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जियो न्यूज पर गिरी गाज, 15 दिन के लिए लगाया गया बैन
30 Jun, 2026 11:47 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कराची: पाकिस्तान के मीडिया जगत से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां देश के सबसे बड़े और लोकप्रिय उर्दू समाचार चैनलों में से एक 'जियो न्यूज' पर 15 दिनों का कड़ा प्रतिबंध लगा दिया गया है। पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेगुलेटरी अथॉरिटी (पेमरा) ने नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए चैनल के प्रसारण लाइसेंस को दो हफ्तों के लिए सस्पेंड करने का आदेश जारी किया है। नियामक संस्था का आरोप है कि चैनल द्वारा मुहर्रम के पवित्र महीने के दौरान एक ऐसा कार्यक्रम प्रसारित किया गया, जिससे देश में सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने और धार्मिक भावनाएं आहत होने की गंभीर आशंका पैदा हो गई थी।
विवादित कार्यक्रम पर नियामक की सख्ती
पेमरा के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई आगामी 26 जून को प्रसारित हुए 'सफर-ए-इश्क' नामक विशेष कार्यक्रम के संदर्भ में की गई है। नियामक संस्था का कहना है कि इस शो के दौरान कुछ ऐसे दृश्य और धार्मिक रीति-रिवाज दिखाए गए, जो पाकिस्तान के सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक ताने-बाने की संवेदनशीलता के बिल्कुल विपरीत थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए अथॉरिटी ने जियो न्यूज प्रबंधन को तुरंत अपने संस्थान के भीतर एक उच्च स्तरीय आंतरिक जांच शुरू करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, पूरे विवाद को अंतिम फैसले और आगे की समीक्षा के लिए काउंसिल ऑफ कंप्लेंट्स (शिकायत परिषद) के पास भेज दिया गया है।
चैनल ने मांगी माफी और हटाया कंटेंट
नियामक संस्था के इस कड़े रुख और निलंबन की कार्रवाई के तुरंत बाद जियो न्यूज बैकफुट पर आ गया है। चैनल प्रबंधन ने त्वरित कदम उठाते हुए उस विवादित कार्यक्रम को टेलीविजन स्क्रीन के साथ-साथ अपनी वेबसाइट और यूट्यूब सहित सभी डिजिटल प्लेटफॉर्मों से पूरी तरह से हटा दिया है। इसके साथ ही चैनल ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इस पूरे घटनाक्रम पर जनता और प्रशासन से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है।
संपादकीय चूक और चैनल की सफाई
जियो न्यूज ने इस पूरे विवाद को एक अनजानी 'संपादकीय चूक' करार दिया है। चैनल प्रशासन ने अपनी सफाई में स्पष्ट किया कि उनका मकसद किसी भी तरह से सांप्रदायिक तनाव फैलाना या किसी विशेष धार्मिक विचारधारा का प्रचार-प्रसार करना नहीं था। इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल सूचनात्मक था, जिसके तहत इराक और कुछ अन्य मध्य-पूर्वी देशों में शिया समुदाय द्वारा निभाई जाने वाली स्थानीय और पारंपरिक धार्मिक रीतियों को दर्शकों के सामने केवल जानकारी के लिए पेश किया गया था। बहरहाल, इस बड़ी चूक ने चैनल को एक पखवाड़े के लिए ऑफ-एयर कर दिया है।
संगठन को एकजुट करने में जुटे संजय दत्त, बड़े नेताओं संग करेंगे अहम बैठक
30 Jun, 2026 10:43 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। हरियाणा कांग्रेस के नव नियुक्त प्रभारी संजय सतीशचंद्र दत्त ने राज्य में संगठन का कामकाज पूरी तरह से संभाल लिया है। महाराष्ट्र से दिल्ली पहुंचने के बाद संजय दत्त ने लगातार दो दिनों तक कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की और हरियाणा की राजनीतिक स्थिति को लेकर जरूरी दिशा-निर्देश प्राप्त किए। अब अपने अगले कदम के तहत वे मंगलवार और बुधवार को नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में हरियाणा के तमाम दिग्गज कांग्रेस नेताओं से मुलाकात करने जा रहे हैं। उन्होंने दो दिनों तक दिल्ली में रहने की आधिकारिक सूचना हरियाणा के सभी प्रमुख नेताओं को भेज दी है, ताकि राज्य के संगठन को लेकर गहन मंथन किया जा सके। गौरतलब है कि निवर्तमान प्रभारी बीके हरिप्रसाद को कर्नाटक का अध्यक्ष बनाए जाने के बाद संजय दत्त को यह नई और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।
वरिष्ठ नेताओं को एकजुट करने का रहेगा जिम्मा
संजय दत्त के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती राज्य में अलग-अलग गुटों में बंटे कांग्रेस नेताओं को एक मंच पर लाने की है। अगर वरिष्ठता के लिहाज से देखा जाए, तो जिन नेताओं को एकजुट करने की जिम्मेदारी उन्हें मिली है, वे सभी राजनीति में उनसे काफी सीनियर हैं। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव और पूर्व विधान परिषद सदस्य रह चुके संजय दत्त को अब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला, पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा, पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह और पूर्व सिंचाई मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव जैसे कद्दावर नेताओं के साथ तालमेल बिठाकर काम करना होगा। इनमें से रणदीप सिंह सुरजेवाला वर्तमान में कर्नाटक और कुमारी सैलजा उत्तराखंड कांग्रेस की प्रभारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं।
मैराथन बैठकों का दौर और चंडीगढ़ में राज्य स्तरीय बैठक की तैयारी
दिल्ली में होने वाली इन मुलाकातों का शेड्यूल भी तय कर दिया गया है। कांग्रेस प्रभारी संजय दत्त नई दिल्ली में मंगलवार को सुबह दस बजे से लेकर शाम साढ़े सात बजे तक और बुधवार को शाम साढ़े पांच बजे तक हरियाणा कांग्रेस के नेताओं से आमने-सामने बातचीत करेंगे। इन मैराथन बैठकों के दौरान मुख्य रूप से कांग्रेस को एकजुट करने के सुझावों, एसआईआर अभियान, प्रदेश कमेटी में नई नियुक्तियों और ब्लॉक अध्यक्षों के गठन जैसे बेहद जरूरी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होना तय माना जा रहा है। नई दिल्ली में नेताओं की राय जानने और इस पूरी रूपरेखा को तय करने के बाद, नए प्रभारी जल्द ही चंडीगढ़ में हरियाणा कांग्रेस की एक बड़ी राज्य स्तरीय बैठक भी बुला सकते हैं।
संगठनात्मक अनुभव और निष्पक्ष छवि बनेगी ताकत
