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शहबाज-मुनीर को लगेगी मिर्ची, पुतिन ने तालिबान पर दिया चौंकाने वाला बयान
6 Dec, 2025 06:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत की दो दिवसीय यात्रा करके वापस जा चुके हैं. जहां एक ओर अमेरिका के टैरिफ वॉर ने पूरी दुनिया में अनिश्चितता की स्थिति पैदा कर दी है. वहीं दूसरी ओर भारत के सबसे पुराने दोस्त रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत की यात्रा की. रूसी राष्ट्रपति का भारत का दौरा पूरी दुनिया में चर्चा का विषय रहा. लेकिन इस दौरान व्लादिमीर पुतिन भारत से जाते-जाते कुछ ऐसा बोल गए, जिससे पाकिस्तान को बड़ा संदेश गया है |
‘तालिबान ने अफगानिस्तान को संभाला’
भारत से रवाना होने से पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अफगानिस्तान की तालिबानी सरकार की तारीफ की. उन्होंने कहा कि अफगानी सरकार ने आतंकवाद से निपटने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. तालिबान सरकार बहुत अच्छा काम कर रही है. तालीबान सरकार अफीम के खिलाफ भी लड़ाई लड़ रही है. इस कारण रूस ने तालिबानी सरकार को मान्यता दी है | बता दें कि रूस पहला देश है जिसने अफगानिस्तान की तालिबानी सरकार को मान्यता दी है |
‘तालिबानी सरकार ड्रग्स की चुनौती का सामना कर रही’
पुतिन ने तालिबानी सरकार की जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि हमको ये स्वीकार करना होगा कि अफगानिस्तान कई दशकों तक गृहयुद्ध का सामना करता रहा है. लेकिन तालिबान की सरकार ने अफगानिस्तान को संभाल लिया. इसके अलावा कई बिंदुओं पर अफगानी सरकार काफी अच्छा काम कर रही है.
पाकिस्तान और तालिबानी सरकार के बीच तनाव
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्तों में पिछले कुछ समय से तनाव है. ऐसे में समय में रूसी राष्ट्रपति की अफगानी सरकार की तारीफ करने से पाकिस्तान को मिर्ची लगेगी. पाकिस्तान लगातार अफगानिस्तान की तालिबानी सरकार पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाता रहा है. कुछ समय पहले तालिबान सरकार के एक मंत्री ने भारत की यात्रा भी की थी. इसके बाद भी पाकिस्तान बौखलाया था. वहीं अब रूसी राष्ट्रपति के तालिबानी सरकार की इस तरह तारीफ करना निश्चित ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पाक सेना प्रमुख जनरल आसिफ मुनीर को नागवार गुजरेगा |
पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर टकराव, चार की जान गई और कई घायल
6 Dec, 2025 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर एक बार फिर से तनाव बढ़ गया है. दोनों देशों के बीच चमन सीमा पर भारी गोलीबारी हुई है. अफगानिस्तान के अधिकारियों ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से हुई भारी गोलीबारी में चार नागरिकों की मौत हो गई है |
रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान के स्पीन बोल्डक जिले के गवर्नर ने शनिवार (6 दिसंबर, 2025) को इन मौतों की पुष्टि भी कर दी है. वहीं, पाकिस्तान के जिला अस्पतालों में घायलों को लाए जाने की सूचना है. हालांकि, पाकिस्तान ने कहा कि गोलीबारी में कोई मारा नहीं गया है |
दोनों पक्ष एक-दूसरे पर लगा रहे पहले हमला करने का आरोप
दोनों पक्षों के अधिकारियों ने एक-दूसरे पर शुक्रवार (5 दिसंबर, 2025) को बलूचिस्तान प्रांत से लगी सीमा पर गोलीबारी का आरोप लगाया. अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी अधिकारियों ने कहा कि अफगान बलों ने बदानी इलाके में मोर्टार दागे थे. जबकि अफगान तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने आरोप लगाया कि स्पिन बोल्दक पर हमला पाकिस्तान ने किया था. उन्होंने दावा किया कि उनके बलों ने जवाबी कार्रवाई की. पाकिस्तान के आधिकारिक सूत्रों ने डॉन को बताया कि पाकिस्तानी बलों ने अफगान हमले के जवाब में गोलीबारी की. इसके अलावा, चमन-कंधार राजमार्ग पर भी गोलीबारी की सूचनाए हैं, लेकिन इनकी फिलहाल पुष्टि नहीं हो सकी है |
क्वेटा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर पुष्टि की कि गोलीबारी रात करीब 10 बजे शुरू हुई और देर रात तक जारी रही. चमन जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक ने कहा कि एक महिला समेत तीन घायलों को अस्पताल लाया गया है. जबकि पाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा ISPR या विदेश कार्यालय की ओर से इस बारे में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है |
पिछले महीने भी जारी था दोनों देशों के बीच तनाव
चमन सीमा को फ्रेंडशिप गेट (मैत्री द्वार) के नाम से भी जाना जाता है. यह बलूचिस्तान प्रांत को अफगानिस्तान के कंधार से जोड़ती है. दोनों देश पिछले महीने तनाव के बाद युद्धविराम समझौते पर सहमत हुए थे, लेकिन पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने पिछले महीने कहा था कि तकनीकी रूप से कोई युद्धविराम समझौता लागू नहीं है, क्योंकि यह अफगान तालिबान की ओर से पाकिस्तान में आतंकवादी हमलों को रोकने पर निर्भर करता है और वह ऐसा करने में असफल रहा है |
पर्ल हार्बर की याद ताजा: फ्रांस की न्यूक्लियर पनडुब्बियों पर ड्रोन का संकट
6 Dec, 2025 11:42 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रूस यूक्रेन युद्ध के कारण यूरोप में तनाव पहले ही अपने चरम पर है और इसी बीच फ्रांस से बेहद चिंता बढ़ाने वाली घटना सामने आई है. देश के सबसे सुरक्षित सैन्य ठिकाने आइले लॉन्ग प्रायद्वीप पर स्थित न्यूक्लियर सबमरीन बेस के ऊपर पांच अनजान ड्रोन मंडराते देखे गए. यह वही जगह है जहां फ्रांस अपनी चार परमाणु बैलिस्टिक पनडुब्बियां रखता है. अगर यह अटैक करने की कोई साजिश होती तो यह फ्रांस का पर्ल हार्बर मोमेंट हो सकता था. दरअसल दूसरे विश्वयुद्ध में जापान ने अमेरिका के पर्ल हार्बर पर हमला बोला था, जिस कारण अमेरिकी बेस पर तबाही मची थी. इस हमले के बाद अमेरिका युद्ध में उतरा था. रिपोर्ट के अनुसार, घटनास्थल नॉर्थवेस्ट फ्रांस का वह इलाका है जिसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी अटलांटिक मैरिटाइम प्रीफेक्चर संभालता है. इनके प्रवक्ता गिलोम ले रस्ले ने पुष्टि की कि ड्रोन संवेदनशील इन्फ्रास्ट्रक्चर के बिल्कुल ऊपर देखे गए, हालांकि उन्होंने कहा कि तत्काल कोई खतरा नहीं था. उनके अनुसार यह हरकत ‘जनता को डराने की कोशिश’ भी हो सकती है |
ड्रोन दिखने पर फ्रांस ने क्या किया?
