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अमेरिका ने किया खुलासा: उत्तर कोरियाई सैनिक रूस के लिए लड़ रहे हैं
21 Mar, 2025 11:24 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रूस-यूक्रेन युद्ध को तीन साल हो चुके हैं, लेकिन यह जंग खत्म होने का नाम नहीं ले रही. अस्थाई सीजफायर पर सहमति अभी हाल ही मे बनी थी, मगर अब इसमें एक नया मोड़ आ गया है.
अमेरिका ने पहली बार खुले तौर पर स्वीकार किया है कि उत्तर कोरियाई सैनिक रूस के लिए लड़ रहे हैं. वॉशिंगटन का कहना है कि इन सैनिकों की मौजूदगी ने युद्ध को और लंबा कर दिया है और इसे पहले से ज्यादा खतरनाक बना दिया है.
अमेरिका ने पुतिन से की ये डिमांड
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने बुधवार को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि रूस को उत्तर कोरियाई सैनिकों की तैनाती से फायदा हुआ है, जिससे यह संघर्ष और ज्यादा भयावह हो गया है. यह बयान ऐसे समय में आया है जब रूस के उप विदेश मंत्री आंद्रेई रुडेंको हाल ही में प्योंगयांग का दौरा कर लौटे हैं. इस दौरान दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग पर चर्चा हुई थी. जब अमेरिकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता टैमी ब्रूस से इस बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि उत्तर कोरिया के सैनिक इस जंग को और लंबा कर रहे हैं. अमेरिका ने रूस से मांग की है कि वह प्योंगयांग की सैन्य मदद लेना बंद करे.
कैसे लड़ते हैं उत्तर कोरियाई सैनिक?
उत्तर कोरियाई सैनिकों की लड़ाई का तरीका बेहद खतरनाक और आत्मघाती बताया जा रहा है. वे किसी भी कीमत पर पकड़े नहीं जाना चाहते, इसलिए कई सैनिक खुद के ही नीचे ग्रेनेड फोड़कर आत्महत्या कर लेते हैं. वे हमलों को अंजाम देने के लिए अपने साथी सैनिकों का भी बलिदान करने से पीछे नहीं हटते.
इसके अलावा, तेजी से हमले करने के लिए वे अपने बॉडी आर्मर और हेलमेट तक उतारकर लड़ते हैं. इससे उनकी क्रूरता का अंदाजा लगाया जा सकता है. पश्चिमी खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक लगभग 12,000 उत्तर कोरियाई सैनिक रूस भेजे जा चुके हैं. इनमें से करीब 4,000 या तो मारे गए हैं या गंभीर रूप से घायल हुए हैं.
कैसे हुई रूस और उत्तर कोरिया की नजदीकी?
बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2023 के आखिर में रूस और उत्तर कोरिया के बीच सैन्य सहयोग की शुरुआत हुई थी. यह वही उत्तर कोरिया है, जिस पर रूस ने खुद ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रतिबंध लगाए थे. लेकिन जब यूक्रेन के साथ जंग में रूस को गोला-बारूद और मिसाइलों की कमी महसूस हुई, तो उसने उत्तर कोरिया से हथियार खरीदने शुरू कर दिए. बदले में रूस ने उत्तर कोरिया को तेल देना शुरू किया, जो कि संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों का उल्लंघन था.
2024 में पुतिन ने प्योंगयांग जाकर किम जोंग-उन से मुलाकात की. इससे पहले पुतिन 2000 में उत्तर कोरिया गए थे, तब वहां किम जोंग-उन के पिता किम जोंग-इल सत्ता में थे. इस दौरान दोनों देशों ने एक रणनीतिक साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसमें लिखा गया कि अगर किसी देश पर युद्ध की स्थिति आती है, तो वे एक-दूसरे की मदद करेंगे. इसके कुछ महीनों बाद ही उत्तर कोरियाई सैनिक रूस के लिए लड़ते दिखे. शुरुआत में रूस और उत्तर कोरिया ने इस तथ्य को नकार दिया कि उत्तर कोरियाई सैनिक रूस-यूक्रेन युद्ध में शामिल हैं. लेकिन अक्टूबर 2024 में पुतिन ने खुद स्वीकार किया कि अब उन्हें उत्तर कोरिया से सिर्फ गोला-बारूद ही नहीं बल्कि सैनिक भी मिल रहे हैं.
अमेरिका का अंडा संकट: राष्ट्रपति ट्रंप के सख्त टैरिफ नीतियों का असर
21 Mar, 2025 11:10 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने सख्त टैरिफ नीतियों से भारत समेत पूरी दुनिया को हिला चुके है. आज वही अमेरिका खुद अंडों की किल्लत से जूझ रहा है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जब वैश्विक बाज़ार में अपनी शर्तें थोपनी शुरू की थीं, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि एक दिन यही सुपरपावर अपनी बुनियादी ज़रूरतों के लिए छोटे देशों के दरवाजे खटखटाएगा. लेकिन यही हकीकत है. अमेरिका में अंडों का संकट इतना गंभीर हो चुका है कि अब उसे यूरोप के छोटे-छोटे देशों से मदद मांगनी पड़ रही है.
बर्ड फ्लू के कारण लाखों मुर्गियों की मौत हो चुकी है, जिससे अंडों की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है. हालत यह है कि कभी खाने की प्लेटों में भरपूर मौजूद रहने वाला अंडा अब अमेरिका में लग्जरी आइटम बन चुका है. संकट इतना गहरा गया है कि अमेरिका को अब लिथुआनिया जैसे देशों से अंडे मंगवाने की नौबत आ गई है.
कैसे आई अंडों की किल्लत?
पिछले दो महीनों में अमेरिका को घरेलू अंडा संकट से निपटने के लिए कई देशों की ओर रुख करना पड़ा है. इसका कारण है बर्ड फ्लू का गंभीर प्रकोप, जिसने लाखों मुर्गियों की जान ले ली. नतीजा? अंडों की कीमतें आसमान छूने लगीं. एक समय जो अंडा हर अमेरिकी की प्लेट में आसानी से उपलब्ध था, वह अब लग्जरी आइटम बन चुका है.
US से नहीं निकाला जाएगा भारतीय छात्र बदर, सरकार के आड़े आई अदालत
अमेरिका ने पहले फ़िनलैंड, डेनमार्क, स्वीडन और नीदरलैंड से संपर्क किया था. लेकिन फ़िनलैंड ने साफ इनकार कर दिया, और इस पर सोशल मीडिया पर जमकर मज़ाक भी उड़ाया गया. अब ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने लिथुआनिया से संपर्क किया है ताकि वहां से अंडों का आयात संभव हो सके.
