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बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठा
28 Mar, 2026 03:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जिनेवा । बलूच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) ने जिनेवा में अपनी 11वीं अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस आयोजित कर बलूचिस्तान के मानवाधिकार मुद्दे को वैश्विक मंच पर उठाया। यह सम्मेलन संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 61वें सत्र के दौरान आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न कार्यकर्ताओं और वक्ताओं ने भाग लिया।सम्मेलन में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि बलूचिस्तान में लंबे समय से मानवाधिकार उल्लंघन हो रहे हैं और इस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्याप्त जवाबदेही नहीं तय की गई है। उन्होंने वैश्विक समुदाय से अपील की कि इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जाए।
इतिहास और विरोध का संदर्भ
कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों ने बताया कि 27 मार्च को बलूच कार्यकर्ता उस दिन के रूप में याद करते हैं, जब 1948 में बलूचिस्तान के जबर्दस्ती कब्जे का दावा किया जाता है। उनका कहना है कि इसके बाद से क्षेत्र के लोगों को लगातार दमन का सामना करना पड़ रहा है।
गंभीर आरोप और पाकिस्तान का रुख
सम्मेलन में वक्ताओं ने दावा किया कि सैकड़ों युवाओं, छात्रों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को जबरन गायब किया गया, यातनाएं दी गईं और उनकी हत्या की गई। हालांकि, पाकिस्तान इन आरोपों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बार-बार खारिज करता रहा है।
अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग
बीएनएम ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि बलूचिस्तान के हालात पर ध्यान दिया जाए और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। साथ ही संगठन ने बलूच लोगों के लिए आत्मनिर्णय के अधिकार की भी वकालत की।
ईरान नीति पर अमेरिका और इस्राइल आमने-सामने, बढ़ा कूटनीतिक तनाव
28 Mar, 2026 02:54 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन | अमेरिका और इस्राइल के बीच ईरान युद्ध को लेकर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हुई एक फोन कॉल ने दोनों देशों की सोच में अंतर को उजागर कर दिया। यह बातचीत ऐसे समय में हुई, जब युद्ध को लेकर वैश्विक दबाव बढ़ रहा है और बातचीत के जरिए समाधान की कोशिशें जारी हैं।रिपोर्ट के मुताबिक, इस बातचीत के दौरान वेंस ने नेतन्याहू के उस दावे पर सवाल उठाया, जिसमें ईरान में सत्ता परिवर्तन को आसान बताया गया था। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि वेंस ने साफ तौर पर कहा कि हालात उतने आसान नहीं हैं, जितना पहले बताया गया था। इस बातचीत के बाद यह भी आरोप लगे कि इस्राइल वेंस की भूमिका को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है, जबकि वे युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
क्या वेंस ने नेतन्याहू के दावों पर सवाल उठाए?
सूत्रों के अनुसार, वेंस ने नेतन्याहू से सीधे पूछा कि ईरान में सत्ता परिवर्तन को लेकर इतना भरोसा क्यों जताया गया। एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि युद्ध से पहले इस्राइल ने हालात को आसान बताकर पेश किया था, जबकि वास्तविकता ज्यादा जटिल है। वेंस इस मुद्दे पर ज्यादा सतर्क और स्पष्ट नजर आए।
क्या इस्राइल वेंस की भूमिका को कमजोर कर रहा है?
बातचीत के बाद यह दावा भी सामने आया कि इस्राइल, वेंस की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। कहा गया कि कुछ रिपोर्ट्स जानबूझकर फैलाई गईं, जिनमें बताया गया कि ईरान वेंस के साथ समझौता करना चाहता है। एक अधिकारी ने इसे इस्राइल की रणनीति बताया, ताकि बातचीत की दिशा को प्रभावित किया जा सके।
क्या वेंस ही समझौते की आखिरी उम्मीद हैं?
अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान के साथ किसी भी समझौते की सबसे बड़ी संभावना वेंस के जरिए ही है। उनका कहना है कि अगर ईरान वेंस के साथ कोई समझौता नहीं कर पाता, तो फिर समझौते की संभावना बेहद कम रह जाएगी। वेंस फिलहाल अमेरिकी दूतों के साथ बातचीत की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
ईरान युद्ध पर वेंस की रणनीति क्या है?
वेंस लंबे समय से विदेशी युद्धों के विरोधी रहे हैं और वे इस संघर्ष को लंबा खिंचने नहीं देना चाहते। उन्होंने साफ किया है कि यह कोई हमेशा चलने वाला युद्ध नहीं होना चाहिए। हालांकि उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसलों का समर्थन किया है, लेकिन उनकी सोच थोड़ी अलग बताई जा रही है। यही वजह है कि वे इस पूरे मामले में संतुलन बनाकर चलने की कोशिश कर रहे हैं।
हमास और हिजबुल्ला के बाद नए मोर्चे खुले, इस्राइल की सुरक्षा पर सवाल
28 Mar, 2026 02:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेल अवीव । पश्चिम एशिया में जारी युद्ध अब नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। इस्राइल अब सिर्फ ईरान, हिजबुल्ला और हमास से ही नहीं, बल्कि यमन से भी हमलों का सामना कर रहा है। यमन से पहली बार मिसाइल दागे जाने के बाद हालात और गंभीर हो गए हैं। इससे साफ संकेत मिल रहा है कि इस्राइल अब चारों तरफ से घिरता जा रहा है और प्रधानमंत्री नेतन्याहू के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है।इस्राइली सेना के मुताबिक, शनिवार सुबह यमन की ओर से एक मिसाइल दागी गई। इसके बाद बीयर शेबा और परमाणु रिसर्च सेंटर के आसपास सायरन बजने लगे। इससे पहले भी ईरान और हिजबुल्ला लगातार हमले कर रहे थे। यमन के हूती विद्रोही, जो तेहरान समर्थित माने जाते हैं। वो अब इस युद्ध में खुलकर उतरते दिख रहे हैं, हालांकि उन्होंने इस हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
क्या यमन के हूती अब युद्ध में उतर आए हैं?
