धर्म एवं ज्योतिष
श्राद्ध अनुष्ठानों में क्यों किया जाता है काले तिल का प्रयोग?
21 Sep, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व है और सर्वपितृ अमावस्या पर ज्ञात-अज्ञात पितरों का श्राद्ध व तर्पण कर पितरों को विदा किया जाता है. सर्वपितृ अमावस्या (पितृपक्ष की अंतिम तिथि) का महत्व है कि इस दिन संपूर्ण पितरों का श्राद्ध-पिंडदान किया जा सकता है, चाहे किसी विशेष तिथि का श्राद्ध करना छूट गया हो. पितृपक्ष के दौरान काले तिल का सबसे ज्यादा प्रयोग किया जाता है. पितरों को तर्पण समेत किसी भी कार्य में काले तिल सबसे पहले देखे जाते हैं. पितरों के कार्यों में इस विधि में तिल का प्रयोग आवश्यक माना गया है. आइए जानते हैं श्राद्ध अनुष्ठानों में क्यों किया जाता है काले तिल का प्रयोग.
इसलिए पितरों के कार्यों में होता है काले तिल का प्रयोग
गरुड़ पुराण के अनुसार, काले तिल और कुशा दोनों की उत्पत्ति भगवान विष्णु के शरीर से हुई है. पौराणिक कथा के अनुसार, जब हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रह्लाद को अपने अत्याचारों से पीड़ित किया तो भगवान विष्णु अत्यंत क्रोधित हुए. उस समय उनके शरीर से पसीने की बूंदें निकलीं, जो पृथ्वी पर गिरकर काले तिल में परिवर्तित हो गईं. यही कारण है कि काले तिल को दिव्य और पवित्र माना जाता है. चूंकि भगवान विष्णु पितरों के आराध्य माने जाते हैं, इसलिए पितृ तर्पण में काले तिल का विशेष महत्व है.
काले तिल से पितर होते हैं प्रसन्न
मान्यता है कि काले तिल में पितरों को आकर्षित करने और तर्पण स्वीकार करवाने की शक्ति होती है. जब जल के साथ काले तिल अर्पित किए जाते हैं, तो पितर प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं. यह परंपरा केवल धार्मिक आस्था से ही नहीं, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पितृ दोष से जुड़े ग्रह शनि, राहु और केतु को शांत करने के लिए काले तिल का उपयोग किया जाता है. श्राद्ध के दौरान काले तिल अर्पित करने से इन ग्रहों के अशुभ प्रभाव कम होते हैं और परिवार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. माना जाता है कि इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और वंशजों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है.
सफेद तिल का शुक्र से संबंध
यहां यह समझना आवश्यक है कि श्राद्ध और तर्पण में केवल काले तिल का उपयोग होता है, सफेद तिल का नहीं. ज्योतिष में सफेद तिल का संबंध चंद्रमा और शुक्र से माना जाता है. इसका उपयोग शुभ कार्यों, प्रसाद और सुख-समृद्धि से जुड़े कर्मकांडों में होता है. जबकि पितृ कर्म गंभीर और आत्मा की शांति से जुड़ा अनुष्ठान है, इसलिए उसमें काले तिल को ही प्रधानता दी जाती है.
काले तिल के साथ कुश का भी प्रयोग
श्राद्ध विधि में काले तिल के साथ-साथ कुशा का प्रयोग भी आवश्यक है. कुशा को पवित्र माना गया है क्योंकि इसकी जड़ में भगवान ब्रह्मा, मध्य में भगवान विष्णु और शीर्ष पर भगवान शिव का वास माना जाता है. इस कारण पितृ कर्म में कुशा का प्रयोग अनिवार्य है. हालांकि, पूजा-पाठ जैसे शुभ कार्यों में भी इसका उपयोग किया जाता है.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 21 सितम्बर 2025)
21 Sep, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष- विघटनकारी तत्वों से क्षतिग्रस्त होने से बचियें, समस्याएं बनी ही रहेगी।
वृष- कार्य सफलता से संतोष, स्त्रीवर्ग से उल्लास, आपकी चिन्ताएं कम अवश्य होंगी।
मिथुन- आशानुकूल सफलता मिलेगी, व्यावसायिक क्षमता अनुकूल बनेगी, समय का ध्यान दें।
कर्क- अशुद्ध गोचर रहने से विशेष कार्य स्थिगित रखे, अधिकारियों से तनाव बन सकता हैं।
सिंह- आर्थिक योजना फलीभूत होगी, विरोधी परेशान करेंगे, कार्य की अवश्य चिन्ता बनेगी।
कन्या- स्वभाव में अशान्ति, मानसिक बेचैनी, कार्यतीव्रता के कुछ प्रयास अवश्य सफल होगें।
तुला- अर्थव्यवस्था कुछ अनुकूल होगी, आशानुकूल सफलता का हर्ष अवश्य ही होगा।
वृश्चिक- इष्ट मित्र सहायक रहेंगे, बड़े-बड़े लोगों से मेल मिलाप अवश्य ही होगा, कार्य बनेगा।
धनु- मान प्रतिष्ठा बाल-बाल बचे, कार्य वृत्ति में सुधार होगा, रुके कार्य शीघ्र निपटा ले।
मकर- व्यवसाय में व्यग्रता, तनाव व क्लेश से हानि, कार्य को स्थगित कर देवें, समय का ध्यान रखे।
कुंभ- सफलता के साधन जुटायें, धन लाभ, आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा, ध्यान रखे।
मीन- बिगड़े कार्य बनेंगे, योजना फलीभूत होगी, इष्टमित्र सुख वर्धक अवश्य होंगे।
सूर्य ग्रहण के समय न करें ये 7 काम, वरना हो सकते हैं अशुभ परिणाम
20 Sep, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
धर्म, सूर्य ग्रहण के समय कुछ कार्यों को करना अशुभ और नुकसानदायक माना गया है. ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण काल में वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है, जिससे शरीर, मन और जीवन पर असर पड़ सकता है. आइए जानें वे 7 काम जो सूर्य ग्रहण के समय नहीं करने चाहिए.
