ख़बर
आंधी-तूफान से चीन में तबाही, अब सुपर टाइफून 'बावी' को लेकर अलर्ट
7 Jul, 2026 11:14 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। मध्य चीन का हुबेई प्रांत इन दिनों प्रकृति के भीषण प्रकोप से जूझ रहा है। क्षेत्र में आए विनाशकारी आंधी-तूफान ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। चीनी सरकारी मीडिया द्वारा जारी ताजा रिपोर्टों के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में आने से अब तक कम से कम आठ लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है। मौसम वैज्ञानिकों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए देश के कई अन्य हिस्सों में भी मूसलाधार बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है, जिससे अनुमानित रूप से लगभग 20 करोड़ की विशाल आबादी के प्रभावित होने की आशंका है।
हुबेई प्रांत में तूफान के बाद हाहाकार
हुबेई प्रांत में आए इस तूफान की रफ्तार इतनी तेज थी कि इसने अपने रास्ते में आने वाली कई संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचाया। तेज हवाओं के कारण सैकड़ों पेड़ जड़ से उखड़ गए, बिजली के खंभे गिर गए और कई रिहायशी मकानों की छतें उड़ गईं। तूफान के बाद हुए हादसों और मलबे की चपेट में आने से आठ लोगों ने अपनी जान गंवाई है। प्रभावित इलाकों में बिजली और संचार व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। प्रशासनिक टीमें और राहत कर्मी मलबे को हटाने तथा प्रभावितों तक मदद पहुंचाने के काम में जुटे हुए हैं।
20 करोड़ की आबादी पर बाढ़ और मूसलाधार बारिश का साया
चीन के राष्ट्रीय मौसम विज्ञान केंद्र (NMC) ने चेतावनी दी है कि अगले कुछ दिनों में देश के मध्य, पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में रिकॉर्ड तोड़ बारिश हो सकती है। यांग्त्ज़ी नदी और उसकी सहायक नदियों में जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच रहा है, जिससे मैदानी इलाकों में भीषण बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। मौसम विभाग के मुताबिक, यदि बारिश का यह सिलसिला थमा नहीं, तो देश के कई घने बसे प्रांतों की करीब 20 करोड़ आबादी सीधे तौर पर इस आपदा की जद में आ सकती है, जिससे फसलों और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंच सकता है।
सुरक्षा एजेंसियों ने शुरू किया बड़े पैमाने पर रेस्क्यू
संभावित खतरे को देखते हुए चीनी सरकार ने सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। निचले और संवेदनशील इलाकों में रहने वाले हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों और अस्थाई राहत शिविरों में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन (लैंडस्लाइड) की आशंका के चलते यातायात को रोक दिया गया है। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे बेहद जरूरी होने पर ही घरों से बाहर निकलें और मौसम संबंधी आधिकारिक चेतावनियों का लगातार पालन करते रहें।
द्विपक्षीय संबंधों के विस्तार पर चर्चा, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ेगा सहयोग
7 Jul, 2026 09:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जकार्ता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी तीन देशों की यात्रा के पहले चरण के तहत सोमवार को इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता पहुंचे। अपनी इस बेहद महत्वपूर्ण यात्रा के दौरान पीएम मोदी मंगलवार को इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ एक उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, ऊर्जा और रणनीतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाना है। प्रधानमंत्री की यह यात्रा भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति, महासागर दृष्टिकोण (विजन महासागर) और एक स्वतंत्र, खुले तथा समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र की प्रतिबद्धता के लिहाज से बेहद खास मानी जा रही है। दिल्ली से प्रस्थान करने से पूर्व प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया था कि इस यात्रा के दौरान समुद्री सुरक्षा और आपसी निवेश जैसे अहम क्षेत्रों में कई दूरगामी फैसले लिए जाएंगे।
₹2,500 करोड़ के ब्रह्मोस सौदे पर लग सकती है मुहर
इस द्विपक्षीय वार्ता का सबसे बड़ा और रणनीतिक आकर्षण ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल रक्षा सौदा है। रक्षा सूत्रों के मुताबिक, भारत और इंडोनेशिया के बीच करीब 2,500 करोड़ रुपये के इस मिसाइल समझौते पर बातचीत अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। इंडोनेशिया पहले तय की गई शुरुआती सिंगल-सिस्टम बैटरी की खरीद से काफी आगे बढ़कर अब बड़े पैमाने पर तटीय व मोबाइल लॉन्चर, रडार, ट्रेनिंग और मेंटेनेंस से जुड़े व्यापक सपोर्ट पैकेज की चरणबद्ध खरीद पर मुहर लगा सकता है। फिलीपींस के बाद इंडोनेशिया इस अत्याधुनिक मिसाइल प्रणाली को खरीदने वाला दूसरा बड़ा आसियान (ASEAN) देश बनने की राह पर है।
कई अहम द्विपक्षीय समझौतों पर होंगे हस्ताक्षर
आर्थिक और तकनीकी सहयोग को गति देने के लिए दोनों देश स्वास्थ्य, कृषि, खाद्य सुरक्षा, फार्मास्यूटिकल्स, शिक्षा, अंतरिक्ष अनुसंधान, विज्ञान, विनिर्माण और महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) जैसे विविध क्षेत्रों से जुड़े कई महत्वपूर्ण करारों पर हस्ताक्षर करेंगे। यह कदम इसलिए भी जरूरी माना जा रहा है क्योंकि दोनों देशों के बीच होने वाला द्विपक्षीय वस्तु व्यापार वित्त वर्ष 2023 के 38.8 अरब डॉलर से घटकर साल 2026 में 24.8 अरब डॉलर के स्तर पर आ गया है, जिसे दोबारा रफ्तार देने की कोशिश की जाएगी।
एयरपोर्ट पर प्रोटोकॉल तोड़कर हुआ भव्य स्वागत
