत्रालय ने रविवार को बताया कि खाड़ी देश के समुद्री क्षेत्र में एक मिलिट्री हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया है. यह क्रैश पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच हुआ है. सोशल मीडिया एक्स पर एक बयान में मंत्रालय ने कहा, 'एक कतरी हेलीकॉप्टर अपनी नियमित ड्यूटी के दौरान समुद्री क्षेत्र में क्रैश हो गया. इसमें सात लोग सवार थे जिसमें छह लोगों के शव बरामद किए गए हैं जबकि एक शख्स लापता है.
ईरान ने कहा, खाड़ी में समुद्री सुरक्षा के लिए UN एजेंसी के साथ सहयोग को तैयार
मेहर न्यूज एजेंसी ने रविवार को बताया कि इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन में ईरान के प्रतिनिधि अली मौसवी ने कहा है कि 'दुश्मन' देशों के जहाजों को छोड़कर बाकी सभी जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर सकते हैं, बशर्ते वे सुरक्षा और बचाव के इंतजामों में तालमेल बिठाएँ. मौसावी ने कहा कि इस संकरे जलमार्ग से गुजरना तभी मुमकिन है जब तेहरान के साथ सुरक्षा और बचाव के इंतजामों में तालमेल बैठाया जाए. मौसावी ने कहा, 'कूटनीति ईरान की प्राथमिकता बनी हुई है. हालाँकि, आक्रामकता को पूरी तरह से रोकना साथ ही आपसी विश्वास और भरोसा ज्यादा जरूरी है.' उन्होंने आगे कहा कि ईरान पर इजराइल और अमेरिका के हमले ही होर्मुज जलडमरूमध्य में मौजूदा हालात की जड़ है.
US और इजराइल ने 80000 आम जगहों पर हमला किया: ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी
ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी के प्रेसिडेंट पीरहॉसेन कोलिवंद ने कहा कि 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिका और इजराइल ने 80,000 से ज्यादा आम जगहों पर हमला किया है. आईएएनएस ने रविवार को शिन्हुआ न्यूज एजेंसी के हवाले से बताया कि कोलिवंद ने विदेशी मीडिया के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं. उन्होंने अमेरिका और इजराइल के हमलों के दौरान अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों के उल्लंघन पर भी रोशनी डाली. कोलिवंद ने बताया कि जिन जगहों पर हमला हुआ उनमें से 20,000 से ज्यादा तेहरान में थी और 60,000 से ज्यादा दूसरी जगहों पर. उन्होंने बताया कि देश में जिन कमर्शियल जगहों को निशाना बनाया गया, उनकी संख्या करीब 18,790 है. उन्होंने यह भी बताया कि 266 मेडिकल सेंटरों पर हमला हुआ है और 498 स्कूलों को निशाना बनाया गया. उन्होंने कहा कि इन हमलों में ईरान के मेडिकल स्टाफ के 12 सदस्यों की मौत हो गई और 90 से ज्यादा लोग घायल हो गए. स्थानीय जानकारी के मुताबिक ईरान में मरने वालों की संख्या 1500 से ज्यादा हो गई है.
अमेरिका के तेल पर प्रतिबंध हटाने पर ईरान के स्पीकर ने ये दिया जवाब
ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर गालिबफ ने अमेरिका द्वारा ईरानी तेल की बिक्री पर से अस्थायी रूप से प्रतिबंध हटाने की घोषणा के बाद 'माफ कीजिए, हमारा सारा तेल बिक चुका है' का संदेश देकर जवाब दिया है. अमेरिका ने यह कदम दुनिया भर में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को कम करने की कोशिश में उठाया था. उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, 'समुद्र में फँसे ईरानी तेल पर से प्रतिबंध हटाना? माफ कीजिए हमारा सारा तेल बिक चुका है.' गालिबफ इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के एक अनुभवी सदस्य हैं. वह देश के कई नेताओं की हत्या के बाद एक प्रमुख नेता के तौर पर उभरे हैं.
इजराइल ने ईरान की मिसाइल की मारक क्षमता को लेकर चिंता जतायी
इजराइल ने ईरान की मिसाइल क्षमता को लेकर बड़ी चिंता जतायी है. इजराइली सुरक्षा बल( आईडीएफ) ने एक्स पर कहा,'ईरानी शासन ने 'ऑपरेशन रोरिंग लायन' की शुरुआत के बाद पहली बार एक लंबी दूरी की मिसाइल लॉन्च की, जो लगभग 4,000 किलोमीटर की दूरी तक पहुँच सकती है. जून 2025 में 'ऑपरेशन राइजिंग लायन' के दौरान आईडीएफ ने खुलासा किया कि ईरानी शासन की 4,000 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली मिसाइलें विकसित करने की योजना है. ये यूरोप, एशिया और अफ्रीका के दर्जनों देशों के लिए खतरा पैदा करती है. ईरानी शासन ने इस बात से इनकार किया.' हम यह कहते आ रहे हैं, ईरानी शासन एक वैश्विक खतरा है और अब ऐसी मिसाइलों के साथ जो लंदन, पेरिस या बर्लिन तक पहुँच सकती हैं. ईरानी शासन ने इस क्षेत्र के 12 देशों पर हमले किए हैं और एक ऐसी क्षमता विकसित कर रहा है जो कहीं अधिक व्यापक खतरा पैदा करती है.
UAE ने कहा- ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों का जवाब दे रहे हैं
संयुक्त अरब अमीरात ने कहा कि वह रविवार को ईरान की तरफ से हो रहे हवाई हमलों का जवाब दे रहा है. रक्षा मंत्रालय ने अपने एक्स हैंडल पर शेयर किए गए एक बयान में कहा, 'संयुक्त अरब अमीरात के हवाई सुरक्षा तंत्र (Air Defences) इस समय ईरान की तरफ से आ रही मिसाइल और ड्रोन की धमकियों का जवाब दे रहे हैं.' मंत्रालय ने आगे बताया कि जो आवाजें सुनाई दे रही हैं, वे हवाई सुरक्षा तंत्र द्वारा मिसाइलों और ड्रोनों को रोकने (intercept) का नतीजा हैं.' मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि देश के पूर्वी इलाके में तीन ड्रोनों को रोककर नष्ट कर दिया गया है.