सूर्य ग्रहण के समय न करें ये 7 काम
1. नग्न आंखों से सूर्य को न देखें
सूर्य ग्रहण को बिना सुरक्षा के देखने से आंखों की रोशनी पर बुरा असर पड़ सकता है.
हमेशा सोलर ग्लासेस या विशेष फिल्टर का उपयोग करें.
2. भोजन न पकाएं और न खाएं
ग्रहण के दौरान भोजन दूषित माना जाता है क्योंकि नकारात्मक ऊर्जा उसमें समाहित हो सकती है.
इस समय तुलसी के पत्ते खाने-पीने की चीजों में डालकर रखें.
3. सोना नहीं चाहिए
ग्रहण काल में सोना शारीरिक और मानसिक ऊर्जा को प्रभावित कर सकता है.
विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं को इस समय सोने से बचना चाहिए.
4. बाल और नाखून न काटें
इस समय शरीर से जुड़ी चीजों को काटना अशुभ माना जाता है.
इससे नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और ऊर्जा का ह्रास होता है.
5. यात्रा से परहेज करें
ग्रहण के समय यात्रा करना जोखिम भरा माना जाता है.
विशेष रूप से लंबी या महत्वपूर्ण यात्राओं से बचना चाहिए.
6. नुकीली चीजों का प्रयोग न करें
चाकू, कैंची, सुई-धागे जैसी चीजों का प्रयोग इस समय गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष रूप से वर्जित है.
इससे गर्भस्थ शिशु पर नकारात्मक असर पड़ सकता है.
7. मंदिर में पूजा-पाठ न करें
ग्रहण काल में मंदिर में पूजा करना वर्जित होता है.
हालांकि, आप मंत्र जाप जैसे गायत्री मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का जाप कर सकते हैं.
ग्रहण के बाद क्या करें?
स्नान करें और घर की सफाई करें.
जरूरतमंदों को दान दें.
भगवान की मूर्तियों को फिर से स्नान कराकर पूजा करें.
इस महा कवच के पाठ से बुरी शक्तियां रहेंगी दूर, हर टोटकों का काट, असली पूजा यही
20 Sep, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पितृ पक्ष के बाद शारदीय नवरात्रि के दिन शुरू हो जाते हैं. आदिशक्ति देवी दुर्गा स्वर्ग लोक से पृथ्वी लोक पर आकर अपने भक्तों का कल्याण करती हैं. नवरात्रि के दिन शुरू होने में कुछ दिन शेष रह गए हैं. 22 सितंबर सोमवार से शारदीय नवरात्रों की शुरुआत हो जाएगी, जिनमें घट स्थापना के बाद नौ दिनों तक देवी दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा अर्चना, आराधना और दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाएगा. दुर्गा सप्तशती धार्मिक ग्रंथ है जिसमें देवी कवच समेत अनेक चमत्कारी स्तोत्र का वर्णन किया गया है. नवरात्रि के दिनों में दुर्गा सप्तशती का पाठ करना विशेष फलदाई होता है.
कुल इतने श्लोक
हरिद्वार के विद्वान धर्माचार्य पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि साल में चार बार नवरात्रि का आगमन होता है. नवरात्रि के दिनों में दुर्गा सप्तशती का पाठ करने पर संपूर्ण से अधिक फल की प्राप्ति होने की धार्मिक मान्यता है. दुर्गा सप्तशती का पाठ करने के लिए सबसे पहले शक्तिशाली ‘देवी कवच’ का पाठ किया जाता है. देवी कवच में कुल 56 श्लोक हैं.
अदृश्य सुरक्षा घेरा
देवी कवच का पाठ करने से भक्त के चारों ओर शक्ति का एक अदृश्य कवच बन जाता है, जिससे बुरी शक्तियां और नकारात्मक ऊर्जा देवी की भक्ति में बाधा नहीं बनती हैं. दुर्गा सप्तशती का पाठ पूर्ण करने के लिए देवी कवच का सबसे पहले पाठ किया जाता है जिसमें देवी के 9 रूपों की का वर्णन किया गया है. इसके पाठ करने से सभी दुर्गा सप्तशती के सभी स्तोत्र और मंत्र का संपूर्ण से अधिक लाभ मिलता है.
