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एयरलाइन के लिए काला दिन, 24 घंटे में दो विमान हादसे; 10 लोगों की मौत
11 Jul, 2026 08:14 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नासाउ। बहामास की एयरलाइन 'फ्लेमिंगो एयर' के लिए शुक्रवार का दिन बेहद दुखद और विनाशकारी रहा। कुछ ही घंटों के भीतर एयरलाइन के दो विमानों के साथ गंभीर दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें से एक हादसे में 10 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। दिन की शुरुआत में, तकनीकी खराबी के चलते वापस लौटे एक विमान में लैंडिंग के बाद आग लग गई थी, हालांकि उसमें सवार सभी यात्री सुरक्षित बच गए। इस झटके से एयरलाइन उबर भी नहीं पाई थी कि कुछ ही घंटों बाद कंपनी का दूसरा विमान नॉर्थ एंड्रोस इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
नॉर्थ एंड्रोस में भीषण विमान दुर्घटना
राजधानी नासाउ के लिंडन पिंडलिंग अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से सैन एंड्रोस के लिए उड़ान भरने वाला विमान दोपहर करीब एक बजे जंगल में जा गिरा। दुर्घटना के समय इलाके में स्वतंत्रता दिवस से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे थे, जिससे बचाव कार्यों में भी स्थानीय स्तर पर हलचल रही। पुलिस ने बताया कि दुर्घटनास्थल से एक व्यक्ति को जीवित निकाला गया था, लेकिन अस्पताल में उपचार के दौरान उसने भी दम तोड़ दिया। प्रशासन ने फिलहाल मृतकों की पहचान गुप्त रखी है और जब तक परिजनों को सूचित नहीं किया जाता, तब तक यात्रियों की सूची सार्वजनिक न करने का निर्णय लिया है।
सरकार का कड़ा कदम और उड़ानों पर रोक
बहामास के प्रधानमंत्री फिलिप ब्रेव डेविस ने इस त्रासदी पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदनाएं प्रकट की हैं। एक ही दिन में दो गंभीर हादसों को देखते हुए बहामास सरकार ने तत्काल प्रभाव से फ्लेमिंगो एयर की सभी उड़ानों को अगले आदेश तक निलंबित कर दिया है। ऊर्जा, उपयोगिता एवं विमानन मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह एहतियाती फैसला यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए लिया गया है, ताकि दुर्घटना के कारणों की गहराई से जांच की जा सके।
सुरक्षा मानकों पर एयरलाइन का इतिहास
फ्लेमिंगो एयर बहामास के 13 प्रमुख गंतव्यों के लिए अपनी सेवाएं देती है और इसके बेड़े में कुल नौ विमान शामिल हैं। हालांकि साल 2012 से पहले एयरलाइन के विमानों के साथ कई छोटी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें 2023 में हवा में विमान का दरवाजा खुलने और 2016 में लैंडिंग गियर फेल होने जैसी घटनाएं शामिल हैं, लेकिन शुक्रवार का हादसा एयरलाइन के इतिहास में सबसे घातक साबित हुआ है। सरकार की जांच के बाद यह तय होगा कि एयरलाइन अपनी परिचालन क्षमता और सुरक्षा मानकों में सुधार के लिए क्या कदम उठाएगी।
स्पेन के जंगल धधके: भीषण आग से 12 की जान गई, 23 लापता; राहत-बचाव जारी
11 Jul, 2026 08:06 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अल्मेरिया। स्पेन के अल्मेरिया प्रांत में जंगलों में लगी भीषण आग ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें कम से कम 12 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है। सिएरा डे लॉस फिलाब्रेस पहाड़ियों के निकट स्थित यह इलाका बड़ी संख्या में विदेशी नागरिकों का बसेरा है, जो अब राख में तब्दील हो चुका है। आग के कारण 23 लोग लापता हैं और 3,200 हेक्टेयर से अधिक भूमि जलकर नष्ट हो गई है। बचाव दल अब भी लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं और मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
आपातकालीन दिशा-निर्देशों की अनदेखी बनी जानलेवा
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, मौतों का प्रमुख कारण सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह को न मानना रहा। कई निवासियों ने घबराहट में कारों के जरिए भागने का प्रयास किया या पैदल ही निकल पड़े, जो कि आग की भीषण लपटों के बीच खतरनाक साबित हुआ। अधिकारियों ने बताया कि कुछ लोग सूखी नदी के रास्ते सुरक्षित निकलने की कोशिश में फंस गए, जो उनके लिए जानलेवा साबित हुआ। मरने वालों में चार ब्रिटिश नागरिकों के होने की पुष्टि उनके वाहन के मॉडल (दाहिनी ओर स्टीयरिंग) से की जा रही है, जबकि अन्य सात लोगों की मौत पैदल भागते समय हुई।
प्रतिकूल भौगोलिक परिस्थितियों से बढ़ी चुनौती
इस विनाशकारी आग को बुझाने के लिए 150 दमकलकर्मी और मिलिट्री इमरजेंसी यूनिट के 220 जवान दिन-रात संघर्ष कर रहे हैं। सिएरा डे लॉस फिलाब्रेस की ऊबड़-खाबड़ जमीन, सूखी झाड़ियां और तेज हवाओं ने राहत कार्यों को अत्यंत कठिन बना दिया है। भीषण हीटवेव के कारण पूरा क्षेत्र बारूद की तरह ज्वलनशील हो चुका है, जिससे आग एक स्थान से दूसरे स्थान पर तेजी से फैल रही है। स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने इस हृदयविदारक घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
यूरोप पर जलवायु परिवर्तन का गहरा प्रभाव
यह घटना पूरे यूरोप में व्याप्त भीषण गर्मी और सूखे का परिणाम है। कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस के आंकड़ों के अनुसार, यूरोप विश्व का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप है, जहां 1980 के दशक के बाद तापमान वैश्विक औसत से लगभग दोगुनी गति से बढ़ रहा है। स्पेन के अलावा फ्रांस भी इसी तरह के संकट से जूझ रहा है, जहां तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। लगातार बढ़ती गर्मी के चलते हज़ारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करना पड़ रहा है, जो भविष्य के लिए एक बड़ी पर्यावरणीय चुनौती है।
