ख़बर
प्रॉपर्टी बाजार में बड़ा बदलाव, 9 महीने बाद फिर बढ़े कलेक्टर रेट
1 Apr, 2026 03:53 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। हरियाणा की 14 तहसीलों और उप तहसीलों में बुधवार यानी आज से नए कलेक्टर रेट लागू हो जाएंगे। जहां ज्यादा लेनदेन हुआ है, उन स्थानों पर सरकार ने अधिक कलेक्टर रेट बढ़ाए हैं। प्रदेश के 7.43 फीसदी यानी कुल 11,947 क्षेत्रों में 75 फीसदी तक कलेक्टर रेट में बढ़ोतरी की गई है। गुरुग्राम के सेक्टर-28 में रिहायशी संपत्ति 2024 में 71,600 रुपये प्रति वर्ग गज थी। बीते साल इसमें 30 फीसदी बढ़ोतरी हुई थी और यह 93,080 रुपये प्रति वर्ग हो गई थी। अब 45 फीसदी बढ़ोतरी से इसकी कीमत 1,34,944 रुपये वर्ग गज हो जाएगी। इसी तरह बहादुरगढ़ में टीचर कॉलोनी, रणजीत कॉलोनी, भगवान कॉलोनी में रेट महंगे हुए हैं। हालांकि, कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में 130 फीसदी बढ़ोतरी को घटाकर 75 प्रतिशत कर दिया गया है। जींद में फव्वारा चौक, अपोलो रोड, डिफेंस कॉलोनी में व्यावसायिक भूमि के रेट 20 फीसदी तक बढ़ाए गए हैं। रेवाड़ी में धारूहेड़ा क्षेत्र के अलावलपुर, आसदपुर, खटावली, महेश्वरी और कापड़ीवास आदि गांवों में 45 से 60 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। सोनीपत में कृषि भूमि में अधिक खरीद-फरोख्त हुई है। ऐसे में इन्हीं क्षेत्रों में 15 से 75 फीसदी तक दाम बढ़े हैं। यमुनानगर में फव्वारा चौक से कमानी चौक तक व्यवसायिक जमीन में 75 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। यहां 90,800 रुपये प्रति वर्ग से 1,58,900 रुपये प्रति वर्ग गज तक दाम हो गए हैं। इसी तरह पानीपत में जीटी रोड पर करनाल की तरफ करीब 60 से 75 प्रतिशत तक रेट बढ़ाए हैं। करनाल रोड पर सर्वाधिक प्रति वर्ग गज 17 हजार की बढ़ोतरी हुई है। कुरुक्षेत्र में सबसे ज्यादा इस्माइलाबाद में 75 फीसदी तक रेट बढ़े हैं। करनाल में 75 फीसदी तक रेट बढ़ाए गए हैं। वहीं, कैथल में अभी नए रेट पोर्टल पर अपडेट नहीं हो सके हैं। अंबाला के सेक्टरों में रिहायशी व व्यावसायिक भूमि के रेट 75 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। पोर्टल पर नए कलेक्टर रेट अपडेट करने का काम जारी है। नए रेट बुधवार से लागू होंगे। -हेमा शर्मा, सचिव हरियाणा राजस्व विभाग।
नौ माह पहले बढ़े थे रेट
साल 2025 में एक अगस्त को कलेक्टर रेट में बढ़ोतरी हुई थी। नौ माह बाद फिर से कलेक्टर रेट में बढ़ोतरी के पीछे सरकार के राजस्व व आपदा प्रबंधन विभाग ने तर्क दिया है कि सभी क्षेत्रों की 50 फीसदी रजिस्ट्रियों का विश्लेषण होना है। राजस्व विभाग के मुताबिक, कलेक्टर रेट में संशोधन एक फार्मूला आधारित है। जिन क्षेत्रों में कम, मध्यम और सर्वाधिक रजिस्ट्री होती हैं उसी के अनुसार स्लैब तैयार किया जाता है।
अमेरिकी कंपनियों पर ईरान की कार्रवाई, राजनीतिक दबाव या प्रतिशोध की तैयारी?
1 Apr, 2026 02:46 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Iran Israel war: ईरान-इजरायल-अमेरिका जंग को 33 दिनों से ज्यादा का समय हो चुका है. यह जंग खत्म होने के बजाय तेजी से बढ़ती ही जा रही है. इस जंग में कई और देश भी शामिल हो रहे हैं. अभी तक इस जंग में केवल सैन्य ठिकानों को ही निशाना बनाया जा रहा था. हालांकि अब ईरान ने अमेरिकी कंपनियों पर हमले का खुला ऐलान कर दिया है. जिन कंपनियों पर हमले की बात कही जा रही है उनकी ईरान की तरफ से एक लिस्ट भी जारी की गई है. टेक कंपनियों पर हमला करने के पीछे की सबसे बड़ी वजह उनका युद्ध में अमेरिका और इजराइल की मदद करना माना जा रहा है.
