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यूक्रेन-रूस युद्ध में नया मोड़, 1210 रूसी सैनिक मारे गए, शांति वार्ता की कोशिशें जारी
18 Mar, 2025 12:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यूक्रेन और रूस युद्ध में नया मोड़ आ गया है. अमेरिका जहां रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत कर शांति समझौते की कवायद कर रहा है. वहीं यूक्रेन की सेना जंग के मैदान में लगातार रूसी सैनिकों को मार रही है. पुतिन और डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत से पहले यूक्रेन ने रूस के 1210 सैनिक मार गिराए हैं.
द कीव इंडिपेंडेंट ने रक्षा मंत्रालय के हवाले से बताया है कि जंग के मैदान में 17 मार्च को रूस के 1210 सैनिक मारे गए. 16 मार्च को यूक्रेन ने पुतिन के 1400 से ज्यादा सैनिक मारे. वो भी तब, जब शांति वार्ता के लिए अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ रूस के राजधानी मॉस्को में हैं.
8 लाख 95 हजार सैनिक ढेर
रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध में अब तक रूस के 8 लाख 95 हजार सैनिक ढेर हो चुके हैं. अमेरिका से खुफिया जानकारी मिलने के बाद यूक्रेन हर घंटे रूस के 55 से ज्यादा सैनिकों को मार रहा है. यूक्रेन की सेना एक तरफ हवाई ड्रोन का इस्तेमाल कर रही है तो वहीं चलने वाले ड्रोन के जरिए भी रूसी सैनिकों को युद्ध के मैदान में दौड़ा रही है.
यूक्रेन ने अब तक रूस के एक सबमरीन और 28 बोट को मार गिराया है. 10 हजार से ज्यादा रूसी टैंक नष्ट हो चुके हैं. वहीं रूस ने ओब्लास्ट और खारसेन जैसे इलाकों पर कब्जा कर लिया है.
यूक्रेन का कहना है कि रूस ने उसके 20 प्रतिशत हिस्से को अपने कब्जे में ले लिया है, जिसे छोड़ने के बाद ही शांति की बात की जाएगी.
शांति के लिए शर्तों पर दांव
रूस और यूक्रेन जहां जंग के मैदान में मजबूती से आमने-सामने है. वहीं शांति के लिए शर्तों का दांव भी खेलना शुरू कर दिया है. रूस का कहना है कि जंग के बाद यूक्रेन न्यूट्रल स्थिति में रहे. वहीं नाटो की मेंबरशिप लेने की कवायद न करे.
दूसरी तरफ यूक्रेन का कहना है कि जो जमीन रूसी कब्जे में है, उसे पहले छोड़ा जाए. वहीं रूस अस्थाई के बदले स्थाई शांति समझौते पर हस्ताक्षर करे, जिससे आने वाले पीढ़ी प्रभावित न हो.
वहीं एक पेच शांति सैनिकों की तैनाती को लेकर भी फंसा है. रूस का कहना है कि यूक्रेन में कोई भी देश शांति सैनिकों की तैनाती न करे. ऐसा करना युद्ध की आग में फिर से घी डालने जैसा होगा.
अमेरिकी खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड भारत दौरे पर, पीएम मोदी से की मुलाकात
18 Mar, 2025 12:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिकी राष्ट्रीय खुफिया की निदेशक तुलसी गबार्ड भारत के दौरे पर हैं. उनकी यात्रा तीन दिन की है. गबार्ड का यहां पर शानदार स्वागत किया गया. सोमवार को उन्होंने पीएम मोदी से मुलाकात की. उन्होंने अपने इस दौरे पर एक इंटरव्यू में बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमले को लेकर टिप्पणी की, जिससे मुहम्मद युनूस की अंतरिम सरकार को मिर्ची लग गई. युनूस सरकार ने कहा कि तुलसी गबार्ड की टिप्पणियां किसी भी सबूत पर आधारित नहीं थीं.
तुलसी गबार्ड ने एक इंटरव्यू में बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न और हत्या का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मुद्दे पर बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के साथ हाल ही में बातचीत शुरू की है, लेकिन यह चिंता का विषय बना हुआ है.
बांग्लादेश ने क्या प्रतिक्रिया दी?
मुख्य सलाहकार के कार्यालय ने कहा, वे (गबार्ड की टिप्पणी) पूरे देश को एक व्यापक और अनुचित तरीके से चित्रित करते हैं. गबार्ड का बयान बांग्लादेश की छवि और प्रतिष्ठा को गुमराह करने वाला और नुकसान पहुंचाने वाला है. एक ऐसा देश जिसकी पारंपरिक इस्लाम प्रथा प्रसिद्ध रूप से समावेशी और शांतिपूर्ण रही है और जिसने उग्रवाद और आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में उल्लेखनीय प्रगति की है.
कार्यालय ने कहा कि बांग्लादेश को इस्लामवादी खिलाफत के विचार से बेबुनियाद तरीके से जोड़ने से अनगिनत बांग्लादेशियों और दुनिया भर में उनके दोस्तों और साझेदारों की कड़ी मेहनत को नुकसान पहुंचा है. आगे कहा गया कि बांग्लादेश किसी भी तरह के इस्लामवादी खिलाफत से जोड़ने के किसी भी प्रयास की कड़ी निंदा करता.
बांग्लादेश ने और क्या कहा?
