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भारत, चीन और ब्राजील सब टैरिफ लगाते हैं हमने लगाया तो क्या गलत किया: राष्ट्रपति ट्रंप
4 Sep, 2025 09:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन । चीन हमें टैरिफ से मारता है, भारत हमें टैरिफ से मारता है, ब्राजील भी यही करता है। लेकिन टैरिफ को मुझसे बेहतर कोई नहीं समझ सकता। भारत पहले सबसे ज्यादा टैरिफ वसूलता था, लेकिन अब उन्होंने कहा है कि यहां जीरो टैरिफ होगा। ट्रंप ने स्कॉट जेनिंग्स रेडियो शो में बातचीत के दौरान कहा- अमेरिका ने टैरिफ लगाकर एक बड़ी नेगोशिएटिंग पावर हासिल की। उनका दावा है कि अगर अमेरिका दबाव नहीं बनाता, तो भारत कभी इस तरह का प्रस्ताव नहीं रखता।
हाल के दिनों में ट्रंप कई बार ‘जीरो टैरिफ’ की बात दोहरा चुके हैं। सोशल मीडिया पर भी उन्होंने भारत-अमेरिका व्यापार को एकतरफा नुकसानदायक करार दिया। उनका आरोप है कि भारत अमेरिका को बड़े पैमाने पर सामान बेचता है, लेकिन बदले में अमेरिका को भारत में उतनी पहुंच नहीं मिलती। तनाव तब और बढ़ा जब ट्रंप ने भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया और बाद में इसे दोगुना कर 50 प्रतिशत कर दिया। दरअसल, यह कदम तब उठाया गया जब भारत ने रूस से तेल खरीद जारी रखी, जबकि ट्रंप चाहते थे कि भारत यह कदम बंद करे। लेकिन भारत ने साफ कह दिया कि उसके फैसले जनता और बाजार की जरूरतों के हिसाब से होंगे। भारत ने लगातार कहा है कि व्यापार को लेकर बातचीत जारी है। मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में बताया कि मतभेद सुलझाने की कोशिश की जा रही है और नवंबर तक द्विपक्षीय व्यापार समझौता यानी बीटीए हो सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी साफ किया है कि भारत अपने घरेलू हितों से समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा था कि किसानों, मछुआरों और डेयरी किसानों की भलाई भारत की पहली प्राथमिकता है।
बेडरूम में निर्वस्त्र सो रही थी महिला, बाहर खिड़की साफ कर रहे थे मजदूर, फिर मचा हड़कंप
4 Sep, 2025 07:43 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चेंगदू। चेंगदू शहर के एक अपार्टमेंट में महिला अपने बेडरूम में सो रही थी। खिड़की के पर्दे खुले थे और कमरे की लाइट जल रही थी। इसी दौरान दो खिड़की साफ करने वाले मजदूर वहां पहुंचे और महिला को बिना कपड़ों के देख लिया। महिला के पति ने कहा कि अचानक पत्नी की चीख सुनकर वे कमरे में पहुंचे। उन्होंने देखा कि बाहर दो मजदूर खड़े होकर उनकी पत्नी को घूर रहे थे। तुरंत उन्होंने पर्दे खींच दिए।
इस घटना के बाद महिला की हालत बिगड़ गई। डॉक्टरों ने उसे डिप्रेशन और ऐंग्जाइटी बताया है। पति के मुताबिक, तब से पत्नी बेहद उदास रहती है और सामान्य जीवन नहीं जी पा रही है। कपल ने मैनेजमेंट से माफी और मुआवजे की मांग की। लेकिन मैनेजमेंट ने सिर्फ एक टोकरी फल भेजकर मामला खत्म करने की कोशिश की। मानसिक नुकसान को लेकर उन्होंने कोई चिंता नहीं दिखाई।
जब यह मामला सोशल मीडिया पर फैल गया, तो मैनेजमेंट ने ऑफर दिया कि अगर कपल अगस्त में किराये का कॉन्ट्रैक्ट बढ़ाता है तो हर महीने 600 युआन की छूट दी जाएगी। पति ने छूट को नकारते हुए कहा- “हम हर महीने 10 हजार युआन का किराया दे सकते हैं। क्या हमें 600 युआन की कमी है? यह छूट उनकी सोच बताती है कि वे असली समस्या को गंभीरता से लेना ही नहीं चाहते। ये कपल लग्जरी ‘पोर्ट अपार्टमेंट’ में रहता है, जहां वे हर महीने लगभग 1.23 लाख रुपये किराया देते हैं। प्रॉपर्टी मैनेजमेंट ने पहले ही कहा था कि 21 से 30 अप्रैल के बीच खिड़कियां साफ की जाएंगी। कपल ने साफ कहा था कि सफाई से पहले अलग से नोटिस दिया जाए, लेकिन मैनेजमेंट भूल गया।
पुर्तगाल में बड़ा हादसा: केबल ट्रैम पटरी से उतरी, हादसे में 15 लोगों की मौत
