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2026 तक टल गए स्टारलाइनर के स्पेस मिशन, नासा ने जताई चिंता
19 Jul, 2025 11:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नासा ने क्रू कैप्सूल बोइंग CST-100 स्टारलाइनर को 2026 तक के लिए ग्राउंड (सेवा से बाहर) करने का फैसला किया है। जून 2024 में तकनीकि खराबी आने के बाद से ही बोइंग स्टारलाइनर काफी चर्चा में था। नासा के अनुसार, इसे ठीक करने में 2026 तक का समय लगेगा। तब तक के लिए बोइंग स्टारलाइनर के सभी मिशन को रद कर दिया गया है।
पिछले साल सुनीत विलियम्स समेत कई अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेस में लेकर गया बोइंग स्टारलाइनर अचानक से खराब हो गया था। इसके कारण क्रू मेंबर्स को कई महीनों तक स्पेस में रहना पड़ा था, जिसके बाद नासा ने बोइंग स्टारलाइनर को क्रू मेंबर्स के बिना ही धरती पर वापस बुलाया था।
बोइंग स्टारलाइन में क्या थी खराबी?
नासा के अनुसार, जून 2024 में क्रू फ्लाइट टेस्ट के दौरान बोइंग स्टारलाइनर में गंभीर समस्याएं देखने को मिलीं थीं। इसमें कई जगहों पर हीलियम गैस लीक होने लगी थी। अंतररष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) में पहुंचने के बाद कैप्सूल के 28 में से 5 कंट्रोल थ्रस्ट फेल हो गए थे।
नासा ने लिया फैसला
आखिरकार नासा ने अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा के लिए उन्हें ISS में ही छोड़ने का फैसला किया और बोइंग स्टारलाइनर को खाली धरती पर वापस बुला लिया। इसके बाद स्पेसएक्स का ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट सुनीता विलियम्स समेत सभी अंतरिक्ष यात्रियों को धरती पर वापस लेकर आया। नासा और बोइंग मिलकर स्पेसक्राफ्ट की तकनीकि खराबी को ठीक करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अभी तक यह पूरी तरह से सही नहीं हुआ है।
क्रू मेंबर्स के बिना स्पेस में जाएगा स्पेसक्राफ्ट
नासा के अंतरिक्ष यात्रियों का कहना है कि बोइंग स्टारलाइनर ठीक होने के बाद इसका ट्रायल होगा। इस दौरान बिना क्रू मेंबर्स के इसे उड़ाया जाएगा और सफल परीक्षण के बाद ही इसे मंजूरी मिलेगी। इस पूरी प्रक्रिया में 2025 के अंत या 2026 तक का समय लग सकता है।
अमेरिका में स्टेबलकॉइन को मिला कानूनी दर्जा, ट्रंप के हस्ताक्षर से लागू हुआ नया अधिनियम
19 Jul, 2025 10:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि जल्द ही कुछ बड़े व्यापारिक समझौते घोषित किए जाएंगे. उन्होंने संकेत दिया कि ये समझौते लगभग तैयार हैं और किसी भी समय घोषित किए जा सकते हैं.
व्हाइट हाउस में स्टेबलकॉइन अधिनियम पर हस्ताक्षर समारोह के दौरान ट्रंप ने कहा, 'हम इसे आज ही कर सकते हैं. शायद थोड़ी देर बाद. हम करेंगे. जब मैं किसी देश को यह पेपर भेजता हूं कि उन्हें 35 या 40 प्रतिशत टैरिफ देना होगा, तो वहीं से डील शुरू हो जाती है. फिर वे कॉल करते हैं और कहते हैं कि क्या कुछ अलग तरह की डील हो सकती है, जैसे कि अपने देश को व्यापार के लिए खोलना.'
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत अमेरिका द्वारा लगाए जाने वाले टैरिफ की 90 दिनों की अवधि को 9 जुलाई से बढ़ाकर 1 अगस्त तक कर दिया गया है. इस दौरान कई प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ वार्ता जारी है.ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि एक अगस्त की समयसीमा के बाद कोई और बदलाव या विस्तार नहीं होगा और उस दिन से टैरिफ लागू होना शुरू हो जाएगा.
ट्रंप ने ऐतिहासिक स्टेबलकॉइन अधिनियम पर भी हस्ताक्षर किए
इस अवसर पर ट्रंप ने एक ऐतिहासिक स्टेबलकॉइन अधिनियम पर भी हस्ताक्षर किए, जो इस क्षेत्र में अमेरिका का पहला संघीय विनियमन है. ट्रंप ने कहा, 'एक्ट एक स्पष्ट और सरल नियामकीय ढांचा प्रदान करता है, जो डॉलर समर्थित स्टेबलकॉइनों की जबरदस्त संभावनाओं को सामने लाएगा. यह अधिनियम स्टेबलकॉइन के लिए मानक तय करता है, जो अमेरिकी डॉलर या अन्य फिएट मुद्राओं से जुड़े डिजिटल करेंसी होते हैं.'
इसकी निगरानी फेडरल रिजर्व और मुद्रा नियंत्रक कार्यालय द्वारा की जाएगी. इसके तहत जारीकर्ताओं को यह जानकारी साझा करना अनिवार्य होगा कि उनके पास आरक्षित निधियों के रूप में अमेरिकी मुद्रा, मांग जमा, सरकारी प्रतिभूतियां और अन्य स्वीकृत परिसंपत्तियां मौजूद हैं. ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि वह अमेरिका को क्रिप्टो की राजधानी बनाना चाहते हैं. उनके अनुसार, स्टेबलकॉइनों का उपयोग अमेरिकी ट्रेजरी में मांग को बढ़ाएगा, ब्याज दरों को कम करेगा और डॉलर को वैश्विक आरक्षित मुद्रा के रूप में मजबूत बनाएगा.