संजय सतीशचंद्र दत्त महाराष्ट्र कांग्रेस के एक बेहद अनुभवी नेता हैं और लंबे समय तक संगठनात्मक कार्यों से जुड़े रहे हैं। इसी जमीनी अनुभव को देखते हुए पार्टी आलाकमान ने उन्हें हरियाणा जैसे राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण राज्य का प्रभार सौंपा है। उनके सामने अब हरियाणा कांग्रेस के संगठन को नए सिरे से सक्रिय करने, आपसी गुटबाजी पर पूरी तरह नियंत्रण पाने, जिला और ब्लॉक स्तर पर कमेटियों को मजबूत करने के साथ-साथ आगामी चुनावी तैयारियों को गति देने का बड़ा लक्ष्य है। वे इससे पहले तमिलनाडु और मध्य प्रदेश के सह-प्रभारी के रूप में भी शानदार काम कर चुके हैं। हरियाणा की राजनीति में किसी भी स्थानीय गुट से सीधा जुड़ाव न होना और उनकी निष्पक्ष छवि ही इस समय उनकी सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही है।
बिल्डिंग मालिकों के लिए अहम अपडेट, ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट के नियम हुए और कड़े
30 Jun, 2026 10:18 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गुरुग्राम: हरियाणा सरकार ने प्रदेश के रियल एस्टेट सेक्टर और भवन निर्माण नियमों को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार की तरफ से हरियाणा बिल्डिंग कोड के अंतर्गत हाल ही में किए गए संशोधनों को जमीन पर उतारने के लिए नई गाइडलाइन जारी कर दी गई है। इस नई व्यवस्था को पूरी तरह से ऑनलाइन और जवाबदेह बनाने के लिए टाउन प्लानिंग मुख्यालय ने एक विशेष पोर्टल पर काम करना शुरू कर दिया है। इस डिजिटल बदलाव का सबसे बड़ा फायदा आम जनता को होगा क्योंकि अब सभी रिहायशी इमारतों के ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट यानी ओसी सीधे वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रहेंगे।
आधी-अधूरी इमारतों को सर्टिफिकेट मिलने पर लगेगी पूरी रोक
इस नए पोर्टल के अस्तित्व में आने के बाद भ्रष्टाचार और मनमानी पर काफी हद तक लगाम लग सकेगी। अब तक देखने में आता था कि कई बिल्डर या मकान मालिक अधूरी इमारतों का भी ओसी हासिल कर लेते थे, जिससे वहां रहने आने वाले लोगों को बुनियादी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। सरकार के इस सख्त कदम के बाद अब बिना काम पूरा किए ओसी जारी करना नामुमकिन हो जाएगा क्योंकि पोर्टल पर हर जानकारी पूरी पारदर्शिता के साथ दर्ज होगी और कोई भी नागरिक उसे आसानी से देख सकेगा।
हाई रिस्क टावरों के लिए पैनल वाले आर्किटेक्ट ही होंगे जिम्मेदार
सुरक्षा के लिहाज से हाई रिस्क वाली ऊंची इमारतों और ग्रुप हाउसिंग टावरों के लिए सरकार ने बेहद कड़े नियम बनाए हैं। नई व्यवस्था के तहत इन बड़े प्रोजेक्ट्स को ओसी जारी करने का अधिकार सिर्फ उन्हीं आर्किटेक्ट्स को होगा जो कम से कम पांच साल के अनुभव के साथ सरकार के विशेष पैनल में शामिल होंगे। इसके लिए विभाग जल्द ही योग्य और अनुभवी आर्किटेक्ट्स का एक आधिकारिक पैनल तैयार करने की प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है, जिससे बहुमंजिला इमारतों की निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा को पूरी तरह सुनिश्चित किया जा सके।
व्यवस्था पूरी होने तक पुरानी गाइडलाइन के अनुसार ही जारी होंगे नक्शे
सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि जब तक नया डिजिटल पोर्टल पूरी तरह बनकर तैयार नहीं हो जाता और आर्किटेक्ट्स के पैनल की चयन प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक जनता को परेशान होने की जरूरत नहीं है। इस बीच के समय में विभाग ने स्पष्ट गाइडलाइन दी है कि संशोधन में शामिल कई नई व्यवस्थाएं तभी से लागू मानी जाएंगी जब इनका बुनियादी ढांचा तैयार हो जाएगा। तब तक राज्य में भवनों के नक्शे पास करने और ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट जारी करने का काम पहले से तय नियमों के मुताबिक ही सामान्य रूप से चलता रहेगा।
यूरोप में आसमान से बरस रही आग, कई देशों में रेड अलर्ट घोषित
30 Jun, 2026 10:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रोम: यूरोपीय महाद्वीप इन दिनों भीषण प्राकृतिक आपदा का सामना कर रहा है, जहां पिछले एक सप्ताह से जारी रिकॉर्ड तोड़ गर्मी ने जनजीवन को बुरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। इस जानलेवा हीटवेव (लू) के कारण पूरे यूरोप में अब तक सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई देशों के जंगलों में भीषण आग लगने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। मौसम वैज्ञानिकों ने चिंता जताते हुए चेतावनी दी है कि आगामी सप्ताह की शुरुआत से फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों में तापमान एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच सकता है, जहां पहले से ही गर्मी ने पिछले कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
इटली के 22 प्रमुख शहरों में रेड अलर्ट
यूरोप को झुलसाने वाली इस भीषण लू का केंद्र अब इटली और बाल्कन क्षेत्र के देश बन चुके हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए इटली के मौसम विभाग ने उत्तर में स्थित बोलजानो से लेकर सुदूर दक्षिण के सिसिली द्वीप पर बसे पलेर्मो तक, देश के 22 बड़े शहरों में 'रेड हीट वॉर्निंग' यानी अत्यधिक भीषण गर्मी का अलर्ट जारी किया है। प्रशासन ने नागरिकों को दोपहर के समय घरों से बाहर न निकलने और स्वास्थ्य के प्रति विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
वेटिकन सिटी में भी दिखा चिलचिलाती धूप का असर
इस ऐतिहासिक गर्मी का सीधा असर ईसाई धर्म के सबसे पवित्र स्थलों में से एक, वेटिकन सिटी में भी साफ तौर पर महसूस किया गया। यहां 'सेंट्स पीटर एंड पॉल' के पावन त्योहार के अवसर पर पोप लियो का पारंपरिक 'एंजेलस' संदेश सुनने के लिए दुनिया भर से भारी संख्या में श्रद्धालु और तीर्थयात्री एकत्रित हुए थे। इस दौरान चिलचिलाती धूप और असहनीय तापमान से बचने के लिए वहां मौजूद लोग लगातार छतरियों, पानी और पोर्टेबल पंखों का सहारा लेते हुए खुद को सुरक्षित रखने की कोशिश करते नजर आए।
अदालत के फैसले से ट्रंप को झटका, फेड गवर्नर को नहीं हटाया जा सकेगा
30 Jun, 2026 09:43 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन डीसी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कार्यकारी शक्तियों और केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता के बीच चल रहे टकराव में देश की सर्वोच्च अदालत ने एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक कड़े मुकाबले वाले 5-4 के बहुमत से ट्रंप प्रशासन की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसके जरिए फेडरल रिजर्व बोर्ड की गवर्नर लिसा कुक को उनके पद से हटाने का प्रयास किया जा रहा था। साल 1913 में फेडरल रिजर्व की स्थापना के बाद के इतिहास में यह पहला ऐसा मौका है, जब किसी अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा केंद्रीय बैंक के किसी शीर्ष अधिकारी को बर्खास्त करने की कोशिश को सर्वोच्च न्यायालय ने सीधे तौर पर नाकाम कर दिया हो।