4 Sep, 2025 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लिस्बन। पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन की ऐतिहासिक और बेहद लोकप्रिय ग्लोरिया फनिक्युलर रेलवे पटरी से उतर गई, जिससे अब तक कम से कम 15 लोगों की मौत और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। हादसे के वक्त ट्रेन में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और पर्यटक सवार थे। राहत और बचाव कार्य खबर लिखे जाने तक जारी रहा। कई यात्री मलबे में फंसे हुए बताए जा रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसे के बाद कुछ ही मिनटों में चारों तरफ धुआं भर गया और लोग दहशत में आकर खिड़कियों से बाहर कूदने लगे।
शुरुआती जांच में पता चला है कि हादसे का कारण एक ढीली या टूटी हुई ट्रैक्शन केबल थी, जिसके कारण उतरते समय डिब्बों ने कार से नियंत्रण खो दिया। ढलान पर वह तेजी से नीचे जाने लगी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक ट्रैम नियंत्रण से बाहर हो गई और एक इमारत से जाकर टकरा गई। लोगों ने बताया कि यह ‘कार्डबोर्ड बॉक्स की तरह’ ढह गया।
लिस्बन के मेयर कार्लोस मोएदास ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए कहा, ‘यह हमारे शहर के लिए बेहद कठिन दिन है। लिस्बन शोक में डूबा है। हमारी सारी टीमें- नगर निगम, आपातकालीन सेवाएं, सिविल प्रोटेक्शन और फायर डिपार्टमेंट पीड़ितों की मदद में जुटी हैं।’ मेयर ने साफ कहा कि यह त्रासदी पूरे शहर के लिए गहरा घाव छोड़ गई है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि पटरियों पर गिरी हुई ट्रेन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है और दर्जनों फायर ब्रिगेड, पुलिस और एंबुलेंस की गाड़ियां मौके पर पहुंची हुई हैं।
ग्लोरिया फनिक्युलर ट्रेन लिस्बन का एक प्रमुख आकर्षण मानी जाती है। 1885 में शुरू हुई यह लाइन पुराने शहर और ऊंचाई वाले इलाके को जोड़ती है। पर्यटकों के बीच इसकी खास लोकप्रियता है और एक बार में यह 42 लोगों को ले जा सकती है। फिलहाल हादसे की वजह साफ नहीं हो पाई है। पुर्तगाल की ज्यूडिशियरी पुलिस की होमिसाइड ब्रिगेड ने जांच शुरू कर दी है। वहीं, ट्रांसपोर्ट कंपनी कैरिस, जो इस लाइन का संचालन करती है, ने बयान जारी कर कहा है कि सभी संसाधनों को सक्रिय कर दिया गया है और प्राथमिकता पीड़ितों की मदद करना है। पुर्तगाल के राष्ट्रपति मार्सेलो रेबेलो डी सूसा ने हादसे पर गहरा शोक जताते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है। वहीं, यूरोपीय संघ आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भी पुर्तगाली भाषा में एक्स पर शोक संदेश साझा किया और कहा कि यूरोप इस कठिन समय में पुर्तगाल के साथ है।
तानाशाह किम जोंग उन के साथ बीजिंग पहुंची उनकी बेटी किम जू ए......दुनिया भर में इसकी चर्चा
4 Sep, 2025 10:56 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग । उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन की बेटी किम जू ए इनदिनों सुर्खियों में है। यह पहली बार था जब वे सार्वजनिक रूप से किसी विदेश यात्रा पर अपने पिता के साथ गई थीं। यात्रा के दौरान, उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग जैसे प्रमुख वैश्विक नेताओं से मुलाकात की। किम जोंग उन का अपनी बेटी को विदेश दौरे पर ले जाना कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। किम जू ए को दुनिया के सामने लाने का यह तरीका इसका संकेत देता है कि वह अपने पिता की संभावित उत्तराधिकारी हो सकती हैं। जिस तरह से उन्हें पुतिन और जिनपिंग से मिलवाया गया, यह एक तरह से उनका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परिचय था। यह उनकी राजनीतिक शिक्षा और कूटनीति की शुरुआत हो सकती है। अपने पिता के साथ इसतरह के महत्वपूर्ण मौकों पर शामिल होना उन्हें भविष्य की भूमिका के लिए तैयार करने जैसा है। किम जोंग उन शायद अपनी और अपने परिवार की एक नई, अधिक खुली और स्वीकार्य छवि पेश करना चाहते हैं। अपनी बेटी को ऐसे वैश्विक मंचों पर लाना उत्तर कोरिया की पारंपरिक गोपनीयता से हटकर एक कदम है।
कौन हैं किम जू ए?