ब्रह्मपुत्र पर ड्रैगन की नई चाल: विशाल डैम का निर्माण शुरू, भारत ने दी तीखी प्रतिक्रिया
19 Jul, 2025 09:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चीन : भारत और बांग्लादेश के विरोध के बावजूद चीन ने दक्षिण-पूर्वी तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर दुनिया के सबसे बड़े बांध का निर्माण शुरू कर दिया है। उसका दावा है कि इससे हर साल 300 अरब किलोवाट बिजली का उत्पादन होगा। चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ ने कहा कि इस बांध से तिब्बत में बिजली की जरूरतें पूरी होंगी। परियोजना पर कुल 1.2 ट्रिलियन युआन (167 अरब डॉलर, करीब 14 लाख करोड़ रुपये) का निवेश होने की योजना है। विशेषज्ञों के अनुसार, चीन ब्रह्मपुत्र नदी के पानी को भारत के खिलाफ हथियार की तरह इस्तेमाल कर सकता है।
चीन की इस परियोजना का भारत और बांग्लादेश विरोध कर रहे हैं। इसके बावजूद चीन ने इस परियोजना को जोर-शोर से शुरू करने का फैसला किया है। ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध बनाने की शुरुआत का एलान खुद चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग ने किया है। शनिवार को चाइना याजियांग ग्रुप नाम की एक नई कंपनी का भी आधिकारिक तौर पर अनावरण किया गया। शिन्हुआ ने बताया कि यह कंपनी तिब्बत के दक्षिण-पूर्व में स्थित निंगची शहर में स्थित पांच जलप्रपात बांधों वाली इस जलविद्युत परियोजना के निर्माण के लिए जिम्मेदार होगी।
2020 में चीन ने प्रमुख नीतिगत दस्तावेज को स्वीकृति दी
बता दें कि चीन 1.5 बिलियन डॉलर लागत जैम हाइड्रोपावर स्टेशन की शुरुआत 2015 में ही कर चुका है। यह तिब्बत की सबसे बड़ी परियोजना है। ब्रह्मपुत्र पर डैम की यह परियोजना चीन की 14वीं पंचवर्षीय योजना (2021-25) का हिस्सा है। 2020 में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (CPC) ने जिस प्रमुख नीतिगत दस्तावेज को स्वीकृति दी थी, यह उसी का हिस्सा है। चीन इस परियोजना को देश के आर्थिक-सामाजिक विकास और 2035 तक अमल में लाए जाने वाले दीर्घकालिक उद्देश्यों का अंग बताता है।
भारत-चीन के बीच तनाव का कारण बनेगा ब्रह्मपुत्र पर बांध
तिब्बत में इस नदी को यारलुंग जांगबो नाम से जाना जाता है। परियोजना के लिए इसी पर बांध निर्माण शुरु हुआ है। इसे हिमालय के करीब एक विशाल घाटी में बनाया जाएगा। इसी स्थान से ब्रह्मपुत्र नदी अरुणाचल प्रदेश और फिर बांग्लादेश की तरफ मुड़ जाती है। यह बांध चीन और भारत के बीच तनाव का कारण बन सकता है। चीन का दावा है कि निचले इलाकों पर इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। चीन के पर्यावरणविद लंबे समय से ब्रह्मपुत्र घाटी में बांध निर्माण के अपरिवर्तनीय प्रभाव को लेकर चिंतित हैं, जहां नदी 50 किलोमीटर (31 मील) के क्षेत्र में 2,000 मीटर (6,560 फीट) की ऊंचाई तक गिरती है। यह क्षेत्र एक राष्ट्रीय प्रकृति अभयारण्य और देश के प्रमुख जैव विविधता केंद्रों में से एक है।
ड्रैगन भारी मात्रा में पानी छोड़ने की कुटिल चाल भी चल सकता है
इस परियोजना से भारत में चिंताएं पैदा हो गई हैं, क्योंकि बांध के आकार और पैमाने के कारण चीन ब्रह्मपुत्र के जल प्रवाह को नियंत्रित कर सकेगा। जल प्रवाह पर अधिकार मिलने पर पड़ोसी देश के साथ टकराव की स्थिति में चीन सीमावर्ती क्षेत्रों में बाढ़ लाने के लिए भारी मात्रा में पानी छोड़ने की कुटिल चाल भी चल सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, चीन ब्रह्मपुत्र नदी के पानी को भारत के खिलाफ हथियार की तरह इस्तेमाल कर सकता है। वह जरूरत पड़ने पर तिब्बत के बांध में जमा पानी को बिना किसी पूर्व सूचना के छोड़ सकता है। इससे अरुणाचल प्रदेश और असम के निचले इलाकों में बाढ़ आ सकती है और हालात बिगड़ सकते हैं। बड़े बांध के निर्माण से रिहायशी इलाकों के साथ जंगल और जंगली जानवरों पर भी इसका असर पड़ता है। नदी के बहाव के साथ गाद आती है जो खनिजों से भरपूर होने के साथ खेती और तटीय इलाकों की स्थिरता के लिए जरूरी है। बांध का निर्माण गाद के प्रवाह को प्रभावित कर सकता है और अरुणाचल प्रदेश की जैव विविधता प्रभावित हो सकती है।
भारत भी ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध बना रहा है
यह भी दिलचस्प है कि चीन के अलावा ब्रह्मपुत्र पर भारत भी बांध बना रहा है। हालांकि, यह परियोजना तिब्बत नहीं, अरुणाचल प्रदेश में है। भारत और चीन ने सीमा पार की नदियों से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के लिए 2006 में विशेषज्ञ स्तरीय तंत्र (ईएलएम) की स्थापना की थी। इसके तहत चीन बाढ़ के मौसम में भारत को ब्रह्मपुत्र नदी और सतलुज नदी के जलस्तर से जुड़ी वैज्ञानिक जानकारी मुहैया कराता है।
हरियाणा: रेवाड़ी में महिला की दर्दनाक हत्या, अकेलेपन का उठाया फायदा
