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पाकिस्तान की नई चाल? ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित कर चुकाया 'कर्ज'
21 Jun, 2025 06:04 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पाकिस्तान अब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एहसान चुकाने में जुटा हुआ है. पहलगाम अटैक के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया था. इसी ऑपरेशन से पनाह मांगने के लिए पाकिस्तान ने अमेरिका की मदद ली थी. वहीं, डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि उन्होंने दोनों देशों के बीच सीजफायर कराया. अब ट्रंप के इसी एहसान को चुकाने के लिए पाकिस्तान ने ट्रंप को 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट किया है.
पाकिस्तान सरकार ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट किया. पाकिस्तान सरकार ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट किया है. पाकिस्तान सरकार ने हाल के भारत-पाकिस्तान संकट के दौरान उनके निर्णायक राजनयिक हस्तक्षेप और नेतृत्व के चलते उन्हें 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए औपचारिक रूप से नॉमिनेट करने का निर्णय लिया है.
असीम मुनीर के दौरे के बाद लिया फैसला
पाकिस्तान की तरफ से ट्रंप को नॉमिनेट करने का यह फैसला राष्ट्रपति ट्रंप के बुधवार को व्हाइट हाउस में पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर की मेजबानी के तुरंत बाद आया है. पाकिस्तान की जियो न्यूज के अनुसार, मुनीर ने व्हाइट हाउस में ट्रंप के साथ लंच किया. हालांकि, उन दोनों के बीच क्या बातचीत हुई अभी यह सामने नहीं आया है. मुनीर के पास “फील्ड मार्शल” की उपाधि है.
दरअसल, ट्रंप को नॉमिनेट करने का यह फैसला मुनीर के दौरे के बाद आया है. हालांकि, यह भी सामने आया है कि मुनीर ने पहले ही ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट किया जाना चाहिए. मुनीर ने ट्रंप को नॉमिनेट करने की वकालत की थी. साथ ही मुनीर ने ट्रंप को भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव को रोकने और सीजफायर करने का भी श्रेय दिया.
पाकिस्तान उतार रहा ट्रंप का एहसान
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को अटैक हुआ था. इसी के बाद भारत ने पाकिस्तान के आतंकवाद के बाद बड़ा कदम उठाया. भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया. इस ऑपरेशन के पाकिस्तान के 9 आतंकी ठिकानों पर मिसाइल बरसाई गई और इसको तबाह किया गया. इसी के बाद पाकिस्तान ने भी भारत पर नाकाम हमला करने की कोशिश की.
दोनों देशों के बीच लगातार 4 दिन तक वार-पलटवार का सिलसिला जारी रहा. इसी के बाद पाकिस्तान के आग्रह पर भारत सीजफायर पर राजी हो गया. हालांकि, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उन्होंने दोनों देशों के बीच सीजफायर कराया. अब ट्रंप के इसी दावे के चलते पाकिस्तान उन्हें शांति पुरस्कार देना चाहता है और इस एहसान को चुकाना चाहता है.
UN में US राजनयिक की जुबान फिसली: इजराइल को बताया 'अराजकता और आतंक' का स्रोत, तुरंत किया सुधार
21 Jun, 2025 05:38 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
13 जून के बाद से इज़राइल ने ईरान के कई परमाणु और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है. जवाब में ईरान ने भी मिसाइलों से पलटवार किया है. अमेरिका ने साफ किया है कि वो इन हमलों में सीधे शामिल नहीं है, लेकिन वो पूरी तरह इज़राइल के साथ है. लेकिन इसी बीच संयुक्त राष्ट्र में ऐसा कुछ हुआ जिसने कूटनीति के गलियारों में हलचल मचा दी है.
अमेरिका की ओर से UN में मौजूद डिप्लोमैट ने ऐसी जुबानी चूक कर दी जिससे न सिर्फ इजराइल चौंका, बल्कि खुद अमेरिका को भी सफाई देनी पड़ी. शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में अमेरिका की कार्यवाहक स्थायी प्रतिनिधि डोरोथी शिया ने गलती से इज़राइल को आतंक और तबाही फैलाने वाला देश बता दिया. हालांकि उन्होंने फौरन अपनी गलती सुधारते हुए कहा कि उनका इशारा ईरान की ओर था. लेकिन तब तक बयान वायरल हो चुका था.
ईरान पर बरसीं शिया, बोले- सबसे बड़ा खतरा
बाद में शिया ने दोहराया कि उनका इशारा पूरी तरह ईरान की ओर था. उन्होंने कहा कि ईरान मिडल ईस्ट में आतंक और अस्थिरता का सबसे बड़ा स्रोत है और उसके पास अब वो सभी संसाधन हैं जिनसे वह परमाणु हथियार बना सकता है, जो अमेरिका के लिए अस्वीकार्य है. उन्होंने सुरक्षा परिषद से अपील की कि ईरान पर सख्त दबाव बनाया जाए ताकि वह अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाएं छोड़ दे.उन्होंने कहा कि अब और तबाही नहीं होनी चाहिए. ईरान को अपनी राह बदलनी होगी.
ईरान की शिकायत: IAEA चीफ ग्रॉसी भी निशाने पर
ईरान ने अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के चीफ राफेल ग्रॉसी के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र महासचिव और सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष के आगे शिकायत दर्ज कराई है. संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर-सईद इरावानी ने कहा है कि राफेल ग्रॉसी ने ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम को लेकर गलत सोच दिखाई है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ग्रॉसी ने ईरान पर इजराइल के हमलों की निंदा नहीं की, जो उन्हें करनी चाहिए थी.
