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हरियाणा के सोनीपत में भाजपा नेता सुरेंद्र जवाहरा की गोली मारकर हत्या, जमीनी विवाद में मौत
15 Mar, 2025 06:24 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणा के सोनीपत में होली के दिन एक भाजपा नेता मुंडलाना मंडल अध्यक्ष सुरेंद्र जवाहरा की गोली मारकर हत्या कर दी गई. उन पर तीन गोलियां चलाई गई. बताया जा रहा है कि इस हत्या की वारदात को जमीनी विवाद के चलते अंजाम दिया गया है. सुरेंद्र को उनके पड़ोसी ने गोली मारी, जिसके साथ उनका जमीनी विवाद चल रहा था. इसी रंजिश में पड़ोसी ने सुरेंद्र जवाहरा की हत्या कर दी.
घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में ले लिया. अब सदर थाना पुलिस मामले की जांच में जुट गई है. पुलिस ने तीन टीमों का गठन किया है. जल्दी ही आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा. मामले को लेकर मृतक की पत्नी कमला का बयान भी दर्ज कर लिया गया है. अब पुलिस हत्या की असल वजह जानने की कोशिश कर रही है. ये घटना शुक्रवार रात साढ़े 9 बजे की है, जब जवाहरा गांव में पड़ोसी ने मंडल अध्यक्ष सुरेंद्र जवाहरा को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया. सुरेंद्र ने अपने पड़ोसी से उनकी बुआ के नाम की जमीन खरीदी थी.
आरोपी ने माथे और पेट में मारी गोली
मृतक के जमीन खरीदने के बावजूद पड़ोसी मृतक सुरेंद्र को जमीन पर कदम न रखने की चेतावनी दे रहा था. इसी विवादित जमीन की बुआई करने पर गुस्साए पड़ोसी ने बीती रात 3 गोलियां मारकर सुरेंद्र की हत्या कर दी. सुरेंद्र ने पहले अपने परिवार और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ धूमधाम से होली मनाई. इसके बाद जब वह घर आए, तब पड़ोसी ने इस वारदात को अंजाम दिया. इस दौरान सुरेंद्र अपनी जान बचाने के लिए एक दुकान में घुस गए थे.
ये भी हो सकती है हत्या की वजह
सुरेंद्र के माथे और पेट में गोली लगी. हत्या करने के बाद आरोपी फरार हो गए. इसके बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई. सुरेंद्र को लहूलुहान हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें चेक किया और मृत घोषित कर दिया. जमीनी विवाद के साथ-साथ उनकी हत्या की एक और वजह बताई जा रही है. कहा जा रहा है कि उनकी पत्नी ने साल 2022 में सरपंच का चुनाव लड़ा था. हालांकि वह मामूली अंतर से हार गई थी, लेकिन इस दौरान कृष्ण सरपंच उनका विरोधी बन गया था. कृष्ण के साथ भी उनका एक विवाद था, जिसको लेकर कहा जा रहा है कि सुरेंद्र की हत्या की एक वजह ये विवाद भी हो सकता है.
बलूच लिब्रेशन आर्मी ने पाकिस्तान आर्मी के काफिले पर किया हमला, कई सैनिक घायल
15 Mar, 2025 03:22 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बलूचिस्तानः बलूच लिब्रेशन आर्मी (BLA) ने पाकिस्तान पर एक और बड़ा हमला कर दिया है। BLA ने इस हमले में पाकिस्तानी सेना के एक काफिले को बम से उड़ा दिया है। यह दावा बलूचिस्तान पोस्ट के अनुसार किया गया है। खबर के अनुसार शनिवार सुबह करीब 9 बजे तरबत में दे बलूच के पास सी पीक रोड पर पाकिस्तानी सेना के काफिले में शामिल एक वाहन पर बम विस्फोट हुआ है। जानकारी के अनुसार इस विस्फोट में पाकिस्तानी सेना के जवान हताहत हुए हैं, हालांकि अधिकारियों ने अभी तक इस संबंध में कोई विवरण नहीं दिया है।
पिछले 24 घंटों में बड़ा हमला
बलूचिस्तान में पिछले 24 घंटों में पाकिस्तानी सेना पर यह दूसरा विस्फोट है। इससे एक दिन पहले हरनई में पाकिस्तानी सेना के बम निरोधक दस्ते के पैदल सैनिकों को उस समय निशाना बनाया गया, जब वे रेलवे ट्रैक पर सफाई में व्यस्त थे। वहीं इसी सप्ताह बलूच लिबरेशन आर्मी द्वारा किए गए एक बड़े हमले में बोलन में जाफर एक्सप्रेस पर कब्जा कर लिया गया था, जिसमें पाकिस्तानी सेना के कई जवान और बंधक मारे गए। बलूच लिबरेशन आर्मी ने कैदियों की अदला-बदली पर कर्मियों की रिहाई की शर्त रखी। शनिवार को इस घटना के चौथे दिन भी बड़ी संख्या में पाकिस्तानी सैनिक बोलन में मूवमेंट में जुटे हुए हैं, जबकि बलूच लिबरेशन आर्मी ने कल रात अपने बयान में कहा था कि पाकिस्तानी सेना के साथ लड़ाई जारी है।
एंटोनियो गुटेरेस ने बांग्लादेश की सुधार प्रक्रिया पर एकजुटता व्यक्त की, यूनुस से की मुलाकात
15 Mar, 2025 02:11 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका: चार दिवसीय दौरे पर बांग्लादेश पहुंचे संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अंतरिम सरकार के सलाहकार मोहम्मद यूनुस से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने देश के घरेलू मुद्दों और रोहिंग्या की स्थिति पर चर्चा की। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने ढाका की सुधार और परिवर्तन प्रक्रिया को लेकर एकजुटता व्यक्त की। इससे पहले गुटेरेस ने कॉक्स बाजार पहुंचकर रोहिंग्या शरणार्थियों और उनकी मेजबानी करने वाले बांग्लादेशी लोगों से मुलाकात की।
महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि गुटेरेस को शरणार्थियों से मिलने का मौका मिला। इनमें से कई युवा पुरुष और महिलाएं थीं। शरणार्थियों ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव को अपने अनुभवों और चिंताओं के बारे में बताया। उन्होंने बच्चों से भी बात की। शरणार्थियों ने बताया कि उन्हें म्यांमार में अपने घरों की कितनी याद आती है। गुटेरेस ने युवाओं से भी मुलाकात की। युवाओं ने उनको फंडिंग कटौती के बारे में बताया।
