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ताइवान मुद्दे पर अमेरिका के बदले संकेत, ट्रंप के रुख के बीच चीन ने बढ़ाई कूटनीतिक चालें
16 May, 2026 11:09 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन | अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ताइवान और चीन के बीच जारी गतिरोध पर एक बड़ा बयान देते हुए स्पष्ट किया है कि वर्तमान परिस्थितियों में वे किसी भी नए सैन्य टकराव के पक्ष में नहीं हैं। ट्रंप ने जानकारी दी कि हाल ही में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हुई बैठक में ताइवान के संवेदनशील मुद्दे पर बेहद विस्तार से चर्चा हुई। चीनी दूतावास के अनुसार, दोनों महाशक्तियों ने रणनीतिक स्थिरता बनाए रखने और आपसी सहयोग के जरिए द्विपक्षीय संबंधों को एक सकारात्मक दिशा देने पर सहमति जताई है।
स्वतंत्रता की कोशिशों पर जिनपिंग की दोटूक और ट्रंप का रुख
डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ताइवान की संप्रभुता या स्वतंत्रता के किसी भी प्रयास के सख्त खिलाफ हैं और उनका मानना है कि ऐसी किसी भी कोशिश से क्षेत्र में एक बड़ा युद्ध छिड़ सकता है। ट्रंप के अनुसार, जिनपिंग ने साफ तौर पर कहा कि वे ताइवान की आजादी के लिए कोई टकराव नहीं देखना चाहते। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि इस मसले पर उन्होंने स्वयं कोई सीधी प्रतिक्रिया देने के बजाय चीनी राष्ट्रपति के विचारों को गंभीरता से सुना। जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या चीन के हमले की स्थिति में अमेरिकी सेना ताइवान की रक्षा करेगी, तो उन्होंने इस पर रहस्य बनाए रखते हुए कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
ईरान और होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी हुई मंत्रणा
चीन की यात्रा से वापस अमेरिका लौटते समय 'एयर फोर्स वन' विमान में पत्रकारों से मुखातिब होते हुए ट्रंप ने बताया कि जिनपिंग के साथ वार्ता में ताइवान के अलावा ईरान और हथियारों की बिक्री जैसे महत्वपूर्ण विषय भी शामिल थे। ट्रंप ने रणनीतिक विश्लेषण साझा करते हुए कहा कि चीन अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) के रास्ते आयात करता है। इसलिए, बीजिंग अपनी व्यापारिक सुरक्षा के लिए ईरान पर इस समुद्री मार्ग को हर हाल में खुला रखने का राजनयिक दबाव बना सकता है।
ताइवान की समुद्री सीमा में चीनी नौसेना की बढ़ती हलचल
इस कूटनीतिक हलचल के बीच, ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को अपनी समुद्री सीमा में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (PLAN) के आठ युद्धपोतों और एक सरकारी जहाज की मौजूदगी दर्ज की है। ताइवानी सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर बताया कि सुबह छह बजे तक इन चीनी जहाजों की संदिग्ध गतिविधियों की कड़ी निगरानी की गई और सुरक्षा के लिहाज से जरूरी जवाबी कदम उठाए गए। गौरतलब है कि चीन ताइवान को अपना ही एक हिस्सा मानता है और 'वन चाइना' नीति के तहत उस पर संप्रभुता का दावा करता है, जबकि लोकतांत्रिक ताइवान अपनी स्वतंत्र सरकार और रक्षा प्रणाली के साथ खुद को एक अलग इकाई के रूप में देखता है।
ट्रंप की नाराजगी के संकेत तेज, अमेरिका ने यूरोपीय देशों में सैनिक भेजने की योजना रोकी
16 May, 2026 09:58 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन | यूरोप में अपनी सैन्य मौजूदगी को लेकर अमेरिका ने एक बड़ा और नीतिगत फैसला किया है। पेंटागन ने पोलैंड और जर्मनी भेजे जाने वाले हजारों अमेरिकी सैनिकों की आगामी तैनाती को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस निर्देश के बाद उठाया गया है, जिसमें उन्होंने यूरोप में तैनात अमेरिकी सैनिकों की संख्या में लगभग 5,000 की कटौती करने की बात कही थी। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस फैसले के तहत पोलैंड और जर्मनी में होने वाली नई रवानगी को रोका जा रहा है, न कि वहां पहले से मौजूद सैनिकों को वापस बुलाया जा रहा है।
पोलैंड जाने वाले हजारों जवानों की रवानगी रुकी
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, अमेरिकी सेना की पहली कैवेलरी डिवीजन की दूसरी आर्मर्ड ब्रिगेड के लगभग 4,000 सैनिकों को इसी सप्ताह पोलैंड के लिए रवाना होना था। हालांकि, नए आदेशों के बाद अब उनकी इस तैनाती पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। इस फैसले को ट्रंप प्रशासन की नई वैश्विक सैन्य रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
जर्मनी में मिसाइल बटालियन की तैनाती भी रद्द
पोलैंड के साथ-साथ जर्मनी में होने वाली एक और महत्वपूर्ण सैन्य तैनाती को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। टेक्सास के फोर्ट हुड में स्थित एक विशेष बटालियन, जो लंबी दूरी के रॉकेट और मिसाइल दागने की आधुनिक क्षमताओं से लैस है, अब जर्मनी नहीं जाएगी। इस विशेष यूनिट की प्रस्तावित तैनाती को भी पेंटागन ने आधिकारिक रूप से रद्द कर दिया है।
क्या है इस सैन्य कटौती का मुख्य उद्देश्य?