इजरायल ने ईरान में की टारगेटेड एयरस्ट्राइक
21 Jun, 2025 05:32 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। इजरायल की डिफेंस फोर्स ने दावा किया है कि उन्होंने ईरानी मिलिट्री के सीनियर सदस्य सईद इजादी को मार गिराया है। इजादी पर इजरायल के खिलाफ साजिश रचने का आरोप है। इजरायल ने ईरान में एक टारगेटेड एयरस्ट्राइक कर इजादी को मार गिराया है।
सोशल मीडिया साइट एक्स पर आईडीएफ ने लिखा, 'इजरायल को नष्ट करने के ईरानी सरकार की योजना के मास्टरमाइंड सईद इजादी को कोम क्षेत्र में एक सटीक हमले में मार गिराया गया है।' इजादी कुद्स फोर्स के फिलिस्तीनी कोर का कमांडर था और ईरान व हमास के बीच को-ऑर्डिनेट करता था।
बेहनाम शाहरियारी को मार गिराया
इसके अलावा ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के भीतर कुद्स फोर्स के हथियार हस्तांतरण इकाई के कमांडर बेहनाम शाहरियारी को मार गिराया गया है। शाहरियारी ईरानी शासन से मिडिल ईस्ट में अपने प्रॉक्सी को सभी हथियारों के हस्तांतरण के लिए जिम्मेदार था, जो सीधे इजराइल को नष्ट करने के प्रयासों में सहायता करता था।
आईडीएफ ने कहा कि ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के वरिष्ठ कमांडरों और हमास के लोगों के बीच इजादी ही मीडिएटर का काम करता था। हमास को ईरान की तरफ से मिलने वाली फंडिंग के लिए भी इजादी ही जिम्मेदार था।
अल-आगा को किया था ढेर
पोस्ट में कहा गया, 'लेबनान से संचालित हमास को इजादी निर्देश देता था। गाजा पर हमास के नियंत्रण को बनाए रखने में वह महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था।' इसके पहले 20 जून को गाजा में मुजाहिदीन ब्रिगेड के एक वरिष्ठ कमांडर अली सादी वास्फी अल-आगा को भी इजरायल ने ढेर कर दिया था।
आगा साउथ गाजा ब्रिगेड का चीफ था और असद अबू शरिया का उत्तराधिकारी बनने वाला था। अबू शरिया को इस महीने की शुरुआत में ही मार गिराया गया था। अल-आगा इजरायली ठिकानों पर हुए कई हमलों में शामिल था और वह अपने आतंकी समूह में गुर्गों की भर्ती करता था।
106 बच्चों के पिता हैं टेलीग्राम CEO पावेल दुरोव, कहा- 'सभी में समान रूप से बटेगी दौलत'
21 Jun, 2025 12:16 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मैसेजिंग ऐप Telegram के संस्थापक पावेल ड्यूरोव ने खुलासा किया है कि उनके 100 से अधिक बच्चों को उनकी अरबों की संपत्ति बराबर रूप से दी जाएगी. फ्रांस की एक राजनीतिक मैगजीन Le Point को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि वे नहीं चाहते कि उनके मरने के बाद बच्चे आपस में लड़े, इसलिए सभी को एक जैसा हक मिलेगा. ड्यूरोव ने कहा कि अपनी 20 अरब डॉलर (तकरीबन 1.67 लाख करोड़ रुपये) की संपत्ति को सभी बच्चों में बराबर रूप में बांटेंगे.
100 से ज्यादा बच्चों के पिता हैं ड्यूरोव!
40 वर्षीय पावेल ड्यूरोव ने बताया कि वे आधिकारिक तौर पर तीन अलग-अलग महिलाओं से छह बच्चों के पिता हैं. लेकिन एक दोस्त की मदद के लिए 15 साल पहले उन्होंने जिस क्लिनिक में स्पर्म डोनेट किया था, वहां से मिली जानकारी के मुताबिक, उनकी वजह से अब तक 12 देशों में 100 से ज्यादा बच्चे जन्म ले चुके हैं. ड्यूरोव ने कहा कि उन्होंने पहले ही अपनी वसीयत बना दी है, लेकिन उनके बच्चों को विरासत में कुछ भी मिलने के लिए 30 साल का इंतजार करना होगा. उन्होंने कहा, “मैं चाहता हूं कि वे आम लोगों की तरह जिंदगी जिएं, खुद पर भरोसा करना सीखें और कुछ खुद बनाएं, न कि किसी बैंक अकाउंट पर निर्भर रहें.”
Telegram की वजह से बना दुश्मन
ड्यूरोव का कहना है कि उनका काम जोखिम से भरा है क्योंकि वे “स्वतंत्रता की रक्षा” करते हैं और इससे उनकी दुश्मनी कई ताकतवर सरकारों से हो चुकी है. Telegram की पहचान एक प्राइवेसी-फोकस्ड और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप के तौर पर होती है, जिसे हर महीने 1 अरब से अधिक लोग इस्तेमाल करते हैं. फ्रांस में ड्यूरोव पर गंभीर आपराधिक आरोप लगे हैं. उन पर आरोप है कि उन्होंने Telegram पर आपराधिक गतिविधियों—जैसे ड्रग तस्करी, बच्चों से जुड़ी आपत्तिजनक कंटेंट और फ्रॉड को रोकने के लिए सही कदम नहीं उठाए.
इसके चलते उन्हें पिछले साल गिरफ्तार भी किया गया था. हालांकि, ड्यूरोव ने इन सभी आरोपों को “पूरी तरह बेतुका” बताया था.उन्होंने कहा, “अगर कोई अपराधी हमारी ऐप का इस्तेमाल करता है, तो इसका मतलब यह नहीं कि ऐप चलाने वाला भी अपराधी है.” Telegram पहले भी कह चुका है कि वह कानूनी एजेंसियों के साथ सहयोग करता है और कंटेंट मॉडरेशन में लापरवाही के आरोप गलत हैं.
रूस से दुश्मनी, अब UAE में हैं बसे
पावेल ड्यूरोव रूस में जन्मे थे और VKontakte नाम की सोशल मीडिया साइट के संस्थापक थे. लेकिन 2014 में उन्होंने दावा किया था कि रूसी सरकार के सेंसरशिप के दबाव को मानने से इनकार करने के चलते उन्हें उस कंपनी से हटा दिया गया. उसके बाद उन्होंने Telegram की शुरुआत की, जो आज रूस में भी काफी पॉपुलर है. मौजूदा समय में ड्यूरोव दुबई में रहते हैं और उनके पास फ्रांस और संयुक्त अरब अमीरात की नागरिकता है.
Telegram के बड़े-बड़े ग्रुप्स—जो 2 लाख लोगों तक के हो सकते हैं—की वजह से ऐप पर कट्टर विचारधाराएं, फेक न्यूज और अवैध कंटेंट फैलाने के आरोप लगते रहे हैं. ब्रिटेन में तो Telegram पर पिछले साल हुई हिंसक घटनाओं को संगठित करने का आरोप भी लगा था. हालांकि, कंपनी ने कुछ चैनल्स हटाए भी, लेकिन साइबर एक्सपर्ट्स का मानना है कि दूसरे सोशल मीडिया ऐप्स की तुलना में Telegram की मॉडरेशन सिस्टम काफी कमजोर है.
