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पंचायत विभाग के खाते से फर्जी चेक के जरिए निकाली गई रकम
25 Feb, 2026 11:24 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में धोखाधड़ी की परतें खुलने लगी हैं। बैंक में विकास एवं पंचायत विभाग के पूर्व निदेशक डीके बहरा के फर्जी चेक व फर्जी डेबिट नोट से पैसे निकाले गए। डीके बहरा 28 अक्तूबर को विभाग का चार्ज छोड़ चुके हैं। इसके बावजूद उनके हस्ताक्षरयुक्त फर्जी चेक से बैंक से पैसे निकलते रहे जबकि विभाग ने बैंक में नए निदेशक के हस्ताक्षर अपडेट करवा दिए थे। एंटी करप्शन ब्यूरो में दर्ज एफआईआर के मुताबिक पंचायत विभाग ने 26 सितंबर 2025 को आईडीएफसी फर्स्ट बैंक व एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में एक-एक खाता खुलवाया। आईडीएफसी बैंक में 50 करोड़ रुपये और एयू स्मॉल बैंक में 25 करोड़ रुपये जमा करवाए गए। यह मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना का पैसा था।
जनवरी में विभाग को बैंक के स्टेटमेंट में कुछ गड़बड़ी दिखाई दी। विभाग ने बीती 13 जनवरी को दोनों बैंकों से कहा गया कि वे विभाग का खाता बंद कर एक्सिस बैंक में सारा पैसा ट्रांसफर कर दें। एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक ने सारा पैसा ब्याज के साथ जमा कर दिया लेकिन आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने 50 करोड़ में से सिर्फ एक करोड़ 27 लाख रुपये जमा कराए। इस पर विभाग ने बैंक को रिकॉर्ड के साथ तलब कर लिया। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के रिकॉर्ड को जब खंगाला गया तो पता चला कि पूर्व निदेशक बीके बहरा के हस्ताक्षरयुक्त फर्जी चेक व फर्जी डेबिट नोट से एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में पैसे ट्रांसफर किए गए जबकि बहरा 28 अक्तूबर को पद छोड़ चुके थे। जांच में यह भी सामने आया है कि एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक से यह पैसा स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट के खाते में डाले गए। पंचायत विभाग ने एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक से भी रिकॉर्ड मंगवाया था, मगर इस बैंक ने अपना रिकॉर्ड पंचायत विभाग को जमा नहीं कराया। एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक से ही 14 बार लेन देन के जरिये करीब 47 करोड़ रुपये दूसरे एकाउंट में ट्रांसफर हुए। इस मामले में अब एंटी करप्शन ब्यूरो सभी पहलुओं से बारीकी से जांच कर रही है।
पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ प्रदर्शन के लिए Chandigarh जा रहे थे
25 Feb, 2026 10:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिसार। कांग्रेस के 25 फरवरी को चंडीगढ़ में प्रस्तावित विधानसभा घेराव-विरोध प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने बुधवार की सुबह कांग्रेस ग्रामीण जिला अध्यक्ष बृजलाल बहबलपुरिया को उनके घर से हिरासत में ले लिया। पुलिस ने सुबह 5 बजे उनके गांव बहबलपुर स्थित पैतृक आवास से हिरासत में लिया। इसके बाद उनको हिसार सदर थाने लाया गया है। बरवाला विधानसभा से कांग्रेस की टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ने वाले भूपेंद्र गंगवा को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है। पूर्व चैयरमेन भूपेंद्र गंगवा बुधवार को जब चंडीगढ़ की ओर निकल रहे थे तो सूरेवाला चौक पर तैनात पुलिस ने उनकी गाड़ी को रुकवा कर उनको हिरासत में ले लिया। पुलिस ने उनकी गाड़ियों को भी जब्त किया है। जानकारी मिलने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ता एकत्र हो रहे हैं।
किम जोंग-उन उत्तर कोरिया के सुप्रीम लीडर बने रहेगे, फिर चुने गए महासचिव
