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आतंकवाद निरोधी अदालत का फैसला, PTI के 82 कार्यकर्ताओं को 4 महीने की सजा
3 May, 2025 02:27 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को बड़ा झटका लगा है। उनकी पार्टी के 82 नेताओं को एक मामले में जेल की सजा सुनाई गई है। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान की एक आतंकवाद निरोधी अदालत ने जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के 82 कार्यकर्ताओं को पिछले साल हुए हिंसक विरोध-प्रदर्शन के सिलसिले में शुक्रवार को चार महीने की जेल की सजा सुनाई।
82 नेता दोषी करार
अदालत के इस फैसले के बाद से पाकिस्तान में इमरान खान की पार्टी और उनके कार्यकर्ताओं के बीच तहलका मचा हुआ है। बता दें कि इस्लामाबाद और रावलपिंडी में 26 नवंबर 2024 को हुए विरोध-प्रदर्शन के बाद 1,500 से अधिक PTI समर्थकों को गिरफ्तार किया गया था। इन लोगों ने सरकार पर पार्टी संस्थापक इमरान खान को रिहा करने का दबाव बनाने के लिए प्रदर्शन किया था। इमरान अगस्त 2023 से जेल में बंद हैं। सुनवाई के बाद रावलपिंडी स्थित अदालत ने 82 आरोपियों को दोषी ठहराया और उन्हें चार-चार महीने की कैद तथा 15-15 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।
सिंगापुर में मतदान आज, 11 पार्टियों के बीच जोरदार संघर्ष
3 May, 2025 11:16 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सिंगापुर में आज (3 मई) संसदीय चुनाव के लिए वोटिंग कराई जा रही है. सुबह 8 बजे से शुरू हुई वोटिंग रात 8 बजे तक चलने वाली है. इस चुनाव में मुख्य मुकाबला 1965 से सत्ता पर काबिज पीपुल्स एक्शन पार्टी (PAP) और प्रमुख विपक्षी दल वर्कर्स पार्टी (WP) के बीच है. इन दोनों के अलावा कई अन्य छोटे दल भी चुनावी मैदान में हैं. कुल मिलाकर इस सिंगापुर के आम चुनाव में कुल 211 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं. इस चुनाव का रिजल्ट कल यानी कि 4 मई को आ सकता है. लोग सुबह से ही मतदान केंद्र पर पहुंचने लगे हैं. देश में 27,58,846 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने के लिए पात्र हैं. मतदान के लिए पूरे देश में 1,240 केंद्र बनाए गए हैं. ऐसा माना जा रहा है कि आज देर रात या फिर कल सुबह तक नतीजे आ सकते हैं. सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग ने लोगों से सत्तारूढ़ पीपुल्स एक्शन पार्टी (PAP) के लिए वोट देने की अपील की है. कुल 97 संसदीय सीट में से 92 पर अलग-अलग राजनीतिक दलों के 211 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं. इन चुनाव में महंगाई एवं विदेशी श्रमिकों की बढ़ती संख्या प्रमुख मुद्दा माना जा रहा है.
सिर्फ PAP ही लड़ रही सभी सीटों पर चुनाव
चुनाव में 11 पार्टियां हिस्सा ले रही हैं, लेकिन सिर्फ PAP ही सभी 97 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. सिंगापुर चुनाव में हिस्सा लेने वाले दलों की बात करें तो सत्ताधारी पीपल्स एक्शन पार्टी (PAP) सभी 32 सीटों पर उम्मीदवार, विपक्ष की बड़ी पार्टी (WP) 26 सीटों पर, प्रोग्रेस सिंगापुर पार्टी (PSP) 13 उम्मीदवार और छह सीटों पर, अन्य पार्टियों में SPP, SDP, PPP, PAR, RDU, NSP, SUP और SDA भी चुनाव लड़ रही हैं.
वोटिंग प्रतिशत रह सकता है हाई
सिंगापुर में मतदान को सिविल ड्यूटी माना जाता है. यही कारण है कि यहां मतदान प्रतिशत हमेशा ही हाई रहता है. पिछले चुनाव में यहां 90 प्रतिशत से ज्यादा मतदान हुआ था. ऐसे में माना जा रहा है कि इस चुनाव में पिछले चुनाव का रिकॉर्ड टूट सकता है. यहां 27 लाख मतदाता आज अपनी सरकार चुन रहे हैं. सिंगापुर में 1965 से ही पीपुल्स एक्शन पार्टी का कब्जा है.
जम्मू-पहलगाम हमले के बाद बढ़ा तनाव, पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र से दखल की लगाई गुहार!
3 May, 2025 08:54 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पाकिस्तान ने शुक्रवार को कहा कि पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद भारत के साथ तनाव बढ़ने पर उसे उचित समय पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की बैठक बुलाने का अधिकार है. संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि असीम इफ्तिखार अहमद ने कहा कि हम देख रहे हैं कि यह सब कुछ जम्मू-कश्मीर की स्थिति की बैकग्राउंड में हो रहा है. असीम इफ्तिखार अहमद ने एक सवाल के जवाब में यह बात कही, जिसमें उनसे पूछा गया था कि क्या पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के मद्देनजर सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाने की योजना बना रहा है.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य
पाकिस्तान वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का एक अस्थायी सदस्य है और जुलाई में 15 देशों वाली संयुक्त राष्ट्र संस्था की अध्यक्षता करेगा. अहमद ने कहा कि यहां स्पष्ट है कि यह एक घटना थी, लेकिन अब जो स्थिति उत्पन्न हो गई है, वह क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए वास्तविक खतरा है. उन्होंने कहा कि हमारा मानना है कि सुरक्षा परिषद को वास्तव में यह अधिकार मिला है, तथा पाकिस्तान समेत परिषद के किसी भी सदस्य के लिए सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाना, चर्चा का अनुरोध करना तथा इस गंभीर स्थिति पर विचार करना पूरी तरह से वैध होगा.
दोनों देशों के बीच बढ़ा तनाव
अहमद ने कहा कि हमने परिषद के सदस्यों के साथ इस पर चर्चा की है. हमने पिछले महीने के अध्यक्ष और इस महीने के अध्यक्ष के साथ इस पर चर्चा की है. हम स्थिति पर बहुत बारीकी से नजर रख रहे हैं और हमें उचित लगने पर बैठक बुलाने का अधिकार है. जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को आतंकवादियों ने 26 लोगों की हत्या कर दी थी, जिसके परिणामस्वरूप दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया है.