राफेल को चुनौती देने आ रहा J-35: पाकिस्तान के 40 चीनी स्टील्थ जेट का भारत पर क्या होगा असर?
21 Jun, 2025 12:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
J-35 stealth jets: ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत की जवाबी कार्रवाई से करारी हार मिलने के बाद पाकिस्तान जल्द ही चीन से 40 J-35 स्टील्थ फाइटर जेट लेने वाला है. ये पांचवीं पीढ़ी के विमान हैं. इसकी डिलीवरी इस साल के अंत तक शुरू हो सकती है. यह J-35 का पहला विदेशी निर्यात है. इसे अभी चीन की सेना में भी पूरी तरह इस्तेमाल नहीं किया गया. पाकिस्तान को इसका FC-31 मॉडल मिलेगा. इसमें इन्फ्रारेड सर्च सिस्टम और अन्य हथियारों के साथ डेटा शेयर करने की क्षमता है. ऐसे में आइए जानते है कि आखिर भारत को इससे कितना फर्क पड़ेगा. क्या यह भारत के लिए चिंता का विषय है या नहीं?
भारत के लिए चिंता का विषय है या नहीं?
भारत के पास अभी ऐसा कोई स्टील्थ जेट नहीं है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह भारत के लिए चिंताजनक है. ET के हवाले से रिटायर्ड ग्रुप कैप्टन अजय अहलावत ने कहा, “पाकिस्तान के पास जे-35 होना भारत के लिए खतरा है.” भारत के पास राफेल और SU-30 MKI जैसे शक्तिशाली जेट हैं, लेकिन स्टील्थ जेट के आने से पाकिस्तान की ताकत बढ़ सकती है. भारत ने अमेरिका के F-35 या रूस के SU-57 को खरीदने पर विचार किया, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का अपना AMCA (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) ही सबसे अच्छा ऑप्शन है.
राफेल से ताकतवर या कमजोर
राफेल और J-35 दोनों आधुनिक फाइटर जेट हैं. हालांकि इनके रोल अलग हैं. राफेल हवा में और जमीन पर हमला और जासूसी कर सकता है. यह कई युद्धों में आजमाया हुआ है, इसके रडार और हथियार सिस्टम शानदार हैं. दूसरी ओर, J-35 एक स्टील्थ जेट है. यह रडार से बच सकता है और इसमें नए सेंसर व रडार हैं. लेकिन यह अभी विकास में है और युद्ध में पूरी तरह आजमाया नहीं गया. राफेल अनुभव में बेहतर है, लेकिन J-35 की स्टील्थ क्षमता इसे खास बनाती है.
J-35 की खासियत
J-35 चीन का दूसरा पांचवीं पीढ़ी का जेट है. इसे शेनयांग एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन ने बनाया. यह सुपरसोनिक जेट दो इंजन वाला है और इसमें आधुनिक रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल टारगेटिंग सिस्टम और बहुत कम रडार क्रॉस-सेक्शन (0.001 वर्ग मीटर) है. इससे यह रडार पर आसानी से नहीं दिखता, जैसा अमेरिका का एफ-35. यह अन्य हथियारों के साथ टारगेट की जानकारी शेयर कर सकता है और रडार से मिसाइलों को गाइड कर सकता है.
भारत का AMCA प्रोग्राम
भारत का AMCA स्टील्थ जेट बनाने की योजना है, लेकिन यह साल 2035 से पहले तैयार नहीं होगा. तब तक भारत को अपने रडार और हवाई रक्षा सिस्टम को बेहतर करना होगा. ऐसा इसलिए क्योंकि J-35 जैसे जेट को पकड़ना मुश्किल है. चीन J-35 को तेजी से और सस्ते में बना रहा है. इसका डिजाइन अमेरिका के F-35 से मिलता-जुलता है. इसके पीछे साइबर जासूसी की बात भी सामने आई है. चीन का कहना है कि J-35 युद्ध में बहुत प्रभावी होगा और अन्य हथियारों के साथ मिलकर काम करेगा.
फरीदाबाद बनेगा 'ग्रीन सिटी'! वृक्षारोपण अभियान का शुभारंभ, पर्यावरण संतुलन का लिया संकल्प
20 Jun, 2025 09:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS), फरीदाबाद शाखा कार्यालय की ओर से शनिवार को राजकीय बालिका वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय (GGSSS), NIT-5, फरीदाबाद के सहयोग से वृक्षारोपण अभियान का आयोजन किया. इसका मकसद पर्यावरण स्थिरता को बढ़ावा देना और छात्रों और समुदाय के बीच पर्यावरण के प्रति जागरुकता पैदा करना है.
इस कार्यक्रम में BIS फरीदाबाद शाखा कार्यालय की निदेशक और प्रमुख विभा रानी की उपस्थिति खासी अहम रही, जो इस अवसर की मुख्य अतिथि थीं. अपने संबोधन में, उन्होंने जलवायु परिवर्तन से निपटने और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में वृक्षारोपण के महत्व पर जोर दिया.
पर्यावरण के जिम्मेदार संरक्षक बनने के लिए प्रोत्साहित
विभा रानी ने छात्रों को इस तरह की हरित पहलों में सक्रिय भागीदारी करने और पर्यावरण के जिम्मेदार संरक्षक बनने के लिए प्रोत्साहित किया. इस अभियान में प्रिंसिपल कृ्ष्ण चंद, संकाय सदस्य हेमंत कुमार, कांता देवी, अंजना अरोड़ा पीजीटी छात्रों और बीआईएस अधिकारियों की उत्साही भागीदारी देखी गई.
स्वस्थ भविष्य की ओर एक सामूहिक कदम
स्कूल परिसर में कई पौधे लगाए गए जो एक हरे और स्वस्थ भविष्य की ओर एक सामूहिक कदम का प्रतीक है. यह पहल सामुदायिक पहुंच और पर्यावरण चेतना के प्रति बीआईएस की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है इसने युवा पीढ़ी को प्रकृति की रक्षा और संरक्षण में सक्रिय कदम उठाने के लिए प्रेरित करने के लिए एक मंच के रूप में भी काम किया.