ईरान की तरफ से हमले का खुला ऐलान भारतीय समय अनुसार मंगलवार देर शाम किया गया था. इसके लिए बाकायदा ईरान ने एक लिस्ट जारी की है. इस लिस्ट में Apple, Google, Meta, IBM, Tesla और Boeing जैसी 18 बड़ी अमेरिकी टेक कंपनियां हैं. ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) का कहना है कि इन कंपनियों को 1 अप्रैल की शाम 8 बजे निशाना बनाया जाएगा. IRGC ने आरोप लगाया है कि ये कंपनियां ईरानी अधिकारियों के ‘टारगेटेड असेसिनेशन’ में शामिल थीं.
क्या है हमले की असली वजह?
अमेरिका की तरफ से लगातार ईरान के सैन्य ठिकानों के साथ-साथ रिहायशी इलाकों में भी हमले किए जा रहे हैं. इन हमलों में अब तक हजारों की संख्या में लोग मारे जा चुके हैं तो वहीं बड़ी संख्या में लोग घर छोड़ने पर मजबूर हुए हैं. अमेरिका की कई बड़ी टेक कंपनियां मिडिल ईस्ट के देशों में काम कर रही हैं. ईरान का आरोप है कि ये सभी कंपनियां भले ही मिडिल ईस्ट के देशों में बैठकर काम कर रही हैं. लेकिन ये सभी यहां बैठकर ईरान के खिलाफ ही काम कर रही हैं.
आईआरजीसी के बयान में कहा गया, “ईरान में आतंक के हर काम के जवाब में इन कंपनियों को अपनी सुविधाओं की तबाही की जाएगी. ” IRGC ने आरोप लगाया है कि ये कंपनियां ईरानी अधिकारियों के ‘टारगेटेड असैसिनेशन’ में शामिल थीं. IRGC ने इन कंपनियों को ‘आतंकवादी कंपनियां’ बताया है. आरोप लगाया कि इनका इस्तेमाल बिना पायलट वाले ड्रोन उड़ाने और सटीक निशाना चुनने में किया जा रहा है.
टेक कंपनियों की वजह से मारे गए ईरान के नेता?
अमेरिकी टेक कंपनियों पर हमला करने के पीछे की सबसे बड़ी वजह ईरान के कई सीनियर नेताओं की मौत मानी जा रही है. ईरान का आरोप है कि इन टेक कंपनियों ने ही देश के कई सीनियर लीडर्स की जानकारी अमेरिका और इजराइल को शेयर की है. इन टेक कंपनियों की बदौलत ही अमेरिका-इजरायल इतना बड़ा हमला कर पाया है. IRGC का मानना है कि इन कंपनियों की मदद से ही उसके टॉप लीडर की मारे गए हैं. यही वजह है कि ईरान अब इन कंपनियों से बदला लेने की तैयारी कर रहा है.
किन कंपनियों पर होंगे हमले?
ईरान ने जिन कंपनियों को धमकी दी है, उनमें शामिल हैं – Apple, Meta, Google, Microsoft, Intel, IBM, Dell, Tesla, Nvidia, Boeing, HP, Cisco, Oracle, Planter, J.P. Morgan, GE, Spire Solutions और G42 जैसी कंपनियां शामिल हैं. ईरान की तरफ से हमले का समय भी बताया गया है. ईरान ने सभी टेक कंपनियों के कर्मचारियों को चेतावनी दी है. इसमें कहा है कि हम इन कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों को सलाह देते हैं कि वे अपनी जान बचाने के लिए तुरंत अपने काम करने की जगह छोड़ दें.’
क्या है अमेरिका का रिएक्शन?
ईरान की धमकी के बाद अमेरिका का रियेक्शन भी सामने आ गया है. व्हाइट हाउस के अधिकारियां ने कहा कि वह ईरान के किसी भी हमले का रोकने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं. इस तरह की धमकियों से कुछ नहीं होगा हम कल भी तैयार थे आज भी हमलों के लिए पूरी तरह से तैयार हैं.
