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आतंकी संपर्क पर नहीं मिलेगी माफी, ग्रीन कार्ड होल्डर्स को ट्रंप की सख्त चेतावनी
22 Jul, 2025 01:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अवैध प्रवासियों के बाद अब अमेरिका स्थायी प्रवासियों पर भी सख्ती बरतने जा रहा है। अमेरिका की ट्रंप सरकार ने अब ग्रीन कार्ड होल्डर्स के लिए एक आदेश जारी किया है। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ट्वीट किया है कि ट्रंप सरकार आव्रजन कानून लागू करके उन अमेरिका के उन स्थायी निवासियों को देश से निष्कासित करेगी, जिन्होंने विदेशी आतंकवादी संगठन से संबंधित हैती गिरोह का समर्थन और किसी भी तरह से सहयोग किया है। ट्रंप के इस आदेश से अमेरिका में बसे भारत समेत दुनियाभर के देशों के लाखों लोगों को झटका लगा सकता है।
अमेरिका के आव्रजन कानून के प्रावधान
बता दें कि अमेरिका में इमिग्रेशन एक्ट इमिग्रेशन एंड नेशनलिटी एक्ट (INA) 1952 का संशोधित रूप है। 1952 के एक्ट में समय-समय पर संशोधन करके नए प्रावधान किए गए हैं। इस एक्ट के तहत ही अमेरिका में स्थायी और अस्थायी निवासियों के लिए कुछ नियम बनाए गए हैं। आतंकवादी संगठनों से संबंधित नीतियों का वर्णन भी इमिग्रेशन एंड नेशनलिटी एक्ट (INA) की धारा 212 और 237, एक्जीक्यूटिव ऑर्डर 13224 में किया गया है। यह कानून और नियम अमेरिकी नागरिकों और बाहर से आकर अमेरिका में बसे लोगों या ग्रीन कार्ड होल्डर्स पर लागू होते हैं।
आतंकियों के समर्थकों के लिए प्रावधान
INA की धारा 212(a)(3)(B) के तहत, विदेशी आतंकी संगठन के सदस्य या उनके समर्थक अमेरिका में नहीं घुस सकते। इस नियम के दायरे में वे लोग भी आते हैं, जिन्होंने आतंकवादी गतिविधियों में भाग लिया हो। INA की धारा 237(a)(4)(B) के तहत अगर अमेरिका में बाहर से आकर बसा कोई शख्स या ग्रीन कार्ड होल्डर विदेशी आतंकी संगठन की मदद या किसी भी तरह का सहयोग करता है तो उसे अमेरिका से निष्कासित किया जा सकता है।
अमेरिका के अपने नागरिकों के लिए नियम
अमेरिका के नागरिकों के लिए कानून में प्रावधान किया गया है कि अगर अमेरिका का अपना कोई नागरिक जानबूझकर विदेशी आतंकी संगठन की मदद या सहयोग करता है तो वह कृत्य गैर-कानूनी होगा। इसके लिए आरोपी को 20 साल तक की जेल की सजा या आजीवन कारावास की सजा हो सकती है। कानून में यह भी स्पष्ट किया गया है कि केवल विचारधारा का समर्थन करना दंडनीय नहीं है, लेकिन अगर आतंकी संगठन के लिए कोई गतिविधि की तो यह दंडनीय अपराध है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने जारी किया था एक आदेश
20 जनवरी 2025 को बतौर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दूसरा कार्यकाल शुरू करते हुए एक्जीक्यूटिव ऑर्डर 14159 साइन किया था। इस आदेश के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने अवैध प्रवासियों और आतंकवाद या आतंकियों से जुड़े लोगों पर सख्ती बढ़ाने को कहा। इस आदेश के साथ INA की धारा 262 (एलियन रजिस्ट्रेशन) लागू की गई, जिसके तहत अमेरिका में बाहर से आकर बसे लोगों को 30 दिन से ज्यादा दिन तक अमेरिका में रहने पर रजिस्ट्रेशन और फिंगर प्रिंटिंग करानी होगी। इस आदेश का उल्लंघन निष्कासन का आधार बन सकता है।
भारतीयों के लिए कानून में प्रावधान है कि अगर अमेरिका में रहने वाला कोई भारतीय या ग्रीन कार्ड होल्डर TRF या लश्कर-ए-तैयबा से कनेक्टेड मिला तो उसे INA की धारा 237(a)(4)(B) के तहत अमेरिका से निष्कासित किया जा सकता है।
TRF को घोषित किया है विदेशी आतंकी संगठन
अमेरिका का विदेश मंत्रालय INA की धारा 219 के तहत किसी आतंकी संगठन को विदेशी आतंकवादी संगठन (FTO) घोषित करता है। अमेरिका ने गत 18 जुलाई 2025 को द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) को विदेशी आतंकी संगठन और वैश्विक आतंकवादी संगठन घोषित किया था, क्योंकि इस संगठन ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादी हमला कराया था। हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। TRF को पाकिस्तान समर्थित लश्कर-ए-तैयबा का सहयोगी माना जाता है। इसके बाद ही ट्रंप सरकार ने स्थायी निवासियों और ग्रीन कार्ड होल्डर्स पर आव्रजन कानून के तहत कार्रवाई करने का आदेश दिया है।
परीक्षा केंद्र पर मिलेगी लिखने की सुविधा, CET में हरियाणा‑टेलीवेट वाला प्रश्न
22 Jul, 2025 12:21 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़ (हरियाणा)। संयुक्त पात्रता परीक्षा (सीईटी ) से पहले हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के अध्यक्ष हिम्मत सिंह सोमवार को सोशल मीडिया पर लाइव हुए और परीक्षार्थियों की कई आशंका को दूर किया। इस मौके पर हिम्मत सिंह ने बताया, सीईटी परीक्षा में 25 फीसदी सवाल हरियाणा से जुड़े होंगे, जिसमें सामान्य ज्ञान और इतिहास, कला व संस्कृति से संबंधित प्रश्न होंगे। उन्होंने बताया, कई परीक्षार्थियों ने शिकायत भेजी है, उनसे कई लोगों ने सीईटी पास कराने के लिए संपर्क किया है। परीक्षार्थियों ने ऐसे लोगों के मोबाइल नंबर व फोटो भी भेजे हैं। इन सभी का ब्यौरा पुलिस को सौंप दिया गया। जल्द ही ऐसे लोगों पर कार्रवाई भी की जाएगी।