लिव-इन-पार्टनर की हत्या के बाद प्रेमी ने की खुदकुशी, बदबू से हुआ हत्याकांड का खुलासा
20 Jun, 2025 09:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लिव-इन-रिलेशनशिप कभी-कभी हानिकारक भी साबित हो जाते हैं. ऐसा ही एक खौफनाक मामला सामने आया है हरियाणा के रेवाड़ी से. यहां लिव-इन-पार्टनर की हत्या कर एक युवक ने खुद भी सुसाइड कर लिया. उनकी लाश 13 दिन बाद मिली है. दिल दहला देने वाली इस घटना के बाद से ही इलाके में दहशत का माहौल है.
मामला धारूहेड़ा क्षेत्र के सेक्टर-6 इलाके का है. यह खौफनाक मामला गुरुवार को सामने आया, जब मकान मालिक ने घर का ताला खोला. दरअसल, उन्हें फ्लैट से गंदी बदबू आ रही थी. शक हुआ तो ताला तोड़कर घर में दाखिल हुए. तब उन्हें घर के अंदर बेड पर महिला का शव सड़ी-गली हालत में मिला. वहीं पर युवक का शव भी पड़ा था. पुलिस के मुताबिक, महिला का शव करीब 13 दिन पुराना है. जबकि, युवक का शव 2 दिन पुराना है.
हत्या के बाद कर ली आत्महत्या
जानकारी के मुताबिक, मृत युवक की पहचान पलवल निवासी योगेश के रूप में हुई है, जो यहां किराये के मकान में रह रहा था. 6 जून को पड़ोसियों ने मकान से दुर्गंध आने की शिकायत मकान मालिक को दी. फिर पुलिस को सूचना दी गई. जब पुलिस पहुंची तो कमरे के अंदर योगेश की लाश पड़ी मिली थी. युवक का शव भी 2 दिन पुराना बताया जा रहा है. पुलिस ने योगेश के परिजनों को बुलाकर शव का पोस्टमार्टम कराया और उन्हें सौंप दिया.
शव की शिनाख्त में जुटी पुलिस
वहीं, महिला की मौजूदगी को लेकर कोई जानकारी नहीं मिल सकी. पुलिस ने मकान बंद करवा दिया था. थाना प्रभारी संजय सिंह ने बताया कि महिला की पहचान नहीं हो पाई है. शव पूरी तरह से सड़ चुका था. महिला की मौत कैसे हुई, इसका खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट से होगा. फिलहाल शव को रेवाड़ी स्थित नागरिक अस्पताल के शवगृह में रखवाया गया है. पुलिस मामले की गहनता से जांच में जुटी है.
तुर्किये ने दिखाई सैन्य शक्ति की झलक, लेकिन माना- अब भी बहुत कुछ करना बाकी
20 Jun, 2025 08:38 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Turkiye Boost Missile Production:ईरान-इस्राइल संघर्ष के बीच तुर्किये ने अपनी मिसाइल रक्षा क्षमता बढ़ाने का एलान किया है। राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन ने कहा कि देश को सैन्य रूप से इस स्तर तक मजबूत किया जाएगा कि कोई उस पर हमला करने की हिम्मत न कर सके। विश्लेषकों के मुताबिक, यह कदम तुर्किये की रणनीतिक तैयारी और घरेलू समर्थन मजबूत करने की कोशिश है।
ईरान और इस्राइल के बीच जारी युद्ध ने तुर्किये को भी सतर्क कर दिया है। राष्ट्रपति रेसेप तैय्यप एर्दोआन ने घोषणा की है कि देश की रक्षा क्षमता को इस हद तक मजबूत किया जाएगा कि कोई भी तुर्किये पर हमला करने की हिम्मत न करे। उन्होंने कहा कि तुर्किये अब मीडियम और लॉन्ग रेंज मिसाइलों के उत्पादन को तेज करेगा, ताकि भविष्य में किसी भी संभावित खतरे का प्रभावी जवाब दिया जा सके। हालांकि, तुर्किये सीधे युद्ध में शामिल नहीं है, लेकिन इस कदम को एक नए क्षेत्रीय हथियारों की होड़ की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
एर्दोआन ने यह बात जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ टेलीफोन पर बातचीत में कही। उन्होंने कहा कि ईरान का परमाणु मुद्दा सिर्फ बातचीत से ही सुलझ सकता है। तुर्किये के विश्लेषकों का मानना है कि यह निर्णय सिर्फ रक्षा नहीं बल्कि भविष्य के संघर्षों से पहले की रणनीतिक तैयारी है। खास बात यह है कि तुर्किये की सेना भले ही आकार में नाटो की दूसरी सबसे बड़ी सेना है, लेकिन उसका एयर डिफेंस अब भी कमजोर माना जाता है। ऐसे में मिसाइलों की ताकत बढ़ाना उसकी रणनीतिक जरूरत बन चुका है।
कैबिनेट बैठक के बाद किया एलान
एर्दोआन ने अपने कैबिनेट की बैठक के बाद कहा कि हालिया हालात को देखते हुए हम अपनी मिसाइल भंडारण (स्टॉक) क्षमता को इस स्तर तक ले जाएंगे कि कोई हमारे खिलाफ कठोर रुख अपनाने की हिम्मत न करे। उन्होंने देश में बने ड्रोन, लड़ाकू विमान, बख्तरबंद वाहन और नौसेना के जहाजों की प्रगति का जिक्र किया, लेकिन यह भी माना कि अब भी पूर्ण ‘डिटरेंस’ हासिल करने के लिए बहुत कुछ करना बाकी है।
ईरान-इस्राइल संघर्ष में तुर्किए को क्या खतरा?