लिथुआनिया बना अमेरिका की नई उम्मीद?
लिथुआनियन पोल्ट्री एसोसिएशन के प्रमुख गाइटिस काउज़ोनस के मुताबिक, अमेरिका के वारसा दूतावास ने लिथुआनिया में अंडों के निर्यात की संभावनाओं पर चर्चा की है. यूरोपीय सोशल मीडिया यूजर्स ने इस खबर पर अमेरिका की जमकर खिल्ली उड़ाई.
कई लोगों ने इसे ट्रंप की कूटनीति और उनकी ‘अहंकारी’ व्यापार नीतियों का नतीजा बताया. एक व्यंग्यात्मक टिप्पणी में तो ये तक लिखा गया कि दुनिया का सबसे महान देश, और अंडे तक नहीं हैं. खैर, हकीकत तो यही है कि अमेरिका फिलहाल अंडों की भारी कमी से जूझ रहा है और अगर यह संकट लंबा चला तो अमेरिकी सरकार को और भी छोटे देशों से हाथ फैलाकर मदद मांगनी पड़ सकती है.
राष्ट्रपति के गोद लिए गांव में हुआ बड़ा घोटाला, पूर्व सरपंच की गिरफ्तारी
20 Mar, 2025 09:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नूंह. हरियाणा के नूंह जिले की ग्राम पंचायत रोजका मेव में 25 करोड़ रुपए के घोटाले के आरोपी पूर्व सरपंच दीन मोहम्मद उर्फ धोना को गिरफ्तार कर लिया गया है. बुधवार को उन्हें जिला कोर्ट में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने उन्हें 2 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया.
नारनौल पुलिस ने दीन मोहम्मद को तावडू क्षेत्र से गिरफ्तार किया और कोर्ट में पेश किया. अब देखना है कि पुलिस 2 दिन की रिमांड में उनसे क्या जानकारी निकाल पाती है. नूंह के तत्कालीन जिला उपायुक्त धीरेंद्र खडगटा ने एचएसआईआईडीसी के अधिकारियों, बैंक अधिकारियों, जिला राजस्व अधिकारी और रोजका मेव की पूर्व महिला सरपंच खातुनी और सरपंच प्रतिनिधि दीन मोहम्मद पर धोखाधड़ी और गबन के आरोप में पुलिस कार्रवाई के आदेश दिए थे. इसके बाद दीन मोहम्मद को निलंबित कर दिया गया था.
ग्राम पंचायत की वर्तमान सरपंच नाहिदा ने बताया कि दीन मोहम्मद ने 35 करोड़ रुपए का रिकॉर्ड अभी तक नहीं दिया है और पंचायत के 20 खाते खुलवाए थे, जिनमें 35 करोड़ रुपए का फर्जीवाड़ा किया गया. शिकायतकर्ता हाजी अर्जुन ने कहा कि राष्ट्रपति द्वारा गांव रोजका मेव को गोद लेने के बाद करीब 55 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ था. घोटाला उजागर होने के बाद दीन मोहम्मद को पद से निलंबित कर दिया गया और मामला दर्ज किया गया.
अब देखना है कि 25 करोड़ के घोटाले के अलावा 35 करोड़ रुपए के रिकॉर्ड की जांच में क्या निकलता है. इस मामले में कई आरोपियों की पहले ही गिरफ्तारी हो चुकी है. दीन मोहम्मद उर्फ धोना अपने रसूखों की वजह से कई साल से बचता आ रहा था, लेकिन अब ईद शायद जेल में मनेगी.
हरियाणा में बनेगा पहला आईआईटी, केंद्र सरकार ने दी सैद्धांतिक मंजूरी
20 Mar, 2025 06:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणा में जल्दी प्रदेश का पहला इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलाजी (आईआईटी) बनने जा रहा है। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने हरियाणा में आईआईटी के निर्माण संबंधी प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान कर दी है।अब हरियाणा सरकार इस प्रस्ताव को सिरे चढ़ाने के लिए उपयुक्त तथा अनुकूल जमीन की व्यवस्था करेगी। हरियाणा में जमीन मिलना काफी चुनौतीपूर्ण काम है। राज्य में तीन केंद्रीय मंत्रियों मनोहर लाल, कृष्णपाल गुर्जर और राव इंद्रजीत समेत भाजपा के पांच सांसद हैं।
पांच सांसद कांग्रेस के हैं। ऐसे में मनोहर लाल के करनाल, कृष्णपाल गुर्जर के फरीदाबाद, राव इंद्रजीत के गुरुग्राम, चौधरी धर्मबीर सिंह के भिवानी-महेंद्रगढ़ और नवीन जिंदल के कुरुक्षेत्र संसदीय क्षेत्र में से किसी एक में आईआईटी की स्थापना होनी तय है।
IIT के लिए जरूरत पड़ेगी 300 एकड़ जमीन
केंद्र का पत्र मिलने के बाद तकनीकी शिक्षा विभाग के निदेशक की तरफ से प्रदेश के सभी जिला उपायुक्तों को पत्र लिखकर कम से कम 300 एकड़ जमीन आईआईटी के लिए चिन्हित करने को कह दिया गया है। हरियाणा में पहले भी कई बड़ी परियोजनाएं जमीन के अभाव में सिरे नहीं चढ़ सकी हैं। आईआईटी की इस बड़ी परियोजना के लिए एक ही स्थान पर 300 एकड़ जमीन की जरूरत पड़ेगी। अलग-अलग स्थानों पर जमीन का चयन कर प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्ताव बनाकर केंद्र को भेजा जाएगा। इसके बाद केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय की टीम द्वारा हरियाणा का दौरा कर किसी एक जमीन पर प्रोजेक्ट को स्वीकृति दी जाएगी। यह विभाग धर्मेंद्र प्रधान का है, जो कि विधानसभा चुनाव में हरियाणा के प्रभारी भी रहे हैं।
कुरुक्षेत्र में बनने की संभावना अधिक
संभावना जताई जा रही है कि केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने धर्मेंद्र प्रधान को आईआईटी के लिए राजी किया है। मनोहर लाल करनाल से सांसद हैं, जबकि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी कुरुक्षेत्र से सांसद रह चुके हैं और कुरुक्षेत्र जिले की लाडवा विधानसभा सीट से विधायक हैं। नायब सैनी करनाल से भी विधायक रह चुके हैं। हालांकि, राज्य के पांचों भाजपा सांसद अपने-अपने क्षेत्र में आईआईटी के लिए कोशिश करते नजर आएंगे, लेकिन संभावना है कि करनाल अथवा कुरुक्षेत्र में कहीं आईआईटी का तोहफा दिया जा सकता है। केंद्र में अपनी मजबूत पकड़ के चलते केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर भी इस प्रोजेक्ट को लपक लें तो कोई हैरानी नहीं होगी। गुरुग्राम समेत इन सभी क्षेत्रों में जमीन काफी महंगी है। भिवानी क्षेत्र में जमीन की उपलब्धता अधिक रहती है, इस बात का फायदा धर्मबीर सिंह उठाने का कोई मौका नहीं छोड़ेंगे।
बलूच लिबरेशन आर्मी का बड़ा ऑपरेशन: बलूचिस्तान में 354 पाकिस्तानी सैनिकों की हत्या का दावा
20 Mar, 2025 02:22 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बलूचिस्तान में हिंसक झड़पों के बीच बलोच लिबरेशन आर्मी ने ऑपरेशन दारा-ए-बलोन का जिक्र किया है. बलोच आर्मी का कहना है कि इस ऑपरेशन के तहत हमने 354 सैनिकों को मार गिराया है. बलूचिस्तान के इतिहास का इसे सबसे बड़ा ऑपरेशन बताया जा रहा है.