यूनुस के कार्यालय ने कहा, नेताओं को अपने बयान विशेष रूप से सबसे संवेदनशील मुद्दों पर वास्तविक ज्ञान के साथ बोलना चाहिए. भय को बढ़ाने और यहां तक कि सांप्रदायिक तनाव को बढ़ाने से उन्हें बचना चाहिए.
तुलसी गबार्ड तीन दिवसीय यात्रा पर रविवार को नई दिल्ली पहुंचीं. गबार्ड ने इस्लामिक खिलाफत की विचारधारा के बारे में बात की और बताया कि कैसे वैश्विक स्तर पर आतंकवादी समूह ऐसे परिणाम की चाह रखते हैं. हालांकि, मुख्य सलाहकार के कार्यालय ने कहा कि दुनिया भर के कई देशों की तरह बांग्लादेश को भी चरमपंथ की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन इसने कानून , सामाजिक सुधारों और अन्य आतंकवाद विरोधी प्रयासों के माध्यम से इन मुद्दों को हल करने के लिए लगातार काम किया है.
इंडोनेशिया में आज सुबह 5.5 तीव्रता से आया भूकंप
18 Mar, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भूकंप के झटके आए दिन धरती को दहला रहे हैं। आज सुबह फिर भूकंप आया और धरती कांप गई। लोगों में दहशत फैल गई। रिपोर्ट के अनुसार, आज सुबह इंडोनेशिया में जोरदार भूकंप आया। नॉर्थ सुमात्रा में यह भूकंप सुबह करीब 3 बजकर 53 मिनट पर आया और इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.5 मापी गई। इस भूकंप का केंद्र धरती के नीचे 10 किलोमीटर की गहराई में मिला है। हालांकि भूकंप से किसी तरह के जान माल के नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन भूकंप के झटकों से इंडोनेशिया के लोग डरे हुए हैं और सरकार ने भी देशभर में अलर्ट जारी करके लोगों को सतर्क किया है।
आज ही के दिन टेक्सास के स्कूल में हुई चूक से 295 मौतें, इतिहास का काला दिन
18 Mar, 2025 08:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आज के दिन का इतिहास उस भयानक और दर्दनाक त्रासदी से जुड़ा है, जिसमें एक चूक के कारण 295 स्कूल स्टूडेंट्स और टीचर्स की जान चली गई थी। यह हादसा अमेरिका के टेक्सास शहर में हुआ था और उस त्रासदी को न्यू लंदन स्कूल विस्फोट के नाम से जाना जाता है। आज से 88 साल पहले 18 मार्च 1937 को टेक्सास शहर में बने न्यू लंदन स्कूल में प्राकृतिक गैस के रिसाव से इतना भीषण विस्फोट हुआ था कि स्कूल के चिथड़े उड़ गए थे। उस विस्फोट के बाद हादसास्थल पर जो मंजर देखने का मिला, उसने लोगों का दिल दहला दिया। इस हादसे को वर्ष 1900 के गैल्वेस्टन डिजास्टर और 1947 की टेक्सास सिटी ट्रेजेडी के बाद टेक्सास के इतिहास का तीसरा सबसे घातक हादसा कहा गया। आइए जानते है कि 18 मार्च 1937 के दिन क्या हुआ था?
इस तरह हुआ था हादसा
इतिहास में दर्ज रिकॉर्ड के अनुसार, 18 मार्च 1937 को शुक्रवार था और स्कूल हर रोज की तरह लगा था। ईस्ट टेक्सास में न्यू लंदन स्कूल नया-नया बना था। दोपहर के समय बच्चे छुट्टी होने का इंतज़ार कर रहे थे। स्कूल की मेन बिल्डिंग से दूर 100 फीट दूर बने ऑडिटोरियम में PTA मीटिंग चल रही थी और मां-बाप अपने बच्चों के साथ थे। छोटे-छोटे बच्चे ऑडिटोरियम में डांस परफॉर्मेंस दे रहे थे। एग्जाम भी चल रहे थे। वीकएंड पर होने वाले स्पोर्ट्स कंपीटिशन की तैयारियां ग्राउंड में चल रही थीं।
मेन बिल्डिंग में लगभग 500 छात्र और 40 शिक्षक थे। अचानक एक टीचर लेम्मी आर. बटलर ने एक इलेक्ट्रिक सैंडर ऑन कर दिया। इस दौरान सैंडर के स्विच से एक चिंगारी निकली, जिससे बेसमेंट में भरी गैस में आग भड़क गई थी। इससे भयानक विस्फोट हुआ, जिसने स्कूल की बिल्डिंग को ध्वस्त कर दिया। छत बिल्डिंग से ऊपर उठ गई और धड़ाम से नीचे आ गिरी। स्कूल की दीवारें गिरने लगीं। ईंट-कांच और लकड़ी के बीम हवा में उड़ने लगे। कुछ ही मिनटों में सबकुछ तहस नहस हो गया।
10 एकड़ (4 हेक्टेयर) में बना स्कूल मलबे और लाशों का ढेर बन गया। आसमान काले धुएं से भर गया। धमाके की आवाज सुनकर लोग दौड़े आए। पुलिस, डॉक्टरों, रेस्क्यू टीमों ने मिलकर बचाव अभियान चलाया। धमाके से कुछ सेकेंड पहले स्कूल बस ड्राइवर लोनी बार्बर प्राइमरी बच्चों को लेकर निकला था, जिनकी जान किस्मत से बच गई। बार्बर ने 2 घंटे का सफर करके बच्चों को उनके घर छोड़ा और फिर अपने 4 बच्चों की तलाश में स्कूल वापस आया। उनके बेटे आर्डेन की हादसे में जान गई थी। मृतकों में ज्यादातर बच्चे 5वीं से 11वीं क्लास के थे, क्योंकि छोटे छात्रों को एक अलग बिल्डिंग में पढ़ाया जाता था। मृतकों को न्यू लंदन के पास प्लीजेंट हिल कब्रिस्तान में दफनाया गया था।
