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ऑस्ट्रेलिया में नियम तोड़ने वाले प्लेटफॉर्म्स की जांच शुरू
3 Apr, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कैनबरा । 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए ऑस्ट्रेलिया में लागू किए गए सोशल मीडिया प्रतिबंध के नियमों का पालन नहीं करने वाले पांच बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ जांच शुरू कर दी गई है। दिसंबर में लागू किए गए इन नियमों के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चे उनके प्लेटफॉर्म तक पहुंच न बना सकें। यदि कोई कंपनी इस दिशा में पर्याप्त कदम नहीं उठाती है, तो उस पर 4.95 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि कुछ प्लेटफॉर्म उम्र सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर लापरवाही बरत रहे हैं और बच्चों को आसानी से उम्र सीमा पार करने के विकल्प दे रहे हैं। साथ ही, उम्र-सीमित खातों की रिपोर्टिंग के लिए भी प्रभावी व्यवस्था नहीं दी गई है।
सरकार ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि नियमों की अनदेखी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। देश की संचार मंत्री अनिका वेल्स ने कहा कि जो कंपनियां व्यवस्थित रूप से अपनी कानूनी जिम्मेदारियों को निभाने में विफल रही हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि ऑस्ट्रेलिया में कारोबार करने वाली सभी कंपनियों को स्थानीय कानूनों का पालन करना ही होगा। ई-सेफ्टी कमिश्नर जूली इनमैन ग्रांट ने भी संकेत दिए हैं कि अब यह नीति लागू करने के निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है और आने वाले समय में निगरानी और कड़ी की जाएगी।
सरकार ने संबंधित प्लेटफॉर्म्स को संभावित उल्लंघनों के बारे में सूचित कर दिया है और जांच प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस सख्ती का असर भी तेजी से देखने को मिला है। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, प्रतिबंध लागू होने के बाद 16 साल से कम उम्र के बच्चों के करीब 47 लाख सोशल मीडिया अकाउंट्स को बंद या निष्क्रिय कर दिया गया है। यह कदम बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाने और डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
चीन ने बनाया विशाल कार वाहक सुपर जहाज, समा जाएंगी 10,000 से ज्यादा गाड़ियां
3 Apr, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। चीन के क्वांगचो शिपयार्ड इंटरनेशनल ने एक कार वाहक जहाज बनाया है, जिसने दुनिया को हैरान कर दिया है। यह जहाज इतना विशाल है कि इसमें 10,000 से भी ज्यादा गाड़ियां एक साथ समा सकती हैं। इस विशालकाय जहाज ने अपने समुद्री परीक्षण की शुरुआत कर दी है। दक्षिण कोरिया की एचएमएम कंपनी के लिए बनाया गया यह जहाज समुद्री व्यापार की दुनिया में गेम-चेंजर साबित होने वाला है। यह दुनिया का पहला ऐसा दोहरे ईंधन वाला पोत है, जिसकी क्षमता पांच अंकों में पहुंच गई है।
आधुनिक तकनीक और विशाल आकार के मेल ने इसे शिपिंग इंडस्ट्री का ‘बाहुबली’ बना दिया है। इस जहाज की लंबाई 230 मीटर और चौड़ाई 40 मीटर है। इसका स्ट्रक्चरल ड्राफ्ट 10.5 मीटर रखा गया है, ताकि गहरे समुद्र में यह पूरी स्थिरता के साथ चल सके। इस जहाज की रफ्तार 19 समुद्री मील यानी करीब 36 किलोमीटर प्रति घंटा है। यह रफ्तार भारी भरकम माल की ढुलाई और समय की बचत के बीच एक बेहतरीन तालमेल पेश करती है। इसकी बनावट में सुरक्षा और गति दोनों का ध्यान रखा गया है।
इस जहाज का सबसे आकर्षक हिस्सा इसका इंटरनल डिजाइन है। इसमें 14 डेक वाला एक विशाल गैराज बनाया गया है। यह डिजाइन इतना लचीला है कि इसमें सिर्फ छोटी कारें ही नहीं, बल्कि भारी ट्रक भी आसानी से रखे जा सकते हैं। यह जहाज इलेक्ट्रिक वाहनों और हाइड्रोजन ऊर्जा से चलने वाली आधुनिक कारों को सुरक्षित ले जाने में सक्षम है। इसकी 10,800 वाहनों की क्षमता इसे दुनिया के सबसे बड़े कार वाहकों की लिस्ट में टॉप पर ले आती है। आजकल समुद्री जहाजों से होने वाला प्रदूषण एक बड़ी चिंता है, लेकिन यह नया जहाज डीजल और एलएनजी दोनों ईंधनों का उपयोग करता है।
कार वाहक जहाजों का निर्माण करना बहुत ही जटिल काम माना जाता है। यह उच्च तकनीक और भारी निवेश वाला क्षेत्र है। चीन के क्वांगचो शिपयार्ड ने इस जहाज को बनाकर यह साबित कर दिया है कि वह इस तकनीक में पूरी दुनिया का नेतृत्व कर रहा है। 10,000 से ज्यादा वाहनों की क्षमता वाला यह सफल मॉडल अब वैश्विक बाजार में चीन की पकड़ को और मजबूत करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ऐसे और भी विशाल जहाजों की मांग बढ़ेगी। जब एक ही बार में इतनी बड़ी संख्या में वाहन ट्रांसपोर्ट किए जाएंगे, तो शिपिंग की लागत में कमी आएगी। इसका सीधा असर वाहनों की कीमत और डिलीवरी के समय पर पड़ेगा। खासकर भविष्य की इलेक्ट्रिक गाड़ियों को दुनिया भर में पहुंचाने के लिए यह जहाज एक लाइफलाइन का काम करेगा।