बलूचिस्तान पोस्ट के मुताबिक बलोच लड़ाकों ने इस ऑपरेशन के तहत पहले ट्रेन हाईजैक किया और फिर अलग-अलग जगहों पर पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया. पाकिस्तान सरकार की तरफ से बीएलए के बयान पर कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी गई है.
कितने सैनिक मरे, फाइनल खुलासा
बलोच लिबरेशन आर्मी का कहना है कि हमारे क्षेत्र को पाकिस्तान ने जबरन कब्जा कर रखा है. यहां से रोज लोग गायब हो रहे हैं. पाकिस्तान की सेना लोगों का अपहरण कर रही है. इसी के खिलाफ हमने दारा-ए-बलोन नाम से ऑपरेशन की शुरुआत की थी.
बलोच लड़ाकों ने इस ऑपरेशन में 354 पाकिस्तानी सैनिकों को मारने का दावा किया है. दावे के मुताबिक मरने वाले जवानों में 41वें डिवीजन से 45, 17वीं पीओके रेजिमेंट से 56, ईएमई सेंटर से 47, 25वीं बलूच रेजिमेंट से 15, 6वीं आर्मर्ड रेजिमेंट से 26 और इन्फैंट्री स्कूल से 25 जवान शामिल थे.
बलोच आर्मी ने अपने बयान में कहा है कि इस तरह का ऑपरेशन आगे भी चलाया जाएगा. हमारा ऑपरेशन सफल रहा है. पाकिस्तान की सेना ज्यादा दिनों तक बलूचिस्तान में राज्य नहीं कर पाएगी.
समर्थन पर भी लगाई लताड़
ट्रेन हाईजैक को लेकर पाकिस्तान ने अफगानिस्तान और भारत पर आरोप लगाया था. बलोच लड़ाकों का कहना है कि यह सब बेबुनियाद है. पाकिस्तान की सेना खुद आतंकियों को पाल रही है. दाऊद और हाफिज जैसे दुनिया के मोस्ट वाटेंड पाकिस्तान में बैठे हैं.
बलोच सेना का कहना है कि हमारे पास लोगों का जनसमर्थन है और इसी के बूते हम पाकिस्तानी सैनिकों को पिट रहे हैं. बलोच ने अफगानिस्तान से अपना संबंध काफी पुराना बताया है. संगठन का कहना है कि ज्यादती के खिलाफ अफगानिस्तान अगर समर्थन करता है तो इसमें गलत कुछ भी नहीं है.
यूक्रेन-रूस युद्ध में नाटो संगठन बिखरने के कगार पर, पोलैंड ने बारूदी सुरंग संधि से हटने का किया ऐलान
20 Mar, 2025 02:11 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दुनिया के पश्चिमी देशों ने 4 अप्रैल 1949 को नाटो (North Atlantic Treaty Organization) की स्थापना की थी. इस संगठन में 32 देश हैं, जिसमें 30 यूरोपीय और 2 नॉर्थ अमेरिका के देश शामिल हैं. ये संगठन दुनिया का सबसे ताकतवर संगठन माना जाता है, लेकिन यूक्रेन के खिलाफ रूस की जंग ने महज तीन साल में इसको बिखरने पर मजबूर कर दिया है.
नाटो को दुनिया का सबसे मजबूत सैन्य संगठन माना जा रहा था, लेकिन यूक्रेन और रूस युद्ध के बीच नाटो पूरी तरह बिखर गया है. नाटो के देश पुतिन के सामने खुद को सरेंडर कर रहे हैं. पोलैंड ने बारूदी सुरंग वाले संधि से खुद को बाहर कर लिया है. पोलैंड का कहना है कि हम पुतिन से अब पंगा नहीं ले सकते हैं.
यूक्रेन सीमा से लगे नॉर्वे ने भी किए हाथ खड़े
इधर, नॉर्वे ने रूस के साथ मिलकर मछली बेचने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. नॉर्वे नाटो का एकमात्र देश है, जिसकी सीमा रूस से लगती है. वहीं इटली ने भी पुतिन के चलते यूक्रेन में शांति सेना न भेजने का फैसला किया है. तुर्की पहले ही युद्ध में न्यूट्रल रहने की बात कह चुका है और अब अमेरिका ने तो ऐसी धमकी दी है, जिससे नाटोका ही अस्तित्व खतरे में आ सकता है.
अमेरिका ने दिए नाटो से बाहर होने के संकेत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की युद्ध विराम कोशिशों से यूक्रेन सहमत नहीं था और उसने खुद के साथ विश्वासघात महसूस किया. अमेरिका के रूस ओर झुकने के बाद कुछ यूरोपीय देशों ने यूक्रेन का साथ देने का वादा किया था. जिसके बाद अमेरिकी ने संकेत दिए हैं कि वह नाटो से बाहर हो सकता है. अमेरिका का नाटो से बाहर होने के मतलब है नाटो की ताकत आधी हो जाना. इसके अलावा नाटो के तहत कई यूरोपीय देशों की सुरक्षा के लिए अमेरिकी हथियारों का सहारा भी मिलता है, ट्रंप के बाहर होने के बाद ये भी बंद हो जाएगा.
