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शिकागो के पास बड़ा सड़क हादसा, भारतीय छात्रा की मौत से परिवार में मातम
18 May, 2026 11:29 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शिकागो: अमेरिका से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है, जहाँ शिकागो के नजदीक हुए एक भीषण सड़क हादसे में 25 वर्षीय भारतीय छात्रा नव्या गडुसु की मौत हो गई। यह दर्दनाक दुर्घटना शनिवार देर रात इंडियाना राज्य के लेक काउंटी में इंटरस्टेट-65 हाईवे पर पेश आई। हादसे की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें नव्या के अलावा छह अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, दुर्घटना के तुरंत बाद राहत टीम ने नव्या को अस्पताल पहुंचाया, जहाँ रात करीब 12:16 बजे डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। लेक काउंटी कोरोनर कार्यालय ने इस बात की पुष्टि की है कि छात्रा की असमय मौत सड़क हादसे के दौरान शरीर में लगीं अत्यंत गंभीर चोटों के कारण हुई है।
भारतीय वाणिज्य दूतावास ने जताया गहरा शोक, परिजनों की मदद में जुटा प्रशासन
इस हृदयविदारक घटना की जानकारी मिलते ही अमेरिका में भारतीय राजनयिक मिशन भी सक्रिय हो गया है। शिकागो स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास (कांसुलेट) ने इस हादसे पर गहरा दुख प्रकट करते हुए पीड़ित परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर आधिकारिक बयान जारी करते हुए लिखा कि भारतीय छात्रा नव्या गडुसु की सड़क दुर्घटना में हुई असामयिक मृत्यु से वे बेहद आहत हैं। कांसुलेट इस बेहद कठिन और दुखद समय में नव्या के परिवार और उनके दोस्तों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है और मृतका के पार्थिव शरीर को भारत भेजने के लिए जरूरी कागजी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में हरसंभव सहायता प्रदान कर रहा है।
हाईवे पर दो वाहनों के बीच इस तरह हुई जोरदार भिड़ंत
इंडियाना स्टेट पुलिस द्वारा जारी की गई शुरुआती जांच रिपोर्ट के मुताबिक, यह भीषण हादसा शनिवार की रात करीब 11:15 बजे हुआ। घटना के वक्त एक लाल रंग की मिनीवैन, जिसमें नव्या समेत कुल सात लोग सवार थे, हाईवे पर आगे चल रहे एक खराब वाहन के कारण महज 10 से 15 मील प्रति घंटे की बेहद धीमी रफ्तार से आगे बढ़ रही थी। इसी दौरान पीछे से आ रही एक दूसरी तेज रफ्तार कार के चालक को मिनीवैन की इस धीमी गति का समय रहते सही अंदाजा नहीं मिल सका। दुर्घटना से बचने की आखिरी कोशिश में जब पीछे वाले ड्राइवर ने अपनी कार को अचानक मोड़ने का प्रयास किया, तो उसकी कार का संतुलन बिगड़ गया और वह मिनीवैन के बाईं ओर के हिस्से से बेहद ताकत के साथ जा टकराई।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी: आम के डिब्बों पर बिना सीट बेल्ट बैठे थे यात्री
टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि अनियंत्रित हुई मिनीवैन सड़क से पूरी तरह उतर गई और पास ही बनी गहरी खाई में जा गिरी। पुलिस प्रशासन की जांच में इस हादसे के दौरान सुरक्षा मानकों की एक बड़ी और भयावह अनदेखी भी उजागर हुई है। जांच अधिकारियों ने बताया कि दुर्घटनाग्रस्त हुई मिनीवैन में केवल आगे की तरफ ही दो वैध सीटें मौजूद थीं, जबकि गाड़ी के पिछले हिस्से में कोई सीट नहीं थी। नव्या सहित वैन में सवार बाकी के पांच लोग पीछे रखे आम के डिब्बों (कार्टन्स) के ऊपर बिना किसी सीट बेल्ट के बैठे हुए थे। कार की सीधी टक्कर और सुरक्षा घेरे की इसी कमी के कारण छात्रा नव्या को सबसे अधिक गंभीर चोटें आईं, जो अंततः उनके लिए जानलेवा साबित हुईं।
तीन पीड़ितों के बैंक खाते खाली, साइबर क्राइम ने मचाई तबाही
18 May, 2026 11:27 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सोनीपत: जिले में साइबर अपराधियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। ठगों ने चालाकी से जाल बुनकर एक महिला समेत तीन लोगों को अपना शिकार बनाया और उनके खातों से कुल 14.14 लाख रुपये उड़ा लिए। धोखेबाजों ने इस वारदात को अंजाम देने के लिए रिश्तों का फर्जीवाड़ा, झांसा और आधुनिक तकनीक का सहारा लिया।
रिश्तेदारों के नाम पर फर्जीवाड़ा
ठगी का पहला मामला बेहद चौंकाने वाला है, जहाँ अपराधियों ने रिश्तों के भरोसे का फायदा उठाया। एक पीड़ित के पास फोन आया, जिसमें कॉलर ने खुद को उनकी साली का बेटा (साढ़ू का लड़का) बताया। बातों के जाल में फंसाकर ठग ने पीड़ित के खाते से ₹3.5 लाख पार कर दिए।
मोटी कमाई और निवेश का झांसा
दूसरा मामला एक महिला से जुड़ा है। साइबर शातिरों ने उन्हें ऑनलाइन निवेश के जरिए घर बैठे तगड़ा मुनाफा कमाने का लालच दिया। महिला इस झांसे में आ गई और डिजिटल प्रक्रिया के नाम पर ठगों ने उनके बैंक अकाउंट से ₹5.15 लाख साफ कर दिए।
मोबाइल हैक कर उड़ाए लाखों
तीसरी वारदात में शातिरों ने तकनीक का सहारा लिया। ठगों ने एक व्यक्ति के मोबाइल फोन को रिमोट एक्सेस लेकर हैक कर लिया। इसके बाद बिना कोई भनक लगे पीड़ित के खाते से ₹5.49 लाख निकाल लिए गए।
मॉस्को पर बड़ा हमला, यूक्रेन ने अहम औद्योगिक ठिकानों को निशाना बनाया
18 May, 2026 10:31 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मॉस्को: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध ने एक बेहद खौफनाक और विनाशकारी मोड़ ले लिया है। यूक्रेन की सेना ने शनिवार और रविवार की दरमियानी रात रूस के कई राज्यों को निशाना बनाते हुए 1000 से अधिक आत्मघाती (कामिकेज़) ड्रोनों से अब तक का सबसे बड़ा हवाई हमला किया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस भीषण बमबारी में कम से कम चार नागरिकों की मौत हो गई है, जिनमें रूस में काम करने वाला एक भारतीय मजदूर भी शामिल है। मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास ने आधिकारिक बयान जारी कर इस दुखद घटना की पुष्टि की है। दूतावास के अनुसार, इस हमले में तीन अन्य भारतीय नागरिक गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं, जिन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना की जानकारी मिलते ही भारतीय राजनयिकों की एक उच्च स्तरीय टीम ने तुरंत प्रभावित इलाके का दौरा किया और अस्पताल पहुंचकर घायल भारतीयों से मुलाकात कर हरसंभव मदद का भरोसा दिया।
मॉस्को से लेकर यूक्रेनी सीमा तक बरपा कहर, सुरक्षा कारणों से पहचान गुप्त
रूसी रक्षा मंत्रालय और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस अभूतपूर्व ड्रोन हमले में राजधानी मॉस्को और उसके नजदीकी उपनगरों में तीन लोगों की जान गई है, जबकि यूक्रेन की सीमा से बिल्कुल सटे बेलगोरोद प्रांत में एक अन्य व्यक्ति ने दम तोड़ा है। अकेले मॉस्को क्षेत्र में ही करीब 12 से अधिक लोग गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं, जिनमें तेल रिफाइनरियों और औद्योगिक संयंत्रों में नाइट शिफ्ट में काम करने वाले मजदूर शामिल हैं। सुरक्षा और कूटनीतिक संवेदनशीलता को देखते हुए फिलहाल मारे गए भारतीय नागरिक और घायल हुए अन्य तीन लोगों के नामों व पहचान को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। भारतीय दूतावास पीड़ित नागरिकों की कंपनी के प्रबंधन और स्थानीय रूसी अधिकारियों के साथ मिलकर कानूनी व चिकित्सीय प्रक्रियाओं को पूरा करने में जुटा है।