न्यायालय ने पलटी ट्रंप सरकार की दलील
नौ सदस्यीय खंडपीठ ने ट्रंप प्रशासन के उस अनुरोध को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया, जिसमें निचली अदालत के उस आदेश को रद्द करने की मांग की गई थी जिसने लिसा कुक की तत्काल बर्खास्तगी पर रोक लगाई थी। अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने फेड की स्वतंत्रता पर लगातार सवाल उठाए हैं और अपनी प्रशासनिक शक्तियों के दायरे को बढ़ाने की कोशिश की है। लिसा कुक फेडरल रिजर्व बोर्ड के उन सात सदस्यों में शामिल हैं, जो दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था यानी अमेरिका की मौद्रिक नीतियां निर्धारित करने में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। उन्हें साल 2022 में तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडेन ने नियुक्त किया था और उनका आधिकारिक कार्यकाल साल 2038 तक सुरक्षित है।
ट्रंप की सोशल मीडिया पर नई चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट से लगे इस बड़े कानूनी झटके के बाद भी राष्ट्रपति ट्रंप के तेवर ढीले नहीं पड़े हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अदालत के इस फैसले को केवल एक प्रक्रियात्मक निर्णय करार दिया और लिसा कुक के खिलाफ आगे भी कदम उठाने का संकल्प दोहराया। ट्रंप ने लिखा कि वे जल्द ही उचित कानूनी रास्ता अपनाएंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि देश के महत्वपूर्ण वित्तीय फैसले लेने वाली संस्थाओं में कोई ऐसा व्यक्ति न रहे जिस पर आरोप हों। राष्ट्रपति ने कुक पर धोखाधड़ी के गंभीर आरोप लगाए हैं, हालांकि ये आरोप अब तक किसी भी कानूनी मंच पर साबित नहीं हो सके हैं।
आरोपों के पीछे की असली वजह
फेडरल रिजर्व की पहली अश्वेत महिला गवर्नर लिसा कुक ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका साफ कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप मौद्रिक नीतियों पर उनके साथ चल रहे वैचारिक मतभेदों के कारण उन्हें पद से हटाना चाहते हैं और इन पुराने आरोपों को महज एक बहाने के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। गौरतलब है कि ट्रंप ने 25 अगस्त 2025 को सोशल मीडिया पर एक बर्खास्तगी पत्र साझा कर कुक को हटाने की मुहिम शुरू की थी। इसके बाद जिला न्यायाधीश जिया कॉब ने अपने फैसले में कहा था कि बिना किसी पूर्व नोटिस या निष्पक्ष सुनवाई के इस तरह का कदम उठाना तय कानूनी प्रक्रिया का सीधा उल्लंघन है। न्यायाधीश ने यह भी स्पष्ट किया था कि जिन आरोपों का जिक्र किया जा रहा है, वे कुक के पद संभालने से भी पहले के हैं और फेडरल रिजर्व अधिनियम के तहत किसी अधिकारी को हटाने का ठोस कारण नहीं बनते। इस फैसले को बाद में कोलंबिया सर्किट अपील अदालत और अब सुप्रीम कोर्ट ने भी सही ठहराया है।
फेडरल रिजर्व पर बढ़ता नियंत्रण
वैश्विक अर्थव्यवस्था की ब्याज दरें तय करने वाले दुनिया के सबसे ताकतवर केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व पर अपनी पकड़ मजबूत करना ट्रंप की वापसी के बाद से ही उनके एजेंडे में रहा है। पूर्व फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल का आठ साल का कार्यकाल इसी वर्ष 15 मई को समाप्त हुआ था। उनकी विदाई के बाद ट्रंप ने अपनी पसंद के अधिकारी केविन वॉर्श को इस पद के लिए नामित किया था, जिन्हें 13 मई को अमेरिकी सीनेट से मंजूरी मिल गई थी। इसके बाद वॉर्श ने 22 मई को नए फेड चेयरमैन के रूप में अपनी शपथ ली थी, लेकिन लिसा कुक के मामले में आए अदालत के इस नए फैसले ने ट्रंप की इस राह में एक बड़ी कानूनी दीवार खड़ी कर दी है।
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच दोहा वार्ता पर विरोधाभासी दावे
30 Jun, 2026 09:08 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां अमेरिका और ईरान के बीच जारी हालिया गतिरोध और गंभीर तनाव के बीच भी पर्दे के पीछे से बातचीत के रास्ते खुले रखने के प्रयास किए जा रहे हैं। दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य करने और विवादित मुद्दों को सुलझाने के लिए तकनीकी स्तर की वार्ता का अगला दौर आयोजित करने की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
दोहा बनेगा कूटनीति का नया केंद्र
इस बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण बातचीत के लिए कतर की राजधानी दोहा को चुना गया है। रणनीतिक सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के प्रतिनिधि दोहा में आमने-सामने बैठकर तकनीकी मसलों पर चर्चा करेंगे। हालांकि, वैश्विक परिस्थितियों और सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए इस बैठक की सटीक तारीख अभी तक तय नहीं की गई है, लेकिन माना जा रहा है कि इस पर जल्द ही सहमति बन जाएगी।
तनाव के बीच पर्दे के पीछे के प्रयास
पिछले कुछ समय से अमेरिका और ईरान के बीच रणनीतिक और राजनीतिक मोर्चे पर कड़वाहट काफी बढ़ गई है, जिससे मध्य-पूर्व सहित वैश्विक स्तर पर चिंता की स्थिति बनी हुई है। ऐसे माहौल में इस बैक-चैनल डिप्लोमेसी (पर्दे के पीछे की कूटनीति) को बेहद अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीकी स्तर की यह वार्ता सीधे तौर पर बड़े राजनीतिक मुद्दों को हल न भी करे, तो भी यह भविष्य में किसी बड़े टकराव को टालने और दोनों पक्षों के बीच संवादहीनता को खत्म करने में एक मजबूत सेतु का काम कर सकती है।
रास तनुरा में अरामको हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त, सभी 14 लोगों की गई जान
