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दक्षिण कोरिया में सीएसएटी टेस्ट के लिए रोक दी जाती हैं उड़ानें और कई अहम काम
16 Nov, 2025 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सियोल। दुनिया की सबसे मुश्किल परीक्षाओं में से एक दक्षिण कोरिया में होने वाला कॉलेज स्कॉलास्टिक एबिलिटी टेस्ट (सीएसएटी) गुरुवार को आयोजित किया गया था। 13 घंटों तक चलने वाले इस टेस्ट के लिए दक्षिण कोरिया ने देशभर में कड़े इंतजाम किए थे। अस्थायी रूप से विमानों के उड़ान भरने और लैंडिंग पर भी रोक लगा दी थी। दक्षिण कोरिया की इस बेहद अहम यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट में पांच लाख से ज्यादा छात्रों ने हिस्सा लिया। मीडिया रिपोर्ट में शिक्षा मंत्रालय का हवाला देते हुए बताया गया है कि इस साल कॉलेज स्कॉलास्टिक एबिलिटी टेस्ट के लिए कुल 5,54,000 छात्रों ने आवेदन किया था, जो पिछले साल की तुलना में 6 फीसदी ज्यादा है और 2018 के बाद से सबसे ज्यादा संख्या है। इस परीक्षा के नतीजों के आधार पर दक्षिण कोरिया के छात्र-छात्राओं को देश की टॉप यूनिवर्सिटीज में जगह मिलती है।
दक्षिण कोरिया में छात्रों के लिए यह सबसे कठिन परीक्षा मानी जाती है। परीक्षा के दौरान हवाई जहाजों की उड़ानें रोक दी गईं और देर से पहुंचने वाले छात्रों को एग्जाम सेंटर तक पहुंचाने के लिए जगह-जगह पुलिस की तैनाती की गई थी। इंग्लिश एग्जाम के लिसनिंग सेक्शन के दौरान शोर-शराबे से बचने के लिए एहतियातन पूरे देश में दोपहर 1:05 बजे से 1:40 बजे तक 35 मिनटों के लिए सभी उड़ानें और लैंडिंग रोक दी गईं थी। इन उड़ानों में सैन्य और नागरिक दोनों तरह की उड़ानें शामिल थीं, केवल इमर्जेंसी फ्लाइट्स को ही उड़ान की इजाजत थी।
ड्रोन और हल्के विमान उड़ाने पर भी रोक थी। कुल 140 उड़ानें- 65 घरेलू और 75 अंतरराष्ट्रीय, पुनर्निर्धारित करनी पड़ीं। सीएसएटी टेस्ट के दिन सैन्य विमान भी जमीन पर रखे गए और तोप अभ्यास और टैंक संचालन जैसे डिफेंस एक्सरसाइज रोक दिए गए। देश भर में 10,475 पुलिसकर्मी और 2,238 पेट्रोल कारें ट्रैफिक कंट्रोल के लिए तैनात की गईं। सुबह के ट्रैफिक को कम करने के लिए शेयर बाजार के खुलने और बंद होने के समय में भी एक घंटे की देरी की गई।
टेस्ट के लिए लेट हो रहे छात्रों की मदद के लिए मुफ्त पुलिस कार और मोटरसाइकिलें तैनात थीं जिन्हें 112 पर कॉल कर बुलाया जा सकता था। हालांकि, जो छात्र सुबह 8:10 बजे के बाद सेंटर पहुंचे, उन्हें परीक्षा देने नहीं दी गई और अब उन्हें अगले साल परीक्षा देनी होगी। छात्रों की संख्या को देखते हुए सियोल में मेट्रो की 29 अतिरिक्त ट्रेनें चलाई गईं। सरकारी संस्थानों को भी सुबह 10 बजे से काम शुरू करने को कहा ताकि छात्रों के लिए ट्रैफिक दिक्कत न बने।
सीएसएटी को कोरियाई भाषा में सुनेंग कहा जाता है। यह परीक्षा हर साल होती है जिसे छात्र टॉप यूनिवर्सिटीज में एडमिशन पाने के लिए देते हैं। यह परीक्षा हर साल नवंबर के तीसरे सप्ताह वाले गुरुवार को होती है। हाई स्कूल के फाइनल ईयर के छात्र या हाई स्कूल पास छात्र इस टेस्ट को दे सकते हैं। यह आठ घंटे लंबी परीक्षा पांच विषयों से मिलकर बनी होती है। परीक्षा के दौरान कोई डिनर ब्रेक नहीं होता। परीक्षा बिना रुके जारी रहती है और छात्रों को सिर्फ वॉशरूम जाने के लिए सीट से उठने की इजाजत होती है। चार विषय कोरियन, गणित, अंग्रेजी, और कोरियन इतिहास देने वालों को 37,000 वॉन फीस देनी पड़ती है। पांच विषय जिसमें विज्ञान या सामाजिक विज्ञान का विकल्प शामिल है देने वालों को 42,000 वॉन देने होते हैं। परीक्षा के उत्तर 25 नवंबर को शाम 5 बजे जारी होंगे। रिपोर्ट कार्ड 5 दिसंबर को मिलेगा।
एक बार फिर CBI को मिली बड़ी सफलता, भगोड़े जगदीश पुनेठा को UAE से लाया गया भारत
16 Nov, 2025 09:35 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
डेस्क: देश छोड़कर विदेश भागे भगोड़े अपराधियों (Fugitive Criminals) को पकड़ने में एक बार फिर एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है. केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) बड़ी कार्रवाई करते हुए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में छिपे भगोड़े जगदीश पुनेठा (Jagdish Punetha) को भारत वापस (Back India) लाने में सफल रही है. पुनेठा को गुरुवार (13 नवंबर, 2025) को इंटरपोल चैनल्स और UAE के अधिकारियों की मदद से पकड़कर वापस भारत लाया गया.
बता दें कि जगदीश पुनेठा के खिलाफ उत्तराखंड पुलिस ने 2021 में पिथौरागढ़ थाने में धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का केस दर्ज किया था. केस दर्ज होने के बाद आरोपी पुनेठा UAE भाग गया था. उत्तराखंड पुलिस की रिक्वेस्ट पर केंद्रीय जांच एजेंसी ने 6 मई 2025 को इंटरपोल से रेड नोटिस जारी करवाया था.
रेड नोटिस जारी होने के बाद से CBI लगातार UAE के अधिकारियों के संपर्क में बनी रही और उनके साथ मिलकर पुनेठा को ट्रैक किया गया. UAE की पुलिस ने जगदीश पुनेठा को पकड़ा और फिर CBI ने उसे भारत लाने की पूरी प्रक्रिया को कोऑर्डिनेट किया. बता दें कि उत्तराखंड पुलिस की एक टीम भी UAE गई और 13 नवंबर को उसे लेकर दिल्ली पहुंची.