अमेरिकी रक्षा अधिकारियों का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य मौजूदा सैन्य संतुलन को बिगाड़े बिना यूरोप में सैनिकों की कुल संख्या को नियंत्रित करना है। अधिकारियों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि यह प्रक्रिया केवल नए सैनिकों की खेप को रोकने तक सीमित है। वहां पहले से मोर्चे पर डटे अमेरिकी सुरक्षा बलों को फिलहाल वापस नहीं बुलाया जा रहा है, जिससे मित्र देशों के साथ सुरक्षा प्रतिबद्धताओं पर कोई सीधा असर न पड़े।
आधुनिक युद्ध में ड्रोन होंगे निर्णायक हथियार, अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने संसद में रखी रणनीति
16 May, 2026 09:46 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन | अमेरिकी सेना ने देश की संसद (कांग्रेस) को आगाह किया है कि ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मानव रहित (अनमैन्ड) प्रणालियां आधुनिक युद्धक्षेत्र की तस्वीर को बहुत तेजी से बदल रही हैं। सैन्य नेतृत्व के अनुसार, यूक्रेन संकट ने यह पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य के युद्धों में कम लागत वाले, भारी तादाद में इस्तेमाल होने वाले और बिना इंसानी नियंत्रण वाले हथियारों की भूमिका सबसे अहम होने वाली है। अमेरिकी कांग्रेस की 'हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी' के समक्ष बयान देते हुए सेना सचिव डैनियल ड्रिस्कॉल ने जोर देकर कहा कि सामरिक बदलाव की यह रफ्तार ऐतिहासिक है और जो सैन्य बल वक्त के साथ खुद को नहीं ढालेंगे, वे अप्रासंगिक हो जाएंगे।
ड्रोन और एआई से बदलती युद्ध की रणनीति
सेना सचिव ड्रिस्कॉल के मुताबिक, आधुनिक ड्रोन बेहद किफ़ायती, सटीक और बहुउद्देशीय हैं, जो इंसानी जंग के तौर-तरीकों को बुनियादी रूप से बदल रहे हैं। अमेरिकी सेना अब तेजी से ऐसे सिस्टम तैयार करने में जुटी है जो एआई, स्वचालन (ऑटोमेशन) और आधुनिक कमांड नेटवर्क से लैस हों। मुख्य रूप से इन तैयारियों का केंद्र हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र में भविष्य की संभावित चुनौतियों से निपटना है। वर्ष 2027 के सैन्य बजट पर हुई इस बजटीय सुनवाई में जनरल क्रिस्टोफर लानेव ने भी माना कि यूक्रेन और मध्य पूर्व के संघर्षों से सबक लेते हुए अमेरिकी सेना अपनी ट्रेनिंग और रणनीति में बड़े बदलाव कर रही है।
'ऑपरेशन जेलब्रेक' और सूचनाओं का आदान-प्रदान
भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए अमेरिकी सेना ने फोर्ट कार्सन में 'ऑपरेशन जेलब्रेक' नामक एक विशेष परियोजना शुरू की है। इसके तहत रक्षा कंपनियां और सैन्य इंजीनियर मिलकर उन तकनीकी व सॉफ्टवेयर बाधाओं को दूर कर रहे हैं, जो विभिन्न सैन्य प्रणालियों के बीच डेटा और जरूरी जानकारी साझा करने में अड़चन बनती हैं। अधिकारियों का मानना है कि युद्ध के दौरान एक हिस्से से मिली जानकारी तुरंत पूरी सेना तक पहुंचनी चाहिए। इसके अलावा, ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक हमलों की तेज रफ्तार का मुकाबला करने के लिए इंसानी क्षमता के साथ-साथ एआई का सहारा लेना अब अनिवार्य हो गया है।
बड़े पैमाने पर उत्पादन की अमेरिकी रणनीति
सुनवाई के दौरान जब सांसदों ने छोटे ड्रोन के बजट में कटौती और सेना की गंभीरता पर सवाल उठाए, तो अधिकारियों ने देश की अनूठी रणनीति को सामने रखा। सांसद यूजीन विंडमैन की चिंताओं का जवाब देते हुए ड्रिस्कॉल ने स्पष्ट किया कि अमेरिका का लक्ष्य शांति के समय में लाखों ड्रोन का स्टॉक खड़ा करना नहीं है। इसके बजाय, वाशिंगटन एक ऐसा मजबूत औद्योगिक ढांचा तैयार कर रहा है, जो युद्ध की स्थिति उत्पन्न होते ही बेहद कम समय में बड़े पैमाने पर ड्रोन का उत्पादन शुरू कर सके। उन्होंने उदाहरण दिया कि भले ही रूस और यूक्रेन लाखों की संख्या में ड्रोन बना रहे हों, लेकिन अमेरिका जरूरत पड़ने पर बहुत तेजी से उस स्तर को पार करने की क्षमता विकसित कर रहा है।
घर के बाहर खड़े युवक की हत्या, 20 राउंड से अधिक फायरिंग
16 May, 2026 09:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
झज्जर। हरियाणा के झज्जर जिले के सुबाना गांव में आपसी दुश्मनी और रंजिश के चलते दिनदहाड़े एक युवक की बेरहमी से हत्या करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। गांव के रहने वाले हितेश उर्फ गुल्लू नामक युवक को निशाना बनाते हुए हमलावरों ने उस पर चौतरफा गोलियां बरसा दीं। वारदात के वक्त हितेश अपने घर के बाहर सामान्य रूप से खड़ा था, तभी अचानक एक बुलेरो गाड़ी में सवार होकर आए अज्ञात बदमाशों ने उसे घेर लिया। हमलावरों की नीयत इतनी खतरनाक थी कि उन्होंने युवक को संभलने का बिल्कुल भी मौका नहीं दिया और उस पर बीस से अधिक राउंड ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी, जिससे वह लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़ा और मौके पर ही उसकी दर्दनाक मौत हो गई।
पुरानी रंजिश के चलते रची गई खूनी साजिश
इस खौफनाक हत्याकांड के पीछे की वजह पुरानी आपसी रंजिश को माना जा रहा है, जिसकी जड़ें कुछ साल पुरानी बताई जा रही हैं। स्थानीय सूत्रों और पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, करीब दो वर्ष पहले मृतक हितेश और आरोपी पक्ष के बीच किसी बात को लेकर गंभीर विवाद और झगड़ा हुआ था। उस समय का वह मनमुटाव समय के साथ शांत होने के बजाय और गहराता चला गया, जिसके परिणामस्वरूप आरोपियों ने इस खूनी खेल को अंजाम देने की पूरी साजिश रची और मौका पाकर हितेश की जान ले ली।
ताबड़तोड़ फायरिंग के बाद आरोपी हुए फरार और गांव में दहशत
वारदात को अंजाम देने के बाद सभी हमलावर अपनी बुलेरो गाड़ी में सवार होकर बेहद तेजी से मौके से फरार हो गए। दिनदहाड़े हुई इस अंधाधुंध गोलीबारी की आवाज से पूरा सुबाना गांव दहल उठा और आसपास के इलाके में भारी दहशत व सनसनी फैल गई। घटना की सूचना मिलते ही हितेश के परिजन और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर एकत्र हो गए, जिन्होंने तुरंत स्थानीय पुलिस प्रशासन को इस खूनी वारदात की जानकारी दी।
दो नामजद आरोपियों सहित अन्य के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज
सूचना पाकर तुरंत मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने घटनास्थल का बारीकी से मुआयना किया और वहां से खाली कारतूस बरामद किए। पुलिस ने मृतक के परिजनों द्वारा दिए गए बयानों और शिकायत के आधार पर गिरधरपुर गांव के रहने वाले दो युवकों को नामजद करते हुए उनके अन्य अज्ञात साथियों के खिलाफ हत्या की विभिन्न धाराओं में आपराधिक मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस ने कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए नागरिक अस्पताल के शव गृह में सुरक्षित रखवा दिया है।
आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने तेज की तलाश
इस जघन्य हत्याकांड के बाद क्षेत्र में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है। झज्जर पुलिस के आला अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों को पकड़ने के लिए कई विशेष टीमों का गठन किया गया है जो उनके संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं। पुलिस गांव में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगालने के साथ-साथ डिजिटल इनपुट्स की भी मदद ले रही है ताकि फरार चल रहे दोनों नामजद आरोपियों और उनके मददगारों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा जा सके।
भूकंप के झटकों से जापान में दहशत, लोग घरों से बाहर निकले
15 May, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मियागी। जापान का उत्तरी इलाका शुक्रवार को एक बार फिर भूकंप के तेज झटकों से दहल उठा। रिक्टर स्केल पर 6.7 की तीव्रता वाले इस तगड़े भूकंप के बाद जापानी प्रशासन ने एहतियात बरतते हुए देश के पांच प्रांतों (प्रान्तों) में इमरजेंसी वार्निंग जारी कर दी है। हालांकि, तटीय इलाकों के लिए राहत की बात यह है कि मौसम विज्ञान एजेंसी ने फिलहाल सुनामी का कोई भी तात्कालिक अलर्ट जारी नहीं किया है।
जमीन से 43 किलोमीटर गहराई पर था केंद्र
जापानी भूकंप विज्ञान केंद्र के मुताबिक, स्थानीय समय के अनुसार यह भूकंप रात 8:22 बजे आया। इसका केंद्र मियागी प्रांत के तटीय क्षेत्र में जमीन के भीतर करीब 43 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था। जापानी स्केल (1 से 7 की तीव्रता प्रणाली) पर इस भूकंप की विभीषिका को 'स्तर 5' मापा गया है। वहीं, अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने पहले इसकी तीव्रता 6.6 आंकी थी, जिसे बाद में सुधार कर 6.7 घोषित किया गया।
रोकी गईं हाई-स्पीड बुलेट ट्रेनें; जनजीवन प्रभावित
भूकंप के तेज झटकों को देखते हुए जेआर ईस्ट (JR East) रेलवे प्रबंधन ने सुरक्षा के लिहाज से टोक्यो और शिन-ओमोरी स्टेशनों के बीच दौड़ने वाली मशहूर हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन सेवाओं को तुरंत रोक दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मियागी प्रांत के प्रमुख शहरों— टोम, ओसाकी और इशिनामाकी में झटके इतने जोरदार थे कि लोग डर के मारे घरों से बाहर निकल आए। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, अब तक किसी भी बड़े बुनियादी ढांचे के ढहने या किसी नागरिक के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन स्थानीय प्रशासन नुकसान का आकलन करने में जुटा है।
महीने भर के भीतर दूसरा बड़ा झटका; पर्यटकों को सावधानी बरतने की सलाह
जापान के उत्तरी क्षेत्र में एक महीने के भीतर यह दूसरा बड़ा भूकंपीय संकट है। इससे पहले बीते 20 अप्रैल को इसी इलाके में 7.7 तीव्रता का विनाशकारी भूकंप आया था, जिसके बाद समुद्र में ऊंची लहरें उठने लगी थीं और सुनामी का अलर्ट जारी करना पड़ा था। बार-बार आ रहे इन झटकों के मद्देनजर अंतरराष्ट्रीय ट्रैवल एजेंसियों और ब्रिटेन के फॉरेन ऑफिस ने जापान जाने वाले पर्यटकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। यात्रियों से कहा गया है कि वे स्थानीय आपदा प्रबंधन और जापानी अधिकारियों द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करें।
डॉक्टर के सवालों से भड़की महिला स्टाफ, कंडोम इस्तेमाल पर उठाया सवाल
15 May, 2026 02:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
फतेहाबाद: स्थानीय सेक्टर तीन में संचालित पॉली क्लीनिक में हाल ही में पदस्थ हुए एक डॉक्टर की कार्यप्रणाली और उनके कथित अशोभनीय व्यवहार को लेकर महिला कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा है। नवनियुक्त अतिरिक्त एसएमओ डॉक्टर नरेंद्र के खिलाफ संस्थान की महिला स्टाफ सदस्यों ने मानसिक प्रताड़ना और अश्लील टिप्पणियां करने के गंभीर आरोप लगाते हुए शुक्रवार की सुबह जमकर हंगामा किया। इस विरोध प्रदर्शन में पीड़ित महिलाओं के परिजन भी बड़ी संख्या में शामिल हुए, जिन्होंने मीडिया के समक्ष डॉक्टर की हरकतों को उजागर किया। इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने आरोपी डॉक्टर को तुरंत प्रभाव से स्थानांतरित करते हुए उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है।
वैवाहिक स्थिति पर आपत्ति और दफ्तर की बातें गुप्त रखने का दबाव
महिला कर्मचारियों ने अपनी शिकायत में बताया कि वे इस स्वास्थ्य केंद्र में पिछले कई वर्षों से विभिन्न पदों पर ईमानदारी से अपनी सेवाएं दे रही हैं, लेकिन एक मई को कार्यभार संभालने वाले डॉक्टर नरेंद्र ने आते ही अजीबोगरीब निर्देश देने शुरू कर दिए। आरोप है कि ग्यारह मई को बुलाई गई एक बैठक में डॉक्टर ने उपस्थिति रजिस्टर की जांच करते हुए महिला स्टाफ के नामों के आगे 'मिस' लिखे होने पर आपत्ति जताई और सभी की शादीशुदा जिंदगी पर व्यक्तिगत टिप्पणियां कीं। महिलाओं द्वारा खुद को विवाहित बताए जाने पर डॉक्टर ने उनके नाम के आगे 'मिसेज' न होने को लेकर बहस की और बाद में पूरे स्टाफ को हिदायत दी कि दफ्तर के भीतर का माहौल पूरी तरह से दोस्ताना रहेगा और यहाँ होने वाली किसी भी बात की भनक उनके परिवार या घर तक नहीं पहुंचनी चाहिए।
स्वास्थ्य समीक्षा बैठक में अश्लील विमर्श और अमर्यादित शब्दों का प्रयोग
शिकायत पत्र में डॉक्टर नरेंद्र पर बेहद गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाते हुए महिलाओं ने कहा कि एक अन्य विभागीय चर्चा के दौरान डॉक्टर ने ओपीडी पर्ची के मुख्य बिंदुओं को छोड़कर सीधे तौर पर शारीरिक संबंधों से जुड़े अश्लील शब्दों का प्रयोग करना शुरू कर दिया। आरोप है कि पुरुष और महिला संबंधों की अमर्यादित व्याख्या करते हुए डॉक्टर ने परिवार नियोजन के तहत आने वाले एक बिंदु पर चर्चा के दौरान बार-बार बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने महिला कर्मचारियों के सामने गर्भनिरोधक साधनों के इस्तेमाल के सही तरीकों पर अवांछित सवाल पूछे और चुप्पी साधने पर महिलाओं को खुलकर बात करने के लिए मजबूर करते हुए कहा कि वे सब कुछ जानती हैं पर बताना नहीं चाहतीं।
सिविल सर्जन के समक्ष तीखी नोकझोंक और दोनों पक्षों में हंगामा
