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पत्नी से अवैध संबंधों की सच्चाई छुपाना है मानसिक क्रूरता: पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट
28 Apr, 2025 06:54 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि अगर पति का किसी दूसरी महिला से संबंध है और पत्नी इस संबंध के बारे में अपने पति से कोई जवाब चाहती है तो पति को इसका जवाब देना होगा।अगर पति अपनी पत्नी द्वारा पूछे गए सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं देता अथवा विवाहेतर संबंधों को छिपाता है तो यह उसका अपनी पत्नी के प्रति मानसिक क्रूरता वाला व्यवहार होगा। जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस सुखविंदर कौर की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया है। मामला एक ऐसे पति से जुड़ा था, जिसने पत्नी द्वारा उस पर अवैध संबंधों का आरोप लगाने के आधार पर तलाक मांगा था।
विवाह को तोड़ने जैसा व्यवहार पत्नी के साथ क्रूरता
पति ने अदालत में स्वीकार किया कि वह एक महिला को जानता है और उसके साथ कई बार हवाई जहाज और ट्रेन से यात्रा कर चुका है। हालांकि उसने यह भी कहा कि उनके बीच कोई अवैध संबंध नहीं है। लेकिन कोर्ट ने माना कि विवाहेत्तर संबंधों का उचित स्पष्टीकरण नहीं होना भी विवाह संस्था को तोड़ने जैसा व्यवहार है और इसे पत्नी के साथ क्रूरता ही माना जाएगा।
जानें क्या है यह मामला?
यह मामला फैमिली कोर्ट के 2023 के फैसले के खिलाफ दायर अपील से जुड़ा था, जिसमें पति को तलाक देने से मना कर दिया गया था। पति और पत्नी का विवाह 2011 में हुआ था और उनका एक बच्चा भी है। पति ने आरोप लगाया था कि पत्नी झूठे आरोप लगाकर उसकी प्रतिष्ठा खराब कर रही है, जबकि पत्नी ने कहा कि उसने अपने पति को एक महिला के साथ पार्क में देखा था और पूछने पर पति ने स्वीकार किया कि वह महिला उसकी कंपनी में काम करती है और वह उससे शादी करने वाला है।
अदालत में एक सीडी भी पेश की गई थी, जिसमें पति को एक फ्लैट से एक महिला के साथ निकलते हुए देखा गया था। साथ ही पति और उस महिला ने मिलकर एक कंपनी भी रजिस्टर करवाई हुई थी।
कोर्ट ने कहा कि पति ने खुद भी कई बातें स्वीकार की हैं, जैसे महिला के साथ गोवा यात्रा करना, जिससे साफ है कि पति का व्यवहार ही दांपत्य जीवन में दरार का कारण बना है। अंत में हाई कोर्ट ने कहा कि पति वर्ष 2018 से पत्नी से अलग रह रहा है, लेकिन विवाह टूटने की जिम्मेदारी उसी पर है। इसलिए उसे तलाक की कोई राहत नहीं दी जा सकती। अदालत ने उसकी अपील खारिज कर दी।
ट्रंप के 100 दिन: अमेरिका की विदेश नीति में बड़ा बदलाव, सहयोगी देश नाराज़
28 Apr, 2025 04:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। राष्ट्रपति के रूप में दूसरे कार्यकाल में डोनाल्ड ट्रंप के व्हाइट हाउस में 100 दिन पूरे हो गए हैं। वह अमेरिका के ऐसे राष्ट्रपति हैं जिन्होंने अभूतपूर्व टैरिफ वार शुरू किया, अमेरिका की विदेशी सहायता में कटौती की, नाटो सहयोगियों की निंदा की, यूक्रेन पर आक्रमण को लेकर रूस के दृष्टिकोण से सहमति जताई और ग्रीनलैंड को अमेरिका में मिलाने, पनामा नहर को वापस लेने व कनाडा को 51वां राज्य बनाने का इरादा जताया।
इन 'अराजक' सौ दिनों में उन्होंने नियम-आधारित विश्व व्यवस्था के कुछ हिस्सों को उलट दिया है जिसे अमेरिका ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनाने में मदद की।
ट्रंप अब आठ वर्ष पहले की तुलना में कहीं अधिक कट्टरपंथी
ट्रंप के पहले कार्यकाल में ईरान और वेनेजुएला पर विशेष अमेरिकी दूत नियुक्त किए जाने से पहले राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन और जार्ज डब्ल्यू. बुश के अधीन काम कर चुके इलियट अब्राम्स ने कहा, ''ट्रंप अब आठ वर्ष पहले की तुलना में कहीं अधिक कट्टरपंथी हैं। मैं हैरान हूं।''
ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के ''अमेरिका फर्स्ट'' एजेंडे ने दोस्तों को अलग-थलग कर दिया है और विरोधियों को प्रोत्साहित किया है। साथ ही सवाल उठे हैं कि वह कहां तक जाने को तैयार हैं।
ट्रंप के फैसलों ने दुनिया को कर दिया बेचैन
उनके कार्यों और अनिश्चितता ने कुछ सरकारों को इतना बेचैन कर दिया है कि वे ऐसे कदम उठा रहे हैं जिन्हें पूर्व स्थिति में लाना मुश्किल हो सकता है, भले ही 2028 में अमेरिका में अधिक पारंपरिक राष्ट्रपति चुना जाए।
डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन प्रशासन के लिए पश्चिम एशिया के पूर्व वार्ताकार ने कहा, ''हम जो देख रहे हैं, वह विश्व मामलों में एक बहुत बड़ा व्यवधान है। इस समय कोई भी निश्चित नहीं है कि जो हो रहा है उसका क्या मतलब निकाला जाए या आगे क्या होगा।''
ट्रंप ने कई अधिकारियों को निकाला
वैश्विक प्रणाली में ट्रंप के बदलाव का यह आकलन रॉयटर द्वारा वाशिंगटन और दुनियाभर की राजधानियों में एक दर्जन से अधिक वर्तमान और पूर्व सरकारी अधिकारियों, विदेशी राजनयिकों और स्वतंत्र विश्लेषकों के साथ साक्षात्कार से निकाला है।
ट्रंप के बदलने की संभावना काफी कम
कई लोगों का कहना है कि पहले हो चुके कुछ नुकसान लंबे समय तक बने रह सकते हैं। दरअसल, ट्रंप के बदलने की संभावना काफी कम है और वह उम्मीद करते हैं कि कई देश अमेरिका के साथ अपने संबंधों में स्थायी बदलाव करें। इसका असर पहले ही शुरू हो चुका है।
कुछ यूरोपीय सहयोगी अमेरिका से रूठे
उदाहरण के लिए, कुछ यूरोपीय सहयोगी अमेरिकी हथियारों पर निर्भरता कम करने के लिए अपने स्वयं के रक्षा उद्योगों को बढ़ावा देने की सोच रहे हैं। दक्षिण कोरिया में अपने परमाणु शस्त्रागार को विकसित करने की बहस तेज हो गई है। अटकलें लगाई जा रही हैं कि बिगड़ते संबंध अमेरिकी भागीदारों को कम से कम आर्थिक रूप से चीन के करीब जाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
भारत के कदमों से पाकिस्तान परेशान, शहबाज सरकार ने आज सिंधु जल समझौते पर बैठक बुलाई
28 Apr, 2025 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत के पाकिस्तान के खिलाफ एक्शन लिए जाने के बाद से पाकिस्तान घबराया हुआ है। सिंधु जल समझौते रोक लगाने के बाद से पाकिस्तान को सूखे का डर सता रहा है। इस बीच पाकिस्तान में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने आज सीसीआई की बैठक बुलाई है। सिंध सरकार के अनुरोध पर पाकिस्तान में प्रधानमंत्री ने आज सीसीआई की बैठक बुलाई है।
सिंध के वरिष्ठ मंत्री शरजील इनाम मेमन ने इसकी जानकारी दी है। यह बैठक पहले 2 मई को होनी थी, लेकिन सिंध सरकार के अनुरोध पर इसे आज ही की जा रही है। शरजील इनाम ने आगे बताया कि नहर परियोजनाओं के मुख्य मुद्दे पर चर्चा की जाएगी और इस मामले पर आज निर्णय लिए जाने की उम्मीद है।
समर्थन वापस लेने का दिया अल्टीमेटम
सिंध में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के प्रभाव पर प्रकाश डाला, जिसके कारण पूरे प्रांत में यातायात में भारी व्यवधान उत्पन्न हुआ है और व्यापार प्रभावित हुआ है।
उधर पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) का कहना है कि आगामी कॉउंसिल ऑफ कॉमन इंटरेस्ट (CCI) की बैठक में अगर नहर का मसला हल नहीं हुआ तो PPP अपना समर्थन वापस ले लेगी।
पाकिस्तान को हुआ भारी नुकसान
शरजील इनाम ने बताया है भारत सरकार के फैसले से पाकिस्तान को बहुत नुकसान हो रहा है। एक तो माल का परिवहन बंद हो गया था, जिससे व्यापार और किसानों दोनों को नुकसान हुआ, क्योंकि माल को अन्य प्रांतों में नहीं ले जाया जा सका।'
कई संगठनों ने कहा कि वे CCI की बैठक में निर्णय होने तक अपना विरोध प्रदर्शन बंद नहीं करेंगे, मेमन ने उनकी अपील पर विचार करने और बैठक को आज करने के फैसले के लिए संघीय सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरकार बातचीत में विश्वास करती है और उम्मीद है कि CCI की बैठक के निष्कर्ष पर पहुंचने के बाद विरोध प्रदर्शन समाप्त हो जाएगा।
सिंधु नदी पर 6 नहरें बनाने का प्रस्ताव
दरअसल पाकिस्तान के पंजाब प्रांत ने सिंधु नदी पर 6 नहरें बनाने का प्रस्ताव रखा है, जिससे नदी का पानी पंजाब के किसानों को मिल सके। वहीं सिंध प्रांत इसके सख्त खिलाफ है। PPP भी सिंध के लोगों के समर्थन में उतर आई है। PPP का कहना है कि अगर पंजाब में नदी पर नहर बनी तो सिंध में पानी की कमी हो जाएगी।
बांग्लादेशी प्रवासी समुदाय ने यूनुस के खिलाफ इंटरपोल में शिकायत दर्ज कराई, रेड नोटिस की मांग
28 Apr, 2025 01:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बांग्लादेश की अतंरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस की मुश्किलें कम नहीं हो रही है. बांग्लादेश में हालात बिगड़ते जा रहे हैं और यूनुस कानून व्यावस्था पर काबू पाने में असक्षम नजर आई है. यूनुस सरकार में हिंदुओं ही नहीं बल्कि शेख हसीना सरकार के समर्थकों और पार्टी सदस्यों के ऊपर हिंसा हुई है. अब यूनुस बेलगाम होकर घूम रहे थे, लेकिन अब नहीं घूम पाएंगे क्योंकि प्रवासी बांग्लादेशियों ने ही यूनुस के खिलाफ मौर्चा खोल दिया है.
