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पति की हत्या के मामले में महिला दोषी करार, अदालत ने सुनाई उम्रकैद की सजा
14 May, 2026 07:20 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यूटा: अमेरिका के यूटा राज्य से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहाँ अपने ही पति की हत्या करने वाली महिला कोरी रिचिन्स को बिना पैरोल उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। यह मामला तब पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना था जब कोरी ने पति की मौत के बाद बच्चों के लिए दुख से उबरने पर एक किताब लिखी थी, जबकि असल में वह खुद ही उनकी कातिल निकली। बुधवार को जज ने सजा सुनाते हुए कहा कि ऐसा जघन्य अपराध करने वाला व्यक्ति कभी आजाद रहने के लायक नहीं है।
लालच के लिए पति को दिया धीमा जहर
अदालती जांच में सामने आया कि कोरी रिचिन्स ने साल 2022 में अपने पति एरिक रिचिन्स के ड्रिंक में 'फेंटेनाइल' नामक नशीली दवा की घातक मात्रा मिलाकर उन्हें मार डाला था। वह रियल एस्टेट के कारोबार में डूबे करोड़ों के कर्ज से छुटकारा पाना चाहती थी और पति की 40 लाख डॉलर (करीब 33 करोड़ रुपये) की संपत्ति हड़पना चाहती थी। इतना ही नहीं, वह किसी दूसरे व्यक्ति के साथ नया जीवन शुरू करने की योजना बना रही थी। हत्या से पहले भी उसने वैलेंटाइन डे पर जहरीला सैंडविच देकर पति को मारने की कोशिश की थी।
अदालत में बच्चों के बयानों ने सबको झकझोर दिया
सजा सुनाए जाने के दौरान सबसे भावुक पल तब आया जब एरिक के बेटों के पत्र पढ़कर सुनाए गए। अब 11 और 13 साल के हो चुके बच्चों ने बताया कि उन्हें अपनी ही मां से डर लगता है। बड़े बेटे ने खुलासा किया कि उनकी मां अक्सर उन्हें कमरे में बंद कर देती थी और नशे में रहती थी। छोटे बेटे ने बताया कि मां उन्हें डराने के लिए युद्ध के डरावने वीडियो दिखाती थी और पिता के बिस्तर पर बैठने से मना करती थी ताकि वे भी मौत के डर में जिएं। बच्चों ने जज से गुहार लगाई कि उनकी मां को कभी जेल से बाहर न आने दिया जाए।
किताब की आड़ में छिपाई थी असलियत
कोरी रिचिन्स की गिरफ्तारी तब हुई थी जब वह अपनी लिखी किताब का प्रचार कर रही थी। इस किताब में उसने एक बच्चे के अपने पिता को खोने के दर्द की कहानी लिखी थी, जिसे उसने एक 'आदर्श मां' की छवि बनाने के लिए इस्तेमाल किया। हालांकि, पुलिस को उसके मोबाइल से ऐसे संदेश मिले जिनमें वह अपने प्रेमी से पति को रास्ते से हटाने और संपत्ति पाने की बातें कर रही थी।
बीमा धोखाधड़ी और अन्य संगीन जुर्म
जूरी ने कोरी को सिर्फ हत्या ही नहीं, बल्कि बीमा धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज बनाने और हत्या की कोशिश जैसे गंभीर मामलों में भी दोषी पाया है। उसने पति की जानकारी के बिना उनके नाम पर कई जीवन बीमा पॉलिसी ली थीं। हालांकि कोरी ने खुद को निर्दोष बताया है, लेकिन सबूतों और गवाहों के आधार पर अदालत ने उसे ताउम्र जेल की सलाखों के पीछे रहने का आदेश दिया है। जिस दिन उसे सजा सुनाई गई, उस दिन उसके मृत पति एरिक का 44वां जन्मदिन था।
ओमान के समुद्री क्षेत्र में बड़ा हादसा, भारतीय ध्वज वाला शिप डूबा
14 May, 2026 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यूएई के पास फिर गहराया समुद्री संकट, अज्ञात लोगों ने जहाज को कब्जे में लेकर ईरान की ओर मोड़ा
दुबई। खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता की लहर दौड़ गई है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के पूर्वी तट के पास से एक कमर्शियल जहाज को जबरन जब्त कर ईरान की ओर ले जाने की खबर सामने आई है। ब्रिटिश सैन्य एजेंसी 'यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस' (UKMTO) ने इस घटना की पुष्टि करते हुए सुरक्षा अलर्ट जारी किया है।
फुजैरा तट के पास की घटना
UKMTO की रिपोर्ट के मुताबिक, यह जहाज फुजैरा बंदरगाह से लगभग 70 किलोमीटर (38 समुद्री मील) उत्तर-पूर्व में लंगर डाले हुए था। इसी दौरान अज्ञात हमलावरों ने जहाज पर कब्जा कर लिया और उसका रुख ईरानी जलक्षेत्र की ओर मोड़ दिया। फिलहाल इस जहाज के नाम और उस पर सवार लोगों की विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है, और न ही किसी संगठन ने इस कार्रवाई की जिम्मेदारी ली है।
भारतीय मालवाहक जहाज पर हमला, 14 नाविकों की बची जान
इसी दौरान समुद्री सुरक्षा से जुड़ी एक और बड़ी खबर ओमान के तट से आई है। सोमालिया से यूएई के शारजाह जा रहे एक भारतीय ध्वज वाले मालवाहक जहाज पर हमला हुआ। हमले के बाद जहाज में भीषण आग लग गई और वह समुद्र में डूब गया। राहत की बात यह रही कि जहाज पर सवार सभी 14 भारतीय चालक दल के सदस्यों को ओमान के कोस्ट गार्ड ने सुरक्षित बचा लिया।
भारत ने जताया कड़ा विरोध
भारतीय विदेश मंत्रालय ने नागरिक जहाजों पर हो रहे इन हमलों की कड़ी निंदा की है। भारत सरकार ने इस घटना को "पूरी तरह से अस्वीकार्य" बताते हुए समुद्री व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। पिछले कुछ महीनों में इस क्षेत्र में जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं में तेजी आई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है।
ट्रंप की यात्रा पर व्हाइट हाउस ने साफ किया रुख, ताइवान मुद्दा सबसे अहम
14 May, 2026 05:11 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ चीन के दौरे पर हैं, जहाँ उनकी मुलाकात राष्ट्रपति शी जिनपिंग से हुई। साल 2017 के बाद ट्रंप का यह पहला चीन दौरा है, जिसे विशेषज्ञों ने अब तक का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन बताया है। ट्रंप के साथ एनवीडिया (Nvidia) के सीईओ जेन्सेन हुआंग समेत अमेरिका के दिग्गज कारोबारी, विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री भी बीजिंग पहुंचे हैं। ट्रंप ने शी जिनपिंग को एक 'महान नेता' बताते हुए उम्मीद जताई है कि दोनों देशों के भविष्य के संबंध पहले से कहीं बेहतर और उज्ज्वल होंगे।
