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8 राउंड गोलियां चलीं, पुलिस का पलड़ा भारी; दो इनामी शूटर ढेर नहीं, घायल होकर पकड़े गए
3 Jul, 2026 03:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रेवाड़ी। हरियाणा के रेवाड़ी जिले में देर रात कानून और अपराधियों के बीच आमने-सामने की खूनी जंग देखने को मिली। पुलिस और कुख्यात बदमाशों के बीच हुई इस जबरदस्त मुठभेड़ में दोनों तरफ से ताबड़तोड़ फायरिंग हुई। आत्मरक्षा में पुलिस द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई में दो इनामी बदमाश गोली लगने से घायल हो गए, जिन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। इस दौरान बदमाशों ने पुलिस टीम को भी निशाना बनाया, जिसमें एक सब-इंस्पेक्टर बाल-बाल बच गए।
वारदात की फिराक में थे बदमाश, सीआईए ने बिछाया जाल
यह पूरी कार्रवाई सीआईए (CIA) धारूहेड़ा के प्रभारी योगेश के नेतृत्व में अंजाम दी गई। पुलिस को पुख्ता इनपुट मिला था कि जड़थल इलाके में कुछ शातिर अपराधी किसी बड़ी और सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने के इरादे से घूम रहे हैं। सूचना मिलते ही सीआईए की टीम ने पूरे इलाके को चारों तरफ से घेर लिया। पुलिस टीम को अपने इतने नजदीक देखकर बदमाशों में हड़कंप मच गया और खुद को घिरता देख उन्होंने भागने के लिए पुलिस पर सीधे गोलियां बरसानी शुरू कर दीं।
दोनों ओर से चलीं गोलियां, बुलेटप्रूफ जैकेट ने बचाई सब-इंस्पेक्टर की जान
बदमाशों की तरफ से अचानक हुई फायरिंग के बाद पुलिस ने भी मोर्चा संभाला और आत्मरक्षा में गोलियां चलाईं। इस मुठभेड़ के दौरान दोनों तरफ से करीब चार-चार राउंड फायरिंग हुई। बदमाशों की एक गोली सीआईए के सब-इंस्पेक्टर फखरुद्दीन को जा लगी। गनीमत यह रही कि वह बुलेटप्रूफ जैकेट पहने हुए थे, जिसके कारण गोली उनके शरीर के पार नहीं हो सकी और उनकी जान बच गई।
वहीं, पुलिस की सटीक जवाबी फायरिंग में दोनों मुख्य बदमाशों—मोहन और गोविंद उर्फ झम्मन—के पैरों में गोलियां लगीं। पैर में गोली लगते ही दोनों जमीन पर गिर पड़े, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें दबोच लिया और तुरंत इलाज के लिए रेवाड़ी के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया।
आधा दर्जन से अधिक संगीन मामले हैं दर्ज, बखापुर फायरिंग में थे वांटेड
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, घायल हुए दोनों बदमाश बेहद शातिर और समाज के लिए बड़ा खतरा बने हुए थे। आरोपी मोहन (निवासी बोलनी) और गोविंद उर्फ झम्मन (निवासी राजस्थान) पर पहले से ही मर्डर, डकैती, लूटपाट और रंगदारी (फिरौती) जैसी संगीन धाराओं के तहत आधा दर्जन से ज्यादा आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। हाल ही में 28 जून को इन दोनों ने अपने एक अन्य साथी प्रवीण के साथ मिलकर बखापुर गांव के रहने वाले रतिराम पर जानलेवा हमला करते हुए तीन गोलियां चलाई थीं, जिसके बाद से पुलिस लगातार इनकी तलाश में छापेमारी कर रही थी।
डीएसपी पहुंचे अस्पताल, जांच तेज
देर रात मुठभेड़ की सूचना मिलते ही डीएसपी सुरेंद्र श्योराण स्थिति का जायजा लेने खुद ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। उन्होंने मीडिया को बताया कि सीआईए की मुस्तैद टीम लगातार इन अपराधियों का पीछा कर रही थी। जब बदमाशों ने घेराबंदी तोड़ने के लिए पुलिस पर हमला किया, तो बहादुर जवानों ने मुंहतोड़ जवाब देते हुए दोनों को घायल अवस्था में गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल इलाके में सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी गई है और मामले की आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
हरियाणा के ताऊ ने किया गजब कारनामा, 80 की उम्र में आसमान से लगाई छलांग
3 Jul, 2026 03:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कैथल। आमतौर पर माना जाता है कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर साथ छोड़ देता है, बुजुर्गों के कदम डगमगाने लगते हैं और चारपाई से उठना भी एक बड़ी चुनौती बन जाता है। लेकिन हौसले अगर बुलंद हों, तो ढलती उम्र भी घुटने टेक देती है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है कैथल जिले के कलायत क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बात्ता गांव के रहने वाले 80 वर्षीय बुजुर्ग चूहड़ सिंह ने। उन्होंने सात समंदर पार ऑस्ट्रेलिया में कुछ ऐसा कारनामा किया है, जिसे सुनकर हर कोई दंग है।
आसमान को चूमा: 18 हजार फीट की ऊंचाई से स्काईडाइविंग
बुजुर्ग चूहड़ सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के आसमान में 18 हजार फीट की हैरतअंगेज ऊंचाई से 'स्काईडाइविंग' (हवाई छलांग) कर दुनिया को दिखा दिया कि इच्छाशक्ति के आगे उम्र की कोई सीमा नहीं होती। इतनी ऊंचाई से विमान से नीचे कूदना और हवा में तैरना अच्छे-अच्छे युवाओं के पसीने छुड़ा देता है, लेकिन चूहड़ सिंह ने बेहद साहस और शांत मन के साथ इस एडवेंचर को पूरा किया।
बुलंद इरादों और अद्वितीय साहस की अनूठी मिसाल
उनकी इस जांबाजी का वीडियो और तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर भी लोगों को खूब प्रेरित कर रही हैं। 80 साल की उम्र में जहां लोग आराम की जिंदगी चुनते हैं, वहीं चूहड़ सिंह ने अपने इस साहसी कदम से साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो किसी भी चुनौती को शिकस्त दी जा सकती है। उनकी इस कामयाबी से न सिर्फ उनका परिवार, बल्कि पूरा बात्ता गांव और कैथल जिला खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा है।
दमिश्क में कैफे बना धमाके का निशाना, IED ब्लास्ट में 9 लोगों की मौत
3 Jul, 2026 02:37 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दमिश्क। सीरिया की राजधानी दमिश्क में हुए एक भीषण धमाके से पूरा शहर दहल गया। यहाँ के एक व्यस्त कैफे में हुए जोरदार विस्फोट में नौ लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बीस अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। धमाके के तुरंत बाद सभी घायलों को पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां कई लोगों का इलाज चल रहा है। सीरिया के गृह मंत्रालय के मुताबिक, यह धमाका शहर के हिजाज इलाके में स्थित अल-नस्र स्ट्रीट के एक कैफे में हुआ, जो जस्टिस पैलेस (न्यायालय) से महज सत्तर मीटर की दूरी पर है।