फ्रांस के अखबार ले मोंड की रिपोर्ट के मुताबिक, ड्रोन दिखते ही काउंटर-ड्रोन और सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया. मरीन राइफल बटालियन, जो इस बेस की सुरक्षा संभालती है, ने ड्रोन पर फायर भी किया. हालांकि यह अभी साफ नहीं है कि कोई ड्रोन मार गिराया गया या नहीं. न्यूक्लियर सबमरीन जैसा संवेदनशील ठिकाना होने के कारण यह घटना यूरोप में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा रही है. फ्रांस लंबे समय से ऐसी किसी संभावित ‘हाइब्रिड वारफेयर’ गतिविधि के खतरे को लेकर सतर्क रहा है |
क्या पहले भी ड्रोन दिखने के आए मामले?
यह घटना उसी पैटर्न का हिस्सा है जो पिछले कुछ महीनों से पूरे यूरोप में देखा जा रहा है. इसी हफ्ते आयरलैंड के पश्चिमी तट पर भी 4-5 ड्रोन देखे गए, जो यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की की फ्लाइट के ठीक बाद उनके रास्ते में दिखाई दिए. ड्रोन आयरिश नेवी के जहाज ‘ले विलियम बटलर येट्स’ के ऊपर लगभग स्थिर हो गए, मानो ये जानबूझकर दिखना चाहते हों. सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यह घटनाएं किसी बड़े पैमाने पर यूरोप की हवाई सुरक्षा को परखने की कोशिश भी हो सकती हैं |
यूरोप में लगातार हो रही ड्रोन की घटनाएं
10 सितंबर से अब तक कई यूरोपीय देशों ने अपने हवाई क्षेत्र में रहस्यमय ड्रोन देखे हैं. सबसे गंभीर मामला पोलैंड का था, जहां बेलारूस से 19 ड्रोन सीमा पार करते देखे गए थे. तब से लेकर अब तक कई देशों ने रूस पर इसके आरोप लगाए हैं. हालांकि रूस हर बार जिम्मेदारी से इनकार करता रहा है |
जलवायु परिवर्तन ने दुनियाभर के शहरों को भीषण गर्मी में धकेला
5 Dec, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन । जलवायु परिवर्तन की रफ्तार ने दुनिया भर के शहरों को अभूतपूर्व गर्मी में धकेल दिया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले दशकों में शहरी तापमान 2 डि्गी से 7 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ने की आशंका है। अर्बन हीट आइलैंड प्रभाव के कारण कॉन्क्रीट और भीड़भाड़ वाले इलाकों में गर्मी और ज्यादा असहनीय हो सकती है। इसका सबसे ज्यादा असर गरीब, बच्चे, बुजुर्ग और खुले में काम करने वाले लोगों पर पड़ेगा।
रिपोर्ट में बताया गया है कि बढ़ती गर्मी के चलते श्रमिक उत्पादकता में भारी गिरावट दर्ज की जाएगी। 1995 से 2030 के बीच गर्मी के कारण 3.75 मिलियन फुल-टाइम नौकरी के बराबर कामकाजी घंटे खो चुके हैं, जो 2030 तक बढ़कर 8.1 मिलियन के स्तर तक जा सकते हैं। इसके चलते वैश्विक आर्थिक नुकसान करीब 498 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली, टोक्यो, बीजिंग, करांची, ढाका और जकार्ता जैसे बड़े शहरों में अगले वर्षों में भीषण गर्मी, स्वास्थ्य संकट, पानी की कमी और कूलिंग उपकरणों की बढ़ी मांग देखने को मिलेगी। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक हीटवेव के कारण हीटस्ट्रोक के मामले वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ रहे हैं। 2000–2021 के बीच 65 साल से जयादा आयु के लोगों में गर्मी से होने वाली मौतों में 85फीसदी तक वृद्धि दर्ज की गई है। केवल यूरोप में 2022 की गर्मियों में 61,000 से ज्यादा अतिरिक्त मौतें दर्ज की गई।
क्लाइमेट विशेषज्ञ बताते हैं कि 2008 से 2019 के बीच भारत के दस प्रमुख शहरों में हर साल औसतन 1,116 लोगों की जान हीटवेव से गई। उनका कहना है कि बढ़ती गर्मी से निपटने तुरंत राहत उपायों और दीर्घकालिक शहरी योजना दोनों जरूरी हैं। शहरों में ग्रीन कवर बढ़ाना, जलाशयों को संरक्षित करना और कंक्रीट के उपयोग को घटाना जरुरी कदम हैं। कृषि पर भी गर्मी का प्रभाव दिख रहा है। वैज्ञानिक कम पानी और गर्मी झेलने वाली फसलों की प्रजातियां विकसित करने में जुटे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालयी ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे कृत्रिम झीलों और अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है। आने वाले समय में नदियों के जलप्रवाह और मैदानी क्षेत्रों में बाढ़ की आवृत्ति बढ़ सकती है।
विशेषज्ञ ने चेतावनी दी हैं कि हीटवेव को हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है। अत्यधिक तापमान शरीर के अंगों को क्षति पहुंचा सकता है और समय पर मदद न मिले तो जीवन खतरे में पड़ सकता है। बढ़ती गर्मी की चुनौती से निपटने के लिए समाज और सरकार दोनों को अभी से तैयारी करनी होगी।
हिजाब महिलाओं की गरिमा को बचाता है, वहीं पश्चिम उन्हें भोग की वस्तु बनाता है: खामेनेई