खर्राटों को सामान्य समस्या समझकर ना करें नजरअंदाज
22 Mar, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। यदि नींद पूरी न हो या बार-बार टूटती रहे तो इसका असर सीधे स्वास्थ्य पर पड़ता है। कई लोगों को सोते समय खर्राटे लेने की समस्या होती है। इससे न केवल उनकी अपनी नींद प्रभावित होती है, बल्कि आसपास सोने वाले लोगों की नींद भी खराब हो जाती है। :आमतौर पर लोग इसे सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह कई स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत भी हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि जब सोते समय नाक या गले के रास्ते से हवा का प्रवाह ठीक तरह से नहीं हो पाता, तब खर्राटों की आवाज उत्पन्न होती है। हवा जब संकरे या बाधित मार्ग से गुजरती है तो आसपास के ऊतक आपस में टकराकर कंपन करने लगते हैं, जिससे खर्राटों की आवाज सुनाई देती है। कभी-कभी खर्राटे आना सामान्य माना जाता है, लेकिन अगर यह समस्या लंबे समय तक बनी रहे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार इसका कारण ऊपरी श्वसन तंत्र में रुकावट होना होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते इस समस्या का समाधान करना जरूरी है, क्योंकि इससे नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है और उच्च रक्तचाप तथा टाइप 2 डायबिटिज जैसी बीमारियों का खतरा भी कम किया जा सकता है। इसलिए यदि खर्राटे लगातार आ रहे हों, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना ही बेहतर होता है। रिपोर्ट के अनुसार जब व्यक्ति सांस लेता है तो हवा नाक, मुंह और गले से होते हुए फेफड़ों तक पहुंचती है। अगर तालु, टॉन्सिल, एडिनोइड्स या जीभ में सूजन या बनावट से जुड़ी समस्या हो तो हवा के गुजरने पर ये ऊतक आपस में टकराने लगते हैं, जिससे घरघराहट जैसी आवाज पैदा होती है। उम्र बढ़ने के साथ गले की मांसपेशियों का लचीलापन कम होना और नाक की हड्डी का टेढ़ा होना भी इसका कारण बन सकता है।
कई लोग यह मानते हैं कि खर्राटे लेना गहरी नींद का संकेत है, जबकि यह धारणा सही नहीं है। अगर खर्राटे बहुत तेज हों और सोते समय सांस रुकने जैसी स्थिति महसूस हो, तो यह स्लीप अपनिया का संकेत हो सकता है। स्लीप एपनिया एक गंभीर स्थिति है, जिसमें नींद के दौरान बार-बार सांस रुक जाती है। इससे शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम हो सकता है और दिनभर थकान, सिरदर्द, चिड़चिड़ापन तथा ध्यान केंद्रित करने में परेशानी जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी होता है। डॉक्टर नाक, मुंह और गले की जांच करते हैं और जरूरत पड़ने पर स्लीप स्टडी कराने की सलाह देते हैं। इस जांच में सोते समय मस्तिष्क की गतिविधि, दिल की धड़कन, ऑक्सीजन स्तर और सांस लेने के पैटर्न पर नजर रखी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार खर्राटों की बड़ी वजह हमारी जीवनशैली भी होती है।
शराब का सेवन, नींद की दवाइयों का उपयोग, मोटापा और गर्दन के आसपास अतिरिक्त चर्बी श्वसन मार्ग को संकरा कर देती है। पुरुषों में यह समस्या महिलाओं की तुलना में अधिक देखी जाती है और कई मामलों में यह आनुवंशिक कारणों से भी जुड़ी होती है। खर्राटों से राहत पाने के लिए जीवनशैली में सुधार करना जरूरी है। वजन नियंत्रित रखना, सोने की सही मुद्रा अपनाना, सोने से पहले शराब से परहेज करना और नियमित व्यायाम करना लाभदायक माना जाता है। इसके अलावा नेजल स्ट्रिप्स और डॉक्टर द्वारा सुझाए गए ओरल उपकरण भी मदद कर सकते हैं। गंभीर मामलों में सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है, जैसे लेसर असिस्टेड यूवूलोपलाटोप्लास्टी या टॉन्सिल से जुड़ी प्रक्रियाएं।
बच्चे बोलने-चलने से पहले ही दिखाने लगते हैं चालाकियां
22 Mar, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन । बच्चे बोलना या ठीक से चलना सीखने से पहले ही छोटे-छोटे झूठ या चालाकियां दिखाने लगते हैं। हाल ही में इंसानों के व्यवहार को लेकर की गई एक नई रिसर्च ने चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे हैं। यह निष्कर्ष यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टोल के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन में सामने आया है, जिसने मानव व्यवहार को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
यह अध्ययन प्रोफेसर इलेना हाइका के नेतृत्व में किया गया। रिसर्च के दौरान ब्रिटेन, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के 750 से अधिक माता-पिता से बातचीत की गई। उनसे पूछा गया कि उनके छोटे बच्चे किस तरह के व्यवहार दिखाते हैं और किस उम्र में धोखे जैसी आदतें दिखाई देने लगती हैं। अध्ययन में पाया गया कि करीब 10 महीने की उम्र तक लगभग 25 प्रतिशत बच्चे किसी न किसी रूप में धोखे को समझने लगते हैं। यह संख्या 17 महीने की उम्र तक लगभग 50 प्रतिशत तक पहुंच जाती है। वहीं तीन साल की उम्र तक कई बच्चे झूठ बोलने या बहाने बनाने में काफी कुशल हो जाते हैं।
रिसर्च में यह भी सामने आया कि बच्चों में धोखे की शुरुआत बहुत छोटे और सरल रूपों से होती है। जैसे किसी बात को सुनकर भी अनसुना करने का नाटक करना, अपनी पसंदीदा चीज छिपा देना या मना की गई चीज को चोरी-छिपे खा लेना। कई माता-पिता ने बताया कि उनके बच्चे ऐसी हरकतें बहुत कम उम्र में ही करने लगते हैं। एक मामले में तो एक माता-पिता ने बताया कि उनका लगभग आठ महीने का बच्चा भी शुरुआती स्तर का धोखा देने जैसा व्यवहार दिखा रहा था। प्रोफेसर होइका के अनुसार बच्चों का यह व्यवहार जानबूझकर किसी को नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं होता, बल्कि यह अधिकतर परिस्थितियों से बचने या अपनी इच्छा पूरी करने की कोशिश होती है।
उदाहरण के तौर पर बच्चा डांट से बचने के लिए बहाना बना सकता है या अपनी पसंद की चीज पाने के लिए चालाकी दिखा सकता है। जैसे-जैसे बच्चे की भाषा विकसित होती है और वह दूसरों के सोचने के तरीके को समझने लगता है, वैसे-वैसे उसके झूठ भी ज्यादा जटिल और रचनात्मक हो जाते हैं। अध्ययन में कुल 16 तरह के धोखे या भ्रामक व्यवहारों का उल्लेख किया गया है। इनमें अतिशयोक्ति करना, किसी गलती से इनकार करना, अनसुना करने का नाटक करना और चीजों को छिपाना जैसे तरीके शामिल हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि तीन साल की उम्र तक बच्चे ऐसे व्यवहार अधिक बार और कई अलग-अलग तरीकों से करने लगते हैं।