जकार्ता हवाईअड्डे पर उतरते ही प्रधानमंत्री मोदी का भव्य और अभूतपूर्व स्वागत किया गया। इंडोनेशियाई हवाई क्षेत्र में प्रवेश करते ही उनके विमान को वहां की वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने एस्कॉर्ट किया। इसके बाद एयरपोर्ट पर खुद राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने अपने चार वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों के साथ प्रोटोकॉल से आगे बढ़कर पीएम मोदी की अगवानी की। प्रधानमंत्री को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और पारंपरिक नृत्य से उनका स्वागत किया गया, जिससे अभिभूत होकर पीएम मोदी ने मेजबान देश के इस विशेष सत्कार की सराहना की। प्रधानमंत्री 8 जुलाई तक इंडोनेशिया में रहेंगे, जिसके बाद वे अपनी यात्रा के अगले चरणों के लिए ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के लिए रवाना होंगे।
समुद्री व्यापार पर खतरा, होर्मुज में दो मालवाहक जहाजों पर हमला
7 Jul, 2026 09:25 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दुबई/वाशिंगटन। खाड़ी क्षेत्र के सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण समुद्री जलमार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Hormuz Strait) से एक बेहद तनावपूर्ण खबर सामने आई है। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि सोमवार की रात इस जलमार्ग से गुजर रहे कमर्शियल (व्यापारिक) जहाजों को निशाना बनाते हुए ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने कम से कम दो मिसाइलें दागी हैं। इस औचक हमले के बाद दुनिया के सबसे व्यस्त तेल परिवहन मार्ग में सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं और क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया है।
व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाकर दागी गईं मिसाइलें
अमेरिकी खुफिया और नौसेना सूत्रों से मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह घटना उस समय हुई जब अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप वाणिज्यिक जहाज इस समुद्री मार्ग से अपना सफर तय कर रहे थे। ईरान की ओर से दागी गईं ये मिसाइलें जहाजों के बिल्कुल करीब आकर समंदर में गिरीं। हालांकि, राहत की बात यह रही कि इस हमले में किसी भी जहाज को सीधा नुकसान नहीं पहुंचा है और न ही किसी क्रू मेंबर के हताहत होने की खबर है। अमेरिकी नौसेना के सेंट्रल कमांड ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्र में अपनी गश्त और निगरानी बढ़ा दी है।
वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए सबसे संवेदनशील मार्ग
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी दुनिया की लाइफलाइन माना जाता है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर कुल तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां (20%) हिस्सा इसी तंग जलमार्ग से होकर गुजरता है। ओमान और ईरान के बीच स्थित यह समुद्री रास्ता खाड़ी के तेल उत्पादकों (जैसे सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और इराक) को दुनिया के बाकी बाजारों से जोड़ता है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में इस तरह की उकसावे वाली कार्रवाई वैश्विक व्यापारिक स्वतंत्रता का खुला उल्लंघन है और इससे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अस्थिरता का खतरा बढ़ सकता है।
क्षेत्र में बढ़ा टकराव और अलर्ट पर अमेरिकी नौसेना
इस मिसाइल हमले के बाद खाड़ी देशों और पश्चिमी ताकतों के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर है। अमेरिकी नौसेना के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वे स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए हैं और वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपने सहयोगियों के साथ मिलकर हर जरूरी कदम उठा रहे हैं। फिलहाल ईरान की सरकार या उसके रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की तरफ से इस मिसाइल परीक्षण या हमले को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इस घटना के बाद हिंद महासागर और खाड़ी क्षेत्र से गुजरने वाले अन्य जहाजों को भी विशेष सावधानी बरतने और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करने की हिदायत दी गई है।
ढाका के पास रैली में धमाका, शेख हसीना के विरोध में जुटे छात्रों में भगदड़
7 Jul, 2026 09:10 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। बांग्लादेश में राजधानी ढाका के नजदीकी इलाके सावर में नवगठित 'नेशनल सिटिजन पार्टी' (NCP) की एक राजनीतिक रैली के दौरान सिलसिलेवार बम धमाका होने की खबर सामने आई है। इस अचानक हुए हमले में कम से कम तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। गौरतलब है कि इस रैली का नेतृत्व और संचालन मुख्य रूप से वे छात्र कर रहे थे, जो बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की नीतियों का विरोध कर रहे हैं। घटना के बाद इलाके में भारी तनाव व्याप्त है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
ईदगाह मैदान में चल रही सभा को बनाया निशाना
एनसीपी (NCP) द्वारा सोमवार की देर रात जारी किए गए एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, यह कायराना हमला सावर थाना स्टैंड के पास स्थित ईदगाह मैदान में आयोजित रैली के दौरान हुआ। पार्टी ने अपने बयान में कहा, "सावर में शांतिपूर्ण ढंग से चल रही एनसीपी की जनसभा के दौरान कुछ अज्ञात आतंकवादियों ने देशी बम से धमाका किया।" यह विस्फोट सोमवार की रात करीब 9:45 बजे उस समय हुआ जब मंच से वक्ता अपनी बात रख रहे थे और मैदान में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।
सुरक्षा बल अलर्ट, जांच में जुटी पुलिस
धमाके की आवाज सुनते ही रैली में भगदड़ मच गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। स्थानीय पुलिस और सुरक्षा बलों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला और पूरे इलाके को चारों तरफ से घेर लिया। घायलों को तुरंत पास के नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। सावर थाना पुलिस का कहना है कि यह हमला रैली में व्यवधान डालने और दहशत फैलाने के इरादे से किया गया था। फिलहाल पुलिस घटना स्थल से साक्ष्य जुटाकर हमलावरों की पहचान और धरपकड़ के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है।
सिंधु जल समझौते को लेकर भारत-पाक तनाव बढ़ा, पाक सेना का तीखा बयान