सुपर-100 में मिलेगा अधिक छात्रों को मौका, हरियाणा सरकार ने बढ़ाईं सीटें
10 Jul, 2026 05:55 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नारनौल: महेंद्रगढ़ जिले के सरकारी स्कूलों में शिक्षा ग्रहण कर रहे होनहार विद्यार्थियों के लिए एक बेहद शानदार और राहत भरी खबर सामने आई है। प्रदेश सरकार ने राज्य के होनहार बच्चों को भविष्य में आगे बढ़ने के समान अवसर देने के लिए अपनी महत्वाकांक्षी योजना में बड़ा विस्तार किया है। इस नई पहल के बाद अब जिले के सरकारी स्कूलों के छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के प्रवेश स्तर पर और अधिक अवसर मिल सकेंगे, जिससे उनके करियर को एक नई उड़ान मिलेगी।
सुपर-100 कार्यक्रम में बढ़ाई गईं अतिरिक्त सीटें
राज्य सरकार ने अपने प्रसिद्ध 'सुपर-100 कार्यक्रम' के दायरे को बढ़ाते हुए इसमें 100 अतिरिक्त सीटें शामिल करने का एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इन बढ़ी हुई सीटों पर योग्य और जरूरतमंद विद्यार्थियों को दाखिला देने के लिए आधिकारिक तौर पर ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। प्रदेश के जो भी छात्र इस बेहतरीन मुफ्त कोचिंग सुविधा का लाभ उठाना चाहते हैं, वे 9 जुलाई से ही विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपना डिजिटल आवेदन दर्ज करा सकते हैं।
शिक्षा विभाग ने जिला अधिकारियों को दिए कड़े निर्देश
इस जनहितैषी योजना को धरातल पर पूरी तरह कामयाब बनाने के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग ने भी कमर कस ली है। विभाग की ओर से जिला शिक्षा अधिकारी को सख्त हिदायत दी गई है कि वे जिले के कोने-कोने में स्थित सभी राजकीय विद्यालयों के छात्र-छात्राओं तक इस सूचना को प्राथमिकता के आधार पर पहुंचाएं। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी योग्य और होनहार विद्यार्थी जानकारी के अभाव में इस बेहतरीन मौके से वंचित न रह जाए और ज्यादा से ज्यादा पंजीकरण कराए जा सकें।
बजट घोषणा के तहत हुआ महत्वाकांक्षी योजना का विस्तार
मुख्यमंत्री द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट के दौरान की गई घोषणाओं को अमलीजामा पहनाते हुए इस सुपर-100 कार्यक्रम का विस्तार किया गया है। सरकार की इस दूरदर्शी सोच का सीधा फायदा उन गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों को मिलेगा जो पैसों की कमी के कारण देश की प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी नहीं कर पाते थे। अब नए बदलावों के साथ यह कार्यक्रम और अधिक छात्रों के सपनों को सच करने का एक मजबूत माध्यम बनने जा रहा है।
चीन-ताइवान तनाव के बीच मिसाइल परीक्षण चर्चा में, रडार ने तुरंत दी जानकारी
10 Jul, 2026 04:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन| वैश्विक रणनीतिक और कूटनीतिक गलियारों से एक बेहद सनसनीखेज और बड़ी अंतरराष्ट्रीय खबर सामने आ रही है। दक्षिण चीन सागर (South China Sea) के विवादित जल क्षेत्र में चीनी सेना द्वारा हाल ही में किए गए बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण ने पूरी दुनिया की चिंताओं को बढ़ा दिया है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब बीजिंग की इस बेहद गोपनीय और आक्रामक मिसाइल लॉन्चिंग को ट्रैक करने में ताइवान के 'लॉन्ग-रेंज अर्ली-वार्निंग रडार' (अत्याधुनिक लंबी दूरी के टोही रडार सिस्टम) ने अविश्वसनीय रूप से केंद्रीय और अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अंतरराष्ट्रीय रक्षा विश्लेषकों और 'साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट' के रणनीतिक इनपुट्स के अनुसार, ताइवान ने न केवल इस मिसाइल को सफलतापूर्वक ट्रैक किया, बल्कि इस पूरे संवेदनशील ऑपरेशन के दौरान महाशक्ति अमेरिका के साथ 'रीयल-टाइम' (तत्काल) खुफिया और सैन्य जानकारी भी साझा की। यह कदम वैश्विक पटल पर वाशिंगटन और ताइपे के बीच दिनों-दिन गहरे होते जा रहे रक्षा संबंधों और अटूट खुफिया सहयोग की जीती-जागती मिसाल बनकर सामने आया है।
बीजिंग ने साधी चुप्पी, मगर ताइवान ने खोल दी चीन के सबसे खतरनाक मिसाइल टेस्ट की पोल
इस संवेदनशील मिसाइल परीक्षण के बाद से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी खलबली मची हुई है। हालांकि, अपनी पुरानी आदत के अनुसार चीनी रक्षा मंत्रालय और कम्युनिस्ट सरकार ने अभी तक इस बात को पूरी तरह से गुप्त रखा है और आधिकारिक तौर पर इस बात का खुलासा नहीं किया है कि उसने दक्षिण चीन सागर में किस विशिष्ट श्रेणी या मारक क्षमता वाली मिसाइल का परीक्षण किया था। चीन की इस रहस्यमयी चुप्पी के बीच ताइवान की 'राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद' के दूरदर्शी महानिदेशक और कूटनीतिज्ञ जोसेफ वू ने एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया है। जोसेफ वू ने खुफिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए साफ तौर पर कहा कि चीन द्वारा दागी गई यह मिसाइल कोई साधारण हथियार नहीं थी, बल्कि यह संभवतः चीन की सबसे घातक पनडुब्बी से लॉन्च की जाने वाली परमाणु-सक्षम बैलिस्टिक मिसाइल 'जेएल-2' (JL-2 Submarine-Launched Ballistic Missile) थी, जो सीधे तौर पर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी और उसके सहयोगी देशों के ठिकानों को निशाना बनाने की क्षमता रखती है।
हाई-टेक रडार तकनीक से मंदी पड़ी ड्रैगन की चाल, अमेरिका-ताइवान रक्षा गठबंधन और मजबूत
इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि ताइवान की सीमा पर तैनात अत्याधुनिक अर्ली-वार्निंग रडार सिस्टम चीन की हर गुप्त सैन्य गतिविधि को पलक झपकते ही पकड़ने में पूरी तरह सक्षम है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ताइवान द्वारा जुटाए गए इस रीयल-टाइम डेटा को तुरंत अमेरिका के साथ साझा करने से अमेरिकी नौसेना और पैसिफिक कमांड को दक्षिण चीन सागर में चीनी पनडुब्बियों की सटीक स्थिति और उनकी आक्रामक क्षमताओं का आकलन करने में बहुत बड़ी मदद मिली है। चीन के इस आक्रामक मिसाइल परीक्षण ने जहाँ एक तरफ ताइवान जलडमरूमध्य में युद्ध के खतरों को एक बार फिर से हवा दे दी है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका और ताइवान के इस गुप्त और मजबूत खुफिया नेटवर्क ने चीनी राष्ट्रपति और उनके सैन्य कमांडरों की रणनीतिक चालों को समय से पहले ही दुनिया के सामने बेनकाब करके रख दिया है। अब देखना यह होगा कि इस खुफिया खुलासे के बाद अंतरराष्ट्रीय मंच पर चीन की क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।
नेतन्याहू ने ईरान को दी खुली चेतावनी, बोले- लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई
10 Jul, 2026 03:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यरूशलेम| अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चला आ रहा संघर्ष एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। दोनों देशों के बीच हुआ हालिया युद्धविराम समझौता पूरी तरह से टूट चुका है, जिसके बाद से पूरे पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं और तनाव अपने उच्चतम स्तर पर है। इस बेहद नाजुक मोड़ पर इस्राइली प्रधानमंत्री के एक नए और आक्रामक बयान ने जलती हुई आग में घी डालने का काम किया है। इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान को बेहद कड़े लहजे में सीधी चेतावनी जारी की है। नेतन्याहू ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि 'युद्ध अभी खत्म नहीं हुआ है' और उनका देश किसी भी संभावित स्थिति या सैन्य संकट से निपटने के लिए अपनी तैयारियों को अंतिम रूप दे रहा है। गुरुवार को इस्राइल के हत्जेरिम एयर बेस पर आयोजित इस्राइली वायुसेना के पासिंग आउट परेड (दीक्षांत समारोह) को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने अपनी रणनीति जगजाहिर की। उन्होंने कहा कि आसमान में इस्राइल की हवाई सर्वोच्चता और ताकत को बनाए रखना ही उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति का सबसे मुख्य स्तंभ है। उन्होंने आगाह किया कि भले ही ईरान को हालिया सैन्य गतिविधियों में भारी नुकसान उठाना पड़ा हो, लेकिन उससे जुड़ा खतरा अभी टला नहीं है।
ईरान को लगा है करारा झटका, लेकिन सुरक्षा चुनौतियां अभी भी बरकरार
स्थानीय सुरक्षा सूत्रों और राजनयिक गलियारों से आ रही खबरों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अपने संबोधन में ईरान की रणनीतियों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा, "तेहरान के मौजूदा शासन को हमारी सेना ने बेहद करारा और गहरा झटका दिया है। हमारी विदेश और रक्षा नीति पूरी तरह से शीशे की तरह साफ है—हम ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियारों से लैस नहीं होने देंगे, चाहे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई समझौता हो या न हो। दुनिया को यह समझना होगा कि अगर इस्राइल ने समय रहते सही और सटीक सैन्य कार्रवाई नहीं की होती, तो ईरान अब तक परमाणु बम का निर्माण कर चुका होता। हम चैन से नहीं बैठ सकते क्योंकि जंग अभी खत्म नहीं हुई है, बल्कि हमारे सामने रोज नई रणनीतिक चुनौतियां उभरकर सामने आ रही हैं।"
डोनाल्ड ट्रंप के कड़े रुख के बाद पश्चिम एशिया का समीकरण बदला
नेतन्याहू का यह बड़ा और आक्रामक बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस आधिकारिक एलान के ठीक एक दिन बाद आया है, जिसने वैश्विक राजनीति में हड़कंप मचा दिया था। राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने बयान में ईरान के साथ हुए युद्धविराम समझौते को पूरी तरह से समाप्त घोषित कर दिया था। इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी साफ कर दिया था कि ईरान के साथ भविष्य में किसी भी तरह की कूटनीतिक या शांति वार्ता करना केवल और केवल समय की बर्बादी है। अमेरिका के इस सख्त रुख के बाद से ही इस बात के संकेत मिलने लगे थे कि क्षेत्र में सैन्य टकराव अपरिहार्य हो चुका है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य में टकराव और दोनों ओर से ताबड़तोड़ हवाई हमले
वाशिंगटन का ईरान पर सीधा आरोप है कि उसने अंतरराष्ट्रीय नियमों को ताक पर रखकर हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में व्यावसायिक और व्यापारिक जहाजों को जानबूझकर निशाना बनाया है, जो कि सीधे तौर पर युद्धविराम समझौते का खुला उल्लंघन है। इस उकसावे वाली कार्रवाई के जवाब में अमेरिकी वायुसेना ने ईरान के भीतर और उसके नियंत्रण वाले क्षेत्रों में 80 से अधिक सामरिक ठिकानों पर भीषण हवाई हमले किए। इसके साथ ही अमेरिका ने ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए उसके तेल निर्यात पर दोबारा से कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। अमेरिका की इस कार्रवाई के पलटवार में ईरान ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और ठिकानों के आसपास के क्षेत्रों पर ताबड़तोड़ मिसाइल और जवाबी हमले किए हैं, जिससे क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति बन गई है।
क्या पश्चिम एशिया में किसी बहुत बड़े सैन्य ऑपरेशन की तैयारी में है इस्राइल?