जांच में पता चला हादसे का कारण
न्यू लंदन स्कूल के निर्माण में एक मिलियन डॉलर खर्च हुआ था और यह देश के सबसे अमीर स्कूलों में से एक था, जिसे कच्चे तेल के पैसे से बनाया गया था, लेकिन इतने बड़े स्कूल में हुए हादसे ने पूरे देश को हिला दिया था। सरकार के आदेश पर यूनाइटेड स्टेट्स ब्यूरो ऑफ माइंस ने हादसे की जांच की, जिसके विशेषज्ञों ने निष्कर्ष निकाला कि स्कूल में गैस लाइन के कनेक्शन में कमियां थी। गलत तरीके से कनेक्शन के कारण ही स्कूल में गैस लीक हो गई थी, क्योंकि प्राकृतिक गैस अदृश्य और गंधहीन होती है, इसलिए रिसाव का पता नहीं चल पाया। माना जाता है कि सैंडर के स्विच से निकली चिंगारी ने ही आग भड़काई थी।
हरियाणा में महिलाओं को हर महीने 2100 रुपये देने की घोषणा, 5000 करोड़ रुपये का फंड प्रावधान
17 Mar, 2025 06:16 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़: हरियाणा में महिलाओं को हर महीने 2100 रुपये मिलेंगे. CM नायब सिंह सैनी ने बजट में ऐलान किया. इसके लिए बजट में 5,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. सीएम में बजट पेश करने के दौरान कहा कि प्रदेश में महिलाओं को प्रति माह ₹2100/- की आर्थिक सहायता देने की ‘लाडो लक्ष्मी योजना’ शुरू होगी. सीएम सैनी ने सोमवार को राज्य विधानसभा में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 2.05 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया. सैनी ने कहा कि उन्हें राज्य के बजट के संबंध में विभिन्न वर्गों से लगभग 11,000 सुझाव मिले हैं.
सरकार ने अभी लाडो लक्ष्मी योजना का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी नहीं किया है. योजना का लाभ उठाने के लिए हरियाणा सरकार के अंत्योदय सरल पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा. योजना का लाभ उठाने के लिए आपको हरियाणा की स्थायी निवासी होना चाहिए. परिवार की सालाना आय 1,80,000 रुपये से अधिक न हो. अगर आपने अभी तक बीपीएल कार्ड नहीं बनवाया है तो लाडो लक्ष्मी योजना के लिए आवेदन नहीं कर पाएंगे. बीपीएल में रजिस्ट्रेशन कराते समय अंत्योदय सरल पोर्टल की यूजर आईडी और पासवर्ड से लॉगिन करना होगा. योजना का लाभ उठाने के लिए परिवार पहचान पत्र होना जरूरी है.
हरियाणा में बनेगा ‘भविष्य विभाग’
हरियाणा में ‘भविष्य विभाग’ नाम से एक नया विभाग बनाया जाएगा. सैनी ने कहा कि बजट में 2025-26 के लिए 2,05,017.29 करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान जताया गया है. उन्होंने कहा कि पिछले 10 साल में हरियाणा सरकार ने ई-शासन पर बहुत जोर दिया है. उनकी सरकार ने चुनाव घोषणा पत्र के 217 वादों में 19 को पूरा किया है. सीएम सैनी ने कहा, इस दिशा में मेरा प्रस्ताव हरियाणा एआई मिशन स्थापित करने का है. विश्व बैंक ने 474 करोड़ रुपये की सहायता देने का भरोसा दिया है.
BLA के हमलों से पाक सेना में मचा हड़कंप, 2500 सैनिकों ने छोड़ी नौकरी
17 Mar, 2025 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पाकिस्तान के बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में हाल ही में सेना और सुरक्षाबलों हमले बढ़ गए हैं. इन हमलों में बड़ी संख्या में सेना के जवानों की मौत भी हुई. इस बीच सामने आया है कि पाकिस्तान सेना के जवान बड़ी संख्या में नौकरी छोड़कर देश से भाग रहे हैं. रिपोर्ट ने रविवार को दावा कि एक हफ्ते में पाकिस्तान के करीब 2500 जवानों ने सेना की नौकरी छोड़ दी.
सूत्रों के हवाले से बताया कि पाकिस्तानी सेना पर लगातार हमले, बिगड़ते आर्थिक हालात की वजह से सेना के जवान नौकरी छोड़ रहे हैं. जिन फौजियों ने नौकरी छोड़ी, वो देश के बाहर मिडिल ईस्ट के देशों सऊदी अरब, कतर, कुवैत और यूएई में काम करने चले गए हैं. अपनी जान को दांव पर लगाने से बेहतर वो विदेश जाकर काम करना पसंद कर रहे हैं.