भीषण नुकसान के लिए आईईडी में भरे गए थे धातु के टुकड़े
शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस हमले के लिए लगभग एक किलोग्राम वजन वाले इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) का इस्तेमाल किया गया था। इस बम को और ज्यादा घातक बनाने के लिए इसमें धातु के छोटे-छोटे टुकड़े भरे गए थे, ताकि धमाका होते ही वे तेजी से फैलें और ज्यादा से ज्यादा जान-माल का नुकसान हो। स्थानीय समय के अनुसार यह दर्दनाक हादसा दोपहर करीब तीन बजे हुआ। विस्फोट की आवाज सुनते ही पुलिस, सुरक्षा बल और राहत दल तुरंत मौके पर पहुंचे। सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर जांच शुरू कर दी है।
हमले के पीछे इस्लामिक स्टेट के स्लीपर सेल का हाथ होने की आशंका
फिलहाल इस हमले की जिम्मेदारी किसी भी संगठन ने नहीं ली है, जिससे जांच काफी पेचीदा हो गई है। हालांकि, सीरिया के सुरक्षा अधिकारियों को अंदेशा है कि इस खूनी खेल के पीछे आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (IS) का हाथ हो सकता है। अधिकारियों का मानना है कि पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद के सत्ता से हटने के बाद बनी देश की नई सरकार जब पूरे सीरिया में अपना नियंत्रण मजबूत करने की कोशिश कर रही है, ठीक उसी समय आईएस अपने स्लीपर सेल को दोबारा सक्रिय करने में जुटा है। यह संगठन नए लड़ाकों की भर्ती और हथियारों का नेटवर्क मजबूत कर देश में अस्थिरता फैलाना चाहता है।
हाल के महीनों में सुरक्षा बलों पर बढ़े आतंकी हमले
सीरिया में पिछले कुछ महीनों के भीतर सुरक्षा बलों को निशाना बनाने की घटनाओं में तेजी आई है। इससे पहले जून के महीने में अलेप्पो प्रांत के पास अज्ञात हमलावरों ने दो सीरियाई सैनिकों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। वहीं मई में भी हसाका प्रांत में एक सैन्य बस पर बड़ा हमला हुआ था, जिसमें दो सैनिकों की जान चली गई थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इन सभी हमलों के पीछे इस्लामिक स्टेट का ही हाथ माना जा रहा है। ऐसे में सीरिया की नई सरकार के सामने देश में अमन-चैन कायम करना और इन आतंकी गतिविधियों पर लगाम लगाना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
खामेनेई के अंतिम सफर में बड़ा मोड़! हत्या वाली जगह पहुंचा ताबूत, मोजतबा नहीं होंगे शामिल
3 Jul, 2026 12:37 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के पार्थिव शरीर वाले ताबूत को एक अघोषित कार्यक्रम के दौरान उसी स्थान पर ले जाया गया, जहां उनकी हत्या की गई थी। ईरानी सरकारी मीडिया ने इस औचक आयोजन की पुष्टि करते हुए इसे पूर्व सर्वोच्च नेता का 'शहादत स्थल' बताया है। गौरतलब है कि इस साल की शुरुआत में 28 फरवरी को अमेरिकी और इस्राइली हमलों में अली खामेनेई की मौत हो गई थी, जिसके बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को इस्लामी गणराज्य का नया सर्वोच्च नेता नियुक्त किया गया। इस घटना के बाद से ही पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में तनाव और संघर्ष काफी बढ़ गया है।
अंतिम यात्रा का कार्यक्रम और सुरक्षा चिंताएं
दिवंगत नेता के सम्मान में राजधानी तेहरान में 4 और 5 जुलाई को बहु-दिवसीय सार्वजनिक विदाई समारोह का आयोजन किया जा रहा है। सैन्य अधिकारियों के मुताबिक, इस अंतिम यात्रा में देश के इतिहास की सबसे बड़ी भीड़ जुटने की उम्मीद है, जिसमें करीब 20 मिलियन (2 करोड़) लोग शामिल हो सकते हैं। सुरक्षा व्यवस्था की देखरेख कर रहे सैन्य कमांडरों के अनुसार, सार्वजनिक विदाई का यह कार्यक्रम तेहरान के इमाम खुमैनी ग्रैंड प्रेयर ग्राउंड्स में आयोजित होगा। हालांकि, सुरक्षा कारणों और इस्राइली हमलों के सीधे खतरे को देखते हुए ईरान के मौजूदा सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई अपने पिता के इस अंतिम संस्कार कार्यक्रम में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं होंगे।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया और शोक संदेश
अली खामेनेई के निधन पर वैश्विक स्तर से भी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत कर ग्रैंड अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच क्षेत्र के ताजा घटनाक्रमों, होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति, लेबनान युद्धविराम और जारी कूटनीतिक वार्ताओं को लेकर भी अहम चर्चा हुई।
भारत की ओर से प्रतिनिधित्व
इस ऐतिहासिक विदाई समारोह में शामिल होने के लिए भारत सरकार की तरफ से एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ईरान रवाना हो रहा है। विदेश मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और विदेश मामलों की राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा शुक्रवार, 3 जुलाई को ईरान पहुंचेंगे। यह भारतीय प्रतिनिधिमंडल दिवंगत सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार और विदाई कार्यक्रमों में शामिल होकर भारत की ओर से शोक प्रकट करेगा।
नोरोवायरस ने मचाई अफरा-तफरी! क्रूज पर 125 लोग बीमार, कैसे फैलता है यह संक्रमण?
3 Jul, 2026 12:32 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सैन फ्रांसिस्को। अमेरिका से कनाडा और अलास्का की 20 दिवसीय यात्रा पर निकले एक आलीशान क्रूज जहाज पर 'नोरोवायरस' का भीषण प्रकोप देखने को मिला है। इस संक्रामक वायरस की चपेट में आने से जहाज पर सवार कम से कम 125 लोग गंभीर रूप से बीमार हो गए हैं, जिनमें 102 पर्यटक और क्रू मेंबर के 23 सदस्य शामिल हैं। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के बीमार होने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियां पूरी तरह मुस्तैद हो गई हैं। सीमित और भीड़भाड़ वाली जगहों पर यह वायरस बेहद खतरनाक रूप अख्तियार कर लेता है, यही वजह है कि जहाज के वापस तट पर लौटते ही इसे पूरी तरह सैनिटाइज करने का काम शुरू कर दिया गया है।
क्या है नोरोवायरस और क्यों है यह बेहद संक्रामक
नोरोवायरस मुख्य रूप से इंसान के पेट और आंतों पर हमला करने वाला एक अत्यंत संक्रामक वायरस है। यह किसी पीड़ित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने, दूषित पानी या भोजन का सेवन करने और वायरस से प्रभावित किसी सतह को छूने से बहुत तेजी से फैलता है। चूंकि क्रूज, हॉस्टल या अस्पतालों जैसी जगहों पर बड़ी संख्या में लोग एक साथ सीमित दायरे में रहते हैं, इसलिए वहां इसके पैर पसारने की आशंका सबसे ज्यादा होती है। वैसे तो सामान्य तौर पर लोग इससे कुछ दिनों में उबर जाते हैं, लेकिन नवजात बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों के लिए यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।