ट्रंप ने फिर ईरान को धमकाया कहा- पाषाण युग में भेज देंगे, तेल के कुओं को तबाह करना आसान
3 Apr, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को देश के नाम संबोधन में ईरान के विरुद्ध जारी सैन्य कार्रवाई पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। ट्रंप ने दावा किया कि पिछले एक महीने के युद्ध में ईरान की नौसेना, वायुसेना और मिसाइल क्षमता पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। उन्होंने तेल ठिकानों का जिक्र करते हुए कहा कि वे सबसे आसान लक्ष्य हैं, लेकिन अब तक उन पर हमला इसलिए नहीं किया गया क्योंकि इससे ईरान को दोबारा संभलने का कोई मौका नहीं मिलता।
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ईरान के पास अब कोई प्रभावी वायु रक्षा प्रणाली या रडार शेष नहीं है, जिससे अमेरिकी सेना सैन्य रूप से अजेय हो गई है। युद्ध विराम की अटकलों के बीच राष्ट्रपति ने घोषणा की कि अमेरिकी अभियान फिलहाल जारी रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगले दो से तीन हफ्तों में ईरान पर और भी घातक हमले किए जाएंगे ताकि उसे पूरी तरह पस्त किया जा सके। बातचीत की गुंजाइश पर ट्रंप ने कहा कि उनका लक्ष्य सत्ता परिवर्तन नहीं था, लेकिन नेतृत्व खत्म होने से वहां अब नया और अधिक समझदार समूह सक्रिय है। राष्ट्रपति ने सीधी धमकी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही कोई समझौता नहीं हुआ, तो ईरान के सभी बिजली संयंत्रों को एक साथ निशाना बनाकर उसे पाषाण युग में धकेल दिया जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अमेरिकी जनता अब इस युद्ध को जल्द समाप्त होते देखना चाहती है।
खत्म कर देंगे तेल के कुऐं
ट्रंप ने ईरान के तेल क्षेत्रों को लेकर सीधी धमकी देते हुए कहा कि अमेरिका ने अब तक जानबूझकर इन ठिकानों को निशाना नहीं बनाया है, लेकिन यदि हमला हुआ तो वे पूरी तरह नष्ट हो जाएंगे। वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बात करते हुए उन्होंने दावा किया कि अमेरिका का तेल उत्पादन अब सऊदी अरब और रूस के कुल उत्पादन से भी अधिक है, इसलिए ईंधन की कीमतों में मौजूदा वृद्धि केवल अल्पकालिक है। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य के मुद्दे पर उन्होंने सहयोगी देशों को नसीहत दी कि अब इसकी सुरक्षा का नेतृत्व अन्य देशों को स्वयं करना चाहिए। उन्होंने दुनिया को चुनौती दी कि वे अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अमेरिका पर भरोसा करें और अपनी सुरक्षा के लिए साहस जुटाएं।
जिसे जरुरत है वो खुलवाए होर्मुज
ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका अब विदेशी तेल पर निर्भर नहीं है और अन्य देशों को अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए स्वयं कदम उठाने चाहिए। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का विशेष जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा कि जो देश मध्य पूर्व के तेल पर आश्रित हैं, उन्हें इस समुद्री मार्ग को खुला रखने की जिम्मेदारी खुद लेनी होगी। उन्होंने साफ संकेत दिया कि अमेरिका इस मामले में अब नेतृत्व नहीं करेगा, बल्कि प्रभावित देशों को स्वयं साहस दिखाना होगा। ट्रंप ने उन देशों पर भी निशाना साधा जो ईरान के खिलाफ कार्रवाई में शामिल नहीं हुए, और उन्हें अमेरिकी तेल खरीदने का सुझाव दिया। संबोधन के दौरान उन्होंने इजरायल और खाड़ी देशों जैसे सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। ईरान पर तीखा हमला करते हुए ट्रंप ने कहा कि उसे कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाना चाहिए, क्योंकि वह इसका इस्तेमाल पूरी दुनिया को ब्लैकमेल करने और अस्थिरता पैदा करने के लिए करेगा।
इंडोनेशिया के मोलुक्का सागर में 7.6 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, सुनामी के साथ एक की मौत
3 Apr, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जकार्ता। इंडोनेशिया के उत्तरी मोलुक्का सागर में गुरुवार को 7.6 तीव्रता के एक बेहद शक्तिशाली भूकंप ने भीषण तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा के कारण न केवल कई इमारतें क्षतिग्रस्त हुई हैं, बल्कि समुद्र में सुनामी की लहरें भी पैदा हो गई हैं। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, अब तक मलबे में दबने से एक व्यक्ति की मौत की पुष्टि हो चुकी है। भूकंप का केंद्र फिलीपींस के तट से लगभग 580 किलोमीटर दूर समुद्र में स्थित था, जिसके झटके मलेशिया और ताइवान तक महसूस किए गए।