महासचिव ने सबको आश्वासन दिया कि वे फंडिंग कटौती को रोकने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के म्यांमार संघर्ष को न रोक पाने पर लोगों से माफी मांगी। इसके अलावा गुटेरेस ने 60 हजार रोहिंग्या शरणार्थियों के साथ इफ्तार भी किया। गुटेरेस ने कहा कि हम फंडिंग कटौती के साथ एक गहरे मानवीय संकट का सामना कर रहे हैं। इससे कई लोग पीड़ित होंगे, और कुछ लोग मर भी सकते हैं। गुटेरेस ने कहा कि मेरी आवाज तब तक समाप्त नहीं होगी जब तक कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय यह नहीं समझ लेता कि रोहिंग्या शरणार्थियों में अब निवेश करना उनका दायित्व है।
अंतरिम सरकार के सलाहकार मोहम्मद यूनुस भी इफ्तार में मौजूद थे।उन्होंने द्विपक्षीय चर्चा के लिए अलग से मुलाकात की। गुटेरेस आखिरी बार 2018 में कॉक्स बाजार में आए थे और उन्होंने कहा कि चुनौतियां कई स्तरों पर बहुत बड़ी हैं। रमजान पवित्र और एकजुटता का महीना है। इस महीने में अंतरराष्ट्रीय समुदाय का बांग्लादेश में रोहिंग्याओं के लिए समर्थन कम करना अस्वीकार्य होगा। हम ऐसा न हो इसके लिए हर संभव प्रयास करेंगे।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने बांग्लादेश के विदेश सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन और रोहिंग्या मुद्दों और प्राथमिकता मामलों पर बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार के उच्च प्रतिनिधि खलीलुर रहमान से भी मुलाकात की। महासचिव और विदेश सलाहकार ने बांग्लादेश में चल रहे परिवर्तन और सुधार प्रयासों पर चर्चा की। महासचिव और उच्च प्रतिनिधि ने राखीन राज्य की स्थिति और म्यांमार में रोहिंग्या और अन्य अल्पसंख्यकों पर आगामी उच्च स्तरीय सम्मेलन पर चर्चा की।
डोनाल्ड ट्रंप का भारत को एफ-35 का ऑफर, यूरोपीय देशों में किल स्विच के कारण चिंता बढ़ी
15 Mar, 2025 12:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन: डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति ने अमेरिका की सुरक्षा को लेकर सहयोगी देशों को ही डरा दिया है। सहयोगी देशों में अब अमेरिका की 'किल स्विच' नीति पर जोरदार चर्चा हो रही है। खासकर जब डोनाल्ड ट्रंप भारत पर अमेरिकी एफ-35 स्टील्थ फाइटर जेट खरीदने के लिए दबाव बना रहे हैं, उस वक्त सवाल उठ रहे हैं कि क्या 'किल स्विच' को लेकर आशंका पहले ही साफ कर लेने की जरूरत नहीं है? अमेरिका अपनी इस नीति का इस्तेमाल फाइटर जेट्स को अपंग बनाने के लिए कर सकता है। 'किल स्विच' की वजह से ही पुर्तगाल ने एफ-35 लड़ाकू विमान खरीदने के फैसले को कैंसिल करने के संकेत दिए हैं।
हालांकि डोनाल्ड ट्रंप पहले से ही नॉर्थ अटलांटिक संधि संगठन (Nato) और यूरोपीय सहयोगियों की आलोचना करते रहे हैं। लेकिन उन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल में अमेरिका की विदेश नीति की किताब को ही पलट दिया है। उन्होंने रूस का साथ देने का फैसला किया है और यूरोप को अपनी सुरक्षा खुद करने के लिए कहा है। यूरोपीय देशों में अब अमेरिका को लेकर विश्वास टूटता जा रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने वाइट हाउस में यूक्रेनी राष्ट्रपति को जिस अंदाज में बेइज्जत किया और जैसे उन्होंने यूक्रेन को हथियारों की आपूर्ति रोकी। उससे सवाल उठ रहे हैं कि क्या एफ-35 लड़ाकू विमान का इस्तेमाल करना किसी और देश के लिए सही फैसला होगा?
क्या एफ-35 में किल स्विच है?
डोनाल्ड ट्रंप के फैसलों से यूरोपीय देश काफी परेशान है। जिनमें से एक है डेनमार्क। डोनाल्ड ट्रंप ने डेनमार्क के ग्रीनलैंड द्वीप पर आक्रमण करने और उसे अपने कब्जे में लेने की धमकी दी है। ऐसी आशंका है कि अगर डोनाल्ड ट्रंप वाकई ग्रीनलैंड पर कब्जा करने का आदेश देते हैं। तो सबसे पहले अमेरिका दूर से डेनमार्क के एफ-35 लड़ाकू विमान को अपंग बना देगा। यानि एफ-35 किसी काम का नहीं रहेगा। किल स्विच के बारे में कहा जाता है कि अगर F-35 लड़ाकू विमान को ऑपरेट करने वाला कोई देश डोनाल्ड ट्रंप की आज्ञा का पालन नहीं करता है। तो संयुक्त राज्य अमेरिका इन किल स्विच को दूर से ही ट्रिगर कर सकता है ताकि ये युद्धक विमान बेकार हो जाएं। हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसा कोई किल स्विच मौजूद नहीं है जो F-35 को उड़ान भरने में असमर्थ बना सके।
हालांकि एफ-35 लड़ाकू विमान बनाने वाली कंपनी लॉकहीड मार्टिन और साथ ही एक ऑपरेटर स्विस सरकार ने सार्वजनिक रूप से यह कहा है कि किल स्विच जैसा कुछ नहीं है। लेकिन एक्सपर्ट्स का ये भी कहना है कि किल स्विच हो या न हो, ऐसे कई तरीके हैं जिनसे संयुक्त राज्य अमेरिका इन युद्धक विमानों को दूर से ही बेकार कर सकता है। सबसे पहली बात तो ये कि ये लड़ाकू विमान मेटिनेंस के लिए अमेरिका पर निर्भर होते हैं। दूसरा उनके कंपोनेंट्स और सॉफ्टवेयर को लगातार अमेरिका ही अपडेट करता है। इसके अलावा डेटा और खुफिया नेटवर्क भी अमेरिका से ही जुड़ा है। तीसरा एफ-35 लड़ाकू विमान को बेचते वक्त अमेरिका जो शर्तें तय करता है, उनमें ऐसे ऐसे प्रावधान शामिल किए जाते हैं कि अमेरिका की मंजूरी के बिना ये फाइटर जेट किसी लायक नहीं रहते हैं।
कैसे किल स्विच के बिना भी एफ-35 को बना सकता कबाड़?