संवाद के दौरान उन्होंने यूट्यूबर व कोचिंग संचालकों से कहा कि वे सीईटी पेपर का विश्लेषण तभी करें, जब चारों सत्र की परीक्षा हो जाए। इससे परीक्षार्थियों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा- इस बार ओएमआर शीट पर परीक्षार्थियों को सभी जानकारी खुद भरनी होगी। पहले सबकुछ लिखा हुआ आता था। परीक्षा के दौरान 24 बुकलेट का सेट मिलेगा। पहले परीक्षार्थी को दिखाया जाएगा कि सेट सील है या नहीं। यदि सील ठीक है, तो मौके पर ही दो परीक्षार्थियों से हस्ताक्षर करवाएंगे जाएंगे। यदि सील खुली हुई है, तो उस पर साइन न करें और हमें बताएं। कार्रवाई की जाएगी।
दिव्यांग अभ्यर्थी अपने ही जिले में देंगे परीक्षा
हिम्मत सिंह ने कहा- दिव्यांग परीक्षार्थी अपने ही जिलों में परीक्षा दे सकेंगे। ऐसे परीक्षार्थियों के परीक्षा केंद्र उनके जिले में ही बनाए गए हैं। इनकी संख्या करीब 15 हजार है। परीक्षा के दौरान उन्हें अपना मेडिकल सर्टिफिकेट लाना होगा। वे अपने साथ सहयोगी को ला सकते हैं। सीईटी ग्रुप-सी की परीक्षा है, इसलिए इससे कम योग्यता वाले सहयोगी यानी 10वीं तक का वाला सहयोग ला सकते हैं। सहयोगी को अपने साथ पहचान-पत्र व योग्यता वाला प्रमाण-पत्र लाना अनिवार्य होगा।
2.40 लाख परीक्षर्थियों के परीक्षा केंद्र 50-75 किमी दूरी पर
परीक्षा केंद्र दूसरे जिले में बनाए जाने के सवाल के जवाब पर उन्होंने कहा- सभी के परीक्षा केंद्र जिले के आसपास नहीं हो सकते। उन्होंने तर्क देते हुए कहा- हिसार में सर्वाधिक अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था, ऐसे में संभव नहीं था कि जिले के निकट ही उनका परीक्षा केंद्र बनाए जाएं। उनके मुताबिक 25 से 50 किमी की दूरी पर करीब दो लाख परीक्षार्थी परीक्षा देने जाएंगे, जिनमें 22 प्रतिशत महिला और 24 प्रतिशत पुरुष परीक्षार्थी होंगे। वहीं, 50 से 75 किमी की दूरी तक करीब 2.40 लाख और 100 किमी से ज्यादा दूरी पर एक सत्र में करीब 50 हजार परीक्षार्थी शामिल होंगे। हिम्मत सिंह ने यह भी दावा किया है कि बेशक दूरी अधिक हो, मगर सभी रूटों पर बसों की पर्याप्त संख्या रहेगी। फिलहाल परीक्षा केंद्रों की दूरी को लेकर शिकायतें नहीं आई हैं।
आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों को त्रुटि दूर करने का मिलेगा मौका
चेयरमैन ने कहा- परीक्षा के बाद आरक्षित श्रेणी यानी डीएससी, ओएससी, ओबीसी के प्रमाण-पत्रों से जुड़ी त्रुटियां दूर कराने का मौका दिया जाएगा। परीक्षा के बाद और परिणाम घोषित करने से पहले आयोग पोर्टल खोलकर प्रमाण-पत्रों से जुड़ी त्रुटियां दूर करने का अवसर देगा, वहीं, जिन अभ्यर्थियों के आवेदन के दाैरान फोटो के स्थान पर हस्ताक्षर और हस्ताक्षर के स्थान पर फोटो चस्पा हो गई है वह परीक्षा वाले दिन अपना पहचान पत्र साथ लेकर आएं। इससे उन्हें परीक्षा केंद्र के अंदर जाने का मौका मिलेगा।
आयोग के अध्यक्ष ने यह भी दिए जवाब
सीईटी का स्कोर तीन साल तक मान्य रहेगा, इस बार चार गुना के बजाय 10 गुना अभ्यर्थी बुलाए जाएंगे।
परीक्षा केंद्र के अंदर ही पेन मिलेगा, इसलिए पेन-पेसिंल या कोई अन्य सामान न लाएं
सीईटी के लिए पासिंग मार्क सामान्य वर्ग के लिए 50 प्रतिशत और आरक्षित श्रेणी के लिए 40 प्रतिशत अंक हैं।
जिन्होंने पुरानी और नई सीईटी में आवेदन किया है, उन्हें सीईटी का एक नंबर मर्ज करने का माैका मिलेगा।
सीईटी को लेकर किसी भी भ्रमित करने वाली सूचना पर विश्वास न करें, आयोग की वेबसाइट पर देखें।
सालाना भर्तियों के कैलेंडर को लेकर सरकार से वार्ता हो चुकी है, सकारात्मक परिणाम आने की उम्मीद।
सीईटी प्रति वर्ष कराने के सवाल पर कहा, पॉलिसी के अनुसार और सरकार के निर्देशों के अनुरूप काम होगा।
परीक्षा के दौरान फोटोयुक्त कोई भी पहचान पत्र परीक्षा के लिए मान्य होगा।
बस का खर्च सरकार उठाएगी
हरियाणा सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि सीईटी के दौरान बस का खर्च सरकार व हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग उठाएगा। इस बारे में सरकार की ओर से परिवहन विभाग को पत्र भी लिखा गया है। हरियाणा सरकार ने सीईटी परीक्षा के लिए 26 व 27 जुलाई को परीक्षार्थियों के लिए बस सुविधा मुफ्त की गई है। हरियाणा सरकार सीईटी परीक्षा के लिए नौ हजार बसों का इंतजाम कर रही है।
ट्रंप का नया मिशन: इजरायल और अरब देशों के बीच सुलह की कोशिश
22 Jul, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्र्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को फोन किया है। बताया जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति गाजा और सीरिया में इजरायली सेना के हमलों से चिंता में हैं। दोनों देशों में हालात सुधारने और विवाद का निपटारा करने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नेतन्याहू से बात की है। वे इजरायल और हमास की जंग को खत्म कराना चाहते हैं। इजरायल और सीरिया के बीच चल रहे विवाद को निपटाना चाहते हैं, ताकि मध्य पूर्व में शांति स्थापित हो। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने मीडिया ब्रीफिंग में इस बारे में बताया।
क्या बोलीं व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव?