प्रधानमंत्री नेतन्याहू के इस कड़े बयान को इस्राइली रक्षा बलों (IDF) के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एयाल जमीर के बयानों से भी बड़ा समर्थन मिला है। सेना प्रमुख ने रणनीतिक संकेत देते हुए कहा कि तेहरान के खिलाफ शुरू किया गया सैन्य अभियान अभी अपने मुकाम तक नहीं पहुंचा है। इस्राइली सेना आने वाले दिनों के लिए पूरी तरह से नई और बेहद आक्रामक रणनीतिक योजनाएं तैयार कर रही है। उन्होंने खुले तौर पर कहा, "हमारे सामने अभी कई बड़े और निर्णायक सैन्य अभियान बाकी हैं, जिन्हें अंजाम दिया जाना तय है।"
इसके साथ ही इस्राइल के रक्षा मंत्री इस्राइल काट्ज ने भी सेना के हौसले को बढ़ाते हुए कहा कि अगर आने वाले समय में जमीनी हालात की मांग हुई, तो ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को और अधिक तीव्रता के साथ दोबारा शुरू करने के लिए हमारा पूरा रक्षा तंत्र चौबीसों घंटे तैयार है। इस्राइल अपनी हवाई बढ़त को खोने नहीं देगा और क्षेत्रीय खतरों को पूरी तरह खत्म करने के लिए हर पल सतर्क है।
हरियाणा के छोटे से गांव से फुटबॉल की बड़ी उड़ान, बेटियों ने रचा इतिहास
10 Jul, 2026 03:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिसार। वैश्विक स्तर पर खेल के बड़े आयोजनों को लेकर जहाँ दुनिया भर में जबरदस्त उत्साह और चर्चाओं का दौर चलता रहता है, वहीं हरियाणा का एक छोटा सा गांव खेल संस्कृति की अनूठी मिसाल पेश कर रहा है। यहाँ फुटबॉल का जुनून किसी खास टूर्नामेंट या समय का मोहताज नहीं है, बल्कि यह यहाँ की रोजमर्रा की जिंदगी का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है।
भोर की पहली किरण के साथ मैदान पर गूंजती है कोच की सीटी
हिसार जिले के मंगाली आकलां गांव में कदम रखते ही खेल के प्रति एक अलग ही समर्पण देखने को मिलता है। यहाँ सूरज उगने से काफी पहले ही खेल के मैदान में हलचल शुरू हो जाती है। कोच की सीटी की आवाज के साथ ही हर उम्र की बेटियां मैदान में पसीना बहाने उतर पड़ती हैं। फुटबॉल को अपनी किस्मत मान चुकी ये खिलाड़ी सुबह-सुबह मैदान पर गेंद के साथ ड्रिबलिंग और पासिंग का कड़ा अभ्यास करती नजर आती हैं, जिससे पूरा माहौल खेल के रंग में रंगा हुआ महसूस होता है।
दो दशकों की कड़ी मेहनत ने बदल दी ग्रामीण अंचल की तस्वीर
यह खेल मैदान पिछले लगभग बाईस वर्षों से इस गांव के सामाजिक और आर्थिक बदलाव का सबसे बड़ा गवाह रहा है। दो दशक पहले शुरू हुई खेल की एक छोटी सी मुहिम आज एक विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुकी है। इस समय अवधि के दौरान यहाँ की बेटियों ने अपनी मेहनत के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर सौ से अधिक पदक जीतकर गांव का नाम रोशन किया है। यह खेल मैदान न केवल खिलाड़ियों को तराश रहा है, बल्कि रूढ़िवादी सोच को पीछे छोड़कर महिलाओं को आगे बढ़ने के नए अवसर भी दे रहा है।
उजाड़ और कटीली जमीन पर तैयार हुआ देश की प्रतिभाओं का मंच
जिस जमीन पर आज बेटियां देश के लिए खेलने का ख्वाब बुन रही हैं, उसका इतिहास काफी संघर्षपूर्ण रहा है। ग्रामीण बताते हैं कि इस जगह पर कभी कंटीली झाड़ियां हुआ करती थीं और बुजुर्ग इसे एक पुराने कब्रिस्तान के रूप में जानते थे। लेकिन ग्रामीणों और खेल प्रेमियों के दृढ़ संकल्प ने इस बंजर और उपेक्षित भूमि का कायाकल्प कर दिया। आज वही उजाड़ जमीन एक शानदार खेल मैदान में तब्दील हो चुकी है, जहाँ से निकलकर बेटियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने की तैयारी कर रही हैं।
भारतीय टीम का सफर और खेल कोटे से मिला सरकारी नौकरियों का तोहफा
इस मैदान से निकले खिलाड़ियों की सफलता के आंकड़े बेहद प्रेरणादायक हैं। यहाँ की बेहतरीन ट्रेनिंग की बदौलत अब तक आठ बेटियां भारतीय राष्ट्रीय फुटबॉल टीम की जर्सी पहनकर देश का गौरव बढ़ा चुकी हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, खेल के प्रति इस निष्ठा ने खिलाड़ियों को आत्मनिर्भर भी बनाया है, जिसके चलते गांव के 41 प्रतिभावान खिलाड़ियों को खेल कोटे के अंतर्गत विभिन्न सरकारी विभागों में सम्मानजनक नौकरियां हासिल हुई हैं।
मिडिल ईस्ट में फिर मंडराया संकट, अमेरिका-ईरान टकराव ने बढ़ाई चिंता
10 Jul, 2026 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यरुशलम। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिका-ईरान संघर्ष विराम (सीजफायर) को समाप्त घोषित किए जाने के बाद मिडिल ईस्ट (मध्य-पूर्व) में युद्ध का खतरा एक बार फिर मंडराने लगा है। इस बड़े भू-राजनीतिक घटनाक्रम के बीच, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार को एक बेहद कड़ा बयान जारी किया है। नेतन्याहू ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि ईरान के साथ जारी संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है, बल्कि इजरायल के सामने अब और भी बड़ी व नई सुरक्षा चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
संघर्ष विराम टूटने से बढ़ा क्षेत्र में खतरा
अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा ईरान पर की गई भारी बमबारी और सीजफायर समझौते को खत्म करने के फैसले के तुरंत बाद इजरायली प्रधानमंत्री का यह बयान सामने आया है। दरअसल, होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों के बाद अमेरिका और ईरान के बीच का तनाव चरम पर पहुंच चुका है। इजरायल इस पूरे घटनाक्रम पर बारीक नजर बनाए हुए है, क्योंकि इस संघर्ष का सीधा असर उसकी खुद की सुरक्षा और सीमाओं पर पड़ना तय माना जा रहा है।
नेतन्याहू की सेना और देश को चेतावनी
इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने सुरक्षा अधिकारियों के साथ हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद कहा कि क्षेत्रीय स्थिरता को खतरा पैदा करने वाली ताकतों के खिलाफ इजरायल चुप नहीं बैठेगा। उन्होंने साफ किया कि भले ही ईरान और उसके प्रॉक्सी संगठनों के खिलाफ पहले कुछ कामयाबी मिली हो, लेकिन चुनौती अभी पूरी तरह टली नहीं है। नेतन्याहू ने देश की सेना और खुफिया एजेंसियों को किसी भी आपातकालीन स्थिति और नए खतरों से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद रहने का निर्देश दिया है।
नए मोर्चे खुलने की आशंका
राजनयिक विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच सीधी सैन्य भिड़ंत की स्थिति में इजरायल के लिए भी नए मोर्चे खुल सकते हैं। लेबनान में सक्रिय हिजबुल्लाह और यमन के हुती विद्रोही, जो ईरान समर्थित गुट हैं, इजरायल को निशाना बना सकते हैं। नेतन्याहू का यह बयान इसी संभावित खतरे को भांपते हुए अपनी रक्षात्मक और आक्रामक तैयारियों को मजबूत करने का एक साफ संकेत है, जिसने पूरे मध्य-पूर्व को एक बार फिर बारूद के ढेर पर ला खड़ा किया है।
आरती सिंह राव का बड़ा ऐलान, हरियाणा के नए अस्पतालों तक पहुंचेगी मुफ्त डायलिसिस सेवा
10 Jul, 2026 02:46 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अटेली। हरियाणा सरकार आम जनता को बेहतर और आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार बड़े कदम उठा रही है। इसी कड़ी में राज्य के भीतर स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करते हुए बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण और उप-मंडलीय स्तर पर लोगों को सीधे लाभ मिल सके।
प्रदेश के 16 उप-मंडलीय अस्पतालों में मिलेगी मुफ्त डायलिसिस की सुविधा
राज्य सरकार ने गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को बड़ी राहत देते हुए एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। प्रदेश में पहले से चल रही मुफ्त डायलिसिस योजना का दायरा अब और बढ़ा दिया गया है। इसके तहत कनीना समेत राज्य के 16 नए सब-डिवीजनल अस्पतालों में भी मरीजों को पूरी तरह निःशुल्क डायलिसिस की सुविधा मिलने लगेगी। इस पहल से स्थानीय स्तर पर मरीजों के धन और समय दोनों की बचत होगी और उन्हें इलाज के लिए बड़े शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी।
गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए मेदांता से समझौता
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को देश में सबसे अव्वल बनाने के उद्देश्य से सरकार ने एक बड़ा रणनीतिक फैसला लिया है। इसके अंतर्गत देश के प्रतिष्ठित मेदांता अस्पताल के साथ एक विशेष समझौता (एमओयू) किया गया है। इस करार के तहत राज्य की गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों की सेहत की नियमित और बारीकी से निगरानी की जाएगी। इसके साथ ही, मेदांता के विशेषज्ञ डॉक्टर और चिकित्सा विशेषज्ञ समय-समय पर मरीजों को उच्च स्तरीय परामर्श और गाइडेंस भी प्रदान करेंगे।
करोड़ों रुपये की विकास परियोजनाओं से चमकेगी गांवों की सूरत
क्षेत्रीय विकास को गति देने के लिए स्वास्थ्य मंत्री ने अपने विशेष दौरे के दौरान स्थानीय निवासियों को करोड़ों रुपये की सौगात दी है। इस दौरान क्षेत्र के विभिन्न गांवों में विकास कार्यों की रफ्तार तेज करने के संकल्प को दोहराया गया। ग्राम पंचायत बोचड़िया, हसनपुर और सलीमपुर जैसे ग्रामीण इलाकों में लगभग 3.13 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुई विभिन्न जनकल्याणकारी और बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाओं का विधिवत उद्घाटन कर उन्हें जनता को समर्पित किया गया।
मुख्यमंत्री के नेतृत्व में विकास और जनसेवा की नई इबारत
सरकार का मुख्य फोकस इस समय हर वर्ग तक बिना किसी भेदभाव के मूलभूत सुविधाएं पहुंचाना है। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में जनहित की योजनाओं को धरातल पर उतारने का काम तेजी से चल रहा है। जनसंपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों की समस्याओं को सुना जा रहा है और मौके पर ही उनके समाधान के प्रयास किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य सुधारों से लेकर ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की यह मुहिम आने वाले समय में राज्य की तस्वीर बदलने वाली साबित होगी।
NATO सम्मेलन के दौरान ट्रंप से हुई बड़ी चूक, गलत नाम लेने पर छिड़ी बहस
10 Jul, 2026 02:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अंकारा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी जुबान फिसलने के कारण दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गए हैं। तुर्किये की राजधानी अंकारा में आयोजित नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन के दौरान उन्होंने ईरान पर चर्चा करते हुए उसे गलती से 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ जापान' कह दिया। उनके इस अजीबोगरीब बयान का वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया से लेकर राजनयिक गलियारों तक हलचल तेज हो गई है।
जुबान फिसलने से अस्तित्व में आया नया 'देश'
नाटो सम्मेलन के इतर यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के साथ एक प्रेस वार्ता के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप अमेरिकी रक्षा प्रणालियों की ताकत का बखान कर रहे थे। इसी दौरान अमेरिकी विमानवाहक पोत 'यूएसएस अब्राहम लिंकन' पर हुए हमलों का जिक्र करते हुए उनके मुंह से ईरान की जगह जापान का नाम निकल गया। ट्रंप ने कहा, "हमारे विमानवाहक पोत पर 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ जापान' की तरफ से 111 मिसाइलें दागी गई थीं, लेकिन हमारी सेना ने उन सभी को हवा में ही मार गिराया।" हालांकि, उनके अगले ही वाक्यों से यह साफ था कि उनका इशारा अमेरिका के परम मित्र देश जापान की ओर नहीं, बल्कि धुर विरोधी देश ईरान की तरफ था।