तुर्किये का यह कदम सिर्फ सैन्य चिंता तक सीमित नहीं है। देश में यह आशंका है कि ईरान में युद्ध लंबा खिंचा तो उसकी सीमा से शरणार्थियों का पलायन शुरू हो सकता है। साथ ही, तुर्किये ईरान से तेल और गैस का बड़ा आयातक है, ऐसे में युद्ध से तेल कीमतों में बढ़ोतरी तुर्किये की पहले से डगमग अर्थव्यवस्था पर और दबाव बना सकती है। इसी वजह से एर्दोआन इस संघर्ष को रोकने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से भी बात कर चुके हैं।
राजनीतिक समीकरण भी साध रहे एर्दोआन
हालांकि, इस्राइल और तुर्किये के बीच पहले जैसे संबंध नहीं रहे हैं, लेकिन दोनों देशों ने हाल ही में एक तनाव को कम करने की एक प्रक्रिया को भी शुरू किया है, ताकि सीरिया में सैन्य टकराव को रोका जा सके। इस्राइली विदेश मंत्री गिदोन सार ने एर्दोआन पर तीखा हमला करते हुए उन्हें साम्राज्यवादी सोच वाला नेता बताया, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि तुर्किये और इस्राइल के बीच सीधा टकराव फिलहाल संभव नहीं है। तुर्किए में इस्राइल के खिलाफ जनता में आक्रोश है और एर्दोआन का यह रुख घरेलू समर्थन मजबूत करने की रणनीति का भी हिस्सा माना जा रहा है।
पाकिस्तान को एफएटीएफ की चौथी बार ग्रे-लिस्ट में डालने की तैयारी
20 Jun, 2025 11:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ सकती हैं। अंतरराष्ट्रीय संस्था एफएटीएफ (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स) पाकिस्तान को चौथी बार ग्रे लिस्ट में डालने की तैयारी कर रही है। मनीकंट्रोल के मुताबिक जून के आखिर या जुलाई की शुरुआत में एफएटीएफ पाकिस्तान पर रिपोर्ट जारी कर उसे ग्रे लिस्ट में डाल सकता है। इससे पाकिस्तान पर कई तरह के आर्थिक पाबंदियां लग सकती हैं। हाल ही में फ्रांस में हुई एफएटीएफ की बैठक में भारत ने पहलगाम हमले, पाकिस्तान की आतंकवाद को फंडिंग और सरकारी समर्थन का मुद्दा उठाया है। पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी। एफएटीएफ ने इसकी निंदा करते हुए कहा था ऐसे हमले बिना फंडिंग के संभव नहीं है।
एफएटीएफ यानी फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है, जो मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद को फंडिंग देने वाली गतिविधियों पर नजर रखती है। ग्रे लिस्ट में उन देशों को डाला जाता है, जो आतंकवाद की फंडिंग या मनी लॉन्ड्रिंग रोकने में पूरी तरह नाकाम रहते हैं। ऐसे देशों की निगरानी होती है, और उन्हें विदेशी फंडिंग मिलना मुश्किल हो जाता है।
टेरर फंडिंग को रोकने में नाकाम
भारत ने दावा किया है कि पाकिस्तान आतंकवादी संगठनों, जैसे लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद, को फंडिंग रोकने में नाकाम रहा है। पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने एफएटीएफ पर पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डालने का दवाब बना रहा है। एफएटीएफ ने 2022 में पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से हटाया था, लेकिन भारत का कहना है कि पाकिस्तान ने उस वक्त किए गए कानूनी सुधारों और आतंकवाद विरोधी उपायों को लागू करने में ढिलाई बरती है। भारत ने एफएटीएफ को बताया कि पाकिस्तान ने आतंकी संगठनों के लीडर्स के खिलाफ ठोस जांच और सजा सुनिश्चित करने में कमी दिखाई है। पाकिस्तान का मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद फंडिंग रोकने का ढांचा अभी भी कमजोर है।
पाकिस्तान की बढ़ेगी मुश्किलें
ग्रे लिस्ट में आने से पाकिस्तान की इकोनॉमी पर बुरा असर पड़ेगा। विदेशी निवेश और आईएमएफ, वल्र्ड बैंक जैसी संस्थाओं से कर्ज मिलना मुश्किल हो सकता है। इससे पाकिस्तान की पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था और दबाव में आ सकती है। ग्रे लिस्ट में आने के बाद पाकिस्तान की आर्थिक छवि खराब होगी। विदेशी निवेशक और अंतरराष्ट्रीय बैंक पाकिस्तान को पैसा देने से कतराएंगे, जिससे देश में डॉलर और निवेश की भारी कमी होगी। आईएमएफ, वल्र्ड बैंक जैसी संस्थाएं कर्ज देने के लिए सख्त शर्तें लगा देती हैं या कर्ज देने से मना भी कर सकती हैं। विदेशी पूंजी न आने से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और कमजोर हो जाती है। फॉरेक्स रिजर्व की किल्लत से महंगाई बढ़ेगी और आम जनता पर बोझ बढ़ेगा। एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में आने के बाद पाकिस्तान की हर बड़ी फाइनेंशियल डील, लेन-देन और बैंकिंग गतिविधियों पर सख्त नजर रखी जाएगी। कई बार लेन-देन में देरी या रोक भी लगाई जा सकती है।
मस्क के स्टारशिप में टेस्ट के दौरान धमाका
20 Jun, 2025 10:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
टेक्सास। दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी इलॉन मस्क का स्टारशिप-36 रॉकेट टेक्सास के स्टारबेस टेस्टिंग साइट पर अचानक धमाके के साथ फट गया। इसकी लपटें और धुआं दूर-दूर तक दिखाई दिया। ये धमाका भारतीय समय के अनुसार गुरूवार को सुबह करीब 09:30 बजे हुआ।
धमाका उस वक्त हुआ जब 29 जून को होने वाले स्टारशिप के 10वें टेस्ट फ्लाइट से पहले रॉकेट का दूसरा स्टैटिक फायर टेस्ट चल रहा था। इस टेस्ट में रॉकेट को जमीन पर ही रखकर उसके इंजन को चालू किया जाता है, ताकि लॉन्च से पहले सब कुछ ठीक हो, ये चेक किया जा सके।
रॉकेट आग के गोले में बदल गया
टेस्ट शुरू होने से ठीक पहले, रॉकेट के ऊपरी हिस्से में, जहां फ्यूल टैंक होते हैं, अचानक विस्फोट शुरू हुआ। देखते ही देखते पूरा रॉकेट आग के गोले में बदल गया। आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों ने बताया कि धमाका इतना जोरदार था कि उनके घरों की खिड़कियां हिल गईं। इस धमाके का जो वीडियो सामने आया है उसमें दिख रहा है कि रॉकेट के नोज यानी, ऊपरी हिस्से से अचानक आग की लपटें निकलती हैं और फिर पूरा रॉकेट धमाके के साथ फट जाता है।
