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नंबर नहीं, स्टेटस सिंबल! दुनिया के सबसे वीआईपी फोन नंबरों की कहानी
10 Jul, 2026 09:54 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। मोबाइल नंबर याद न रख पाने की आम परेशानी को एक शख्स ने ऐसे अनोखे जुनून में बदल दिया, जिसने उन्हें सीधे 'गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में पहुंचा दिया। यह व्यक्ति दुनिया के 15 सबसे दुर्लभ और वीआईपी मोबाइल नंबर्स के मालिक हैं, जिसे उन्होंने 'गोल्डन डिजिट्स' का नाम दिया है। इस अनमोल कलेक्शन के चार नंबरों ने अपनी खासियतों की वजह से गिनीज बुक में अपना नाम दर्ज कराया है।
एक सलाह से शुरू हुआ अनोखा सफर
इस अनोखे शौक की शुरुआत करीब 15 साल पहले एक इत्तेफाक से हुई थी। जब इस शख्स का मोबाइल फोन खराब हुआ और उन्हें अपना ही नंबर याद करने में काफी परेशानी हुई, तब उनके एक दोस्त ने उन्हें ऐसा नंबर लेने की सलाह दी जिसे याद रखना बच्चों का खेल हो। दोस्त की यह सलाह उन्हें इतनी पसंद आई कि उन्होंने बार-बार दोहराए जाने वाले और खास पैटर्न वाले वीआईपी नंबर्स को इकट्ठा करना शुरू कर दिया।
गिनीज बुक में दर्ज हुए चार नंबर
उनके इस 'गोल्डन डिजिट्स' कलेक्शन में 0 से 9 तक के बेहतरीन कॉम्बिनेशन वाले कुल 15 नंबर्स शामिल हैं। इनमें से चार इतालवी (+39) नंबरों ने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। इस रिकॉर्ड लिस्ट में लगातार 10 बार एक ही अंक वाला नंबर (+39) 3333333333, सबसे ज्यादा घटते क्रम वाला नंबर (+39) 3376543210 और सबसे ज्यादा बढ़ते क्रम वाला नंबर (+39) 3401234567 शामिल हैं। इसके अलावा एक नंबर ऐसा भी है जिसमें 11 बार एक ही अंक आता है।
करोड़ों में है इन नंबर्स की कीमत
कलेक्टर का कहना है कि दुनिया में इकलौते होने के कारण ये सभी नंबर्स पूरी तरह अनमोल हैं। हालांकि, इतिहास की पुरानी नीलामियों से इनकी भारी-भरकम कीमत का अंदाजा लगाया जा सकता है। साल 2006 में दोहा की एक चैरिटी नीलामी में 666-6666 नंबर करीब 23 करोड़ रुपये में बिका था, वहीं 2003 में चीन में 8888-8888 नंबर को सुख-समृद्धि का प्रतीक मानकर करीब 2.80 लाख डॉलर में खरीदा गया था। ऐसे में 4 गिनीज रिकॉर्ड वाले इन 15 'गोल्डन डिजिट्स' की कुल कीमत का सटीक अंदाजा लगाना नामुमकिन सा है।
पहले सुलह की कोशिश, फिर चेतावनी और अब अटैक... क्या है ट्रंप की रणनीति?
10 Jul, 2026 08:51 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में व्यापारिक जहाजों पर किए गए हमलों के जवाब में अमेरिका ने उसके 80 से अधिक सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें बरसाई हैं। पहली नजर में यह अमेरिका की सीधी सैन्य कार्रवाई लगती है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के पीछे एक गहरा राजनीतिक मोड़ भी छिपा हुआ है। दरअसल, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जून में ईरान के साथ जिस समझौते (संघर्ष विराम) को अपनी बड़ी कामयाबी बताया था, वह बहुत जल्द खुद उनके लिए एक बड़ी राजनीतिक मुसीबत बन गया।
अपनी ही पार्टी के निशाने पर आए ट्रंप
इस समझौते के तहत अमेरिका ने होर्मुज से अपनी नौसैनिक नाकाबंदी हटा ली थी और ईरानी तेल पर भी कुछ राहत दी थी, जिसके बदले में ईरान ने इस समुद्री रास्ते को खुला रखने का वादा किया था। लेकिन इस डील में ईरान के परमाणु कार्यक्रम या उसके मिसाइल नेटवर्क पर कोई पाबंदी नहीं लगाई गई थी। इसी वजह से टॉम कॉटन, टेड क्रूज और रोजर विकर जैसे ट्रंप की अपनी ही रिपब्लिकन पार्टी के कई बड़े नेताओं ने इस समझौते पर गंभीर सवाल उठाए और इसे अमेरिका की बेहद कमजोर कूटनीति और एक बड़ी भूल करार दिया।
हमलों के बाद ट्रंप को मिला राजनीतिक मौका
इस बीच 6-7 जुलाई को ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तीन व्यापारिक जहाजों पर हमला कर दिया। इस हमले ने न केवल समझौते को तोड़ दिया, बल्कि ट्रंप को सैन्य कार्रवाई करने के साथ-साथ अपनी राजनीतिक छवि सुधारने का भी एक बड़ा मौका दे दिया। अगर ट्रंप चुप बैठते तो उन पर 'ईरान के सामने झुकने' का ठप्पा लग जाता। इसलिए उन्होंने नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान अपने सुरक्षा अधिकारियों के साथ बैठक की और इस बड़े हमले को मंजूरी देकर यह कड़ा संदेश दिया कि अमेरिका बातचीत तो कर सकता है, लेकिन चुनौती मिलने पर पूरी ताकत से जवाब भी देगा।
सख्त कदम के बाद भी खड़ी हुई नई दुविधा
इस बड़ी मिसाइल कार्रवाई के बाद ट्रंप ने ईरान के साथ संघर्ष विराम को पूरी तरह 'खत्म' घोषित कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद वे एक नई राजनीतिक उलझन में फंस गए हैं। एक तरफ जहां डेमोक्रेट्स और युद्ध विरोधी संगठन उन पर पूरे क्षेत्र को युद्ध की आग में धकेलने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ट्रंप की पूर्व सहयोगी और पूर्व रिपब्लिकन सांसद मार्जोरी टेलर ग्रीन ने भी उन पर निशाना साधा है। ग्रीन का कहना है कि इस बमबारी के कारण दुनिया भर में तेल की कीमतें बढ़ने लगी हैं और शेयर बाजार भी नीचे गिर गया है, जिससे आम जनता पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।
ऑस्ट्रेलिया दौरे पर पीएम मोदी का बड़ा संबोधन, भारतीय समुदाय में दिखा जबरदस्त उत्साह
9 Jul, 2026 04:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेलबर्न। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में विशाल भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए दोनों देशों के रिश्तों को एक नई ऊंचाई दी है। खचाखच भरे स्टेडियम में प्रवासी भारतीयों के जोश और उत्साह के बीच पीएम मोदी ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत और प्रगाढ़ बनाने में भारतीय समुदाय की सबसे बड़ी भूमिका रही है। प्रधानमंत्री ने बेहद भावुक अंदाज़ में कहा कि पिछले 12 वर्षों में यह उनकी तीसरी ऑस्ट्रेलिया यात्रा है, जो कूटनीति के लिहाज से एक 'हैट-ट्रिक' की तरह है।
'हाउसफुल और ब्लॉकबस्टर' कार्यक्रम, मेलबर्न की कॉफी का जिक्र
अपने संबोधन की शुरुआत में पीएम मोदी ने ऑस्ट्रेलिया की पारंपरिक संस्कृति और वहां के पुरखों को नमन कर सबका दिल जीत लिया। उन्होंने कार्यक्रम की विशालता को देखकर कहा, 'यह आयोजन पूरी तरह हाउसफुल है। यह वाकई एक ब्लॉकबस्टर जैसा है। इससे पहले मैं आप सभी से सिडनी में दो बार मिल चुका हूं, लेकिन मेलबर्न के लोगों से मिलने का मुझे बेसब्री से इंतजार था। इसीलिए इस बार मैंने तय किया था कि मेलबर्न आकर यहां के लोगों के साथ 'फ्लैट व्हाइट कॉफी' की चुस्कियां जरूर लूंगा।' प्रधानमंत्री ने कहा कि मेलबर्न का यह जनसैलाब दिखाता है कि दोनों देशों के संबंध आज किस ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच चुके हैं।