ईरान-बहरीन बयान से सनसनी, एमेजॉन मुख्यालय पर मिसाइल हमले का दावा
1 Apr, 2026 12:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। ईरान ने बहरीन में मौजूद एमेजॉन के हेडक्वार्टर पर मिसाइल हमला किया है जिससे बैटेलको हेडक्वार्टर की बिल्डिंग को भारी नुकसान पहुंचा है। यह बिल्डिंग बहरीन के हमाला में स्थित है। बैटेलको, बहरीन की सबसे बड़ी टेलीकम्युनिकेशन कंपनी है और एमेजॉन वेब सर्विसेज़ के बुनियादी ढांचे को होस्ट करती है। बहरीन सरकार ने इस हमले की पुष्टि की है। गौरतलब है कि ईरान ने मंगलवार को ही धमकी दी थी कि 1 अप्रैल से मिडिल ईस्ट में अमेरिकी कंपनियों को निशाना बनाया जाएगा और अब इसकी शुरुआत हो गई है।
तुर्की पर मिसाइल से हमला: ईरान ने किया इंकार, फाल्स फ्लैग ऑपरेशन की आशंका
1 Apr, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्तांबुल। तुर्की में हाल ही में एक मिसाइल हमले की खबर सामने आई, जिसे नाटो के एयर डिफेंस सिस्टम ने इंटरसेप्ट किया। प्रारंभिक रिपोर्ट्स में इसे ईरान से दागे जाने का दावा किया गया था, लेकिन ईरान ने स्पष्ट रूप से इस बात से इंकार किया है। ईरान का कहना है कि उसने तुर्की या उसके पड़ोसी देशों पर कोई हमला नहीं किया है।
विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह हमला ईरान की ओर से नहीं किया गया था, तो इसे फाल्स फ्लैग ऑपरेशन के तौर पर देखा जा सकता है। इसका उद्देश्य संभावित रूप से नाटो देशों को युद्ध में खींचना और क्षेत्रीय तनाव बढ़ाना हो सकता है। इस संदर्भ में अमेरिका और इज़राइल पर ऐसे साजिश के आरोप लग रहे हैं।
तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगान ने स्थिति को संभालते हुए कहा कि यदि कुर्दिश लड़ाके ईरान में हमले की योजना बनाते हैं तो तुर्की इसे गंभीरता से लेगा। उन्होंने किसी भी उकसावे या प्रतिक्रिया में संयम बरतने का संकेत दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि तुर्की, जो नाटो का सदस्य है, ने फिलहाल युद्ध में शामिल होने से खुद को अलग रखा है, ताकि क्षेत्रीय जटिलता और नाटो देशों की भागीदारी पर कोई दबाव न पड़े। मिडिल ईस्ट के पड़ोसी देश जैसे मिस्र और अज़रबैजान भी इस घटना पर सतर्क हैं।
यह घटना चौथी बार सामने आई है जब तुर्की पर कथित मिसाइल हमला हुआ है और सभी बार ईरान ने हमले से इंकार किया। इससे मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने की संभावना बनी हुई है।
समझौता छिपाना पड़ा भारी, हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द किया
1 Apr, 2026 11:27 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अंबाला की फैमिली कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें एक व्यक्ति को अपनी पूर्व पत्नी को 5,000 रुपये प्रतिमाह गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने पाया कि यह आदेश स्थापित कानूनी सिद्धांतों के विपरीत था। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि याचिकाकर्ता महिला ने पूर्व में हुए समझौते और 16 लाख रुपये की प्राप्ति का तथ्य छिपाया। कोर्ट के अनुसार, यह राशि पहले दायर एक सिविल मामले में गुजारा भत्ता के रूप में दी जा चुकी थी। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि दोनों पक्षों के बीच तलाक हो चुका था और इसके बावजूद महिला ने मासिक भत्ता की मांग की। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने वाला पक्ष अदालत से राहत पाने का हकदार नहीं हो सकता। अदालत ने अंबाला फैमिली कोर्ट के आदेश को त्रुटिपूर्ण बताते हुए रद्द कर दिया और कहा कि यह स्थापित कानून के विपरीत था, इसलिए इसे बरकरार नहीं रखा जा सकता। मामले में गुरमीत कौर को फैमिली कोर्ट ने प्रति माह 5,000 रुपये गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ पति ने हाईकोर्ट में रिवीजन याचिका दायर की थी। सुनवाई में सामने आया कि महिला को पहले ही 16 लाख रुपये की एकमुश्त राशि मिल चुकी थी और दोनों के बीच समझौते के आधार पर तलाक हो चुका था। हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में दोहराया कि न्यायालय के समक्ष तथ्यों को छिपाना गंभीर मामला है और ऐसे मामलों में राहत नहीं दी जा सकती।
चीन में निर्माणाधीन टनल में भीषण धमाका, 4 मजदूरों की मौत, 09 घायल
1 Apr, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। दक्षिण-पश्चिम चीन के चोंगकिंग क्षेत्र में एक निर्माणाधीन सुरंग में हुए भीषण विस्फोट ने चार मजदूरों की जान ले ली, जबकि 9 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हादसा सोमवार दोपहर उस समय हुआ, जब एक राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के तहत सुरंग निर्माण का काम चल रहा था।
स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, यह सुरंग हुबेई और सिचुआन प्रांतों को जोड़ने के लिए बनाई जा रही थी। वानझोउ जिला परिवहन आयोग ने बताया कि धमाका इतना तेज था कि मौके पर मौजूद कई मजदूर इसकी चपेट में आ गए। प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक, घटना के बाद एक मजदूर लापता हो गया था और 12 लोग घायल बताए गए थे। बाद में बचाव दल ने मलबे से लापता व्यक्ति का शव बरामद किया, जबकि अस्पताल में इलाज के दौरान तीन अन्य घायलों ने दम तोड़ दिया। इस प्रकार मृतकों की संख्या बढ़कर चार हो गई।
जांच में शुरुआती तौर पर सामने आया है कि सुरंग के भीतर ज्वलनशील गैस जमा हो गई थी, जिससे यह विस्फोट हुआ। हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि हादसे के सही कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत तकनीकी जांच जारी है। घटना के बाद प्रशासन ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। साथ ही, सुरक्षा के मद्देनजर निर्माण कार्य को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है और पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी गई है।
रूस का सैन्य ट्रांसपोर्ट विमान क्रीमिया में क्रैश, 29 की जान गई
1 Apr, 2026 10:48 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मॉस्को: रूसी रक्षा मंत्रालय ने बुधवार तड़के पुष्टि की कि क्रीमिया में एक रूसी एएन-26 सैन्य परिवहन विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से चालक दल के छह सदस्यों और 23 यात्रियों की मौत हो गई. घटनास्थल पर मौजूद एक सूत्र ने तास (TASS) न्यूज एजेंसी को बताया कि विमान एक चट्टान से टकरा गया.शिन्हुआ न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार रूसी रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार देर रात बताया कि क्रीमिया प्रायद्वीप के ऊपर एक निर्धारित उड़ान के दौरान An-26 विमान से संपर्क टूट गया था. शुरुआती जानकारी के मुताबिक यह दुर्घटना किसी तकनीकी खराबी के कारण हुई थी और विमान पर किसी भी तरह की शत्रुतापूर्ण गोलीबारी नहीं की गई थी.