॥अथ श्री देव्याः कवचम्॥
ॐ अस्य श्रीचण्डीकवचस्य ब्रह्मा ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, चामुण्डा देवता, अङ्गन्यासोक्तमातरो बीजम्, दिग्बन्धदेवतास्तत्त्वम्, श्रीजगदम्बाप्रीत्यर्थे सप्तशतीपाठाङ्गत्वेन जपे विनियोगः।
ॐ नमश्चण्डिकायै॥
मार्कण्डेय उवाच
यद्गुह्यं परमं लोके सर्वरक्षाकरं नृणाम्।
यन्न कस्यचिदाख्यातं तन्मे ब्रूहि पितामह॥१॥
ब्रह्मोवाच
अस्ति गुह्यतमं विप्र सर्वभूतोपकारकम्।
देव्यास्तु कवचं पुण्यं तच्छृणुष्व महामुने॥२॥
प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।
तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम् ॥३॥
__________________________ ॥४-५५॥
लभते परमं रुपं शिवेन सह मोदते॥ॐ॥५६॥
इति देव्याः कवचं सम्पूर्णम्।
नवरात्र में जरूर करें ये चमत्कारी उपाय, मातारानी की होगी खास कृपा
20 Sep, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
धर्म, नवरात्रि का पर्व सिर्फ पूजा-पाठ का नहीं, बल्कि जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का अवसर भी होता है। अगर आप चाहते हैं कि माता रानी की कृपा से आपके जीवन में सुख, समृद्धि और शांति आए, तो इन चमत्कारी उपायों को जरूर अपनाएं.
नवरात्रि में जरूर करें ये चमत्कारी उपाय
1. अखंड ज्योति जलाएं
नवरात्रि के पहले दिन से लेकर नवमी तक घर में अखंड दीपक जलाएं.
इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मां दुर्गा की कृपा बनी रहती है.
2. नवार्ण मंत्र का जाप करें
रोज सुबह और शाम “ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै” मंत्र का जाप करें.
यह मंत्र शक्ति, ज्ञान और कल्याण का प्रतीक है.
3. हर दिन देवी को प्रिय रंग की चीजें अर्पित करें
हर दिन देवी के अलग रूप की पूजा होती है. उनके अनुसार रंग चुनें.
पहला दिन: पीला (मां शैलपुत्री)
दूसरा दिन: हरा (मां ब्रह्मचारिणी)
तीसरा दिन: पीला-हरा (मां चंद्रघंटा)
चौथा दिन: नारंगी (मां कुष्मांडा)
पांचवां दिन: सफेद (मां स्कंदमाता)
छठा दिन: लाल (मां कात्यायनी)
सातवां दिन: नीला (मां कालरात्रि)
आठवां दिन: गुलाबी (मां महागौरी)
नवां दिन: बैंगनी (मां सिद्धिदात्री)
4. खीर का भोग लगाएं
मां दुर्गा को खीर बहुत प्रिय है. इसे भोग में शामिल करें.
इससे धन और समृद्धि का आगमन होता है.
5. कन्या पूजन करें
अष्टमी या नवमी को 5 या 7 कन्याओं को भोजन कराएं और उपहार दें.
यह उपाय मां दुर्गा के बाल रूप की पूजा मानी जाती है और विशेष फलदायक होता है.
6. दान और सेवा करें
जरूरतमंदों को अनाज, वस्त्र या धन का दान करें.
इससे पुण्य और मानसिक शांति मिलती है.
7. श्रृंगार का सामान अर्पित करें
मां को लाल चुनरी, सिंदूर, चूड़ी, बिंदी आदि अर्पित करें.
यह उपाय सौभाग्य और वैवाहिक सुख को बढ़ाता है.
नवरात्रि के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें
मन को शांत रखें और व्रत में सात्विक भोजन करें.
पूजा में लाल आसन का प्रयोग करें.
हर दिन आरती और भजन जरूर करें.
दुनिया का एकमात्र मंदिर जहां नरमुखी गणेशजी की होती है पूजा, श्राद्ध और तर्पण से मिलता है गया जैसा पुण्य
20 Sep, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पितृ श्रद्धा और तर्पण की परंपरा भारतीय संस्कृति में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है. दक्षिण भारत में इसके लिए तमिलनाडु का तिलतर्पणपुरी सबसे पवित्र स्थलों में गिना जाता है. मान्यता है कि यहीं पर भगवान राम ने अपने पितरों की शांति के लिए पूजा-अर्चना की थी. इस स्थान की विशेषता यह भी है कि यहां स्थित आदि विनायक मंदिर देश का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां भगवान गणेश का स्वरूप मानव मुख वाला है, गजमुख नहीं. इस अद्वितीय स्वरूप को देखने के लिए हजारों श्रद्धालु यहां प्रतिवर्ष आते हैं. आइए जानते हैं दक्षिण भारत के तिलतर्पणपुरी के बारे में…
भगवान राम के श्राद्ध कर्म की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान राम अपने पिता दशरथ का श्राद्ध कर्म कर रहे थे, तो उनके द्वारा बनाए गए चावल के पिंड बार-बार कीड़ों में बदल जाते थे. इस विचित्र स्थिति से परेशान होकर राम ने भगवान शिव से प्रार्थना की. तब भोलेनाथ ने उन्हें तिलतर्पण पुरी स्थित आदि विनायक मंदिर में पूजा करने का निर्देश दिया. राम ने यहां आकर अनुष्ठान किया, जिसके बाद वे चार पिंड चार शिवलिंग में परिवर्तित हो गए. आज ये शिवलिंग पास ही स्थित मुक्तेश्वर मंदिर में विराजमान हैं. यही कारण है कि यहां आज भी मंदिर के भीतर ही पितृ शांति का अनुष्ठान होता है, जो सामान्यतः नदी तटों पर किया जाता है.