ICC, UN, के बाद अब इंटरपोल में भी यूनुस के याचकाएं दायर की गई हैं. जिसमें यूनुस पर मानवीय हिंसाओं के खिलाफ रेड नोटिस जारी करने की मांग की गई है. साथ ही इस याचिका में यूनुस को आतंकवादियों की मदद करने का आरोप लगाया है और कहा गया है कि नई सरकार आने के बाद उन्होंने देश की जेलों से 700 से ज्यादा आतंकियों को छोड़ दिया.
क्या होता है इंटरपोल का रेड नोटिस?
इंटरपोल का रेड नोटिस एक तरह का अलर्ट है जो दुनिया भर की पुलिस को भेजा जाता है. यह अलर्ट इसलिए भेजा जाता है ताकि पुलिस किसी ऐसे व्यक्ति को ढूंढ सके, जिसे या तो किसी दूसरे देश में मुकदमा चलाने के लिए पकड़ना है या जिसने कोई सज़ा पाई है और भाग गया है.
रेड नोटिस का मतलब यह नहीं है कि पुलिस तुरंत उस व्यक्ति को गिरफ्तार कर लेगी, लेकिन यह उन्हें उस व्यक्ति पर नजर रखने और उसे पकड़ने की तैयारी करने के लिए कहता है, ताकि उसे वापस उस देश में भेजा जा सके जहां उसे पकड़ा जाना है.
शेख हसीना के खिलाफ अंतरिम सरकार ने भी की थी यही मांग
कुछ दिन पहले यूनुस सरकार ने शेख हसीना के खिलाफ इंटरपोल से रेड नोटिस जारी करने कहा था, जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी की जा सके. बता दें, शेख हसीना अगस्त में हुए तख्तापलट के बाद से भारत में रह रही हैं और बांग्लादेश बार-बार उनकी वापसी की मांग कर रहा है, ताकि उनके शासन के दौरान हुए जुल्म की सजा दी है.
पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान में खौफ, चीन से मांगने लगा मदद
28 Apr, 2025 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। पहलगाम अटैक के बाद भारत की ओर से सिंधु नदी समझौता सस्पेंड किए जाने पर पाकिस्तान घबराया हुआ है। भारत की ओर से किसी तरह की सैन्य कार्रवाई की संभावनाओं के बीच पाकिस्तान मदद दूसरे देशों से मदद मांग रहा है। ऐसे में वह कभी चीन की तरफ तो कभी सऊदी अरब और कभी ब्रिटेन की ओर देख रहा।
इस बीच चीन का भी रिएक्शन सामने आया है। चीन ने पहलगाम आतंकी हमले की तेज और निष्पक्ष जांच का एलान किया है। पहलगाम हमले के बाद से भारत और पाकिस्तान में तनाव चरम पर है। चीन ने भारत के साथ इस्लामाबाद के बढ़ते तनाव के बीच अपनी संप्रभुता और सुरक्षा हितों की रक्षा करने में अपने सदाबहार सहयोगी पाकिस्तान के प्रति समर्थन व्यक्त किया है।
चीन ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री से की बात
रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने रविवार को पाकिस्तानी उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार के साथ टेलीफोन पर बातचीत की। रिपोर्ट के मुताबिक, डार ने वांग को कश्मीर क्षेत्र में आतंकवादी हमले के बाद पाकिस्तान और भारत के बीच चल रहे तनाव के बारे में जानकारी दी।
'चीन घटना पर बारीकी से रख रहा नजर'
रिपोर्ट के मुताबिक, वांग ने कहा कि चीन घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रख रहा है। वांग चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य भी हैं।
रिपोर्ट में वांग के हवाले से कहा गया है, 'एक मजबूत मित्र और हर मौसम में रणनीतिक सहयोगी साझेदार के रूप में, चीन पाकिस्तान की वैध सुरक्षा चिंताओं को पूरी तरह समझता है और उसकी संप्रभुता और सुरक्षा हितों की रक्षा करने में पाकिस्तान का समर्थन करता है।'
पाकिस्तान को मिला चीन का साथ?