भले ही ऐसे किसी किल-स्विच के फिलहाल कोई सबूत नहीं मिले हैं, ताकि अमेरिका दूर से ही उसे दबाकर एफ-35 लड़ाकू विमान को बेकार सक सके, लेकिन इन विमानों को बेकार करने के कई तरीके हैं। फिलहाल एफ-35 स्टील्थ फाइटर जेट का इस्तेमाल 16 देश कर रहे हैं। इन देशों को मिलाकर करीब 1000 एफ-35 फाइटर जेट एक्टिव हैं। इन देशों में ब्रिटेन, कनाडा, जर्मनी, इजरायल, इटली, नीदरलैंड, डेनमार्क और जापान जैसे देश शामिल हैं। इजरायल को छोड़कर बाकी सभी देशों के ऊपर एफ-35 फाइटर जेट के इस्तेमाल को लेकर कई तरह की शर्तें शामिल हैं। द एविएशनिस्ट में डेविड सेन्सियोटी और स्टेफानो डी'उर्सो ने लिखा है कि शर्तों की वजह से एफ-35 का इस्तेमाल करना किसी के लिए संभव नहीं है।
अमेरिकी बिक्री नीति के मुताबिक F-35 खरीदारों को "अमेरिकी नीति के आधार पर महाद्वीपीय संयुक्त राज्य अमेरिका (CONUS) के बाहर स्वतंत्र परीक्षण ऑपरेट करने की इजाजत नहीं है। यूनाइटेड स्टेट्स गवर्नमेंट (USG) सुरक्षा नियमों और राष्ट्रीय रक्षा नीति (NDP) के मुताबिक अमेरिकी नागरिकों को महत्वपूर्ण अमेरिकी टेक्नोलॉजी की सुरक्षा के लिए काम करने होंगे"। इसका मतलब यह है कि इन देशों को न सिर्फ अपने सभी मिशनों के लिए अमेरिका की इजाजत की जरूरत होगी, बल्कि वे अमेरिका के टेक्निकल कर्मियों के बिना इन फाइटर जेट्स का मरम्मत भी नहीं कर सकते हैं। भारत एफ-35 फाइटर जेट को लेकर अमेरिकी शर्तों को जानता है और माना जा रहा है कि अगर भारत इसे खरीदने का फैसला करता है तो निश्चित तौर पर इन शर्तों को लेकर बातचीत होगी।
इस्लामिक स्टेट के खतरनाक आतंकी अल-रिफाई की मौत, सुरक्षा बलों ने बड़ी सफलता की हासिल
15 Mar, 2025 12:32 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बगदाद: इराक के प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी ने शुक्रवार को ऐलान किया कि इस्लामिक स्टेट के प्रमुख अब्दल्लाह माकी मोसलेह अल-रिफाई को इराक में एक ऑपरेशन के दौरान ढेर कर दिया गया है। बता दें कि अब्दल्लाह माकी मोसलेह अल-रिफाई को 'अबु खदीजा' के नाम से भी जाना जाता था। इस ऑपरेशन को इराकी राष्ट्रीय खुफिया सेवा और अमेरिकी बलों ने संचालित किया। 'अबु खदीजा' को दुनिया में एक खतरनाक आतंकवादी के रूप में जाना जाता था और वह इराक के लिए लगातार एक बड़ा खतरा बना हुआ था।
'भगोड़े कट्टरपंथी को आज इराक में मार दिया गया'
इराक के प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक बयान में कहा, 'इराक के लोग आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अपनी प्रभावशाली जीत जारी रखे हुए हैं। अबु खदीजा आतंकवादी संगठन का डिप्टी खलीफा था और इराक तथा विश्व के सबसे खतरनाक आतंकवादियों में से एक था।' अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार रात अपने सोशल मीडिया मंच 'ट्रुथ' पर कहा, 'ISIS के भगोड़े कट्टरपंथी को आज इराक में मार दिया गया। हमारे साहसी योद्धाओं ने इराकी सरकार और कुर्दिश क्षेत्रीय सरकार के सहयोग से उसे खोजकर मार गिराया।'
बगदादी की मौत के बाद से बेहाल है संगठन
एक सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि यह ऑपरेशन इराक के पश्चिमी प्रांत अनबर में एक हवाई हमले के जरिए किया गया। एक अन्य अधिकारी के अनुसार, अभियान गुरुवार की रात शुरू किया गया था लेकिन अल-रिफाई की मौत की पुष्टि शुक्रवार को हुई। बता दें कि 2019 में इस्लामिक स्टेट के सबसे बड़े नेता अबू बक्र अल-बगदादी को अमेरिका के सैनिकों ने मार गिराया था और तभी से यह आतंकी संगठन नेतृत्व की समस्याओं का सामना कर रहा है। बगदादी की मौत के बाद से इसके तमाम नेताओं को मार गिराया गया है और यह संगठन बुरी तरह लड़खड़ाया हुआ है। हालांकि अभी भी यह समय-समय पर आतंकी घटनाओं को अंजाम देने में कामयाब रहता है।
अमेरिका का ग्रीन कार्ड धारक भारतीयों के लिए खतरे की घंटी, उपराष्ट्रपति ने स्थायी निवास को रद्द करने की बात
15 Mar, 2025 11:54 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
डोनाल्ड ट्रंप के कुर्सी संभालने के बाद से ही अमेरिका में कई बदलाव हो रहे हैं. पहले प्रवासियों को लेकर अमेरिका ने सख्ती दिखाई अब गाज ग्रीन कार्ड होल्डर पर गिरने वाली है. बता दें कि ग्रीन कार्ड होल्ड कोई अवैध प्रवासी नहीं है, जिनको युही ट्रंप निकाल सकते हैं. लेकिन उनके उप राष्ट्रपति ने ऐसी बात कही है कि इससे करीब 50 हजार भारतीय प्रभावित हो सकते हैं.