चिली और अर्जेंटीना में धरती कांपी, रिक्टर स्केल पर 7.4 भूकंप दर्ज
3 May, 2025 08:48 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चिली-अर्जेंटीना: दक्षिण अमेरिकी देशों चिली और अर्जेंटीना में शुक्रवार को 7.4 तीव्रता का भूकंप आया है. यह भूकंप चिली और अर्जेंटीना के समुद्री तटों पर महसूस किया गया. इस तेज भूकंप के झटकों के बीच अर्जेंटीना में सुनामी अलर्ट और निकासी आदेश जारी कर दिया गया है. यह भूकंप ड्रेक पैसेज में, उशुआइया से 219 किलोमीटर दक्षिण में आया है. सुनामी के चलते चिली के राष्ट्रीय आपदा रोकधाम और प्रतिक्रिया सेवा ने अंटार्कटिक क्षेत्र, मैगलन क्षेत्र के समुद्र तट क्षेत्र को खाली करने का आदेश जारी किया है.
10 किलोमीटर थी इस भूकंप की गहराई
भूकंप के तुरंत बाद चिली सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सुनामी का खतरा जताया और मैगेलन क्षेत्र के पूरे तटीय हिस्से के साथ-साथ अंटार्कटिक क्षेत्र के समुद्र तट खाली करने का आदेश दिया. संयुक्त राज्य भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, भूकंप का केंद्र अर्जेंटीना के उसुआइया शहर से 219 किलोमीटर दक्षिण में समुद्र में था. अभी तक किसी नुकसान या हताहत की खबर नहीं है, लेकिन प्रशासन सतर्क है. इस भूकंप की गहराई सिर्फ 10 किलोमीटर थी, जिसकी वजह से इसका असर सतह पर ज्यादा महसूस हुआ. ड्रेक पैसेज एक ऐसा क्षेत्र है. जहां प्रशांत और अटलांटिक महासागर मिलते हैं, और यह टेक्टोनिक प्लेट्स की गतिविधियों के लिए जाना जाता है. फिलहाल इस भूकंप से कोई जान-माल के नुकसान की खबर सामने नहीं आई है.
अमेरिकी कॉलेज में गोलीबारी से दहशत, दो महिलाओं को लगी गोली
3 May, 2025 08:05 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लॉस एंजिल्स: अमेरिका के दक्षिणी कैलिफोर्निया के एक टेक्निकल कॉलेज के परिसर में दो महिलाओं को गोली मारी गई और उन्हें अस्पताल ले जाया गया. इंगलवुड के मेयर जेम्स बट्स ने बताया कि गोलीबारी की घटना स्पार्टन कॉलेज ऑफ एरोनॉटिक्स एंड टेक्नोलॉजी कैंपस में शाम 4 बजे के आसपास हुई. टीवी वीडियो में लॉस एंजिल्स के दक्षिण-पश्चिम में स्थित शहर इंगलवुड में परिसर के बाहर भारी पुलिस बल की मौजूदगी दिखाई गई. न्यूज चैनल पर बोलते हुए जेम्स बट्स ने बताया कि अधिकारियों को नहीं लगता कि संदिग्ध अभी भी परिसर में है, लेकिन वे कमरे-दर-कमरे तलाशी ले रहे हैं. स्पार्टन कॉलेज ऑफ एरोनॉटिक्स एंड टेक्नोलॉजी के देशभर में परिसर हैं और यह पायलट और टेक्नीशियन ट्रेनिंग के साथ-साथ स्नातक डिग्री कार्यक्रम भी प्रदान करता है. इसकी वेबसाइट के अनुसार, परिसर में 500 छात्र हैं.
गोलीबारी में तीन लोगों की मौत
इससे पहले अप्रैल में वर्जीनिया में गोलीबारी की घटना सामने आई थी. कानून प्रवर्तन के अनुसार, मंगलवार शाम वर्जीनिया में हुई गोलीबारी में तीन लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए. इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है. स्पॉट्सिल्वेनिया शेरिफ कार्यालय की प्रवक्ता मेजर एलिजाबेथ स्कॉट ने बताया कि शाम करीब 5:30 बजे (स्थानीय समयानुसार), कानून प्रवर्तन को वाशिंगटन डीसी से करीब 65 मील दक्षिण-पश्चिम में स्पॉट्सिल्वेनिया काउंटी में एक टाउन हाउस कॉम्प्लेक्स में गोलीबारी के बारे में 911 कॉल प्राप्त हुई.
गन कल्चर से अमेरिका परेशान
खुद को दुनिया का सबसे ताककवर देश कहने वाला अमेरिका 'गन कल्चर' से परेशान है. 'गन कल्चर' के खिलाफ न तो बाइडन प्रशासन ने कोई ठोस कदम उठाया न ही ट्रंप कुछ कर सकते हैं. अमेरिका की जनसंख्या लगभग 33 करोड़ है लेकिन वहां, हथियारों की संख्या 40 करोड़ तक पहुंच गई है. ये अमेरिका के लिए एक राजनीतिक मुद्दा है. एक तरफ ऐसे लोग हैं जो हथियार पर रोक लगाने की बात कर रहे हैं. दूसरी तरफ ऐसे लोग हैं जो अपने साथ हथियार रखना चाहते हैं.
2017 में दोषी ठहराए गए राम रहीम को अब 21 जुलाई का इंतजार
2 May, 2025 06:57 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
साध्वियों के यौन शोषण मामले में सजा काट रहे डेरा मुखी गुरमीत सिंह की सजा के खिलाफ अपील पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सुनवाई 21 जुलाई तक स्थगित कर दी है। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि अगली सुनवाई पर कोर्ट हर हाल में सजा निलंबन पर अपना फैसला सुना देगा।
डेरे की दो साध्वियों के यौन शोषण मामले में पंचकूला की सीबीआई कोर्ट ने अगस्त 2017 में डेरा मुखी को दोषी करार देते हुए उसे 10-10 साल की सजा सुनाई थी और साथ ही डेरा मुखी पर 30 लाख 20 हजार रुपए का जुर्माना भी लगा दिया था।
पहले मामले में दस वर्ष की सजा पूरी होने के बाद दूसरे मामले में दस वर्ष की सजा शुरू होनी है। सजा को डेरा मुखी ने हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए अपील दायर की थी।
पीड़िता ने की थी उम्रकैद की मांग
वहीं, दोनों पीड़ित साध्वियों ने भी तब हाई कोर्ट में अपील दाखिल कर डेरा मुखी को उम्रकैद की सजा सुनाई जाने की मांग की थी। तब हाईकोर्ट ने इन अपील को एडमिट कर लिया था।
अक्टूबर 2017 में हाई कोर्ट ने डेरा मुखी पर लगाए गए 30 लाख 20 हजार रुपए के जुर्माने पर रोक लगाते हुए डेरा मुखी को दो महीनों के भीतर जुर्माने की यह राशि सीबीआई कोर्ट में जमा करवाए जाने के आदेश दिए थे और साथ ही जमा करवाई जाने वाली जुर्माने की इस राशि को किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में इसकी एफडी करवाए जाने के भी आदेश दिए गए थे। तब हाई कोर्ट ने इन अपील को एडमिट कर लिया था।
गुरमीत राम रहीम ने क्या कहा?