रक्षा मंत्रालय ने बताया, '31 मार्च को मॉस्को के समय के अनुसार लगभग 18:00 बजे, एएन-26 सैन्य परिवहन विमान से संपर्क टूट गया, जब वह क्रीमिया प्रायद्वीप के ऊपर एक निर्धारित उड़ान पर था.' मंत्रालय ने आगे कहा, 'खोज और बचाव दल ने विमान के दुर्घटनास्थल का पता लगा लिया है. घटनास्थल से मिली रिपोर्टों के अनुसार विमान में सवार चालक दल के छह सदस्य और 23 यात्री मारे गए हैं.'
मंत्रालय की रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि विमान में कुल कितने लोग सवार थे, लेकिन इस विमान में किसी भी जीवित बचे व्यक्ति का कोई जिक्र नहीं किया गया. एएन-26 एक हल्का सामरिक सैन्य परिवहन विमान है, जो दशकों से सेना का मुख्य आधार रहा है और यह कम तथा मध्यम दूरी तक माल और 40 यात्रियों तक को ले जाने में सक्षम है.
दिसंबर 2025 की शुरुआत में भी इसी तरह की एक घटना हुई थी, जब रूस ने एक एंटोनोव ट्रांसपोर्ट विमान से जुड़े एक जानलेवा सैन्य विमानन हादसे की जानकारी दी थी. 9 दिसंबर को मॉस्को के पूर्व में स्थित इवानोवो क्षेत्र के इवानकोवो गाँव के पास एक एंटोनोव एएन-22 विमान टेस्ट फ़्लाइट के दौरान क्रैश हो गया.
यह विमान मरम्मत के काम के बाद उड़ान पर निकला था, जिससे यह संकेत मिलता है कि घटना के समय विमान का रखरखाव के बाद का परीक्षण चल रहा था. रूसी अधिकारियों ने पुष्टि की कि इस हादसे में कोई भी जीवित नहीं बचा. हालाँकि, आधिकारिक बयान में शुरू में विमान में सवार लोगों की संख्या का जिक्र नहीं किया गया था, लेकिन सरकारी समाचार एजेंसी तास (TASS) ने पहले बताया था कि विमान में चालक दल के सात सदस्य सवार थे. इस हादसे में सभी लोगों की मौत हो गई, जो संबंधित सैन्य विमानन इकाई के लिए एक दुखद क्षति है.