24 Feb, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्योंग यांग। उत्तर कोरिया की सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया (केडब्ल्यूपी) ने किम जोंग-उन को एक बार फिर पार्टी का महासचिव चुन लिया है। बताया गया है, कि पार्टी की नौवीं कांग्रेस में यह निर्णय देश के विकास और समृद्धि के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सरकारी एजेंसी ने सोमवार को बताया, कि किम जोंग-उन के नेतृत्व में देश की परमाणु युद्ध-प्रतिरोधक क्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। पार्टी ने कहा कि महासचिव के रूप में उनकी पुनर्नियुक्ति पार्टी सदस्यों, जनता और सैनिकों की सामूहिक इच्छा को दर्शाती है। यह फैसला कांग्रेस के चौथे दिन लिया गया। आमतौर पर कई दिनों तक चलने वाली इस कांग्रेस के समापन पर अगले पांच वर्षों के लिए अर्थव्यवस्था, रक्षा और कूटनीति से जुड़े प्रमुख नीतिगत लक्ष्य तय किए जाते हैं। पार्टी नियमों के मुताबिक महासचिव का चुनाव पार्टी कांग्रेस में ही होता है, जिसे देश की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था माना जाता है।
कांग्रेस में किम जोंग-उन की सराहना करते हुए उन्हें मजबूत और ‘क्रांतिकारी सशस्त्र सेनाओं’ का निर्माण करने वाला नेता बताया गया, जो किसी भी प्रकार के युद्ध और बाहरी आक्रामकता से निपटने में सक्षम हैं। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया, कि परमाणु बलों को केंद्र में रखकर देश की रक्षा क्षमता में क्रांतिकारी सुधार हुआ है और कठिन वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद राज्य समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
पार्टी सचिव री इल-ह्वान ने कांग्रेस को संबोधित करते हुए दावा किया कि वैश्विक अशांति और प्रतिबंधों के बीच भी किम जोंग-उन ने देश को स्थिरता और विकास के मार्ग पर आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि उत्तर कोरिया ने बाहरी दबावों को निष्प्रभावी करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रभावशाली पहचान बनाई है। उल्लेखनीय है कि यह कांग्रेस वर्ष 2021 के बाद पहली बार आयोजित की गई है, जिसे आने वाले वर्षों की नीतियों और रणनीतियों के निर्धारण के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नेपाल में पोखरा से काठमांडू जा रही बस त्रिशूली नदी में गिरी, 18 यात्रियों की हुई मौत
24 Feb, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काठमांडु। नेपाल में सोमवार तड़के एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। पोखरा से राजधानी काठमांडू जा रही एक यात्री बस अनियंत्रित होकर धादिंग जिले में त्रिशूली नदी में जा गिरी। इस दुखद घटना में अब तक 18 यात्रियों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 25 अन्य घायल हैं। यह हादसा सोमवार तड़के करीब 1:15 बजे पृथ्वी हाईवे पर बेनिघाट रोरांग ग्रामीण नगरपालिका-3 के चिनाधारा, चरौंडी इलाके में हुआ।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, बस तेज रफ्तार में थी और अचानक सड़क से फिसलकर करीब 300 मीटर गहरी ढलान से नीचे गिरती हुई सीधे नदी किनारे जा पहुंची। बस की हालत इतनी खराब थी कि उसके परखच्चे उड़ गए। जिला ट्रैफिक पुलिस प्रमुख शिशिर थापा ने बताया कि मृतकों में 11 पुरुष और 6 महिलाएं शामिल हैं। घायलों में भी महिलाओं और पुरुषों के साथ एक नाबालिग लड़की है, जिनमें से कई की स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है। हादसे की खबर मिलते ही नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस की टीमें स्थानीय लोगों के साथ राहत और बचाव कार्य में जुट गईं। पहाड़ी इलाका और रात का घना अंधेरा होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। नेपाल में हाल के दिनों में यह दूसरा बड़ा सड़क हादसा है। इससे पहले 6 फरवरी को बैतडी जिले में एक शादी समारोह से लौट रही बस खाई में गिर गई थी, जिसमें 13 लोगों की जान चली गई थी। लगातार हो रहे इन जानलेवा हादसों ने नेपाल के पहाड़ी रास्तों पर सड़क सुरक्षा के दावों की पोल खोल दी है। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है, हालांकि प्रारंभिक तौर पर खराब सड़कें, तेज रफ्तार और चालक की थकान को बड़ी वजह माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ी रास्तों पर रात के समय लंबी दूरी की यात्रा और सुरक्षा मानकों की अनदेखी अक्सर ऐसे भयावह परिणामों का कारण बनती है। फिलहाल घायलों का उपचार नजदीकी अस्पतालों में चल रहा है और प्रशासन मृतकों की शिनाख्त की प्रक्रिया में जुटा है।