हूती विद्रोही लंबे समय से यमन की राजधानी सना पर कब्जा किए हुए हैं। अब उनके प्रवक्ता ने साफ संकेत दिया है कि अगर ईरान पर हमले जारी रहे तो वे सीधे सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी उंगलियां ट्रिगर पर हैं। इससे यह साफ हो गया है कि युद्ध का दायरा और बढ़ सकता है।
कैसे चारो तरफ से घिरा इस्राइल?
इस्राइल पर एक साथ कई दिशाओं से दबाव बढ़ रहा है। ईरान लगातार मिसाइल हमले कर रहा है। हिजबुल्ला लेबनान से हमला कर रहा है। गाजा से हमास सक्रिय है और अब यमन से भी खतरा बढ़ गया है। इससे इस्राइल की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा दबाव बन गया है।
क्या ईरान ने भी जवाबी हमला तेज कर दिया है?
इस्राइल ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला किया, जिसके बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की। सऊदी अरब के एक सैन्य बेस पर ईरानी हमले में अमेरिकी सैनिक घायल हुए और कई विमान क्षतिग्रस्त हुए। इससे यह संघर्ष अब और ज्यादा अंतरराष्ट्रीय रूप लेता दिख रहा है।
वैश्विक व्यापार पर कितना असर पड़ा?
लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य पर खतरा बढ़ने से वैश्विक व्यापार पर असर पड़ रहा है। पहले ही हूती विद्रोहियों ने कई जहाजों को निशाना बनाया है। होर्मुज से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल और गैस सप्लाई होता है। ऐसे में इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से वैश्विक बाजार भी प्रभावित हो रहे हैं।
क्या इस्राइल-ईरान टकराव अब और बढ़ेगा?
इस्राइल ने साफ कहा है कि वह अपने अभियान को और तेज करेगा। वहीं ईरान ने भी भारी कीमत चुकाने की चेतावनी दी है। इससे यह साफ है कि दोनों पक्ष पीछे हटने के मूड में नहीं हैं और आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं।अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस्राइल और सऊदी अरब के बीच संबंध सामान्य करने की बात फिर दोहराई है। लेकिन मौजूदा हालात में यह आसान नहीं दिख रहा। फलस्तीन मुद्दा अभी भी बड़ी बाधा बना हुआ है।जिस तरह अलग-अलग देशों और समूहों की एंट्री हो रही है, उससे यह खतरा बढ़ गया है कि यह युद्ध पूरे पश्चिम एशिया को अपनी चपेट में ले सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर हालात ऐसे ही रहे, तो यह संघर्ष और ज्यादा व्यापक और खतरनाक हो सकता है।
ड्यूटी पर तैनात होमगार्ड से मारपीट, बाइक जब्त कर लौटते वक्त घेरा
28 Mar, 2026 02:11 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रतिया (फतेहाबाद)। शुक्रवार रात्रि को फतेहाबाद रोड पर लगे नाके के दौरान इंपाउंड की बाइक को शहर थाने ले जाने के दौरान होमगार्ड जवान सोमनाथ पर हमले का मामला सामने आया है। बड़ी नहर के पास एक महिला व दो युवकों ने होमगार्ड जवान पर हमला बोल दिया। महिला ने होमगार्ड जवान की वर्दी फाड़ डाली। गनीमत रही कि जब महिला और उसके दो साथी होमगार्ड जवान पर हमला व मारपीट कर रहे थे। उसी दौरान मौके से गुजर रहे थाना प्रभारी ने झगड़ा होता देखकर पुलिस की गाड़ी रोकी और घायल जवान को नागरिक अस्पताल में भर्ती करवाया।शहर पुलिस ने होमगार्ड जवान की शिकायत पर रतिया निवासी महिला व दो अन्य युवकों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर मामले में आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है। घटना का एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें एक महिला सहित कुछ लोग होमगार्ड जवान के साथ मारपीट और गाली-गलौज करते दिखाई दे रहे हैं। पीड़ित जवान ने बताया कि वह पुलिस टीम के साथ रतिया के सरदूलगढ़ रोड पर एक चेक नाके पर चेकिंग कर रहा था। इस दौरान एक बाइक चालक को चेकिंग के लिए रोका गया। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान बाइक सवार के पास लाइसेंस और बाइक के दस्तावेज नहीं मिले जिस पर पुलिस ने बाइक इपाउंड कर उसे थाने में छोड़ने के लिए कहा। आरोप है कि ज़ब वह बाइक लेकर बाइक सवार युवकों के साथ थाने जा रहा था तो युवकों ने फोन कर अपने परिजनों को बुला लिया। इस दौरान फतेहाबाद रोड बड़ी नहर के पास बीच रास्ते होमगार्ड जवान से साथ मारपीट की गई। इतना ही नहीं एक महिला ने होमगार्ड जवान का कॉलर पकड़ा और उनके साथ अश्लील गाली-गलौज की।महिला ने होमगार्ड जवान को उसके कॉलर और बेल्ट से पकड़कर जोर से धक्का दिया। घटना के दौरान मौके से गुजर रहे शहर थाना प्रभारी ने झगड़ा होते देख गाड़ी रोकी और होमगार्ड जवान को तुरंत नागरिक अस्पताल ले जाया गया जहां उनका उपचार चल रहा है। पुलिस प्रवक्ता विनोद कुमार ने बताया कि होमगार्ड जवान की शिकायत पर एक महिला व दो अन्य युवकों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर मामले में आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है।
बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता: इंडोनेशिया में सोशल मीडिया बैन पर माता-पिता खुश