7 Jul, 2026 07:33 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों पुराने सिंधु जल समझौते (Indus Waters Treaty) को लेकर एक बार फिर गंभीर तनाव की स्थिति बनती दिख रही है। पाकिस्तानी सेना के उच्च पदस्थ सूत्रों के हवाले से आई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सैन्य नेतृत्व ने यह रुख अपनाया है कि इस ऐतिहासिक समझौते के प्रावधानों के तहत पाकिस्तान के हिस्से का पानी हासिल करने के लिए सेना हर मुमकिन कदम उठाएगी। सीमा पार से आया यह बयान दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और सामरिक मोर्चे पर तल्खी को और ज्यादा बढ़ा सकता है।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने उठाया था सख्त कदम
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि पिछले साल की एक बड़ी घटना से जुड़ी है। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए एक भीषण आतंकवादी हमले के बाद, भारत सरकार ने कड़ा रुख अख्तियार किया था। इसके परिणामस्वरूप, भारत ने 22 अप्रैल 2025 को सिंधु नदी तंत्र से पाकिस्तान की ओर जाने वाले पानी को रोकने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। भारत का स्पष्ट मानना रहा है कि आतंकवाद और द्विपक्षीय समझौते एक साथ नहीं चल सकते, जिसके बाद से ही पानी की आपूर्ति को लेकर दोनों देशों में रार मची हुई है।
66 साल पुराने समझौते पर मंडराया संकट
साल 1960 में विश्व बैंक (World Bank) की मध्यस्थता में हुए सिंधु जल समझौते के तहत दोनों देशों के बीच छह नदियों के पानी का बंटवारा किया गया था। इस संधि के अनुसार, तीन पूर्वी नदियों (रावी, ब्यास और सतलुज) पर भारत का पूरा अधिकार है, जबकि तीन पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम और चेनाब) का अधिकांश पानी पाकिस्तान को मिलना तय हुआ था। हालांकि, पिछले साल भारत द्वारा उठाए गए सख्त कदमों के बाद से इस 66 साल पुराने समझौते के अस्तित्व पर अब तक का सबसे बड़ा संकट मंडरा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर घेराबंदी की तैयारी में पाकिस्तान
पाकिस्तानी सैन्य और प्रशासनिक हलकों में मची इस खलबली के बीच यह भी संकेत मिल रहे हैं कि इस्लामाबाद इस मामले को अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत (Court of Arbitration) और विश्व बैंक के समक्ष नए सिरे से उठाने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तानी रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि पानी की कमी से देश के कृषि क्षेत्र और अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंच सकता है। दूसरी तरफ, भारतीय सुरक्षा एजेंसियों और जल शक्ति मंत्रालय की इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर है और सीमावर्ती नदी क्षेत्रों में निगरानी व जल प्रबंधन को पहले से अधिक मजबूत कर दिया गया है।
भूकंप से वेनेजुएला में भारी तबाही, हजारों की मौत और हजारों घायल
7 Jul, 2026 06:28 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काराकास। वेनेजुएला में आए विनाशकारी दोहरे भूकंप ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है, जिससे चारों तरफ चीख-पुकार और मलबे का मंजर दिखाई दे रहा है। वेनेजुएला सरकार द्वारा सोमवार को जारी किए गए नए और आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस भयावह प्राकृतिक आपदा में जान गंवाने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 3,535 तक पहुंच गई है। वहीं, घायलों का आंकड़ा भी तेजी से बढ़ते हुए 16,740 हो चुका है। मलबे के नीचे दबे लोगों की तलाश और राहत कार्य अब भी युद्ध स्तर पर जारी हैं, जिससे हताहतों की संख्या में और इजाफा होने की आशंका बनी हुई है।
महज 39 सेकंड के अंतराल पर आए दो शक्तिशाली झटके
भूवैज्ञानिकों और खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, बीते 24 जून को उत्तर-मध्य वेनेजुएला के याराकुए राज्य को केंद्र बनाकर बैक-टू-बैक दो बेहद शक्तिशाली भूकंप आए। पहला झटका रिक्टर पैमाने पर 7.2 की तीव्रता का था, जिसे 'फोरशॉक' माना गया। इसके ठीक 39 सेकंड बाद 7.5 तीव्रता का मुख्य और अधिक विनाशकारी भूकंप का झटका महसूस किया गया। महज डेढ़ से दो मिनट के भीतर धरती के इस भयंकर कंपन ने पूरी व्यवस्था को हिलाकर रख दिया।
राजधानी के उत्तर में स्थित ला गुएरा में मलबे का ढेर
इस त्रासदी का सबसे भीषण रूप राजधानी काराकास और उसके उत्तर में स्थित तटीय राज्य ला गुएरा में देखने को मिल रहा है। भूकंप के झटके इतने तीव्र थे कि देखते ही देखते बहुमंजिला इमारतें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं और पूरे के पूरे रिहायशी मोहल्ले मलबे के ढेर में तब्दील हो गए। हजारों परिवार इस समय बेघर हो चुके हैं और खुले आसमान के नीचे या अस्थाई राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हैं। प्रभावित इलाकों में बिजली, पानी और संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है।
राहत शिविरों में बढ़ने लगा बीमारियों का खतरा
इतने बड़े पैमाने पर विस्थापन के बाद अब प्रभावित क्षेत्रों में मानवीय संकट गहराने लगा है। अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठनों और रेड क्रॉस की टीमों ने चेतावनी दी है कि शिविरों में अत्यधिक भीड़, वेंटिलेशन की कमी और पीने के साफ पानी की किल्लत के चलते संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ रहा है। प्रशासन का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र (UN) और दुनिया के अन्य देशों से मिल रही मदद के सहारे प्रभावितों तक भोजन, दवाइयां और जरूरी सामान पहुंचाने की हरसंभव कोशिश की जा रही है, हालांकि बुनियादी ढांचे के तबाह होने से बचाव दलों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
अब दस्तावेज की कमी नहीं बनेगी बाधा, बड़े बेटे-बेटी के रिकॉर्ड से होगा सत्यापन
6 Jul, 2026 04:23 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। हरियाणा में परिवार पहचान पत्र (PPP) के तहत चल रही डेटा वेरिफिकेशन की प्रक्रिया के बीच राज्य सरकार ने बुजुर्गों के हक में एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अब बुजुर्गों को अपनी पेंशन रुकने का डर नहीं रहेगा, जिससे राज्य के हजारों परिवारों ने राहत की सांस ली है।