डॉक्टर की इन कथित हरकतों से तंग आकर समस्त महिला स्टाफ न्याय की गुहार लगाने के लिए सिविल सर्जन डॉ. बुधराम के कार्यालय पहुंची, जहाँ पहले से मौजूद आरोपी डॉक्टर और पीड़ित महिलाओं के बीच करीब बीस मिनट तक बेहद तीखी नोकझोंक और बहस हुई। पीड़ित पक्ष के परिजनों ने भी डॉक्टर को उनकी इस अभद्रता के लिए जमकर खरी-खोटी सुनाई, जिससे मुख्य चिकित्सा अधिकारी के दफ्तर में काफी समय तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। दोनों पक्षों के बीच चली इस हंगामेदार बैठक में डॉक्टर की ओर से कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं आने के कारण मामला और अधिक गरमा गया, जिससे दफ्तर के बाहर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई।
आरोपी डॉक्टर को पद से हटाया और स्थायी तबादले के लिए महानिदेशक को पत्र
मामले की संवेदनशीलता और महिला कर्मचारियों के तीव्र आक्रोश को देखते हुए सिविल सर्जन डॉ. बुधराम ने त्वरित प्रशासनिक कदम उठाते हुए डॉक्टर नरेंद्र को पॉली क्लीनिक से हटाकर डेपुटेशन पर तुरंत भूना स्वास्थ्य केंद्र भेजने के आदेश जारी कर दिए हैं। इसके साथ ही जिला स्वास्थ्य प्रशासन ने इस पूरे घटनाक्रम और महिला स्टाफ के बयानों की एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करके स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक को प्रेषित की है, जिसमें आरोपी डॉक्टर के स्थायी स्थानांतरण और विभागीय जांच की सिफारिश की गई है। उच्चाधिकारियों को भेजे पत्र में स्पष्ट किया गया है कि कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और जांच रिपोर्ट आने के बाद कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
अबू धाबी में भारत-UAE के बीच कई बड़े समझौते, गैस सप्लाई पर भी डील
15 May, 2026 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अबू धाबी: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पांच देशों के विदेश दौरे के पहले पड़ाव के तहत शुक्रवार को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की राजधानी अबू धाबी पहुंचे, जहां उनका अभूतपूर्व और भव्य स्वागत किया गया। विमान से उतरते ही प्रधानमंत्री मोदी को हवाई अड्डे पर 'गार्ड ऑफ ऑनर' देकर सम्मानित किया गया। इस दौरान यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने प्रोटोकॉल तोड़कर स्वयं अगवानी करते हुए प्रधानमंत्री मोदी का बेहद गर्मजोशी से स्वागत किया, जो दोनों देशों के बीच के बेहद प्रगाढ़ और विशेष कूटनीतिक रिश्तों को दर्शाता है।
आसमान में एफ-16 विमानों का सुरक्षा घेरा और भारत का सम्मान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 15 से 20 मई तक चलने वाली इस पांच दिवसीय विदेश यात्रा की शुरुआत ही बेहद ऐतिहासिक रही। जैसे ही प्रधानमंत्री का विशेष विमान संयुक्त अरब अमीरात के हवाई क्षेत्र (एयरस्पेस) में दाखिल हुआ, वैसे ही सम्मान और सुरक्षा के तौर पर यूएई वायुसेना के अत्याधुनिक एफ-16 (F-16) लड़ाकू विमानों ने उनके विमान को चारों तरफ से एस्कॉर्ट किया। यूएई के राष्ट्रपति के साथ हुई प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में प्रधानमंत्री मोदी ने इस असाधारण स्वागत के लिए आभार जताते हुए कहा कि आज आपके वायुसेना के जेट विमानों ने मुझे जो सुरक्षा प्रदान की है, वह वास्तव में भारत की 140 करोड़ जनता के लिए एक बहुत बड़ा सम्मान है।
'मैं अपने दूसरे घर आया हूं'— द्विपक्षीय वार्ता में भावुक हुए पीएम मोदी
हाई-लेवल मीटिंग के दौरान दोनों वैश्विक नेताओं के बीच की गहरी दोस्ती साफ नजर आई। प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति अल नाहयान से कहा कि भले ही वे फोन पर लगातार एक-दूसरे के संपर्क में रहते थे, लेकिन वे व्यक्तिगत रूप से मिलने के लिए बेहद उत्सुक थे। यूएई के राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करते हुए 'अपने दूसरे घर में आने' की बात कहने पर पीएम मोदी भावुक दिखे और उन्होंने कहा कि यह भावना मेरे जीवन में बहुत बड़ा महत्व रखती है। इस आत्मीय बातचीत के बाद दोनों राष्ट्राध्यक्षों की मौजूदगी में भारत और यूएई के बीच कई महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoUs) का आदान-प्रदान किया गया।
रक्षा, ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में हुए ऐतिहासिक समझौते
इस महा-शिखर वार्ता का सबसे बड़ा और सकारात्मक परिणाम दोनों देशों के बीच हुए आर्थिक व रणनीतिक समझौतों के रूप में सामने आया है। भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच रक्षा सहयोग को बढ़ाने, ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने, गैस सप्लाई की निरंतरता बनाए रखने और बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) के विकास से जुड़े कई अहम करारों पर अंतिम सहमति बनी है। इन समझौतों से दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों को एक नई ऊंचाई मिलेगी और वैश्विक बाजार में दोनों देशों की स्थिति मजबूत होगी।
यूएई भारत में करेगा 5 अरब डॉलर का भारी-भरकम निवेश
इस आधिकारिक दौरे की सबसे बड़ी आर्थिक कामयाबी यह रही कि संयुक्त अरब अमीरात ने भारत के विभिन्न विकासशील क्षेत्रों में 5 अरब डॉलर (लगभग 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक) के भारी-भरकम निवेश का आधिकारिक एलान किया है। यह विशाल निवेश मुख्य रूप से भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा और यूएई के इस बड़े वित्तीय कदम से भारत में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी युगों-युगों के लिए और अधिक मजबूत हो जाएगी।
राष्ट्रपति नाहयान ने पीएम मोदी का किया स्वागत, UAE में दिखी खास मेहमाननवाजी
15 May, 2026 01:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अबू धाबी: भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच गहरे होते द्विपक्षीय और कूटनीतिक संबंधों को नया आयाम देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को यूएई की आधिकारिक यात्रा पर पहुंचे हैं। इस महत्वपूर्ण दौरे का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और अधिक प्रगाढ़ और सुदृढ़ बनाना है। अपनी इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री भारतीय समयानुसार यूएई के शीर्ष नेतृत्व के साथ कई उच्च स्तरीय बैठकों में हिस्सा लेंगे।
आसमान में मिला अभूतपूर्व और भव्य स्वागत