तेहरान ने संयम बरतते हुए अपनी शक्ति का केवल एक अंश ही इस्तेमाल किया
22 Mar, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान,। ईरान से अमेरिका-इजराइल का संघर्ष जारी है, जिसमें तनाव कम होने के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट मुताबिक कि देश ने ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4 का 66वां चरण शुरू किया है, जिसमें 5 अति-भारी और बहु-युद्धक मिसाइलें तैनात की गई हैं। इसी बीच, पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में ड्रोन और मिसाइल हमलों की खबरें भी सामने आई हैं। आईआरजीसी के मुताबिक ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4 के 66वें चरण में बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई की गई, जिसमें कई मिसाइल प्रणालियों का इस्तेमाल करते हुए इजराइल और क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
रिपोर्ट के मुताबिक इन घटनाक्रमों के बीच, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि इजराइली हमले के जवाब में तेहरान ने अपनी शक्ति का केवल एक अंश ही इस्तेमाल किया है। संयम बरतने का कारण तनाव कम करने का अनुरोध था। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरानी बुनियादी ढांचे को फिर से निशाना बनाया गया तो बिल्कुल भी संयम नहीं बरता जाएगा। यह घटनाक्रम इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच आया है, जहां दोनों पक्ष मिसाइल हमलों और सैन्य अभियानों से चिह्नित एक बढ़ते संघर्ष में उलझे हुए हैं।
इस बीच यूरोपीय नेताओं ने ब्रुसेल्स में युद्ध के कारण बढ़ती ऊर्जा कीमतों से निपटने के लिए हुई बैठक में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और मध्य पूर्व में जल और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों पर रोक लगाने की मांग की है। यूरोपीय परिषद के रूप में सामूहिक रूप से आने-जाने वाले 27 यूरोपीय संघ देशों के सभी प्रमुखों ने एक संयुक्त बयान जारी कर ऊर्जा शिपमेंट को स्थिर करने और युद्धरत पक्षों से तनाव कम करने और अधिकतम संयम बरतने का आह्वान किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक इजराइली सेना ने शुक्रवार को कहा कि उसने द्रुज समुदाय पर हुए हमलों के जवाब में सीरिया में ठिकानों पर हमला किया है। सेना ने कहा कि उसने दक्षिणी सीरिया के स्वेदा में द्रुज आबादी पर हुए हमलों के जवाब में सीरियाई बुनियादी ढांचे पर हमला किया। सीरिया की सरकारी एजेंसी ने हमले की पुष्टि नहीं की, जो ईरान को निशाना बनाकर अमेरिका के साथ चल रहे युद्ध के बीच सीरिया पर इजराइल का पहला हमला है।
इजराइल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने शुक्रवार को पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच नागरिकों के धैर्य की सराहना की और कहा कि जिम्मेदारी और विवेकपूर्ण निर्णय के साथ धीरे-धीरे स्कूल खोलने की दिशा में काम चल रहा है। उन्होंने ये बातें एक्स पर साझा किए गए हिब्रू भाषा के एक वीडियो संदेश में कहीं। इजराइली पीएम ने लोगों के धैर्य के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि हम जिम्मेदारी और विवेकपूर्ण निर्णय के साथ धीरे-धीरे स्कूल खोलने और अपने बच्चों को यथासंभव स्थिरता, सुरक्षा और नियमित दिनचर्या लौटाने के लिए काम कर रहे हैं।
ट्रंप की रणनीति पर सवाल: ईरान युद्ध के लिए 200 अरब डॉलर के बजट पर अमेरिकी संसद में रार
22 Mar, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। ईरान के साथ बढ़ते सैन्य संघर्ष और इसके वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ते प्रतिकूल प्रभावों ने अमेरिकी राजनीति में एक नया भूचाल ला दिया है। व्हाइट हाउस द्वारा युद्ध के लिए प्रस्तावित 200 बिलियन डॉलर (200 अरब डॉलर) से अधिक के अतिरिक्त वित्त पोषण अनुरोध ने रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों ही दलों के सांसदों को आमने-सामने खड़ा कर दिया है। इस भारी-भरकम बजट की मांग और युद्ध की अस्पष्ट समयसीमा को लेकर अमेरिकी कांग्रेस में विभाजन गहरा गया है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस फंड की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा है कि अमेरिकी सेना को अपनी सर्वोच्च शक्ति बनाए रखने के लिए संसाधनों की तत्काल जरूरत है। उनके अनुसार, वैश्विक स्तर पर शीर्ष पर बने रहने के लिए यह एक छोटी कीमत है। हालांकि, उनकी अपनी ही पार्टी के भीतर अमेरिका फर्स्ट की नीति को लेकर विरोधाभास उभर रहा है। कोलोराडो की प्रतिनिधि लॉरेन बोएबर्ट और चिप रॉय जैसे रिपब्लिकन नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि वे किसी भी अनंत युद्ध के लिए करदाताओं का पैसा खर्च करने के पक्ष में नहीं हैं। उनका तर्क है कि जब देश के भीतर लोग आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, तब विदेशी धरती पर अरबों डॉलर खर्च करना तर्कसंगत नहीं है।
खाड़ी क्षेत्र की स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण बनी हुई है। अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। जनरल डैन केन के अनुसार, ए-10 वारथॉग विमान और अपाचे हेलीकॉप्टर ईरानी नौसैनिक संपत्तियों और फास्ट-टैक जलयानों को निशाना बना रहे हैं ताकि महत्वपूर्ण शिपिंग मार्गों को खोला जा सके। इस सैन्य गतिविधि और बुनियादी ढांचे पर हमलों के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है, जिससे दुनिया भर में ऊर्जा संकट का खतरा पैदा हो गया है। विपक्षी डेमोक्रेट नेता और कई वित्तीय संरक्षक अब इस बात पर अड़े हैं कि प्रशासन पहले यह स्पष्ट करे कि इस युद्ध का अंतिम लक्ष्य क्या है और क्या यह 200 अरब डॉलर की राशि आगे चलकर एक ट्रिलियन डॉलर में तो नहीं बदल जाएगी। सीनेट में बहुमत के नेता जॉन थ्यून ने भी बजट पास होने को लेकर अनिश्चितता जताई है। इस बीच, प्रशासन के भीतर ईरानी तेल प्रतिबंधों में ढील देने पर भी चर्चा हो रही है ताकि तेल की कीमतों को स्थिर किया जा सके, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इससे युद्ध के दौरान ईरान की आर्थिक स्थिति और मजबूत हो सकती है। फिलहाल, वॉशिंगटन में इस युद्ध की लागत और नैतिकता पर छिड़ी यह बहस थमने का नाम नहीं ले रही है।
मुनीर बोले-ईरान से इतनी मोहब्बत है तो वहीं चले जाओ, भड़के शिया उलेमाओं ने जताई आपत्ति