इंडोनेशिया की मौसम विज्ञान एजेंसी ने बताया कि भूकंप के बाद तटीय क्षेत्रों में पांच अलग-अलग स्थानों पर सुनामी की लहरें देखी गईं, जिनमें सबसे ऊंची लहर उत्तरी सुलावेसी में 0.75 मीटर दर्ज की गई। मुख्य झटके के बाद 11 आफ्टरशॉक भी महसूस किए गए, जिनमें सबसे तेज झटका 5.5 तीव्रता का था। अधिकारियों ने शुरुआत में लहरों के 3 मीटर तक ऊंचे उठने की आशंका जताई थी, जिसके कारण तटीय इलाकों में रहने वाले लोग दहशत में अपने घरों से बाहर निकल आए। मानाडो इलाके में एक खेल प्राधिकरण की इमारत का हिस्सा गिरने से एक व्यक्ति की जान चली गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, झटके इतने तेज थे कि अलमारियों में रखा सामान गिर गया और कई क्षेत्रों की बिजली कट गई।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस भूकंप का असर देखा गया। अमेरिकी सुनामी चेतावनी केंद्र ने शुरुआत में इंडोनेशिया, फिलीपींस और मलेशिया के लिए खतरनाक सुनामी का अलर्ट जारी किया था, जिसे बाद में वापस ले लिया गया। जापान, ताइवान और पापुआ न्यू गिनी के तटों पर भी मामूली लहरें उठने का अंदेशा जताया गया है। राष्ट्रीय आपदा एजेंसी फिलहाल घरों और चर्चों को हुए नुकसान का विस्तृत आकलन कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इंडोनेशिया पैसिफिक रिंग ऑफ फायर पर स्थित होने के कारण दुनिया का सबसे अधिक भूकंपीय सक्रिय क्षेत्र है, जहाँ टेक्टोनिक प्लेटों के टकराने से अक्सर ऐसे विनाशकारी झटके और सुनामी की स्थिति पैदा होती रहती है। फिलहाल प्रशासन ने लोगों को समुद्र तटों से दूर रहने और सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
VC पर शिकंजा, भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच विजिलेंस करेगी
3 Apr, 2026 08:12 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। हरियाणा के चार विश्वविद्यालयों में वर्तमान व पूर्व कुलपतियों (वीसी) पर वित्तीय अनियमितताओं व भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। सरकार ने इन मामलों की जांच के लिए समग्र फाइल राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसएंडएसीबी) के पास भेज दी है। इन कुलपतियों में गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय (जीजेयू) हिसार के कुलपति प्रो. नरसी राम, दीनबंधु छोटू राम विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीसीआरयूएसटी) मुरथल के प्रो. प्रकाश सिंह, श्री कृष्ण आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय (एसकेएयू) कुरुक्षेत्र के प्रो. करतार सिंह धीमान और महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) रोहतक पूर्व वीसी प्रो. राजबीर सिंह हैं। इन चारों के खिलाफ सरकार को कई शिकायतें मिली थीं। इसके बाद मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने जांच के लिए एसएंडएसीबी के डीजपी डॉ. अर्शिंदर सिंह चावला को फाइल भेजी दी। उनको एक तय समयसीमा में जांच पूरी करने के निर्देश दिए गए है। आरोप सही पाए जाने पर विजिलेंस तत्काल मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी भी कर सकती है। चावला ने बताया कि चारों विश्वविद्यालयों में भ्रष्टाचार संबंधित शिकायत आई है। अभी वरिष्ठ स्तर पर अधिकारियों की तरफ से जांच की जा रही है, जल्द ही आगे की जानकारी देंगे।
ये हैं आरोप
विद्यार्थी कोष के लगभग 50 करोड़ रुपये में हेराफेर किए जाने का आरोप है। आरोप है कि इस राशि को सरकारी बैंक के बजाय निजी बैंक में कम ब्याज दर पर फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) के रूप में रखा गया, जिससे विश्वविद्यालय को भारी वित्तीय नुकसान हुआ।
जीजेयू हिसार, प्रो. नरसी राम
नॉन-टीचिंग स्टाफ की भर्ती में बड़े पैमाने पर अनियमितता बरतने का आरोप है। इन आरोपों को लेकर वीसी ने कहा कि उनके कार्यकाल में अब तक नॉन टीचिंग स्टाफ की भर्ती नहीं की गई है और न इस तरह का मामला उनके सामने आया है। कब और किस वीसी के कार्यकाल में ऐसा हुआ, इसकी जानकारी उनको नहीं है।
एसकेएयू, प्रो करतार सिंह धीमान
आरक्षण नियमों और भर्ती रोस्टर का उल्लंघन करने के आरोप हैं। उन्होंने कहा कि आरोप बेबुनियाद हैं और किसने लगाए, यह भी कोई पता नहीं है। उनके पास कोई शिकायत व सवाल भी नहीं आया है। किसी भी प्रकार की कोई अनियमितता आरक्षण रोस्टर में भर्ती के दौरान नहीं की गई। समाज कल्याण विभाग से संबंध कर रोस्टर बनवाया गया और सरकार के नियमानुसार ही भर्ती की गई। एक एसोसिएट प्रोफेसर व 36 सहायक प्रोफेसर पदों पर भर्ती निकाली गई थी जिनमें 23 योग्य अभ्यर्थी मिले थे और उन्हें पूरे नियमों के अनुसार ही प्रक्रिया कर मार्च में ज्वाइन भी करवा दिया गया। बाकी पदों के लिए फिर से भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
एमडीयू रोहतक, पूर्व कुलपति राजबीर सिंह
विश्वविद्यालय परिसर के लिए 20 हजार पौधों की खरीद में वित्तीय हेराफेरी और नियुक्तियों में अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल करने के आरोप हैं।
ट्रंप के पूर्व आध्यात्मिक सलाहकार रॉबर्ट मॉरिस यौन शोषण के मामले में जेल से हुए रिहा