सेना को सेमीकंडक्टर देने वाले एंगस्ट्रेम प्लांट और तेल रिफाइनरियों पर सटीक निशाना
कीव इंडिपेंडेंट की खोजी रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेनी वायुसेना का मुख्य ध्येय मॉस्को और उसके आसपास स्थित रूस के सैन्य ढांचे और ईंधन से जुड़े अति-संवेदनशील ठिकानों को आर्थिक व सामरिक रूप से पंगु बनाना था। यूक्रेनी ड्रोनों ने रूस के विख्यात 'एंगस्ट्रेम प्लांट' को भारी नुकसान पहुंचाया है, जो रूसी सेना के आधुनिक हथियारों और मिसाइलों के लिए सेमीकंडक्टर व इलेक्ट्रॉनिक चिप्स बनाने वाला मुख्य केंद्र माना जाता है। इसके अतिरिक्त, मॉस्को की सबसे बड़ी ऑयल रिफाइनरी, सोलनेचनोगोर्स्क और वोलोडार्स्कोये स्थित विशाल ईंधन भंडारण स्टेशनों को भी ड्रोनों ने निशाना बनाया, जिससे वहां आसमान छूती आग की लपटें और धुएं का गुबार देखा गया।
राष्ट्रपति जेलेंस्की ने हमले को ठहराया जायज, हवाई अड्डों पर परिचालन ठप
इस भीषण तबाही के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर इस जवाबी कार्रवाई को पूरी तरह से न्यायसंगत और जायज ठहराया है। उन्होंने साफ कहा कि रूस द्वारा यूक्रेनी शहरों पर किए जा रहे लगातार हमलों और युद्ध को लंबा खींचने की सनक का यह सीधा जवाब है और रूसियों को यह समझना होगा कि उनका देश इस युद्ध को तुरंत बंद करे। इस बड़े हवाई हमले के कारण रविवार सुबह मॉस्को के चारों प्रमुख हवाई अड्डों पर विमानों की आवाजाही को पूरी तरह रोकना पड़ा, जिससे दर्जनों अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानें रद्द या डाइवर्ट करनी पड़ीं। हालांकि, रूसी वायुसेना का दावा है कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने मुस्तैदी दिखाते हुए मॉस्को की तरफ बढ़ रहे 120 से अधिक ड्रोनों को हवा में ही मार गिराया, लेकिन मलबे के गिरने से कई बहुमंजिला रिहायशी इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा है।
जंग खत्म करने के बदले अमेरिका की शर्तें, ईरान को 25% प्रॉपर्टी लौटाने की बात
18 May, 2026 08:17 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन: पश्चिम एशिया में जारी भीषण तनाव के बीच वैश्विक कूटनीति के मोर्चे से एक बेहद बड़ी खबर सामने आ रही है। ईरान की आधिकारिक फार्स न्यूज एजेंसी ने सनसनीखेज दावा किया है कि अमेरिका ने ईरान के साथ शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए पांच बेहद सख्त और बड़ी शर्तें सामने रखी हैं। इस गुप्त रिपोर्ट के मुताबिक, वॉशिंगटन ने साफ कर दिया है कि वह पूर्व में हुई बमबारी से ईरान को हुए भारी नुकसान का कोई भी मुआवजा नहीं देगा। इसके साथ ही सबसे बड़ी शर्त के रूप में अमेरिका ने मांग की है कि ईरान अपना 400 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम (एनरिच्ड यूरेनियम) तुरंत अमेरिकी प्रशासन को सौंप दे, ताकि उसके परमाणु हथियारों की क्षमता को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सके।
एक परमाणु केंद्र की शर्त और फ्रीज संपत्ति पर अमेरिका का कड़ा रुख
अमेरिकी प्रस्तावों की कड़ियों को उजागर करते हुए रिपोर्ट में बताया गया है कि जो बाइडन प्रशासन चाहता है कि ईरान के भीतर भविष्य में केवल एक ही परमाणु अनुसंधान केंद्र को चालू रखने की अनुमति दी जाए, जबकि बाकी सभी केंद्रों को पूरी तरह से बंद करना होगा। इसके अलावा, आर्थिक मोर्चे पर भी ईरान को बड़ा झटका देते हुए अमेरिका उसकी अंतरराष्ट्रीय बैंकों में फ्रीज (जब्त) पड़ी विदेशी संपत्तियों में से महज 25 प्रतिशत से अधिक की राशि को जारी करने के पक्ष में बिल्कुल नहीं है। राजनीतिक मोर्चे पर वाशिंगटन की अंतिम शर्त यह है कि लेबनान सहित पश्चिम एशिया के तमाम मोर्चों पर जारी युद्ध को पूरी तरह खत्म करने का मसला केवल आपसी बातचीत के जरिए ही हल किया जाए। हालांकि, इन शर्तों को लेकर अभी तक अमेरिका या ईरान के विदेश मंत्रालयों की तरफ से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
ओमान सागर को अमेरिकी सेना की कब्रगाह बनाने की ईरानी धमकी और UAE पर ड्रोन हमला
इन शर्तों के बीच ईरान का रुख बेहद आक्रामक नजर आ रहा है और उसने अमेरिका को चेतावनी देते हुए सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) की नाकाबंदी तुरंत खत्म करने की मांग की है। तेहरान ने साफ लफ्जों में धमकी दी है कि यदि यह नाकाबंदी नहीं हटाई गई, तो वे ओमान सागर को अमेरिकी नौसेना और सैनिकों की कब्रगाह में तब्दील कर देंगे। इस जुबानी जंग के बीच जमीन पर भी हालात तब बेहद विस्फोटक हो गए, जब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के प्रतिष्ठित 'बराकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र' के ठीक बाहर एक रहस्यमयी ड्रोन हमला हुआ, जिससे वहां भीषण आग लग गई। सुरक्षा एजेंसियों की शुरुआती जांच की सुई सीधे तौर पर ईरान की तरफ घूम रही है, क्योंकि यह इतिहास में पहली बार है जब यूएई के किसी अति-संवेदनशील न्यूक्लियर प्लांट को सीधे निशाना बनाने का दुस्साहस किया गया है।
होर्मुज संकट पर भारत का कड़ा रुख, ट्रम्प का नया 20 साल वाला परमाणु फॉर्मूला
इस समुद्री तनाव के बीच वैश्विक व्यापार को सुचारू रखने के लिए भारत ने भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी आवाज बुलंद की है। संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने दो टूक शब्दों में कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट जैसे वैश्विक व्यापारिक मार्ग में वाणिज्यिक जहाजों (कॉमर्शियल शिपिंग) की आवाजाही को रोकना पूरी तरह से अस्वीकार्य और अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है। भारत की यह चिंता इसलिए भी जायज है क्योंकि जंग के इस माहौल के बीच मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला एलपीजी टैंकर 'सिमी' 20 हजार टन गैस लेकर सुरक्षित रूप से गुजरात के कांडला पोर्ट पहुंचा है और युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक ऐसे 15 एलपीजी जहाज अपनी जान जोखिम में डालकर भारत पहुंच चुके हैं। इस बीच, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी एक नया चौंकाने वाला प्रस्ताव देते हुए कहा है कि ईरान को स्थाई रोक के बजाय कम से कम 20 साल के लिए अपने पूरे परमाणु कार्यक्रम को सस्पेंड कर देना चाहिए, साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि तेहरान के पास सोचने का समय बहुत तेजी से खत्म हो रहा है।