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप विश्व में शांति चाहते हैं। खासकर मध्य पूर्व में फैली अशांति का खात्मा करना चाहते हैं। उन्होंने भारत और पाकिस्तान के युद्ध को खत्म कराया। ईरान के परमाणु ठिकानों को तबाह कर दिया। फिर ईरान और इजरायल में सीजफायर कराया। वे रूस और यूक्रेन में युद्ध को भी खत्म कराना चाहते हैं और इसके लिए प्रयास कर रहे हैं। इजरायल और हमास में चल रही जंग को खत्म कराने के लिए बातचीत कर रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप के प्रयासों से ही इजरायल और हमास के बंधकों की रिहाई संभव हुई थी।
क्यों चल रही इजरायल-हमास में जंग?
बता दें कि इजरायल और हमास में जंग 7 अक्टूबर 2023 से चल रही है। इजरायल ने फिलिस्तीन के आतंकी संगठन हमास का विनाश करने का संकल्प लिया हुआ है। इसके लिए इजरायल हमास के गढ़ गाजा पट्टी को टारगेट कर रहा है। हाल ही में मई महीने में इजरायल की सेना ने गाजा में ताबड़तोड़ हमले किए हैं। हमलों में खाने-पीने की तलाश में भटक रहे करीब 1000 लोग मारे गए। इजरायल की सेना ने कैथोलिक चर्च पर भी हमला किया था। इजरायल सेना के हमले और गाजा में बिगड़ते हालातों को देखकर ट्रंप चिंतित हैं, इसलिए वे इजरायल-हमास जंग को जल्द खत्म कराना चाहते हैं।
सीरिया के साथ इजरायल का विवाद क्या?
इजरायल ने सीरिया पर हमला ड्रूज समुदाय के कारण किया है। ड्रूज समुदाय के करीब डेढ़ लाख लोग इजरायल के कब्जे वाले गोलान हाइट्स में रहते हैं। यह समुदाय इजरायल में अल्पसंख्यक है और इजरायल सीरिया में रहने वाले ड्रूज समुदाय को अपने साथ करना चाहता है, जबकि सीरिया की नई सरकार अपने इलाके में रहने वाले ड्रूज समुदाय पर राज करना चाहती है। इसी ड्रूज समुदाय की रक्षा करने का तर्क देते हुए इजरायल ने सीरिया पर हमला किया है।
स्कूल में पढ़ाई चल रही थी, आसमान से आई तबाही: विमान हादसे में मासूमों की मौत
22 Jul, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका, बांग्लादेश की राजधानी ढाका में एयरफोर्स का ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट बीते दिन हादसे का शिकार हो गया. यह हादसा दोपहर करीब 1:30 बजे माइलस्टोन स्कूल और कॉलेज की इमारत पर हुआ. इस हादसे में अब तक 22 लोगों की मौत हो चुकी है. इसके साथ ही 170 से ज्यादा लोग घायल हो गए.
ढाका में हुए इस हादसे के बाद सरकार ने एक दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है. जिस समय ये हादसा हुआ उस दौरान स्कूल में क्लासेस चल रही थीं और सैकड़ों छात्र वहां मौजूद थे. यही कारण है कि मरने वालों में ज्यादातर बच्चे शामिल हैं. बांग्लादेशी सेना ने वायुसेना का F-7 BGI विमान के क्रैश होने की पुष्टि की है.
अधिकारियों ने बताया कि 88 घायलों का राजधानी के 7 अस्पतालों में इलाज चल रहा है और उनमें से 25 की हालत गंभीर बनी हुई है. उन्होंने कहा कि राजधानी के विभिन्न अस्पतालों में 17 शव रखे गए हैं और मृतकों की संख्या बढ़ सकती है. इन 17 लोगों में से 10 बच्चे हैं, जबकि सात की पहचान नहीं हो पाई है. शुरुआती जांच में माना जा रहा है कि ये शव भी बच्चों के ही हो सकते हैं.
हादसे में पायलट की मौत
फाइटर जेट ने दोपहर 1 बजकर 6 मिनट पर उड़ान भरी थी और 1 बजकर 30 मिनट तक यह हादसे का शिकार हो गया. इस हादसे में पायलट की भी मौत हो चुकी है. इसके अलावा कई लोग गंभीर रूप से घायल हैं. विमान में हादसे के बाद आग की लपटें उठीं और पूरे कैंपस में काला धुआं फैल गया. इसके बाद वहां मौजूद छात्र भागते नजर आए. गंभीर रूप से घायल हुए लोगों को वायुसेना के हेलीकॉप्टर से अस्पताल में शिफ्ट किया गया.
घायलों में से दो की बाद में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी में मौत हो गई, जिससे मृतकों की संख्या 22 हो गई. डॉक्टरों ने बताया कि आने वाले दिनों में मौत का आंकड़ा बढ़ सकता है. क्योंकि कई लोगों की हालत काफी गंभीर बनी हुई है.
चीन में बना था F-7BGI
बांग्लादेश की राजधानी में जो F-7BGI बांग्लादेश एयरफोर्स (BAF) का मल्टीरोल फाइटर हादसे का शिकार हुआ हे. यह चीन के चेंगदू J-7 फाइटर का एडवांस वर्जन है, जिसे सोवियत यूनियन के MiG-21 की तर्ज पर बनाया गया था. बांग्लादेश ने इसे 2011 में खरीदा था.
यूक्रेन की राजधानी पर रूस का आक्रमण, बम शेल्टर तक हुए निशाना
22 Jul, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यूक्रेन की राजधानी कीव पर रूस ने बहुत बड़ा हमला किया. मॉस्को पर लगातार हमले के बाद रूस इंतकाम लिया है. कीव को भस्म करने के लिए रूसी सेना ने 4 सौ से अधिक ड्रोन से हमला किया और किंझल जैसी घातक मिसाइल का भी इस्तेमाल किया. रूस ने कीव में बम शेल्टर्स को भी नष्ट करने की कोशिश की है. यूक्रेन में सैनिकों की कमी बनाए रखने के लिए रूस अब यूक्रेनी सेना के ट्रेनिंग सेंटर को निशाना बना रहा है.
यूक्रेन के लिए एक एक सेंकड बेहद अहम हो चुका था. लोग किसी तरह भागते हुए आसपास के अंडरग्राउंड ठिकानों तक पहुंचे. रूस ने राजधानी का बदला राजधानी से लिया है. हर एक हमले का बदला 10 धमाके से लिया है. हर नुकसान का इंतकाम बड़ी तबाही से. यूक्रेन ने मॉस्को को निशाना बनाया तो रूस ने इसका बदला यूक्रेन की राजधानी कीव से लिया है.
मॉस्को में ड्रोन हमले का बदला लेने के लिए रूस ने कई घंटे की तैयारी की और जब एक्शन शुरु हुआ तो पूरा कीव दहल उठा. पुतिन के गुस्से की वजह मॉस्को पर हो रहे लगातार हमले हैं. मॉस्को में लगातार ड्रोन से धमाके हो रहे थे. अब कीव को दहला कर पुतिन ने यूक्रेन को सबक सिखाने की कोशिश की है. कीव पर बेहद तेज रफ्तार और घातक मिसाइलों से प्रहार किया गया. कीव का ऐसा कोई इलाका नहीं बचा जहां धमाके नहीं हुए.