लंदन में पाकिस्तानी प्रतिनिधि की इजराइल अधिकारी से मुलाकात, मचा बवाल
16 Nov, 2025 08:32 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के पर्यटन सलाहकार सरदार यासिर इलियास खान का एक वीडियो और कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर दो दिनों से चर्चा के केंद्र में हैं. इन वायरल क्लिप्स में उन्हें इजराइल के पर्यटन महानिदेशक माइकेल इज़्हाकोव से हाथ मिलाते और बातचीत करते देखा जा रहा है.
बस यही दृश्य पाकिस्तान में बड़ा राजनीतिक तूफान बन गया है. पाकिस्तान और इजराइल के बीच आधिकारिक संबंध न होने के कारण इस मुलाकात को लेकर कयास, आलोचना और आरोपों की बाढ़ आ गई है.
वायरल वीडियो में साफ दिखता है कि वर्ल्ड टूरिज्म एक्सपो, लंदन में सरदार यासिर इलियास खान इजराइली अधिकारी से हाथ मिला रहे हैं और उनसे संक्षिप्त बातचीत भी कर रहे हैं.
कई पाकिस्तानी पत्रकारों और सोशल मीडिया पर यूजर्स ने इन तस्वीरों को साझा करते हुए सवाल उठाया कि क्या पाकिस्तान अब इजराइल से रिश्तों में नरमी की ओर बढ़ रहा है. क्योंकि हाल ही में पाकिस्तान ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प की गाजा में युद्धविराम से जुड़ी 20-सूत्री योजना का स्वागत किया था, जिसके बाद पाकिस्तान की पारंपरिक दो-राष्ट्र समाधान वाली नीति पर भी चर्चा तेज हो गई.
सरदार यासिर इलियास ने इस पर सफाई दी है कि ये मुलाकात तय नहीं थी. बीबीसी को दिए बयान में यासिर इलियास ने कहा कि मुलाकात न तो औपचारिक थी और न ही तयशुदा. इजराइली प्रतिनिधि बिना पहचान बैज के पाकिस्तानी पवेलियन में आए. सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरों को तोड़ा-मरोड़ा गया है. साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में जब पत्रकारों ने विदेश मंत्रालय से सवाल पूछे, तो प्रवक्ता ने तीन बार लगभग एक ही जवाब दिया कि हमें इस मुलाकात की जानकारी नहीं.
रूसी वैज्ञानिकों का दावा—किर्गिस्तान की झील में मिला डूबा हुआ शहर, एटलांटिस की बहस फिर तेज
15 Nov, 2025 11:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। सदियों पहले भूकंप के झटकों ने इस कदर धरती को हिलाया कि दुनिया का एक बड़ा हिस्सा पानी में समा गया। यह कोई साधारण शहर नहीं था, बल्कि इसे पूरी दुनिया का केंद्र कहा जाता था। यूनान के मशहूर दार्शनिक प्लेटो ने इस कहानी को सच बताते हुए इस शहर को 'एटलांटिस' का नाम दिया था। प्लेटो का कहना था कि एटलांटिस एक टापू पर स्थित दुनिया का सबसे सभ्य और खूबसूरत शहर था।
प्लेटो के द्वारा बताए गए एटलांटिस की वैज्ञानिक आज भी तलाश कर रहे हैं। इसी कड़ी रूसी पुरातत्वविदों ने किर्गिस्तान की एक झील में पूरे शहर को ढूंढने का दावा किया है। यह खबर सामने आने के बाद एटलांटिस का नाम एक बार फिर सभी की जुबां पर है। यह शहर एटलांटिस की तरह ही खूबसूरत और समृद्ध नजर आ रहा है।
भूकंप के बाद झील में समाया
रूसी विज्ञान अकादमी के पुरातत्वविदों का कहना है कि उन्होंने किर्गिस्तान की इस्सिक कुल झील में एक जलमग्न शहर को ढूंढा है। यह शहर 15वीं शताब्दी में आए भूकंप के बाद झील में समा गया था। यह दुनिया की आठवीं सबसे गहरी झील है। इस झील का सर्वेक्षण किया जा रहा है। झील के आसपास खुदाई जारी है।
रूसी वैज्ञानिकों ने झील के नीचे जो शहर खोजा है, वो अपने समय में बेहद समृद्ध हुआ करता था। इस शहर में बड़े व्यावसायिक समूह की तस्वीर देखी जा सकती है। इस शहर की इमारतें पक्की ईंट, पत्थर और लकड़ी की बीम से मिलकर बनी थीं। साथ ही यहां अनाज और आटा पीसने वाली चक्की भी मिली है।
रहस्यमयी शहर में मिला बड़ा कब्रिस्तान
रूसी पुरातत्वविदों के अनुसार, यह शहर काफी बड़ा है, जहां एक सार्वजनिक इमारत भी मिली है। यह इमारत मस्जिद, स्नानघर, मदरसा या स्कूल के रूप में इस्तेमाल होती रही होगी। इसके अलावा शहर में एक बड़ा कब्रिस्तान भी मिला है। इन कब्रों में दफन लोगों को पारंपरिक इस्लामी रीति-रिवाजों से दफनाया गया है। शव का सिर उत्तर की ओर और मुंह किबला की तरफ है। यह वही दिशा है, जिस दिशा में मुस्लिम समुदाय के लोग नमाज अदा करते हैं।
डूबने से पहले लोगों ने छोड़ दिया था शहर
रूसी पुरातत्वविदों का कहना है कि इस खोज से यह साबित हो गया है कि यहां कभी कोई एक प्राचीन शहर था, जो भूकंप के कारण झील में धंस गया। हालांकि, आपदा आने से पहले ज्यादातर लोगों ने इस शहर को छोड़ दिया था। वहीं, कुछ समय बाद बंजारे यहां आकर बस गए और झील के किनारे छोटे-छोटे गांव बना लिए।
यूनानी दार्शनिक प्लेटो के एटलांटिस को कई लोग महज एक कल्पना मानते हैं, तो वहीं कुछ लोगों का कहना है कि यह सच भी हो सकता है। मुमकिन है कि कभी कोई ऐसा समृद्ध शहर रहा हो, जो अब धरती पर मौजूद नहीं है।
ऐसा एग्जाम कि देशभर में रुक गई उड़ानें! दक्षिण कोरिया में 5 लाख छात्र पहुंचे सेंटर
15 Nov, 2025 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दक्षिण कोरिया में गुरुवार को एक ऐसी परीक्षा हुई जिसके लिए देश में फ्लाइट तक को रोक दिया गया. देश में पांच लाख से ज्यादा छात्रों ने देश की बेहद मुश्किल यूनिवर्सिटी एंट्रेंस एग्जाम दिया. स्टूडेंट्स को समय पर परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने के लिए पुलिस को तैनात किया गया और आधे घंटे के लिए सभी उड़ानें रोक दी गईं.