नेतन्याहू और ट्रम्प के बीच सैन्य हमले पर गुप्त चर्चा, लेबनान में सीजफायर बेअसर
दूसरी तरफ, इजराइल और अमेरिका के शीर्ष नेतृत्व ने ईरान को चारों तरफ से घेरने की अपनी सैन्य तैयारियों को और तेज कर दिया है। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार को फोन पर एक बेहद गोपनीय और लंबी बातचीत की, जिसमें ईरान के खिलाफ आने वाले दिनों में किए जाने वाले संभावित बड़े सैन्य हमलों और युद्ध को दोबारा शुरू करने की रणनीतियों पर गहन मंथन हुआ। इस बातचीत के तुरंत बाद पीएम नेतन्याहू ने यरुशलम में अपने शीर्ष मंत्रियों—विदेश मंत्री गिदोन सार, रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज, वित्त मंत्री बेजालेल स्मोट्रिच और राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन ग्वीर—के साथ एक हाई-लेवल इमरजेंसी सुरक्षा बैठक बुलाई। अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों (एक्सिओस) की मानें तो ट्रम्प भी मंगलवार को अपने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के साथ सिचुएशन रूम में एक बड़ी बैठक करने जा रहे हैं जिसमें ईरान पर सीधे मिलिट्री एक्शन के विकल्पों को अंतिम रूप दिया जाएगा। इन तमाम बड़ी तैयारियों के बीच, संघर्ष विराम की तमाम अपीलों को दरकिनार करते हुए इजराइली सेना ने दक्षिणी लेबनान पर 30 से ज्यादा भीषण हवाई हमले किए हैं, जिसके कारण वहां हाहाकार मचा हुआ है और हजारों बेकसूर नागरिक अपनी जान बचाने के लिए सामूहिक पलायन को मजबूर हैं।
जहाजों पर हमले के खिलाफ भारत का कड़ा रुख, कहा- जवाब मिलेगा
17 May, 2026 04:52 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
न्यूयॉर्क: मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में जारी भीषण सैन्य संघर्ष के बीच भारत ने वैश्विक समुद्री व्यापार की लाइफलाइन माने जाने वाले 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (होर्मुज जलडमरूमध्य) में जहाजों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेहद कड़ा और आक्रामक रुख अपनाया है। संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पार्वथानेनी हरीश ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना, अंतरराष्ट्रीय चालक दल की जान खतरे में डालना और समुद्री जहाजों की निर्बाध आवाजाही को रोकना किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। भारतीय राजनयिक ने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का हर हाल में पूरी तरह सम्मान होना चाहिए। हाल ही में इस संवेदनशील क्षेत्र में दो बड़े वाणिज्यिक जहाजों के डूबने से वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
वैश्विक मंच पर भारत की चिंता और कड़ा रुख
भारतीय राजनयिक पार्वथानेनी हरीश ने यह महत्वपूर्ण बातें संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद की एक विशेष बैठक के दौरान कहीं। यह आपातकालीन बैठक विशेष रूप से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक मार्गों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से बुलाई गई थी। भारत का यह तीखा बयान ऐसे समय में आया है, जब कुछ ही दिनों पहले ओमान के तट के पास भारतीय ध्वज वाले एक जहाज पर हमला किया गया था। इस बैठक में पश्चिम एशिया संकट के कारण पूरी दुनिया में उपजे ईंधन और उर्वरक संकट से निपटने के लिए भारत ने अपना दृष्टिकोण साझा किया। भारतीय प्रतिनिधि के अनुसार, इस गंभीर संकट से पार पाने के लिए मजबूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग और तात्कालिक व दीर्घकालिक उपायों का तालमेल बेहद जरूरी है।
ओमान तट पर भारतीय जहाज को बनाया निशाना
रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले होर्मुज जलमार्ग के पास स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। इसी सिलसिले में 13 मई 2026 को सोमालिया से आ रहे भारतीय ध्वज वाले एक मालवाहक जहाज पर हमला किया गया। हालांकि ओमान के सुरक्षा अधिकारियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस जहाज पर मौजूद चालक दल के सभी 14 सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया। इस हमले के पीछे किसका हाथ था, इसकी अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन भारत सरकार ने इस कायरतापूर्ण कृत्य को पूरी तरह से अनुचित बताया है। फरवरी 2026 में मिडिल ईस्ट में संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक भारतीय ध्वज वाले कम से कम तीन जहाजों को निशाना बनाया जा चुका है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रणनीतिक महत्व और ईरान संकट
ओमान के तट के पास स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे संकरा और महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहां से वैश्विक अर्थव्यवस्था की लगभग 20 प्रतिशत (पांचवां हिस्सा) ऊर्जा और कच्चे तेल की आपूर्ति गुजरती है। पश्चिम एशिया में इस अशांति की शुरुआत 28 फरवरी 2026 को हुई थी, जब अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर संयुक्त सैन्य हमले किए थे। इसके बाद ईरान की ओर से की गई जवाबी कार्रवाई के कारण इस पूरे जलमार्ग में जहाजों का आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस टकराव ने भारत सहित पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए ईंधन, खाद्यान्न और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति का एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।
लंबे समय के सहयोगी देशों में बढ़ी अनबन, अमेरिका-इजरायल रिश्ते चर्चा में
17 May, 2026 02:51 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेलअवीव: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीतियों के कारण अब अमेरिका और उसके सबसे भरोसेमंद सहयोगी इजरायल के बीच भी मतभेद उभरने लगे हैं। ट्रंप की हालिया चीन यात्रा के तुरंत बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और वियतनाम की ओर से आए बयानों ने दोनों देशों के बीच बढ़ती कूटनीतिक दूरी की पुष्टि कर दी है। प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अमेरिका पर अपनी सैन्य निर्भरता को लेकर न केवल खुलकर बात की है, बल्कि भविष्य में इसे धीरे-धीरे पूरी तरह खत्म करने का भी इरादा जताया है। उनके इस रुख ने वैश्विक राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
सैन्य आत्मनिर्भरता की ओर इजरायल का बड़ा कदम
दशकों से अमेरिका से अरबों डॉलर की सैन्य और आर्थिक मदद पाने वाला इजरायल अब इस बैसाखी को छोड़ने की तैयारी कर रहा है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के हालिया बयानों ने इस चर्चा को तेज कर दिया है कि क्या इजरायल वास्तव में अमेरिकी रक्षा सहायता के बिना अपनी सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर सकता है। अमेरिकी मीडिया को दिए इंटरव्यू में नेतन्याहू ने साफ कहा कि अब वह समय आ चुका है जब इजरायल को अमेरिकी सैन्य सहायता के दायरे से बाहर निकलना चाहिए और अपनी रक्षा जरूरतों को खुद पूरा करने के लिए आत्मनिर्भर बनना चाहिए।