30 Jun, 2026 08:11 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रियाद : मोदी 3.0 सरकार के पहले संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर जहां कई मंत्रियों की छुट्टी होने की अटकलें लगाई जा रही हैं, वहीं शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के भविष्य को लेकर भी चर्चाएं गर्म हैं। हाल ही में हुए नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक विवाद के बाद सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक उनके इस्तीफे की मांग उठ रही है। हालांकि, राजनीतिक जानकारों और वर्तमान परिस्थितियों के आकलन के अनुसार, धर्मेंद्र प्रधान का मंत्री पद सुरक्षित रहेगा। ज्यादा से ज्यादा उनका विभाग बदला जा सकता है, लेकिन उन्हें मंत्रिमंडल से हटाए जाने की संभावना न के बराबर है।
क्यों लग रही हैं धर्मेंद्र प्रधान को हटाए जाने की अटकलें
धर्मेंद्र प्रधान को घेरे जाने की सबसे बड़ी वजह हालिया पेपर लीक मामला है, जिसने देश भर के छात्रों और अभिभावकों में भारी आक्रोश पैदा किया। विपक्ष इस मुद्दे पर लगातार हमलावर है। इसके अलावा, हाल ही में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) नामक संगठन ने कई शहरों में उनके इस्तीफे को लेकर प्रदर्शन किया है। वहीं, लद्दाख के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी 28 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर इस मांग के समर्थन में भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। इससे पहले यूजीसी (UGC) के एक सर्कुलर को लेकर भी प्रधान विवादों में आए थे, जिससे सरकार पर उन्हें हटाने का चौतरफा दबाव बनता दिख रहा है।
दबाव की राजनीति के आगे नहीं झुकता मोदी नेतृत्व
राजनीतिक इतिहास गवाह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कभी भी विपक्ष या किसी आंदोलन के दबाव में आकर अपने मंत्रियों के इस्तीफे नहीं लिए हैं। पूर्व में केवल एमजे अकबर का अपवाद सामने आया था, लेकिन वह मामला कामकाजी कमियों का नहीं बल्कि 'मी टू' आंदोलन के दौरान लगे व्यक्तिगत यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़ा था। वर्तमान में चल रहे सीजेपी के प्रदर्शन या सोनम वांगचुक के आंदोलन का असर उस स्तर का नहीं दिखाई देता। वांगचुक ने पिछले साल लद्दाख में भी 15 दिनों की भूख हड़ताल की थी, जिसके बाद उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत छह महीने जेल में भी रहना पड़ा था। ऐसे में प्रधानमंत्री किसी भी आंदोलन के सामने झुकने का संदेश देना पसंद नहीं करेंगे।
सरकारी एजेंडे और नई शिक्षा नीति पर बेहतर काम
धर्मेंद्र प्रधान के पद पर बने रहने की एक बड़ी वजह यह भी है कि वे सरकार और संगठन के एजेंडे को बेहद प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा रहे हैं। उनके कार्यकाल में एनसीईआरटी (NCERT) की किताबों में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जिनमें आपातकाल और मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) जैसे विषयों को जोड़ा गया है, जबकि गुजरात दंगे, फैज की कविताएं और मुगल शासकों से जुड़े कुछ हिस्सों को हटाया गया है। हाल ही में 26 जून को धर्मेंद्र प्रधान के 57वें जन्मदिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर पोस्ट कर राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को लागू करने की दिशा में उनके काम की खुलकर सराहना की थी, जो उनके मजबूत कद को दर्शाता है।
पेपर लीक पुराना ढर्रा और गाज गिरने की कोई नजीर नहीं
भले ही विपक्ष पेपर लीक को वर्तमान सरकार की नाकामी बता रहा हो, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि यह समस्या दशकों पुरानी है। साल 2002 से 2025 के बीच देश में पेपर लीक के करीब 45 बड़े मामले सामने आ चुके हैं। वहीं, 2015 के बाद से परीक्षाओं में गड़बड़ी के लगभग 150 मामले दर्ज हुए हैं। इन मामलों का इतिहास देखें तो शायद ही कभी किसी बड़े राजनेता या उच्च अधिकारी पर बड़ी गाज गिरी हो। पिछले 11 सालों में केवल एक ही मामले में अदालत से सजा हो पाई है। इस प्रशासनिक ढर्रे को देखते हुए केवल पेपर लीक के आधार पर धर्मेंद्र प्रधान की छुट्टी कर दी जाएगी, इसकी उम्मीद बेहद कम है।
तीन दशक बाद सुलझा पानी का विवाद, दोनों राज्यों ने मिलाया हाथ
29 Jun, 2026 05:38 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
डीगढ़:उत्तर भारत के दो प्रमुख राज्यों, हरियाणा और राजस्थान के बीच पानी के बंटवारे को लेकर एक बेहद ऐतिहासिक और दूरगामी फैसला हुआ है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अगुवाई में दोनों राज्यों ने एक महत्वपूर्ण सहमति पत्र (MoU) पर दस्तखत किए हैं। इस खास मौके पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल के साथ हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा विशेष रूप से मौजूद रहे। इस नए समझौते के तहत अब मानसून के महीनों में जब पानी की उपलब्धता अधिक होगी, तब हरियाणा पाइपलाइन के जरिए राजस्थान तक पानी पहुंचाएगा।
1994 के फॉर्मूले को मिली नई रफ्तार, बड़े बांधों का रास्ता साफ
यह समझौता मुख्य रूप से साल 1994 में बने 'अपर यमुना रिवर बोर्ड' के नियमों पर आधारित है। इसके जरिए राजस्थान को उसके हक का पानी मिलने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है, जिसे अंतरराज्यीय तालमेल और सहयोगात्मक संघवाद की एक बेहतरीन मिसाल माना जा रहा है। सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि पिछले काफी समय से लटकी पड़ी रेणुका, किशाऊ और लखवार जैसी बड़ी बांध परियोजनाओं के काम में अब तेजी आएगी। जब ये बांध बनकर तैयार हो जाएंगे, तो दोनों राज्यों में पीने के पानी की किल्लत दूर होगी और खेती-किसानी के लिए सिंचाई व्यवस्था भी मजबूत होगी।
इनेलो का तीखा पलटवार: 'हरियाणा के हितों से हुआ है समझौता'
जहां एक तरफ सरकार इसे जल सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम बता रही है, वहीं दूसरी तरफ हरियाणा में विपक्षी दल इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) ने इस पर मोर्चा खोल दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय संरक्षक और पूर्व वित्त मंत्री प्रो. संपत सिंह ने इस समझौते का पुरजोर विरोध करते हुए सरकार पर हरियाणा के हक को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है। उन्होंने चंडीगढ़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि बीजेपी सरकार ने राज्य के हितों की अनदेखी की है, जबकि सतलुज-यमुना लिंक (SYL) जैसी जरूरी नहर का काम आज भी अधूरा पड़ा है और हरियाणा खुद पानी के संकट से जूझ रहा है।
पुराना इतिहास और आंदोलन की चेतावनी