3 Apr, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान उनके धार्मिक सलाहकार (रिलिजियस एडवाइजर) रहे रॉबर्ट मॉरिस, एक नाबालिग बच्ची के यौन शोषण के आरोप में छह महीने की जेल की सजा काटने के बाद बाहर आ गए हैं। मॉरिस, जो एक मेगाचर्च के पादरी और प्रसिद्ध टेलीएवेंजेलिस्ट रहे हैं, को 1980 के दशक में एक 12 वर्षीय बच्ची के साथ दुर्व्यवहार करने का दोषी पाया गया था।
रॉबर्ट मॉरिस की पहचान ट्रंप के करीबी आध्यात्मिक सहयोगियों में रही है। साल 2016 में उन्हें ट्रंप के इवेंजेलिकल एग्जीक्यूटिव एडवाइजरी बोर्ड में शामिल किया गया था और उन्होंने 2020 में टेक्सास स्थित अपने गेटवे चर्च में ट्रंप की मेजबानी भी की थी। हालांकि, उनके अतीत के काले कारनामों ने उनके करियर और साख पर गहरा दाग लगा दिया। अदालती कार्यवाही के दौरान यह सामने आया कि जब मॉरिस एक प्रचारक के रूप में काम कर रहे थे, तब उन्होंने एक 12 साल की बच्ची का पांच साल तक यौन उत्पीड़न किया। पीड़िता ने अदालत को बताया कि क्रिसमस के दिन से शुरू हुआ यह सिलसिला वर्षों तक चला और मॉरिस ने उसे चुप रहने के लिए धमकाया भी था।
सुनवाई के दौरान मॉरिस ने स्वीकार किया कि उन्होंने बच्ची के साथ गलत व्यवहार किया और उसे कई बार अनुचित तरीके से स्पर्श किया, हालांकि उन्होंने यौन संबंधों से इनकार किया। अदालत ने उन्हें 10 साल की सजा सुनाई थी, जिसे बाद में निलंबित कर दिया गया, लेकिन हाल ही में छह महीने की जेल काटने के बाद उन्हें रिहा किया गया। रिहाई के बाद पीड़िता ने संतोष जताते हुए कहा कि उसे आखिरकार न्याय मिल गया है। अपनी रिहाई के बाद मॉरिस ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए कहा कि उन्होंने दशकों पहले जो किया वह पूरी तरह गलत था और उसके लिए कोई बहाना नहीं दिया जा सकता। उन्होंने पीड़िता और उसके परिवार के प्रति आभार व्यक्त किया कि उन्होंने इस सच को दुनिया के सामने लाने की हिम्मत दिखाई। यह मामला सामने आने के बाद मॉरिस ने अपने चर्च के पादरी पद से भी इस्तीफा दे दिया था।
‘ईरान को 2-3 हफ्तों में नष्ट कर देंगे’, ट्रंप ने होर्मुज की धमकी दी
2 Apr, 2026 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Donald trump Statement: इजरायल-ईरान और अमेरिका के बीच शुरू जंग को 34 दिन बीच चुके हैं. इस दौरान ट्रंप ने कई बार युद्ध खत्म करने की बात कही. लेकिन फिर किसी बात का हवाला देते हुए टाल दिया. आज गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने देश में राष्ट्र के नाम संबोधन किया है. जिसमें लोगों को उम्मीद थी कि ट्रंप इस दौरान सीजफायर की घोषणा कर सकते हैं. लेकिन उन्होंने इस दौरान कहा कि अगले 2-3 हफ्तों में ईरान पर ज़ोरदार हमला करेंगे. ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को रोक रखा था. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ट्रंप ने कहा कि हम हम होर्मुज स्ट्रेट में जाएंगे और इसकी सुरक्षा भी करेंगे. फिलहाल, मिडिल ईस्ट में तनाव की स्थिति बनी हुई है.
ट्रम्प ने कहा, “मेरी पहली प्राथमिकता हमेशा कूटनीति का रास्ता ही रहा है, फिर भी उस शासन ने परमाणु हथियारों की अपनी लगातार खोज जारी रखी और किसी भी समझौते के हर प्रयास को ठुकरा दिया. इसी कारण से, जून में मैंने ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ के तहत ईरान की प्रमुख परमाणु सुविधाओं पर हमला करने का आदेश दिया. इसके बाद भी परमाणु हथियारों की अपनी खोज को छोड़ने का कोई इरादा नहीं बनाया. उन्होंने कहा कि ईरान के पास कुछ ऐसे हथियार थे जिनके बारे में किसी को यकीन ही नहीं था कि वे उनके पास हैं. हमें अभी-अभी इस बारे में पता चला और हमने उन्हें खत्म कर दिया.
कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दूंगा
राष्ट्र को संबोधित करते हुए ट्रम्प ने कहा, “मैं जानकारी देना चाहता हूं कि ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ अमेरिका की सुरक्षा और आजाद दुनिया की हिफाजत के लिए क्यों जरूरी है. जिस पहले दिन, 2015 में मैंने राष्ट्रपति पद के लिए अपने चुनाव अभियान की घोषणा की थी, उसी दिन मैंने यह कसम खाई थी कि मैं ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दूंगा. यह शासन पिछले 47 सालों से ‘अमेरिका का नाश हो, इजरायल का नाश हो’ के नारे लगाता आ रहा है. ईरान ने अमेरिका और इजरायल के साथ अनगिनत जघन्य अपराध किए.”
ट्रंप ने सैनिकों को दिया धन्यवाद
ट्रम्प ने कहा, “मौजूदा हालात पर चर्चा के दौरान सबसे पहले मैं अपने सैनिकों को भी धन्यवाद देना चाहता हूं, जिन्होंने वेनेज़ुएला देश को कुछ ही मिनटों में अपने कब्जे में लेने का शानदार काम किया. वह हमला तेज, जानलेवा, ज़ोरदार था और पूरी दुनिया में हर किसी ने उसकी तारीफ की. अब हमारे पास दुनिया में कहीं भी सबसे मज़बूत सेना है. हम भारी मात्रा में तेल और गैस के उत्पादन और बिक्री में बहुत अच्छा तालमेल बिठा रहे हैं.”