परिश्रम से सींच रहे ऑस्ट्रेलिया का विकास, भारत पर भी टिकी नजर
प्रवासी भारतीयों के योगदान की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'आप सभी अपनी कर्मभूमि ऑस्ट्रेलिया के विकास को अपने अथक परिश्रम और ईमानदारी से सींच रहे हैं। इसके साथ ही मैं यह भी अच्छी तरह जानता हूं कि आपकी एक नजर हमेशा अपनी मातृभूमि भारत पर टिकी रहती है। आप हमेशा यह जानने को उत्सुक रहते हैं कि भारत में क्या चल रहा है। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि 21वीं सदी का नया भारत आज पूरी दुनिया के सामने एक विकसित राष्ट्र बनने के संकल्प के साथ तेजी से आगे बढ़ रहा है।'
क्रिकेट डिप्लोमेसी और प्रधानमंत्री अल्बानीज का आभार
पीएम नरेंद्र मोदी ने मंच पर मौजूद अपने ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष एंथनी अल्बानीज की तारीफों के पुल बांधे। उन्होंने कहा, 'मेलबर्न ने सचमुच सबका दिल जीत लिया है। मैं अपने परम मित्र और भारत के शुभचिंतक प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज का हृदय से आभारी हूं। आप सिडनी के कार्यक्रम में भी हमारे साथ थे और आज मेलबर्न में भी भारतीय समुदाय के इस जश्न में शामिल हुए हैं; एक तरह से हमारा यह साझा सफर अब पूरा हो गया है।' क्रिकेट का उदाहरण देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम वाले शहर (अहमदाबाद) से लेकर इस ऐतिहासिक मेलबर्न स्टेडियम तक, हम दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्ष हर जगह साथ रहे हैं। प्रधानमंत्री अल्बानीज जब भी बोलते हैं, तो वे भारतीयों का दिल और दिमाग पूरी तरह जीत लेते हैं। उन्होंने सिडनी में भी अपनी जबरदस्त छाप छोड़ी थी और आज मेलबर्न में भी भारतीयों के दिलों को जीत लिया है।
मिडिल ईस्ट में फिर बढ़ा संकट, ईरान पर अमेरिकी कार्रवाई के बाद खाड़ी देशों में हलचल
9 Jul, 2026 03:51 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मनामा। अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी सैन्य जंग की चिंगारी अब पूरे खाड़ी क्षेत्र में फैल चुकी है। अमेरिकी सेना द्वारा ईरान पर की गई भीषण बमबारी के बाद पश्चिम एशिया में तनाव अप्रत्याशित रूप से चरम पर पहुंच गया है। ईरान की तरफ से जवाबी कार्रवाई के सीधे अल्टीमेटम के बाद खाड़ी के तमाम देशों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। गुरुवार को बहरीन और कुवैत जैसे शांतिपूर्ण देशों में आसमान थर्रा देने वाले धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जिससे स्थानीय आबादी के बीच भारी दहशत का माहौल है। जिन अरब देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं, वहां स्थिति बेहद संवेदनशील हो चुकी है और पूरा क्षेत्र एक बड़े युद्ध की आशंका से घिर गया है।
बहरीन और कुवैत में सायरन की गूंज, फिफ्थ फ्लीट पर हमले का दावा
गुरुवार को बहरीन के आसमान में अचानक हवाई हमले के सायरन बजने से हड़कंप मच गया। बहरीन के गृह मंत्रालय ने तुरंत सोशल मीडिया पर संदेश जारी कर नागरिकों से धैर्य रखने और बिना वक्त गंवाए सबसे नजदीकी सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की। सायरन बजने के कुछ ही देर बाद राजधानी मनामा में कई जोरदार धमाके सुने गए। इसी बीच ईरानी मीडिया ने सनसनीखेज दावा किया है कि बहरीन में स्थित अमेरिकी नौसेना के सबसे महत्वपूर्ण 'फिफ्थ फ्लीट' मुख्यालय को निशाना बनाया गया है, हालांकि अमेरिकी या बहरीन प्रशासन ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। दूसरी ओर, कुवैत की सेना ने बयान जारी कर बताया कि उनके उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम ने दुश्मन के कई मिसाइल और ड्रोन हमलों को हवा में ही ध्वस्त कर दिया है। कुवैती सेना के मुताबिक, शहर में सुनाई दे रही धमाकों की आवाजें दरअसल डिफेंस सिस्टम की ओर से की गई जवाबी कार्रवाई की थीं।
हाई अलर्ट पर खाड़ी देश, ईरान के राडार पर अमेरिकी बेस
तनाव की गंभीरता को देखते हुए कतर के गृह मंत्रालय ने भी अपने देश में सुरक्षा खतरे का स्तर बढ़ा दिया है और नागरिकों को घरों के भीतर ही रहने की सख्त हिदायत दी है। कुवैत में भी आपातकालीन सायरन बजाकर लोगों को मुस्तैद रहने को कहा गया है। दरअसल, ईरान के सरकारी मीडिया ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वे अमेरिका के हमलों का बदला खाड़ी में मौजूद उसके सैन्य अड्डों को तबाह करके लेंगे। वर्तमान में इस पूरे क्षेत्र में अमेरिकी सेना का एक बड़ा नेटवर्क फैला हुआ है, जो अब ईरान के सीधे निशाने पर है। इसमें कुवैत का अली अल सलेम एयर बेस शामिल है जहां करीब 13,500 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। वहीं, कतर का अल उदीद एयर बेस मध्य पूर्व में अमेरिका का सबसे बड़ा कमांड सेंटर है। इसके अलावा यूएई का अल धफरा एयर बेस, सऊदी अरब के सुरक्षा प्रतिष्ठान और जॉर्डन के मिसाइल डिफेंस रडार सिस्टम भी संभावित ईरानी मिसाइलों के दायरे में आ चुके हैं।
सेंटकॉम का दूसरा बड़ा हमला, मंडराया महायुद्ध का खतरा
इन तमाम धमकियों और पलटवार के बीच, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने लगातार दूसरी रात भी ईरान के ठिकानों पर भीषण बमबारी जारी रखी। अमेरिकी सेना का तर्क है कि इन हमलों का एकमात्र उद्देश्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे वैश्विक व्यापार मार्ग में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित करना और वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाने की ईरान की क्षमता को पूरी तरह पंगु बनाना है। बहरहाल, दोनों पक्षों की इस जिद के बीच खाड़ी देश एक ऐसे विनाशकारी संघर्ष के मुहाने पर खड़े हैं, जो न केवल इस क्षेत्र की स्थिरता को निगल सकता है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और इसके सामाजिक ताने-बाने को भी तहस-नहस कर सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर फिर संकट, बड़े हमले के बाद आवाजाही प्रभावित