क्रूज पर मची खलबली और राहत के उपाय
इस आलीशान जहाज पर कुल 3,032 यात्री और 1,144 चालक दल के सदस्य सवार थे। संक्रमण फैलने की आधिकारिक जानकारी जून के आखिरी हफ्ते में स्वास्थ्य अधिकारियों को दी गई, जिसके बाद जहाज पर तुरंत सुरक्षात्मक कदम उठाए गए। राहत की बात यह रही कि सभी लोग एक साथ बीमार नहीं पड़े थे। क्रूज संचालित करने वाली कंपनी ने बताया कि संक्रमण का पता चलते ही पूरे जहाज पर विशेष सफाई अभियान चलाया गया और अगली यात्रा पर रवाना होने से पहले पूरे क्रूज को पूरी तरह कीटाणुरहित (सैनिटाइज) किया गया है ताकि संक्रमण के चक्र को तोड़ा जा सके।
बीमारी के लक्षण और इससे सुरक्षा के तरीके
इस वायरस की चपेट में आने पर मरीज को अचानक तेज उल्टी, दस्त, पेट में ऐंठन, जी मिचलाना और अत्यधिक कमजोरी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जो आमतौर पर एक से तीन दिनों तक बनी रहती हैं। इससे बचाव के लिए डॉक्टरों ने कुछ बेहद जरूरी गाइडलाइंस जारी की हैं। संक्रमण से सुरक्षित रहने के लिए साबुन और साफ पानी से कम से कम 20 सेकंड तक हाथ धोना सबसे असरदार तरीका है, विशेषकर भोजन करने से पहले और शौचालय के उपयोग के बाद। इसके अलावा, बीमार व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने से बचें, केवल साफ व सुरक्षित भोजन और पानी का ही सेवन करें, तथा संक्रमित सतहों को लगातार सैनिटाइज करते रहें। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस बीमारी से सुरक्षा के लिए केवल हैंड सैनिटाइजर के भरोसे रहने के बजाय साबुन-पानी का इस्तेमाल सबसे ज्यादा जरूरी है। क्रूज जहाजों पर ऐसी बीमारियां पहले भी सामने आ चुकी हैं, जिन्हें समय पर आइसोलेशन और स्वच्छता से नियंत्रित किया जा सकता है।
पाकिस्तान से वापसी के दौरान बड़ा खतरा! इजरायल के टारगेट पर थे ईरानी वार्ताकार, अमेरिका बना ढाल
3 Jul, 2026 12:27 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिका और इस्राइल को भले ही एक-दूसरे का सबसे मजबूत सहयोगी माना जाता हो, लेकिन ईरान युद्ध के दौरान दोनों देशों की रणनीतियों में बड़ा टकराव देखने को मिला। हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने मध्य पूर्व के अपने मित्र देशों के माध्यम से ईरान को आगाह किया था कि इस्राइल उसके दो बेहद महत्वपूर्ण नेताओं की हत्या की साजिश रच रहा है। अमेरिकी प्रशासन को डर था कि अगर युद्धविराम वार्ता में शामिल इन नेताओं पर हमला हुआ, तो शांति की पूरी कूटनीतिक प्रक्रिया ध्वस्त हो जाएगी और पूरा क्षेत्र एक विनाशकारी युद्ध की आग में झुलस जाएगा।
रिपोर्ट में बताया गया है कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालीबाफ इस युद्धविराम वार्ता को आगे बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभा रहे थे। ये दोनों नेता अमेरिका, कतर और पाकिस्तान जैसे देशों के साथ लगातार संपर्क में थे, ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोला जा सके और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा का कोई ठोस ढांचा तैयार किया जा सके। अमेरिका किसी भी कीमत पर इन नेताओं को खोना नहीं चाहता था, क्योंकि ऐसा होने से शांति के सारे प्रयास पटरी से उतर जाते।
अमेरिका की बड़ी चिंता और इस्राइल के निशाने
अमेरिकी खुफिया तंत्र को यह इनपुट मिला था कि इस्राइल ने गालीबाफ और अराघची को अपने संभावित निशानों की सूची में सबसे ऊपर रखा है। ट्रंप प्रशासन का स्पष्ट मानना था कि यदि इन दोनों नेताओं पर कोई आंच आती है, तो ईरान के साथ भविष्य में समझौते के सभी रास्ते हमेशा के लिए बंद हो जाएंगे। इसी वजह से अमेरिका ने क्षेत्रीय मध्यस्थों के जरिए ईरान तक सुरक्षा संदेश पहुंचाया और साथ ही इस्राइल को भी हाथ रोकने की सलाह दी। रिपोर्ट के अनुसार, गालीबाफ 2025 के 12 दिवसीय युद्ध और हालिया संघर्ष के दौरान दो बार इस्राइली हमलों का निशाना बनने से बाल-बाल बचे थे। अप्रैल में इस्लामाबाद में हुई वार्ता के बाद ईरानी सांसद मोहसिन जंगानेह ने भी स्वीकार किया था कि गंभीर सुरक्षा खतरों के बीच यह बातचीत जारी रखी गई थी।
कड़े सुरक्षा घेरे में कूटनीतिक यात्राएं
हमलों की लगातार मिल रही धमकियों के बाद ईरान ने अपने शीर्ष नेताओं की सुरक्षा और यात्रा के तरीकों में व्यापक बदलाव किए। जब अराघची और गालीबाफ अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से मिलने पाकिस्तान पहुंचे, तो ईरान ने पाकिस्तान और कतर के जरिए अमेरिका से इस्राइल द्वारा हमला न किए जाने की लिखित गारंटी मांगी थी। इस यात्रा के दौरान ईरानी विमान को पाकिस्तानी सीमा से इस्लामाबाद तक फाइटर जेट्स की सुरक्षा दी गई। वापसी में भी एक बड़े सुरक्षा खतरे के इनपुट के बाद विमान की मशहद हवाई अड्डे पर आपात लैंडिंग कराई गई, जिसके बाद पूरा प्रतिनिधिमंडल 8 घंटे का सफर सड़क मार्ग से तय करके तेहरान पहुंचा। इस खौफ के बावजूद दोनों नेताओं ने कतर, स्विट्जरलैंड और ब्रिक्स बैठक के लिए भारत की अपनी कूटनीतिक यात्राएं जारी रखीं।
रणनीति और प्राथमिकताओं का बड़ा अंतर
शुरुआत में एक सुर में काम करने वाले अमेरिका और इस्राइल के लक्ष्य वक्त के साथ बदलते चले गए। जहां अमेरिका सैन्य दबाव के साथ-साथ एक अंतरिम समझौते और स्थायी शांति की वकालत कर रहा था, वहीं इस्राइल की प्राथमिकता ईरान के पूरे शीर्ष राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व को खत्म कर वहां सत्ता परिवर्तन का माहौल बनाना था। इस्राइल को डर था कि जल्दबाजी में किया गया कोई भी युद्धविराम ईरान को आर्थिक रूप से दोबारा मजबूत होने और अपनी परमाणु व मिसाइल क्षमताओं को बढ़ाने का मौका दे देगा। हालांकि इस रिपोर्ट पर किसी भी देश ने आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन यह साफ तौर पर जाहिर करता है कि युद्ध के मैदान के समानांतर कूटनीति के मोर्चे पर भी एक बड़ा अंतर्विरोध चल रहा था।
Iran War: ट्रंप बोले- लगातार 3 दिन ईरान पर किया हमला, रडार सिस्टम को पहुंचाया भारी नुकसान