ईरान में अमेरिका के निशाने पर हैं अल-कायदा के आतंकी: रक्षा मंत्री हेगसेथ
2 Apr, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। ईरान के साथ बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ अपने अभियान को और अधिक विस्तार देने के संकेत दिए हैं। पेंटागन ने स्पष्ट किया है कि ईरान के भीतर सक्रिय अल-कायदा से जुड़े तत्व अब अमेरिकी सेना के सीधे निशाने पर हैं। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस बात पर जोर दिया कि ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियानों के बावजूद, अमेरिका का प्राथमिक ध्यान आतंकवाद-रोधी कार्रवाइयों पर पूरी तरह केंद्रित है। रक्षा मंत्री हेगसेथ ने कड़े शब्दों में कहा कि अल-कायदा अभी भी अमेरिका का प्रमुख दुश्मन बना हुआ है और ईरान में इस संगठन के कई सदस्य उनकी टारगेट लिस्ट में शामिल हैं।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई भी व्यक्ति अल-कायदा से जुड़ा है और ईरानी क्षेत्र का उपयोग अपनी गतिविधियों के लिए कर रहा है, तो उसे एक वैध सैन्य लक्ष्य माना जाएगा। पेंटागन के इस रुख से यह स्पष्ट हो गया है कि अगर ईरानी शासन आतंकवादियों को शरण देना जारी रखता है, तो उन ठिकानों पर अमेरिकी हमले निश्चित हैं। यह बयान उन खुफिया रिपोर्टों के बाद आया है जिनमें ईरान के भीतर अल-कायदा नेतृत्व की मौजूदगी की आशंका जताई गई थी।
इस सैन्य रणनीति के साथ-साथ जॉइंट चीफ्स के चेयरमैन जनरल डैन केन ने भी संकेत दिया कि ईरान की सैन्य संरचना पर दबाव लगातार बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी सेना प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग केंद्रों, हथियारों के भंडारण स्थलों और अनुसंधान सुविधाओं के खिलाफ सटीक हमले जारी रखे हुए है। इस दबाव का उद्देश्य न केवल ईरान की सैन्य शक्ति को कम करना है, बल्कि उग्रवादी समूहों के लिए उपलब्ध संसाधनों और सुरक्षित पनाहगाहों को भी नष्ट करना है।
अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी सैन्य अभियान अंतरराष्ट्रीय कानूनों और स्थापित प्रक्रियाओं के तहत ही संचालित किए जा रहे हैं। जनरल केन के अनुसार, किसी भी हमले से पहले नागरिक जोखिमों और कानूनी पहलुओं पर सावधानीपूर्वक विचार किया जाता है। अमेरिका के इन ताजा बयानों से यह संकेत मिलता है कि अब यह संघर्ष केवल दो देशों की पारंपरिक सेनाओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह ईरानी क्षेत्र में मौजूद गैर-राज्य तत्वों और आतंकवादी नेटवर्कों के खिलाफ एक व्यापक युद्ध का रूप ले सकता है। अमेरिका ने साफ कर दिया है कि वह अपनी क्षेत्रीय स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए किसी भी खतरे को निष्क्रिय करने में संकोच नहीं करेगा।
प्रॉपर्टी दिलाने के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा, कंपनी कर्मी से ठगी
2 Apr, 2026 11:06 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रेवाड़ी (हरियाणा)। शहर में एक कंपनी कर्मी से 59 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि प्रॉपर्टी दिलाने के नाम पर उसके नाम से विभिन्न बैंकों से लोन करवाकर रकम हड़प ली गई। शिकायत के आधार पर कसौला थाना पुलिस ने 9 बैंकों के अधिकारियों, एक महिला समेत 12 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस को दी शिकायत में रेवाड़ी निवासी डीके ने बताया कि वह बावल स्थित एक कंपनी में कार्यरत है। 19 अक्तूबर 2024 को कंपनी के एक साथी के माध्यम से उसकी मुलाकात गढ़ी बोलनी रोड स्थित एक सोसायटी में रहने वाले राकेश और अनिल से हुई। राकेश ने खुद को रियल एस्टेट कारोबारी बताते हुए उसे प्रॉपर्टी में निवेश का झांसा दिया।
आठ बैंकों से कराया लोन
पीड़ित के अनुसार, पहले आरोपियों ने धारूहेड़ा की एक कंपनी के जरिए लोन लेकर रकम अपने खाते में ट्रांसफर कराने और बदले में प्लॉट की रजिस्ट्री कराने की बात कही, जिसे उसने ठुकरा दिया। इसके बाद आरोपी उसके दस्तावेज लेकर 20 लाख रुपये का लोन कराने का झांसा देकर आठ बैंकों में आवेदन कर बैठे। 30 अक्तूबर से 5 नवंबर 2024 के बीच आरोपियों ने आठ बैंकों से उसके नाम पर कुल 59,19,513 रुपये का लोन ले लिया।
ईएमआई भरने का दिया भरोसा
जब पीड़ित को इस बारे में पता चला और उसने विरोध जताया तो आरोपियों ने खुद ही ईएमआई भरने का भरोसा दिया। इस दौरान राकेश ने सिक्योरिटी के नाम पर उसके चेक भी अपने पास रख लिए। आरोप है कि इन्हीं चेकों का दुरुपयोग कर 30 अक्तूबर से 7 नवंबर के बीच उसके खाते से 59 लाख रुपये निकाल लिए गए।
जमीन भी निकली विवादित
पीड़ित ने बताया कि 14 नवंबर को आरोपियों ने 750 वर्गगज में से 400 वर्गगज जमीन उसके नाम कर दी और बाकी जल्द दिलाने का आश्वासन दिया। बाद में जांच करने पर पता चला कि उक्त जमीन पर पहले से ही किसी अन्य व्यक्ति का कब्जा है। राकेश ने शुरुआत में 13 किस्तें जमा करवाईं, लेकिन बाद में फ्लैट बेचकर फरार हो गया।
बाउंस हुए चेक