ताइवान मुद्दा: चीन की 'लाल रेखा' और ट्रंप की तैयारी
इस बैठक में ताइवान का मुद्दा सबसे संवेदनशील बना हुआ है। जहाँ एक तरफ ट्रंप प्रशासन ने ताइवान के लिए 11 अरब डॉलर के हथियार पैकेज को मंजूरी दी है, वहीं चीन इसे अपना अटूट हिस्सा मानता है। शी जिनपिंग ने ट्रंप को सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि अमेरिका इस मुद्दे को गलत तरीके से न संभाले, अन्यथा दोनों देशों के बीच संघर्ष की स्थिति पैदा हो सकती है। चीन ने साफ कर दिया है कि ताइवान, लोकतंत्र, राजनीतिक व्यवस्था और विकास का अधिकार उसकी 'चार लाल रेखाएं' हैं, जिन पर कोई भी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।
व्यापारिक विवाद और ऊर्जा संकट पर मंथन
व्हाइट हाउस के अनुसार, ट्रंप इस दौरे से कुछ ठोस परिणाम निकालना चाहते हैं। अमेरिका को उम्मीद है कि चीन अमेरिकी सोयाबीन, बीफ और विमानों की खरीद बढ़ाएगा। साथ ही, दोनों देशों के बीच व्यापारिक विवादों को सुलझाने के लिए एक 'बोर्ड ऑफ ट्रेड' जैसी स्थाई व्यवस्था पर भी चर्चा हो सकती है। इसके अलावा, ईरान-इस्राइल युद्ध के कारण वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति पर पड़े असर को लेकर भी ट्रंप चीन से सहयोग चाह रहे हैं। चूंकि चीन ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है, इसलिए ट्रंप चाह रहे हैं कि चीन ईरान पर दबाव बनाए ताकि ऊर्जा बाजार में स्थिरता आए।
चिप निर्माण और आर्थिक सहयोग पर जोर
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में ताइवान चिप निर्माण का सबसे बड़ा केंद्र है। ट्रंप अमेरिका में चिप उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए ताइवान के साथ व्यापारिक सहयोग को और मजबूत करना चाहते हैं। इसी उद्देश्य से अमेरिका के टॉप टेक और वित्त क्षेत्रों के कारोबारी इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बने हैं। ट्रंप ने कहा कि वे चीन को सम्मान देने और व्यापार के नए रास्ते खोलने आए हैं।
राजकीय भोज और सांस्कृतिक कार्यक्रम
बीजिंग पहुंचने पर ट्रंप का जोरदार स्वागत चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग ने किया। द्विपक्षीय बैठकों के बाद ट्रंप ऐतिहासिक 'टेंपल ऑफ हैवेन' का दौरा करेंगे, जिसे चीन में स्वर्ग और पृथ्वी के मिलन का प्रतीक माना जाता है। ट्रंप के सम्मान में गुरुवार को राजकीय भोज का आयोजन किया गया है, जबकि शुक्रवार को वर्किंग लंच और टी कार्यक्रम के साथ इस महत्वपूर्ण दौरे का समापन होगा।
मां की दवा लेने निकली युवती की हत्या का सच सामने आया
14 May, 2026 04:24 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अंबाला: शहर में मां की बीमारी की रिपोर्ट लेने निकली एक युवती के अचानक गायब होने के सनसनीखेज मामले का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है, जिसमें उसके प्रेमी द्वारा ही हत्या कर शव को दूसरे राज्य के जंगलों में जलाने की खौफनाक बात सामने आई है।
प्रेम प्रसंग और शादी के दबाव में रची गई खौफनाक साजिश
पुलिस जांच में यह दुखद खुलासा हुआ है कि अंबाला निवासी अमनदीप कौर का बराड़ा के रहने वाले संदीप के साथ पिछले छह वर्षों से प्रेम संबंध चल रहा था। आरोपी संदीप पहले से ही शादीशुदा था और जब अमनदीप ने उस पर विवाह के लिए दबाव बनाना शुरू किया, तो उसने इस रिश्ते से पीछा छुड़ाने के लिए एक जानलेवा योजना तैयार की। शातिर आरोपी ने युवती को यह कहकर अपने झांसे में लिया कि वे दोनों मिलकर जहर खाकर अपनी जान दे देंगे, लेकिन उसने युवती को जहरीला पदार्थ खिलाकर खुद को बचा लिया, जिससे अमनदीप की मौके पर ही मौत हो गई।
सीसीटीवी फुटेज और कार ट्रैकिंग से हुआ कातिल का पर्दाफाश
इस अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझाने में सीसीटीवी कैमरों की फुटेज ने सबसे अहम भूमिका निभाई, जिसमें आरोपी अपने एक साथी और रेहड़ी चालक की मदद से एक भारी बोरे को कार में लादते हुए दिखाई दिया। परिजनों के शक के आधार पर जब पुलिस ने आरोपी की कार की लोकेशन को ट्रैक किया, तो उसकी स्थिति हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के जंगलों में पाई गई। हरियाणा पुलिस ने बिना समय गंवाए हिमाचल पुलिस के साथ मिलकर एक संयुक्त ऑपरेशन चलाया और आरोपी को उस वक्त रंगे हाथों दबोच लिया जब वह सबूत मिटाने के उद्देश्य से शव को पेट्रोल डालकर जला रहा था।
किराए के कमरे में वारदात और साक्ष्य मिटाने का प्रयास
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी संदीप ने पिछले डेढ़ साल से एक कमरा किराए पर ले रखा था, जहां उसने इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया और फिर शव को बोरे में भरकर करीब दो सौ किलोमीटर दूर पोंटा साहिब के जंगलों में ले गया। पुलिस ने मौके से युवती का अधजला शव बरामद कर लिया है और वारदात में इस्तेमाल की गई कार और अन्य सामान की बरामदगी के लिए आरोपी को कोर्ट में पेश कर पांच दिन के रिमांड पर लिया है। पुलिस अब उन अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है जिन्होंने शव को ठिकाने लगाने में आरोपी की मदद की थी।
परिवार में मातम और न्याय की गुहार
कैंसर पीड़ित मां की टेस्ट रिपोर्ट लेने निकली बेटी की मौत की खबर मिलते ही पूरे परिवार में कोहराम मच गया है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। अमनदीप के मामा और अन्य रिश्तेदारों ने प्रशासन से मांग की है कि इस जघन्य अपराध के लिए दोषी को सख्त से सख्त सजा दी जाए ताकि समाज में एक उदाहरण पेश हो सके। फिलहाल पुलिस ने पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कर ली है और मामले से जुड़े हर तकनीकी साक्ष्य को मजबूती से जुटाया जा रहा है ताकि आरोपी को कानून के कटघरे में खड़ा कर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया जा सके।