डेरा मुखी गुरमीत सिंह हाई कोर्ट में अपील दायर कर कहा है कि इस मामले में सीबीआई अदालत ने उसे बिना उचित साक्ष्यों और गवाहों के उसे दोषी ठहरा सजा सुना दी है जो तय प्रक्रिया के अनुसार गलत है।
डेरा मुखी ने कहा कि, पहले इस मामले में एफआईआर ही दो तीन वर्षों की देरी से दायर हुई। यह एक गुमनाम शिकायत पर दर्ज की गई जिसमे शिकायतकर्ता का नाम तक नहीं था।
यौन शोषण के छह साल बाद हुआ बयान दर्ज
पीड़िता के बयान ही इस केस में सीबीआई ने छह वर्षों के बाद रिकॉर्ड किये थे। सीबीआई का कहना था कि, वर्ष 1999 में यौन शोषण हुआ था लेकिन बयान वर्ष 2005 में दर्ज किये गए।
जब सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की तब कोई शिकायतकर्ता ही नहीं था। अपनी अपील में डेरा मुखी ने सवाल उठाया है कि यह कहना कि पीड़िताओं पर कोई दबाव नहीं था, गलत है। क्योंकि दोनों पीड़िता सीबीआई के संरक्षण में थी।
सुनारिया जेल में हत्या और रेप के मामले में 20 साल की सजा काट रहे डेरा मुखी गुरमीत को वीरवार को 21 दिन की फरलो पूरी होने के बाद शाम करीब 5 बजे सुनारिया जेल पहुंच गए है। डेरा मुखी गुरमीत को कड़ी सुरक्षा के बीच सिरसा से सुनारिया जेल लाया गया। 9 अप्रैल को डेरा मुखी गुरमीत 21 दिन की फरलो पर गए थे।
गुरमीत को इससे पहले 2 जनवरी 2025 को 30 दिन की पैरोल मिली थी, जिसमें से उसने 10 दिन सिरसा डेरे में और 20 दिन बरनावा (उत्तर प्रदेश) में बिताए थे, लेकिन इस बार 21 दिन की फरलो के दौरान वह सिरसा डेरे में ही रहा, जहां उसने अपने अनुयायियों से मुलाकात की और डेरे का स्थापना दिवस भी मनाया।
हरियाणा को अतिरिक्त पानी देने पर पंजाब नाराज़, केंद्र को दखल देना पड़ा
2 May, 2025 03:19 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पानी को लेकर पंजाब और हरियाणा आमने-सामने आ गए हैं. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड बीबीएमबी (Bhakra Beas Management Board) के हरियाणा को अतिरिक्त पानी देने के फैसले को लेकर पंजाब और हरियाणा के बीच टकराव और भाखड़ा डैम से आज पानी न छोड़े जाने की स्थिति को देखते हुए दिल्ली में आपात बैठक बुलाई है.
केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने बीबीएमबी के फैसले पर चर्चा के लिए पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिवों को तलब किया है.
बुलाई गई आपात बैठक
पंजाब के मुख्य सचिव इस समय छुट्टी पर हैं. इसी के चलते उनकी तरफ से बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह विभाग) आलोक शेखर और जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव कृष्ण कुमार शामिल होंगे. बैठक में बीबीएमबी के चेयरमैन मनोज त्रिपाठी और केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे.
मीटिंग में कौन-कौन होगा शामिल
मीटिंग में आलोक शेखर, एडिशनल मुख्य सचिव पंजाब, अनुराग रस्तोगी, मुख्य सचिव हरियाणा, मनोज त्रिपाठी अध्यक्ष ,भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पंजाब हरियाणा और राजस्थान जल शक्ति मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहेंगे.
पंजाब-हरियाणा के बीच क्या है विवाद
पंजाब और हरियाणा के बीच भाखड़ा डैम के पानी को लेकर विवाद पैदा हो गया है. इसी के चलते दोनों तरफ से आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है. पंजाब को लेकर बीबीएमबी ने फैसला सुनाया है कि वो हरियाणा को अतिरिक्त पानी दें. इस पर अब पंजाब के सीएम भगवंत मान ने कहा था कि उनके पास हरियाणा या किसी दूसरे राज्य को देने के लिए अतिरिक्त पानी नहीं है.
हरियाणा और पंजाब के बीच पानी को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब भाखड़ा डैम से हरियाणा को दिए जा रहे पानी की मात्रा घटाकर 4,000 क्यूसेक कर दी गई. बीबीएमबी की तकनीकी समिति ने 23 अप्रैल को हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान को पानी जारी करने का फैसला लिया था. इसी को लेकर पंजाब सरकार का कहना है कि उसने मानवता के चलते हरियाणा को सीमित मात्रा में पानी दिया था, लेकिन अब अतिरिक्त मांग करना सही नहीं है.
वहीं, हरियाणा का पक्ष है कि भाखड़ा डैम में पानी का स्तर ऊंचा है, और अगर समय पर इसे निकाला नहीं गया तो बारिश के दौरान अतिरिक्त पानी पाकिस्तान चला जाएगा, जिससे राष्ट्रीय नुकसान होगा. सैनी ने यह भी कहा कि पानी किसी एक राज्य की संपत्ति नहीं, बल्कि प्राकृतिक संसाधन है जिस पर सभी का हक है.
