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जंग के मैदान में हथियार फेंककर भागे ट्रंप, नेतन्याहू बोले- कुछ भी हो हम तो लड़ेंगे और जीतेंगे
25 Mar, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यरूशलेम। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जंग का मैदान छोड़कर भाग गए हैं। पहले दिन ट्रंप ने दमदारी से कहा था कि अमेरिका ओर इजराइल ने मिलकर ईरान पर हमला किया है। फिर 24वें दिन बोले अब अमेरिका 5 दिन तक ईरान पर हमला नहीं करेगा। तभी इजराइली पीएम ने ऐलान करते हुए कहा कि हम ये जंग लड़ेंगे और जीतेंगे। उन्होंने सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई महत्वपूर्ण चर्चा की जानकारी साझा करते हुए बताया कि दोनों नेता एक ऐसे समझौते की दिशा में काम कर रहे हैं, जो इजरायल के रणनीतिक हितों को सुरक्षित रखते हुए युद्ध के लक्ष्यों को प्राप्त कर सके। हालांकि, इस बातचीत के बावजूद नेतन्याहू ने ईरान और लेबनान के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रखने का अपना संकल्प दोहराया है।
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने सोशल मीडिया के माध्यम से स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ट्रंप इजरायल और अमेरिका की संयुक्त सैन्य उपलब्धियों को एक ठोस समझौते में बदलने के पक्ष में हैं। नेतन्याहू ने कहा कि इजरायली सेना ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को लक्षित करना जारी रखेगी। उन्होंने खुलासा किया कि हाल ही में इजरायली अभियानों में दो और ईरानी परमाणु वैज्ञानिकों को ढेर किया गया है और हिजबुल्लाह के खिलाफ भी कार्रवाई तेज कर दी गई है। उनका संदेश स्पष्ट है कि जब तक अंतिम समझौता नहीं होता, इजरायल अपने हितों की रक्षा के लिए सैन्य दबाव कम नहीं करेगा। इसी बीच, वाशिंगटन से एक राहत भरी खबर आई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि उन्होंने अमेरिकी सैन्य विभाग को ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे और बिजली संयंत्रों पर प्रस्तावित हमलों को पांच दिनों के लिए स्थगित करने का निर्देश दिया है। ट्रंप के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच शत्रुता समाप्त करने को लेकर सकारात्मक और उत्पादक बातचीत शुरू हुई है और यह स्थगन इन्हीं चर्चाओं की प्रगति पर निर्भर करेगा। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब युद्ध अपने चौथे सप्ताह में है और तेल की बढ़ती कीमतों सहित वैश्विक हवाई मार्गों पर मंडराते खतरे ने अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को हिला कर रख दिया है।
दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी हलचल तेज है। बहरीन ने एक नया मसौदा प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें सदस्य देशों को होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का अधिकार देने की वकालत की गई है। इस प्रस्ताव में मांग की गई है कि ईरान वाणिज्यिक जहाजों पर हमले तुरंत बंद करे। यदि यह प्रस्ताव पारित होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बलों को नेविगेशन बाधित करने वाले तत्वों के खिलाफ संबंधित देशों के क्षेत्रीय जल के भीतर भी सैन्य कार्रवाई करने की अनुमति मिल सकती है। हालांकि, सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों की वीटो शक्ति को देखते हुए इस प्रस्ताव के भविष्य पर अभी सस्पेंस बना हुआ है। आने वाले पांच दिन क्षेत्र में शांति की स्थापना या युद्ध के विस्तार की दृष्टि से अत्यंत निर्णायक साबित होने वाले हैं।
टोंगा में आया 7.6 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, दहशत का माहौल
25 Mar, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नुकुअलोफा। दक्षिण प्रशांत महासागर स्थित टोंगा द्वीप समूह के पास मंगलवार तड़के 7.6 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आने से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। संयुक्त राज्य भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के अनुसार यह भूकंप स्थानीय समयानुसार सुबह 4:37 बजे आया। भूकंप का केंद्र टोंगा के वावाउ द्वीप समूह में स्थित नेइआफू से लगभग 153 किलोमीटर पश्चिम में बताया गया है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस भूकंप की गहराई पृथ्वी की सतह से करीब 237 से 238 किलोमीटर के बीच थी, जिसे वैज्ञानिक दृष्टि से गहरा भूकंप माना जाता है। इतनी अधिक गहराई पर आने वाले भूकंप सामान्यतः सतह पर कम विनाशकारी प्रभाव डालते हैं। यही कारण है कि फिलहाल किसी बड़े नुकसान या किसी के हताहत होने की कोई सूचना सामने नहीं आई है। भूकंप के झटकों के बाद संभावित खतरे को देखते हुए प्रशांत सुनामी चेतावनी केंद्र (पीटीडब्ल्यूसी) ने स्थिति का आकलन किया। केंद्र ने स्पष्ट किया कि इस भूकंप से सुनामी का कोई खतरा नहीं है, क्योंकि इसका केंद्र धरती के भीतर काफी गहराई में था। आमतौर पर उथले भूकंप ही समुद्र में बड़े स्तर पर हलचल पैदा कर सुनामी का कारण बनते हैं।
एक दिन पहले हिहिफो में आया था भूकंप