यहां भगवान शिव के चरण चिन्ह भी
इस स्थान को तिल और तर्पण से जोड़कर तिलतर्पण पुरी नाम दिया गया है. यहां पितृ दोष निवारण, आत्म पूजा, अन्नदान और विशेषकर अमावस्या पर पिंड दान का अत्यधिक महत्व है. श्रद्धालु मानते हैं कि यहां पितृ कर्म करने से पूर्वजों को मोक्ष मिलता है और परिवार पर से पितृ दोष का प्रभाव समाप्त होता है. मंदिर परिसर में नंदीवनम (गोशाला) और भगवान शिव के चरण चिन्ह भी स्थित हैं, जो इसकी पवित्रता को और बढ़ाते हैं.
देवी सरस्वती का एकमात्र मंदिर
यह पवित्र स्थल तमिलनाडु के तिरुवरुर जिले के कुटनूर से मात्र 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. यही नहीं, कुटनूर में देवी सरस्वती का एकमात्र मंदिर भी है, जिसे कवि ओट्टकुठार ने बनवाया था. श्रद्धालु तिलतर्पण पुरी आने पर सरस्वती मंदिर के दर्शन अवश्य करते हैं. मंदिर के संरक्षक लक्ष्मण चेट्टियार बताते हैं कि हजारों भक्त यहां गणेश, सरस्वती और शिव के दर्शन के लिए आते हैं. नर मुख गणेश का यह मंदिर सांतवीं सदी का माना जाता है और मान्यता है कि माता पार्वती ने अपने मैल से गणेश का यह रूप बनाया था. इसे गणेश का पहला स्वरूप भी माना जाता है.
गया के श्राद्ध के समान महत्व
पितृ कर्म के लिए दक्षिण भारत में एक और प्रसिद्ध स्थल है कांचीपुरम, जिसे दक्षिण का काशी कहा जाता है. यहां विशेषकर नेनमेलि श्रद्धा संरक्षण नारायणन मंदिर में अमावस्या और एकादशी के दिन श्राद्ध कर्म का आयोजन होता है. यहां किया गया तर्पण गया के श्राद्ध के समान महत्व रखता है.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 20 सितम्बर 2025)
20 Sep, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष- कही विवाद होने से बचिए, दैनिक कार्य गति में बाधा बनेगी कार्य रुके ही जायेंगे।
वृष- योजनाएं फलीभूत होंगी, कुछ नवीन मैत्री, मंत्रणा सुखप्रद अवश्य होगी।
मिथुन- तर्क वितर्क वाद विवाद मानसिक बेचैनी, कार्यवृत्ति में बाधायें अवश्य ही बनेगी।
कर्क- भाग्य का सितारा बुलंद होगा, नई योजना फलीभूत होगी, रुके कार्य अवश्य बनेंगे।
सिंह- आकस्मिक चिंताएं धन का व्यय एवं अनेक प्रकार के उपद्रव होंगे उनसे बचकर चलेंगे।
कन्या- मनोवृत्ति रखें तो स्त्री जाति से सुख वृथा भ्रम, दूसरों की उत्तेजना से बचें।
तुला- परिश्रम से सोचे हुए कार्य बनेंगे, कार्य कुशलता से संतोष होगा, रुके कार्य बनेंगे।
वृश्चिक- कार्य व्यवसाय गति में सुधार होगा, योजनाएं फलप्रद रहे, इष्ट मित्र सुखवर्धक होंगे।
धनु- योजनाएं फलीभूत होगी, मनोवृत्ति संवेदनशील रहेगी, रुके कार्य अवश्य ही बनेंगे।
मकर- कार्य व्यवसाय गति में सुधार होगा, चिन्ताएं कम होगी, कार्य पर विचार कर देखें।
कुंभ- तनाव क्लेश, आशांति मानसिक उद्विघ्नता से बचें, किन्तु परिश्रम सफल होंगा।
मीन- मान प्रतिष्ठा के योग बनेंगे, कुटुम्ब की समस्याएं, सुलझे कार्यगति उत्तम होगी।
घर से निकलते समय करें ये आसान उपाय, बन जाएंगे बिगड़े हुए सभी काम
19 Sep, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हम सभी चाहते हैं कि जब भी घर से कोई काम लेकर बाहर निकलें तो वो काम बिना रुकावट और परेशानी के पूरा हो जाए. कई बार ऐसा होता है कि दिनभर मेहनत करने के बाद भी रिज़ल्ट उम्मीद के मुताबिक नहीं मिलता. ऐसे में लोग छोटे-छोटे घरेलू और आध्यात्मिक उपाय आज़माते हैं ताकि किस्मत साथ दे और कामयाबी हाथ लगे. इलायची और दालचीनी दो ऐसी चीज़ें हैं जो न सिर्फ रसोई की जान हैं बल्कि ज्योतिष और परंपरा में भी बेहद असरदार मानी जाती हैं. माना जाता है कि घर से निकलते वक्त अगर इन्हें सही तरीके से अपनाया जाए तो काम में रुकावट दूर होती है और सफलता मिलने की संभावना बढ़ जाती है. .
इलायची और दालचीनी का महत्व
दालचीनी और इलायची दोनों ही मसाले भारतीय परंपरा में शुभ माने जाते हैं. स्वाद और खुशबू तो इनका हर कोई दीवाना है, लेकिन ज्योतिष में इन्हें ग्रहों से जोड़ा गया है. दालचीनी शुक्र और शनि ग्रह का प्रतीक मानी जाती है, जबकि इलायची बुध ग्रह का प्रतिनिधित्व करती है. इन ग्रहों का संतुलन व्यक्ति के जीवन में धन, बुद्धि और सफलता लाने वाला माना गया है.