वांग ने आगे कहा, चीन एक तुरंत और निष्पक्ष जांच की वकालत करता है और मानता है कि ये संघर्ष भारत या पाकिस्तान के मौलिक हितों की पूर्ति नहीं करता है, न ही यह क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए फायदेमंद है।' पहलगाम हमले पर पाकिस्तान को चीन का समर्थन मिलना उसके लिए एक सफलता की तरह है।
चीन की ओर से पाकिस्तान को यह समर्थन शहबाज शरीफ के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले की 'स्वतंत्र जांच' की मांग की है। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि उनका इस मामले में हस्तक्षेप का इरादा नहीं है।
युद्धविराम के बाद भी नहीं थमा तनाव, इजरायल ने बेरूत पर दागी मिसाइलें
28 Apr, 2025 12:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेरूत। इजरायली जेट विमानों ने रविवार को बेरूत के दक्षिणी उपनगरों पर हमला बोला। नवंबर के अंत में युद्धविराम लागू होने के बाद से क्षेत्र पर यह तीसरा इजरायली हमला है। हताहतों की तत्काल कोई रिपोर्ट सामने नहीं आई है।
हिजबुल्ला के ठिकानों को निशाना बना रही इजरायली सेना
इजरायली सेना ने हमले से पहले जारी चेतावनी में कहा कि वह हदथ क्षेत्र में हिजबुल्ला के ठिकानों को निशाना बनाने जा रही है। निवासियों से हमले से पहले उस ठिकाने से कम से कम 300 मीटर दूर जाने का आग्रह किया गया। अल जमूस के पास हमले से पहले लेबनानी राजधानी के कुछ हिस्सों में लड़ाकू विमानों की आवाज सुनी गई।
हिजबुल्ला को अपने क्षेत्र में व्यापक प्रभाव और समर्थन
युद्धविराम से पहले इजरायली ड्रोन और लड़ाकू जेट नियमित रूप से दक्षिणी उपनगरों पर हमला करते थे। यहां हिजबुल्ला का व्यापक प्रभाव और समर्थन है। इजरायल उस क्षेत्र को उग्रवादी गढ़ के रूप में देखता है, जहां उसने प्रमुख हसन नसरल्ला सहित हिजबुल्ला के कई शीर्ष नेताओं की हत्या की है और समूह पर वहां हथियार जमा करने का आरोप लगाता रहा है।
इजरायली हमलों में गाजा में 51 लोगों की मौत
इजरायल का हमला जारी रहने के बीच गाजा पट्टी के अस्पतालों में पिछले 24 घंटों में 51 फलस्तीनियों के शव लाए गए। स्वास्थ्य मंत्रालय ने रविवार को कहा कि इसी के साथ ही पिछले डेढ़ साल से चल रहे इजराइल-हमास युद्ध में मरने वाले फलस्तीनियों की संख्या 52,243 हो गई है।
इजरायल ने 18 मार्च को अचानक बमबारी करके हमास के साथ अपने युद्ध विराम को समाप्त कर दिया और तब से वह प्रतिदिन हमला कर रहा है। उधर, सशस्त्र सैन्यबलों ने एक बफर जोन का विस्तार किया है और दक्षिणी शहर रफाह को घेर लिया है और अब लगभग 50 प्रतिशत क्षेत्र पर उनका नियंत्रण है।
नए सिरे से आक्रामक कार्रवाई कर रहा इजरायल
इजरायली अधिकारियों का कहना है कि नए सिरे से आक्रामक कार्रवाई और कड़ी नाकाबंदी का उद्देश्य हमास पर सात अक्टूबर, 2023 को हमले के दौरान अगवा कर बंधक बना लिए गए लोगों को रिहा करने के लिए दबाव डालना है, जिसके कारण युद्ध शुरू हुआ था।
कनाडा के चुनाव में सत्ता परिवर्तन की संभावना, मतदाता आज करेंगे अपना फैसला
28 Apr, 2025 09:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ओटावा। कनाडा के मतदाता सोमवार को संसदीय चुनाव के लिए मतदान करने जा रहे हैं, जिससे देश की सत्ता में नाटकीय परिवर्तन हो सकता है।
प्रारंभिक मतदान में 73 लाख से अधिक वोट डाले गए
जनवरी में हुए सर्वेक्षणों से संकेत मिलता है कि कंजर्वेटिव निश्चित जीत की ओर बढ़ रहे हैं। बाद में लिबरल पार्टी ने बढ़त हासिल करना शुरू कर दिया। हालांकि हाल के दिनों में प्रतिस्पर्धा कम हो गई है। प्रारंभिक मतदान में 73 लाख से अधिक वोट डाले गए, जो एक रिकॉर्ड है।
चुनाव में टैरिफ का होगा मुद्दा
रिपोर्ट के अनुसार, इस चुनाव में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी एक मुद्दा हो सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति के व्यापार युद्ध और कनाडा को 51वां राज्य बनाने की धमकियों ने कनाडाई लोगों को नाराज कर दिया है। इससे राष्ट्रवाद में उछाल आया है, जिससे लिबरल पार्टी को संसदीय चुनाव में नैरेटिव बदलने में मदद मिली है।
क्यूबेक प्रांत के पूर्व प्रीमियर जीन चारेस्ट ने कहा कि ट्रंप ही अभियान हैं। अहम सवाल यह है कि हम ट्रंप का सामना करने के लिए किस व्यक्ति को चुनने जा रहे हैं। सब कुछ बदल गया है। संघीय चुनाव कराने के लिए जिम्मेदार स्वतंत्र एजेंसी, इलेक्शन कनाडा, पात्र मतदाताओं को भाग लेने के लिए कई अवसर प्रदान करती है।
प्रधानमंत्री कार्नी पोलीवरे के बीच कड़ी टक्कर
कनाडा चुनाव में लिबरल पार्टी के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और कंजर्वेटिव नेता पियरे पोलीवरे के बीच कड़ी टक्कर है। संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच बुलाए गए इस चुनाव में पहले ही मतदान में उछाल देखा जा चुका है।
मतदान के दिन से पहले डाले गए वोट
18 अप्रैल से 21 अप्रैल तक अग्रिम मतदान खुले थे, जिससे मतदाता आम चुनाव के दिन से पहले अपने मतपत्र डाल सकें। लगभग 20 लाख कनाडाई लोगों ने अग्रिम मतदान के पहले दिन मतदान किया, जिसने एक दिन में मतदान का नया रिकॉर्ड बनाया।
मेल के जरिए मतदान कर रहे लोग
मतदाता डाक से मतदान करने के लिए आवेदन कर सकते हैं, जिसे "विशेष मतपत्र" के रूप में जाना जाता है। मेल-इन वोटिंग के लिए आवेदन 23 अप्रैल तक जमा करना था। अब तक, 7.5 लाख से अधिक कनाडाई लोगों ने अपने मेल-इन मतपत्र वापस कर दिए हैं, जो 2021 में ऐसा करने वाले 6.6 लाख से अधिक है।
17 साल की चीयरलीडर पॉपकॉर्न लंग्स से पीड़ित, क्या होती है ये बीमारी
27 Apr, 2025 06:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। 17 साल की चीयरलीडर ब्रायना मार्टिन को एक गंभीर फेफड़ों की बीमारी पॉपकॉर्न लंग्स से पीड़ित पाया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्रायना बीते तीन वर्षों से वेपिंग की आदत से जूझ रही थी। एक दिन अचानक ब्रायना को सांस लेने में दिक्कत महसूस हुई, जिसके बाद अस्पताल ले जाया गया। जांच में सामने आया कि वह ब्रोंकियोलाइटिस ऑब्लिटरन्स नामक दुर्लभ बीमारी का शिकार हो चुकी है, जिसे आम भाषा में पॉपकॉर्न लंग्स कहा जाता है। इसमें फेफड़ों के सबसे पतले वायुमार्ग, ब्रॉन्कियोल्स, में सूजन आ जाती है और धीरे-धीरे वहां स्कार टिशू बन जाता है। इसके कारण वायुमार्ग सिकुड़ जाते हैं, जिससे व्यक्ति को सांस लेने में लगातार कठिनाई होती है।
इस बीमारी का नाम पॉपकॉर्न लंग्स क्यों पड़ा?