किम जू ए के बारे में दुनिया को बहुत कम जानकारी है क्योंकि उत्तर कोरिया अपने नेताओं और उनके परिवारों के बारे में जानकारी गुप्त रखता है। उन्हें पहली बार 2022 में सार्वजनिक रूप से देखा गया था, जब वह अपने पिता के साथ एक बैलिस्टिक मिसाइल लांच कार्यक्रम में शामिल हुई थीं। पूर्व अमेरिकी एनबीए स्टार डेनिस रॉडमैन ने 2013 में अपनी प्योंगयांग यात्रा के बाद दुनिया को किम जू ए के अस्तित्व के बारे में बताया था। उन्होंने कहा था कि किम जोंग उन ने खुद अपनी बेटी से उन्हें मिलवाया था। उत्तर कोरिया का सरकारी मीडिया उन्हें प्यारी बच्ची या होनहार बच्ची जैसे शब्दों से संबोधित करता है, लेकिन उनका नाम शायद ही कभी लेता है। तस्वीरों में अक्सर देखा गया है कि बड़े-बड़े अधिकारी भी उनके सामने सिर झुकाते हैं। किम जोंग उन के अपने तीनों बच्चों में से, केवल किम जू ए को ही अब तक सार्वजनिक मंचों पर देखा गया है, जो उनकी उत्तराधिकारी बनने की अटकलों को और भी मजबूत करता है।
ट्रंप बोले- बहुत जल्द रूस यूक्रेन की जंग रुकवाने के लिए उठाएंगे जरुरी और बड़ा कदम
4 Sep, 2025 09:55 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस-यूक्रेन जंग पर सख्त रुख दिखाते हुए मंगलवार को साफ कहा कि वे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बेहद निराश हैं। ट्रंप ने इशारों में यह भी जताया कि उनकी सरकार रूस में हो रही मौतों को रोकने के लिए जल्द कदम उठाएगी।
रेडियो शो को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा- ‘मैं पुतिन से बहुत निराश हूं और हम जल्द कुछ ऐसा करेंगे जिससे लोगों की जान बचे। ट्रंप ने अगस्त में अलास्का में पुतिन के साथ शिखर वार्ता की थी। इसके बाद वे यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और यूरोपीय देशों व नाटो नेताओं से व्हाइट हाउस में मिले। उन बैठकों के बाद ट्रंप ने उम्मीद जताई कि पहले जेलेंस्की और पुतिन की द्विपक्षीय मुलाकात होगी और फिर वे खुद भी शामिल होकर त्रिपक्षीय बैठक करेंगे। लेकिन जेलेंस्की का कहना है कि रूस लगातार इस मुलाकात को रोक रहा है, जबकि रूस का तर्क है कि एजेंडा अभी तैयार नहीं है।
ट्रंप ने जेलेंस्की से वादा किया है कि किसी भी शांति समझौते में अमेरिका यूक्रेन की सुरक्षा की गारंटी देगा। उन्होंने यह भी धमकी दी कि अगर रूस ने आगे बढ़कर शांति प्रक्रिया में सहयोग नहीं किया तो अमेरिका और कड़े प्रतिबंध लगाने से पीछे नहीं हटेगा। वर्तमान में रूस, यूक्रेन के लगभग पांचवें हिस्से पर कब्जा किए हुए है। ट्रंप का कहना है कि किसी भी समझौते में ‘भूमि अदला-बदली और सीमाओं में बदलाव अहम भूमिका निभाएंगे।’ हालांकि यूक्रेन ने यह साफ किया है कि वह अपनी जमीन को कानूनी तौर पर रूस का हिस्सा मानने को तैयार नहीं है।
इंटरव्यू में जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या उन्हें रूस और चीन की बढ़ती दोस्ती से चिंता है, तो उन्होंने कहा- ‘मुझे बिल्कुल चिंता नहीं है। हमारे पास दुनिया की सबसे ताकतवर सेना है। वे हम पर कभी हमला नहीं करेंगे। यकीन मानिए।’ इसी बीच, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मंगलवार को पुतिन को ‘पुराना दोस्त’ कहते हुए बीजिंग में उनका स्वागत किया। बुधवार सुबह पुतिन और किम जोंग चीन की विक्ट्री डे परेड में शामिल हुए, इसे वैश्विक ताकत दिखाने की कोशिश माना जा रहा है। इसके बाद ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि किम जोंग, पुतिन और ट्रंप अमेरिका के खिलाफ साजिश रच रहे हैं।
रूस ने यूक्रेन पर हमले बढ़ाए
4 Sep, 2025 08:40 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कीव। रूस ने देर रात यूक्रेन पर अब तक का बड़ा हमला किया। यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, रूस ने 500 से ज्यादा ड्रोन और करीब दो दर्जन मिसाइलें एक साथ दागीं। इस हमले का सबसे ज्यादा निशाना नागरिक ढांचा, खासतौर पर ऊर्जा संयंत्र बने हैं। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब सर्दियों का मौसम नजदीक आ रहा है और तीन साल से जारी युद्ध ने यूक्रेन की बिजली और हीटिंग व्यवस्था को पहले ही बुरी तरह प्रभावित कर रखा है।
यूक्रेनी वायु सेना ने बताया कि हमले का केंद्र पश्चिमी और मध्य यूक्रेन रहा। इस दौरान कम से कम पांच लोग घायल हुए हैं। राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि यह हमला रूस की दम दिखाने की कोशिश है। उन्होंने चेतावनी दी कि व्लादिमीर पुतिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह दिखाना चाहते हैं कि उन पर कोई अंकुश नहीं है।
रूस पर और कड़े प्रतिबंध लगाए जाएं