घर से निकलने का छोटा उपाय
कहा जाता है कि जब भी आप किसी खास काम के लिए बाहर जा रहे हों, तो एक छोटा-सा उपाय आपके दिन को बदल सकता है. इसके लिए बस एक दालचीनी और एक इलायची का छोटा टुकड़ा लें. घर से बाहर निकलते समय इसे चबाते हुए आगे बढ़ें. खास बात ये है कि बाहर निकलते समय हमेशा दाहिने पैर (राइट फुट) से कदम रखें और तीन बार ताली बजाएं.
क्यों माना जाता है असरदार
इस छोटे से उपाय के पीछे मान्यता है कि दालचीनी और इलायची की ऊर्जा व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास बढ़ाती है. दाहिने पैर से निकलना शुभ माना जाता है और तीन ताली बजाने से नकारात्मकता दूर होती है. ऐसा करने से कामयाबी मिलने की संभावना बढ़ जाती है और दिनभर पॉज़िटिविटी बनी रहती है.
लक्ष्मी नारायण राजयोग का संबंध
ज्योतिष के अनुसार जब शुक्र, शनि और बुध ग्रह शुभ स्थिति में होते हैं तो इसे लक्ष्मी नारायण राजयोग कहा जाता है, ये योग इंसान की किस्मत चमका सकता है और अचानक धन प्राप्ति का योग भी बना सकता है. इसलिए कहा जाता है कि अगर आप खाली जेब घर से निकल रहे हैं तो लौटते वक्त जेब भरी हो सकती है.
तिजोरी में रख दें मोर पंख, धन-धान्य से भर जाएगा घर, खत्म हो जाएंगे सारे टंटे, हर विवाद
19 Sep, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारतीय संस्कृति और परंपरा में मोर को अत्यंत शुभ पक्षी माना गया है. मोर न केवल अपनी सुंदरता से मन मोह लेता है बल्कि इसका पंख भी धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्त्व रखता है. भगवान श्रीकृष्ण के मुकुट पर सजे मोर पंख को पवित्रता, सौंदर्य और चमत्कार का प्रतीक माना जाता है. सनातन धर्म में मोर पंख का विशेष स्थान है क्योंकि यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने वाला और सकारात्मक वातावरण बनाने वाला माना जाता है. यही कारण है कि प्राचीन काल से लेकर आज तक लोग अपने घरों में मोर पंख को सजावट और पूजा के रूप में रखते आए हैं.
तुरंत करेगा ये काम
मोर पंख को चमत्कारी इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसके छोटे-छोटे उपाय बड़े बदलाव ला सकते हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार घर में मोर पंख रखने से ग्रहों की स्थिति अनुकूल होती है. यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में दोष है या ग्रह अशुभ प्रभाव डाल रहे हैं तो मोर पंख का उपाय करने से यह दोष धीरे-धीरे कम होने लगता है. यह घर में वास्तुदोष को भी दूर करता है. घर के उत्तर दिशा में मोर पंख रखने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और नकारात्मक ऊर्जा स्वतः ही नष्ट हो जाती है.
धीरे-धीरे दूर होंगी परेशानियां
मोर पंख का संबंध सीधे-सीधे भगवान श्रीकृष्ण से है. श्रीकृष्ण ने अपने मुकुट में मोर पंख धारण करके यह संदेश दिया कि जीवन में सुंदरता, सरलता और संतुलन का होना आवश्यक है. मोर पंख को जहां भी रखा जाता है वहां पर वातावरण स्वतः ही शांत और पवित्र हो जाता है. यही कारण है कि घर में इसे रखना शुभ माना जाता है. मोर पंख को घर की तिजोरी में रखने का विशेष महत्त्व है. ऐसा करने से धन का आगमन बढ़ता है और मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है. धन से जुड़ी परेशानियां धीरे-धीरे दूर होती हैं और परिवार में समृद्धि आती है.