3 Jul, 2026 10:12 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा दावा करते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर वाणिज्यिक जहाजों (कमर्शियल जहाजों) पर हुए ईरानी हमलों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए अमेरिकी सेना ने लगातार तीन रातों तक ईरान के सैन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए थे। राष्ट्रपति ट्रंप के मुताबिक, इन गुप्त ऑपरेशन्स के जरिए अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने बार-बार ईरान के अत्याधुनिक रडार सिस्टम को नेस्तनाबूद किया और दुनिया भर में ईंधन (ऊर्जा) की सप्लाई चेन को सुरक्षित रखने के लिए 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (होर्मुज जलडमरूमध्य) से कमर्शियल तेल टैंकरों को बेहद सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला।
'हमने ईरान के रडार सिस्टम को पूरी तरह अंधा कर दिया'
एक अंतरराष्ट्रीय बिजनेस न्यूज चैनल को दिए विशेष इंटरव्यू में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की विस्तार से जानकारी दी। ट्रंप ने कहा, "हमने ईरान के रक्षा रडार तंत्र को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है। हमारी इस सख्त कार्रवाई के बाद उनके पास कोई रडार सिस्टम नहीं बचा था और वर्तमान में भी उनकी स्थिति वैसी ही है। हाल ही में उनके पास एक बेहद आधुनिक और नया रडार सिस्टम आया था, लेकिन बीते हफ्ते हमारे जांबाज सैनिकों ने उसे भी पूरी तरह तबाह कर दिया।"
जब ट्रंप से यह सवाल पूछा गया कि क्या अमेरिका आने वाले दिनों में भी ईरान के खिलाफ ऐसी ही सैन्य कार्रवाई जारी रखेगा या दोनों देशों के बीच युद्ध छिड़ सकता है? इस पर ट्रंप ने युद्ध की आशंका से साफ इनकार नहीं किया। उन्होंने आक्रामक लहजे में कहा कि अमेरिका के पास दुश्मन को नेस्तनाबूद करने के लिए सभी जरूरी संसाधन और आधुनिक हथियार हर वक्त तैयार हैं।
होर्मुज में अमेरिकी नौसेना की 'लोहे की दीवार'
राष्ट्रपति ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी सेना की घेराबंदी और अमेरिकी नौसेना की ताकत का जिक्र करते हुए इसे एक 'लोहे की दीवार' करार दिया। उन्होंने कहा, "स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में मैंने जो सुरक्षा नाकेबंदी की थी, वह कोई साधारण घेराबंदी नहीं बल्कि एक अभेद्य लोहे की दीवार की तरह थी। हमारी नौसेना दुनिया की सबसे महान और अविश्वसनीय ताकत है। इन सैनिकों की मुस्तैदी का ही नतीजा था कि अमेरिका की मर्जी के बिना कोई भी संदिग्ध जहाज ईरान की सीमा तक नहीं पहुंच सका।"
तबाह हो चुकी है ईरान की अर्थव्यवस्था, भुखमरी की कगार पर देश
डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि लगातार अमेरिकी प्रतिबंधों और हालिया सैन्य हमलों के बाद ईरान की रीढ़ की हड्डी टूट चुकी है और उसकी अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। ट्रंप के अनुसार:
300% बढ़ी महंगाई: ईरान में इस वक्त महंगाई दर 300 फीसदी तक बढ़ चुकी है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वे किसी भी तरह की कमाई या तेल व्यापार नहीं कर पा रहे हैं।
नेतृत्व विहीन हुई ईरानी सेना: ट्रंप ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा, "ईरान की सेना अब मैदान से गायब हो चुकी है। उनके शीर्ष कमांडर और नेता मारे जा चुके हैं। दूसरे दर्जे के नेतृत्व का भी सफाया कर दिया गया है और तीसरे दर्जे के बचे-खुचे नेताओं में से भी अधिकांश को ढेर कर दिया गया है।"
अनाज के लिए तरस रहा है ईरान: अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि आज ईरान के लोगों को भोजन की सख्त जरूरत है। उन्हें मक्का, गेहूं और सोयाबीन चाहिए। अमेरिका इन खाद्य सामग्रियों की आपूर्ति करने के लिए तैयार है, बशर्ते ईरान हमारे द्वारा तय की गई शर्तों को माने और आतंकवाद का रास्ता पूरी तरह छोड़ दे।
वैश्विक आर्थिक मंदी को टाला
ट्रंप ने वैश्विक बाजार पर इस तनाव के असर को लेकर कहा कि अगर अमेरिका समय रहते कदम नहीं उठाता और होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद हो जाता, तो पूरी दुनिया में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतें $350 प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जातीं। इससे पूरी दुनिया में एक भयानक आर्थिक मंदी आ जाती।अमेरिकी राष्ट्रपति ने सीक्रेट मिशन का खुलासा करते हुए कहा, "हमारी नौसेना ने बेहद खामोशी और चालाकी से इस संवेदनशील जलमार्ग से अंतरराष्ट्रीय तेल टैंकरों को सुरक्षित निकाला। एक रात तो ऐसी भी थी, जब हमारे जवानों ने चुपचाप 22 बड़े कमर्शियल जहाजों को ईरान के नाक के नीचे से बाहर सुरक्षित निकाल लिया और दुनिया में किसी को भनक तक नहीं लगी।" ट्रंप के इस बड़े बयान के बाद खाड़ी देशों में एक बार फिर भू-राजनीतिक (Geopolitical) तनाव चरम पर पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
जब हर उम्मीद टूट गई थी... 8 दिन बाद मलबे से जिंदा मिला सुरक्षा गार्ड
3 Jul, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ला गुआइरा (वेनेजुएला): वेनेजुएला में बीते 24 जून को आए दो विनाशकारी भूकंपों की त्रासदी के बीच एक ऐसा चमत्कार हुआ है, जिसने मायूस हो चुके देश को हौसला और उम्मीद की नई ऊर्जा दी है। मलबे के ढेर में तब्दील हो चुकी एक इमारत के बेसमेंट से 43 वर्षीय सुरक्षा गार्ड हर्नान अल्बर्टो गिल फ्लोरेस को आठ दिनों के कड़े संघर्ष के बाद जिंदा बचा लिया गया है। विभिन्न देशों से आए राहतकर्मियों और स्थानीय बचाव दल ने गुरुवार तड़के लगभग 100 घंटे तक चले बेहद जटिल रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद हर्नान को सुरक्षित बाहर निकाला। जैसे ही उन्हें स्ट्रेचर पर ऑक्सीजन मास्क के साथ मलबे से बाहर लाया गया, वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं और पूरा इलाका तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। कई भावुक बचावकर्मी इस कामयाबी पर एक-दूसरे के गले लगकर इसे कुदरत का अनोखा करिश्मा बताते नजर आए।
सुरक्षा केबिन बना ढाल, मलबे में बची रही सांसें
हर्नान तटीय शहर ला गुआइरा के 'गैलेरियास प्लाया ग्रांडे शॉपिंग सेंटर' में रात की पाली में सुरक्षा गार्ड के रूप में तैनात थे। जिस वक्त भूकंप के जोरदार झटके आए, वह अपने छोटे से सुरक्षा केबिन के भीतर ही थे। भूकंप की तीव्रता इतनी भयानक थी कि पूरी बहुमंजिला इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई, लेकिन खुशकिस्मती से हर्नान का केबिन पूरी तरह मलबे में नहीं दबा। केबिन के ढांचे की वजह से उनके आसपास हवा की मौजूदगी बनी रही, जिससे दम घुटने के खतरे के बावजूद उनकी सांसें चलती रहीं।