ऐतिहासिक रक्षा समझौता और अमेरिकी मदद के आंकड़े
नेतन्याहू का यह बयान इसलिए बेहद हैरान करने वाला है क्योंकि इजरायल की पूरी रक्षा प्रणाली काफी हद तक अमेरिकी फंडिंग पर टिकी है। वर्तमान में वर्ष 2016 में हुए एक 10 वर्षीय समझौते के तहत अमेरिका हर साल इजरायल को 3.8 अरब डॉलर की भारी-भरकम सैन्य सहायता देता है। इस समझौते की शर्त यह भी है कि इस रकम का एक बड़ा हिस्सा इजरायल को अमेरिकी हथियार और सैन्य उपकरण खरीदने पर ही खर्च करना होता है। आंकड़ों की बात करें तो 1948 में इजरायल की स्थापना के बाद से अब तक अमेरिका उसे 300 अरब डॉलर से अधिक की आर्थिक और सैन्य मदद दे चुका है, जो इतिहास में किसी भी देश को मिली सबसे बड़ी सहायता है।
अमेरिकी जनमत में बदलाव और सप्लाई चेन का संकट
इजरायल द्वारा इस नीतिगत बदलाव के पीछे सबसे बड़ी वजह अमेरिका के घरेलू राजनीतिक माहौल में आ रहा बदलाव है। हालिया वैश्विक सर्वे बताते हैं कि गाजा और क्षेत्र में हुए युद्ध के बाद अमेरिकी नागरिकों, विशेषकर युवाओं और वहां के विश्वविद्यालयों में इजरायल के प्रति नकारात्मक राय तेजी से बढ़ी है। सैन्य इतिहासकारों का मानना है कि नेतन्याहू इस बदलते राजनीतिक मिजाज को भांप चुके हैं और वह भविष्य में अमेरिकी सहायता बंद होने की स्थिति में किसी भी बड़े झटके से बचने के लिए इजरायल को पहले से तैयार करना चाहते हैं। इसके अलावा, हालिया युद्धों के दौरान हथियारों की अचानक बढ़ी मांग और सप्लाई चेन (आपूर्ति श्रृंखला) में आई दिक्कतों ने भी इजरायल को अपने स्थानीय हथियार उद्योग को मजबूत करने और कच्चे माल के भंडार तैयार करने पर मजबूर किया है।
कूटनीतिक विशेषज्ञों का आकलन और व्यावहारिक चुनौतियां
हालांकि, कूटनीतिक और रक्षा मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में वॉशिंगटन से पूरी तरह नाता तोड़ लेना इजरायल के लिए व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। अमेरिका से पूरी तरह अलग होना भले ही अभी मुमकिन न हो, लेकिन बदलते वैश्विक और राजनीतिक समीकरणों ने तेल अवीव को नए विकल्पों पर सोचने के लिए मजबूर जरूर कर दिया है। इजरायल अब अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता को बढ़ाने के लिए स्थानीय रक्षा उत्पादन पर करीब 110 अरब डॉलर खर्च करने की योजना बना रहा है, ताकि आने वाले दशक में अमेरिकी इमदाद को घटाकर 'शून्य' पर लाया जा सके।
अमेरिका पहुंचा ‘समंदर का सिकंदर’, ईरान बॉक्स ऑफिस पर नहीं चला जादू
17 May, 2026 11:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन: दुनिया का सबसे विशाल और अत्याधुनिक अमेरिकी युद्धपोत 'जेराल्ड आर. फोर्ड' करीब एक साल तक समुद्र में रहकर कई बड़े सैन्य अभियानों को अंजाम देने के बाद आखिरकार स्वदेश लौट आया है। शनिवार को इस महाकाय एयरक्राफ्ट कैरियर ने वर्जीनिया के नॉरफॉक पोर्ट पर लंगर डाला। वियतनाम युद्ध के बाद से किसी भी अमेरिकी युद्धपोत की यह अब तक की सबसे लंबी ऑपरेशनल तैनाती मानी जा रही है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक सैन्य रणनीतियों का मुख्य केंद्र रहा यह जहाज वेनेजुएला संकट और ईरान युद्ध जैसे बड़े मोर्चों पर तैनात था। हालांकि, इसकी अत्यधिक लंबी तैनाती अमेरिकी सैन्य क्षमता पर सवाल खड़े कर रही थी, जिसके बाद इसे वापस बुलाने का फैसला लिया गया।
अपनों की वापसी पर भावुक हुए परिवार और रक्षा मंत्री ने बढ़ाया हौसला
जैसे ही यह विशाल युद्धपोत नॉरफॉक पोर्ट पर पहुंचा, वहां का माहौल बेहद भावुक हो गया। अपने प्रियजनों के इंतजार में खड़े सैकड़ों परिवारों ने आंसुओं और स्वागत पोस्टरों के साथ नाविकों का जोरदार स्वागत किया। इस ऐतिहासिक और राहत भरे पल का गवाह बनने के लिए अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ भी खुद वहां मौजूद रहे। उन्होंने फोर्ड कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के नाविकों की असाधारण बहादुरी और देश सेवा की जमकर सराहना की।
अत्यधिक तनाव, रसद की कमी और सैनिकों में बढ़ता असंतोष
आमतौर पर किसी भी एयरक्राफ्ट कैरियर को अधिकतम 7 महीनों के लिए ही समुद्र में तैनात किया जाता है, लेकिन बदलती वैश्विक परिस्थितियों के कारण यह मिशन 11 महीने तक खिंच गया। इतनी लंबी तैनाती की वजह से सैनिकों में भारी शारीरिक और मानसिक थकान देखी जा रही थी। उनके परिवारों ने शिकायत की थी कि कई दिनों तक सैनिकों से कोई संपर्क नहीं हो पा रहा था और जहाज पर जरूरी रसद (सामान) की भी किल्लत होने लगी थी। अत्यधिक तनाव का आलम यह था कि कुछ नाविकों ने लौटते ही सेना की नौकरी तक छोड़ने की बात कह दी है। शीर्ष नौसैनिक अधिकारियों ने भी यह माना है कि भविष्य में सैनिकों को इतने लंबे समय तक तनाव में रखने से बचना चाहिए।
तकनीकी खामियां और ईरान युद्ध के दौरान लगी भीषण आग
इस ऐतिहासिक सफर के दौरान लगभग 13 अरब डॉलर (करीब 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक) की भारी-भरकम लागत से बने इस पोत के भीतर कई गंभीर तकनीकी कमियां भी सामने आईं। सफर के दौरान जहाज के टॉयलेट्स खराब हो गए थे। इसके अलावा, मार्च में ईरान युद्ध के दौरान इसके लॉन्ड्री एरिया में अचानक भीषण आग लग गई थी, जिसे बुझाने में नौसेना को करीब 30 घंटे की कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। उस दौरान स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि 600 से अधिक नाविकों को अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट होना पड़ा था।
अमेरिकी नौसेना की रीढ़ और इसकी आधुनिक तकनीक
तमाम चुनौतियों और विवादों के बावजूद यह युद्धपोत अमेरिकी रक्षा तंत्र की असली रीढ़ माना जाता है। वेनेजुएला और ईरान के खिलाफ चले ऑपरेशन्स के दौरान इसी जहाज से फाइटर जेट्स ने उड़ान भरी थी। इस जहाज की सबसे बड़ी खासियत इसका 'एडवांस इलेक्ट्रॉनिक कैटापल्ट सिस्टम' है, जो छोटे ड्रोनों से लेकर भारी लड़ाकू विमानों को भी बेहद आसानी से हवा में लॉन्च कर सकता है। यह आधुनिक तकनीक अमेरिका के बाकी पुराने 10 विमानवाहकों में भी मौजूद नहीं है। पिछले साल जून में वर्जीनिया से रवाना होने के बाद इस युद्धपोत ने अटलांटिक, भूमध्य सागर, नॉर्वे, कैरेबियन और मिडिल ईस्ट के अशांत समंदरों का सफर तय किया और अब यह आखिरकार अपने देश वापस आ चुका है।
ताइवान ने दिखाई सख्ती, कहा- हमारी संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं
17 May, 2026 08:51 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन: चीन के आधिकारिक दौरे से लौटे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ताइवान को लेकर एक ऐसा विवादित बयान दे दिया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका अपने देश से 9,500 मील दूर किसी नए युद्ध में शामिल होने का इच्छुक नहीं है, जबकि भौगोलिक दृष्टि से ताइवान चीन के बेहद करीब है। ट्रंप के इस बयान पर ताइवान ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिका को कूटनीतिक रूप से कटघरे में खड़ा कर दिया है। जहां अमेरिकी राष्ट्रपति इस बेहद संवेदनशील मुद्दे से पल्ला झाड़ते दिखे, वहीं ताइवान ने दो टूक शब्दों में साफ कर दिया कि वह किसी भी कीमत पर चीन के अधीन नहीं है।
बीजिंग में जिनपिंग की चेतावनी और ट्रंप का बदला रुख
दरअसल, इस पूरे विवाद की पटकथा बीजिंग में ही लिख दी गई थी, जहां चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ट्रंप के साथ हुई उच्च स्तरीय बैठक में दो टूक चेतावनी दी थी कि ताइवान का मुद्दा दोनों महाशक्तियों के बीच सीधे सैन्य टकराव की वजह बन सकता है। चीन यात्रा से लौटते ही ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि वह नहीं चाहते कि ताइवान औपचारिक रूप से अपनी पूर्ण स्वतंत्रता की घोषणा करे। उन्होंने सचेत किया कि ताइवान का ऐसा कोई भी कदम दुनिया में एक विनाशकारी युद्ध को जन्म दे सकता है और अमेरिका इतनी दूर एक और नया मोर्चा खोलने के पक्ष में बिल्कुल नहीं है।
14 अरब डॉलर की डिफेंस डील पर बढ़ा सस्पेंस
ट्रंप के इस बदले हुए तेवरों का असर दोनों देशों के बीच होने वाले रक्षा समझौतों पर भी पड़ता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ताइवान के साथ होने वाली 14 बिलियन डॉलर (लगभग 1.15 लाख करोड़ रुपये) की बड़ी सैन्य डील को लेकर सस्पेंस बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि वह अभी इस डील को मंजूरी देने पर विचार कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि ट्रंप का यह टालमटोल वाला रवैया सीधे तौर पर चीन द्वारा बनाए गए रणनीतिक और आर्थिक दबाव का ही नतीजा है।
ताइवान का तीखा पलटवार और संप्रभुता का दावा
डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान के सामने आने के कुछ ही घंटों के भीतर ताइवान के विदेश मंत्रालय ने बेहद आक्रामक अंदाज में पलटवार किया। ताइवान ने स्पष्ट किया कि वह एक पूर्ण संप्रभु, स्वतंत्र और लोकतांत्रिक देश है, जो किसी के दबाव में नहीं आने वाला। ताइवान ने अमेरिका को याद दिलाया कि वाशिंगटन से मिलने वाली सैन्य सहायता उसकी सुरक्षा और अस्तित्व के लिए बेहद जरूरी है। यह तीखी प्रतिक्रिया इसलिए भी आई क्योंकि ट्रंप ने ताइवान को चीन के खिलाफ सौदेबाजी (बातचीत) के लिए महज एक 'अच्छा कार्ड' बता दिया था, जिससे ताइवान की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची।
डैमेज कंट्रोल की कोशिश और वन चाइना पॉलिसी का संकट
मामले को तूल पकड़ता देख और घरेलू व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घिरने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने डैमेज कंट्रोल (स्थिति संभालने) की कोशिश भी की। ट्रंप ने बाद में स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि अमेरिका की ताइवान नीति में कोई बुनियादी बदलाव नहीं आया है और उनके कार्यकाल के दौरान ताइवान पर कोई हमला नहीं होने दिया जाएगा। इसके बावजूद, उनके शुरुआती बयानों ने साफ संकेत दे दिया है कि अमेरिका इस समय चीन को सीधे तौर पर नाराज करने का जोखिम नहीं उठाना चाहता। अमेरिका लंबे समय से 'वन चाइना पॉलिसी' का समर्थन करने के साथ-साथ ताइवान का सबसे बड़ा हथियार सप्लायर भी रहा है, लेकिन ट्रंप के इस बयान ने सालों पुराने इस जटिल रणनीतिक संतुलन को हिलाकर रख दिया है।
हंतावायरस संक्रमण को लेकर सतर्कता बढ़ी, यात्रियों के क्वारंटीन होने से स्वास्थ्य विभाग अलर्ट
16 May, 2026 01:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेलबर्न (ऑस्ट्रेलिया)। 'एमवी होंडियस' नामक एक क्रूज जहाज पर जानलेवा हंतावायरस का प्रकोप फैलने के बाद छह यात्रियों को कड़े क्वारंटीन में रखने का फैसला लिया गया है। शुक्रवार को इन यात्रियों को सुरक्षित रूप से ऑस्ट्रेलिया पहुँचाया गया, जहाँ इन्हें कम से कम तीन सप्ताह (21 दिन) तक आइसोलेशन में रहना होगा। संक्रमण के खतरे को देखते हुए इस अवधि के दौरान इन यात्रियों को किसी से भी मिलने-जुलने की बिल्कुल इजाजत नहीं होगी।
विमान से लाए गए यात्री, स्वास्थ्य मंत्री ने दी कड़ी प्रतिक्रिया
हंतावायरस से प्रभावित इन यात्रियों को नीदरलैंड से एक विशेष गल्फस्ट्रीम बिजनेस जेट के जरिए ऑस्ट्रेलिया लाया गया। यह विमान पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के पर्थ के नजदीक स्थित 'आरएएएफ बेस पियर्स' पर उतरा, जहाँ से यात्रियों, क्रू मेंबर्स और एक डॉक्टर को कड़ी सुरक्षा के बीच बस द्वारा 'बुल्सब्रुक क्वारंटीन सेंटर' भेजा गया। ऑस्ट्रेलिया के स्वास्थ्य मंत्री मार्क बटलर ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वायरस के प्रसार को रोकने के लिए सरकार दुनिया की सबसे सख्त क्वारंटीन गाइडलाइंस का पालन कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका और यूरोप लौटने वाले अन्य यात्रियों को भी कुछ दिनों के लिए अलग रखा जाएगा।
क्रूज पर 11 लोग संक्रमित और तीन की मौत
जिस क्रूज जहाज 'एमवी होंडियस' पर यह वायरस फैला है, वह अर्जेंटीना से अंटार्कटिका और दक्षिण अटलांटिक के द्वीपों की यात्रा पर निकला था। सफर के दौरान जहाज पर हंतावायरस के 11 मामले सामने आए, जिनमें से तीन संक्रमितों की मौत हो चुकी है। शुरुआती जांच में केवल एक यात्री संक्रमित मिला था, जिसकी बाद की रिपोर्ट निगेटिव आ गई थी। वर्तमान में क्वारंटीन किए गए 6 यात्रियों (जिनमें 5 ऑस्ट्रेलियाई और 1 न्यूजीलैंड का नागरिक शामिल है) की रवानगी से पहले की रिपोर्ट निगेटिव आई थी और उड़ान के दौरान भी डॉक्टर ने उनकी सेहत पर नजर रखी थी। अब यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने के बाद जहाज नीदरलैंड की ओर वापस लौट रहा है।
WHO की गाइडलाइन और अमेरिका में भी अलर्ट
हंतावायरस के संक्रमण से बचाव और जांच को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने आगाह किया है कि वायरस की पुष्टि होने के बाद शुरुआती 42 दिनों का समय बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण होता है। इसके बाद क्या कदम उठाए जाने हैं, इस पर मंथन चल रहा है। दूसरी ओर, अमेरिका ने भी इस मामले को लेकर मुस्तैदी दिखाई है; स्वास्थ्य अधिकारियों के निर्देश पर दो यात्रियों को ओमाहा (नेब्रास्का) के राष्ट्रीय क्वारंटीन केंद्र भेजा गया है। नेब्रास्का मेडिसिन विभाग की प्रवक्ता कायला थॉमस ने पुष्टि की है कि ओमाहा लाए गए यात्रियों को चिकित्सकीय जांच के बाद ही यात्रा की हरी झंडी दी गई थी।
अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों के बीच भारत-UAE सहयोग मजबूत, विशेषज्ञ बोले- भविष्य पर पड़ेगा असर