28 Mar, 2026 01:48 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जकार्ता। इंडोनेशिया ने शनिवार से 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लागू करना शुरू कर दिया। नए सरकारी नियम के तहत अब बच्चे यूट्यूब, टिकटॉक, फेसबुक, इंस्टाग्राम, थ्रेड्स, एक्स, बिगो लाइव और रोबॉक्स पर अकाउंट नहीं बना पाएंगे।सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य बच्चों को अश्लील फिल्में, साइबर बुलिंग, ऑनलाइन घोटाले और डिजिटल लत जैसी खतरनाक चीजों से सुरक्षित रखना है। इस निर्णय के साथ इंडोनेशिया दक्षिण-पूर्व एशिया का पहला देश बन गया है, जिसने बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर सख्त रोक लगाई।
लगभग 70 मिलियन बच्चों पर होगा लागू
इंडोनेशिया के संचार और डिजिटल मामलों की मंत्री मेटुया हफिद ने मार्च में इस नियम की घोषणा करते हुए बताया कि यह लगभग 70 मिलियन बच्चों पर लागू होगा। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि नियम का पालन कराना आसान नहीं होगा, क्योंकि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को नियमों के अनुरूप बनाना और 16 साल से कम उम्र के खातों को रिपोर्ट कराना चुनौतीपूर्ण है। मंत्री हफिद ने कहा यह निश्चित रूप से कठिन कार्य है, लेकिन हमें अपने बच्चों को बचाने के लिए कदम उठाने होंगे। इसे लागू करना आसान नहीं, लेकिन हमें इसे पूरा करना ही होगा।
माता-पिता ने सराहा
13 वर्षीय मौरा मुन्थे, जो रोजाना लगभग चार घंटे सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेम्स पर बिताती हैं, ने नए नियम के बारे में कहा कि उनकी राय '50-50' है, लेकिन वे ज्यादातर इस निर्णय के पक्ष में हैं। उनकी मां लेनी सिनुराया ने कहा कि सोशल मीडिया के चलते माता-पिता ने अपने बच्चों पर नियंत्रण खो दिया है और यह कदम बच्चों की सुरक्षा के लिए सही है।सिनुराया ने बताया, "आजकल जब हम बच्चों को किसी रेस्तरां में देखते हैं, उनके हाथ में हमेशा फोन होता है। वे तब तक नहीं खाते जब तक उन्हें फोन नहीं दिया जाता, और अगर नहीं दिया तो वे हंगामा करते हैं। मील टाइम का मतलब है परिवार और दोस्तों के साथ बातचीत करना, लेकिन अब फोन सब कुछ नियंत्रित कर रहा है।" सरकार ने कहा कि यह प्रतिबंध धीरे-धीरे लागू किया जाएगा, ताकि सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स नियमों के अनुरूप आएं और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
दुनियाभर में मांगे पकड़ रही हैं जोर
बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने की मांगें दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही हैं। इसका उदाहरण ऑस्ट्रेलिया का ऐतिहासिक कानून है, जो पिछले साल लागू हुआ। हाल ही में इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारत से भी बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने पर विचार करने का आग्रह किया।ऑस्ट्रेलिया: 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए पहले ही प्रतिबंध लागू।फ्रांस: सितंबर से 15 साल से कम उम्र के बच्चों पर बैन लागू करने की तैयारी।इंडोनेशिया: आज से 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया प्रतिबंध प्रभावी।स्पेन और डेनमार्क: 15-16 साल की आयु सीमा तय करने की योजना।
भारत में भी शुरू हुई चर्चा
कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने अपने बजट में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध की घोषणा की है। हालांकि, केंद्र सरकार ने अभी तक पूरे देश में कोई आयु-आधारित नियम लागू नहीं किया है, लेकिन इस विषय पर बातचीत शुरू हो गई है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पिछले महीने कहा था कि सरकार सोशल मीडिया कंपनियों के साथ आयु-आधारित प्रतिबंध पर चर्चा कर रही है। वहीं, इस साल की शुरुआत में जारी आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने भी बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर आयु-आधारित सीमा लागू करने का सुझाव दिया।
टॉप कमांडर से लेकर रक्षा मंत्री तक—ईरान के बड़े चेहरे कैसे बने टारगेट
28 Mar, 2026 01:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान | ईरान में जारी युद्ध अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां हमले सीधे देश के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बना रहे हैं। अमेरिका और इस्राइल के संयुक्त हमलों में ईरान के कई बड़े राजनीतिक और सैन्य नेता मारे गए हैं। इन हमलों ने सिर्फ सैन्य ताकत ही नहीं, बल्कि ईरान के पूरे सत्ता ढांचे को हिला दिया है। इससे यह साफ हो गया है कि अब रणनीति नेतृत्व को खत्म कर सिस्टम को कमजोर करने की है।इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की मौत सबसे बड़ा झटका मानी जा रही है। 28 फरवरी को उनके ठिकाने पर हुए हमले में उनकी जान गई। वह 1989 से सत्ता में थे और उन्होंने सुरक्षा तंत्र को मजबूत कर ईरान को क्षेत्रीय ताकत बनाया। लेकिन उनके दौर में अमेरिका और इस्राइल के साथ टकराव भी लगातार बढ़ता रहा।
क्या ईरान की सबसे बड़ी ताकत थे खामेनेई?