स्थायी शब्द से मूर्ख मत बनिए
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ग्रीन कार्ड धारकों को संदेश दिया कि स्थायी शब्द से मूर्ख मत बनिए. गुरुवार रात ने कहा, "ग्रीन कार्ड धारक को अमेरिका में रहने का अनिश्चितकालीन अधिकार नहीं है." उन्होंने आगे कहा, "यह मूल रूप से अभिव्यक्ति की आजादी के बारे में नहीं है. यह राष्ट्रीय सुरक्षा के बारे में है. लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि हम एक अमेरिकी नागरिक के रूप में, यह तय करते हैं कि हमारे राष्ट्रीय समुदाय में किसे शामिल किया जाए."
30 लाख भारतीयों के लिए बुरी खबर
अमेरिका में करीब 12.7 मिलियन ग्रीन कार्ड होल्डर हैं और इसमें भारतीय करीब 2.8 मिलियन हैं. भारतीय मूल के लोग अमेरिका में ग्रीन कार्ड लेना वाला दूसरा सबसे बड़ा समुदाय है. 2024 में ही करीब 50 हजार भारतीयों ने ग्रीन कार्ड हासिल किया था.
क्या होता है ग्रीन कार्ड?
ग्रीन कार्ड जिसे स्थायी निवासी कार्ड भी कहा जाता है, एक ऐसा दस्तावेज है जो गैर-अमेरिकी नागरिकों को अमेरिका में स्थायी रूप से रहने और काम करने की परमिशन देता है. इसको I-551 या एलियन रजिस्ट्रेशन कार्ड के नाम से भी जाना जाता है. ग्रीन कार्ड धारक बाद में अमेरिका नागरिकता के लिए भी आवेदन कर सकते हैं. लेकिन जेडी वेंस के बयान ने ऐसा करने का इरादे रखने वालों झटका दिया है. वेंस ने इस बात पर जोर दिया कि निवास आजीवन गारंटी नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि अगर राष्ट्रपति और विदेश मंत्री तय करते हैं कि किसी को अब यहां नहीं रहना चाहिए, तो "उन्हें यहां रहने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है- यह इतना ही सरल है."
कराची से लाहौर जा रहे PIA विमान में लैंडिंग गियर का एक पहिया चोरी, सुरक्षा अधिकारियों ने शुरू की जांच
15 Mar, 2025 11:50 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लाहौर: पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) एक विमान जब लाहौर एयरपोर्ट पर उतरा तो हर कोई हैरान हो गया. इस हैरानी की वजह विमान का एक पहिया गायब होना है. यह अजीब घटना उस समय घटी जब पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) का एक घरेलू विमान उतर रहा था. इस बात का अब तक पता नहीं चल पाया है कि आखिर आसमान से पहिया कहां गायब हो गया है. इस पूरे मामले की जांच की जा रही है. सोशल मीडिया पर यह भी दावा किया जा रहा हैं कि पहिया चोरी हो गया है. हालांकि एयरलाइन की तरफ से इस बारे में अब तक कोई जानकारी नहीं दी गई है. एयरलाइन पूरे मामले की जांच की बात कहता नजर आ रहा है. इस तरह की घटना हाल ही में नेपाल में भी देखने को मिली थी.
लैंडिंग गियर का पहिया गायब
पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस की उड़ान संख्या PK-306 गुरुवार सुबह कराची से लाहौर के लिए रवाना हुई. कराची से उड़ान के दौरान सब कुछ ठीक था. लेकिन लाहौर हवाई अड्डे पर उतरने के बाद विमान के पहिए गायब पाए गए. पता चला है कि विमान बिना पहियों के ही किसी तरह लाहौर में उतर गया.
एयरपोर्ट पर मिले टायर के टुकड़े
PIA के प्रवक्ता ने कहा कि इस बात की जांच की जा रही है कि क्या विमान ने कराची से बिना पहियों के उड़ान भरी थी या फिर हवा में ही उसके पहिए उखड़ गए. उन्होंने दावा किया कि विमान के पहियों के कुछ टुकड़े कराची हवाई अड्डे पर पाए गए हैं. हालांकि, विमान निर्धारित समय पर बहुत आसानी से उतर गया.
कब पता चला पहिए गायब हुआ?
एयरलाइन प्रवक्ता ने बताया कि यात्री सुरक्षित उतर चुके थे. इसके बाद विमान के कैप्टन ने निरीक्षण किया. तभी देखा कि मुख्य लैंडिंग गियर के छह पहियों में से एक गायब था. एक हवाई जहाज बिना पहियों के आसमान में नहीं उड़ सकता है. एयरलाइन ने कहा कि पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस का सुरक्षा विभाग मामले की जांच कर रहा है.
नूंह में शहाबुद्दीन मर्डर केस: मुख्य आरोपी नफीस गिरफ्तार
14 Mar, 2025 06:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नूंह: हरियाणा के नूंह जिले में करीब 4 महीने पहले सदर थाना क्षेत्र के रानीका गांव में हुए मर्डर केस में शहाबुद्दीन की झगड़े के बाद उपचार के दौरान मौत हो गई थी और इस मामले में पुलिस ने 17 लोगों को नामजद किया था, जिनमें से चार आरोपियों की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है. अब सीआईए नूंह पुलिस ने मुख्य आरोपी नफीस को गिरफ्तार कर लिया है.
पुलिस उसे रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है ताकि हत्या में इस्तेमाल किए गए लाठी-डंडे आदि बरामद किए जा सकें. इस बात की जानकारी सीआईए नूंह प्रभारी जंगशेर ने मीडिया को दी है. मृतक शहाबुद्दीन भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा प्रदेशाध्यक्ष और जिला प्रमुख जान मोहम्मद का जीजा था. जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने इस मामले में हत्या सहित अन्य संगीन धाराओं में 17 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की थी. पीड़ित हामिद ने पुलिस को बताया कि 14 अक्टूबर 2024 को उनके पिता शहाबुद्दीन जंगल में अपने खेतों में पानी भर रहे थे. तभी इंजन बंद हो गया. जब उनके पिता ने इंजन के पास जाकर देखा तो कुछ लोग इंजन से चीजें खोलकर चुरा रहे थे. जैसे ही उन्होंने इसका विरोध किया, वे लड़ाई-झगड़े पर उतर आए. तभी वहां लगभग दो दर्जन लोग इकट्ठा हो गए और उन्होंने उनके पिता को जमीन पर पटक कर लाठी-डंडों और फरसा से बेरहमी से मारा. इस घटना का वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था.