माइग्रेशन की मांग को लेकर बढ़ा आंदोलन, प्रशासन पर दबाव
24 Feb, 2026 10:22 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हांसी (हरियाणा)। नारनौंद नर्सिंग कॉलेज की छात्राएं माइग्रेशन की मांग के लिए पिछले 12 दिन से हांसी विधायक विनोद भयाना के आवास के बाहर धरना दे रही हैं। विधायक के आवास के बाहर सोमवार को पांच छात्राएं भूख हड़ताल पर बैठीं। देर रात करीब 11 बजे एक छात्रा की अचानक तबीयत बिगड़ गई। जिसको नागरिक अस्पताल हांसी में भर्ती कराया गया। छात्राओं ने मंगलवार को विधायक आवास घेराव का एलान किया हुआ है। धरने पर बैठी मुस्कान को उपचार के लिए एंबुलेंस से नागरिक अस्पताल ले जाया गया। मुस्कान नर्सिंग कॉलेज की फोर्थ सेमेस्टर की छात्रा है। धरना कमेटी के अनुसार विधायक ने 15 दिन में माइग्रेशन कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। धरना और घेराव में किसान और मजदूर भी शामिल होंगे।
मलेशिया में आया 7.1 तीव्रता का भूकंप, गहराई ज्यादा होने से नहीं हुआ कोई नुकसान
24 Feb, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। मलेशिया में रविवार-सोमवार को जोरदार भूकंप के झटके महसूस किए गए। अमेरिका के सीस्मोलॉजिस्ट के मुताबिक सोमवार सुबह मलेशिया के सबा राज्य के पास बोर्नियो आइलैंड भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिपोर्ट में बताया गया है कि भूकंप की तीव्रता रिएक्टर स्केल पर 7.1 मापी गई थी। बताया जा रहा है कि भूकंप का सेंटर कोस्टल स्टेट कैपिटल कोटा किनाबालु से 100 किलोमीटर से दूर था। इसकी गहराई 619.8 किलोमीटर थी, जिसकी वजह से तीव्रता ज्यादा होने के बावजूद जान-माल की कम क्षति होने की संभावना है। बता दें भूकंप भारतीय समयानुसार 10 बजकर 27 मिनट पर आया।
रिपोर्ट के मुताबिक भूकंप के तुरंत बाद तटीय इलाकों में सुनामी को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं। हालांकि, अमेरिकी सुनामी चेतावनी केंद्र ने कोई अलर्ट जारी नहीं किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भूकंप की अत्यधिक गहराई का मतलब है कि सुनामी आने की कोई उम्मीद नहीं है। मलेशियाई मौसम विभाग ने इस भूकंप की तीव्रता को 6.8 मैग्नीट्यूड बताया है विभाग के मुताबिक सबा के पश्चिमी तट और सरवाक राज्य के कई इलाकों में झटके महसूस किए गए। विभाग स्थिति पर बारीकी से नजर रखे हुए है और किसी भी आपात स्थिति के लिए प्रशासन को अलर्ट कर दिया गया है।
रंजिश के चलते हुई थी सत्यवान की हत्या, जांच में सामने आया सच
24 Feb, 2026 09:26 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रोहतक। खेड़ी साध प्रॉपर्टी डीलर सत्यवान अपहरण कांड का खुलासा हो गया है। धर्मेंद्र हत्याकांड की रंजिश के चलते ही जमानत पर आए हत्या आरोपी सत्यवान की शनिवार दोपहर गोली मारकर हत्या की गई थी। मंगलवार सुबह गिरफ्तार आरोपी भिवानी जिले के गांव भापड़ौदा निवासी मंजीत उर्फ माफिया की निशानदेही पर पुलिस ने कन्हेली हेड के पास जेएलएन से शव बरामद कर लिया। साल 2018 में नए साल के जश्न के दौरान खेड़ी साध गांव में युवक धर्मेंद्र की गोली मारकर हत्या की गई थी। पुलिस ने पड़ोसी प्रॉपर्टी डीलर सत्यवान को गिरफ्तार किया था। लंबे समय तक जेल में रहने के बाद सत्यवान छह माह जमानत पर बाहर आया था। 