5 Dec, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तहरान। ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई ने एक बार फिर अनिवार्य हिजाब और सख्त ड्रेस कोड का खुलकर बचाव किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लगातार पोस्ट करते हुए उन्होंने पश्चिमी देशों पर तीखा हमला बोला और दावा किया कि इस्लाम महिलाओं को सच्ची आजादी और सम्मान देता है, जबकि पश्चिमी पूंजीवादी व्यवस्था उन्हें महज यौन वस्तु बना देती है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान की संसद के 150 से ज्यादा सांसदों ने न्यायपालिका पर हिजाब कानून को ढीला करने का आरोप लगाया था। ठीक एक दिन बाद खामेनेई ने जवाब दिया। उन्होंने लिखा, समाज का पहला कर्तव्य है महिलाओं की सुरक्षा, गरिमा और शांति सुनिश्चित करना। इस्लाम ठीक यही करता है। पश्चिम में पूंजीवाद महिलाओं को विज्ञापनों, फिल्मों और फैशन की भेंट चढ़ाता है। वहाँ औरत को सिर्फ शरीर समझा जाता है। खामेनेई ने पश्चिमी समाज में लैंगिक वेतन असमानता का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि वहाँ महिलाओं से समान काम करवाया जाता है, लेकिन वेतन कम दिया जाता है और उनका शारीरिक शोषण आम है। इसके उलट इस्लाम में महिला को घर का फूल बताया गया है। उन्होंने हदीस का हवाला देते हुए लिखा, “महिला नौकरानी नहीं है। वह फूल है, जिसकी देखभाल करनी है। उसकी खुशबू और रंग पूरे घर को महकाते हैं। उसे सम्मान और सुरक्षा दो, वह तुम्हें समृद्ध करेगी।
खामेनेई ने यह भी कहा कि हिजाब और पर्दे का कानून औरत को सड़क पर चलते हुए पुरुषों की भूखी नजरों से बचाता है और उसे एक सम्मानजनक पहचान देता है। उनके मुताबिक पश्चिमी आजादी का मतलब सिर्फ नग्नता और भोग है, जबकि इस्लामी व्यवस्था औरत को सशक्त बनाती है, उसे पढ़ने-लिखने, आगे बढ़ने और अपनी पहचान बनाने का पूरा हक देती है। 2022 में महसा अमीनी की हिरासत में मौत के बाद ईरान में हिजाब विरोधी बड़े आंदोलन हुए थे। उसके बाद से कानून को और सख्त करने की मांग तेज हो गई थी। खामेनेई के ताजा बयानों ने उस बहस को फिर हवा दे दी है। सरकार अब नए कानून पर काम कर रही है, जिसमें हिजाब न पहनने पर भारी जुर्माना और जेल की सजा का प्रावधान होगा। खामेनेई का संदेश साफ है – हिजाब कोई दमन नहीं, महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा का इस्लामी तरीका है।
अमेरिका में छात्र को भारी हथियारों, दर्जनों राउंड गोलियों के साथ किया गिरफ्तार
5 Dec, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिका में पुलिस ने यूनिवर्सिटी ऑफ डेलावेयर के पूर्व छात्र को भारी हथियारों, दर्जनों राउंड गोलियों, बॉडी आर्मर और एक खतरनाक मैनिफेस्टो के साथ गिरफ्तार किया है। 25 साल का छात्र को 24 नवंबर की आधी रात से ठीक पहले पकड़ा जब वह पार्क में संदिग्ध हालात में पिकअप में बैठा था। अधिकारियों के मुताबिक उसके व्यवहार पर शक होने के बाद जब ट्रक की तलाशी ली गई तो अंदर का नजारा देख सब हैरान रह गए।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस को एक .357 ग्लॉक पिस्टल, 27 राउंड की कई भरी हुई मैगजीन्स और बॉडी आर्मर प्लेट्स मिली। अभियोजन पक्ष के मुताबिक यह पिस्टल ऐसे किट में फिट की गई थी कि वह सेमी-ऑटोमैटिक राइफल की तरह काम कर सके। इससे साफ होता है कि हथियारों का यह जखीरा किसी साधारण इस्तेमाल के लिए नहीं था। उसे तब पकड़ा गया है जब कुछ दिन पहले ही व्हाइट हाउस के पास एक अफगान नागरिक ने दो नेशनल गार्ड्स पर हमला किया था। इस शख्स के पास एक नोटबुक मिली, जिसमें खतरनाक बातें लिखी हैं।
सबसे ज्यादा चिंता उस नोटबुक से बढ़ी जो उसके साथ बरामद हुई. इसमें हाथ से लिखे नोट्स थे जिनमें यूनिवर्सिटी ऑफ डेलावेयर कैंपस पुलिस डिपार्टमेंट पर हमला करने की कथित योजना दर्ज थी। नोटबुक में मुख्यालय का बनाया गया नक्शा भी था, जहां एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स मार्क किए हुए थे। एक रिपोर्ट के मुताबिक इसमें हमले के बाद पुलिस से बच निकलने की रणनीति, इस्तेमाल होने वाले हथियारों का विवरण और कई ऐसी बातें थीं जिन्हें पुलिस ‘पूर्व नियोजित हमले की योजना’ बता रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक गिरफ्तारी के बाद लुकमान ने कथित रूप से कहा कि शहीद बनना सबसे बड़ी चीजों में से एक है। पुलिस के लिए यह बयान इस कथित साजिश की गंभीरता को और बढ़ाने वाला था। योजनाओं में एक कैंपस पुलिस अधिकारी का नाम भी दर्ज था, लेकिन अभी यह साफ नहीं है कि वह निशाने पर क्यों था? बताया जा रहा है गिरफ्तार छात्र पाकिस्तान में पैदा हुआ था, लेकिन बचपन से अमेरिका में रह रहा है और अमेरिकी नागरिक है। गिरफ्तारी के बाद उसके घर पर छापा मारा और वहां से हथियार बरामद किए गए हैं। जांच एजेंसी अब यह समझने की कोशिश कर रही है कि क्या लुकमान अकेले काम कर रहा था या इसके पीछे कोई और भी शामिल है।
अमेरिका में एफ-16सी फाइटिंग फाल्कन जेट ट्रेनिंग के दौरान क्रैश