19 Jul, 2025 07:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रेवाड़ी। मसीत गांव में एक 48 वर्षीय महिला की उसके घर में निर्मम हत्या कर दी गई। जब यह वारदात हुई महिला घर में अकेली थी। घर के अंदर सामान भी बिखरा पड़ा था। इसी से आशंका जताई गई है कि रात में बदमाश घर में घुसे और लूटपाट के विरोध में उन्होंने हत्या की।
मृतक महिला की पहचान सुनीता देवी के रूप में हुई है। सुनीता का बेटा अर्जुन पठानकोट में बीएससी नर्सिंग का छात्र है, जबकि पति प्यारेलाल चित्तौड़गढ़ में एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं। दो बेटियां हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। अर्जुन ने बताया कि मेरी अंतिम बार मां से 17 जुलाई को बात हुई थी। 18 जुलाई को सुबह मैंने बात करने के लिए प्रयास शुरू किए थे, लेकिन शाम तक फोन ऑन नहीं मिला। फिर मैंने पड़ोसी अजय को कॉल कर मां से बात कराने को कहा। घर पर देखा तो महिला मृत अवस्था में पड़ी हुई थी। उसके बाद जानकारी पुलिस को दी गई।
महिला के सिर पर गहरे चोट के निशान पाए गए हैं, जो निर्मम हत्या की ओर इशारा करते हैं। पास में ही सरिया भी मिला है। मृतका सुनीता देवी का मोबाइल फोन भी गायब मिला है। अर्जुन के अनुसार घर की अलमारी और संदूक के ताले टूटे हुए मिले हैं। कानों की बाली और गले के जेवर भी गायब हैं। घर पर एक सरिया भी पड़ा मिला है, जिस पर खून लगा हुआ है। पुलिस की पांच टीमें मामले में जांच कर रही हैं। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे खंगाल रही है। हत्या के कारणों का पता लगाया जा रहा है। जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
फरीदाबाद में निर्माण कार्य बना मौत का कारण, पिलर से गिरे मजदूर, एक की इलाज के दौरान मौत
19 Jul, 2025 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जेवर एक्सप्रेसवे पर हादसा: पिलर से गिरकर घायल हुए दो मजदूरों में एक की मौत, दूसरा अस्पताल में भर्ती
फरीदाबाद। हरियाणा के फरीदाबाद जिले के छांयसा गांव के पास निर्माणाधीन जेवर एक्सप्रेसवे पर बड़ा हादसा हो गया। निर्माण कार्य के दौरान दो मजदूर पिलर से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। इनमें से एक मजदूर की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि दूसरा अस्पताल में भर्ती है और उसका इलाज जारी है। मृतक की पहचान 28 वर्षीय प्रिंस पाल के रूप में हुई है, जो पंजाब के अमृतसर का निवासी था। वहीं, घायल मजदूर का नाम ओमकार बताया गया है, जो निजी अस्पताल में उपचाराधीन है।घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी है।
फिलहाल पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और इसमें निर्माण कंपनी या साइट प्रबंधन की कोई लापरवाही तो नहीं रही।प्रशासन की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन हादसे के बाद मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।
उत्तर कोरिया का चौंकाने वाला कदम, सैटेलाइट इमेज में दिखा नया लॉन्चिंग प्लेटफॉर्म
19 Jul, 2025 04:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
उत्तर कोरिया एक बार फिर अपने अंतरिक्ष मिशन को लेकर सुर्खियों में है. दरअसल एक सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि उत्तर कोरिया ने अपने अहम स्पेस लॉन्चिंग स्टेशन सोहे Sohae Satellite Launching Station में एक नया और बड़ा पियर यानी जहाजों को लंगर डालने वाला प्लेटफॉर्म तैयार कर लिया है. माना जा रहा है कि यह सुविधा बड़े रॉकेट हिस्सों की ढुलाई के लिए बनाई गई है.
ये वही लॉन्च स्टेशन है जिसे उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने 2022 में आधुनिक बनाने के आदेश दिए थे. इस स्टेशन से बड़े रॉकेट लॉन्च किए जाते हैं और यहीं पर रॉकेट इंजनों की टेस्टिंग भी होती है. दिलचस्प बात ये है कि 2018 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के दौरान किम ने इसी स्टेशन को खत्म करने का वादा किया था, ताकि प्रतिबंधों से राहत मिल सके. लेकिन बाद में उन्होंने उस वादे को तोड़ दिया.
सैटेलाइट इमेज में क्या दिखा?
सैटेलाइट इमेज से पता चलता है कि 25 मई तक ये पियर बन रहा था और हाल ही में ये पूरी तरह तैयार हो गया है. इसका मकसद बड़े और भारी रॉकेट पार्ट्स को समुद्र के रास्ते स्टेशन तक लाना बताया जा रहा है. 38 North प्रोजेक्ट के मुताबिक, पियर को इस तरह डिजाइन किया गया है कि बड़े और भारी जहाज़ यहां आसानी से लंगर डाल सकें. इसके अलावा स्टेशन के अंदर नई सड़के और संभवत:रेलवे लाइन भी बिछाई जा रही हैं जिससे रॉकेट के पुर्जे और ईंधन एक जगह से दूसरी जगह ले जाना आसान हो सके.
अब तक कितने रॉकेट भेज चुका है उत्तर कोरिया?
रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर कोरिया ने अगस्त 1998 से मई 2024 के बीच कम से कम 9 बार सैटेलाइट रॉकेट लॉन्च करने की कोशिश की है, इनमें से सिर्फ तीन लॉन्चिंग को ही सफल माना गया है. बाकी प्रयास या तो विफल रहे या अधूरे. सबसे हाल की कोशिश में तो रॉकेट पहले स्टेज में ही फट गया था. यही वो वजह है जिससे दुनिया को लगने लगा है कि उत्तर कोरिया चुपचाप अपनी स्पेस कैपेबिलिटी को तेजी से बढ़ा रहा है.
रॉकेट और सैटेलाइट के पीछे असली मंशा क्या?
उत्तर कोरिया कई बार कह चुका है कि वह अंतरिक्ष में सैटेलाइट भेजना चाहता है, लेकिन दुनिया का शक ये है कि वो इस बहाने बैलिस्टिक मिसाइल टेक्नोलॉजी को टेस्ट कर रहा है. संयुक्त राष्ट्रप पहले ही इसे बैन कर चुका है क्योंकि मिसाइल और सैटेलाइट लॉन्चर में एक जैसी टेक्नोलॉजी होती है जैसे इंजन, गाइडेंस सिस्टम और वॉरहेड अलग करने की तकनीक.
जहां उत्तर कोरिया गुपचुप रॉकेट लॉन्च की तैयारी में है, वहीं उसका पड़ोसी दक्षिण कोरिया खुले तौर पर पिछले दो साल में चार जासूसी सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेज चुका है और एक और लॉन्च बाकी है. ऐसे में दोनों देशों के बीच स्पेस रेस और टेंशन दोनों तेज़ी से बढ़ रहे हैं.
हरियाणा में कानून व्यवस्था बेहाल, सरपंच की दिनदहाड़े हत्या से उबाल
19 Jul, 2025 02:41 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जींद: हरियाणा के जींद जिले में कानून-व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल उठ खड़े हुए हैं, जहां गुरुवार को दिनदहाड़े एक गांव के सरपंच की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मृतक की पहचान चाबरी गांव के सरपंच रोहताश के रूप में हुई है, जिनकी हत्या उन्हीं की लाइसेंसी पिस्तौल से कर दी गई। पुलिस के अनुसार, रोहताश पर यह हमला राधाना और पिंडारा के बीच सड़क पर उस समय हुआ, जब कुछ अज्ञात हमलावरों ने उन्हें घेर लिया। आरोपियों ने पहले उन्हें बुरी तरह पीटा, फिर उनकी लाइसेंसी पिस्तौल छीनकर उनके सिर में गोली मार दी। गोली लगते ही रोहताश की मौके पर ही मौत हो गई। उनकी पिस्तौल घटनास्थल पर ही पड़ी मिली।
चौंकाने वाली बात यह है कि गोली लगने से कुछ ही मिनट पहले रोहताश ने पुलिस की इमरजेंसी हेल्पलाइन 112 पर कॉल कर मदद मांगी थी। कॉल रिकॉर्ड में उन्होंने कहा कि कुछ लोग मुझ पर हमला कर रहे हैं। मेरी पिस्तौल छीन ली है। कृपया मुझे बचाइए, लेकिन पुलिस समय पर नहीं पहुंच सकी। रोहताश की हत्या ने पूरे गांव और आसपास के क्षेत्रों को हिलाकर रख दिया है। वह न केवल चाबरी गांव के निर्वाचित सरपंच थे, बल्कि उनकी छवि एक शांत और विवादों से दूर रहने वाले व्यक्ति की थी। वह अपने पीछे पत्नी, बेटा और बेटी को छोड़ गए हैं।
पंचायत चुनाव में मिली थी बड़ी जीत
रोहताश अगस्त 2023 में हुए पंचायत चुनाव में चुने गए थे। गौरतलब है कि चाबरी और उसके पड़ोसी गांव भिदाताना ने 2022 के पंचायत चुनावों का बहिष्कार किया था, जिसके बाद दोबारा हुए चुनावों में रोहताश ने कुल 1,029 वोटों में से 611 वोटों के साथ जीत दर्ज की थी। यह हत्या हाल के दिनों में जींद जिले में हुई हत्याओं की लंबी श्रृंखला का हिस्सा है। पिछले एक महीने में जिले में कम से कम 11 हत्याएं हो चुकी हैं, जिनमें कई मामलों का संबंध गैंगवार, पारिवारिक रंजिशों और व्यक्तिगत दुश्मनी से है।
कब-कब हुई हत्याएं
20 जून: खरकरमजी गांव में शराब ठेकेदार की हत्या
24 जून: जोगिंदर नगर, भिदाताना और सफा खेड़ी में तीन अलग-अलग हत्या मामले
26 जून: जुलाना में चचेरे भाई ने युवक की हत्या कर दी
27 जून: जलालपुर खुर्द में बलजीत उर्फ 'बादल सैनी' की हत्या
5 जुलाई: पौली गांव के पास गैंगवार में कुख्यात अपराधी ऋषि लोहान की हत्या
6 जुलाई: काबरचा गांव में पूर्व सरपंच के बेटे की चाकू मारकर हत्या
पुलिस की कार्रवाई
घटना के बाद डीएसपी संजय कुमार ने बताया कि इस मामले में कई संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है। रोहताश के बेटे के बयान पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है।
उड़ान के दौरान दरवाजा खोलने की कोशिश, क्रू से भिड़ा यात्री, इमरजेंसी लैंडिंग
19 Jul, 2025 12:29 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका के डेट्रायट जा रही एक डोमेस्टिक एयरलाइन को पूर्वी आयोवा में इमरजेंसी लैंडिंग करना पड़ा. बताया जा रहा है कि उड़ान के दौरान एक यात्री ने विमान के चालक दल के सदस्य के साथ हाथापाई की और हवा में इमरजेंसी दरवाजा खोलने की कोशिश की. पायलट की हवाई यातायात नियंत्रण (एटीसी) से बातचीत के आधार पर यह जानकारी मिली है.