कोई हताहत नहीं, लेकिन नुकसान बड़ा
स्पेसएक्स ने इस हादसे के बाद बयान जारी कर बताया कि टेस्ट साइट के आसपास पहले से ही सुरक्षा का पूरा इंतजाम था। सभी कर्मचारी सुरक्षित हैं और आसपास के इलाकों में रहने वालों को भी कोई नुकसान नहीं हुआ। कंपनी ने लोगों से अपील की है कि वो टेस्ट साइट के पास न जाएं, क्योंकि अभी भी वहां आग बुझाने और सफाई का काम चल रहा है। कैमरन काउंटी के शेरिफ ऑफिस और स्थानीय पुलिस ने भी पुष्टि की कि कोई घायल नहीं हुआ। फायर डिपार्टमेंट की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने की कोशिश शुरू की। लेकिन रॉकेट और टेस्ट साइट को हुआ नुकसान इतना ज्यादा है कि स्पेसएक्स को अब अपनी 10वीं टेस्ट फ्लाइट की योजना पर फिर से काम करना पड़ेगा।
मंदी की चपेट में रूस, आम लोगों के लिए हालात मुश्किल
20 Jun, 2025 09:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मॉस्को। रूस की अर्थव्यवस्था मंदी के कगार पर खड़ी है। इकोनॉमी मिनिस्टर मैक्सिम रेशेत्निकोव ने सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम में ये बात कही। उन्होंने कहा बिजनेस और इंडस्ट्री के आंकड़े दिखा रहे हैं कि देश मंदी के बेहद करीब है। यानी, महंगाई बढ़ रही है, आर्थिक गतिविधियां धीमी हो रही हैं, कारोबार कम हो रहा है, और निवेश रुक रहा है।
रूस में मंदी के पीछे तीन बड़े कारण हैं। पहला, रूस में ब्याज दरें बहुत ज्यादा हैं। हाल ही में ब्याज दर को 21 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत किया गया, लेकिन ये अभी भी इतनी ज्यादा है कि कारोबारी कर्ज लेने से डर रहे हैं। दूसरा, यूक्रेन के साथ चल रहे युद्ध की वजह से रूस पर पश्चिमी देशों के आर्थिक प्रतिबंध हैं, जिसने व्यापार और निवेश को मुश्किल बना दिया है। तीसरा, तेल की कीमतें कम होने से रूस की कमाई पर असर पड़ रहा है। हालांकि बीते कुछ दिनों में इजराइल-ईरान जंग के कारण कच्चे तेल के दामों में तेजी आई है।
यूक्रेन के साथ जंग से बिगड़ी स्थिति
यूक्रेन के साथ करीब 3 साल से चल रही जंग के कारण रूस में महंगाई बहुत ज्यादा है। 2024 में ये 9.5 प्रतिशत थी और 2025 में भी 9.8 प्रतिशत के आसपास बनी हुई है। महंगाई को काबू करने के लिए सेंट्रल बैंक ने ब्याज दरें बढ़ाईं। ज्यादा ब्याज दर से लोग कम खर्च करते हैं, जिससे मांग घटती है और महंगाई कंट्रोल में आती है। लेकिन इससे कारोबारियों को कर्ज लेना महंगा पड़ रहा है, जिससे निवेश और प्रोडक्शन कम हो रहा है। यूक्रेन के साथ युद्ध के कारण रूस 2025 में अपने बजट का 41 प्रतिशत हिस्सा रक्षा और सुरक्षा पर खर्च करेगा, जो कोल्ड वॉर के समय से सबसे ज्यादा है। इससे बाकी सेक्टर, जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, और इन्फ्रास्ट्रक्चर, के लिए पैसा कम बच रहा है। साथ ही, पश्चिमी सैंक्शन्स ने रूस के तेल और गैस निर्यात को मुश्किल बना दिया है। 2023 में रूस की तेल की कमाई 20 प्रतिशत से ज्यादा घट गई थी।
खाने-पीने की चीजें महंगी
आम रूसियों के लिए हालात मुश्किल हो रहे हैं। महंगाई की वजह से खाने-पीने की चीजें, जैसे मक्खन, अंडे, और सब्जियां महंगी हो गई हैं। आलू-प्याज के दाम मई में सालाना आधार पर 2.5 गुना तक बढ़ गए हैं। आलू 166.5 प्रतिशत बढक़र 84.7 रूबल/किग्रा पर पहुंच गया है। प्याज 87.2 प्रतिशत महंगाा हुआ है। इसके दाम 72.3 रूबल/किग्रा हो गए हैं। ज्यादा ब्याज दरों की वजह से कार, घर, या बिजनेस के लिए कर्ज लेना मुश्किल हो गया है। साथ ही, युद्ध और पलायन की वजह से लेबर की भारी कमी है, जिससे प्रोडक्शन और सर्विसेज प्रभावित हो रही हैं।
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के पूर्व अधिकारी माइकल रूबिन का दावा
20 Jun, 2025 08:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध को लेकर सभी की निगाहें अमेरिका पर टिकी हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सीधे तौर पर ईरान को धमकी दे चुके हैं। ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और पाकिस्तान के फील्ड मार्शल जनरल आसिम मुनीर की हालिया व्हाइट हाउस मीटिंग को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। मुनीर को बाकायदा लंच के लिए आंमत्रित किया गया था। इस बीच अब अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) के पूर्व अधिकारी और अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टिट्यूट के वरिष्ठ विश्लेषक माइकल रूबिन ने कई बड़े दावे किए हैं। उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन की नजर पाकिस्तान पर सिर्फ इसलिए है क्योंकि ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई के बाद उसके परमाणु कार्यक्रम से जुड़े सामान को पाकिस्तान में शिफ्ट किया जा सकता है।
माइकल रूबिन का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप और अमेरिकी सेनाओं की केंद्रीय कमान के अधिकारी पाकिस्तान के साथ मीठी-मीठी बातें सिर्फ इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उन्हें ईरान के खिलाफ रणनीतिक सहयोग चाहिए। रूबिन ने साफ कहा कि डोनाल्ड ट्रंप पाकिस्तान को अमेरिका का मित्र इसलिए कह रहे हैं क्योंकि उन्हें इस दोस्ती से कुछ हासिल करना है। वे चाहते हैं कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म कर दिया जाए। अगर ऐसा होता है, तो अमेरिका को उन परमाणु सामग्रियों को कहीं न कहीं ले जाना होगा, और हो सकता है कि इसके लिए पाकिस्तान चुना जाए।
क्या चीन के लिए संदेश ले जा रहे थे मुनीर?