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर कहा कि पुतिन अपनी निर्दयता और दंड से बचने की मानसिकता दिखा रहे हैं। रूस की यह आक्रामकता इसलिए जारी है क्योंकि उसकी युद्ध अर्थव्यवस्था पर पर्याप्त अंतरराष्ट्रीय दबाव नहीं है। अब समय आ गया है कि रूस पर और कड़े प्रतिबंध लगाए जाएं। जेलेंस्की ने अपने मंगलवार शाम के वीडियो संदेश में बताया कि रूस की तरफ से ड्रोन हमलों की संख्या लगातार बढ़ रही है, और अब दिनदहाड़े भी हमले किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि रूसी सेना ने मोर्चे के कुछ इलाकों में बड़ी संख्या में सैनिकों को तैनात किया है, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है।
पुतिन की कूटनीतिक चाल
इसी बीच, पुतिन चीन में शीर्ष नेताओं से मिल रहे हैं। उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। अमेरिका का आरोप है कि ये देश अलग-अलग तरीकों से रूस की मदद कर रहे हैं। उत्तर कोरिया ने रूस को सैनिक और गोला-बारूद भेजा है। चीन और भारत रूस से तेल खरीद रहे हैं, जिससे अप्रत्यक्ष रूप से रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था को सहारा मिल रहा है।
यूरोपीय देशों से समर्थन जुटा रहे हैं जेलेंस्की
यूक्रेनी राष्ट्रपति लगातार यूरोपीय देशों का दौरा कर रहे हैं ताकि और समर्थन जुटाया जा सके। मंगलवार को वे डेनमार्क पहुंचे, जहां उत्तरी यूरोपीय और बाल्टिक देशों के नेताओं से नई सैन्य मदद और कूटनीतिक समर्थन पर चर्चा की। ब्रिटेन के रक्षा मंत्री जॉन हीली भी कीव पहुंचे और यूक्रेनी सेना को मजबूत करने के उपायों पर बैठक की। बुधवार को जेलेंस्की पेरिस जाएंगे, जहां उनकी फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात होगी। गुरुवार को पेरिस में एक बड़ी बैठक होगी, जिसमें यूरोपीय और अमेरिकी नेता यूक्रेन के युद्ध के बाद सुरक्षा की गारंटी पर विचार करेंगे।
जिनपिंग ने रखा जीजीआई का प्रस्ताव....अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को मिर्ची लगना तय
3 Sep, 2025 05:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शंघाई सहयोग संगठन की बैठक को संबोधित कर ग्लोबल गवर्नेंस इनिशिएटिव (जीजीआई) का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने कहा कि दुनिया में बहुपक्षीय व्यवस्था होनी चाहिए और किसी एक देश को ही सर्वशक्तिमान नहीं मानना चाहिए है। जिनपिंग ने एससीओ नेताओं को संबोधित कर कहा यह बात कही, जिस पर रूस ने तत्काल सहमति जाहिर की है। इसके अलावा भारत भी इस पर सहमत है, क्योंकि लंबे समय से पीएम नरेंद्र मोदी भी कहते रहे हैं कि वैश्विक संबंध समानता के आधार पर तय होने चाहिए। जिनपिंग का यह फॉर्मूला सीधे तौर पर अमेरिका के लिए खुला चैलेंज है, जो इन दिनों तमाम देशों पर टैरिफ लगा रहा है।
अमेरिका ने सबसे बड़ा टैरिफ भारत पर लगाया है। इसके बाद जिनपिंग का बयान अहम है। शी ने कहा, मैं आप लोगों के समक्ष ग्लोबल गवर्नेंस इनिशिएटिव का प्रस्ताव रखना चाहता हूं। मैं सभी देशों के साथ काम करने के लिए तत्पर हूं। यह संबंध समानता के आधार पर होनी चाहिए और मानव सभ्यता के साझा भविष्य के निर्माण के लिए सहयोग की भावना पर आधारित हो। उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ के लिए यह जरूरी है। जिनपिंग ने कहा कि यह विजन वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है।
जिनपिंग ने कहा, सबसे पहले हमें समानता के आधार पर बात करनी होगी। हम सभी को यह मानना होगा कि क्षेत्रफल, क्षमता, संपदा से परे सभी देशों को एक समान माना जाए। सभी को ग्लोबल गवर्नेंस में निर्णय लेने का मौका मिले तो वहीं लाभार्थी के तौर पर भी बराबर हों। हमें वैश्विक संबंधों में अधिक लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रोत्साहित करना होगा। इसके अलावा विकासशील देशों को भी शामिल करना होगा। उन्होंने कहा कि हम सभी अंतरराष्ट्रीय नियमों से बंधे हुए हैं, लेकिन इनका सही ढंग से और यूएन चार्टर के अनुसार पालन होना चाहिए।
जिनपिंग ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नियमों को सभी पर एक समान तरीके से लागू होना चाहिए। इसमें कोई दोहरा मानदंड नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जैसे कुछ देश अपने ही ढंग से नियमों को चलाते हैं और उन्हें दूसरे देशों पर थोपने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि हम सभी लोगों को बहुपक्षीय व्यवस्था की बात करनी चाहिए। हमें साथ मिलकर वैश्विक व्यवस्था की बात करनी होगी।
पुतिन की ओर से जिनपिंग के प्रस्ताव पर जवाब भी आ गया है। उन्होंने कहा कि हम जिनपिंग की इस बात से सहमत हैं कि एक समानता आधारित व्यवस्था होनी चाहिए। यह बात तब महत्वपूर्ण है, जब कुछ देश अपनी ही चीजें थोपने में जुटे हैं। चीन के इस प्रस्ताव का रूस समर्थन करता है। हम खुलकर साथ हैं। इस तरह भारत, चीन और रूस ने खुलकर अमेरिका का नाम तक नहीं लिया, लेकिन पूरी बात उसे लेकर ही कही गई।