इनेलो नेता ने इतिहास का जिक्र करते हुए याद दिलाया कि 1994 के मूल समझौते के वक्त भी उनकी पार्टी के 17 विधायकों ने चौधरी ओम प्रकाश चौटाला के नेतृत्व में विरोध स्वरूप इस्तीफे दे दिए थे। उनका आरोप है कि नए समझौते में हरियाणा की हिस्सेदारी को कम करके राजस्थान को फायदा पहुंचाया जा रहा है। इनेलो ने साफ कर दिया है कि वे हरियाणा के पानी की एक-एक बूंद के लिए अपना लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रखेंगे और जल्द ही चौधरी अभय सिंह चौटाला की अध्यक्षता में एक बड़ी बैठक बुलाकर इस समझौते के खिलाफ अपनी आगामी रणनीति का एलान करेंगे।
बापू को नमन, मंदिर में पूजा और जनसंवाद, तीन दिन की यात्रा रहेगी खास
29 Jun, 2026 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
विक्टोरिया/नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने तीन दिवसीय सेशेल्स दौरे के अंतिम दिन वहां रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों से मुलाकात कर दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रिश्तों को एक नई ऊर्जा दी। राजधानी विक्टोरिया में प्रवासी भारतीयों से संवाद करने और उनके योगदान की सराहना करने के बाद प्रधानमंत्री स्वदेश के लिए रवाना हो गए। इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान भारत और सेशेल्स के बीच रक्षा, डिजिटल पेमेंट, स्वास्थ्य, ऊर्जा और ब्लू इकोनॉमी जैसे 19 अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग की नई इबारत लिखी गई।
सांस्कृतिक जुड़ाव और महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि
दौरे के आखिरी दिन प्रधानमंत्री मोदी ने विक्टोरिया स्थित प्रसिद्ध अरुल मिहु नवशक्ति विनायकर मंदिर का रुख किया, जहां उन्होंने भगवान गणेश की विशेष पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने विक्टोरिया के पीस पार्क का दौरा कर वहां स्थापित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर इस यात्रा को बेहद सफल बताते हुए कहा कि इसके सकारात्मक परिणाम दोनों देशों को भविष्य के नए क्षेत्रों में साथ मिलकर काम करने का अवसर देंगे।
हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा और रक्षा सहयोग मजबूत
भारत की 'हिंद महासागर नीति' के लिहाज से इस दौरे को गेम-चेंजर माना जा रहा है। रणनीतिक साझेदारी को बढ़ाते हुए भारत ने सेशेल्स को एक 'फास्ट पेट्रोल वेसल' (तेजी से गश्त करने वाला जहाज) उपहार में दिया। इसके साथ ही सेशेल्स डिफेंस फोर्स की ताकत बढ़ाने के लिए 10 यूटिलिटी वाहन और लेजर रेडियल क्लास बोट्स के पांच सेट भी सौंपे गए। भारत ने सेशेल्स कोस्ट गार्ड के जहाज 'पीएस जोरोस्टर' की मरम्मत का काम पूरा कर लिया है और वहां के डोर्नियर विमान को आधुनिक ग्लास कॉकपिट से लैस करने की प्रक्रिया भी गति पकड़ रही है।
सेशेल्स में भी चलेगा भारत का डिजिटल डंका, लागू होगा यूपीआई
भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) को अब वैश्विक स्तर पर एक और बड़ी कामयाबी मिली है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और सेंट्रल बैंक ऑफ सेशेल्स के बीच हुए एक ऐतिहासिक समझौते के तहत अब सेशेल्स में भी भारत की यूपीआई (UPI) आधारित डिजिटल भुगतान प्रणाली शुरू की जाएगी। इस कदम से दोनों देशों के बीच व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे आम नागरिकों और सैलानियों के लिए पैसों का लेन-देन बेहद सुगम हो जाएगा।
स्वास्थ्य और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी सौगात
चिकित्सा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाते हुए भारत ने सेशेल्स को छह आधुनिक एम्बुलेंस सौंपी हैं और वहां 'नए सेशेल्स नेशनल हॉस्पिटल' के निर्माण को लेकर प्रारंभिक समझौता किया है। इसके अलावा भारत की लोकप्रिय 'जन औषधि योजना' का विस्तार अब सेशेल्स में भी होगा, जिससे वहां के नागरिकों को सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली भारतीय दवाएं मिल सकेंगी। स्थानीय युवाओं के कौशल विकास के लिए 'प्रोफेशनल और टेक्निकल एजुकेशन सेंटर' की आधारशिला भी एक वर्चुअल समारोह के जरिए रखी गई।
अंतरिक्ष, कृषि और विकास परियोजनाओं के लिए साझा कार्ययोजना
दोनों देशों ने कृषि अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र में वर्ष 2026 से 2031 तक की पंचवर्षीय कार्य योजना पर मुहर लगाई है। इसके साथ ही अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग को लेकर भी सहमति बनी है, जिससे भारतीय सैटेलाइट तकनीक का लाभ सेशेल्स को मिल सकेगा। सेशेल्स अब 'कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर' (CDRI) का सदस्य बन गया है, जो जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन में मददगार होगा।
सुरक्षा के मोर्चे पर दोनों देशों ने एक प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर किए हैं, जो अंतरराष्ट्रीय अपराधों पर लगाम कसेगी। इसके अलावा, भारत ने मित्रता की मिसाल पेश करते हुए सेशेल्स को 500 मीट्रिक टन चावल और 8,500 मीट्रिक टन सीमेंट की मदद दी है। साथ ही, सेशेल्स में सतत विकास कार्यों को गति देने के लिए वहां की सरकार और एक्जिम बैंक ऑफ इंडिया के बीच एक 'अम्ब्रेला लाइन ऑफ क्रेडिट' समझौता भी संपन्न हुआ है।
नहराणा गांव के पास बड़ा हादसा, डायल-112 वाहन दुर्घटनाग्रस्त; तीन जवान जख्मी
29 Jun, 2026 04:32 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सिरसा। हरियाणा के सिरसा जिले में रात के वक्त गश्त कर रही पुलिस की आपातकालीन सेवा की एक गाड़ी भीषण सड़क हादसे का शिकार हो गई। नाथूसरी चोपटा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव नहरणा के पास 'डायल 112' की एक तेज रफ्तार गाड़ी अचानक संतुलन खो बैठी और सड़क किनारे लगे एक मजबूत पेड़ से जा टकराई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि गाड़ी के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार तीन पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के तुरंत बाद मौके पर पहुंचे स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को नाथूसरी चौपटा के नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार देने के बाद उनकी नाजुक हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत सिरसा रेफर कर दिया।
आधी रात को गश्त के दौरान बेकाबू हुई आपातकालीन गाड़ी