22 Mar, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर पाकिस्तान के शिया मुस्लिमों को नफरत की नजर से देखते हैं। इसकी बानगी एक हाई-प्रोफाइल इफ्तार बैठक में देखी गई। जहां जनरल मुनीर ने कहा कि जिन्हे ईरान में गहरी मोहब्बत है वे पाकिस्तान छोड़कर ईरान चलें जाएं, ये उनकी बेहतरी के लिए अच्छा होगा। इस शिया उलेमा भड़क गए और उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि लगता है पाकिस्तान में जिया उल हक का दौर आ गया है।
सैयद जवाद नकवी ने सेना प्रमुख के रवैये की तुलना पूर्व तानाशाह जनरल जिया-उल-हक के दौर से कर दी। उलेमा का आरोप है कि वर्तमान नेतृत्व जिया-उल-हक की तर्ज पर शिया समुदाय पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया है कि सेना की रणनीतिक नीतियों और विदेशी ताकतों को सैन्य ठिकाने देने जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सवाल उठाने वाली आवाजों को कुचलने का प्रयास किया जा रहा है। इस विवाद ने पाकिस्तान के भीतर आंतरिक सुरक्षा और सांप्रदायिक सद्भाव के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है।दरअसल, पाकिस्तान में हाल ही में आयोजित एक हाई-प्रोफाइल इफ्तार बैठक के बाद देश का धार्मिक और राजनीतिक माहौल गरमा गया है। 19 मार्च को हुई इस बैठक में पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर और प्रमुख शिया उलेमा के बीच तीखी बहस और तनावपूर्ण संवाद की खबरें सामने आई हैं। सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान सेना प्रमुख का रवैया काफी सख्त रहा, जहां उन्होंने लगभग एक घंटे तक अपना पक्ष रखा लेकिन उलेमा को अपनी बात कहने या जवाब देने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया।
विवाद का मुख्य केंद्र जनरल मुनीर का वह कथित बयान बना है, जिसमें उन्होंने शिया समुदाय के धार्मिक जुड़ाव पर टिप्पणी करते हुए कहा, अगर आपको ईरान से इतना लगाव है, तो आप वहां चले जाएं। इस बयान ने शिया समुदाय के भीतर गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। समुदाय के नेताओं और उलेमा ने इसे अपनी देशभक्ति पर सीधा प्रहार और अपमानजनक करार दिया है। मौलाना हसनैन अब्बास गर्देजी और अल्लामा नजीर अब्बास तकवी जैसे दिग्गजों ने कहा कि एक संवैधानिक पद पर बैठे अधिकारी के लिए ऐसी भाषा का उपयोग करना अनुचित है। उनका तर्क है कि पाकिस्तान के निर्माण में शिया समुदाय की ऐतिहासिक भूमिका रही है और इराक या ईरान जैसे धार्मिक स्थलों से भावनात्मक जुड़ाव को देशद्रोह या कम देशभक्ति से जोड़कर देखना गलत नैरेटिव है।
डीजीपी अजय सिंघल ने ‘अभेद्य’ ऐप किया लॉन्च, सुरक्षा बढ़ेगी।
21 Mar, 2026 02:41 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। हरियाणा पुलिस द्वारा जबरन वसूली (एक्सटॉर्शन) कॉल्स पर रोक लगाने के लिए विकसित अभेद्य ऐप का आज औपचारिक शुभारंभ किया गया। इस नई पहल के जरिए आम नागरिकों को संदिग्ध कॉल्स की शिकायत दर्ज कराने और समय रहते पुलिस सहायता प्राप्त करने में बड़ी मदद मिलेगी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार अभेद्य ऐप आधुनिक तकनीक पर आधारित है, जो एक्सटॉर्शन कॉल्स की पहचान, रिकॉर्डिंग और ट्रैकिंग में सहायक होगा। इससे पुलिस को त्वरित कार्रवाई करने में आसानी होगी और अपराधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा। हरियाणा पुलिस का मानना है कि इस डिजिटल पहल से नागरिकों में सुरक्षा की भावना मजबूत होगी और साइबर व फोन आधारित अपराधों पर अंकुश लगाने में महत्वपूर्ण सफलता मिलेगी।
डीजीपी की पत्नी को भी आई ‘डिजिटल अरेस्ट’ कॉल
हरियाणा में साइबर अपराध के बढ़ते खतरे के बीच बड़ा खुलासा हुआ है। डीजीपी अजय सिंघल ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट गिरोह अब आम जनता ही नहीं, बल्कि पुलिस अधिकारियों के परिवारों को भी निशाना बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी को भी ऐसी फर्जी कॉल आई, जिससे इस खतरे की गंभीरता साफ हो जाती है। डीजीपी ने बताया कि विदेश से आने वाली संदिग्ध कॉल्स की डिटेल मांगने पर कई बार टेलीकॉम कंपनियां नियमों का हवाला देकर जानकारी देने से मना कर देती हैं, जिससे जांच में दिक्कत आती है। इसके बावजूद हरियाणा पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। अब तक 17 अपराधियों को डिपोर्ट कराया गया, 800 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया और 10 संदिग्धों को डिटेन किया गया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में 178 फिरौती कॉल्स दर्ज हुई थीं, जबकि 2025 में यह घटकर 108 रह गई हैं, जो पुलिस की सख्ती का परिणाम है। झज्जर में 9 साल के बच्चे के अपहरण मामले में 24 घंटे के भीतर बच्चे को सकुशल छुड़ाकर 90 लाख रुपये भी बरामद किए गए। डीजीपी ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट और एक्सटॉर्शन पर लगाम लगाने के लिए ‘अभेद्य ऐप’ तैयार किया गया है। यह ऐप विदेशी नंबरों से आने वाली संदिग्ध कॉल और मैसेज को ब्लॉक करता है। उन्होंने लोगों, खासकर व्यापारियों से इसे डाउनलोड करने की अपील की है। साथ ही बैंकों के साथ मिलकर दो ओटीपी जैसी अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था लागू करने पर भी काम जारी है।
हमलों के बाद अमेरिका की रणनीति पर उठे सवाल
21 Mar, 2026 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध ने अब नया मोड़ ले लिया है। ईरान के दो बड़े हमलों ने न सिर्फ क्षेत्रीय संतुलन बिगाड़ा है, बल्कि अमेरिका की रणनीति को भी हिला दिया है। कतर के गैस प्लांट पर हमला और हिंद महासागर में डिएगो गार्सिया जैसे सुरक्षित सैन्य ठिकाने को निशाना बनाने की कोशिश ने ट्रंप को कहीं न कहीं एक झटका जरूर दे दिया है। यह दोनों इतने बड़े कारण हैं कि ट्रंप को अब युद्ध खत्म करने की बातें कहनी पड़ रही है। ऐसे में आइए विस्तार से समझते हैं, कि ट्रंप इरान के इन दो वार से कैसे नरम पर गए। ट्रंप को पहला बड़ा झटका तब लगा जब ईरान ने कतर के रास लाफान गैस हब पर मिसाइल हमला किया। यह दुनिया के सबसे बड़े एलएनजी उत्पादन केंद्रों में से एक है और वैश्विक गैस सप्लाई का बड़ा हिस्सा यहीं से आता है। इस हमले से उत्पादन क्षमता करीब 17 प्रतिशत तक घट गई और अरबों डॉलर का नुकसान हुआ। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार भी हिल गया।
कतर हमले से अमेरिका को कैसे नुकसान?
