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यज्ञ में बासी भोजन पर गुस्से का विरोध, सुरक्षा गार्डों की गोलीबारी
22 Mar, 2025 07:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणा के कुरुक्षेत्र में यज्ञ के दौरान फायरिंग की घटना सामने आई है. गोली लगने से एक युवक घायल हुआ है. कार्यक्रम स्थल पर पत्थरबाजी और लाठियां भी चली हैं. एक युवक के सिर में पत्थर लगा है. यज्ञ में अलग-अलग राज्यों से ब्राह्मण बुलाए गए थे. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यज्ञ में शामिल हुए ब्राह्मणों पर लाठियां भांजी गई हैं. बाबा के बाउंसर पर गोलियां चलाने का आरोप है. घटना के पीछे बासी भोजन को लेकर हुआ विवाद बताया जा रहा है.
यज्ञ के दौरान गोली लगने से घायल होने वाले का नाम नाम आशीष बताया जा रहा है, जो उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का रहने वाला है. उसकी जांघ में गोली लगी है. वही, दूसरा युवक प्रिंस है, जिसके सिर पर पत्थर लगा है. वह लखीमपुर खीरी का रहने वाला बताया गया है. घटना कुरुक्षेत्र के केशव पार्क में आयोजित महायज्ञ में सुबह की है. यज्ञ में आए ब्राह्मणों पर बाउंसरों द्वारा फायरिंग की गई, जिसमें एक ब्राह्मण गंभीर रूप से घायल हो गया. यज्ञ स्थल पर तोड़फोड़ भी की गई है.
ब्राह्मणों को दिया बासी खाना
मिली जानकारी के अनुसार, यज्ञ में शामिल ब्राह्मणों को बासी भोजन परोसा गया, जिसका उन्होंने विरोध किया. लगातार हो रहे विरोध के चलते सुबह आयोजकों के सुरक्षा गार्डों और ब्राह्मणों के बीच बहस हो गई. देखते ही देखते माहौल गरमा गया और गार्डों ने गुस्से में फायरिंग कर दी. इस हमले में लखनऊ से आए आशीष नामक ब्राह्मण को गोली लग गई. घायल को तुरंत एलएनजेपी अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है.
बाब के बाउंसरों ने कराया बवाल!
केशव पार्क में 18 मार्च से 1008 कुंडीय शिव-शक्ति महायज्ञ आरंभ हुआ था. इसमें देश भर से 1500 से ज्यादा ब्राह्मणों को बुलाया गया था. इन ब्राह्मणों के ठहरने और खाने-पीने की व्यवस्था यज्ञ के आयोजकों ने की. ब्राह्मणों का आरोप है कि पहले दिन ने बाबा के सुरक्षा गार्ड (बाउंसर) उनके साथ किसी न किसी बात को लेकर परेशान कर रहे थे. कभी भी किसी के साथ मारपीट कर देते थे. कोई घूमता दिखाई देता तो उसे भी थप्पड़ या डंडा मार देते थे. यह यज्ञ 27 मार्च तक चलना है. इसमें बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल, पूर्व मंत्री सुभाष सुधा, राम विलास शर्मा, सीएम नायब सैनी की धर्मपत्नी सुमन सैनी, पूर्व सांसद सुनीता दुग्गल समेत पार्टी के नेता शिरकत कर चुके हैं.
कौन हैं यज्ञ कराने वाले स्वामी हरिओम?
अपने आपको यज्ञ सम्राट कहने वाले स्वामी हरिओम स्वामी हरिओम ने 108 यज्ञ करवाने का संकल्प लिया हुआ है. कुरुक्षेत्र के थीम पार्क में यह 102 वां महायज्ञ था, जिसमें यज्ञ करवाने के लिए बुलाए गए ब्राह्मणों पर गोलियां चलाने से विघ्न पड़ गया. इससे पहले भी स्वामी दो बार कुरुक्षेत्र के इसी केशव पार्क में यज्ञ कर चुके हैं. पहले यज्ञ में बरसात के पानी से यज्ञ कुंड डूब गए थे और जलधारा से विघ्न पड़ा था. उसके बाद दूसरे यज्ञ में अग्निकांड होने से यज्ञ में विघ्न हुआ था. वहीं, अब तीसरे महायज्ञ में गोलीकांड से विघ्न पड़ गया.
सेना की वर्दी में रहते हैं बाउंसर
विश्व कल्याण हेतु महायज्ञ करवाने का दावा करने वाले स्वामी हरिओम अपने साथ बाउंसर लेकर चलते हैं, जो उनके साथ भारतीय सेना की वर्दी में तैनात रहते हैं. यह असली है या नकली है यह भी संदेह के घेरे में है. कुरुक्षेत्र में स्वामी जी संघ से जुड़े शिक्षा विभाग में सेवारत एक कर्मचारी के निवास पर आकर अक्सर रुकते हैं. यह कर्मचारी सरकारी सेवा में आने से पहले गीता निकेतन आवासीय विद्यालय में अपनी सेवाएं दे चुका है.
रमजान में चीनी की डिमांड बढ़ी, पाकिस्तान में खुदरा बाजार में 180 रुपये प्रति किलो बिक रही चीनी
22 Mar, 2025 03:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पाकिस्तान में चीनी की कीमतों को लेकर हाहाकार मचा हुआ है. रमजान के महीने में पाकिस्तान में चीनी की खपत अधिक होने के कारण डिमांड काफी ज्यादा बढ़ गई है, लेकिन आपूर्ति कम होने के कारण खुदरा बाजार में चीनी 180 पाकिस्तानी रुपये प्रति किलो मिल रही है. हालांकि पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने कुछ दिनों पहले चीनी की कीमतों पर बढ़ोत्तरी को लेकर चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान में चीनी की कीमतें 164 रुपये प्रति किलोग्राम की तय सीमा को पार नहीं करनी चाहिए. लेकिन पाकिस्तान के खुदरा बाजारों में 180 रुपये की बिक्री के साथ चीनी की आसमान छू रहीं हैं.
कार्रवाई के बाद कीमत में आई मामूली गिरावट
कराची होलसेलर्स ग्रॉसर्स एसोसिएशन (KWGA) के अध्यक्ष ने कहा, "पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 15 मार्च को चीनी जमाखोरों पर कार्रवाई की घोषणा की. इसके बाद कराची में चीनी की थोक कीमत 168 रुपये से घटकर 158 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई." उन्होंने कहा, "हालांकि, चीनी की थोक कीमत में 10 रुपये की मामूली गिरावट भी खुदरा विक्रेताओं को चीनी की कीमतों से फायदा कमाने से रोकने में असफल रही. वहीं, रमजान का महीना होने के कारण चीनी की डिमांड में काफी ज्यादा बढ़ोत्तरी हुई है."
कीमत को स्थिर करने में सरकार हुई नाकाम
रउफ इब्राहिम ने आगे कहा, "पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार देश में चीनी की कीमत को स्थिर करने और उपभोक्ताओं को 130 रुपये प्रति किलोग्राम के सुनिश्चित दर से चीनी उपलब्ध कराने में नाकाम साबित हुई है." उन्होंने कहा, "पाकिस्तान में चीनी की बढ़ी कीमतों के कारण सबसे ज्यादा नुकसान चीनी के खुदरा विक्रेता उठा रहे हैं. वहीं, सरकार चीनी मिल मालिकों पर सिर्फ आरोप लगा रही है, कोई कार्रवाई नहीं कर रही है."