2 मिनट में यूक्रेन इवानो फ्रैंकीवस्क इलाके को खाली कराया
कीव में रिहायशी इलाकों पर ड्रोन की बरसात की गई, तो वहीं अहम ठिकानों को शक्तिशाली मिसाइलों से निशाना बनाया गया. एक तरफ कीव दहल रहा था उसी वक्त सूमी में एक साथ कई इमारतों में आग लगी थी. यहां दो बार रूस ने ड्रोन से हमला किया. कीव में दहशत के बीच ही यूक्रेन रूस से MIG-31 फाइटर जेट्स के उड़ान की जानकारी मिली. रूसी मिग-31 किंझल मिसाइलों से लैस थे. रूसी फाइटर जाइटोमीर के ऊपर पहुंचे. इसके बाद मिग-31 से किंझल मिसाइलें दागी गईं. सिर्फ 2 मिनट में यूक्रेन इवानो फ्रैंकीवस्क इलाके को खाली कराया.
हाइपरसोनिक मिसाइलों के जोरदार धमाके से पूरा इलाका दहल उठा. तबाही का ब्योरा अभी सामने नहीं आ सका है. लोग डर की वजह से अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन्स में छिपे थे लेकिन रूस ड्रोन्स ने स्टेशन के एंट्री प्वाइंट्स को भी टारगेट किया. मेट्रो स्टेशन में हमलों की वजह से धुआं भर गया. धुएं की वजह से लोगों का दम घुटने लगा. बाहर निकलने का रास्ता भी क्षतिग्रस्त हो गया. रूस ने कीव के रिहायशी इलाकों को निशाना बनाने के साथ यूक्रेन के डिफेंस प्लांट और झुलियानी एयरबेस को निशाना बनाया.
रूस के जबरदस्त प्रहार से कीव कई अपार्टमेंट….शॉपिंग कॉम्प्लेक्स…और स्कूल क्षतिग्रस्त हो गए. कीव में इस तबाही की अहम वजह रूस की ताकतवर मिसाइल और गेरान-2 ड्रोन से हमले हैं. रूस के कीव को दहलाने के लिए पांच हाइपरसोनिक किंझल मिसाइलों से हमला किया. कीव के हर इलाके में धमाके के लिए 426 आत्मघाती ड्रोन से हमला किया गया. इसके अलावा कैलिबर मिसाइलों से हमले हुए कीव पर 4 मिसाइलों से प्रहार हुआ. एक इस्कंदर मिसाइल से भी कीव पर हमला किया गया. रूस ने फिर Kh-101 मिसाइल का इस्तेमाल किया है. कीव पर 14 KH-101 मिसाइलों से हमला किया.
शेल्टर नष्ट करने का मिशन
इस बार उन जगहों को भी टारगेट किया गया जहां कीव के लोग शरण लेते हैं. रूस ने कीव में कई मेट्रो स्टेशन पर हमले किए. ड्रोन और मिसाइल से अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन्स के एंट्री गेट पर हमले हुए. यूक्रेन का दावा है कि रूस ने खासतौर शेल्टर नष्ट करने का मिशन चलाया. रूस की कोशिश थी कि बम से बचने की जगह नष्ट हो जाए.
रिपोर्ट के मुताबिक, खारकीव में लगातार ड्रोन धमाकों की वजह से कई जगहों पर आग लग गई. वहीं, यूक्रेन पिछले कई दिनों से मॉस्को पर हमले कर रहा है. 21 जुलाई को भी हमले जारी रहे और यूक्रेन ने ड्रोन से मॉस्को एम्युनिशन प्लांट पर हमला किया. इससे एक दिन पहले मॉस्को में रिहाइशी बिल्डिंग पर हमले किए गए. 19 जुलाई को भी मॉस्को पर बड़ा ड्रोन हमला हुआ था. 18 जुलाई मॉस्को में 12 धमाके सुने गये. 17 जुलाई मॉस्को में 10 ड्रोन से हमला किया गया था.
यूक्रेन ने रूस के 5 प्रातों पर एक साथ हमला किया. यूक्रेन ने मॉस्को में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की. यूक्रेनी के ड्रोन हमलों की वजह से मॉस्को में हड़कंप मचा रहा. मॉस्को के सभी एयरपोर्ट को बंद करना पड़ा. हमलों की वजह से दर्जनों विमान की उड़ानें कैंसिल हो गई और उड़ाने रद्द होने से एयरपोर्ट पर हजारों लोगों की भीड़ जमा रही. इन हमलों का बदला लेने के लिए रूस ने नया प्लान तैयार किया है जिसे सोमवार से शुरु कर दिया गया है.
रूस के नए सैनिक युद्ध में नहीं जाएंगे!
रूस के एक और प्लान की जानकारी सामने आई है. मीडिया के मुताबिक, रूसी सेना यूक्रेन में सेना ट्रेनिंग सेंटर को निशाना बना रही है ताकि सैन्य भर्ती अभियान रोका जा सके. रूस की कोशिश है कि यूक्रेन में सैनिकों की ट्रेनिंग रोकी जाए ताकि यूक्रेन में सैनिकों की कमी हमेशा बनी रहे. रूस की कोशिश है कि नए सैनिक युद्ध में न जा सकें.
यूक्रेन के टारगेट पर रोस्तोव का एक रेलवे स्टेशन था. रिपोर्ट के मुताबिक रोस्तोव के स्टेशन से सेना को हथियार की सप्लाई हो रही थी. रूस शाहेद ड्रोन को लॉन्च करने के लिए अमेरिका पिक अप ट्रक का इस्तेमाल कर रहा है. इन ट्रकों से ड्रोन को पहले एक खास स्पीड तक पहुंचाया जाता फिर ड्रोन रिलीज कर दिया जाता है.
मां से पैसे नहीं मिले तो कर दी हत्या, बेटे ने लाश के पास ही बिताई रात
21 Jul, 2025 04:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणा : हरियाणा के नूंह जिले से एक झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक नशेडी बेटो ने 20 रुपए के लिए अपनी मां की बेरहमी से हत्या कर दी. मां की हत्या करने के बाद बेटा पूरी रात उसी घर में सोता रहा. घटना की जानकारी होते ही पूरे इलाके में हड़कंप मच गया. सूचना मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंच गई. आरोपी बेटे को गिरफ्तार कर पुलिस ने उसे जेल भेज दिया है. साथ ही मां के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराने के बाद परिजनों को सौंप दिया है.