दस्तावेजों की कमी से बुजुर्गों में थी आशंका
दरअसल, हरियाणा सरकार द्वारा परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) में जन्मतिथि (उम्र) के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इस फैसले के बाद राज्य के हजारों बुजुर्गों में यह चिंता और डर पैदा हो गया था कि यदि उनके पास उम्र साबित करने के लिए कोई आधिकारिक या जरूरी दस्तावेज नहीं हुए, तो कहीं उनकी वृद्धावस्था सम्मान भत्ता पेंशन बंद न हो जाए।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर वैकल्पिक व्यवस्था तैयार
बुजुर्गों की इस परेशानी को देखते हुए सरकार ने तुरंत बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री के कड़े निर्देश पर प्रशासन अब एक ऐसी वैकल्पिक (Alternative) व्यवस्था तैयार कर रहा है, जिससे किसी भी पात्र बुजुर्ग की पेंशन केवल कागजों या दस्तावेजों के अभाव में नहीं काटी जाएगी। सरकार का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी जरूरतमंद इस योजना से वंचित न रहे।
नियमित मिलती रहेगी पेंशन, सत्यापन का काम भी जारी
सरकार ने पूरी तरह स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि जिन बुजुर्गों की जन्मतिथि का सत्यापन (Verification) अभी तक पूरा नहीं हो पाया है, उन्हें घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। ऐसे सभी लाभार्थियों को पहले की तरह ही हर महीने नियमित रूप से उनकी पेंशन मिलती रहेगी। पेंशन रोकने के बजाय सत्यापन की प्रक्रिया को और आसान बनाया जा रहा है।
पत्नी को बनाया ढाल, चाकू की नोक पर साले को बुलाया और कर दी हत्या
6 Jul, 2026 03:48 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
करनाल। हरियाणा के करनाल जिले के कुचपुरा गांव में पारिवारिक विवाद और दहेज के लालच में एक बेहद खौफनाक वारदात सामने आई है। यहाँ एक शख्स ने अपनी पत्नी की जान को खतरे में डालकर अपने ही साले को ससुराल बुलाया और फिर रास्ते में ही चाकू घोंपकर उसकी बेरहमी से हत्या कर दी। इस खूनी खेल के बाद से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है।
बहन की गर्दन पर चाकू रख भाई को दी चुनौती, मांगे 20 लाख
जानकारी के अनुसार, रायसन गांव के रहने वाले 28 वर्षीय जसविंदर की शादी एक साल पहले हुई थी। वहीं उनकी बहन मंजीत कौर का विवाह भी एक वर्ष पहले कुचपुरा निवासी मनीष के साथ हुआ था। आरोप है कि शादी के बाद से ही ससुराल वाले मंजीत को लगातार प्रताड़ित कर रहे थे। रविवार की रात विवाद इतना बढ़ गया कि आरोपियों ने मंजीत के सारे गहने छीन लिए, उसे कमरे में बंद किया और उसकी गर्दन पर चाकू रखकर मायके से 20 लाख रुपये मंगवाने का दबाव बनाया। जान पर बन आने पर बहन ने भाई जसविंदर को फोन कर मदद के लिए बुलाया।
गांव के बाहर ही घेरकर किया जानलेवा हमला
ससुराल में बहन की जान खतरे में होने की बात सुनकर जसविंदर घबरा गया। वह तुरंत अपने दो अन्य भाइयों को साथ लेकर मोटरसाइकिल से अपनी बहन को बचाने के लिए कुचपुरा गांव के लिए रवाना हुआ। लेकिन आरोपी पहले से ही पूरी साजिश रचकर बैठे थे। जैसे ही जसविंदर कुचपुरा गांव के बाहरी रास्ते पर पहुंचा, वहां घात लगाए बैठे कुछ लोगों ने उसे चारों तरफ से घेर लिया और उस पर धारदार हथियारों व चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया।
अस्पताल पहुंचने से पहले तोड़ा दम, इकलौते भाई की मौत से कोहराम
हमले में जसविंदर गंभीर रूप से लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़ा। उसे आनन-फानन में नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन घाव इतने गहरे थे कि डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। मंजीत कौर ने रोते हुए आरोप लगाया कि उसके ससुराल वाले पहले भी दहेज के लिए उसके साथ मारपीट करते थे और कुछ समय पहले जब जसविंदर उसे लेने आया था, तब भी उसके साथ दुर्व्यवहार किया गया था। इस बार आरोपियों ने उसकी जान लेने की नीयत से ही उसे जाल में फंसाया था।
आरोपी घर छोड़कर फरार, पुलिस की कई टीमें गठित
वारदात की सूचना मिलते ही निसिंग थाना पुलिस की टीम दलबल के साथ मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया है। जांच अधिकारी अजय कुमार ने बताया कि पीड़ित परिवार की शिकायत के आधार पर मुख्य आरोपी पति मनीष और उसके परिजनों के खिलाफ हत्या व दहेज उत्पीड़न की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। घटना के बाद से ही सभी आरोपी अपने घर पर ताला लगाकर फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं।
नेतन्याहू बनाम आइजनकोट: सत्ता संघर्ष तेज, पीएम की कुर्सी पर संकट के संकेत
6 Jul, 2026 03:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेल अवीव: ईरान और हमास के साथ जारी युद्ध के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की राजनीतिक राह बेहद मुश्किल हो गई है। वैश्विक मंच के साथ-साथ अब उनके अपने ही देश में तख्तापलट और राजनीतिक बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। नेतन्याहू को यह सीधी चुनौती किसी बाहरी दल से नहीं, बल्कि कभी उनकी ही वॉर कैबिनेट का हिस्सा रहे इजरायल के पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट से मिल रही है। गाजा जंग में अपने सगे बेटे और दो भतीजों को खोने वाले आइजनकोट अब नेतन्याहू के सबसे बड़े और मजबूत सियासी प्रतिद्वंदी बनकर उभरे हैं।
नई पार्टी 'याशार' के साथ नेतन्याहू पर सीधा प्रहार
सुरक्षा मामलों के कड़े जानकार माने जाने वाले 66 वर्षीय पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट ने हाल ही में अपनी नई सेंट्रिस्ट (मध्यमार्गी) पार्टी ‘याशार’ (जिसका अर्थ 'ईमानदार' है) की औपचारिक शुरुआत की है। पार्टी लॉन्च करते ही उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री नेतन्याहू पर निशाना साधा। आइजनकोट ने जनता को संबोधित करते हुए भावुक और आक्रामक लहजे में कहा कि अब जिम्मेदारी हमारे कंधों पर है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या हम उस बड़ी आपदा को नजरअंदाज कर दें जो हमारे देश पर आई है, या फिर आपसी विभाजन को स्वीकार कर एक और नई तबाही की तरफ बढ़ें? उन्होंने देश को फिर से एकजुट करने और इसके पुनर्निर्माण का आह्वान किया है।