यूएई की धरती पर कदम रखने से पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वहां बेहद खास और ऐतिहासिक अंदाज में स्वागत किया गया। जैसे ही प्रधानमंत्री का विशेष विमान संयुक्त अरब अमीरात के हवाई क्षेत्र (एयरस्पेस) में दाखिल हुआ, वैसे ही सम्मान के तौर पर यूएई वायुसेना के अत्याधुनिक एफ-16 (F-16) लड़ाकू विमानों ने उनके विमान को अपने सुरक्षा घेरे में ले लिया। यूएई के लड़ाकू विमानों द्वारा प्रधानमंत्री के विमान को एस्कॉर्ट करना दोनों देशों के बीच के बेहद करीबी और मजबूत कूटनीतिक रिश्तों को दर्शाता है।
राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से होगी रणनीतिक वार्ता
इस यात्रा के सबसे मुख्य पड़ाव में प्रधानमंत्री मोदी यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ एक विशेष द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इस शिखर वार्ता के दौरान दोनों वैश्विक नेता आपसी हितों से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों, द्विपक्षीय व्यापार, ऊर्जा सहयोग को बढ़ावा देने और विभिन्न क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी को भविष्य में और आगे ले जाने के ठोस उपायों पर विस्तार से विचार-विमर्श करेंगे। इस मुलाकात से दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को नई गति मिलने की उम्मीद है।
पांच देशों के महादौरे की शुरुआत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह यूएई यात्रा उनके पांच देशों के विस्तृत विदेश दौरे का पहला पड़ाव है। इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय दौरे के तहत संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा संपन्न करने के बाद वे यूरोप के चार प्रमुख देशों नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का रुख करेंगे। प्रधानमंत्री के इस व्यापक विदेश दौरे का मुख्य एजेंडा वैश्विक पटल पर भारत की स्थिति को मजबूत करना और इन देशों के साथ व्यापार, अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी, ऊर्जा सुरक्षा, नवाचार (इन्नोवेशन) तथा पर्यावरण के अनुकूल हरित विकास (ग्रीन डेवलपमेंट) के क्षेत्रों में दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारियों को नया विस्तार देना है।
चीन-ताइवान तनाव बढ़ा, ताइपे ने बीजिंग पर लगाए गंभीर आरोप
15 May, 2026 01:14 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा के दौरान हुई द्विपक्षीय वार्ता में ताइवान का संवेदनशील मुद्दा पूरी तरह से गरमा गया है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस विषय पर बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिका को सीधे तौर पर टकराव की चेतावनी दी, जिसके बाद ताइवान ने भी इस पर पलटवार किया है। ताइवान ने बीजिंग के दावों को खारिज करते हुए चीन को ही इस पूरे क्षेत्र में असुरक्षा और अशांति का एकमात्र कारण बताया है।
ताइवान की आजादी और शांति एक साथ संभव नहीं: जिनपिंग
बीजिंग में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने दो टूक शब्दों में कहा कि ताइवान का मुद्दा चीन-अमेरिका संबंधों के बीच सबसे महत्वपूर्ण और नाजुक विषय है। जिनपिंग ने चेतावनी दी कि यदि इस मामले को सूझबूझ से नहीं संभाला गया, तो यह बेहद खतरनाक स्थिति पैदा कर सकता है। उन्होंने एक उपमा देते हुए कहा कि ताइवान की स्वतंत्रता और क्रॉस-स्ट्रेट (समुद्री क्षेत्र) की शांति आग और पानी की तरह हैं, जो कभी एक साथ नहीं रह सकते। चीनी राष्ट्रपति ने साफ किया कि इस मुद्दे पर लापरवाही दोनों महाशक्तियों के बीच सीधे सैन्य संघर्ष की वजह बन सकती है, जिससे दोनों देशों के आपसी संबंध पूरी तरह दांव पर लग जाएंगे।
ताइवान का पलटवार: चीन ही है क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा
शी जिनपिंग के इस आक्रामक बयान पर ताइवान प्रशासन ने बिना देर किए बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ताइवान कैबिनेट की प्रवक्ता मिशेल ली ने बीजिंग के दावों पर पलटवार करते हुए कहा कि ताइवान जलडमरूमध्य और पूरे हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र में अस्थिरता और असुरक्षा का अगर कोई एकमात्र स्रोत है, तो वह चीन का लगातार बढ़ता सैन्य खतरा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस इलाके में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ताइवान अपनी सैन्य क्षमताओं को लगातार अपग्रेड कर रहा है और किसी भी चीनी दुस्साहस को रोकने के लिए प्रभावी संयुक्त निवारक प्रणाली विकसित करना इस समय सबसे बड़ी जरूरत है।
अमेरिका की 'रणनीतिक अस्पष्टता' और ट्रंप का मौन
कूटनीतिक नजरिए से देखा जाए तो अमेरिका ताइवान में लोकतांत्रिक व्यवस्था का समर्थन करता है और उसके साथ बेहद मजबूत अनौपचारिक व व्यापारिक संबंध रखता है। इसके बावजूद, यदि चीन ताइवान पर कभी हमला करता है तो अमेरिकी सेना सीधे तौर पर दखल देगी या नहीं, इस पर वाशिंगटन हमेशा से जानबूझकर चुप रहता है, जिसे कूटनीति में 'रणनीतिक अस्पष्टता' (Strategic Ambiguity) कहा जाता है। इस बैठक के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने बीजिंग के ऐतिहासिक 'टेंपल ऑफ हेवन' का दौरा कर इस यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल और चीनी संस्कृति की जमकर तारीफ की, लेकिन जब संवाददाताओं ने उनसे ताइवान संकट को लेकर सवाल पूछे, तो वे पूरी तरह मौन रहे।
व्यापार से लेकर यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व पर भी हुआ मंथन
इस बहुचर्चित शिखर वार्ता के दौरान केवल ताइवान ही नहीं, बल्कि दोनों वैश्विक ताकतों के बीच कई अन्य ज्वलंत अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। ट्रंप और शी जिनपिंग ने आपसी व्यापार, अत्याधुनिक तकनीक, यूक्रेन युद्ध और उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम जैसे विषयों पर अपने-अपने विचार साझा किए। इसके अलावा, मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) के मौजूदा हालातों पर भी दोनों नेताओं के बीच गंभीर बातचीत हुई, जो इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि चीन इस समय ईरान का सबसे करीबी सहयोगी होने के साथ-साथ ईरानी कच्चे तेल का दुनिया का सबसे बड़ा खरीदार भी है।
अंतरिक्ष से गुजरने वाला विशाल एस्टेरॉयड, पृथ्वी पूरी तरह सुरक्षित: वैज्ञानिक