एक ही दिन में कई बड़े सियासी कन्फ्यूजन
तुर्किये में चल रहे इस अहम सम्मेलन के दौरान ट्रंप की तरफ से यह इकलौती चूक नहीं थी। इसी बैठक के दौरान उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की का परिचय कराते समय उन्हें रूसी राष्ट्रपति 'व्लादिमीर पुतिन' कहकर संबोधित कर दिया। हालांकि, इस बार उन्होंने तुरंत अपनी गलती सुधारी और माहौल को हल्का करने के लिए मजाक भी किया। इसके अलावा, ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते (JCPOA) का नाम लेते समय भी वे थोड़े भ्रमित नजर आए।
ट्रंप को लेकर हाई अलर्ट, कथित साजिश के दावे से बढ़ा अंतरराष्ट्रीय तनाव
10 Jul, 2026 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हालिया हवाई हमलों और वहां के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की अंतिम यात्रा के बीच एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। इजरायल ने अमेरिकी रक्षा मंत्रालय 'पेंटागन' के साथ कुछ बेहद संवेदनशील और नई खुफिया जानकारी साझा की है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस खुफिया इनपुट में यह संकेत दिया गया है कि तेहरान (ईरान) एक बार फिर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की बड़ी साजिश रच रहा है।
इस कथित हत्या की साजिश की खबर सामने आने के बाद वाशिंगटन और तेहरान के बीच पहले से ही बेहद नाजुक दौर से गुजर रहा तनाव और ज्यादा बढ़ गया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब दोनों देशों के बीच जून महीने में हुआ संघर्ष विराम समझौता पहले से ही पूरी तरह टूटने की कगार पर पहुंच चुका है। इजरायल द्वारा दी गई इस खुफिया जानकारी के बाद अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां और खुफिया विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गए हैं।
बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन पर बढ़ी बहस, मोदी बोले- ऑस्ट्रेलिया का कदम महत्वपूर्ण
10 Jul, 2026 12:09 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेलबर्न/नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया द्वारा 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाए जाने के बाद अब भारत में भी इस पर गंभीर बहस छिड़ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के इस कड़े कदम को दुनिया के लिए एक बड़ी सीख और प्रेरणा बताया है। मेलबर्न में आयोजित भारत-ऑस्ट्रेलिया शिखर सम्मेलन के दौरान ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज की मौजूदगी में पीएम मोदी ने साफ किया कि बच्चों को ऑनलाइन खतरों से सुरक्षित रखने के ऑस्ट्रेलिया के इन प्रयासों से भारत भी काफी कुछ सीख रहा है।
पीएम मोदी ने की कड़े कानून की सराहना
शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और सोशल मीडिया से जुड़े नियमों में ऑस्ट्रेलिया द्वारा किए जा रहे बदलाव समाज और आने वाली पीढ़ी की सुरक्षा के लिहाज से बेहद अनुकरणीय हैं। पीएम के इस बयान के बाद यह कयास लगाए जाने लगे हैं कि क्या भारत भी भविष्य में अपने यहां बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और साइबर सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सोशल मीडिया पर ऐसी ही कोई बड़ी पाबंदी लगाने की तैयारी कर रहा है।
क्या है ऑस्ट्रेलिया का ऐतिहासिक कानून?
ऑस्ट्रेलिया वैश्विक स्तर पर ऐसा सख्त कदम उठाने वाला पहला देश बना था। दिसंबर 2025 में लागू हुए इस कानून के तहत वहां 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के इंस्टाग्राम, फेसबुक, टिकटॉक, यूट्यूब, एक्स (ट्विटर) और स्नैपचैट जैसे प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अकाउंट बनाने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। ऑस्ट्रेलिया सरकार ने इन टेक कंपनियों को सख्त हिदायत दी है कि वे यूजर्स की उम्र के सत्यापन (Age Verification) के लिए अचूक और ठोस सिस्टम तैयार करें, ऐसा न करने पर कंपनियों पर भारी जुर्माने का प्रावधान है।
वैश्विक स्तर पर छिड़ी पाबंदी की बहस
ऑस्ट्रेलिया के इस फैसले का असर अब पूरी दुनिया में देखने को मिल रहा है और कई बड़े देश इसी राह पर आगे बढ़ रहे हैं:
ब्रिटेन: ब्रिटेन के कार्यवाहक प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी बच्चों के लिए सोशल मीडिया, लाइव स्ट्रीमिंग और गेमिंग पर कड़े प्रतिबंध लगाने का एलान किया है।
कनाडा, ब्राजील और इंडोनेशिया: इन देशों ने भी नाबालिगों की सुरक्षा के लिए इंटरनेट और सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर कई तरह की सीमाएं और पाबंदियां लागू की हैं।
फ्रांस, स्पेन और दक्षिण कोरिया: ये देश भी अपने यहां बच्चों को डिजिटल दुनिया के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए कानूनी खाका तैयार करने पर विचार कर रहे हैं।
अमेरिका-ईरान के बीच फिर गहराया संकट, परमाणु हथियारों से लेकर होर्मुज तक खिंची तलवार
10 Jul, 2026 12:01 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव अब केवल परमाणु कार्यक्रम (न्यूक्लियर डील) के मुद्दे तक सीमित नहीं रह गया है। वर्तमान में इस संघर्ष का मुख्य केंद्र 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) बन चुका है। इस रणनीतिक समुद्री मार्ग में वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों और अमेरिका की जवाबी सैन्य कार्रवाई के बाद क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर बड़ा खतरा मंडराने लगा है।
वैश्विक तेल आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता
भू-राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। दुनिया भर में होने वाली कच्चे तेल की कुल आपूर्ति का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। यही वजह है कि इस समुद्री मार्ग में होने वाली कोई भी सैन्य हलचल या जहाजों के आवागमन में रुकावट का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ता है। हालिया तनाव के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है, और कई बड़ी शिपिंग कंपनियों ने इस रूट पर अपने जहाजों के परिचालन को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है।
अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और सुरक्षा का दावा
अमेरिकी प्रशासन और अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) का साफ कहना है कि उनके द्वारा की गई हवाई कार्रवाई का एकमात्र उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। अमेरिका के मुताबिक, उन्होंने ईरान के केवल उन्हीं सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है जिनसे इस समुद्री मार्ग के यातायात और व्यापारिक जहाजों को सीधा खतरा पैदा हो रहा था। अमेरिका इस व्यस्त जलमार्ग में बिना किसी रुकावट के वाणिज्यिक जहाजों की निर्बाध आवाजाही बनाए रखने की वकालत कर रहा है।
वैश्विक कूटनीति और अर्थव्यवस्था पर संकट
इस बढ़ते क्षेत्रीय गतिरोध के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक प्रयास भी तेज हो गए हैं। कई देश इस संघर्ष को और आगे बढ़ने से रोकने और समुद्री मार्गों को सुरक्षित बनाने के लिए मध्यस्थता की कोशिशों में जुटे हैं, हालांकि अब तक कोई ठोस या स्थायी समाधान निकलकर सामने नहीं आया है। विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य अब केवल एक क्षेत्रीय विवाद नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है। यदि यह तनाव जल्द ही शांत नहीं हुआ, तो आने वाले समय में दुनिया भर में शिपिंग लागत बढ़ने और तेल संकट गहराने से वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लग सकता है।
हरियाणा-चंडीगढ़ में बैंक फ्रॉड का बड़ा मामला, CBI ने खोला मनी लॉन्ड्रिंग का जाल
10 Jul, 2026 11:49 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़:केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बैंकिंग और सरकारी क्षेत्र में हुए एक बहुत बड़े वित्तीय घोटाले का भंडाफोड़ किया है। जांच एजेंसी ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक से जुड़े 657 करोड़ रुपये के एक विशाल गबन मामले में सक्रिय एक जटिल मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क को बेनकाब किया है। इस पूरी कार्रवाई से प्रशासनिक और बैंकिंग हलकों में हड़कंप मच गया है, क्योंकि जांच के तार सीधे तौर पर सरकारी खजाने और सफेदपोश अपराधियों से जुड़े पाए गए हैं।
शेल कंपनियों और सोने के फर्जी व्यापार का खेल
सीबीआई की गहन छानबीन में यह बेहद चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि सरकारी फंड से अवैध रूप से निकाली गई 329 करोड़ रुपये से अधिक की भारी-भरकम राशि को ठिकाने लगाने के लिए बकायदा एक जाल बुना गया था। इस काली कमाई को वैध दिखाने के लिए पहले कई शेल (फर्जी) कंपनियों के खातों में ट्रांसफर किया गया। इसके बाद, इस पूरी रकम को चंडीगढ़ के एक प्रमुख ज्वेलर के पास भेजा गया, जहां सोने की खरीद-बिक्री के फर्जी दस्तावेज और बिल तैयार किए गए। इस फर्जी लेन-देन के जरिए पूरी राशि को नकद (कैश) में बदला गया और फिर पूरी साजिश में शामिल मुख्य आरोपियों और बिचौलियों के बीच उनकी हिस्सेदारी के हिसाब से बांट दिया गया।
बैंक अधिकारियों और नौकरशाही की गहरी साठगांठ
इस बहु-करोड़ी घोटाले की जड़ें केवल निजी ऑपरेटरों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि इसमें उच्च पदों पर बैठे लोगों की संलिप्तता भी उजागर हुई है। जांच एजेंसी के मुताबिक, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के कई जिम्मेदार अधिकारियों ने हरियाणा सरकार के वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों सहित अन्य लोक सेवकों के साथ मिलकर इस पूरे सुनियोजित अपराध को अंजाम दिया। इन रसूखदार लोगों ने अपने पदों का दुरुपयोग करते हुए नियमों को ताक पर रखा और जनता के पैसे को सीधे तौर पर निजी स्वार्थ के लिए डायवर्ट करने में मुख्य भूमिका निभाई।
सरकारी विभागों और चंडीगढ़ प्रशासन के खातों में सेंध
वित्तीय हेराफेरी के इस बड़े नेटवर्क ने हरियाणा और चंडीगढ़ के कई महत्वपूर्ण सरकारी विभागों के खातों को अपना निशाना बनाया। इस साजिश के तहत हरियाणा सरकार के आठ अलग-अलग प्रमुख विभागों और चंडीगढ़ प्रशासन के दो महत्वपूर्ण विभागों के बजट और फंड में बड़े पैमाने पर हेरफेर की गई। विकास कार्यों और जनहित योजनाओं के लिए आवंटित इस राशि को आरोपियों ने मिलीभगत करके बैंकिंग सिस्टम की कमियों का फायदा उठाते हुए निजी खातों और शेल कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया, जिससे विकास कार्य भी सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं।
सीबीआई की आगे की कार्रवाई और कड़ा रुख
इस बड़े मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का पर्दाफाश होने के बाद अब केंद्रीय जांच ब्यूरो ने मामले से जुड़े सभी आरोपियों पर कानूनी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। फर्जीवाड़े में शामिल शेल कंपनियों के खातों और चंडीगढ़ के संबंधित ज्वेलर के व्यापारिक रिकॉर्ड को खंगाला जा रहा है ताकि इस घोटाले की पूरी कड़ियों को जोड़ा जा सके। सीबीआई इस बात का भी पता लगा रही है कि इस सिफन किए गए पैसे का कोई हिस्सा विदेशों में या किसी अन्य बेनामी संपत्ति में तो निवेश नहीं किया गया है, और आने वाले दिनों में इस मामले में कई बड़ी गिरफ्तारियां और संपत्तियों की जब्ती होने की पूरी संभावना है।