रिश्तों में आएगी मिठास
यह भी माना जाता है कि मां लक्ष्मी को शांति अत्यंत प्रिय है और मोर पंख घर में रखने से शांति और सौहार्द्र बना रहता है. मोर पंख का एक और बड़ा लाभ यह है कि यह परिवार में आपसी झगड़े और मतभेद को दूर करता है. यदि परिवार में अक्सर लड़ाई-झगड़े होते हैं तो घर के मंदिर में मोर पंख रखना चाहिए. इससे वातावरण में शांति आती है और परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और एकता बनी रहती है. यदि आप रिश्तों में मधुरता लाना चाहते हैं तो घर में बांसुरी के साथ मोर पंख रखना चाहिए. ऐसा करने से दांपत्य जीवन में प्रेम बढ़ता है और रिश्तों में मिठास आती है.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 19 सितम्बर 2025)
19 Sep, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- इष्ट मित्रों से लाभ होगा, भोग-ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी, रुके कार्य बनेंगे।
वृष राशि :- अपनों से तनाव, प्रत्येक कार्य में बाधा होगी, लाभकारी योजना हाथ से निकल जायेंगी।
मिथुन राशि :- धन लाभ, आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा, कार्यवृत्ति में सुधार होगा, कार्य बनेंगे।
कर्क राशि :- कार्य योजना फलीभूत हो, दैनिक सफलता के कार्य संभव होगें।
सिंह राशि :- इष्ट मित्रों से सुखवर्धक हो, मनोबल उत्साहवर्धक बना ही रहेगा, कार्यगति में सुधार होगा।
कन्या राशि :- आशानुकूल सफलता से हर्ष होगा, दैनिक व्यवसाय में सुधार होगा, चिन्ता मुक्त होंगे।
तुला राशि :- आर्थिक योजना सफल होंगी, समय पर सोचे कार्य बनेंगे तथा किसी के धोखे से बचेंगे।
वृश्चिक राशि :- दूसरों के कार्य में भटकना पड़ेगा, समय को बचाकर चलने से लाभ ही होगा।
धनु राशि :- दैनिक कार्यगति में सुधार होगा, कार्ययोजना फलीभूत होगी, कार्य का ध्यान रखें।
मकर राशि :- किसी का कार्य बनने से संतोष होगा, चिन्ता निवृत्ति होगी, व्यवसायिक स्थिति में सुधार होगा।
कुंभ राशि :- स्त्री शरीर कष्ट, मानसिक बेचैनी रहेगी, उद्विघ्नता व विद्या बाधा, कार्य बाधा बनेगी।
मीन राशि :- भाग्य का सितारा प्रबल हो, बिगड़े कार्य बनेंगे, मित्र सहयोगियों से लाभ होगा।
क्या दो भंवर वालों की होती है दो शादियां? जानिए इस धारणा के पीछे की सच्चाई
17 Sep, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हमारे शरीर की बनावट कई बार लोगों की सोच और धारणा को जन्म देती है. ऐसे ही एक विशेषता है – सिर में दो भंवर यानी डबल कुंडल होना. अधिकतर लोगों के सिर पर सिर्फ़ एक भंवर होता है, जो बालों की दिशा तय करता है. लेकिन कुछ लोगों के सिर पर दो भंवर होते हैं, जिसे देखकर लोग तरह-तरह की बातें करने लगते हैं. गांवों में इसे लेकर कई मज़ेदार बातें कही जाती हैं. जब किसी बच्चे के सिर पर दो भंवर दिखाई देते हैं, तो मज़ाक में कहा जाता है, “इसकी तो दो शादी तय है.” यह बात भले ही मज़ाक में कही जाती हो, लेकिन धीरे-धीरे इसे एक धारणा का रूप दे दिया गया है. अब सवाल ये उठता है कि क्या सिर में दो भंवर होना कोई विशेष बात है? क्या इससे व्यक्ति के स्वभाव या भविष्य का कोई संबंध है?
वैज्ञानिक नज़रिए से
अगर वैज्ञानिक पहलू पर नज़र डालें तो सिर पर भंवरों की संख्या पूरी तरह से हमारे डीएनए से जुड़ी होती है. बालों की बनावट, उनकी दिशा और भंवरों की संख्या विरासत में मिलती है. यानी अगर परिवार में किसी के सिर पर दो भंवर हैं, तो अगली पीढ़ी में भी ऐसा हो सकता है.
-एक अमेरिकी संस्था द्वारा किए गए शोध के अनुसार, दुनिया की केवल पांच प्रतिशत आबादी में सिर पर दो भंवर पाए जाते हैं. इससे यह तो साफ़ है कि यह सामान्य नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि यह किसी बड़ी बात का संकेत है.
ज्योतिषीय दृष्टिकोण
ज्योतिष शास्त्र में सिर में दो भंवर वाले लोगों को खास माना गया है. कहा जाता है कि ऐसे लोग शांत, समझदार और दूसरों की मदद करने वाले होते हैं. ये अपने काम में पूरी लगन से जुटे रहते हैं और जीवन में अच्छी तरक्की कर सकते हैं. कुछ ज्योतिषियों का मानना है कि इन लोगों को वैवाहिक जीवन में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है. अगर पहली शादी में कठिनाइयां आती हैं, तो दूसरी शादी की संभावना भी हो सकती है. हालांकि, यह सिर्फ़ एक मत है, न कि कोई तयशुदा सच.
आम धारणा और सच्चाई
गांवों में सिर के दो भंवरों को लेकर जो कहावतें प्रचलित हैं, वे पूरी तरह से अनुभव या सुनाई-सुनाई बातों पर आधारित होती हैं. वैज्ञानिक रूप से इसका कोई सीधा संबंध विवाह या भविष्य से नहीं होता.
असल में, यह शरीर की बनावट का एक हिस्सा है, जैसे किसी की आंखें भूरी होती हैं और किसी की नीली. कुछ लोग इसे शुभ मानते हैं, तो कुछ लोग इससे जुड़े अंधविश्वासों में उलझे रहते हैं.
पितृपक्ष में दीपदान से खुलेंगे मोक्ष के द्वार, विष्णु की कृपा से होगा कल्याण
17 Sep, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हर साल आश्विन महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को इंदिरा एकादशी कहा जाता है. यह दिन खासतौर पर पितृपक्ष के दौरान आता है और इसका महत्व बहुत अधिक होता है. इस साल इंदिरा एकादशी 17 सितंबर 2025, बुधवार को मनाई जाएगी. इस दिन अगर कोई श्रद्धा से उपवास करता है, भगवान विष्णु की पूजा करता है और दीपदान करता है, तो पितरों को शांति मिलती है और साधक को सुख, शांति और तरक्की का आशीर्वाद प्राप्त होता है. इंदिरा एकादशी को लेकर मान्यता है कि इस दिन किया गया एक छोटा सा पुण्य कार्य भी कई गुना फल देता है. खासतौर पर अगर घर के पूर्वजों की आत्मा को शांति नहीं मिल रही हो या किसी कारणवश मन बेचैन रहता हो, तो इस एकादशी का व्रत और दीपदान बहुत ही लाभदायक साबित हो सकता है.