बीजिंग में चीन का शक्ति प्रदर्शन: शी जिनपिंग ने किया सैन्य परेड का निरीक्षण, पुतिन और किम भी रहे मौजूद
3 Sep, 2025 04:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग । चीन ने बुधवार को द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति की 80वीं वर्षगांठ पर राजधानी बीजिंग के तियानआनमेन स्क्वायर में विशाल सैन्य परेड का आयोजन किया। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस परेड की अगुवाई की, जिसमें चीन की पूरी सैन्य ताकत दुनिया के सामने प्रदर्शित की गई।
इस दौरान हजारों सैनिकों ने बखूबी मार्च पास्ट किया, जबकि चीन की नवीनतम पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर जेट्स, टैंक, बैलिस्टिक मिसाइलें, हाइपरसोनिक मिसाइलें, पानी के भीतर चलने वाले ड्रोन, शुरुआती चेतावनी विमान और जैमिंग सिस्टम ने परेड में शक्ति का प्रदर्शन किया।
इस भव्य परेड में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन समेत 26 देशों के नेता शामिल हुए। इन देशों की अधिकतर पहचान गैर-पश्चिमी देशों के रूप में है। शी जिनपिंग ने परेड शुरू होने से पहले विदेशी मेहमानों और चीन के सैन्य दिग्गजों का स्वागत किया। इसके बाद वे गेट ऑफ हेवेनली पीस से परेड का अवलोकन करते रहे।
राष्ट्रपति शी ने 10,000 सैनिकों और नौसेना व वायुसेना के जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि चीन हमेशा “शांतिपूर्ण विकास के मार्ग” पर चलेगा। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध को “जापानी आक्रमण के खिलाफ जीत” बताया और विदेशी देशों का सहयोग देने के लिए आभार जताया।
हालांकि, उन्होंने अमेरिका का नाम नहीं लिया, जबकि अमेरिका ने जापान के खिलाफ युद्ध में बड़ी भूमिका निभाई थी। शी ने कहा की “मानवता फिर से शांति या युद्ध, संवाद या टकराव, और साझा जीत या शून्य-योग खेल के विकल्पों के सामने खड़ी है। चीनी जनता हमेशा इतिहास के सही पक्ष और मानव प्रगति के साथ खड़ी रहेगी।” शी जिनपिंग ने जोर देकर कहा कि चीन को पिछली शताब्दी में विदेशी ताकतों द्वारा झेली गई गुलामी, आक्रमण और अपमान की पीड़ा अब दोबारा सहन नहीं करनी पड़ेगी। यही संदेश चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के विचारधारा का अहम हिस्सा है।
शी जिनपिंग ग्रे माओ सूट पहने हुए खुले वाहन में खड़े होकर सैनिकों का अभिवादन करते दिखे। इसके बाद चांगआन एवेन्यू पर परेड शुरू हुई, जिसे करीब 50,000 दर्शकों ने देखा। आकाश में एयरफोर्स के विमानों ने फ्लाईपास्ट किया और बैनर लहराए, जिन पर लिखा था “न्याय की जीत होगी”, “शांति की जीत होगी” और “जनता जीतेगी”।
इस सैन्य प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि क्या शी जिनपिंग अमेरिका की उस भूमिका का जिक्र करेंगे, जिसने चीन को द्वितीय विश्व युद्ध में जापानी कब्जे से मुक्त कराने में मदद की थी। हालांकि, ट्रंप ने शी को शुभकामनाएं भी दीं। कुल मिलाकर, यह परेड न सिर्फ चीन की सैन्य ताकत का प्रदर्शन थी बल्कि शी जिनपिंग की यह कोशिश भी थी कि दुनिया को दिखाया जाए कि चीन अब किसी दबाव या अलगाव से डरने वाला देश नहीं है।
गाज़ा में इज़राइली हमले में 105 फिलिस्तीनी मारे गए, बच्चों और पत्रकारों की भी मौत
3 Sep, 2025 03:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गाज़ा सिटी। इज़राइल ने गाज़ा सिटी पर मंगलवार को भीषण हमला तेज कर दिया, जिसमें कम से कम 105 फिलिस्तीनियों की मौत हो गई। मारे गए लोगों में 32 लोग वे थे जो मदद पाने के लिए लाइन में खड़े थे, जबकि कई बच्चे और पत्रकार भी इस हमले की चपेट में आ गए। सबसे ज्यादा तबाही अल-सबरा इलाक़े में हुई, जहां कई दिनों से लगातार बमबारी जारी है। गाज़ा प्रशासन का कहना है कि सिर्फ भोजन और पानी लेने निकले लोग भी अब सीधे निशाने पर हैं।
खान यूनिस के पास अल-मवासी इलाके में, जिसे पहले “सुरक्षित क्षेत्र” घोषित किया गया था, पानी भरने के लिए खड़े 21 लोगों पर ड्रोन से हमला किया गया। इनमें 7 बच्चे शामिल थे। घटनास्थल से मिले वीडियो में खून से सने पानी के डिब्बे और मासूमों के शव दिखाई दिए। फिलिस्तीनी सिविल डिफेंस के प्रवक्ता महमूद बसाल ने कहा की “वे लोग सिर्फ पानी लेने लाइन में खड़े थे, तभी उन पर हमला कर दिया गया। जिंदगी की तलाश अब मौत में बदल गई है।”
गाज़ा सिटी में अल-अफ़ परिवार के घर पर भी इज़राइली हमला हुआ, जिसमें 10 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे थे। हमले में दो पत्रकार अल-मनारा के रस्मी सालेम और ईमान अल-ज़ामली की मौत हो गई। अक्टूबर 2023 से अब तक 270 से ज्यादा पत्रकार मारे जा चुके हैं, जिससे यह युद्ध दुनिया का सबसे खतरनाक संघर्ष पत्रकारों के लिए बन गया है।