5 Dec, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन,। कैलिफोर्निया के आसमान में अमेरिकी एयरफोर्स के मशहूर थंडरबर्ड्स एरियल डेमो टीम का एक एफ-16सी फाइटिंग फाल्कन ट्रेनिंग के दौरान क्रैश हो गया। हादसा गुरुवार सुबह करीब 10.45 बजे हुआ, लेकिन राहत की बात यह है कि पायलट समय रहते बाहर निकल आया और सुरक्षित रूप से जमीन पर उतरा गया। एयरफोर्स की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि पायलट की हालत स्थिर है और वह मेडिकल टीम की देखरेख में है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ट्रेनिंग मिशन नियंत्रित एयरस्पेस में चल रहा था। हादसे के तुरंत बाद आसमान में पैराशूट लटकते हुए पायलट को नीचे आते देख लोगों ने वीडियो और तस्वीरें साझा कीं जो सोशल मीडिया पर तेजी से से वायरल हो गईं। इन तस्वीरों में क्रैश के बाद उठता धुआं और सूखी झील के किनारे बिखरा मलबा साफ नजर आ रहा है। एयरफोर्स ने कहा है कि घटना की जांच शुरू कर दी गई है और 57वीं विंग पब्लिक अफेयर्स ऑफिस आगे की जानकारी उपलब्ध कराएगा। अभी यह साफ नहीं है कि ट्रेनिंग मिशन के दौरान ऐसी स्थिति कैसे बनी जिसमें पायलट को इजेक्ट करना पड़ा। जांच के बाद ही खराबी या वजह का पता चल सकेगा।
रिपेार्ट के मुताबिक मौके पर स्थानीय एजेंसियों ने तत्काल रेस्क्यू और फायर कंट्रोल का काम संभाला। विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि उन्हें सुबह 10.30 बजे क्रैश की सूचना मिली और तुरंत फायर सपरेशन ऑपरेशन शुरू किया गया। हादसा जिस इलाके में हुआ, वह एक सूखी झील है, जहां ट्रेनिंग मिशन के दौरान कई बार फाइटर जेट्स की लो फ्लाइंग होती है। अधिकारियों के मुताबिक आग फैलने से पहले ही उसे नियंत्रित कर लिया गया ताकि आसपास के क्षेत्र को किसी तरह का नुकसान न हो।
इंटरनेशनल मुजाहिद दिखाने की चाहत में लगा मुनीर........इमरान ने निकाली जमकर भड़ास
5 Dec, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कराची। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के जेल से जारी बयान में पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जेल में बंद इमरान ने आर्मी चीफ जनरल मुनीर पर जमकर भड़ास निकाली है। इमरान ने आरोप लगाया है कि आसिम मुनीर खुद को इंटरनेशनल मुजाहिद (लड़ाका) दिखाने और पश्चिमी समर्थन पाने के लिए जानबूझकर अफगानिस्तान के साथ तनाव बढ़ा रहे हैं। इमरान खान ने मुनीर को मानसिक रूप से बीमार बताया है, जिसके कारण उनके मुताबिक पाकिस्तान में कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा हो गई है और संविधान और कानून का राज पूरी तरह से खत्म हो गया है।
इमरान के अनुसार, मुनीर की नीतियों (अफगानों को धमकाना, शरणार्थियों को निकालना, ड्रोन हमले करना) ने अफगानिस्तान के साथ संबंधों को खराब किया है और आतंकवाद के कैंसर को कंट्रोल से बाहर कर दिया है।
इमरान खान ने कहा कि उन्हें पूरी तरह से अकेले कैद में रखा गया है और जेल मैनुअल के तहत मिलने वाली बुनियादी ज़रूरतें भी छीन ली गई हैं। उन्होंने इसे साइकोलॉजिकल टॉर्चर और टार्चर करार दिया है। यह बयान उनकी बहन डॉ. उज़मा खान से एक महीने से ज़्यादा समय बाद रावलपिंडी की अदियाला जेल में मुलाकात के एक दिन बाद आया है। उन्होंने दावा किया है कि उनकी पत्नी को फर्जी मामलों में जेल में बंद रखा गया है और वह बहुत ज़्यादा दबाव में हैं। खान ने आरोप लगाया कि उनकी बहन नोरीन नियाज़ी को उनसे मिलने के अपने कानूनी अधिकार की मांग करने पर सड़क पर घसीटा गया। यह बयान इमरान खान द्वारा अपने नाम से जारी किया गया है और सोशल मीडिया पोस्ट (एक्स पर) के माध्यम से साझा किया गया है। इमरान खान ने कहा कि आसिम मुनीर की नीतियां पाकिस्तान के लिए खतरनाक हैं। उन्होंने दुख व्यक्त किया कि मुनीर की नीतियों के कारण आतंकवाद कंट्रोल से बाहर हो गया है। उनका आरोप है कि मुनीर को पाकिस्तान के राष्ट्रीय हितों की कोई चिंता नहीं है और वह यह सब पश्चिमी ताकतों को खुश करने के लिए कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुनीर ने पहले अफगानों को धमकाया, फिर पाकिस्तान से शरणार्थियों को निकाला और ड्रोन हमले किए, जिसका नतीजा अब बढ़ते आतंकवाद के रूप में भुगता जा रहा है। इमरान खान ने मुनीर को मानसिक रूप से बीमार आदमी कहा। उन्होंने आरोप लगाया कि मुनीर के नैतिक दिवालियापन के कारण पाकिस्तान में संविधान और कानून का राज पूरी तरह से खत्म हो गया है।
टी-शर्ट में कैमरा और छुपे हुए ईयरपीस से कपल ने कैसीनो को लगा दिया 7 करोड़ का चूना
4 Dec, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सिडनी। ऑस्ट्रेलिया के कैसीनो में चौंकाने वाली खबर आई है। सिडनी के लग्जरी क्राउन कैसीनो में मिकी माउस टी-शर्ट के अंदर छुपा एक छोटा सा कैमरा और कान में घुसे बारीक ईयरपीस ने 7 करोड़ रुपये की चोरी करवा दी। यहां एक चालाक कपल इतना शातिर निकला कि कुछ ही हफ्तों में कैसीनो को लाखों डॉलर का चूना लगा गया।