इस साल परीक्षा देने वाले छात्रों की संख्या पिछले 7 सालों में सबसे ज्यादा थी. ज्यादातर परीक्षार्थी 2007 में पैदा हुए थे—जब देश में जन्मदर में बढ़ोतरी हुई थी, क्योंकि उस साल को बच्चों के जन्म के लिए शुभ माना जाता था.
क्यों रोकी गईं फ्लाइट्स
सुनने की क्षमता (Listening Comprehension) वाले अंग्रेजी सेक्शन के एग्जाम के दौरान किसी तरह का शोर न हो, इसलिए दोपहर 1:05 बजे से 1:40 बजे तक सभी हवाई अड्डों—इंचियोन इंटरनेशनल एयरपोर्ट सहित सभी पर हवाई जहाजों के उड़ान भरने और उतरने पर रोक लगा दी गई.
इस फैसले से 140 उड़ानें प्रभावित हुईं, जिनमें 65 इंटरनेशनल फ्लाइट्स शामिल थीं. फ्लाइट ट्रैकर पर दिखा कि कई विमान हवाई अड्डों के पास चक्कर लगाते रहे, क्योंकि परिवहन मंत्रालय ने 3,000 मीटर (9,843 फीट) से कम ऊंचाई पर उड़ान भरने पर प्रतिबंध लगा दिया था.
9 घंटे तक चला एग्जाम
इसी के साथ देश में इस एग्जाम को इतना महत्व दिया गया. इस बात को इतनी अहमियत दी गई कि सभी छात्र समय से एग्जाम हॉल में पहुंचे. अच्छे से एग्जाम दे सकें इसीलिए दक्षिण कोरिया में वित्तीय बाजार और दफ्तर एक घंटे देर से खुले. यह एग्जाम 9 घंटे तक चलता है और काफी अहम होता है. इस एग्जाम को वहां की प्रतिस्पर्धी सामाजिक व्यवस्था में सफलता के लिए निर्णायक माना जाता है.
रिपोर्ट के मुताबिक, एक परीक्षार्थी की मां, येयेसोन किम, जो अपनी बेटी के एग्जाम सेंटर के बाहर इंतजार कर रही थीं, ने कहा, यह परीक्षा पिछले लगभग 20 वर्षों से हमारा लक्ष्य रही है और अब एक नई शुरुआत भी है.
2007 में पैदा हुए लोगों ने दिया एग्जाम
इस साल कुल 5,54,174 लोगों ने एग्जाम के लिए पंजीकरण कराया—जो पिछले साल की तुलना में 6% ज्यादा है और 2019 के बाद सबसे ज्यादा है. साल 2007 में लगभग 4,96,000 बच्चों का जन्म हुआ था, जिसने 1990 के दशक के मिडिल से जारी गिरावट को कुछ समय के लिए रोक दिया था.
दक्षिण कोरिया दुनिया की सबसे तेजी से उम्रदराज होते देशों में से एक है, हालांकि 2024 में उसकी जन्मदर बढ़कर 0.75 हो गई.
UAE में जश्न का माहौल! 54वां ईद अल इत्तिहाद मनाने की धूम, देशभर में तैयारियां तेज़
15 Nov, 2025 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यूएई को दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है. देश में इस समय जोर-शोर से तैयारियां चल रही हैं. यह सभी तैयारियां देश के नेशनल डे के सेलिब्रेशन के लिए चल रही हैं. जिसे Eid Al Etihad भी कहा जाता है. इस मौके पर शारजाह में जश्न मनाया जाएगा.
शारजाह संयुक्त अरब अमीरात की एकता, प्रगति और सांस्कृतिक गौरव की यात्रा को याद करते हुए 54वें ईद अल इत्तिहाद के भव्य उत्सव की तैयारी कर रहा है. 19 नवंबर से 2 दिसंबर 2025 तक देश भर में पार्कों, ऐतिहासिक स्थलों में रंगीन परेड, आकर्षक प्रस्तुतियां, सांस्कृतिक प्रदर्शन और इंटरएक्टिव गतिविधियां आयोजित की जाएंगी. परिवारों, युवाओं और समुदायों के लिए यह ऐसा मौका होगा जहां वो अपनी परंपराओं का सम्मान करते हुए राष्ट्र की उपलब्धियों का जश्न मना सकेंगे.
पार्कों में होंगे कार्यक्रम
आधिकारिक उद्घाटन बुधवार, 19 नवंबर को शाम 5:00 बजे अल सियूह फैमिली पार्क में होगा, जिसमें
पारंपरिक लोक प्रस्तुतियां, सभी आयु वर्गों के लिए प्रतियोगिताएं, कलात्मक और ड्रामा, युवाओं की चर्चा पैनल, सांस्कृतिक और सामुदायिक गतिविधियां होंगी.
खशीशा पार्क और शारजाह नेशनल पार्क भी पूरे उत्सव के पीरियड के दौरान दैनिक गतिविधियों की मेजबानी करेंगे, जिनमें युवाओं के पैनल, बच्चों के शो और पारंपरिक प्रस्तुतियां शामिल होंगी.
पहली बार, अल लैयाह कैनाल भी 28 नवंबर से 2 दिसंबर तक उत्सव स्थलों में शामिल होगा, जहां राष्ट्रीय प्रस्तुतियां और पारिवारिक व्यवसाय प्रदर्शनी आयोजित की जाएंगी, जिससे उत्सवों का दायरा नए दर्शकों तक बढ़ेगा.
कई सितारे करेंगे परफॉर्म
शारजाह के उत्सवों में कई प्रमुख कार्यक्रम शामिल होंगे, जिनमें:
खोरफक्कान एम्फीथिएटर (29 नवंबर): देश के सितारों हुसैन अल जस्मी और फुआद अब्देलवाहद का शो होगा, खोरफक्कान (21 नवंबर): ओपरेट्टा (Operetta) पल्स ऑफ द नेशन, कल्बा (22 नवंबर से):वार्षिक ओपरेट्टा, आतिशबाजी के साथ दिब्बा अल हसन (22 नवंबर): राष्ट्रीय परेड और आतिशबाजी
ये कार्यक्रम देशभक्ति की भावना और सांस्कृतिक गौरव से भरपूर शामों का वादा करते हैं, जो यूएई की कलात्मक प्रतिभा को उजागर करेंगे.