पानीपत में गोली मारकर जेजेपी नेता रविंद्र मिन्ना की हत्या, अपराधियों की तलाश जारी
22 Mar, 2025 02:53 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणा के पानीपत में जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) नेता रविंद्र मिन्ना की गोली मारकर हत्या कर दी गई है. इस वारदात को विकास नगर में अंजाम दिया गया है. बताया जा रहा है कि मिन्ना के सिर में गोली मारी गई है. फायरिंग में दो अन्य लोग भी घायल हुए हैं, जिनको अस्पताल में भर्ती कराया गया है. अभी तक हमलावरों का पता नहीं चल सका है.
साल 2014 के विधानसभा चुनाव में जननायक जनता पार्टी ने रविंद्र मिन्ना को पानीपत शहर सीट से टिकट दिया था. हालांकि, उनका टिकट काटकर बाद में भारतीय जनता पार्टी प्रत्याशी रोहिता रेवड़ी को समर्थन दे दिया था. इसके साथ ही रविंद्र भी भाजपा में शामिल हो गए थे. हालांकि, कुछ समय बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी को अलविदा कहकर फिर से जेजेपी का दामन थाम लिया था.
14 मार्च को भाजपा नेता सुरेंद्र की हत्या हुई थी
हरियाणा में इस साल नेताओं की हत्या से जुड़ा ये तीसरा बड़ा मामला है. इसी महीने 14 मार्च को भाजपा नेता सुरेंद्र जवाहर की हत्या हुई थी. इस वारदात को सोनीपत जिले के जवाहरा गांव में अंजाम दिया गया था. भाजपा नेता और मुंडलाना मंडल अध्यक्ष सुरेंद्र जवाहर की हत्या उनके पड़ोसी ने गोली मारकर की थी. इस वारदात के बाद ये बात सामने आई थी कि हत्याकांड को जमीन विवाद के चलते अंजाम दिया गया.
24 जनवरी को बसपा नेता हरबिलास की हत्या
भाजपा नेता के मर्डर से पहले 24 जनवरी को बसपा नेता हरबिलास रज्जूमाजरा की हत्या कर दी गई थी. उन्हें अंबाला के नारायणगढ़ में आहलूवालिया पार्क के पास गोली मारी गई थी. हमलावरों ने उनकी कार पर ताबड़तोड़ फायरिंग की थी, जिससे उनकी छाती में 5 गोलियां लगी थीं. इस हमले में उनके दो साथी भी घायल हुए थे.
पाकिस्तान में बीएलए हमलों से बिगड़े हालात, आर्मी चीफ का प्रधानमंत्री पर आरोप
22 Mar, 2025 01:01 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पाकिस्तान में हर तरफ हलचल है. कहीं बमबारी हो रही तो कहीं अज्ञात बंदूकधारी का खौफ है. कहीं पाक आर्मी खून के आंसू रो रही तो कहीं आवाम भूखे मर रही. पाकिस्तान की हालत पूरी तरह पस्त है. बीएलए यानी बलूचिस्तान लिब्रेशन आर्मी ने सरकार और सेना दोनों की बैंड बजा रखी है. आर्मी चीफ मुनीर हों या प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सबकी बीएलए ने नींद उड़ा रखी है. पाकिस्तान में सुरक्षा ताक पर है. कहीं भी बीएलए के लड़ाके या अज्ञात बंदूकधारी किसी को टपका दे रहे. पाकिस्तानी आर्मी से चीजें कंट्रोल नहीं हो रहीं. पाकिस्तान की सुरक्षा की जिम्मेदारी आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर पर है. मगर अब वह पाक को सेफ करने के बदले ब्लेम गेम वाला खेल खेलने लगे हैं. यह डर्टी गेम ठीक वैसा ही है, जैसा कभी परवेज मुशर्रफ ने नवाज शरीफ संग खेला था.
दरअसल, पाकिस्तान में तख्तापलट की आहट सुनाई देने लगी है. बीएलए की वजह से पाकिस्तान की आर्मी और शहबाज सरकार आमने-सामने है. जनरल असीम मुनीर अब पाकिस्तान में आय दिन हो रही घटनाओं के पीछे सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. वह हालिया घटनाओं को लेकर शहबाज शरीफ को घेर रहे हैं. पाकिस्तान जिस आतंकवाद की आग में जल रहा है, उससे उठ रहा धुआं तो पाकिस्तान में तख्तापलट की ओर ही इशारा कर रहा है. इसका सबूत खुद आर्मी चीफ मुनीर देते नजर आ रहे हैं. वह बीएलए के बहाने शहबाज शरीफ पर निशाना साध रहे हैं और उनकी रकार को कमजोर शासन बता रहे हैं.
शहबाज को यूं ही नहीं घेर रहे मुनीर
जी हां, पाकिस्तान के चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल असीम मुनीर ने हालिया घटनाओं को लेकर शहबाज शरीफ सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने पाकिस्तान में सुरक्षा की गिरावट के लिए राजनेताओं को दोषी ठहराया. संयुक्त संसदीय समिति को सुरक्षा ब्रीफिंग में उन्होंने साफ-साफ कहा कि उग्रवाद से लड़ने के लिए बेहतर प्रशासन की जरूरत है और पाकिस्तान को एक कठोर राज्य बनाने पर जोर दिया है. उन्होंने सवाल किया कि पाकिस्तान कब तक कमजोर शासन के कारण लोगों की जान कुर्बान करता रहेगा. मुनीर की यह बात इस बात का इशारा करती है कि उनकी नजर में शहबाज शरीफ सरकार बेहतर नहीं है और वह कमजोर है.
क्यों तख्तापलट के मिल रहे संकेत
अब सवाल है कि आखिर पाकिस्तान की आवाम को मुनीर यह क्या संदेश दे रहे हैं? यही न कि शहबाज से देश संभल नहीं रहा. उग्रवाद और आतंरिक आतंकवाद से लड़ने में उनकी सरकार सक्षम नहीं है. पाकिस्तान को मजबूत नेतृत्व की जरूरत है. सेना ही पाकिस्तान को कठोर राज्य बना पाएगी. दरअसल, बलूचों को मोहरा बनाकर आर्मी चीफ मुनीर पाकिस्तान में तख्तापलट की पटकथा लिख रहे हैं. पाकिस्तान में भारत की तरह ही लोकतंत्र का शासन है. लोकतंत्र में सरकार अपना काम करती है. पाकिस्तानी आर्मी का काम है देश की सुरक्षा करना. अपने काम पर फोकस करने के बजाय मुनीर अब सरकार को ज्ञान और नसीहत दे रहे हैं. ऐसे में उनकी मंशा पर क्यों न सवाल उठे. ऐसा लग रहा है कि वह वही गंदा खेल खेलने में जुट गए हैं, जो कभी दशकों पहले परवेज मुशर्रफ ने शहबाज शरीफ के भाई नवाज शरीफ के साथ खेला था.