वर्ल्ड हैपिनेस डे 2025: फिनलैंड ने आठवीं बार सबसे खुशहाल देश का ताज जीता
20 Mar, 2025 02:04 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आज वर्ल्ड हैपिनेस डे है और इसी मौके पर “वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2025” भी आ गई है. कोई हैरानी की बात नहीं कि फिनलैंड ने लगातार आठवीं बार सबसे खुशहाल देश का ताज अपने नाम किया है. यानी नॉर्डिक देशों का खुशी की दौड़ में दबदबा कायम है. डेनमार्क, आइसलैंड और स्वीडन भी टॉप 4 में हैं.
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वेलबीइंग रिसर्च सेंटर की इस रिपोर्ट में पाया गया कि खुशी के पीछे आर्थिक समृद्धि से ज्यादा भरोसा, आपसी सहयोग और समाज का सकारात्मक नजरिया अहम रोल निभाते हैं. मगर सवाल ये है कि जब दुनिया के सबसे खुशहाल देश सामने हैं, तो सबसे ज्यादा दुखी देश कौन से हैं? आइए, जानते हैं.
अमेरिका और ब्रिटेन की रैंकिंग में गिरावट
जहां एक ओर नॉर्डिक देशों ने टॉप स्थानों पर कब्जा जमाया, वहीं अमेरिका और ब्रिटेन की रैंकिंग में लगातार गिरावट देखी गई. अमेरिका जो पहले टॉप 20 में शामिल था, अब इस लिस्ट में और नीचे खिसक गया है. विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका में बढ़ती सामाजिक असमानता, तनाव और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ लोगों की खुशहाली पर नकारात्मक असर डाल रही हैं. इसी तरह, ब्रिटेन भी पहले की तुलना में नीचे आ गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि विकसित देशों में खुशहाली सिर्फ जीडीपी की बढ़ोतरी से तय नहीं होती.
अफगानिस्तान सबसे दुखी देश
पश्चिमी औद्योगिक देशों में खुशहाली का ग्राफ अब 2005-2010 के मुकाबले नीचे आ चुका है. 15 देशों में खुशी का स्तर गिरा है, जबकि सिर्फ 4 देशों में सुधार हुआ है/ खासकर अमेरिका, स्विट्ज़रलैंड और कनाडा में यह गिरावट 0.5 अंकों से ज्यादा रही, जिससे ये “टॉप 15 सबसे ज्यादा उदास” देशों की लिस्ट में शामिल हो गए हैं.
अफगानिस्तान एक बार फिर बना दुनिया के सबसे दुखी देश में शामिल हुआ है. अफगान महिलाओं ने कहा है कि इस देश में ज़िंदगी एक संघर्ष में बन गई है. पश्चिमी अफ्रीका का सिएरा लियोन दूसरे पायदान पर, जबकि लेबनान तीसरे सबसे अधमरे देश के रूप में दर्ज हुआ है. उसके बाद मलावी, जिम्बाब्वे, बोत्सवाना, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, यमन, कोमोरोस और लेसोथो देश शामिल हैं.
खुशी का असली पैमाना क्या है
गैलप के सीईओ जॉन क्लिफ्टन के अनुसार खुशी सिर्फ पैसा या विकास पर निर्भर नहीं करती, बल्कि यह इस बात पर भी निर्भर करती है कि लोग एक-दूसरे पर कितना भरोसा करते हैं और एक-दूसरे के लिए कितने मददगार हैं. शोधकर्ताओं का मानना है कि छोटे-छोटे सामाजिक कारक, जैसे कि परिवार के साथ भोजन करना, किसी भरोसेमंद व्यक्ति का साथ होना और सामाजिक सहयोग, खुशी के प्रमुख कारणों में शामिल हैं.
रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया कि किसी समुदाय में दूसरों की ईमानदारी और भलाई में विश्वास करना, खुशहाली का एक बड़ा संकेतक है. उदाहरण के लिए, जिन देशों में लोग यह मानते हैं कि अगर उनका बटुआ खो जाए तो उन्हें वापस मिल सकता है, वे आमतौर पर अधिक खुशहाल पाए गए. नॉर्डिक देशों में खोए हुए बटुए की वापसी की दर सबसे अधिक दर्ज की गई, जिससे यह पता चलता है कि वहाँ परस्पर विश्वास और ईमानदारी का स्तर ऊंचा हैं.
कोस्टा रिका और मैक्सिको ने बनाया टॉप 10 में स्थान
जहाँ यूरोपीय देश अब भी शीर्ष 20 में हावी हैं, वहीं इस बार कुछ नए देशों ने शीर्ष 10 में जगह बनाई है। कोस्टा रिका और मैक्सिको पहली बार दुनिया के 10 सबसे खुशहाल देशों में शामिल हुए. रिपोर्ट में बताया गया कि मैक्सिको और यूरोप में चार से पाँच सदस्यों वाले परिवार सबसे अधिक संतुष्ट जीवन जीते हैं. यही नहीं, इज़राइल, जो इस समय युद्ध जैसी स्थिति का सामना कर रहा है, फिर भी आठवें स्थान पर बना रहा.
अमेरिका में भारतीय छात्र बदर खान सूरी की गिरफ्तारी, हमास से कथित संबंधों का आरोप
20 Mar, 2025 01:55 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने वाशिंगटन के जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले एक भारतीय छात्र बदर खान सूरी को हिरासत में लिया है. छात्र को फिलिस्तीनी आतंकवादी समूह हमास के साथ कथित संबंधों और सोशल मीडिया पर हमास के प्रचार प्रसार करने के आरोप में हिरासत में लिया गया है.
होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के एक बयान का हवाला देते हुए गुरुवार को यह बात बताई. छात्र के वकील ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन उसे अमेरिकी विदेश नीति को नुकसान पहुंचाने वाला मान कर उसे डिपोर्ट करने की मांग कर रहा है.
कब किया गया गिरफ्तार
बदर खान सूरी के वकील ने कहा कि उन्हें अलेक्जेंड्रिया, लुइसियाना में हिरासत में लिया गया है और वो इमीग्रेशन कोर्ट में अदालत की तारीख मिलने का इंतजार कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि सूरी को संघीय एजेंटों ने सोमवार रात वर्जीनिया के रॉसलिन में उनके घर के बाहर से गिरफ्तार किया था.
व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर के दोबारा पोस्ट किए गए बयान में भारतीय छात्र के खिलाफ आरोपों के सबूत का हवाला नहीं दिया गया है. इसमें यह भी कहा गया कि राज्य सचिव मार्को रुबियो ने निर्धारित किया कि सूरी की हरकतों ने “उन्हें निर्वासित कर दिया”. जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के छात्र पर सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट करने और “विरोधीवाद” फैलाने का भी आरोप है.