कई जगह की जाएगी परेड
पूरे शारजाह में विभिन्न मोहल्लों और ऐतिहासिक स्थलों पर कई तरह की गतिविधियां आयोजित की जाएंगी:
अल बतायेह (2729 नवंबर): परेड, लोक प्रस्तुतियां
अल धैद (2630 नवंबर): भव्य परेड और हेरिटेज मार्केट
अल हमरिया हेरिटेज विलेज (2022 नवंबर): पारंपरिक गीत और क्लासिक कार प्रदर्शनी
वाडी अल हिलो (23 नवंबर): कविता पाठ और छात्र प्रस्तुतियां
अल ख्रूस उपनगर (28 नवंबर): परेड
अल मदाम (2223 नवंबर): सांस्कृतिक चर्चाएं और वीडियो स्क्रीनिंग
मलैहा हेरिटेज विलेज (2021 नवंबर): रेगिस्तानी माहौल में मिलिट्री बैंड और लोक नृत्य
मुगैदर उपनगर (अल रिफा पार्क, 2122 नवंबर): साइकिल परेड और पारंपरिक कार्यक्रम
इन सभी कार्यक्रमों का मकसद शारजाह की सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करना, समुदायों को जोड़ना और एकता, निष्ठा और राष्ट्रीय गर्व के मूल्यों को मजबूत करना है.
क्यों कहा जाता है ईद अल इत्तिहाद?
सवाल उठता है कि देश के नेशनल डे को ईद अल इत्तिहाद क्यों कहा जाता है. दरअसल, ईद अल इत्तिहाद शब्द का अर्थ अरबी में फेस्टिवल ऑफ द यूनियन होता है. इसमें इत्तिहाद यानी यूनियन/एकता पर जोर दिया गया है—जो यूएई की राष्ट्रीय पहचान का मूल है. यह नाम देश की स्थायी विरासत, शक्ति और गर्व के मूल्यों का प्रतीक है.
ईद अल इत्तिहाद हर साल 2 दिसंबर को आधिकारिक रूप से मनाया जाता है. यह 1971 के उस ऐतिहासिक दिन की याद है जब 7 अमीरात एकजुट होकर संयुक्त अरब अमीरात बने. 2024 में, यूएई के नेशनल डे समारोहों को आधिकारिक रूप से ईद अल इत्तिहाद का नाम दिया गया.
शेख हसीना का बड़ा खुलासा: कहा— मुझे इस्तीफा नहीं देना पड़ा, सत्ता से जबरन हटाया गया
15 Nov, 2025 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना इस समय लगातार अंतरिम सरकार पर निशाना साध रही हैं. शेख हसीना ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में तख्तापलट को लेकर दावा किया है कि मैंने अस्थायी रूप से जाने का फैसला किया. शेख हसीना का कहना है कि उन्होंने कभी इस्तीफा नहीं दिया, कभी सत्ता नहीं छोड़ी, बल्कि उन्हें गैर-निर्वाचित तरीके से सत्ता छीनकर बाहर किया गया. शेख हसीना देश की चार बार की प्रधानमंत्री हैं. बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद शेख हसीना दिल्ली में एक गुप्त स्थान पर रह रहीं हैं.
इसी के बाद इन दिनों एक के बाद एक शेख हसीना के इंटरव्यू सामने आ रहे हैं. हाल ही में एक इंटरव्यू में तख्तापलट को लेकर उन्होंने पाकिस्तान और अमेरिका पर बड़े आरोप लगाए. उन्होंने हाल ही में एक मीडिया हाउस को दिए इंटरव्यू में अपने शासन के गिरने, उसके बाद फैली हिंसा और मोहम्मद यूनुस की अगुवाई वाली अंतरिम सरकार के बारे में बात की. साथ ही वो जनविद्रोह को खारिज करती हैं, अपने विरोधियों पर उग्रवादियों को बढ़ावा देने का आरोप लगाती हैं और चेतावनी देती हैं कि उनके जाने के बाद से बांग्लादेश की अल्पसंख्यकों खासकर हिंदुओं पर सुनियोजित हमले बढ़े हैं.
भारत से की अपील
हाल ही में दिए इंटरव्यू में शेख हसीना ने 2024 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों, अपने राजनीतिक भविष्य और आगामी चुनाव में उनकी संभावित वापसी पर खुलकर जवाब दिया. हसीना का कहना है कि भारत — जिसे वो बांग्लादेश का सबसे अहम संबंध मानती हैं उसको ऐसे किसी भी चुनाव को वैधता नहीं देनी चाहिए जिसमें अवामी लीग को बाहर रखा जाए.
वो यह भी बताती हैं कि नया जुलाई चार्टर देश के इतिहास को फिर से लिखने की कोशिश है और उन मूल सिद्धांतों को कमजोर करता है जिन्हें उनके पिता, शेख मुजीबुर रहमान, ने स्वतंत्रता के समय स्थापित किया था.
जब बांग्लादेश भारत के साथ बढ़ते तनाव और चीन की बढ़ती मौजूदगी के बीच एक भू-राजनीतिक मोड़ पर खड़ा है, हसीना अंतरिम सरकार की अब तक की सबसे कड़ी आलोचना पेश करती हैं — और आगाह करती हैं कि दांव पर सिर्फ बांग्लादेश का भविष्य नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता है.
इस्तीफे को लेकर क्या कहा?
शेख हसीना ने कहा, मैंने न तो इस्तीफा लिखा, न हस्ताक्षर किए, और न ही कोई इस्तीफा राष्ट्रपति को सौंपा. अगस्त में जो हुआ वो एक संवैधानिक सत्ता-हस्तांतरण नहीं था, बल्कि बिना चुने हुए लोगों की ओर से सत्ता छीनने की कार्रवाई थी. अगस्त की शुरुआत तक सुरक्षा हालात इतने बिगड़ चुके थे कि मेरी जान के खिलाफ विश्वसनीय खतरे पैदा हो गए थे. मेरी सुरक्षा और मेरे आसपास के लोगों की सुरक्षा को देखते हुए मुझे देश छोड़ने की सलाह दी गई.
उन्होंने आगे कहा, उस समय मेरे सामने दो विकल्प थे — या तो उग्रवादी ताकतों की मांगों के सामने झुक जाऊं, या फिर खुद को तत्काल खतरे से दूर करके अपने लोगों को और हिंसा से बचाऊं. मैंने हालात को और बिगड़ने से रोकने और किसी भी तरह का और खून-खराबा होने से रोकने के लिए अस्थायी रूप से देश छोड़ने का निर्णय लिया. मेरा जाना मजबूरी और अस्तित्व का सवाल था, त्याग या पद छोड़ने का नहीं.