विनय की शहादत के बाद भी नफरत से इंकार, पत्नी ने कहा ‘हमले के नाम पर न बांटे देश’
1 May, 2025 09:09 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पहलगाम आतंकी हमले में जान गंवाने वाले लेफ्टिनेंट विनय नरवाल की पत्नी हिमांशी नरवाल ने इंसानियत का बड़ा पैगाम दिया है. पति को खोने वाली हिमांशी ने कहा कि हम नहीं चाहते कि लोग मुसलमानों या कश्मीरियों के खिलाफ जाएं. हम शांति चाहते हैं और सिर्फ शांति. हम न्याय चाहते हैं. लोग मुसलमान या कश्मीरियों के खिलाफ न जाएं. हमला करने वाले आतंकियों को सजा मिलनी चाहिए. विनय ने देश सेवा का जो रास्ता चुना था, मैं उस पर चलूंगी.
बता दें कि दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग जिले के पहलगाम के पास बैसरन में 22 अप्रैल को आतंकियों ने हमला किया था. इसमें 26 लोग मारे गए थे. कई अन्य घायल हुए थे. मारे गए लोगों में ज्यादातर पर्यटक थे.हरियाणा सरकार ने हमले में मारे गए नेवी के अधिकार के परिजनों को 50 लाख रुपये की मदद देने की शनिवार को घोषित की थी. साथ ही परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का भी ऐलान किया था.
परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी
मुख्यमंत्री ने कहा था, नरवाल के माता-पिता की इच्छा के मुताबिक परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी. वो नौसेना के अधिकारी थे.करनाल निवासी विनय नरवाल (26) की 16 अप्रैल को ही शादी हुई थी. वो पत्नी हिमांशी के साथ पहलगाम में हनीमून मनाने गए थे.नरवाल के पिता राजेश सरकारी कर्मचारी हैं. उनकी मां गृहिणी और उनकी छोटी बहन है, जो पढ़ाई कर रही है.
फारूक अब्दुल्ला का बड़ा बयान
उधर, जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम और नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने पहलगाम आतंकी हमले पर कहा कि आज कश्मीर एक मुश्किल वक्त से गुजर रहा है. हमें कुछ नहीं पता कि कल क्या होगा? उन्हें पकड़ा जाना चाहिए, जिन्होंने यह (पहलगाम आतंकी हमला) किया है.
हमले के बाद भारत सरकार द्वारा पाकिस्तानी नागरिकों को भारत छोड़ने के आदेश पर अब्दुल्ला ने कहा कि वो गरीब लोग जो 50 साल से यहां रह रहे हैं और उनके बच्चे यहां पढ़ रहे हैं, उन्हें पाकिस्तान भेजा जा रहा है, यह कैसा तरीका है? यह एक अमानवीय तरीका है. मुझे नहीं लगता कि हमें इस हद तक जाना चाहिए.
पाक का एयरस्पेस प्रतिबंध! अब कश्मीर से लोग हज यात्रा के लिए सऊदी कैसे जाएंगे?
1 May, 2025 06:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पहलगाम हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई बड़ी कार्रवाई की थी। जवाब में पाकिस्तान ने भी भारत के लिए अपने हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस प्रतिबंध के बाद हज यात्रियों में असमंजस की स्थिति थी कि उनकी उड़ान में देरी हो सकती है या उसे रद्द किया जा सकता है। हालांकि अब अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि श्रीनगर से सऊदी अरब जाने वाली हज उड़ानों का पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र से कोई लेना-देना नहीं है, इसलिए हज यात्रा तय कार्यक्रम के अनुसार ही होगी। जम्मू-कश्मीर हज कमेटी के अधिकारियों ने कहा है कि राज्य से हज यात्रा की तैयारियां पूरी तरह पटरी पर हैं। पहला बैच उड़ान (एसजी-5304) 4 मई 2025 को श्रीनगर एयरपोर्ट से रवाना होगी। इस उड़ान के लिए यात्रियों को 4 मई को सुबह 5 से 5:30 बजे के बीच श्रीनगर स्थित बेमिना हज हाउस में रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया है।
हज कमेटी ने की यह अपील
हज कमेटी ने यात्रियों से रिपोर्टिंग समय का सख्ती से पालन करने और अपने साथ केवल वैध और स्वीकृत सामान ही लाने की अपील की है। चेक-इन लगेज में एयरलाइंस द्वारा कोई भी प्रतिबंधित वस्तु स्वीकार नहीं की जाएगी। पहले जत्थे में 178 जायरीन भेजे जाएंगे। बाकी उड़ानों का शेड्यूल अलग से जारी किया जाएगा।
कुल कितने लोग करेंगे हज यात्रा
इस साल जम्मू-कश्मीर से 3,600 से ज्यादा लोग सरकारी कोटे के तहत हज यात्रा पर सऊदी अरब जाएंगे। वहीं, हाल ही में सऊदी अरब द्वारा उमराह, टूरिस्ट और विजिट वीजा पर अस्थायी रोक लगाए जाने से कुछ असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। लेकिन अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह कदम हर साल हज से पहले उठाया जाता है ताकि व्यवस्थाएं सुचारू हो सकें। इसका हज यात्रा पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
अफवाहों पर दी गई यह सलाह
हज कमेटी और प्रशासन ने हज यात्रियों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों या अपुष्ट खबरों पर ध्यान न दें और आधिकारिक स्रोतों के जरिए जारी सूचनाओं पर ही भरोसा करें। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि जम्मू-कश्मीर से हज यात्रा पूरी तरह से सुचारू रूप से संचालित होगी और इसमें किसी तरह की बाधा की कोई संभावना नहीं है।
भारत से युद्ध सिर्फ पाकिस्तान को नहीं, अरब देशों को भी पड़ेगा भारी – बड़ी चेतावनी!
1 May, 2025 05:11 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहा तनाव किसी भी वक्त एक बड़े युद्ध का रूप ले सकता है. ये तनाव आर्थिक संकट से गुजर रहे पाकिस्तान के भविष्य के लिए ही खतरा नहीं है बल्कि दुनिया के उस हिस्से की सुरक्षा के लिए भी अलार्म है, जो पहले से युद्ध की आग में झुलस रहा है.
हम बात कर रहे हैं अरब जगत की. दरअसल, गाजा युद्ध और US-इजराइल के ईरान के साथ तनाव ने अरब देशों के लिए पहले ही चिंता बढ़ा रखी है. ऐसे में पाकिस्तान का पूरी तरह से युद्ध में कूदना इन देशों की सुरक्षा के लिए भी चुनौती बन सकता है. इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि पाकिस्तान अरब देशों का सैन्य सहयोगी है.