16 May, 2026 01:27 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि इस क्षेत्र में अमन-चैन और स्थिरता की जल्द से जल्द बहाली के लिए भारत हर मुमकिन मदद देने को तैयार है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ हुई एक द्विपक्षीय बैठक में पीएम मोदी ने भरोसा दिलाया कि भारत हर मुश्किल घड़ी में यूएई के साथ मजबूती से खड़ा रहा है और आगे भी यह अटूट साथ जारी रहेगा। उन्होंने क्षेत्र की सुरक्षा के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से सुरक्षित और निर्बाध समुद्री आवागमन को बेहद जरूरी बताया।
होर्मुज जलमार्ग की सुरक्षा भारत की शीर्ष प्राथमिकता
पश्चिम एशिया के हालातों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र की उथल-पुथल का असर आज पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। उन्होंने वैश्विक व्यापार और सुरक्षा के नजरिए से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले होर्मुज जलमार्ग को खुला और सुरक्षित रखने की वकालत की। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि वैश्विक ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा को बनाए रखने के लिए इस समुद्री मार्ग में जहाजों की स्वतंत्र और सुरक्षित आवाजाही को सुनिश्चित करना भारत की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है। यूएई के राष्ट्रपति ने भी भारत के इस रुख का पूरा समर्थन किया।
वैश्विक संकट के बीच एलपीजी और पेट्रोलियम रिजर्व पर बड़ा समझौता
दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच यह अहम बातचीत और रणनीतिक समझौते ऐसे नाजुक समय में हुए हैं, जब पश्चिम एशियाई संघर्ष के चलते दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहराया हुआ है। हाल ही में भारत में भी ईंधन (पेट्रोल-डीजल) की कीमतों में तेजी देखी गई है, जिसके मद्देनजर प्रधानमंत्री ने देशवासियों से कारपूलिंग, सार्वजनिक वाहनों के इस्तेमाल और वर्क फ्रॉम होम जैसे उपायों के जरिए ईंधन की बचत करने की अपील की थी। ऐसे मुश्किल हालात में भारत और यूएई के बीच एलपीजी आपूर्ति और सामरिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserve) को लेकर हुए समझौते बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर दिखेगा दूरगामी और सकारात्मक प्रभाव
सामरिक और रणनीतिक मामलों के जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी के इस यूएई दौरे और वहां हुए समझौतों के परिणाम आने वाले समय में बहुत दूरगामी साबित होंगे। चूंकि भारत अपनी कच्चे तेल की कुल आवश्यकता का लगभग 87 फीसदी हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से यह साझेदारी भारत को मौजूदा संकट से बड़ी राहत दे सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय नियमों के पालन पर जोर देने वाले इन करारों का भारतीय बाजार और अर्थव्यवस्था पर जल्द ही सकारात्मक असर देखने को मिलेगा।
अमेरिकी जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बाद अदाणी केस चर्चा में, अब न्याय विभाग के फैसले का इंतजार
16 May, 2026 01:20 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन | भारतीय दिग्गज कारोबारी गौतम अदाणी अमेरिका में अपने खिलाफ चल रही विभिन्न कानूनी जांचों के पूर्ण समाधान के बेहद नजदीक पहुंच गए हैं। इस दिशा में एक बड़ी राहत देते हुए अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) ने उनके खिलाफ दर्ज दीवानी मामले को रफा-दफा कर दिया है। माना जा रहा है कि आने वाले कुछ ही दिनों में अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) और कोषागार विभाग भी इनके समानांतर चल रही अन्य जांचों को आधिकारिक तौर पर बंद कर सकते हैं।
बिना दोष स्वीकारे जुर्माने के भुगतान पर बनी सहमति
मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) ने गौतम अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी पर निवेशकों को अधूरी जानकारी देने से जुड़े दीवानी आरोपों का निपटारा कर दिया है। यह पूरा मामला भारत में सौर ऊर्जा परियोजनाओं से जुड़ा हुआ था। अदालती दस्तावेजों के मुताबिक, इस समझौते के तहत बिना किसी गलती या दोष को स्वीकार या अस्वीकार किए, गौतम अदाणी 6 लाख डॉलर और सागर अदाणी 1.2 करोड़ डॉलर का जुर्माना भरने पर सहमत हुए हैं।
आपराधिक आरोप हटने की तैयारी और कानूनी टीम की भूमिका
इस दीवानी समझौते के बाद अब अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) दोनों भारतीय कारोबारियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को पूरी तरह से वापस लेने की तैयारी में है। यह महत्वपूर्ण सफलता सरकारी अभियोजकों और अदाणी समूह की मजबूत कानूनी टीम के बीच महीनों चली लंबी बातचीत के बाद मिली है। इस कानूनी टीम का नेतृत्व 'सुलिवन एंड क्रॉमवेल' के वरिष्ठ भागीदार और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निजी वकीलों में शामिल रॉबर्ट जे जिउफ्रा जूनियर कर रहे थे।
नवंबर 2024 में लगे थे धोखाधड़ी के गंभीर आरोप
गौरतलब है कि नवंबर 2024 में अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग और न्याय विभाग ने एक शिकायत दर्ज की थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि अदाणी समूह ने भारत में सोलर पावर कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए भारतीय अधिकारियों को कथित तौर पर 26.5 करोड़ डॉलर की रिश्वत देने की योजना बनाई थी। साथ ही अमेरिकी बैंकों और निवेशकों से फंड जुटाते समय इस बात को छिपाया गया। अभियोजकों ने गौतम अदाणी पर मुख्य रूप से प्रतिभूति (Securities) और वायर धोखाधड़ी के आरोप लगाए थे, लेकिन उन्हें विदेशी भ्रष्ट आचरण अधिनियम (FCPA) के तहत लगने वाले रिश्वतखोरी के ज्यादा गंभीर आरोपों में शामिल नहीं किया गया था।
दिनदहाड़े कोर्ट में फायरिंग, नीरज उर्फ कातिया को मार गिराया गया
16 May, 2026 01:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सोनीपत। हरियाणा के खरखौदा अदालत परिसर में शनिवार को उस समय चीख-पुकार और दहशत का माहौल बन गया, जब पेशी के लिए आए एक युवक की सरेआम अंधाधुंध गोलियां बरसाकर बेरहमी से हत्या कर दी गई। दिनदहाड़े अंजाम दी गई इस दुस्साहसिक वारदात से कोर्ट परिसर में मौजूद वकीलों, कर्मचारियों और आम लोगों में भगदड़ मच गई। इस सनसनीखेज हत्याकांड के बाद चारों तरफ खौफ का साया पसरा हुआ है और सुरक्षा के दावों पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
पारिवारिक विवाद के चलते कोर्ट पहुंचे युवक पर जानलेवा हमला
मूल रूप से झज्जर के गांव दूबलधन और वर्तमान में गुरुग्राम के सेक्टर-37सी में रहने वाले नीरज उर्फ कातिया का अपनी पत्नी नीतू के साथ लंबे समय से विवाद चल रहा था। पत्नी द्वारा साल 2019 में दर्ज कराए गए दहेज उत्पीड़न के एक मामले की सुनवाई के सिलसिले में ही नीरज शनिवार को खरखौदा कोर्ट में हाजिर होने आए थे। जैसे ही वह अदालत की कार्यवाही निपटाकर परिसर से बाहर निकले और पास ही स्थित लघु सचिवालय के मुख्य द्वार के पास पहुंचे, तभी वहां पहले से घात लगाकर बैठे अपराधियों ने उनकी गाड़ी को जोरदार टक्कर मारी और फिर बिना संभलने का मौका दिए उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसानी शुरू कर दीं।