आंदोलन को लेकर क्या कहा?
शेख हसीना ने साल 2024 में उनके खिलाफ शुरू हुए आंदोलन को लेकर कहा, शुरुआत में यह आंदोलान छात्रों की आर्थिक और सामाजिक शिकायतों से जुड़ा था, लेकिन बहुत जल्दी इसे उग्रवादी गुटों और उन ताकतों ने हाइजैक कर लिया जिनका मकसद बांग्लादेश की लोकतांत्रिक संरचना को खत्म करना था.
उन्होंने आगे कहा, हिंसा का अचानक भड़कना, देश की सबसे लोकप्रिय राजनीतिक पार्टी पर प्रतिबंध लगाना और सत्ता का तुरंत युनुस के आस-पास एक छोटे समूह में केंद्रीकरण होना, ये सब दिखाता है कि यह लोकतांत्रिक सुधार का आंदोलन कभी था ही नहीं. यह जनआंदोलन से कहीं अधिक एक तख्तापलट था.
अगर यह वाकई जनता का आंदोलन होता, तो यूनुस अब तक जनता के बीच जाकर निष्पक्ष चुनाव के जरिए अपनी वैधता क्यों नहीं परखते?
हिंदू समुदाय पर हुए अत्याचार को लेकर क्या कहा?
शेख हसीना ने कहा, अगस्त 2024 के बाद से हिंदू समुदायों और अन्य अल्पसंख्यकों पर होने वाले व्यवस्थित हमले कोई बेमतलब की हिंसक घटनाएं नहीं हैं. वो एक सुनियोजित अभियान का हिस्सा हैं, जिसे कट्टरपंथी तत्व चला रहे हैं जिन्हें वर्तमान प्रशासन ने हिम्मत और सहारा दिया है.
उन्होंने आगे कहा, मेरी सरकार के दौरान, हमने सभी नागरिकों की सुरक्षा के लिए कड़ी मेहनत की, चाहे वो किसी भी धर्म के हों. बांग्लादेश की स्थापना धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर हुई थी जो विविधता का सम्मान करते हैं. लेकिन, अब धार्मिक अल्पसंख्यक भय में जी रहे हैं. उनके मंदिरों पर हमले हो रहे हैं, उनके कारोबार नष्ट किए जा रहे हैं और उनके परिवारों को धमकाया जा रहा है.
अंतरिम सरकार का अल्पसंख्यकों की रक्षा करने में विफल होना सिर्फ लापरवाही नहीं है — यह मिलीभगत है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चुप नहीं रहना चाहिए जबकि बांग्लादेश के हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक इस अत्याचार का सामना कर रहे हैं.
चीन-जापान रिश्तों में बढ़ा तनाव, बीजिंग ने जारी की एडवाइजरी— ‘जापान यात्रा से बचें’
15 Nov, 2025 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चीन और जापान के बीच तनाव बढ़ा हुआ दिखाई दे रहा है. जापान की नई प्रधानमंत्री साने तकाईची ने ताइवान को लेकर बयान दिए थे. उन्होंने ताइवान पर संभावित हमले से जुड़े बयान दिए थे. इसी के बाद चीन ने अब अपने नागरिकों को जापान की यात्रा से बचने की सलाह दी है.
जापानी प्रधानमंत्री साने तकाईची ने 7 नवंबर को संसद में कहा कि चीन की ओर से दावा किए गए स्वशासित ताइवान पर बल का इस्तेमाल होने पर टोक्यो की ओर से सैन्य प्रतिक्रिया हो सकती है. इसी के साथ एक अनुचित और अब हटा दिए गए ऑनलाइन पोस्ट की वजह से शुक्रवार को बीजिंग ने जापान के राजदूत को तलब किया, जबकि टोक्यो ने चीन के राजदूत को तलब किया. टोक्यो ने अब भी कहा है कि ताइवान के प्रति उसकी स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है.
नागरिकों को जापान न जाने की सलाह
शुक्रवार देर रात एक ऑनलाइन पोस्ट में, जापान में चीन के दूतावास ने अपने नागरिकों को जापान की यात्रा से बचने की चेतावनी दी. WeChat पोस्ट में कहा गया, हाल ही में, जापानी नेता ताइवान को लेकर खुले तौर पर उत्तेजक बयान दे रहे हैं, जिससे लोगों के बीच संवाद और संपर्क का माहौल गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है.
पोस्ट में आगे कहा गया कि यह स्थिति जापान में चीनी नागरिकों की व्यक्तिगत सुरक्षा और जीवन के लिए गंभीर जोखिम पैदा करती है. विदेश मंत्रालय और जापान में चीनी दूतावास और वाणिज्य दूतावास गंभीरता से अपने नागरिकों को आने वाले दिनों में जापान की यात्रा से बचने की सलाह देते हैं.
ताइवान को लेकर बढ़ा तनाव
बीजिंग का कहना है कि ताइवान — जिसे जापान ने 1945 तक कई दशकों तक कब्जा किया था — उसके क्षेत्र का हिस्सा है और नियंत्रण हासिल करने के लिए बल प्रयोग करने से इनकार नहीं किया गया है. चीन और जापान अहम व्यापारिक साझेदार हैं, लेकिन ऐतिहासिक अविश्वास और क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा के चलते तनाव बना हुआ है.
तकाईची ने ताइवान को लेकर दिया बयान
तकाईची, जो एक रूढ़िवादी और चीन विरोधी नेता हैं, उन्होंने पिछले महीने सत्ता संभालने के बाद अपने रुख को थोड़ा नरम कर लिया है. लेकिन अपनी सरकार के सिर्फ कुछ ही हफ्तों में, दोनों पड़ोसी देशों के बीच मतभेद उभर आए हैं.
7 नवंबर को संसद में अपनी बात रखते हुए तकाईची ने कहा कि ताइवान पर सशस्त्र हमला होने पर सामूहिक आत्मरक्षा के तहत वहां सैनिक भेजे जा सकते हैं. उन्होंने कहा, अगर ताइवान में किसी आपात स्थिति में युद्धपोत और बल का प्रयोग हुआ, तो यह (जापान के अस्तित्व के लिए) खतरे की स्थिति बन सकती है, चाहे इसे किसी भी नजरिए से देखा जाए.