गौरतलब है कि इस घटना से एक दिन पहले भी टोंगा के हिहिफो क्षेत्र के पास 6.2 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। हालांकि उस भूकंप से भी किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं आई थी। लगातार आ रहे भूकंपों के कारण स्थानीय लोगों में चिंता का माहौल जरूर बना हुआ है। वहीं, भूकंपीय गतिविधियों का असर अन्य क्षेत्रों में भी देखा गया। नेपाल में सोमवार को 4.1 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिनका केंद्र सुदूरपश्चिम प्रांत के बजहांग जिले के पास था। आसपास के इलाकों में भी लोगों ने हल्के झटके महसूस किए, हालांकि वहां भी किसी प्रकार के नुकसान की सूचना नहीं है।
मामूली विवाद बना हत्या की वजह, 10 रुपये के लिए गई जान
25 Mar, 2026 10:58 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पानीपत। गोलगप्पा विक्रेता अश्वनी की हत्या के मामले का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में आरोपियों ने हत्या करना स्वीकार किया। उन्होंने बताया कि गोलगप्पे खाने के बाद 10 रुपये के लिए कहासुनी हुई थी। अश्वनी ने 60 रुपये मांगे थे और वह 50 रुपये दे रहे थे। जिस कारण चाकू मारकर उसकी हत्या कर दी। बीते शनिवार को किला थाना क्षेत्र के कुटानी रोड पर गंदा नाला पटरी पर गोलगप्पे विक्रेता अश्वनी की हत्या कर दी गई थी। परिजनों ने अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आस-पास के सीसीटीवी कैमरे की फुटेज की जांच की थी। फुटेज में पहले दो संदिग्ध नजर आए थे। आस-पास के अन्य फुटेज देखते तो तीन संदिग्ध नजर आए। पुलिस ने 50 से अधिक स्थानों की फुटेज के आधार पर हमलावरों की पहचान करना शुरू कर दिया। जिसमें पुलिस ने हमलावरों की पहचान कर ली थी। मंगलवार देर शाम को सीआईए-2 की टीम ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में दोनों ने हत्या की वारदात को अंजाम देना स्वीकार किया है। दोपहर बाद पुलिस पूरे प्रकरण का खुलासा कर सकती है।
क्या इस्लामाबाद में निकलेगा ईरान-अमेरिका युद्ध का समाधान! व्हाइट हाउस का बयान
25 Mar, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रही जंग लगातार जारी है। इन सब के बीच हाल की कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि जंग रोकने को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हो सकती है। हालांकि इसकी पुष्टि करने से व्हाइट हाउस ने इनकार किया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट से संपर्क कर पूछा कि कुछ रिपोर्टों के मुताबिक क्या अमेरिका के शीर्ष अधिकारी इस्लामाबाद में ईरानी अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। इस पर लेविट ने कहा कि ये संवेदनशील कूटनीतिक चर्चाएं हैं और अमेरिका प्रेस के जरिए बातचीत नहीं करेगा। यह एक बदलती हुई स्थिति है और मुलाकातों के बारे में लगाए जा रहे अंदाजों को तब तक अंतिम नहीं माना जाना चाहिए, जब तक कि व्हाइट हाउस द्वारा उनकी औपचारिक घोषणा न की जाए।
रिपोर्ट के मुताबिक लेविट की यह टिप्पणी कुछ प्रकाशनों में अधिकारियों के हवाले से उन खबरों के बाद आई, जिनमें कहा गया था कि पिछले महीने शुरू हुए ईरान-अमेरिका युद्ध को खत्म करने पर बातचीत इस्लामाबाद में हो सकती है। खबरों में एक पाकिस्तानी अधिकारी और एक दूसरे सूत्र का हवाला दिया, वहीं इजराइल ने चैनल का हवाला देते हुए एक इजराइली अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि ईरान और अमेरिका इस हफ्ते के आखिर में इस्लामाबाद में बातचीत के लिए मिल सकते हैं। उन्होंने बताया कि वैंस के अलावा, ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर अमेरिका का प्रतिनिधित्व करेंगे और ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर गालिबफ तेहरान से आने वाले प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। खास बात यह है कि पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने सोमवार को कहा था कि उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से बात की और इस क्षेत्र में शांति लाने में इस्लामाबाद की मदद का वादा किया।
इस जंग के बीच सोमवार को समाधान की कुछ उम्मीद जगी जब ट्रंप ने दावा किया कि ईरान किसी समझौते के लिए उत्सुक है और कुशनर-विटकॉफ ने रविवार को एक ईरानी नेता के साथ बातचीत की थी। हालांकि ट्रंप ने उस नेता का नाम नहीं बताया, लेकिन ईरान के मोहम्मद बाघर गालिबफ ने बाद में ट्रंप के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि कोई बातचीत नहीं हुई थी। ईरानी नेता ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि फेक न्यूज का इस्तेमाल वित्तीय और तेल बाजारों में हेरफेर करने और उस दलदल से निकलने के लिए किया जाता है, जिसमें अमेरिका और इजराइल फंसे हुए हैं।
कोलंबिया में वायुसेना का विमान टेकऑफ के दौरान हुआ दुर्घटनाग्रस्त, 125 लोग थे सवार
25 Mar, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बोगोटा। दक्षिण अमेरिकी देश कोलंबिया से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां वायुसेना का एक शक्तिशाली लॉकहीड सी-130 हरक्यूलिस विमान टेकऑफ के दौरान भीषण हादसे का शिकार हो गया। यह दुर्घटना पुतुमायो के प्यूर्टो लेगुइज़ामो इलाके में हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उड़ान भरते समय विमान अचानक अनियंत्रित होकर गिर पड़ा और देखते ही देखते उसमें भीषण आग लग गई। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया और आसमान में काले धुएं का गुबार छा गया।