स्काइवेस्ट एयरलाइन की उड़ान संख्या 3612 के पायलट ने करीब छह बजे सिडार रैपिड्स के पूर्वी आयोवा एयरपोर्ट टावर से संपर्क कर विमान को तत्काल उतारने की अनुमति मांगी.
इमरजेंसी दरवाजा खोलने की कोशिश
पायलट ने बताया, वह अभी फ्लाइट अटेंडेंट से लड़ रहा है और इमरजेंसी दरवाजा खोलने की कोशिश कर रहा है. पुलिस के अनुसार, यह घटना विमान के ओमाहा, नेब्रास्का से रवाना होने के थोड़ी देर बाद हुई. विमान को सिडार रैपिड्स एयरपोर्ट की ओर मोड़ दिया गया और सुरक्षित उतारा गया. विमान के उतरते ही स्थानीय पुलिस ने ओमाहा निवासी 23 वर्षीय युवक को गिरफ्तार कर लिया.
डेट्रॉइट के लिए रवाना हुआ विमान
स्काईवेस्ट एयरलाइंस का मुख्यालय यूटा राज्य में है. यह कंपनी यूनाइटेड, डेल्टा, अमेरिकन और अलास्का एयरलाइंस जैसी प्रमुख एयरलाइनों के लिए उड़ानें संचालित करती है. स्काईवेस्ट द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, बाद में विमान डेट्रॉइट के लिए रवाना हुआ. एयरलाइन ने यह भी कहा कि यात्रयों और चालक दल की सुरक्षा सबसे जरूरी है, और इस तरह के बर्ताव को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
टीआरएफ को वैश्विक आतंकी घोषित करने पर भड़का पाकिस्तान, भारत पर लगाए आरोप
19 Jul, 2025 12:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पाकिस्तान ने शुक्रवार को दावा किया कि उसने आतंकवादी नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया है और पहलगाम आतंकवादी हमले को लश्कर-ए-तैयबा से जोड़ने का कोई भी प्रयास गलत है. अमेरिका ने पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटा संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) को वैश्विक आतंकवादी संगठन घोषित किया है, जिसने जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की जिम्मेदारी ली थी.
अमेरिका के इस कदम के बाद पाकिस्तान के विदेश कार्यालय का बयान आया है. बयान में कहा गया है कि पाकिस्तान ने संबंधित संगठनों के नेटवर्क को प्रभावी ढंग से और व्यापक रूप से ध्वस्त कर दिया है, उसके सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है और उन पर मुकदमा चलाया है. पहलगाम हमले की जांच अभी भी अनिर्णायक बताते हुए उसने कहा कि पाकिस्तान में प्रतिबंधित एक निष्क्रिय संगठन लश्कर-ए-तैयबा के साथ इसका कोई भी संबंध जमीनी हकीकत से उलट है.
पाकिस्तान ने संबंधित संगठनों को ध्वस्त किया
विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा कि पाकिस्तान ने संबंधित आतंकवादी संगठनों को प्रभावी और व्यापक रूप से ध्वस्त कर दिया है. उनके नेताओं को गिरफ्तार किया गया है, और उन पर मुकदमा चलाया गया है. उनके सदस्यों को कट्टरपंथी विचारधारा से मुक्त किया गया है.
द रेजिस्टेंस फ्रंट आतंकवादी संगठन घोषित
अमेरिका ने पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटा संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) को वैश्विक आतंकवादी संगठन घोषित किया है, जिसने जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की जिम्मेदारी ली थी. अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी करके यह जानकारी दी. बयान में विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि यह कार्रवाई पहलगाम हमला मामले में न्याय संबंधी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख पर अमल की अमेरिका की प्रतिबद्धता को दर्शाती है.
पहलगाम हमले में 26 लोगों की मौत
अमेरिका के इस कदम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए वाशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास ने कहा कि इससे पता चलता है कि भारत-अमेरिका आतंकवाद-रोधी सहयोग कितना मजबूत है. जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए हमले में 26 लोग मारे गए थे. द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने इस हमले की ज़िम्मेदारी ली थी लेकिन बाद में भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ने पर उसने अपना बयान वापस ले लिया था.
टीआरएफ प्रमुख हमले का मास्टरमाइंड
रुबियो ने कहा कि विदेश मंत्रालय टीआरएफ को विदेशी आतंकवादी संगठन (एफटीओ) और विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी (एसडीजीटी) घोषित करता है. उन्होंने कहा कि टीआरएफ और इससे जुड़े अन्य संगठनों को लश्कर-ए-तैयबा के नाम के साथ विदेशी आतंकवादी संगठन (एफटीओ) और विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी (एसडीजीटी) के रूप में शामिल किया गया है.
अफगानिस्तान में भूगर्भीय हलचल, उत्तराखंड तक पहुंचा झटकों का असर
19 Jul, 2025 12:20 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के एक बयान में कहा गया है कि शुक्रवार देर रात अफगानिस्तान में 4.6 तीव्रता का भूकंप आया. एनसीएस के अनुसार, भूकंप 125 किलोमीटर की गहराई पर आया. एक्स पर एक पोस्ट में, एनसीएस ने कहा कि भूकंप की तीव्रता 4.6 मापी गई. वहीं रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार तड़के उत्तराखंड के चमोली जिले में 3.3 तीव्रता का भूकंप आया.