रिपोर्ट के अनुसार 36 साल की दिलनोजा इसराइलोवा और उनके पति अलीशेरिखोजा इसराइलोव ऑस्ट्रेलिया पहुंचे थे। यहां पहुंचते ही उन्होंने क्राउन कैसीनो की सदस्यता ली और फिर शुरू हुआ उनका हाई-टेक खेल। इस शातिर कपल ने मिकी माउस वाली टी-शर्ट में ऐसा बटन लगाया था, जो कैमरा से लाइव फुटेज सीधे मोबाइल पर भेजता था।
इसके साथ ही, छुपे हुए ईयरपीस से दोनों एक-दूसरे को कार्ड्स की सटीक जानकारी देकर सही दांव लगाते थे। इसका नतीजा यह हुआ कि कुछ ही हफ्तों में उन्होंने 1.2 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (7 करोड़) की मोटी कमाई की। जब कैसीनो स्टाफ ने महिला की शर्ट टी-शर्ट पर लगे एक छोटे, छुपे कैमरे को देखा। इसके फौरान बाद अधिकारियों को सूचना दी गई और वे कैसीनो पहुंचे, जहां उन्होंने महिला और उसके पति को गिरफ्तार किया।
कैमरा और ईयरपीस के अलावा, अधिकारियों को तलाशी के दौरान चुंबकीय डिटेक्टर और फोन के लिए मिरर अटैचमेंट भी मिला। सिडनी में उनके ठिकाने पर पुलिस ने छापेमारी में कीमती गहने, जुआ के उपकरण और करीब 2 लाख रुपये नकद बरामद किए। दोनों पर धोखाधड़ी से वित्तीय लाभ प्राप्त करने का आरोप लगाया गया है और वे हिरासत में हैं।
मुनीर को सीडीएफ बनाने में हिचक रहे शाहबाज शरीफ........छुटटी मनाने नवाज के पास लंदन पहुंचे
4 Dec, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कराची। पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर को 29 नवंबर 2022 को सेना प्रमुख (सीओएसए) बनाया गया था, और उनका 3 साल का मूल कार्यकाल 29 नवंबर 2025 को समाप्त हो गया है। हालाँकि, पिछले साल पाकिस्तान की संसद ने कानून में संशोधन करके सेना प्रमुख का कार्यकाल 3 से बढ़ाकर 5 साल कर दिया था। इस कानूनी बदलाव के कारण, वह तकनीकी रूप से 2027 तक सीओएसए के पद पर बने रह सकते हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, आसिम मुनीर को फील्ड मार्शल के पद पर पदोन्नत किया गया है, जो उन्हें जनरल अय्यूब खान के बाद यह पद प्राप्त करने वाला पाकिस्तान का दूसरा अधिकारी बनाता है। पाकिस्तान के संविधान में 27वां संशोधन किया है, जिसने चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (सीडीएफ) का नया और बेहद शक्तिशाली पद बनाया है। यह पद उन्हें तीनों सेनाओं (थल सेना, वायु सेना और नौसेना) का प्रमुख बनाता है और 5 साल के लिए तय कार्यकाल देता है, जिसका अर्थ है कि वह 2030 तक इस पद पर बने रह सकते हैं। लेकिन सबसे बड़ी खींचतान सीडीएफ पद के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी होने को लेकर है। 27 नवंबर को चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी (सीजेसीएससी) के चेयरमैन लेफ्टिनेंट जनरल साहिर शमशाद मिर्जा रिटायर हो गए, जिसके बाद सीडीएफ का पद प्रभावी होना था। 29 नवंबर की समय सीमा बीतने के बावजूद, सीडीएफ पद पर आसिम मुनीर की नियुक्ति की अधिसूचना अब तक जारी नहीं हुई है।
सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ कथित तौर पर मुनीर को सीडीएफ बनाने से हिचक रहे हैं, क्योंकि इससे मुनीर के पास असीमित शक्तियां आ जाएंगी (जिसमें देश के परमाणु कमांड पर नियंत्रण भी शामिल है)। शहबाज शरीफ इस बीच विदेश दौरे (लंदन) पर हैं। लंदन में बैठे नवाज शरीफ का भी इस निर्णय पर प्रभाव हो सकता है, और संभवतः वह अधिसूचना जारी न करने के पक्ष में हैं, जबकि शहबाज शरीफ पर दबाव है कि इसे जारी किया जाए। इस देरी के कारण पाकिस्तान में एक असामान्य सैन्य नेतृत्व की स्थिति पैदा हो गई है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि सीडीएफ की अधिसूचना जारी न होने के कारण आसिम मुनीर की संवैधानिक स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। यह संशोधन मुनीर को अभूतपूर्व शक्तियाँ देता है, जिससे वह प्रधानमंत्री से भी ज्यादा ताकतवर हो गए हैं। यह उन्हें आजीवन कानूनी कार्रवाई से प्रतिरक्षा प्रदान करता है।
उन्हें तीनों सेनाओं का बॉस और परमाणु कमांड का कंट्रोलर बनाया गया है। इसने न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र को भी सीमित कर दिया है, जिससे न्यायपालिका का पुनर्गठन हुआ है। संयुक्त राष्ट्र (मानवाधिकार) के हाई कमिश्नर वोल्कर टर्क ने भी इस संशोधन को न्यायपालिका की स्वतंत्रता को कमजोर करने वाला और सेना का प्रभाव बढ़ाने वाला बताया है।
आसिम मुनीर का सेना प्रमुख के रूप में मूल कार्यकाल समाप्त हो गया है, लेकिन कानून में संशोधन के कारण वे पद पर बने हुए हैं। उन्हें फील्ड मार्शल का पद मिला है और उन्हें सीडीएफ बनना है, जो उन्हें असीमित शक्ति देगा, लेकिन सीडीएफ पद की अधिसूचना प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा रोके जाने के कारण अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे पाकिस्तान में सेना और नागरिक सरकार के बीच तनाव स्पष्ट है।
इमरान ने बहन से हुई मुलाकात में कहा- मुनीर मानसिक बीमार है और जान भी ले सकता है