मुशर्रफ वाला गेम खेल रहे मुनीर
जी हां, मौजूदा प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ पर भी अपने भाई जैसा हाल होने का खतरा मंडरा रहा है. अब मन में यह सवाल उठता है कि आखिर परवेज मुशर्रफ ने नवाज शरीफ के साथ क्या किया था. दरअसल, जैसे मौजूदा आर्मी चीफ मुनीर बलोचों से जंग और पाक में हो रहे हमलों का ठीकरा शहबाज शरीफ पर फोड़ रहे हैं, ठीक उसी तरह आज से 25 साल पहले परवेज मुशर्रफ ने कारगिल हार का ठीकरा नवाज शरीफ फर फोड़ा था.
क्या था नवाज संग मुशर्रफ का कांड
जी हां, परवेज मुशर्रफ ने नवाज शरीफ को 12 अक्टूबर 1999 को एक सैन्य तख्तापलट के जरिए सत्ता से बेदखल किया था. उस समय मुशर्रफ पाकिस्तान के सेना प्रमुख थे. कारगिल युद्ध में पाकिस्तान की हार के बाद यह हुआ था. जबकि कारगिल युद्ध के मास्टरमाइंड और रणनीतिकार खुद परवेज मुशर्रफ थे. उन्होंने ही पाक की ओर से कारगिल युद्ध (मई-जुलाई 1999) में अहम भूमिका थी. उनके नेतृत्व में पाकिस्तानी सेना और उत्तरी लाइट इन्फैंट्री ने नियंत्रण रेखा (LoC) पार कर कारगिल क्षेत्र में घुसपैठ की थी. नवाज शरीफ को इसकी भनकर नहीं थी. कहते हैं कि नवाज शरीफ को इसके बारे में तब पता चला जब अटल बिहारी वाजपेयी ने उनसे संपर्क किया था.
तुर्की में राष्ट्रपति एर्दोगन के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन, पुलिस ने किया बल प्रयोग
22 Mar, 2025 12:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तुर्की में इस वक्त सबकुछ ठीक ठाक नहीं चल रहा है. राष्ट्रपति रेसेप तैयिप एर्दोगन के खिलाफ देश में हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं. राष्ट्रपति द्वारा इस्तांबुलए के मेयर इमामोग्लू को अरेस्ट करने का आदेश देने के बाद हालात बेकाबू होते नजर आ रहे हैं. ऐसे में तुर्की के खलीफा यानी एर्दोगन को भी अपनी कुर्सी जाने का डर सताने लगा है. शुक्रवार को तुर्की के कई शहरों में प्रदर्शन हिंसक हो गए. इमामोग्लू को राष्ट्रपति चुनाव के दौरान एर्दोगन का प्रतिद्वंदी माना जा रहा है. लोगों ने इस्तांबुल के मेयर के समर्थन में सड़कों पर रैली निकाली. इस्तांबुल में पुलिस ने सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को पीछे धकेलने के लिए मिर्च स्प्रे, आंसू गैस और रबर की गोलियों का इस्तेमाल किया. इतना ही नहीं प्रदर्शनकारियों ने शहर के ऐतिहासिक वाटर-ब्रिज के सामने बैरिकेड को तोड़ने की कोशिश की.
मेयर पर करप्शन का आरोप
पुलिस पर पत्थरबाजी की गई और अन्य वस्तुएं तोड़ी गई. हजारों लोगों ने कई अन्य शहरों में एर्दोगन सरकार से इस्तीफे की मांग करते हुए मार्च निकाला. एसोसिएटिड प्रेस की रिपोर्ट में तुर्की के गृह मंत्री अली येरलिकाया के हवाले से बताया गया कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान देशभर में कम से कम 97 लोगों को हिरासत में लिया गया. मेयर एकरेम इमामोग्लू को बुधवार सुबह उनके निवास पर छापेमारी के दौरान भ्रष्टाचार और आतंकवाद से जुड़े आरोपों के कारण अरेस्ट किया गया था. इसके बाद विपक्षी पार्टी के कई अन्य नेताओं को भी हिरासत में लिया गया.
100 से ज्यादा हिरासत में
बुधवार को मुख्य विपक्षी दल रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टी (CHP) द्वारा प्राथमिक चुनाव आयोजित होना था. इससे पहले ही विपक्षी नेता को उठा लिया गया. राज्य द्वारा संचालित समाचार एजेंसी अनादोलु के अनुसार, बुधवार को मेयर इमामोग्लू से जुड़े लगभग 100 अन्य लोगों को भी हिरासत में लेने के आदेश जारी किए गए. इनमें उनके प्रेस सलाहकार मूरत ओंगुन भी शामिल हैं. हिरासत में लिए गए लोगों में इस्तांबुल जिले के निर्वाचित मेयर रेसुल इमराह सहान और मूरत कालिक भी शामिल हैं.
विपक्षी नेता के वीडियो के बाद शुरू हुआ प्रदर्शन
विपक्षी पार्टी ने राष्ट्रपति रेसेप तैयिप एर्दोगन पर तनाशाही का आरोप लगाया है. इमामोग्लू ने अरेस्ट से पहले एक वीडियो संदेश जारी किय, जिसमें कहा गया कि मुझे यह कहते हुए दुःख हो रहा है कि मुट्ठी भर लोग जनता की इच्छा को चुराने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने प्रिय पुलिस, सुरक्षा बलों को इस गलत काम में शामिल करने के लिए भेजा है. सैकड़ों पुलिस अधिकारियों को मेरे घर के दरवाजे पर भेजा गया है.
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद बढ़ा, भारत ने चीन के नए जिलों पर कड़ी आपत्ति जताई
22 Mar, 2025 12:28 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चीन अपनी चालबाजियों से बाज नहीं आता. भारत से सटी सीमाओं पर आए दिन कुछ न कुछ कारिस्तानी दिखाता ही रहता है. अब उसने लद्दाख से सटे सीमावर्ती इलाके में दो नए जिलों की स्थापना का ऐलान किया है. चीन के इस ऐलान पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है. केंद्र सरकार ने शुक्रवार को संसद में जानकारी दी कि इस मुद्दे पर कूटनीतिक माध्यमों से चीन के खिलाफ औपचारिक विरोध दर्ज कराया गया है.
विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में कहा, 'भारत सरकार ने कभी भी इस क्षेत्र में भारतीय भूभाग पर चीन के अवैध कब्जे को स्वीकार नहीं किया है. इन नए जिलों का निर्माण भारत की संप्रभुता पर हमारे लंबे और स्पष्ट रुख को प्रभावित नहीं करेगा, न ही चीन के अवैध और जबरन कब्जे को कोई वैधता देगा.'
संसद में सरकार से यह सवाल पूछा गया था कि क्या उसे चीन द्वारा होटान प्रीफेक्चर में दो नए जिले बनाने की जानकारी है, जिसमें लद्दाख के भारतीय क्षेत्र का हिस्सा शामिल किया गया है. इसके अलावा, इस स्थिति से निपटने के लिए उठाए गए रणनीतिक और कूटनीतिक कदमों के बारे में भी जानकारी मांगी गई थी. मंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि सरकार इस घोषणा से पूरी तरह अवगत है और वह चीन की ओर से सीमावर्ती क्षेत्रों में किए जा रहे बुनियादी ढांचे के विकास पर नजर रखे हुए है. उन्होंने कहा, 'भारत सरकार सीमा क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान देती है. ताकि न केवल इन क्षेत्रों का आर्थिक विकास हो, बल्कि भारत की रणनीतिक और सुरक्षा आवश्यकताओं को भी पूरा किया जा सके.'