यह दर्दनाक हादसा रविवार रात करीब साढ़े ग्यारह बजे के आसपास का बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, नाथूसरी चोपटा स्टेशन से पुलिस की 'डायल 112' गाड़ी रोज की तरह इलाके की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए नहरणा गांव की तरफ गश्त पर निकली थी। जैसे ही गाड़ी चोपटा-भट्टू मुख्य मार्ग पर स्थित नहरणा गांव के नजदीक पहुंची, तभी अचानक चालक नियंत्रण खो बैठा और गाड़ी सीधे जाकर पेड़ में धंस गई। इस भीषण दुर्घटना में गाड़ी का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया और अंदर बैठे पुलिसकर्मी लहूलुहान होकर उसमें फंस गए।
अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं तीनों घायल जवान
इस अचानक हुए हादसे में गाड़ी चला रहे चालक विजय कुमार, उनके साथ मौजूद एएसआई विजय कुमार और एसपीओ सुनील कुमार को गंभीर चोटें आई हैं। राहत और बचाव कार्य के बाद सभी घायलों को सिरसा के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां चालक विजय कुमार का इलाज सिरसा के सरकारी नागरिक अस्पताल में चल रहा है, वहीं एएसआई विजय कुमार और सुनील कुमार को गंभीर स्थिति के चलते सिरसा के ही एक बड़े निजी अस्पताल में दाखिल कराया गया है। फिलहाल डॉक्टरों की विशेष टीम तीनों घायल जवानों की देखरेख में जुटी है और पुलिस प्रशासन हादसे के सटीक कारणों का पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि यह दुर्घटना किसी तकनीकी खराबी की वजह से हुई या कोई और वजह थी।
अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर बढ़ा तनाव, हमलों के बाद हालात गंभीर
29 Jun, 2026 04:20 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काबुल/इस्लामाबाद। अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में पाकिस्तानी वायुसेना द्वारा किए गए हवाई हमलों में महिलाओं और बच्चों सहित 36 अफगान नागरिकों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 163 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। तालिबान प्रशासन ने दावा किया है कि पाकिस्तान की इस सीमा-पार सैन्य कार्रवाई के कारण पक्तिया, पक्तिका और कुनर प्रांतों में भारी तबाही मची है। तालिबान सरकार के उप-प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस सैन्य कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि हमलों में न केवल बड़े पैमाने पर लोग हताहत हुए हैं, बल्कि कई रिहायशी मकान भी पूरी तरह जमींदोज हो गए हैं।
बचाव कार्य के दौरान दोबारा बमबारी का आरोप
तालिबान प्रवक्ता के अनुसार सबसे भीषण हमला पक्तिया प्रांत के चमकनी जिले के अंतर्गत आने वाले मंडोखेल गांव में हुआ, जहां पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने एक नागरिक के घर को निशाना बनाया। इस शुरुआती हमले में एक बुजुर्ग और एक बच्चे की जान चली गई। घटना के तुरंत बाद जब स्थानीय ग्रामीण घायलों की मदद करने और उन्हें मलबे से निकालने के लिए मौके पर इकट्ठा हुए, तब उसी स्थान पर दोबारा हवाई हमला कर दिया गया। इस दोहरी बमबारी की रणनीति के कारण वहां मौजूद 28 और ग्रामीणों की मौत हो गई, जबकि 158 लोग गंभीर रूप से जख्मी हो गए।
पक्तिका और कुनर प्रांतों में भी तबाही
हवाई हमलों का यह सिलसिला पक्तिया तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि पक्तिका प्रांत के गियान जिले के वालुस्त गांव में भी एक घर पर बम गिराए गए, जिसमें छह लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में अधिकांश महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। इसके अलावा कुनर प्रांत के मनोगई जिले के बारोलो गांव में भी एक नागरिक के रिहायशी मकान को बमबारी का शिकार बनाया गया, जिससे संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा, हालांकि इस इलाके में किसी की जान जाने की खबर नहीं है।
पाकिस्तान ने सैन्य कार्रवाई को बताया जवाबी कदम
अफगानिस्तान द्वारा आम नागरिकों के मारे जाने के दावों के बीच पाकिस्तान सरकार ने इस पूरी सैन्य कार्रवाई को जायज ठहराया है। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने बयान जारी कर कहा कि सुरक्षा बलों ने सीमावर्ती क्षेत्रों में खुफिया इनपुट के आधार पर एक सुनियोजित जमीनी और हवाई अभियान चलाया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा, बलूचिस्तान और कराची में हाल ही में हुए आतंकवादी हमलों के जवाब में की गई है।
कराची में रेंजर्स मुख्यालय पर हमले के बाद बढ़ा तनाव
दोनों पड़ोसी देशों के बीच यह ताजा विवाद शनिवार रात कराची के गुलिस्तान-ए-जौहर इलाके में स्थित पाकिस्तान सिंध रेंजर्स के प्रांतीय मुख्यालय पर हुए फिदायीन हमले के बाद शुरू हुआ। इस हमले में एक विस्फोटक से लदे वाहन को मुख्य द्वार से टकराया गया था, जिसके बाद हुई मुठभेड़ में तीन पाकिस्तानी जवान और तीन हमलावर मारे गए थे। इस हमले की जिम्मेदारी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान से अलग हुए संगठन जमात-उल-अहरार के एक धड़े ने ली थी, जिसके बाद पाकिस्तान ने सीमा पार यह बड़ी सैन्य कार्रवाई की।
रिवाल्वर बनी हादसे की वजह, जांच के दौरान पुलिसकर्मी घायल
29 Jun, 2026 03:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अंबाला। हरियाणा के अंबाला में सोमवार सुबह पुलिस महकमे से जुड़ी एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां सरकारी हथियार की जांच के दौरान दुर्घटनावश चली गोली से एक पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गया। यह वाकया सैनी माजरा टोल प्लाजा के पास तैनात 'इमरजेंसी रिस्पांस व्हीकल' (ईआरवी) के स्टाफ के साथ उस वक्त हुआ जब सुबह की शिफ्ट बदली जा रही थी। राहत की बात यह है कि घायल जवान को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां फिलहाल उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।
ड्यूटी बदलने के दौरान हुआ बड़ा हादसा
यह पूरा मामला सुबह करीब 8 बजे का है, जब रात की गश्त खत्म होने के बाद नियम के मुताबिक पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी हैंडओवर कर रहे थे। नाइट शिफ्ट पर तैनात ईएचसी जसबीर अपनी सरकारी रिवाल्वर सुबह की शिफ्ट के नए इंचार्ज को सौंप रहे थे। जैसे ही दूसरे अधिकारी ने हथियार को हाथ में लेकर उसकी जांच शुरू की, तभी अचानक चूक वश रिवाल्वर का ट्रिगर दब गया। अचानक हुए इस फायर से मौके पर मौजूद हर कोई सन्न रह गया।
अंगूठे को चीरते हुए जांघ में लगी गोली