12 दिसंबर 2025 को राकेश ने लोन चुकाने के लिए फरवरी 2026 तारीख के 35 लाख और 33,99,167 रुपये के दो चेक दिए, लेकिन बैंक में लगाने पर दोनों चेक बाउंस हो गए। पीड़ित का आरोप है कि राकेश इससे पहले भी करीब 30 लोगों के साथ इसी तरह की ठगी कर चुका है। इस मामले में कसौला थाना पुलिस ने राकेश, अनिल और ममता के अलावा बैंक के संबंधित अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
दुर्घटनाग्रस्त हुआ अमेरिका का एफ-35 फाइटर जेट, पायलट ने इजेक्ट कर बचाई खुद की जान
2 Apr, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नेवादा। अमेरिका के नेवादा राज्य में लास वेगास के पास स्थित नेलिस एयर फोर्स बेस पर एक बड़ा हादसा सामने आया है, जहाँ वायुसेना का एक अत्याधुनिक एफ-35 फाइटर जेट उड़ान के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। शुरुआती अपुष्ट खबरों में इस विमान के एफ -15 होने की चर्चा थी, लेकिन बाद में आधिकारिक सूत्रों और सैन्य बयानों के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया कि क्रैश होने वाला विमान वास्तव में एफ -35 फाइटर जेट था। यह घटना नेवादा के क्लार्क काउंटी इलाके में हुई, जिससे सैन्य हलकों में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
वायुसेना द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, यह हादसा अमेरिकी समयानुसार शाम करीब 5 बजे के आसपास हुआ। जैसे ही विमान में तकनीकी खराबी या असंतुलन की स्थिति पैदा हुई, बेस पर तुरंत इमरजेंसी अलर्ट जारी कर दिया गया। राहत की बात यह रही कि विमान के जमीन से टकराने से ठीक पहले पायलट ने सूझबूझ का परिचय देते हुए सुरक्षित तरीके से इजेक्ट कर लिया। हालांकि, हादसे के शुरुआती कुछ समय तक पायलट का लोकेशन स्पष्ट नहीं हो पा रहा था, जिसके कारण तत्काल प्रभाव से एक सघन सर्च ऑपरेशन (खोजी अभियान) चलाया गया।करीब 5 बजकर 42 मिनट पर राहत टीमों को पायलट को खोजने में सफलता मिली। जांच के बाद पता चला कि पायलट सुरक्षित है और उसे केवल मामूली चोटें आई हैं, जिसके बाद उसे उपचार के लिए मेडिकल टीम के पास भेज दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, विमान का मलबा लास वेगास से लगभग 25 मील उत्तर-पूर्व में स्थित इंडियन स्प्रिंग्स इलाके के पास मिला है। यह इलाका आबादी से दूर होने के कारण जमीन पर किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है।
वर्तमान में अमेरिकी वायुसेना की इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीमें और सुरक्षाकर्मी मौके पर तैनात हैं और पूरे प्रभावित क्षेत्र की घेराबंदी कर दी गई है। हालांकि शुरुआती कयासों में तकनीकी खराबी या उड़ान के दौरान संतुलन खोने की बात कही जा रही है, लेकिन हादसे के वास्तविक कारणों का अभी तक आधिकारिक खुलासा नहीं हुआ है। अमेरिकी वायुसेना ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं ताकि दुर्घटना के मूल कारणों का पता लगाया जा सके और भविष्य में इस तरह की महंगी सैन्य संपत्तियों के नुकसान और जोखिम को रोका जा सके।
इराक में अवार्डी अमेरिकी पत्रकार का अपहरण, घसीटकर कार में बैठाकर हुए फरार
2 Apr, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बगदाद। इराक की राजधानी बगदाद में मंगलवार को सड़कों पर चहल-पहल थी, तभी कुछ अज्ञात नकाबपोश आए और एक अमेरिकी पत्रकार को पकड़कर ले गए। ये अवॉर्ड विनिंग अमेरिकी पत्रकार शेली किटल्सन थीं, जिनका बीच बाजार अपहरण कर लिया गया है। इराकी आंतरिक मंत्रालय और पुलिस सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है। ये पूरी खौफनाक घटना सीसीटीवी में साफ दिखाई दे रही है।
मीडिया रिपोर्ट में चश्मदीदों और पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि शेली किटल्सन अपनी कार से कहीं जा रही थीं, तभी दो गाड़ियों ने उनका रास्ता रोक लिया। फुटेज में दिख रहा है कि हथियारबंद नकाबपोशों ने शेली की कार का दरवाजा जबरन खोला और उन्हें अपनी गाड़ी की ओर ले गए। चश्मदीदों का कहना है कि शेली चिल्लाती रहीं, लेकिन अपहरणकर्ता ने उन्हें बंदूक की बट मारकर चुप करा दिया और अपनी गाड़ी में बैठाकर फरार हो गए।
शेली किटल्सन कोई साधारण नाम नहीं हैं, वे एक जांबाज और अवॉर्ड विनिंग जर्नलिस्ट हैं जो लंबे समय से मिडिल ईस्ट के खतरनाक इलाकों से रिपोर्टिंग कर रही हैं। शेली के पास अमेरिकी पासपोर्ट है, जो इस किडनैपिंग को एक अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मुद्दा बनाता है। शेली अक्सर इराक और सीरिया में सक्रिय आतंकी गुटों और मिलिशिया के खिलाफ लिखती रही हैं। माना जा रहा है कि उनकी हालिया रिपोर्टिंग की वजह से ही वे किसी ताकतवर गुट के निशाने पर आ गईं। बताया जा रहा है कि किडनैप होने के बाद अमेरिकी पत्रकार शेली को छुड़ा लिया गया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक इराकी सुरक्षा बलों ने अपहरणकर्ताओं की कार का पीछा किया। इस दौरान किडनैपर्स की गाड़ी अनियंत्रित होकर पलट गई। सुरक्षा बलों ने मौके से एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया है और पत्रकार को उनके चंगुल से छुड़ा लिया। बताया जा रहा है कि गाड़ी पलटने के कारण शेली किट्लसन को चोटें आई हैं, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।
प्लॉट और नौकरी का झांसा, तीन लोगों से लाखों की ठगी
