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शांति मिशन बना विवाद, लीबिया मामले में पाकिस्तान पर गंभीर आरोप
8 Jul, 2026 04:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। वैश्विक कूटनीति के मंच पर एक बेहद चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिशों में जुटे पाकिस्तान ने अब उत्तर अफ्रीकी देश लीबिया के गृहयुद्ध को सुलझाने का बीड़ा उठाया है। कर्नल मुअम्मर गद्दाफी के पतन के बाद से दो विरोधी गुटों में बंटे लीबिया में शांति स्थापित करने के लिए पाकिस्तान पर्दे के पीछे से बातचीत को आगे बढ़ा रहा है। हालांकि, पाकिस्तान की इस 'शांतिदूत' वाली भूमिका पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। इस संशय की मुख्य वजह यह है कि दोनों गुटों के बीच मध्यस्थता की इस मेज को सजाने से ऐन पहले, दिसंबर 2025 में पाकिस्तान ने लीबिया के एक बागी सैन्य गुट के साथ 4 अरब डॉलर (करीब 33 हजार करोड़ रुपये) से अधिक के विशाल हथियार सौदे पर दस्तखत किए थे। यह पूरा मामला इसलिए भी विवादों में है क्योंकि साल 2011 से ही संयुक्त राष्ट्र (UN) ने लीबिया पर कड़ा हथियार प्रतिबंध (आर्म्स एम्बारगो) लगा रखा है।
दो फाड़ में बंटा लीबिया और पाकिस्तान का 36 महीनों का 'शांति फॉर्मूला'
लीबिया पिछले कई वर्षों से दो समानांतर सत्ताओं के बीच पिस रहा है। एक तरफ त्रिपोली से चलने वाली संयुक्त राष्ट्र समर्थित पश्चिमी सरकार है, जिसकी कमान प्रधानमंत्री अब्दुलहामिद दबेबाह के हाथों में है। वहीं दूसरी ओर, पूर्वी लीबिया पर ताकतवर सैन्य कमांडर खलीफा हफ्तार का एकछत्र नियंत्रण है। दावों के मुताबिक, इन दोनों विरोधी खेमों ने खुद पाकिस्तान से इस गतिरोध को खत्म करने की अपील की थी। पाकिस्तान ने इसके लिए 36 महीनों का एक विस्तृत राजनीतिक खाका तैयार किया है, जिसके तहत देश में एक नई साझा सरकार का गठन होना है।
इस प्रस्तावित समझौते के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
संयुक्त राष्ट्र से मान्यता प्राप्त पश्चिमी सरकार के प्रमुख अब्दुलहामिद दबेबाह ही देश के प्रधानमंत्री बने रहेंगे।
पूर्वी लीबिया के मिलिट्री कमांडर खलीफा हफ्तार के बेटे, सद्दाम हफ्तार को 'प्रेसिडेंशियल काउंसिल' का नया चेयरमैन नियुक्त किया जाएगा।
चूंकि देश के अधिकांश बड़े तेल कुओं और रणनीतिक ठिकानों पर हफ्तार की सेना का कब्जा है, इसलिए देश के बजट और खजाने की चाबी भी अप्रत्यक्ष रूप से उन्हीं के पास रहेगी।
वाशिंगटन से लेकर रियाद तक, सबको है पाकिस्तान के इस खेल की खबर
हैरानी की बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय नियमों को दरकिनार कर चल रहे पाकिस्तान के इस बैकस्टेज ड्रामे की पूरी जानकारी महाशक्ति अमेरिका को भी है और वह इसमें परोक्ष रूप से भागीदार है। इसके अतिरिक्त, सऊदी अरब, कतर और तुर्की जैसे क्षेत्रीय दिग्गजों का भी इस पूरी कूटनीतिक प्रक्रिया को मौन समर्थन हासिल है। हालांकि, पाकिस्तानी रक्षा अधिकारियों ने प्रतिबंधों के उल्लंघन के आरोपों को सिरे से नकार दिया है। उनका तर्क है कि वे अकेले नहीं हैं, बल्कि दुनिया के कई अन्य देश भी लीबिया के अलग-अलग गुटों को सैन्य और रसद सहायता पहुंचा रहे हैं। इस एंट्री के जरिए इस्लामाबाद न केवल उत्तरी अफ्रीका में अपना रणनीतिक दबदबा बढ़ाना चाहता है, बल्कि खुद को एक बड़े ग्लोबल वेपन सप्लायर के रूप में स्थापित करने की फिराक में भी है।
शांति वार्ता की आड़ में अरबों डॉलर के 'फाइटर जेट' बेचने की दलाली!
इस तथाकथित शांति वार्ता के पीछे छिपे पाकिस्तान के असल आर्थिक और सैन्य हित अब पूरी तरह बेनकाब हो चुके हैं। दिसंबर 2025 में पाकिस्तान ने लीबिया की पूर्वी सेना (हफ्तार गुट) के साथ अपने इतिहास का सबसे बड़ा रक्षा निर्यात समझौता (डिफेंस एक्सपोर्ट डील) फाइनल किया था। 4 अरब डॉलर से अधिक की इस गुप्त डील के तहत पाकिस्तान, चीन की मदद से तैयार किए गए 16 घातक जेएफ-17 (JF-17 Block-III) फाइटर जेट और 12 सुपर मुशशाक ट्रेनर विमान पूर्वी लीबिया की सेना को सौंपने जा रहा है। गौरतलब है कि यह अरबों डॉलर का सौदा पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख (आर्मी चीफ) जनरल असीम मुनीर और खलीफा हफ्तार के बेटे सद्दाम हफ्तार की एक बेहद गोपनीय मुलाकात के बाद पक्का हुआ था, जिससे यह साफ हो गया है कि इस शांति समझौते की दलाली के पीछे पाकिस्तान का असल मकसद सिर्फ और सिर्फ मुनाफा कमाना है।
ग्रीन ट्रांसपोर्ट की नई शुरुआत, हरियाणा में चलेगी देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन
8 Jul, 2026 03:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जींद। भारत में पर्यावरण अनुकूल और अत्याधुनिक यातायात प्रणाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। 'हरित परिवहन मिशन' और 'मेक इन इंडिया' जैसी महत्वाकांक्षी पहलों के अंतर्गत आगामी 17 जुलाई से हरियाणा की धरती पर देश की पहली हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली ट्रेन का विधिवत संचालन शुरू होने जा रहा है। भारतीय रेलवे के इतिहास में मील का पत्थर साबित होने वाली इस अनूठी ट्रेन का भव्य उद्घाटन स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने कर-कमलों द्वारा करेंगे। इस नई शुरुआत से न केवल राज्य में आवागमन सुगम होगा, बल्कि देश में कार्बन उत्सर्जन को कम करने की दिशा में भी एक नया अध्याय जुड़ेगा।
पूर्णतः स्वदेशी तकनीक और चेन्नई की आईसीएफ में हुआ निर्माण
पूरी तरह से भारतीय कौशल और स्वदेशी तकनीकी अनुसंधान पर आधारित इस पर्यावरण-हितैषी ट्रेन की डिजाइनिंग रेलवे की प्रतिष्ठित संस्था 'अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन' द्वारा की गई है। इस अत्याधुनिक ट्रेन के डिब्बों और विशेष इंजन का निर्माण चेन्नई स्थित विश्वप्रसिद्ध 'इंटीग्रल कोच फैक्टरी' में बेहद बारीकी से किया गया है। यह ट्रेन भारतीय इंजीनियरों की कार्यकुशलता और आत्मनिर्भर भारत के बढ़ते कदमों का एक बेजोड़ उदाहरण है, जो अब पटरियों पर दौड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
हजारों यात्रियों की क्षमता और कम स्टेशनों पर ठहराव की व्यवस्था
यह आधुनिक हाइड्रोजन ट्रेन तकनीकी रूप से जितनी उन्नत है, क्षमता के मामले में भी उतनी ही बेजोड़ है। एक बार में दो हजार छह सौ से अधिक सम्मानित यात्रियों को आरामदेह सफर कराने की विशाल क्षमता से लैस यह ट्रेन शुरुआती चरण में जींद और सोनीपत के मध्य चलाई जाएगी। दोनों शहरों के बीच दैनिक यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस पूरे रूट पर महज चार से पांच प्रमुख स्टॉपेज यानी ठहराव निर्धारित किए गए हैं, जिससे यात्रा के समय में उल्लेखनीय बचत होगी।
आम जनता की जेब को राहत देने वाला बेहद किफायती किराया
रेलवे प्रशासन ने इस हाई-टेक और वीआईपी ट्रेन के संचालन के दौरान आम जनता, विशेषकर नौकरीपेशा लोगों और छात्रों के बजट का पूरा ध्यान रखा है। ट्रेन की अत्याधुनिक सुविधाओं के बावजूद इसके किराये को बेहद नॉमिनल और किफायती रखा गया है। जींद से सोनीपत के सफर के लिए यात्रियों को दूरी के हिसाब से मात्र पांच रुपये से लेकर अधिकतम पच्चीस रुपये के बीच का मामूली किराया चुकाना होगा, जो किसी भी अन्य परिवहन माध्यम की तुलना में बेहद सस्ता और आरामदायक साबित होगा।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भारतीय रेलवे का क्रांतिकारी कदम
परंपरागत डीजल इंजनों से निकलने वाले जहरीले धुएं और प्रदूषण से मुक्ति दिलाने में यह हाइड्रोजन ट्रेन एक गेम-चेंजर साबित होने वाली है। यह ट्रेन पूरी तरह से शून्य कार्बन उत्सर्जन के सिद्धांत पर कार्य करती है, क्योंकि इसके इंजन से धुएं के बजाय केवल पानी और वाष्प का उत्सर्जन होता है। इस सफल प्रयोग के बाद भारतीय रेल आने वाले समय में देश के अन्य हिस्सों में भी ऐसी ही ग्रीन ट्रेनों के जाल को फैलाने की योजना पर गंभीरता से काम कर रही है।
ईरान पर ट्रंप का सख्त रुख, कहा- किसी समझौते में नहीं है दिलचस्पी
8 Jul, 2026 03:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चेन्नई। तमिलनाडु के सियासी गलियारों से इस वक्त की एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। मद्रास उच्च न्यायालय (मद्रास हाईकोर्ट) ने राज्य के मुख्यमंत्री और 'तमिलागा वेत्री कड़गम' (TVK) के प्रमुख सी. जोसेफ विजय के साथ-साथ कैबिनेट मंत्री आधाव अर्जुना को एक तगड़ा कानूनी नोटिस जारी किया है। यह नोटिस साल 2026 के विधानसभा चुनाव में इन दोनों नेताओं की जीत को चुनौती देने वाली विभिन्न चुनाव याचिकाओं (इलेक्शन पेटीशन्स) पर सुनवाई के बाद दिया गया है। अदालत ने इस मामले में न केवल दोनों जन-प्रतिनिधियों से, बल्कि भारत निर्वाचन आयोग (ECI) से भी विस्तृत जवाब तलब किया है।
कोर्ट ने याचिकाओं पर की सुनवाई, चुनाव आयोग से भी मांगा जवाब
मद्रास हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन की एकल पीठ ने पेरंबूर, तिरुचिरापल्ली पूर्व और विल्लीवक्कम विधानसभा क्षेत्रों के चुनावी नतीजों के खिलाफ दायर की गई याचिकाओं पर संज्ञान लेते हुए यह कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री विजय और मंत्री अर्जुना की चुनावी जीत के खिलाफ अदालत में कुल छह अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई हैं, जिन्होंने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
मुख्यमंत्री और मंत्री के खिलाफ कुल छह याचिकाएं दर्ज
अदालती दस्तावेजों के अनुसार, सूबे के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के निर्वाचन को अकेले चार याचिकाओं के जरिए चुनौती दी गई है। इनमें से तीन याचिकाएं सीधे पेरंबूर सीट से उनकी जीत के खिलाफ हैं, जिन्हें एस दिनेश, द्रमुक (DMK) के पराजित उम्मीदवार आरडी शेखर और टीएन लक्ष्मी नरसिंहन द्वारा दायर किया गया है। इसके अतिरिक्त, तिरुचिरापल्ली पूर्व विधानसभा क्षेत्र से विजय की जीत को खारिज करने की मांग करते हुए एस इनिगो इररुदयराज ने एक अलग याचिका लगाई है। दूसरी ओर, विल्लीवक्कम सीट से मंत्री आधाव अर्जुना की जीत पर सवाल उठाते हुए आर शिवराज और कार्तिक मोहन ने दो पृथक याचिकाएं अदालत के समक्ष प्रस्तुत की हैं।
चुनाव प्रचार में बच्चों के इस्तेमाल और चुनावी खर्च छिपाने का संगीन आरोप
इन याचिकाओं में मुख्यमंत्री और मंत्री पर बेहद गंभीर आरोप मढ़े गए हैं। याचिकाकर्ताओं का मुख्य आक्षेप यह है कि मुख्यमंत्री विजय ने अपने चुनावी अभियानों में मासूम बच्चों का अनुचित इस्तेमाल किया और साथ ही दोनों नेताओं ने अपने वास्तविक चुनावी खर्च का पूरा ब्योरा प्रशासनिक रिकॉर्ड में छिपाया है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि वोट बटोरने के लिए बच्चों को बकायदा एक सोची-समझी रणनीति के तहत राजनीतिक रैलियों का हिस्सा बनाया गया। इसके प्रमाण के रूप में 21 अप्रैल 2026 को दिए गए मुख्यमंत्री के एक भाषण का विशेष उल्लेख किया गया है, जिसमें उन्होंने मंच से बच्चों को संबोधित करते हुए कहा था कि वे अपने माता-पिता और बुजुर्गों से टीवीके पार्टी के आधिकारिक चुनाव चिन्ह 'सीटी' पर ही बटन दबाने की जिद करें।
निर्वाचन आयोग के कड़े दिशा-निर्देशों की धज्जियां उड़ाने का दावा
कानूनी चुनौती देने वाले पक्षों का साफ कहना है कि नेताओं का यह कृत्य भारत निर्वाचन आयोग द्वारा 5 फरवरी 2024 को जारी किए गए आधिकारिक दिशा-निर्देशों का सीधा और स्पष्ट उल्लंघन है। आयोग के इन नियमों के तहत देश के किसी भी राजनीतिक दल या नेता को अपनी चुनावी रैलियों, जनसभाओं, पोस्टरों या किसी भी प्रकार की प्रचार सामग्री में बच्चों को शामिल करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। इन आरोपों के साथ ही दोनों दिग्गज नेताओं पर अपनी चुनावी लिमिट और खर्च का पारदर्शी ब्योरा न देने का भी केस है, जिसकी अब हाईकोर्ट की चौखट पर गहन कानूनी जांच होनी तय मानी जा रही है।
हरियाणा पुलिस की कार्रवाई, देसी कट्टों के साथ तीन आरोपी दबोचे गए
8 Jul, 2026 02:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुलाना। अवैध हथियारों की तस्करी और उनके इस्तेमाल के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत स्थानीय थाना मुलाना पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए एक गुप्त सूचना के आधार पर भारी मात्रा में अवैध हथियारों के साथ तीन शातिर बदमाशों को रंगे हाथों दबोच लिया है। पकड़े गए आरोपियों के पास से पुलिस को अवैध देसी पिस्टल और कट्टा बरामद हुआ है, जिसे वे किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने या रौब जमाने की नीयत से अपने पास गाड़ी में छिपाकर घूम रहे थे।
एमएम यूनिवर्सिटी के पास नाकेबंदी कर दबोचे गए तीनों कार सवार
पुलिस को एक मुखबिर से पुख्ता सूचना मिली थी कि तंदवाली गांव का रहने वाला सरनजीत सिंह उर्फ सन्नी अवैध असलहा रखने का आदी है और वह इस समय अपने कुछ साथियों के साथ कार में हथियार लेकर घूम रहा है। सूचना में यह भी बताया गया कि आरोपियों की कार इस वक्त महर्षि मार्कंडेश्वर (एमएम) यूनिवर्सिटी के पास सड़क किनारे खड़ी है। इस सटीक जानकारी पर त्वरित कार्रवाई करते हुए मुलाना थाना के पुलिस कर्मियों की एक विशेष टीम ने बताए गए स्थान पर घेराबंदी की, जहां संदिग्ध कार में तीन लोग सवार मिले जिन्हें पुलिस ने चारों तरफ से घेरकर सरेंडर करने पर मजबूर कर दिया।
तलाशी के दौरान शरीर और गाड़ी की सीट के नीचे से मिले हथियार
कार को कब्जे में लेने के बाद जब पुलिस टीम ने सुरक्षा सावधानियों को बरतते हुए आरोपियों की व्यक्तिगत तलाशी शुरू की, तो मुख्य आरोपी सरनजीत सिंह उर्फ सन्नी के पास से एक अवैध देसी पिस्टल बरामद हुई। इसके बाद जब पुलिस ने कार के भीतर गहन छानबीन की, तो चालक (ड्राइवर) की सीट के ठीक नीचे बेहद शातिर तरीके से छिपाकर रखा गया एक और अवैध देसी कट्टा बरामद हुआ। पुलिस ने दोनों घातक हथियारों और कार को मौके पर ही सील कर अपनी कस्टडी में ले लिया।
अवैध हथियार अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच में जुटी पुलिस
पकड़े गए तीनों आरोपियों के खिलाफ मुलाना थाने में आर्म्स एक्ट (अवैध हथियार अधिनियम) की विभिन्न गंभीर और गैर-जमानती धाराओं के तहत आपराधिक मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब इन तीनों बदमाशों को कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे ये अवैध हथियार कहां से खरीद कर लाए थे और इनका इस्तेमाल किस आपराधिक गतिविधि में किया जाना था।
विश्वविद्यालय क्षेत्र में चौकसी और गश्त बढ़ाने के निर्देश
शैक्षणिक संस्थान और विश्वविद्यालय के ठीक बाहर अवैध हथियारों के साथ पकड़े गए इन युवकों के बाद पुलिस प्रशासन बेहद सतर्क हो गया है। स्थानीय थाना प्रभारी ने एमएम यूनिवर्सिटी और उसके आसपास के संवेदनशील इलाकों में पुलिस गश्त और पीसीआर वाहनों की तैनाती को और अधिक बढ़ाने के निर्देश दिए हैं ताकि छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और भविष्य में इस तरह के असामाजिक तत्वों पर समय रहते नकेल कसी जा सके।
पीएम मोदी पहुंचे प्रम्बानन मंदिर, जहां भारत ने निभाई विरासत बचाने में अहम भूमिका
8 Jul, 2026 12:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
योग्याकार्ता (इंडोनेशिया): भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति (Act East Policy) और सांस्कृतिक कूटनीति को वैश्विक पटल पर एक नई मजबूती मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को इंडोनेशिया के जावा द्वीप पर स्थित ऐतिहासिक 'प्रम्बानन मंदिर परिसर' (Prambanan Temple Complex) का दौरा किया। इस दौरान उनके साथ इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो भी विशेष रूप से मौजूद रहे। दोनों राजनेताओं ने संयुक्त रूप से करीब 1000 वर्ष पुराने इस विश्वप्रसिद्ध हिंदू मंदिर परिसर के संरक्षण और पुनर्स्थापना (Restoration) परियोजना की आधिकारिक शुरुआत की। यह कदम दोनों देशों के बीच हजारों साल पुराने सभ्यतागत और सांस्कृतिक संबंधों को और प्रगाढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जा रहा है।
साझा विरासत का जीवंत प्रतीक: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) संभालेगा कमान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रम्बानन मंदिर को दोनों देशों की साझी सांस्कृतिक विरासत का एक अनुपम प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह भव्य स्मारक भारत और इंडोनेशिया के बीच गहरे ऐतिहासिक और जन-संबंधों का जीवंत प्रमाण है। इस द्विपक्षीय समझौते के तहत:
ASI की भूमिका: 'भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण' (Archaeological Survey of India) के विशेषज्ञ यूनेस्को की इस विश्व धरोहर स्थल के भीतर स्थित कई छोटे और क्षतिग्रस्त मंदिरों के वैज्ञानिक जीर्णोद्धार के लिए इंडोनेशियाई अधिकारियों व पुरातत्वविदों के साथ मिलकर जमीनी स्तर पर काम करेंगे।
रणनीतिक महत्व: यह परियोजना न केवल भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को विस्तार देगी, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ भारत के जुड़ाव को एक नया आयाम भी प्रदान करेगी।
'शिवगृह': जानिए प्रम्बानन मंदिर का गौरवशाली इतिहास
प्रम्बानन मंदिर दक्षिण-पूर्व एशिया के सबसे विशाल और महत्वपूर्ण हिंदू स्थापत्य परिसरों में से एक है। इसके इतिहास और बनावट से जुड़ी मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
त्रिमूर्ति को समर्पित: मूल रूप से प्राचीन काल में 'शिवगृह' (शिव का घर) के नाम से विख्यात यह परिसर मुख्य रूप से भगवान शिव, भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु (त्रिमूर्ति) को समर्पित है।
अद्भुत नक्काशी: इस मंदिर की विशाल दीवारों और पत्थरों पर रामायण महाकाव्य के दृश्यों को बेहद बारीक और खूबसूरत नक्काशी के जरिए उकेरा गया है। इसके मुख्य प्रांगण में आज भी पारंपरिक इंडोनेशियाई रामायण नृत्य-नाट्य (Ramayana Ballet) का भव्य मंचन किया जाता है।
शिखर की ऊंचाई: इस परिसर का सबसे मुख्य आकर्षण केंद्र में स्थित 47 मीटर ऊंचा भव्य शिव मंदिर है। इसके उत्तरी छोर पर ब्रह्मा मंदिर और दक्षिणी छोर पर विष्णु मंदिर अपनी शास्त्रीय हिंदू वास्तुकला की भव्यता को प्रदर्शित करते हैं।
आपदाओं की मार और जीर्णोद्धार की चुनौतियां
सदियों के कालखंड में प्रम्बानन मंदिर परिसर को तीव्र भूकंपों, ज्वालामुखी विस्फोटों और क्षेत्रीय राजनीतिक उथल-पुथल के कारण व्यापक क्षति उठानी पड़ी है। हालांकि, साल 1918 से ही पारंपरिक पत्थर जोड़ने की प्राचीन विधाओं और आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों के मिश्रण से इसके जीर्णोद्धार के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। वर्तमान में परिसर की कई सूक्ष्म संरचनाओं को तत्काल वैज्ञानिक संरक्षण की आवश्यकता है। इसकी ऐतिहासिक महत्ता को देखते हुए यूनेस्को (UNESCO) ने इसे विश्व धरोहर स्थल घोषित किया था, जबकि साल 1998 में इसे इंडोनेशिया की 'राष्ट्रीय सांस्कृतिक संपत्ति' का दर्जा दिया गया।
2014 से वैश्विक स्तर पर साझा विरासत बचा रहा है भारत
साल 2014 के बाद से भारत सरकार ने एशियाई देशों में फैली अपनी साझा सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को संरक्षित करने के लिए एक व्यापक वैश्विक अभियान चलाया हुआ है। इंडोनेशिया से पहले भारत कई देशों में इस तरह के सफल संरक्षण प्रोजेक्ट्स का नेतृत्व कर चुका है:
देश
प्रमुख पुनरुद्धार और संरक्षण परियोजनाएं
वियतनाम
यूनेस्को सूचीबद्ध 'माई सन' (My Son) मंदिर परिसर का पुनरुद्धार।
श्रीलंका
ऐतिहासिक 'तिरुकेथीश्वरम' मंदिर का जीर्णोद्धार और संरक्षण।
म्यांमार
बागान पुरातात्विक क्षेत्र में भूकंप से क्षतिग्रस्त हुए प्राचीन स्मारकों की मरम्मत।
नेपाल
भीषण भूकंप के बाद 28 महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर स्थलों का पुनर्निर्माण।
बहरीन व बांग्लादेश
बहरीन के श्रीनाथजी मंदिर और बांग्लादेश के ऐतिहासिक रामना काली मंदिर के पुनर्निर्माण में वित्तीय व तकनीकी सहयोग।
प्रम्बानन मंदिर के पुनरुद्धार की यह नई शुरुआत इसी वैश्विक संरक्षण अभियान की अगली कड़ी है, जो भारत और इंडोनेशिया के मैत्रीपूर्ण संबंधों को एक नए युग में ले जाने का काम करेगी।
भारत-नेपाल व्यापार में तनाव का असर, आयरन-स्टील एक्सपोर्ट घटा
8 Jul, 2026 11:32 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काठमांडू: भारत और नेपाल के बीच चाय के व्यापारिक गतिरोध के शांत होने के बाद अब आयरन और स्टील (लोहा और इस्पात) के निर्यात को लेकर तनाव गहरा गया है। भारत सरकार द्वारा घरेलू बाजार की सुरक्षा के लिए लगाए गए 'सेफगार्ड ड्यूटी' और 'बीआईएस (BIS) गुणवत्ता प्रमाणपत्र' को अनिवार्य करने के फैसले से नेपाल के निर्यात को तगड़ा झटका लगा है। इस कड़े कदम के चलते भारत को होने वाला नेपाल का आयरन और स्टील निर्यात घटकर लगभग एक तिहाई रह गया है। नेपाली उद्योगपतियों का दावा है कि चालू वित्तीय वर्ष के मात्र 11 महीनों में ही उन्हें 10.6 अरब नेपाली रुपये की भारी राजस्व क्षति उठानी पड़ी है। इस गंभीर संकट को देखते हुए वहां के स्टील कारोबारियों ने नेपाल की बालेन सरकार से भारत के साथ उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बातचीत करने की गुहार लगाई है।
मजदूरों की छंटनी का बढ़ा खतरा, और कड़े प्रतिबंधों का डर
नेपाली निर्यातकों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस व्यापारिक मंदी की वजह से नेपाल की बड़ी स्टील कंपनियों के अस्तित्व पर संकट आ गया है और फैक्ट्रियों में काम करने वाले हजारों मजदूरों की नौकरियों पर छंटनी की तलवार लटकने लगी है। इसके अलावा, नेपाली कंपनियों को इस बात का भी डर सता रहा है कि आने वाले दिनों में भारत इस क्षेत्र में और भी कड़े आयात प्रतिबंध लागू कर सकता है। आंकड़ों की बात करें तो पिछले वित्तीय वर्ष के शुरुआती 11 महीनों में नेपाल ने भारत को लोहा और इस्पात बेचकर 15.42 अरब नेपाली रुपये की मोटी कमाई की थी, जो इस वित्तीय वर्ष की समान अवधि में 68.67 फीसदी की भारी गिरावट के साथ मात्र 4.83 अरब नेपाली रुपये पर सिमट कर रह गई है।
चीन की 'डंपिंग' नीति के कारण भारत ने उठाए कड़े कदम
भारत द्वारा उठाए गए इन सख्त कदमों के पीछे एक बड़ा रणनीतिक कारण माना जा रहा है। भारतीय बाजार में ऐसे गंभीर आरोप लगते रहे हैं कि चीन सीधे तौर पर भारत में स्टील डंप करने के बजाय नेपाल और वियतनाम जैसे पड़ोसी देशों के रास्ते अपने सस्ते स्टील को भारतीय बाजारों में खपा (रूटिंग) रहा है। जानकारों का कहना है कि भारत अब स्टील आयात को लेकर अपनी व्यापार नीति को और ज्यादा सख्त करने की तैयारी में है, जिसके तहत विशेष रूप से उन विदेशी उत्पादों को प्रतिबंधित किया जाएगा जिनमें चीनी कच्चे माल (चाइनीज रॉ मटेरियल) का इस्तेमाल किया गया है। भारत के इस संभावित रुख ने नेपाली स्टील सिंडिकेट की रातों की नींद उड़ा दी है।
कम विकसित देश का हवाला देकर 'सेफगार्ड ड्यूटी' को बताया अनैतिक
नेपाली स्टील एसोसिएशन और उद्योगपतियों का तर्क है कि भारत द्वारा उनके उत्पादों पर सेफगार्ड ड्यूटी थपा जाना पूरी तरह से अनैतिक है, क्योंकि नेपाल अभी भी संयुक्त राष्ट्र के नियमों के मुताबिक एक कम विकसित देश (एलडीसी) की श्रेणी में आता है। उनका कहना है कि इस अतिरिक्त टैरिफ के कारण नेपाल में स्टील का उत्पादन और भारत को होने वाला निर्यात दोनों औंधे मुंह गिर चुके हैं। गौरतलब है कि नेपाल हर साल भारत को करीब 1,45,932 टन लोहा और स्टील उत्पाद भेजता है, जिसकी कुल बाजार वैल्यू 16.35 अरब नेपाली रुपये के आसपास होती है।
चाय विवाद की तर्ज पर बालेन सरकार से हस्तक्षेप की मांग
संकट में घिरे नेपाली उद्योगपतियों ने अब काठमांडू की बालेन सरकार पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है कि वह नई दिल्ली से संपर्क साधे और नेपाली आयरन व स्टील उत्पादों पर से इस दंडात्मक ड्यूटी को हटाने के लिए कूटनीतिक बातचीत का रास्ता तलाशे। कारोबारियों को उम्मीद है कि जिस तरह इससे पहले दोनों देशों के बीच नेपाली चाय के आयात को लेकर बड़ा विवाद हुआ था और बालेन सरकार के आधिकारिक अनुरोध के बाद भारत ने लचीला रुख अपनाते हुए नेपाल को विशेष छूट दे दी थी, ठीक उसी तर्ज पर इस बार भी बातचीत के जरिए कोई बीच का रास्ता निकाला जा सकता है।
इंडोनेशियाई राष्ट्रपति का बयान चर्चा में, बोले- राजनीति से दूर रहना चाहता हूं, पर...
8 Jul, 2026 11:27 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जकार्ता: भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान दोनों देशों के राजनयिक संबंधों में एक बेहद अनूठी और ऐतिहासिक गर्मजोशी देखने को मिली है। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने प्रधानमंत्री मोदी और भारतीय संस्कृति के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त की है। जकार्ता में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति सुबियांतो ने खुले मंच से प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी में कहा कि वह भारत की घरेलू राजनीति में नहीं पड़ना चाहते, लेकिन वह व्यक्तिगत तौर पर नरेंद्र मोदी के बहुत बड़े प्रशंसक हैं। उन्होंने अपने मंत्रियों और करीबी सहयोगियों की तरफ इशारा करते हुए कहा कि इस बात के वे सभी गवाह हैं। इंडोनेशियाई राष्ट्रपति के इस आदरपूर्ण बयान का प्रधानमंत्री मोदी ने मंच के सामने खड़े होकर हाथ जोड़कर और मुस्कुराते हुए अभिवादन किया।
इंडोनेशिया की भाषा और नामों में है 50 प्रतिशत संस्कृत का असर
अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रपति सुबियांतो ने इंडोनेशिया के नागरिकों से अपील की कि वे भारत के विकास और अनुभवों से सीख लें। उन्होंने दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत ने इंडोनेशिया की सभ्यता, संस्कृति और जीवनशैली को बहुत गहराई से प्रभावित किया है। उन्होंने एक बेहद खास बात साझा करते हुए बताया कि इंडोनेशिया की स्थानीय भाषा के लगभग 50 प्रतिशत शब्द सीधे संस्कृत से आए हैं और आज भी इंडोनेशिया में कई लोगों के नाम संस्कृत मूल के ही होते हैं, जो दोनों देशों के बीच की अटूट सांस्कृतिक निकटता को दर्शाता है। इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रपति का पदभार संभालने के महज तीन महीने बाद, साल 2025 में भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होने को अपने जीवन का एक बड़ा सम्मान बताया।
साझा विरासत और आपसी भरोसे से बना है हमारा डीएनए: पीएम मोदी
इंडोनेशियाई राष्ट्रपति की तरफ से आई 'भारतीय डीएनए' संबंधी टिप्पणी का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेहद आत्मीयता से जवाब दिया। पीएम मोदी ने कहा कि इंडोनेशियाई राष्ट्रपति के इन शब्दों ने करोड़ों भारतवासियों के दिलों को गहराई से छू लिया है। उन्होंने संबंधों को परिभाषित करते हुए कहा कि यह साझा डीएनए असल में दोनों देशों के आपसी अटूट विश्वास, पुरानी विरासत और खूबसूरत साझा स्मृतियों के ताने-बाने से मिलकर बना है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी की इस तीन दिवसीय विदेश यात्रा का इंडोनेशिया पहला पड़ाव है, जिसके बाद वे ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के दौरे पर रवाना होंगे। इस द्विपक्षीय यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं, जिसमें भारत को ब्रह्मोस मिसाइल निर्यात के मामले में एक बहुत बड़ी रक्षा डील हासिल हुई है, जो रणनीतिक क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर साबित होगी।
जीनोम टेस्ट में हुआ खुलासा, बोले- भारतीय संगीत सुनते ही थिरकने लगते हैं पैर
संबोधन के दौरान सबसे दिलचस्प और अनूठा वाकया तब सामने आया, जब राष्ट्रपति सुबियांतो ने अपनी रगों में भारतीय अंश होने का एक वैज्ञानिक दावा पेश किया। उन्होंने हल्के-फुल्के और मजाकिया अंदाज में बताया कि अपनी भारत यात्रा पर जाने से ठीक पहले उन्होंने अपना जीनोम सीक्वेंसिंग टेस्ट (DNA टेस्ट) कराया था, जिसकी रिपोर्ट में उनके भीतर भारतीय डीएनए के पुख्ता अंश पाए गए हैं। उन्होंने हंसते हुए कहा कि शायद यही वजह है कि जब भी वह कोई भारतीय संगीत सुनते हैं, तो उनके पैर अपने आप थिरकने लगते हैं। उन्होंने अपने मंत्रियों और जनरलों की तरफ मुस्कुराते हुए देखा और कहा कि उनकी तरह उनके ये अधिकारी भी नाचने-गाने के बेहद शौकीन हैं और मुमकिन है कि जांच कराई जाए तो इनमें से भी ज्यादातर के डीएनए में भारतीय अंश निकल आए।
पाकिस्तान के विमान से संपर्क टूटा, अरब सागर में तलाश जारी
8 Jul, 2026 11:23 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कराची: पाकिस्तान का एक मालवाहक (कार्गो) विमान मंगलवार रात को रहस्यमयी परिस्थितियों में लापता हो गया, जिससे विमानन जगत में हड़कंप मच गया है। इस बोइंग 737-400 विमान में चालक दल (क्रू) के पांच सदस्य सवार थे। यह मालवाहक जहाज संयुक्त अरब अमीरात के शारजाह से कराची की ओर आ रहा था, तभी बीच रास्ते में इसके नेविगेशन सिस्टम में तकनीकी खराबी आ गई और एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से इसका संपर्क पूरी तरह टूट गया। शुरुआती सैटेलाइट आंकड़ों और फ्लाइट ट्रैकिंग इनपुट के आधार पर आशंका जताई जा रही है कि विमान कराची के दक्षिण-पश्चिम में स्थित अरब सागर में क्रैश हो गया है। इस आपातकालीन स्थिति को देखते हुए समंदर में बेहद बड़े पैमाने पर तलाशी और बचाव अभियान (सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन) शुरू कर दिया गया है।
उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों बाद रडार से गायब हुआ विमान
पाकिस्तान एयरपोर्ट्स अथॉरिटी द्वारा जारी आधिकारिक विवरण के मुताबिक, विमान ने पाकिस्तानी समयानुसार रात 9:18 बजे कराची एटीसी को अपने नेविगेशन सिस्टम में खराबी आने की आपातकालीन सूचना दी थी। स्थानीय एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स ने मुस्तैदी दिखाते हुए विमान को रेडियो गाइडेंस देने का प्रयास किया, लेकिन इस अलर्ट के ठीक तीन मिनट बाद ही रडार स्क्रीन पर विमान की ऊंचाई बेहद तेजी से गिरती हुई दर्ज की गई और उसका संचार तंत्र पूरी तरह ब्लैकआउट हो गया। अथॉरिटी के बयान के अनुसार, जिस वक्त संपर्क टूटा, उस समय फ्लाइट कराची से लगभग 155 समुद्री मील (करीब 287 किलोमीटर) पश्चिम में बलूचिस्तान के ओरमारा तटीय इलाके के पास अरब सागर के ऊपर उड़ रही थी।
फ्लाइटराडार 24 के डेटा में भयावह गिरावट के संकेत
अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट-ट्रैकिंग सर्विस 'फ्लाइटराडार 24' (Flightradar24) के शुरुआती तकनीकी विश्लेषण से पता चला है कि ओशनिक एयरस्पेस में रहने के दौरान विमान की ऊंचाई और गति में अचानक बेहद असामान्य बदलाव आए। डेटा के मुताबिक, विमान ने पहले अपनी ऊंचाई खोई, फिर कुछ पलों के लिए ऊपर उठने की कोशिश की और उसके तुरंत बाद सीधे समंदर की तरफ बेहद तेज गति से गोता खाने लगा। रडार द्वारा कैप्चर किए गए आखिरी डेटा पॉइंट के अनुसार, विमान समुद्र तल से महज 1,100 फीट की ऊंचाई पर रह गया था और वह माइनस 22,400 फीट प्रति मिनट की अकल्पनीय और भयावह रफ्तार से नीचे क्रैश हो रहा था, जो विमान पर से पायलटों का नियंत्रण पूरी तरह खो जाने का पुख्ता संकेत है।
के2 एयरवेज का इकलौता और 27 साल पुराना था यह एयरक्राफ्ट
हादसे का शिकार हुआ यह विमान पाकिस्तान में रजिस्टर्ड एक बोइंग 737-400 (कन्वर्टेड फ्रेटर) एयरक्राफ्ट था। करीब 27 साल पुराने इस विमान को वर्तमान में मालवाहक के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था। यह विमान पाकिस्तान की निजी विमानन कंपनी 'के2 एयरवेज' (K2 Airways) का इकलौता एयरक्राफ्ट था, जिसने साल 2024 में ही इस एयरलाइन के बेड़े में शामिल होकर अपनी व्यावसायिक सेवाएं शुरू की थीं। एविएशन रिकॉर्ड्स के मुताबिक, साल 1999 में रूस की 'एयरोफ्लोट एयरलाइंस' के साथ एक यात्री विमान (पैसेंजर प्लेन) के रूप में इसने अपने करियर की शुरुआत की थी, जिसे बाद में साल 2012 में पूरी तरह मालवाहक विमान में तब्दील कर दिया गया था।
समंदर में बचाव अभियान शुरू, एयरलाइन और बोइंग साधे हैं चुप्पी
लापता विमान और उसमें सवार चालक दल के पांच सदस्यों को खोजने के लिए पाकिस्तान एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ने नौसेना, कोस्ट गार्ड और अन्य समुद्री सुरक्षा एजेंसियों को मिलाकर एक संयुक्त और समन्वित रेस्क्यू ऑपरेशन अरब सागर में लॉन्च कर दिया है। रात के अंधेरे और समंदर की लहरों के बीच मलबे और क्रू मेंबर्स की तलाश की जा रही है। इस बीच, इतनी बड़ी विमानन त्रासदी और रहस्यमयी ढंग से गायब होने की इस घटना पर फिलहाल विमान संचालक कंपनी के2 एयरवेज और विमान निर्माता कंपनी बोइंग (Boeing) की तरफ से कोई भी आधिकारिक प्रतिक्रिया या बयान सामने नहीं आया है।
चानौत आंदोलन में बढ़ेगा गांवों का काफिला, 26 गांवों की भागीदारी तय
8 Jul, 2026 10:29 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जींद। हरियाणा के चानौत गांव में पीने के पानी की गंभीर किल्लत को लेकर चल रहा जन आंदोलन अब महाआंदोलन का रूप धारण करने जा रहा है। पेयजल संकट से जूझ रहे ग्रामीणों के इस धरने को और अधिक व्यापक बनाने के लिए आंदोलनकारी अब आसपास के अन्य गांवों को भी इस मुहिम से जोड़ने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। धरना कमेटी ने आंदोलन को लंबे समय तक जारी रखने के लिए आगामी 168 दिनों की एक विस्तृत और ठोस रूपरेखा तैयार कर ली है। आंदोलन के 53वें दिन सुबह से ही भारी संख्या में ग्रामीण धरनास्थल पर जमा होने शुरू हो गए थे, जहां सर्वसम्मति से आंदोलन की भावी दिशा तय की गई।
रोघी और बूरा खाप के छब्बीस गांवों का मिला खुला समर्थन
चानौत गांव के इस हक की लड़ाई को धरातल पर और अधिक मजबूती प्रदान करने के लिए क्षेत्र की प्रतिष्ठित रोघी और बूरा खाप आगे आई हैं। इन दोनों खापों के तहत आने वाले 26 गांवों ने इस जन आंदोलन में सहयोगी की भूमिका निभाने का आधिकारिक एलान कर दिया है। खाप के फैसले के अनुसार, हालांकि ये सभी 26 गांव आंदोलन को सफल बनाने के लिए हर संभव सहयोग देंगे, लेकिन आंदोलन से जुड़े तमाम नीतिगत और महत्वपूर्ण फैसलों को लेने की मुख्य कमान पहले की तरह चानौत धरना कमेटी के हाथों में ही सुरक्षित रहेगी।
छह महीने की क्रमिक रणनीति से आंदोलन को मिलेगी नई धार
धरना कमेटी के प्रमुख सदस्य अनूप चानौत ने बैठक के बाद आगामी रूपरेखा की जानकारी साझा करते हुए बताया कि आंदोलन को निरंतर गति देने के लिए एक क्रमिक चक्र तैयार किया गया है। तय रणनीति के मुताबिक, समर्थन देने वाले 26 गांवों में से प्रत्येक गांव से हर दिन 20 से 30 ग्रामीण बारी-बारी से चानौत पहुंचकर धरने पर बैठेंगे। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक रविवार को कोई एक निर्धारित गांव अपनी पूरी 36 बिरादरी के साथ सामूहिक रूप से चानौत पहुंचेगा। इस प्रकार अगले 26 रविवारों का पूरा शेड्यूल पहले से ही तय कर दिया गया है, जिससे यह आंदोलन बिना रुके अगले छह महीनों तक पूरी ऊर्जा के साथ चलता रहेगा।
प्रधानमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम में पानी की मांग उठाने की तैयारी
ग्रामीणों ने अपने इस स्थानीय मुद्दे को राष्ट्रीय पटल पर ले जाने के लिए आगामी 17 जुलाई को जींद में प्रस्तावित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम के दौरान पुरजोर तरीके से आवाज उठाने का फैसला किया है। आंदोलनकारी प्रधानमंत्री के इस दौरे के समय टी-कनेक्शन के माध्यम से चानौत और आसपास के क्षेत्रों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की अपनी मुख्य मांग को प्रमुखता से उठाएंगे। इस मांग को मजबूती देने के लिए समूचे उत्तर भारत की प्रमुख खापों, विभिन्न सामाजिक संगठनों और किसान यूनियनों को भी इस महारैली और प्रदर्शन का हिस्सा बनाने की व्यापक तैयारी की जा रही है।
दस जुलाई को चानौत में होगी महापंचायत और आगामी बैठक
प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के दौरान अपनी आवाज बुलंद करने और रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए धरना कमेटी ने आगामी 10 जुलाई को चानौत गांव में एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक और महापंचायत बुलाई है। इस बैठक में रोघी व बूरा खाप के प्रतिनिधियों के साथ-साथ उत्तर भारत के अन्य सामाजिक संगठनों के प्रमुख पदाधिकारी भी शिरकत करेंगे। इस महापंचायत में न केवल 17 जुलाई के प्रदर्शन की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया जाएगा, बल्कि शासन और प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए आगे की रणनीतिक घोषणाएं भी की जाएंगी ताकि ग्रामीणों को जल्द से जल्द पानी का हक मिल सके।
होर्मुज जलडमरूमध्य में हमला, भारत की नजर आधिकारिक जानकारी पर
8 Jul, 2026 09:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दोहा: होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रैट ऑफ होर्मुज) के पास कतर के एक विशाल एलएनजी टैंकर जहाज 'अल रकियात' पर संदिग्ध ड्रोन से हमला होने की गंभीर खबर सामने आई है। यह जहाज कतर के रास लफ्फान बंदरगाह से भारत में गुजरात के दहेज बंदरगाह की ओर जा रहा था, तभी ओमान की खाड़ी और अरब सागर के मिलन बिंदु के पास इस वारदात को अंजाम दिया गया। इस हमले के बाद कतर सरकार ने बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है और सीधे तौर पर ईरान के सामने अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
कतर ने जताई कड़ी आपत्ति और हमले की निंदा की
इस सुरक्षा चूक और हमले पर कतर के विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की है। कतर का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग पर इस तरह एक कमर्शियल टैंकर को निशाना बनाया जाना बेहद निंदनीय और चिंताजनक है। कतर ने इसे अंतरराष्ट्रीय नौवहन (नेविगेशन) सुरक्षा कानूनों का एक गंभीर और स्पष्ट उल्लंघन माना है। इसके साथ ही चेतावनी दी गई है कि इस तरह की हिंसक हरकतों से पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था (ग्लोबल एनर्जी सप्लाई) के लिए एक बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
ईरानी उप-राजदूत को तलब कर सौंपा विरोध पत्र
मामले की गंभीरता को देखते हुए कतर के विदेश मंत्रालय ने कतर में तैनात ईरान के उप-राजदूत मोहसेन मोहम्मद घनेई को मुख्यालय में तलब किया। यहाँ प्रोटोकॉल विभाग के निदेशक इब्राहिम बिन यूसुफ ने उन्हें एक औपचारिक विरोध पत्र सौंपा। कतर ने ईरानी राजनयिक के सामने दो टूक शब्दों में कहा कि वे क्षेत्र की शांति और सुरक्षा को खतरे में डालने वाली तमाम गतिविधियों पर तुरंत रोक लगाएं। कतर ने ईरान से मांग की है कि वह वैश्विक ऊर्जा सप्लाई और समुद्री जहाजों की सुरक्षा को दांव पर लगाने जैसी हरकतों से पूरी तरह दूरी बनाए रखे।
कतर उठाएगा अपनी सुरक्षा के लिए कड़े कदम
इस पूरी घटना के बाद कतर ने दुनिया के सामने अपनी स्थिति साफ कर दी है कि वह मूकदर्शक बनकर नहीं बैठेगा। उसने स्पष्ट किया है कि अपनी संपत्तियों और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए वह अंतरराष्ट्रीय कानूनों के दायरे में रहकर कोई भी उचित कदम उठाने के अपने अधिकार का पूरा इस्तेमाल करेगा। कतर ने इस ड्रोन हमले को लेकर ईरान से तुरंत स्पष्टीकरण देने को कहा है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय नियमों का पूरी तरह पालन करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।
अल्ट्रावायलेट रोशनी से सामने आई प्राचीन मगरमच्छ की अनोखी कहानी
8 Jul, 2026 09:27 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मैड्रिड: स्पेन के एक संग्रहालय में एक सदी से भी अधिक समय से धूल फांक रहा एक जीवाश्म आधुनिक विज्ञान की मदद से 12.5 करोड़ वर्ष पुराने मगरमच्छ का सबसे बड़ा रहस्योद्घाटन बनकर उभरा है। वैज्ञानिकों ने अल्ट्रावायलेट (UV) लाइट तकनीक के जरिए इस प्रागैतिहासिक जीव के उन रहस्यों को उजागर किया है, जो सामान्य रोशनी में इंसानी आंखों को कभी दिखाई नहीं दे सकते थे। इस तकनीक की मदद से जीवाश्म में त्वचा, रंग के पैटर्न और बेहद महीन नरम ऊतकों (सॉफ्ट टिश्यूज) के निशान ढूंढ निकाले गए हैं। यह खोज प्राचीन सरीसृपों के क्रमिक विकास, उनकी शारीरिक बनावट और जीवनशैली को समझने की दिशा में एक क्रांतिकारी मोड़ साबित हो सकती है।
1902 में खदान से मिला था जीवाश्म, म्यूजियम में रहा उपेक्षित
इस ऐतिहासिक जीवाश्म की खोज का इतिहास बेहद दिलचस्प है। इसे साल 1902 में प्रसिद्ध भूवैज्ञानिक लुइस मारिया विडाल ने स्पेन के कैटेलोनिया क्षेत्र के नोगुएरा इलाके में स्थित एक चूना पत्थर की खदान से खोदकर निकाला था। शुरुआती दौर में इसका अध्ययन करने के बाद इसे एक बिल्कुल नई और अलग प्रजाति के रूप में वर्गीकृत किया गया। हालांकि, शुरुआती अध्ययनों के बाद यह जीवाश्म दशकों तक संग्रहालय के एक कोने में सुरक्षित रखा रहा। लंबे समय तक वैज्ञानिकों का यही मानना था कि इस पत्थर हो चुके अवशेष से अब और कोई नई वैज्ञानिक जानकारी हासिल नहीं की जा सकती। लेकिन हाल ही में 'कैटलन इंस्टीट्यूट ऑफ पेलियोन्टोलॉजी' के जीवाश्म वैज्ञानिकों ने इसे आधुनिक तकनीकों के तराजू पर दोबारा तौलने का फैसला किया, जिसने पूरी कहानी ही बदल दी।
यूवी प्रकाश पड़ते ही चमक उठे करोड़ों साल पुराने शल्क और नाखून
जब शोधकर्ताओं की टीम ने इस जीवाश्म पर अल्ट्रावायलेट (UV) प्रकाश डाला, तो चूना पत्थर की परतों के भीतर छिपे जैविक संरचनाओं के निशान जादुई रूप से चमक उठे। इस रोशनी में प्राचीन मगरमच्छ के शरीर, पैरों, छाती और पूंछ पर मौजूद त्वचा के कई हिस्से पूरी तरह सुरक्षित पाए गए। जीवाश्म में छोटे और गोल आकार के शल्क (स्केल्स) साफ तौर पर उभर कर सामने आए। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि मगरमच्छ के कुछ पंजों पर नाखूनों को सुरक्षित रखने वाला कठोर प्राकृतिक आवरण (शीथ) भी जस का तस मिला। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह दुनिया भर में मगरमच्छ की त्वचा का अब तक का सबसे प्राचीन और सबसे बेहतर तरीके से संरक्षित उदाहरण है।
आधुनिक मगरमच्छों से मेल खाती है पूंछ, पर शरीर था अधिक चिकना
इस हाई-टेक अध्ययन से यह साफ हुआ है कि प्राचीन मगरमच्छ की पूंछ पर मौजूद शल्कों की बनावट आज के मगरमच्छों से काफी हद तक मेल खाती थी। इससे यह वैज्ञानिक निष्कर्ष निकलता है कि करोड़ों वर्षों के विकासक्रम के बावजूद मगरमच्छों की त्वचा के मूल ढांचे में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं आया है। हालांकि, शोध में कुछ बुनियादी अंतर भी देखे गए हैं। इस आदिम प्रजाति की पूंछ पर आज के मगरमच्छों की तरह उभरी हुई नुकीली धारियां नहीं थीं और न ही इसके पैरों पर बहुत कठोर सुरक्षात्मक कवच था। इन लक्षणों को देखकर वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इसका शरीर आज के मगरमच्छों की तुलना में काफी चिकना, सुव्यवस्थित और हल्का था, जो उसे पानी या जमीन पर तेजी से गति करने में मदद करता था।
प्राचीन संवेदी अंग और पक्षियों जैसी श्वसन प्रणाली का खुलासा
वैज्ञानिकों ने यूवी लाइट की मदद से इस जीव के शरीर के किनारों पर कुछ विशेष प्रकार के सूक्ष्म शल्क भी खोजे हैं, जिन्हें बेहद संवेदनशील संवेदी अंग (सेंसरी ऑर्गन्स) माना जा रहा है। आधुनिक समय के मगरमच्छ भी इन्हीं संवेदी अंगों की बदौलत पानी में होने वाली मामूली हलचल और दबाव के अंतर को भांपकर अपने शिकार की सटीक लोकेशन का पता लगाते हैं। इस खोज से प्रमाणित होता है कि शिकार ढूंढने की यह अद्भुत क्षमता इन जीवों में करोड़ों साल पहले ही विकसित हो चुकी थी। इसके अतिरिक्त, पसलियों के पास कुछ ऐसी कार्टिलेज संरचनाएं मिली हैं जो आधुनिक पक्षियों में पाई जाने वाली 'अनसिनेट प्रोसेस' (श्वसन सहायक प्रणाली) जैसी हैं। यह इस बात का पुख्ता संकेत है कि यह प्राचीन मगरमच्छ आज के सुस्त मगरमच्छों के मुकाबले कहीं अधिक फुर्तीला और सक्रिय जीवन जीता था।
करोड़ों साल पुराने रंगों और धारियों के पैटर्न का पहला सबूत
इस शोध का एक और सबसे रोमांचक पहलू यह है कि पराबैंगनी किरणों के प्रभाव से मगरमच्छ की पूंछ पर हल्के और गहरे रंगों के शेड्स दिखाई दिए हैं। वैज्ञानिक इन्हें शरीर पर पाई जाने वाली सुरक्षात्मक धारियों (कैमॉफ्लाज स्ट्रिप्स) का अवशेष मान रहे हैं। यह पूरे सरीसृप वर्ग के इतिहास में शरीर के रंग और पैटर्न का दुनिया के सामने आया अब तक का सबसे पुराना और प्रामाणिक प्रमाण है। हालांकि, वैज्ञानिक अभी भी इसके वास्तविक त्वचा के रंग को पूरी तरह डिकोड नहीं कर पाए हैं, लेकिन उनका दृढ़ विश्वास है कि इसकी रंगत और बाहरी रूप-रंग आज के मगरमच्छों के प्राकृतिक परिवेश से बहुत अलग नहीं रहा होगा।
दिशा कमेटी की बैठक में तीखी नोकझोंक, नाराज होकर उठे कार्तिकेय शर्मा
7 Jul, 2026 04:07 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अंबाला। जिला मुख्यालय पर आयोजित जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की महत्वपूर्ण बैठक में उस समय जबरदस्त हंगामा हो गया, जब राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा प्रशासनिक अधिकारियों के ढुलमुल रवैये पर पूरी तरह बिफर पड़े। सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS) के तहत जनहित में अनुशंसित विकास कार्यों को प्रशासन द्वारा बार-बार नामंजूर किए जाने से क्षुब्ध होकर कार्तिकेय शर्मा ने तीखा विरोध दर्ज कराया और बैठक का बीच में ही बहिष्कार कर बाहर निकल गए।
प्रशासनिक अनदेखी से नाराज राज्यसभा सांसद ने बीच में छोड़ी बैठक
समीक्षा बैठक के दौरान जैसे ही लंबित विकास कार्यों का मुद्दा उठा, राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा ने प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि आम जनता से जुड़े विकास कार्यों की फाइलों को जानबूझकर लटकाया जा रहा है और बेवजह तकनीकी अड़चनें पैदा की जा रही हैं। तल्ख तेवरों में अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए सांसद ने कहा कि यदि उनके द्वारा भेजे गए जनहित के प्रस्तावों को इसी तरह खारिज ही किया जाना है, तो ऐसी बैठकों में शामिल होने का कोई औचित्य नहीं रह जाता है। अपनी बात रखने के तुरंत बाद वे कड़ा विरोध जताते हुए सदन से उठकर चले गए।
अंबाला लोकसभा सांसद ने भी दर्ज कराया विरोध, मिला खुला समर्थन
इस हाई-प्रोफाइल ड्रामे के बीच राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा की नाराजगी को अंबाला के लोकसभा सांसद वरुण चौधरी का भी पुरजोर साथ मिला। वरुण चौधरी ने भी जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करते हुए अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जनप्रतिनिधियों द्वारा अनुशंसित विकास कार्यों को बेवजह अटकाना लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनभावनाओं के खिलाफ है। लोकसभा सांसद ने अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि केवल राज्यसभा सांसद ही नहीं, बल्कि उनके क्षेत्र के लिए प्रस्तावित कई कल्याणकारी योजनाओं की फाइलें भी सरकारी दफ्तरों में धूल फांक रही हैं।