बदरखान सूरी की गिरफ्तारी के बाद यूनिवर्सिटी के प्रवक्ता ने कहा कि अभी तक हमें सूरी को हिरासत में लिए जाने की वजह नहीं बताई गई है. साथ ही कथित गैरकानूनी गतिविधियों में उसके शामिल होने की हमें कोई जानकारी नहीं थी.
कौन हैं बदरखान सूरी?
बदर खान सूरी अमेरिका में छात्रा वीजा पर रहे हैं. उन्होंने अमेरिकी नागरिक मफेज़ सालेह से शादी की है. वो जॉर्जटाउन के अलवलीद बिन तलाल सेंटर फॉर मुस्लिम-क्रिश्चियन अंडरस्टैंडिंग में पोस्टडॉक्टरल फेलो हैं, जो यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ फॉरेन सर्विस का हिस्सा है.
जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी की वेबसाइट के अनुसार, सूरी की पत्नी मफेज सालेह गाजा से हैं और उन्होंने अल जजीरा और फिलिस्तीनी मीडिया आउटलेट्स के लिए लिखा है. साथ ही उन्होंने युद्धग्रस्त गाजा में विदेश मंत्रालय के साथ भी काम किया है.
सूरी ने एक भारतीय यूनिवर्सिटी से शांति और संघर्ष अध्ययन ( Peace And Conflict Studies) में पीएचडी की है और इस सेमेस्टर में “दक्षिण एशिया में बहुसंख्यकवाद और अल्पसंख्यक अधिकार” विषय पर एक क्लास को पढ़ा रहे हैं.
देश में पहले भी हुई गिरफ्तारी
इससे पहले इस महीने की शुरुआत में ट्रंप प्रशासन ने कोलंबिया यूनिवर्सिटी के एक छात्र महमूद खलील को गिरफ्तार किया और उसे डिपोर्ट करने की कोशिश की. आरोप था कि महमूद खलील फिलिस्तीनी समर्थक विरोध प्रदर्शन में शामिल हुआ था. हालांकि, खलील अब अपनी हिरासत को अदालत में चुनौती दे रहे हैं.
ट्रंप ने बिना सबूत के दावा किया है कि खलील हमास का समर्थन करते हैं. हालांकि, खलील के वकीलों का कहना है कि उसका उस समूह से कोई संबंध नहीं है, जिसे अमेरिका “विदेशी आतंकवादी संगठन” कहता है.
तहव्वुर राणा ने भारत प्रत्यर्पण से बचने के लिए अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स से की अपील
20 Mar, 2025 01:46 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई हमलों का गुनहगार तहव्वुर राणा बहुत शातिर है. भारत आने से बचने के लिए वह चाल पर चाल चल रहा है. 26/11 मुंबई अटैक के आरोपी तहव्वुर राणा ने अपने प्रत्यर्पण से बचने के लिए अब नई चाल चली है. तहव्वुर राणा ने भारत आने से बचने लिए अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स के सामने अर्जी दाखिल की है. इस महीने की शुरुआत में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एलेना कगन ने उसकी पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी थी. इसके बाद तहव्वुर राणा सीधे अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के पास पहुंचा है.
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर प्रकाशित इसकी पूरी डिटेल दी गई है. इसके मुताबिक, तहव्वुर राणा की अर्जी को 4 अप्रैल, 2025 को होने वाली कॉन्फ्रेंस के लिए सुप्रीम कोर्ट के जजों को सौंप दिया गया है. आरोपी तहव्वुर राणा ने भारत प्रत्यर्पण पर रोक लगाने की मांग करते हुए अपनी अर्जी नए सिरे से दायर की है.
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर प्रकाशित आदेश के मुताबिक, तहव्वुर राणा की अपील में कहा गया है कि तहव्वुर राणा ने जस्टिस कगन के समक्ष दायर की गई अपनी आपातकालीन अर्जी का नवीनीकरण किया है. इसमें भारत प्रत्यर्पण पर रोक लगाने की मांग की गई थी. अब यह अनुरोध किया गया है कि नए आवेदन को चीफ जस्टिस रॉबर्ट्स के समक्ष पेश किया जाए.’
पिछली चाल क्या थी
राणा ने एक अपील के जरिए कहा, ‘अगर रोक नहीं लगाई गई तो कोई समीक्षा नहीं होगी और अमेरिकी अदालतें अधिकार क्षेत्र खो देंगी और याचिकाकर्ता जल्द ही मर जाएगा.’ 26/11 के आतंकी हमलों के आरोपी ने दावा किया कि अगर उसे भारत प्रत्यर्पित किया जाता है, तो पाकिस्तानी मूल का मुसलमान होने के कारण उसके साथ अत्याचार की प्रबल संभावना है.
कौन है राणा?
तहव्वुर राणा पाकिस्तानी मूल के कनाडाई नागरिक है . उसका जन्म पाकिस्तान में हुआ है. वह पेशे से डॉक्टर है. उसने पाकिस्तानी सेना में डॉक्टर की सेवा दे चुका है. वह मुंबई हमले का मास्टर माइंड डेविड हेडली का करीबी बताया जाता है. ये भी कहा जाता है राणा ने ही भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई में मौत के तांडव के लिए फाइनेंस किया था. हालांकि, जब अमेरिकी कोर्ट ने राणा को 2009 में गिरफ्तार करने के बाद मुंबई हमले से बरी कर दिया था, वहीं, भारत ने कूटनीतिक चाल से उसे खिलाफ दोष सिद्ध करवाए और अमेरिका से उसके प्रत्यर्पण की बात चलती रही. राणा ने 13 नवंबर को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेने के एक दिन बाद 21 जनवरी को शीर्ष अदालत ने इसे अस्वीकार कर दिया था.