अस्थिर मलबे के बीच जिंदगी और मौत की जंग
सप्ताहांत के दौरान बचाव दल ने आधुनिक उपकरणों की मदद से सबसे पहले हर्नान की मौजूदगी का पता लगाया और उनसे संपर्क साधा। इसके बाद एक बेहद पतले रास्ते के जरिए उन तक पीने का पानी और तरल भोजन पहुंचाया जाने लगा। लगातार हो रही बारिश, बार-बार आ रहे भूकंप के बाद के झटकों (आफ्टरशॉक्स) और मलबे के कभी भी गिर जाने के खतरे के बीच बचावकर्मियों ने अत्यंत सावधानी से एक संकरी सुरंग तैयार की। कोस्टा रिका रेड क्रॉस की जांबाज बचावकर्मी मिन्यार कोलाडो ने एक भावुक वाकया साझा करते हुए बताया कि जब पहली बार हर्नान से बात हुई, तो वह बुरी तरह डरे हुए थे। उन्होंने गुहार लगाई थी कि उनकी पत्नी को उनके जिंदा होने की खबर न दी जाए, क्योंकि उन्हें डर था कि शायद वह अंत तक जीवित बाहर न निकल पाएं। लेकिन अंतरराष्ट्रीय टीमों ने अपनी उम्मीद नहीं खोई और उन्हें नया जीवन देकर ही दम लिया।
अंधेरी रातों के बाद परिवार को मिली नई सुबह
हर्नान की पत्नी गुस्बिमार गोंजालेज ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि इतने दिनों तक मलबे में दबे होने के कारण वे मान चुकी थीं कि अब उनके पति इस दुनिया में नहीं रहे। लेकिन जैसे ही उन्हें यह संदेश मिला कि हर्नान जीवित हैं और उनसे संपर्क हो गया है, तो उनके पूरे परिवार की मानों सोई हुई किस्मत जाग उठी। इस दंपति के 8 और 10 साल के दो छोटे बच्चे हैं, जो अब अपने पिता के सुरक्षित लौटने से बेहद खुश हैं।
वैश्विक एकजुटता से सफल हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन
इस बेहद चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए दुनिया के कई देश एक साथ नजर आए। इस संयुक्त अभियान में वेनेजुएला के स्थानीय दलों के साथ चिली, कोस्टा रिका, अमेरिका, पुर्तगाल, मैक्सिको और अल सल्वाडोर के आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। हर्नान की हर हरकत और स्थिति पर नजर रखने के लिए मलबे के भीतर विशेष टेलीस्कोपिक कैमरे डाले गए थे, जिसकी मदद से इस पूरी योजना को बिना किसी चूक के अमलीजामा पहनाया गया।
तबाही के मंजर के बीच गहराता स्वास्थ्य संकट
भले ही हर्नान की जान बच जाने से हर तरफ खुशी का माहौल है, लेकिन उत्तरी वेनेजुएला में भूकंप के कारण पैदा हुए हालात अब भी रोंगटे खड़े करने वाले हैं। 24 जून को आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के दोहरे भूकंप ने ला गुआइरा सहित कई शहरों को खंडहर बना दिया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस आपदा में अब तक 2,295 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि 11 हजार से ज्यादा लोग जख्मी हैं। लापता लोगों की तलाश अब भी जारी है और हजारों बेघर परिवार खुले आसमान व अस्थाई राहत शिविरों में दिन काट रहे हैं। इस बीच, मलबे से लगातार बरामद हो रहे शवों के कारण पूरे इलाके में भयंकर दुर्गंध फैल चुकी है, जिससे अब वहां महामारी और बड़े स्वास्थ्य संकट का खतरा तेजी से मंडराने लगा है।
धीमी राहत व्यवस्था पर रोष और अंतरराष्ट्रीय मदद
इस भीषण त्रासदी के बीच कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज की सरकार को आम जनता और विशेषज्ञों की तीखी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकारी तंत्र की तुलना में अंतरराष्ट्रीय और निजी राहत दल कहीं ज्यादा तेजी और संवेदनशीलता से काम कर रहे हैं। दूसरी ओर, अमेरिकी प्रशासन ने वेनेजुएला सरकार का बचाव करते हुए साफ किया है कि वे स्थानीय अधिकारियों के साथ पूरी तरह तालमेल बिठाकर काम कर रहे हैं। इस समय जमीन पर राहत कार्यों को गति देने के लिए लगभग 900 अमेरिकी सैनिक भी तैनात किए गए हैं। जानकारों का मानना है कि इस अभूतपूर्व प्राकृतिक आपदा के बाद अब वेनेजुएला के सामने सबसे बड़ी चुनौती लाखों लोगों का पुनर्वास करना और बदहाल हो चुकी स्वास्थ्य सेवाओं को दोबारा पटरी पर लाना है।
पायलट की डायरी बनी जांच की अहम कड़ी, चीन के विमान हादसे का सच आया सामने
2 Jul, 2026 06:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग: चीन की राजधानी बीजिंग में पिछले हफ्ते एक गगनचुंबी इमारत से छोटे विमान के टकराने की भीषण दुर्घटना के मामले में जांच कर रहे अधिकारियों ने एक बेहद सनसनीखेज और चौंकाने वाला खुलासा किया है। आधिकारिक जांच रिपोर्ट के अनुसार, इस भयानक हादसे के पीछे कोई तकनीकी खराबी या मौसम की खराबी नहीं थी, बल्कि विमान उड़ा रहा पायलट खुद लंबे समय से गंभीर मानसिक तनाव (डिप्रेशन), अनिद्रा और घबराहट की बीमारी से जूझ रहा था। जांच टीम को पायलट के पास से एक डायरी मिली है, जिससे साफ पता चलता है कि वह काफी समय से अपनी जान देने (आत्महत्या) के विचार से घिरा हुआ था। इस खौफनाक हादसे में खुद पायलट की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि इमारत में मौजूद 13 अन्य लोग मलबे और कांच की चपेट में आने से घायल हुए थे।
100 से ज्यादा मंजिला 'चाइना जून' टावर से हुई थी टक्कर
बीजिंग के चाओयांग जिला प्रशासन द्वारा सार्वजनिक की गई विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, यह दिल दहला देने वाला हादसा 26 जून को घटित हुआ था। दो सीटों वाले एक छोटे 'ऑरोरा एसए60एल' विमान ने बीजिंग के बाहरी इलाके पिंगगू के एक हवाई अड्डे से उड़ान भरी थी। उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद यह नियंत्रित क्षेत्र से बाहर निकलकर सीधे बीजिंग के सबसे व्यस्त व्यावसायिक और वीआईपी इलाके में घुस गया। इसके बाद विमान सीधे सरकारी कंपनी सीआईटीआईसी (CITIC) ग्रुप के मुख्यालय से जा टकराया, जिसे 'चाइना जून' भी कहा जाता है। 528 मीटर ऊंची और 100 से ज्यादा मंजिलों वाली यह गगनचुंबी इमारत बीजिंग की सबसे ऊंची बिल्डिंग है। विमान के टकराते ही इमारत का भारी मलबा नीचे सड़कों और पार्क में गिरा, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई। गनीमत यह रही कि समय रहते रेस्क्यू टीम ने बिल्डिंग में काम कर रहे हजारों कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जिससे घायलों की संख्या ज्यादा नहीं बढ़ी।
कौन था पायलट और कैसे बना यह आत्मघाती कदम?