कतर के गैस प्लांट में अमेरिकी कंपनियां शामिल, इसलिए सीधा आर्थिक नुकसान।
एलएनजी उत्पादन घटने से वैश्विक गैस सप्लाई प्रभावित हुई।
गैस और ऊर्जा कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई।
यूरोप और एशिया में ऊर्जा संकट गहराया।
भारत समेत कई देशों पर भी असर पड़ा, जिससे वैश्विक दबाव बढ़ा।
अमेरिका की ऊर्जा और आर्थिक रणनीति पर असर पड़ा।
सहयोगी देशों में भी बढ़ सकती है नाराजगी।
अमेरिका पर युद्ध जल्द खत्म करने का दबाव बढ़ा।
खाड़ी देशों में बढ़ सकता था असंतोष
खाड़ी देशों में असंतोष बढ़ने की आशंका इसलिए मजबूत हो गई क्योंकि लंबे समय से ये देश अमेरिका को अपनी सुरक्षा का सबसे बड़ा भरोसेमंद साथी मानते रहे हैं। सऊदी अरब, कतर, यूएई और कुवैत जैसे देशों ने अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को अपने यहां जगह दी, अरबों डॉलर के रक्षा समझौते किए और क्षेत्रीय रणनीति में अमेरिका के साथ खड़े रहे। बदले में उन्हें यह उम्मीद थी कि किसी भी बड़े खतरे की स्थिति में अमेरिका उनकी सुरक्षा की गारंटी देगा। लेकिन हालिया घटनाक्रम ने इस भरोसे को झटका दिया। जब इस्राइल और अमेरिका की कार्रवाई के बाद ईरान ने जवाबी हमले किए, तो निशाना वही खाड़ी देश बने जो अमेरिका के करीबी सहयोगी हैं। कतर के गैस प्लांट पर हमला इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। इससे इन देशों में यह भावना मजबूत हुई कि वे एक ऐसे संघर्ष में घसीटे जा रहे हैं, जिसका फैसला उन्होंने खुद नहीं लिया। इस स्थिति ने अमेरिका की सुरक्षा गारंटी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खाड़ी देशों को अब यह डर सताने लगा है कि कहीं वे बड़े शक्ति संघर्ष में मोहरा न बन जाएं। अगर युद्ध लंबा खिंचता, तो यह असंतोष खुलकर सामने आ सकता था और अमेरिका के साथ उनके रिश्तों में दरार भी पड़ सकती थी।
डिएगो गार्सिया तक पहुंचना ईरान के लिए कितना अहम
डिएगो गार्सिया तक पहुंच बनाना ईरान के लिए सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि बड़ा रणनीतिक संदेश माना जा रहा है। यह ठिकाना अमेरिका और ब्रिटेन का बेहद अहम सैन्य बेस है, जो हिंद महासागर के बीचों-बीच स्थित है और इसे लंबे समय से सुरक्षित माना जाता रहा है। यहां से अमेरिका अपने लंबी दूरी के बमवर्षक विमान, परमाणु पनडुब्बियां और अत्याधुनिक सैन्य संसाधनों का संचालन करता है, जिससे एशिया, अफ्रीका और पश्चिम एशिया में तेजी से कार्रवाई की जा सकती है। ईरान द्वारा इस दूरस्थ और सुरक्षित माने जाने वाले बेस को निशाना बनाने की कोशिश यह दिखाती है कि उसकी मिसाइल क्षमता अब पहले से कहीं ज्यादा बढ़ चुकी है। यह केवल दूरी तय करने की बात नहीं है, बल्कि यह संकेत है कि ईरान अब अमेरिका के सबसे सुरक्षित और रणनीतिक ठिकानों तक भी पहुंच बना सकता है। इसका मनोवैज्ञानिक असर भी बेहद बड़ा है। इससे अमेरिका को यह संदेश गया है कि अब कोई भी ठिकाना पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। साथ ही, यह अमेरिका की सैन्य रणनीति और तैनाती को भी चुनौती देता है। कुल मिलाकर, डिएगो गार्सिया तक पहुंच ईरान की बढ़ती ताकत और बदलते युद्ध संतुलन का स्पष्ट संकेत है।
डिएगो गार्सिया हमला क्यों अहम?