BLA के हमलों से पाक सैनिकों का मनोबल टूटा: रिपोर्ट
इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान की सेना के भीतर हालात काफी ज्यादा खराब हैं. ऐसे में सैनिक लगातार हमलों और असुरक्षा के बीच लड़ने को तैयार नहीं हो रहे हैं. पाकिस्तान में सुरक्षा की स्थिति बिगड़ने से उनका मनोबल टूट रहा है. बड़ी संख्या में सैनिकों का पलायन सेना की ताकत पर सवाल उठा रहा है. पाक सेना से जवानों का पलायन ऐसे समय में हो रहा है, जब एक ओर देश के अंदर सेना का विरोध का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा के मुद्दे पर पाकिस्तान गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है. अगर इसी तरह पाकिस्तानी फौजी सेना को छोड़ते रहे तो भविष्य में पाक सेना के वर्कफोर्स पर बड़ा असर पड़ सकता है.
पहले ट्रेन हाईजैक और फिर नौशिकी में फिदायीन हमला
पाकिस्तान के बलूचिस्तान में हाल ही में जाफर एक्सप्रेस को बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने हाईजैक कर लिया था. बीएलए के लड़ाकों ने ट्रेन में मौजूद सेना के जवानों को चुन-चुनकर मारा. बीएलए ने सरकार को अल्टीमेटम देते हुए कहा था कि 48 घंटे के अंदर बलूच नेताओं को रिहा किया जाए और बलूचिस्तान से सरकार के नुमाइंदों को हटाया जाए. हालांकि पाकिस्तान सेना ने बीएलए के खिलाफ ऑपरेशन चलाकर सभी बंधकों को छुड़ा लिया. पाक सेना ने दावा किया इस घटना को अंजाम देने वाले सभी 33 लड़ाके मारे गए. इस घटना के बाद बीएलए ने दावा किया कि नौशिकी में सेना के काफिले पर आत्मघाती हमला किया, जिसमें 90 पाक सैनिक मारे गए. इन दोनों ही हमलों में बड़ी संख्या में पाक सैनिक जवान मारे गए. इसीलिए वहां के सैनिक अपनी जान को खतरे में नहीं डालना चाहते और वो सेना को छोड़कर दूसरे देशों में काम करने जा रहे हैं. हालांकि पाकिस्तान सेना या वहां की मीडिया ने इसको लेकर कोई रिपोर्ट जारी नहीं की है.
यूक्रेन के डोनेटस्क क्षेत्र में बढ़ते दबाव के बीच जेलेंस्की का अहम फैसला
17 Mar, 2025 12:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने देश की सैन्य रणनीति को मज़बूत करने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है. उन्होंने अंद्रीय हनातोव को यूक्रेन की सेना के जनरल स्टाफ का नया प्रमुख नियुक्त किया है. यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब यूक्रेन रूस के कुर्स्क क्षेत्र में लड़ाई लड़ रहा है और पूर्वी डोनेटस्क क्षेत्र में लगातार दबाव का सामना कर रहा है.
हनातोव ने अनातोली बारहिलेविच की जगह ली है, जो फरवरी 2024 से इस पद पर थे. यूक्रेन के जनरल स्टाफ ने रविवार को अपने टेलीग्राम चैनल पर इस बदलाव की घोषणा की.
फैसले के पीछे की वजह क्या है?
यूक्रेन के रक्षा मंत्री रुस्तम उमेरोव ने कहा है कि हम अपनी सेना को लगातार आधुनिक और प्रभावी बना रहे हैं. इस बदलाव का मकसद यूक्रेनी सेना की युद्धक क्षमता को और बढ़ाना है.बारहिलेविच को अब रक्षा मंत्रालय में जनरल इंस्पेक्टर की नई जिम्मेदारी दी गई है. रक्षा मंत्री उमेरोव ने कहा कि बारहिलेविच टीम का हिस्सा बने रहेंगे और सेना में अनुशासन और सैन्य मानकों को मज़बूत करने में अहम भूमिका निभाएंगे. इस फेरबदल के बावजूद, ओलेक्ज़ांडर सिरस्की यूक्रेन की सेना के कमांडर-इन-चीफ के पद पर बने रहेंगे.
युद्ध में मिल रही है यूक्रेन को चुनौती
यूक्रेन ने पिछले साल अगस्त में रूस को चौंकाते हुए सीमा पार हमला किया था और कुर्स्क क्षेत्र में लगभग 1300 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर कब्ज़ा कर लिया था. मगर अब युद्ध की स्थिति बदल रही है. और यूक्रेन की सेना पीछे हटने को मजबूर हो रही है. रूस ने शुक्रवार को दावा किया कि उसने कुर्स्क क्षेत्र के सबसे बड़े शहर सूज़ा पर नियंत्रण कर लिया है, जो पहले यूक्रेन के कब्जे में था. इसके अलावा, डोनेट्स्क क्षेत्र में भी यूक्रेनी सेना पर भारी दबाव है. रूसी सेना वहां लगातार आगे बढ़ रही है, जिससे यूक्रेन की स्थिति और चुनौतीपूर्ण होती जा रही है.
तो क्या बदल जाएगी युद्ध की रणनीति
यूक्रेन में सैन्य नेतृत्व में यह बड़ा बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब युद्धविराम की संभावनाओं को लेकर चर्चाएं तेज़ हो रही हैं. यूक्रेन को अपने क्षेत्रीय नियंत्रण को बरकरार रखने और रूस के खिलाफ अपनी स्थिति को मज़बूत करने के लिए नई रणनीतियों की जरूरत है. ज़ेलेंस्की ने 2022 में रूस के हमले के बाद से सरकार और सेना में कई बड़े बदलाव किए हैं.