नूंह जिले के जयसिंहपुर गांव में एक कलयुगी बेटे जमशेद ने अपनी मां की कुल्हाड़ी से काटकर हत्या कर दी. इसके बाद आरोपी बेटा पूरी रात मां के साथ उसी घर में सोता रहा. जांच में सामने आया है कि आरोपी नशेड़ी बेटे ने शनिवार की रात अपनी मां रजिया(56) से नशे के लिए 20 रुपए मांगे थे, लेकिन मां ने उसे पैसे देने से इंकार कर दिया था. इसी बात से गुस्साए बेटे ने कुल्हाड़ी से मां को मौत के घाट उतार दिया. आरोपी के पिता मुबारक की 4 महीने पहले ही मौत हुई थी.
हत्या के बाद घर में सोता रहा बेटा
मां को मौत के नींद सुलाने के बाद आरोपी जमशेद भी पूरी रात उसी घर में सोया रहा. इसके बाद जब अगले दिन महिला की मौत की जानकारी हुई, तो पूरे इलाके में हड़कंप मच गया. स्थानीय पुलिस को तुरंत घटना की जानकारी दी गई. पुलिस और FSL टीम तुरंत जयसिंहपुर गांव पहुंच गई. पुलिस ने देखा कि महिला का शव कमरे में खून से लथपथ पड़ा हुआ था. साथ ही कुल्हाड़ी भी वहीं पड़ी हुई थी.
आरोपी कलयुगी बेटा अरेस्ट
शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराने के बाद पुलिस ने परिजनों को सौंप दिया है. आरोपी बेटे को गिरफ्तार पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है. जांच में सामने आया है कि बेटा नशे का आदी है. वह पिछले काफी समय से गांजा और अफीम का सेवन कर रहा है.
जंग से थके जेलेंस्की ने बढ़ाया शांति की ओर कदम, रूस से की युद्धविराम की अपील
21 Jul, 2025 11:27 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कहा- लंबे समय की शांति स्थापित करने के लिए आधिकारिक बैठक जरूरी
कीव। यूक्रेन के कई हिस्सों पर रूस के हमलों के बाद अब यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की बदले नजर आ रहे है। जेलेंस्की ने रूस से सीजफायर के लिए हाथ बढ़ाया है। जेलेंस्की का कहना है कि वह अगले हफ्ते युद्धविराम पर बातचीत कर सकते हैं। दरअसल यूक्रेन के विदेश मंत्री ने जेलेंस्की को एक रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें कई मुद्दे शामिल हैं। जेलेंस्की का कहना है कि उनकी सरकार अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों पर भी तेजी से काम कर रही है।
बता दें शनिवार को देश को संबोधित करते हुए जेलेंस्की ने कहा कि रूस फैसला लेने से कतरा रहा है। सीजफायर करवाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। लंबे समय की शांति स्थापित करने के लिए एक आधिकारिक बैठक जरूरी है। हाल ही में यूक्रेन ने पूर्व रक्षा मंत्री को राष्ट्रीय सुरक्षा एवं रक्षा परिषद का दारोमदार सौंपा है। उन्हीं की अगवाई में रूस और यूक्रेन के बीच सीजफायर की बात शुरू हुई है। हालांकि, दोनों देशों के बीच पहले दौर की बातचीत विफल रही थी।
सीजफायर की शर्त में रूस ने यूक्रेन के सामने कई बड़ी मांगें रखी हैं, जिसमें रूस के द्वारा कब्जा किए गए यूक्रेन के 4 क्षेत्रों को भी सौंपने की बात कही थी। यूक्रेन ने रूस की सभी मांगों को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस को सीजफायर के लिए 50 दिन का समय दिया है। ट्रंप का कहना है कि अगर 50 दिन के अंदर रूस सीजफायर नहीं करता है तो उसे 100 फीसदी टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। साथ ही रूस से व्यापार करने वाले देशों पर भी 500 फीसदी का टैरिफ लगा दिया जाएगा।
प्रो. असीम कुमार घोष का शपथ ग्रहण समारोह आज दोपहर 1 बजे
21 Jul, 2025 10:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणा के नए राज्यपाल प्रोफेसर असीम कुमार घोष आज पद की शपथ लेंगे। शपथ ग्रहण समारोह हरियाणा राजभवन में दोपहर 1 बजे शुरू होगा। असीम कुमार घोष राज्य के 19वें राज्यपाल के रूप में पदभार संभालेंगे और वह बंडारू दत्तात्रेय का स्थान लेंगे। मुख्यमंत्री नायब सैनी समेत सभी मंत्री और विधायक कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे।
डॉलर की गिरती पकड़ से चिंतित ट्रंप: वैश्विक मुद्रा बदलाव से अमेरिका को खतरा
21 Jul, 2025 10:25 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रिजर्व करेंसी का स्टेटस खोना, विश्व युद्ध हारने जैसा
वाशिंगटन। अमेरिका की ओर से नए टैरिफ लागू होने की तारीख नजदीक आ रही है। अब तक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से जापान, ब्राजील, साउथ कोरिया, इंडोनेशिया समेत तमाम देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ का ऐलान किया जा चुका है, जो 1 अगस्त से लागू होने वाले हैं। इस बीच ट्रंप लगातार ब्रिक्स देशों को लेकर अपना रुख सख्त किए हुए हैं और उन पर एक्स्ट्रा टैरिफ की धमकी दे रहे हैं, ब्रिक्स पर ट्रंप की सख्ती के पीछे सबसे बड़ी वजह डॉलर का प्रभुत्व है और इससे जुड़ी चिंता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने यहां तक कह दिया कि, इसका रिजर्व करेंसी स्टेटस खोना, एक विश्व युद्ध हारने जैसा होगा।
पहले बताते हैं डॉलर को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए बयान के बारे में, तो उन्होंने अमेरिकी डॉलर के वैश्विक प्रभुत्व पर जोरदार चेतावनी देते हुए कहा है कि इसका आरक्षित मुद्रा का दर्जा खोना वल्र्ड वार हारने जैसा ही होगा। अपने बयान में ट्रंप ने दावा किया है कि डॉलर में गिरावट अमेरिका को पूरी तरह से बदल देगी और ये पहले जैसा देश नहीं रहेगा। ट्रंप के इस बयान और चिंता के पीछे बड़ा कारण ब्रिक्स देशों की डॉलर के प्रभुत्व को कमजोर करने के स्ट्रेटजी और उठाए जा रहे कदम हैं, क्योंकि ब्रिक्सदेश डॉलर से अलग अन्य वित्तीय विकल्प बनाने के लिए प्रयास तेज किए हुए हैं और कई तो यूएस डॉलर के बजाय अपनी स्थाई करेंसी में ट्रेड कर रहे हैं। इसी वजह से ट्रंप खफा हैं और ब्रिक्स देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका समेत अन्य) पर आक्रामक टैरिफ लगाने की धमकी दी है, अगर वे डी-डॉलरीकरण पर आगे बढ़ते हैं।