जंगल में काम कर रहे लोगों को जब इसकी जानकारी मिली तो वे सब उसे बचाने पहुंचे. पुलिस भी मौके पर पहुंच गई थी. उनके पिता को नूंह के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया गया. हामिद ने बताया कि उनके पिता को फरीदाबाद, मानेसर सहित कई अस्पतालों में इलाज के लिए ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान फरीदाबाद में उनकी मौत हो गई.
नफीस इस हत्याकांड का मुख्य आरोपी था
सीआईए प्रभारी जंगशेर ने बताया कि नफीस इस हत्याकांड का मुख्य आरोपी था. इससे पहले चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. घटना के दिन तीन बाइक पर सवार होकर करीब नौ लोग आए थे, जिन्होंने शहाबुद्दीन की बेरहमी से पीट-पीट कर हत्या कर दी थी. पहले गिरफ्तार किए गए आरोपियों से दो बाइक और लाठी-डंडे बरामद किए जा चुके हैं. अब मुख्य आरोपी नफीस को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसे रिमांड पर लेने की तैयारी की जा रही है ताकि एक बाइक और लाठी-डंडे आदि की रिकवरी की जा सके. कुल मिलाकर, जिले के इस चर्चित हत्याकांड में सीआईए नूंह पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. अब मुख्य आरोपी पुलिस की गिरफ्त में है और बाकी बचे आरोपियों को भी जल्द ही पकड़ लिया जाएगा.
हरियाणा के कैथल में पुलिस एनकाउंटर में ईनामी बदमाश अनूप उर्फ फैजल मारा गया
14 Mar, 2025 05:56 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कैथल: हरियाणा के कैथल के पूंडरी में सलामत स्वीट पर फायरिंग मामले का मुख्य आरोपी अनूप उर्फ फैजल की सुबह 2 बजे राजौंद में जींद मार्ग पर मुठभेड़ हुई, जिसमें आरोपी की मौत हो गई. पुलिस को इनपुट मिली थी कि आरोपी अनूप उर्फ फैजल राजौंद में है, तो पुलिस ने कार्रवाई के लिए टीम भेजी. जैसे ही आरोपी जींद मार्ग पर नहर के पास पहुंचा, पुलिस ने उसे पकड़ने की कोशिश की.
अनूप ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी. पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए उस पर फायरिंग की. जवाबी कार्रवाई में आरोपी को तीन गोलियां लगीं और अस्पताल ले जाते वक्त उसकी मौत हो गई. इस कार्रवाई में कैथल की CIA टीम और राजौंद पुलिस की टीम शामिल थी. कैथल SP राजेश कालिया भी मौके पर पहुंचे और पूरा जायजा लिया. सीन ऑफ क्राइम टीम मौके पर पहुंचकर सबूत इकट्ठा किए हैं. जानकारी के अनुसार, आरोपी अनूप उर्फ फैजल की पहले भी 2015-16 में झज्जर पुलिस के साथ मुठभेड़ हुई थी, जिसमें पुलिस की जवाबी कार्रवाई में आरोपी को टांग में गोली लगी थी. आरोपी पर 5 हजार रुपये का इनाम था. पाई, झज्जर, पूंडरी और यमुनानगर में गोली चलाने का आरोपी था, जिसमें झज्जर और यमुनानगर मामलों में हत्या की गई थी. आरोपी जोगा हजवाना और मिपा नरड़ गैंग से जुड़ा था और उस पर हरियाणा के कई जिलों में मामले दर्ज हैं. कैथल एसपी राजेश कालिया ने बताया कि कुछ दिन पहले एक शख्स विदेश गया था, जो कि रंगदारी मांगता था. तफ्तीश में पता चला कि कुल चार लोग थे जो वसूली कर रहे थे. हमें गुप्त सूचना मिली थी और फिर टीम ने सर्च ऑपरेशन में पता चला कि अनुज ने हमारी टीम पर फायरिंग की और फिर बाद में मुठभेड़ में उसे ढेर कर दिया गया.
दलाई लामा ने चीन को दी चुनौती, कहा- उनका उत्तराधिकारी 'स्वतंत्र दुनिया' में लेगा जन्म
13 Mar, 2025 05:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Dalai Lama: तिब्बतियों के सबसे बड़े आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने चीन को सीधी चुनौती दी है. दलाई लामा ने मंगलवार को जारी हुई "वायस फॉर द वायसलेस" नामक अपनी पुस्तक में लिखा कि दुनिया भर के तिब्बती चाहते हैं. दलाई लामा नामक संस्था उनकी मृत्यु के बाद भी जारी रहे. इस किताब में दलाई लामा ने पहली बार विशिष्ट रूप से साफ किया है कि उनका उत्तराधिकारी 'स्वतंत्र दुनिया' में जन्म लेगा, जो चीन के बाहर है. हालांकि, इससे पहले उन्होंने कहा था कि उनके साथ ही आध्यात्मिक गुरुओं का सिलसिला रुक जाएगा. इससे तिब्बती आध्यात्मिक नेता के पुनर्जन्म को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद फिर से लाइम लाइट में आ गया है.
चीन की बैचेनी की वजह ये है कि 14वें दलाई लामा ने पुष्टि की है कि अगले दलाई लामा का जन्म "स्वतंत्र दुनिया" में होगा. जिससे यह सुनिश्चित होगा कि संस्था चीनी नियंत्रण से परे तिब्बती अधिकारों और आध्यात्मिक नेतृत्व की वकालत करने की अपनी पारंपरिक भूमिका जारी रखेगी. यह बयान बीजिंग के लिए एक सीधी चुनौती है, जो लंबे समय से यह दावा करता रहा है कि अगले दलाई लामा को मान्यता देने का अंतिम अधिकार उसके पास है. चीन ने तिब्बती नेता की घोषणाओं को खारिज करते हुए जोर दिया है कि किसी भी उत्तराधिकारी को बीजिंग की मंजूरी लेनी होगी.
दलाई लामा 1959 में आ गए थे भारत
मौजूदा 14वें दलाई लामा का मूल नाम तेनजिन ग्यात्सो है. वह 1959 में माओत्से तुंग के वामपंथियों के शासन के खिलाफ विफल विद्रोह करने के बाद 23 वर्ष की आयु में हजारों तिब्बतियों के साथ भागकर भारत आए थे. दलाई लामा का जन्म 6 जुलाई 1935 को उत्तर-पूर्वी तिब्बत के ताकस्तेर में रहने वाले ओमान परिवार में हुआ था. बचपन में उनका नाम ल्हामो धोंडुप था. जब वह दो साल के थे, उनकी पहचान 13वें दलाई लामा थुबटेन ग्यात्सो के अवतार के रूप में की गई थी. दलाई लामा एक मंगोलियाई पदवी है. जिसका मतलब होता है ज्ञान का महासागर. दलाई लामा के वंशज करुणा, अवलोकेतेश्वर के बुद्ध के गुणों के साक्षात रूप माने जाते हैं.