2015 में पारित सुरक्षा कानून जापान को कुछ विशेष परिस्थितियों में सामूहिक आत्मरक्षा का अधिकार इस्तेमाल करने की इजाजत देता है, जिसमें देश के अस्तित्व को स्पष्ट खतरा होने की स्थिति भी शामिल है. बढ़ते राजनयिक विवाद के बावजूद, तकाईची ने अब तक संकेत दिया है कि वो अपने बयान को वापस लेने का इरादा नहीं रखती और जोर दिया कि यह टोक्यो की पुरानी नीति के अनुरूप है.
पूर्व जापानी प्रधानमंत्री ताइवान की सुरक्षा पर सीधे टिप्पणी करने से बचते आए हैं और इसके बजाय रणनीतिक अस्पष्टता बनाए रखते हैं. अमेरिका भी लंबे समय से ताइवान की रक्षा के लिए अपनी सैन्य तैनाती को लेकर जानबूझकर अस्पष्ट रहा है.
पोस्ट को लेकर हुआ विवाद
तकाईची के बयान के जवाब में, ओसाका में चीनी महावाणिज्य दूत शुए जियान ने सोशल मीडिया पर एक विवादित पोस्ट की. जो जाहिर तौर पर तकाईची की ओर इशारा थी. जापान ने इस हटाई गई सोशल मीडिया पोस्ट पर विरोध दर्ज कराया.
सत्ता संभालने से पहले, तकाईची, पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की शिष्य, एशिया-पैसिफिक में चीन और उसके सैन्य विस्तार की मुखर आलोचक रही हैं. तकाईची पहले ताइवान का दौरा कर चुकी हैं और हाल ही में हुए APEC सम्मेलन में ताइपेई के प्रतिनिधि से मिलीं, जहां उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी बातचीत की.
लाइव परफॉर्म करते हुए बेहोश होकर गिरी सिंगर ह्यूना
14 Nov, 2025 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मकाऊ । हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान साउथ कोरियाई सिंगर ह्यूना स्टेज पर बेहोश हो गई। मकाऊ में आयोजित “वॉटरबम्ब 2025” म्यूजिक फेस्टिवल के दौरान ह्यूना स्टेज पर लाइव परफॉर्म करते हुए अचानक बेहोश होकर गिर पड़ीं। ह्यूना के गिरते ही बैकअप डांसर्स और सुरक्षा कर्मी तुरंत मंच पर पहुंचे और उन्हें अस्पताल ले जाया गया। इस अप्रत्याशित घटना के कारण शो को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा। सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद दुनिया भर में मौजूद उनके प्रशंसक उनकी सेहत को लेकर चिंतित नजर आए। कुछ घंटों बाद जब ह्यूना को होश आया, तो उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक भावुक पोस्ट शेयर किया। उन्होंने लिखा, “मैं सच में बहुत माफी चाहती हूं। मैं सबको एक शानदार परफॉर्मेंस देना चाहती थी, लेकिन ऐसा नहीं कर पाई। मुझे उस पल की कोई याद नहीं है। कृपया मेरे लिए चिंता मत करें, मैं जल्द ही पहले से भी बेहतर वापसी करूंगी।” उन्होंने अपने फैंस का प्यार और समर्थन के लिए शुक्रिया भी अदा किया। ह्यूना ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि सिंगर फिलहाल आराम कर रही हैं और उनकी सेहत स्थिर है।
डॉक्टरों की एक टीम लगातार उनकी देखरेख कर रही है और उन्हें कुछ दिनों तक विश्राम करने की सलाह दी गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल ही में ह्यूना ने खुलासा किया था कि उन्होंने सिर्फ एक महीने में करीब 10 किलो वजन घटाया है। ऐसा उन्होंने इसलिए किया क्योंकि उनकी शादी के बाद सोशल मीडिया पर उनके वजन और प्रेग्नेंसी को लेकर अफवाहें फैल रही थीं। विशेषज्ञों का कहना है कि तेजी से वजन कम करने से ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट पर नकारात्मक असर पड़ सकता है, जिससे व्यक्ति बेहोश भी हो सकता है।
ईरानी मानव सभ्यता भारत से भी पुरानी : शोध
14 Nov, 2025 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन । अभी तक भारत को दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक माना जाता था, वहीं इस रिपोर्ट के अनुसार मानव सभ्यता की शुरुआत का श्रेय अब ईरान को दिया गया है। विश्व जनसंख्या मूल्यांकन की ताज़ा रिपोर्ट ने इतिहास के अध्ययन में एक नया मोड़ जोड़ दिया है। अध्ययन में बताया गया है कि ईरान, जिसे प्राचीन काल में फारस के नाम से जाना जाता था, मानव बस्तियों का सबसे पुराना केंद्र रहा है। यहां मानव जीवन के साक्ष्य एक लाख साल से भी पुराने मिले हैं, जो यह संकेत देते हैं कि सभ्यता की जड़ें इसी क्षेत्र में सबसे पहले फली-फूलीं। रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान का इतिहास एलामाइट सभ्यता से जुड़ा है, जिसकी शुरुआत लगभग 2700 ईसा पूर्व में हुई थी। यह सभ्यता मानव इतिहास की शुरुआती संगठित बस्तियों में से एक मानी जाती है, जहां लोगों ने पहली बार समूह में रहना, खेती करना और व्यापारिक गतिविधियां शुरू की थीं। पुरातत्वविदों को यहां खुदाई के दौरान कई प्राचीन नगरों, मिट्टी के बर्तनों, लिपियों और धार्मिक अवशेषों के प्रमाण मिले हैं। इन खोजों से यह साफ होता है कि ईरान न केवल मानव बसावट का प्रारंभिक केंद्र रहा, बल्कि इसने समाज के संगठन और संस्कृति की नींव भी रखी।
अध्ययन के अनुसार, ईरान के विभिन्न हिस्सों में एक लाख वर्ष पहले से मानव रह रहे थे। यह निष्कर्ष उन जीवाश्मों और पत्थर के उपकरणों के विश्लेषण पर आधारित है जो वहां की पुरातात्विक खुदाइयों में मिले हैं। भारत, जिसे सदियों से अपनी प्राचीनता और सांस्कृतिक विविधता के लिए जाना जाता है, इस सूची में सातवें स्थान पर है। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारतीय उपमहाद्वीप में संगठित बस्तियों का विकास लगभग 2000 ईसा पूर्व में हुआ, जब सिंधु घाटी सभ्यता अपने उत्कर्ष पर थी। हरप्पा और मोहनजोदड़ो जैसी नगरीय संस्कृतियों ने भारत को उस युग की सबसे उन्नत सभ्यताओं में शामिल किया। अध्ययन यह भी बताता है कि चीन भी भारत की तरह लगभग उसी काल में विकसित हुआ और दोनों देशों ने मानव समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
