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पीओके में बढ़ते विरोध के बीच मुनीर का बड़ा कदम, 4,000 जवानों की मांग
12 Jul, 2026 01:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आगामी 15 जुलाई को होने वाले विशाल विरोध प्रदर्शनों और 'लॉन्ग मार्च' से पहले वहां की स्थानीय प्रशासन और हुकूमत के हाथ-पांव फूल गए हैं। क्षेत्र में संभावित बड़े पैमाने पर अशांति और नागरिक विद्रोह को दबाने के लिए स्थानीय गृह विभाग ने पाकिस्तान की केंद्रीय सरकार से हजारों अतिरिक्त अर्धसैनिक बलों की तत्काल तैनाती की गुहार लगाई है। एक लीक हुए गोपनीय आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार, प्रदर्शनों को कुचलने के लिए इस्लामाबाद से 4,000 अतिरिक्त जवानों और पाकिस्तान रेंजर्स की सात विंग्स की मांग की गई है। यह आपातकालीन कदम संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के प्रमुख नेता शौकत नवाज मीर सहित सैकड़ों सामाजिक कार्यकर्ताओं की हालिया गिरफ्तारी के बाद उपजे भयंकर जन आक्रोश के कारण उठाया गया है।
अति संवेदनशील और गोपनीय पत्र से खुला राज
पाकिस्तान के गृह मंत्रालय के सचिव को 8 जुलाई को भेजा गया यह आधिकारिक पत्र बेहद संवेदनशील है, जिस पर 'अति आवश्यक और गोपनीय' (Most Urgent and Confidential) की मुहर लगी हुई है। यह दस्तावेज साफ तौर पर उजागर करता है कि पाकिस्तान समर्थित स्थानीय प्रशासन जेएएसी द्वारा चलाए जा रहे इस जन आंदोलन से बुरी तरह खौफजदा है। प्रशासन ने आंदोलनकारियों पर लंबे मार्च, चक्काजाम और अनिश्चितकालीन धरने आयोजित करने का आरोप लगाया है। सरकार का दावा है कि इस विरोध प्रदर्शन के कारण पूरे क्षेत्र में एक गंभीर सुरक्षा संकट पैदा हो गया है, जिससे निपटना अब स्थानीय पुलिस के बस से बाहर हो चुका है।
50% जवानों को आधुनिक हथियारों से लैस रखने की मांग
गोपनीय दस्तावेज के मुताबिक, मांगी गई यह अतिरिक्त फोर्स पीओके में पहले से मौजूद भारी सुरक्षा अमले के अलावा होगी। पत्र में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि इन सैनिकों की आवश्यकता प्रदर्शनकारियों के 'खतरे' को बेअसर करने, सरकारी इकबाल (कंट्रोल) को बनाए रखने और पहले से थकी हुई स्थानीय पुलिस को बैकअप देने के लिए है। प्रशासन ने विशेष मांग रखी है कि आने वाले सुरक्षाकर्मियों में से 50 प्रतिशत बल पूरी तरह से आधुनिक स्वचालित हथियारों और गोला-बारूद से लैस होने चाहिए, जबकि शेष 50 प्रतिशत को दंगा-रोधी गियर (Riot Control Gear) दिया जाना चाहिए। यदि दंगा-रोधी उपकरणों की कमी हो, तो उसे पाकिस्तान के केंद्रीय स्टॉक से पूरा करने को कहा गया है।
प्रतिबंधित समूहों और हिंसा का लगाया आरोप
पीओके प्रशासन ने इस पूरी अशांति और नागरिक असंतोष के लिए सीधे तौर पर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी को कटघरे में खड़ा किया है। सरकार का आरोप है कि पुंछ और रावलकोट में लगातार धरने दिए जा रहे हैं और पड़ोसी जिलों में रैलियां आयोजित कर जनता को हुकूमत के खिलाफ भड़काया जा रहा है। प्रशासन ने यह सनसनीखेज दावा भी किया है कि कुछ प्रतिबंधित समूहों से जुड़े सशस्त्र तत्व मुजफ्फरराबाद और मीरपुर डिवीजनों में शांति भंग करने की फिराक में हैं।
सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों द्वारा आवश्यक खाद्य सामग्री ले जा रहे ट्रकों को आग के हवाले किया जा रहा है। प्रशासन का दावा है कि इस टकराव में अब तक चार सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं और 174 अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं, हालांकि स्वतंत्र मानवाधिकार संगठनों द्वारा इन हिंसक दावों की कोई पुष्टि नहीं की गई है।
नेतन्याहू के बेटे ने अपने नाम से पिता का सरनेम हटाया
12 Jul, 2026 10:27 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेल अवीव। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के परिवार से जुड़ा एक नया और बेहद चौंकाने वाला विवाद सामने आया है। प्रधानमंत्री के बड़े बेटे यायर नेतन्याहू ने कानूनी तौर पर अपना नाम बदल लिया है। फ्लोरिडा में रह रहे 34 वर्षीय यायर ने अपने नाम से पिता का मशहूर सरनेम 'नेतन्याहू' हटा दिया है और अब अपना नया नाम 'योनातन हुन' (Yonatan Hunn) रख लिया है। 'हुन' उनके पूर्वजों का पुराना पारिवारिक नाम बताया जा रहा है। लीक हुए दस्तावेजों के अनुसार, नाम बदलने का यह खेल पिछले दो वर्षों के भीतर ही खेला गया है, जिसने इजरायल की राजनीति और आम जनता के बीच एक नई बहस छेड़ दी है।
टैक्स फाइलिंग और डेटा लीक से खुला राज
इस बड़े बदलाव का खुलासा हाल ही में लीक हुए टैक्स और रेगुलेटरी डेटा से हुआ है। रिकॉर्ड के मुताबिक, साल 2024 में टैक्स भरते समय उन्होंने अपने मूल नाम (यायर नेतन्याहू) का ही इस्तेमाल किया था। लेकिन, हाल ही में साल 2026 की टैक्स फाइलिंग के दौरान उन्होंने अपना नाम बदलकर 'योनातन हुन' दर्ज कराया। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह बदलाव उन्होंने अपने मौजूदा नेशनल आइडेंटिफिकेशन नंबर (राष्ट्रीय पहचान संख्या) के तहत एक रेगुलेटरी अपडेट के रूप में दर्ज कराया है। दिलचस्प बात यह है कि इस दस्तावेज में उन्होंने अपना आधिकारिक पता 'बाल्फोर 0' दिया है, जो इजरायल के यरूशलेम स्थित आधिकारिक प्रधानमंत्री आवास का सूचक है।
चाचा को श्रद्धांजलि या युद्ध से बचने का पैंतरा?