9 Jul, 2026 03:32 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चली आ रही युद्धविराम (सीजफायर) की नाजुक डोर आखिरकार पूरी तरह टूट गई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (होर्मुज जलडमरूमध्य) में कमर्शियल जहाजों पर हुए हालिया हमलों के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ आर-पार की सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आधिकारिक घोषणा करते हुए साफ कर दिया है कि ईरान के साथ सीजफायर अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कड़ी चेतावनी दी कि अगर ईरान ने अंतर्राष्ट्रीय शिपिंग और व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाना बंद नहीं किया, तो अमेरिकी सेना का अगला कदम पहले से कहीं ज्यादा सख्त और विनाशकारी होगा। इस तनाव के चलते दुनिया का सबसे व्यस्त तेल शिपिंग मार्ग 'होर्मुज' एक बार फिर पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच गया है।
दक्षिणी ईरान में अमेरिकी सेना का भीषण हमला, रातभर गूंजे धमाके
बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात अमेरिकी नौसेना और जमीनी बलों ने मिलकर दक्षिणी ईरान में अब तक की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया। इस ऑपरेशन के दौरान ईरान के मिसाइल सिस्टम, आधुनिक ड्रोन ठिकानों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास मौजूद उन तमाम सैन्य गढ़ों को नेस्तनाबूद कर दिया गया, जो अंतर्राष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए खतरा बने हुए थे। क्षेत्र में हालात इस वक्त बेहद संवेदनशील हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नौवहन की आजादी (Freedom of Navigation) को बहाल करने और ईरान की हमलावर क्षमता को कुचलने के लिए अतिरिक्त एयर स्ट्राइक का दौर लगातार जारी है।
कमर्शियल जहाजों पर हमले के बाद भड़का अमेरिका
इस महासंकट की शुरुआत 6 और 7 जुलाई को हुई, जब ईरान ने दुस्साहस दिखाते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे कम से कम तीन कमर्शियल जहाजों और तेल टैंकरों पर हमला कर दिया। अमेरिका ने इसे सीजफायर समझौते का सीधा उल्लंघन माना और पलक झपकते ही जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। पहले दौर की कार्रवाई में अमेरिकी लड़ाकू विमानों और मिसाइलों ने दक्षिणी ईरान में स्थित 80 से ज्यादा ईरानी सैन्य ठिकानों पर सटीक निशाना साधा।
रडार, कमांड सेंटर और युद्धपोत तबाह; चाबहार तक हड़कंप
अमेरिकी हमलों का यह सिलसिला 8 जुलाई को और ज्यादा आक्रामक हो गया। इस नए दौर के हमलों में अमेरिकी सेना ने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, कोस्टल रडार, एंटी-शिप मिसाइल लॉन्चर्स, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की फास्ट अटैक बोट्स और मुख्य कमांड सेंटरों को मलबे में तब्दील कर दिया। इन भीषण हमलों के बाद ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण तटीय शहरों—बंदर अब्बास, कोनारक और चाबहार में पूरी रात धमाकों की गूंज सुनाई देती रही, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात पैदा हो गए हैं।
अंतिम पल तक साथ रहे बिमला-सुनील, दर्दनाक हादसे में हुई मौत से गांव गमगीन
9 Jul, 2026 02:27 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सोनीपत। गोहाना के गांव महमूदपुर में मंगलवार देर रात एक ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने न केवल पूरा गांव झकझोर दिया, बल्कि एक मिसाल बन चुके अटूट रिश्ते का भी हमेशा के लिए अंत कर दिया। इस हादसे में दो महिलाओं की मौत हो गई। जेठानी बिमला और देवरानी सुनील का रिश्ता सगी बहनों से भी बढ़कर था, जो हर सुख-दुख में साए की तरह एक-दूसरे के साथ रहीं। किस्मत का खेल ऐसा रहा कि जीवन भर साथ निभाने वाली इन दोनों महिलाओं ने अपनी अंतिम सांस भी एक ही मलबे के नीचे एक साथ ली।
ठंड से बचने के लिए आंगन में सोने का फैसला बना आखिरी
क्षेत्र में पिछले दो दिनों से रुक-रुक कर हो रही हल्की बारिश के कारण रात के समय तापमान गिर गया था और हल्की ठंड का अहसास हो रहा था। मंगलवार की रात बिमला और सुनील पुराने मकान के सामने बने टिन शेड के नीचे सो रही थीं, लेकिन ठंड बढ़ने पर उन्होंने अपनी चारपाइयां वहां से उठाईं और पुराने मकान के अंदर आंगन में बिछा लीं। किसी को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि ठंड से बचने का उनका यही फैसला जिंदगी का आखिरी फैसला साबित होगा और रात में ही कमजोर शहतीर टूटने से पूरी छत उनके ऊपर भरभराकर गिर गई।
दस वर्ष पूर्व देवरानी ने जेठानी को गोद दिया था अपना बेटा
बिमला और सुनील के बीच का प्रेम केवल सामान्य बोलचाल तक सीमित नहीं था, बल्कि उनके आपसी त्याग की चर्चा पूरे क्षेत्र में होती थी। बिमला की तीन बेटियां थीं लेकिन कोई बेटा नहीं था, जिसके चलते करीब 10 वर्ष पहले देवरानी सुनील ने अपने बड़े बेटे दीपक को अपनी जेठानी की गोद में सौंप दिया था ताकि उन्हें कभी बेटे की कमी महसूस न हो। इस बड़े फैसले के बाद दोनों परिवारों के बीच का स्नेह और ज्यादा गहरा हो गया, जिसके बाद से दोनों परिवार मिलकर करीब 28 एकड़ जमीन पर एक साथ खेती-बाड़ी का पूरा काम संभालते थे।
पति के निधन के बाद हर कदम पर बनीं एक-दूसरे का संबल
वर्ष 2015 में बिमला के पति राजेंद्र सिंह के आकस्मिक निधन के बाद देवरानी सुनील ने अपनी जेठानी को कभी अकेलेपन का अहसास नहीं होने दिया। बिमला शुगर की गंभीर मरीज थीं, इसलिए उनकी दवाइयों से लेकर खान-पान और स्वास्थ्य की पूरी देखभाल की जिम्मेदारी सुनील खुद उठाती थी। दोनों का उठना-बैठना, खाना-पीना और सोना हमेशा साथ में ही होता था। इस समय बिमला की तीनों बेटियों और गोद लिए बेटे दीपक की शादी हो चुकी है, जबकि सुनील का छोटा बेटा संदीप भी इसी संयुक्त परिवार के साथ रहता है।
मलबे के भारी दबाव के साथ ही थम गईं समय की सुइयां
इस दर्दनाक हादसे की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पुराने मकान की छत पर करीब डेढ़ फीट मोटी मिट्टी की परत बिछी हुई थी, जिसका वजन कमजोर हो चुकी शहतीर और कड़ियां बर्दाश्त नहीं कर सकीं। दो साल पहले मकान की मरम्मत भी कराई गई थी, लेकिन घून और दीमक के कारण अंदर से खोखली हो चुकी लकड़ी अचानक टूट गई। इस हादसे के वक्त आंगन की दीवार पर टंगी वह घड़ी भी मलबे की चपेट में आकर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे देवरानी-जेठानी की थमती सांसों के साथ ही समय की सुइयां भी हमेशा के लिए
PM मोदी और अल्बनीज की बड़ी पहल, न्यूक्लियर एनर्जी सहयोग से मजबूत होंगे रिश्ते