कोलंबिया के रक्षा मंत्री पेड्रो सांचेज़ ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि विमान में बड़ी संख्या में सैन्य जवान सवार थे। प्रारंभिक सूचनाओं में भारी जनहानि की आशंका जताई गई थी, लेकिन राहत एवं बचाव कार्य के साथ स्थिति धीरे-धीरे स्पष्ट हो रही है। वायुसेना के कमांडर कार्लोस फर्नांडो सिल्वा ने एक आधिकारिक संदेश में जानकारी दी कि विमान में 11 चालक दल के सदस्यों सहित कुल 125 लोग सवार थे। गनीमत यह रही कि बचाव टीमों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक कम से कम 48 लोगों को मलबे से सुरक्षित निकाल लिया है, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया है। हादसे की भयावहता को देखते हुए पूरे इलाके को सील कर दिया गया है। सैन्य और नागरिक राहत टीमें मलबे में फंसे अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं। हालांकि, आग की लपटों ने शुरुआत में बचाव कार्य में काफी बाधा उत्पन्न की थी। विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के कारणों का अभी तक सटीक पता नहीं चल पाया है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी खराबी, मानवीय चूक या मौसम जैसे सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर एक उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं। सरकार ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें हर संभव सहायता देने का भरोसा दिलाया है। साथ ही, आम जनता से अपील की गई है कि वे सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट खबरों और अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।
वन विभाग में बड़ा खुलासा, ग्रीन सिंडिकेट पर शिकंजा
25 Mar, 2026 08:25 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। हरियाणा के पंचकूला से लेकर यमुनानगर स्थित कलेसर जंगल क्षेत्र तक खैर के पेड़ों की अवैध कटाई का मामला एक हाईप्रोफाइल ग्रीन सिंडिकेट के रूप में सामने आया है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि यह कोई अलग-थलग घटना नहीं बल्कि लंबे समय से सक्रिय एक संगठित नेटवर्क है, जो सुनियोजित तरीके से वन संपदा को नुकसान पहुंचा रहा था। यमुनानगर के दारपुर क्षेत्र से हिमाचल सीमा तक फैले जंगलों में बड़े पैमाने पर पेड़ों के कटान के ठोस प्रमाण मिले हैं। पंचकूला के आसरेवाला जंगल, मोरनी-पिंजौर क्षेत्र के जंगलों के साथ दारपुर की मेन खोह, कुई वाली खोह, छोटी वाली खोह, चिकन की खोह, खिलना वाली खोह, कांसली, बागपत, खादरी, टिबरियों, आमवाली, नंगली और फलोड़ी तक कई स्थानों पर खैर के पेड़ों के कटे अवशेष, ताजा ठूंठ और अवैध रास्तों के निशान मिले हैं। इससे वन विभाग के अंदरूनी नेटवर्क पर शक गहरा रहा है।
आसरेवाला से खुला पूरा खेल
दो मार्च 2026 को पंचकूला के आसरेवाला जंगल क्षेत्र में खैर की तस्करी का मामला उजागर होने के बाद पूरे प्रदेश में हलचल मच गई। इसके बाद वन विभाग और पंचकूला पुलिस की एसआईटी ने संयुक्त अभियान शुरू किया। जांच आगे बढ़ी और तब से लेकर अब तक एक वन दरोगा समेत 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
पांच अधिकारी निलंबित, सात और रडार पर
खैर के पेड़ों की अवैध कटान में वन विभाग की भूमिका सवालों के घेरे में है। इस मामले में अब तक पांच अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है। इनमें दो डीएफओ, दो इंस्पेक्टर और एक अन्य कर्मचारी शामिल है। वहीं पांच फॉरेस्टर और दो रेंजर्स की भूमिका भी सवालों के घेरे में है, जिन पर जल्द कार्रवाई हो सकती है। विभागीय स्तर पर संभावित मिलीभगत और निगरानी में कमी की जांच की जा रही है।
सवाल : आला अधिकारियों पर मेहरबानी क्यों?
इतने बड़े पैमाने पर अवैध कटाई के बावजूद वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। लंबे समय तक इस नेटवर्क की जानकारी न होना विभागीय निगरानी पर सवाल खड़ा करता है। बड़े स्तर पर कार्रवाई न होना भी जांच को और गंभीर बना रहा है।
अधिकारी के अनुसार
इस मामले की लगातार निगरानी की जा रही है। जिन अधिकारियों की लापरवाही या संलिप्तता सामने आई है, उन्हें निलंबित कर विभागीय जांच शुरू की गई है। एसआईटी भी सक्रिय है और दोषियों को किसी भी स्तर पर बख्शा नहीं जाएगा।
-राव नरबीर सिंह, वन मंत्री, हरियाणा।
अरब देशों से व्यापार ठप, बर्तन उद्योग पर संकट गहराया
25 Mar, 2026 08:12 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जगाधरी। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध से जगाधरी की बर्तन नगरी प्रभावित हो रही है। युद्ध के कारण जहां अरब देशों का व्यापार बिल्कुल ही ठप हो गया है। वहीं, इन देशों से कच्चा माल आना भी बंद हो गया है, जिससे यहां कच्चे माल की कीमत में 20 से 25 प्रतिशत का उछाल आया है। कच्चे माल के दाम बढ़ने से घरेलू उत्पादन लागत भी बढ़ गई है। दाम बढ़ने से देश के विभिन्न राज्यों के थोक व्यापारियों ने भी ऑर्डर कम कर दिए हैं, इसकी 40 प्रतिशत कमी आई है। युद्ध से बर्तन नगरी का करीब 300 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित है। यही नहीं युद्ध के कारण अरब देशों में माल तो जा नहीं रहा है। वहीं अरब देशों में फैक्टरियों का करोड़ रुपये का भुगतान लटका है। कच्चा माल न आने से घरेलू उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। इससे