इजरायली मीडिया के विश्लेषण के मुताबिक, उनका नया नाम 'योनातन' मुख्य रूप से उनके दिवंगत चाचा 'योनी (योनातन) नेतन्याहू' को एक श्रद्धांजलि माना जा रहा है। योनी नेतन्याहू साल 1976 में युगांडा के एन्तेब्बे (Entebbe) में एक बंधक बचाव मिशन के दौरान शहीद हो गए थे और उन्हें इजरायल में एक महान राष्ट्रीय नायक का दर्जा प्राप्त है। हालांकि, आलोचक इस नाम परिवर्तन के पीछे कुछ और ही कहानी देख रहे हैं। पिछले कई सालों से युद्ध की विभीषिका झेल रहे इजरायल में जहां आम नागरिकों और रिजर्व सैनिकों को मोर्चे पर बुलाया गया है, वहीं 34 वर्षीय यायर (अब योनातन हुन) साल 2023 से फ्लोरिडा (अमेरिका) में आलीशान जिंदगी बिता रहे हैं। विदेश में रहने के कारण इजरायल में पहले ही उनकी भारी थू-थू हो रही थी, और अब नाम बदलने के बाद लोगों का आरोप है कि उन्होंने युद्ध सेवा और सैन्य तैनाती से बचने के लिए यह तरकीब अपनाई है।
संदेह के घेरे में नेतन्याहू परिवार का फैसला
चूंकि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का पूरा परिवार पहले से ही टैक्स चोरी, वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के कई गंभीर अदालती मामलों का सामना कर रहा है, इसलिए बड़े बेटे के इस कदम को बेहद संदेह की नजर से देखा जा रहा है। कई आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस नाम बदलने का सीधा कनेक्शन अंतरराष्ट्रीय संपत्तियों और टैक्स से जुड़ा हो सकता है। हालांकि, इस पूरे मामले पर न तो प्रधानमंत्री कार्यालय और न ही नेतन्याहू परिवार की ओर से कोई आधिकारिक सफाई या प्रतिक्रिया सामने आई है। इसके बावजूद इजरायल की जनता और मीडिया में इसे लेकर कयासों का दौर गर्म है।
वियतनाम में पर्यटकों से भरी नाव डूबी, 15 लोगों की मौत; कई लापता, रेस्क्यू जारी
12 Jul, 2026 08:06 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हनोई/फु क्वोक। वियतनाम के प्रसिद्ध फु क्वोक आईलैंड (Phu Quoc Island) के पास शनिवार (11 जुलाई) को एक बेहद दर्दनाक और बड़ा हादसा हो गया। यहाँ भारतीय पर्यटकों को सैर पर ले जा रही एक स्पीडबोट अनियंत्रित होकर समंदर में पलट गई। इस दर्दनाक हादसे में 15 भारतीय पर्यटकों की डूबने से मौत हो गई है। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय प्रशासन और वियतनाम कोस्ट गार्ड की टीमें तुरंत हरकत में आईं और युद्धस्तर पर राहत व बचाव कार्य शुरू किया गया। इस आपात स्थिति को देखते हुए वियतनाम में स्थित भारतीय दूतावास भी वहां के लोकल एडमिनिस्ट्रेशन के साथ लगातार तालमेल बनाए हुए है।
लहरों का तांडव और बोट पर सवार थे 36 लोग
न्यूज एजेंसी रायटर्स के मुताबिक, इस बोट पर कुल 36 लोग सवार थे। इनमें 32 भारतीय सैलानी, तीन क्रू मेंबर्स (नाव कर्मी) और एक अटेंडेंट शामिल था। रेस्क्यू टीम ने तत्परता दिखाते हुए 21 लोगों को पानी से सुरक्षित बाहर निकाल लिया है, जिनमें से कुछ घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार, हादसे का शिकार हुए अधिकांश पर्यटक भारत के तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और केरल राज्यों के रहने वाले थे।
किनारे से महज 400 मीटर दूर पलटी नाव
यह हादसा उस समय हुआ जब पर्यटकों से भरी यह नाव 'होन माई रुत' द्वीप से वापस 'एन थोई' पोर्ट की तरफ लौट रही थी। बंदरगाह के तट से महज 400 मीटर की दूरी पर समंदर में अचानक उठीं बेहद ऊंची और तेज लहरों के कारण नाव का संतुलन बिगड़ गया और वह पलट गई। तेज हवाओं और खराब मौसम को भी इस हादसे की एक मुख्य वजह माना जा रहा है, हालांकि स्थानीय प्रशासन घटना के सही कारणों की बारीकी से जांच कर रहा है।
भारतीय दूतावास ने जारी किए आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर
वियतनाम में मौजूद भारतीय दूतावास ने इस दुखद घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर जानकारी दी कि स्थानीय अधिकारियों के सहयोग से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया है। पीड़ित परिवारों को तुरंत मदद और सही जानकारी पहुंचाने के लिए हो ची मिन्ह सिटी में भारत के कॉन्सुलेट जनरल और हनोई स्थित दूतावास में तत्काल इमरजेंसी कंट्रोल रूम स्थापित कर दिए गए हैं।
मदद के लिए दूतावास ने निम्नलिखित हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं:
हो ची मिन्ह सिटी कंट्रोल रूम: +84 36 281 7930, +84 91 552 37 14, और +84 33 452 0414
हनोई कंट्रोल रूम: +84 91 308 9165
भारत की बेटी का अमेरिका में जलवा, रिद्धि चौहान बनीं US नेवी कैडेट्स की कमांडर
11 Jul, 2026 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
न्यूयॉर्क। अमेरिका में रहने वाली भारतीय मूल की बेटियों ने एक बार फिर वैश्विक पटल पर अपनी प्रतिभा और नेतृत्व क्षमता का लोहा मनवाया है। न्यूयॉर्क के एक प्रतिष्ठित स्कूल की भारतीय मूल की होनहार छात्रा रिद्धि चौहान ने अपनी कड़ी मेहनत, अनुशासन और अटूट लगन के बल पर अमेरिकी नौसेना के एक बेहद सम्मानित छात्र संगठन में सर्वोच्च पद हासिल कर देश का मान बढ़ाया है।
भारतीय मूल की रिद्धि चौहान ने रचा नया इतिहास
न्यूयॉर्क के बेंजामिन एन. कार्डोजो हाई स्कूल में पढ़ने वाली सत्रह वर्षीय भारतवंशी छात्रा रिद्धि चौहान ने एक अभूतपूर्व उपलब्धि अपने नाम की है। उन्होंने अपनी काबिलियत के दम पर नेवी जूनियर रिजर्व ऑफिसर्स ट्रेनिंग कॉर्प्स (एनजीआरओटीसी) यूनिट में बटालियन कमांडिंग ऑफिसर का प्रतिष्ठित पद हासिल किया है। इस विशेष प्रोग्राम के तहत यह किसी भी छात्र को दिया जाने वाला सबसे बड़ा और सर्वोच्च रैंक है, जो उनकी उत्कृष्ट नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है।
तीन सौ कैडेटों के विशाल दल का करेंगी सफल नेतृत्व