विश्व जनसंख्या मूल्यांकन की यह रिपोर्ट ऐतिहासिक, पुरातात्विक और जनसंख्या संबंधी आंकड़ों के अध्ययन पर आधारित है। इसमें उन क्षेत्रों का विश्लेषण किया गया जहां सबसे पहले मनुष्यों ने स्थायी समूह बनाकर रहना शुरू किया और सभ्यता की नींव रखी। यद्यपि भारत अपनी ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक निरंतरता और आध्यात्मिक विरासत के लिए अब भी विशिष्ट स्थान रखता है, लेकिन इस रिपोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मानव सभ्यता की शुरुआत की कहानी में ईरान का नाम सबसे पहले आता है।
कई हिस्सों में नजर आने लगते हैं किडनी डैमेज के संकेत
14 Nov, 2025 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। शरीर का महत्वपूर्ण अंग किडनी जब ठीक से काम करना बंद कर देती है, तो इसके शुरुआती संकेत शरीर के कई हिस्सों में नजर आने लगते हैं इनमें आंखें सबसे प्रमुख हैं। अक्सर लोग इन संकेतों को थकान या नींद की कमी समझकर अनदेखा कर देते हैं, लेकिन ऐसा करना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है, क्योंकि समय रहते ध्यान न देने पर किडनी पूरी तरह फेल भी हो सकती है। किडनी डैमेज का सबसे आम और बड़ा लक्षण आंखों के आसपास सूजन है। जब किडनी सही तरीके से काम नहीं करती, तो वह खून में मौजूद प्रोटीन को स्टोर करने के बजाय यूरिन के जरिए बाहर निकाल देती है। इससे शरीर में प्रोटीन की कमी हो जाती है और तरल पदार्थ ब्लड वेसल्स से निकलकर टिश्यूज में जमा होने लगते हैं। चूंकि आंखों के आसपास की त्वचा बहुत पतली और संवेदनशील होती है, इसलिए सूजन सबसे पहले वहीं दिखाई देती है।
एक और आम लक्षण है आंखों में खुजली और लालपन । किडनी के खराब होने पर खून में टॉक्सिन्स और यूरिया की मात्रा बढ़ जाती है। यह बढ़ा हुआ यूरिया शरीर के विभिन्न हिस्सों में जमा होकर खुजली पैदा करता है, जिसे यूरिमिक प्रुरिटस कहा जाता है। इससे आंखों में जलन, लालपन और लगातार खुजली महसूस होती है। अगर आपकी नजर अचानक धुंधली होने लगे तो यह भी किडनी से जुड़ी समस्या का परिणाम हो सकता है। दरअसल, किडनी की बीमारी से हाई ब्लड प्रेशर बढ़ता है, जिससे आंखों की रेटिना में मौजूद नाजुक रक्त वाहिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। इसे रेटिनोपैथी कहा जाता है, जो धीरे-धीरे दृष्टि को कमजोर कर सकती है। सबसे गंभीर लक्षणों में से एक है आंखों में खूनस्राव ।
जब किडनी फेलियर के कारण ब्लड प्रेशर बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तो आंखों की छोटी रक्त वाहिकाएं फट सकती हैं, जिससे सफेद हिस्से में लाल धब्बे या ब्लीडिंग दिखाई देने लगती है। यह स्थिति मेडिकल इमरजेंसी होती है और तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। इसलिए अगर आंखों में सूजन, लालपन या धुंधलापन जैसे लक्षण दिखें, तो इन्हें नजरअंदाज न करें यह किडनी के शुरुआती खतरे का संकेत हो सकता है। समय पर जांच और इलाज से गंभीर नुकसान से बचा जा सकता है। बता दें कि किडनी हमारे शरीर की सबसे मेहनती अंगों में से एक है, जो खून को फिल्टर कर शरीर से वेस्ट मटीरियल और टॉक्सिन्स को बाहर निकालती है।
स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही या सिस्टम की नाकामी? डेंगू से जान गई
14 Nov, 2025 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सिरसा (हरियाणा): जिले के अंदर डेंगू का प्रकोप बढ़ा जा रहा हैं। जिले में जहां 600 के आसपास आंकड़ा पहुंच चुका है। वहीं, वीरवार देर रात को रानियां के गांव चकराइयां के 43 वर्षीय गुरमेल सिंह की निजी अस्पताल में डेंगू के उपचार के दौरान मौत हो गई। गुरमेल सिंह की मौत के बाद मामले की जांच करने में स्वास्थ्य विभाग की टीम जुट गई हैं। जिले में यह डेंगू से पहली मौत है। हालांकि इससे पहले भी वायरल बुखार से औटू में बहन भाई, ओढ़ां में बच्ची ओर अहमदपुर में 13 वर्षीय बच्ची की मौत के मामले सामने आ चुके हैं। चिकित्सकों के अनुसार वायरल फीवर व डेंगू के कारण तेजी से प्लेटलेस में तेजी से गिरावट आ रही है। यही कारण है कि मरीज की मौत हो जाती है।
गांव चकराइयां में गुरमेल की मौत के बाद मातम छाया हुआ है। गुरमेल सिंह खेतीबाड़ी करता था और तीन बच्चों का पिता था। वह एक सप्ताह से ज्यादा दिनों से निजी अस्पताल में भर्ती था। जहां पर उसका डेंगू का इलाज चल रहा था।
प्रशासन के दावों पर उठ रहे सवाल
जिले में स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न टीमें जागरूकता अभियान में लगी हुई हैं। फोगिंग करवाने के साथ सैंपल लेने का काम जिले भर में जारी है। इसके बाद भी डेंगू के मामलों में गिरावट नहीं आ रही हैं। जिला प्रशासन ने भी पंचायतों को फोगिंग करवाने की मांग की है।
22 नवंबर को कुदरा डेज़र्ट में होगा भोपाली बॉयज़ का 5वां वार्षिक मिलन समारोह