पॉपकॉर्न लंग्स शब्द का इस्तेमाल पहली बार उन कर्मचारियों के लिए हुआ था, जो माइक्रोवेव पॉपकॉर्न फैक्ट्रियों में काम करते थे और डायसिटाइल नामक रसायन के संपर्क में आने के बाद बीमारी से पीड़ित पाए गए। डायसिटाइल एक कृत्रिम फ्लेवरिंग एजेंट है, जो पॉपकॉर्न और अन्य खाद्य उत्पादों में मक्खन जैसा स्वाद देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
पॉपकॉर्न लंग्स के लक्षण
बीमारी के लक्षणों में लगातार सूखी खांसी, शारीरिक मेहनत पर सांस फूलना, सीने में घरघराहट, बिना किसी स्पष्ट कारण के थकान और सांस लेने में कठिनाई शामिल हैं। गंभीर मामलों में यह सांस की समस्या स्थायी हो सकती है। इससे बचने के लिए उन क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करना चाहिए। इसके अलावा, वेपिंग और धूम्रपान से बचना और फेफड़ों की नियमित जांच कराना भी जरूरी है। यह बीमारी आधुनिक जीवनशैली के कारण बढ़ रही है, और जागरूकता से हम अपनी सेहत की रक्षा कर सकते हैं।
चीन ने रोबोट्स मामले पर जर्मनी और जापान को पीछे छोड़ा, अब साउथ कोरिया और सिंगापुर से होड़
27 Apr, 2025 05:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग । चीन की राजधानी बीजिंग में पिछले दिनों इंसानों और 21 रोबोट्स के बीच अनोखी हाफ मैराथन दौड़ का आयोजन किया गया था। यह पहली बार था जब मशीनों ने 21 किलोमीटर करीब 13 मील की दूरी तक इंसानों के साथ दौड़ लगाई। यह इवेंट बीजिंग के दक्षिण-पूर्वी यिझुआंग जिले में हुआ था, जहां चीन की कई बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों का ऑफिस है।
दरअसल रोबोट्स के बीच मैराथन दौड़ कराकर चीन बतलाना चाहता था कि रोबो की दुनिया में वह अकेला बादशाह है। रोबोटिक्स और टेक्नोलॉजी की दुनिया में चीन अपनी तरक्की को दिखा रहा था। चीन की ड्रॉयडअप और नोएटिक्स रोबोटिक्स जैसी कंपनियों के रोबोट्स ने भी इस रेस में हिस्सा लिया। रेस में शामिल कुछ रोबेट्स का साइज 120 सेमी (3.9 फीट) से कम था, जबकि कुछ 1.8 मीटर (5.9 फीट) तक ऊंचे थे।
इस प्रकार देखने में आया है कि चीन ने बीते कुछ सालों में रोबोटिक्स में तेजी से तरक्की करके जर्मनी और जापान को पीछे छोड़ दिया है। चीन में 2023 तक प्रति 10 हजार कर्मचारियों पर 470 रोबोट थे, यह आंकड़ा जर्मनी के 429 और जापान के 419 से ज्यादा है। अब सिर्फ साउथ कोरिया और सिंगापुर ही रोबोट घनत्व में चीन से आगे हैं।
2032 तक 66 अरब डॉलर का होगा ह्यूमनॉइड रोबोट मार्केट
ग्लोबल ह्यूमनॉइड रोबोट मार्केट का साइज 2023 में 2.43 अरब डॉलर (19 हजार करोड़ रुपए) का था, जिसके 2032 तक 66 अरब डॉलर (5 लाख 63 हजार करोड़ रुपए) तक पहुंचने का अनुमान है। ह्यूमनॉइड रोबोट एक प्रकार का रोबोट है, जिसका आकार इंसानी शरीर जैसा होता है। फिलहाल ह्यूमनॉइड रोबोट विकास के शुरुआती स्टेज में है।
वहीं भारत का ह्यूमनॉइड रोबोट बाजार 2023 में 42 मिलियन डॉलर (करीब 358 करोड़ रुपए) था, जिसके 2030 तक 149.4 मिलियन डॉलर (करीब 1200 करोड़ रुपए) तक पहुंचने की उम्मीद है।
इंडस्ट्रियल नौकरियों में होंगे 2.5 लाख रोबोट्स
गोल्डमैन साक्स का अनुमान है कि 2035 तक ह्यूमनॉइड रोबोट बाजार 38 अरब डॉलर (3 लाख 24 हजार करोड़ रुपए) का होगा। पांच सालों में 2.5 लाख ह्यूमनॉइड रोबोट इंडस्ट्रियल इस्तेमाल के लिए भेजे जाएंगे। 2035 तक 10 लाख रोबोट ग्राहकों द्वारा खरीदे जाएंगे।
पीओके में आपातकालीन स्थिति, स्वास्थ्यकर्मियों की छुट्टियां रद्द
27 Apr, 2025 04:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत के सख्त सैन्य एक्शन की आशंका के चलते पाकिस्तान में हड़कंप मचा हुआ है। इसके चलते पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में आपातकाल जैसे हालात बने हुए हैं। यहां के स्थानीय प्रशासन ने स्वास्थ्यकर्मियों की छुट्टियां तत्काल प्रभाव से रद्द करते हुए सभी चिकित्सा कर्मियों को अलर्ट मोड में रहने का आदेश दिया है।