15 May, 2026 12:11 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन: ब्रह्मांडीय हलचलों के लिहाज से आगामी सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है, क्योंकि एक विशालकाय एस्टेरॉयड (क्षुद्रग्रह) हमारी पृथ्वी के अत्यंत करीब से गुजरने की तैयारी में है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) के वैज्ञानिकों ने इस बात की पुष्टि की है कि '2026 जेएच2' (2026 JH2) नाम का यह खगोलीय पिंड चंद्रमा के मुकाबले धरती के बेहद नजदीक से होकर निकलेगा। हालांकि, राहत की सबसे बड़ी बात यह है कि इस विशाल चट्टान के हमारी पृथ्वी से टकराने का कोई खतरा नहीं है, और यह पूरी तरह सुरक्षित दूरी से निकल जाएगा।
चंद्रमा से भी चार गुना कम दूरी से गुजरेगा अंतरिक्षीय पिंड
खगोलविदों के अनुसार, यह एस्टेरॉयड अंतरिक्ष में पृथ्वी से करीब 90,917 किलोमीटर की दूरी से होकर गुजरेगा। यह दूरी सुनने में भले ही बहुत ज्यादा लगे, लेकिन अंतरिक्ष विज्ञान के पैमाने पर इसे बेहद कम माना जाता है, क्योंकि यह फासला पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की कुल दूरी का मात्र एक चौथाई (चार गुना कम) ही है। इतनी कम दूरी से किसी बड़े एस्टेरॉयड का गुजरना खगोलीय जगत में एक दुर्लभ घटना मानी जाती है, जिसके चलते दुनिया भर के वैज्ञानिक इस पर अपनी नजरें गड़ाए हुए हैं।
हाल ही में हुई खोज और 'अपोलो क्लास' में वर्गीकरण
इस एस्टेरॉयड का पता बहुत पहले नहीं, बल्कि हाल ही में अमेरिका के कैनसास और एरिजोना में स्थित स्पेस ऑब्जर्वेटरी (अंतरिक्ष वेधशालाओं) के वैज्ञानिकों ने लगाया है। अंतरिक्ष विज्ञानियों ने इसे 'अपोलो क्लास' के एस्टेरॉयड की श्रेणी में वर्गीकृत किया है। इस श्रेणी के एस्टेरॉयड की खास बात यह होती है कि इनका यात्रा मार्ग अंतरिक्ष में सीधे पृथ्वी की कक्षा (ऑर्बिट) को काटता है। वैज्ञानिक अब तक इस खगोलीय पिंड को 24 बार से अधिक ट्रैक कर चुके हैं, ताकि इसकी गति, दिशा और सटीक रास्ते का अधिक सटीकता से आकलन किया जा सके।
एक छोटी इमारत के बराबर है आकार, टकराने पर तबाही की क्षमता
वैज्ञानिकों के शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, इस एस्टेरॉयड की मोटाई लगभग 50 से 100 फीट के बीच हो सकती है, जो कि आकार में किसी छोटी रिहायशी इमारत के बराबर है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस आकार का कोई भारी पिंड सीधे तौर पर हमारी धरती से टकरा जाए, तो वह पल भर में एक पूरे महानगर को पूरी तरह तबाह करने की विनाशकारी क्षमता रखता है। यही कारण है कि इस आकार के पिंडों को लेकर वैज्ञानिक बेहद गंभीर रहते हैं, लेकिन इस विशिष्ट मामले में खतरे की कोई आशंका नहीं है।
अगले सौ वर्षों तक सुरक्षित है हमारी पृथ्वी
नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी (JPL) समेत वैश्विक स्तर की कई अन्य खगोलीय संस्थाएं इस एस्टेरॉयड की लगातार मॉनिटरिंग कर रही हैं। अत्याधुनिक कंप्यूटर सिमुलेशन और गणितीय गणनाओं के जरिए वैज्ञानिकों ने साफ कर दिया है कि अगले 100 सालों तक इस एस्टेरॉयड से पृथ्वी को किसी भी तरह का कोई खतरा नहीं है। जाने-माने एस्ट्रोनॉमर मार्क नॉरिस जैसे विशेषज्ञों का भी मानना है कि 90,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी अंतरिक्षीय लिहाज से पूरी तरह सुरक्षित है। वैसे भी हमारी पृथ्वी हर साल अंतरिक्ष में ऐसे कई छोटे पिंडों के करीब से गुजरती है, जिनमें से अधिकांश पृथ्वी के वायुमंडल के घर्षण के कारण हवा में ही जलकर नष्ट हो जाते हैं।
IDFC बैंक घोटाला: CBI ने छापेमारी शुरू की, चंडीगढ़-पंचकूला में दबिश
15 May, 2026 11:51 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने हरियाणा में सरकारी खजाने को भारी चपत लगाने वाले एक बड़े घोटाले के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। देश की शीर्ष जांच एजेंसी ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक से जुड़े लगभग 590 करोड़ रुपये के सरकारी धन के गबन के मामले में चंडीगढ़ और पंचकूला में व्यापक छापेमारी की है। चौदह मई को की गई इस औचक कार्रवाई के दौरान जांच दल ने वित्तीय अनियमितताओं, जालसाजी और सरकारी कोष के दुरुपयोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज तथा डिजिटल साक्ष्य अपने कब्जे में लिए हैं, जिससे इस पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश होने की उम्मीद बढ़ गई है।
सरकारी तंत्र और बैंक अधिकारियों की साठगांठ का खुलासा
यह पूरा मामला हरियाणा सरकार की सिफारिश पर सीबीआई को सौंपा गया था, जिसके बाद एजेंसी ने भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी की धाराओं के तहत अपनी तफ्तीश शुरू की। शुरुआती जांच में यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के कुछ जिम्मेदार अधिकारियों ने राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में तैनात लोक सेवकों के साथ मिलकर एक सुनियोजित साजिश रची थी। इस साठगांठ के जरिए जनता की भलाई और विकास कार्यों के लिए आवंटित सैकड़ों करोड़ रुपये की सरकारी राशि को नियमों को ताक पर रखकर निजी लाभार्थियों और संदिग्ध खातों में ट्रांसफर कर दिया गया।
आभूषण विक्रेताओं और संदिग्ध ठिकानों पर सघन छापेमारी
घोटाले की कड़ियों को जोड़ने के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो ने चंडीगढ़ और पंचकूला क्षेत्र में कुल सात अलग-अलग स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। इस कार्रवाई के दायरे में न केवल संदिग्धों के आवासीय परिसर शामिल थे, बल्कि बड़े ज्वैलर्स के शोरूम, निजी संस्थाओं के कार्यालय और संदिग्ध लाभार्थियों के ठिकाने भी रहे। सीबीआई के अनुसार इस छापेमारी का मुख्य उद्देश्य उस धन के अंतिम निवेश और रूटिंग का पता लगाना था जिसे अवैध तरीके से ठिकाने लगाया गया है। इस दौरान जब्त किए गए वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल उपकरणों को आगे की फोरेंसिक जांच के लिए सुरक्षित रख लिया गया है।
दर्जनों गिरफ्तारियां और संदिग्ध वित्तीय नेटवर्क की पड़ताल
इस बहुचर्चित वित्तीय घोटाले में जांच एजेंसी अब तक सोलह आरोपियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज चुकी है, जिनसे लगातार पूछताछ की जा रही है। सीबीआई की विशेष टीमें इस समय कई जटिल वित्तीय लेनदेन, शेल कंपनियों और संदिग्ध हवाला नेटवर्क की बारीकी से पड़ताल कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे पकड़े गए आरोपियों और जब्त दस्तावेजों की कड़ियों को जोड़ा जाएगा, वैसे-वैसे इस घोटाले में शामिल कुछ और बड़े चेहरों और सफेदपोशों के नाम सामने आ सकते हैं, जिससे गिरफ्तारियों का यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।
सरकारी खजाने की सुरक्षा और सख्त कानूनी कार्रवाई का संकल्प