9 Jul, 2026 12:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेलबर्न: ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज की गरिमामयी उपस्थिति में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच कई ऐतिहासिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इस उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक में दोनों देशों ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, साइबर तकनीक, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष और व्यापार जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी रणनीतिक साझेदारी को एक नई ऊंचाई देने पर सहमति जताई। दोनों वैश्विक नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता दिखाते हुए इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए संवाद व कूटनीति को ही एकमात्र प्रभावी रास्ता बताया।
रक्षा और रणनीतिक सहयोग को मिली नई मजबूती
बैठक के दौरान दोनों देशों ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर एक संयुक्त घोषणा पत्र जारी किया। ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने भारत को अपना शीर्ष सुरक्षा साझेदार बताते हुए कहा कि इस व्यावहारिक साझेदारी से दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी तालमेल (इंटरऑपरेबिलिटी) और रक्षा अभ्यासों को और अधिक प्रभावी व जटिल बनाया जाएगा। इसके साथ ही, हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा चुनौतियों पर दोनों देश नियमित रूप से परामर्श करेंगे।
समुद्री सुरक्षा, साइबर तकनीक और त्रिपक्षीय साझेदारी पर मुहर
दोनों देशों ने मिलकर 'संयुक्त समुद्री सुरक्षा सहयोग रोडमैप' को मंजूरी दी है। इसके अलावा साइबर सुरक्षा और क्रिटिकल टेक्नोलॉजी की सुरक्षा के लिए एक नई साझेदारी पर सहमति बनी। इस दौरान एक बड़ा कदम उठाते हुए भारत, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के बीच 'टेक्नोलॉजी एवं इनोवेशन पार्टनरशिप' (MoU) पर भी हस्ताक्षर किए गए, जो उभरती हुई तकनीकों के क्षेत्र में तीनों देशों के सहयोग को एक नई दिशा देगा।
गगनयान मिशन को मिलेगा ऑस्ट्रेलिया का तकनीकी साथ
भारत के महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष मिशन 'गगनयान' को सफल बनाने के लिए ऑस्ट्रेलिया तकनीकी सहयोग प्रदान करेगा। इसके तहत ऑस्ट्रेलिया के कोकोस (कीलिंग) द्वीप पर एक अस्थायी 'स्पेस ट्रैकिंग टर्मिनल' स्थापित करने पर सहमति बनी है, जो अंतरिक्ष में भारतीय एस्ट्रोनॉट्स की सुरक्षित मॉनिटरिंग में मदद करेगा।
परमाणु समझौता: भारत को यूरेनियम आपूर्ति का रास्ता साफ
स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भारत को एक बड़ी कामयाबी मिली है। साल 2015 के द्विपक्षीय परमाणु सहयोग समझौते के अंतर्गत, शांतिपूर्ण नागरिक उद्देश्यों के लिए भारत को यूरेनियम निर्यात करने संबंधी आवश्यक व्यवस्था पर दोनों देशों ने हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस कदम से भारत के परमाणु बिजली घरों के लिए ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम की निर्बाध आपूर्ति का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
व्यापार विस्तार और सीईसीए (CECA) पर तेजी से बढ़ेगा काम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि साल 2022 में हुए आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते (ECTA) के बाद से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। अब दोनों देशों ने इसे और व्यापक रूप देते हुए 'व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते' (CECA) को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने का निर्णय लिया है, जो दोनों देशों के उद्योगों और निवेशकों के लिए बेहद लाभकारी सिद्ध होगा।
आतंकवाद के खिलाफ अटूट संकल्प और कूटनीति पर जोर
पीएम मोदी ने मेलबर्न में हुए भव्य स्वागत के लिए ऑस्ट्रेलियाई पीएम का आभार जताया और स्पष्ट किया कि आतंकवाद पूरी मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा है, जिसके खिलाफ दोनों देशों का संकल्प अटूट है। वैश्विक तनावों और युद्धों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी विवाद का हल केवल संवाद और कूटनीति से ही निकाला जा सकता है। भारत और ऑस्ट्रेलिया मिलकर पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में कानून आधारित व्यवस्था और नौवहन की स्वतंत्रता (फ्रीडम ऑफ नेविगेशन) सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
राफेल बनाम फ्यूरी: कौन है ज्यादा ताकतवर, अमेरिका के नए जेट पर नजरें
9 Jul, 2026 11:21 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन: अमेरिकी वायुसेना ने भविष्य के हवाई युद्ध का चेहरा बदलने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए अपने अत्याधुनिक मानवरहित (Unmanned) लड़ाकू विमान 'एफवायक्यू-44ए फ्यूरी' (FYQ-44A Fury) का सफल ऑपरेशनल ट्रायल किया है। कैलिफोर्निया के प्रसिद्ध एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस पर हुए इन परीक्षणों के दौरान विमान की ऑटोनोमस (स्वायत्त) फ्लाइट और युद्धक क्षमताओं को बारीकी से परखा गया। इस विमान को अमेरिका के 'कोलैबोरेटिव कॉम्बैट एयरक्राफ्ट' (CCA) प्रोग्राम के तहत तैयार किया गया है।
इंसानी पायलटों का 'लॉयल विंगमैन' बनेगा यह ड्रोन
इस हाईटेक विमान का मुख्य उद्देश्य युद्ध के मैदान में इंसानी पायलट द्वारा उड़ाए जाने वाले एफ-35 या राफेल जैसे लड़ाकू विमानों के साथ एक 'लॉयल विंगमैन' (वफादार साथी) के रूप में काम करना है। यह पूरी तरह ऑटोनोमस ड्रोन हवाई हमले करने, दुश्मन के राडार को चमका देने वाली 'इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर' तकनीक का इस्तेमाल करने और खतरनाक खुफिया मिशनों को अंजाम देने में सक्षम है, जिससे हवाई जंग को और भी अधिक घातक बनाया जा सकेगा।
वैश्विक रक्षा समीकरणों के बीच अमेरिका का बड़ा दांव
यह परीक्षण ऐसे समय में हुआ है जब भारत द्वारा फ्रांस से लगभग 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 114 राफेल फाइटर जेट खरीदने के करार के बाद दक्षिण एशिया के रक्षा समीकरणों में बड़ी खलबली मची हुई है। अपने स्वदेशी तेजस और अगली पीढ़ी के एएमसीए (AMCA) प्रोजेक्ट्स के साथ भारत आने वाले दशकों में एक ग्लोबल डिफेंस पावर बनने की राह पर है। इन सब वैश्विक घटनाक्रमों के बीच, अमेरिका के इस परीक्षण ने रक्षा विशेषज्ञों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है कि यह तकनीक पारंपरिक राफेल विमानों के मुकाबले कहां टिकती है।
पहली बार मानवरहित विमान को मिला 'फाइटर' का आधिकारिक दर्जा