पायलट की पृष्ठभूमि: जांच में मृत पायलट की पहचान 66 वर्षीय बुजुर्ग लियू के रूप में हुई है, जो बीजिंग का ही मूल निवासी था। अधिकारियों के मुताबिक, लियू का अपनी पत्नी से तलाक हो चुका था और वह घर में बिल्कुल अकेला रहता था। उसने अपनी इस अकेलेपन की जिंदगी के बीच साल 2021 में स्पोर्ट पायलट लाइसेंस और हाल ही में साल 2024 में प्राइवेट पायलट लाइसेंस हासिल किया था। हादसे वाले दिन उसने पहले एक सह-पायलट (असिस्टेंट) के साथ ट्रेनिंग उड़ान भरी थी। इसके बाद वह दोबारा अकेले विमान लेकर रनवे से उड़ा, लेकिन हवा में जाते ही उसने हवाई अड्डे के एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से अपना संपर्क तोड़ लिया और विमान का रुख शहर की सबसे ऊंची इमारत की तरफ मोड़ दिया।
चीन की अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था पर खड़े हुए गंभीर सवाल
इस हादसे ने बीजिंग की बेहद सख्त और हाइटेक सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है, जिससे चीनी प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। जिस चाओयांग जिले के व्यावसायिक क्षेत्र में यह विमान क्रैश हुआ, वह चीन के शीर्ष कम्युनिस्ट नेताओं के आधिकारिक निवास स्थान और 'ग्रेट हॉल ऑफ पीपल' जैसी अति-संवेदनशील इमारतों से महज कुछ ही दूरी पर स्थित है।
बीजिंग में किसी भी तरह के छोटे या हल्के विमान को उड़ाने के लिए देश की वायु सेना और नागरिक उड्डयन प्रशासन से कई स्तरों की कड़ी मंजूरी लेनी पड़ती है। इसके बावजूद एक मानसिक रूप से बीमार पायलट इतने संवेदनशील नो-फ्लाई ज़ोन में विमान लेकर कैसे दाखिल हो गया, इसका जवाब रिपोर्ट में नहीं दिया गया है। घटना के बाद चीन के इंटरनेट सेंसर बोर्ड ने सोशल मीडिया से हादसे से जुड़ी तमाम तस्वीरें, वीडियो और पोस्ट को तुरंत डिलीट करवा दिया है।
पूरे देश में फ्लाइट ट्रेनिंग और मनोरंजन उड़ानों पर रोक
इस गंभीर सुरक्षा चूक के बाद चीनी सरकार ने कड़ा एक्शन लेते हुए पूरे देश में संचालित होने वाले सभी प्राइवेट फ्लाइट स्कूलों और एविएशन ट्रेनिंग सेंटर्स को अपनी उड़ानें तुरंत रोकने और नए सिरे से कड़े सुरक्षा ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, चीन में बिना विशेष अनुमति के किसी भी तरह की मनोरंजन उड़ानों, हॉट एयर बलून और ड्रोन उड़ाने पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है। प्रशासन ने इस पूरे मामले को तकनीकी दुर्घटना मानने के बजाय 'व्यक्तिगत कारणों से सार्वजनिक सुरक्षा को गंभीर खतरे में डालने' का आपराधिक मामला घोषित किया है।
शिक्षा विभाग का बड़ा एक्शन, 22 जिलों के 687 निजी स्कूल बंद करने की तैयारी
2 Jul, 2026 12:54 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिसार:शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत गरीब बच्चों के लिए आरक्षित सीटें न दिखाने और नियमों की अनदेखी करने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ शिक्षा निदेशालय ने अपना रुख बेहद सख्त कर लिया है। निदेशालय द्वारा प्रदेश के 22 जिलों में कराए गए एक विशेष गोपनीय सर्वे में 687 ऐसे निजी स्कूल चिन्हित किए गए हैं, जो पिछले तीन साल से उच्च अधिकारियों की आंखों में धूल झोंककर बिना वैध दस्तावेजों के ही संचालित हो रहे थे। शिक्षा के नाम पर व्यावसायिक गतिविधियां चलाने वाले इन संस्थानों पर अब प्रशासनिक गाज गिरना तय हो गया है। निदेशालय ने इस गंभीर गड़बड़ी को संज्ञान में लेते हुए इन सभी दोषी स्कूलों की दाखिला प्रक्रिया और छात्र प्रवेश की शक्तियों को तत्काल प्रभाव से छीनने का कड़ा फैसला लिया है।
सर्वे रिपोर्ट में हुआ फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा
शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी की गई विस्तृत सर्वे रिपोर्ट में इन स्कूलों की कार्यप्रणाली को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच के दौरान चिन्हित किए गए 687 निजी स्कूलों के पास न तो सरकार या विभाग द्वारा जारी की गई आधिकारिक मान्यता से संबंधित वैध दस्तावेज मिले और ना ही उनके पास एक तय समयावधि के भीतर नए दाखिले करने का कोई कानूनी अधिकार पत्र पाया गया। इस गंभीर लापरवाही और नियमों के उल्लंघन को देखते हुए मुख्यालय ने प्रदेश के सभी जिला उपायुक्तों (डीसी) को एक आधिकारिक पत्र भेजने का निर्णय लिया है, ताकि इन गैर-मान्यता प्राप्त और अवैध रूप से चल रहे स्कूलों के खिलाफ जमीनी स्तर पर सीलिंग और अन्य सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
सैकड़ों स्कूलों ने सुधारी गलती, दिखाईं आरक्षित सीटें
इस पूरी कार्रवाई से पहले सरकार और शिक्षा विभाग ने प्रदेश भर के लगभग 1100 संदिग्ध निजी स्कूलों को चिन्हित कर एक सूची तैयार की थी। इन सभी संस्थानों को अपने मान्यता और संचालन से जुड़े जरूरी दस्तावेजों को पूरा करने और कमियों को सुधारने के लिए विभाग की ओर से पर्याप्त समय और अवसर दिया गया था। इस कड़े अल्टीमेटम का असर यह हुआ कि प्रदेश के 413 निजी स्कूलों ने अपनी गलती सुधारते हुए निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने सभी कागजात पूरे कर विभाग को सौंप दिए। इसके साथ ही इन स्कूलों ने नियमों का पालन करते हुए आरटीई के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए लगभग 3 हजार सीटें भी पोर्टल पर घोषित कर दीं, जिसके बाद सरकार ने राहत देते हुए शेष दोषी स्कूलों पर कार्रवाई के अंतिम आदेश जारी कर दिए।
दाखिले के लिए एक किलोमीटर का दायरा और समय सीमा तय
इस बार आरटीई के तहत दाखिला प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और स्थानीय स्तर पर सुलभ बनाने के लिए सरकार ने दूरी के नियमों में स्पष्टता रखी है। नए नियमों के अनुसार, छात्र के घर से केवल एक किलोमीटर के दायरे में आने वाले मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में ही इस कल्याणकारी योजना के तहत मुफ्त दाखिले के लिए आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। योग्य और इच्छुक विद्यार्थी आगामी 6 जुलाई तक विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
अभिभावकों की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी
दाखिले की इस पूरी प्रक्रिया के दौरान अभिभावकों को होने वाली किसी भी प्रकार की तकनीकी असुविधा, कतार या स्कूलों द्वारा की जाने वाली मनमानी की शिकायतों के निवारण के लिए शिक्षा विभाग ने एक विशेष राज्य स्तरीय हेल्पलाइन नंबर 0172-5049801 भी जारी कर दिया है। यदि किसी भी अभिभावक को आवेदन करने में कोई परेशानी आती है या कोई स्कूल आरटीई के तहत दाखिला देने से मना करता है, तो वे सीधे इस हेल्पलाइन नंबर पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं, जिस पर विभाग की विशेष विंग द्वारा तुरंत संज्ञान लेकर त्वरित कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
पानीपत में दर्दनाक हादसा, एक चप्पल ने उजाड़ दिए दो परिवार