दरअसल झेलम वैली के स्वास्थ्य निदेशालय द्वारा 25 अप्रैल को जारी आदेश में आपात स्थिति का हवाला देते हुए स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सभी अस्पतालों और स्वास्थ्य इकाइयों में डॉक्टर्स, पैरामेडिकल स्टाफ और एम्बुलेंस चालकों को हर समय ड्यूटी पर तैनात रहना होगा। आदेश में यह भी कहा गया है कि किसी भी प्रकार की छुट्टी या स्थानांतरण की अनुमति नहीं दी जाएगी और सरकारी वाहनों के निजी उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। आदेश का उल्लंघन करने पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
माना जा रहा है कि पहलगाम हमले के बाद पीओके पर आपात स्थिति को भारतीय सुरक्षा एजेंसियां भी बेहद गंभीरता से ले रही हैं। आशंका जताई जा रही है कि नियंत्रण रेखा एलओसी के नजदीकी क्षेत्रों में सैन्य या आतंकी गतिविधियों में तेजी आ सकती है, विशेषकर उन इलाकों में जो पहलगाम के सामने पड़ते हैं।
पाकिस्तान ने चीन से लगाई गुहार, जल युद्ध में हो शामिल, लेकिन क्या संभव है पानी रोकना?
27 Apr, 2025 03:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित करने के बाद पाकिस्तान में बेचैनी बढ़ती जा रही है। पाकिस्तान के नेता और आम लोग अब अपने सदाबहार मित्र चीन से मांग कर रहे हैं कि वह ब्रम्हपुत्र नदी का जल यानी भारत का पानी रोक दे। सोशल मीडिया से लेकर टीवी डिबेट्स तक पाकिस्तान में यही चर्चा है कि चीन भारत की नदियों पर लगाम लगाकर उसे सबक सिखा सकता है। लेकिन क्या वास्तव में ऐसा संभव है? और अगर चीन ऐसा करता भी है तो भारत पर उसका कितना असर होगा?
पाकिस्तान के कई विशेषज्ञ यह तर्क दे रहे हैं कि भारत की अधिकांश नदियां चीन से होकर निकलती हैं, और अगर चीन पानी रोकता है तो भारत प्यासा रह जाएगा। लेकिन सच्चाई यह है कि भारत की जल व्यवस्था बहुपरतीय है — भारत के भीतर ही दर्जनों नदियां बहती हैं और अधिकांश आबादी का जल स्रोत उन्हीं पर निर्भर है।
सिंधु नदी बेसिन के जल बंटवारे में भी भारत ने पाकिस्तान को 80प्रतिशत से ज्यादा पानी दिया था। इसके बावजूद, पाकिस्तान ने आतंकवाद का समर्थन कर भारत के धैर्य की सीमाएं पार कर दीं, जिसके चलते अब भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित किया है।
भारत-चीन संबंध और जल मुद्दा
जहां भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि जैसी कानूनी व्यवस्था थी, वहीं भारत और चीन के बीच ऐसा कोई बाध्यकारी जल-बंटवारा समझौता नहीं है। हां, बाढ़ के मौसम में ब्रह्मपुत्र नदी जैसे कुछ जलस्रोतों को लेकर जल-विज्ञान डेटा साझा करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) ज़रूर है। लेकिन कानूनी बाध्यता के अभाव में चीन स्वतंत्र है।
चीन ने तिब्बत के मेडोग क्षेत्र में ब्रह्मपुत्र पर सुपर डैम बनाने की योजना बनाई है, जिससे पानी के प्रवाह को नियंत्रित किया जा सकता है। हालांकि, अगर चीन ब्रह्मपुत्र का पानी रोकता भी है, तो इसका प्रभाव मुख्य रूप से अरुणाचल प्रदेश, असम और सिक्किम जैसे उत्तर-पूर्वी राज्यों पर पड़ेगा, न कि पूरे भारत पर। भारत की विशाल जल प्रणाली इसे देशव्यापी संकट से बचाए रखेगी।
पाकिस्तान की चीन से मदद की अपील को विश्लेषक उसकी किसी और को पिता बनाने की प्रवृत्ति करार दे रहे हैं। आतंकवाद के मामले में पाकिस्तान जितना दोषी है, उतना भारत चीन के लिए नहीं है। भारत और चीन के बीच सीमा विवाद जरूर हैं, लेकिन भारत चीन में आतंकवाद नहीं फैलाता और न ही उसकी घरेलू राजनीति में हस्तक्षेप करता है। इसलिए चीन के पास पाकिस्तान जैसा प्रतिशोध लेने का कोई नैतिक या रणनीतिक कारण नहीं है।
भारत की तैयारियां
विश्लेषकों का मानना है कि भारत इस संभावित चुनौती को लेकर भी तैयार है। अरुणाचल और असम जैसे राज्यों में तेजी से बांध निर्माण की परियोजनाएं शुरू हो रही हैं ताकि जल स्टोरेज बढ़ाया जा सके और आपात स्थिति में पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। इस प्रकार पाकिस्तान की चीन से मदद की उम्मीद एक मिथक से ज्यादा कुछ नहीं है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान की नापाक हरकत, चीन को मिला कमजोर किया पहलगाम हमले की निंदा का बयान
27 Apr, 2025 02:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