मंत्रालय के अनुसार, 2014 से 2024 के बीच सीमा अवसंरचना के लिए बजट आवंटन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (BRO) का खर्च पिछले दशक की तुलना में तीन गुना बढ़ गया है. सड़क नेटवर्क, पुलों और सुरंगों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे स्थानीय समुदायों की कनेक्टिविटी बेहतर हुई है और सशस्त्र बलों के लिए लॉजिस्टिक सपोर्ट मजबूत हुआ है. सरकार ने स्पष्ट किया कि वह भारत की सुरक्षा से जुड़े हर घटनाक्रम पर करीबी नजर रखे हुए है और देश की संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगी.
एलन मस्क की ट्रांस बेटी विवियन जेना विल्सन का इंटरव्यू, बताया पिता से रिश्ते का हाल
22 Mar, 2025 12:20 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
उद्योगपति एलन मस्क अक्सर सुर्खियों में रहते हैं. हाल ही में एलन मस्क की ट्रांस बेटी विवियन जेना विल्सन ने एक इंटरव्यू दिया है. अपने इस इंटरव्यू में विवियन ने बताया कि उनके पिता मस्क से कैसे रिश्ते हैं. मस्क इस समय परिवार को लेकर विवादों में घिरे हुए हैं, लेखिका एशले सेंट क्लेयर ने इस बात का खुलासा किया है कि उन्होंने साल 2024 में मस्क के बच्चे को जन्म दिया है. इसी को लेकर जब विवियन से उनके भाई-बहन को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, मुझे खुद नहीं पता है कि मेरे कितने भाई-बहन हैं.
विवियन विल्सन, एलन मस्क और एक्स पत्नी जस्टिन विल्सन की पहली संतान हैं. विवियन का जन्म 2004 में हुआ था और वो पैदाइश के समय एक लड़का थीं. उनका नाम जेवियर मस्क रखा गया था, लेकिन साल 2022 में विवियन ने अपने ट्रांस होने का ऐलान किया और कानूनी तौर पर अपना जेंडर और नाम भी बदल लिया.
पिता मस्क से कैसा रिश्ता?
विवियन इस समय जापान के टोक्यो में रहती हैं. टीन वोग (Teen Vogue) के साथ एक इंटरव्यू में विवियन ने कई बड़े खुलासे किए हैं. विवियन की उम्र 20 साल है. विवियन का पिता मस्क से ज्यादा करीबी रिश्ता नहीं है. उन्होंने इंटरव्यू में कहा कि वो आर्थिक रूप से एलन मस्क पर निर्भर नहीं है. उन्होंने कहा कि उन्होंने पिछले 5 सालों में मस्क से बात नहीं की है.
“मैं नहीं जानती मेरे कितने भाई-बहन हैं”
एलन मस्क और उनके बच्चों को लेकर विवियन ने कमेंट किया. उन्होंने कहा, मैं कहूंगी कि मैं सच में नहीं जानती कि मेरे कितने भाई-बहन हैं. साथ ही उन्होंने कहा कि उनको अपने ही परिवार के बारे में कोई जानकारी नहीं है. एलन मस्क के बच्चे होने की खबर जैसे पूरी दुनिया को होती है, वैसे ही उनको भी सोशल मीडिया और न्यूज के जरिए होती है.
अपने पिता के दुनिया के सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में से एक होने के बावजूद, विवियन उन से कोई रिश्ता नहीं रखना चाहती है. उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि उन्हें लगातार बढ़ते मस्क फैमिली ट्री के साथ रिश्ते रखने में उनके बारे में जानकारी रखने में कोई दिलचस्पी नहीं है.
विवियन ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स को छोड़ा
बेटी विवियन और पिता मस्क के रिश्तों में इतनी दूरियां है कि मस्क के सोशल मीडिया फीड से उनके बारी में विवियन जानकारी हासिल करती हैं. विवियन ने न सिर्फ अमेरिका छोड़ दिया है, बल्कि उसने अपने पिता के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स को भी छोड़ दिया है और थ्रेड्स और ब्लूस्की पर अपने पिता की निंदा की है. विवियन ने कहा, मैं न्यूज में उनके बारे में चीजें देखती हूं और सोचती हूं कि ‘यह बकवास है, मुझे शायद इसके बारे में पोस्ट करना चाहिए और इसकी निंदा करनी चाहिए,’ जो मैंने कई बार किया है.
इंटरव्यू में, विवियन ने खुलासा किया कि वो अपने पिता से नहीं डरती हैं, जिनके पास अब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन में उनकी भूमिका के कारण बहुत अधिक ताकत है. उन्होंने कहा, मुझे इस आदमी से क्यों डरना चाहिए? क्योंकि वो अमीर है? ओह, नहीं, मैं कांप रही हूं, मैं इस बात की परवाह नहीं करती कि किसी के पास कितना पैसा है. वो ट्विटर के मालिक हैं, ठीक है उन्हें इस बात की बधाई हो.
अपने राजनीतिक विचार सामने रखते हुए विवियन ने कहा, मैं मुफ्त हेल्थ केयर में विश्वास करती हूं. मेरा मानना है कि खाना, घर और पानी मानव अधिकार हैं. मेरा मानना है कि पैसों की असमानता अमेरिका की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है, खासकर हमारी पीढ़ी की. विवियन ने कहा कि वह एक वामपंथी हैं.
पारिवारिक विवादों में घिरे मस्क
जहां एक तरफ विवियन ने कहा है कि वो खुद नहीं जानती हैं कि उन के कितने भाई-बहन है. वहीं, दूसरी तरफ हाल ही में लेखिका एशले सेंट क्लेयर ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर दावा किया है कि उन्होंने साल 2024 में मस्क के बच्चे को जन्म दिया था. हालांकि, अब वो इसको लेकर मस्क पर कानूनी कार्रवाई कर रही हैं, उन्होंने मस्क पर अनुपस्थित पिता होने और एकमात्र हिरासत के लिए आवेदन करने के बाद वित्तीय सहायता में कटौती करने का आरोप लगाया है.
तुर्की में इस्तांबुल मेयर की गिरफ्तारी के बाद सड़कों पर प्रदर्शन, सरकार की नींद उड़ गई
22 Mar, 2025 12:11 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुस्लिम देश तुर्की में इस समय सड़कों पर जनता का प्रदर्शन देखने को मिल रहा है. प्रदर्शन के कारण सरकार की नींद उड़ चुकी है. इस प्रदर्शन और सरकार की नींद उड़ने की वजह एक मेयर की गिरफ्तारी को माना जा रहा है. तुर्की पुलिस ने बुधवार को इस्तांबुल के मेयर इक्रेम इमामोगलू को गिरफ्तार किया, वह राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी हैं. उन्हें कथित भ्रष्टाचार और आतंकी संबंधों की जांच के तहत गिरफ्तार किया गया है.
इमामोग्लू की गिरफ्तारी के बाद से ही देश भर में विरोध देखने को मिल रहा है. हजारों की संख्या में लोग सड़क पर उतर कर सरकार के खिलाफ विरोध कर रहे हैं. देश में हालात अब इतने बिगड़ गए हैं कि तुर्की के प्रशासन ने पिछले दिनों देश में अगले 4 दिनों तक किसी भी तरह के प्रदर्शन करने पर प्रतिबंध लगाया था.