डिएगो गार्सिया को अब तक बेहद सुरक्षित सैन्य ठिकाना माना जाता था।
यह युद्ध क्षेत्रों से काफी दूर स्थित है, इसलिए जोखिम कम समझा जाता था।
ईरान की मिसाइल पहुंच ने इस सुरक्षा की धारणा तोड़ दी।
इससे साबित हुआ कि दूर-दराज के बेस भी अब निशाने पर आ सकते हैं।
अमेरिका को अपनी सुरक्षा और रणनीति पर फिर से सोचने की जरूरत पड़ी।
यह अमेरिका के लिए बड़ा रणनीतिक झटका माना जा रहा है।
ट्रंप क्यों आ रहे बैकफुट पर? सात बिंदु में समझें
कतर गैस प्लांट हमले से वैश्विक ऊर्जा संकट बढ़ गया।
अमेरिकी कंपनियों और आर्थिक हितों को सीधा नुकसान हुआ।
गैस और तेल की कीमतों में तेजी से दबाव बढ़ा।
खाड़ी देशों में अमेरिका को लेकर नाराजगी बढ़ने लगी।
सहयोगी देशों की सुरक्षा गारंटी पर सवाल उठे।
डिएगो गार्सिया जैसे सुरक्षित बेस पर खतरा दिखा, सैन्य जोखिम बढ़ा।
युद्ध लंबा खिंचने पर आर्थिक और रणनीतिक नुकसान का डर बढ़ा।
ईरान के इन हमलों ने यह साफ कर दिया कि यह संघर्ष अब सिर्फ क्षेत्रीय नहीं रहा। ऊर्जा सप्लाई, अंतरराष्ट्रीय बाजार और सैन्य संतुलन सभी प्रभावित हो रहे हैं। इससे पूरी दुनिया में चिंता बढ़ गई है और कई देश युद्धविराम की मांग कर रहे हैं। अब नजर इस बात पर है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होता है या टकराव और बढ़ता है। हालांकि ट्रंप ने नरमी के संकेत दिए हैं, लेकिन जमीनी हालात अभी भी तनावपूर्ण हैं। आने वाले दिनों में यह तय करेगा कि दुनिया शांति की ओर बढ़ेगी या बड़े संघर्ष की ओर।
ईरान की खोर्रमशहर-4 मिसाइल बनी चर्चा का केंद्र
21 Mar, 2026 12:37 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ईरान की मिसाइल क्षमता को लेकर सामने आई नई जानकारी ने वैश्विक सुरक्षा समीकरण को हिला दिया है। 4000 किलोमीटर तक मार करने वाली क्षमता ने यह साफ कर दिया है कि अब यह संघर्ष सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहा। इस एक घटनाक्रम ने दुनिया के बड़े हिस्से, खासकर यूरोप को भी संभावित खतरे के दायरे में ला दिया है।
इस पर विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ईरान की मिसाइलें वास्तव में 4000 किलोमीटर तक पहुंच सकती हैं, तो पेरिस और लंदन जैसे बड़े यूरोपीय शहर भी इसकी जद में आ सकते हैं। इससे नाटो देशों की सोच बदल रही है, क्योंकि अब तक इस संघर्ष को क्षेत्रीय माना जा रहा था, लेकिन अब यह वैश्विक सुरक्षा का मुद्दा बनता दिख रहा है।
कैसे बदला युद्ध का गणित? आसान भाषा में समझें
संघर्ष अब सीमित नहीं रहा... पहले यह टकराव सिर्फ पश्चिम एशिया तक माना जा रहा था, लेकिन 4000 KM की रेंज ने इसे वैश्विक बना दिया।
यूरोप भी दायरे में आया... इतनी दूरी तक मार करने की क्षमता का मतलब है कि पेरिस और लंदन जैसे शहर भी संभावित निशाने में आ सकते हैं।
दूर के बेस भी सुरक्षित नहीं... डिएगो गार्सिया जैसे दूरस्थ और सुरक्षित माने जाने वाले सैन्य ठिकाने भी अब खतरे में हैं।
डिफेंस सिस्टम पर दबाव... उन्नत मिसाइलों को रोकना मुश्किल हो रहा है, जिससे अमेरिका और नाटो के मिसाइल डिफेंस सिस्टम की परीक्षा हो रही है।
रणनीति बदलने को मजबूर देश... नाटो और पश्चिमी देशों को अब अपनी सुरक्षा और सैन्य रणनीति फिर से तय करनी पड़ रही है।
युद्ध का दायरा बढ़ा... अब सिर्फ जमीन या सीमित इलाकों तक लड़ाई नहीं, बल्कि लंबी दूरी से हमले का दौर शुरू हो गया है।
ऊर्जा और अर्थव्यवस्था पर असर... ऐसे हमलों से तेल और गैस सप्लाई प्रभावित होती है, जिससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है।
मनोवैज्ञानिक दबाव बढ़ा... दुश्मन की इतनी लंबी पहुंच से देशों में डर और अनिश्चितता बढ़ती है, जो खुद एक बड़ी रणनीतिक ताकत होती है।
खोर्रमशहर-4 कितनी खतरनाक?
यह ईरान की बेहद शक्तिशाली बैलिस्टिक मिसाइल मानी जाती है।
लिक्विड फ्यूल (तरल ईंधन) से संचालित होती है।
एक टन से ज्यादा वजन का वारहेड ले जाने में सक्षम है।
क्लस्टर म्यूनिशन (एक साथ कई विस्फोट) का विकल्प मौजूद है।
लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता रखती है।
हवा में दिशा बदलने (मैन्युवरेबल) की तकनीक से लैस मानी जाती है।
इसी वजह से इसे इंटरसेप्ट करना और रोकना काफी मुश्किल हो जाता है।
क्यों अहम है डिएगो गार्सिया बेस?
डिएगो गार्सिया अमेरिका और ब्रिटेन का एक अहम सैन्य ठिकाना है, जो हिंद महासागर में स्थित है। यह बेस लंबे समय से अफगानिस्तान, इराक और पश्चिम एशिया में सैन्य अभियानों के लिए इस्तेमाल होता रहा है। यहां से भारी बमवर्षक विमान और सैन्य उपकरण तेजी से तैनात किए जा सकते हैं।
दूर होते हुए भी कैसे बना निशाना?