सुनीता विलियम्स का अंतरिक्ष से धरती तक का सफर, स्पेसएक्स के ड्रैगन विमान से वापसी
20 Mar, 2025 01:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनिता विलियम्स 9 महीने बाद धरती पर लौटी हैं। नासा के सभी 4 यात्री स्पेसएक्स के ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट कैप्सूल के जरिए ISS से धरती पर लौटे। आइए जानते हैं, धरती से अंतरिक्ष तक कैसी थी उनकी यात्रा और ड्रैगन कैप्सूल स्प्लैश डाउन करने के बाद क्या-क्या हुआ।
नासा के मुताबिक अंतरिक्ष यात्रियों ने पृथ्वी पर लौटने से पहले इन्होंने पृथ्वी की 4,500 बार परिक्रमा की थी और 28,000 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से करीब 19 करोड़ किलोमीटर की यात्रा की। उन्हें इस यात्रा में 17 घंटे का वक्त लगा।
28 हजार किलोमीटर प्रति घंटा थी कैप्सूल की रफ्तार
धरती पर लौटने की यात्रा में स्पेसएक्स के ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट का सबसे मुश्किल चरण पृथ्वी के वायुमंडल में एंट्री के दौरान था। इस दौरान स्पेसक्राफ्ट की रफ्तार 28,800 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा की थी। जिसके घर्षण के कारण स्पेसक्राफ्ट के बाहरी हिस्से का तापमान करीब 1,600 डिग्री सेल्सियस था।
इतने ज्यादा तापमान होने के कारण स्पेसक्राफ्ट पृथ्वी के वायुमंडल में एक आग के गोले की तरह उतर रहा था।वहीं, स्पेसक्राफ्ट में लगे हीट शील्ड के कारण उसमें बैठे सभी अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित धरती पर लौट आए।
कैप्सूल ने हीट-रेजिस्टेंट का किया इस्तेमाल
ड्रैगन कैप्सूल ने धरती के वायुमंडल के ताप से बचाव के लिए PICA के फेनोलिक-इम्प्रेगनेटेड कार्बन एब्लेटर के हीट-रेजिस्टेंट केसिंग का इस्तेमाल किया था। इस लाइट वेट मेटेरियल का इस्तेमाल सबसे पहले नासा ने ही किया था। बाद में, स्पेसएक्स ने अपने ड्रैगन कैप्सूल को अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से कार्गो और मानव आंदोलन के लिए PICA टाइलों से सुसज्जित किया।
स्पेसएक्स का ड्रैगन कैप्सूल PICA के फेनोलिक-इम्प्रेगनेटेड कार्बन एब्लेटर के गर्मी प्रतिरोधी आवरण से सुसज्जित है। यह नासा ही था जिसने पहली बार इस हल्के पदार्थ का इस्तेमाल किया था। बाद में, स्पेसएक्स ने अपने ड्रैगन कैप्सूल को अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से कार्गो और मानव आंदोलन के लिए PICA टाइलों से सुसज्जित किया।
ड्रैगन कैप्सूल को क्यों लगे 17 घंटे
सुरक्षित तरीके से वापस लौटने के लिए स्पेसक्राफ्ट को नियंत्रित डीअर्बिट बर्न करना पड़ा। डीआर्बिट बर्न का मतलब है स्पेसक्राफ्ट का खुद को स्प्लैशडाउन साइट के हिसाब से सही ट्रैजेक्टरी में लाना। लैंडिंग के दौरान कैप्सूल वायुमंडलीय घर्षण की वजह से अत्यधिक गर्म हो जाता है, जिससे स्पेसक्राफ्ट और चालक दल का धीरे-धीरे नीचे उतरना जरूरी हो जाता है।
स्पेसक्राफ्ट के उतरने की गति को धीमा करने के लिए ही पैराशूट तैनात किए जाते हैं, जिससे सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित होती है। स्पेसएक्स मौसम की स्थिति, समुद्री धारा और रिकवरी जहाज की स्थिति के आधार पर लैंडिंग साइट का चयन करता है।
2024 में गर्मी ने 175 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा, मौसम वैज्ञानिकों ने भविष्य में और बिगड़ने की संभावना जताई
20 Mar, 2025 01:23 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
संयुक्त राष्ट्र (UN)के विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने मंगलवार को अपनी एनुअल क्लाइमेट स्टेटस रिपोर्ट जारी की। इसमें शुरुआती आंकड़ों की पुष्टि करते हुए संकेत दिया गया कि 2024 अब तक का सबसे गर्म साल रहा।
2024 ने 2023 में बनाए गए पिछले रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया। WMO के अनुसार, 2024 में पहली बार वैश्विक तापमान 1850-1900 में निर्धारित आधार रेखा से 1.5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसने पिछले 175 साल के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है।
10 सालों में हीटवेव से हालात खराब
जबकि इससे पहले की रिपोर्ट में 2014 से 2023 का समय सबसे गर्म दशक के रूप में रिकॉर्ड किया गया था। इन 10 सालों में हीटवेव ने महासागरों को प्रभावित किया। साथ ही ग्लेशियरों को रिकॉर्ड बर्फ का नुकसान हुआ।
लाखों लोगों को छोड़ना पड़ा घर
2024 में चक्रवात, बाढ़, सूखा और अन्य आपदाओं ने 2008 के बाद से सबसे अधिक लोगों को विस्थापित किया,
ऐसे में 36 मिलियन लोगों को अपने घरों से बाहर निकलने के लिए मजबूर होना पड़ा था।
सिचुआन भूकंप के बाद चीन में लगभग आधे 15 मिलियन विस्थापित हुए थे।
बाढ़ ने भारत में भी लाखों लोगों को प्रभावित किया।
सऊदी अरब सहित दर्जनों अभूतपूर्व हीटवेव दर्ज किए गए जहां हज यात्रा के दौरान तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया ।
मौसम वैज्ञानिक ने दी चेतावनी
ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी के फेनर स्कूल ऑफ एनवायरनमेंट एंड सोसाइटी की प्रोफेसर सारा पर्किन्स-किर्कपैट्रिक ने कहा कि दुनिया एक ऐसे प्वांइट पर पहुंच गई है जहां शुद्ध शून्य उत्सर्जन अब पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने कहा, 'हमें अपने अलार्म पर स्नूज बटन दबाना बंद करना होगा, जो कि अब नियमित रूप से होने वाले रिकॉर्ड तोड़ने वाले वैश्विक तापमान हैं। उन्होंने कहा, जलवायु परिवर्तन हो रहा है, यह हमारी वजह से है, और बिना किसी गंभीर कार्रवाई के, यह और भी बदतर होता जाएगा? यह जितना लंबा चलेगा, चीजों को बेहतर बनाना उतना ही मुश्किल होगा।'