रिवाल्वर से निकली गोली सीधे सामने खड़े ईएचसी जसबीर के हाथ के अंगूठे और उंगली को बुरी तरह जख्मी करते हुए उनकी जांघ को छूकर निकल गई। गोली लगते ही जसबीर लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़े। अचानक हुई इस घटना से मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। वहां मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों ने बिना वक्त गंवाए घायल जसबीर को उसी आपातकालीन गाड़ी (ईआरवी) में बिठाया और तुरंत अंबाला सिटी के नागरिक अस्पताल लेकर भागे। डॉक्टरों की टीम फौरन उनके इलाज में जुट गई और शुरुआती उपचार के बाद डॉक्टरों ने बताया कि उनके शरीर से काफी खून जरूर बहा है, लेकिन फिलहाल जान का कोई खतरा नहीं है। पुलिस प्रशासन अब इस बात की जांच कर रहा है कि हथियार की चेकिंग के दौरान सुरक्षा नियमों में चूक कहां पर हुई।
यूक्रेन ने तेल ठिकानों पर बोला धावा, रूस में ईंधन संकट की पुष्टि
29 Jun, 2026 12:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पुरी: ओडिशा के पुरी में स्थित विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथ यात्रा से पहले एक बेहद महत्वपूर्ण और पवित्र अनुष्ठान किया जाता है, जिसे 'स्नान यात्रा' या 'स्नान पूर्णिमा' कहा जाता है। ज्येष्ठ पूर्णिमा के पावन अवसर पर महाप्रभु जगन्नाथ, उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा को विशेष स्नान कराया जाता है। वर्ष 2026 में यह पवित्र स्नान यात्रा आज, 29 जून को आयोजित की जा रही है, जिसके साथ ही प्रसिद्ध रथ यात्रा की औपचारिक शुरुआत हो गई है। इसके बाद आगामी 16 जुलाई 2026 को भव्य रथ यात्रा निकाली जाएगी।
108 स्वर्ण कलशों और जड़ी-बूटियों के जल से महास्नान
स्नान यात्रा के दौरान तीनों देवी-देवताओं को एक विशेष और पवित्र कुएं के जल से भरे 108 स्वर्ण कलशों से स्नान कराया जाता है। इस कुएं को पूरे साल में केवल इसी एक दिन खोला जाता. है। भगवान के इस दिव्य स्नान के जल में विशेष जड़ी-बूटियां, सुगंधित इत्र, चंदन और औषधियां मिलाई जाती हैं, जिससे पूरा मंदिर परिसर सुगंधित हो उठता है।
गजवेश श्रृंगार: जब गजानन रूप में दर्शन देते हैं महाप्रभु
महास्नान संपन्न होने के बाद भगवान का भव्य और विशेष श्रृंगार किया जाता है। इस दिन भगवान जगन्नाथ 'गजवेश' धारण करते हैं, यानी उनका मुख भगवान गणेश (गजानन) के रूप में सजाया जाता है। इसके पीछे एक प्राचीन पौराणिक कथा है कि भगवान गणेश के एक परम भक्त की इच्छा पूरी करने के लिए महाप्रभु ने उन्हें गजानन रूप में दर्शन दिए थे। इसी परंपरा को जीवंत रखते हुए आज भी हर साल स्नान यात्रा के दिन भगवान को गजवेश पहनाया जाता है।
15 दिनों का एकांतवास और औषधीय काढ़े का भोग
इस महास्नान के बाद एक अनोखी और मानवीय परंपरा की शुरुआत होती है। मान्यता है कि भारी स्नान के कारण महाप्रभु जगन्नाथ प्रतीकात्मक रूप से बीमार पड़ जाते हैं और अगले 15 दिनों के लिए एकांतवास (जिसे 'अनवसर काल' कहा जाता है) में चले जाते हैं। इस दौरान मंदिर के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए बंद रहते हैं। इस बीमार अवधि में मुख्य पुजारी भगवान को विभिन्न प्रकार की आयुर्वेदिक औषधियों और काढ़े का भोग लगाते हैं। 15 दिन के इस उपचार के बाद भगवान पूरी तरह स्वस्थ होकर 'नवयौवन रूप' में पुनः भक्तों को दर्शन देते हैं।
मोक्षदायिनी रथ यात्रा की भव्य तैयारी
भगवान के ठीक होने के बाद कई धार्मिक अनुष्ठान पूरे किए जाते हैं और फिर वह पावन दिन आता है जब भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ तीन विशाल और भव्य रथों पर सवार होकर अपनी मौसी के घर, गुंडिचा मंदिर के लिए प्रस्थान करते हैं। इस आलौकिक रथ यात्रा में शामिल होने और रथों की रस्सियों को खींचने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं। सनातन परंपरा में मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु इस रथ की रस्सी को स्पर्श मात्र कर लेता है, उसे जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति मिलकर मोक्ष की प्राप्ति होती है।
मंगल ग्रह पर मिला विशाल झील और सक्रिय नदी तंत्र का संकेत
29 Jun, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन: मंगल ग्रह पर कभी जीवन मौजूद था या नहीं, यह सवाल दशकों से वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष प्रेमियों को आकर्षित करता रहा है। अब अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) के परसिवरेंस रोवर ने एक ऐसी महत्वपूर्ण खोज की है, जिसने इस रहस्य को सुलझाने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम बढ़ाया है। रोवर को मंगल के जेजेरो क्रेटर स्थित 'ब्राइट एंजेल फॉर्मेशन' में मैक्रोमोलेक्यूलर कार्बन (MMC) मिला है, जिसे जीवन के निर्माण के लिए आवश्यक प्रमुख तत्वों में से एक माना जाता है।
प्राचीन मडस्टोन चट्टानों में कैद मिला ऑर्गेनिक कार्बन
शोधकर्ताओं ने बताया कि यह कार्बन ब्राइट एंजेल फॉर्मेशन की दो विशिष्ट चट्टानों में पाया गया है, जिनमें से एक को वैज्ञानिकों ने ‘चेयावा फॉल्स’ नाम दिया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि अरबों वर्ष पहले जेजेरो क्रेटर में एक विशालकाय झील और एक सक्रिय नदी तंत्र मौजूद था। उस समय नदी के पानी के साथ बहकर आई मिट्टी और गाद जमा होकर समय के साथ मडस्टोन चट्टानों में बदल गई। इन्हीं प्राचीन चट्टानों के भीतर यह बहुमूल्य ऑर्गेनिक कार्बन सदियों से सुरक्षित और संरक्षित मिला है।
कठोर वातावरण के बावजूद अरबों सालों से सुरक्षित हैं अणु
इस खोज ने वैज्ञानिक जगत में एक नई उत्सुकता पैदा कर दी है, क्योंकि यह पहली बार है जब मंगल की सतह के इतने करीब ऑर्गेनिक कार्बन की मौजूदगी दर्ज की गई है। शोध पत्रिका 'साइंस एडवांसेज' में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार, मंगल का वातावरण अत्यंत कठोर माना जाता है, जहां तीव्र सौर विकिरण और ऑक्सीडेंट रसायन जैसे विनाशकारी कारक जैविक अणुओं को आसानी से नष्ट कर सकते हैं। इसके बावजूद अरबों वर्षों से इस कार्बन का सुरक्षित बने रहना वैज्ञानिकों के लिए बेहद रोचक और गहन शोध का विषय बन गया है।
'शेरलॉक' उपकरण ने खोजे पानी की मौजूदगी के सबूत