4 Dec, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पीटीआई अध्यक्ष इमरान खान ने मंगलवार को अपनी जान को गंभीर खतरा बताया। उनकी बहन डॉ. उज्मा खान से अदियाला जेल में 20 मिनट की मुलाकात के बाद जारी पार्टी के आधिकारिक बयान में इमरान ने दावा किया कि सैन्य प्रतिष्ठान अब उनकी हत्या करवाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा देख रहा है। उन्होंने साफ कहा, अगर मेरे साथ कुछ हुआ तो इसके लिए आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर और डीजी आईएसआई पूरी तरह जिम्मेदार होंगे।
पीटीआई ने आरोप लगाया कि इमरान खान को पूरी तरह एकांत कारावास (सॉलिटरी कन्फाइनमेंट) में रखा गया है, जहाँ बिजली, धूप, साफ पानी, अच्छा खाना और चिकित्सा सुविधाओं तक से वंचित किया जा रहा है। बयान में कहा गया है कि उन्हें मौत की सजा पाए कैदियों से भी बदतर हालात में रखा जा रहा है। इमरान ने बताया कि पाँच दिन तक उनके सेल की बिजली बंद रही और दस दिन तक उन्हें बाहर नहीं निकलने दिया गया। उन्होंने अपने साथ हो रहे सलूक को जानवरों से भी बदतर और पिंजरे में बंद करना बताया। पूर्व प्रधानमंत्री ने जनरल आसिम मुनीर पर सीधा हमला बोलते हुए कहा, ये पाकिस्तान के इतिहास के सबसे जालिम और मानसिक रूप से अस्थिर तानाशाह हैं। उन्होंने मौजूदा व्यवस्था को पूरी तरह अलोकतांत्रिक करार दिया और कहा कि उनपर लगातार मानसिक यातना दी जा रही है।
हालांकि डॉ. उज्मा खान ने मुलाकात के बाद मीडिया से कहा कि उनका भाई शारीरिक रूप से तंदुरुस्त और मानसिक रूप से बेहद मजबूत है। उन्होंने बताया कि इमरान जेल प्रशासन के कुछ व्यवहार से नाराज जरूर थे, लेकिन उनका हौसला बुलंद है और वे पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए संदेश भेजते रहे। उज्मा ने यह भी कहा कि इमरान उत्साहित नजर आ रहे थे। गौरतलब है कि लंबे समय से इमरान खान को परिवार व वकीलों से मिलने की इजाजत नहीं दी जा रही थी। पिछले हफ्ते पीटीआई के देशव्यापी प्रदर्शनों और दबाव के बाद पहली बार उनकी बहन से मुलाकात की अनुमति मिली। पार्टी इसे अपनी बड़ी जीत मान रही है, वहीं इमरान के ताजा बयान ने पाकिस्तान की सियासत में नया तूफान खड़ा कर दिया है।
आज दो दिवसीय यात्रा पर आ रहे पुतिन, 30 घंटे साथ रहेंगे पीएम मोदी और रुसी राष्ट्रपति
4 Dec, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4-5 दिसंबर 2025 को भारत की आधिकारिक यात्रा पर भारत आ रहे हैं। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके खासमखास दोस्त पुतिन करीब 30 घंटे का समय साथ साथ गुजारेंगे। रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा होगी। इससे पहले वे दिसंबर 2021 में दिल्ली आए थे।
यह दौरा दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे होने के खास मौके पर हो रहा है और 23वाँ भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन इसी दौरान आयोजित होगा। वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव के बीच इस मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। पुतिन का यह दौरा भले दो दिन का है, लेकिन दिल्ली में उनका ठहराव करीब 30 घंटे का होगा। वे 4 दिसंबर की शाम लगभग 6 बजे नई दिल्ली पहुंचेंगे। आगमन के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके साथ निजी डिनर और कुछ अनौपचारिक मुलाकातें करेंगे।
अगले दिन यानी 5 दिसंबर की सुबह 9:30 बजे राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत समारोह होगा। इसके बाद पुतिन राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। फिर हैदराबाद हाउस में दोनों नेताओं के बीच पहले सीमित दायरे की वार्ता और उसके बाद बड़े प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत होगी। दोपहर में प्रतिनिधिमंडलों के साथ लंच में कुछ प्रमुख भारतीय उद्योगपति भी शामिल हो सकते हैं। लंच के बाद कई द्विपक्षीय समझौतों और परियोजनाओं की घोषणा की जाएगी, जिसके बाद दोनों नेता मीडिया को संबोधित करेंगे। दोपहर में ही भारत-रूस बिजनेस फोरम का आयोजन होगा जिसमें पुतिन और मोदी दोनों हिस्सा ले सकते हैं। शाम को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से राजकीय भोज होगा। भोज समाप्त होने के बाद रूसी राष्ट्रपति भारत से रवानगी लेंगे।
ऊर्जा, व्यापार, निवेश, अंतरिक्ष पर होगी चर्चा