छात्र की मौत से सनसनी, हॉस्टल रूम में मिला शव
1 Apr, 2026 10:32 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कुरुक्षेत्र। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) कुरुक्षेत्र में पढ़ाई कर रहे एक छात्र ने हॉस्टल नंबर-8 में मंगलवार देर रात फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान पवन कुमार निवासी मेवात के रूप में हुई है। वह बीटेक इलेक्ट्रिकल, पांचवें सेमेस्टर की पढ़ाई कर रहा था। देर रात तक छात्र के कमरे से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ। पवन कुमार हॉस्टल के ब्लॉक-सी के कमरा नंबर 452 में रह रहा था। उसने अज्ञात कारणों से कमरे में पंखे से फंदा लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। पवन शाम से ही अपने हॉस्टल के कमरे में था। दोस्तों ने जब उसे फंदे से लटके देखा तो तुरंत बाद हॉस्टल सिक्योरिटी को सूचना दी। इसके बाद मामले की सूचना थर्ड गेट चौकी पुलिस को दी गई। पुलिस चौकी थर्ड के प्रभारी विनोद कुमार ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया। साथ ही पुलिस की फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल पर जाकर साक्ष्य जुटाए। उन्होंने कहा कि छात्र के कमरे से एक नोटबुक मिली है जिसमें कर्ज के बारे में कुछ लिखा गया है। इस एंगल से भी जांच की जाएगी। सूचना मिलते ही एनआईटी निदेशक सहित अन्य अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। आसपास के छात्रों से जानकारी जुटाई गई। देर रात तक कारणों का खुलासा नहीं हो सका। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। एनआईटी निदेशक डॉ. बीवी रमन्ना रेड्डी ने कहा कि फिलहाल संस्थान का कार्यभार अधिकारिक तौर पर डॉ ब्रह्मजीत के पास है। वे ही घटना के संबंध में जानकारी दे सकते हैं। डॉ ब्रह्मजीत से संपर्क नहीं हो सका।
होर्मुज संकट के बीच ट्रम्प का सख्त बयान: अब अमेरिका नहीं करेगा किसी की मदद
1 Apr, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। डोनाल्ड ट्रम्प ने वैश्विक ऊर्जा संकट और होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति को लेकर कड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब अमेरिका किसी भी देश की मदद के लिए आगे नहीं आएगा और देशों को अपने हालात खुद संभालने होंगे।
सोशल मीडिया पर जारी बयान में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि जो देश, खासकर ब्रिटेन, होर्मुज स्ट्रेट से ईंधन नहीं ला पा रहे हैं, उन्हें अमेरिका से तेल खरीदना चाहिए क्योंकि अमेरिका के पास पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। उन्होंने दो टूक अंदाज में कहा कि अगर देश चाहें तो “हिम्मत दिखाएं और खुद होर्मुज स्ट्रेट जाकर तेल ले लें”, क्योंकि अमेरिका अब उनकी मदद के लिए नहीं आएगा।
राष्ट्रपति ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि ईरान काफी हद तक कमजोर हो चुका है और क्षेत्र में सबसे कठिन चरण पहले ही पार हो चुका है। उनके अनुसार अब बाकी देशों को अपनी ऊर्जा जरूरतों को लेकर खुद पहल करनी होगी।
इस बयान को वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार में अमेरिका की बदलती नीति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय संबंधों और तेल आपूर्ति की रणनीतियों पर व्यापक असर पड़ सकता है।
फ्लोरिडा एयरपोर्ट का नाम होगा अब प्रेसिडेंट डोनाल्ड जे. ट्रम्प इंटरनेशनल एयरपोर्ट
1 Apr, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिका के फ्लोरिडा में स्थित पाम बीच इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम बदलकर अब डोनाल्ड ट्रम्प के नाम पर रखा जाएगा। इस फैसले के तहत एयरपोर्ट का नया नाम ‘प्रेसिडेंट डोनाल्ड जे. ट्रम्प इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ होगा।
यह निर्णय फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डीसैंटिस द्वारा एक विधेयक पर हस्ताक्षर करने के बाद लिया गया। अब इस नाम परिवर्तन को लागू करने के लिए फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (एफएए) को औपचारिक प्रस्ताव भेजा जाएगा। एफएए की मंजूरी मिलने के बाद फ्लाइट चार्ट, नेविगेशन सिस्टम और एयरपोर्ट साइनेज में बदलाव किया जाएगा। संभावना है कि यह नया नाम 1 जुलाई से लागू हो सकता है।
यदि यह प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तो ट्रम्प पहले ऐसे अमेरिकी राष्ट्रपति बन जाएंगे, जिनके कार्यकाल के दौरान ही उनके नाम पर किसी एयरपोर्ट का नाम रखा जाएगा। इसके साथ ही पाम बीच इंटरनेशनल एयरपोर्ट अमेरिका का नौवां ऐसा वाणिज्यिक हवाईअड्डा बन जाएगा, जिसका नाम किसी राष्ट्रपति पर होगा। यह एयरपोर्ट ट्रम्प के निजी निवास मार-ए-लागो एस्टेट के बेहद करीब स्थित है, जो इस फैसले को और खास बनाता है।