इस अभूतपूर्व खोज में परसिवरेंस रोवर पर लगे अत्याधुनिक उपकरण 'शेरलॉक' (SHERLOC) की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यह उपकरण लेजर तकनीक की मदद से चट्टानों के भीतर मौजूद खनिजों और कार्बनिक यौगिकों की सूक्ष्मता से पहचान करता है। विश्लेषण के दौरान वैज्ञानिकों ने यह भी पाया कि इस कार्बन के साथ सल्फेट, कार्बोनेट, आयरन-फॉस्फेट और सल्फाइड जैसे खनिज भी मौजूद हैं। ये ऐसे खनिज हैं, जो आमतौर पर पानी की मौजूदगी वाले वातावरण में ही बनते हैं, जिससे मंगल पर प्राचीन काल में पानी की उपस्थिति का एक और ठोस प्रमाण मिलता है।
जीवन का प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं, पर अनुकूल माहौल का संकेत
हालांकि, वैज्ञानिकों ने यह पूरी तरह स्पष्ट किया है कि केवल ऑर्गेनिक कार्बन की मौजूदगी को सीधे तौर पर प्राचीन जीवन का प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं माना जा सकता। ऐसे कार्बनिक यौगिक जैविक (बायोटिक) और अजैविक (एबायोटिक) दोनों ही प्राकृतिक प्रक्रियाओं से बन सकते हैं। फिर भी, इस विशिष्ट कार्बन और पानी से संबंधित खनिजों का अनोखा संयोजन इस संभावना को मजबूती प्रदान करता है कि मंगल पर कभी ऐसा वातावरण जरूर मौजूद था, जो सूक्ष्म जीवों के पनपने और उनके विकास के लिए अत्यंत अनुकूल रहा हो।
'मार्स सैंपल रिटर्न मिशन' से खुलेगा अंतिम रहस्य
इस खोज का अंतिम और निर्णायक उत्तर तभी मिलेगा, जब परसिवरेंस रोवर द्वारा एकत्र किए गए इन भू-वैज्ञानिक नमूनों को पृथ्वी पर लाकर अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं में उनकी गहन जांच की जाएगी। यदि भविष्य में 'मार्स सैंपल रिटर्न मिशन' सफल होता है, तो वैज्ञानिक यह सटीक पता लगाने में सक्षम हो सकेंगे कि मंगल पर मिले ये कार्बनिक अवशेष किसी प्राचीन जैविक गतिविधि के संकेत हैं या केवल भू-वैज्ञानिक प्रक्रियाओं का परिणाम। फिलहाल, यह खोज मंगल पर जीवन की संभावनाओं को लेकर अब तक के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण संकेतों में से एक मानी जा रही है।
भारतीयों का बदला मूड, ट्रंप पर भरोसे में आई ऐतिहासिक गिरावट
29 Jun, 2026 11:50 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: एक नए वैश्विक सर्वेक्षण में भारतीय जनमानस के बीच अमेरिका और उसके नेतृत्व को लेकर एक अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिला है। पिछले 25 वर्षों के इतिहास में यह पहला मौका है जब अमेरिकी सरकार पर भारतीयों का भरोसा अपने सबसे निचले स्तर पर आ गिरा है, जबकि अमेरिका को लेकर नकारात्मक दृष्टिकोण रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया है। इसके विपरीत, विदेशी नेताओं की लोकप्रियता के मामले में भारतीयों ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को अपनी पहली पसंद बताया है। वैश्विक स्तर पर भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को लेकर लोगों में भारी असंतोष देखा जा रहा है।
विदेशी नेताओं में पुतिन पर भारतीयों को सबसे ज्यादा भरोसा
साल 2026 के ग्लोबल ओपिनियन सर्वे के आंकड़ों से साफ हुआ है कि भारतीय नागरिक दुनिया के अन्य बड़े राष्ट्राध्यक्षों के मुकाबले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर सबसे ज्यादा विश्वास करते हैं। सर्वे के अनुसार, 51 फीसदी भारतीयों ने पुतिन के नेतृत्व पर अपना भरोसा जताया है। इस सूची में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 39 फीसदी के साथ दूसरे स्थान पर हैं। इसके बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (34 फीसदी), फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (33 फीसदी) और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की (29 फीसदी) का नंबर आता है, जबकि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 25 फीसदी रेटिंग के साथ छठे पायदान पर हैं।
अमेरिका की रेटिंग में 25 साल की सबसे बड़ी गिरावट
सर्वेक्षण के परिणाम बताते हैं कि वर्तमान में केवल 45 फीसदी भारतीय ही अमेरिका के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं, जबकि 31 फीसदी की राय नकारात्मक हो चुकी है। यह पिछले ढाई दशकों में अमेरिका को मिली सबसे खराब रेटिंग है। इतना ही नहीं, सिर्फ 39 फीसदी भारतीयों को इस बात का विश्वास है कि डोनाल्ड ट्रंप वैश्विक मामलों में सही फैसले लेंगे। यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में एक बड़ा झटका है, जब अमेरिका के प्रति सकारात्मक राय 54 फीसदी और नकारात्मक महज 19 फीसदी थी, जबकि ट्रंप पर 52 फीसदी भारतीयों को भरोसा था।
ट्रंप की इमिग्रेशन और विदेशी नीतियां बनीं नाराजगी की वजह
भारतीयों के बीच अमेरिका की साख गिरने के पीछे राष्ट्रपति ट्रंप की कुछ कड़े फैसले मुख्य वजह बनकर उभरे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, भारतीयों को ट्रंप द्वारा लगाए जा रहे ग्लोबल टैरिफ (वैश्विक सीमा शुल्क), वेनेजुएला और ईरान के संकट को संभालने का तरीका और उनकी सख्त इमिग्रेशन (आप्रवासन) नीतियां रास नहीं आ रही हैं। ट्रंप की इमिग्रेशन नीतियों को सिर्फ 32 फीसदी भारतीयों का समर्थन मिला, जबकि वेनेजुएला और ईरान से जुड़े मामलों पर उनकी नीति को क्रमशः केवल 17 फीसदी और 28 फीसदी लोगों ने सही माना।
वैश्विक स्तर पर भी घटा अमेरिकी साख का ग्राफ
यह अविश्वास सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है; सर्वे में शामिल दुनिया के 36 देशों में औसतन केवल 23 फीसदी वयस्कों ने ही वैश्विक मामलों में ट्रंप के नेतृत्व की सराहना की है। इंडोनेशिया, इटली, नाइजीरिया, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया और तुर्की जैसे देशों में अमेरिका के प्रति भरोसे में दो अंकों (10 फीसदी से ज्यादा) की भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसके अलावा, 36 देशों के औसत के अनुसार महज 35 फीसदी लोग मानते हैं कि अमेरिका वैश्विक शांति और स्थिरता में योगदान देता है। अमेरिका द्वारा व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सम्मान किए जाने को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राय काफी नकारात्मक हुई है।
सर्वे का पैमाना: यह सालाना सर्वेक्षण टेलीफोन, व्यक्तिगत मुलाकातों और ऑनलाइन माध्यमों से किया जाता है, जिसे तीन प्रतिष्ठित संस्थाएं मिलकर संचालित करती हैं। वर्ष 2026 के इस सर्वे के लिए भारत भर में 13 अलग-अलग भाषाओं में 3,566 नागरिकों का आमने-सामने (फेस-टू-फेस) इंटरव्यू लिया गया था।
हादसे के बाद प्रशासन सख्त, सुपरवाइजर पर गिरी गाज और कंपनी हुई ब्लैकलिस्ट