पाकिस्तान और अरब देशों के बीच रणनीतिक रिश्तों के अलावा इस्लाम आधारित सांस्कृतिक और धार्मिक संबंध भी हैं. 50 से ज्यादा मुस्लिम देशों का संगठन OIC भी इन देशों के बीच रिश्ते सुधारने का काम करता है. पाकिस्तान खुद को इस्लामिक वर्ल्ड के एक प्रमुख सैन्य शक्ति के रूप में पेश करता है, जो अरब देशों के लिए इसे एक विश्वसनीय भागीदार बनाता है.
पाकिस्तान की सेना लगभग 22 अरब देशों में मौजूद है. जहां पाक सैन्य अधिकारी प्रशिक्षण और रणनीतिक परामर्श की भूमिका में रहते हैं. ईरान, यमन के हूती विद्रोही और ISIS जैसे आतंकी संगठनों से खतरे की वजह से खाड़ी देशों को एक विश्वसनीय सैन्य सहयोगी की जरूरत है और पाकिस्तान की सेना इसमें उनका साथ देती है.
अरब देशों की पाकिस्तान पर निर्भरता
अरब देशों के पास जो सेना है उसके पास किसी जंग या बड़े आतंकी ऑपरेशन से निपटने का अनुभव न के बराबर है. ऐसे में ये देश अपने यहां विद्रोह प्रदर्शन या इजराइल और ईरान से आने वाले भविष्य के खतरों से निपटने के लिए पाक सेना पर निर्भर हैं.
यही नहीं पाकिस्तान अमेरिका का भी सुरक्षा सहयोगी है और उसकी सेना का अरब में होना वाशिंगटन की पॉलिसी का भी एक हिस्सा है. पाकिस्तान एकमात्र इस्लामी देश है जो परमाणु हथियारों से लैस है. जिसे सऊदी अरब जैसे देश रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानते हैं, विशेष रूप से ईरान के साथ क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्विता होने के कारण ये और अहम बन जाता है.
अरब देश क्यों नहीं चाहेंगे कि पाकिस्तान जंग में पड़े?
अरब देश इस नाजुक समय में कभी नहीं चाहेंगे कि पाकिस्तान किसी जंग से अस्थिर हो जाए. क्योंकि मध्य पूर्व में इजराइल के खिलाफ आवाजें उठ रही हैं. दूसरी तरफ ईरान ने सीधे तौर पर धमकी दी है कि अगर उस पर अमेरिकी और इजराइली हमलों के लिए अरब देशों ने अपने क्षेत्र का इस्तेमाल होने दिया, तो वह अपनी मिसाइल इजराइल के साथ-साथ इन देशों पर भी दागेगा.
ऐसे में पाकिस्तान की सेना का कमजोर होने का सीधा मतलब है- अरब देशों की सुरक्षा कमजोर होना. पाकिस्तान नियमित रूप से सऊदी अरब और UAE जैसे देशों के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास करता है, जो उनकी सैन्य क्षमता को बढ़ाते हैं और आपसी सहयोग को मजबूत करते है. इतिहास में भी कई बार पाकिस्तान सेना अरब देशों के लिए रीढ़ की हड्डी साबित हुई है.
भारत-पाक के बीच चल रहे तनाव पर भी सऊदी अरब, यूएई और कतर जैसे अरब देशों ने शांति की बात की है.
इतिहास में अरब देशों के लिए पाक सेना की भूमिका
पाकिस्तान सेना अरब-इजराइल युद्धों 1967 और 1973 से लेकर गल्फ वॉर 1990 में अहम भूमिका निभा चुकी है. खबरों के मुताबिक 1967 में हुए 6 दिनों के अरब इजराइल युद्ध में पाकिस्तानी वायुसेना के पायलटों ने हिस्सा लिया था. 1973 में हुए अरब इजराइल के बीच योम किप्पुर युद्ध के दौरान भी ये सहयोग देखने को मिला था.
इजराइल से ही युद्ध में नहीं पाकिस्तान सेना ने गल्फ वॉर, जो कुवैत और सद्दाम हुसैन के इराक के बीच हुई थी, उसमें भी अहम भूमिका निभाई थी. जब इराक की सेना ने कुवैत पर चढ़ाई कर दी थी, तब पाकिस्तान ने सऊदी अरब में अपने करीब 10 हजार सैनिक भेजे थे. पाकिस्तानी सैनिकों ने इराक के खिलाफ सीधे युद्ध में हिस्सा नहीं लिया था. उनकी सऊदी में ये तैनाती रक्षात्मक थी, जो सिर्फ सऊदी भूमि की सुरक्षा के लिए थी, खासकर मक्का और मदीना जैसे पवित्र शहरों के लिए.
अरब में सुन्नी-शिया लड़ाई से बचता रहा पाकिस्तान
ऐसा नहीं है कि पाकिस्तान सेना ने हर समय अरब में सऊदी नेतृत्व का साथ दिया है. कई मौकों पर पाकिस्तान की सऊदी अरब के साथ करीबी ने ईरान के साथ उसके रिश्ते को तनावपूर्ण बनाया है. पाकिस्तान ईरान के साथ अपनी सीमा साझा करता है और दोनों देशों के बीच अच्छे व्यापारिक रिश्ते हैं. जिसकी वजह से पाकिस्तान ने यमन युद्ध के दौरान तटस्थता की नीति को अपनाया और सऊदी अरब का साथ नहीं दिया. हालांकि कुछ रिपोर्ट दावा करती हैं कि पाक अधिकारियों ने इस युद्ध में सऊदी सेना को गाइड करने का काम किया था.
भारत से युद्ध अरब के लिए क्यों खतरा?
भारतीय सेना पाकिस्तानी सेना से हर तरीके से मजबूत नजर आती है. भारत पाकिस्तान को पहले ही युद्ध में मात देता रहा है. अगर इस बार जंग होती है, तो पाकिस्तान को एक बार फिर बड़ा नुकसान होना निश्चित माना जा रहा है जिससे उसकी सेना कमजोर हो जाएगी. अगर ऐसा होगा तो पाक सेना को इससे उभरने में सालों लग सकते हैं जिसकी वजह से अरब को सुरक्षा देना उसके लिए मुश्किल हो सकता है.
भारत पाकिस्तान युद्ध कितना बड़ा खतरा?
पहलगाम हमले के बाद भारत पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर है और इसको लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता बनी हुई है. पूरी दुनिया इस समय एक बुरे दौर से गुजर रही है और यूक्रेन युद्ध, सुडान गृह युद्ध, इजराइल-फिलिस्तीन युद्ध, चीन ताइवान तनाव और अमेरिका ईरान तनाव के चलते यूरोप, एशिया, अफ्रीका, उत्तर अमेरिका जैसे महाद्वीप किसी न किसी तरीके से संघर्ष की चपेट में हैं.