कार सवार हमलावरों की अंधाधुंध फायरिंग और मौके पर ही मौत
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हत्यारे एक ब्रेजा कार में सवार होकर बेहद आक्रामक अंदाज में आए थे, जिन्होंने नीरज को निशाना बनाते हुए करीब चार से पांच गोलियां उनके शरीर में उतार दीं। गोलियों की आवाज से पूरा इलाका गूंज उठा और नीरज लहूलुहान होकर वहीं जमीन पर गिर पड़े। वारदात के समय नीरज के साथ मौजूद उनके कुछ दोस्तों और साथियों ने उन्हें बचाने तथा संभालने की पुरजोर कोशिश की, लेकिन घाव इतने गहरे थे कि उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जिसके बाद हमलावर अपनी तेज रफ्तार गाड़ी से फरार होने में कामयाब रहे।
पुलिस अधिकारियों का दौरा और साक्ष्य जुटाने की कवायद तेज
न्यायालय परिसर जैसी सुरक्षित जगह पर इस तरह की बड़ी वारदात की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और एसीपी जोगिंद्र शर्मा भारी पुलिस बल के साथ तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने पूरे इलाके को सील करके अपनी प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है, जिसके तहत फोरेंसिक टीम की मदद से मौके से जरूरी सबूत जुटाए जा रहे हैं। इसके साथ ही हमलावरों के भागने के रूट और उनकी पहचान स्थापित करने के लिए कोर्ट और सचिवालय के आसपास लगे तमाम सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाला जा रही है, ताकि जल्द से जल्द आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा जा सके।
डोनाल्ड ट्रंप को लेकर ईरान में नया विवाद, भारी इनामी प्रस्ताव से बढ़ा तनाव
16 May, 2026 12:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान | ईरानी मीडिया से आई एक बेहद चौंकाने वाली खबर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है। दावों के मुताबिक, ईरानी सरकार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या करने वाले को 50 मिलियन यूरो (लगभग ₹558 करोड़) का भारी-भरकम इनाम देने के लिए अपनी संसद में एक नया प्रस्ताव पेश करने की योजना बना रही है। 'ईरान वायर' की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने बताया कि देश की सैन्य और सुरक्षा एजेंसियों ने मिलकर 'काउंटर-एक्शन' नाम की एक कार्ययोजना का खाका तैयार किया है, जिसके तहत इस करोड़ों रुपये के इनाम का प्रावधान रखा गया है।
निशाने पर सिर्फ ट्रंप नहीं, नेतन्याहू भी शामिल
समिति के अध्यक्ष इब्राहिम अजीजी ने साफ तौर पर कहा कि इस जवाबी कार्रवाई के तहत केवल डोनाल्ड ट्रंप ही नहीं, बल्कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के कमांडर को भी टारगेट किया जाना चाहिए। अजीजी ने इन नेताओं पर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाते हुए यह बात कही। इससे पहले, सरकार के करीबी माने जाने वाले अली अकबर राएफीपुर के मीडिया संगठन 'मसाफ' ने भी यह दावा किया था कि 'किल ट्रंप' नाम के एक विशेष अभियान के लिए 50 मिलियन डॉलर का फंड पहले ही सुरक्षित रख लिया गया है।
हैकिंग ग्रुप 'हंडाला' का बड़ा दावा और वित्तीय सुरक्षा
इस बीच, 'हंडाला' नामक एक हैकिंग ग्रुप ने बयान जारी कर इस बात की पुष्टि की है कि उन्होंने ट्रंप और नेतन्याहू के खात्मे के लिए 50 मिलियन डॉलर की राशि आवंटित की है। ग्रुप का कहना है कि जो भी व्यक्ति या संगठन इस काम को सफलतापूर्वक अंजाम देगा, उसे यह पूरी रकम सौंप दी जाएगी। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि इस पूरे ऑपरेशन के दौरान बातचीत और पैसों के लेन-देन को पूरी तरह से सुरक्षित और गुप्त रखने के लिए एडवांस एन्क्रिप्शन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है।
ईरान ने बताया इसे अपना अधिकार, मोबाइल पर भेजे गए संदेश
ईरान इंटरनेशनल मीडिया के मुताबिक, अजीजी ने सरकारी टेलीविजन पर बात करते हुए कहा कि हालिया संघर्ष शुरू होने के बाद से ईरानी सांसदों ने कई विधेयकों के मसौदे तैयार किए हैं, जिनमें से एक सेना और सुरक्षा बलों को जवाबी कार्रवाई की छूट देता है। उन्होंने कहा, "हमारे इमाम की शहादत का बदला लेना हमारा अधिकार है, और किसी भी स्वतंत्र व्यक्ति या मुस्लिम को अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ वैसा ही सुलूक करना चाहिए।"हैरान करने वाली बात यह है कि इस साल मार्च की शुरुआत में ईरान के आम मोबाइल यूजर्स को बड़े पैमाने पर टेक्स्ट मैसेज भेजे गए थे, जिनमें ट्रंप की हत्या से जुड़े इस अंतरराष्ट्रीय अभियान का प्रचार किया गया था, जिसके स्क्रीनशॉट भी सामने आए हैं।
आतंकवाद के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, नाइजीरिया में ISIS के अहम चेहरे की मौत
16 May, 2026 12:14 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन | अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को एक अत्यंत महत्वपूर्ण और बड़ी सैन्य कामयाबी की जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी विशेष बलों ने नाइजीरिया में एक बेहद सटीक ऑपरेशन चलाकर खूंखार आतंकी संगठन आईएसआईएस (ISIS) के दूसरे सबसे बड़े वैश्विक कमांडर अबू-बिलाल अल-मिनुकी को ढेर कर दिया है। मारे गए इस शीर्ष आतंकी को पूरी दुनिया में इस्लामिक स्टेट नेटवर्क का दूसरा सबसे प्रभावशाली और खतरनाक रणनीतिकार माना जाता था।
अमेरिकी और नाइजीरियाई सेना का संयुक्त और सटीक प्रहार
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' के जरिए इस सैन्य कार्रवाई की पुष्टि की। उन्होंने इस अभियान को बेहद जटिल और सुनियोजित बताया, जिसे अमेरिकी सेना और नाइजीरियाई सशस्त्र बलों ने आपसी तालमेल के साथ अंजाम दिया। ट्रंप ने अल-मिनुकी को वर्तमान समय का सबसे सक्रिय और क्रूर आतंकवादी करार देते हुए कहा कि वह अफ्रीका में छिपकर यह सोच रहा था कि वह सुरक्षित है, लेकिन अमेरिकी खुफिया तंत्र लगातार उसकी हर गतिविधि पर पैनी नजर रखे हुए था।
वैश्विक नेटवर्क को लगेगा झटका, ट्रंप ने जताया आभार
अमेरिकी राष्ट्रपति का मानना है कि इस कुख्यात कमांडर के खात्मे से दुनिया भर में आईएसआईएस का आतंकी ताना-बाना पूरी तरह बिखर जाएगा और कमजोर होगा। अब यह आतंकी न तो अफ्रीका के मासूम लोगों को डरा पाएगा और न ही अमेरिकी नागरिकों के खिलाफ कोई नई साजिश रच सकेगा। ट्रंप ने इस सफल और साहसिक मिशन के लिए अमेरिकी सैनिकों के पराक्रम की जमकर सराहना की और साथ ही इस पूरे ऑपरेशन में अभूतपूर्व सहयोग देने के लिए नाइजीरियाई सरकार के प्रति विशेष आभार प्रकट किया।
कौन था अंतरराष्ट्रीय आतंकी अबू-बिलाल अल-मिनुकी?