इस बेस की सबसे बड़ी ताकत इसकी दूरी थी, क्योंकि यह सामान्य युद्ध क्षेत्रों से काफी दूर है। लेकिन ईरान द्वारा इसे निशाना बनाने की कोशिश ने यह साबित कर दिया कि अब कोई भी ठिकाना पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। इससे साफ संकेत मिला है कि ईरान दूर-दराज के रणनीतिक ठिकानों को भी निशाना बना सकता है।
मिसाइल डिफेंस सिस्टम की परीक्षा
इस हमले के दौरान अमेरिकी नौसेना ने एसएम-3 मिसाइल डिफेंस सिस्टम से इंटरसेप्शन की कोशिश की। यह सिस्टम सीधे टकराकर मिसाइल को नष्ट करता है। हालांकि इस घटना ने दिखाया कि आधुनिक और उन्नत मिसाइलों को रोकना अभी भी आसान नहीं है और सुरक्षा तंत्र के सामने बड़ी चुनौती है।
ईरान की बढ़ती आक्रामक रणनीति
ईरान ने हाल के दिनों में खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा ठिकानों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है। कुवैत के मीना अल-अहमदी रिफाइनरी पर ड्रोन हमले की खबरें सामने आई हैं। इसके साथ ही ईरान ने उन देशों को चेतावनी दी है जो अमेरिका को समर्थन दे रहे हैं। इसके साथ ही कतर के गैस प्लांट पर हुए हमले के बाद से भी कहीं न कहीं अमेरिका बैकफुट पर आया है।
अमेरिका की बढ़ती सैन्य तैयारी
अमेरिका ने इस बढ़ते खतरे को देखते हुए अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। अतिरिक्त युद्धपोत और हजारों मरीन तैनात किए गए हैं। हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने सैन्य अभियान कम करने की बात कही है, लेकिन जमीनी स्तर पर तैयारियां लंबे टकराव की ओर इशारा कर रही हैं। हालांकि, ट्रंप ने युद्ध को थामने की भी बात कह चुके हैं। उनका कहना है कि हमारा लक्ष्य पूरा हो चुका है। अब ह युद्ध रोकने पर विचार कर सकते हैं।
वैश्विक खतरे में बदलता संघर्ष
यह घटनाक्रम दिखाता है कि यह संघर्ष अब क्षेत्रीय नहीं रहा। मिसाइल क्षमता, ऊर्जा संकट और सैन्य टकराव ने इसे वैश्विक खतरे में बदल दिया है। आने वाले समय में यह तय करेगा कि दुनिया कूटनीति की ओर बढ़ेगी या बड़े युद्ध की तरफ।
क्षेत्र में सुरक्षा हालात को देखते हुए लिया गया फैसला
21 Mar, 2026 11:38 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बगदाद|इराक में नाटो मिशन ने सुरक्षा चिंताओं के कारण अपने कर्मियों की अस्थायी वापसी शुरू कर दी है। एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी के हवाले से इराकी न्यूज एजेंसी (आईएनए) ने यह जानकारी दी। रिपोर्ट में इस कदम को एक अस्थायी उपाय बताया गया है, जो पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और मिशन के सदस्यों की सुरक्षा के लिए उठाया गया है। उसने यह भी कहा कि युद्ध समाप्त होते ही और इराक में सुरक्षा स्थिति स्थिर होने पर नाटो सैनिक वापस लौट आएंगे।
यह नाटो का गैर लड़ाकू मिशन
इराक में नाटो मिशन एक गैर-लड़ाकू सलाहकार मिशन है, जो 2018 में इराकी सरकार के अनुरोध पर स्थापित किया गया था ताकि उसके सुरक्षा क्षेत्र को मजबूत किया जा सके। यह गैर-लड़ाकू मिशन 2018 में इराकी अधिकारियों के अनुरोध पर बनाया गया था, ताकि देश को अपनी सुरक्षा बलों को मजबूत करने और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में मदद मिल सके। नाटो कर्मियों ने इराक के सुरक्षा बलों के सदस्यों को प्रशिक्षण दिया, लेकिन गठबंधन के अनुसार वे उनके साथ युद्ध अभियानों में तैनात नहीं थे।
अमेरिकी कमांडर ने कहा धन्यवाद
यूरोप में नाटो बलों के कमांडर, अमेरिकी वायु सेना के जनरल एलेक्सस ग्रिनकेविच ने नाटो सैनिकों की इराक में तैनाती इराक और सहयोगियों का धन्यवाद किया। ग्रिनकेविच ने शुक्रवार को एक बयान में कहा, 'मैं नाटो मिशन, इराक के समर्पित पुरुषों और महिलाओं का भी धन्यवाद करना चाहता हूं, जिन्होंने इस अवधि के दौरान अपना मिशन जारी रखा। वे सच्चे पेशेवर हैं।' यह अस्थायी वापसी 28 फरवरी से ईरान पर अमेरिका-इस्राइल के संयुक्त हमलों के बाद बढ़े तनाव के बीच हो रही है, जिसके जवाब में ईरान और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों ने पूरे मध्य पूर्व में इस्राइल और अमेरिकी हितों पर हमले किए।
10-15 गाड़ियों की भिड़ंत, हादसे में सात लोग घायल।
21 Mar, 2026 11:08 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पानीपत (हरियाणा)। पानीपत में शनिवार सुबह अचानक आई धुंध में पानीपत में सिवाह स्टैंड के पास जीटी रोड हाईवे पर वाहनों की टक्कर हो गई। एक साथ 10-15 वाहन आपस में भिड़ गए। हादसे में कई वाहन क्षतिग्रस्त हुए। जिससे जीटी रोड पर लंबा जाम लग गया। हादसे की सूचना पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और क्षतिग्रस्त वाहनों का हाईवे से हटाया। हादसे में तीन बच्चों समेत 7 लोग घायल भी हुए हैं। जिन्हें जिला नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हादसा सुबह करीब आठ बजे जीटी रोड हाईवे पर हुआ। बताया जा रहा है कि धुंध के कारण दिल्ली की ओर से आ रही एक कार की सामने चल रही कार से टक्कर हो गई। इसके बाद पीछे से वाहन आते रहे और एक दूसरे से टकराते रहे। इस टक्कर में करीब 15 वाहन क्षतिग्रस्त हुए। जिनमें 10 वाहनों ज्यादा क्षतिग्रस्त हुए। हादसे पर पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर पहले घायलों को अस्पताल पहुंचाया। इसके बाद क्रेन की मदद से सभी वाहनों को एक साइड किया। बाद में हाईवे से हटाकर रास्ता साफ कराया। इस दौरान हाईवे पर करीब एक घंटे तक जाम लगा रहा।
मार्च में दिसंबर जैसा एहसास, ठंड ने बढ़ाई कंपकंपी