सीबीआई ने इस कार्रवाई के बाद साफ कर दिया है कि सरकारी धन के गबन और भ्रष्टाचार के इस पूरे नेटवर्क को जड़ से उखाड़ने के लिए हर कानूनी कदम उठाया जाएगा। एजेंसी का मुख्य ध्यान उस पूरी प्रणाली को समझने और बेनकाब करने पर है जिसके जरिए इतने बड़े पैमाने पर सरकारी राशि को बैंकों से निकालकर निजी हाथों में सौंप दिया गया। आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े अन्य गवाहों और संदिग्धों को भी समन जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है ताकि जनता की गाढ़ी कमाई के एक-एक पैसे का हिसाब लिया जा सके और दोषियों को सख्त सजा दिलाई जा सके।
अविश्वास प्रस्ताव पास, वाइस चेयरमैन राजपाल शर्मा की कुर्सी हुई खाली
15 May, 2026 11:27 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बहादुरगढ़: स्थानीय नगर परिषद के सियासी गलियारों में एक बहुत बड़ा उलटफेर देखने को मिला है, जिसने शहर की राजनीति की दशा और दिशा बदल दी है। लंबे समय से चल रही खींचतान के बाद आखिरकार नगर परिषद के वाइस चेयरमैन राजपाल शर्मा उर्फ पालेराम शर्मा को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी है। पार्षदों द्वारा उनके खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव भारी बहुमत के साथ पारित हो गया है, जिसके चलते उन्हें अपने पद से तत्काल प्रभाव से हाथ धोना पड़ा। इस विशेष बैठक में शामिल हुए सभी छब्बीस पार्षदों ने एकजुट होकर निवर्तमान वाइस चेयरमैन के विरोध में मतदान किया, जिससे विपक्षी खेमे में भारी उत्साह देखा जा रहा है।
प्रशासनिक पहरे और कड़ी सुरक्षा के बीच मतदान की प्रक्रिया संपन्न
सत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए शुक्रवार, पंद्रह मई को नगर परिषद कार्यालय में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और गुप्त मतदान के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक आहूत की गई थी। इस पूरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को पूरी तरह से निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और पारदर्शी ढंग से पूरा कराने के लिए जिला प्रशासन की ओर से अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) जगनिवास को विशेष तौर पर प्राधिकृत अधिकारी नियुक्त किया गया था। अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा सुबह से ही नगर परिषद परिसर के भीतर और बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, जबकि शहर के प्रबुद्ध नागरिकों और राजनीतिक विश्लेषकों की निगाहें पल-पल बदलते घटनाक्रम पर टिकी हुई थीं।
चेयरपर्सन सहित छह पार्षदों ने बनाई महत्वपूर्ण बैठक से दूरी
इस बड़े सियासी शक्ति प्रदर्शन के दौरान संख्या बल का दिलचस्प गणित देखने को मिला, जहाँ बैठक में पहुंचे सभी छब्बीस पार्षदों ने बिना किसी मतभेद के अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में अपनी पर्ची डाली। दूसरी तरफ इस पूरे राजनैतिक ड्रामे के बीच नगर परिषद की चेयरपर्सन सरोज राठी ने अविश्वास प्रस्ताव की कार्यवाही से खुद को पूरी तरह दूर रखा। चेयरपर्सन के अलावा स्वयं निवर्तमान वाइस चेयरमैन राजपाल शर्मा, वार्ड छह के पार्षद राजेश तंवर, वार्ड आठ के पार्षद प्रवीन छिल्लर, वार्ड चौदह की पार्षद सविता सैनी और वार्ड बाईस के पार्षद प्रवीन ने भी इस अहम बैठक में हिस्सा नहीं लिया और अपनी अनुपस्थिति दर्ज कराई।
मार्च महीने में ही तैयार हो चुकी थी तख्तापलट की पूरी पटकथा
वाइस चेयरमैन की कार्यप्रणाली को लेकर पार्षदों के भीतर सुलग रही असंतोष की चिंगारी काफी समय पहले ही भड़क चुकी थी, जिसकी पटकथा मुख्य रूप से सत्रह मार्च को ही लिख दी गई थी। उस दौरान परिषद के पच्चीस पार्षदों ने एक राय होकर उपायुक्त को बकायदा एक कानूनी शपथ पत्र (हलफनामा) सौंपा था, जिसमें वर्तमान नेतृत्व पर अविश्वास जताते हुए विशेष बैठक बुलाने का आग्रह किया गया था। पार्षदों के इस सामूहिक कदम पर त्वरित संज्ञान लेते हुए उपायुक्त ने नौ अप्रैल को अतिरिक्त उपायुक्त जगनिवास को इस पूरी चुनावी और प्रशासनिक प्रक्रिया को अमलीजामा पहनाने की जिम्मेदारी सौंपी थी, जिसके तहत पंद्रह मई की तिथि मुकर्रर की गई थी।
पाकिस्तान में आत्मघाती हमले से भारी नुकसान, 15 सैनिकों की मौत
15 May, 2026 09:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद: पाकिस्तान के अशांत खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बाजौर इलाके में स्थित सेना के एक शिविर पर भीषण आत्मघाती आतंकी हमला हुआ है। इस आत्मघाती हमले में शुरुआती जानकारी के मुताबिक कम से कम 15 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत हो गई है। आतंकियों ने इस हमले को बेहद सोची-समझी रणनीति के तहत अंजाम दिया, जिससे सुरक्षा बलों को संभलने का मौका नहीं मिल सका। इस घटना के बाद से पूरे सीमावर्ती क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।
सिलसिलेवार धमाके और भीषण मुठभेड़
आतंकवादियों ने इस हमले को अंजाम देने के लिए बेहद आक्रामक तरीका अपनाया। हमलावरों ने सबसे पहले सेना के परिसर के एक मुख्य हिस्से को निशाना बनाते हुए जोरदार विस्फोट किया। इस धमाके के कारण कैंप के भीतर अचानक अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया, जिसका फायदा उठाते हुए आधुनिक और भारी हथियारों से लैस उग्रवादी परिसर के अंदर दाखिल हो गए। इसके बाद परिसर में मौजूद सुरक्षाकर्मियों और आतंकियों के बीच आमने-सामने की भीषण मुठभेड़ शुरू हो गई, जो काफी देर तक जारी रही।
टीटीपी ने ली आत्मघाती हमले की जिम्मेदारी
इस घातक और बड़े हमले की जिम्मेदारी प्रतिबंधित आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने ली है। संगठन ने एक आधिकारिक संदेश जारी कर दावा किया है कि इस आत्मघाती वारदात को उनकी विशेष 'इस्तशहादी विंग' (आत्मघाती दस्ते) ने अंजाम दिया है। सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार, अक्टूबर 2025 में क्वेटा में हुए बड़े हमले के बाद यह पहला मौका है जब टीटीपी ने सीधे तौर पर किसी सुसाइड ब्लास्ट की जिम्मेदारी खुले तौर पर कबूल की है।
एक ही हफ्ते में दूसरा आत्मघाती धमाका
खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में सुरक्षा व्यवस्था की बदहाली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस क्षेत्र में एक ही सप्ताह के भीतर यह दूसरा आत्मघाती हमला है। इससे ठीक पहले मंगलवार को प्रांत के लक्की मरवत जिले के नौरंग बाजार में बारूद से लदे एक ऑटोरिक्शा के जरिए आत्मघाती विस्फोट किया गया था, जिसमें दो पुलिस जवानों और एक महिला सहित कई नागरिकों की जान चली गई थी। इसके अलावा इसी वर्ष फरवरी महीने में भी एक अन्य उग्रवादी हमले में पांच पुलिसकर्मियों और दो आम नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।
पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल
लगातार अंतराल पर हो रहे इन बड़े आतंकी हमलों ने पाकिस्तान के सुरक्षा दावों की पोल खोल दी है। खासकर अफगानिस्तान सीमा से सटे खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में उग्रवादियों के बढ़ते प्रभाव और सेना को सीधे निशाना बनाने की क्षमता ने देश की आंतरिक सुरक्षा और खुफिया तंत्र पर बेहद गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार और सैन्य नेतृत्व के तमाम दावों के बावजूद इस अशांत क्षेत्र में आतंकवाद का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे निपटने में स्थानीय प्रशासन पूरी तरह नाकाम नजर आ रहा है।
भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा संबंधों को मजबूती, एयर फोर्स मीटिंग में आधुनिक विमान तकनीक पर चर्चा
14 May, 2026 09:22 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कैनबरा: भारतीय वायु सेना (IAF) और रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स के बीच रक्षा संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए कैनबरा में 12वीं 'एयर स्टाफ वार्ता' आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सैन्य तालमेल को बढ़ाना और भविष्य की चुनौतियों के लिए मिलकर रणनीति तैयार करना था। इस चर्चा के दौरान एक खास ड्रोन लड़ाकू विमान की मौजूदगी ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।
भविष्य की हवाई जंग पर रणनीतिक चर्चा
वायु सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हुई इस वार्ता में ऑपरेशंस के दौरान आपसी तालमेल, संयुक्त अभ्यास और प्रशिक्षण पर विस्तार से चर्चा हुई। भारतीय वायु सेना की ओर से एयर वाइस मार्शल संजीव तालियान और ऑस्ट्रेलिया की ओर से एयर वाइस मार्शल स्टीवन पेस ने इस संवाद का नेतृत्व किया। दोनों देशों ने हवा में ईंधन भरने (Air-to-Air Refuelling) के समझौते और भविष्य के एयरोस्पेस सहयोग को मजबूत करने पर अपनी सहमति जताई, ताकि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे।
तस्वीर में दिखा आधुनिक 'घोस्ट बैट' लड़ाकू विमान
बैठक के दौरान जारी एक तस्वीर ने रक्षा विशेषज्ञों के बीच हलचल पैदा कर दी है। फोटो सेशन के दौरान बैकग्राउंड में बोइंग कंपनी का 'एमक्यू-28 घोस्ट बैट' (MQ-28 Ghost Bat) दिखाई दिया। यह एक मानवरहित लड़ाकू विमान (ड्रोन) है, जिसे भविष्य की हवाई जंग के लिए तैयार किया गया है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह बिना पायलट के उड़ता है और युद्ध के दौरान पायलट वाले लड़ाकू विमानों की सुरक्षा और सहायता करने में सक्षम है।
क्यों खास है एमक्यू-28 घोस्ट बैट?
बोइंग द्वारा विकसित यह विमान एक 'फोर्स मल्टीप्लायर' के रूप में जाना जाता है, जो हवाई बेड़े की शक्ति को कई गुना बढ़ा देता है। इसका डिजाइन 'मॉड्यूलर' है, जिसका अर्थ है कि मिशन की जरूरत के हिसाब से इसके आगे के हिस्से को बदलकर नए उपकरण तुरंत लगाए जा सकते हैं। यह 2,000 नॉटिकल मील से अधिक की दूरी तय कर सकता है और 40,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ान भरते हुए दुश्मन को चकमा देने में माहिर है।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मजबूत होती साझेदारी
ऑस्ट्रेलिया में पिछले आठ वर्षों की रिसर्च के बाद तैयार हुआ यह सिस्टम दुनिया का सबसे परिपक्व 'सहयोगी लड़ाकू विमान' माना जा रहा है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच इस तरह के सहयोग से न केवल दोनों देशों की सैन्य तकनीक साझा होगी, बल्कि बदलते वैश्विक खतरों का मुकाबला करने के लिए एक मजबूत गठबंधन भी तैयार होगा। यह साझेदारी स्पष्ट करती है कि भविष्य की हवाई सुरक्षा में एआई (AI) और मानवरहित विमानों की भूमिका सबसे अहम रहने वाली है।
ब्रिटेन की राजनीति में नई हलचल, पीएम स्टार्मर की कुर्सी पर खतरा?
14 May, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन: ब्रिटिश राजनीति में बड़ा उलटफेर; स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग का इस्तीफा, स्टार्मर की कुर्सी पर संकट
लंदन। ब्रिटेन की सत्ताधारी लेबर पार्टी के भीतर मचे घमासान के बीच स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग ने अपने पद से इस्तीफा देकर हड़कंप मचा दिया है। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के नेतृत्व के लिए इसे अब तक की सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है। स्ट्रीटिंग का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पार्टी चुनावी हार और आंतरिक कलह से जूझ रही है।
नेतृत्व परिवर्तन की सुगबुगाहट
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि वेस स्ट्रीटिंग केवल कैबिनेट से बाहर नहीं हुए हैं, बल्कि वे प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी में हैं। स्ट्रीटिंग को पार्टी के भीतर एक प्रभावशाली और महत्वाकांक्षी नेता के रूप में देखा जाता है। उनके इस कदम को स्टार्मर के नेतृत्व को सीधे चुनौती देने और भविष्य में प्रधानमंत्री पद की दावेदारी पेश करने के रूप में देखा जा रहा है।
चुनावी हार के बाद बढ़ा दबाव
प्रधानमंत्री स्टार्मर के लिए मुश्किलें पिछले हफ्ते हुए स्थानीय और क्षेत्रीय चुनावों के बाद से ही शुरू हो गई थीं। इन चुनावों में लेबर पार्टी को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा, जिससे पार्टी के भीतर असंतोष की लहर दौड़ गई। चुनाव परिणामों के बाद से ही स्टार्मर पर पद छोड़ने का भारी दबाव था, और अब स्ट्रीटिंग के इस्तीफे ने इस आग में घी डालने का काम किया है। वे कैबिनेट से इस्तीफा देने वाले पहले बड़े मंत्री बन गए हैं।
सत्ता के संघर्ष में नया मोड़
वेस स्ट्रीटिंग की राजनीतिक सक्रियता और उनकी महत्वाकांक्षाएं काफी समय से चर्चा का विषय रही हैं। उन्हें पार्टी के उन चुनिंदा दिग्गजों में गिना जाता है, जो वर्तमान नेतृत्व को हटाने की क्षमता रखते हैं। जानकारों का मानना है कि स्ट्रीटिंग के बाद कुछ अन्य मंत्री भी बगावत का रास्ता अपना सकते हैं, जिससे कीर स्टार्मर की सरकार पर अस्तित्व का संकट खड़ा हो सकता है। फिलहाल, लंदन की सत्ता के गलियारों में भविष्य की रणनीतियों को लेकर बैठकों का दौर जारी है।
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