8 दशक से डॉलर है रिजर्व करेंसी
1944 से अमेरिकी डॉलर अन्य देशों द्वारा उपयोग की जाने वाली प्राथमिक आरक्षित मुद्रा बनी हुई है। दुनिया भर के देशों के सेंट्रल बैंक अपनी फाइनेंशियल सेफ्टी के लिए अपने पास डॉलर रिजर्व रखते हैं। इसके अलावा देश, व्यवसाय और लोग ट्रेड के लिए इसका ही ज्यादातर इस्तेमाल करते हैं। रिपोट्र्स की मानें तो करीब 90त्न के आस-पास विदेशी मुद्रा लेनदेन डॉलर में ही होता है और यही इसे वल्र्ड रिजर्व करेंसी बनाता है। हालांकि, ब्रिक्स पश्चिमी फाइनेंशियल सिस्टम को दरकिनार करने के लिए सक्रिय रूप से उपाय कर रहा है और इसमें स्विफ्ट पेमेंट नेटवर्क के विकल्प और कमोडिटी-बेस्ड ब्रिक्स करेंसी पर चर्चा शामिल है। हालांकि, कोई एकीकृत मुद्रा अभी तक उभरकर सामने नहीं आई है, लेकिन अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका में ब्रिक्स देशों के विस्तार ने व्यापार के बढ़ते आकार को डॉलर की पहुच से बाहर करने का काम किया है। कुछ केंद्रीय बैंक भी अमेरिकी ट्रेजरी में अपनी होल्डिंग कम करते हुए गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं।
1973 के बाद सबसे ज्यादा इस साल टूटा डॉलर
डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्लोबल फाइनेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर को अपना हथियार बनाया है और ईरान (2012 में) के अलावा रूस (2022 में) को विश्वव्यापी अंतरबैंक वित्तीय दूरसंचार सोसायटी से बाहर रखा है, तब से तमाम देशों ने अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी नेतृत्व वाली वैश्विक वित्तीय प्रणाली पर निर्भरता कम करने की कोशिश की है। ब्रिक्स जो कि वल्र्ड जीडीपी में 35 प्रतिशत से अधिक का योगदान देता है, अगर ग्लोबल ट्रेड में डॉलर के उपयोग को कम कर देगा, तो ये अमेरिका के लिए संकट की वजह बनेगा और इसका असर भी देखने को मिलने लगा है। डॉलर दशकों में अपनी सबसे बड़ी गिरावट का सामना कर रहा है और यूरो, पेसो और येन जैसी करेंसी इसके मुकाबले तेजी से बढ़ रही हैं। डॉलर साल 2025 में ही अब तक यून-यूरो के मुकाबले 10 फीसदी से ज्यादा गिर चुका है। शुरुआती महीनों में तो इसकी वैल्यू 1973 के बाद सबसे ज्यादा गिरी है। यूएस डॉलर गिरकर 97.48 तक आ गया था, जो कि बीते साल के आखिर में 109 के पार पहुंच गया था।
चीन ने ब्रह्मपुत्र पर दुनिया का सबसे बड़ा 'जल बम' बनाने का काम शुरू कर दिया
21 Jul, 2025 09:23 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यह दुनिया में सबसे बड़ा होगा; 12 लाख करोड़ रुपए लागत
बीजिंग। चीन ने तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी (चीन में यारलुंग सांगपो) पर दुनिया का सबसे बड़ा डैम बनाना शुरू कर दिया है। शनिवार को चीन के प्रधानमंत्री ली क्यांग ने इसकी शुरुआत की। इसकी कुल लागत करीब 167.8 अरब डॉलर (लगभग 12 लाख करोड़ रुपए) बताई गई है। यह डैम अरुणाचल प्रदेश की सीमा से सटे न्यिंगची शहर में बनाया जा रहा है। इसे लेकर भारत और बांग्लादेश दोनों ने गहरी चिंता जताई गई है।
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक परियोजना में पांच सीढ़ीदार (कैस्केड) जलविद्युत स्टेशन होंगे। इससे हर साल 300 अरब किलोवॉट-घंटे से अधिक बिजली पैदा होगी। इस बिजली से 30 करोड़ लोगों की जरूरतों को पूरा किया जा सकता है।
संवेदनशील क्षेत्र में बन रहा बांध
बीते साल 18 दिसंबर को भारत और चीन के सीमा संबंधी विशेष प्रतिनिधियों (एसआर) एनएसए अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई वार्ता में सीमा पार नदियों के आंकड़ों को साझा करने का मुद्दा उठा था। ब्रह्मपुत्र बांध से इंजीनियरिंग से जुड़ी भारी चुनौतियां पैदा होती हैं, क्योंकि प्रोजेक्ट साइट टेक्टोनिक प्लेट सीमा पर स्थित है, जहां काफी भूकंप आते हैं। तिब्बती पठार, जिसे विश्व की छत माना जाता है, टेक्टोनिक प्लेटों के ऊपर स्थित होने के कारण अक्सर भूकंप का अनुभव करता है। लेकिन पिछले साल दिसंबर में एक आधिकारिक बयान में भूकंप संबंधी चिंताओं को दूर करने की कोशिश करते हुए कहा गया कि हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट सुरक्षित है तथा इसमें इकोलॉजिकल प्रोटेक्शन का ध्यान रखा गया है।
अरुणाचल सीएम ने बताया वाटर बम
इसमें कहा गया है कि जियोलॉजिकल सर्वे और तकनीकी प्रोग्रेस के जरिए प्रोजेक्ट के विज्ञान-आधारित, सुरक्षित और उच्च-गुणवत्ता वाले विकास के लिए एक ठोस आधार तैयार किया गया है। ब्रह्मपुत्र नदी तिब्बती पठार से होकर बहती है और पृथ्वी पर सबसे गहरी घाटी बनाती है। यह बांध सबसे ज्यादा वर्षा वाले क्षेत्रों में से एक में बनाया जाएगा। अरुणाचल के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने हाल ही में चीन के इस मेगा डैम को भारत के लिए वाटर बम बताया था। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि ये प्रोजेक्ट सिर्फ पर्यावरणीय या जल सुरक्षा का मामला नहीं, बल्कि अस्तित्व के लिए भी खतरा है। उन्होंने कहा कि इस बांध से सैन्य खतरा पैदा होगा और यह सीमावर्ती जनजातियों के जीवन, भूमि और संसाधनों को बर्बाद कर सकता है।