एफवायक्यू-44ए की सबसे बड़ी तकनीकी विशेषता यह है कि अमेरिकी वायुसेना ने पहली बार किसी बिना पायलट वाले विमान को आधिकारिक रूप से 'फाइटर कैटेगरी' का दर्जा दिया है। मिलिट्री कोडिंग के अनुसार, इसके नाम में 'Y' का अर्थ प्रोटोटाइप, 'F' का अर्थ फाइटर और 'Q' का अर्थ अनमैन्ड (मानवरहित) है। यह तकनीक राफेल जैसे पारंपरिक लड़ाकू विमानों से बिल्कुल अलग है, क्योंकि इसे उड़ाने के लिए न तो विमान के अंदर किसी पायलट की जरूरत होती है और न ही जमीन पर बैठे किसी रिमोट ऑपरेटर की।
सिर्फ एक लैपटॉप से अपलोड हुआ मिशन, ऑटोनोमस टेकऑफ
इस सफल ट्रायल के दौरान इंजीनियर्स और वायुसेना के जवानों ने केवल एक लैपटॉप की सहायता से विमान में मिशन प्लान अपलोड किया। इसके बाद इस अत्याधुनिक विमान ने पूरी तरह ऑटोनोमस (स्वचालित) तरीके से रनवे पर टैक्सींग की और खुद ही टेकऑफ किया। उड़ान के दौरान हवा में ही जरूरी निर्देश प्राप्त करने और अपने मिशन को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद यह सुरक्षित बेस पर लौट आया। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसे बेहद कम तकनीकी कर्मचारियों और बिना किसी भारी-भरकम बुनियादी ढांचे के भी तेजी से ऑपरेट किया जा सकता है, जो भविष्य के युद्धों में बिना इंसानी जान जोखिम में डाले दुश्मन को नेस्तनाबूद करने की क्षमता रखता है।
समुद्री मोर्चे पर भारत की नई रणनीति, सवांग पोर्ट विकास से बढ़ेगी साझेदारी
9 Jul, 2026 11:17 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जकार्ता: भारत और इंडोनेशिया ने हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी रणनीतिक और सैन्य साझेदारी को एक नई ऊंचाई देते हुए कई महत्वपूर्ण समझौतों पर मुहर लगाई है। इसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में चीन की विस्तारवादी नीतियों को संतुलित करना और भारत के विकास-उन्मुख दृष्टिकोण को मजबूती से आगे बढ़ाना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इंडोनेशिया दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच इंडोनेशिया के सबसे महत्वपूर्ण 'सवांग बंदरगाह' (Sabang Port) के संयुक्त विकास को लेकर एक ऐतिहासिक सहमति बनी है। यह बंदरगाह दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में शुमार 'मलक्का जलडमरूमध्य' (Strait of Malacca) के ठीक मुहाने पर स्थित है।
विस्तारवाद नहीं, विकासवाद के पक्ष में भारत
इंडोनेशियाई संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के वैश्विक दृष्टिकोण को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि भारत कभी भी विस्तारवाद की नीति का समर्थन नहीं करता, बल्कि वह हमेशा 'विकासवाद' और 'सबका साथ, सबका विकास' के मंत्र पर आगे बढ़ता है। पीएम मोदी ने दोनों देशों के भौगोलिक संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि भले ही दोनों देशों की राजधानियां हजारों किलोमीटर दूर हों, लेकिन समुद्र में हमारे बीच की दूरी महज 150 किलोमीटर है। यह दूरी कोई बाधा नहीं, बल्कि दोनों देशों के गहरे सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंधों का एक मजबूत सेतु है।
मलक्का जलडमरूमध्य और सवांग बंदरगाह का रणनीतिक महत्व
सवांग बंदरगाह का संयुक्त विकास भारत की सुरक्षा और नौसैनिक पहुंच के लिहाज से बेहद गेम-चेंजर साबित होने वाला है। यह स्थान अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के अंतिम छोर 'इंदिरा पॉइंट' से महज 100 मील की दूरी पर स्थित है, जो भारत के महत्वाकांक्षी 'ग्रेटर निकोबार प्रोजेक्ट' के बेहद करीब है। मलक्का जलडमरूमध्य वैश्विक व्यापार की एक लाइफलाइन है, जहां से हर साल करीब 2.8 ट्रिलियन डॉलर का माल गुजरता है। पश्चिमी एशिया से पूर्वी एशियाई देशों (चीन, जापान, दक्षिण कोरिया) को होने वाली कच्चे तेल और गैस की अधिकांश आपूर्ति इसी मार्ग से होती है। इसके अलावा भारत का खुद का पेट्रोलियम, कोयला और मशीनरी का एक बड़ा व्यापार इसी रास्ते पर निर्भर है।
ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइल सौदों से मजबूत होगी नाकेबंदी
इस महत्वपूर्ण बंदरगाह के विकास के जरिए भारत और इंडोनेशिया मिलकर हिंद महासागर में चीन की आक्रामक समुद्री रणनीतियों (स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स) को कड़ी चुनौती देने में सक्षम होंगे। रणनीतिक सहयोग के अलावा, दोनों देशों के बीच पहले ही ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और अस्त्र मिसाइल जैसी घातक रक्षा प्रणालियों के लिए रक्षा सौदे हो चुके हैं। भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' (Act East Policy) के तहत उठाया गया यह कदम न केवल दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के साथ आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को नई धार देगा, बल्कि एक स्वतंत्र, मुक्त और सुरक्षित हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र के निर्माण में भी बड़ी भूमिका निभाएगा।
ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर, दूसरे दिन भी जारी रही बमबारी
9 Jul, 2026 11:12 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में वाणिज्यिक और मर्चेंट जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए लगातार दूसरे दिन भीषण बमबारी की है। इस बड़ी सैन्य कार्रवाई के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को बेहद सख्त लहजे में चेतावनी दी है। ट्रंप ने साफ किया है कि अगर तेहरान ने अपनी आक्रामक हरकतें तुरंत बंद नहीं कीं, तो उसे इसके बेहद गंभीर और विनाशकारी परिणाम भुगतने होंगे।
ट्रुथ सोशल पर डोनाल्ड ट्रंप की खुली चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट साझा करते हुए इस बात की पुष्टि की कि यह कार्रवाई ईरान द्वारा अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में मालवाहक जहाजों पर किए गए हमलों का करारा प्रतिशोध है। उन्होंने अपने संदेश में कड़े शब्दों में लिखा, "यह ईरान द्वारा कल जहाजों पर की गई बमबारी का सीधा जवाब है। अगर ऐसी हिमाकत दोबारा की गई, तो अंजाम इससे भी कहीं ज्यादा बुरा होगा।" ट्रंप का यह बयान अमेरिकी सेंट्रल कमांड द्वारा ईरान के सैन्य ठिकानों पर नए दौर के हवाई हमले शुरू करने के तुरंत बाद आया।
यूएस सेंट्रल कमांड ने कहा- तेहरान की आक्रामकता का करारा जवाब
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर जारी एक बयान में इन हमलों की पूरी जानकारी दी। कमांड ने बताया कि कमांडर इन चीफ (राष्ट्रपति) के सीधे आदेश पर अमेरिकी नौसेना और वायुसेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की स्वतंत्र आवाजाही को बाधित करने वाली ईरान की सैन्य क्षमता को पूरी तरह से नष्ट करने के लिए यह अतिरिक्त हमले किए हैं। सेंट्रल कमांड ने जोर देकर कहा कि एक महत्वपूर्ण वैश्विक जलमार्ग में निर्दोष नागरिकों और जहाजों को निशाना बनाने के लिए सीधे तौर पर ईरान ही पूरी तरह जिम्मेदार है।