खामेनेई ईरान के सबसे शक्तिशाली नेता थे। सेना, खुफिया एजेंसियों और विदेश नीति पर उनका पूरा नियंत्रण था। उनके फैसले ही देश की दिशा तय करते थे। उनकी मौत से सत्ता के केंद्र में बड़ा खालीपन पैदा हो गया है और नेतृत्व की कमान कमजोर पड़ी है।
अली लारीजानी भी थे अहम
अली लारीजानी 17 मार्च को मारे गए। वह राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख थे और परमाणु वार्ता में अहम भूमिका निभाते थे। वह खामेनेई के करीबी सलाहकार भी थे और ईरान की विदेश और सुरक्षा नीति तय करने में उनका बड़ा योगदान था।
खुफिया तंत्र के मुखिया इस्माइल खातिब
इस्माइल खातिब 18 मार्च को इस्राइली हमले में मारे गए। वह ईरान के खुफिया मंत्री थे और देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा की जानकारी जुटाने का काम देखते थे। वह खामेनेई के भरोसेमंद माने जाते थे और खुफिया नेटवर्क के प्रमुख चेहरे थे।
सुरक्षा नीति के अहम खिलाड़ी अली शमखानी
अली शमखानी 28 फरवरी को तेहरान में हुए हमले में मारे गए। वह ईरान की सुरक्षा और परमाणु नीति के बड़े फैसलों में शामिल थे। इससे पहले भी उन पर हमला हुआ था, लेकिन इस बार वह बच नहीं सके।
सैन्य ताकत के प्रमुख थे मोहम्मद पकपुर
मोहम्मद पकपुर आईआरजीसी के प्रमुख थे और 28 फरवरी को हमले में मारे गए। आईआरजीसी ईरान की सबसे ताकतवर सैन्य इकाई है। पकपुर देश की सैन्य रणनीति और ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहे थे।
रक्षा नीति के केंद्र में थे अजीज नसीरजादेह
अजीज नसीरजादेह, जो ईरान के रक्षा मंत्री थे, भी उसी हमले में मारे गए। वह सैन्य योजना और रक्षा नीति तैयार करने में अहम भूमिका निभाते थे और वायुसेना से जुड़े अनुभव रखते थे।
सेना की कमान संभाल रहे थे अब्दोलरहीम मौसवी
अब्दोलरहीम मौसवी सेना प्रमुख थे और सभी सैन्य शाखाओं के बीच तालमेल बनाते थे। 28 फरवरी को हुए हमले में उनकी मौत हो गई, जिससे सेना की कमान पर सीधा असर पड़ा।
आंतरिक सुरक्षा के जिम्मेदार गोलामरेजा सोलेमानी
गोलामरेजा सोलेमानी बसीज फोर्स के प्रमुख थे और 17 मार्च को मारे गए। यह फोर्स देश के अंदर कानून व्यवस्था और सरकार की पकड़ बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है।
खुफिया नेटवर्क के धुरंधर रेजाई
बेहनाम रेजाई 26 मार्च को बंदर अब्बास में मारे गए। वह नौसेना खुफिया प्रमुख थे और क्षेत्रीय गतिविधियों पर नजर रखते थे। उनकी मौत से ईरान की समुद्री सुरक्षा और जानकारी जुटाने की क्षमता प्रभावित हुई है।
नौसेना प्रमुख तंगसीरी की हमले में मौत
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के नौसेना प्रमुख अलीरेजा तंगरीसी के अमेरिका-इस्राइल के हमले में मारे जाने की खबर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, बंदर अब्बास के तटीय इलाके में हुए हमले में उनकी मौत हुई थी। तंगसीरी 2018 से इस पद पर थे और होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की रणनीति में अहम भूमिका निभा चुके थे।
तनाव के बीच एक्शन में भारतीय नौसेना, होर्मुज में जहाजों को एस्कॉर्ट
28 Mar, 2026 01:29 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। भारत के लिए पेट्रोलियम उत्पाद लेकर जा रहे दो और व्यापारी जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे हैं। बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच भारतीय नौसेना के युद्धपोत इन्हें सुरक्षा देने के लिए स्टैंडबाय पर तैनात हैं। सूत्रों के अनुसार, आने वाले समय में ऐसे और जहाज इस मार्ग से गुजरेंगे। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बना हुआ है। यह दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, जहां सुरक्षा को लेकर लगातार सतर्कता बरती जा रही है।बता दें, अमेरिका और इस्राइल-ईरान टकराव के बीच इस जलडमरूमध्य में लगातार तनाव बरकरार है। ईरान अमेरिका, इस्राइल समेत अपनी किसी दुश्मन देशों के जहाजों को वहां से नहीं गुजरने दे रहा है। भारत के जहाजों को नहीं रोका जा रहा है। जंग के हालातों के बीच पहले भी भारत के जहाज होर्मुज से निकल चुके हैं। इसके बावजूद सुरक्षा देने के लिए भारतीय नौसेना को युद्धपोत के साथ अलर्ट पर रखा गया है।
पश्चिम एशिया संकट के चलते बाधित था होर्मुज
ये जहाज उन 22 भारतीय जहाजों में शामिल थे, जो पश्चिम एशिया में युद्ध के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे हुए थे। युद्ध के चले ईरान ने होर्मुज को आंशिक रूप से बाधित कर दिया है, जिसके चलते पूरी दुनिया में तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है।
भारत ने कूटनीतिक ताकत से अपने जहाजों की आवाजाही सुनिश्चित कराई