गाजा में इजरायली सेना का हमला तेज, हमास के ठिकानों पर मचाई तबाही
20 Mar, 2025 01:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काहिरा/यरूशलेम। इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू हमास को छोड़ने के मूड में नहीं हैं, बंधकों को छोड़ने को लेकर फिर से शुरू किए गए हमलों को बढ़ाने को लेकर पीएम ने आदेश दे दिया है। इजराइली सेना ने बुधवार को कहा कि उसके बलों ने मध्य और दक्षिणी गाजा पट्टी में जमीनी अभियान फिर से शुरू कर दिया है। इससे एक दिन पहले हवाई हमलों के कम से कम 48 फलस्तीनी मारे गए।
इजरायली सेना ने शुरू की जमीनी कार्रवाई
इजराइली सेना ने कहा कि उसके अभियान ने नेत्जारिम कॉरिडोर पर इजरायल के नियंत्रण को बढ़ाया, जो गाजा को दो भागों में विभाजित करता है, और यह एक "केंद्रित" युद्धाभ्यास था जिसका उद्देश्य एन्क्लेव के उत्तर और दक्षिण के बीच एक आंशिक बफर जोन बनाना था। फलस्तीनी उग्रवादी समूह हमास ने कहा कि जमीनी कार्रवाई और नेत्जारिम कॉरिडोर में घुसपैठ दो महीने पुराने युद्धविराम समझौते का नया और खतरनाक उल्लंघन है।
इजरायली क्षेत्र में गोलीबारी की तैयारी का पता लगाया
संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि बुधवार को मध्य गाजा शहर में संयुक्त राष्ट्र की एक साइट पर एक हमले में एक विदेशी कर्मचारी की मौत हो गई और पांच कर्मचारी घायल हो गए। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने हमले का श्रेय इजरायल को दिया, लेकिन इजरायल ने इससे इनकार करते हुए कहा कि यह हमास की एक साइट पर हुआ, जहां उसने इजरायली क्षेत्र में गोलीबारी की तैयारी का पता लगाया।
रक्षा मंत्री इजरायल कैट्ज ने चेतावनी दी कि अगर गाजा में बंधकों को रिहा नहीं किया गया, तो इजरायल इतनी तीव्रता से कार्रवाई करेगा जो आपने पहले कभी नहीं देखी होगी।वहीं, बुधवार को दूसरे दिन सैन्य कार्रवाई में गाजा में 20 फलस्तीनी मारे गए। एक दिन पहले 400 लोग मारे गए थे।
सेना ने गाजा पट्टी के खान यूनिस इलाकों में पर्चे गिराए
सेना ने कहा कि उत्तरी गाजा में जिस स्थल को निशाना बनाया गया, वहां हमास द्वारा इजरायली क्षेत्र में हमले की तैयारी की जा रही थी। सेना ने गाजा पट्टी के बेत हनून और खान यूनिस इलाकों में पर्चे गिराए। साथ ही चेतावनी दी कि यहां आपकी जान को खतरा है। इसे तुरंत खाली करें। इस बीच, पेरिस में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ बैठक में जार्डन के राजा अब्दुल्ला ने युद्ध विराम को बहाल करने का आह्वान किया।
हमास के कब्जे में अब भी 59 बंधक
सात अक्टूबर, 2023 को हमास ने इजरायल पर हमला किया था, जिसमें करीब 1,200 लोग मारे गए थे। 251 लोगों को बंधक बना लिया गया था। इसके बाद इजरायल ने हमास के सफाए के लिए गाजा में सैन्य अभियान चला रखा था।
15 महीने तक जारी रहे इस अभियान में गाजा में 48 हजार से ज्यादा फलस्तीनी मारे गए। गत जनवरी में इजरायल और हमास के बीच छह सप्ताह के लिए युद्धविराम और बंधकों की रिहाई के लिए समझौता हुआ था। हमास के कब्जे में अब भी 59 बंधक हैं।
रूस-यूक्रेन युद्ध: रूस के भाड़े के सैनिक यूक्रेनी मोर्चे पर मारे जा रहे हैं, पुतिन की रणनीति पर सवाल
20 Mar, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रूस यूक्रेन युद्ध को तीन साल से ज्यादा का समय बीत चुका है. इस युद्ध में रूस यूक्रेन पर भारी पड़ता नजर आया है, लेकिन यूक्रेन में रूस गहरे घाव दिए हैं. कुछ न्यूज़ आउटलेट्स ने दावा किया था कि चाहें यूक्रेन ने एक बड़ी भूमि का हिस्सा गवाया, लेकिन मौते सबसे ज्यादा यूक्रेनी सैनिकों की हुई है.
युद्ध क्षेत्र में लड़ने वाले सैनिकों में भी पुतिन बड़ा खेल किया है, जिसके चलते उसके अपने सैनिक बहुत कम मारे गए हैं. अब सवाल आता है कि रूस की तरफ से मारे जाने वाले सैनिक कौन हैं. अगस्त 2023 में एक कुख्यात बोस्नियाई सर्ब भाड़े का सैनिक रूसी प्रोपेगैंडा वीडियो में दिखाई दिया था, जिसके बाद से ही शक होने लगा था कि रूस अपनी सेना में भाड़े के सैनिक भर्ती कर यूक्रेन मोर्चे पर भेज रहा है. कुछ खुफिया खबरों से पता चला है कि रूस ने अपनी सेना में कई देशों से सैनिक भर्ती किए हैं और उनके यूक्रेनी मोर्चे पर मरने के लिए छोड़ दिया.
रूस ने कितने विदेशी भाड़े के सैनिकों की भर्ती की है?
रूस के सशस्त्र बलों में सेवा देने वाले सभी विदेशी नागरिकों का कोई निश्चित अनुमान नहीं है और लीक हुआ डाटाबेस से भी रूसी हताहतों का पूरा रिकॉर्ड नहीं है, जबकि पश्चिमी अनुमानों के मुताबिक इस जंग में रूस की तरफ से करीब 7 लाख सैनिक मारे गए हैं.
लेकिन लीक हुए रिकॉर्ड रूस के विदेशी भाड़े के सैनिकों के बारे में कई तरह के वास्तविक साक्ष्यों को उजागर करता हैं, जिनमें से कुछ को वेतन के लिए भर्ती किया था और अन्य का कहना है कि उन्हें भर्ती करने के लिए दबाव डाला गया था या धोखा दिया गया था.
अस्पताल में भर्ती होने के रिकॉर्ड के RFE/RL जांच में पाया गया कि सर्बिया, नेपाल, भारत, चीन, श्रीलंका, क्यूबा और कैमरून सहित एक दर्जन से ज्यादा देशों के विदेशी सैनिकों का फरवरी 2022 के बीच रूसी सैन्य अस्पतालों में इलाज किया गया था.