क्यों खास है इंदिरा एकादशी?
पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि एक समय राजा इंद्रसेन ने इस व्रत को किया था, जिससे उनके पितरों को मुक्ति मिली और राज्य में सुख-शांति लौट आई. तभी से यह परंपरा बनी कि इस एकादशी को उपवास करने और दीप अर्पित करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और व्यक्ति को जीवन में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं.
इस बार इंदिरा एकादशी पर विशेष संयोग बन रहे हैं – गौरी योग, शिव योग और परिघ योग जैसे शुभ योग इस दिन के महत्व को और भी बढ़ा रहे हैं. ऐसे में अगर पूरे मन से श्रद्धा के साथ इस दिन पूजा की जाए तो जीवन के कई कष्टों से छुटकारा मिल सकता है.
दीपदान का महत्व
इंदिरा एकादशी पर दीप जलाना सिर्फ एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक साधना भी मानी जाती है. शाम को भगवान विष्णु के सामने दीप अर्पित करने से अंधकार दूर होता है और आत्मा में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. इसके अलावा, दीप जलाते समय जब व्यक्ति अपने पूर्वजों को याद करता है तो उनके प्रति श्रद्धा प्रकट होती है और आत्मिक जुड़ाव बढ़ता है.
मान्यता है कि इस दिन दीप जलाने से पितरों को स्वर्गलोक में स्थान मिलता है और उनके जीवन के सभी दोष मिट जाते हैं. यही नहीं, घर में भी सुख-शांति बनी रहती है, और धन, सेहत व तरक्की के रास्ते खुलते हैं.
इंदिरा एकादशी पर दीपदान करने के लाभ:
-पूर्वजों को मोक्ष प्राप्त होता है
-घर का वातावरण शांत और सकारात्मक रहता है
-रोग और कर्ज से छुटकारा मिलता है
-भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है
-पारिवारिक समृद्धि में वृद्धि होती है
कैसे करें व्रत और दीपदान?
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें. घर के पूजा स्थान को सजाएं और भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र के सामने दीप जलाएं. फल, फूल, तुलसी और पंचामृत से पूजा करें. पूरे दिन फलाहार करें और मन को शांत रखें. शाम को दीपदान करें और पितरों का स्मरण करें.
पितरों की शांति और घर की समृद्धि के लिए इंदिरा एकादशी पर करें ये खास दान
17 Sep, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सनातन परंपरा में एकादशी के व्रत को विशेष स्थान दिया गया है. साल भर में कुल चौबीस एकादशी आती हैं, जिनमें से कुछ खास होती हैं. ऐसी ही एक एकादशी है - इंदिरा एकादशी. यह व्रत पितृपक्ष के समय आता है और इसे पितरों की शांति के लिए किया जाता है. 2025 में इंदिरा एकादशी 17 सितंबर, बुधवार को मनाई जाएगी. इस दिन व्रत रखने, पूजा करने और दान देने से पितरों को सुख मिलता है और उनका आशीर्वाद घर-परिवार को मिलता है. इस दिन का खास महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह भगवान विष्णु को समर्पित होती है, और पितरों की आत्मा की शांति के लिए सबसे शुभ मानी जाती है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं
दान का महत्व<br />इंदिरा एकादशी के दिन किया गया दान सामान्य दिनों से कहीं अधिक फलदायी माना जाता है. यह विश्वास है कि इस दिन जरूरतमंदों की मदद करने से न सिर्फ पितरों को तृप्ति मिलती है, बल्कि जीवन में चल रही कठिनाइयों से भी छुटकारा मिलता है. मानसिक शांति, पारिवारिक सुख और आर्थिक उन्नति - ये सब इस दिन किए गए सच्चे मन के दान से प्राप्त हो सकते हैं.
इंदिरा एकादशी पर किन वस्तुओं का दान करें?<br />इस खास दिन पर कुछ खास चीजों का दान करना बेहद शुभ माना गया है. आइए जानते हैं वो कौन-कौन सी चीजें हैं जो इस दिन दान की जाती हैं:
1. अन्न का दान<br />पके हुए भोजन या कच्चे चावल, गेहूं जैसे अन्न का दान करने से पितरों की आत्मा को संतोष मिलता है. यह दान भूखे लोगों तक भोजन पहुंचाने का माध्यम बनता है.
2. जल का दान<br />तांबे के लोटे में जल भरकर या पानी की बोतलें दान करना शुभ होता है. पानी जीवन का आधार है, और इसका दान सबसे सरल लेकिन पुण्यदायी माना गया है.
3. तिल का दान<br />काले या सफेद तिल का दान करना पवित्रता का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि तिल से पितरों की आत्मा को शांति और ऊर्जा मिलती है.
4. फल और सब्जियां<br />मौसमी फल जैसे केला, सेब या संतरा, और हरी सब्जियां जैसे लौकी, टिंडा, पालक आदि का दान करने से घर में स्वास्थ्य और समृद्धि बनी रहती है.
5. वस्त्र का दान<br />साफ-सुथरे और अच्छे वस्त्र, खासकर सर्दियों में गर्म कपड़े, जरूरतमंदों को देने से न सिर्फ पुण्य मिलता है, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भी आती है.