चीन और इथियोपिया में भूकंप, लोगों में दहशत, जानिए भूकंप की तीव्रता और असर
17 Mar, 2025 12:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भूकंप के झटकों से धरती आज फिर कांप गई। आज अलसुबह भारत के पड़ोसी देश चीन में भूकंप आया। इसके अलावा इथियोपिया देश में भी देररात भूकंप आया और उसके बाद लगातार झटके लगे रहे हैं, जिनकी तीव्रता भी रिक्टर स्केल पर अलग-अलग है। चीन में आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.1 मापी गई। इस भूकंप का केंद्र चीन के Qinghai शहर के पास धरती के नीचे 10 किलोमीटर की गहराई में मिला।
इथियोपिया में सबसे पहले भूकंप देररात करीब 12 बजकर 23 मिनट पर आया, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.5 मापी गई। इसके बाद 4.3 और 5.1 की तीव्रता वाले झटके भी लगे। लगातार लोगों को झटकों से परेशान होना पड़ रहा है। हालांकि दोनों देशों में भूकंप से अभी तक किसी तरह के जान माल के नुकसान की खबर नहीं आई है, लेकिन लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी ने दोनों देशों में आए भूकंप की पुष्टि की।
अमेरिका में तूफान और आंधी से भारी तबाही; 40 की मौत, घर और स्कूल हुए नष्ट
17 Mar, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दक्षिण अमेरिका भयंकर तूफान की चपेट में है. इस तूफान की वजह से दक्षिण-पूर्व के ज्यादातर राज्य प्रभावित हैं. अब तक कुल 40 लोगों की मौत हो गई. लोगों के घर मलबे में बदल गए हैं. दूर-दूर फैले पेड़ पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं. लोगों की कार तबाह हो गई हैं.
अमेरिका में आया प्रकृति का ये सैलाब इतना खतरनाक है कि लोग अभी भी इसके दृश्यों से सहमे हुए हैं. मिसौरी में शुक्रवार को आए इस चक्रवाती तूफान का सबसे ज्यादा प्रभाव देखने को मिला. यहां पर अब तक कुल 12 लोगों की मौत हो गई है. मिसौरी में गवर्नर माइक ने चिंताजनक स्थिति में कहा कि हमारे राज्य में तबाही का स्तर चौंका देने वाला है.
टेक्सास और कंसास में भी धूल भरी आंधी का कहर रहा. ये हवाएं इतनी तेज थीं कि वहां पर खड़ी गाड़ियां आपस में टकरा गईं, जिसकी वजह से उस समय ट्रैवल कर रहे कुछ लोगों की मौत हो गई और अन्य लोग घायल हो गए.
इस हवा की वजह से ओक्लाहोमा के जंगलों में आग भड़क गई. ये ऐसा क्षेत्र है, जहां 100 मिलियन से ज्यादा लोगों के घर हैं. इस तूफान की वजह से अर्कांसस, अलबामा और मिसिसिपी में भी मौत की खबरें सामने आई हैं.
ट्रंप ने कहा, प्रभावित लोगों के लिए प्रार्थना करें
अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि हम दक्षिण और मध्यपश्चिम के कई राज्यों में आए भयंकर तूफान पर सक्रिय रूप से नज़र रख रहे हैं. यहां पर बहुत से लोगों की जान चली गई है. नेशनल गार्ड को अर्कांसस में तैनात किया गया है.
मेरा प्रशासन राज्य और स्थानीय अधिकारियों की सहायता के लिए तैयार है. ये सभी अपने समुदायों को इस मुश्किल से बचाने में मदद कर रहे हैं. मेलानिया और मेरे साथ मिलकर इन भयानक तूफानों से प्रभावित लोगों के लिए प्रार्थना करें.
बाढ़ को लेकर जारी की गई चेतावनी
दक्षिण अमेरिका के ज्यादातर हिस्सों में अभी भी मौसम में सुधार आने की संभावना नहीं है. टेक्सास, लुइसियाना, अलबामा, अर्कांसस, टेनेसी, मिसिसिपी, जॉर्जिया, केंटकी और उत्तरी कैरोलिना ज्यादातर क्षेत्रों में बाढ़ को लेकर चेतावनी जारी की गई है.
खराब मौसम और बड़े स्तर पर हुई तबाही की वजह से यहां पर बिजली के खंभे उखड़ गए हैं. लोगों को आधारभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं. बहुत से लोगों को पूरे-पूरे घर तबाह हो गए हैं. स्कूलों की इमारतें गिर गई हैं. लोगों का पूरा जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है.
रिपोर्ट के मुताबिक, यहां रविवार को 320,000 से ज्यादा लोगों को बिजली के बिना अपने काम करने पड़े. अर्कांसस, जॉर्जिया और ओक्लाहोमा में आपातकाल की घोषणा की गई है.
सुनीता विलियम्स की वापसी का एलान, NASA करेगा लाइव कवरेज
17 Mar, 2025 10:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अंतरिक्ष में फंसे सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर को वापस लाने के तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। पिछले 9 महीनों से अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन में फंसे दोनों अंतरिक्ष यात्रियों को 19 मार्च को सफलतापूर्वक धरती पर वापस लाया जाएगा। नासा ने दोनों के वापसी को लेकर बड़ा अपडेट दिया है।
कहां उतरेगा SpaceX का कैप्सूल?