इससे पहले बीते दिनों चार भारतीय जहाज भारत आ चुके हैं। जग वसंत, पाइन गैस, शिवालिक और नंदा देवी भी करीब 92 हजार मीट्रिक टन एलपीजी लेकर भारत पहुंचे थे। भारत में घरेलू और व्यवसायिक उपयोग के लिए एलपीजी गैस की बड़ी मांग है। यही वजह है कि होर्मुज जलडमरूमध्य बाधित होने के बाद भारत में एलपीजी का संकट पैदा हो गया था, लेकिन सरकार ने कूटनीतिक स्तर पर ईरान के साथ बातचीत कर भारतीय जहाजों का होर्मुज से सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित कराया। ईरान ने भी बयान जारी कर साफ कर दिया है कि भारतीय जहाजों को नहीं रोका जा रहा है।
IMF ने पाकिस्तान के लिए खोला खजाना, 1.2 अरब डॉलर सहायता पर सहमति
28 Mar, 2026 01:18 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद |आर्थिक बदहाली और महंगाई की मार झेल रहे पाकिस्तान के लिए राहत भरी खबर आई है। दरअसल, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और पाकिस्तान के बीच करीब 1.2 अरब डॉलर को लेकर कर्मचारी स्तर का समझौता (SLA) हो गया है। यह समझौता हफ्तों तक चली लंबी बातचीत के बाद हुआ है। इस पैसे से पाकिस्तान को अपनी डूबती अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए कुछ और समय मिल गया है।
दो रास्तों से आएगी मदद
आईएमएफ के मुताबिक, यह फंड दो अलग-अलग व्यवस्थाओं के तहत दिया जाएगा। पहला है 'विस्तारित कोष सुविधा' (EFF) और दूसरा 'लचीलापन और स्थिरता सुविधा'(RSF)। ईएफएफ उन देशों को दी जाती है जो गंभीर संकट से जूझ रहे होते हैं, यानी जो लंबे समय तक भुगतान करने में सक्षम नहीं होते। आईएमएफ मिशन की प्रमुख इवा पेत्रोवा ने कहा कि आईएमएफ बोर्ड की अंतिम मंजूरी मिलने के बाद पाकिस्तान को EFF के तहत लगभग 1 अरब डॉलर और RSF के तहत 21 करोड़ डॉलर मिलेंगे।
बंद कमरों से वर्चुअल बातचीत तक का सफर
इस समझौते तक पहुंचना पाकिस्तान के लिए आसान नहीं था। आईएमएफ की टीम ने 25 फरवरी से 2 मार्च तक इस्लामाबाद और कराची में डेरा डाला था। पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ आमने-सामने की बातचीत में कई पेंच फंसे थे, जिसके कारण टीम बिना किसी समझौते के वापस लौट गई थी। इसके बाद कई दौर की वर्चुअल मीटिंग्स हुईं। दावा किया गया है कि इस दौरान पाकिस्तान सरकार ने भविष्य में कड़े आर्थिक फैसले लेने का भरोसा दिलाना दिलाया है। इसके बाद बातचीत बनी है।
पाकिस्तान को आर्थिक नीति को सख्त बनाना होगा-आईएमएफ
आईएमएफ का कहना है कि पाकिस्तान को अपनी व्यापक आर्थिक नीतियों को और सख्त बनाना होगा। इसका सीधा मतलब है कि आने वाले दिनों में पाकिस्तान की जनता पर टैक्स का बोझ बढ़ सकता है। इतना ही नहीं, बिजली-गैस की कीमतों में और इजाफा हो सकता है। पाकिस्तान सरकार को ऊर्जा क्षेत्र में घाटे को कम करने और सामाजिक सुरक्षा के दायरे को बढ़ाने के लिए कहा गया है, जिससे गरीब तबके को बढ़ती कीमतों से बचाया जा सके।गौरतलब है कि पाकिस्तान ने साल 2024 में 7 अरब डॉलर के EFF कार्यक्रम में प्रवेश किया था। इसका उद्देश्य अर्थव्यवस्था में सुधार करना है। इसके साथ ही, पिछले साल उसे जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन से निपटने के लिए 1.4 अरब डॉलर का RSF फंड भी मिला था। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह 1.2 अरब डॉलर पाकिस्तान को दिवालिया होने से तो बचा लेंगे, लेकिन स्थायी सुधार के लिए पाकिस्तान को अपनी नीतियों में बुनियादी बदलाव करने होंगे।
नेपाल की सियासत में हलचल: केपी शर्मा ओली गिरफ्तारी के बाद अस्पताल में
28 Mar, 2026 01:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काठमांडू। नेपाल की राजनीति में ये हफ्ता ऐतिहासिक रहा। एक ओर जेन-जी आंदोलन के बा पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को शनिवार सुबह गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के कुछ ही समय बाद उन्हें काठमांडू के त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। बताया जा रहा है कि वह लंबे समय से बीमार हैं और उनका पहले कई बार किडनी ट्रांसप्लांट भी हो चुका है। इस कार्रवाई से नेपाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।पुलिस ने ओली को भक्तपुर स्थित उनके आवास से हिरासत में लिया और जिला पुलिस रेंज काठमांडू लाया गया। इसके बाद मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया। इसी मामले में नेपाली कांग्रेस नेता और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को भी गिरफ्तार किया गया है। सरकार की ओर से यह कार्रवाई एक जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है।
गिरफ्तारी के पीछे क्या मामला?