इस शिखर सम्मेलन में रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, निवेश, अंतरिक्ष और परमाणु सहयोग समेत कई क्षेत्रों में अहम समझौते होने की संभावना है। रूसी पक्ष पहले ही संकेत दे चुका है कि अतिरिक्त एस-400 वायु रक्षा रेजीमेंट की डिलीवरी और पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर एसयू-57 की भारत को पेशकश पर बात आगे बढ़ सकती है। एसयू-57 के मामले में तकनीक हस्तांतरण और भारत में संयुक्त उत्पादन का प्रस्ताव भी चर्चा में है। इसके अलावा दोनों देश ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार असंतुलन को दूर करने, रुपी-रूबल भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने और अफगानिस्तान, मध्य एशिया तथा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समन्वय जैसे मुद्दों पर भी गहन विचार-विमर्श करेंगे। पुतिन-मोदी की यह मुलाकात केवल औपचारिक वार्ता नहीं होगी बल्कि आने वाले वर्षों में भारत-रूस विशेष रणनीतिक साझेदारी की नई दिशा और गति तय करेगी। युद्ध और पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद दोनों देशों के बीच रक्षा एवं ऊर्जा सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है, और यह यात्रा उस साझेदारी को और गहरा करने का बड़ा अवसर है।
4 नवंबर शाम 6 बजे भारत पहुंचेंगे पुतिन
रुसी पुतिन शाम को करीब 6 बजे भारत पहुंचेंगे। आगमन के बाद उनकी कुछ महत्वपूर्ण मीटिंग्स होंगी, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ प्राइवेट डिनर और अन्य निजी कार्यक्रम शामिल हैं।
5 नवंबर को होगा स्वागत
पुतिन के लिए 5 नवंबर को सुबह 9:30 बजे राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में औपचारिक स्वागत समारोह होगा, इसके बाद राजघाट जाकर श्रद्धांजलि देंगे। सीमित दायरे की वार्ता, फिर हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय तथा प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत। और साथ में लंच होगा जिसमे कुछ प्रमुख उद्योगपति भी शामिल हो सकते हैं। हैदराबाद हाउस में समझौतों की घोषणा कर सकते हैं।
भारत-रूस बिजनेस फोरम, जिसमें दोनों नेता शामिल हो सकते हैं। राष्ट्रपति की ओर से शाम को राज्य भोज के बाद पुतिन भारत से प्रस्थान करेंगे।
भारत पर बुरी नजर रखने वाले पाक के पूर्व पीएम पर बरसाईं गोलियां, हालत गंभीर
4 Dec, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान में राजनीतिक हिंसा का एक और खौफनाक मामला सामने आया है। देश के पूर्व अंतरिम प्रधानमंत्री और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के पूर्व तथाकथित प्रधानमंत्री अनवार-उल-हक काकर पर अज्ञात हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं। हमले में वे गंभीर रूप से घायल हो गए और फिलहाल क्वेटा के एक अस्पताल में उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। डॉक्टरों के अनुसार वे जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। हमले की यह घटना ऐसे समय हुई है जब पाकिस्तान की सियासत पहले से ही अस्थिरता के दौर से गुजर रही है। एक पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान पहले से अदियाला जेल में बंद हैं, वहीं अब दूसरे पूर्व अंतरिम पीएम पर जानलेवा हमला हो गया। अभी तक किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है और जांच शुरू कर दी गई है।
अनवार-उल-हक काकर को फरवरी 2024 में शहबाज शरीफ सरकार ने आम चुनाव तक के लिए अंतरिम प्रधानमंत्री बनाया था। इससे पहले वे पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के कथित प्रधानमंत्री भी रह चुके हैं। वे अपने भारत-विरोधी भड़काऊ और विवादास्पद बयानों के लिए अक्सर सुर्खियों में रहे हैं। सबसे ज्यादा विवाद तब हुआ था जब दिल्ली के लाल किले के पास हुए आतंकी विस्फोट पर अनवार-उल-हक ने खुलेआम जश्न मनाते हुए कहा था कि यह हमला बलूचिस्तान में भारत की कथित कार्रवाइयों का बदला था। पीओके में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने धमकी भरे लहजे में कहा था,“अगर तुम बलूचिस्तान को खून-खून करते रहोगे तो हम भारत को लाल किले से लेकर कश्मीर के जंगलों तक मारेंगे। अल्लाह के फजल से हमने किया है और वो अभी तक लाशें गिन नहीं पाए हैं।” उनका यह बयान दिल्ली हमले में मारे गए मासूम नागरिकों का अपमान माना गया था और भारत ने इसकी कड़ी निंदा की थी। अब उसी अनवार-उल-हक पर उनके ही देश में जानलेवा हमला हुआ है, जिसने पाकिस्तान में नई राजनीतिक उथल-पुथल पैदा कर दी है।
शेख हसीना को अब किस मामले में अदालत ने ठहराया दोषी, क्या है प्लॉट आवंटन में अनियमितताओं का मामला
3 Dec, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका । बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और अवामी लीग प्रमुख शेख हसीना को सोमवार को एक बार फिर विशेष अदालत ने कानूनी झटका दे दिया है। अदालत ने पुरबचल न्यू टाउन प्रोजेक्ट में प्लॉट आवंटन में अनियमितताओं से जुड़े बहुचर्चित जमीन घोटाला मामले में उन्हें दोषी मानते हुए सजा सुनाई है। यहां बताते चलें कि जमीन घोटाला मामले में विशेष अदालत ने कुल तीन लोगों को दोषी करार दिया है। शेख हसीना, शेख रेहाना (हसीना की बहन), तुलिप रिजवाना सिद्दीक (शेख रेहाना की बेटी व ब्रिटिश सांसद)। ये तीनों राजुक (राजुक) द्वारा किए गए प्लॉट आवंटन में कथित अनियमितताओं के मामले में दोषी ठहराए गए है।
क्या है पूरा मामला?