20 फरवरी को उसकी कार खरावड़ मंदिर के नजदीक आउटर बाईपास के किनारे पर लावारिस मिली। कार पर अंधाधुंध फायरिंग की हुई थी। चार गोलियां कार में लगी थी। घटनास्थल से 15 खोल बरामद हुए थे। घटना के बाद से ही सत्यवान का सुराग नहीं लग रहा था। एसपी ने ब्लाइंड केस को सुलझाने के लिए एसआईटी का गठन किया था। इसमें सीआईए की टीम के अलावा आईएमटी थाना पुलिस को भी साथ लिया था परिजनों ने दिल्ली के गांव जाड़ौदा निवासी प्रदीप डागर व प्रदीप के परिजनों पर शक जताया था। पुलिस ने अपहरण का मामला दर्ज कर जांच की। जांच के दौरान पुलिस ने भिवानी जिले के गांव भापड़ौदा निवासी मंजीत उर्फ माफिया व भाली गांव निवासी मनीष को काबू किया। पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि पुरानी रंजिश के चलते ही सत्यवान की हत्या हुई है। अब पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी कि हत्याकांड में प्रदीप डागर या अन्य आरोपियों की भूमिका है या नहीं।
चार गोलियां लगी हैं सत्यवान को, तीन पेट व एक चेहरे पर
पुलिस मंगलवार सुबह आरोपी मंजीत को लेकर कन्हेली हेड पर पहुंची। आरोपी ने बताया कि प्रॉपर्टी डीलर सत्यवान ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था। शव को वे अपनी कार में डालकर कन्हेली हेड पर पहुंचे। वहां नहर में फेंक दिया। इसके बाद मौके से भाग गए। प्रॉपर्टी डीलर सत्यवान की हत्या पुरानी रंजिश के चलते हुई है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। हत्याकांड में सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी लेने वाले सुंदर राठी उर्फ काला की कोई भूमिका अब तक सामने नहीं आई है। डाली गई पोस्ट दहशत फैलाने का हिस्सा हो सकती है।
‘मार-ए-लागो’ रिसॉर्ट में घुसने की कोशिश करते समय मारा गया शख्स कई दिनों से था लापता
24 Feb, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फ्लोरिडा स्थित ‘मार-ए-लागो’ रिसॉर्ट की सुरक्षा में एक बार फिर सेंधमारी की कोशिश हुई है। हालांकि अमेरिकी सीक्रेट सर्विस ने इस खतरे को भांप लिया और एक हथियारबंद घुसपैठिए को मौके पर ही ढेर कर दिया। इस शख्स की पहचान 21 साल के ऑस्टिन टकर मार्टिन के रूप में हुई है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक हमलावर ऑस्टिन अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना का रहने वाला था। सीक्रेट सर्विस के प्रवक्ता एंथनी गुग्लिल्मी ने कहा कि ऑस्टिन पिछले कई दिनों से लापता था और उसके परिवार ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी। जांचकर्ताओं का मानना है कि वह नॉर्थ कैरोलिना से फ्लोरिडा तक का सफर तय करके आया था और इस यात्रा के दौरान उसने वह बंदूक खरीदी थी, जिसे लेकर वह रिसॉर्ट में घुसा था बाद में उसकी कार से हथियार का एक खाली बॉक्स भी बरामद हुआ है।
रिपोर्ट में अधिकारियों के मुताबिक यह पूरी घटना रविवार को स्थानीय समयानुसार रात करीब 1:30 बजे की है। ऑस्टिन पाम बीच एस्टेट के ‘नॉर्थ गेट’ से अपनी गाड़ी लेकर उस वक्त अंदर घुस गया, जब वहां से एक दूसरी गाड़ी बाहर निकल रही थी। अंदर घुसते ही उसका सामना दो सीक्रेट सर्विस एजेंट्स और एक पाम बीच काउंटी शेरिफ के डिप्टी से हुआ। ऑस्टिन के पास एक शॉटगन और पेट्रोल का कनस्तर था। पाम बीच काउंटी के एक शख्स ने बताया कि सुरक्षाकर्मियों ने उसे बार-बार हथियार और पेट्रोल का डिब्बा नीचे रखने की चेतावनी दी। उसने गैस का डिब्बा तो रख दिया, लेकिन अपनी शॉटगन को फायरिंग पोजीशन में ऊपर उठा लिया। इसके जवाब में अधिकारियों ने तुरंत फायरिंग की और उसे वहीं ढेर कर दिया। इस घटना में कोई भी अधिकारी घायल नहीं हुआ है।
हमले का मकसद क्या था, यह अभी साफ नहीं है और अधिकारी इसकी जांच कर रहे हैं। एफबीआई, सीक्रेट सर्विस और पाम बीच काउंटी शेरिफ कार्यालय मिलकर इस मामले की जांच कर रहे हैं। एफबीआई के निदेशक काश पटेल ने कहा है कि इस मामले की तह तक जाने के लिए सभी जरूरी संसाधन लगा दिए गए हैं और स्थानीय एजेंसियों के साथ समन्वय किया जा रहा है। जांच एजेंसियां ऑस्टिन के बैकग्राउंड, डिजिटल फुटप्रिंट और घटना से पहले के कुछ दिनों की उसकी हर गतिविधि को खंगाल रही हैं। अटॉर्नी जनरल ने बताया कि उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप से बात की है और वे सुरक्षित हैं। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने हथियारबंद घुसपैठिए को ढेर करने के लिए सीक्रेट सर्विस की त्वरित और निर्णायक कार्रवाई की तारीफ की।