जानकारी के मुताबिक, यह मामला पिछले साल हुए जेन-जी विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। इन प्रदर्शनों के दौरान हिंसा हुई थी, जिसमें 77 लोगों की मौत हुई थी और बड़े पैमाने पर संपत्ति को नुकसान पहुंचा था। जांच आयोग ने इसे आपराधिक लापरवाही का मामला माना और कार्रवाई की सिफारिश की थी।
क्या जांच रिपोर्ट के बाद ही हुई कार्रवाई?
पूर्व जज गौरी बहादुर कार्की की अगुवाई वाले आयोग ने अपनी रिपोर्ट में ओली समेत कई बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई की सिफारिश की थी। इसके बाद प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह की अगुवाई वाली कैबिनेट ने इस रिपोर्ट को लागू करने का फैसला लिया। इसी के आधार पर पुलिस ने गिरफ्तारी वारंट जारी कर कार्रवाई की।
क्या बोल रहे ओली के समर्थक?
ओली के करीबी और सीपीएन-यूएमएल नेता प्रदीप ज्ञावली ने इस कार्रवाई को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है। उनका कहना है कि यह उनके नेता को निशाना बनाने की साजिश है। वहीं, पार्टी मुख्यालय में इस मुद्दे को लेकर बैठक भी बुलाई गई है।
और किस पर हो सकती है कर्रवाई?
रिपोर्ट में कई और अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं, जिन पर कार्रवाई की सिफारिश की गई है। इनमें पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं। कुछ के खिलाफ सख्त कार्रवाई और कुछ को चेतावनी देने की बात कही गई है।
सुरक्षा में सेंध: रेवाड़ी जेल से भागे साइबर फ्रॉड के दो आरोपी
28 Mar, 2026 09:42 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रेवाड़ी। जिले की हाईटेक जेल से दो बंदियों के फरार होने का मामला सामने आया है। घटना का खुलासा शनिवार शाम को उस समय हुआ, जब जेल में नियमित गिनती के दौरान दो बंदी कम पाए गए। इसके बाद जेल प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। फरार हुए दोनों बंदी उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और ऑनलाइन ठगी के मामलों में आरोपी थे। जेल कर्मी मुस्ताक अहमद ने सदर थाना पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 27 मार्च को उनके पास जेल का कार्यभार था। शाम के समय जब बंदियों की गिनती की गई तो दो बंदी गायब मिले। जांच करने पर उनकी पहचान उत्तर प्रदेश के रामपुरा निवासी 22 वर्षीय फैजान और इटावा निवासी 21 वर्षीय जाहिद के रूप में हुई। शिकायत के अनुसार दोनों बंदियों को दोपहर करीब डेढ़ बजे जेल परिसर में देखा गया था, लेकिन इसके बाद वे किसी को दिखाई नहीं दिए। घटना के बाद जेल प्रशासन ने आसपास के क्षेत्र में दोनों की तलाश की, लेकिन देर रात तक उनका कोई सुराग नहीं लग सका। इसके बाद मामले की सूचना पुलिस को दी गई। सदर थाना पुलिस ने जेल कर्मी की शिकायत पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और फरार बंदियों की तलाश के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। गौरतलब है कि रेवाड़ी की यह जेल प्रदेश की हाईटेक जेलों में गिनी जाती है, जिसका उद्घाटन हाल ही में किया गया था। जेल में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने के दावे किए गए थे, लेकिन दिनदहाड़े दो बंदियों के फरार होने की घटना ने इन दावों की पोल खोल दी है।
देश ने खोया अपना वीर सपूत, पूर्व सांसद चौधरी जंगबीर सिंह नहीं रहे
27 Mar, 2026 02:24 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भिवानी। पूर्व सांसद चौधरी 85 वर्षीय जंगबीर सिंह का शुक्रवार को लंबी बीमारी के चलते निधन हो गया। जगबीर सिंह ने शुक्रवार को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में अंतिम सांस ली। वो बीते अक्तूबर से लगातार बीमार चल रहे थे। इस दौरान इनके बड़े बेटे कमल प्रधान व छोटे बेटे हरिकेश लगातार उनकी देखभाल में लगे थे। जंगबीर सिंह का जन्म तोशाम हलके के खरकड़ी (माखवान) गांव में एक मार्च 1941 को हुआ था। उन्होंने एमए व एलएलबी तक पढ़ाई की और फौज में भर्ती हुए। राज राइफल में रहते उन्होंने 1962 व 1965 की चीन व पाक से लड़ाई में दुश्मनों के छक्के छुड़ाए थे। इसके बाद वो राजनीति में आए और आपातकाल के दौरान 1975 से 77 तक दो साल हिसार जेल में रहे। चौधरी जंगबीर सिंह के पिता चौधरी रघुबीर सिंह भी फौज में सूबेदार थे। जिनसे मिली प्रेरणा से जंगबीर सिंह में भी देश सेवा व समाज सेवा का गजब का जज्बा रहा। साथ ही अपने पिता से प्रेरित होकर समाज सेवा में हमेशा अग्रणी रहे। जिसके चलते वो हरियाणा विकास पार्टी से साल 1991 से 96 तक भिवानी संसदीय सीट से लोकसभा सांसद भी रहे। कमल प्रधान ने बताया कि उनके पिता का अंतिम संस्कार 28 मार्च को सुबह 11 बजे तोशाम जूई रोड स्थित चौधरी रघुबीर सिंह फार्म हाउस पर पेट्रोल पंप के पास किया जाएगा।