2 Jul, 2026 12:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पानीपत:हरियाणा के पानीपत जिले के अंतर्गत आने वाले गांव सिवाह में मंगलवार की शाम एक ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने कुछ ही मिनटों में दो हंसते-खेलते परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। गांव के ऐतिहासिक बिरफला जोहड़ (तालाब) के पास रोज की तरह बच्चे खेल रहे थे, लेकिन खेल-खेल में शुरू हुई एक सामान्य सी बात देखते ही देखते एक ऐसी बड़ी मानवीय त्रासदी में बदल गई, जिसने पूरे गांव को गहरे शोक और सन्नाटे में डुबो दिया है। इस हादसे में दो किशोर दोस्तों की पानी में डूबने से मौत हो गई, जिसके बाद से दोनों पीड़ित परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है।
खेल के दौरान अचानक जोहड़ में गिरी चप्पल
ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, सिवाह गांव के रहने वाले कुछ बच्चे मंगलवार की शाम को बिरफला जोहड़ के पास खेल रहे थे। इसी दौरान खेलते-खेलते 15 वर्षीय समीर की चप्पल अचानक अनियंत्रित होकर जोहड़ के गहरे पानी में चली गई। समीर अपनी चप्पल को निकालने के उद्देश्य से जोहड़ के किनारे से पानी के भीतर उतर गया। उसे इस बात का अंदाजा नहीं था कि बरसात और अन्य कारणों से जोहड़ में पानी का स्तर काफी ज्यादा है और नीचे दलदल जैसी स्थिति है। जैसे ही वह चप्पल पकड़ने के लिए आगे बढ़ा, उसका पैर गहरे पानी की तरफ फिसल गया और वह खुद को बचाने के लिए पानी में छटपटाने लगा।
दोस्त को डूबता देख अनीश ने लगाई छलांग
समीर को पानी में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करता देख जोहड़ के किनारे खड़े उसके सबसे पक्के दोस्त अनीश उर्फ कल्लू ने एक पल की भी देरी नहीं की। अपने दोस्त की जान बचाने की खातिर अनीश ने बिना कुछ सोचे-समझे और अपनी जान की परवाह किए बिना जोहड़ के गहरे पानी में छलांग लगा दी। हालांकि, अनीश को भी पानी की गहराई और वहां के खतरनाक बहाव का सही अनुमान नहीं था। दोस्त को बचाने की यह जांबाज कोशिश बेहद दुर्भाग्यपूर्ण साबित हुई और समीर को बाहर खींचने के प्रयास में अनीश भी गहरे पानी के भंवर में फंस गया।
गहराई में समा गए दोनों दोस्त, गांव में मातम
पानी का स्तर अधिक होने और तैरकर बाहर आने का कोई रास्ता न मिलने के कारण दोनों किशोर खुद को संभाल नहीं पाए। देखते ही देखते दोनों दोस्त एक-दूसरे का साथ निभाते हुए जोहड़ की अथाह गहराई में समा गए और उनकी सांसें थम गईं। वहां मौजूद अन्य छोटे बच्चों ने जब यह भयानक मंजर देखा, तो वे चीखते-चिल्लाते हुए गांव की तरफ भागे और शोर मचाकर परिजनों व ग्रामीणों को इस हादसे की जानकारी दी। सूचना मिलते ही भारी संख्या में ग्रामीण जोहड़ की तरफ दौड़े और स्थानीय गोताखोरों की मदद से दोनों बच्चों को पानी से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इस दुखद घटना ने पूरे सिवाह गांव की आंखें नम कर दी हैं।
कस्टडी डेथ से मचा हड़कंप, हिसार में युवक की मौत के कारणों की पड़ताल
2 Jul, 2026 11:42 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिसार:हरियाणा के हिसार जिले में एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ पत्नी के साथ मारपीट के आरोप में गिरफ्तार किए गए एक 30 वर्षीय युवक की पुलिस स्टेशन की हवालात में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतक की पहचान मूल रूप से उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के सरसा कलां निवासी सुनील कुमार के रूप में हुई है, जो हिसार की स्थानीय मछली मार्केट में एक चिकन कॉर्नर चलाता था। बुधवार की सुबह पुलिस हिरासत के दौरान युवक का शव मिलने से प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है और मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्चाधिकारी इसकी गहनता से जांच कर रहे हैं।
घरेलू विवाद के बाद हुई थी गिरफ्तारी
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, सुनील कुमार का अपनी पत्नी संध्या के साथ पिछले कुछ समय से विवाद चल रहा था। बीते 26 जून को भी दोनों के बीच हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें उसकी पत्नी का हाथ टूट गया था। उस दौरान अस्पताल से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने मामले को संज्ञान में लिया था। इसके बाद मंगलवार की शाम को एक बार फिर दोनों के बीच किसी बात को लेकर तीखी बहस और विवाद शुरू हो गया, जिसके बाद परेशान होकर पत्नी ने तुरंत पुलिस को इस बात की सूचना दी। मौके पर पहुंची अर्बन एस्टेट थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सुनील को गिरफ्तार कर लिया और कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उसे हवालात में बंद कर दिया था।
हवालात में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत
थाने में बंद किए जाने से पहले नियमानुसार युवक की पूरी चिकित्सीय जांच यानी मेडिकल टेस्ट कराया गया था। इसके बाद उसे भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत सुरक्षित हवालात में रखा गया था। बुधवार की सुबह जब पुलिसकर्मी नियमित जांच और ड्यूटी के लिए हवालात की तरफ गए, तो उन्होंने सुनील को बेसुध और मृत अवस्था में पाया। पुलिस अभिरक्षा में हुए इस हादसे की खबर फैलते ही थाने में हड़कंप मच गया और तुरंत ही वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी सूचना दी गई।
न्यायिक मजिस्ट्रेट की निगरानी में जांच शुरू
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सहित सीन ऑफ क्राइम टीम और कई अन्य प्रशासनिक अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे। विशेषज्ञों की टीम ने घटनास्थल से जुड़े सभी आवश्यक डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों को अपने कब्जे में ले लिया है। मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट (जेएमआईसी) राजीव कुमार की प्रत्यक्ष मौजूदगी में मृतक की पत्नी संध्या के विस्तृत बयान दर्ज किए गए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि मौत की असली और सटीक वजहों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा और यदि इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
ईरान-अमेरिका वार्ता का नया दौर, 6 अरब डॉलर की राशि पर अटकी निगाहें
2 Jul, 2026 10:22 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दोहा: कतर की राजधानी दोहा में अमेरिका और ईरान के बीच हुई हालिया अप्रत्यक्ष वार्ता संपन्न हो गई है। इस उच्च स्तरीय बैठक में दोनों देशों के बीच पूर्व में हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के क्रियान्वयन को लेकर विस्तृत रोडमैप पर चर्चा की गई। वार्ता के दौरान ईरान की विभिन्न अंतरराष्ट्रीय बैंकों में फ्रीज (जमी हुई) करीब 3 अरब डॉलर की राशि को जारी करने के प्रस्ताव पर मुख्य रूप से सहमति बनाने का प्रयास किया गया। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच समझौते के उल्लंघन की निगरानी करने के लिए एक विशेष हॉटलाइन स्थापित करने जैसे कई संवेदनशील मुद्दों पर भी गहन विमर्श हुआ।