खसरे ने बांग्लादेश में मचाई तबाही, 432 लोगों की मौत
14 May, 2026 04:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका: बांग्लादेश इस समय खसरे (Measles) के भीषण प्रकोप से जूझ रहा है, जिसने अब एक गंभीर संकट का रूप ले लिया है। देश में इस बीमारी से मरने वालों की संख्या बढ़कर 432 हो गई है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले महज 24 घंटों में ही आठ और लोगों ने अपनी जान गंवाई है। संक्रमण की रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश में खसरे के पुष्ट और संदिग्ध मामलों की कुल संख्या 60 हजार के पार पहुंच गई है, जिसे विशेषज्ञ पिछले कई वर्षों का सबसे खतरनाक दौर बता रहे हैं।
तेजी से बढ़ता संक्रमण और विशेषज्ञों की चिंता
स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, बुधवार सुबह तक 1,489 नए संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जिससे कुल संदिग्ध मरीजों की संख्या 53,056 हो गई है। वहीं, पुष्ट मामलों की संख्या भी 7,150 तक पहुंच गई है। जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ मुश्ताक हुसैन ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि जब संक्रमण के मामले 50 हजार से ज्यादा हो जाएं, तो सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (Public Health Emergency) घोषित कर देना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि समय पर टीकाकरण न होने और सही कदम न उठाने की वजह से मृत्यु दर में इतनी बढ़ोतरी हुई है।
टीकाकरण में लापरवाही और कुपोषण बनी मुख्य वजह
विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले एक साल में टीकाकरण अभियान में आई सुस्ती और बच्चों में कुपोषण ने इस बीमारी को और ज्यादा घातक बना दिया है। वायरोलॉजिस्ट महबूबा जमील के अनुसार, जिन इलाकों में टीकाकरण पर ध्यान दिया गया है, वहां हालात थोड़े बेहतर हैं, लेकिन सिलहट जैसे जिले वर्तमान में सबसे बुरी तरह प्रभावित हैं। विशेषज्ञों ने उम्मीद जताई है कि यदि अब टीकाकरण गतिविधियों में तेजी लाई जाती है, तो अगले कुछ हफ्तों में नए मामलों में कमी देखी जा सकती है।
सरकार के खिलाफ फूटा जनता का गुस्सा
इस स्वास्थ्य त्रासदी को लेकर बांग्लादेश में राजनीति भी गर्मा गई है। ढाका के धनमंडी इलाके में प्रदर्शनकारियों ने मानव श्रृंखला बनाकर अपना विरोध दर्ज कराया। लोगों का आरोप है कि पूर्व अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस और स्वास्थ्य सलाहकार नूरजहां बेगम की लापरवाही के कारण हजारों लोगों की जान खतरे में पड़ी है। प्रदर्शनकारियों ने इन अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने और पीड़ित परिवारों के लिए उचित मुआवजे की मांग की है।
बर्बाद हुआ दो दशकों का सफल रिकॉर्ड
बांग्लादेश कभी अपनी टीकाकरण प्रणाली के लिए कम आय वाले देशों के बीच एक अंतरराष्ट्रीय मॉडल माना जाता था। पिछले दो दशकों में यहां वैक्सीन कवरेज में लगातार सुधार हुआ था। हालांकि, हालिया संपादकीय रिपोर्टों में कहा गया है कि पिछली सरकार की प्रशासनिक ढिलाई ने इस शानदार रिकॉर्ड को मिट्टी में मिला दिया है। समय रहते कदम न उठाने के कारण आज देश को इस बड़ी मानवीय त्रासदी का सामना करना पड़ रहा है।
कड़ी मेहनत का फल: किसान की बेटी मानसी ने प्रदेश में तीसरा स्थान पाया
14 May, 2026 02:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कैथल: जिले के गांव देबन की रहने वाली एक किसान की होनहार सुपुत्री मानसी ने हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की 10वीं की परीक्षा में प्रदेश भर में संयुक्त रूप से तीसरा स्थान प्राप्त कर अपनी सफलता का परचम लहराया है।
संघर्ष और समर्पण से हासिल किया प्रदेश में गौरवशाली स्थान
मानसी ने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर 500 अंकों में से 497 अंक प्राप्त कर न केवल अपने माता-पिता का सिर गर्व से ऊंचा किया है बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन कर दिया है। एक साधारण किसान परिवार से संबंध रखने वाली मानसी की इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि यदि इरादे मजबूत हों तो संसाधनों की कमी सफलता के आड़े नहीं आती। मानसी की इस शानदार कामयाबी के बाद उनके निवास पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है और पूरे क्षेत्र में हर्षोल्लास का माहौल बना हुआ है।
सोशल मीडिया से दूरी और नियमित अध्ययन बना सफलता का आधार
अपनी तैयारी के सफर के बारे में जानकारी देते हुए मानसी ने बताया कि परीक्षा के दौरान उन्होंने मोबाइल फोन और सोशल मीडिया के आकर्षण से खुद को पूरी तरह दूर रखा था। वह हर दिन करीब 8 घंटे पूरी एकाग्रता के साथ पढ़ाई को देती थीं और कठिन विषयों पर पकड़ बनाने के लिए उन्होंने अपने शिक्षकों की मदद से एक विशेष समय-सारणी तैयार की थी। मानसी का मानना है कि पढ़ाई में निरंतरता और अनुशासन ही वह मुख्य कारण हैं जिन्होंने उन्हें मेरिट सूची में स्थान दिलाने में मदद की।
घर की जिम्मेदारियों के बीच सेल्फ-स्टडी का अनूठा तालमेल
मानसी की खूबी यह भी है कि वह केवल अपनी किताबों तक सीमित नहीं रहीं बल्कि घर के कामकाज में भी अपनी माता का पूरा सहयोग करती हैं। घरेलू जिम्मेदारियों को बखूबी निभाने के साथ-साथ उन्होंने पूरे साल अपनी पढ़ाई को कभी प्रभावित नहीं होने दिया और हर स्थिति में कम से कम 3 घंटे का समय स्वाध्याय के लिए अवश्य निकाला। अनुशासन और समय प्रबंधन के प्रति उनकी इसी प्रतिबद्धता ने उन्हें आज प्रदेश के टॉपर्स की कतार में लाकर खड़ा कर दिया है।
भविष्य में डॉक्टर बनकर समाज सेवा करने का दृढ़ संकल्प