रिपोर्ट के अनुसार, भूकंप 10 किलोमीटर की गहराई पर आया. एक्स पर एक पोस्ट में, एनसीएस ने कहा कि भूकंप की तीव्रता 3.3 रही, जिसकी गहराई 10 किलोमीटर रही. इससे पहले 8 जुलाई को, उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में रिक्टर पैमाने पर 3.2 तीव्रता का भूकंप आया था. रिपोर्ट के अनुसार, यह भूकंप दोपहर 1:07 बजे 5 किलोमीटर की गहराई पर आया था.
इस महीने कई बार आया भूकंप
जानकारी के मुताबिक अफगानिस्तान में इससे पहले 17 जुलाई को, रिक्टर पैमाने पर 4.7 तीव्रता का एक और भूकंप आया था. वहीं 14 जुलाई को, इस क्षेत्र में 4.0 तीव्रता का भूकंप आया था. 10 जुलाई को, 4.3 तीव्रता के भूकंप ने इस क्षेत्र को हिला दिया था.
इस तरह के उथले भूकंप, पृथ्वी की सतह के पास आने पर ऊर्जा के अधिक उत्सर्जन के कारण, गहरे भूकंपों की तुलना में अधिक खतरनाक होते हैं. गहरे भूकंपों की तुलना में, जो सतह पर आते ही ऊर्जा खो देते हैं, इससे जमीन का कंपन ज्यादा होता है और इमारतों को अधिक नुकसान होते हैं.
शक्तिशाली भूकंपों का इतिहास
अफगानिस्तान में शक्तिशाली भूकंपों का इतिहास रहा है, और रेड क्रॉस के अनुसार, हिंदू कुश पर्वत श्रृंखला एक भूगर्भीय रूप से सक्रिय क्षेत्र है, जहां हर साल भूकंप आते हैं. अफगानिस्तान भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के बीच कई फॉल्ट लाइन पर स्थित है. और एक फॉल्ट लाइन सीधे हेरात से भी होकर गुजरती है.
यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के बीच टकराव
भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के बीच टकराव क्षेत्र में कई सक्रिय भ्रंश रेखाओं पर इसका स्थान इसे एक भूकंपीय रूप से सक्रिय क्षेत्र बनाता है. ये प्लेटें आपस में मिलती और टकराती रहती हैं, जिससे लगातार भूकंपीय गतिविधियां होती हैं. संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (यूएनओसीएचए) के अनुसार, अफगानिस्तान मौसमी बाढ़, भूस्खलन और भूकंप सहित प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बना हुआ है.
रिपोर्ट ने कहा कि अफगानिस्तान में लगातार आने वाले भूकंप कमजोर समुदायों को नुकसान पहुंचाते हैं, जो पहले से ही दशकों के संघर्ष और अविकसितता से जूझ रहे हैं और एक साथ कई झटकों से निपटने के लिए उनके पास बहुत कम लचीलापन है.
अफगानिस्तान में हुई तिहाई मुल्कों की बैठक: भारत से जोड़ने के लिए नई रेल कनेक्टिविटी का मार्ग तय
18 Jul, 2025 10:56 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काबुल। अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में तीन देशों की बैठक हुई। इस बैठम में फैसला लिया गया है कि पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा स्थित खारलाची से उज्बेकिस्तान के नैबाबाद तक ट्रेन का रूट विकसित किया जाएगा। काबुल में हुई इस बैठक में अफगानिस्तान पर शासन कर रहे तालिबान के नेता और उज्बेकिस्तान एवं पाकिस्तान के नेता मौजूद थे। इस बैठक में फैसला हुआ कि इस रेलवे परियोजना के लिए फिजिबिलिटी स्टडी कराई जाए। तीनों देशों के बीच इसे लेकर सहमति बन गई है। इसे यूएपी रेलवे प्रोजेक्ट नाम दिया गया है, जिसका अर्थ उज्बेकिस्तान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान रेलवे परियोजना से है।
उज्बेकिस्तान ऐसा देश है, जो सिल्क रूट पर स्थित है। यह सिल्क रूट यानी रेशम मार्ग चीन को मध्य एशिया के देशों से जोड़ता था और फिर यही रूट आगे बढ़ते हुए यूरोप तक जाता है। ऐसे में यदि यह परियोजना शुरु होती है तो पाकिस्तान के लिए बड़ी सफलता होगी। पाकिस्तान के डिप्टी पीएम इशाक डार ने एक्स पर इस समझौते की जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि मैं पाकिस्तान, उज्बेकिस्तान और अफगानिस्तान के लोगों को बधाई देता हूं। तीनों देशों के बीच रेल नेटवर्क के लिए फिजिबिलिटी स्टडी पर सहमति बनी है।
उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट क्षेत्रीय स्तर पर कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा। इसके अलावा आर्थिक तौर पर भी फायदेमंद होगा। डार ने कहा कि पाकिस्तान के बंदरगाहों से मध्य एशिया तक सीधी पहुंच इस कॉरिडोर से होगी। इस समझौते पर साइन से पहले तीनों देशों के विदेश मंत्रियों की भी बैठक हुई थी।
बता दें पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बीते कई सालों से तनाव की स्थिति बनी हुई है। फिर भी इस अहम प्रोजेक्ट पर सहमति मायने रखती है। इस परियोजना पर तीनों देशों ने 2023 में ही सहमति जताई थी। यह रेल लिंक उज्बेकिस्तान के तरमिज से होकर गुजरेगा। इसके अलावा अफगानिस्तान में मजार-ए-शरीफ और लोगार से जाएगा। पाकिस्तान में इस रेल लिंक की एंट्री खारलाची बॉर्डर से होगी। यह बॉर्डर खैबर पख्तूनख्वा में पड़ता है और अफगानिस्तान से सटा है। तीनों देशों का मानना है कि इससे कनेक्टिविटी बढ़ेगी तो अर्थव्यवस्था को भी ताकत मिलेगी।