बंदर अब्बास और सिरीक में गूंजे भीषण धमाके
यह सैन्य कार्रवाई ओमान के तट के पास कई व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाए जाने के बाद शुरू हुई है। बुधवार को शुरू हुई इस बमबारी के बाद गुरुवार को भी अमेरिकी युद्धक विमानों और मिसाइलों ने ईरान के रणनीतिक सैन्य अड्डों और बंदरगाहों को निशाना बनाया। ईरानी सरकारी मीडिया ने भी देश के दक्षिणी तटीय क्षेत्रों में भारी गोलाबारी और विस्फोटों की पुष्टि की है। खबरों के अनुसार, बेहद महत्वपूर्ण चोकपॉइंट माने जाने वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर स्थित प्रमुख बंदरगाह शहर बंदर अब्बास और सिरीक में लगातार दूसरे दिन आसमान दहला देने वाले धमाके सुने गए।
बुनियादी ढांचे को नेस्तनाबूद करने की धमकी
इससे पहले अंतरराष्ट्रीय मीडिया से बातचीत करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के आक्रामक रुख को स्पष्ट किया था। उन्होंने संकेत दिए थे कि अमेरिकी सेना दोबारा बड़ा हमला करने की तैयारी में है। हालांकि, उन्होंने यह उम्मीद जताई कि यह तनाव किसी लंबे युद्ध में नहीं बदलेगा और जो भी कार्रवाई होगी वह बेहद तेज और सटीक होगी। इसके साथ ही ट्रंप ने ईरान की आर्थिक और रणनीतिक कमर तोड़ने के लिए उसके बिजली संयंत्रों (पावर प्लांट), पानी साफ करने वाले डिसेलिनेशन प्लांटों को उड़ाने और ईरान के सबसे प्रमुख तेल-उत्पादन केंद्र खार्ग द्वीप को अपने नियंत्रण में लेने की सीधी धमकी भी दी है।
PM मोदी का ऑस्ट्रेलिया दौरा: दोस्ती, साझेदारी और प्रवासी भारतीयों पर रहेगा फोकस
9 Jul, 2026 10:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेलबर्न: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने तीन देशों के आधिकारिक दौरे के दौरान गुरुवार को ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में 'भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम' और 'इकोनॉमिक रोडमैप बिजनेस रिसेप्शन' में शिरकत की। इस खास मौके पर उन्होंने दोनों देशों के उद्योगपतियों और दिग्गजों को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत और ऑस्ट्रेलिया ने मिलकर एक बेहद मजबूत और भविष्योन्मुखी साझेदारी की ठोस नींव रख दी है। वैश्विक चुनौतियों के बीच दोनों देशों का यह तालमेल व्यापारिक जगत को नई गति दे रहा है।
अनिश्चितता के दौर में भरोसेमंद साथी
संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने वैश्विक हालातों का जिक्र करते हुए कहा कि आज पूरी दुनिया अनिश्चितता, आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) में रुकावट और ऊर्जा संकट के दौर से गुजर रही है। ऐसे कठिन समय में भारत और ऑस्ट्रेलिया का एक भरोसेमंद और मजबूत साझेदार के रूप में कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ना बेहद जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के साथ मिलकर काम करने से दोनों ही पक्षों के व्यापारियों और व्यवसायों को एक-दूसरे के नए बाजारों तक आसान और फायदेमंद पहुंच मिली है।
क्लीन एनर्जी और न्यूक्लियर सेक्टर में बड़ी महत्वाकांक्षा
प्रधानमंत्री ने भारत के भविष्य के ऊर्जा लक्ष्यों को साझा करते हुए कहा कि देश साल 2030 तक 500 GW रिन्यूएबल एनर्जी (अक्षय ऊर्जा) और साल 2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने के बड़े लक्ष्य पर काम कर रहा है। इस महत्वाकांक्षी यात्रा में ऑस्ट्रेलिया की उन्नत तकनीक और वहां का विशाल यूरेनियम भंडार भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण और पूरक भूमिका निभा सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने भारत के पोर्ट, एयरपोर्ट, सड़क, रेलवे, एआई (AI), सेमीकंडक्टर और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में ऑस्ट्रेलियाई निवेशकों को दीर्घकालिक निवेश के लिए आमंत्रित किया।
राज्यों और विश्वविद्यालयों के बीच सीधे जुड़ाव पर जोर
साझेदारी के दायरे को और व्यापक बनाने के लिए पीएम मोदी ने एक नया विजन पेश किया। उन्होंने सुझाव दिया कि दोनों देशों के बीच के संबंध सिर्फ बड़े कूटनीतिक स्तर तक सीमित न रहें, बल्कि इसमें 'स्टेट-टू-स्टेट' (राज्य-से-राज्य) और 'सेक्टर-टू-सेक्टर' भागीदारी को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इसके तहत दोनों देशों के राज्यों, छोटे-बड़े शहरों, विश्वविद्यालयों और स्थानीय उद्योगों को सीधे आपस में जोड़कर इस विकास गाथा का अहम भागीदार बनाया जाएगा।
मार्वल स्टेडियम में जुटेगा 40 हजार भारतवंशियों का हुजूम
इस ऐतिहासिक कार्यक्रम के समापन के बाद ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने पीएम मोदी के साथ एक बेहद खास सेल्फी ली, जो दोनों देशों के बीच की गर्मजोशी को बयां करती है। 6 से 11 जुलाई तक चलने वाले इस दौरे के तहत पीएम मोदी आज मेलबर्न के प्रसिद्ध मार्वल स्टेडियम में करीब 40 हजार प्रवासी भारतीयों (भारतवंशियों) के एक विशाल जनसमूह को संबोधित करेंगे। इसके बाद दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच एक उच्च स्तरीय बैठक भी होगी, जिसमें आगामी द्विपक्षीय 'ट्रेड डील' (व्यापार समझौते) को अंतिम रूप देने पर गहन चर्चा हो सकती है। इस सफल दौरे के बाद पीएम मोदी 11 जुलाई को न्यूजीलैंड के लिए रवाना होंगे।
हरियाणा-NCR में फिर बरसेंगे बादल, अगले 3 दिन बारिश की संभावना
9 Jul, 2026 09:07 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणा। प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर के क्षेत्रों में मानसून पूरी तरह से मेहरबान बना हुआ है। पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य के कई हिस्सों में झमाझम बारिश दर्ज की गई है, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से बड़ी राहत मिली है। मौसम विज्ञान विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, आगामी दो से तीन दिनों तक राज्य में बारिश का यह दौर इसी तरह जारी रहने की उम्मीद है। हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि 11 जुलाई के बाद मानसून की रफ्तार में कुछ समय के लिए थोड़ी सुस्ती देखी जा सकती है।
प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में झमाझम बारिश और मौसम के पैटर्न में बदलाव