2 Apr, 2026 09:10 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बहादुरगढ़ (हरियाणा)। बहादुरगढ़ के आर्य नगर निवासी एक शिक्षक सहित तीन लोगों से सस्ते प्लॉट और सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर करीब 11 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। पीड़ितों ने आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। शिकायतकर्ता विक्रांत पुत्र प्रताप सिंह ने बताया कि वह दिल्ली के झाड़ौदा स्थित एक निजी स्कूल में अध्यापक है। वह गांव गोयला कलां निवासी अभिषेक को पिछले 6-7 वर्षों से जानता है। आरोप है कि नवंबर 2025 में अभिषेक ने एचएसवीपी के सेक्टर-11 बहादुरगढ़ में कम कीमत पर मकान दिलाने और विक्रांत को लैंड रिकॉर्ड एंड रेवेन्यू विभाग में तथा उसकी पत्नी पूनम को केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय के तहत बहादुरगढ़ कोर्ट में सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा दिया।
इसके अलावा आरोपी ने विक्रांत के साले दिनेश और पड़ोसन निर्मला को भी सस्ते प्लॉट दिलाने का लालच दिया। भरोसा कर पीड़ितों ने अलग-अलग समय पर आरोपी को करीब 11 लाख रुपये दे दिए। आरोप है कि आरोपी ने नौकरी और प्लॉट के नाम पर फर्जी जॉइनिंग लेटर, आईडी कार्ड और अन्य दस्तावेज भी उपलब्ध कराए। बाद में जांच करने पर कागजात फर्जी पाए गए। पीड़ितों ने जब रुपये वापस मांगे तो आरोपी ने केवल आंशिक राशि लौटाई और बाकी पैसे देने में टालमटोल कर रहा है। पीड़ितों ने पुलिस से मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।
परमाणु हथियारों की होड़ का जिन्न आया बोतल से बाहर, सऊदी, तुर्की, जापान ने भरी हुंकार
2 Apr, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अमेरिका-इजराल लगातार ईरान पर बमबारी कर रहे हैं। वहीं ईरान भी लगातार उनके हमलों का जवाब पूरी ताकत से दे रहा है। इस युद्ध ने दुनिया को एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहां से वापसी का रास्ता धुंधला नजर आता है। पिछले एक साल में अमेरिका-इजराइल ने ईरान पर दो बड़े हमले किए। इन हमलों का मुख्य मकसद ईरान की परमाणु क्षमता को खत्म करना था, जिसे अमेरिका और इजराइल अपने लिए खतरा मानते हैं। ईरान में पिछले पांच हफ्तों से सैन्य अभियान जारी है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जानकारों का मानना है कि इस जंग ने दुनिया भर में परमाणु हथियारों की होड़ के उस जिन्न को बोतल से बाहर निकाल दिया है, जिसे दशकों तक काबू में रखने की कोशिश की गई थी। ईरान में शासन बदलने और उसके परमाणु कार्यक्रम को जमींदोज करने की जिद अब उल्टी पड़ती नजर आ रही है। यूरोप से लेकर पूर्वी एशिया तक के देश अपनी परमाणु नीति पर दोबारा विचार करने को मजबूर हैं। कई देश अब इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि क्या उन्हें अपने शक्तिशाली सहयोगियों पर आंख मूंदकर भरोसा करना चाहिए? ट्रंप प्रशासन की अनिश्चितता और बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच, अब अपनी संप्रभुता बचाने के लिए खुद के परमाणु हथियार बनाने का विकल्प सबसे ऊपर आ गया है। यह शीत युद्ध के बाद बनी वैश्विक व्यवस्था से एक बहुत बड़ा भटकाव है।
एक वक्त था जब कई देश अमेरिका की परमाणु छतरी के नीचे खुद को महफूज मानते थे, लेकिन आज स्थिति बदल चुकी है। यूरोप में जर्मनी और पोलैंड जैसे देश अब फ्रांस के उस प्रस्ताव पर गंभीरता से चर्चा कर रहे हैं, जिसमें यूरोपीय परमाणु गारंटी की बात कही गई है। उन्हें डर है कि अमेरिका किसी भी वक्त अपने हाथ खींच सकता है। वहीं, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में जापान और दक्षिण कोरिया की चिंताएं भी चरम पर हैं।
खुद अमेरिका ने भी संकेत दिए हैं कि वह 33 साल के अंतराल के बाद परमाणु परीक्षण फिर से शुरू कर सकता है। रूस की पोसीडॉन अंडरवाटर ड्रोन और ब्यूरेवेस्टनिक क्रूज मिसाइल जैसी तकनीक ने अमेरिका की नींद उड़ा दी है। सऊदी अधिकारियों ने पहले ही साफ कर दिया था कि अगर ईरान बम बनाता है, तो वे भी पीछे नहीं रहेंगे। हाल ही में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए रक्षा समझौते ने इस आग में घी डालने का काम किया है। पाकिस्तान ने संकेत दिए हैं कि जरूरत पड़ने पर उसके परमाणु हथियार सऊदी अरब के लिए उपलब्ध रहेंगे।
नाटो सदस्य तुर्की भी इस दौड़ से बाहर नहीं रहना चाहता। तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान परमाणु शक्ति बनता है, तो तुर्की को भी इस रेस में शामिल होना पड़ेगा। ईरान के खिलाफ मौजूदा सैन्य कार्रवाई ने दुनिया को एक कड़ा सबक दिया है। लीबिया और यूक्रेन जैसे देशों का उदाहरण सबके सामने है, जिन्होंने अपने परमाणु विकल्प छोड़ दिए और बाद में उन्हें बाहरी हमलों का सामना करना पड़ा।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के महानिदेशक राफेल मारियानो ग्रॉसी ने इस प्रवृत्ति पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि ज्यादा देशों के पास परमाणु हथियार होने से दुनिया सुरक्षित नहीं, बल्कि और भी खतरनाक हो जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि आज का माहौल परमाणु हथियारों के पक्ष में वैसा ही है जैसा पहले कभी नहीं था। अगर देशों को लगता है कि सामूहिक सुरक्षा का वादा सिर्फ एक दिखावा है, तो वे निश्चित रूप से सबसे बड़े हथियार की ओर ही देखेंगे।