इज़राइल की नाकाबंदी के कारण लोग सिर्फ हमलों से ही नहीं, बल्कि भूख से भी मर रहे हैं। पिछले 24 घंटे में 13 लोग भूख से मरे, जबकि युद्ध शुरू होने के बाद अब तक 361 लोग भुखमरी के शिकार हो चुके हैं। इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि युद्ध “निर्णायक चरण” में है और सेना गाज़ा सिटी पर कब्ज़े की तैयारी कर रही है। इस बीच हजारों रिजर्व सैनिकों को बुलाया गया, हालांकि इज़राइली मीडिया के अनुसार 365 सैनिकों ने ड्यूटी पर आने से इनकार कर दिया है।
बेल्जियम ने मंगलवार को फिलिस्तीन को मान्यता दी और अन्य देशों से भी ऐसा करने की अपील की। फिलिस्तीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह कदम “नरसंहार और जबरन विस्थापन रोकने के लिए ज़रूरी है।” इस बीच यमन के हूती विद्रोहियों ने दावा किया कि उन्होंने इज़राइल के कई ठिकानों और एक कार्गो जहाज़ को ड्रोन और मिसाइल से निशाना बनाया है। गाज़ा प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से मांग की है कि इज़राइल को रोका जाए और इसे “युद्ध अपराध व नरसंहार” घोषित किया जाए।
पुतिन, पेजेशकियन और किम की मौजूदगी में चीन ट्रंप को दिखाएगा अपनी सैन्य ताकत
3 Sep, 2025 11:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। चीन की राजधानी बीजिंग में चल रही राजनीतिक हलचल दुनिया की राजनीति का नक्शा बदल सकती है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रूस, ईरान और उत्तर कोरिया जैसे देशों के नेताओं की मेजबानी की है, जो यह दर्शाता है कि चीन अब केवल आर्थिक नहीं, बल्कि एक सैन्य शक्ति के रूप में भी खुद को स्थापित कर रहा है। 3 सितंबर को बीजिंग में एक बड़ी सैन्य परेड होने वाली है, जिसमें हाइपरसोनिक हथियार, परमाणु-सक्षम मिसाइलें और समुद्री ड्रोन सहित हजारों सैनिकों का प्रदर्शन किया जाएगा। इस सैन्य परेड को चीन का अब तक का सबसे बड़ा शक्ति-प्रदर्शन माना जा रहा है। इस परेड में भाग लेने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और उत्तर कोरिया के किम जोंग उन बीजिंग पहुँच चुके हैं। अमेरिकी मीडिया ने इस गठजोड़ को बेहद गंभीर माना है, जिसमें अमेरिकी मीडिया ने कहा है कि चीन एक नया वैश्विक व्यवस्था (ग्लोबल ऑर्डर) बनाने की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी थिंक टैंक का मानना है कि ट्रंप प्रशासन की नीतियों ने पारंपरिक अमेरिकी सहयोगियों जैसे ऑस्ट्रेलिया, जापान और यूरोपीय देशों को असमंजस में डाल दिया है। ऑस्ट्रेलिया ने चीन के साथ अपने संबंधों में नरमी दिखाई है। बताया गया है कि भारत, हालांकि एक लोकतांत्रिक देश है, लेकिन एससीओ (एससीओ) शिखर सम्मेलन में उसकी भागीदारी से वैश्विक समीकरणों की जटिलता साफ झलकती है। ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन के जोनाथन ज़िन ने कहा है कि शी जिनपिंग का संदेश साफ है कि चीन एक महान शक्ति बन चुका है और अमेरिकी सहयोगियों को यह महसूस हो रहा है कि वे अमेरिका पर पूरी तरह भरोसा नहीं कर सकते हैं।
बाढ़ से मर रही पाकिस्तान की जनता, ख्वाजा आसिफ का बेतुकान बयान....बाल्टी में पानी स्टोर कर लें लोग
3 Sep, 2025 10:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के पंजाब, पीओके, केपीके सहित देश के बड़े हिस्से में बाढ़ तबाही मचा रही है। बाढ़ से लाखों लोग और पशु सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं, साथ ही बड़े पैमाने पर फसलें तबाह हुई हैं। एक ओर बाढ़ का कहर जारी है, दूसरी ओर पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ की ओर से अजीबोगरीब बयान देने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में रक्षा मंत्री आसिफ कहते सुने जा रहे हैं कि पाकिस्तानियों को बाढ़ का पानी स्टोर कर लेना चाहिए।
सोशल मीडिया पर एक पाकिस्तानी टीवी चैनल की क्लिप सामने आई है। इसमें न्यूज एंकर फोन पर ख्वाजा आसिफ से बात करने का दावा कर रहा है। एंकर जब बाढ़ पर सवाल करता है, तब रक्षा मंत्री आसिफ कहते हैं कि पानी को बाल्टियों और डब्बों में स्टोर कर लें और बाद में काम में ले लें। बाढ़ को लोग खराबी की तरह ना देखकर, बल्कि अल्ला की रहमत की तरह से लें। आसिफ का ये वीडियो सोशल यूजर्स के बीच चर्चा बटोर रहा है।
बात दें कि पाकिस्तानी रक्षा मंत्री आसिफ ने इससे पहले बाढ़ के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराया था। आसिफ का कहना है कि भारत के पानी छोड़ने की वजह से पाकिस्तान में बाढ़ आ रही है। उन्होंने कहा कि भारत से आ रहा बाढ़ का पानी अपने साथ लाशें भी पाकिस्तान में ला रहा है। पाकिस्तान में बह रही लाशें भारतीयों की हैं।
ख्वाजा आसिफ ने सियालकोट के बाढ़ प्रभावित इलाकों के दौरे के दौरान कहा कि भारत से बह रहा बाढ़ का पानी अपने साथ लाशें, मवेशी और मलबे के ढेर लेकर आया है। आसिफ ने दावा किया कि स्थानीय लोगों ने सीमा पार लाशें बहते हुए देखी हैं। इससे क्षेत्र से पानी निकालने की कोशिश कर रही नगरपालिका टीमों के काम में बाधा आ रही है।