मोहम्मद यूनुस ने किसी भी फैसले को लेकर जानकारी नहीं दी, मुझे अंधेरे में रखा
24 Feb, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। बांग्लादेश में आम चुनाव के बाद नई सरकार गठित होते ही राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के जज्बात भी बदल गए हैं। इतने दिनों से मोहम्मद यूनुस की अगुआई में चल रही अंतरिम सरकार पर उन्होंने एक भी सवाल नहीं उठाया। अल्पसंख्यकों पर अत्याचार होते रहे और भारत के साथ रिश्ते खराब करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अब शहाबुद्दीन कह रहे हैं कि मोहम्मद यूनुस ने उन्हें अंधेरे में रखा। बांग्लादेश की मीडिया के मुताबिक राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने कहा कि मोहम्मद यूनुस ने ना तो कभी संस्थानों के बीच समन्वय पर ध्यान दिया और ना ही वह किसी भी फैसले को लेकर उन्हें कोई जानकारी देते थे।
रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने कहा कि यहां तक कि विदेश दौरे की भी जानकारी उन्हें नहीं होती थी। विदेश नीति से संबंधित कोई भी सूचना राष्ट्रपति तक पहुंचती ही नहीं थी। उन्होंने कहा कि उन्हें अलग-थलग करने के लिए सारी राजनीतिक हथकंडे अपनाए जा रहे थे। शहाबुद्दीन ने कहा कि सरकार को जरूरी फैसले राष्ट्रपति की सलाह से करने चाहिए लेकिन यूनुस खुद ही सारे फैसले कर लेते थे। संविधान कहता है कि विदेश दौरे पर जाते समय राष्ट्रपति को जानकारी देनी चाहिए और लौटने के बाद इसके परिणामों पर चर्चा होनी चाहिए। कार्यकाल के दौरान वह 14 से 15 बार विदेश गए लेकिन एक बार भी उनकी सहमति नहीं ली गई।
उन्होंने कहा कि मोहम्मद यूनुस को मुख्य सलाहकार बनाने में उनकी बड़ी भूमिका थी। इसके बाद भी वह मुझे नजरअंदाज ही करते थे। वह मुझसे मिलने कभी आए ही नहीं, ऊपर से मुझे अंधेरे में रखा। उन्होंने कहा कि कतर और कोसोवो से उन्हें आमंत्रण मिला था लेकिन उनके नाम से ही लेटर बनाकर यात्रा रद्द कर दी गई। उन्होंने कहा कि बड़ा ही अजीब है, क्या राष्ट्रपति भी संवैधानिक कार्यों में इतना बिजी हो सकता है। उन्होंने कहा कि मुझे जनता के सामने जाने ही नहीं दिया जाता था। मेरी छवि जनता के बीच से बिगाड़ने की कोशिश की गई। ये लोग चाहते थे कि मेरा नाम कहीं भी सामने ना आए और कोई मुझे पहचाने तक ना। उन्होंने कहा कि मुझे यूनिवर्सिटी के कॉन्वोकेशन तक में नहीं जाने दिया जाता था।
विशेष अदालत ने दोषी को सुनाई 20 साल कठोर कारावास की सजा
23 Feb, 2026 04:19 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
फतेहाबाद|अतिरिक्त एवं सत्र न्यायधीश, स्पेशल जज -कम-फ़ास्ट ट्रैक के न्यायधीश अमित गर्ग ने एक 14 वर्षीय नाबालिग बच्ची के साथ हुए जघन्य यौन अपराध के मामले में आरोपी अभिजीत निवासी ढाणी बस्ती भीमा, फतेहाबाद को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे अपराध समाज पर गहरा आघात हैं और दोषी पर दया दिखाना न्याय का मजाक होगा। घटनाक्रम के अनुसार 13.10.2024 को पीड़िता के पिता ने हुडा चौकी में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि आरोपी अभिजीत पिछले 10 महीनों से उनकी बेटी को स्कूल जाते समय खाने-पीने की चीजों का लालच देकर बहलाता-फुसलाता था।करीब 18 दिन पहले, आरोपी उसे जबरन चिल्ली वाली झील के पास खेतों में ले गया, जहां उसने पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया और विरोध करने पर मारपीट की। आरोपी ने पीड़िता को जान से मारने की धमकी भी दी थी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज किया। केस की तफ्तीश उप-निरीक्षक राज बाला द्वारा अमल में लाई गयी तथा तफ्तीश के दौरान आरोपी को 16.10.2024 को गिरफ्तार किया गया, जिसने अपना अपराध कबूल किया।