न्यूयॉर्क। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में निंदा के दौरान पाकिस्तान ने एक बार फिर अपनी दोगली नीति का परिचय दिया। आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोगों की हत्या के बावजूद पाकिस्तान ने चीन के साथ मिलकर निंदा प्रस्ताव के शब्दों को कमजोर करने की कोशिश की। इस हमले में अधिकांश मृतक पर्यटक थे, फिर भी पाकिस्तान ने सीधे तौर पर आतंकवादियों की निंदा करने से परहेज किया और केवल दुख जताकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका द्वारा प्रस्तावित मूल मसौदे में भारत सरकार के साथ सक्रिय सहयोग का आह्वान था, जैसा कि पुलवामा हमले के बाद भी किया गया था। लेकिन पाकिस्तान ने चीन का सहारा लेकर भाषा को बदलवाया। नतीजतन, अंतिम बयान में संबंधित अधिकारियों के साथ सहयोग करने की बात कही गई — जिससे सीधे तौर पर भारत का नाम हट गया।
संयुक्त राष्ट्र का नरम रुख
पहलगाम हमले के बाद जारी यूएनएससी के बयान में कहा गया, कि सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है, जिसमें कम से कम 26 लोग मारे गए और कई घायल हुए। सदस्यों ने आतंकवाद के इस निंदनीय कृत्य के अपराधियों और उनके मददगारों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
हालांकि, इस बार भाषा अपेक्षाकृत नरम रही और भारत सरकार के साथ सीधे सहयोग का उल्लेख नहीं किया गया — जैसा पुलवामा हमले के निंदा वक्तव्य में था।
पाकिस्तान की रणनीति ही थी कि आतंकियों को उसने स्वतंत्रता सेनानी बताया। पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने पहलगाम हमले को लेकर आतंकवादियों को स्वतंत्रता सेनानी बताने की कोशिश की थी। इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी भारत के जांच प्रयासों का समर्थन करने के बजाय तटस्थ और पारदर्शी अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की, जिससे पाकिस्तान की मंशा और अधिक स्पष्ट हो गई।
पाकिस्तान की छवि पर बुरा असर
संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान का यह रवैया एक बार फिर उसकी वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचाता है। आतंकवाद के खिलाफ विश्व समुदाय के बढ़ते सहयोग और भारत के आक्रामक कूटनीतिक प्रयासों के बीच पाकिस्तान खुद को अलग-थलग कर रहा है। साथ ही, चीन के साथ उसकी बढ़ती साठगांठ भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना का कारण बन रही है।
साफ है कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी आतंकवाद को लेकर दोहरा खेल खेल रहा है। भारत ने अपनी कूटनीति के जरिए न केवल पाकिस्तान के झूठ को बेनकाब किया है, बल्कि वैश्विक समुदाय के सामने आतंकवाद के खिलाफ एकजुट लड़ाई का आह्वान भी किया है।
नूंह जिले में बड़ा हादसा, घायल कर्मचारियों की हालत नाजुक
26 Apr, 2025 05:58 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणा के नूंह जिले से गुजरने वाले दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे पर भीषण सड़क हादसा हुआ है. इस हादसे में 6 सफाई कर्मचारियों की मौत हो गई है. वहीं, 5 सफाई कर्मचारी गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं. यह घटना फिरोजपुर झिरका थाना क्षेत्र के इब्राहिम बास गांव के पास हुई है.
दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार पिकअप वाहन ने सफाई कार्य में जुटे कर्मचारियों को टक्कर मार दी. इस भीषण हादसे में 6 सफाई कर्मचारियों की मौके पर ही मौत हो गई. यह हादसा शनिवार सुबह करीब 10 बजे हुआ. सुबह 10 सफाई कर्मचारी एक्सप्रेस-वे पर सफाई कार्य कर रहे थे. अचानक आई तेज रफ्तार पिकअप ने इन कर्मचारियों को जोरदार टक्कर मार दी.
हादसे के बाद वहां चीख पुकार मच गई. आस-पास के लोग तुरंत मदद के लिए पहुंचे. लेकिन 6 सफाई तब तक दम तोड़ चुके थे. वहीं, पांच घायल कर्मचारी मदद मांग रहे थे. सभी घायलों को स्थानीय लोगों ने पास के अस्पताल में भर्ती करवाया. वहीं मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए सामान्य अस्पताल भिजवा दिया है.
चश्मदीदों ने क्याब ताया?