आंतरिक संकट के बीच पाकिस्तान को याद आया भारत, बयानबाजी तेज
10 Jul, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। आंतरिक संकटों, चरमराती अर्थव्यवस्था और देश के भीतर बढ़ते उग्रवाद से घिरे पाकिस्तान की सेना एक बार फिर अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए भारत पर मनगढ़ंत आरोप लगाती नजर आई है। पाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा (आईएसपीआर) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने अपनी सरकार और सुरक्षा बलों की विफलता से ध्यान भटकाने के लिए भारत के खिलाफ बेबुनियाद दावे किए हैं। देश में लगातार हो रही सुरक्षा चूक और खुफिया एजेंसियों की नाकामी के चलते पाकिस्तानी सेना इस वक्त भारी जन-दबाव का सामना कर रही है।
चौतरफा संकट में घिरा पाकिस्तान
वर्तमान में पाकिस्तान गंभीर आंतरिक चुनौतियों से जूझ रहा है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आटे, दाल और बिजली जैसी बुनियादी चीजों की कमी के चलते जनता सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रही है। वहीं, बलूचिस्तान प्रांत में दशकों से जारी दमन के विरोध में 'बलूच लिबरेशन आर्मी' ने पाकिस्तानी सेना पर बड़े हमले शुरू कर दिए हैं, और खैबर पख्तूनख्वा का इलाका 'तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान' (टीटीपी) के उग्रवादी हमलों से दहल रहा है। इन गंभीर हालातों का समाधान खोजने के बजाय पाक नेतृत्व भारत विरोधी एजेंडा चलाने में व्यस्त है।
प्रेस ब्रीफिंग में लगाए बेबुनियाद आरोप
लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ ने अपनी हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि भारत पाकिस्तान के भीतर आतंकवादी गतिविधियों की फंडिंग कर रहा है। पाक सैन्य प्रवक्ता ने यहां तक कह दिया कि उनके सुरक्षा बलों ने आतंकवाद विरोधी अभियानों के दौरान भारत समर्थित 54 प्रॉक्सियों (चरमपंथियों) को मार गिराया है। इसके अलावा, उन्होंने अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पर भी आरोप लगाया कि वह भारत के साथ मिलकर पाकिस्तान की पश्चिमी सीमा को अस्थिर करने और वहां अशांति फैलाने की बड़ी साजिश रच रही है।
ध्यान भटकाने की पुरानी रणनीति
हमेशा की तरह इस बार भी पाकिस्तान इन गंभीर आरोपों के पक्ष में कोई एक भी ठोस सबूत या दस्तावेज पेश करने में पूरी तरह नाकाम रहा। पाकिस्तानी जनरल का पूरा ध्यान केवल भारत को घेरने पर ही रहा, जबकि उन्होंने इस बात का कोई जवाब नहीं दिया कि उग्रवादी संगठन पाकिस्तान की कड़ी सुरक्षा के बावजूद देश के अंदर इतने बड़े हमलों को अंजाम देने में कैसे कामयाब हो रहे हैं। यह पूरी कवायद पाकिस्तान की उस पुरानी रणनीति को दिखाती है, जहां जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़कर पड़ोसी देश पर झूठे आरोप लगाना एक आसान रास्ता मान लिया जाता है।
बाली में गूंजते हैं संस्कृत मंत्र और हिंदू परंपराएं, जानिए इस द्वीप की अनोखी पहचान
10 Jul, 2026 10:42 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जकार्ता। दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम बहुल देश होने के बावजूद इंडोनेशिया में भारतीय संस्कृति की जड़ें बेहद गहरी हैं। ईसा पूर्व के समय से ही भारतीय व्यापारियों और नाविकों के वहां लगातार जाने की वजह से इंडोनेशिया पर हिंदू और बौद्ध धर्म का बड़ा प्रभाव पड़ा। प्राचीन काल में वहां श्रीविजया और मजापहित जैसे कई महान हिंदू साम्राज्य फले-फूले। इस ऐतिहासिक रिश्ते का असर आज भी वहां साफ दिखाई देता है, यहां तक कि इंडोनेशिया की भाषा ‘बहासा इंडोनेशिया’ में भी संस्कृत के कई शब्दों का इस्तेमाल होता है।
त्योहारों और कला में रामायण-महाभारत की झलक
इंडोनेशिया के सांस्कृतिक उत्सवों, पारंपरिक नृत्यों और कठपुतली शोज में अर्जुन, हनुमान, कौरव और भगवान राम जैसे पात्र रचे-बसे हैं। यहां भारत की तरह ही धूमधाम से रामलीला का मंचन किया जाता है, जिसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के कलाकार मिलकर रामायण के किरदारों को निभाते हैं। इसके अलावा, इंडोनेशिया में दुनिया का सबसे बड़ा बौद्ध स्तूप 'बोरोबुदुर' और भव्य 'प्रांबनन हिंदू मंदिर कॉम्प्लेक्स' मौजूद हैं, जो वहां की प्राचीन और समृद्ध धार्मिक विरासत की गवाही देते हैं।
बाली द्वीप: हिंदू संस्कृति का बड़ा केंद्र
इंडोनेशिया का बाली द्वीप इस मामले में सबसे खास है, क्योंकि यहां हिंदू समुदाय के लोग बहुसंख्यक हैं और बेहद शांति व सुकून से रहते हैं। हालांकि यहां का हिंदू धर्म भारत से थोड़ा अलग है, लेकिन उनके मंदिर, त्योहार और परंपराएं पूरी तरह भारतीय संस्कृति से जुड़ी हुई हैं। बाली में हिंदुओं की बहुसंख्या होने के कारण वहां की सरकार भी इस सांस्कृतिक विरासत को पूरा बढ़ावा देती है। सरकारी स्तर पर भी रामायण और महाभारत पर आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
विविधता में एकता का साझा सिद्धांत
पूरे इंडोनेशिया में हिंदुओं की आबादी करीब 1.7 फीसदी है, जिन्हें देश में पूरी धार्मिक स्वतंत्रता मिली हुई है। इंडोनेशिया का आधिकारिक दर्शन 'पांच सिला' भी विविधता में एकता पर आधारित है, जो भारत के मूल सिद्धांत से काफी मिलता-जुलता है। भले ही पिछले कुछ सालों में वहां थोड़ी कट्टरता बढ़ी हो, लेकिन बाली जैसे क्षेत्रों में आज भी सांस्कृतिक तालमेल बहुत मजबूत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा से उम्मीद जताई जा रही है कि दोनों देशों के बीच न सिर्फ व्यापारिक रिश्ते सुधरेंगे, बल्कि इस साझी सांस्कृतिक विरासत को भी एक नई मजबूती मिलेगी।
हादसे के बाद प्रशासन सख्त, सुपरवाइजर पर गिरी गाज और कंपनी हुई ब्लैकलिस्ट