नासा ने रविवार शाम को एक बयान में कहा कि दोनों अंतरिक्ष यात्री 18 मार्च (मंगलवार) को धरती पर वापसी करेंगे। नासा ने फ्लोरिडा तट दोनों यात्रियों के उतरने की उम्मीद जताई जा रही है।
वहीं, नासा वापसी की लाइव कवरेज भी टेलीकास्ट करने जा रहा है। लाइव कवरेज की शुरुआत ड्रैगन अंतरिक्ष यान के हैच बंद करने की तैयारी से शुरू होगी। नासा के अंतरिक्ष यात्री निक हेग और रोस्कोस्मोस (रूस) के अंतरिक्ष यात्री अलेक्सांद्र गोरबुनोव भी ड्रैगन कैप्सूल से वापस आएंगे।
बता दें कि शुक्रवार (14 मार्च) को स्पेसएक्स ने Crew-10 मिशन लॉन्च किया था। फॉल्कन-9 रॉकेट से Crew Dragaon कैप्शूल को लॉन्च किया गया था। NASA के कमर्शियल क्रू प्रोग्राम के तहत ISS के लिए यह ग्यारहवीं क्रू फ्लाइट है।
गौरतलब है कि सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर को मार्च के अंत तक धरती पर वापस आना था, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एलन मस्क से उन्हें जल्दी वापस लाने का आग्रह करने के बाद इस मिशन में तेजी लाई गई।
सुनीता विलियम्स और बुच विल्मर पिछले साल 5 जून को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन गए थे। उन्हें महज एक हफ्ते के बाद धरती पर वापस लौटना था, लेकिन बोइंग स्टारलाइनर में गड़बड़ी की वजह से दोनों वहां फंस गए। 9 महीने से ज्यादा समय से दोनों वहां फंसे हैं।
स्पेस स्टेशन पर सुनीता विलियम्स ने क्या किया?
स्पेस में रहते हुए सुनीता विलियम्स ने कई अहम रिसर्च एक्सपेरिमेंट किए। उन्होंने 900 घंटों से ज्यादा समय रिसर्च में बिताए। अपने मिशन के दौरान, उन्होंने बोइंग स्टारलाइनर को उड़ाने का भी काम किया, जिसे उन्होंने खुद बनाने में मदद की थी और जो नासा को 4.2 अरब डॉलर में पड़ा।
अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन में उन्होंने कई चीजों को बदला, सफाई की और बहुत सा कचरा जमीन पर वापस भेजने में मदद की।
विदेशी शत्रु अधिनियम लागू करने के ट्रंप के आदेश पर कोर्ट ने दी अस्थायी रोक
17 Mar, 2025 09:20 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने निर्वासन में तेजी लाने के लिए 1798 के विदेशी शत्रु अधिनियम को लागू करते हुए कहा कि अमेरिका एक आपराधिक संगठन से आक्रमण का सामना कर रहा है, जो अपहरण, जबरन वसूली, संगठित अपराध और अनुबंध हत्याओं से जुड़ा है।
यह कदम वेनेजुएला के गिरोह ट्रेन डे अरागुआ के कथित सदस्यों के निर्वासन में तेजी लाने के लिए उठाया गया। हालांकि, आदेश के कुछ समय बाद ही एक संघीय न्यायाधीश ने युद्धकालीन कानून के इस्तेमाल के तहत होने वाले किसी भी निर्वासन को 14 दिनों के लिए अस्थायी रूप से रोक दिया है।
अधिनियम में राष्ट्रपति की घोषणा के लिए आधार नहीं
न्यायाधीश जेम्स बोसबर्ग ने कहा कि अधिनियम राष्ट्रपति की घोषणा के लिए आधार प्रदान नहीं करता, क्योंकि आक्रमण शब्द वास्तव में किसी भी राष्ट्र द्वारा किए गए शत्रुतापूर्ण कृत्यों से संबंधित है। अधिनियम को लागू करते हुए ट्रंप ने कहा था कि गिरोह के सदस्य राष्ट्र को अस्थिर करने के लिए शत्रुतापूर्ण कार्रवाई कर रहे हैं।
इस अधिनियम का उपयोग केवल युद्ध के समय किया जाता है। यह राष्ट्रपति को खतरे के रूप में चिह्नित प्रवासियों के उचित प्रक्रिया अधिकारों को दरकिनार करने और तेजी से निर्वासित करने की अनुमति देता है।
वेनेजुएला सरकार ने भी की निंदा
अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन के वकील ली गेलरेंट ने कहा कि हम बहुत खतरनाक स्थिति में हैं, जब प्रशासन युद्धकालीन अधिकार का उपयोग आव्रजन उद्देश्यों या किसी अन्य गैर-सैन्य उद्देश्य के लिए करने की कोशिश करने जा रहा है, जब हम शांति में हैं।
वहीं, वेनेजुएला सरकार ने रविवार को अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के गिरोह ट्रेन डी अरागुआ के 200 से अधिक कथित सदस्यों को अल साल्वाडोर निर्वासित करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले युद्धकालीन कानून के क्रियान्वयन की कड़ी निंदा की है।
इस बीच, अमेरिकी-अरब भेदभाव विरोधी समिति ने मुकदमा दायर कर ट्रंप प्रशासन के उस कदम को चुनौती दी है, जिसमें फलस्तीनी अधिकारों के लिए विरोध करने या समर्थन व्यक्त करने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों और विद्वानों को निर्वासित करने की बात कही गई है। यह कोलंबिया विश्वविद्यालय के छात्र महमूद खलील की हिरासत के बाद आया है।
हिजाब को सख्ती से लागू करने के लिए ड्रोन, सर्विलांस तकनीक, फेशियल रिकग्निशन का इस्तेमाल कर रहा ईरान