क्या विश्वकर्मा पूजा पर कार या वाहन में नींबू लटकाना चाहिए?
17 Sep, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हर साल जब विश्वकर्मा पूजा का समय आता है, तो फैक्ट्रियों, दुकानों और घरों में मशीनों की सफाई और सजावट शुरू हो जाती है. इस दिन मशीनों, औजारों और वाहनों की पूजा की जाती है. ऐसा माना जाता है कि भगवान विश्वकर्मा ही उन सभी यंत्रों के निर्माता हैं, जिनसे हमारा जीवन आसान होता है. इस मौके पर एक सवाल अक्सर सामने आता है-क्या इस दिन वाहन में नींबू टांगना कोई खास धार्मिक नियम है या सिर्फ एक परंपरा? इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं
नींबू टांगने की मान्यता
कई लोग अपने वाहन के आगे एक नींबू और कुछ हरी मिर्च लटकाते हैं. आम तौर पर इसे बुरी नज़र से बचाव का तरीका माना जाता है. यह परंपरा कई सालों से चली आ रही है, लेकिन इसका कोई धार्मिक आधार नहीं है. खासकर विश्वकर्मा पूजा के दिन इसे करने का कोई धार्मिक नियम नहीं है. फिर भी कुछ लोग इसे अपनी निजी आस्था और सुरक्षा की भावना से जोड़कर देखते हैं.
पूजा का सही तरीका
विश्वकर्मा पूजा के दिन लोग अपने औजारों और वाहनों को अच्छे से धोते हैं, फूल और रंगों से सजाते हैं और पूजा करके भगवान का धन्यवाद करते हैं. ऐसा करना केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि एक तरीका है अपने काम के साधनों के प्रति आदर जताने का. यह दिन उन सभी चीजों को महत्व देने का दिन है जो हमारे रोज़मर्रा के काम को आसान बनाती हैं.
नए वाहन की खरीदारी
अगर आप नया वाहन खरीदने का सोच रहे हैं, तो विश्वकर्मा पूजा का दिन एक अच्छा मौका माना जाता है. इस दिन नया वाहन लेना शुभ माना जाता है, क्योंकि इसे एक नई शुरुआत से जोड़ा जाता है. कई लोग इसी वजह से इस दिन गाड़ी बुक कराते हैं या डिलीवरी लेते हैं.
क्या यह विश्वकर्मा पूजा से जुड़ा हुआ है?
विश्वकर्मा पूजा का मूल भाव मेहनत, समर्पण और तकनीक के साधनों के प्रति सम्मान है. इस दिन औज़ारों और मशीनों को विश्राम दिया जाता है और उनकी उपयोगिता के लिए आभार जताया जाता है. लेकिन नींबू लटकाने की परंपरा सीधे तौर पर इस पर्व से जुड़ी नहीं है. यह एक अलग लोक परंपरा है जो समय के साथ विभिन्न अवसरों से जुड़ गई है.
फिर भी कई लोग विश्वकर्मा पूजा के बाद अपने वाहन को सजाते हैं, उसकी पूजा करते हैं और उस पर नींबू लटकाते हैं. यह पूरी तरह से व्यक्तिगत सोच पर निर्भर करता है. कुछ इसे सुरक्षा का प्रतीक मानते हैं तो कुछ लोग इसे केवल एक रस्म समझते हैं.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन ( 17 सितम्बर 2025)
17 Sep, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- विरोधी तत्वों से परेशानी, अधिकारियों से तनाव, इष्ट मित्र कष्टप्रद होंगे।
वृष राशि :- कार्य कुशलता से संतोष, व्यवसायिक गति में सुधार होगा, व्यवसायिक कार्य योजना बनेगी।
मिथुन राशि :- इष्ट मित्रों से लाभ होगा, व्यवसायिक गति में सुधार होगा, कार्य योजना सफल होगी।
कर्क राशि :- मनोबल उत्साहवर्धक रहेगा, कार्यकुशलता से संतोष होगा, कार्य व्यवसाय उत्तम चलेगा।
सिंह राशि :- चोट-चपेट होने का डर है, कार्यगति में सुधार, कार्य बाधा होगी किन्तु अधिकारियों का सहयोग मिलेगा।
कन्या राशि :- व्यवसायिक गति उत्तम रहेगी, धैर्य से कार्य करें, स्थिति में सुधार होगा, समय का ध्यान रखें।
तुला राशि :- अधिकारी वर्ग सहायक होगा तथा भाग्य का सितारा साथ देगा, रुके कार्य बनने से हर्ष होगा।
वृश्चिक राशि :- किसी के धोखे से बचें, विवाद होने की संभावना है, धन हानि, व्यर्थ भ्रमण में समय नष्ट होगा।
धनु राशि :- मनोवृत्ति संवेदनशील रहेगी, भोग-ऐश्वर्य में समय बीतेगा, कार्य बाधा होगी, धैर्य रखकर कार्य करें।
मकर राशि :- स्थिति में सुधार होते हुये भी सफलता फलप्रद नहीं, कार्य विफलत्व से चिन्ताप्रद स्थिति रहेगी।
कुंभ राशि :- धन लाभ, आशानुकूल सफलता से हर्ष होगा, कार्य बनेंगे, अधिकारियों का समर्थन मिलेगा।
मीन राशि :- समय अनुकूल नहीं, विशेष कार्य स्थगित रखें, कार्य अवरोध होगा, सावधानी से कार्य करें।
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