युद्ध और रक्षा जानकारों ने चिंता जताई है कि पाकिस्तान और भारत के बीच अगर युद्ध होता है, तो सबसे ज्यादा नागरिकों की मौत हो सकती है. ये आंकड़ा इतिहास में सबसे ज्यादा भी हो सकता है, क्योंकि ये दुनिया का सबसे ज्यादा और घनी आबादी वाला हिस्सा है. संयुक्त राष्ट्र भी भारत और पाकिस्तान के तनाव से बेहद चिंतित है.
ऑस्ट्रेलिया चुनाव में बिगड़ सकता है ट्रंप का मामला: कनाडा की तरह ऑस्ट्रेलिया में भी ट्रंप की छवि पार्टी को पहुंचा सकती नुकसान
1 May, 2025 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ऑस्ट्रेलिया में आम चुनाव से पहले राजनीतिक तापमान चरम पर है, लेकिन यह चुनाव विपक्षी नेता पीटर डटन के लिए नई चुनौती लेकर आया है। उनकी तुलना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से की जाती रही है। कनाडा में हाल ही में हुए चुनाव में कंजर्वेटिव पार्टी की हार के बाद ऑस्ट्रेलिया में भी ऐसी ही आशंकाएं जताई जा रही हैं कि ट्रंप से जुड़ी छवि यहां भी कंजर्वेटिव पार्टी को नुकसान पहुंचा सकती है। इन परिस्थितियों को देखते हुए डटन अब खुद को ट्रंप से अलग साबित करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि उनकी कठोर और दक्षिणपंथी नीतियों के कारण मतदाता उन्हें ऑस्ट्रेलियाई ट्रंप के रूप में देखने लगे हैं। पीटर डटन इससे पहले ऑस्ट्रेलिया के गृह, रक्षा और आव्रजन मंत्री रह चुके हैं। वे अपनी कठोर नीतियों और अप्रवासी विरोधी बयानों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने न सिर्फ पब्लिक ब्रॉडकास्टिंग को नफरत फैलाने वाला मीडिया बताया, बल्कि 41 हजार सरकारी नौकरियां खत्म करने और वोक एजेंडा खत्म करने की बात भी कही। उनका यह अंदाज ट्रंप की राजनीति से मेल खाता है, जिसके कारण युवाओं और उदार मतदाताओं के बीच उनकी लोकप्रियता कम होती जा रही है। ऐसे में प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानी चुनावी दौड़ में उनसे आगे नजर आ रहे हैं।
इस चुनाव में ट्रंप का कितना असर होगा
कई विश्लेषकों का मानना है कि ऑस्ट्रेलिया में ट्रंप का प्रभाव अप्रत्यक्ष रूप से चुनाव को प्रभावित कर रहा है। अमेरिका द्वारा लगाए गए वैश्विक टैरिफ, ट्रंप समर्थित उद्योगपतियों की मौजूदगी और अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव ने मतदाताओं को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या डटन की शैली ऑस्ट्रेलिया के लिए सुरक्षित है। यहां तक कि डटन खुद अपने निर्वाचन क्षेत्र डिक्सन में कड़ी टक्कर का सामना कर रहे हैं, जहां वे सिर्फ 1.7% से आगे हैं।
इन मुद्दों पर चुनाव हो रहा है
इस चुनाव में मुख्य मुद्दा महंगाई और जीवन यापन की बढ़ती लागत है। दोनों प्रमुख पार्टियों, डटन की लिबरल पार्टी और अल्बानीज़ की लेबर पार्टी ने कर कटौती और राहत योजनाओं का वादा किया है। हालांकि, ट्रंप की तर्ज पर मेक ऑस्ट्रेलिया ग्रेट अगेन जैसे नारों के साथ डटन के अभियान ने मध्यम वर्ग के मतदाताओं को भ्रमित कर दिया है। डटन की पार्टी का ट्रंप-प्रेरित दृष्टिकोण भी अल्पसंख्यकों और युवा मतदाताओं को आकर्षित करने में विफल रहा है।
इस बार चीन से सुरक्षा कोई मुद्दा नहीं
चीन का मुद्दा भी इस चुनाव में अपेक्षाकृत शांत रहा है। पिछली बार से अलग इस बार चीन से खतरे पर ज्यादा जोर नहीं दिया गया, जबकि हाल ही में चीनी युद्धपोतों द्वारा ऑस्ट्रेलिया की परिक्रमा और लाइव फायर ड्रिल्स चर्चा में रहे। इसकी एक वजह यह भी है कि ट्रंप की नीतियों को अब चीन से भी बड़ा वैश्विक खतरा माना जा रहा है। यही वजह है कि ऑस्ट्रेलिया की सुरक्षा संधि AUKUS को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या अब अमेरिका पर भरोसा किया जा सकता है।
ऑस्ट्रेलियाई सर्वेक्षण क्या कह रहे हैं?