अपनी इस बड़ी जीत के बाद मानसी ने भविष्य के लिए अपने ऊंचे लक्ष्यों को भी साझा किया है और वह चिकित्सा के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहती हैं। उनका सपना एक काबिल डॉक्टर बनकर ग्रामीण और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के लोगों की निस्वार्थ सेवा करना है ताकि वे स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित न रहें। मानसी का यह लक्ष्य उनके सेवा भाव और समाज के प्रति उनकी संवेदनशीलता को दर्शाता है जिससे प्रेरणा लेकर क्षेत्र के अन्य छात्र भी शिक्षा के प्रति उत्साहित हो रहे हैं।
भाजपा ने बढ़त बनाई, कांग्रेस की स्थिति लगातार कमजोर – नतीजे बताते हैं सच
14 May, 2026 01:28 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रोहतक: हरियाणा के सात नगर निकायों के हालिया चुनावी नतीजों ने प्रदेश की सियासी तस्वीर को एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है, जहां भारतीय जनता पार्टी ने अपना दबदबा कायम रखते हुए विपक्षी खेमे को आत्ममंथन के लिए मजबूर कर दिया है।
भाजपा की चुनावी मशीनरी और रणनीतिक आक्रामकता
हरियाणा के निकाय चुनावों में भाजपा की जीत महज एक संयोग नहीं बल्कि उसकी सूक्ष्म प्रबंधन शैली और चुनावी गंभीरता का परिणाम नजर आती है। सांपला जैसी नगर पालिकाओं में, जिसे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का गढ़ माना जाता है, वहां भाजपा ने चुनाव के अंतिम दिनों में तीन कैबिनेट मंत्रियों सहित स्वयं मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को प्रचार मैदान में उतारकर माहौल को पूरी तरह अपने पक्ष में कर लिया। पार्टी की यह कार्यशैली दर्शाती है कि वह किसी भी चुनाव को छोटा नहीं मानती और बूथ स्तर तक अपने कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखकर विरोधियों के लिए घेराबंदी तैयार करने में माहिर हो चुकी है।
सत्ता पक्ष की नीतियों पर जनता का अटूट भरोसा
सात में से छह निकायों पर परचम लहराकर भाजपा ने यह सिद्ध कर दिया है कि प्रदेश की जनता मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व और सरकार की जनहितैषी नीतियों पर मुहर लगा रही है। लगातार तीन विधानसभा चुनावों में जीत के बाद नगर निकायों और राज्यसभा सीटों पर कब्जा जमाना यह संकेत देता है कि मतदाता फिलहाल किसी नए राजनीतिक प्रयोग के मूड में नहीं हैं। इन परिणामों से यह भी साफ होता है कि सरकार के कामकाज को लेकर आम जनमानस में एक सकारात्मक स्वीकार्यता बनी हुई है, जिसे भेद पाने में विपक्ष के तमाम दावे फिलहाल नाकाम साबित हो रहे हैं।
कांग्रेस की सांगठनिक कमजोरी और गुटबाजी का संकट
दूसरी ओर, इन नतीजों ने कांग्रेस की अंदरूनी कलह और सांगठनिक शिथिलता को एक बार फिर उजागर कर दिया है, जहां पार्टी चुनावी मैदान में पूरी ऊर्जा के साथ जुटने के बजाय बिखरी हुई नजर आई। विधानसभा चुनाव की हार के बाद उम्मीद की जा रही थी कि कांग्रेस एकजुट होकर वापसी करेगी, लेकिन सोनीपत और अंबाला जैसे अपने पारंपरिक प्रभाव वाले क्षेत्रों में भी पार्टी अपनी पकड़ बचाने में संघर्ष करती दिखी। उकलाना में एक निर्दलीय की जीत को कांग्रेस समर्थित बताकर साख बचाने की कोशिश जरूर की जा रही है, परंतु वास्तविकता यह है कि गुटबाजी के चलते पार्टी का ढांचा धरातल पर उतना सक्रिय नहीं हो पा रहा है जितनी जरूरत थी।
भविष्य की राजनीति और नेतृत्व के सामने चुनौतियां
मौजूदा चुनावी रुझान बताते हैं कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अपनी सौम्य छवि और त्वरित फैसले लेने की क्षमता से जनता के बीच जो पैठ बनाई है, उसने भाजपा को एक 'अजेय इलेक्शन मशीन' के रूप में स्थापित कर दिया है। इन निरंतर चुनावी झटकों के बाद अब कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और भविष्य की दिशा को लेकर नई बहस छिड़ना स्वाभाविक है क्योंकि पार्टी का पारंपरिक जनाधार धीरे-धीरे खिसकता जा रहा है। यदि विपक्ष ने अपनी रणनीति और आपसी समन्वय में समय रहते बड़े बदलाव नहीं किए, तो आगामी राजनीतिक सफर उसके लिए और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
जासूसी ऑपरेशन के बीच क्रैश हुआ दुनिया का सबसे बड़ा प्लेन
14 May, 2026 01:28 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मैक्सिको की खाड़ी / वॉशिंगटन: सौर ऊर्जा के क्षेत्र में क्रांति लाने वाला और बिना ईंधन की एक बूंद के पूरी दुनिया का चक्कर लगाकर इतिहास रचने वाला प्रसिद्ध विमान 'सोलर इम्पल्स 2' (Solar Impulse 2) अब इतिहास के पन्नों में ही दफन हो गया है। नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (एनटीएसबी) की हालिया रिपोर्ट ने पुष्टि की है कि 4 मई को एक मानवरहित परीक्षण उड़ान के दौरान बिजली आपूर्ति ठप होने से यह विमान मैक्सिको की खाड़ी में दुर्घटनाग्रस्त होकर नष्ट हो गया। जो विमान कभी 'स्वच्छ ऊर्जा' और 'विश्व शांति' का वैश्विक दूत माना जाता था, उसका अंत समुद्र की गहराइयों में हुआ।
इंजीनियरिंग का चमत्कार और ऐतिहासिक सफर
स्विस इंजीनियरों बर्ट्रेंड पकार्ड और आंद्रे बोर्शबर्ग द्वारा तैयार किए गए इस विमान ने साल 2016 में तब वैश्विक सुर्खियां बटोरी थीं, जब इसने केवल सौर ऊर्जा के दम पर पूरी पृथ्वी की परिक्रमा पूरी की थी। यह विमान तकनीकी रूप से बेहद उन्नत था:
विशाल विंगस्पैन: इसके पंखों का विस्तार 232 फीट था, जो एक बोइंग 747 विमान से भी अधिक था।
हल्का वजन: कार्बन फाइबर से बने होने के कारण इसका कुल वजन मात्र 5,100 पाउंड था।
सौर शक्ति: इसके पंखों पर 17,248 सौर सेल लगे थे, जो इसे 39,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ाने की क्षमता देते थे।
शांति के प्रतीक से सैन्य मशीन तक का सफर
सोलर इम्पल्स 2 का अंत न केवल दुखद रहा, बल्कि काफी विवादास्पद भी रहा। साल 2019 में इस ऐतिहासिक विमान को 'स्काईड्वेलर एयरो' नामक कंपनी को बेच दिया गया था। नई कंपनी ने इसके मूल उद्देश्य (पर्यावरण संरक्षण) को बदलकर इसे एक मिलिट्री सर्विलांस ड्रोन में तब्दील कर दिया। इसमें जासूसी रडार, हाई-टेक ऑप्टिक्स और फोन टैपिंग जैसे उपकरण लगाए गए थे।
इसके मूल निर्माताओं ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि मूल समझौते के अनुसार इस विमान को स्विट्जरलैंड के म्यूजियम में संरक्षित किया जाना था, लेकिन इसे सैन्य परीक्षणों के जोखिम भरे क्षेत्र में झोंक दिया गया।
हादसे की रात और तकनीकी विफलता
हादसे के समय यह विमान मिसिसिपी के स्टेनिस इंटरनेशनल एयरपोर्ट से एक ऑटोनोमस (कंप्यूटर नियंत्रित) उड़ान पर था। उड़ान के दौरान अचानक तकनीकी खराबी आई और बिजली की सप्लाई पूरी तरह बंद हो गई, जिससे विमान सीधे समुद्र में जा गिरा। गनीमत यह रही कि विमान मानवरहित था, इसलिए कोई जानी नुकसान नहीं हुआ।
भविष्य की तकनीक पर सवाल
इस दुर्घटना ने सौर ऊर्जा से चलने वाले लंबी दूरी के ड्रोन्स की सुरक्षा और उनकी विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सोलर इम्पल्स 2 का नष्ट होना सौर उड्डयन (Solar Aviation) के क्षेत्र में एक बड़ी क्षति है। यह हादसा दर्शाता है कि अत्यधिक ऊंचाई पर सौर ऊर्जा पर निर्भर प्रणालियों को अभी भी बिजली प्रबंधन और ऑटोनोमस नेविगेशन के मोर्चे पर लंबी दूरी तय करनी है।
गुप्त बैठक की खबर से बढ़ी राजनीतिक हलचल, दोनों देशों पर नजरें
14 May, 2026 12:28 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यरूशलेम / दुबई: पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी युद्ध की आग के बीच इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच एक बड़ा कूटनीतिक विवाद छिड़ गया है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने दावा किया कि युद्ध के चरम दौर में नेतन्याहू और यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नहयान के बीच एक 'गुप्त बैठक' हुई थी। इस खबर ने वैश्विक स्तर पर हलचल मचा दी, लेकिन कुछ ही घंटों बाद यूएई ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए इसे पूरी तरह 'निराधार' और 'बेबुनियाद' करार दिया।
इजरायल का दावा: अल ऐन में हुई रणनीतिक चर्चा
इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, नेतन्याहू ने 26 मार्च को गुप्त रूप से यूएई के अल ऐन शहर की यात्रा की थी। दावे में कहा गया कि दोनों नेताओं के बीच ईरान के बढ़ते खतरे और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर घंटों लंबी रणनीतिक चर्चा हुई। इजरायल ने इस कथित बैठक को दोनों देशों के बीच भविष्य के रक्षा सहयोग की एक ऐतिहासिक सफलता के रूप में प्रचारित किया, जिससे ईरान के खिलाफ एक नया गठबंधन बनने के संकेत मिले।
यूएई का सख्त खंडन: 'पारदर्शिता ही हमारा आधार'
इजरायल के इस सनसनीखेज दावे पर यूएई के विदेश मंत्रालय ने सख्त रुख अपनाया। मंत्रालय ने आधिकारिक बयान में कहा कि इजरायली प्रधानमंत्री की किसी भी गुप्त यात्रा या बैठक की बात पूरी तरह झूठ है। यूएई ने स्पष्ट किया कि उसके इजरायल के साथ संबंध 'अब्राहम अकॉर्ड' के तहत पूरी तरह खुले और आधिकारिक हैं और वे किसी भी तरह की गैर-पारदर्शी या गुप्त कूटनीति का हिस्सा नहीं हैं। यूएई ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया को भी चेतावनी दी कि जब तक अमीरात की आधिकारिक एजेंसियां कोई पुष्टि न करें, तब तक ऐसे दावों को स्वीकार न किया जाए।
पर्दे के पीछे की हलचल और रक्षा सहयोग के कयास
भले ही यूएई ने बैठक का खंडन किया हो, लेकिन कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स इस ओर इशारा कर रही हैं कि ईरान के खतरे को देखते हुए पर्दे के पीछे दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग काफी बढ़ा है। खुफिया सूत्रों के अनुसार, इजरायली एजेंसी 'मोसाद' के प्रमुख डेडी बरनेआ ने युद्ध के दौरान कई बार गुप्त दौरे किए हैं। सबसे चौंकाने वाला दावा इजरायल में अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी ने किया, जिन्होंने कहा कि ईरान के हमलों से यूएई की सुरक्षा के लिए इजरायल ने अपना घातक 'आयरन डोम' एयर डिफेंस सिस्टम और सैन्य कर्मी वहां तैनात किए थे।
ईरान की चेतावनी और क्षेत्रीय कूटनीति के पेंच
इस पूरे घटनाक्रम पर ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी दी है कि जो भी देश इजरायल के साथ मिलकर क्षेत्र में अस्थिरता पैदा करेंगे, उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यूएई एक तरफ इजरायल के साथ सुरक्षा सहयोग चाहता है, लेकिन दूसरी तरफ वह अरब जगत के दबाव और ईरान के साथ सीधे टकराव से बचने के लिए किसी भी सैन्य गठजोड़ को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने से बच रहा है। फिलहाल, इस कूटनीतिक 'दावे और खंडन' के खेल ने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है।
चीन ने अमेरिका को दी सख्त नसीहत: ताइवान पर गलत कदम पड़ा भारी
14 May, 2026 11:19 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग: अमेरिका और चीन के बीच ताइवान को लेकर जारी तल्खी एक बार फिर विश्व पटल पर खुलकर सामने आ गई है। बीजिंग के 'ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल' में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई द्विपक्षीय वार्ता के दौरान सीधी चेतावनी दी है। जिनपिंग ने दोटूक शब्दों में कहा कि ताइवान का मुद्दा दोनों देशों के रिश्तों में सबसे अहम और संवेदनशील कड़ी है; यदि इसे सही तरीके से नहीं संभाला गया, तो अमेरिका और चीन के बीच सीधा टकराव या युद्ध जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। 2017 के बाद ट्रंप का यह पहला चीन दौरा है, जिसे वैश्विक राजनीति में 'हाई-स्टेक समिट' के तौर पर देखा जा रहा है।
बंद कमरे में हुई गंभीर चर्चा और 'चार लाल रेखाएं'
चीनी सरकारी मीडिया शिन्हुआ के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच करीब दो घंटे तक चली गोपनीय बातचीत में जिनपिंग ने ताइवान को लेकर चीन की कड़ाई को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि ताइवान का सवाल ही वह आधार है जिस पर दोनों देशों के संबंधों की स्थिरता टिकी है। इससे पहले चीनी दूतावास ने सोशल मीडिया पर चीन की 'चार लाल रेखाओं' का जिक्र कर अमेरिका को पहले ही आगाह कर दिया था। इन रेखाओं में ताइवान का सवाल, चीन की राजनीतिक व्यवस्था, मानवाधिकार और विकास का अधिकार शामिल हैं। चीन ने साफ किया है कि इन मुद्दों पर किसी भी तरह का बाहरी हस्तक्षेप या दबाव स्वीकार्य नहीं होगा।
ट्रंप की कूटनीति और 'थुसीडाइड्स ट्रैप' का जिक्र
एक ओर जहां जिनपिंग का लहजा सख्त रहा, वहीं डोनाल्ड ट्रंप ने व्यक्तिगत स्तर पर गर्मजोशी दिखाने की कोशिश की। ट्रंप ने जिनपिंग को 'एक महान नेता' और 'पुराना मित्र' बताते हुए कहा कि वे 2026 को दोनों देशों के संबंधों के लिए एक ऐतिहासिक साल बनाना चाहते हैं। हालांकि, जिनपिंग ने उन्हें 'थुसीडाइड्स ट्रैप' (Thucydides Trap) के खतरे से आगाह किया—यह एक ऐसा सिद्धांत है जो कहता है कि जब एक उभरती हुई शक्ति किसी स्थापित महाशक्ति को चुनौती देती है, तो युद्ध की संभावना प्रबल हो जाती है। जिनपिंग ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों को प्रतिद्वंद्वी के बजाय भागीदार बनना चाहिए।
गार्ड ऑफ ऑनर और प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी
ट्रंप के स्वागत के लिए बीजिंग में भव्य आयोजन किया गया, जहां पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की ऑनर गार्ड बटालियन ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इस अहम बैठक में ट्रंप के साथ अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ जैसे शीर्ष अधिकारी भी मौजूद रहे। वार्ता में केवल ताइवान ही नहीं, बल्कि ईरान युद्ध के कारण उपजे वैश्विक ऊर्जा संकट, व्यापार टैरिफ और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे जटिल मुद्दों पर भी चर्चा हुई। हालांकि, ट्रंप की इस यात्रा को प्रतीकात्मक रूप से सफल माना जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ताइवान पर चीन की यह चेतावनी आने वाले दिनों में वाशिंगटन की विदेश नीति के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगी।
ट्रंप चीन दौरे पर, इधर वेंस ने खुद की तुलना फिल्मी किरदार केविन से की
14 May, 2026 09:16 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन / बीजिंग:अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन की महत्वपूर्ण आधिकारिक यात्रा के बीच वॉशिंगटन में सत्ता का केंद्र 'वाइट हाउस' एक दिलचस्प वजह से चर्चा में है। राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में कार्यवाहक जिम्मेदारी संभाल रहे उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एक मजाकिया बयान देकर सबको लोटपोट कर दिया। वेंस ने वाइट हाउस में अपनी स्थिति की तुलना 1990 की मशहूर हॉलीवुड फिल्म 'होम अलोन' के बाल कलाकार मैकाले कल्किन (केविन) से की। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि राष्ट्रपति के बिना वाइट हाउस में ऐसा सन्नाटा पसरा है कि उन्हें खुद को केविन की तरह अकेला महसूस हो रहा है।
सुरक्षा प्रोटोकॉल और 'होम अलोन' वाली स्थिति
उपराष्ट्रपति वेंस ने पत्रकारों से हल्के-फुल्के अंदाज में बातचीत करते हुए बताया कि सुरक्षा और सीक्रेट सर्विस के कड़े प्रोटोकॉल के कारण राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति कभी भी एक साथ विदेश यात्रा नहीं कर सकते। अमेरिकी नियमों के तहत 'लाइन ऑफ सक्सेशन' (सत्ता के उत्तराधिकार) को सुरक्षित रखने के लिए यह अनिवार्य है कि दोनों शीर्ष नेताओं में से एक हमेशा देश के भीतर मौजूद रहे। वेंस ने हंसते हुए कहा, "जब मैं अकेले वाइट हाउस में दाखिल होता हूं, तो मुझे यह समझने में एक पल लगता है कि आखिर चल क्या रहा है।"
धोखाधड़ी के खिलाफ सख्त तेवर और फंडिंग की चेतावनी
हंसी-मजाक के बीच उपराष्ट्रपति वेंस ने प्रशासनिक गंभीरता भी दिखाई। 'एंटी-फ्रॉड टास्कफोर्स' का नेतृत्व कर रहे वेंस ने उन राज्यों को कड़ी चेतावनी दी है जो संदिग्ध धोखाधड़ी की जांच में ट्रंप प्रशासन का सहयोग नहीं कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट लहजे में कहा कि जो राज्य जांच में बाधा डालेंगे या सहयोग से पीछे हटेंगे, उनकी सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजनाओं (Medicaid आदि) के लिए मिलने वाली 'फेडरल फंडिंग' रोकी जा सकती है। यह बयान दर्शाता है कि राष्ट्रपति की गैर-मौजूदगी में भी प्रशासन अपने कड़े फैसलों पर मुस्तैद है।
बीजिंग में ट्रंप-जिनपिंग की महावार्ता
दूसरी ओर, चीन की राजधानी बीजिंग में राष्ट्रपति ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच उच्च स्तरीय बैठकों का दौर जारी है। 'ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल' में ट्रंप का औपचारिक स्वागत किया गया, जहां दोनों नेताओं ने सलामी गारद का निरीक्षण किया। इस तीन दिवसीय यात्रा के दौरान व्यापारिक मतभेदों, टैरिफ और ईरान युद्ध जैसे गंभीर वैश्विक मुद्दों पर गहन चर्चा हो रही है। राष्ट्रपति ट्रंप के शनिवार तक वापस लौटने की उम्मीद है, तब तक वाशिंगटन की कमान 'होम अलोन' मोड में जेडी वेंस के पास ही रहेगी।
दिलजीत दोसांझ मैनेजर के घर फायरिंग: AAP ने BJP पर निशाना साधा
13 May, 2026 05:51 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
करनाल। हरियाणा के गोंदर गांव में मशहूर गायक दिलजीत दोसांझ के मैनेजर गुरप्रताप कांग के आवास पर कथित गोलीबारी का मामला गरमा गया है, जिसकी जिम्मेदारी सोशल मीडिया पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े सदस्यों द्वारा लिए जाने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, स्थानीय पुलिस प्रशासन ने इस तरह की किसी भी हिंसक वारदात से पूरी तरह इनकार किया है और इसे केवल अफवाह करार दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर टायसन बिश्नोई और आरजू बिश्नोई के नाम से संचालित पेजों पर एक पोस्ट साझा की गई है, जिसमें यह आरोप लगाया गया है कि मैनेजर के घर पर ऑस्ट्रिया-निर्मित हथियारों का इस्तेमाल कर फायरिंग की गई। पुलिस के मुताबिक, परिजनों से संपर्क करने पर उन्होंने भी ऐसी किसी घटना के होने की पुष्टि नहीं की है, जिसके चलते फिलहाल इस मामले में आधिकारिक तौर पर संशय बना हुआ है।
सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी और गैंगस्टरों की चेतावनी
इंटरनेट पर प्रसारित पोस्ट में लॉरेंस बिश्नोई गैंग के कथित गुर्गों ने दावा किया है कि यह फायरिंग केवल एक चेतावनी है और इसके पीछे मुख्य कारण दिलजीत दोसांझ की टीम पर लगाए गए गंभीर आरोप हैं। पोस्ट में उल्लेख किया गया है कि सिंगर के मैनेजर और उनकी टीम के कुछ सदस्यों को पूर्व में भी संदेश भेजे गए थे, जिनमें महिला कर्मचारियों के शोषण और फर्जी कार्यक्रमों के नाम पर धोखाधड़ी करने की बातें कही गई थीं। गैंग की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान पंजाब की एक युवती के साथ अभद्र व्यवहार किया गया था और बार-बार आगाह करने के बावजूद टीम में कोई बदलाव नहीं किया गया, जिसके परिणामस्वरूप कथित तौर पर इस हमले को अंजाम दिया गया।
पुलिस प्रशासन का पक्ष और वारदात का खंडन
निसिंग थाना पुलिस और स्थानीय अधिकारियों ने गोंदर गांव में किसी भी प्रकार की गोलीबारी की सूचना को सिरे से खारिज कर दिया है। थाना प्रभारी कृष्ण कुमार के अनुसार, न तो पुलिस के पास इस संबंध में कोई शिकायत दर्ज कराई गई है और न ही गांव में ऐसी किसी हलचल की जानकारी मिली है। पुलिस टीम ने मैनेजर के परिवार से भी चर्चा की है, जिसमें परिजनों ने स्पष्ट किया है कि उनके घर पर किसी ने भी गोलियां नहीं चलाई हैं। प्रशासन का मानना है कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही यह जानकारी भ्रामक हो सकती है और वे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किए जा रहे इन दावों की सत्यता की जांच करने में जुटे हैं ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तीखी बयानबाजी
इस घटनाक्रम के सामने आते ही सियासी गलियारों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं और विपक्षी दलों ने सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनुराग ढांडा ने इस मामले को लेकर सत्ताधारी दल पर तीखा हमला बोलते हुए इसे पंजाब विरोधी मानसिकता का हिस्सा बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ समय पहले सिंगर को एक राजनीतिक प्रस्ताव दिया गया था और उसे ठुकराने के बाद इस तरह की डराने-धमकाने वाली गतिविधियां की जा रही हैं। उन्होंने गैंगस्टर और सत्ता के बीच कथित सांठगांठ की ओर इशारा करते हुए कहा कि इस तरह की घटनाओं के जरिए पंजाब से ताल्लुक रखने वाली हस्तियों को भयभीत करने का प्रयास किया जा रहा है।
जुड़वा बहनों की पहचान पर सवाल, पिता अलग होने की पुष्टि से हड़कंप
13 May, 2026 04:28 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन: ब्रिटेन से चिकित्सा विज्ञान को हैरान कर देने वाला एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने जुड़वा बच्चों के जन्म से जुड़ी पुरानी धारणाओं को झकझोर कर रख दिया है। यहाँ 49 वर्षीय दो जुड़वा बहनों ने जब अपनी पहचान जानने के लिए डीएनए टेस्ट कराया, तो नतीजों ने सबको स्तब्ध कर दिया। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि एक ही कोख से एक साथ जन्म लेने के बावजूद दोनों बहनों के जैविक पिता अलग-अलग हैं। मेडिकल हिस्ट्री में इस तरह की घटना को अविश्वसनीय रूप से दुर्लभ माना जाता है, जिसने अब वैश्विक स्तर पर विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है।
संदेह से शुरू हुआ सच्चाई की खोज का सफर
मिशेल और लवीनिया ऑस्बॉर्न नाम की इन बहनों के मन में अपने मूल को लेकर लंबे समय से कुछ सवाल थे। मिशेल को अक्सर लगता था कि उनकी शारीरिक बनावट उस व्यक्ति से नहीं मिलती, जिन्हें वे अपना पिता मानती आ रही थीं। अपने इसी संदेह को मिटाने के लिए उन्होंने डीएनए किट का सहारा लिया, जिससे पता चला कि जेम्स उनके असली पिता नहीं थे। इसके बाद जब लवीनिया ने अपनी जाँच कराई, तो रहस्य और गहरा गया क्योंकि दोनों बहनों के डीएनए प्रोफाइल एक-दूसरे से पूरी तरह मेल नहीं खा रहे थे। अंततः यह प्रमाणित हो गया कि दोनों के पिता दो अलग-अलग व्यक्ति हैं।
क्या है हेटेरोपैटरनल सुपरफेकंडेशन की दुर्लभ प्रक्रिया
चिकित्सा जगत में इस असाधारण स्थिति को ‘हेटेरोपैटरनल सुपरफेकंडेशन’ के नाम से जाना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रक्रिया तब घटित होती है जब किसी महिला के मासिक चक्र के दौरान शरीर से दो अंडे निकलते हैं और वे बहुत ही कम समय के अंतराल में दो अलग-अलग पुरुषों के शुक्राणुओं द्वारा निषेचित हो जाते हैं। दुनिया भर के चिकित्सा इतिहास में अब तक ऐसे 20 से भी कम मामले आधिकारिक रूप से दर्ज किए गए हैं, और ब्रिटेन में वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित यह अपनी तरह का पहला मामला माना जा रहा है।
भावुक कर देने वाला अंत और अटूट रिश्ता
सच्चाई सामने आने का यह सफर भावनात्मक रूप से काफी चुनौतीपूर्ण रहा क्योंकि वर्ष 2022 में जब ये नतीजे आए, उसी दौरान उनकी माँ का निधन हो गया। माँ ने इस रहस्य को पूरी जिंदगी अपने सीने में दबा कर रखा था। बाद में कड़ी मशक्कत के बाद मिशेल ने अपने जैविक पिता एलेक्स और लवीनिया ने अपने पिता आर्थर की पहचान सुनिश्चित की। इस चौंकाने वाले खुलासे के बावजूद दोनों बहनों के आपसी प्रेम में कोई कमी नहीं आई है। उनका मानना है कि वे किसी चमत्कार का हिस्सा हैं और इस सच्चाई ने उनके बीच के जुड़ाव को पहले से कहीं अधिक मजबूत बना दिया है।
क्या पाकिस्तान ने ईरानी विमानों को सुरक्षा दी? रिपोर्ट में दावा
13 May, 2026 04:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद/वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने दक्षिण एशिया की कूटनीति में एक नया उबाल ला दिया है। हालिया चर्चाओं ने इस कयास को हवा दी है कि क्या पाकिस्तान आज से 53 साल पुराने उस एहसान का बदला चुका रहा है, जो ईरान ने 1971 के युद्ध के दौरान उस पर किया था। दावा किया जा रहा है कि ईरान ने अमेरिकी जवाबी कार्रवाई के डर से अपने सैन्य विमानों के बेड़े को पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस पर सुरक्षित ठिकाना दिया है। हालाँकि, पाकिस्तानी प्रशासन ने इन खबरों को पूरी तरह निराधार बताते हुए स्पष्ट किया है कि आबादी के बीच स्थित इस बेस पर विमानों को छिपाना तकनीकी रूप से असंभव है।
1971 का वो दौर जब ईरान बना था पाकिस्तान का रक्षक
यह वर्तमान स्थिति इतिहास के उन पन्नों को पलटती है जब 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान ईरान ने पाकिस्तान की ढाल बनकर मदद की थी। उस समय ईरान के शाह मोहम्मद रजा पहलवी ने संकट की घड़ी में पाकिस्तान के लिए अपने एयरबेस के दरवाजे खोल दिए थे। जब भारतीय वायुसेना की बमबारी से पाकिस्तानी विमानों पर अस्तित्व का संकट मंडरा रहा था, तब ईरान ने न केवल उन्हें शरण दी, बल्कि गुप्त रूप से ईंधन, गोला-बारूद और सैन्य हेलीकॉप्टरों की आपूर्ति भी जारी रखी थी। आज की हलचल को इसी ऐतिहासिक कर्ज की अदायगी के रूप में देखा जा रहा है।
महाशक्तियों के बीच पाकिस्तान का खतरनाक कूटनीतिक संतुलन
ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान की स्थिति एक दोधारी तलवार पर चलने जैसी हो गई है। एक ओर पाकिस्तान चीन के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को गहरा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर वह अमेरिका के साथ अपने पुराने और तनावपूर्ण सैन्य संबंधों को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश में जुटा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरानी विमानों को पनाह देने की बात में थोड़ी भी सच्चाई निकलती है, तो यह पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आत्मघाती कदम साबित हो सकता है। रिपब्लिकन सांसद लिंडसे ग्राहम जैसे अमेरिकी नेताओं ने पहले ही चेतावनी दे दी है कि ऐसी स्थिति में अमेरिका को पाकिस्तान की मध्यस्थ की भूमिका पर पुनर्विचार करना पड़ेगा।
विश्वसनीयता का संकट और बदलती वैश्विक राजनीति
आधी सदी के बाद आज कूटनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं, लेकिन पाकिस्तान के प्रति अमेरिकी संदेह की दीवार अभी भी ऊँची है। ओसामा बिन लादेन के मामले और चरमपंथी समूहों के इतिहास के कारण अमेरिकी सुरक्षा प्रतिष्ठान पाकिस्तान की हर हरकत को शक की निगाह से देखता है। वर्तमान में ईरान अमेरिका का कट्टर दुश्मन है और ऐसे में पाकिस्तान का कथित तौर पर ईरान की मदद करना उसे वैश्विक राजनीति के केंद्र में ला खड़ा करता है। इन दावों ने न केवल दक्षिण एशिया बल्कि मध्य पूर्व की राजनीति में भी नई हलचल पैदा कर दी है, जिससे आने वाले दिनों में कूटनीतिक टकराव बढ़ने के आसार हैं।
सिंगापुर में पर्यावरण और सुरक्षा नियम इतने सख्त, आम पर भी बड़ा जुर्माना
13 May, 2026 03:36 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सिंगापुर सिटी: सिंगापुर अपने कड़े अनुशासन और सार्वजनिक नियमों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है, लेकिन हाल ही में भारतीय मूल की एक महिला की सोशल मीडिया पोस्ट ने इन नियमों की गंभीरता को एक नए स्तर पर लाकर खड़ा कर दिया है। महिला ने चेतावनी देते हुए साझा किया कि इस शहर में सड़क किनारे लगे सरकारी पेड़ों से गिरा हुआ एक आम उठाना भी आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है। इस खुलासे ने न केवल पर्यटकों बल्कि दूसरे देशों में रह रहे लोगों को भी हैरान कर दिया है, क्योंकि वहां प्राकृतिक रूप से गिरे हुए फलों पर भी सरकार का पूर्ण अधिकार होता है।
सरकारी संपत्ति और फलों से जुड़े सख्त कानून
सिंगापुर के कानूनों के मुताबिक, सार्वजनिक स्थानों, पार्कों और सड़कों के किनारे लगे सभी फलदार पेड़ राज्य की संपत्ति माने जाते हैं। महिला ने स्पष्ट किया कि इन पेड़ों से फल तोड़ना तो दूर, जमीन पर गिरे हुए फल को बिना अनुमति उठाना भी अवैध कृत्य की श्रेणी में आता है। नियमों का उल्लंघन करने पर व्यक्ति को भारी आर्थिक दंड का सामना करना पड़ता है। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि सार्वजनिक संसाधनों का प्रबंधन केवल अधिकृत संस्थाओं द्वारा ही किया जाए और शहर की व्यवस्था में किसी भी प्रकार का मानवीय हस्तक्षेप न हो।
भारी जुर्माना और जेल की सजा का प्रावधान
नियमों की सख्ती का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सामान्य सार्वजनिक उद्यानों में बिना अनुमति फल उठाने पर 5,000 सिंगापुर डॉलर (लगभग 3.12 लाख रुपये से अधिक) तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं, यदि कोई व्यक्ति किसी संरक्षित वन क्षेत्र या राष्ट्रीय उद्यान में ऐसी गतिविधि करते हुए पकड़ा जाता है, तो यह दंड और भी कठोर हो जाता है। ऐसी स्थिति में 50,000 सिंगापुर डॉलर तक का जुर्माना और साथ ही 6 महीने तक की जेल की सजा भुगतनी पड़ सकती है। यह कड़े प्रावधान ही सिंगापुर को दुनिया के सबसे अनुशासित देशों की सूची में शीर्ष पर रखते हैं।
सोशल मीडिया पर छिड़ी तुलना और व्यवस्था की चर्चा
इस जानकारी के वायरल होते ही इंटरनेट पर बहस का दौर शुरू हो गया है। विशेषकर भारत में लोग इसकी तुलना अपने यहां की व्यवस्था से कर रहे हैं, जहाँ सड़क किनारे लगे पेड़ों से फल चुनना एक सामान्य और रोजमर्रा की बात मानी जाती है। कुछ यूजर्स ने जहाँ
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