16 Mar, 2025 11:21 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान । हिजाब को लेकर सख्ती के चलते ईरान की दुनियाभर में फजीहत पहले भी हो चुकी है। इसके बावजूद वहां की इस्लामिक सरकार हिजाब को सख्ती से लागू करने के लिए जुटी हुई है। इसी कड़ी में ईरानी सरकार हिजाब को सख्ती से लागू करने के लिए ड्रोन, सर्विलांस तकनीक, फेशियल रिकग्निशन और मोबाइल एप का इस्तेमाल कर रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि महिलाओं को सजा देने और उनपर सख्त ड्रेस कोड लागू करने के लिए डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है। रिपोर्ट में सामने आया है कि ईरान की सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल महिलाओं और लड़कियों पर नजर रखने के लिए कर रही है।
इसके अलावा ईरान की सरकार ने तेहरान और आसपास के इलाकों में हिजाब को सख्ती से लागू करने के लिए ड्रोन तैनात किए हैं। पहले यह सर्विलांस टैक्सी, एंबुलेंस और सरकारी वाहनों में यात्रा करने के दौरान था लेकिन अब निजी वाहनों और सार्वजनिक स्थानों को भी इसकी जद में लाया गया है। एआई तकनीक से लैस कैमरे विश्वविद्यालयों में भी लगवा दिए गए हैं।
ईरान ने हिजाब को सख्ती से लागू करने के लिए कानून बना दिया था। इसके अलावा कानून के तहत ईरान के सुरक्षाबलों को अधिकार मिल जाता है कि वे इसे सख्ती से लागू करवाएँ। इस्लामिक पीनल कोड के आर्टिकल 286 में यहां तक प्रावधान है कि करप्शन ऑफ अर्थ की दोषी महिलाओं को मौत की सजा दी जा सकती है।
जी-7 देशों ने वन चाइना नीति को दरकिनार किया, गुस्से से लाल हुआ ड्रैगन
16 Mar, 2025 10:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ओटावा । जी-7 देशों ने अपने हालिया बयान में वन चाइना नीति के संदर्भ को हटाया है, इससे चीन नाराज हो गया है। चीन ने जी-7 के कदम को अपनी संप्रभुता के लिए खतरा करार देकर अहंकारी और दोहरे मापदंड वाला बताया है। इस बदलाव के चलते दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया है।
जी-7 के विदेश मंत्रियों द्वारा जारी बयान में ताइवान को लेकर चीन की जबरदस्ती की निंदा की गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, जी-7 ने अपने बयान से वन चाइना नीति का उल्लेख हटा दिया, जो दशकों से ताइवान मुद्दे पर पश्चिमी देशों की नीति का आधार रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव पश्चिमी देशों की चीन के प्रति कड़े रुख को दिखाता है। जी-7 देशों ने चीन के बढ़ते परमाणु जखीरे को लेकर भी चिंता जाहिर की। हालांकि, इस बार के बयान में शिनजियांग, तिब्बत और हांगकांग में मानवाधिकारों के उल्लंघन का जिक्र नहीं है। पिछले बयानों में चीन के साथ रचनात्मक और स्थिर संबंधों की इच्छा जाहिर की गई थी, लेकिन इस बार यह संदर्भ भी हटा दिया गया।
इस पर चीन ने जी-7 के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कनाडा स्थित चीनी दूतावास ने तथ्यों की अनदेखी करने और चीन की संप्रभुता को ठेस पहुंचाने वाला बताया। चीन का कहना है कि ताइवान मुद्दे पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए वन चाइना सिद्धांत का पालन होना चाहिए।
जी-7 ने पूर्वी और दक्षिण चीन सागर में चीन के आक्रामक रवैये पर चिंता जाहिर की है। खासतौर पर, फिलीपींस और वियतनाम के खिलाफ चीन की खतरनाक सैन्य कार्रवाइयों और जल तोपों के इस्तेमाल की निंदा की गई।
अमेरिका और जापान का प्रभाव बढ़ा
ताइवान पर जबरदस्ती शब्द के इस्तेमाल को अमेरिका और जापान के बढ़ते प्रभाव के रुप में देखा जा रहा है। हाल ही में जापानी प्रधानमंत्री और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच हुई बैठक में इसी शब्दावली का उपयोग किया गया था। जी-7 देशों का यह रुख चीन के साथ उनके संबंधों को और तनावपूर्ण बना सकता है। शी जिनपिंग और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच संभावित बैठक की चर्चा चल रही है, जिससे आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और स्पष्टता आ सकती है।
22 फर्जी कर्मचारी बनाकर एचआर मैंनेजर ने लगाया कंपनी को 16 करोड़ का चूना
16 Mar, 2025 09:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग । किसी भी कंपनी के लिए उसका ह्यूमन रिसोर्स मैनेजर सबसे अहम होता है। कंपनी में एचआर मैंनेजर वहां होता है जो देखता है कि कंपनी को किस तरीके के और कितनी संख्या में लोगों की जरूरत है, लेकिन अगर ह्यूमन रिसोर्स डेस्क का मैनेजर ही फर्जीवाड़ा करने लगे तो.. ऐसा ही एक मामला चीन में सामने आया है। यहां एक कंपनी के एचआर मैनेजर ने 8 सालों तक 22 फर्जी कर्मचारियों की बिल्कुल सटीक अटेडेंस दर्ज कर उन्हें बराबर सैलरी देता रहा। इस तरीके से एचआर मैंनेजर ने कंपनी को करीब 16 मिलियन युआन यानी 18 करोड़ रुपये की घपलेबाजी कर दी।