बीते एक दिन में पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, कैथल, जींद, कुरुक्षेत्र, करनाल, पानीपत, सोनीपत, फरीदाबाद, पलवल, मेवात, गुरुग्राम, रेवाड़ी, रोहतक और झज्जर सहित कई जिलों में मध्यम से भारी बारिश दर्ज की गई है। इसके साथ ही भिवानी, चरखी दादरी, महेंद्रगढ़ और हिसार के हांसी क्षेत्र में भी हल्की बौछारें पड़ी हैं। मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन के मुताबिक, वर्तमान में भारतीय मानसून के पारंपरिक स्वरूप में बड़ा बदलाव आ रहा है। वैश्विक जलवायु परिवर्तन और प्रशांत महासागर में अल नीनो की सक्रियता के चलते मानसूनी हवाओं का पुराना ढर्रा काफी हद तक प्रभावित हुआ है।
बंगाल की खाड़ी की प्रणालियों और कम दबाव के क्षेत्र का असर
मौसम प्रणालियों में आ रहे बदलावों के कारण बंगाल की खाड़ी से उठने वाले चक्रवाती सिस्टम अब पश्चिम दिशा की ओर रुख कर रहे हैं, जिसकी वजह से देश के कुछ राज्यों में अत्यधिक बारिश और कुछ इलाकों में सूखे जैसे हालात बन रहे हैं। वर्तमान में दक्षिण-पूर्वी मध्य प्रदेश के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र आगे बढ़कर उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश और उससे सटे उत्तर प्रदेश के हिस्सों में सक्रिय हो गया है। इसी सिस्टम के असर से हरियाणा, दिल्ली और पूरे एनसीआर क्षेत्र में अगले दो से तीन दिनों तक बारिश की अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं।
चरखी दादरी में सर्वाधिक बारिश और अंबाला के तापमान की स्थिति
बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो बुधवार को चरखी दादरी में सबसे ज्यादा 45.0 मिलीमीटर बरसात दर्ज की गई, जिसने स्थानीय स्तर पर मौसम को बेहद खुशनुमा बना दिया। वहीं अंबाला जिले में इस मानसूनी गतिविधि के चलते अधिकतम तापमान गिरकर 31.8 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26.6 डिग्री सेल्सियस पर आ गया है। इस मानसूनी बारिश ने तापमान को नियंत्रित कर आम जनजीवन को राहत पहुंचाई है।
आगामी दिनों में उमस बढ़ने के आसार और मानसून की दोबारा वापसी
मौसम विभाग का अनुमान है कि 11 जुलाई के बाद से बारिश की गतिविधियों में कुछ कमी आनी शुरू हो जाएगी। इसके चलते अगले सप्ताह की शुरुआत में तापमान में मामूली बढ़ोतरी होने के साथ-साथ हवा में नमी के कारण उमस का प्रभाव काफी बढ़ सकता है। हालांकि, यह राहत और उमस का दौर ज्यादा लंबा नहीं चलेगा क्योंकि 18-19 जुलाई के आस-पास मानसून की टर्फ लाइन एक बार फिर से सक्रिय होने की संभावना है, जिससे राज्य में दोबारा अच्छी बारिश का दौर शुरू होगा।
PM मोदी ने बताया भारत-ऑस्ट्रेलिया सहयोग का नया अध्याय, परमाणु ऊर्जा पर दिया जोर
9 Jul, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सिडनी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान 'भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम' को संबोधित करते हुए दोनों देशों के बीच व्यापारिक और रणनीतिक साझेदारी को एक नई दिशा दी। वैश्विक अस्थिरता, आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) में रुकावट और ऊर्जा संकट के इस दौर में पीएम मोदी ने भारत और ऑस्ट्रेलिया को एक-दूसरे का सबसे भरोसेमंद और प्राकृतिक साझेदार बताया। उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई उद्योगपतियों को भारत के विकास में निवेश के लिए आमंत्रित किया।
परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग का ऐतिहासिक मौका
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में भारत की परमाणु महत्वाकांक्षाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ऑस्ट्रेलिया का विशाल यूरेनियम भंडार और विशेषज्ञता भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। भारत ने SHANTI Act के जरिए न्यूक्लियर सेक्टर को निजी कंपनियों के लिए खोल दिया है और साल 2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। ऐसे में दोनों देशों के पास इस क्षेत्र में आपसी सहयोग को एक ऐतिहासिक ऊंचाई पर ले जाने का बेहतरीन अवसर है।
भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और पेंशन फंड के लिए बड़ा अवसर
प्रधान मंत्री ने ऑस्ट्रेलिया के विशाल 4 खरब डॉलर के पेंशन फंड को भारत की विकास गाथा से जुड़ने का न्योता दिया। उन्होंने कहा कि भारत में पेंशन को बेहद पवित्रता और भरोसे के साथ देखा जाता है, इसलिए ऑस्ट्रेलियाई पेंशन फंड भारत में निवेश कर सुरक्षित और बड़ा लाभ कमा सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने भारत के बंदरगाहों, हवाई अड्डों, सड़कों, रेलवे और शहरी बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) में दीर्घकालिक निवेश के लिए ऑस्ट्रेलियाई पूंजी और तकनीक का स्वागत किया।
ECTA समझौते से व्यापार हुआ दोगुना
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच दोनों देशों के मजबूत आर्थिक रिश्तों की तारीफ करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि साल 2022 में रिकॉर्ड समय में लागू हुए ईसीटीए (ECTA) समझौते ने दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को नई ताकत दी है। इस ऐतिहासिक समझौते के बाद से भारत से ऑस्ट्रेलिया को होने वाला निर्यात दोगुना हो चुका है, जिससे दोनों देशों के व्यवसायों को नए और बड़े बाजार मिले हैं।
2030 तक 500 GW अक्षय ऊर्जा का लक्ष्य
भारत के पर्यावरण अनुकूल लक्ष्यों को साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट अक्षय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) क्षमता हासिल करने और 2070 तक नेट जीरो (शून्य कार्बन उत्सर्जन) का लक्ष्य रखा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों देशों की यह साझेदारी सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि दोनों देशों के छोटे-बड़े शहरों, राज्यों और विश्वविद्यालयों को भी इस सुनहरी विकास गाथा का अहम हिस्सा बनना होगा।
पलवल केस में बड़ा फैसला, फांसी की जगह दोषी को 50 साल की वास्तविक कैद
9 Jul, 2026 08:12 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पलवल। सात साल की उम्र पूरी होने से महज 17 दिन पहले एक मासूम बच्ची के साथ हुए जघन्य दुष्कर्म और हत्या के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोषी की दोषसिद्धि को तो बरकरार रखा है, लेकिन उसकी फांसी की सजा (सजा-ए-मौत) को बदलते हुए बिना किसी कानूनी छूट के 50 वर्ष के वास्तविक कड़े आजीवन कारावास में तब्दील कर दिया है।