ईरान ने अब्राहम लिंकन पर दागीं क्रूज़ मिसाइलें, अमेरिका ने की तस्वीर जारी
27 Mar, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान,। मिडिल ईस्ट में जारी ईरान-अमेरिका युद्ध लगातार खतरनाक मोड़ लेता जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने अमेरिकी नौसेना के दैत्याकार विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन पर मिसाइल दागा। ईरान का कहना है कि उसने चाबहार के निकट, अपनी तटरेखा से करीब 250–300 किलोमीटर दूर अब्राहम लिंकन की ओर क्रूज़ मिसाइलें दागीं। हालांकि अमेरिका ने इस हमले से हुए नुकसान की पुष्टि नहीं की है और तस्वीरें जारी कर अपने जहाज को सुरक्षित बताया है।
रिपोर्ट के मुताबिक इससे पहले ईरान ने चेतावनी दी थी कि अगर यह अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर उसकी मिसाइल रेंज में आया, तो उसे निशाना बनाया जाएगा। ईरान के इस हमले से क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। इस बीच साउथ कोरिया के किम जोन उन ने भी अमेरिका की आलोचना करते हुए कहा कि ईरान के खिलाफ युद्ध “स्टेट स्पॉन्सर्ड टेररिज्म” जैसा है। यह बयान वैश्विक स्तर पर इस संघर्ष को और राजनीतिक बना रहा है। वहीं होर्मूज को लेकर भी स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। ईरान ने कहा है कि केवल “मित्र देशों के” जहाजों को ही इस रास्ते से गुजरने दिया जाएगा। इस जलमार्ग से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल सप्लाई होता है, इसलिए इसका असर वैश्विक बाजार पर पड़ रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने दावा किया है कि उसके न्यूक्लियर पॉवर प्लान के पास एक प्रोजेक्टाइल गिरा। हालांकि इसमें किसी तरह का नुकसान या कोई हताहत नहीं हुआ है, लेकिन यह घटना न्यूक्लियर सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा करती है। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया ने भी सुरक्षा कारणों से कुछ ईरानी वीजा धारकों के प्रवेश पर अस्थायी रोक लगा दी है। कुल मिलाकर, हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। एक तरफ सैन्य हमले और चेतावनियां हैं, तो दूसरी तरफ कूटनीतिक बयानबाजी और वैश्विक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो रही हैं। इससे साफ है कि यह संघर्ष अब सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक संकट बनता जा रहा है।
शादी से लौट रहे दोस्तों की कार हादसे का शिकार, दो की मौत, तीन गंभीर
27 Mar, 2026 11:48 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिसार-हांसी। बाईपास पर देर रात एक तेज रफ्तार टाटा सियरा कार ट्रैक्टर-ट्रॉले में जोरदार टकरा गई। इस दर्दनाक हादसे में फतेहाबाद जिले के गांव मोची चौबारा के दो युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।मृतकों की पहचान महावीर (42) और मनोज (38) के रूप में हुई है। दोनों दोस्त भिवानी जिले के बड़सी गांव में एक शादी समारोह में शामिल होकर वापस लौट रहे थे।
हादसे का विवरण
हादसा 26 मार्च की रात करीब 2:30 बजे हांसी बाईपास पर सैनीपुरा फ्लाईओवर के पास हुआ। हिसार की ओर जा रही टाटा सियरा कार ने आगे चल रहे ट्रैक्टर-ट्रॉले में पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में महावीर और मनोज की मौके पर ही मौत हो गई। कार में सवार अन्य तीन लोगों को गंभीर चोटें आईं, जिन्हें उपचार के लिए हिसार मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है। सभी लोग बड़सी गांव में विवाह कार्यक्रम में शामिल होने गए हुए थे और रात में वापस मोची चौबारा लौट रहे थे।मृतकों के शवों को नागरिक अस्पताल हांसी में रखवाया गया है। पुलिस ने परिजनों के बयान दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
ईरान के लोग चाहते हैं मैं उनका सुप्रीम लीडर बन जाऊं और हंस दिए ट्रंप