रिपोर्ट के मुताबिक यांग नाम का एक व्यक्ति शंघाई में लेबर सर्विस कंपनी में मैनेजर के रूप में काम करता था। यहां पर आरोपी यांग का काम एक फर्म को दिए गए श्रमिकों के बदले में उनकी वेतन का प्रबंधन करने का था। आठ साल पहले यांग ने जब समझा की कर्मचारियों की नियुक्ति और वेतन देने तक में उसके अलावा कोई और व्यक्ति नहीं है, तब यांग ने इस कमी का फायदा उठने की सोची। सबसे पहले उसने सन नाम के एक फर्जी कर्मचारी को बनाया और एक महीने के बाद उसके नाम पर वेतन के भुगतान के लिए आवेदन कर दिया। यांग ने यहां पर पैसे एक फर्जी अकाउंट में ट्रांसफर करवा लिए।
यांग के कारनामे का पता किसी को भी नहीं चला और यह सब शांति से चलता रहा। 2014 में अपने कारनामे से खुश होकर यांग ने धीरे-धीरे और फर्जी कर्मचारी बनाना शुरू कर दिया। और 2022 तक आते-आते यांग करीब 22 कर्मचारियों को बना चुका था। 2022 में उसका यह भांडा फूट गया। इन कर्मचारियों की वेतन कितनी थी इसके बारे में कोई भी जानकारी सामने नहीं आई है।
कैसे फूटा भांडा
यांग 8 सालों तक इन कर्मचारियों के नाम की सैलरी उठाता रहा। लेकिन 2022 में फर्म के वित्त विभाग ने यांग की इस गड़बड़ी को नोटिस किया। उन्होंने देखा की सन नाम का कर्मचारी पिछले 8 सालों से लगातार काम पर आ रहा है और अपनी सैलरी भी ले रहा है लेकिन सन को आजतक किसी ने देखा नहीं है कंपनी में कोई भी उसका दोस्त या पहचानने वाला नहीं है। वित्त विभाग ने इसकी जानकारी कंपनी के अधिकारियों को दी।
ट्रेन हाईजैक पर सेना और सरकार के दावों पर उठे सवाल, सियासतदान पूछे रहे....80 लोग कहां चले गए
16 Mar, 2025 08:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद ।पाकिस्तानी सेना और शाहबाज सरकार बलूचिस्तान में जाफर एक्सप्रेस ट्रेन पर हमले के मामले में घिरती दिख रही है। पाक सेना ने कहा है कि सफल ऑपरेशन चलाकर 36 घंटे से भी कम समय में सभी बंधकों को छुड़ाया गया है। इस ऑपरेशन के लिए शाहबाज सरकार ने भी अपनी सेना की जमकर तारीफ की है। हालांकि इसमें मरने वालों की संख्या पर कई सवाल उठ रहे हैं। ट्रेन हाईजैक करने वाले गुट बीएलए का कहना है कि 214 लोग मरे हैं। वहीं पाक सेना का कहना है कि इस हादसे में 26 लोगों की जान गई। लेकिन पाक सेना के बयान में कई झोल हैं, इसकारण सेना के दावों पर कई सवाल उठ रहे हैं। पाकिस्तान के पत्रकार और राजनीतिक टिप्पणीकार जो सवाल पूछ रहे हैं, उनका कोई जवाब फिलहाल पाक सेना के पास नहीं है।
भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त रहे अब्दुल बासित ने ट्रेन हाईजैक मुद्दे पर कहा है कि शाहबाज सरकार के बयान चीजों को साफ नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा, फौज ने बताया है कि ऑपरेशन में 339 लोग छुड़ाए गए हैं और 21 नागरिक इस दौरान मारे गए। जबकि पीएम शहबाज शरीफ ने खुद कहा है कि ट्रेन में 440 लोग सवार थे। अब सवाल ये है कि 80 लोग कहां चले गए। आखिर सरकार और सेना इस बात को साफ करे कि कितने लोग ट्रेन में थे, कितने लोग मारे गए और कितने बचाए गए। अगर 70-80 का फर्क बयानों में आ रहा है तब फिर कैसे सवाल नहीं उठेंगे। हमें संजीदगी दिखाने की जरूरत है, ये सीरियस मामला है।
दरअसल पाकिस्तान की सेना ने बताया कि बलूचिस्तान प्रांत में बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के लड़ाकों ने जफर एक्सप्रेस ट्रेन को रोकते हुए यात्रियों को बंधक बना लिया था। बोलन जिले के एक दुर्गम पहाड़ी रास्ते में 440 से यात्रियों को बंधक बनाया था। पाक सुरक्षाबलों ने करीब 36 घंटे तक चले संघर्ष के बाद ट्रेन और यात्रियों को छुड़ाया है। पाक सेना का दावा है कि ऑपरेशन में 33 हमलावर मार गिराए। वहीं 21 यात्रियों की जान गई और चार सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई।
पाकिस्तानी सेना के दावे के उलट बलूच लिबरेशन आर्मी ने 214 बंधकों को मारने का दावा किया है। शुक्रवार को जारी बयान में बीएलए ने बताया कि उसके लड़ाकों ने 214 को मारा है, जो सभी पाकिस्तानी सेना के जवान हैं। इतना ही नहीं ट्रेन से निकले यात्रियों ने भी कैमरे पर कहा है कि वह खुद निकलकर आए हैं ना कि उन्हें किसी ने छुड़ाया है।
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