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने कहा है कि पूर्वी पंजाब प्रांत इतिहास की सबसे भीषण बाढ़ से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि नदियों का जलस्तर अब तक के उच्चतम स्तर पर है। इससे 20 लाख से ज्यादा की आबादी सीधेतौर पर प्रभावित है। पाकिस्तान में 26 जून से अब तक बारिश और बाढ़ से 849 लोग मारे गए हैं और 1,130 घायल हुए हैं।
विवादित कच्चाथीवू द्वीप पहुंचे राष्ट्रपति दिसानायके....तमिलनाडू में तनाव चरम पर
3 Sep, 2025 09:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलंबो । कच्चाथीवू द्वीप को लेकर भारत और श्रीलंका के बीच तनाव फिर बढ़ गया है। श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके ने अचानक विवादित द्वीप का दौरा कर कच्चाथीवू को श्रीलंका का अभिन्न अंग बताया है। उनकी इस यात्रा से भारत और श्रीलंका के संबंधों में नया तनाव पैदा हुआ है। राष्ट्रपति दिसानायके ने कच्चाथीवू को श्रीलंका का अभिन्न अंग बताकर कहा कि उनकी सरकार किसी भी बाहरी दबाव में अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कच्चाथीवू की रक्षा करना श्रीलंका का दायित्व है।
वहीं अभिनेता से राजनेता बने विजय ने भारत सरकार पर तीखा हमला कर आरोप लगाया है कि केंद्र तमिल मछुआरों की रक्षा करने में नाकाम रहा है। विजय ने इस मुद्दे पर तमिलनाडु में एक आंदोलन का नेतृत्व भी किया था। उनका कहना है कि अब तक 800 से अधिक भारतीय मछुआरों को श्रीलंकाई नौसेना ने हिरासत में लिया है और कई मछुआरों की मौत भी हो चुकी है।
कच्चाथीवू विवाद का इतिहास
कच्चाथीवू द्वीप ऐतिहासिक रूप से रामनाथपुरम राजाओं का हिस्सा था और ब्रिटिश शासनकाल में मद्रास प्रेसिडेंसी के अधीन था। 1974 में हुए एक समझौते के तहत इस द्वीप को श्रीलंका को सौंप दिया गया था। इस समझौते में भारतीय मछुआरों और तीर्थयात्रियों को बिना वीज़ा के आवाजाही और मछली पकड़ने की छूट दी गई थी। 1976 में समुद्री सीमा के पुनर्निर्धारण के बाद भारतीय मछुआरों को श्रीलंकाई जलक्षेत्र में मछली पकड़ने से रोक दिया गया। तब से यह द्वीप भारत और श्रीलंका के बीच विवाद का कारण बना हुआ है। अब देखना यह है कि श्रीलंका के राष्ट्रपति की इस यात्रा के बाद भारत सरकार की क्या प्रतिक्रिया होती है।
भारत की अगली चाल पर नजर
श्रीलंकाई राष्ट्रपति की यह यात्रा तब हुई है, जब तमिलनाडु में कच्चाथीवू को लेकर आक्रोश बढ़ रहा है। अब देखना होगा कि भारत सरकार श्रीलंका के इस कदम पर किस तरह की प्रतिक्रिया देती है।
तीनों महाशक्तियों को करीब आने के लिए अमेरिका ने ही किया मजबूर
2 Sep, 2025 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। भारत-चीन और रूस, वो देश हैं, जो इस वक्त डोनाल्ड ट्रंप के निशाने पर हैं। रूस पर उसने पहले ही प्रतिबंध लगा रखे हैं, भारत को वो अपनी शर्तों पर झुकाने के लिए लगातार लगा हुआ है और चीन को भी रूस से तेल व्यापार के चलते टैरिफ और सैंक्शंस की धमकियां मिल रही हैं। ऐसे में इन तीनों महाशक्तियों को कहीं न कहीं एक साथ आने के लिए अमेरिका ने ही मजबूर किया है। अमेरिका के टैरिफ वॉर के बाद तीनों देशों के बीच एक स्वाभाविक गठबंधन बना है, जो अमेरिका को ये आईना दिखाने के लिए काफी है कि वो दुनिया का बादशाह नहीं है। खासतौर पर ब्रिक्स देशों ने डोनाल्ड ट्रंप के आगे झुकने से बिल्कुल मना कर दिया है, जिसके बाद इन तीनों देशों की भूमिका काफी बढ़ जाती है।
शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन की मीटिंग से एक ऐसी तस्वीर आई है, जो न सिर्फ डोनाल्ड ट्रंप को बेचैन करने वाली है बल्कि पश्चिमी देशों के भी होश उड़ा देगी। जिस सहयोग को तोड़ने के लिए उन्होंने जमीन आसमान एक कर दिया, वो अब बढ़ता हुआ नजर आ रहा है।ये वो तस्वीर है, जिसे देखने के लिए एशिया की राजनीति कई सालों से इंतजार कर रही थी। ये वो तिकड़ी है, जो दादागिरी पर उतरे अमेरिकी राष्ट्रपति को शक्ति संतुलन का मतलब समझा देगी। ये वो तस्वीर है, जो बताती है कि इस दुनिया में विकास और दोस्ती ही एक साथ चल सकते हैं। चीन के तियानजिंग में जब एशिया के दो सबसे बड़े खिलाड़ी मिले, तो पूरी दुनिया देखती रह गई। फिर उन्हें जब रूस का साथ मिला, तो ये शक्तिशाली तस्वीर सामने आई। दुनिया के तीन ऐसे देश, जो अमेरिका को चैलेंज देने की क्षमता रखते हैं। ये तीन राष्ट्राध्यक्ष जिस तरह से हंसते हुए दिख रहे हैं, उसे देखकर अमेरिका की छाती पर सांप लोट रहे होंगे। चीन और भारत के बीच सीमा विवाद को लेकर उनके रिश्ते कभी इतने अच्छे नहीं रहे, हालांकि रूस से भारत की दोस्ती कोई नई नहीं है। गलवान सीमा विवाद के बाद भारत-चीन के बीच रिश्ते काफी तल्ख हो गए थे, जिसे सामान्य करने में रूस ने बड़ी भूमिका निभाई।
पंचशील सिद्धांतों को बेहिचक तोड़ता रहा है चीन, फिर कैसे भरोसा करे भारत?