भारत भी ब्रह्मपुत्र पर बना रहा डैम
भारत भी अरुणाचल प्रदेश में इसी नदी पर एक बड़ा डैम बना रहा है। ब्रह्मपुत्र और सतलुज पर जल-प्रवाह डेटा को लेकर भारत-चीन के बीच 2006 से एक्सपर्ट लेवल मैकेनिज्म चल रहा है। पिछले साल दिसंबर में एनएसए अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई बातचीत में भी यह मुद्दा उठा था। 2015 में चीन ने तिब्बत में 1.5 अरब डॉलर की लागत वाला जम हाइड्रोपावर स्टेशन शुरू किया था। तब भी भारत ने चिंता जताई थी कि चीन धीरे-धीरे ब्रह्मपुत्र के जलस्तर और दिशा पर कब्जा कर सकता है।
अल-वलीद बिन खालिद का अंत: सऊदी 'स्लीपिंग प्रिंस' ने दुनिया को कहा अलविदा
21 Jul, 2025 08:16 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रियाद। सऊदी अरब के प्रिंस अल वलीद बिन खालिद बिन तलाल अल सऊद का शनिवार को निधन हो गया। वे पिछले 20 साल से कोमा में थे। उन्हें स्लीपिंग प्रिंस (सोते हुए राजकुमार) के नाम से जाना जाता था। प्रिंस अल वलीद सऊदी अरब के राजपरिवार के वरिष्ठ सदस्य प्रिंस खालिद बिन तलाल के बेटे और अरबपति प्रिंस अल वलीद बिन तलाल के भतीजे थे। उनका जन्म अप्रैल 1990 में हुआ था। साल 2005 में, लंदन में मिलिट्री ट्रेनिंग के दौरान उनका भयानक सडक़ हादसा हुआ। इस एक्सीडेंट में उन्हें गंभीर ब्रेन इंजरी और इंटरनल ब्लीडिंग हुई। इसके बाद से वे कोमा में चले गए।
परिवार ने हार नहीं मानी, इलाज जारी रखा
सऊदी सरकार ने प्रिंस के इलाज के लिए अमेरिका और स्पेन से विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम बुलाई। हालांकि वे कभी पूरी तरह होश में नहीं आए। बीच-बीच में उनके शरीर में हलचल दिखती थी, जिससे परिवार को उम्मीद बंधती रही। डॉक्टरों ने उन्हें मेडिकल रूप से अचेत और बिना होश वाला घोषित कर दिया था। उनके पिता प्रिंस खालिद ने इलाज बंद कराने से साफ इनकार कर दिया।
झूमर की जगह लटकाई 4.3 करोड़ की फरारी, दुबई के यूट्यूबर की अनोखी सजावट हुई वायरल
20 Jul, 2025 11:20 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दुबई। दुबई के मशहूर यूट्यूबर मोहम्मद बीराघडारी ने अपने घर की सजावट के लिए ऐसा कारनामा कर डाला, जो लोगों को हैरान करने के साथ ही साथ पसंद भी आ रहा है। उन्होंने एक करीब 4.3 करोड़ रुपए की फरारी कार खरीदी, लेकिन इसे चलाने की बजाय अपने घर की छत से झूमर की तरह लटका दिया।
बीराघडारी, जिन्हें सोशल मीडिया पर मो व्लॉग्स के नाम से जाना जाता है, का कहना है कि यह उनके घर की अब तक की सबसे बोल्ड और यूनिक सजावट है। उन्होंने इस नजारे का वीडियो इंस्टाग्राम पर साझा किया, जिसे अब तक 84.9 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है।
वीडियो में देखा जा सकता है कि किस तरह एक असली फरारी को विशेष तकनीक से सुरक्षित तरीके से घर की छत से उल्टा लटकाया गया है। यह नजारा किसी हाई-फैशन आर्ट गैलरी जैसा प्रतीत होता है, जहां लक्ज़री और क्रिएटिविटी का अनोखा संगम दिखता है। बीराघडारी के इस स्टाइलिश प्रयोग पर जहां कई लोग चौंक गए, वहीं कुछ ने इसे पैसे की बर्बादी भी कहा है। लेकिन उनके फॉलोअर्स इसे आर्ट और लग्जरी का परफेक्ट मिक्स बता रहे हैं। दुबई जैसे शहर में जहां भव्यता और ग्लैमर आम बात है, वहां भी यह फरारी झूमर एक अलग ही स्टेटमेंट पीस बनकर उभरा है।
नागासाकी के गिरजाघर में 80 साल बाद बजी घंटी
20 Jul, 2025 10:19 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नागासाकी। जापान के नागासाकी शहर में लगभग 80 साल पहले गिरजाघर की घंटी अमेरिका द्वारा गिराए गए परमाणु बम से नष्ट हो गई थी। उसके स्थान पर अब एक नई घंटी लगाई गईं है। लगभग 80 साल तक इस गिरजाघर में घंटी नहीं बजी।
इस गिरजाघर में जो नई घंटी लगाई गई है। अमेरिका के नागरिकों के सहयोग से यह घंटी गिरजाघर में लगाई गईं है। इस घंटी को सेंट कैटरी बेल आफ होप का नाम दिया गया है। नागासाकी के आर्चबिशप पीटर मीचियाकी नाकामुरा ने एक समारोह में इस घंटी को अपना आशीर्वाद दिया। इस समारोह में लगभग 100 लोग उपस्थित थे। सबसे बड़ी बात यह है,कि इस गिरजाघर में 80 साल बाद घंटी की ध्वनि सुनने को मिली है।
लॉस एंजिलिस में कार सवार ने भीड़ पर गाड़ी चढ़ाई
20 Jul, 2025 09:17 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिका के लॉस एंजिलिस में एक कार सवार में भीड़ पर गाड़ी चढ़ा दी। इस हादसे में 28 लोग घायल हो गए, जिनमें 10 की हालत गंभीर है। यह हादसा लोकल समयानुसार सुबह करीब 2 बजे वेस्ट सांता मोनिका बुलेवार्ड पर हुआ, जो एक म्यूजिक वेन्यू के पास है। लॉस एंजिलिस फायर डिपार्टमेंट की टीम ने मीडिया को बताया कि घायलों को अस्पताल पहुंचाने का काम जारी है। अधिकारियों ने अभी तक वाहन या चालक की पहचान नहीं की है। यह भी क्लियर नहीं है कि यह हादसा जानबूझकर किया गया या गलती से हुआ। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में घटनास्थल पर दर्जनों फायर फाइटर्स और पुलिसकर्मी दिखाई दे रहे हैं। सडक़ पर एक ग्रे रंग की कार डैमेज हालत में दिख रही है, जिसके आसपास मलबा बिखरा पड़ा है।