27 Mar, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को एक कार्यक्रम में कहा कि वे ईरान के साथ बातचीत कर रहे हैं। उनका दावा है कि जंग जल्दी खत्म करने के लिए दोनों तरफ से बातचीत जारी है। हालांकि ट्रंप के दावों को ईरान ने खारिज कर दिया। इन सब के बीच ट्रंप ने एक बात और कही जिसने सबका ध्यान खींचा। उन्होंने कहा कि ईरान के कुछ लोग उनसे अनौपचारिक रूप से कह रहे थे कि आप हमारे अगले सुप्रीम लीडर बन जाओ। ट्रंप ने हंसते हुए कहा कि मैंने मना कर दिया। दुनिया में किसी देश का नेता ईरान का सुप्रीम लीडर बनना नहीं चाहता होगा।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने ये भी कहा कि अमेरिका ने ईरान को बहुत बुरी तरह हरा दिया है। उन्होंने कहा कि हम इतनी बड़ी जीत हासिल कर रहे हैं कि किसी ने पहले कभी नहीं देखा। ईरान अब बहुत जल्दी समझौता करना चाहता है, लेकिन डर रहा है। डर इसलिए कि अगर उसने समझौता किया तो उसके अपने लोग उसे मार सकते हैं और हमें भी डर है। ट्रंप का कहना है कि अमेरिका ने ईरान को 15 सूत्र वाला प्रस्ताव भेजा है। इसमें कहा गया है कि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम बंद करे, हिजबुल्लाह जैसे गुटों को सपोर्ट न करे और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोल दे।
रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने अमेरिका के प्रस्ताव को मानने से साफ इनकार कर दिया। ईरान के एक अधिकारी ने कहा कि ट्रंप अपने आप से बात कर रहे हैं क्या? हम उनके साथ कोई डील कभी नहीं करेंगे। न अब, न भविष्य में। ईरान ने अपना खुद का 5 सूत्र वाला जवाब दिया और कहा है कि जंग उसी की शर्तों पर खत्म होगी।
23 गांवों में पानी की बड़ी सौगात, 24x7 सप्लाई; सर्वे करेगा जल-स्वच्छता संगठन
27 Mar, 2026 10:48 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नारनौल। प्रदेश के 23 गांवों में 24 घंटे पेयजल की आपूर्ति की जाएगी। इसके लिए प्रदेश के सभी जिलों से एक-एक गांव चयनित हुआ है। इन गांवों में अब 24 घंटे पेयजल की आपूर्ति की जाएगी। इसको लेकर शुक्रवार को जनस्वास्थ्य विभाग के सभी जिलों के अधिकारियों की बैठक होगी जिसमें आगामी रणनीति बनाई जाएगी। 24 घंटे पानी की आपूर्ति के लिए महेंद्रगढ़ जिले के सिगड़ी गांव का चयन हुआ है। यहां पहले से ही वाटर टैंक बना है। इसके अलावा घर-घर नल भी लगे हैं। हालांकि 11 मार्च तक प्रदेश के 6 जिलों ने गांवों की सूची नहीं भेजी थी। इसके बाद उन्हें ऐसे गांवों का चयन कर जल्द सूची उपलब्ध करवाने के लिए कहा गया था। अब प्रदेश के 23 जिलों से एक-एक गांव का चयन किया जा चुका है। इन गांवों में 24 घंटे पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए जल जीवन मिशन के तहत आवश्यक तकनीक और प्रबंधन संबंधी सुधार किए जाएंगे। प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्र में 2841428 और शहरी क्षेत्र में 995691 पेयजल उपभोक्ता हैं। इनमें महेंद्रगढ़ जिले में शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में कुल 153845 उपभोक्ता हैं।
जल और स्वच्छता सहायता संगठन गांव में करेगा सर्वे
महेंद्रगढ़ जिले के सिगड़ी गांव में अब जल एवं स्वच्छता सहायता संगठन की तरफ से घर-घर जाकर सर्वे किया जाएगा। अगर किसी के घर में नल पर टोटी नहीं मिली तो लगवाई जाएगी। वहीं, पानी की एक-एक बूंद बचाने के लिए लोगों को जागरूक भी किया जाएगा।
प्रदेश में इन जिलों से एक-एक गांव का किया गया चयन
जिला गांव
अंबाला टेपला
भिवानी रूपाना
चरखी दादरी नोरंगाबास राजपूतान
फरीदाबाद बहादुरपुर
फतेहाबाद उदयपुर
गुरुग्राम खेड़ा
हांसी मोहला
हिसार फ्रांसी
झज्जर लंगरपुर/देसलपुर
जींद सुंदरपुरा
कैथल सलीमपुर महमूद
करनाल यूनिसपुर
कुरुक्षेत्र अरुनाई/रामगढ़ रोर
महेंद्रगढ़ सिगड़ी
नूंह खोरी खुर्द
पलवल रसूलपुर
पंचकूला बरवाला
पानीपत थिराना
रेवाड़ी साबन
रोहतक सिंहपुरा खुर्द
सिरसा नकोरा
सोनीपत नहरा
यमुनानगर अलाहर
अधिकारी के अनुसार
गांव सिगड़ी में हर घर में नल पर टोली लगी हुई या नहीं, इसको लेकर सर्वे करवाया जाएगा। जिला सलाहकार मंगतूराम सरसवा की अध्यक्षता में एक टीम बनाई जाएगी। लोगों को जागरूक भी किया जाएगा। गांव सिगड़ी में पहले से ही वाटर टैंक बना हुआ है।
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