शुक्रवार देर रात इस्तांबुल में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए और रेसेप तैयप एर्दोगनकी चेतावनी को दरकिनार करते हुए जबरदस्त प्रदर्शन किया. ऐसा कहा जा रहा है कि इस तरह का प्रदर्शन तुर्की में एक दशक बाद देखने को मिल रहा है.
क्या है तुर्की का हालिया विवाद?
तुर्की में विपक्षी नेता ने एर्दोगनपर सवाल उठा रहे हैं कि वे अपनी विपक्षी नेताओं से घबरा गए हैं, इसलिए उन्होंने इक्रेम इमामोगलू को गिरफ्तार किया है. इक्रेम इस समय इस्तांबुल के मेयर हैं और विपक्ष के सबसे मजबूत चेहरे हैं. इकराम की पार्टी सीपीसी 23 मार्च को एक कांग्रेस करने वाली थी, जिसमें उन्हें विपक्ष की और से राष्ट्रपति का उम्मीदवार बनाया जाना तय था. ऐसे में उनकी गिरफ्तारी पर सवाल उठाए जा रहे हैं.
तुर्की में भी 2028 में चुनाव हैं, इक्रेम इमामोअलु की लोकप्रियता उनके लिए भविष्य में चुनौती हो सकती है, इसलिए अब देखना होगा कि रएर्दोगन इस बार सत्ता में काबिज रह पाएंगे या नहीं.
देश में सत्ता विरोधी लहर तेज
पूरे देश में एर्दोगनके दो दशकों से भी ज्यादा लंबे शासन के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर तेज हो रही है, तुर्की के लोकप्रिय और दो बार के मेयर इमामोग्लू, को अगले कुछ दिनों में उनके रिपब्लिकन पीपल्स पार्टी (CHP) के आधिकारिक राष्ट्रपति उम्मीदवार के रूप में घोषित किया जाना था. इमामोग्लू कई सर्वेक्षणों में एर्दोगन से आगे चल रहे हैं. ऐसे में उनकी गिरफ्तारी के कारण भारी विरोध देखने को मिल रहा है.
तुर्की में अगला राष्ट्रपति चुनाव 2028 में होना है, लेकिन एर्दोगन पहले ही राष्ट्रपति के रूप में अपने दो बार के कार्यकाल की सीमा तक पहुंच चुके हैं. कई लोग इस गिरफ्तारी को एक लोकप्रिय विपक्षी नेता और एर्दोगन के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी को अगले राष्ट्रपति पद की दौड़ में हटाने के लिए राजनीतिक रूप से प्रेरित प्रयास के रूप में देखते हैं.
देश में फिर 2013 जैसा विरोध प्रदर्शन
मीडिया की माने तो भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर इमामोग्लू से पुलिस ने चार घंटे तक पूछताछ की, जिसके दौरान उन्होंने सभी आरोपों से इनकार किया. शनिवार शाम को अभियोजकों की तरफ से पूछताछ के लिए उन्हें न्यायालय में ट्रांसफर किए जाने की उम्मीद थी. उनकी गिरफ्तारी ने 2013 के बाद से सबसे बड़े विरोध प्रदर्शनों को जन्म दिया है, जब तुर्की में बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शन हुए थे, जिसमें आठ लोग मारे गए थे.
खुद फंस गए रेसेप तैयप एर्दोगन?
तुर्की के खलीफा रेसेप तैयप एर्दोगन पिछले कुछ सालों से दुनिया के अन्य देशों की राजनीति में दखल देते नजर आए हैं. कई बार खलीफा एर्दोगन अपने आप को मुस्लिम वर्ल्ड का लीडर साबित करने की कोशिश भी की है. गाजा हो या फिर सीरिया हर देश के मसले पर उन्होंने दखल देने की कोशिश की है. इस बीच खुद को बड़ा दिखाने के चक्कर में खलीफा खुद मुश्किलों में घिरते नजर आ रहे हैं. यही कारण है कि वे अपने विपक्षी नेताओं और उनको टक्कर देने वाले हर नेता को गिरफ्तार करवा रहे हैं.
ऐसा करने के पीछे का साफ संदेश है कि वे किसी को भी अपने सामने खड़ा नहीं होने देना चाहते हैं. उनको डर है अगर ऐसे हालात रहे तो आने वाले समय में उन्हें अपनी कुर्सी से भी हाथ धोना पड़ सकता है. इस बात को और बल इसलिए भी मिल रहा है कि क्योंकि जनता अब बगावत पर उतर आई है. हालांकि यह पहली घटना नहीं है जब एर्दोगान सरकार के विरोध-प्रदर्शनों का सामना करना पड़ा है.
तुर्की आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा- एर्दोगान
विपक्षी नेता ओजगुर ओज़ेल ने कहा कि यह कोई सीएचपी रैली नहीं है, यहां सभी दलों के लोग हैं और वे मेयर इमामोग्लू के साथ एकजुटता दिखाने और लोकतंत्र के लिए खड़े होने आए हैं. उन्होंने कहा कि एर्दोगान जुडीशरी की मदद से इमामोग्लू का हाथ मरोड़ना चाहते हैं. वह इसे एक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं.
जैसे-जैसे प्रोटेस्ट बढ़ा है तो एर्दोगान का इस मामले में बयान आया है. उन्होंने कहा है कि तुर्की गलियों के आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा.
बांगलादेश में तख्ता पलट विरोध प्रदर्शनों में विदेशी फंडिंग का खुलासा, क्रिप्टोकरेंसी में भारी निवेश
22 Mar, 2025 12:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बांग्लादेश में तख्ता पलट के दौरान हुए विरोध प्रदर्शनों के पीछे विदेशी फंडिंग की भूमिका सामने आई है. प्रदर्शनकारी नेताओं ने बड़ी मात्रा में क्रिप्टोकरेंसी में निवेश किया है, जिससे मनी लॉन्ड्रिंग का शक पैदा हुआ है. मीडिया रिपोर्ट में बताया गया कि इस आंदोलन के लिए विदेशों से फंडिग की गई थी, जिसके बाद कई नेताओं ने भारी मात्रा में बिटक्वाइन में निवेश किया है.
एडीएसएम (ADSM) लीडर और ‘जातीय नागरिक कमेटी’ के संस्थापक सरजिस आलम ने 7.65 मिलियन डॉलर (65 करोड़ रुपये) क्रिप्टोकरेंसी टेथर (Tether) में निवेश किए. सामान्य परिवार से आने वाले आलम का इतनी बड़ी संख्या में निवेश करना विदेशी फंडिंग की ओर इशारा कर रहा है.
अंतरिम सरकार में आईटी एडवाइजरी और एडीएसएम कोऑर्डिनेटर नाहिद इस्लाम ने 204.64 बिटकॉइन (BTC) का निवेश किया है, जिसकी कीमत 17.14 मिलियन डॉलर (147 करोड़ रुपये) है. इस भारी निवेश ने उनके पैसे के स्रोत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इन नेताओं के अलावा भी कई छात्र नेताओं ने भी निवेश किया है.