नाम बदलने की प्रक्रिया जटिल
अमेरिका में किसी एयरपोर्ट का नाम बदलना केवल प्रशासनिक फैसला नहीं होता, बल्कि इसमें स्थानीय, राज्य और संघीय स्तर की मंजूरी शामिल होती है। आमतौर पर पहले स्थानीय निकाय या एयरपोर्ट अथॉरिटी प्रस्ताव पारित करती है, इसके बाद राज्य सरकार की मंजूरी ली जाती है और अंत में एफएए इसे आधिकारिक रूप से लागू करता है। हालांकि एयरपोर्ट का कोड आमतौर पर नहीं बदला जाता, लेकिन इस मामले में सांसद ब्रायन मस्ट ने तीन अक्षरों वाला कोड पीबीआई से बदलकर डीजेटी करने का प्रस्ताव भी रखा है।
ट्रम्प के नाम पर बढ़ रहे संस्थान
एयरपोर्ट के अलावा भी ट्रम्प के नाम पर कई अन्य संस्थानों के नाम रखने के प्रस्ताव सामने आए हैं, जिनमें नेवी के वॉरशिप, निवेश वीजा प्रोग्राम, सरकारी वेबसाइट्स और बचत योजनाएं शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला अमेरिकी राजनीति में प्रतीकात्मक और ऐतिहासिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
इजराइल में सख्त कानून: फिलिस्तीनी आरोपियों को 90 दिन में फांसी का प्रावधान
1 Apr, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेल अवीव। इजराइल की संसद नैसेट ने एक बेहद सख्त और विवादास्पद कानून पारित किया है, जिसके तहत फिलिस्तीनी आरोपियों को आतंकवादी गतिविधियों या इजराइली नागरिकों की हत्या के मामलों में 90 दिनों के भीतर फांसी दी जा सकेगी।
नए कानून के अनुसार, दोषी ठहराए गए व्यक्ति को अपील करने का अधिकार नहीं होगा, और सजा सुनाए जाने के बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर उसे लागू किया जाएगा। हालांकि अदालत को विशेष परिस्थितियों में उम्रकैद की सजा देने का विकल्प भी रखा गया है।
यह विधेयक इत्तमार बेन ग्विर द्वारा आगे बढ़ाया गया था। बिल पास होने के बाद उन्होंने और अन्य सांसदों ने संसद में शैंपेन खोलकर जश्न मनाया। बेन ग्विर ने कहा, जो यहूदियों की हत्या करेगा, वह सांस नहीं ले सकेगा।
दो अलग-अलग कानूनों पर बढ़ा विवाद
इस कानून को लेकर सबसे बड़ा विवाद यह है कि वेस्ट बैंक में रहने वाले फिलिस्तीनियों और इजराइली यहूदियों पर अलग-अलग कानूनी व्यवस्था लागू होती है। फिलिस्तीनियों पर मिलिट्री कानून, जबकि यहूदी बस्तियों में रहने वालों पर सिविल कानून लागू होता है। ऐसे में एक ही अपराध के लिए अलग-अलग सजा की संभावना बढ़ गई है।
मानवाधिकार संगठनों और विपक्ष का विरोध
कई मानवाधिकार संगठनों ने इस कानून को भेदभावपूर्ण और नस्लीय बताते हुए इसकी आलोचना की है। उनका कहना है कि यह कानून फिलिस्तीनियों के खिलाफ सख्ती को बढ़ावा देगा और न्याय प्रणाली में असमानता पैदा करेगा। वहीं, विपक्षी नेता यायर लापिद ने भी इस कदम की आलोचना करते हुए इसे हमास के सामने झुकने जैसा बताया।
सुप्रीम कोर्ट में दी गई चुनौती
कानून पारित होने के तुरंत बाद नागरिक अधिकार संगठनों ने इजराइल सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इसे असंवैधानिक करार देते हुए रद्द करने की मांग की है। गौरतलब है कि बेंजामिन नेतन्याहू ने पहले इस बिल का विरोध किया था, लेकिन बाद में अपना रुख बदलते हुए अंतिम मतदान में इसका समर्थन किया। इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बहस तेज होने की संभावना है, क्योंकि इसे सुरक्षा और मानवाधिकारों के बीच संतुलन के सवाल से जोड़कर देखा जा रहा है।
बैंक ने तय किया 686 करोड़ का मुआवजा, एपिस्टीन केस की पीड़ितों के लिए राहत
31 Mar, 2026 11:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन।अमेरिका में चर्चित जेफ्री एपिस्टीन सेक्स कांड से जुड़े मामले में बैंक ऑफ अमेरिका ने प्रभावित पीड़ितों को करीब 686 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मुआवजे के तौर पर देने पर सहमति जताई है। यह भुगतान उन लोगों के लिए होगा, जो वर्ष 2008 से 2019 के बीच कथित शोषण का शिकार हुए थे और जिन्होंने बैंक की भूमिका पर सवाल उठाए थे।
दायर मुकदमे में आरोप लगाया गया था कि बैंक ने एपिस्टीन से जुड़े खातों और लेन-देन में संदिग्ध गतिविधियों को नजरअंदाज किया, जिससे उसे वित्तीय लाभ हुआ। पीड़ितों की ओर से कहा गया कि यदि समय रहते उचित निगरानी की जाती, तो शोषण की घटनाओं को रोका जा सकता था। मामले में संघीय अदालत में समझौते का प्रस्ताव रखा गया है, जिस पर न्यायाधीश की अंतिम मंजूरी आवश्यक होगी।
बताया जा रहा है कि यह बैंक द्वारा ऐसे मामलों में किया गया तीसरा बड़ा समझौता है। समझौते के तहत पात्र पीड़ितों को दावों की समीक्षा के बाद मुआवजा वितरित किया जाएगा। इस फैसले को पीड़ितों के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी कदम माना जा रहा है, हालांकि बैंक ने किसी भी प्रकार की कानूनी गलती स्वीकार नहीं की है।