मतदान से ठीक पहले कई सर्वेक्षण संकेत दे रहे हैं कि अल्बानीज़ की लेबर पार्टी एक बार फिर सत्ता में लौट सकती है, हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें बहुमत मिल पाएगा या नहीं। इस बार युवा मतदाता निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं, जो मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था से असंतुष्ट हैं और बदलाव के पक्ष में वोट कर सकते हैं। विश्लेषकों का कहना है कि डटन की हार की स्थिति में वे पूरी जिम्मेदारी ट्रंप के प्रभाव पर नहीं डाल सकते, क्योंकि उनकी पार्टी ने जनता को लुभाने के लिए कोई कारगर रणनीति नहीं अपनाई।
मोहम्मद यूनुस की सरकार पर तानाशाही का आरोप, अगले 3 दिन तक हजारों लोगों को भुगतना पड़ेगा कष्ट
1 May, 2025 04:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बांग्लादेश में अगले तीन दिन अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के लिए मुश्किल भरे रहने वाले हैं। दरअसल, बांग्लादेश में गुरुवार से तीन दिवसीय राजनीतिक संग्राम शुरू हो गया है। राजधानी ढाका की सड़कों पर हजारों लोग प्रदर्शन करने के लिए तैयार हैं। एक तरफ विपक्षी दल सत्ता में आने की उम्मीद में रैलियां कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ यूनुस सरकार के खिलाफ लोगों का गुस्सा साफ दिखाई दे रहा है। नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और मौजूदा कार्यवाहक प्रधानमंत्री मोहम्मद यूनुस की सरकार पर तानाशाही का आरोप लग रहा है। 84 वर्षीय यूनुस ने पिछले साल उस समय सत्ता संभाली थी, जब जनता ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के महल पर हमला किया था और वह देश छोड़कर भारत चली गई थीं। यूनुस ने वादा किया था कि देश में दिसंबर 2025 तक चुनाव करा लिए जाएंगे, लेकिन अभी तक कोई ठोस तारीख सामने नहीं आई है।
मजदूर दिवस पर दिखेगी बीएनपी की ताकत
सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने गुरुवार को मजदूर दिवस के मौके पर एक विशाल रैली की तैयारी की है। पार्टी का दावा है कि यह हाल के वर्षों की सबसे बड़ी रैली होगी। बीएनपी के मीडिया अधिकारी शैरुल कबीर खान ने कहा, "यह रैली सत्ता परिवर्तन की दिशा तय करेगी।"
पुराने सहयोगी और नई युवा पार्टी भी मैदान में
जमात-ए-इस्लामी और जातीय पार्टी भी सड़कों पर उतरने जा रही है। जातीय पार्टी, जो कभी शेख हसीना के साथ मानी जाती थी, अब विपक्ष में है। पिछले साल अक्टूबर में पार्टी के कार्यालयों पर भी हमला हुआ था, जिसमें सरकार पर आरोप लग रहे हैं। हसीना सरकार के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व करने वाले छात्रों द्वारा गठित नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) शुक्रवार को रैली करेगी। पार्टी नेता नाहिद इस्लाम ने इससे पहले यूनुस सरकार में शामिल होने के बाद इस्तीफा दे दिया था।
इस्लामिक संगठन ने दी चेतावनी
एनसीपी नेता अरिफुल इस्लाम अदीब ने कहा है कि यह शक्ति प्रदर्शन नहीं, बल्कि जनसंवाद का जरिया है, लेकिन हमें 30 हजार लोगों के आने की उम्मीद है। शनिवार को हिफाजत-ए-इस्लाम नाम का एक इस्लामिक संगठन भी ढाका में एक "भव्य रैली" करेगा। संगठन के नेता मामुनुल हक ने कहा है कि सरकार को हमारी कुर्बानियों की याद दिलाने का समय आ गया है। उन्होंने महिला अधिकार आयोग की सिफारिशों को रद्द करने की मांग की और कहा कि चाहे यूनुस हो या कोई और, हम चुप नहीं बैठेंगे।
पाकिस्तान से तनाव के बीच भारत की नौसैनिक ताकत बढ़ी, अमेरिका ने दी 131 मिलियन डॉलर की तकनीक
1 May, 2025 03:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच भारत की समुद्री ताकत में इजाफा हुआ है। ट्रंप प्रशासन ने बुधवार को भारत को इंडो-पैसिफिक मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस और इससे जुड़े उपकरणों की बिक्री को मंजूरी दे दी, जिसकी अनुमानित कीमत 131 मिलियन अमेरिकी डॉलर है। भारत लगातार प्रशांत क्षेत्र में अपनी भूमिका बढ़ा रहा है, भारत ने हाल ही में अमेरिका से सीविजन सॉफ्टवेयर खरीदने का अनुरोध किया है।
रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी ने अमेरिकी कांग्रेस को एक अधिसूचना में बताया, "यह प्रस्तावित बिक्री अमेरिकी विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों का समर्थन करेगी, जिससे अमेरिका-भारतीय रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने और एक प्रमुख रक्षा साझेदार की सुरक्षा में सुधार करने में मदद मिलेगी, जो इंडो-पैसिफिक और दक्षिण एशिया क्षेत्रों में राजनीतिक स्थिरता, शांति और आर्थिक प्रगति के लिए एक महत्वपूर्ण ताकत बनी हुई है।"
भारत की ताकत बढ़ेगी
अमेरिकी कांग्रेस की अधिसूचना के अनुसार, प्रस्तावित बिक्री भारत को अपनी समुद्री डोमेन अवेयरनेस को मजबूत करके वर्तमान और भविष्य के खतरों से निपटने में मदद करेगी, विशेषज्ञों ने कहा है कि इससे क्षमताओं और रणनीतिक स्थिति को मजबूत करके वर्तमान और भविष्य के खतरों से निपटने में मदद मिलेगी। रक्षा एजेंसी ने कहा कि भारत को इन वस्तुओं और सेवाओं को अपनी सेना में शामिल करने में कोई समस्या नहीं होगी। इस बिक्री से क्षेत्र में सैन्य संतुलन में कोई बदलाव नहीं आएगा। इसका मुख्य ठेकेदार वर्जीनिया के हर्नडन में स्थित हॉकआई 360 कंपनी होगी।
भारत-पाकिस्तान तनाव
पहलगाम हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। कश्मीर सीमा ही नहीं बल्कि समुद्री सीमा भी तनाव से मुक्त नहीं है, दोनों देशों की ओर से समुद्र में नौसेना की तैनाती बढ़ा दी गई है। उम्मीद है कि अमेरिका से मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस मिलने से भारत को अच्छी बढ़त मिलेगी।
सनसनीखेज खुलासा: मैनेजर ने रची खुद लूट की साजिश, पुलिस को भी किया गुमराह
30 Apr, 2025 08:58 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणा के सोनीपत में राठधना रोड स्थित पंप के मैनेजर से लूट का मामला झूठा निकाला। मैनेजर ने पंप की राशि हड़पने के लिए खुद की झूठी कहानी गढ़ी थी। घरवालों और पुलिस को यकीन दिलाने के लिए आरोपित ने रोने का नाटक भी किया। खुद को नुकीली चीज से पेट पर चोट भी पहुंचाई।