2 Sep, 2025 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। भारत, रुस और चीन तीन महाशक्तियां एक साथ आ जाएं तो दुनिया की तकदीर और तश्वीर बदलते देर नहीं लगेगी। और तो और किसी एक देश की दादागीरी भी नहीं चलेगी। भारत अपने सिद्धांतों पर हमेशा ही अमल करता रहा है। न कभी किसी को धोखा दिया है और न ही किसी पर हमला किया है। लेकिन, चीन ने पंचशील सिद्धांतों को तोड़ने में कभी हिचकिचाहट महसूस नहीं की है।
चीन के तियानजिन शहर में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन पर दुनिया भर की निगाहें टिकी हैं। इस दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात में पंचशील सिद्धांतों का ज़िक्र किया। यह वही पंचशील है, जिसे भारत और चीन ने 1954 में शांति और सहयोग की नींव के तौर पर दुनिया के सामने रखा था। उस समय पंडित नेहरू और चाउ एन लाई ने मिलकर पांच मूलभूत सिद्धांतों परस्पर सम्मान, आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना, समानता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पर सहमति जताई थी। लेकिन इतिहास गवाह है कि चीन ने इन सिद्धांतों का पालन करने के बजाय भारत की पीठ में छुरा घोंपा।
अब जबकि एससीओ समिट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग फिर से बातचीत कर रहे हैं और साझेदारी की बात कर रहे हैं, तो यह सवाल उठना लाज़मी है कि भारत चीन पर कितना भरोसा कर सकता है? विशेषज्ञ मानते हैं कि पंचशील सिद्धांतों का हवाला देना अच्छा लगता है, लेकिन चीन की नीतियां अक्सर विस्तारवादी रही हैं। उसकी आक्रामक सैन्य गतिविधियां, आर्थिक दबदबे की कोशिशें और इंडो-पैसिफिक में शक्ति प्रदर्शन इस बात का प्रमाण हैं कि वह भरोसे से ज़्यादा दबाव की राजनीति को महत्व देता है। 1962 के युद्ध ने साफ कर दिया कि पंचशील चीन के लिए केवल कूटनीतिक औजार था, भरोसे की गारंटी नहीं। युद्ध के बाद से अब तक, चाहे अरुणाचल प्रदेश पर दावा हो या डोकलाम और गलवान जैसी झड़पें, चीन का ट्रैक रिकॉर्ड यह दिखाता है कि उसकी बात और ज़मीन पर की जाने वाली कार्रवाई में भारी फर्क है। गलवान घाटी में 2020 की हिंसक झड़प में 20 भारतीय जवानों की शहादत ने इस अविश्वास को और गहरा कर दिया।
मिली और चेल्सी के रिश्ते को लेकर लोग अक्सर पाल लेते हैं गलतफहमी
2 Sep, 2025 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन । दुनिया में रिश्ते और परिवार की परिभाषा में आ रहे बदलाव की ताजा मिसाल हैं ब्रिटेन में रहने वाली 21 साल की मिली और 23 साल की चेल्सी। ये दोनों ही पिछले 9 सालों से एक-दूसरे के साथ हैं। ये युवतियां सपोर्ट वर्कर के तौर पर काम करती हैं और जल्द ही माता-पिता बनने की तैयारी में भी जुटी हैं। लेकिन उनके रिश्ते को लेकर लोग अक्सर गलतफहमी पाल लेते हैं, जिससे उन्हें कई बार तकलीफ झेलनी पड़ती है।
दरअसल, मिली की लंबाई 5 फुट 6 इंच है जबकि उनकी मंगेतर चेल्सी उनसे पांच इंच छोटी यानी 5 फुट 1 इंच हैं। उम्र में बड़ी होने के बावजूद चेल्सी का चेहरा अधिक युवा लगता है और उनका पहनावा भी लड़कों जैसा है। इसी वजह से लोग उन्हें कपल की बजाय मां-बेटे का रिश्ता मान बैठते हैं। यही गलतफहमी सोशल मीडिया पर भी देखने को मिलती है, जहां उनकी तस्वीरों और वीडियोज पर कई बार अपमानजनक और भद्दे कमेंट्स किए जाते हैं। मिली का कहना है कि अक्सर लोग उन्हें ‘मां और बेटा’ कहकर बुलाते हैं और उन पर बच्चों की तरफ आकर्षित होने का आरोप लगाते हैं, जो बेहद शर्मनाक और अपमानजनक है। इसका असर उनके निजी जीवन पर भी पड़ा है। दोनों ने बताया कि लोग उन्हें सड़क पर एक साथ देखकर अजीब नजरों से देखते हैं। वे पब्लिक में हाथ पकड़ने या एक कपल की तरह पेश आने से झिझकने लगी हैं।
यह स्थिति बताती है कि समाज में समलैंगिक रिश्तों को अभी भी पूरी तरह स्वीकार नहीं किया गया है और लोग बिना समझे अपनी राय थोपने लगते हैं। फिर भी मिली और चेल्सी ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने रिश्ते को और मजबूत बनाने का फैसला किया है और आईयूआई फर्टिलिटी ट्रीटमेंट के जरिए जल्द ही पेरेंट्स बनने की योजना बनाई है। उनका मानना है कि वे लोगों की नफरत और ट्रोलिंग के कारण अपनी खुशियों को रोकने वाली नहीं हैं।
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