व्यक्तिगत त्रासदी और 40 साल का सैन्य अनुभव
अक्टूबर 2023 में हुए हमास के हमले के बाद शुरू हुई जंग में आइजनकोट ने अपने 25 साल के बेटे गल मेयर आइजनकोट और दो सगे भतीजों को खो दिया था। इस व्यक्तिगत नुकसान ने इजरायली जनता के दिलों में उनके प्रति गहरी संवेदना और सम्मान पैदा कर दिया है। लोग उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देख रहे हैं जो युद्ध की असली और भयानक कीमत को समझता है। एक साधारण कामकाजी परिवार से आने वाले आइजनकोट ने 40 वर्षों तक इजरायली डिफेंस फोर्स (IDF) में अपनी सेवाएं दी हैं और वे 2015 से 2019 तक देश के सेना प्रमुख भी रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, उनकी छवि किसी पारंपरिक, विभाजनकारी या लोकलुभावन (पॉपुलिस्ट) राजनेता जैसी नहीं है, जो उन्हें नेतन्याहू से बिल्कुल अलग और लोकप्रिय बनाती है।
रणनीतिहीन युद्ध का आरोप और कैबिनेट से इस्तीफा
गादी आइजनकोट ने साल 2024 में नेतन्याहू की वॉर कैबिनेट से यह आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया था कि प्रधानमंत्री के पास गाजा को लेकर कोई स्पष्ट और दूरदर्शी रणनीति नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा था कि युद्ध के मैदान में मिली कुछ तात्कालिक सफलताओं को सरकार भूलवश हमास का पूर्ण खात्मा मान बैठी है, जो कि सच नहीं है। इसी वैचारिक मतभेद के कारण उन्होंने सरकार का साथ छोड़ दिया और अब वे जनता के बीच सरकार की कमियों को उजागर कर रहे हैं।
अनिवार्य सैन्य सेवा का एजेंडा और चुनावी समीकरण
आइजनकोट की पार्टी ‘याशार’ का मुख्य एजेंडा देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा को अचूक बनाना, युद्ध प्रभावित उत्तरी और दक्षिणी क्षेत्रों का पुनर्विकास करना, शिक्षा व स्वास्थ्य में निवेश बढ़ाना और 7 अक्टूबर को हुई सुरक्षा चूक की जांच के लिए एक स्वतंत्र राज्य आयोग का गठन करना है। उन्होंने ‘सभी के लिए सेवा’ का नारा दिया है, जिसके तहत इजरायल के अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स (कट्टरपंथी) यहूदियों और अरब नागरिकों के लिए भी सेना में काम करना अनिवार्य करने की बात कही गई है।
ताजा चुनावी सर्वे और रुझानों में आइजनकोट की पार्टी बेहद मजबूत स्थिति में नजर आ रही है और वह नेतन्याहू की 'लिकुड पार्टी' के बाद दूसरे स्थान पर बनी हुई है। हालांकि, इजरायल की जटिल राजनीति में किसी भी एक दल को पूर्ण बहुमत मिलना मुश्किल दिख रहा है, लेकिन गठबंधन सरकार बनाने के मामले में आइजनकोट की स्थिति नेतन्याहू से बेहतर मानी जा रही है। इजरायल में आगामी अक्टूबर तक आम चुनाव होने की संभावना है, जहां आइजनकोट के सामने नेतन्याहू के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट की मौजूदगी भी एक बड़ी चुनौती होगी।
बाप ने छीनी इकलौते बेटे की जिंदगी, अदालत ने सुनाई उम्रकैद की सजा
6 Jul, 2026 03:18 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
फतेहाबाद। हरियाणा के फतेहाबाद जिले की जिला अदालत ने अपने ही 17 वर्षीय इकलौते बेटे की बेरहमी से हत्या करने के आरोपी पिता को दोषी करार देते हुए उम्रकैद (आजीवन कारावास) की सख्त सजा सुनाई है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश दीपक अग्रवाल की अदालत ने मामले की अंतिम सुनवाई करते हुए दोषी पिता सरजीत सिंह पर उम्रकैद के साथ-साथ 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने यह फैसला अभियोजन पक्ष के गवाहों, मेडिकल रिपोर्ट और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर लिया है।
शराब के नशे में उपजे विवाद में ली बेटे की जान
यह खौफनाक वारदात करीब डेढ़ साल पहले गांव भूथन कलां में घटित हुई थी। मृतक किशोर परमजीत सिंह की मां रोशनी देवी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, आरोपी पिता सरजीत सिंह अत्यधिक शराब पीने का आदी था। वारदात वाली रात वह भारी नशे में धुत होकर घर लौटा था। घर पर किसी घरेलू बात को लेकर उसका अपने इकलौते बेटे परमजीत से विवाद हो गया। बहस इतनी बढ़ी कि गुस्से में आकर सरजीत ने पास ही पड़े लकड़ी के भारी डंडे (लठ) से बेटे के सिर पर ताबड़तोड़ वार कर दिया, जिससे परमजीत लहूलुहान होकर गिर पड़ा और उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
बेटी के ससुराल गई थी मां, पीछे से हो गया अनर्थ
रोशनी देवी ने पुलिस को बताया था कि उनके दो बच्चे थे—एक शादीशुदा बेटी किरण और 17 साल का अविवाहित बेटा परमजीत। 20 दिसंबर 2024 को रोशनी अपनी बेटी के ससुराल चिकनवास गई हुई थी और घर पर पिता-पुत्र अकेले थे। जब उसे बेटे की मौत की खबर मिली और वह बदहवास हालत में घर पहुंची, तो आरोपी पति सरजीत सिंह रोते हुए अपनी गलती कबूल करने लगा कि उसने नशे में धुत्त होकर अपने ही हाथों अपने बुढ़ापे के एकमात्र सहारे को हमेशा के लिए खत्म कर दिया।
माइनर के पास पुलिया के नीचे छिपाया था वारदात में इस्तेमाल लठ
वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी ने सबूत मिटाने की भी कोशिश की थी। गिरफ्तारी के बाद पुलिस पूछताछ में आरोपी सरजीत सिंह ने सच उगल दिया था। पुलिस की जांच टीम ने उसकी निशानदेही पर भिरड़ाना माइनर (नहर) के साथ लगती सड़क के पास बनी एक खाल की पुलिया के नीचे से वारदात में इस्तेमाल किया गया वो खून से सना लठ भी बरामद कर लिया था, जिसे फॉरेंसिक जांच (FSL) के लिए भेजा गया था।
अदालत में पुख्ता सबूतों के दम पर मिली सख्त सजा
जिला अटॉर्नी देवेंद्र मित्तल और सहायक जिला अटॉर्नी अरुण बंसल ने अदालत में सरकार की तरफ से इस केस की बेहद प्रभावी पैरवी की। सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयान, डॉक्टरों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और एफएसएल (FSL) की टीम द्वारा जुटाए गए वैज्ञानिक सबूत पेश किए गए। इन पुख्ता कड़ियों के आधार पर अदालत ने माना कि आरोपी ने बिना किसी उकसावे के अपने ही नाबालिग बेटे की जान ली है, जिसके बाद कोर्ट ने उसे यह कड़ी सजा सुनाई।