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने कर्ज उतारने के लिए यह सारा नाटक किया। जांच में पुलिस के सामने कई ऐसे तथ्य जाए। जिससे शक की सुई उसी की ओर घूम गई। फिलहाल पुलिस ने गांव जोली हाल शहर के बंदेपुर में रहने वाले विनोद को गिरफ्तार कर लिया है।
राठधना रोड स्थित किरण फिलिंग स्टेशन पर बतौर मैनेजर काम करने वाले विनोद ने पुलिस को बताया कि वह राठधना रोड स्थित किरण फिलिंग वह सोमवार को करीब सवा 11 बजे ईंधन की बिक्री के रुपये लेकर मिशन चौक स्थित पंजाब नेशनल बैंक में जमा करवाने के लिए जा रहे थे।बताया था कि जब वह बाइक पर सवार होकर गंदे नाले के नजदीक पहुंचा तो राठधना गांव की ओर से आई सेंट्रो कार सवारों ने उसकी बाइक के आगे कार अडा दी। उसमें से उतरे दो युवकों ने बैग छीनने की कोशिश की। जब उसने बैग नहीं छोड़ा तो एक युवक ने चाकू निकालकर पेट से सटा दिया। छिनाझपटी के दौरान उसके पेट पर चाकू भी लगा।
दर्ज कर लिया था लूट का मामला
बताया कि आरोपितों ने उसके बैग में रखे आठ लाख रुपये की राशि निकाल ली। उसके बाद आरोपित कार में सवार होकर मैप्सिको सिटी की तरफ भाग गए। उसने सूचना पंप पर दी। जिसके बाद सेल्समैन उसके पास आए। जिसके बाद मामले से पुलिस को अवगत कराया गया। सूचना के बाद मौके पर पहुंची थाना सेक्टर-27 पुलिस ने आसपास के क्षेत्र में बदमाशों की तलाश थी। पुलिस ने लूट का मामला दर्ज कर लिया था। मामले की जांच स्पेशल एंटी गैग्सटर यूनिट ने की तो मामला कुछ और ही निकल कर आया।
पुलिस और परिवार के सामने रोने का नाटक
पति के साथ हुई वारदात के बाद पत्नी भी परिवार की महिलाओं के साथ वहां पहुंची। पत्नी और परिवार की अन्य महिलाएं किसी अनहोनी की आशंका से सहमी हुई थी। पुलिस टीम जैसे ही विनोद को लेकर वहां आई। पत्नी और परिवार की महिलाएं बिलख पड़ी। विनोद चाकू का निशान दिखाकर सब ठीक होने का भरोसा दिलाया। उसके बाद महिलाएं शांत हुई। इस दौरान विनोद भी रोने का नाटक करता रहा।
जांच के दौरान कई तथ्य सामने आए। कर्ज की बात भी सामने आ रही थी। वहीं, आरोपित द्वारा बताई जा रही बातों में काफी अंतर मिल रहा था। गहनता से जांच की तो कई साक्ष्य भी मिले। जिसके बाद उससे पूछताछ की तो उसने कर्ज के चलते लूट का नाटक कर रुपये हड़पने की बात कबूली। - अजय धनखड़, प्रभारी, स्पेशल एंटी गैंग्सटर यूनिट
पानी को लेकर हरियाणा और पंजाब आमने-सामने, CM सैनी का बड़ा बयान आया सामने
30 Apr, 2025 08:20 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा हरियाणा को और पानी छोड़ने से इनकार करने के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मान पर निशाना साधा और कहा कि वह इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रहे हैं। सैनी ने यह भी स्पष्ट किया कि हरियाणा को उसके हिस्से का पूरा पानी नहीं मिला है, बल्कि केवल 60 प्रतिशत पानी मिला है।सैनी ने बुधवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि वह इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रहे हैं। मैं स्पष्ट करना चाहूंगा कि एसवाईएल (सतलज-यमुना लिंक) नहर का मामला सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में है। लेकिन यह मुद्दा एसवाईएल के पानी का नहीं है। यह पीने के पानी का मुद्दा है।
हरियाणा को अभी तक उसका पूरा हिस्सा नहीं मिला है। पिछले सप्ताह हरियाणा को केवल 4,000 क्यूसेक पीने का पानी मिला, जो राज्य की कुल मांग का लगभग 60 फीसदी है। यदि बीबीएमबी (भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड) हरियाणा की मांग के अनुसार शेष पानी उपलब्ध कराता है, तो यह भाखड़ा बांध के जलाशय का केवल 0.0001% होगा। दिल्ली में आप के चुनाव हारने के बाद भगवंत मान दिल्ली के लोगों को दंडित करने का काम कर रहे हैं।
-नायब सैनी, हरियाणा मुख्यमंत्री
दिल्ली में पानी की आपूर्ति होगी प्रभावित
सैनी ने आगे कहा कि अगर हरियाणा के संपर्क बिंदु पर पानी कम होगा तो दिल्ली की पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित होगी। जब तक दिल्ली में आप की सरकार थी, भगवंत मान को दिल्ली को पानी भेजे जाने पर कोई आपत्ति नहीं थी। लेकिन अब जब आप दिल्ली में हार गई है तो वह दिल्ली के लोगों को दंडित करने के लिए ऐसा कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मान से पार्टी की राजनीति से ऊपर उठकर राज्य को पेयजल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया और संकीर्ण दृष्टिकोण से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में सहयोग करने का अनुरोध किया।
मैं भगवंत मान से पार्टी की राजनीति से ऊपर उठकर हरियाणा को पेयजल उपलब्ध कराने का अनुरोध करता हूं। भाखड़ा बांध जलाशय को जून से पहले खाली करना जरूरी है ताकि मानसून के दौरान बारिश के पानी को संग्रहित किया जा सके। अगर जलाशय में जगह नहीं बची तो अतिरिक्त पानी हरि-के-पत्तन के रास्ते पाकिस्तान चला जाएगा, जो न तो पंजाब के हित में है और न ही राष्ट्र के। भगवंत मान, मैं आपसे संकीर्ण दृष्टिकोण से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में सहयोग करने और हरियाणा को उचित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने का अनुरोध करता हूं।
-नायब सैनी, हरियाणा मुख्यमंत्री
'भगवंत मान ने मुझे आश्वासन दिया था'
हरियाणा के सीएम ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें पंजाब के सीएम ने पानी छोड़ने का आश्वासन दिया था, लेकिन 27 अप्रैल तक रोक दिया गया, आगे उन्होंने कहा कि उन्होंने हरियाणा के लोगों को गुमराह किया है।
खेत से चोरी हुई थीं गायें: भोपाल के गोदरमऊ क्षेत्र में हुई घटना ने बढ़ाई पुलिस की चुनौती।
अपराधियों को संरक्षण देने का आरोप: बृजभूषण और प्रज्वल रेवन्ना मामले पर बरसीं शोभा ओझा
जशपुर में विमान हादसा: आरा पहाड़ पर एयर एम्बुलेंस क्रैश होने से मचा हड़कंप