कैसे चुने जाते हैं नए दलाई लामा
दलाई लामा के उत्तराधिकारी के चयन की परंपरा सदियों से एक गहन आध्यात्मिक प्रक्रिया रही है. नए दलाई लामा की खोज में तिब्बती बौद्ध भिक्षुओं द्वारा दर्शन, संकेतों और सपनों की व्याख्या करना शामिल है. ऐतिहासिक रूप से यह प्रक्रिया वरिष्ठ भिक्षुओं द्वारा मृतक दलाई लामा के शरीर में शगुन देखने से शुरू होती है. उदाहरण के लिए, 13वें दलाई लामा की मृत्यु के बाद, उनका शरीर शुरू में दक्षिण की ओर था. लेकिन बाद में पूर्व की ओर मुड़ गया, जिसे इस बात का संकेत माना गया कि उनका पुनर्जन्म उसी दिशा में होगा. एक बार संभावित पुनर्जन्म की पहचान हो जाने पर, बच्चे को कई परीक्षणों से गुजरना पड़ता है. जिसमें पिछले दलाई लामा से संबंधित वस्तुओं को पहचानने की क्षमता भी शामिल है. दलाई लामा ने अन्य चिह्नों के अलावा अपने पूर्ववर्ती द्वारा प्रयुक्त अनुष्ठानिक वस्तुओं का भी सही चयन किया था.
चीन क्यों कर रहा हस्तक्षेप
एक रिपोर्ट के अनुसार चीन का दावा है कि दलाई लामा के उत्तराधिकार में अंतिम निर्णय उसका होगा. चीनी कम्युनिस्ट पार्टी दलाई लामा को अलगाववादी मानती है और तिब्बत पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए उनके उत्तराधिकारी को नियंत्रित करना चाहती है. 2011 में, बीजिंग ने घोषणा की कि केवल चीनी सरकार ही अगले दलाई लामा की नियुक्ति कर सकती है. उसने निर्वासित तिब्बती धार्मिक समुदाय द्वारा किए गए किसी भी चयन को अस्वीकार कर दिया. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने कहा, "जीवित बुद्ध दलाई लामा की वंशावली चीन के तिब्बत में बनी और विकसित हुई, और उनकी धार्मिक स्थिति और नाम भी चीन की केंद्रीय सरकार द्वारा निर्धारित किया गया था. "धार्मिक अनुष्ठानों और ऐतिहासिक परंपराओं के अनुसार 14वें दलाई लामा की पहचान की गई और उत्तराधिकारी को मंजूरी देने के लिए इसे तत्कालीन केंद्रीय सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया गया."
पंचेन लामा को गायब कर चुका है चीन
चीन पहले ही तिब्बत के दूसरे सबसे बड़े आध्यात्मिक व्यक्ति पंचेन लामा पर नियंत्रण कर चुका है. 1995 में जब दलाई लामा ने छह वर्षीय गेधुन चोएक्यी न्यिमा को पंचेन लामा के रूप में मान्यता दी, तो चीनी अधिकारियों ने उसे अगवा कर लिया. चीन ने अपने उम्मीदवार ग्याइनकैन नोरबू को पंचेन लामा बना दिया. गेधुन चोएक्यी न्यिमा आज तक लापता हैं और उनके बारे में किसी को कुछ भी मालूम नहीं है.
पानीपत में तेज रफ्तार कार ने बाइक सवार भाई-बहन को मारी टक्कर, दोनों की मौत
13 Mar, 2025 04:01 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पानीपत: हरियाणा के पानीपत में तेज रफ्तार का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है. आए दिन तेज रफ्तार के कारण किसी न किसी की जान जा रही है. बुधवार शाम को फिर पानीपत में तेज रफ्तार के कारण भाई-बहन की जान चली गई.
दरअस, बिहोली गांव में रूहल फैक्ट्री के पास तेज रफ्तार कार ने बाइक पर जा रहे भाई-बहन को टक्कर मार दी, जिससे होली से 24 घंटे पहले दोनों की मौके पर ही मौत हो गई. मृतकों की पहचान शीला और संदीप, निवासी किवाना गांव के रूप में हुई है. संदीप अपनी बहन शीला को ससुराल गोयला गांव से मायके ले जा रहा था. जैसे ही वे गोयला गांव से बाइक पर सवार होकर बिहोली गांव के पास पहुंचे, नशे में धुत्त कार चालक ने उनकी बाइक को सीधी टक्कर मार दी.
टक्कर लगने से दोनों भाई-बहन उड़ते हुए खेतों में जा गिरे. कार चालक मौके पर कार छोड़कर फरार हो गया. पुलिस ने कार को कब्जे में ले लिया है. गांव के सरपंच ने बताया कि कार में कई युवक सवार थे और सभी नशे में धुत्त थे. 35 वर्षीय संदीप की करीब डेढ़ साल पहले शादी हुई थी और अभी कोई बच्चा भी नहीं था.
सड़क दुर्घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों के शवों को कब्जे में लेकर पानीपत के सामान्य अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. जांच अधिकारी ने बताया कि परिजनों के बयानों के आधार पर अज्ञात कार चालकों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है और शव का पोस्टमार्टम करवा कर परिजनों को सौंप दिया गया है.
शराब पीकर गाड़ी चलाने के आरोप
पानीपत पुलिस के जांच अधिकारी सुनील कुमार ने बताया कि संदीप अपनी बहन को ससुराल से मायके लेकर आ रहा था. इस दौरान रास्ते में कार ने टक्कर मार दी. मृतकों के चचेरे भाई चैनपाल सिंह ने बताया कि कार चालक और साथ में युवकों ने शराब पी थी औऱ हुड़दंग मचा रहे थे. उन्होंने बताया कि गाड़ी चलाने वाले आरोपी मौके से फरार हो गए थे. बहन की उम्र 50 साल के करीब थी.