इस गौरवशाली पद को संभालने के बाद अब भारतीय मूल की यह होनहार बेटी तीन सौ कैडेटों के एक बड़े और अनुशासित दल की कमान संभाल रही हैं। इतनी कम उम्र में इतने बड़े सैन्य कैडेट समूह का मार्गदर्शन और नेतृत्व करना अपने आप में एक मिसाल है। रिद्धि की इस कामयाबी ने न केवल उनके परिवार और स्कूल को गौरवान्वित किया है, बल्कि प्रवासी भारतीय समुदाय का सिर भी फख्र से ऊंचा कर दिया है।
कड़ी मेहनत और सुबह की तैयारियों से मिली बड़ी सफलता
इस शीर्ष मुकाम को हासिल करने के पीछे रिद्धि चौहान का कड़ा परिश्रम और असाधारण समर्पण छिपा हुआ है। वे अपनी जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से निभाने के लिए हफ्ते में चार दिन सुबह सात बजे से पहले ही स्कूल पहुंच जाती हैं। इतनी सुबह स्कूल पहुंचने का उनका मुख्य उद्देश्य साथी कैडेटों को सैन्य ड्रिल और अन्य आवश्यक अभ्यासों की गहन प्रैक्टिस करवाना होता है, ताकि उनकी बटालियन हर मोर्चे पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सके।
अमेरिकी नौसेना के इस विशेष लीडरशिप प्रोग्राम का महत्व
नेवी जूनियर रिजर्व ऑफिसर्स ट्रेनिंग कॉर्प्स दरअसल एक उच्च स्तरीय लीडरशिप और नागरिकता विकास कार्यक्रम है, जिसे सीधे अमेरिकी नौसेना का पूरा सहयोग और संरक्षण प्राप्त है। यह अनूठा प्रोग्राम अमेरिका के तमाम प्रमुख हाई स्कूलों में छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए चलाया जाता है। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य युवा छात्र-छात्राओं में मजबूत चरित्र निर्माण, उच्च स्तर का अनुशासन, देशभक्ति और आपस में मिलकर काम करने वाले टीमवर्क की भावना को गहराई से विकसित करना है।
32 भारतीयों को लेकर जा रही नाव वियतनाम में दुर्घटनाग्रस्त, सामने आया बड़ा अपडेट
11 Jul, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
फु क्वोक ( वियतनाम ) । वियतनाम के खूबसूरत पर्यटन स्थल फु क्वोक द्वीप के पास एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ 32 भारतीय पर्यटकों से भरी एक नाव समंदर में पलट गई। इस हादसे के बाद समुद्र में चीख-पुकार मच गई और पूरे क्षेत्र में हड़कंप का माहौल है। प्रशासन द्वारा युद्ध स्तर पर बचाव कार्य चलाया जा रहा है, जबकि भारतीय दूतावास ने भी स्थिति की गंभीरता को देखते हुए फौरन राहत कार्य शुरू कर दिए हैं।
हादसे का विवरण और रेस्क्यू ऑपरेशन
फु क्वोक स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन अथॉरिटी के मुताबिक, यह हादसा दोपहर करीब 1 बजे हुआ। ओशन पर्ल आइलैंड कंपनी की यह स्पीडबोट, जिसमें 32 भारतीय पर्यटकों समेत कुल 36 लोग सवार थे, होन मे रुट से एन थोई पोर्ट की ओर जा रही थी। द्वीप से करीब 400 मीटर की दूरी पर अचानक तकनीकी खराबी के चलते नाव असंतुलित होकर पलट गई, जिससे सभी यात्री समुद्र में गिर गए। फिलहाल राहत और बचाव दल लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं। इस घटना के बाद भारतीय राजदूत खुद स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और दो विशेष टीमें राहत कार्यों में सहायता के लिए घटनास्थल के लिए रवाना हो चुकी हैं।
प्रभावित परिवारों के लिए इमरजेंसी हेल्पलाइन
इस संकट की घड़ी में भारत सरकार ने प्रभावित परिवारों की मदद के लिए 24 घंटे काम करने वाले इमरजेंसी कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिए हैं। हो ची मिन्ह सिटी में स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास के लिए हेल्पलाइन नंबर +84 36 281 7930, +84 91 552 3714 और +84 33 452 0414 जारी किए गए हैं। इसके अतिरिक्त हनोई में स्थित कंट्रोल रूम के लिए +84 91 308 9165 नंबर पर संपर्क किया जा सकता है, जहाँ से हर संभव कूटनीतिक और लॉजिस्टिक्स सहायता प्रदान की जा रही है।
स्थिति की गंभीरता और प्रशासन की कार्रवाई
हादसे में कुछ लोगों के हताहत होने की आशंका जताई गई है, हालांकि हताहतों की सटीक संख्या की आधिकारिक पुष्टि होना अभी शेष है। भारतीय दूतावास के अधिकारी वियतनामी प्रशासन के उच्च अधिकारियों के साथ निरंतर संपर्क में हैं ताकि पीड़ितों को तत्काल सहायता पहुंचाई जा सके। स्थिति पर नज़र बनाए रखने के लिए दूतावास की टीमें आज शाम और रात तक दुर्घटनास्थल पर पहुँचकर बचाव अभियानों को और तेज़ करेंगी। भारत सरकार इस मुश्किल समय में अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
कैथल के ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर इलाज की सुविधा, नए स्वास्थ्य केंद्र भवनों का निर्माण
11 Jul, 2026 03:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कैथल। हरियाणा के कैथल जिले में ग्रामीण स्तर पर चिकित्सा सुविधाओं को सुदृढ़ करने और आम जनता को उनके घर के नजदीक ही बेहतर इलाज मुहैया कराने के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग ने एक बड़ी कार्ययोजना तैयार की है। विभाग द्वारा जिले के कई ग्रामीण इलाकों में जर्जर हो चुके प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की जगह अत्याधुनिक और सर्वसुविधायुक्त नए भवनों का निर्माण कराया जाएगा। बुनियादी ढांचे में होने वाले इस बड़े सुधार से ग्रामीण अंचल में चिकित्सा व्यवस्था का कायाकल्प होगा और मरीजों को इलाज के लिए जिला मुख्यालय की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी।
तीन प्रमुख प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के नए भवनों के निर्माण को मिली मंजूरी
जिला स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, जिले के तीन बड़े गांवों जाखौली, बालू और बाता में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के नए भवनों के निर्माण के प्रशासनिक प्रस्ताव को सरकार की तरफ से अंतिम मंजूरी मिल चुकी है। इन तीनों ही स्थानों पर जल्द ही बजट आवंटन के साथ ही नए परिसरों का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। इन केंद्रों के नए भवन बन जाने से आसपास के दर्जनों गांवों की एक बड़ी आबादी को सीधे तौर पर आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलना सुनिश्चित हो सकेगा।