जगाधरी की बर्तन ईकाइयों का उत्पादन घटकर 55 से 60 प्रतिशत रह गया है। उद्यमियों का कहना है कि यदि हालात ऐसे ही रहे तो बर्तन नगरी पर बड़ा संकट आ जाएगा। उत्पादन लागत ज्यादा होने से घरेलू बाजार में सामान की कीमत दोगुनी हो जाएगी। जगाधरी से स्टील, एल्युमिनियम के अलावा पीतल व कांसे के बर्तन भी विदेशों में जाते हैं। यहां से ईरान, इराक, इस्राइल, सउदी अरब, दुबई, कतर, ओमान, बहरीन, कुवैत, लेबनान, जाॅर्डन सहित तमाम मिडिल ईस्ट के देशों में सामान जाता है। युद्ध से बर्तन नगरी को 300 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है और अभी भी हालात गंभीर बने हुए हैं। जेके मैटल के संचालक भारत गर्ग ने बताया कि जगाधरी से एल्युमिनियम और स्टील के बर्तन मिडिल ईस्ट के देशों में जाते हैं। उनके पास एल्युमिनियम के बड़े-बड़े भगौने सहित अन्य बर्तन बनते हैं, जो अरब देशों में जाते हैं। परंतु एक महीने से माल नहीं गया है और गोदाम में बंद है। इसके अलावा वहां से कच्चा माल आता है, जो बंद हो गया है। इससे यहां पर लागत करीब 20 से 25 प्रतिशत बढ़ गई है। ऐसे में घरेलू उत्पादन की लागत बढ़ गई है। इसके अलावा इंडस्ट्री को गैस नहीं मिल पा रही है। डीजल के दाम में 22 प्रतिशत वृद्धि हो गई है। वहीं, फर्निश ऑयल भी नहीं मिल रहा है।
800 से ज्यादा फैक्टरियां प्रभावित : दविंद्र गुप्ता
स्मॉल स्केल एल्युमिनियम यूटेंसिल्स एसोसिएशन के प्रधान दविंद्र गुप्ता ने बताया कि जगाधरी ऐतिहासिक बर्तन औद्योगिक नगरी है, यहां छोटी-बड़ी 800 फैक्टरियां हैं। यहां कई ऐसी इकाइयां हैं, जिनका संचालन तीसरी और चौथी पीढ़ी कर रही हैं। यहां स्टील के बर्तन बनाने की भी 450 से 500 छोटी-बड़ी इकाइयां हैं। एल्युमिनियम की 125 से ज्यादा फैक्टरियां चल रही हैं। पीतल और तांबे की करीब 100 फैक्टरियां हैं। यहां से करीब 250 से ज्यादा इकाइयां बर्तनों का निर्यात करती हैं। इनमें 100 इकाइयां अरब देशों में काम कर रही हैं। अरब देशों में गोल्ड व सिल्वर प्लेटिंग वाली तश्तरी, बाउल, आयतें और सजावट जाता है। इसके अलावा कटलरी और रेस्टोरेंट में प्रयोग होने वाले सामान भी जगाधरी से जाता है।
तेहरान और अमेरिका के बीच शांति के लिए मध्यस्थता वाली खबरें फेक: ईरान
25 Mar, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग जल्द ही शांति में बदल जाएगी। इसके लिए कई देश मध्यस्थता कर रहे हैं और बातचीत कर शांति बहाल हो जाएगी। इस तरह की राहत भरीं खबरें हकीकत में बदलतीं इससे पहले ही ईरान ने साफ कर दिया कि ये सिर्फ अटकलें और भ्रामक खबरें है। ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बघेर गालिबाफ ने सीधे संवाद की खबरों को खारिज करते हुए इन्हें फेक न्यूज करार दिया। ईरान का रुख फिलहाल सख्त बना हुआ है, लेकिन अमेरिका के इस रुख के बाद वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है और कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गई हैं। भले ही ईरान ने प्रस्ताव मिलने की बात स्वीकार की है, लेकिन अंतिम समझौते तक पहुंचने की राह अब भी कूटनीतिक दांव-पेचों में फंसी नजर आती है। वहीं दूसरी तरफ बताया जा रहा है कि ईरान के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि उन्हें मध्यस्थों के माध्यम से अमेरिका की ओर से कुछ महत्वपूर्ण प्रस्ताव मिले हैं।
इधर खबरें चल रहीं है कि ईरान इन प्रस्तावों की गंभीरता से समीक्षा कर रहा है। अधिकारी के अनुसार, अमेरिका की ओर से भेजे गए कुछ बिंदुओं पर विचार किया जा रहा है, जिससे यह संकेत मिलता है कि लंबे समय से जारी गतिरोध और प्रत्यक्ष टकराव के बावजूद दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे कूटनीतिक संवाद का रास्ता खुला है। यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ समझौते की संभावना जताई थी। हालांकि खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष जारी है और इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं, लेकिन अब ईरान ने भी स्वीकार किया है कि मध्यस्थों के जरिए अमेरिका का प्रस्ताव उन तक पहुंचा है। इससे पहले ईरान किसी भी तरह की बातचीत से इनकार करता रहा था। बताया जा रहा है कि अमेरिका की ओर से ईरान को 15 बिंदुओं का एक ड्राफ्ट भेजा गया है, जिसमें तनाव कम करने की रूपरेखा तैयार की गई है। क्षेत्रीय शांति के लिए तुर्की और मिस्र जैसे देश सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान से फोन पर चर्चा की है। फिदान ने कतर, सऊदी अरब, पाकिस्तान और यूरोपीय संघ के अधिकारियों के साथ भी संपर्क साधा है। दूसरी ओर, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतेह अल सीसी ने भी स्पष्ट किया है कि उन्होंने ईरान को तनाव कम करने के लिए कड़े संदेश भेजे हैं। मिस्र के अधिकारियों के अनुसार, इन संदेशों का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा के बुनियादी ढांचे पर हमलों को रोकना है, ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़े संकट से बचाया जा सके। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को एक चौंकाने वाले बयान में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच सकारात्मक बातचीत हुई है, जिसके बाद उन्होंने ऊर्जा ढांचों पर होने वाले संभावित हमलों को पांच दिनों के लिए टालने का निर्णय लिया। ट्रंप ने दावा किया कि बातचीत बेहद मजबूत रही है और लगभग सभी मुद्दों पर सहमति बन सकती है।