विदेशी फंड से हुआ था बांग्लादेश में आंदोलन
अंतरिम सरकार के प्रेस सचिव और पत्रकार शफीकुल आलम के पास 93.06 बिटकॉइन हैं. इसकी कीमत 10 मिलियन डॉलर यानी 86 करोड़ रुपए है. इससे यह स्पष्ट होता है कि आंदोलन से जुड़े लोगों को विदेश से फंड प्राप्त हुआ है. यह खुलासा हुआ है कि बांग्लादेश में नेतृत्व परिवर्तन की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को विदेशी धन से वित्त पोषित किया गया था, जिसके बाद ही बांग्लादेश में तख्ता पलट को अंजाम दिया गया. बांग्लादेश के जिस आंदोलन को कभी छात्र-नेतृत्व वाले बदलाव का प्रयास माना जा रहा था, उस पर अब विदेशी फंडिंग के आरोप लग रहे हैं.
तख्तापलट के बाद आंदोलन शांत
पिछले साल अगस्त में बांग्लादेश में छात्रों ने आरक्षण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू किया था. उस आंदोलन के कारण तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा था. उनकी सरकार के पतन के बाद, आंदोलन धीरे-धीरे बंद हो गया. बांग्लादेश का नेतृत्व अब अंतरिम सरकार के हाथों में है. उम्मीद थी कि इस बीच चुनाव हो जाएंगे और नई लोकतांत्रिक सरकार सत्ता में आएगी, लेकिन ऐसा अभी तक नहीं हुआ है. जो छात्र सरकार को उखाड़ फेंकना चाहते थे, उन्होंने एक राजनीतिक पार्टी बना ली है. यही कारण है कि कई तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं.
बांग्लादेश में तख्तापलट की साजिश, सेना और सरकार के बीच बढ़ी टकराव की स्थिति
22 Mar, 2025 11:50 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बांग्लादेश में सेना ने शुक्रवार को 9वीं डिवीजन के सैनिकों को बड़ी संख्या में बख्तरबंद वाहनों में ढाका में इकट्ठा होने का आदेश जारी किया है. हर ब्रिगेड से 100 सैनिक तैनात हैं. बांग्लादेश सेना और छात्रों के बीच तनाव के बीच यह कदम उठाया गया है. ऐसे में इस बात के कयास काफी ज्यादा है कि आर्मी चीफ सभी गलतियों का ठीकरा मोहम्मद यूनुस पर फोड़ते हुए देश में अपनी स्थिति फिर से मजबूत कर सकते हैं.
शेख हसीना सरकार का तख्तापलट होने के बाद बांग्लादेश में नई सरकार बनने तक मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का चीफ बनाया गया. माना जाने लगा कि यूनुस बांग्लादेश की डूबती नैया को पार लगाएंगे. लेकिन उनके कार्यकाल के दौरान ना सिर्फ भारत से रिश्ते खराब हुए बल्कि अमेरिका के साथ भी स्थितियां ज्यादा दिन अच्छी नहीं रह पाई. बांग्लादेश की सुरक्षा व्यवस्था के सूत्रों ने बताया कि सेना को देश पर अपनी पकड़ मजबूत करने में कुछ और दिन लगेंगे. जिसके चलते एहतियातन कदम उठाए गए हैं.
क्यों घबराई है बांग्लादेशी सेना?
बांग्लादेश सेना की 10 डिवीजन हैं. 9वीं इन्फैंट्री डिवीजन सावर में स्थित है, जबकि घाटाइल में फॉर्मेशन 19वीं इन्फैंट्री डिवीजन तैनात है. बांग्लादेश की सेना के डर की वजह कई हैं. ग्रामीण विकास और सहकारिता मंत्रालय के सलाहकार आसिफ महमूद शाजिब भुइयां का हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि सेना प्रमुख जनरल वकार-उज़-ज़मान की इच्छा नहीं थी, कि नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस को अंतरिम प्राधिकरण का चीफ बनाया जाए. लेकिन उन्होंने सहमति दी. इससे पहले एक छात्र नेता हसनात अब्दुल्ला ने 11 मार्च को जनरल ज़मान के साथ एक गुप्त बैठक के बाद सार्वजनिक रूप से सेना के खिलाफ आंदोलन शुरू करने की धमकी दी थी. ऐसे में आर्मी चीफ सरकार से नाराज हैं.
छात्र आंदोलन की आशंका से सेना में खौंफ
बांग्लादेश की सेना को भुइयां के खुलासे और अब्दुल्ला की फेसबुक पोस्ट के बाद नया छात्र आंदोलन खड़ा होने का डर सता रहा है. यह अभी स्पष्ट नहीं है कि सेना कठोर कदम उठाएगी या नहीं. यूनुस 26 मार्च को तीन दिवसीय चीन यात्रा पर जाने वाले हैं. माना जा रहा है कि कानून और व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने पर यूनुस अपनी चीन यात्रा रद्द कर सकते हैं. बांग्लादेश में अधिकांश लोग 11 मार्च की बैठक के विवरण से हैरान थे, जो सेना प्रमुख को खराब रोशनी में दिखाने और एक असफल आंदोलन को पुनर्जीवित करने के प्रयास के रूप में सार्वजनिक किए गए थे.
यरूशलम में हवाई हमले से अलर्ट करने बजने लगे सायरन
21 Mar, 2025 09:22 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेल अवीव। इजराइली सेना ने कहा कि यमन से मिसाइल दागे जाने के बाद मध्य यरूशलम और इजराइल के अन्य हिस्सों में हवाई हमलों के प्रति सचेत करने वाले सायरन बज उठे। इस मिसाइल हमले से कुछ घंटे पहले इजराइली सेना ने हूती विद्रोहियों की ओर से दागी मिसाइल को मार गिराने का दावा किया था। ईरान के समर्थन वाले हूती विद्रोहियों ने इजराइल और हमास के बीच अस्थाई संघर्ष-विराम के इस सप्ताह खत्म होने के बाद इजराइल पर फिर हमले शुरू कर दिए हैं।
अनिल विज ने केजरीवाल पर तंज करते हुए कहा 'जहां-जहां पैर पड़े संतन के, वहीं-वहीं बंटाधार'
21 Mar, 2025 08:09 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा पंजाब उप चुनाव को लेकर की जा रही बयानबाजी पर तंज कसते हुए कहा कि जहां-जहां पैर पड़े संतन के वहीं-वहीं बंटाधार. शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए विज ने कहा कि केजरीवाल का दिल्ली में बंटाधार हो चुका है और अब पंजाब का बंटाधार करने के लिए केजरीवाल पंजाब में विराजमान हो गए हैं. उन्हें नहीं लगता कि भगवंत मान की सरकार पंजाब में ज्यादा दिन रह पाएगी.
विधानसभा में कैबिनेट मंत्री अनिल विज और कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बीच तीखी तकरार को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि हुड्डा बिना आधार के मुद्दे उठाते हैं, पढ़कर नहीं आते लेकिन उन्हें जवाब तो देना पड़ेगा.
उन्होंने कहा कि भूपेंद्र हुड्डा डेमोक्रेसी की प्रथा में विश्वास नहीं रखते, यही कारण है कि जब हम विपक्ष में थे, वह तब भी किसी को बोलने नहीं देते थे और उठा उठा कर सदस्यों को बाहर फेंकते थे.
कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर उठाया सवाल
विपक्ष का नेता न चुनने पर कैबिनेट मंत्री अनिल विज बोले, यह कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर प्रश्न चिह्न है कि वह फैसला लेने में सक्षम नहीं है.
कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने कांग्रेस द्वारा अब तक हरियाणा में विपक्ष का नेता न चुने जाने को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर प्रश्न चिह्न है कि वह फैसला लेने में सक्षम नहीं है. यही कारण है कि वह छह महीने में यह भी फैसला नहीं ले पाए कि हरियाणा विधानसभा में उनका लीडर कौन होगा?
उन्होंने कहा कि जिस तरीके से इन्हें हर प्रदेश से उखाड़ कर फेंका जा रहा है, उससे उनके फैसला लेने की क्षमता छिन्नभिन्न हो गई है. यही कारण है कि यह फैसला नहीं ले पा रहे और पर्याप्त संख्या होने के बावजूद भी सदन को विपक्ष का नेता नहीं मिला.
पहली बार इतना बेहतरीन बजट पेश किया गया है: विज
हरियाणा की भाजपा हाईकमान ने प्रदेश के मंत्रियों को अपने-अपने जिलों में प्रेस कांफ्रेंस करने के लिए कहा है. इस पर जब मंत्री अनिल विज से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि हरियाणा में पहली बार इतना बेहतरीन बजट पेश किया गया है, जिसमें सर्वांगीण विकास को मध्य नजर रखते हुए 2 लाख करोड़ से ज्यादा का बजट पेश किया गया है.
इस दौरान विज ने जमकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में इससे बेहतरीन बजट पेश नहीं हो सकता है.
पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था फेल
पश्चिम बंगाल में सड़कों पर भारी मात्रा में आधार कार्ड मिलने के बाद से राजनीतिक गरमा गई है. इसे लेकर हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार को घेरते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था पूरी तरह से फेल है और वहां हर तरह के गैरकानूनी काम होते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल की सरकार किसी भी व्यवस्था को नहीं मानती है.
कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने कहा कि पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश से आने वाले लोगों की भी बहुत बड़ी संख्या है. पश्चिम बंगाल में हर तरह की अनियमितता हो रही है. विज ने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता इस समय त्राहि माम, त्राहि माम कर रही है और जब भी पश्चिम बंगाल में चुनाव आएंगे पश्चिम बंगाल की जनता इस सरकार को उखाड़ कर फेंक देगी और वहां पर भी प्रजातांत्रिक भारतीय जनता पार्टी की सरकार को बनाएगी.
दुबई में हाई-प्रोफाइल पार्टी के बाद यूक्रेनी मॉडल की हालत गंभीर, अस्पताल में भर्ती
21 Mar, 2025 07:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दुबई में एक हाई-प्रोफाइल पार्टी में शामिल होने के बाद एक यूक्रेनी मॉडल की हालत गंभीर हो गई. उसे सड़क किनारे टूटी हुई रीढ़ की हड्डी, हाथ और पैर के साथ पड़ा पाया गया. 20 साल की इस OnlyFans मॉडल की हालत इतनी खराब थी कि वह बोल भी नहीं पा रही थी. बताया जा रहा है कि वह अरब शेखों के एक रहस्यमयी पोर्टा पॉटी पार्टी में शामिल हुई थी, जहां अमीर लोगों की घिनौनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए महिलाओं का इस्तेमाल किया जाता है.
यह मामला तब सामने आया जब मॉडल 8 दिनों तक लापता रही. उसने अपने दोस्तों को बताया था कि उसे दुबई के एक होटल में पार्टी के लिए आमंत्रित किया गया है. इसके बाद से उसका कोई पता नहीं चला. मॉडल के परिवारवालों और दोस्तों ने उसकी तलाश शुरू की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला. जब वह सड़क किनारे गंभीर हालत में मिली, तो उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया. उसकी मां ने बताया कि मॉडल के पास न तो उसके दस्तावेज थे, न फोन और न ही कोई और सामान.
क्रूरता की शिकार बनी मॉडल?
इस मॉडल को एक सीक्रेट पार्टी में ले जाया गया, जहां वह शेखों और प्रभावशाली लोगों के बीच फंस गई. ऐसी आशंका जताई जा रही है कि उसे कई दिनों तक शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना दी गई, फिर उसे मरने के लिए सड़क पर फेंक दिया गया. दुबई में होने वाली पोर्टा पॉटी पार्टियों के बारे में कहा जाता है कि इसमें सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स और मॉडल्स को मोटी रकम देकर बुलाया जाता है, फिर उनसे अमानवीय काम करवाए जाते हैं.
चार सर्जरी के बाद भी हालत गंभीर
इस दर्दनाक घटना के बाद मॉडल की चार बड़ी सर्जरी कराई गई, लेकिन अब भी उसकी हालत गंभीर बनी हुई है. डॉक्टरों का कहना है कि उसके ठीक होने में लंबा समय लग सकता है. इस बीच रूस की एक वकील, कट्या गॉर्डन ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाया और मॉडल्स को चेतावनी दी कि वे इस तरह के आयोजनों से दूर रहें. उन्होंने कहा कि दुबई में ऐसी पार्टियों का चलन बढ़ता जा रहा है, जहां महिलाओं को यातनाएं दी जाती हैं और उनकी जिंदगी खतरे में डाल दी जाती है.
महिलाओं को चेतावनी
इस घटना के बाद कई संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मॉडल्स और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स को ऐसे खतरनाक ऑफर्स से बचने की सलाह दी है. यह पहली बार नहीं है जब पोर्टा पॉटी पार्टीज का मामला सामने आया हो. इससे पहले भी कई महिलाओं के लापता होने और प्रताड़ित किए जाने की घटनाएं रिपोर्ट की गई हैं. वकील गॉर्डन ने कहा कि लड़कियों, महिलाओं से मेरी अपील है सिर्फ पैसों के लिए ऐसी पार्टियों में मत जाओ, यह तुम्हारी जिंदगी बर्बाद कर सकता है.
दोस्तों की उम्मीदें बनी हुई हैं
मॉडल के परिवारवाले और दोस्त उसकी जल्द से जल्द ठीक होने की दुआ कर रहे हैं. एक दोस्त ने कहा, ‘हम सभी उम्मीद कर रहे हैं कि वह ठीक हो जाए. हम उन सभी का धन्यवाद करते हैं, जिन्होंने उसे ढूंढने और जानकारी देने में मदद की.’ हालांकि, यह मामला अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है और दुबई में होने वाली इन गुप्त पार्टियों की सच्चाई को उजागर करने की मांग तेज हो रही है.
दुबई में गुरु नानक दरबार गुरुद्वारे में हुआ अंतरधार्मिक रोजा इफ्तार का आयोजन
21 Mar, 2025 06:55 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बई में आपसी भाईचारे की एक अनूठी मिसाल देखने को मिली. गुरु नानक दरबार गुरुद्वारे में इंटरफेथ इफ्तार (अंतरधार्मिक रोजा इफ्तार) का आयोजन किया गया. इस इफ्तार में केवल शाकाहारी भोजन परोसा गया और इसमें कई धर्मों से जुड़े 275 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया. इस आयोजन का उद्देश्य सांप्रदायिक सौहार्द और शांति का संदेश देना था.