अबू-बिलाल अल-मिनुकी (जिसे अबू बक्र इब्र मुहम्मद इब्र अली अल-मैनुकी भी कहा जाता था) मुख्य रूप से अफ्रीका के विशाल साहेल क्षेत्र में आतंक का पर्याय बना हुआ था। यह क्षेत्र अटलांटिक महासागर से लेकर लाल सागर तक करीब 5,900 किलोमीटर में फैला है, जिसमें माली, नाइजर, नाइजीरिया, चाड और सूडान जैसे कई देश आते हैं। वह 'इस्लामिक स्टेट वेस्ट अफ्रीका प्रोविंस' (ISWAP) का शीर्ष रणनीतिकार था और लेक चाड डिवीजन के आतंकी हमलों का संचालन करता था। उसका मुख्य काम दुनिया भर के आतंकी गुटों को फंड और निर्देश मुहैया कराना था, जिसके चलते अमेरिकी विदेश विभाग ने जून 2023 में उसे विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी (SDGT) घोषित किया था।
राजनीतिक टकराव खत्म, CM की तारीफ के बाद बनी पार्टी में सौहार्द्र
16 May, 2026 11:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सिरसा। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय चौधरी भजनलाल पर राज्यसभा सदस्य रेखा शर्मा द्वारा की गई एक विवादित टिप्पणी से पैदा हुए सियासी तूफान को थामने के लिए खुद मुख्यमंत्री नायब सैनी आगे आए हैं। इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए मुख्यमंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री के राजनीतिक कद और प्रदेश के प्रति उनकी सेवाओं को रेखांकित किया, जिसके तत्काल बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया। मुख्यमंत्री के सकारात्मक रुख के बाद जहां एक तरफ सांसद रेखा शर्मा ने अपने विवादित बयान पर सार्वजनिक रूप से खेद प्रकट किया, वहीं दूसरी तरफ आहत चल रहे भाजपा नेता कुलदीप बिश्नोई ने भी तमाम गिले-शिकवे भुलाकर विवाद को खत्म करने का एलान कर दिया।
मुख्यमंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री को बताया सम्मानित नेता और नाराजगी की खबरों को नकारा
सिरसा रेलवे स्टेशन पर नांदेड़ साहिब के लिए एक विशेष ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के बाद पत्रकारों से रूबरू हुए मुख्यमंत्री नायब सैनी ने इस पूरे विवाद पर बेहद परिपक्वता से जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि स्वर्गीय चौधरी भजनलाल हरियाणा की राजनीति के एक बेहद सम्मानित और कद्दावर नेता थे, जिन्होंने लंबे समय तक प्रदेश का कुशल नेतृत्व किया और राज्य को विकास की एक नई दिशा देने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारतीय जनता पार्टी के भीतर कुलदीप बिश्नोई की किसी भी तरह की नाराजगी के कयासों को सिरे से खारिज करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि संगठन में कोई भी व्यक्ति रुष्ट नहीं है और सभी लोग मिलकर सूबे को एक विकसित राज्य बनाने के सामूहिक लक्ष्य पर पूरी मुस्तैदी से काम कर रहे हैं।
सांसद रेखा शर्मा ने वीडियो जारी कर मांगी माफी और अपने विवादित शब्द लिए वापस
मुख्यमंत्री द्वारा चौधरी भजनलाल की जमकर सराहना किए जाने के तुरंत बाद राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा ने भी एक वीडियो संदेश जारी कर बैकफुट पर आते हुए इस पूरे मामले में क्षमा मांगी। उन्होंने अपनी सफाई में कहा कि पंचकूला में चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया था और उनकी मंशा किसी भी व्यक्ति विशेष को ठेस पहुंचाने की नहीं बल्कि केवल पुरानी राजनीतिक कार्यप्रणाली को रेखांकित करने की थी। उन्होंने आगे कहा कि चौधरी भजनलाल हमेशा से जमीन से जुड़े एक आदरणीय जननेता रहे हैं और चूंकि उनका परिवार आज भी हमारी ही पार्टी का एक अहम हिस्सा है, इसलिए यदि उनके किसी भी समर्थक या परिजनों की भावनाएं आहत हुई हैं तो वह अपने शब्दों को सहर्ष वापस लेती हैं।
कुलदीप बिश्नोई ने जताई संतुष्टि और समर्थकों से पुलिस केस वापस लेने की अपील
सांसद रेखा शर्मा की ओर से खेद जताए जाने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री के पुत्र और भाजपा नेता कुलदीप बिश्नोई ने भी एक वीडियो जारी कर इस विवाद के सम्मानजनक पटाक्षेप पर अपनी सहमति दे दी। उन्होंने सांसद की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि वह इस माफीनामे से पूरी तरह संतुष्ट हैं और संकट के इस दौर में पिता के स्वाभिमान के लिए खड़े होने वाले देश-प्रदेश के तमाम समर्थकों और शुभचिंतकों का दिल से आभार व्यक्त करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने अपने अनुयायियों से भावनात्मक अपील की कि इस पूरे प्रकरण को यहीं समाप्त माना जाए और विरोध स्वरूप अलग-अलग थानों में दर्ज करवाई गई सभी प्राथमिकियों को भी तुरंत वापस ले लिया जाए ताकि दल के भीतर पूरी एकजुटता बनी रहे।
चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए बयान से भड़का था भजनलाल समर्थकों का गुस्सा
इस पूरे सियासी घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई थी जब रेखा शर्मा ने पंचकूला के एक कार्यक्रम में पुराने दौर का जिक्र करते हुए चौधरी भजनलाल और चंद्रमोहन के चुनाव जीतने के तरीकों पर एक बेहद तल्ख टिप्पणी कर दी थी। इस बयान के सार्वजनिक होते ही पूरे हरियाणा में बिश्नोई समाज और भजनलाल समर्थकों के बीच भारी रोष फैल गया था, जिसके बाद हिसार में बिश्नोई महासभा ने आपात बैठक बुलाकर कड़ा रुख अपनाया था। कुलदीप बिश्नोई ने भी इस पर बेहद कड़ा पलटवार करते हुए इसे सोच की दुर्बलता बताया था और आलाकमान को अनुशासन के दायरे में रहकर एक बड़ी चेतावनी दी थी, जिसका समाधान अब मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद बेहद शांतिपूर्ण तरीके से निकाल लिया गया है।
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