“सिंधु जल संधि पर नई चुनौती: चीन दे सकता है पाकिस्तान को कूटनीतिक सहारा”
18 Jul, 2025 08:53 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। पहलगाम आतंकी हमले के बाद जब भारत ने सिंधु जल संधि पर रोक लगाने का फैसला किया, फिर क्या पाकिस्तान बौखला उठा था। इस संधि के लागू होने के बाद 65 वर्षों में भारत और पाकिस्तान ने कई जंग लड़ी, लेकिन यह समझौता जारी रहा। लेकिन इस पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने साफ कर दिया कि खून और पानी साथ नहीं बह सकते। सिंधु जल समझौते के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच लगातार तनातनी बनी हुई है, लेकिन भारत अपने रुख से पीछे हटने को तैयार नहीं है। इस बीच चीन ने इस मामले में रुचि दिखाई है।
दरअसल, पाकिस्तान ने मामले में चीन से कूटनीतिक समर्थन मांगा है, जिसके बाद बीजिंग और उसके विश्लेषकों ने भारत के इस कदम को एक तरह की गैरकानूनी दबावपूर्ण कूटनीति बताया है। इसके बदले में चीन ने पाकिस्तान के अंदर सिंधु की एक सहायक नदी पर स्थित मोहमंद बांध के निर्माण में तेजी लाने की घोषणा की है। भारत को चीनी प्रतिक्रिया की कुछ हद तक अपेक्षा पहले ही थी, क्योंकि बीजिंग और इस्लामाबाद एक दूसरे को सदाबहार दोस्त हैं। वहीं, चीन भारत को अपना क्षेत्रीय दुश्मन मानता है और दोनों के बीच पूर्वी सीमा पर तनाव चल रहा है। लेकिन एक विश्लेषक के अनुसार, बीजिंग की भूमिका केवल एक तटस्थ पर्यवेक्षक से कहीं अधिक है।
अमेरिका स्थित जल संधाधन अनुसंधान संस्थान में रिसर्च एसोसिएट पिंटू कुमार महला के हवाले से बताया है कि बीजिंग अपने क्षेत्र की नदियों के प्रवाह को बाधित करके प्रतिक्रिया दे सकता है, जो भारत में आती हैं। हालांकि, चीन सिंधु जल संधि का पक्षकार नहीं है, लेकिन सिंधु नदी का उद्गम तिब्बत से होता है।
भड़क सकता है क्षेत्रीय तनाव
महला के अनुसार, सिंधु जल संधि पर बीजिंग का किसी भी तरह का हस्तक्षेप क्षेत्रीय तनाव को भड़काने का जोखिम पैदा करता है। उनका कहना है कि चीनी मीडिया भारत को आक्रामक बताने वाले दुष्प्रचार शामिल है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि दक्षिण एशियाई राजनीति में बीजिंग की व्यापक उपस्थिति को बढ़ावा दिया जा सके।
“मेर्क्ज़ सरकार की कठोर नीति: बिना शरण मिलने वालों को भेजा अफगानिस्तान, तालिबान पर तीसरा तनाव”
18 Jul, 2025 06:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बर्लिन। ईरान और पाकिस्तान के बाद अब जर्मनी ने भी अफगान नागरिकों को अपने देश से निकालना शुरु कर दिया है। यह तालिबान सरकार के लिए एक और बड़ा झटका है, जो पहले से ही अपने नागरिकों के बड़े पैमाने पर निर्वासन से परेशान है। शुक्रवार सुबह, बर्लिन से एक विमान ने 81 अफगान नागरिकों को लेकर उड़ान भरी। ये वे लोग थे जिनका जर्मनी की न्यायिक एजेंसियों से पहले भी संपर्क रहा था। जर्मनी ने कतर की मदद से यह निर्वासन किया है और स्पष्ट किया है कि यह सिर्फ शुरुआत है, और आने वाले समय में बड़ी संख्या में अफगानों को निकाला जाएगा। यह कदम जर्मनी की नई सरकार के सख्त प्रवासी कानूनों की घोषणा के बाद हुआ है। चांसलर फ्रेडरिख मर्ज ने चुनावी रैली में साफ कर दिया था कि जर्मनी की सीमाएं अब सबके लिए खुली नहीं रहेंगी। उनके नेतृत्व में अफगानों की देशनिकाली की प्रक्रिया तेज हो गई है। जिन लोगों को निकाला जा रहा है, वे हैं जो 2021 में तालिबान के कब्जे के बाद अफगानिस्तान से भागकर जर्मनी आए थे। कई लोगों को तब उम्मीद थी कि पश्चिमी देश उन्हें अपनाएंगे, लेकिन अब जर्मनी सरकार का कहना है कि केवल उन्हीं लोगों को निकाला गया है जो न्यायिक जांचों में दोषी साबित हुए हैं। पिछले तीन महीनों में, पाकिस्तान, ईरान और अब जर्मनी, तीनों देशों ने हजारों अफगानों को या जबरन निकाला है या बाहर का रास्ता दिखाया है। 19 अप्रैल को आई खबर के अनुसार, 19,500 पाकिस्तानी नागरिकों ने देश छोड़ा था, और हर दिन 700-800 अफगानी नागरिक पाकिस्तान छोड़ रहे थे। पाकिस्तान से निकाले गए ज्यादातर लोगों ने अपने देश की शक्ल तक नहीं देखी थी। कई लोग पाकिस्तान में पैदा हुए थे, और कुछ की बेटियां पंजाब में स्कूल जाती थीं।