पुतिन ने दिखाई चालाकी
अपने सैनिकों कम जान जाए इसलिए पुतिन ने भाड़े के सैनिकों को मोर्चे पर भेजने की चाल चली. जिसका फायदा पुतिन को बखूबी मिला है. जंग तीन साल बाद रूस यूं ही मजबूत खड़ा है, क्योंकि उसकी सेना आज भी पूरी ताकत के साथ खड़ी है. वहीं यूक्रेन ने अपने सारे खास सैनिक जंग में झोक रखे हैं और दिन बा दिन वह कमजोर हो रहा है.
पाकिस्तान में फ्लाइट अटेंडेंट से बहस पर अफसर की बेटी ने तोड़ी नाक, एयरलाइंस में मचा हंगामा
20 Mar, 2025 11:53 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पाकिस्तान में एक अफसर की बेटी से बहस करना फ्लाइट अटेंडेंट को महंगा पड़ा है. बातचीत के बीच ही अफसर की बेटी ने फ्लाइट अटेंडेंट की नाक तोड़ दी. घटना के सामने आने के बाद पाकिस्तानी एयरलाइंस की पूरी दुनिया में थू-थू हो रही है. पाकिस्तान के लोग भी एयरलाइंस मैनेजमेंट पर जमकर भड़ास निकाल रहे हैं.
वहीं घटना के बाद विभाग ने नए सिरे से फ्लाइट सुरक्षा नियम बनाने की बात कही है. सरकार का कहना है कि इस तरह की गलती फिर से न हो, इसके तुरंत उपाय किए जाएंगे.
मामले को विस्तार से समझिए
बुधवार को सेरेन की फ्लाइट बोइंग 737-800 इस्लामाबाद से कराची के लिए जा रही थी. इस फ्लाइट में पाकिस्तान के वरिष्ठ नौकरशाह इफ्तिखार जोगेजाई अपनी बेटी के साथ सवार थे. जियो टीवी के मुताबिक नौकरशाह क्वैटा के पूर्व कमिश्नर रहे हैं. उनकी पाकिस्तान के सियासी गलियारों में मजबूत पकड़ है.
रिपोर्ट के मुताबिक बाप-बेटी के फ्लाइट में बैठने के बाद अटेंडेंट ने सीट बेल्ट लगाने को कहा, जिसे नौकरशाह ने तो खुद मान लिया, लेकिन उसकी बेटी ने सीट बेल्ट लगाने से इनकार कर दिया.वहीं दावा किया जा रहा है कि पूरी लड़ाई खाने को लेकर हुई. कहा जा रहा है कि फ्लाइट अटेंडेंट ने उड़ान के बाद खाना देने की बात कही, जिस पर जोगेजाई की बेटी भड़क गई.अटेंडेंट ने जब उसे विमान से नीचे उतारने की बात कही, तो लड़की ने उसके नाक पर मुक्का जड़ दिया. घटना के बाद नौकरशाह और उसकी बेटी को फ्लाइट से उतार दिया गया.
रफा-दफा कराने में जुटी सरकार
पाकिस्तान एयरलाइंस के वरिष्ठ अधिकारी इस पूरे मसले को रफा-दफा कराने में जुटे हैं. अधिकारियों ने बाप और बेटी से लिखित में माफीनामा देने के लिए कहा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर बाप और बेटी लिखित माफीनामा देते हैं तो उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा. वहीं लोगों का कहना है कि यह मामला गंभीर है, इसलिए केस दर्ज कर उस पर तुरंत कार्रवाई हो.
हरियाणा के हयातपुर में दिनदहाड़े व्यापारी की हत्या, दो अन्य घायल
19 Mar, 2025 10:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणा के गांव हयातपुर में मंगलवार (18 मार्च) को दिनदहाड़े बाइक सवार दो अज्ञात हमलावरों ने 45 वर्षीय व्यापारी को उसके कार्यालय में घुसकर गोलियों से भून डाला. फायरिंग में व्यापारी के साथ दफ्तर में बैठे दो अन्य व्यक्ति भी घायल हो गए. पूरी वारदात कार्यालय में लगे सीसीटीवी फुटेज में कैद हो गई. पुलिस को हत्या के पीछे व्यापारिक रंजिश नजर आ रही है. सेक्टर 10 थाने में एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है.
पुलिस के अनुसार मृतक व्यापारी की पहचान गांव हयातपुर निवासी बलजीत यादव के रूप में हुई है. बलजीत का झज्जर जिले में ईंट भट्ठा और शराब का ठेका था. मंगलवार (18 मार्च) शाम को हयातपुर गांव में एक व्यापारी के ऑफिस में दो शूटर बाइक पर पहुंचे. उस समय बलजीत अपने ऑफिस में चार अन्य व्यक्तियों के साथ बैठा थे. दोनों हमलावर उसके कार्यालय में घुसे और उसके तुरंत बाद गोलियां चला दीं.
फायरिंग के बाद बाइक पर हुए फरार
इसके बाद हमलावर बाइक पर सवार होकर मौके से फरार हो गए. फायरिंग में बलजीत गंभीर रूप से घायल हुए, सात ही रविंदर और राम भी गोली लगने से जख्मी हो गए. गंभीर रूप से घायल व्यापारी को नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. सूचना मिलने के बाद पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की.
इसलिए हुआ विवाद
बताया जा रहा है कि जिला झज्जर में शराब का ठेका लेने को लेकर यह विवाद हुआ और गोलीकांड किया गया. मृतक का हयातपुर में क्रेन सर्विस का कारोबार भी था. कुछ दिन पहले मृतक का पोता भी छत से गिरकर घायल हो गया था, जिसका इलाज अस्पताल में चल रहा है. बलजीत नियमित रूप से अपने पोते के साथ अस्पताल में रहता था. मंगलवार को ही अपने दफ्तर आया था, तभी यह घटना घटी.
आरोपियों को पकड़ने की कोशिश जारी
वहीं घटना को लेकर डीसीपी पश्चिम करण गोयल ने देर रात बताया कि मामले की जांच की जा रही है. सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं. आरोपियों को पकड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं.
माओवाद की समाप्ति के बाद अब बस्तर का सर्वांगीण विकास होगा: मंत्री राम विचार नेताम
अम्बिकापुर में विकास को नई रफ्तार
ड्रोन के साथ अपने हौसलों को उड़ान दे रही हैं सरूपी मीणा
अल्पविराम की अवधारणा जीवन और कार्य के संतुलन के लिये अत्यंत आवश्यक : अर्गल
चिन्हारी योजना से सशक्त हो रही छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति