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के टकराव से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप
दोनों वरिष्ठ सांसदों के इस सख्त और आक्रामक रुख के चलते बैठक कक्ष में सन्नाटा पसर गया और वहां मौजूद प्रशासनिक अमले में खलबली मच गई। सांसदों द्वारा सामूहिक रूप से नाराजगी जताए जाने और बैठक का वॉकआउट करने से जिला प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। विकास योजनाओं को लेकर जनप्रतिनिधियों और नौकरशाही के बीच खुलकर सामने आया यह गतिरोध अब क्षेत्र के राजनीतिक गलियारों में गरमागरम बहस और चर्चा का मुख्य केंद्र बन गया है।
जकार्ता में पीएम मोदी का संबोधन, द्विपक्षीय रिश्तों को बताया नई ऊंचाइयों की ओर
7 Jul, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जकार्ता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने इंडोनेशिया दौरे के दौरान वहां की संसद को संबोधित करते हुए स्थानीय जनता के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया है। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने भावुक होते हुए कहा कि इंडोनेशिया के नागरिकों, यहां के बच्चों, महिलाओं और ऊर्जावान युवाओं ने इस ऐतिहासिक दिन को उनके जीवन के सबसे अविस्मरणीय और यादगार दिनों में से एक बना दिया है।
भावुक संबोधन और भव्य स्वागत का जिक्र
प्रधानमंत्री ने इंडोनेशियाई संसद के मंच से सुबह हुए अपने भव्य स्वागत का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज सुबह इंडोनेशिया की सरजमीं पर कदम रखने के बाद वहां के लोगों ने जिस गर्मजोशी, आत्मीयता और अगाध प्रेम के साथ उनका स्वागत-सत्कार किया है, उसे वे अपने जीवन में कभी नहीं भूल सकते। पीएम मोदी का यह बयान दोनों देशों के बीच मजबूत होते सांस्कृतिक और कूटनीतिक रिश्तों को रेखांकित करता है।
हांसी में पानी विवाद मामले में पूर्व सरपंच सोमेश पुलिस गिरफ्त में
7 Jul, 2026 02:35 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हांसी। चानौत गांव में पिछले कई दिनों से गहराए पेयजल संकट और ग्रामीणों के उग्र होते आंदोलन के बीच हांसी सदर थाना पुलिस ने एक बड़ी दंडात्मक कार्रवाई को अंजाम दिया है। पुलिस ने इस पूरे विवाद में मुख्य रूप से नामजद किए गए आरोपी और इलाके में 'टीमैन' के नाम से मशहूर पूर्व सरपंच सोमेश को गिरफ्तार कर लिया है। चानौत में बुनियादी हक और पानी की आपूर्ति को लेकर ग्रामीणों का प्रदर्शन लंबे समय से जारी था, लेकिन इसी दौरान हुए बहुचर्चित 'टी प्रकरण' में पूर्व सरपंच सोमेश की संलिप्तता और भूमिका प्रमुखता से उजागर होने के बाद पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए यह बड़ा एक्शन लिया है।
पीने के पानी की किल्लत पर आमने-सामने ग्रामीण और प्रशासन
चानौत गांव में पीने के स्वच्छ पानी की भारी किल्लत के चलते पिछले काफी समय से स्थानीय नागरिकों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच गतिरोध बना हुआ है। अपनी जायज और बुनियादी मांगों को लेकर गांव के लोग लगातार धरने पर बैठे हुए हैं। शांतिपूर्ण चल रहे इस आंदोलन के बीच अचानक एक नया विवाद खड़ा हो गया, जिसने देखते ही देखते बड़ा तूल पकड़ लिया और स्थानीय स्तर पर इसे 'टी प्रकरण' का नाम दिया गया। इस घटनाक्रम के बाद इलाके में तनाव और अधिक बढ़ गया था।
ठोस सबूतों के आधार पर पूर्व सरपंच सोमेश हिरासत में
'टी प्रकरण' के सामने आने के बाद हांसी सदर थाना पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी सघन तफ्तीश शुरू कर दी थी। पुलिस टीम ने घटनास्थल से मिले पुख्ता गवाहों, तकनीकी साक्ष्यों और गहन जांच-पड़ताल के आधार पर पूर्व सरपंच सोमेश को उनके ठिकाने से दबोच लिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी से पूछताछ की जा रही है ताकि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे की कड़ियों को पूरी तरह स्पष्ट किया जा सके।
आंदोलन के बीच पुलिसिया कार्रवाई से बढ़ा सियासी तापमान
इस गिरफ्तारी के बाद चानौत गांव और आस-पास के राजनीतिक तथा सामाजिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। एक तरफ जहां ग्रामीण अब भी पानी के संकट को दूर करने की मांग पर अड़े हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ 'टीमैन' की गिरफ्तारी ने इस पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया है। सदर थाना पुलिस का कहना है कि क्षेत्र में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं और किसी को भी शांति भंग करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
भिवानी में युवक को मारने की कोशिश, पीठ से छूकर निकली गोली; आरोपी का आपराधिक रिकॉर्ड सामने आया
7 Jul, 2026 12:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भिवानी। हरियाणा के भिवानी जिले के अंतर्गत आने वाले गांव दांग कलां में सोमवार की रात करीब 8 बजे पुरानी दुश्मनी के चलते ताबड़तोड़ फायरिंग का एक सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। हमलावरों ने गांव के ही एक युवक को निशाना बनाकर गोलियां चलाईं, जिसमें से एक गोली उसकी पीठ को रगड़ती हुई निकल गई। हमले में बाल-बाल बचे घायल युवक, जिसका नाम मिंटू उर्फ लारा है, को तुरंत इलाज के लिए भिवानी के जिला नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वारदात की भनक लगते ही तोशाम थाना पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए फौरन घटना स्थल का मुआयना किया और अस्पताल पहुंचकर पीड़ित के बयान दर्ज किए।
डेढ़ महीने पुराने विवाद में पीठ पर दागी गोली
नागरिक अस्पताल में जेरे इलाज पीड़ित मिंटू उर्फ लारा ने पुलिस को दिए बयानों में बताया कि करीब डेढ़ माह पहले उसका गांव के ही कुछ दबंगों के साथ किसी बात को लेकर झगड़ा हुआ था। इसी आपसी रंजिश को पालकर सोमवार की रात जब वह गली से गुजर रहा था, तभी घात लगाए बैठे संजय नामक युवक ने उस पर पीछे से अचानक तमंचे से फायर झोंक दिया। गोली सीधे उसकी पीठ को छूते हुए पार हो गई, जिससे वह लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़ा और चीख-पुकार सुनकर ग्रामीण मौके पर जुटने लगे।
इलाके का घोषित अपराधी है नामजद हमलावर
पुलिस तफ्तीश में यह बात सामने आई है कि गोली चलाने वाला मुख्य आरोपी संजय कोई नौसिखिया नहीं है, बल्कि वह पहले भी कई संगीन वारदातों को अंजाम दे चुका है। तोशाम थाना पुलिस अलग-अलग आपराधिक मामलों में काफी समय से उसकी सरगर्मी से तलाश कर रही थी। इस नई वारदात को अंजाम देने के बाद भी शातिर आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से रफूचक्कर होने में कामयाब रहा, जिसके बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल बना हुआ है।
हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट में मुकदमा दर्ज
तोशाम पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए पीड़ित मिंटू के आधिकारिक बयानों के आधार पर आरोपी संजय के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की हत्या के प्रयास (अटेंप्ट टू मर्डर) और आर्म्स एक्ट की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा पंजीकृत कर लिया है। थाना प्रभारी का कहना है कि पुलिस की अलग-अलग टीमें गठित कर दी गई हैं जो आरोपी के संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं, और बहुत जल्द ही सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा।
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