कंडम और किराए की इमारतों से मुक्ति दिलाने के लिए शासन को भेजा नया प्रस्ताव
इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग ने क्षेत्र के दो अन्य महत्वपूर्ण गांवों पाई और सजूमा के स्वास्थ्य केंद्रों की बदहाली को दूर करने के लिए भी एक विशेष प्रस्ताव उच्च अधिकारियों को भेजा है। वर्तमान में पाई गांव का स्वास्थ्य केंद्र पूरी तरह कंडम और जर्जर हो चुकी बेहद असुरक्षित इमारत में संचालित हो रहा है, जबकि सजूमा गांव का सरकारी अस्पताल पिछले लंबे समय से एक निजी किराए के भवन में जैसे-तैसे चल रहा है। इन दोनों ही स्वास्थ्य केंद्रों के लिए विभागीय स्तर पर जमीन चिह्नित कर नए सरकारी भवनों की मंजूरी मांगी गई है।
नए सर्वसुविधायुक्त परिसर बनने से दूर होगी चिकित्सकों और संसाधनों की भारी कमी
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इन सभी चिन्हित स्थानों पर नए और आधुनिक भवनों का निर्माण पूरा होने के बाद वहां न केवल संसाधनों का विस्तार किया जाएगा, बल्कि चिकित्सा जगत की अन्य आवश्यक सुविधाएं भी बढ़ाई जाएंगी। नए भवनों के अस्तित्व में आते ही इन केंद्रों पर लंबे समय से खाली चल रहे डॉक्टरों, नर्सों और अन्य पैरामेडिकल स्टाफ के स्वीकृत पदों को भी प्राथमिकता के आधार पर भरा जाएगा। स्टाफ की तैनाती और नई चिकित्सा मशीनें आने से ग्रामीण मरीजों को चौबीसों घंटे आपातकालीन सेवाएं मिल सकेंगी।
जिला नागरिक अस्पताल पर बढ़ते मरीजों के अत्यधिक दबाव को कम करने की बड़ी कोशिश
वर्तमान में पूरे कैथल जिले के भीतर बाईस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, छह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, तीन शहरी स्वास्थ्य केंद्र और छह हेल्थ वेलनेस सेंटर संचालित हैं, लेकिन ये सभी केंद्र इस समय डॉक्टरों और जरूरी संसाधनों की गंभीर किल्लत से जूझ रहे हैं। हालात इतने खराब हैं कि बाईस में से बारह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर वर्तमान में एक भी परमानेंट डॉक्टर तैनात नहीं है, जिसके कारण छोटी-मोटी बीमारियों के इलाज के लिए भी ग्रामीणों को जिला नागरिक अस्पताल आना पड़ता है। ग्रामीण केंद्रों के सुधरने से जिला अस्पताल पर मरीजों का यह भारी दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा।
UNSC सीट की दौड़ में भारत का बड़ा कदम, गुटेरेस से मुलाकात करेंगे एस. जयशंकर
11 Jul, 2026 02:16 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
न्यूयॉर्क। विदेश मंत्री एस. जयशंकर अगले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में वर्ष 2028-29 के कार्यकाल के लिए भारत की अस्थायी सीट हेतु आधिकारिक अभियान का शंखनाद करेंगे। कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान की अपनी आधिकारिक यात्रा संपन्न करने के बाद, विदेश मंत्री अमेरिका पहुंच चुके हैं। सोमवार को वे संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान भारत की उम्मीदवारी को औपचारिक रूप से पेश करेंगे। इस दौरे के दौरान उनकी मुलाकात संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से भी प्रस्तावित है।
भारत-ईयू रणनीतिक वार्ता और कूटनीतिक दौरे
संयुक्त राष्ट्र में कार्यक्रमों के बाद, विदेश मंत्री 14-15 जुलाई को ब्रुसेल्स का रुख करेंगे। वहां वे तीसरी 'भारत-ईयू व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद' की बैठक में हिस्सा लेंगे। इस दौरान वे यूरोपीय संघ और बेल्जियम के अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों और वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा करेंगे। भारत की यह सक्रियता विभिन्न वैश्विक मंचों पर अपनी उपस्थिति को और अधिक प्रभावी बनाने की रणनीतिक कोशिश का हिस्सा है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत की दावेदारी और चुनौतियां
भारत ने पिछली बार 2021-22 के कार्यकाल के लिए सुरक्षा परिषद में कार्य किया था। 2028-29 के कार्यकाल के लिए चुनाव अगले साल जून में आयोजित होंगे, जहाँ भारत का मुख्य मुकाबला एशिया-प्रशांत समूह श्रेणी में ताजिकिस्तान के साथ होगा। वर्तमान में दुनिया यूक्रेन युद्ध, गाजा संघर्ष और क्षेत्रीय तनावों जैसी जटिल भू-राजनीतिक स्थितियों से गुजर रही है, ऐसे समय में भारत "#India4UNSC 2028-29 शांति, ग्रह, प्रगति" के संदेश के साथ अपनी दावेदारी पेश कर रहा है।
सुरक्षा परिषद में सुधार की अनिवार्यता
भारत वर्षों से सुरक्षा परिषद के विस्तार और उसमें व्यापक सुधारों की वकालत कर रहा है। भारत का स्पष्ट मानना है कि 1945 में स्थापित यह 15 सदस्यीय परिषद समकालीन विश्व की वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित नहीं करती और 21वीं सदी के लिए अप्रासंगिक हो चुकी है। भारत ने चेतावनी दी है कि यदि केवल अस्थायी श्रेणी का विस्तार हुआ, तो यह सुधार प्रक्रिया विफल हो जाएगी, क्योंकि स्थायी सदस्यों की निर्णय लेने की शक्ति और संरचना में मौलिक बदलाव नहीं आएगा। भारत का तर्क है कि वह अपने बढ़ते आर्थिक और वैश्विक प्रभाव के अनुरूप परिषद में स्थायी स्थान पाने का पूर्ण अधिकारी है।
'Kia Ora' से जुड़े पुराने उपहार का जिक्र, ऑकलैंड में PM मोदी ने सुनाया यादगार किस्सा