14 Nov, 2025 01:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दुबई, यूएई – नवंबर 2025: यूएई में बसे जीवंत भोपाली समुदाय के लिए 22 नवंबर को कुदरा डेज़र्ट में होने वाला 5वां वार्षिक भोपाली बॉयज़ गेट-टुगेदर उत्साह का विषय बना हुआ है। पिछले वर्ष की शानदार सफलता के बाद, इस बार का आयोजन भी मेलजोल, सांस्कृतिक गर्व और सामुदायिक पहल से भरे यादगार पलों का वादा करता है। इस आयोजन को बीबी ऑर्गनाइजिंग कमेटी जिसमें नवेद खान, यूसुफ आलम, अनस खान, अफ़्ताब खान, वसीम आगा और मोहम्मद अमान शामिल हैं—द्वारा आयोजित किया जा रहा है। एक साधारण सी मुलाकात के रूप में शुरू हुआ यह आयोजन अब एक महत्वपूर्ण वार्षिक मंच का रूप ले चुका है, जहाँ यूएई में रहने वाले भोपाली मूल के प्रोफेशनल्स, उद्यमियों और छात्रों को आपस में जुड़ने का अवसर मिलता है। इस वर्ष का मुख्य उद्देश्य सामुदायिक उत्थान* तथा भोपाली नेटवर्क के भीतर और भी मजबूत रिश्ते बनाना है। उपस्थित लोगों को सामूहिक प्रगति के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर चर्चा करने का अवसर मिलेगा, जिनमें शामिल हैं:
* *नौकरी सहयोग और करियर नेटवर्किंग*
* *चैरिटी पहलों और सामुदायिक कल्याण*
* *सामाजिक जुड़ाव और प्रोफेशनल कनेक्शन*
* *भोपाली व्यवसायों का प्रचार*
* *खेल गतिविधियाँ और युवाओं की भागीदारी*
चर्चाओं के अलावा, आयोजन में सांस्कृतिक यादें, पारंपरिक भोजन, इंटरैक्टिव सत्र और कुदरा डेज़र्ट के प्राकृतिक सौंदर्य के बीच आउटडोर गतिविधियाँ शामिल होंगी। आयोजन समिति की ओर से सदस्यों ने बताया कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य यूएई में रह रहे भोपालियों के बीच सहयोग, पहचान और एकता को मजबूत करना है। “हर साल हम इस मिलन को और अधिक प्रभावशाली और समावेशी बनाने का प्रयास करते हैं। यह सिर्फ एक गेट-टुगेदर नहीं, बल्कि पूरे भोपाली समुदाय के लिए भविष्य के अवसरों को जोड़ने वाला पुल है,” समिति ने कहा। बढ़ते उत्साह के साथ, यह 5वां वार्षिक गेट-टुगेदर अपनी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए एक और महत्वपूर्ण आयोजन के रूप में पहचान बनाने को तैयार है—जहाँ भाईचारा, विरासत और सामुदायिक प्रगति का उत्सव मनाया जाएगा।
एच-1बी वीजा प्रोग्राम का बचाव कर ट्रंप ने कहा, आपको टैलेंट लाना ही होगा
14 Nov, 2025 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एच-1बी वीजा प्रोग्राम का बचाव कर कहा कि अमेरिका को कुछ खास उद्योगों के लिए विदेशी प्रतिभा की जरूरत है। एक इंटरव्यू के दौरान ट्रंप से पूछा गया कि क्या उनकी सरकार एच-1बी वीजा को कम प्राथमिकत देने जा रही है, इस पर ट्रंप ने जवाब दिया, आपको टैलेंट लाना ही होगा। इंटरव्यूकर्ता ने कहा कि हमारे पास पहले से बहुत टैलेंट है, इस पर ट्रंप ने दो टूक कहा कि नहीं, आपके पास नहीं है।
ट्रंप ने कहा, कुछ खास तरह की प्रतिभाएं यहां नहीं हैं। आप बेरोजगारों की कतार में खड़े किसी व्यक्ति को उठाकर नहीं कह सकते कि चलो, अब तुम मिसाइल फैक्ट्री में काम करो। लोगों को ये समझना होगा कि हर काम के लिए खास स्किल चाहिए।हालांकि, यह बयान तब आया है जब ट्रंप प्रशासन ने सितंबर में एच-1बी वीजा पर सख्ती की घोषणा की थी, जिसमें आवेदन शुल्क को बढ़ाकर 100,000 डॉलर कर दिया गया था।
इसके तहत, अमेरिकी श्रम विभाग ने 175 से ज्यादा इन्वेस्टिगेशन शुरू की हैं ताकि एच-1बी प्रोग्राम के दुरुपयोग की संभावनाओं को परखा जा सके। यह पहल प्रोजेक्ट फायरवॉल के नाम से चल रही है, जो उन कंपनियों को निशाने पर ले रही है जो इस वीजा सिस्टम का गलत फायदा उठाती हैं।
डीओएल सचिव लोरी शावेज-डीरीमर ने कहा, हम एच-1बी के दुरुपयोग को रोकने और अमेरिकी नौकरियों की रक्षा करने के लिए हर संसाधन का इस्तेमाल कर रहे हैं।
इसी बीच, फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डीसैंटिस ने राज्य के विश्वविद्यालयों में एच-1बी वीजा पर लगे कर्मचारियों को हटाने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा, हम विदेशी कर्मचारियों को क्यों ला रहे हैं, जब हमारे अपने लोग ये काम कर सकते हैं? यह सस्ता श्रम का तरीका है।
वहीं, व्हाइट हाउस ने दोहराया कि राष्ट्रपति ट्रंप की प्राथमिकता अमेरिकी कामगारों को पहले मौका देना है। हालांकि, इस नीति के खिलाफ कई कानूनी चुनौतियां भी सामने आई हैं, जिनमें से एक मुकदमा यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स ने दायर किया है। इसके अलावा, 31 अक्टूबर को पांच अमेरिकी सांसदों ने ट्रंप को पत्र लिखकर 19 सितंबर के उनके आदेश पर पुनर्विचार करने की अपील की।
सोनीपत पहुंचे CM नायब सैनी, वीर कुशाल सिंह के 350वें बलिदान दिवस पर नमन
14 Nov, 2025 12:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सोनीपत (हरियाणा): सोनीपत के राई स्थित राजीव गांधी एजुकेशन सिटी में आज वीर कुशाल सिंह के 350वें बलिदान दिवस पर भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे और वीर शहीद कुशाल सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम में हरियाणा सरकार के कैबिनेट मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा, विधायक महिपाल ढांडा और बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मोहनलाल बडोली भी विशेष रूप से मौजूद रहे। सभी अतिथियों ने वीर कुशाल सिंह के बलिदान और शौर्य की गाथा को याद करते हुए उन्हें नमन किया।
राजीव गांधी एजुकेशन सिटी में आयोजित यह कार्यक्रम देशभक्ति से ओत-प्रोत रहा, जहां बड़ी संख्या में लोग वीर कुशाल सिंह की स्मृति में एकत्रित हुए। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने कहा कि ऐसे वीरों के बलिदान को सदैव याद रखा जाएगा।
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