मामला पुरबचल न्यू टाउन प्रोजेक्ट से जुड़ा है, जो ढाका के पास राजुक द्वारा विकसित एक बड़ा आवासीय प्रोजेक्ट है। इस मामले में आरोप था कि हसीना और उनके परिवार ने अपने प्रभाव का उपयोग करके इस हाई-प्रोफाइल प्रोजेक्ट में प्लॉट अवैध तरीके से हासिल किए। मामला कई सालों से जांच में था, और हाल ही में गवाही व दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद अदालत ने इस मामले में फैसला सुनाया।
राजधानी ढाका की विशेष अदालत ने फैसला सुनाया और तीनों आरोपियों को दोषी मना। अदालत ने कारावास की सजा सुनाई, इसकी अवधि को लेकर आधिकारिक बयान आना बाकी है। हसीना पहले से ही कई कानूनी चुनौतियों का सामना कर रही हैं। उनके खिलाफ विभिन्न आर्थिक और प्रशासनिक अनियमितताओं के मामले चल रहे हैं। अब एक और मामले में दोषी ठहराया जाना उनकी राजनीतिक और कानूनी स्थिति को कमजोर करता है।
तुलिप सिद्दीक जो कि ब्रिटेन में लेबर पार्टी की सांसद हैं का नाम फैसले में शामिल होने से मामला अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया है। ब्रिटेन की राजनीति और मीडिया में भी इस पर चर्चा शुरू हो चुकी है। अवामी लीग के नेताओं ने इस फैसले को “राजनीतिक प्रतिशोध” बताया है। उनका कहना है कि विपक्षी सरकार हसीना परिवार को “कमजोर करने” की कोशिश कर रही है।
मुनीर के सीडीएफ बनाने को लेकर पाकिस्तानी सेना में घमासान, गुस्से में विदेश चले गए शहबाज
3 Dec, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान इन दिनों अपने इतिहास के सबसे गंभीर संवैधानिक और संस्थागत संकट से जूझ रहा है। मौजूदा सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर का तीन साल का मूल कार्यकाल 29 नवंबर 2025 को समाप्त हो चुका है, लेकिन प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अब तक उन्हें देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएफ) के रूप में नियुक्त करने वाली अधिसूचना पर हस्ताक्षर नहीं कर रहे हैं। इसके लिए वे जानबूझकर विदेश में डेरा डाले हुए हैं।
सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ और भारत के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड (एनएसएबी) के सदस्य तिलक देवाशेर ने बताया कि जैसे ही 29 नवंबर की तारीख नजदीक आई, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ पहले बहरीन और फिर लंदन चले गए। उनका इरादा साफ है – वे आसिम मुनीर को पांच साल का विस्तार देने वाली अधिसूचना पर हस्ताक्षर करने से बचना चाहते हैं। यह रणनीति इतनी स्पष्ट है कि पाकिस्तानी राजनीतिक हलकों में इसे खुली बगावत की तरह देखा जा रहा है। अधिसूचना नहीं जारी होने से पाकिस्तान में अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो गई है। तकनीकी रूप से 29 नवंबर के बाद देश के पास कोई वैधानिक सेना प्रमुख नहीं है। सबसे गंभीर बात यह है कि न्यूक्लियर कमांड अथॉरिटी भी फिलहाल बिना प्रमुख के है, क्योंकि नया ‘स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड’ढांचा भी इसी अधिसूचना से जुड़ा हुआ था। एक परमाणु हथियार संपन्न देश के लिए यह स्थिति न सिर्फ विचित्र, बल्कि बेहद खतरनाक है।
2024 में पारित पाकिस्तान आर्मी एक्ट संशोधन के अनुसार अब सेना प्रमुख का कार्यकाल सीडीएफ के बराबर यानी पांच साल होगा। लेकिन कानूनी विशेषज्ञ इस बात पर बंटे हुए हैं कि क्या इसके लिए नई अधिसूचना अनिवार्य है या पुराना संशोधन अपने आप लागू हो गया। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि संशोधन में शामिल ‘डीम्ड क्लॉज’के कारण आसिम मुनीर का कार्यकाल अपने आप पांच साल का हो गया है और उन्हें दो साल का स्वतः विस्तार मिल चुका है। वहीं दूसरी राय यह है कि बिना प्रधानमंत्री के हस्ताक्षर वाली नई अधिसूचना के यह प्रावधान लागू नहीं हो सकता। यह विवाद अब अदालत तक जाने की संभावना रखता है।
सूत्रों के मुताबिक, सेना मुख्यालय रावलपिंडी में इन दिनों असामान्य हलचल है। कई वरिष्ठ लेफ्टिनेंट जनरल नए सेना प्रमुख बनने या नवसृजित दो चार-सितारा पदों पर नियुक्ति की दौड़ में सक्रिय हो गए हैं। यदि अधिसूचना जल्द जारी नहीं हुई तो सेना के अंदर खुला सत्ता संघर्ष शुरू होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। प्रधानमंत्री की लंबी विदेश यात्रा ने इस संकट को और गहरा दिया है। तिलक देवाशेर ने चेतावनी दी है कि यह स्थिति ज्यादा दिन नहीं चल सकती। एक परमाणु शक्ति संपन्न देश बिना सेना प्रमुख और न्यूक्लियर कमांड चेन के नहीं चलाया जा सकता। सरकार की चुप्पी और अधिसूचना पर स्पष्ट बयानबाजी न होने से अटकलें तेज हो गई हैं। हर गुजरता दिन पाकिस्तान के राजनीतिक और सैन्य ढांचे में अस्थिरता को बढ़ा रहा है। फिलहाल पूरे देश की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रधानमंत्री लंदन से कब लौटते हैं और आसिम मुनीर का भविष्य तय करने के लिए अधिसूचना पर हस्ताक्षर करते हैं या नहीं। यह संकट न केवल पाकिस्तानी सेना की एकता, बल्कि पूरे देश की सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है।
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