ईरान युद्ध ने उस अंतरराष्ट्रीय तंत्र की पोल खोल दी है जो परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के लिए बनाया गया था। ईरान की संसद में अब एनपीटी से बाहर निकलने के लिए बिल पेश किया जा रहा है। उनका तर्क है कि जब यह संधि उनके ठिकानों की रक्षा नहीं कर सकती, तो इसमें रहने का कोई मतलब नहीं है। अप्रैल 2026 में न्यूयॉर्क में होने वाली एनपीटी रिव्यू कॉन्फ्रेंस में बड़े टकराव की आशंका है।
मौसम विभाग का अलर्ट, ठंडी हवाओं का असर जारी रहेगा
2 Apr, 2026 08:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिसार (हरियाणा)। मार्च महीने के आखिरी दिन ओलावृष्टि-बारिश के बाद बुधवार को दिन भर आसमान में बादल छाए रहे। ओलावृष्टि के बाद दिन व रात के तापमान में गिरावट रही। अप्रैल में भी लगातार 7 से 8 पश्चिम विक्षोभ सक्रिय होंगे। इस वजह से तापमान सामान्य या इससे कम ही रहेगा। 2 अप्रैल की रात से नया पश्चिम विक्षोभ सक्रिय होने से कुछ क्षेत्रों में हल्की बूंदाबांदी के आसार हैं। मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि अप्रैल में भी मौसम में लगातार बदलाव देखने को मिलेंगे। अप्रैल महीने में कुल 7-8 पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होंगे। पहले पखवाड़े में लगातार एक के बाद एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होंगे। 2-3 अप्रैल ,दूसरा 7-8 अप्रैल को फिर बाद 11-12 अप्रैल से उत्तरी पर्वतीय क्षेत्रों पर बर्फबारी और मैदानी राज्यों विशेषकर हरियाणा एनसीआर दिल्ली में बार बार मौसम में बदलाव देखने को मिलेंगे। इस दौरान हरियाणा एनसीआर दिल्ली में आंधी चलने के साथ साथ बारिश हो सकती है जिसकी वजह से संपूर्ण इलाके में दिन और रात के तापमान सामान्य और सामान्य से नीचे बने रहेंगे। दूसरे पखवाड़े में 1-2 पश्चिमी विक्षोभ कमजोर पड़ती नजर आ रही हैं। गुजरात और राजस्थान पर एक प्रति चक्रवातीय परिसंचरण तंत्र विकसित होने की वजह से संपूर्ण मैदानी राज्यों विशेषकर हरियाणा एनसीआर दिल्ली में तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। तीसरे सप्ताह में प्रति चक्रवातीय परिसंचरण तंत्र कमजोर पड़ने लगेगा और पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से हरियाणा एनसीआर दिल्ली में अप्रैल माह के अंतिम 10 दिनों के दौरान एक बार फिर से मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा। इस दौरान बारिश और तेज गति से हवा चल सकती है।
बिजली गिरने से किशोर की मौत
गांव कंवलगढ़ में मंगलवार शाम को बिजली गिरने से किशोर दिलबाज (15) की मौत हो गई। मृतक के चाचा करमजीत ने बताया कि उनका घर खेत में ढाणी के तौर पर बने हुए हैं। बारिश के चलते दिलबाज पॉलिथीन से घर की छत को ढक रहा था। इसी दौरान तेज गर्जना के साथ दिलबाज पर बिजली गिर गई। इससे वह बुरी तरह से झुलस गया और मौके पर ही उसने दम तोड़ दिया। पुलिस ने मृतक के चाचा करमजीत के बयान पर इत्तफाकिया कार्रवाई कर शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया है।
ट्रंप का एक और दावा: ईरान के नए राष्ट्रपति ने सीजफायर की मांग रखी, लेकिन ‘होर्मुज स्ट्रेट’ खोले बगैर नहीं होगा युद्धविराम
2 Apr, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के “नए राष्ट्रपति” ने अमेरिका से संपर्क कर युद्धविराम (सीजफायर) की गुजारिश की है। ट्रंप ने यह बात अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर साझा की।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट करते हुए अपने ताजा बयान में कहा, कि ईरान के नए नेतृत्व का रवैया पहले की तुलना में कम कट्टर और अधिक समझदार है, और उसने अमेरिका से युद्ध रोकने का अनुरोध किया है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वे ईरान के किस नेता की बात कर रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका तभी युद्धविराम पर विचार करेगा, जब होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से खुला, सुरक्षित और स्वतंत्र रूप से संचालित होगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ऐसा नहीं हुआ, तो अमेरिका ईरान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रखेगा। अपने बयान में उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर ईरान को “स्टोन एज” तक धकेल दिया जाएगा।
पहले भी कर चुके हैं बड़ा दावा
इससे पहले भी ट्रंप ने कहा था कि वे 2–3 हफ्तों के भीतर ईरान से जुड़े संघर्ष को समाप्त कर सकते हैं। उनका यह ताजा बयान कुछ और ही कह रहा है, जिसमें स्पष्टता का अभाव बताया गया है। ट्रंप के इस दावे पर कई सवाल भी उठ रहे हैं। उन्होंने “नए राष्ट्रपति” का नाम नहीं बताया, जिससे बात होने की बात उन्होंने कही है। ईरान की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। ऐसे में यह बयान फिलहाल राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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