11 Jul, 2026 02:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ऑकलैंड। न्यूजीलैंड के अपने ऐतिहासिक दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'किया ओरा' (Kia Ora) के साथ अपने संबोधन की शुरुआत की। 40 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री के न्यूजीलैंड आगमन को उन्होंने अपना सौभाग्य बताया। प्रधानमंत्री ने इस दौरान 140 करोड़ भारतीयों की ओर से शुभकामनाएं प्रेषित कीं। उन्होंने अपनी पुरानी स्मृतियों को साझा करते हुए बताया कि सार्वजनिक जीवन में आने से बहुत पहले, लगभग 25-30 वर्ष पूर्व भी उन्हें न्यूजीलैंड आने का अवसर मिला था।
न्यूजीलैंड की पुरानी यादें और मफलर का भावनात्मक जुड़ाव
प्रधानमंत्री ने अपनी पुरानी यात्रा का जिक्र करते हुए एक भावुक किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि उस समय उन्हें न्यूजीलैंड के एक मित्र ने ठंड से बचने के लिए मफलर, कैप और दस्ताने उपहार में दिए थे। पीएम ने कहा कि उन्होंने उस मफलर को आज भी संभाल कर रखा है और इस बार न्यूजीलैंड आते समय उन्होंने विशेष रूप से उसे अपने साथ रखा क्योंकि वहां ठंड अधिक है। यह घटना दोनों देशों के बीच संबंधों की गहराई और व्यक्तिगत आत्मीयता को दर्शाती है, जिसे प्रधानमंत्री ने अपनी धरोहर की तरह संजोया है।
द्विपक्षीय संबंधों और महिला सशक्तीकरण पर जोर
संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने भारत और न्यूजीलैंड की साझा दोस्ती और प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने खेल के मैदान में न्यूजीलैंड की टीम में भारतीय मूल के खिलाड़ियों के योगदान की सराहना की और देश के विकास में महिलाओं की भूमिका को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि आज भारत में महिलाओं के लिए विकास और संभावनाओं के नए द्वार खुल रहे हैं। खेल से लेकर देश निर्माण तक, दोनों देशों का यह जुड़ाव वास्तव में अद्भुत और असाधारण है।
'मिनी इंडिया' की झलक और वैश्विक नेतृत्व की सराहना
ऑकलैंड के 'स्पार्क एरिना' में 'किया ओरा मोदी' कार्यक्रम के दौरान प्रवासी भारतीयों का उत्साह देखते ही बनता था, जिसने वहां 'मिनी इंडिया' की झलक प्रस्तुत की। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने पीएम मोदी की प्रशंसा करते हुए उन्हें दुनिया के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक बताया। उन्होंने कहा कि साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का नेतृत्व करना और करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकालना मोदी के नेतृत्व की बड़ी सफलता है। इस भव्य आयोजन में भारतीय मूल के हजारों लोगों की उपस्थिति ने दोनों देशों के बीच मजबूत सांस्कृतिक सेतु को और प्रगाढ़ किया है।
17 जुलाई को बदलेगी रेलवे की तस्वीर! पीएम मोदी हरियाणा के 11 स्टेशनों को देंगे नई सौगात
11 Jul, 2026 01:42 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अंबाला। भारतीय रेल के आधुनिकीकरण और यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं प्रदान करने की दिशा में आगामी सत्रह जुलाई का दिन एक नया इतिहास रचने जा रहा है। देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के संकल्प के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'अमृत भारत स्टेशन योजना' के अंतर्गत पूरी तरह पुनर्विकसित किए गए ग्यारह अत्याधुनिक रेलवे स्टेशनों को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने से रेल यात्रा के एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है, जो भारतीय रेलवे की सूरत बदल कर रख देगा।
अंबाला रेल मंडल के चार प्रमुख स्टेशनों को मिला चमचमाता नया स्वरूप
उत्तर रेलवे के अंतर्गत आने वाले अंबाला रेल मंडल के लिए यह गौरव का क्षण है, क्योंकि प्रधानमंत्री द्वारा लोकार्पित किए जाने वाले स्टेशनों में इस मंडल के चार अत्यंत महत्वपूर्ण स्टेशन शामिल हैं। इनमें हिमाचल प्रदेश का अंब अंदौरा, पंजाब का साहिबजादा अजीत सिंह नगर (मोहाली) व पवित्र नगरी आनंदपुर साहिब और हरियाणा का ऐतिहासिक कालका रेलवे स्टेशन शामिल हैं। इन सभी स्टेशनों को स्थानीय संस्कृति और आधुनिक वास्तुकला के बेजोड़ मेल के साथ नए सिरे से तैयार किया गया है, जो अब पर्यटकों और आम यात्रियों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बनेंगे।
करोड़ों रुपये के भारी-भरकम बजट से विकसित की गईं विश्वस्तरीय सुविधाएं
अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत इन रेलवे स्टेशनों के कायाकल्प पर करोड़ों रुपये की भारी-भरकम राशि निवेश की गई है। इस पुनर्विकास का मुख्य उद्देश्य केवल इमारतों का सौंदर्यीकरण करना नहीं, बल्कि उन्हें आने वाले कई दशकों की भविष्य की आवश्यकताओं और यात्रियों की बढ़ती संख्या के अनुरूप ढालना है। स्टेशनों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, लिफ्ट, एस्केलेटर, आधुनिक प्रतीक्षालय, स्वच्छ पेयजल और बेहतर प्रकाश व्यवस्था जैसे वैश्विक स्तर के मानक स्थापित किए गए हैं, जो यात्रियों के सफर को बेहद आरामदायक और सुरक्षित बनाएंगे।
अंब अंदौरा रेलवे स्टेशन के आधुनिकीकरण पर खर्च हुए लगभग चौबीस करोड़
अंबाला मंडल के अंतर्गत आने वाले अंब अंदौरा स्टेशन को विशेष प्राथमिकता देते हुए इसके विकास पर कुल तेईस करोड़ चौरासी लाख रुपये की बड़ी धनराशि खर्च की गई है। इस भारी निवेश के माध्यम से स्टेशन परिसर के प्रवेश और निकास द्वारों को सुगम बनाया गया है, साथ ही साथ प्लेटफार्मों की ऊंचाई बढ़ाने और वहां नए शेड लगाने का कार्य भी पूरा कर लिया गया है। इस स्टेशन के नए स्वरूप में आधुनिक सूचना प्रणाली और दिव्यांगजनों के अनुकूल विशेष रैंप व अन्य मूलभूत सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है।
सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा अनुभव के साथ पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इन नए अत्याधुनिक स्टेशनों के शुरू होने से न केवल आम यात्रियों को पहले से कहीं अधिक सुविधाजनक और सुखद यात्रा का अहसास होगा, बल्कि संबंधित क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। आनंदपुर साहिब और कालका जैसे धार्मिक व पर्यटन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण स्टेशनों के आधुनिक हो जाने से देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में भारी इजाफा होने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय रोजगार और व्यापार के नए अवसर पैदा होंगे।
अमेरिका-ईरान तनाव पर पाकिस्तान की चिंता, शाहबाज शरीफ बोले—'हमले तुरंत बंद हों'
11 Jul, 2026 12:31 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते हवाई हमलों के कारण पश्चिम एशिया में एक बार फिर गंभीर तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इस बिगड़ते हालात के बीच पाकिस्तान ने अपने द्वारा मध्यस्थता किए गए युद्धविराम को बचाने के लिए कूटनीतिक सक्रियता तेज कर दी है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरान और कतर के शीर्ष नेतृत्व से अलग-अलग संवाद किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच ठप पड़ी शांति वार्ता को पुनः बहाल करना और क्षेत्र में स्थिरता स्थापित करना है।
शांति बहाली के लिए पाकिस्तान की कूटनीतिक सक्रियता
शुक्रवार रात प्रधानमंत्री शरीफ ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ विस्तृत चर्चा की, जिसमें उन्होंने क्षेत्र में व्याप्त तनाव पर गहरी चिंता प्रकट की। शरीफ ने जोर दिया कि शांति और स्थिरता बहाल करना समय की मांग है। उन्होंने ईरान से इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन के तहत किए गए वादों के प्रति प्रतिबद्ध रहने का आग्रह किया। इसके साथ ही, उन्होंने कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी से भी संपर्क किया ताकि वार्ता की प्रक्रिया को पटरी पर लाने के लिए कतर की मध्यस्थता का प्रभावी उपयोग किया जा सके।
समझौते का टूटना और परस्पर आरोप-प्रत्यारोप
गौरतलब है कि 18 जून को अमेरिका और ईरान ने पश्चिम एशिया में शांति के लिए इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके बाद स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में तकनीकी वार्ता भी हुई थी। हालांकि, यह युद्धविराम अधिक समय तक कायम नहीं रह सका। अमेरिका ने ईरान पर समझौते का उल्लंघन करने और होर्मुज में व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने का आरोप लगाया, वहीं दूसरी ओर ईरान ने अमेरिका पर समझौते की शर्तों को न मानने का दोष मढ़ दिया है।
तनाव के बीच वैश्विक सुरक्षा की चिंताएं
वर्तमान में दोनों देशों के बीच तनाव एक नए और संवेदनशील मोड़ पर है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी नेतृत्व के विरुद्ध कथित साजिशों की खबरों ने वाशिंगटन और तेहरान के बीच कड़वाहट को और गहरा दिया है, जिसके परिणामस्वरूप अमेरिका ने सख्त तेवर अपना लिए हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि फिलहाल दोनों ओर से सैन्य हमलों में कमी आई है और होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति सामान्य बनी हुई है। पाकिस्तान के ये कूटनीतिक प्रयास अब इस बात पर निर्भर करेंगे कि क्या अमेरिका और ईरान पुनः वार्ता की मेज पर बैठने के लिए तैयार होते हैं।
अंतरिक्ष क्षेत्र में जापान का बड़ा कमाल, रीयूजेबल रॉकेट से दुनिया को चौंकाया
11 Jul, 2026 12:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नोशिरो। जापान की अंतरिक्ष एजेंसी जाक्सा (JAXA) ने अपने प्रयोगात्मक पुन: प्रयोज्य रॉकेट 'आरवी-एक्स' (RV-X) का पहला सफल परीक्षण पूरा कर एक नई उपलब्धि हासिल की है। यह प्रयोग जापान के अंतरिक्ष प्रक्षेपण को किफायती बनाने और वैश्विक बाजार में स्पेसएक्स जैसी प्रतिस्पर्धी कंपनियों के सामने खुद को मजबूती से खड़ा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। नोशिरो परीक्षण केंद्र से उड़ान भरते हुए रॉकेट ने हवा में सटीक नियंत्रण के साथ उड़ान भरी, क्षैतिज रूप से आगे बढ़ा और अंत में सुरक्षित रूप से जमीन पर उतरने में सफलता प्राप्त की।
जापान की नई अंतरिक्ष रणनीति और तकनीक
यह परीक्षण भविष्य के कम लागत वाले रॉकेट विकसित करने के कार्यक्रम का हिस्सा है, जो वर्तमान के एकबारगी इस्तेमाल होने वाले एच-3 रॉकेट का अधिक आधुनिक विकल्प बनेगा। जाक्सा और मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज द्वारा संयुक्त रूप से विकसित आरवी-एक्स रॉकेट 1.8 मीटर व्यास और 7.3 मीटर लंबा है, जिसमें टिकाऊ इंजन और शॉक-एब्जॉर्बिंग लैंडिंग गियर लगाए गए हैं। सरकार इस तकनीक को केवल वाणिज्यिक अंतरिक्ष बाजार के लिए ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण मान रही है।
वैश्विक प्रतिस्पर्धा और एशियाई अंतरिक्ष दौड़
अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में जापान और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है। चीन ने हाल ही में अपने रॉकेट के पहले चरण को सफलतापूर्वक पुन: प्राप्त करने का दावा किया है, जिसके बाद जापान का यह सफल परीक्षण एशियाई देशों के लिए इस दौड़ में बने रहने के संकेत देता है। एलन मस्क की स्पेसएक्स द्वारा पुन: प्रयोज्य रॉकेट के माध्यम से मिशन की लागत को काफी कम कर देने के बाद, अब जापान भी उसी राह पर है ताकि वह वैश्विक लॉन्च बाजार में अपनी विश्वसनीय और प्रतिस्पर्धी क्षमता को स्थापित कर सके।
भविष्य की योजनाएं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग
आगामी समय में जाक्सा इस तकनीक के विस्तार के लिए फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों के साथ मिलकर भी काम कर रहा है। भविष्य की योजनाओं के तहत, आरवी-एक्स रॉकेट को लगभग 100 मीटर की ऊंचाई तक भेजने का लक्ष्य रखा गया है ताकि इसकी क्षमताओं का अधिक व्यापक और गहन परीक्षण किया जा सके। शनिवार के इस सफल परीक्षण के विस्तृत परिणामों पर ऑनलाइन ब्रीफिंग के माध्यम से चर्चा की जाएगी, जो जापान के आगामी अंतरिक्ष मिशनों के लिए दिशा तय करने में सहायक साबित होगी।
ईरान पर ट्रंप का तीखा हमला, बोले—'मेरी हत्या हुई तो अमेरिका देगा करारा जवाब'
11 Jul, 2026 11:04 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने एक बार फिर चिंताजनक स्थिति उत्पन्न कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक अत्यंत कठोर सैन्य चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि उनकी जान लेने का कोई भी प्रयास किया गया, तो अमेरिका ईरान पर भारी हमला करने के लिए पूरी तरह तैयार है। ट्रंप ने अपनी चेतावनी में दावा किया है कि ईरान पर निशाना साधती हुई 1000 मिसाइलें वर्तमान में तैयार हैं और भविष्य की आवश्यकता के अनुसार उनकी संख्या में और अधिक वृद्धि की जा सकती है।
ट्रंप की सैन्य चेतावनी और जवाबी कार्रवाई का संकल्प
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सार्वजनिक रूप से कहा कि यदि ईरानी सरकार द्वारा उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की हत्या की साजिश रची जाती है, तो अमेरिका इसका तत्काल और विनाशकारी जवाब देगा। उन्होंने उल्लेख किया कि अमेरिकी सेना को आवश्यक निर्देश दिए जा चुके हैं और अमेरिका के पास ईरान के हर हिस्से को पूरी तरह से नष्ट करने की सामरिक क्षमता मौजूद है। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि इस सैन्य तैयारी को लंबे समय तक बनाए रखा जा सकता है, जो ईरान के लिए एक कड़ा संदेश है।
ईरान का अविश्वास और पूर्ण रक्षा की तैयारी
दूसरी ओर, ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने अमेरिका पर तीखा प्रहार करते हुए साफ कर दिया है कि तेहरान को वाशिंगटन पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं है। गालिबाफ ने हाल ही में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ हुई बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान किसी भी समझौते से अमेरिका के पीछे हटने की स्थिति में अपनी पूर्ण रक्षा के लिए तैयार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल वही देश अमेरिका से संवाद कर सकता है जो हर परिस्थिति में युद्ध के लिए मुस्तैद हो, और ईरान अपनी सुरक्षा व जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए किसी भी सीमा तक जाने को तैयार है।
सीजफायर के खात्मे की घोषणा
तनाव के इसी क्रम में राष्ट्रपति ट्रंप ने एक अन्य बयान में यह भी स्पष्ट किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच पूर्व में लागू सीजफायर अब पूरी तरह समाप्त हो चुका है। हालांकि ट्रंप ने यह भी स्वीकार किया कि ईरान ने उनसे बातचीत जारी रखने का आग्रह किया था, जिस पर अमेरिका ने सहमति तो दी है, लेकिन सीजफायर की शर्तों को अब पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है। इन बयानों ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद की जगह सैन्य टकराव की संभावनाओं को और अधिक बढ़ा दिया है।
ब्रिटिश शाही परिवार में पिघली बर्फ! किंग चार्ल्स और हैरी-मेगन की ऐतिहासिक मुलाकात
11 Jul, 2026 10:18 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन। ब्रिटिश शाही परिवार के भीतर वर्षों से चले आ रहे गतिरोध को समाप्त करने की दिशा में एक सकारात्मक पहल देखने को मिली है। किंग चार्ल्स तृतीय ने शुक्रवार को अपने छोटे बेटे प्रिंस हैरी, बहू मेगन मार्कल और उनके दोनों बच्चों आर्ची व लिलिबेट से शाही आवास हाईग्रोव हाउस में मुलाकात की। यह मिलन छह साल पहले शाही जिम्मेदारियों को त्यागकर अमेरिका में बसने के बाद से परिवार के पुनर्मिलन की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रतीकात्मक कदम माना जा रहा है।
शाही परिवार के पुनर्मिलन का सुखद पल
प्रिंस हैरी अपनी ब्रिटेन यात्रा के दौरान चैरिटी कार्यक्रमों में व्यस्त थे, लेकिन इस बीच उनकी अपने पिता किंग चार्ल्स और क्वीन कैमिला के साथ भेंट ने सभी अटकलों पर विराम लगा दिया है। बकिंघम पैलेस ने भी इस मुलाकात की पुष्टि की है, जो शाही परिवार के रिश्तों में आई कड़वाहट को दूर करने के लिए एक बड़ी संभावना के रूप में देखी जा रही है। लंबे समय बाद अपने दादा किंग चार्ल्स के साथ बच्चों के समय बिताने को भी इस मुलाकात का एक विशेष पहलू माना जा रहा है।
मुलाकात की राह में आई चुनौतियां और तनाव
यह मिलन आसान नहीं था, क्योंकि आधिकारिक प्रोटोकॉल और प्रिंस हैरी के शाही अधिकारियों के बीच कुछ असहज स्थितियाँ उत्पन्न हुई थीं। आवास को लेकर उपजे विवाद ने स्थिति को कुछ समय के लिए तनावपूर्ण बना दिया था, जब हैरी को बकिंघम पैलेस में ठहरने का निमंत्रण देने के बाद उसे वापस ले लिया गया। इन तमाम अनबन के बावजूद, पिता-पुत्र की इस मुलाकात ने साबित किया है कि व्यक्तिगत संबंध शाही मर्यादा और प्रशासनिक जटिलताओं से ऊपर हो सकते हैं।
कानूनी लड़ाई और रिश्तों में सुधार की उम्मीद
हाल ही में प्रिंस हैरी को ब्रिटिश टैबलॉयड मीडिया के खिलाफ अपनी कानूनी लड़ाई में एक बड़ा झटका लगा है, जिससे उनके शाही परिवार के साथ रिश्तों में और भी तनाव आने की चर्चाएँ थीं। हालांकि, कैंसर का उपचार करवा रहे 77 वर्षीय किंग चार्ल्स के साथ संबंधों को सुधारने के लिए हैरी ने अपनी प्रतिबद्धता पहले भी जाहिर की है। सितंबर में हुई संक्षिप्त भेंट के बाद यह शुक्रवार की मुलाकात शाही रिश्तों की बर्फ पिघलाने और भविष्य में एक नई शुरुआत की उम्मीदों को बल देती है।
मोदी के न्यूजीलैंड दौरे की बड़ी उपलब्धि, भारत-न्यूजीलैंड के बीच 2030 रोडमैप पर बनी सहमति