एमओयू के उल्लंघन पर नजर रखने के लिए बनेगी हॉटलाइन
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी 'इर्ना' (IRNA) के मुताबिक, ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने वार्ता के इस दौर के आधिकारिक रूप से समाप्त होने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों के बीच यह सहमति बनी है कि गुरुवार तक एक विशेष और प्रभावी संचार व्यवस्था (हॉटलाइन) स्थापित कर ली जाएगी। इस चैनल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होगा कि यदि किसी भी पक्ष की ओर से MoU का कोई उल्लंघन होता है, तो उसकी वास्तविक समय (रियल-टाइम) में त्वरित सूचना दर्ज की जा सके और उसे एक-दूसरे के साथ साझा किया जा सके।
कतर और पाकिस्तान ने निभाई मध्यस्थ की भूमिका
उप विदेश मंत्री गरीबाबादी ने स्पष्ट किया कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडलों के बीच कोई भी आमने-सामने या सीधी बातचीत (Direct Talk) नहीं हुई। दोनों देशों के बीच कूटनीतिक कड़वाहट को देखते हुए सभी दौर की वार्ताएं कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता के जरिए ही पूरी की गईं। दोनों मध्यस्थ देशों ने दोनों पक्षों के प्रस्तावों और शर्तों को एक-दूसरे तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, ताकि खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता लाने की दिशा में इस समझौते को अमलीजामा पहनाया जा सके।
चांद पर बेस बनाने की दौड़ तेज, तीन कंपनियों को मिला अरबों रुपये का प्रोजेक्ट
2 Jul, 2026 09:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दोहा: कतर की राजधानी दोहा में अमेरिका और ईरान के बीच हुई हालिया अप्रत्यक्ष वार्ता आधिकारिक तौर पर संपन्न हो गई है। इस द्विपक्षीय बैठक में दोनों देशों के बीच पूर्व में हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (MoU) को अमलीजामा पहनाने के लिए विस्तृत रोडमैप पर चर्चा की गई। वार्ता का मुख्य एजेंडा ईरान की विभिन्न अंतरराष्ट्रीय बैंकों में फ्रीज (जमी हुई) करीब 3 अरब डॉलर की धनराशि को जारी करने का प्रस्ताव था। इसके साथ ही, भविष्य में किसी भी तरह के गतिरोध से बचने के लिए एक विशेष निगरानी तंत्र स्थापित करने जैसे कई संवेदनशील मुद्दों पर भी दोनों पक्षों ने सहमति जताई।
उल्लंघन पर नजर रखने के लिए गुरुवार तक बनेगी हॉटलाइन
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी 'इर्ना' (IRNA) के अनुसार, ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने वार्ता के इस दौर के पूरे होने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों के बीच एक विशेष और प्रभावी संचार व्यवस्था (हॉटलाइन) स्थापित करने पर सहमति बनी है, जिसे गुरुवार तक सक्रिय कर दिया जाएगा। इस नए संचार चैनल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होगा कि यदि किसी भी पक्ष की ओर से एमओयू (MoU) के नियमों का उल्लंघन होता है, तो उसकी वास्तविक समय (रियल-टाइम) में तुरंत सूचना दर्ज की जा सके और दोनों देश आपस में डेटा साझा कर सकें।
कतर और पाकिस्तान ने संभाली मध्यस्थता की कमान
उप विदेश मंत्री गरीबाबादी ने स्पष्ट रूप से जानकारी दी कि इस पूरी कूटनीतिक प्रक्रिया के दौरान अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडलों के बीच कोई भी आमने-सामने या सीधी बातचीत (Direct Talk) नहीं हुई है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक तनाव को देखते हुए, बातचीत के सभी दौर कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता के माध्यम से ही संचालित किए गए। इन दोनों मध्यस्थ देशों ने दोनों पक्षों की शर्तों और प्रस्तावों को एक-दूसरे तक पहुंचाने और इस बातचीत को तार्किक अंजाम तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
रूस-यूक्रेन युद्ध तेज: कीव पर मिसाइल-ड्रोन अटैक, कई इमारतों में आग
2 Jul, 2026 08:18 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कीव: रूस ने एक बार फिर यूक्रेन की राजधानी कीव पर मिसाइल और घातक ड्रोन से भीषण हवाई हमला बोला है। स्थानीय समयानुसार गुरुवार तड़के हुए इस हमले से पूरा शहर दहल उठा और कई जोरदार धमाकों के साथ रिहायशी इलाकों में भीषण आग लग गई। द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस हमले में कई बहुमंजिला रिहायशी इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने खुफिया इनपुट के आधार पर इस बड़े हमले की पहले ही चेतावनी दी थी, जिसके बाद भारी संख्या में नागरिकों ने अपनी जान बचाने के लिए मेट्रो स्टेशनों में शरण ली थी।
हमले में 8 लोगों की मौत, मलबे में दबे होने की आशंका
अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, इस ताजा रूसी हमले में अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 12 अन्य नागरिक गंभीर रूप से घायल हैं। कीव के मेयर विटाली क्लिट्स्को ने बताया कि हमले के कारण एक नौ मंजिला रिहायशी इमारत का एक बड़ा हिस्सा ढह गया है, जिसके मलबे में कई लोगों के फंसे होने की आशंका है। शहर के मध्य हिस्से में स्थित एक होटल की छत और कई इमारतों में लगी आग को बुझाने के लिए दमकलकर्मी लगातार मशक्कत कर रहे हैं। हमले के दौरान कीव में यूक्रेनी एयर डिफेंस सिस्टम की ओर से की गई जवाबी फायरिंग की आवाजें भी साफ सुनी गईं।
यूक्रेन के पलटवार के बीच पुतिन का हमला, जेलेंस्की की अपील
रूस का यह आक्रामक हमला ऐसे समय में आया है जब यूक्रेन ने भी लंबी दूरी के ड्रोन हमलों से पलटवार तेज कर दिया है। हाल के दिनों में यूक्रेन ने मॉस्को, रूसी ईंधन डिपो और क्रीमिया क्षेत्र को निशाना बनाकर रूस पर दबाव बढ़ाया था। आयरलैंड दौरे से लौटने से ठीक पहले राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा कि व्लादिमीर पुतिन किसी भी कीमत पर युद्ध जारी रखना चाहते हैं। उन्होंने वैश्विक समुदाय से अपील की कि रूस पर ऐसी परिस्थितियां थोपी जानी चाहिए, जिससे उनके लिए इस जंग को आगे बढ़ाना असंभव हो जाए।
हाई अलर्ट पर पोलैंड, फाइटर जेट और एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव
रूस द्वारा यूक्रेन की सीमा के करीब किए गए इस भीषण हवाई हमले के बाद पड़ोसी देश पोलैंड में भी हड़कंप मच गया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, पोलैंड ने सुरक्षा के लिहाज से अपने लड़ाकू विमानों (फाइटर जेट्स) और वायु रक्षा प्रणालियों (एयर डिफेंस सिस्टम) को तुरंत सक्रिय कर दिया है। पोलैंड के सैन्य अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह कदम यूक्रेनी सीमा से लगे उनके अपने हवाई क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने और किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए एहतियातन उठाया गया है।
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