ट्रंप ने दिया शांति का संकेत, होर्मुज पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं होने पर भी युद्ध स्थगित
31 Mar, 2026 11:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियान को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख में एक बड़ा और चौंकाने वाला बदलाव देखने को मिल रहा है। नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप अब इस सैन्य संघर्ष को खत्म करने के लिए तैयार दिख रहे हैं, भले ही रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (होर्मुज जलडमरूमध्य) पूरी तरह से दोबारा न खुले। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट के बयानों से यह स्पष्ट हुआ है कि इस अहम तेल मार्ग को तत्काल खोलना अब अमेरिकी जीत के लिए अनिवार्य शर्त नहीं माना जा रहा है। ट्रंप ने अपने करीबियों और सहयोगियों से चर्चा के दौरान संकेत दिए हैं कि युद्ध की प्राथमिकताओं को अब नए सिरे से परिभाषित किया गया है।
कुछ समय पहले तक अमेरिका के लिए होर्मुज जलमार्ग को मुक्त कराना एक शीर्ष प्राथमिकता थी, क्योंकि दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ईरान द्वारा इस मार्ग की घेराबंदी के कारण वैश्विक बाजार में ईंधन की आपूर्ति प्रभावित हुई है और कीमतों में भारी उछाल देखा जा रहा है। इसके बावजूद, ट्रंप प्रशासन अब इस लक्ष्य से पीछे हटता नजर आ रहा है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपने सैन्य लक्ष्यों को बदल दिया है। अब ट्रंप का मानना है कि यदि ईरान की समग्र सैन्य क्षमता को काफी हद तक कमजोर कर दिया जाता है, तो इसे ही एक बड़ी सफलता के रूप में स्वीकार किया जाएगा।
अमेरिका का नया फोकस अब तीन मुख्य लक्ष्यों पर केंद्रित है- पहला, ईरान की नौसैनिक क्षमता को इस स्तर तक नुकसान पहुँचाना कि वह भविष्य में चुनौती न दे सके, दूसरा, उसकी मिसाइल शक्ति को कम करना और तीसरा, भविष्य में समुद्री रास्तों को खतरे में डालने की ईरान की क्षमता को पूरी तरह घटाना। अमेरिकी अधिकारियों का तर्क है कि इन लक्ष्यों की प्राप्ति के बाद युद्ध को धीरे-धीरे समाप्त किया जा सकता है। ट्रंप प्रशासन अब सीधे और लंबे सैन्य अभियान के बजाय कूटनीतिक दबाव और रणनीतिक प्रहारों के जरिए ईरान को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश कर रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह सुरक्षित करना एक अत्यंत जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया है। इसके लिए समुद्र में बिछी बारूदी सुरंगों को हटाना और तेल टैंकरों को निरंतर सुरक्षा प्रदान करना होगा, जिससे युद्ध लंबे समय तक खिंच सकता है।
अमेरिका ने चेताया ईरान को, कहा- समझौता करो वरना बड़े हमले होंगे
31 Mar, 2026 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन|ईरान को लेकर दुनिया की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन हो चुका है। इस बयान के साथ ही अमेरिका ने साफ कर दिया है कि अब हालात पहले जैसे नहीं हैं। इस्राइल और अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के बीच यह बयान ऐसे समय आया है, जब पूरे मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच चुका है और हालात तेजी से बदल रहे हैं पीट हेगसेथ ने पेंटागन में प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा कि ईरान में अब नया शासन है और उसे पहले से ज्यादा समझदारी दिखानी होगी। उन्होंने कहा कि मौजूदा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समझौते के लिए तैयार हैं और उसकी शर्तें ईरान को पहले से पता हैं। लेकिन उन्होंने साफ चेतावनी दी कि अगर ईरान इन शर्तों को नहीं मानता, तो अमेरिकी सेना और ज्यादा ताकत के साथ हमला जारी रखेगी।
क्या ईरान में सच में सत्ता परिवर्तन हुआ है?
हेगसेथ के मुताबिक, पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को सत्ता दी गई है। अली खामेनेई करीब चार दशकों तक ईरान के सर्वोच्च नेता रहे। हालांकि मोजतबा खामेनेई अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। इससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या वास्तव में नया शासन पूरी तरह स्थापित हो चुका है या स्थिति अभी भी अस्थिर है।
क्या अमेरिका ईरान से बातचीत भी कर रहा है?
अमेरिका ने दावा किया है कि वह ईरान के नेताओं के साथ बातचीत कर रहा है। लेकिन यह साफ नहीं है कि ईरान की ओर से बातचीत कौन कर रहा है। इस वजह से कूटनीतिक स्थिति अस्पष्ट बनी हुई है। अमेरिका एक तरफ बातचीत की बात कर रहा है, तो दूसरी तरफ सैन्य दबाव भी बढ़ा रहा है।
क्या अमेरिका सैन्य कार्रवाई और तेज करेगा?