11 Jul, 2026 09:40 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ऑकलैंड । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की न्यूजीलैंड यात्रा ने दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को एक नई ऊंचाई प्रदान की है। चार दशकों के लंबे अंतराल के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा की गई इस यात्रा को भारत और न्यूजीलैंड के बीच रणनीतिक साझेदारी का एक नया अध्याय माना जा रहा है। इस ऐतिहासिक दौरे के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के लिए कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जो भविष्य में दोनों देशों की प्रगति को नई दिशा देंगे।
रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई मजबूती
भारत और न्यूजीलैंड ने संबंधों को रणनीतिक स्तर पर ले जाने के लिए 'रोडमैप 2030' तैयार किया है, जिसके तहत अगले चार वर्षों में व्यापार, रक्षा, मैरीटाइम सुरक्षा, पर्यटन, संस्कृति, खेल, कृषि तकनीक और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आपसी सहयोग को सुदृढ़ किया जाएगा। दोनों राष्ट्र साल 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 7 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य पर सहमत हुए हैं। इसके अतिरिक्त, समुद्री सुरक्षा को बेहतर बनाने हेतु फ्रेमवर्क तैयार करने, हाइड्रोग्राफी और नॉटिकल कार्टोग्राफी में डेटा साझा करने तथा सैन्य स्तर पर लॉजिस्टिकल सपोर्ट के लिए महत्वपूर्ण समझौते किए गए हैं।
सुरक्षा और आपदा प्रबंधन में साझा पहल
आतंकवाद की वैश्विक चुनौती से निपटने के लिए दोनों देशों ने एक विशेष वर्किंग ग्रुप बनाने का निर्णय लिया है, जो खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान और समन्वय को बढ़ाएगा। इसके अलावा, भारत की एनडीआरएफ और न्यूजीलैंड की नेशनल इमरजेंसी मैनेजमेंट एजेंसी के बीच आपदा प्रबंधन को लेकर करार हुआ है। इसमें भूकंप, सुनामी और तटीय खतरों से निपटने की तैयारी के साथ ही आपसी जानकारी साझा करने पर जोर दिया गया है। साथ ही, लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने हेतु विदेश मंत्री स्तर की वार्षिक वार्ता और संसदीय आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर भी सहमति बनी है।
कृषि, संस्कृति और तकनीकी सहयोग का विस्तार
कृषि और तकनीकी क्षेत्र में सहयोग के तहत नगालैंड और उत्तराखंड में 'किवी फ्रूट एक्शन प्लान' की शुरुआत की गई है और भारत में किवी फ्रूट एक्सीलेंस सेंटर्स स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही, दोनों देशों के संबंधित मंत्रालयों के बीच मत्स्य पालन, पशुपालन, डेयरी, पर्यटन, खेल विज्ञान और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए समझौते किए गए हैं। न्यूजीलैंड का 'ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस' में शामिल होना स्वच्छ ऊर्जा के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जबकि गोवा के नेशनल सेंटर फॉर पोलर एंड ओशन रिसर्च और न्यूजीलैंड के बीच हुआ समझौता वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में नए द्वार खोलेगा।
धारूहेड़ा हादसा: डंपर से भिड़ा कैंटर, आग की लपटों में घिरा वाहन, चालक सुरक्षित
11 Jul, 2026 09:13 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दिल्ली-जयपुर हाईवे पर भीषण सड़क दुर्घटना: टक्कर के बाद कैंटर में लगी आग, चालक और परिचालक बाल-बाल बचे
शनिवार की सुबह दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया। यहाँ सावरियां होटल के समीप एक तेज गति से आ रहे कैंटर ने आगे चल रहे डंपर को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। भिड़ंत इतनी भीषण थी कि कैंटर के इंजन में अचानक आग भड़क उठी और देखते ही देखते पूरा वाहन आग का गोला बन गया। गनीमत यह रही कि दुर्घटना के तुरंत बाद चालक और क्लीनर सूझबूझ दिखाते हुए वाहन से बाहर कूद गए, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
हाईवे पर मची अफरा-तफरी, दमकल विभाग ने पाया आग पर काबू
चश्मदीदों के मुताबिक, हादसे के बाद हाईवे पर चीख-पुकार मच गई और आसमान में काले धुएं का गुबार साफ देखा जाने लगा। स्थानीय लोगों ने बिना वक्त गंवाए तुरंत पुलिस और दमकल केंद्र को मामले की जानकारी दी। खबर मिलते ही धारूहेड़ा थाना पुलिस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां घटनास्थल पर पहुँचीं। फायर फाइटर्स ने काफी प्रयासों के बाद लपटों पर नियंत्रण पाया, लेकिन तब तक कैंटर पूरी तरह राख हो चुका था।
सड़क पर वाहनों की टक्कर से भड़की चिंगारी
शुरुआती तफ्तीश में सामने आया है कि दोनों वाहन दिल्ली से जयपुर की दिशा में आगे बढ़ रहे थे। इसी दौरान सावरियां होटल के पास कैंटर अनियंत्रित होकर डंपर के पिछले हिस्से से जा टकराया। टक्कर लगते ही कैंटर के अगले हिस्से में शॉर्ट सर्किट या घर्षण की वजह से आग लग गई, जिसने चंद मिनटों में ही पूरे ट्रक को अपनी चपेट में ले लिया।
यातायात रहा बाधित, पुलिस जांच में जुटी
इस अचानक हुए हादसे के चलते दिल्ली-जयपुर मार्ग पर कुछ देर के लिए वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और जाम की स्थिति बन गई। मौके पर मौजूद पुलिस टीम ने क्रेन की मदद से दुर्घटनाग्रस्त गाड़ियों को रास्ते से हटवाया और हाईवे पर ट्रैफिक को दोबारा बहाल किया। पुलिस प्रशासन द्वारा दुर्घटना के सही कारणों का पता लगाने के लिए मामले की बारीकी से जांच की जा रही है। राहत की सबसे बड़ी बात यह रही कि किसी की जान नहीं गई, हालांकि वाहन के जलने से भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।
हादसे के बाद प्रशासन सख्त, सुपरवाइजर पर गिरी गाज और कंपनी हुई ब्लैकलिस्ट