चश्मदीदों की मानें तो हादसा बहुत ही भयानक था. अचानक से हमें जोरदार आवाज आई. फिर देखा कि तेज रफ्तार पिकअप वाहन ने सफाईकर्मचारियों को कुचल दिया है. लोग मदद के लिए चीख रहे थे. स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी और घायलों को अस्पताल पहुंचाने में मदद की. देखते ही देखते सड़क पर भारी भीड़ जमा हो गई एंबुलेंस, रोड सुरक्षा एजेंसी के वाहन और पुलिस टीमें मौके पर पहुंचीं. हादसे की भयावहता ऐसी थी कि आसपास के लोग स्तब्ध रह गए. लोग हादसे पर गहरा दुख व्यक्त कर रहे हैं और मृतकों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट कर रहे हैं.
मृतकों की पहचान नहीं हुई
मृतकों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है. हादसे के कारणों की जांच की जा रही है और पिकअप चालक के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है. पुलिस की ओर से बताया कि सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों की मदद से हादसे की पूरी परिस्थितियों का पता लगाया जाएगा. प्रशासन ने हादसे के बाद एक्सप्रेस वे पर यातायात को नियंत्रित किया और घटनास्थल को खाली कराया.
फ्लोरिडा एयरपोर्ट पर बम अलर्ट, उड़ानों पर पड़ा असर
26 Apr, 2025 03:58 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
फ्लोरिडा में सेंट पीट-क्लियर वॉटर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर शुक्रवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब वहां बम की धमकी मिली। आनन-फानन में कई उड़ानों को रद्द कर दिया गया और कई उड़ानों को खाली करवा दिया गया। किसी तरह की कोई जनहानि न हो इसके लिए एहतियात के तौर पर अच्छे से जांच की जा रही है।
बम की धमकी के बाद रद्द की गई उड़ानें
फ्लोरिडा में सेंट पीट-क्लियर वॉटर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर शुक्रवार को बम की धमकी मिली। इस धमकी के बाद एयरपोर्ट अधिकारियों और वहां मौजूद सभी कर्मचारियों ने तुरंत एयरपोर्ट खाली करवाया। कई उड़ानें रद्द की गई हैं।
एफएए डेटा से पता चलता है कि हवाई अड्डे पर संभावित खतरे की जांच जारी रहने के कारण ग्राउंड स्टॉप को बढ़ाने की 30% से 60% संभावना है।
शुक्रवार दोपहर को मिली थी बम की धमकी
दरअसल फ्लोरिडा के क्लियर वॉटर में सेंट पीट-क्लियर वॉटर इंटरनेशनल एयरपोर्ट को शुक्रवार दोपहर को बम की संभावित धमकी मिली। रिपोर्टों के अनुसार, एयरपोर्ट पर प्रस्थान रोक दिया गया है जबकि कई उड़ानों को खाली करा लिया गया है। संघीय उड्डयन प्राधिकरण के आंकड़ों से पता चला है कि अधिकारियों द्वारा खतरे की जांच की जा रही है।
LoC पर फिर आग उगला पाकिस्तान ने, इंडियन आर्मी ने दिया मुंहतोड़ जवाब
26 Apr, 2025 03:53 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
श्रीनगर पहलगाम में 22 अप्रैल को आतंकी हमले में 27 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। 17 मासूम लोग बुरी तरह से घायल हो गए। इसी बीच पाकिस्तान की सेना एलओसी पर दो दिन से लगातार सीजफायर कर नियमों का उल्लंघन कर रही है। यह फायरिंग पाकिस्तान की ओर से भारत की चौकियों पर की गई। रात भर चली गोलीबारी में भारतीय सेना को किसी तरह का कोई नुकसान नहीं हुआ। वहीं भारत की सेना ने भी पाक सेना को मुंह तोड़ जवाब दिया।
नाकाम हुए पाक के नापाक इरादे
पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। पहले पहलगाम अटैक में उसका नाम आया और अब एलओसी से सीजफायर कर वो नियमों का उल्लंघन कर रहा है। पहलगाम अटैक के बाद पाक का ये दूसरी बार है जब पाक ने सीजफायर किया है। हालांकि उसे नापाक इरादे पूरे नहीं हुए और भारत की सेना को किसी भी तरह का कोई नुकसान नहीं हुआ।
भारतीय सेना का पाक को मुंहतोड़ जवाब
सेना के एक अधिकारी ने बताया कि पहलगाम अटैक के बाद पाक की ओर से दो बार एलओसी से सीजफायर किया गया। हालांकि हमारी सेना ने भी उनके इस नापाक इरादे को पूरा नहीं होने दिया और मुंहतोड़ जवाब दिया। अधिकारी ने बताया कि अभी इस मामले में जांच चल रही है और अच्छी बात ये है कि हमारी सेना और चौकियों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। उन्होंने बताया कि पाक की ओर से भारत को उकसाने के लिए गोलीबारी की जा रही है।
कब हुआ था पहलगाम आतंकी हमला?
जानकारी के लिए बता दें कि पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को आतंकी हमला हुआ। इस आतंकी हमले में 27 मासूम लोगों की जान चली गई और 17 लोग घायल हो गए जिनका इलाज चल रहा है। मासूमों की मौत से पूरे देश में आक्रोश है और सभी न्याय की मांग कर रहे हैं। वहीं भारत सरकार ने भी पाकिस्तान से सारे नाते तोड़ने का फैसला कर लिया है और पाकिस्तानी वीजा रद्द करने से लेकर सिंधु जल समझौता तक कैसिंल कर दिया है।
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