हेगसेथ ने कहा कि अगर ईरान समझौता नहीं करता है, तो अमेरिकी सेना और ज्यादा आक्रामक कार्रवाई करेगी। उन्होंने बताया कि पिछले 24 घंटों में ईरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमलों में कमी आई है। वहीं अमेरिका ने 200 से ज्यादा डायनामिक स्ट्राइक किए हैं। इन हमलों में रियल टाइम जानकारी के आधार पर नए लक्ष्य तय किए गए और उन्हें निशाना बनाया गया।
जमीनी हालात क्या संकेत दे रहे हैं?
हेगसेथ के अनुसार अमेरिकी हमलों से ईरानी सेना का मनोबल टूट रहा है। उन्होंने कहा कि कई कमांड बंकर तबाह कर दिए गए हैं और कई नेता छिपने को मजबूर हो गए हैं। बिजली, पानी और कम्युनिकेशन जैसी सुविधाएं प्रभावित हुई हैं। उन्होंने दावा किया कि इससे ईरानी सेना में भगदड़ और निराशा बढ़ रही है।
अमेरिका का कहना है कि यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और आने वाले दिन बेहद अहम होंगे। हेगसेथ ने कहा कि अमेरिकी सैनिक इस लड़ाई को खत्म करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और वे इसे आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा से जोड़कर देख रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के पास विकल्प बढ़ रहे हैं, जबकि ईरान के विकल्प कम होते जा रहे हैं|
इस्फ़हान में अमेरिकी एयर स्ट्राइक: 1,000 किलोग्राम बंकर बस्टर बम गिराया गया
31 Mar, 2026 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लंबे समय से बना हुआ है और हाल के हफ्तों में यह और तेज हुआ है। दोनों देशों के बीच सैन्य गतिविधियां और बयानबाजी लगातार बढ़ रही हैं। इसी बीच अमेरिका ने ईरान के इस्फहान शहर में एक बड़े सैन्य और परमाणु ठिकाने पर हमला कर स्थिति को और गंभीर बना दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार इस हमले में करीब 10 हजार किलोग्राम बंकर बस्टर बमों का इस्तेमाल किया गया, जिससे इलाके में जबरदस्त विस्फोट और आग देखी गई। इस घटना का भयानक वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे है।
बेहद अहम सैन्य केंद्र को बनाया निशाना
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक इस्फहान में स्थित गोला-बारूद सुविधा को निशाना बनाया गया, जो ईरान के लिए बेहद अहम सैन्य केंद्र माना जाता है। यह क्षेत्र ईरान के न्यूक्लियर इंफ्रास्ट्रक्चर से भी जुड़ा हुआ है। हमले में बड़ी संख्या में पेनिट्रेटर म्यूनिशन का उपयोग किया गया, जो जमीन के अंदर छिपे ठिकानों को नष्ट करने में सक्षम होते हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में कई धमाके और आग की लपटें दिखाई देती हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि वहां मौजूद हथियारों के कारण सेकेंडरी ब्लास्ट भी हुए।
सबसे ताकतवर बमों में शामिल बंकर बस्टर बम
बंकर बस्टर बम खास तरह के हथियार होते हैं जिन्हें मजबूत और जमीन के नीचे बने ठिकानों को नष्ट करने के लिए डिजाइन किया जाता है। ये बम पहले कंक्रीट या चट्टानों को भेदते हैं और फिर अंदर जाकर विस्फोट करते हैं। सबसे ताकतवर बमों में मैसिव ऑर्डनेंस पेनिट्रेटर शामिल है, जिसे बोइंग कंपनी ने विकसित किया है। यह बम जीपीएस गाइडेंस के जरिए सटीक निशाना साधता है। हालांकि इस्फहान हमले में अपेक्षाकृत छोटे बंकर बस्टर का इस्तेमाल हुआ, लेकिन इनका उद्देश्य भी गहराई में छिपे सैन्य ढांचे को खत्म करना ही था।
कुछ ही घंटों पहले ईरान ने किया था हमला
इस हमले के कुछ ही घंटों पहले ईरान ने दुबई के पास एक कुवैती ऑयल टैंकर को निशाना बनाया था, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। हालांकि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन तेल रिसाव की आशंका जताई गई है। दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वह इस सैन्य अभियान को जल्द खत्म करने के लिए तैयार हैं, भले ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह खुला न हो। रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका फिलहाल ईरान की नौसेना और मिसाइल क्षमता को कमजोर करने पर ध्यान दे रहा है और आगे कूटनीतिक दबाव बनाने की योजना बना रहा है।
ओबीसी अधिकार पर घमासान: राहुल बोले- सरकार छीनना चाहती है हक
हिमाचल कांग्रेस का प्लान: मंत्री-विधायक संभालेंगे पंचायत और निकाय चुनाव
परिसीमन पर शाह की साफ तस्वीर: बड़े राज्यों की बढ़ेगी ताकत
स्मार्ट गवर्नेंस की मिसाल बना जबलपुर, पूरे प्रदेश में हासिल किया पहला स्थान
कुदरत का 'डबल रोल': कहीं सूरज उगल रहा आग, तो कहीं बादलों ने थामी बागडोर