वास्मािटन(ईएएमस)। माईकल रूबिन ने ये भी कहा कि पाकिस्तान अब स्वतंत्र देश नहीं रहा। वह चीन का प्रॉक्सी बन गया है। ऐसे में यह भी संभव है कि जब जनरल मुनीर ट्रंप से मिले, तो उन्होंने चीन की ओर से भी कुछ गुप्त संदेश अमेरिका तक पहुंचाए हों। रूबिन ने कहा कि चीन की सबसे बड़ी चिंता तेल है, जो फारस की खाड़ी और होरमुज की खाड़ी से होकर आता है। अगर ईरान-इजरायल के बीच युद्ध लंबा चला, तो सबसे बड़ा नुकसान चीन को होगा, ना कि अमेरिका को।
पाकिस्तान को मदद मिलेगी या दबाव डाला जाएगा?
अब यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर ट्रंप प्रशासन पाकिस्तान से कोई बड़ी भूमिका निभाने को कहे तो क्या पाकिस्तान मना कर पाएगा? ट्रंप ने पाकिस्तान को हाल ही में पसंदीदा मित्र देश कहा था, और यही बयान अब राजनयिक दबाव के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। माइकल रूबिन का कहना है कि ट्रंप जनरल्स से प्रभावित रहते हैं। और सच तो यह है कि पाकिस्तान के पीएम से ज्यादा ताकत अब आर्मी चीफ मुनीर के पास है। हो सकता है कि ट्रंप ने उन्हें निजी तौर पर धमकी दी हो और सार्वजनिक रूप से दोस्ती का नाटक किया हो। रूबिन के अनुसार, ईरान और पाकिस्तान चाहे कभी-कभार सहयोग करते हों, लेकिन दोनों स्वाभाविक प्रतिस्पर्धी हैं। ईरान का परमाणु कार्यक्रम पाकिस्तान के लिए एक रणनीतिक चुनौती है, इसलिए अगर ईरान झुकता है, तो पाकिस्तान को स्वाभाविक रूप से लाभ होगा। ऐसे में हमें पाकिस्तान को एक डॉलर भी नहीं देना चाहिए, क्योंकि वह अपने स्वार्थ में अमेरिका का साथ देगा।
ईरान के खिलाफ सैन्य अड्डों का उपयोग?
बता दें कि पाकिस्तान ईरान के साथ करीब 900 किलोमीटर का बॉर्डर साझा करता है, ऐसे में इस वॉर में पाकिस्तान काफी निर्णायक हो सकता है। सैन्य अड्डों का उपयोग अमेरिका को ईरान की पूर्वी सीमा पर निगरानी और संभावित जमीनी कार्रवाइयों के लिए एक मजबूत आधार प्रदान कर सकता है। वैसे अफगानिस्तान युद्ध के वक्त भी पाकिस्तान ने अमेरिका को काफी आर्मी सपोर्ट किया था। पाकिस्तान का एयरस्पेस ईरान पर हमलों के लिए अहम साबित हो सकता है, ऐसे में अमेरिका की ओर से ईरान पर अटैक के लिए पाकिस्तान के एयर स्पेस की मांग की जा सकती है। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में अमेरिकी अभियानों के लिए भी अपने एयर स्पेस को खोला था और अब एक बार इसका यूज ईरान के लिए किया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो अमेरिका को मिडिल ईस्ट में मजबूती मिल सकती है।
ईरान का इस्राइल पर मिसाइल अटैक, जवाब में IDF ने अराक परमाणु रिएक्टर को किया टारगेट
19 Jun, 2025 02:31 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्राइल और ईरान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। लगातार सातवें दिन दोनों ने एक-दूसरे पर हमले किया। इस्राइली सेना ने ईरान के अराक हैवी वाटर परमाणु रिएक्टर को निशाना बनाकर मिसाइल दागी। इसके जवाब ईरान ने इस्राइल के सोरोका अस्पताल पर हमला किया। हमले से अस्पताल में काफी नुकसान हुआ।
बृहस्पतिवार सुबह इस्राइल ने ईरान के अराक हैवी वॉटर परमाणु रिएक्टर पर हमला किया। हालांकि हमले से लोगों को नुकसान नहीं पहुंचा। एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि किसी भी तरह का विकिरण खतरा नहीं है। रिएक्टर को खाली करा लिया गया और नागरिक इलाकों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। इससे पहले इस्राइल ने चेतावनी दी थी कि वह परमाणु रिएक्टर पर हमला करेगा।
इसके जवाब में ईरान ने दक्षिण इस्राइल में सोरोका अस्पताल पर हमला किया। बीरशेबा में अस्पताल के प्रवक्ता ने कहा कि अस्पताल को अलग-अलग इलाकों में काफी नुकसान हुआ है और हमले में लोग घायल हुए हैं। अस्पताल में 1,000 से अधिक बिस्तर हैं और यह 10 लाख लोगों को सेवाएं प्रदान करता है।
ईरान के लिए अहम है अराक परमाणु रिएक्टर
अराक हैवी वाटर परमाणु रिएक्टर तेहरान से 250 किलोमीटर दूर दक्षिण-पश्चिम में है। यह परमाणु रिएक्टरों को ठंडा करने में मदद करता है। साथ ही यह प्लूटोनियम का भी उत्पादन करता है। इसका परमाणु हथियारों में उपयोग किया जा सकता है। इससे ईरान को यूरेनियम के अलावा बम बनाने का एक और रास्ता मिल जाएगा।
2019 में ईरान ने हैवी वाटर रिएक्टर के दूसरे सर्किट को शुरू किया। उस समय ब्रिटेन प्लूटोनियम की मात्रा को सीमित करने के लिए अराक रिएक्टर को दोबारा डिजाइन करने में मदद कर रहा था। इसके बाद 2018 में ब्रिटेन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के परमाणु समझौते से अमेरिका को एकतरफा वापस लेने के फैसले के बाद परियोजना से हट गया था। संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने इस्राइल से ईरानी परमाणु स्थलों पर हमला न करने के लिए कहा है।