सुपर टाइफून बावी से हाई अलर्ट, तेज हवाओं का बड़ा खतरा
6 Jul, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। प्रशांत महासागर क्षेत्र में स्थित अमेरिकी भूभाग गुआम और उत्तरी मारियाना द्वीपसमूह पर 'सुपर टाइफून बावी' (Super Typhoon Bavi) का भीषण खतरा मंडरा रहा है। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक, यह साल 2026 का दूसरा सबसे विनाशकारी तूफान है, जो इस इलाके में भारी तबाही मचा सकता है। वर्तमान में यह चक्रवात बेहद तेजी के साथ टिनियन और रोता द्वीपों की तरफ अग्रसर है। तूफान के केंद्र में हवाओं की अधिकतम रफ्तार लगभग 280 किलोमीटर प्रति घंटा मापी गई है, जिसकी वजह से इसे सैफिर-सिम्पसन स्केल पर सबसे खतरनाक यानी 'कैटेगरी-5' के तूफान के रूप में वर्गीकृत किया गया है। मौसम पूर्वानुमान एजेंसियों के अनुसार, इस सुपर टाइफून का मुख्य केंद्र टिनियन और रोता द्वीपों के ठीक बीच से होकर गुजरने की संभावना है। विशेषज्ञों ने सचेत किया है कि समंदर का अनुकूल तापमान और परिस्थितियां इस तूफान को तट से टकराने से पहले और ज्यादा आक्रामक बना सकती हैं। इसके असर से अत्यंत तीव्र हवाओं के साथ समुद्र में गगनचुंबी लहरें उठने, मूसलाधार बारिश होने और बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने की चेतावनी दी गई है।
सुरक्षित ठिकानों पर जाने की अपील और अलर्ट जारी
खतरे को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने आम नागरिकों से घरों के भीतर रहने और बिना किसी बेहद जरूरी काम के बाहर न निकलने की सख्त हिदायत दी है। उत्तरी मारियाना द्वीपसमूह के अधिकारियों ने जनता से आपातकालीन सुरक्षा गाइडलाइंस का पालन करने और तूफान के गुजरने तक मजबूत कंक्रीट की इमारतों या सरकारी राहत शिविरों में शरण लेने को कहा है। किसी भी अप्रिय स्थिति से तुरंत निपटने और जान-माल की रक्षा के लिए सभी राहत व बचाव दलों (रेस्क्यू एजेंसियों) को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषित की आपातकालीन आपदा
हालात की संवेदनशीलता और भयावहता को भांपते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तरी मारियाना द्वीपसमूह के लिए पहले ही 'आपातकालीन आपदा घोषणा' को अपनी मंजूरी दे दी है। व्हाइट हाउस के इस कदम के बाद अब फेडरल (संघीय) एजेंसियों के लिए प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री, वित्तीय संसाधन और आपदा प्रबंधन से जुड़ी हर जरूरी मदद को बिना किसी देरी के तुरंत पहुंचाने का रास्ता साफ हो गया है।
ताइवान की ओर बढ़ने की आशंका और पुराना घाव
ताइवान पर भी खतरा: मौसम विभाग का आकलन है कि उत्तरी मारियाना द्वीपसमूह को अपनी चपेट में लेने के बाद सुपर टाइफून बावी पश्चिम दिशा की ओर मुड़ जाएगा। अनुमान है कि अगले वीकेंड (सप्ताहांत) तक यह ताइवान के तटीय क्षेत्रों तक दस्तक दे सकता है। हालांकि, वहां पहुंचते-पहुंचते इसकी रफ्तार थोड़ी धीमी होकर लगभग 204 किलोमीटर प्रति घंटा रह जाएगी, लेकिन इसके बावजूद यह 'कैटेगरी-3' के एक बेहद गंभीर चक्रवात के रूप में सक्रिय रहेगा।
अप्रैल की तबाही का खौफ: ध्यान देने वाली बात यह है कि इसी साल अप्रैल के महीने में आए 'सुपर टाइफून सिनलाकू' ने भी उत्तरी मारियाना द्वीपसमूह में भयंकर तबाही का मंजर पैदा किया था। उस दौरान हफ्तों तक बिजली गुल रही थी और जल प्रणालियां ठप होने के कारण लोगों को पानी उबालकर पीने की एडवाइजरी जारी की गई थी। पुरानी आपदा के कड़वे अनुभवों को देखते हुए प्रशासन इस बार कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहता और पहले से ही मुस्तैद है।
चौंकाने वाला मामला: 72 मौतों के केस में 11 वर्षीय बच्चा आरोपी
6 Jul, 2026 11:56 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कराची। पाकिस्तान के कराची शहर से एक बेहद हैरान करने वाला कानूनी मामला सामने आया है। जनवरी महीने में हुए एक दिल दहला देने वाले अग्निकांड में पुलिस ने अदालत के समक्ष जो चार्जशीट (आरोपपत्र) दाखिल की है, उसमें एक 11 साल के मासूम बच्चे को मुख्य आरोपी बनाया गया है। इस भीषण हादसे में कुल 72 बेकसूर लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी, जबकि सैकड़ों दुकानें खाक हो गई थीं। अब यह पूरा मामला कानूनी प्रक्रिया के तहत कोर्ट के पाले में पहुंच चुका है।
यह दर्दनाक हादसा 17 जनवरी को कराची के व्यस्ततम सदर इलाके के एम.ए. जिन्ना रोड पर बने 'गुल प्लाजा शॉपिंग कॉम्प्लेक्स' में घटित हुआ था। आग की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि फायर ब्रिगेड और रेस्क्यू टीमों को इसे पूरी तरह काबू में करने के लिए करीब एक हफ्ते की कड़ी मशक्कत करनी पड़ी थी। इस दौरान समूचे इलाके में हाहाकार मचा रहा और बड़े पैमाने पर वित्तीय तबाही हुई।
पिता और प्रबंधन समिति के सदस्य भी नामजद, सभी फरार
पुलिस द्वारा कोर्ट में पेश किए गए आरोपपत्र में केवल उस 11 वर्षीय बच्चे को ही नहीं, बल्कि उसके पिता और गुल प्लाजा मैनेजमेंट कमेटी के चार अन्य पदाधिकारियों को भी सह-आरोपी बनाया गया है। प्रबंधन से जुड़े आरोपियों में तनवीर पास्ता, अमर इस्माइल, मोहम्मद रमजान और मोहम्मद अमीन के नाम शामिल हैं। पुलिसिया रिपोर्ट के मुताबिक, हादसे के बाद से ही ये सभी आरोपी अंडरग्राउंड (फरार) हो गए हैं और कानून की गिरफ्त से दूर हैं।
माचिस की तीली से खेल रहा था बच्चा
अभियोजन पक्ष की थ्योरी के अनुसार, घटना वाले दिन बच्चे के पिता दुकान पर हाजिर नहीं थे और दुकान की पूरी जिम्मेदारी अकेले उस छोटे बच्चे के कंधों पर थी। आरोप है कि दुकान में अकेला बैठा बच्चा माचिस की तीलियों से खेल रहा था, जिससे निकली एक चिंगारी ने विकराल रूप धारण कर लिया और देखते ही देखते बहुमंजिला इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। हालांकि, इस थ्योरी की न्यायिक समीक्षा की जा रही है और आखिरी फैसला अदालत में पेश होने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।
42 गवाहों की गवाही और 13 वर्षीय प्रत्यक्षदर्शी का बयान