पुतिन के ढुलमुल रवैये को देखते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने दी चेतावनी, कहा- संघर्ष जारी रखने पर उठाएंगे आर्थिक कदम
13 Mar, 2025 03:53 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Donald J. Trump: सऊदी अरब में यूक्रेन और अमेरिका के बीच 30 दिनों के संघर्ष विराम पर सहमति बनी थी. इस प्रस्ताव को अमेरिका ने रूस के समक्ष रखा, लेकिन राष्ट्रपति पुतिन के ढुलमुल रवैये को देखते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें चेतावनी दी है. ट्रंप अब जो बाइडेन की तर्ज पर ही पुतिन पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने की भाषा बोलते हुए नजर आए. व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि रूस संघर्ष विराम पर सहमत होगा. उन्होंने बताया कि अमेरिकी प्रतिनिधि रूस जा रहे हैं और 30 दिनों के संघर्ष विराम समझौते का प्रस्ताव पुतिन को सौंपेंगे.
ट्रंप ने पुतिन को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर रूस ने यूक्रेन के खिलाफ जंग जारी रखी तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. ट्रंप ने कहा, ''रूस को इसकी भारी आर्थिक कीमत चुकानी पड़ सकती है. हम कुछ ऐसे कदम उठा सकते हैं. जिससे रूस पर नकारात्मक वित्तीय प्रभाव पड़े. यह रूस के लिए घातक होगा. मैं ऐसा नहीं चाहता क्योंकि मेरा उद्देश्य शांति स्थापित करना है.''
रूस विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
रूस ने इस प्रस्ताव पर फिलहाल विचार करने की बात कही है. क्रेमलिन प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने कहा कि, अमेरिका के संघर्ष विराम प्रस्ताव पर पहले अमेरिका से ही चर्चा की जाएगी. इस प्रस्ताव में जमीन, हवा और जल तीनों स्तरों पर युद्ध रोकने की बात कही गई है. इससे पहले सऊदी अरब के जेद्दा शहर में अमेरिका और यूक्रेन के प्रतिनिधियों के बीच 30 दिनों के संघर्ष विराम पर सहमति बनी थी. सहमति बनने के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा था कि अब यह प्रस्ताव रूस को भेजा जाएगा और रूस की सहमति मिलते ही इसे लागू किया जाएगा.
अमेरिका-यूक्रेन के बीच साउदी अरब में बनी बात
इससे पहले यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने सऊदी अरब पहुंचकर क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से मुलाकात की थी. यह मुलाकात शांति समझौते के लिए यूक्रेन के अधिकारियों और सऊदी-अमेरिकी प्रतिनिधियों के बीच होने वाली वार्ता से पहले हुई थी. क्राउन प्रिंस से मुलाकात के बाद जेलेंस्की ने कहा कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस के साथ उनकी मुलाकात सकारात्मक रही. उन्होंने कहा, ''वैश्विक मामलों और यूक्रेन को समर्थन देने के लिए उनके गंभीर और संयमित रुख के लिए हम आभारी हैं. हमने द्विपक्षीय संबंधों से लेकर आपसी सहयोग बढ़ाने तक कई मुद्दों पर चर्चा की. मेरा मानना है कि क्राउन प्रिंस के प्रयासों से वास्तविक शांति स्थापित हो सकेगी. सऊदी अरब कूटनीति का एक महत्वपूर्ण मंच है और हम इसकी सराहना करते हैं.''
विधानसभा में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने की वक्फ बोर्ड के कब्जे वाली जमीनों की जांच की घोषणा
13 Mar, 2025 03:49 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणा में वक्फ बोर्ड के कब्जे वाली गांवों की शामलात जमीनों की जांच होगी. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विधानसभा में इसकी घोषणा की है. सीएम ने कहा कि पूरे हरियाणा में किसी भी गांव की शामलात देह की भूमि जो वक्फ बोर्ड के नाम की गई, उसकी जांच कराई जाएगी.
रोहतक-गोहाना रोड पर स्थित पीर बोधी भूमि के संबंध में चिंता जताए जाने के बाद सैनी ने यह घोषणा की. सैनी ने सदन में कहा, हम पूरे हरियाणा में इसकी जांच कराएंगे… अगर किसी भी गांव की शामलात देह भूमि (साझा उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल की जाने वाली गांव की भूमि) कहीं भी वक्फ बोर्ड को हस्तांतरित की गई है, तो उसकी गहन जांच कराई जाएगी.
सीएम सैनी ने विधानसभा में क्या कहा?
पीर बोधी मामले का जिक्र करते हुए सैनी ने कहा, पीर बोधी मामले की जांच के लिए रोहतक मंडल आयुक्त की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई जाएगी. करनाल मंडल आयुक्त और रोहतक उपायुक्त इस कमेटी के सदस्य होंगे. कमेटी मामले से जुड़े सभी तथ्यों और अभिलेखों की जांच करेगी.
सीएम ने कहा, कांग्रेस विधायक बीबी बत्रा द्वारा उठाए गए पीर बोधी मुद्दे को सरकार ने गंभीरता से लिया है. प्रारंभिक जांच में पता चला है कि 1967-68 में यह जमीन शामलात देह की जमीन थी. 1990 में केंद्र सरकार ने इस जमीन को पंजाब वक्फ बोर्ड के नाम पर अधिसूचित कर दिया. इसके बाद इस जमीन को कब्रिस्तान के तौर पर दर्ज किया गया और अब यह वक्फ बोर्ड के नाम पर है.
चीन में एचआर मैनेजर ने वेतन और भत्तों के नाम पर करोड़ों रुपये की हेराफेरी की
13 Mar, 2025 12:57 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
किसी भी कंपनी के लिए उसकी एचआर पॉलिसी सबसे ज्यादा जरूरी होती है. क्योंकि यही सिस्टम यह सुनिश्चित करता है कि कर्मचारियों को सही तरीके से वेतन और अन्य सुविधाएं मिल रही हैं. लेकिन जब इसी सिस्टम में गड़बड़ी हो जाए तो कंपनी को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है. प्राइवेट जॉब में खासतौर पर पेरोल सिस्टम की पारदर्शिता बहुत जरूरी होती है वरना कर्मचारी और कंपनी दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. चीन से सामने आए एक ताजा मामले ने दिखाया कि कैसे एक एचआर मैनेजर ने फर्जी कर्मचारियों का रिकॉर्ड बनाकर करोड़ों रुपये की हेराफेरी कर दी. इस मामले ने कंपनी की सुरक्षा नीतियों पर सवाल खड़े कर दिए.