युद्ध खतरे के बीच राहत? ट्रंप बोले, ईरान ने परमाणु हथियार नहीं रखने का किया वादा
25 Mar, 2026 07:39 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को दावा किया कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न करने पर पूरी तरह सहमत हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि ईरान के खिलाफ युद्ध जीत लिया गया है
उन्होंने तीन सप्ताह से चल रहे ईरान के साथ संघर्ष में अमेरिका की जीत की घोषणा भी की और उन्होंने कहा कि तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े तेल-गैस संबंधी एक बहुत बड़ा तोहफा अमेरिका को भेजा है।
मंगलवार को ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने दावा किया कि ईरान समझौता करने के लिए उत्सुक है और संकेत दिया कि उपराष्ट्रपति जेडी वैंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, मध्य पूर्व के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर वार्ता का नेतृत्व कर रहे हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि वर्तमान ईरानी नेतृत्व में पहले ही महत्वपूर्ण बदलाव हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि वास्तव में, यह सत्ता परिवर्तन है। आप जानते हैं, यह सत्ता में बदलाव है क्योंकि सभी नेता उन नेताओं से बहुत अलग हैं जिन्होंने शुरुआत में ये सारी समस्याएं पैदा की थीं।
इससे पहले, ट्रंप ने ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता को सुविधाजनक बनाने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सोशल मीडिया पोस्ट का समर्थन किया। शरीफ ने चल रहे संघर्ष के व्यापक समाधान के लिए वार्ता की मेजबानी करने की भी पेशकश की।
मार्कवेन मुलिन के गृह सुरक्षा विभाग के नए सचिव के रूप में शपथ ग्रहण समारोह के बाद ट्रंप ने पत्रकारों से कहा मैं पहले से कुछ नहीं कहना चाहता, लेकिन वे इस बात पर सहमत हो गए हैं कि उनके पास कभी परमाणु हथियार नहीं होंगे।
ट्रंप ने कहा कि ईरानी नेतृत्व ने अमेरिका को होर्मुज जलडमरूमध्य और तेल आपूर्ति से संबंधित एक “महत्वपूर्ण पुरस्कार” दिया है। वे एक समझौता करने जा रहे हैं। उन्होंने कल कुछ ऐसा किया जो वास्तव में अद्भुत था। उन्होंने हमें एक उपहार दिया। और वह उपहार आज पहुंचा। यह एक बहुत बड़ा उपहार था जिसकी कीमत बहुत अधिक थी।
आगे ट्रंप ने कहा कि मैं आपको यह नहीं बताऊंगा कि वह उपहार क्या है, लेकिन यह एक बहुत महत्वपूर्ण पुरस्कार था। और उन्होंने इसे हमें दिया है। तो इसका मेरे लिए एक ही मतलब है, हम सही लोगों से निपट रहे हैं। नहीं, यह परमाणु हथियार नहीं थे। यह तेल और गैस से संबंधित था। अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि ईरान के खिलाफ युद्ध जीत लिया गया है।
ट्रंप ने कहा कहा कि मुझे यह कहना अच्छा नहीं लगता। हमने यह युद्ध जीत लिया है। यह जंग हम जीत चुके हैं... यह ऐसा है जैसे हम कोई युद्ध नहीं जीत रहे जहां उनके पास न नौसेना है, न वायु सेना है, न कुछ भी नहीं है। और हमारे विमान तेहरान और उनके देश के अन्य हिस्सों के ऊपर से उड़ रहे हैं। वे इसके बारे में कुछ नहीं कर सकते।
अब डबल गैस नहीं चलेगी: PNG यूजर्स को छोड़ना होगा LPG सिलेंडर
24 Mar, 2026 04:31 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
करनाल। हरियाणा में अब रसोई गैस की व्यवस्था पूरी तरह बदलने जा रही है। सरकार ने साफ कर दिया है कि जिन घरों तक पाइप नेचुरल गैस यानी पीएनजी पहुंच चुकी है, वहां अब एलपीजी सिलिंडर नहीं चलेगा। यानी एक ही घर में दो तरह की गैस रखने का दौर अब खत्म होगा। सोमवार को मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक के बाद ये सख्त फैसले लिए गए हैं। इसमें राज्य में एलपीजी और पीएनजी की स्थिति की समीक्षा करते हुए यह तय किया गया कि जहां पीएनजी उपलब्ध है, वहां के उपभोक्ताओं को उसी पर शिफ्ट करना होगा। भले ही वे पीएनजी को न चाहते हों लेकिन फिर भी उन्हें पीएनजी ही लेनी होगी। बैठक में निर्णय लिया गया है कि पीएनजी कनेक्शन होने के बावजूद एलपीजी कनेक्शन रखना अब गैरकानूनी माना जाएगा। ऐसे सभी उपभोक्ताओं को तुरंत अपना सिलिंडर कनेक्शन सरेंडर करना होगा। आदेश में यह भी स्पष्ट है कि इसके बाद कोई भी उपभोक्ता सरकारी तेल कंपनियों से गैस सिलिंडर की रिफिल यानी भरवा नहीं ले सकेगा। सबसे सख्त प्रावधान ये है कि अगर किसी इलाके में पीएनजी की सुविधा उपलब्ध है और उपभोक्ता इसे लेने से इनकार करता है, तो उसका एलपीजी कनेक्शन ही सस्पेंड कर दिया जाएगा। यानी अब विकल्प की गुंजाइश लगभग खत्म कर दी गई है। जिन घरों में पीएनजी मीटर पहले ही लगाए जा चुके हैं, वहां तुरंत प्रभाव से एलपीजी सप्लाई बंद करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि एक ही घर में दोहरी गैस व्यवस्था पूरी तरह खत्म हो जाए।
अफसरों को सख्ती से आदेश करवाने होंगे लागू
राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी उपायुक्तों, जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रकों और सिटी गैस कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि इस फैसले को जमीनी स्तर पर सख्ती से लागू कराया जाए। साथ ही पीएनजी पाइपलाइन बिछाने में आ रही अड़चनों जैसे रोड कटिंग और राइट ऑफ वे को भी तुरंत दूर करने को कहा गया है। ताकि गैस कंपनी शहर की सड़कों पर अपनी पाइपलाइन बिछा सकें और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पीएनजी के कनेक्शन पहुंच सकें। सरकार का दावा है कि पीएनजी ज्यादा सुरक्षित, सस्ती और सुविधाजनक है। इससे सिलिंडर ढुलाई, गैस खत्म होने और ब्लैक मार्केटिंग जैसी समस्याएं खत्म होंगी।
अधिकारी के अनुसार
सरकार की ओर से ये आदेश मिले हैं। इनको धरातल पर सख्ती से लागू कराया जाएगा। जहां पीएनजी की पाइपलाइन हैं वहां के उपभोक्ताओं को पीएनजी कनेक्शन ही लेना होगा। जिनके कनेक्शन चल रहे हैं उन्हें अपना एलपीजी सिलिंडर सरेंडर करना होगा। पाइपलाइन बिछाने के लिए सरकार की ओर से नगर निगम और एचएसवीपी को भी निर्देश जारी किए हैं।
टेकऑफ के कुछ ही देर बाद विमान में आई गंभीर समस्या
24 Mar, 2026 12:07 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बोगोटा|दक्षिण अमेरिकी देश कोलंबिया में सोमवार को हुआ भीषण सैन्य विमान हादसा न सिर्फ कोलंबिया, बल्कि पूरे अमेरिकी महाद्वीप को झकझोर देने वाला साबित हुआ। उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों बाद सैनिकों से भरा विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें बड़ी संख्या में जवानों की जान चली गई और कई घायल हो गए। इस हादसे ने सेना की सुरक्षा व्यवस्था, तकनीकी खामियों और आपात तैयारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती जांच में हमले की आशंका से इनकार किया गया है, लेकिन तकनीकी खराबी की संभावना जताई जा रही है।
पूरी बात को ऐसे समझा जा सकता है कि कोलंबिया के अमेजन क्षेत्र में स्थित पुटुमायो प्रांत के प्यूर्टो लेगुइजामो शहर में सोमवार को एक बड़ा सैन्य विमान हादसा हो गया। यह विमान उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में कुल 128 लोग सवार थे, जिनमें ज्यादातर सैनिक शामिल थे। कोलंबिया की सेना के प्रमुख जनरल ह्यूगो एलेजांद्रो लोपेज बैरेटो ने बताया कि इस दर्दनाक हादसे में अब तक कम से कम 66 सैनिकों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। चार सैन्य कर्मी अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
कोलंबिया के रक्षा मंत्राी ने इस हादसे पर क्या कहा?
इस हादसे पर कोलंबिया के रक्षा मंत्री पेड्रो सांचेज ने गहरा दुख जताया है। उन्होंने कहा कि यह दुर्घटना पूरे देश के लिए बहुत पीड़ादायक है। उन्होंने यह भी साफ किया कि अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि इस विमान पर किसी उग्रवादी या गैर-कानूनी सशस्त्र समूह ने हमला किया हो। रक्षा मंत्री के अनुसार, यह विमान पुटुमायो के ही एक अन्य शहर में सैनिकों को ले जा रहा था। हादसे के बाद घायलों को तुरंत इलाज के लिए पास के छोटे अस्पतालों में ले जाया गया और बाद में उन्हें बड़े शहरों, खासकर राजधानी बोगोटा भेजा गया।
रक्षा मंत्री ने जांच का भरोसा दिया
रक्षा मंत्री ने कहा कि C-130 विमान का हादसा पूरे देश के लिए दुखद है। उन्होंने लोगों से अपील की कि इस दुखद घटना का इस्तेमाल राजनीति या निजी फायदे के लिए न करें। ऐसा करना उन परिवारों के प्रति अनादर होगा जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस हादसे की जांच पूरी ईमानदारी और तेजी से की जाएगी।
सांचेज ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार का लक्ष्य है कि पीड़ित परिवारों को सच्चाई पता चले और उन्हें न्याय मिले। रक्षा मंत्री का कहना है कि सरकार सेना को मजबूत बनाने में लगातार काम कर रही है, लेकिन इस हादसे ने एक बार फिर सुरक्षा और तकनीकी व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जो हादसे की असली वजह सामने लाएगी।
हादसे के कारण पर सैन्य अधिकारियों का क्या कहना है? समझिए
बात अगर हादसे के कारणों की की जाए तो हवाई सेना के अधिकारियों और विशेषज्ञों के अनुसार, हादसे की असली वजह अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन शुरुआती जानकारी में यह सामने आया है कि विमान में उड़ान भरने के तुरंत बाद तकनीकी खराबी आ गई थी।
विमान ने टेकऑफ के कुछ ही मिनट बाद समस्या का सामना किया।
बताया जा रहा है कि यह विमान (हरक्यूलिस C-130) चार इंजनों वाला होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि संभव है कि इंजन में अचानक खराबी आई हो।
दूसरी ओर एक सैन्य विमान विशेषज्ञ ने बताया कि यह विमान कुछ साल पहले ही पूरी तरह से जांच (ओवरहाल) से गुजरा था, इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि हादसा खराब रखरखाव की वजह से हुआ।
बचाव और राहत कार्य जारी
हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत मदद शुरू कर दी। कई ग्रामीण अपनी मोटरसाइकिलों से घायलों को अस्पताल पहुंचाते दिखे। कुछ लोग आग बुझाने में भी जुटे रहे। सेना और वायुसेना की टीमें भी तुरंत मौके पर पहुंच गईं। करीब 57 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और उन्हें इलाज के लिए भेजा गया। वायुसेना ने घायलों को बड़े अस्पतालों तक पहुंचाने के लिए विशेष विमान भी भेजे।
हादसे की जांच और राष्ट्रपति के आदेश को भी समझिए