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तफ्तीश में 42 गवाहों के बयानों को चार्जशीट का मुख्य आधार बनाया है। इनमें एक 13 साल के अन्य बच्चे का बयान बेहद अहम माना जा रहा है, जिसने जांच अधिकारियों को बताया कि आग अचानक भड़की थी और पलक झपकते ही पूरे शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में फैल गई। इस प्रत्यक्षदर्शी के बयान को केस की सबसे मजबूत कड़ी माना जा रहा है।
72 मौतें, हजार से ज्यादा दुकानें राख और सुरक्षा में भारी चूक
नुकसान का आकलन: इस प्रलयंकारी आग में 72 लोगों की मौत के अलावा 8 लोग गंभीर रूप से झुलस गए थे। वहीं, करीब 1153 दुकानें जलकर पूरी तरह कबाड़ में तब्दील हो गई थीं।
व्यापारियों का गुस्सा: इस हादसे के बाद से ही स्थानीय कारोबारियों और मृतकों के परिवारों में प्रशासन के प्रति भारी नाराजगी है। पीड़ित पक्ष लगातार उचित मुआवजे और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग कर रहा है।
बिल्डिंग की लापरवाही: सरकारी जांच में यह कड़वा सच भी सामने आया है कि इस विशाल शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में आग से निपटने के न्यूनतम इंतजाम (अग्निशमन उपकरण) भी मौजूद नहीं थे। आपातकालीन निकास द्वारों (इमरजेंसी एग्जिट) पर ताले लटके हुए थे और पूरी बिल्डिंग की वायरिंग बेहद जर्जर व असुरक्षित थी। पुलिस ने इन सभी गंभीर लापरवाहियों को भी केस डायरी और आरोपपत्र का हिस्सा बनाया है, जिन पर कोर्ट में विस्तृत सुनवाई होनी बाकी है।
वेंस की टिप्पणी पर नेतन्याहू ने रखा पक्ष, भारत को बताया खास मित्र
6 Jul, 2026 09:56 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यरूशलेम। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि वैश्विक पटल पर अमेरिका ही इजरायल का एकमात्र और सबसे मजबूत मददगार है। नेतन्याहू ने पूरी स्पष्टता के साथ कहा कि इजरायल के अंतरराष्ट्रीय संबंध सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भारत सहित दुनिया के कई अन्य शक्तिशाली देशों के साथ भी उसके बेहद मजबूत और भरोसेमंद रणनीतिक रिश्ते हैं।
एक अमेरिकी टेलीविजन कार्यक्रम में चर्चा के दौरान इजरायली प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से भारत का जिक्र करते हुए कहा कि इजरायल को भारत जैसे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र से हमेशा महत्वपूर्ण और ठोस समर्थन मिलता आया है। उन्होंने रेखांकित किया कि करीब 1.4 अरब की आबादी वाला भारत वैश्विक मंच पर इजरायल के साथ व्यापक सहयोग और तालमेल रखता है। नेतन्याहू ने उन सभी अटकलों को खारिज किया जिनमें यह कहा जा रहा था कि इजरायल के पास अमेरिका के अलावा कोई दूसरा प्रभावशाली साझेदार नहीं है।
तकनीक और रक्षा क्षेत्र में बहुआयामी साझेदारी
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने बताया कि तकनीकी नवोन्मेष (इन्नोवेशन) से लेकर रक्षा और सुरक्षा जैसे बेहद संवेदनशील क्षेत्रों में इजरायल के कई देशों के साथ गहरे संबंध हैं। उन्होंने विशेष तौर पर इजरायल की साइबर सुरक्षा और उन्नत तकनीकों का हवाला देते हुए कहा कि आज दुनिया के तमाम विकसित और विकासशील देश इजरायल की इस विशेषज्ञता का लाभ उठाने के लिए उत्सुक हैं।
सार्वजनिक और निजी रुख में अंतर
वैश्विक कूटनीति के एक दिलचस्प पहलू को उजागर करते हुए नेतन्याहू ने कहा कि कई अंतरराष्ट्रीय नेता व्यक्तिगत और गोपनीय स्तर पर उनसे संपर्क साधते हैं और इजरायल के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की इच्छा जताते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुछ देश भले ही वैश्विक दबाव या घरेलू राजनीति के चलते सार्वजनिक रूप से इजरायल के खिलाफ अलग रुख दिखाते हों, लेकिन पर्दे के पीछे वे इजरायल की सैन्य क्षमता, आधुनिक युद्ध अनुभव, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और साइबर सुरक्षा के बेजोड़ कौशल से सीखने को लालायित रहते हैं।
13 जुलाई को वाशिंगटन में डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात संभव
बैठक का एजेंडा: इस कूटनीतिक हलचल के बीच इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। इसके अनुसार, आगामी 13 जुलाई को बेंजामिन नेतन्याहू वाशिंगटन का दौरा कर सकते हैं, जहां उनकी मुलाकात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से होने की संभावना है।
मुख्य मुद्दे: इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान ईरान की परमाणु और क्षेत्रीय चुनौतियां, मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) के सुरक्षा हालात और सऊदी अरब के साथ ऐतिहासिक शांति समझौतों को आगे बढ़ाने जैसे रणनीतिक मुद्दों पर गंभीर चर्चा होगी। बताया गया है कि हाल ही में दोनों शीर्ष नेताओं के बीच फोन पर हुई बातचीत के दौरान ही इस मुलाकात की रूपरेखा तय कर ली गई थी।
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि ट्रंप से होने वाली इस अहम बैठक से ठीक पहले नेतन्याहू का यह बयान बेहद मायने रखता है, जिसमें उन्होंने अमेरिका को यह संदेश दिया है कि इजरायल की विदेश नीति बहुआयामी है और इसमें भारत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
तेहरान में अंतिम यात्रा के दौरान लगे 'किल ट्रम्प' के नारे, तीन बेटे हुए शामिल
6 Jul, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान: ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद देश में शोक की लहर है। रविवार को आयोजित किए गए उनके अंतिम संस्कार समारोह में खामेनेई के तीन बेटे मसूद, मेयसम और मुस्तफा तो नजर आए, लेकिन उनके सबसे चर्चित बेटे और संभावित उत्तराधिकारी मुजतबा खामेनेई इस पूरे आयोजन से पूरी तरह दूर रहे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजराइल से जान का गंभीर खतरा होने की वजह से मुजतबा ने सुरक्षा कारणों से सार्वजनिक रूप से इस अंतिम संस्कार में हिस्सा नहीं लिया। इस दौरान पूरी तेहरान नगरी में गम और गुस्से का माहौल देखा गया।
तेहरान में उमड़ा जनसैलाब, 'किल ट्रम्प' और 'किल बीबी' के लगे नारे