असल में यह घटना चीन के एक कंपनी से जुड़ी है. एक रिपोर्ट के मुताबिक वहां के एचआर मैनेजर ने अनोखे तरीके से कंपनी को करोड़ों का चूना लगा दिया. शंघाई की लेबर सर्विस कंपनी में काम करने वाले इस शख्स ने 22 फर्जी कर्मचारियों को जोड़कर उनकी सैलरी और सेवरेंस पेमेंट नौकरी छोड़ने के बाद मिलने वाली राशि के नाम पर 16 मिलियन युआन करीब 18 करोड़ रुपये हड़प लिए. इस मैनेजर का नाम यांग बताया गया है जिसे कंपनी की पे-रोल (वेतन भुगतान) मैनेज करने की पूरी जिम्मेदारी दी गई थी.
कैसे किया बड़ा फर्जीवाड़ा?
रिपोर्ट के मुताबिक यांग ने देखा कि उसे कर्मचारियों को रखने और वेतन जारी करने का पूरा अधिकार मिला हुआ था और इस प्रक्रिया की कोई निगरानी नहीं थी. उसने सबसे पहले एक फर्जी कर्मचारी का रिकॉर्ड बनाया और उसके लिए सैलरी अप्रूव करवाई. यह सैलरी एक बैंक खाते में ट्रांसफर की गई जो यांग के नियंत्रण में था लेकिन उसके नाम पर नहीं था. जब लेबर सर्विस कंपनी ने जांच की कि सन के खाते में पैसे क्यों नहीं पहुंचे तो यांग ने बहाना बना दिया कि टेक कंपनी ने भुगतान रोक दिया है.
आठ साल तक चलता रहा खेल, ऐसे खुला राज
2014 से लेकर 2022 तक यांग ने 22 ऐसे फर्जी कर्मचारियों को जोड़ा और उनकी सैलरी व अन्य भत्तों के नाम पर पैसे निकालता रहा. आखिरकार 2022 में टेक कंपनी के वित्त विभाग ने गौर किया कि ‘सन’ नाम के कर्मचारी की अटेंडेंस रिकॉर्ड में 100 प्रतिशत उपस्थिति थी, लेकिन उसे कभी ऑफिस में नहीं देखा गया. जब मामले की गहराई से जांच हुई तो यांग की इस आठ साल पुरानी धोखाधड़ी का पर्दाफाश हो गया.
सजा और सोशल मीडिया पर सुर्खियां
जांच में फर्जी उपस्थिति और बैंक लेन-देन का खुलासा होने के बाद यांग को 10 साल और 2 महीने की जेल की सजा सुनाई गई. उसके राजनीतिक अधिकार भी एक साल के लिए छीन लिए गए और उसे भारी जुर्माना भरने का आदेश दिया गया. कोर्ट ने उसे 1.1 मिलियन युआन करीब 1.5 करोड़ रुपये लौटाने को कहा जबकि उसके परिवार को 1.2 मिलियन युआन (करीब 1.6 करोड़ रुपये) वापस करने पड़े. इस मामले ने चीन में सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोरीं. कई लोगों ने कंपनी की लापरवाही पर सवाल उठाए.
चीन में करोलिन लेविट के वीडियो क्लिप्स हो रहे हैं वायरल, ट्रंप की प्रवक्ता बनीं इंटरनेट सेंसेशन
13 Mar, 2025 12:54 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चीन: चीन और अमेरिका के रिश्ते हमेशा से ही तल्ख़ियों से भरे रहे हैं. कभी व्यापारिक प्रतिबंध तो कभी सैन्य तनाव, दोनों महाशक्तियों के बीच खींचतान खत्म होने का नाम नहीं लेती. हाल के दिनों में अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर फिर से गर्मा गया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर भारी टैरिफ लगा दिया है, जिससे वैश्विक बाज़ार में हलचल मच गई है. मगर इसी राजनीतिक तनातनी के बीच, एक दिलचस्प घटनाक्रम चीन में देखने को मिला है. ट्रंप की एक प्रवक्ता करोलिन लेविट चीन के सोशल मीडिया पर इंटरनेट सेंसेशन बन गई हैं.
कौन हैं करोलिन लेविट?
करोलिन लेविट, जो इतिहास की सबसे कम उम्र की व्हाइट हाउस प्रेस सचिव हैं, अचानक से चीन के इंटरनेट यूज़र्स के बीच चर्चा का विषय बन गई हैं. पिछले कुछ हफ्तों में, सोशल मीडिया पर उनके कई वीडियो क्लिप वायरल हो चुके हैं. जिनमें वह अमेरिकी पत्रकारों के तीखे सवालों का जवाब देते हुए ट्रंप की नीतियों का बचाव करती नज़र आ रही हैं. उनके बेबाक अंदाज, आत्मविश्वास ने लाखों चीनी यूज़र्स को प्रभावित किया है.
चीन में क्यों छा गईं करोलिन लेविट?
लेविट की लोकप्रियता तब और बढ़ गई जब एक वायरल वीडियो में उन्हें एक अमेरिकी पत्रकार को शांत, मगर सख्त अंदाज़ में जवाब देते हुए देखा गया. यह वीडियो चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीबो पर जंगल की आग की तरह फैल गया. कई चीनी यूज़र्स उनके तेज़-तर्रार जवाबों के कायल हो गए. चीन में लोग उनकी छवि को एक आत्मनिर्भर, पेशेवर और बुद्धिमान महिला के रूप में देख रहे हैं. जो न सिर्फ अपने करियर को बखूबी संभाल रही हैं, बल्कि अपने निजी जीवन में भी संतुलन बनाए हुए हैं. कुछ लोगों को उनकी आकर्षक व्यक्तित्व और गोरी त्वचा भी प्रभावित कर रही है.
क्या कहा था करोलिन लेविट ने?
वीडियो में लेविट से पूछा गया था कि क्या ट्रंप इस साल व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स एसोसिएशन डिनर में शामिल होंगे, जहां मुख्य अतिथि के रूप में कॉमेडियन एम्बर रफिन को बुलाया गया था. रफिन ने एक बार ट्रंप को बच्चे की तरह कहा था. इस पर लेविट ने बिना किसी आक्रोश के शांतिपूर्वक जवाब दिया, जिसने लोगों को प्रभावित किया. कुछ यूज़र्स का कहना है कि लेविट ट्रंप की विवादास्पद नीतियों का जिस तरह आत्मविश्वास के साथ बचाव कर रही हैं.
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