यह इफ्तार खास इसलिए था क्योंकि इसमें सभी धर्मों के लोग एकसाथ शामिल हुए. आयोजन स्थल में प्रवेश करने से पहले सभी लोगों ने अपने जूते बाहर उतारे और सिर को ढका. इस आयोजन में सरकारी अधिकारी, धार्मिक नेता, राजनयिक और अन्य प्रतिष्ठित व्यक्ति शामिल हुए. गुरुद्वारे के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह कंधारी ने बताया कि यह आयोजन यूएई की धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है.
हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल
इस इफ्तार की एक और खास बात यह रही कि मुस्लिम समुदाय के लोगों ने अपने हिंदूओं के सम्मान में नॉनवेज से परहेज किया और केवल शाकाहारी भोजन ही किया. यह कदम हिंदू-मुस्लिम एकता और आपसी सम्मान को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा संदेश देता है.
गुरुद्वारे के अध्यक्ष ने कहा कि हम इस इफ्तार से शांति, प्रेम और मानवता का संदेश फैलाना चाहते हैं. यह आयोजन यूएई शासकों का आभार व्यक्त करने और मुस्लिम समुदाय के लिए प्रार्थना करने का अवसर भी है. इस आयोजन का स्पेशल महत्व इस साल घोषित ‘कम्युनिटी ईयर’ से भी जुड़ा है, जिसका उद्देश्य सभी समुदायों को साथ लाना है.
गुरुद्वारे की सेवा भावना
दुबई का यह गुरुद्वारा सेवा और सामुदायिक कार्यों के लिए जाना जाता है. यहां तीन समय का लंगर (मुफ्त भोजन सेवा) दिया जाता है, जिसमें किसी की जाति, धर्म या राष्ट्रीयता के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता. यह गुरुद्वारा सामाजिक सेवा और सामुदायिक एकता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
इस कार्यक्रम में प्रमुख अमीराती नागरिक और पूर्व यूएई राजनयिक मिर्जा अल सायेघ भी शामिल हुए. उन्होंने कहा कि हर बार जब मैं इस इफ्तार में शामिल होता हूं, तो मुझे एहसास होता है कि सभी धर्म शांति और सद्भाव की बात करते हैं. यह आयोजन यूएई और भारत के रिश्तों को भी मजबूत बनाता है.
भारतीय कौंसुल जनरल ने की सराहना
दुबई में भारतीय कौंसुल जनरल सतीश कुमार सिवन ने इस इफ्तार की सराहना की और कहा कि गुरुद्वारे द्वारा इतने सालों से किए जा रहे इस आयोजन से सहिष्णुता, समावेशिता और मानवता की भावना मजबूत होती है. भारत और यूएई, दोनों ही देशों में विविधता और सहिष्णुता को प्राथमिकता दी जाती है.
अमेरिकी नागरिक भी बने हिस्सा
इस आयोजन में अबू धाबी से आए अमेरिकी नागरिक स्टीवन एरिक्सन ने भी भाग लिया. उन्होंने बताया कि वे पिछले साल से इस आयोजन में शामिल हो रहे हैं और इसे लेकर उत्साहित हैं. उन्होंने कहा कि हम गुरुद्वारे के साथ कई सामुदायिक सेवा कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हैं. यहां सिर पर पगड़ी पहनना और जूते उतारना कोई असुविधा नहीं, बल्कि एक सम्मान की बात है.
धर्म से ऊपर इंसानियत का संदेश
इस अनोखे आयोजन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि धर्म से ऊपर *इंसानियत और भाईचारा होता है. यह इफ्तार न सिर्फ हिंदू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा देता है, बल्कि यूएई में धार्मिक सद्भाव और सहिष्णुता का भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण पेश करता है
अमेरिका ने 200 वेनेजुएला नागरिकों को केवल टैटू के आधार पर डिपोर्ट किया, ट्रंप के आदेश पर हुआ कदम
21 Mar, 2025 06:39 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका में वेनेजुएला के करीब 200 नागरिकों को सिर्फ उनके टैटू के आधार पर खतरनाक गैंग ‘ट्रेन डे अरागुआ’ का सदस्य मानते हुए डिपोर्ट कर दिया गया. यह डिपोर्टेशन अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश से हुआ, जिन्होंने 18वीं सदी के युद्धकालीन कानून का हवाला देते हुए इन लोगों को बिना कानूनी प्रक्रिया के ही अल सल्वाडोर की एक कुख्यात जेल में भेज दिया.
न्यूयॉर्क स्थित कानूनी समूह द ब्रोंक्स डिफेंडर्स और अन्य वकीलों ने इस डिपोर्टेशन की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार के पास यह साबित करने का कोई ठोस सबूत नहीं है कि डिपोर्ट किए गए लोग किसी गैंग का हिस्सा थे. उनके मुताबिक, सिर्फ जेनरल टैटू होने के कारण उन्हें खतरनाक गैंग का सदस्य मान लिया गया.
जबरन किया गिरफ्तार
इनमें से एक व्यक्ति जे.जी.जी. को अधिकारियों ने इसलिए पकड़ा क्योंकि उसके पास आंख का टैटू था. जब उसने अधिकारियों से कहा कि यह उसे गूगल पर पसंद आया था, तो उसकी बात को अनसुना कर दिया गया. इसी तरह, जेर्स रेयेस बारियोस नाम के एक व्यक्ति को इसलिए डिपोर्ट किया गया क्योंकि उसके टैटू में एक ताज, एक फुटबॉल और ‘Dios’ लिखा था.
टैटू और गैंग की पहचान
कुछ मामलों में, टैटू को अपराधियों की पहचान का संकेत माना जाता है. MS-13 जैसे कुख्यात गिरोह के सदस्यों के चेहरे पर टैटू होते हैं, जो उनकी गैंग से कनेक्शन को बताते हैं. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रेन डे अरागुआ गिरोह के लिए टैटू उतने जरूरी नहीं होते.
इसके अलावा, ताज, सितारे, घड़ियां आदि डिज़ाइन पूरी दुनिया में आम हैं और इनका कोई निश्चित अपराध से संबंध नहीं होता. उदाहरण के लिए, रेयेस बारियोस का टैटू स्पेनिश फुटबॉल क्लब रियल मैड्रिड से प्रेरित था, लेकिन अधिकारियों ने इसे अपराधी होने का प्रमाण मान लिया.
अमेरिका अधिकारियों का दावा
अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया कि केवल टैटू के आधार पर ही गिरफ्तारियां नहीं हुईं, लेकिन वकीलों और परिवारों का कहना है कि टैटू को बार-बार गैंग सदस्यता का प्रमाण बताया गया. इस डिपोर्टेशन से पहले, पीड़ितों को अपने वकीलों से मिलने तक की अनुमति नहीं दी गई. जब वे अपने वकीलों तक पहुंचे, तब तक वे अमेरिका से बाहर भेजे जा चुके थे. इससे सवाल उठता है कि क्या यह डिपोर्टेशन कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करता है या नहीं.
इस मुद्दे को लेकर न्यायिक समीक्षा की मांग उठ रही है. अमेरिकी मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि बिना किसी उचित जांच के इस तरह का डिपोर्टेशन गैरकानूनी है. वेनेजुएला सरकार ने भी इस पर नाराजगी जताई है और अमेरिका से स्पष्टीकरण की मांग की है.
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