सरकार ने इस हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं। राष्ट्रपति ने भी इस घटना के बाद सेना के उपकरणों और विमानों को आधुनिक बनाने की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि अगर कोई अधिकारी अपनी जिम्मेदारी सही तरीके से नहीं निभा रहा है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कुल मिलाकर देखा जाए तो यह हादसा कोलंबिया के लिए एक बड़ी त्रासदी है। फिलहाल सरकार और सेना हादसे के कारणों की जांच कर रही है और घायलों के इलाज पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट से ही साफ हो पाएगा कि इस दुर्घटना की असली वजह क्या थी।
गर्भवती महिला कर्मचारी को वर्क फ्रॉम होम देने से कंपनी ने किया इनकार
24 Mar, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। एक कंपनी को अपनी गर्भवती कर्मचारी के साथ लापरवाही बरतने के मामले में भारी कीमत चुकानी पड़ी। अमेरिका में कोर्ट ने कंपनी को करीब 22.5 मिलियन डॉलर यानी करीब 200 करोड़ रुपए का मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह मामला चेल्सी वॉल्श नाम की महिला से जुड़ा है, जो टोटल क्वालिटी लॉजिस्टिक्स में काम करती थीं। चेल्सी की प्रेग्नेंसी हाई-रिस्क थी और डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने को कहा था। उन्होंने कंपनी से वर्क फ्रॉम होम की अनुमति मांगी, लेकिन कंपनी ने इनकार कर दिया और कहा कि या तो वह ऑफिस आकर काम करें या बिना वेतन की छुट्टी लें।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बिना वेतन छुट्टी लेने का मतलब था उनकी आय और हेल्थ इंश्योरेंस खत्म होना, इसलिए मजबूरी में उन्होंने ऑफिस जाकर काम जारी रखा। कुछ ही दिनों बाद उन्हें समय से पहले प्रसव पीड़ा हुई और उन्होंने एक बच्ची को जन्म दिया, लेकिन जन्म के कुछ घंटों बाद ही बच्ची की मौत हो गई। यह प्रीमैच्योर डिलीवरी थी, जो तय समय से करीब 18 हफ्ते पहले हो गई थी। इसके बाद चेल्सी ने कंपनी के खिलाफ मुकदमा दायर किया और उसे इस त्रासदी के लिए जिम्मेदार ठहराया। कोर्ट की जूरी ने महिला के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कंपनी को दोषी माना और भारी जुर्माना लगाया। यह फैसला कर्मचारियों के अधिकारों, खासकर गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा और सुविधा को लेकर एक अहम मिसाल माना जा रहा है।
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच बयानबाजी ने पकड़ा जोर
24 Mar, 2026 11:57 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन|अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध अब अपने चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य हमले शुरू करने के फैसले की जिम्मेदारी अपने रक्षा सचिव पीट हेगसेथ पर डाल दी है। टेनेसी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप के एक बयान ने वाशिंगटन के राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
क्या हेगसेथ ने की थी युद्ध की वकालत?
दरअसल सोमवार को मेम्फिस सेफ टास्क फोर्स की एक बैठक में ट्रंप ने संकेत दिया कि हेगसेथ उनके प्रशासन के पहले वरिष्ठ अधिकारी थे जिन्होंने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का सुझाव दिया था। ट्रंप ने अपने बगल में बैठे हेगसेथ की ओर इशारा करते हुए कहा, 'पीट, मुझे लगता है कि आप सबसे पहले बोलने वाले व्यक्ति थे और आपने कहा था, 'चलो यह करते हैं क्योंकि आप उन्हें परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दे सकते'।' ट्रंप ने आगे बताया कि ऑपरेशन को मंजूरी देने से पहले उन्होंने हेगसेथ, जनरल केन और कई अन्य महत्वपूर्ण लोगों को फोन किया था।
युद्ध का चेहरा बने हेगसेथ
फरवरी के अंत में शुरू हुए इस युद्ध का उद्देश्य ईरान के मिसाइल कार्यक्रम, ड्रोन उत्पादन और नौसैनिक शक्ति को नष्ट करना बताया गया है। पीट हेगसेथ इस युद्ध के सबसे प्रमुख चेहरे के रूप में उभरे हैं। वे नियमित रूप से पेंटागन में मीडिया को ब्रीफिंग दे रहे हैं और अमेरिकी सैन्य उद्देश्यों का बचाव कर रहे हैं। हाल ही में जब उनसे युद्ध की समयसीमा के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कोई निश्चित तारीख बताने से इनकार कर दिया और कहा कि मिशन सही रास्ते पर है और ट्रंप ही इसके अंत का फैसला करेंगे।
ट्रंप प्रशासन के भीतर मतभेद
रिपोर्ट्स के अनुसार, युद्ध शुरू करने के फैसले पर ट्रंप प्रशासन के भीतर गहरे मतभेद थे। ट्रंप ने स्वीकार किया था कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस अभियान को लेकर बहुत उत्साहित नहीं थे। दूसरी ओर कथित तौर पर इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और मीडिया मुगल रूपर्ट मर्डोक जैसे लोग अमेरिका पर सैन्य कार्रवाई के लिए दबाव बना रहे थे। इन आंतरिक तनावों का पहला बड़ा परिणाम तब दिखा जब नेशनल काउंटर टेररिज्म सेंटर के पूर्व प्रमुख जो केंट ने पिछले हफ्ते अपने पद से इस्तीफा दे दिया। वे इस युद्ध के विरोध में इस्तीफा देने वाले पहले वरिष्ठ अधिकारी हैं।
युद्ध में हुआ है भारी नुकसान
चार हफ्तों के इस संघर्ष में अब तक भारी जानमाल का नुकसान हुआ है। आंकड़ों के अनुसार, युध्द में ईरान के 1,500 से अधिक, लेबनान में 1,000 से अधिक, इस्राइल में 15 और अमेरिका के 13 सैनिक मारे गए हैं। ट्रंप ने यह भी कहा है कि प्रशासन युद्ध समाप्त करने और 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को फिर से खोलने के लिए बातचीत की संभावनाएं तलाश रहा हैं। उन्होंने कूटनीति के लिए ईरान को दी गई समयसीमा 5 दिन के लिए बढ़ा दी है, हालांकि ईरानी अधिकारियों ने किसी भी तरह की बातचीत होने से साफ इनकार किया है।