मासूम को बहला-फुसलाकर खेतों में ले गया था दोषी और की थी हत्या
यह खौफनाक और दिल दहला देने वाली वारदात 24 मई 2021 को पलवल इलाके में घटित हुई थी। उस दिन सात साल से भी कम उम्र की मासूम बच्ची के माता-पिता जब अपने काम पर गए हुए थे, तब आरोपी आनंद सिंह बच्ची को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। वह उसे सूनसान खेतों में ले गया जहां उसने मासूम के साथ दरिंदगी की और पोल खुलने के डर से गला दबाकर उसकी बेरहमी से हत्या कर दी। इसके बाद उसने साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से बच्ची के शव को एक गड्ढे में छिपा दिया था, जिसके बाद पलवल की निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) ने उसे दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई थी।
हाईकोर्ट ने पुलिस जांच, अभियोजक और ट्रायल कोर्ट की कमियों पर जताई नाराजगी
दोषी की ओर से दायर अपील पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने दुष्कर्म, हत्या, अपहरण और सबूत मिटाने के आरोपों में उसकी दोषसिद्धि को पूरी तरह सही माना। इसके साथ ही माननीय अदालत ने पुलिस जांच के दौरान दस्तावेजों में की गई गड़बड़ियों, लोक अभियोजक (सरकारी वकील) की गंभीर लापरवाही और ट्रायल कोर्ट की कमियों पर बेहद तल्ख और कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में हर मुकदमा एक जहाज की तरह होता है जिसे सुरक्षित किनारे तक पहुंचना होता है, और जब हालात मुश्किल हों तो ट्रायल जज को उस जहाज को संभालने वाले कप्तान की तरह मुस्तैद रहना चाहिए।
कपड़ों की पहचान न कराना अभियोजन पक्ष की बड़ी विफलता
अदालत ने सुनवाई के दौरान इस बात पर गहरी चिंता और नाराजगी जताई कि मामले से जुड़े अहम साक्ष्य यानी पीड़िता के कपड़ों की पहचान तक नहीं कराई गई। खंडपीठ ने इस चूक को लोक अभियोजक और ट्रायल कोर्ट की एक बहुत बड़ी विफलता करार दिया। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह केवल जांच एजेंसी की लापरवाही नहीं है, बल्कि यह अभियोजन पक्ष और मामले को देखने वाले दोनों ट्रायल जजों की सामूहिक विफलता को दर्शाता है, जिसके कारण न्याय प्रक्रिया की बारीकियों की अनदेखी हुई।
भारी-भरकम जुर्माना लगाने के साथ न्याय सुनिश्चित करने का संदेश
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में न्यायाधीशों के मूल कर्तव्यों को याद दिलाते हुए कहा कि अदालत का काम यह सुनिश्चित करना है कि कोई निर्दोष सजा न पाए और कोई असली दोषी कानून के शिकंजे से बच न सके। दोषी आनंद सिंह की फांसी को 50 साल की वास्तविक कैद में बदलने के साथ ही अदालत ने उस पर भारी जुर्माना भी लगाया है। हत्या के मामले में 50 लाख रुपये और पॉक्सो एक्ट के तहत 23 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जिसे वसूल करने के बाद पूरी राशि पीड़ित परिवार को मुआवजे के तौर पर सौंपी जाएगी।
व्यापार बंद करने की धमकी के साथ ट्रंप ने स्पेन पर साधा निशाना
8 Jul, 2026 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के रक्षा बजट में कम योगदान देने को लेकर स्पेन सरकार के खिलाफ बेहद कड़ा रुख अपनाया है। ट्रंप ने स्पेन को एक 'असुरक्षित और नाकाम भागीदार' करार देते हुए साफ कहा है कि अमेरिका अब उसके साथ किसी भी तरह का व्यापार नहीं करना चाहता। वर्ष 2026 के नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान नए महासचिव मार्क रूटे के साथ हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के वक्त ट्रंप ने मीडिया से चर्चा में यह बातें कहीं। उन्होंने इस सैन्य गठबंधन में स्पेन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए।
स्पेन से अब कोई व्यापारिक उम्मीद नहीं: अमेरिकी राष्ट्रपति
अपनी बेबाक बयानबाजी के लिए मशहूर अमेरिकी राष्ट्रपति ने दोटूक शब्दों में कहा, "अब स्पेन से किसी भी तरह की उम्मीद रखना बेकार है। हम उसके साथ अपने तमाम व्यापारिक रिश्तों को खत्म करने जा रहे हैं। स्पेन नाटो के भीतर एक बेहद गैर-जिम्मेदार सहयोगी की तरह व्यवहार कर रहा है, जो न तो अभियानों में ठीक से हिस्सा लेता है और न ही तय फंड मुहैया कराता है। ऐसे में मैं स्पेन के साथ कोई वास्ता नहीं रखना चाहता।"
नाटो के नए डिफेंस बजट लक्ष्य को मानने से स्पेन का इनकार
दरअसल, यह पूरा विवाद तब गहराया जब स्पेन नाटो का एकमात्र ऐसा सदस्य देश बना, जिसने सैन्य गठबंधन के नए रक्षा खर्च के नियमों को स्वीकार करने से साफ मना कर दिया। गौरतलब है कि साल 2025 में हुए हेग शिखर सम्मेलन के दौरान नाटो के तमाम सदस्य देशों ने यह सहमति बनाई थी कि साल 2035 तक सभी देश अपनी जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) का पांच फीसदी हिस्सा देश की सुरक्षा और रक्षा प्रणाली पर खर्च करेंगे।
हालांकि, स्पेन ने इस नियम से एक विशेष छूट हासिल कर ली, जिसके तहत वह अपने सैन्य बजट को अपनी जीडीपी के केवल 2.1 प्रतिशत तक ही सीमित रख सकता है। उसे पांच फीसदी वाले कड़े नियम को मानने की जरूरत नहीं होगी। यही वजह है कि अपनी अर्थव्यवस्था के अनुपात में रक्षा पर खर्च करने के मामले में स्पेन पूरे नाटो गठबंधन में सबसे निचले पायदान पर है।
यूरोपीय सहयोगियों पर क्यों भड़क रहे हैं ट्रंप?
अमेरिकी राष्ट्रपति लगातार यूरोपीय देशों की इस बात के लिए आलोचना करते रहे हैं कि वे अपनी सामूहिक सुरक्षा के लिए तय मापदंडों के अनुसार पैसा खर्च नहीं कर रहे हैं। अपने पूरे कार्यकाल के दौरान उन्होंने हमेशा नाटो के सदस्य देशों पर रक्षा बजट बढ़ाने का दबाव बनाया है। उनका सीधा आरोप है कि कई यूरोपीय देश अपनी खुद की सुरक्षा के लिए अमेरिका के संसाधनों पर जरूरत से ज्यादा निर्भर हो चुके हैं, जो कि पूरी तरह गलत है।
ईरान नीति और अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बढ़ा तनाव
पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक दूरियां और ज्यादा बढ़ी हैं, जिसका मुख्य कारण विदेश नीति को लेकर पैदा हुए मतभेद हैं। स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज उन गिने-चुने यूरोपीय राष्ट्राध्यक्षों में शामिल थे, जिन्होंने ईरान के खिलाफ अमेरिका द्वारा की गई सैन्य कार्रवाई का खुलकर विरोध किया था। इसके अलावा, स्पेन सरकार ने अपने दक्षिणी इलाके में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों का उपयोग ईरान के खिलाफ हमलों में करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था, जिसने आग में घी डालने का काम किया और दोनों देशों के रिश्तों में कड़वाहट ला दी।
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