वहीं हाल के दिनों में ईरान ने भी बड़ी संख्या में अफगानी नागरिकों को बाहर निकाला है। हाल ही में 29,155 लोगों को वापस अफगानिस्तान भेजा गया था। ईरान ने यह तब किया जब वहां गर्मी 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गई थी। 11 जुलाई को, ईरान और पाकिस्तान ने एक ही दिन में करीब 30 हजार अफगान शरणार्थियों को जबरन निकाला, जिसमें पाकिस्तान ने उसी दिन 568 लोगों को बाहर का रास्ता दिखाया। इसे लेकर तालिबान और ईरान के बीच तनाव भी देखा जा रहा है। अफगान तालिबान ने हाल ही में ईरान से कहा था कि दूसरों के साथ वही व्यवहार करें जो वे खुद के साथ सह सकें।
यह लगातार तीसरा बड़ा झटका है जब हजारों अफगानी नागरिकों को अपने ही देश लौटना पड़ रहा है, जहां तालिबान का शासन है। इनमें से कई लोगों का अफगानिस्तान से कोई सीधा संबंध नहीं रहा है, और उन्हें एक इसतरह के देश में भेजा जा रहा है जिसकी राजनीतिक और सामाजिक स्थिति अस्थिर है। यह स्थिति तालिबान सरकार के लिए गंभीर चुनौतियां पैदा करती है, जिसमें इतने बड़े पैमाने पर विस्थापित लोगों के पुनर्वास और उनकी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने का दबाव शामिल है।
हरियाणा में मौसम की मार, फसलें हुईं चौपट, किसानों की बढ़ी चिंता
18 Jul, 2025 05:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Haryana: प्रदेश में तेजी से मौसम में बदलाव के साथ ही बादलवाही रही। शुक्रवार को कई जिलों में छिटपुट बूंदाबांदी हुई। वहीं यमुनानगर में वर्षा होने के साथ ही नकटी नदी में एक 66 वर्षीय किसान ठाकुर सिंह की डूबने से मौत हो गई।
वहीं प्रदेश में मौसम विज्ञानियों ने आने वाले दिनों भी वर्षा होने की संभावना व्यक्त की है। साथ ही इससे तापमान में भी गिरावट दर्ज की जा सकती है। पिछले कुछ दिनों से लगातार वर्षा होने से हिसार के हांसी-नारनौंद क्षेत्र में खेतों में पानी भर गया। इससे करीब छह हजार एकड़ में फसल खराब हो गई।
मौसम विज्ञान विभाग की ओर से मानसून के लगातार सक्रिय रहने की बात कही गई है। विज्ञानियों के अनुसार 18 जुलाई को भी हवा में नमी रहने से कई जिलों में छिटपुट बूंदाबांदी हुई।
यमुनानगर के कुछ इलाकों व नूंह में तेज वर्षा हुई। वहीं प्रदेश के नारनौल, सिरसा और सोनीपत में हल्की वर्षा हुई। प्रदेश में लगातार हो रही वर्षा का असर खेतों पर भी पड़ा है। खेत में खड़ी हजारों एकड़ भूमि में पानी भर गया है। इसका सीधा प्रभाव कपास की फसल पर पड़ा है।
यमुनानगर के साढौरा में 70 एमएम वर्षा
यमुनानगर जिले में वीरवार को कहीं बादल खूब बरसे तो कहीं सूखा रहा। वर्षा से धान व गन्ना उत्पादक किसानों को काफी फायदा मिला। सबसे अधिक साढौरा तहसील क्षेत्र में 70 एमएम वर्षा दर्ज की गई। यमुनानगर के कई क्षेत्रों में अल सुबह वर्षा शुरू हो गई।
वहीं गांव कल्याणपुर अंटारी निवासी 66 साल के किसान ठाकुर सिंह नकटी नदी में अचानक आए पानी की उफनती लहरों में बह गया जिससे उसकी मौत हो गई। वीरवार को उसका शव नदी की पटरी के पास पेड़ में फंसा मिला। वहीं जीटी बेल्ट के कई जिलों में बादलवाही रही तो कहीं धूप खिली रही।
इन जिलो में आज भी वर्षा की संभावना
सिरसा, हिसार, भिवानी, चरखी दादरी, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, गुरुग्राम, फरीदाबाद, मेवात, पलवल, पंचकूला, अंबाला, यमुनागनर, फतेहाबाद, जींद, रोहतक, झज्जर, कुरुक्षेत्र, कैथल, करनाल, पानीपत व सोनीपत।
बदमाशों का कहर: बाइक से लौट रहे सरपंच को बीच रास्ते रोका और कर दी हत्या
18 Jul, 2025 01:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणा : जींद में गुरुवार देर रात एक सनसनीखेज वारदात में चाबरी गांव के सरपंच रोहताश की गोली मारकर हत्या कर दी गई। बदमाशों ने सरपंच की लाइसेंसी रिवॉल्वर छीनकर उसी से उनके सिर में गोली मारी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जींद के सिविल अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
जानकारी के अनुसार, चाबरी गांव के सरपंच रोहताश गुरुवार शाम को किसी काम से जींद शहर आए थे। अपना काम निपटाने के बाद वे रात करीब 12:30 बजे बाइक से अपने गांव लौट रहे थे। पिंडारा और रधाना गांव के बीच कुछ अज्ञात बदमाशों ने उन्हें रोक लिया। बदमाशों ने सरपंच के साथ धक्का-मुक्की की और उनकी लाइसेंसी रिवॉल्वर छीन ली। इसके बाद बदमाशों ने उसी रिवॉल्वर से रोहताश के सिर में गोली मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी फरार हो गए।
पुलिस की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही जींद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लिया। पुलिस ने हत्यारों की तलाश में आसपास के क्षेत्रों में नाकेबंदी कर सर्च अभियान शुरू किया है, लेकिन अभी तक आरोपियों का कोई सुराग नहीं मिला है। मृतक की लाइसेंसी रिवॉल्वर भी मौके पर बरामद की गई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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