ईरान ने डिएगो गार्सिया द्वीप पर अमेरिका-ब्रिटेन के सैन्य अड्डे पर दागीं मिसाइलें
24 Mar, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन। मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान की मिसाइल कार्रवाई ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं को और गहरा कर दिया है। रिपोर्टों के मुताबिक ईरान ने हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया द्वीप पर अमेरिका और ब्रिटेन के संयुक्त सैन्य अड्डे को निशाना बनाते हुए लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हालांकि ये मिसाइलें अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकीं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक डिएगो गार्सिया द्वीप पर स्थित यह सैन्य अड्डा रणनीतिक रूप से अत्यंत अहम है। बताया जा रहा है कि यह हमला मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के बीच पहली बार इतनी लंबी दूरी की मिसाइलों के इस्तेमाल का संकेत देता है। इजराइल डिफेंस फोर्स के मुताबिक युद्ध शुरू होने के बाद इस स्तर की क्षमता का प्रदर्शन पहली बार देखा गया है। हालांकि ईरान ने आधिकारिक रूप से इस हमले की पुष्टि नहीं की है। ईरानी मीडिया भी इस संबंध में विदेशी स्रोतों के हवाले से ही रिपोर्टिंग कर रहा है। अमेरिकी मीडिया संस्थानों ने अज्ञात अधिकारियों के हवाले से इस घटना की जानकारी दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस असफल हमले के बावजूद इसकी रणनीतिक अहमियत कम नहीं है। इससे यह संकेत मिलता है कि ईरान अपनी मिसाइल क्षमता का दायरा बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। वर्तमान में चागोस द्वीपसमूह ईरान से करीब 3800 किलोमीटर दूर है, जो इसकी मारक क्षमता का एक अहम संकेतक है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या भविष्य में यूरोप के प्रमुख शहर जैसे लंदन, पेरिस और बर्लिन भी इस दायरे में आ सकते हैं। हालांकि, ब्रिटेन के एक कैबिनेट मंत्री ने कहा है कि फिलहाल इस बात का कोई ठोस प्रमाण नहीं है कि ईरान के पास इतनी लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें हैं।
बता दें हाल ही में ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को लेकर वैश्विक स्तर पर वार्ता चल रही थी, लेकिन इस घटनाक्रम ने उस प्रक्रिया को भी प्रभावित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात इसी तरह बिगड़ते रहे, तो यह क्षेत्रीय संघर्ष एक व्यापक वैश्विक संकट का रूप ले सकता है।
फायर ब्रिगेड और आपातकालीन सेवाएं मौके पर तुरंत पहुंचीं
24 Mar, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
टेक्सास|अमेरिका में टेक्सास तट के पास सोमवार को एक तेल रिफाइनरी में विस्फोट हुआ। इस धमाके के बाद मौके पर हड़कंप मच गया और आसमान में धुएं का भारी गुबार छा गया। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर स्थानीय निवासियों को घरों के भीतर ही रहने का आदेश जारी किया है।
राहत बचाव कार्य जारी
यह विस्फोट ह्यूस्टन से लगभग 145 किलोमीटर पूर्व में स्थित पोर्ट आर्थर की वैलेरो रिफाइनरी में हुआ। पोर्ट आर्थर की मेयर चार्लोट एम. मोसेस ने जानकारी दी कि इस घटना में कोई भी घायल नहीं हुआ है सभी सुरक्षित हैं। उन्होंने बताया कि दमकलकर्मी मौके पर पहुंच चुके हैं और जल्द से जल्द आग पर काबू पाने की कोशिश कर रहे हैं। मेयर ने शहर के पश्चिमी हिस्से के लोगों से अपील की है कि वे घरों से बाहर न निकलें।
क्या बोले स्थानीय निवासी?
सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो और तस्वीरों में रिफाइनरी से आग की लपटें और काला धुआं निकलता दिखाई दे रहा है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, धमाका इतना जोरदार था कि उनके घरों की खिड़कियां तक हिल गईं। प्रशासन ने फेसबुक के जरिए संदेश दिया है कि जब तक आपातकालीन सेवाओं की ओर से खतरा टलने की घोषणा का संकेत न मिल जाए, तब तक लोग सुरक्षित स्थानों पर ही रहें।
लोगों से सतर्क रहने की अपील
टेक्सास के राज्य प्रतिनिधि क्रिश्चियन मैनुअल ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में बताया कि 'टेक्सास कमीशन ऑन एनवायर्नमेंटल क्वालिटी' की टीम वायु निगरानी उपकरणों के साथ रिफाइनरी पहुंच गई है। उन्होंने निवासियों को सलाह दी है कि वे बाहरी गतिविधियों को सीमित करें और अपने घरों के खिड़की-दरवाजे बंद रखें।
वैलेरो की वेबसाइट के अनुसार, इस रिफाइनरी में लगभग 770 कर्मचारी काम करते हैं और इसकी क्षमता प्रतिदिन लगभग 4,35,000 बैरल तेल संसाधित करने की है। यह प्लांट कच्चे तेल से गैसोलीन, डीजल और जेट ईंधन तैयार करता है। गौरतलब है कि यह विस्फोट ऐसे समय में हुआ है जब ईरान युद्ध के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति में अनिश्चितता बनी हुई है और गैस की कीमतों में पहले से ही भारी उछाल देखा जा रहा है। फिलहाल वैलेरो कंपनी की ओर से इस घटना पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों पर पुलिस कार्रवाई, CM हाउस के बाहर तनाव
बालाकोट-नोटबंदी पर राहुल का तंज, संसद में हंगामा