21 Mar, 2026 10:04 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणा। के विभिन्न जिलों में पिछले कुछ दिनों से जारी मौसम के बदलाव ने शनिवार की सुबह दिसंबर की सर्दी जैसा माहौल बना दिया। कई इलाकों में घना कोहरा और धुंध छा गई, जिससे दृश्यता काफी कम हो गई और लोगों को ठंड का अहसास हुआ। हाल ही में हुई बारिश के बाद अब कोहरे ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है, जबकि किसानों के लिए यह बदलाव फायदेमंद साबित हो रहा है। कुरुक्षेत्र में अल सुबह से ही घना कोहरा छाया रहा, जहां दृश्यता मात्र 25 मीटर तक सीमित रही। बादल छाए होने से अधिकतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 13 डिग्री दर्ज किया गया। दिन में हल्की धूप निकलने की संभावना है, लेकिन मौसम ठंडक भरा बना रहेगा। पानीपत में तीन दिनों की बारिश के बाद शनिवार को सुबह से तेज धुंध और कोहरा देखा गया। अधिकतम तापमान 26 डिग्री और न्यूनतम 14 डिग्री तक गिर गया। मौसम विशेषज्ञ डॉ. आशीष कुमार के अनुसार, अगले दो दिन बादल छाए रहेंगे और सोमवार को फिर बारिश हो सकती है। बहादुरगढ़ में गुरुवार-शुक्रवार को हुई बारिश के बाद शनिवार सुबह घना कोहरा छा गया। दृश्यता कम होने से वाहन चालकों को हेडलाइट जलाकर धीमी रफ्तार से चलना पड़ा। काम पर जाने वाले लोगों को भी काफी दिक्कत हुई। मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक ऐसा ही मौसम बने रहने की उम्मीद है। फतेहाबाद जिले में वीरवार की हल्की बारिश के बाद पूरा इलाका गहरी धुंध की चपेट में रहा। दृश्यता कम होने से नेशनल हाईवे पर वाहनों की रफ्तार धीमी पड़ी और चालकों को लाइटें जलानी पड़ीं। अधिकतम तापमान 27 डिग्री जबकि न्यूनतम 15 डिग्री दर्ज हुआ। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यह धुंध और तापमान में गिरावट गेहूं की फसल के लिए वरदान साबित हो रही है। ओस की बूंदें फसल को प्राकृतिक नमी दे रही हैं, जिससे दानों की चमक और गुणवत्ता बढ़ेगी। पैदावार में इजाफे की उम्मीद जताई जा रही है। कृषि विभाग ने किसानों को मौसम का फायदा उठाने और सावधानी बरतने की सलाह दी है। झज्जर में भी शनिवार सुबह घना कोहरा छाया रहा, जहां साढ़े 8 बजे तक दृश्यता 30 मीटर तक रही। लोगों को एक बार फिर सर्दी का अहसास हुआ और कई लोग गर्म कपड़े पहनकर नजर आए। अधिकतम तापमान 26 डिग्री और न्यूनतम 24 डिग्री दर्ज किया गया। हालांकि दिन चढ़ने के साथ कोहरा कुछ कम हुआ। बादली क्षेत्र में दो दिनों की रुक-रुक कर बारिश से खेती-बाड़ी को नुकसान पहुंचा है। किसानों के अनुसार सरसों की खड़ी फसल खराब हो गई है और गेहूं के उत्पादन पर भी बुरा असर पड़ा है। क्षेत्र में 15 से 18 एमएम तक बारिश दर्ज की गई। हरियाणा में पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से मौसम में यह बदलाव आया है। मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों में बादल, हल्की बारिश और कोहरे की स्थिति बनी रह सकती है। लोगों को सड़कों पर सतर्क रहने और वाहन धीमी गति से चलाने की सलाह दी जा रही है।
पश्चिम एशिया संकट के बीच पश्चिम एशिया में शांति की चर्चा
21 Mar, 2026 09:44 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन|पश्चिम एशिया में चल रहे भीषण संघर्ष के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने बड़ा संकेत दिया है। उन्होंने कहा है कि ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान को धीरे-धीरे कम करने पर विचार किया जा रहा है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब इस्राइल और ईरान के बीच हमले लगातार बढ़ रहे हैं और हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अमेरिका अपने सैन्य लक्ष्यों को लगभग हासिल कर चुका है। उन्होंने साफ किया कि अमेरिका का मकसद ईरान की मिसाइल ताकत को खत्म करना, रक्षा ढांचे को कमजोर करना और उसे परमाणु क्षमता हासिल करने से रोकना है। ट्रंप के मुताबिक अब हालात ऐसे हैं कि युद्ध को धीरे-धीरे खत्म करने पर विचार किया जा सकता है।
गैस फील्ड हमला बना बड़ा मोड़
इस हफ्ते इस्राइल ने ईरान के एक अहम गैस फील्ड पर हमला किया, जिससे हालात और बिगड़ गए। इसके जवाब में ईरान ने कतर में दुनिया के सबसे बड़े एलएनजी प्लांट को निशाना बनाया। इस टकराव का सीधा असर वैश्विक बाजार पर पड़ा और तेल-गैस की कीमतों में तेज उछाल देखा गया।
ट्रंप के पांच बड़े लक्ष्य क्या हैं?
ईरान की मिसाइल क्षमता और लॉन्च सिस्टम को पूरी तरह खत्म करना।
ईरान के रक्षा उद्योग को कमजोर और नुकसान पहुंचाना।
ईरान की नौसेना और वायुसेना की ताकत को खत्म करना, एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम सहित।
ईरान को परमाणु हथियार क्षमता हासिल करने से हर हाल में रोकना।
इस्राइल, सऊदी अरब, कतर, यूएई समेत सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
जंग के बीच बढ़ता नुकसान
ईरान के जवाबी हमलों में एक अमेरिकी F-35 लड़ाकू विमान को नुकसान पहुंचने की खबर सामने आई है। हालांकि पायलट सुरक्षित बताया गया है। इस बीच तेल की बढ़ती कीमतों और सप्लाई संकट को देखते हुए अमेरिका ने समुद्र में फंसे ईरानी तेल पर अस्थायी राहत देने का फैसला किया है, ताकि वैश्विक बाजार में संतुलन बनाया जा सके।
क्या सच में थमेगी जंग?
ट्रंप के बयान से यह संकेत जरूर मिला है कि अमेरिका युद्ध को लंबा खींचने के मूड में नहीं है, लेकिन जमीनी हालात अभी भी तनावपूर्ण हैं। ईरान और इस्राइल के बीच हमले जारी हैं और किसी भी समय हालात और बिगड़ सकते हैं। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि क्या कूटनीतिक प्रयास आगे बढ़ते हैं या संघर्ष और गहराता है।
शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों पर पुलिस कार्रवाई, CM हाउस के बाहर तनाव
बालाकोट-नोटबंदी पर राहुल का तंज, संसद में हंगामा