अभियोजन पक्ष की तरफ से केस की पैरवी देवेंद्र मित्तल, जिला न्यायवादी व् जगसीर सिंह बराड़, उप जिला न्यायवादी फतेहाबाद ने की। मामले की जानकारी देते हुए देवेंद्र मित्तल, जिला न्यायवादी ने बताया कि दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, अदालत ने दोषी की कम उम्र और अन्य परिस्थितियों के बजाय अपराध की गंभीरता को प्राथमिकता दी।न्यायालय ने दोषी अभिजीत को विभिन्न धाराओं के तहत सजा सुनाई। इसमें पॉस्को अधिनियम की धारा 4(2) के तहत 20 वर्ष का सश्रम कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माना, बीएनएस की धारा-87 के तहत 10 वर्ष का सश्रम कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माना, धारा 137(2) के तहत 7 वर्ष का सश्रम कारावास और 50,000 रुपये जुर्माना तथा पोस्को अधिनियम की धारा 12 के तहत 3 वर्ष का सश्रम कारावास और 20,000 रुपये जुर्माना शामिल है। जुर्माना न भरने की स्थिति में अतिरिक्त कारावास का भी प्रावधान किया गया है। न्यायालय ने यह भी आदेश दिया है कि दोषी पर लगाए गए कुल 1,70,000 रुपये के जुर्माने में से 1,00,000 रुपये पीड़िता को मुआवजे के रूप में दिए जाएंगे। शेष 70,000 रुपये अदालती कार्यवाही की लागत के रूप में राज्य के खजाने में जमा होंगे। अभियोजन पक्ष का मानना है कि बच्चों की सुरक्षा के प्रति यह फैसला समाज में एक कड़ा संदेश स्थापित करेगा।
विपक्ष सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की तैयारी में
23 Feb, 2026 03:47 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़ हरियाणा| विधानसभा के बजट सत्र का आज दूसरा दिन है। दोपहर 2 बजे से सदन की कार्यवाही की प्रश्नकाल से शुरुआत होगी। इसके बाद शून्यकाल और फिर राज्यपाल प्रोफेसर असीम कुमार घोष के अभिभाषण पर चर्चा होगी। प्रश्नकाल में विधायकों की तरफ से पूछे गए सवालों का जवाब भी दिया जाएगा। इस दौरान हंगामे के भी पूरे आसार है। इसके बाद 24 से 27 फरवरी तक सत्र की बैठकें सुबह 11 बजे से शुरू होंगी। 27 फरवरी को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी राज्यपाल के अभिभाषण पर अपनी बात रखेंगे।
भीड़ को नियंत्रित करने के लिए किए गए दो हवाई फायर
23 Feb, 2026 03:35 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पानीपत| की रिफाइनरी में ठेकेदार द्वारा 12 घंटे की ड्यूटी कराए जाने के खिलाफ मजदूरों ने जोरदार प्रदर्शन किया। मजदूर आठ घंटे की कार्य अवधि की मांग कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान गेट पर भीड़ बढ़ने पर सीआईएसएफ के जवानों ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए दो राउंड हवाई फायर किए। इससे इलाके में थोड़ी देर के लिए अफरा-तफरी मच गई, लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ।मजदूरों का आरोप है कि ठेकेदार कंपनी द्वारा अनुचित रूप से लंबी शिफ्ट लगाई जा रही है, जिससे उनकी सेहत और परिवार पर बुरा असर पड़ रहा है। वे बेहतर कार्य परिस्थितियों, उचित वेतन और 8 घंटे की ड्यूटी की मांग कर रहे हैं। घटना की सूचना मिलते ही सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को शांत कराने में जुटी। पुलिस ने दोनों पक्षों से बातचीत शुरू की है और जांच जारी है।
पाकिस्तान की एयर स्ट्राइक में कई मासूमों की गई जान, अफगानिस्तान बोला- बदला लेंगे