हादसे के समय मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने बताया कि अचानक एक तेज रफ्तार गाड़ी भीड़ में घुसी, जिससे अफरा-तफरी मच गई। लॉस एंजिलिस फायर डिपार्टमेंट और पुलिस ने इलाके को घेर लिया है और लोगों से वहां न आने की अपील की है। एक महिला ने मीडिया बताया कि उसने कार के भीड़ में घुसने से पहले गोली चलने की आवाज सुनी थी। उसने कहा कि ड्राइवर हादसे के बाद गाड़ी में ही था, बाद में सिक्योरिटी गाड्र्स ने उसे पकडक़र जमीन पर गिरा दिया।
भारत-PAK की लड़ाई में गिरे थे 5 फाइटर जेट्स…, डोनाल्ड ट्रंप ने फिर दोहराया जंग रुकवाने का दावा
20 Jul, 2025 08:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन, अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया है कि उनके हस्तक्षेप से भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को रोका जा सका था।
ट्रंप ने कहा कि भारत की ओर से पहलगाम हमले के जवाब में चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद दोनों देशों के बीच हालात बेहद गंभीर हो गए थे, लेकिन उनके दखल से टकराव टल गया। ट्रंप ने बयान दिया कि हमने कई युद्ध रोके और ये कोई मामूली युद्ध नहीं थे। भारत और पाकिस्तान के बीच हालात बहुत गंभीर हो चुके थे। विमान मार गिराए जा रहे थे। मुझे लगता है कि करीब पांच लड़ाकू विमान गिरा दिए गए थे। ये दोनों परमाणु हथियारों से लैस देश हैं और एक-दूसरे पर हमला कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह एक ‘नई किस्म की जंग’ जैसी स्थिति बन गई थी, जैसा कि अमरीका ने ईरान के साथ किया था। ट्रंप ने दावा किया कि ‘हमने ईरान की परमाणु क्षमता को पूरी तरह खत्म कर दिया’। हालांकि, उन्होंने यह साफ नहीं किया कि ये विमान किस देश के गिरे थे। भारत और पाकिस्तान को लेकर उन्होंने कहा कि हालात लगातार बिगड़ते जा रहे थे और हमने इसे ट्रेड के जरिए सुलझाया। हमने कहा कि अगर तुम लोग हथियारों (और शायद परमाणु हथियारों) का इस्तेमाल करते रहोगे, तो हम कोई व्यापार समझौता नहीं करेंगे। ट्रंप ने यह बात व्हाइट हाउस में रिपब्लिकन सांसदों के साथ डिनर के दौरान कही। बता दें कि ट्रंप अब तक 24 बार भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर कराने की बात कह चुके हैं। पहली बार ऐसा दावा उन्होंने 10 मई को सोशल मीडिया पर किया था। उधर, ट्रंप के दावे के बाद अब भारत में सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने इस बारे में पीएम मोदी से संसद के मानसून सत्र में स्पष्टीकरण की मांग की है। ट्रंप के दावे के बाद कांग्रेस ने सवाल किया गया कि व्यापार के लिए राष्ट्र के सम्मान के साथ क्यों समझौता किया गया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट किया कि संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से ठीक दो दिन पहले, ‘ट्रंप मिसाइल’ 24वीं बार दागी गई और हर बार की तरह इस बार भी वही दो बातें दोहराई गईं। उन्होंने ट्रंप के बयान का हवाला देते हुए कहा कि अमरीका ने भारत और पाकिस्तान, दो परमाणु संपन्न देशों के बीच युद्ध रोक दिया। अगर युद्ध जारी रहता, तो कोई व्यापार समझौता नहीं होता यानी भारत और पाकिस्तान को अमरीका के साथ व्यापारिक समझौते के लिए तत्काल संघर्षविराम को मानना पड़ा।
कांग्रेस नेता ने मांग की मोदी को संसद में स्वयं खड़े होकर अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा पिछले 70 दिनों से किए जा रहे दावों पर स्पष्ट एवं ठोस स्पष्टीकरण देना चाहिए। कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल पूछा है। राहुल ने पूछा कि मोदी जी, पांच जहाजों का सच क्या है? देश को जानने का हक है! उधर भारतीय जनता पार्टी के आईटी सेल के राष्ट्रीय संयोजक अमित मालवीय ने राहुल गांधी पर प्रधानमंत्री मोदी से लड़ाकू विमान को नुकसान पहुंचने के सवाल पर हमला बोला है। मालवीय ने एक्स पर पोस्ट किया कि राहुल गांधी की मानसिकता एक देशद्रोही की है। ट्रंप ने अपने बयान में न तो भारत का नाम लिया, न ही यह कहा कि वे पांच जहाज भारत के थे। फिर कांग्रेस के युवराज ने उन्हें भारत के ही क्यों मान लिया? पाकिस्तान के क्यों नहीं माने? क्या उन्हें अपने देश से ज़्यादा हमदर्दी पाकिस्तान से है? सच्चाई यह है कि ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान अब तक उबरा नहीं है, लेकिन दर्द राहुल गांधी को हो रहा है! जब भी देश की सेना दुश्मन को सबक सिखाती है, तब कांग्रेस को मिर्ची लगती है। भारत विरोध अब कांग्रेस की आदत नहीं, पहचान बन चुका है। राहुल गांधी बताएं — क्या वह भारतीय हैं या पाकिस्तान के प्रवक्ता?
ब्रिक्स देशों को चेतावनी, अमरीका के साथ खेल मत खेलो
अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिक्स देशों को फिर से चेतावनी दी है। ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर वे अमरीका के खिलाफ काम करेंगे, तो उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने खास तौर पर ब्रिक्स समूह के सदस्य देशों से होने वाले आयात पर 10 फीसदी टैरिफ लगाने की बात दोहराई। ट्रंप ने ब्रिक्स समूह में शामिल देशों का नाम लिए बगैर कहा कि जब मैंने पहली बार ब्रिक्स ग्रुप के बारे में सुना तो इस पर सख्त कार्रवाई की। अगर यह समूह कभी भी मजबूत तरीके से सामने आता है, तो यह बहुत जल्द खत्म हो जाएगा। ट्रंप ने कहा कि हम कभी भी किसी को हमारे साथ खेलने की इजाजत नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि वह विश्व की आरक्षित मुद्रा के रूप में अमरीकी डॉलर की भूमिका की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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