ईरान इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट के अनुसार, अंतिम संस्कार के दौरान मस्जिद और सड़कों पर इकट्ठा हुए लाखों लोगों ने अमेरिका और इजराइल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान भीड़ 'किल ट्रम्प' और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ 'किल बीबी' के नारे लगाते हुए पूर्व सुप्रीम लीडर की मौत का बदला लेने की मांग कर रही थी। आज सोमवार को तेहरान की मुख्य सड़कों से खामेनेई की बेहद भव्य अंतिम यात्रा निकाली जा रही है, जिसमें शहर के प्रमुख मार्गों पर देश के शीर्ष धार्मिक नेता, सरकारी पदाधिकारी और सेना के आला अफसरान मौजूद हैं। इमाम खुमैनी मोसाल्ला ग्रैंड मस्जिद और इस्लामिक रिवोल्यूशन स्क्वायर के आसपास सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए हैं।
ट्रम्प की तीखी टिप्पणी पर ईरान का पलटवार, कहा- अमेरिका के पास सभ्यता नहीं
अयातुल्ला खामेनेई के अंतिम संस्कार को लेकर वैश्विक स्तर पर भी जुबानी जंग तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक विवादित बयान देते हुए कहा कि खामेनेई के अंतिम संस्कार के वक्त ईरान का पूरा शीर्ष नेतृत्व एक ही जगह मौजूद था और अमेरिका चाहता तो महज एक हमले में पूरी ईरानी लीडरशिप को खत्म कर सकता था, लेकिन बातचीत की गुंजाइश रखने के लिए ऐसा नहीं किया गया। ट्रम्प के इस दावे पर आर्मेनिया स्थित ईरानी दूतावास ने बेहद कड़ा पलटवार करते हुए कहा कि इंसानों को मारा जा सकता है लेकिन उनके विचारों को नहीं, और अमेरिका के पास न तो कोई सभ्यता है, न इतिहास और न ही कोई सम्मान।
भीषण गर्मी में फायर ब्रिगेड ने छिड़का पानी, सेना ने दी खुली चुनौती
तेहरान में तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर होने के बावजूद अपने नेता को अंतिम विदाई देने के लिए लाखों की भीड़ डटी रही। लोगों को हीटस्ट्रोक से बचाने के लिए फायर ब्रिगेड की गाड़ियों से पानी की बौछारें की गईं, साथ ही जगह-जगह ठंडे पेय पदार्थ और तरबूज बांटे गए। इस बीच ईरानी सेना के ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरमिनिया ने अमेरिका और इजराइल को सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि सीजफायर के इस दौर का इस्तेमाल ईरानी सेना अपनी ताकत को कई गुना बढ़ाने के लिए कर रही है और किसी भी दुस्साहस का बेहद करारा जवाब दिया जाएगा।
रूस का बड़ा बयान, होर्मुज जलडमरूमध्य को बताया ईरान का 'परमाणु हथियार'
इस पूरे घटनाक्रम और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच रूस के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव का एक बड़ा बयान सामने आया है। मेदवेदेव ने कहा कि 'होर्मुज स्ट्रेट' (जलडमरूमध्य) असल में ईरान का सबसे बड़ा 'परमाणु हथियार' है। उनका मानना है कि दुनिया के इस सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्ग पर पूरी तरह नियंत्रण रखकर ईरान जब चाहे तब वैश्विक तेल व्यापार और पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को अपने दबाव में ले सकता है।
8 लाख पटाखों ने बिगाड़ी हवा: महज 40 मिनट में प्रदूषण के रिकॉर्ड टूटे
6 Jul, 2026 08:11 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन: अमेरिका के 250वें स्वतंत्रता दिवस के जश्न में हुई आतिशबाजी ने देश की राजधानी वॉशिंगटन डीसी की आबोहवा को पूरी तरह बिगाड़ दिया है। 4 जुलाई को मनाए गए इस ऐतिहासिक जश्न के दौरान लगभग 40 मिनट तक आसमान में बारूद का ऐसा तमाशा चला कि रविवार को कुछ समय के लिए वॉशिंगटन डीसी दुनिया के सबसे प्रदूषित बड़े शहरों की सूची में शीर्ष पर पहुंच गया। ग्लोबल एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म IQAir के आंकड़ों के मुताबिक, प्रदूषण का स्तर बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गया था, हालांकि रविवार शाम तक स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ और अमेरिकी राजधानी वैश्विक रैंकिंग में खिसककर 26वें स्थान पर आ गई।
राजधानी में 'कोड रेड' अलर्ट जारी, सिगरेट पीते हुए मैराथन जैसी स्थिति
आसमान में घुले जहर को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने शहर में 'कोड रेड' एयर क्वालिटी अलर्ट जारी कर दिया है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने नागरिकों को सख्त हिदायत दी है कि वे घरों से बाहर निकलने और बाहरी गतिविधियों से बचें। अधिकारियों ने चेतावनी देते हुए इस प्रदूषण की तुलना 'सिगरेट पीते हुए मैराथन दौड़ने' से की है। प्रशासन का कहना है कि यह प्रदूषित हवा बुजुर्गों, बच्चों और सांस की बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए तो जानलेवा है ही, साथ ही इसके और भीषण गर्मी के घातक मिश्रण से पूरी तरह स्वस्थ लोगों की सेहत पर भी बेहद गंभीर बुरा असर पड़ सकता है।
सैकड़ों लोगों की बिगड़ी तबीयत, अस्पतालों में लगी कतारें
जश्न के बाद फैली इस वायु प्रदूषण और उमस भरी गर्मी के कारण सैकड़ों लोगों को आपातकालीन चिकित्सा सहायता की जरूरत पड़ी है। डीसी फायर और ईएमएस (EMS) विभाग ने बताया कि उन्होंने 96 मरीजों को प्राथमिक उपचार दिया, जिनमें से 40 लोगों को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इसके अलावा, जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में 289 मरीज और यूएस डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ एंड ह्यूमन सर्विसेज के रिकॉर्ड में 314 मरीजों के इलाज के लिए संपर्क करने की बात सामने आई है। हालांकि, अधिकारी अभी इस बात की पूरी तरह पुष्टि नहीं कर रहे हैं कि इनमें से कितने लोग सिर्फ खराब हवा और कितने भीषण गर्मी की वजह से बीमार पड़े।
विश्व रिकॉर्ड बनाने की होड़ में छोड़े गए 8.5 लाख पटाखे
इस अभूतपूर्व प्रदूषण की मुख्य वजह आजादी के इस महापर्व पर बनाया गया एक मेगा प्लान था। नेशनल मॉल, पोटोमैक नदी में खड़ी बड़ी नावों और वेस्ट पोटोमैक पार्क समेत कुल 10 अलग-अलग स्थानों से करीब 8,50,000 आतिशबाजी छोड़ी गईं। आयोजकों को उम्मीद थी कि यह विशाल आयोजन दुनिया के सबसे बड़े आतिशबाजी शो के तौर पर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराएगा। हालांकि, पर्यावरण और सेहत की इस भारी तबाही के बीच रविवार देर रात तक इस रिकॉर्ड को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी थी।
हादसे के बाद प्रशासन सख्त, सुपरवाइजर पर गिरी गाज और कंपनी हुई ब्लैकलिस्ट