23 Feb, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काबुल। अफगानिस्तान ने सीमावर्ती इलाकों में पाकिस्तान की एयर स्ट्राइक की पुष्टि करते हुए कहा है कि इस हमले में दर्जनों नागरिकों मारे गए हैं। तालिबान के प्रवक्ता जुबिउल्लाह मुजाहित ने कहा है कि बीती रात नांगरहार और पाकटिका प्रांतों में पाकिस्तान ने अचानक हवाई हमला कर दिया। इसमें दर्जनों लोगों की जान चली गई, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी सेना ने नांगरहार में एक रिहाइशी इमारत पर हमला किया जिसमें एक परिवार के करीब 23 लोग रहते थे। मलबे में परिवार दब गया है। अब तक इसमें से केवल चार लोगों को ही निकाला जा सका है। तालिबान ने बताया है कि पाकिस्तान ने बेरमाल और आरगुन जिलों में हवाई हमले किए हैं। इस्लामाबाद की तरफ से कहा गया था कि पाकिस्तान में हुए आतंकी हमले का बदला लेने के लिए सीमावर्ती इलाकों में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक जबीउल्लाह मुजाबित ने कहा कि पाकिस्तान ने नापाक हरकत करके मासूमों की जान ली है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सेना ने घुसपैठ की है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के जनरल इसी तरह की हरकतें करके अपनी छवि सुधारने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के हवाई क्षेत्र में दखल दिया है। ऐसे में अफगानिस्तान के पास भी जवाब देने का अधिकार है। सही समय आने पर हमला किया जाएगा। पाकिस्तान का कहना है कि खैबर-पख्तूनख्वा के बन्नू इलाके में शनिवार को एक आत्मघाती हमले में सेना के एक लेफ्टिनेंट कर्नल और एक सैनिक की मौत हो गई थी और उसी का बदला लेने के लिए यह एयर स्ट्राइक की गई है। इसके बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि पाकिस्तान के पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि इस्लामाबाद की शिया मस्जिद पर हमला और शनिवार को बन्नू में हुई घटना समेत आतंकवाद की ये घटनाएं कथित तौर पर ख्वारिज ने अफगानिस्तान स्थित अपने आकाओं और संचालकों के इशारे पर की थीं।
मंत्रालय ने कहा कि इन हमलों की जिम्मेदारी फितना अल ख्वारिज (एफएके) से संबंधित अफगानिस्तान स्थित पाकिस्तानी तालिबान और उनके सहयोगियों तथा इस्लामिक स्टेट ऑफ खुरसान प्रांत ने ली है। उसने कहा कि पाकिस्तान को यह भी उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय सकारात्मक एवं रचनात्मक भूमिका निभाते हुए तालिबान शासन से दोहा समझौते के तहत अपनी इन प्रतिबद्धताओं का पालन करने का आग्रह करेगा कि वह अन्य देशों के खिलाफ अपनी भूमि का उपयोग होने से रोके और यह कार्य क्षेत्रीय एवं वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान ने हमेशा क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने का प्रयास किया है, लेकिन हमारे नागरिकों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
बर्फीला तूफान और भारी बर्फबारी को लेकर न्यूयॉर्क और बोस्टन अलर्ट पर, 1500 से ज्यादा उड़ानें रद्द
23 Feb, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्वी तट पर तीव्र शीतकालीन तूफान की चेतावनी से जनजीवन प्रभावित हो गया है। अमेरिकी मौसम विभाग के अनुसार सेंट्रल अटलांटिक और उत्तर-पूर्वी राज्यों में भारी बर्फबारी, तेज हवाओं और तटीय बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। हालात को देखते हुए न्यूयॉर्क और बोस्टन सहित कई बड़े शहरों में अलर्ट जारी किया गया है। खराब मौसम के चलते 1500 से अधिक उड़ानें रद्द कर दी गई हैं।
अमेरिका की राष्ट्रीय मौसम सेवा के मौसम पूर्वानुमान केंद्र के मुताबिक दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र में बना निम्न दबाव तंत्र (लो प्रेशर सिस्टम) दक्षिणी मध्य अटलांटिक तट की ओर बढ़ रहा है और तेजी से गहराते हुए उत्तर-पूर्व की ओर आगे बढ़ेगा। इस प्रणाली के कारण सोमवार तक व्यापक और गंभीर प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।
एक से दो फीट तक बर्फबारी की आशंका
पूर्वानुमान के अनुसार कुछ इलाकों में बर्फबारी की दर एक इंच प्रति घंटे से अधिक हो सकती है। कुल बर्फबारी एक से दो फीट तक पहुंचने की संभावना है, जिससे सड़क और हवाई यात्रा लगभग ठप हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारी और गीली बर्फ के साथ तेज हवाओं का संयोजन बिजली आपूर्ति बाधित कर सकता है और कई क्षेत्रों में पावर कट की स्थिति बन सकती है।