खामनेई की अमेरिका को गंभीर चेतावनी, कहा-सरेंडर नहीं करेंगे
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बिना शर्त सरेंडर की चेतावनी खारिज करते हुए ईरान के सुप्रीम नेता अयातुल्ला खामनेई ने धमकी दी कि अमेरिका युद्ध में कूदा, तो गंभीर नतीजे भुगतने होंगे। इस बीच, इस्राइली सेना ने तेहरान में यूरेनियम सेंट्रीफ्यूज बनाने वाले संयंत्र एवं मिसाइल उपकरण की फैक्टरी को निशाना बनाया है। ईरान ने भी तेल अवीव व हाइफा समेत कई शहरों में मिसाइलें दागीं।
तकनीक का कमाल, वैज्ञानिकों ने कृत्रिम सूर्यग्रहण बनाया
19 Jun, 2025 11:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन। प्रकृति को समझने के लिए इंसान नैसर्गिक खगोलीय घटनाओं तक को कृत्रिम रूप दे रहा है। इसी कड़ी में पेरिस एयर शो में यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ने कृत्रिम सूर्य ग्रहण की तस्वीरें जारी की हैं। सूर्य ग्रहण के इस अनूठे प्रयोग के लिए दो सैटेलाइटों को सटीक ढंग से सूर्य के सामने लाया गया।इन सैटेलाइटों को 2024 में छोड़ा गया था और मार्च 2025 से इन्हें कई बार सूर्य के सामने लाने का प्रयास हो रहा है। ये पृथ्वी से कई हजार किलोमीटर ऊपर एक-दूसरे से 492 फीट दूर उड़ रहे हैं।
कृत्रिम सूर्य बनाते समय इसमें से एक चांद की तरह सूर्य को ब्लॉक कर देता है और दूसरा अपने टेलिस्कोप से सूर्य के बाहरी वायुमंडल कोरोना का अध्ययन करता है। इस वर्ष जुलाई से इस पर वैज्ञानिक प्रयोग शुरू होगा। 21 करोड़ डॉलर के इस मिशन का नाम प्रोबा-तीन रखा गया है और अभी तक 10 सफल सूर्य ग्रहण बना लिए हैं।आंद्रे जुकोव ने बताया कि प्रयोग के प्राथमिक नतीजे बेहतर हैं। यह अनूठा और अविश्वसनीय था। उनका अनुमान है कि पूरे मिशन में करीब 200 ग्रहण बनाए जाएंगे, यानी हर हफ्ते औसतन दो ग्रहण।
इससे वैज्ञानिकों को अध्ययन के लिए 1000 घंटे से भी ज्यादा पूर्ण सूर्य ग्रहण की स्थितियां मिलेंगी। इससे ग्रहण के अध्ययन का ज्यादा समय मिलेगा, क्योंकि सूर्य ग्रहण के दौरान कुछ ही मिनट के लिए पूर्ण ग्रहण होता है, जब चांद सटीक स्थिति में धरती और सूर्य के बीच आ जाता है।
अमीर बनने के लिए लड़की ने 8 बॉयफ्रेंड बनाए....लेकिन 9वें बॉयफ्रेंड ने जेल पहुंचा दिया
19 Jun, 2025 10:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। चीन में 24 साल की एक लड़की (यिन शुए) ने अमीर बनने के लिए 8 प्रेमी बनाए। गरीब होने के कारण यिन शुए ने 5 साल में 10 करोड़ रुपए कमाकर अमीर बनने की योजना बनाई। इसके लिए लड़की ने खूबसूरती को हथियार बनाया। सबसे पहले नौकरी छोड़कर सारी जमा-पूंजी खूबसूरत दिखने के लिए प्लास्टिक सर्जरी पर लगा दी।
इसके बाद शुए ने फिटनेस रूटीन, अच्छी ड्रेसिंग स्टाइल सीखकर सोशल मीडिया पर अमीर लोगों को टारगेट करना शुरू किया। यिन बॉयफ्रेंड्स के घर रुकने के बहाने मौका पाकर डिजाइनर बेल्ट, महंगे सोफे, इलेक्ट्रॉनिक्स सामान चुरा लेती थी। फिर सभी सामानों को ऑनलाइन सेकेंड-हैंड प्लेटफॉर्म्स पर बेच देती थी। इससे महज कुछ महीनों में 8 अमीर लोगों से 2 लाख युआन (करीब 22 लाख रुपए) की चोरी की।
नौवें बॉयफ्रेंड को फंसाने के चक्कर में पकड़ी गई यिन की चालाकी नौवें बॉयफ्रेंड के घर पकड़ी गई। वेलेंटाइन डे पर बॉयफ्रेंड का घर लूटते वक्त यिन कैमरे में कैद हो गई। इसके बाद बॉयफ्रेंड ने पुलिस को बुलाकर यिन को अरेस्ट करवा दिया। पुलिस के सामने यिन ने अपना अपराध कबूल कर लिया, जिसके बाद सच्चाई बाहर आई।
100 करोड़ी महागाथा: भारी-भरकम बजट और सितारों की फौज के साथ आ रही है ‘राजा शिवाजी’।
जर्मनी पहुंचे रक्षा मंत्री, हाईटेक डिफेंस और AI पर होगी चर्चा
पार्टी में हलचल: प्रदेश अध्यक्ष ने विजय सिन्हा से की अहम मुलाकात
सिंगरौली शिक्षा विभाग में गड़बड़ी, कई अधिकारियों पर FIR
कबीरचौरा अस्पताल का कायाकल्प: 315 करोड़ के बजट से बदलेगी मंडलीय चिकित्सालय की सूरत।
निश्चिंत होकर घूमें घाट: डिजिटल लगेज लॉकर सेवा से काशी आने वाले पर्यटकों का सफर होगा आसान।
यूपी से उठी देशव्यापी लहर: सीएम योगी ने लखनऊ मार्च को बताया महिला अस्मिता की नई क्रांति।
22 मई को मचेगा धमाल: वरुण, मृणाल और पूजा की फिल्म 'है जवानी तो इश्क होना है' की नई रिलीज डेट आई।
प्रियंका और सोनिया के संदेश से पलटवार: कांग्रेस ने अपने कार्यकर्ताओं को जारी किए विशेष निर्देश