112 किमी प्रति घंटा तक चलेंगी हवाएं
डेलावेयर से दक्षिण-पूर्वी न्यू इंग्लैंड तक तटीय क्षेत्रों में 64 से 113 किलोमीटर प्रति घंटे (लगभग 112 किमी प्रति घंटा) की रफ्तार से हवा के झोंके चलने की आशंका है। तेज हवाओं के कारण दृश्यता में भारी कमी आएगी और यात्रा बेहद खतरनाक हो सकती है। तटीय न्यू जर्सी से लेकर केप कॉड तक मध्यम स्तर की बाढ़ और सड़कों के जलमग्न होने की चेतावनी जारी की गई है।
मौसम विभाग ने कहा है कि रविवार रात के दौरान हालात और बिगड़ सकते हैं, जब बर्फबारी की तीव्रता चरम पर होगी।
अधिकारियों ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने, आपातकालीन किट तैयार रखने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। विशेषज्ञों के अनुसार फरवरी में अटलांटिक तट पर ऐसे शक्तिशाली शीतकालीन तूफान सामान्य हैं, जब ठंडी महाद्वीपीय हवाएं अपेक्षाकृत गर्म अटलांटिक महासागर के संपर्क में आती हैं और तेजी से तीव्र मौसम प्रणाली का निर्माण करती हैं।
अगर इजराइल चाहे तो वह पूरे मिडिल ईस्ट पर कर सकता है कब्जा
23 Feb, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दोहा। अमेरिकी राजदूत के एक बयान पर मिडिल ईस्ट में नया विवाद खड़ा हो गया है। इजराइल में अमेरिका के राजदूत माइक हकाबी ने मिडिल ईस्ट के देशों को लेकर कहा कि अगर इजराइल चाहे तो वह सब कब्जा कर सकता है। इस टिप्पणी के बाद 14 अरब और इस्लामिक देशों ने संयुक्त बयान जारी कर इसकी कड़ी निंदा की है। यह बयान एक इंटरव्यू के दौरान आया। जिसमें राजदूत से पूछा कि क्या आधुनिक इजराइल का दावा उस भूभाग पर हो सकता है, जो इराक की यूफ्रेटीस नदी से लेकर मिस्र की नील नदी तक फैला है। इस पर हकाबी ने जवाब दिया, अगर वे सब ले लें तो भी ठीक होगा यानी अगर इजराइल इलाके पर भी कब्जा कर ले तो वो सही होगा।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक शनिवार रात दोहा से जारी संयुक्त बयान में कतर, मिस्र, जॉर्डन, यूएई, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, तुर्किये, सऊदी अरब, कुवैत, ओमान, बहरीन, लेबनान, सीरिया और फिलिस्तीन के विदेश मंत्रालयों ने इन टिप्पणियों को खतरनाक और भड़काऊ बताया। साथ ही गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल, अरब लीग और ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन के सचिवालयों ने भी इस पर आपत्ति जताई। संयुक्त बयान में कहा गया है कि इस तरह की बातें यह संकेत देती हैं कि इजराइल को अरब देशों की जमीन पर कब्जे का अधिकार मिल सकता है, जिसमें कब्जे वाला वेस्ट बैंक भी शामिल है। हस्ताक्षर करने वाले देशों ने साफ कहा कि कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों या किसी अन्य अरब भूमि पर इजराइल की कोई संप्रभुता नहीं है।
रिपोर्ट के मुताबिक बयान में यह भी कहा गया कि ऐसी टिप्पणियां अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का स्पष्ट उल्लंघन हैं और क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा पैदा करती हैं। इंटरव्यू में जिस क्षेत्र का जिक्र किया गया, उसमें आज का लेबनान, सीरिया, जॉर्डन और सऊदी अरब के हिस्से शामिल हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक जब विवाद बढ़ा तो अमेरिकी राजदूत हकाबी ने अपने बयान को कुछ हद तक अतिशयोक्ति बताया और कहा कि इजराइल अपनी मौजूदा सीमाओं का विस्तार नहीं कर रहा, बल्कि उसे अपनी वर्तमान जमीन के अंदर सुरक्षा का अधिकार है। हालांकि, उनके बयान की चौतरफा आलोचना हुई और सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इस बयान को इजराइल के ग्रेटर इजराइल प्लान से भी जोड़ा। इसके बावजूद अरब और इस्लामिक देशों ने ऐसे उकसाने वाले बयानों को तुरंत रोकने की मांग की और चेतावनी दी कि दूसरों की जमीन पर नियंत्रण को वैध ठहराने वाली बातें शांति नहीं, बल्कि तनाव और हिंसा को बढ़ावा देती हैं।
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